Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 19 - SexBaba
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Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)

थैंक्स..!!

गुरनाम क लिए मैं लगा कर काम करना ज़रूरी था.. वर्ण हर दुम्म hi अपनी फॅमिली को लेके चिंता में रहता.. श्वेता ने पूजा के दिल की मुराद पूरी कर hi दी.. वो भी बिन जाने, पूजा खुश तो फिर होगी hi.... मीठा सुकून से hi खाना चाहिए.. पटेल खुद महेंद्र से खार खता है. जितना हो सका उसने महेंद्र की बर्बादी में अपना हिस्सा दाल दिया..... हर्र अड्डे पर एक्सप्लोसिव का स्टॉक तो होगा hi.. जैसे धने हाँ उनके.. बैसा hi सबब वहां मिलेगा..
 
अपडेट ::: 85

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भले hi मैं अड्डे से काफी दूर आ गया था. पारर जैसा भयंकर ब्लास्ट हुआ था, खुद को सेफ रखने क लिए मुझे निचे गिरना hi था. कही से भी कोई चीज़ आ कर मुझसे टकरा सकती थी. ब्लास्ट क प्रेशर से चीज़ें दूर दूर तक उड़द क जाती हाँ.. और फिर किसी से भी टकरा उसे चीरते हुए गुज़र जाती हाँ.. मैं खुद को सेफ रखने क लिए निचे गिर पड़ा था...

बेस के अंदर सच में hi बारूद का स्टॉक था, जो ब्लास्ट हो गया था.. अब्ब हर तरफ से गुंडे भागे भागे इस रतफ आएंगे.. फिर पुरे एरिया को hi अपने गैर में ले लेंगे..

मई उठ खड़ा हुआ, फिर से भागना शुरू कर दिए.. पिस्तौल एक बार फिरसे मेरे हाथ में था.. सामने आने वाले को मैं मौका फिये बिना hi मार देने वाला था.

धमाके से एक बार तो सबब hi हिल गए होंगे..

फ़ौरन hi नाईट क्लब के ऊपर से एक बड़ी सर्च लाइट ों हुई.. और पुरे एरिया क गिर्द चक्कर लगाने लगी..

अब्ब सब का hi फोकस ब्लास्ट वाली साइड में हो गया था, सबब hi भागम भाग इधर hi आ रहे थे.. और मुझे सभी की नज़रो से बचते हुए आगे बढ़ना था..

अब्ब मुझे किसी दूसरे अड्डे पर जाना था.. मैं जल्द से जल्द हर तरफ अफरा तफरी पहला देना चाहता था... महेंद्र सिंह गैंग ने जितना लोगों को परेशां किया था, मैं भी उतना hi इन हरामियों की माँ बेहेन एक कर देना चेहरा था..

अब्ब तक तो मैंने खुद को दूसरों की नाज़ों से बचाया हुआ था.. पारर जल्द hi अब्ब मई दुसरो की नज़रो में आने वाला था..

हॉस्पिटल; 500 मीटर दूर था, तो मैं वहां तो जाने से रहा.. इसलिए मैंने 1 अड्डे की तरफ जाना शुरू कर दिया, जो यहाँ 200 मीटर की दूरी पर था..

बाकी से 2 अड्डे हॉस्पिटल की दूसरी साइड में था.. अब्ब सब का hi धयान इस तरफ हो चूका था, एरिया की सिक्योरिटी और भी ज़यादा टाइट होने वाली थी..

अब्ब मुझे एरिया में पहेली यही सेक्युर्टी की आँखों में धुल जहां कर एक और अड्डे को तबाह करके हॉस्पिटल या दूसरी तरफ मौजूद अड्डों पर जाना था..

मैं तेज़ी से लोगों की नज़रों से बचता हुआ आगे बढ़ने लगे... पर अब्ब लोगों की नज़रो से बचना आसान अनहि रहा था..

दो गलियों में से गुजरने क बाद जैसे hi मैं तेस्री गली में मुड़ने लगा. तो किसी घर की छत पार्स एक बाँदा मुझे देख कर चीखना लगा..

वो मेरी तरफ इशारा करता हुआ किसी से कहने लगा..... " वोओओओ देखहूऊओ"

आदमी:- usne..apna..chehra..chhupa..rakha..hai..wo..chhup..kar..bhaag..raha..hai.

उसकी आवाज़ इतनी ऊंची थी, क बहुत से लोग जो छतो पर खड़े थे, वो सबब hi मेरी तरफ देखने लगे..

फिर तो जैसे शोर hi मचने laga..bhago..pakdo..jaane न paaye..goli मर दो इसे.. तलवार ले आओ... मेरा पिस्तौल कहाँ है..

मैं सबब की नज़रो में आ गया tha...main पहचान लिया गया था.. अब्ब यहाँ रुकना खतरे से खाली नहीं था... मई पटेल क पास भी नहीं जा सकता था.. अब्ब मुझे किसी पाइपलाइन का सहारा लेना पड़ेगा.. मैंने फुल रफ़्तार से भागना शुरू कर दिया.. कुछ लोग मेरे पीछे भागने अलगे.. तो मैंने मुद के एक दो को शूट कर दिया.. पीर तो जैसे सबब hi पागलों की तरह से एक दूसरे से टकराने लगे.. मुझे पकड़ने चले थे.. साले खाली मेरा पीछा करने लगे हाँ...

अब्ब लोगों को भी समझ में आए चूका था, जो ब्लास्ट हुआ है, उसमे मेरा hi हाथ hai..jald hi ये खबर पुरे एरिया में फेल जानी थी.. और मुझे पागल कुत्ते की तरह ढूंढ़ने लगेंगे...

मैं भागता हुआ एक प्लाट में पोंछा और वहां बने हुए मैनहोल का ढकन खोल कर साइड में कर दिया... मैंने पीछे मुद कर देखा तो पीछे कोई नहीं था, और न किसी ने मुझे देखा था... मैं ढकन खोल कर देख रहा था क अंदर से गैस तो नहीं निकल रही.. लेकिन अंदर से किसी किसम की कोई गैस नहीं निकल रही थी..

मैं मैनहोल में उतर गया, मैनहोल का ढक्कन फिरसे एडजस्ट किया.

मैनहोल की गहराई मेरे क़द से कुछ hi उअप्र तक थी.... निचे उतारते hi मैंने बैग से टोर्च निकली, उसे ों करके अंदर का व्यू देखने लगा.. 30 फ़ीट आगे जा क्र ये रास्ता एक 'टी' की शकल अख्तियार कर रहा था.. एक रास्ता लेफ्ट तो एक राइट में जा रहा था..

मैंने मैनहोल क अंदर का माहौल देखना शुरू कर दिया, कही कोई सांप hi न मिल जाए मुझे, ऐसी जगा पर अक्सर ऐसी hi चीज़ें देखने को मिलती हाँ..

यहाँ घुटन बहुत ज़यादा थी, तो मैं तेज़ी से आगे बढ़ें लगा..

30 फ़ीट पर जाने क बाद मैं रुक गया और दोनों साइड में hi देखने लगा.. ये दोनों रास्ते कहाँ तक्क जाते हाँ.. मैं खड़े हो कर नक़्शे की लोकेशन को समझने लगा.. मैं इस बात पर ग़ौर कर रहा था, क दोनों रास्ते कहाँ जाते होंगे..

कुछ देर में मैं सबब समझ गया.. एक रासरा हॉस्पिटल की तरफ जा रहा था.. तो

दोसरा रास्ता इस एरिया से बहार निकल रहा था. या आगे जा कर कही और घूम कर जा रहा था...

मैं हॉस्पिटल वाली साइड में तेज़ी से बढ़ने लगा.. जैसे जैसे टाइम गुज़र रहा था, अंदर घुटन बढ़ती जा रही थी... पाइपलाइन मेरे सर्र क बराबर थी, फिर भी मैं किसी हद तक झुक कर तेज़ तेज़ भाग रहा था, मेरी नज़र ऊपर पिलेलीने की छत पर भी थी, कही कोई चीज़ ऊपर न अटकी हो, और मेरी लपवाराई से वो मेरे सर्र में hi न कही घुस जाए.. और किसी को कुछ पता hi न चले क मैं कहाँ जा के मर्डर गया हों.. मेरी तो लाश भी किसी को सालों तक्क नहीं मिलने वाली थी. और जब्ब मिलती तो किसी को पता भी नहीं चलता था, ये लाश मेरी है या किसी और की..

मेरे होंटो पर मुस्कान आ गई थी, जब्ब ऐसे विचार मेरे मैं में आये तो..

इंसान कही भी हो उसे मौत लम्हा लम्हा याद आती hi रहती है, और सबब से ज़यादा उसे अपने पीछे रह जाने वलु की बड़ी याद आने लगती है..

पाइपलाइन में भागते हुए मुझे कई मोड़ भी मिले थे.. पर मई कही नहीं रुका..

15 मिंट बाद एक बार फिरसे 2 मोड़ आये तो मैं रुक गया..

मैं वही खड़ा रह कर फिरसे जज करने लगा क मैं इस वक़्त कहा हो सकता हों.. कुछ देर तक मई ग़ौर करता रहा जब्ब सही से समझ नहीं आया तो मैं मैनहोल का ढकन खोल कर बहार देखने का सोचा..

मैं ऊपर देखते हु आगे बढ़ने लगा.. कुछ दूर जाते hi मुझे एक जाग स्तैर दिखी, उसके ऊपर hi मैनहोल का ढक्कन था.. मैं उस स्तैर पर चढ़ कर ढक्कन को हटाने लगा... मई ये भी बहुत धयान से कर रहा था, बाद में पता चले क ऊपर hi मेरे सवागत क लिए कोई मौजूद हो..

मैंने थोड़ा सा ढक्कन सरका कर बहार झाँका.. ये एक खाली प्लाट था.. यहाँ पर रौशनी कम् थी .. आस पास कुछ कचरा पड़ा हुआ था..

मैं बहार आया और ढक्कन को फिरसे वापिस लगा दिया.. कचरे से गुज़र कर मैं कुछ फासले पर पोहंचा.. अपने चेहरे पार्स कपडा हटाया और गहरी गहरी साँसे लगा.. फ्रेश हवा में आ कर जान में जान सी आ गई थी.. वर्ण इतने टाइम से मैं एक घुटन वाले माहौल में था...

कुछ देर मैं ताज़ा हवा में सांस लेता रहा.. साथ hi मैं चरों तरफ घूम फिर कर भी देखने लगा.. इस तरफ ज़यादा बिल्डिंग्स नहीं थीं.. 150 मीटर क एरिया में 4 hi स्माल कोठियां थीं.

मेरे पीछे 150 मीटर क फासले पर हॉस्पिटल था.. मैंने हॉस्पिटल जाने का प्रोग्राम कैंसिल करते हुए इस साइड में दोनों अड्डों को तबाह करने का सोच लिया.

नक़्शे के हिसाब से मैं समझने लगा क इस साइड में महेंद्र गैंग क अड्डे कहाँ हो सकते हाँ.. जब्ब मुझे समझ आया तो मैं उस तरफ तेज़ कदमो से चने लगा..

ये तो मैं समझ hi गया था, एक अड्डा ब्लास्ट होने की वजा से गुंडों और आम जनता का धयान उस तरफ ज़यादा होगा.. इस तरफ कम् hi किसी का ध्यान जाएगा.. रात वाले हमले में और अब्ब के हमले में सबब hi ये समझ चुके थे क ये सबब एक hi इंसान कर रहा है.. और वो मुझे वही कही ढूंढ रहे होंगे..

ज़यादा शक उन्हें महेंद्र सिंह से खार रखने वाले लोगों पर होगा.. और वो उन्ही घरु में घुस कर मुझे ढूंढ रहे होंगे...

मैं अपने रियल फेस में नहीं था. यहाँ मैं अपने चेहरे को नहीं छुपा सकता tha..main तेज़ चल रहा था, भागने से किसी को भी शक हो सकता था..

कुछ मिनट्स बाद मैं एक बेस पर पांच गया... यहाँ भी hi-tech सिक्योरिटी hi थी... मेरे पास प्लानिंग करने क लिए टाइम नहीं था.. बेस के अंदर घुसना आसान नहीं था.. पर मेरे पास बेस्ट ऑप्शन मौजूद था.. मई अपने रास्ते में आने वाली हर एक लाइट को गोली से उड़ाता हुआ अंदर घुसने लगा..

अंदर हर तरफ शोर मचने लगा. सभी समझ चुके थे, यहाँ भी कोई घुस आया है.. इस से पहल क सभी एक जगा जमा हो जाएँ और मुझे भून कर रख दें.. मैं तेज़ी अंदर अंदर की तरफ बढ़ा.. नाईट विज़न गूगल मैंने लगा लिए थे.. अंदर लाइट्स को तोड़ कर अँधेरा करते हुए, अपने राते में आने वाले हर एक गुंडे की माँ को छोड़ने लगा...

मैं ये सबब बहुत hi तेज़ी में कर रहा था.. हर बेस पर बारूद का ढेर लगा हुआ था, और मुझे वहां तक्क पोहंच कर उसी बारूद को धमाके से उड़ाना था..

जितना फ़ास्ट में था.. और अँधेरा मेरे लिए मददगार बना हुआ था. मुझे मेरे मक़सद में ज़यादा परेहनी नहीं... साले स्टुपिड गुंडे अँधेरे की वजा से और अपने मरने वाले साथियों को देख कर और भी डर गए और अपनी गन्स से अपने साथियों को अँधेरे में मारने लगे... पूरा बेस hi गोलियों की आवाज़ से गूंजने लगा था.

अगले 1 घंटे में मैंने इस तरफ के दोनों hi अड्डे भी उड़ा दिए थे.. पुरे इलाके में हां हां कार मची हुई थी, किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था.. ये सबब एक इंसान hi कर रहा है, या इस इलाके में कोई बाला नाज़िल हो गई है.. एक अकेला आदमी ये सबब कैसे कर सकता है.. हर तरफ चीखो पुकार मच चुकी थी.. लोग सड़कों पर आ गए थे.. बहुत से गुंडे इस खेल में ख़तम हो चुके थे..

सबब hi हैरान थे मैं उनकी नज़रों में आने क बाद फिरसे कहाँ ग़ायब हो जाता है.. अब्ब तक्क 30+ गुंडे मेरी गोलियों का निशाना बन्न चुके थे.. धमाकों से कितने मरे थे, मैं नहीं जानता था.. पारर अब्ब महेंद्र गैंग 70% से ज़यादा ख़तम हो चूका था.

उसके 3 बड़े अड्डे ख़तम हो चुके थे.. अनगिनत गुंडे मारे जा चुके थे..

मेहन्द्र गैंग क लिए ये बहुत बड़ा लोस्स था..

बाकी के गुंडे अपने बच रहे बेस की सुरक्षा में लगे होंगे.. वो इस एरिया की एक अलग hi साइड में था.. और मैं अभी उस तरफ जा कर उस अड्डे को तबाह नहीं कर सकता था... वाहन तक्क पोहचने में जितना टाइम लगने वाला था.. तब्ब तक्क सबब hi वहां के एक एक चप्पे को अपने अंडर में ले लेने वाले थे...

मैं भी अब्ब तक्क बहुत थक चूका था.. बार बार पाइपलाइन में घुसने की वजा से और झुक कर चलने की वजा से कमर का कबाड़ा होने लगा था.. पाइपलाइन का नक्शा मैं बहुत अच्छे से समझ चूका था.. कही भी आने जाने में मुझे ज़यादा प्रॉब्लम नहीं होने वाली थी..

मैं एक बार फिरसे पिनेलिने के ज़रिये हॉस्पिटल की तरफ बढ़ने लगा..




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वीरेंदर सिंह वेंटीलेटर पर अपनी ज़िन्दगी की आखरी साँसे ले रहा था.. उसके फटे हुए सीने को तो बंद कर दिया गया था.. पारर खून का रिसना बंद नहीं हुआ था.. और एक साइड का लंग्स स्नाइपर गन की खतरनाक बुलेट से पूरा hi फहत गया था..

ऐसी हालत में डॉक्टर वीरेंदर के लिए क्या कर सकते थे.. महेंद्र सिंह ने कभी सोचा भी नहीं होगा क उसका भाई कभी उससे दूर भी जा सकता है.. वो भी इतनी अचानक.. अभी उसने दुन्या क रंग देखे hi कहाँ थे..

साले को कौन समझाए को जिस तरह से वो सबब दुन्या क रंग देखने में लगे हुए हाँ. उस तरह से दुन्या क रंग दीखते तो बहुत अच्छे से हाँ.. पर देखने की उम्र बहुत hi कम् होती है..

महेंद्र सिंह अपने भाई क ग़म में था, चुटिया भूल hi गया था, क जिस धंदे में वो है, वहां तो उसकी आत्मा किसी भी पल उसके शरीर का साथ छोड़ कर जा सकती है..

कौन बताये महेंद्र सिंह को उसके साथ साथ अलोक गैंग के ख़तम होने का समय आ गया है.. जितना राज करना था, उन सभी ने कर लिया था, तीनो गैंग की जगा एक hi गैंग अब्ब दिल्ली पर राज करेगी, और वो होगी विज्जू की गैंग..

बोले तो स की गैंग..... बहुत लूट लिया इन कुत्तो ने दिल्ली क मासूमो को..

अब्ब से स का राज चलेगा. दिल्ली में अब्ब आम जनता चैन की नींद सोया करेगी.. हर लड़की, वो आम हो या ख़ास, खुद की इज़्ज़त को सेफ रखते हुए अपने सारे खवाब पुरे कर पाएगी..

महेंद्र सिंह साइड में बैठा अपने भाई को देख रहा था. मेहन्द्र सिंह बहुत दुखी था अपनी भाई की इस हालत को देख के ... महेंद्र सिंध एक चेयर पर बैठा था, वो अचानक से खड़ा हुआ ... और भागता हुआ रूम से बहार निकल गया.





महेंद्र:- दांय, ये धमकाआआआ.??



हॉस्पिटल में भी सबब होने वाले धमाके से हिल गए थे, धमाके की आवाज़ थी hi बड़ी भयंकर...

दांय:- मैं अभी पता करता hon.............dany जाने लगा....

महेंद्र:- दांय, अनूप कहाँ है..

दांय:- वो निचे है, और वही से hi सबब आदमियों से राब्ता रखे हुए है..

महेंद्र:- दांय जल्दी से पता करो, जहाँ तक मैं समझ रहा हों, ये बी रात वाले काण्ड जैसा hi है... पता नहीं कौन हरामज़ादा ये सबब कर रहा है, तुम इस सबब का पता लगाओ, और मुझे साड़ी रिपोर्ट हो..

अगले डेढ़ घंटे में महेंद्र सिंह क साथ साथ दांय और अनूप भी अपना सर्र पकड़ कर एक जगा बैठे हुए थे.. उनके तीन बड़े अड्डे ख़तम हो चुके थे, और उन्हें तबाह करने वाला अभी तक्क हाथ नहीं आया था.. तीनो hi जान चुकी थे, ये सबब एक hi इंसान कर रहा है... तीनो क चेहरे ग़ुस्से से भरी हुए थे .. सालों की म्हणत किसी ने बर्बाद कर दी थी..

तीनो हैरान भी बहुत थे. क एक आदमी इतना सबब कुछ कैसे कर सकता है.

इनको कौन बताये........ साला जब्ब एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना सकता है, तो

ओने मन आर्मी का टाइटल जीनते वाला .. अकेला विज्जू क्या कुछ नहीं कर सकता...

महेंद्र:- (शॉकिंग face)dany वो अकेला hi सबब करता फिर रहा है.. अकेला आदमी hi हमारे गैंग की धज्जियां उड़ने में लगा हुआ है... साला, वो है कौन.?? और हमे क्यों बर्बाद करने पर तुला हुआ है... वो आता है और एक अड्डे को धमकाए से उड़ा कर कही ग़ायब हो जाता hai..fir दूसरा अड्डे को धमाके से उडाता hai..fir ग़ायब हो जाता है... महेंद्र जितना शॉकेड था, उतना hi हैरान भी था...

