Incest कर्ज और फर्ज - एक कश्मकश - Page 5 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest कर्ज और फर्ज - एक कश्मकश

’अब मै भी अपने दुस्साहस को लेकर असमंजस में फंसते जा रहा था. लेकिन आखिर में मैने सोचा कि 'अब जब ओखली में सिर दे ही दिया है तो मूसलों का क्या डर...देखा जाएगा जो होगा, जो योजना बनाई थी उसे तो अब पूरा अंजाम देना ही है...’ और नहा कर बाहर आया।

मेरे अंदर अपनी साली जूली के जिस्म को भोगने का भूत जो सवार है।

मै नहाकर तैयार होकर आंगन में रखी कुर्सी पर बैठ गया कुसुम भी मेरे पास बैठी थी, मेरे लंड दर्शन करने के बाद से जूली किचिन में से बाहर ही नही आ रहा थी। तभी कुसुम ने आवाज लगाई।

जूली नास्ता रेड्डी हो तो ले आ, बेटा तेरे जीजू और मुझे घर निकलना है,

मेरी सास बोली पता नही इस जूली को क्या हो गया है किचिन के कोने मे गुमसुम

बैठे हुए है। कुसुम बोली शादी से पहले यही हाल होता है अपने होने वाले की याद कर रही होगी। हाहाहा हाहाहा

मै मन ही मन बोला

मै अभी जो जूली को अपना लंड दर्शन दिया था ये उसका कमाल है।

मेरी सास चाय नास्ता लेकर आई और हम खा पीकर अपने घर की ओर चल दिये। मेरी और जूली की कोई मुलाकात नही हुयी। कुसुम के रहते मैने ज्यादा कोशिश भी नही की।

मै कुसुम को बैठा कर बाइक से अपने घर की ओर निकल पड़ा। थोड़ी देर बाद कुसुम बोली अरुण तुम तो कह रहे थे बाइक पंचर हो गयी थी पर ये तो ठीक है।

मै समझ गया अब झुठ बोलने से कोई फायदा नही है और सच बताने में ही भलाई है।

मै बोला कुसुम हमारी रिंकी बेटी हम दोनों से गुस्सा है और मैने कुसुम को रात की पूरी बात बता दी।

कुसुम---- हाहाहा हाहाहा ओह अब मुझे यकीन हुआ रिंकी मुझसे भी एक कदम आगे है, आप टेंशन ना लो मै घर पहुँचकर सब ठीक कर दूँगी।

मै--- Thank God ये सुनकर मुझे अब तसल्ली हुई।

कुसुम-- अरुण गाड़ी जरा सब्जी वाले ठेले पर रोकना मुझे कुछ सब्जिया लेनी है।

मैने सब्जी के ठेले पर गाड़ी खड़ी कर दी।

कुसुम उतरकर सब्जी लेने लगी। मै गाड़ी को थोड़ा साइड में लगाने लगा।

मैने थोड़ी दूर से देखा तो कुसुम के नितंब पर से साड़ी काफी नीचे खिसक गयी थी जिससे उसकी पैंटी की हरी रंग की इलास्टिक दिख रही थी। कुसुम के बड़े बड़े नितंब को देखकर हर कोई आने जाने वाला देखते हुए मजे लेते हुए जा रहा था।

दूसरी साइड पर लगे ठेले वाले कुसुम उठी हुई गांड और पैंटी की हरे रंग की इलास्टिक को देखकर चिला रहे थे।

"" हरी हरी मिर्ची ले लो, एकदम हरी ""

मै ये सब नजारा देखकर मै कुसुम के पीछे खड़ा हो गया जिससे कुसुम की बड़ी सी गांड ढक गयी।

सब्जी के ठेले पर खड़ी होकर उससे बहस कर रही थी। कुसुम ने हाथ में एक लंबा और मोटा सा बेगन पकड़ा हुआ था। कुसुम के बेगन पकड़ने की style मै शॉकड हो गया।

जैसे कुसुम कोई लंबा और मोटा लंड अपने नरम और मुलायम हाथो में थामे हो, उसके हाथ का अंगूठा बेगन के मुह पर दबा हुआ था, ऐसा लग रहा था जैसे कुसुम लंड के सुपाडे को अंगूठे से दबाये हो।

ठेला वाला--- भाभी जी आपके हाथ में जो है उससे बड़ा और लंबा भी मेरे पास आप कहो तो मै दिखाऊ,

कुसुम-- हा भैया दिखाओ ना जितना मोटा और लंबा होगा उतना ही ज्यादा उसमे गूदा भरा होगा, और खाने में स्वाद भी आयेगा।

मै ठेले वाले की बातें सुनकर समझ गया ये भोसड़ी का मेरी बीवी का भाभी जी बोलकर मजे ले रहा है।

मै--- कुसुम ये तुम इतने लंबे और मोटे बेगन क्यो ले रही हो, मुझे बेगन बिल्कुल पसंद नही है।

मेरी बात खतम ही नही हुई थी कि ठेले वाला बीच में बोल पड़ा।

भैयाजी ये इतने लंबे और मोटे बेगन आपको पसंद नही है लेकिन भाभीजी को कुछ ज्यादा ही पसंद है, देख नही रहे आप कितने अच्छे इतने लंबे और मोटे बेगन पसंद किये है।

कुसुम--- अरे अरुण आज मसाला बेगन बनाउगी हमारी रिंकी बेटी को इतने लंबे और मोटे बेगन मसाले भरे हुए सब्जी बहुत पसंद है और वो खूब प्यार से खाती है।

मै चुप हो गया और कुसुम से कहा ठीक ठीक है पर जो लेना हो जल्दी ले लो, देर हो रही है।

हमारी बातें सुनकर ठेले वाला बोला-- भाभीजी ये खीरा भी ले लो। मेरे ये छोटे और मीठे खीरे आपकी बिटिया को ख़ाने मे जरूर पसंद आयेंगे।

तभी मै कुसुम से बोला लेना है क्या,

कुसुम-- हा, दे दो भैया।

फिर हम सब्जी खरीद कर गाड़ी की तरफ चल दिये।

तभी पीछे से एक ठेला वाला बोला भाभीजी मूली भी ले लो, मेरी मूली पतली और लंबी जरूर है पर खाने में बहुत अच्छी है मुह में लेते ही मजा आ जायेगा।

कुसुम--- अरुण रुको जरा इसकी मूली भी देख लेती हूँ, और उस ठेले वाले के पास जाकर मूली छटने लगी।

भैया तुम्हारी मूली पतली और लंबी जरूर पर है बिल्कुल फ्रेश।

ठेले वाला--- भाभीजी वो क्या है ना अभी मेरी मूली बड़ी और मोटी हो रही थी पर मैने उसे होने नही दिया। क्योकि मूली ज्यादा मोटी और लंबी हो जाये तो उसमे मजा नही रहता और मुह में वो स्वाद भी नही आता है।

मै-- ठीक है बहुत हो गया अब जल्दी से पैक करो।

हम दोनों बातें करते हुए घर पहुँच गए, कुसुम बोली अंदर चलिए, मैने कहा तुम जाओ वैसे भी मेरा ड्यूटी टाइम हो गया है, और वो रिंकी से मुझे डर लग रहा है, उसने मुझे तुम्हारे साथ देख लिया तो मेरे ऊपर फिर से भड़क जायेगी।

कुसुम--- हाहाहा हाहाहा आप भी ना कुछ भी बोलते हो। ठीक है तो फिर शाम को मिलते है। मै सीधा कॉलेज की ओर निकल गया। कॉलेज में मैने जूली को दस बारह बार फोन लगाया पर जूली ने कोई कोल recived नही किया और मेरी उससे कोई बात नही हो सकी। मेरा जूली की चुदाई का भूत उतरने लगा।

मुझे समझ आ गया मेरा सुबह का लंड दर्शन कर जूली डर गयी या उसे मेरा लंड पसंद नही आया। इसी उधेड़ बुन में शाम हो गयी और मै कॉलेज से घर की ओर चल दिया।

समय अपनी रफ्तार से चलता रहा, देखते ही रात हो गयी मुझे घर जाने में बड़ी उलझन सी लग रही थी। जैसे जैसे घर नजदीक आता जा रहा था, मेरी धड़कन बढ़ती जा रही थी,

मुझे अपनी बेटी रिंकी का सामना करने की हिम्मत नही हो पा रही थी।

शायद उसकी वजह मेरा रात का वो भयानक खाबाव था जिसमे मेरी बेटी रिंकी मेरे काले मोटे मूसल जैसे लंबे लंड को अपने नरम मुलायम हाथो से थामे मुझसे कह रही थी।

"" I agree पापा मान जाना ""

मै अपनी बेटी के साथ होने वाली अनहोनी से बचने के लिए घर देर से जाने की सोच रहा था। मैने सोचा आज दोस्तो के पास जाया जाये और थोड़ा मूड फ्रेश कर एंजॉय किया जाये।

रात के 9 बजे कुसुम ने फोन किया।

कुसुम-- कहा हो आप, इतनी देर क्यो हो रही है।

मै-- दोस्तो के साथ बैठा हूँ, उसकी birth day पार्टी थी। बस आधे घंटे में आता हू, तुम खाना खा लो, मै खा लिया हू।

कुसुम--- ठीक है।

मै कुसुम से झूठ बोलकर होटल में खाना खा कर रात दस बजे घर पहुँच गया। हॉल में पापा tv देख रहे थे, रिंकी अपनी दादी के साथ कमरे में थी और कुसुम किचिन में बचा हुआ काम खतम कर रही थी।

"" हर मिडिल क्लास फैमिली के घर ज्यादा बड़े नही होते है, और आपस में अनबन होने पर भी घर के लोगो को एक दूसरे की शक्ल

देखना मजबूरी होती है। ""

मेरी और मेरी बेटी जूली की भी यही मजबूरी थी, मै अपनी बेटी से छिपने की कोशिश कर जरूर रहा था पर ये सब बेकार था।

मुझे देखकर मेरे पापा ने मुझे हॉल में बैठकर बात करने को कहा।

मैने हाथ मुह धोकर हॉल में आकर बैठ गया, और पापा से बात करने लगा।

पापा-- अरुण बेटा अब तेरी साली जूली की शादी अगले महीने है तो तेरा भी फर्ज बनता है तुम भी अपनी साली जूली की शादी में कुछ मदद करके अपने सास ससुर की थोड़ी मदद करो। और अपने दमाद् होने का फर्ज निभाओ।

मै--- हा पापा sure. मै तो जूली को शादी से पहले बहुत कुछ देना चाहता हूं, बस उसी बारे में plan बना रहा था।

मै पापा से बात करते हुए मेरी नजर रिंकी के कमरे में बार बार जा रही थी, मुझे पता नही क्यो रिंकी को देखने की ललक हो रही थी। मैं सोफे से उठकर हॉल में टेहलने लगा, और दबे पाँव रिंकी के कमरे के बाहर खड़े होकर अंदर झाँकने लगा।

अंदर का नजारा देख मेरे होश उड़ गये, रिंकी चश्मा पहनकर एक ढीली सी बनियान पहने कंप्यूटर पर कुछ काम कर रही थी। जिसमें रिंकी के साइड से गोरे गोरे छोटे छोटे, सुडॉल् भरे हुए स्तन साफ दिख रहे थे। एक स्तन की छोटी सी गुलाबी निप्पल जो उसके स्तनों में से अभी उग रही थी। साफ नजर आ रही थी, ब्रा नही पहने थी।

मै ये दृश्य देखकर शोकड हो गया। मै समझ गया ये मेरी बेटी जूली पूरी तरह से अपनी मम्मी और पत्नी कुसुम पर ही गयी है। ये भी अपनी मम्मी कुसुम की तरह रात को सोने से पहले ब्रा नही पेहनति है।

दरवाजे पर मेरे पैरो की आहट सुनकर रिंकी ने गेट की ओर देखा जैसे ही हमारी निगाहें मिली।

मेरा लंड अकड़ने लगा और मै तुरंत अपने बेडरूम में चला गया।

कुसुम ने बर्तन साफ किये और बाकी छोटा मोटा काम खत्म करके रूम में आ गयी,

कुसुम ने कमरे के अंदर आकर अपनी साड़ी उतारी और उसने अपनी ब्रा भी निकाल दी और टीशर्ट पहन ली।

वैसे तो कुसुम लगभग 35 साल की है पर उसने अपने आपको बिल्कुल मेंटेन किया हुआ है दिखने में लगभग 25-26 साल की महिला ही लगती है, कसा हुआ बदन, तीखे नैन नक्श, कजरारी आंखे, सांचे में ढली हुई कमर, भारी नितम्ब और सुडौल जाँघे , जिन्हें देखकर कोई भी दीवाना हो जाये।

"आज बहुत खूबसूरत लग रही हो तुम" मैने उसकी ओर देखकर कहा

"मैं तो हमेशा जैसी लगती हूं वैसी ही हूँ" कुसुम ने जवाब दिया

"पर आज तुम कुछ अलग सी लग रही हो" मैने मादक आवाज़ में कहा

"हम्म्म्म, चलो कभी तो आपने ध्यान दिया, वैसे आज क्या अलग रह है आपको मुझमे" कुसुम ने इठलाते हुए कहा और आकर मेरे साथ बेड पर लेट गयी

"पता नहीं पर आज तुम्हें देखकर मन में अजीब से ख्याल आ रहे है" मैने ट्यूबलाइट के स्विच बन्द करते हुए कहा...अब सिर्फ टेबल लैंप की हल्की हल्की रोशनी हो रही थी

