Incest कर्ज और फर्ज - एक कश्मकश - Page 7 - SexBaba
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Incest कर्ज और फर्ज - एक कश्मकश

रूमाल से पोंछ कर वापस पेंट में डालकर ढाबे पर बैठी अपनी पत्नी कुसुम और मम्मी के पास जाकर बैठ गया। मेरे चेहरे पर अजीब सी खुशी थी जिसे मेरी पत्नी कुसुम बर्दाश्त नही कर पायी और व्यंग भरा ताना देकर हस्ती हुयी बोली।

प्रोफेसर साहब आप क्या हगने बैठ गये थे जो इतनी देर लगा दी आने में हमारी दो कप चाय खतम हो गयी।

हाहाहा हाहाहा हाहाहा

कुसुम का ताना सुनकर मेरे मुह से एकाएक निकल गया मैडम हगने नही हिलाने बैठ गया था और अब धोकर आ रहा हूँ। कुसुम का गुस्से से मुह फूल गया उसने उम्मीद नही की थी मुझसे इस तरह जबाब सुनने की। मेरी मम्मी ने मुझे डान्ते हुए कहा अरुण बोलने से पहले बेटा कुछ सोच लिया करो क्या कह रहे हो, किसे कह रहे हो, कहा कह रहे हो, किसके सामने कह रहे हो।

कुसुम तेरी पत्नी है कोई यार दोस्त नही जो तेरे मुह में आयेगा तू बक देगा, वो तो बेचारी मजाक कर रही थी और तू उसे इस तरह जबाब दे रहा है। कुछ तो अपनी मम्मी और पत्नी का लिहाज सीख।

मै . बोला मम्मी आप हमेशा मुझे ही क्यो डान्ति हो अपनी बहू से कुछ क्यो नही बोलती जो तुम्हे अकेले छोड़ कर खुद टॉर्च लेकर हिरनी कि तरह झड्डियो में घुस गयी थी।

कुसुम बीच में बोल पड़ी मै जान बुझ कर नही गयी थी समझे।

मम्मी जो भी हो अरुण बेटा तुम्हे कुछ भी बोलने से पहले सोचना चाहिए।

मैने उन दोनो को sorry बोला।

तभी बस कंडेक्टर ने आवाज दी बस की सवारी वापस बस में बैठ जाये बस जाने वाली है और हम तीनों भी अपनी चाय खतम कर पैसे देकर बस में चढ़ गये। बस चलने लगी। मेरी मम्मी और कुसुम ऊपर कोच में चढ़ गयी और जैसे ही मै चढ़ने वाला था तो मम्मी ने मुझे कहा अरुण बेटा दो मिनिट नीचे खड़ा रह। और कोच की पर्दा लगा दी।

मुझे कुछ समझ नही आया आखिर मम्मी ने मुझे दो मिनिट रुकने को क्यो बोला??

मै खड़ा होकर बस में इधर उधर देखने लगा पूरी बस में अंधेरा था और एक दो सवारी को छोड़ कर सब सो रहे थे।

तभी हमारे कोच की खिड़की खुली होने की वजह से हवा आ रही थी और पर्दा उड़ रहा था और मम्मी अपनी पैंटी में mc pad सेट कर रही थी।

दो मिनिट बाद कुसुम ने पर्दा खोला और बोली आ जाओ मै भी कोच में ऊपर चढ़ गया । और बैग से सिर टिका कर मम्मी और कुसुम के साथ लेट गया।

अब स्लीपर तो इतनी चौड़ी होती नहीं है कि बीच में गैप रहता. मेरी मम्मी जिस्म से मोटी होने के कारण जगह और कम बची थी और लेटे हुए हम तीनों एक दूसरे से चिपके हुए थे। मै कुसुम के बगल में लेटा हुआ था,

कुसुम ऐसे लेटने में असहज महसूस कर रही थी तो उसने अपना मुंह दूसरी तरफ घुमा लिया. और ऐसा करने से उसके चूतड़ मेरे सामने आ गए थे, उसके बड़े बड़े चूतड़ मेरी टांगों से रगड़ने लगे थे।

15-16 दिन के बाद मेरी पत्नी कुसुम जो

इतनी गर्म माल है मेरे से सटी हुयी लेटी थी। लेकिन अभी भी वो मुझसे गुस्सा और नाराज थी इसलिए मेरा दिल बहुत तेज धड़क रहा था.

मैंने हिम्मत करके अपना चेहरा भी उसी तरफ घुमाया और अपना एक पैर उसके चूतड़ के ऊपर रख दिया. लेकिन उसने अपना पैर हल्का सा हिलाया तो मैंने अपना पैर वापस कर लिया।

मम्मी और कुसुम धीरे धीरे से बातें कर रही थी मेरी मम्मी कुसुम को समझा रही थी कि बहू तुम भी अपना बड़बोला पन कम कर दो ऑफिस में सब बड़े बड़े अधिकारी कर्मचारी होंगे उन्हें बुरा लग गया तो तो तुझे परेशानी होगी। बहु कम बोलना और ज्यादा सुनना सीख। आधे घंटे तक वो दोनो ऐसे ही फॉर्मल बातें करती रही।

मुझे बोरियत हो रही थी, तभी कुसुम बोली मम्मी एक बात पूछूँ आप अभी भी so young and beautful है but पापा एकदम बूढ़े से है, आपकी शादी में इतना इतना age gafe का क्या reason था???

मम्मी हस्ती हुई बोली बहू ये बात हर कोई मुझसे पूछता है, मै तुझे अब क्या बोलू बस अरुण के नाना की गाँव की पुरानी रीति रिवाज और सरकारी नौकरी वाले दमाद के लालच में मेरी शादी अरुण के पापा जो उस समय सेकंड क्लास के अधिकारी थे और उम्र में मुझसे 18-20 साल बड़े थे उनके साथ हो गयी।

कुसुम का ये सवाल सुनकर मेरी आँखे जो नींद से भारी हो रही थी कि अचानक से खुल गयी और मेरी मम्मी कुसुम को जो

अपनी जीवन गाथा बता रही थी वो मुझे काफी दिलचस्प लगी और मै भी आँख बंद कर अपनी मम्मी की शादी की कहानी सुनने लगा।

बहू मेरी शादी बचपन में जब में शादी का मतलब ही नहीं जानती थी उस वक्त सिर्फ शादी हुई थी जबकि गौना नही हुआ था।

अरुण के पापा तो अपनी नौकरी में एक शहर से दूसरे शहर पोस्टिंग लेकर रहते, मै एक बार जाकर फिर स्कूल पढने जाने लगी मुझे तब तक किसी बात का कोई पता नहीं था । फिर मेने नवी क्लास पास कर ली तो मेरे ससुराल से समाचार आने लग गए की इसको ससुराल भेजो इसका गौना करो .

ये 1975 की बात हे और में मासूम नादान सी ससुराल चली गई उस वक्त मुझे साड़ी पहनना भी नहीं आता था हम नागालैंड में ओढ़नी और बटन वाली कुर्ती जो शर्ट जैसी होती है और नीचे गागरा (पेटीकोट)पहनते हे में भी ये कपडे पहन के चली गई जो मेरे दुबले पतले सरीर पर काफी ढीले ढाले थे मुझे संभोग की कोई जानकारी नहीं थी

हमारा परिवार ऐसा हे इसमें ऐसी बात ही नहीं करते हे न मेरी बड़ी बहन ने कुछ बताया ना ही मेरी माँ ने बाद में मुझे पता चला की मेरी सास ने जल्दी इसलिए की कि में पढ़ रही थी उसका बेटा (अरुण के पापा) उम्र में ज्यादा था वो सोच रही थी कि इसे जल्दी ससुराल बुला ले नहीं तो ये इसे छोड़ कर किसी दुसरे अपनी उम्र वाले के साथ चली जाएगी।

जबकि हमारे परिवार के संस्कार ऐसे नहीं थे मुझे तो कुछ पता भी नहीं था शादी के कई साल बाद मेने मेरे पति (अरुण के पापा) को देखा जब वो गौना लेने आये मुझे वो देख कर मुस्करा रहा थे मेने भी चोर नजरों से उन्हें देखा मोटा सा काला सा ठिगना दिखा कुछ पेट बहार आया था।

में अपनी सुन्दरता देख इठला उठी जब में मेरे घर में उसके (अरुण के पापा) सामने से निकलती कुछ घुंगट किये हुए तो खीसे निपोर देते मुझे ख़ुशी हुई कि में सुन्दर हु इसका मुझे अभिमान हो गया और में अरुण के पापा साथ गाड़ी में अपनी ससुराल चल दी गाड़ी में उनके साथ और परिवार वाले भी थे हम शाम को गाँव में पहुँच गए !

गाँव पहुँचने के बाद देखा मेरी ससुराल वालों का घर काफी बड़ा था एक तरफ बड़ा कमरा एक तरफ बड़ी सी रसोई और बरामदा मै भारी भरकम कपडे और गहने पहने हुई थी मेरे पति (अरुण के पापा)

इक्लौते लड़के थे जो अपने १ चचेरी बहन और माँ के साथ रहते थे ससुर जी का पहले ही देहांत हो गया था ! वहा जाते ही मेरी सास और ननंद ने मेरा स्वागत किया मुझे खाना खिलाया घर मेहमानों से भरा था मेने पहली बार घूघट निकला था।

में परेशान थी मेरी ननद मुझे कमरे में ले गई जिसमे खटिया पर ही बिस्तर बिछाये हुए थे और उसने मुझे कहा ” भाभी ये भारी साड़ी जेवर आदि उतार ले हलके कपडे पहन ले अब हम सोयेंगे !” मेने अपने कपडे उतार कर माँ का दिया हुआ गागरा कुर्ती ओधनी पहन ली स्तन बहुत छोटे थे इसलिए ब्रा में पहनती नहीं थी गर्मी थी तो चड्डी भी नहीं पहनी और अपनी ननद के साथ सो गई थोड़ी देर में में नींद के आगोश में थी..

आने वाले खतरे से अनजान में सोई हुई थी अचानक आधी रात को असहनीय दर्द से मेरी नींद खुल गई और में चिल्ला पड़ी नाइट बल्ब की मंद रौशनी मेने देखा मेरी ननद गायब हे और मेरे पति (अरुण के पापा)

मेरी छोटी सी चूत में जिसमे मेने कभी एक ऊँगली भी नहीं गुसाई थी अपना मोटा और लम्बा लंड डाल रहे थे और सुपारा उन्होंने मेरी चूत में फंसा दिया था मेरा गागरा मेरी कमर पर था बाकि कपडे पहने हुए थे और अरुण के पापा पढ़े लिखे गंवार की तरह जिसने न तो मुझे जगाया न मुझे सेक्स के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार किया नींद में मेरा घागरा उठाया सरसो का तेल लगाया और लंड डालने के लिए जबरदस्त धक्का लगा दिया।

मेरी आँखों से आंसू आ रहे थे और में बलि होते बकरे की तरह चिल्ला उठी मेरी चीख उस कमरे से बाहर घर में गूंज गई बाहर से मेरी सास की गरजती आवाज आई वो मेरे पति (अरुण के पापा) को डांट रही थी की छोटी हे इसे परेशान मत कर मान जा मेरे पति (अरुण के पापा) मेरी चीख के साथ ही कूद कर एक तरफ हो गए तब मुझे उनका (अरुण के पापा) मोटे केले जितना लंड दिखा मेने कभी बड़े आदमी का लंड नहीं देखा था छोटे बच्चों की नुनिया ही देखि थी इसलिए मुझे वो डरावना लगा।

उन्होंने अन्दर से माँ को कहा अब कुछ नहीं करूँगा तू सोजा ! फिर उन्होंने मेरे आंसू पोंछे मेरी टांगे सुन्न हो रही थी में घबरा रही थी थोड़ी देर वो चुप सोये फिर मेरे पास सरक गए उन्होंने कहा मेने गाँव बहुत लड़कियों के साथ सेक्स किया वो तो नहीं चिल्लाती थी उन्हें क्या पता एक चालू लड़की में और अनजान मासूम सील्पैक लड़की में क्या अंतर होता हे !

थोड़ी देर में उन्होंने फिर मेरा गागरा उठाना शुरू किया मेने अपने दुबले पतले हाथों से रोकना चाहा उन्होंने अपने मोटे हाथ मेरी दोनों कलाइयाँ पकड़ कर सर के उपर कर दी अपनी भारी टांगो से मेरी टांगे चौडी कर दी फिर से ढेर सारा तेल अपने लिंग के सुपाडे पर लगाया कुछ मेरी चूत पर में कसमसा रही थी उन्हें धक्का देने की कोशिश कर रही थी पर मेरी दुबली पतली काया उनके भेंसे जेसे शरीर के नीचे दबी थी मेने चिल्ला कर अपनी सास को आवज देनी चाही उसी वक्त उन्होंने मेरे हाथ छोड़ कर मेरा मुंह अपनी हथेली से दबा दिया में गूं गूं ही कर सकी मेरे हाथ काफी देर ऊपर रखने से दुःख रहे थे मेने हाथों से उन्हें धकेलने की नाकाम कोशिश की उनके बोझ से में दब रही थी

मेरा वजन उस वक्त ३८-४० किलो था और वे ६५-७० किलो के ! अब उन्होंने आराम से टटोल के मेरी चूत का छेद खोजा जिसे उन्होंने कुछ चौड़ा कर दिया था अपने गीले लिंग का सुपाडा मेरी छोटी सी चूत के छेद पर टिकाया और हाथ के सहारे से अन्दर ठेलने लगे २-३ बार वो नीचे फिसल गया फिर थोडा सा मेरी चूत में अटक गया मुझे बहुत दर्द हो रहा था जेसे को लोहे की राड डाली जा रही हो जिस छेद को मेने आज तक अपनी अंगुली नहीं चुभाई थी उसमे वो भारी भरकम लंड डाल रहा था मेरे आंसुओं से उसे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था वो पूरी बेदर्दी दिखा रहा था और मुस्कुरा रहे थे की उसे सील बंद माल मिला जिसकी सील वो तोड़ रहा था ! मेरी दोनों टांगो को वो अपने पैर के अंगूठो से दबाये हुए था

मेरे उपर वो चढ़े थे उनका लिंग का सुपाडा मेरी चूत में फंसा हुआ था अब उन्होंने एक हाथ को तो मेरे मुंह पर रहने दिया दुसरे हाथ से मेरे कंधे पकडे और जोर का धक्का लगाया लंड २ इंच और अन्दर सरक गया मेरी सांसे रुकने लगी मेरी आँखे फ़ैल गई फिर उसने थोडा लंड बाहर खिंचा में भी लंड के साथ उठ गई उसने जोर से कंधे को दबाया और जोर से ठाप मारी में दर्द के समुन्दर में डूबती चली गई आधे से ज्यादा लंड मेरी संकरी चूत में फसा हुआ था मेरी चूत से खून आ रहा था पर उन्हें दया नहीं आई वो और में पसीने पसीने थे मुंह से हाथ उन्होंने उठाया नहीं था और फिर उन्होंने आखिरी शोट मारा और उनका पूरा लंड मेरी चूत में गुस चूका था उनका सुपाडा मेरी बच्चेदानी पर ठोकरे मार रहा था में बेहोश हो गई पर दर्द की वजह से वापिस होस आ गया में रो रही थी सिसक रही थी मेरा चेहरा आंसुओं से तर था पर धनाधन धक्के लगा रहे थे।

मेरे चेहरे से हाथ हटा लिया था मेरे कंधे कभी कमर पकड कर बुरी तरह से चोद रहे १५-२० मिनिट तक उन्होंने धक्के लगाये मेरी चूत चरमरा उठी हड्डियाँ कदकदा उठी मुझे बिलकुल आनंद नहीं आया था और वे मेरी चूत में ढेर सारा वीर्य डालते हुए ढेर हो गए और भेंसे की तरह हांफने लगे में रो रही थी सिसकियाँ भर रही थी मेरी चूत से खून और वीर्य मेरी जांघों से नीचे बह रहा था थोड़ी देर में सुबह हो गई मेरे पति (अरुण के पापा) बाहर चले गए मेरी ननद आई उसने मेरी टांगे पूंछी मेरे कपडे सही किये मुझे खड़ा की में लड़खड़ा रही थी वो हाथों का सहारा लेकर पेशाब कराने ले गई मुझे तेज जलन हुई मेने रोते रोते कहा मुझे मेरे गाँव जाना हे अरुण के पापा और मेरी सास ने बहुत मनाया पर में रोती रही चाय नास्ता भी नहीं किया।

आखिर उन्होंने अस.टी.ड़ी. से मेरे घर फ़ोन किया १-१.३० घंटे मुझे मेरे भाई और छोटे वाले चाचा लेने आ गए और में अपनी सूजी हुई चूत लेकर मेरे घर रवाना हो गई वापिस कभी न आने की सोच लेकर पर क्या ऐसा संभव हे तो ये अनुभव रहा मेरी सुहागरात का।

मेरी मम्मी की आवाज भारी हो गयी और कुसुम से बोली बता बहू तुझे जैसा भी लगा हो पर ये १०० फीसदी सच हे।

मै मम्मी की कहानी सुनकर हतप्रभ रह गया, मेरे पापा जो मेरे लिए आज तक एक आदर्श थे उनका ये बहशी और जानवर वाली सुहागरात के बारे में सुनकर मुझे बहुत बुरा लगा। मुझे अपनी मम्मी पर तरस आ रहा था।

"" मै इतना जरूर समझ गया कि जिसका बाप ऐसा हो उसका बेटा मेरे जैसा ही कामी, वासना भरा हुआ, जो अपनी मम्मी के प्रति गंदी सोच रखते हुए मुठ मारने वाला ठरकी ही होगा ""

कुसुम मम्मी के कंधे पर सिर रख कर बोली फिर क्या हुआ???

