Hindi Desi Sex - Saim (Love,Thrill,Romance) - Page 7 - SexBaba
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Hindi Desi Sex - Saim (Love,Thrill,Romance)

अपडेट NO.62


सुबह जब मेरी आंख खुली तो AB'bua पेहली सी hi उठ चुकी थी अब बारिश भी बंद होगी थी हम फ्रेश होकय और ब्रेकफास्ट क्र क घर क लिए निकल गए..

मैं Ab'bua को उनके घर ड्राप क्र क क घर आ गया घर पी सब डाइनिंग टेबल पी थय सब न्य उनकी तबियत का पोछा फिर मैं अपने कमरे में चला गया कुछ इमेल्स एंड डाक्यूमेंट्स चेक किये अभी मैं पेपर चेक क्र hi रहा था कोई कमरे में आया देखा तो अबीरा थी..

मैं न्य फाइल्स बंद क्र दी..

मैं:- औ बैठो..

अबीरा आ क मेरी पास बेथ गई..

अबीरा:- आप काम क्र लीजिये ज़रूरी होगा..

मैं:- अरे नहीं बीएस वैसी hi कुछ पेपर देख रहा था..

अबीरा:- एक बात पॉचों.?

मैं:- हम्म ज़रूर..

अबीरा:- अपने सच में मुझी अपना लिया न.?

मैं:- हाँ Bilkul..q कुछ हुवा क्या.?

अबीरा:- नहीं कुछ हुवा तो नहीं..

अबीरा कपनी उंगलियों क साथ खेल रही थी..

मैं न्य उसका हाथ अपने हाथों में लय लिया..

और उसकी तरफ देखनी लगा..

अबीरा भी मेरी आंखों में देखनी लगी कुछ देर में हम अपने आप यज्ञ को होने लगी और अब हम एक दोस्सरी होंठों क बोहत करीब hi थय क मेरा मोबाइल बजनी लगा..

हम रुक गए मैं न्य उसकी आंखों में देखती हुवी एक हल्का सा किश क्र दिया और फ़ोन उठा लिया अबीरा शर्माती होइ बाहिर चली गई..

फ़ोन देखा तो मेरी जान का फ़ोन tha..matlab कोमल.

मैं:- Hello मेरी जान किसी ही...

कोमल:- आपको तो कोई परवा hi नहीं ही पूरी 7 दिन बाद कॉल किया मैं न्य कल मेरा लास्ट एग्जाम ही एंड यू प्रॉमिस क मिललंय ाओं गए..

मैं:- ओह्ह हाँ मेरी जान कल मैं बोहत इम्पोर्टेन्ट मीटिंग पी जा रहा हूँ ुसमय 3 दिन लग जाये गए मैं 3 दिन बाद ाओं गए...

Komal(Udass होती हुवे):- O.k Bye...

उसनी फ़ोन कट क्र दिया..

मेरी चेहरी पी एक मुस्कान आ गई..

मैं नीची चला गया और अब तक साब जाने क लिए रेडी थय सब को बरी बरी मिला और साब निकल गए और मैं रत्न क साथ चला गया क्यू क आज मुझी उसकी कज़न सी मिलना था..

हम कुछ देर में एक रेस्टुरेंट पोहंच gaye..Aur टेबल पी बेथ गए..

मैं:- सो माय स्वीट वाइफ क्या लेना पसंद क्रय गई..

रत्न:- जो मेरी स्वीट हस्बैंड को पसंद ए..

मैं:- मैं तो बीएस सॉफ्ट ड्रिंक..

रत्न:- हम्म्म आप प्लीज ाच्य सी हैंडल करना उसको वैसी तो मैं न्य यह बता दिया क क्या प्लान ही हमारा..

मैं:- उसको यह मत बताना क मैं कोण हूँ...

रत्न:- वह क्योँ..

मैं:- प्लीज न जान..

रत्न:- o.k जैसा आप chahy...Lo वह आ गई...

मैं उस तरफ देखा तो एक लड़की अपने शोल्डर पी बेग लटका क सिंपल ग्रीन शलवार कमीज और आंखों पी चश्मा और बाल खुली हुवे अंदर i..Dwkhny में वह बोहत दरी होइ लग रही थी..

वह सीधा हमारी पैसा ी और आ क रत्न क गली मिली और मेरी तरफ देखा..

मैं न्य हाथ यज्ञ क्र दिया..

मैं:- Hello...

उसनी अपनी हाथ जोरती हुवे कहा..

Woh:-Namstey...

मैं न्य हाथ पिच्य क्र liya..Aur बेथ गए..

रत्न:- रानी यह हैं मेरी B.F..

अभी वह कुछ बोलती मैं बिच में hi बोल पारा..

मैं:- Rocky....Main Rocky...Ap.?

रत्न मेरी तरफ अजीब नज़रूँ सी देखनी lagi..main न्य आंखों में शांत रहंय का इशारा किया..

रानी:- मैं Rani..Ratna की बेहेन..

मैं:- आप कुछ लय गई.?

रानी:- नहीं कुछ नहीं...

मैं:- अरे ऐसी किसी नहीं पहली बार हम मिल रखी हैं... वेटर...

वेटर आ गया..

मैं:- मैडम क लिए एक जूस एंड तवो सॉफ्ट ड्रिंक्स...

रानी मेरी तरफ देखनी लगी..

मैं:- सो क्या सीटूशन. ही.?

रानी:- जो भी ही आपको करना ही मेरी पापा आपकी साथ एक हफ्ता रहना चाहती हैं..

मैं:- और फिर.?

रानी:- अगर उनको न पसंद ए तो वह मेरी शादी उसी सी करवा दी गए..

मैं:- अगर पसंद आ गया तो.?

रानी:- तो जैसा रत्न न्य कहा वैसी hi होगा..

मैं:- अगर कोई प्रॉब्लम होइ तो.?

रानी:- बीएस आप फॅमिली को संभल लेना बाकि मैं देख लून गई..

मैं:- O.k 2 दिन बाद चली गए..

रानी:- जैसा आप ठीक समझी...

फिर कुछ देर बातें क्र क हम निकल गए घर आ क मैं थोड़ी देर सू गया शाम को सब क साथ खाना खा क मैं कमरे में आज्ञा तनीषा क साथ..

मैं तनीषा की गॉड में सर रख क लेट गया वह मेरा सर सेहलानी लगी और मैं न्य उसको सफी बात बता दी वह भी खुश होइ यह सुन अभी मैं न्य उसको घर में किसी को जा बतानी को कहा और मैं उसको किश करनी लगा...

तभी मेरा लुंड फुल हार्ड होगया और मेरा किश वाइल्ड hogya...mera हाथ तनीषा क बूब्स पी चला गया..

तभी तनीषा अलग होगी..

मैं सवालिया नज़रों सी उसको देख य लगा और पोछा..

मैं:- क्या हुवा..

तनीषा:- मेरी पीरियड्स आज hi स्टार्ट होय हैं आईएम सॉरी..

मैं न्य उसकी बलून में हाथ डाला और हल्का किश क्र क बोलै..

मैं:- सॉरी फॉर व्हाट.? लेटस स्लीप..

तनीषा न्य मुस्कुरा क मेरी माथे पी किश किया और मैं सीधा होकय लेट गया और और तनीषा मेरी सीने पी सर रख क लेट गई और हम दोनों सू गए...

नेक्स्ट मॉर्निंग मेरी आंख खुली तनीषा अभी बी सू रही थी मैं उठ क फर्श हुवा और ध्यान लगा क किचन में कॉफ़ी बना क कमरे में आज्ञा और तनीषा को जगा क कॉफ़ी दी और वह मर्ग सीने सी लग क बेथ गई और कॉफ़ी पीने लगी मैं उसकी बलून सी खेल रहा था और वह कॉफ़ी पि रही थी कुछ देर में वह बी फ्रेश होगी और त्यार होने लगी मैं न्य उसको रूक दिया..

मैं:- आज आराम क्र लो..

तनीषा:- I'm फाइन..

मैं:- मरस तनीषा आज आपको ऑफिस सी छुट्टी ही..

तनीषा न्य मुस्कुरा क मेरी यरफ देखा..

मैं न्य बहन फैला दिन और वह मेरी सीने सी आ क लग गई..

तनीषा:- O.k बॉस बूत मैं घर पी क्या करूं गई...

मैं:- आप अपने पति क साथ आज शहर 2 जा रही हैं..

तनीषा:- ाचा जी थैंक ु सर जो अपने मेरी लिए इतना सोचा..

मैं न्य हल्का सा उसके गळून पी किश क्र दिया फिर हम दोनों नीची आ गए और नाश्ता किया अंजलि अऊर आयेशा चली गई नूर और रत्न को कॉलेज क छुटियाँ थी वह अभी तक सू रही थी और अक्षरा भी सू रही थी...

मैं न्य और तनीषा न्य नाश्ता किया और हम दोनों रेडी होकय माँ को बता क निकल गए...

करीब 3 घंटी बाद हम शहर 2 पोहंच गए वहां एक होतुल जा क कुछ इंतज़ाम किया और फिर मैं तनीषा की वहां चूर क कोमल को कॉलेज की तरफ चला गया...

मैं वहां पोहंचा को पेपर खतम होने में 10 मं थय..

कुछ देर में स्टूडेंट्स बाहिर अन्य लगी..

मैं क जा क कोमल की क्लास क बाहिर खरा होगया.. वह बेमन सी उठी और बैग उठा क बाहिर अन्य लगी जैसी hi उसकी नज़र गेट पी पारी उसको तो जैसी सब कुछ मिल गया वह भाग क मेरी तरफ ी और मेरी गली लग गई..

मैं न्य भी उसको कस क पाकर लिया सब वहां हामी देखनी लगी...

तभी एक आवाज़ ी...

अवनि:- ओह्ह लल्ला मजनूओं सब देख रही हैं...

हम अलग हुवे फिर मैं अवनि को भी गली लगा क मिला..

हम बाहिर आ गए अवनि को कह दिया वह घर जाये हम बीएस अभी ए उसनी भी कोमल की ख़ुशी को देख हाँ क्र दी..

मैं कोमल को गारी में बिठा क चलनी लगा वह मेरी कंधी पी सर रख क बेथ गई...

कोमल:- आपको मुझी टांग करनी में मज़ा अत ही.? पता ही कल मैं सारा दिन अपसेट थी...

मैं:- ओह्ह्ह I'M सॉरी मेरी जान सरप्राइज जो देना था अपनी जान ko..Aur टुमस्य मिलनी और कोई भी आया ही..

कोमल:- कोण आया ही ?

मैं:- खुद मिल लेना..

हम होटल पोहंच गए..

मैं कोमल का हत्ब पाकर क अंदर लय गया एंटर होती hi फूल गिरने लगी हम्र्य पी और सामन्य बारे सा सॉरी लिखा था यह मेरी लिए खुद सरप्राइज था मैं न्य बीएस टेबल डेकोरेट करनी को कहा था..

तभी तनीषा वहां सी ी और उसनी अपनी दोनों कान पकड़ी हुवे थय..

वह सीधा कोमल क पास ी...

तनीषा:- कोमल मैं टुमस्य उम्र तजूर्बी में चाही hi बरी हूँ लेकिन मैं मोहबत क मलमय में टुमस्य बोहत छूती हूँ क्या तुम अपनी दीदी को माफ़ करो गई.?

तनीषा की आंखों में आंसूं थय...

कोमल पहात सी तनीषा क गली लग गई और बोलने लगी..

कोमल:- नहीं दीदी आप प्लीज ऐसा मत कीजिये मैं आपसी नाराज़ ज़रूर थी लेकिन अब नहीं जब मुझी सच पता चला I'm सॉरी मैं न्य आप पी हाथ उठाया और जो भी भला बुरा बोलै...

फिर दोनों में और बेटों होने लगी हम टेबल पी आ क बेथ गए..

फिर हम कोमल क घर गए और सब भी मुझसी और तनीषा सी मिल क खुश हुवे हम शाम को घर क लिए निकल गए....

तो बे कंटिन्यू...
 
अपडेट NO.63


हम घर पोहंच गए थय हामी अन्य में देर होगी थी सब सो गए थय हम भी अपने कमरे में चली गए और फ्रेश होकय सू गए..

नेक्स्ट डे...

सुबह सब रोटीने वर्क क्र क मैं मॉल गया अकेला कुछ सामान खरीदा और एक घर आज्ञा और यह दिन तयारी में hi निकल गया सब को मैं यह बता क जा रहा था क मैं एक बिज़नेस मीटिंग क लिए जा रहा हूँ और अन्य में टाइम लगी गए...

मैं रत्न क साथ गारी में गया बस स्टॉप पी वहां रानी हमारा वेट क्र रही थी..

हम जा क उस सी मिल्ली आज भी उसनी मुझी नमस्ते hi किया था..

हम बस में बेथ गए और बस निकल पारी रानी क गाओं की तरफ....

अभी कुछ देर hi होइ थी बस को चली हम दोनों चुप थय रानी विंडो सीट पी बेथ क बाहिर देख रही थी और मैं बीएस इधर उधर देख रहा था मैं न्य चुप तोरती हुवा पोछा..

मैं:- तुम्हारी गगर में कोण कोण है.?

रानी:- हमारी फॅमिली बोहत बरी ही मेरी बुआ उनके बची और मेरी चाचा और हम सब मिल क रेहटी हैं..

मैं:- ओह्ह ग्रेट तुम्हारी कितनी बुआ हैं.?

रानी:- 2 बुआ हैं..

मैं:- ओहहक तो वह मुझी अपनाये गई मेरा मतलब ही एक्सेप्ट क्रय गई.?

रानी:- मुझी नहीं लगता..

मैं:- वह क्यू इतना बुरा दीखता हूँ.?

रानी:- नहीं उस घर में सब मेरी पापा क केहनी पी चलती हैं...

मैं:- हम्म्म और चची और तुम्हारी माँ.?

रानी:- वह मेरी हर बात सुनती हैं दोनों मुझसी बोहत प्यार करती हैं मेरी कच्ची की कोई बेटी नहीं ही इस लिए वह मुझसी प्यार करती हैं...

