Incest कर्ज और फर्ज - एक कश्मकश - Page 2 - SexBaba
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Incest कर्ज और फर्ज - एक कश्मकश

वो बोली मजा तो दूर मुझे ऐसा लग रहा था की आप मॉल में प्रीति दीदी के देवर से जो मैने हँसकर बात करने की गुस्सा मुझ पर निकाल रहे हो। और मेरा रेप कर रहे हो।

आप मुझे बस ये बताए आज जो हुआ उसमे गलती किसकी है।

मुझे उसके इस सवाल का जबाब समझ नही आ रहा था। उसकी आँखों में आँसू थे। मुझे gulity फील हो रही थी मै सोच रहा था शायद मुझसे गलती हो गयी मुझे भी उसके साथ जबरदस्ती नही करनी थी। मै उसको बोला मै तुम पर कोई गुस्सा नही निकाल रहा था। मै तुम्हारा पति हू और तुमसे बेइंतहा प्यार करता हू। और तुम्हे खोने से डरता हू। अब चाहे तुम इसे जलन समझो या शक।

"दुनिया मै जो किसी से हद से ज्यादा प्यार करता है वो डरता भी है और अपने डर को छिपाने के लिए ही शक करता है"

कुसुम बिना कुछ बोले लाइट बंद करके मेरी तरफ पीठ करके आँख बंद करके सोने लगी। मुझे नींद नही आ रही थी रात भर करवट बदलते सुबह हो गयी। मै उठा घड़ी में देखा साढ़े छे बजे थे, मैने कुसुम के चेहरे की तरफ देखा वो एक मासूम भोली प्यारी गुड़िया की तरह सो रही थी, उसके गालो पर आँसू के निशान चमक रहे थे। मैने उसके गालो और माथे को प्यार से चूमा और बाथरूम चला गया। वापस आकर कपड़े पहनकर बेडरूम से बाहर जाने से पहले कुसुम के हाथ जो चादर में से बाहर निकल रहे थे। अपने चेहरे, गाल, और माथे से लगाने के बाद चूमकर चादर से ढक दिये।

सुबह के साढ़े सात बज गये थे हॉल में मम्मी पापा मंदिर जाने लिए निकल रहे थे। पापा मुझसे बोले बेटा अपनी बाइक की चाबी देना, मेरी स्कूटी रिंकी स्कूल ले गयी है। मैने कहा पापा आपने उसको स्कूटी क्यो दे दी। उसको स्कूटी चलाना कब आने लगा। कोई एसिडेंट कर दिया तो ऊपर से लाइसेंस भी नही है। पापा बोले अपनी मम्मी से पूछो उनके कहने पर ही मैने उसको स्कूटी चलाना शिखाई और आज चाबी दी है। तेरी मम्मी और रिंकी तो एक दूसरे की पक्की सहेली बन गयी है। उसकी हर बात मानती है जाने कोनसा जादू रिंकी ने कर दिया है।तेरी मम्मी और रिंकी दिन रात मोबाइल में नये नये कपड़े, मैकेप करके वीडियो बनाती रहती है और तो और भर रात अपने कमरे में दोनों सोती भी है की नही बस मुझे तो दोनों की हसी मस्करी की आवाजे आती है।

मम्मी पापा से बोली अब बस करो बहुत हो गयी शिकायत और मुझसे बोली चल हमारे साथ मंदिर। वो सब समझ गयी थी रात को मेरे और कुसुम के बीच झगडा हुआ है। मै मम्मी पापा के साथ मंदिर चला गया। मंदिर में दर्शन करने के बाद हम लोग थोड़ी देर मंदिर के बाहर बरामदे में बैठ गए। मम्मी मेरा उदास चेहरा देखकर बोलि बेटा तुम गुरु माता की बातो पर विश्वास करते हो मैने कहा हा वो जो बताती है वो सच होता है।

मम्मी बोली फिर तुम कुसुम को समझाओ कि वो पति व्रत पूजा शुरू कर दे। अभी समय है। तुम दोनों की जिंदगी में ये झगड़े कही ज्यादा बढ़ गये तो तुम दोनों को परेशानी होगी। मै सास हु उसे ज्यादा कुछ कहूंगी तो सब कहेगे कि अपनी बहू को परेशान करती हू। मैने मम्मी से कहा ठीक है।

फिर हम लोग घर पहुँच गए और नास्ता करके मै कॉलेज के लिए चलने लगा तो कुसुम ने मुझे टिफिन देते हुए मेरी तरफ बड़ी ही मासूमियत से देखने लगी मुझे उससे नजरे मिलाने में शर्मिंदगी फील हो रही थी। उसकी नजरों में मुझे रात का सवाल दिखा जिसका जबाब शायद मेरे पास नही था। मै टिफिन लेकर कॉलेज के लिए निकल गया।

मेरा कॉलेज में पढ़ाने में मन नही लग रहा था। दोपहर के दो बजे के लंच में मैने टिफिन खोला कि मेरे साले कुसुम का भाई का फोन आ गया। मैने कहा बोल रिंकू तो वो रुवासी आवाज में बोला अभी आप पुलिस थाने के पास आ जाओ। मै ये सुनकर तुरंत उसके पास चला गया। वो मुझे देखकर आँखों में आँसू लिए मेरे सामने खड़ा था। मैने पूछा क्या हुआ।

तो वो बोला जूली कुसुम की छोटी बहन अंदर है उसको ले आओ। मै बहुत डर रहा था क्योकि पहली बार थाने में जा रहा था। अंदर बहुत सारे लड़के लड़किया अपना मुह ढाके खड़े हुए थे। तभी सामने से एक लेडी इंस्पेक्टर आयी और मुझे गौर से देखने लगी। मुझसे बोली तुम अरुण हो मैने कहा हा। मै उसको देखकर डर गया तो बोली अरे पहचाना नही मुझे मुझे हम एक ही कॉलेज में थे। मै उसे पहचान गया और बोला हा। वो बोली अरुण तुम कैसे आये मैने कहा वो जूली नाम की लड़की है। तो उसने जूली को आवाज दी।

जूली को देखकर वो बोली ये होटल में एक लड़के के साथ बिना कपड़ो के नंगी पकड़ी गयी है। ये तुम्हारी कौन है मैने कहा हिचकिचते हुए कहा मेरी पत्नी की छोटी बहन और मेरी साली है। वो बोली क्या बात कर रहे हो तुमने कैसे परिवार में शादी कर ली। मैने कहा हो गयी बस।

फिर मुझे वो थोड़ा साइड में लेकर आई और मोबाइल में वीडियो दिखाने लगी वीडियो में जूली बेड पर जीन्स पहने हुए ऊपर से पूरी नंगी खड़ी होकर fetish girl की तरह बड़े ही सेक्सी style में मटक रही थी। जूली के बड़े बड़े चूचे कसे हुए और छोटे डार्क चोकलेटी निप्पल सीधे खड़े हुए थे। कोई लड़का नंगा बेड पर लेटा था उसकी आवाज आ रही थी और उसकी टांगे और उसके हाथ लंड सेहलाता हुआ दिख रहा था। तभी होटल के रूम के दरवाजे की आवाज आई और वो दोनों डरते हुए वीडियो बंद हो गया।

वो इंस्पेक्टर मुझसे बोली तुम बताओ ये अगर इंटरनेट पर ये लड़का डाल दे तो तेरी साली की जिंदगी बर्बाद हो जायेगी। मैने कहा मै उससे बात करूँगा पर अभी आप इसे छोड़ दे प्लीज। वो बोली ठीक है मै इसे छोड़ देती हू पर इसकी अब जल्दी शादी करा दो।

मैने उसे thnks बोला और कहा तुम अपनी फैमिली के साथ कभी आओ घर पर। वो बोली जरूर।

मै इंस्पेक्टर के साथ अंदर गया उसने उस लड़के को बुलाया और उससे कहा अपना नाम पता काम बता वो बोला संजय, बाइक के शोरूम में जॉब करता हू।

संजय को देखकर मैने सोचा बहंचोद इस शकल वाले चूतिये से मेरी सुंदर साली पट कैसे गयी।

तभी एक लेडी जूली से बोली तुझे ये चूतिया ही मिला था ना ही इसकी शकल अच्छी है और ना ही ये गांडू के पास पैसा है। एक हजार रुपए दे रहा था कि मुझे छोड़ दो तेरे साथ जो करना है करो। तुझे आशकी करनी ही है तो अपने जीजा जैसा हैंडसम, स्मार्ट लड़का पटा लेती। जूली भी उस लड़के की तरफ घूर के देख रही थी।

"आज कल किसी लड़की के सामने अगर कोई दूसरी लड़की अगर उसके प्रेमी की शकल सूरत को बुरा कहे तो उस लड़की को भी अपना प्रेमी बुरा लगने लगता है"

ये ही हाल जूली का था, जूली ने उस चूतिये को एक थप्पड़ मार दिया और गुस्से में बोली हट गांडू।

तभी वो इंस्पेक्टर जूली पर चिलाते हुए बोली तुम्हे शर्म नही आती होटल में नंगी होकर अपनी हवस बुझाने के चक्कर मे अपनी और फैमिली के लोगो को की तो इज्जत मत खराब करो। अब जाओ यहा से आज अरुण के कहने पर छोड़ रही हू।

मै जूली को लेकर बाहर आ गया। मेरे साले ने उसे देखकर हाथ उठाने की कोशिश की पर मैने रोक लिया। उससे से कहा चल घर। वो बोला पापा हॉस्पिटल में admit है जूली कि खबर सुनकर गिर पड़े मैने कहा तो चलो हॉस्पिटल वो बोला आप दोनों जाओ मै आता हू।

मैने जूली को बाइक पर बैठाया और चल दिया, रास्ते में मै सोचने लगा मेरे ससुर जैसे गरीब लोग बहुत गलती करते है। पहले तो एक खूबसूरत औरत से शादी की पहली गलती फिर अपनी बीवी से भी ज्यादा तीन खूबसूरत लड़किया पैदा कर दी। बड़ी लड़की अपने उम्र से दोगुने के साथ चली गयी, छोटी वाली होटल में नंगी पकड़ी गयी। बीच वाली मेरे पास है जिसका एक रूप कल में मॉल में देख ही चुका हू।

" लड़कीयो का गरीब होना कोई गलती नही है, लेकिन खुबसूरत लड़कियों का गरीब होना बहुत बड़ी गलती है "

मुझे भूख लग रही थी मैंने रास्ते में जूली से कुछ खाते है फिर चलते है और बाइक एक lovers कैफे पर रोक दी और cabin में बैठकर खाने का ऑर्डर दे दिया। और जूली से बोला अब मुझे सब सच बताओ । जूली धीरे से डरते हुए बोली जीजाजी मै और संजय होटल में सेक्स कर रहे थे। मैने बीच में उसे टोकते हुए कहा।

जूली मै अभि की तुम्हारी सेक्स की कहानी नही पूछ रहा हू। मुझे शुरु से सब बताओ जिससे मै समझ सकू कि

आखिर गलती किसकी है।

जूली की शर्ट के दो तीन बटन शायद पिटाई में टूट गये थे जिससे उसकी सिलेटी रंग की ब्रा में कसे हुए चूचे उसकी शर्ट की खुली बटन वाली जगह में से दिख रहे थे। ये देखकर मेरा लंड हलचल करने लगा।

मैने इधर उधर देखा तो वेटर हमारा ऑर्डर लेकर आ रहा था तो मैने जल्दी से अपनी शर्ट उतारी और जूली से कहा तुम अपनी शर्ट वॉशरूम में बदल लो और मेरी पहन लो। वो अपनी चूची को देखकर तुरंत समझ और मेरी शर्ट अपने सीने से लगाकर चली गयी और मुझे अपनी शर्ट देते हुए बोली। जूली ने मुझे धीरे से दबी हुई आवाज में कहा जीजाजी आप बहुत अच्छे हो, मैने कहा कैसे वो बोलि मै बहुत डर गयी थी। पर आपने सब ठीक कर दिया। मुझे थोड़ी हसी आ गयी।

मै अब जीजा साली के रिश्ते वाले मजाक के मूड में आ गया और जूली को छेड़ते, चीढाते हुए बोला जूली सब ठीक से कहा हुआ कुछ और अच्छा भी हो सकता था। वो शर्मा गयी, हम दोनों mature जो थे। ये सुनकर जूली हसने लगी और उससे रहा नही गया और मेरे से चिपक्कर बैठ गयी उसने अपना एक हाथ मेरे हाथ में डाल दिया जिससे उसके बड़े और कसे हुए दूध् मेरे बाह से touch हो रहे थे। मेरा लंड उचकने लगा था। मैने उससे कहा जूली सच बताना ये सब कब और कैसे शुरु हुआ। जूली ने कहा जीजाजी आज मै आपको अपनी पूरी कहानी बताती हू।

मुझे दो साल पहले फेसबुक पर उस चूतिये संजय से मुलाकात हुई और हम बाते करने लगे। वो मुझे मिलने की बोलता पर मै मना कर देती। अभी आपकी दीदी की शादी हो गयी और उसने मुझे मिलने के लिए होटल में बुलाया वो असाम् से आया था। मैने उसकी बात मान ली।

मैने जूली से कहा तुम इतनी अकल नही है लड़का लड़की को होटल में किसलिए बुलाता है, छोटी बच्ची हो क्या।

जूली बोली मुझे पता है, वो क्या है कुसुम दीदी की शादी के बाद मै आठ दिन से उस लड़के से फोन सेक्स करने लगी थी। और मेरे अंदर भी उससे मिलने की बेताबी होने लगी थी। पर वो चूतिया निकलेगा मुझे नही पता था और ये सब हो गया।

मैने कहा जूली तुम इतनी सुंदर हो तुम्हे वो पसंद कैसे आ गया। जूली बोली मुझसे गलती हो गयी।

आज मेरी उम्र 26 के करीब हो गई है। पिचले कई सालो से मैंने लिंग नही देखा और ना ही मैंने उम्मीद की थी। इसलिए मै अपने आप को रोक भी नही पायी।

मै जब होटल में पकड़ गयी तो मैने सुसाइड करने का सोच लिया था।

लेकिन अब मुझे फिर से जीने की इच्छा हो रही है आपने मुझे कितना supprt किया काश अगर आप मेरे जीजाजी ना होते तो मैं आपसे शादी करती। इतना कह कर वो शांत हो गई।

मैने पूछा क्या हुआ कोई समस्या हो तो बताओ ना में हु ना pls।

वो बोलि जीजाजी nothing लेकिन मैने उसके दूध को दबना शुरू किया और उसकी शर्ट नीचे से उठा दी उसके निप्पल कड़क हो गए थे।

उसने फिर से मेरे लंड को पकड़ लिया और धीरे से बोली जीजाजी आपका लिंग ज़िप खोलकर बहार निकालो ना।

मैंने अपने जींस की बटन खोल दी।

उसने फुर्ती से मेरा ज़िप खोल कर मेरे चड्डी में से मेरा लंड बहार निकल लिया और जोर से मुट्ठी भर कर पकड़ लिया। जैसे ही उस ने लंड को मुट्ठी में पकड़ आ मेरे लंड का पानी निकल गया। उसका पूरा हाथ मेरे वीर्य से भर गया वो बड़े गोर से मेरे लंड को देख रही थी। मुझे शर्मिंदी फील हो रही थी।

उसे धीरे से कहा जीजाजी अपनी जींस की पॉकेट में से रुमाल निकलो। मेने रुमाल निकालकर उसे दे दीया। उसने बड़े प्यार से मेरे लिंग को साफ किया। लिंग की त्वचा पीछे खीच कर साफ करने लगी।

और रुमाल से साफ करने के बाद मुझसे बोली अब में वाश रूम जा रही हूं। हाथ धो कर आती हूं। मैंने बोला में भी चलता हूं। और मैने लिंग जींस के अंदर किया। आप लोग समझ सकते हैं लंड में से वीर्य निकल जाए तो फिर क्या मनोदशा होती है। मेरी पूरी काम वासना खतम हो चुकी थी। मै सोच रहा था की क्या जूली के साथ अभी कैफे में मैने जो किया उसमे मुझसे कोई गलती तो नही हो गयी।

हम शांत थे. वो बोली जीजाजी अगर आपको कुछ और खाना है तो मंगा लो नही तो हॉस्पिटल चलते है पापा को देखना है। शाम के 6 बज चुके थे.

मैने बाइक उठाई और जूली को बैठाकर निकल पड़ा।

अक्सर गरीब फैमिली में छोटे घर और एक ही कमरा होने की वजह से पापा मम्मी सेक्स करते समय ये क्यो भूल जाते है कि उनके बच्चे भी बड़े हो गए वो उन्हे सेक्स करते हुए देख रहे है।

आखिर गलती किसकी है।

जूली, वो चूतिया संजय, मेरे सास ससुर।
 
मुझे आज अपनी जिंदगी में एक नई और सच्ची सीख मिली।

"अगर हमारी मिडिल क्लास फैमिली की बहन, बेटी, मम्मी, भाभी या कोई भी लड़की को हम चुदते हुए देख ले या उसकी शिकायत मिले तो गुस्से में आकर उसे मारे पीटे और गाली गलौज ना करे। बल्कि उसे प्यार से समझाए और उससे बात करके ये जानने की कोशिश करे कि वो कब से और क्यो चुदने के लिए तड़प रही थी, उसकी वजह जाने, और उसकी चुदाई की तड़प को समझे, और आहिस्ता आहिस्ता उसके करीब जाये और उसकी चुदाई करके उसकी तड़प खतम करे। जैसे मैने अपनी साली जूली के साथ किया, और उसकाे उस चूतिये के चगुल से आजाद करवाया।

Othrwise हमारी मिडिल क्लास फैमिली की बहन, बेटी, मम्मी, भाभी किसी भी चूतिये से चुदवा कर आ जायेगी और हम बस उसका वीडियो देखते रहेगे।"

मै जूली को लेकर हॉस्पिटल पहुँच गया वो मेरा हाथ पकड़कर मुझसे धीरे से बोली जीजाजी आप आज अपने घर मत जाना प्लीज। मुझे उसकी आँखों में फिर से डर दिखाई दे रहा था। मैने उसके हाथ के ऊपर हाथ रखकर कहा मै तुम्हे ऐसे हाल में छोड़कर नही जाऊंगा।

हम हॉस्पिटल के अंदर चले गए सब शांत थे। मेरे ससुर जरनल वार्ड में दीवाल के पास वाले बेड पर आँख बंद करके लेटे हुए थे। बेड के पास एक दो फुट चोड़ी और पांच फुट लंबी बेंच या टेबल पर मेरी सास और साला रिंकू बैठा हुआ था। मेरी सास ने मुझे बैठने को बोला और रिंकू खड़ा हो गया। मैने फल की थैली अपने साले रिंकू को दे दी। जूली मेरा हाथ पकड़े हुए थी मैने जूली को भी बैठने का इशारा किया। मैने सास से पूछा अब कैसे है पापा डॉक्टर ने क्या बोला। मेरी सास बोली अब ठीक है अभी डॉक्टर देखकर गए है बीपी बढ़ गया था।आज रात को observation में रखेगे और कल डिस्चार्ज कर देंगे। मेरी सास दांत मीसते हुए धीरेधीरे जूली को कोसने लगी। आ गयी करमजली मुह काला करके, मेरे तो नसीब ही फुट गए जो ऐसी औलाद मिली है। पहले बड़ी वाली लड़की ने नंगा नाच दिखाया जैसे तैसे उससे पिंड छूटा अब ये नंगा नाच दिखाने लगी। और कोसते कोसते मेरी सास ने एक घूंसा जूली की पीठ पर मार दिया और बोली जहर दे दे अपने पापा को ऐसे घुट घुट के मत मारो।

मेरी सास ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली बेटा तुम इसे यहाँ क्यो ले आये इसे तो कुआ में ढकेल आते इसी के कारण पापा की ये हालत हुयी है।

मुझे अंदर ही अंदर हँसी भी आ रही थी और बुरा भी लग रहा था।

मै बीच में सास को रोकते हुए बोला जो हो गया सो गया अब आगे की सोचो क्या करना है। मेरी आवाज सुनकर मेरे ससुर ने आँखे खोल ली। मैने जूली को इशारा किया कि थोड़ा दूर चली जाए क्योकि फिर से जूली को देखकर ससुर का बीपी ना बढ़ जाये।

ससुर जी ने मुझे देखा और हल्के से मुस्कुराये मैने कहा पापा अब आप जल्दी से जूली के लिए एक अच्छा सा घर देखिये अब उस की शादी करा देते है। ससुर से बोला आप पैसे की चिंता मत करो मै सब बंदोबस्त कर दूंगा। वो मेरी तरफ देखने लगे। मेरे ससुर मेरे हाथ जोड़ने लगे और आँखों में आँसू भर कर बोले तुम जैसा दामाद पाकर मै धन्य हो गया जो अपना फर्ज बेटे की तरह निभा रहा है।

शाम के सात बज गए थे मै सास से बोला मम्मी आप और जूली घर चले जाये मै और रिंकू यही रात भर रुकेंगे। सास बोली नही बेटा मै रुकती हू।

फिर मै खड़ा हुआ और वार्ड से बाहर निकलने लगा मैने रिंकू से कहा तुम जूली को लेकर घर चले जाओ ये लो बाइक की चाबी और घर से पापा की कोई शर्ट लेते आना।

"जूली की शर्ट मुझे टाइट हो रही थी।"

मै वापस वार्ड में जाने लगा तो जूली ने मुझे पीछे से जोर से भीच लिया उसकी चुचिया मेरी पीठ पर चिपक गयी। उसके हाथ मेरी छाती पर थे। मैने उसके हाथो को पकड़कर उसे अपने जिस्म से अलग करते हुए उसके गाल पर हाथ फेरते हुए कहा चिंता मत कर मै सब ठीक कर दूंगा।

मै वापस सास के पास बैठ गया और दीवाल से टिककर पूरे वार्ड का मुआयना करने लगा। मेरे बगल वाले बेड पर एक बुजुर्ग लेटे हुए थे और उनके साथ एक मेरी सास की उम्र की औरत और एक नयी शादी शुदा भाभी जो शायद उनकी बेटी या बहू होगी उसके गोद में एक छोटा बच्चा था।

मेरे ससुर ने आँख बंद कर ली। मेरी सास मुझसे बोली बेटा कुछ खाना पीना हो तो बैग में से निकाल दू। मैने कहा नही मेरा टिफिन है रात को खा लूंगा।

फिर मैने अपने घर फोन लगाया और पापा को सब बात बताई। मेरी सास ने मेरी मम्मी से बात करने लगी। मै उनकी बातें सुन रहा था। मेरी मम्मी सास से बोल रही थी कुसुम को आप समझाए पति व्रत पूजा करे नही तो उसके और अरुण के दूरियाँ ना बढ़ जाए और कल मेरे और कुसुम के बीच खाने की टेबल पर हुई अनबन के बारे में बता दिया।

आधे घंटे बाद रिंकू आ गया और कपड़े की थैली मुझे देते हुए बोला ये लीजिये शर्ट और tshirt जो पसंद हो वो पहन लेना। दस मिनिट बैठने के बाद रिंकू से मेरी सास ने कहा जा घर जूली अकेली होगी। रिंकू ने मुझे बाइक की चाबी दे दी।

मैने कहा रुक रिंकू चल मै भी जरा बाहर होकर आता हू। मैने रिंकू से कहा जूली अब कैसी है वो बोला वो तो खा पीकर ऐसे खुश लग रही है जैसे कुछ हुआ ही नही। मैने पूछा अभी क्या कर रही थी। वो आपकी और कुसुम दीदी की शादी की एल्बम और हनीमून के फोटो देख रही थी।

मैने रिंकू से कहा बाइक ले जा सुबह ले आना। और मै चाय के होटल पर चाय पैक करवाकर वापस हॉस्पिटल आ गया। मैने चाय सास ससुर को दे दी और खुद भी पीने लगा।

रात के साढ़े नौ बज गए थे। मेरी सास ने मुझसे कहा बेटा टिफिन में से खाना निकाल देती हू तुम खाना खा लो मैने कहा ठीक है और हाथ धोने चला गया। वापस आकर खाना खाने लगा मेरी सास ने पूछा तुम्हारा कुसुम का क्या झगडा हुआ था मैने कहा कुछ नही तो वो मुझे एक चिट्ठी देते हुए बोली ये तुम्हारे टिफिन में से एक चिट्ठी निकली जिसमें sorry लिखा था। चिट्ठी पढ़कर मुझे बहुत खुशी हुई। मेरी सास ने मुझसे कुसुम से बात करने के लिए फोन लगाने को कहा मैने उन्हे फोन लगाकर दे दिया। वो फोन लेकर वार्ड से बाहर चली गयी। आधा घंटा हो गया था मै खाना खाकर टेबल पर सीधा लेट गया। मेरे ससुर का बेड वार्ड के कोने में दीवाल के पास था जिससे हमें थोड़ी privacy मिल गयी थी मतलब हम पर किसी की नजर नही पड़ रही थी।

11 बज गए मेरी सास फोन लेकर आई वो काफी टेंशन में थी और मुझसे बोली बेटा अगर तुम्हे कुछ परेशानी हुआ करे या कुछ चाहिए तो मुझसे कभी भी बोल सकते हो तुम मेरे दामाद नही मेरे बेटे हो मै तुम्हारी मम्मी हूँ। कुसुम तो शुरु से ही थोड़ी attitude वाली लड़की रही है। मैने कहा मम्मी ऐसी कोई बात नही है।

मै सोचने लगा आखिर मेरी सास ने कुसुम से क्या बात की है जो मुझसे ऐसे बोल रही है तो मैने उनसे बोला अभी खाना खाया है थोड़ा बाहर घूमकर आता हू। और मैने call रिकॉर्डिंग में जाकर सुनने लगा।

मेरी सास को कुसुम रात वाली बात बता रही थी कि मैने उसके ऊपर बिना गलती के खाने को लेकर सबके सामने चिल्लाया और उसके साथ जबरदस्ती गुस्से में सेक्स किया। उसका मूड खराब था। ये सुनकर मेरी सास उसको समझा रही थी बेटी शादीशुदा जिंदगी में सेक्स के लिए मूड नही बनाया जाता है। सेक्स तो खराब मूड ठीक कर देता है, और तुझे किस्मत से इतना अच्छा पति मिला है इतना प्यार करता है उसको खुश करना तेरा फर्ज है। अभी तेरी उम्र ही क्या है जो तू सेक्स लिए मना कर रही है। एक दो बच्चे हो जायेंगे फिर तेरे से अपने आप ही दामाद दूर भागेगे। मै तेरी मम्मी हू मुझसे पूछ तेरे पापा ने पिछले 18 सालों से मुझसे सेक्स नही किया और मै आज भी सेक्स करने के लिए तरस रही हू।