मम्मी आगे बताने लगी फिर में दसवी बोर्ड की तय्यारी करने लगी स्कूल जाने लगी ! मेने १०वी की परीक्षा दी और गर्मियों की छुट्टियों में फिर ससुराल जाना पड़ा इस बार मेरे पति अरुण के पापा का स्वाभाव कुछ बदला हुआ था वो इतने बेदर्दी से पेश नहीं आये शायद उन्हें ये पता चल गया की ये मेरी ही पत्नी रहेगी में इस बार ४-५ दिन ससुराल में रुकी थी पर वे जब भी चोदते मेरी हालत ख़राब हो जाती पहली चुदाई में ही चूत में सुजन आ गई बहुत ही ज्यादा दर्द होता मुझे बिलकुल आनंद नहीं आता वो रात ७-८ बार मुझे चोदते पर उनकी चुदाई का टाइम ५-७ मिनट रहता रात भर सोने नहीं देते वो मुझे कहते मेने बहु सारी लड़कियों से सेक्स किया हे उन्हें मज़ा आता हे तुम्हे क्यों नहीं आता में मन ही मन में डर गई की कही मुझे कोई बीमारी तो नहीं हे कही में पूर्ण रूप से ओरत हु या नहीं हु अब में किस से पूछती में सारी सहेलिया तो कुंवारी थी फिर वापिस पीहर आ गई पढने लगी मेरा काम यही था। गर्मी की छुटियों में ससुराल जा कर चुदना और फिर वापिस आ कर पढना ।

फिर मेरे गर्भ ठहर गया सितम्बर १९७६ में मेरे बेटा अरुण हो गया !बेटा होने के बाद कुछ विशेष नहीं हुआ ! में प्राइवेट पढ़ती रही , अरुण के पापा साल में एक बार आते जब में ससुराल चली जाती और अरुण के पापा महीने डेढ़ महीने तक रहते में उनके साथ रहती और जब वे वापिस चेन्नई जाते तो में अपने पीहर आ जाती इसका कारण था कई लोंगो की मेरे उपर पड़ती गन्दी नज़र ! अरुण के पापा की गाँव में खेती थी उसे में दूसरों को बोने के लिए दे देती थी जब फसल आती तो वे मुझे मेरा हिस्सा देने के लिए बुलाते थे ज्यादातर में शाम को मेरे पीहर आ जाती थी।

अरुण के पापा की सबसे अच्छी बात ये थी कि उन्होंने मुझे पढाई करने से नही रोका वो हमेशा मुझे पढ़ने और आगे बढ़ने के लिए motivate करते ।

जैसे तुझे बहू अरुण के मना करने पर भी नौकरी करने की परमिशन दे दी।

अब में कॉलेज में प्राइवेट पढने लग गई तब मुझे पता चला की मुझे आनंद क्यूँ नहीं आता हे अरुण के पापा मुझे सेक्स के लिए तैयार करते नहीं थे सीधे ही चोदने लग जाते थे और मुझे कुछ आनंद आने लगता जब तक वो ढेर हो जाते रात में सेक्स ५-७ बार करते पर वो ही बात रहती फिर मेने उनको समझाया कुछ मेरा भी ख्याल करो मेरे स्तन दबाओ कुछ हाथ फिराओ अब तक मेने कभी उनके लंड को कभी हाथ भी नहीं लगाया था ।

अब मेने भी उनके लंड को हाथ में पकड़ा तो वो फुफकार उठा उन्होंने मेरे स्तन दबाये पेट और झांघों पर चुम्बन दिए चूत के तो नजदीक भी नहीं गए मेने भी मेरी जिंदगी में कबी लंड के मुंह नहीं लगाया हे मुझे सोच के ही उबकाई आती हे ।

अबकी बार उन्होंने चोदने का आसन बदला अब तो वो सीधे सीधे हे चोदते थे इस बार उन्होंने मेरी टांगे अपने कंधे पर रखी और लंड गुसा दिया और हचक हचक कर चोदने लगे मेरी टांगे मेरे सर के उपर थी में बिलकुल दोहरी हो गई थी पर चमत्कार हो गया आज मुझे आनंद आ रहा था उनका सुपाडा सीधे मेरी बच्चेदानी पर ठोकर लगा रहा था मुझे लग रही थी पर आनंद बहुत आया इस बार जब उन्होंने अपने माल को मेरी चूत में भरा तो में संतुस्ठ थी फिर मेने अपनी टांगे ऊपर करके ही चुदाया मुझे मेरे आनंद का पता चल चूका था।

अचानक मेरी मम्मी शांत हो गयी तो कुसुम ने पूछा क्या हुआ मम्मी आपकी आँखों में आँसू क्यों आ गये, मेरी मम्मी की आँखों में आँसू भर आये थे। हालांकि मैने नही देखे क्योकि मेरी आँखे बंद थी मै सोने का बहाना बना कर लेटा हुआ था।

मैने अपनी वासना की भूख मिटाने के लिए उस दिन जब अरुण के पापा के साथ संभोग किया था तो मै भूल गयी थी कि मै एक महीने पेट से हू और जब अरुण के पापा का लंड मेरी बच्चेदानी में ठोकर मार रहा था तो मेरा mis garage हो गया।

Dr ने बोला बच्चे दानी damage हो गयी है हम एक ही बच्चे से संतोष करना पड़ा। मेरी इच्छा एक बेटी की थी।

कुसुम ने मेरी मम्मी का हाथ थामते हुए कहा मम्मी जरूरी नही कि माँ बनने के लिए बेटी को अपनी कोख से जनम दिया जाये अगर आपके अंदर ममता है तो मेरी जैसी 35 साल की लड़की भी आपकी बेटी बन सकती है, आज से मै आपकी बहू के साथ साथ बेटी भी हू। और दोनों एक दूसरे का हाथ थामे हुए सो गयी।

जारी है.......
 
बस अपनी रफ्तार से दौड़ रही थी, सुबह के साढ़े चार बज चुके थे, मौसम में ठंडक घुल गयी थी, मै अपनी पत्नी के गरम जिस्म से चिपका हुआ गरमहाट महसूस करता हुआ गहरी नींद में जा चुका था।

और एक नयी सुबह की शुरुआत हुई बस की खिड़की में निकलता हुआ सूरज दिखाई दे रहा था। मेरी पत्नी कुसुम की हल्की हल्की आवाज मेरे कानों में आ रही थी। मेरी निद्रा टूटी और मैने आँखे खोली तो मम्मी और कुसुम बैठी हुयी चाय की चुस्की ले रही थी। मेरे बदन मम्मी का दुपट्टा से ढका हुआ था और बस पेट्रोल पंप पर खड़ी थी।

मै भी उठ कर बैठ गया और मम्मी और कुसुम की तरफ देखते हुए बस की खिड़की में से बाहर का नजारा देखने लगा। मम्मी बोली मेरा प्यारा बेटा मुझे पता है आज आराम से नही सो पाया मेरे वजह से बेचारा एक करवट लेटा रहा।

"" मुझे अपनी मम्मी के शब्दो में एक बेटे के लिए ममता नजर आ रही थी "" मै अपने आप से शर्मिंदा था ।

तभी कुसुम बोली मम्मी इस बस की सीट कुछ ज्यादा ही छोटी है वरना चार सवारी वाले में हम तीनों आराम से सो सकते थे। मम्मी हस्ती हुई बोली शायद मै कुछ ज्यादा ही मोटी हो गयी हू। दो लोगो की जगह तो मै ही घेरे थी।

हाहाहा हाहाहा हाहाहा आवाज

अंतः हमारे सफर का अंत हुआ और हम अपने एक रिश्तेदार के यहाँ चले गए। रिश्तेदार के यहाँ हम फ्रेश वगेरा होकर मै कुसुम को लेकर collectrate ऑफिस चला गया, ऑफिस में कुसुम के वो sdm साहब मिल गये जिन्होंने कुसुम को नौकरी के लिए बुलाया था।

Sdm साहब मुझे और कुसुम को ऑफिस में देखकर बहुत खुस हुए । और बोले interviw के बाद वापस मुझसे मिलना आप दोनों, फिर कुसुम interviw देने चली गई और खुश होती हुई बाहर आ गयी कुसुम के चेहरे की खुशी बता रही थी उसको नौकरी मिल गयी। फिर भी मैने कुसुम से पूछा क्या हुआ तो वो बोली सब ठीक रहा बस एक प्रॉब्लम थी इस वक्त मेरे ३५ साल में २ महीने बढ़ रहे थे पर साहब ने चला लिया उस नोकरी में ३५ साल का होना जरुरी था।

फिर हम sdm sir के cabin मे चले गए,

साहब ने कहा अपने खाने पिने का सामान, गैस, बिस्तर वगेरह ले आना तब तक में तुम्हारे लिए किराये का कमरे का इंतजाम कर लूँगा और अभी मै तुम लोगो का रहने का इंतजाम एक होटल में किये देता हूँ।

और sdm साहब ने होटल का visting कार्ड मुझे दे दिया। मै और कुसुम होटल की तरफ चल दिये। होटल मैनेजर ने हमको होटल दिखाया और कहा रात को आप यहाँ आराम से रह जाना अभी कमरा देख लो । साहब ने उस होटल वाले को कमरा खली रखने का कह दिया था। जहा मै, कुसुम और मम्मी साहब के कहने पर रुकने वाले थे वो साहब का खाश था उन्होंने हमसे किराया भी नहीं लिया और कहा आप साहब के खास लोगो से भी कोई किराया नहीं लूँगा।

बेड पर बिस्तर किये हुए थे दोपहर का समय था होटल मैनेजर ने हम को चाय पिलाई खाने का पूछा मैने कहा अभी भूख नहीं हे ।

फिर हम भी वापस अपने रिश्ते दार के घर चल दिये।

वहाँ पहुँचकर हमने मम्मी को सारी बात बताई इधर मम्मी ने भी रिश्तेदार के पड़ोसी एक रिटायर आदमी का घर था जिसमे वो उसके दो बेटे बहुए पोते पोतियों के साथ रहता था मकान दो मंजिला था, जिसमें ऊपर का एक कमरा खाली था वो कमरा मेरी मम्मी ने किराये पर ले लिया, कमरा के बगल से छत पर जाने की सीढ़ी थी।

मेने कहा ठीक हे यूंकि कमरा छोटा था, latrine कमरे से बाहर थी। पर छोटा सा किचिन और बाथरूम कमरे में ही था। मेने सोचा कुसुम और मम्मी को ही रहना है यहाँ आराम से रहेंगे । किराया भी तीन हजार बिजली पानी सहित था, मेने मम्मी कुसुम से कहा थोड़ी देर रेस्ट कर लेते हे मम्मी मकान मालिक से दरी और तकिया मांग लाई।

हमें नींद आ गई शाम को ५ बजे में कुसुम और मम्मी जगी हमने कहा चलो गृहशथी क सामान ले आते है मम्मी बोली तुम दोनों होकर आओ मेरी बैक पैन है आराम करूँगी।

कुसुम बोली ठीक है, अपने कपड़े लेकर बाथरूम में चली गई, तैयार होकर हम घुमने निकल गए।

हम घुमने के लिए निकले मेने कुसुम से मजाक में कहा साहब के पहचान वाले के होटल चलते हे घुमने के लिए बाइक ले लेते हे। वैसे भी उसके लिए तो तुम ही साहब हो।

कुसुम ने कुछ सोचा उसको फोन कर कहा मुझे आपकी बाइक चाहिए उसने कहा आप बही रुके नोकर से कह कर चाय नास्ता करे मुझे इतना रुकना नहीं था। तभी वो होटल वाला अपनी बाइक लेकर आया वो भी मुझे जानता था उसने कुसुम से पूछा क्या हुआ मैडम जी । कुसुम ने उसे बाइक का कहा उसने कहा आप मेरी ले जाओ! कोई परेशानी नही है बस पेट्रोल डलवा लीजिये।

कुसुम पीछे बेठी अब हम शहर में इधर उधर गाड़ी घुमा रहे थे ।

सामने एक पानी पूरी का ठेला देखकर कुसुम ने गाड़ी रुकवा दी और पानी पूरी खाने लगी। हमने गृहस्थी का सब सामान बर्तन, गैस, बिस्तर, राशन, और जो भी जरूरी सामान था सब खरीद लिया।

शाम को जब मै और कुसुम वापस आये तो मम्मी मुझे अवॉयड करती है ।

हलकी फुलकी बात होती है ।

मम्मी बोली रिस्तेदार बुला रहे खाने के लिए चलो चलते हैं। शाम का खाना हमने रिश्तेदार के साथ खाया मैने वापस आते हुए रास्ते में कुसुम से कहा तुम ये नोकरी करलो । मैने कुसुम को नोकरी करने की सहमती दे दी।

खाना खाने के बाद हम वापस अपने कमरे में आ गए कुसुम अपने बेड पर लेट जाती है

और मम्मी किचन में चली जाती है।

चूंकि कमरे में एक ही चटाई पर दो बिस्तर लगा था और sdm sir ने होटल में भी रूम बुक करवा दिया था और होटल वाले की बाइक भी वापस करनी थी तो उस रात मै अकेला सोने के लिए होटल में चला गया।

आज कुसुम का जॉब का पहला दिन था, सुबह के 9:30 बजे मै कुसुम को ऑफिस छोड़ कर वापस मम्मी के पास कमरे पर आ गया।

सुबह की साढ़े दस बज चुके थे मम्मी छत पर कपड़े सूखने के लिए रस्सी पर डालने गयी थी, मैने आवाज लगाई तो मम्मी बोली अभि आई।

मै बिस्तर पर लेट गया और छोटे से कमरे में क्या क्या सामान और लाना है उसके बारे में सोचने लगा। मम्मी कमरे में आ गयी मुझसे बोली बेटा बहू को टाइम से पहुँचा दिया आज उसका पहला दिन था नौकरी का देर तो नही हुई।

मै --- हूं हु कर बताया।

भाग्य ने एक बार फिर करवट ली. लगभग 11 बजे मम्मी नहाने चली गईं और मैं मोबाइल में फिल्म देख रहा था.

