Incest कर्ज और फर्ज - एक कश्मकश - Page 6 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest कर्ज और फर्ज - एक कश्मकश

हर बार की तरह इस बार भी निष्पक्ष विश्लेषण करने के लिए आपका धन्यवाद, आभार

लेखक के लिए पाठक/पढ़ने वाले अनमोल हीरे मोती की तरह होते है, सभी के अपने अपने मत होते है, उनके मतों को पढ़कर लेखक को जो खुशी मिलती है उसे शब्दों में बया नही किया जा सकता है।

इस update में पाठकों ने मुझे कहानी के मुख्य पात्र का cuckold / व्यभिचारी चरित्र प्रदर्शित होने पर सोचने को विवश किया है, शायद cuckold / व्यभिचारी की ठीक परिभाषा मुझे नही पता, लेकिन हो सकता आप सभी सही है।

आपने डॉ जुबेदा कादरी की बातों पर जो अपना मत दिया है वो अपनी जगह सही है, सभी के अपने अपने मत होते है, लेकिन जुबेदा जी सिर्फ आज के समय में हमारी समाज में लड़को की उम्र 35,40,45,50 तक होती जा रही है लेकिन उनकी शादियां नही हो रही है। उस समस्या को देखते हुए अपनी राय दे रही थी,

फिर भी उसके लिए आपका बहुत बहुत आभार।

आखिर में यही कहना चाहता हूं कि ये incest story है adultry मसाला सिर्फ मनोरंजन के लिए है।

धन्यवाद, आभार, शुक्रिया
 
अध्याय --- 11 ----

----------------- शराब या श्राप -----------------

मै और कुसुम इंजेक्शन लगने के थोड़ी देर बाद अपने घर की ओर चल दिये। और जाते समय अपने दोस्त को बोला आज शाम को घर आ कर अपनी भाभीजी के इंजेक्शन लगाने आ जाना।

शाम के चार बज गये थे।

मैंने घर आते ही अपनी बीवी कुसुम को बेड पर लेटाने के बाद बाथरूम में जाकर फ्रेश होकर वापस हाल में आकर अपनी मम्मी पापा को कुसुम की प्रेग्नेसी की बात बताई जिसे सुनकर वो दोनों बड़े खुश हुए और फिर मैने कुसुम की माहवारी के pad से infection से बने चकते और vigina infection भी बता दिया ।

मेरी मम्मी बोली कोई प्रॉब्लम नही है ये अक्सर हो जाता है इंजेक्शन और दवाई से ठीक हो जायेगा।

मुझे रिंकी दिख नही रही थी तो मैने मम्मी से पूछा तो वो बोली अपनी फ्रेंड के साथ गयी है अभी आती होगी।

मेरी मम्मी कुसुम के पास बेडरूम में जाकर उससे बातें करने लगी और मै भी घर से बाहर मूड फ्रेश करने अपने दोस्त की दुकान पर चला गया।

मैने आज फिर जूली को चार पांच बार फोन लगाया पर उसका फोन busy. ही आता रहा। मै समझ गया जूली अपने होने वाले पति के साथ फोन पर लगी हुई है और अब इसकी मुझे मिलना मुश्किल है। जूली को मेरा लंड दर्शन करवा कर मैने गलती कर दी। उसे शायद मेरा लंड पसंद नही आया।

खैर जो हुआ सो हुआ।

रात के आठ बजने वाले थे, कुसुम की योनि के infection. And pregency के कारण अब मेरा संभोग होना मुश्किल था और dr. जुबेदा ने मुझे अब कंट्रोल करने के लिए advise दी थी। जिससे मैने अपने दोस्त के साथ दो पेग लगा लिए।

तभी मेरे फोन पर रिंग बजी मैने देखा तो मेरी बेटी रिंकी का फोन था। मैने मन में सोचा

"अब इसकी सेज्वानी में क्या परेशानी है। ""

मै फोन उठाया तो रिंकी प्यार से बोली कहाँ है आप, मैने कहा क्यो क्या हुआ??

रिंकी--- घर पर आ जाइये मैने आपके लिए खाना बनाया है वो आपकी पसंद का।

मै--- बस पांच मिनिट में आता हू।

मुझे रिंकी की style बेटी की जगह पत्नी जैसी लग रही थी।

मै ठीक पांच मिनिट में घर पहुँच गया सब लोग dining tabale पर मेरा ही इंतजार कर रहे थे,

"अरे वाह, क्या बात है, आज तो आप बिल्कुल सही टाइम पर घर आये हो, हम बुलाते है तो कभी नही आते , आज रिंकी ने बुलाया तो झट से दौड़े चले आये हम्म्म्म" कुसुम ने मेरी ओर देखकर कहा

"वो....मैं.....वो" मै कुसुम की बात से थोड़ा घबरा गया

" अरे मम्मी, मैं पापा की सबसे प्यारी बेटी हूँ, इसीलिए तो एक बार बोलने पर भी टाइम पर आ गए" रिंकी ने मेरे बोलने से पहले ही जवाब दे दिया

"हां, ये तो है, आप सबसे ज्यादा रिंकी को ही प्यार करते है" कुसुम ने कहा

कुसुम की बात सुनकर रिंकी को बड़ा अच्छा लगा पर मेरे तो गले का निवाला वहीं का वहीं रह गया,अब वो क्या बोलता, कि अपनी इस सबसे प्यारी बेटी की आज सुबह ही उसके चूत की आकृति मेरे लंड ने महसूस की थी।

हमारी बातचीत का सिलसिला जारी था, तभी मेरी मम्मी मुझसे बोली अरुण बेटा अब तुझे अपनी पत्नी कुसुम की care बड़ी ही जिम्मेदारी और संयम के साथ करनी है, कुसुम को जरा सा भी परेशान नही करना है, और उसको खुश रखना है।

" मै मम्मी का इशारा समझ रहा था वो भी सयम शब्द का मतलब सभोग् से था जो मुझे वो indirectly नही करने को बोल रही थी ""

फिर वो कुसुम से बोली--

कुसुम अब तुम आगणबादी की नौकरी से छुट्टी ले लो, और ज्यादा से ज्यादा आराम करो बेटी।

वैसे तो हमारे यहाँ बर्तन , कपड़े, और साफ सफाई के लिए बाई आती ही है, रही बात खाना बनाने की तो सुबह का खाना मै बना दूँगी और शाम का मेरी प्यारी रिंकी बिटिया बना देगी जैसे आज बनाया है।

फिर वो रिंकी से बोली--

रिंकी अब से तुम भी अब अपनी मम्मी की जगह अपने पापा के खाने पीने, उनकी जरूरतों का ख्याल रखना शुरु कर दो, क्योकि अब तुम छोटी नही हो, पापा को सुबह नास्ते में क्या चाहिए और रात को खाने में क्या चाहिये ये तुम अभी उनसे पूछ लो। तुम्हारे पापा ड्यूटी से थके हारे आयेंगे और उनकी जरूरत की चीज नही मिलेगी तो चिड़चिड़े हो जायेंगे, इससे तो बेस्ट ये है कि तुम अपने पापा को भी खुश रख सकती हो।

""रिंकी बिटिया अब तुझे अपने पापा की एक अच्छी बेटी होने का फर्ज निभाना है""

तभी मेरे पापा मम्मी की चुटकी लेते हुए बोले मुझे क्या करना है मैडम""

सब हँसने लगे। हाहाहा हाहाहा हाहाहा

तभी रिंकी बोली

'पनीर कोफ़्ता खाया आपने?' रिंकी ने बड़े प्यार से मुझ से पूछा ।

'नहीं खाया तो नहीं है.' मैने कहा.

'मैंने आपके लिए बनाया था पापा बट अब तक तो सब ठंडा हो चुका होगा.' रिंकी ने खेद प्रकट किया.

'कोई बात नहीं. मेरा पेट भर गया है वैसे भी अब पेट में जगह नहीं है...’ मै बोला।

'क्यूँ नहीं है?' रिंकी ने फिर सवाल किया. अभी-अभी दादी के समझाने के कारण वह मुझे थोड़ा ज्यादा ही प्यार दिखा रही थी.

'मैने पूछा 'क्या तुमने खाया पनीर कोफ़्ता?'

'नहीं पापा मेरा भी पेट भर गया है.' रिंकी ने मेरा ही जवाब देते हुए कहा.

'क्यूँ?' मैने भी सवाल कर दिया.

'आपके care करने की ख़ुशी से ही पेट भर गया.' उसने शरारत से कहा.

'हम्म तो ये बात है...' मैने उसके गाल पर अपना दूसरा हाथ रख उसका चेहरा अपनी तरफ मोड़ कर कहा.

'हाँ पापा आई एम सो हैप्पी.' रिंकी ने गहरी साँस भर के कहा था.

रिंकी स्ट्रॉबेरी-फ्लेवर की लिप-ग्लॉस (एक तरह की लिपस्टिक) लगा रखी थी और हमारे चेहरे इतने करीब थे की मुझे उसके होठों की खुशबू आ रही थी जिसपर मेरे लंड ने एक अंगड़ाई ली थी.

मेरे मम्मी पापा, कुसुम सभी लोगो का खाना हो चुका था, और सब उठ कर हाथ धो कर अपने कमरे में जाने लगे,

रिंकी खाना खाने के बाद बर्तन सब किचिन में रख देना, और कमरे में आने से पहले अपने पापा को दूध पिला देना। रिंकी की दादी रूम में घुसने से पहले बोली।

रिंकी मेरी तरफ देखते हुए बड़ी सेक्सी smile देती हुई बोली जी दादी।

तभी कुसुम बीच में बोल पड़ी मुझसे अरुण सुनो ना अपने दोस्त को फोन लगाकर पूछो कि कितनी देर से आयेगा इंजेक्शन लगाने, मुझे तो अब नींद आ रही है।

मै बोला ठीक है।

और वो बेडरूम में चली गई।

मुझे शराब के दो पेग का नशा चढ़ रहा था और मै तो बस बातें करते हुए एंजॉय करने के मूड में था।

अब खाने की टेबल पर मै और रिंकी थे।

'पापा?' रिंकी एक बार फिर सवाल करने से पहले बोली.

'ह्म्म्म...' मै उसके हिलते हुए गुलाबी होंठ देख मंत्रमुग्ध होकर बोला.

'आपको नींद नहीं आ रही?' उसने पूछा.

'तुम्हें आ रही लगती है...है ना?' मै रिंकी के सवाल का आशय समझ गया था।

'हाँ...आपको कैसे पता?' रिंकी ने मानते हुए कहा.

'बस पता है...तुम्हारी जो बात है...' मै वापस अपनी फॉर्म में आ चुका था.

'हाहा...दो दिन से अच्छे से नींद ही नहीं आई पापा...' रिंकी बोली.

'क्यूँ?' मैने फिर पूछा.

'आपको पता तो है...' रिंकी ने मेरी तरफ भोली सी निगाहों से देख कर कहा.

'मुझे कैसे पता होगा?' मैने अज्ञानता जाहिर की.

'आपसे लड़ाई कर ली थी इसलिए ना...' रिंकी ने नज़र झुका अपना अपराध-बोध जाहिर किया.

मैने भी उसे और नहीं सताया और कहा, 'चलो फिर खाना खा लिया हैं. अब आराम से सो जाना'

रिंकी बोली, 'ओके पापा' और किचिन की तरफ चल दी.

किचिन में घुसने से पहले मुड़कर उसने देखा मै फोन पर दोस्त को इंजेक्शन के लिए call लगा रहा था.

'पापा! आप क्या कर रहे हो?' रिंकी ने बुरा सा मुहँ बनाते हुए कहा.

'अरे बेटी अभी तुम्हारी मम्मी के इंजेक्शन लगना है।

'पापा...यहाँ आ जाओ चुपचाप और मुझे बेटी मत बुलाया करो ना...' रिंकी ने चिढ़ते हुए कहा.

'ऐसे बुला रही हो या ऑर्डर दे रही हो?' मैने टस से मस न होते हुए कहा 'प्यार से बुलाओगी तो आऊँगा.'

'जाओ मैं नहीं बुलाती.' रिंकी ने भी नखरा दिखाया.

मैने कोई जवाब नहीं दिया और अपनी आँखें फेर ली. रिंकी कुछ पल मुझे देखती रही फिर नखरा छोड़ मुस्काते हुए कहा,

'पापा?'

'हाँ रिंकी?' मैने झट से आँखें उसकी तरफ करते हुए कहा.

'पापा मेरे प्यारे पापा यहाँ किचिन में मेरे पास आ जाओ ना?' रिंकी ने आँखे टिमटिमा कर कहा.

मै मुस्कुराते हुए उठ खड़ा हुआ और जा कर रिंकी के साथ किचिन में घुस गया. रिंकी की आँखें खुलीं थी और उसके चेहरे पर भी मुस्कान तैर रही थी, किचिन की उस मद्धम रौशनी में हम दोनों एक-दूसरे को निहारते हुए खड़े थे. मैने अपना हाथ थोड़ा आगे किया जिसपर रिंकी ने भी अपना हाथ आगे बढ़ा मेरा हाथ थाम लिया और मै हौले-हौले उसकी हथेली सहलाने लगा.

कुछ देर बाद कुसुम की आवाज आ गई, हम दोनों अभी भी हाथ पकड़े हुए थे.।

मै कुसुम की आवाज सुनकर रिंकी से दूध का बर्तन लेकर बेडरूम में कुसुम के पास चला गया। और रिंकी से बोला बेटी अब तुम भी सो जाओ।

रिंकी अपनी कमर मटका कर अपने रूम में चली गई।

'मैने ने समय देखा, रात के 10 बज रहे थे,

कुसुम ने पूछा क्या हुआ वो आ रहा है या नही, मेरे जांघो के चकते में जलन हो रही है दरअसल आज तेज ओमस् भरी गर्मी का मौसम था, मैंने सोचा आज दोस्त से इस बारे में पूछ लूँगा कि क्या लगाना है पर अभी तक वो आया ही नहीं, उसका फोन भी नहीं लग रहा था।

बीवी बोली- लगता है आज नहीं आएगा !

उसने नाइटी पहन ली और सोने की तैयारी कर ली।

तभी बेल बजी, बीवी बोली- ओह नो ! लगता है महाराज अब आये हैं !

और वाकई कंपाउंडर दोस्त ही था, आते ही बोला- सॉरी भाभी, आज एक मरीज में उलझ गया तो लेट हो गया।

फिर मेरी बीवी कुसुम को निहारते हुए बोला- वाह भाभी ! क्या लग रही हो, एकदम क़यामत ढा रही हो !

मेरी बीवी कुसुम चहकते हुए बोली- जनाब, हम तो ऐसे ही है, तुम बताओ कि पहले चाय पिओगे या सूई घुसाओगे?

" मेरी बीवी कुसुम मेरे दोस्त को हमारी शादी के समय से जानती है और मेरे दोस्त का हमारे घर में पहले से ही आना जाना है जिससे कुसुम उससे काफी फ्रैंक हो कर हँसी मजाक कर लेती है ""

वो बोला- नहीं, भाभी में अपनी चाय साथ लाया हू , आप तो बस दो ग्लास और कुछ प्याज नमकीन ले आओ। और मुझे इशारा करते हुए बोला अरुण आ जा यार।

मुझे और कुसुम को उसकी शराब की ड्रिंक का अंदाज हो चुका था,

मै कुसुम को बोला तुम बैठो मैं ले आता हू। और किचिन से दो ग्लास और प्याज नमकीन ले आया, आते हुए मैने हाल की लाइट बंद कर दी। मेरे पापा सो रहे थे, रिंकी अपनी दादी के साथ कमरे मे थी और उनके दरवाजे लगे थे, शायद वो भी सो गये थे।

मै और मेरा दोस्त एक लार्ज पेग पीकर इधर उधर की बातें करने लगे।

"" दोस्त के साथ शराब पीना वो भी अपने बेडरूम में अपनी बीवी के सामने पति की सबसे बड़ी गलती होती हैं ""

आज ये फ्री की दारू मुझे कितनी भारी पड़ने वाली है इसका मैने अभी तक कोई अंदाजा नही लगाया है।

तभी कुसुम एक शरारती smile देते हुए बोली अगर दारू पार्टी हो गयी हो तो अब जो करने आये हो वो शुरु करो, मै तैयार हू।

मुझे कुसुम की बात में डबल मीनिंग जैसी महसूस हुई।मेरा दोस्त ये सुनकर तुरंत बोला।

आप तो फटाफट लेट जाओ। मेरा इंजेक्शन तैयार है।

मै कुसुम से बोला

अब आ जाओ मैडम !

वो उठी- ठीक है, मैं चेंज करके आती हूँ, सूट पहन कर !

मै शाम को भी दो पेग पीकर आया था, और अभी फिर से पी ली थी जिससे मुझे नशा ज्यादा होना शुरु हो गया था।

मैने कहा- काहे का चेंज? लेट जाओ चुपचाप।

वो भागी पर दोस्त ने कुसुम का रास्ता रोक लिया, बोला- तुम्हें क्या परेशानी है?

फिर मेरी तरफ देख कर बोला- यार अरुण समझाओ ना इसे !

मैंने समझाया- यार, लगवा लो ! यह कंपाउंडर है, अपना दोस्त है।

वो मान गई।

उसकी नाइटी शोल्डरलेस और फ्रंट-ओपन थी, मैंने उसकी बेल्ट खोल दी और जब वो लेट गई तो उसकी नाइटी पूरी की पूरी ऊपर सरका दी। मेरी बीवी कुसुम के स्तन बहुत ज्यादा ही उभरे हुए और भारी हैं इसलिए वो रात को सोते समय ब्रा नहीं पहनती है जिससे उसके बड़े बड़े निप्पल नाइटी में साफ साफ नजर आ रहे थे। और संयोग यह कि पेंटी भी उस दिन माइक्रो पहन रखी थी जिसमें पीछे तो सिर्फ डोरी ही होती है।

अब दोस्त भी दंग रह गया, बोला- वाह, क्या लग रही हो !

और पास बैठ कर उसके कूल्हे पर हाथ फिराने लगा, बोला- दर्द तो नहीं होता?

वो बोली- बहुत होता है और वो जगह सख्त भी हो रही है !

उसने उस जगह को दबा दबा कर देखा, फिर मुझसे बोला- अरुण, इस जगह दिन में दो बार बर्फ की मालिश किया करो, सब ठीक हो जाएगा।

और कोई परेशानी हो तो बता दिया करो।

कुसुम हम दोनों के बीच में लगभग अर्ध नग्नावस्था में आराम से पसरी हुई थी शराब के सरूर में मेरी तो शर्म जाती रही और मेरे ऊपर उत्तेजना हावी होती गई।

मैं बोला- यार, एक परेशानी और है !

मैंने कहा- कुसुम, तुम्हारी वो चकत्ते वाली जगह दिखा दो इसे !

वो कुछ नहीं बोली, तकिये में मुँह छुपा लिया।

मैंने फिर पूछा, वो चुप रही।

दोस्त बोला- यार, क्या बात है? क्या छुपा रहे हो? याद रखना कि मै कंपाउंडर जरूर हू लेकिन डॉक्टर से कम नही हू और डॉक्टर से कोई बात नहीं छुपाते हैं।

मैं बोला- नहीं, वो असल में वो जगह ऐसी है न ! इसलिए इसे संकोच हो रहा होगा ! पर खैर कोई बात नहीं ! चल कुसुम सीधा हो कर लेट जा !

मैंने उससे कहा।

अब वो चित्त लेट गई, उसकी नाइटी लगभग हट चुकी थी उसने हाथों से अपने अध खुले वक्ष छुपा रखे थे, उसकी ऐसी नग्न अवस्था, रात का समय और शराब का नशा इस सबने माहौल को बहुत ही उत्तेजक बना दिया था।

मैं अब मूड में आ चुका था, मैंने उसके हाथ उसकी आधी नंगी छातियों से उठा कर ऊपर कर दिए।

मैं नशेड़ी और शराबी की तरह आवाज में बोला- यार, तू तो आज इसका पूरा ही चेकअप कर दे !

फिर कुसुम के अर्ध नग्न उभारों को मसलते हुए कहा- देख, ये ठीक हैं या नहीं ! इसमें बहुत दर्द की शिकायत करती है।

उसने कहा- अरुण तुम चुप रहो, भाभी खुद बोलेगी क्या प्रॉब्लम है।

फिर दोस्त ने कुसुम से पूछा- भाभी, आप बताओ और कोई प्रोब्लम तो नहीं है ना इन दोनों में?

