hotaks444
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रात में कोई घटना विस्तार से बताने लायक नहीं है आज भी कामेश ने अपनी थकान के आगे कामया को भुला दिया था और कामया को भी जैसे कोई फरक नहीं पड़ता था वैसे ही हमेशा की तरह सुबह और फिर खाने का समय भी हो गया कामया ने भी पापाजी और मम्मीजी के साथ ही खाना खा लिया पर खाने की टेबल पर जो नई बात खुली वो थी मम्मीजी के तीर्थ जाने की आज मम्मीजी के साथ उसे शापिंग को जाना था लाखा आ जाएगा और फिर
पापाजी- बहू चली जाना इनके साथ या कोई कोई काम है
कामया- जी नहीं चली जाऊँगी
मम्मीजी हाँ… चलना नहीं तो समझ ही नहीं आता कि क्या लो
कामया- जी मम्मीजी पर जाना कब है परसो सुबह
मम्मीजी- पर तू अकेली रह जाएगी बहू
कामया- जी कोई बात नहीं आप तो जल्दी आ जाएँगी ना
पापाजी- अरे कहाँ महीना भर तो लगेगा ही या फिर ज्यादा भी हो सकता है लंबा टूर अरेंज किया है तुम्हारी सास ने
मम्मीजी- हाँ… लंबा टूर कहाँ जाती हूँ में एक टूर अरेंज किया उसमें में भी
पापाजी- अरे अरे नहीं भाई हमने कब कहा की गलत किया बिल्कुल जाना चाहिए
मम्मीजी- और क्या कुछ हमारे मंडली के लोग है और होगा तो गुरुजी के आश्रम भी जाएँगे यहां से गये उन्हें बहुत दिन हो गये है कामया को भी मिलाना है
पापाजी- हाँ… बोलना कि अब बहुत घूम चुके अब इस आश्रम की शोभा बढ़ाओ
और फिर खाना खाकर पापाजी तो शोरुम चले गये और कामया और ममी जी अपने कमरे में तैयार होने लाखा काका पापाजी को छोड़ कर तुरंत वापस आएँगे सोचकर दोनों जल्दी से तैयारी करने लगी कामया भी तैयार होते वक़्त सोच रही थी कि लाखा काका से जरूर मौका देखकर पूछेगी कि क्या बात है आज कल आते क्यों नहीं है
वो तैयार होते होते बहुत कुछ अपने आपसे बातें करती जा रही थी पर एक बात तो तय थी कि वो आज लाखा काका से पूछकर ही दम लेगी तभी बाहर गाड़ी का हार्न सुनाई दिया
वो जल्दी से नीचे की ओर भागी जाते हुए भीमा की भी नजर उसपर थी टाइट फिटिंग वाला चूड़ीदार पहना था बहू ने क्या खूब दिख रही थी मस्त कलर कॉम्बीनेशन था और सुंदर भी बहुत दिख रही थी जाते हुए बहू ने एक बार किचेन की ओर देखा भी था और उनकी नजर भी मिली थी पर आज भीमा जानता था कि आज वो कुछ नहीं कर सकता
मम्मीजी और बहू बाहर खड़ी कार तक पहुँच गये थे बाहर लाखा गाड़ी का दरवाजा खोले नीचे सिर किए खड़ा था मम्मीजी की ओर कामया की तरफ का दरवाजा खुला था कामया की नजर जैसे ही लाखा पर पड़ी वो एक बार सिहर उठी पर जल्दी से अंदर बैठ गई और लाखा भी भागकर अपनी सीट पर पहुँच गया गाड़ी सड़क की और भागने लगी थी पर कामया का पूरा ध्यान लाखा की ओर ही था लाखा भी नजर चुरा कर कभी बहू की ओर देख लेता था पर उसके चेहरे पर एक चिंता की लकीर साफ देखने को मिल रही थी
पर कामया का ध्यान मम्मीजी की ओर भी था जो कि कुछ कहती भी जा रही थी और बहू की ओर देखकर मुस्कुराती भी जा रही थी वो बहुत खुश लग रही थी कि आज बहुत दिनों बाद घर से बाहर शापिंग को जो निकली थी बहुत कुछ खरीदना था पर कामया का पूरा ध्यान तो सिर्फ़ और सिर्फ़ लाखा काका की ओर ही था वो बार-बार उनकी तरफ ही देख रही थी पर काका की नजर एक दो बार ही उससे टकराई और वो पूरा ध्यान गाड़ी चलाने की ओर दे रहे थे
