अपडेट ::: 85
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भले hi मैं अड्डे से काफी दूर आ गया था. पारर जैसा भयंकर ब्लास्ट हुआ था, खुद को सेफ रखने क लिए मुझे निचे गिरना hi था. कही से भी कोई चीज़ आ कर मुझसे टकरा सकती थी. ब्लास्ट क प्रेशर से चीज़ें दूर दूर तक उड़द क जाती हाँ.. और फिर किसी से भी टकरा उसे चीरते हुए गुज़र जाती हाँ.. मैं खुद को सेफ रखने क लिए निचे गिर पड़ा था...
बेस के अंदर सच में hi बारूद का स्टॉक था, जो ब्लास्ट हो गया था.. अब्ब हर तरफ से गुंडे भागे भागे इस रतफ आएंगे.. फिर पुरे एरिया को hi अपने गैर में ले लेंगे..
मई उठ खड़ा हुआ, फिर से भागना शुरू कर दिए.. पिस्तौल एक बार फिरसे मेरे हाथ में था.. सामने आने वाले को मैं मौका फिये बिना hi मार देने वाला था.
धमाके से एक बार तो सबब hi हिल गए होंगे..
फ़ौरन hi नाईट क्लब के ऊपर से एक बड़ी सर्च लाइट ों हुई.. और पुरे एरिया क गिर्द चक्कर लगाने लगी..
अब्ब सब का hi फोकस ब्लास्ट वाली साइड में हो गया था, सबब hi भागम भाग इधर hi आ रहे थे.. और मुझे सभी की नज़रो से बचते हुए आगे बढ़ना था..
अब्ब मुझे किसी दूसरे अड्डे पर जाना था.. मैं जल्द से जल्द हर तरफ अफरा तफरी पहला देना चाहता था... महेंद्र सिंह गैंग ने जितना लोगों को परेशां किया था, मैं भी उतना hi इन हरामियों की माँ बेहेन एक कर देना चेहरा था..
अब्ब तक तो मैंने खुद को दूसरों की नाज़ों से बचाया हुआ था.. पारर जल्द hi अब्ब मई दुसरो की नज़रो में आने वाला था..
हॉस्पिटल; 500 मीटर दूर था, तो मैं वहां तो जाने से रहा.. इसलिए मैंने 1 अड्डे की तरफ जाना शुरू कर दिया, जो यहाँ 200 मीटर की दूरी पर था..
बाकी से 2 अड्डे हॉस्पिटल की दूसरी साइड में था.. अब्ब सब का hi धयान इस तरफ हो चूका था, एरिया की सिक्योरिटी और भी ज़यादा टाइट होने वाली थी..
अब्ब मुझे एरिया में पहेली यही सेक्युर्टी की आँखों में धुल जहां कर एक और अड्डे को तबाह करके हॉस्पिटल या दूसरी तरफ मौजूद अड्डों पर जाना था..
मैं तेज़ी से लोगों की नज़रों से बचता हुआ आगे बढ़ने लगे... पर अब्ब लोगों की नज़रो से बचना आसान अनहि रहा था..
दो गलियों में से गुजरने क बाद जैसे hi मैं तेस्री गली में मुड़ने लगा. तो किसी घर की छत पार्स एक बाँदा मुझे देख कर चीखना लगा..
वो मेरी तरफ इशारा करता हुआ किसी से कहने लगा..... " वोओओओ देखहूऊओ"
आदमी:- usne..apna..chehra..chhupa..rakha..hai..wo..chhup..kar..bhaag..raha..hai.
उसकी आवाज़ इतनी ऊंची थी, क बहुत से लोग जो छतो पर खड़े थे, वो सबब hi मेरी तरफ देखने लगे..
फिर तो जैसे शोर hi मचने laga..bhago..pakdo..jaane न paaye..goli मर दो इसे.. तलवार ले आओ... मेरा पिस्तौल कहाँ है..