और मैं दंग रह गया जब कुसुम पहली बार बोली- कभी-कभी सांस लेने में दिक्कत आती है और कभी-कभी चुचूकों के आस पास बहुत खुजली सी मचती है।

वो बोला- ओ के ! अपनी ब्रा दिखाओ और एक टेप ले कर आओ।

मैंने दोनों चीजे लाकर उसे दी, कुसुम की ब्रा 36 नंबर की थी।

फिर उसने उसे बैठने के लिए कहा, जब वो बैठ गई तो उसने टेप से उसके स्तन का नाप लिया और बोला- भाभी, एक तो ब्रा थोड़े बड़े नंबर की पहना करो, मेरे ख्याल से बिना ब्रा के सांस लेने में कोई परेशानी नहीं होगी। लाओ ये भी देख लेते हैं।

और फिर मुझ से बोला- अरुण, इसकी पीठ के नीचे तीन तकिये लगा दो।

मैंने सोचा जाने क्या करेगा पर मैंने लगा दिए।

मैने बीवी कुसुम को उस पर लिटा दिया और बाप रे ! इस मुद्रा में लेटने से उसके गदराये स्तन और ज्यादा उभर गए और तन गए, गर्दन नीचे की तरफ हो गई।

अब उसने उसके हाथ भी ऊपर कर दिए मेरी बीवी को शायद होश ना हो लेकिन वो इस समय निहायत ही उत्तेजक स्थिति में आ गई थी और जब उसने उसे जोर जोर से सांस लेने को कहा तो जैसे क़यामत आ गई हो, गहरी गहरी साँसों के साथ फूल कर ऊपर उठते और गिरते उसके वक्ष गज़ब ढा रहे थे।

हम दोनों आँखे फाड़े इस उत्तेजक दृश्य को निहार रहे थे। मेरे दोस्त ने दोनों कानों में आला हाथ में लेकर कुसुम के उभार पर रख लिए और बोला- कहीं कोई दिक्कत नहीं है, एकदम सामान्य सांस आ रही है।

अच्छे से छातियाँ चेक करने के बाद उसने कहा- कोई प्रोब्लम नहीं है !

फ़िर मुस्कुरा कर बोला- बस बड़े ज्यादा हैं !

हाहाहा हाहाहा

मुझ से बोला- इन्हें खूब मसला करो तो आराम मिलेगा ! अब और बताओ ?

हाहाहा हाहाहा

फिर चश्मा लगा कर उसके नाइटी में झलक मारते दोनों चुचूकों का पास से घूरते हुए देखकर बोला- यहाँ थोड़ी खुश्की है, रोज क्रीम लगाने से फायदा होगा।

इस हद तक आकर दोस्त का भी हौंसला खूब खुल गया, मेरी बीवी की शर्मो-हया पर भी धीरे धीरे गुस्से की गर्मी चढ़ने लगी थी और दोनों के बीच में मैं मूकदर्शक सा बन गया था।

पर दोस्तो, मैं सच कह रहा हूँ कि मैं इस माहौल को रोकने के बजाये उसे और बढ़ावा दे रहा था। अब आप लोग इसे मेरी मानसिक विकृति, शराब का नशा समझें या कुछ और !

क्योंकि मैंने उसी समय दोस्त को बोरोप्लस लाकर दे दी ।

मेरी इस घटिया हरकत को देखकर कुसुम की हँसी छूट गयी और वो उठ कर बैठ गयी,

हाहाहा हाहाहा हाहाहा

मेरे दोस्त से बोली सुनिये भैया अब अरुण को नशा बहुत हो गया और पागलो की तरह हरकत कर रहे है, उन्हे अब ये भी नही पता बोरो प्लस कब और कहा लगाई जाती है।

प्लीज अब सुई मत लगाओ।

रात भी बहुत हो गयी है, आप जाये और हम सुबह इंजेक्शन लगवा लेंगे।

कुसुम की बात सुनकर मेरा दोस्त भी हँसने लगा।

हाहाहा हाहाहा हाहाहा

मुझे कुसुम और दोस्त की हँसी की आवाज सुनकर मुझे शराब के नशे के साथ साथ उत्तेजना भी होने लगी।

यह शराब के नशे में उत्तेजना भरा रोमांचक नज़ारा तब रुका जब मेरे दोस्त ने कहा- चलो भाभी, अब बताओ कि आप के चकत्ते कहाँ हो रहे हैं?

सबसे बड़ी बात यह कि वास्तव में जांघों के बीच में हो गए चकत्तों से कुसुम काफी तकलीफ में थी और वो गुप्तांगों में है, उसे अस्पताल में जाकर बार बार दिखाने से अच्छा था घर में ही इलाज़ हो जाए तो ठीक रहे। और वो अपने दोनों स्तन की जांच करवा चुकी थी इससे उसे सुकून मिला था।

कुसुम बोली- हाँ, ये बताएँगे, मैं तो ठीक से देख भी नहीं सकती पर इन्हें आज दिखाई थी वो जगह ! बहुत तकलीफ है,।

और अब मैंने अपने दोस्त का ध्यान बीवी के जांघों के बीच किया और उसने दोनों पैरों को आहिस्ता-आहिस्ता चौड़ा करना शुरू किया। उसे पैर चौड़े करने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी इस लिए मैंने एक पैर थाम लिया जिससे उसने पैर काफी चौड़े कर दिए, उसकी योनि के दोनों तरफ छिलने से घाव बन गए थे।

मैंने उसके कहे अनुसार किया, मेरी बीवी ने भी बिना किसी संकोच के दोनों पैर चौड़े हो जाने दिए लेकिन अब वो निहायत ही सेक्सी, उत्तेजक, अश्लील, भद्दी और वासनामयी मुद्रा में उसकी छोटी सी पैंटी में दिख रही आधी अधूरी चूत खोल कर पड़ी हुई थी।

फिर पहली बार मुझसे पूछते हुए दोस्त बोला- इफ यू डोंट माइंड अगर पैंटी हटा दो तो ज्यादा अच्छे से जांच हो पाएगी।

माहौल गर्म हो चुका था, हम दोनों ही उत्तेजित अवस्था में थे, ऐसा लग रहा था जैसे बचपन में डॉक्टर डॉक्टर का खेल खेलते समय किसी भी बहाने से लड़कियों के कपड़े उतार दिया करते थे और यहाँ भी मात्र बस एक महीन सी चड्डी जो ज्यादा कुछ छुपा नहीं रही थी, बस व्यवधान कर रही थी।

मैं बोला- कुसुम, थोड़ा सा को-ओपरेट करो !

वो बेचारी कुछ नहीं बोली, मैने इसे ही स्वीकृति मान लिया और यहाँ मैं स्वीकार करूँगा कि मुझ पर वासना इतनी हावी हो गई थी कि मै बहुत ही गंदे तरीके से उसकी चड्डी उतारने के लिए आगे बढ़ा।

तो कुसुम बोली नही तुम बस ऐसे ही देख लो।

उसकी साँसें अब रुक रुक कर चल रही थी, ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उसे अब डर लग रहा था।

कुछ देर कुसुम के जिस्म को निहारने के बाद वो बोला- भाभी तो कमाल की सेक्सी है यार !

फिर कुसुम की पैंटी में दिख रही योनि पर छाये हुए झांटों के गुच्छे देखकर हम दोनों को डांटने लगा- यह क्या जंगल उगा रखा है? इन में पसीना आकर और इन बालों की रगड़ जांघों पर लगने से ही रेषेज़ हुए हैं, इन्हें गर्मियों के दिनों में, माहवारी के दिनों में सफाचट रखा करो ! समझे?

अब हम दोनों उसकी छोटी सी पैंटी में दिख रही आधी अधूरी चूत के ठीक सामने आ गए, वो पैर चौड़े किये हुए निहायत ही अश्लील मुद्रा में पड़ी हुई थी।

इस घटना को लिखते लिखते मैं खुद इतना उत्तेजित हो गया हूँ कि बस बता नहीं सकता !

फिर मुझसे भी बोला- यार, साफ़ सफाई का ध्यान रखा करो ! और अगर चूत पर बाल अच्छे भी लगते हैं तो कम से कम गर्मियों में तो साफ़ कर ही दिया करो !

मैंने अपने एक हाथ से शराब का ग्लास पकड़े हुए उसे समझाया- तुम्हारी भाभी को हेयर-रिमूविंग क्रीम से एलर्जी है और इस नाजुक जगह की शेविंग करने में मुझे डर लगता है, बस कभी-कभी कैंची से हल्के कर देता हूँ।

यह भी तो को-ओपरेट नहीं करती !

वो बोला- नहीं, उमस वाली तेज गर्मी में पूरे साफ़ करना ही सही रहता है। और इसमें दिक्कत क्या है? मैं अपनी बीवी की शेव करता ही हूँ !

थोड़ी देर बैठने और एक लार्ज पैग पीने के बाद उसने कहा- अब भाभी अपने कुल्हे उलट के लेट जाओ।

वो ना-नुकर करने लगी पर वो उसे प्यार से पुचकारने लगा- प्यारी भाभी, अब लेट भी जाओ, देखो, बिल्कुल भी दर्द नहीं करता हूँ, अभी फ्री कर दूंगा।

भाभी कोर्स पूरा ही लगवाओ, और अब आखिरी ही तो बचा है।

रात काफी हो चुकी थी बाहर बारिश हो रही थी, हम दोनों ने ही नशा भी कर रखा था, कुसुम आज दिन में कूल्हे में सुई लगवा चुकी थी और उसके काफी फायदा हो गया था और उसका संकोच अब जा चुका था इसीलिए अब थोड़ी सी जबरदस्ती करने पर वो नाइटी पहने होने के बावजूद भी सुई लगवाने के लिए राजी हो ही गई और

मेरे पास आ कर बोली- आप साथ ही रहना !

मैंने उसके गालों को चूमते हुए कहा- डोंट वरी डार्लिंग ! मैं पास ही रहूँगा।

वो मेरी गोद में सर रख कर औंधी लेट गई। इस बार दोस्त ने बिना हिचक के उसकी नाइटी कमर तक ऊँचा उठा दिया और बिना समय गंवाए उसकी पेंटी भी सरका कर कूल्हे अनावृत कर दिए और सहलाते हुए दबा दबा कर चेक किए और बोला- दर्द में बर्फ की मालिश से आराम आयेगा।

वो बोली- हाँ । लेकिन जनाब मेरे जांघों के चकत्तों में बिल्कुल भी फायदा नहीं है !

वो इंजेक्शन लगाते हुए बोला- उसे भी ठीक कर देंगे। तुम्हारा इलाज करने तो मजा आ रहा है।

और उसे बातों में लगाते हुए सुई लगाई थी कि मेरी पत्नी की सिसकारी निकल गई, उसने मुझे जोर से भींच लिया।

वो बोला- लो हो गया !

फिर खुद ही स्प्रिट का फाहा मसलने लगा। यह दृश्य भी बहुत मनोहारी लग रहा था क्योंकि फाहा मसलने से उसके नग्न कूल्हे बहुत ही उत्तेजक तरीके से हिल रहे थे। थोड़ी देर स्प्रिट मसलने के बाद दूसरे कूल्हे पर एक जोरदार चपत लगाते हुए बोला- लो भाभी, अब सीधी हो जाओ।

चपत पड़ते ही वो जोर से चिहुंक उठी और आउच करके चिल्लाई, पर मैं समझ गया था कि उसे मजा आया होगा क्योंकि जैसा मैंने पहले भी बताया है कि उसे नंगे बदन होकर नितंबो पर पिटाई खाना अच्छा लगता है !

और हुआ भी वो ही !

वो उसी तरह लेटी रही, मेरे दोस्त ने दो चार चपत और लगाई पर वो बेशरम की तरह कूल्हे पर चांटे खाए जा रही थी। माहौल फिर वासनामय हो गया था, दोस्त भी भरपूर उत्तेजित हो गया था, इसका पता उसकी अगली हरकत से जाहिर हो गया जब उसने मेरी बीवी के नंगे हो चुके चूतड़ों के बीच में से हाथ पूरा अन्दर डाल कर उसकी चूत में गुदगुदी करना शुरू कर दिया।

अब कुसुम चिल्ला कर सीधी हो गई और दोस्त पर घूंसे बरसाने लगी और उससे गुत्थम गुत्था हो गई बिना यह देखे कि वो अर्धनग्न अवस्था में है। दोस्त भी उसके साथ कुश्ती सी लड़ता रहा और अंततः कुसुम ने शराब की खाली हो चुकी बोतल दोस्त के सिर में दे मारी।

उसका सिर तो नही फटा पर उसका नशा जरूर उतर गया।

कुसुम गुस्से मे लाल पीली होती हुयी चिल्ला चिल्लाकर बोली ये क्या मजाक है, मै कुछ बोल नही रही हूँ तो तुम जहाँ मन करे हाथ लगाओगे। मजाक की भी कोई लिमिट होती है। मै कब से कंट्रोल कर रही हूँ,

बास्टर्ड,

मै तुम्हे भरोसा करके अरुण के एक दोस्त और डॉक्टर समझकर फ्रैंक होकर हँसी मजाक करते हुए अपनी बीमारी और तकलीफ बता रही हूँ । साले तुम मर्द लोगो की जात ही एक जैसी होती है, थोड़ा सा अगर कोई लेडी हँस कर खुल कर फ्रैंक होकर थोड़ा कूल mind. से बातें क्या करने लगे तुम तो साले उसके जिस्म को गिद्ध की तरह नोचने को आमादा हो जाते हो।

और तुनें क्या समझ रखा है मुझे।

अरुण को शराब पिला कर जो चाहे वो करोगे। मै इससे पहले सब लोगो को बुलाऊ

गेट lost, gate out.

तुरंत मेरे घर से निकल जाओ, और दोबारा अगर गलती से मुझे नजर भी आ गए तो समझ लेना।

मेरे हाथो में अभी भी आखिरी पेग से भरा हुआ शराब का ग्लास था। मै कुछ समझ या कह पाता इससे पहले गेट खोल कर मेरा दोस्त अपने हाथो से दोनों कान पकड़कर sorry कहते हुए फुर्ती में मेरे घर से निकलकर चला गया और जाते हुए उसकी नजरे झुकी हुई थी।

मुझे अपने दोस्त का यह बेकरारी और बिंदास स्वागत भूले नहीं भूलता।

हाहाहा हाहाहा हाहाहा

मेरे बेडरूम का तापमान फुल ac. में गर्म हो चुका था। कुसुम बेड पर उल्टी होकर तकिये में मुह

छिपाये आँख बंद कर लेटी थी।

कुसुम की नाइटी में चमक रही मोटी नंगी मांसल जांघों पर मैने हाथ फेरते हुए कहा क क क के कुसुम उसने खीच कर एक लात मारी मुझे, मैने कहा तुमने मुझे अभी लात क्यो मारी???

कुसुम--- क्योकि मै तुम्हे तुम्हारे दोस्त के सामने बेजजात नही करना चाहती थी, मन तो कर रहा था की उसके सामने ही तुम्हे खीच कर लागाउं। साला शराबी

जब सुबह जुबेदा ने मेरे स्कूल की शरारत बताई तो मेरी तरफ घूर के देख रहा था, मेरे चरित्र पर शक कर रहा था।

खुद ने कैसे कैसे दोस्त बना रखे है जो तेरी बीवी को तेरी आँखों के सामने गंदी नजर से और अपने गंदे हाथो से छू रहा है और तुम शराब का ग्लास लेकर देख रहे हो।

"" मेरे लिए शराब एक श्राप बन गयी ""

मैंने कुसुम को काफी समझाया कि कुछ गलत नहीं हुआ क्योंकि इस सब में मेरी भी सहमति शामिल थी और फिर भगवान् ने तो सिर्फ नर और मादा ही बनाए है अन्य प्राणियों में फ्री सेक्स होता ही है, इंसान ने शादी का पवित्र बंधन बनाया है जो उचित भी है, जिसका सम्मान भी करना चाहिए, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि किसी दूसरे ने आपके नग्न शरीर को छू लिया तो कोई पाप हो गया। और यही काम छुप कर या किसी को धोखा देकर किया जाए तो गलत होता है।

अरुण अभी चुप चाप सो जाओ तुम अभी शराब के नशे में हो और मै गुस्से में हू, अभी हम बात करेंगे तो मेरे हाथो से अभी तुम्हारी हत्या हो जायेगी।

लाइट बंद।
 
अध्याय --- 11 ----

----------------- पश्छताप -----------------

अरुण अभी चुप चाप सो जाओ तुम अभी शराब के नशे में हो और मै गुस्से में हू, अभी हम बात करेंगे तो मेरे हाथो से अभी तुम्हारी हत्या हो जायेगी।

इस घटना के बाद मै, मेरी बीवी कुसुम और दोस्त दोनों से ही बहुत झेंप और शर्मिन्दा हो रहा था।

लाइट बंद होने के बाद मै कुसुम के पैरो के बगल में लेट गया, मै गिल्टी फील कर रहा था। मैने डिसाइड कर लिया कि कल से कुसुम के उठने से पहले ही घर से चला जाऊंगा, वैसे भी मुझे सेमिनार के लिए दो दिन के लिए दूसरे शहर में जाने के लिए कॉलेज वाले बोल रहे थे।

इसलिए मैने मोबाइल में 5 बजे की अलार्म लगाई और फिर सोने की कोशिश करने लगा।

सुबह अलार्म की पहली घण्टी के साथ ही मेरी आँखे खुल गयी, मैने बगल में देखा तो कुसुम अभी तक सो रही थी, अक्सर वो 6 बजे ही उठा करती थी ,

कुसुम अभी भी पिछली रात वाली अधनंगी हालत में थी. तकिये में मुह दबाकर रोने की वजह से उसका मेक-अप उसके चेहरे को बदरंग कर चुका था.

फिर मैने कुसुम की नाइटी को नीचे करने का व्यर्थ प्रयास किया - मैने देखा कि उसके एक कूल्हे पर लाल निशान पड़ गया था, मेरे दोस्त के ज़ोरदार थप्पड़ को याद कर मेरे तो रोंगटे खड़े हो गए थे.

मुझे रात की अपनी करतूत के सही मायने समझ आने लगे थे. मै अब अपनी कुसुम से बात करने लायक भी नहीं रहा था. मै कुछ देर इसी असमंजस में बैठे रहा कि कुसुम को sorry कैसे कहें.

मेरे आँखों में भी आँसू भर आये, थोड़ी देर इसी तरह मै बैठे हुए अपने आँसू रोकने की कोशिश करता रहा, पर कब तक मै बैठा रहता आख़िर घर से बाहर तो निकलना ही था.

मै फ्रेश होने के लिए बाथरूम में चला गया, लगभग 45 मिनट में नहा धोकर बिल्कुल तैयार हो गया, कुसुम अभी भी सो रही थी, मैने खुद ही किचन में अपने लिए चाय बनाने चल पड़ा,

किचन में खटपट की आवाज़ से कुसुम की नींद टूट गई, उसने साइड में देखा तो मै वहां नज़र नही आया, वो समझ गई कि शायद मै चाय बनाने किचन में गया हू,

कुसुम तुरन्त उठी और किचन की तरफ चल दी, मैने चाय बना ली थी

कुसुम - अरे आपने चाय क्यों बनाई, मुझे उठा दिया होता मैं बना देती

मै - कोई बात नही कुसुम, वैसे भी तुम्हे 6 बजे जगने की आदत है, इसलिए सोचा कि थोड़ी देर और सोने देता हूँ, वैसे भी मैं ठीक ठाक चाय बना लेता हूँ,

{मै (मन मे) - अब तुमको क्या बताऊँ कि तुमसे से सामना न हो इसीलिए तो सुबह सुबह भागदौड़ करनी पड़ रही है}

कुसुम (थोड़े गुस्से से) - मुझे आज के बाद तुम्हारे दोस्त और तुम्हारे बीच कोई भी दोस्ती यारी अब नही होनी चाहिये, वरना इस बार सच्ची में मै उसका और तुम्हारा सिर फोड़ दूंगी।

अरुण तुमसे तो ज्यादा समझदार मेरी वो नासमझ बेटी रिंकी है जो अपनी दादी के कहने पर मेरी care. करना शुरू कर दी है।

मै - गुस्सा क्यों होती हो, सुबह सुबह मूड खराब नही करना चाहिए किसी का

कुसुम - आपको मै final warning दे रही हूँ ..........