ऐसे ही हाल बच्चे हो जाने के बाद सब लड़कियों का होता है। फिर तुम्हे अपने पति के साथ जबरदस्ती करनी पड़ेगी। तब भी तेरे पापा की तरह वो बहाने बनाकर सो जाया करेगा।

और अभी बेटी अगर तू अपने पति के साथ करने के लिए ऐसे आनकानी करेगी तो फिर वो किस के साथ सोयेगा। कुसुम ने चिढ़ते हुए कहा मम्मी आप सुला लो अपनी गोद में, आपको अपने मासूम दामाद की ज्यादा फिक्र हो रही है, वैसे भी अभी वो आपके पास ही है। हा नही तो।

जब से सुन रही हू मेरा प्यारा दामाद, मै तो अब कुछ हू नही। आपको भी भूत चढ़ा है और आपके लाडले दामाद को भी दोनों मिलकर अपना भूत उतार लो। कुसुम मम्मी की बातो को सुनकर irritate हो रही थी।

ये सुनकर मेरी सास बोली वाह बेटी वो कहावत सही है

"जब किसी को ज्यादा अच्छा खाना मिल जाए तो वो खाता कम फैलाता ज्यादा है"

कुसुम बोली मम्मी मुझे क्या उनसे प्यार नही है, मै अपनी गलती मानकर उनको टिफिन में sorry लिखकर चिट्ठी भेजी, सोचा वो पढ़कर खुश होकर मुझे फोन करेगे, मै उनके फोन का इंतजार करती रही, शाम आठ बजे अपने पापा को फोन किया, और बात करके काट दिया। मुझे फोन नही कर सकते थे, मै उनकी पत्नी हू वो मुझे ब्याह कर लाए है खरीदकर नही लाये। एक फोन कर देते तो मुझे कितनी खुशी होती।

और मुझे अब सबसे ज्यादा गुस्सा इस बात पर आ रहा कि हम दोनों पति पत्नी के बीच की बात थी आपसे मेरी शिकायत करने की क्या जरूरत थी।

और अब रात के साढ़े दस बजे आप मुझे पति पुराण पढ़ा रही है। सुबह मेरी सास पति पूजा करने को कहती है।

ये सुनकर मेरी सास बोली

मेरी तो दोनों बेटियां पगला गयी हैं लाज शर्म तो बेच खाई है और कुसुम इतना घमंड अच्छा नही है।

कुसुम तुमसे तो बात ही करना बेकार है वो मेरा दामाद है मुझे अब उसकी खुशी के लिए जो ठीक लगेगा वो करूँगी। फोन काटो और सो जाओ अकेली, यही तेरी किस्मत में लिखा है।

मैं कुसुम और सास की काल रिकॉर्डिंग सुनकर सोचने लगा कुसुम ठीक कह रही है मुझे उसको फोन करना चाहिए था। अभी फोन करता हू। लेकिन फिर ख्याल आया वैसे भी वो गुस्से में है अगर अभी फोन लगाया तो समझेगी कि सास ने बोला होगा और मुझ पर और भड़क जायेगी। सुबह बात करता हू। और वापस हॉस्पिटल के वार्ड में आ गया।

मेरी सास कुछ सोच रही थी। उनकी सोच का कारण मुझे पता था। मैने पूछा क्या हुआ पापा कि चिंता मत करो वो ठीक हो जायेंगे। वो बोली बेटा वो बात नही है तेरे पापा को नर्स नींद की गोली खिला गयी है वो सो रहे है। मैने कहा आप भी सो जाओ, मै अभि बैठा हू।

तभी बगल वाले बेड पर हसीन भाभी का जो बच्चा था वो रोने लगा। तो वो भाभी ने हमारी तरफ करवट लेकर उसे अपने स्तनों को खोलकर दूध पिलाने लगी। वो हमारी तरफ देख रही थी। मेरी नजर उस भाभी के बड़े बड़े दूधों पर थी। मुझे ये समझ नही आ रहा था जब उसका बच्चा एक स्तन के निप्पल से मुह लगाकर दूध पी रहा है, तो भाभी ने अपने दोनों स्तनों को क्यो खोला है, मुझे तो नही दिखा रही है क्योकि मेरी सास को स्तनों को दिखाने से कोई मतलब नही है उनके पास तो भाभी से अच्छे और सुडॉल् स्तन है। पर मुझे क्या भाभी दूध दर्शन करा रही है तो करो।

मेरी सास हसीन भाभी के घूरते हुए दूधों पर मेरी नजरों को भांप गयी और मुझसे बोली बेटा वो कपड़ो की थैली देना मै बाथरूम होकर आती हू। मै तो बस हसीन भाभी के दूध दर्शन करने में मस्त था, काफी देर हो चुकी थी उस भाभी का बच्चा सो गया था और भाभी के दोनों बड़े बड़े थन जैसे चूचे दूध की बूदों से लिसे हुए पलंग से नीचे लटक रहे थे। भाभी अपने मोबाइल में लगी हुई थी।

मुझे अपनी सास की याद आई उन्हे क्या हो गया अभी तक वापस क्यो नही आई, मै उन्हे बुलाने के लिए उठने वाला ही था कि सामने से वो ढीली ढालि मैक्सी पहने हुए फ्रेश होकर अपने नितंबों को हिलाते हुए चली आ रही थी।

मै सास को देखता ही रह गया वो अपना सलवार कुर्ता बदलकर मेरे सामने मैक्सी पहने खड़ी हो गयी थी उनके दूध मैक्सी में ऐसे लटक रहे थे जैसे पेड़ पर पपीता। मेरा लंड एक दम टाइट होने लगा था। मेने जींस पेहनी हुई थी मुझे बैठने में परशानी हो रही थी। सास बोली बेटा अब देखते ही रहोगे या मुझे बैठने के लिए जगह भी दोगे। में खिसक गया और वो मेरे पास आकर बैठ गयी। मैने कहा मम्मी ये ड्रेस क्यो चेंज कर दी । वो बोली बेटा वो कुर्ता टाइट फील हो रहा था जिससे गैस बन रही थी। मेने कहा ठीक है।

मेरी नजर कभी उस भाभी के खुले हुए थनों पर और कभी मेरी सास के मैक्सी में लटक रहे पपीतो पर जा रही थी। सास मेरी उलझन समझ गयी थी, वो उस भाभी से बोली बेटी बच्चा दूध पीकर सो गया है अपने कपड़े ठीक कर लो।

मै अपना मन मार कर चुपचाप बैठ गया, तो मेरी सास बोली बेटा तेरे मोबाइल में कोई गेम जैसे लुडो वगेरा होगा तो चालू कर हम दोनों खेलते है।

मैंने मोबाइल में लुडो लगा दिया मेरी सास ने अपनी मैक्सी जांघो तक ऊँची चढ़ा ली, और पालती मारकर बैठ गयी। जिससे मुझे उनकी नंगी नंगी मोटी मोटी मांसल जांघे दिखने लगी। मैक्सी में उनके बटन लगे हुए थे, बटन के बीच के गेफ् में से उनके स्तन मैक्सी में बाहर की ओर लटक रहे थे। मुझे नही पता वो ऐसा जानबूजकर कर रही थी या नही। क्योकि वो एक छोटे बच्चे की तरह बड़े मस्ती में लुडो खेल रही थी।

हम तीन चार बाजी लुडो की खेल चुके थे, रात के एक से ज्यादा बज गए थे पूरे वार्ड में मरीज और अटेडरो की खराटो की आवाज आ रही थी। वो भाभी भी सो चुकी थी।

मेरी सास बोली बेटा पेट में गैस कुछ ज्यादा बन रही है हल्का दर्द भी हो रहा है, तो मैने कहा मै नर्स को जगाकर दवाई ले आता हू। तो वो बोली मत जगाओ नर्स को वो दवाई देने में आनाकानी करेगी। तुम जरा बैग में से तेल कि सीसी लेकर हल्की मालिश कर सकते हो।

मैंने कहा बिलकुल मेने उनको टेबल पर लेटाया और उनकी मैक्सी जो जांघो तक थी वहा हाथ लगा कर मालिश करने लगा। मै वैसे भी अपनी सास की मोटी मोटी मांसल जांघो को हाथ लगाकर उत्तेजित हो चुका था। फिर मैंने उनसे कहा टांग ऊपर नीचे करो जिनसे उनकी मैक्सी बिलकुल ऊपर पेट तक चली जाएगी और मुझे चूत देखने को मिल जाएगी। मेरी सास मेरी बात मान गयी।

सास ने जैसे ही टाँगे ऊपर की तो उनकी मैक्सी उनके पेट तक आ गई और मुझे उनकी चुत दिखने लगी, जो पूरी भूरे बालो से ढकी हुई थी। मेरा लंड खड़ा हो चुका था। मेने फिर टांगे नीचे की फिर ऊपर की पूछा मम्मी कैसा लग रहा है अब। वो बोली अच्छा। मेने फिर थोड़ा सा तेल लेकर उनकी झांघो पर लगाते हुए उनकी चूत की तरफ उगली ले जाने लगा उनकी आंखे बंद थी। मेरे हाथो में उनके चुत के बाल टच हो रहे थे। जैसे ही मैं उनकी चुत में हाथ लगाने वाला था की वो अचानक से मैक्सी नीचे कर के बैठ गई और बोली अब ठिक हू बस करो। मेरी हसरत अधूरी रह गई। और वो बोली बेटा अब आराम है और वो अपनी टांगे सिकोड़ कर दीवाल की तरफ करवट करके बोली बेटा दो बज गए होंगे अब तुम भी थोड़ा आराम कर लो मै इस तरफ करवट करके उनके साथ लेट गया।

में अजीब सा महसूस कर रहा था और मुझे नींद भी नही आ रही थी। मै उठा और पेशाब करने चला गया, वापस आया तो देखा मम्मी की मैक्सी की ऊपर की दो बटन खुली थी उनकी सफेद ब्रा दिख रही थी और उनकी मैक्सी जांघो तक ऊपर थी। मुझे मेरे मेरे लंड में हलचल फील हुआ और कंट्रोल नही हुआ और जाकर उनके बगल से बैठ गया और उनके दो मैक्सी के बटन और खोल दिए जिनसे उनके सफेद ब्रा में बंद दूध दिखने लगे। और उनकी मैक्सी को भी ऊंचा कर दिया जिससे उनकी भूरे बालो वाली चूत दिखने लगे। मम्मी पैंटी नही पहने थी । फिर मैंने मम्मी के ब्रा ऊपर की पट्टी से अपनी उंगली उनके निपल्स पर टच करने की कोशिश की लेकिन ब्रा के हुक टाइट थे तो उंगली अंदर नहीं जा रही थी।

फिर मम्मी की ब्रा के हुक खोलने की कोसिस की लेकिन उन्होनें करवट ले ली अब उनका मुह मेरी तरफ था। और मैं थोड़ा नीचे खिस्क कर उनके ब्रा में बंद दूध पर मुह लगा कर किस करने लगा तब अचानक से वो हिली मै डर गया और आंख बंद कर ली। उन्होने करवट बदलते हुए अपने दूध पर हाथ लगाया तो उठ कर बैठ गई और में धीरे से आंख खोलकर देख रहा था। अंधेरे की वजह से। अपनी मैक्सी के बटन बंद करें और मैक्सी नीचे करके उठकर बैठ गई। मुझसे पूछा बेटा कितने बज गए। मैने मोबाइल में टाइम देखा और बोला साढ़े चार बजने वाले है।

मुझे ये बात नही पता चली क्या वो सब समझ गई थी या नहीं।

वो बोली बेटा अगर तुमको सोना है तो सो जाओ. उन्होंने टांग ऊपर करके पालती मारकर बैठ गयी और अपनी गोदी में मुझे लेटने को फोर्स करने लगी। मैने मना किया। लेकिन वो नही मानी तो में अपनी सास की गोद में लेट गया उन्होंने चादर से मुझे ढक दिया। लेकिन मुझे भुख लग रही थी। मेने पूछा बैग में कुछ खाने को है। वो बोली बेटा बैग में कुछ नहीं है। मैने कोई बात नही, सास के मैक्सी में कैद बड़े बड़े पपीते जैसे स्तन ने मेरे मुह को पूरा ढक लिया उनके स्तनों का वजन एक एक किलो से ज्यादा होगा। उन्होंने चादर इस तरह डाल दी जैसे कोई मम्मी अपने बेटे को दूध पिला रही हो।

मुझे पता नहीं चला हम कब मेरी आँख लग गयी।

मेरे और मेरी सास के बीच जो हुआ था उसमें गलती किसकी थी

मेरी, सास की, कुसुम की, या मेरी कुंडली में लिखी मेरी किस्मत की।
 
उन्होंने चादर इस तरह डाल दी जैसे कोई मम्मी अपने बेटे को दूध पिला रही हो।

मुझे पता नहीं चला हम कब मेरी आँख लग गयी।

मेरी सास भी मुझे गोद में लिए बैठे हुए सो रही थी।

सुबह के साढ़े पांच बजने थे, मुझे अपने ससुर की आवाज सुनाई दी। मै सास की गो में से उठा तो वो भी जाग गयी, और उन्होंने पूछा क्या हुआ बेटा, मैने कहा पापा आवाज दे रहे है, तो उन्होंने ससुर से पूछा क्या हुआ वो आँख बंद किये हुए थे। वो बोले टॉयलेट जाना है। मेरी सास ने ससुर को पकड़कर टॉयलेट ले गयी। मैने कुसुम को एक गुड मॉर्निंग मैसेज डाल दिया। मै आधा जगा सा बैठा हुआ वार्ड को देखने लगा।

ससुर के बेड के बगल वाली हसीन भाभी भी बैठी हुयी मुझे देख रही थी, उनके गोद में बच्चा सो रहा था, मै और भाभी शायद दोनों एक जैसी हालत में थे हम दोनों ही मजबूरी में हॉस्पिटल मे अपनी रात खराब कर चुके थे। भाभी का makeup फीका पड़ गया था और उनके चेहरे की चमक कम हो गयी थी।

उनका बच्चा फिर से जाग गया और रोने लगा तो भाभी ने रात की तरह मेरी ओर मुह करके मुझे दूधो के दर्शन कराते हुए बच्चे को दूध पिलाने लगी। बच्चा रो रहा था और भाभी के स्तनों के निप्पल को मुह में नही ले रहा था। भाभी उसके मुह में जबरदस्ती निप्पल को डाल रही थी। ऐसे करने से उनके स्तनों में से दूध की पिचकारी बच्चे के मुह और उनके हाथो पर चल रही थी। बच्चा चुप नही हो रहा था। तो भाभी ने उसको बेड पर लिटा दिया और अपने दोनों स्तनों को खोले हुए उस पर चिल्लाते हुए बोली। पीले दूध नही तो मै किसी और को पिला दूँगी। (भाभी का इशारा मेरी तरफ था) मै भाभी की बात और उनके दूध दर्शन करके पुरा जाग गया और मैने हल्की सी smile दे दी। पर बच्चे के रोने की वजह से रोमांटिक माहौल नही बन पा रहा था। तभी में हिम्मत करके भाभी के पास चला गया और भाभी को बोला बच्चे को पोट्टी आ रही होगी और आप दूध पिला रही है। भाभी मुझे smile देते हुए बोली आपको बड़ा अनुभव है। भाभी के स्तनों को मैने पास से देखा वो मेरी पत्नी कुसुम से बड़े और भारी भरे हुए थे, भाभी के स्तनों की ठीक से खिचाई, दबाई, और निचोड़ा नही गया था। उनके स्तनों के निप्पल चूड़ी के आकार के गोल और भूरे थे। उनकी स्तनों की निबोली एक इंच की बड़ी और मोटी थी। मैने लगभग दो मिनिट तक भाभी पूरे स्तनों का मुआयना किया। भाभी अपने स्तनों को मुझे बड़े इत्मिनान से दिखा रही थी। पर बच्चा रो कर रंग में भंग कर रहा था।

फिर भाभी ने बच्चे की चड्डी उतार दी। और बच्चे ने ढेर सारी पोट्टी कर दी थी, जिसकी बदबु से मेरा पूरा रोमांस छू हो गया और मै दूर होकर ससुर के बेड पर बैठ गया। पीछे से मेरा साला रिंकू हाथ में बैग लेकर आकर मेरे पास खड़ा हो गया। मैने उससे पूछा तुम क्यो आये वो बोला आपके और मम्मी पापा के लिए नास्ता चाय लाया हू।

वो भाभी अपने बच्चे को लेकर टॉयलेट चली गयी।

मेरे सास ससुर भी आ गए सास ने रिंकू से बैग लिया और चाय नास्ता निकालकर ससुर और मुझे देने लगी। और मुझसे कहा बेटा आज तो जूली ने रिकॉर्ड तोड़ दिया सुबह छे बजे ये सब बना दिया। रिंकू बोला जूली दीदी सुबह पांच बजे जग गयी थी और मुझे भी जगाकर बोली ये नास्ता जीजाजी को दे आ पर मै ही अब छे बजे आया हू।

सास हस्ती हुई बोली वाह क्या जीजा साली का प्यार, है जो लड़की आठ बजे जगती थी वो पांच बजे जग गयी। वाह वाह कमाल है। हम सब हसने लगे।

आधे घंटे बाद ससुर मुझसे बोले बेटा डॉक्टर तो दस बजे आयेंगे जब तक तुम और मम्मी नहा धोकर आ जाओ, और खाना बन गया होगा वो भी ले आना। यहाँ रिंकू है ही अपने पापा के पास। मैने कहा ठीक है और गाड़ी पर सास को बैठाकर ससुराल की ओर चल दिया।

मेरी ससुराल हॉस्पिटल से आधे घंटे का रास्ता था, सुबह की ठंडी हवा से मेरे अंदर ताजगी आ गयी थी। सास के बड़े बड़े थन जैसी स्तन मेरी पीठ पर सटे हुए थे, जिससे मेरा रोम रोम मचल रहा था। मै सोच रहा था बाइक बनाने वाले ने क्या चीज बनाई है वो incest sex lover रहा होगा क्योकि बाइक पर बैठाकर हम अपनी परिवार की मम्मी, दीदी भाभी के मदमस्त स्तनों का स्पर्श बड़ी ही आसानी कर सकते है।

पांच मिनिट बाद हम घर पहुँच गए।

मैने गाड़ी खड़ी की मै और सास एक दूसरे को देखकर smile देते हुए अंदर चले गए। मैने सास से कहा मम्मी मै पहला ऐसा लड़का हू जो शादी के दस दिन में अपनी ससुराल तीसरी बार आया हू वो भी अपनी पत्नी के बिना। मै और सास हसने लगे।

सास ने जूली को आवाज देते हुए कहा बेटी जल्दी से कुछ नास्ता और बना दे जब तक तेरे जीजा नहा धोकर आते है। जूली मुझे देखकर ख़ुशी के मारे फूल कर कुप्पा हो गयी।

मै आपको पहले ही बता चुका हू मेरी ससुराल में एक कमरा, किचिन, छोटा सा आंगन जिसमें लैट्रिन बाथरूम बना हुआ है, आगन में ही नल लगा है और नहाने धोने के लिए ड्रम मे पानी भरा रहता है।

मैने बाथरूम में बाल्टी में पानी भर दिया और बोला मम्मी पहले लैट्रिन करके आता हू।

लैट्रिन बाथरूम attach थे, मै लैट्रिन करके बाहर आया और तोलियां से हाथ पोछने लगा तभी मेरी सास बोली बेटा तुम पांच मिनिट बाद नहा लेना मै लैट्रिन करके आती हू।

आप लोगो को तो पता ही होगा जब प्रैशर बनता है तो सब भूल जाते है यही हाल मेरी सास का था। मैने कहा मै आंगन में नहा लेता हू आप आराम से लैट्रिन जाये।

मैने आंगन में कपड़े उतारकर सफेद सूती चड्डी पहने खड़े होकर नहाने लगा।

मैने एक बाल्टी पानी अपने ऊपर डाल ली और साबुन लगाने लगा। मेरी नजर सामने खड़ी मेरी साली जूली पर पड़ी उसका मुह खुला था और आँखे फटी थी वो मेरे जिस्म को निहार रही थी और कल्पना में डूबी थी।

मै जूली को अपने जिस्म को निहारते हुए देखकर उत्तेजित होने लगा था मेरा लंड चड्डी में खड़ा हो गया था। और मै जूली को आगोश में लेने के लिए उसकी ओर चल पड़ा।

अचानक मेरी वासना टूटी और मैंने अपने कदम वापस खींच लिये। अन्दर से बाथरूम का दरवाजा खुलने की आवाज आई।

मेरी सास लैट्रिन करके बाथरूम से बाहर आ गयी। मैने जल्दी जल्दी नहाया और कपड़े पहनकर कमरे में बैठ गया। मेरी सास ने जूली से कहा जीजा को नास्ता दे दे बेटी जब तक मै नहाकर आती हू और अपने ब्लाउस पेटीकोट लेकर बाथरूम में घुस गयी।

मै अपना मोबाइल देखने लगा क्योकि कुसुम का गुड मॉर्निंग मैसज का reply नही आया था। शायद अभी तक कुसुम ने मैसजे पढ़ा नही था।

जूली मेरे पास आकर खड़ी हो गयी।

मैने बिना उसे देखे पूछा क्या हुआ।

“नाश्ता लाई हूँ !”

मैने जूली की तरफ देखा, तो कुसुम को भूल गया और कहा वहीं रख दे !” जूली की आवाज ही मुझे सेक्सी लगने लगी थी।

जूली मेरे सामने ढीली tshirt और लोवर में खड़ी थी उसके दोनों हाथ उसकी लोवर के चूत वाले हिस्से पर थे। जैसे अपनी मुट्ठी बन्द कर के अपनी चूत दबा ली हो।

“क्या हो गया जूली? बड़ी बेताब लग रही हो?” मैने उसे चूत दबाते देख कर पूछ लिया।

“वो बोली बस जीजू, कुछ देख लिया था और अब उसे लेने की इच्छा होने लगी है।”

उसका इशारा मेरे लंड को नहाते हू देखने से था।

मै उसका इशारा समझ गया

मैने कहा

“हमें बताओ, हमारी साली को क्या चाहिये? हम देंगे !”

वो बोली

“बस जीजू आप ही दे सकते हो !” और मुझे एक रहस्मयी मुस्कान से देखने लगी।

मैने अन्दर चडडी नहीं पहने थी। क्योकि मेरी चड्डी नहाने से गीली होकर सूख रही थी। और अपने ससुर का पजामा पहनकर बैठा था। पाजामा लण्ड की जगह से उभरा हुआ था। मैंने जूली को अपना लण्ड को निहारते हुये पकड़ लिया। । सच पूछो तो मै भी जूली को ही निहार रहा था।

मै जूली से चिपक कर बैठ गया। उसने भी कसर नहीं छोड़ी ! वो मेरी जांघों से सट कर मेरे लिये चाय निकालने लगी। तभी उसकी एक बांह मेरी कमर से लिपट गई और वो मुझे प्यार करने लगी। मेरी नजरें तो अब बदल चुकी थी, मैंने मौके का फ़ायदा उठाया। मैंने उसके होंठों पर चूम लिया।

भला वो कहाँ पीछे रहती, उसने तो अपने होंठ मेरे होंठों से ही चिपका दिये।

मैं तो अपने होश ही खो बैठा। मुझे एक सुनहरा अवसर मिल रहा था। मैंने मौका हाथ से जाने नहीं दिया। इस पार या उस पार ! बस मेरा नन्हा सा नासमझ दिमाग यही सोच पाया।

जूली ने मेरे पजामे में हाथ डाल दिया, मेरे कड़क लण्ड को पकड़ लिया।

मै हतप्रभ सा रह गया। मुझे भी शायद लण्ड पर एक मीठा सा सुखद अहसास होने लगा।

मै बोला

“जूली, तुम कितनी प्यारी हो, कितनी मस्त हो !” मेरे स्वर में वासना का पुट था।

मेरे हाथ उसकी गदरायी भरी हुयी छातियों के उभार पर आ गये। जूली ने भी अपने संतरो जैसे उरोज मेरे सामने की ओर कर दिये। जूली की चूचियाँ मैने धीरे से सहला दी। उसके मुख से एक सिसकारी निकल पड़ी।

जूली सिसकरिया लेते हुए बोली

“जीजू, मैंने आपका लण्ड देख लिया था, बस वही चाहिये !” उसने वासना से भर कर कहा।

मेरा लण्ड ऊपर-नीचे कर के मुठ सी मारने लगी।

मुझे सामने अलमारी में रखी कुसुम की पूरी फैमिली तस्वीर पर पड़ी तो।

मुझे ना जाने क्यो ये गलत लगने लगा मैने उससे कहा

“देख जूली, मजाक नहीं करना, माना कि जीजा साली का रिश्ता ऐसा ही होता है, पर बस मजाक को मजाक ही रहने दे।”

जूली के नासमझ दिमाग को एक झटका सा लगा। वो बोली जीजू आप सही तो कह रहे है, आप तो दीदी के लिये बने है, मैं यह क्या करने लगी थी। उसे बड़ी शर्मिन्दगी सी हुई। वो अपना चेहरा छुपा कर कमरे से भाग गयी।

मेरी सास भी नहाकर पेटीकोट ब्लाउस पहनकर कमरे में आ गयी और साड़ी पहनने लगी। सास के अंदर शायद अब शर्म कम हो गयी थी, उनके ब्लाउस में से स्तनों का आकार बड़ा और सुडॉल् लग रहा था।वो मुझसे बोली बेटा मै बाजार से सब्जी लेकर आती हू तुम क्या खाओगे। मैने कहा जो आपको ठीक लगे।

तभी मेरे मोबाइल पर मेरे पापा का फोन आने लगा मैने उनसे बात की वो बोले हम लोग हॉस्पिटल आ रहे समधी जी को देखने और कुसुम ने खाना भी बना दिया नौ बजे तक पहुँच जायेंगे।

मैने अपनी सास को बताया और कहा आप भी चाय नास्ता कर लो हम भी निकलते है आठ बज गए है। सास ने जूली को आवाज दी और चाय मांगने लगी वो किचिन में थी, जूली चाय लेकर आई। उसके हाथ पर रुमाल बंधा हुआ था, मेरी सास ने पूछा हाथ में क्या हो गया। वो बोली भिंडी काटते हुए कट गया।

मैं और जूली एक दूसरे को देख रहे थे हम दोनों की नजरो में एक दूसरे से बहुत से सवाल थे जिसके जबाब हम दोनों के होंठो के पास नही थे।

सास ने चाय नास्ता किया और हम हॉस्पिटल के लिए निकल पड़े जाते जाते कुसुम ने मुझे एक चिठी दी मैने चिठ्ठी खोलकर पढ़ी उसमें लिखा था।

"खून से लिख रही हू स्याही मत समझना,

आपकी प्यारी साली हू पराई मत समझना'"

