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अपडेट NO.53
आफ्टर 2 डेज...
आज पूरी 48 घंटी हो चुके थय उस घटना को मैं अब संभल चूका था लेकिन मेरी दिमाग में बीएस तनीषा और अबीरा क अलफ़ाज़ घूम रही थय जो क मुझी बोले गए थय...
मैं अपनी भाई का अंतिमसंस्कार तक न क्र सका...
मेरा दिमाग पूरा खराब था मैं चाहता तो तो सीधा जा क सेव को मार सकता था लेकिन मुझी हर उस शख्स को सजा देनी थी जिस न्य अभी क साथ यह साब किया यह बात मेरी दिमाग में अभी ी थी अभी क आखरी अल्फ़ाज़ किया थय..
"धिकाय बज़्ज़ो क धोके को देख लिया अब भरोसायमाद का भरोसा देखना"..
इसका मतलब कोई था जिसनी देव को साड़ी इनफार्मेशन दी थी...
कोण होसकता ही वह.?
मैं इस वक़त एक सुनसान जगह था जहाँ बिलकुल शांति थी बीएस छोटी सी झँपरी जो क मैने बनाई थी...
मैं:- अदि...
अदि:- जी भाई...
मैं:- मैं जो कहां करो गए.?
अदि:- जी भाई हुकम करो...
मैं:- अभी तुम मुझसी दूर चले जाओऔर मुझी ढूंढ़ने की कोशिश भी नहीं करो गए...
अदि:- भाई लेकिन.?
मैं:- मैने कहा न...
फिर शाम को मेरी दिमाग में कमिश्नर का ख्याल आया मैं तुरंत फ़ोन निकल क उसको मिलाया...
कॉम:- Hello कोण.?
मैं:- सैम ठाकुर बोल रहा हूँ...
कॉम:- सर आप अपने हमे याद किया बोलिये क्या क्र सकता हूँ आपके लिए.?
मैं:- अभी एक मुझी **** मिलिए...
फ़ोन कट...
मैने फ़ोन निकला और अपने लॉयर को लगाया..
किन:- Hello सर आफ्टर लॉन्ग time..How अरे यू.?
मैं:- फाइन किन जितनी जल्दी हॉसकय इंडिया पोहंचो...
किन:- एव्री थिंग इस फाइन सर..
मैं:- तुम जल्दी औ...
किन:- फाइन सर मैं कल Hi आ जैन गए..
मैं:- O.k...
फ़ोन सुत्त....
आफ्टर 3 हरष...
मैं उस जगह पोहंच गया जहाँ मैने कमिसीनेर को बुलाया था...
कमिश्नर वहां आ गया Hi hello क बाद वह बोलै..
कॉम:- सर उस दिन अपने फ़ोन क्र क वह नाटक करनी को क्यू कहा.?
मैं:- मैं किसी को नहीं बताना चाहता था क मैं कोण हूँ..
कॉम:- O.k सर..
मैं:- यह नंबर ********* पी *** डेट को किस किस की कॉल ै थी पता करना ही...
किम:- O.k सर 2 घंटी में डिटेल्स आपको फॉरवर्ड क्र दूँ गए...
मैं:- थैंक ु...
कमिश्नर चला गया...
मैं फिर वहीँ आ गया..
पास समुंदर की लहरें की झंगनाहट और उस दिन का सन मेरा डिल चिर रहा था..
तभी मैने एक बात नोटिस की वहां साब मौजूद थय सिवाए रत्न क मुझी यह बात नार्मल नहीं लगी..
अचानक मेरी डिल सी अजीब सी आवाज़ निकली जिस में ककी मेरा नाम दर्द सी लय रहा ही और मुसलसल लय रहा ही मैने दुःख में इस बात को िंगोरे क्र दिया लेकिन अब मुझी कन्फर्म होगया था यह रत्न की आवाज़ ही जो इस वक़त किसी मुसीबत में ही...
मैं उठ गया और आंखें बंद क्र ली और फिर खोली तो एक सुनसान सी जगह खरा था सामन्य एक बंद फैक्ट्री थी...
मैं धीरे धीरे अंदर गया दबे पाऊँ अंदर जाने का लगा वहां ज़्यादा लोग नहीं थय अंदर कुर्सी पी रत्न बंधू थी और साइड पी 4 आदमी बैठी तैश खेल रही थय...
मेरी आंखें गुस्से सी लाल होगी...
मैं भाग क रत्न क पास गया...
उसने अपनी आंखें ऊपर की टी मुझी वहां पा क रोने लगी...
मैने अपना हाथ उसके ऊपर लय जाने लगा तभी एक गोली चली जो सीधा मेरी सीने पी लगी और लगती Hi जम्में पी गिर गई...
जिससे देख क उन साब की आंखें फात गई और मैने अपनी आग में जलती होइ आंखें और उन में आंसूं सी उनकी तरफ देखा और स्पीड सी भाग क उनके हाथ पेअर टूर दिए यह काम 1 मं में Hi क्र दिया था और वापिस रत्न की तरफ आया उसकी आंखों में अभी भी ाँसों थय मैने जल्दी सी उसके हाथ खोली वह उठ क झात सी मेरी गली लग गई...
