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- Dec 5, 2013
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अपडेट NO.71
मेरी और रानी क चेहरी पी इस वक़त 12 बाजी थय वाकई साब खुश थय...
इंदू:- औ बीटा पंडित जी सी तुम दोनों क लिए पूजा करवा लय...
मैं न्य रानी की तरफ देखा उस न्य नज़रें झुका ली....
मैं:- जी आंटी ज़रूर...
इस वक़त कोई चारा नहीं था मेरी पास...
जानकी:- ोये होये देखो तो किसी श्रम रही ही...
भाग्य:- बिलकुल हम्र्य जीजू जो सामन्य हैं और आज तो वह क़यामत लग रही hain..hayee अगर तेरी नज़र नहो होती न मैं आज भगा क लय जाती इसको...
सब हसने लगी फिर इंदू आंटी और कृष्णा अंकल एक साथ हम दोनों को लय क गए और पंडित जी न्य पूजा शुरू की..
तभी आसमान का रंग बदल गया बदल चा गए और बारिश शुरू होगी जैसी क आज बदल ख़ुशी मरीन झूम रही हूँ और खुल क पानी बरसा रही हूँ बारिश की आवाज़ Hi कुछ अलग थी जैसी वह कह रही हूँ क आज बारी समय बाद किसी प्यार करनी वळून को मिलती देखा ही...
पंडी जी न्य पूजा की हम न्य उनके पेअर chuway..Aur बाकि बरूण क भी...
कृष्णा:- अब घर चलती हैं काफी वक़त होगया ही...
सब गरियोँ में बेथ क हवेली की तरफ वापिस आ गए...
मैं काम hi बोल रहा था मेरी मन में स्वाळून का भंडार था..
अगर मैं चाहता मैं यह सब रोक सकता था लेकिन मैं ऐसा नहीं क्र सका पता नहीं क्योँ और मेरी डिल में ऐसी बोहत तरगं क सवाल थय जिनका जवाब मेरी पास नहीं था...
हवेली आ क मैं सीधा कमरे में चला गया... बिना किसी सी बात किये और जा क बीएड पी लेट गया...
तभी मुझु कृष्णा अंकल की आवाज़ ी...
मैं नीची चला गया उनकी बात सुने...
कृष्णा:- बीटा अब तुम्ही उस कमरे में रहंय की ज़रूरत नहीं ही...
मैं:- It's O.k अंकल में ठीक हूँ उधर...
कृष्णा:- देखो बीटा हंसय जो गलती होइ ही उसी सुधारनी का मौका दो..
मैं:- जी अंकल जैसा आप चाही...
कृष्णा:- सुनूँ रॉकी का सामान रानी क कमरे में रखवा दो...
मैं यह सुन क एक डैम शॉक होगया मेरी साथ bhi...Main थोड़ा कण्ट्रोल क्र क बोलै...
मैं:- अंकल यह किसी शादी सी पेहली....
कृष्णा:- देखो बीटा मुझी चम्पी पूरा भरोसा ही क तुम हमरी इज़्ज़त का पूरा ख्याल रखो gy..Aur शादी तो बीएस एक रसम होगी आज मैं न्य तुम्ही डिल सी दामाद बना लिया ही...
मैं इस क बाद कुछ बोलनी की हालत में नहीं था...
कृष्णा:- अपने घर वळून को बोलै लो जितना जल्दी हॉसकय...
मैं:- अंकल वह तो अभी नहीं हैं इधर अगर बुरा न मान्य तो वह लोग शादी में ए गए...
कृष्णा:- कोई बात नहीं अगर उनकी तरफ सी कोई दिकत तो नहीं ही.?
मैं:- नहीं नहीं बीएस बिजी होने की वजह सी...
कृष्णा:- O.k beta...Ao खाने कहती हैं...
हम सब डाइनिंग टेबल पी जा क बेथ गए उसकी बाद कृष्णा अंकल न्य ऐसी बात कही जिस सी सभी लेडीज ख़ुशी क मैरी फूली नहीं समां रही थी...