मैं:- और तुम्हारी कितनी भाई बेहेन हैं.?

रानी:- मैं इकलौती हूँ मेरी चची का एक बीटा ही और मेरी दोनों बुआ की 2 2 बेटियां हौं जो मुझसी बरी हैं...

मैं:- ओह्ह ग्रेट बिलकुल स्टारप्लस क सीरियल की कास्ट..

रानी:- क्या मतलब.?

मैं:- ओह्ह नहीं कुछ नहीं...

ऐसी hi बात कृत्य हुवा और उसकी फॅमिली बारी में पोछती हुवे टाइम गुज़र गया तभी बीएस रुक गई..

और मैं न्य पोछा..

मैं:- यह तुम्हारा गेन ही.?

रानी:- नहीं मेरा गाओं अगला ही..

मैं:- तो बस क्यू रुकी.?

रानी:- क्यू क यह हमरा दुश्मन गेन ही और यहाँ सी जाने सी पेहली 5 मं बस रोकनी पार्टी ही और वहां सी यहाँ अन्य क लिए भी शामे...

मैं:- ओह्ह अजीब ही ाचा मैं ज़रा पानी की बोतल लय क आया...

यह कह क मैं उठा..

रानी:- नहीं यहाँ मत उतरना..

लेकिन मैं अपनी धुन में बस सी नीची उत्तर गया..

बस सी उत्तरतय hi पता नहीं क्यू मुझी एक अजीब सी फेल्लिंग ी लेकिन मैं ीगोंरे क्र क एक शॉप क पास गया और बोलै..

मैं:- एक पानी की बोतल देना...

लेकिन वह दुकान दर मुझी अजीब तारीकी सी घूर्णी लगा तभू मेरा ध्यान शिष्य पी गया वहां सी एक आदमी मुझपी डंडे सी हमला करना आया मैं झुक गया डंडा दुकान क साथ पारी बॉटल्स पी लगा..

मैं पिच्य होगया तभी 5 6 आदमी चाकू तलवार लय क आ गैर मुझपी हमला करनी...

मैं थोड़ा अलग हुवा और उस आदमी को पाकर लिया जिसनी डंडा मारा था और उसकी सर पी एक मूका मार क उसको उन आदमियों पी फ़ेंक दिया और भाग क उनके पास पोहंच गया अब तक वह सम्भल चुके थय..

एक न्य मुझपी खंजर क वार किया मैं न्य उसका जेठ पाकर क एक मूका उसकी पेट में मारा वह सीधा दूर जा क गिरा..

दोसरी 2 मुझी एक साथ मारण्य ए मैं न्य दोनों को अपनी टाँगूं में जाकर क तीसरी क सर पी मूका मर दिया और दोनों को एक फ्लिप मर क उसी दुकान पी फेक दिया जहाँ मैं पानी लेनी गया हुवा था..

वहां बोहत लोह इकठा होगये थय..

मैं दुकान पी जा क एक पानी की बूटले ली और उसको घूरता हुवा वापिस बस में आज्ञा...

बस में रानी गेट पी hi खरी थी और परेशां दिख रही थी..

मैं:- क्या हुवा तुम्ही बाहिर क्यू ी कुछ चाहिए क्या.?

रानी न्य अजीब सु नज़र मुझपी डाली और बोली..

रानी:- तुम्हारा दिमाग ठीक भी ही.? तुम्ही पता नहीं तुमनी क्या किया ही अब नल्दी सी चलो...

मैं कुछ नहीं बोलै और चुप चाप बस पी सवार होगया इस बार बस चल पारी और करीब 5 मं बाद हम रानी क गाओं में एंटर होने वाली थय दोनों गाओं क दरमियान की जगह पी एक बोहत Hi ख़ूबसूरत सी मूर्ती थी और उसके साइड पी एक तलवार टाइप चीज़ ज़मीं में गारी होइ थी...

मैं:- रानी वह क्या ही.?

रानी:- यह यहाँ क राजा की मूर्ती ही..

मैं:- मतलब यहाँ राजा है.?

रानी:- ही नहीं थय और पेहली यह दोनों गाओं एक hi थय और तुम यकीन नहीं करो गए..

मैं:- क्या यकीन नहीं करूं गए.?

रानी:- क यहाँ जो साइड पी एक तलवार बानी थी वह एक बोहत ख़ास तलवार ही जिस को आज तक कोई छु भी नहीं पाया...

मैं:- वह क्यू.?

रानी:- मेरी दादा केहत्य हैं क यहाँ क राजा क सिवा उसी कोई नहीं कोई सकता और यह जो झटना ही उसकी पास ुसमय जितना भी पानी डालो हमेशा सूखा रहता ही बीएस एक दिन िसमय पानी अत ही...

मैं:- वह कोनसा दिन ही.?

रानी:- *****..

मैं:- क्या सच.?

रानी:- हाँ सच और पता ही उस दिन मेरा जनम दिन होता ही...

मैं:- रियली.? ओह्ह्ह हैप्पी बर्थडे...

रानी:- उसको गुज़री 4 महीने होगये अब क्यू.?

मैं:- उस वक़त नहीं मिला इस लिए अब बोल दिया..

रानी:- तुम सच में पागल ho..pata नहीं रत्न न्य क्या देखा तुम में..

मैं:- यह तो ही...

फिर हम बस स्टॉप पी उत्तर गए वहां एक गारी हामी लेनी ी थी...

मैं और रानी उस में बेथ गए और वह हामी एक बरी सी हवेली में लय आया और गारी रोक दी..

रानी गारी सी उत्तर गई और मैं भी उसकी लीची उत्तर गया जैसी hi मेरा पेअर ज़मीन पी पारा अचानक बदल च गए और बीजोल्यां चमकनी लगी..

लेकिन कुछ hi देर में फिर सी सोरराज निकल आया..

रानी न्य मुझी अंदर अन्य का इशारा किया..

मैं उसकी पिच्य अपनी शोल्डर पर बैग लटका क चलता हुवा और हवेली को देखता हुवा अंदर चला गया...

सामन्य सब लोग खरी थय और एक आदमी कुर्सी पी बैठा था...

मैं रानी क साथ खरा होगया..

रानी:- पापा यह है रॉकी जिस सी मैं प्यार करती हूँ..

मैं न्य अपने हाथ जोर क नमस्ते कहा..

लेकिन न hi उस आदमी न्य और न hi किसी और न्य कोई जवाब दिया..

लेकिन फिर वह आदमी बोलै..

R'papa:- इसी इसकी कमरे में लय जाओ और अगर यह हमरी परीक्षा में कामयाब होगा तभी इस घर का दामाद बनी गए...

और वह उठ क चला गया और उसकी साथ साथ सब आदमी जो खरी थय वह बी चली गए..

मैं यज्ञ जा क R'maa क पेअर चुवे..

उन्होंय मेरी सर पी हाथ रख और बोली..

R'maa:- सदा सुखी रहो..

और बाकि औरतें भी चली गई और रानी मुझी एक कमरे में लय ी जिस को कमरा कहना शायद घीक नहीं गोगा कबर खाना था जिस में बीएस एक सिंगल बीएड था...

मैं:- वाओ व्हाट आ रूम.. घर में कोई और रूम खली नहीं ही.? यह बोहत हाई क्लास ही..

रानी:- सॉरी लेकिन पापा न्य सख्ती सी मन किया ही कोई और कमरा देंय क लिए..

Main(dhire सी):- खूसर बूढ़ा..

रानी:- हाँ.? कुछ बोलै..

मैं:- नहीं कुछ नहीं एडजस्ट क्र लूँ ga..mujhy अंदाज़ा था इस का..

रानी:- अगर किसी चीज़ की ज़रूरत हो मुझी आवाज़ दी देना...

मैं:- O.k...

रानी चली गई..

और मैं सौंही लगा अब क्या होगा बचो तेरा......

तो बे continue..h
 
अपडेट NO.63


मैं बीएड पी लेट गया यह काफी छोटा और उनकंफर्टबले था लेकिन अब जो भी यह hi ही लेकिन अब जल्दी कुछ सोचना होगा इस सब क बारी वर्ण यह लोग कच्चा खा जाये गए मुझी..

मैं इन्ही सोचो में गम था क मेरा दरवाज़ा नॉक हुवा..

Main(Dhere सी):- अब कोण आज्ञा...

मैं उठ क दरवाज़ा खोला तो सामन्य रानी की बरी बेहेन मतलब बुआ की छोटी बेटी खरी थी..

मैं:- जी कहिये किसी आना हुवा.?

R'sis:- खाना त्यार ही 10 मं में नीची आ क खा लो वर्ण फिर नहीं मिल्ली गए...

Main(Smile क साथ):- तुम लोग खाना भी कहती हो.?

R'sis:- मतलब.?

मैं:- नहीं मुझी लगा बीएस दिमाग hi कहती हो...

R'sis अजीब सा मुँह बना क चली गई..

मैं:- हर इंसान एक एंटीक पीेछे ही इधर...

खैर मैं फ्रेश होकय और कापरी चेंज क्र क नीची चला gya..Nichy कोई नहीं बैठा था टेबल पी...

मैं टेबल क पास जा खरा होगया और रानी को आवाज़ दी..

मैं:- रानी...

रानी किचन सी हाथ साफ़ करती होइ बाहिर ी...

रानी:- बोलो क्या बात ही .?

मैं:- मुझी तो कह क गई थी क 10 मं बाद खाना नहीं मिल्ली गए अभी तो कोई आया भी नहीं...

रानी:- सब मर्द पेहली कहती हैं और औरतें बाद में...

मैं:- वह क्यू साब को साथ बेथ क खाना चाहिए...

रानी:- मेरी पापा क सामन्य मात कहना यह...

मैं:- अजीब है साब...

फिर सब लोग टेबलर पी आ गए और साब न्य खाना खाया..

दोनों बुआ क हस्बैंड मुझी अजीब तारीकी सी घूर रही थय...

मैं भी उनको आंखों आंखों में टांग क्र रहा था...

तभी एक आदमी भागता हुवा हवेली में आया...

आदमी:- मालिक मालिक...

साब उसकी तरफ देखनी लगी...

R'papa:- क्या बात ही हरी.,?

हरी:- मालिक चमत्कार होगया चमत्कार...

R'Chacha:- क्या बात ही.?

हरी:- मालिक आज मूर्ती क पास वाली झरनी में पानी आ रहा ही...

सब खरी होगये और बोली...

सब:- क्या लेकिन आज तो वह दिन नहीं ही...

हरी:- मालिक हम अपनी आंखों सी देख आया हूँ...

R'papa:- चाल क देखना पारी गए उस सी पेहली वह वहां पोहंच जाये...

सब जाने क लिए रेडी होजाती हैं...

मैं भी सुन क एक्सीटेंड था क कुछ नया देखनी को मिल्ली गए...

मैं भी जाने क लिए त्यार होगया...

हम 10 मं बाद गाओं क बॉर्डर पी पोहंच गए हम लोग गरियोँ सी उत्तर..

जैसी Hi मेरा पाऊँ ज़मीन को लगा और मेरी साइड बाली गारी सी रानी उत्तर रही थी और हम दोनों न्य एक साथ पाऊँ नीची रखी...

एक खतरनाक बिजली कार्की उस जगह साब लोग दार गए और हम दोनों नीची उत्तर क जैसी Hi सामन्य देखा उस मूर्ती क पास वाला झरने में फुल सपीड सी पानी बह रहा था और मूर्ती में अजीब सी चमक और तावलर वाली साइड सी नीली रौशनी नीलकल रही थी..

साब यह देख क हिरण थय किसी को कुछ समझ नहीं आ था क क्या हो रहा ही...

तभी वहां क गाओं सी 5 6 गाड़ियां वहां आ क रोकी उस में सी कई आदमी निकली और जैसी hi सब सी यज्ञ वाली गारी में सी आदमी निकला वैसी Hi आसमान साफ़ होगया और मूर्ती और तलवार की चमक भी बंद होगी लेकिन झरना अभी बी बह रहा था...

वह आदमी हमरे सामन्य आ क खरा hogya...Aur अजीब सी हस्सी हस्सनाय लगा और फिर अपनी नज़र उठा क मुझपी डाली उसकी नज़र में एक अजीब सी वेह्शत थी..

मेरी बिलकुल साथ रानी खरी थी और उसनी जैसी Hi नज़र रानी पी डाली पता नहीं क्यू लेकिन मेरी कदम खुद Hi रानी रानी क यज्ञ आ क खरी होगये और रानी मेरी पिच्य चुप गई..

उसकी चेहरी की हस्सी गायब होगी और फिर वह बोलै...

आदमी:- किसी हैं **** जी...

R'papa:- हम तो हमेशा की तर्हां ाच्य हैं तुम अपना देखो रखा...

रखा:- हम भी बरिया हैं जी बीएस आपका वडा पूरा होने का इंतज़ार क्र रही हैं...

R'papa:- हम न्य टुमस्य कुछ और भी माँगा था...

रखा:- हम अपने वाधय सी नहीं हत्य आप हत्य हैं यह लोंदा यहाँ क्यू आया ही हामी साब पता ही..

R'papa:- हम अपना फैसला सुन्ना चुके हैं जिस दिन तुम वह चीज़ पूरी क्र दो गए उस दिन तुम्ही तिम्हारी चीज़ मिल जाये गई...

फिर R'papa न्य कुछ नहीं बोलै और हैं गरियोँ में बेथ क हवेली वापिस आ गए...

मेरे दिमाग में बोहत कुछ चल रहा था मैं उस बात को लय ल सेरियऑस होगया था फिर अपने दिमाग सी ख्याल निकल क सू गया क्यू क बोहत ठाक चूका था..

तू बे कंटिन्यू...

नोट:- सॉरी फॉर शार्ट अपडेट थकावट की वजह सी इतना hi लिख पाया hun..And हाँ जो भाई कह रही हैं मूवी का सन ही भाइयोँ बीएस प्लाट वह ही एक सन ही जो क उस सी सिचुएशन को ाच्य सी एक्सप्लेन क्र रहा hy...And फॅमिली इंट्रो ऑफ़ रानी कुछ hi उपदटेस में ए गए....
 
अपडेट NO.64


R'papa का रूम..