दांय जो बहुत देर से खामोश tha..mahendra की बात सुनी तो

दांय:- महेंद्र ीरर्र कही वो पुराणी बंद पड़ी हुई पिपलिनेस में तो नहीं ट्रेवल कर रहा..

अनूप:- ऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह.. शीट्ट्ट्ट..... साला पहले ये सबब क्यों नहीं दमाग में आया.... हम भी सबब चूतिये hi हाँ.. पहले याद आ जाता तो अब्ब तब्ब उसे मार न चुके होते... इतना नुकसान तो नहीं होता... बहुत पहले hi उसकी माँ को छोड़ लेते..

महेंद्र:- वही होगा, कोई और जगा ऐसी है hi नै.. जहाँ वो छुप सके.. अनूप तुम उन बंद पड़ी पिपलिनेस को चेक करवाओ.. और अगर वो उन्ही पिपीलीने में कही दिखे.. तो उन्हें पाइपलाइन को hi उसकी कबर बना दो.... दांय तुम 4तह अड्डे पर सिक्योरिटी बढ़ा दो.. और वह की पिपलिनेस को सील करवा दो...

दोनों महेंद्र को okay बोल कर निकल लिए.. और महेंद्र अपने कोट की जेब से सिगार निकल कर उसे आग दिखने लगा....

24 हॉर्स में hi महेंद्र सिंह की माँ चुद गई थी, उसकी आधी से ज़यादा गैंग का नामो निशान मिट चूका था... महेंद्र सिंह को किसी पल चैन नहीं मिल रहा था... भाई पहले से hi म्ररने वाला था.. और अब्ब उसका गैंग मिटने वाला था.. वीरेंदर की तरह से उसकी गैंग की भी आखरी साँसे चल रही थीं..




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मैं पिपलिनेस के अंदर रहते हुए तेज़ी से हॉस्पिटल की और बढ़ रहा था..

मुझे चलते हुए 15 मिंट हो चुके थे, मेरे हिसाब से मुझे हॉस्पिटल तक पोहचने में 10 मिंट और लगने वाले थे...

मुझे ऊपर ज़मीन पारर धमक सी महसूस होने लगी.. मैंने ऊपर देखा तो मुझसे कुछ hi आगे एक मैनहोल थे. और उसी मंडल क ढक्कन क पास कुछ लोग मौजूद थे..

मई समझ गया क अब्ब महेंद्र गैंग ने समझ लिया है, मैं पिलेलीनेस के रास्ते आ जा रहा हों.. मैं तेज़ी से आगे बढ़ने लगा.. जब मैं मैनहोल से कुछ hi दूर गया था, तो मैनहोल का ढक्कन खोल दिया गया.. मुझसे 20 फ़ीट की दूरी पर एक मोड़ था और मुझे उस मोड़ तक पोहंचना था और मुझे किसी की नज़रो में भी नहीं आना था...

मैं भागने laga..abhi मोड़ कुछ फ़ीट क फासले पर hi था, क

आवाज़:- चीखता हुआ..... वोओओओओओओओओ rahaaaaaaaaaaaaaaaaaaa.. वोओओओ भाएअगगग रहा haiiiiiiiiii...... मैंने पीछे मुद कर देखा तो एक आदमी अपना सर्र निचे किया हुए अंदर नज़र दौड़ा रहा था.. मुझे उस पर बहुत ग़ुस्सा आया मैंने फ़ौरन hi पिस्तौल उसके सर्र की तरफ कर किया... गोली चली... और वो निचे गिर गया..

दोबारा चीखने से पहले hi वो मर्डर चूका था..

अब्ब मेरे लिए पिपीलिनेस से बहार निकलना बहुत ज़रूररी हो गया था.. मैं तेज़ी से भागने लगा..

7 मींटूट्स hi हुए थे क मुझे पिपलिनेस में बदबू आना शुरू हो गई.. मैंने अपना चेहरा ढाका हुआ था, पारर वो बहुत तेज़ स्मेल thi.saans क साथ अंदर घुसते hi दमाग ख़राब करने लगी... मैं सोचने लगा क ये स्मेल तो किसी गटर के खुलने से आती है..

जैसे hi ये बात मेरी समझ में आई.. तो मेरे तोते hi उड़द गए.. साले पिपलिनेस को hi मेरे लिए गंदे badbu-daar पानी की कबर बना देने वाले थे..

अब्ब मेरे लिए जल्द से जल्द से इस दलदल से निकल जाना ज़रूरी हो गया था.. कही वो सबब मिल कर पुरे इलाके क मैनहोल के ढक्कन अपने कब्ज़े में न ले लें... और मेरे लिए कही से भी बहार निकलने का रास्ता न रहे... अगर ऐसा हुआ तो मैं मरने में देर नहीं लगेगी.. साफ़ पानी में भी कुछ देर सर्वाइव किया जा सकता है.. पारर गटर क गंदे पानी में तो मैं चाँद मिंटो में hi मर्डर जाता..

मैं उस तरफ धयान देने लगा. जिस तरफ से बदबू आ रही थी.. मुझसे कुछ hi दूर एक एक और मोड़ था.. और मैं तेज़ी से वहां पोहंचा तो मुझे लेफ्ट साइड से गुत्तर का पानी आता हुआ दिखा... मैंने राइट साइड में देखा तो मुझे वह कुछ नहीं दिखा.. मतलब अभी उस साइड से पानी नहीं आया था... मुझे अपने पीछे जगा जगा से मैनहोल के ढक्कन उठाये जाने की आवाज़ें सुनाई दे रही थी.. ज़रूर कुछ लोग अंदर घुस कर मुझे ढूंढ भी रहे होंगे..

मैंने पीछे मुद कर देखा तो मुझे कोई दिखा तो नहीं. पर आवाज़ से पता चल रहा था. क कुछ लोग पिपलिनेस में दाखिल हो चुके हाँ..

और अब्ब मेरे लिए गुत्तर का पानी और गलियों का सवागत तैयार था.. अगर जल्द hi कही से न निकला तो मरना कन्फर्म था.. वो मेरी लोकेशन खो चुके थे.

कोई नहीं जानता था, मैं इन पिपलिनेस में किस तरफ हों..

पानी की सतह अभी बहुत कम् थी.. धीरे धीरे करके पानी का लेवल बढ़ रहा था.. मैंने साफ़ रास्ता छोड़ कर जिस तरफ से पानी आ रहा था.. उस तरफ बढ़ने लगा..

गन्दा पानी अभी मेरे पैरो में hi था .. गुंडों क इस मोड़ तक्क आने से पहले hi मुझे किसी और मोड़ तक पोहंचना था.. एक मोड़ मुड़ते hi मैं सभी की नज़रों से ओझल हो सकता था.. इस तरफ अब पानी आ गया था.. तो कोई इस तरफ अब्ब आने से रहा..

मैं उसी गंदे पानी में तेज़ी से आगे भागने लगा.. अब्ब मुझे कैसे भी करके बहार निकलना था, और बहार रहते हुए जैसे भी लड़ना पड़े.. मैं लड़ सकता था.. पिपलिनेस क अंदर मैं ज़िंदा दफ़न नहीं होना चाहता था.. अब्ब किसी मैनहोल क ढक्कन क बहार गुंडे भी मेरे सवागत क लिए मजूद हाँ. तो खुद को उनके कब्ज़े में दे दूंगा.. पारर अब्ब इन पिपलिनेस से बहार निकलना ज़रूरी हो गया था.

किसी भी लम्हे पानी का बहाओ बहुत तेज़ हो सकता था, और मेरे लिए मैनहोल ढूंढा hi मुश्किल हो जाता...

जैसे जैसे मैं आगे बढ़ रहा था, पानी की ऊंचाई भी बढ़ती जा रही थी.. मतलब पानी छोड़े अभी कुछ hi देर हुई थी.. और अब्ब कुछ hi देर में गुत्तरों का पानी किसी सैलाबी रेल की मानिंद पिपलिनेस में सफर करने वाला था...

आगे एक और मोड़ आया तो मैं भाग कर उस मोड़ में दाखिल हो गया.. अब्ब मैं गुंडों से तो बच hi गया था.. पर गटर के पानी से बचना आसान नहीं था..

टोर्च की रौशनी भी मुझे फांस्वा सकती thi...mujhe जल्द hi कोई मैनहोल ढूंढ कर टोर्च को बंद कर देना था...

टोर्च की रौशनी में मुझे कुछ दूर स्टैर्स दिखें. जिसका मतलब था, क वहां मैनहोल है.. मैं तेज़ी से वहां की और भगा.. जैसे hi मैं उस मैनहोल क ढक्कन क पास पोहंचा.. तो मुझे मैनहोल क ढक्कन को उठाये जाने की आवाज़ सुनाई देने लगी......

आगे कुआं पीछे खाई... कभी कभी इंसान को किसी सेंटेंस का रियल में भी सामना करना पड़ जाता है.... इस वक़्त तो सच में hi..




"आगे कुआं पीछे खाई".... वाला हिसाब था...



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अपडेट ::: 86

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आगे कुआँ पीछे खाई.


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जो शेर दिल होते हाँ, उन्हें ऐसी कहावतों की क्या परवा हो सकती थी.. और फिर जब्ब जान पर बन्न आई हो, तो खुद को हर किसम के हालातों का सामना करने क लिए हर दम hi तैयार रखना चाहिए...

मैंने जब्ब से ट्रैंनिंग ली थी. दिन हो या रात मैं हम वक़्त hi हर किसम की सूरत इ हाल क लिए तैयार hi रहता था..

मैनहोल क ढक्कन को हटाए जाने की आवाज़ मुझे सुनाई दी तो मैं वही रुक गया.. यहाँ रहते हुए कोई मुझे नहीं देख सकता था.

हाँ अगर कोई निचे झुक पर पिपलिनेस के अंदर दोनों साइड में देखता तो मैं उसकी नज़रो में आ सकता था.. पारर ये सबब अब्ब इतना आसान भी नहीं रहा था.. पिपलिनेस में पानी छोड़ दिया गया था.. जिसकी वजा से अंदर बदबू बहुत ज़यादा हो गई थी.. पाइपलाइन के अंदर उतर के मुझे देखने क लिए उन्हें उस गन्दी स्मेल को खुद क अंदर भी उतरना पड़ता.. और ये सबब आसान भी नहीं था..

ढक्कन धीरे धीरे करके ऊपर उठा.. फिर अचानक से hi किसी ने उसे पूरा hi साइड में हटा दिया.. पाइपलाइन क अंदर एक दुम्म से रौशनी फेल गई.. किसी क हाथ में एक बड़ी टोर्च थी, जिसकी रौशनी पिपलिनेस क अंदर आ रही थी..

मैंने अपनी टोर्च पहले से hi ऑफ कर चूका था... थोड़ी सी hi रौशनी मुझे फंसा सकती थी.. मैं पाइपलाइन की दीवार क साथ झुक कर खड़ा हो गाय.. और उनके नेक्स्ट रिएक्शन क लिए खुद को टेरर करने लाग...

हाथ में पिस्तौल था, और उसका मैगज़ीन पूरी तरह से भरा हुआ था.. एक झटके में hi मैं कइयों को मार गिराने क लिए तैयार हो गया था...

पिपलिनेस में छोड़ा गया पानी अब्ब तक 6" लेवल पर पोहंच चूका था, और उसकी स्मेल ने मेरी आत्मा तक्क को हिला के हुआ था.. पर मुझे ये सबब सहन तो करना hi था...

ढक्कन के हटाया गया तो अचानक से hi गन्दी स्मेल बहार निकली, जो बहार खड़े हुए गुंडे के दिल ख़राब होने लगे.. उनकी आवाज़ों से जो मैंने हिसाब लगाया.. वो 4 या 5 थे.. मैंने उन्हें फ़ौरन hi मर गिराने का सोच लिया था, वो अंदर घुसने क लिए तैयार होते उससे पहले hi मैं उन्हें मार देना चाहता था.. अभी तो वो बदबू से किसी हद्द तक तंग थे..

बहार खड़े टोर्च को पड़े हुए गुंडे ने टोर्च को साइड में किया.. तो

मैं तेज़ी से स्ट्रिस के पास पोहंचा.. ऊपर देखा तो मुझे एक आदमी मैनहोल के पास hi खड़ा हुआ दिखा वो साइड में मोहन किये हुए थूक रहा था..

मैं जल्दी से स्टैर्स चढ़ने लगा.. ज़यादा ऊँचाई तो थी नहीं.. 7-8 फ़ीट थी.. 4 सेक् में hi मैं ऊपर था, कोई कुछ समझता उससे पहले hi मैंने माहौल क पास खड़े हुए गुंडे को गोली मार दी..

टोर्च वाले गुंडे के पास भी हलकी मशीन गन थी.. जो उसने अपने कंधे में लटके हुई थी.. बाकी दो के हाथो में मशीन गन्स थी.. पर उन गन्स का रुख मैनहोल की तरफ नहीं था.. मैंने देर न करते हुए दोनों को भी एक एक गोली मार दी.. टोर्च की रौशनी अचानक से मेरे ऊपर पड़ी तो मैं हड़बड़ा गया.. मैंने जल्दी से उस टोर्च वाले को भी गोली मार दी..

पारर टोर्च की रौशनी मुझपर पड़ने से कुछ दूर खड़े हुए एक गुंडे की नज़र मुझपर पड़ गई थी..... वो मुझसे 40 फ़ीट की दूरी पर थे.. और जैसे मैंने सोचा था.. सबब गुंडे मैनहोल क पास hi जमा हो रहे थे..

4 गुंडे मारे जा चुके थे.. जिसकी नज़र मुझपर पड़ी उसने वही से खड़े हो कर अपनी मशीन गन को सीधा किया और ट्रिगर दबा कर पूरी मशीन गन hi मुझपर खली करने लगा...

tad....tad....tad....tad....tad....tad....tad....tad....tad....tad....tad....

tad....tad....tad....tad....tad....tad....tad....tad....tad....tad....

पूरा एरिया एक बार फिरसे मशीन गन की गोलियों से गूँज उठा..

टोर्च की रौशनी मुझपर पड़ते hi मैं निचे लेट गया tha..is लिए मैं उन गोलियों से बच गया था.. अब्ब अँधेरे हो चुके था.. टोर्च वाले को मैं मार चूका था.. तो मुझे अब्ब अँधेरे में मारना आसान नहीं था... नाईट विज़न गोलगे पहल से hi मेरे सर्र पर थी.. वो मैंने निचे गिरते hi उसे मैं अपनी आँखों कर सेट कर चूका था..

मशीन क चलने से अब्ब सबब गुंडे इस तरफ धयान देने वाले थे.. जिसने मशीन गन चलाई थी, उस से कुछ फालसे पर 2 गुंडे और भी खड़े थे.. गोलियों क चलने से उन दोनों का ध्यान भी मेरी तरफ हो गया था..

इससे पहले क वो अपनी मशीन गन्स से मुझे मारते..

मेरे पिस्तौल में आवाज़ किये बिना hi गोलियां उगलनी शुरू कर दीं..

दो को गोली लगी तो तीसरा निचे गिर कर खुद को बचा गया..

मैं नहीं जानता था क ये कौन सा एरिया था.. मैं लेते लेते hi वहां से घीसकने लगा.. अब्ब मेरे लिए यहाँ भी पाइपलाइन जैसी सिचुएशन बनने वाली थी.. गोलियों की गूँज से सबब को hi पता चल गया होगा.. मैं पिपलिनेस से बहार आ गया हों.. यहाँ अँधेरा था. और ये किसी बिल्डिंग की बैक साइड थी..... कुछ hi फासले पर एक देवर थी उस बिल्डिंग की...

मेरे पास सोचने क लिए टाइम नहीं था.. मैं देर किये बिना hi उठा खड़ा हुआ और भाग कर दीवार क पास पांच गया.. 8 फ़ीट ऊंची दीवार पर चढ़ने में मुझे काफी दिक्कत हुई.. शूज सारे hi पानी में भीग चुके थे..

मैं दीवार से अंदर कूड़ा और फिर एक तरफ आगे बढ़ गया.. मई इस कोठी में नहीं रुक सकता था, टोर्च की रौशनी में मेरे यहाँ आने क निशान उन्हें दिख जाने थे.. मैं कोठी में घुस कर खुद को साफ़ करना चाहता था.. ऐसी हालत में मेरा यहाँ से भागना मुमकिन नहीं था.. गंदे पानी की वजा से पेअर चिपचिपे हो गए the..aur स्मेल से मेरा दमाग फटा जा रहा था... मैं कोठी की गिर्द चक्कर लगाने लगा.. मुझे कोठी की दूसरी तरफ खुले में hi एक वाटर नल लगा हुआ दिख गया.. मैं तेज़ी से वहां पोहंचा और वाटर नल को खोल कर खुद को साफ़ करने लगा..

जल्द hi मैंने खुद को साफ़ कर लिया.. थोड़ा सा पानी खुद क पेट में उतरा और फिर आगे बढ़ने क लिए तैयार हो गया..

कुछ देर बाद मैं कोठी से बहार था... शूज धो कर मैंने हाथ में पकड़ लिए थे.. और बहार आ कर किसी जगा उन्हें फ़ेंक दिया था.. अब मैं शूज पहन कर भी नहीं भाग सकता था.. वो गीले थे.. मैं नंगे पाऊँ hi तेज़ी से एक तरफ भागने लगा..

पिस्तौल एक बार फिलसे फुल्ली लोडेड था.. आधा खली हो कहके मैगज़ीन मैंने बदल लिया था...

वक़्फ़े वक़्फ़े से अलग अलग एरिया में गोलियों की आवाज़े गूँज रही थी.. मैं एक बार फिरसे उन सबब की नज़रो से दूर हो चूका था...

पुरे एरिया की शॉप्स भी बंद कर व दी गईं थीं.. मुझे ढूंढ़ने क लिए पुरे एरिया में hi कर्फ्यू लगा दिया गया था.. दूर से hi मैं किसी की भी नज़रो में आ सकता था..

साले चूतिये यहाँ भी सबब से एक गलती हो गई थी.. लोगों की भीड़ में मुझे ढूंढ़ना आसान था.. यहाँ रहने वाले सबब hi तो एक दूसरे को जानते थे, तो मुझ जैसे एक अनजान को ढूंढ़ना कैसे मुश्किल रहता.. दुकाने बंद कर देने से दुकानों के बहार रखे हुए काउंटर मुझे छुपने में बड़द दे रहे थे... और मैं उन्ही की ारः लेता हुआ उन सभी से hi दूर हो रहा था...

अगले 20 मिंट में hi मैं उस इलाके से दूर हो चूका था... हॉस्पिटल बहुत पीछे रह गया था.. अब्ब मुझे घूम कर पटेल की कोठी में जाना था.. इस एरिया में अब्ब लोगों का रश ख़तम होने लगा था.. मुझे यहाँ भी कोई परेशां नहीं हुई.. और मैं अगले 15 मिंट में में मैं पटेल की कोठी की बैक दीवार कूद कर अंदर घुस चूका था...

जैसे hi मई अंदर पोहंचा तो पटेल साब जो मेरे hi इंतज़ार में थे, मुझे देख कर खड़े हुए.... और बड़े जोश से मेरे गले लगा गए

पटेल:- रॉकी बीटा दिल खुश कर दिए तुमने.. आज सालों बाद मुझे बहुत बड़ी ख़ुशी मिली है.. महेंद्र गैंग को बड़ी ज़बरदस्त चोट दी है तुमने .. बहुत अच्छे beta..baaki के बचे हुए गैंग को भी ऐसे hi ख़तम करना.. बहुत से दुखी लोगों की ज़िन्दगी में खुशियां आ जाएँगी इस गैंग क ख़तम हो जाने से.

ख़ुशी का इज़हार करते करते एन्ड में पटेल इमोशनल हो गए थे...

