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अपडेट NO.43(MEGA UPDATE.A)
हम लोग कोमल क घर गए वहां मुझी देख क बुआ बोहत बोहत खुश होइ और मैने घर पी फ़ोन क्र क बता दिया था और तनीषा को सब मैनेज करनी को कह दिया था...
मुझी अलग कमरा मिला सोने क लिए शाम को अंकल ए ुणस्य मिला और थोड़ी बात चीत की उनकी प्रॉब्लम क बारी में और जाने की कोशिश की क उनका और राजीव का क्या पन्गा ही यह पोछा ुँहू न्य बताया क वह उनकी कंपनी खरीदना चाहती हैं और वह मुझपी प्रेशर दाल रही हैं...
मैं कुछ देर बात क्र क कमरे में आज्ञा...
और सोचनी लगा क्या किया जाये.....
यौन hi प्लान बना क सू गया...
अगली सुबह उठा और ध्यान लगाया और तनीषा को फ़ोन किया 3 रिंग बाद hi फ़ोन उठा लिया...
मैं:- गुड मॉर्निंग मेरी जान...
तनीषा:- गुड मॉर्निंग...
मैं:- जल्दी सी सब को यथा दो...
तनीषा:- ी लव यपु ना!!..
मैं:- ी लव यपु तू!...
फ़ोन कट...
तभी मेरी कमरे का दरवाज़ा खुला बया अंदर आ गई..
मैने जल्दी सी दरवाज़ा बंद किया और उनको पाकर क बीएड पी लिटा दिया...
बुआ:- आ गई यद् मेरी बी.?
मैं:- अरे याद तो उनको किया जाता ही जिनको भूल जाये...
बुआ:- इसी लिए इतना तर्पया ही...
मैं:- अभी हप जाये...
बुआ:- हाँ अभी सबकी उतनी में टाइम ही मुझी बी बोहत खुजली हो रही ही..
मैने बुआ को होंठ चूसनी शुरू क्र diye...Phir हमारी एक्सप्रेस 1 घंटा चली फिर मैं बुआ क ऊपर hi लेट गया...
मैं:- एक बात कहूं...
बुआ:- हम्म्म..
मैं:- क्या आपकी यह मस्त गांड मिले गई.?
बुआ:- अभी नहीं मैने आज तक वहां नहीं लिया ऊँगली बी...
मैं:- बाद में तो दो गई.?
मैनी एक हाथ उनकी मस्त नंगी मामय पी रख दिया और मसल दिया..
बुआ:- अह्ह्ह मेरी राजा में पूरी तेरी हूँ.. तेरी घर जाने सी पेहली तुझी गांड दी दूँ गई...
फिर मैं और वफ साथ नहाये जल्दी सी क्यू क सबकी उतनी का टाइम होगया था
मैं कोमल और अवनि को कॉलेज चोरनी गया और निकल गया अपने प्लेन को एक्सेक्यूटे करनी...
1सत टारगेट :- मुन्नी Bai..(Kothy वाली)..
यह राजीव क कोठी को संभालती ही बल्के कोठी की आर में उसका सारा माल संभालती ही.....
लेकिन इसकी पास रात में जाना था इसी लिए मैं अभी राजीव क बंगलो क बाहिर अपनी गारी लय क खरा था और नज़र रख रहा था...
(अब आप सोच रही हों गए क हीरो क पास पावर्स हैं उसको क्यू नहीं इस्तमाल krta..lekin मैं बता दूँ पावर्स कोई बच्चों का खेल नहीं होती जब डिल चाहा खेल लिया... जब तक उनकी ज़रप्रात न पारी मेरी ख्याल सी उनको इस्तमाल करना सब सी बरी बेवकूफी होती ही अगर पावर्स पी hi निर्भर रहना ही तो इंसान अपने जिस्म को जला दी और पावर्स को hi उसे क्रय बीएस रूह सी इसी लिए जो काम का मज़ा हाथों सी करनी में ही पावर्स में नहीं...)..
खैर करीब 1 घंटी बाद राजीव और उसकी पत्नी बाहिर ए और अपनी गारी में बेथ कहीं चले गए...
मैने बी गारी उनकी पिच्य लगा ली वह लोग हॉस्पिटल ए थय भाई ए बी क्यू न उनका बीटा जो एडमिट ही...
जी हाँ बिलकुल वह सनी इसी का बीटा ही...
वह अंदर चले गए में बी उनकी पिच्य चला गया वह सीधा एक रूम में चले गए वहां सनी लेता हुवा था राजीव की पत्नी उसकी पास बेथ गई और राजीव डॉक्टर सी बात करनी लगा...
राजीव:- डॉक्टर मेरी बेटे को जल्दी सी ठीक करो..
डॉक्:- सर बोहत बुरी तर्हां मारा गया ही इनको लेकिन एक बात नहीं समझ आ रही इनकी जुबां बी ठीक और कोई और बी प्रॉब्लम नहीं मिली फिर बी यह बोल क्यू नहीं पा रही...
यह कारनामा आपकी भाई का ही मैनी उसकी जुबां को लॉक क्र दिया था...
राजीव न्य डॉक् का कालर पकड़ा और..
राजीव:- जो मर्ज़ी क्र लेकिन इसको ठीक क्र...