मैने अपने हाथ नहीं लगाई उसको...
वह अलग होइ और मेरी आंखों में देखनी लगी जिन में आंसूं थय उसने अपने मुँह पी सी कपड़ा हटाया...
रत्न:- क्या हुवा मैं ठीक हूँ रोइ क्यू रही हैं...
मैं कुछ नहीं बोलै और उसका हाथ पाकर क वहां सी टेलिपोर्ट होकय घर क सामन्य पोहंच गया...
रत्न:- यह साब क्या ही आप कुछ बोलते क्यू नहीं और मुझी किसने पकड़ा था.?
मैं:- अंदर जाओ...
रत्न:- आप नहीं चलो गए..
मैं:- साब पता चल जाये गए अंदर जाओ...
और मैं सीधा दुबारा वहां सी टेलिपोर्ट होकय उसी जगह पोहच गया और उन गुण्डों को पाकर क जम्में पी लिटा दिया वह दर्द सी चिल्ला रही थय...
मैं:- किसने किया यह साब.?
गुंडा..1:- आए हमे माफ़ क्र दी साहब हमे तो बीएस यहाँ रखनी को पैसी दिए थय...
मैं:- किसने दिए थय.?
ग1:- रोहन सहा न्य....
नाम सूं क मेरी टूटे ुर गए.. तभी मोबाइल की घंटी बजी..
मैने चेक किया तो कमिश्नर का मश्ग था डिटेल्स का उसमे भी लास्ट क 3 कॉल्स रोहन क नंबर क थय...
मेरा दिमाग घूम गया लेकिन मैं जाना चाहता था यह क्यू किया उसने...
मैने ग1 को रोहन को मश्ग क्र क यहाँ बुलानी को कहा...
घर पी...
जैसी Hi मैं घर सी निकला पापा साब फिर सी रोने लगी वहां पी सब मौजूद थय सिवाए रत्न k...Aur अक्षरा की तबियत थोड़ी खराब थी तो वह अपने कमरे में थी..
पापा न्य साडी तयारी की अंतिमसंस्कार की.
पापा को सब सच पता था लेकिन वह चुप थय नहीं पता क्योँ.?
तनीषा बीएस अपने कमरे में बैठी रोटी रहती थी और अबीरा बी यहीं घर में थी और H.M की फॅमिली भी आ गई थी वही सब को जब अबीरा न्य बताया साब यकीन नहीं क्र सकी...
इशिका सोच में थी किसी अभी वह कुछ बोलती तभी गारी आ क रुकी जिसमे सी कोमल और फॅमिली ै...
सब को बता दिया था कोमल हलकी नाम आंखों सी घर में एंटर होइ...
माँ सब सी गली मिली और रोइ...
कोमल:- तनीषा दी कहाँ हैं.?
माँ:- अपने कमरे में रू रही ही...
कोमल हर जगह मुझु ढूंढ रही थी शायद वह समझी मैं कमरे में होंगे इसी लिए वह वहां आ गई वहां तनीषा अकेली रू रही थी..
तनीषा कोमल को देखती Hi उसके गल्ली लग गई...
कोमल:- शांत हो जय दीदी भगवन को जो मंज़ूर था..
तनीषा:- जिसका सुहाग उसके भाई को मार दी वह किसी शांत रही तो उस सी दूर रहना मेरी बेहेन वह एक दरिंदा ही....
कोमल न्य यह जैसी hi सूना वह झात सी अलग होइ और तनीषा को ढाका दिया..
कोमल:- क्या बाक रही हो...
तनीषा:- हाँ वह एक जिस्म का भूका इंसान और पैसों लालची ही...
तभी तनीषा क मुँह पी एक ज़ोर दार थापर पारा जिसकी आवाज़ पूरी घर में गूंजी...
साब तेह सुन क भाग क उप्पेर ए...
Komal(chilla क्र):- खबर दार मेरी सैम क बारी में कुछ बकवास की हो तो...
तभी साब वहां आ गए...
माँ:- क्या हुवा....
कोमल:- यह मेरी सौम्य क बारी में उलटी सीधी बकवास क्र रही ही...
तनीषा:- जो सच ही वही बता रही हूँ वह एक बदचलन इंसान ही...
तभी एक और आवाज़ गजरे वहां....
"मैं तेरी जान लय लोन गई अगर टुन्नाय मेरी सैम क बारी में कुछ कहा."..
सब उस तरफ देखनी लगी...
यह रत्न थी सब हिरण होगये यह वही समय था जब मैं उसको घर चोर आया था..
माँ भाग क उसके पास ी..
माँ:- तू कहाँ थी हम न्य तुझी कितना ढूंढा..
रत्न:- मेरे पति क होते मुझी क्या होगा bhala...Aur कोई बी उनके बारी में उल्टा सीधा मात कहो..