"और वो अजीब से ख्याल क्या हैं भला" कुसुम भी अब मेरी मंशा समझ चुकी थी और सच पूछो तो वो तो तीन चार दिनों से इसके लिए तड़फ रही थी पर आज मेरी बदले मूड को देखकर उसके शरीर मे चींटिया सी रेंगने लगी

मुझे ऐसा लग रहा है कि तुम्हे कच्चा ही खा जाऊं, क्योंकि आज तुम बहुत सुंदर लग रही हो" मैने कुसुम की tshirt के अंदर हाथ डालते हुए कहा

"अच्छा अगर हिम्मत है तो खाकर दिखाइए " कुसुम ने इतराकर जवाब दिया

अब मैने टीशर्ट के अंदर से ही उसकी खरबूजे जैसी चुंचियो को अपने हाथों में भर लिया और तुरंत उसके ऊपर आकर उसके होठों को चूमने लगा, तीन दिनों के बाद अपने पति के स्पर्श से कुसुम एकदम से उत्तेजित हो गयी, उसके निप्पल हार्ड होकर तन गए मै बीच बीच में अपनी अंगुलियों से उसके निप्पलों को कुरेद देता जिससे कुसुम के शरीर मे आनन्द की एक लहर सी दौड़ जाती, अब हम दोनों पागलो की तरह एक दूसरे को चूम रहे थे, मैने अपने मुंह से कुसुम की जीभ को पकड़कर चूसता ओर कुसुम भी ठीक वैसा ही करती,

मेरा लन्ड अब तनकर बिल्कुल खड़ा हो गया था जो कुसुम की जांघो के बीच आ रहा था

मुझे अब बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था ,,

,

मैने पलक झपकते ही कुसुम की टीशर्ट और नाइटी को उसके शरीर की गिरफ्त से आज़ाद कर दिया , अब कुसुम एक छोटी सी पैंटी में थी जिसमे उसके भारी भरकम नितम्ब बड़ी मुश्किल से समय हुए थे, मैने उसकी पैंटी की इलास्टिक में अपनी अंगुलिया फ़साई और एक झटके में उसे निकालकर फेंक दिया, आज तीन दिन के बाद मैने उसकी चुत के दीदार किये थे

कुसुम हमेशा अपने शरीर की साफ सफाई करती थी, हालांकि उसे चुदाई किये हुए तीन दिन ही बीते थे पर फिर भी वो रेगुलरली अपनी चुत के बालों की सफाई करती रहती थी।

मैने जब उसकी गुलाबी चुत को देखा तो सब्र का बांध टूट गया, मै कुसुम की प्यारी सी चुत पर पागलो की तरह टूट पड़ा और उसे अपने मुंह मे भरकर चूसने लगा, कुसुम की चुत से निकलती मादक खुसबू मेरे नथुनों में भर गई,

तीन दिनों बाद अपनी चुत पर मेरे होठों का स्पर्श पाते ही कुसुम के शरीर मे सिहरन सी दौड़ गयी, मैने अपना मुंह कुसुम की चुत में घुसा रखा था और अपने दोनों हाथों से उसकी दोनों चुचियों को मसल रहा था, इस दोतफ हमले के सामने कुसुम ज्यादा देर न टिक पायी और एक जोरदार अँगड़ाई के साथ उसकी चुत ने पानी छोड़ दिया,

मै सारे पानी को अपनी जीभ से चाट गया, अब मैने अपनी जीभ को गोल करके मधु की चुत की गहराइयों में घुसाना शुरू किया, कुसुम तो जैसे जन्नत की सैर कर रही थी, उसने अपने दोनों हाथों से मेरे सर को पकड़ा और उसे अपनी चुत की तरफ धकेलने लगी, लगभग 10 मिनट के अंदर ही वो दोबारा झड़ गई,

अब मैने उसकी चुत पर से अपना मुंह उठाया और अपना पाजामे और टीशर्ट उतारना लगा, पाजामे उतरते ही मेरा लम्बे लन्ड स्पंज की भांति उछलकर कुसुम के चेहरे के सामने आ गया, कुसुम ने जब लंड को इस तरह ठुमकते हुए देखा तो उससे बर्दास्त न हुआ और उसने लपककर लंड को अपने मुंह मे भर लिया और अंदर ही अंदर उसके सुपाडे पर अपनी जीभ फेरने लगी, मुझको अपने लन्ड के इर्द गिर्द इतनी गर्माहट पाकर असीम आनन्द की अनुभूति होने लगी, मै कुसुम का सर पकड़कर अपने लंड को और अंदर घुसाने लगा, अब कुसुम का मुंह पूरी तरीके से मेरे लन्ड से भरा हुआ था,

थोड़ी देर इसी तरह लंड चुसवाने के बाद मैने अपना लन्ड बाहर निकाला और कुसुम की चुत के मुहाने पर सेट करके एक जोरदार धक्का दिया जिससे मेरा आधा लन्ड चुत के अंदर घुस चुका था, तीन दिनों से अनचुदी चुत में जब लन्ड का प्रवेश हुआ तो कुसुम के बदन में एक टिश सी उठी पर उसने अपने होंठों को बंद करके अपनी आवाज़ बाहर नही निकलने दी

मैने दोबारा अपने लड को थोड़ा बाहर निकाला और इस बार पूरी ताकत के साथ दोबारा चुत में घुसा दिया, मेरा पूरा का पूरा लंड चुत में घुस चुका था, इस बार कुसुम सम्भाल न सकी और उसके मुंह से हल्की सी चीख निकल गयी,

मैने अब ताबड़तोड़ धक्के लगाना शुरू कर दिया था, हर धक्के में मेरा लन्ड कुसुम की बच्चेदानी से टकरा रहा था,

कुसुम तो मजे के मारे दोहरी हो गयी, उसके मुंह से हल्की हल्की आवाज़े निकलनी शुरू हो गई,

उन्ह्ह्ह्ह…ह्म्प्फ़्फ़्फ़्फ़… ओहहहहहह यस ओहहहहहहह यस"

ओह्हहहहहह कितना तड़पाया है आपने........ओह्हहहहहह ह्म्प्फ़्फ़्फ़्फ़

इधर मेरी भी आवाजे शुरु हो गयी।

उन्ह्ह्ह्ह…ह्म्प्फ़्फ़्फ़्फ़… ओहहहहहह यस ओहहहहहहह यस"

ओह्हहहहहह उम्ह्ह्ह्ह्ह कुसुम ऽऽऽऽऽऽऽ…आहऽऽऽऽऽऽऽ…कितनी खूबसूरत हो गई है हाय्य…स्स्स्स्स्स्साऽऽऽऽ सो क्या सूंदर चौड़ी गांड हो गयी है तेरी…...ह्म्म्म"

ओह्ह ......आपको आज क्या हो गया है.....उन्ह्ह्ह्ह…कितना मज़ा आ रहा है.....हमेशा ऐसे ही चोदिये मुझे, आपसे चुद कर मैं तो मज़े से पागल हुई जा रही हूं, फाड़ दीजिये इस निगोड़ी चुत को, बुझा दीजिये इसकी प्यास " अब कुसुम भी धीरे धीरे औकात में आती जा रही थी,।

मै लगातार ताबड़तोड़ धक्के लगाए जा रहा था, 20 मिनट की धमाकेदार चुदाई के बाद मै और कुसुम दोनों बुरी तरीके से झाड़ गए और कसकर गले लिपट गए, मैने अब हल्के हल्के कुसुम के होंठों को चूसना शुरू कर दिया था, थोड़ी देर बाद जब दोनों की वासना ठंडी हुई तो मै बोला।

"तुमने रिंकी बेटी का गुस्सा शांत किया की नही क्या वो अब भी हमसे नाराज है" मैने कुसुम से पूछा

"सच पूछिए तो वो आपसे गुस्सा नही है और ना ही नाराज है वो बहुत जिद्दी हो गयी है और मुझसे शायद रूठी है, i hope कल तक ठीक हो जायेगी" कुसुम थोड़ा दुखी होती हुई बोली

"पर क्यों वो तुमसे रूठी है तुमने पूछा नही" मैने हैरानी से पूछा

"आप भूल गए क्या, परसो जो सुबह सुबह ड्रामा हुआ था उसकी वजह से, पर आज मेरे हाथ की बनी मसाले वाले बेगन की सब्जी रिंकी खुशी से खा रही थी, so i tihnk रिंकी अब सुबह तक फिर से मेरी अच्छी बेटी बन जायेगी।

और कल वैसे भी sunday है आप भी घर पर रहेंगे तो कुछ आप भी रिंकी को प्यार से समझा देना " कुसुम ने कहा

इधर रात में रिंकी अपने पापा को अपने करीब लाने कि योजना सोच रही थी, उसे एक बात तो बिल्कुल साफ हो गयी थी कि उसके पापा जानबूझकर उसके सामने आने में और उससे बाते करने से झिझक रहे हैं, ओर इसलिए रिंकी ने इरादा बना लिया था कि सबसे पहले उसे अपने पापा की झिझक खत्म करनी होगी, उन्हें यकीन दिलाना होगा कि वो उनसे नाराज़ नहीं है और ये करने के लिए उसे अपने पापा के साथ थोड़ा खुलना होगा, उनसे प्यार से आराम से बात करनी होगी,रिंकी रात भर इसी उधेड़बुन में लगी रही और फाइनली अपनी योजना को सफल बनाने के लिए उसने तीन पॉइंट डिसाइड किये।

पहला कि अपने पापा से खुलकर बात करना ताकि उनकी झिझक खत्म हो

दूसरा उन्हें मेरे बदन की झलकियाँ दिखाकर उनके होश उड़ाना

तीसरा की उन्हें पूरी तरह काबू में लाकर वो सब हासिल करना जो पहले वो ट्रेन में चाहते थे पर अब मैं चाहती हूं,

रिंकी जानती थी कि उसे ये सब करने के लिए बड़ी मेहनत करनी होगी और थोड़ा धैर्य रखना होगा वरना बात बिगड़ सकती है, इसी तरह अपनी प्लानिंग करते करते उसे नींद आ गयी थी।

जारी है.....
 
धन्यवाद, आभार, शुक्रिया

"

(मायके से ससुराल आते समय कुसुम ने वो हर सब्जी खरीदा जिसे शायद महिलाएं मास्टरवेशन के लिए यूज करती होंगी। और सब्जी विक्रेता भी सब्जियों को बेचते समय अपनी ठरक जाहिर करता रहा।

गौरतलब था कि बैगन , मूली और खीरे के अलावा दूसरा कोई भी सब्जी नही खरीदा कुसुम ने। ये विचारणीय प्रश्न होना चाहिए था अरूण सर के लिए ! 😆)

अनुभव और जाम🥃 ज्यादा हो तो हमेशा झलकता है। ऊपर लिखी लाइन में आपके अंदर एक मझे हुए reders पाठक की झलक दिखती है। इतनी गहराई तो मैने लिखने मे भी नही दिखाई।

मेरा पूरा foucs सब्जी विक्रेता के द्विअर्थी व्यंग पर ही था, और मै उसे और बेहतर बनाने की कोशिस में लगा था।

आप जैसे readrs पाठक को पाकर मेरी कहानी धन्य हो गयी। 🙏🙏🙏🙏🙏

इसी प्रकार अपने review की बारिश करते रहे।

धन्यवाद।
 
आप नाराज़ तो नही है ना मुझसे" कुसुम ने मेरी आंखों में झांककर पूछा

"अरे कैसी बात कर रही हो, हमारी बेटी रिंकी से ज्यादा इम्पोर्टेन्ट और कुछ भी नही " मेरे लिए कहा

और फिर हम दोनों जन एक दूसरे की बाहों में आराम से सो गए।

इधर रिंकी सोच रही थी।

पहला कि अपने पापा से खुलकर बात करना ताकि उनकी झिझक खत्म हो

दूसरा उन्हें मेरे बदन की झलकियाँ दिखाकर उनके होश उड़ाना

तीसरा की उन्हें पूरी तरह काबू में लाकर वो सब हासिल करना जो पहले वो ट्रेन में चाहते थे पर अब मैं चाहती हूं,

रिंकी जानती थी कि उसे ये सब करने के लिए बड़ी मेहनत करनी होगी और थोड़ा धैर्य रखना होगा वरना बात बिगड़ सकती है, इसी तरह अपनी प्लानिंग करते करते उसे नींद आ गयी थी।

अगले दिन मै सोकर लेट उठा, मेरी रात की खुमारी अभी तक उतरी नही थी, मै बाथरूम में जाकर फ्रेश हुआ और तकरीबन आधे घण्टे बाद नाश्ता करने के लिए हॉल की तरफ चल पड़ा, हॉल में जाकर मैने देखा कि वहां सिर्फ और सिर्फ कुसुम ही बैठी चाय की चुसकियाँ ले रही थी, कुसुम को वहां अकेला देख मुझे थोड़ी हैरानी हुई क्योंकि अभी 8:30 बजने को हुए थे पर रिंकी जो अक्सर स्कूल के लिए अब तक तैयार हो जाया करती थी , उसका कोई नामो निशान ही नज़र नहीं आ रहा था,

"अरे कुसुम, आज हमारी बेटी रिंकी दिखाई नहीं दे रही, तबियत तो ठीक है उसकी, स्कूल नही जाएंगी क्या आज" मैने कुसुम के पास ही टेबल पर बैठता हुआ पूछने लगा।