आखिर कार गाड़ी एक शापिंग कॉंप्लेक्स के सामने रुकी तो भागकर मम्मीजी की तरफ के दरवाजे को खोले खड़ा हो गया पर कामया की ओर आया ही नहीं कामया भी अपनी तरफ का डोर खोलकर मम्मीजी के साथ हो ली और काम्पलेस में घुस गये बहुत देर तक शापिंग चलती रही और दोनों के हाथ भर गये थे एक शॉप पर जाकर मम्मीजी एक सोफे पर बैठ गई तो शाप के मालिक ने मम्मीजी से कहा
शाप कीपर- अरे सेठानी जी आप कैसी है बहुत दिनों के बाद
मम्मीजी- हाँ… भैया आज कल तो बस घर पर ही रहना होता है अच्छा सुनो किसी को भेज दो जरा यह समान बाहर गाड़ी में रख आए
शाप कीपर- जी क्यों नहीं
और उसने जोर से एक आवाज लगाकर एक आदमी को बुलाया और इशारे से समान को गाड़ी में रखने को कहा
वो आदमी- जी कौन सी गाड़ी है
कामया- जी चलिए में बताती हूँ
शाप कीपर- अरे मेडम आप क्यों तकलीफ करती है गाड़ी का नंबर बता दीजिए वो ढूँढ लेगा
कामया- जी नहीं में बता देती हूँ और रखवा भी देती हूँ
मम्मीजी- मेरी बहू है
शाप कीपर- जी नमस्ते मेडम
और कामया उस आदमी को लेकर बाहर पार्किंग की ओर चली और अपनी गाड़ी को ढूँढने लगी
दूर एक कोने में उसे अपनी गाड़ी दिख गई और कामया ने उस आदमी को इशारे से अपनी गाड़ी दिखाई और उसके पीछे-पीछे गाड़ी की ओर चल दी
गाड़ी के पास जैसे ही पहुँचे तो लाखा जल्दी से बाहर निकला और डिकी को खोलकर खड़ा हो गया और उस तरफ देखने लगा जिस तरफ से बहू आ रही थी पर उसकी नजर में मम्मीजी कही नहीं आई
वो आदमी समान रखकर जाने लगा तो कामया ने कहा
कामया- और भी समान मम्मीजी के पास रखा है वो भी ले आओ
वो आदमी- जी मेमसाहब और दौड़ता हुआ चला गया
अब वहां लाखा काका और कामया ही थे
लाखा ने एक नजर बहू की ओर डाली और अपना सिर झुकाए चुपचाप खड़ा हो गया
कामया- काका क्या बात है
लाखा- जी कुछ नहीं वो बस (उसकी आवाज गले से नहीं निकल रही थी )
कामया- पर आप गाड़ी सिखाने क्यों नहीं आ रहे कोई तो बात है
लाखा की आँखों में कुछ परेशानी के भाव वो साफ देख सकती थी पर काका के कुछ ना कहने से उसके मन में भी एक डर घुस गया था वो चुपचाप खड़ी काका की ओर ही देखती रही लाखा भी कभी इधर कभी उधर देखता हुआ कुछ अपने हाथ को इधर-उधर कर रहा था पर उसके इस तरह से करने से कामया को और भी चिंता होने लगी कि कही यह बीमार तो नहीं या फिर कुछ और परेशानी
वो कुछ इधर-उधर होने लगा था शायद वो बचना चाहता था कामया को जबाब देने से पर कामया तो वहां खड़ी उसी की ओर देख रही थी जब कामया को जबाब नहीं मिला तो वो फिर से बोली
कामया- आपने बताया नहीं कि क्या बात है आप आज कल शाम को आते नहीं
लाखा- जी वो
कामया उसकी तरफ देखती रही
लाखा कुछ गुस्से में परेशान सा दिखता हुआ कुछ अटकते हुए और कुछ सकुचाते हुए बोला
लाखा- जी वो सब गड़बड़ हो गया बहू रानी
कामया- लेकिन हुआ क्या है बताएगे नहीं तो .......और अब तो कामया के चेहरे पर भी चिंता की लकीर खिंच गई थी