अबीर:- क्योँ न कही उसी न्य मारा मेरी पति को अपने हाथों सी 2 दिन पेहली...
तभी इशिका बोली...
इशिका:- नहीं ऐसा नहीं होसकता..
अबीरा:- क्यू नहीं हो सकता उसने खुद बुलाया था अभी को एक आदमी को भेज क
आयेशा:- एक्साक्ट्ली क्या हुवा था.?
****
इशिका:- उसने नहीं मारा वह तो यहाँ था बी नहीं वह मेरी साथ अमेरिका में हमारा क्विज कम्पेशन था और उस दिन हमारी मोबाइल बी लय लिए थय उन लोगो न्य...
सब तेह सुन क हिरण होगये...
H.M:- मतलब तुम जिसके सतब गई थी. वह सैम था.?
इशिका:- हाँ और कल hi हम इंडिया वापिस ए हैं... और माँ न्य और बुआ न्य भी उसको मेरी साथ आती हुवी देखा ही..
A'maa:- हाँ हम न्य उसको देखा था इसके साथ...
आयेशा:- अगर वह यहाँ थय hi नहीं तो तारा क केहनी क मुताबिक उसके साथ ज़बरदस्ती भी उसी दिन करनी की कोशिश की..
इशिका:- नहीं यह झूट ही मैं इस बात की गवाह हूँ और वह मेरी साथ था...
तभी किसी क ज़मीन पी गिरनी की आवाज़ ी..
यह अबीरा और तनीषा दोनों थी जिनको सब सुन्न क बोहत बारे झटका लगा था.... हाला क आयेशा और अंजलि कुछ कुछ नहीं को बी थोड़े समय क लिए भय हुवा था उनकी बी कुछ वैसी hi हालत थी वह कुछ बोली नहीं थीं जब सैम को तनीषा और अबीरा बोल रही थीं..
माँ और पापा पता नहीं क्यू सब कुछ पता होने क बावजूद चुप थय....
कोमल:- उनके बारी में किसी न्य ऐसा सोचा बी किसी.? मैं तुम सब को कभी माफ़ नहीं करूं गई अंजलि दीदी खास क्र क आपको वह तो आपका बेतु था न कहा गया वह प्यार वह भरोसा जो आपको उपाय था चाही वह माफ़ बी क्र दी क्योँ क बोहत बारे डिल ही उनका लेकिन मैं कभी नहीं क्र सकूं गई...
वह यह कह क कमरे सी बाहिर चली गई और पेची चरों को पश्ताप और दुःख में चोर गई...
(उस दिन एक नुम सी तनीषा को कॉल ी थी और उसने सौम्य क बारी में पोछा क बॉस कहाँ हैं और उनका फ़ोन बंद ही और उन्होंय जो काम दिया था उसका पूरा होने का करह रही थय क)
"जैसा उन्हों न्य कहा था सब वैसा किया ही कुछ देर में आपको पता लग जाये गए..."
इधर मैं वही छुपा हुवा था क तभी रोहन वहां आ गया और कुर्सी खली देख क वहां सी भागण्य लगा...
मैं उसके सामन्य आ गया...
रोहन मुझी देख क चौंक गया और पलट क भागण्य लगा...
मैने उसकी कामर में एक ज़ोर दार लात मारी वह वही गिर गया...
रोहन:- मुझी माफ़ क्र दी मैने यह जान बूझ क नहीं किया...
मैने उसका कालर पकड़ा..
मैं:- तुझी अपना दोएत मंटा था तूने ऐसा क्यू किया...?
रोहन:- मैने जान क नहीं...
मैने एक हाथ उसके हाथ पी मारा जी से उसका बज़्ज़ो टूट गया...
रोहन:- अह्ह्ह्हह्हह...
मैं:- मुझी सिर्फ सच बता क्यू किया यह साब और तेरा देव क साथ क्या रिश्ता ही...
रोहन:- अह्ह्ह्ह बताता hun...Woh मेरी पापा हैं...
मैं:- क्याआ.? तो तू यहाँ क्या क्र रहा था..?
रोहन:- मैं यहाँ तुम पी नज़र रखनी आया था जान क तुम्हारी कॉलेज में एडमिशन लिया और तुम्हारी साथ दोस्ती की तकय चम्पी नज़र रख क टुमस्य भाई की वीडियोस और अपने चाचा की बेटी को ढून्ढ सकूं...
मैं:- तुम लोगो को किसने बताया तुम्हारी चाचा की बेटी मेरी साथ ही.?
रोहन:- क्यू क तुम्ही hi आखरी बार चची क साथ देखा था हॉस्पिटल में अगर कोई और होता उस से मार पिट क्र उगलवा लेती लेकिन तुम्हारी साथ पेहली सी दुश्मनी थी और तुम्हारी साब सी बारी ताकत तुम्हारा दोस्त था जो हमेशा तुम्ही बचा लेता था हार वॉर सी..