"आप तो सचमुच पागल होते जा रहे है, आपको तो ये भी ध्यान नहीं कि आज संडे है, इसीलिए रिंकी आराम से सो रही है" कुसुम थोड़ी हंसती हुई हुई बोली

"अरे हां, माफ करना मुझे ध्यान ही नही रहा, कब संडे है और कब मंडे" मै भी अपने कप में पास रखे हुए थर्मस से चाय डालते हुए बोला

"हां तो फिर इतना काम करने की ज़रूरत की क्या है, किसी चीज़ का ध्यान नही रखते, न सेहत का ना खाने पीने का" कुसुम थोड़ी तुनकती हुई बोली

"अरे यार, सेहत तो मेरी चंगी भली है, तुमने तो कल रात ही पूरी परख की है, कहो तो दोबारा दिखा दूँ कि मेरी सेहत कैसी है,ह्म्म्म" मैने कुसुम की हथेलियों पर अपना हाथ रखते हुए बोला

"हे भगवान, आप तो बिल्कुल बेशर्म होते जा रहे है, कल रात से जी नही भर क्या जो सुबह उठते ही दोबारा चालू हो गए" कुसुम भी हल्के हल्के मुस्काते हुए बोली

"क्या करूँ जान, तुम चीज़ ही ऐसी हो कि जितना चखो कभी मन ही नही भरता " मै अपने होठों पर जीभ फिराता हुआ बोला।

"अच्छा जी, रात की चुदाई बाद अब मैं अच्छी हो गई, दो दिन पहले झगडा करने के बाद तो नज़र उठाकर भी नही देखते और अब बोलते हो कि एक पल भी नही रह जाता, हम्म्म्म" कुसुम भी अब पूरी तरह खेल में शामिल हो चुकी थी

"अरे यार, क्या बताऊँ अब, उस गलती के लिए मैं माफी चाहता हूं, प्लीज़ जान माफ करदो ना" मैने कुसुम के हाथों को मसलते हुए बोला

"ऐसे कैसे माफ कर दूँ, इसकी सज़ा तो आपको मिलेगी ही" कुसुम अपने होठों पर मुस्कान लाते हुए बोली।

"चलो भई, तुम जो सज़ा दोगी हम स्वीकार कर लेंगे" मै बोला

"ऐसे नहीं पहले वादा कीजिये कि जो मैं कहूँगी, वो आप करोगे" कुसुम चहकते हुए बोली

"चलो ठीक है, तुम जो कहोगी, मैं करूँगा,अब खुश" मै हँसते हुए बोला

"तो सुनिए, पिछले दो महीने से आपने एक दिन भी पूरा घर पर नही बिताया है" कुसुम बोली

"अरे पर .....???" मैने थोड़ा परेशान होकर बोला

"वो सब मुझे नही पता, आपने वादा किया है, अब आप मुकर नही सकते वरना मैं आपसे नाराज़ हो जाऊंगी" कुसुम ने नज़रे फेरते हुए कहा

"चलो भई, अब तुमने कह ही दिया है तो ठीक है, वैसे भी तुम्हारी बात टालने की हिम्मत किसमे है, इसी बहाने मैं दिन रात तुम्हारे पास रहूंगा ओर फिर........" मैने कुसुम को हाथ थोड़ा जोर से दबाते हुए कहा

"ज्यादा खुश मत होइए, मैने इसके लिए आपको नहीं रोका है, मैं तो बस अपनी बच्ची रिंकी की खातिर आपको रुकने के लिए बोल रही हूं ताकि आप उसके साथ अच्छा टाइम स्पेंड कर सके, कुसुम ने हँसते हुए कहा

"चलो ठीक है फिर ये तय रहा, मैं आज कही नही जाऊंगा, अब खुश" मै बोला

"बहुत खुश" कुसुम ने भी खुशि से जवाब दिया

हम दोनों अभी बाते कर ही रहे थे कि रिंकी अपने कमरे से आती हुई दिखाई दी,।

""रात भर रिंकी अपने पापा के ख्यालो में खोई थी और आखिर में अपने पापा के नाम की उंगली कर आराम से सो गई थी, सुबह उठकर वो थोड़ा फ्रेश हुई और एक पतली सी पजामी और झीनी सी पारदर्शी ड्रेस डालकर सीधा मेरे पास आ गई""

"अरे पापा, आप अभी तक कॉलेज नही गए" रिंकी ने हैरान होकर पूछा

"नही रिंकी , वो आज sunday की छुट्टी है" मैने सामान्य होकर जवाब दिया, अब मेरी झिझक काफी हद तक कम हो चुकी थी

"अरे वाह, ये तो बड़ी अच्छी बात है, इसी बहाने मुझे आपके साथ टाइम स्पेंड करने का समय मिल जाएगा...मेरे मतलब है हमें...." रिंकी के चेहरे पर खुशि साफ झलक रही थी।

"चलो रिंकी, आकर नाश्ता कर लो, कुसुम ने रिंकी से कहा और किचिन की तरफ चल पड़ी

रिंकी सीधी आकर मेरे बाजू में बैठ गयी, रिंकी ने बेहद ही झीनी सी पारदर्शी ड्रेस पहनी थी जिसमे से उसकी घाटी के नजारे साफ देखे जा सकते थे, रिंकी ने इस बात का फायदा उढाने की चाल सोची, वो झुक कर अपने कप में चाय डालने लगी, उसके इस तरह आगे की ओर झुकने से

रिंकी की छाती मेरे काफी करीब आ गई और मेरी नज़रे न चाहते हुए भी उसकी टीशर्ट के अंदर ब्रा में कैद मुलायम मम्मों पर अटक गई,

मुझे ऐसा लग रहा था कि रिंकी के मम्मे बरसों से पिंजरे में क़ैद कबूतर की तरह थे जो आज़ाद होने के लिए फडफडा रहे थे, रिंकी उस रूप में सेक्स की देवी लग रही थी, उसका यौवन उसकी ड्रेस में से ही कहर ढा रहा था,उसकी छतियो के बीच की घाटी जानलेवा थी,दिल थाम देने वाली 'कातिल घाटी' , उसका नव यौवन कयामत ढा रहा था ,जाने अंजाने वो मेरी साँसों में उतरती जा रही थी।

जानलेवा नज़ारा देख मेरा रोम रोम रोमांचित हो उठा था, मेरे सारे शरीर मे मीठी मीठी टीस सी उठ रही थी, अब मुझसे और बर्दास्त करना बहुत मुश्किल हो रहा था, ये खतरनाक मंज़र देख मेरा लंड बगावत पर उतर आया, मैने तुरंत अपने दिमाग को झटक कर अपना ध्यान भटकाने की कोशिश की पर हर बार मेरी आंखें इज़ाज़त मानने से इनकार कर देती और तुरंत उस नज़ारे को खुद में समाने के लिए उसी ओर उठ पड़ती,

"क्या हुआ पापा ,आप क्या देख रहे हो" रिंकी ने जानबूझकर मुझे यानी अपने पापा को छेड़ने के लिए कहा जबकि वो खुद जानबूझकर मुझे अपनी घाटी का दर्शन दे रही थी

"कककककक.....कुछ...भी तो नही......वो ....वो....मैं" अचानक रिंकी के इस तरह पूछने से मै थोड़ा सा घबरा गया पर मैने तुरंत खुद को संभाल लिया।

रिंकी बेटी sorry.

'पापा डोंट से सॉरी...माफ़ी तो मुझे आपसे माँगनी चाहिए. आप क्यूँ सॉरी बोल रहे हो...आफ्टर ऑल द थिंग्स यू डिड फॉर मी...मैंने आपकी बिना बात पर ही इतना ओवर-रियेक्ट कर दिया. सो आई एम सॉरी पापा...प्लीज़ फोर्गिव मी..?’ रिंकी ने एक ही साँस में बोलते हुए मुझसे मिन्नत की.

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था. मैने असमंजस भरी नज़रों से रिंकी की आँखों में देखा और फिर कहने की कोशिश की,

'आपने ओवर-रियेक्ट नहीं किया. बात ही ऐसी कह दी थी के आप हर्ट हो गए. प्लीज़ लिसेन (सुनो) टू मी फॉर अ सेकंड.'

'नहीं पापा...मैं नहीं सुनूंगी...आपने मुझे हर्ट नहीं किया ओके? मैं ही आपको नहीं समझ सकी...आप ने मुझे हमेशा एक फ्रेंड की तरह बल्कि उस से भी बढ़कर ट्रीट किया और इतना ख्याल रखते है मेरा ताकि आई कैन एन्जॉय माय लाइफ ...और मैंने आपको एक छोटी सी बात के लिए इतना बुरा-बुरा कह दिया...सो आई शुड बी सेयिंग सॉरी...’रिंकी मेरी कोई बात सुनने को राज़ी नहीं थी.

'छोटी सी बात थी वो...' मैने फिर कहने का प्रयास किया.

'पापा नो...डोंट से अ वर्ड......' रिंकी ने फिर से मेरी बात काट दी. अब मै चुप हो गया और समझ नहीं पा रहा था कि अचानक रिंकी को यह क्या हो गया है और उसके तेवर बदल कैसे गए .

'पापा?' रिंकी ने इस बार मुझे दुलार कर कहा.

'रिंकी..?' मैने उसकी बदली आवाज़ सुन सधी हुई सवालिया नज़र से उसे देखा.

'प्लीज़ बिलीव मीं...विश्वास करो मेरा, आई एम रियली सॉरी ना...आपकी कोई गलती नहीं थी.' रिंकी मेरे करीब आ खड़ी हो गई थी. बैठे हुए मैने अपनी नज़र उठा उसकी आँखों में देखा और एक पल बाद धीमे से हाँ में हिला दिया.

'ओके रिंकी.' मैने हौले से कहा.

रिंकी ने मेरी बात सुन मेरी ओर अपना हाथ बढ़ाया और मुस्का दी, मैने भी धीमे से मुस्कुरा कर थोड़े संकोच के साथ उसका हाथ थाम लिया जिसपर रिंकी आगे बढ़ मेरी गोद में बैठ गई.

आई मिस्ड टॉकिंग टू यू पापा...एंड आई एम रियली सॉरी.' रिंकी ने प्यार से मुहँ बना कर उनसे अपनी माफ़ी का इज़हार एक बार फिर कर दिया 'प्लीज़ फोर्गिव मी?'

'आई मिस्ड टॉकिंग टू यू टू डार्लिंग.' मैने कहा, पर रिंकी ने मेरे संबोधन पर कोई आपत्ति नहीं जताई 'प्रॉमिस करो कि फिर मुझसे कभी नाराज़ नहीं होओगी.' मै रिंकी का बर्ताव देख अपने से सटाते हुए आगे बोला.

'आई प्रॉमिस पापा...' रिंकी ने मुस्कुरा कर हाँ भर दी थी और मेरा लंड खुश हो एक बार फिर उछल कर खड़ा हो गया.

ओह थैंक यू पापा" रिंकी मेरी गोद मे ही बैठे हुए अपने दोनों हाथों को मेरी गर्दन के दोनों ओर लपेट लिया

इस तरह अचानक और बेपरवाह होकर मुझसे भूरपूर तरीके से चिपटने से रिंकी के मम्मे मेरी छाती से जा टकराये, रिंकी के इस तरह गोद मे बैठने की वजह से मै थोड़ा असहज हो गया ।

पर मेरे जिस्म में सर से ले कर पैर तक एक अजीब सी मस्ती की लहर दौड़ गई, ऊपर से रिंकी के जवान जिस्म से आती मादक गंध ने तो मेरे होश ही उड़ा दिए, आज मैने पहली बार रिंकी के जवान होते बदन पर नज़र डाली थी, रिंकी लगभग इसी साल 18 की हुई थी, दिखने में वो कुसुम की तरह ही खूबसूरत थी, वही तीखे नैन नक्श, दमकता गोरा चिट्टा चेहरा और गुलाबी रसीले होंठ, छोटे छोटे अमरूद जैसी सुंदर सुंदर चुचियाँ, पतली गोरी कमर, उभरी हुई गांड, भरी मांसल जाँघे और उसके कच्चे यौवन की मादक खुशबू मुझे धीरे धीरे उत्तेजित करने लगी थी,

मेरा फनफनाता लंड मेरी पैंट में सर उठाने लगा था, रिंकी की छोटी सी कैपरी से झांकती उसकी खूबसूरत पिंडलियों ने तो मेरे दिमाग का फ्यूज़ ही उड़ा कर रख दिया था, मै अपनी भावनाओं पर काबू करने की नाकाम सी कोशिश कर रहा था, पर मेरा लंड तो बस जवान जिस्म का सामीप्य पाकर उसके आपे से बाहर होने लगा था,

"अच्छा तुम्हे क्या चाहिए रिंकी" मैने ध्यान बटाने के लिए उसकी ओर देखकर पूछा

"मुझे तो नया फोन चाहिए पापा" रिंकी खुश होती हुई बोली

"ज़रूर तुम्हे भी तुम्हारा गिफ्ट मिलेगा, पर पास होने के बाद" मै बोला

मै लगातार अपना ध्यान बटाने की कोशिश कर रहा था पर मेरा लंड तो आज मनमानी पर उतर आया था, रिंकी भी नासमझी में अपनी गांड को हिला हिलाकर मुझसे बाते किये जा रही थी,