जूली ने सच्ची में अपने खून से लिखा था।

मैने जूली से कहा जल्दी मिलेंगे अपना ख्याल रखना।

जूली शायराना अन्दांज में बोली " इंतजार रहेगा आपका"

मैने जूली की आँखों में प्यार और आँसू देखकर थोड़ा सोच में था और अपनी सास के महकते हुए बदन के स्पर्श और मुलायम स्तनों की छुअन को भूलकर मैं फुल स्पीड में गाड़ी चला कर हॉस्पिटल पहुँच गया।

वार्ड में साफ सफ़ाई हो रही थी मरीज के attndar बाहर खड़े थे, मैने इधर उधर देखा तो वो हसीन भाभी अपने बच्चे को गोद में लिए खिला रही थी उसकी मम्मी या सास जो भी हो वो भी वही थी। मेरी सास उनके पास जाने लगी तो मैं भी चल दिया। वो भाभी के बच्चे को दूर से इशारे से खिलाने लगा। वो भाभी तो एक्सपर्ट थी वो बच्चे को मेरी गोद में देने लगी मैने अपने हाथ बच्चे को गोद लेने के लिए बढ़ाये तो भाभी ने जानबूजकर अपने स्तनों का स्पर्श करा दिया।

और मेरी आँखों में देखते हुए बच्चे के गाल पर ऐसे kiss करने लगी की जैसे मुझे kiss कर रही हो भाभी की साँसों की हवा मेरे गाल पर महसूस हो रही थी। मेरी सास भाभी के साथ वाली महिला से बातें करने लगी।

भाभी के बच्चे को मैने गोद में लिया हुआ था, भाभी मेरी तरफ देखते हुए बच्चे को तोतली आवाज में खेलते हुए बोली दूध पीना हो तो बोलो , ऐसे देखते ही रहेगा क्या। मै भाभी का इशारा समझ रहा था।

वार्ड की सफाई हो गयी थी और हम अंदर वार्ड में चले गए। मेरा साला रिंकू और मेरे ससुर बेड पर बैठे थे, वो ठीक दिख रहे थे, रिंकू हमें देखकर खड़ा हो गया। मै और सास बेंच पर बैठ गए। मैंने कहा डॉक्टर आये तो रिंकू बोला अभी नही। मै वार्ड के दरवाजे की तरफ देखने लगा।

पांच मिनिट बाद वार्ड के दरवाजे पर

मेरे सामने लाल रंग की चमकदार साड़ी में तीखे नैन नक्ष लिए, माथे पर लाल रंग की बड़ी सी बिंदिया, आंखों में गहरा काला काजल, कानों में लहराती हुई बालियाँ और खुली हुई लहराती जुल्फें, स्लिम सपाट चिकना पेट में गोल गहरी नाभि, कमर में आधा साड़ी से दबाये हुए रेडमी नोट मोबाइल, नागिन जैसी लेहरति हुयी चाल, मदमस्त करते हुए मटकते हुए नितंब, हाथो में खनकती हुई चूड़िया, एक मदमस्त नवयौवना चली आ रही थी।

जिस मरीज के बेड के पास से वो गुजर रही थी, वो लेटां हुआ मरीज बेड पर बैठ जाता। जो मरीज के attandar उन्हे कुछ खिला पिला रहे थे वो attandar अपने हाथ मरीज के मुह की जगह आँख और नाक में घुसा रहे थे। वार्ड में ड्यूटी दे रही नर्स एकाएक अपनी ड्यूटी भूलकर बस उसे है देख रही थी।

वो साक्षात गजगमिनी, कमायानी, और सौंदर्य की देवी सीधी मेरे पास आकर खड़ी हो गयी और बोली बस बहुत हो गया। अब नयन सुख मिल गया हो तो थोड़ा खिसक जाइये।

मै उसकी आवाज सुनकर एकदम से बोल पडा ओ तेरी ये तो मेरा माल है, (कुसुम)। मेरी बात सुनकर मेरे सास, ससुर, साला बड़ी जोर से हस पड़े। मेरी सास ने मेरी पीठ पर प्यार से एक चपत लगा दी और बोली बेटा माल क्या बोल रहा है, तेरी पत्नी है कुसुम।

कुसुम मुझे घूर के देख रही थी उसने मेरी जांघ पर नोच दिया। तभी मेरे मम्मी पापा खाने का सामान लेकर आ गए। मै और कुसुम बेंच से उठकर बेड के दूसरी तरफ बैठ गए। जहा वो हसीन भाभी बैठी थी।

दोनों समधी आपस में हालचाल पूछते हुए बात करने लगे। मेरे ससुर कुसुम को बड़े ही प्यार से देख रहे थे, उनके चेहरे पर बहुत खुशी झलक रही थी।

क्योकि मेरे ससुर ने कुसुम को पिछले 18 सालों में एक अंदर से दुखी विधवा लड़की के रूप मे देखा था, यहाँ तक की कुसुम की पहली शादी के बाद भी वो दुखी और नीरस नजर आती थी। लेकिन मुझसे शादी के बारह दिन बाद कुसुम को आज देख रहे थे। जो पूरी तरह से खुश, सज संवरकर श्रृंगार किये हुए उनके सामने हस्ती हुई बैठी थी।

"" बहुत सी लड़किया शादी के पहले सादा सिंपल रहती है, लेकिन शादी के बाद एकदम से उनका रंग, रूप, अदा, फैशन करने का तरीका बदल जाता है, वो सेक्सी, हॉट, बोल्ड हो जाती है, जिन्हे हम सेक्सी और हसीन भाभी कहते है.

अगर आप लोगो को ये देखना हो तो कुछ दिनों बाद राखी का त्यौहार रक्षाबंधन आने वाला है तो आप हसीन नयी शादी हुई लड़की को देख लेना""

मेरी पत्नी कुसुम भी शादी के बाद हॉट सेक्सी फैशनेबल हो गयी थी।

थोड़ी देर बाद डॉक्टर आये और ससुर को डिस्चार्ज दे दिया। हम अपने सामान की पैकिंग करने लगे। एक सुंदर गोरी सी नर्स आई और मुझसे बोली आप मेरे साथ अंदर कैबिन में चलिए, मैने कुसुम को छेड़ते हुए कहा मैडम ये मुझे अपने साथ अंदर कैबिन में ले जा रही है, परमिशन दे दीजिये। वो नर्स हसने लगी। कुसुम चिढ़ते हुए बोली वो दवाई देने के लिए ले जा रही है, आई बात समझ में।

मेरी और कुसुम की हसी मजाक देखकर वो हसीन भाभी कुसुम से बोली ये आपके कौन है। कुसुम बोली ये मेरे पतिदेव है,

वो भाभी बोली ओह तो ये आपके पति है, कुसुम बोली क्यो आपको भी अंदर कैबिन में ले जाना है,

भाभी--- नही नही

कुसुम --- तो इसमें आह भरने की कोनसी बात है ।

कुसुम मुझसे बोली अब आप यहा क्यो बैठे है।

मैने कहा मै बैठकर ये सोच रहा मै किसके साथ कैबिन में अंदर जाऊ।

मेरा जवाब सुनकर नर्स, भाभी, और मै तीनो हँसने लगे।

कुसुम का पारा गरम वो उठी और अपना मोबाइल कमर में घुसेड़कर नर्स से बोली चलिए और मेरी बाँह पकड़कर मुझे अपने साथ ले जाने लगी।

हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होकर मेरे मम्मी पापा अपने घर, और सास ससुर, साला अपने घर, ऑटो में बैठकर निकल गए।

मैने कुसुम से कहा मैडम आपको कहा ले जाना है, वो आँख दिखाते हुए मेरे बाप यहाँ से चलो पहले फिर बताती हू।

मैने कुसुम को बैठाया और फिल्मी हीरो की तरह एक किक मारी कुसुम मेरी पीठ पर चिपक गयी। हम दोनों हस्ते हुए बाहर रोड पर आ गए। कुसुम बोली मुझे पापा के घर जाना है और उस जूली की बच्ची को दो थप्पड़ लगाने है, उसकी वजह से पापा को हॉस्पिटल में admit होना पड़ा।

मैंने कहा अब माफ कर दो उसे गलती हो गयी थी। कुसुम बोली तुम उसके वकील मत बनो शांति से गाड़ी चलाओ।

थोड़ी देर कुसुम बोली हॉस्पिटल में रात भर बड़ी अच्छी गुजरी होगी उस भाभी के साथ। मैने कहा नही ना, मन तो कर रहा था पर तुम्हारे डर से हिम्मत नही हुई। कुसुम बोली अच्छा जी।

मै कुसुम को खुश करने लिए गाना गाते हुए गाड़ी चलाने लगा।

वैसे भी "सारे शहर में आप सा कोई नही कोई नही। " हम दोनों ससुराल पहुँच गये।

कुसुम ने पहले सास ससुर से इधर उधर की बात की फिर जूली को लेकर घर की छत पर चली गयी मै भी पीछे पीछे चला गया।

वो जूली को समझाते होते हुए बोली घर की लड़की मोबाइल पर किसी लड़के से बात करती है तो उसके मम्मी और बहन को पता रहता है पर उसे कुछ बोलते नही है, इसका मतलव ये नही है कि तुम कुछ भी करो।

छोटी बच्ची नही हो तुम आइंदा कोई भी गलती मत करना समझी।

मैने बीच में बोल दिया वो आजकल की लड़कियों को फेसबुक ने बिगाड़ दिया है। फेसबुक पर मेरी प्यारी जूली उस लड़के की बातो में फस गयी थी अब वो फेसबुक use ही नही करेगी मै इसकी जिम्मेदारी लेता हू।

कुसुम हस्ते हुए मुझसे बोली प्रोफेसर साहब आपका फेसबुक तो में आज रात को logout करूँगी। अब घर चले हम दोनों को ड्यूटी पर भी जाना है। हम तीनो हसने लगे। मैने जूली के गाल पर प्यार से हाथ फेरा, उसने मेरे हाथो को हल्के से चूम लिया।

मै और कुसुम अपने घर आ गए और मैने पूछा रिंकी कहा है।

कुसुम वो तो स्कूल गयी है। और मै अपने कॉलेज पढ़ाने चला गया।

शाम को अपने दोस्त से मिला उसने पूछा और अरुण साहब कैसी कट रही है रातें कुसुम भाभी के साथ।

उसको मैने अपने कुसुम के बीच हुआ दुखड़ा सुनाया वो बोला बांकी सब ठीक है पर तुम अपनी wife को थोड़ा change over dose दो मतलब रात में कुछ नया try करो। मै समझ गया और मेडिकल से mango flavor condom लेकर घर चला गया।

रात को खा पीकर अपने कमरे में कुसुम का इंतजार करने लगा।

थोड़ी देर बाद कुसुम कमरे में आई। मै उसे देखते ही रह गया उसने एक हलकी नीला रंग की एक नाइटी मैक्सी पहन रखी थी। जो उसके घुटनो के ऊपर तक तक थी। उसकी मोटी झंघे चमक रही थी। उसके चूतर बड़े बड़े तरबूज की तरह नाईटी में से अलग से बहार निकल रहे थे। उसके दूध एक दम बड़े फूले ऊंचे लग रहे थे। नाइटी ट्रांसपेरेंट थी जिसे उसके निप्पल एकदम नुकीले बहार की और तने हुए थे। में ये रूप देखकर टेंशन में आ गया। मैंने सोचा आज तो कुछ नया try करे बिना काम नहीं चलेगा। तबी कुसुम ने स्माइल देते हुए पुछा क्यो कया हुआ कैसे लगी ड्रेस मेंने कहा सेक्सी लेडी वाह। मैंने पूछा ये कहा से मिली वो बोली माल में से खरीदी है। मैंने कहा कितने की है वो बोली 1750 रुपये की है। मैने कहा इतनी मेहगी।

वो बोली अपनी पत्नी को तोहफा में ही दे दो। मैंने कहा ठीक है मैडम पर आज आपका इरादा कुछ ठीक नहीं लग रहा है। वो बोली हा आज तो हमारी ये हनीमून वाली रात समझो मेंने कहा मुझ गरीब को क्यों मारना चाह रही हो। वो हंसी और मेरे पास आकार बिस्तर पर बैठ गई और अपने होठों को मेरे होठों पर रख कर किस करने लगी। में भी शुरू हो गया हम दोनो एक दोसरे को किस करने लगे वो अपनी जीभ से मेरी जीभ पकड़ने लगी, मेरे होठों को काटती, चूसती, फिर में उसके दूध को दबाता हुआ उसे नाइटी से बाहर निकाल लिया। और जोश आ गया में दूध दबा कर पीने लगा। वो बोली आहिस्ता से ज्यादा जोर से मत दबाओ आराम से पियो। वो भी जोश में थी मेरे पीठ को कस कर पकडकर मेरी गरदन और कान पर किस, करते हुए दांतो से काट रही थी। फिर मेने उसे नाभी पर किस करते हुए उसे योनि पर आ गया मैंने देखा उसमें योनि में से लार सी टपक रही है।

पर मुजे अच्छा लगा और में उसकी योनि को चाटने लगा। वो जोर जोर से आहें भर रही थी। मैंने उसकी योनि की त्वचा को अपनी उनग्लियान से खोला और उसमे अपनी जीभ घुसा दी। वो और जोश में आ गई। मेरा लिंग चड्डी में से मैंने बहार निकाला था। कुसुम ने मुझे ऊपर खीच लिया में उसके ऊपर आ गया। वो मुझसे ज्यादा ताकत वाली थी उसने एकदम से मुजे पलट दिया और मेरे ऊपर चढ़ गई और मेरे निपल्स को दांतों से काटने लगी। मुझे बड़ा ही मजा रहा था। मैंने कहा मेरे छाती में बाल है आराम से करो वो बोली ये मेरा जंगल है और मैं उसकी रानी और मेरी नाभी को किस करते हुए मेरे लिंग पर पहुच गयी।

मेने झाँटे नहीं बनायी थी। वो बोली ये काट लिया करो मुह में जाति है। और मेरा लिंग सूघंती हुई लिंग को मुह में रख लिया मुझे ऐसा लगा जैसे उसे लिंग नहीं कोई कुल्फी नजर आ रही हो।

लिंग को एकदम मुह के अंदर तक ले गई। 1 मिनट तक रखी रही। में समज गया ये बहुत प्यासी है। लिंग को छोडने का नाम ही नहीं ले रही है।

दोस्तो मेने एक बात नोटिस की जो लेडी या लड़की सिंपल और सादा रहती वो सेक्स के मामले में कुछ ज्यादा ही सक्रिय होती है। मुझे मेरे लिंग में अकडन सी महसूस होने लगी थी। शायद मेरा वीर्य निकलने वाला था। तबी में उठा और पेशाब करने चला गया मेरा लिंग तना हुआ था। में मन में सोच रहा था आज कुसुम की प्यास बिना बुझाए लिंग ढीला हो जाता तो उससे बुरा लगता है। में वापस कमरे में आया हम दोनो नंगे थे 11:30 बजे चुक थे मेरा लिंग ढिला हो चुका था।

कुसुम मुझसे आकार मुझसे चिपक गई। में उसके निपल्स को शेहला रहा था। उसने कहा अब शुरे करे। मैंने कहा सोच लो वो बोली करो ना सोचना क्या है। उसने मेरे लिंग को पकडकर हलके से दबा दिया। मेरा लिंग टाइट होना लगा था। तबी उसकी नजर कंडोम पर पड़ी वो बोली ये भी लाए थे। मेने कहा हा। वो कंडोम का पैकेट देख कर बोली ये मैंगो क्यों छपा है इस पर मैंने कहा ये फ्लेवर है। वो बोली मतलब मेने कहा इसको लिंग में पहनने के बाद लिंग चूसोगी तो पता चलेगा।

उसने कहा वाह क्या बात है। और उसने पैकेट में एक कंडोम निकला उसमे से आम की महक आ रही थी। फिर उसने कहा ये लगाओ ना। मैंने अपने लिंग पर कंडोम चड्ढा लिया कुसुम ने मेरे लिंग के ऊपर तक कंडोम की रबर चड्ढा दी।

और धीरे से मुह में रख लिया मैंने कहा क्यों कैसा लगा, उसने कहा स्वाद तो आ रहा है। मैने कहा ठीक तो फिर।

वो लिंग को धीरे धीरे चाटने, चुसने लगी। फिर मेने सोचा कही ऐसे ही चुसने से विर्या ना निकल जाए।

तो मैंने कहा कुसुम आज कुछ नया करे वो बोली क्या, मैने उसके नितंबो का सेहलाते हुए उसकी गांड की तरफ इशारा किया। वो मेरा इशारा समझ गयी वो मुझे चूमते हुए सेक्सी कातिलाना अंदाज में बोली जो भी करना है बस शुरू करो।

आप लोग सोच रहे हैं मेरी पत्नी कुसुम एक चुदॆल टाइप की लड़की हैं। तो मैं आपको बताना चाहता हूं। हर लड़की कुसुम की तरह ही होती है। हर लड़की की सेक्स इच्छा कुसुम की तरह ही होती है। लेकिन लड़की की जब शादी हो जाती है तो वो अपनी सेक्स इच्छा दबा लेती और पति की इच्छा से सेक्स करती है। कुछ पति मेरी तरह अपनी पत्नी की इच्छा की कदर करता है। लेकिन कुछ सिर्फ अपनी इच्छा के हीसब से सेक्स करते हैं। पत्नी इसलिय कुछ नहीं बोलती क्यूंकि उसके पति उसे चुदैल न समझे।

अगर आपको ट्रस्ट नहीं है तो आप गर्लफ्रेंड बनाये फिर उसके साथ सेक्स करिए तो आप समझ जाएंगे आपकी गर्लफ्रेंड भी अपने शरीर के तीनो छेदो में सेक्स करने के लिए तैयार हो जाती है। आज कल लड़के और लड़कियां लव मैरिज करना पसंद करते हैं कयो की लव मैरिज में शादी से पहले ही कपल जिस्म के तीनो छेदों का भोग कर लेते हैं। वो ओरल सेक्स, एनल सेक्स, और योनि सेक्स का पूरा मजा लेते है। पर जब ऐसे कपल शादी करते हैं तो उनकी शादी लंबी नहीं चलती है। कयकी शादी के पहले ही पत्नी को ओरल सेक्स, गुदा सेक्स की आदत पड जाति है पर पति केवल योनि संभोग ही करता है। जिससे अक्सर झगड़ा होने लगता है। आप लोगो ने सुना होगा लव मैरिज जब टूटती है तो अक्सर लड़की एक ही वजह बताती है की मेरी शादी के बाद अब पहले जैसा प्यार नहीं रहा। मतलब पहले की तरह सेक्स लाइफ नहीं रही।

मै कुसुम का अंदाज देखकर खुश हो गया और कुसुम को vasline की शीशी देकर बोला इसे लगा लो। उसने vasline निकल कर अपनी अगुली में लेकर अपनी टांगे चोड़ी कर अपनी गुदा में लगाने लगी। मेरा लिंग एक दम तना हुआ था। फिर घोड़ी की स्टाइल में बैठ गई। में जमीन पर खड़ा होकर उसकी गुदा में लिंग घुसाने लगा टोपा गया ही था की वो जोर से चिल्लाई में रुक गया मैंने कहा क्या हुआ वो बोली रेहन दो दर्द हो रहा है। मेने कहा ठिक है।

फिर वो शांत थी में कंडोम को निकलने ही वाला था की वो बोली एक बार ट्राई और करे। मैंने कहा ठीक है। फिर मैंने अपने हाथों से बहुत सारी vasline लेकर उसकी गुदा में लगा दी। और उगली से अंदर बहार कर के होल को देखने लगा। थोड़ी देर उन्गली करने के बाद में पुचा अब करू वो बोली हा। फ़िर मैंने लिंग उसकी गुदा में डालकर हिलने लगा। 5-6 मिनट धीरे-धीरे हिलते हुए मेरा वीर्य निकल गया और मैंने धीरे से अपना लिंग निकला तो कुसुम की गुदा में से टट्टी भी निकलनॆ लगी। मेरे लिंग भी टट्टी से खराब हो गया था।

कुसुम बोली ये क्या हुआ हम दोनो की हंसी छूट गई.कमरे में बदबू भर गई। वो धीरे से उठी और चूतर टेढे करते हुए चल रही थी। मेने पुचा ये चाल को क्या हुआ ऐसे टेढ़ी क्यो चल रही हो। वो कराहती हुई बोली आप ने जो गांड मार दी मेरी.मुजे इतनी हसी आई क्या बताउ। फिर सब साफ करने के बाद हम दो नंगे ही एक दोसरे से चिपक कर सोने लगे। वो अपना बंद आंखों से ही मुझसे बोली अब दोबारा नहीं करेंगे। मेने पुचा क्यो क्या हुआ। उसने कहा ऐसा लग रहा है जैसा अभी भी कुछ गुदा में फसा हुआ हो, मैंने कहा मतलब तो वो बोली मतल जब टट्टी करते है और टट्टी अटक जाए। में कैसे बताउ में तुम्हारे को कुछ अजीब सा लग रहा है पाद भी एकदम से निकल रहा है जैसा हवा गुब्बारे में से निकल जाती है।

मैंने कहा दर्द भी हो रहा है क्या वो बोली दर्द तो इतना नहीं है। पूरी गुदा चिकनी सी है। कुछ रिस रहा हो। मैंने कहा vasline की वजह से ऐसी चिकनी लग रही होगी। मैंने कहा ये बताओ कि मजा आया की नहीं वो बोली मजा तो आया ऐसा लगा जैसा गुदा में गुदगुदी हो रही थी। मैंने कहा योनि में और गुदा में कुछ अंतर था वो बोली योनि में ऐसा महसूस होता जैसा कुछ नरम सी रॉड अंदर जाति रहे। लेकिन गुदा में ज्यादा अंदर लेने पर उतना मजा नहीं होता। मेने पुचा ज्यदा मजा किसमे आया वो बोली मुझे नहीं पता सोने दो। मैंने कहा बस ये बताओ तुम् खुश हो, उसने कहा मैं खुश हूँ। और मुझे किस करते हुए टाइट हग करते हुए सोने लगी।

हमारी गुदा सेक्स लाइफ की शुरुआत हो गई थी। अब हम सप्ताह में एक बार गुदा सेक्स करते हैं। आप में बहुत से लोग अविवाहित होंगे में उन्हें बताना चाहता हूं। की मैरिड लाइफ में सेक्स वीक में 1-2 बार ही होता है। क्यूंकी लाइफ में जिम्मेदारी ज्यादा हो जाती है।

जारी है.......
 
अध्याय --- 6----

------+-+------ नया रिश्ता -------------------

सुबह हम उठे हम दोनों बहुत ही खुश थे, रोज की तरह रिंकी स्कूल गयी थी, मै और कुसुम तैयार होकर अपनी ड्यूटी पर चल दिये। कुसुम मुझसे बोली मुझे भी आगंबड़ि केंद्र पर छोड़ देना, हम साथ निकल पड़े।

रास्ते में कुसुम मुझसे बोली कल रिंकी का नीट का test है। आज रात को आप उसके साथ दिमापुर चले जाना। मैने कहा कुसुम तुम मुझे ये बात अभी बता रही हो, तुमने समझ क्या रखा है मुझे। अभी दो दिन हॉस्पिटल में रहा, अब आज रात को दिमापुर चले जाओ। मैं इंसान हू कोई मशीन नही, तुम मुझे पहले क्यो नही बता सकती थी।

कॉलेज के dirctor पापा के दोस्त है इसलिए कुछ नही बोलते, नही तो कभी का सस्पेंड हो गया होता अब फिर छुट्टी लेनी पड़ेगी।

सबसे बड़ी बात ये है की रिंकी भी मुझसे बोल सकती है कि मुझे पापा नीट का test देने जाना है। वो तो मुझसे बात ही नही करती है, अभी तक हमारे बीच अगर कुछ बात भी होती है तो उसने हा और ना में ही जबाब दिया है।

कुसुम हमारी शादी को पंदरह दिन से ज्यादा हो गये पर अभी तक मेरा और रिंकी के बीच कभी कोई बात तो दूर हमने एक दूसरे को ठीक से देखा तक नही है। मै सोकर उठता हू रिंकी स्कूल में होती है। मै शाम को आता हू रिंकी टूशन चली जाती है, रात को वो मेरी मम्मी के कमरे और मै उसकी मम्मी के कमरे में चले जाते है। ऐसा ही चल रहा है क्यो।

I think हमारे बीच बाप बेटी का नया रिश्ता नही बना है।

एक कहावत सच है

"शादी करके फस गया यार अच्छा खासा था कुँवारा"

मै शांत हो गया, कुसुम मेरे गाल दबाते हुए एक प्यारी सी मुस्कान देते हुए बोली मेरे प्यारे अरुण सर जी अगर आपके मन में कुछ और भी हो तो वो भी बाहर निकाल दीजिये।

मैने कहा दूर हटाओ अपना हाथ गाड़ी चलाने दो।

कुसुम मुझसे बोली ऐसा मिस्टर अरुण जी मुझसे शादी करके ही आपका चेहरा पर चमक बढ़ गयी है, और वो हॉस्पिटल वाली भाभी और नर्स आपको लाइन मार रही थी। अगर विश्वास नही हो तो शादी से पहले वाली अपनी फोटो देख लीजिये।

मैने कहा मै शुरू से ही हैंडसम हू, कुसुम बोली ओहो इतने हैंडसम थे तो कोई लड़की 35 साल तक क्यो नही मिली शादी के लिये।

मुझसे शादी करके आपकी जिंदगी में खुशिया आ गयी है, फंसे नही है आप।

कुसुम ये बात तो सच कह रही थी, मैने कहा सॉर्री बस खुश।

कुसुम जोर से हस्ती हुई बोली आप कॉलेज के प्रोफ़ेसर है मै आपको आपकी तरह ही समझाती हू, अभी आप मेरे स्टूडेंट है।

सुनिये आप जो हॉस्पिटल में जो परेशानी हुयी वो आपकी दीवानी साली जूली देवी की मेहरबानी और आपकी जिद की वजह से हुई थी। आपने मुझे छोड़कर अपने पापा को फोन किया और आपके पापा ने मुझे रात को बताया की अरुण नही आयेगा वो हॉस्पिटल में है। मुझे फोन किया होता तो मै तुरंत आ जाती और मै रात भर हॉस्पिटल में रुकती आपको परेशान नही होने देती।

अब रही बात रिंकी और आपके बीच नये रिश्ते की तो सुनिये रिंकी ने तो आपको अपना पापा तभी मान लिया था जब आप मुझे देखने आये थे, और आपने उसकी आँखों में देखकर कहा था रिंकी मुझे पापा बोलेगी मै उसके पापा होने का फर्ज निभाऊँगा।