फिर तुम दोनों को अलग करनी क लिए हमने चल चली लेकिन फिर बी तुम्ही नहीं कुछ क्र सकी फिर अभी को अकेले में बुल्ला क...
3 दिन पेहली...
(रोहन की ज़ुबानी..)
जब तुम यहाँ सी अमेरिका गए तो मैने तुम्हारी घर पी नज़र रखना शुरू क्र दी कुछ दिनों क बाद अभी घर आज्ञा और मैं उसका पिच करनी लगा एक दिन अभी और उसकी बीवी एक होटल में खाना खा रही थय क मैं वहां गया अभी सी मिला और बोला...
रोहन:- सर आप अभी हैं.?
अभी:- जी बोलिये...
रोहन:- जी वह आपको सैम साब न्य बुलाया ही...
अबीरा:- क्या भैया आ गए.?
रोहन:- बूत उन्होंने सर को अकेले बुलाया ही अर्जेंट..
अभी:- अबीरा तुम घर जाओ मैं सैम सी मिल क अत हूँ..
उसके बाद अभी को मैं अपने फार्म हाउस पी लय गया जहाँ पापा पेहली सी मौजूद थय..
उनको देख क अभी साब समझ गया और उसने मुझु ढाका दिया और तभी एक डांडा उसके सर पी पारा और वह वही गिर गया...
देव:- हाहाहा मुझु मैरी गए अरे इतने साल चल रहा लेकिन अब तुम मारो गए...
अभी:- बुज़दिलों की तरहं वॉर करता ही..
देव:- ः बोल जो मर्ज़ी bol...Tum दोनों को एक साथ नहीं मार सकता अकेले अकेले मारों गए हाहाहा..
तभी देव न्य एक चाकू निकला और अभी मुँह पी मारा और निशान बना दिया ऐसी hi कई वार उसके जिस्म पी Kiye...Jiska बाद वह ज़मीन पी गिर गया..
अभी:- धोके बाज़ क धोके को देख लिया अब भरोसेमन्द क भरोसे को देख वह ए गए तुम साब को मारी गए...
देव:- ः तो फ़िक्र मात क्र जल्दी तेरी पिच्य ए गए वह..
अभी:- ः वह एक ऐसी तलवार ही जिसके साथ लगती hi हार चीज़ काट क भिकार जाती ही और तूने उस तलवार की माया चुरा ली ही देव तू तो गया बेटे....
खाचक खाचक...
और अभी की सांसें बंद हो गई...
इधर जब मैं यह सुन्न रहा था मेरी आंखें नाम होगी...
मैने रोहन की गार्डन पाकर क उखाड़ क फ़ेंक दी...
और कमिशनर को फ़ोन किया...
और खुद निकल गया एक और जगह तारा क पास..
इधर तारा एक कॉफ़ी शॉप में बैठी थी तभी उसके सामन्य कोई आ क बेथ गया...
यह और कोई नहीं मैं था....
उसकी नज़ार जैसी hi मुझपी पारी वह झात सी उठी और मेरी पैरों में गिर गई...
मैं यह समझ नहीं पाया..
तारा:- मुझी माफ़ क्र दो मुझसी बोहत बरी गलती हो गई...
मैने उसको उठाया और खरा किया..
मैं:- यह सब क्यू किया तुमनी....
तारा:- अपने प्यार क लिए...
मैं:- मतलब.?
तारा:- मैं रेहान सी प्यार करती हूँ...
मैं:- वह कमिशनर का बीटा.?
तारा:- हाँ...
मैं:- तो उस से मेरा क्या कनेक्शन...
तारा:- मैं पेहली तुम्ही चाहंय लगी थी तुम्हारी पॉपुलरिटी देख क मैं तुम्ही कपङा बनाना चाहती थी लेकिन तभी एक दिन रेहान मुझी मिला उसका बात करना का अंदाज़ उसकी केयर करना मुझी पसंद आ गया आहिस्ता आहिस्ता मैं उस सी प्यार करनी लगी..
कुछ पेहली मुझी फ़ोन आया क अगर मैने ऐसा न किया तो वह लोग रेहान को मार दी गए इसी लिए मैं कुछ दिन अमेरिका चली गई फिर वहां सी खबर मिली रेहान का एक्सीडेंट होगया..
2 दिन पेहली फिर फ़ोन आया और उसने कहा क अगली बार ैसिडेंट नहीं मौर होगी..
मैं दार गई और फिर उसदिन उसके फ़ोन क बाद मैं तुम्हारी घर गई और जान क यह दारमा किया....
तारा फूट फूट क रोने लगी...
मैं:- ाचा बीएस रोना बंद करो और जो झूट बोलै उसका सच बताओ सब को..
तारा:- वफ रेहान को मार दी...
मैं:- उसको कुछ नहीं होगा मैं वडा करती हूँ...
तारा मेरी गली लग गई लेकिन मैने उसको हाथ नहीं लगाया वह खुद अलग होगी और फिर वह वहां सी चली गई....
तो बे कंटिन्यू....