कृष्णा:- तुम सब भी बैठो साथ आज हम साब मिल क खाये गए...
सब ख़ुशी और हीरानी सी उनको देख रही थय...
कृष्णा:- अरे बैठो भी बोहत भूक लगी ही...
सब बेथ गए और सब ख़ुशी ख़ुशी खाना कहानी लगी..
मेरी हलक सी खाना नीची नहीं उत्तर रहा था...
कृष्णा:- अरे लता को भी फ़ोन क्र अन्य का कह दो और साथ में उन्दोनो को भी...
इंदू:- हम न्य बता दिया ही वह दोनों तो बोहत उतावली हो रही हैं उनकी छोटी बेहेन की सगाई ही खुश तो होंगी...
Kaya(R'chachi):- अमित भी आ रहा ही..
मैं सवालिया नज़रूँ सी देख और सुन रहा था सब की बात..
तभी शांति आंटी न्य मेरी एक्सप्रेशंस को भांप लिया और बोली..
शांति:- बीटा लता मेरी बरी बेहेन ही और मेरी छोटी बेटी और उसकी छोटी बेटी क साथ वह अमेरिका रहती ही तीनो वहां परण्य गए हुवे हैं अमित भी उनकी साथ hi ही....
यह सुन क मेरा एक बार दिमाग हिल गया और मेरी दिमाग में एक फ़्लैश बैक चल गया और में अपनी उन यादवों में चला गया जो क शायद मेरी ज़िन्दगी क हस्सें तरीन पल थय....
मुझी खोया हुवा देख मैं जनकज दीदी बोली...
जानकी:- क्या बात ही कहाँ खो गया...
मैं:- कुछ नहीं कुछ याद आज्ञा था...
यह नाम बीएस इतफ़ाक़ समझ क मैं न्य यह बात दिमाग सी निकल दी..
खाना खा क सब खतून की तरफ चली गए और मैं कमरे में चला गया पुरानी वाली hi जहाँ इंदू आंटी सामान समेत रही थी..
उनका ध्यान उस तरफ था और उनकी कमर साड़ी में बोहत सेक्सी लग रही थी...
मैं न्य आराम सी यज्ञ जा क एक हाथ उनकी कमर में दाल क खेंच लिया और अपने साथ चिपका लिया...
वह दार गई और चिल्लानी lagi..main न्य हाथ उनके मुँह पी रख दिया और आराम सी बोलै..
मैं:- मैं हूँ...
वह रिलैक्स hogai...Main न्य उनको छोरा वह झट सी पलट क मेरी गाल लग गई...
मैं:- आप ठीक हैं.?
इंदू:- द्र दिया था मुझी...
मैं:- आईएम सॉरी...
इंदू आंटी अलग होइ..
इस वक़त उनके चेहरी पी दुनिया भार की मस्सोमियत मुझी बोहत प्यार आया उनपे..
मैं न्य उनको होंठों को हल्का सा चूम लिया जिद य उनके होंठ खिल गए...
मैं:- आप बोहत प्यारी हैं...
इंदू:- क्या मैं सही क्र रही हूँ.?
मैं:- किस बारी में.?
इंदू:- मेरी बेटी की शादी टुमस्य होने वाली है ैद्य में मैं तुम्हारी साथ...
मैं न्य उनका हाथ पकड़ा...
मैं:- मेरी एक बात का जवाब दी गई सच सच...
इंदू:- हम्म..
मैं:- आप न्य मुझी उस दिन किश क्योँ किया.?
इंदू:- मैं नहीं जानती क्योँ किया मेरी खुद पी काबू नहीं रहता जब भी मेरी सामन्य होते हो..
मैं:- क्या यह बीएस प्यास की वजह सी होता ही जो क कृष्णा अंकल पूरी नहीं क्र सकती..
इंदू:- अगर मेरी प्यास मुझ पी भरी पर सकती तो बोहातों क सामन्य नंगी लेट प्यास बुझा लेती...
मैं:- तो फिर मेरी सामन्य क्यू.?