विजय:- पटेल साब आप चिंता मैट करें, जल्द hi मैं बाकी के बचे गुंडों को और उनके लीडर्स को ख़तम कर डोंगा.. आप ये बताएं यहाँ तो कोई मुझे ढूंढ़ने नहीं आया था..

patel:-(muskurate हुए) आये थे, पागलो की तरह hi तुम्हे यहाँ वहां ढूंढ रहे the..aur सबब बहुत ज़यादा टेंशन में थे, वो सबब मिलकर तुम्हे कही से भी ढूंढ नहीं पा रहे थे.. हर उस आदमी पर गैंग वळून को शक था, जो उनके सताए हुए हाँ.. हर घर में hi घुस कर वो तुम्हे ढूंढ़ने में लगे हुए थे..

विजय:- वो फिर भी यहाँ आ सकते हाँ.. अब्ब तो उन्हों ने मुझे पिपलिनेस में भी ढूंढ लिया था, मेरी किस्मत अच्छी थी, जो बच क निकल आया..

पटेल:- ओहो.. तो फिर अब्ब.??

vijay:-(muskurata हुआ) अब्ब क्या.. वो साड़ी रात मुझे ढूंढ़ते रहेंगे.. और मैं कुछ घंटे के लिए चैन की नींद सो जाऊँगा... रात क आखरी पेहेर फिरसे उन सभी पर टूट पडूंगा.. आप मुझे कोई सीक्रेट रूम बताएं, जहाँ मैं चैन से कुछ घंटे गुज़र सकूँ, वहां कोई मुझे ढूंढ न सके...

पटेल ने मुझे एक रूम दिखाया.. दो रूम्स के अंदर से गुजरने क बाद आता था वो रूम , उसका रास्ता वार्डरॉब के अंदर से था.... पटेल ने ये सबब भी किया हुआ है.. शायद महेंद्र गैंग से खुद को और अपनी फॅमिली को बचने क लिए उसने ये सबब किया होगा.. पटेल का ये सीक्रेट रूम मेरे लिए बेस्ट था..

मैं उस रूम में जा कर बाथरूम में घुस गया और फ्रेश हो कर बीएड पर आ कर लेट गया..




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अनूप महेंद्र सिंह से मिलने क बाद हॉस्पिटल से बहार निकला.. उसके साथ hi दांय भी था.. जो 4तह बेस की सुरक्षा क लिए जा रहा था..

दांय:- अनूप अब्ब तुम क्या करने वाले हो..... रस्ते में दांय ने अनूप से पूछा.

अनूप:- पहले तो उसे ढूंढ़ते हाँ. वो कहाँ होगा, और किस एरिया की पिपलिनेस में इस वक़्त ट्रेवल कर रहा होगा.. अब्ब आगे वो क्या करना चाहता है.. ये जान्ने की कोशिश करूँगा..

दांय:- अनूप तुम पहले एरिया में घूम रहे 70% आदमियों को पीपलनेस के सभी मैनहोल को अपने कब्ज़े में लेने का बोल दो..

अनूप:- हाँ तुम जाओ और जा कर बेस को सेफ करो, मई भी कुछ ऐसा hi सोच रहा हों.

दांय क जाने के बाद अनूप ने अपने आदमियों को पिपलिनेस खंगानले क काम पर लगा दिया.. जल्द hi गुंडे विजय को ढूंढ़ने में सफल हो गए थे.. अनूप को पता चला तो उनसे जिस एरिया की तरफ विजय को जाते हुए पाया था.. इस तरफ की पाइपलाइन को गुत्तरो के पानी से कनेक्टेड करने क लिए बोल दिया..

जल्द hi अनूप को पता भी चल गया क विजय कुछ गुंडों को मार कर पाइपलाइन से सुरक्षित निकल कर फिरसे कही ग़ायब हो गया है... बहुत ढूंढ़ने पर भी कोई सुराग़ नहीं मिला तो वो तिलमिलाते हुए हॉस्पिटल वापिस आ गया...

और महेंद्र सिंह को साड़ी रिपोर्ट दे दी..

महेंद्र:- साला वो इतना शातिर और डेरिंग है.. मेरे इतने आदमियों क होते हुए भी उनको मार कर बच निकलता है... अनूप तुम हॉस्पिटल की सुरक्षा को बढ़ा दो... और दांय से बोल कर हमारे आखरी अड्डे को तबाह होने से बचने क लिए कह दो... सूबा हो लेने दो. फिर देखते हाँ.. कौन है वो सूरमा जो ये सबब कौन कर रहा है.. एक तो वीरेंदर ने मुझे कुछ और सोचने लायक भी नहीं छोड़ा है...





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अलोक नाथ का एक हाथ और एक कान उसके शरीर से अलग कर दिए गए थे.. कंधे पर लगने वाली गोली ने अलोक के कंधे के जोड़ को चूर चूर कर दिया था.. जिस वजा से डॉटर्स को अलोक का एक हाथ और कंधे का कुछ हिस्सा उसके शरीर से अलग करना पड़ा था..

सिद्धार्त नाथ भी अपने भाई क पास hi था, उसे भी सबब रिपोर्ट मिल रही थी.

जो कुछ भी महेंद्र गैंग क साथ हुआ था. और हो रहा था.. वो सबब जान गया था.. हॉस्पिटल में और बहार खुले में अलोक गैंग क भी कुछ गुंडे मौजूद थे.. दोनों गैंग क गुंडे मिल कर इस तबाही को रोकने में लगे हुए थे.. और सिद्धार्त नाथ अपने भाई क ग़म में डूबा हुआ था.. उसकी साड़ी ऐयाशी उसके भाई क hi दुम्म से थी.. उसकी पावर भी उसके भाई क दुम्म से थी.. अपने भाई क बिना वो कुछ भी नहीं था.. अलोक नाथ क साथ कुछ भी गलत होने की सूरत में सिद्धार्त नाथ भी नहीं बछङे वाला था..

वो ये बात बहुत अच्छे से जान गया था.. इसलिए जब्ब से hi उसके भाई पर अटैक हुआ था.. वो घुसे में तो था hi, पारर वो चिंतित भी बहुत था.. अगर उसके भाई को कुछ हुआ तो फिर उसे कौन बचाएगा. जितना उसने अपने भाई की पावर का गलत उसे किया था.. शहर क लोग तो उसके बदन के एक एक रेशे को अलग करदेंगे... सिद्धार्त नाथ ये भी सोच रहा था..

उसकी फॅमिली शाम तक हॉस्पिटल में hi रही थी.. उसके बाद वो सबब चले गए थे.. सिद्धार्त और उसके फ्रेंड्स हॉस्पिटल में hi थे.. वो सबब भी सिद्धार्त क साथ hi छुपे हुए थे.. हॉस्पिटल से बहार उन सबब क लिए मौत थी, या फिर जेल..

अलोक नाथ सही होता तो.. किसी क लिए कोई टेंशन वाली बात नहीं थी.. अलोक नाथ क ज़ख़्मी होने se...MLA और दूसरे बुसिनेस्स्में के मर्डर जाने से हालत ने अचानक से hi रुख बदल लिया था.. अब्ब पोलिटिकल पावर भी नहीं रही थी.. दूसरे बुसिनेस्स्में के मरने से शहर में अफरा तरफरी मची हुई थी...

सिद्धार्त और उसके दोस्त बहुत ज़यादा टेंशन में आ गए थे... सबब बातें कम् और एक दूसरे को देख ज़यादा रहे थे..... अब हो रहे हमलो ने सभी दोस्तों की गांड की हवा टाइट कर दी थी...

सभी को अपनी ज़िन्दगी खतरे में दिखने लगी थी...





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TIME:03:10:AM:




मैं एक बार फिरसे पूरी फार्म में था. कुछ घंटो की नींद लेकर मैं एक बार फिरसे हालत इ जुंग में था..

पहले मुझे थकन नहीं होनी चाहिए थी.. जुंग लड़ते हुए मसल्स बहुत ज़यादा थक जाते हाँ, पर मैं इस सबब का आदि हो चूका था.. असल बात पिपलिनेस के अंदर ट्रेवल करने से मैं बुरी तरह से थक गया था.. ज़यादा तर मुझे झुक कर hi चलना पड़ा था....

मुझे ढून्ढ न पाने की वजा से कई गुंडे सुस्त पद गए थे.. हाथो में गन्स लिए हुए पुरे एरिया में घूम रहे थे. गन्स का वज़न कम् तो नहीं होता... सोये भी नहीं थे.. अब्ब उनके एक्टिव रहने की परसेंटेज बहुत ज़यादा गिर चुकी थी..

सबब गुंडे hi मेरे लिए आसान शिकार the..ammunition की कमी नहीं thi,mere पास मौजूद स्टॉक कुछ और भी बढ़ चूका था.. महेंद्र गैंग क 3रद अड्डे से मुझे बहुत कुछ मिला था...

रात क इस टाइम जितना भी कोई खुद को एक्टिव शो करे.. असल में वो उतना एक्टिव होता नहीं है.. बास खुद को ज़हर करता रहता है.. ज़यादा तर गुंडे तो कल रात से hi जाग रहे थे, तो उनके अंदर अब्ब ज़यादा देर तक्क मेरा सामना करने की अहलियत नहीं बची थी...

मुझे हॉस्पिटल में घुस कर सबब को की ख़तम करना था.. और वो भी जल्द से जल्द..

जीतेन्द्र, अलोक नाथ ज़ख़्मी पड़े थे, तो मला समेत कई बुसिनेस्स्में मारे जा चुके थे.. गैंग क 3 अड्डे ख़तम हो चुके थे.. गैंग की पावर अब्ब वो नहीं रही थी.. जो पहले थी.. गैंग का ढांचा मैंने तोड़ दिया था.. ये बात भी सभी को अंदर से तोड़ देने क लिए काफी थी.. घंटो से मुझे ढून्ढ नहीं पा रहे थे. ये बात hi उनको फ़्रस्ट्रेशन में डालने वाली थी....

बाकी बचे हुए दोनों गैंग के बड़ों को मार कर मैं दोनों hi गैंग्स को ख़तम कर देना चाहता था.. अलोक गैंग, अलोक और किशन के ख़तम होने से खुद hi ख़तम हो जाता.. उनके मरते hi बाकी का काम खुद कम साब करने वाले थे.. मैंने पहले से hi कमिश्नर सर से कह दिया था.. इसलिए मैं पहले अलोक गैंग को ख़तम करने नहीं गया था.. लीडर्स का मरना ज़यादा ज़रूरी होता है.. लीडर्स मरे तो गैंग ख़तम..

पुलिस डिपार्टमेंट फिर किसी क दबाओ में नहीं आता.. 3 अड्डे ख़तम हो जाने क बाद 4तह अड्डे को ख़तम करना मेरे लिए ज़रूरी नहीं था.. गैंग 70% से ज़यादा ख़तम हो चूका था.. महेंद्र और अलोक क मरते hi बाकी का सबब काम कमिश्नर और पापा करने वाले थे.. मेरा काम बास लीडर्स को मारना था.. और बड़े अड्डे ख़तम करने थे..

कमर पर बंधी हुई बेल्ट में दो सीलेंसर लगे पिस्तौल और भी थे.. पूरी बेल्ट hi तीनो पिस्टल्स क मैगजीन्स से भरी हुई थी..

मई इस वक़्त पूरी फार्म में था.. और अब्ब जल्द hi सबब ख़तम कर देना चाहता था.. हॉस्पिटल में घुसना आसान नहीं था.. मुझे अपने रास्ते में आने वाले सभी

गुंडों को मारते हुए तेज़ी से 3रद फ्लोर तक जा पोहंचना था.. वहां पोहंच गया तो गैंग्स के बड़ो को मरते hi गैंग पूरी तरह से ख़तम हो जाने वाला था..

सभी बड़े अब्ब तक थक हार कर सो चुके होंगे.. और मैं उन्हें सोइ हालत में इस दुन्या से मुक्त कर देना चाहता था..

सभी लीडर्स क मरते hi कमिश्नर अपनी पोर्स क साथ मिलकर पुरे इलाके को अपने अंडर लेने वाले थे.. मला और कई बुसिनेस्स्में के मरने से पोलिटिकल पावर भी ख़तम.. अड्डों क तबाह होने से गैंग की पावर ख़तम.. एमुनिशन भी ख़तम.

कई गुंडों क मरने से सबब का hi खुद को बचने क लिए सरेंडर करना ज़रूरी हो जाना था....

ये सबब पहले से hi प्लान किया जा चूका था.. अभी तक्क ये प्लान कम, papa,Comm और मेरे बीच में hi था... कुछ मिन्ट्स पहले hi मैं कम सर को फोन कर चूका था.

जैसे hi मेरी तरफ से सिग्नल मिलता.. कम, पापा और उनकी फाॅर्स पुरे एरिया को hi अपने अंडर लेने क लिए दौड़ पड़ती...

पापा, कम और कम साब एक hi जगा पर बैठे हुए मेरी तरफ से मिलने वाले सिग्नल का इंतज़ार कर रहे थे...

गैंग को आगे बढ़ने के लिए और कम साब की नेचर को जानते हुए मुझे कम साब क सामने खुद को शो करना पड़ा था... कम साब सिर्फ जनता से प्यार hi नहीं करते थे.. कम साब को देश से भी बहुत मोहब्बत थी.. जैसे मोहब्बत कम साब को देश से थी.. वैसी कम् hi किसी में देखने में आती है....





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हॉस्पिटल की बैक साइड तक्क पोंछने क लिए मुझे रास्ते में 4 गुंडों को मारना पड़ा था.. गुंडों को मार कर मैंने छुपा दिया था.. शॉप्स इमरजेंसी में बंद की गई थी.. तो ऑस्कर शॉप्स क बहार बने हुए काउंटर्स उन गुंडों की लाशों को छुपाने के लिए मददगार सबत हुए थे.. 1 को मैंने गुत्तर का ढक्कन खोल कर गटर में फ़ेंक दिया था.. वही उसके लिए बेस्ट जगा थी..

मैं दीवार कूद कर हॉस्पिटल में जा घुसा.. हॉस्पिटल की दीवार ज़यादा ऊंची नहीं थी.. 30 मीटर क फासले पर हॉस्पिटल से कनेक्टेड एक छोटी की दो मंज़िला अमरत थी.. वहां कोई सिक्योरिटी नहीं थी.. उसके अंदर से हॉस्पिटल में घुसने का रास्ता था.. बैक साइड में एक खिड़की थी.. खिड़की का शीशा एक जगा से टूटा हुआ tha.maine अंदर हाथ दाल कर खिड़की खोल दी...

अंदर घुसा तो देखने से पता चला. ये हॉस्पिटल की लांड्री थी.. और जगा जगा कपड़ो का ढेर लगा हुआ था, कुछ ड्राई क्लीनिंग की महसीने पड़ी हुई थी.. अंदर एक लाइट जल रही थी, जिस की रौशनी में मुझे ये सबब दिख गया था..

मुझे एक दूर दिखा मैं उस दूर क पास गया.. उसे खोलने की कोशिश की.. दूर हॉस्पिटल वाली साइड से लॉक्ड था.. दूर के ऊपर एक roshan-daan था, मैंने पास में पड़ी एक टेबल को दूर के पास ला कर रखा और उसपर छड़ कर हॉस्पिटल के अंदर क व्यू देखने लगा...

मेरी आँखों के सामने एक 30 फ़ीट लम्बी राहदारी थी.. और दोनों साइड्स रूम्स थे.. जिनके दूर लॉक्ड दिख रहे थे.. मुझे इस तरफ कोई गुंडा नहीं दिखा..

मैं टेबल से निचे उतरा.. टेबल को साइड में किया, लॉक को तोड़ने की कोशिश करने लगा.. लॉक नहीं टूटा तो मैंने मैंने लॉक पर गोली चला दी..

लॉक टूटा तो मैंने ज़ोर लगा कर दूर खोल दिए.. और तेज़ी से राहदारी में भागने लगा.. गोली की आवाज़ तो नहीं हुई थी.. पर लॉक के टूटने से आवाज़ ज़रूर हुई थी.. और मैं नहीं चाहता था क मैं इसी राहदारी में hi फँस jaaon.lock टूटने की आवाज़ किसी क कानो तक भी पोहंच सकती थी. तेज़ी से भागता हुआ मैं राहदारी क मोड़ तक जा पोहंचा.. सर्र को थोड़ा सा बहार निकल कर मई दसूरी तरफ देखने लगा.. कोई इस तरफ है तो नहीं.. मुझे कोई नहीं दिखा तो मैं आगे बढ़ गया..

यहाँ भी एक राहदारी थी..20 फ़ीट आगे जाने क बाद मुझे लिफ्ट दिखी, जो चालू थी... मैंने लिफ्ट से जाना सही नहीं समझा और आगे बढ़ गया... लाइफ से थोड़ा सा hi आगे गया था.. एक मोड़ आया और मोड़ के फ़ौरन बाद hi ऊपर जाने के लिए स्टैर्स मुझे दिख गई थीं..

पर वहां 4 गुंडे भी थे.. 1 खड़ा था, तो 3 सूफी पर बैठे हुए थे.. गन्स गुंडों क दोनों पैरों क दरमियान कड़ी हुई थी..

अब्ब यहाँ पर आम लोगों क भी मौजूद होने क ामकान थे. कुछ फासले पर मुझे पेशेंट्स वार्डस भी दिख रही थी.. मुझे यहाँ ओपन फायरिंग से बचना था..

मैं अभी मोड़ की साइड में छुपा हुआ था.. मैंने सांस लेकर खुद को आने वाले समय क लिए तैयार किया.. और पिस्तौल पर अपनी ग्रिफ्ट मज़बूत करते हुए टहल रहे गुंडे के सर्र में गोली मार di..halki सी तीच की आवाज़ हुई और गोली सीढ़ी गुंडे के सर्र में घुस गई... गुंडा निचे गिरता उससे पहले hi मैंने पिस्तौल को घुमाया और सूफी पर बैठे हुए तीनो गुंडों की तरफ सीधा कर दिया..

tich..tich..tich... तीनो गुंडे जो रात भर से जाग रहे थे.. मैंने उन्हें हमेशा क लिए सुला दिया.. कहाँ रात जागते रहेंगे.. महेंद्र गैंग में रहते हुए इन्हे सोने क लिए टाइम तो मिलने से रहा.. मई उनके एहसास करते हुए उन्हें सुला दिया..

किसी का एहसास करना तो भलाई का काम है ना.. और भलाई वाला काम मुझे छोड़ने की आदत नहीं थी..

सीलेंसर लगे पिस्तौल से ज़यादा आवाज़ तो हुई नहीं थी.. खड़े हुए गुंडों को गोली लगी तो

एक बार तो सूफी पर बैठे हुए गुंडे कुछ समझ नहीं पाए.. पर जैसे hi उनमे से एक के सर्र से निकलने वाले खून से शावर का काम किया तो बाकी दोनों गुंडे हड़बड़ा गए.. दोनों hi अपनी गन्स को उठाने लगे.. अब्ब मैं दोनों को कोई मौका तो देने से रहा.. उड़ा दिया सालो को भी..

मैंने आस पास नज़र दौड़ाई तो मुझे कोई और नहीं दिखा.. गुंडों की लाशों को कही ठिकाने लगाने की बजाये मई तेज़ी से ऊपर जा पोहंचा.. 4-5 मिंट में hi मैं पुरे हॉस्पिटल का नक्शा बदल देना चाहता था..

ऊपर वाले फ्लोर पर दूर तो था नहीं.. बास स्टैर्स से कुछ hi फासले पर 10 क करीब मौजूद थे.. जिनमे से 3 तो सुफो पर सो रहे थे.. दो घूम फिर रहे थे.. किसी का भी धयान स्टैर्स की तरफ नहीं था.. होता भी कैसे निचे 4 गुंडे मौजूद थे. ऊपर वाले गुंडों को निचे का डर नहीं था ..

उनको क्या पता क वो चरों hi ख़ामोशी से मर्डर चुके हाँ.. वर्ण अब तक्क तो हॉस्पिटल में तूफ़ान आ चूका होता..

पिस्तौल का मैगज़ीन ऊपर आने से पहले hi मैंने बदल लिया था.. ऊपर पोहचते hi मैंने किसी को मोके दिए बिना hi टहल रहे दोनों गुंडों को पहले शूट कर दिया.. सर्र में गोली लगने से वो ढेर हो गए थे..