इसका नतीजा ये हुआ कि अचानक रिंकी की छोटी सी चुत सीधा मेरे उठे हुए लंड से थोड़ा सा रगड़ गई, अपनी चुत पर लंड के इस अहसास से रिंकी की हल्की सी आह निकल गई पर इसने उसे मुझ पर ज़ाहिर नही होने दिया, ।

आज पहली बार किसी लंड को अपनी अनछुई छोटी सी चुत के इतने नज़दीक पाकर रिंकी के बदन में एक मीठी सी टीस उठ पड़ी,

रिंकी के इस तरह हिलने से बार बार मेरा लंड रिंकी की चुत से कैपरी के ऊपर से ही रगड़ खा रहा था, मै बार बार अपने लंड को एडजस्ट करने की कोशिश करता ताकि रिंकी को मेरे खड़े लंड का आभास ना हो पर बार बार मेरा लंड होले से उसकी चुत पर रगड़ जाता,

रिंकी तो अब मजे के मारे हल्की हल्की आहें भर रही थी, अचानक उसने अपनी गांड को कुछ ज्यादा ही झटका दिया जिसकी वजह से मेरा लंड सीधा जाकर उसकी चुत के मुहाने पर कैपरी के ऊपर से ही अटक गया, अगर आज हम दोनों के कपड़े न होते तो मेरा लंड सीधा रिंकी की चुत में घुस चुका होता, रिंकी इस मजे को सह नही पायी और उसकी चुत से कामरस की बूंदे निकलकर उसकी पैंटी को भिगोने लगी।

थोड़ी देर बाद मुझे किचिन से बाहर निकलकर हॉल की तरफ आती हुई कुसुम दिखने लगी,

जब कुसुम की नज़र हॉल में बैठे हुए मेरी तरफ गयी और रिंकी को मेरी गोद मे देखकर तो जैसे कुसुम के तन बदन में आग सी लग गयी,

" उफ़्फ़ ये रिंकी की बच्ची कैसे अपने पापा की गोद मे जमकर बैठी है, हाय कितना मज़ा आ रहा होगा इसको अपने पापा को छूने पर, काश इसकी जगह मैं होती, हाय्य मैं तो अपनी गांड की गोलाइयों को अरुण के लन्ड से सटा देती , उन्हें अपने शरीर की खुशबू से पागल ही बना देती, उफ़्फ़ क्या मादक नज़ारा होता वो, मैं अपने प्यारे पति की गोद मे बैठकर उनके तने हुए लंड पर अपनी गांड मटकाती और वो अपने हाथों से मेरे इन प्यारे मम्मों को जी भरकर मसलते, इससस्स मैं तो मजे से पागल ही हो जाती, पर अब तो ये रिंकी की बच्ची ने मेरी जगह हथिया ली है, नहीं नहीं वो सिर्फ मेरी जगह है, वहां बैठने का हक़ सिर्फ मुझे ही है"

कुसुम अपने मन ही मन में सोचती हुई नास्ते की टेबल की ओर बढ़ती आ रही थी।

"ए रिंकी की बच्ची, पापा की गोद में क्यों बैठी है तू, बेअक्ल सीधा उनकी गोद मे जाकर उन्हें और परेशान कर रही है, चल नीचे उतर जल्दी से" कुसुम ने थोड़े गुस्से में आकर रिंकी को कहा,

कुसुम को अपनी सगी बेटी रिंकी जिसे उसने अपनी कोख से पैदा किया है उससे जलन सी महसूस होने लगी,

जारी है......
 
अध्याय --- 10 ----

----------------- शरारत -----------------------

कुसुम को अपनी सगी बेटी रिंकी जिसे उसने अपनी कोख से पैदा किया है उससे जलन सी महसूस होने लगी,

रिंकी ने जब कुसुम को इतने गुस्से में देखा तो वो थोड़ा डर गई, वो उसके गुस्से से भली भांति परिचित थी, इसलिए उसने नीचे उतरना में ही अपनी भलाई समझी, ऊपर से वो नही चाहती थी कि उसकी गीली पैंटी का आभास मुझ को हो जाये ,इसलिए वो बेमन से मेरी ( अपने पापा) की गोद से नीचे उतरी और साइड में जाकर बैठ गई, पर वो अभी भी हैरानी से कुसुम को देख रही थी

इधर रिंकी के गोद से उतरने पर मेरे पैंट में बना उभर पूरी तरह से देखा जा सकता था, इसलिए मैने तुरंत अपने एक पैर पर दूसरे पैर को रख लिया, पर इससे पहले की मै ये सब कर पाता रिंकी ने कनखियों से मेरे लंड के उभार को देख लिया , उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आ गई थी,

ओह माई गॉड, पापा का डिक कितना बड़ा है....... कितना बड़ा उभर बना हुआ था .......इसस्ससस ये मैं क्या सोच रही हूं......ये गलत है......पर....पर वो उत्तेजित क्यों हो गए......कहीं वो मुझे......नहीं नहीं ....ये मेरी गलती है......मुझे ऐसे उनकी गोद मे नहीं बैठना चाहिए था......पर हाय्य कितना मज़ा आ रहा था.......उनका बड़ा सा डिक कैसे मेरी पुसी को टच कर रहा था......उम्ह्ह्ह्ह्ह पापाऽऽऽऽऽऽऽ...........मुझे इतना अच्छा क्यों लग रहा है........हाय्य काश थोड़ी देर बैठ जाती ......अम्मममम कितना मज़ा आ रहा था......उम्ह्ह्ह्ह्ह मेरी चुत से पानी भी निकलने लगा है.....हाय ये मैं क्या सोच रही हूं......पर मुझे पापा की गोद में बैठकर इतना अच्छा क्यों लग रहा था....काश मैं उनकी गोद मे हमेशा बैठी रहूं....

पर ....मम्मी ने आकर सारा काम बिगड़ दिया......" रिंकी अपने मन मे मची उथल पुथल से परेशान थी

"अरे महारानी अब इतनी चुप क्यों हो गयी" कुसुम ने रिंकी को चुप देखकर पूछा

"वो.....वो...कुछ नहीं मम्मी ....वो तो मैं ऐसे ही एग्जाम के बारे में सोच रही थी....10 से हमारे एग्जाम शुरू हैं ना" रिंकी ने सफाई से अपना बचाव करते हुए कहा

"अरे वाह, तू कब से पढ़ाई की चिंता करने लगी" कुसुम ने मजाक करते हुए कहा

कुसुम की बात सुनकर मै और कुसुम हंस पड़े और रिंकी के होठों पर भी हल्की से मुस्कान आ गयी।

हे भगवान, बाल बाल बच गया, अगर किसी ने मेरा पैंट का उभार देख लिया होता तो बवाल मच जाता, ये लंड भी ना...पहले से ही जूली के चक्कर मे ज़िन्दगी झंड हुई पड़ी है और अब ये रिंकी को देखकर लार टपक रहा है,

अगर कुसुम को थोड़ा सा भी आभास हो जाता तो न जाने क्या हो जाता"

इधर मेरे मन मे मचा तूफान थमने का नाम ही नही ले रहा था।

थोड़ी देर बाद मेरे मम्मी पापा आ गये, उन्होंने कुसुम और रिंकी की खितपिट सुन ली थी। मेरी मम्मी कुसुम से बोली बहू क्यो मेरी लाडली पोती पर सुबह सुबह गरम हो रही हो।

कुसुम-- देखिये ना मम्मी रिंकी सुबह सुबह ही अपने पापा को परेशान करने लगी। उनकी गोद में बैठ गयी और नाश्ता भी नही करने दे रही है। रिंकी अब छोटी नही रही धीऱे धीऱे बढ़ी होती जाँ रही है। अब अकल नही सीखेगी तो फिर आगे इसको ही परेशान होना पड़ेगा।

दादी-- अरे बहू तुम खाम खा इतना परेशान हो, पापा बेटी एक दूसरे को लाड़ कर रहे है, और बेटी कितनी भी बड़ी हो जाये पर पापा के लिए तो हमेशा परी ही रहती है। सबसे बड़ी बात यह है कि अरुण तुम्हारा पति होने के साथ साथ रिंकी का पापा भी है और जितना अधिकार तुम्हारा अरुण पर है उतना ही रिंकी का है।

रिंकी भी तुम्हारी तरह अपने पापा के गोद में बैठ सकती है, पापा के सीने से लग सकती है, पापा के कंधे पर सर रखकर सो और रो सकती है, बेटी का भी अपने पापा के जिस्म पर पूरा हक है, यही तो पापा बेटी का प्यार होता है।

""मेरा बेटा अरुण अपना पति और पापा का फर्ज बहुत ही अच्छे से निभा रहा है""

तभी मेरी पापा बीच में मेरी मम्मी से बोल पड़े देवी जी अगर प्रवचन खतम हो गये हो तो अब हम भी कुछ खा ले। हमारी बहू क्या बनाया है खाने में?

फिर सब हँसने लगे।

थोड़ी देर ही हुई थी कि कुसुम ने किचन के अंदर से आवाज़ लगाई " खाना बन गया है, सारे लोग टेबल पर बैठ जाओ"

कुसुम की आवाज़ सुनकर सभी टेबल पर आ बैठे, हेड चेयर पर मेरे पापा बैठे थे , और उनके एक तरफ उनकी खूबसूरत पत्नी मतलब मेरी मम्मी और दूसरी तरफ जवान नातिनि रिंकी थी।

मै सबसे लास्ट में बैठा था, तभी कुसुम अंदर से खाने के बर्तन वगरैह ले आयी और उसने सबकी प्लेट्स में खाना सर्व किया

और खुद भी मेरे पास बैठकर खाना शुरू कर दिया।

तभी खाना खाते हुए कुसुम को थोड़ा ठस्का लगा, मैने उसे पानी दिया और कहा क्यो क्या हुआ। वो कुछ नही बोलकर शांत हो गयी।

मेरी मम्मी--- बहू खाना खाने के बाद तुम अरुण के साथ डॉक्टर के पास जरूर जाना है, सुबह भी

उल्टियां कर रही थी। एक बार chekup. करवा लो।

मै-- अरे मम्मी कुसुम के गैस बन रही होगी अक्सर ऐसा हो जाता है।

मम्मी-- गुस्से में मुझसे बोली तेरे मुह में गैस नही बन रही है, इतना बड़ा हो गया पर बचपन नही गया। तुझे शादी को तीन महीने होने को आये और अभी तक अपनी पत्नी को नही समझ पाया। पत्नी के साथ सोने से ही पति नही बन जाता कोई, तुम्हे अपनी पत्नी की तन और मन की बात भी समझना चाहिए।

मेरे पापा फिर मम्मी को चुप करते हुए बोले अब चुप हो जाओ। और मुझसे मुस्कुरा कर बोले बेटा अब तू भी बाप बनने वाला है, समझा।

मै ये सुनकर शोकड हो गया, और पापा से बोला कुछ भी मत बोलो।

कुसम् तुम्हारी तबियत ठीक नही है और तुमने मुझे बताया नही,

कुसुम-- अरे कुछ ज्यादा परेशानी नही है बस पूरे शरीर में दर्द और उल्टी का मन कर रहा है।

मै--- खाना finish करो और तैयार हो जाओ हम अभी डॉक्टर के पास चलते है।

हमारी बातें सुनकर रिंकी बोली पापा मै भी आपके और मम्मी के साथ चलु, पापा आपकी की care करने के लिए कोई तो चाहिए।

रिंकी की बात सुनकर कुसुम एक दम से बोली कोई जरूरत नही है, मै अपने पति और तेरे पापा की care. कर सकती हू। बड़ी आई care करने वाली।

""माँ बेटी की बात सुनकर मै ये तो समझ गया अब मेरी जिंदगी झंड होने वाली है और मेरे लोंड़े लगने वाले है""

मेरी मम्मी--- रिंकी बेटी तुम्हे ऐसा नहीं बोलना चाहिए और क्या बहू छोटी सी बात पर मेरी लाडली पर चिल्ला रही हो वो तुम्हारी care करनी है ये बोल रही थी।

मेरे पापा--- चलो खाना हो गया, अरुण अब तुम और बहू जल्दी से डॉक्टर के पास जाओ।

मै--- ठीक है और मै और कुसुम हॉस्पिटल के लिए निकल पड़े।

मै कुसुम को अपनी बाइक पर बैठा कर हॉस्पिटल के लिए चला जा रहा था, कुसुम शांत थी। शायद उसकी वजह हमारी बेटी रिंकी थी।

मै भी मन ही मन अपनी पत्नी कुसुम और बेटी रिंकी के बारे में गहरी सोच में था।

मैं खुद मानता हूँ कि ऐसी होनी नहीं होनी चाहिए। कोई अन्य सभ्य पुरुष यह बर्दाश्त नहीं कर सकता पर मैंने इसमें मज़ा लिया, यही तो चिंता की बात है।

शायद मैं विकृत मानसिकता का शिकार हो गया हूँ लेकिन इसमें अकेले मेरी गलती नहीं है, मुझे बीवी के साथ बेटी ही ऐसी मिली है।

थोड़ी देर पहले घर पर मेरी मम्मी ने कहा मुझे अपनी पत्नी कुसुम के तन मन में क्या ये समझना चाहिए।

तो अब मैं आपको खुल कर अपनी बीवी कुसुम के बारे में बताता हूँ, और अब तो मै अपने सगे बच्चे का बाप बनने वाला हू। और शायद हमारी लाइफ भी बदलने वाली है।

हमारी शादी के बाद से पिछले तीन महीनों में मेरी बीवी के साथ बिताया हुआ हर पल और जितना मैने उसे समझा है कम से कम मैं लिख तो सकता हूँ।

मेरी कुसुम का गुस्सा तेज है, उसके साथ कुछ किसी ने किया तो उसका तुरंत बदला जरूर निकलती है।

वो बहुत ही स्पष्टवादी भी है, मुझसे कुछ भी बात छुपाती नहीं है, अभी भी यौनपूर्व क्रीड़ा के दौरान उसे योनि की चुसाई सबसे ज्यादा पसंद है। सम्भोग में चरम की स्थिति कभी कभी बेधड़क गालियाँ बकती है, वो भी एकदम गन्दी-गन्दी !

