Hindi Desi Sex - Saim (Love,Thrill,Romance) - Page 8 - SexBaba
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Hindi Desi Sex - Saim (Love,Thrill,Romance)

अपडेट NO.71


मेरी और रानी क चेहरी पी इस वक़त 12 बाजी थय वाकई साब खुश थय...

इंदू:- औ बीटा पंडित जी सी तुम दोनों क लिए पूजा करवा लय...

मैं न्य रानी की तरफ देखा उस न्य नज़रें झुका ली....

मैं:- जी आंटी ज़रूर...

इस वक़त कोई चारा नहीं था मेरी पास...

जानकी:- ोये होये देखो तो किसी श्रम रही ही...

भाग्य:- बिलकुल हम्र्य जीजू जो सामन्य हैं और आज तो वह क़यामत लग रही hain..hayee अगर तेरी नज़र नहो होती न मैं आज भगा क लय जाती इसको...

सब हसने लगी फिर इंदू आंटी और कृष्णा अंकल एक साथ हम दोनों को लय क गए और पंडित जी न्य पूजा शुरू की..

तभी आसमान का रंग बदल गया बदल चा गए और बारिश शुरू होगी जैसी क आज बदल ख़ुशी मरीन झूम रही हूँ और खुल क पानी बरसा रही हूँ बारिश की आवाज़ Hi कुछ अलग थी जैसी वह कह रही हूँ क आज बारी समय बाद किसी प्यार करनी वळून को मिलती देखा ही...

पंडी जी न्य पूजा की हम न्य उनके पेअर chuway..Aur बाकि बरूण क भी...

कृष्णा:- अब घर चलती हैं काफी वक़त होगया ही...

सब गरियोँ में बेथ क हवेली की तरफ वापिस आ गए...

मैं काम hi बोल रहा था मेरी मन में स्वाळून का भंडार था..

अगर मैं चाहता मैं यह सब रोक सकता था लेकिन मैं ऐसा नहीं क्र सका पता नहीं क्योँ और मेरी डिल में ऐसी बोहत तरगं क सवाल थय जिनका जवाब मेरी पास नहीं था...

हवेली आ क मैं सीधा कमरे में चला गया... बिना किसी सी बात किये और जा क बीएड पी लेट गया...

तभी मुझु कृष्णा अंकल की आवाज़ ी...

मैं नीची चला गया उनकी बात सुने...

कृष्णा:- बीटा अब तुम्ही उस कमरे में रहंय की ज़रूरत नहीं ही...

मैं:- It's O.k अंकल में ठीक हूँ उधर...

कृष्णा:- देखो बीटा हंसय जो गलती होइ ही उसी सुधारनी का मौका दो..

मैं:- जी अंकल जैसा आप चाही...

कृष्णा:- सुनूँ रॉकी का सामान रानी क कमरे में रखवा दो...

मैं यह सुन क एक डैम शॉक होगया मेरी साथ bhi...Main थोड़ा कण्ट्रोल क्र क बोलै...

मैं:- अंकल यह किसी शादी सी पेहली....

कृष्णा:- देखो बीटा मुझी चम्पी पूरा भरोसा ही क तुम हमरी इज़्ज़त का पूरा ख्याल रखो gy..Aur शादी तो बीएस एक रसम होगी आज मैं न्य तुम्ही डिल सी दामाद बना लिया ही...

मैं इस क बाद कुछ बोलनी की हालत में नहीं था...

कृष्णा:- अपने घर वळून को बोलै लो जितना जल्दी हॉसकय...

मैं:- अंकल वह तो अभी नहीं हैं इधर अगर बुरा न मान्य तो वह लोग शादी में ए गए...

कृष्णा:- कोई बात नहीं अगर उनकी तरफ सी कोई दिकत तो नहीं ही.?

मैं:- नहीं नहीं बीएस बिजी होने की वजह सी...

कृष्णा:- O.k beta...Ao खाने कहती हैं...

हम सब डाइनिंग टेबल पी जा क बेथ गए उसकी बाद कृष्णा अंकल न्य ऐसी बात कही जिस सी सभी लेडीज ख़ुशी क मैरी फूली नहीं समां रही थी...

कृष्णा:- तुम सब भी बैठो साथ आज हम साब मिल क खाये गए...

सब ख़ुशी और हीरानी सी उनको देख रही थय...

कृष्णा:- अरे बैठो भी बोहत भूक लगी ही...

सब बेथ गए और सब ख़ुशी ख़ुशी खाना कहानी लगी..

मेरी हलक सी खाना नीची नहीं उत्तर रहा था...

कृष्णा:- अरे लता को भी फ़ोन क्र अन्य का कह दो और साथ में उन्दोनो को भी...

इंदू:- हम न्य बता दिया ही वह दोनों तो बोहत उतावली हो रही हैं उनकी छोटी बेहेन की सगाई ही खुश तो होंगी...

Kaya(R'chachi):- अमित भी आ रहा ही..

मैं सवालिया नज़रूँ सी देख और सुन रहा था सब की बात..

तभी शांति आंटी न्य मेरी एक्सप्रेशंस को भांप लिया और बोली..

शांति:- बीटा लता मेरी बरी बेहेन ही और मेरी छोटी बेटी और उसकी छोटी बेटी क साथ वह अमेरिका रहती ही तीनो वहां परण्य गए हुवे हैं अमित भी उनकी साथ hi ही....

यह सुन क मेरा एक बार दिमाग हिल गया और मेरी दिमाग में एक फ़्लैश बैक चल गया और में अपनी उन यादवों में चला गया जो क शायद मेरी ज़िन्दगी क हस्सें तरीन पल थय....

मुझी खोया हुवा देख मैं जनकज दीदी बोली...

जानकी:- क्या बात ही कहाँ खो गया...

मैं:- कुछ नहीं कुछ याद आज्ञा था...

यह नाम बीएस इतफ़ाक़ समझ क मैं न्य यह बात दिमाग सी निकल दी..

खाना खा क सब खतून की तरफ चली गए और मैं कमरे में चला गया पुरानी वाली hi जहाँ इंदू आंटी सामान समेत रही थी..

उनका ध्यान उस तरफ था और उनकी कमर साड़ी में बोहत सेक्सी लग रही थी...

मैं न्य आराम सी यज्ञ जा क एक हाथ उनकी कमर में दाल क खेंच लिया और अपने साथ चिपका लिया...

वह दार गई और चिल्लानी lagi..main न्य हाथ उनके मुँह पी रख दिया और आराम सी बोलै..

मैं:- मैं हूँ...

वह रिलैक्स hogai...Main न्य उनको छोरा वह झट सी पलट क मेरी गाल लग गई...

मैं:- आप ठीक हैं.?

इंदू:- द्र दिया था मुझी...

मैं:- आईएम सॉरी...

इंदू आंटी अलग होइ..

इस वक़त उनके चेहरी पी दुनिया भार की मस्सोमियत मुझी बोहत प्यार आया उनपे..

मैं न्य उनको होंठों को हल्का सा चूम लिया जिद य उनके होंठ खिल गए...

मैं:- आप बोहत प्यारी हैं...

इंदू:- क्या मैं सही क्र रही हूँ.?

मैं:- किस बारी में.?

इंदू:- मेरी बेटी की शादी टुमस्य होने वाली है ैद्य में मैं तुम्हारी साथ...

मैं न्य उनका हाथ पकड़ा...

मैं:- मेरी एक बात का जवाब दी गई सच सच...

इंदू:- हम्म..

मैं:- आप न्य मुझी उस दिन किश क्योँ किया.?

इंदू:- मैं नहीं जानती क्योँ किया मेरी खुद पी काबू नहीं रहता जब भी मेरी सामन्य होते हो..

मैं:- क्या यह बीएस प्यास की वजह सी होता ही जो क कृष्णा अंकल पूरी नहीं क्र सकती..

इंदू:- अगर मेरी प्यास मुझ पी भरी पर सकती तो बोहातों क सामन्य नंगी लेट प्यास बुझा लेती...

मैं:- तो फिर मेरी सामन्य क्यू.?

इंदू:- मेरी वासना मुझपी पहली बार भरी पारी और हर बार भरी पार्टी ही जब भी सामन्य आती हो...

मैं:- उस किश में एक राइ बराबर भी वासना नहीं थी बीएस था तो सिर्फ प्यार...

इंदू आंटी न्य सर झुका लिया..

मैं:- मैं बीएस यह जाना चाहता हूँ क क्योँ था उस में इतना प्यार जिसको आप न्य वासना का नाम दिया.?

इंदू:- नहीं जानती बीएस जब भी सामन्य आती हो डिल करता ही लय क कहीं ुर जाओं और ज़िन्दगी भर क लिए खुद में समां लोन या तुम में समां जाओं...

मैं:- तो यह प्यार ही या वासना.?

इंदू:- यह धोका होगा मेरा अपने पति और बेटी क साथ...

मैं:- जिस्म को तो संभल लिया डिल का क्या क्रय गई.?

इंदू:- डिल में सामान्य वाली कभी नहीं निकलती चाही कितनी दूरी ho...Agr यह सुना ही क मैं प्यार करती हूँ टुमस्य तो हाँ करती हूँ प्यार पता नहीं कब किसी हुवा लेकिन हुवा तो हुवा..

और वह रोने लगी...

मैं न्य उनको बहून में भार लिया उन्होंने मुझी ऐसी पकड़ा था जैसी चोरी गई नहीं और खूब रू रही थी मैं न्य भी डिल का गुबार निकालनी दिया..

कुछ समय बाद मैं न्य उनको अलग किया और उनकी आंखें साफ़ की और दोनों आंखों की चूम बोलै...

मैं:- अगर प्यार किया ही तो दर केसा और मैं वडा करता हूँ हमेशा आपकी प्यार की कदर करूं ga...Aur बाकि उप्पेर वाली पी चोर दो वह साब देख रहा ही और सब ठीक क्र दी गए...

इंदू:- मुझी ज़रूरत ही आपके प्यार ki..Agr अपनी डिल क किसी एक कोने में बसा सकती हो तो..

मैं:- मैं न्य पेहली hi कहा ही की मैं हमेशा आपके प्यार की कदर करूं ga...Aur आपको हर ख़ुशी दूँ गए...

इंदू:- यज्ञ सी अकेली में आप मुझी मेरी नाम सी बुलाये गए..

मैं:- जैसा आपका hukam...Indoo जी..

इंदू शर्मा क मेरी गली लग गई तभी किसी क अनत की आवाज़ सी हम अलग होगये और बैग्स को पैक करनी लगी...

मैं वहां सी बाहिर आज्ञा और फ़ोन निकल क कोमल को किया...

आज इतने दिनों बाद फ़ोन क्र रहा था पेहली तो खूब दन्त पारी उस सी...

मैं:- मेरी जान सॉरी न...

कोमल:- आप हमेशा ऐसी कृत्य ho..main वेट करूं आप फ़ोन hi नहीं कृत्य...

मैं:- थोड़ा बिजी था बाबा...

कोमल:- मेरी लिए भी बिजी थय.?

मैं:- आपकी लिए तो दुनिया चोर दी बिजी किसी hongay..Aur जो बतानी क लिए फ़ोन किया वह तो सुन लो...

कोमल:- जी बोलिये...

मैं न्य ा तो ज़ साडी स्टोरी बता दी यह वाली...

कोमल:- ियना सब कुछ होगया बताय भी नहीं...

मैं:- सॉरी किसी को नहीं पता था...

कोमल:- क्या राहुल भैया ठीक हैं अब.?

मैं:- हाँ मेरी साथ hi हैं इधर...

कोमल:- और रानी के ही.? प्यारी ही.?

मैं:- अरे प्यारी होना या न होने सी मतलब.?

कोमल:- अब आपका क्या भरोसा होसकता ही उसको भी बीवी बना लो...

कोमल की यह बात सुन क मैं एक बार को हिल गया और बीएस यह निकला मेरी मुँह सी..

मैं:- मतलब.? क्या मैं अपनी मर्ज़ी सी यह सब क्र रहा हूँ.?

कोमल:- नहीं मेरा वह मतलब नहीं था...

मैं:- मतलब बीएस एक hi होता ही जो बोलै jaye..Aur इस में साफ़ साफ़ यह hi मतलब था..

कोमल:- आप गलत समझ रही हैं...

मैं:- कोमल मैं न्य कभी भी किसी पी अपना प्यार मुसलत नहीं kiya...Han यह सच ही मेरा पहला प्यार आप थी अगर मेरी ज़िन्दगी ऐसी न होती तो आपकी सिवा किसी को देखना भी मेरी लिए गुनाह होता...

कोमल:- मैं आपकी प्यार पी कभी नहीं शक kiya...I'm सॉरी...

वह रोने लगी..

मैं:- ाचा रोना तो बंद करो पता ही न रोटी आप हो तकलीफ मुझी होती ही..

कोमल:- मैं पागल हूँ हमेशा आपको ताक़िफ़ देती hun..I'm सॉरी सैम...

मैं:- कोमल...

कोमल:- हम्म..

मैं:- ी लव यू...

कोमल:- ी लव यू तू!!! मोरे थें अन्य THING...Apki ज़िन्दगी में कोई भी ए मुझी कोई प्रॉब्लम नहीं ही...

मैं:- ब्येई ंद लव यू!!..

कोमल:- बई..

फ़ोन सुत्त...

Main(man में):- यह ज़िन्दगी नहीं झांड़ ही साली सुलझनी की बजाए उलझती जा रही ही और क्या जो टेबल पी नाम लिया था सब न्य क्या यह वही hy.?agr वह इ ही तो क्या होगा.?.....

तो बे कंटिन्यू

नोट:- नई चरक्टेर ंद सम फ़्लैश बैक ों इतस Way.....Nd थैंक्स फॉर थे 5 लाच+ व्यूज ंद 1000+ लाइक्स..

कीप सपोर्टिंग
 
अपडेट NO.72


मैं सर बातों को दिमाग सी निकल क हवेली क बाहिर चला गया और ऐसी hi टेहळणी लगा और मैं एक जगह सी गुज़र रहा था वहां पी मुझी किसी क रोने की आवाज़ आ रही थी मैं उस तरफ चला गया वहां पी एक औरत बैठी ही और वह रू रही hy..main उसकी पास गया..

मैं:- क्या हुवा काकी आप रू क्यू रही हैं.?

औरत:- जिसका बीटा मारण्य की हालत में हो वह रोये न तो क्या क्रय.?

मैं:- क्या हुवा आपकी बेटे को..

औरत:- उसकी तबियत बोहत खराब ही लेकिन asptal(hospital) वाली कह रही हैं क इस बीमारी का इलाज नहीं है यहाँ...

मैं:- ऐसी क्या बीमारी ही उसी.?

औरत:- उसकी मुँह सी खून निकल रहा ही और बेहोश hi पारा ही अब मुझी तो इतना पता नहीं क क्या करूं.? और शहर लेकी जाने क पैसी नहीं हैं...

