Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 15 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)

अपडेट ::: 70

*************



आज की रात पैलेस में खुशियां की रात थी. माँ और पापा एक रूम में बंद हो गए थे. और जो रूम मेरे हिस्से में आया था. उस रूम में एक बड़ा बीएड रखा हुआ था. और उस रूम में आज मेरे साथ सिर्फ मेरी तितलियाँ hi थीं. अब्ब कुछ दिनों तक्क मेरे साथ मेरी तितलियों के सीवे किसी और की गुंजाइश नहीं निकलने वाली थी. और सबब ने भी ok बोल दिया था. दिल तो सबब का hi था. लेकिन सबब एक साथ सोने से रहें. पहले पूजा दीदी के sath,kabhi रानी तो कभी सीखा और रूपा सो जाया करती थीं.

लेकिन अब्ब मेरी तितलियों के आ जाने से फ़िलहाल के लिए कोई चेंजिंग ऑप्शन नहीं रहा था. तीनो hi कुछ दिनों तक्क रेगुलर मेरे साथ सोने वाली थीं. अगर आज पापा न मिले होते तो माँ भी साथ में होती.

रूम के अंदर आते hi दूर को अंदर से लॉक क्र दिए गया. मैं बोहत थका हुआ था, लेकिन तीनो का ख्याल रखते हुए खुद पर काबू रखे हुए था.

तीनो को गुज़रे सालों का प्यार वसूलना था मुझसे.. और जैसा प्यार तीनो वसूलने वाली थीं. वो भी मैं जानता था. आज मई बोहत hi ज़यादा एक्ससिटेड था, पहली बार हम चरों hi खुल के मस्ती करने वाले थे.

अब्ब तीनो hi जवान हो गई थें. और छूट खुलवाने लायक भी हो गई थीं. मैं और मेरा लुंड भी कबसे किसी छूट में घुसने के लिए बेकरार थे.

मेरा लुंड भी मेरे मैं से कंटेक्टेड था. उसने भी कह दिया क माँ और बहनो को निकाल कर ले आओ. फिर हम दोनों hi मिल कर सबब की hi छूट में घुस जाएंगे..

एक मिशन माँ और बहनो वाला पूरा हुआ. तो दूसरा भी शुरू होने जा रहा था.

इस बार का मिशन मेरे लिए मेरे लुंड के लिए मेरे रीडर्स के मनोरंझण के लिए था. सील पैक छूट और गांड के साथ साथ, पहले से खुली हुई छूट एंड गांड में घुसने का मिशन था.. साथ साथ दिल्ली के गुंडों की भी माँ चुदती रहेगी.. लोगों का भला भी होता रहेगा. माँ और बहनो के साथ टाइम भी स्पेंड होता रहेगा. और दन्न से भी मेंटली जुंग जारी रहेगी....

दन्न से अभी डायरेक्ट जुंग का समय नै आया था.. टाइम अभी था सबब के साथ अच्छे से मिल कर रहने का.. अपने पैलेस में रह रहे लोगों को खुशियां बांटने का. और दिल्ली शहर में भी रह रहे अनगिनत मासूमों की ज़िन्दगियों को बदलने का समय आ गया था.

बदला तो मैं दन्न और दूसरे सभी से लूंगा... और उन सभी की माँ की छूट का भोसड़ा बना दूंगा. लेकिन अभी सभी के दिलों की तमन्नाएँ पूरी करने सा समय था. ये भी एक बोहत बड़ा मिशन था. किसी के दिल की आरज़ू पूरी किये बिना मैं कैसे यहाँ से जा सकता था.

दन्न से जुंग करने के लिए na-jaane मुझे कितने समय के लिए दिल्ली से दूर जाना पड़े और फिर कैसे कैसे हालातों का मुझे सामना करना पड़े. इस लिए पहले सभी को कुछ खुशियां hi बाँट दूँ.

हम रूम में ए और तीनो में से किसी ने दूर को लॉक कर दिया. मेरी नज़र बीएड की तरफ थी. इसलिए मुझे नहीं पता लॉक किसने लगाया था.

मैंने मुद के तीनो को देखा तो तीनो मुझे hi आँखों में आंसू लिए हुए निहार रही थीं.

लो जी, फिर से इमोशंस जाग पड़े..... होना तो चाहिए था कुछ ऐसा hi आखिर ये हम चरों के स्पेशल इमोशंस थे. क्या क्या नै सपने सजाये गए थे गुज़रे हुए वक़्त में, क्या क्या करने का मैं में सोच लिया था हम चरों ने hi. लेकिन फिर मुझे एक लम्बे समय के लिए तीनो से दूर हो जाना पड़ा. तीनो hi मुझसे दूर रहने की आदि नहीं थें. बड़ी हिम्मत जूता क्र तीनो ने ये सालों का सफर तय किया था...

मैंने अपनी बाहें तीनो के लिए खोल दीं और तीनो hi भाग क्र मुझसे लिपित गईं. रोइ तो नहीं थी बास सालों के इंतज़ार ने आँखों से बहार आने का रास्ता चुन लिया था. तीनो hi मुझे चूमने लगी थें. अपने दिल को ठंडक पोहंचा रही थें. कुछ देर में सबब हलकी हो गईं.

प्रिय:- विज्जु अब्ब दिल को पूरा चैन मिला है. वर्ण पहले तुझसे मिलके दिल की तालाब पूरी नहीं हुई थी.

जहान्वी:- प्रिय, हमारा विज्जु हमें वापिस मिल गया है, हम फिरसे वहीँ ज़िन्दगी जियेंगी. जो पहले हम जिया करती थीं.

श्रुति- हाँ बोहत इंतज़ार किया है विज्जु तेरा हमने, तुझ बिन नींद hi हमारी कही खो गई थी, जब भी अपनी ऑंखें बंद करती थीं, तेरा hi चेहरा सामने आ जाता था...

विजय:- अब्ब तो मैं सच में hi सब की आँखों के सामने हूँ ना. तो दिल की तालाब भी पूरी करलो, और आँखों को भी ठंडा करलो, जो सालों से मुझे देखना की तमन्ना में खुली रह गई थीं....

हाल मेरा भी तो कुछ ऐसा hi था.... लेकिन मुझे यहाँ तुम्हारी जैसी hi पूजा didi,rani,shikha,rupa,shetal और नताशा दीदी मिल गई थीं.. वर्ण मैं भी तुम सबब बिन यहाँ पागल सा होने लगता था. बड़ी मुश्किल से सबने hi मुझे अपना प्यार दे कर संभाला है... वर्ण तुम सबब की याद और तुम सबब की भयानक ज़िन्दगी मुझे हर दुम्म डराए रखती thi.kuch कर नहीं सकता था ना तुम सबब के लिए.. बड़ी मुश्किल से मैं अपने अंदर के डर पर काबू प् सका हूँ..... बास एक hi तमन्ना थी कैसे भी करके जल्दी से तुम सबब को वहां से निकल कर ले आऊं... बड़ी मुश्किल से ये वक़्त कटा है..

मैंने भी तुम सबब के जितना hi दर्द झेला है...

तीनो मेरी hi बात सुन रही थें.

सबब बातें करते हुए मुझे अपना गुज़रा हुआ समय और दर्द याद आने लगा. कैसा था मैं, कितने दर्द से गुज़रा था main.sabb इतना भी आसान नहीं था. ये जो कुछ भी हुआ था.. वो सबब इतना टफ था, क सोचते हुए भी दिल तड़पने लगता है..

तीनो की आंखे एक बार फिर से नम्म हुई लेकिन फिर तीनो ने hi खुद पर काबू पाया और मुझे बाज़ो से थामे हुए बीएड की जानिब बाद गईं..

तीनो hi बीएड को देख कर अपना मूड बदलने लगें... तीनो hi सालों पहले वाली मस्ती को याद करने लगी. तीनो ने मुझे बीएड पर धक्का दिया और मेरे ऊपर चढ़ गई...

मैंने तीनो को देखा तो तीनो hi पल भर में बदल गई थीं. कैसी अंडरस्टैंडिंग थी तीनो की एक hi बार में तीनो ने अपना चोला hi बदल लिया था.. इस वक़्त तीनो hi पहले वाला सबब भूल कर मस्ती करने के मूड में आ आगे थें.

विजय:- ये सबब क्या है,

जानवी:- विज्जु क्या तुझे बताना पड़ेगा...

प्रिय:- जहान्वी इसे बताने की क्या ज़रूरत है. चल हम अपना गेम शुरू करते हाँ..

श्रुति प्रिय और जहान्वी की बात सुन कर अपने कपडे उतरने लगी..

अब कपडे उतरने में कौनसी झिझक... ये काम तो सबब hi मेरे सामने सालों पहले करती hi रही थीं. लेकिन अब्ब मैं और मेरा लुंड भी जवान हो चुके थे.

विजय:- श्रुति इतनी जल्दी क्या है. अभी आज hi तो आया हूँ.

शुरतुइ की देखा देखि प्रिय और जहान्वी भी अपने कपडे उतरने लगी.. जब तक प्रिय और जहान्वी नंगी होती. श्रुति मेरे ऊपर चढ़ दौड़ी. और मेरे होंठों पर टूट पड़ी. और main""arre अरे"" hi करता रह गया.

षुरूति मेरे होंठों को अपने होंठों में लिए नरमी से चूमने लगी. अभी श्रुति ने चूसना शुरू नहीं किया था. श्रुति बड़े प्यार से मेरे होंठों पर लगी नमी को चाट रही थी. जल्दी किसको थी. ये सबब करने की जल्दी तो थी, ये सबब जल्दी ख़तम करने के मूड में नहीं थी.

इतनी देर में जहान्वी और प्रिय भी नंगी हो चुकी थीं. तीनो के बदन पर ब्रा पेंटी तक भी नहीं थी. टोटली नंगी थीं. प्रिय ने श्रुति की छूट पर हाथ रख क्र श्रुति की छूट को थोड़ा ऊपर किया और मेरे ट्रॉउज़र की डोरी खोलने लगी.

जहान्वी ने श्रुति को किश करने से नै रोका वो श्रुति के फ्री होने का वेट करने लगी. और प्रिय को मेरे ट्रॉउज़र की डोरी खोलते हुए देखने लगी....

श्रुति खुद hi मेरे होंठों से अलग हुई..

श्रुति:- चलो विज्जु नंगे होने में हमारी मदद करो, वर्ण हम तुम्हारी ये शर्ट पहाड़ देंगी.

मैं कोई पागल था जो इस सबब में देर करता. एक तो मैं भी अपनी तितलियों के साथ ये सबब करने के लिए बेचैन था, दूसरा मुझे पूजा और रानी ने इस सबब का आदि भी तो बना दिया था...

और पिछले एक साल में मुझे बास एक बार पूजा दीदी और रानी साथ मस्ती की थी.. या फिर भाभी के साथ... अब्ब 2 बार लुंड से पानी निकाल क्र कैसे मुझे चैन मिल सकता था.. और वैसे भी तीन गरम तितलियाँ मेरे सामने नंगी थें और मैं वेट करूँ. मैं पागल तो नहीं था.

कुछ hi सेकण्ड्स लगे मैं भी तीनो के जैसा hi नंगा हो गया था. मेरा लुंड भी सब समझते हुए खड़ा हो चूका था. और फिर जैसे hi मेरी तितलिओं ने मेरे लुंड को देखा तो शॉकेड हो गईं..

प्रिय:- विज्जू मुझे लगा था तेरा लुंड कुछ बड़ा है, लेकिन ये तो बोहत बड़ा और मोटा भी है... विज्जु तूने तो सच में hi इक शेर पाल रखा है.

श्रुति:- प्रिय, तूने सच कहा, विज्जु ने तो एक शेर hi पाल रखा है. अब्ब तो ये हमारा hi है.. मैं तो इसे कच्चा hi खा जाऊँगी..

जहान्वी:- तो मैं कौनसा विज्जु के लुंड को माफ़ी देने वाली हूँ... बड़ा वेट करवाया है विज्जु तुमने... लेकिन तेरे लुंड को देख क्र तो तुझे सबब माफ़ किया जा सकता है....

विजय:- अच्छा तो फिर अब्ब क्या विचार हाँ तुम सबब के .....

तीनो:- विचार तो बोहत hi अच्छा हाँ हम सबब के... आज तो सालों की तड़प मिटाएंगी तुझसे....

प्रिय:- विज्जु तुम लेट जाओ. हम खुद hi सबब करलेंगी..

विजय:- क्या मतलब, अभी मेरा नंबर नहीं है क्या...

जहान्वी:- विज्जु तुम्हरा नंबर भी लगेगा. पहले हम अपने दिल की करलें, फिर जो तुम्हारा दिल करे कर लेना.. अभी हमने hi सबब अपनी मर्ज़ी से करने दो..

विजय:- ठीक है, तुम तीनो की hi मान लेता हूँ...

मैं लेट गया. मेरा लुंड छत की तरफ हो गया. प्रिय और जहान्वी मेरे लुंड के पास बैठी और फिर दोनों ने hi मेरे लुंड को पकड़ लिया. पहले उसे अच्छी तरह से दबा कर चेक करने लगी..

प्रिय:- देखा जहान्वी कितना हार्ड है. किसी लोहे के जैसा..

जहान्वी;- हाँ प्रिय, बोहत हार्ड है, एक बार तो हमारी चीखें hi निकाल देगा.

श्रुति:- मैडम लुंड छोटा भी हो तो पहली बार छूट में घुसते hi चीखें निकाल देता है.

प्रिय:- तू क्यों कड़ी है..

श्रुति:- तो क्या करूँ. तुम दोनों ने तो लुंड को पकड़ने लायक जगा hi नहीं छोड़ी.

जहान्वी:- तू अपनी छूट को विज्जु के मोहन पर रखदे. और मज़ा ले, मैं और प्रिय विज्जु का लुंड पहले अच्छे से चेक करलें. फिर कुछ और सोचेंगी.

शूरति:- ये तो बड़ी अच्छी बात बताई जहान्वी तुमने...

श्रुति देर किये बिना hi मेरे सर्र की गिर्द अपने पेअर रख कर अपनी छूट को मेरे मोहन पर रखके बैठ गई. शूरति का मोहन प्रिय और जहान्वी की तरफ था.

श्रुति ने अपने हाथ मेरी कमर की साइड में बीएड पर रखे और झुक क्र अपनी छूट को मेरे मोहनन पर सेट करने लगी...

मैंने भी अपने हाथों से श्रुति के चुत्तडों को पकड़ कर श्रुति की छूट को अपने मोहन के करीब किया और फिर अपनी जीब निकल क्र श्रुति की आज hi सफाई की गई चिकनी छूट को चाटने लगा....

तीनो ने पहले से hi मैं बना लिया था. इसलिए तीनो ने अपनी छूट और गांड को चमका लिया था. तीनो आज ग़ज़ब की सेक्सी लग रही थीं. तीनो ने अभी मुझे खुल के खुद को देखने नहीं दिया था. और मुझपर टूट पड़ी थीं...

मेरा मूड तो था पहले तीनो से hi खूब बातें करूँगा. मस्ती के लिए टाइम hi टाइम था. लेकिन वो तीनो hi कुछ और सोचे हुए थी..

मेरी तितलियाँ भी क्या करती.. कोठे पर रहते हुए, इतने सालो खुद पर काबू रखे हुए गुज़ार चुकी थीं. अब कैसे वो खुद को रोक पाती. रोज़ hi किसी न किसी की छूट में लुंड घुसा हुआ देखना, और फिर खुद पर कण्ट्रोल कर लेना बोहत बड़ी बात थी....

दलदल में फँसी हुई थीं. इस बात का डर भी था क कही उनके साथ कुछ गलत न हो जाए लेकिन फिर भी छूट की गर्मी परेशां किये रखती थी....

छूट के खुल जाने का डर भी था. तीनो को और छूट की गर्मी ख़तम न होने की टेंशन भी थी. कैसा अजीब सिस्टम था...

श्रुति अपनी छूट पर मेरी जीब की गर्मी से बेहाल होने लगी थी.. बोहत समय से रुकी हुई थी छूट की गर्मी. आज पहली रात थी, तो तीनो का hi जल्दी में पानी निकल जाना था.. तीनो की hi छूट का पानी तो कब्ब से निकलने के लिए बेकरार था. बास तीनो को hi छूट पर इशारा चाहिए था...

कुछ hi देर में श्रुति अपनी छूट को मेरे मोहन पर रगड़ने लगी. श्रुति की छूट ने पानी की बरसात शुरू करदी थी. श्रुति जल्दी hi झड़ने वाली हो गई थी..

मैंने भी श्रुति को जल्दी ठंडा करने का सोच लिया. मेरी जीब श्रुति की छूट से कुछ ऊपर हुई और श्रुति की उनतोच गांड के छेड़ के ऊपर जा कर लगी..

श्रुति को एक झटका लगा. और शूरति की सिसकियाँ निकालनी शुरू हो गयी

श्रुति:- ohhhhhhhhhhhhh..yessssss....vijjjjuuuuuuu...yessssssssssss... विज्जउ

विज्जु मेरी गांड को भी चाटो.... विज्जू मेरी छूट पानी छोड़ने वाली है..

श्रुति की बात सुनकर प्रिय और जहान्वी जो मेरे लुंड को दबा दबा के चेक कर रही थीं.. दोनों hi श्रुति की बात सुनके हैरान रह गईं...

प्रिय:- श्रुति तेरी छूट इतनी जल्दी पानी निकलने वाली है..

श्रुति:- (अपनी छूट को मेरे मोहन अपर घिसते hue)kya बताओ प्रिय....... इतने समय बाद ये सबब करने में मज़ा भी बोहत ा रहा है. और फिर मेरी छूट ने सालों से पानी भी तो खुल के नहीं निकला बास विज्जु के चाटने से hi निकलने वाला हो गया...

शूरति हंप्टी हुई ये सबब बोल रही थी.. मैं शूरति की गांड के छेड़ पर अपनी जीब फेर रहा था. और श्रुति की हालत पतली होने लगी थी. श्रुति की गांड से बड़ी मस्त स्मेल आ रही थी. जो मेरे लुंड को और भी सख्त करने लगी थी.

जहान्वी:- प्रिय देखो विज्जु का लुंड और भी सख्त होने लगा.

प्रिय- हाँ ज़रूर विज्जु क श्रुति की छूट और गांड चाटने में मज़ा आ रहा होगा.

जहान्वी:- अब्ब क्या हम विज्जु के लुंड को दबती hi रहेंगी... इसे मोहन में नै लेना क्या..

प्रिय:- जल्दी क्या है जहान्वी पहले अच्छे से चेक तो करलूं.

जहान्वी:- और अपनी छूट में कब्ब लेगी इसे..

परिया:- आज नहीं जहान्वी, आज विज्जु थका हुआ है, खुल कर सबब मज़ा नहीं आने वाला, आज तो बास छूट का पानी निकाल कर सोते हाँ. अभी विज्जु से कुछ बातें भी करनी हाँ. ये सबब तो बाद में भी होता hi रहे. अगर छूट की आग का मसला न होता तो आज इतना सबब भी मैं नहीं करने वाली थी.

जहान्वी:- तू ठीक बोली प्रिय. आज जितना मिल रहा है उतना तो करेंगी hi..

मेरी जीब बड़ी महारत से श्रुति की छूट के अंदर तो कभी गांड के छेड़ पर रेगुलर hi चल रही थी. श्रुति की साँसे और सिसकियाँ तेज़ होने लगी..

षुरूति की छूट की आग ने श्रुति को कुछ ज़यादा hi जलाया हुआ था, श्रुति झटके पे झटके खाने लगी, और प्रिय और जहान्वी के हाथों में मौजूद लुंड पर गिरते हुए श्रुति झड़ने लगी...

प्रिय:- देख जहान्वी कितनी जल्दी हार मान गई श्रुति...

श्रुति मेरे लुंड पे hi हंप्टी हुई बोलने लगी

श्रुति:- बोहत बोले रही हो तुम दोनों. विज्जु से छूट चटवा के देखो . 2 hi मिंट में न झाड़ गई तो फिर बात करना.

जहान्वी:- तू पहले साँस ठीक करले फिर बोल लेना.

माने श्रुति को खुद पार्स हटा दिया.

विजय:- अब किसका मोड़ का मेरे मोहन पे छूट रखने का..

जहान्वी:- विज्जु तुम बास अपने होंटो पर लगे श्रुति के अमृत को hi chat'te रहो अभी हाम्रा मैं कुछ और है...

प्रिय:- चल जहान्वी विज्जु के लुंड को टास्ते कारण. बोहत दबा के देख लिया...

जहान्वी:- हाँ चल ठीक है..

विजय:- तुम दोनों में से एक अपनी छूट मुझसे चतवते हुए मेरे लुंड को अपने मोहन में ले सकती है. तुम दोनों का भी हो जाएगा और मेरा भी. क्या मैं तुम दोनों अपना लुंड चूसते हुए hi देखता रहूं..

श्रुति:- न न प्रिय, जहान्वी, अभी विज्जु से अपनी छूट न चटवाने वर्ण तुम दोनों भी जल्दी hi झाड़ जाओगी.