तभी मम्मी के फोन की घंटी बजी. मैं फोन उठाता, उससे पहले ही घंटी बंद हो गई.

मैंने देखा, सुनीता आंटी का फोन था.

सुनीता आंटी मम्मी की अच्छी दोस्त है सुनीता आंटी की मिस्ड कॉल के साथ व्हाट्सएप पर उनके मैसेज भी दिखाई दिये तो मैंने सोचा सुनीता आंटी इतनी सेक्सी है क्यो ना देखा जाये वो मेरी मम्मी को बिगाड़ तो नही रही है और मैने व्हाट्सएप खोल दिया. व्हाट्सएप मम्मी के फिंगर प्रिंट से ही खुलता तो मोबाइल फोन वही रख कर नीचे चला गया और जाते जाते मम्मी से बोला सुनीता आंटी का फोन और मैसेज आये है। मै नीचे जा रहा हूँ और कमरे के दरवाजे बाहर से बंद कर चला गया।

मैने सोचा मै अपनी मम्मी और पत्नी को इस मोहल्ले में अकेला रहने के लिए छोड़ रहा हूँ तो मोहल्ले के बारे में थोड़ा पता लगाया जाये यहाँ कैसे लोग है, क्या माहौल है, औरत के अकेले रहने लायक है या नही।

मोहल्ले की पान की दुकान, चाय की दुकान, नाई की दुकान पर इसकी सारी जानकारी मिल सकती है ये तीनो दुकान वाले हर मोहल्ले के तीसरे आँख और कान होते है और मै भी एक चाय वाले की दुकान पर बैठ कर बातें करने लगा। एक डेढ़ घंटे गप्पे लगाते हुए मुझे हो गया था मेरा उठने का मन नही कर रहा था।

कहते है न जब उपर वाला किसी को किसी से मिलाने पे आता है तो क़ायनात भी मदद करति है वही मम्मी और मेरे साथ हुआ।।।।।।

बरसात का सीजन तो था ही अचानक से मौसम खराब होने लगा और तेज हवा चलने लगी काली घटा आ गयी और लाइट चली गई। मै तुरंत ही अपने घर की ओर चल दिया मै बहुत जल्दी जल्दी कदम बढा रहा था क्योकि मै कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर के आया था और मेरी मम्मी अकेली थी ना जाने वो अंधेरे में क्या कर रही होगी और मुझे गालिया दे रही होगी।

लेकिन मुझे नही पता था मेरे घर की ओर जाने वाले हर कदम मुझे दुनिया के सबसे पवित्र रिश्ते को कलनकित करने के लिए बढ़ रहे है।

मै सीढ़ियों से चढ़ कर सीधा कमरे की तरफ गया दरवाजे वैसे ही बंद थे जैसे मै करके गया था और खिड़की खुली हुई थी जो मेरे जाने से पहले बंद थी, शायद अभी लाइट जाने पर मम्मी ने खोली होगी। ये देखकर मुझे कुछ तसल्ली हुयी कि मम्मी अंदर अंधेरे में नही है और मैने जैसे ही खिड़की के अंदर झाँका तो मेरे पैरो के नीचे से जमीन खिसक गयी और मेरी आँखे फटी रह गयी।

मेरी मम्मी अपने मोबाइल में एक पॉर्न क्लिप देख रही थी और वो भी बिना हेडफोन के जिससे पोर्न फिल्म में निकल रही चुदाई की आवाज से पूरा कमरा गूँज रहा है।ये दृश्य देखकर मेरे पैर खिड़की पर ही रुक गये और मेरी आँखे मम्मी के मोबाइल स्क्रीन पर टिक गयी।

पोर्न क्लिप में एक milf bbw लेडी एक young लड़के के साथ बहुत ही मस्ती में घोड़ी या डॉगी style में उछल उछल कर चुदवा रही थी।

मै ये तो समझ गया कि ये पोर्न क्लिप सुनीता आंटी ने ही मम्मी को whatsup पर भेजी थी वो ही, क्योकि सुनीता आंटी मम्मी को न्यूड सेक्स क्लिप्स भेज सकती थीं और चुदाई के क्लिप्स देखकर मेरा दिमाग टनटनाने लगा.

मै कोई teenager boy नही हू जो ये क्लिप देखकर अपनी मम्मी के नाम की मुठ मारना शुरु कर दू। या झूठी कहानियों और पोर्न फिल्म की तरह दरवाजा खोलकर मम्मी के साथ sex करना शुरु कर दू।

मै एक mature 35 साल का शादी शुदा लड़का हू मै ये जानता हूँ मम्मी की भी पर्सनल लाइफ है, उन्हे क्या पसंद है ना पसंद, अपने एंजॉय के लिए चुदाई की क्लिप देखना उनकी खुद की choice है।

वो मेरी है मम्मी जो खुद एक mature औरत है उनको भी अपनी लाइफ जीने की आजादी है। और चुदाई की फिल्म देखना कोई पाप तो नही है। हर कोई देखता है।

पर आज जब मैने अपनी मम्मी को पोर्न फिल्म देखते हुए देखा तो मेरे अंदर एक बार फिर से अपना अतीत याद आ गया।

मैं थोड़ा सब्र से काम लेना चाहता था आखिर मम्मी इन गंदी क्लिप को देखकर क्या करती है, और वो कोई ऐसा काम तो नही करती है जो उन्हें नही करना चाहिए और अगर करती है तो मुझे अपने पापा और पत्नी कुसुम से इस बारे में बात करनी पड़ेगी। इसलिए मैंने मम्मी को बातों के जरिये जानने की कोशिश करने लगा। और मैने अपने पैर वापस दरवाजे की तरफ खींच लिए और एक आवाज देते हुए मम्मी की पोर्न फिल्म देखने वाली घटना को ingnore करते हुए उनसे कहा मम्मी मौसम खराब होने वाला है लगता है तूफान आने वाला है। तभी जोरदार बारिश शुरु हो गयी।

मम्मी: अरुन बेटा बारिश सुरु हो गई।

मै: है तो।

मम्मी: छत पे कपडे डाले है सुखने के लिये

भिग जायँगे बेटा।

मैने तुरंत दौड दी छत पर जाने के लिए

मम्मी पीछे पीछे थी

आज मम्मी ने अपने mc मे पहने वाले छूत वाले सारे कपड़े धोये थे तो कपडे ज्यादा थे।

हम दोनों छत पे पहुचे बारिश सुरु हो गई थी अचानक वाली।

हम ने जल्दी २ कपडे समेटे जिसके हाथ जो लगा उठा लिये

और निचे आ गये।

तभी मम्मी को याद आया की उसने अपने

अन्डरगारर्मेन्ट्स अलग से सुखाए थे जिस से किसी पडोसी की नज़र न पड़ेगी और मम्मी के पास टोटल २ सेट थे जो उसने आज वाश किये थे

कल के लिए उनके पास पहहने के लिए और सेट नहीं थे ।

मम्मी: छत की और जाते हुए।

मै: क्या हुआ मम्मी क्या रह गया।

मम्मी: कुछ नहीं अभी आती हू।

मै: क्या हुआ मम्मी कहाँ जा रहे हो दोवारा बारिश काफी अचानक तेज हो गई है।

मम्मी: कुछ कपडे रह गये है

मै: बाद में ले आना।

मम्मी: नहीं जरुरी है गीले हो जायँगे और दूसरे मेरे पास नहीं है।

मै: ओके तो मैं ले आता हू।

मम्मी: नहीं नही मैं ले आती हूं।

जब तक मम्मी कुछ बोलति मै छत पर दौड़ लगा कर पहुँच गया।

मम्मी मुझे रोकती रह जाती है तब तक मै छत पर पहुँच चुका था।

मम्मी भी पीछे पीछे आ जाती है तब तक मै कपडे ढूंड ने लगा।

मम्मी: भीगते हुए तू रुक मैं लेके आती हु।

मै : मना किया था आप को देखो कुछ भी नहीं है

मम्मी: है नहीं है तू रुक मैं आती हु।

मै: नहीं साथ चलो भीग जायंगे।

मम्मी क्या बोले समझ नहीं आ रहा था।

उन्हे पता था मै ऐसे नहीं जाऊंगा

तो वो खुद उस तरफ चल देती है जहा उन्होंने अन्डरगारर्मेन्ट्स सुखाये थे।

मै मम्मी के पीछे पीछे चल दिया और देखा

सामने साइड में छुपा के मेरी मम्मी ने अपने ब्रा और पेंटी सुखने को डाला है पर वो गीले हो चुकी थी।

मम्मी अपनी ब्रा पेंटी उतारते हुए।

मै वहां से चल दिया,

मम्मी: अब क्या हुआ बोला था न रहने दे

मै ले आउंगी नहीं माना अब क्या हुआ

ले जा।

और मेरी तरफ अपने अंदरगारर्मेन्ट्स बढ़ा देति है

मै कुछ नहीं बोला और मम्मी के ब्रा पैंटी हाथ में ले लिए ।

मम्मी मेरे हाथ मैं अपने अन्डरगारर्गर्मेन्ट्स दे कर निचे आ जाती है।

मै अपने हाथ में अपनी मम्मी की पेंटी और ब्रा को पकड़ कर खड़ा रहकर देखने लगा।

मम्मी: आवाज़ देते हुए देखता रहेगा या निचे भी लायेगा वैसे भी २ ही जोड़ी है और दोनों ही गीले हो गये और अगर नहीं सुखी तो कल क्या पेहनुगी।

जलदी आ।

मै नीचे आ गया।

बारिश की वजह से मै और मम्मी आधे अधूरे भींग गये थे।. अब मम्मी मुझे मम्मी नहीं बल्कि एक गठीले बदन की भारी मांसल जिस्म वाली औरत के रूप में दिखने लगीं.

मैंने मम्मी को वासना भरी हुई कामुक नजर से देखा तो पाया कि 5 फुट 5 इंच कद, गोरा चिट्टा रंग, भरा बदन, मस्त चूचियां, मोटे मोटे चूतड़. संभोग के लिए और क्या चाहिए?

मम्मी पेटीकोट, ब्लाउज पहने हुए ड्रेसिंग टेबल के सामने अपने बाल संवार रही थीं. और मैं मन ही मन काम वासना का ताना बाना बुनने लगा. शीशे में दिख रही मम्मी की चूचियां और साक्षात दिख रहे पारदर्शी कपड़े के पेटीकोट में चूतड़ों ने मेरा दिमाग खराब कर दिया. मन में आया कि यहीं बेड पर गिरा कर मम्मी के चूतड़ दबा दूं लेकिन हिम्मत नहीं पड़ी.

मम्मी: जा बाथरूम में जा कर मेरी ब्रा पैंटी निचोड के सुखा दे।

ये पिछले दो दिनों का खेलापन था हम दोनों मम्मी बेटे का।

एक मम्मी अपने बेटे से अपनी पैंटी और ब्रा खुद अपने हाथ से देकर सुखाने के लिए बोल रही है।

मम्मी तो समझ चुकी थी वो मुझे अपना मान चुकी है।

अब बस मेरे समझने की देर है।।

थोड़ी देर बाद

मम्मी: सॉरी बेटा।

मै: क्यों मम्मी

मम्मी: वो मैंने तुम्हे अपने अन्डरगारर्मेन्ट्स सूखाने के लिए बोला।

मै: तो क्या हुआ मम्मी आप भी तो मेरे छोटे कपडे धो के सुखाती थी और अब भी कई बार मैं जल्दी में अपना अंडरवियर छोड़ जाता हु तो आप धोकर सुखा देते हो।

मै तो सॉरी नहीं बोलता।

मम्मी: वो आदमी की बात कुछ और होती है

हम लेडीज की कुछ और

हम तो दिखा भी नहीं सकते ।

मै: मम्मी पता नहीं इंडियन इतने बैकवर्ड क्यों है

फ़ोरेन में हस्बैंड और वाइफ दोनों एक दूसरे के कपडे धो लेते है पर इंडिया में नहीं।

मम्मी: अच्छा तो तू अपनी पत्नी कुसुम के कपडे धोएगा।

मै: मुझे मम्मी की बात सुनकर शर्म आ गयी और शरमाते हुआ क्या मम्मी कुछ भी

मम्मी: हस्ते हुए ओके सॉरी

चल छोड़ चाय पियेगा

मै: हां पर आप बैठो मैं बनाता हु।

मम्मी: ठीक

चलो किचन में।

मै किचन में चाय बनाने लगा और

मम्मी पास खड़ी हो गयी

मम्मी: बताया नही।

मै : क्या

मम्मी: तू भी धोयेंगा।

मै; खिसियाते हुए हां धोऊंगा आप के भी धो दुँगा।

मम्मी; मैं तेरी बीवी थोड़े ही हूँ ।

मै: मम्मी तो हो मेरी प्यारी मम्मी जिसे मैं बहुत प्यार करता हूं।

मम्मी: कितना अपनी बीवी से ज्यादा।

मै: उससे भी ज्यादा।। प्यार करता हु आप को

मम्मी: झुठ।

मै: सच मम्मी ।

मम्मी: तो ठीक है मेरे अन्डरगारर्मेन्ट्स धो के सुखा देना मैं समझ जाउंगी।

और हस्ने लगती है।

मै: ओके डन ।

मम्मी; ओके नहीं मज़ाक़ कर रही थी मुझे पता है मेरा बेटा मुझे प्यार करता है।

चाय बन गई।

अलमोस्ट

और हम दोनों चाय पीते है,

और पूरा दिन यु ही बारिश के कारण गुजर जाता है।

शाम के 4 बज चुके थे और बारिश बंद हो गयी मै कुसुम को ऑफिस से लाने के लिए घर से निकल गया।

हमारे छोटे शहर की सड़क जरा सी बारिश हो जाने पर नदी बन जाती है और मै इसी नदी मै बाइक लेकर फँस गया वैसे भी होटल वाले की बाइक पुरानी थी और बाइक बंद पड़ गयी।

इधर मम्मी बाथरूम में जाती है तो शॉकड हो जाती है वो देखती है उनकी ब्रा और पेंटी बाथरूम रूम में सुख रही है।

जब उसके पास जाती है तो उसमे से खुशबु आ रही होती है

मम्मी सोचती है मैं धोती हु तो खुशबु नही

आती।

तभी मम्मी मुझे whatsup पर मैसेज करती है और पूछती है मेरी ब्रा पैंटी में इतनी अच्छी खुशबू कैसे आ रही है।

तभी मम्मी के मोबाइल पे मेरा reply मेसेज आता है खुशबु आ रही है न पियर्स साबुन से धोइ है।

मम्मी मेसेज पढ़ कर मुस्करा देति है।

तभी मेरा दूसरा मैसेज आता है।

मैं प्रूफ दे दिया है की मैं आप को अपनी वाइफ से ज्यादा प्यार करता हुँ।

आई लव यु मम्मी सो मच मैं आप की पेंटी और ब्रा दोनों डेली धो सकता हु ।

मम्मी: मैं भी तुम्हारा अंडरवियर रोज़ धो सकती हु

अगर तुम भी मुझे मेरे हस्बैंड यानि अपने पापा से ज्यादा प्यार करोगे।

मै मम्मी का मैसेज पढ़ कर कन्फ्यूज्ड था की क्या जवाब दू। प्यार तो मैं भी मम्मी से करता हूँ पर मम्मी कौन से प्यार की बात कर रही है।

फिर मैने मैसेज किया

What।

मम्मी: आई लव यु बेटा।

मै:आई लव यु मम्मी

मम्मी से whatsup chat करते हुए साढ़े पांच कब बज गये मुझे पता ही नही चला, मुझे अपनी पत्नी कुसुम को ऑफिस से लाने की बात याद भूल गयी, ऊपर से मेरी बाइक बंद पड़ी थी, मै सड़क पर बन चुकी बरसाती नदी में मम्मी के साथ हो रही chat पढ़ते हुए मुस्कुराता हुआ खड़ा था।

अचानक से सामने एक gov officer की गाड़ी siren देते हुए मेरे पास खड़ी हो गयी। गाड़ी में से बड़ी फुर्ती से गन मेन पीछे से गेट खोल कर उतरा।

मैने देखा मेरी पत्नी कुसुम उसमें बीच वाली सीट पर अकेली हाथ में मोबाइल फोन पकड़े बैठी हुयी थी जो दिखने में किसी बड़ी ऑफिसर की तरह लग रही थी और sdm साहब आगे driver के साथ बैठे हुए थे। कुसुम मुझसे बड़े ही attitude के साथ रुआब दिखाते हुए बोलि यहाँ क्यो खड़े हो?? जल्दी घर पहुँचो??

