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“तू तो यहां मजे कर रहा था ठाकुर और मै सूरजगढ़ के चप्पे-चप्पे में तुझे तलाश कर रहा था। तूने गढ़ी की सुरक्षा के लिये भैरव का फार्मूला अपनाया, जिन्हें मैंने कैद कर लिया।
उसके बाद तेरी बीवी को गढ़ी में जाकर भोगा। बेचारी मुझे देखते ही अचेत हो गई थी। नमूने के लिये मैं उसकी साड़ी, ब्लाउज और अंगिया साथ में गले का हार अपने साथ ले आया, जो मैं तुझे सबूत के तौर पर दिखाना चाहता था।”
“नहीं….।” वह चीख पड़ा।
“और सुनेगा तो पागल हो जाएगा। तो सुन मैंने गढ़ी को राख की ढेरी में बदल दिया था। इतना ही नहीं तेरे एकलौते बच्चे को कैद कर लाया था पर मुझे दुख है…।”
“मेरा बच्चा... मेरे बच्चे को क्या हुआ….।”
“कुमार सिंहल को मैं यहां ला रहा था…. उसकी मौत का जिम्मेदार मैं नहीं हूं - वह भयानक मलेरिया से पीड़ित हो कर मर गया था।”
“क... मी...ने…।” ठाकुर जोरों से चिल्लाया…। वह सचमुच पागल हो गया था - “तूने मेरी दुनिया उजाड़ दी... तूने मुझे बर्बाद कर दिया। कुमार ने तेरा क्या बिगाड़ा था हरामजादे….। तूने गढ़ी के वंशज को मिटा दिया।”
“जब तू यह पूछता है तो मुझे बड़ी प्रसन्नता होती है। यही सवाल मैंने भी तो किया था कि मैंने तेरा क्या बिगाड़ा था। पर ऊपर वाला शायद जो करता है, वह अच्छा ही करता है। अगर तुमने मुझे जालिम ना बनाया होता तो यह धन मुझे कैसे मिलता... अब तो ठाकुर तुझे कुछ समय और जीना है - चाहे खुशी से जी ले चाहे रो कर…।”
ठाकुर हथेलियां रगड़ रहा था।
उसका वश चलता तो उसी वक्त मुझे ठिकाने लगा देता। परंतु मेरी रिवाल्वर एक पल के लिये भी उससे विमुख नहीं हुई थी। और वह बाज की तरह मुझ पर झपट्टा मारना चाहता था। क्रोध के कारण उसका सारा शरीर कांप रहा था।
उसके बाद तेरी बीवी को गढ़ी में जाकर भोगा। बेचारी मुझे देखते ही अचेत हो गई थी। नमूने के लिये मैं उसकी साड़ी, ब्लाउज और अंगिया साथ में गले का हार अपने साथ ले आया, जो मैं तुझे सबूत के तौर पर दिखाना चाहता था।”
“नहीं….।” वह चीख पड़ा।
“और सुनेगा तो पागल हो जाएगा। तो सुन मैंने गढ़ी को राख की ढेरी में बदल दिया था। इतना ही नहीं तेरे एकलौते बच्चे को कैद कर लाया था पर मुझे दुख है…।”
“मेरा बच्चा... मेरे बच्चे को क्या हुआ….।”
“कुमार सिंहल को मैं यहां ला रहा था…. उसकी मौत का जिम्मेदार मैं नहीं हूं - वह भयानक मलेरिया से पीड़ित हो कर मर गया था।”
“क... मी...ने…।” ठाकुर जोरों से चिल्लाया…। वह सचमुच पागल हो गया था - “तूने मेरी दुनिया उजाड़ दी... तूने मुझे बर्बाद कर दिया। कुमार ने तेरा क्या बिगाड़ा था हरामजादे….। तूने गढ़ी के वंशज को मिटा दिया।”
“जब तू यह पूछता है तो मुझे बड़ी प्रसन्नता होती है। यही सवाल मैंने भी तो किया था कि मैंने तेरा क्या बिगाड़ा था। पर ऊपर वाला शायद जो करता है, वह अच्छा ही करता है। अगर तुमने मुझे जालिम ना बनाया होता तो यह धन मुझे कैसे मिलता... अब तो ठाकुर तुझे कुछ समय और जीना है - चाहे खुशी से जी ले चाहे रो कर…।”
ठाकुर हथेलियां रगड़ रहा था।
उसका वश चलता तो उसी वक्त मुझे ठिकाने लगा देता। परंतु मेरी रिवाल्वर एक पल के लिये भी उससे विमुख नहीं हुई थी। और वह बाज की तरह मुझ पर झपट्टा मारना चाहता था। क्रोध के कारण उसका सारा शरीर कांप रहा था।