इंदू:- मेरी वासना मुझपी पहली बार भरी पारी और हर बार भरी पार्टी ही जब भी सामन्य आती हो...
मैं:- उस किश में एक राइ बराबर भी वासना नहीं थी बीएस था तो सिर्फ प्यार...
इंदू आंटी न्य सर झुका लिया..
मैं:- मैं बीएस यह जाना चाहता हूँ क क्योँ था उस में इतना प्यार जिसको आप न्य वासना का नाम दिया.?
इंदू:- नहीं जानती बीएस जब भी सामन्य आती हो डिल करता ही लय क कहीं ुर जाओं और ज़िन्दगी भर क लिए खुद में समां लोन या तुम में समां जाओं...
मैं:- तो यह प्यार ही या वासना.?
इंदू:- यह धोका होगा मेरा अपने पति और बेटी क साथ...
मैं:- जिस्म को तो संभल लिया डिल का क्या क्रय गई.?
इंदू:- डिल में सामान्य वाली कभी नहीं निकलती चाही कितनी दूरी ho...Agr यह सुना ही क मैं प्यार करती हूँ टुमस्य तो हाँ करती हूँ प्यार पता नहीं कब किसी हुवा लेकिन हुवा तो हुवा..
और वह रोने लगी...
मैं न्य उनको बहून में भार लिया उन्होंने मुझी ऐसी पकड़ा था जैसी चोरी गई नहीं और खूब रू रही थी मैं न्य भी डिल का गुबार निकालनी दिया..
कुछ समय बाद मैं न्य उनको अलग किया और उनकी आंखें साफ़ की और दोनों आंखों की चूम बोलै...
मैं:- अगर प्यार किया ही तो दर केसा और मैं वडा करता हूँ हमेशा आपकी प्यार की कदर करूं ga...Aur बाकि उप्पेर वाली पी चोर दो वह साब देख रहा ही और सब ठीक क्र दी गए...
इंदू:- मुझी ज़रूरत ही आपके प्यार ki..Agr अपनी डिल क किसी एक कोने में बसा सकती हो तो..
मैं:- मैं न्य पेहली hi कहा ही की मैं हमेशा आपके प्यार की कदर करूं ga...Aur आपको हर ख़ुशी दूँ गए...
इंदू:- यज्ञ सी अकेली में आप मुझी मेरी नाम सी बुलाये गए..
मैं:- जैसा आपका hukam...Indoo जी..
इंदू शर्मा क मेरी गली लग गई तभी किसी क अनत की आवाज़ सी हम अलग होगये और बैग्स को पैक करनी लगी...
मैं वहां सी बाहिर आज्ञा और फ़ोन निकल क कोमल को किया...
आज इतने दिनों बाद फ़ोन क्र रहा था पेहली तो खूब दन्त पारी उस सी...
मैं:- मेरी जान सॉरी न...
कोमल:- आप हमेशा ऐसी कृत्य ho..main वेट करूं आप फ़ोन hi नहीं कृत्य...
मैं:- थोड़ा बिजी था बाबा...
कोमल:- मेरी लिए भी बिजी थय.?
मैं:- आपकी लिए तो दुनिया चोर दी बिजी किसी hongay..Aur जो बतानी क लिए फ़ोन किया वह तो सुन लो...
कोमल:- जी बोलिये...
मैं न्य ा तो ज़ साडी स्टोरी बता दी यह वाली...
कोमल:- ियना सब कुछ होगया बताय भी नहीं...
मैं:- सॉरी किसी को नहीं पता था...
कोमल:- क्या राहुल भैया ठीक हैं अब.?
मैं:- हाँ मेरी साथ hi हैं इधर...
कोमल:- और रानी के ही.? प्यारी ही.?
मैं:- अरे प्यारी होना या न होने सी मतलब.?
कोमल:- अब आपका क्या भरोसा होसकता ही उसको भी बीवी बना लो...
कोमल की यह बात सुन क मैं एक बार को हिल गया और बीएस यह निकला मेरी मुँह सी..