मै कुसुम का डाइलोग सुनकर मन ही मन बोला तेरी माँ की...........

ये दृश्य देखकर मेरी मुस्की गायब हो गयी, मेरा रोम रोम भरे पानी में जल उठा।

तभी Sdm sir बोले क्या हुआ अरुण???

मै--- sir बाइक बंद पड़ गयी।

Sdm sir -- आ जाये आपको भी घर छोड़ देता हूँ।

मै-- sir कोई बात नही मै आ जाऊंगा।

कुसुम sdm साहब के साथ चली गई।

तभी फिर से तेज बारिश शुरु हो गयी और मेरे आँख के आँसू भी।

मै जिंदगी के उस दोराहे पर खड़ा हो गया कि एक तरफ मुझे जनम और जीवन देने वाली मेरी मम्मी मेरे करीब आ रही थी।

और

दूसरी ओर मेरी जीवनसंगिनी, मेरी पत्नी कुसुम जिसके साथ मुझे पूरी जिंदगी साथ निभाना है वो मुझसे दूर जा रही थी।

मुझे ये जानना है कि टूटती मर्यादा बिखरते रिश्तें की सबसे बड़ी वजह क्या मेरी पत्नी कुसुम की सरकारी नौकरी करने की

""जिद "" है।

जारी है.....
 
मेरी जीवनसंगिनी, मेरी पत्नी कुसुम जिसके साथ मुझे पूरी जिंदगी साथ निभाना है वो मुझसे दूर जा रही थी।

मैने अपने आँखों के आँसू पोंछे। नौकरी के पहले दिन ही इसे हवा लग गयी

मेरे अंदर गुस्से का उबाल भरा हुआ था मैने सोच लिया था आज मै अपनी पत्नी को अपना ओरिजिनल इंडियन हसबैंड वाला रूप दिखाऊँगा अब ये नौकरी जरूर करेगी लेकिन सिर्फ मेरी मै कुसुम की जितनी अकड़ गांड में भरी हुई है वो निकाल कर रहूँगा। मुझे सबके सामने डायलॉग चिपका कर गयी है। खुद को कलेक्टर समझ रही थी।

शाम साढ़े छे बजे मै घर पहुँचा।

कुसुम मेरी मम्मी के साथ खिल खिल करके हँस ते हुए भिंडी काट रही थी और उसने जैसे ही मुझे देखा तो बड़ी ही style में बोली आ गये महाराज

मुझे लगा था कि पानी में बह गये।

हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा

मै गुस्से में चुप कर खिलखिलाना बहुत हो गया।

कितने बजे घर आई ये बता मुझे???

मेरी मम्मी क्या हुआ बेटा ऐसे गुस्से में क्यो है।

मम्मी आप अपनी बहू से पूछो आज किसके साथ ऑफिस से छूटने के बाद मुह काला कर के आई है।

कुसुम पूरे गुस्से में मुझे भिंडी काटने वाला चाकू दिखाते हुए बोली एक मिनिट क्या कहा फिर से कहना. . . ..???

मै-- कुसुम के हाथ में चाकू देखकर डर गया मै को लगा ये पागल कही मुझे मार ना दे। मै डरते हुए बोला जब सुना नही तो छोड़ो।

कुसुम -- फिर से कहना

अरुण चुप कर क्या बोल रहा है बहू से कुछ पता है तुझे, मेरी मम्मी चिल्लाकर मुझसे बोली।

मम्मी -- चुप करो तुम दोनों, कैसे कुत्ता बिल्ली की तरह लड़ रहे हो। अब मै जिससे जो पूछूँगी वो ही बोलेगा।

मै चुप हो गया।

अरुण तू बता बेटा क्या हुआ है??

मै-- मम्मी मै इसे ऑफिस से वापस लाने के लिए जा रहा था तो रास्ते में गाड़ी बंद पड़ गयी। काफी कोशिश की पर स्टार्ट नही हुई सामने आपकी बहू अपने अफसर के साथ गाड़ी में बैठ कर आई और मुझे डाइलोग मारते हुई बोली यहाँ क्यो खड़े हो, जल्दी घर आ जाओ।

कुसुम-- बीच में मेरी बात काट करती हुई बोली तो इसमें गलत क्या बोला मैने। तुम वहा सड़क पर भरे गंदे पानी में जो खड़े थे ।

मम्मी--- बहू अभी तू नही बोल पहले अरुण की बात पूरी करने दो। वैसे बेटा बहू कह तो सही रही थी। इसमें इतनी गुस्सा वाली बात क्या है???

मै मम्मी की बात का क्या जबाब दू क्योकि मै मम्मी से ही व्हाट्स अप chat कर रहा था.

मै-- इसने ये बात जिस अदा से कही थी वो मुझे अच्छा नही लगा।

कुसुम -- मैने क्या गाली देकर कहा था??

मै--- तुम्हारे कहने का तरीका भी गाली से कम नही था।

कुसुम-- मुह टेढ़ा करके मुझे चिढ़ती हुई बोली ओह मेला बाबू शोना यहाँ क्यो थडा है ऐसे पूछती sdm sir के सामने।

ये सुनकर मेरी हँसी छूट गयी।

हाहाहा हाहाहा हाहाहा

मेरा गुस्सा कम हो गया

खैर छोड़ो ये बात मुझे ये बताओ तुम अपने अफसर के साथ अकेली गाड़ी में क्यो आई?? मै तुम्हे लेने आ तो रहा था??

कुसुम--- ओह तो ये असल बात है तुम्हें ये देखकर मिर्ची लग गयी कि मै sdm sir के साथ आई।

मै--- हा।

कुसुम--- मै अपनी मर्जी से नही आई gov ऑफिस है पूरा स्टाफ जल्दी घर जाने का बहाना ढुढ़ता है, जैसे मौसम खराब हुआ सब भग गये। मै अकेली रह गयी तुम्हारा इंतजार कर रही थी पर मौसम खराब के कारण मैने तुम्हे फोन नही किया क्योकि तुम्हें क्यो परेशान करू।

बारिश बंद हुई तो मै भी निकलने लगी तभी sdm sir भी निकल रहे थे उन्होंने फोर्स किया तो मै उनके साथ गाड़ी में बैठ गयी और mr अरुण मै अकेली नही थी मेरे साथ एक लड़की और थी हम दोनों बीच वाली सीट पर थे वो पिछले चौराहे पर उतर गयी थी उसका घर आ गया था समझे महाराज।

मै क्या बोलू मेरे पास अब कोई जबाब ही नही था। मै अटकते हुए वो वो वो

कुसुम -- वो वो वो क्या कर रहे हो, अपनी गलती मानने की वजह मुझ पर भड़क रहे हो। शादी के तीन महीने हो गये पर अब तक तुम मुझे समझ नही पाये मुझे लगता है सारी जिंदगी लग जायेगी तुम्हे पर मुझे कभी समझ नही पाओगे। और जब गाड़ी खराब हो गयी थी तो उसे किसी mechnic के पास ले जाते तुम तो गंदे पानी में खड़े होकर मुस्की छोड़ रहे थे।

मम्मी-- बस करो अब बहुत हो गया बहू पति है तेरा। चलो अब किचिन में खाना बनाना है वैसे भी सात बज गये।

कुसुम और मम्मी किचिन में चले गए।

""मै सोच रहा था शायद कुसुम की गलती नही है मै बेवजह उस पर भड़क गया ""

(कुसुम और मम्मी किचिन में बातें कर रही थी। जिसकी आवाज मुझे साफ सुनाई दे रही थी।)

मम्मी--- सच कहु बहू वैसे गलती तेरी है तुझे अरुण रास्ते में मिल गया था तो तुझे साहब की गाड़ी से उतर जाना था और अपने पति के साथ घर आना था। अगर तेरी जगह मै होती तो अपने पति के साथ ही आती।

कुसुम-- आप मम्मी अब भी मेरी गलती मान रही हो, अब मै क्या बोलू आपको

मम्मी-- बोल दे बहू सच बोल दे जो तेरे दिल, मन और दिमाग में सब आज बता ही दे तू क्या सोचती है मेरे बेटे के बारे में ।

मेरा बेटा तो तुझे कितना प्यार करता है। ख़ुशनसीब है जो इतना प्यार करने वाला पति मिला है।

कुसुम --- वही तो सबसे बड़ी प्रॉब्लम है आपके बेटे को सिवाय प्यार करने के अलावा कुछ नही आता है, प्यार के अलावा उसे ना ही कुछ दिखता है, सूझता है, और ना ही सोचता है। उसके इसी प्यार से मुझे irritate होता है। हद से ज्यादा प्यार गुलाम बना देता है। उसके इसी प्यार की वजह से मै पेट से हो गयी। वो तो आजाद घूम रहे है, पर मै फँस गयी अब एक साल तक पेट फुला के घर में बैठो।

अरुण की filospi भी इतनी छोटी है कि मुझे सुनकर ही गुस्सा आता है, मुझे हमेशा एक ही बात बोलते है मै 15 हजार रुपये महिना कमा रहा हूँ, पापा की पेंशन आ रही है, खुद का घर है, एक मिडिल क्लास फैमिली को क्या चाइये। वो बस इसी में खुश है और इससे ज्यादा करने की ना सोचते है और ना करने की कोशिश करते हैं। मेरे सपने बड़े है मुझे clerk बने रह कर पूरी लाइफ बर्बाद नही करना है। मुझे senior officer बनना है, जल्दी से जल्दी प्रमोशन चाहिए, मेरे नीचे भी बत्ती वाली गाड़ी लगी हो, gun man, assitant, gov बंगला, एक vip की तरह रहना है, इसके लिए मुझे जो करना चाहिए वो मै करूँगी।

इस दुनिया में आप जैसी सासु माँ के लिए उसका बेटा कभी गलत हो नही सकता हमेशा बहू ही गलत होती है। तारीफ तो तब है जब आप जैसी मम्मी अपने बेटे की माँ की जगह एक दिन के लिए पत्नी बन कर देखो तब आप को पता चलेगा कैसा है आपका लाडला बेटा ।

""कुसुम को नही पता था इस बार उसने बिना कुछ सोचे समझे बहुत गंदी और गलत बात बोल दी थी ""

मम्मी-- बहू बोलने से पहले कुछ सोच लिया तो कर।

कुसुम-- इसमें सोचना क्या है मै सच बोल रही हूँ वैसे भी एक माँ और पत्नी के रिश्ते में कोई ज्यादा फर्क नही है दोनों एक जैसे है। सिवाय रात को मर्द के साथ बिस्तर गरम करने से ही पत्नी और माँ का रिश्ता बदल जाता है, बस यही से सोच, और फीलिंग्स बदल जाती है। मै आपसे शर्त लगाती हूँ कि आप उसे एक दिन केवल पत्नी की तराह ट्रीट कर के देखो एक दिन में ही दूध का दूध और पानी का पानी सब समझ आ जायेगा। और आप की अकल ठिकाने ना आये तो कहना।

मम्मी-- बहू इतना घमंड अच्छा नही है, क्यो अपने ego की वजह से अपनी खुशयो में आग लगा रही है।

कुसुम बड़ी जोर से हँस पड़ी हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा

मेरी प्यारी मम्मी आप तो serious हो गयी मै मजाक कर रही हूँ। आपका लाडला बेटा और मेरा पति थोड़ा टेढ़ा है पर सिर्फ मेरा है, मम्मी के गाल नोचते हुए कुसुम बोली

""मै कुसुम और मम्मी के एक दिन की पति बनने की शर्त को सुनकर शॉकड हो गया था।""

मम्मी चल अब बहुत हो गया हँसी मजाक रोटी बना जल्दी।

खाना बनने के बाद हम तीनो खाने बैठ गये। कुसुम मुझसे बोली अब आप वापस कब जा रहे है आपकी अब यहाँ कोई जरूरत नही है मै और मम्मी अब आराम से सेट हो गये है, आप क्यो अपनी छुटिया बढा रहे हो।

मम्मी -- तुझे अरुण को वापस भेजने की बड़ी जल्दी है। दो चार दिन रह लेगा तो तुझे क्या परेशानी है।

कुसुम--- मुझे कोई परेशानी नही है आपका बेटा ही बोल रहा था मै नही रूकूँगा वापस जाना है कॉलेज की छुट्टी ज्यादा हो गयी है। मै तो चाहती हूँ वो खुश रहे यहाँ रहे या वहा रहे।

कुसुम-- मुझे शांत हो के क्यो बैठे हो कुछ बाते करो मुझसे।

मैने कुसुम से पूछा कैसा रहा आज gov office का पहला दिन???

कुसुम बोली मस्त, साहब बोले कभी कभी ऑफिस जाना और कमरे पर आराम करना छुट्टी पर जाना तो पहले 15 दिन बता देना और वापसी तारीख पर present होना है। साहब ने कह दिया तनखाह बन्ने में समय लगेगा पेसे चाहो तो कैशियर बाबू से ले लेना । पहले मुझे साहब से थोड़ा डर लग रहा था। लेकिन Sdm साहब सिर्फ फोन से ही बात करते है मीटिंग में कभी कभी सामने आते है तो मेरी तरफ देखते ही नहीं फिर मेरा डर दूर हो गया।

खाना खा कर कपड़े चेंज करके कुसुम मम्मी सोने लगी तो मैंने कहा- मम्मी मै आज भी होटल चला जाता हूँ सोने ।

तो मम्मी बोली क्यों न बेटा आज हम एक ही कमरे में सो जाये।

मैने ने कहा- सो सकते हैं, आइडिया बुरा नहीं है. पर

मेरा होटल बेडरूम बेहतर है ac भी लगा है। यहाँ मच्छर भी ज्यादा है इसलिए मै जाता हूँ. वैसे भी एक रात की बात है कल मै टिकिट करा कर चला जाऊंगा।

मम्मी बोली कल कही मत जा और एक दो दिन रुक ले। मै बोला ठीक है सोच कर बताता हूँ।

मै जैसे ही जाने को हुआ तो कुसुम पीछे से बोली आपको सुबह जल्दी आने की जरूरत नही है मै ऑफिस अकेले आ जा सकती हू। वैसे भी वो ऑफिस है कोई स्कूल नही कि बच्चे को छोड़ने जाओ और लेने आओ। आप आराम से आइयेगा।

मै होटल के लिए निकल गया।

मैं रात भर बिस्तर पर करवट बदलते रहा पर नींद आँखों से दूर थी, आज कुसुम और मेरी मम्मी के बीच किचिन में जो बातें हुयी उन्हे याद कर के मेरा दिल बैठा जा रहा था,

एक ही सवाल मेरे दिमाग में बार बार आ रहा था।

क्या मै एक अच्छा पति नही हू????