दोनों:- श्रुति तू सच कह रही है.

श्रुति:- चेक करके देख लो. पूछने की क्या ज़रूरत है. जब्ब छूट पानी छोड़ने लगेगी तू पता चल जाएगा.

मैंने श्रुति की बात सुन कर मुस्कुराने लगा..

विजय:- अब्ब जब्ब की छूट का पानी की आखरी स्टेज पे हो तो मैं क्या क्र सकता हूँ. मैं तो बास अपना काम hi करूँगा. पानी तो खुद बी खुद hi निकल जायगा..

प्रिय:- जहान्वी तू विज्जु से अपनी छूट चटवा के देख.

जहान्वी;- मैं क्यों चितवौ. तुम जाओ विज्जु में मोहन पे अपनी छूट रखो, मैं तो नहीं इतनी जल्दी झड़ने के मूड में. अभी तो मैं विज्जु के लुंड को अच्छे से चूसूंगी, बाकी का बाद में देखेंगी..

विजय:- ये क्या लगा रखा है. तुम तीनो ने, इस बात पे भी बहस होती है क्या.

प्रिय:- विज्जु आज तुम कुछ मैट बोलो, चल जाह्नवी न तू विज्जु के मोहन में बैठने वाली है और न मैं, पहले हम दोनों hi मिल के विज्जु के लुंड को chaat'ti चूसती हाँ.

मेरा लुंड कुछ ज़यादा hi पसंद आ गया था दोनों को और श्रुति की बात सुन के दोनों hi छूट चटवाने से डर गई थीं कहीं छूट जल्दी पानी छोड़ के मज़ा न ख़राब करदे..

छूट का पानी निकल जाने के बाद फिर नहीं आएगा क्या.??

दोनों hi मेरे लुंड पे झुक गईं और फिर प्रिय मेरे लुंड के सुपडे को चाटने लगी और जहान्वी नीचे से मेरे लुंड को चाटने लगी. दोनों मूड में आने अलगी तो मैंने श्रुति को देखा. तो वो भी रानी कमीनी के जैसे hi नदीदी बन कर दोनों को मेरे लुंड chaat'te हुए देख कर अपने होंठों पर जुबां फेरने लगी.

श्रुति ठंडी हो क्र फिर से गरम होने लगी थी. मुझे हंसी आने लगी.

विजय:- श्रुति क्या देख रही हो. अभी तो ठंडी है हो

श्रुति:- इतनी जल्दी नहीं मेरी आग बुझने वाली. सालों से जल रही है कुछ दिन तो लगेंगे hi.

विजय:- अच्छा चलो तब्ब तब तुम मुझे किश तो करती राहु.

श्रुति मेरी बायत सुन क्र मेरे पास ै और झुक क्र मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए. श्रुति मेरे होंठों पर लगे अपनी छूट के पानी को चाटने लगी.

प्रिय मज़े से मेरे लुंड पर अपनी जीब फेरने में लगी हुई थी और जहान्वी मेरे लुंड को नीचे से ले क्र ऊपर तक चाट रही थी. बड़े लुंड का वो दोनों hi आज पहले बार मज़ा ले रही थें. और दोनों hi बड़े आराम से मेरे लुंड के मज़े लेने में लगी यही थीं. दोनों को कोई जल्दी नहीं थी. मेरा लुंड भी दोनों के प्यार को देख कर झूमने लगा.

श्रुति को किश करने में मज़ा आने लगा. प्रिय श्रुति जहान्वी तीनो hi किश करने में माहिर हीं हो चुकी थीं. तीनो hi लेस्बियन भी बन चुकी थीं.

पहले भी सबब मिलकर hi हम किया करते थे. श्रुति किश बड़े अच्छे से कर रही थी. श्रुति मेरे होंठों को कभी चूमती और कभी मेरी आँखों में देख कर मेरे होंठों को चाटने लगती..

शरती:- विज्जु अपना मोहन खोलो.

मैं भी समझ गया श्रुति अब्ब मेरे मोहन में अपनी जुबां डालने वाली है. मैंने अपना मोहन खोला तो श्रुति ने अपनी जीब मेरे मोहन के अंदर घुसा दी. मैं श्रुति की जॉब को छोस्ने लगा तो श्रुति ने अपनी जीब मेरे मोहन से निकल ली.

श्रुति- विज्जु अभी चूसो नहीं. मैं कुछ और करने वाली हूँ.

मैंने श्रुति की बात मान ली.

श्रुति फिरसे मेरे मोहन में अपनी जीब दाल कर मेरे मोहन के अंदर उसे घूमने लगी.

मुझे अजीब सा मज़ा आने लगा. थोड़ी सी गुदगुदी भी हुई. ये मैंने पहले कभी नहीं किया था. और न hi रानी या पूजा दीदी ने कभी ऐसा किया था. ये मेरे लिए नया था. कुछ देर श्रुति मेरे मोहन में अपनी जीब घूमती रही. शायद वो अपनी जीब से मेरे मोहन को अंदर से चेक कर रही थी.

फिर श्रुति ने मेरे मोहन से अपनी जीब निकल ली.

श्रुति;- विज्जु कैसा लगा.. मज़ा आया ना.

विजय:- हाँ श्रुति मज़ा तो आया लेकिन ये सबब तुमने कहाँ से सीखा.

श्रुति :- इसमें सीखने वाली कौनसी बात है. ये तो खुद hi मान में आए है और बास भी करने लगती हूँ. हम तीनो hi हर तरह से एक दूसरे के मज़े ले लिया करती हाँ..

प्रिय ने अब्ब मेरे लुंड को अपने मोहन में ले लिया. और मेरा लुंड 3" तक्क प्रिय के मोहन में जा चूका था. पूजा दीदी की तरह से प्रिय को भी कुछ कुछ परेशानी हुई. पहली बार था ना. थोड़ा टाइम लगेगा आदि होने में.

प्रिय मेरे लुंड को मोहन में लेकर चूस रही थी और कभी अपनी जीब से मेरे लुंड के सुराख़ को चाटने भी लगती थी. प्रिय के ऐसा करने से मेरे अंदर करंट सा दौड़ने लगता था.

मैं श्रुति को किश करने में लग गया और प्रिय जहान्वी मेरे लुंड को चूसने चाटने लगी. ऐसे hi 10 मिंट तक्क हम चरों hi धीरे धीरे सबब करते रहे. कभी प्रिय मेरे लुंड को अपने मोहन में लेती तो कभी जहान्वी.. दोनों hi मज़े से मेरे लुंड के मज़े लिए जा रही थीं.

लेकिन अब्ब मेरा लुंड बोहत सख्त हो गया था और मुझे बड़ी बेचैनी शुरू हो गई थी. खाली चूसने में मैं भरने वाला कहाँ था... पारर कोई आगे hi नहीं बढ़ रही थी. काफी देर से लेते लेते hi सबब हो रहा था...

प्रिय जहान्वी भी अब्ब लुंड को चूम चाट क्र अपना दिल भर चुकी थीं वो भी नेक्स्ट स्टेप के लिए रेडी होने लगीं.

प्रिय- जहान्वी क्या तुम्हे भी बेचैनी शुरू हो गई है या सिर्फ मेरा hi ऐसा हाल है.

जहान्वी:- हाँ प्रिय विज्जु का लुंड चाटने चूंसे से hi मेरी तो छूट पानी छोड़ने लगी है.

प्रिय:- तो फिर अब आगे क्या करें.

जहानीव:- मैं रो सोच रही हूँ. विज्जु को किश करते हुए अपनी छूट को विज्जु के लुंड पर रगड़ों.

प्रिय:- मैं तो मेरा भी अब्ब कुछ ऐसा hi हो रहा है.

मैं दोनों की बात सुन रहा था. मैं मेरा भी मचल रहा था. अब्ब मेरा मूड तो था. क पूजा दीदी के जैसे किसी को उल्टा करूँ और उसकी छूट और गांड के छेड़ पर अपना लुंड रगड़ों. लेकिन प्रिय ने कह दिया था क आज मैं कुछ न करूँ. वो खुद hi करेंगी....

दोनों ने hi आपस में कुछ डीडे किया. श्रुति को मेरे ऊपर से हटा दिया और जहान्वी मेरे लुंड पर बैठ गई. प्रिय उठी और अपनी छूट को मेरे मोहन पर रख कर बैठ गई.

दोनों ने hi खुद के चेहरे मिलाये और किश करने lageen.shuruti ने दोनों के hi बूब्स पकड़ लिए और उन्हें दबाने लगी. प्रिय और जहान्वी आपस में किश करते hi मेरे मोहन और लुंड पर घिसाई शुरू करने लगी. मैंने प्रिय के चूतड़ों को पकड़ा और छोड़ा सा उठा कर प्रिय की छूट पर चमक रहे पानी को चाटने लगा.

प्रिय ने एक बार किश तोर कर मुझे देखा और फिरसे जहान्वी को किश करने लगी.

प्रिय की छूट भी श्रुति की तरह से शवेद थी. प्रिय अब्ब जवान हो गई थी. और एक नमकीन और रसीली छूट की मालिकान बन गई थी. तीनो hi हर किसम की

ट्रैंनिंग में कामयाब थीं. सबब स्टेप्स बड़े अच्छे से ले रही थी....

प्रिय का जिस्म जहान्वी को किश करते हुए बड़ा खूबसूरत दिख रहा था. प्रिय के चुत्तड़ बहार को निकले हुए थे. और रूम की रौशनी में बोहत hi ज़यादा चमक रहे थे..... प्रिय भी माँ की hi तरह से बेमिसाल हुसैन की मालिक थी. माँ के जैसी hi प्रिय की स्किन भी बोहत चमकदार थी. प्रिय के बदन की चमक ने मेरे लुंड को और भी टाइट कर दिया था. जो जहान्वी की छूट के नीचे दबा हुआ रगड़ खा रहा था.

जहान्वी की छूट का पानी मेरे लुंड को भिगो रहा था, जिससे मेरे लुंड पर जहान्वी की छूट की रगड़ और भी अच्छे से हो रही थी. जहान्वी तो मेरे लुंड को चाट चाट कर hi बोहत गरम हो गई थी. अब्ब वो भी श्रुति की तरह से झड़ने वाली थी. प्रिय की किश की वजा से जहान्वी की स्पीड बढ़ नहीं पा रही थी. लेकिन जितना उससे हो रहा था वो अपनी छूट को घिसने में लगी हुई थी.

अभी तीनो का टाइम था तो मैं चुप hi था. वर्ण मैं भी कुछ करता..

श्रुति दोनों के hi बूब्स और निप्पल को कस कस के दबाने और मरोड़ने में लगी हुई थी. 3 मिंट hi हुए थे. क प्रिय और जहान्वी ने किश तोड़ दिए. और सिसकियाँ लेने लगीं. अब्ब प्रिय अपनी छूट को मुझसे चटवा रही थी और श्रुति प्रिय के बूब्स को दबा रही थी. जहान्वी प्रिय से फ्री हुई तो उसने मेरे पेट पर हाथ रख दिए.

जहान्वी मेरे पुरे लुंड पर अपनी छूट को ज़ोर ज़ोर से रगड़ने लगी. जहान्वी का एंडिंग पॉइंट आ गया था. प्रिय भी झड़ने वाली थी. लेकिन जहान्वी पहले hi झटके खाने लगी. और फिर जहान्वी एक आखरी झांकता लेती यही झाड़ गई.

प्रिय ने जहान्वी को साइड किया कर फिर मेरे मोहन पार्स अपनी छूट को हटा कर पूरी तरह से मेरे ऊपर लेते गई.

प्रिय ने मुझे किश नहीं की. बास मेरे शोल्डर को पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से मेरे लुंड पर अपनी छूट की रगड़ने लगी. प्रिय ने अपनी ऑंखें बंद कर ली थीं. प्रिय अपनी बंद किये हुए अपनी चूर का पानी जल्दी से निकाल लेना चाहती thi.priya भी झड़ने वाली थी. आज सबब का hi पानी जल्दी निकल रहा था.

प्रिय की चिकनी छूट मेरे लुंड पर ज़ोर से रगड़ खा रही थी. प्रिय की साँसें मेरे चेहरे से टकराने लगी. प्रिय तेज़ साँस लेते हुए सिसकियाँ लेने लगी.

प्रिय:- siiiiiiiiiiiiiii. hmmmmmmmmmmmm.ooooooooooo. ufffffffffffffffffffff..

प्रिय सिसकियाँ लेते हुए मेरे गले लग गई और ऐसे hi अपनी छूट को रगड़ने लगी.

प्रिय की स्पीड तेज़ हुई. प्रिय का जिस्म अकड़ने लगा और फिर प्रिय अपनी छूट का पानी मेरे लुंड पर गिरते हुए खुद भी मेरे सीने पर गिर गई..

तीनो hi पानी छोड़ गई थें और मेरा पानी निकलना बाकी था.

कुछ देर में प्रिय रिलैक्स हुई और फिर मेरी आंखें देखने लगी. फिर प्रिय ने मुझे किइस करना शुरू कर दिया. प्रिय मेरी तितली मुझे अपना प्यार देने लगी.

कुछ देर प्रिय ने मुझे किश किया और फिर मेरे लुंड का ख्याल करते हुए मुझे छोड़ दिया..

प्रिय:- विज्जु ज़यादा परेशां तो नहीं किया ना हमने...

विजय:- मेरी तो खैर है, असली परेहनी तो मेरे लुंड को हु थी.

जहान्वी:- विज्जु अब्ब्ब तुम लेलो मज़ा, जो तुम्हारा दिल कर रहा है वो करलो.

आज तो सबब ऐसे hi हो रहा है. जब्ब सबब पूरा पूरा करेंगे. तब्ब hi सबब सही से होगा...

प्रिय:- चल शूरति नीचे लेट जा. तू भी बोहत गरम हो गई है. चल बजा ले अपनी छूट की आग को.

षुरूति ख़ुशी ख़ुशी लेट गई. और मैं भी उठ कर शूरति के ऊपर hi चढ़ गया. मैं तो था क श्रुति के बूब्स को चूसो लेकिन अभी टाइम कम् था, अपने लुंड का पानी निकल कर तीनो से hi कुछ बातें करूँगा, फिर थकन भी तो मिटानी है. 3 दिन से ऐसे hi फिर रहा था..

मैं श्रुति के पैरों की तरफ आया तो श्रुति ने खुद hi अपने पेअर खोल दिए.. जैसे लुंड लेने वाली हो..

विजय:- श्रुति क्या अंदर लेने का मैं हो रहा यही.

श्रुति:- विजजू अंदर लेने का मैं तो कब्ब से है. लेकिन तुम अपना और मेरा पानी निकाल दो.. छूट के अंदर तो कल hi जायेगा.

विजय:- श्रुति तुम उलटी लेट जाओ.

श्रुति मेरी बात सुनते hi उलटी लेट गई. और मैं श्रुति के ऊपर आ गया. और अपने लुंड को श्रुति की छूट और गांड में घिसने लगा. इस तरह में मुझे मज़ा आता था. मैं पूरा hi श्रुति के ऊपर लेट गया और अपनी गांड को उठा कर श्रुति की छूट और गांड को अपने लुंड से घिसने लगा....

मैं ऐसे तब्ब तक्क करता रहा. जब्ब तब्ब मेरा लुंड एन्ड तक नहीं पोहंच गया. श्रुति इस बीच फिरसे झड़ने वाली हो गई thi.aur अपनी गांड को उठा उठा के अपनी छूट रगड़वा रही थी.

श्रुति:- विज्जु ये तुमने बड़ा सही तरीका ढूंढा है. ऐसे लग रहा है जैसे तुम मुझे छोड़ रहे हो.... siiiiiiiiiiiiiiiiiii अह्ह्ह्हह्हह ओह्ह्ह्हह्ह विजजूउउउ और तेज़ ragdo..mai फिरसे झड़ने वाली हूँ..

जहान्वी और प्रिय हम दोनों को hi देख रही थी.

दोनों फिर से गरम होने लगी थीं. श्रुति कुछ hi देर में झटके लेते हुए झड़ने लगी. तो प्रिय खुद hi लेट गई...

प्रिय:- विज्जु अब तुम मेरी छूट पर अपने लुंड को रगड़ो.....

मैं भी अब्ब करीब था टी प्रिय के ऊपर छड्ड कर प्रिय के छूट पर अपने लुंड को रगड़ने लगा. मैं बोहत तेज़ी से कर रहा था. मेरा सारा लुंड प्रिय की छूट के लिप्स के अंदर से हो क्र गुज़र रहा था. मेरी स्पीड बढ़ी तो प्रिय थोड़ी सी हिली.

तब्ब मेरा लुंड प्रिय की छूट के छेड़ पर था. प्रिय के हिलने से मेरा लुंड सुपडे समेत प्रिय की छूट में घुस गया..

priya:-aiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaa marrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiii..

vijjjjuuuu..andar क्यों दाल दिया...

मैंने नीचे झुक के देखा तो मेरा लुंड का सुपड प्रिय की छूट में ग़ायब हो चूका था.... और प्रिय की टाइट छूट में फँस चूका था.....

जहान्वी:- प्रिय अब्ब थोड़ा सा गया है तो पूरा hi ले लो ना. विज्जु तुम भी दाल दो अंदर.

प्रिय:- नहीं विज्जउ अभी नहीं. कॉल मैं आराम से लुंगी.. अभी लिया तो फिर मज़ा नहीं आएगा.. और जहान्वी तुम, विज्जु अभी थका हुआ है... ऐसे सही से मज़ा नहीं आएगा.

श्रुति:- विज्जु सील तक्क तो अंदर बहार कर सकते हो. अब्ब प्रिय की छूट थोड़ी खुल गई है तो थोड़ा सा और भी दाल दो.

विजय:- बोलो प्रिय क्या कहती हो. थोड़ा सा और डालो या बहार निकल लूँ..

प्रिय:- विज्जु मेरा मैं मैट बदलो वर्ण मैं अभी क अभी सारा hi डालने को बोल दूंगी. और ये दोनों फिर मोहन देखती रहेंगी.. कॉल हम तीनो hi पूरा पूरा लेंगी.

इसलिए तुम अपने लुंड को बहार निकाल लू..

मैंने भी प्रिय की छूट में घुस चूका लुंड बहार निकला. और फिरसे घिसाई शुरू करदी...

अगले 5 मिंट में प्रिय झाड़ गई. और मैं भी अब्ब आखरी स्टेज पर था.

जहान्वी:- विज्जु मैं मोहन में दाल कर निकल देती हूँ..

श्रुति:- नहीं तुम दोनों पहले hi विज्जु का लुंड मोहन में ले चुकी हो. अब्ब मेरी बारी है..

मैं भी श्रुति की बात सुनके साइड में लेट गया और श्रुति फिर मेरे लुंड के मज़े लेने लगी.. कुछ hi देर में मेरा लुंड अपना पानी छोड़ने लगा. जो कुछ श्रुति के होंठों पर लगा और कुछ श्रुति के बूब्स पर गिरने लगा. मेरे लुंड का पानी तीनो hi अपनी उँगलियों से लपेट कर चाटने लगीं..

कुछ देर बाद हम सबब hi बाथरूम से फ्रेश होकर बीएड पर लेते थे...

प्रिय मेरे ऊपर आ गई और श्रुति और जहान्वी दोनों मेरी साइड में लेट आई..

विजय:- प्रिय तुझे आज दुःख लगा था ना.. जब्ब पापा मिले थे..

प्रिय:- हाँ विज्जु तब्ब बोहत दिल दुख था मेरा.. पारर फिर सबब ठीक हो गया..

विजय:- प्रिय तुझे ग़म नहीं करना चाहिए. तुम जिसका भी खून हो, वो था तो एक हवस का मारा hi ना. उसे तो पता भी नहीं होगा क उसके लुंड की वजा से तुम इस दुन्या में आ चुकी हो. और फिर ऐसे बाप का तुम करोगी भी क्या...

प्रिय:- विज्जु मैं भी सबब समझती हूँ. बास कुछ देर दिल दुख था. लेकिन फिर पापा ने मुझे भी अपनी बेटी बना लिया तो अब्ब मान ठीक हूँ..

जहान्वी:- प्रिय मुझे और जहान्वी को देखो, हम भी तो अपने असल से दूर हाँ. और अब्ब हम वापिस भी तो नै जा सकती.. जैसी हमारी ज़िन्दगी हो गई है. जैसे हमारी समाज में इज़्ज़त रह गई है. दुःख तो हमें भी बोहत है लेकिन हम कर भी क्या सकती हाँ..