मैं:- मतलब.? क्या मैं अपनी मर्ज़ी सी यह सब क्र रहा हूँ.?
कोमल:- नहीं मेरा वह मतलब नहीं था...
मैं:- मतलब बीएस एक hi होता ही जो बोलै jaye..Aur इस में साफ़ साफ़ यह hi मतलब था..
कोमल:- आप गलत समझ रही हैं...
मैं:- कोमल मैं न्य कभी भी किसी पी अपना प्यार मुसलत नहीं kiya...Han यह सच ही मेरा पहला प्यार आप थी अगर मेरी ज़िन्दगी ऐसी न होती तो आपकी सिवा किसी को देखना भी मेरी लिए गुनाह होता...
कोमल:- मैं आपकी प्यार पी कभी नहीं शक kiya...I'm सॉरी...
वह रोने लगी..
मैं:- ाचा रोना तो बंद करो पता ही न रोटी आप हो तकलीफ मुझी होती ही..
कोमल:- मैं पागल हूँ हमेशा आपको ताक़िफ़ देती hun..I'm सॉरी सैम...
मैं:- कोमल...
कोमल:- हम्म..
मैं:- ी लव यू...
कोमल:- ी लव यू तू!!! मोरे थें अन्य THING...Apki ज़िन्दगी में कोई भी ए मुझी कोई प्रॉब्लम नहीं ही...
मैं:- ब्येई ंद लव यू!!..
कोमल:- बई..
फ़ोन सुत्त...
Main(man में):- यह ज़िन्दगी नहीं झांड़ ही साली सुलझनी की बजाए उलझती जा रही ही और क्या जो टेबल पी नाम लिया था सब न्य क्या यह वही hy.?agr वह इ ही तो क्या होगा.?.....
तो बे कंटिन्यू
नोट:- नई चरक्टेर ंद सम फ़्लैश बैक ों इतस Way.....Nd थैंक्स फॉर थे 5 लाच+ व्यूज ंद 1000+ लाइक्स..
कीप सपोर्टिंग
मेरी और रानी क चेहरी पी इस वक़त 12 बाजी थय वाकई साब खुश थय...
इंदू:- औ बीटा पंडित जी सी तुम दोनों क लिए पूजा करवा लय...
मैं न्य रानी की तरफ देखा उस न्य नज़रें झुका ली....
मैं:- जी आंटी ज़रूर...
इस वक़त कोई चारा नहीं था मेरी पास...
जानकी:- ोये होये देखो तो किसी श्रम रही ही...
भाग्य:- बिलकुल हम्र्य जीजू जो सामन्य हैं और आज तो वह क़यामत लग रही hain..hayee अगर तेरी नज़र नहो होती न मैं आज भगा क लय जाती इसको...
सब हसने लगी फिर इंदू आंटी और कृष्णा अंकल एक साथ हम दोनों को लय क गए और पंडित जी न्य पूजा शुरू की..
तभी आसमान का रंग बदल गया बदल चा गए और बारिश शुरू होगी जैसी क आज बदल ख़ुशी मरीन झूम रही हूँ और खुल क पानी बरसा रही हूँ बारिश की आवाज़ Hi कुछ अलग थी जैसी वह कह रही हूँ क आज बारी समय बाद किसी प्यार करनी वळून को मिलती देखा ही...
पंडी जी न्य पूजा की हम न्य उनके पेअर chuway..Aur बाकि बरूण क भी...
कृष्णा:- अब घर चलती हैं काफी वक़त होगया ही...
सब गरियोँ में बेथ क हवेली की तरफ वापिस आ गए...
मैं काम hi बोल रहा था मेरी मन में स्वाळून का भंडार था..
अगर मैं चाहता मैं यह सब रोक सकता था लेकिन मैं ऐसा नहीं क्र सका पता नहीं क्योँ और मेरी डिल में ऐसी बोहत तरगं क सवाल थय जिनका जवाब मेरी पास नहीं था...