वो दोनों निचे गिरते या कोई कुछ समझता... उसे पहले hi मेरे पिस्तौल ने एक बार फिरसे

tich..tich..tich...tich..tich.. की आवाज़ निकाली, पांच गोलियां और चलें और सो रहे तीनो गुंडों क इलावा बाकी सबब मारे गए.. कुछ hi सेक् में 7 गुंडे मर्डर चुके थे.. मैंने फ़ौरन hi मैगज़ीन निकलने वाला बटन को प्रेस किया.. मैगज़ीन पिस्तौल से बहार निकला.. तब्ब तक्क मैं बेल्ट में अटका हुआ नया मैगज़ीन अपने दूसरे हाथ में ले चूका था.. जैसे hi मैगज़ीन निकला .. मैंने दूसरा मैगज़ीन फ़ौरन hi पिस्तौल में लोड किया और सो रहे गुंडों को भी शूट कर दिया..

tich..tich..tich... की आवाज़ 3 बार सुनाई दिए और तीनो हमेशा क लिए एक लम्बी नींद सो गए.. जिस हसीं खवाब को वो देख रहे थे.. अब्ब हमेशा hi उनेह वो कखवाब hi देखने थे.. दुन्या क रंग उनके ख़तम हो चुके थे..

10 गुंडे आवाज़ किये बिना hi मारे गए थे.. 1 मिंट से भी कम् समय में मैंने 10 गुंडों को मार दिया था.. मैंने पुरे फ्लोर पर नज़र दौड़ाई तो मुझे कोई और नहीं दिखा...

पता नहीं इस हॉस्पिटल में कक्तव के ज़रिये चैकिंग हो रही थी या नहीं.. अगर हो रही होती तो अब्ब तक्क सबब को hi पता चल जाना चाहिए था..

निचे वाले गुंडों को मार कर ऊपर आते हुए 10 गुंडों को मरने में 2 मिंट लग चुके थे.. मैं ये सबब बहुत hi फुर्ती से कर रहा था.. टाइम को वास्ते करना मतलब खुद को खतरे में डालना था..

इस वक़्त मैं किसी चीते से भी ज़यादा एक्टिव था.. मेरी सेंसेस पूरी तरह से वर्किंग में थीई.. मेरी नज़र सामने होते हुए भी चरों तरफ थी.. मैं स्ट्रिस पर दौड़ता हुआ 3रद फ्लोर पर पोहंचा...

सामने देखा तो एक बार तो मेरी सिटी hi गुम्म हो गई.....

मेरे सामने 40 क करीब गुंडे थे... और यहाँ मौजूद गुंडे नींद में भी नहीं थे.... वो पूरी तरह से न सही.. पारर बहुत हद्द तक्क एक्टिव ज़रूर दिख रहे थे..





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अपडेट ::: 87

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3रद फ्लोर पर 40 क करीब गुंडे थे.. ये मेरा अंदाज़ा था.. वर्ण इससे कम् या ज़यादा भी हो सकते थे..

3रद फ्लोर पर एक 40क्ष40 फ़ीट का हाल भी था.. जो मुझे दिखा था. और गुंडे उसी हाल में मौजूद थे....

मेरे सीढ़ियों पर चढ़ने की आवाज़ तो नहीं हुई थी. पर इतने गुंडों में से किसी की नज़र मुझपर न पड़ी हो ये होना मुश्किल था..

जैसे hi मेरी नज़र उन सब पर पड़ी थी.. मैं फ़ौरन hi पीछे भी हट गया था..

पीछे hat'te hi, मैंने फुर्ती को काम में लाते हुए अपनी पीठ कर बंधे बैग को उतार कर अपने हाथो में ले लिया था.. इस काम में मुझे 4 सेकण्ड्स hi लगे थे..

पिस्तौल मेरे हाथ में था.. फिर भी मैंने बैग खोला और उसके अंदर से दो स्मोक बम निकल लिए.....

इससे पहले क कोई आ कर मेरे लिए मौत का सामान करता.. मैंने दोनों स्मोक बॉम्ब्स की पिन निकाल कर एक के करके गुंडों की तरफ उछाल दिए.. फ़ौरन hi धुंआ होना भी शुरू हो गया था.. मैं पूरी रफ्तार से भागा और भागता हुआ हाल में मौजूद एक पिलर की साइड में हो गया...

पिलर मुझे गुंडों को देखते हुए hi दिखा था..

3रद फ्लोर पर आने के बाद, गुंडों को देखकर अपना बैग उतार कर दोनों बॉम्ब्स को गुंडों की तरफ फेंकना और फिर फ़ौरन hi पिलर की ारः में जा के छुप जाना..

इस सबब में मुझे 40 सेकण्ड्स hi लगे थे.. और इतनी फुर्ती गुंडों में कहाँ थी.. कोई मुझे जज करता या मेरे खिलाफ किसी किसम का कोई एक्शन लेता.. उससे पहले hi मैंने स्मोक बॉम्ब्स उनकी तरफ उछाल दिए थे..

धुंआ होते hi सबब हड़बड़ा गए थे.. गन्स उनके हाथ में थीं.. मैं भी उनकी नज़रों में आ गया था.. मेरे भागते hi 2 गुंडों ने अपनी गन्स से गोलियां भी चलानी शुरू कर दी थीं..

एक तो मैं भाग रहा था.. दूसरा कोई भी गुंडा अपने हाथों में गन्स लिए हुए सीधा निशाना नहीं बनाये हुए थे.. तीसरा धुंआ हो जाने की वजा से कोई भी सही से निशाना नहीं ले पाया था.. सब hi तो धुंए से परेशां हो गए थे.

गोलियां मुझतक पोहंचती उससे पहले hi मैं पिलर की साइड में पोहंच गया था..

मेरे वहां पोहचते hi हाल में फेंके गए बॉम्ब्स का धुंआ बहुत ज़यादा बढ़ने लगा था... अब्ब कोई अगर गोलियां भी चलता तो. तो उनके अपने hi साथी मारे जाते..

मैंने किसी को शूट करने की बजाये, उस पिलर की ारः को छोड़ा और कुछ फासले पर भागते समय मुझे जो रूम दिखा था.. उसकी और भाग खड़ा हुआ..

धुंआ कम् होते hi मैं सबब की नज़रों में आ सकता था.. अब्ब मुझे खुद को सेफ रखते हुए सभी गुंडों को मारना था.. और अब्ब मेरे लिए ये सबब करना मुश्किल भी नै था..

भागते हुए मैंने बेल्ट में एड्स हुआ दूसरा पिस्तौल भी निकाल लिया था.. दूर क पास पोहंचा तो ...

जो गुंडे बॉम्ब्स क धुवें से परेशां थे. मैंने अपने दोनों पिस्टल्स से hi हाल में मौजूद गुंडों को एक एक करके गिरना शुरू कर दिया..

एक तो धुंआ था, दूसरा मेरे पिस्टल्स पर सीलेंसर लगे हुए थे.. किसी को कुछ समझ नहीं आया क गोलियों चल रही हाँ या नहीं.. उनके साथी धुंए की वजा से गीर रहे हाँ, या गोलयां लगें से.... एग्जॉस्ट फैन लगे हुए थे.. तो धुवां भी जल्द ख़तम हो जाना था..

बच रहे गुंडों की चीखें हाल में गूंजने लगी थीं.. जिसे गोली लगती वो नीचे गिरने lagta..haal में धुवां और खून फैलने लगा था..

15 सेकण्ड्स में hi दोनों पिस्तौल खाली हुए तो मैं दूर खोल कर अंदर रूम में घुस गया..




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3रद फ्लोर पर गोलियों की आवाज़ गूंजी तो सबब hi एकदुम्म से हड़बड़ा गए.. सबब ऐसे उठे जैसे सभी की माँ का रपे उनके hi घर में होना शुरू हो गया हो..

mahendra..anoop..dany..siddhart उसके फ्रेंड्स.. किशन.. अघा वो सबब रात बहुत देर तक्क जागने क बाद अभी कुछ देर पहले hi सोये.. वो सभी बहुत ज़यादा थक चुके थे.. खुद को रिलैक्स करने क लिए वो सबब सो गए थे.. बहार 3रद फ्लोर पर 40 क करीब गुंडे सिक्योरिटी पर मामूर थे.. टेंशन कम् hi थी सभी को...

कल रात से हो रही थकन को मिटने क लिए सोना पड़ा... जिस तरह से कई गन्स के चलने की आवाज़ें सुनाई दे रही थी.. सबब hi बोखला कर उठ खड़े हुए..

सबब hi कच्ची नींद में थे.. तो लड़ने की पोजीशन में नहीं रहे थे.. थकन के मारे सभी का hi बुरा हाल था.. और ऊपर से नींद का नशा.. जितनी भयंकर गोलियां चल रही थी.. कोई भी लड़ने की हिम्मत खुद में नहीं पा रहा था..

अघा लड़ने क लिए आगे बढ़ने लगा.. तो किशन ने उसे रोक दिया..

किशन:- अघा अभी रहने दो.. हमे उसकी सही लोकेशन का भी पता नहीं है.. और बहार जैसे फायरिंग हो रही है.. हम में से कोई, किसी अंधी गोली का निशाना बन्न सकता है.... अब्ब तक्क सभी एक रूम में इकट्ठे हो गए थे..

महेंद्र:- वो कुत्ते का बचा यहाँ भी आ गया ha..chain से कोन भी नहीं देगा. अब्ब वो बच कर जाने न पाए.. महेंद्र सिंह जल्द hi नींद क खुमार से नहर आ गया था.. गैंगस्टर जो था.. ऐसी नींद तो फिर होनी hi थी..

अनूप फर्स्ट और 2ंद फ्लोर के गुंडों से राब्ता करने में लगा हुआ था.. पर किसी से कोई राब्ता नहीं हो पा रहा था..

अनूप:- महेंद्र जिस तरह से वो अकेला hi हम सबब पर भरी पद रहा है.. मुझे नहीं लगता हम उसपर फ़ौरन hi काबू पा लेंगे.. अभी हमें इस फ्लोर से निकल कर निचे के किसी फ्लोर पर जाना होगा.. वही रह कर उससे निपटने की कोशिश करते.. जैसी फायरिंग हो रही है.. अभी हम उससे नहीं लड़ सकते.. हमें खुद को और वीरेंदर क साथ अलोक को भी तो सेफ रखना है..

दांय:- हाँ महेंद्र अनूप सही कह रहा है.. अभी हामरे पास टाइम है.. हम निकल सकते हाँ.. बाद में हमारे लिए निकलने का समय भी नहीं रहेगा...

अघा को छोड़ सभी लिफ्ट क रास्ते निचे जाने लगे.. सबब से आगे सिद्धार्त और उसके दोस्त थे.... जो कांपते हुए नोचे जा रहे थे...

वरिंदर और अलोक को भी बिना स्ट्रेचर क निचे लेजाया जा चूका था....

अघा थका हुआ था, पर धीरे धीरे उसकी नींद का खुमार उतरने लगा था.. वो निचे नहीं गया. वो एक राइफल उठा कर हाल की तरफ बढ़ने लगा..

जब्ब किसी की मौत आती है.. तो मौत उसे कही जाने नहीं देती...




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मैंने जल्दी से दोनों पिस्तौल फिरसे लोड किये.. अब्ब मैं एक बार फिरसे एक्शन क लिए रेडी था.. मैं दूर खोल कर गुंडों को मारने hi वाला था..

अचानक से एक साथ दो काम हुए...

हाल में मौजूद गुंडों को जैसे hi सही से समझ में आया क कोई उन्हें गोलियों से मार रहा.. उनके कई साथी मारे जा चुके हाँ तो वो पागल हो कर अपने हाथो में पकड़ी हुई गन्स से फायर करने लगे.. एक ने गन्स का ट्रिगर दबाया था, तो सबब पर पागल पत्र का दौरा पड़ने लगा..

एक बार फिरसे हाल में चीखो पुकार मच गई.. अँधा ढूंढ चल रही गोलियां उनके अपने hi साथियों को लग रही थीं.. अब्ब सभी खुद को सेफ रखने क लिए अपनी गन्स से गोलियां चला रहे थे..

दूसरा काम ये हुआ क हॉस्पिटल का अलार्म बज्ज उठा.. अब्ब सबब hi इस हॉस्पिटल को घेरे में लेने वाले थे..

अब्ब इस इलाके क सभी गुंडे hi हॉस्पिटल की तरफ बढ़ने वाले थे.. और मुझे उनके पोहचने से पहले hi उनके लीडर्स को मारना था..

गोलियां भले hi अंधी चल रही थीं.. पर मैं अब्ब किसी एक जगा नै रुक सकता था.. मुझे हरकत में रहते हुए भरपूर एक्शन का मुज़ाहिरा करना था..

बेल्ट में से खली हो चुके मैगज़ीन मैंने बैग से निकल कर फिरसे भर लिए थे..

जितनी बुलेट मेरे पास थीं.. उससे में मैं ऐसे 4 गैंग्स को ख़तम कर सकता था... मैंने दूर खोला और एक झटके में सर्र बहार निकल कर पुरे हाल को देख डाला... धुंआ अब्ब काफी हद्द तक्क कम् हो चूका था.. और गुंडे भी अब्ब 6-7 hi सही सलामत नज़र आ रहे थे.. अक्सर निचे गिरे हुए तड़प रहे थे.. चीखों पुकार से पूरा हाल hi गूँज रहा था...

मैंने एक सांस अंदर खेंचि.. फिर उसे बहार निकल कर दोनों पिस्टल्स को बच रहे गुंडों की तरफ सीधा कर दिया..

दोनों hi सीलेंसर लगे पिस्तौल tich...tich...tich...tich...tich...tich...tich...

की आवाज़ करने लगे और स्टुपिड गुंडे जो अभी तक नहीं समझ पाए थे, उनपर जानलेवा हमला कौन कर रहा था.. उनके कुछ समझने से पहले hi मैंने उन्हें भी ऊपर पोहंचा दिया..

हाल में मौजूद गुंडों को शूट करते हुए मैं हरकत में था..

और यही चीज़ मुझे बचा गई थी...

वर्ण मेरी लाश भी यही गुंडों क बीच में पड़ी होती.. मुझपर अनगिनत गोलियों की बरसात क्र दी गई थी..

गुंडों में मौजूद 3 गुंडे हाल में पड़े हुए सुफोन की ारः में हो गए थे...

हाल में एक बार फिरसे गोलियों की तड़तड़ाहट गूंजने लगे..

ये तो मैं जान hi गया था.. क अब्ब मुझे किसी एक जाग नहीं रुकना है.. मैं मुसलसल हरकत में था... हरकत किये बिना मई फँस जाता..

4 सेकण्ड्स में hi हाल में बच रहे 7 गुंडे मारे गए थे.. और मुझपर गोलियां आखरी सेकंड में चलाई गई थीं.. वर्ण मेरा राम नाम सत्य हो चूका होता..

मैं तेज़ी से निचे गिरा और लेते लेते hi लुढ़कता हुआ गोलियों की रेंज से दूर होने लगा.. अभी मेरे पिस्तौल में बहुत सी गोलियां थी.. बच रहे तीन गुंडों क लिए 3 गोलियां hi काफी थीं.. हाँ अगर रूम्स में मौजूद गुंडे या लीडर अंदर से गन्स लेकर बहार न आ जाएँ तो..

तीनो गुंडे धुऐं की वजा से पहले से hi परेशां थे, मुझ से लड़ना उनके लिए आसान नहीं था.. मैं लुढ़कता हुआ उनकी गोलियों की रेंज से दूर हुआ तो वो मुझे मारने क लिए सुफोन की ारः से बहार नहीं निकले थे..

कल रात से हो रहे हमलो की वजा से मेरी दहशत कुछ ज़यादा hi उन सबब के सर्र पर सवार हो चुकी थी.. किसी में मुझसे सामना करने की हिम्मत नहीं बची थी.. ये मेरे लिए प्लस पॉइंट था.... वर्ण एक अकेले को मारने से कैसा डरना..

अगर हाल में लाशों के ढेर न लगे हुए होते, तो बच रहे 3 गुंडे सुफोन क पीछे छुपने की बजाये मेरा सामना करना पसंद करने.. कैसे लड़ते वो मुझसे मेरी दहशत ने उन्हें कही न नहीं छोड़ा था..

मैं पिलर की साइड में हुआ तो बेल्ट क अंदर से एक मैगज़ीन निकाल कर गुंडों की तरफ उछाल दिया.. मैगज़ीन फेंकते hi मैं ज़ोर से चिल्लाया..

bomb..abb तुम लोगों के चीथड़े उड़ जाएंगे...

बम की आवाज़ सुनकर तीनो गुंडे जो सुफोन की ारः में थे, वो चीखते हुए उठ खड़े hue....tich...tich...tich... की आवाज़ इस बार फिरसे मेरे दोनों पिस्टल्स से निकली और तीनो स्टुपिड गुंडे वही ढेर हो गए...

बम से बच गए थे.. पारर मेरे पिस्टल्स क निशाने से नहीं बच पाए थे..

मुझे 4 मिंट इस फ्लोर पर बीत चुके थे.. पर अभी तक्क रूम में से कोई हाल की तरफ नहीं आया था.. और न hi किसी के आने का कोई इशारा मिला था..

ये बड़ी हैरान कर देने वाली बात थी.. अब्ब तक्क तो सभी को hi मुझे घेरे में ले लेना चाहिए था..

क्या वो सबब जो अंदर रूम्स में थे.. वो भी मेरी दहशत का शिकार हो गए थे..

हाहाहाहाहा होना hi चाहिए था.. साले चूतिये सभी एक साथ मिलकर लड़ना जानते थे.. 40 गुंडे क्या मरे सबब क सबब hi भाग खड़े हुए थे..

या वो सबब ओपन जुंग लड़ना नहीं छह रहे थे... हाल में मजूद गुंडों का सफाया हुआ तो मैं एक साइड में छुप कर किसी और क आने का इंतज़ार करने लगा.. अब्ब मेरा फोकस पूरी तरह से राहदारी में बने हुए रूम्स की तरफ था..

मुझे किसी क आने की आहत सुनाई दी.. तो मैं और भी चौकस हो गया.... मुझे रह रह कर ख्याल आ रहा था.. जितनी देर से अंदर बने हुए रूम्स में से कोई बहार नहीं आया था.. कही सभी डर क मारे भाग तो नहीं गए..

वो भागने वाले तो नहीं थे.. ज़रूर वो अपना लाइन ऑफ़ एक्शन बदलने वाले थे..

शीट्ट्ट्ट ये बड़ी गड़बड़ हो जायेगी... अब्ब मुझे जल्दी से नीचे जाना पड़ेगा.. वर्ण सबब hi बच कर निकल जायेंगे.. और किसी का भी बच कर निकलना सही नहीं था.. सभी को आज hi ख़तम करना ज़रूरी था.. ज़ख़्मी सांप खतरनाक होता है.. मेरा तो कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता था.. पारर साले ये गैंग्स वाले हरामी गुंडे आम बेबस लोगों पर ज़ुल्म की इन्तहा कर देंगे..

सुनाई देने वाले कदमो की आहात के बार फिरसे थम गई थी.. मैंने इस आने वाले को जल्दी से मार कर रूम को चेक कर लेना चाहता था.. मेरे लिए ये कन्फर्म करना ज़रूरी था. आया क वो सबब यही हाँ या कही भाग गए हाँ... अगर सबब यहाँ से भाग गए तो फिर जल्द hi वो मेरे हाथ नहीं आने वाले थे..

अब्ब हॉस्पिटल में गुंडे भी एंटर होना शुरू हो जाएंगे... और निचे कही पोजीशन ले कर मेरे लिए फन्दा तैयार करने में लग्ग जाएंगे....

एक बार फिरसे कदमो की आहात सुनाई दी तो मैंने अपना ध्यान उस तरफ लगा दिया..