मैं सबब की नज़रो में आ गया tha...main पहचान लिया गया था.. अब्ब यहाँ रुकना खतरे से खाली नहीं था... मई पटेल क पास भी नहीं जा सकता था.. अब्ब मुझे किसी पाइपलाइन का सहारा लेना पड़ेगा.. मैंने फुल रफ़्तार से भागना शुरू कर दिया.. कुछ लोग मेरे पीछे भागने अलगे.. तो मैंने मुद के एक दो को शूट कर दिया.. पीर तो जैसे सबब hi पागलों की तरह से एक दूसरे से टकराने लगे.. मुझे पकड़ने चले थे.. साले खाली मेरा पीछा करने लगे हाँ...
अब्ब लोगों को भी समझ में आए चूका था, जो ब्लास्ट हुआ है, उसमे मेरा hi हाथ hai..jald hi ये खबर पुरे एरिया में फेल जानी थी.. और मुझे पागल कुत्ते की तरह ढूंढ़ने लगेंगे...
मैं भागता हुआ एक प्लाट में पोंछा और वहां बने हुए मैनहोल का ढकन खोल कर साइड में कर दिया... मैंने पीछे मुद कर देखा तो पीछे कोई नहीं था, और न किसी ने मुझे देखा था... मैं ढकन खोल कर देख रहा था क अंदर से गैस तो नहीं निकल रही.. लेकिन अंदर से किसी किसम की कोई गैस नहीं निकल रही थी..
मैं मैनहोल में उतर गया, मैनहोल का ढक्कन फिरसे एडजस्ट किया.
मैनहोल की गहराई मेरे क़द से कुछ hi उअप्र तक थी.... निचे उतारते hi मैंने बैग से टोर्च निकली, उसे ों करके अंदर का व्यू देखने लगा.. 30 फ़ीट आगे जा क्र ये रास्ता एक 'टी' की शकल अख्तियार कर रहा था.. एक रास्ता लेफ्ट तो एक राइट में जा रहा था..
मैंने मैनहोल क अंदर का माहौल देखना शुरू कर दिया, कही कोई सांप hi न मिल जाए मुझे, ऐसी जगा पर अक्सर ऐसी hi चीज़ें देखने को मिलती हाँ..
यहाँ घुटन बहुत ज़यादा थी, तो मैं तेज़ी से आगे बढ़ें लगा..
30 फ़ीट पर जाने क बाद मैं रुक गया और दोनों साइड में hi देखने लगा.. ये दोनों रास्ते कहाँ तक्क जाते हाँ.. मैं खड़े हो कर नक़्शे की लोकेशन को समझने लगा.. मैं इस बात पर ग़ौर कर रहा था, क दोनों रास्ते कहाँ जाते होंगे..
कुछ देर में मैं सबब समझ गया.. एक रासरा हॉस्पिटल की तरफ जा रहा था.. तो
दोसरा रास्ता इस एरिया से बहार निकल रहा था. या आगे जा कर कही और घूम कर जा रहा था...
मैं हॉस्पिटल वाली साइड में तेज़ी से बढ़ने लगा.. जैसे जैसे टाइम गुज़र रहा था, अंदर घुटन बढ़ती जा रही थी... पाइपलाइन मेरे सर्र क बराबर थी, फिर भी मैं किसी हद तक झुक कर तेज़ तेज़ भाग रहा था, मेरी नज़र ऊपर पिलेलीने की छत पर भी थी, कही कोई चीज़ ऊपर न अटकी हो, और मेरी लपवाराई से वो मेरे सर्र में hi न कही घुस जाए.. और किसी को कुछ पता hi न चले क मैं कहाँ जा के मर्डर गया हों.. मेरी तो लाश भी किसी को सालों तक्क नहीं मिलने वाली थी. और जब्ब मिलती तो किसी को पता भी नहीं चलता था, ये लाश मेरी है या किसी और की..
मेरे होंटो पर मुस्कान आ गई थी, जब्ब ऐसे विचार मेरे मैं में आये तो..
इंसान कही भी हो उसे मौत लम्हा लम्हा याद आती hi रहती है, और सबब से ज़यादा उसे अपने पीछे रह जाने वलु की बड़ी याद आने लगती है..
पाइपलाइन में भागते हुए मुझे कई मोड़ भी मिले थे.. पर मई कही नहीं रुका..
15 मिंट बाद एक बार फिरसे 2 मोड़ आये तो मैं रुक गया..