डॉक्:- सर हम पूरी कोशिश क्र रही हैं..
राजीव:- घर कब तक लय जा सकती हैं.?
डॉक्:- जब आप चाही मैं घर आ क इलाज करूं गए..
राजीव:- तो सारी पेपर्स रेडी करवा...
वह डॉक् वहां सी भाग गया...
फिर वह सनी को लय घर आज्ञा और मैं बी घर चला गया क्यू क दोनों को लेने बी जाना था..
रात को तकरीबन क्यू0 बाजी मैं पूरा त्यार होकय अपनी नई कापरी जो सुबह hi लय आया था पेहेन लिए और निकल गया..
मैं कोठी पी पोहंच गया वहां का बाजार रोशन था हर तरफ हुसैन और उसकी खरीदार मैं गारी वहीँ लय गया सब मेरी गारी की तरफ hi देखनी लगी मैनी मुन्नी क कोठी क सामन्य गारी रोकी...
पूरी स्लो मोशन में उतरा और कोठी की तरफ नज़र मरी सब रंडियां जो अपनी बालकनियों में खरी थी सब मेरी तरफ hi देख रही थी और उनकी पास अन्य को बोल रही थी...
मैं मुन्नी क कोठी पी ऊपर गया...
वहां रक्स चल रहा था गाने पी 2 लड़कियां नाच रही थी तमशाइये वहां पैसी लूटा रही थय..
मैं वहां गया तो सब मेरी hi तरफ देल्हनी लगी मैने मुन्नी की तरफ देखा वह अपने एक हाथ क बल बैठी पान खा रही थी...
मैं उसकी तरफ चल पारा रक्स अभी बी व्हाल रहा था...
मैं:- अदब..
अपना हाथ माथे तक लेट हुवी मैनी कहा...
मुन्नी:- अदब jnb..Apki तारीफ..
मैं:- सब कृत्य हैं वैसी न चीज़ को असद केहेती हैं...
मुन्नी:- पेहली कबि देखा नहीं आपको.?
मैं:- अरे हम तो शमा हैं हर जगह हैं बीएस देखनी वाली की नज़र होनी किये...
मुन्नी:- बातें तो अछि कृत्य हैं यहाँ किसी आना हुवा.?
मैं:- अरे मालिकाये हुसैन क पास किस लिए अत ही कोई.?
मुन्नी:- बीएस दीदार करना ही यह प्यार बी.?
मैं:- प्यार तो उनको किया जाता ही जो नज़रूँ को भाता ही और हमे तो कोहे नूर भा गया ही...
मुन्नी:- और बी हीरी हैं एक नज़र तो डालिये..
मैं:- अब कोहे नूर जैसी चमक किसी और हीरी में होती तो आज तक अंग्रेज़जों को हम न कोसती...
Muni(hehe):- जंब आपको पता बी होगा कोहे नूर की किम्मत का.?
मैं:- मुँह माँगा मिल्ली गए..
मुन्नी:- हर चीज़ पैसी सी नहीं खरीदी जाती असद साहब...
मैं:- दुनिया की ऐसी कोई चीज़ नहीं जो यह न चीज़ कोहे नूर क लिए न ला सकी..
मुनि बीएस मुस्कुरा दी और उठ क मेरा हाथ पाकर क कमरे में लय गई और उसको बंद क्र दिया..
वह मेरी करीब ै..
मुन्नी:- आज तक आपसे हसीन नहीं देखा देखती hi डिल में उत्तर गए..
मैं:- यह hi हमारा हॉल ही..
उसनी मेरी होंठ चुम लिए.. और एक हाथ सी मेरी पंत की ज़िप खोली और बेल्ट निकल क अंडरवियर नीची किया और उसकी नज़र जैसी hi लुंड पी गई.. उसनी अपने मुँह पी हाथ रख लिया..
मैं:- क्या हुवा पसंद नहीं आया क्या.?
मुन्नी:- ऐसा सच में बी होता ही मुझी तो लगा बीएस वह वीडियो में होता ही..
मैं:- कोई बात नहीं हम अपनी शमा लय क निकलती हैं...
मुन्नी:- नहीं यह तो मुझी लेना ही.
मैं:- हर चेस्ज़ की कीमत होती ही...
मुन्नी:- बोलिये क्या चाहिए...
मैने उसको पकड़ा और किश करनी लगा 10 मं तक किश किया वह किश की बिच में hi जहर गई और ऊपर निढाल गिर गई..
मैं:- इंसान को क़ाबलियत हमेशा उसको परखनय क पता चलती ही...
मुन्नी:- आज तक ज़िन्दगी में कबि बिना हाथ लगाए नहीं झरि आपके स्पर्श सी हमारा रोम रोम खरा होगया.. बोलिये क्या चाहिए...
मैं:- अपनी मेहबूब की बहून में सौदे नहीं कृत्य...
मुन्नी:- तो प्यार बी नहीं कृत्य.?
मैं:- सब मिल्ली गए सही समय पी हम कल मिल्ली गए सुबह ******होटल में..
मुन्नी:- जहाँ बुलाओ गए ाजाओं गई.
मैं खरा हुवा कापरी सही क्र क निकल गया घर की तरफ...