मेरी बीवी कुसुम बहुत ही ज्यादा बिंदास और दिलफ़ेंक किस्म की है और मैं उसके पराये मर्दों के साथ खुले और उन्मुक्त व्यवहार को देखकर उत्तेजित हो जाता हूँ यह मेरी कमजोरी है और यह बात वो भी अच्छी तरह से समझ गई है।

मुझे शादी के बाद उसकी इस प्रकृति का पता कैसे लगा, आज मैं आपको यही बात बताने जा रहा हूँ।

मै अपनी बीवी कुसुम के बारे सोचता हुआ हॉस्पिटल पहुँच गया और बाइक को पार्किंग में खड़ा करके हॉस्पिटल के अंदर चले गये।

Reception. पर मैने enqiry की तो एक नर्स ने हमें 3 फ्लोर पर रूम नम्बर 303 में एक लेडी डॉक्टर के पास भेज दिया।

उस लेडी डाक्टर का नाम ज़ुबैदा कादरी था। कुछ ही दिनों पहले उसने हॉस्पिटल में जोइनिंग ली थी। मैं उसे देखता ही रह गया था।

यही हालत कुसुम की थी।

बड़ी गज़ब की थी वो। उम्र यही कोई 37-38 साल। उसने अपने आपको खूब संभाल कर रखा हुआ था। रंग ऐसा जैसे दूध में किसी ने केसर मिला दिया हो। त्वचा बेदाग और बहुत ही स्मूथ। आँखें झील की तरह गहरी और बड़ी-बड़ी। स्लीवलेस कमीज़ के साथ चुड़ीदार सलवार और उँची ऐड़ी की सैंडल पहने थी, मगर उसके हुस्न का जलवा कुछ और ही था। किसी माहिर संग-तराश का शाहकार थी वो ।

उसके जिस्म का एक-एक अंग सलीके से तराशा हुआ था। उसके सीने का उभरा हुआ भाग फ़ख्र से हमेशा तना हुआ था। उसके चूतड़ इतने चुस्त और खूबसूरत आकार लिये हुए थे, मानो कुदरत ने उन्हें बनाने के बाद अपने औजार तोड़ दिये हों।

वो कुसुम को बड़ी गौर से देख रही थी, अचानक से वो चौकते हुए बोली,

हाय अल्लाह कुसुम धामी convent school की 12class की सबसे hot, bold, sexy, aatitude, ego, वाली लड़की जो अपने गुस्से, अकड़ और बदले में जो ठान ले उस काम को करके ही छोड़ती थी। जिसके नखरे और तेवर इतने की पूरे स्कूल का कोई भी लड़का उसको प्रपोज नही कर पाया। पैसे से गरीब पर दिल की अमीर।

इतने सालों के बाद अब मिली हो, अभी तक कहा थी, कैसी थी, क्या कर रही थी, घर में सब कैसे है, प्रीति दीदी कहा है, उसने एक सांस में बहुत से सवाल कर दिये कुसुम से।

कुसुम उसकी आवाज सुनकर बोली अरे कमीनी तू अभी तक जिंदा है।

कुसुम और वो कुंभ के मेले में बिछड़ी हुई बहनो की तरह गले मिलने लगी।

"" कुसुम के बारे में जो उस लेडी डॉक्टर ने बताया वो ही सारे गुण उसकी बेटी रिंकी में है और मजे की बात तो ये है कि रिंकी भी अभी 12 मे ही है ""

जैसी मम्मी वैसी बेटी

फिर कुसुम ने मेरा उस लेडी डॉक्टर से परिचय कराया।

वो मुझे देखकर बोली थैंक्स गॉड कम से आप तो मिले इसे मुझे तो लगता था कि ये virgin ही मरेगी। हाहाहा हाहाहा

""कुसुम भी 12 में साइंस पढ़ी हुई है पर डॉक्टर नहीं बन पायी क्योकि हालात गरीबी, मजबूरी में उसकी शादी हो गयी थी जो आप लोगो को मै पहले भी बता चुका हूँ।

पर उसकी ये खास दोस्त डॉक्टर है और वो पहले से ही परिचित है, उसके परिवार का कुसुम के घर खूब आना जाना था।""

कुसुम और वो लेडी डॉक्टर आपस में बातें करने लगे और मै शांति से उनकी बातें सुनने लगा।

"" औरते जब बात करना शुरु कर दे तो कभी टोकना नही चाहिए ""

कुसुम यार अब तो तुम पूरी बदल गयी हो।

तु इस समय 36 साल की भरी-पूरी अम्मा दिख रही है। दिखने में नयन-नक्ष कद तो पहले जैसा ही है। पर स्कूल के समय दुबली थी पर अब डर्टी पिक्चर की विद्या बालन जैसी हो गई है,

और उसने कुसुम के एक हाथ से स्तनों को दबाया और दूसरे से कुसुम के नितंबो को बजाते हुए हस्ती हुई बोली ये जरूर भारी हो गये है।

कुसुम भी हस्ती हुई अपनी हामी दे रही थी।

कुसुम तेरा स्वाभाव अब भी बेबाक है, या कुछ अंतर आया।

क्या अब भी पहले की तरह डबल मीनिंग बातचीत, रोमांटिक नोवेल-फिल्मों की शौकीन है।

और सबसे खास और अजीब बात तेरी कि जिन मर्दों को जानती है उनसे फ्लर्ट करना, धोल धप्पे से बातें करना अन्तरंग बातों को लेकर चुहल करना तेरी आदत बदली की नही।

मै कुसुम की काले कारनामे की कहानी सुनकर दंग था और मै उस लेडी डॉक्टर की तरफ ही देख रहा था।

तभी वो मुझसे बोलि भाई जान आप बताओ कुसुम का गुस्सा अब भी पहले की तरह तेज है, या कुछ कम हुआ। क्योकि पहले इसके साथ कुछ किसी ने किया तो उसका तुरंत बदला जरूर निकलती थी।

मै एक बार होली की बात बताती हूँ आपको. . ...

होली का नाम सुनकर कुसुम उससे बोली चुप कर कमीनी। दोनों हसने लगी।

ठीक है नही बताती वो fine art potrate वाली तो मै पूरी लाइफ नही भूल सकती।

मुझे अब कुसुम के राज जानने की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी।

तो मैने उस डॉक्टर से कहा बताओ ना कोई नहीं मुझे कोई प्रॉब्लम नही है इन fact मुझे और अच्छा लगेगा आप दोनों के स्कूल के दिनो की शरारत जानकर। We are friends

कुसुम उसको ना ना ना करके मना करती रही पर वो लेडी डॉक्टर नही मानी और सब बताने लगी।

होली वाले दिन जब हम दोनों के एक दोस्त ने कुसुम के ड्रेस के अंदर स्तनों में हाथ डालकर रंग क्या डाला । तो कुसुम ने गुस्से में उसे लगभग नंगा कर दिया और बिफर गई। अपने हाथो से उसके लंड को रंग लगाकर रगड़ती रही और उसका लण्ड झाड़ कर ही मानी। कुसुम ने उसका लंड इतनी जोर से और गुस्से में पकड़ कर रगड़ रगड़ कर हिलाया था कि बेचारे का पानी के साथ साथ खून भी निकल आया था।

""मेरी बीवी कुसुम की होली वाली घटना जो उसके दोस्त और उसके बीच घटी थी वास्तव में बहुत ही ज्यादा सनसनीखेज और उत्तेजक थी, जिसने मुझे अंदर तक हिला दिया ।""

मै कुसुम की चेहरे की तरफ देख रहा था, कुसुम के चेहरे पर शर्म वाली हसी थी।

वो लेडी डॉक्टर मुझसे बोली मै अब आपको होली से भी ज्यादा एक रोचक किस्सा है जिसे आपको मै बताती हूँ।

और सबसे अजीब बात जिसे सुन कर शायद आप होली वाले वाकये को सही से समझ पायेंगे,

एक बार स्कूल के दिनों में सहेलियों के द्वारा कुसुम के साथ शर्त लग गयी फिर क्या कुसुम एक बार महज दो हजार रुपयों के लिये उसने फाईन आर्ट की लाइव पोट्रेट क्लास में सभी लड़के लडकियों और टीचर की मौजूदगी में नग्नावस्था में खुद की पेंटिंग बनाने के लिए एक घंटे तक बैठी रही, वो भी निहायत ही अश्लील मुद्रा में क्योंकि विषय के हिसाब से उसे अपनी गुच्छेदार झांटों को हाईलाइट करना था।

कुसुम sorry यार मै ही तेरी वो अन्तरंग सहेली हू जिसने सर को बता दिया था कि तेरी झांटें घनघोर हैं।

पर बाद में पूरी क्लास और सर ने तेरे फिगर की खूब तारीफ़ की, इससे तू फूल गई और मारे खुशी तूने मुझे सबके सामने चूमा था।

तुझे याद है कुसुम जब ऊँची ऐड़ी की सैंडल पहन कर चलती थी तो हवाओं की साँसें रुक जाती थीं। जब तू बोलती थी तो चिड़ियाँ चहचहाना भूल जाती थीं और जब तू नज़र भर कर किसी की तरफ देखती थी तो वक्त थम जाता था।

इतना सब सुनने के बाद मै तो पूरा हिल गया और सोचने लगा ये मैने कैसी लड़की से शादी कर ली।

उधर कुसुम भी अपनी स्कूल के दिनों में की गयी गलतियों या शरारतो को सुनकर शर्म से पानी पानी हो रही थी।

कुसुम का सब्र का बांध टूट गया और वो बोली कादरी की बच्ची अब बस बहुत हो गया। मै यहाँ chekup कराने आई हू ना कि तेरी बकवास सुनने।

वो लेडी डॉक्टर हस्ती हुयी बोली sorry sorry कुसुम acchullay हम बचपन के सहेली है इसलिए कंट्रोल नही कर पायी मै तुझसे मिलने को कितने सालों से तड़प रही थी।

I really sorry.

अब बता क्या प्रॉब्लम है,

कुसुम ने उसे बताना शुरु किया। कि उसके सीने और पेट में दर्द है, और उल्टी भी हुई थी, मन कचचा सा हो रहा है।

उसकी माहवारी बंद हो चुकी है लगातार पैड लगाने से उसकी चूत और दोनों जाँघों के बीच के जगह चकत्ते पड़ कर छिल गई थी, वो इस वजह से बहुत परेशानी में है,

फिर डॉक्टर ने उससे पूछा- महीना कब से नही हुआ है?

वो बोली- दो महीने से,

डॉक्टर--- छाती, पेट में दर्द है।

कुसुम-- हा

डॉक्टर--- स्तनों में भारीपन या दर्द है।

कुसुम--- हा

डॉक्टर--- टट्टी पेशाब में जलन है

कुसुम-- नही पर सेक्स करते समय नीचे जलन होती है.

डॉक्टर ने मुस्कुरा कर कहा- नीचे कहां?

मेरी पत्नी ने शर्मा कर कहा- उधर चूत में.

डॉक्टर ने चुत शब्द सुना तो एकदम से बोली- ये गड़बड़ बात है … उधर तो जलन नहीं होनी चाहिए. इसे तुरंत जांचना होगा.

मेरी पत्नी कुसुम की पूरी बात सुनने के बाद डॉक्टर ने उससे अपने मम्मे दिखाने को कहा.

मेरी बीवी ने मेरी तरफ देखा तो मैंने आंख के इशारे से उसे हामी भर दी.

फिर डॉक्टर और मेरी पत्नी साईड में पर्दा लगे एक केबिन में गए.

डॉक्टर ने उससे ब्लाउज खोलने को कहा. मैं भी वहीं पर्दा के पास खड़ा था. मेरी पत्नी ने साड़ी को हटाया, जिससे ब्लाउज के ऊपर से उसके दोनों बूब्स दिखने लगे.

डॉक्टर मेरी बीवी के तने हुए मम्मे देखने लगी.

फिर उसने मेरी बीवी से कहा कि अपने हाथ से बताओ कि किधर दर्द है.

मेरी बीवी ने अपने एक चुचे को एक जगह से दबाकर उसे बताया कि इधर दर्द है.

डॉक्टर ने अपने हाथ से मेरी बीवी के मम्मे की दर्द वाली जगह पर उंगली से दबाकर देखा तो मेरी बीवी की हल्की सी आह निकल गई.

मैं अपनी आंखों से एक औरत के हाथ से अपनी बीवी के दूध दबाकर देखते हुए मस्त होने लगा.

फिर डॉक्टर ने उससे ब्लाउज खोलने के लिए कहा तो मेरी पैंट में सनसनी होने लगी.

मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था.

मेरी बीवी ने मेरी तरफ देखा तो मैंने सर हिलाकर उससे ब्लाउज खोलने का इशारा कर दिया.