पर इसका जबाब मेरे पास नही था तो मैने सोचा क्यो ना जैसे कुसुम ने कहा कि एक दिन के लिए मै अपनी मम्मी का बेटे का रिश्ता भूल कर अगर पति बन जाऊ तो शायद मुझे अपने अंदर चल रहे सवाल का जवाब मिल सकता है कि एक अच्छा पति हू या नही??

इधर मेरी मम्मी का भी यही हाल था वो भी अपनी बहू को झूठा साबित करना चाहती थी कि उनका लाडला बेटा एक अच्छा पति भी है।

मै और मम्मी इसी कश्मकश में finaly इस dicision पर पहुँचे कि कल का दिन हम दोनों एक पति पत्नी के तरह ही रहेंगे।

अगली सुबह

मै मम्मी के मैसेज का इंतजार कर रहा था कि शायद वो आज के दिन एक नये रिश्ते की शुरुआत करे।

इधर कुसुम ऑफिस के लिए चली जाती है, घर का काम ख़तम करने के बाद, मम्मी थोड़ा आराम करती है, उसके बाद मुझे मैसेज.. . ..

मम्मी : कहा हो।

मै: होटल में।

मम्मी: तो घर आ जाओ।

मै: कहीं जाना है।

मम्मी: तू अपनी पत्नी कुसुम से भी इस तरह पूछ सकता है क्या...??

मै: नहीं

मम्मी: तो फटाफट आ जाओ

मै: ओके मम्मी।

१ घंटे में मै घर आ गया।

मम्मी: अरुन बेटा कहाँ घुमाने ले जा रहे हो मुझे।

मै: कब

मम्मी; आज और अभी ।

मै; कहाँ जाना है आप बताओ।

मम्मी: मूवी चले।

मै: ओके चले

मम्मी: क्या पहनु।

मै: आप की मर्ज़ि।

मम्मी:बताओ ना

मै: क्या बोलू

मम्मी: हा।

मै: कोई सूट पहन लो।

मम्मी; मेरे पास अच्छे नहीं है।

मै: कुसुम का कोई सूट डाल लो।

मम्मी: पर वो मेरे को नहीं आयेंगे।

मै:क्यु

मम्मी: उसके साइज में और मेरे साइज में फर्क है।

मै: आप का क्या साइज है

मम्मी: 40-36-40

मै; कुछ नहीं बोला।

मम्मी: क्या हुआ ज्यादा मोटी हूँ।

मै: नहीं कुछ सोचते हुए।

मम्मी: बोल न क्या हुआ।

मै:क्या मस्त फिगर है।

मम्मी: क्या बोला।

मै: कुछ नही।

मम्मी: बोल न क्या बोला।

मै :कुछ नहीं चलो आज मूवी नहीं चलते आप के लिए कुछ सूट खरीदते है।

मम्मी: ओके अब क्या पहनू।

मै: ब्लू वाली साडी पहन लो और

मम्मी: और

मै: कुछ नही

मम्मी: बोल न और।

मै: पेटीकोट और ब्लाउज और

मम्मी: और

मै: और

मम्मी: है बोल ना

मै: और कुछ नहीं बोल के मै कमरे से बाहर निकल आया।

मम्मी कुछ तो समझ जाती है पर कन्फर्म करना चाहती है इसलिए मैसेज करती है

" और क्या पहनु बेटा""

मै थोड़ी देर ख़ामोश रहता हू।

और मम्मी को मैसेज भेज कर बता दिया।

"" ब्लू पेंटी और ब्रा"" सब मैचिंग मैचिंग

मम्मी मेसेज पढ कर हस देती है ।

उनके पति ने कभी नहीं कहा क्या पहनना है, और बेटा ब्रा और पेंटी का कलर बता रहा है।

हाहा हाहा हाहा हाहा

मम्मी का कुछ reply नहीं आया और शायद वही पहनती है जो मैने बोला था ।

और मेकअप के बाद

रूम से बाहर आती है ।

मम्मी: चल

मै: हाँ चलो।

बाहर बाइक के पास आते आते मम्मी मुझसे बोली आज तो ब्लू कलर बोल दिया कल वाइट या पिंक मत बोल देना मेरे पास वो कलर नहीं है, और मुस्करा देती है ।

मै मम्मी की ओर देखते हुए नये खरीद लेते है।

मम्मी: क्या।

मै: वही पिंक या वहाइट।

मम्मी: वो अपनी बीवी को दिलाना ।

मै: उसके पास है अब आप भी खरीद लो हस्ते हुए।

मम्मी मेरे पीठ में कोहनी मारती है और बाइक पर बैठ जाती है।

ऐसे ही बैठे हुए हम दोनों मॉल पहुच गये।

और शॉप देखते हुए दोने गारमेंट्स की दुकान पर गये

और मम्मी के साइज के सुट देखने लगे।

कफी देर देखने के बाद ३ सूट पसंद आये जो पैक करा लिए २ चूडीदार और १ पटिआला सुट।

एक पिंक कलर ,बलैक ,एण्ड ग्रीन।

खरीदने के बाद शॉप से बाहर आते हुए।

मम्मी:कर ली अपने मन की।

मै: अभी कहा।

मम्मी: अब क्या बाकि है।

मै: इनके मैचिंग की अंदर पहनने के लिये।

मम्मी: समझ तो गयी पर मेरे मुह से सुनना चाहती थी।क्या

मै: बोलू ।

मम्मी: हा

मै: ब्रा पैंटी

मम्मी जा अपनी बीवी को दिलाना इस सुट्स की मैचिंग ब्रा और पैंटी।

तू बहुत बेशरम हो गया है अपनी मम्मी को कोई बेटा ब्रा पेंटी दिलाता है ।

मै: हां वो तो है कोई बेटा अपनी मम्मी की ब्रा पेंटी धोके भी नहीं डालता।

हाहाहा हाहाहा हाहाहा हाहाहा

हस्ते हुए हम दोनों घर की और चल देते है।

घर पहुच कर

दोनो थोड़ी देर आराम करते है

डोरबेल बाजति है।

मम्मी घडी देख कर लगता है बेटा तेरी बीवी आ गयी है ।

""मेरी मम्मी और मेरे बीच बन रहे नजाजज् रिश्ते का सच हमारी आँखों में एक डर के साथ साफ साफ दिख रहा था ""

कुसुम क्या हुआ । मम्मी बेटा एक साथ क्यो खड़े हुए है।

मम्मी: कुछ नहीं बहू बेडशीट गन्दी थी उसे चेंज कर रही थी।

कुसुम मुझसे बोली सुनिये आप फटाफट तैयार हो जाये हम दोनों को साहब ने खाने पर बुलाया है। नीचे साहब की गाड़ी खड़ी है खास हम दोनों को ले जाने के लिए।

मै वाह वाह कमाल है मैडम आपको जॉइन किये हुए आज दूसरा दिन है और आपके साहब ने अपने घर आने का न्यौता कर दिया।

कुसुम-- ओहो तुमसे तो बात करना ही बेकार है,

मै-- तो अच्छा है ना तुम्हे जिसके साथ बातें करना अच्छा लगता है उस के साथ ही जाओ।

कुसुम-- मम्मी मै आपको बताती हूँ साहब के यहाँ एक छोटी सी पार्टी है ऑफिस के सब लोग आ रहे है, अरुण को साहब मिल चुके है इसलिए अरुण को भी साथ लाने को बोला है। उन्हे ये नही पता है कि आप भी आई है otherwise आपको भी invite करते। मम्मी आप अपने बेटे को समझाओ ना प्लीज पार्टी में जायेंगे तो नये नये contact बनेंगे, जान पहचान होगी, इससे मुझे जल्दी प्रमोशन मिल सकता है।

मम्मी--- बेटा अरुण तैयार हो जा चला जा बहु के साथ अपनी प्यारी मम्मी की बात मान ले। मम्मी ने कुसुम की बात का समर्थन करते हुए मुझसे कहा।

मम्मी आप कह रही हो तो मै चला जाता हूँ, वैसे आपको अकेला छोड़ कर जाने का मन नही कर रहा है।

कुसुम-- हस्ती हुयी मुझसे बोलि अगर माँ बेटे का सोलो ड्रामा खतम हो गया हो तो अब चले।

हाहाहा हाहाहा हाहाहा

हम घर से निकल गये, रास्ते में कुसुम गुर्राते हुए बोली अब ऐसे मुह मत लटकाओ थोड़ा हँसो, मै तुम्हे कोई मरियत में नही ले जा रही हू, वापस आकर अपनी अम्मा का खूब मन भर कर दूध पी लेना। "हद है यार इन माँ बेटे की नौटंकी।"

आधे घँटे बाद हम पार्टी में पहुँच गए, कुसुम अपनी साथ काम करने वाली लड़कियों के पास चली गई, कुसुम को देखकर उसके सर उसके पास आ गये और कुसुम से बातें करने लगे।

और मै एक साइड खड़ा हो गया।

“ये साली कुसुम तो साड़ी में और भी कमाल लगती है ..पिछवाड़ा तो देख इसका ”

एक अजनबी आवाज को सुनकर मैं अचानक ही रुक गया,ये कुसुम की ऑफिस पार्टी थी और मैं उसके लिए सॉफ्ट ड्रिंक लेने गया हुआ था,

मैंने उन लड़को को घूरा जो कुसुम की ऐसी तारीफ कर रहे थे,कुछ लड़को का ग्रुप था जिनमे एक लड़का बहुत ही हैंडसम टाइप था,डोले शोले और अच्छी हाइट ने उसे और भी आकर्षक बना रखा था,लेकिन उसकी नजर अभी कुसुम के उन्नत पिछवाड़े पर ही टिकी थी साथ ही बाकी लोग भी उसे खा जाने वाली निगाह से देख रहे थे,कुसुम अभी अपने sdm. सर शर्मा जी से हँस हँस कर बाते कर रही थी इन सबसे अनजान की उसके ही ऑफिस के लड़के उसे ऐसी नजरो से घूर रहे है…….

लेकिन मेरे अंदर भी कुछ बदल रहा था,उन लोगो की बात का मुझपर दोहरा असर हो रहा था,एक तरफ ऐसा लगा की सालो के दांत तोड़ दु तो दूसरी तरफ मुझे एक उत्तेजना सी महसूस हुई ,मेरे साथ यही होता रहा है,जब भी मैं किसी को कुसुम को घूरते हुए देखता तो एक अजीब सी जलन और मजा मेरे अंदर घर कर जाता है,

मुझे पहले पहल तो लगा की ये कोई रोग है लेकिन जब मैं इसके बारे में पता किया तो पता चला की ये एक कामन सी चीज है जो हर मर्द में होती है,ज्यादा या कम मात्रा में,ये असल में जलन का ही एक रूप है जब आपकी कोई इन्फिरियरटी के कारण आप खुद को दुसरो से कम समझते है ,और जब कोई आपकी प्रोपर्टी की तरफ देखता है तो कुछ नही कर पाने का दुख उमड़ता है,लेकिन मन धीरे धीरे इसमें मजे लेने लगता है, मर्दानगी का ईगो आप मे जलन पैदा करता है और साथ ही अवचेतन में छुपी हुई कुछ कुंठाये आपके भीतर एक उत्तेजना का संचार भी करती है,ये जितना नार्मल है उतना ही एबनार्मल भी है……

मैं इन सब से पिछले दो महीनों से जूझ रहा हूँ और मुझे एक ही रास्ता दिखा की मैं कुसुम को ही ये फैसला करने दु की उसे क्या चाहिए,मैं किसी भी तरह से उसके ऊपर कोई भी फैसला थोपना नही चाहता ,अगर मैं ऐसा करता तो मेरे मन में ही अंतर्द्वंद की स्तिथि उमड़ जाती ……

मैं अपने ख्यालों से सम्हलता की वही हट्टा कट्टा लड़का बोल उठा,

“शर्मा इसकी लेता है क्या कैसे हँस हँस कर बात कर रही है..”

सभी लड़के मुस्कुरा उठे,

“नही यार साला बुड्डा ठरकी तो है लेकिन इसे नही पटा पायेगा, साली बड़ी नखरे वाली और तेज है लड़को को घुमा कर छोड़ दे “

उस लड़के की आंखों में एक अजीब सा नशा चढ़ गया

“तब तो ये मेरे लायक है ..”

वो बड़े ही शान से बोला ..

मैं चलता हुआ कुसुम तक पहुच गया मुझे देखकर शर्मा जो जोरो से हँस रहा था, उसकी हँसी थोड़ी कम हो गई जैसे झेंप गया हो या मेरा आना उसे पसंद नही आया हो …

“कैसे हो अरुण ..”

“अच्छा हु सर ,नाइस पार्टी भाभी जी नही दिख रही “

मेरी बात सुनकर उसका चहरा पूरी तरह से उतर गया..

“होंगी यही ओके तुम दोनो एन्जॉय करो मैं बाकी के गेस्ट से मिलता हु ..”

उसके जाने के बाद कुसुम ने और मैंने एक दूसरे को घूरा और हँस पड़े ,

“साला ठरकी ,अच्छा हुआ की तुम जल्दी आ गए नही तो इसे सम्हालना बहुत मुश्किल हो जाता है ,साला चिपके ही जाता है “

कुसुम की चंचल हँसी को मैं बस देखता ही रह गया…

वो सच में कमाल की लग रही थी ,मादकता उसके जिस्म के हर हिस्से से फूटे जा रही थी , तीन महीने हो चुके है हमारी शादी को लेकिन जब भी उसे देखता हू पता नही साला मेरा बाबूराव ऐसे क्यो अकड़ जाता है, मेरी हवस भरी निगाहों को वो आसानी से पहचान गई ..

“यंहा तो सब्र करो,अपनी ही बीवी को ऐसे घूर रहे हो..”

उसके आवाज में थोड़ी मस्ती थी ,

“तुम हो ही ऐसी ,सोचो मेरा ये हाल हो रहा है तो दुसरो का क्या हो रहा होगा,उस बेचारे शर्मा का क्या दोष और उन लड़को का जो तुम्हे देखकर आहे भर रहे है ..”

उसने अपनी आंखे बड़ी कर ली

“कौन लड़के ??”

मैंने हल्के आंखों से उन लोगो की तरफ इशारा किया,वो भी बहाने से पलटी ..और फिर मेरी तरफ देखने लगी ,

“ये साले ऑफिस के ठरकी लोग है ,इनका काम ही यही है,हा लेकिन वो नया लड़का थोड़ा अलग है ,उसमे एक बात है..हैंडसम भी है ..”

कुसुम ने थोड़ी शरारत फिर से दिखाई, उसे भी मुझे थोड़ा जलाने में मजा आता है, मैंने आंखों में ही पूछ लिया की वो किसकी बात कर रही है,

“चलो मिलावाती हु ..”

वो मुड़ी और थोड़े ही देर में हम उन्ही लड़को के पास थे..

“हाय कैसी चल रही है तुम लोगो की पार्टी..शर्मा कभी कभी तो मेहरबान होता है,फोकट की दारू ज्यादा मत पी लेना ..”

कुसुम का अंदाज बहुत ही फ्रेंडली था,मैं भी थोड़े आश्चर्य में था की ये वही लड़के है जिन्हें ये अभी गालियां दे रही थी ..

“ओह इनसे मिलो मेरे पतिदेव अरुण ..”

कुसुम ने मेरा सभी से परिचय करवाया और सभी ने बड़े ही अच्छे ढंग से मुझसे हाथ मिलाया ,लेकिन आखिर में ..