यहाँ मेरी जाने क बाद मुन्नी अभी बी बीएड पी लेती होइ थी उसको उठानी लड़कियां ी...
लड़की:- क्या हुवा दीदी लगता ही खूब जैम क चूड़ा ही उस चीकनी न्य अभी तक उलटी पारी हो.?
लड़की2:- है मैं बी अपनी छूट में उसका लुंड लू gi....Didi किसी चूड़ा उसनी आपको वैसी पहला आदमी ही जिसको तुमनी अपना जिस्म दिया...
मुन्नी:- ज़िन्दगी में पहली बार झरि हूँ वह बिना कुछ किये...
लड़की:- मतलब.?
मुन्नी:- पेहली शख्स था जिसनी आज मुझी चुवा...
लड़की:- दीदी एक बात नहीं समझ अति क इतनी बारी कोठी में होती हुवी बी आप आज तक कुवारी हैं.?
लड़की2:- अपनी जवानी को किस लिए संभाला ही.?
मुन्नी:- शयद इसी का इंतज़ार था...
इधर मैं गारी चलती हुवी मुन्नी क hi बारी में सोच रहा था उसको छूती hi लगा वह इस काम को अपनी मर्ज़ी सी नहीं क्र रही उसकी हस्ती और कठोर चेहेरी क पिच्य की रोटी होइ मुन्नी शायद मुझी hi दिखी.. जहाँ सब अपना जिस्म दिखा रही थय उसी जगह वह अकेली थी जिसका जिस्म ढाका हुवा था खूबसूरती की मिस्साल थी..
खैर मैं घर आ क सू गया सुबह उठ क सारी काम किया कोमल न्य शाम को घुम्मी जाने का प्लेन बनाया...
(मैं इस वक़त थोड़ा सन की तरफ तवजहा दी रहा हूँ इस लिए कोमल का ज़िकर काम ही इसका मतलब यह नहीं क उसकी यह मेरी दरमियान कुछ होगया ही..)
मैं होटल पोहंच गया यह मेरा hi होटल था सब सी बारे और ाचा कमरा त्यार करवाया और मुन्नी का इंतज़ार करनी लगा...
वह आ गई मैं नीची गया उसको गारी क अंदर सी रेसवे किया वह आज बिना कोई बज़्ज़ारो मेकअप क ै थी वह मेरी आंखों में देखती हुवी उत्तर गई गारी सी और उसका हाथ पाकर क अंदर लय आया और लिफ्ट में बी हथबपाकरी रखा वह बीएस मुझी देखी जा रही थी और मैं उसको हम कुछ नहीं बोल रही थय..
मैं उसको कमरे में लय और लॉक क्र दिया और बीएड क पास खरी होगी वह बीएड पी 2 शराब की बॉटल्स पारी थी..
मैं:- क्या हुवा कोहे नूर क्या डेल्ह रही हैं.?
मुन्नी:- यह देख रही थी..
मैं:- आपको पसंद ी क्या.?
मुन्नी:- मज़्ज़रात जंब लेकिन मैं शराब नहीं पित्ती...
मैं:- अरे भाई पी लीजिये अभी हमारी दोस्त बी आती hi होंगे उनकी लिए त्यार हो जाइये पि क...
तभी उसकी चेहरी की साडी चमक गयाब होगी और उसकी आंख चालक गई..
मैने यह बात नोट क्र ली मेरा शक यकीन में बदल गया...
मुन्नी:- हम नहीं क्र सकती किसी और को भेज डेट हैं हम..
मैं:- मुँह मांगी कीमत मिल्ली गई...
Munni(Chillate हुवी):- हम रंडी नहीं हैं जो किसी को बी अपना जिस्म दी दें...
मैं:- तो क्यू नाटक क्र रही हो आइए बने की जो आप नहीं हैं क्यू ऐसी जगह में रह क जहाँ सब हवा जा नागा नाच कृत्य हैं आप आज तक पाक हैं क्यू आज तक मेरी इलावा आपकी जिस्म को आपकी बाप तक न्य नहीं चुवा.? क्यू.? इस क्यू का जवाब ही आपकी पास.?
मुन्नी तो जैसी सकती में hi चली गई...
अब आप सोच रही होंगे क मुझी किसी पता चला भाई अब थोड़ा बोहत तो पावर्स उसे क्र hi लेती है किसी को बी छूती hi सरो जनम कुंडली निकल सकती हैं....
मुन्नी:- आपको किसी पता यह सब.?
मैं:- यह मेरी क्यू का जवाब नहीं ही...
Munni(Rote हुवे):- मैं यह सब अपनी मर्ज़ी आय नहीं क्र रही इसी पिच्य बोहत दुखी कहानी ही...
मैं मेरी माँ पापा और मेरा छोटा भाई हम सब हसी ख़ुशी ज़िन्दगी गुज़र रही थय क एक दिन राजीव की नज़र हमारी हस्ती ज़िन्दगी पी पर गई वह पापा का बुआइनेसा एम्पियर खरीदना चाहता था उसको यह न देंय क कारण उसनी मेरी माँ पापा का ऑक्सीडेंट करवा दिया..
2 साल पेहली...