आफ्टर 2 डेज...
आज पूरी 48 घंटी हो चुके थय उस घटना को मैं अब संभल चूका था लेकिन मेरी दिमाग में बीएस तनीषा और अबीरा क अलफ़ाज़ घूम रही थय जो क मुझी बोले गए थय...
मैं अपनी भाई का अंतिमसंस्कार तक न क्र सका...
मेरा दिमाग पूरा खराब था मैं चाहता तो तो सीधा जा क सेव को मार सकता था लेकिन मुझी हर उस शख्स को सजा देनी थी जिस न्य अभी क साथ यह साब किया यह बात मेरी दिमाग में अभी ी थी अभी क आखरी अल्फ़ाज़ किया थय..
"धिकाय बज़्ज़ो क धोके को देख लिया अब भरोसायमाद का भरोसा देखना"..
इसका मतलब कोई था जिसनी देव को साड़ी इनफार्मेशन दी थी...
कोण होसकता ही वह.?
मैं इस वक़त एक सुनसान जगह था जहाँ बिलकुल शांति थी बीएस छोटी सी झँपरी जो क मैने बनाई थी...
मैं:- अदि...
अदि:- जी भाई...
मैं:- मैं जो कहां करो गए.?
अदि:- जी भाई हुकम करो...
मैं:- अभी तुम मुझसी दूर चले जाओऔर मुझी ढूंढ़ने की कोशिश भी नहीं करो गए...
अदि:- भाई लेकिन.?
मैं:- मैने कहा न...
फिर शाम को मेरी दिमाग में कमिश्नर का ख्याल आया मैं तुरंत फ़ोन निकल क उसको मिलाया...
कॉम:- Hello कोण.?
मैं:- सैम ठाकुर बोल रहा हूँ...
कॉम:- सर आप अपने हमे याद किया बोलिये क्या क्र सकता हूँ आपके लिए.?
मैं:- अभी एक मुझी **** मिलिए...
फ़ोन कट...
मैने फ़ोन निकला और अपने लॉयर को लगाया..
किन:- Hello सर आफ्टर लॉन्ग time..How अरे यू.?
मैं:- फाइन किन जितनी जल्दी हॉसकय इंडिया पोहंचो...
किन:- एव्री थिंग इस फाइन सर..
मैं:- तुम जल्दी औ...
किन:- फाइन सर मैं कल Hi आ जैन गए..
मैं:- O.k...
फ़ोन सुत्त....
आफ्टर 3 हरष...
मैं उस जगह पोहंच गया जहाँ मैने कमिसीनेर को बुलाया था...
कमिश्नर वहां आ गया Hi hello क बाद वह बोलै..
कॉम:- सर उस दिन अपने फ़ोन क्र क वह नाटक करनी को क्यू कहा.?
मैं:- मैं किसी को नहीं बताना चाहता था क मैं कोण हूँ..
कॉम:- O.k सर..
मैं:- यह नंबर ********* पी *** डेट को किस किस की कॉल ै थी पता करना ही...
किम:- O.k सर 2 घंटी में डिटेल्स आपको फॉरवर्ड क्र दूँ गए...
मैं:- थैंक ु...
कमिश्नर चला गया...
मैं फिर वहीँ आ गया..
पास समुंदर की लहरें की झंगनाहट और उस दिन का सन मेरा डिल चिर रहा था..
तभी मैने एक बात नोटिस की वहां साब मौजूद थय सिवाए रत्न क मुझी यह बात नार्मल नहीं लगी..
अचानक मेरी डिल सी अजीब सी आवाज़ निकली जिस में ककी मेरा नाम दर्द सी लय रहा ही और मुसलसल लय रहा ही मैने दुःख में इस बात को िंगोरे क्र दिया लेकिन अब मुझी कन्फर्म होगया था यह रत्न की आवाज़ ही जो इस वक़त किसी मुसीबत में ही...
मैं उठ गया और आंखें बंद क्र ली और फिर खोली तो एक सुनसान सी जगह खरा था सामन्य एक बंद फैक्ट्री थी...
मैं धीरे धीरे अंदर गया दबे पाऊँ अंदर जाने का लगा वहां ज़्यादा लोग नहीं थय अंदर कुर्सी पी रत्न बंधू थी और साइड पी 4 आदमी बैठी तैश खेल रही थय...
मेरी आंखें गुस्से सी लाल होगी...
मैं भाग क रत्न क पास गया...
उसने अपनी आंखें ऊपर की टी मुझी वहां पा क रोने लगी...
मैने अपना हाथ उसके ऊपर लय जाने लगा तभी एक गोली चली जो सीधा मेरी सीने पी लगी और लगती Hi जम्में पी गिर गई...
जिससे देख क उन साब की आंखें फात गई और मैने अपनी आग में जलती होइ आंखें और उन में आंसूं सी उनकी तरफ देखा और स्पीड सी भाग क उनके हाथ पेअर टूर दिए यह काम 1 मं में Hi क्र दिया था और वापिस रत्न की तरफ आया उसकी आंखों में अभी भी ाँसों थय मैने जल्दी सी उसके हाथ खोली वह उठ क झात सी मेरी गली लग गई...