हवेली आ क मैं सीधा कमरे में चला गया... बिना किसी सी बात किये और जा क बीएड पी लेट गया...
तभी मुझु कृष्णा अंकल की आवाज़ ी...
मैं नीची चला गया उनकी बात सुने...
कृष्णा:- बीटा अब तुम्ही उस कमरे में रहंय की ज़रूरत नहीं ही...
मैं:- It's O.k अंकल में ठीक हूँ उधर...
कृष्णा:- देखो बीटा हंसय जो गलती होइ ही उसी सुधारनी का मौका दो..
मैं:- जी अंकल जैसा आप चाही...
कृष्णा:- सुनूँ रॉकी का सामान रानी क कमरे में रखवा दो...
मैं यह सुन क एक डैम शॉक होगया मेरी साथ bhi...Main थोड़ा कण्ट्रोल क्र क बोलै...
मैं:- अंकल यह किसी शादी सी पेहली....
कृष्णा:- देखो बीटा मुझी चम्पी पूरा भरोसा ही क तुम हमरी इज़्ज़त का पूरा ख्याल रखो gy..Aur शादी तो बीएस एक रसम होगी आज मैं न्य तुम्ही डिल सी दामाद बना लिया ही...
मैं इस क बाद कुछ बोलनी की हालत में नहीं था...
कृष्णा:- अपने घर वळून को बोलै लो जितना जल्दी हॉसकय...
मैं:- अंकल वह तो अभी नहीं हैं इधर अगर बुरा न मान्य तो वह लोग शादी में ए गए...
कृष्णा:- कोई बात नहीं अगर उनकी तरफ सी कोई दिकत तो नहीं ही.?
मैं:- नहीं नहीं बीएस बिजी होने की वजह सी...
कृष्णा:- O.k beta...Ao खाने कहती हैं...
हम सब डाइनिंग टेबल पी जा क बेथ गए उसकी बाद कृष्णा अंकल न्य ऐसी बात कही जिस सी सभी लेडीज ख़ुशी क मैरी फूली नहीं समां रही थी...
कृष्णा:- तुम सब भी बैठो साथ आज हम साब मिल क खाये गए...
सब ख़ुशी और हीरानी सी उनको देख रही थय...
कृष्णा:- अरे बैठो भी बोहत भूक लगी ही...
सब बेथ गए और सब ख़ुशी ख़ुशी खाना कहानी लगी..
मेरी हलक सी खाना नीची नहीं उत्तर रहा था...
कृष्णा:- अरे लता को भी फ़ोन क्र अन्य का कह दो और साथ में उन्दोनो को भी...
इंदू:- हम न्य बता दिया ही वह दोनों तो बोहत उतावली हो रही हैं उनकी छोटी बेहेन की सगाई ही खुश तो होंगी...
Kaya(R'chachi):- अमित भी आ रहा ही..
मैं सवालिया नज़रूँ सी देख और सुन रहा था सब की बात..
तभी शांति आंटी न्य मेरी एक्सप्रेशंस को भांप लिया और बोली..
शांति:- बीटा लता मेरी बरी बेहेन ही और मेरी छोटी बेटी और उसकी छोटी बेटी क साथ वह अमेरिका रहती ही तीनो वहां परण्य गए हुवे हैं अमित भी उनकी साथ hi ही....
यह सुन क मेरा एक बार दिमाग हिल गया और मेरी दिमाग में एक फ़्लैश बैक चल गया और में अपनी उन यादवों में चला गया जो क शायद मेरी ज़िन्दगी क हस्सें तरीन पल थय....
मुझी खोया हुवा देख मैं जनकज दीदी बोली...
जानकी:- क्या बात ही कहाँ खो गया...
मैं:- कुछ नहीं कुछ याद आज्ञा था...
यह नाम बीएस इतफ़ाक़ समझ क मैं न्य यह बात दिमाग सी निकल दी..
खाना खा क सब खतून की तरफ चली गए और मैं कमरे में चला गया पुरानी वाली hi जहाँ इंदू आंटी सामान समेत रही थी..