“और ये है हमारे ऑफिस के सीनियर मेंबर राज , अभी ही आया है..”

ये वही लड़का था जिसके बारे में कुसुम ने मुझसे कहा था,और साथ ही वो जो कुसुम को पटाने की बात कर रहा था,

साला था तो दिखने में बेहद हैंडसम ,लेकिन उसकी बात सच हो पाएगी या नही ये मैं नही कह सकता क्योकि मैं कुसुम को जानते हुए भी नही जानता हू, उसका अंदाज जितना बिंदास ,अदाएं उतनी ही कातिलाना लेकिन दिमाग उससे भी ज्यादा तेज ,किसी लड़के की वो फेंटेसी हो सकती है लेकिन उसे पाना कोई आसान काम तो नही लगता….

पार्टी अपने सबाब पर पहुच चुकी थी और कुसुम के साथ साथ मैं भी कुछ ड्रिंक्स अंदर कर चुके था, कुसुम पीने के बाद और भी मतवाली हो जाती है,वो दुनिया की फिक्र भूल कर मेरे साथ डांस करने लगी,लगभग सभी डांस फ्लोर में आ चुके थे…..

मैंने कुसुम को कस रखा था और कभी कभी उसके जिस्म को मसल भी देता था,उसकी आंखों में भी वासना की लहरे नाचने लगी थी,लेकिन अभी हम इसे कम नही करना चाहते थे,आज तो बिस्तर में भूचाल आना तय था लेकिन अभी उसे आग और भड़काने का दिल था……..

“मुझे एक और ड्रिंक चाहिए “ कुसुम मेरे कानो में चिल्लाई

“कितना पीयेगी बेवड़ी “

मैं उसके कानो में चिल्लाया और वो खिलखिला के हँस पड़ी ..

“प्लीज़ जान “ वो फिर से चिल्लाई और मैं मुस्कुराते हुए उसके लिए ड्रिंक लाने चला गया, डांस फ्लोर में अंधेरा था लेकिन डांस लाइट के कारण उजाला और अंधेरा बार बार हो रहा था,कभी जैसे आधे सेकंड के लिए रोशनी हो जाती फिर से आधे सेकंड का अंधेरा ..

मैं बार में खड़ा हुआ अपने पैक का इंतजार कर रहा था,और मेरी निगाहे अभी भी कुसुम पर थी जो अभी भी मस्त हुई नाच रही थी ,तभी किसी ने उसे पीछे से जकड़ लिया,वो कोई नही राज था,उसने कुसुम के कानो में कुछ कहा वो पलटी और उसे देखकर हँसने लगी,दोनो साथ डांस कर रहे थे …….

लेकिन अभी तक मुझे कुछ भी गलत नही लगा लेकिन राज ने अपने हाथ आगे बढ़ाये और कुसुम की कमर को सहलाने लगा, कुसुम नशे में थी या शायद उसे उसके ऐसा करने में कोई आपत्ति नही थी ,उसकी कोई प्रतिक्रिया नही आयी और राज ने उसे थोड़ा और अपने पास खिंचा,

मेरी मतवाली और मदहोश बीवी के साथ उस खूबसूरत मर्द को देखकर एक अजीब सा अहसास मेरे अंदर आ गया,मैं कोई प्रतिक्रिया नही कर रहा था लेकिन एक उत्तेजना मेरे अंदर बढ़ रही थी,मेरा लिंग अकड़न खा रहा था,तभी राज ने कुसुम को और जोरो से अपने करीब खिंच लिया ,और उसके कानो में कुछ कहने लगा,कुसुम हंसते हुए उसके सीने में एक मुक्का मार गई

,दोनो के चहरे बेहद करीब थे ,राज का हाथ कुसुम के कमर को जकड़े था जो उसकी साड़ी के कारण खुला हुआ था,सीधे चमड़ी का स्पर्श राज के अंदर क्या भावना जगा रहा होगा ये तो मुझे नही पता लेकिन मेरी हालत खराब थी ,मैं बेहद ही उत्तेजित महसूस कर रहा था,मैंने अपनी बीवी को किसी मर्द के इतने पास अपने कंपोंडर दोस्त के बाद आज देखा था…

मेरी ड्रिंक्स आ चुकी थी और मैं उसे लेकर फिर से कुसुम की तरफ बढ़ा,राज ने मुझे आते देख लिया और वो कुसुम से थोड़ा दूर हो गया,मैंने कुसुम को उसकी ड्रिंक दी और राज को एक हल्की स्माइल वो झेंपा लेकिन मुस्कुराता हुआ हमसे अलग हो गया…

ड्रिंक खत्म होने के बाद मैं कुसुम से चीपक चुका था,कुसुम मेरे सीने में अपना सर रखे हुए थी और मैं उसे अपनी बांहो में भरा हुआ था,गाना भी रोमांटिक चल रहा था

मिलाओ ना निगाह हमसे, करोगे कैसे निकाह हमसे

ए दिल ए दिल ए दिल

और कुसुम भी नशे में चूर हो चुकी थी……

“क्या हो रहा था उसके साथ “

मैंने हल्के से उसके कानो में कहा,वो मुझसे थोड़ी और चीपक गई

“बस थोड़ी मस्ती ,आपको कोई ऐतराज तो नही …”

मैं उसका चहरा देखने उससे थोड़ा अलग हुआ ,उसके होठो में एक नशीली सी मुस्कान थी जैसे कह रही हो की देखो

"मैं कितनी कमीनी हु…"

“फिलहाल तो आज तुम होटल मेरे साथ चलो तुम्हारी पूरी मस्ती निकलता हु “वो खिलखिलाई और “आप ठरकी हो ये तो पता था लेकिन इतने हो ये नही पता था,इन पोर्न वेबसाइट्स और कहानियों ने अपका दिमाग खराब कर रखा है..”वो गुस्से में थी लेकिन होठो में मुस्कान लेकर ..

पूरे रास्ते कुसुम बेहद ही उत्तेजित लग रही थी वही हाल मेरा भी था,मेरे सामने बार बार कुसुम और उसके चाहने वाले राज का चहरा घूम रहा था,जब राज ने कुसुम के कमर में हाथ डाला था वो सीन ही मुझे गुस्से के साथ साथ उत्तेजित कर दे रहा था….

जारी है.......
 
बहुत बहुत शुक्रिया आभार व्यक्त करते हुए मै कुछ और भी लिखना चाहता हूँ.....

Incest, cuckold, wife swap, homosexul, age gape relation.

ये बबहुत ही सेंसटिव विषय है, इन में अक्सर कोई कब कैसे क्यो फँस जाता हैं इसका कोई सटीक जबाब नही है, लेकिन ये मनोरोग, हो सकते हैं जिनका इलाज संभव नहीं है।

KUSUM एक महत्व कान्छी लड़की है, वो अन्य लड़कियों की तरह नही है जो सिर्फ घर, बच्चे, और पति के बिस्तर से बंधी रहती है। पहले कुसुम शायद अकेले खड़े होने से डरती थी, उसे लगता था समाज उसका बहिष्कार करेगा। लेकिन अब अकेले अपने बलबूते पर खड़े होकर खुद समाज को डराना चाहती हैं।

अरुण की माँ उम्र के उस पड़ाव में है जहाँ अक्सर नादानी और तर्जुबे का बटवारा हो रहा है।

अंत में आपका रिव्यू कहानी लिखने में बहुत मजा दे रहा है।

धन्यवाद
 
अध्याय --- 14 ----

------------ ""पतन की शुरुआत "" ------------

“फिलहाल तो आज तुम होटल मेरे साथ चलो तुम्हारी पूरी मस्ती निकलता हु “वो खिलखिलाई और “आप ठरकी हो ये तो पता था लेकिन इतने हो ये नही पता था,इन पोर्न वेबसाइट्स और कहानियों ने अपका दिमाग खराब कर रखा है..”वो गुस्से में थी लेकिन होठो में मुस्कान लेकर ..

पूरे रास्ते कुसुम बेहद ही उत्तेजित लग रही थी वही हाल मेरा भी था,मेरे सामने बार बार कुसुम और उसके चाहने वाले राज का चहरा घूम रहा था,जब राज ने कुसुम के कमर में हाथ डाला था वो सीन ही मुझे गुस्से के साथ साथ उत्तेजित कर दे रहा था….

रास्ते में हमने कुछ खाना भी पैक करवा लिया क्योकि साहब की पार्टी में हमने खाया कम और पिया ज्यादा था।

आधे घंटे बाद हम दोनों होटल पहुँच गए, गाड़ी से उतरते ही कुसुम मुझसे एक नशीली कातिल मुस्कान के साथ कान में बोली मेडिकल पर जाइये और एक स्ट्रॉबेरी ले आइये, मै कुसुम की बात समझ नही पाया और कुसुम से दोबारा पूछा क्या??

कुसुम कुछ ज्यादा ही नशे में थी वो मेरे करीब आई और मेरे लंड को छेड़ते हुए बोली इसका स्वाद बदलने की दवाई समझे। हाहाहा हाहाहा हाहाहा

मै तुरंत ख़ुशी से oh अभी आया कुसुम ऊपर होटल के कमरे में चली गई।

हल्के मध्यम रोशनी से पूरा कमरा जगमगा रहा था,हवा में उड़ाती हुई खुशबू ने मेरे नथुनों को भर दिया,मैं आश्चर्य से भर गया जब मैं कमरे में घुसा,अभी कुसुम कही दिखाई तो नही दी लेकिन मोहोल को देखकर जरूर लग रहा था की आज कुसुम रोमांस के फूल मुड़ में है ,मैं धीरे से जब अपने कमरे में पहुचा तो पाया की वो बाथरूम में है और साथ ही बेड में पड़े उसके उत्तेजक अंतः वस्त्रो ने ये बात कन्फर्म कर दी थी की आज वो जलवे बिखेरने वाली थी ,मैंने उन अंतः वस्त्रो को देखा वो बिल्कुल ही नए थे जैसे पहली बार आज ही उनका इस्तेमाल होने वाला हो,वो बहुत ही मुलायम थे इनके मुलायम की उन्हें छूते ही मेरा लिंग अकड़न खाने लगा, मैं जल्दी से बाथरूम के दरवाजे के पास पहुचा दरवाजा खुला हुआ था मैं अंदर दाखिल हो गया,कुसुम अंदर बिना किसी कपड़े के शावर के नीचे खड़ी हुई थी ,मैंने भी जल्दी से अपने कपड़े फेके और पीछे से उसे जाकर अपनी बांहो में भर लिया..वो मुस्कुराई ले आये दवाई ..

“हा मेरी जान बड़ी मूड में लग रही हो ..”वो हल्के से हँसी

“और आप हमेशा की तरह जल्दबाजी में ..”वो खिलखिलाई

“कभी तो थोड़ा सब्र करो ,भाग थोड़ी ना रही हु, इतना इंतजाम किया है और आप यही शुरू हो जाओगे,”उसका गीला हाथ मेरे लिंग पर था, सच में मैं यही सोच रहा था की कभी अकड़े हुए लिंग को उसकी गीली योनि में घुसा ही दु ,लेकिन उसकी बात सुनकर मैं थोड़ा खुद पर कंट्रोल पाने की सोची..

“ऐसे भी मेरे पास कुछ ऐसी खबर है की आप आज रात धमाल मचा दोंगे,पानी गिर गया तो फिर खबर का मजा नही आएगा ..”वो फिर से अपनी चिर परिचित अंदाज में खिलखिलाई और झट से टॉवेल उठाकर बाहर निकल गई ..

उसकी बात सुनकर मेरे दिल की धड़कने बढ़ गई थी ,मेरा दिमाग ही ऐसा था की मैं एक साथ कई पॉसिबिलिटी के बारे में सोचता हू।

उसके साथ ही मैं अपने लंड को सहलाता हुआ बाहर निकला और जल्दी से एक शार्ट पहन लिया ,मेरी उत्तेजना की शिखर ये था की लिंग शार्ट को मानो फाड़कर बाहर आना चाहता था,एक तंबू साफ साफ दिख रहा था,

उसने एक झीनी सी नाइटी पहनी और उसके ताजे अंतःवस्त्र उसमे से झांकने लगे …

मैंने उसे फिर से जकड़ लिया था मेरा लिंग उसके कूल्हे में गड़ा जा रहा था ,साला सोने का नाम ही नही ले रहा था…

“ओहो चलो खाना तो खा लो “

“मुझे तो बस तुम्हे खाना है ,”मैं उसके गर्दन को चूमने गला वो मचली और तेजी से मुझसे अलग हो गई उसके होठो में शरारत भरी मुस्कान थी ,

“अगर ऐसा किये ना, तो कोई बात नही बतलाऊंगी “वो हसंते हुए बाहर निकल गई और खाना टेबल में सजाने लगी,मैंने अपने लिंग को सहलाया ..

“थोड़ी देर सब्र करले बेटा नही तो कुछ भी नही मिलेगा “

खाना बड़ी मुश्किल से अंदर जा रहा था,आज मैं उसकी चुदाई को इतना बेताब था जिसे मैं दो ढाई महीने से चोद रहा था,

हवसी तो मैं पहले से था लेकिन लग रहा था की अपनी फेंटेसी की वजह से मेरी पुरानी हवस फिर के जाग गई है और बड़ी जोर से जागी है …

पूरे खाने के दौरान कुसुम ने मुझे अपने से दूर ही रखा और मैं उसे देखकर अपना लिंग मसलता रहा,मुझे लगा की साला आज तो ये अंदर जाए बिना ही झड़ जाएगा …

मैं अपनी हवस को काबू पाने के लिए थोड़ा इधर उधर चल रहा था,जब ये कम नही हुई तो मैं अपने तकिये को मारने लगा,कुसुम मुझे देखकर हँसने लगी..

“पूरी ताकत यही निकाल दोगे क्या ..”उसे पता था की जब मैं ज्यादा जोश में आता था और मुझे उसका साथ नही मिलता था तब मैं अपनी उत्तेजना को कम करने के लिए पंच तकिये को मारा करता हू,खासकर उसके पीरियड वाले टाइम में मैं कई घण्टे तक उसे मरता थक जाता था ।

लेकिन फिर कुसुम की टांगो को देखकर उत्तेजित हो जाता,आखिर उस बेचारी को अधिकतर मेरा लिंग अपने मुह और हाथो से मसल कर झडना पड़ता था,कुल मिलाकर मैं हवसी था जिसे कुसुम जैसी समझदार लड़की ही अपने प्यार से मैनेज कर पाती थी …

मैं तुरंत ही उसके ऊपर कूद गया ,उसकी आंखों को देखकर थोड़ा शांत हुआ,और उसके होठो को अपने होठो में भर लिया..

जब सांसे फूलने लगी तो हम अलग हुए ..

“क्या बताना चाहती थी “

मैं थोड़ा शांत हो चुका था ,

जब मेरी बीवी ने मुझसे कहा की तुम अपनी एक सेक्सुअल फैंटसी(इच्छा) बताओ और बदले मे तुम मेरी सेक्सुअल फैंटसी पूरी करना !

तो मैंने उसे बताया की मुझे आज की ये होटल की रात अपनी हनीमून वाली रात बनानी है तो वो मुस्कुराने लगी और कहनी लगी डिमांड तो बड़ी करी हैं आपने बदले में मैं भी बड़ी डिमांड करुँगी!

मेरी आंखे बड़ी हो गई और लिंग ने फिर से फुंकार जोरो से मार दी ,मैंने अपने लिंग को इतने जोरो से सहलाया की वो हँस पड़ी ..

“क्या तुम भी बस इतनी सी बात पर ऐसा खड़ा कर रहे हो पहले पूरा तो सुन लो “

मैं अधीरता से उसे देखने लगा ..