रिंकी तो आपको मुझसे ज्यादा प्यार करती है, हमेशा आपके बारे में ही बात करती है, अगर विश्वास ना हो तो अपने मम्मी पापा से पूछ लीजिये वो तो आपकी ख़ुशी के लिए कुछ भी कर सकती है। जब आपके और मेरे बीच दो दिन पहले जो अनबन हुयी थी तो उसने मुझसे बात तक नही की थी, और तो और खाना तक नही खाया मुझे ही बुरा भला कहती रही।

आपने उसकी instagram प्रॉफ़िल् देखी है गाड़ी रोको मै दिखाती हू। कुसुम ने मुझे रिंकी की इंस्टा प्रॉफ़िल् दिखाई।

रिंकी ने आपके मॉल में जो वीडियो बनाये थे और फोटो खींची थी उनको मिक्स करके एक वीडियो बनाया था।

वो मेरी तस्वीरों को देखकर गाना गा रही थी

""खता तो जब हो जब हाल दिल किसी से कहे,

किसी को चाहते रहना कोई खता तो नही।

प्यार मुझसे करते है वो, मै जानती हू,

ये बात और मुझसे कभी कहा तो नही। ""

रिंकी ने ही मुझसे कहा की मुझे पापा के साथ दिमापुर नीट के test के लिए जाना है।

अब प्रॉब्लम आपके और रिंकी के बीच बातचीत की-- शादी के अगले दिन पूजा करके हम पांच दिन के लिए हनीमून चले गए। फिर जब हम वापस आये तब रिंकी ने ही मुझसे आपके साथ मॉल में जाने लिए कहा था, आपने नोटिस किया हो वो आपके साथ ही पूरे मॉल में चिपकी रही। रिंकी के लिए स्कूल और टूशन जाना भी जरूरी है वो तो बोलती है मुझे पढ़ लिख कर पापा का नाम रोशन करना है और उनकी तरह ही बनना है।

अब मै आपकी परेशानी बताती हू

मै filoshpi के जरिये बताती हू।

दरसल नया रिश्ता जब बनता है तो उसमे ढलना आसान नही होता है, हमारे दिल और दिमाग हर पल कुछ कंफ्यूजन रहते है।

चूतिये लोग कहते है रिश्ता मन से बनता है।

अबे चूतियों मन से अगर रिश्ता बनता तो हर लड़की हर किसी की पत्नी होती। क्योकि मन से तो सब कहते ये मेरी पत्नी है इसे मैने मन से नया रिश्ता बना लिया है।

रिश्ता मन से नही तन से बनता है।

आपने रिंकी को मन से तो बेटी मानते है पर तन से बेटी मानने में आपको असमंजस होता है क्योकि अगर आपने रिंकी को अपनी गोद में खिलाया होता, उसको नहलाया होता, उसकी बालों की चोटी बनाई होती, उसे अपने सीने पर रखकर सुलाया होता, उसको बचपन से जवानी की देहलीज पर कदम रखते हुए देखा होता तो आपके अंदर बाप बेटी वाली फीलिंग्स होती।

लेकिन उसे आपने कमसिन जवान लड़की के रूप में देखा है, यही कारण है मै उसके साथ बाप बेटी का नया रिश्ता नही बना पा रहा हू। लेकिन जब आपने रिंकी को बेडरूम में कपड़े पहनते हुए उसकी गलती से ब्रा पैंटी में देखा तो एक बाप की तरह उसको दरवाजे बंद करके कपड़े पहनने को बोला।

अगर आपकी जगह मै होती और आपके जवान बेटा होता तो मुझे भी उससे मम्मी बेटे वाला नया रिश्ता बनाने में ऐसी झिझक होती।

मुझे कुसुम की कोई भी बात समझ नही आ रही थी।

मैने बाइक रोकी और कुसुम को बोला उतरना, और कुसुम के सामने हाथ जोड़कर

मैने कहा मैडम ओ मैडम कुसुम मैडम बस करो और मुझे माफ करो तुम्हारी रिश्तों वाली filoshpi मुझे समझ नही आ रही है।

मुझे रिंकी और मेरे बीच बाप बेटी के रिश्ते की शुरुआत कैसे हो ये बताओ देवीजी।

कुसुम हसने लगी बोली क्यो बोर हो गये अभी थोड़ा सा ज्ञान और बचा है वो और ले लो।

मैने कहा मैडम आपका आगणबादी केंद्र आ गया और जो बचा हुआ ज्ञान है वो आप अपनी सहेली को दे देना। मेरे कान में धुँआ निकल रहा है।

जाइये ज्ञान पांडे मैडम बाय।

मै कॉलेज चला गया, स्टूडेंट को पढ़ाने में मन नही लग रहा था, मै कैंटीन में खाना खा रहा था तभी मेरे साथ के एक टीचर आये और मेरे साथ बैठकर खाना खाते हुए बोले अरुण क्या हुआ कोई टेशन है तो बताओ वो साइक्लोजी की टीचर थे। मैने उन्हे अपनी रिंकी के साथ नये रिश्ते वाली बात बताई।

वो हस्ते हुये मुझे समझाने लगे।

जब बच्चे का जनम होता है तो वो नंगा होता है वो अपने माँ बाप के सामने नंगा ही आया है और जब माँ उस बच्चे को बिना लाज शर्म के परदा के अपने नंगे जिस्म से चिपकाकर बच्चे को अपने स्तनों से दूध पिलाती है तो जो नया रिश्ता बनता है उसे माँ, मम्मी कहते है। कुछ महीनों के बाद जब बाप उस बच्चे के नंगे बदन को बिना लाज शर्म के परदे के छूते है, उसे अपने सीने से लगाते है और वो बच्चा सुसु और पोट्टी कर देता है जो नया रिश्ता बनता उसे बाप, पापा कहते है।

हर नये रिश्ते की शुरुआत एक लड़की और लड़के से होती है।

जैसे जब एक लड़की शादी के बाद ससुराल जाती है और वो अपने सास, ससुर, ननद, देवर, जेठ जेठानी, और भी ससुराल मे बहुत से लोग होते है उनके साथ नया रिश्ता बनने में काफी समय लगता है इसका कारण एक दूसरे के बीच लाज, शर्म का परदा है। जैसे जैसे लाज शर्म कम होती है तो मानसिक रूप से रिश्ता बनना आसान होता जाता है।

सबसे पहले लड़की अपने पति के साथ शादी की पहली रात मतलब सुहागरात पर शारीरिक रूप से जुड़ती है। दोनों लड़की लड़का एक दूसरे के जिस्मों के साथ बिना लाज शर्म के जुड़कर पति पत्नी का नया रिश्ता बनाते है।

अगर लड़का लड़की शादी के बाद शारीरिक संभोग नही करे तो उनके बीच कभी भी पति पत्नी का रिश्ता नही होगा। और ऐसे रिश्ते को कानूनी मान्यता भी नही है। अगर पति पत्नी का रिश्ता बनाना है तो शारीरिक संबंध तो बनाना ही पड़ेगा।

"अगर बनना है खसम लुगाई तो करनी पड़ेगी चुदाई"

सबसे आसान लड़की के लिए पति पत्नी का नया रिश्ता बनाना होता है।

पति पत्नी के रिश्ते के बाद लड़की का जो नया रिश्ता बनता है उसमे संभोग (चुदाई) की जरूरत नहीं होती है लेकिन एक दूसरे के जिस्मो का बिना परदे, लाज शर्म के देखना जरूरी होता है। जितनी जिस्म से शर्म खुलेगी नया रिश्ता बनना आसान होता जायेगा।

पहले के जमाने लड़की अपनी ससुराल में पति को छोड़कर सबसे पर्दा करती थी नतीजा उसका ससुर कभी बहु से बाप बेटी वाला रिश्ता नही बन पाता था। सारी जिंदगी लड़की परदे की आड़ में निकाल देती।

अपनी सास से मम्मी का, ये रिश्ता शुरू शुरू में केवल formality के लिए ही होता है। लेकिन जब लड़की गर्भवती होती है और उसकी सास उसके नंगे बदन पर बिना लाज शर्म के परदा के तेल से मालिश करती हैं उसकी care करती है तो रिश्ता बहु से बेटी का बन जाता है। जिस्म से लाज शर्म के परदे हटे नये रिश्ते बने।

ननंद या देवरानी या जेठानी से सहेली का रिश्ता-- जब नयी बहु ननंद या देवरानी या जेठानी अपनी जवानी की बाते share करने लगती है और एक दूसरे के सामने नंगी होकर कपड़े बदलना शुरू कर देती है और जब भैया ना हो तो कामुक बाते करके गर्म होने पर एक दूसरे के नंगे जिस्म को सेहलाने लगती है तो नया रिश्ता बनता है।

कुछ लोग कहते है

रिश्ता एक डोरी से बंधा होता है, जबकि सच्चाई ये है की नया रिश्ते में कोई भी लाज शर्म की दीवार नही होती है और जैसे जैसे लाज शर्म की दीवार बनती जाती है रिश्ते का रूप बदलता जाता है या कमजोर होता जाता है।

कहने का मतलब ये जब तक दो लोग एक दूसरे से लाज, शर्म का पर्दा करेंगे तब तक नये रिश्ते की शुरुआत नही हो सकती।

मेरा सर दर्द होने लगा आखिर में मैने मन में कहा मां चुदाये रिंकी और कुसुम मै जैसा हू वैसा ही रहूँगा।

लंच टाइम खतम हो गया था और मै और वो टीचर अपनी क्लास में चले गये।

मुझे बस वो टीचर की एक ही बात समझ आई और अपने मन में सोचने लगा

मुझे रिंकी और अपने बीच लाज शर्म का परदा हटाना होगा उसके साथ बातें करके, उसका दोस्त बनकर जैसे भी हो, तभी मेरा उसके साथ बाप बेटी का नया रिश्ता बनेगा।

मै अपने कॉलेज से जल्दी छुट्टी लेकर रेलवे एजेंट के पास चला गया और दो तत्काल सरकारी कोटा वाली दो ट्रेन टिकिट लेकर वापस अपने घर आ गया। कुसुम ने मेरे बैग तैयार कर दिया था। मै डैनिंग tabale पर बैठकर खाना खाने लगा।

हमने योजना बनाई रात को ट्रेन से निकलेंगे और सुबह परीक्षा देकर शाम को उसी ट्रेन से वापसी करेंगे।

कुसुम ने रिंकी को पुकारते हुए आवाज़ लगाई.

'जी मम्मी?' रिंकी ने चिल्ला कर सवाल किया. उसका कमरा फर्स्ट फ्लोर पर था.

'तुम तैयार हुई कि नहीं? ट्रेन का टाइम हो गया है, जल्दी से नीचे आ कर खाना खा लो.' कुसुम ने कहा.

'हाँ-हाँ आ रही हूँ मम्मा.'

कुछ देर बाद रिंकी नीचे हॉल में आई तो मुझे देखकर बोली पापा. मम्मी कहाँ है?'

'वो कपड़े बदल कर अ...आ रही है.' मैने रिंकी की ओर देख कर जवाब दिया. लेकिन रिंकी के पहने कपड़ों को देख मै हकला गया।

आज उसने अपनी नई लाई पोशाकों में से एक चुन कर पहनी थी. उसने लेग्गिंग्स के साथ टी-शर्ट पहन रखी थी. लेग्गिंग्स एक प्रकार की पजामी होती है जो बदन से बिलकुल चिपकी रहती है सो लड़कियां उन्हें लम्बे कुर्तों या टॉप्स के साथ पहना करती हैं, लेकिन रिंकी ने उनके ऊपर एक छोटी सी टी-शर्ट पहन रखी थी जो मुश्किल से उसकी नाभी तक आ रही थी. लेग्गिंग्स में ढंके रिंकी के जवान बदन के उभार पूरी तरह से नज़र आ रहे थे. उसकी टी-शर्ट भी स्लीवेलेस और गहरे गले की थी. मै अपनी बेटी को इस रूप में देखकर झेंप गया और नज़रें झुका ली.

'पापा कैसी लगी मेरी नई ड्रेस?' रिंकी मेरे बगल वाली कुर्सी पर बैठते हुए बोली.

'अ...अ...अच्छी है, बहुत अच्छी है.' मैने सकपका कर कहा.

रिंकी बैठ कर खाना खाने लगी उतने में उसकी मम्मी कुसुम भी आ गई लेकिन उसके कुर्सी पर बैठे होने के कारण कुसुम को उसके पहने कपड़ों का पता न चला.

'जल्दी से खाना खत्म कर लो, जाना भी है, मैं जरा किचिन का काम खतम कर लूँ तब तक...' कह कुसुम किचिन में चली गई.

'हर वक्त ज्ञान देती रहती है तुम्हारी मम्मी.' मैने दबी आवाज़ में रिंकी से कहा.

हम हसी से खिलखिला दिए.

खाना खाने के बाद रिंकी उठ कर वाशबेसिन में हाथ धोने चल दी, मै भी रिंकी के पीछे-पीछे ही चल रहा था. आगे चल रही रिंकी की ठुमकती चाल पर न चाहते हुए भी मेरी नज़र चली गई. रिंकी ने ऊँचे हील वाली सैंडिल पहन रखी थी जिस से उसकी टांगें और ज्यादा तन गईं थी और उसके नितम्ब उभर आए थे. यह देख मेरा चेहरा गरम हो गया था.

उधर रिंकी वॉशबेसिन के पास पहुँच थोडा आगे झुकी और हाथ धोने लगी, रिंकी के हाथ धोने के साथ-साथ उसकी गोरी कमर और नितम्ब हौले-हौले डोल रहे थे. यह देख मुझे उत्तेजना का एहसास होने लगा था पर अगले ही पल मै ग्लानी और शर्म से भर उठा.

'छि...यह मैं क्या करने लगा. हे भगवान् मुझे माफ़ करना.' पछतावे से मैने प्रार्थना की.

मेरे मम्मी पापा बाजार से आ गए पापा ने मुझसे कहा बेटा अरुण ट्रेन का time हो गया है अब जल्दी करो। मै रिंकी को बोला चल।

मै और रिंकी ने रेल स्टेशन के लिए एक e रिक्शा में बैठ गये, उसमे पहले से दो लोग बैठे थे। कुछ देर बाद मैंने देखा कि एक आदमी लगातार हमारी तरफ घूर रहा है, रिंकी दूसरी साइड बैठी बाहर देख रही थी,

जब मैंने गौर से देखा तो रिंकी की tshirt ढीला होने की वजह से उसके सीने के उभार का काफी हिस्सा दिख रहा था, मेरी समझ में नहीं आया कि मैं क्या करूँ?

उस आदमी को टोकने से कोई फायदा नहीं था । कुछ देर सोचने के बाद मैंने धीरे से रिंकी के कान में कहा- अपना tshirt ठीक करो बेटी ...

हम स्टेशन पहुँच गए हमारी ट्रेन प्लेटफार्म पर लग चुकी थी. मै ट्रेन के दरवाजे पर ही खड़े था, मैने रिंकी का हाथ थाम कर उसे अन्दर चढ़ा लिया. जब रिंकी मेरा हाथ थाम कर अन्दर चढ़ रही थी तो एक पल के लिए वह थोड़ा सा आगे झुक गई थी और मेरी नज़रें उसके गहरे गले वाली टी-शर्ट पर चली गई थी, रिंकी के झुकने से मुझे उसके वक्ष के उभार नज़र आ गए थे. जवानी की देहलीज पर बढ़ रही रिंकी के दूध से सफ़ेद उरोज देख मै फिर से विचलित हो उठा.

एक हलके से झटके के साथ ट्रेन चल पड़ी और हम भी अपने-आप को संभाल कर अपनी बर्थ की ओर चल दिए.

ओह पापा यू आर सो स्वीट!' कहती हुयी रिंकी खड़ी हुई और मेरे बगल में आ कर बैठ गई.

रिंकी के परफ्यूम की भीनी-भीनी खुशबू ने मुझे और अधिक असहज कर दिया था. इस तरह हम दोनों ही बिना कुछ बोले बैठे रहे.

'पता है पापा, मेरे सारी फ्रेंड्स आपसे जलती हैं?' इससे पहले कि हमारे बीच की खामोशी और गहरी होती रिंकी ने चहक कर माहौल बदलते हुए कहा.

हाहाहा...अरे क्यूँ ?' मैने भी थोड़े आश्चर्य और थोड़ी राहत की सांस लेते हुए हस्ते हुए पूछा.

'कुछ नहीं पापा ऐसे ही फ्रेंड्स लोग मजाक करते रहते हैं.' रिंकी ने टालने की कोशिश की.

'अरे बताओ ना?' मैने अपना हाथ रिंकी की पीठ पर ले जाते हुए कहा.

'वो सब कहते हैं कि ...कि तेरे पापा तो तेरे बॉयफ्रेंड जैसे हैं. पागल हैं मेरी फ्रेंड्स भी.' रिंकी ने शर्माते हुए बताया.

मुझे बड़ी जोर से हसी आई

'हाहाहा...क्या सच में?'

'नहीं ना पापा वो सब मजाक में कहते हैं...और मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है ओके...' रिंकी ने थोड़ा सीरियस होते हुए कहा।

मैने कहा इसमें सीरियस होने की क्या बात है लेकिन वो ऐसा क्यो बोलते है इसका कारण तो होगा।

रिंकी ने अपना मोबाइल निकाला और मुझे अपने instragram वीडियो दिखाने लगी।

वो मेरी तस्वीरों को देखकर गाना गा रही थी

""खता तो जब हो जब हाल दिल किसी से कहे,

किसी को चाहते रहना कोई खता तो नही।

प्यार मुझसे करते है वो, मै जानती हू,

ये बात और मुझसे कभी कहा तो नही। ""

'मैने अनजाने में अपना दूसरा हाथ रिंकी की जांघ पर रख लिया था.

रिंकी की जांघें लेग्गिंग्स में से उभर कर बेहद सुडौल और कसी हुई नज़र आ रही थी. रिंकी की जांघ एकदम कसी हुई और माँसल थी. मैने हलके से अपना हाथ उस पर फिराया, मेरा उसकी जांघ पर हाथ रखते ही रिंकी की नजर उस पर जा टिकी थी, लेकिन उसने अपनी बात जारी रखी और इस तरह मेरे छूने को नज़रन्दाज कर दिया,

'चलो पापा अब आप आराम से बैठ जाओ. मैं अपनी बर्थ पे जाती हूँ.' कह रिंकी उठने को हुई. मैने भी अपने हाथ उसकी पीठ और जांघ से हटा लिए थे. और आँखें बंद करके लेट गया। तभी मुझे पैरो की आहट सुनी आँखे खोली और उसी के साथ ही मुझ पर मानो बिजली गिर गई.

मैने जैसे ही आँखें खोली तो सामने का नज़ारा देख मेरा सिर चकरा गया था, रिंकी की पीठ मेरी तरफ थी और वह खड़ी-खड़ी ही कमर से झुकी हुई थी. उसके दोनों नितम्ब लेग्गिंग्स के कपड़े में से पूरी तरह उभर कर नज़र आ रहे थे वह उसकी पतली गोरी कमर केबिन में फैली रौशनी में चमक रही थी. मेरा चेहरा अपनी बेटी के अधो-भाग के बिलकुल सामने था. मैने गौर किया कि रिंकी असल में सामने वाली बर्थ के नीचे रखे बैग में कुछ टटोल रही थी. मुझसे रहा न गया.

'क्या ढूँढ रही हो रिंकी?' मैने पूछा.

'कुछ नहीं पापा मेरे ईयरफोंस नहीं मिल रहे, डाले तो इसी बैग में थे.' रिंकी ने झुके-झुके ही पीछे मुड़ कर कहा.

मैने ध्यान दिया की रिंकी के इस तरह झुके होने की वजह से उसकी लेग्गिंग्स का महीन कपड़ा खिंच कर थोड़ा पारदर्शी हो गया था और केबिन में इतनी रौशनी थी कि उन्हें उसकी सफ़ेद लेग्गिंग्स में से गुलाबी कलर का अंडरवियर नज़र आ रहा था. उन पर एक बार फिर जैसे बिजली गिर पड़ी.

मैने अपनी नज़रें अपनी बेटी रिंकी के नितम्बों पर पूरी शिद्दत से गड़ा लीं, मै सोच रहा था कि पहली बार में उसकी अंडरवियर क्यूँ नहीं दिखाई दी थी, और मुझे एहसास हुआ की रिंकी जो अंडरवियर पहने थी वह कोई सीधी-सिम्पल अंडरवियर नहीं थी बल्कि एक थोंग था, जो कि एक प्रकार का मादक (सेक्सी) अंडरवियर होता है जिससे पीछे का अधिकतर भाग ढंका नहीं जाता. ट्रेन के हिचकोलों से हिलते रिंकी के नितम्बों ने मेरी धज्जियाँ उड़ा दीं थी.

'ये रिंकी कब इतनी जवान हो गई? पता ही नहीं चला, आज तक इसकी मम्मी ने भी कभी ऐसी पैंटी पहन कर नहीं दिखाई जैसी ये पहने घूम रही है...ओह्ह मेरे से पैसे ले जा कर ऐसी कच्छियाँ लाती है

अचानक मेरे अन्दर सोया हुआ मर्द फिर से जाग उठा था मेरी पेंट में लंड तन के खड़ा हो गया था. अब तक रिंकी को उसके ईयरफोंस मिल चुके थे और वह सामने की बर्थ पर लेटकर गाने सुन रही थी, उसने मुस्का कर मेरी ओर देखा, उसे नहीं पता था कि सामने लेटे उसके पापा किस कदर उस के जिस्म के दीवाने हुए जा रहे थे.

ट्रेन अपनी रफ्तार से चली जा रही थी, और हम लोग थोड़ी बहुत बातें करते हुए सो गये।

सुबह 6 बजे हम dimapur पहुचे। फ़िर हमने डिसाइड किया की रेलवे स्टेशन पर फ्रेश होकर परीक्षा सेटर निकलेंगे, पहले में फ्रेश होने गया। फ़िर रिंकी गई, फ्रेश होने के बाद वो मुझसे बोली पापा मेरा पेट खराब हो गया है। लगता बार बार जाना पडेगा कोई दवा लियाओ।

मेने कहा ठीक है लेकिन दवा देने के बाद भी उसे आराम नही मिला तो मैंने कहा एक काम करते हम कोई धर्मशाला में एक कमरा लेते है वहा तुम आराम कर लेना में जब तक अस्पताल ढुढ़ता हु वो बोली ठीक है।

फिर हम लोग धर्मशाला में एक कमरा लेकर आराम करने लगे परीक्षा पेपर 11 बजे था, थोड़ी देर लेटने के बाद उसे आराम मिल गया वो बोली पापा में ठीक हू।

मैने कहा तो फिर ड्रेस चेंज कर लो हम चलते हैं।

वो बोली ठीक और उसने बैग में से एक कुर्ती और चूड़ीदार तंग पजामी निकाली। मैने उससे कहा फॉर्मल ड्रेस पहनकर exam देने क्यो जा रही हो। वो बोली ये मेरी लकी ड्रेस है, और वॉशरूम में चली गई। धर्मशाला के बाथरूम छोटे होते है. और दरवाजे की कुंडी भी खराब थी। कफी देर होने के बाद जब रिंकी वापिस नही आई तो मेने उसे आवाज दी वो धीरे से बोली हा पापा।

मेने कहा अब चलो ना टाइम हो गया वो बोली पापा एक समस्या हो गई मेने पूछा क्या हुआ वो बोली मेरी पजामी में मेरी टांग में फस गयी है और अंदर पकडने और बैठने के लिए कुछ नही है।

मुजे हसी आई मन ही मन बोला चूड़ीदार तंग पाजामी पहनेगी ये तो होना ही था। फिर मेने कहा मैं मदद करू कुछ वो बोली ठिक है। फिर मेने उसे गेट खोलने को बोला उसने थोड़ा सा गेट खोल दिया मेने देखा की उसकी एक टांग पजामी के अंदर और एक बहार थी अब मैने उसे बोला थोड़ा गेट खोले और ज्यादा तो उसने गेट खोल दिया।

वाह क्या नजारा था में उसकी तरफ नीचे से देखा उसकी गोरी चिकनी भरी हुयी जांघे, मटकी की तरह उसके गोरे चिकने चुतड़, थे। उसने कुर्ती नही पेहनी थी जिससे उसकी ब्लू पैंटी उसके चुतडो पर जो कसी थी मुझे दिख रही थी। वो उलटी खड़ी हुई थी (मेने ये दृश्य पहली बार नही देखा था इससे पहले भी में ये सब अपनी पत्नी कुसुम का देख चुका था)

मेरे लंड में कुछ खास हलचल होने लगी। मेने रिंकी की जांघो को हाथ लगाया तो वो चोंक गई लेकिन मजबूरी थी शांत रही। फिर मैंने उसे बोला की मेरी तरफ घुमो। वो जब मेरी तरफ घूमी तो मैं उसके दूध देख कर भोचका रह गया क्या मस्त चूचे थे। उसके हल्की ग्रीन रंग की ब्रा में उसके दूध बहार निकलने की कोसिस कर रहे थे। वो अपनी आंखे बंद करे थी। मैंने अपनी उंगलीयो से उसकी पजामी को जोर से खीचा तो वो मुझसे चिपक गई। बाथरूम छोटा था।

उसके दूध मेरे सीने से चिपक गए हम दोनो शांत वो आंख बंद करती और खोलने लगती । मैं उसकी कुर्ती को ऊपर करने में लगा था। मेरी उगलिया उसके पैंटी की लाइन पर गई उसकी चूत के बाल बहार निकल रहे थे, मुजे कंट्रोल नही हो रहा था, मेरा लंड टाइट हो गया था, वो जोर से कांप रही थी, मेने जोर लगाया तो उसकी पजामी छूट गई और इलास्टिक ऊपर हो गयी उसके चुतड मेरे हाथ में आ गए क्या मुलायम थे। उसके दूध ऊपर नीचे हो रहे थे,

तभी वो धीरे से बोली पापा पजामी उपर हो गई है, में ठीक से पहनकर के आती हूं। मैंने कहा ठीक और बहार आ गया,

मै बाहर खड़ा हुआ सोच रहा था मेरा और मेरी बेटी रिंकी के साथ कैसा नया रिश्ता बन रहा था।

जारी है
 
तभी वो धीरे से बोली पापा पजामी उपर हो गई है, में ठीक से पहनकर के आती हूं। मैंने कहा ठीक और बहार आ गया,

मै बाहर खड़ा हुआ सोच रहा था मेरा और मेरी बेटी रिंकी के साथ कैसा नया रिश्ता बन रहा था।