उनका ध्यान उस तरफ था और उनकी कमर साड़ी में बोहत सेक्सी लग रही थी...
मैं न्य आराम सी यज्ञ जा क एक हाथ उनकी कमर में दाल क खेंच लिया और अपने साथ चिपका लिया...
वह दार गई और चिल्लानी lagi..main न्य हाथ उनके मुँह पी रख दिया और आराम सी बोलै..
मैं:- मैं हूँ...
वह रिलैक्स hogai...Main न्य उनको छोरा वह झट सी पलट क मेरी गाल लग गई...
मैं:- आप ठीक हैं.?
इंदू:- द्र दिया था मुझी...
मैं:- आईएम सॉरी...
इंदू आंटी अलग होइ..
इस वक़त उनके चेहरी पी दुनिया भार की मस्सोमियत मुझी बोहत प्यार आया उनपे..
मैं न्य उनको होंठों को हल्का सा चूम लिया जिद य उनके होंठ खिल गए...
मैं:- आप बोहत प्यारी हैं...
इंदू:- क्या मैं सही क्र रही हूँ.?
मैं:- किस बारी में.?
इंदू:- मेरी बेटी की शादी टुमस्य होने वाली है ैद्य में मैं तुम्हारी साथ...
मैं न्य उनका हाथ पकड़ा...
मैं:- मेरी एक बात का जवाब दी गई सच सच...
इंदू:- हम्म..
मैं:- आप न्य मुझी उस दिन किश क्योँ किया.?
इंदू:- मैं नहीं जानती क्योँ किया मेरी खुद पी काबू नहीं रहता जब भी मेरी सामन्य होते हो..
मैं:- क्या यह बीएस प्यास की वजह सी होता ही जो क कृष्णा अंकल पूरी नहीं क्र सकती..
इंदू:- अगर मेरी प्यास मुझ पी भरी पर सकती तो बोहातों क सामन्य नंगी लेट प्यास बुझा लेती...
मैं:- तो फिर मेरी सामन्य क्यू.?
इंदू:- मेरी वासना मुझपी पहली बार भरी पारी और हर बार भरी पार्टी ही जब भी सामन्य आती हो...
मैं:- उस किश में एक राइ बराबर भी वासना नहीं थी बीएस था तो सिर्फ प्यार...
इंदू आंटी न्य सर झुका लिया..
मैं:- मैं बीएस यह जाना चाहता हूँ क क्योँ था उस में इतना प्यार जिसको आप न्य वासना का नाम दिया.?
इंदू:- नहीं जानती बीएस जब भी सामन्य आती हो डिल करता ही लय क कहीं ुर जाओं और ज़िन्दगी भर क लिए खुद में समां लोन या तुम में समां जाओं...
मैं:- तो यह प्यार ही या वासना.?
इंदू:- यह धोका होगा मेरा अपने पति और बेटी क साथ...
मैं:- जिस्म को तो संभल लिया डिल का क्या क्रय गई.?
इंदू:- डिल में सामान्य वाली कभी नहीं निकलती चाही कितनी दूरी ho...Agr यह सुना ही क मैं प्यार करती हूँ टुमस्य तो हाँ करती हूँ प्यार पता नहीं कब किसी हुवा लेकिन हुवा तो हुवा..
और वह रोने लगी...
मैं न्य उनको बहून में भार लिया उन्होंने मुझी ऐसी पकड़ा था जैसी चोरी गई नहीं और खूब रू रही थी मैं न्य भी डिल का गुबार निकालनी दिया..
कुछ समय बाद मैं न्य उनको अलग किया और उनकी आंखें साफ़ की और दोनों आंखों की चूम बोलै...
मैं:- अगर प्यार किया ही तो दर केसा और मैं वडा करता हूँ हमेशा आपकी प्यार की कदर करूं ga...Aur बाकि उप्पेर वाली पी चोर दो वह साब देख रहा ही और सब ठीक क्र दी गए...