मैं वही खड़ा रह कर फिरसे जज करने लगा क मैं इस वक़्त कहा हो सकता हों.. कुछ देर तक मई ग़ौर करता रहा जब्ब सही से समझ नहीं आया तो मैं मैनहोल का ढकन खोल कर बहार देखने का सोचा..
मैं ऊपर देखते हु आगे बढ़ने लगा.. कुछ दूर जाते hi मुझे एक जाग स्तैर दिखी, उसके ऊपर hi मैनहोल का ढक्कन था.. मैं उस स्तैर पर चढ़ कर ढक्कन को हटाने लगा... मई ये भी बहुत धयान से कर रहा था, बाद में पता चले क ऊपर hi मेरे सवागत क लिए कोई मौजूद हो..
मैंने थोड़ा सा ढक्कन सरका कर बहार झाँका.. ये एक खाली प्लाट था.. यहाँ पर रौशनी कम् थी .. आस पास कुछ कचरा पड़ा हुआ था..
मैं बहार आया और ढक्कन को फिरसे वापिस लगा दिया.. कचरे से गुज़र कर मैं कुछ फासले पर पोहंचा.. अपने चेहरे पार्स कपडा हटाया और गहरी गहरी साँसे लगा.. फ्रेश हवा में आ कर जान में जान सी आ गई थी.. वर्ण इतने टाइम से मैं एक घुटन वाले माहौल में था...
कुछ देर मैं ताज़ा हवा में सांस लेता रहा.. साथ hi मैं चरों तरफ घूम फिर कर भी देखने लगा.. इस तरफ ज़यादा बिल्डिंग्स नहीं थीं.. 150 मीटर क एरिया में 4 hi स्माल कोठियां थीं.
मेरे पीछे 150 मीटर क फासले पर हॉस्पिटल था.. मैंने हॉस्पिटल जाने का प्रोग्राम कैंसिल करते हुए इस साइड में दोनों अड्डों को तबाह करने का सोच लिया.
नक़्शे के हिसाब से मैं समझने लगा क इस साइड में महेंद्र गैंग क अड्डे कहाँ हो सकते हाँ.. जब्ब मुझे समझ आया तो मैं उस तरफ तेज़ कदमो से चने लगा..
ये तो मैं समझ hi गया था, एक अड्डा ब्लास्ट होने की वजा से गुंडों और आम जनता का धयान उस तरफ ज़यादा होगा.. इस तरफ कम् hi किसी का ध्यान जाएगा.. रात वाले हमले में और अब्ब के हमले में सबब hi ये समझ चुके थे क ये सबब एक hi इंसान कर रहा है.. और वो मुझे वही कही ढूंढ रहे होंगे..
ज़यादा शक उन्हें महेंद्र सिंह से खार रखने वाले लोगों पर होगा.. और वो उन्ही घरु में घुस कर मुझे ढूंढ रहे होंगे...
मैं अपने रियल फेस में नहीं था. यहाँ मैं अपने चेहरे को नहीं छुपा सकता tha..main तेज़ चल रहा था, भागने से किसी को भी शक हो सकता था..
कुछ मिनट्स बाद मैं एक बेस पर पांच गया... यहाँ भी hi-tech सिक्योरिटी hi थी... मेरे पास प्लानिंग करने क लिए टाइम नहीं था.. बेस के अंदर घुसना आसान नहीं था.. पर मेरे पास बेस्ट ऑप्शन मौजूद था.. मई अपने रास्ते में आने वाली हर एक लाइट को गोली से उड़ाता हुआ अंदर घुसने लगा..
अंदर हर तरफ शोर मचने लगा. सभी समझ चुके थे, यहाँ भी कोई घुस आया है.. इस से पहल क सभी एक जगा जमा हो जाएँ और मुझे भून कर रख दें.. मैं तेज़ी अंदर अंदर की तरफ बढ़ा.. नाईट विज़न गूगल मैंने लगा लिए थे.. अंदर लाइट्स को तोड़ कर अँधेरा करते हुए, अपने राते में आने वाले हर एक गुंडे की माँ को छोड़ने लगा...