वो अपने ब्लाउज के एक एक करके हुक खोलने लगी.

अब वो ऊपर से सिर्फ ब्रा में थी.

डॉक्टर ने उससे ब्रा भी खोलने को कहा.

मेरी पत्नी कुछ शर्मा रही थी क्योंकि वो पहली बार किसी अन्य महिला के साथ और अपनी पति के सामने वो इस प्रकार से थी.

मैंने उससे कहा- अरे शर्माओ मत, जब तक डॉक्टर को दिखाओगी नहीं, तब तक इलाज कैसे होगा.

ये सुनकर उसने अपनी ब्रा खोलकर एक तरफ रख दी और दोनों हाथों से अपनी चूचियों को छुपाने लगी.

मैं उससे कहा- डॉक्टर से शर्म कैसी, दिखा दो न!

डॉक्टर भी बोलने लगी - हां दिखाओ, नहीं तो इलाज कैसे होगा?

फिर मेरी पत्नी ने दोनों हाथ हटा लिए जिससे उसके दोनों बूब्स उछल कर डॉक्टर के सामने आ गए.

डॉक्टर सामने से मेरी पत्नी क़े दूध छूकर चैक करने लगी।

वो एक मम्मे की दर्द वाली जगह दबा दबा देखने लगी.

फिर उसने दूसरे मम्मे को भी उसी जगह दबा कर चैक किया.

इतनी देर में मेरी बीवी भी अपनी शर्म छोड़ चुकी थी.

मुझे भी ये देखकर मजा आने लगा था.

डॉक्टर ने दोनों हाथों से मेरी बीवी के दूध को दाब दाब कर दर्द देखना शुरू कर दिया था.

मेरी बीवी भी उसे बता रही थी कि इसमें इधर दर्द होता है, इधर नहीं होता है.

डॉक्टर बारी बारी से दोनों मम्मे दबाते हुए देख रही थी.

मैंने भी महसूस किया कि इस सीन से मेरा लंड भी खड़ा हो गया था.

डॉक्टर ने बहुत देर तक मेरी बीवी के मम्मों को हर तरह से दबा कर जांचा.

फ़िर वो ऐसे ही बात करने लगी कि ये ठीक हो जाएगा.

मेरी बीवी अभी भी ऊपर से पूरी नंगी थी.

मेरी पत्नी ने मेरी तरफ देखा तो मैंने भी उसे दो उंगलियों से छेद बनाकर इशारा कर दिया कि चुत भी दिखा दो.

उसने मेरी तरफ गुस्सा से देखा.

मगर उसके पास कोई चारा नहीं था.

मुझे हसी आ रही थी हाहाहा हाहाहा हाहाहा

वो बगल में रखी टेबल पर बैठ गई.

डॉक्टर ने साड़ी और पेटीकोट हटाने को कहा.

मेरी पत्नी शर्माती हुई अपनी साड़ी और पेटीकोट खोलने लगी.

डॉक्टर भी उसे ही देख रही थी.

मेरी बीवी ऊपर से तो नंगी थी ही अब नीचे से भी नंगी होने जा रही थी.

इधर लंड मेरी पैंट फाड़ कर जैसे बाहर आने को बेताब हो गया था.

मैंने ध्यान दिया कि डॉक्टर ने भी अपनी चूत एक दो बार मसल दि थी जो मेरी बीवी ने भी नोटिस किया था.

मेरी पत्नी आते समय शायद अपनी पैंटी पहनना भूल गई थी.

साड़ी पेटीकोट के हटते ही वो हम दोनों के सामने पूरी तरह नंगी हो गई थी.

उसे जैसे ही ख्याल आया कि उसने पैंटी नहीं पहनी है, वो झट से अपनी चूत को छुपाने लगी.

डॉक्टर ने उसे लेटने को कहा और पैरों को मोड़ कर फैलाने को कहा.

अब तक वो भी अपनी शर्म छोड़ चुकी थी.

मेरी पत्नी के चूत में छोटे छोटे बाल थे, कुछ दिन पहले मेरी पत्नी ने चूत के बाल साफ किए थे.

मेरी बीवी पूरी नंगी टेबल पर लेटी हुई थी.

अब डॉक्टर मेरी बीवी के पास जाकर पहले तो चूत देखती रही. मेरी बीवी की चूत बहुत गोरी है.

फिर वो मेरी बीवी की चूत की फांकों को अपने हाथ से फैला फैला कर देखने लगी.

वो कभी कभी चूत को मसल भी देती थी

जिससे मेरी पत्नी के मुँह से एक सेक्सी आवाज भी निकल जा रही थी.

कुछ देर बाद मेरी पत्नी ने अपने पैर पूरी तरह से अलग करके डॉक्टर के सामने चूत फैला दी थी.

वो चुत खोले हुए मेरी ओर देख रही थी.

मैंने भी आंख मारते हुए उसे एक मुस्कान दे दी. मैंने देखा कि उसके चेहरे पर भी एक हल्की सी मुस्कान आ गई थी.

""मुझे ऐसा महसूस होने लगा था कि औरत को अपने पति की रजामंदी मिल जाए तो वो किसी के सामने भी अपनी चुत खोलने को राजी हो सकती है.""

डॉक्टर ने अब अपनी एक उंगली को मेरी पत्नी के चूत में घुसा दी और चुत चैक करने लगी .

इससे मेरी पत्नी को अब मजा आने लगा था और उसकी चुत ने हल्का हल्का सा रस छोड़ना शुरू कर दिया था.

""चुत से रस रिसना किसी को भी ये बताने के लिए काफी होता है कि चुत गर्म होने लगी है और चुत वाली को मजा आ रहा है.""

डॉक्टर बहुत देर तक मेरी पत्नी की चूत को उंगली से ऐसे चैक करती रही, जैसे कि वो चुत चोद रही हो.

शायद डॉक्टर को अब चूत छोड़ने का मन ही नहीं था.

मैं तो ये देखकर दंग था कि मेरी पत्नी इस वक्त मुझे और भी ज्यादा सेक्सी लग रही थी.

वो अपनी आंखें बंद करके डॉक्टर की उंगली को अपनी चुत में लेकर मजा ले रही थी.

फिर डॉक्टर ने अपनी उंगली चुत से निकाली और मेरी बीवी से कपड़े पहन कर बाहर आने को कहा.

मैंने देखा कि डॉक्टर की सलवार भी गीली हो रही है.

इधर मेरा भी लंड पूरा खड़ा था.

लेडी डॉक्टर मुस्कुराते हुए अपने कुर्सी पर बैठ गयी.

मेरी पत्नी अपने कपड़े पहन कर वापस डॉक्टर के पास आ गई.

लेडी डॉक्टर ने मुझसे कहा कि संभोग करने से पहले अपनी पत्नी को पूरा गर्म किया करो, जिससे उसकी योनी पूरी गीली हो जाए, तभी अपना डिक योनी में डाला करो, इससे जलन नहीं होगी. तुम शायद सूखी योनी में डिक पेल देते हो, जिससे इसको जलन होती है.

उसने मेरी बीवी का सोनोग्राफि टेस्ट कमरा नंबर 306 में करवाने के लिए कहा फिर रिपोर्ट देखने के बाद दवाई लिखेगी।

जारी है.....
 
बहुत बहुत शुक्रिया

मै आपकी जिग्यसा कुछ हद तक समाधान करने के लिए बस इतना ही कहूंगा ये एक इकसूत्री कहानी है। वास्तविक जीवन में कब कोनसी घटना घट जाये ये किसी को नही पता होता...... ठीक उसी तरह मै भी ये कहानी वास्तविक और काल्पनिक घटनाओ जो अक्सर आज कल हो रही है उनको देखकर लिखता हूँ। और सच तो ये है कहानी को incest या adultry का idea तो मुझे भी नही रहता।

जैसे अरुण की बीवी को कोई लाइन दे तो adultry और उसकी बेटी, फैमिली मिलती है तो incest शुरु हो जाता है। कहानी अब और ज्यादा मजे देने वाली है, इतना ही वादा कर सकता हूँ क्योकि अब मै कहानी में बहुत कुछ नया करने वाला हू।

Dhanyavaad.
 
धन्यवाद, आभार, शुक्रिया.....

दरसल मै पाठक/रीडर को ज्यादा टेंशन नही देना चाहता हूँ,

हास्यास्पद लेखन पढ़ने वाले के चेहरे पर मुस्कुराहट लाता है, आज के तनाव भरे माहौल में सबसे मुश्किल काम लोगो के चेहरे पर मुस्कुराहट लाना है। मैने ये जिम्मा लिया है।

आप जैसे सभी रीडर का प्यार इसी तरह मिलता रहे बस यही दुआ है।

धन्यवाद.....
 
उसने मेरी बीवी का सोनोग्राफि टेस्ट कमरा नंबर 306 में करवाने के लिए कहा फिर रिपोर्ट देखने के बाद दवाई लिखेगी।

मैं अपनी बीवी को कमरा नंबर 306 में ले जाने लगा. जाते समय मैं अपनी बीवी कुसुम को छेड़ रहा था कि तुम्हारी चुत तो रस निकालने लगी थी.

हाहाहा हाहाहा हाहाहा

वो शर्माने लगी और हस्ती हुयी बोली- साली कादरी की बच्ची ने उंगली से ही मेरा रेप कर दिया है.

हाहाहा हाहाहा हाहाहा

हम दोनों हस रहे थे हाहाहा हाहाहा हाहाहा

जब सोनोग्राफी वाले डॉक्टर के कमरे में पर गये. तब डॉक्टर के जाने का टाईम हो गया था. फिर भी हमने बाहर बैठे लड़के से रिक्वेस्ट की तो उसने डॉक्टर से बात की, तो डॉक्टर राज़ी हो गये, हालाँकि वो घर जाने के लिए अपने कपड़े चेंज कर चुके थे. फिर हम अंदर गये तो मैंने देखा कि डॉक्टर 56-57 साल का बुजुर्ग था

फिर उसने कुसुम को लेटने के लिए बोला और उस लड़के को बोला कि तू एक काम कर बाहर क्लिनिक की लाईट वगैराह बंद करके चला जा और में इनकी सोनोग्राफी करके बंद कर दूंगा, तो वो लड़का चला गया, और तभी कुसुम वहाँ लेट गयी.

फिर डॉक्टर ने उसकी साड़ी खोलने को कहा, तो उसने अपनी साड़ी और पेटीकोट का नाड़ा खोल लिया. फिर डॉक्टर ने बिना देखे वहाँ एक कपड़ा डाल दिया और वो एक लोशन कुसुम के पेट पर लगाने लगा. फिर थोड़ी देर के बाद वो मशीन से चैक करने लगा, तो मैंने कहा कि सर बराबर हो रही है. तो उन्होंने कहा कि हाँ और बोला कि थोड़ा साड़ी पेटीकोट नीचे कर लो.

फिर कुसुम ने थोड़ी साड़ी पेटीकोट नीचे की तो उसकी पेट के ऊपरी और नाभि के नीचे आखिरी हिस्से के बाल थोड़े- थोड़े दिखाई देने लगे. फिर डॉक्टर ने लोशन लिया और वहाँ उसकी पेट के ऊपरी और नाभि के नीचे के आखिरी हिस्से वाली जगह पर लगाने लगा. तो मैंने देखा कि वो जानबूझ कर धीरे-धीरे अपना नीचे की ओर हाथ फैर रहा था. और कुसुम मेरी ओर देख कर इशारा कर रही थी.

मेरी झांटे सुलग रही थी, मैने कहा डॉक्टर साहब अपना हाथ पेट पर ही फेरिये ना।

तभी डॉक्टर ने कहा कि आपको एतराज़ है क्या? मै हट जाता हूँ आप खुद ही कर लीजिये....... तो में बोला कि नहीं सर आप करो, नो प्रोब्लम. फिर उसने धीरे-धीरे फिर लोशन लगाना स्टार्ट किया और उसका हाथ धीरे-धीरे कुसुम की नाभी के नीचे यौनानागो तक पहुँचने लगा, तो मैंने देखा कि बुड्ढे डॉक्टर की पैंट आगे से फूल गयी थी. फिर उसने अपने एक हाथ से अपने खड़े लंड को टाईट किया और मुझे सामने से देखा.

में क्या करता बस शांत होकर देखने के अलावा, तो उसकी हिम्मत थोड़ी और बढ़ गयी. फिर उसने धीरे-धीरे कुसुम की यौनानागो के उपरी भाग को टच करना चालू कर दिया, तो कुसुम ने कहा कि अरुण इनको बोलो कि नीचे हाथ ना ले जाए. फिर मैंने कहा कि कुसुम वो ज़रूरी है नहीं तो लोशन ठीक से नहीं लगेगा तो बराबर नहीं होगा.

फिर तभी कुसुम ने एक धीमी सिसकारी भरी श करके. शायद उसने अपनी मर्दानी उंगलियों को कुसुम की चूत पर फैरना शुरू कर दिया था, कुसुम के बदन पर कपड़ा पड़ा होने की वजह से मुझे ठीक से दिख नही रहा था।

अब वो कमीना डॉक्टर मुझे सामने से देखे जा रहा था. अब मेरा भी लंड खड़ा हो गया था तो मैंने भी उसके सामने अपने लंड को एड्जस्ट किया, तो वो भी मुस्कुरा दिया. फिर मैंने कहा कि कितना टाइम लग रहा है, तो वो बोला कि बस दो मिनिट, और हंस दिया. अब उसका हाथ और नीचे तक चला गया था, कपड़े के अंदर जो उसने बदन को ढकने लिए डाला था.