कुछ देर में hi मुझे राहदारी वाली साइड पर किसी क ृक्क जाने का एहसास हुआ... अभी मैं अपना सर्र निकल कर उसे नहीं देख सकता था...

आने वाले ने अचानक से hi गोलियां चलनी शुरू कर दी थी.. 8-10 गोलियों क बाद वो ृक्क गया और फिर ठप्प से निचे गिरने की आवाज़ आई..

मेरे होंटो पर मुस्कान आ गई.. उसने मुझे जाल में फासने क लिए गोलियां फायर की थीं.. उसने की तो चालाकी hi थी.. पर वो मुझसे ज़यादा चालक नहीं था.. उसके गिरते hi मैं उसकी चालाकी समझ गया था..

मैं पिलर की ारः से नहीं निकला... कुछ देर वो भी वही निचे पड़ा रहा.. फिर वो उठा कर चलता हुआ हाल की तरफ बढ़ने लगा... उसके चलने क अंदाज़ से मुझे पता चल गया क वो कितना एक्टिव है इस समय.. मैं ये भी समझ गया था,..

क वो लड़ने वाला इंसान है.. वर्ण वो इतनी लाशें देख कर यहाँ से भाग चूका होता.. वो चलता चलता एक बार फिरसे रुक गया.. मेरा धयान उसके क़दमों की चाप पर hi था.. मैंने अपना सर्र निकल कर उसे नहीं देखा.. साला ग़ज़ब का बाँदा लग रहा था.. उसकी सांस की आवाज़ से hi मुझे पता चल रहा था.. क इस टाइम पुरे हाल पर नज़र रखे हुए है..

जैसे hi मैं पिलर की साइड से निकला वो मुझे अपने पास मौजूद गन से भून कर रख देगा..

देर भी हो रही थी.. अगर कोई निचे से ऊपर आ गया तो मेरे लिए खतरा बढ़ जायेगा.. और फिर देर होने से महेंद्र भी कही भाग न जाए..

मुझे जल्द hi कुछ करना पड़ेगा..

मैं पिलर से देखने लगा.. कुछ फासले पर पड़े हुए सुफोन से अपना फासला काउंट करने लगा..

सूफी मुझसे 9-10 फ़ीट की दूरी पर थे.. मेरे लिए वहां तक सेफ पोहंचना आसान नहीं था.. पर चांस तो लेना hi था.. वर्ण देर होने की सूरत में मैं वैसे भी नहीं बचने वाला था.... उसके पास बड़ी गन थी.. और फिर निचे बे बैकअप आने का भी ामकान था..

पिलर की ारः से सूफी तक्क सेफ पोहचने क लिए मैं खुद को तैयार करने लगा.. मैं सांस भी बहुत धयान से ले रहा था.. वर्ण जैसे मैं उसकी साँसों की आवाज़ सुन पर रहा था.. वो भी मेरी साँसों की आवाज़ सुन सकता था...

वो फिर से चलना शुरू हो गया.. उसका रुख दूसरे पिलर की तरफ था.. हाल में दो hi पिलर थे.. एक की ारः में मई था.. और दूसरे की तरफ वो चलता हुआ जा रहा था..

उसके कदमो को धयान में रखते हुए, अपने हाथों में पिस्तौल कर अपनी पकड़ मज़बूत बनाते हुए, और सूफी क फासले को भी ध्यान में रखते हुए मैंने अपनी जगा छोड़ दी.... मैं हवा में उड़ता हुआ सोजों की ारः में जाने लगा.. मेरे हाथ किसी भी लम्हे फायर करने क लिए तैयार थे..

वो भी बहुत शातिर और एक्टिव गुंडा था.. मेरे उछालते hi वो मेरी तरफ मुदा और मुझे सही देखे बिना hi मेरी आवाज़ को जज करते हुए ट्रिग्गर दबा कर फायरिंग करते लगा...

tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..tad..

हाल एक बार फिरसे गोलियों की आवाज़ से गूँज उठा.. उसकी गन से निकली हुई अनगिनत गोलियों में से एक गोली मेरे बाज़ो को अच्छा ख़ासा ज़ख़्मी करते हुए गुज़र गई..

जम्प करते हुए मेरे भी दोनों हाथ हरकत में थे.. मेरे लेफ्ट हैंड ने एक गोली निकली और तीच... की आवाज़ करते हुए उसके सर्र में जा घुसी... मरते हुए भी उसकी गन पार्स ऊँगली नहीं हटी थी.. जब्ब तक्क पूरा मैगज़ीन खली नहीं हो गया.. गन में से गोलियां निकलती hi रहें..

एक गोली मेरे बाज़ो पर कोहनी से 1.5" ऊपर लगी थी.. खून तेज़ी से बहने लगा.

शुक्र था क गोली बाज़ो की हड्डी पर नहीं लगी थी. वर्ण मेरा एक बाज़ो किसी काम का नहीं रहता.. और अभी मुझे अपने दोनों बाज़ुओं की बहुत ज़रूरत थी...

अभी मुझे हॉस्पिटल में रहते हुए बहुत कुछ करना था.. गुंडों का सफाया करना था.. और खुद को भी सेफ रखना था.. उसके मुझे ज़यादा ज़ख़्मी होने से बचना था..

उसके सर्र में गोली लगते हुए मैंने देख लिया tha.main जान गया था, क वो अब्ब इस दुन्या से जाने वाला है, इसकी आखरी साँसे चल रही होंगी.....

मैं अपने बाज़ो पर लगी गोली को नज़र अंदाज़ करते हुए उठा.. आखरी मरने वाले गुंडे को देखने लगा..

उसकी सूरत देखते hi मई हैरान रह गया. मैं उसे पहचान चूका था, वो अघा था. मुझे इसकी पिछ दिखा कर बताया गया था.. क ये मेरे लिए आसान हरीफ़ नहीं होगा..

कितनी जल्दी अघा मेरे हाथो मारा गया था..

बेवक़ूफ़ इंसान मरने क लिए कितना स्टुपिड त्रिका इस्तेमाल किया था इसने.. स्टुपिड लोगों क जैसे पुरे हाल में दनदनाता फिर रहा था.. जिसे वो डेरिंग समझ रहा था. वो अघा का पागल पंन्न था..

साला वैसे था बहुत चालक.. मेरी किस्मत अच्छी थी जो बच गया.. अगर अघा कही छुप कर मुझे शूट करता तो मेरे लिए खतरा बहुत बढ़ सकता था..

मैंने आघा की शर्ट पहाड़ी... फटी शर्ट क एक पीेछे को अपने ज़ख़्मी बाज़ो पर बांधना शुरू कर दिया...

इस कपडे से खून तो थमने वाला था नहीं.. अब्ब जल्द hi मुझे ये सबब ख़तम करना होगा.. वर्ण यहाँ मेरे लिए चूहे दान तैयार किया जा रहा था.. जितना वक़्त गुज़रता मेरे लिए खुद को बचाना मुश्किल हो जाता..

अघा को देख कर मैं समझ गया क बाकी के सबब कही भाग चुके हाँ...

मैंने एक नज़र पुरे हाल पर डाली.. और फिर हाल में मौजूद खिड़की से बहार झाँकने लगा,....'

बहार गुंडे नहीं थे.. पारर आम लोग काफी दूर रह कर हॉस्पिटल की और देख रहे थे... पास में मौजूद घरों पर भी लाइट्स ों हो चुकी थीं..

किसी क लिए ये मौत का खेल था.. तो देखने वळून क लिए ये इंटरनेंमेंट थी.

अब्ब तक्क पुरे इलाके में हालात बहुत ज़यादा ख़राब हो चुके थे.. मैंने एक खिड़की का शीशा खोला तो मुझे हॉस्पिटल के निचे से शोर सुनाई देने लगा था.. बिलकुल निचे मैं झाँक कर नहीं देख सकता था.. किसी गुंडे की नज़र पड़ती तो वो वही से मुझे शूट कर सकता था..

हॉस्पिटल में हंगामा मचा हुआ था.. फर्स्ट फ्लोर पर पेशेंट्स थे.. पुलिस अभी नहीं आई थी.. वो मेरे hi आर्डर पर यहाँ आने वाली थी.. मीडिया की गाड़ियां ज़रूर आना शुरू हो गई थीं..

मैंने अपने चेहरे को अच्छे से कवर किया... हाल में आया और वही पड़ी हुई गन में से एक गन को उठाया उसका मागज़ीने चेक किया और फिर स्टैर्स की जानिब बढ़ने लगा..

स्टैर्स क पास पोहंच कर मैंने ऐसे hi चेक करने क लिए उस गन को 2ंद फ्लोर की जानिब करके ट्रिगर दबा दिया ..

tad.....tad.....tad.....tad.....tad.....tad.....tad.....tad.....tad.....tad.....tad.....tad.....tad.....

की आवाज़ एक बार फिरसे गूंजी.. मेरे फायर करते hi अनगिनत गन्स ने भी बरसना शुरू कर दिया... मैं पहले से hi कुछ ऐसा hi समझ रहा tha..lift और स्टैर्स से मैं निचे नहीं जा सकता था.. एक सेकंड में hi मुझे परलोक भेज दिया जाता..

मैं 3रद फ्लोर पर मौजूद कामर्स को चेक करने लगा.. फिर जो जो सीएएम मुझे दिख रहे थे.. मैं उन्हें शूट करने लगा.. अगर कोई मुझे निच्चे से देख रहा होगा.. तो अब्ब मैं उसकी नज़रों से ओझल हो चूका था....

फिर मैंने हाल में मौजूद गन्स में से दो गन्स को उठाया और फिर उन्हें भी स्टैर्स पर ला कर खाली कर दिया.. निचे से मुझे अनगिनत गन्स को चला कर जवाब दिया जा रहा था..

दोनों गन्स क खाली होते hi मैं वापिस भगा.. और राहदारी से होता हुआ हॉस्पिटल की बैक साइड में जा पोंछा.. वहां की एक खिड़की खोल कर निचे देखने लगा..

विंडो क नीचे सिल्ल बानी हुई थी.. मैं इस तरफ मौजूद सिल्ल को देखने लगा.. यहाँ से वो लांड्री की बिल्डिंग मुझे दिख रही थी.. मैंने 3रद फ्लोर पर रहते हुए hi लांड्री वाली साइड में जाने लगा..

वहां पोहंच कर मैंने वह की एक खिड़की खोल कर चेक की.. खिड़की खुली तो उसकी सिल्ल को अपने हाथ से दबा कर देखने लगा.. कही मेरे वज़न से टूट न जाए.

सिल्ल बहुत ज़यादा मज़बूत थी.. मैं एक बार फिरसे हाल में आया और इस बार मैंने 4 गन्स को उठाया और स्टैर्स से निचे 2ंद फ्लोर पर फायरिंग करने लगा..

मैं उन्हें यही समझाना छह रहा था.. क मैं ऊपर से निचे आने क लिए बेचैन हों.. और मुझे कोई रास्ता नहीं दिख रहा.. और गन्स को चला कर अपने लिए कोई रास्ता बनाने की कोशिश कर रहा हों..

4 गन्स खली करके मैं फिरसे वापिस लांड्री की तरफ भागा..

लांड्री वाली खिड़की खोल कर मैंने आस पास का व्यू चेक किया.. सभी का hi धयान हॉस्पिटल की फ्रंट साइड में था.. वहां वही लोग और मीडिया इकठी हुई थी.. पता नहीं मीडिया न्यूज़ में क्या दिखा रही होगी.. शायद मुझे टेररिस्ट बता कर न्यूज़ फ़्लैश कर रही होगी....

मैंने तीनो पिस्टल्स फिरसे लोड कर लिए the...main सिल्ल पर खड़ा हुआ.. और वही से लांड्री की छत को देखने लगा.. लांड्री की छत यहाँ से 13 फ़ीट क करीब थी... पक्की छत थी.. गलती से कूड़ा तो हाथ या पेअर तुड़वा बेठुंगा...

मैं लांड्री की छत पर कूदने hi वाला था.. क मुझे राइट साइड में निचे की तरफ 2ंद फ्लोर की सिल्ल के साथ की खिड़की खुली हुई दिखी... यहाँ दो बातें हो सकती थी..

NO:1:-koi खिड़की को खोल कर बहार गन सीढ़ी किये हुए होगा..

NO:2:-wo खिड़की बी चांस hi खुली रह गई होगी...

अगर वहां कोई गन लिए खड़ा हुआ है. तो मेरे लांड्री की छत पर कूदते hi वो मुझे गोलियों से भून कर रख देगा.. अगर वहां कोई नहीं है तो मुझे उस खिड़की क रास्ते 2ंद फ्लोर पर जाने में आसानी हो जायेगी.. और वही से सबब का काम तमाक कर देना आसान रहेगा.

सोचने में टाइम न बर्बाद करते हुए, 2ंद फ्लोर की सिल्ल का फासला नापते हुए मैं कूद गया..





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फर्स्ट फ्लोर पार्स इमरजेंसी पर मौजूद 2 डॉक्टर्स को 2ंद फ्लोर पर लाया गया. वीरेंद्र और अलोक की ट्रीटमेंट शुरू कर दी गई..

अनूप ने कुछ गुंडे लिफ्ट की जानिब तो कुछ गुंडे स्टैर्स पर लगा दिए थे.. गुंडे अब्ब बहुत hi कम् रह गए थे... mahendra..dany या अनूप किसी को ऊपर भेज कर उन्हें मरवाना नहीं चाहते थे.. वर्ण जैसी सूरत इ हाल बन गई थी.. कुछ गुंडों का 3रद फ्लोर पर जाना ज़रूरी हो गया था... पारर अनगिनत गुंडों के मर जाने से सभी क hi हौसले टूट चुके थे...

एकेला शेर सभी पर भारी पड़ रहा था..

महेंद्र वापिस आया और एक सूफी पर बेथ गया.. 2ंद फ्लोर पर मौजूद लाशों को साइड में कर दिए गया था...

महेंद्र अपना सर्र पकडे बैठा हुआ था... साइड में खड़े हुए सिद्धार्त और उसके फ्रेंड्स थार थार काँप रहे थे...

जैसी तबाही मची हुई थी.. सबब के सबब hi दहशत का शिकार हो चुके थे..

थे तो सबब hi बहुत बड़े क्रिमिनल्स.. पर जैसे उन सबब की बंद एक एकेला आदमी बजा रहा था.. वो देख कर सबब की hi सिटी गुम्म हो चुकी थी...

दोनों गैंग क बच रहे लीडर बहुत अच्छे से समझ गए थे.. पोलिटिकल पावर और गुंडों के रहने से जो पावर उनकी थी.. वो 90% ख़तम हो चुकी है....

जैसी तबाही मच चुकी थी.. महेंद्र गैंग या अलोक गैंग कैसे पुरे देश की मीडिया को जवाब दे सकती थी..

पहले लड़कियों के रपे वाले काण्ड को तो छुपा लिया गया था.. या दबा दिया गया था.. पारर अब्ब उनके पास किसी क सवालों का जवाब नहीं था..

जिस पावर के बलबूते पर वो सबब अकड़ रहे थे.. वो जा चुकी थी..

गैंग क ख़तम हो जाने से अब्ब कोई भी उनकी सपोर्ट नहीं करने वाला था.. अब्ब तो सबब hi दोनों गैंग्स से अपना कनेक्शन ख़तम करने वाले थे.. अब्ब दोनों गैंग्स से जुड़ के किसी को मिलना भी क्या था.. जो खुद ख़तम हो चुके हों.. वो किसी और के क्या काम आएंगे..

बुरे धंदे में सभी अपना अपना मुफाद ढूंढ़ते हाँ.. जब्ब उनको मुफाद नज़र आना बंद हो जाएगा.. तो वो क्यों अपना पैसा और वक़्त बर्बाद करते फिरें..

कुछ ऐसा hi अब्ब दोनों गैंग्स क साथ होने वाला था.. यही सबब बातें अब्ब महेंद्र और किशन सोच रहे थे..

वीरेंदर ने महेंद्र को तोड़ कर रख दिया था.. तो किशन अलोक की वजा से कुछ कर पाने की हालात में नहीं था.. अघा का भी उसे लग रहा था.. जैसे वो अकेला hi ऊपर रह गया है.. जल्द hi उसकी मौत भी होने वाली है...

अलोक गैंग भी अघा और अलोक के बाद ख़तम हो जाने वाला था.. किशन तो सिर्फ एक गुंडा था.. गैंग का एक लीडर था.. पारर असल में बात तो अलोक और अघा की hi थी..

सबब ऐसा hi कुछ सोच रहे थे.. क अचानक से 3रद फ्लोर पार्स स्टैर्स क रास्ते गोलियों की बारिश शुरू हो गई.. गोलियां किसी की तरफ नहीं थी, सिर्फ फर्श से hi टकरा रही थीं.. पर महेंद्र.. anoop..dany..kishan सबब के सबब खुद को फर्श पर लगने वाली गोलियों से बचने क लिए भाग खड़े हुए... निचे खड़े हुए गुंडों ने जब्ब फायरिंग शुरू की तो....

mahendra..anoop..dany.. और किशन भागते भागते वही रुक गए.. उनके चेहरे पसीने से भीग चुके थे..

साले चूतिये कही के .. गैंग्स क लीडर बने फिरते हाँ.. गोलियों की आवाज़ से hi डर गए थे.. और भाग खड़े हुए..

वो भी क्या करते, दहशत का माहौल तो कबका बना हुआ था.. सिद्धार्त नाथ और उसके फ्रेंड्स फ़ौरन hi निचे फिर पड़े the.unme भागने की भी हिम्मत नहीं रही थी.... उनकी हालत देख कर लग रहा था.. जैसे सभी को लकवा मार गया हो..... उनके शरीर काँप ज़रूर रहे थे.. पारर उनकी हालत किसी परलीज़े पेशेंट क जैसे हो चुकी थी....

जब्ब ऊपर से आणि वाली गोलियों किसी की तरफ नहीं आएं.. तो सभी लम्बी लम्बी सांस लेते हुए एक दूसरे को देख कर खिस्यानी हंसी हंसने लगे....

सबब hi एक दूसरे से बढ़ कर डर गए थे....

कुछ देर बाद फिर ऊपर से गोलियों की बरसात शुरू हो गई.. तो सबब एक दूसरे को देखने लगे..... सबब अभी एक दसूरे को देख hi रहे थे.. क एक बार फिरसे अनगिनत गलियों की बरसात शुरू हो गई.... इस बार की होने वाली फायरिंग से सब्बके hi दिल देहल उठे थे.. एक साथ 4 गन्स के मैगज़ीन कहली किये जा रहे थे..

सिद्दरत और उनके दोस्त मारे दहशत क कब्ब के बेहोश हो चुके थे.. उनके दिल ने धड़कने अपनी रूटीन को छोड़ चुकी थीई.. इतनी गोलियों तो उन्हें ने कभी किसी हॉलीवुड मूवी में भी चलते हुए नहीं सुनी थीं.. ऐसी हालत तो फिर उन सबब की होनी hi थी......





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थैंक यू वैरी मच..!!

विज्जू ने अपनी बेस्ट परफॉरमेंस दी है.. अघा स्टुपिड था.. खुद को शेर समझ कर सामने आ गया और मारा गया.... जैसी हालत सब की हो चुकी है.. अब्ब किसी में विज्जू का सामना करने की हिम्मत hi कहाँ बची है.. गैंगस्टर हाँ.. क्रिमिनल्स हाँ.. पर वो सभी फेस तो फेस तो लड़ने वाले हाँ नहीं.. और विज्जू ओने मन आर्मी है
 
अपडेट ::: 88

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जैसे hi मैं 2ंद फ्लोर की सिल्ल पर कूड़ा, सिल्ल से टकराया, धप्प की आवाज़ हुई, वही रुके बिना मैं hi मई फ़ौरन खिड़की से अंदर कूद गया, हाथो को फर्श पर जमाया.. फिर लेट कर घूमता हुआ दूर होने लगा..

ये सब मैंने बहुत hi तेज़ी में किया था.. अगर कोई खिड़की के पास हो तो तो मैं उसके हमले से बच सकूँ.. इस बीच मैंने आस पास अच्छे से देख लिया था..