श्रुति:- हाँ प्रिय हम विज्जउ से कह के घर भी जा सकती हाँ. लेकिन फिर कोठे पर रह के पूरा महाराष्ट hi तो हमें जानने लगा है. हम अपने घर में भी एक अछि ज़िन्दगी नहीं जी सकती.. हमारे लिए भी तो हमारे माँ बाप छूट चुके हाँ.. तुम क्यों ग़म करती हो.. रेखा बाई के कोठे से मिलें और भी तो कई हम जैसी हाँ, जिसके बाप का पता नै होता... विज्जू तो माँ और पापा ले प्यार की निशानी था.. और फिर पापा भी तो कुछ नहीं जानते थे... ये सबब तो भगवन ने किया है..... प्रिय और देखा नहीं तुमने माँ कैसे सबब hi दुःख दर्द को भूल गई है... तुम बास माँ और पापा के मिलान की ख़ुशी मनाओ. वर्ण जितना ज़ालम माँ के साथ हुआ है, माँ तो एक ज़िंदा लाश hi बानी रहती... और फिर हम सबब भी तो एक साथ हमेशा रहेंगे.. खुश रहेंगे. दुखी रह कर हमें मिलेगा भी क्या.... पहले hi तो साओन से ऐसे दही रहकर हमने गुज़र दिए अब्ब हम सिर्फ अपनी ज़िन्दगी की खुशियों को जियेंगी...... तुम अपने उस हवस परास्त पिता को कभी भी याद मैट करना..

विजय:- और जो खुशियां हमें मिल रही हाँ. अहम उन्हें सेलिब्रेट करेंगे.. जो बीत चूका उसे याद रख के क्या मिलेगा...

प्रिय:- तुम तीनो ठीक कह रहे हो. मुझे कोई ग़म नहीं है. बास वक़्ती तौर अपर हुआ था. और वैसे भी मैं उस हवस परास्त की बेटी हो भी कैसे सकती हूँ..

जो माँ के पास अपने लुलंद का पानी निकलने आया था.. ज़रूर उसे भी दन्न ने hi भेजा होगा.

हम तीनो ने hi प्रिय को चूमना शुरू कर दिया. प्रिय अब्ब ठीक हो गई थी. पैदा करना वाला hi तो पिता नहीं होता. पलने और सँभालने वाला भी तो पिता होता है. प्रिय हम सबब की जान थी, और हम सबब प्रिय की जान थे. माँ, पापा के लिए ख़ास थीं, पापा का प्यार थीं और फिर ये कैसे हो सकता था क पापा भी हम सबब को खुद के दिल में न परोयें... पापा तो पहले से hi एक ग्रेट इंसान थे. उनके जैसा होना आसान नहीं था..

कुछ देर ऐसे hi हम बातें करते रहे और फिर मुझे नींद आने लगी.. तीनो ने भी मुझे सोने दिया... प्रिय मेरे ऊपर hi सो गई..



********************************************************************************



Location:Mumbai


*******************



जिस रात रेखा बाई का कोठा उजड़ा था. पूरा मुंबई hi ये सब जान गया था. मीडिया की वजा से ये खबर पुरे इंडिया में फेल गई थी..

मुंबई की जेल में मौजूद बग्गा भी ये खबर सुन चूका था... वो पहले बोहत खुश हुआ. क रेखा बाई अगर मुझसे जीत गई है तो क्या हुआ. किसी ने उसे hi उसके कोठे से उठा लिया. बग्गा को रेखा बाई के अपहरण से बड़ी ख़ुशी हुई थी.

लेकिन फिर जैसे hi उसे पता चला क रेखा बाई के साथ साथ पूरा कोठा hi उजाड़ गया है... तो बग्गा का घुसा सातवें आसमान तक जा पोहंचा.

बग्गा श्वेता के निकल जाने से ग़ुस्से में आ गया था... पिछले कई सालों से बग्गा जेल की ज़िन्दगी काट रहा था.. वो रेखा बाई से बलदा तो लेना hi चाहता था. लेकिन बग्गा के लिए श्वेता एक चैलेंज बन चुकी थी. बग्गा ने आज तक जिस औरत या लड़की को अपने नीचे लाने का सोचा था. बग्गा को कभी भी कोई परेशानी नहीं हुई थी.. लेकिन श्वेता ने बग्गा को थप्पड़ मार कर बग्गा के दिल में श्वेता के लिए नए एहसास जगा दिए थे.. बग्गा ने कसम खा ली थी क कुछ भी हो जाए. वो श्वेता को हासिल करके hi रहेगा...

अगर देखा जाए तो बग्गा की बर्बादी hi श्वेता की वजा से हुई थी. अगर श्वेता बग्गा के दिल में न बस्ती.. या बग्गा ज़िद्दी न होता तो बग्गा बर्बाद न होता..

बग्गा कुछ भी सेह सकता था लेकिन श्वेता को अपने हाथ से निकलता हुआ नहीं देख सकता था.. बग्गा के लिए ये सबब सहन कर मुमकिन नहीं रहा था...

बग्गा पहले भी किसी से कम् नहीं था. अब्ब तो उसकी सज़ा भी कम् रह गई थी. लेकिन श्वेता क ग़ायब हो जाने की वजा से बग्गा के लिए जेल की ज़िन्दगी नर्ग बनने लगी... बग्गा के लिए जेल में रहा मुष्किल हुआ तो उसने अपने दोस्तों से बात की..

बग्गा ने जेल में रह क्र खुद को और भी स्टोरंग बना लिया था.. बग्गा को जेल में रह कर कई किसम के खतरनाक क्रिमिनल्स मिल चुके थे. बग्गा की उन सबहि से खूब जमने लगी थी....

बग्गा के 3 ख़ास दोस्त थे..

1..भीम singh..age:40

भीम सिंह एक खतरनाक डाकू था, जो किसी दौर में पहले कसाई था, शुरू से hi गलत लोगों में उठने बैठने की वजा से भीम सिंह हर बुरे धंदे में इन्वॉल्व होना शुरू हो गया. लड़कों को उठा आकर उनका रपे करना, रह चलती किसी लड़की को उठा कर ले जाना. और फिर उसका रपे करके कहीं पहनक देना भीम सिंह की आदत बन गई थी. भीम सिंह किसी बैल की इस ताक़त का मिल्क था. बड़ी बड़ी मूंछें थी उसकी.. भीम सिंह का hi एक दोस्त जो जेल में hi उसके साथ था.. डरा..

2..dara...age:38

डरा का अत पता खुद डरा को भी नहीं था. भीम सिंह के hi जैसा हत्ता कट्टा था, साड़ी घटिया आदतें भीम सिंह जैसी थीं. और मिल कर रहते थे..

भीम सिंह और डरा सिंह ने मिल कर एक गैंग था जो लोगों के घरों में डाका डाला करते थे. 4 साल तक दोनों ने hi खूब पैसा इकठा किया था. लेकिन वो लुटे हुए पैसे को अपने इस्तेमाल में नहीं ला सके थे. एक डाके में भीम संघ डरा सिंह पुलिस के हाथे चढ़ गए और भीम सिंह और डरा सिंह क शिव बाकी सबब hi मारे गए. दोनों को जेल हो गई, कहाँ उन्हे उम्र भर रहना था.

3..जसवंत एक sikh..age:42

दमाग नाम को नै था इसमें लकिन लड़ाई में ये सबब से hi आगे था, डर भी नहीं था जसवंत को किसी का.. ऐसे hi अपन hi गाओं में एक लड़ाई के दौरान पागल सा हुआ और कई लोगों को मार दिया.... इसे भी उम्र कैद हो गई...

बग्गा ने तीनो दोस्तों से hi मीटिंग की जेल से भागने की प्लानिंग करने लगे.

तीनो बड़े hi हैरान हुए..

भीम सिंह:- बग्गा तुम्हारी सजा की तो कुछ hi महीने रहते हाँ. तुम क्यों यहाँ से भागना चाहते हो...

बग्गा:- य्र्र सबब hi तो जानते हो. श्वेता मेरी ज़िद बन्न गई थी. अब्ब सुनने में आया है. वो कोठे से फरार है. मैं उसे ढूंढ कर hi रहूँगा... मुझे तब्ब तक चैन नहीं मिलेगा जब्ब तब्ब वो मेरे लुंड के नीचे नहीं आ जाती. बड़ा तड़पाया है उसने.

बग्गा की बात सुनके तीनो hi हस्सन लगा...

हहहहहहहहहहहहह

जसवंत:- वाह्ह बग्गा तुम एक औरत के लिए जेल तोड़ कर भागना चाहते हो.. कुछ महीने इंतज़ार भी नहीं कर सकते.

डरा- बग्गा तुम्हारे लिए कौन सी औरतों और लड़कियों की कमी हो सकती है..

बग्गा:- श्वेता मेरे लिए मेरी ज़िद्द है, मैं उसे नहीं छोड़ सकता.. चाहे मुझे कुछ भी करना पड़े..

भीम सिंह:- बग्गा क्या वो तुम्हारे लिए hi रहेगी, या हमें भी कुछ हिस्सा मिलेगा..

बग्गा:- सॉरी यारो वो सिर्फ मेरे लिए है, बाकी जिस के लिए भी तुम तीनो कहोगे मैंने उसे तुम्हारे क़दमों में ढेर करदूंगा.




************************************************************************************




विजय के लिए आने वाले वक़्त में कोई एक टेंशन नहीं थी. विजय अपने सामने मौजूद दुश्मनो पर फोकस किये हुए था. बग्गा को विजय समेत सबब hi भूले हुए थे. और भुला हुआ दुश्मन कुछ ज़यादा hi हानि पोहंचा देता है कभी कभी.

दन्न अपनी स्टेट पावर और मेंटली पॉवरफुल होने की वाज से स्ट्रांग था... लेकिन बग्गा और उसके दोस्त तो खुद में hi एक तूफ़ान थे... सब के सबब के दमाग से पैदल बास ज़िद्द के लिए अपनी मैं मर्ज़ी करने के लिए काट मरने वाले...

बग्गा किसी भी हिसाब से दन्न से ज़िद्द और ईगो में कम् नहीं था. श्वेता के लिए बग्गा ने अपना साम्राज्य hi ख़तम करवा दिया. वर्ण बग्गा इतना भी गया गुज़रा नहीं था.....

विजय का फोकस अपने घर वळून को खुशियां देने में था. और दन्न के साथ साथ अपने दूसरे दुश्मनो से बदला लेने पर वो अपना फोकस बनाये हुआ था...

बग्गा के जेल में जाने से सबब ने hi बग्गा को नज़र अंदाज़ करके अपने लिए ख़तरात को जनम दे दिया था..

अब्ब देखना ये था क दन्न या बग्गा श्वेता को केस ढूंढ़ते हाँ.. तब्ब hi असली जुंग शुरू होगी. और विजय के लिए ये जुंग कोई आसान कुंग नहीं थी.

औरत के लिए तो मुल्कों के मुल्क hi उजाड़ दिए गए थे. ये तो फिर भी कुछ hi लोग हाँ. श्वेता के लिए दन्न दो दिन और 2 रातें मुसलसल जाग सकता है. बग्गा अपना बनाया गया सेटअप ख़तम कर सकता है. और सालों के लिए जेल में जा सकता है..

श्वेता के लिए ये जुंग आसान तो नहीं थी.. और न hi विजय के लिए.




************************************************************************************




 
अपडेट ::: 71

*************



रेखा बाई के अपहरण के बाद दन्न को तो झटका लगा hi था.. पारर रेखा बाई के पार्टनर्स के लिए भी ये सबब बोहत hi शॉकिंग था....

रेखा बाई की वजा से सबब का hi धंदा बोहत बढ़िया से चल रहा था. रेखा बाई के जैसी कोई नहीं थी... रेखा बाई ने सभी को hi नित नयी लड़कियां उठवा कर दीं थीं. कई और भी ऐसे धंदे थे जो रेखा बाई मुंबई के मला और दूसरे कई बुसिनेस्स्में लोगों के साथ मिल कर कर रही थी..

कोठे का धंदा रेखा बाई का शोक था. वर्ण उसके पास पैसा और पावर बोहत थी.. कई ऐसे अड्डे थे जो रेखा बाई की zer-e-nigrani चल रहे थे..

अब्ब रेखा बाई नै रही थी. तो सबब को hi परेशानी उठानी पद रही थी. लेकिन अब्ब कोई भी कुछ कर नहीं सकता था.. कहीं से भी रेखा बाई का पता नहीं चल पा रहा था.. रेखा बाई के पार्टनर्स भी उसे ढूंढ़ने में लगे हुए थे..

कौन बताये क इक नयी hi जुंग शुरू हो चुकी है, जो विजय ने शुरू की है, और रेखा बाई के जैसे hi धीरे धीरे करके सारे hi रेखा बाई के पास पोहचने वाले हाँ...

लेकिन इस सबब के लिए अभी टाइम था.. विजय अपनी लाइफ में बिजी हो गया था. और रेखा बाई के पार्टनर्स भी जैसे तैसे करके रेखा बाई के अधूर ेछोड़े हुए धंदे को फिरसे आगे बढ़ने में लग गए..



********************************************************************************





सूबा मेरी आँख खुली तो मैंने देखा क मैं अपनी तितलियों के बीच में नंगा hi सोया हुआ हूँ.... मुझे रात का सबब याद आया तो फिर मेरे होंटो पर एक मुस्कान आ गई.. तीनो आखिर कार मेरी बहन में ा hi गई थीं. कितना फासला बढ़ा दिया था वक़्त ने हमारे बीच का.. जो अब्ब सिम्त चूका था.. मैंने प्रिय को खुद से अलग किया और फिर तीनो को hi एक एक किश करके बाथरूम में घुस गया..

फ्रेश हो कर मैं बहार निकला अभी सूरज नहीं निकला था. सबब hi सो रहे थे.. मुझे जल्दी उठने की आदत थी. इसलिए मैं जल्दी hi उठ गया था..

पैलेस को मैंने अभी पूरा सही से नहीं देखा था. ट्रॉउज़र और हाफ बाज़ो शर्ट पहने मैं जॉगिंग करता हुआ पूरा पैलेस hi देखने लगा.. मुझे कई जगा पैलेस की सुरक्षा के लिए गार्ड्स काढ़े हुए दिखे थे... जूली ने बड़ा सही से सबब सेटअप बनाया था.. मैंने भी सबब से hello हाय की और आधे घंटे तक्क पुरे पैलेस का सर्वे करता रहा..

फिर मैं पैलेस की छत पर जा पोहंचा. मैं पैलेस की छत पर खड़ा हो कर

आस पास का नज़ारा देखने लगा. कुछ फासले पर बानी हुई कोठियां मुझे नज़र आ रही थीं. बोहत hi विप एरिया था. ये दिल्ली सिटी के मोस्ट पॉपुलर एरिया था.

जब तक सूरज नहीं निकला मैं एक्सरसाइज और फाइटिंग प्रैक्टिस करता रहा. सूरज निकलने के 10 मिंट बाद मैं नीचे आ गया. अभी तक कोई भी नहीं उठा था. सबब hi थके हुए थे. देर से hi उठने वाले थे..

मैं किटेचं में गया तो वहां एक माइड कड़ी थी, मैं उसे जइसे का कह कर बहार आ गया. वो मुझे जूस दे गई, जूस पि कर मई सोचने लगा क अब क्या करना चाहिए. मैंने पहले लाली के कमरे में जाने का सोचा. देखता हूँ वो सोइ हुई है या जाग रही है.

मई लाली के कमरे में पोहंचा तो लाली गहरी नींद में थी. मैं जब भी लाली से मिलने आया था तो लाली मुझे सोती हुई hi दिखी थी.

मैं बहार आया और रेखा बाई के पास जाने लगा.

बेसमेंट में पोहंचा तो रेखा बाई बंधी हुई थी. रेखा बाई को यहाँ आते hi फिरसे नंगा कर दिया गया था.

.

.

.

मैं रेखा बाई के पास पोहंचा तो रेखा बाई की आंख खुल गई. रेखा बाई को अब्ब नींद क्यों आएगी. उसकी नींदें तो अब्ब हमेशा के लिए उड़द चुकी थीं.

मुझे देख कर रेखा बाई बोली.

रेखा बाई:- तुम विज्जु हो ना.

विजय:- हाँ रेखा बाई, मैं विज्जु hi हों. तुम मुझे कैसे भूल सकती हो, शकल बदल गई थी मेरी लेकिन ऑंखें तो वही हाँ ना.

रेखा बाई:- मैं कहाँ पर हूँ. और ये कौन सी जगा है..

विजय:- क्या करेगी रेखा बाई जान कर.. अब्ब तुम्हारे लिए कुछ भी जानना ज़रूरी नहीं है. तू बास अपने लिए होने वाले बर्ताव को याद रख. बड़े मज़े की ज़िन्दगी जी है न तुमने. अब्ब बाकी के मज़े मैं तुझे कराऊंगा....

रेखा बाई मेरी बात सुन के मुस्कुराने अलगी.

रेखा बाई:- तो क्या हो जाएगा, तू अगर मेरे साथ कुछ भी करलेगा. कब्ब तक्क तू मुझे ऐसे कैद में रखेगा. मेरे चाहने वाले मुझे कैसे भी करके ढूंढ hi निकलनेगे. और फिर तुम अपना हशर देखना, मैं कैसे फिरसे तुम्हारी माँ और बहनो को कोठे की रंडियां बनती हूँ...

हहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहह

मैं रेखा बाई की बात सुन कर हस्सन लगा..

विजय:- रस्सी जल गई पर बल नहीं गया... रेखा बाई, तुझे इतना घमंड क्यों है खुद पर और खुद की पावर par....koi नहीं आने वाला तुझे यहाँ से निकालने के लिए. तो मुंबई में नहीं है. मुंबई यहाँ से हज़ारों किलोमीटर दूर है..

रेखा बाई मेरी ये बात सुन कर हक्की बक्की रह गई..

रेखा बाई:- kkk...ky..kya..mm..matlab.????

विजय:- वो छोड़ बास ये याद रख तूने जितने मज़े लेने थे ले लिए.. अब्ब हम तुझे मज़े कराएँगे.. तुझे बड़ा घमंड रहा है. अपनी खूबसूरती पर.. बड़े मज़े से तू चूड़ी है अपनी जवानी में, अपनी छूट के चमत्कार दिखा दिखा के बोहत नाम और पैसा कमाया है ना तूने.. पैसा तो तेरा तेरे hi पार्टनर्स के काम आएगा. जितना भी कमाया था वो अब्ब तेरे लिए बेकार हो गया है.... और तू जो अपनी छूट और गांड के मज़े दूसरों को दिया और लिया करती थी ना. आज से hi तेरी छूट और गांड के हशर ख़राब होने वाले हाँ. तू बड़ी देर तक और बड़े बड़े लुँडो से चूड़ी होगी, तू शायद सोच रही होगी क तुझे कोई भी कैसे भी करके चोदे तुझे फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला. तू मैं तुझे ये बता दूँ ये तेरी भूल है. तो छुड़ेगी और ऐसे छुड़ेगी.

अपनी आज तक की साड़ी hi चुड़ाइयों को भूल जाएगी.. तुझे ऐसा मज़ा कराऊंगा क यहीं बेसमेंट में तेरी सिसकियाँ hi गूंजती रहेंगी...

रेखा बाई कुछ कुछ मेरे तेवर समझ गई थी.. अब्ब रेखा बाई सेहम सी गई थी. रेखा बाई की आँखों में डर दिखने लगा था..

रेखा बाई:- kk...kya..mm..matlab..ttt..tum..kk..kya ..करने ..वाले ...हो..

विजय:- डर गई.. hahahahaha..sahi hai..tujhe दररना hi चाहिए... जो कुछ तेरे साथ होने वाला है. उसे इमेजिन करके तू दरर्ति hi reh...bada डराया है तूने बेबस लड़कियों और औरतों को...

साली कुत्तिया पन्गा उनसे लिया जाता है, जिनसे बराबरी हो, bebass,lachaar लड़कियों को घरों से उठवा कर अपनी पावर दिखती हो.. अब्ब तू इसी बेसमेंट में मेरी पावर देखना.. तुझे एक एक बेबस, लाचार, मजबूर, रोटी बिलक्ति लड़कियां और औरतें याद न करवा दें तो मेरा नाम बदल देना.... और एक बात, तुझे मैं मरने नै देने वाला.. तू जिए गई और एक लम्बी उम्र जिए gi..par तेरा एक एक सांस मौत से बदतर होगा, और तुझे मौत नहीं आने दी जायेगी...

इतना बोल क्र मैं बहार जाने लगा, कुछ दूर जा कर मैं रुका और मुद कर रेखा बाई को देखने. मेरे होंटो पर इक डेविल स्माइल थी.

विजय:- रेखा बाई तू इतनी एक्सपेरिएंस्ड तो होगी hi, जो मैंने बोलै उसे तुमने मेरी आँखों में देख क्र बोहत अच्छे से समझ लिया होगा. तू आँखों को परखने में माहिर तो है ना, तो फिर से देख मेरी आँखों में, तुझे खुद के साथ होने वाला सबब दिख जाएगा... तू उसे इमेजिन कर, मैं चलता हूँ, जल्द hi तेरे लिए इंतेज़ाम भी करना है.

इतना बोल कर मैं बेसमेंट से बहार निकल आया..

कुछ देर में मैं सिटींग हाल में बैठा tha.aur जूली भी वहीँ बैठी हुई थी. वो मुझे देख के खिल उठी.