मै - अच्छा ठीक है बाय

(मैने कुसुम को बीच मे ही टोका, और इससे पहले की खिटपिट और बढ़े अपना bag लेकर घर से रवाना हो गया)

कुसुम अभी भी गुस्से में थी उसने मुझसे नही पूछा कि इतने सुबह कहाँ जा रहे हो।

मै पूरे दो दिन सफर में बस एक ही गाना सुनता, गुनगुनाता रहा कि वो पूरा गाना मुझे याद हो गया और मै जिसे पूरा लिख रहा हूँ।

इससे पहले के याद तू आये

मेरी आँखों में फिर लहू आये

तुझसे रिश्ता मैं तोड़ जाऊँगा

मैं तेरा शहर छोड़ जाऊंगा

मुझको ग़म हैं तेरी जुदाई का

रंज हैं अपनी बेवफाई का

अपने वादे से फिर गया हूँ मैं

अपनी नज़रों से गिर गया हूँ मैं

इससे पहले कि तू मुझे छोड़े

मुझको ठुकराये मेरा दिल तोड़े

अपना दिल खुद मैं तोड़ जाऊँगा

मैं तेरा शहर छोड़ जाऊंगा

तेरा मुजरिम मैं तेरा हरजाई

साथ ले जाऊँगा ये रुसवाई

दाग दामन से ये मिटा दूंगा

खुद को इतनी बड़ी सज़ा दूंगा

इससे पहले की लोग ताने दे

तेरे आंसू न मुझको जाने दे

ये ताल्लुक मैं तोड़ जाऊँगा

मैं तेरा शहर छोड़ जाऊंगा

हाँ मेरा इंतज़ार तो होगा

अब भी कुछ ऐतबार तो होगा

तू खुला छोड़ देगी दरवाज़ा

पर गलत है ये तेरा अंदाज़ा

इससे पहले की आह दिल भर दे

सब गुनाहों को माफ़ तू कर दे

ये भरम भी मैं तोड़ जाऊँगा

मैं तेरा शहर छोड़ जाऊंगा।

मै दो दिन बाद वापस आ गया।

मुझे यह डर था कि कुसुम उस रात को जो हुआ वो मेरे मम्मी पापा को बताकर मेरी सारी पोल खोल देगी,

पर ये ग़लत साबित हुआ.

हालाँकि शुरू के चार-पाँच दिन तो मै धड़कते दिल से रोज़ घर से अपने कॉलेज जाया करता, लेकिन फिर धीरे-धीरे मै थोड़ा आश्वस्त हो गया कि अगर कुसुम से आगे छेड़-छाड़ और बदजुबानी न की तो शायद वह किसी से कुछ ना बोले.

उधर कुसुम ने भी अपना इरादा बदल लिया था, उसने सोचा तो था कि वह अपनी सास ससुर से सब सच-सच बोल देगी, लेकिन जब उसने घर पर इतनी ख़ुशी का माहौल देखा तो उस से कुछ कहते न बना. और बात टलते-टलते टल गयी.

मेरा अंदाज़ा सही था, कुसुम ने सोच लिया था कि अगर घर में मैंने शराब पी या पीकर आया तो वह सबकुछ उगलने में एक पल की भी देरी नहीं करेगी.

कुसुम को अब मै फूटी आँख नहीं सुहाता था - क्योकि उसे लगता, ग़लती मैने ही की थी .

जो एक पूरी तरह से सच नही था।

अब मै घर मे किसी से ज्यादा बात भी नही करता ।मैने अपने आपको पूरा पश्चाताप की आग में झोंक दिया था। मेरी पीड़ा और ग्लानि मुझे मन ही मन खाये जा रही थी।

ऐसे ही लगभग एक हफ्ता हो गया था यहां तक कि मैने कुसुम से बात भी नही की थी। मै कुसुम के गुस्से को जानता था। मुझे पता था कि शायद कुसुम मुझे कभी माफ न करे। इस बात का दुख हमेशा मेरे मन मे रहता ।

पर होनी को कौन टाल सकता था। जो हुआ सो हुआ।

बस जब कभी उसे पैसो की जरूरत होती, तो उसके तकिये के नीचे रख देता।

मै अब घर पर कम ही रुकता । मैने अपने कॉलेज के स्टूडेंट को एक्स्ट्रा क्लास देना शुरू कर दिया था। रात रात भर वही रुकता. इसका एक फायदा तो ये हुआ कि मेरी income तो बढ़ रही थी। पर नुकसान ये कि अब मै पहले जैसा हसमुंख इंसान नही रहा था।

उस रात वाली घटना के बाद से ही मैने कुसुम के साथ कभी भी शारीरिक संम्बंध नहीं बनाए थे। हालांकि हम लोग पहले भी हफ्ते में तीन या चार बार ही सेक्स करते थे पर अब तो वो भी बिल्कुल बन्द हो चुका था।

उधर लाख कोशिशों के बाद भी रिंकी के मन मे मेरे प्रति प्रेम दिनोदिन बढ़ता ही गया। उसकी वासना ने उसके दिमाग को पूरी तरह से वश में कर लिया था।

परन्तु उसके मन मे डर था कि

"" कहीं पापा ने मुझे ठुकरा दिया तो, मैं बर्दास्त नही कर पाऊंगी.....मैं किसी भी हाल में अपने पापा को पाकर रहूंगी" रिंकी यही सब सोचती रहती।

दिनों दिन रिंकी की वासना बढ़ती जा रही थी।

""मै दोस्तों, शराब, और अपनी बेटी रिंकी, साली जूली को पूरी तरह से भूल गया""

जूली को भूलने की वजह थी कि उसका घर बस रहा था और मेरा घर उजड़ने की कगार पर था। और मै अब अपनी वजह से किसी का भी घर, जिंदगी, बरबाद नही करना चाहता।

रिंकी को ingnor करने की वजह ये थी वो मेरी सौतेली बेटी सही पर मेरी पत्नी कुसुम की तो सगी बेटी है अगर गलती से उसे भनक भी लग गयी तो मेरा मरना निशिचित् है।

"" मैने अपने आप से एक भीष्म प्रतिज्ञा कर ली की अपनी पत्नी कुसुम के अलावा किसी भी लड़की, औरत के साथ संभोग नही करूँगा और ना ही कामुक, वासना विचार सोचकर मुठ मारूंगा। ""

ऐसे ही 10-12 दिन बीत गए और एक सुबह ----

मेरे मम्मी पापा दोनों मंदिर जा चुके थे,

शाम के खाना बनाने की ड्यूटी रिंकी की ही लग गयी थी जिससे थकान की वजह से रिंकी अभी भी सोई हुई थी, और अपने पापा के मधुर सपनों में खोई थी,

कुसुम अब रिंकी को उठाने के लिए उसके रूम की तरफ जाने लगी,

"रिंकी, बेटा उठ जा, देख सूरज भी सर पर चढ़ आया है, चल जल्दी खड़ी हो और हाथ मुंह धोकर नाश्ता कर ले" कुसुम ने रिंकी की चादर को हटाते हुए कहा

"बस 5 मिनट और मम्मी" रिंकी नींद में कसमसाते हुए बोली

"क्या 5 मिनट, देख दादी और दादा तो मंदिर भी जा चुके और तेरे पापा कॉलेज के लिए निकलने वाले है, और तू है कि अब तक मजे से सो रही है" कुसुम ने थोड़ा डांटते हुए कहा

मेरे जाने की बात सुनकर जैसे रिंकी आसमान से जमीन पर आ गई हो, वो तुरंत चौंककर बोली - पर पापा इतनी जल्दी क्यो जाने लगे है, मेरा... मतलब है कि पहले तो वो 10 बजे जाते थे न तो फिर इतनी जल्दी क्यो??

" उनकी छोड़ तू जल्दी से फ्रेश हो जा और नीचे आकर नाश्ता कर ले" कुसुम उसके कमरे से निकलती हुई बोली

"पापा शायद मेरी वजह से ही इतनी सुबह जाने लगे है ताकि उन्हें मुझे फेस न करना पड़े, अब मुझे पक्का यकीन हो गया है कि पापा मुझसे दूर दूर रहने की कोशिश कर रहे है, पर पापा आप चाहे जितनी कोशिश कर लो, मैं आपको पाकर ही रहूंगी, जो काम आपने अधूरा छोड़ा था वो मैं पूरा करूंगी, जितना दुख मैंने आपको दिया हैं उससे कई गुना मज़ा मैं आपको दूंगी मेरे प्यारे पापा" रिंकी मन ही मन फैसला करने लगी

अब वो खड़ी हुई और फ्रेश होने के बाद नीचे नाश्ता करने चली गई, उसके दिमाग ने अब अपने पापा को वापस अपने करीब लाने की योजना बनाना शुरू कर दिया था।

वो अभी नाश्ता करते हुए सोच ही रही थी।

और अचानक से बोल उठी।

"मम्मी मेरी वो पुरानी 11th की बुक्स कहाँ है, मुझे उनमे से एक बुक चाहये थी, मेरी स्टडी के लिए" रिंकी ने तिरछी नज़रो से मेरे चेहरे को देखते हुए कुसुम से पूछा

"रिंकी.... वो तो स्टोर रूम में ऊपर टांड पर रखी है, तेरे 12 में आने के बाद मैंने उन्हें एक बॉक्स में रखकर वहां रखवा दिया था, पर वो तो बहुत ऊपर हैं तेरे हाथ कैसे आएगी, मैं एक काम करती हूं , शाम तक किसी से उतरवा दूंगी, " कुसुम ने चाय पीते हुए ही कहा

"पर मम्मी मुझे तो अभी ही चाहिए , मुझे उनमे से कुछ जरूरी नोट्स बनाने है" रिंकी ने बड़ा ही मासूम से चेहरा बनाते हुए कहा

"चल तो फिर तेरे पापा ही तेरी हेल्प कर देंगे उन्हें उतरवाने में" कुसुम ने बड़े ही सामान्य तरीके से जवाब दिया

"पर....कुसुम.....मुझे तो अभी जाना है.....लेट हो रहा है...." मैने कहा

"क्या जाना है ..... थोड़ा लेट चले जाओगे तो पहाड़ नही टूट जाएगा....बच्ची यहां पढ़ने के लिए बुक्स मांग रही है और आप हो कि 5 मिनट लेट नही जा सकते...."

कुसुम ने तल्खी से जवाब देते हुए कहा

"पर कुसुम मेरी बात तो सुनो" मैने एक बार और कोशिश करते हुए कुसुम से कहा

"पर वर कुछ नहीं, आप बुक्स उतारोगे तो उतारोगे, मुझे ओर कुछ नहीं सुनना" कुसुम ने आर्डर करते हुए मुझसे कहा

"चलो ठीक है, उतारता हूँ मैं बुक्स" मैने निराश होते हुए कहा, मुझे यह भी पता था कि कुसुम की ज़िद के आगे मेरी नहीं चलने वाली है

मैने फटाफट बाकी नाश्ता किया और हाथ धोकर स्टोर रूम की तरफ जाने लगा,

"रुकिए पापा, मैं भी आती हूँ" रिंकी ने मुझको रोकते हुए कहा

"तुम्म्म्म्म..... क्या करोगी....रिंकी.... मम्मम मैं...उतारता हूँ ना" मै घबराते हुए बोला

"पर मुझे जो बुक चाहिए वो मैं निकाल लूँगी, बाकी बुक्स आप दोबारा रख देना" रिंकी बड़े ही आराम से बोली

"ठीक है जैसा तुम बोलो" मैने भी बेमन से जवाब दे दिया

अब रिंकी ने तुरंत हाथ धो लिए और मेरे साथ स्टोररूम की तरफ चल पड़ी जो फर्स्ट फ्लोर पर था।

रिंकी सीढ़ियों पर चलते वक्त जान बूझकर मेरे बिल्कुल पास पास चल रही थी, सो अचानक बिना सोचे-समझे इस तरह करीब आ जाने पर मै कुछ पल के लिए थोडा असहज हो गया, और उससे कुछ कहते नहीं बन रहा था. रिंकी के परफ्यूम की भीनी-भीनी खुशबू ने मुझे और अधिक परेशान कर दिया था, जल्दी ही हम दोनों स्टोररूम के सामने खड़े थे

स्टोररूम काफी दिनों से बंद पड़ा था,

जब मैने स्टोर रूम खोला तो देखा की वहां पर काफी दिनों से सफाई नहीं हुई थी, बुक्स जिस जगह पडी थी वो काफी ऊपर थी , मैने आसपास देखा तो उसे एक लकड़ी की सीढ़ी दिखाई दी, पर उस पर काफी धूल मिट्टी जमा थी।

"पापा यहां पर तो काफी गंदगी है, आपके कपड़े ना खराब हो जाए" रिंकी ने कहा

"कोई बात नहीं मैं दूसरे कपड़े पहन लूंगा " मैने बिना रिंकी की तरफ देखे ही कहा और सीढी को लेकर उस जगह के पास लगाने लगा जहां बुक्स पड़ी थी

जैसे ही मैने ऊपर चढ़ने के लिए अपना पांव आगे बढ़ाया सीढ़ी में से चरमराने की आवाज़ आयी, चूंकि सीढ़ी काफी पुरानी थी इसलिए ज्यादा वजन झेल नही सकती थी

"पापा आप मत चढ़िए, वरना सीढ़ी टूट जाएगी, आपका वजन थोड़ा ज्यादा है इस सीढ़ी के लिए" रिंकी ने कहा

"पर सीढ़ी के बिना इतनी ऊपर कैसे पहुँच पाऊंगा" मैने थोड़ा परेशान होकर कहा

"एक तरीका है" रिंकी के चेहरे पर एक शातिर मुस्कुराहट आ चुकी थी

"कोनसा तरीका" मैने बस उसकी तरफ देखकर पूछा

" आप एक काम कीजिये , सीधी को नीचे से पकड़ लीजिये, मैं इस पर चढ़कर बुक्स उतार लेती हूं" रिंकी बोली

"चलो ठीक है, तुम चढ़ जाओ पर जरा ध्यान से" मैने कहा

"पापा, मैं चढ़ तो जाऊंगी पर आप मुझे सम्भाल तो लोगे ना" रिंकी ने बेहद ही मादक अंदाज़ में द्विअर्थी शब्दों में कहा

"तुम चिंता मत करो बेटी, मैं अच्छे से पकड़ कर रखूंगा,बिल्कुल गिरने नही दूंगा" मैने सामान्य तरीके से जवाब दिया

"ठीक है तो पापा मैं चढ़ रही हूं, आप सम्भालना" ये कहते हुए रिंकी ने अपना पांव सीधी के पहले कदम पर रखा और फिर धीरे धीरे ऊपर चढ़ने लगी।

रिंकी ने ये सब कुछ पहले से ही सोच रखा था इसीलिए आज उसने जानबूझकर स्कर्ट पहनी थी, रिंकी धीरे धीरे ऊपर चढ़ी जा रही थी , मैने सीढ़ी को मजबूती से पकड़ा हुआ था, रिंकी को अपने इतने पास पाकर मेरा ध्यान विचलित होता जा रहा था,

जैसे ही रिंकी सीढ़ी पर थोड़ी ऊपर पहुंची , मैने अपनी नज़रे उठाकर ऊपर की ओर देखा, उस पर जैसे बिजली गिर गयी हो, मेरा चेहरा बिल्कुल गर्म हो गया, मुझे ऐसा लग रहा था जैसे बहुत तेज़ बुखार हो, मुझे अपनी सांसे रुकती हुई सी महसूस होने लगी और मेरा दिल जोरों से धड़कने लगालगा।

ट्यूबलाइट की तेज़ रौशनी में रिंकी की स्कर्ट में से झलकती पूरी तरह नंगी दूध सी सफ़ेद जांघें चमक रहीं थी, उसकी स्कर्ट में से उसकी छोटी सी पैंटी उसकी बड़ी सी गांड की दरारों में फंसी साफ दिखाई पड़ रही थी,उसकी भींची हुई टांगों के बीच योनि की 'V' आकृति उसे बिल्कुल साफ साफ नज़र आ रही थी.

मेरा लंड खड़ा होकर अब मुझे तकलीफ देने लगा था, मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि अगर मैने जल्दी से अपने लंड को आज़ाद नही किया तो कहीं उसकी नसे ना फट जाए, इस नज़ारे को देखकर मेरे बदन में हज़ारों ज्वालामुखी फूटने लगे,

मैने अब तक जो प्रतिज्ञा की थी कि मै अपनी बेटी से दूर रहूँगा वो सब मुझे एक पल में ही मिट्टी में मिलती हुई नजर आने लगी, मेरा दिमाग मुझे नज़रे नीचे करने को कह रहा था पर मेरा दिल इस नज़ारे को अपनी आंखों में कैद करने की बात कह रहा था,

" रिंकी...मेरी बेटी है...हाय्य अब भी कितनी छोटी-छोटी चड्डिया पहनती है...उफ़ पर वो मेरी बेटी... इस का जिस्म ओह्ह.. कितनी मस्त हो गयी है बिल्कुल आहहहहहह, नहीं नहीं वो मेरी बेटी है" मेरा दिमाग अब बुरी तरह फंस चुका था,

इधर रिंकी भी जानबूझकर ज्यादा टाइम लगा रही थी, बीच बीच मे वो अपनी सुंदर गांड को मटका देती जिससे मेरे दिल पर हज़ारों घाव हो जाते,

"पापाआआआ.... आपने ठीक से तो पकड़ा है ना, अगर आपने गिरा दिया तो मैं दोबारा कभी नहिं चढूंगी" रिंकी ने चेहरे पर कुटिल मुस्कान लाते हुए कहा

"तुम चिंता मत करो बेटी, मैं बहुत अच्छे से पकडटा हूँ, जिसे चढ़ाता हूँ उसे कभी नही छोड़ता" मै भी अब धीरे धीरे इस खेल में बढ़ रहा था हालांकि मेरे दिल मे अभी भी काफी डर था पर फिलहाल तो रिंकी की चड्डी ने मेरे दिमाग का फ्यूज़ उड़ा रखा था,

" ह्म्म्म , मुझे बुक मिल गयी है पापा, अब मैं नीचे उतर रही हूं" रिंकी ने कनखियों से मेरी ओर देखा तो मै अभी भी अपनी नज़रे उसकी स्कर्ट के अंदर गड़ाए हुए था

"अरे इतनी जल्दी मिल गयी, अगर कोई और बुक हो तो वो भी निकल लो वरना बार बार चढ़ना पड़ेगा" मेरी आंखों में वासना के दौरे तैरने लगे, और मेरा लंड तो बस मेरी पैंट को फाड़कर बाहर आने को तैयार था

"नहीं पापा अभी मुझे यही बुक चाहिए, अगर जरूरत पड़ेगी तो दोबारा चढ़ जाऊंगी, वैसे भी आप काफी अच्छे से चढ़ाते है" रिंकी ने अपने चेहरे पर शरारती मुस्कान लाते हुए कहा

"ठीक है जैसी तुम्हारी मर्ज़ी" मै बड़े बेमन से बोला,

धीरे धीरे रिंकी अपनी गांड को मटकती हुई नीचे उतरने लगी, जैसे ही वो लास्ट कदम उतरने वाली थी उसने जानबूझकर गिरने का बहाना बनाया और गिरते हुए मेरी बाहों में समा गई

मैने आज 12 दिन बाद रिंकी के कोमल शरीर को छुआ था, मै तो उसकी मादक गन्ध से मदहोश ही हो गया मुझे ये एहसास बहुत अच्छा लग रहा था, इधर रिंकी को भी मेरी बाहों में उतेजना सी महसूस हो रही थी, जिसकी गवाही उसकी चुत से निकली पानी की कुछ बूंदे थी जो उसकी पैंटी से होते हुए जांघो से स्पर्श करके उसे ठंडक का एहसास करवा रही थी,

पर मेरे मन मे ये डर भी था कि अगर रिंकी की मम्मी मतलब कुसुम को ये आभास या पता हो गया कि उसकी बेटी की वजह से मैं उत्तेजित हो रहा हूँ तो इस बार तो वो मुझे मार ही डालेगी, इसलिए मै तुरंत होश में आया और बोला

"अरे आराम से बेटी, अभी गिर जाती तो"

रिंकी भी अब थोड़ी सम्भली और मेरी बाहों की कैद से खुद को न चाहते हुए भी आज़ाद किया,

"चलो बेटी, अब नीचे चलते है, मुझे कॉलेज भी जाना है" मैने अपनी बिखरी सांसे समेटते हुए कहा

"ठीक है पापा" कहते हुए रिंकी मेरे साथ नीचे आ गयी, मैने रिंकी से नज़र बचाकर अपने लन्ड को पैंट में एडजस्ट किया

मै अब कॉलेज जाने के लिए दरवाज़े की ओर जाने लगा कि रिंकी ने पीछे से मुझसे कहा - " पापा जल्दी घर आना , मैं आपका वेट करूंगी"

"यस ऑफकोर्स मैं कोशिश करूंगा जल्दी आने की" मैने मुस्कुराते हुए जवाब दिया

ये बोलकर मै कॉलेज के लिए अपनी बाइक में रवाना हो गया,

मै तो सीधा कॉलेज के लिए निकल गया पर आज के इस घटनाक्रम ने रिंकी और मेरे दोनों के दिलों में आग सी लगा दी थी।

जारी है.....
 