मैं ये सबब बहुत hi तेज़ी में कर रहा था.. हर बेस पर बारूद का ढेर लगा हुआ था, और मुझे वहां तक्क पोहंच कर उसी बारूद को धमाके से उड़ाना था..
जितना फ़ास्ट में था.. और अँधेरा मेरे लिए मददगार बना हुआ था. मुझे मेरे मक़सद में ज़यादा परेहनी नहीं... साले स्टुपिड गुंडे अँधेरे की वजा से और अपने मरने वाले साथियों को देख कर और भी डर गए और अपनी गन्स से अपने साथियों को अँधेरे में मारने लगे... पूरा बेस hi गोलियों की आवाज़ से गूंजने लगा था.
अगले 1 घंटे में मैंने इस तरफ के दोनों hi अड्डे भी उड़ा दिए थे.. पुरे इलाके में हां हां कार मची हुई थी, किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था.. ये सबब एक इंसान hi कर रहा है, या इस इलाके में कोई बाला नाज़िल हो गई है.. एक अकेला आदमी ये सबब कैसे कर सकता है.. हर तरफ चीखो पुकार मच चुकी थी.. लोग सड़कों पर आ गए थे.. बहुत से गुंडे इस खेल में ख़तम हो चुके थे..
सबब hi हैरान थे मैं उनकी नज़रों में आने क बाद फिरसे कहाँ ग़ायब हो जाता है.. अब्ब तक्क 30+ गुंडे मेरी गोलियों का निशाना बन्न चुके थे.. धमाकों से कितने मरे थे, मैं नहीं जानता था.. पारर अब्ब महेंद्र गैंग 70% से ज़यादा ख़तम हो चूका था.
उसके 3 बड़े अड्डे ख़तम हो चुके थे.. अनगिनत गुंडे मारे जा चुके थे..
मेहन्द्र गैंग क लिए ये बहुत बड़ा लोस्स था..
बाकी के गुंडे अपने बच रहे बेस की सुरक्षा में लगे होंगे.. वो इस एरिया की एक अलग hi साइड में था.. और मैं अभी उस तरफ जा कर उस अड्डे को तबाह नहीं कर सकता था... वाहन तक्क पोहचने में जितना टाइम लगने वाला था.. तब्ब तक्क सबब hi वहां के एक एक चप्पे को अपने अंडर में ले लेने वाले थे...
मैं भी अब्ब तक्क बहुत थक चूका था.. बार बार पाइपलाइन में घुसने की वजा से और झुक कर चलने की वजा से कमर का कबाड़ा होने लगा था.. पाइपलाइन का नक्शा मैं बहुत अच्छे से समझ चूका था.. कही भी आने जाने में मुझे ज़यादा प्रॉब्लम नहीं होने वाली थी..
मैं एक बार फिरसे पिनेलिने के ज़रिये हॉस्पिटल की तरफ बढ़ने लगा..
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वीरेंदर सिंह वेंटीलेटर पर अपनी ज़िन्दगी की आखरी साँसे ले रहा था.. उसके फटे हुए सीने को तो बंद कर दिया गया था.. पारर खून का रिसना बंद नहीं हुआ था.. और एक साइड का लंग्स स्नाइपर गन की खतरनाक बुलेट से पूरा hi फहत गया था..
ऐसी हालत में डॉक्टर वीरेंदर के लिए क्या कर सकते थे.. महेंद्र सिंह ने कभी सोचा भी नहीं होगा क उसका भाई कभी उससे दूर भी जा सकता है.. वो भी इतनी अचानक.. अभी उसने दुन्या क रंग देखे hi कहाँ थे..
साले को कौन समझाए को जिस तरह से वो सबब दुन्या क रंग देखने में लगे हुए हाँ. उस तरह से दुन्या क रंग दीखते तो बहुत अच्छे से हाँ.. पर देखने की उम्र बहुत hi कम् होती है..
महेंद्र सिंह अपने भाई क ग़म में था, चुटिया भूल hi गया था, क जिस धंदे में वो है, वहां तो उसकी आत्मा किसी भी पल उसके शरीर का साथ छोड़ कर जा सकती है..