वो मुस्कुराते हुए मेरे सीने से लग गई ..

उसने आखिरी लाइन को थोड़ा मजाकिया अंदाज में कहा था लेकिन मेरे लिए इतना भी काफी था मैंने उसे झट से नीचे लिटा दिया और उसके ऊपर टूट पड़ा ,पहले तो हंसती रही लेकिन फिर वो सिसकियां लेने लगी ,मैं उसके पूरे बदन को अपने थूक से गीला कर रहा था,

उसे भी पता था की मेरी इस उत्तेजना का कारण क्या है लेकिन हवस थोड़ी ही देर में प्यार की शक्ल लेने लगा,जिस चहरे को तीन महीनों से देख रहा था वो रोज मुझे कुछ नया ही लगता था,हर नजरिये के साथ साथ नजर भी बदलते जाती है ,

वो इतनी मासूम लग रही थी की मुझे खुद पर भी थोड़ा गुस्सा आने लगा की मैने अपनी इतनी खूबसूरत बीवी को खुद से दूर रहकर अकेले रहकर नौकरी करने की सहमति क्यो दे दी। और अपनी प्यारी कुसुम को दूसरे मर्दो के बीच अकेला छोड़ दिया। जहा हर मर्द उसे फसाना चाह रहा है।

""आज तो कुसुम सिर्फ बातें ही कर रही थी अगर असल जिंदगी में वो किसी के साथ पट गयी तो उसका सामना करना मेरे लिए बेहद ही मुश्किल होगा…""

उसने मेरी आंखों में झांका मैं अभी भी उसके आंखों में डूबा हुआ था,उसकी आंखे थोड़ी पनियाई जैसे पहले पहले प्यार में अक्सर होता है,शायद ये थोड़ी थोड़ी शरारतें हमारे प्यार को कभी बूढ़ा होने नही देंगी,हम आज भी उसी नए जोड़े की तरह एक दूसरे के साथ व्यव्हार कर रहे थे जैसा की शादी के समय किया करते थे,वो आज भी मेरी आंखों में प्यार देखकर इमोशनल हो जाती और आज भी मैं उसकी आंखों में पानी देखकर उसके प्यार में और उतर गया,

मैंने अपने होठो को उसके आंखों पर लगा दिया,उसका पानी मेरे होठो से मेरे मुह में चला गया था,उसके होठो पर हल्की मुस्कान खिली और हमारे होठ फिर से मिल गए,मन शांत होने लगा और हवस ने हारकर प्यार का रूप ले लिया,कपड़े खुलते गए और हम एक दूजे में सामने लगे,मन और भी शांत हो रहा था,उत्तेजना बढ़ रही थी लेकिन शरीर के तल पर ही वो मन को नही जला पा रही थी,शरीर के तल पर दोनो ही मिल चुके थे ,सांसे भी एक दूसरे में घुलने लगी थी और मन भी ,..........

अब हम दोनों एक दूसरे के सामने आ गए. उसके दोनों मम्में मेरे सीने से चिपक गए थे, आंचल थोड़ा सा हट गया, था तो उसकी खूबसूरत मखमली वक्षरेखा नज़र आई।

गोरे मम्मों के बीच में मंगल सूत्र!

मैंने नीचे को देखकर कहा- ये मंगल सूत्र भी बड़ा किस्मत वाला है।

वो बोली- नहीं, ये नहीं … आप किस्मत वाले हो।

मैंने उसके सर पर हाथ फेरा और उसके माथे को चूम लिया तो उसने अपना चेहरा मेरे सीने में छुपा लिया और मैंने भी कस कर उसे अपनी आगोश में ले लिया।

15-17 दिनों बाद अपनी बीवी को बांहों में भरा था. मुझे अपनेपन की फीलिंग आई तो मैंने अपनी टांग भी उसके ऊपर रख ली।

अब सब्र सा नहीं हो रहा था तो मैंने उसकी ठोड़ी पकड़ कर ऊपर को उठाई और उसके होंठों पर एक चुम्बन अंकित कर दिया।

बेशक उसने चुम्बन में मेरा साथ दिया, मगर एक कंपकंपी एक हरारत सी मैंने महसूस की।

मैंने पूछा- क्या हुआ कुसुम?

वो बोली- बड़ा अजीब सा लग रहा है।

मैंने कहा- तुम खूबसूरत हो जवान हो, आज पार्टी में बहुत से लोगों ने तुम पर ट्राई किया था।

वो बोली- हाँ किया था, मगर मुझे हमेशा इस बात का डर लगा रहा कि अगर मैंने एक बार गलती कर ली तो हो सकता है, कल वही गलती मेरे साथ साथ मेरी बेटी के भविष्य में उसको नुकसान न पहुंचाए।

मैंने कहा- अरे वाह, बड़ी दूर की सोची, और अगर मुझ से शादी ही न होती तो?

वो बोली- ""सोचना पड़ता है, मर्द और औरत की सोच में बहुत फर्क पड़ता है, आप अगर कोई गलती कर भी लेते तो कोई खास फर्क नहीं पड़ता, इस समाज में मर्द के लिए सब गुनाह माफ है, मगर मेरे किसी एक गुनाह की सज़ा मेरी बेटी भी भुगते, ये मुझे मंजूर नहीं है।""

मुझे इस बात की बड़ी तसल्ली हुई कि चलो जिदी, और गुस्से वाली बीवी मिली, मगर इधर उधर मुंह मारने वाली भी नहीं मिली।

मैंने प्यार में आ कर फिर उसके होंठों को चूमा, मगर इस बार थोड़ा ज़्यादा देर!

और होंठ चूमते वक्त अपनी जीभ से उसके नीचे के होंठ को चाटा भी!

उसने भी अपनी जीभ से मेरी जीभ को हल्के सी छूआ।

अब मैं थोड़ा ज़्यादा फ्री महसूस कर रहा था, तो मैंने उसके आँचल को हटा कर बड़े अच्छे से उसकी वक्षरेखा को देखा और उसको छूकर कहा- ये मेरी सबसे पसंदीदा चीज़ है. मुझे औरतों के बड़े

और गोल मम्में बहुत पसंद है. और बड़ा क्लीवेज तो मेरी कमजोरी है.

मैंने खुश होकर उसके दो गोल और दूध से सफ़ेद मम्में मेरा मन ललचा गए.

मैंने एक को पकड़ कर दबाया- अरे यार, क्या मस्त चूची है तुम्हारी!

वो कुछ नहीं बोली, बस मुस्कुरा दी।

मैंने दोनों मम्में बारी बारी से दबा कर देखे।

बनियान मैंने पहनी ही नहीं थी, तो मैं अब सिर्फ एक छोटी सी चड्डी में था।

कुसुम मेरी चड्डी को देखा, अब लंड तो मेरा पहले ही खड़ा हो चुका था, तो अब मेरी चड्डी काफी फूली हुई लग रही थी।

वो बोली- ठीक है, तो ये बताओ, बातें ही करोगे या चोदोगे भी मुझे?

मैंने कहा- चोदूँगा ज़रूर चोदूँगा, मगर तुम्हें चोदने से पहले तुमसे बहुत से बातें भी करूंगा।

वो मुझसे लिपट कर बोली- बातें और सेक्स दोनों साथ भी तो हो सकते हैं।

मैंने कहा- क्यों चूत में बहुत खुजली हो रही है।

वो बोली- 15-17 दिन बाद आज लंड मेरे हाथ में आया है. कहते हुये उसने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया- अब इसलिए सब्र का पैमाना छलकने को है।

मैंने चड्डी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाया तो उसने हल्की सी सिसकी भरी- सी … आह…

मैंने पूछा- क्या हुआ?

वो बोली- 15-16 दिन के बाद लंड को अपने हाथ में पकड़ा है, बहुत तड़पती थी मैं!

मैंने पूछा- तो जब दिल मचलता था, तो कैसे समझाती थी अपने दिल को?

वो बोली- अरे उसके लिए तो रसोई में बहुत कुछ मिल जाता है.

कह कर वो हंस दी।

मैं समझ गया कि खीरा बैंगन गाजर ने इसके सुख दुख में साथ दिया है।

मैंने अपनी चड्डी उतार दी और उस से बोला- लो मिलो अपने पति से … प्यार करो इसे!

वो उठ कर बैठ गई, और तकिये के पास रखे कंडोम के पैकेट से कंडोम निकालकर मेरी जांघ पर सर रख दिया, फिर मेरे लंड की चमड़ी पीछे को हटा कर मेरा टोपा बाहर निकाला और मेरे सुर्ख लाल टोपे के बिल्कुल शिखर पर चूमा और उस पर कंडोम चढ़ा कर फिर उसे मुंह में लेकर चूस ने लगी।

मैं मन ही मन बड़ा खुश हुआ, क्योंकि कुसुम को कुछ कहने या सिखाने की ज़रूरत नहीं थी, उसे पता था, कैसे क्या करना है। पति को क्या पसंद होता है, इसी लिए उसने बिना कहे ही मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया।

मैंने पूछा- लंड चूसना अच्छा लगता है?

वो बोली- अरे बहुत, इसे चूसे बिना तो सेक्स का मज़ा ही नहीं आता।

आप भी दिखाइए अपनी जीभ का कमाल।

और उसने घोड़ी बन कर अपनी भरी हुई गाँड मेरी तरफ घुमा दी। उसकी दोनों टाँगों के बीच में अपना सर सेट किया. तो उसने अपनी भोंसड़ी मेरे मुंह पर रख दी।

मैंने पहले उसकी चूत की दरार को चूमा और फिर अपनी जीभ की नोक से उसकी चूत की दरार के अंदर डाल कर फेरा.

तो उसने अपनी कमर थोड़ी ऊपर को उठाई। चूत तो उसकी … भर भर के पानी छोड़ रही थी।

एकदम से गीली चिकनी चूत, हल्का नमकीन खट्टा सा पानी का स्वाद मुंह में आया, तो मैंने उसकी सारी चूत को अपने मुंह में भर लिया, और फिर अपनी पूरी जीभ से उसकी चूत के अंदर और उसके चूत के छोले को चाटने लगा।

मैंने कहा- तुम्हें लंड चूसना पसंद नहीं?

वो बोली- पहले नहीं था. मगर आज तो मैं इतनी बेताब हो गई कि मुझे नहीं लगता आगे से मैं इसे बिना चूसे रह पाऊँगी.

और फिर वो मेरा लंड चूसने लगी और मैं उसकी चूत चाटने लगा.

क्योंकि मुझे चूत चाटना बहुत पसंद है. और जो मैं मज़े ले ले कर उसकी चूत चाट रहा था कि अचानक वो तड़प उठी, और अकड़ गई. उसने मेरे सर को अपनी जांघों में भींच लिया और मेरे लंड को अपने दाँतों से काट दिया.

उसके मुंह से सिर्फ ‘उम्म … उम …’ की आवाज़ें ही निकली क्योंकि उसके मुंह में तो मेरा लंड घुसा था। मैं समझ गया कि ये तो स्खलित हो गई। मगर मैं फिर भी उसकी चूत में अपनी जीभ घुमाता रहा।

उसका बहुत सारा पानी मेरे मुंह पे लगा गया, बहुत सारा मैंने निगल लिया।

उसके बाद जब उसने अपनी जांघों की पकड़ ढीली करी तो एकदम से उठ कर मेरे ऊपर चढ़ गई।

“मार डाला ज़ालिम तुमने तो! यार, बस अब एक बार इससे भी स्खलित कर दो मुझे! फिर चाहे जान से मार दो!”

मैं कुछ कहता या करता, उससे पहले ही उसने खुद ही मेरा लंड अपनी चूत पर सेट किया और ऊपर बैठ गई. गीली चूत में मेरा लंड फिसलता हुआ अंदर तक घुस गया।

पूरा लंड अपने अंदर ले कर वो मेरी कमर पर ही बैठ गई।

एक भरा हुआ दूध सा गोरा, नंगा बदन मेरा लंड लेकर मेरी कमर पर बैठा था। मैंने कोई हरकत नहीं करी। एक बार उसने जैसे अपनी पूरी सतुष्टि करी हो कि हाँ एक मजबूत लंड उसकी चूत में अंदर तक घुस चुका है।

उसके बाद उसने आँखें खोली और मेरी तरफ देखा।

मैंने पूछा- क्या?

वो बोली- आपको मेरी ये बेताबी बुरी तो नहीं लगी? कहीं आप सोचें कि कितनी कामुकता भरी है इसमें?

मैंने कहा- नहीं, बल्कि मुझे जैसी पत्नी चाहिए थी, तुम बिल्कुल वैसी हो. बल्कि मेरी सोच से भी बढ़कर। अब अगर ऊपर चढ़ी हो तो रुको मत, चोद डालो मुझे। मैं हमेशा से चाहता हू कि एक भरी पूरी तगड़ी औरत मुझे हराकर मेरे ऊपर चढ़ कर खुद सेक्स करे, मैं उसे नहीं बल्कि वो मुझे चोदे। और देखो तुम मुझे मिल गई। अब शुरू हो जाओ और अपने दिल में छुपी उस रांड को बाहर निकालो, और मुझे एक ज़बरदस्त चुदाई का मज़ा दो।

वो बोली- जो हुकुम मेरे सरकार!

और उसके बाद उसने धीरे धीरे अपनी कमर हिलानी शुरू करी। पहले सीधी बैठ कर फिर, आगे झुक कर फिर मेरे ऊपर लेट कर, मगर उसने अपनी कमर नहीं रोकी, और मेरा लंड बार बार उसकी चूत में अंदर बाहर जाता रहा। पहली उसकी गीली चूत सूखी. और उसके बाद धीरे फिर से वो पानी छोड़ने लगी।

उसकी कमर चलती रही, उसको सांस चढ़ने लगी।

मैंने पूछा- मैं ऊपर आऊँ”?

वो बोली- नहीं, अब तो मर कर ही नीचे उतरूँगी।

वो मुझे पेलती रही.

धीरे धीरे उसके बदन पसीने से भीगने लगा, कुसुम एक शानदार औरत ही नहीं , एक जानदार औरत भी है।

उसके बड़े बड़े मम्में मेरे चेहरे पर झूल रहे थे जिन्हें मैंने खूब चूसा, और बहुत बार ज़ोर ज़ोर से काटा. इतनी ज़ोर से कि कुसुम की चीख निकाल दी.

मगर वो सिर्फ कामुकता के सैलाब में बहती चली गई, एक बार भी नहीं कहा लो मत काटो दर्द होता है।

उसके मम्मों पर मेरे दांतों के बहुत से निशान बन गए।

वो मुझे चोदती रही, चोदती रही, जब तक के मेरे लंड ने उसकी चूत में वीर्य की उल्टी नहीं कर दी।

जब मेरा माल गिरा तो वो बोली- अरे ये क्या किया, अंदर ही गिरा दिया?

मैंने पूछा- क्यों, क्या हुआ,

वो बोली- अरे नहीं, वो बात नहीं, मेरे जिस्म पर गिराते, मेरे स्तनों पर, मेरे मुंह में … मुझे अच्छा लगता है मर्दाना वीर्य में भीगना, उसे टेस्ट करना।

मैंने उसकी चूत से लंड निकाला, जो अभी भी मेरे वीर्य से भीगा हुआ था, और मैंने अपने लंड को उसके मुंह में डाल दिया।

वो बड़े शौक से मेरे लंड को चाट गई। जितना भी वीर्य लगा था, सब चाट गई।

उसके बाद हम दोनों वैसे ही कुछ देर लेटे रहे।

हम कुछ कुछ बातें करते रहे।

ओह जान तुम तो किसी भी मर्द को अपना गुलाम ही बना दोगी..”