तभी कुसुम ने 2-3 सिसकारी और भरी और उसका हाथ पकड़ लिया . डॉक्टर ये क्या कर रहे है? तो उसने कहा कि आपको तकलीफ़ जो हो रही है तो कोई बात नहीं. फिर कुसुम ने कहा कि आप रहने दीजिए, आहह

अब तो वो समझ चुका था. उसका भांडा फूटने वाला है तो उसने कुसुम को वापस साड़ी पेटीकोट पहनने को बोला और कंप्यूटर में रिपोर्ट बनाने लगा।

मैं कुसुम के चेहरे को देखकर समझ गया उसके साथ कमीने बुड्ढे डॉक्टर ने अश्लील हरकत की है, पर मै मौन रहकर नज़रांदाज कर गया।

हम रिपोर्ट लेकर वापस dr जुबेदा कादरी के पास आ गये। सारी रिपोर्ट देखने के बाद डॉ कादरी. कुसुम से बोली बांकी सब नॉर्मल है लेकिन एक good news है और एक bad news है। Good news is कुसुम तुम pregnet हो। और bad news है की आप दोनों ने unsafe और wild तरीके से संभोग किया है जिससे योनी के internal part में बहुत ही गहन इन्फेक्शन है, केवल खाने वाले एंटीबायोटिक्स से काम नहीं चलेगा, इंजेक्शन लगेंगे सुबह शाम तीन दिन, तब आराम आएगा। आप दोनों को फिल्हाल परहेज करना है।

मै परहेज शब्द का मतलब ठीक से नही समझ पाया..... और उत्सुक होकर बोला... मैडम किस चीज का परहेज...???

डॉक्टर कादरी मेरी तरफ देखकर हस कर बोली संभोग नही करना है महाशय..!

मेरी बीवी कुसुम को इंजेक्शन के नाम से ही डर लगता है, वो घबरा गई।

डॉक्टर कादरी- घबराओ नहीं ! कुछ नहीं होगा, तुम एक काम करो आज एक और एक शाम वाला इंजेक्शन लगवा लो। जिससे infection जल्दी recover हो जायेगा,और मैं कुछ और मेडिसिन लिख देती हूँ वो खाती रहना।

बाहर कंपोंडर है उससे एक इंजेक्शन अभी लगवा लेना और अपना adress उसको बता देना तो वो शाम को घर पर लगा देगा।

मै और कुसुम अभी अभी सोनोग्राफि वाले डॉक्टर के साथ हुए सदमे से बाहर नही निकले थे।

तो मैने dr जुबेदा से कहा आप इंजेक्शन की टेशन मत लो मेरा एक दोस्त है जो कंपोंडर है उससे लगवा लूँगा।

कुसुम ने भी कहा ये ठीक रहेगा।

डॉक्टर जुबेदा कादरी कुसुम से बोली चल कुसुम मै भी निकल रही हूँ, हम इतने दिनों बाद मिले कम से कम एक काफी तो साथ पी सकते है। कुसुम ने मेरी ओर देखा तो मैने भी मौन सहमती दे दी..... हम तीनो एक रेस्ट्रों में चले गए।

कुसुम और डॉ कादरी इधर उधर की बातें करने लगे थोड़ी देर बाद कुसुम ने डॉ कादरी से पूछा...... कादरी तूने शादी की..?

डॉ कादरी-- हा।

कुसुम -- गुड... कब... किससे.. मुझे कब मिलवा रही है...??

डॉ कादरी --- कुसुम तू जानती है उनको.

कुसुम -- ओह ऐसा क्या, कौन है वो खुश नसीब... क्या वो भी तेरी तरह डॉक्टर है..?

डॉ कादरी --- नही यार

कुसुम -- फिर कौन है भला जिसे मैं भी जानती हू।

डॉक्टर कादरी -- जाहिद

जाहिद का नाम सुनकर कुसुम के तो होश उड़ गये, उसका मुह खुला रह गया, आँखे डॉक्टर कादरी के चेहरे को घूर रही थी। आँखों में सवालों की बारिश नजर आ रही थी।

कुसुम का ये रूप देखकर मुझसे रहा नही गया और मै कुसुम को झकझोर कर बोला.... क्या हुआ मैडम तुम्हे डॉक्टर कादरी के पति जाहिद का नाम सुनकर झटका क्यो लग गया....???

आप अगर जाहिद के बारे सुनेंगे तो आपको भी झटका लगेगा... कुसुम मुझसे मुस्कुरा कर बोली....!

भला जाहिद मै ऐसी क्या खासियत जो मुझसे तुम इस तरह बोल रही हो... क्या तुम उसे जानती हो...??? मै भी कुसुम की तरफ मुस्कुरा कर बोला।

मुझे और कुसुम को आपस में बहस करते हुए देख डॉक्टर कादरी बीच में बोली.... अरे तुम दोनों बहस करना बंद करो मै बताती हूँ जाहिद के बारे में....?

डॉक्टर कादरी --- जाहिद मेरे कजिन भाई थे... कजिन भाई है... मतलब अभी भी कजिन भाई थे... ओह्ह ओ बड़ा ही कंफ्यूजन..... हाहा हाहा हाहा

मै बोला मैडम आप कहना क्या चाहती हो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है... कजिन भाई थे......, है..... ठीक से बताओ।

डॉक्टर जुबेदा कादरी एक लंबी सांस लेते हुए जाहिद भाई मेरे चाचा के लड़के है, रिश्ते में मेरे कजिन भाई थे, अभी भी भाई है लेकिन शौहर भी है।

ये सुनकर मेरी हँसी छूट पड़ी..... हाहा हाहा हाहा... मतलब जाहिद आपका भाई भी है और शौहर भी है...... हाहा हाहा

भाई को शौहर बनाने का ख्वाब दुनिया में बहुत सी लड़किया देखती है, भाई-बहन के बीच रोमांटिक रिश्ते होने की कल्पना करती है।

ईश्क, मोहब्बत, वफा हम लड़कियों ने संभाल कर रखी है, घर के हर शख्स को पुकारने में "जान" लगाते है, "जान" का मतलब जान से प्यारा होता है। जैसे भाई जान, अब्बा जान, अम्मी जान, और भी बहुत है।

बचपन मे जिस भाई से हमने सारे राज, सुख दुख, खुशी, तकलीफ, दर्द बांटे और जवानी आने पर उसको भूल कर किसी और को अपना जिस्म सौंप दे, दिल्लगी, मोहब्बत, निकाह करे और अपने भाई को जवानी की आग मे जलता छोड़ दे। ये तो सरासर नाइंसाफी है भाई बहन के रिश्ते की..... भाई के लिए एक बहन का भी फर्ज होता है

डॉक्टर जुबेदा कादरी मुझसे थोड़ा गंभीर होते हुए बोली अरुण जी मै आपसे एक बात पूछती हूँ....... आप तो प्रोफेसर है, स्टूडेंट को कॉलेज में पढ़ाते है, अच्छा खासा कमाते भी है फिर भी आपकी शादी 35+ की उम्र में क्यो हुयी....?? आप ही क्यो आप जैसे आपके मजहब के बहुत सारे घरों में 35-40, 45 साल के लड़के कुवारे बैठे हुए हैं, जबकि उनकी छोटी, बड़ी बहनो की शादियां हो चुकी हैं और तो और उनके बहनो के बच्चे भी शादी लायक हो गये है।

क्या उन बहनो का फर्ज नही बनता था कि हमारे भाईयो की शादी नही हो रही हैं तो हम भी शादी ना करे और अगर हो सके तो अपने भाई से शादी कर के एक दूसरे को जिस्मानी, मानसिक, पारिवारिक खुशी दे। लेकिन आप की बहने ऐसा नहीं करती है..... गैर मर्दो के साथ जिस्मानी तालुक बनाती है, निकाह कर परिवार बढाती हैं लेकिन अपने भाईयो की परवाह नही करती है।

(डॉक्टर जुबेदा कादरी के सवाल कड़वे जरूर थे लेकिन वो सच कह रही थी... क्योकि ये आज के समय का हमारी समाज का कड़वा सच है लड़को की उमर 40-45 तक होती जा रही है लेकिन शादी नही हो रही है जबकि, वहा कजिन भाई बहन आपस मे शादी कर खुशी खुशी जीवन व्यतीत कर रहे हैं।)

शायद जुबेदा कादरी सच बोल रही हैं

डॉक्टर जुबेदा कदारी भाई बहन के बीच शादी के फायदे गिनाने लगी जो वाकई बहुत गौरतलब थे:

मैने करीबी रिश्तेदारी में शादी इसलिए जाइज़ ठहराई है क्योंकि हमारे मे चचेरी, ममेरी और फुफेरी बहन को "सगी बहन" माना ही नहीं जाता है और इस विषय पर सारी बहस ही चाचा, मामा, और फूफा के बेटे बेटियों को सगे भाई बहन मानने और ना मानने पर है। जो लोग चाचा- मामा के बच्चों को सगे भाई बहन मानते हैं वही लोग इस तरह की शादी पर सवाल उठाते हैं और भद्दी टिप्पणियां करते हैं यहां तक कि ये लोग अपनी मान्यता दूसरों पर थोपने की पूरी कोशिश करते हैं । और यही समस्या की जड़ है जहाँ एक वर्ग द्वारा दूसरे वर्ग पर अपनी मान्यता थोपी जाती है और न मानने वाले को अपराधी समझा जाता है ।

दूसरा फायदा यह है कि जिसे हम बचपन से जानते है उसी के साथ शादी होती है जिससे उसकी आदतें और स्वभाव का बेहतर अंदाजा रहता है।

तीसरा फायदा यह है कि यदि कोई समस्या होती है तो परिवार के सदस्य आपके काम आते हैं और आपके हर सुख दुख में भागीदार होते हैं। इसी का नतीजा देखने को मिलता है कि रिश्तों में आपसी जुड़ाव और तालमेल पहले से बेहतर हो जाता है।

इसके अलावा भी भाई बहन के शादी करने के सामाजिक,आर्थिक और मनोवैज्ञानिक फायदे हैं।

डॉक्टर जुबेदा कादरी की बातें मै और कुसुम मूकदर्शक बनकर सुन रहे थे.......

उन्होंने टेबल पर से पानी का ग्लास उठा कर एक सांस में पूरा पीने के बाद बोली.....

हा कुसुम तू तो मेरी खास सहेली है तुम मुझे बताओ क्या जाहिद भाई के साथ शादी कर के मैने कोई गलती की है....????

कुसुम डॉक्टर जुबेदा कदारी का हाथ थामते हुए बोली मुझे नही लगता इसमें कुछ गलत है। मैं एक महिला हूं। मुझे लगता है कि लड़कियों के परिवार में भाई बहनो का शादी करने का मुख्य कारण सुरक्षा है। इसलिए अगर उनकी शादी अजनबी परिवारों से होती है तो उन्हें कभी पता नहीं चलता कि उनकी बेटियों के साथ अच्छा व्यवहार किया जाता है या नहीं। कजिन भाई से शादी करने पर कम से कम आप जानते हैं कि आपकी बेटी किस हाल में जी रही है।

डॉक्टर जुबेदा कदारी मुझसे बोली हाँ प्रोफेसर अरुण महाशय आपकी क्या राय है.....?????

मै---- मुझे भी नही लगता इसमें कुछ गलत है। जन्म के बाद माता पिता ही बच्चे को बताते हैं कि ये तुम्हारा भाई है,बहन है, काका,मौसी,नानी,दादा हैं। किनसे क्या व्यवहार होना चाहिए, रिश्ते की क्या सीमा होनी चाहिए ये भी हम माता-पिता और समाज से ही सीखते हैं।

मुझे बचपन से बताया गया कि चाचा,मामा, मौसी,बुआ की बेटियाँ मेरी बहन है और उनसे राखी बंधवाई तो मैं उनको अपनी बहन ही मानता हूँ । जब मेरी पहली जॉब लगी तो ट्रेनिंग में कुछ तमिलनाडु के कुछ लोग मिले उन्होंने बताया कि वो लोग अपनी बुआ की लड़की से शादी कर सकते हैं , मेरा तो दिमाग ही घूम गया क्योंकि मैं तो ऐसा सोच भी नही सकता था ।

फिर धीरे धीरे समझ बढ़ी तब पता चला कि वो लोग बुआ की बेटी को बहन मानते ही नही इसलिए उनके लिए अजीब नही है।

संस्कृति की बात है, हमारी मातृभाषा निमाड़ी में अपनी माँ को "तू" बोला जाता है जो कि बाकी लोगों को असभ्य लग सकता है।

आखिर हम दोनों के मत सुनने के बाद डॉक्टर जुबेदा कादरी ने राहत की सांस ली.... और उनके चेहरे पर जंग जीतने वाली खुशी थी।

तभी मेरा फोन बज उठा और मै बात करने के लिए कुर्सी से उठ कर बाहर आ गया। कुसुम और डॉक्टर जुबेदा कादरी आपस में खुसुर फुसुर बातें कर रहे थे।

कुसुम डॉक्टर जुबेदा कादरी से पूछ रही थी कि कादरी की बच्ची आखिर तूने जाहिद भाई में ऐसा क्या देखा कि निकाह के लिए राजी हो गयी....??