कौन बताये महेंद्र सिंह को उसके साथ साथ अलोक गैंग के ख़तम होने का समय आ गया है.. जितना राज करना था, उन सभी ने कर लिया था, तीनो गैंग की जगा एक hi गैंग अब्ब दिल्ली पर राज करेगी, और वो होगी विज्जू की गैंग..
बोले तो स की गैंग..... बहुत लूट लिया इन कुत्तो ने दिल्ली क मासूमो को..
अब्ब से स का राज चलेगा. दिल्ली में अब्ब आम जनता चैन की नींद सोया करेगी.. हर लड़की, वो आम हो या ख़ास, खुद की इज़्ज़त को सेफ रखते हुए अपने सारे खवाब पुरे कर पाएगी..
महेंद्र सिंह साइड में बैठा अपने भाई को देख रहा था. मेहन्द्र सिंह बहुत दुखी था अपनी भाई की इस हालत को देख के ... महेंद्र सिंध एक चेयर पर बैठा था, वो अचानक से खड़ा हुआ ... और भागता हुआ रूम से बहार निकल गया.
महेंद्र:- दांय, ये धमकाआआआ.??
हॉस्पिटल में भी सबब होने वाले धमाके से हिल गए थे, धमाके की आवाज़ थी hi बड़ी भयंकर...
दांय:- मैं अभी पता करता hon.............dany जाने लगा....
महेंद्र:- दांय, अनूप कहाँ है..
दांय:- वो निचे है, और वही से hi सबब आदमियों से राब्ता रखे हुए है..
महेंद्र:- दांय जल्दी से पता करो, जहाँ तक मैं समझ रहा हों, ये बी रात वाले काण्ड जैसा hi है... पता नहीं कौन हरामज़ादा ये सबब कर रहा है, तुम इस सबब का पता लगाओ, और मुझे साड़ी रिपोर्ट हो..
अगले डेढ़ घंटे में महेंद्र सिंह क साथ साथ दांय और अनूप भी अपना सर्र पकड़ कर एक जगा बैठे हुए थे.. उनके तीन बड़े अड्डे ख़तम हो चुके थे, और उन्हें तबाह करने वाला अभी तक्क हाथ नहीं आया था.. तीनो hi जान चुकी थे, ये सबब एक hi इंसान कर रहा है... तीनो क चेहरे ग़ुस्से से भरी हुए थे .. सालों की म्हणत किसी ने बर्बाद कर दी थी..
तीनो हैरान भी बहुत थे. क एक आदमी इतना सबब कुछ कैसे कर सकता है.
इनको कौन बताये........ साला जब्ब एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना सकता है, तो
ओने मन आर्मी का टाइटल जीनते वाला .. अकेला विज्जू क्या कुछ नहीं कर सकता...
महेंद्र:- (शॉकिंग face)dany वो अकेला hi सबब करता फिर रहा है.. अकेला आदमी hi हमारे गैंग की धज्जियां उड़ने में लगा हुआ है... साला, वो है कौन.?? और हमे क्यों बर्बाद करने पर तुला हुआ है... वो आता है और एक अड्डे को धमकाए से उड़ा कर कही ग़ायब हो जाता hai..fir दूसरा अड्डे को धमाके से उडाता hai..fir ग़ायब हो जाता है... महेंद्र जितना शॉकेड था, उतना hi हैरान भी था...
दांय जो बहुत देर से खामोश tha..mahendra की बात सुनी तो
दांय:- महेंद्र ीरर्र कही वो पुराणी बंद पड़ी हुई पिपलिनेस में तो नहीं ट्रेवल कर रहा..
अनूप:- ऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह.. शीट्ट्ट्ट..... साला पहले ये सबब क्यों नहीं दमाग में आया.... हम भी सबब चूतिये hi हाँ.. पहले याद आ जाता तो अब्ब तब्ब उसे मार न चुके होते... इतना नुकसान तो नहीं होता... बहुत पहले hi उसकी माँ को छोड़ लेते..