ये एक पेशेंट रूम था.. रूम 15 फ़ीट का था.. और रूम में दूर वाली साइड में 2 बीएड पड़े हुए थे.. और दूर रूम क राइट साइड में था..

जहाँ मैं गिरा था वो जगा खली थी.. मई जल्दी से उठ खड़ा हुआ.. दूर के पास गया, दूर को खोलने लगा, तो वो बहार से बंद था.. मैं वापिस रूम की मुदा और रूम में किसी और दूर को देखने लगा.. दूर तो कोई और भी नहीं था..

एक आत्ताच बाथरूम था, मैं बाथरूम में घुस गया.. बाथरूम में भी कोई और दूर नै था रूम से बहार जाने क लिए... मैं वापिस आया और बीएड पर बीएड पर बेथ कर बैग को उतार कर अपनी गॉड में रख दिया.. फिर बैग को खोल कर देखने लगा.. उसमे क्या कुछ है... जो मेरे काम आ सके..

मुझे दूर खोलना था. बाथरूम में एक एक साइड में ऊपर करके 1.5क्ष2.5 फ़ीट की एक जाली लगी यही थी.. मुझे दूर को तोडना था, जाली को तोड़ क्र या जाली को खोल कर बहार जाना था.. और ये सबब मुझे जल्द से जल्द करना था..

कहीं ऊपर से जवाब न मिलने की वजा से वो ऊपर जा पोहंचे और मुझे ऊपर न पा क्र वो फिरसे सोचने लगें क मैं कहीं निचे तो नहीं आ गया.. और वो सब फिरसे 3रद फ्लोर पर पोहंच आकर खुद को सुरक्षित करलें..

मई किसी को अपने लाइन ऑफ़ एक्शन क बारे में जान्ने नहीं देना चाहता था.. मुझे सबब जल्द से जल्द करना था..

मैं डबल गेम खेल रहा था. तो वो भी दिवुब्ले गेम खेल सकते थे..

मेरे पास टाइम नहीं tha...bag में मुझे अम्मुनितिओं क शिव कुछ नहीं मिला.. मुझे क्या पता था, क मुझे कोई खिड़की भी खोलनी पड़ेगी..

मेरा ये मिशन तो बहुत hi फ़ास्ट था.. कही भी रुके बिना सिर्फ सामने आने वाले को मारना था.. मैंने तैयारी भी उसी हिसाब से की हुई थी..

बैग को फिरसे बंद किया.. पिस्तौल और मैगजीन्स को ले कर भी सबब तैयारी की और दूर को तोड़ने का फैसला कर लिया.. बाथरूम क रस्ते टाइम ज़यादा लगेगा.. और मुझे टाइम को बचते हुए सबब करना था..

सबब मुझसे दहशतज़दा तो पहले से hi हो चुके थे.. मुझे उन सबब को और भी दहशत ज़ादा करना था.. वो कोई भी स्टेप सही से न ले सकें.. उन सब की दहशत से hi मुझे फायदा उठाना था..

मैं ये सबब सोच hi रहा था क मुझे दूर क पास किसी क आने की आहात सुनाई देने लगी.. मैं जल्दी से उठ खड़ा हुआ और पिस्तौल को हाथ में थम क इक साइड में खड़ा हो गया.. जहाँ से अंदर आने वाला मुझे देख न पाए...

दूर खुला और एक गुंडा अंदर दाखिल हुआ.. उसकी मशीन गन उसके कंधे से लटकी हुई थी.. और वो रूम में आते hi सीधा बाथ्ररोम की तरफ बढ़ने लगा..

जब कोई और मुझे नहीं दिखा तो मैंने पीछे से hi उसके सर्र में गोली मार दी..

वो धदममममम से नीचे गिरता.. उससे पहले hi मैंने उसे जा कर थाम लिया... वर्ण उसके गिरने से अच्छी खासी आवाज़ होती.. और सबब को hi पता चल जाना था.. क अंदर कुछ लोचा हो गया है..

मैंने उसकी गन उठाई.. वो हलकी मशीन गन थी.. और एक बड़ा मैगज़ीन उसमे लगा हुआ tha..jitni गोलियां उसमे थी.. वो सही से चलने पर आधे से ज़यादा गुंडों को ऊपर पुहंचने क लिए काफी थीं..

गन हाथ में आई तो मैंने सोच लिया क अब्ब पिस्तौल को छोड़ कर एक बार गन से hi सबब की बांड बजता हों.. गन की फायरिंग से सबब अच्छे से दहशत ज़ादा हो जाएंगे..

गुंडे की लाश को मैंने बाथरूम में पोहंचा और बाथरूम का दूर बहार से बंद कर दिया.. रूम क दूर क पास आ कर दूर को थोड़ा सा खोला.

बहार नज़र दौड़ा कर एक नज़र देखा..

ओह्ह्ह्ह कुछ hi फासले पर गुंडे खड़े हुए थे.. शुक्र है बच गया.. साले सबब के सबब hi स्टैर्स की तरफ गन्स किये खड़े हुए थे..

पास में hi एक बड़ा बॉक्स भी पड़ा हुआ था.. जिसमे अम्मुनितिओं भरा हुआ था.. बम का यहाँ कोई काम नहीं था.. साले पूरी तैयार ी किये हुए थे.. ये एक हॉस्पिटल था और यहाँ जुंग जैसा सामान ले आये थे...

बहार मीडिया आई हुई थी. और अंदर हॉस्पिटल में गुंडे भयंकर वेपन्स लिए घूम रहे थे.. गैंगस्टर्स को कितनी छूट दे दी जाती है... सबब hi अपनी मर्ज़ी करने लगते हाँ.. पावर मिलते है.. तो सबब पर hi हुकूमत करने लगते हाँ..

वर्ण जितना एमुनिशन इनके पास था, हुकूमत को चाहिए इन सभी गुंडों को hi रोड पर एक साइड में खड़ा करके एक साथ hi सबब को शूट कर दिया था.. और गंस्टर्स जो गुंडे पालते हाँ.. उन गंगस्टस को बीच सड़क पर बाँध कर उसके ऊपर से रूलर्स गुज़ार दिए जाएँ.. ऐसा हशर होने से फिर जल्द hi किसी में इतनी हिम्मत नहीं आएगी.. गैंग बना कर आम लोगों पर हुकूमत करें.. उनका पैसा लूटें.. उनकी इज़्ज़तों से खेलें..

दूर मैंने थोड़ा सा hi खोला था.. इससे पहले क एक गुंडे के कम् होने का एहसास किसी को हो.. मुझे सबब को hi मार गिरना होगा..

पारर मैं पहले बाकी के सभी को भी देख लेना चाहता था.. मेरे लेफ्ट साइड में स्टैर्स थीं तो मैंने राइट साइड में नज़र घुमाई.. तो मुझे वहां बाकी के भी सबब दिख गए.. जो सुफोन पर बैठे हुए थे.. सबब hi अपने सुफो पर सर्र टिकाये हुए हॉस्पिटल की छत को घूर रहे थे.. कही छत फॉर कर मुझे तो नहीं 3रद फ्लोर पर देख रहे थे.....

मैंने गन पर अपनी पकड़ मज़बूत की.. और फिर उसे स्ट्रिस के पास खड़े हुए गुंडों की तरफ सीधा करके ट्रिगर दबा दिया....

tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad...tad.

की आवाज़ गूंजी और वो सभी गुंडे जो स्टैर्स की तरफ देख रहे थे.. पीछे से आयने वाली गोलियों से एक एक करके ढेर होने लगे.. उनके जिस्मो में अनगिनत सुराख़ बनने लगे... खून की नदियां बहने लगीं... वो 15 क करीब थे.. सबब के सबब hi ढेर हो गए थे...

कुछ सेकण्ड्स तक्क मशीन गन की फायरिंग ने पुरे फ्लोर का नक्शा hi बदल कर रख दिया था.. हॉस्पिटल की दीवारें खून से रंगी जा चुकी थीं..

मैंने गन फेंकी और झट से दोनों हटो में दोनों hi पिस्टल्स थाम लिए.. और दूर को एक झटके में पूरा खोल कर बहार निकल आया...

और भागते हुए इक साइड में छुप गया.. मुझे लिफ्ट वाली साइड से गुंडों के भाग कर आने की आवाज़ें सुनाई दीं.. मैं उन्हें देखने लगा..

वो 3 थे..

मैंने उनके कुछ समझने या कुछ करने से पहले hi गोलियों से उड़ा दिया.. वो भागते भागते hi धदममम से ढेर से हो गए...

गैंग्स क बड़े गोलियों के चलते hi नीचे फर्श पर गिर पड़े थे... और अभी तक्क उसी हालत में थे..

हरामज़ादे, गोलियों के चलने की दिशा को नहीं देखा किसी ने.. सबब hi खुद को बचने क लिए नीचे लेते गए थे.. स्टुपिड गुंडे वहां लेट कर कैसे कोई बच सकता था.. सबब यहाँ से भाग कर बच सकते थे.. गन की फायरिंग को देखना चाहिए था.. क कहाँ से हो रही है.. किसी ने ये जान्ने की कोशिश नहीं की क मौत जो उनके सर पर ाँ पोहंची है.. उससे से बचने के लिए भी कुछ किया जाना ज़रूरी है या नहीं... गोलियों की आवाज़ से बच कर सबब समझने लगे थे .. क वो अब्ब सेफ हाँ...

कैसे क्रिमिनल्स थे.. सबब क सबब... पारर वो भी क्या करें.. कल रात से hi तो मैंने उनकी माँ छोड़ी हुई थी.. जब्ब भी कुछ रेस्ट करने लगते थे मैं उनकी माँ की कभी छूट, तो कभी गांड फाड़ने में लग जाता था..

सबब क hi हाथ उनके सरों पर थे.. वो उनके सर्र हाथों समेत नीचे थे..

दोनों ाहतो में पिस्तौल लिए मैंने नीचे फर्श पर लेते हुए गैंग्स क लीडर्स को एक एक करके मारना शुरू कर दिया.. और इस काम में मुझे कोई टाइम नहीं लगा...

जैसे जैसे किसी को गोली लग रही थी.. वो चीखने लगता था.. और चीखों को सुन कर सभी अपना सर्र उठाये हुए इधर उधर देखने लगे थे.. पर मैं किसी से फर्क किये बिना hi एक एक करके सभी को hi ऊपर भेज रहा था..

कुत्तों का ऊपर कोई काम तो था नहीं.. पर कही और भेजने की जगा भी तो नहीं था.. ऊपर भगवन खुद hi गुंडों को फैसला कर lenge..unko कहाँ रखना है..

पहले अघा की एक गोली से मैं ज़ख़्मी हो चूका था.. अब्ब मैं खुद क साथ ऐसा नहीं होने देना चाहता था.. मैं नीचे लेते हुए सभी को मार भी रहा था.. तो कही से आने वाली अंधी गोली पर भी धयान रखे हुए था...

dany,anoop और किशन को मैंने फ़ौरन hi मार दिया tha.kisi को ज़िंदा रख कर करना भी क्या tha..police को देता तो वो फिरसे बहार आ जाते....

महेंद्र ने सर्र उठाया तो उसकी शकल देख कर उसे पहचानते hi मैंने महेंद्र क हाथो और पैरों पर फायर कर दिए थे... कुछ फासले पर मुझे सिद्धार्त और उसके फ्रेंड्स बेहोशी की हालत में पड़े हुए दिखे थे..

जब्ब सबब हो गया तो .........

मैंने फोन निकाल कर पापा को कॉल कर दी.. और सबब "फिनिश हो चूका है" बोल दिया...

कुछ देर में वो सबब यहाँ पोहचने वाले थे..

मैं एक नज़र फिरसे पुरे फ्लोर को देखने laga.koi अगर अगर साँसे ले रहा था तो मैं उसे उन उखड़ी हुई साँसों से मुक्त करने लगा...

अंदर रूम्स भी चेक करने लगा.. तो मुझे एक hi रूम्स में अलोक और जीतेन्द्र बीएड पर बेहोश पड़े हुए दिखे.... उनक इलाज चल रहा था... मरने वाले को इलाज की क्या ज़रूरत.....

2 डॉक्टर्स इक साइड में खड़े थार थार काँप रहे थे... मैंने डॉक्टर्स को कुछ नहीं कहा..

अलोक और जीतेन्द्र को सर्र में दो दो गोलियां मार दीं.. बेहोशी में दोनों को मारना मुझे अच्छा तो नहीं लगा था.. पारर सांप को कभी भी मौका नहीं देना चाहिए, इसलिए मैंने दोनों को hi शूट कर दिए था.. जीतेन्द्र तो बचने वाला था नहीं.. और अलोक के रिलेशन्स उसके काम आ सकते थे.. बाद में किसी किसम की प्रॉब्लम क्रिएट न ho.isliye मुझे दोनों को मारना hi पड़ा था..

डॉक्टर्स दोनों क सर्र में गोलियां घुसते देख कर hi कांपते हुए गिर गए थे..

मैं वापिस हाल में आया और एक सूफी पर बैठ गया.. मैंने सिद्धार्त और उसके फ्रेंड्स को अच्छे से देख लिया था.. वो जल्दी होश में आने वाले नहीं था..

महेंद्र सिंह भी दर्द को सहन न करते हुए बेहोश हो चूका था.. इस फ्लोर पर भी 25 क करीब लाशें पड़ी हुई थीं...

10 मिंट में hi मुझे कॉल आने लगी, कॉल पापा की थी..

कुछ देर मुझसे बात हुई, और फिर जल्द hi पापा और कम मेरे पास पोहंच गए.

मेरे पास आते hi पापा ने और कम ने मुझे गले से लगा लिया..

पापा:- बहुत अच्छे विजय बीटा.. तुमने सबब बहुत बढ़िया से किया है. i'm प्राउड ऑफ़ यू माय सोन..

कम:- विजय बीटा वेल दोने... कम मुझे कंधे पर थपकी देने लगे... दोनों ने मेरे ज़ख़्मी बाज़ो को देख लिया था.. पर ये नहीं कहा था..

अरे बीटा तुम गोली लगी है.. और पापा ने दुःख या दर्द का इज़हार नहीं किया था.

देश की सेवा पर बधाई दी जाती है.. न क दुःख का इज़हार किया जाता है.. मेरे पापा भी तो एक शेर hi थे.. मुझे बहुत ज़यादा सराहा था उन्हों ने.. ऐसी जुंग लड़ने वाले तो अनगिनत गोलियों का शिकार हो जाते हाँ. मुझे तो फिर भी एक गोली छूती हुई गुज़र गई थी..

विजय:- पापा सिद्धार्त और उसके दोस्तों को पैलेस में पोहंचा दीजियेगा.. और अब्ब मैं चलता हों... वैसे आपने बहार क्या बताया है मीडिया को..

पापा:- (कम को देखकर हस्ते हुए) यही क अंदर टेररिस्ट घुसे हुए थे.. और दोनों गैंग्स मिलकर टेर्रोरिस्ट्स को सपोर्ट कर रहे the..kal रत भी यही कुछ हुआ था.. पर तब्ब सबब को अहिस बात नहीं बताई गई थी.. अंदर चल क जल्द hi सबब को वेपन्स दिखा दिए जायेंगे.. वेपन्स देख कर आप सबब समझ जायेंगे.. क किसी गैंग क पास ऐसे खतरनाक हथियार क्यों कर मौजूद हाँ.. हॉस्पिटल में ऐसी हथियार लेकर किसी को आने की इजाज़त कोई कानून नै देता.. कल रात से hi दोनों गैंग्स ने मिल कर पुरे एरिया में ख़ौफ़ो ह्रास पहला रखा है.. उसी को ख़तम करने क लिए ये सबब किया गया है..

कम भी पापा की बात सुनकर हस्सन लगे... मैं कुछ देर वही खड़ा रहा.. फिर लांड्री क रास्ते हॉस्पिटल से बहार निकल गया...

यहाँ अब्ब मेरा कोई काम नहीं रहा था.. पैलेस में पोहंच कर hi अपने मई ज़ख़्मी बाज़ो का कुछ करने वाला था....




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5 बजने वाले थे जब्ब मैं पैलेस पोहंचा....

मई सीधा अपने रूम में गया.. सबब अभी सो रही थी.. मैंने एक नज़र सबब को देखा और फिर बाथरूम में घुस गया..

अपने बाज़ो को बचते हुए मैं नहाया और फिर नंगा hi बहार आ गया.. पानी गिरने की आवाज़ से माँ उठ गयी थी.. मुझे देख कर

माँ:- आ गया मेरा पायरा बीटा.... कब आया, और ये तेरे बाज़ो पर चोट.. गोली तो नहीं लगी तुझे विज्जू बीटा.. माँ एकदुम्म से hi बीएड से नीचे कूद गई और भाग कर मेरे पास आ गई...

माँ मेरे बाज़ो को टटोलने lagi..maine अपनी पट्टी उतार दी थी. खून अभी भी नहीं रुका था.. पारर उसका बहाओ अब्ब कम् हो गया था..

माँ:- विज्जू बीटा तेरा बाज़ो तो बहुत घायल हो चूका है..

विजय:- माँ कुछ नहीं हुआ मई ठीक हों.. बास थोड़ी सी hi तो चोट लगी है..

maa:-(namm आँखों में मुझे दहकती hui)ye थोड़ी सी चोट है.. इतना बड़ा ज़ख़्म बना हुआ है. कितना गहरा घाव आया है मेरे विज्जू को..

तीनो तिलतलियाँ भी माँ क बीएड पार्स उछलने से कुछ हिल गई थीं. उसकी नींद भी टूट गई गई.. सूबा भी होने वाली thi.kuch देर में वैसे hi तीनो उठने वाली थी... फिर माँ के बोलने से वो तीनो hi पूरी तरह से उठ चुकी थी.. माँ को और मुझे देखते hi वो तीनो भी बीएड से नीचे उतर कर हमारे पास आ गईं..

माँ को आंसू बहते हुए और फिर मेरे बाज़ो को देखते हुए वो तीनो भी देहल उठी..

तीनो:- ?विज्जू ये खून क्यों निकल रहा है.. तुम्हे गोली लगी है क्याआ ?

चरों hi मुझे ज़ख़्मी देख कर तड़पने लगी थीं..

विजय:- देखो जहाँ मई गया था.. वहां तो ये सबब होना hi था.. फिर मुझे चोट भी तो ज़यादा नहीं लगी है ना... गोली बास छूटे हुए गुज़र गई है..

क्या तुम चरों hi ऐसे आंसू बहती रहोगी.. अभी तो मुझे और भी कितनी चोटें आएँगी.. क्या हर बार ऐसे hi आंसू बहाओगी..

माँ:- विज्जू बीटा, तुम भी सही कह रहे हो.. पर तुम हमारे सामने आज पहली बार चोट खा क आये हो.. तो खुद से कण्ट्रोल नहीं हुआ..

विजय:- माँ रेखा बाई भी तो मुझे कितना मारा करती थीं.. तब्ब भी तो आप सबब बर्दाश्त कर लिया करती थी ना. तो अब्ब भी आप सबब बर्दाश्त करलें...

प्रिय:- विज्जू वहां हमसे कब्ब सहन होता था.. वहां तो हम मजबूर थी.. वहां जब्ब भी तो तुम्हे चोट लगती थी, तो दिल तड़प जाता था.. पर वहां किसी क दर्द को देख कर छुप छुप कर रोना पड़ता था..

श्रुति:- हाँ विज्जू प्रिय सही बोल रही है.. वहां की बात और थी..

जहान्वी:- विज्जू दर्द तो हमे हर बार hi होगा ना. हम सबब एक hi तो हाँ.. किसी एक को चोट लगेगी तो दर्द सबब को एक जैसा hi होना है ना..

विजय:- हाँ, बास दर्द को महसूस तो किया जा सकता है, पारर ऐसे रियेक्ट नहीं करना आज क बाद.. आप सबब को मेरी hi तरह से मज़बूत बनना है.. तुम सबब जानना नहीं चाहोगी मैंने अपना मिशन पूरा किया है या नहीं..