वह और रोने लगी..

मैं:- काकी फ़िक्र मत करो हम अभी उसको शहर लय क चलती हैं मैं अभी गारी लय क अत हूँ...

मैं वहां सी सीधा हवेली भगा और जल्दी सी गारी लय क वहां पोहंच गया और उस लरकी को उठा क गारी में बिठाया और औरत न्य उसका सर अपनी गॉड में रख दिया..

हम करीब क शहर में hi एक ाच्य हॉस्पिटल पोहंच गए और मैं उस लरकी को लय क अंदर गया और जल्दी सी वार्ड बॉय को कह क उसको इमरजेंसी रूम भेजवा दिया और मैं न्य अपना कार्ड दिखाया उनको और जल्दी सी डॉक्टर को बुलाना का कहा..

डॉक्टर आया और जल्दी सी ट्रीटमेंट शुरू किया... थोड़ी देर बाद डॉक्टर बाहिर आया और बोलै...

डॉक्:- सर इनका केस बोहत खराब हो चूका ही इनकी किडनी खराब हो चुकी hain...Agr हमनी किडनी ट्रांसप्लांट नहीं की तो वह नहीं बच सकता...

औरत न्य जैसी hi सुना वह ज़मीन पी बेथ क रोने लगी...

मैं:- आप जल्दी सी अर्रंगे करवा लीजिये पैसों की फ़िक्र मात करना..

डॉक्:- सॉरी सर अभी कहीं अवेलेबल नहीं ही....

मैं:- उसका ब्लड ग्रुप क्या ही.?

डॉक्:- ो+..

मैं:- मेरा भी यही ही आप मेरी एक किडनी उसको लगा दो...

डॉक्:- यह क्या कह रही हैं सर आप इन मामूली सी लोगों क लिए इतना क्यू क्र रही हैं...

मैं:- आपको शर्म अणि चाहिए डॉक्टर आपको इंसानियत शब्द क मतलब भी पता hy....Mery पास इन फज़ूल बातों का वक़त नहीं ही आप जल्दी सी ऑपरेशन की तयारी शुरू कीजिये...

डॉक् मुँह तत्वों की तर्हां लटका क चला gya...Aur मैं उस औरत क पास आया...

मैं:- आप फ़िक्र नहीं करो सब ठीक होजाये गए....

काकी:- बीटा मैं एहसान कभी नहीं चूका पाऊँ गई...

मैं:- यह एहसान नहीं ही काकी आप प्लीज चुप होजाइये...

तभी नर्स न्य मुझी अंदर बुलाया...

मैं जल्दी सी अंदर चला गया और मैं न्य कापरी चेंज किये और बीएड पी लेट गया एक नर्स न्य मुझी इंजेक्शन lgya...Ab उसी थोड़ी पता था क इसका असर मुझपी नहीं होगा लेकिन मैं न्य फिर भी बेहोश होने का नाटक किया और आंखें बंद क्र ली...

मैं 5 मं ऐसी hi लेता रहा और मुझी किसी न्य चुवा भी नहीं मैं परेशां होगया क क्या हुवा जो डॉक्टर न्य ऑपरेशन क्यू नहीं शुरू किया....

मैं न्य हलकी सी आंखें खोली तो वहां पी वक़त अपनी जगह रुक गया था डॉक्टर जो मुझी कट मतन्य लगा था वही जाम होगया था...

मैं हैरान होगया और उठ क बेथ गया और सोचनी लगा क यह क्या होगया ही....

तभी वहां हलकी सी रौशनी में एक अप्सरा सी पारी ूर्ति होइ मेरी सामन्य i...Main एक तक उसको देखता rha...lekin खुद पी कबो रख क मैं न्य पोछा...

मैं:- कोण हैं आप और यह वक़त क्यू रोका ही अपने...

पारी:- हम परीलोक सी ए हैं...

मैं:- परीलोक सी यहाँ किस लिए.?

पारी:- हामी एक कार्य सपा गया था जैसी पूरा करना था हामी..

मैं:- केसा कार्य.?

पारी:- हम आपकी परीक्षा लय रही थय...

मैं:- किसी परीक्षा आप क्या बोल रही हैं मुझी कुछ नहीं समझ में आ रहा...

पारी:- मैं आपकी यह परीक्षा लय रही थी आप किसी इंसान क दुःख को कितना अपना समझती हैं और उसकी मदद करनी क लिए क्या क्र सकती हैं....

मैं हिरण था क जो कुछ भी हुवा वह सब मेरी परीक्षा थी...

मैं:- मतलब यह सब आप क्र रही थी.?

पारी:- हाँ और आप िसमय सफल huway...Ab हामी मालूम हुवा क सब सच बोलती हैं..

मैं:- कोण क्या बोलता ही.?

पारी:- यह hi क आप कितनी ाच्य हैं और ख़ूबसूरत भी आपकी जैसा जिस्म शायद hi किसी का हो...

मुझी अब एहसास हुवा क मैं उसकी सामन्य शिरट्लेस्स Hi खरा था...

मैं न्य जल्दी सी अपनी बॉडी पी हाथ रख लिया जैसी लड़कियां अपनी जिस्म को छुपाती हैं...

और इधर उधर अपनी शर्ट ढूढ़ने लगा और पाकर क जल्दी सी पेहेन ली...

वह भी हल्का हल्का मुस्कुरा रही थी...

पारी:- वैसी hi ाच्य लग रही थय...

मैं:- मुझपी गन्दी नज़र रखती हो.?

मैं न्य एक्टिंग कृत्य हुवे कहा..

वह खुल क हसने लगी...

वह है रही थी मैं उसकी खूबसूरती में खू सा गया...

उसनी मुझी होश में लाती हुवे कहा...

पारी:- कहाँ खू गए आप..?

मैं:- कहीं nahi..Wesy अपने नाम नहीं बताया अपना.?

पारी:- प्रीति...

मैं:- लगती भी हो...

प्रीति:- मतलब.?

मैं:- प्रीटी...

वह हल्का सा ब्लश क्र गई और उसमें भी क़यामत धा गई...

प्रीति:- मैं आपको एक वर्धन देंय ी हूँ...

मैं:- वर्धन.? कोनसा.?

परीति न्य अपनी हाथ में पकरि होइ चारि को घुमा दिया और कुछ रौशनी होइ जो क सीधा मेरी अंदर चली गई...

मैं:- यह ही क्या.?

परीति:- यह आपका वर्धन ही आपकी और आपकी साथ जोरि होइ कन्याओं क liye....Woh साधा जवान रही गए...

मैं:- व्हाट.? मैं कुछ समझा नहीं...

परीति:- बाकि आपको खुद पता चल जाये ga...Ab मुझी जाना hoga...Apki इजाज़त चाहिए...

मैं:- इतनी जल्दी.?

परीति:- आप बोली तो रुक जाती हूँ.?

मैं:- अरे नहीं आप जाओ....

प्रीति मुक्सुराती हुवा वहां सी गायब होगी....

तभी सब कुछ नार्मल होगया और मैं वही उसी जगह खरा था जहाँ वह औरत मिली थी...

मैं न्य टाइम देखा तो रात क 7 बज रही थय...

मैं जल्दी सी हवेली गया...

वहां सब बाहिर बैठत मेरा वेट मर रही थय और परेशान थय...

जब मुझी आती देखा तो सब क स्वाळून की झरि शुरू होगी..

मैं न्य इधर उधर का बहाना बना दिया और हम सब खाना कहानी लगी....

खांट क बाद सब अपनी रूम्स में चली gaye...Ab मेरी सामन्य एक नै समस्या थी...

मैं रानी क साथ एक hi कमरे में किसी सू सकता hun...?q क हकीकत तो हम दोनों जानती हैं न...

लेकिन भाई जब गांड मरवाई ही तो छोटा बारे क्या देखना.....

मुझी इंदू आंटी ऊपर लय क गई रानी क कमरे तक वह अभी नीची hi थी...

मैं न्य इंदू आंटी को पाकर लिया हल्का सा किश क्र दिया...

इंदू:- एक बात मणि गए.?

मैं:- हुकम करो...

इंदू:- शादी सी पेहली रानी क साथ कुछ मात करना...

मैं:- आपका मान मैं नहीं टूटनी दूँ ga...Mera वडा ही आपसी...

इंदू:- मुझी यही उम्मीद थी आपसी..

मैं:- लेकिन आपको तो प्यार क्र सकती हैं न...

मैं न्य यह कह क हल्का सा हिंट चूम लिया...

इंदू:- बिलकुल जी भर क लेकिन उसकी लिए थोड़ा सा वेट...

मैं:- O.k जैसी आपकी मर्ज़ी...

किसी क अन्य की आहत सी हम दोनों अलग होगये....

यह रानी hi थी..

इंदू आंटी रानी का माथा चूम क चली गई...

मैं वही खरा था रानी सी मुर क दरवाज़ा बंद क्र दिया और वही खरी खरी बोली..

रानी:- अब हम क्या क्रय गए.?

मैं:- हामी कुछ नहीं करना यह सब देख लय गए...

रानी:- मैं मज़ाक नहीं क्र रही...

मैं:- देखि प्लान था क रिश्ता पका करवाना अब थोड़ी चेंजिंग ही...

रानी:- वह क्या.?

मैं:- यही क हामी मांगनी कृ पारी गई उसकी बाद तुम बाहिर चली जाना और कुछ समय बाद घर पी बता देना क मैं तुम्ही धिका दिया या कोई भी और बात बहना बना क मुझी बुरा बता देना फिर तुम भी खुश मैं bhi...That's आल...

रानी:- यह इतना आसान ही.?

मैं:- क्या.?

रानी:- ृष्ट्य बना क तकर देना...

मैं:- ृष्ट्य डिल सी बनती हैं जिस ृष्ट्य में डिल की जगा दिमाग का इस्तमाल हो वह तिरन्य में क्या ही.?

रानी:- फिर इतना प्यार क्यू दिखती hi सबको.? अगर यह भी दिखावा ही तो..

मैं:- क्यू क इन साब सी मैं न्य डिल सी रिश्ता जोड़ा ही...

रानी:- तो फिर तोरी गए किसी.?

मैं:- मैं कब कह रहा हूँ क तीरों गए.?

रानी:- तो फिर.?

मैं:- देखो तुम्ही धिका देंय क लिए यह लोग मुझी कोसी गए गए गालियां दी क और अंत में ऐसा कह क चिर दी गए k....Maar जाये टी ाचा ही...

रानी:- शट उप..

यह कह क वह जल्दी सी बाथरूम की तरफ भाग गई..

Main(man में):- इसको क्या हुवा..

10 मं बाद वह बाहिर ी...

मैं:- तुम ठीक हो.?

रानी:- हम्म मैं ठीक hun...Mujhy नींद आ रही ही..

मैं:- Hmmm...Tum सू जाओ बीएड पी मैं यहाँ नीची सू जाओं गए..

रानी:- ज़मीन पी.?

मैं:- कोई नहीं मैं एडजस्ट क्र लोन गए....

और रानी न्य 2 गद्य निकली और बिछा दिए...

मैं:- अरे एक hi सही ही...

रानी:- हम दोनों नीची सोये गए...

मैं:- अरे तुम ऊपर आराम सी सू जाओ...

लेकिन वह बिना कुछ सीने गदा पी लेट क अपने ऊपर चादर लय क लेट गई और बोली..

रानी:- लेट तय वक़त लाइट बंद क्र देना...

अजीब लड़की ही कुछ समझ नहीं अत इसका भी...

समाजः सी याद आया उस वर्धन क बारी में किस सी पॉचों.? हाँ अदि sy...Bary दिन होगये वह भी पता नहीं कहा होगा सुबह बात करूं गए उस सी अभी सू जाता हूँ...

मैं लाइट बांड क्र क लेट गया और जल्दी hi ड्रीम लैंड में चला गया....

तो बे कंटिन्यू.....
 
अपडेट NO.73


सुबह जब मेरी आंख खुली तो रानी अभी भी सू रही थी वह सत्य सोते हुवे बोहत क्यूट लग रही थी..

मैं उठ क फ्रेश हुवा और बाहिर आया तो रानी भी उठ चुकी थी.

उसको नहीं पता था क मैं बाहिर आज्ञा हूँ वह उदर बेथ क Hi अंगराई लय रही थी जैसी कोई काली खिल रही हो. और चेहरी पी एक प्यारी सी मुस्कान थी.

वह उठी और जब मूर्ति मुझी खुद को घोरता हुवा पाया. और हलकी सी शर्मा गई. लेकिन फिर संभल क बोली.

रानी:- गुड मॉर्निंग.

मैं:- आपको भी गुड मॉर्निंग.

मैं साइड होगया वह बाथरूम चली गई.

मैं कापरी चेंज क्र क नीची आया तो सब लोग जग चुके थय भैया और कृष्णा अंकल नीची बैठी थय.

मैं भी नीची चला गया और अंकल और भैया क साथ बेथ गया.

कृष्णा:- बीटा आज शाम को मेरी बेहेन और बची आ रही हैं गाओं.

मैं:- वह hi जिनके बारी में आप बात क्र रही थय.

कृष्णा:- हाँ बीटा वही क्या तुम उनको लेनी जा सकती हो.

मैं:- मैं अंकल.?

कृष्णा:- हाँ बीटा मुझी राहुल साथ एक काम जाना ही मैं नहीं जा पाऊँ गए तुम जानकी या रानी को लय जाना.

मैं:- ठीक ही अंकल चला जाओं गए.

तभी वहां इंदू ै.

इंदू:- नाश्ता लग गया ही अजैये.

वह बज़ाहिर सब को करह रही थी लेकिन उनकी आंखें मेरी तरफ थी.

मैं न्य भी आंखों सी उनको हाँ बोलै और हम लोग चली गए टेबल पी. भैया और अंकल यज्ञ चली गए मैं पेची था और मैं न्य इंदू का हाथ पाकर लिया.

Indoo(ghabra क):- यह क्या क्र रही हैं कोई देख लय गए.

मैं:- कोई नहीं देखी गए.

और उनको खेंच लिया वह मुझसी चुरवानी की कोशिश क्र रही थी लेकिन उतनी नहीं जितनी करनी चाहिए.

इंदू:- प्लीज!..

मैं:- एक शर्त पी.

इंदू:- वह क्या.?

मैं:- आज अपने हथून सी खिलाना प्रय गए.

इंदू:- सब क सामन्य.

मैं:- हाँ सब क सामन्य क्यू दर गई. अगर प्यार ही तो साबित करो.

इंदू:- ऐसी बात ही तो चाही आज कुछ होजाये आपको मैं अपने हथून सी खिलाओं गई. और अगर मैं न्य खिला दिया आपको सबकी सामन्य मुझी किश करना होगा.

मैं:- कच्चा खा जाये गए सब मुझी.