मेरी माँ पापा और मेरा भाई गारी आय जा रही थय क ट्रक न्य आ क उनको टक्क्र मरी मेरी माँ पापा तो मौके पी मार गए लेकिन मेरी भाई बच तो गया लेकिन उआकी सर पी गहरी चोट लगने सी उसकी याददाश्त चली गई...
मैं बी सादमय में थी उसनी हमरी ारी प्रॉपर्टी कग्रिड ली क्यू क उसका कोई बचा नहीं था वह सनी को अपना बीटा बना क लय गया और मुझी धमकी दी अगर मैने उसको कुछ बताया तो सनी को मार दी गए...
उसनी मुझी अपना कोठा संभालनी को कहा और तब सी मैं वहां हूँ...
मैं:- मुझी सारा ाच बताओ...
मुन्नी:- सब तो बता दिया...
मैं:- मैने कहा सारा मतलब sara...Sirf कोठा नहीं और बी कुछ संभालनी को कहा.?
मुन्नी:- हाँ उसका माल अत ही जो क कोठी पी रखा जाता ही लेकिन वह क्या ही आज तक नहीं पता चला..
मैं:- और तुमनी आज तक किसी को खुद को हाथ क्यू नहीं लगानी दिया.?
मुन्नी:- बचपन में एक बार पापा न्य मुझी हाथ लगया था मेरी जिस्म में अजीब आ करंट लगा मैने पापा का हाथ पाकर क मूर दिया जिस बी आदमी न्य मुझी हाथ लगानी की कोशिश की उसको झटका लगता लेकिन किसी महिला को नहीं लेकिन जब कल आप ए मेरा डिल चीख उठा और आपके पास अन्य को कहा लेकिन आपकी छोटी hi मुझी जैसी जानत मिल गई सेहरा में पानी मिल गया ज़िन्दगी भार की खुशियां मिल गई लेकिन आपको अगर यह जिस्म hi चाहिए तो लीजिये...
उसनी अपना पालू नीची गिरा दिया और..
मुन्नी:- इसी किसी को बी सोम्पो आपकी मर्ज़ी मैं उफ़ तक नहीं करूं गई...
मैं उसकी पैसा गया और उसका पल्लो पकड़ा और ऊपर क्र दिया...
मैं:- मुझसी शादी करो गई नूर.....
जी हाँ मुन्नी उसका असली नाम नहीं ही उसनी सब सी अपना असली नाम छुपा क मुन्नी रख लिया था...
उसको तो जैसी इसी बात का इंतज़ार था वह मेरी गली ऐसी लगी जैसी जन्मो सी भूकी को खाना मिल्ली..
वह लगातार रोये जा रही थी...
मैं:- बीएस करो कितना रू गई.?
नूर:- साडी ज़िन्दगी की भड़ास निकालनी ही...
मैं:- प्लीज चुप एक बोहत ज़रूरी बात बतानी ही...
नूर थोड़ा नार्मल हो गई फिर मैनी अपनी ज़िन्दगी का फ़्लैश बैक ब्लैक आमद वाइट मूवीज की तर्हां बता दिया...
मैं:- अगर अब बी तुम चाहो मन क्र सकती हो...
नूर:- मैं पागल हूँ जो अपनी जान को चूरू गई मुझी कही दूर लय चालू मुझी नहीं जाना वापिस...
मैं:- यू अरे सू बेऔतीफुल्ल...
नूर:- आप बी बोहत ख़ूबसूरत हैं दुनिया की हर लड़की क ड्रीम हस्बैंड हैं..
मैं:- लेकिन आपका तो रियल हूँ न...
नूर:- Hmmm...Im सूऊऊ लकी....
मैं:- लेकिन अभी एक काम और करना ही....
नूर:- वह क्या.?
मैं:- राजीव को barbad..Usky पपूण का गाढ़ा भार चूका ही...
नूर:- लेकिन वह...
मैं:- मुझपी भरोसा रखो...
नूर:- ठीक ही.. लेकिन आपको कुछ नहीं होना चाहिए...
मैं:- बीएस देखती जाओ...
नूर:- वैसी आपको या कोई आपके घर वळून को यह न पसंद ए क मैं कोठी पी रहती थी.?
मैं:- तुम मेरी बीवी हो बीएस आज सी तुम बीएस मेरी बीवी हो samjhi...Wesy शादी किसी होगी.?
नूर:- मतलब.?
मैं:- मतलब निक्काह क्रय गए यह फेरी.?
नूर:- आपकी मर्ज़ी ही...
मैं:- निकाह क्रय गए कल...
नूर:- सच्ची.?
मैं:- हाँ हम कल राजीव की बर्बादी जश्न देखी गए और शाम की निक्काह क्र क घर चले गए...
नूर का चेहरा खिल उठा और वह मेरी गल्ली लग गई...
मैं:- अब चले या यही रहना ही.?
नूर:- कहाँ जाओं गई.?
मैं:- मेरी साथ क्या चलो गई इस उनपरडिक्टेबले जर्नी पी.?
नूर:- मज़िल का पता होने सी इंसान कमज़ोर पर जाता ही पता चल जाता ही कहाँ जाना ही लेकिन सफर का मज़ा तब अत ही जब मंज़िल पता न हो.. किसी न्य बोहत खूब कहा ही..
"सफर ख़ूबसूरत ही मंज़िल सी भी.."