माँ:- विज्जू बीटा, तुम यहाँ हो तो इसका मतलब सिर्फ एक hi है ना, क तुम सबब ख़तम करके ए हो.. मेरा बीटा कभी कोई काम अधूरा छोड़ता है क्या..

मैंने माँ को गले से लगा लिया.. माँ एक पतली और शार्ट निघ्त्य पहनी हुई थी.. जो माँ के आधे चूतड़ों को hi छुपाये हुए थे.. बाकी की तीनो तो ब्रा और शॉर्ट्स में थी.. वो भी लूसे....

एक हिसाब ने चरों नंगी hi सुई थीं.. जैसे कपडे पहने थे.. सोते हुए तो सारे hi इधर उधर हो जाते हाँ..

vijay:-maa आप सही कह रही हाँ, आपके बेटे ने मिशन पूरा कर लिया है.. आप सबब को मई डिटेल में बताओगे.. पहले आप सबब फ्रेश हो जाएँ.. और ड्राइंग रूम में बैठ कर सबब डिटेल में बात करते हाँ.. वही न्यूज़ भी देख लेंगे....

माँ:- हाँ ये ठीक रहेगा विज्जू बीटा..

विजय:- माँ ये निघ्त्य पहले कभी नहीं देखि मैंने..

माँ:- विज्जू बीटा, अभी हमने टाइम hi कितना बिताया है साथ में.. अभी तो मेरे पास बहुत सी कलेक्शन है तुम्हे दिखने क लिए...

माँ की निघ्त्य को पीछे से ऊपर करते हुए मैंने अपने हाथ माँ क चूद्दार पर रखने लगा.. माँ ने निचे बिलकुल hi छोटी सी पंतय पहन राखी थी.. जो माँ की गांड की दरार में फँसी यही थी.. माँ के पुरे चुत्तड़ hi नंगे हो गए थे... मैं माँ क दोनों चूतड़ों को सहलाने लगा... माँ की पंतय को खेंच कर माँ की गांड को रात से सही से हवा नहीं लगी थी.. माँ की गांड को खुलने से पहल फ्रेश हवा ले लेनी चाहिए थी...

सेहत अच्छी होगी तो खुलते समय उसकी सहन शक्ति बढ़ जाएगी..

विजय:- माँ ऐसे रात में ऐसे दिलों को हिला देने वाले गेटउप में किश लिए सो रही थी.. मई तो था नहीं.. फिर किश को अपने जिस्म क हसीं नज़ारे दिखाने के लिए ये सबब पहन रखा है..... इतने मस्त चुत्तड़ तो पूरी रात यह नंगे रहे होंगे ना....

मेरी बात सुनके माँ ने मेरे गले को चूम लिया.. और बाकी की तीनो हस्सन लगी.

प्रिय:- विज्जू माँ तुमसे छोड़ने क बाद से बहुत ज़यादा चेंज हो गई हाँ.. पता है रात माँ हमसे फ्रेंड्स क जैसे बर्ताव कर रही थी.. माँ ने अपनी जवानी की बातें बहुत hi मिर्च मसाला लगा कर बताई theeen..jaise हम माँ की जवानी की बेस्ट फ्रेंड्स हों.... अपनी अर्ली आगे की बातें माँ ने बड़े मज़े ले ले बाते हाँ हम तीनो को..

janvi:-(maa के साइड से एक बूब्स को दबा कर) विज्जू माँ ने जो प्यार पूरी रात तुमसे वसूल किया है ना. तो माँ के अंग अंग में बिजलियाँ सी भर गई हाँ.. माँ का बास चले तो माँ सबब को hi बताती फिरें क वो कितनी खुश हाँ..

विजय:- अच्छा मेरी माँ इतना खुश है.. मेरे प्यार से ...

shruti:-aur नहीं तो क्या.. माँ को खुद से अलग करके माँ क चेहरे की चमक देखो. तुम्हे सबब पता चल जाएगा..

मैंने माँ को खुद से अलग किया, और फिर माँ का चेहरे देखना लगा.. माँ मुझे hi निहार रही थीं.. माँ की आँखों की चमक किसी अंधेरी रात में सब्बसे ज़यादा चमक रहे तारे से भी ज़यादा थी.. माँ की आँखों में इन्तहा की शान्ति और प्यार दिख रहा था.. एक सुकून की इन्तहा दिख रही थी माँ की आँखों में.. जैसे माँ ने वो सबब पा लिया हो, जो उसके दिल की हसरत थी..

माँ:- मेरा विज्जू है hi इतना पायरा.. जो भी उसका प्यार प् ले उसके अंदर सकूँ का एक समंदर सा उतर जाता है.. मेरी तरह से तुम तीनो भी तो विज्जू क प्यार में मेरी hi तरह से पागल हो ना.. तो फिर डिटेल की क्या ज़रूरत है.. चलो अब्ब सबब hi तैयार होकर ड्राइंग में पोह्न्चू... मई विज्जू के बाज़ो की ड्रेसिंग करती हों..

विजय:- माँ मई करलूँगा ना.. आप भी तीनो क साथ hi फ्रेश हो जाएँ..

माँ:- कहा ना नहीं, मैं अपने हाथो से hi करूंगी..

तीनो बाथरूम में घुस गई और माँ मुझे लिए हुए बीएड की तरफ बढ़ गईं.. माँ ने मुझे वहां बिठाया और बहार जा कर फर्स्ट अिध बॉक्स ले आएं.. और आते hi मेरे ज़ख्म को ट्रीट करने लगीं..




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आधे घंटे बाद हम सबब hi ड्राइंग रूम में बैठे थे.... लेद टीवी पर न्यूज़ फ़्लैश हो रही थी.. और मैं सबब को hi शार्ट डिटेल में अपने मिशन क बारे में बता रहा थे.. गोली मेरे लेफ्ट बाज़ो में लगी थी.. माँ मेरी राइट में बैठी थी..

जहान्वी मेरे लेफ्ट साइड में थी.. तो प्रिय और श्रुति दोनों साइड क सूफी पर बैठी हुई थीं..

मैंने एक निक्कर पहनी हुई थी.. ऊपर से मई नंगा hi था..

मैंने अपने राइट हैंड को घुमा कर माँ की शर्ट में गले वाली साइड से डाला हुआ था... माँ ने एक ट्रॉउज़र और खुली शर्ट पहनी हुई... अभी माँ ने ब्रा नहीं पहनी थी.. कुछ देर में hi सबब वापिस रूम में जा कर ब्रेकफास्ट क लिए तैयार होने जाने वाली थीं..

अभी हम बास कुछ टाइम स्पेंड कर रहे थे.. मेरे हाथ में माँ का एक बूब्स था और मैं माँ के बूब्स को दबा रहा tha..mission करके मई थका हुआ था और माँ का लम्स पा आकर मैं अपनी थकन मिटाना चाहता था... ..

अभी कोई नहीं उठा था.. उठने का टाइम हो रहा था.. और किसी क आने से पहले मैं माँ से कुछ प्यार करना छह रहा था... मैं माँ के उन्ही बूब्स को अपने हाथ में लिए हुए महसूस कर रहा था.. जिसका दूध पि कर मैं बड़ा हुआ था.. सालों तक मेरी हुकूमत इन्ही बूब्स पर रही थी.. आज एक बार फिरसे मैं माँ क बूब्स से खेलते हुए माँ को और बाकी तीनो को अपने मिशन की डिटेल बता रहा था..

माँ कभी कभी मेरे चेहरे को घुमा कर, मेरे होंटो पर तो कभी मेरे गालों पर किश कर दिया करती थी. जहान्वी मेरे पेट को सेहला रही थी.. और प्रिय और श्रुति मेरी बातें सुन कर मुझे माँ से मस्ती करते हुए और जहान्वी को मुझसे मस्ती करते हुए भी देख रही थीं...

डिटेल बताते 20 मिंट लग गए थे.. इस बीच माँ के बूब्स से भी खेलता रहा था...

जब्ब साड़ी देतीअल ख़तम हुई तो..

माँ:- (मुझे अच्छे से होंटो पर किश करते hue)waah मेरे विज्जू ने तो कमल कर दिया.. इतने गुंडों को अकेले hi मार गिराया..

प्रिय:- हमारा विज्जू है hi कमल का माँ...

श्रुति:- (चहकते हुए) हाँ माँ हमारा विज्जू कमाल और धमाल दोनों में hi नंबर ओने hai...(shuruti का इशारा चुदाई की तरफ था) श्रुति की बात से सबब hi हस्सें लगे...

माँ:- विजू बीटा किसी भी लम्हे मालती आती होगी.. अब्ब तो मेरे बूब्स को छोड़ दे.. क्या आज hi सारा दूध निकाल लेगा.. कुछ बाद के लिए भी तो बचा ले..

माँ की बात से सबब हस्सन लगी..

मैं माँ के दूध को अपनी पांचू उँगलियों में कस्ते हुए बोलै..

विजय:- जब मैं छोअ था, तब्ब सालों तक इनमे दूध ख़तम नहीं हुआ था.. अभी तो कुछ hi मिनट्स हुए हाँ.. अभी तो दूध जमा होना शुरू हुआ है.. निकलना तो अभी बाकी है.. ख़तम होने की बात तो बहुत दूर है..

जहान्वी:- हाँ विज्जू माँ का दूध कभी अपने बच्चों क लिए ख़तम नहीं होता..

प्रिय:- विज्जू मेरे लिए भी बचा लेना..

कोई कुछ और बोलता भाभी क आने की आहात सुनाई दी.. इतनी जल्दी एक वो hi उठती थीं.. बाकी सबब बाद में hi उठते थे.. मैंने माँ की मानते हुए माँ का दूध छोड़ diya...maa की शर्ट से हाथ निकला और भाभी को आते हुए देखने लगा..

माँ से मेरा प्यार सबब hi जानती थीं.. और आने वाले समय में बाकी सबब भी जान जाते.. पर माँ की रेस्पेक्ट तो सबब के सामने करनी hi थी.. माँ बीवी बनना चाहती थी मेरी.. वो अलग बात है..

माँ को कुछ हट के फील हो ये मेरे लिए सही नहीं था...

भाभी आते हुए मुझे देख कर खुश हो गईं..




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थैंक यू वैरी मच डिअर..!!

एक्शन हो या सेक्स वो सन और कंडीशंस क हिसाब से होता है.. मिशन कुछ ज़यादा डिटेल में चला गया था.. पर वो सबब डिटेल में बताना भी सही था.. मैंने

2-3 बेस को बैस्ट करने की डिटेल भी तो हाईड कर ली थी.. फसत फारवर्ड से कुछ रीडर्स को मज़ा नहीं आता.. माय स्टोरी इस फॉर माय आल रीडर्स .. मुझे सब के लिए सोचना पड़ता है.. मैं ये सबब दिल से आप सबब क लिए लिखता हों.. थैंक्स फॉर योर सुग्गेस्टिव.. ऐसे hi सुग्गेस्टिव आगे राइटर क बहुत काम आते हाँ..

मुझे आपके जान कर अच्छा लगा... मुझे सॉरी कहने की कोई ज़रूरत नहीं है डिअर.. आपको कुछ भी कहने की परमिशन है..

ी ऍम लुकिंग फॉर योर एव्री काइंड ऑफ़ सुग्गेस्टिव.. योर सुग्गेस्टिविस बेटर फॉर में एंड माय स्टोरी...

बंडल ऑफ़ थैंक्स फॉर योर लवली सुग्गेस्टिव एंड कमेंट
 
अपडेट ::: 89

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मैंने माँ के बूब्स पार्स हाथ को हटा कर माँ की शर्ट से तो निकाल लिया था, पर मैंने अपना हाथ माँ से नहीं हटाया था.. मैंने अपना हाथ ऊपर उठा कर माँ के बालों से खेलना शुरू कर दिया था. अभी मेरा माँ से मैं नहीं भरा था...

सेक्स की भूक तो मुझे माँ से थी नहीं.. बल्कि मुझे किसी से भी सेक्स की भूक नहीं थी, प्यार hi प्यार था.. सभी को मुझसे, तो मैं क्यों सभी से सेक्स वाली फीलिंग्स रखता.. प्यार था तो प्यार hi देना था, और प्यार hi पाना था..

अब्ब वक़्त आया था, हम सबब की लाइफ में, जब्ब हम सबब एक हुए थे, तो अब्ब हम सबब hi एक दूसरे क प्यार को पूरी तरह से महसूस कर लेना चाहते थे.. सालों की तड़प को मिटा लेना चाहते थे.. मैं माँ से कई घंटे दूर रहा था.. मिशन पूरा करके मई मेंटली तौर पर थक भी गया था...

जुंग लड़ने से थकन हो या न हो, पर जब्ब आप के हाथो लाशों क ढेर लग जाएँ, अनगिनत लोगों का खून बहे, तो मेंटली थकन ज़रूर हो जाती है...

वो गैंगस्टर थे, क्रिमिनल्स थे, घटिया करैक्टर के मालिक थे, अक्सर उनमे रेपिस्ट थे...... पर थे जो इंसान hi..

सबब क सबब hi बुरे थे.. सबब को मारने का हक़ मुझे नहीं था.. पर जो समाज क लिए गंदगी बन जाएँ.. मासूमो से जीने का हक़ छीन लें, उन्हें मारना तो फिर पड़ता hi है....

खून बहा कर तबियत मचलने सी लगती है... इतना खून मैंने पहले कभी बहाया भी तो नहीं था.. इन कुछ hi दिनों में मैंने अनगिनत लोगों का खून बहा दिया था..

मेंटली थकन तो होनी hi थी... और माँ से बेस्ट कौन ऐसा हो सकता है.. जिसके लम्स से मई अपनी वो मेंटली थकन उतार सकता.. माँ का लम्स hi होता है, जो अंदर और बहार से पूरी तरह से शांत कर देता है.. और मैं वही सबब कर रहा था... मा क नरम बूब्स को दबा कर मुझे बहुत सुकून मिला था. माँ के नरम और कुछ कुछ गरम बूब्स को दबाने से मेरे अंदर एक लेहेर सी दौड़ जाती थी... मेरे हाथ की उंगलियां माँ क सोटफ बूब्स को बहुत अच्छे से फील कर रही थी.. मेरी आंगलियां माँ क बूब्स की हॉटनेस को खुद में परोये मेरी नसें में दौड़ा रही थीं... उसे से मुझे शान्ति मिल रही थी.. माँ क निप्पल की हलकी हलकी सख्ती मुझे एक अलग सुकून दे रही थी.. नहाने से माँ की पूरी से hi खुशबु की बरसात होने लगी थी.. माँ क शरीर की खुशबु को मई सांस ले कर खुद के अंदर उतार रहा था.. माँ क बूब्स की खुशबू मेरी उँगलियों मेरे अंदर उतार रही थीं... माँ क साथ ऐसा सबब करने से मेरा मैं हल्का होना शुरू हो गया था...

मई बहुत हद्द तक्क शांत हो गया था.. पर अभी मुझे माँ के लम्स की, माँ की ममता की ज़रूरत थी..

भाभी आ गई थी.. तो भाभी की रेस्पेक्ट भी ज़रूरी थी.. माँ तो मुझमे समाई हुई hi thi..jhanvi ने मेरे पेट से हाथ नहीं हटाए थे.. वो जो कर रही थी, वो सबब नार्मल बात थी... और फिर भाभी भी तो ऐसे hi माहौल की हिस्सेदार बन्न चुकी थी.. भाभी भी तो मेरा लुंड लेने वळून की लिस्ट में शामिल थीं..

उन्हें इस सबब से क्यों परेशानी होने लगी.. और किसी को भाभी के आने से खुद को रोकने की क्या ज़रूरत थी.. पर मैं जो माँ क साथ कर रहा था.. वो भाभी के सामने नहीं करना चाहता था.. इसलिए मैंने माँ का बूब्स छोड़ दिया था..

भाभी पास आई, वो मुझे देख कर खुश हो गईं.. भाभी नाहा कर आयी थी..

पहनी हुई शर्ट आधी से ज़यादा गीली हो चुकी थी.. भाभी शायद ये सोच कर आई थी क इस टाइम तो कोई उठता नहीं है तो उसे इस हाल में कौन देखेगा..

वो मस्त नज़ारा लिए हुए hi किचन में आ गई थीं..

भाभी की ब्रा उनकी शर्ट से साफ़ दिख रही थी.. शर्ट आधी से ज़यादा उनके बदन से चीपजकि हुई तो भाभी क जिस्म का ज़यादा तर हिस्सा साफ़ दिखाई पद रहा था..

पीछे से क्या हाल है, वो मुझे नहीं दिखा.. ज़रुरु भाभी की गांड की दरार ने उनका ट्रॉउज़र भी फंसा होगा...

पैलेस में आ कर सभी मस्त माहौल में जीने लगी थीं... हर कोई खुद को आज़ाद समझ कर भरपूर तरीके से लाइफ को एन्जॉय कर रहा था...

भाभी....... लुकिंग सो हॉट एंड सेक्सी...

पर अभी मेरा लुंड भाभी को ऐसे देख कर खड़ा होने क मूड में नहीं था... भाभी पास आएं तो मैं उनसे मिलने क लिए खड़ा नहीं हुआ... मुझे इस वक़्त माँ की ज़यादा ज़रूरत थी, तो मैं इस टाइम मतलबी हो आया था... हहहहहहए

और माँ से जुड़े हुए सभी को hi मतलबी होना चाहिए... किसी से मिलने क लिए माँ को छोड़ने की क्या ज़रूरत है भला..

मुझे खड़ा होता न देख कर जहान्वी कड़ी हो गई और भाभी को बैठने की जगा दे दी..

भाभी आते हुए मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी.. और मैं भी माँ के बालो से खेलता हुआ भाभी को देख कर मुस्कुरा रहा था..

भाभी आ कर मेरे पास बैठ गई. और

भाभी:- तुम कब्ब ए विज्जू.??

विजय:- अभी कुछ देर हुई आया हों भाभी...

भाभी की नज़र टीवी पर चल रही न्यूज़ पर पड़ी तो

भाभी:- ोोोू तो तुम अपना मिशन पूरा कर आये.. और ये बाज़ो पर पट्टी.. मतलब तुम्हे भी कुछ चोट आई है............ भाभी मेरी पट्टी को ग़ौर से देखते हुए बोली..

विजय:- हाँ मिशन पूरा हुआ.. और ऐसे मिस्शन में चोट तो फिर बनती hi है.

भाभी:- हाँ ये तो है.. चोट तो बनती hi है.. पर ख्याल रखा करो अपना.. पहले भी एक बार गोली खा चुके हो.. खुद का और हम सबब का ख्याल रखा करो. ये साड़ी रौनक देख रहे हो, ये सबब तुम्हारे hi दुम्म से है.. तुम्हे कुछ हो ये किसी से बर्दाश्त नहीं होगा...... भाभी मेरे बाज़ो को पर उँगलियाँ चलते हुए बहुत hi प्यार से बोलीं..

विजय:- भाभी मैं भी सबब समझता हों.. और मैं भी तो प्यार भरी ज़िन्दगी आप सबब क साथ बिताना चाहता हों. मुझे कुछ हो, ये तो मई भी नहीं चाहता.. अब्ब तो मैं हर दुम्म hi खुद को सेफ रखने की कोशिश करता हों.. भाभी सामने टीवी पर देखें, वहां पूरी डिटेल बता रहे हाँ... अनगिनत गुंडों को मैंने टपकाया है.. आखिर वो सबब भी तो मंझे हुए क्रिमिनल्स थे.. मुकाबला तो सख्त होना hi था.. और फिर जिसकी गोली मुझे लगी है.. वो भी कोई आम गुंडा नहीं tha..apne गैंग का सबसे खतरनाक गुंडा था.. उसकी अनगिनत गोलियों में से एक hi मुझे छूटे हुए गई है.. पर मेरी एक hi गोली सीधे उसके सर्र में जा घुसी.. वो भी मैं हवा में जम्प कर रहा था... वर्ण वो मुझे इतनी आसानी से भी शूट नहीं कर सकता था,........ और फिर ये गोली जो मुझे लगी है..