आभार शुक्रिया

इस बार आपके rivew में हास्य के साथ साथ एक व्यंग अच्छा लगा।😂😂 कामदेव भाई ने जो टिप्पड़ी की थी वो उनके नजरिये से ठीक होगी या फिर सियासतदारों की संगति का असर हो सकता है। 😂😂

रही बात update की अरुण ने जो किया है, उससे वो शर्मिंदा है, थोड़ा वक्त लगेगा उबरने में।

बांकी एक शिकायत है आपसे contest की मेरी कहानी पर आपने शब्दों की बारिश अभी तक नही की....????
 
अध्याय --- 12 ----

----------------- मजाक -----------------

मै कॉलेज के लिए निकल गया पर आज के इस घटनाक्रम ने रिंकी और मेरे दोनों के दिलों में आग सी लगा दी थी।

अपने पापा के जाने के बाद रिंकी दौड़कर अपने रूम में आ गई, उसकी सांसे तेज़ तेज़ चल रही थी, उत्तेजना चरम पर थी, उसका मन खुशियों के सागर में हिलोरे मार रहा था, उसने दरवाज़े की कुंडी बन्द की और भागकर अपने पलँग पर पेट के बल आ गिरी,

इधर मेरा भी कमोबेश यही हाल था, रह रहकर मेरी आँखों के सामने रिंकी की उभरी हुई गांड का मंजर आ जाता, मै बार बार कोशिश करता कि दिमाग से ये ख्याल निकल जाए पर जितनी मै आग बुझाने की कोशिश करता उतनी ही आग और भड़क जाती, बड़ी मुश्किल से बाइक चलाते हुए मै अपने कॉलेज में पहुंचा, मैने अपना ध्यान पढाने में लगाने की कोशिश की पर मेरी हर कोशिश बेकार साबित हो रही थी, मै जब जब अपनी पलकें झपकाता, मेरी जवान बेटी के खूबसूरत जिस्म का ख्याल मेरी आँखों के सामने आ कर मेरे होश उड़ा देता,

सुबह के घटनाक्रम के बाद मेरे लंड में ऐसा जोश आ गया था जो कम होने का नाम ही नही ले रहा था ,खास तौर पर रिंकी की उभरी हुई मांसल गांड के बारे में सोचकर को तो मेरा लंड बुरी तरह फनफना उठा था.

मै अपनी कुर्सी पर बैठ बैचैन होने लगा था, मैने जो खुद से वादा किया था कि मै किसी भी लड़की के बारे में सोचकर मुठ नही मारेगा, पर परिस्थितियां काफी बदल चुकी थी, और अब मुझे ये यकीन था कि मेरा वो सपना कभी पूरा नही होने वाला, इसलिए मैने अपनी इस प्रतिज्ञा को भूल जाना ही ठीक समझा, मैने सोचा कि शायद मुठ मारने के बाद मेरे दिल से रिंकी का ख्याल निकल जाए

और यही सोचकर वो अपनी सीट से उठा और सीधा बाथरूम में घुस गया, मेरी वासना मेरे काबू से बाहर होने लगी थी इसलिए हारकर मैने अपने लंड को पैंट की जिप से बाहर निकाल लिया,

मेरा लंड लोहे की रोड की तरह सख़्त हो गया था, मेरी आँखे बंद थीं और मेरी आँखों के सामने रिंकी का सुडौल मांसल बदन घूमने लगा और रिंकी के मोटे मोटे मम्मे और उभरी हुई गान्ड को याद कर के अपने हाथ तेज़ी से लंड पर चलाने लगा

"उन्ह्ह्ह्ह…ह्म्प्फ़्फ़्फ़्फ़… ओहहहहहह यस ओहहहहहहह यस"

ओह्हहहहहह उम्ह्ह्ह्ह्ह रिंकीऽऽऽऽऽऽऽ…आहऽऽऽऽऽऽऽ…कितनी खूबसूरत हो गई है हाय्य…स्स्स्स्स्स्साऽऽऽऽ सो क्या सूंदर चौड़ी गांड हो गयी है उसकी…...ह्म्म्म"

मेरे हाथ पिस्टन की तरह अपने लन्ड के ऊपर खचाखच चले जा रहे थे, थोड़ी देर बाद ही मूठ मारते मारते अचानक मेरे लंड ने एक जोरदार झटका लिया और फिर दूसरे ही लम्हे रिंकीअअअअअस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स” कहते हुए बुरी तरह झड़ने लगा,

मेरे लंड ने इतना पानी छोड़ा कि मै खुद हैरान हो गया, आज से पहले मेरा लंड कभी इतनी जल्दी ना तो झड़ा था और ना ही लंड से इतना ज़्यादा वीर्य निकला था, आज पहली बार मैने अपना वादा तोड़कर रिंकी के बारे में सोचते हुए मूठ लगाई थी,

मूठ मारने के बाद धीरे धीरे मेरी चेतना वापस लौटने लगी, मुझे वापस अहसास होने लगा था कि मेरी कल्पना सिर्फ कल्पना तक ही सीमित रहे तो अच्छा है वरना इसका बुरा अंजाम भुगतना पड़ सकता है, 12 दिन के बाद आज मेरी अपनी पत्नी कुसुम से दोबारा बातचीत शुरू हुई है, इसे मै अपनी बेवकूफी से गंवाना नही चाहता था, इसलिए मैने फटाफट अपनी सफाई की और वापस आकर क्लास मे ध्यान लगाने लगा।

समय अपनी रफ्तार से चलता रहा और शाम हो गयी, सारे मेरे साथ वाले टीचर अपने घर जा चुके थे, मै कहाँ जाऊ???

" मैं घर जाकर रिंकी से कैसे नज़रें मिला पाऊंगा, ना जाने उसने क्या प्लान किया होगा, अगर मैं उसके प्लान में फँस गया और उसने मेरे साथ कहीं अजीब व्यवहार किया तो कुसुम को पक्का शक हो जाएगा, वो जरूर रिंकी से इसकी वजह पूछेगी, अगर रिंकी ने उसे सब कुछ बता दिया तो, मेरा बसा बसाया घर बर्बाद न हो जाये, कहीं कुसुम रिंकी को लेकर मुझे छोड़ कर चली गयी तो, नहीं नहीं मैं ऐसा नही होने दूंगा,

मैं रिंकी के सामने ही नही जाऊंगा,, लेकिन घर भी तो जाना पड़ेगा ,, अब मैं क्या करूँ " - मै इसी उधेड़बुन में लगा रहा, पर लाख कोशिशों के बावजूद भी मै किसी निष्कर्ष पर ना पहुंच सका,

अब शाम के 8:00 बजने को आये थे, मेरे घर जाने का समय भी हो गया था, उधर रिंकी पलकें बिछाए अपने पापा का इंतजार कर रही थी और इधर मै घर जाने या ना जाने की ऊहापोह स्तिथि में फंसा हुआ था।

आखिरकार हारकर मै अपनी बाइक पर बैठा और घर की तरफ रवाना होने वाला था कि मेरा फोन बजा,

जब फोन की स्क्रीन पर कुसुम का नम्बर देखा तो मेरा दिल जोरो से धड़कने लगा

" मैं कुसुम से क्या कहूँ, मुझे घर जाना चाहिए या नहीं, आखिर मैने डरते डरते फ़ोन उठाया

मै - हेलो,

कुसुम - क्या हुआ, इतना टाइम क्यों लगाया फ़ोन उठाने में

मै - वो वो अम्म्म मैं ममम ड्राइव कर रहा था इसलिए जल्दी नही उठा पाया

कुसुम (खुश होते हुए)- अरे वाह, इसका मतलब आज आप टाइम पर घर आ जाओगे , कितना अच्छा लगेगा आज सब लोग साथ मे खाना खाएंगे

मै(घबराते हुए) -- अरे नहीं अम्म्म कुसुम , मैं मैं घर नही आ रहा, जरासल मुझे एक कलिंग से मिलने जाना तो अभी उसी के घर जा रहा हूँ, मुझे घर आते आते देर हो जाएगी, तुम लोग खाना खा लो, मैं घर आकर बाद में खा लूंगा,

" अब कुसुम को कैसे समझाऊं की रिंकी की वजह से ही घर नही आ रहा " मै मन ही मन बोला।

कुसुम (गुस्से से)- ठीक है फिर, खाना भी बाहर ही खा लेना, यहां तो अगर खाना बचा भी तो मैं डस्टबिन में फेंक दूंगी,

मै - कुसुम सुनो तो सही, हेलो, hellllo......

कुसुम ने गुस्से से फ़ोन बीच मे ही काट दिया,

इधर कुसुम का मूड खराब हो चुका था, पर वो कर भी क्या सकती थी,

"रिंकी , मम्मी पापा , आओ सब लोग खाना खाने का टाइम हो गया है " उसने आवाज़ लगाई

रिंकी अब भी अपने रूम में थी,

रिंकी को लगा कि शायद पापा आ गए है, तभी मम्मी उन्हें खाना खाने बुला रही है, ये सोचकर ही रिंकी के मन मे सिहरन सी उठ गई,

वो जल्दी से उठी और आईने में खुद को निहारने लगी, उसने अपने गुलाबी होंठों पर हल्की सी ग्लास लिपिस्टिक लगाई और बालों को थोड़ा सा संवारा,

और एक हल्की सी मुस्कुराहट उसके चेहरे पर फैल गयी,

रिंकी को जैसे जोर का झटका लगा हो, पापा को वहां ना पाकर तो जैसे उसके पैर वहीं के वहीं जम गए हों, उसने न जाने कैसे कैसे सपने संजोये थे, पर उसके सारे सपने उसे मिट्टी में मिलते नज़र आ रहे थे,

उसकी तो जैसे भूख ही मर गयी थी, वो भारी मन से टेबल पर आकर बैठ गयी।

कुसुम ने उसके लिए एक प्लेट लगाई और फिर उसमें सारी डिशेज़ सर्व कर दी।

दादी और दादा तो खाने का लुत्फ उठा रहे थे, पर रिंकी बिल्कुल धीरे धीरे खा रही थी,

उसको ऐसे खाते देख कुसुम बोली - पहले तो कैसे फटाफट खाना खाती थी, और अब देखो कैसे स्लो मोशन में खाना खा रही है

उसकी बात सुनकर दादा और दादी भी हसने लगे,

रिंकी - ऐसा तो कुछ नही है मम्मी

कुसुम - मुझे लगता है कि तेरा ध्यान कहीं और है, कहीं तू अपने पापा के बारे में तो नहीं सोच रही हो

कुसुम की बात सुनकर तो रिंकी को इस लगा जैसे कुसुम ने उसकी कोई चोरी पकड़ ली हो, वो घबरा सी गई।

रिंकी (घबराते हुए) - नही म्म्म्मम्म मम्मी, ऐसी तो कोई बात नहीं

कुसुम - झूट मत बोल, मैं जानती हूँ कि मुझसे ज्यादा तू तेरे पापा को ही प्यार करती है, और वो अब वो घर नही आये, इसलिये तू परेशान है

प्यार की बात सुनकर एक बार तो रिंकी घबराई फिर उसे लगा कि मम्मी तो बाप बेटी वाले प्यार की बात कर रही है।

रिंकी खाना खाकर वापस अपने रूम में आ चुकी थी, वो अंदर से बहुत दुखी थी।

लेकिन कुछ भी हल ना निकलता देख वो थक हारकर लेट गई, काम की थकान की वजह से वो जल्दी ही नींद के आगोश में चली गई,

रात के लगभग 11:00 बज चुके थे, मुझे लगा की अब तक घर मे सब लोग सो चुके होंगे, मैने अपनी गाड़ी निकली और घर की तरफ चल पड़ा,

जल्दी ही मै घर पहुंच गया, चूंकि मै उस काली रात की वजह से अब लेट ही आता था, इसलिए मेरे पास घर की डुप्लीकेट चाबी रहती थी, मैने हल्के से दरवाज़ा खोला ताकि आवाज़ सुनकर कोई जाग न जाये,

मुझे बड़े जोरों की भूख लग रही थी, मै सीधा किचन में गया और वहीं सिंक में हाथ धोकर अपने लिए प्लेट में खाना डाल लिया, प्लेट लेकर मै डाइनिंग टेबल की ओर बढ़ ही रह था कि मुझे लगा की इस वक्त हॉल की लाइट जलाना सही नही होगा,

ये सोचकर सीधा अपने रूम की ओर ही बढ़ गया, अपने रूम में जाकर मैने खाना खाना शुरू किया ही था कि कुसुम की नींद खुल गयी, मुझे अपने सामने देखकर उसने नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा - " आ गए आप, थोड़ा और लेट आ जाते, या फिर आते ही नही, घर मे रिंकी बेटी अपने पापा का इंतजार कर रही थी, और इनका कोई अता पता नहीं, बेचारी खाना भी ढंग से ना खा पाई "

" पहले तो तुम धीरे बोलो, इतनी जोर से चिल्लाओगी तो सब जग जाएंगे, और मैने पहले ही कहा था ना कि काम है वरना मैं ज़रूर आ जाता,

मै--- हाँ मैने बड़े ही शांत तरीके से बोला

कुसुम-- "ठीक है जो मन मे आये करो"

लेकिन कल वैसे भी sunday. है कल आप पूरा दिन घर पर ही रहेंगे, समझे।

कुसुम ने कहा और चुपचाप सो गई।

मैने भी जल्दी से खाना खाया और फिर आकर कुसुम के बगल में लेट गया, और सोचने लगा कल क्या होगा क्योकि कल तो sunday है।

Sunday का दिन था मेरे पापा मम्मी को शक होने लगा था कि मेरे और कुसुम के बीच झगडा हुआ है, मेरे मम्मी पापा दोनों ही नही चाहते है कि उनकी प्रेग्नेट बहू को किसी भी तरह का स्ट्रेस हो।

उनकी ख़ुशी के लिए और रात को कुसुम से किये गए वादे को निभाने के लिए मैंने आज पूरे दिन घर पर रुकने का फैसला किया, क्योकि मैं भी कुसुम को स्ट्रेस नही देना चाहता हूँ।

दोपहर का समय था, लाइट चली गई थी मै अपने घर के बाहर दरवाजे पर कुर्सी डालकर मोबाइल में टाइम पास कर रहा था, और मेरे पापा ca के ऑफिस में टैक्स से संबधी काम से गये थे , कुसुम, रिंकी, और मेरी मम्मी खा पीकर हॉल में बैठे हुए जूली की शादी में पेहनने के लिए साड़ी से मैचिंग वाले ब्लाउस पेटीकोट सिलवाने की तैयारी में लगे थे। और हमारी पड़ोसन सुनीता आंटी का इंतजार कर रही थी, क्योकि सुनीता आंटी वर्क फ्रॉम होम बुटीक स्टोर चलाती है, और वो एक अच्छी फैशन डेजैनर है।

थोड़ी देर बाद मुझे दूर से मेरी साली जूली और मेरी सास मेरे घर की ओर आते दिखे, जैसे जैसे वो नजदीक आती जा रही थी मेरी धड़कन बढ़ती जा रही थी।

मेरी नजरें जूली पर थी।

जूली दिखने में बड़ी आकर्षक है, याने कोई ब्यूटी क्वीन तो नहीं है कुसुम की तरह, पर फिर भी उसको देखते ही मन में और दूसरे अंगों में भी गुदगुदी सी होती है. जूली इस समय सलवार कमीज पहने थी, बिना ओढनी, के जिसमें से उसका सुडौल मांसल बदन खिल कर दिख रहा था. टाइट कमीज में उसके जवान उरोज मचल मचल कर बाहर आने को कर रहे थे.

फिर मेरी नजर सासु पर पड़ी।

सासु ने तो मुझे मंत्रमुग्ध कर डाला. वैसे भी मुझे उमर में बड़ी औरतों से खास लगाव है, ज्यादा पके फ़लों जैसी वे ज्यादा ही मीठी लगती हैं. और मेरी सास तो एकदम माल दिख रही थीं.

कुसुम की मां – मेरी सास के बारे में वैसे मुझे ऐसा सोचना नहीं चाहिये ऐसा मेरे मन में आया पर मन पर काबू करना बड़ा मुश्किल होता है. उनका चेहरा बड़ा खूबसूरत , कुसुम से थोड़ा अलग पर एकदम स्वीट. बदन भरा पूरा , मोटा नहीं , पर कद में छोटी, करीब पांच फुट की होंगी और इस वजह से बदन थोड़ा खाया पिया दिखता है पर उनके बदन में मांसलपन भले हो, सिठानी जैसा मुटापा नहीं है. और एकदम गोरी चिट्टी , उनका पेट और बाहें जो दिख रही थीं, उससे उनकी स्किन कितनी चिकनी है ये दिख रहा था. बाकी तो ज्यादा कुछ दिखा नहीं क्योंकि वे अपना आंचल अपने बदन में लपेटी हुई थीं. मेरे मन में आया कि इनको सिर और पैरों से पकड़कर छह इंच खींच दिया जाये और कमर के नीचे के याने चौड़े भरे हुए भारी भरकम कूल्हों को दो हाथों के बीच रखकर थोड़ा पिचका दिया जाये तो एकदम मॉडल लगेंगी.

कुछ ही पल में हम एक दूसरे के सामने खड़े थे, मैने पैर छूकर सास को प्रणाम किया, जूली और मैने एक दूसरे को बस smile. दी। और घर के अंदर ले गया।

जैसे ही जूली के पैर घर की देहलीज पर पड़े तुरंत लाइट आ गयी, ये देखकर मेरी मम्मी बोली वाह जूली तुम तो बड़ी भाग्य शाली है तेरे पैर रखते ही पूरे घर में रोशनी हो गयी।

मेरी सास और जूली कुसुम की प्रेग्नेसी की खबर सुनकर कुसुम को देखने हमारे यहाँ आई थी।

अंदर जाकर हम बैठे, मेरी मम्मी ने चाय बनाई. मैं नजर बचाकर जितना हो सकता है, जूली को देख रहा था. मेरी मम्मी, सास, कुसुम, रिंकी, जूली, हॉल में बैठकर नास्ता करते हुए उनकी बातें चल रही थी।

एक साड़ी को मेरी सास बार बार बड़े प्यार से देख रही थी, शायद वो साड़ी उन्हें पसंद थी। मेरी मम्मी ये बात समझ गयी और

कुसुम की मम्मी को साड़ीया दिखाते हुए बोली बहनजी ये साड़ी आप ले लो, आप पर खूब जचेगी। तो सास ना नुकर करने लगी। मै भी बीच में बोल पड़ा अरे मम्मीजी ले लो ना। तो सास मान गयी फिर कुसुम बोली इसका मैचिंग का ब्लाउस का पीस भी है अभी सुनीता आंटी आने वाली है आप उनको नाप दे देना वो सिल देगी।

थोड़ी देर बाद door weel बजी।

अरुण बेटा जरा दरवाजे खोल देना सुनीता आंटी आई होगी। मेरी मम्मी ने मुझे आवाज देते हुए कहा।

मै-- ठीक है मम्मी,

मैने जैसे ही दरवाजे खोले तो सुनीता आंटी को देखते ही रह गया। मै उनके बारे में थोड़ा बताना चाहता हूँ।

सुनीता शर्मा उम्र 52 साल लंबाई 5 फीट 4 इंच होगी रंग गोरा ओर शरीर की बनावट ऐसी की मेरी गली के छोटे से लेकर बूढ़े तक उसको गिद्ध की तरह भूखी नज़रों से देखते हैं। आंटी अक्सर साड़ी या सूट ही पहनती है साड़ी को नाभि के 2 इंच नीचे बांध कर जब निकलती है तो गाली के सभी लंड सलामी देते हैं। उनका फिगर 38-32-42 के करीब होगा, अब बिल्कुल सही तो नहीं बता सकता, पड़ोसन आंटी है मेरी, कभी नापा नहीं है उसका फिगर।

आंटी की छाती भारी है और वो थोड़े गहरे गले के ब्लाउज पहनती है जिनसे उसके मम्मे उनके ब्लाउज़ और सूट के गले से बाहर झांकते रहते हैं। खास तौर पर वो जो ब्लाउज़ पहनती है न, वो पीछे से बैकलेस होते हैं, जैसे बस थोड़ा कपड़ा या पीछे पीठ पर सिर्फ एक धागा होता है, गोरी खुली हुई मांसल पीठ और पीठ के बीच में बनती गहरी खाई। नाभि के नीचे तक गोरा मखमली पेट और चलते वक़्त उस पेट का थरथराना, वो मांस का हिलना तो बस पूरे मोहल्ला वालों के सभी लंडों को खड़ा कर देता है।

आंटी के पति सऊदी में जॉब करते हैं जिसके कारण उन की चुदाई बहुत कम होती है, ऐसा मुझे लगता है. मेरे मोहल्ले के सभी जवान और बूढ़े उसको हवस भरी नज़रों से देखते हैं; और देखें भी क्यों न… जब मोहल्ले में इतना जबरदस्त कसा हुआ माल हो जिसका जिस्म गदराया हुआ हो। एक ऐसी मदमस्त औरत जो दिखने में ही इतनी छिनाल लगती थी; मानो कितने लंड निगल जाएगी।

सुनीता आंटी मेकअप बहुत करती है घुंघराले काले बाल, आंखों में काजल, पलकों पर लाइनर होठों पर मैक की लाल गाढ़ी लिपस्टिक, हर वक़्त किसी हीरोइन की तरह बन संवर के रहती है। इतना ही नहीं, गहरा ब्लाउज़ नाभि से नीचे बांधी साड़ी ओर हील्स की बजह से उभरी हुई मोटी मस्त गांड जो ऐसे मटकती है कि मेरा खुद का लंड भी खड़ा हो जाता है मै अपनी शादी से पहले सुनीता आंटी को अपना लंड हिला हिला के कितनी बार अपने मन में अपनी फैंटसी बना कर चोद चुका हूँ।

सुनीता आंटी बोली अरूण बेटा अब देखता ही रहेगा या अंदर भी आने देगा। मै तुरंत बीच में से हट गया और गेट बंदकर अपने बेडरूम में चला गया।

शायद जूली का मूड था गप्पों का पर चाय नास्ता खतम होते ही रिंकी ने जूली को जबरदस्ती उठा लिया “चलो मौसी, बाकी गप्पें अब मेरे कमरे में करेंगे और जूली, रिंकी के कमरे में चले गयी। जूली के जाते ही मै भी अपने बेडरूम में चला गया।

अब मेरी मम्मी, सास, और सुनीता आंटी, और कुसुम ही हॉल में बातें कर रहे थे, शुरुआत जरा फ़ॉर्मल बातों से हुई. .