रिंकी बाथरूम से बाहर आई और तैयार थी मेरे साथ पेपर देने जाने के लिए रिंकी ने ऑरेंज कलर का चूड़ी दार सलवार सूट पेहेन रखा था मेरी बेटी रिंकी सेक्सी आइटम लग रही थी उसके बदन से चिपका हुआ कुरता जिसमे से उसके उरोज बाहर की तरफ निकल रहे थे जिनको उसने अपनी चुन्नी से ढक रखा था , उसकी जांघ और नितंबो से चिपकी हुई उसकी टाइट और चूड़ी दार सलवार जिसमे से उसकी सेक्सी पैरो और झांघो की सुन्दरता साफ़ नजर आ रही थी उसकी काजल लगी हुई आँखें नाक में छोटी सी नोज रिंग बाल ढीले clutcher से बंधे हुए बाल जिनमे से साइड से सामने के बालो की 2 लम्बी लटें जो बार बार आकर उसके गालों पे गिरती जिन्हें रिंकी बार बार अपनी उँगलियों से अपने कान के पीछे करती कुल मिलाके बहुत ही सेक्सी और हॉट लग रही थी रिंकी ,

जब भी रिंकी चलती मैं उसके कुर्ते के कट में से उसकी साइड की झांगो से लेके नितंबो तक का शेप देखता उसकी सलवार उसकी टांगो से इतनी चिपकी हुई थी की उसकी गांड तक का शेप साफ़साफ़ साफ नजर आ रहा था रिंकी मुझे देख कर मुस्करा रही थी।

"मैने मन में कहा ये लड़की तो आज जान लेकर रहेगी"

मैं भी ब्लू जीन्स व्हाइट शर्ट पहने हुए अपने बदन पर बॉडी स्प्रे डाल कर कपड़े पहने ब्लैक शूज और काला चश्मा…. मैं तैयार हो कर खड़ा था। वैसे तो मेरी उम्र 35 साल है पर मै अपने कसरति जिस्म की वजह से 25 साल का हैंडसम लड़का लगता हू।

शक्ल सूरत तो अच्छी थी ही कुल मिला कर मैं जँच रहा था

रिंकी मुझसे बोली पापा कैसी लग रही हूँ मैं इस ड्रेस मैने कहा its beautiful.रिंकी ने तुरंत अपना मोबाइल निकाला और मेरे करीब आकर मेरे गाल से अपने गाल चिपका कर एक सेल्फी लेने लगी। मुझे रिंकी के बदन से आ रही खुशबू ने पागल कर दिया था. मै बड़ी मुश्किल से अपने ऊपर कंट्रोल करके उससे बोला रिंकी बेटी अब बस कर।

चल नौ बज चुके है पेपर के लिए देर हो जायेगी। हम धर्मशाला के रूम को ताला लगाकर नीचे आ गए, मैने रिंकी से कहा बेटी पहले कुछ खा लेते है फिर चलते है। वही पास में एक नास्ते की दुकान पर हम जाकर हम बैठ गये।

वो दुकान के पीछे ही दुकान वाले का मकान था। उसकी दुकान पर वो पति पत्नी मिलकर काम कर रहे थे। मैने रिंकी से पूछा क्या खायेगी वो बोली मेरा तो पेट सही नही है कुछ हल्का फुल्का ले लीजिये। मैने दुकान वाले से request की वो अपने घर में थोड़ी सी दाल खिचड़ी बना दे। तो उसकी पत्नी ने खिचड़ी बनाने लगी।

बातों ही बातों में उस दुकान वाले से हमारी पहचान निकल आई वो मेरी मम्मी की गाँव के थे। और वो मेरी मम्मी को भी जानते थे।

"आज के जमाने में भी अच्छे लोग मिल जाते है"

वो दुकान वाले को मैने पूरा exam center का पता बताया तो वो बोले ये जगह highway पर है और ऑटो बहुत पैसे लेगा आप मेरी बाइक ले जाए।

"वो मेरे पापा मम्मी के किये गए अहसानो का कर्ज उतारकर अपना फर्ज निभा रहा था"

मै उसको ना नुकर करते हुए मान गया।

मै और रिंकी बाइक पर बैठ कर सेंटर की ओर चल दिये।

हम बात करते हुए चल रहे थे, अब मेरा मन रिंकी को अपने जिस्म से सटा देख बिगड़ने लगा उसके चुंचे के पीठ में गड़ने से मेरा लंड खड़ा हो गया था।

उसने मोबाइल निकालकर इंस्टा वीडियो बनाने लगी।

रिंकी तो जैसे पागल सी हो गयी थी

वो मेरे गालो पर हाथ फेरेते हुए गाना गा रही थी।

"" बोल तेरे मीठे मीठे बात तेरी सच्ची लागे,

मुझे बड़ी ही रोमांटिक नजारे और हसीन फीलिंग्स हो रही थी, ऐसा लग रहा था आज कितने दिन बाद सूर्य की किरण जमीन पर पड़ रही थी।

हम exam center के नजदीक पहुँच गये।

और फिर center के पार्किंग स्थल में बाईक लगाकर दोनों अंदर घुस गए । Center के आखिरी हिस्से में सिर्फ पेड़ पौधे थे. हम लोग समय से आधे घंटे पहले आ गये थे, बहुत से लड़के लड़किया साथ साथ खड़े, बैठे , लेटे, एक दूसरे के गले में हाथ डाले हुए बात कर रहे थे। Exam center लवर्स प्वाइंट के रूप में नजर आ रहा था।

हम दोनों एक विशालकाय बृक्ष के नीचे बैठ गए। मै रिंकी की neet test की बुक खोलकर उसको पढ़ने लगा और रिंकी से बोला बेटी थोड़ा revision कर लो। वो अपना मोबाइल निकालकर इंस्टा वीडियो बानने लगी। मोबाइल में गाना बज रहा था

"" किताबे बहुत सी पढ़ी होगी तुमने,

कभी कोई चेहरा क्या तुमने पढ़ा है।

मै रिंकी की इस तरह वीडियो और गाना सुनकर खुद को रोक नहीं पाया और मै भी रिंकी के साथ गाना गाने को मजबूर हो गया।

"" पढ़ा है मेरी जान दिल से पढ़ा है,

रिंकी-- बता मेरे चेहरे पर क्या क्या लिखा है।

हम दोनों हसने लगे।

थोड़ी देर बाद रिंकी इधर उधर देखने लगी और मेरी बाह में बाह डालकर मुझसे चिपक गई तो मेरा हाथ उसके पीछे था, तभी मुझे उसके कोमल, मुलायम, cup bra में कसे हुए दूधों का एहसास अपनी बाह पर मिलने लगा।

मुझे कुछ समझ नही आ रहा था मै क्या करू, मेरी जवान लड़की मेरे साथ इस तरह चिपक कर बैठी थी जैसे मै उसका प्रेमी या पति हू।

रिंकी ने चुन्नी ओढ़ रखी थी।

मेरे हाथ की उंगलियाँ ना चाहते हुए भी उसकी चुन्नी के नीचे उसके सीने के उभारो पर पहुँच गयी थी।

मैने उसकी तरफ देखा तो उसने मेरे कंधे पर अपना सर रख दिया अब वो बार बार मेरी गर्दन पे अपने होंठ फेर रही थी और मैं कुछ नहीं कर पा रहा था।

रिंकी कि आंखें बन्द हो चुकी थी, हम दोनों काम वासना की दुनिया में खो रहे थे

हमारी मर्यादा टूटने की कगार पर आने वाली थी।

"हमारे बीच कैसा नया रिश्ता बन रहा था"

मैंने सोचा enough is enough ये ऐसे नहीं मानेगी मुझे ही कुछ करना पड़ेगा।

मैने अपनी सांसों को नियंत्रित करते हुए उससे कहा रिंकी बेटी exam का समय हो गया है सभी लड़की लड़के अंदर चले जा रहे है। रिंकी ऐसे react करते हुए अपनी आँखों को खोलकर मुझे देख रही थी जैसे कोई हसीन ख्वाब से मैने उसे जगा दिया हो। वो मेरी तरफ मुस्कुरा कर देखती हुई खड़ी हो गयी।

मै उसको center के गेट तक छोड़ने गया, उसने गेट के अंदर जाने से पहले मेरे सीने से लिपट गयी और बोली मेरा इंतजार करना।

और अंदर चली गयी।
 
रिंकी exam center के अंदर चली गयी थी लेकिन मेरी निगाहें उसको गेट पर ढूढ़ रही थी। पता नही मुझे क्या हो रहा था एक अजीब सा attraction रिंकी से होने लगा था । रिंकी के शब्द "मेरा इंतजार करना" मेरे कानों में गूँज रहे थे।

और मै उसी पेड़ के नीचे बैठ कर उसका इंतजार करने लगा।

पेपर खतम हो गया था

थोड़ी देर बाद रिंकी बहार निकल आई

रिंकी मुझे देखकर ख़ुशी से झूम उठी.

'पापाआआआ.....!' उसने दौड़ते हुए मुझ को आवाज़ दी और खिलखिलाते हुए मेरी ओर बढ़ी.

मैने भी आगे बढ़ते हुए अपनी बाँहें खोल दीं रिंकी आ कर मेरे आगोश में समा गई, मैने रिंकी को अपनी छाती पर भींच लिया था. रिंकी का वक्ष अब मेरी छाती से लगा हुआ था और मेरे हाथ उसकी पीठ और कमर पर कसे हुए थे. मैने आज पहली बार उसे इस तरह गले लगाया था. मेरे बदन में जैसै करन्ट दौड़ने लगा और मैने अपनी बाँहें और ज्यादा कस लीं थी.

कुछ एक क्षण के उन्माद के बाद रिंकी को भी एक पुरुष के जिस्म की संरचना और ताकत का एहसास होने लगा, रिंकी अपने पापा की छाती पर उसके स्तनों का मर्दन कर रही थी, उसका बदन मेरी बाजूओं में इस तरह जकड़ा हुआ था कि वह चाहकर भी मुझसे अलग नहीं हो पा रही थी.

'पापा...!' ओह आह, मेरी कसती चली जा रही पकड़ से आजाद होने की कोशिश करते हुए रिंकी ने मुझसे कहा.

'मैंने उसे अपनी गिरफ्त से थोड़ा आजाद करते हुए कहा.

पेपर कैसा गया वो बोली मस्त मजा आ गया।

'हाँ पापा...ओह गॉड. आई एम् सो हैप्पी!' रिंकी ने कहा.

वो बहुत खुश नजर आ रही थी।

दो बजे थे मैने रिंकी से कहा बेटी चल और मजा मस्ती करते है। वो बोली good idea पर कैसे. मैने कहा

आज संडे को फनडे बना कर। (Comptition exam हमेशा sunday को ही होते है)

वो मेरी ओर देखने लगी उसकी कुछ समझ में नहीं आया मैंने कहा आज तुम्हे dimapur घुमाते हैं… रिंकी खुशी से बोली सच हम घूमने जाएंगे मैंने कहा हां मेरी बेबी आज हम घूमने जाएंगे ।

रिंकी के गोरे मुखड़े की रौनक बढ़ गयी ये सुन कर मैने कहा चलें प्रिंसेस रिंकी जी….

मेरी बात सुन कर वो हल्का सा मुस्कुरा दी उसे मुस्कुराते देख मुझे भी राहत मिली फिर हम बाइक के पास आये और मैने गाड़ी स्टार्ट की, और कहा आइए मैडम प्लीज बैठये मेरी इस हरकत पर रिंकी खिलखिला कर हंस पड़ी और बैठ गईं मैंने style मारते हुए बाइक घुमाई।

पर इतने सब मे ही मुझे रिंकी की ओर एक खिंचाव सा होने लगा था और मन मे सोचने लगा कि रिंकी कितनी खूबसूरत और प्यारी हैं क्या incest sex कहानियों में बने हुए रिश्ते ऐसी ही स्थितियों में बनते होंगे ये सब सोचते हुए मैं बाइक चलाते हुए एक मॉल की पार्किंग में बाइक लगा कर के बाहर आया और प्लीज कम मैडम

रिंकी बोली इतना खुश मत करो मुझे पापा जब भी मै ज्यादा खुश होती हूँ भगवान कोई न कोई दुख डाल देता है मैंने कहा रिंकी अब ये सब बातें भूल भी जाओ जो होना था हुआ पर अब ऐसा कुछ नही होने वाला अब से तुम्हारी जिंदगी सिर्फ खुशियों से भरी होगी और मैं रिंकी का हाथ थामे हुए उसे ले कर मॉल के अंदर आ गया।

मैंने कहा सब से पहले आज मैं तुझे शॉपिंग करवाउँगा तो रिंकी बोली अच्छा ठीक है जैसी आपकी मर्ज़ी चलो…. फिर मैं रिंकी को ले कर लेडीज सेक्शन में आया और सब से पहले जीन्स और टॉप निकलवाये काउंटर पर मौजूद सेल्स गर्ल ने नए फैशन की ढेर सारी जीन्स और टॉप का ढेर लगा दिया मैंने कहा पसन्द कर लो…..

फिर रिंकी ने दो जीन्स और दो टॉप सेलेक्ट कर लिये।

फिर मैंने सेल्स गर्ल को कहा नाइटी दिखाओ । रिंकी ने मेरे हाथ पर चुटकी सी नोचि और शर्माती हुयी धीरेसे बोली पापा मै ये नही पहनती हू। मैने उसे कहा तेरी मम्मी के लिये है। सेल्स गर्ल ने कई सारी सिंपल सी नाइटी निकाल दी मैंने कहा कुछ स्पेशल दिखाओ तो उसने सिल्की कपड़े में कुछ खूबसूरत सी नाइटी दिखाई मैंने उनमें से एक ब्लैक और एक रेड कलर की पसन्द कर ली वो सब पैक करवा कर पेमेंट कर के आगे बढ़े।

रिंकी का चेहरा कुछ उतरा हुआ सा दिख रहा था। मैने उससे पूछा क्या हुआ बेटी वो मुह फुला कर बोली कुछ नही मै कोई teenager लड़का तो नही था जो उसके नखरे उठाता लेकिन मै इतना जरूर समझ गया था कि जो नाइटी मैने कुसुम अपनी पत्नी और उसकी मम्मी के लिये ली है वो उस बात से जल गयी है। और रिंकी को अपनी मम्मी से ही जलन होने लगी है।

मै बड़ी ही कश्मकश में पड़ गया था मेरी बेटी मेरी पत्नी से जलन महसूस करने लगी है। जैसे वो मम्मी बेटी नही सौतन हो।

"" शायद मेरी वजह से सगी माँ बेटी में ये कैसा नया रिश्ता बनना शुरू हो गया था""

मैने जब उसकी चेहरे की तरफ देखा तो वो मोबाइल में मेरे और उसके आज बने हुए वीडियो देख रही थी।

मैने रिंकी से कहा क्या हुआ बेटी और शॉपिंग करनी है, वो बोली हा पापा मुझे ब्रा पैंटी लेनी है। मै रिंकी के मुह से ब्रा पैंटी शब्द सुनकर सहम गया। मैने अटकते हुए कहा रिंकी बेटी बनियान अपनी मम्मी के साथ खरीद लेना। वो बोली पापा बनियान नही ब्रा होता और मुझे आज और अभी लेनी है। और वो लेडी अंडर गारमेंट शॉप में घुस गयी।

फिर मैं भी रिंकी के पीछे पीछे अंडर गारमेंट्स वाले सेक्शन में गया वहा सेल्स गर्ल एक की लेडी थी। उसने मुझसे पूछा may I help you sir मैंने कहा इसके लिए अंडर गारमेंट्स चाहिए तो उसने साइज पूछा रिंकी ने जानबूजकर मेरी तरफ मुह करके मेरे चेहरे की तरफ देखते हुए धीरे से बताया 34 साइज की ब्रा और 36 कि पैंटी।

मै ये समझ गया कि रिंकी जानबूजकर मुझे अपना फिगर का साइज बता रही है.

Sales girl ने नार्मल कॉटन की ब्रा पैंटी दिखाई तो रिंकी ने कहा कुछ और दिखाइए कॉस्टली तो उसने नेट की कुछ फैंसी ब्रा पैंटी दिखाई जिनमे सिर्फ नाम का कपड़ा था उसमें से एक रेड कलर का सेट मुझे बहोत अच्छा लगा मैं उसे उठा कर देखने लगा तो वो लेडी बोली sir ये ले लीजिए ये एकदम लेटेस्ट है और mam पर खूब जंचेगा…. वो हमें boyfreind, girlfriend समझ रही थी मैने हैरानी से रिंकी की ओर देखा और उसे टोकने के लिए मुह खोला ही था कि रिंकी ने उसे वो सब पैक करने को बोला और मुझ को चुप रहने का इशारा किया।

मैने धीरे से फुसफुसा कर रिंकी के कान में कहा कि ये क्यों ले रहे ही है तेरे किस काम की ये, रिंकी बड़ी नौटी style में मुस्कुराते हुए कहा पहनने की चीज है तो पहनने के काम ही आएगी । हम पेमेंट कर के आगे बढ़ गये, फिर वो कॉस्मेटिक काउंटर पर गयी और ढेर सारा मेकअप का सामान लैक्मे की लिपस्टिक नेल पॉलिश काजल etc खरीदा मैने एक दो बार उसे मना करने की कोशिश की पर रिंकी ने एक ना सुनी।

सारा सामान ले कर हम वापस मॉल के थियेटर सेक्शन में आ गए लगभग 8000 की शॉपिंग हो गयी थी….. रिंकी ने दो पल के लिए मेरी आंखों में देखा मेरे चेहरे पर थोड़ी सख्ती थी । रिंकी ज्यादा देर मुझसे नजर नही मिला पाई और नजरें झुका ली।

मैने सोचा हो सो गया मैंने दो टिकट फिल्म की ले ली उसी समय का शो था और ज्यादा भीड़ नही थी….. धाकड़ का शो था फिर मैंने पॉपकॉर्न और कोल्ड ड्रिंक लिया और हम अंदर चले गए….. एक कार्नर सीट पर जा कर बैठे और थोड़ी देर में ही फ़िल्म शुरू हो गयी…. मैंने पॉपकॉर्न का बॉक्स रिंकी की गोद मे रख दिया और फ़िल्म देखने लगे…..

मैं बीच बीच मे रिंकी की गोद मे रखे हुए बॉक्स में से पॉपकॉर्न निकाल रहा था और ऐसे में ही बार बार मेरा हाथ अंधेरे में उसके कसे हुए बूब पर लग रहा था।

पॉपकॉर्न खत्म होने पर रिंकी ने मेरा हाथ अपने हाथ मे ले लिया और हम फ़िल्म देखने लगे फ़िल्म में दो तीन काफी गरम सीन थे ।

उधर पूरे थिएटर में ठहाके और गंदे कमेंट्स आने चालू हो गए. 'चूस ले चूस ले...ओओओओ...मसल-मसल...हाहाहा हाहाहा' 'वाह सीरियल किसर...आहाहाहा...' की आवाजें आने लगी, एक आदमी ने तो बेशर्मी की हद ही पार कर दी थी, 'डाल दे साली के..डाल डाल...’रिंकी का सिर पास बैठे अपने पापा के सामने ऐसे कमेंट सुन शर्म से झुक गया था और उसका बदन गुस्से से तमतमा रहा था 'कैसे जाहिल लोग हैं यहाँ पर...बेशर्म...हुह.' बाकी की फिल्म कब ख़त्म हुई उसे आभास भी नहीं हुआ, उसका पूरा समय वहां आए मर्दों को कोसने में ही बीत गया था.

पर हमने उस पर कोई बात किये बिना चुपचाप पूरी फ़िल्म देखी और फिर जब फ़िल्म खत्म हुई तो हम बाहर आ गए….. पर मेरे सीट से खड़े होते ही रिंकी ने मेरा हाथ कस के अपने हाथ मे पकड़ लिया और वैसे ही हाथ पकड़े हुए बाहर आई हम पार्किंग तक ऐसे ही हाथों में हाथ डाल कर आये और मुझे ऐसा लग रहा था मानो मैं अपनी गर्ल फ्रेंड के साथ मूवी देख कर निकला हूँ…..…. वो काफी खुश थीं।

अरे रिंकी! बताया नहीं तुमने कि मूवी कैसी लगी तुम्हें? पिछली बार तो फिल्म की बातों का रट्टा लगा कर हॉल से बाहर निकली थी तुम...'

'हेहे...ठीक थी पापा...'

'हम्म...मतलब जंची नहीं फिल्म

'हेह...नहीं पापा ऐसा नहीं है...बस वैसे ही, मूवी की कास्ट (हीरो-हीरोइन) कुछ खास नहीं थी...और क्राउड भी गंवार था एकदम...सो...आपको कैसी लगी?' रिंकी ने धीरे-धीरे अपने मन की बात कही और पूछा.

'...मुझे तो ठीक लगी...' मैने कहा, 'और क्राउड तो अब हमारे देश का जैसा है वैसा है.'

रिंकी ने नाखुशी जाहिर करते हुए कहा.

'हुह...फिर भी बदतमीजी की कोई हद होती है. पब्लिक प्लेस का कुछ तो ख्याल होना चाहिए लोगों को...’

मैने रिंकी की पीठ थपथपाते हुए कहा.

'हाहाहा...अरे तुम क्यूँ खून जला रही हो अपना?'

'और क्या तो पापा...गुस्सा नहीं आएगा क्या आप ही बताओ?' रिंकी का आशय थिएटर में हुए अश्लील कमेंट्स से था.

मैने हस्ते हुए कहा

'अरे अब क्या बताऊँ...हाहाहा.' 'माना कि कुछ लोग ज्यादा ही एक्साइटेड हो जाते हैं...'

रिंकी ने मेरे ढुल-मुल जवाब को काटते हुए कहा.

'एक्साइटेड? बेशर्म हो जाते हैं पापा...और सब के सब आदमी ही थे...आपने देखा किसी लड़की या लेडी को एक्साइटेड होते हुए?'

मैने हस्ते हुए कहा

'हाहाहा तुम तो मेरे ही पीछे पड़ गई...मैं कहाँ कह रहा हूँ के लडकियाँ एक्साइटेड हो रहीं थी.' 'अब हो जाते हैं बेचारे मर्द थोड़ा उत्साहित क्या करें...'

शाम के साढ़े सात बजे थे अंधेरा हो चुका था मैंने कहा अब चलते हैं भूख लगी है फिर मैंने गाड़ी स्टार्ट की और एक अच्छे से रेस्टोरेंट में लगाई रिंकी ने खाना आर्डर किया हमने खाना खाया और खा पी कर बाहर आये ।

बाइक पर बैठे रिंकी ने कहा और बताओ पापा…. अब कहाँ चले मै बोला अब बस सीधा धर्मशाला जायेंगे, ये बाइक भी पेट्रोल डावाकर उस दुकान वाले को देना है। और फिर मैने उस दुकान वाले को बाइक की चाभी दी, हम धर्मशाला आ गए….. हम ऊपर अपने कमरे में आ गए चाभी मेरी जेब मे थी और मेरे हाथों में सामान था मैंने कहा रिंकी बेटी मेरी जेब से चाभी निकालो तो।

रिंकी ने मेरे जेब मे हाथ डाला और संयोग से मेरा लंड जो रिंकी बाइक पर मुझसे चिपक कर आई थी और उसके स्तनों के स्पर्स के बाद से लगातार खड़ा ही था उसे मैंने घुमा कर उसी साइड में किया हुआ था जिस तरफ की जेब मे चाभी थी।

रिंकी ने तेजी में हाथ अंदर डाला और चाभी पकड़ने के लिए उंगलियां घुमाई जेब के अंदर और उनकी उंगलियां चाभी से पहले मेरे लंड पर टकराई….. और कुछ समझने से पहले रिंकी ने अच्छे से हाथ से टटोल कर लंड की सख्ती महसूस की ये इतनी जल्दी में हुआ कि रिंकी और मुझे कुछ समझ ही नही आया और जब उसे समझ आया कि वो क्या चीज है तो उसने जल्दी से हाथ बाहर निकाल लिया मुझे भी समझ नही आया क्या करूँ ।

तो मैं एकदम से बोला बेटी चाभी निकालो ना क्या कर रही हो रिंकी ने एक पल सोचा और फिर से हाथ मेरी जेब मे घुसाया रिंकी का हाथ मेरे सख्त हुए सुपाड़े को टच करता हुआ ही अंदर गया और उसने एक बार हाथ घुमा कर अच्छे से चाभी को टटोला पर वो रुमाल और फ़ोन के बीच मे उलझी पड़ी थी रिंकी ने चाभी पकड़ कर खींची और एक बार फिर से उसकी उंगलियां लंड की सख्ती को महसूस करती हुई बाहर आ गईं…..

रिंकी जल्दी से चाभी लगा कर दरवाजा खोला और अंदर चली गईं मुझे तो इस घटना से बड़ा मजा आया….. मैं भी अंदर आ कर सारा सामान टेबल पर रख कर बोला अब बताओ रिंकी बेटी कैसा रहा आज का दिन रिंकी मेरी ओर देख कर बोली मज़ा तो खूब आया । मैने कहा अबसे हम हर संडे को मूवी और डिनर के लिए जाया करेंगे। रिंकी एकदम खुश हो कर बोली कितना खयाल है मेरा….. मैंने थोड़ा शरारती लहजे में कहा अब मेरी नई गर्ल फ्रेंड है तो उसका ख्याल रखूंगा ही।

रात के नौ बज गये थे और हमारी ट्रेन साढ़े दस बजे की थी, मैने कहा चल रिंकी बेटी चल नीचे थोड़ी देर टहलेंगे और पास में जो पार्क है वही बैठेंगे, फिर वही से रेलवे स्टेशन पहुँच जाएंगे

फिर हम धर्मशाला से बाहर आ के पैदल ही टहलते हुए चल पड़े पार्क की ओर अभी हम कुछ कदम ही चले थे कि रिंकी ने मेरा हाथ अपने हाथों में पकड़ कर साथ चलने लगी…..
 
हम धर्मशाला से बाहर आ के पैदल ही टहलते हुए चल पड़े पार्क की ओर अभी हम कुछ कदम ही चले थे कि रिंकी ने मेरा हाथ अपने हाथों में पकड़ कर साथ चलने लगी…..

मेरे और रिंकी के बीच अब काफी नजदीकी बढ़ चुकी थी. चौबीस घंटे एक-दूसरे के साथ रहने और बातें करने से बातों-बातों में रिंकी अब मेरे साथ फ्रैंक हो गयी , वह मुझसे अपनी फ्रेंड्स और उनके कारनामों का भी जिक्र कर रही थी, कि फलां का चक्कर उस लड़के से चल रहा है और फलां लड़की को उसके बॉयफ्रेंड ने क्या गिफ्ट दिया था वगैरह-वगैरह. मै भी उसकी बातों में पूरा इंटरेस्ट लेकर सुन रहा था । जिस से रिंकी और ज्यादा खुल कर बतिया रही थी. जाने-अनजाने ही मै और रिंकी (पापा बेटी) एक नये incest sex वाले रिश्ते के चक्रव्यूह में फंसते चले जा रहे थे.

रिंकी ने चलते चलते कहा आज मौल में जब अंडरगार्मेंट्स खरीद रहे थे वो सलेस girl हमें boyfreind, girlfriend समझ रही थी….. मैंने रिंकी को छेड़ते हुए कहा ऐसा लगता है क्या रिंकी बोली मैं क्या जानू…..