महेंद्र:- वही होगा, कोई और जगा ऐसी है hi नै.. जहाँ वो छुप सके.. अनूप तुम उन बंद पड़ी पिपलिनेस को चेक करवाओ.. और अगर वो उन्ही पिपीलीने में कही दिखे.. तो उन्हें पाइपलाइन को hi उसकी कबर बना दो.... दांय तुम 4तह अड्डे पर सिक्योरिटी बढ़ा दो.. और वह की पिपलिनेस को सील करवा दो...
दोनों महेंद्र को okay बोल कर निकल लिए.. और महेंद्र अपने कोट की जेब से सिगार निकल कर उसे आग दिखने लगा....
24 हॉर्स में hi महेंद्र सिंह की माँ चुद गई थी, उसकी आधी से ज़यादा गैंग का नामो निशान मिट चूका था... महेंद्र सिंह को किसी पल चैन नहीं मिल रहा था... भाई पहले से hi म्ररने वाला था.. और अब्ब उसका गैंग मिटने वाला था.. वीरेंदर की तरह से उसकी गैंग की भी आखरी साँसे चल रही थीं..
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मैं पिपलिनेस के अंदर रहते हुए तेज़ी से हॉस्पिटल की और बढ़ रहा था..
मुझे चलते हुए 15 मिंट हो चुके थे, मेरे हिसाब से मुझे हॉस्पिटल तक पोहचने में 10 मिंट और लगने वाले थे...
मुझे ऊपर ज़मीन पारर धमक सी महसूस होने लगी.. मैंने ऊपर देखा तो मुझसे कुछ hi आगे एक मैनहोल थे. और उसी मंडल क ढक्कन क पास कुछ लोग मौजूद थे..
मई समझ गया क अब्ब महेंद्र गैंग ने समझ लिया है, मैं पिलेलीनेस के रास्ते आ जा रहा हों.. मैं तेज़ी से आगे बढ़ने लगा.. जब मैं मैनहोल से कुछ hi दूर गया था, तो मैनहोल का ढक्कन खोल दिया गया.. मुझसे 20 फ़ीट की दूरी पर एक मोड़ था और मुझे उस मोड़ तक पोहंचना था और मुझे किसी की नज़रो में भी नहीं आना था...
मैं भागने laga..abhi मोड़ कुछ फ़ीट क फासले पर hi था, क
आवाज़:- चीखता हुआ..... वोओओओओओओओओ rahaaaaaaaaaaaaaaaaaaa.. वोओओओ भाएअगगग रहा haiiiiiiiiii...... मैंने पीछे मुद कर देखा तो एक आदमी अपना सर्र निचे किया हुए अंदर नज़र दौड़ा रहा था.. मुझे उस पर बहुत ग़ुस्सा आया मैंने फ़ौरन hi पिस्तौल उसके सर्र की तरफ कर किया... गोली चली... और वो निचे गिर गया..
दोबारा चीखने से पहले hi वो मर्डर चूका था..
अब्ब मेरे लिए पिपीलिनेस से बहार निकलना बहुत ज़रूररी हो गया था.. मैं तेज़ी से भागने लगा..
7 मींटूट्स hi हुए थे क मुझे पिपलिनेस में बदबू आना शुरू हो गई.. मैंने अपना चेहरा ढाका हुआ था, पारर वो बहुत तेज़ स्मेल thi.saans क साथ अंदर घुसते hi दमाग ख़राब करने लगी... मैं सोचने लगा क ये स्मेल तो किसी गटर के खुलने से आती है..
जैसे hi ये बात मेरी समझ में आई.. तो मेरे तोते hi उड़द गए.. साले पिपलिनेस को hi मेरे लिए गंदे badbu-daar पानी की कबर बना देने वाले थे..
अब्ब मेरे लिए जल्द से जल्द से इस दलदल से निकल जाना ज़रूरी हो गया था.. कही वो सबब मिल कर पुरे इलाके क मैनहोल के ढक्कन अपने कब्ज़े में न ले लें... और मेरे लिए कही से भी बहार निकलने का रास्ता न रहे... अगर ऐसा हुआ तो मैं मरने में देर नहीं लगेगी.. साफ़ पानी में भी कुछ देर सर्वाइव किया जा सकता है.. पारर गटर क गंदे पानी में तो मैं चाँद मिंटो में hi मर्डर जाता..