इस वक़त रानी क पापा मतलब कृष्णा बीएड पी बैठी थय और उनकी पत्नी भी साथ hi बैठी थी दोनों के चेहरी पी घबराहट साफ़ दिख रही थी आइये जानती हैं क्या वजह ही...

कृष्णा:- मुझी कुछ समजह नहीं आ रहा अब क्या क्रय?

इंडो:- आप बीएस शांत रहिये साब ठीक होजाये गए..

कृष्णा:- किसी सही होगा एक तरफ वह दवा करता ही क वही ही उसका असली हक़दार और यहाँ रानी के साथ आया वह लड़का...

इंडो:- अब ऊपर वाले पी चोर दीजिये...

कृष्णा:- भैया न्य जिसकी लिए अपने घर सी जुदाई सही अगर वही हम पूरा न क्र सकी तो लानत ही हम पी...

इंडो:- आप सही कह रही हैं लेकिन हम रानी की ज़िन्दगी थोड़ी तबाह होने दी सकती हैं वह जिस सी चाही गई उसी सी उसकी शादी होगी...

कृष्णा:- मैं उसका बुरा थोड़ी छहों गए लेकिन अगर उसको पता चला तो अनर्थ होजाये गए कोई नहीं बची गए...

फिर दोनों ऐसी hi कुछ देर िद्र उदर की बातें कृत्य हैं और सू जाती हैं...

नेक्स्ट मॉर्निंग..

जब मेरी आंख खोली तो सुबह क 5:30 हो रही थय और गाओं की सुबह का तो मज़ा hi अलग ही मैं उठ क फ्रेश हुवा और ट्रैक सूट पेहेन क जॉगिंग पी निकल गया घर में अभी कोई जगा नहीं था...

मैं हवेली क बही hi कुछ लाप्स लगा क वापिस आज्ञा...

जब मैं घर में ग़ुस्सा तो साब जाग चुके थय लेडीज बाहिर hi बैठी थी और कुछ नाश्ता त्यार करनी क लिए किचन में थी...

मैं:- Hello एवरीवन...

जानकी( रानी की बुआ की बरी बेटी):- ओह्ह तो तुम जाग गए हम तो रानी को तुझ पी पानी फेंकनी क लिए मन रही थय..

मैं:- फिर तो तुम्हारी अरमानो पी पानी फिर गया सो सॉरी हाँ..

Bhagya(Rani की 2ंद बुआ की बरी बेटी):- अरे पानी तो तूझपी फिर गए जब आज मां जी तेरी चटनी बनाये गए...

इंडो:- बीएस करो तुम लोग घर ए मेहमान सी कोई ऐसी बात करता ही.?

Shanti(1st बुआ रानी की..):- अरे हामी तो परीक्षा hi लेनी ही न..

मैं:- मुझी शादी करनी ही या एंट्रेंस एक्साम्स देंय हैं.?

जानकी:- उस सी भी मुश्किल होगा शहरी बाबू...

मैं:- अब हम भी दिखाए गए क किसी दिलवाली ढुलनीय लय जाये गए...

भाग्य:- हाँ हाँ देख लय गए सस्ती शारुख खान...

मैं पिछले डाइलॉगे मार क स्टाइल में खरा था फिर जब यह आया तो सीधा होगया सब हसनी लगी...

तभी मेरी ध्यान साइड पी गया जहाँ सी रानी ट्रे में चाय लय क आ रही थी...

आज जब मैं न्य उसको देखा तो कहीं खू गया उसकी हल्की हल्की गिली बाल गुलाबी होंठ उनपे प्यारी सी मुस्कान सुराही दार गर्दन हलकी ग्रीन आंखें उनपे काजल और मथ्य पी बिंदी जब लहराती चल क आ रही थी मैं तो पागल सा होगया...

मेरा ध्यान तब टूटा जब किसी न्य मुझी आवाज़ दी...

यह रानी hi थी को मेरी सामन्य चाय लय क खरी थी...

रानी:- रॉकी चाय लो न..

मैं उसकी तरफ देखती हुवे hi..

मैं:- मैं चाय नहीं पिता...

मुझी पता नहीं था मैं क्या बोल गया मुझी ध्यान तब आया जब जानकी न्य कहा..

जानकी:- तुम चाय नहीं पितय यह बात तो रानी को पता होनी चाहिए न फिर तुम्ही क्यू नहीं पता रानी.?

मैं होश में आज्ञा और बात को संभालनी लगा...

मैं:- w..Woh...Mery केहनी का मतलब ही दिन की पहली चाय मैं खुद नहीं पिता रानी मुझी पिलाती ही...

भाग्य:- हाउ रोमांटिक...

जानकी:- तो चुप kr..Aur आज तो साब क सामन्य वह पिलानी सी रही तो खुद पीजिये...

रानी क चेरी पी पेहली परेशानी थी लेकिन अब वह शांत लग रही थी...

लेकिन मेरी लिए एक और मुश्किल Thi..main न्य लाइफ में चाय नहीं पि थी लेकिन अब अगर न पि तो पता नहीं क्या होगा...

रानी न्य चाय मेरी तरफ क्र दी मैं उसकी अनखुन में देखनी लगा और हाथ सी चाय लेनी लगा जैसी Hi मेरा हाथ कप को पकृत्य hi मेरी उँगलियाँ रानी की उंगलियों सी टकराई...

एक अजीब सा करंट मुझी और रानी को लगा और साथ hi आस्मां सी बोहत तीज बिजली करकंय को आवाज़ ी जिस सी रानी दार गई और उसकी हाथ सी कप गिर गया और वह 2 कदम लीची होगी...

फिर सब कुछ नार्मल होगया मुझी और रानी को चूर क जो क एक दोस्सरी को सवालिया नज़रूँ सी देख रही थय...

तभी सब की आवाज़ सी मैं होश में आया...

शांति:- यह अचानक क्या होगया मौसम को अभी धुप थी अचानक बदल आ गए और बिजल्जी भी कितनी ज़ोर सी कार्की...

इंडो:- हाँ मुझी भी समजह नहीं आ रहा चलो खैर हम नाश्ता त्यार कृत्य हैं...

फिर सब न्य नाश्ता किया आज भी साब मरद पेहली खा क निकल गए लेकिन मैं न्य नाश्ता अभी नहीं किया था जैसी Hi साब चली गए लेडीज नाश्ता करनी बैठी मैं नीची चला गया और टेबल पी बेथ गया जैसी hi मैं बैठा साब औरतें खरी होगी..

मैं:- अरे खरी क्यू होगी बैठो...

इंदू:- नहीं पेहली तुम खा लो फिर हम खाये गए..

मैं:- अरे आंटी साथ बेथ क कहती हैं न...

शांति:- नहीं औरत और मरद एक साथ बेथ नहीं खा सकती...

मैं:- यह कहाँ लिखा ही.?

इंदू:- बीटा यह नहीं होसकता..

मैं खरा हुवा और इंदू की तरफ बढ़ा.. और उनको पाकर क चेयर पी बिठा दिया वह बिना किसी विरोद क बेथ गई...

मैं उनकी साइड वाली चाय पी बेथ गया वह फुर खरी होने लगी मैं न्य उनका हाथ पाकर liya...Aur रानी की तरफ देखा वह फ़ौरन मेरा इशारा समझ गई और खाना यज्ञ रख दिया..

मैं न्य खुद एक निवाला बनाया और उनकी तरफ बढ़ाया..

मेरी नज़र जैसी hi उनके वीर्य पी पारी उनकी आंखों में आंसूं थय...

मैं न्य दोस्सरी हाथ सी आंसूं साफ़ किया और निवाला उनकी नूह में रख दिया वह कहनी लगी फिर मैं बोलै..

मैं:- आंटी आज कल क ज़मानी में भी आप ऐसा क्यू सोचती हैं आज कल लड़कियां अपने हक़ क लिए लर्र रही हैं और कोई भी औरत मरद सी काम नहीं होती या गुलाम नहीं होती वह बराबरी का हक़ रखती हैं और आप तो मेरी माँ की तर्हां हैं मैं किसी खा सकता हूँ अगर आप भूकी खरी रही तो...

आंटी न्य मेरी चेरी पी हाथ रखा और उसको सेहलती हुवे कहा..

इंदू:- तुम बोहत ाच्य हूँ काश मेरा भी तुम्हारी तर्हां एक बीटा होता...

मैं:- मैं आपका बीटा हूँ..

मैं न्य उनका हाथ अपने हाथ में लिया और बोलै..

फिर मैं न्य सब की तरफ दुख क कहा..

मैं:- अब सब को िनिटेशन दूँ.?

जानकी:- वाक़ई रानी तेरी नस्सेब खोल गए जो यह महाशय तुम्ही मिल्ली...

भाग्य:- यह सच में ऐसा ही क नाटक करता ही बीएस...

मैं:- इतनी एक्टिंग अति तो पिक्चर न सिग्न क्र लेता...

भाग्य:- लो फिर वही सस्ता शारुख खान स्टाइल...

सब हसनी लगी और नाश्ता करनी लगी..

मैं नाश्ता क्र क रानी को कह क खेतों की तरफ निकल गया जहाँ पी रानी क पापा और दोनों पूफा जी थय और कोई बहस चल रही थी...

कृष्णा:- तुम दोनों को नज़र रखनी चाइये थी न..

Ramesh(Rani की 1सत बुआ का पति):- भाई साहब अब उन में सी कोई मान नहीं रहा...

कृष्णा:- अब किसी पता लगाए,

मैं वहां पोहंच गया और पोछा क्या हुवा तो पुहपा न्य बताया क कोई आदमी ही इस गाओं गए जो क हमारी साडी खबरिन उनको देता ही और उसी वजह सी कोई आदमी मारी गए..

मैं:- अभी तक वह नहीं मिला क्या.?

Suresh(2nd बुआ का पति):- नहीं कोई कुछ बोल hi नहीं रहा हम न्य सब को पोछा ही...

मैं:- कुछ मदद करूं.?

कृष्णा:- रमेश कह दो इसी हम्र्य ममल्य में तान न ाराये...

मैं:- सर मैं तो बीएस मदद करना छह रहा था...

फिर वह पोचनय लगी तभी मेरा ध्यान एक आदमी पी गया...

मैं न्य उस आदमी को बुलाया.. वह मेरी पास आया और मैं न्य उस सी पोछा..

मैं:- चाचा खेत में किता कमा लेथ हो.?

आदमी:- शाहब महीने का 5 हज़ार कमाता हूँ...

मैं:- अरे वह उस में इतनी महंगी सोने की चैन आ जाती ही.?

मैं न्य उसकी गली में हाथ डाला और चैन बाहिर निकली सब मेरी तरफ देखनी लगी...

आदमी:- नहीं साहब यह पुराणी ही और मेरी बाप की ही.?

मैं:- ाचा यह तेरी बाप न्य लय क दी ही.? सर गोल्ड अभी भी चमक रहा ही और यह चैन पोलिश नहीं ही पोलीह चैन पी ऐसी चमक नहीं होती और हमारी चाचा की पता बी नहीं इस पी छोटा सा प्राइज टांग भी लगा ही..

मैं उसको निकला और पढ़ा...

मैं:- र जेवेलर्स 10 टोला चैन डेट 2 दिन पेहली....

उस आदमी की हालत खराब होगी और सब मुझी हैरत सी देखनी लगी कृष्णा अंकल भी...

कृष्णा अंकल न्य उस आदमी को सजा देंय को कहा और जाने लगी मैं बोलै..

मैं:- अंकल कभी कभी इंसान भूल जाता ही क उसको क्या करना ही हर इंसान एक जैसा होता ही और हो या मरद मर्दानगी लोगो को मार क दुश्मनी मूल लय क हर वक़त दर मशीन रही को नहीं केहत्य मर्द वह होता ही जो काम सी काम अपनी लोगों को पहचान सकी....

यह कह क मैं वहां सी सीधा हवेली चला गया जहाँ पोहंच क जानकी न्य एक और बम फोरा हम दोनों पी....

तो बे कंटिन्यू...
 
अपडेट NO.65


मैं खेतों सी निकल क हवेली गया सीधा अभी शाम का वक़त था मैं जैसी hi पोहंचा सब बाहिर लाउन्ज में बैठी थय मतलब लेडीज और सब न्य रानी को घेरा हुवा था और कुछ पोची रही थय...

मैं साइड सी दबी पाऊँ निकलने लगा लेकिन तभी तभी जानकी की नज़र मुझपी पर गई...

जानकी:- अरे तुम कहाँ जा रही हो.?

मैं रुक गया और पलट क उस तरफ देख क कहा..

मैं:- मैं तो बीएस कमरे में जा रहा था आप लोग बातें करो..

भाग्य:- अरे तुम इधर औ टुमस्य बात करनी ही हमे तुम्हारी और रानी की लव स्टोरी सुनाओ न...

मैं न्य रानी की तरफ देखा और बोलै..

इस सी पॉच लो...

जानकी:- यह तो कुछ बोल hi नहीं रही...

मैं अब उनके पास लोहंच गया और इंदू आंटी क पास बेथ गया..

मैं:- तो बात तब की ही जब एक रात इंदू अकेले रोड पी जा रही थी और इसकी हाथ में कोई दवा क पैकेट्स थय जो क वो अपनी दोस्त क लिए लेनी ी थी तभी कुछ गुंडे इसको चेर्नी लगी मैं तभी वहां सी गुज़रा और एक अकेली लड़की को गुंडों को छेरता देख क मैं उसकी करीब गया और उन को खूब मारा फिर रानी को हॉस्टल चोर ज आया फिर हम मिलती रही तभी प्यार होगया हमारी बिच...

भाग्य:- हाहाहा तुमनी गुंडों को मारा.? ः...

Main(dhire सी):- होगया इज़्ज़त का फालूदा..

जानकी:- स्टोरी अछि ही ब्र्रिटेर कोण ही.?

मैं:- अरे सच्ची ही...

शांति:- बोहत खूब रानी न्य तो कुछ और बताया...

Main(man में):- लग गए बस...

मैं:- क्यव बताया रानी न्य.?

शांति:- यह hi क किसी उसनी तुम्ही बच्या...