ये तो एक इनाम है मेरे लिए.. उन दोनों लड़कियों की इज़्ज़त क लिए मैंने ये सबब किया है.. और भी na-jaane कितनी लड़कियों की इज़्ज़त अब्ब इन दोनों गैंग्स क ख़तम हो जाने से मेहफ़ूज़ हो गई होगी..

मेरी बात सुन कर सभी खुश हो गयी.. माँ ने मेरे गाल को चूम लिया.. भाभी मेरे बाज़ो पर प्यार से उँगलियाँ चलने लगीं..

कुछ देर ऐसे hi हम सबब मिशन से रिलेटेड hi बातें करते रहे.. अभी नया नया था सबब तो इस टॉपिक को कोई छोड़ hi नहीं रहा था.. बात थी भी बहुत सीरियस, दोनों लड़कियों के साथ बहुत hi गलत किया गया था... मैंने माँ को और सबब को बता दिए था क कुछ hi देर में वो सभी लड़के यही आने वाले हाँ..

सबब ये जान कर बहुत खुश हुई.. और मुझसे डिमांड करने लगीं क मैं उन सभी लड़कों का अंजाम उन्हें भी दिखाओं....

ये तो मैंने पहले hi सोच लिया था, क पैलेस में दोनों लड़कियों को और उनकी फैमिलीज़ को ला क्र लड़कियों का अंजाम दिखा दिया जाएगा.... बास दोनों फैमिलीज़ को सेक्रेटली लाना पड़ेगा.. पैलेस का राज़ किसी को बताया नहीं जा सकता था.. और न hi किसी को ये पता चलने दिया जा सकता था क ये सबब पैलेस क अंदर हो रहा है....





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ब्रेकफास्ट पर सबब मुझे देख कर बहुत खुश हुए थे.. जब सबब को पता चला क मैंने अपना मिशन अच्छे से पूरा कर लिया है तो सब एक एक करकेमुझे बधाई देने लगे. मेरा बाज़ो अब्ब शर्ट में छुपा हुआ था, तो ब्रेकफस्ट क टाइम किसी को नहीं बताया गया क मुझे गोली लगी है...

रानी और नताशा दीदी, पूआज दीदी क दोनों साइड्स में बैठी हुई थीं..

मैं पूजा दीदी को देख रहा था.. बधाई तो मुझे पूजा दीदी ने भी दी थी, पर सबब के सामने उनको कुछ ज़यादा hi शर्म आ रही थी.. अब वो मेरी दुल्हन जो बनने वाली थीं... सब क सामने कुछ भी बोलने से पहले बहुत सोचना पद रहा था.. कल से hi सबब गर्ल्स की नज़रें पूजा दीदी क लिए बदल चुकी थीं..

साड़ी गर्ल्स को एक टॉपिक मिल गया था, और वो पूजा दीदी के मज़े लेने में लग गई थीं.. अब्ब जब्ब तक्क शादी नहीं ह जाती, ये सबब तो चलने hi वाला था.. और पूजा दीदी का चेहरा बात बात कर लाल पड़ने वाला था...

गर्ल्स पार्टी को भी इंटरनेंमेंट का कोई मौका चाहिए, बास फिर सबब hi शुरू हो जाती हाँ..

माँ जवानी में ऐसा माहौल देख चुकी थीं.. पर मेरी तितलियों क लिए ये सबब नई नई था.. वो ये मौका छोड़ने क मूड में नहीं थीं.. शादी की अभी बात hi हुई थी.. तीनो ने इसी का भरपूर फायदा उठाते हुए शादी की मस्ती शुरू कर दी थी.. जो कुछ उन्हें नहीं पता था, वो rani,shikha,rupa और शीतल बता रही थी..

पूआज दीदी क चेहरे का रंग कल के बदले आज कुछ और भी नया नया रूप धरने लगा था.... पूजा दीदी अब्ब एक दुल्हन क जैसे hi शर्माने लगी थीं...

गर्ल्स ने शादी तक क लिए एक एक लम्हे को सेलिब्रेट करने का मैं बना लिया..

और शादी से पहले क्या कुछ करना है.. उस बारे में चर्चा करते हुए प्रोग्राम फाइनल करने में लग्ग गईं थी...

सालों से चल रही खामोश लाइफ को रंग देने क बारे में फैसले लिए जाने लगे.

दिल्ली में रह रहे सबब hi सालों से मेरी वजा से लाइफ को पूरी तरह से इंटरटेन नहीं कर सके थे.. मेरे उनके साथ जुड़ने से पहले उन सबब की लाइफ जैसे भी थी, पारर मेरे उनके साथ आत्ताच हो जाने से उन सबब की भी लफिए से खुशियां माँ और बहनो की रिहाई तक्क क लिए रुक गई थी....

अब्ब जबकि सबब ठीक हो चूका था.. तो सबब hi अपनी सालों की रुक चुकी खुशियों को सूद समेत वसूल करना छह रही थी.........

इतनी गर्ल्स हों और धमाके न हों, ये होना पॉसिबल नहीं था... अब्ब देखते हाँ आने वाले दिनों में ये गर्ल्स क्या धमाल मचने वाली हाँ...

अब्ब दिल्ली भी सबब क लिए सुरक्षित हो चूका था..

तो सबब इस सबब को खूब एन्जॉय करने वाली थीं...

एक दन्न का खतरा था, उसे भी देख लिया जायेगा... फ़िलहाल दन्न को साइड में रखते हुए इन दिनों की ख़ुशी को सेलिब्रेट करना ज़यादा ज़रूरी था..

दन्न क लिए तो जूली ने तैयारी शुरू कर hi दी थी.. और जूली भी दन्न से कम् नहीं थी..

अब्ब अगल मिशन था...... दन्न वस vijjuu,mehak,julie,raja गैंग.....

दन्न जो पुरे महाराष्ट्र में सबब से पावरफुल इंसान था.. और हम जो अभी नयी नयी पावर हासिल किये हुए थे.. दन्न की पावर और सालों के एक्सपीरियंस की धज्जियां उड़ाने क लिए बेचैन थे...

ब्रेकफास्ट क बाद सबब hi सिटींग रूम में बैठ कर आगे क्या करना हाँ, उसपर चर्चा करने में लग गयी..... और मैं जूली से मिलने कण्ट्रोल रूम की तरफ बढ़ गया..




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Location:Pune

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TIME:08:25:AM:

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दन्न की हवेली में मातम छाया हुआ था...

कुछ ऐसी सूरत इ हाल थी एक रूम की.

दन्न और उसके फ्रेंड्स एक बार फिरसे एक साथ बैठे हुए थे.. टॉपिक था दिल्ली के दोनों गैंग्स का खत्म....

सभी रात भर से hi बैठे हुए थे...

और उन सभी के विचारों में तूफ़ान ए हुए थे.. सभी तकरीबन एक जैसा hi सोच रहे थे..

हाउ इस थिस पॉसिबल..........

एक एकेला आदमी HI दोनों गैंग्स को ख़तम कर चूका है..

और उस आदमी क बारे में कोई कुछ भी नहीं जान पाया था..

दन्न ने का HI अपने कुछ आदमी दिल्ली क लिए भेजे थे..

वही से पल पल की रिपोर्ट भी मिल रही थी..

सबब न्यूज़ तो देख HI रहे थे.. पारर उनके आदमियों की रिपोर्ट कुछ ज़यादा HI

जानदार थी.. दन्न के आदमी कुछ कर तो नहीं पा रहे थे.. बास कैसे भी करके महेंद्र के इलाके में घुसे हुए थे.. और साड़ी इन्फो कलेक्ट करके दन्न को भेज रहे थे.

दन्न के आदमियों ने कन्फर्म करके बता दिया था, क वो एक HI आदमी है, जिसने अपना

चेहरा छुपाया हुआ है, उसकी शकल तो नहीं दिखी, पर उसकी बॉडी देख कर लगता HAI,WO 30 क आस पास की आगे का है......

और फिर जैसी तबाही महेंद्र क इलाके में मची हुई थी, वो सबब दन्न को रिपोर्ट किया जा रहा था..

और दन्न..............

वो आदमी है या छलावा.........................

जैसे परफॉर्मेंस दी गई थी, एक अकेले आदमी की तरफ से..

वो दन्न और उसके दोस्तों के लिए भी NA-KAABIL-E-YAKEEN बात थी..

दिल्ली अब्ब दन्न और उसके दोस्तों क लिए, तीनो गैंग्स से पाक हो चूका था..

पारर......

दिल्ली सिटी....... दिल्ली सिटी में एक ऐसा इंसान भी रहता है..

जो अकेले HI सबब को मार देने की हिम्मत और सलाहियत रखता है..

वहां दन्न और उसके दोस्त कैसे अपना धंदा सेट कर सकेंगे..

यही सोच सबब को खाये जा रही थी.. कैसे वो अपना ढेर सारा पैसा लगा कर

दिल्ली में धंदा शुरू करें.. दिल्ली शहर में कोई इंसान नहीं.. एक बाला रहती है, जो आती हुई दिखती है और पालक झपकते HI अनगिनत गुंडों का सफाया करके कही ग़ायब हो जाती है..

दन्न और उसके दोस्त दिल्ली में धंदा शुरू करने के बारे में कोई फैसला करने की समझ बूझ से महसूम हो चुके थे..

वही दन्न जो अपने दमाग की वजा से हर एक पर भारी रहता था, आज उसकी मैया HI चुद गई थी... वो बार बार अपने कनपटी की नसों को मसलने लगता था..

अभी दो दिन पहले HI तो सबब बैठे ख़ुशी मन रहे थे.. क दलहि में मौजूद तीनो गैंग्स ख़तम होने वाली हाँ, तो अपना धंदा शुरू करने में आसानी बन जायेगी..

पुरे महाराष्ट्र की तरह दिल्ली में भी उनका टूटी बोलने लगेगा..

पर उस अननोन के दिल्ली में रहते वो कैसे अपना धंदा जमा सकते हाँ..

जैसे तीनो गैंग्स को पालक झपकते हुए घटम कर दिया गया, ऐसे इंसान क रहते हुए कैसे वो अपना धंदा वहां सेट करें...

सबब के सबब HI बिग्गेस्त गैंगस्टर्स थे.. वर्ल्ड बेस्ट ब्रेन थे.. पारर आज वही ब्रेन्स डैमेज होने लग गए थे.. सभी क सालों का एक्सपीरियंस मिटटी में मिलने लगा था... ऐसा भयनकर इंसान भी तो किसी ने अपनी पूरी लीलफे में नहीं देखा था....

एक अकेला आदमी HI सबब की मैया छोड़ गया.. वही दन्न और उसके फ्रेंड्स की गांड कैसे सलामत रह सकती थी... यही सबब वो सोच रहे थे..

नए धंदे क चक्रों में कहीं गांड HI न फहत जाए..

ऐसी hi सोचों में डूबे वो सभी काफी देर से छुप सर्र झुकाये अपने दमाग के घोड़े दौड़ा रहा थे.... पारर दमाग के घोड़े भी दौड़ दौड़ कर थक चुके थे.. पर कही से कोई सलूशन नहीं मिल पाया था..

दन्न ने एक लम्बी सांस ली.... सबब को देखा.. और फिर बहुत सेर की चुप्पी को तोड़ते हुए बोलने लगा.

दन्न:- मारतें ज़िन्दगी में दूसरी बार दमाग की चलें हिल कर रह गई हाँ.. पहले कभी ऐसी कंडीशन मेरे सामने नहीं आई है.. ऐसा इंसान तो आज तक्क हमने पूरी दुन्या में कही नहीं देखा, न कही से कोई ऐसी जानकारी मिली है..

एक अकेला आदमी सबब को hi मार कर ग़ायब हो गया.. कोई भी उसका कुछ नहीं बिगड़ पाया.... वो भी उन्ही क इलाके में.. जहाँ किसी अजनबी को घुसते hi पहचान लिया जाता है... महेंद्र सिंह क एरिया में घुस कर पुरे गैंग का hi सफाया क्र गया.. एक अकेला आदमी....

अब्ब तो मुझे उस श्वेता क बेटे पर भी शक होने लगा है.. मेरा दिल नहीं मानता.. ये वो नहीं हो सकता.. जैसे काण्ड वो आदमी दिल्ली में करता फिर रहा है.. श्वेता का बीटा इतना पावरफुल, इतना storng,itna डेरिंग, इतना फुर्तीला, इतना खूंखार.. शार्प शूटर.. परफेक्ट टाइमिंग.. लम्हो में फैसला लेने की एबिलिटी, कुछ भी गलत होने पर लम्हों में hi खुद को बचा लेना...

नहीं........... नहीं मार्टियन वो श्वेता का बीटा विजय नहीं हो सकता... और फिर वो क्यों तीनो गैंग्स को ख़तम करेगा. ये भी सोचने वाली बात है.. और एक बात भी जो समझ में आती है.. अगर विजय hi ये सबब कर रहा है.. तो क्या वो पागल है, अभी उसे दिन hi कितने हुए हाँ, अपनी माँ और माँ और बहनो को कोठे की दलदल से निकलने हुए, वो क्यों उन सबब के साथ टाइम स्पेंड करने की बजाये मौत के खेल में शामिल होने चला जाए...

उसे इस सबब से हासिल भी क्या होगा.. श्वेता क्यों चाहेगी क उसका इकलौता बीटा यौन मौत क वादी की जा घुसे.. वो तो खुद को सेफ जान कर महीनो अपने बेटे को खुद से दूर ना करे....

और फिर ज़रूरी भी तो नहीं क वो दिल्ली में hi आया हो.. हम तो सबब फ़र्ज़ करके चल रहे थे.. क अगर वो दिल्ली में आया है तो ये सबब वही कर रहा है...

इतने कम् समय में वो इतना सब कैसे कर सकता है.. श्वेता और उसके बेटे को अब्ब कुछ देर क लिए भूल जाते हाँ.. और उस आदमी को सोचते हाँ.

बास्टर्ड... पता नहीं कौन है, कहाँ से आया है, ऐसे इंसान को तो खुद हुकूमत करनी चाहिए.. पर वो सबब ख़तम करके पुलिस को साथ में शामिल कर रहा है.. वो चाहता तो पुरे दिल्ली पर अपना होल्ड जाम सकता था.. पर उनसे ऐसा नहीं किया..

दन्न कुछ देर क लिए रुक गया.. वो लम्बी लम्बी साँसे लेने लगा.. सबब दन्न को hi देखर एह तेह.. सभी की ऐसी शामे hi थी.. दन्न की इतनी लम्बी स्पीच में पल पल चेहरे क रंग बदले the..kabhi शॉकिंग.. कभी ग़ुस्से से भरे.. कभी ख़ुशी के.. कभी अंदर जलने वाली आग के....

दन्न के फ्रेंड्स भी कुछ दन्न से मुख्लिफ भाव नहीं रखते थे...

2 मिंट दन्न चुप रहा.... फिर आगे बॉल...

दन्न:- अब्ब तुम बताओ आगे क्या करना चाहिए, दिल्ली में धंदा शुरू कर लेना चाहिए या नहीं..

मार्टियन जो दन्न की बात सुन रहा था.. वो भी अभी तक्क कोई फैसला नहीं कर पाया था..

मार्टियन:- दन्न य्र्र पहले तो सबब सोच hi लिया था, क दिल्ली में धंदा करना है, पर जैसे 2 hi रातों में दोनों गैंग्स ख़तम हुए हाँ... उसने सोचने समझने की ताक़त हजी छीन ली है...

धंदा करते हुए रिस्क तो हर दुम्म रहता hi है.. दिल्ली में जैसा तीनो के साथ हुआ है.. वो है तो बहुत hi भयंकर.. पारर कोई भी धंदा रिस्क लिए बिना तो चलने से रहा... अब्ब सोचने वाली जो बात है, वो ये है क..

आगे का सबब कैसे शुरू किया जाए... दिल्ली में एक बार तो हर तरफ hi हंगामा मचा रहेगा.. अभी दिल्ली में धंदा सेट तो किया जा सकता है.. पारर शुरू नहीं.

दन्न:- ठीक है मार्टियन.. अब्ब धंदा शुरू करना है तो आगे ज़यादा सोचना क्या..

दिल्ली में मौजूद आदमियों से कह दो, वो कोई अच्छी सी जगा ढून्ढ लें..

तुम सबब भी 2-3 दिन में दिल्ली पोहंचो.. मैं भी कुछ दिनों में वहां चक्कर लगता हों.. फिर वही बैठ कर आगे का प्लान करेंगे.. तुम सबब पहले वाहन खुद को एडजस्ट करो.. वहां पर मौजूद बुसिनेस्स्में को खुद क साथ मिलाओ.. और जो दोनों गैंग्स क साथ पहले जुड़े हुए थे.. उन्हें अपने साथ मिलाओ.. मेरा नाम बता देना... दन्न के साथ शामिल होने से उनका डर कुछ कम् हो जाएगा..




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थैंक्स डिअर..!!

विज्जू ने बहुत करके सेकंड फ्लोर पर मौजूद गुंडों को ख़तम किया है.. महेंद्र ज़िंदा नहीं बचेगा.. अभी उससे को जानना है.. और वैसे भी अब्ब वो उसके दोनों हाथ और पेअर किसी काम क नहीं रहे.. महेंद्र के रिलेशन्स अब्ब उसके किसी काम नहीं आएंगे.. कम को मेहन्द्र और अलोक पर पहले से hi बहुत ग़ुस्सा है.. कम तो आम जनता को ज़यादा नुसकान न हो,. इसलिए चुप रहा वर्ण वो तो कबका महेंद्र को टपका चूका होता.. लेकिन कम पुरे गैंग को ख़तम नहीं करवा सकता था इसलिए चुप रहा.. अब्ब अकेला महेंद्र कुछ नहीं रहा... रंजीत और कम का खुश होना भी बनता है.. दिल्ली को साफ करना कभी खवाब था कम का..

श्वेता को उसकी लाइफ क सारे रंग वापिस मिलते जा रहे हाँ, तो वो लड़की तो अब्ब बनेगी hi.. उसके अंदर का मौसम भी रोज़ रोज़ बदल रहा है.. अब देखते हाँ विज्जू से श्वेता क्या क्या चाहती है..

विज्जू को लगी चोट को सबब क लिए सहन करना hi गए.. विज्जू का लाइफ स्टाइल अब बदल चूका यही. और मर्दो को तो ऐसे हलातोंसे गुज़ारना hi पड़ता hi
 
थैंक्स डिअर..!!

मेंटली थकन होती hi यही. जैसी विज्जू को हुई है.. अनगिनत लोगों का खून बहाया है तो विज्जू को अब्ब अपणी माँ से hi वो सुकून मिल सकता है, जो उसकी मेंटली थकन उतर दे.. अब्ब तो विज्जू श्वेता का बीटा और पति दोनों है.. श्वेता और श्वेता की शादी तो सीक्रेट hi रहेगी.. सभी क सामने तो खुल hi जायेगा सबब.. अपर वो ओपनली शादी तो करेंगे नहीं.. या शायद कर भी लें.. ये तो बाद में hi पता चलेगा.. दोनों क मैं में क्या हिअ.. पूजा सकीय hi एक अलग जोन में चली गई हिअ.. और गर्ल्स मण्डली ने भी अब्ब इस सबब का मज़ा लेना शुरू कर दिया है.. तो पूजा क लिए अब्ब विज्जू से मिलना आसान भी नहीं रहा है.. पर दोनों पड़ी मिलेंगे तो ज़रूर..

विज्जू सबब का ख़ास है, साडी रौनक hi विजू क दम से है.. भाभी भी विज्जू क लिए वही फीलिंग्स रखती हाँ, जैसी सबब.. जल्द hi उनका भी नंबर लगने वाला है..

वो भी इस सब्बका बेसब्री से इंतज़ार क्र रही हं..

दन्न पागल होने लगा है.. खुद की पावर का नशा भी तो बहुत है उसे.. मरेगा अगर दिल्ली में आया तो..
 
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