हम लोग कोमल क घर गए वहां मुझी देख क बुआ बोहत बोहत खुश होइ और मैने घर पी फ़ोन क्र क बता दिया था और तनीषा को सब मैनेज करनी को कह दिया था...
मुझी अलग कमरा मिला सोने क लिए शाम को अंकल ए ुणस्य मिला और थोड़ी बात चीत की उनकी प्रॉब्लम क बारी में और जाने की कोशिश की क उनका और राजीव का क्या पन्गा ही यह पोछा ुँहू न्य बताया क वह उनकी कंपनी खरीदना चाहती हैं और वह मुझपी प्रेशर दाल रही हैं...
मैं कुछ देर बात क्र क कमरे में आज्ञा...
और सोचनी लगा क्या किया जाये.....
यौन hi प्लान बना क सू गया...
अगली सुबह उठा और ध्यान लगाया और तनीषा को फ़ोन किया 3 रिंग बाद hi फ़ोन उठा लिया...
मैं:- गुड मॉर्निंग मेरी जान...
तनीषा:- गुड मॉर्निंग...
मैं:- जल्दी सी सब को यथा दो...
तनीषा:- ी लव यपु ना!!..
मैं:- ी लव यपु तू!...
फ़ोन कट...
तभी मेरी कमरे का दरवाज़ा खुला बया अंदर आ गई..
मैने जल्दी सी दरवाज़ा बंद किया और उनको पाकर क बीएड पी लिटा दिया...
बुआ:- आ गई यद् मेरी बी.?
मैं:- अरे याद तो उनको किया जाता ही जिनको भूल जाये...
बुआ:- इसी लिए इतना तर्पया ही...
मैं:- अभी हप जाये...
बुआ:- हाँ अभी सबकी उतनी में टाइम ही मुझी बी बोहत खुजली हो रही ही..
मैने बुआ को होंठ चूसनी शुरू क्र diye...Phir हमारी एक्सप्रेस 1 घंटा चली फिर मैं बुआ क ऊपर hi लेट गया...
मैं:- एक बात कहूं...
बुआ:- हम्म्म..
मैं:- क्या आपकी यह मस्त गांड मिले गई.?
बुआ:- अभी नहीं मैने आज तक वहां नहीं लिया ऊँगली बी...
मैं:- बाद में तो दो गई.?
मैनी एक हाथ उनकी मस्त नंगी मामय पी रख दिया और मसल दिया..
बुआ:- अह्ह्ह मेरी राजा में पूरी तेरी हूँ.. तेरी घर जाने सी पेहली तुझी गांड दी दूँ गई...
फिर मैं और वफ साथ नहाये जल्दी सी क्यू क सबकी उतनी का टाइम होगया था
मैं कोमल और अवनि को कॉलेज चोरनी गया और निकल गया अपने प्लेन को एक्सेक्यूटे करनी...
1सत टारगेट :- मुन्नी Bai..(Kothy वाली)..
यह राजीव क कोठी को संभालती ही बल्के कोठी की आर में उसका सारा माल संभालती ही.....
लेकिन इसकी पास रात में जाना था इसी लिए मैं अभी राजीव क बंगलो क बाहिर अपनी गारी लय क खरा था और नज़र रख रहा था...
(अब आप सोच रही हों गए क हीरो क पास पावर्स हैं उसको क्यू नहीं इस्तमाल krta..lekin मैं बता दूँ पावर्स कोई बच्चों का खेल नहीं होती जब डिल चाहा खेल लिया... जब तक उनकी ज़रप्रात न पारी मेरी ख्याल सी उनको इस्तमाल करना सब सी बरी बेवकूफी होती ही अगर पावर्स पी hi निर्भर रहना ही तो इंसान अपने जिस्म को जला दी और पावर्स को hi उसे क्रय बीएस रूह सी इसी लिए जो काम का मज़ा हाथों सी करनी में ही पावर्स में नहीं...)..
खैर करीब 1 घंटी बाद राजीव और उसकी पत्नी बाहिर ए और अपनी गारी में बेथ कहीं चले गए...
मैने बी गारी उनकी पिच्य लगा ली वह लोग हॉस्पिटल ए थय भाई ए बी क्यू न उनका बीटा जो एडमिट ही...
जी हाँ बिलकुल वह सनी इसी का बीटा ही...
वह अंदर चले गए में बी उनकी पिच्य चला गया वह सीधा एक रूम में चले गए वहां सनी लेता हुवा था राजीव की पत्नी उसकी पास बेथ गई और राजीव डॉक्टर सी बात करनी लगा...
राजीव:- डॉक्टर मेरी बेटे को जल्दी सी ठीक करो..
डॉक्:- सर बोहत बुरी तर्हां मारा गया ही इनको लेकिन एक बात नहीं समझ आ रही इनकी जुबां बी ठीक और कोई और बी प्रॉब्लम नहीं मिली फिर बी यह बोल क्यू नहीं पा रही...
यह कारनामा आपकी भाई का ही मैनी उसकी जुबां को लॉक क्र दिया था...
राजीव न्य डॉक् का कालर पकड़ा और..
राजीव:- जो मर्ज़ी क्र लेकिन इसको ठीक क्र...