मैं:- मुझी बच्या.? किस सी.?

जानकी:- जब तुम्ही लरकी मार रही तो रानी न्य बताया की उसनी किसी उन लार्को को चैन सी मारा और रानी एक त्रिनेड कुंग फु खिलाडी ही..

मैं न्य रानी की तरफ गुस्से सी dekha..Usny नज़रें घुम्मा ली और सब हंसी लगी...

इंदू:- तुम सब चुप करो क्यू टांग क्र रही हो मेरी बची को..

मैं उठ क कमरे में चला गया..

एक्चुअली मुझी बुरा नहीं लगा था बूत रानी को टांग करनी क लिए मैं ऐसी आया था...

अभी 2 मं hi हुवे थय दरवाज़ा नॉक हुवा...

मैं समझ गया सब न्य रानी को भेजा होगा माननी क लिए..

मैं:- चली मुझी टुमस्य कोई बात नहीं करनी...

तभी दरवाज़ा खोल रानी अंदर आ गई..

मैं नाराज़ होनत की एक्टिंग करनी लगा..

रानी:- I'm सॉरी सब इतना फाॅर्स क्र रही थय..

मैं:- तो क्या मुझी गुंडों सी बचने का झूट बोलो gi...Kuch और भी बता सकती थी...

रानी:- उस वक़त कुछ सूजा नहीं...

मैं:- साडी इज़्ज़त का भाजी पाओ जर दिया...

रानी:- सॉरी न...

मैं:- सॉरी का अचार डालूं.?

तभी रानी चुप Hogai...Mujhy कुछ गर बार लगी मैं न्य लीची देखा तो वह रू रही थी...

पता नहीं क्यू उसके रोने सी मुझी बोहत दुःख हुवा मुझी इतना नहीं टांग करना चाहिए था..

मैं उसकी पास गया...

मैं:- ही मैं मज़ाक क्र रहा था तुम प्लीज रोना बंद करो...

रानी:- मैं भी तो सॉरी बोल रही थी न...

मैं:- मैं बीएस तुम्ही टांग क्र रहा था...

रानी:- और मैं भी...

अचानक वह हसनी लगी मतलब एक्टिंग क्र रही थी...

मैं:- यू लैर....

मैं यज्ञ बढ़ा लेकिन तभी वह कमरे जय बाहिर भाग गई...

मेरी चेरी लय एक स्माइल आ गई..

फिर मैं लेट गया और सू गया...

रात को किसी की हिलनी सी मेरी आंख खुली यह भाग्य थी...

भाग्य:- उठो सब कहानी पी वेट क्र रही हैं तुम्हारा...

मैं:- O.k तुम जाओ मैं अत हूँ...

मैं उठ क फ्रेड हुवा और नीची चला गया सब आदमी खाना खा क चली गए थय बीएस लेडीज बेथ क खा रही थी मैं भी जा क साथ बेथ गया इस बार कोई नहीं उठा...

जानकी:- अब किस सी लारी हो खाब में.?

इंदू:- तो बीएस भी क्र व टांग क्र रही ही...

मैं:- इनकी ज़हादि करवाओ ताकि यह अपने पति को टांग क्रय...

मेरी यह बोलते hi सब को मुँह रुक गए और जानकी का चेहरा मुरझा गया और रोने जैसा होगया और वह उठ क चली गई...

मुझी कुछ समझ नहीं आया..

इंदू:- बीटा तुम खाना खाओ..

मैं:- लेकिन जानकी दीदी को क्या हुवा.?

इंदू:- कुछ नहीं..

मैं न्य इंदू आंटी क हाथ पी अपना हाथ रख दिया...

उनके भी आंसूं निकल गए..

मैं:- आप प्लीज चुप होजाये मैं दीदी सी मिल क अत हूँ...

मैं उठ क जानकी क कमरे क पास चला गया दरवजा बंद था मैं न्य खरकया...

जानकी:- माँ मुझी प्लीज अकेला चूर दीजिये...

मैं:- दीदी मैं हूँ प्लीज दरवाज़ा खोलिये..

2 मं बाद उन्होंने दरवाज़ा खुला..

साफ़ दिख रहा था क ेओह रू रही थी...

मैं:- दीदी I'M रियली सॉरी अगर कुछ गलत बोलै होतो मैं न्य...

जानकी:- नहीं तुम्ही कुछ नहीं bola...ao अंदर औ..

दीदी जा क बीएड क सामन्य बेथ गया और उनकी तरफ देखनी लगा...

मैं:- क्या अगर मुझी कोई हक़ ही कुछ पॉच सकता हूँ.?

जानकी:- हम्म्म..

मैं:- आप रू क्यू रही थी और बात क्या ही.?

जानकी:- कुछ नहीं अपनी बेबसी पी रू रही थी...

मैं:- आप बेबस नहीं हैं काम सी काम तब तक तो नहीं जब तक मैं यहाँ हूँ...

जानकी:- कुछ नहीं क्र सकती अब हम...

मैं:- प्लीज दीदी बताइये...

जानकी:- मेरी शादी हो चुकी ही...

मैं:- क्या तो आप अपने घर क्यू नहीं रहती.?

जानकी:- क्यू क मस्र्य पति अभी जेल में हैं...

मैं:- व्हाट.?

जानकी:- हाँ उनको फसाया गया ही...

मैं:- किसने.?

जानकी:- रखा ny...Main और मेरी पति हम एक साथ कॉलेज में परहत्य थय हम एक दोस्सरी सी बोहत प्यार कृत्य थय और जब हमारा कॉलेज ख़तम हुवा तो उन्होंने वापिस अपने घर जन्य की बज्यै एक कंपनी में जॉब करना शुरू क्र दी वह बीएस कभी कभी अपने घर जाती थय और फिर जब वह मेरी फॅमिली सी मिल्ली तो वह सब को ाच्य लगी हमारी शादी होगी उन्होंने अपने घर नहीं बताया और कोई टेंशन में थय इसी लिए कोर्ट मर्रिज होइ फिर यह बात जब हमारी दुश्मन को पता लगी रखा न्य तो उसनी एक गर्बर घोटाला क्र क सारा लीज़्ज़म उनपे लगा दिया और उनको जेल में डलवा दिया और उनका चाकर दूसरी लडकियोँ सी ही यह भी साबित करवा दिया...

और वह रोने लगी...

मैं उनके पास गया और हाथ पी हाथ रख दिया और बोलै..

मैं:- तो कृष्ण अंकल न्य उनको बचानी की कोशिश नहीं की.?

जानकी:- की थी लेकिन रखा न्य एक शरत उनके यज्ञ रख दी जो क पूरी क्र क Hi वह उन्ही चोरी गए क्यू क जब तक उस कंपनी क मालिक क सिग्नेचर नहीं होंगे उनको नहीं छोरा जाये गए...

मैं:- तो उनके घर वालों को पता ही यह बात.?

जानकी:- हाँ बीएस उनके पापा और दादा को पता ही...

मैं:- क्या आप उनका नाम और कोई फोटो दिखा सकती हैं.?

जानकी:- हाँ...

उन्होंने न्य मोबाइल निकला और फोटो दिखाई और नाम बतातया मैं सुन क बोहत ज़्यादा शॉक हुवा और मसरा खून खोलनी लगा..

तो बे कंटिन्यू..
 
अपडेट NO.66


जब जानकी न्य फोटो मुझी दिखाई मेरी पैरों क टॉय सी ज़मीन निकल गई क्यू क वह तस्सवर मेरी बारी भाई राहुल की थी...

मैं न्य फोटो देखि मेरी मुँह सी बीएस यह निकल गया..

मैं:- राहुल भैया...

मैं राहुल भैया सी मिला तो नहीं था लेकिन गाओं क घर में उनकी फोटो ज़रूर देखि थी...

जानकी न्य जब मेरी मुँह सी राहुल भैया का नाम सुना वह चौंक गई..

जानकी:- तुम राहुल को किसी जानती हो और तुमनी राहुल भैया क्यू कहा.?

मुझी एक डैम होश आज्ञा...

मैं:- क्या पका यही हैं दीदी आपकी हस्बैंड.?

जानकी:- हाँ रॉकी यह hi है और तुम क्यू इतना परेशां होगये क्या रिश्ता ही तुम्हारा राहुल क साथ..

मैं वही अपना सर पाकर क बेथ गया..

मतलब मेरा भाई इतनी बरी मुसीबत में ही मुझी पता भी नहीं था और यह बात दादा जी भी जानती hain...lekim उन्होंने मुझी क्यू नहीं बताया.? पापा को क्यू नहीं बताया.? अगर पापा को पता होता वह मुझी ज़रूर बताते...

जानकी न्य मेरी कंधी पी हाथ रखा तो मुझी कुछ होश आया...

जानकी:- रॉकी प्लीज btao...Please....

वह भी रू रही थी और मेरी भी आंखें नुम थी..

मैं न्य जानकी को पाकर क बीएड पी बिठा दिया...

और उसका हाथ पाकर क बोलै..

मैं:- राहुल भैया मेरी भाई हैं....

जानकी:- क्या.? राहुल सच में तुम्हारा भाई ही.?

मैं:- हाँ वह मेरी वैर्य चाचा की बेटी हैं...

जानकी:- लेकिन तुम लोगो न्य कुछ क्यू नहीं किया.?

मैं:- मुझी नहीं पता था इस बारी में...

जानकी:- लेकिन उसनी कभी रॉकी नाम नहीं बताया अपने भाई का...

मैं:- तो क्या बताया.?

जानकी:- वह हमेशा अपने एक भाई क बारी में बात करता था जो अमेरिका चला गया था बचपन में...

मैं:- मैं वही हूँ और मेरा असली नाम सैम ही....

जानकी:- क्या तो क्या तुम वही सैम हो जिसकी बारी में राहुल बात करता था.?

मैं:- हाँ वही हूँ...

जानकी मेरी गली लग गई और कस क पाकर लिया 2 मं बाद अलग होइ और उनकी आंखें फिर नुम होगी...

मैं न्य उनकी आंखें साफ़ की और बोलै...

मैं:- अब आप फ़िक्र मात कीजिये आपका भाई आज्ञा ही न सब ठीक होजाये गए बीएस कुछ दिन और...

जानकी:- क्या सच...

मैं:- बीएस कुछ दिन ी प्रॉमिस भैया को बोहत जल्द घर लय क ाओं ga...Bhabhi...

जानकी खुश होगी और भाभी पी थोड़ा शर्मा गई...

मैं:- ऐसी Hi मुस्कुराती रहिये...

जानकी:- लेकिन तुमनी घर में साब को झूट क्यू बोलै.?

मैं:- सब बताओं गए थोड़ा वेट Please...aur किसी को मात बताइये गए..

जानकी:- O.k नहीं बताओं गई देवर जी...

मैं:- तो चलिए फिर आज देवर भाभी साथ खाना खाये गए...

जानकी ख़ुशी ख़ुशी उठ गई और हम दोनों हस्ती हुवे बाहिर आ गये...

अंदर सी मुझी बोहत गुस्सा आ रहा था लेकिन मैं जानकी दीदी को संभालनी क लिए निर्मल बेहवे क्र रहा था...

हामी ऐसी आती देख क सब चौंक गए...

भाग्य:- जानकी तो ठीक तो ही न.?

जानकी:- हाँ मैं बिलकुल ठीक हूँ अब तो पेहली सी ज़्यादा...

इंदू:- सच में जादूगर ही तो सब को अपने जड़ो में फसा लेता ही...

मैं:- वह तो ही चलो अब हामी खाना दी दो..

रानी:- मैं लगती हूँ..

फिर मैं न्य और जानकी न्य खाना खाया और सब सोने सगळी गए नींद मेरी नज़रूँ सी दूर थी..

मैं कमरे में गया और सब सी पेहली मैं न्य दादा जी को फ़ोन लगाया...

उन्होंने फ़ोन पिक किया...

दादा जी:- Hello सैम बेट केसा ही.?

मैं:- मैं ठीक हूँ दादा जी आप यह बताइये क राहुल भैया कहाँ हैं.?

वहां कुछ देर क लिए ख़ामोशी.. रही और फिर दादा जी बोले...

दादा जी:- बीटा W..Woh तो दोस्सरी शहर में ही..

मैं:- दादा जी क्या इतना पराया क्र दिया मुझी.? क्या मैं कुछ नहीं लगता आपका या इस परिवार का क किसी न्य अपने दुःख में शामिल नहीं किया..

दादा जी:- यह क्या बोल रहा ही To..Tu मेरा सब्ज़ी लाडला ही..

मैं:- तो राहुल भैया वाली बात मुझी क्यू नहीं बताई.?

दादा जी:- हम तुझी परेशां नहीं करना चाहती थय...

मैं:- अब तो बोहत खुश हूँ मैं jesy...Aj दादा जी अपने मेरा मान टूर दिया..

दादा जी:- नहीं बीटा मैं माफ़ी चाहता हूँ...

मैं:- माफ़ी मांग क अब पाप क भाग्य दार बनाई gy...Main रखता हूँ फ़ोन...

मैं न्य फ़ोन सुत्त क्र दिया...

मैं न्य तनीषा को कॉल की..

उसनी 2 रिंग में फ़ोन उठा लिया...

तनीषा:- Hello मेरी जान किसी हो.?

मैं:- क्या सू रही थी.?

तनीषा:- आप रू रही हैं क्या बात ही.?

मैं न्य सर बात तनीषा को बता दी उसको भी कुछ नहीं पता था...

तनीषा:- प्लीज आप खुद को सम्भालिये सव ठीक होजाये गए...

मैं:- सब ठीक करना होगा..

तनीषा:- वह किसी.?

मैं:- जिस कंपनी न्य राहुल भैया पी इलज़ाम लगाया ही उस क सारी शेयर्स खरीद लो मुँह मैंगी दामों में कल सुबह hi...

तनीषा:- जैसा आप कही लेकिन प्लीज कलम डाउन...

मैं:- I'm Ok मेरी जान बोहत सेहेन शक्ति ही मुझ में..

तनीषा:- ी लव एंड मिस यू..

मैं:- शामे 2 यू.. हुड नाईट...

तनीषा:- आप भी सो जाइये..