मैं उस तरफ धयान देने लगा. जिस तरफ से बदबू आ रही थी.. मुझसे कुछ hi दूर एक एक और मोड़ था.. और मैं तेज़ी से वहां पोहंचा तो मुझे लेफ्ट साइड से गुत्तर का पानी आता हुआ दिखा... मैंने राइट साइड में देखा तो मुझे वह कुछ नहीं दिखा.. मतलब अभी उस साइड से पानी नहीं आया था... मुझे अपने पीछे जगा जगा से मैनहोल के ढक्कन उठाये जाने की आवाज़ें सुनाई दे रही थी.. ज़रूर कुछ लोग अंदर घुस कर मुझे ढूंढ भी रहे होंगे..
मैंने पीछे मुद कर देखा तो मुझे कोई दिखा तो नहीं. पर आवाज़ से पता चल रहा था. क कुछ लोग पिपलिनेस में दाखिल हो चुके हाँ..
और अब्ब मेरे लिए गुत्तर का पानी और गलियों का सवागत तैयार था.. अगर जल्द hi कही से न निकला तो मरना कन्फर्म था.. वो मेरी लोकेशन खो चुके थे.
कोई नहीं जानता था, मैं इन पिपलिनेस में किस तरफ हों..
पानी की सतह अभी बहुत कम् थी.. धीरे धीरे करके पानी का लेवल बढ़ रहा था.. मैंने साफ़ रास्ता छोड़ कर जिस तरफ से पानी आ रहा था.. उस तरफ बढ़ने लगा..
गन्दा पानी अभी मेरे पैरो में hi था .. गुंडों क इस मोड़ तक्क आने से पहले hi मुझे किसी और मोड़ तक पोहंचना था.. एक मोड़ मुड़ते hi मैं सभी की नज़रों से ओझल हो सकता था.. इस तरफ अब पानी आ गया था.. तो कोई इस तरफ अब्ब आने से रहा..
मैं उसी गंदे पानी में तेज़ी से आगे भागने लगा.. अब्ब मुझे कैसे भी करके बहार निकलना था, और बहार रहते हुए जैसे भी लड़ना पड़े.. मैं लड़ सकता था.. पिपलिनेस क अंदर मैं ज़िंदा दफ़न नहीं होना चाहता था.. अब्ब किसी मैनहोल क ढक्कन क बहार गुंडे भी मेरे सवागत क लिए मजूद हाँ. तो खुद को उनके कब्ज़े में दे दूंगा.. पारर अब्ब इन पिपलिनेस से बहार निकलना ज़रूरी हो गया था.
किसी भी लम्हे पानी का बहाओ बहुत तेज़ हो सकता था, और मेरे लिए मैनहोल ढूंढा hi मुश्किल हो जाता...
जैसे जैसे मैं आगे बढ़ रहा था, पानी की ऊंचाई भी बढ़ती जा रही थी.. मतलब पानी छोड़े अभी कुछ hi देर हुई थी.. और अब्ब कुछ hi देर में गुत्तरों का पानी किसी सैलाबी रेल की मानिंद पिपलिनेस में सफर करने वाला था...
आगे एक और मोड़ आया तो मैं भाग कर उस मोड़ में दाखिल हो गया.. अब्ब मैं गुंडों से तो बच hi गया था.. पर गटर के पानी से बचना आसान नहीं था..
टोर्च की रौशनी भी मुझे फांस्वा सकती thi...mujhe जल्द hi कोई मैनहोल ढूंढ कर टोर्च को बंद कर देना था...
टोर्च की रौशनी में मुझे कुछ दूर स्टैर्स दिखें. जिसका मतलब था, क वहां मैनहोल है.. मैं तेज़ी से वहां की और भगा.. जैसे hi मैं उस मैनहोल क ढक्कन क पास पोहंचा.. तो मुझे मैनहोल क ढक्कन को उठाये जाने की आवाज़ सुनाई देने लगी......
आगे कुआं पीछे खाई... कभी कभी इंसान को किसी सेंटेंस का रियल में भी सामना करना पड़ जाता है.... इस वक़्त तो सच में hi..
"आगे कुआं पीछे खाई".... वाला हिसाब था...
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