इंदू:- अब आपकी मर्ज़ी ही जो मर्ज़ी करो यह तो करना प्रय गए.

मैं:- O.k चैलेंज एक्सेप्टेड.

तभी कृष्णा अंकल की आवाज़ ी.

हम अलग होवय और इंदू मुस्कुराती होइ चली गई.

मैं भी वहां सी सीधा डाइनिंग टेबल पी जा क बेथ गया. रानी भी नीची आ चुकी थी.

खाना टेबल पी लग गया था सब बेथ चुके थय और खाना डार्ट क्र भी दिया था मैं न्य इंदू की तरफ देखा वह वहां सी मेरी पास आ क खरी होगी मेरी साथ रानी बैठी थी.

कृष्णा:- अरे इंदू बैठो खाओ.

इंदू:- नहीं आज मैं पेहली अपनी बची को खिलाओं गई अपने हाथों सी.

शांति:- छोटी बची थोड़ी ही अब खा लय गई.

इंदू:- अब पता नहीं कितनी दिन रही गई हम्र्य साथ फिर अपने घर चली जाये गई.

मैं उनकी तरफ सवालिया नज़रूँ सी देखनी लगा.

रानी न्य अपनी माँ को गली लगा लिया.

रानी:- माँ मैं कहीं नहीं जाने वाली.

इंदू:- अब जाना तो पारी गए न अपने घर.

रानी कुछ नहीं बोली और चुप चाप बेथ गई इंदू न्य खाना खाना लगाया और रानी को खिलानी लगी.

तभी जानकी बोली.

जानकी:- इसको भी इधर hi रख लो सब क साथ.

इंदू:- वह रुके गए नहीं.

जानकी:- फिर तो यह भी यहाँ सी विधा होगा.

इंदू:- चलो इसको भी खिला देती हूँ.

मान गए भाई इनकी दिमाग को किसी सब क सामन्य खिल्लाये गई भी और खुद hi सन क्रीट क्र दिया.

इंदू न्य एक लुक्मा बनाया और मेरी मुँह क करीब लय ी और मैं न्य भी मुँह खोल दिया.

उन्होंने न्य मुझी खिला दिया और उनकी आंखों में एक शरारत थी और होंठों पी एक कातिल मुस्कान.

फिर वह खिलाने लगी मुझी और रानी को. फिर उन्होंने न्य आंखों सी कहा क अब तुम्हारी बरी.

मैं न्य भी एक कामिनी मुस्कान क साथ अपने साइड पी रखा हुवा चमच नीची गिरा दिया.

वह उसको उठानी क लिए नीची होइ मैं भी उठानी क भय नीची हुवा और जल्दी सी गाल पी किश क्र लिया. और सीधा होगया और वह भी चमच उठा क खरी होगी. हम दोनों मान hi मान मुस्कुरा रही थय. फिर खाना खा क फारिग होगये.

कृष्णा अंकल और उंक्लेस खेतों में चली गए.

मैं:- भैया आपसी कुछ बात करनी ही.

राहुल:- हाँ काहू.

मैं न्य उनको आंखों सी कमरे में जाने का इशारा किया.

वह समझ गए.

राहुल:- हाँ हम ऊपर जा क बात कृत्य हैं सब काम क्र रही हैं डिस्टर्ब नहीं कृत्य.

हम उठ गए और ऊपर जाने लगी मैं न्य पिच मूर क देखा तो इंदू मुझी hi देख रही थी. मैं न्य नज़रें बचा क फ्लाइंग किश क्र दिया और ऊपर चला गया.

राहुल bhaiya's रूम!.

राहुल:- हाँ भाई क्या हुवा सब ठीक तो है न.

मैं:- हाँ सब ठीक ही. मैं चाहता हूँ अब आप ऑफिस जाया कीजिये.

राहुल:- कोनसे ऑफिस.?

मैं:- अरे वही जिस में पेहली जाती थय.

राहुल:- वहां क्यू जाओं गए और फिर सी वही होगा जो पेहली हुवा.

मैं:- अब कंपनी का M.D नहीं जाये गए तो प्रॉब्लम तो होगी.

राहुल:- मतलब.?

मैं:- भैया वह कंपनी अब अपनी है और उसको आपको संभालना ही.

राहुल:- क्या.? किसनी खरीदी.? तेरी पापा न्य.?

मैं:- हाँ समझ लो.

राहुल:- थैंक्स भाई. !

और मेरी गली लग गए.

मैं:- और हाँ जल्द सी जल्दी घर जाइये और सब को भाभी क बारी में बता दो बिचारि कब सी बाहिर खरी हैं.

राहुल भैया अलग हुवे तभी दरवाज़ा खुला और जानकी दीदी अंदर आ गई.

जानकी:- सॉरी मैं डिस्टर्ब नहीं करना चाहती थी लेकिन तुझी किसी पता लगा.

मैं:- बीएस पता लग गया. और हाँ भैया दादा जी सी बात क्र लेना बल्कि मैं अभी फ़ोन करता हूँ.

मैं न्य मोबाइल निकला और दादा जी को मिलाया.

2 रिंग्स क बाद फ़ोन रेसवे हुवा.

मैं न्य फ़ोन स्पीकर पी दाल दिया.

मैं:- नमस्ते दादा जी.

दादी:- दादा नहीं दादी नालायक इतनी दिन सी फ़ोन क्यू नहीं किया.

मैं:- ओह्ह तो मेरी स्वीट हार्ट ही. बीएस स्वीट हार्ट थोड़ा बिजी था दादा जी किधर हैं.?

दादी:- वह तो बाहिर हैं फ़ोन इधर ही रुक बाहिर जाती हूँ.

मैं:- दादी आपको पता ही कोण हैं और मेरी साथ.?

दादी:- कोण है ?

मैं:- राहुल भैया.

दादी:- क्या कहाँ ही वह. नलयक कब सी घर नहीं फ़ोन किया उसकी माँ रोज़ पूछती ही उसका. दी उसको फ़ोन.

राहुल:- हाँ दादी जी किसी हो.?

दादी:- तो कहाँ ही बीटा.? कब सी तुझसी बात नहीं होइ रुक टफी माँ को बुलाती हूँ.

दादी:- दीपा ओह्ह दीपा देख किसका फ़ोन ही.

B'chachi:- कोण ही माँ जी.

दादी:- राहुल.

B'chachi:- क्या राहुल का फ़ोन.

चची न्य फ़ोन लिया और बात की.

B'chachi:- बीटा कहाँ ही तो ियनय दिन सी फ़ोन क्यू नहीं किया तो ठीक तो है न.

राहुल:- हाँ माँ ाचा हूँ बीएस थोड़ा सा बिजी था पापा सी बाटी होती थी बता देता था.

राहुल भैया क ाँसों निकल गए जानकी दीदी उनकी पास आ क खरी होगी और हौसला देंय लगी.

B'chachi:- तो घर कब ए गए.?

राहुल बोल भी नहीं पा रहा था.

इस लिए मैं न्य बोलै.

मैं:- अरे चची हंसी भी पॉच लो कुछ.

B'chachi:- तो भी वही है तेरी भी टांगें टोरों गई इतनी दिन सी फ़ोन भी नहीं किया अंजलि बता रही थी कहीं बाहिर गया ही.

राहुल भैया न्य सवालिया नज़रों सी मेरी तरफ देखा.

मैं:- हाँ चची बीएस थोड़ा काम था और वहीँ भैया मिल गए और कल घर आ रही हैं आपकी बहु क साथ.

B'chachi:- क्या राहुल न्य लड़की ढून्ढ ली.? और बताया भी नहीं तूने राहुल इतना पराया क्र दिया अपनी माँ को.

राहुल:- नहीं माँ ऐसी बात नहीं ही वह बात ऐसी ही.

मैं बिच में hi.

मैं:- अब कल घर ए गए तो ाच्य सी क्लास लेना.

B'chachi:- ाच्य सी लोन गई. वैसी किसी ही मेरी बहु फोटो तो भेज.

मैं:- लो चची फोटो क्यू डायरेक्ट बात क्र लो.

जानकी दीदी की जैसी हालत खराब हो गई और वह ईशारी सी ना करनी लगी.

मुझी मज़ा आ रहा था टांग करनी में दोनों को मैं हंस रहा था.

B'chachi:- वह भी यही ही.

मैं:- हाँ चची लो बात करो.

जानकी दीदी न्य जल्दी सी सर पी दुप्पटा लय लिया मेरी एक बार फिर हसी छूट गई.

फिर दीदी बोली.

जानकी:- नमस्ते आंटी.

B'chachi:- नमस्ते बीटा किसी हो.?

जानकी:- अछि हूँ आप बताइये किसी हैं.?

मैं:- अब चची कल मिल क हल चल पोछना अब आपको सबको बाटना और तयारी भी तो करनी ही.

B'chachi:- हाँ सही कह रहा ही तो वैसी तो भी ए गए.?

मैं:- अभी पता नहीं.

राहुल:- ए गए माँ साथ hi ए गए

B'chachi:- ठीक ही फिर जल्दी आना अपना ख्याल रखना और बहु का भी.

मैं:- अरे अभी सी बहु मान लिया पेहली मिल तो लो.

B'chachi:- टोने देख ली मतलब अछि hi होगी. वैसी बहु नाम क्या ही तेरा.

जानकी:- जानकी. !

B'chachi:- बोहत प्यारा नाम ही. ाचा अब मैं रखती हूँ तयारिया भी करनी हैं अभी.

फ़ोन कट.

फ़ोन बंद होते hi जानकी और राहुल न्य मुझी पकरणय क लिए यज्ञ हुवे और मैं हँसता हुवा बीएड पी चार गया.

राहुल:- रुक अभी बताता हूँ तुझी.

जानकी:- मैं अभी बहु नहीं बना अभी तुझी बनती हूँ मंत्री.

और पाकर क लिटा दिया और पाकर लिया.

मैं:- अब मैं न्य तो आपकी प्रॉब्लम सोल्वे की ही फिर भी मरना ही तो मार लो.

जानकी:- वैसी बात तो सही ही और मुझी पता भी क मैं कल जा रही हूँ.?

मैं:- अब ससुराल भी तो जाना ही क मायके hi रहना ही.

जानकी दीदी शर्मा गई.

राहुल:- अंजलि घर पी नहीं ही क्या वह बारी चाचा क घर ही.?

मैं:- हाँ वह उधर रह क ऑफिस संभल रही हैं.

जानकी:- अंजलि कोण ही.?

मैं:- आपकी ननद.

राहुल:- और बाकि साब उदर hi हैं.?

मैं:- कल जा क देख लेना.

जानकी:- मैं किसी सब का सामना करूं गई.?

मैं:- दीदी हम ठाकुर हैं औरत का मन सामान हम्र्य लिए सब कुछ ही आप फ़िक्र मत करना सब ठीक होजाये गए.

जानकी:- तो मेरी साथ चली गए.

मैं:- नहीं मैं नहीं चल सकता.

जानकी:- तो जाये गए मतलब जाये गए.

मैं:- O.k फिर मैं जल्दी वापिस आ जाओं गए.

राहुल:- हाँ यह सही रही गए.

मैं वहां सी सी निकल क अपने कमरे में चला गया जहाँ कोई मेरा इंतज़ार क्र रहा था.

मैं कमरे में गया तो वहां अदि पेहली सी मौजूद था.

आज अभी वाली हादसी क बाद मैं उस सी पहली बार मिला था.

मैं:- अदि तू यहाँ.?

अदि:- हाँ भाई रात को अपने याद किया था.

मैं:- हाँ यर पेहली तो सॉरी उस बात क लिए.

अदि:- भाई आप मेरी मालिक हैं कुछ भी बोल सकती हैं.

मैं:- चल कोई बात नहीं और हाँ मुझी कुछ पोछना था.

अदि:- जी मुझी पता ही.

मैं:- यो जवाब भी दी दो.

अदि:- भाई आपको पता ही न आपकी 8 पत्नियां होंगी.

मैं:- हाँ.

अदि:- लेकिन ऐसा नहीं ही.

मैं:- मतलब.?

अदि:- भाई 8 आपकी वह पत्निया हैं जिनके पास लॉकेट हैं. लेकिन उसकी इलावा भी आपकी ज़िन्दगी में लड़कियां ए गई. जिनके साथ आपकी शादी हो सकती ही. अब वह कोण हैं आपको वक़त अन्य पी मालूम होजाये गए.

मैं:- नहीं प्लीज अब और नहीं ऐसा नहीं होसकता मुझसी और नहीं होसकता मैं किसी अकेला संभल पाऊँ गए सब को और कल की कोमल की बात सुने क बाद यह बिलकुल नहीं.

अदि:- भाई यह आपकी नियति ही और मैं आपकी पेहली भी बता चूका हूँ क आपका प्यार किसी क लिए और न hi किसी का प्यार आपकी लिए और एक दोसरी क लिए कभी काम नहीं होगा.

मैं:- अदि तो समझ नहीं रहा.

अदि:- भाई मैं आपकी हालत समझ सकता हूँ.

मैं:- हाँ यज्ञ बता और.

अदि:- और उस वर्धन का मतलब था क आपकी पत्नियां और आप हमेशा जवान रही गए उम्र बढ़ी गई लेकिन रूप और ताकत नहीं.

मैं:- हम्म्म. अब और कोण कोण है?. मतलब वह जो पेहली हुवा वह नहीं होना चाहिए था.

इधर अमेरिका एयरपोर्ट पी आज कुछ लोग थय जोके देखनी में इंडियन लग रही थय और वह आपस में कुछ बात क्र रही थय.

आइये देखती हैं क्या बातें हो रही हैं...

लड़का1:- हाँ बीएस कुछ देर में फ्लाइट ही.

औरत:- हाँ कितनी दिनों क बाद हम घर जाये गए और ियनय ख़ुशी क मौके पी.

इन सब में एक लड़की थी जो काफी खामोश सी थी ऐसा लग फ था कुछ सोच रही हो. तभी वह अपनी डेरी निकलती ही और उसपे लिखती ही.

"अज्ज मैं उसका देश हमेशा क लिए चोर रही हूँ"..

तो बे कंटिन्यू.....
 
अपडेट NO.74


िद्र अदि सी बात क्र क मैं नीची आ गया और सब नीची hi बैठी थय और जानकी को घेरा हुवा था. मैं भी उदर चला गया और पोछा.

मैं:- क्या बात ही क्यू जानकी दीदी को घेरा हुवा ही सब न्य.

भाग्य:- अरे तुम्ही पता ही कल जानकी अपने ससुराल जा रही है.

मैं:- क्या सच में. फिर तो ख़ुशी की बात ही.

जानकी दीदी न्य एक अजीब सी नज़र मुझपी डाली मैं हल्का सा मुस्कुरा दिया और सब क साथ मिल क उनको चेर्नी लगा क आपकी सास यह कही गई वह कही गई बला बला.