मैने अपने हाथ नहीं लगाई उसको...
वह अलग होइ और मेरी आंखों में देखनी लगी जिन में आंसूं थय उसने अपने मुँह पी सी कपड़ा हटाया...
रत्न:- क्या हुवा मैं ठीक हूँ रोइ क्यू रही हैं...
मैं कुछ नहीं बोलै और उसका हाथ पाकर क वहां सी टेलिपोर्ट होकय घर क सामन्य पोहंच गया...
रत्न:- यह साब क्या ही आप कुछ बोलते क्यू नहीं और मुझी किसने पकड़ा था.?
मैं:- अंदर जाओ...
रत्न:- आप नहीं चलो गए..
मैं:- साब पता चल जाये गए अंदर जाओ...
और मैं सीधा दुबारा वहां सी टेलिपोर्ट होकय उसी जगह पोहच गया और उन गुण्डों को पाकर क जम्में पी लिटा दिया वह दर्द सी चिल्ला रही थय...
मैं:- किसने किया यह साब.?
गुंडा..1:- आए हमे माफ़ क्र दी साहब हमे तो बीएस यहाँ रखनी को पैसी दिए थय...
मैं:- किसने दिए थय.?
ग1:- रोहन सहा न्य....
नाम सूं क मेरी टूटे ुर गए.. तभी मोबाइल की घंटी बजी..
मैने चेक किया तो कमिश्नर का मश्ग था डिटेल्स का उसमे भी लास्ट क 3 कॉल्स रोहन क नंबर क थय...
मेरा दिमाग घूम गया लेकिन मैं जाना चाहता था यह क्यू किया उसने...
मैने ग1 को रोहन को मश्ग क्र क यहाँ बुलानी को कहा...
घर पी...
जैसी Hi मैं घर सी निकला पापा साब फिर सी रोने लगी वहां पी सब मौजूद थय सिवाए रत्न k...Aur अक्षरा की तबियत थोड़ी खराब थी तो वह अपने कमरे में थी..
पापा न्य साडी तयारी की अंतिमसंस्कार की.
पापा को सब सच पता था लेकिन वह चुप थय नहीं पता क्योँ.?
तनीषा बीएस अपने कमरे में बैठी रोटी रहती थी और अबीरा बी यहीं घर में थी और H.M की फॅमिली भी आ गई थी वही सब को जब अबीरा न्य बताया साब यकीन नहीं क्र सकी...
इशिका सोच में थी किसी अभी वह कुछ बोलती तभी गारी आ क रुकी जिसमे सी कोमल और फॅमिली ै...
सब को बता दिया था कोमल हलकी नाम आंखों सी घर में एंटर होइ...
माँ सब सी गली मिली और रोइ...
कोमल:- तनीषा दी कहाँ हैं.?
माँ:- अपने कमरे में रू रही ही...
कोमल हर जगह मुझु ढूंढ रही थी शायद वह समझी मैं कमरे में होंगे इसी लिए वह वहां आ गई वहां तनीषा अकेली रू रही थी..
तनीषा कोमल को देखती Hi उसके गल्ली लग गई...
कोमल:- शांत हो जय दीदी भगवन को जो मंज़ूर था..
तनीषा:- जिसका सुहाग उसके भाई को मार दी वह किसी शांत रही तो उस सी दूर रहना मेरी बेहेन वह एक दरिंदा ही....
कोमल न्य यह जैसी hi सूना वह झात सी अलग होइ और तनीषा को ढाका दिया..
कोमल:- क्या बाक रही हो...
तनीषा:- हाँ वह एक जिस्म का भूका इंसान और पैसों लालची ही...
तभी तनीषा क मुँह पी एक ज़ोर दार थापर पारा जिसकी आवाज़ पूरी घर में गूंजी...
साब तेह सुन क भाग क उप्पेर ए...
Komal(chilla क्र):- खबर दार मेरी सैम क बारी में कुछ बकवास की हो तो...
तभी साब वहां आ गए...
माँ:- क्या हुवा....
कोमल:- यह मेरी सौम्य क बारी में उलटी सीधी बकवास क्र रही ही...
तनीषा:- जो सच ही वही बता रही हूँ वह एक बदचलन इंसान ही...
तभी एक और आवाज़ गजरे वहां....
"मैं तेरी जान लय लोन गई अगर टुन्नाय मेरी सैम क बारी में कुछ कहा."..
सब उस तरफ देखनी लगी...
यह रत्न थी सब हिरण होगये यह वही समय था जब मैं उसको घर चोर आया था..
माँ भाग क उसके पास ी..
माँ:- तू कहाँ थी हम न्य तुझी कितना ढूंढा..
रत्न:- मेरे पति क होते मुझी क्या होगा bhala...Aur कोई बी उनके बारी में उल्टा सीधा मात कहो..