मैं:- हम्म bye...

मैं कमरे सी बाहिर निकल क चाट की तरफ चला गया ठंडी हवा चल रही थी मैं दिवार क साथ ठीक लगा क लहरा होगया तभी कोई स्टैर्स सी उप्पेर अत हुवा दिखाई दिया...

यह रानी थी...

रानी:- तुम इस वक़त यहाँ क्या क्र रही हो.?

मैं:- नींद नहीं आ रही थी सोचा यहाँ आ जाओं कुछ देर तुम नहीं सोइ.?

रानी:- नहीं अभी मुझी भी नींद नहीं आ रही.

मैं:- क्यू कोई नींद ुरा क लय गया kya.?(Hastey हुवे..)

रानी:- हाँ शायद...

मैं:- तुमनी उसी मारा नहीं त्रिनेड कुंग फु fighter...(haha)

रानी:- न जाने क्यू नहीं मार पाई... खैर यह बताओ जानकी दीदी को किसी मनाया जो वह इतना खुश हैं.?

मैं:- कुछ नहीं बीएस कुछ लोटनी का वडा किया hy...Dua करो मैं वडा पूरा क्र सकें...

रानी:- कुछ परेशानी ही क्या.?

मैं:- नहीं बिलकूप ठीक हूँ मैं...

रानी:- अगर बताना चाओ तो बता सकती हो...

मैं:- काश बता सकता...

रानी:- कोई बात नहीं अब सू जाओ तुम...

मैं:- हम्म्म

और रानी एक अजीब सी नज़र मुझली दाल क नीची चली गई और मैं भी नीची जा क सू गया....

तो बे कंटिन्यू..
 
अपडेट NO.67


अगली सुबह मेरी आंख जल्दी खुल गई बल्कि यह क मुझी ठीक सी नींद hi नहीं ी थी..

मैं उठ क फ्रेश होकय जब नीची उत्तरा तो बाहिर सी बोहत आवाज़ आ रही थी मैं बाहिर गया तो बोहत सी लोग बाहिर खरी थय और कृष्णा अंकल सब क सामन्य खरी थय..

मैं भी जा क खरा होगया और ममल्य का जायज़ा लेनी लगा..

तभी एक आदमी सामन्य आ क बोलै..

आदमी:- मालिक अब आप क्या क्रय गए.? और वह रखा इस बात क बिलकुल खिलाफ ही...

कृष्णा:- अब यह काम तो हामी भी सही नहीं लग रहा ..

मैं:- I'm सॉरी सर लेकिन मैं कुछ जान सकता हूँ.?

कृष्णा अंकल न्य एक झुरझुरी सी नज़र मुझपी डाली..

R'phoopha:- कुछ नहीं बीटा यह यहाँ लडकियोँ क लिए कॉलेज बनानी क लिए कह रही हैं...

मैं:- यह तो बोहत अछि बात ही िसमय सोचना क्या आपको तो फ़ौरन हाँ क्र देनी चाहिए..

आदमी:- अगर लडकियोँ को पढ़ाये गए तो वह हाथ सी निकल जाये गई...

मैं:- क्या कहा अपने.?

आदमी:- पढ़ाई क्र क उनका दिमाग खराब होजाये गए ऊंची ऊंची सपने देखी गई...

मैं:- लानत ही आपकी ऐसी घटिया सोच पी आज कल लडकिया क्या कुछ नहीं क्र रही इस दुनिया में और वह सिर्फ पढ़ाई की वजह सी ही और आप केहत्य हैं दिमाग खराब होजाता ही और आपको पता ही क शहर की hi लडकिया यज्ञ क्यू भर जाती हैं क्यू क वह उनको फ्रीडम देती और चाही गाओं की लड़की उस सी ज़्यादा तीज और काबिल हो लेकिन वह आप जैसी लोगों की वजह sy...Aur पढ़ाई तो दूर की बात ही कुछ ऐसी भी लोग हैं जो घर की देवियों क साथ खाना तक नहीं कहती उनको पेअर की जूती समझती हैं और वह क्या समझी गए एक औरत का दर्द 9 महीने एक जान का ख्याल अपनी जान सी ज़्यादा रखना शादी क बाद अपने पति को दुनिया मन और वह चाही कुछ भी क्रय उसकी साथ वह उफ़ तक नहीं बोलती अरे हुमय तो पाऊँ धू क पीने चाइये..

सब की बोलती बंद थी सब मुझी घूर रही थय अभी घर की औरतें भी आ गई थी बाहिर और फिर मैं दुबारा बोलै..

मैं:- जिन लोगो को यह कॉलेज चाहिए वह इस साइड पी आ जय बाकि इधर...

वहां खरी जनता में सी 80% लोग हम वाली साइड पी आ गए...

मैं:- इन चाँद लोगो की वजह सी इंसानियत मर दी जाती ही अगर अब फैसला आपके हाथ में ही सर और उसका रिजल्ट bhi...Over तो यू...

मैं यह कह क अंदर चला गया...

बाहिर पिन ड्राप साइलेंस tha...Aur कृष्णा अंकल भी बिना कुछ बोले वहां सी बाहिर चली गए और उनके साथ सब आराम आराम सी चली गए..

मैं जा क डाइनिंग टेबल पी जा बेथ गया और रानी को बोलै..

मैं:- आज नाश्ता नहीं मिल्ली गए.?

रानी:- अभी लती हूँ...

इंदू आंटी और शांति आंटी मेरी पास ी और मेरी पी हाथ फेरा और मेरा माथा चूम क बोली..

इंदू:- काश सब तेरी जैसी होते तो यह दुनिया कितनी अछि होती..

शांति:- मुझी ख़ुशी ही क हमरै रानी न्य येरय जैसा इंसान चुनना..

मैं:- अरे नहीं आंटी ऐसी कोई बात नहीं मैं तो बीएस वह ङोल रहा था जो मुझी सही लगा...

इंदू:- हमेशा खुश रहो और मुझु ख़ुशी ही मेरी बेटी न्य ाच्य इंसान सी प्यार किया..

शांति:- मेरी ुमार में तो मिलता तुझी कभी नहीं चोरटी...

मैं:- तो अब पाकर अब कोनसी बोरही होगी हो आज भी जाएं लड़कियां जलती हैं आपसी..

सब हसनी लगी और शांति आंटी शर्मा गई..

शांति:- धात मुझपी लाइन मरता ही अभी रानी को बताती हूँ..

मैं:- आप हो hi इतनी सुन्दर..

इतनी में रानी और जानकी नाश्ता लय ी और हामी नजहता कटनी lgy..Phir मैं बोलै...

मैं:- जानकी दीदी क्या आप मेरी साथ चली गई मुझी कुछ काम ही शहर में...

जानकी:- क्या काम ही.?

मैं न्य उनको आंखों सी इज़हार किया वह बोहत खुश होगी...

इंदू:- क्या काम ही बीटा.?

मैं:- कुछ नहीं आंटी कुछ कापरी लेनी हैं मुझी इस लियर बोल था था दीदी बरी हैं तो थोड़ी हेल्प होजायर गई और दीदी भी बोल रही थी उनको अपनी कसीस दोस्त सी मिलना ही...

जानकी:- हाँ ममी मुझु भी काम यह मैं न्य hi कहा था इसको...

इंदू:- ाचा लेकिन शाम न्य पेहली घर अजना...

फिर हम न्य नाश्ता पूरा किया और मैं रूम मरीन चला गया और अपने कापरी चगे किये इतने में रूम में रानी आ गई वह थोटी उपसड़त लग रही थी...

मैं:- अरे औ na..Sab ठीक ही न अपसेट क्यू हो.?

रानी:- नहीं बीएस पोचनय ी थी कुछ चाहिए तो नहीं...

मैं:- नहीं सब ठीक ही वैसी भी बीएस कुछ दिन सब ठीक होजाये गए तुम परहंय बाहिर चली जाना और मैं घर...

रानी यह सुनते hi बाहिर चली गई..

मैं भी कंधी अचका क त्यार होकय नीची आ गया...

नीची जानकी दीदी त्यार थी और साथ में रानी उसकी माँ और बुआ और भाग्य बैठी थी..

मैं:- चली दीदी...

इंदू:- बीटा roko..Yeh लो..

उसनहोने न्य कुछ पेसय मुझी देती हुवे कहा...

मैं:- अरे नहीं आंटी इसकी कोई ज़रूरत नहीं..

इंदू:- खरीदारी करनी जा रही हो तो कुछ तो चाहिए होगा न...

मैं:- बीएस आपकी दुआ चाहिए और जब चाहिए होंगे मैं खुद लय लोन गए..

इंदू:- लय जानकी तो रख लय यह तो नहीं रखी गए...

जानकी दीदी न्य पर्स में रख लिए और हम बाहिर आ गए और गारी मैं चलनी वाला था दीदी साथ बेथ गई और मैं न्य गारी चला दी..

जानकी:- सैम हम कहाँ जा रही हैं...

मैं:- आपसी जो वडा किया था उसी पूरा करनी...

जानकी:- क्या.? तुम मज़ाक तो नहीं क्र रही.?

मैं:- नहीं सच बोल रहा हूँ...

जानकी दीदी न्य मुझी साइड सी हुग क्र लिया और गाल पी एक किश किया...

मैं:- अरे कंट्रोल जब भैया आ जाये गए तब क लिए संभल क रखिये...

जानकी दीदी शर्मा गई और सीधी होकय बेथ गई लेकिन वह बोहत खुश थी..

तभी मेरा मोबाइल बजा कॉल तनीषा का था...

मैं:- Hello गुड मॉर्निंग...

तनीषा:- गुड मॉर्निंग मेरी jaan...kahan हौं आप.?

मैं:- बीएस जा रहा हूँ उधर...

तनीषा:- सब डील होगी ही और पेपर्स रेडी क्र दिए गए hain..kya मैं ाओं वहां.?

मैं:- नहीं आप मात आना मैं खुद जा था हूँ और हाँ अभी किसी को मात बताना...

तनीषा:- o.k जैसा आप कही Bye लव यू...

मैं:- शामे 2 यू...

फ़ोन कट...

जानकी दीदी मुझी देख रही अजीब सी नज़रूँ सी..

मैं:- आप क्या देख रही हैं और यह बताइये क शोपिंग मॉल कहाँ ही इधर.?

जानकी:- कुक्सह दूरी पी hi ही लेकिन वहां क्या करना ही.?

मैं:- शोपिंग...

हम मॉल पोहंच गए और हम गेट्स सेक्शन में गए...

जानकी:- तुम सच में शोपिंग करनी ए हो.?

मैं:- भैया क लिए कापरी लीजिये उनका साइज आपको hi पता ही...

जानकी:- क्या उनके लिए लेनी हैं.?

मैं:- हम्म्म्म...

जानकी दीदी ख़ुशी ख़ुशी शोपिंग करनी लगी उनकी ख़ुशी की इंतहा नहीं थी उनका जो डिल क्र रहा था वह लय रही थी...

1 घनगय बाद उन्होंने कोई 20 सी ज़्यादा कापरी लय लिए..

हम काउंटर पर गए...

उस न्य बिल बनाया....

जानकी:- मैं न्य भी न ख़ुशी में कुछ ज़्यादा hi लय लिए इतनी तो ममी न्य भी नहीं दिए थय मैं कुछ आपिस क्र देती हूँ...

मैं न्य उनको कहा..

मैं:- जब तक आपका भाई ज़िंदा ही इतनी सी बात पी कभी परेशां मत होना...

मैं न्य अपना कार्ड उसको दिया पेमेंट क लिए...

उसनी डिटेल्स देखि तो हीरानी सी बोलै.

सेल्समेन:- सर आप पेहली बता दत्त क आप कोण हैं मैं खुद आपकी साडी शोपिंग करवा देता...

मैं:- अरे नहीं भाई आप प्लीज जल्दी सी पैक करवा दो और गारी में रख दो...

सेल्समेन:- जी बिलकुल सुर मैं रखवा दूँ गए जब तक आप बैठिये कुछ लें गए जूस या कुछ और.?

मैं:- नहीं थैंक ु हामी देर हो रही ही...

उसनी जल्दी सी 2 3 लोगो को बुला क पैक किया और गारी में रखवा दिया...

जानकी दीदी फिर अजीब सी नज़रूँ सी देख रही थी...

मैं:- क्या हुवा चलिए...

जानकी:- तुम कोण हो.?

मैं:- आपका देवर और कोण.?

जानकी:- यह सब लोग इतनी रेस्पेक्ट खली मेरा देवर होने पी तो दी गए नहीं...

मैं:- अरे चलिए देर हो रही ही कुछ देर में सब पता चल जाये गए..

हम फिर गारी में बेथ गए और हम कुछ देर की ड्राइव क बाद शहर पोहंच गए और हम रक होटल क बाहिर रोके...

मैं:- चलिए अंदर चली.?

जानकी दीदी बिना कुछ बोले उत्तर गई और मेरु उतारती hi 3 4 आदमी ए और हामी वेलकम क्र क अंदर लय गये अंदर हल में कुछ लोग टेबल्स पी बैठी थय और एक सीट खली थी जो क सब सी सामन्य वाली थी..

मेरी आती hi सब खरी होगये और मैं जा क उस चेयर लय बेथ गया मेरी बैठती hi सब बेथ गए..

मैं:- Hello एवरीवन I'm सैम ठाकुर आप सब जानती हैं क मैं न्य आपको क्यू बुलाया ही मैं आज hi इसकी साडी ऑथोर्टी लेना चाहता हूँ..

आदमी1:- सर हम सब की खुशकिस्मती ही क आप न्य हामी इस काबिल समझा...

आदमी2:- सर सब पेपर रेडी हैं..

मैं:- मर रखा मान गए थय.?

आदमी1:- सर जो अपने ऑफर दी थी ुज़के बाद वह किसी मन क्र सकती थय बीएस किसी वजह सी वह नहीं आ सकी बूत हे सिग्न आल थे पेपर एंड यू सिग्न ों थिस पेपर आल थे कंपनी बेलोंगस तो यू...

मैं न्य पेपर लिए और उनको सिग्न क्र दिया सब न्य ताली बजे...