थोड़ी देर बाद कृष्णा अंकल घर ए और राहुल भैया क साथ कहीं चले गए और मुझी एयरपोर्ट जाने का कह गए.

शांति:- तो किसको साथ लय ल जाये गए.?

मैं:- मैं तो उनको पहचानता नहीं जिसको ठीक पता ही वह चली. जानकी दीदी आप चलो.

जानकी:- मुझी पैकिंग करनी है.

शांति:- एक काम क्र इंदू को लय जा.

मैं न्य यह सुनते hi इंदू की तरफ देखा उसका चेहरा खिल गया और खुश होगी.

जानकी:- हाँ ममी आप चली जाओ ठीक रही गए.

इंदू:- हम्म्म. कब जाना ही.

मैं:- अभी.

भाग्य:- इतनी जल्दी.?

मैं:- हाँ ट्रैफिक का कुछ भरोसा नहीं लेट नहीं हो सकती.

फिर इंदू त्यार होने चली गई कोई 30 40 मं बाद बाहिर ी.

मैं तो जैसी देखता रह गया वह बोगत hi सुन्दर लग रही थी साड़ी में.

जानकी:- अरे वह ममी लगता ही जैसी डेट पी जा रही हो.

इंदू शर्मा गई.

रानी:- सच्ची माँ बोहत सुन्दर लग रही हो.

इंदू:- अब इतनी बी नहीं हूँ. चले.?

उसनी शरारती नज़रूँ सी मुझी देखती हुवे कहा.

मैं:- हाँ चलो.

और हम बाहिर आ गए और एक बरी गारी लय क निकल गए एयरपोर्ट की तरफ.

अभी कुछ डोर hi ए थय हम.

मैं:- बोहत सुन्दर लग रही हो.

इंदू:- ऐसा कुछ नहीं ही. बज मैं वैसी hi.

मैं न्य एक हाथ उनके हाथ पी रलह दिया.

मैं:- मेरी जान बोहत सुन्दर ही.

इंदू न्य अपना हाथ मेरी हाथ में रखती हुवे.

इंदू:- अगर आपको पसंद ही मैं रोज़ ऐसी hi त्यार रहूं गई.

मैं:- अरे मैं मार जाओ गए ऐसी.

इंदू न्य फ़ौरन हाथ हटा क मेरी मुँह पी रख दिया.

इंदू:- ऐसी शब्द नहीं निकलती मुँह सी.

और अपना सर मेरी कंधी पी रख दिया.

वह कुछ बोल नहीं रही थी मैं न्य पोछा.

मैं:- क्या हुवा चुप क्यू होगयी.?

फिर भी कुछ नहीं बोली. मैं न्य देखा तो वह रू रही है.

मैं न्य फ़ौरन गारी साइड में रोकी और उनका मुँह ऊपर किया और हाथों में लिया.

मैं:- क्या हुवा क्यू रू रही हो.

इंदू:- अपने वह क्यू बोलै.? क मुझी चोर क चली जाओ गए.?

मैं:- मैं मज़ाक क्र रहा था.

इंदू:- मैं मज़ाक में भी नहीं सुन सकती.

मैं:- इतना प्यार करती हो.?

इंदू:- शायद hi मैं लफ़्ज़ून में बयां क्र सकूं.

मैं:- इंदू शायद मैं इतनी प्यार क काबिल नहीं हूँ.

इंदू:- वह क्यू आपके जैसा इंसान तो हर लड़की का सपना होता ही.

मैं:- लेकिन मैं न्य अभी तक बोहत सा झूट बोलै ही.

इंदू:- क्या आप मुझी पसंद नहीं कृत्य.?

मैं:- नहीं वह एक सच ही.

इंदू:- तो फिर.?

मैं:- मेरा असली नाम रॉकी नहीं ही.

इंदू:- तो क्या ही .?

मैं:- सैम ठाकुर.

इंदू:- क्याआ.? आप सैम ठाकुर हो.?

मैं:- हाँ क्या आप जानती हो मुझी.?

इंदू कुछ नहीं बोली बीएस मेरा हाथ पाकर लिया और अपने आपको हलकी सी छोटी कटी.

मैं:- यह क्या क्र रही हैं आप मुझी लगा गुस्सा करो गई.?

इंदू:- मेरी इतनी हिम्मत कहाँ आप पी गुस्सा क्र सकूं..

मैं:- क्या मतलब.?

इंदू:- प्लीज इस सी यज्ञ आप कुछ नहीं पोची गए आपको मेरी कसम.

मैं:- यह गलत ही मुझी बताओ तो सही क मेरा नाम सुनते क्या होगया था आपको.?

इंदू:- प्लीज मैं यज्ञ नहीं बता सकती.

मैं:- जैसी आपकी मर्ज़ी अब बताओ कहाँ जाना ही.

इंदू:- एयर पोर्ट. और कहाँ जाना ही.?

मैं:- उसमें अभी वक़त ही. आज हम आपको डेट पी लय क चले गए.

इंदू:- सच.? एक बात पॉचों.?

मैं:- इजाज़्ज़त की क्या ज़रूरत ही.?

इंदू:- वह क्या आपको कुछ पता ही.? शांति पुराण क बारी में.?

मैं:- हाँ वह तो आपका गाओं ही.

इंदू:- नहीं उस तलवार और झरनी क बारी में.

मैं:- नहीं ज़्यादा तो नहीं पता बीएस जी सुना वह बता दिया. और यह भी क रानी क जनम दिन पी उस में भी पानी अत ही. और एक बात बताओं उस दिन मेरा भी जनम दिन होता ही.

मेरी यह बोलते hi इंदू की चेहरी का रंग बदल गया वह बिलकुल छुओ होगी.

मैं न्य उनको हिलाया.

मैं:- कहाँ खू जाती हैं घर पी तो बोहत रोमांटिक बनती हैं यहाँ एक डैम चुप.?

इंदू:- है.. हाँ कि सच में आप मुझी प्यार करना चाही गए.?

इंदू न्य मुझी पी बोहत ज़ोर दिया हो. जैसी कोई नौकरानी राजा सी पॉच रही हो क क्या आप मुझी प्यार क्रय गए.?

मैं:- यह किसी बातें क्र रही हैं.? अगर आपको पसंद नहीं तो ठीक ही कोई बात नहीं.

इंदू न्य फ़ौरन अपने होंठ मेरी होंठों पी रख दिए और उनको चूसनी लगी मैं पेहली समझ नहीं पाया फिर उसका साथ देंय लगा.

10 मं की किश क बाद हम अलग होवय.

इंदू:- मुझी प्यार कृत्य रही गए न चाही कुछ भी होजाये.?

मैं:- क्या होगया ही आपको क्यू ऐसी बत्रिन क्र रही हैं.

इंदू:- जो पोछा ही प्लीज उसका जवाब दीजिये और वडा कीजिये क रानी को अपनाये गए.

मैं यह सुन क एक डैम शांत होगया और चुप होगया.

इंदू:- वडा कीजिये मुझसी.

मैं:- यह इन साब बातों का वक़त नहीं ही.

इंदू:- यही वक़त ही अगर कुछ देर होगी तो अनर्थ होजाये गए.

मैं:- केसा अनर्थ.?

इंदू:- मुझीसी वडा कीजिये.

मैं सोच में पार गया और तभी मेरे डिल की धरकन बढ़ गई और तीज तेज़्ज़ धरकनी लगा मेरा डिल जैसी किसी क अन्य की खुशी सी झूम गया हो.

दोस्सरी तरफ.

अमेरिका सी इंडिया वाली फ्लाइट इंडिया लैंड क्र गई थी और उसकी लैंड होते hi वही लड़की जो डेरी में लिख रही थी वह थोड़ी बेचैन होगी और उसका डिल तेज़्ज़ धरकने लगा और वह िद्र उदर देखनी लगी जैसी किसी को ढून्ढ रही हो लेकिन जहाँ नज़र घूमती मायूसी hi मिलती.

औरत:- क्या हुवा.? किसी ढून्ढ रही ही.?

लड़की कुछ नहो बोलती बीएस मान में सोचती ही.

Larki(man में):- यह केसा एहसास ही जैसी वह मेरी बोहत करीब ही. हे ऊपर वाली अगर इस बार मेरा सामना हुवा मैं खुद को संभल नहीं पाऊँ गई.

और उसकी आंख में सी हल्का सा पानी निकल जाता ही.

तो बे कंटिन्यू.
 
अपडेट NO.75


मैं इंदू की एक्सप्रेशंस सी कंफ्यूज हो रहा था वह फिर अपनी बात को दोहराती हुवे बोली.

मैं:- हो क्या गया गए आपको चलो वडा चाहिए न मैं करता हु...

अभी इस सी पेहली मैं कुछ बोलता एक गोली चली जो क मेरी और इंदू क बिच सी गुज़री गारी का शीशा तोरती हुवे.

मैं न्य गोली को देख लिया था आती हुवे मैं न्य इंदू को पिच्य की दिया था.

इंदू एक डैम घबरा गई. तभी बोहत सी गोलियां एक साथ चली पूरी गारी गोलियों सी चली हो गई मैं न्य इंदू को अपनी बहू में भर लिया था.

कुछ देर में फायरिंग बंद होगी. मैं न्य देखा तो इंदू बेहोश हो गई थी मेरी लिए ाचा था अब वह नहीं देख पाए गई मुझी.

मैं सीधा हुवा एक आदमी गारी चेक करनी आ रहा था क मार गए क नहीं अभी वह करीब आ hi रहा था क मैं न्य दरवाज़ी को एक टांग मरी वह जार सी उखाड़ क सीधा उस आदमी को जा क लगा वह वहां सी डोर जा क गिरा और उसकी हाथ में एक मशीन गन था जो क हवा में ुचा गई जिस को मैं न्य यज्ञ होकय पाकर लिया और उसका पता मेरी गली में आज्ञा जो वहां खरी तज्ञ उन्होने फिर सी गोलियां चलना शुरू क्र दिया 4 तरफ सी गोलियां चल रही थी और बिच में मैं खरा था तभी मैं न्य न्य गन रीलोड की ाहर चलना शुरू क्र दी मेरे पोरी बाज़ू हिल रही थय गन क रेकोईल सी लेकिन मैं न्य गन का ट्रीगर नहीं छोरा और अंधाधुन फायरिंग करता रहा और यज्ञ भरता रहा जो भी आ रहा था वह मरता जा रहा था तभी गोलियां खतम होगी मेरी वाली गन मैं न्य उसको फेंका और भाग क एक आदमी क सर पी लात मरी और और उसकी सर सी फ्लिप लगा क उसकी गन पाकर क उसकी गर्दन तोर दी और बिना देरी किये फिर सी गोलियां चलना शुरू क्र दी अब बोहत काम लोग बची थय जिन की गोलियां ख़तम होगी थी लेकिन मैं न्य उनको भागण्य नहीं दिया और सब को गोलियां मार दी लेकिन डीके आदमी की टांग में गोली मरी जो क भाग रहा था.

मैं उसकी पास गया और उसका गिरेबान पाकर लिया.

मैं:- बोल किसनी भेजा ही तुझी.

Admi(dard सी चिल्लाता हुवा):- R..Raka न्य भेजा था.

मैं न्य गोली उसकी सर में मार दी और फोबे निकल क कमिशनर को किया और साडी बात बता दी.

और मैं इंदू क पास गया जो क वहां बेहोश पारी थी.

मैं न्य मुँह पी पानी डाला जिस सी वह होश में ी और एक डैम घबरा गई और जब खुद को सही देखा और मुझी देखती hi गली लग गई.

मैं:- कुछ नहीं हुवा सब ठीक ही.

इंदू:- कोण थय वह और हम किसी बच गए.

मैं:- पता नहीं कोण थय और मेरी होती हुवे आपको कुछ नहीं होसकता पुलिस वक़त पी आ गई थी.

तब तक वहां पुलिस भी आ गई थी और काफी भर भी होगी थी.

मैं न्य कमिशनर सी कह क एक गारी भी मंगवा ली थी.

मैं:- चलो पेहली मॉल जा क कापरी लेती हैं फिर चले गए. सारी कापरी खराब होंगे हैं.

इंदू:- हम्म जैसा आप कही.

वह अभी भी दरी होइ थी अब इतना अचानक सब कुछ होजाये तो दर तो लगी गए न फिर भी मैं न्य उनको संभाला और हम मॉल चली गए और वहां सी और कपड़े लिए और वहां सी सीधा एयरपोर्ट.

अभी भी मेरी डिल में वैसी hi बेचैनी थी जैसी तब होती थी.

सम इयर्स बैक अमेरिका.

आज की शाम बोहत अजीब थी एक खली सरक जिस्पी कोई नहीं था बीएस खली किसी क हसने की आवाज़ आ रही थी.

यह और कोई मैं था और मेरी साथ 2 लोग और थय. एक तो अभी था दोसरा अमित था.

नई चरक्टेर

अमित:- आगे 24 साल,,,,, जो थोड़ी समय पेहली अमेरिका परहंय आया ही. अपनी बहनो और बुआ क साथ.

मैं:- तुम दोनों हसना बांड करो अब.

Abhi(hastey हुवे):- तो बात की हस्सी वाली क्र रहा ही. हाहाहा

Amit(hasta हुवा):- मतलब फुल ों फ़िल्मी स्टाइल यज्ञ बाटना क्या हुवा.

मैं:- सलून पेहली हसना बांड करो वर्ण मैं जा रहा हूँ.

अमित:- रुक रुक... हम नहीं हटे अब.

अभी:- हाँ यज्ञ बोल.

मैं:- क्या बोलों यर आज तक नहीं देखा उसकी बाद लेकिन फिर भी प्यार ही.

अमित:- तूने 5 साल का था तब देखा था मुझी तो तब की अपनी शकल याद नहीं तुझी उसकी भी याद ही.

फिर हसने लगी दोनों.

मैं:- अब ही तो ही तुम लोग हसो मैं जा रहा हूँ सुबह स्कूल भी जाना ही.

मैं यह कह वहां सी निकल आया वह दोनों वहीँ खरी हस्ती रही.

अगली सुबह मैं स्कूल सी घर आया तो मुझी अमित का फ़ोन आया उसनी मुझी अपने घर बुलाया था.

मैं शाम को त्यार होकय उसके घर की तरफ चला गया मेरी साथ अभी भी था हम दोनों उसकी घर पोहंच गए. हम वहां गए तो दरवाज़ा नॉक किया तो एक लड़की न्य दरवाज़ा खोला.

इंट्रो:-

Lata(Amit की बुआ):- आगे 45 इयर्स.

Rashmi(Lata की beti):-Age 23 इयर्स.

Kiran(Amit की दूसरी बुआ की बेटी):- आगे 20 इयर्स.

तो बे कंटिन्यू.