अबीर:- क्योँ न कही उसी न्य मारा मेरी पति को अपने हाथों सी 2 दिन पेहली...
तभी इशिका बोली...
इशिका:- नहीं ऐसा नहीं होसकता..
अबीरा:- क्यू नहीं हो सकता उसने खुद बुलाया था अभी को एक आदमी को भेज क
आयेशा:- एक्साक्ट्ली क्या हुवा था.?
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इशिका:- उसने नहीं मारा वह तो यहाँ था बी नहीं वह मेरी साथ अमेरिका में हमारा क्विज कम्पेशन था और उस दिन हमारी मोबाइल बी लय लिए थय उन लोगो न्य...
सब तेह सुन क हिरण होगये...
H.M:- मतलब तुम जिसके सतब गई थी. वह सैम था.?
इशिका:- हाँ और कल hi हम इंडिया वापिस ए हैं... और माँ न्य और बुआ न्य भी उसको मेरी साथ आती हुवी देखा ही..
A'maa:- हाँ हम न्य उसको देखा था इसके साथ...
आयेशा:- अगर वह यहाँ थय hi नहीं तो तारा क केहनी क मुताबिक उसके साथ ज़बरदस्ती भी उसी दिन करनी की कोशिश की..
इशिका:- नहीं यह झूट ही मैं इस बात की गवाह हूँ और वह मेरी साथ था...
तभी किसी क ज़मीन पी गिरनी की आवाज़ ी..
यह अबीरा और तनीषा दोनों थी जिनको सब सुन्न क बोहत बारे झटका लगा था.... हाला क आयेशा और अंजलि कुछ कुछ नहीं को बी थोड़े समय क लिए भय हुवा था उनकी बी कुछ वैसी hi हालत थी वह कुछ बोली नहीं थीं जब सैम को तनीषा और अबीरा बोल रही थीं..
माँ और पापा पता नहीं क्यू सब कुछ पता होने क बावजूद चुप थय....
कोमल:- उनके बारी में किसी न्य ऐसा सोचा बी किसी.? मैं तुम सब को कभी माफ़ नहीं करूं गई अंजलि दीदी खास क्र क आपको वह तो आपका बेतु था न कहा गया वह प्यार वह भरोसा जो आपको उपाय था चाही वह माफ़ बी क्र दी क्योँ क बोहत बारे डिल ही उनका लेकिन मैं कभी नहीं क्र सकूं गई...
वह यह कह क कमरे सी बाहिर चली गई और पेची चरों को पश्ताप और दुःख में चोर गई...
(उस दिन एक नुम सी तनीषा को कॉल ी थी और उसने सौम्य क बारी में पोछा क बॉस कहाँ हैं और उनका फ़ोन बंद ही और उन्होंय जो काम दिया था उसका पूरा होने का करह रही थय क)
"जैसा उन्हों न्य कहा था सब वैसा किया ही कुछ देर में आपको पता लग जाये गए..."
इधर मैं वही छुपा हुवा था क तभी रोहन वहां आ गया और कुर्सी खली देख क वहां सी भागण्य लगा...
मैं उसके सामन्य आ गया...
रोहन मुझी देख क चौंक गया और पलट क भागण्य लगा...
मैने उसकी कामर में एक ज़ोर दार लात मारी वह वही गिर गया...
रोहन:- मुझी माफ़ क्र दी मैने यह जान बूझ क नहीं किया...
मैने उसका कालर पकड़ा..
मैं:- तुझी अपना दोएत मंटा था तूने ऐसा क्यू किया...?
रोहन:- मैने जान क नहीं...
मैने एक हाथ उसके हाथ पी मारा जी से उसका बज़्ज़ो टूट गया...
रोहन:- अह्ह्ह्हह्हह...
मैं:- मुझी सिर्फ सच बता क्यू किया यह साब और तेरा देव क साथ क्या रिश्ता ही...
रोहन:- अह्ह्ह्ह बताता hun...Woh मेरी पापा हैं...
मैं:- क्याआ.? तो तू यहाँ क्या क्र रहा था..?
रोहन:- मैं यहाँ तुम पी नज़र रखनी आया था जान क तुम्हारी कॉलेज में एडमिशन लिया और तुम्हारी साथ दोस्ती की तकय चम्पी नज़र रख क टुमस्य भाई की वीडियोस और अपने चाचा की बेटी को ढून्ढ सकूं...
मैं:- तुम लोगो को किसने बताया तुम्हारी चाचा की बेटी मेरी साथ ही.?
रोहन:- क्यू क तुम्ही hi आखरी बार चची क साथ देखा था हॉस्पिटल में अगर कोई और होता उस से मार पिट क्र उगलवा लेती लेकिन तुम्हारी साथ पेहली सी दुश्मनी थी और तुम्हारी साब सी बारी ताकत तुम्हारा दोस्त था जो हमेशा तुम्ही बचा लेता था हार वॉर सी..