जानकी दीदी साइड में सोफे पारा था ुसपय बैठी थी...

मैं न्य उनकी तरफ देखा और स्माइल क्र दी उन्होंने फिर सी सवाल किया नज़रों सी...

मैं:- Ok एवरीवन एन्जॉय थे पार्टी ी हैवे तो लीव...

मैं खरा होगया और दीदी क साथ बाहिर आज्ञा...

बाहिर एक वकील खरा था जो मेरी बाहिर आती hi मेरी पास आया मुझसी हाथ मिलाया और हम गारी तक आ गये और बेथ गए गारी में...

मैं:- सब पेपर रेडी हैं और क्या आज hi बाहिर आ जाये गए.?

वकील:- यस सर आल पेपर्स अरे रेडी और मैं न्य बैल लिए कल hi अप्लाई क्र दिया था और बीएस आपकी सिग्न इन पेपर्स पी चाहिए और 1 घंटी में बाहिर...

मैं न्य पेपर लय सिग्न क्र दिए और वकील बाहिर निकल गया..

जानकी दीदी की आंखों में आंसूं थय...

मैं:- आप क्यू रू रही हैं.?

जानकी:- तुम फरिश्ता बन क ए हो हमारी ज़िन्दगी में...

मैं:- अपने भी पराया क्र दिया मुझी.?

जानकी दीदी न्य मुझ गली लगा लिया और बोली..

जानकी:- नहीं मैं तो बीएस ऐसी hi बोल रही थी अब देखती हूँ मां किसी न कृत्य हैं तेरी लिए...

मैं:- नहीं दीदी आप घर पी नहीं बताये गई क यह सब मैं न्य किया ही...

जानकी:- लेकिन क्यू.?

मैं:- प्लीज दीदी...

जानकी:- लेकिन तेरी भाई को बतानी सी नहीं रोके गए तो...

मैं:- O.k नहीं रोको ga...wesy 2 घंटी क्या क्रय.?

जानकी:- लेकिन वह तो 1 घंटा कह रही थय...

मैं:- मुझी पता ही मेरी देश का काम सी काम 2 घंटी लगी गए..

जानकी:- तो फिर क्या क्रय.?

मैं:- आप आराम क्र लो औ अंदर चलती हैं...

जानकी:- हम्म. ठीक ही...

मैं दीदी को लय वापिस होटल क अंदर चला गया रूम में दीदी को चोर क मैं नीची आ गया तभी मुझी कॉल ी...

दादा जी की कॉल थी..

मैं:- Hello..

दादा जी:- Hello बीटा तो फ़ोन क्यू नहीं उठा रहा था.?

मैं:- मैं कोण होता हूँ आपका फ़ोन उठाने वाला...

दादा जी:- बीटा तो क्यू ऐसी बातें क्र रहा ही यह बात हम न्य तेरी दादी और पापा को भी नहीं बताई...

मैं:- अपने ऐसा क्यू किया अगर हामी पता होता कब क राहुल भैया बाहिर आ गए होती...

दादा जी:- बात की कुछ ऐसी थी जो क राहुल न्य बतनय सी मन की थी और हामी भी सच नहीं बताया अपनी कसम दी क चुप करवा diya.lekin कुछ तो बात थी जो राहुल न्य ऐसा कहा...

मैं:- अब यह तो राहुल भैया hi बता सकती हैं...

दादा जी:- लेकिन वह तो...

मैं:- वह आ रही हैं बाहिर कुछ देर में...

दादा जी:- क्या.? यह किसी हुवा हम कब सी कोशिश क्र रही थय..

मैं:- वह छोड़िये आप बीएस घर में किसी को न पता चले इस बारी में..

दादा जी:- हाँ मैं ख्याल रखूँ गए उसको जल्दी सी घर लय आ बीएस तो..

मैं:- Hmm...ab मैं रखता हूँ बई ध्यान रखना अपना...

दादा जी:- हम्म bye...

फ़ोन सुत्त....

2 घंटी बाद...

तो बे कंटिन्यू...
 
अपडेट NO.68


2 घंटी बाद...

मैं और जानकी दीदी गारी में बेथ गए वह बोहत ज़्यादा खुश और नर्वस लग रही थी..

मैं न्य उनको हौसला देती हुवे कहा..

मैं:- आप हौसला रखी सब ठीक होजाये गए...

जानकी:- हम्म्म लेकिन यह सब हो रहा ही मुझी यकीन नहीं आ रहा..

मैं:- यकीन आ जाये गए जब आप भैया सी मिल्ली गई...

मैं न्य गारी चला दी और साथ hi मेरा फ़ोन बज गया देखा तो वकील का फ़ोन था..

मैं:- Hello..

वकील:- सर सब काम होगया ही आप जाइये बीएस कुछ देर में उनको रहे मिल जाये गई..

मैं:- O.k एंड थैंक यू..

वकील:- सर इतस माय हॉनर तो वर्क फॉर यू...

मैं:- O.k We'll बे तेरे इन 30 मीन्स..

वकील:- O.k सर...

फ़ोन सुत्त...

मैं न्य गारी चला दी और जानकी दीदी की तरफ दुख जो अपने हाथों सी खेल रह8 थी..

हम कुछ देर की ड्राइव क बाद वहां पोहंच गए...

मैं न्य वकील को फ़ोन किया और बाहिर अणु को कहा उसनी 5 मं बोलै और फ़ोन बंद क्र दिया...

मैं और दीदी जेल क बाहिर वेट करनी लगी...

5 मं बाद वकील बाहिर निकला और उसके साथ राहुल भैया भी थय जिनकी हालत देखनी में hi बोहत खराब लग रही थी बारी बाल आंखों क नीची हल्की...

दीदी न्य जैसी hi उनको देखा भाग क गली लग गई उन्होंने भी जब दीदी को देखा तो फ़ौरन बाहें फैला दी और उनको अपनी बहून में भार लिया जैसा वह अपनी साडी जुदाई आज hi ख़तम करनी वाली हैं और कभी भी उनको नहीं चोरी गई..

मेरी आंखों में आंसूं आ गए थय लेकिन मैं दूर hi खरा था और उनके मिलान को देख रहा था..

5 मं बाद दीदी उनसे अलग होइ तब भाई की नज़र मुझपी गई..

उन्होंने दीदी सी पोछा..

राहुल:- यह कोण ही.?

जानकी:- पहचानिये कोण है.?

राहुल:- उम्म्म्म नहीं मुझी नहीं मालूम कोण है यह.?

जानकी:- वही जिसकी हर वक़त बातें कृत्य थय वह ऐसा होगा वह वैसा होगा...

राहुल भैया एक डैम शॉक hogaye...Aur एक डैम हैरानी सी बोली...

राहुल:- क्या यह सैम ही.?

जानकी दीदी न्य हाँ में सर हिल्ला दिया...

राहुल भैया भाग क मीय पास ए मैं भी तकरीबन भागता हुवा उनके गली लग गया...

भैया न्य मुझी कस क गली लगा रखा था और मैं न्य भी हम दोनों रू रही थय..

कुछ देर बाद भाई अलग होवै..

राहुल:- केसा ही तो एक डैम हैंडसम होगया ही..

मैं:- एक डैम बरिया हूँ अब आप आ गौए और भी मस्त हो जाओं गए...

राहुल:- बोहत मिस किया तुझी..

मैं:- मैं न्य भी आपको मिस किया और बोहत Kiya..Abi चलती हैं..

राहुल:- हाँ चल...

मैं:- आप बैठो गारी mein..Didi...

और जानकी दीदी भैया को गारी में लय गई..

मैं वकील क पास गया..

मैं:- थैंक यू सो मच..

वकील:- सर प्लीज ऐसा मत खाइये आपकी लिए कुछ भी क्र सकता हूँ..

मैं:- सो स्वीट ऑफ़ यू एंड सी यू Soon..Nd साडी पेमेंट मिल गई या कुछ और चाहिए.?

वकील:- नहीं सर क्यू शर्मिंदा क्र रही हैं...

मैं:- O.k bye..

वकील चला गया और मैं गारी तक आज्ञा...

जब मैं बात क्र रहा था तब जानकी न्य साडी बात भैया को बता दी जी वह हन्ति थी..

मैं जैसी hi वहां गया बगिया न्य फिर सी गली लगा लिया..

मैं:- साब ठीक ही न भैया.?

राहुल:- केसा तुझी शुक्रिया कहूँ जो टोने किया मेरी लिए..

मैं:- एक भाई दोस्सरी क लिए जान भी दी सकता ही और मैं न्य तो कुछ नहीं किया...

राहुल:- तो फरिश्ता ही मेरी भाई...

मैं बीएस मुस्कुरा दिया और बोलै..

मैं:- अब हामी चलना चाहिए...

हम गारी में बेथ गए भैया भाभी पिच्य बेथ गए मैं गारी चलनी लगा और सीधा होटल आ गए..

मैं भैया को कमरे में लय गया और उनको फ्रेश होने का कह क नीची कैंटीन में चला गया...

कुछ देर में भैया और भाभी नीची आ गए...

भैया अब ाच्य लग रही थय बल सौर्य और मुँह पी रौनक और कापरी भी ाच्य थय...

राहुल:- इतनी कापरी लेनी की क्या ज़रूरत थी...

मैं:- अब यह तो आप भाभी सी पोचो उन्होंने लिए...

जानकी:- आपकी लिए hi तो लिए हैं देखो न किसी पेट निकल गया ही क्या वहां बीएस कहती रेहटी थय.?

इस बात पी भैया और मैं हस्स दिए..

मुझी भैया सी बोहत बातें करनी थी लेकिन मैं अभी कुछ नहीं बोलै और कहा..

मैं:- अब घर चली वर्ण आपकी मां मुझी कच्चा खा जाये गए...

राहुल:- सैम यह सब क्यू क्र रहा ही.? जानकी न्य बताया मुझी...

मैं:- आपको बाद में बताओं गए...

जानकी:- एक तो यह तेरा बाद में मुझी बोहत बूरा लगता ही..

मैं:- वक़त बोहत बरी सहीज़ ही दीदी और वक़त इंसान को बनता और बिगरता ही..

राहुल:- लगता ही हमरा छोटो सा बेबी अब काफी बारे होगया...

मैं:- जी भाई अब चली.?

और हम गारी में बेथ क निकल गैर गाओं की तरफ...

हामी वापिस आती समय शाम होगी थी और घर पी सबको क्या बताना था वह मैं दोनों को बता चूका था...

हम गाओं पोहंच गए और मैं न्य हवेली क दरवाज़ी क सामन्य गारी रोकी..

जानकी दीदी चिलाती होइ ख़ुशी सी बाहिर निकली...

सब उनकी आवाज़ सुन क बाहिर आ गए सब आदमी भी थय..

इंदू:- क्या हुवा क्यू चिल्ला रही ही तो और इतनी खुश क्या बात ही.?

जानकी न्य भैया को बाहिर अन्य का कहा...

जैसी hi भैया बाहिर निकली सब क मुँह खुले रह गए और सब ख़ुशी सी झूम उठी..

और भाग क राहुल भैया क पास आ gaye...aur हल पोचनय लगी और छोटी किसी वह भी पूछने lagy..Main साइड पी hi खरा था और सब को खुश देख क मैं भी खुश था..

जानकी:- अरे सांस लो सब बताती हूँ पेहली अंदर तो चलो...

शांति:- रुक मैं आरती लय क अति हूँ..

रानी:- बुआ मैं लती हूँ...

वह अंदर चली गई..

और आरती लय क बाहिर ी...

इंदू आंटी न्य आरती की थाली ली.

और सब घर क अंदर खरी होगये और भैया और जानकी दीदी बाहिर मैं अभी तक गारी क पास hi खरा था...

तभी इंदू आंटी का ध्यान मुझपी गया. उन्होंने मुझी भी यज्ञ अन्य का कहा..

मैं न्य ना का इशारा किया लेकिन जानकी दीदी मेरा हाथ पाकर क अपने साथ लय ी मेरी साइड में राहुल भैया खरी थय..

इंदू आंटी न्य आरती क्र क भैया क सर पी तिलक लगाया और मेरी भी..

फिर हम अंदर चली गए बेथ गए रानी और भाग्य किचन में चाय बने चली गई...

कृष्णा:- यह सब किसी हुवा हम न्य बोहत कोशिश की लेकिन तुम्ही निकल नहीं पाए...

जानकी:- मां जिस कंपनी न्य इनपे इलज़ाम लगाया था वह बिक गई ही और जिस न्य खरीदी ही उन्होंने न्य कुछ भी हुवा वह सब माफ़ क्र क सारी चार्जेज वापिस लय लिए...

J'papa:- क्या पूरी की पूरी कंपनी hi खरीद ली.?

जानकी:- हाँ पापा.

कृष्णा:- कोण ही वह भला इंसान हामी उनका शुक्रिया ऐडा करना चाहिए...

जानकी दीदी न्य एक नज़र मुझपी डाली मैं न्य सर झुका लिया...

और फिर वह बोली..

जानकी:- वह इंडिया सी बाहिर सी हैं...

शांति:- जो भी हैं बोहकत भला इंसान है...

कृष्णा:- हाँ उस रखा को अब मैं बताओं गए क मैं क्या चीज़ हूँ बोहत शांत था मैं...

मैं:- अब जो होना था होगया अब ख़तम कृत्य हैं...

कृष्ण:- तुम कोण होती ऐसा बोलनी वाली. और कोई हक़ नहीं है तुम्हारा मेरी ममलूँ में बोलने का...

सब एक डैम चुप होगये जानकी कुछ बोलने लगी तभी मैं उनको चुप रहंय का इशारा किया...

और मैं चुप चाप ऊपर कमरे में चला गया.

मेरी जाती Hi जानकी दीदी भी उठ क वहां सी अपने कमरे में चली गई...

शांति:- लगता ही ठाक गई राहुल बीटा तुम भी जा क आराम क्र लो रात क खाने क टाइम उठ जाना...

राहुल भैया भी उठ क कमरे में चली गए...

भैया जैसी hi कमरे में एंटर होवै जानकी दीदी बीएड पी बेथ क रू रही थी.

राहुल:- जान प्लीज मात रो..