फिर हम ऐसे ही बातें करते हुए पार्क में आ गए ये काफी बड़ा पार्क था ….. अंदर एक पक्की सड़क पार्क के पिछले हिस्से तक गयी थी और दोनों ओर पेड़ लगे हुए थे कही कही सड़क के किनारे पत्थर के बेंच लगी हुई थी और थोड़ी थोड़ी दूर पर लाइट्स भी लगी हुई थी….. कुछ लोग नजर आ रहे थे ज्यादातर कपल्स ही थे जो एक दूसरे के हाथों में हाथ डाल कर बैठे हुए थे कुछ पेड़ों के नीचे कुछ बेंच पर।

मैं और रिंकी पहली बार आये थे इस पार्क में तो मैंने सोचा पीछे तक घूम के पूरा पार्क देखते हैं तो हम चलते चले गए काफी आगे जाने पर पार्क एकदम सुनसान था और हम चुपचाप चले जा रहे थे तभी मेरे कान में कोई आवाज़ आयी मैंने उधर देखा तो एक लड़की जो दिखने में रिंकी की उम्र की थी और एक 25-26 साल का लड़का सड़क से थोड़ा हट के एक पेड़ के नीचे आपस मे लिपटे हुए खड़े थे…. लड़की की सलवार नीचे सरकी हुई थी और लड़का शायद उसे खड़े खड़े चोद रहा था वो सीन देख के मैं एक पल के ठिठक से गया।

रिंकी की नजर उस ओर गयी कुछ सेकेंड्स तक वो भी उन्हें देखती रही तभी उस लड़के का ध्यान हमारी ओर गया तो उसने थोड़ा सा शर्मा कर कहा भाई और आगे चले जाओ वहां एकदम खाली है कोई नही होगा….. रिंकी ने फौरन मुझे हाथ से खींचते हुए आगे चलना शुरू किया मैं भी उसके साथ चल दिया….. पर चार पांच कदम चलने के बाद मैंने फिर से उस ओर मुड़ कर देखा और मेरे साथ ही रिंकी ने भी देखा वो लड़का अब तेज तेज कमर हिलाते हुए लड़की को चोद रहा था… हम अब आगे आ चुके थे और पेड़ो की वजह से वो लोग हमें दिखने बन्द हो गए थोड़ा और आगे पहुंचे तो देखा वहां पार्क की पिछली बाउंडरी थी फिर हम वही एक बेंच पर बैठ गए एकदम शान्त वातावरण था हल्की हवा चल रही थी…. मैं और रिंकी एकदम पास बैठे थे….. हमारे हाथ अब भी एक दूसरे को पकड़े हुए थे मैंने कहा शहर के लोग कही भी शुरू रहते हैं…. कोई शर्म नहीं इन्हें रिंकी ने कोई जवाब नही दिया वो नीचे देख रही थीं…. मैंने कहा सॉरी रिंकी मुझे नही मालूम था यहां ये सब देखने को मिलेगा रिंकी ने कहा उसमे आपकी क्या गलती है और मेरी ओर बड़े प्यार से देखने लगी ।

फिर रिंकी ने अपना मोबाइल निकाल लिया और मुझसे बोली

'क्या पापा...यहाँ तो कोई है ही नहीं जो अपना साथ में फोटो ले दे. कितनी ब्यूटीफुल जगह है ये...और डरावनी भी.'

मैने कहा

'अरे तो तुम फ्रंट-कैमरा ऑन कर लो न.'

रिंकी बोली

'हाँ पर पापा उसकी फोटो इतनी साफ़ नहीं आयेगी अंधेरा भी तो है .' .

मैने अपना मोबाइल रिंकी को दे दिया और बोला इससे खीच लो।

'रिंकी ने मेरी बाहँ थाम ली थी.

' और मेरे मोबाइल का फ्रंट-कैमरा ऑन कर मेरे साथ फोटो लेने लगी.

जब कुछ देर वह कशमकश में लगी रही तो मैने रिंकी से पूछा कि अब वह क्या करने की कोशिश कर रही है? तो उसने बताया कि कैमरे के फ्रेम में वे दोनों अच्छे से नहीं आ रहे है. मै और रिंकी कुछ देर तक अपनी पोजीशन अडजस्ट कर फोटो लेने का प्रयास करते रहे,, पर जब बात नहीं बनी तो मैने कहा,

'ऐसे तो खिंच गई हम से तुम्हारी फोटो...व्हाए डोंट यू कम एंड सिट इन माय leg.' 'इस तरह कैमरा में हम दोनों फिट हो जाएंगे.'

रिंकी ख़ुशी से उछल पड़ी

'ओह thats good idea पापा.'

रिंकी मेरी गोद में आ बैठी, मुझे अपनी बेटी की कच्ची सी योनि अपनी जांघ पर टिकती हुई महसूस हुई थी, मेरी रूह कांप गई थी.

मेरे मुह से निकल पड़ा

'ओह रिंकी यू आर सो ब्यूटीफुल...'

'इश्श पापा. यू आर मेकिंग मी शाय (शरम)...’रिंकी ने मुस्काते हुए जवाब दिया 'इतनी भी सुन्दर नहीं हूँ मैं...मुझे बहलाओ मत...’

'तुम्हें क्या पता?' मैने उसकी पीठ सहलाते हुए कहा और अपना दूसरा हाथ उसकी जांघ पर रख लिया. रिंकी की योनि का आभास मुझे पागल किए जा रहा था.

'आज तो कुछ गलत होगा मुझसे लग रहा है..!' मै मन ही मन सोचने लगा.

मै उसकी जांघ सहलाना शुरू कर दिया.

मै रिंकी के जवान बदन को अपनी गोद में पा कर उत्तेजना और उत्साह से भर उठा मैने एक हाथ अपनी जांघ पर बैठी रिंकी के कंधे पर रख रखा था, उसके कसे हुए बदन को अपने इतने करीब पाकर मेरे लंड ने भी सिर उठाना शुरू कर दिया था.

मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना न रहा . मेरी कमसिन् जवान बेटी मेरी गोद में बैठी फोटो खींच रही थी. मै उसके बदन के कोमल स्पर्श से मंत्रमुग्ध हो उठा , उसके घने बाल मेरे चेहरे को छू रहे थे । रिंकी ने अपना एक हाथ मेरे गले में डाल मेरी तरफ मुहँ कर बैठी थी , मेरा एक हाथ उसके पीछे उसकी पीठ पर था जिसे मै थोड़ी-थोड़ी देर में ऊपर से नीचे तक फेर दे रहा था.

रिंकी अपना दूसरा हाथ अपनी जांघ पर रखे बैठी थी

फोटो बुरी नहीं आई थी, आउटडोर एनवायरमेंट होने की वजह से फ्रंट-कैमरे से भी फोटो साफ़ खिंच गई थी. उसके बाद तो जैसे मेरी लॉटरी निकल गई,

रिंकी ने फ़ोन से इंस्टा वीडियो बनाने लगी। वो मेरी गोद और जांघो पर बैठी हुयी अपनी कमर उठा उठा कर नाचती झूमती हुयी गाना गाने लगी.......

"" जुल्फे मेरी उलझा दे तू, काजल मेरा बिखरा दे तू

एक जवानी तेरी एक जवानी मेरी दोनों मिले बने प्रेमकहानी मेरी। ""

रिंकी के उछलने से वो मेरी जांघ से थोड़ा नीचे खिसक गयी।

मैने रिंकी को थोड़ा और करीब खींचा जिससे वह मेरी जाँघ पर खिसक कर मुझसे सट गई, ऐसा करते ही रिंकी की एक जाँघ मेरे खड़े लंड से जा टकराई. रिंकी को कुछ पल तो पता नहीं चला था, पर फिर उसे अपनी जाँघ के साथ लगे मेरे खड़े कड़क ठोस लंड का आभास होने लगा और उसने नज़र नीचे घुमा कर मेरी गोद में देखा रिंकी अब होश खोने के कागार पर आ खड़ी हुई थी.

रिंकी ने वीडियो बनाना बंद कर दिया और एक मूर्ति की तरह मेरी गोद में बैठी हुयी कुछ सोचने लगी।

मेरा लंड जीन्स के अन्दर से तन कर मेरी गोद में किसी डंडे सी आकृति बना रहा था और रिंकी की जाँघ से सटा हुआ था.

मैने रिंकी को हिलाया तो वो चिहुँक कर थोड़ा पीछे हट गई. उसने अपनी जाँघ पर अपने पापा के लंड से हुए स्पर्श का पता चल चुका था और मै उसके चेहरे पर ही नज़र गड़ाए हुए था अब उसने मेरी गोद में झाँक कर अनायास ही अपने-आप को पीछे हटा ने लगी।

मैने भी झट नज़र उठा कर उस की तरफ देखा कि उसकी क्या प्रतिक्रिया होती है पर मै खुद बिल्कुल सामान्य होने की एक्टिंग करते हुए, रिंकी का गाल फिर से थपथपाया और पूछा,

क्या हुआ रिंकी बेटी और वीडियो नही बनाना वो असहज होते हुए बोली नही। तो मैने कहा चल अब मेरी बारी मै एक वीडियो बनाता हू।

मैने old song

"" चूम लू होंठ तेरे दिल की ये हसरत है

कितनी लगती हो हसी मेरी नजर से देखो, ""

गाने पर एक्टिंग करते हुए हम दोनों अपनी सारी शर्म, हया भूल गये, हमारे होंठ एक दूसरे के होंठो को चूमने के लिए करीब आने लगे, हमारी साँसे, धड़कने, की रफ्तार बढ़ गयी. हमारी गरम साँसे एक दूसरे के चेहरे को स्पर्श कर रही थी। हमारी आँखे बंद होने लगी।

हम पापा बेटी की मर्यादा भूलकर आगे बढ़ने को बेताब हो रहे थे। रिंकी की जिंदगी का ये पहला चुंबन था जो वो हर हाल में लेना चाहती थी रिंकी और मेरे होंठो के बीच का फ़ासला खत्म होने वाला था कि अचानक

मेरे फ़ोन पर रिंग आने लगी,

मोबाइल की रिंग सुनकर हम वासना की नींद से जाग गये, ।

मेरा मोबाइल रिंकी के हाथो में था।

रिंकी ने झुंझला कर कहा.

'ओहो आज तो कुछ ज्यादा ही याद आ रहीं है इनको आपकी ..!'

हैल्लो?' रिंकी ने फोन उठाया.

'हैल्लो रिंकी?' उसकी मम्मी ने पूछा 'कैसा रहा exam पेपर

'रिंकी ..? ओह हाँ अच्छे हुए मम्मी...

'पापा कहाँ है तुम्हारे?' कुसुम ने पूछा.

'यही है...' रिंकी ने बता दिया.

मैने रिंकी के तेवर देख पूछा,

'क्या हुआ रिंकी? किस से बात कर रहीं है,?'

'आपकी बीवी से और किस से...?' रिंकी ने गुस्से से तमतमाते हुए कहा.

रिंकी के अपनी मम्मी को थोड़ी गुस्सेs से जवाब देने के बाद उसकी मम्मी कुसुम भी चिड़ गईं थी.

पार्क के सूनसान जगह पर हम बैठे थे जिससे मोबाइल के speakar में से आवाज जोर से आ रही थी, जैसे फोन का लाउड speakar चालू हो।

कुसुम ने रिंकी से कहा अपने पापा को फोन देना। और मुझसे बोली रिंकी कैसे इतनी बद्तमीज़ गई है . और ना जाने क्या क्या बोलना शुरु कर दिया। कुसुम का भी tap recorder शुरु हो गया।

मै कुसुम की बातो को सुनकर सोचने लगा रिंकी के आज मेरे साथ आकर पंख निकल चुके थे अब वो रिंकी नहीं रही थी जो चुपचाप सुन लेती थी...उसने भी अपनी मम्मी के सामने बोलना शुरू कर दिया हैं

जैसे ही मेरे नाम की बात आने पर रिंकी ने मुझसे फोन अपने हाथ में ले लिया और अब मेरा पक्ष लेने लगी और आखिर गुस्से में आ फोन ही डिसकनेक्ट कर दिया उसने फोन रखने से पहले अपनी मम्मी से कहा ।

'आपसे तो सौ गुना अच्छे हैं पापा...मेरा इतना ख्याल रखते हैं...बेचारे पता नहीं इतने दिन से आपको कैसे झेला है..?' (मै उसके मुहँ से ऐसी बात सुन स्तब्द्ध रह गया)

फोन कट जाने के बाद रिंकी ने शिकायत पर शिकायत करते हुए मुझे बताना चालू किया कि कैसे उसको मम्मी डाटती है, 'और बस एक बार जब वो शुरू हो जातीं है तो फिर पूरी दुनियां की कमियाँ मुझ में ही नज़र आने लगती है उनको...rinki ऐसी रिंकी वैसी...ढंग से बाहर निकलो, ढंग से कपड़े पहनो, ढंग से ये करना ढंग से वो करना... रिंकी का गुस्सा उसकी मम्मी की कही बातों को याद कर बार-बार फूट रहा था.

'मैं तो मर जाऊं तो ही चैन आएगा उनको...' रिंकी रुआँसी हो बोली.

मैने उसके कंधे पर हाथ रख उसे सीने से चिपका लिया।

और रिंकी से कहा बेटी वो मम्मी है ऐसा नही बोलते मम्मी को बुरा लगा है।

'हाँ पापा...बट मुझे बुरा नहीं लगता क्या...आप ही बताओ?' रिंकी ने मेरा सपोर्ट पा कर कहा 'मैंने भी कह दिया आज तो कि आपसे तो पापा अच्छे हैं और वो पता नहीं कैसे झेलते हैं आपको...’

मै अंदर से बड़ी हसी आ रही थी, क्योकि दोनों मम्मी बेटी बिल्कुल एक जैसी नहेले पर देहला थी। दोनों की टर टर बंद कराना बहुत मुश्किल काम था। दोनों ही कुसुम और रिंकी (मम्मी बेटी) ego, aattitude, और jiddi है। लेकिन रिंकी ये सच बोल रही थी उसकी मम्मी और मेरी पत्नी कुसुम को झेलना हर किसी के बस में नही है।

हमे यहां बैठे 45-50 मिनट हो गये थे मैंने हस्ते हुए कहा अब वापस चलें बेटी बहुत हो गया रिंकी बोली ठीक है और हम उठ कर वापस चल दिये….. रिंकी की भी हसने लगी और मेरी बाहों में बाहे डालकर चलने लगी।

पांच मिनट में हम फिर से उस जगह को क्रॉस कर रहे थे जहां वो जोड़ा लगा हुआ था और हम दोनों की नजर उधर ही थी पर अब वो वहां नही थे…. रिंकी ने कहा लगता है चले गए वो लोग तो मै हड़बड़ा कर सामने देखने लगा….. फिर हम पार्क से बाहर आये और रास्ते मे एक होटल से मैंने खाना पैक करवा लिया और हम रेल स्टेशन आ गए

ट्रेन आने में समय था हम दोनों ने खाना का पैकेट खोलकर खाते हुए बातें करने लगे।

रिंकी बोली पापा

'मेरी लाइफ कितनी happy हो गई है ...पूरी लाइफ में मैंने इतनी मस्ती नहीं की होगी जितनी यहाँ एक दिन में कर चुकी हूँ...और ये सब बस पापा आपकी वजह से ही पॉसिबल हो पाया है नहीं तो अभी घर पे बैठी वही बोरिंग लाइफ जी रही होती..

पता ही नहीं चला कब दिन निकल गया...और आप तो अब मेरे फ्रेंड जैसे हो गए हैं...इवन boy-फ्रेंड जैसे, कितना ख्याल रख रहे हैं मेरा. आई होप कि पापा आप वापस घर जाने के बाद भी ऐसे ही कूल बने रहें...कितना कुछ शेयर कर चुके हैं हम एक-दूसरे से...और मम्मी को खबर ही नहीं है कि हम यहाँ कितनी मस्ती कर रहे हैं...हेहे...

पर घर पे सच में मुझे केयरफुल रहना पड़ेगा कहीं भूले-भटके कुछ मुहँ से निकल गया तो मेरे पापा बेचारे फँस जाएँगे. .एंड फ़ोन से हमारी पिक्स भी निकाल कर रखनी होगी कहीं उन्होंने देख लीं तो और गड़बड़ हो सकती है.

मै बड़ी ही उलझन और कश्मकश में सोचने लगा,

"" खूबसूरत कमसिन् जवान लड़की का पापा होने में कुछ भी गलत नही है,

लेकिन सौतेली खूबसूरत कमसिन् जवान लड़की का पापा होना मेरे लिए एक अभिशाप बनना शुरु हो गया था,

ये हम दोनों पापा बेटी के बीच कैसे नये रिश्ते की शुरुआत हो गयी है।

और इसका क्या अंजाम होगा ये कोई बता सकता है क्या???

जारी है.......
 
अध्याय --- 7----

------------ सच का सामना -------------------

मै बड़ी ही उलझन और कश्मकश में सोचने लगा,

"" खूबसूरत कमसिन् जवान लड़की का पापा होने में कुछ भी गलत नही है,

लेकिन सौतेली खूबसूरत कमसिन् जवान लड़की का पापा होना मेरे लिए एक अभिशाप बनना शुरु हो गया था,

समय रात के 10:35 सभी यात्रीगढ कृपया ध्यान दें गाड़ी संख्या 12152 पूर्वा एक्स्प्रेस प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर आ रही है।

इस आवाज को सुनकर हमारा ध्यान टूटा हम अपनी अपनी सोच से बाहर निकल आये। और अपने बैग लेकर आती हुई ट्रेन पर चढ़ने के लिए तैयार थे। प्लेटफॉर्म पर भीड़ कम थी, ज्यादातर स्टूडेंट ही नजर आ रहे थे जो शायद रिंकी की तरह neet का टेस्ट दे कर अपने घर जा रहे थे।

ट्रेन आ गयी और हल्की धक्का मुक्की करते हुए मै और रिंकी ट्रेन में चढ़ गये। पर इस हल्की धक्का मुक्की में भी हमारे जिस्म आपस में फिर से एक दूसरे के बदन सटकर छुअन का अहसास करने लगे।

कोच के अंदर हम अपनी सीट पर पहुँच गये। हमारी एक सीट मिडिल और एक लोअर वाली थी। हमने सामान सीट के नीचे रख दिया और एक दूसरे से दूरी बनाते हुए बैठ गये। रिंकी विंडो में से बाहर देख रही थी हमारे चेहरे पर एक खुशी और एक चिंता दिख रही थी।

हमारे चेहरे की खुशी की वजह अभी तक हम दोनों पापा और बेटी के बीच जो हुआ था और हम दोनों को चिंता इस बात की थी आगे हमारा रिश्ता का क्या अंजाम होगा।

तभी

हमारे सामने वाली सीट पर तीन लड़किया और एक लड़का आकर बैठ गये उनकी उम्र भी 20-22 साल की होगी और वो भी रिंकी की तरह neet टेस्ट देकर आ रहे थे।

ट्रेन चलने लगी, और बाहर अंधेरा हो गया रिंकी ने मेरी तरफ देखने लगी। मैने उससे धीरे से कहा कपड़े चेंज कर के आना हो तो चली जाओ तो उसने मुझे smile देते हुए कहा रहने दो अगर सुबह की तरह फिर से पाजामी मेरी टांग में अटक गयी तो प्रॉब्लम हो जायेगी। हम दोनों की हंसी छूट गयी, उसने अपना मोबाइल निकाल कर अपनी इंस्टा वीडियो देखने लगी, और वीडियो देखते हुए बार बार हस रही थी।

मुझसे रहा नही गया तो उससे पूछा क्या हुआ तो वो बोली कुछ नही, मैने फिर पूछा बताओ ना तो वो मेरे पास सरक कर आ गयी और मेरे हाथ मे हाथ डालकर मुझे इंस्टा वीडियो के कॉमेंट दिखाने लगी।

जो उसने आज थोड़ी समय पहले उस पार्क में जो मेरे साथ वीडियो बनाई थी उस पर

उसकी frnds ने बड़ी सारी रोमांटिक comments

"" जैसे nice couple, तेरा boyfreind मस्त है, मुझे भी ऐसा boyfrnd चाहिए, इसका कोई भाई है क्या। मुझे जलन हो रही है, काश मेरा वाला भी ऐसा होता, जवानी की कहानी बढ़ी, होंठो को चूमकर दिल की हसरते पूरी कर देती रिंकी,

Ohh सेक्सी आगे क्या हुआ। ""

बहुत सारे cooment लिखे थे।

मुझे भी ये कॉमेंट पढ़कर हसी आ गयी। मैने रिंकी से कहा तुम अपनी frinds को सच क्यो नही बताती की मै तुम्हारा पापा हू। तो वो मुझे आँखे मारते हुए बोली कोई जरूरत नही है और उनको कभी पता भी नही चलना चाहिए।

वो बार बार मोबाइल पर अपनी उंगली फेर रही थी जिससे मेरी बाह भी हिल रही थी। जिससे रिंकी के ब्रा में कसे हुए स्तन बार बार मेरी बाह से दबने लगे। और मुझे फिर से अपने बदन में पार्क वाला अहसास होने लगा। उसने अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया।

थोड़ी देर बाद हमारे सामने बैठे लड़कियों में से एक ने पूछा रिंकी से आप वो ही हो सुबह neet टेस्ट देने आए थे। रिंकी ने कहा हा, पर आपको कैसे पता, तो वो लड़की बोली मै भी वही थी और आप दोनों जब पेड़ के नीचे वीडियो बना रहे थे तब सब आप दोनो को ही देख रहे थे।

मैने ये सुनकर अपनी बाह रिंकी की बाह में से निकाल ली,

वो लड़की ने रिंकी से इशारे में मेरी तरफ देखकर पूछा बॉयफ्रेंड है तो रिंकी भी इशारे मे बोली हा, उस लड़की ने अपनी उंगली से O (ओ)इशारा कर रिंकी से कहा nice choice.

मै रिंकी और उस लड़की के इशारों को समझ रहा था पर रिंकी के चेहरे की ख़ुशी देखकर कुछ नही बोला और ना चाहते हुए भी अपनी जवान कमसिन खूबसूरत बेटी का बॉयफ्रेंड बन गया।

ट्रेन अपनी रफ्तार से चल रही थी। रिंकी ने अपना हैंड बैग उठाया और वाॅश रूम के लिए चली गई। मै उन लड़के लड़कियों से बात करने लगा उन्होंने अपना नाम रोमा, सोमा, सीमा, और नितिन बताया।

जिसमे सीमा बड़ा सा चस्मा लगाए हुए पडाकू टाइप की लड़की थी और रोमा मोटी सी भारी शरीर की थी, सोमा जरूर कुछ सेक्सी लग रही थी। नितिन भी ठीक ठाक था। कुल मिला कर मेरी रिंकी के आगे वो सब फैल थे।

तभी रिंकी वापस आ गयी जैसे मैने उसकी तरफ देखा तो मै अपने होश खो बैठा।

रिंकी ने अपने सिर पर दुपट्टा ओढ़ लिया था

ट्रेन के डिब्बे की दूधिया रोशनी में उसका चेहरा दूध की तरह सफेद गोरा चमक आ रहा था। उसके माथे पर रेड ड्रेस से मैच करती लाल चमकती छोटी सी बिंदी, आँखों में हल्का काजल, नाक में छोटी सी सोने की nose ring होंठो पर हल्की लाल लिपस्टिक, रिंकी के गालो की चूमती उसकी जुल्फ की लट।

रिंकी सुबह की तराह एक बार फिर से अपना make up करके मेरे सामने खड़ी थी।

मेरी बेटी रिंकी मेरे सामने सादगी भरी सौंदर्य की मूरत बन कर खड़ी थी।

जैसे जैसे रिंकी के कदम मेरे पास आ रहे थे मेरी धड़कने तेज हो रही थी।

तभी अचानक से सामने बैठी सोमा ने उसका हाथ पकड़कर अपने और रोमा के बीच बैठा लिया। मै और रिंकी एक दूसरे की तरफ देख रहे थे।

नितिन मेरे पास बैठा था, तभी रोमा बोली आज की रात धूम मचाते है और कोई गेम खेलते हैं। वैसे भी 12 बजने वाले है और नींद आयेगी नही तो सोमा बोली अंताछरी खेले। और सब रेड्डी हो गये।

सीमा बोली ऐसा है मैडम आप लोगों को जो खेलना है खेलो मै तो ऊपर सोने जा रही हूँ।

मै और नितिन एक साइड और मेरे सामने रोमा और सोमा के बीच मेरी दिल की धड़कन बढ़ाने वाली मेरी प्यारी बेटी रिंकी बैठी थी।

गाने का खेल शुरू हो गया मै और नितिन एक टीम में और रिंकी रोमा, सोमा एक टीम थी। नितिन भी खूब गाने पर गाना गाये जा रहा था।

पर मै और रिंकी अभी शांत ही थे, रिंकी क्यो शांत क्यो थी ये मुझे नही पता लेकिन मै इसलिए शांत था क्योकि मेरे अंदर अभी भी एक कॉलेज का प्रोफेसर वाला attitude था और वो लोग मुझे अपने स्टूडेंट ही लग रहे थे।

शायद इसीलिए मै बार बार उनको धीरेधीरे गाने की और सही गाने की सलाह दे रहा था। तभी रोमा मुझसे बोली अरुण तुम प्रोफेसर की तरह गाने की spelling क्यो चेक कर रहे हो हमारे साथ गाओ और एंजॉय करो रात का।

वैसे भी अरुण तुम उम्र में हम लोगो से तीन चार साल बड़े ही हो पर बातें एक mature आदमी की तरह कर रहे हो। हम इस उम्र में एंजॉय नही करेंगे तो कब करेंगे। और रात फिर लोटने वाली नही है, I think तुम्हे और रिंकी को भी हमे जॉइन करके इस पल के मजे लेने चाहिए।

मै रोमा की बातें सुनकर समझ गया वो सही कह रही है वेबजह मास्टर बनने की जरूरत नही है।

तभी च शब्द आया और रोमा सोमा ने रिंकी से कहा अब तुम गाओ।

रिंकी थोड़ा शर्माते हुए मेरी तरफ देखने लगी तो रोमा बोली अरे रिंकी तुम तो ऐसे शर्मा हो रही हो जैसे अरुण की नयी नवेली दुल्हन हो। ये सुनकर सबकी हंसी छूट गयी।

सोमा बोली रिंकी अब शुरू करो।

रिंकी ने मेरी तरफ देखते हुए गाना शुरू किया-----+

"" चेहरे से अब तेरे हटती नही अँखियाँ,

तेरा नाम ले लेकर छेड़े मुझे सखियाँ,

सखियों से अब मुझको पीछा छुड़ाना है """