डॉक्:- सर हम पूरी कोशिश क्र रही हैं..
राजीव:- घर कब तक लय जा सकती हैं.?
डॉक्:- जब आप चाही मैं घर आ क इलाज करूं गए..
राजीव:- तो सारी पेपर्स रेडी करवा...
वह डॉक् वहां सी भाग गया...
फिर वह सनी को लय घर आज्ञा और मैं बी घर चला गया क्यू क दोनों को लेने बी जाना था..
रात को तकरीबन क्यू0 बाजी मैं पूरा त्यार होकय अपनी नई कापरी जो सुबह hi लय आया था पेहेन लिए और निकल गया..
मैं कोठी पी पोहंच गया वहां का बाजार रोशन था हर तरफ हुसैन और उसकी खरीदार मैं गारी वहीँ लय गया सब मेरी गारी की तरफ hi देखनी लगी मैनी मुन्नी क कोठी क सामन्य गारी रोकी...
पूरी स्लो मोशन में उतरा और कोठी की तरफ नज़र मरी सब रंडियां जो अपनी बालकनियों में खरी थी सब मेरी तरफ hi देख रही थी और उनकी पास अन्य को बोल रही थी...
मैं मुन्नी क कोठी पी ऊपर गया...
वहां रक्स चल रहा था गाने पी 2 लड़कियां नाच रही थी तमशाइये वहां पैसी लूटा रही थय..
मैं वहां गया तो सब मेरी hi तरफ देल्हनी लगी मैने मुन्नी की तरफ देखा वह अपने एक हाथ क बल बैठी पान खा रही थी...
मैं उसकी तरफ चल पारा रक्स अभी बी व्हाल रहा था...
मैं:- अदब..
अपना हाथ माथे तक लेट हुवी मैनी कहा...
मुन्नी:- अदब jnb..Apki तारीफ..
मैं:- सब कृत्य हैं वैसी न चीज़ को असद केहेती हैं...
मुन्नी:- पेहली कबि देखा नहीं आपको.?
मैं:- अरे हम तो शमा हैं हर जगह हैं बीएस देखनी वाली की नज़र होनी किये...
मुन्नी:- बातें तो अछि कृत्य हैं यहाँ किसी आना हुवा.?
मैं:- अरे मालिकाये हुसैन क पास किस लिए अत ही कोई.?
मुन्नी:- बीएस दीदार करना ही यह प्यार बी.?
मैं:- प्यार तो उनको किया जाता ही जो नज़रूँ को भाता ही और हमे तो कोहे नूर भा गया ही...
मुन्नी:- और बी हीरी हैं एक नज़र तो डालिये..
मैं:- अब कोहे नूर जैसी चमक किसी और हीरी में होती तो आज तक अंग्रेज़जों को हम न कोसती...
Muni(hehe):- जंब आपको पता बी होगा कोहे नूर की किम्मत का.?
मैं:- मुँह माँगा मिल्ली गए..
मुन्नी:- हर चीज़ पैसी सी नहीं खरीदी जाती असद साहब...
मैं:- दुनिया की ऐसी कोई चीज़ नहीं जो यह न चीज़ कोहे नूर क लिए न ला सकी..
मुनि बीएस मुस्कुरा दी और उठ क मेरा हाथ पाकर क कमरे में लय गई और उसको बंद क्र दिया..
वह मेरी करीब ै..
मुन्नी:- आज तक आपसे हसीन नहीं देखा देखती hi डिल में उत्तर गए..
मैं:- यह hi हमारा हॉल ही..
उसनी मेरी होंठ चुम लिए.. और एक हाथ सी मेरी पंत की ज़िप खोली और बेल्ट निकल क अंडरवियर नीची किया और उसकी नज़र जैसी hi लुंड पी गई.. उसनी अपने मुँह पी हाथ रख लिया..
मैं:- क्या हुवा पसंद नहीं आया क्या.?
मुन्नी:- ऐसा सच में बी होता ही मुझी तो लगा बीएस वह वीडियो में होता ही..
मैं:- कोई बात नहीं हम अपनी शमा लय क निकलती हैं...
मुन्नी:- नहीं यह तो मुझी लेना ही.
मैं:- हर चेस्ज़ की कीमत होती ही...
मुन्नी:- बोलिये क्या चाहिए...
मैने उसको पकड़ा और किश करनी लगा 10 मं तक किश किया वह किश की बिच में hi जहर गई और ऊपर निढाल गिर गई..
मैं:- इंसान को क़ाबलियत हमेशा उसको परखनय क पता चलती ही...
मुन्नी:- आज तक ज़िन्दगी में कबि बिना हाथ लगाए नहीं झरि आपके स्पर्श सी हमारा रोम रोम खरा होगया.. बोलिये क्या चाहिए...
मैं:- अपनी मेहबूब की बहून में सौदे नहीं कृत्य...
मुन्नी:- तो प्यार बी नहीं कृत्य.?
मैं:- सब मिल्ली गए सही समय पी हम कल मिल्ली गए सुबह ******होटल में..
मुन्नी:- जहाँ बुलाओ गए ाजाओं गई.
मैं खरा हुवा कापरी सही क्र क निकल गया घर की तरफ...