लाखा- जी असल में भोला को सबकुछ मालूम हो गया
और एक मुक्का डिकी पर चला दिया गुस्से में वो अब भी स्थिर खड़ा नहीं हो पा रहा था दो चार मुक्के उसने डिकी पर चलाता रहा पर उसका चेहरा देख साफ लग रहा था कि वो परेशान है
पापाजी- बहू चली जाना इनके साथ या कोई कोई काम है
कामया- जी नहीं चली जाऊँगी
मम्मीजी हाँ… चलना नहीं तो समझ ही नहीं आता कि क्या लो
कामया- जी मम्मीजी पर जाना कब है परसो सुबह
मम्मीजी- पर तू अकेली रह जाएगी बहू
कामया- जी कोई बात नहीं आप तो जल्दी आ जाएँगी ना
पापाजी- अरे कहाँ महीना भर तो लगेगा ही या फिर ज्यादा भी हो सकता है लंबा टूर अरेंज किया है तुम्हारी सास ने
मम्मीजी- हाँ… लंबा टूर कहाँ जाती हूँ में एक टूर अरेंज किया उसमें में भी
पापाजी- अरे अरे नहीं भाई हमने कब कहा की गलत किया बिल्कुल जाना चाहिए
मम्मीजी- और क्या कुछ हमारे मंडली के लोग है और होगा तो गुरुजी के आश्रम भी जाएँगे यहां से गये उन्हें बहुत दिन हो गये है कामया को भी मिलाना है
पापाजी- हाँ… बोलना कि अब बहुत घूम चुके अब इस आश्रम की शोभा बढ़ाओ
और फिर खाना खाकर पापाजी तो शोरुम चले गये और कामया और ममी जी अपने कमरे में तैयार होने लाखा काका पापाजी को छोड़ कर तुरंत वापस आएँगे सोचकर दोनों जल्दी से तैयारी करने लगी कामया भी तैयार होते वक़्त सोच रही थी कि लाखा काका से जरूर मौका देखकर पूछेगी कि क्या बात है आज कल आते क्यों नहीं है
वो तैयार होते होते बहुत कुछ अपने आपसे बातें करती जा रही थी पर एक बात तो तय थी कि वो आज लाखा काका से पूछकर ही दम लेगी तभी बाहर गाड़ी का हार्न सुनाई दिया
वो जल्दी से नीचे की ओर भागी जाते हुए भीमा की भी नजर उसपर थी टाइट फिटिंग वाला चूड़ीदार पहना था बहू ने क्या खूब दिख रही थी मस्त कलर कॉम्बीनेशन था और सुंदर भी बहुत दिख रही थी जाते हुए बहू ने एक बार किचेन की ओर देखा भी था और उनकी नजर भी मिली थी पर आज भीमा जानता था कि आज वो कुछ नहीं कर सकता
मम्मीजी और बहू बाहर खड़ी कार तक पहुँच गये थे बाहर लाखा गाड़ी का दरवाजा खोले नीचे सिर किए खड़ा था मम्मीजी की ओर कामया की तरफ का दरवाजा खुला था कामया की नजर जैसे ही लाखा पर पड़ी वो एक बार सिहर उठी पर जल्दी से अंदर बैठ गई और लाखा भी भागकर अपनी सीट पर पहुँच गया गाड़ी सड़क की और भागने लगी थी पर कामया का पूरा ध्यान लाखा की ओर ही था लाखा भी नजर चुरा कर कभी बहू की ओर देख लेता था पर उसके चेहरे पर एक चिंता की लकीर साफ देखने को मिल रही थी
पर कामया का ध्यान मम्मीजी की ओर भी था जो कि कुछ कहती भी जा रही थी और बहू की ओर देखकर मुस्कुराती भी जा रही थी वो बहुत खुश लग रही थी कि आज बहुत दिनों बाद घर से बाहर शापिंग को जो निकली थी बहुत कुछ खरीदना था पर कामया का पूरा ध्यान तो सिर्फ़ और सिर्फ़ लाखा काका की ओर ही था वो बार-बार उनकी तरफ ही देख रही थी पर काका की नजर एक दो बार ही उससे टकराई और वो पूरा ध्यान गाड़ी चलाने की ओर दे रहे थे