इंदू:- मुझी ज़रूरत ही आपके प्यार ki..Agr अपनी डिल क किसी एक कोने में बसा सकती हो तो..
मैं:- मैं न्य पेहली hi कहा ही की मैं हमेशा आपके प्यार की कदर करूं ga...Aur आपको हर ख़ुशी दूँ गए...
इंदू:- यज्ञ सी अकेली में आप मुझी मेरी नाम सी बुलाये गए..
मैं:- जैसा आपका hukam...Indoo जी..
इंदू शर्मा क मेरी गली लग गई तभी किसी क अनत की आवाज़ सी हम अलग होगये और बैग्स को पैक करनी लगी...
मैं वहां सी बाहिर आज्ञा और फ़ोन निकल क कोमल को किया...
आज इतने दिनों बाद फ़ोन क्र रहा था पेहली तो खूब दन्त पारी उस सी...
मैं:- मेरी जान सॉरी न...
कोमल:- आप हमेशा ऐसी कृत्य ho..main वेट करूं आप फ़ोन hi नहीं कृत्य...
मैं:- थोड़ा बिजी था बाबा...
कोमल:- मेरी लिए भी बिजी थय.?
मैं:- आपकी लिए तो दुनिया चोर दी बिजी किसी hongay..Aur जो बतानी क लिए फ़ोन किया वह तो सुन लो...
कोमल:- जी बोलिये...
मैं न्य ा तो ज़ साडी स्टोरी बता दी यह वाली...
कोमल:- ियना सब कुछ होगया बताय भी नहीं...
मैं:- सॉरी किसी को नहीं पता था...
कोमल:- क्या राहुल भैया ठीक हैं अब.?
मैं:- हाँ मेरी साथ hi हैं इधर...
कोमल:- और रानी के ही.? प्यारी ही.?
मैं:- अरे प्यारी होना या न होने सी मतलब.?
कोमल:- अब आपका क्या भरोसा होसकता ही उसको भी बीवी बना लो...
कोमल की यह बात सुन क मैं एक बार को हिल गया और बीएस यह निकला मेरी मुँह सी..
मैं:- मतलब.? क्या मैं अपनी मर्ज़ी सी यह सब क्र रहा हूँ.?
कोमल:- नहीं मेरा वह मतलब नहीं था...
मैं:- मतलब बीएस एक hi होता ही जो बोलै jaye..Aur इस में साफ़ साफ़ यह hi मतलब था..
कोमल:- आप गलत समझ रही हैं...
मैं:- कोमल मैं न्य कभी भी किसी पी अपना प्यार मुसलत नहीं kiya...Han यह सच ही मेरा पहला प्यार आप थी अगर मेरी ज़िन्दगी ऐसी न होती तो आपकी सिवा किसी को देखना भी मेरी लिए गुनाह होता...
कोमल:- मैं आपकी प्यार पी कभी नहीं शक kiya...I'm सॉरी...
वह रोने लगी..
मैं:- ाचा रोना तो बंद करो पता ही न रोटी आप हो तकलीफ मुझी होती ही..
कोमल:- मैं पागल हूँ हमेशा आपको ताक़िफ़ देती hun..I'm सॉरी सैम...
मैं:- कोमल...
कोमल:- हम्म..
मैं:- ी लव यू...
कोमल:- ी लव यू तू!!! मोरे थें अन्य THING...Apki ज़िन्दगी में कोई भी ए मुझी कोई प्रॉब्लम नहीं ही...
मैं:- ब्येई ंद लव यू!!..
कोमल:- बई..
फ़ोन सुत्त...
Main(man में):- यह ज़िन्दगी नहीं झांड़ ही साली सुलझनी की बजाए उलझती जा रही ही और क्या जो टेबल पी नाम लिया था सब न्य क्या यह वही hy.?agr वह इ ही तो क्या होगा.?.....
तो बे कंटिन्यू
नोट:- नई चरक्टेर ंद सम फ़्लैश बैक ों इतस Way.....Nd थैंक्स फॉर थे 5 लाच+ व्यूज ंद 1000+ लाइक्स..
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