मेरे बेडरूम का दरवाजा open ही था, और इनकी बातें मैं चुपके से सुन रहा था।

मेरी मम्मी बोली - और सुनीता तेरी ढलती जवानी कैसी कट रही है?

सुनीता बोली- उंगली के सहारे! ओर सभी जोर जोर से हंसने लगी.

हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा

तभी मेरी सास बोली- यार सभी का यही हाल है, 50 के बाद सभी के पति बूढा जाते हैं और हम औरतों की सारी जवानी इस उम्र के बाद रंग देती है जिसे चखने के लिए कोई इन्सान या जानवर ही नहीं है।

सुनीता आंटी बोली- जरूरी है घर का जानवर ही चखे? जंगल में भूखे भेड़ियों की कमी नहीं है, बस इशारा करो, नोच नोच के खाएंगे!

और सभी एक दूसरे की ओर शरारत से देख कर हंसने लगी और बाहर के मर्दों की बातें करने लगी जैसे; यार वो कपूर की क्या परसनेलिटी है, उनकी बीवी तो हाथ जोड़ती होगी.

और फिर हंसने लगी.

हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा

"" मै आज अपनी मम्मी और सास के मुह से पहली बार इस तरह की अश्लील बातें सुन रहा था और कुसुम जो एक तरफ दोनों के रिश्ते में बहू और बेटी है वो भी उनकी बातें सुनकर खिल खिल कर के हँस रही थी ""

मेरी मम्मी -- सुनीता आंटी से बोली तेरी कारीगरी की बड़ी तारीफ सुनी है, तो मैंने सोचा इस बार मैं अपनी समधिन कुसुम की मम्मी के नई साड़ी के लिए तुझसे उनका ब्लाउज़ सिलवा कर देखूँ।

और तुझे वैसा ही ब्लाउज़ सिलना है जैसा तुमने मेरा सिला है।

तो सुनीता आंटी मुस्कुरा कर बोली - अच्छा मैं आपको कुछ नए डिजाइन भी दिखा दूँगी

"" मै उन सब की अश्लील बातों को सुनकर exited था और अब ब्लाउस का सुनते ही मैंने सोचा कुछ intersting होने वाला है कि क्यों न लाइव शो देख जाये।""

तो मैं बेडरूम के दरवाजे पर टंगे पर्दे में से हॉल के अंदर देखने की जगह ढूंढने लगा। मुझे एक छोटी सा छेद दिखा जिससे हॉल साफ साफ दिख रहा था, मैं पर्दे के छेद के पास खड़ा हो कर देखने लगा।

मेरी सास खड़ी थी ओर सुनीता आंटी इंची टेप लेकर उनके पास आयी - हां जी, तो कैसा ब्लाउज़ सिलवाना चाहेंगी आप?

सास ने कहा- आप कुछ डिजाइन नयी दिखाओ?

तो सुनीता आंटी ने सास को एक एल्बम दी जिसमें बहुत से डिजाइन थे, मुझे तो नहीं दिखे पर सास ने एक डिजाइन पसंद करके सुनीता आंटी को दिखाया।

सुनीता आंटी बोली- बिल्कुल बनेगा , आप बस अपना नाप मुझे ले लेने दो।

सुनीता आंटी पहले सास के एक कंधे से दूसरे कंधे तक का नाप लिया और अपनी डायरी में लिख लिया। फिर सास की बाजू ऊपर उठा कर बगल से पेट के ऊपर तक का नाप लिया, फिर पीठ का नाप लिया।

जब पीठ का नाप ले रही थी तो सास बोली- मैं हमेशा बैकलेस ही पहनती हूँ, तो पेट पे कम से कम कपड़ा लगाना, हो सके तो सिर्फ कोई सुनहरी डोरी या ऐसा कुछ ही लगाना।

सुनीता आंटी ने किसी बहुत ही आज्ञाकार बच्चे की तरह हाँ में सर हिलाया,

फिर सुनीता आंटी ने सामने आकर इंची टेप से पहले सास के एक चूचे का और फिर दूसरे चूचे का नाप लिया।

“मैडम जी” सुनीता आंटी बोली- अगर पीछे से बैकलेस रखना है तो सामने पैड लगाने पड़ेंगे, क्योंकि बैकलेस में ब्रा तो आप पहन नहीं सकती।

बेशक सास को भी ये बात पता थी, पर सास उसकी बात सुन कर मुस्कुरा दी, बोली- हाँ, बैकलेस में ब्रा तो पहनी नहीं जाती, आप मेरे इस ब्लाउज़ में ही ब्रा बना देना।

तभी सुनीता आंटी बोली- मैडम जी, अगर अंदरूनी ब्रा बनानी है तो प्लीज़ पल्लू को हटा दो, इसके साथ साइज सही नहीं आ रहा।

तो सास ने बिना कुछ बोले पल्लू हटा दिया.

सास का पल्लू हटते ही मेरी आंखें बड़ी हो गई, मै अपनी सास के चुचों को घूरने लगा और मेरा चेहरा गुलाबी पड़ने लगा, पता नहीं शर्म से या मेरी सास की ओर बढ़ रही कामुकता से।

सासु मा के 75% चुचे खुल चुके थे.

सुनीता आंटी ने सासु मा को पलट दिया, उनकी पीठ को देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया और मै अपने लंड को मसलने लगा. सासु माँ का face मै नहीं देख पा रहा था, उनका मुँह दूसरी ओर था।

सुनीता आंटी- मैडम, आपको फिटिंग कैसी चाहिए टाइट या लूज़?

तो सासु मा बोली- टाइट… ऐसा लगे जैसे बॉडी पे पेंट किया हुआ हो।

तो सुनीता आंटी- फिर आपको अपना ब्लाउज़ उतारना होगा.

तो सासु मा ऊपर मन से थोड़ा सा गुस्सा दिखती हुई बोली- पागल हो? नहीं ऐसे ही लो!

तभी मेरी मम्मी सासु से बोली- बहनजी तुम सुनीता से शर्मा रही हो, पहले मै जिस दर्जी से कभी ब्लाउज़ या सूट सिलवाने जाती थी ?

साला बहुत ठर्की था नाप लेने के बहाने चूचे दबाता था।

सुनीता आँटी बोली- अहह काश मेरे कोई दबा जाए।

ओर सब फिर से हंसने लगी।

हाहाहा हाहाहा हाहाहा

फिर सुनीता आँटी मेरी सासु को समझाते हुए बोली-- बुरा मत मानिए, दरअसल ब्रा वाला ब्लाउज़ सिलने के लिए आपके बदन के इन हिस्सों का मुझे बिल्कुल सही नाप चाहिए, तभी आपको सही फिटिंग आएगी।

कुसुम हस्ती हुई बोली

अरे मम्मी ब्लाउस उतरने से फिटिंग ठीक आती है मैने भी उतारा था, तभी तो मेरे ब्लाउस फिटिंग हुई, आप चाहो अपनी समधन से पूछ लो।

हाहाहा हाहाहा

और सासु माँ ने अपने ब्लाउज़ की डोरी खोली और उतार दिया। अब क्योंकि सासु माँ पहले ही बैकलेस ब्लाउज़ पहन कर आई थी, तो नीचे से ब्रा तो पहना ही नहीं था, सो ब्लाउज़ उतरते ही सासु माँ टॉपलेस हो गई और सासु माँ के गोरे गोल मम्मे आज़ाद हो गए जिन्हें देख कर सुनीता आँटी बोली माशाअल्लाह क्या जिस्म है… काश आप हमारे होते!

और चुप हो गयी.

तो मेरी मम्मी हस्ती हुई बोली- तो क्या करती ?

सुनीता आँटी बोली- कुछ नहीं!

मम्मी बोली- बता दो?

तो सुनीता आँटी मेरी सासु माँ के मखमली चुचों को अपनी मुलायम हथेलियों में भरते हुए बोली - इन्हें निचोड़ कर इनका सारा रस पी जाती !

सुनीता आँटी के हाथों में मेरी सासु माँ के चुचे आते ही सासु माँ की सिसकारी निकल गयी- अहह महः क्या कर रही हो ?

सुनीता आँटी आँख मारती हुई बोली- जो करवाने आप यहां आयी हो।

सासु बोली- मतलब?

सुनीता आँटी बोली- अब ज्यादा बनो मत, आपकी समधन के जितने ब्लाउज़ सिले हैं उससे ज्यादा उसकी चुसाई की है।

सासु माँ बोली- हम्म… तो आज मेरी भी प्यास बुझा दो, बहुत प्यासी हूँ मेरी रानी !

और सासु माँ ने अपनी बाहों को सुनीता आँटी के गले में डाल दिया।

पूरे हॉल में हँसी के ठहके गूजने लगे,

हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा

तीनो चारो औरते खूब जोर जोर से हस रही थी, हाहाहा हाहाहा हाहाहा

सुनीता आँटी मेरी सासु मा के हाथ जोड़ते हुए बोली मेरी माँ मुझे माफ करो अब दोबारा से कभी भी ऐसा मजाक नही करूँगी। आपने तो मेरी ले ली होती।

तीनो चारो औरते और जोर जोर से हस रही थी, हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा

सुनीता आंटी का चेहरा और डाइलोग सुनकर मेरी भी हँसी निकल गयी।

हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा।

उनकी हँसी की आवाज सुनकर जूली और रिंकी भी हॉल में आ गये।

हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा।

"" मैं मन ही मन सोच रहा था अगर औरते अश्लील मजाक करना शुरु कर दे तो अच्छे भले आदमी (रसिया मर्द) मजाक करना भूल जाये ""

जारी है.....
 
आपका ये review मेरे लिए सबसे खास उपहार है, इस review में आपको देने के लिए मेरे शब्द कोष में शब्द नही है, पिछले दो दिन में जो हुआ उसकी वजह से मुझे खुद से ही guilt फील हो रही थी। मै अंदर ही अंदर घुट रहा था कि मैने आखिर reviw क्यो लिखा...??? और उसके बाद एक और गलती कर दी आपको जबाब देकर....!

बड़े भाई छोटे भाई से कुछ कह दे तो छोटे भाई को जबाब नही देना चाहिए, पर मै गलती दोहराता रहा...

आप तो मुझ जैसे नये लोगों को आगे बढ़ने, लिखने की प्रेणना देते है, इस आभाषी दुनिया में अपनी बातों को शब्दों के माध्यम से लिखने का होंसला देते हो ये मै नही इस फोरम का हर शक्स जानता है।

आज के आधुनिक युग में मनोरंजन के इतने साधन है, मोबाइल में ही बहुत सारे app. और भी चीज है, लेकिन हम सभी उन आधुनिक app. को छोड़कर शब्दों के मायाजाल को पसंद करते है, इसकी क्या वजह है इसका स्पष्ट जबाब मेरे पास नही है।

शायद आपने अब तक नोटिस किया हो मै कुछ खास, चुनिदा writer की कहानी पर reviw लिखता हूँ। मुझे डर रहता है कि अर्थ का अनर्थ ना हो जाये।

खैर जो हुआ सो हुआ.... बड़े भाई ने छोटे भाई को माफ कर दिया मुझे मेरा पुरुष्कार मिल गया...!

इसी तरह अपना प्यार, आशीष देते रहिये 🙏🙏
 
उनकी हँसी की आवाज सुनकर जूली और रिंकी भी हॉल में आ गये।

हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा।

उन दोनों ने जब अपनी मम्मी और नानी को अर्ध नग्न रूप में देखा तो दोनों के होश उड़ गये।

रिंकी हस्ती हुई बोली ओहो मेरी सेक्सी नानी ये क्या मस्त फिगर है, पर थोड़ी सी लिमिट रखो आप , बांकी सब औरतो even अपनी मम्मी कुसुम और दादी से बोली आप लोग भी देख रहे है, और जोर शोर से हँस रहे है। अगर पापा हॉल में आ गये तो, और उन्होंने ऐसे देख लिया तो क्या सोचेंगे। गोस्सिप् करना है तो बिंदास होकर करिये मै भी आपको जॉइन करती हूँ।

रिंकी की बातें सुनकर मेरी सास ने चलो बहुत हुआ मजाक अब खतम करे। और उन्होंने अपने ब्लाउस पेहनने लगी। तभी रिंकी हस्ती हुई आँख मारते हुए बोलि my sexy naani one pics तो बनता है। और अपनी नानी का फोटो खीचने लगी।

तो मेरी मम्मी बोली मेरी प्यारी बिटिया यहाँ आ मेरे पास बैठ और फोटो भी खीच ले। रिंकी वही बैठ गयी और जूली किचिन में चली गई। शायद पानी पीने।

"" मैने मन ही मन कहा मेरी बेटी रिंकी मुझे पता है तुमने ऐसे क्यो बोला क्योकि तुम नही चाहती कि तेरे पापा तेरे जिस्म के अलावा किसी और का नग्न जिस्म ना देखे ""

जूली को अकेले किचिन में जाते देख मेरा मन हिचकोले खाने लगा . क्यों नही आख़िर मेरी सबसे सेक्सी साली जो थी .वैसे भी पिछले 15 दिन से मेरे लंड को चूत नही मिली थी और आठ दिन बाद उसकी शादी हो जायेगी। मुझे पूरा भरोसा था की इस बार जूली को पटा लिया तो मै उस की चूत चोद लूगा। मै जैसे ही किचिन मे घुसा तो जूली फीरिज में कुछ ढूढ़ रही थी। और हल्की झुकी हुई खड़ी थी। उसके बाहर की ओर निकले हुए बड़े बड़े नितंबो को देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया।

मै सीधा जूली के पीछे जाकर उसकी आंखों को अपने हाथों से बंद कर अपने से चिपका लिया ..ऐसे ही मेरा लंड भी खड़ा हो रहा था और मैने जूली के नितंबो पर टिका दिया लोअर के अन्दर से..

जूली कहने लगी , “अरे क्या जिजू , बड़ी देर करदी आने मे .

आपको तो मालूम था की हम लोग अभी घर में ही है फिर भी छिपे हुए हो .”मैने पलटते हुए जबाब दिया , मैने कहा मुझे लगा शायद तुम मेरा चेहरा नही देखना चाहती हो, क्योकि मैने तुम्हे कितने फोन लगाए पर तुमने एक बार भी जबाब नही दिया। जूली बोली “सॉरी . चलो अब हमे माफ़ कर दो .” मैने अपने लंड को अभी भी उसके नितंबो से चिपकाये रखा.. जूली भी थोड़ा पीछे झुक कर उसे और दबा रही थी .लंड झटके मार रहा था.

"" मेरी साली जूली उन लड़कियों की तरह है जो फोन नही उठाती, पर अकेले में मिल जाओ तो लेहन्गा भी उठा देती है ""

हाहा हाहा हाहा

जूली ने मेरे हाथों को अपने हाथों मे लेते हुए कहा , “चलो जाओ माफ़ किया . लेकिन आपको भी हमारी जीजी का ध्यान रखना चाहिए . इस हाल मे ज्यादा अकेले नही छोड़ना चाहिए .”मैने जूली की तरफ़ आँख मरते हुए कहा , “अब तुम्हारी जीजी को तो क्या , तुम को भी अकेले नही छोडूंगा .”

वैसे जूली तुम फ्रिज में क्या देख रही थी, मैने अभि भी अपना लंड जूली के नितंबो मे चिपकते हुए पूछा।

जीजू प्यास लगी थी पानी पीने आई थी, जूली सीधी खड़ी हो कर बोली।

चलो जीजू हॉल में चलते हैं, और मै भी जूली के साथ हॉल में आ गया।

फिर मै कुसुम को थोड़ा खिसका कर वहीँ सोफे पर ही अपने लिए जगह बना कर बैठ गया, मेरे बैठते ही कुसुम उठ कर बेडरूम में चली गई शायद toilet करने। मेरी बेटी रिंकी नीचे बैठ कर साड़ी घरी कर रही थी और मैं सोफे पर बैठा था जिस कारण रिंकी की चुचिया थोड़ी थोड़ी दिख रही थी क्योकि सर्ट कि ऊपर कि बटन खुली थी बार बार मेरी नज़रे रिंकी कि चुचियो कि तरह चली जाती।

रिंकी की चुचुइयो को इंग्नोर करते हुए मै बोला , “क्या बात है ?

साड़ीयों ब्लाउस की प्रदर्शनी लगा रखी है .” सास ने एक ब्लाउस को उठाकर अपने बदन पर रखते हुए बोली ,” नही बेटा . हम सब तो यह देख रहे थे की इन ब्लाउस को पहनने के बाद बदन पर ब्लाउस दिखती है या हमारा बदन .”

मेरी सास सुनीता आंटी को आंख मारते हुए बोली , “सुनीता बड़ी सेक्सी ब्लाउस डिज़ाइन करती है . पुरा बदन उघाड़ कर रख देते है इसके हाथो से सिले ब्लाउस .”