जूली:- विजय तुम कब्ब उठे.

विजय:_ मैं तो बोहत देर से उठा उहा था. अपना सारा रूटीन वर्क भी कर लिया है मैंने तो.

जूली:- गुड ये तो अच्छी बात है.

विजय:- तुम कैसी हो जूली, सॉरी मैं तुम्हे ज़यादा समय नहीं दे पाया..

जूली:- इतस ok विजय, मैं भी सब समझती हूँ, यहाँ जैसा समां बना हुआ है और जैसे पल पल हालत बदल रहे हाँ, ऐसा तो फिर होना hi था.

फिर मैं और जूली पैलेस की सुरक्षा को लेके बात करने लगे. पैलेस के पहले से मौजूद ख़ुफ़िया रस्ते बंद करके और नए रास्ते बनाने के बारे में भी बातें होती रहें.

1 घंटे बाद मैं अपने रूम में फ्रेश होने के लिए चल दिए....

********************************************************************************

ब्रेकफाट के बाद सबब फिर से सिटींग हाल में जा कर बैठ गए. माँ और पापा अभी नहीं उठे थे. वो अपने रूम में hi थे.

मेरी तितलियाँ आज बोहत फ्रेश दिख रही थीं. फ्रेश होती भी क्यों न, सैलून का रुका हुआ पानी जो छूट से बहार आ गया था, और वो भी अपने विज्जु की वजा se.isliye बोहत ज़यादा चहक रही थीं. और बात बात पर खिलखिलाते हुए हस्सन लग जाती. तीनो के hi हस्सन ने सबब को बोहत अच्छा लगने लगा था. मेरी दिल्ली वाली बकरियां भी तीनो के साथ खूब मस्ती करने में लगी हुई थीं.

राजा और मेरे दूसरे फ्रेंड्स अपनी फॅमिली के साथ ऊपर वाले पोरशन में रहते थे. आज वो नीचे नहीं ए थे. कल रात में सबब का मुश्तर्का डिनर था तो सबब hi नीचे डाइनिंग हाल जे आ गए थे, वर्ण उनका खाना पीने अलग hi था..

यहाँ नीचे कारन, जूही, जूही माँ, मेरी दिल्ली वाली फॅमिली सोनाक्षी family,aur मेरी बहने hi थीं. कोठे से आने वाली अक्सर ब्रेकफास्ट के बाद अपने रूम में चली चली गए थी. अपर्णा तो हमसे आत्ताच हो hi गई थी. वो इस सबब से अलग नहीं होना चाहती थी.

पूजा दीदी:- विज्जु अब्ब क्या करने का इरादा है.

विजय:- दीदी आज तो रेखा बाई का कुछ इंतेज़ाम करना है, और कोठे से लाइ गई लड़कियों से एक साथ बात करने का इरादा है. उन सबब का मैं भी तो जानना है.

उन लड़कियों में से 3 लड़कियां भी इस वक़्त हमसे थोड़े फैसले पर बैठी हुई थी, वो आपस में बात क्र रही थी, मेरी बात सुनकर मेरी तरफ देखने लगी.

प्रिय:- विज्जु क्या बात करने वाले हो सबसे..

विजय:- यही फ्यूचर को लेके कुछ बात करूँगा. आखिर उन्हों ने भी अपनी नयी ज़िन्दगी शुरू करनी है.

पूजा दीदी:- विज्जु ये तुमने सही सोचा है. सब को hi एक अच्छी लाइफ मिलनी चाहिए. इन सबब का भी हक़ बनता है..

jhanvi:-(teeno लड़कियों से) सुरभि तुम तीनो क्या कहती हो इस बारे में.

सुरभि:- जहान्वी हमें यकीन है विज्जु जो भी करेगा वो हम सबब के लिए सही hi होगा. जितना वो हमारे लिए कर रहा है, उसे देख के हमे नहीं लगता क हमें कुछ कहने की जौरात है.

नताशा दीदी:- नहीं सुरभि ये सही नहीं है. ज़रूरी नहीं है क विज्जु सबब hi ठीक करदे, तुम सबब के अपने भी दिल में कुछ न कुछ तो होगा hi, इसलिए तुम सबब जो जो तुम्हरे दिल में है वो विज्जु को बता देना.

सुरभि:- ठीक है दीदी.

विजय:- तो फिर सबब शाम से 2 घंटे पहले पैलेस पार्क में इकठे हो जाना. सबब से hi पूछा जायेगा. अब उनके लिए आगे क्या करना सही रहेगा. मैं सबब अपनी मर्ज़ी से नहीं करना चाहता. सबब मेरे करने से बोहत कुछ अधूरा रह सकता है, जिससे हम सबब ओपनली डिसकस करके सलूशन निकलने की कोशिश करेंगे.

रानी:- हाँ विज्जु ये सही रहेगा..

कारन और जूही सबब सुन रहे थे, लेकिन वो कुछ बोले नहीं, और न hi बड़ों ने कुछ कहा.

अजित भाई भी ब्रेकफास्ट करके अपने रूम में चले गए थे. हर्ष अंकल अपने ऑफिस चले गए, तो औंटीएस और भाभी हमारे साथ hi मिल कर टाइम स्पेंड करने लगीं...

1 घंटे सबसे बातें करने के बाद मैं उठ गया. अब्ब मुझे रेखा बाई के लिए कुछ करना था, और मैंने सोच लिया था रेखा बाई के साथ क्या करना है...

रेखा बाई को फिजिकली टार्चर करने के कुछ साहिल होने वाला था नहीं, रेखा बाई मेटली तारुतरे के लायक थी, और मैं ऐसा hi कुछ रेखा बाई के साथ करने वाला था. रेखा बाई को साड़ी उम्र अपने शरीर से बड़ा लगाओ रहा था, बड़े मज़े किये थे रेखा बाई ने. बड़ा मान था रेखा बाई को खुद की पावर का, रेखा बाई खुद के लिए घटिया तरीन बर्ताव डेसेर्वे करती थी.

कितनो की इज़्ज़त उजाड़ चुकी थी रेखा बाई, कितने घरों का नूर चुरा कर ले गई थी.. ये तो शायद रेखा बी को भी याद नहीं होगा, रेखा बाई को वही सबब याद करवाना था...... और मैं उसी के इंतेज़ाम में लगा हुआ था. 2 घंटे लगे मुझे रेखा बाई के लिए सबब अर्रंगे करने में.

इन 2 घंटों में राजा, उदय, जीतू और अनुपम भी मेरे साथ शामिल हो चुके थे.

वो मुझसे पूछने लगे क तुम क्या करने वाले हो, तो मैंने उन्हें सबब बता दिया क मैं रेखा बाई के साथ क्या करने वाला हूँ......

वो चरों hi शॉकेड हो गए मेरी बात सुनकर..

उदय:- विजय मैंने तो कुछ और hi सोचा था. रेखा बाई को लेके..

अनु:- और मैंने तो जीतो के साथ मिलके रेखा बाई की छूट और गांड का भोसड़ा बनाने का सोचा हुआ था. लेकिन तुम ये सबब क्यों करने वाले हो..

विजय:- देखो ीरर्र, रेखा बाई का जिस्म हमसे किसी के लिए भी भोगने लायक नहीं है. एक तो उसे इससे कोई खास फ़र्क़ नहीं पड़ेगा, और दूसरे हमे क्या ज़रूरत है रेखा बाई क घटिया शरीर से अपना मैं बहलाने की.. और न hi ये सबब रेखा बाई के मज़े के लिए किया जा रहा है. उसे जितना घमंड अपने शरीर से रहा है, वो सारा मैं उसकी छूट और गांड से निकाल देना चाहता हूँ.

रेखा बाई ी छूट और गांड तो फटेगी hi, पारर जैसे मैंने कहा वैसे hi होगा, इसमें रेखा बाई के लिए मंतालय टार्चर बोहत ज़यादा होगा. और रेखा बाई इसी लायक है. रेखा बाई को रट तड़पते देखना है मुझे, और रेखा बाई की ऐसी hi हालत मैं सबब को hi दिखाना चाहता hun.shayad मेरे ऐसा करने से किसी के दिल के कुछ ज़ख़्म भर जाएँ.

तुम सबब बास कुछ देर में रेखा बाई को ख़ुफ़िया रस्ते वाले बेसमेंट में पोहंचा दो. पता है ना मैं किस रास्ते की बात कर रहा हूँ.

राजा:- हाँ विजय मैं समझ गया, तुम जिस रस्ते से इस पैलेस में घुसे थे, रेखा बाई को वही लेजाना है.

uday:-uske बाद क्या करना है.

फिर मैंने सबब को आगे का भी सबब बता दिया. सब hi रेखा बाई के लिए ऐसा सुनके खुश हो गए.

विजय:- ये सबब करने के बाद तुम सबब दिल्ली के 2 दूसरे गैंग्स की भी कुंडली निकालो. अब्ब घरवळून को टाइम देने के साथ साथ ये सबब भी करना है. इस शेर्हर में मुझे शांति देखनी है.

जीतू::- ठीक है विजय ये हम कर लेंगे.

विजय:- और तुम सबब के घर वळून का क्या हाल है. मुझे तो किसी से मिलने का सही टाइम hi नहीं मिला.

राजा चुप रहा, वो कुछ नहीं बोलै, और बाकी के तीनो hi

तीनो:- विजय वो सबब यहाँ बोहत खुश हाँ.. बास तुम्हे hi याद करते रहते हाँ, सबब तुमसे मिलने के लिए बोहत बेचैन हाँ..

विजय:- हाँ टाइम निकाल के मैं मिलता हूँ सबब से .एक बात और भी है, अभी इस पैलेस में मौजूद किसी भी महिला को कहीं अकेले मैट जाने देना. अभी पुरे दिल्ली की नज़र भी हमपर है, कही कोई कुछ गड़बड़ न करदे. हमारे कितने दुश्मन बन्न गए हाँ, हम नहीं जानते, इसलिए सबब की hi सुरक्षा को लेके सीरियस हो जाओ.

फिर हम सबब hi अपने अपने काम में लग्ग गए, और मैं फ्री होकर पैलेस में चला गया.

माँ और पापा भी उठ चुके थे, और दोनों hi बोहत फ्रेश लग्ग रहे थे. दोनों को खुश देख कर मैं बी खुश हो गया..

मैं दोनों के hi बीच में जा के बैठ गया, और प्रिय को देखके अपने पास आने को बोलै. प्रिय चल के आई और मेरी गॉड में बैठ गई...

पापा ने भी अपनी लाइफ अकेले रह के गुज़री थी, और जैसा माहौल यहाँ का बन्न गया था, वो पापा के लिए बड़ा अजीब होने वाला था. यहाँ साड़ी hi महिलाएं बेशरम बन्न चुकी थें और पापा के लिए ये सबब बोहत hi अजीब सिचुएशन क्रिएट करने वाला था.

इसे बदला तो जा नहीं सकता था, अब्ब देखते हाँ पापा क्या रिएक्शन देते हाँ...

प्रिय मेरी गॉड में आ के मेरे चेहरे को थाम कर अपनी उँगलियों से मेरे चेहरे को अपना प्यार देने लगी.

माँ और पापा ने प्रिय की पीठ को सहलाना शुरू कर दिया, दोनों hi प्रिय से अपने प्यार का इज़हार कर रहे थे..

पापा:- प्रिय बेटी, अब्ब कैसी हो तुम..

प्रिय:- सॉरी पापा कल आपके होते हुए भी मैं दुखी हो गई थी, मुझे ये याद रखना चाहिए था, जो माँ के जीवन साथी हाँ और जो मेरे विज्जु के पापा हाँ, वही मेरे भी तो पापा हाँ, मुझे किसी और के बारे में नहीं सोचना चाहिए था..

आप इतने अच्छे हाँ और मैं उस हवस परास्त को याद करके आंसू बहाने लग गई थी.. सॉरी पापा ... सॉरी माँ ...

माँ और पापा प्रिय की ऐसी बात सुनकर बोहत खुश hue.aur दोनों ने hi प्रिय का एक एक हां थाम कर अपने होंटो से लगा कर चूम लिया...

पापा:- प्रिय बेटी तुमने मेरे दिल से एक बोझ उतर दिया हिअ. वर्ण मैं ये सोच रहा था, क विज्जु मेरा बीटा है, ये सोच कर तुम कही इस बात को दिल पर ने लेलो. तुम सबब तो एक hi थे, बीच में तो मैं hi आया हूँ, बास यही बात मुझे डिस्टर्ब कर रही थी, कहीं मेरी वजा से तुम सबब के दिल न दुखते रहें..

पापा बी इमोशनल हो गए थे.. इतने सख्त शरीर के मालिक थे, दिल के अच्छे तो थे hi, लेकिन कल से hi वो पुरे के पुरे बदल गए थे..

बदलते भुई क्यों न उनकी ज़िन्दगी की ाधुदृ ख्वाहिशें जो पूरी हो गई थीं.

प्रिय पापा की बात सुनकर मेरी गॉड से उठी और पापा की गॉड में जा क्र बैठ गई और पापा के चेहरे को थाम कर पापा के गालों पर हलके हलके किश करने लगी..

प्रिय:- पापा आप दिल पर कोई भी बोझ न लें, मैंने कहा ना कल मुझसे भूल हो गई थी, सब कुछ अचानक से हुआ था, तो मुझे भी वो याद आ गया था. आप hi मेरे पापा हाँ, और अब्ब आप आगे से ऐसा कुछ भी नहीं सोचेंगे..

पापा:- थैंक यू प्रिय बेटी.. अब्ब मैं सच में बोहत खुश हूँ.. मुझे श्वेता मिली, एक बीटा मिला और तुम्हारे जैसी 3 बेटियां भी मिल गई........

पापा ने जहान्वी और श्रुति को भी अपने पास hi बुला लिया.. दोनों आ क्र नीचे hi पापा के घुटनो पर सर्र रख कर बैठ गईं..

jhanvi..shruti:- हाँ पापा हम भी आप की hi बेटियां हाँ. हमे पीछे मुद के नहीं देखना. आप जैसे अच्छे पापा को छोड़ कर हमने भी किसी और के बारे में नहीं सोचना. वो तो हमारा कल था, और आप हमारा आज हाँ..

माँ:- जग जग जिओ मेरे bachcho..sada ऐसे hi खुश खुश रहना.. अब्ब भगंवन ने हमें खुशियां दी हाँ तो उन खुशियों को छोड़ कर हम दुखी क्यों हो जाएँ. अब्ब हम इन्ही खुशियों से बाकी की साड़ी ज़िन्दगी जी लेंगे.

बोहत अच्छा माहौल बन गया था.. सबब hi चेचक चेचक के बाटन ाकरने लगे..

विजय:- माँ मैं लाली के कमरे से हो के आता हूँ. अभी तक मैं उससे मिला भी नहीं..

माँ:- हाँ विज्जु बीटा तुम जाओ. लाली का हक़ भी बनता है तुमसे मिलने का.

मैं उठ कर लाली के कमरे में जाने लगा. जब मैं लाली के कमरे में पोहंचा तो लाली को एक माइड कुछ मिडीने दे रही थी. लाली मुझे देख के अचंभे में आ गई. मैं पूरा बदल गया था और लाली ने मुझे मेरे इस रूप में कभी नहीं देखा था..

माइड ने लाली को मेडिसिन दी तो मैंने उसे रूमसे बहार जाने को बोल दिया. माइड बहार गई तो मैंने दूर अंदर से लॉक किया और मुद कर लाली को देखने लगा.

लाली मुझे लॉक लगते देख कर दर्री नै बास वो मुझे हैरानी से देख रही थी और ख़ास क्र मेरी आँखों पर कुछ ज़यादा hi फोकस किये हुए थी लाली.

मैं मुस्कान देता हुआ लाली की तरफ बढ़ने लगा. लाली मेरी मुस्कान को देख कर और भी मुझे ग़ौर से देखने लगी.

विजय:- क्या हुआ लाली मुझे पहचानने की कोशिश कर रही है.

लाली:- hmmmmmmmmmmmmmmmm..

विजय:- तो फिर मुझे पहचाना या नहीं..

लाली कुछ नहीं बोली बास मुझे ग़ौर से hi देखती रही.. लाली इतनी भी कम् नहीं थी जो मुझे पहचान नहीं पाती, लाली ने मुझे पहचान लिया और फिर लाली की आँखों में लाली उतरने लगी. जो लाली की आँखों से पानी निकलने लगी. लाली दुखी हो गई थी. मुझे इतने बरसों बाद देख के .. शायद गुजज़्रे हुए सालों में जो बीत चूका था लाली को भी सबब याद आने लगा था..

लाली आंसू बहते हुए नम्म आँखों से मुझे देखने लगी. और फिर लाली ने अपने दोनों हाथ जोड़ दिए..

लाली:- विज्जु मैंने तुम्हारे साथ जो भी किया, वो सही है या गलत लेकिन मैं तुमसे तुम्हारी माँ और बहनो से बर्ताव के लिए माफ़ी मांगती हूँ.

मन बीएड पर जा बैठा और लाली के दोनों hi हाथ थाम लिए.. लाली ने एक खुली शर्ट पहनी हुई थी, और नीचे का हिस्सा एक चादर से ढाका हुआ था.

जांग के नीचे एक तकिया रखा हुआ था, जिससे लाली का एक चुत्तड़ उठा हुआ था और लाली थोड़ा तिरछी हो कर बैठी हुई थी. ज़रूर लाली का चुत्तड़ ज़ख़्मी होगा. इसलिए ऐसे बैठी थी.'

मैंने लाली ने हाथ पकड़ लिए..

विजय:- लाली तुम माफ़ी क्यों मांग रही हो. तुमने तो बोहत अच्छा काम किया है, तुमने मेरी बहनो की बढ़िया से सुरक्षा की hai..uske लिए तो तुम्हे मैं स्पेशल थैंक्स बोलना छह रहा था, पारर तुमसे मिलने का टाइम नहीं मिला, एक 2 बार आये भी था, लेकिन तुम सो रही थी.

लाली:- नहीं विज्जु मैंने बोहत गलत किया है, मुझे शमा कार्डो अगर दिल माने तो, वर्ण मैं तो बोहत hi बुरी बन्न गई थी, ये भी भूल गई थी, क रेखा बाई के कोठे अपर सबब hi मेरी तरह से मजबूर हाँ..

मैंने लाली के हाथ खोल कर लाली को अपने गले से लगा लिया.. मेरे हाथ लाली की पीठ पर गए तो लाली की हलकी सी चीख निकल गई..

लाली की पीठ पर भी ज़ख़्म थे. मैंने लाली को खुद से अलग किया और लाली को देखते हुए लाली के ऊपर पड़ी हुई चादर को हटा दिया. लाली नीचे से पूरी नंगी थी. लाली मुझे चादर हटते हुए देख रही थी. पारर बोली कुछ नहीं. मैंने लाली की आँखों में देखते हुए लाली की शर्ट को पकड़ा और उसे उतरने लगा, लाली ने चुप चाप अपने हाथ ऊपर कर दिए. मैंने लाली को शर्ट भी निकल दी.

लाली पूरी तरह से नंगी हो गई, तो मैं पीछे हाथ कर लाली को अच्छे से देखने लगा.

लाली की हालत सच में hi बोहत बुरी की थी रेखा बाई ने... लाली का पूरा बदन hi ज़ख्मो से भरा हुआ था. मैं घूम फिर क्र लाली को देखने अला. लाली की पीठ और चूतड़ों पर ज़यादा ज़ख़्म थे. बूब्स पर भी ए हुए थे, लेकिन इन 3 दिनों में वो काफी बेहतर हो गए थे. पीठ और चुत्तरों की जिल्द फहत गई थी. एक साइड का चुत्तड़ कुछ ज़यादा hi छील गया था..

विजय:- लाली ये सरे ज़ख्म तुमने मेरी बहनो के लिए खाये हाँ ना..

लाली बास मुझे आँखों में आंसू लिए देख रही थी..

विजय:- लाली तुमने जो भी किया मेरी बहनो के लिए, मैं उसे मरते दुम्म तक नहीं भूलूंगा. मैं नहीं जानता तुम्हारा मैं अचानक से कैसे बदला, लेकिन तुमने खुद को बदल कर बोहत अच्छा kiya,warna शायद मुझसे तुम्हारे साथ कुछ गलत बर्ताव हो जाता..

लाली:- विज्जु तुम अब्ब भी मेरे साथ कुछ भी कर सकते हो.. रेखा बाई के कोठे पर भी तो मेरा सबब कुछ भी ख़तम हो गया था. मैं ज़िंदा hi कहा थी. कुत्तिया बन्न के छोड़ने से में जल्द hi मरने वाली हो गाइट hi. जिस औरत की इज़त hi न रहे. वो तो बास एक ज़िंदा लाश hi रह जाती है..