रोमा और सोमा आखिरी लाइन उसके साथ गाने लगी।

मुझे इस तरह रिंकी का गाना गाते हुए देखना अंदर तक घायल आ रहा था।

मेरे दिमाग में भी अपनी कॉलेज लाइफ मे लिखी शायरी याद आने लगी जो मैने अपने दिल में दबा कर रखी थी। कभी होंठो पर नही आई थी।

अपनी हसीन बेटी रिंकी की आँखों को देखकर मेरे होंठो पर अल्फाज आ गये और मै भी धीरे से रिंकी की आँखों में देखकर बोल उठा

""ये निगाहें जो खूबसूरत सी नजर आ रही है

मुझे पता है ये तबाही की ओर ले जा रही है।""

मेरी शायरी सुनकर सोमा बोल पड़ी वाह वाह तुम तो शायर भी हो।

तभी नितिन बोला अरुण गाने का गेम है और अब हमको अब ह से गाना है तुम गाओगे या मै गाऊ।

मैने भी रिंकी के चेहरे की तरफ देखते हुए गाना शुरू किया।

"" हम लाख छिपाये प्यार मगर दुनिया को पता चल जायेगा ""

फिर से सब मिलकर अगली लाइन गाने लगे

"" लेकिन छिप छिप कर मिलने से मिलने का मजा तो आयेगा ""

गाने का गेम जारी था और जैसे गाने रोमांटिक होते जा रहे थे मै और रिंकी अपने पापा बेटी के रिश्ते को भूलते जा रहे थे।

आधे घंटे बाद कोई बड़ा स्टेशन आ गया और ट्रेन रुक गयी। मै और नितिन ट्रेन से उतरकर नीचे आ गये। और खाने पीने के लिए कोल्ड ड्रिंक चिप्स लेने लगे।

नितिन मेरे से धीरे से बोला अभी मजा कम आ रहा है अरुण कुछ और ज्यादा एंजॉय करते है, मैने कहा मतलब उसने धीरे से simran off orange फ्लेवर एक छोटी सी बोतल शराब की निकाल कर कोल्ड ड्रिंक की बोतल में भर दी और मुझसे बोला ले पी।

पहले मै उसको मना किया पर बाद में सोचा थोड़ा सा पी लेता हूं और मै और नितिन दोनों ने एक एक बड़े बड़े घूँट में पी कर बोतल खतम कर दी।

मैने नितिन से पूछा तेरी क्या स्टोरी तुम अंदर बैठी लड़कियों में से किसी के बॉय फ्रेंड हो। वो बोला अरुण जो ऊपर सो रही है सीमा वो मैरी बेहन है, नीचे जो सेक्सी सोमा और रोमा उसकी सहेली है मै सोमा को पसंद करता हूँ पर मुझे हमेशा भैया बोल कर confuse करती है।

मै तेरी तरह लकी नही हू जो रिंकी जैसी चाँद जैसी खूबसूरत gf मिली।

हम आपस में बातें कर रहे थे तभी सोमा भी ट्रेन से नीचे आ गयी और उसने भी हमारी बात को आगे बढ़ाते हुए मुझसे बोली अरुण अब हम फ्रेंड्स तो बन ही गये है। इसलिए मै एक फ्रेंड्स की तरह तुमसे पूछ रही हूँ तुम रिंकी को प्यार करते हो या नही।

मै सोमा की बात सुनकर चोंक गया और अपना टीचर वाला दिमाग से सोचने लगा सोमा ऐसा क्यो पूछ रही है, उसको रिंकी ने तो नही ऐसा पूछने के लिए भेजा है।

मेरी गहरी सोच देखकर सोमा बोली मै समझ गयी ज्यादा मत सोचो।

क्योकि प्यार के इकरार में जब सोच गहरी हो जाये तो वो प्यार नही होता।

"मेरी गहरी सोच के तीन कारण थे एक मै, दूसरा रिंकी और तीसरा हमारे बीच बाप बेटी का रिश्ता"

जो सोमा को पता नही था, तभी बीच में नितिन हस्ते हुए बोल पड़ा अरुण अगर तुझे रिंकी से प्यार नही है तो हम शुरू करवा देते है। ये सुनकर सोमा भी बोली good idea.

सोमा मेरे हाथ पकड़कर मुझसे कहने लगी अरुण रिंकी तुझे बेइंतहा प्यार करती है, ये उसकी आँखों में साफ दिखता है, और मै खुद एक लड़की हू इसलिए उसके दिल की बात बहुत ही अच्छे से समझती हूँ।

नितिन फिर मजाक मे बोला सोमा मेरे दिल की बात कब समझोगी, सोमा बोली shut up. नितिन भैया।

अरुण तेरी प्रॉब्लम भी मुझे जो लग रही है वो शायद तेरी और रिंकी की age diffrence. क्योकि तुम रिंकी से पांच छे साल बड़े दिखते हो पर अरुण age is not warrier in love.

तभी ट्रेन ने अपना सायरन दे दिया, सोमा मेरा हाथ पकड़कर चलते हुए बोली अब ट्रेन में जैसा हम लोग कहे तुम वैसा ही करना और हम ट्रेन में फिर चढ़ गये।

ट्रेन ने अपनी रफ्तार पकड़ ली, और मेरी धड़कनो की रफ्तार भी बढ़ने लगी थी, मै सोच रहा था ये सोमा और मोटी रोमा, ना जाने क्या करने वाले है।

हम सब ने कोल्ड ड्रिंक और चिप्स खा लिए थे और खाली बोतल में फेकने वाला था तो सोमा बोली एक गेम खेलते हैं मै बोतल गोल गुमानुगी जिसकी तरह बोतल का मुह आया उसे में जो बोलूँगी वो करना पड़ेगा।

पहले हम दो टीम बनाते है एक टीम अरुण और रिंकी की दूसरी में मै, रोमा और नितिन

मेरा टीचर दिमाग फिर सोचने लगा

ये "" लड़किया neet test पास नही करने वाली, ये तो बस मस्ती करने आई है ""

तभी बोतल घूमी और मै फस गया और वो तीनो एकसाथ बोले अरुण और रिंकी खड़े होकर बाहों में बाहे डालकर डांस करेगे।

रिंकी उनकी बात सुनकर खुशी से उछल पडी और बोली i am reddy.

रिंकी ने मेरा हाथ पकड़कर मुझे भी खड़ा कर दिया और मेरी बाहों में बाहे डालकर हल्के से हिलने लगी।

वो तीनो बैकग्राउंड में गाना गाने लगे।

मुझे अपने अंदर डबल नशा का असर होने लगा पहला रिंकी की खूबसूरत आँखों का दूसरा फ्री की शराब का।

मै बहकने लगा

अब मै रिंकी से बिल्कुल चिपक गया था. रिंकी के कुर्ती और ब्रा में कसे हुए स्तन मेरी छाती से स्पर्श कर रहे थे. मेरा तना हुआ लंड रिंकी की पेट से हल्के से नीचे चिपक कर रगड़ मार रहा था.

मैने रिंकी को अपनी बाहों में जकड़ लिया।

उसने भी अपने हाथों से मेरे सिर को पकड़ लिया।

मेरा बायाँ हाथ उसके नितम्बों पर था और दायाँ उसकी पीठ पर।

उसकी आँखों में लाल डोरे खिंच गये और उनमें नशा सा उतर आया था और मैं जितना उनमें देखता, उतना ही नशा मुझ पर भी चढ़ रहा था।

और फिर हमारे होंठ एकदम से पास आये और मैंने उसके ऊपर के होंठ को अपने होठों से दबा लिया, उसने मेरे निचले होंठ को!

हमारी साँसें मिल गई, फिर हमारी जीभ मिली, अब मेरे दाँये हाथ ने उसकी पीठ से हठकर उसके गर्दन के ऊपर के बालों को जकड़ लिया।

हमारी साँसें मिली, हमारी खुशबू मिली, हम एक दूसरे को पी जाना चाहते थे।

मैं उस समय ना जाने कौन सी दुनिया में था जहाँ सिर्फ़ वो थी और मैं।

यह रिंकी का पहला चुम्बन था।

फिर मैं उसके चेहरे, गर्दन, छाती पे पागलों की तरह चूमने लगा और वो आँखें बन्द करे आहें भर रही थी।

उसके बगलों से आती डियो और पसीने की मिली-जुली खुशबू मुझे पागल कर रही थी।

उसने शर्म के मारे अपना मुँह अपने हाथों से ढक लिया।

तभी रिंकी ने फिर से अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और मुझे किस करने लगी.

मै इस बार ऐसे चिहुंक उठा … मानो मै रिंकी के होंठो के इस हमले के लिए तैयार ही नहीं था.

रिंकी के धीरे-धीरे किस करने के बाद मैने अपने आप सोच लिया कि आज जो हो रहा है, होने दिया जाए.

अब मुझको तो मानो गुलाब के फूलों का रस चूसने मिल गया था. मै लगातार रिंकी के रसीले होंठों का रस चूसता चला गया.

इसका नतीजा ये निकला कि धीरे-धीरे .

रिंकी की चूचियां मेरी छाती से रगड़ने लगी थीं इससे धीरे-धीरे रिंकी के अन्दर भी उत्तेजना जागती जा रही थी.

मै अपनी जिस बेटी के प्यार सेअभी तक बच रहा था … अब उसी के चुम्बनों से मुझको मज़ा आने लगा था. मैने उसके होंठों को चूमने के साथ साथ छोटे-छोटे स्तनों को दोनों हाथ से पकड़ कर धीरे-धीरे दबाना शुरू कर दिया था.

अब तो रिंकी मदमस्त हो चली थी और उसने अपने होंठों से मेरे होंठों को जोर से चूमना और चूसना शुरू कर दिया था. इसी क्रम में मेरा मुँह खुल गया तो रिंकी ने अपनी जीभ को मेरे मे मुँह में डाल दी .

रिंकी की जीभ की गर्माहट से मै मचल उठा और मैने भी रिंकी की जीभ का स्वागत करते हुए अपनी जीभ को उससे लड़ाने लगा.

अब मै कभी अपनी जीभ उसके मुँह में देता, तो कभी उसकी जीभ अपने मुँह में लेकर चूसने लगता.

रिंकी मेरे आगोश में अपने आपको पूरी तरह से समर्पित कर चुकी थी.

उसके लिए यह किसी मर्द का पहला चुंबन था, जिससे वह मदांध होकर पूरी तरह से खो चुकी थी.

रिंकी इस पल को पूरा एन्जॉय करने लगी थी.

मै रिंकी की चूचियों को दबाते दबाते अब उसकी आंखों में प्यार से देखने लगा था.

इससे रिंकी को शर्म आ गई और उसने अपनी आंखें नीचे कर लीं.

मैने रिंकी की चूची दबा कर पूछा- क्या हुआ रिंकी?

रिंकी चुप रही मगर उसकी नजरें कहने लगी थी कि मैं समर्पण कर चुकी हूं.

मै भी रिंकी की निगाहों से यह समझ चुका था कि रिंकी अब गर्मा गई है और इसकी चूत तो आज मेरे लंड के नीचे आ ही जाएगी.

अब मैने फिर से उसके होंठों को जोर से चूसा और उसकी चूचियों को जोर से दबा दिया.

धीरे-धीरे इस हार्ड चुसाई में हम भूल चुके थे कि मै उसका पापा और वो मेरी बेटी है । और हम दोनों चलती ट्रेन में अजनबी दोस्तो के सामने खड़े होकर एक दूसरे को kiss कर रहे है।

इस समय मेरे हाथ रिंकी के जिस्म को कसने लगे थे.

रिंकी को मेरी उम्र का भी कोई ख्याल नहीं रहा था. जबकि शायद

पहले वो सोचती होगी कि कोई भी पहली बार मेरे साथ kiss करेगा तो वो जवान और हम उम्र मेरा हस्बैंड ही होगा.

पर आज उसकी उम्र से दोगुनी उम्र का आदमी जो रिश्ते में उसका पापा है उसके साथ kiss करने में लगा था.

रिंकी भी इसका आनन्द ले रही थी. वो अपना हाथ मेरे बालों में सहला रही थी. उसकी हालत ऐसी हो गई थी … जैसे वो कह रही हो कि और जोर से चूस लो.

चूंकि रिंकी का यह पहली बार था, तो वो खुल कर तो कुछ नहीं कह पा रही थी लेकिन अपने हाथों से लगातार यह अहसास दे रही थी कि उसे मजा आ रहा है और उसे और भी मजा चाहिए.

अब तक यह सारा कांड चलती ट्रेन में खड़े हुए ही हो रहा था.

अचानक से नितिन, रोमा, सोमा के गाने की आवाज बंद हो गयी। हमारे कानों में ट्रेन की खड़ खड़ती आवाज के साथ एक नयी आवाज सुनाई देने लगी।

कुसुम कुसुम ओ कुसुम (मेरी पत्नी और मेरी बेटी रिंकी की मम्मी का नाम) ये देख क्या हो रहा है, कैसे ये एक दूसरे के मुह से मुह लगा कर दीवानों की तरह एक दूसरे को चूम रहे है।

जारी है.........
 
कुसुम कुसुम ओ कुसुम (मेरी पत्नी और मेरी बेटी रिंकी की मम्मी का नाम) ये देख क्या हो रहा है, कैसे ये एक दूसरे के मुह से मुह लगा कर दीवानों की तरह एक दूसरे को चूम रहे है।

हम पापा बेटी अपनी प्यार भरी वासना की नींद से जाग गये, हमारी बंद आँखे एक झटके से खुल गई।

हमने सामने देखा तो एक अधेड़ उम्र की औरत हमें देखकर बड़बड़ा रही है, और दूसरी अधेड़ औरत को आवाज दे रही थी।

मै और रिंकी एक दूसरे के आलिंगन के आगोश से छूट गए और अपने अपने जिस्म से दूरी बनाते हुए सीट पर बैठ गये। हम दोनों शर्म से पानी पानी हो रहे थे। हमें ऐसा लग रहा था जैसे हमने बहुत बड़ा गुनाह किया है। रिंकी ने अपनी शकल अपने दुपट्टे से ढक ली।

रिंकी को चेहरा दुप्पटे से ढकते हुए देख

वो औरत रिंकी से बोली देखो कैसे सती सावित्री बन रही है। अभी तो कितनी बेशर्मी और बेहायी से चूमा चाटी कर रही थी। अब शक्ल दिखाने में शर्म आ रही है।

यही शिखाया है तेरे माँ बाप ने कपड़ो और हाथ पाँव से एक अच्छे घर की लड़की दिख रही है, और यहा चलती ट्रेन में गुलछरे उड़ा रही है और ये सब हवस मिटानी थी तो किसी होटल में चली जाती है।

तेरी जैसी लड़किया पहले खुद कुकर्म करती है और फिर लड़को पर इल्जाम लगाती है।

तभी सोमा बीच में बोल पड़ी आंटी आप अपना काम करिये और जहा जा रही है वहा जाइये otherwise अपनी सीट पर बैठीये।

वो औरत सोमा से बोली तू बड़ी इन दोनों की अम्मा बन रही है, ये दोनों ऐसे सबके सामने पब्लिक place में चूमा चाटी कर रहे थे तब तो इनको रोकने की वजह मोबाइल में फिल्म बना रही थी और मुझे जाने को बोल रही है।

रोमा बोली आंटी अब हो गया ना बस खतम करे, वो औरत फिर बोली अभी कहा हुआ है वो तो अगर हम ना आते तो ना जाने क्या क्या हो जाता।

वो औरत फिर से रिंकी को देखकर बोली मुझे तो इस लड़की की हरकत पर गुस्सा आ रहा है। इसको अपने माँ बाप की जरा सी भी फिक्र नही है, इसके माँ बाप कितनी मेहनत से पैसे कमाते होंगे और इसे पढ़ने के लिए भेजा है और ये बेटी यहाँ चलती ट्रेन में सबके सामने रंग रेलिया मना रही है।

तभी दूसरी अधेड़ औरत भी आ गयी और मुझे बड़ी गौर से देखने लगी और एकदम से बोली ओह मेरी मैया तुम धामी सर के बेटे अरुण हो।

अब गालिया खाने की मेरी बारी थी।

ये सुनकर मै और रिंकी के साथ साथ सभी लोग दंग रह गये। उसके साथ वाली अधेड़ औरत ने कहा कुसुम ताई तुम इसे जानती हो तो वो बोली हा।

मै इसके पूरे खानदान को जानती हू। इसकी पहली पत्नी सुहागरात के अगले दिन ही इसे छोड़ कर चली गई थी। बड़ी मुश्किल से इसकी एक विधवा लड़की से अभी एक महीने पहले ही इसकी शादी हुयी है, और इसकी पत्नी बहुत सुंदर है और मैने सुना है इसको दहेज में इसको अपनी पत्नी से भी ज्यादा खूबसूरत सुंदर जवान बेटी मिली है। मैने इसकी पत्नी को तो शादी के बाद बाजार में आते जाते देखा है पर इसकी बेटी से नही मिली हू।

मेरा सच से सामना करने की शुरुआत होने का समय शुरु हो चुका था। और ये पहला राउंड था।

मेरी पहचान खुलने के बाद उन औरतो की आवाज थोड़ी कम हो गयी और

तभी पहले वाली अधेड़ औरत मुझसे बोली अरुण तुम बीवी बच्ची वाले होकर ऐसे कांड कर रहे हो अगर धामी सर को पता चला तो वो एक बार अपना एक्लोता बेटा समझकर माफ भी कर देंगे पर तुम्हारी बीवी को पता चला कि तुम अपनी बेटी की उम्र की लड़की के साथ ट्रेन में इस तरह चूमा चाटी कर रहे थे तो वो अपनी सयानी जवान बेटी को कभी भी तुम्हारे साथ घर में नही रखेगी।

मैने उन बुढियो से कहा गलती हो गयी और अब दोबारा नही करूँगा आप लोग जाए और अपनी सीट पर बैठे। वो बुढ़िया अपनी सीट पर ना जाते हुए पहले मूतने गयी और वापस आकर हमारे कंपर्टमेंट में झांकते हुए अपनी सीट पर जाकर सोने लगी।

सुबह के चार बज चुके थे।

मेरे कंपर्टमेंट में एक खामोशी छा गयी थी, कुछ देर पहले जहा मेरे और रिंकी के प्यार भरे चुंबन की बारिश हो रही थी वहा अब ऐसा लग रहा था उन बुढियो ने मेरे और रिंकी के प्यार का कत्ल कर दिया हो।

मैने अपनी नजर उठाकर सामने बैठी लड़कियों की तरफ देखा तो रोमा, सीमा, सोमा और नितिन मुझे खा जाने वाली निगाहों से घूर रहे थे।

मै डर गया,

मैने फिर रिंकी की तरफ देखा तो उसके दुपट्टे से ढके चेहरे पर मुझे बस उसकी बड़ी बड़ी आँखों में छोटे छोटे आँसू नजर आ रहे थे।

मै ये तो समझ गया था कि अब इन लड़कियों की गालियों की बरसात मेरे ऊपर होने वाली है बस इंतजार कर रहा था कि शुरुआत कौन करेगा।

तभी सीमा जो ऊपर सो रही थी वो भी नीचे आकर मुझसे गुस्से में बोली और कितने झूठ छिपा रखे हैं रिंकी से।

सीमा की बात का जबाब देने से पहले सोमा बोली अरुण मुझे तुम बहुत पसंद आये थे और तुम पर पूरा भरोसा करके ही मैने तुम्हारे और रिंकी के बीच ये सब प्लान बनाया था। लेकिन तुम तो धोकेबाज निकले। मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी।

तुम शादी शुदा और एक बेटी के बाप होकर भी रिंकी जैसी प्यारी लड़की के साथ इतना बड़ा game खेल रहे हो।

नितिन बोला मुझे एक बात समझ नहीं आई अरुण तुम्हे देखकर तो ऐसा नहीं लगता कि तुम्हारी शादी हो चुकी है और तुम्हारी उम्र तो इतनी नही लगती कि तुम एक जवान बेटी के बाप हो।

नितिन की बात सुनकर सीमा ही बोल पड़ी अरे पागल वो इसकी step dauther है। मुझे तो लगता है इसने उस विधवा लड़की से शादी जानबूजकर की है और ये उसकी जवान लड़की के साथ जरूर आगे कोई हरकत करेगा।

अब रोमा का नम्बर था वो मोटी मुझे मुक्का दिखाते हुए रिंकी से बोली रिंकी क्या तुम अरुण के बारे में पहले से जानती थी या इसने तुम्हे भी धोखे में रखकर ये सब किया है। अगर अरुण ने ऐसा जानबूजकर किया है तो इसकी आज खैर नही। रिंकी हम सब तेरे साथ है, बस एक बार तू सच बता हमें।

ये अरुण दिखने में हैंडसम और जितना cute and sweet है अंदर से लोमड़ी की तरह चतुर चालक है

थोड़ी देर पहले बड़ा ही शरीफ जादा बन कर मजा ले रहा था, और तो और शायरी सुना कर मजे ले रहा था, इसकी तो सारी शायरी आज हम लड़किया मिल कर ठीक से सुनते हैं। वैसे भी मैने मोबाइल में वीडियो बना लिया है, अगर ये रिंकी इसकी ये चाल है और इसने जानबूजकर तुझे फँसाया है तो मै वो वीडियो इसकी पत्नी और बेटी को दिखा दूँगी । इसकी पत्नी अच्छे से इसकी खबर लेगी। रिंकी बस यार एक बार तू सच बोल please.

तभी रिंकी जोर से बोली सब चुप हो जाओ और

रिंकी अपनी रोती हुई आवाज में बोली मुझे किसी से कुछ नही कहना बस।

सब मेरी ही गलती है, मेरा ही कसूर है, मुझे इसकी सजा मिलनी चाहिए, और उठकर जाने लगी।

मै रिंकी की इस बात को सुनकर अंदर से गुस्से से भर गया,

मै उसके पीछे जाने लगा तो रोमा ने मेरा हाथ पकड़ लिया। और बोली तुम कहा जा रहे हो। मैने उसकी तरफ घूर के देखा और थोड़ा गुस्से में कॉलेज के प्रोफेसर की तरह बोला बस अब बहुत सुन चुका मै सबकी और आगे अब किसी की एक बात नही सुनुंगा। तुम सब यही बैठो शांति से कोई पीछे नही आयेगा। और सुन मोटी जो तूने मोबाइल में वीडियो बनाया है उसे अभी कि अभी डिलीट कर नही तो तेरे मोबाइल फोन के साथ साथ तुझे भी में ट्रेन से नीचे फेंक दूंगा। मेरी धमकी सुनकर उन सबकी गांड फट गई और वीडियो डिलीट कर दिये।

और मै रिंकी के पीछे चला गया।

रिंकी एक पल लड़खड़ाई और उसके मुँह से कराह निकली , ‘आह्ह्ह्ह…’ और फिर अगले ही पल वह बाथरूम में जा घुसी और एक सिसकी के साथ दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ आई.

‘आऽऽऽऽ…हाए मम्मीऽऽऽऽ…’ रिंकी अपने हाथों में मुँह छुपाए रो रही थी. हर एक पल बाद रिंकी का जिस्म भय और शर्म से कंपकंपा रहा था. उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या सोच कर उसने अपने आप को इस स्थिति तक आने दिया था. जब उसे साफ़ पता था कि उसके पापा,

इसी पापा और बेटी की मर्यादा के रिश्ते के कारण उससे दूरियाँ बना रहे थे। फिर भी उसने उनका प्रतिकार करने के बजाय उनको उकसाया था. अपनी इस लाचार अवस्था पर विचार कर-कर के बार-बार उसकी रूलाई फूट रही थी. रिंकी को अपने आप पर भी बेहद ग़ुस्सा आ रहा था. रिंकी ने अपने पापा बेटी के रिश्ते के धर्म का निर्वाह करने के बजाय उसने इस तरह का कुकर्म करने की कोशिश की थी. आख़िर में ये सब उसी की चालबाज़ी का नतीजा था.

‘बस किसी तरह घर वापस पहुँच जाऊँ, सब बता दूँगी मम्मी को.’ रिंकी बाथरूम बैठी हुई अपनी गलती मान रही थी, ‘ रिंकी के दिमाग़ में एक के बाद एक ख़याल आते जा रहे थे, ‘ मैंने अपने पापा को क्यो बढ़ावा दिया…पता नहीं मेरा भी कैसे माथा ख़राब हो गया था…हाय…अब उनसे कैसे शक्ल दिखाऊ और कैसे बात करूँगी…मेरी जैसी बेटी किसी को न दे भगवान…’

इधर मेरे मन में सवालों के तूफान उठ रहे थे मै सोच रहा था,

मेरी पापा बेटी के रिश्ते के पाप की लंका का दहन हो चुका था, कुछ पल तो मै अपनी वासना के उन्माद से ऊबर ही न सका, लेकिन फिर मुझे अपनी परिस्थिति की नाजुकता का अंदाज़ा होने लगा. मेरा लंड भी अब शांत हो कर सुस्त पड़ गया था. कुछ देर बैठे रहने के बाद मै उठ कर दबे पाँव बाथरूम के दरवाज़े के पास गया. अंदर से रिंकी के सिसकने की आवाज़ आ रही थी, मै कुछ पल सुनते रहा मेरा सिर शर्म के कारण झुका हुआ था और मै हार मान चुका था.

‘पता नहीं क्या होगा, ट्रेन एक पब्लिक place होता है यह मेरे दिमाग़ में ही नहीं आया.’ ‘कहीं उन औरतो ने किसी के सामने मुँह खोल दिया तो मैं तो कहीं का नहीं रहूँगा…हे भगवान मेरी भी मत मारी गयी थी, इतने मौक़े आए जब मैं संभल सकता था लेकिन इस वासना के भूत ने मुझे बर्बाद करके ही छोड़ा…’

अब मुझे अपनी करतूत के सही मायने समझ आने लगे थे. मै अब अपनी बेटी से बात करने लायक भी नहीं रहा था. मै कुछ देर इसी असमंजस में बाथरूम के दरवाजे पर बैठा रहा कि रिंकी को बाथरूम से बाहर आने को कैसे कहें. हमारी ट्रेन सवा- पांच बजे हमारे स्टेशन पर पहुँचने वाली थी. अभी घड़ी में पौने- पांच होने लगे, तो मैने किसी तरह हिम्मत जुटायी और बाथरूम के गेट खटखटाये.

रिंकी बाथरूम का गेट खोलकर बाहर आ गयी। हम दोनों एक दूसरे से दूरी बनाए रहे . अब न तो हमें भूख लग रही थी न ही प्यास — एक तरफ़ रिंकी अपने आप को मन ही मन कोस रही थी और दूसरी तरफ़ मै ख़ुद अपने पाप की आग में जल रहा था.