मै भी हाजिर -जवाब था . तुरंत बोल पड़ा , मम्मीजी “जाओ इन्हे पहनकर आओ . हम भी जरा देखें की हमारी सुनीता आंटी की सिले हुए ब्लाउस ज्यादा सेक्सी है या आपका बदन .”इसी तरह हमारे बीच हँसी मज़ाक चल रहा था . मै भी उनके अश्लील मजाक के खेल में शामिल हो गया।

तभी सासु बोली घर के सामने ही रोड पर एक ठेले से तेरे लिए बड़े बड़े मोटे मोटे केले लेकर आई हू और मुझे केले की थैली देते हुए बोली ले केले खायेगा बहुत अच्छे है तो मैं एक केला उठाकर खाने लगा और बोला कि बहुत अच्छे केले है मम्मीजी ।

तभी सुनीता आंटी बीच में बेसर्मी से कहने लगी कि मोटे केले कि बात ही अलग है एक केला खा लो पेट भर जाता है तब मैं बोला कि केला तो केला है मोटा हो या पतला लंबा हो या छोटा तो सुनीता आंटी बोली कि नहीं रे मोटे और लम्बे केले कि बात ही अलग होती है बहुत मजा आता है

मोटा केला खाने में यह तो नसीब वाले को मिलता है तब मैंने बोला कि आंटीजी इसमें नसीब वाली बात कहा है जब मन पड़े खा लो बाजार से लाकर तो बोली कि बाजार में मिल जाते है पर जो केला मुझे चाहिए वो नहीं मिलता तो मैं बोला कि आपको कौन सा केला चाहिए, आपके घर में है तो सही।

तो उदास हो कर बोली कि उस केले में अब मजा नहीं रहा अब वो केला कमजोर पड़ गया तो मैं हसने लगा और बोला कि केला तो आपके सामने है पर आप उसे देख नहीं रही है और हसने लगा तो सुनीता आंटी भी हसने लेगी ‘

अंततः हमारी हँसी मजाक का end हो गया, क्योकि मेरे पापा घर में आ गये थे।

मेरे पापा और कुसुम की मम्मी ने नमस्ते किया और पापा हॉल में पड़े अपने बेड पर बैठ गये, अब थोड़ी देर में सब हॉल में से खिसकने लगे। पहले सुनीता आंटी, फिर मै, जूली और रिंकी भी अपने कमरे में चली गई। मेरे मम्मी पापा और सास फॉर्मल बातें करते हुए जूली की शादी की बात करते हुए चुप हो गये।

मै बेडरूम में गया तो कुसुम लेटी हुयी थी, कुसुम रिंकी, मुझे और जूली को देखकर उठ कर बैठ गयी। मै जाकर कुसुम के पास बैठ गया। वो तीनो इधर उधर की बातें करने लगे। मै अपने मोबाइल में fb पर लड़कियों के इंस्टा reel डांस वीडियो देखने लगा।

तो जूली बोली , “क्या जीजू ऐसा डान्स देख रहे हो . इससे अच्छा तो मे नाच सकती हूँ .” मैने पहले सोचा की सायद जलन होने की वजह से वोह बोल रही होगी . लेकिन दूसरी बार कहने पर मैने फोन बंद कर दिया और बोला , “तो दिखाओ मेरी प्यारी साली साहिबा . हम भी देखें तुम कितना अच्छा नाच सकती हो .”चल्लेंज मान कर जूली ने एक ऑडियो लगा कर नाचना चालू कर दिया . ऑडियो रीमिक्स सोंग्स की थी . और पहला गाना ही

“तुम तो धोके बाज हो वादा करके भूल जाते हो ” था . जूली गाने की धुन पर नाचने लगी .

इसी बीच रिंकी भी मुझे पकड़कर घसीट कर अपने साथ जूली के साथ नाचने लगी। कुसुम हम तीनो का वीडियो बनाने लगी।

गाने की लाइन -- हम तीनो बारी बारी से गाते हुए नाच रहे थे।

जूली--- छोड़ो गिले शिकवे हमसे प्यार करो जी

मै-- आया अभी आया इंतजार करो जी

रिंकी--- आओ आकर चूम लो, प्यास बढाकर छोड़ जाते हो।

रिंकी शर्ट पहने हुए थी उसने बटन खोलकर मेरी ओर उछाल फेंका . और अब अंदर झीना समीज पहने हुए थी जिसमें उसके nipple साफ साफ दिख रहे थे। मेरी साँसे ये सब देख कर भारी हो उठी .

मेरे पुरे शरीर मे वासना की लहरे हिलोरे मार रही थी . लंड उत्तेजना से पागल हो रहा था . पुरे बदन मे लहू सन -सन -सन करके दौड़ रहा था . अपने लंड को किसी तरह से मैने दबा रखा था.. जूली और रिंकी का बदन कहीँ से भी स्थिर नही था . दोनों का जलवा अपने पुरे उफान पर था .

कभी नजदीक आकर तो कभी दूर से ही मुझ को अपने बदन की नुमाइश कर के उकसा रही थी . दोनों की जवानी और शबाब अपने पुरी रवानी पर था . पूरे बेडरूम मे जोर जोर से उठ बैठ रही सांसे म्यूजिक से ताल से ताल मिला रही थी .

मेरी बेटी और साली दोनों ही धून के साथ अपनी ताल मेल बैठा कर मुझ को बेकाबू करने मे लगी थी . मै भी बेकाबू हो कर अपने सूख रहे होंठों पर जीभ बार बार सहला रहा था .

जूली की भरी भरी छातियां उछल उछल कर मुझ को आमंत्रण दे रही थी की आओ मुझे दबोच लो . उसकी मस्त जंघे हाथी की सूंड की तरह झूम रही थी . कभी फैला कर तो कभी सिकोड़ कर अपनी सलवार में चमक रही चूत को दिखा और छुपा रही थी . पीछे घूम कर अपने चूतड मटका मटका कर नाच कर मेरे लंड को उसने शायद एक इंच ज्यादा लंबा कर दिया ।

और रिंकी की तो बात ही क्या थी.वह बेकाबू हो चुका थी .. मैने कुसुम की ओर देखा वो वीडियो कम बना रही थी बस मुझे घूर रही थी। तभी मै वापस से कुसुम के पास जा ही रहा था की दोनों ने मुझे वापस धकेल कर बेड पर बैठा दिया और अपने अपने चूतड को मेरी गोद पर रख कर मेरे लंड को रगड़ने लगी .लंड की इस रगड़ाई से एकदम बौखला गया .

मेरे बदन का सारा लहू मनो इस वक्त मेरे लौडे मे समाया हुआ था . मैने अपने दोनों हाथों से दोनों के एक एक स्तन को जकड लिया . जूली के भारी -भारी उरोज मेरे हाथों मे भी नही समां रहे थे . चिकनी ड्रेस की वजह से जूली के चूतरो पर से मेरे हाथ फिसल रहे थे .

जूली के चूतर शिकारी को इतना नजदीक देख कर फड़फडाने लगे . वो अपने सीने को अपने कंधे पीछे की और करके आगे तान रही थी . जिससे उसके भरपूर मस्त उरोज और आगे आकर इस समा को और रंगीन बना रहे थे . मैने पागल होते हुए उसकी उरोजो के सामने से पकड़ कर और उसके चुंचियों को को अपने हाथो मे लेकर तौलने लगा . फिर उसके दोनों घुन्डियों को अंगुली के बीच मे लेकर जोर से मसल दिया .जिससे उसकी आग और बढ़ गई . गाने की मादक धुन के साथ नाच रही रिंकी और जूली को अपने बदन पर से बचे खुचे कपडे उतार कर फेंकते हुए देख मेरे दिल की धड़कन और बढ़ गई . रिंकी और जूली एक अच्छी डांसर तो वो थी ही .

तभी पीछे से आकर अपना चेहरा मेरे गाल से चिपका कर जूली बोली , “ जिजू

बोलो क्या बोल रहे थे .” जूली के मुँह से सिस्कारी निकल रही थी . “उई.ई.ई.ई.i माँ आ.अ.अ.आ….स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्. धीरे से .”

इधर रिंकी ने अपने चूतड की रगड़ाई चालू रखी थी . मेरे लंड को काफी दिनों बाद चूत की महक मिल रही थी . फिर यह तो मेरी बेटी और साली की चूत थी . नशा डांस के साथ शबाब का डबल हो रहा था . मै उन दोनों नशीले बदन को अपनी बाँहों मे समेट कर इस रगड़ाई को रोक कर अपनी

अनियंत्रित हो रही सांसों को समेटने मे लगा . और जूली के मुह से

आह्ह..ओह्ह..उफ़..स्.स्.स्.स्.स्…जिजू..आई..ल व ..यु…ओओओह..जैसी मादक सिस्कारी निकल रही थी.

“उई.ई.ई.ई.i माँ आ.अ.अ.आ….स्.स्.स्.स्.स्.स्.स्. धीरे से .”

गाना एकदम से बंद हो गया और कुसुम की भारी आवाज हमारे कानों में सुनाई देने लगी।

Enough is enough. बहुत हो गया डांस जूली मेरी प्यारी बहन अब बचे हुए ठुमके आठ दिन बाद अपने होने वाले पति के साथ सुहाग रात के लिए बचा कर रख। और मेरे पति और अपने जीजू को बख़्श दे।

"" हम तीनो "दिल तो पागल है" फिल्म के होडिंग पर लगे रोमांटिक पोस्टर वाली अवस्था में थे ""

ये सुनकर मेरी हँसी छूट गयी।

हाहाहा हाहाहा

तभी मेरी मम्मी बेडरूम में आ गयी और बोली जूली चल बेटी तेरी मम्मी घर जा रही है। और हम सब उनको छोड़ने अपने घर के दरवाजे पर आ गये।

मेरे पापा बोले अरुण बेटा तुम इनको घर तक छोड़ आ, मै ये सुनकर बहुत खुश हुआ पर जाहिर नही होने दिया और कुसुम की तरफ देखने लगा तो कुसुम ने भी व्यंग भरा इशारा किया "जाइए छोड़ आइये"।

तो मैं तैयार हो गया और बोला ठीक है चलिए तो जूली और सासु दोनों तैयार हो गई

तब जूली और सासु दोनों को बिठा लिया जूली सलवार सूट में थी और सासु साड़ी में इस कारण जूली बीच में दोनों तरफ टाँगे फैला कर बैठ गई

और उसके पीछे सासु बैठ गई पूरे रास्ते में जूली कि चूचियाँ मेरे पीठ से टकराती रही जो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था मैंने दोनों को एक होटल में नास्ता भी कराया, हम होटल से बाहर निकल रहे थे तभी जूली की सहेली अपनी मम्मी के साथ शॉपिंग करती हुई मिल गयी और जूली से बातें करने लगी। उसकी पांच दिन बाद शादी थी और उसने मुझे कुसुम के साथ आने का invitation दिया। मुझे कसम देते हुए बोलि आपको जरूर आना है और जूली को मुझे लाने की जिम्मेदारी सौंप दी।

शाम के करीब 6 बजे तक मैं अपनी सासु और साली जूली दोनों को मेरी बाइक पर घुमाता रहा जूली मुझसे फिर से पट गई थी और मेरे कंधे में हाथ रखकर बाइक पर बैठी थी और मै उन दोनों को उनके घर छोड़ कर फिर मै वापस अपने घर आ गया ।

जारी है
 
अध्याय --- 13 ----

-- ""जिद "" टूटती मर्यादा बिखरते रिश्तें --

और उन दोनों को उनके घर छोड़ कर फिर मै वापस अपने घर आ गया ।

रात के आठ बज चुके थे हम सभी लोग एक साथ बैठकर खाना खा रहे थे।

रिंकी मेरे बगल में बैठी हुई थी, खाते खाते वो मुझसे बोली पापा अगर जूली मौसी और नानी आज नही आती तो आप मुझसे बातें नही करते, हमेशा कटे कटे से रहते हैं, मम्मी भी आपकी शिकायत कर रही थी कि आप घर पर कम टाइम स्पेंड करने लगे है" Thank god मौसी और नानी के आने से पापा आप थोड़े से कूल तो हुए पिछले 15 दिन से तो आप बिल्कुल change. हो गये थे।

" नहीं बेटी, ऐसी तो कोई बात नही, वो तो बस थोड़ा काम ज्यादा होने की वजह से कभी कभी घर लेट आना होता है वरना तो...... " मैने अपना बचाव करते हुए कहा

"वरना तो क्या, मम्मी ने मुझे सब बताया है कि आप कभी कभी नही बल्कि हमेशा ही लेट आते है, खाना भी बाहर ही कहते हो,बोलो मैं सही बोल रही हूं या नहीं" रिंकी ने चहकते हुए कहा

" नहीं तो , मैं तो ज्यादातर घर ही खाता हूं खाना" मै अब कुसुम से अपनी उस रात की घटना को भूलकर अपना बचाव करने में लगा था।

"आप ऐसे नही मानोगे मैं अभी मम्मी को बुलाकर पूछती हूँ........मम्मी......ओ...मम्मी.....जरा इधर तो आना" रिंकी अब जोर जोर अपनी मम्मी मम्मी को आवाज़ लगाने लगी

"आ रही हु, ऐसे क्यों चिल्ला रही है, ये लड़की भी न बस" कुसुम जल्दी ही रोटिया लेते हुए आयी और खुद भी वहीं बैठ गयी

"क्या है ,क्यों जोर जोर से चिल्ला रही थी " कुसुम ने हल्का सा गुस्सा करते हुए पूछा और साथ ही मेरी प्लेट में रोटी सर्व करने लगी

"मम्मी, पापा बोल रहे हैं कि वो रोज़ाना घर पर टाइम से आते है और हमेशा घर पर ही खाना खाते है, आप बोलो की ये सच है या झुठ" रिंकी ने कुसुम की ओर देखकर कहा।

"अरे वाह, आप तो अब झूठ भी बोलने लगे हो, रिंकी ये 15 दिन से लेट ही आते है, कितनी बार समझाया कि घर जल्दी आया करो पर इनके कानो पर तो जूं तक नही रेंगती, अब तू ही इन्हें समझा" कुसुम ने लगभग शिकायत के अंदाज़ में मेरी तरफ देखकर कहा।

मुझे कुसुम से एक बार फिर से डर लगने लगा।

मेरे इस तरह डरने से कुसुम और रिंकी को भी हंसी आने लगी , और उनको इस तरह हसता देख मै भी थोड़ा मुस्कुरा दिया

,

"आज कितने दिनों बाद आपको हसता देखा है, वरना तो 10-15 दिन से तो जैसे आपकी हंसी भी चली गयी थी" कुसुम ने मुझे मुस्काता देख कहा

"आप चिंता मत कीजिये मम्मी, अब मैं पापा को बिल्कुल पहले जैसा बना दूंगी" रिंकी ने 'पहले' शब्द पर कुछ ज्यादा ही जोर दिया था

धीरे धीरे मै भी कुसुम से थोड़ा खुलता जा रहा था और धीरे धीरे मेरी झिझक कम होती जा रही थी, मुझे यकीन होता जा रहा था कि कुसुम शायद उस रात वाली घटना को भुलाकर मुझे एक ओर मौका देना चाहती है, शायद कुसुम ने मुझे माफ कर दिया है, इसलिए मुझ को भी अब उससे बातें करने में कम झिझक हो रही थी

हम सब अभी बाते कर रहे थे कि रिंकी ने अपनी अपनी चाल का अगला हिस्सा चला

"अच्छा पापा, वो मुझे एक और पुरानी बुक चाहिए थी स्टोररूम से , तो उस दिन की तरह कल भी आप मुझे चढ़ा लोगे क्या" रिंकी ने थोड़ी मादक आवाज़ में कहा

"हाँ हाँ क्यों नही , मैं तुम्हे जरूर चढ़ा लूंगा बेटी.....मेरा मतलब चढ़ा दूंगा बेटी" मैने कहा

"देख लो पापा, मुझे चढ़ाना इतना आसान नही है, कहीं आप दब न जाये" रिंकी ने अपने चेहरे पर कुटिल मुस्कान लाते हुए कहा

"चिंता मत कर बेटी, तू देखना मैं तुझे कितनी अच्छी तरीके से चढ़ाता हूँ" मुझे भी धीरे धीरे इस खेल का मज़ा लेने लगा था, मै सोच रहा था कि मेरी बेटी बड़ी भोली है वो मेरे सब्दो का मतलब नही समझ रही पर मुझे क्या पता था कि खेल तो मेरी बेटी ने ही शुरू किया है

"हम्म्म्म, वो तो पता लग जायेगा कि आप कैसे चढ़ाते है" रिंकी ने कहा

हम दोनों अभी बातें कर ही रहे थे कि अचानक कुसुम का मोबाइल बजने लगा और वो तेज़ तेज़ कदमो से हमारे बेडरूम में चली गई।

8-10 मिनिट बाद कुसुम बेडरूम से निकलती हुई हमारे पास आ खड़ी हुई, वो बहुत खुश सी लग रही थी

"अरे अब तुम्हे क्या हुआ, इतनी खुश क्यों हो? " मैने उसे इस हालत में देखकर पूछा।

अभी SDM साहब का फोन आया और उन्होंने कहा आप दिमापुर आ जाओ में यहाँ उपनिदेसक लगा हुआ हु यहाँ तेहसिल की तरफ से सविंदा पर लगा देता हु ३०००० महिना हे । वे बार बार कह रहे है एक बार आकर देख लो तुम्हे कुछ नहीं करना हे कभी कभी ऑफिस में आना हे कल कलेक्टर के पास इंटरव्यू हे उन्होंने कहा तुम्हारा नाम फ़ाइनल हो गया हे किसी को लेकर आ जाओ।

कुसुम की ये बात सुनकर मेरे मम्मी पापा खुशी से उछल पड़े, और बोले thats good news. Congralutaion मेरी बहू।

मै--- एक मिनिट wait. कुसुम कोनसी जॉब, कौन sdm ये सब क्या है मुझे कुछ समझ नही आ रहा है। आखिर तुम क्या कह रही हो, क्या हुआ है, क्या चल रहा है इस घर में कोई मुझे बताएगा???

कुसुम बोली मै आपको शुरु से सब बताती हूँ। आप मेरे साथ बेडरूम में चलिए।

ये बात हमारी शादी के पहले की है,

मै ऍम ऐ कर रही थी और हमारे वार्ड में मेरे जितनी पढ़ी लिखी कोई और नहीं थी और हमारी आर्थिक हालत भी ठीक नहीं थी तो हमारे वार्ड पार्षद जी ने मुझे आँगन बाड़ी में लगा दिया साथ ही अस्पताल में आशा सहयोगिनी का काम भी दे दिया।

फिर एक बार तहसील मुख्यालय पर हमारे प्रक्शिष्ण में एक अधिकारी आये उन्होंने मुझे शाम को मंदिर में देखा था और मुझ पर फ़िदा हो गए मेने उनको नहीं देखा फिर उनका एक दिन फोन आया मेने पूछा कोन हो तुम उन्होंने कहा में उपखंड अधिकारी हु आपके प्रक्षिशन में आया था मेने कहा मेरा नंबर कहा से मिला उन्होंने कहा रजिस्टर में नाम और नंबर दोनों मिल गए मेने पूछा काम बोलो उन्होंने कहा ऐसे ही याद आ गई मेने सोचा केसा बेव्फूक हे खेर फिर कभी कभी उनका फोन आता रहता।

इधर मेरा बी.एड. में नंबर आ गया था फिर उनका तबादला भी हो गया कभी कभी फोन आता लेकिन कभी गलत बात उन्होंने नहीं की एक बार बी.एड. करते मै कोलेज की तरफ से घुमने नागालैंड गयी तब उनका फोन आया मेने कहा नागालैंड घुमने आये हे तो वो बड़े खुश हुए उन्होंने कहा में अभी नागालैंड में ही एस डी एम् लगा हुआ हु में अभी तुमसे मिलने आ सकता हु क्या मेने मन कर दिया मेरे साथ काफी लडकिया और टीचर थी में किसी को बातें बनाने का अवसर नहीं देना चाहती थी और वो मन मसोस कर रह गए !

फिर ऐसे ही दो तीन साल निकल गए, और हमारी शादी हो गयी। अभी दस दिन पहले

उनका फोन आया और उन्होंने कहा आप दिमापुर आ जाओ में यहाँ उपनिदेसक लगा हुआ हु यहाँ तेहसिल की तरफ से सविंदा पर लगा देता हु ३०००० महिना हे।

मेने मना कर दिया वे बार बार कहते एक बार आकर देख लो तुम्हे कुछ नहीं करना हे कभी कभी ऑफिस में आना हे मेने कहा सोचूंगी फिर बार बार कहने पर मेने अपने फोटो स्टेट डिग्रिया ईमेल से भेज दी।

आज फिर उनका फोन आया कल कलेक्टर के पास इंटरव्यू हे तुम्हारा नाम फ़ाइनल हो गया हे किसी को लेकर आ जाओ।

मैने कुसुम से कहा कोई जरुरत नही है कही जाने की, हो गयी जॉब मै 30000 कमाता हू, तुम 10000 कमाती हो पापा की पेंशन आ रही है। No need any other job.