मुझे कोई शॉक तो था नहीं जो मैं तुम्हारी माँ और बहनो के साथ साथ बाकि सबब से बुरा बर्ताव करती.. मैं भी तो उसी दलदल में पहन्सि हुई थी. जब मुझे कोई राह नहीं दिखी तो मैं ग़ुस्से से पागल होने लगी.. और फिर मुझे कोठे पर रहने वालियों से कोई मतलब नहीं रह गया था.. जब्ब छूट की आग भड़कती तो छोड़ने को मैं करता था, लेकिन जब्ब छूट की आग बुझ जाती थी, तो ग़ुस्सा आने लगता, दिल करता कही भाग जाऊं, पारर भागने के लिए भी कोई राह नहीं थी, फ़्रस्ट्रेशन की वजा से मैं दूसरों से भी बुरा बर्ताव करने लगी.. इसके इलावा मैं और कर भी क्या सकती थी.

रेखा बाई से रेल्क्शन्स बढ़ा के खुद के लिए कुछ अच्छा माहौल गेनेराते करना भी मेरी मज़बूरी थी, वर्ण तुम्हारी माँ के साथ जैसा होता रहा था वह कोठे par,mere साथ होता तो मई तो पागल hi हो जाती, बास इस सबब से बचने के लिए मैं बुरी बन्न गई.... लेकिन फिर एक दिन मैंने श्वेता और प्रिय को तुम्हारे बारे में बात करते हुए सुन लिए था.. तब्ब जहान्वी और श्रुति 18 बार्स की होने वाली थीं.. श्वेता और प्रिय दोनों hi जहान्वी, श्रुति को लेके टेंशन में थीं.. वही तुम्हारी बातें भी सुनने को मिल गईं. जिससे मुझे पता चला क तुम जल्दी hi कुछ न कुछ करके अपनी माँ और बहनो को वहां से निकाल कर ले जाएंगे...

मेरे अंदर की मरी हुई आस एक बार फिरसे जाग उठी. मेरा दिल फिरसे इक नयी ज़िन्दगी के लिए मचलने लगा और मैंने श्वेता को अपने साथ मिला कर सबब प्लान कर लिया. जहान्वी और श्रुति को बहाने के लिए मुझे बड़ा घटिया तरीका इस्तेमाल करना पड़ा था. लेकिन हम priya,shruti या जहान्वी को बता भी तो नहीं सकती थीं, बात बड़ी खतरनाक thi,chhupana आसान नहीं होता, इसलिए जितने कानो से बची रहे उतना hi अच्छा था.. विज्जु तुम देख लो फिर भी रेखा बाई को पता चल hi गया. वो तो तुम सही टाइम पर आ गए वर्ण एक दो दिन में जहान्वी और प्रिय को बेचा जाने वाला था..

लाली रट हुए सबब बता रही थी. और मैं लाली की बातें सुन रहा था.. लाली भी तो दलदल में धंसी हुई थी, फ़्रस्ट्रेशन की वजा से बुरा बर्ताव करना, कोई बड़ी बात भी नहीं थी, लाली जैसी hi आग तो मेरे अंदर भी थी, मैं भी तो रेखा बाई के सामने ऐड जाया करता था..

रोज़ hi अपनी मर्ज़ी के बिना किसी के आगे छूट को खोल देना आसान काम तो नहीं है.. सबब hi तो किसी न किसी घर की इज़्ज़त hi थीं. कोई भी तो पैदाइशी रंडी नहीं थी..

लाली को मौका मिला तो उसने सबब बदल दिया और खुद को दलदल से निकलने के लिए सर्र धड़ की बाज़ी लगाडी..




********************************************************************************





 
थैंक ु वैरी मच..!!

रेखा बाई के लिए मैंने आप सबब के लिए बढ़िया से सेटअप तैयार किया है. यकीनन आपको बड़ा मज़ा आने वाला hai...rekha बाई को इबरत का निशान तो बनाया hi जाएगा.. उसे स्पेशल ट्रीटमेंट भी डी जाएगी.. उसे अपने शरीर और पैसा & पावर का बड़ा ग़रूर रहा है. सबब उसे दिखा दिया जायेगा.. दिल्ली पे ग्रिफ्ट स्ट्रांग होना विजय के लिए ज़रूरी भी है.. और लोगों की भलाई के लिए भी ज़रूरी है... लाली भी तो दलदल में फँसी हुई थी... वो भी एक अच्छी लाइफ डेसेर्वे करती है..
 
अपडेट ::: 72

*************



मैं लाली की बातें सुन रहा था. और लाली आंसू बहते हुए अपने अंदर का दर्द मुझे बता रही थी...

विजय:- लाली तुझे पता है, अब तू मेरे लिए कितनी ख़ास हो गई है.

लाली मुझे देखने लगी..

मुझे लाली का दुःख कम् करना था. लाली का भी तो अब्ब हमारे बाद कोई नहीं था. मैं लाली के चेहरे पर झुकता हुआ लाली के होंटो के पास आया, लाली मुझे हेरात से देखने लगी. मैंने लाली के ज़ख्मो का ख्याल रखते हुए अपने होंठ लाली के होंटो पर रख दिए.. लाली को एक झटका लगा, लेकिन मैं लाली के झटके की परवा किये बिना hi लाली के होंटो को धीरे से चूमने लगा, लाली का जिस्म थोड़ा सा काँपा. ये लाली के लिए ख़ुशी का मौका था, शायद वो सोच रही थी, क्या वो कभी इतने प्यार के लायक हो पायेगी.

लेकिन लाली मेरे हर तरह के प्यार के लायक बन्न चुकी थी. अब्ब मैं लाली को कभ भी दुखी नहीं देखना चाहता था. कुछ देर लाली के होंटो को चाटने के बाद मैंने लाली के नीचे वाले होंठ को अपने होंटो में कैद कर लिया. लाली के होंठ खुश्क थे, और अब्ब मैं लाली के होंटो की खुश्की को ख़तम कर रहा था. लाली के बदन में हलचल होने लगी थी, लेकिन वो खुद पर काबू पाए हुए थी..

मैंने 5 मिंट तक लाली के दोनों hi होंटो को प्यार किया और फिर मैं सीधा खड़ा हो गया....

मैंने लाली को देखा तो लाली की आँखों में आंसू थे.

विजय:- क्यों लाली इस सबब का यकीन नहीं था ना, इसलिए आंसू बहा रही हो.

laali:-vijju तुमने मेरे होंटो को नहीं चूमा है, मुझे एक सम्मान मिला है तेरे ऐसा करने से. वर्ण मैं कहाँ इस काबिल रही थी.

विजय:- लाली मेरी एक बात मानेगी...

लाली:- (रट हुए सर्र हिला कर हाँ बोलने लगी)

विजय:- मैं चाहता हूँ क आज से तुम खुद को मेरी फॅमिली का हिंसा समझो, क्या तुम ऐसा कर सकती हो, खुद से लड़ना और अपने अंदर के दर्द को ख़तम करना आसान नहीं है, कुछ तुम कोशिश करना और कुछ मैं करूँगा.. और फिर हम सबब साथ मिलकर एक खूबसूरत ज़िन्दगी जियेंगे.. तुम ऐसी खूबसूरत ज़िन्दगी में हमारा साथ डौगी ना..

laali:-haan विजजूउ, अगर तुम मुझे इस लायक समझते हो तो मुझे इस से बड़ी खुशखबरी और कब्ब मिलेगी.. मैंने तो बास इतना सोचा था क रेखा बाई के कोठे से निअक्ल bhaagon..aur होनी मर्ज़ी की ज़िन्दगी जियों.. पारर तुमने तो मुझे मेरी साड़ी hi खुशियां दे दी हाँ. अब्ब मुझे कभी कोई ग़म नहीं रहेगा..

विजय:- वडा करती हो लाली..

लाली:- लाली मर जाएगी विज्जू, पारर तुम जैसा मुझे रखोगे, उससे एक इंच भी इधर उधर नहीं हटेगी..

विजय:- लाली कोठे पर होने वाली रेगुलर चुदाई की वजा से तेरे लिए खुद को संभल पाना मुश्किल हो जायेगा. क्या तुम अपनी छूट की तड़प को सहन कर पाओगी..

लाली:- विज्जू कोठे पर मैं बोहत ज़यादा चूड़ी हूँ, अब्ब मैं कुछ कह सही सकती, क मैं खुद पर कितना काबू रख पाऊँगी और कितने दिन रख पाऊँगी.. अगर तुम मेरे साथ हो तो मुझे खुद से लड़ने में आसानी हो जाएगी..

विजय:- लाली मैं कभी भी तुम्हारा शाट नहीं छोड़ोगे.. हाँ मैं अभी अपने बदले के लिए मसरूफ रहने वाला हूँ. जितना टाइम मिलेगा, वो मैं सबब के लिए बाँट लिया करूंगा. और जितना टाइम तुम्हारे हिस्से में आएगा, वो तुम्हे मिल जायेगा.

लाली:- विज्जु मुझे मंज़ूर है..

लाली की बात सुनकर मैंने लाली के ज़ख़्मी बूब्स पर अपनी जीब फेरनी शुरू करदी. लाली ने अपना एक हाथ मेरे सर्र पर रख दिया.. मैंने 5 मिंट तक्क अच्छे से लाली को उसका हक़ दिया.... लाली की नंगी छूट कुछ गेली हो गई थी. लेकिन अभी वो ज़ख़्मी थी तो उसके लिए इतना hi काफी था..

मैंने लाली के बूब्स को अच्छे से छाता, उसके निप्पल्स को मोहन में लेके अच्छे से चूसा और फिर खड़ा हो गया..

विजय:- अब्ब कुछ यकीन आया या नहीं...

लाली:- हाँ विजजू अब्ब सबब ठीक है, थैंक यू सो मच..

विजय:- अच्छा लाली अगर तुम ठीक हो तो मैं जाओ अभी मुझे बोहत से काम भी करने हाँ..

लाली:- हाँ विज्जु तुम जाओ, अब्ब देखना मैं कितनी जल्दी ठीक होती ुहं.. तुम्हारे ऐसा करने से मुझे एक अलग hi हौसला मिला है. वर्ण मैं तो अंदर से टूट hi चुकी थी. पारर अब सबब ठीक है..

विजय:- ठीक है मैं चलता हु, और अपने बूब्स का ख़ास ध्यान रखना बड़े टेस्टी हाँ, तुम ठीक हो जाओ, फिर अच्छे से इनको पिऊँगा.

लाली खुश हो गई और मैं लाली के कमरे से बहार आ गया..

अब्ब मेरा मैं था माँ से अकेले में मिलने का.. माँ को ढूंढा तो पता चला क वो कमरे में हाँ और पापा कहीं बहार गए हाँ..

मैं माँ के कमरे में गया तो माँ बीएड पर लेती हुई थी और छत को देख कर मुस्कुरा रही थी. मैंने दूर लॉक किया और चलता हुआ माँ के पास जा पोहंचा.

माँ अभी भी खोई हुई थी, माँ को पता hi नै चला क मैं उनके पास हों.

मैं माँ के ऊपर hi लेट गया, और माँ अचानक से किसी को खुद के ऊपर पा कर हड़बड़ा गई.. फिर मुझपर नज़र पड़ते hi चैन की सांस ली.

माँ- विज्जू बीटा तू है.

विजय:- हाँ माँ मैं hi हूँ. आप कहाँ खोई हुई थीं..

माँ:- मैं कहाँ खोने लगी. मैं तो बास तेरे पापा को याद कर रही थी..

मैं माँ के ऊपर पूरा hi लेट गया था. मैं माँ के गलों को चूमने लगा.

विजय:- क्यों माँ रात भर में जो पापा ने किया वो याद कर रही थी आप..

maa:-(muskurati hui)vijjuu तुझे तो सबब पता hi है, फिर क्यों पूछ रहा है.

विजय:- ये जानना मेरा जक है ना माँ.

माँ:- विजजू बीटा, सालों बाद वही खुशबू मेरे अंदर उत्तरी है, जिस खुशबु के लिए मैं सालों तरसती रही थी..

विजय:- पापा का बर्ताव कैसा रहा आपके साथ.

माँ:- बीटा अगर मुझे तेरे पापा के प्यार पर शक होता तो मैं इतनी जल्दी कैसे उनके सीने में समां जाती, मेरा और तुम्हारे पापा का प्यार बोहत ख़ास था और आज भी है.. मुझे तब्ब भी अगर मौका मिलता तो मैं तुम्हारे पापा के साथ hi भाग जाती.. लेकिन भाग पाना बोहत खतनाक भी था. मेरे भाई बोहत hi खतरनाकक थे, वो कही से भी मुझे और तेरे पापा को ढूंढ लेते, इसलिए मैं तेरे पापा के साथ नहीं भागी. मुझे खुद से भी ज़याद तेरे पापा की ज़िन्दगी पायरी थी..

विजय:- माँ अपने भाइयों के बारे में और बाकी सबब के बारे में कब्ब बताओगी.

माँ:- अभी नहीं बीटा, पहले तू यहाँ का सबब देख, और दन्न से बदला ले, फिर तुझे सबब बताऊँगी..

विजय:- माँ एक बात और भी है.

माँ:- हाँ विज्जु बीटा क्या बात है..

विजय:- माँ जैसे हम सब हो गए हाँ, पापा इस सबब के बारे में क्या कहते हाँ. हमारा ये सबब खुल्लम खुल्ला करना, शर्म तो हमारी बीच रही नहीं, तो पापा इस बारे में कुछ कहते हाँ. या

माँ:- विज्जु बीटा वो भी सबब समझ गए हाँ. जैसे नर्ग जैसी ज़िन्दगी सबब जी रहे थे. वहां हमारे साथ जैसा भी होता रहा है. तेरे पापा को सबब पता है, और उन्हें ये सबब तो एक्सेप्ट करना hi पड़ेगा.. और मुझे नहीं लगता क तेरे पापा को इससे कोई परेशानी होगी..

माँ के बदन की खुशबु से मेरा लुंड खड़ा हो चूका था. मेरे लुंड से माँ भी मास होने लगी थी.. मेरा लुंड माँ की छूट पर दबा हुआ था..

विजय:- माँ आप सूरत की कोठी में मुझसे छोड़ने की बात क्यों कर रही थीं.

माँ मुस्कुराते हुए..

माँ:- क्यों तेरा दिल नहीं करता क्या मुझे छोड़ने के लिए..

विजय:- नहीं माँ पहले आप बताएं..

माँ:- विज्जू सच तो ये है क कोठे पर जैसे मैं तेरे hi सामने चुदती रही हूँ. उससे मेरे अंदर सबब कुछ hi ख़तम हो गया था. लेकिन रेगुलर छोड़ने की आदत पद चुकी थी. तू दिल किया क कभी अपने दिल में बसने वाले से भी चुद लूँ. अपनी मर्ज़ी के बिना तो सालों से चुदाई करवाती रही हूँ.. प्यार से चुदाई के लिए तरस गई थी, इसलिए तुझसे प्यार से छोड़ने के लिए मेरा भी दिल मचलने लगा था...

और जब्ब तो शुरू शुरू में प्रिय, जहान्वी और शूरति से नंगे हो कर मस्ती किया करता था. तब्ब से hi मैंने मैं बना लिया था क तुझसे मैं ज़रूर छुडोंगी.. तू मेरा बीटा है और मैं तुझसे अपना हक़ लेना चाहती थी, मेरा भी दिल करता है, अपनी मर्ज़ी से और अपनी ख़ुशी से किसी का लुंड लून, और फिर मेरे बेटे से बढ़ कर किसका लुंड मेरे लिए ख़ास हो सकता है.....

पारर अब्ब तेरे पापा आ गए हाँ तो मुझे लगता है क ये सबब हमें नहीं करना चाहिए..

vijay:-maa सच तो ये है, क मैं भी ये सबब आप के साथ नहीं करना चाहता, लेकिन दूसरा सच ये भी है, क आप को चुड़ते देख कर मेरा भी मैं बदल गया था. माँ आपके जैसी कोई है भी तो नहीं ना ... और फिर जैसे आपने अपनी छूट को संभल कर रखा हुआ है. जैसे आप अपनी छूट पे क्रीम लगाया करती थीं. वो सन मुझे कभी भुला नहीं है.

माँ मेरी बात सुन के मुस्कुराने लगी और फिर मेरे होंटो को अपने होंटो में ले कर हल्का सा चूस लिया..

माँ:- मुझे भी ये सबब पता है. मैं तेरी आँखों को बड़े अच्छे से समझती हूँ. अब्ब भी तेरा लुंड मेरी छूट में घुसने के लिए बेचैन हो रहा है..

विजय:- माँ इसे तो आदत पद चुकी है खड़ा रहने. आप इसकी चिंता मैट करें.

माँ:- रात priya,jhanvi और श्रुति के साथ किया नहीं क्या...

विजय:- माँ आज का रात का प्रोग्राम सेट किया हुआ तीनो ने.

माँ:- विज्जु देर मैट करना. वो तीनो hi बड़ी बेचैन हैं, सालों से चुदाई देख देख के अब्ब उनका खुद पर कण्ट्रोल ख़तम होने लगा है. बास तेरे प्यार की वजा से सबने खुद को संभाला हुआ था.

विजय:- माँ आप टेंशन न लें. आज रात hi तीनो की सील खुल जायेगी.. आप अपनी बताएं.. आप कब्ब अपनी सील खुलवा रही हाँ..

माँ:- ये के बात हुई भला, मेरी सील खुली न होती तो तू कैसे पैदा होता..

माँ मसखरी करने लगी..

मैंने माँ के होंटो को अपने होंटो में कैद किया और माँ के होंटो को हलके हलके चूमने laga.maa मेरे सर्र के बालों को सहलाने लगी और मैं माँ के होंटो को चूमने के बाद किश करने लगा. माँ भी मेरा साथ देने लगी. माँ के नरम होंटो का रस मुझे कही और hi लेजाने लगा. और मेरा लुंड माँ के कपडे को फहाद कर माँ की छूट में घुसने की कोशिश कर रहा था.

मैंने किश तोड़ी और माँ मुझे देखने लगी, माँ की आँखों में एक अज़ीम सकूँ था.

विजय:- माँ आप मसखरी कर रही हाँ ना, आपको पता हिअ ना मैं कौनसी सील खुलवाने की बात कर रहा हूँ.

माँ मुस्कुराते हुए बोली

माँ:- वो तो अब्ब तेरे पापा hi खोलेंगे, बास किस्मत से hi बची रह गई. वर्ण वो भी कब्ब की खुल चुकी होती.

विजय:- माँ वो मैं खोलना चाहता हूँ. मेरा बड़ा दिल है मैं आपकी गांड की सील को खोलों. माँ आपकी गांड बोहत hi मस्त है. सच पूछो तो मुझे आपकी छूट से भी मोहब्बत है लेकिन आपकी गांड आपकी छूट से ज़यादा ख़ास है. अब आप ने मेरा मैं बना hi दिया है तो मुझेअपनी गांड की सील खोलने की भी पेर्मिशन दे दें..

माँ:- मुझे क्या मिलेगा इतनी कीमती चीज़ दे कर तुझसे. वो ऐसे hi तो नहीं मैंने सालों से संभल क्र राखी हुई है. कुछ तो ख़ास करना पड़ेगा तुम्हे .. ऐसे तो मैं तुझे वो देने से रही...

विजय:- बोलो माँ क्या ख़ास करना पड़ेगा मुझे. आपकी खोलने के लिए..

माँ:- वो भी बता दूंगी, जब मेरा उसे खुलवाने का मैं बना. अभी उसके लिए बोहत टाइम है. तुम पहले जो इतनी सील पेंडिंग पड़ी हुई हाँ. उन्हें खोल लो, मेरा नंबर उन सबब के बाद.. समझ गए मेरे लल्लू राम..

विजय;- माँ ये तो ज़यादती है ना मेरे साथ.. वैसे माँ, मौका तो अब्ब भी है, क्यों ना इसी मोके का फायदा उठा लें उन दोनों.

माँ ने मेरी बात का जवाब नहीं दिया, मेरे लुंड की मुसलसल रगड़ से माँ की छूट बोहत ज़यादा गरम हो कर पानी छोड़ रही थी.

माँ ने ज़ोर लगा कर मुझे पलट दिया और मेरे ऊपर चढ़ कर लेट गई.. माँ मेरे होंटो को फिरसे अपने होंटो में लेने लगी.. और इस बार माँ ने पुरे जोश में मुझे किश करना शुरू कर दिया...

माँ की और माँ की छूट की बर्दाश्त ख़तम हो चुकी थी.

माँ मुझे किश करते हुए मेरे लुंड पर अपनी छूट को भी ज़ोर से रगड़ने लगी थीं..

माँ कभी मेरे ऊपर वाले होंठ को चूसती तो कभी मेरे नीचे वाले होंठ को, माँ के मोहन का मीठा पानी मेरे मोहन के अंदर जाने लगा. माँ भी मज़े में आई हुई थी. माँ की किश और छूट की रगड़ बढ़ने लगी.

मेरे हाथ माँ के चुत्तड़ पर चले गए. माँ एक बार तो रुकी, लेकिन फिरसे माँ मुझे किश करने लगी.. माँ ने ग्रीन सिग्नल दे दिया था.