नोट:- अगली अपडेट फ्लैशबैक होगा कोशिश करों गए क 1 hi अपडेट में फ़्लैश बैक पूरा क्र दूँ लेकिन मैक्स. 3 अपडेट लगी गए.

स्टे कनेक्टेड यह अपडेट छोटा ही सॉरी फॉर तहत इतना hi लिख पाया था.
 
अपडेट NO.76


फ्लैशबैक कॉन्टिनुएस.



हम जब अमित क घर गए और नॉक किया तो दरवाज़ा एक लड़की न्य खोला.

एक हस्सें जमील लड़की मैं पहली बार देख रहा था वह भी इंडियन उसका चेहरा एक डैम क्यूट जो ठण्ड की वजह सी लाल हुवा पारा था.

मैं उसी को देखता रहा ऐसा मेरी साथ पहली बार हुवा था क मैं किसी में इतना खू गया था वर्ण बोहत मौके थय लेकिन मैं ऐसे कभी नहीं ख्य था फिर उसके बोलने सी होश में आया मैं.

लड़की:- यस! हु अरे यू.?

मैं:- हम अमित सी मिलने ए हैं.

लड़की:- जी अजैये अंदर.

वह थोड़ा साइड होइ मैं और अभी अंदर चली गए उसनी दरवाज़ा बंद किया और अमित को आवाज़ देने लगी.

लड़की:- अमित भैया आपसे मिलने कोई आया ही.

तभी अमित नीची आया और हम सी मिल क हामी अंदर लाउन्ज में लय गया.

तभी वहां एक और लड़की और औरत ी.

अमित:- बुआ यह है मेरी दोस्त सैम और अभी. और यह हैं मेरी बुआ और दोनों बहने.

बुआ:- बीटा तुम लोग इंडिया सी हो.?

मैं:- जी आंटी.

बुआ:- यहाँ कब ए.?

मैं:- यह तो यहीं पैदा हुवा ही मैं 5 साल का था तब इंडिया सी यहाँ आया. लेकिन अभी भी इंडिया नहीं भुला.

बुआ:- अरे बीटा अभी देखा hi कहाँ रहा 5 साल क तो थय. तुम.

अमित:- बुआ इसको बोहत कुछ याद ही.

यह कह क अमित और अभी हसने लगी.

तभी वही लड़की हम्र्य लिए कोल्ड ड्रिंक्स लय क ी.

मैं एक बार फिर उसमें खू सा गया वह भी समझ गई लेकिन वह उनकंफर्टबले फील करनी लगी थी.

इसलिए मैं न्य खुद का ध्यान अलग किया और बुआ सी बातें करनी लगा.

बुआ:- क्या क्या याद ही तुम्ही 5 साल की थय जब.?

अमित:- बीएस एक लड़की. ः.

बुआ:- अमित बेहवे योरसेल्फ.

अमित चुप क्र गया और मैं नज़रें झुका क बेथ गया.

बुआ:- बीटा यह ऐसा hi ही तुम बुरा मत मन इसकी बात का.

मैं:- कोई बात नहीं आंटी. अब हामी चलना चाहिए. वर्ण मस्सी दन्ताय गई.

बुआ:- तुम अपने माँ पापा क साथ नहीं रेहटी.? क्यू.?

मैं:- वह इंडिया में hi हैं और मैं यहाँ अपनी मस्सी क साथ रहता हूँ.

बुआ:- कोई बात नहीं बीटा तुम आती रहना इसी अपना hi घर समझना.

मैं:- अमित कल मैं तुझी लेनी आ जाओं गए.

अमित:- हाँ ठीक ही.

मैं एक नज़र उसपे दाल क बाहिर निकल गया.

और अगली दिन मैं अमित को लेनी गया उसका कॉलेज था मेरी हिघ्स्चूल क साथ hi इस लिए उसनी अपने साथ लय क जाने को कहा था.

मैं जब वहां गया और बेल्ल बजे फिर सी दरवाज़ा उसने hi खोला लेकिन इस बार बिना कुछ बोले अंदर चली गई.

मैं भी अंदर चला गया लेकिन जब अंदर गया तो पता चला अमित बीमार होगया ही कल रात उसको बुखार आज्ञा था.

बुआ:- बोलै था न क ठंडी पानी सी न नाहा मेरी सुनता hi नहीं ही यह तो.

मैं:- कोई बात नहीं आराम क्र गए तो ठीक होजाये गए.

बुआ:- बीटा एक काम करो तुम इनदोनो को लय जाओ अपने साथ.

मैं:- जी जैसा आप कहें आंटी.

मैं वहां सी बाहिर आया और गारी स्टार्ट क्र उनका वेट करनी लगा लेकिन बाहिर बीएस वही ी.

मैं:- क्या रश्मि दीदी नहीं ए गई.?

किरण:- नहीं यहाँ पी उसकज मां अकेले सभ नहीं संभल पाई गई इस लिए नहीं आ रही.

वह आ क मेरी साथ बेथ गई.

मैं न्य गारी स्टार्ट की.

किरण:- कल मुझी घूर क्यू रही थय.?

मैं उसके अचानक सवाल सी घबरा गया पर कुछ बोल नहीं पाया.

मैं:- woo...Woh मैं जान भुज क नहीं क्र रहा था I'm सॉरी अगर तुम्ही बुरा लगा हो तो.

किरण:- हाँ बुरा लगा आज क बाद मत देखना.

मैं एक डैम सीरियस होकय गारी चलने लगा.

वह अचनाक हसने लगी.

मैं कंफ्यूज होगया क अब हस्स क्यू रही है लेकिन एक बात थी मैं एक फिर उसकी हस्सी में खू सा गया.

उसने चुटकी बजे.

किरण:- Hello कहाँ खू जाती हो.?

मैं:- कहीं नहीं अब तुम हस्स क्यू रही थी.?

किरण:- मैं मज़ाक क्र रही थी तुम सीरियस होगये. वैसी चमकहान खू जाती हो.?

मैं:- तुम्हारी खूबसूरती में.

किरण:- वैसी सुना था क अमेरिका काफी फ़ास्ट ही इतना ही यह पता नहीं था मतलब आती hi फ़्लर्ट.

मैं:- अरे नहीं मैं फ़्लर्ट नहीं क्र रहा सच में.

किरण:- तो और क्या क्र रही हो.?

मैं:- बीएस तारीफ क्र रहा हूँ और मैं न्य आज तक फ़्लर्ट नहीं किया किसी क साथ.

किरण:- ाचा मतलब फर्स्ट मैं थी वैसी इतने बुरे भी नहीं दिखती क कोई भाव hi न दी.

मैं:- भाव तो मिलता ही लेकिन मैं लेता नहीं.

किरण:- अरे वह क्यू.?

मैं:- बीएस एक मोहबत होगी ही.

किरण:- ाचा जी कोण है वह खुसनसीब.

तभी सचुल आज्ञा था.

मैं:- फिर कभी बताओं गए.

किरण:- कब बताओ गए.

मैं:- जब अकेले मिले गए..

किरण:- कल कॉफ़ी पीने चली गए.

मैं:- O.k.

वह उत्तर क चली गई और मैं यह सोचता रह गया क मुझी हो क्या गया ही क मैं ऐसी हरकतें क्र रहा हूँ.

यह सोचती हुवे सारा दिन निकल गया और मैं उसको घर चोर दिया रास्ते में बीएस नार्मल बातें होइ.

नेक्स्ट डे संडे था.

मैं घर सी त्यार होकय मैं उस कॉफ़ी शॉप में चला गया जहाँ हमनी मिलने प्लेन बांया था.

मैं जा क उसका वेट करने लगा जब वह ी तो उसके साथ एक लड़की और भी थी.

वह दोनों मेरी सामन्य आ क बेथ गई मैं खरा हुवा और दोनों को hi कहा

किरण:- सैम यह सिमी मेरी दोस्त.

मैं:- Hello सिमी नीस तो मीट यू.

उसने हैंडशेक किया वह अजीब सी नज़रों सी देख रही थी मुझी.

मैं:- सू क्या लें गई आप.?

किरण:- कॉफ़ी hi मिले गई चाय तो मिलने सी रही.

मैं:- अरे क्यू नहीं मिले गई. ओह्ह जस्सी 3 कप चाय तय लय क आ.

सिमी:- आपको पंजाबी अति ही.?

मैं:- हाँ जी थोड़ी बोहत यह जस्सी सी सीखी ही.

उस कॉफ़ी शॉप में काम करनी वाला लड़का पंजाबी था हमारी अछि Hi hello होगी थी अगर इंडियन डिश कहानी होती थी तो इसी को कहता था.

किरण:- सो बताओ अपनी मोहबत क बारी में वैसी वह नहीं ी.?

मैं:- नहीं जी वह तो इंडिया में है.

किरण:- पर तुम तो कह रही थय. क तुम 5 साल क थय जब यहाँ ए थय.

मैं:- बिलकुल और तब hi उसको पहली बार देखा था.

किरण:- मतलब तब सी वह प्यार ही तुम्हारा.?

मैं:- हम्म्म. पता नहीं उसको याद होगा क नहीं लेकिन मैं ऐसा हूँ वडा क्र निभाता ज़रूर हूँ.

किरण:- ाचा जी ऐसी बात ही हम भी डेमो लेती हैं.

मैं:- जी हुकम करो.

किरण:- तो यज्ञ सी जब तक मैं न कहूँ चाय नहीं पियो गए.?

मैं:- O.k दोने.

तभी जस्सी चाय लय आज्ञा और मेरी साथ hi बेथ गया.

जस्सी:- ओह्ह लय यार चा पि.

मैं:- न परवा आज तो बाद नए पिणि.

जस्सी:- ोये ओह्ह क्यू.?

मैं:- बीएस वडा क्र लय किसी नाल.

किरण हसने लगी लेकिन यह देख क सिमी को पता नहीं क्यू जलन हो रही थी.

किरण:- अब पूरी एक महीने हम रोज़ यहाँ ए गए मैं चाय पियोँ गई तुम देखो गए.

मैं:- चलो ठीक ही अब चीनी कितनी.?

किरण:- ढाई चमच.

मैं न्य चाय में ची ी दाल दी.

ऐसी hi वक़त गुज़रता रहा हम रोज़ आती थय चाय पीने इसी बेच जस्सी और सिमी की भी अच् बने लगी लेकिन सिमी हमेशा ऐसा वैसा कुछ करती रहती जिस सी मुझी शक होता लेकिन मज़ाक समझ क चोर देता.

अमित और रश्मि और बुआ तो भी यह पता था क हम ऐसी आती हैं कभी कभी लेकिन उनको बुरा नहीं लगता था हम बीएस दूर दूर रेहटी थय आज तक मैं न्य किरण तो टच तक नहीं किया.

हमरी मुलकातून क बोहत देर होगी थी जब तक उस सी बात न क्र लूँ नेरा दिन नहीं निकलता था उसका भी यही हाल था.

एक दिन मैं रोज़ की तर्हां कॉफीशॉप पी गया तो लाइट्स बंद थी जैसी hi मैं अंदर गया रौशनी होगी और हर तरफ बलून्स Hi बलून्स थय और बिच में रेड कलर सी लिखा था ी लव यू.

तभी गण शुरू हुवा और उन बलून्स में सी किरण बाहिर ी. रेड कलर का ड्रेस पेहेन क और मेरी बिलकुल करीब आ क टांगो क बल बेथ.

किरण:- जब सी देखा ही आपको भूल गए हैं खुद क्या आप भूल गए हैं खुद को हामी याद क्र. सैम ी लव यू विल यू मर्री में.?

मैं एक डैम बूट बन क खरा था लेकिन मैं उसको मन नहीं क्र पा रहा था मुझी कोमल का ख्याल आ रहा था लेकिन कोमल की याद मुझी किरण क प्यार क सामन्य अज्ज पहली बार काम लग रही थी.

मैं न्य उसका हाथ पकड़ा और उसका खरा क्र क गली लगा लिया.

अज्ज पहली बार उसे चुवा था अजीब सा एहसास था और अचनाक मौसम खराब होगया और बारिश होने लगी हर तरफ हरिआली लेहक रही थी.

मैं:- किरण शयद मैं भी प्यार करनी लगा हूँ टुमस्य तुम्हारी बिना मेरा जीवन बिलकुल एक वीरान जंगल जैसा होगा. ी लव यू तू. !

वह अलग होइ उसकी आंखों मेंदुनिया भार की ख़ुशी थी.

मेरी चेहरी पी एक डैम परेशानी आ गई जैसी उसनी देख लिया.

किरण:- क्या हुवा आपको क्यू परेशां होगये.?

मैं:- वैसी तुम मुझी आप क्यू कह रही हो.?

किरण:- मेरी हमेशा सी तमना थी मैं अपने प्यार को प्यार सी बुलाऊँ इज़्ज़त दूँ इस लिए मैं आपको आज सी आप कहां गई.

मैं:- तो ठीक ही मैं भी आप कहूँ गए. (तब सी मेरी आदत ही आप केहनी की. )

किरण:- हम्म लेकिन परेशां क्यू हैं.?

मैं:- मैं अमित को लय क परशान हूँ कहीं उसको बुरा लगा तो क मैं उसकी बेहेन क साथ.?

तभी वहां अचनाक एक आवाज़ ी.

मैं न्य देखा तो वहां सब खरी थय बुआ रश्मि अमित अभी.

अमित:- पागल मुझी ख़ुशी होगी मेरी बेहेन एक ाच्य इंसान म साथ प्यार क्र रही है.

मैं जा क अमित क गली लगा और बुआ क पेअर चुवे.

रश्मि:- मुबारक हो जीजा जी.

हम दोनों हसने लगी और किरण शर्मा गई.

ऐसी Hi कुछ वक़त बिट गया इसी बिच हम दोनों न्य दोनों क नाम का तातो बनाया था. उसनी. स और मैं न्य क.

मैं न्य चेस्ट लय बनाया था और उसने अपनी गर्दन क पास. परमानेंट.

हम दोनों बोहत खुश थय एक दोस्सरी क साथ उसको मैं न्य कोमल क बारी मरीन सब बता दिया था और सब कुछ वक़त पी चोर क हम दोनों प्यार क समुंदर में नाहा रही थय.

लेकिन वक़त न्य पानी की लेहरून की ऐसा पलटा क मेरी ज़िन्दगी क गोटे लग्न शुरू होगये.

तो बे कंटिन्यू.
 
अपडेट NO.77
फ़्लैश बैक कंटिन्यू.

मेरी ज़िन्दगी एक डैम बदल चुकी थी जो पेहली सुनसान थी आज हरी भरी होगी थी किरण की वजह सी.

आज 2 हफ्ते होगये थय उस दिन को अब मैं न्य किरण क घर जाना थोड़ा काम क्र दिया था ाचा नहीं लगता बार बार जाना इस लिए.