कुसुम-- तुम्हे जरूरत नही होगी पर मुझे है और मुझे जॉब करना पसंद है मैने तुम्हे शादी के पहले ही बोला था। आपको तो मेरा support करना चाहिए कि उम्र के आखिरी पड़ाव में मुझे gov. जॉब मिल रही है।

लेकिन तुम अब अपना male ego क्यो बीच में ला रहे हो।

मै बोला इसमें male ego की बात कहाँ से आ गयी।

तो कुसुम बोली और नही तो क्या आपको लग रहा है कि मै भी gov. Job करके आपके बराबर पैसे कमाउंगी इसलिए आपके ego पर चोट पहुँची है।

मै-- कुसुम तुम गलत सोच रही हो मै तुम्हे जॉब करने से नही रोक रहा हूँ। तुम अभी प्रेग्नेट हो, और ऐसी हालत में अकेले रहना ठीक नहीं होगा।

कुसुम-- गुस्से मे वाह वाह इसमें भी आपकी गलती है मैने कितनी बार बोला मै अभी माँ नही बनना चाहती हूँ, हमें कंडोम use करना चाहिए पर आपको कंडोम लगाकर संभोग करने में मजा नही आता है। जबकि सच्चाई ये है कि आप जैसे हर husband जानबूजकर् संभोग में कंडोम इसलिए नही लगाता है कि उसे जल्द से जल्द अपनी पत्नी को प्रेग्नेट कर उसकी आजादी खतम करनी होती है और सबसे बड़ी सोच ये होती है कि शादी के दो महीने में पत्नी को पेट से करके सबको अपनी मार्दांगी दिखाते फिरते है कि मै बाप बनने वाला हू।

मै--- तुम्हारा दिमाग खराब है मै ऐसा नहीं सोचता मै।

कुसुम-- एक लंबी सांस लेते हुए ठीक है मान लेती हूँ मै, पर आज मै प्रेग्नेट हु, कल बोलोगे बच्चा छोटा है, बच्चा थोड़ा बड़ा होगा तो फिर प्रेग्नेट कर दोगे। मै इस प्रेग्नेट और बच्चे के चकरव्युह में फँसकर अपनी अभी मिल रही ऑप्पोर्चनिटी नही खोना चाहती हूँ।

Its my last decision i am going.

मै--- गुस्से में एक बात बता तू तेरा sdm बोल रहा है कोई काम नही है तो क्या वो तुझे रात में साथ सोने की salary देगा।

कुसुम-- शी कितनी घटिया सोच है अरुण तुम्हारी अपनी पत्नी से ऐसे बात कहते हुए शर्म नही आ रही है।

मेरे और कुसुम के बीच कहासुनी बढ़ गयी और कुसुम बेडरूम से निकलकर हॉल में अपने सास ससुर के पास जाकर बैठ गयी।

मै भी कुसुम के पीछे हॉल में आ गया।

मेरे पापा -- अरुण बेटा क्या प्रॉब्लम है तुम्हे??

मै-- बहुत प्रॉब्लम है, मै कमा रहा हूँ कुसुम को कमाने की no need. कुसुम अभी प्रेग्नेट है, मै उसके साथ दिमापुर नही रह सकता, मेरी जॉब यहाँ है, ये वहा अकेली कैसे रहेगी, अभी संविदा पर रख रहा है, कोई परमानेंट थोड़े ही है। हमारी रिंकी बेटी भी छोटी है उसकी पढाई, घर के काम खाना, पीना,कौन करेगा। इसकी बहन जूली की शादी के भी आठ दिन बचे अपने मायके नही जायेगी क्या??

कुसुम बीच में बोल पड़ी -- पापा मेरी जैसी कितनी शादी शुदा लड़किया है जो अकेली रहती है, प्रेग्नेट होकर भी जॉब करती है।मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। और मै ये मौका नही हाथ से छोड़ने वाली।

मेरे पापा-- अरुण बेटा तेरे सारे सवाल बेकार है, मुझे बस इतना कहना है कि बहू को अभी जोइनिंग लेकर बस 2-3 महीने नौकरी करना है उसके बाद उसकी metrnity leave हो जायेगी फिर वापस अपने घर में रहेगी रही बात बहू के अकेले रेहने और प्रेग्नेसी में देखरेख का इसलिए मेरी बहु कुसुम के साथ तेरी मम्मी भी चली जायेगी।

इधर रिंकी जो इतनी देर से सारी बातचीत सुन रही थी, उसके दिमाग मे एक खुराफाती तरकीब बन चुकी थी

"नहीं मम्मी, आप सही बोल रही हो आपको जाना जरूरी है" पापा का ख्याल रखने के लिये मै हू। रिंकी ने सबको चोंकाते हुए कहा।

"बेटी तुम्हारी मम्मी गलत फैसला कर रही है, यहां पर तुम अकेले परेशान हो जाओगी" मैने रिंकी को अपना पक्ष लेते हुए कहा

"नहीं, मैन एक बार बोल दिया तो बोल दिया और वैसे भी मैं अकेली कहाँ हूँ, आप हैं ना मेरे साथ" रिंकी ने कनखियों से मेरी ओर देखकर कहा, उसके चेहरे पर अजीब सी मुस्कुराहट थी जिसे मै समझ नही पा रहा था

मेरी मम्मी -- ओह मेरी रिंकी गुडिया कितनी समझदार हो गयी है "चल ठीक है, मेरी रिंकी इसी बहाने अपने पापा के लिए खाना वगरैह बना देना ,ताकि इन्हें बाहर का खाना ना खाना पड़े"

मेरे पापा -- बहू कुसुम कल सुबह दस बजे कलेक्टर से मिलना होगा, इसलिए तू और अरुण जाकर तैयार होजा, अभी 1 घण्टे में ही निकलो, सुबहः तक वहां तुम लोग पहुंच जाएंगे" मेरे पापा ने मुझे लगभग आदेश देते हुए कहा।

इधर मेरी मम्मी जो इतनी देर से सारी बातचीत सुन रही थी, वो भी बोल पड़ी कुसुम अरुण के साथ मै भी चल रही हू। दिमापुर मे रिश्तेदार भी है जिससे मै बहु की रहने की ठीक से व्यवस्था करवा दूँगी मै तो उसके साथ रहूँगी। वैसे भी वो पेट से है।

"जैसा आप ठीक समझे , आप भी तैयार हो जाये।

मै, कुसुम और मम्मी तीनों बस स्टैंड पहुँच गए और अच्छे से सामान रखकर बस में बैठ गये, स्लीपर कोच बस थी और हमने चार सवारी वाला कोच बुक किया था, कुसुम और मेरी मम्मी एक साथ बैठी हुई थी और बातें कर रही थी, मै भी सामने बैठकर मोबाइल में हेडफोन लगाकर फिल्म देख रहा था और बस अपनी रफ़्तर से चल रही थी। दो घंटे बाद मेरी फिल्म खतम हो गयी और मै सोने की कोशिश कर ने लगा ।

मेरी मम्मी और कुसुम अभी भी बातें कर रही थी तो मैने अपने कानों में मम्मी के मुह से ऐसे शब्द सुने कि मेरी आँखों की पूरी नींद उड़ गयी। मेरी मम्मी कुसुम से कह रही थी कि बहू अभी तक तुम आगणबादी में औरतो और लड़कियों के साथ काम करती थी पर अब सरकारी ऑफिस में आदमियों के साथ काम करोगी। बहू तुझे तो पता है जमाना खराब है हर आदमी की नजर और नियत अच्छी नही होती है तो तुझे बड़ी ही सावधानी से काम करना होगा।

कुसुम-- मम्मीजी आप जो कह रही है वो सच है लेकिन आदमी की नजर और नियत खराब की बात है वो तो क्या ऑफिस और क्या घर हर जगह हमारे साथ के लोगो की भी खराब हो सकती है। मुझे अपनी मर्यादा, इज्जत और रिश्ते की रक्षा करनी आती है। क्योकि मुझे अपनी लाइन और लिमिट हमेशा याद रहती है।

मम्मी मेरी थोड़ी इठती हुई बोली क्या कह रही हो बहू भला घर के मर्द अपनी बहन बेटी पर बुरी नजर थोड़े ही डालेंगे।

कुसुम-- मम्मीजी मै ऐसे ही थोड़े बोल रही हूँ मेरे साथ ऐसा हुआ है इसलिए बोल रही हूँ। कम उम्र में विधवा होना मेरे लिए एक श्राप से कम नही था, घर हो या बाहर, रिश्तेदार हो या अजनबी हर कोई मेरे जिस्म को भोगने की नियत से ही देखता था।

"कुसुम के मुह से ये बात सुनकर मेरे कान एकदम खड़े हो गये और मै पूरे ध्यान से कुसुम की बात सुनने के लिए बेताब होने लगा और सोने का बहाना करके कुसुम की बातें सुनने लगा "

मेरी मम्मी चोंकते हुए बोली क्या हुआ था बहू तो कुसुम बताने लगी।

मुझे विधवा होकर डेढ़ साल हो गया था एक दिन मेरे पूरे फैमिली के लोग एक रिश्तेदार के यहाँ तेरहवीं पर फेरे के लिये गये थे, रिंकी छोटी होने की वजह से मै नही गयी तो मै घर में अकेली रह गयी।

मेरे पापा और ताऊ के रिश्ते में सुधार हो गया था और मेरे ताऊ का लड़का अपनी फैमिली के साथ हमारे पड़ोस में रहने लगा था। मेरे ताऊ के लड़के का घर आस पास होने की वजह से मेरी भाभी ने कहा तू अकेली केसे सोएगी डर जाएगी तू मेरे बेटे को अपने घर लेजा !

मेरा भतीजा करीब 18 साल का था मै भी 19-20 की थी मेने सोचा बच्छा हे इसको साथ ले जाती हु ! खाना खाकर हम लेट गए बिस्टर नीचे की पास पास किये हुए थे थोड़ी देर बातें करने के बाद रिंकी को दूध पिला कर मुझे नींद आ गई ! आधी रत को अचानक मेरी नींद खुल गई मेरा भतीजा मेरे पास सरक आया और एक हाथ से मेरा एक वक्ष भींच रहा था और दुसरे वक्ष को अपने मुह में ले रहा था।

हालाँकि ब्लाउज मेनें पहना हुआ था मेरे गुस्से का पार नहीं रहा में एक झटके में खड़ी हो गई लाइट जलाई और उसे झंजोड़ के उठा दिया !मेरे गुस्से की वजह से मुंह से गाली निकल रहे थे वो आँखे मलता हुआ पूछने लगा :- “क्या हुआ बुआ ?” मुझे और गुस्सा आया मेने कहा :-“अभी तू क्या कर रहा था ?” पठ्ठा बिलकुल मुकर गया और कहा में तो कुछ नहीं कर रहा था

मेने उसको कहा अपने घर जा वो बोला इतनी रात को मेने कहा हा उसका घर सामने ही था वो तमक कर चला गया और में दरवाजा बंद कर के सो गई ।

सुबह मेने अपनी भाभी उसकी मम्मी को कहा तो वो हंस कर बात को टालने लगी कहा इसकी आदत हे मेरे साथ सोता हे तो भी नींद में मेरे स्तन पीता हे मेने कहा अपने पिलाओ आइन्दा मेरे घर सोने की जरुरत नहीं हे मुझे उसके कुटिल इरादों की कुछ जानकारी मिल गई थी। मेरी भाभी भी चालू थी पड़ोसियों ने उसे मुझे पटाने के लिए लालच दिया था इसलिए वो अपने बेटे के लिए मेरी टोह ले रही थी उसे पता था मुझे कम उम्र में विधवा हुए डेढ़ साल हो गए थे शायद ये पिघल जाये पर मैं बहुत मजबूत थी अपनी इज्जत के मामले में,

इससे पहले भी कईयों ने मुझ पर डोरे डाले थे। मेरे घर के पास मंदिर है उसमे आने का बहाना लेकर मुझे ताकते रहते थे

उनमे एक शहर के धन्ना सेठ का लड़का भी था जिसने कही से मेरे मोबिल नंबर प्राप्त कर लिए और मुझे बार बार फोन करता पहले मिस कॉल करता फिर फोन लगा कर बोलता नहीं।

मै इधर से गलियां निकलती रहती फिर एक दिन हिम्मत कर उसने अपना परिचय दे दिया और कहा में तुमको बहुत चाहता हु इसलिए बार बार मंदिर आता हु मेने कहा तुम्हारे बीबी बच्चे हे शर्म नहीं आती फिर भी नहीं माना। तो मेने उसको कहा शाम को मंदिर में आरती के समय लाउड स्पीकर पर ये बात कह दो तो सोचूंगी।

तो उस समय तो हा कर दी फिर शाम को उसकी फट गई फिर उसने कहा की मुझे आपकी आवाज बहुत पसंद आप सिर्फ फोने पर बात कर लिया करे में कुछ गलत नहीं बोलूँगा मेने कहा ठीक हे जिस दिन गलत बोला बात चीत कट और मेरा मूड होगा या समय होगा तो बात करुँगी ये सुनते ही वो मुझे धन्यवाद् देने लगा और रोने लगा और कहने लगा चलो मेरे लिए इतना ही बहुत हे कम से कम आपकी आवाज तो सुनने को मिलेगी में बोर होने लगी और फोन काट दिया।

उसके बाद वो दो चार दिनों के बाद फोन करता मेरा मूड होता तो बात करती वर्ना नहीं वो भी कोई गलत बात नहीं करता मेरी तारीफ करता इस से मुझे कोई परेशानी नहीं थी मेरे बी.ऐ. हो चूका था मेने private स्कूल ज्वाइन कर लिया पेरा टीचर बन गई वहा भी और टीचर मुझ पर ट्राई करते पर मेने किसी को घास नहीं डाली.

साल निकलती गयी और मेरे पापा का प्रीति दीदी और dr. जीजा पर गुस्सा खतम हो गया और वो हमारे घर आने जाने लगे।

आपको तो पता ही हम ३ बहने हे सबसे बड़ी प्रीति, फिर मै, सबसे छोटी जूली है । मै मायके में ही रहने लगी थी। हमारी आर्थिक हालत अब भी थोड़े खराब थे तो प्रीति दीदी और जीजाजी जब भी घर आते तो पैसे और जरूरत के सामान देकर मदद कर देते थे।

मेरे सबसे बड़े Dr. जीजाजी जब भी घर आते तो मुझसे हंसी मजाक करते थे मै मासूम थी सोचती थी में साली हु इसलिए मेरा लाड रखते हे इसलिए वे कबी यहाँ वहा हाथ भी रख देते थे तो मै ध्यान नहीं देती थी

जीजा जी जीजी के साथ आते हम बहुत खुश होते हंसी मजाक करते मेरी मम्मी कभी कभी चिढती और कहती अब तुम बड़ी हो कोई बच्ची नहीं हो जो अपने जीजा जी से इतनी मजाक करो पर में ध्यान नहीं देती थी

कभी वो मुझे अपनी बाँहों में उठा कर कर मुझे कहते थे अब तुम्हारा वजन बढ़ गया हे वेसे में बहुत दुबली पतली थी। मेरे जीजाजी उस वक्त करीब ४६-४७ साल के थे ५.१० फुट उनकी लम्बाई हे अच्छी बॉडी हे बाल उनके कुछ उड़ गए हे पर फिर भी अच्छे लगते थे पर मेने कभी उनको उस नजर से नहीं देखा था मेने उनको सिर्फ दोस्त और बड़ा बुजुर्ग ही समझा था।

इस बीच में कई बार में अपनी दीदी के ससुराल गई वहा जीजा जी मुझसे मजाक करते रहते दीदी बड़ा ध्यान रखती मुझे कोई गलत नही लगता ।

दीदी जीजू की शादी को अभी 3 साल ही हुए थे और उनकी 1 बेटी भी थी श्रेया उनका घर ज्यादा बड़ा नहीं था 2 रूम किचन फ्लैट था मेरा सामान 2ण्ड रूम मे रखवा दिया था मैंने अपने कपडे चेंज किये और गर्मियों के दिन थे इसलिए 1 पतली सी कैपरी और पतला सा टॉप पेहेन लिया फिर दीदी से थोड़ी बातें की । रिंकी को दूध पिला कर फिर थोड़ी देर बाद सो गयी।

शाम को उठी तो दीदी खाना बना रही थी मैंने सोचा उनकी हेल्प कर दू थोड़ी तो किचन मे उनके पास जाके खड़ी हो गयी और उनकी हेल्प करने लगी इतने मैं जीजू भी आ गये और बातें करने लगे 1 दम से लाइट चली गयी और मुझे अपने हिप्स पर 1 हाथ महसूस हुआ वो हाथ मेरे पूरे हिप्स पर घूम रहा था सारी उंगलिया मेरे हिप्स को सहला रही थी वो हाथ मेरे हिप्स पर घूमते हुए मेरे हिप्स को सहला रहा था और जोर 2 से दबा रहा था।

मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या करू क्या नहीं करू ये किसका हाथ है मेरे पास दो ही तो लोग थे जीजू और दीदी मैं ये सब सोच रही थी तभी 1 ऊँगली मेरे दोनों हिप्स के बीचे की दरार में घुस गयी और अंदर घुमने लगी मेरे अंदर 1 अजीब सी फीलिंग आ रही थी मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था मेरी आँखें बंद हो चुकी थी और मैंने नोटिस किया की मेरी पेंटी भी गीली हो गई थो थोड़ी सी इतने मे लाइट आ गयी और वो हाथ गायब हो गया लाइट आयी तो मैंने देखा मेरे पास दीदी खड़ी थी और उनके पास जीजू मैंने सोचा ये सब किसने किया होगा मैंने अंदाजा लगाया की शायद अँधेरे मे जीजू को पता नहीं होगा की वो किस के हिप्स पे हाथ फेर रहे है तो गलती से हो गया होगा।

कुछ दिन बाद मै वापस अपने घर आ गयी कुछ महीनों के बाद जीजा जी मेरे घर में आये दीदी नहीं आई थी वे रत को कमरे में लेटे थे टीवी देख रहे थे। मेरे पापा मम्मी छत पर सोने चले गए मेरी मम्मी ने मुझे आवाज दी आजा सो जा। मेरा मनपसंद प्रोग्राम आ रहा था मेने कहा आप सोवो में आती हु में जहा जीजा जी बेड पर सो रहे थे उसी बेड पर बेठ कर टीवी देखने लगी तोड़ी देर में जीजाजी बोले बेठे बेठे थक जाओगी सो कर देख लो मेने कहा नहीं फिर उन्होंने कहा मेने कहा मुझे देखने दोगे या नहीं, नहीं तो में चली जाउंगी थोड़ी देर तो वो सोये रहे।

फिर उन्होंने मेरे कंधे पकड़ कर मुझे अपने साथ सुलाने की कोशिश करने लगे मेने उनके हाथ झटके और खड़ी हो गई वो डर गए मेने टीवी बंद की और मम्मी के पास जाकर सो गई सुबह चाय देने गई तो वो नज़रे चुरा रहे थे मेने भी मजाक समझा और इस बात को भूल गई फिर जिंदगी पहले जेसी हो गई ।

अपनी अंतर्मन की बातें बताते हुए कुसुम चुप हो गयी और उसने अपना सिर मेरी मम्मी यानी अपनी सास के कंधे पर रख दिया। हमारे स्लीपर कोच में अजीब सी शांति हो गयी, सिर्फ बस के पहिए की रुकने की आवाज आ रही थी। मैने अपनी खुली आँखे मलते हुए खिड़की में से देखा तो बस एक ढाबे पर खड़ी थी।

मै, मम्मी और कुसुम बस में से उतरकर नीचे आ गये।

मेरे मन में कुसुम की बातें सुनकर बहुत से सवाल उठ रहे थे।

"" क्या कुसुम के साथ जो उसके जीजा ने किया वो गलत था, या मै भी जूली का जीजा हू और जो उसके साथ कर रहा हूँ, और करने की सोच रहा हूँ वो गलत है ""

आखिर जीजा साली का रिश्ता असल रूप में क्या है???

जारी है......
 
आभार शुक्रिया एक बार आपका हृदय प्रफुल्लित करने वाले review के तहे दिल से धन्यवाद.....