माँ के बेस्ट चुत्तड़ जो मेरे लिए फवौरीते थे, मेरे हाथ बड़े hi प्यार से माँ के कहतद पर चलने lage..mujhe बड़े सॉफ्ट सा फील हुआ. माँ के रूई के जैसे चुत्तडों कर अपने हाथ फेरने में मुझे बोहत मज़ा आने अलग था. मेरा लुंड और भी अकड़ने लगा, जो माँ की छूट के लिए बोहत hi अच्छा था.. जितना मेरा लुंड अकड़ता माँ की छूट उतना hi अच्छे से रगड़ खाती. और माँ मज़े की वादियों में चली जाती. मुझे तो बास माँ के मज़े की फ़िक्र थी..

माँ मुझे किस छोड़ क्र मेरे ऊपर गिर गई, माँ की साँसे बोहत तेज़ थे, और माँ की छूट की रगड़ भी बढ़ती जा रही थी..

अब तो माँ की छूट पानी बहा कर hi दुम्म लेगी..

माँ के जिस्म की अकड़न बढ़ने लगी और माँ झाकते खाते हुए मेरे ऊपर ढेर हो गई, मज़ाक़ मज़ाक़ में hi माँ ने अपनी छूट को ठंडा कर लिया था..

माँ बातों से और मेरर लुंड की हीट से अपना आप खो बैठी थीं , चलो अच्छा हुआ अब माँ ठंडी हो गई है..

माँ को पापा का प्यार मिला तो माँ राटा भर मज़े से चुदती रही, अब्ब माँ को मेरा प्यार मिला तो माँ ने एक बार फिर से अपने दिल की मानते हुए मेरे लुंड की हीट से अपनी छूट का पानी निकाल लिया था.. ऐसा hi तो माँ सालों से चाहती थी.. अब्ब माँ का हर दिन और हर रात मज़े वाली होने वाली थी...

माँ की साँसे अभी भी तेज़ थीं.

कुछ देर में माँ ठीक हुई और फिर मेरी आँखों में देखने लगी..

माँ:- विज्जु बीटा थैंक्स...

विजय:- माँ पापा से रात भर में आपकी छूट को ठंडा नहीं किया क्या.. जो आप फिर भी इतनी हॉर्नी हो गयी.

माँ:- विज्जु बीटा तेरे पापा की वजा से hi तो मैं हॉर्नी हुई हूँ. तेरे पापा ने रात भर में बड़े प्यार से मेरी छूट का पानी निकला है. तेरे पापा की चुदाई के लिए तो मैं कब्ब से तरस रही थी.. तेरे पापा की चुदाई ने मेरे सोये हुए अरमान फिरसे जाग दिए हाँ, इसलिए अब्ब मेरा खुद पर कण्ट्रोल नहीं रहा.

पहले मेरा खुद पर किसी हद तक तो कण्ट्रोल था hi.. रात भर तेरे पापा से प्यार वाली चुदाई हुई है. और अब्ब भी तो मैंतुम्हारे प्यार के लिए ये सबब कर गई हूँ.. इसी प्यार के लिए तो मैं तरसती रही हूँ. वर्ण चुदाई तो मेरी सालों तक होती hi रही है. लेकिन मेरी मैं पसंद चुदाई अब्ब शुरू हुई है, इस सबब के लिए.. और अब्ब मेरा दिल किया करने को तो मैंने कर लिया..

विजय:- माँ तो अब्ब मैं अपने लुंड का क्या करूँ..

माँ हस्सन लगी..

माँ:- एंटी तेरी बहने हाँ किसी से भी कह दे, कोई भी तेरे लुंड को चूस कर ठण्ड कर देगी..

विजय:- आप नहीं चूसेंगी मेरे लुंड को..

माँ:- सवाल hi पैदा नहीं होता, अभी मैं बास तुम्हारे पापा के लुंड से hi पहले अपनी छूट को अच्छे से ठंडा करूंगी. और अपनी सालों की दिल की पियास बुझाऊँगी. तेरे पापा भी तो इस सबब के लिए तरस रहे हाँ. वो भी तो सालों से अधूरे थे. ये तो तेरी बातों से मैं बेचैन हो गई थी. और फिर तेरे पापा भी तो लेट आने वाले हाँ. मैं क्या तब्ब तक्क ऐसे hi अपनी छूट की आग को लिए फिरती रहती..

विजय:- आपकी छूट ठंडी हो गई है, तो अब्ब मैं जाऊं..

माँ:- (शरारती मुस्कान देते hue)haan तुम अभी जाऊं. अभी मैं नाहा क्र फिर से सो जाऊँगी. अभी रात भर की नींद बाकी रहती है.. तू अपने लुंड के लिए कोई और ढूंढ ले..

विजय:- माँ ये है तो ज़यादती hi, लेकिन कोई बात नहीं, आपकी गांड की सील जब खोलूँगा तब्ब सबब हिसाब बराबर करलूँगा..

माँ:- तब्ब की तब्ब देखि जायेगी. अब्ब तुम जाओ.

माँ एक नउघैत स्माइल देते हुए बोली..

मैं भी माँ को bye बोल कर रूम से बहार आ गया.. माँ के ऐसे रूप को देख कर मैं बोहत खुश था. माँ का ये रूप मेरे लिए नया था, पर मुझे इतनी ख़ुशी मिली थी क बयां से बाहर है.. माँ अपनी जवानी में भी ऐसी hi नॉटी रही होंगी. मेरे लुंड को क्या परेशानी होने वाली थी, यहाँ कई थी जो खुद hi मेरे लुंड के लिए तरस रही थी. माँ तो फिर भी यही थी, और माँ जैसे भी खुश रहेगी, मुझे भी तो माँ को खुश देख कर ख़ुशी hi मिलेगी..

मैं सोचने लगा क मुझे किसकी छूट की खुशबु से अपने लुंड का पानी निकलना चाहिए... फिर मुझे याद आया क नताशा दीदी को मेरे लुंड की इस वक़्त ज़यादा ज़रूरत है. वो भी तरस रही होंगी. उनके पास चलता हूँ.

मैं नताशा दीदी क रूम में गया तो अंदर रूम में नताशा दीदी के साथ रानी और पूजा दीदी भी थी. मैंने रूम लॉक क्या और अपने कपडे उतारने लगा..

तीनो मुझे शॉक और एक्ससिटेमेंट से देखने लगीं.

रानी :- वाह विज्जु आज तो तुमने क्या सॉलिड एंट्री मारी है. क्या धँसो स्टाइल अपनाया है तुमने.. मज़ा आ गया.. चल आ जा बीएड पे. मैं भी अपने कपडे उतारती हूँ.

नताशा दीदी ने रानी को एक धप लगा दी..

विजय:- अभी मैं सिर्फ नताशा दीदी के लिए आया हूँ..

नताशा दीदी मेरी बात से खुश हो गईं. रानी और पूजा दीदी हैरान रह गईं..

पूजा दीदी:- क्या मतलब विज्जु हम क्यों नहीं, सिर्फ नताशा hi क्यों..

विजय:- क्यों की अभी मुझे जल्दी है और आप तीनो के लिए भी एक खुशखबरी है..

तीनो:- kyaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa???

विजय:- आ रात प्रिय, जहान्वी और श्रुति की सील मैं खोलने वाला hun..uske बाद 2-3 दिन आप तीनो की भी छूट का नंबर लगने वाला है..

पूजा दीदी और नताशा दीदी शर्मा गईं. लेकिन रानी बीएड पर hi कड़ी हो कर नाचने लगीं..

रानी:- विज्जू तुमने बड़ी अच्छी खबर सुनाई है. मैं तो कबसे तरस रही थी, ऐसी hi किसी खबर के लिए..

नताशा didi,puja दीदी:-- रानी कमीनी तुझे कुछ ज़यादा hi आग लगी हुई है.

रानी:- क्यों आप दोनों को नहीं लगी हुई है आआगगग..

मैंने नताशा दीदी को पकड़ा और उन्हें उठा कर किश करने लगा और साथ में hi उनके दोनों बूब्स को भी दबाने laga.natasha दीदी तो कब्ब से मेरे लिए और मेरे सुपर्ष के लिए तरस रही थीं, उन्हें ने भी मुझे ज़ोरदार किश करने शुरू कर दी.

बाकी सब की hi तरह से नताशा दीदी का भी एक अलग hi मज़ा था, वो शर्माती हुई खुल के मुझसे अपना हिस्सा वसूल किया करती थीं. मेरा खड़ा लुंड नताशा दीदी की छूट पर था और वो मुझे किश करते हुए मेरे लुंड पर अपनी छूट को रगड़ रही थीं.

रानी ने नताशा दीदी की हेल्प करते हुए नताशा दीदी की शलवार का नाडा खोलना शुरू कर दिया, दीदी ने भी अपनी गांड थोड़ी से पीछे हटा कर रानी को अपनी hi शलवार का नाडा खोलने की पेर्मिशन दे दी..

पूजा दीदी बैठी ये सबब देख कर मुस्कुरा रही थे..

कुछ देर में hi नताशा दीदी की शलवार उनके पैरों में थी. और रानी ने उनकी पंतय भी सरका कर मेरे लुंड को उनकी छूट पर सेट कर दिया.

मेरे लुंड सही जगा मिलते hi झूम उठा..

मैं अपने लुंड को नताशा दीदी की छूट के लिप्स पर रगड़ने लगा. रानी मेरे लुंड को पकड़ कर सही से नताशा दीदी की छूट के लिप्स में फंसा रही थी.

मैं नताशा दीदी को किश कर रहा था. और उनके बूब्स भी दबा रहा था.

मैं तो पहले से hi मज़े में था, नताशा दीदी भी जल्दी hi अपने पुरे जोबन पर आने लगी. उनकी किश वाइल्ड होने लगी थी, उनकी छूट भी एक लम्बे आरसे से पानी बहाने के लिए बहाना ढूंढ रही थी.

रानी नताशा दीदी के पीछे गई और उनकी कमीज पीछे से उठा कर उनकी गांड पर अपनी जीब फेरने लगी..

4-4 साइड्स पार्स दीदी पर हमले हो रहे थे. कैसे वो ये सबब सहन कर सकती थी. उन्हों ने मुझे किश करना छोड़ा और मेरे गले लगते हुए ज़ोर से साँसे लेने ले.

मेरे हाथ डाब गए थे, इसलिए मैं अपने हाथ को उनके बोओब्स से हटाया और उनके गले में बहन डालता हुआ, अपने लुंड को उनकी छूट पर अच्छे से रगड़ने लगा. मेरा लुंड दीदी की छूट से रगड़ खता हुआ रानी के गले से टकराने लगा.

रानी की गांड चटाई और मेरे लुंड की दीदी की छूट पर रगड़े वो बर्दाश्त नहीं कर पाई, और झटके कहते हुए पानी छोड़ गई.

रानी ने उनको बीएड पर धक्का दिया और फिर मेरे लुंड को मोहन में लेकर मज़े लेने लगी. रानी भी नताशा दीदी की गांड को चाट कर हॉर्नी हो गई थी, और कुछ वो "जल्द hi उसकी छूट भी खुलने वाली है" इस वजा से भी हॉर्नी हो गई थी..

रानी पुरे ज़ोर ो शोर से मेरे लुंड के छुपे लगा रही थी.. रानी म्हणत करे और मेरा लुंड पानी न छोड़े. ये कैसे हो सकता था.. रानी की म्हणत से मेरा लुंड अपने चार्म पर आया और रानी के मोहन के अंदर hi पिचकारियां मारने लगा.

रानी कमनीनी लुंड का सारा माल जातक गई. नताशा दीदी और रानी शांत हो गई थीं. पूजा दीदी गर्म हो चुकी थें. उनकी भी छूट का पानी निकलना चाहिए था.

और में अभी बिजी था.

विजय:- नताशा दीदी आप पूजा दीदी की छूट चाट कर इन्हे ठंडा कर दें. 2-3 दिन में तो मैं वैसे भी पूरा मज़ा देने hi वाला हूँ. तब्ब तक्क के लिए इतना hi काफी है. क्यों पूजा दीदी अपनी छूट के खुलने तक वेट क्र लेंगी ना आप..

वो कुछ नहीं बोली. एक तो छूट की गर्मी और दूसरा छूट खुलने की बात से वो बोहत ज़यादा शर्मा रही थी.

नट्सः दीदी को रिलैक्स हए बोहत देर हो गई थी. इसलिए उन्हों ने पूजा दीदी को भी नंगा करना शुरू कर दिया और पूजा दीदी ने भी उन्हें नहीं रोका. मैं मुस्कुराता हुआ लॉक खोल कर बहार निकल गया...




********************************************************************************





पैलेस के पार्क में कोठे पर से लाइ जाने वाली सभी महिलायें मौजूद थीं. सभी के लिए बैठने का बंदोबस्त किया गया था.

मर्दो में मैं और अनिल hi थे. राज को भी इस सबब में शामिल नहीं किया गया था.

कारन अपनी माँ और बहन के साथ पैलेस क अंदर था, ये सबब सुन्ना उनके लिए भी सही नै था. इसलिए वो नहीं ए थे..

मेरी दिल्ली वाली फॅमिली की साडी hi महिलाएं भी साथ थें. वो सभी इक साइड में बैठी हुई थीं.

लाली को भी मैं अपनी बहन के उठा कर यही ले आया था. उसके लिए अच्छे से बैठने का इंतेज़ाम किया गया था.

मेरे साथ माँ और मेरी बहने बैठी थे, अपर्णा भी साथ में थी और वो माँ का एक हाथ पड़के हुए थी.

मैं सभी को hi देख रहा था. और सब मुझे देख रहे थे.

माँ:- विज्जू बीटा अब्ब सबब आ गई हाँ तो तुम कहो जो इन सबब से कहने वाले हो.

विजय:- हाँ maa,main बास सबब को देख रहा था. अभी सबब से पूछता हूँ.

vijay:-(sab से hi) यहाँ पर जो भी बात होगी वो खुल कर होगी. जैसा माहौल सबको मिला है, शर्म तो किसी को भी नहीं आएगी, और आणि भी नै चाहिए.

इसलिए अब्ब सबब hi अपने अपने दिल की बात बयानगी. आगे चल कर आप सबब में से कोई भी जैसी भी ज़िन्दगी जीना चाहती है, उसपर बात होगी, और जो जो उल्जहने आप सबब की लाइफ में हाँ, या आने वाले समय को लेके कुछ उलझने आप सबब के मैं में हाँ, आप उसका इज़हार कर सकती हाँ. मैं अकेला कोई भी फ़ासिला नहीं लेने चाहता. आप की ज़िन्दगी है, और आप सब के मैं में भी बोहत कुछ होगा, इसलिए आप सबब के लिए सबब कुछ आप सबब के मैं के हिसाब से hi मैं करना चाहता हूँ.

मेरे दिल में आप सबब के लिए बोट प्यार और मान सम्मान hai..main करना तो बोहत कुछ चाहता हूँ आप सब के लिए. लेकिन पहले आप सबब मुझे वो बताएं, जो मैंने अभी कहा, किसी के भी मैं की कोई भी बात रेहनी नहीं चाहिए. मेरी कोशिश होगी क मैं सबब को hi उनके मैं की लाइफ जीने में मदद दूँ..

मेरी बात सुन कर एक बड़ी उम्र की औरत कड़ी हुई.

वो:- विज्जू बीटा सबब से पहले तो मैं तुम्हरी माँ को बधाई दूंगी क भगवन ने उन्हें तुम जैसा बीटा दिया है, तुम्हारी hi वजा से (सबब को देखती हुई) ये सबब उस दलदल से निकल पाई हाँ. मुझे भी तुम्हारी माँ की hi तरह से सालों लग गए रेखा बाई के पास फंसे हुए, मैं तो कब्ब की उम्म्मीद छोड़ चुकी थी. लेकिन अब्ब उपरवाले की मेहेरबानी से और तुम्हारी हिम्मत से हम सबब को एक नयी ज़िन्दगी जीने को मिल गई है..

विज्जू बीटा, ये नयी ज़िन्दगी हम सबब के लिए बोहत अच्छी भी hai,aur बोहत बुरा भी. हमें आगे चल के बोहत सी परेशानियों का सामना करना पद सकता है.

विजय:- आंटी वही सबब तो जान्ने के लिए मैंने आप सबब को यहाँ पे बुलाया है.

वो:- विज्जू बीटा मेरी उम्र अब्ब छोड़ने की नहीं रही है. लेकिन फिर भी मैं हफ्ते में दो बार न चुद लून तो मुझे नींद नहीं आती है.. जब्ब मेरा ये हाल है तो फिर तुम खुद hi सोच लो क जवान लड़कियां कैसे खुद को संभल पाएंगी.

विजय:- आंटी आप सही कह रही हाँ. आपकी इस समस्या पर मैंने पहले से hi घोर कर लिया है. मैं अंत में सबब बताऊंगा. अभी आप कुछ और भी कहना चाहती हाँ, तो आप बिला झिझक कह सकती हाँ.

वो:- नहीं विज्जु बीटा मुझे कुछ और नहीं कहना...

विजय:- आप सबब में जो अभी तक कुंवारी हाँ. वो साइड में जेक बेथ जाएँ, और जिनकी चुदाई चतले अभी ज़यादा समय नहीं हुआ वो दूसरी साइड में कड़ी हो जाएँ.

5 कुंवारियां तो मेरे साथ hi थी. अपर्णा, कृति और मेरी बहने.

इनके इलावा 6 और थीं. जो अभी सील पैक hi थीं. 3 कृति की आगे की थें 2 अपर्णा की आगे की थीं. और एक jhanvi,shruti की आगे की थी.

दूसरी साइड में 7 लड़कियां थीं. जिनकी चुदाई चले अभी ज़यादा समय नहीं हुआ था... बच जाने वाली लड़कियों और औरतों की तादाद 24 थी.. और ये वो थीं जो रेगुलर hi चुद रही थी.

vijay:-(vigin लड़कियों से) तुम सबब के मैं में सेक्स को ले के कोई परेशानी तो नहीं है....

वो शायद पहले से hi खुद में कुछ डीडे किये हुए थीं. उन सभी ने एक लड़की को बोलने का कह दिया..

लड़की:- विजजू भाई मैं सबब से पहले आप को थैंक्स बोलना चाहती हूँ, जो आपने हमें इस दलदल में उतरने से बचा लिया, वर्ण हमें खुद के बच जाने की कोई उम्मीद नहीं थी. आग हम सबब hi शरीफ खंडन से हाँ. हम सबब चूंकि अभी तक्क कुनवारी हाँ तो हमे लगता है क हमें एक कोशिश करके अपने घरवळून से राब्ता कर लेना चाहिए, हो सकता है हम में से किसी को उसके घर वाले एक्सेप्ट कर लें.

विजय:- ये तो अच्छी बात है, अगर किसी को उसके अपने मिल जाते हाँ तो, इससे बढ़ कर ख़ुशी की बात और क्या हो सकती है.

मेरी बात सुनके उन सभी लड़कियों की ऑंखें नम्म होने लगीं. वो अभी से hi खुद को अपने घरों में देखने लगी थीं.

विजय:- तुम सबब का बक्ग्रौंद क्या है.

लड़की:- मैं मिडिल क्लास से बिलोंग करती हूँ. हम में सिर्फ एक hi लड़की हाई क्लास से है. बाकी सबब hi गरीब घर से हाँ..

विजय:- अगर मैं कोई बात खुल के कहूं तो क्या सुन पाओगी..

सबब:-- हाँ विज्जू तुम कुछ भी कह सकते हो...

विजय:- अभी खतरा टाला नहीं है. तुम सबब से घर वळून से राब्ता कर लिया जायेगा और तुम सबब को अपने अपने घरुन में भी भेजने का इंतेज़ाम कर दिया जायेगा. लेकिन अभी तुम सबब के लिए खतरा बना हुआ है. अगर कोई एक भी पकड़ में आ गई तो सबब की सबब hi फिरसे उसी दलदल में जा फंसेंगी. क्या तुम सबब कुछ वक़्त के लिए वेट कर सकती हो.

सबब सोच में पद गईं.

विजय:- देखो मैं भी सबब समझता हूँ, मैं एक काम और भी क आप सबब के लिए करूँगा. क तुम सबब के घरवाले अगर यहाँ आ क्र रहना चाहें तो ये किया जा सकता है, लेकिन जब्ब तक्क मेरा और तुम सबब का दुशमन ज़िंदा है, तुम सबब के लिए और तुम्हारे घरवळून की ज़िन्दगी के लिए खतरा बना रहेगा. क्या तुम सबब ऐसा चांस लेना पसंद करोगी..

सब:- nahi..nahi..vijjuu.. हमें कोई जल्दी नहीं है, हम अपने घर वालों को खतरे में नहीं आने देंगी..

ऐसे hi इन सभी से कुछ देर बातें हुई, सभी को इत्मीनान दिलाया. और वो खुश खुश बैठ गईं.

चुद चुकी लड़कियां भी अपनी अपनी प्रोब्लेम्स मुझसे डिसकस करने लगीं.