फिर तुम दोनों को अलग करनी क लिए हमने चल चली लेकिन फिर बी तुम्ही नहीं कुछ क्र सकी फिर अभी को अकेले में बुल्ला क...
3 दिन पेहली...
(रोहन की ज़ुबानी..)
जब तुम यहाँ सी अमेरिका गए तो मैने तुम्हारी घर पी नज़र रखना शुरू क्र दी कुछ दिनों क बाद अभी घर आज्ञा और मैं उसका पिच करनी लगा एक दिन अभी और उसकी बीवी एक होटल में खाना खा रही थय क मैं वहां गया अभी सी मिला और बोला...
रोहन:- सर आप अभी हैं.?
अभी:- जी बोलिये...
रोहन:- जी वह आपको सैम साब न्य बुलाया ही...
अबीरा:- क्या भैया आ गए.?
रोहन:- बूत उन्होंने सर को अकेले बुलाया ही अर्जेंट..
अभी:- अबीरा तुम घर जाओ मैं सैम सी मिल क अत हूँ..
उसके बाद अभी को मैं अपने फार्म हाउस पी लय गया जहाँ पापा पेहली सी मौजूद थय..
उनको देख क अभी साब समझ गया और उसने मुझु ढाका दिया और तभी एक डांडा उसके सर पी पारा और वह वही गिर गया...
देव:- हाहाहा मुझु मैरी गए अरे इतने साल चल रहा लेकिन अब तुम मारो गए...
अभी:- बुज़दिलों की तरहं वॉर करता ही..
देव:- ः बोल जो मर्ज़ी bol...Tum दोनों को एक साथ नहीं मार सकता अकेले अकेले मारों गए हाहाहा..
तभी देव न्य एक चाकू निकला और अभी मुँह पी मारा और निशान बना दिया ऐसी hi कई वार उसके जिस्म पी Kiye...Jiska बाद वह ज़मीन पी गिर गया..
अभी:- धोके बाज़ क धोके को देख लिया अब भरोसेमन्द क भरोसे को देख वह ए गए तुम साब को मारी गए...
देव:- ः तो फ़िक्र मात क्र जल्दी तेरी पिच्य ए गए वह..
अभी:- ः वह एक ऐसी तलवार ही जिसके साथ लगती hi हार चीज़ काट क भिकार जाती ही और तूने उस तलवार की माया चुरा ली ही देव तू तो गया बेटे....
खाचक खाचक...
और अभी की सांसें बंद हो गई...
इधर जब मैं यह सुन्न रहा था मेरी आंखें नाम होगी...
मैने रोहन की गार्डन पाकर क उखाड़ क फ़ेंक दी...
और कमिशनर को फ़ोन किया...
और खुद निकल गया एक और जगह तारा क पास..
इधर तारा एक कॉफ़ी शॉप में बैठी थी तभी उसके सामन्य कोई आ क बेथ गया...
यह और कोई नहीं मैं था....
उसकी नज़ार जैसी hi मुझपी पारी वह झात सी उठी और मेरी पैरों में गिर गई...
मैं यह समझ नहीं पाया..
तारा:- मुझी माफ़ क्र दो मुझसी बोहत बरी गलती हो गई...
मैने उसको उठाया और खरा किया..
मैं:- यह सब क्यू किया तुमनी....
तारा:- अपने प्यार क लिए...
मैं:- मतलब.?
तारा:- मैं रेहान सी प्यार करती हूँ...
मैं:- वह कमिशनर का बीटा.?
तारा:- हाँ...
मैं:- तो उस से मेरा क्या कनेक्शन...
तारा:- मैं पेहली तुम्ही चाहंय लगी थी तुम्हारी पॉपुलरिटी देख क मैं तुम्ही कपङा बनाना चाहती थी लेकिन तभी एक दिन रेहान मुझी मिला उसका बात करना का अंदाज़ उसकी केयर करना मुझी पसंद आ गया आहिस्ता आहिस्ता मैं उस सी प्यार करनी लगी..
कुछ पेहली मुझी फ़ोन आया क अगर मैने ऐसा न किया तो वह लोग रेहान को मार दी गए इसी लिए मैं कुछ दिन अमेरिका चली गई फिर वहां सी खबर मिली रेहान का एक्सीडेंट होगया..
2 दिन पेहली फिर फ़ोन आया और उसने कहा क अगली बार ैसिडेंट नहीं मौर होगी..
मैं दार गई और फिर उसदिन उसके फ़ोन क बाद मैं तुम्हारी घर गई और जान क यह दारमा किया....
तारा फूट फूट क रोने लगी...
मैं:- ाचा बीएस रोना बंद करो और जो झूट बोलै उसका सच बताओ सब को..
तारा:- वफ रेहान को मार दी...
मैं:- उसको कुछ नहीं होगा मैं वडा करती हूँ...
तारा मेरी गली लग गई लेकिन मैने उसको हाथ नहीं लगाया वह खुद अलग होगी और फिर वह वहां सी चली गई....
तो बे कंटिन्यू....