लेकिन अमित सी मिलता था हमारी बिच ऐसा कुछ बदला नहीं था.

लेकिन पेचलय एक हफ्ते सी मैं किरण सी नहीं मिला था फ़ोन पी बात हो रही थी लेकिन वह भी बोहत काम जब भी मैं फ़ोन करता वह बिजी होने का कह क सुत्त क्र देती. मैं न्य भी ज़्यादा फाॅर्स नहीं किया.

संडे को मैं न्य सोचा उसको सरप्राइज देता हूँ मैं एक फ्लावर शॉप पी गया और उसके लिए फ्लावर्स लिए और चॉक्लेट लय क उसके घर चला गया.

मैं न्य जा क बेल्ल दी तो बुआ न्य दरवाज़ा खोला.

मैं:- Hello आंटी किसी है.

Bua(Heran होकय):- मैं तो ठीक हूँ बीटा तुम यहाँ.?

मैं:- I'm सॉरी आंटी क्या नहीं आना चाहिए था.?

बुआ:- अरे नहीं बीटा वह बात नहीं ही किरण तो टुमस्य मिलने का कह क गई थी घर सी.

नेक्स्ट डे इन हाई स्कूल.

मैं आज जल्दी उठा था स्कूल जाने क सी पेहली शायद मुझी अपने आप को त्यार करना था किसी चीज़ क लिए.

मैं 1 घंटी बाद नीची गया और मस्सी सी मिला और दीदी अभी सू क नहीं उठी थी.

मैं:- मस्सी आज मैं जल्दी निकलों गए मुझी कुछ काम ही.

मस्सी:- अरे उस सी तो मिल लय.

मैं:- मस्सी दीदी सी कहना मैं जल्दी आ क मिलों गए.

मस्सी:- चल ड़याँ सी जाना.

मैं घर सी निकल गया रेडी होकय मेरी आंखें भीगी होइ थी.

मैं गारी में बेथ क स्कूल पोहंच गया. और क्लास में चला गया. और चुप चाप बेथ गया और अन्य वाली पळून का इंतज़ार करनी लगा.

ब्रेक होइ सब बची आराम सी कैंटीन में बैठी थय जिन में सी एक किरण भी थी.

मैं कैंटीन गया एक बार दूर सी जी भर क किरण को देखा और फिर आंखें साफ़ क्र क चेहरी पी एक फेकि मुस्कान लय क ए आया और सीधा किरण क पास गया.

मैं:- किरण.

उसनी मेरी तरफ देखा.

Main(Thora ऊँचा):- मई ी हैवे अटेंशन प्लीज.

सब मेरी तरफ देखनी लग गए.

मैं किरण क सामन्य अपने घुटनूं क बल बैठा और रिंग उसके यज्ञ क्र बोलै.

मैं:- ी लव यू किरण विल यू बे माय G.F.

सब गुर सी मुझी देखनी लगी.

किरण क चेहरी पी एक कातिल मुस्कान आ गई जिस को सिर्फ मैं hi देख पाया जो सीधा डिल मैं उत्तर गई.

कजर्न खरी होइ और एक ज़ोर दर थापर मेरी चेहरी पी मारा.

सब हैरान होगये.

किरण:- फुंहारी हिम्मत किसी होइ मुझी ऐसा केहनी की. तुम जैसे आवारा और गरीब क साथ मेरा क्या जोर. अपनी औकात देखि ही और मुझी प्रपोज़ करनी चली थय ी लव यू माय फुट 2 कोड़ी का प्यार मेरी सामन्य नहीं चली गए.

वह यह कह क वहां सी चली गई.

सब मेरी तरफ अजीब नज़रों सी देखनी लगी और आपस में बातें करनी लगी तभी मेरी नज़रूँ क सामन्य एक शख्स आया.

लड़का:- अब पता चली मेरी औकात.

मैं न्य एक नज़र उसपे डाली.

लरकी क साथ 2 लरकी और थय जिन में सी एक न्य मेरी चेहरी पी एक मौका मारा.

मैं न्य कुछ नहीं कहा.

लड़का:- ऐसी hi टोने मुझी मारा था जब उस दिन मैं न्य उस लड़की का हाथ पकड़ा था.

फिर दोसरी लरकी न्य एक लात मेरी पेट में मरी.

लड़का:- कैच समझ नहीं आ रही न तुझे चल बताता हूँ.

फिर दोनों न्य एक साथ लात मरी मुझी. मैं जा क दरवाज़ी सी टकराया. सब वह खरी देख रही थय बीएस.

लड़का आज्ञा आया और मुझी पाकर क बाहिर लय आया और एक पिलर क साथ लगा दिता मुझी.

लड़का:- उस दिन सी Hi मैं न्य बदला लेने का सोच लिया था लेकिन कुछ समजह नहीं आ रही थी क किसी बदला लोन फिर एक दिन तुझी किरण क साथ देखा उसी वक़त पूरा प्लान बना लिया था उसको अपने प्यार में फसा क तेरी पिच्य लगा दिया और आज यह करने को कहा और तो पागल वही क्र बैठा. अब मेरा बदला पूरा हुवा.

तभी दोनों लाकरों न्य मेरी सर पी एक साथ फ्लाइंग किक मरी जिस सी मेरी आंखें बंद होगी और मैं बेहोश होगया.

इधर जब यह सब कह क किरण वहां सी नीलकी तो सीधा अपने घर गई वह पता नहीं क्यू खुश थी

वह जैसी Hi घर ी.

किरण:- बुआ बुआ.

तभी वहां पी बुआ आ गई और साथ में अमित और रश्मि भी थी.

किरण अमित और रश्मि को देख क हेरा थी व क उनको अभी कॉलेज होना चाहिए था.

किरण:- अरे भैया और दीदी आप कॉलेज नहीं गए.?

रसंहि:- तेरी ज़मीर का जनाज़ा प्रणय क लिए hi हम घर थय.

किरण:- क्या मतलब.?

अमित:- क्र ी जो करनी गई थी.?

सब क छ्रूं पी गुस्सा देख क किरण एक बार दार गई.

किरण:- K...Kya मतलब क्या करनी गई थी.?

बुआ:- सैम को ज़लील करनी का काम.

किरण यह सुन क हैरान थी क सब को किसी पता चला.?

किरण:- आप सब को किसी लता चला.

रश्मि:- हामी hi नहीं जिसको ज़लील क्र क ी ही उसको भी पता था आज उसके साथ क्या होना ही.

यस्टरडे जब सैम अमित क घर आया था.

जब मैं और बुआ बात क्र रही थय अमित और रसंहि भी आ गए बाहिर.

अमित:- अरे तो यहाँ किरण तुझसी मिलने गई थी.

मैं:- मेरा कोई प्लान नहीं था इनफैक्ट मेरी तो उस सी बात भी नहीं होइ मैं तो सरप्राइज देने आया था.

अमित:- तो वह कहाँ गई.?

रश्मि:- मैं कॉल क्र क पोछती हूँ.

रश्मि न्य कॉल की और फ़ोन स्पीकर पी डाला.

उस न फ़ोन पिक किया.

किरण:- Hello दीदी क्या हुवा अभी तो घर सी ी हूँ.

रश्मि:- तू कहाँ ही.?

किरण:- **** काफी

रश्मि:- किस क साथ.?

किरण:- सैम क साथ बता क तो ी थी.

यह सुन क हम सब शॉकेड होगये मैं यहाँ खरा हूँ वह झूट क्यू बोल रही थी.?

रश्मि:- ाचा चल bye.

उस न्य फ़ोन बंद क्र दिया.

अमित:- बुआ यह झूट क्यू बोल रही ही.

बुआ:- पता नहीं. उदर जा क hi पता चली गए.

अमित:- मैं जाता हूँ.

मैं:- मैं भी चलता हूँ.

मैं और अमित वहां चली गए और जा क अंदर देखा तो हम दोनों हैरान थय.

मैं:- यह किरण टोनी क साथ क्या क्र रही ही.?

अमित;- टोनी कोण ही.?

मैं:- यह स्कूल का लोफर लड़का ही अभी कुछ दिन पेहली इस सी मेरा झगड़ा हुवा था कैंटीन में लड़की क साथ बदतमीज़ी क्र रहा था पाकर क धोया था इसको.

Amit(gusse में):- मैं अभी किरण को जा क पोछता हूँ.

मैं न्य अमित का हाथ पाकर लिया ओफ़्कौर्से अगर किसी क बेहेन किसी गैर क साथ बैठी होगी बाँदा आउट ऑफ़ कण्ट्रोल तो होजाये गए न.

मैं:- प्लीज बात को समजह लेती हैं पेहली.

हम दोनों चुप क उनके पिच्य वाली टेबल पी बेथ गए.

और वह कल की साडी प्लानिंग करनी लगी.

अमित की गुस्सा आ रहा था अपनी बेहेन और टोनी पर लेकिन मैं न्य उसको शांत रहंय को कहा.

थोड़ी देर में किरण उठ क चली गई तभी वहां कुछ आदमी आ क टोने क पैसा बेथ गए.

टोनी:- कल साले की ऐसी हालत करों गए 1 महीने तक बीएड सी नहीं उठी गए और तुम सब कल सब टाइम पी होना चाहिए.

टोनी उठ क चला गया.

अमित:- तूने मुझी क्यू रोका मैं दोनों का मुँह तोर देता.

मैं:- तुझी कसम ही मेरी तो किरण को कुछ नहीं क्रय गए

अमित:- मैं किसी सेहेन क्र लोन मेरी बेहेन किसी ऐसी इंसान क साथ.

मैं:- मेरा वडा ही मैं उसको हर खत्री सी दूर रखूँ गए.

अमित:- खतरा तो तेरी पी ही वह खुद खतरा ही.

मैं:- भाई तुझी मेरी कसम ही.

तभी मेरा फ़ोन बजा कॉल किरण का hi था.

मैं न्य पिक किया और अमित न्य चीन क स्पीकर पी दाल दिया.

मैं:- Hello.

किरण:- Hello बेबी किसी हो.

मैं:- मैं ठीक हूँ आप बताओ किसी हो क्या क्र रही हो.?

किरण:- अभी सू क उठी थी.

अमित का पारा हाई होगया मैं न्य उसको शब्त रहंय का कहा.

मैं:- ाचा अब उठी.

किरण:- हाँ बेबी मैं न्य अपने सैन्य में देखा तुम मुझी सब क सामन्य पर्पस क्र रही हो.

मैं:- ाचा तो यह सपना हम पूरा क्र दी गए.

किरण:- क्या सच.?

मैं:- हाँ.

किरण:- थैंक यू चलो bye मैं फ्रेश होजाती हूँ.

मैं न्य कॉल बंद क्र दी और अमित को शांत क्र घर भेज दिया.

लेकिन मैं खुद शांत नहीं था मेरा डिल रो रहा था मेरा मेहबूब मुझी धोका दी रहा था इतने प्यार सी तो मैं उसका मान नहीं तो सकता था इसी लिए मैं न्य फैसला किया क जो वह चाहती ही ज़रूर होगा.

इधर अमित घर जा क बुआ और रश्मि को सब सच बता देता ही.

किरण रीच आफ्टर स्कूल.

किरण यह सब सुन क हैरान थी क उसको अगर पता था वह क्यू आया उसके पास.

बुआ:- तूने बोहत बरी गलती की किरण.

किरण:- नहीं वह बोहत बुरा इंसान ही.

अमित:- अपनी बकवास बाद क्र एक लफ्ज़ भी बोलै न उसके खिलाफ.

किरण:- उसको कोई फरक नहीं पारा होगा लेकिन मैं टोनी सी प्यार करती हूँ.

रश्मि:- प्यार माय फुट जो तुम्ही धोका दी रहा ही.

तभी अमित का मोबाइल बजा.

अमित न्य रेसवे किया और स्पीकर ों किया कॉल अभी का था.

अभी:- अमित जल्दी सी हॉस्पिटल आ सैम हॉस्पिटल में ही उसको किसी न्य बोहत मारा ही.

अमित और बाकि दोनों की आंखें भीग गई अमित न्य फ़ोन बंद किया.

अमित:- यह भी मुझी पता था जोगा लेकिन उसने खुद की कसम दी थी इस लिए मैं कुछ नहीं क्र सका. अगर आज उसे कुछ हुवा मैं ज़िन्दगी भार तुझी माफ़ नहीं करूं गए.

अमित यह कह क निकल गया.

बुआ:- तुझी कबि किसी बात क लिए नहीं रोका आज भी नहीं रोके गए चाही तो किसी का खून भी क्र दी लेकिन आज क बाद अपने लिए प्यार लफ्ज़ को तो दफना ी ही.

बुआ यह कह क चली गई और रश्मि भी उसको गुस्से में घोरती होइ चली गई.

किरण को यकीन नहीं हो रहा था क टोनी न्य ऐसा किया उसके साथ इसी लिए वह घर सी निकल गई टोनी क लॉस जाने क लिए.

तभी सिमी न्य उसे देख लिया जो इसी क घर आ रही थी वह उसके पिच्य चली गई.

किरण टोनी क घर पोहंच गई और अंदर जाने लगी तो दरवाज़ा खोला था वह अंदर गई तो एक कमरे में 3 लोग शराब पि रही थय.

टोनी:- साली को ाचा सबक सिखाया मन तो क्र रहा था जान सी मर दूँ लेकिन ऐसी केस होजाता साली को को ैसिडेंट करवा क मरवाओं गए

लड़का2:- बॉस जितना आज उसको मारा ही न 1 महीना नहीं तह पाए गए.

टोनी हसनी लगता ही.

िद्र किरण को अपने कानून पर यकीन नहीं होता क उसनी जिस्पी भरोसा किया वह ऐसा निकला

वह अंदर जाती ही और जा क टोनी क सामन्य खरी होजाती ही.

टोनी और दोनों उसको देख क खरी होजाती हैं

किरण:- क्यू मेरी साथ ऐसा किया.?

टोनी:- मुझी अपनी बेअजति का बदला लेना था.

किरण:- मतलब वह सब नाटक था.?

टोनी:- हाँ सब नाटक था लेकिन

किरण रोने लगती ही तभी टोनी उसका हैयह पाकर लेता ही

टोनी:- लेकिन तेरी जवानी असली ही जो हम राग्र्य गए

किरण उस सी अपना हाथ चुरवानी लगती ही

और चुरवा क भाग जाती ही लेकि दोनों लरकी उसको पाकर न्य लगती हैं और टोनी दरवाज़ा बंद देता ही लेकिन इस सी पेहली सिमी सब कुछ देख लेती ही वह अमित को फ़ोन करती ही.

अमित साडी बात सुन क गुस्से में वहां सी निकल जाता ही लेकिन वहां सी कोई और भी निकला था.

यह और कोई नहीं सैम था जोके भागता जा रहा था उसकी सर सी खून निकल रहा था लेकिन वह उसकी परवा किये बिना भागता जा रहा था.