यहाँ मेरी जाने क बाद मुन्नी अभी बी बीएड पी लेती होइ थी उसको उठानी लड़कियां ी...
लड़की:- क्या हुवा दीदी लगता ही खूब जैम क चूड़ा ही उस चीकनी न्य अभी तक उलटी पारी हो.?
लड़की2:- है मैं बी अपनी छूट में उसका लुंड लू gi....Didi किसी चूड़ा उसनी आपको वैसी पहला आदमी ही जिसको तुमनी अपना जिस्म दिया...
मुन्नी:- ज़िन्दगी में पहली बार झरि हूँ वह बिना कुछ किये...
लड़की:- मतलब.?
मुन्नी:- पेहली शख्स था जिसनी आज मुझी चुवा...
लड़की:- दीदी एक बात नहीं समझ अति क इतनी बारी कोठी में होती हुवी बी आप आज तक कुवारी हैं.?
लड़की2:- अपनी जवानी को किस लिए संभाला ही.?
मुन्नी:- शयद इसी का इंतज़ार था...
इधर मैं गारी चलती हुवी मुन्नी क hi बारी में सोच रहा था उसको छूती hi लगा वह इस काम को अपनी मर्ज़ी सी नहीं क्र रही उसकी हस्ती और कठोर चेहेरी क पिच्य की रोटी होइ मुन्नी शायद मुझी hi दिखी.. जहाँ सब अपना जिस्म दिखा रही थय उसी जगह वह अकेली थी जिसका जिस्म ढाका हुवा था खूबसूरती की मिस्साल थी..
खैर मैं घर आ क सू गया सुबह उठ क सारी काम किया कोमल न्य शाम को घुम्मी जाने का प्लेन बनाया...
(मैं इस वक़त थोड़ा सन की तरफ तवजहा दी रहा हूँ इस लिए कोमल का ज़िकर काम ही इसका मतलब यह नहीं क उसकी यह मेरी दरमियान कुछ होगया ही..)
मैं होटल पोहंच गया यह मेरा hi होटल था सब सी बारे और ाचा कमरा त्यार करवाया और मुन्नी का इंतज़ार करनी लगा...
वह आ गई मैं नीची गया उसको गारी क अंदर सी रेसवे किया वह आज बिना कोई बज़्ज़ारो मेकअप क ै थी वह मेरी आंखों में देखती हुवी उत्तर गई गारी सी और उसका हाथ पाकर क अंदर लय आया और लिफ्ट में बी हथबपाकरी रखा वह बीएस मुझी देखी जा रही थी और मैं उसको हम कुछ नहीं बोल रही थय..
मैं उसको कमरे में लय और लॉक क्र दिया और बीएड क पास खरी होगी वह बीएड पी 2 शराब की बॉटल्स पारी थी..
मैं:- क्या हुवा कोहे नूर क्या डेल्ह रही हैं.?
मुन्नी:- यह देख रही थी..
मैं:- आपको पसंद ी क्या.?
मुन्नी:- मज़्ज़रात जंब लेकिन मैं शराब नहीं पित्ती...
मैं:- अरे भाई पी लीजिये अभी हमारी दोस्त बी आती hi होंगे उनकी लिए त्यार हो जाइये पि क...
तभी उसकी चेहरी की साडी चमक गयाब होगी और उसकी आंख चालक गई..
मैने यह बात नोट क्र ली मेरा शक यकीन में बदल गया...
मुन्नी:- हम नहीं क्र सकती किसी और को भेज डेट हैं हम..
मैं:- मुँह मांगी कीमत मिल्ली गई...
Munni(Chillate हुवी):- हम रंडी नहीं हैं जो किसी को बी अपना जिस्म दी दें...
मैं:- तो क्यू नाटक क्र रही हो आइए बने की जो आप नहीं हैं क्यू ऐसी जगह में रह क जहाँ सब हवा जा नागा नाच कृत्य हैं आप आज तक पाक हैं क्यू आज तक मेरी इलावा आपकी जिस्म को आपकी बाप तक न्य नहीं चुवा.? क्यू.? इस क्यू का जवाब ही आपकी पास.?
मुन्नी तो जैसी सकती में hi चली गई...
अब आप सोच रही होंगे क मुझी किसी पता चला भाई अब थोड़ा बोहत तो पावर्स उसे क्र hi लेती है किसी को बी छूती hi सरो जनम कुंडली निकल सकती हैं....
मुन्नी:- आपको किसी पता यह सब.?
मैं:- यह मेरी क्यू का जवाब नहीं ही...
Munni(Rote हुवे):- मैं यह सब अपनी मर्ज़ी आय नहीं क्र रही इसी पिच्य बोहत दुखी कहानी ही...
मैं मेरी माँ पापा और मेरा छोटा भाई हम सब हसी ख़ुशी ज़िन्दगी गुज़र रही थय क एक दिन राजीव की नज़र हमारी हस्ती ज़िन्दगी पी पर गई वह पापा का बुआइनेसा एम्पियर खरीदना चाहता था उसको यह न देंय क कारण उसनी मेरी माँ पापा का ऑक्सीडेंट करवा दिया..
2 साल पेहली...