अब्ब वो अपने घर तो जाने से रहें. वो अभी सेक्स की फील्ड में नयी थीं. खुद की इज़्ज़त गुणवा देने से दुखी भी थीं. लेकिन छूट के अंदर लुंड की रगड़ का नशा भी बोहत खतरनाक है. वो लड़कियां भी सोच में पद गई थीं. आगे लाइफ में क्या करें. मैंने सबब को hi बेस्ट मश्वरा दे दिया, और वो सुन कर खुश हो गईं.

vijay:-(kamm चूड़ी लड़कियों से) देखो मैं सबब समझता हूँ, जो भी आपकी प्रोब्लेम्स हाँ. आप सबब अब्ब अपने अपने घर तो लौटने से रहीं. लेकिन मेरे पास आप सबब के लिए कुछ बेस्ट है करने को .... अआप सबब कुछ महीने यहाँ रहें, खतरा ताल जाने दीजिये. फिर मैं आप सबब के लिए hi कोई बिज़नेस शुरू करवा दूंगा. आप सबब hi अपनी लाइफ में बिजी हो जाना और बहार अपने लिए कोई मैं पसंद लड़का ढूंढ कर शादी कर लेना. पारर खुद की सच्चाई को छुपा क्र नहीं, वर्ण बाद में परेशानी हो सकती है. बाकी तुम सबब की सेक्स लाइफ तुम सबब के अपने हाथ में आ जायेगी. जिस से दिल करे चुद लिया करना.. अब्ब आप के साथ कोई ज़बरदस्ती करने वाला नहीं है.. अब्ब से आप अपनी लाइफ अपने हिसाब से जियेंगी.

सबब hi मेरी ये बात सुनकर खुश हो गए..

एक लड़की:- विज्जू क्या सच में hi हम एक आज़ाद ज़िंदगी जी सकती हाँ..

विजय:- हाँ क्यों नहीं, आप सबब की आज़ाद ज़िन्दगी और सुरक्षा की ज़िम्मेदारी में लेता हूँ.

लड़की:- फिर तो vijjuuu,ye हम सबब के लिए बोहत hi बढ़िया है.. हम खुद को सबत करके अपने लिए मान सम्मान बढ़ने की कोशिश भी क्र सकती हैं. हो सकता है आने वाले वक़्त में हम में से किसी के घर वाले उसे एक्सेप्ट कर लीं.

इज़्ज़त तो जा hi चुकी, कोई बात नहीं, वो हमारा गुज़रा हुआ कल था. अब्ब हमें आगे देखना है. क्या पता आगे आने वाली लाइफ हमें अपने घरवाले मिल जाएँ.

लड़की की ये बात भी अच्छी थी.

बाकी की बची औरतों और लड़कियों में 5 औरतें बड़ी आगे की थीं.

बाकी कोई 22-35 की आगे के दरमियान में थीं.

बड़ी आगे की औरतों ने अपने लिए पैलेस में hi रहना मुनासिब समझा.. पैलेस में नौकरों और गवर्ड्स की कमी तो थी नहीं. और ऐसे माहौल में में सभी hi छुप छुप के चुदाई करते hi हैं. कोठे पर रहने वालियां खुद के लिए बढ़िया सा लुंड ढूंढ क्र डुंग लिया करेंगी.

यहाँ मेरे पैलेस में खुल्लम खुल्ला चुदाई की बातें हो रही थी. बातें hi नहीं थे. आगे चल के पैलेस की दीवार के साथ बने हुए रूम्स रात भर के लिए चुदाई की बुकिंग में जाने वाले थे..

बाकी बच रही लड़कियों और औरतों ने पैलेस से बहार रह कर खुद को सबत करने के लिए कह दिया. वो भी अपने दुम्म पर अपनी लाइफ को सेट करने वाली थी. और अपनी मर्ज़ी से लुंड ढूंढ के छोड़ना चाहती थीं..

शाम हो गई थी, सबब के विचारो को जानते जानते, फिर मैं सबब को hi ले कर रेखा बाई के पास जाने लगा...

इन सबब का भी हक़ बनता था. सबकी जान्ने का पूरा पूरा हक़ था, रेखा बाई के लिए मैंने क्या कुछ किया है.

मेरा एक बाज़ो माँ ने ऑटो दूसरा अपर्णा ने थमा हुआ था और अपर्णा मस्ती करते हुए बार बार मेरे लुंड को हिला रही थी. और माँ भी अपर्णा की इस हरकत पर मंद मंद मुस्कुरा रही थी. एक और छूट मेरे लिए फ्यूचर में बुक जो हो गई थी.





वर्ड काउंट: 5495

************************************************************************************




 
अपडेट ::: 73

*************



मैं दिल्ली वाली फॅमिली को पैलेस में जाने का बोल कर बाकी सबब को ले कर बेसमेंट की तरफ बढ़ गया... रेखा बाई के साथ होने वाला सलूक सबब के देखने लायक नहीं था, रेखा बाई का गैंगबैंग दिल्ली वाली फॅमिली के लिए देखना ज़रूरी नहीं था, रेखा बाई का अंजाम दिखाया जा सकता था, लेकिन रेखा बाई के साथ चुदाई करने वळून को तो मैं अपनी दिल्ली वाली फॅमिली को नहीं दिखा सकता था.

बाकी सबब के लिए ये एक नार्मल बात थी, इसलिए मैं सभी को लिए बेसमेंट की और चल पड़ा..

बेसमेंट में पोहंचा तो जूली मिल गई, जूली ने मुझे सब के साथ आते हुए देखा तो

जूली:- विजय सबब के लिए इस तरफ से देखने का इंतेज़ाम किया गया है...

मैंने जूली की बात सुनकर एक स्माइल दी और सभी को ले कर जूली की बताए जगा जाने लगा. जूली मेरे साथ hi थी..

हम अंदर पोहंचे तो वो एक बड़ा रूम था. और सबब के लिए बैठने का इंतज़ाम भी किया गया था..

माँ और अपर्णा मेरे साथ hi थीं वो भी मेरे साथ बैठ गयी. बाकी सब भी खुद के लिए चेयर मुतख़ब करके बैठ गईं.

विजय:- हाँ जूली, सबब वैसे hi किया गया है ना, जैसे मैंने ने बताया था.

जूली:- हाँ विजय सबब तुम्हारे हिसाब से hi किया गया है.

ये बोलते hi जूली ने एक वाल पर लगा हुआ पर्दा खेंच दिया. दीवार पर 7 फ़ीट ऊंचाई और 12 फ़ीट चौड़ाई में एक बड़ा शीशा लगा हुआ था. और शीशे के पार रेखा बाई दिख रही थी.

रेखा बाई हवा में बंधी हुई थी. रेखा बाई के हाथ ऊपर करके ज़ंजीरों से बंधे हुए थे. और पैरों को भी ज़ंजीरों से बंधा हुआ था, रेखा बाई के दोनों पेअर घुटनो से फोल्ड किये गए थे. उसके घुटनो को भी ज़ंजीरों से बांध कर रखा गया था, रेखा बाई अपने पैरों को आगे पीछे न सके.

एक हिसाब से रेखा बाई घोड़ी hi बानी हुई थी, बास वो घोड़ी सीढ़ी नहीं उलटी थी. रेखा की छूट में एक आदमी अपना लुंड घुसाए हुए अंदर बहार कर रहा था. और एक आदमी रेखा बाई के मोहन में लुंड घुसाने में लगा हुआ था, लेकिन रेखा बाई अपना मोहन इधर उधर मार कर लुंड को मोहन में जाने से बच रही थी.

माँ:- विज्जू बीटा ये सबब क्या है, ये सबब तो नार्मल दिख रहा है.

प्रिय:- हाँ विज्जू, इस कुत्तिया के साथ तो ये सबब सही नहीं है, ये तो चुद चुद के इस सबब के आदि है, इस के लिए तो कोई और hi सजा होनी चाहिए..

jhaniv,shruti:- हाँ विज्जू, रेखा बाई को भी उतना hi दर्द मिलना चाहिए जितना इसने हम सबब को दिया है, खली चुदाई से काम नहीं चलने वाला..

aparna:-(namm आँखों से) विज्जू भाई मुझे भी इस कुत्तिया को ऐसे नहीं देखना, इसका वो हशर करो क मेरे दिल को चैन मिल सके, इस कुटिया ने मुझे मेरे घर से दूर कर दिया. इस कुत्तिया को कम् सजा नहीं मिलनी चाहिए.

विजय:- अरे आप पहले सबब सही से देख तो लें, वह हाल में सिर्फ रेखा बाई की चुदाई hi नहीं हो रही है, और भी कुछ ऐसा है जो रेखा बाई के लिए na-kaabil-e-bardasht है.

माँ:- विज्जू मैं कुछ समझी नै, तुम कहना क्या चाहते हो..

विजय:- आप सबब रेखा बाई के चेहरे पर ग़ौर करें, फिर मुझे बताएं क आप सबब ने क्या चीज़ नोटिस की है.

मेरी बात सुनकर सब हैरान हो गईं, और फिर से रेखा बाई को देखने लगी, इस बार सबब hi बड़े धयान से सबब देख और समझ रही थीं, अपर्णा भी रोना भूल कर रेखा बाई को देखने लगी.

जूली सबब को हैरान होते देख कर मंद मंद मुस्कुरा रही थी और मैं भी जूली को देख कर मुस्कुरा रहा था.. जूली को भी उसके मैं की ज़िन्दगी मिल गई थी.

माँ:- विज्जू ये रेखा बाई का चेहरा इतना अजीब क्यों है, जैसे वह कुछ ऐसा है जो इसके लिए सहन करना बोहत मुश्किल है. लेकिन देखने से सही समझ नहीं आ रहा..

प्रिय:- विज्जू ये सबब क्या है.

विजय:- जूली इन्हे सबब समझाओ.

बड़े शीशे के पास hi एक छोटी सी खिड़की भी लगी हुई थी. जिसे खोलने से हाल की हवा इस तरफ आने लगती.

जूली ने मेरी बात सुनकर उस खिड़की को खोल दिया और फिर फ़ौरन hi बंद भी कर दिया.

5 सेक् में hi सबब को पता चल गया था.. उस तरफ क्या है.. सब के hi चेहरे बदल गए.

माँ:- विज्जू बीटा, ये इतनी बदबू कहाँ से आई.

प्रिय:- माँ मुझे लगता है, वो जो रेखा बाई अपना सर इधर उधर कर रही है. वो भी इसी बदबू से तंग है, वर्ण वो क्यों किसी का लुंड अपने मोहन में लेने से इंकार करती..

माँ:- मैं अब्ब भी पूरी बात नहीं समझी..

विअज्य:- रेखा बाई के लिए, रपे या गैंगबैंग कोई सजा नहीं है, वो भी तो सालों चुदती रही है, उसे चुदाई से क्या फर्क पड़ने वाला है, हाँ पहले दिन चुदाई से उसे परेशानी होगी, लेकिन फिर वो इस सबब की आदि हो जाती..

और दूसरा ये सबब हम रेखा बाई को मज़ा देने के लिए तो करने से रहे, रेखा बाई की सजा बोहत बड़ी है. इसलिए मैंने कुछ अलग सोचा था..

सबब hi एक दुम्म से बोल padi:----kyaaaaaaaaaaaaaaa?? क्या सोचा था तुमने...

विजय:- माँ जो लोग रेखा बाई को छोड़ रहे हाँ, उन सब का ताल्लुक़ इस शहर की गंदगी साफ़ करने वलु से है. मैंने शहर भर से गटर साफ़ करने वाले 10 हट्टे काटते आदमियों का अर्रंगे किया है. वो सबब एक महीने के लिए यहाँ पैसों के लिए ये सबब करने पर तैयार हुए हाँ.... वो सबब तो इस बदबू के आदि होते हाँ, उन्हें इस सबब से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला, लेकिन रेखा बाई क लिए एक तो बिन मर्ज़ी की चुदाई और ऊपर से बदबू, ये सबब रेखा बाई के लिए सहन करना मुमकिन नै रहेगा...

इससे रेखा बाई को मेंटली टार्चर मिलता रहेगा.. जितना गन्दा शरीर है रेखा बाई का उसे ऐसे hi माहौल मिलना चाहिए.. जितनी गंदगी इसने पहले है, वही इसे भी झेलनी पड़ेगी.

विजय:- जूली साउंड ओपन करना... जूली ने एक बटन दबाया और रेखा बाई की आवाज़ आने लगी..

रेखा बाई:- छोड़ दो मुझे कुत्ते के bachcho,ahhhhhhhhh,maaaaaaaaa, ये बदबू मुझे मार डालेगी... aakhkh.....thuuuuuuuuuuuuu...... यकककककक..

रेखा बाई का मोहन बदबू की वजा से ख़राब होने लगा और वो वोमिटिंग जैसी कंडीशन में जाने लगी.. लेकिन वो खली पेट थी, इसलिए वो अपने अंदर का बहार भी नहीं निकल सकती थी..

जितना हो सकता था वो चिल्लाने लगती.. कभी गलियां देने लगती कभी मिन्नतें करने लगी...

मुझे छोड़ दो प्लीज, मेरे पास बोहत पैसा है, वो सबब ले लेना, लेकिन मुझे इस सबब से बचा लो, मुझे कोई मास्क hi dedo.mujhse ये सब सहन नहीं होता....

तुम सुन नहीं रहे हो हरामी., तेरी माँ को रंडी बनाओ.. सुनले हरामज़ादे... ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh..

सबब रेखा बाई की बातें और बोलने का अंदाज़ देख क्र हेरह रह गईं.

प्रिय:- विज्जु तुमने ये सबब कैसे सोच लिया... इतना सबब कैसे तुम्हारे दमाग में आये..

विजय:- अरे मेरी तितली ये सबब तो मैंने सालों पहले hi सोच लिया था, अब्ब मैं रेखा बाई को छोड़ क्र तो अपना घुसा तो निकलने से रहा.. उस कुत्तिया का बदन इस लायक hi नहीं है क उसे छोड़ा जाए. चुदाई उसके लिए मज़े की चीज़ है और उसे मज़ा नहीं सजा देनी है...

अपर्णा:- विज्जउ भाई यू अरे थे बेस्ट..

माँ:- विज्जू बीटा रेखा बाई की ये हालत देख के मुझे बोहत शान्ति मिली है.

जहान्वी:- पारर विज्जू इससे ये रेखा बाई भी कुछ hi दिनों में इस बदबू की आदि हो जायेगी...

जानवी की बात सुनकर सबब hi मेरी तरफ देखने लगी..

माँ:- हाँ विजजू ये सबब होते रहने से रेखा बाई भी तो उन सभी आदमियों के जैसी इस स्मेल की आदि हो जाएगी..

मैंने सभी को बारी बारी देखा..

विजय;- माँ ये कैसे हो सकता है क आपका बीटा कुछ सोचे और रेखा बाई को फायदा हो, मैं तो रेखा बाई का एक एक सांस जहन्नम बनाने वाला हूँ... रेखा बाई की चुदाई एक साथ दो आदमी करेंगे. और फिर रेखा बाई को हर 2 घंटे बाद 30 मिंट की रेस्ट दी जाएगी.. जो रेखा बाई को फूलों से महकते एक रूम में मिलेगी. रेखा बाई को उस में जाते hi बोहत सकूँ मेलगा, लेकिन फिर जब्ब वो फूलों से महकती हुई फिरसे हाल में छोड़ने के लिए जायेगी तो वही बदबू एक बार फिरसे रेखा बाई के लिए सहन करना मुमकिन नहीं रहेगा...

एक महीने तक यही सबब कुछ रेखा बाई के साथ होता रहेगा, इस एक महीने में रेखा बाई को सिर्फ 10% खाने पीने को मिलेगा, ज़यादा तर एनर्जी ड्रिप्स के ज़रिये रेखा बाई में इंजेक्ट की जाएगी... एक hi महीने में रेखा बाई का बदन पिघलना शुरू हो जाएगा... 1 महीने के बाद देखेंगे अब्ब रेखा बाई के साथ क्या करना सही रहेगा....

1 महीने में मैं बोहत कुछ सोच लूंगा.. आगे रेखा बाई का क्या करना है.

सबब दीदे पहाडे मुझे देख रहे थे, और जूली इन सभी को देख कर मुस्कुरा रही थी....



************************************************************************************



आज मेरी लाइफ की पहली दुमदार चुदाई वाली रात थी.

*****************************************************



मेरा लुंड तो अनगिनत बार अपना पानी निकल चूका था, लेकिन कभी किसी की छूट में घुसने का चांस नहीं बना था.

और आज हम चरों hi बोहत ज़यादा एक्ससिटेड थे.. रूम अंदर से लॉक था, और देर न करते हुए तीनो hi तितलियों ने अपने अपने कपडे उतरने कर रूम के एक कार्नर में

फ़ेंक चुकी थी, जैसे ये सब के उनके बदन पर फज़ुल में hi हाँ, तीनो hi वाइट पंतय में थीं.

.




.

तीनो hi बीएड के ऊपर घुटनो के बल बीएड पर कड़ी थीं, पिरया सेंटर में थी और जहान्वी और श्रुति प्रिय के साइड में थीं, दोनों ने प्रिय के एक दूध पर हाथ रखा हुआ था. और एक दूसरे को देख कर कुछ डीडे कर रही थी, आज होने वाली धमाके दार चुदाई की वजा से कुछ तो प्लान करना hi था. खाली लुंड लेने से मज़ा तो आने से रहा, लुंड के साथ कुछ मिर्च मसाला भी हो जाए, तो लुंड लेने का और छूट के फ्हटने का मज़ा hi कुछ और होता है..

मैं तीनो को hi देख रहा था. अगर वो तीनो झट में अपने कपडे उत्तर सकती थीं, तो मैं भी उनसे कुछ काम नहीं था, मैंने भी देर किये बिना अपने सारे कपडे उतारने दिए.

तीनो ने hi कुछ डीडे किया...

प्रिय:- विज्जू आज हमारे जलवे देखोगे क्या.???

जहान्वी:- विजजूउ आज हमारे जलवे देख कर खुद पर काबू रख के दिखाना.

श्रुति:- और आज हम तीनो hi अपने जलवे दिखा कर तुम्हारा हशर करने वाली हाँ..

तीनो hi नॉटी स्माइल देती हुई अलग हो गईं.. मैं तीनो को hi देहने लगा. क्या अंदाज़ अख्तियार करने वाली थीं तीनो, मुझे भी इस सबब में मज़ा आने लगा था, चुदाई का मज़ा तो आना hi था, लेकिन चुदाई अगर कुछ स्टाइल में हो जाए तो मज़ा hi अलग होता है, फिर ऐसा समय जल्द भूलता भी नहीं है, उसे hi याद करके लुंड में हर दुम्म कड़कपन्न रहता है.

और लुंड को तो अब्ब हर दुम्म hi अकड़ के hi रहना था, जब्ब तक्क सबब की छूट और गांड न खुल जाएँ..'

मैं सबब इमेजिन करके hi मज़े ले रहा था, लेकिन ये भूल गया क कमरे में तीनो hi तूफ़ान लाने के मूड में हाँ.

श्रुति:- विज्जु कहाँ खोये हुए हो, मेरी तरफ देखो..

मैंने श्रुति की आवाज़ सुन के उसकी तरफ देखा तो मेरे होश hi उड़द गए. श्रुति बड़ी कातिल ऐडा से अपने बूब्स को पकडे हुए मेरी आँखों में देख रही थी, और उसके बूब्स क्या ग़ज़ब के दिख रहे थे.







श्रुति:- विज्जु मेरे बूब्स को देखो क्या कभी इनके जैसे देखे हाँ. मेरे निप्पल को देखो, कैसे ये तुम्हारे मोहन में जाने के लिए बेताब हाँ. रात को तो तुमने सिर्फ छूट का hi मज़ा लिया था, अब्ब ज़रा इनके दर्शन करो और उन्हें इनका हक़ भी दो.

फिर बीएड पर लेट गई और अपने पेअर खोल कर एक नॉटी स्माइल के साथ अपनी छूट दिखते हुए बोली.







श्रुति:- विज्जु मेरी चुरट देखो कैसे चमक रही है, ये तुम्हरे लिए सालों से सजी सजती सवनवर्ती रही है, बड़े नखरे उठवाये है इसने मुझसे.. कहती थी जब्ब विज्जु मुझे खुला करने के लिए आये तो मैं उसे सबसे स्पैंगल बन कर मिलना चाहती हूँ.. इसलिए इसने मुझसे बड़ी खिदमत करवाई है.

विज्जु आज तुमने मेरी छूट को खुला करना है, देखो कैसे तुम्हरे लिए सालों से बेचैन है. इसकी आग तुम hi बुझाओगे. देखो कैसे तुम्हारे सामने आते hi पानी छोड़ने लगी.

प्रिय:- नहीं विज्जु उसकी तरफ मैट देखो, वो तो बास ावें hi बोले जा रही है, सच तो ये है क आज मुझसे जाया सेक्सी कोई नहीं दिखेगी .. जितनी आग मेरे अंदर है उतनी hi आग मैं तुम्हारे दिल में और तुम्हारे लुंड में भी लगा दूंगी..