आख़िरकार सफ़र का अंत आ गया, जब ट्रेन नागालैंड स्टेशन में घुसने लगी, तो लोग उठ-उठ कर अपना सामान दरवाज़ों के पास जमा करने लगे. मैने उठ कर अपना बैग बर्थ के नीचे से निकाला, और फिर रिंकी के सामान की तरफ़ हाथ बढ़ाया.

‘कोई ज़रूरत नहीं है और एक एहसान करने की…’ रिंकी बेरुख़ी से बोली.

रिंकी को शायद ऐसा लग रहा था उन अधेड़ औरतो ने उसको ही बुरा भला कहा और सारी उसकी गलती बताकर रिंकी को ही पूरे कांड का दोषी या गुनेहगार मान लिया है।

मै वही खड़ा रहा

उसने देखा कि पापा अभी तक अपनी जगह से हिले भी नहीं थे. रिंकी ने अपना बैग लिया और दरवाज़े की तरफ़ थोड़ा सा बढ़ी, मेरी इतनी भी हिम्मत नहीं हो रही थी की अपनी बेटी की तरफ़ देख सकू, मै मुड़ कर दरवाज़े से बाहर निकलने को आगे बढा. और फिर से रिंकी के हाथ से बैग लेने की कोशिश करी ।

‘अगर आपने मुझे हाथ भी लगाने की कोशिश की तो ठीक नहीं होगा वो औरते सामने ही खड़ी है! और कुछ सुनवाना चाहते है क्या अभी इतने से मन नही भरा क्या’ रिंकी की तल्ख़ आवाज़ मेरे कानों में पड़ी.

रिंकी एक पल वहीं खड़ी हुयी ग़ुस्से और दर्द से काँपती रही।

मैने एक दफ़ा फिर रिंकी की तरफ़ मिन्नत भरी नज़रों से देखा, पर उससे कुछ कहते न बना. तभी ट्रेन एक झटके के साथ रुक गयी.

हम स्टेशन के बाहर आ गये और अपने घर जाने के लिए एक ऑटो में बैठ गये स्टेशन से घर तक के सफ़र में रिंकी और मेरे बीच एक लफ़्ज़ की भी बातचीत नहीं. हुई। हम दोनों एक दूसरे से दूरी बनाए बैठे रहे .

अंततः हम घर पहुँच गये।

जारी है........
 
घर पे दस्तक

देते ही हमारे सामने अपने गीले बालों को तोलियाँ से लपेटे हुए, और बालों की दो लटो से टपकती हुई पानी की छोटी छोटी बूंदे जो सीधे गोरे गोरे मुलायम गालो को चूम रही थी, माथे पर छोटी सी चमकती हुई पीली रंग की बिंदी, कानों में छोटे छोटे पीले रंग की झुमकी, आँखों में हल्का काजल, तोते जैसी छोटी सी नाक में सोने की छोटी सी rounded nose ring. होंठो पर हल्की होंठो के रंग से मैच करती हुई गुलाबी रंग की लिपिस्टक लगाए पीली साड़ी और बिना बाह वाले ब्लाउस के clevage में दिख रहे स्तनों की घाटी में मुसुकरति हुयी कुसुम ने दरवाजा खोला।

‘आ गये वापस आख़िर तुम दोनों…’ कुसुम ने मुस्कुरा कर कहा, लेकिन उसकी आवाज़ में ताना या हल्का सा व्यंग्य भी था, ज़ाहिर था कि कुसुम फोन पर रिंकी का व्यवहार भूली नहीं थी.

फिर रिंकी थोड़ा सकुचा कर अपनी मम्मी की तरफ़ बढ़ी, और कुसुम के गले लग गयी,

कुसुम फिर से रिंकी से ताना मारते हुए बोली क्यो फोन पर तो मेरी मम्मी बन रही थी अब क्या हुआ।

‘ओह, मम्मा…’ उसने अपने माँ को बाँहों में भरते हुए कहा, ‘आइ एम सो सॉरी…’

‘अरे…’ कुसुम उसके बदले स्वरूप से अचंभे में थी, फिर संभल कर मुस्कुराई और उसे फिर से गले लगाते हुए बोली, ‘कोई बात नहीं…कोई बात नहीं, चलो भी अब, अंदर नहीं चलना?’ और हम घर के अंदर पहुँच कर अपने अपने रूम में चले गए। मैने अपने सारे कपड़े उतारे और चड्डी बनियान में बिस्तर पर लेट कर ट्रेन के कांड के बारे में सोचने लगा। और सोचते हुए ही एक गहरी नींद के आगोश में चला गया।

जब मेरी आंख खुली तो घड़ी की सुई 9 बजा रही थी, मैने अपने आस पास नज़र दौड़ाई तो कुसुम बेडरूम मै नही थी, मै फ्रेश होने के लिए बाथरूम में गया और लगभग 1 घण्टे में कॉलेज जाने के लिए बिल्कुल रेडी हो गया ,अब सिर्फ नाश्ता करना ही बाकी रह गया था।

मै ब्रेकफास्ट करने के लिए हॉल में गया और कुर्सी पर बैठ गया पास ही मेरे पापा अखबार पढ़ रहे थे। मैने पापा को गुड मॉर्निंग विश किया तो पापा ने अखबार लपेटते हुए मुझसे पूछा अरुण मेरी प्यारी नातिनि रिंकी के साथ क्या किया है तुमने। मै पापा का सवाल सुनकर डर गया।

मुझे लगा है रिंकी ने ट्रेन कांड के बारे में सबको सबकुछ तो नही बता दिया।

मेरा दिल धक धक करने लगा..... मेरे हाथ पांव फूलने लगे...... मैने अटकते हुए कहा नही तो, क्यो क्या हुआ उसने कुछ कहा है क्या।

मैने सोचा कि रिंकी अपने कमरे में से बाहर आये इससे पहले मैं रिंकी से नज़र बचाकर सीधा कॉलेज के लिए निकल लेता हूँ इसलिए मै दबे पांव दरवाज़े की ओर बढ़ने लगा

"अरे, आप कहाँ जा रहे है, नाश्ता तो कर लीजिए" कुसुम किचन से निकलती हुई मुझको बाहर जाता देख बोली

"क क क .......कुसुम......वो वो....म.....कॉलेज में ही कर लूंगा नाश्ता......तुमम्म चिंता मत करो" मै घबराता हुआ बोला

"नहीं कोई जरूरत नही है आफिस में नाश्ता करने की , आप यही नाश्ता करके जाओ, बाहर की चीज़ें ज्यादा नही खानी चाहिए वरना बीमार पड़ जाओगे, चलिए आइए इधर, मैं अभी आपके लिए प्लेट लगाती हूँ....." कुसुम ने लगभग आर्डर देते हुए अंदाज़ में कहा

अब मेरे पास भी कोई चारा नहीं था.... इसलिए मै हारकर वापस टेबल की तरफ बढ़ने लगा......एक बार फिर मेरा दिल धक धक करने लगा..... मेरे हाथ पांव फूलने लगे...... मै धीरे धीरे चलता हुआ टेबल की तरफ आया और जाकर अपनी सीट पर बैठ गया......मेरी नज़र अभी भी नीचे की ओर झुकी हुई थी......

मेरे पापा फिर से बोले अरुण मेरे सवाल का जबाब नही दिया तुमने। मैने कुसुम की ओर देखा और एक लंबी सांस लेते हुए बोला पापा आप अपनी लाडली नातिनि को बुलाये फिर मै बताता हूँ।

पापा बोले वो तो स्कूल चली गयी है और मै इसलिए तुमसे पूछ रहा हूँ कि जब से आई है तब से उदास है।

कुसुम पापा की बात कट करते हुए बोली अरे पापा जब रिंकी का कोई पेपर या टेस्ट बिगड़ जाए तो वो एक दिन तक ऐसे ही उदास रहती है, रिंकी की ये शुरू से आदत है। वो हर काम को कुछ ज्यादा ही दिल से

लगा लेती है और काम बिगड़ जाए तो उसकी यही नौटंकी शुरू हो जाती है।

मुझे कुसुम की बात सुनकर मेरी जान में जान आ गयी।

और मै नास्ता खतम करके कॉलेज के लिए निकलने लगा तो कुसुम बोली आज बड़ी ही जल्दी में हो। मै भी चल रही हूँ ना साथ में, मुझे आगनबाड़ी केंद्र छोड़ने में क्या आपको शर्म आती है। मैने कहा तो फिर चलो ना बातें क्यो बना रही हो।

मै और कुसुम बाइक पर बैठकर चल दिये। उसके बदन से निकलने वाली perfume की खुशबू और कुसुम के ब्लाउस में कसे हुए स्तनों का अहसास मुझे अपनी पीठ पर होने लगा। कुसुम ने अपने मुह को मेरी गर्दन के पास लाकर मुझसे बोली आपको क्या हो गया है मैने कहा मुझे क्या हुआ है।

कुसुम बोली बात बात पर ऐसे react कर रहे हो जैसे कोई कांड कर दिया हो और मुझसे छिपा रहे हो। मैने कहा अटकते हुए कहा क क कैसा कांड मेरी हालत देखकर कुसुम जोर से हस्ती हुई बोली हाहाहा हाहाहा अरुण जी मै मजाक कर रही हूँ, इतने चुप और शांत मत रहो, बेटी के पेपर बिगड़ने की टेंशन मत लो। और बेटी को भूलकर जरा बाइक पर बैठी खूबसूरत बीवी पर ध्यान दो।

मैने कहा कुसुम मैडम खूबसूरत बीवी पर रात को बेड पर ध्यान दिया जाता है दिन में नही। वैसे भी तीन दिन हो गये है धमाल किये हुए। कुसुम मुझसे चिड़ते हुए बोली मुझे आपकी की यही बात पसन्द नही है हर बात सीधे बिस्तर पर क्यो ले जाते है। आपके दिमाग मे हमेशा बस बिस्तर की ही बात आती है। आप तो पढे लिखे हैं, आपको ये भी नही पता बेडरूम की बातें बेड पर अच्छी लगती है।

मै मजाक में कुछ बोली आप क्या बोल रहे हो। आपकी पत्नी हू मै और पत्नी सिर्फ पति का बिस्तर गरम करने के लिए नही होती है। सुबह से आपका चेहरा उतरा हुआ देखकर थोड़ा हँसाने की कोशिश कर रही थी मै।

वो गुस्से के अंदाज से बोली

चलो उतारो मुझे मेरा केंद्र आ गया, जाते जाते वो फिर मेरी तरफ देखने लगी और रुक गयी मैने कहा अब क्या हुआ तो वो बोली sorry. मै कुछ ज्यादा ही बोल गयी।अरुण सुनो अगर रिंकी के पेपर की वजह से आपका मूड खराब मत करो। Next time वो जरूर पास कर लेगी, बाय और हा थोड़ा हस भी लो।

मै कुसुम को ड्रॉप करने के बाद अपने कॉलेज में चला गया।

मेरा कॉलेज में पढ़ने पढाने का मन नही कर रहा था।

जब से रिंकी के साथ मेरा वो ट्रेन वाला कांड हुआ था, मुझे घर और बाहर मे किसी से ज्यादा बात करने का मन नही था। मुझे रिंकी की पीड़ा और ग्लानि मन ही मन खाये जा रही थी।

इसलिए जल्दी छुट्टी लेकर मै शहर से दूर एकांत में बैठकर सोच रहा था।

पूरा दिन हो गया था और शाम होने वाली थी। बड़े बुरे बुरे ख्याल आ रही थे अगर रिंकी और मेरे बीच हुए कांड की बात कुसुम को पता चल गयी तो क्या होगा। मै अपनी पत्नी कुसुम के गुस्से को भी जानता था। मुझको पता था कि शायद कुसुम कभी माफ न करे। और माफ तो छोड़ो वो मुझे साफ ना कर दे। कभी कभी मै सोचता कि मुझे रिंकी के साथ दिमापुर जाना ही नहीं चाहिए था। ना मै दिमापुर जाता और ना मेरे मन मे अपनी बेटी रिंकी के लिए कोई बुरा ख्याल आता।

पर होनी को कौन टाल सकता था। जो हुआ सो हुआ। पर अब मैने मन ही मन ये निश्चय कर लिया कि मै अपनी गलती का पश्चाताप करूँगा। मै रिंकी से जितना दूर हो सकता है, रहने की कोशिश करूँगा।

शाम के 7:00 बजने वाले थे, मैने सोचा कि कुसुम को फ़ोन करके आज टाइम पर घर ना आने की कह देता हूँ, वरना वो मुझसे गुस्सा होगी, ये सोचकर मैने अपना मोबाइल निकाला और कुसुम को कॉल लगा दिया।

कुसुमु - हेलो

मै - हेलो, हाँ कुसुम क्या कर रही हो

कुसुम - कुछ नहीं बस खाना बना रही हूं

मै - अच्छा सुनो, मैने इसलिए फ़ोन किया था कि तुम्हे बता दूँ , आज मैं जल्दी घर नही आ पाऊंगा,

कुसुम- अरे क्यो कुछ काम है क्या,

मै- नही ऐसी बात नही है।

कुसुम-- थोड़ी प्यारी सी आवाज में ऐसा है अरुण सर जब कोई काम नही है तो फिर घर जल्दी आना चाहिए और वैसे भी मैने आपके पंसंद की डिश बनाई है। समझ रहे हो ना।

मै - अरे वाह आज सूरज पश्चिम से उग आया क्या, जो इतने प्यार से घर आने की बात कर रही हो।

कुसुम -- खींजते हुए बस हो गया शुरू आपका।

मै कितने प्यार से बात कर रही हूँ और आप डाइलोग मार रहे हो, ये अपनी कॉलेज की टीचरि मुझ पर मत झाड़ा करो।

मै - अरे कुसुम ऐसी बात नहीं, अच्छा सुनो मैं 8:00 बजे तक आ जाऊंगा

कुसुम - चलो ठीक है, बाय

मै - बाय

""मुझे कुसुम का स्वभाव आज तक समझ नही आया था कि हाल ही उसका पारा गरम हो जाता है और हाल ही नरम ""

मै अब घर जाने के लिए निकल पड़ा पर मेरे मन मे हल्का हल्का डर तो था पर मेरे पास और कोई विकल्प भी नहीं था, आज नहीं तो कल मुझे अपनी बेटी रिंकी का सामना करना ही पड़ेगा, इसी उधेड़बुन में लगा मै जल्दी ही अपने घर पहुंच गया, मैने अपनी गाड़ी खड़ी की ओर घर के अंदर आ गया,

जैसे ही रिंकी ने घर के बाहर गाड़ी की आवाज़ सुनी, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा, उसके शरीर मे हज़ारो चींटिया सी रेंगने लगी, वो धड़कते दिल के साथ अपने कमरे से बाहर निकली, और सीढ़ियों से नीचे उतरते हुए हॉल की तरफ बढ़ने लगी,

मै सोफे पर सीढ़ियों की तरफ मुंह करके बैठा था, मेरी नजरे भी सीढ़ियों की तरफ थी, इसलिए मै रिंकी को आते हुए देख पा रहा था, मेरे पापा मम्मी भी साथ बैठकर अपनी इधर उधर की बाते बता रहे थे,

रिंकी शर्म के मारे आंखे झुकाए हुए स्लो मोशन में ऐसे आगे बढ़ रही थी कि मानो वो अपनी सुहागरात की सेज की तरफ बढ़ रही हो, जैसे जैसे वो नज़दीक जा रही थी उसे अपनी सांसे भारी होती महसूस हो रही थी,

अब वो सोफे के बिल्कुल पास आ गई ।

"पापाआआआ.............." रिंकी ने कांपते होठों से मुझ को पुकारा

मेरे सामने रिंकी अपनी पलके झुकाए खड़ी थी,

"आज उसकी सुंदरता में चार चांद लग गए थे, उसकी काली झील जैसी आंखे , तीखे नैन नक्श, पतले गुलाबी होंठ जिनका मै दीवाना बन चुका हूँ , वो ऐसे खड़ी थी मानो अजंता की कोई मूरत " मैने रिंकी को देखा तो देखता ही रह गया, मेरे मुंह से शब्द ही नही निकल रहे थे,

अभी थोड़ी देर पहले जिस रिंकी से मै दूर रहने की सोच रहे था उसके चांदी जैसे खूबसूरत बदन को देखकर मेरा मन एक पल के लिए डोल गया पर दूसरे पल ही मुझे अपने से किया हुआ वादा याद आ गया कि अब मै रिंकी से जितना दूर हो सके रहूँगा, और मैने तुरंत अपनी धोखेबाज़ नज़रो को रिंकी पर से हटा लिया,

"पापाआआआ......आप कैसे हो............???? " रिंकी ने दोबारा अपनी पलके झुकाए ही पूछा

"ममम्मम मैं......ठीक हूँ.... रिंकी......तुम्म्म्म्म कैसी हो....." मैने अपनी पूरी हिम्मत समेटकर पूछा

"मैं भी ठिक्क हूं... पापा" रिंकी ने जवाब दिया

"तुम्म्म्म्म बैठो, मैं थोड़ा हाथ...मुंह धोकर आता हूँ रिंकी ......." मैने कांपते हुए कहा और बिना नज़रे फेरे ही सीधा अपने रूम में चला गया।

अंदर कमरे मे आकर मै सीधा बाथरूम में घुस गया.....और हथेलियों से पानी अपने मुंह पर मारने लगा, मुझे ऐसा महसूस हो रहा था मानो कहीं दूर से भागकर आ रहा हूँ, मेरी हार्ट बीट तेज़ हो गई थी, मुझे पसीना आने लगा, मैने तुरंत अपने कपड़े निकाले और शावर के नीचे आकर खड़ा हो गया।

शावर से निकलती पानी की बूंदे जब मेरे शरीर को भिगोने लगी तो मुझको कुछ रिलैक्स महसूस होने लगा

मै अपनी ख्यालो की सवालों वाली दुनिया में अपने आपसे बात करने लगा।

" चिंता मत कर अरुण, सब ठीक हो जाएगा.... देख रिंकी ने खुद तेरे से आकर बात की, इसका मतलब शायद वो मुझे माफ कर चुकी है...... हो सकता है समय के साथ उसकी नफरत कम हो गई हो........तू बस उससे आराम से बात कर...... जितना कम हो सके उतनी ही बात कर ....हो सकता है वो मुझे एक और मौका दे दे अपनी गलती सुधारने का.....

नहीं नहीं वो अपनी मम्मी कुसुम की तरह गुस्सेल है.... वो मुझे कभी माफ नही करेगी.....अगर उसने कुसुम को बता दिया तो........

नहीं वो कुसुम को नही बताएगी....अगर बताना होता तो अब तक बता चुकी होती.....शायद वो तुझे सुधरने का एक मौका दे रही है....इस मौके को मत गंवाना ....."

मै अपने अन्तर्मन से बाते कर रहा था।

नहाने के बाद मैने अपना पजामा पहना ओर ऊपर टीशर्ट डालकर वापस हॉल की तरफ बढ़ने लगा, कुसुम ने अब तक खाना लगा दिया था, सभी लोग मेरा ही इंतेज़ार कर रहे थे,

मै आकर सीधा अपनी कुर्सी पर बैठ गया मेरे एक तरफ कुसुम और पापा थे तो दूसरी तरफ रिंकी और मम्मी।

कुसुम ने सबकी प्लेट्स में खाना सर्व किया, सबने खाना खाना शुरू कर दिया....रिंकी और मै दोनों ही बिल्कुल धीरे धीरे खाना खा रहे थे, मेरे तो निवाला बड़ी मुश्किल से गले से नीचे उतर रहा था...

रिंकी अपने पापा के इतने पास बैठकर मेरे जिस्म से निकलती गर्मी को महसूस करने की कोशिश कर रही थी, रिंकी मुझको अपने नज़दीक पाकर उसके बदन में हल्की हल्की चिंगारियां सी फुट रही थी ...वो प्यासी निगाहों से बस मुझको ही देख रही थी,

अजीब सी विडंबना थी आज रिंकी मुझे कुछ ज्यादा ही प्यासी निगाहों से देख रही थी और मै उससे बचने की कोशिश कर था।

सही बात ही है " जैसा बाप वैसी बेटी"

अरे तुम दोनों इतने चुप क्यों हो, कोई झगड़ा हुआ है क्या तुम दोनों का" मेरी मम्मी ने मेरी और रिंकी को इशारा करते हुए कहा

" नहीं....तो दादी ..... ऐसी तो कोई बात नही" रिंकी झिझकते हुए बोली

"हां मम्मी ऐसी कोई बात नही है" मै भी लगभग रिंकी के साथ ही बोल पड़ा

कुसुम ने मुझे चिढ़ाते हुए कहा

"तो फिर इतनी चुप्पी क्यों है , कल तक तो आप दोनों की चपर चपर बन्द ही नही होती थी और अब देखो जैसे एक दूसरे को जानते ही नही हो"

मै तो बिल्कुल सुन्न हो चुका था, मुझे समझ नही आ रहा था कि क्या बोलू, पर इससे पहले की मै कुछ बोलू, रिंकी बीच मे बोल पड़ी

" अरे मम्मी, हमेशा आप ही बोलती हो खाते टाइम ज्यादा बात नहीं करनी चाहिए, आप चिंता मत करो, मैं पापा को इतना सताऊंगी, इतनी बाते करूंगी कि इन्हें खुद मुझे चुप कराना पड़ेगा" रिंकी ने बात सम्भालते हुए बड़े ही शातिर तरीके से जवाब दिया और मेरी तरफ तिरछी नज़रो से देखने लगी।

रिंकी की बात सुनकर बाकी लोग तो हसने लगे पर मेरी हालत खराब हो गई, मुझे समझ नही आ रहा था कि मै क्या करू इसलिए मै भी बेमन से थोड़ा सा मुस्कुरा दिया, पर मेरे माथे पर शिकन की लकीरें उभर आई,

मै रिंकी के इस बदले हुए रूप से फिर हैरान हो गया।

मैने खाना खा लिया, ऐसे भी मै अक्सर कम ही खाता हू, सो मै उठकर किचन की तरफ हाथ धोने बढ़ा, पर इससे पहले की मै आगे बढ़ पाता रिंकी ने भी उठकर बोला कि उसका खाना हो गया है और वो तेज़ तेज़ कदमों से चलते हुए मुझसे पहले ही किचन में घुस गई,

उसे किचन में जाता देख एक बार तो मै ठिठका पर मुझे हाथ तो धोने ही थे सो मै भी अंदर की ओर चल पड़ा,

रिंकी किचन में हाथ धो रही थी, मै उससे थोड़ा दूर जाकर ही खड़ा हो गया

रिंकी ने वाशबेसिन में हाथ धोने से पहले अपनी कुर्ती को साइड में कर लिया , जिससे उसकी सुंदर सी गांड उभरकर सामने आ रही थी, मेरी धोकेबाज़ नज़रे तुरंत रिंकी की ठुमकती गांड की तरफ उठ गई, मुझ पर जैसे बिजली सी गिर पड़ी,

उधर रिंकी जान बूझकर हाथ धोते समय अपनी कमर और गांड को होले होले हिला रही थी,

मैने तुरंत अपनी नज़रे दूसरी तरफ फेरनी चाही पर इससे पहले की मै अपना चेहरा घुमा पाता, मुझ पर एक और गाज गिर पड़ी, रिंकी ने अपना रुमाल नीचे गिरा दिया और अब वो उसे हटाने के लिए झुकी तो

उसकी पतली सी लिंगरी उसकी मांसल जांघो से बिल्कुल चिपक गयी थी, और स्ट्रेच होने की वजह से लिंगरी हल्की सी पारदर्शी हो गयी थी, जिसमे से उसकी ब्लू कलर की छोटी सी खूबसूरत पैंटी मेरी आंखों के सामने आ गयी, उसकी मोटी सी मांसल गदरायी गांड पर उस छोटी सी पैंटी को देखकर मेरी सांसे ऊपर की ऊपर और नीचे की नीचे रह गयी, मेरा चेहरा गरम होने लगा, मुझे अपने लन्ड में तनाव महसूस होने लगा,और जल्द ही लंड विकराल रूप ले लिया जिससे मेरे पाजामे में उभार बन गया,

रिंकी जानबुझकर रुमाल उठाने में ज्यादा वक्त लग रही थी, उसने कनखियों से मेरी ओर देखा तो पाजामे में मेरे लन्ड का उभार उसकी आँखों से छुप नहीं पाया, और उसके चेहरे पर एक शातिर हंसी आ गयी।

मुझ से अब ओर ज्यादा बर्दास्त नही हो रहा था, मेरा लन्ड पूरा उफान पर आ चुका था पर मै ये जनता था कि अगर रिंकी ने मुझे इस हालत में देख लिया तो गज़ब हो जाएगा, और उसकी नफरत जो थोड़ी बहुत कम हुई है वो दोबारा बढ़ जाएगी, इसलिए इससे पहले की रिंकी देखे मै तुरन्त वहां से हटा और अपने लंड के उभार को छुपाते हुए अपने कमरे की तरफ चल पड़ा

कमरे में आते ही मै सीधा बाथरूम में घुस गया, और जल्दी जल्दी अपने हाथ धोने लगा

और अपने आपको कोसने लगा

तू पागल है क्या अरुण, एक बार जो गलती हो चुकी है और अब दोबारा वही गलती करने जा रहा था, अगर रिंकी तेरे लंड का उभार देख लेती तो

" मेरे अन्तर्मन से आवाज़ आई

अब डर के मारे मेरा खड़ा हुआ लन्ड वापस बैठने लगा पर रिंकी के इस गांड दर्शन ने मेरे अंदर के मर्द को जगा दिया था,

मै अपने कमरे में बिस्तर पे आकर लेट गया। कमरे के छत की ओर देखते हुए मुझे बार-बार रिंकी का ध्यान आ रहा था।

मुझे मन ही मन रिंकी के जिस्म की छुअन याद आ रही थी। उसकी मांसल नितंबो पे मेरे हाथ, और उसकी वो नरम कसे हुए स्तनों की हलकी सी झलक।।

मुझको ये सब सोचना अच्छा लग रहा था, रिंकी के बारे में सोचते हुए मैने एक करवट ली और बिस्तर पे रखे तकिये के ऊपर अपनी टाँग चढा ली। अपने कमर से तकिये में दबाव ड़ालने लगा, मुझे तकिये में दबाव डालना अच्छा लग रहा था। कुछ देर तकिये में अपनी कमर का फ्रंट भाग रगडने के बाद मेरा ध्यान गया की मेरे लंड में हलकी-हलकी इरेक्शन आ गई है।

और मुझे मुट्ठ मारने का मन होने लगा। मै पेंट के ऊपर से अपने लंड को पकड़ रगडने लगा, लेकिन अभी उसका इरेक्शन ख़तम हो गया था,

उधर बाकी लोगों ने भी खाना खा लिया था और अपने अपने रूम में चले गए, कुसुम ने बर्तन साफ किये और बाकी छोटा मोटा काम खत्म करके रूम में आ गयी।

जारी है।
 
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