डॉक्टर जुबेदा कादरी ---- ये कोई खास कहानी है लेकिन मै तुझे शॉर्ट में बताती हूँ। हमारा निकाह तो अभी कुछ साल पहले हुआ है, बाकी सब कुछ (समागम भी) पहले ही हो गया था मेरी उम्र .......... साल की थी, तब एक दिन रात को जाहिद ट्यूशन क्लास से बाइक पर मुझे वापिस ला रहा था, अचानक बाइक फिसली और हम दोनों सुनसान सी सड़क पर गिरे । उसे खास चोट नहीं लगी लेकिन मै ज़ोर से गिरी थी, इसलिए दर्द से कराहती हुई रोने लगी । मै तो उठ भी नहीं पा रही थी । जैसे तैसे मुझे बाहों में उठा कर हम दोनों रोड के किनारे पर पेड़ के नीचे बैठ गए । मैं बोली ।"मुझे मेरे कपड़े उतार कर देखना है, मुझे कितनी चोटें आई हैं ।"

जाहिद भाई मुंह फेर कर खड़ा हो गया । मै कपड़े उतार कर खुदका जिस्म देखने लगी । मेरी जांघों पर खरोंच थी । मै रोने लगी । वो घबरा कर मुझे शांत कराने लगा । मुझे उस पर प्यार आने लगा।

मैने अचानक उससे कहा भाई " मुझे अभी प्यार करना है तेरे साथ।" उसे बहुत ताज्जुब हुआ मुझे घूरने लगा । मै उसके कपड़े उतारने लगी । उसका गोरा भरा हुआ खूबसूरत कुंवारा जिस्म देख कर मुझे प्यार आ गया । हम दोनों ने बहुत देर तक प्यार समागम किया, मैं दर्द से कराहती हुई प्यार से उसका पहला जिस्मानी रिश्ते का अनुभव करती हुई , पूरे उत्साह से समागम करवाती रही, हम दोनों बार बार झड चुके थे । कपड़े पहने और बाइक पर सवार होकर वापिस घर आ गए । हमारे दोनों के बीच जिस्मानी हवस पूरी करने का रिश्ता बन गया था जो की कई बरसों तक चलता रहा । कुछ साल पहले हमने निकाह कर लिया।

कुसुम डॉक्टर जुबेदा कादरी सुनकर हँस पड़ी हाहा हाहा हाहा और हस्ती हुयी बोली

जुबेदा तू जाहिद को भाई बोलती है या शौहर.....??

जुबेदा हस्ती हुई बोली शुरु शुरु में हमेशा भाई जान ही निकलता था, लेकिन अम्मी और चाची ने टोक टोक कर (ये लड़की तो बेड़ा गर्क करके मानेगी शौहर को भाई बोलती हैं,कब अकल आयेगी) शौहर बोलना सिखला दिया.... लेकिन उस समय लगता बहुत फन्नी था... जब भी कोई काम होता तो मुह से जाहिद भाई पहले निकलता और वो भी सुनकर हँस पड़ते... हाहा हाहा हाहा हाहा

मै फोन पर बात करके वापस आ गया, फिर हम रेस्ट्रो से निकलकर जुबेदा को अलविदा कह के अपने दोस्त कंपोंडर के पास दवाई लेकर चले गए।

मैने दोस्त को पूरी बात बताई तो वो बोला भाभीजी आप किसी नर्स से लगवा लो।

कुसुम बोली- नहीं, मैं तुम्हारे अलावा किसी से नहीं लगवाऊँगी।

मैंने भी कहा तो वो मान गया।

अगले पल वो इंजेक्शन भर के आ गया, उसके आते ही मेरी पत्नी कुसुम घबरा गई।

तो दोस्त ने उसे प्यार से दुलारते हुए कहा- प्यारी भाभी जी, डरते नहीं ! मैं हूँ ना ! कुछ नहीं होगा, अब चुपचाप उल्टी लेट जाओ।

कुसुम डरते डरते लेट गई,

अब मेरा कंपोंडर दोस्त बिल्कुल प्रोफेशनल अंदाज में आ गया था, उसने मेरी बीवी की साड़ी कमर से हटा दी फिर बोला- नाड़ा ढीला करके पेटीकोट नीची करो, यह कूल्हे पर ही लगेगा।

कुसुम थोड़ी सी पेटीकोट नीचे खिसका दी।

वो बोला- मैडम, इतने से काम नहीं चलेगा, यह टीका मोटी मांसल जगह पर ही लगता है।

पर कुसुम ने यह बात अनसुनी कर दी।

दोस्त बोला- ओफ़ हो ! अब कंपोंडर से क्या शर्माना?

मैंने भी कहा पर कुसुम संकोच में थी तो उसने पेटीकोट थोड़ी सी और सरका ली।

मेरा दोस्त झुंझला कर बोला- यार तुम करो ! यह तो नहीं मान रही है।

मुझे लिखते हुए शर्म आ रही है कि मेरी अंदर की वासना की आग सुलगने लगी और मैंने कुसुम का पेटीकोट का नाड़ा पकड़े हुए उसके दोनों नितम्बो के नीचे कर दिया, फिर उसके नितंब या कूल्हे पूरे नंगे हो गये थे।

वो कसमसाई, दोस्त भी बोला- यार, इतने की जरूरत नहीं है !

क्योंकि कूल्हे पूरे नंगे हो गये थे।

मैंने कहा- यार जल्दी लगा दो ! मैं तो चाहता हूँ कि मेरी जान को तकलीफ ना हो !

उसने बहुत सफाई से इंजेक्शन लगाया तब भी वो जोर से चिल्लाई। फिर स्प्रिट का फाहा लगा कर मसलने लगा इससे कुसुम हिलते हुए नग्न कूल्हे बहुत उत्तेजक लग रहे थे।

इस तरह इंजेक्शन लग गया, मेरी बीवी की भी शर्म भी कम हो गयी और मैं दोस्त की मौजूदगी में बीवी को अर्धनग्न अवस्था में देख रोमांचित होता रहा।

मै और कुसुम इंजेक्शन लगने के थोड़ी देर बाद अपने घर की ओर चल दिये। और जाते समय अपने दोस्त को बोला आज शाम को घर आ कर अपनी भाभीजी के इंजेक्शन लगाने आ जाना।

जारी है.....
 
बहुत बहुत शुक्रिया आपका......... आपने कुसुम के केरेक्टर में इतनी बारीकी से विश्लेषण किया, पर कहीं ना कही आप कुछ भूल रहे हैं, हो सकता है वो आपके नजरिये से गलत/सही हो।

कुसुम एक जिद्दी, गुस्से वाली लड़की है जो ठान लेती है वो ही करती हैं, कॉलेज के दिनो मे जो मुठ मरवाने का वाक्या आपने ठीक से नही पढ़ा शायद क्योकि वो वाक्या वासना से भरा नही था, बल्कि वो गुस्से से भरा हुआ बदले की भावना से किया गया कांड था, होली में उसके नाजुग अंगो पर मजाक में रंग डाला गया था, जिससे वो गुस्से में आकर लड़के को भी नंगा कर सबक सिखाना चाहती थी।

"घटना का होना और घटना को लिखना दोनो ही घटनाक्रम में बहुत फर्क हो जाता है।"

अरुण को आप अपने नजरिये से कक्कोल्ड से ग्रसित समझ रहे हैं जबकि कक्कोल्ड जैसा कुछ हो ही नही रहा है। अरुण खुद थोड़े ही कुसुम को अन्य मर्दो के सामने परोस रहा है, वो तो अपनी बीमार पत्नी का इलाज कराने आया है।

सोनोग्रफी वाले डॉ और कंपोंडर ने जो कुसुम के बदन के साथ छेडछाड की वो अम्यूमन हर महिला/लड़की के साथ होती है, ।

मैने उसका विवरण अपने नजरिये से लिखा है, देखने, पढ़ने में और लिखने में जमीं आसमा का अंतर हो जाता है, कहानी में कामुकता लाने के लिए लेखन में तीनो पात्रों (अरुण,कुसुम, अन्य मर्द) की मनोदशा का वर्णन किया है।

जब एक मर्द किसी औरत के बदन को अपने प्रोफ़ेसन की आड़ में seduce करता है, तो सामने खड़ा देखने वाला कैसा फील करता है। ऐसा सभी के साथ होता हैं, ये दृश्य देखकर सभी उत्तेजित होते है। पर हालातो के हिसाब से चुप्पी साध लेते है।

भड़कते वो ही जिन्हे अपनी मर्दांगी पर शक होता है, उन्हे लगता हैं कि गैर मर्द के छूने से उनकी बीवी उन्हे छोड़कर गैर मर्द से चुदवा लेगी। वो अपनी मर्दंगी को दिखाने के लिए झगडा फसाद करने लगते है।

I hope आप के जबाब मिल गये है।

इसी तरह अपने reviw से कहानी की कमिया/खामिया बताते रहिये।

Thanks brother.
 
बहुत बहुत शुक्रिया आपका......... आपने कुसुम के केरेक्टर में इतनी बारीकी से विश्लेषण किया,

(सिर्फ आपके तर्क है बस, कोई शरीफ लड़की कैसे गुस्से में ही सही सबके सामने किसी का लन्ड मसल सकती है।)

कहानी के शब्दों को ध्यान से पढ़ा होता है तो दोबारा सवाल ना करती आप.... लेकिन कर ही दिये है तो आपको दोबारा समझाए देता हूँ।

मैने पहले ही बताया है कि घटना होना और उस घटना को लिखने में पूरा घटनाक्रम ही बदल जाता है, सबसे बड़ा जबाब है ये कि ये होली की घटना अरुण ने डॉ जुबेदा के मुह से कुसुम के बारे में सुनी है, वो भी शॉर्ट में और डॉ जुबेदा ने सिर्फ कुसुम के हाथों से लड़के का लंड मसलने वाली बात पर उसे चिढ़ाने/ मजाक के तौर उपहास उड़ाने के लिए ज्यादा जोर देकर कही है।

जिसको वो अपने शब्दों में काल्पनिक तौर पर लिख ✍️ रहा है होली में सभी लड़की लड़के भांग वगेरा के नशे में भी हो सकते है।😂😂 नशा और गुस्सा दोनों ही इंसान को अंधा कर देता है उसे कुछ दिखाई नही देता है शायद ऐसा कुसुम के साथ हुआ होगा।

(सोनोग्राफी में महिला के पार्ट्स के साथ छेड़खानी आपसे ही सुनी है,)😂

महिला/लड़की को छेड़ने की भी एक कला होती है...😂😂😂. रेखा जी...😂😂. डॉक्टर के पेशे में सबसे आसान है, जिसके साथ होता हैं वो ही जानता है, ये इतनी बड़ी बात भी नही होती कि तमाशा बनाया जाये उसकी वजह ये भी जिसके साथ हो रहा है उसकी तो बीमारी के कारण पहले से ही फटी पड़ी है।😂😂😂

मै आपको इसका प्रत्यक्ष उदाहरण देता हूँ जिसकी आप कल्पना भी नही कर सकती है।

इंजेक्शन/ ड्रिप लगाने के समय लड़की/महिला मेज/बेड पर लेटी होती है उसका हाथ जो बेड/मेज से बाहर की ओर लटका रहता है और इंजेक्शन/ ड्रिप लगाने वाला उसी लटके हुए हाथ की हथेली/उंगलियों पर अपना लंड रगड़ कर मजे लेते रहता है।😂😂😂

( सबके सामने ननगे होकर पेंटिंग बनवाना क्या था, उसको और अछे से समझा देना)

दो हजार रुपए की शर्त, जिद इंसान से बहुत कुछ करवा सकती है, क्लास में लड़किया ही थी।

I hope आप के जबाब मिल गये है।

इसी तरह अपने reviw से कहानी की कमिया/खामिया बताते रहिये।

धन्यवाद. 🙏🙏

और ज्यादा जानकारी के लिए आप डॉ जुबेदा कादरी और कुसुम देवी से टोल फ्री नंबर पर संपर्क करे। हाहा हाहा हाहा😂😂😂😂😂😂
 
मै आपको जबाब देने से पहले एक बार फिर से कुसुम और अरुण के बारे में बताता हू जिसे आपने शायद ठीक से नही पढ़ा।

"

मैं आपको खुल कर अपनी बीवी कुसुम के बारे में बताता हूँ,

हमारी शादी के बाद से पिछले तीन महीनों में मेरी बीवी के साथ बिताया हुआ हर पल और जितना मैने उसे समझा है कम से कम मैं लिख तो सकता हूँ।

मेरी कुसुम का गुस्सा तेज है, उसके साथ कुछ किसी ने किया तो उसका तुरंत बदला जरूर निकलती है।

वो बहुत ही स्पष्टवादी भी है, मुझसे कुछ भी बात छुपाती नहीं है, अभी भी यौनपूर्व क्रीड़ा के दौरान उसे योनि की चुसाई सबसे ज्यादा पसंद है। सम्भोग में चरम की स्थिति कभी कभी बेधड़क गालियाँ बकती है, वो भी एकदम गन्दी-गन्दी !

कुसुम बहुत ही ज्यादा बिंदास और दिलफ़ेंक किस्म की है और मैं उसके पराये मर्दों के साथ खुले और उन्मुक्त व्यवहार को देखकर उत्तेजित हो जाता हूँ !

""""यह मेरी कमजोरी है और यह बात वो भी अच्छी तरह से समझ गई है।"""""

आखिर लाइन पर गौर फरमाइये।

अगर ये आपको cuckold लगता है, तो है...... !
 
Back
Top