स्त्री/लड़की के चरित्र पर मेरी समझ के माध्यम से बस इतना जान पाया हू कि स्त्री/लड़की के चरित्र पर हमारा समाज बहुत मेहनत करता है, थोड़ी सी उसकी चारित्रहीनता की कही से कोई खबर मिल जाये तो बस उसकी आधी शादी की तैयारी तो उसी दिन हो जाती है।

( जुली और रिंकी के रूप मे दो अप्सराएं उसे अवश्य पथभ्रष्ट कर सकती है।)

ये लाइन पढ़कर मै गद गद हुए जा रहा हूँ 😂😂😂🙏
 
मै, मम्मी और कुसुम बस में से उतरकर नीचे आ गये।

रात के 11 बज चुके थे, बरसात का मौसम था, अभी अभी बारिश हो कर बंद हुई थी, ठंडी हवा चल रही थी। चारो तरफ गीला कीचड़ और उड़ते हुए हरे रंग वाले टिड्डे, और झींगुर दिख रहे थे। बस में से आधी साँवरिया ही उतरी थी ज्यादातर आदमी और दो तीन लेडी नजर आ रही थी। अधिकांश आदमी मेरी मम्मी और कुसुम को ही घूर रहे थे।

कुसुम और मम्मी साथ साथ चल रही थी, और मै उन दोनों के पीछे चल रहा था, दोनों ने ही सलवार कुर्ता पहना हुआ था। बस में पैर सिकोड़ कर बैठे रहने से मम्मी और कुसुम के कपड़े अस्त व्यस्त हो गये थे। मेरी पत्नी कुसुम तो avrege बदन की है और लंबी है लेकिन मेरी मम्मी की थोड़ी हाइट कम है और वो भारी बदन वाली एक bbw. लेडी है। जिससे मम्मी के नितम्बो का साइज मेरी वाइफ कुसुम के नितंबो से बड़ा है और यही वजह से मेरी मम्मी के नितंबो के दरार में उनकी सलवार का कपड़ा घुस गया था और उनके बड़े बड़े मटके जैसे नितंब चलने पर उछलते हुए नजर आ रहे थे।

और ज्यादातर लोग उनके नितंबो को ही घूर रहे थे। मेरी मम्मी की उम्र 50+ होगी पर वो फैशनेबल है जिससे 44-45 की लगती है। इस अंधेरी रात में वो दोनों सास बहू कम बहने लग रही थी। तभी मैने कहा मम्मी उधर कहा जा रही हो, वो बोली पेशाब करने।

मै बोला उधर ढाबे के बाथरूम में चलते हैं, तो वो बोली पहले नही बता सकता, मै बोला आप पहले नही पूछ सकती थी। मेरी और मम्मी की बहस सुनकर कुसुम हँसने लगी, हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा

मैने कुसुम से चिढ़ते हुए कहा why you are laugh ऐसी कोनसी बात बोल दी मम्मी ने जो खिल खिल कर रही हो।

कुसुम अभी भी हस्ती हुई बोली मै तो बस यूही........... हाहाहा हाहाहा हाहाहा

मै बोला अब चलो भी।

फिर हम तीनो ढाबे के बाथरूम की ओर जाने लगे, मम्मी और कुसुम लेडी बाथरूम में घुस गयी, मै गेट से थोड़ी दूर खड़ा हो गया। लेकिन जिस स्पीड से वो दोनों बाथरूम में घुसी थी, उससे दुगुनी स्पीड से वापस आ गयी। मम्मी सीधी मेरे पास आकर मुझ पर भड़क उठी। अरुण तुझे कुछ पता नही रहता है क्या ढाबे के बाथरूम कितनी गंदी है, वास आ रही है, और सबसे बड़ी समस्या पूरे बाथरूम में टिड्डे और झींगुर भरे हुए है। तो भी हम दोनों को अंदर भेज दिया।

मम्मी के मुह से लगे लगे मुझे दूसरी बार डाँट मिल गयी। और मेरी धर्म पत्नी कुसुम देवी मुझे चीढाते हुई दांत दिखाते हुए फिर हँस रही थी। हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा

मुझे इस बार कुसुम की हंसी सुनकर कुछ ज्यादा ही गुस्सा आ गया और मै मम्मी से बोल पड़ा मम्मी आप तो ऐसे चिल्ला रही हो जैसे आपकी dress में टिड्डे और झींगुर घुस गया हो। मम्मी बोली चुप कर बेशर्म और उधर रोड की दूसरी साइड चल मुझे जोर से पेशाब आ रही है। और हम रोड की दूसरी साइड चले गए।

कुसुम तो नवयोवना है इसलिए अपने मोबाइल की टॉर्च जलाकर फुर्ती में रोड से नीचे उतरकर पेशाब करने चली गयी पर मम्मी भारी शरीर, भरे हुए मांसल बदन, बड़े बड़े स्तनो और नितंबो वाली है और उनकी उम्र और बारिश की वजह से कीचड़ से बचते हुए रोड के किनारे से हल्के से दूर मेरी तरफ पीठ करके खड़ी थी। मै मम्मी से ज्यादा दूरी पर नही था, और ना चाहते हुए भी मेरी नजर मम्मी के नितंबो की दरार में फँसी हुई सलवार पर जा रही थी।

"मुझे नही पता क्या हो रहा था, मेरी मम्मी भी इस उम्र में बला की सुंदर है, मेरी उन पर से नजर नही हट रही थी, मै शादी शुदा होकर अपनी मम्मी से सुंदर लड़की का पति होने के बाबजूद अपनी मम्मी की सलवार में चमक रहे छोटी सी पैंटी में कसे हुए भारी भारी तरबूज जैसे गोरे गोरे, बड़े बड़े नितंबो को देखने के लिए लालयित हो रहा था।""

""36 साल की उम्र में सुंदर बीवी, सेक्सी बेटी, प्यासी साली होने के बाबजूद मेरे अंदर अपनी मम्मी के लिए incest feelings हो रही थी ""

तभी मम्मी ने मेरी ओर देखा और बोली बेटा अरुण जरा अपना मोबाइल की टॉर्च जलाना मुझे तो कुछ दिखाई ही नही दे रहा है, तेरी बीवी कुसुम तो हिरनी की तरह उछल कूद करती हुई वहा झाड़ियों में छिप गयी है।

मैने मम्मी की बात सुनकर तुरंत अपने मोबाइल की टॉर्च जलाई और मम्मी के तरफ रोशनी कर दी, मम्मी अब भी खड़ी थी मैने पूछा अब क्या हुआ मम्मी बोली बेटा तुझे बिल्कुल भी अकल नही है, इतनी दूर खड़ा हो कर मोबाइल की टॉर्च दिखा रहा है उसकी रोशनी बिल्कुल भी नही आ रही है, यहाँ मेरे पास में आकर रोशनी दिखा ना। वैसे भी मेरे पैर में कीचड़ लग गया ।

मै अपनी मम्मी के एकदम करीब खड़ा हो गया। मोबाइल की दूधिया रोशनी में मेरी मम्मी मुझे आज अपनी पत्नी कुसुम से भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी मैं तो बस देखता ही रह गया। मेरी हालत खराब होने लगी मैं अपने आप को संभाल पाता इससे पहले ही मम्मी ने वह नजारा मुझे दिखा दिया कि मैं तो पागल होते होते बचा।

मम्मी ने अपना कुर्ता ऊंचा किया और मुह से दबा लिया मम्मी की नंगी गोरी पीठ जिस पर बड़े बड़े दो चोकलाटी रंग के तिल दिखने लगे। पीठ के नीचे की कमर में सलवार के नाड़े में चमक रही नीली रंग की पैंटी की इलास्टिक मुझे नजर आने लगी। और मम्मी अपनी सलवार का नाडा खोलने लगी। मेरी तो सांसे ही अटक गई मुझे यकीन नहीं आ रहा था कि मैं या क्या देख रहा हूं मुझे लगने लगा था कि कहीं मैं सपना तो नहीं देख रहा लेकिन सपना नहीं वह हकीकत था।

मेरे फोन की टॉर्च की रोशनी मम्मी के ऊपर थी। मैंने जल्दी से वहाँ से टॉर्च की रोशनी हटा कर दूसरी तरफ कर दी।

मम्मी बोली अरुण बेटा.. टॉर्च जरा मेरी तरफ दिखाओ.. मुझे कुछ पता नहीं चल रहा है।

मैंने फिर से टॉर्च की रोशनी मम्मी की तरफ की।

मम्मी ने सलवार के नाड़े के साथ साथ पैंटी की इलास्टिक पकड़ कर अपनी जांघो तक नीचे कर ली और एक सफेद कपड़े (mc pad) जैसा अपनी पैंटी में से निकालकर साइड में फेंक दिया। मम्मी शायद mc से थी। ये देखकर मेरे दिमाग की घंटी बजने लगी। मै सोचने लगा मेरी मम्मी की उम्र 50+ की होगी पर अभी तक उनकी mc. बंद नही हुई है। जहा तक मैने पढ़ा और सुना है लेडीज की mc. 46-47 तक होना बंद हो जाती है। और mc बंद होने के साथ संभोग की इच्छा भी कम हो जाती है। फिर मेरी मम्मी की mc. अभी तक कैसे हो रही है। क्या मम्मी की उम्र कम है या मम्मी की शरीरिक रूप से अभी भी जवान है और वो बूढ़ी नहीं हुई है। क्या मेरी मम्मी की संभोग की इच्छा अभी तक पूरी नही हुई है, क्या मेरी मम्मी अभी संभोग करने के लिए उत्सुक रहती है।

"””मुझे अपनी मम्मी के संभोग क्रिया से जुड़े बहुत सारे सवाल मेरे मन में उठने लगे।""

अब मम्मी अपनी सलवार को उतार चुकी थीं और मूतने के लिए नीचे बैठ रही थीं। मैंने नीचे की तरफ रोशनी की.. तो देखा कि मम्मी नीचे बैठ चुकी थीं और नीचे बैठते ही मम्मी ने अपने एक हाथ से मेरी टाँग को पकड़ लिया, ताकि वो बैठे हुए अपना संतुलन बना सकें। मेरी मम्मी भारी बदन वाली मोटी bbw महिला है और जमीन पर बैठकर पेशाब करने से उनका गिरने का डर रहता है।

"" मेरे घर में मम्मी के बाथरूम में commod वाली सीट western style वाली है, और वो उस पर ही बैठकर टॉयलेट वगेरा करती है ""

मुझे मम्मी की टाँगों में उनकी खिसकी हुई सलवार दिखाई दे रही थी। मैं कोशिश कर रहा था कि किसी तरह मम्मी यौनांग दिखाई ना दे पाये.. पर मैं खड़ा था और मम्मी बैठी थीं। तो मम्मी की गुप्तांगो का दिखने का कोई चान्स नहीं था।

फिर मम्मी पूरी नीचे बैठ गई, और पेशाब करने लगी। जैसे ही मम्मी ने बैठकर मूतना शुरु किया ना जाने कहां से सीटी की आवाज मेरे कानों में गूंजने लगी मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि आवाज कहां से आ रही है बस इतना पता था कि मम्मी पेशाब कर रही है ।

मम्मी ने अभी भी मेरी टाँग अपने हाथ से पकड़ी हुई थी। उनके हाथों का स्पर्श मेरे लंड को धीरे-धीरे जगा रहा था। कुछ देर बाद मुझे उनके मूतने की आवाज़ आने लगी- शस्स्श.. स्स्स्शह..’ शी शी शी शू शू

टॉर्च की रोशनी में मम्मी की पीली-पीली पेशाब की धार दिखाई देने लगी। मूतने की इतनी मधुर आवाज़ के साथ सीधी धार को देख कर मेरा लंड कुछ अकड़ने लगा, मैंने आज तक किसी औरत को यहाँ तक कि अपनी पत्नी कुसुम को भी इतने करीब से पेशाब करते हुए नहीं देखा था।

मेरी नजरें तो मम्मी के ऊपर ही टिकी थी, यह नज़ारा देख कर तो मेरा मन और बहक गया, दिल में आ रहा था कि जल्दी से जल्दी कुसुम आ जाये और मुझसे मम्मी के उन अंगो को देखने का पाप होने से बच जाये जो एक माँ बेटे के रिश्ते को कलंकित करता है।

मम्मी नीचे की तरफ देख रही थीं। अचानक उन्होंने अपना सर उठाया और मेरी तरफ देख कर मुस्कुराई- ऐसे क्या देख रहा है? कभी किसी औरत को पेशाब करते हुए नहीं देखा क्या? मैंने शरमाते हुए कहा- नहीं.. इतने करीब से कभी नहीं देखा।

मैं मम्मी का इशारा कुछ समझा नहीं.. मुझे तो अपनी पत्नी कुसुम और अपने मम्मी बेटे की रिश्ते की मर्यादा का डर था। पर पता नहीं मम्मी को मेरी पत्नी कुसुम और अपने मम्मी बेटे की रिश्ते की मर्यादा का डर था या नहीं।

मम्मी अभी भी बैठ कर पेशाब कर रही थीं और मैंने अपने फोन की टॉर्च उनके ऊपर की हुई थी। अभी भी मम्मी की चूत से मूत की धार निकलने की धीमी-धीमी आवाज़ आ रही थी।

मेरा लंड तो मम्मी की चूत की मूत की धार की आवाज को सुन कर गरम हो गया था। मम्मी ने अभी भी सहारा लेने के लिए मेरा पैर पकड़ा हुआ था।

मम्मी बोली - मुझे बहुत ज़ोर से पेशाब लगी हुई थी.

मैं- हाँ मम्मी .. मैंने देखा, आपकी मूतने की आवाज़ आ रही है।

मम्मी ने बहुत सारा पेशाब कर दिया था जिससे जमीन पर गड्डे में पूरा भर गया और पेशाब बहने लगा और बह कर मम्मी के पैर गीले होने लगे तो मम्मी ने अपना मूतना रोका और झुक कर खड़ी हो गईं और हल्की से नीचे अपनी चूत को झुकाया और सहारा लेने के लिए मेरे हाथ को पकड़ लिया।

मम्मी ने अपनी जांघें थोड़ी सी चौड़ी कर दी। अब तो मम्मी की चूत और गांड दोनों के छेद मेरी आँखों के सामने थे।

मम्मी की गाँड का छेद अब खुल चुका था। मम्मी पेशाब करने में थोड़ा जोर लगाती तो मम्मी की गाँड का छेद थोड़ा और बड़ा हो जाता। मुझे लगा शायद उनकी टट्टी बाहर आ रही है फिर मम्मी की गाँड से कुछ नहीं आया

गांड का बादामी रंग का छोटा सा छेद तो कभी खुलता कभी बंद होता ऐसे लग रहा था , जैसे मुंबई की मरीन ड्राइव पर कोई नियोन साइन रात की रोशनी में चमक रहा हो।

मम्मी के पेशाब करते हुए हिलने पर गांड का छल्ला तो इतना बड़ा हो गया था,

जैसे किसी छोटी बच्ची की कलाई में पहनी हुई कोई लाल रंग की चूड़ी हो।

मैंने टॉर्च मम्मी की चूत की तरफ की तो देखा उनकी चूत पर हल्की-हल्की भूरे रंग (तमिया) और सफेद झाँटें उगी थीं और उनकी गोरी-गोरी चूत की फाँकें निकली हुई थीं। उनकी गरम चूत से मूत की धार टिप-टिप करके निकल रही थी। उनकी चूत से निकलती हुई पीली पेशाब का नज़ारा देख कर मेरे लंड में एकदम से जान आ गई और मेरा लंड उनकी चूत को देख कर खड़ा होने लगा।

मम्मी की चूत की पेशाब अब खत्म होने लगी थी। उनकी गोरी चूत से अब सिर्फ़ बूँद-बूँद पेशाब निकल रही थी। मम्मी ने पेशाब कर लिया, फिर वो वैसे ही सलवार को पैंटी के साथ जांघो तक एक हाथ से उठाये हुए अपनी चूत पर हाथ चलाने लगी जैसे कि पेशाब पौंछ रही हो।

फिर मम्मी अपनी नीली पैंटी सलवार के साथ पकड़ कर ऊँची करने लगी और सलवार का नाडा बांधने लगी मै अब मम्मी से थोड़ा दूर खड़ा हो कर कुसुम का आते हुए देखने लगा ...

तभी कुसुम भी हमारे पास आ गयी मेरी मम्मी कुसुम पर गुस्सा होते हुए बोली बहू मुझे एक बात बता तुझे बड़ी जल्दी थी जाने की तेरे साथ मै भी चल रही थी पेशाब करने के लिए लेकिन तुम अकेली चली गई। तुझे तो पता है मेरा फोन बस में बैग रखा हुआ है और यहाँ अंधेरा और कीचड़ फैला हुआ मुझे तो कुछ दिख भी नही रहा था।

अरुण से मोबाइल की टॉर्च जलवायी तब जाकर पेशाब करी।

कुसुम हस्ती हुई बोली कर ली ना अब चलो ढाबे पर चाय पीते है, वैसे भी ठंड सी लग रही है।

मै बोला तुम दोनों चलो मै भी अब पेशाब कर लूँ। कुसुम और मम्मी ढाबे पर चले गए।

मैने पेशाब करने के लिए अपना लंड पैंट में से जैसे बाहर निकाला तो वो फुस्कार मारते हुए सांप की तरह मम्मी की मोटी गांड को ढूढ़ ने लगा।

मेरी आँखों के सामने सिर्फ मम्मी की गांड का वो सीन ही बार बार नजर आ रहा था, उत्तेजना की वजह से मेरे लंड में से पेशाब बाहर नही आ रहा था।

मेरी नजर गड्डे में भरी मम्मी की पेशाब पर पड़ी तो मेरे अंदर incest sex से भरा हुआ जानवर जाग गया और मुझे कसम से नही पता मेरे पैर मम्मी की पेशाब से भरे हुए गड्डे की ओर चल पड़े। मम्मी की पेशाब देखकर मेरा लंड जो मेरे पेंट से बाहर निकला हुआ था और जोर से फनफना उठा।

मुझे ये लिखते हुए आज सच में बड़ी ही शर्म और गिल्टी शर्मिंदगी फील हो रही है कि मम्मी की पेशाब देखकर मेरे अंदर सच में जो जानवर जागा था उसने मुझे अपने वश में कर लिया था।

मै मम्मी की पेशाब से भरे हुए गड्डे के पास बैठ गया और मैंने जल्दी से अपनी एक हाथ की उंगली मम्मी की पेशाब से भरे हुए गड्डे में डाल दी। मैंने जैसे ही मम्मी की पेशाब से भरे हुए गड्डे में उंगली लगाई.. मम्मी की पेशाब मुझे बहुत गरम लगी।

अपनी उंगली को मम्मी की पेशाब से भरे हुए गड्डे से गीला करने के बाद मैंने अपनी नाक में ले जाकर सूँघा। मम्मी की पेशाब की खुशबू बहुत ही लाजवाब थी। मैंने जल्दी से अपने मुँह में डाल कर अपनी उंगली को चूस लिया। मम्मी की पेशाब का स्वाद बहुत ही मस्त था। मुझे खुद को मेरी इस हरकत को देख के हंसी आ गयी - और अपने आप से बड़बड़ाते हुए बोला

हाए रे.. मैने तो सच्ची में मम्मी की पेशाब पी ली.. मुझे मम्मी की पेशाब बहुत ही स्वादिष्ट लगी।

मेरे से मम्मी की पेशाब को चखने के बाद रुका नहीं गया। मैं झट से अपना मुँह मम्मी की पेशाब से भरे हुए गड्डे के पास ले गया और मैं कुत्ते की तरह मम्मी की पेशाब से भरे हुए गड्डे के पास सूघने लगा..

दस मिनिट तक मै मम्मी की पेशाब से भरे हुए गड्डे के पास अपने नथुनों को लगाकर सूघता रहा और एक हाथ से उंगली में लेकर मम्मी की पेशाब को अपने लंड पर मलने लगा, मम्मी की पेशाब को मलते मलते मेरा लंड इतना ज्यादा erect हो गया कि उसमे से वीर्य का फब्बारा निकल कर सीधा मम्मी की पेशाब से भरे हुए गड्डे में जा गिरा। मेरे लंड से निकला वीर्य और मेरी मम्मी की चूत से निकली पेशाब का मिलन हो गया।

ये वाक्या मेरी जिंदगी का बहुत ही खास पल था जिसे लिखते हुए आज मेरे मन में सवाल है जिसके जवाब आप लोग दे सकते है।

१. इस पूरे वाक्या की गलती मेरी पत्नी कुसुम की थी, अगर वो जॉब की जिद ना करती तो मै यहाँ नही आता, और मेरी मम्मी को छोड़ कर पेशाब करने अकेली क्यो गयी???

२. इस पूरे वाक्या की गलती मेरी मम्मी की है जो अपने जवान 36 साल के शादी शुदा बेटे के सामने इस तरह पेशाब करने लगी। या उनकी mc पीरियड होने की वजह से सेक्स उत्तेजना जो अक्सर इस दोरान बढ़ जाती है, को कंट्रोल नही कर पायी और मजबूरी बस अपने बेटे के सामने नग्न हो गयी।

३. इस पूरे वाक्या की गलती मेरी कुंडली में लिखी मेरी किस्मत की थी या आज दोपहर में मेरे द्वारा किये गये सुनीता आंटी से केला वाले मजाक में कहे गये शब्द कि मेरे पास बहुत मोटा, बड़ा, और लंबा केला है।

या मेरे हाथ में पकड़े हुए मोबाइल फोन की थी जिसकी रोशनी के लालच में मेरी मम्मी ने मुझे पास बुलाया।

जारी है.....
 
Back
Top