जानकी:- I'm सॉरी राहुल मेरी घरवाली तुम्हारी. भाई क साथ ऐसा बर्ताव क्र रही हैं और ऊपर सी वह कुछ बोलने नहीं देता..

राहुल:- उसनी कहा था न क वक़त बोहत बरी चीज़ ही अगर वह कुछ क्र रहा ही तो सोच समझ क क्र रहा होगा...

दीदी समझ गई और वह दोनों आराम करनी लगी...

इधर मुझ कमरे में आया कुछ देर hi होइ थी क दरवाज़ा नॉक हुवा मेरा...

मैं न्य खोला तो इंदू आंटी थी...

मैं:- आंटी आप.?

इंदू:- कच बात करनी ही अगर तुम फ्री हो तो...

मैं:- अरे आइये आंटी...

मैं साइड होगया वह ाबदेर आ गई...

इंदू:- दरवाज़ा बंद क्र दो..

मैं न्य सवालिया नज़रूँ सी उनकी तरफ देखा उन्होंने फिर बात को दुहराया..

मैं न्य दरवाज़ा बंद क्र दिया..

मैं आंटी सामन्य खरा था वह कुछ भी नहीं बोल रही थी...

अचानक उन्होंने मेरे होंठ को चूमना शुरू क्र दिया...

मैं शॉक होगया उनके इस हम्लय sy...Kuch 10 15 सेक् बाद वह अलग होगी..

मैं बिलकुल बूट बन क खरा था...

इंदू:- मुझी माफ़ करना मैं यह बिलकुल नहीं करना चाहती थी लेकिन खुद को रोक नहीं पाई.....

मैं:- आप प्लीज माफ़ी मत मांगिये मैं बाहिर चला जाता हूँ...

इंदू:- नहीं मैं टुमस्य बात करनी ी थी लेकिन...

वह गिलटी फील क्र रही थी..

मैं:- आप बोलिये और भूल जाइये इस बात को..

इंदू न्य खुद को ठीक क्र क बोलै...

इंदू:- राहुल को तुमनी छुडवाया है न.?

मैं एक डैम षिक होगया लेकिन कंट्रोल क्र क बोलै...

मैं:- नहीं मैं किसी वह तो किसी न्य कंपनी खरीद ली...

इंदू न्य नेर हाथ पाकर क अपने सर पी रख दिया और बोली..

इंदू:- मेरी सर की खा क बोल..

मैं न्य हाथ हटा लिया और पलट गया..

इंदू:- मुझी पता था तूने hi किया ही जब सी तू आया ही हमारी ज़िन्दगी बदल गई ही लेकिन हमनी बदली में बीएस तुझी ज़िलत दी ही मैं अभी सब को सच बताती हूँ...

मैं:- नहीं आंटी प्लीज ऐसा मत करना लेकिन आपको पता किसी चला...

इंदू:- जब जानकी न्य तुझी अपने पास खरा किया और तेरी जाने क बाद वह भी उठ क चली गई और रोने लगी तब मुझी शक हुवा और पोचनय चली ी अब सच यकीन में बदल गया...

मैं:- और जो आती hi किया.?

आंटी नेरा इशारा समझ गई और फिर शर्मिंदा होगी...

इंदू:- मैं करना नहीं कहती थी लेकिन जब भी तुम सामन्य होते हो मेरे डिल को कुछ होने लगता ही मुझी पता ही गलत ही मेरी बेटी प्यार करती ही टुमस्य...

मैं आंटी क करीब गया उनकी सांसें तीज चलनी लगी मैं न्य अपना एक हाथ उनकी कमर में दाल दिया और उनका चेहरा ऊपर क्र क अपने होंठ उनके होंठों पी रख दिए और चूसबी लगा वह भी मेरा साथ देने लगी...

5 मं की सॉफ्ट किश क बाद हम अलग हुवे...

आंटी का चेहरा खिल उठा जैसी पहली बार किश किया हो...

मैं:- आप ऐसी किश क्र रही थी जैसे पहली बार की हो...

इंदू:- पहली बार hi की थी..

मैं:- क्या इस का मतलब अंकल कुछ नहीं.?

इंदू:- उब्का क्या ही जब डिल किया पेटीकोट उठा क नोचा और अपनी प्यास भुजा क सू गए..

मैं:- आप क्या चाहती हैं.?

इंदू:- प्यार ढेर सारा...

मैं यज्ञ बढ़ा और उनको गली लगा लिया वह गली लगती hi रोने लगी और कस क मुझी बहून में भार लिया...

कुछ देर में आंटी चली गई और मैं राहुल भैया सी बात करनी चला गया...

तो बे कंटिन्यू...
 
अपडेट NO.69


जब इंदू आंटी गई उसके कुछ समय बाद मैं राहुल भैया क रूम की तरफ चला गया....

वहां जा क मैं न्य दूर नॉक किया उनका तो जानकी न्य खोला और जैसी hi सामन्य मुझी देखा सीधा गली लग गई...

जानकी:- I'm सॉरी मेरी वजह सी यह सब सुनना पारा...

मैं:- आरर भाभी कोई बात नहीं और मुझी बुरा नहीं लगा और वैसी भी बरो की बातों गए कभी बुरा नहीं मानना चाहिए..

जानकी दीदी अलग होइ और मेफी तरफ देख क कहा..

जानकी:- तुम इंसान हो क नहीं...

मैं:- मालूम nahi...Wesy भैया किधर हैं...

जानकी:- वाशरूम mein...Tum बैठो अंदर मैं नीची जा रही हूँ...

वह नीची चली गई और मैं जा क बीएड पी बेथ गया और वेट करनी लगा...

कुछ देर में भैया बाहिर ए और मुझी देख क बोले...

राहुल:- अरे सैम तो यहाँ.?

मैं:- जी भैया आपसी hi मिलनी आया था...

राहुल:- ाचा किया आज्ञा मुझी भी तुजसि बोहत बातें करनी हैं...

मैं:- पेहली मुझी कुछ पोछना ही...

राहुल भैया आ क मेरी पास बेथ गए...

राहुल:- क्या पोछना ही...

मैं न्य उठ क दूर बंद क्र दिया और वापिस आ क बेथ गया..

मैं:- भैया यह सब कुछ किसी हुवा और यह केस यह सब क्या ही.?

राहुल भैया एक बार कहीं खू गए लेकिन फिर खुद को संभालती हुवे बोले..

राहुल:- W..Woh वही हुवा था जो जानकी न्य बताया था...

मैं भैया की तरफ देखता रहा बोलै कुछ नहीं..

राहुल:- ऐसी क्यू घूर रहा ही.?

मैं:- देख रहा हूँ मेरी भैया को झूट भी नहीं बोलना अत...

राहुल:- झूट कब बोलै मैं न्य...

मैं:- भैया आपको मेरी कसम सच सच बताइये सब क्यू हुवा आप ग्रेजुएशन क बाद घर क्यू नहीं ए और दादा जी और छाछ जी क सिवा घर पी किसी को कुछ क्यू नहीं पता अपने अपनी कसम दी क चुप क्यू किया...

राहुल भैया कुछ नहीं बोले बीएस कहीं खू गए..

मैं:- ठीक ही नहीं बताना तो आपकी मर्ज़ी मैं जा रहा हूँ..

मैं उठ क जाने लगा राहुल भैया न्य मेरा हाथ पाकर लिया.

राहुल:- बताता हूँ सब कुछ....

राहुल की ज़ुबानी...

मैं गाओं सी शहर परण्य आया था मैं न्य आईटी फील्ड में में एडमिशन लिया था और जब मेरा 3रद ईयर था कॉलेज में मैं न्य एक ऐसा सॉफ्टवेयर बनाया जिस सी हम हर एक एक इलेक्ट्रॉनिक को कण्ट्रोल क्र सकती हैं जब चाही और जैसी चाही इस्तमाल क्र सकती हैं और मेरा यह प्रोजेक्ट काफी वायरल होगया कॉलेज में इसी दुराण मेरी मुलाक़ात जानकी सी होइ वह तब 2ंद ईयर में थी उसनी मेरी सी हेल्प लेनी आना और मेरा उसको पढ़ाना कब प्यार में बदल गया पता नहीं चला...

मेरी फाइनल ईयर में एक एशिया तूफ़ान आया जिस न्य मेरी ज़िन्दगी को बर्बाद क्र दिया...

एक दिन एक सेमिनार में मेरी मुलका R'Group ऑफ़ कम्पनीज क मालिक सी होइ जिस न्य मुझसी बोहत अछि तर्हां बात की और अपना कार्ड मुझी दिया क मुझी ज़रूरत हो तो उस सी जा क मिलों...

मैं न्य कोई ध्यान नहीं दिया उसकी बातों पी...

मेरी ग्रेजुएशन कॉम्पेलटे होने क बाद मैं गाओं गया वहां जा क कुछ दिन रहा और वापिस शहर आ गया और जॉब ढोंढाण्य लगा तभी मुझी वह कार्ड का ख्य आया और मैं पोहंच गया उस क ऑफिस..

उस सी मिला और उसनी अपने साथ काम करनी क लिए एक ाचा पकगे दिया था मैं न्य सोचा था अब जानकी और मेरी घर वालों सी बात क्र लेनी चाहिए लेकिन एक दिन जब मैं रखा क घर गया वहां मेरी मुलाकात उसकी बेटी काया सी होइ जो क एक बोहत मॉडर्न लड़की थी उस वक़त भी वह एक शार्ट ड्रेस में थी..

मैं जा क रखा सी मिला...

रखा:- राहुल यह मेरी बेटी काया यह भी बोहत जल्द ऑफिस ज्वाइन करनी वाली ही...

मैं:- Hi...

उस सी हाथ मिलाया वह मेरी तरफ अजीब तर्हां सी देख रही थी और मेरी हाथ को बोहत अजीब तारीकी सी छु रही थी...

मैं न्य ीगोंरे किया कुछ दिन बाद वह ऑफिस अन्य लगी और जान बूझ क मुझसी चिपकनी लगी...

कुछ दिन बाद रखा न्य मुझी अपने ऑफिस बुलाया..

मैं गया और उसके सामन्य बेथ गया...

Main:-Hello सर कोई ज़रूरी काम था.?

रखा:- हाँ राहुल सुना ही तुमनी कॉलेज में कोई बोहत यूनिक चीज़ बनाई थी...?

राहुल:- यह सर वह एक सॉफ्वेयर था जो क अब एक डिवाइस बन चूका ही जिस हम....

ऐसी hi साडी डिटेल उसको बता दें मैं न्य...

रखा:- राहुल तुम हमारी बोहत ाच्य पार्टनर हो और हम चाहती हुईं क यह डिवाइस हम अपनी कंपनी क नाम सी लांच क्रय जिस सी हराम फ़ायदा होगा..

राहुल:- मुझी ख़ुशी होगी ऐसा क्र क...

रखा:- और यह डिवाइस मेरा बीटा लांच क्रय गए...

जैसी सुन क मैं हिरण और गुस्सा दोनों था लेकिन कुछ बोलै नहीं बीएस यह hi बोलै...

राहुल:- मेरी म्हणत ही सर यह किसी किसी और क नाम सी लांच क्र दूँ.?

रखा:- तुम्ही सोचने का टाइम देता हूँ ठंडी दिमाग सी सोचना क उसका अंजाम क्या होगा....

मैं छू चाप वहां सी निकल आया..

और उस सी अगली दिन मेरी फ्लैट पी काया ी...

मैं उसी देख क हिरण रह गया..

मैं:- तुम यहाँ.?

काया:- राहुल तुम भाग जाओ यहाँ सी वर्ण मेरी पापा और भाई तुम्ही जान सी मार दी गए...

राहुल:- क्या लेकिन क्यू.?

Kaya:-Woh सब बतानी का टाइम नहीं ही बतानी का वह कुछ भी क्र सकती हैं....

राहुल:- तुम मुझी यह सब क्यू बता रही हो.?

काया:- क्यू क मैं टुमस्य प्यार करती हूँ राहुल... हाँ राहुल जब सी तुम्ही देखा ही कुछ नहीं सुजाता मुझी.....

राहुल:- I'm सॉरी काया मैं तुम्हारी प्यार की कदर करता हूँ लेकिन मैं किसी और सी प्यार करता हूँ...

काया:- मैं जानती हूँ राहुल तभी तो खुद बा खुद पिच्य हैट गई थी मैं लेकिन आज बोले बिना रह नहीं pai..lekin तुम्ही अभी जाना होगा तुम्हारी फॅमिली को भी खतरा होसकता ही इन सब में...

राहुल:- अब कहाँ जाओं फिर...

काया:- बीएस कृष्णा अंकल hi बचा सकती हैं तुम्ही पापा सी..

राहुल:- वह कोण हैं.?

काया:- जानकी क मां तुम जल्दी सी उनके गाओं चली जाओ...

उसकी बाद काया न्य मेरा बैग पैक करवा क मुझी अपनी गारी में बस स्टॉप छोरा मैं न्य उसका शुक्रिया ऐडा किया और निकल गया गाओ की तरफ...

वहां जा क मैं न्य और जानकी न्य सब कुछ सच बता दिया और उन्होंने भी मुझी एक्सेप्ट क्र लिया और कुछ दिन में हम दोनी की शादी करवा दी मैं यह मामला नैतनय क बाद अपने घर जाने वाला था लेकिन हुवा उस सी उल्टा जब कृष्णा अंकल न्य सब को बता दिया मैं उनका जमाई हूँ तब सी रखा न्य कृष्णा अंकल पी हम्लय शुरू करवा दिए लेकिन मैं बचता गया...

आखिर कर रखा न्य मुझपी यह केस करवा दिया और डायरेक्ट C.M सी अपील करवाई जिस क चलती मुझी सजा होगी लेकिन मीडिया की वजह सी वह मुझी मार नहीं सकी और न hi वह आज तक वह डिवाइस ढून्ढ पाए hain...lekin जब उनको पता चली गए तब मैं बाहिर आ गया हूँ वह फिर सी हम्लय कार्य गए और उसका बीटा भी....