आखिर कार गाड़ी एक शापिंग कॉंप्लेक्स के सामने रुकी तो भागकर मम्मीजी की तरफ के दरवाजे को खोले खड़ा हो गया पर कामया की ओर आया ही नहीं कामया भी अपनी तरफ का डोर खोलकर मम्मीजी के साथ हो ली और काम्पलेस में घुस गये बहुत देर तक शापिंग चलती रही और दोनों के हाथ भर गये थे एक शॉप पर जाकर मम्मीजी एक सोफे पर बैठ गई तो शाप के मालिक ने मम्मीजी से कहा
शाप कीपर- अरे सेठानी जी आप कैसी है बहुत दिनों के बाद
मम्मीजी- हाँ… भैया आज कल तो बस घर पर ही रहना होता है अच्छा सुनो किसी को भेज दो जरा यह समान बाहर गाड़ी में रख आए
शाप कीपर- जी क्यों नहीं
और उसने जोर से एक आवाज लगाकर एक आदमी को बुलाया और इशारे से समान को गाड़ी में रखने को कहा
वो आदमी- जी कौन सी गाड़ी है
कामया- जी चलिए में बताती हूँ
शाप कीपर- अरे मेडम आप क्यों तकलीफ करती है गाड़ी का नंबर बता दीजिए वो ढूँढ लेगा
कामया- जी नहीं में बता देती हूँ और रखवा भी देती हूँ
मम्मीजी- मेरी बहू है
शाप कीपर- जी नमस्ते मेडम
और कामया उस आदमी को लेकर बाहर पार्किंग की ओर चली और अपनी गाड़ी को ढूँढने लगी
दूर एक कोने में उसे अपनी गाड़ी दिख गई और कामया ने उस आदमी को इशारे से अपनी गाड़ी दिखाई और उसके पीछे-पीछे गाड़ी की ओर चल दी
गाड़ी के पास जैसे ही पहुँचे तो लाखा जल्दी से बाहर निकला और डिकी को खोलकर खड़ा हो गया और उस तरफ देखने लगा जिस तरफ से बहू आ रही थी पर उसकी नजर में मम्मीजी कही नहीं आई
वो आदमी समान रखकर जाने लगा तो कामया ने कहा
कामया- और भी समान मम्मीजी के पास रखा है वो भी ले आओ
वो आदमी- जी मेमसाहब और दौड़ता हुआ चला गया
अब वहां लाखा काका और कामया ही थे
लाखा ने एक नजर बहू की ओर डाली और अपना सिर झुकाए चुपचाप खड़ा हो गया
कामया- काका क्या बात है
लाखा- जी कुछ नहीं वो बस (उसकी आवाज गले से नहीं निकल रही थी )
कामया- पर आप गाड़ी सिखाने क्यों नहीं आ रहे कोई तो बात है
लाखा की आँखों में कुछ परेशानी के भाव वो साफ देख सकती थी पर काका के कुछ ना कहने से उसके मन में भी एक डर घुस गया था वो चुपचाप खड़ी काका की ओर ही देखती रही लाखा भी कभी इधर कभी उधर देखता हुआ कुछ अपने हाथ को इधर-उधर कर रहा था पर उसके इस तरह से करने से कामया को और भी चिंता होने लगी कि कही यह बीमार तो नहीं या फिर कुछ और परेशानी
वो कुछ इधर-उधर होने लगा था शायद वो बचना चाहता था कामया को जबाब देने से पर कामया तो वहां खड़ी उसी की ओर देख रही थी जब कामया को जबाब नहीं मिला तो वो फिर से बोली
कामया- आपने बताया नहीं कि क्या बात है आप आज कल शाम को आते नहीं
लाखा- जी वो
कामया उसकी तरफ देखती रही
लाखा कुछ गुस्से में परेशान सा दिखता हुआ कुछ अटकते हुए और कुछ सकुचाते हुए बोला
लाखा- जी वो सब गड़बड़ हो गया बहू रानी
कामया- लेकिन हुआ क्या है बताएगे नहीं तो .......और अब तो कामया के चेहरे पर भी चिंता की लकीर खिंच गई थी
लाखा- जी असल में भोला को सबकुछ मालूम हो गया
और एक मुक्का डिकी पर चला दिया गुस्से में वो अब भी स्थिर खड़ा नहीं हो पा रहा था दो चार मुक्के उसने डिकी पर चलाता रहा पर उसका चेहरा देख साफ लग रहा था कि वो परेशान है