जब मैं बेहोश हुवा मेरी आंखों क सामन्य जो आया उस सी मेरी रूह कम्प गई क किरण को 3 भेड़िये की रही हैं जैसी देखती hi मैं चिल्लाता हुवा उठा.

मैं:- किराआआआं.

मैं न्य खुद को हॉस्पिटल में पाया लेकिन उसकी परवा किये बिना मैं न्य अपनी नीडल्स निकल और सब को पिच्य करता हुवा वहां सी भाग गया बिना किसी चीज़ की परवा किउए बिना

मैं नहीं जनता था कहा जा रहा हूँ

मैं एक घर क सामन्य रुका और वहां सिमी को देखा और समझ गया क यही वह जगह ही.

सिमी न्य मुझी देख लिया और मेरी हालत देख क वह घबरा गई.

मैं बिना कुछ बोलै वहां सी दरवाज़ी की तरफ गया और एक लात मार क टूर दिया.

अंदर का नज़ारा दुख क मेरा खून खोल गया वहां पी टोनी किरण क ऊपर लेता था और दोनों न्य उसकी हैयह पेअर पाकर हुवे थय.

जैसी hi दरवज़ा खुला सब य वहां देखा और मुझी देख तीनो की तो जैसी गांड hi पहात गई लेकिन किरण को आशा की किरण नज़र ी.

मैं बिना कुछ बोले सीधा टोनी को जा क पाकर लिया और उसकी गर्दन पाकर ली तभी एक न्य गन निकल ली और चला दी मेरी पी.

मुझी गोली पूरी स्लोमोशन में अति होइ नज़र आ रही थी मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था लेकिन मैं साइड होगया गोली सीधा टोनी क डिल पी लगी वह वही गिर गया जैसी देखती hi दोस्सरी न्य मेरी ऊपर फ्लावर वास मारा जोकि फिसल क सीधा किरण क सर में लगा

किरण की आंखें बंद होने लगी उस न्य एक उम्मीद क साथ अपना हाथ सैम की तरफ किया जिसको उसने पाकर भी लिया लेकिन तभी उसकी भी हिम्मत खतम होगी और दोनों एक साथ बेहोश होगये.

तभी वहां पुलिस आ गई और उन दोनों को पाकर लिया और साडी सिटिवशं की वीडियो सिमी न्य बना ली थी.

जब मेरी आंख खुली मैं हॉस्पिटल में था मेरी साइड पी दीदी बैठी थी उनकी आंखों क नीची सौख्य हुवे आंसूं साफ़ इस बात की निशानी थय क वह रू रही थी

मैं:- दीदी

उन्होंने जैसी hi मुझी सही देखा वह मेरी गली लग गई और मेरा चेहरा चूमने लगी.

ऐसी hi मस्सी और अंकल भी मिले मैं 2 दिन बाद होश में आया था मेरी दिमाग में अभी भी किरण की बाएं चल रही थी

तभी वहां अमित आया

अमित:- केसा ही तो.

मैं:- दीदी प्लीज थोड़ी देर अकेले में बात क्र सकता हूँ अमित क साथ.?

दीदी और मस्सी बाहिर चली गई वह जाना नहीं चाहती थी लेकिन मेरी केहनी पी चली गई.

मैं:- किरण किसी ही.?

अमित:- वह अब ठीक ही कब सी होश आया ही बीएस तेरा नाम लिए जा रही ही.

मैं:- मैं दुबारा उसकी ज़िन्दगी नहीं खराब करना चाहता मुझसी वडा क्र क तो उसका हमेशा ख्याल रखी गए मेरी बारी में लुक माहि बताये गए.

अमित:- तो केसा आदमी ही.?

मैं:- भाई वह टोनी न्य मेरी सी बदला लेनी क लिए किरण का उसे किया मैं नहीं चाहता यज्ञ सी कुछ भी ऐसा वोग हमेशा खुश रही मेरी लिए यह hi काफी ही.

वह मेरी गली लग गया और रोने लगा उसको मैं न्य समझा दिया और वह रोटा हुवा चला गया. यह मेरी अमित सी आखरी मुलाकात थी इसकी बाद मैं उस सी शायद hi मिल पाऊँ गए.

उसके बाद वह चला गया और मैं न्य अंकल सी कह क शिफ्टिंग क कह दिया जिसे उन्होंने मान लिया और पुलिस का केस सिमी न्य जो वीडियो बनाई थी उस सी क्लियर होगया.

हम लोग अगली दिन hi दोसरी शहर चली गए जहाँ मैं न्य अपनी नै ज़िन्दगी शुरू की मेरी ज़िन्दगी में प्यार नाम का कोई लफ्ज़ नहीं था अब लेकिन तनीषा क आती hi ज़िन्दगी न्य नया मूर लय लिया.

इधर किरण को अपनी गलती का एहसास होगया था वह सैम सी मिलना चाहती थी उसनी ढूंढा भो बोहत लेकिन वह नामकम रही और रात रात भर दोती थी और बीएस सैम के स्केकट बनती रहती थी.

रश्मि और बुआ क संभालनी पर थोड़ी संभल गई थी लेकिन वह अपनी डेरी में कुछ न कुछ लिखती रहती और सैम सी मिलनी की उम्मीद अपने डिल में जगा क रखती थी.

फ़्लैश बैक एंड्स

नोट:- नेक्स्ट उपदटेस अरे ों प्रेजेंट
 
अपडेट NO.78
प्रेजेंट

मैं और इंदू निकल गए थय एयरपोर्ट क लिए इंदू काफी दरी होइ लग रही थी.

मैं न्य इंदू क हाथ पी अपना हाथ रखा और उसके गाल पी एक किश किया.

मैं:- ट्रस्ट में कुछ नहीं होगा.

इंदू न्य अपना सर मेरी कंधी पी रख दिया और अपना दोसरा हाथ मेरी हाथ में.

मैं एक हाथ सी ड्राइव क्र रहा था.

इंदू:- काश मैं साडी ज़िन्दगी आपकी बहून में गुज़र पाती.

मैं:- अगर हर चीज़ इंसान की मर्ज़ी सी होती तो यह दुनिया कब की तबाह होती इस लिए सब कुछ ऊपर वाला hi करता ही. और मेरा वडा ही क मैं कभी हाथ नहीं चोरो गए.

इंदू:- उमाह

मेरी गाल को चूमती हुवे वापिस कंधी पी रख लिया सर.

तभी इंदू का फ़ोन बजा.

इंदू न्य कॉल रेसवे किया

इंदू:- Hello.

*****

इंदू:- हाँ हम भी आ गए बीएस 5 मं वेट करो

****

इंदू:- हाँ सही रास्ते में hi कुछ खिल्ला देना.

******

इंदू:- हाँ बीएस पोहंच गए.

फ़ोन सुत्त.

मैं:- किसका फ़ोन था.?

इंदू:- लत्ता का फ़ोन था वह पोहंच गए हैं.

Main(man में):- सहित यह तो बुआ हैं मतलब मेरा शक सही था अब क्या करूं गए.? कैसी रियेक्ट करों.? क्या वह भी ए गई पूछ क देखता हूँ.

मैं:- Aaa...Woh कोण कोण आ रहा ही.?

इंदू:- मेरी ननद उसकी बेटी रश्मि और जानकी की बेटी किरण और छोटी का बीटा अमित.

Main(man में):- क्या मैं वापिस चला जाओं.? क्या इंदू को सब बता दूँ.? अब क्या करूं.?

बोहत सी सवाल थय मेरी मन में और जवाब थय जीरो.

तभी इंदू न्य मेरी हाथ का सहलाया.

जैसी हिम्मत दी रही हो क कुछ नहीं होगा.

आंखों आंखों में उसनी मुझी बोहत हिम्मत दी अब जो होगा देख लोन गए यह सोच क मैं न्य गारी भगा दी.

करीब 5 मं बाद हम एयरपोर्ट पार्किंग में थय.

इंदू गारी सी उत्तरी साड़ी ठीक करनी लगी लेकिन मैं अभी तक सोचो में गम गारी में बैठा था.

मेरी सोच को इंदू न्य तोरती हुवे इंदू न्य चलनी को कहा

मैं बाहिर निकला और इंदू क पेची पेची चलनी लगा.

मेरी डिल की धरकन भर रही थी और हालत खराब हो रही थी क मैं किसी रियेक्ट करूं फिर कासुअल बेहवे करनी का सोच क यज्ञ बढ़ा.

तभी अराइवल आज्ञा और मैं हल्के कदमो क साथ चलनी लगा.

तभी इंदू न्य शायद देख लिया उनको वह तेज़्ज़ कदमो क साथ यज्ञ बरहनी लगी.

बी थ्रीड पर्सन.

यहाँ एयरपोर्ट पर लता और सब लोग इंतज़ार क्र रही थय

रश्मि:- कब ए गई ममी.?

लता:- बीएस अन्य वाली होंगी. और तुझी क्या हुवा.?

किरण का डिल तेज़्ज़ी सी धरक रहा था क शायद वह बोहत करीब ही लेकिन उसको यकीन नहीं हो रहा था इसी लिए वह बीएस अपने हाथों को आपस में रैगर रही थी.

अमित:- बुआ वह देखिये बरी माँ आगे

वहां सी इंदू अति होइ देखती ही वह अकेली Hi आ रही थी.

वह आती hi अमित क गली मिलती हैं.

इंदू:- अरे मेरा बीटा तो बारे होगया

अमित:- आप वैसी की वैसी हैं बरी माँ.

रश्मि:- अरे हम सी भी मिल लो हम भी हैं लाइन में ममी.

फिर इंदू रश्मि लता और किरण सी मिलती है.

लता पूछती है

लता:- अरे दीदी अकेले ए हो.?

इंदू:- नहीं अरे वह कहाँ गया.? सैम.

सुब एक बार यह नाम सुन क हिल जाती हैं और किरण झट सी खरी होजाती ही जो डिल घबरानी की वजह सी बेथ गई थी.

सब क चेरून पी ख़ुशी और हैरानगी दोनों क असरात थय.

तभी पिल्लोर बना हुवा था उसके पिच्य सी एक लड़का बाहिर निकलता ही. जैसी देख साब क होश ुर जाती हैं और किरण की तो जैसी जानत हाथ लग गई.

सैम वहां सी चलता हुवा अत ही और आंखों पी सी चश्मा उतरता ही उसकी आंखें देख क सब को यकीन होगया था क यह वही ही जिसको वह इतनी सलून सी याद कृत्य थय.

इंदू:- यह सैम मेरा होने वाला दामाद रानी की इसी सी सगाई हो रही ही.

यह मनो सब क उप्पेर एक बम की तर्हां फूटा था.

सैम यज्ञ बढ़ता ही और बुआ क पेअर छूटा ही.

वह उसको बना देरी किये गली लगा लेती हैं.

बी हीरो.

बुआ न्य मुझी कस क गली लगा लिया था.

मैं:- किसी हैं आप.?

लता:- तूने कोनसा पॉच लिया था एक बार मेरा ख्याल नहीं आया क्या हम कुछ नहीं लगती थय तेरी.?

मैं:- माफी चाहूँ गए. आपको नाराज़ किया.

लता:- पगली टोने hi तो खुश किया. ही.

मैं अलग हुवा तो रश्मि साइड सी गली लग गई.

मैं न्य सीधा किया गली लगा लिया.

रश्मि:- मैं तुझसी बोहत नाराज़ हूँ

मैं:- अरे बाप रय मैं तो ढेर साडी वैनिला आइस क्रीम लाया था पर आप तो नाराज़ हो चलो किसी और क दी देता हूँ. (राश्मक को वैनिला आइस क्रीम बोहत पसंद थी मैं जब भी उनके घर जाता उनके लिए लय क जाता था)

वह अलग होइ और हल्का सा मुका मुझी मारा. और मुस्कुरानी लगी उनकी आंखों में भी आंसूं थय.

मैं न्य अमित की तरफ देखा जो मुँह उदर क्र क खरा था.

इंदू सवालिया नज़रूँ सी देख रही थी मैं न्य शांत रहंय का इशारा किया और अमित की तरफ गया

मैं:- नाराज़ ही.?

No रिस्पांस..

मैं:- देख भाई मिस इंडिया सी मिळवण्य की सोच रहा था मैं तो..

अमित पलटा और गली लग गया आज बोहत दिनों बाद उसकी गली लगा था वह रू रहा था मेरी भी आंखें भार गई अपने दोस्त सी इतने सलून बाद मिल क.

वह अलग होकय.

अमित:- तूने एक फ़ोन तक नहीं किया मुझी कितना इंतज़ार किया क आज क्रय गए कल क्रय गए लेकिन टुन्नाय नहीं किया.

मैं:- शायद उस वक़त यह सही था मैं और टूटने की हिम्मत नहीं रखता था तब शायद अब हालत न्य बोहत कुछ सीखा दिया ही.

इधर किरण न्य जब सुन्ना क उसनी जैसी हमेशा चाहा ही हमेशा उसका इंतज़ार किया ही वह किसी और का होजाये गए उसकी तो जैसी दुनिया Hi ुजार गई हो और उसकी आंखों में सी आंसूं बहने लगी और उसका डिल बंद होने क कगार पी आज्ञा था.

लेकिन जैसी hi उसनी जैम की बात सुनी..

"मैं और टूटनी की हिम्मत नहीं रखता था तब"

उसकी आत्मा न्य उसको jhinjora..k तो किसी भूल गई क किसी तूने उसके प्यार को सर इ बाजार ज़लील किया था किसी अपने स्वार्थ क लिए तूने उसके प्यार को मार दिया था अब किसी तो अपना हक़ जमा रही ही जब क तो उसको अपना केहनी का हक़ खू चुकी ही.

इंदू जो क तब सी चुप खरी थी अब उसके लिए सब्र करना मुश्किल हो रहा था.

इंदू:- यह सब क्या ही तुम सब पेहली सी एक दूसरी को जानते हो.?

मैं:- मैं आपको बाद में बताता हूँ.

रश्मि:- हाँ ममी बोहत भूक लगी ही पेहली कुछ कहती हैं..

मैं बिना किरण की तरफ देखी अमित क साथ सामान गारी तक लय क आज्ञा.

सब गारी में बेथ गए अमित मेरी साथ यज्ञ बेथ गया था सब पिच्य बेथ गए सब क चेहरी पी ख़ुशी थी बीएस किरण Hi दुखी थी जो ऊपर सी खुश होने का नाटक क्र रही थी और चोरी चोरी नज़रूँ सी सैम को देख रही थी.

मैं सीधा देख क गारी चला रहा था और अमित क साथ बातें क्र रहा था.

कुछ देर में हम एक रेस्टुरेंट क बाहिर थय.

हम अंदर गए और बेथ गए और खाना आर्डर करनी लगी पीने क लिए सब अपनी अपनी पसंद की चीज़ें मंगवा रही थय

वेटर:- मम आपकी लिए.?