यह सब बातें सुन क मेरा दिमाग घूम गया था बोहत गुस्सा आ रहा थमुझी मेरी आंखें लाल हो रही थी क तब hi दरवाज़ा खुला और जानकी दीदी अंदर आ गई...

जानकी:- क्या बातें हो रही हैं भाइयोँ में...

उनकी आवाज़ सुन क मैं थोड़ा नार्मल होगया...

राहुल:- कुछ नहीं बचपन की बत्रिन और यह क्या क्र रहा ही वह बातें...

जानकी:- चलिए बाद में करना बातें पेहली खाना खा लें..

मैं और राहुल भैया खाना कहानी नीची चली गए...

तो बे कंटिन्यू..

नोट:- I'M सॉरी दोस्तों मैं जनता हूँ क उपदटेस छोटी आ रही हैं लेकिन जितना टाइम मिल रहा ही उतना लिख रहा हूँ बीएस कुछ दिन और फिर बैक तो नोर्मा Size..Hope यू आल अंडरस्टैंड...
 
अपडेट NO.70


भैया क साथ बात क्र क मुझी बोहत गुस्सा आ रहा था उस रखा पी साला ही क्या चीज़ अब एक मुलाकात तो बनती है उस सी..

मैं कहानी की टेबल गया भैया क साथ मैं न्य थोड़ा सा Hi खाया था मेरी दिमाग में बीएस वही बातें चल रही थी जिस पी शांति और इंदू आंटी न्य कहा भी था क कहाँ खोये हो खाना खाओ...

खाने क बाद मैं अपने कमरे में आज्ञा और लेट गया लेकिन नींद आंखों सी कोसों दूर थी..

मैं उठ क ऊपर चाट की तरफ चला गया और जा क खरा होकय सोचनी लगा क क्या करना चाहिए मुझी...

तभी किसी क अन्य का एहसास हुवा मैं न्य देखा तो यह रानी थी जो क कुछ परेशानी में ऊपर आ रही थी...

मैं:- अरे तुम सोइ नहीं अभी तक.?

रानी:- नींद नहीं आ रही थी तुम भी तो नहीं सोये...

मैं:- हाँ बीएस कुछ देर सोचा ऊपर आ जाओं...

रानी:- I'm सॉरी रॉकी मेरी वजह सी तुम्ही सब सहना पर रहा ही अगर तुम चाहो तो जा सकती हु मैं सब को संभल लोन गई...

मैं:- अरे कोई बात नहीं मुझी यह सब पेहली सी एक्सपेक्टेड था और तुम क्यू फ़िक्र क्र रही हो सब ठीक होजाये गए..

रानी:- मुझु नहीं लगता...

मैं:- कभी भी ना उम्मीद नहीं होते किसी भी चीज़ क लिए जिस चीज़ को डिल सी चाहो कोई भी तुम्ही उस सी दूर नहीं क्र सकता...

रानी:- जब मिलनी की उम्मीद न हो तो इंसान बेबस होजाता ही..

मैं:- यह तो आपके चाहंय पी ही क आप उसको कितना चाहती ho...Agr आपकी चाहत सच्ची ही ज़रोरो मिली गए...

रानी:- दुआ ही meri...Aur हाँ कल हम सब को मंडी जाना ही...

मैं:- वह क्यू.?

रानी:- आज राहुल जिजीउ घर ए थय न उन क लिए पूजा करनी hai...Tum सुबह जल्दी उठ जाना...

मैं:- मैं क्या करूं गए जा क..

रानी:- तुम्ही आना ही मतलब आना ही...

उसनी ऐसी हक़ सी कहा क मैं मन नहीं क्र सका और मुस्कुरा दिया..

वह भी मुस्कुरा क नीची चली gai...Main भी थोड़ी देर में नीची आ क सू गया..

नेक्स्ट मॉर्निंग..

मेरी नींद किसी क हिलनी सी खुली आंखें खोल क देखा तो जानकी दीदी थी...

जानकी:- उठो सैम जल्दी सी त्यार होजाओ फिर हामी निकलना भी ही..

मैं:- क्या भाभी इतनी सुबह सुबह कहाँ जाना ही...

जानकी:- आपको बता दूँ क 7 बज रही हैं और मंदिर जाना hy..Utho जल्दी...

मैं:- ओह्ह हाँ रानी न्य बताया था आप चलो मैं 10 मं में त्यार होकय अत हूँ..

जानकी दीदी चली गई और मैं उठ क वाशरूम में जा क फ्रेश हुवा और नाहा क बाहिर आया और बाहिर आया तो बीएड पी कुरता पजामा पारा था..

पता नहीं किसनी रखा होगा.?

बाद में पॉच लोन गए और मैं उसको लय पेहेन लिया और त्यार होगया

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और नीची आज्ञा सब बाहिर लाउन्ज में बैठी थय शायद मेरा वेट क्र रही थय...

और जैसी hi सबकी नज़र मुझपी पारी सब क मुँह खुले रह गए जैसी कोई अजूबा देख लिया हो ख़ास क्र क लेडीज की..

मैं जा क सब को गुड मॉर्निंग कहा..

शांति:- वह बीटा बोहत प्यारे लग रही हो नज़र न लग जाये किसी की...

और अपना काजल आंखों सी निकल क मुझी लगा दिया...

राहुल भैया न्य भी कहा ाच्य लग रही हो..

कृष्णा:- चलो देर हो रही ही..

सब बाहिर आ क गारी में बेथ गए..

हम्र्य यज्ञ पिच्य 2 2 गाड़ियां चल रही थी...

मेरी नज़र रास्ते पी गई और वहां आज जितना राश होना चाहिए उतना नहीं था कुछ तो अजीब था...

हम कुछ देर की ड्राइव क बाद मंदिर पोहंच गए..

सब उत्तर क कञ चलनी लगी मैं पिच्य चल रहा था मेरी नज़र इधर उधर जा रही थी वहां hi कुछ गर्बर थी..

मैं न्य वहां समझ क इग्नोर किया..

सब त्यारियां पेहली सी hi क्र क राखी गई थी..

पंडित:- आइये कृष्णा जी सब तयारिया होगी हैं यहाँ बैठिये...

कृष्णा:- औ राहुल बीटा यहाँ बैठो...

राहुल भैया बेथ गए वहां और पंडित जी न्य पूजा शुरू की...

तभी मंदिर में अफरा तफरी मच गई और अचानक 8 10 गाड़ियां एक लाइन में वहां ै...

सब की नज़रें उधर चली गई..

R'chacha और फूफा यज्ञ को गए और अपने आदमियों को आवाज़ देंय लगी क जा क देखो कोण आया ही ..

सब यज्ञ गए लेकिन वहां की भीड़ में सी आदमी बाहिर निकली जिन क पास हथियार थय और वह उन उनपे झपट गए और पाकर लिया...

करसिशना:- यर्ह क्या हो रहा ही सब.?

Kushal(R'chacha):- पता नहीं भइया आपकी केहनी पी hi हम काम लोगों को लय क ए थय...

इंदू:- अब क्या होगा और यह कोण आया ही.?

पंडित:- अगर उएह पूजा रुकी तो बोहत बारे अब शगुन होजाये गए...

तभी गारी का दरवाज़ा खुला और उस में सी एक आदमी बाहिर आया जिस न्य सफेद पेण्ट कोर्ट पहना था और पूरी स्टाइल सी बाहिर आया और निकल क एक अंगराई ली और एक आदमी न्य आ क उसकी मुँह में सिगरेट रखा और जला दिया...

मैं हीरानी सी देख रहा था क यह कोण ही.? और इतनी आदमी लय क क्यू क्या ही और मेरी स्वाळून का जवाब कृष्णा अंकल न्य एक लाइन में दी दिया...

कृष्णा:- रखा यहाँ.?

Main(man में):- ओह्ह्ह्ह तो यह ही वह जिस न्य मेरी नींद ुरा क रख दी थी..

कृष्णा अंकल यज्ञ को गए और वह भी चल क आज्ञा आया पूरी स्टाइल में...

मैं साइड में hi खरा था मुझी लगा यह खुद सब संभल लय गए मेरा बोलना ठीक नहीं होगा...

रखा:- अरे नमस्ते कृष्णा जी...

कृष्णा:- तू क्यू आया ही और तेरी हिमत किसी होइ यह सब करनी की...

रखा हसने लगा...

रखा:- मेरी एक आदत ही मैं जो चाहता हूँ हासिल क्र क रहता hun..Aur मैं यहाँ तेरी लिए नहीं राहुल सी मिलने आया हूँ...

कृष्णा:- अगर मेरी दामाद पी अपनी गन्दी नज़र डाली न तो...

रखा न्य इशारा किया एयर 10 आदमियों न्य आ क करसिंहना अंकल और कुशल अंकल को पाकर लिया और जानकी पापा को भी...

रखा:- जाओ और उस राहुल को लय क आ...

सब बोहत दरी हुवे खरी थय मैं अपना बज़्ज़ो पेट पी बांध क खरा था और सब देख रहा था बीएस...

एक आदमी भाग क आया और राहुल भैया को पकरणय लगा...

उस सी पेहली क वह राहुल भैया को हाथ लगा पता मैं न्य उसका हाथ पाकर लिया और घुम्मा दिया...

उसकी एक ज़ोर दर चीख वहां गूँज गई..

मैं न्य उसका हाथ hi उसकी कमर क पिच्य दाल क यज्ञ को फ़ेंक दिया...

वह जा क बिच में गिरा...

और मैं साइड सी निकल क भैया क सामन्य आया और रखा की तरफ देखती हुवे पंडित सी बोलै..

मैं:- ापण्डित जी पूजा पूरी कीजिये...

और चल क यज्ञ आया तभी एक आदमी साइड आया और मुझी लात मारण्य लगा मैं न्य उसकी लात पाकर मूर दी और अपनी कोहनी उसकी पपीठ पी मारी वह वही पी गिर गया...

मैं यज्ञ बढ़ा और जा क रखा क सामन्य खरा होगया...

सब हीरानी सी मुझी देख रही थय..

मैं:- देख मैं ज़्यादा टाइम नहीं वास्ते करूं गए बीएस यही कहूँ गए क चुप चाप चला जा वर्ण तेरा अंजाम वह होगा जो आज तक किसी न्य न देखा होगा और न सुन्ना होगा...

तभी 2 3 आदमी भाग क ए और मुझपी डांडी मारण्य लगी मैं न्य थोड़ा पिच्य होकय एक का कालर पकड़ क दूसरी क पेट पी मारा दोनों hi जम्में पी गिर गए...

मैं इस बार थोड़ी तीज आवाज़ में बोलै..

मैं:- तुझी मेरी बात नहीं समझ आ रही...

एक आदमी जो क भाग आ रहा था उसकी सीने पी अपना हाथ मर्त्य हुवा कहा और जिस सी उसकी मुँह सी खून की एक धार निकली और नीची गिर गया...

रखा:- तो जनता नहीं किस सी पाएंगे लय रहा ही...

मैं:- जनता हूँ सब जनता हूँ तेरी बारी mein...Aur हिसाब भी करूं गए लेकिन अभी नहीं अभी चला जा....

रखा:- क्या क्र लय गए...

मैं:- तेरी पास जगा काम पर जाये गई इतनी टुकड़ी करूं गए तुम सब क....

तभी वहां एक और गारी ी जिस मरीन सी कुछ आदमी निकले जो सीधा रखा क पास गए और कण में कुछ बोले जिस सी एक बार उसको झटका laga...Aur मेरी चेहरी पी कातिल मुस्कुराहट आ गई...

रखा:- देख लोन गए सब को...

मैं:- वडा रहा जिस दिन दुबारा मिली का तेरी ज़िन्दगी का आखरी दिन hoga..aur मेरी भी एक आदत ही मैं अपना वडा पूरा करता हूँ...

रखा पलट गया और अपनी गारी में जा क बेथ गया...

मैं न्य उनकी तरफ देखा जिन्होंने अंकल को पकड़ा था..

मैं:- अभी तक समजह नहीं आया या वहां आ क समझाऊँ....

ऐसा सुनते hi सब न्य उनको छोरा और वापिस गरियोँ में बेथ गए जैसी hi गारी चलनी लगी मैं न्य रखा की तरफ देख कहा...

मैं:- उम्मीद ही मुलाकात तुझी नहीं भूली गई और मेरा वडा भी...

और जैसी गाड़ियां ी थी वैसी hi चली गई...

सब गाओं वाली खुश होगये और मेरी पास आ गए और मुझी कंधी पी बिठा लिया....

मैं न्य जब रानी की फॅमिली की तरफ देखा देखा सब बोहत खुश और हिरण थय और कृष्णा अंकल साइड में बैठी थय...

मैं उत्तर क उनके पास गया और उनके सामन्य बेथ गया...

मैं:- क्या हुवा अंकल जय सोच रही हैं.?

उन्होंने मुझी देखा और गली लगा लिया यह पहली बार था जब उन्होंने मुझी गली लगाया था..

कृष्णा:- आज मुझी अपनी गलती का एहसास हुवा ही क मैं अपने परिवार की सर पी किसी मौत की तलवार लटका क रखता था मुझी माफ़ क्र दी बीटा मुझी माफ़ क्र दी...

मैं:- आपको एहसास हुवा मेरी लिए बोहत बरी बात ही...

तब तक सब वहां आ गए थय और पूजा भी पूरी होगी थी...

इंदू:- बोहत धन्यवाद बीटा तुमनी आज हामी और गाओं वालों को बचा लिया...

मैं:- आंटी किसी बातें क्र रही हैं क्या मैं आपका बीटा नहीं हूँ..?

कृष्णा:- तुम मेरी बेटे और दामाद दोनों ho..Mujhy मंज़ूर ही मैं अपनी बेटी की शादी टुमस्य hi करून गए..

कृष्णा अंकल खरी हुवा और पूरी गाओं वळून क सामन्य बोले..

कृष्णा:- यह मेरा दामाद ही और अगली hi हफ्ते इसकी और रानी की सगाई होगी....

मेरा तो एक रंग आ रहा था एक जा रहा tha...Main न्य अजीब सा मुँह बना क रानी की तरफ देखा उसका भी यही हाल था...

और साथ hi साब तालियां बजानी लगी...

तो बे कंटिन्यू...
 
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