मेरी माँ पापा और मेरा भाई गारी आय जा रही थय क ट्रक न्य आ क उनको टक्क्र मरी मेरी माँ पापा तो मौके पी मार गए लेकिन मेरी भाई बच तो गया लेकिन उआकी सर पी गहरी चोट लगने सी उसकी याददाश्त चली गई...
मैं बी सादमय में थी उसनी हमरी ारी प्रॉपर्टी कग्रिड ली क्यू क उसका कोई बचा नहीं था वह सनी को अपना बीटा बना क लय गया और मुझी धमकी दी अगर मैने उसको कुछ बताया तो सनी को मार दी गए...
उसनी मुझी अपना कोठा संभालनी को कहा और तब सी मैं वहां हूँ...
मैं:- मुझी सारा ाच बताओ...
मुन्नी:- सब तो बता दिया...
मैं:- मैने कहा सारा मतलब sara...Sirf कोठा नहीं और बी कुछ संभालनी को कहा.?
मुन्नी:- हाँ उसका माल अत ही जो क कोठी पी रखा जाता ही लेकिन वह क्या ही आज तक नहीं पता चला..
मैं:- और तुमनी आज तक किसी को खुद को हाथ क्यू नहीं लगानी दिया.?
मुन्नी:- बचपन में एक बार पापा न्य मुझी हाथ लगया था मेरी जिस्म में अजीब आ करंट लगा मैने पापा का हाथ पाकर क मूर दिया जिस बी आदमी न्य मुझी हाथ लगानी की कोशिश की उसको झटका लगता लेकिन किसी महिला को नहीं लेकिन जब कल आप ए मेरा डिल चीख उठा और आपके पास अन्य को कहा लेकिन आपकी छोटी hi मुझी जैसी जानत मिल गई सेहरा में पानी मिल गया ज़िन्दगी भार की खुशियां मिल गई लेकिन आपको अगर यह जिस्म hi चाहिए तो लीजिये...
उसनी अपना पालू नीची गिरा दिया और..
मुन्नी:- इसी किसी को बी सोम्पो आपकी मर्ज़ी मैं उफ़ तक नहीं करूं गई...
मैं उसकी पैसा गया और उसका पल्लो पकड़ा और ऊपर क्र दिया...
मैं:- मुझसी शादी करो गई नूर.....
जी हाँ मुन्नी उसका असली नाम नहीं ही उसनी सब सी अपना असली नाम छुपा क मुन्नी रख लिया था...
उसको तो जैसी इसी बात का इंतज़ार था वह मेरी गली ऐसी लगी जैसी जन्मो सी भूकी को खाना मिल्ली..
वह लगातार रोये जा रही थी...
मैं:- बीएस करो कितना रू गई.?
नूर:- साडी ज़िन्दगी की भड़ास निकालनी ही...
मैं:- प्लीज चुप एक बोहत ज़रूरी बात बतानी ही...
नूर थोड़ा नार्मल हो गई फिर मैनी अपनी ज़िन्दगी का फ़्लैश बैक ब्लैक आमद वाइट मूवीज की तर्हां बता दिया...
मैं:- अगर अब बी तुम चाहो मन क्र सकती हो...
नूर:- मैं पागल हूँ जो अपनी जान को चूरू गई मुझी कही दूर लय चालू मुझी नहीं जाना वापिस...
मैं:- यू अरे सू बेऔतीफुल्ल...
नूर:- आप बी बोहत ख़ूबसूरत हैं दुनिया की हर लड़की क ड्रीम हस्बैंड हैं..
मैं:- लेकिन आपका तो रियल हूँ न...
नूर:- Hmmm...Im सूऊऊ लकी....
मैं:- लेकिन अभी एक काम और करना ही....
नूर:- वह क्या.?
मैं:- राजीव को barbad..Usky पपूण का गाढ़ा भार चूका ही...
नूर:- लेकिन वह...
मैं:- मुझपी भरोसा रखो...
नूर:- ठीक ही.. लेकिन आपको कुछ नहीं होना चाहिए...
मैं:- बीएस देखती जाओ...
नूर:- वैसी आपको या कोई आपके घर वळून को यह न पसंद ए क मैं कोठी पी रहती थी.?
मैं:- तुम मेरी बीवी हो बीएस आज सी तुम बीएस मेरी बीवी हो samjhi...Wesy शादी किसी होगी.?
नूर:- मतलब.?
मैं:- मतलब निक्काह क्रय गए यह फेरी.?
नूर:- आपकी मर्ज़ी ही...
मैं:- निकाह क्रय गए कल...
नूर:- सच्ची.?
मैं:- हाँ हम कल राजीव की बर्बादी जश्न देखी गए और शाम की निक्काह क्र क घर चले गए...
नूर का चेहरा खिल उठा और वह मेरी गल्ली लग गई...
मैं:- अब चले या यही रहना ही.?
नूर:- कहाँ जाओं गई.?
मैं:- मेरी साथ क्या चलो गई इस उनपरडिक्टेबले जर्नी पी.?
नूर:- मज़िल का पता होने सी इंसान कमज़ोर पर जाता ही पता चल जाता ही कहाँ जाना ही लेकिन सफर का मज़ा तब अत ही जब मंज़िल पता न हो.. किसी न्य बोहत खूब कहा ही..
"सफर ख़ूबसूरत ही मंज़िल सी भी.."