जैसे ये सबब कर रही थें मुझे नहीं लगता, क मैं आज बच पाऊँगा, ये तीनो तो मिलकर मुझे मार hi डालने वाली थीं. क्या सन क्रिएट कर रही थीं. प्रिय रूम में साइड पर रखे हुए एक टेबल पर एक पेअर रखे अपने एक चुत्तड़ को हाथ से पकडे हुए मुझे देख कर अपनी और आकर्षित कर रही थी...







प्रिय:- देखो इस पोज़ में मैं कैसी दिख रही हूँ. मेरी छूट की शेप कैसी लाजवाब दिख रही है, देखो अभी से hi इसके लिप्स तुम्हरे हथु, तुम्हारे मोहन और तुम्हरे लुंड के सुपर्ष के लिए तड़प रहे हाँ. रात से hi ये ख़ुशी से फूलने नहीं समां रहे हाँ. और मेरे बूब्स को देखो कैसे तने हुए हाँ, ये भी तुम्हारे प्यार के लिए आज ख़ुशी से झूम रहे हाँ. छूट की तरह से आज इन्हे भी पूरी पूरी ख़ुशी देना.

श्रुति क्या कम् थी, जो अब्ब प्रिय भी ऐसे कातिल बानी हुई थी. बड़े ग़ज़ब के स्टाइल में अपनी छूट के दर्शन दे रही थी, मुझे लगने लगा क आज मेरी खैर नहीं है.

प्रिय:- क्यों विज्जू अभी से hi पसीने आने शुरू हो गए हाँ. अभी तो हमने कुछ किया भी नहीं है. अब इस पोज़ में देखो मुझे मैं कैसे दिख रही हूँ. क्या मेरी छूट श्रुति से कम् है.

प्रिय अपनी एक टांग को हाथ से पकड़ कर ऊपर उठाये मुझे मुस्कान देती हुई अपनी छूट दिखा रही थी







मेरे बदन से ठंडा पसीना निकलना शुरू हो गया था. बिजलियाँ hi गिराई जा रही थीं आज मुझपर. एक एक अंदाज़ जानलेवा था.. कुछ देर प्रिय मुझे अच्छे से अपनी छूट का नज़ारा करवाती रही, फिर पास की टेबल पर घुटन के बल उलटी हो गई... प्रिय मुझे पीछे मुद क्र देखते हुए मुस्कुराई और फिर आगे बोली.







प्रिय:- विज्जु देखो मैं कैसे कमसिन काली हूँ, देखो मेरी छूट और गांड पीछे से और भी ज़यादा पायरी लग रही हाँ. क्या कहते हो ऐसे hi मुझे छोड़ोगे या किसी और स्टाइल में.. वैसे इस अंदाज़ में तुम्हारा लुंड बढ़िया से मेरी छूट में घुसेगा. और तुम मज़े की हसीं वादियों में चले जाओगे...

जहान्वी:- नहीं विज्जउ, उन दोनों में इतना भी दुम्म नहीं है, आज मुझसे ज़यादा खूबसूरत हॉट और सेक्सी कोई नहीं लग सकती . मुझे देखो विज्जउ







मैंने जहान्वी की तरफ देखा तो जहान्वी भी मुझे मारने का पूरा प्लान बनाये हुए थी.. आज तीनो hi मुझे कही का नहीं छोड़ने वाली थीं. जहान्वी अपने दोनों hi हाथ अपने कंधे पर रखते हुए अपने दोनों hi बूब्स को दबाये मुझे एक क्यूट से स्माइल दे रही थी. जहान्वी का अंदाज़ भी इतना खतरनाक था मेरा खुद पर कण्ट्रोल खोने लगा... मुझे लगा जैसे आज तीनो मेरे साथ क्र रही हाँ, मेरा लुंड किसी की छूट में घुसे बिना hi अपना पानी छोड़ देगा... मेरा लुंड तीनो को ऐसे देख कर झटके पे जखटके खा रहा था.

.




.





.

जहान्वी बीएड के कोने से अपनी गांड टिकाये नेक्स्ट पोज़ देने लगी.

जहान्वी:- देखो विजय मेरे बूब्स श्रुति और प्रिय से कम् हाँ क्या. देखो मेरे बूब्स पर कोई भी दाग नहीं है, और चमक देखो कितनी है, रूम की लाइट बंद भी कर दो तो रौशनी कम् नहीं होगी.. बल्कि और भी बढ़ जाएगी.. इतनी दूर से देख कर तुम्हरा झटके खाने लगा, जब उसे अपने मोहन में ले के चूसेंगे तब्ब तुम्हारा क्या हाल होगा.

फिर जहान्वी भी अपना पोज़ चेंज करने लगी.. जहान्वी बीएड पर लेट गई और अपने पैरों को खोल कर उठा दिया और कहने लगी.






जहान्वी:- देखो विज्जु मेरी छूट कैसे तुम्हे प्यार करने के लिए मचल रही है. देखो अभी से hi कितनी लाल दिख रही है, विज्जु ये इसका ओरिजिनल कलर है, आज तुम इसकी बजा बजा कर ऐसी हालत करो क ये इसका जो खुद के कलर पर घमंड है वो चकचूर हो जाए.. आज इसकी वो हालत करो, जो तुमने कभी किसी की न की हो..... अब्ब मैं तुम्हे अपनी गांड दिखती हूँ.







जहान्वी:- देहको विज्जु मेरी छूट की तरह से मेरी गांड भी सील पैक है. देखो कैसे चमक रही है. विज्जू तुम इस पोजीशन में मुझे जब छोड़ोगे तो सोचो कितना मज़ा आएगा.. इस पोजीशन में तुम कभी अपना लुंड मेरी छूट में घुसना और कभी मेरी गांड में. बोलो करोगे ना मेरी छूट और गांड को खुला...

मेरा गाला पूरा hi खुश्क हो चूका था, कांटे से पड़ने लगे थे मेरे गले में और मेरा लुंड उछाल उछाल आकर नाचने लगा था. इतने झटके आज से पहले मेरे लुंड ने कभी नहीं खाये थे. ऐसी हालत तो इसकी पहले कभी भी नहीं hi थी.

मुझे कभी ऐसा सन भी देखने को मिलेगा मैं सोचा भी नहीं था. .. लेकिन ये सबब इतना बढ़िया और मनुराणां से भरपूर था, क मैं सोचने लगा ऐसा तो अक्सर होते रहना चाहिए, कितना मज़ा है इस सबब में...

लेकिन इस सबब में एक गड़बड़ थी, साला लुंड के लिए ये सबब बर्दाश्त करना पॉसिबल नहीं था. इतने झटके इसने खा लिए क, मुझे लगने लगा, अगर 2 मिंट किसी और ने मुझे अपने जलवे दिखाए तो मेरा लुंड पानी छोड़ जाएगा..

तीनो:- विज्जु देख लिए हम तीनो के जलवे, अब्ब बताओ किसकी छूट सबसे बढ़िया है, और बूब्स किसके बेस्ट सबसे हाँ. और किसकी गांड की शेप और तिघटनेस सबसे उम्दा है.

विजय:- जितने खतरनाक जलवे आज तुम सबब ने दिखाए हाँ. और तुम सबब ने hi अपनी छूट और गांड के साथ मुझे सबब बोहत hi बढ़िया से दिखाया है. तुम तीनो hi एक दूसरे से कम् नहीं हो, लेकिन मैं पहले तुम तीनो को अच्छे से चेक करूँगा. क किस की छूट में दुम्म ज़यादा है. किसकी छूट का पानी ज़यादा टेस्टी है, किसके बूब्स सबसे प्यारे हाँ, गांड में नंबर 1 कौन है..

मैं मई सबकी छूट को चूसे कर चेक करूँगा.. फिर बताऊंगा. तुममे से किसकी छूट सबसे बेस्ट है..

तीनो:- तो चलो फिर शुरू करो.

मैं पहले प्रिय के पास गया और उसके पैरों में बैठ गया. प्रिय ने अपना एक पेअर टेबल पर रख दिया. मैंने प्रिय के चुड़तों को पकड़ कर प्रिय की पूरी छूट को hi अपने मोहन में भर लिया. प्रिय मेरे सर्र पर हाथ रख कर मुझे हलकी मुस्कान से देखने लगी.







मैं अच्छे से प्रिय की छूट को चाटने लगा. कुछ देर ऐसा करने के बाद मैंने प्रिय की छूट से मोहन हटा लिया...

प्रिय:- हाँ विज्जु अब्ब बोल कैसी लगी मेरी छूट और कैसा था मेरी छूट का पानी.

विजय:- अभी कहाँ, अभी तो जहान्वी ,श्रुति को hi चेक करना है, दोनों की छूट को चेक करने के बाद hi बताऊंगा ना....

मैं जानवी के पास गया, जहान्वी सूफी पर लेट गई और मैं नीचे झुक पर जहान्वी की छूट को पीने लगा.






कुछ देर जहान्वी छूट का पानी टास्ते किया. फिर जहान्वी को छोड़ कर श्रुति की तरफ बढ़ गया. षुरूति बीएड पर लेती थी. मैंने श्रुति को चूतड़ों से पकड़ कर उठाया और उसकी छूट को अपने मोहन में ले लिया.






षुरूति बोहत गरम थी. षुरूति की छूट ने कुछ ज़यादा hi पानी छोड़ दिया था. जितना मुझे मिला मैंने छठा और फिर उसे भी छोड़ कर बीएड से नीचे ुअत्तर गया..

तीनो:- अब बताओ किसकी छूट का पानी ज़यादा टेस्टी है...

विजय:- अभी कहाँ अभी रिजल्ट आने में टाइम है, और मैं अकेला कोई फैसला नै लेने वाला, मेरा लुंड भी पहले तुम सबब को अच्छे से चेक करेगा, वो भी अपने हिसाब से तुम तीनो को चेक करेगा.. पारर उसका तरीका कुछ हट के है. वो तुम तीनो की छूट में घुस कर अच्छे से चेक करेगा.... उसके बाद में सबब बता सकता हूँ. क तुम तीनो की छूट में से बढ़िया किसकी छूट है..

तीनो:- ये तो अच्छा है ना. एक से भले दो. तुमने चेक क्र लिया, अब्ब तुम्हाले लुंड की बारी है.. बोलो कैसे करना है..

विजय:- अभी उसका टाइम नहीं आया तो पहले तुम तीनो अपनी मर्ज़ी करलो, फिर उसे एक एक करके तुम तीनो के अंदर घुसा भी दूंगा..

तीनो:- ok दोने

जहान्वी नीचे बैठी और मेरे लुंड को पकड़ कर चाटने लगी..







मुझे पोज़ दिखते दिखते तीनो hi अपनी छूट को बोहत ज़यादा गीला क्र चुकी थीं. कुछ मैंने तीनो की कहत को चाट कर आग को और भी भड़का दिया था..

इस लिए अब्ब वो तीनो hi बेचैन हो गयी थें. जहान्वी भी अपनी छूट की गर्मी को लिए मज़े से मेरे लुंड को चाटने में लगी हुई थी... 2 मिंट बाद जहान्वी की नज़र प्रिय और श्रुति पर पड़ी..





जहान्वी:- क्या देख रही हो मैंने मन तो नहीं किया ना, विज्जू का लुंड सिर्फ मेरा hi तो नहीं है, आ जाओ और अपनी पियास बुझाओ लो. जहान्वी साइड हटी तो प्रिय और श्रुति आ कर मेरे लुंड को पकड़ कर मज़े लेने लगी. दोनों hi मेरे लुंड को अपनी मुठियों में लिए हुए थीं.

विजय:- क्या देख रही हो. लुंड को फील बाद में कर लेना पहले इसे इसका हल्का करो..

मेरी बात सुन कर दोनों hi सर्र उठा कर मुझे देखने लगें





प्रिय:- कुछ ज़यादा hi जल्दी नहीं तुम्हे..

श्रुति:- वो बेचारा भी क्या करे, हमने आग hi इतनी भड़का दी है. उसका लुंड कण्ट्रोल में रहा hi कहाँ है..

तीनो hi हस्सन लगें

जहान्वी:- प्रिय उठो विज्जु को बीएड पर लिटाते हाँ. तीनो को विज्जु का लुंड सही से मिलेगा..

कुछ देर में मैं बीएड पर लेता था और वो तीनो hi मेरे लुंड पर टूट पड़ीं...







प्रिय मेरे लुंड को अपने मोहन में लेने लगी, श्रुति मेरे लुंड को चाटने लगी तो जहान्वी मेरे लुंड के बॉल्स को अपने मोहन में लिए चूसने लगी..

मेरे लुंड के लिए ये सबब बोहत hi खतरनाक था, साला कही बीच में hi ना रोने लगे. तीनो hi अपनी छूट की आग की वाज से परेशां थें. इसलिए वो धीरे धीरे अपनी स्पीड बढ़ने लगीं. और मेरे लुंड को हालत खराब होने लगी. मेरा लुंड तीनो के ऐसा करने से और भी फूलने लगा. मेरे लुंड को पहले से hi तीनो के जलवे देख देख कर झड़ने के करीब था.

प्रिय ने मेर ापुरा लुंड पकड़ा और उसे अच्छे से चाटने लगी..







प्रिय को कुछ ज़यादा hi आग लगी हुई थी. प्रिय कुछ देर तो मेरे लुंड को ज़ोरदार तरीके से चाटती रही और फिर अचानक से मेरे लुंड को अपने मोहन में ले लिया.

और पुरे मज़े और जोश से मेरे लुंड को चाटने लगी. प्रिय को ऐसा करते देख कर श्रुति और जहान्वी मुस्कुराने लगीं.

प्रिय जिस हिसाब से मेरे लुंड को चूस रही थी मुझे लगने लगा क प्रिय खुद का पानी तो निकलेगी hi मेरा भी निकल देगी.. जितना हेतुप मुझे तीनो ने कर दिया था, मेरा लुंड अब्ब किसी भी टाइम पिचकारियां छोड़ने वाला था...

जहान्वी ने प्रिय की छूट पर अपनी ऊँगली चलनी शुरू कर दी. वो भी समझ गई थी क प्रिय अपनी छूट का पानी निकलना चाहती है, इसलिए वो फ़ास्ट होने लगी है.

जहान्वी की मदद से प्रिय सच में hi अपनी छूट का पानी छोड़ने लगी. मेरा लुंड उसके मोहन में hi था. और प्रिय मेरे लुंड को मोहन में लिए हुए hi हांपने लगी. प्रिय ने मेरे लुंड को अपने मोहनसे निकला और साइड में होकर खुद की सांस ठीक करने लगी. जहान्वी ने मेरे लुंड को मोहन में लिया और प्रिय की hi तरह से मेरे लुंड को चूसने लगी.. जहान्वी की स्पीड से लग रहा था क वो मेरे लुंड का पानी भी निकलने का इरादा रखती है.

ार फिर जहान्वी ने जैसा सोचा था, वो कर दिखाया, मेरा लुंड तो कब से फटने के करीब था, जहान्वी की म्हणत से मेरे बदन के सारे रोईं hi खड़े कर दिए, और मेरा लुंड जहान्वी के मोहन में hi झटके खाने लगा, मेरा लुंड हार मानते हुए जहान्वी के मोहन में झड़ने लगा... मेरी सांस भी फूल गई थी.

कुछ देर में प्रिया और मैं रिलैक्स हुए तो..

प्रिय:- विज्जू मैं तो तुम्हे जलवे दिखा कर फांसते फांसते खुद hi फस गई, बड़ी जल्दी मेरी छूट ने मुझसे देगा कर दी... कमीनी से सबर hi नहीं हुआ. और रोने लगी...

जहानीव:- क्यों विज्जू कैसा रहा आज का ये एक्सपेरिएने..

vijay:-mindblowing, superb,excellent, फैंटास्टिक... इतने खतरनाक रूप आज तुम तीनो ने दिखाए मज़ा hi आ गया.. लेकिन इतना सबब सहन करना मेरे लुंड के बास की बात नहीं है.

तीनो hi हस्सन लगी..



वर्ड काउंट:4182

रेखा बाई के साथ जैसा सलूक किया गया है वो सही है या नहीं, मैं सबब नहीं जानता,

बास मुझे लगा ऐसा hi करना चाहिए इसके साथ में, रेखा बाई इससे भी ज़यादा बुरे बर्ताव की मुस्तहिक़ है.. अभी एक महीने बाद रेखा बाई के लिए स्पेशल ट्रीटमेंट शुरू की जायेगी. जो रेह्का बाई के लिए मरते दुम्म तक यादगार रहेगी.

************************************************************************************
 
थैंक यू वैरी मच..!!

फीलिंग तो अभी महक के अंदर नहीं जाएगी है विजय के लिए.. हाँ विजय उसे अच्छा ज़रूर लगा है. कभी विजय जैसा मिला नहीं ना. इसलिए वो विजय से कनेक्टेड हो गई..

रंजीत ने कितना किया उसके बढ़ कर विजय के लिए पूजा और हर्ष ने भी किया है.. विजय को फॅमिली का प्यार दिया .. ये विजय के लिए सबसे बेस्ट था..
 
थैंक्स..!!

नेक्स्ट अपडेट में कुछ खुलासा किया जायेगा, श्वेयता और रंजीत की अर्ली लाइफ का फिर कुछ और भी खुल कर सामने आ जायेगा.. अगर विज्जू भी रंजीत की तरह से अपनी माँ पर होने वाले ज़ुल्म से अनजान होता तो वो क्या वो इतना सबब कुछ कर पता.. विज्जू के सामने सबब हुआ. लेकिन रंजीत तो कुछ जानता नहीं था. कुछ ऐसा हुआ था. श्वेता और रंजीत की लाइफ में क रंजीत कुछ जान नहीं पाया. और श्वेता उसक नज़रों से सालों के लिए दूर हो गई थी... एक बात मैंने अपडेट में लिखी थी. जब्ब श्वेता और रंजीत पैलेस में मिले थे. क रंजीत श्वेता की जुदाई में पागल तक होने की हद्द तक्क पोहंच चूका था. सिर्फ जुदाई में वो ऐसा हो गया.. फिर श्वेता के बाद रंजीत की लाइफ में कोई नहीं आई. और रंजीत ने अपनी लाइफ लोगों की भलाई के लिए सर्फ़ करदी.. यही तो तयाग था रंजीत का श्वेता से प्यार का ... सैलून तक तो रंजीत भी तड़पा है...

अब रंजीत भी कोठे पर रह कर सबब को बलदा हुआ पायेगा तो वो भी सबब के जैसा hi हो जायेगा.. सबब hi शर्म ो हाय भूल चुके हाँ. तो रंजीत को इस सबब का आदि तो बनना पड़ेगा..

अब्ब रंजीत को बीच में से निकला नहीं जा सकता था.. इसकी की भी एक वजा है. जो आगे चल कर सामने आएगी..
 
थैंक यू वैरी मच भाई..

सही कहा आपने विज्जू के लिए अगर श्वेता रंजीत को छोड़ दे तो विज्जउ हर दम तो श्वेता की छूट में घुसने से रहा. विज्जू के लिए तो और भी बोहत हाँ और श्वेता को सेक्स की आदत पद चुकी है. और विज्जू को अभी दन्न से भी लड़ना है. और दिल्ली में अभी दो गैंग्स भी हाँ....

आगे चल के और पता नहीं विज्जू की लाइफ में क्या लिखा हुआ है.
 
थैंक्स फॉर थे सुग्गेस्टिव......

भाई का कहना भी सही है. लेकिन यहाँ विज्जू पर लोड की बात नहीं है. विज्जू असबब का है लेकिन ख़ास तो अपनी माँ और बहनो के लिए hi है. .. मैं एक बात मानता हु क बेटे का बाप अगर करैक्टर के लिहाज़ से फेरफेक्ट हो तो उसे भी उसका हक़ मिलना चाहिए.. किस्मत ने श्वेता और रंजीत को दूर कर दिया था. लेकिन वो थे तो एक दूसरे के लिए बोहत hi ख़ास.. जल्द hi एक शार्ट फ्लैशबैक को कुछ खुल कर सामने आ जाएगा. श्वेता राजित के लिए ऐसी क्यों है.. कोई भी औरत ऐसे hi तो नहीं किसी की बहन में चली जाती. कुछ तो रहा होगा गुज़रे हुए कॉल में.
 
भाई मैंने पहले hi कह दिया था क मुझे कभी किसी बात का बुरा नहीं लगता .. अब्ब सबब के सुग्गेस्टिव hi तो स्टोरी को एक सही सिम्त देते हाँ.. एक ब्रेन हर टाइम परफेक्ट हो ये ज़रूरी तो नहीं. आपके सबब के सुग्गेस्टिव से hi आगे चल के कुछ सही िया जा सकता है. स्टोरी में अक्सर मिस्टेक्स भी हो hi जाती हाँ. और रीडर्स को जो अच्छा न लगे वो तो अपनी गए देगा hi......
 
Back
Top