किरण:- चाय.

वेटर:- शकर मैडम ?

सैम:- 2.5 चमच.

यह बात मेरी मुँह सी खुद बा खुद निकल गई थी मैं यह बोलना नहीं चाहता था लेकिन अपने आप निकल गया.

सब अपनी बातून में लगी थय किसी न्य ज़्यादा नोटिस नहीं किया. लेकिन जिसके लिए बोलै था शायद वह समझ गई.

किरण यज्ञ कुछ नहीं बोलती बीएस नज़रें झुका क आंसूं साफ़ क्र लेती ही

िद्र मैं इग्नोर क्र क बातून में लग गया लेकिन अचानक अमित न्य ऐसा सवाल क्र लिया किस सी मेरी आंखों में आंसूं आ गए.

अमित:- भाई अभी किधर ही उसको भी लय अत.

अमित क ऐसी सवाल पी मेरा हाथ रुक गया.

अमित:- सब ठीक तो है न तो रोने क्यू लगा.?

सब इधर देल्हनी लगती हैं.

मैं कुछ नहीं बोलै बीएस अमित को गली लगा क रोने लगा आज मैं अमित सी इतनी देर बाद मिला लेकिन अभी को कभी नहीं मिल पाऊँ इस एहसास सी hi मेरी आंखें नुम होगी और मेरी मुँह सी बीएस यह निकला.

मैं:- वह कहता था न क वह हंसी यज्ञ रही गए वह बोहत यज्ञ चला गया हामी चोर क.

अमित:- क्या मतलब चोर क मैं उसी समझाऊँ गए तो बता कहाँ ही.

शायद वह भी समाजः चूका था लेकिन समझना नहीं चाहता था

मैं:- वह हामी चोर क चला गया अमित वह चला गया.

जब बुआ और सब न्य सुना तो वह भी रोने लगी लेकिन इंदू उसको जानती नहीं थी वह संभालनी लगी सबको.

बुआ:- यह सब किसी हुवा.?

मैं न्य रोते हुवे साडी दास्ताँ सूना दी जैसी सुन क सब को और दुलह हुवा.

फिर किसी का डिल नहीं किया कहानी का इसी लिए सब वापिस हवेली की तरफ चली गए इंदू न्य पोचनय की कोशिश की मैं न्य उसको समझा क बाद में बात करनी को कह दिया. वह भी आराम सी मान गई

शाम को हम हवेली पोहंच गए..

तो बे कंटिन्यू.
 
अपडेट NO.79


हम शाम को हवेली पोहंच गए जहाँ सब बाहिर खरी इंतज़ार क्र रही थय हमारा.

मैं न्य गारी हवेली क गेट क बाहिर खरी की और सब उत्तर गए.

रानी और जानकी थाली लय क ए उनका वेलकम करनी क लिए.

हम सब अंदर चली गए सब बाहिर हॉल में बेथ गए लेकिन मैं वहां सी सीधा कमरे में चला गया क्यू क मुझी अभी खुद को थोड़ा मज़बूत करना था सामना करनी क लिए.

मैं कमरे में आया और बीएड पी सर पाकर क बेथ गया अभी थोड़ी देर hi होइ थी क किसी न्य मुझी हिलाया जिस सी मैं होश में आया. मैं न्य नज़रें उठा क देखा तो यर्ह प्रीति थी.

मैं:- अरे आप कब ए इधर.?

परीति:- जब आप अपनी सोचो में गम थय क्या बात ही.? किन सोचो में गम हैं.?

मैं:- कुछ नहीं बीएस वैसी hi थोड़ा सोच रहा था कुछ आप बताओ किसी आना हुवा.? आज भी कोई परीक्षा लेनी है.?

प्रीति:- मैं हमेशा थोड़ी न परीक्षा लेती हूँ बीएस आपसी मिललंय का डिल किया तो आ गई.

मैं:- ाचा जी हुसंसय मिललंय का डिल परियोँ गए भी करता ही.? अभी ितबी अछि किस्मत कहाँ मेरी....

प्रीति:- आपसी मिललंय का डिल तो पूरा परिस्तान का करता ही.

मैं:- मतलब.?

प्रीति:- कुछ नहीं अब मैं चलती हूँ.

मैं:- अरे रुको कहाँ जा रही हो.?

प्रीति:- मैं किसी को बिना बताये आ गई हूँ अब चलती हूँ वर्ण दांत पारी गई.

मैं:- O.k जैसी मर्ज़ी आपकी.

वह एक प्यारी सी स्माइल दी क चली गई.

तभी कोई कमरे में आया. यह रानी थी.

रानी:- अरे उप्पेर क्यू आ गए आप सब नीची पॉच रही हैं.

मैं:- बीएस वैसी hi मूड थोड़ा ऑफ था.

रानी:- मूड क्यू ऑफ था.? कुछ हुवा क्या.?

मैं:- नहीं बीएस वैसी hi.

रानी:- नीची खाना रेडी ही अजैये नीची.

मैं:- हम्म चलो मैं फ्रेश होकय अत हूँ.

रानी चली गई.

मैं वाशरूम चला गया और फ्रेश होकय कमरे सी निकल क सिरियोँ क पास आया तो दोस्सरी तरफ सी किरण को आती देखा जिसको देखती hi मेरी डिल में अजीब सा दर्द हुवा और बातें याद आगे साडी.

वह भी मेरी तरफ देख रही थी और आंखों में पश्ताप था उसकी लेकिन मैं शायद समझना नहीं चाहता था इस बात को.

इसीलिए मैं नज़रें नीची क्र क वहां सी निकल गया.

नीची सब टेबल पी बैठी थय और भैया भी आ गए थय

मैं जा क अमित क साथ बेथ गया और खाना स्टार्ट क्र दिया किरण भी आ क बेथ गई.

सब कहती हुवे बागें क्र रही थय और सगाई की तयारियोँ की बातें चल रही थी.

जानकी और भैया न्य जाने की तयारी क्र ली थी और वह रेडी होने चली गए थय.

अब सगाई क लिए बीएस 5 दिन थय और जानकी दीदी और भैया 2 दिन में वापिस अन्य को कह रही थय.

मैं उनको समझा दिया था क क्या करना ही और घर पी मेरी बात न बतानी को कहा.

कुछ देर बाद वह दोनों निकल गए और साब लोग आराम करनी क लिए चली गए और मैं भी सू गया.

तो बे कंटिन्यू.

Note:-Sorry फॉर शार्ट अपडेट पहला लिखा हुवा था अपडेट वह देल होगया था इसी लिए इतना hi लिख पाया.
 
अपडेट NO.80


मेरी आंख सीधा रात को 7 बाजी खुली मैं उठ क देखा तो रानी सामन्य अपने बल बना रही थी जो अभी अभी नाहा क निकली थी.

मैं उसमें खो सा गया था जैसी वह अपने बलून को सवार रही थी चेहरा बिलकुल मस्सों आंखों में अजीब सी ख़ुशी.

उसको नहीं पता था क मैं उसको देख रहा हूँ. जब वह उतनी लगी तब उसकी नज़र मुझपी पारी मैं उसको अभी भी घूरय जा रहा था.

वह थोड़ा शर्मा गई और आंखें नीची क्र ली अपनी. जिस सी मेरा ध्यान हटा ुसपय से.

मैं बीएड सी उठा और वाशरूम जाने लगा जाती जाती रुक गया और पलट क रानी सी कहा.

मैं:- तुम बोहत ख़ूबसूरत हो.

यह कह क मैं वाशरूम में चला गया.

कोई 15 मं बाद नाहा क बाहिर आया तो सामन्य मेरी शर्ट और पेण्ट पारी थी बीएड पी यह रानी न्य hi किया होगा.

मैं न्य कापरी पेहेन लिए और नीची चला गया.

नीची सब बैठी थय हॉल में बातें क्र रही थय भाग्य और रश्मि गायब थय शायद किचन में होंगे.

मैं जा क सीधा बुआ क पैसा बेथ गया.

बुआ:- आज्ञा बचा नींद किसी रही.?

मैं:- बरिया थी मस्त सोया.

कृष्णा:- लता टुन्नाय बताया क्यू नहीं क तो पेहली सी जानती है दामाद जी को.

लता:- भैया अपने पूछा hi नहीं यह अमेरिका में मिला था जब हम नई नई गए थय वहां और अमित का दोस्त बन गया इस लिए फिर आना जाना लगा रहता था इसका.

कृष्णा:- तुमनी कभी बताया नहीं क अमेरिका भी गए हो.?

मैं:- अंकल मैं जल्दी hi वापिस आज्ञा था. इस लिए ज़रूरी नहीं समझा बताना.

मैं बात को ज़्यादा नहीं बढ़ाना चाहता था ताकि कोई और बात न खुल जाये.

तभी किठन सी भाग्य और रश्मि चाय लय अति होइ दिखी.

सब क लिए बना क ले थी वह चाय रानी न्य खरी होकय सब को चाय पकरै जब मेरी तरफ की तो मैं बोलै.

मैं:- मैं चाय नहीं पिता. बताया तो था.

तभी रश्मि बोली.

रश्मि:- तो और चाय नहीं पिता.? स्पेशल बनवा क पितय थय तो और रानी....

वह अचानक कुछ ज़यादा बोल गई थी जिस्पी बुआ न्य उनका हाथ पाकर लिया और सब मेरी तरफ दुखण्य लगी.

मैं:- W....Woh तब की बात अलग थी लेकिन अब नहीं पि सकता.

तभी किरण को वह बात याद आ गई जब उसनी सैम को कहा था क मुझसी वडा करो जब तक मैं नहीं कहूँ गई चाय नहीं पियो गए.

और उसकी आंखों में सी 2 बूँद पानी टपक गया लेकिन्न्कुच बोली नहीं.

शांति:- अरे किरण तो क्यू चुप ही जब सी ी ही बरी चुप चुप रहती ही कोई बात ही क्या.?

किरण:- अरे नहीं मस्सी सब बरिया ही बीएस थोड़ा सा जेटलैग हुवा था.

भाग्य:- वैसी क्या क्या किया वहां तुम लोगों न्य.?

और सब लड़कियां अपनी बातून में लगी होइ थी और मैं अमित क साथ बाहिर आज्ञा हवेली क.

ुर कुछ देर टेहळणी लगी और बेटों करनी लगी और थोड़ा इमोशनल होगये थय अपनी बातून को याद क्र क फिर उसको नींद आ गई और वह जा क सू गया और मैं चाट पी चला गया और आस्मां मून तरूण का खूबसूरत नज़ारा लेने लगा और साथ साथ गाने भी सुन रहा था.

तभी किसी क उप्पेर अन्य क लिए का एहसास हुवा मुझी लगा अज्ज फिर रानी ी होगी लेकिन मैं गलत था.

यह किरण थी जो अपना सर नीची क्र क आराम आराम सी उप्पेर आ रही थी.

मैं न्य एक नज़र उधर देख अभी नज़रें मिलती उस सी पेहली hi मैं न्य नज़रें आस्मां की तरफ क्र ली.

किरण उप्पेर आ क खरी होगी और अपने हथून को आपस में रगड़ने लगी और हिम्मत इकठा करनी लगी बोलने क लिए.

उसनी अपनी साडी हिममय जूता क बोलै.

किरण:- K...Kya मैं अपसेट बात क्र सकती हूँ.

उसकी आवाज़ में दार पश्ताप और गमी दोनों क इसरत थय.

मैं उसकी आवाज़ सुन क वहाँ सी जाने लगा लेकिन तभी वफ बोली.

किरण:- मैं रानी क बारी में बात करनी ी हूँ.

जैसी सुन क मेरी पेअर रयक गए क रानी क बारी में क्या बात करनी ही.?

मुझी रुका देख क वह पलट गई. और बोलने लगी.

किरण:- रानी मो हम्र्य बारी में कुछ न पता चली तो ाचा रही गए.

मैं यह बात सुन क हल्का सा मुस्कुरा दिया. और बोलै.

मैं:- हमारी बिच था क्या जो उसको पता चली गए.?

किरण:- कुछ तो था न.

मैं:- हमारी बिच एक गलत फेहमी थी जो दोनों की दूर होगी थी उसदिन.

किरण:- I'M सॉरी मैं बहक गई थी.

मैं:- 2 कोड़ी क इंसान को सॉरी बोल क लफ्ज़ जाया मात करो.

किरण रोने लगी. और रट हुवे बोली.

किरण:- मैं न्य बोहत धूड़ा था आपको पगलून की तर्हां.

मैं:- मुर्दो को ज़िंदा में ढूंढो की तो यह hi हल होगा.

किरण:- प्लीज ऐसा मात कहिये.

मैं और कुछ बिना बोले वहां सी चला गया क्यू क उस सी ज़यादा मैं वहां नहीं रुक सकता था.

मैं अपने कमरे की तरफ जा रहा था क रस्ते में किसी न्य मुझी खेच लिया और जल्दी सी दरवाज़ा बंद क्र लिया.

यह इंदू थी.

उसनी दरवाज़ा बंद किया और जब पलटी तो वह बोहत सेक्सी अंदाज़ में थी लेकिन जैसी hi उसने मेरी आंखों में ांसोइ देखी तो वह तरप गई एक.

और मेरी पास आ क आंखें साफ़ क्र क बोली.

इंदू:- क्या हुवा रू क्यू रही हैं.?

मैं:- कुछ नहीं मैं ठीक हूँ.

इंदू:- नहीं रोइ क्यू रही हैं बताओ ापमो मेरी कसम.

उसने अपनी कसम दी दी जिस क आज्ञा मुझी घुटने ताकने पारी.

मैं न्य जल्दी क इंडोक को गली लगा लिया और रोने लगा शायद मुझी इस वक़त इसकी सब सी ज़्यादा ज़रूरी थी जिसके गली लग क मैं रू सकता और अपना दर्द बता सकूं.

और इसी लिए मैं न्य अपनी और किरण की साडी कहानी इंदू को बता दी और फिर रोने लगा उसनी मुझी बीएड पी बिठा दिया और पानी दिया.

इंदू:- वह ऐसा किसी क्र सकती ही आपके साथ. मैं उस सी एक बार पोचून गई ज़रूर.

मैं:- नहीं उस सी नहीं पोछना प्लीज मैं नहीं चाहता क वह बात खोले.

इंदू मेरी हालत समझ गई थी इसी लिए वह कुछ नहीं बोली बीएस अपने आप को संभालनी का कह क दिया और मैं इंदू क कमरे सी निकल क रानी क कमरे में चल गया जहाँ वह नीची ज़मीन पी गदा बिछा क सू रही थी और मैं भी जा क उसके साथ सू गया.

तो बे कंटिन्यू...

नोट:- अज्ज एक और अपडेट ए गए तिमेंग कन्फर्म नहीं ही.
 
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