मेरे मुह से यही निकला …

मैं थका हुआ उसके ऊपर पड़ा हुआ था वही वो मेरे सर को सहलाती हुई शांत पड़ी थी,जब मैंने उसकी आंखों में देखा तो वो उसकी आंखों में एक अजीब सी हलचल थी और होठो पर एक कातिल मुस्कान…

“सच में मैं किसी भी मर्द को अपना गुलाम बना सकती हु..”

कुसुम की बात से मेरे भी होठो पर एक मुस्कान खिल गई ..

“मुझे तो बना ही चुकी हो …”

वो हल्के से हँसी ..

“अच्छा,लेकिन मुझे तो लगता है की मैं आपकी गुलाम बन चुकी हु ,आपके प्यार के आगे मेरी हुस्न की क्या मजाल है,जब से हमारी शादी हुई है आपके प्यार की कसीस ने मुझे अपना गुलाम ही बना दिया है…”

उसकी आंखों से छलकती हुई सच्चाई की बूंदों को मैंने अपने होठो में भर लिया …

“तुम्हारे हुस्न और सच्चाई ,तुम्हारी ये प्यारी सी आंखे और भरे हुए होठो से छलकते हुए रस के प्याले ,किसी भी मर्द को पागल बना देंगे….तुम जब हंसती हो तो लगता है की चांद खिल गया है,तुम्हारा रूठा हुआ चहरा भी इतना प्यारा है की दिल करता है अपना सब कुछ तुम्हारे कदमो में रख दु …”

मेरी आवाज में कुसुम के लिए बस प्यार ही प्यार था..

और उसके आंखों में आंसू ,जिसे मैं अपने होठो से हल्के हल्के से चूम रहा था,

“इतना ही प्यार करते हो तो हमेशा शक क्यो करते रहते हो ….” आज मम्मी के सामने मुझे कहाँ मुह काला कर के आई हो क्यो बोला था?????

उसकी बात से मैं सकपका गया था,ना जाने क्यो लेकिन उसकी हर बात मुझे अच्छी लगती है उसे मेरे सिवा किसी और की फिक्र ही नही है …

मेरे होठो में हल्की मुस्कान तैरने लगी …

“जलन तो होती है लेकिन फिर भी अच्छा लगता है जब देखता हु की तुम्हारा प्यार बस मेरे लिए है,और उन बेचारों के चहरे में मायूसी देखता हु...मेरे जीवन में सिर्फ तुम ही एक लड़की हो ,मैंने तो कभी कोई लड़की पटाई भी नही लेकिन तुम जिससे बात कर दो वो तुम्हारा दीवाना हो जाता है ,ऐसी बीवी है मेरी तो थोड़ा शक तो बनता है..”

उसने झूठे गुस्से से मुझे मारा ..

“आप भी ना ……..”

लेकिन वो तुरंत ही गंभीर हो गई

“लेकिन अगर किसी से मुझे भी प्यार हो गया तो …”

उसकी बात सुनकर मैं भी गंभीर हो चुका था..

“तो मैं समझूंगा की मेरा प्यार कमजोर था..”

वो थोड़ी देर मुझे देखने लगी ..

“और अगर मैं बहक गई तो ….”

उसकी बातो का इशारा मैं समझ सकता था,

मैं भी गहरे सोच में डूब चुका था..

“मुझे नही पता ….”

मैं बस इतना ही बोल पाया …

उसने प्यार से निहारते हुए मेरे होठो पर अपने होठो को रख दिया ..

जारी है।
 
और अगर मै बहक गई तो ….”

उसकी बातो का इशारा मैं समझ सकता था,

मैं भी गहरे सोच में डूब चुका था..

“मुझे नही पता ….”

मैं बस इतना ही बोल पाया …

उसने प्यार से निहारते हुए मेरे होठो पर अपने होठो को रख दिया ..

थोड़ी देर बाद

“जान अब मुझे तुम्हारी गांड चोदनी है!!” मैंने कहा।

“आप ठरकी हो ये तो पता था लेकिन इतने हो ये नही पता था,इन पोर्न वेबसाइट्स और कहानियों ने अपका दिमाग खराब कर रखा है..”वो गुस्से में थी लेकिन होठो में मुस्कान लेकर ..

“ठीक है आओ चोद लो पतिदेव!” कुसुम बोली

फिर मैं बहुत खुश हो गया था। मैं अपनी खूबसूरत और सेक्सी बीवी की गांड चोदने जा रहा था। और इस बार मैं उसे उल्टा पेट के बल लिटा दिया। कुसुम की कमर के नीचे मैंने 2 मोटे तकिया लगा दिए। अब उसके पुट्ठे और गांड उपर आ गये थे। मैं लेट गया और उसके सफ़ेद पुट्ठो को सहलाता रहा। फिर मैं हाथ से दबाने लगा। मेरी खूबसूरत बीवी के पुट्ठे माशाअल्ला है मैं उसके पुट्ठे को किस कर रहा था और चाट रहा था। कुछ देर तक उसका चुम्बन लेने के बाद मैंने कुसुम के गोल मटोल पुट्ठे खोल दिए। सामने उसकी गांड थी। मैं जीभ लगाकर चाटने लगा। कुसुम “उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी….. ऊँ—ऊँ…ऊँ….”

की आवाज निकाल रही थी। मैं जल्दी जल्दी उसकी चिकनी और कसी गांड पीने लगा। कुसुम को अलग तरह का सुख और नशा मिल रहा था। 15 मिनट तक मैंने अपनी बीबी की गांड पी। कुसुम पेट के बल लेटी हुई थी।

कुसुम खुद ही doggy sytle में आ गयी। उसने खुद की अपनी गांड के छेद में तेल लगा दिया और जल्दी जल्दी ऊँगली करने लगी। मुझे ये देखकर बहुत अच्छा लग रहा था। कुसुम जल्दी जल्दी अपनी गांड में ऊँगली कर रही थी। मैं अपने 9” के लंड को फेट रहा था। कुसुम का सिर बेड पर था और उसने अपनी गांड पीछे से उठा रखी थी। फिर मुझे बहुत जोर की वासना चढ़ गयी थी। मैंने अपने सीधे हाथ की दो ऊँगली में ढेर सारा तेल लगा लिया और कुसुम की गांड में डाल दी। “…..ही ही ही……अ अ अ अ.अहह्ह्ह्हह उहह्ह्ह्हह….. उ उ उ…” वो चीख पड़ी।

फिर मैं पीछे से जल्दी जल्दी उसकी गांड में ऊँगली करने लगा। उफ्फ्फ! कितना कसा छेद था मेरी खूबसूरत बीबी की सेक्सी गांड का। मुझे बहुत कसावट मिल रही थी। मुझे भरपूर मजा मिल रहा था। कुसुम doogy style में बनी हुई थी। आज पहली बार वो अपनी गांड चुदाने जा रही थी। धीरे धीरे मैं गांड में अपनी ऊँगली भीतर तक डालने लगा।

दूसरे हाथ की ऊँगली मैं कुसुम की चूत में करने लगा। इससे उसको बहुत आनंद आ रहा था। उसे भरपूर मजा मिल रहा था। मैं इस समय उसकी रसीली चूत और कसी गांड दोनों में ऊँगली कर रहा था। जब चिकनाहट कम हो जाती थी मैं उसकी गांड में थूक देता था। फिर मै खड़ा हो गया और मैंने आपनी बीबी की गांड में अपना लंड डाल दिया। मेरे लंड में तेल लगा हुआ था। इस वजह से वो आराम से अंदर घुस गया था। धीरे धीरे मैं अपनी बीबी के साथ डीप ऐनल सेक्स करने लगा।

तभी मेरा फोन बजने लगा, कुसुम देखो जरा किसका फोन है रात के बारह बजे किसकी सेजवानी में परेशानी हो गयी????

आपकी मम्मी का फोन है, ओह आह मम्मी ??? में सिसकरिया लेते हुए बोला।

चुप करो वो आपकी मम्मी है, मै फोन पिक करती हूँ जरा रुक जाओ, आह आह

हैलो मम्मी आह आह आह ओह उ शि सी सी।

हैलो कुछ तो बोलो और फोन disconnet हो गया।

क्या हुआ कुसुम???

मम्मी हमारी कामुक सिसकरिया सुनकर फोन काट दी, कल सुबह गाली खाने के लिए रेडी रहना पड़ेगा। और जब मैने आपसे रुकने को बोला तब भी आप और जोर से पेलने में लगे थे। मम्मी के नाम से आप को कुछ ज्यादा ही जोश आ रहा था क्या?????

कुसुम “अई…..अई….अई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….हा हा हा…मेरी गांड फट गयी!! ओह्ह” इस तरह से चीख रही थी। मुझे अच्छा लग रहा था। हम दोनों बेड पर रासलीला कर रहे थे। मैं खड़े होकर अपनी बीबी की गांड चोद रहा था। दोस्तों मैं समझता था की गांड में कभी लंड नही जाएगा। पर मैं पूरी तरह से गलत था। आज तो मेरा 9” का लंड आराम से अंदर घुस गया था। मैं झुककर किसी कुत्ते की तरह अपनी बीबी की गांड मार रहा था। कुसुम कामुक किलकारियाँ निकाल रही थी। उसकी बड़ी बड़ी चूची नीचे को लटक रही थी। सेक्स के नशे में मैं उसके गोल मटोल पुट्ठो पर कई चांटे चट चट करके मार दिए। कुसुम के सफ़ेद गोरे पुट्ठे पर मेरी ऊँगली गुलाबी रंग की छप गयी। फिर मैं उसके साथ ऐनल सेक्स करने लगा।

वो “आऊ…..आऊ….हमममम अहह्ह्ह्हह…सी सी सी सी..हा हा हा..” की कामुक आवाजे निकाल रही थी। मेरा लंड उसकी गांड में जल्दी जल्दी और बड़ी आसानी से फिसल रहा था। मैंने अपना बाया हाथ उसकी चूत के दाने पर रख दिया और जल्दी जल्दी उसके चूत के दाने को सहलाने और घिसने लगा। कुसुम को आज परम सुख मिल रहा था। मैं जल्दी जल्दी बेड पर खड़े होकर अपनी बीबी की गांड चोद रहा था। आधे घंटे की गरमा गर्म चुदाई के बाद

हमममम अहह्ह्ह्हह…सी सी सी सी..हा हा हा..” की कामुक आवाजे निकाल रही थी। मेरा लंड उसकी गांड में जल्दी जल्दी और बड़ी आसानी से फिसल रहा था। मैंने अपना बाया हाथ उसकी चूत के दाने पर रख दिया और जल्दी जल्दी उसके चूत के दाने को सहलाने और घिसने लगा। कुसुम को आज परम सुख मिल रहा था। मैं जल्दी जल्दी बेड पर खड़े होकर अपनी बीबी की गांड चोद रहा था। आधे घंटे की गरमा गर्म चुदाई के बाद मैंने अपना माल उसकी गांड में ही छोड़ दिया। मेरा लंड अब बाहर आ गया। हम दोनों के पसीने छूट गये। कुसुम मेरी उपर लेट गयी और “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हममममअहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” बोलकर गहरी और लम्बी सांसे ले रही थी। साफ था की आज मैंने कसके उसकी गांड चोद ली थी। वो अब भी अपनी गांड के छेद को सहलाये जा रही थी। कुसुम के माथे पर ही पसीना छूट गया था। उसकी पीठ पर ही काफी पसीना आ गया था। उसकी गांड कल्ला गयी थी।

“क्यों मजा आया जान ऐनल सेक्स में????” मैंने पूछा

“ अरुण!! आज तो तुमने मेरी माँ चोद दी” कुसुम बोली।

धीरे धीरे उसकी साँसे तेज से धीरे होनी लगी। मैं उसकी रसीली चूचियों को सहलाने लगा। कुछ देर तक हम दोनों सुस्ताते रहे।

मैने कहा कुसुम मेरी जान अब तुम अपनी sexual fantasy बताओ???

मेरे होठो को चूमते हुए कुसुम बोली अब आपकी जान में जान नही बची है अपनी sexual fantasy बताने की। उधार रही।

हम दोनों नंगे ही एक दूसरे से चिपक कर सो गये।

अगली सुबह

“गुड मॉर्निंग बेबी “

सुबह सुबह जब नींद खुली तो ये प्यारी सी आवाज मेरे कानो में आई.. कुसुम का खिला हुआ चहरा मेरे आंखों के सामने था,वो मुझसे लिपट गई उसके बाल भीगे हुए थे और शरीर से हल्के इत्र की खुश्बू आ रही थी ,

"यार कुसुम, देखो क्या हाल बना लिया तुमने अपना , जब मैं मना कर रहा था उस तरह से करने के लिए तब तो तुमने थप्पड़ मार कर मुझे करने के लिए उकसाया , अब देखो ये क्या हाल हो गया है " मैने कुसुम को लंगड़ाते हुए चलते देखकर कहा ,

"आप चुप करिये जी ! एक सुहागन अगर अपने रूम से लंगड़ाते हुए ना निकली तो उसका सुहाग किस काम का " कुसुम के गालो की लाली और आँखों की थकावट बता रही थी की रात के प्यार का नशा अभी तक उसके ऊपर चढ़ा हुआ था |

“कल जो भी हुआ उसके लिए सॉरी जान ,शायद मैं ज्यादा पी गई थी “उसने मुझसे सटते हुए कहा

“लेकिन बहुत एक्साइटिंग था,कसम से कल का सेक्स मैं कभी नही भूलूंगी “

मैं कुसुम के कमर को और जोरो से अपने ओर खिंचने लगा,वो मेरे आंखों में देख रही थी ,

मैं भी हँस पड़ा ,

“सच में आपको गुस्सा नही आया ??”

“आया ना,लेकिन मजा भी आया ,ये वैसे ही था जैसा तुमने हमारी सुहागरात वाली रात को कहा था,की दर्द तो हुआ लेकिन मजा भी आया,तो बात इसपर डिपेंड है की ज्यादा गुस्सा आया की मजा ”

हम दोनो ही हँसने लगे ..

उसे तैयार होते हुए देखकर ना जाने कितने सवाल मेरे मन में आ रहे थे,मैं यही सोच रहा था की आज वो ऑफिस में राज का सामना कैसे करेगी,या राज शायद आज उसपर और भी ज्यादा लाइन मारेगा..

वो रोज से ज्यादा खूबसूरत लग रही थी और जाते हुए उसने मुझे जो शैतानी मुस्कान दी थी उससे लगा था की कुछ तो होने वाला था,

कुसुम मै क्या तुम्हे ऑफिस छोड़ने चलु??

मैने हस्ते हुए पूछा।

नही यार तुम आराम करो, हा फ्रेश होकर मम्मी से फोन कर पूछ लो क्या सब्जी लाना है घर जाते हुए खरीद कर लेते जाना, कुसुम ये बोल कर ऑफिस के लिए निकल गयी।

मै भी फ्रेश होकर होटल से घर के लिए निकल गया ।

उधर घर में मम्मी खुद को शीशे में निहार रही थी | क्या मै बूढी हो रही हूँ? अपने चेहरे को गौर से देखते हुए, चेहरे के एक एक हिस्से की गौर से जाँच करते हुआ, जैसे कोई खूबसूरत औरत अधेड़ हो जाने के बाद खुद की खूबसूरती का जायजा लेती है | वो अभी भी जवान है और किसी भी मर्द के होश उडा देने में सक्षम है, ये मुझे भी पता है लेकिन कल रात अपने सगे बेटे और बहू की संभोग करते हुए कामुक सिसकियों की आवाज फोन में सुनकर कुछ ऐसा हुआ जिसने गंभीरतापूर्वक विचार करने पर मजबूर कर दिया, पहली बार मम्मी को अहसास हुआ की अब वो जवानी की दहलीज से फिसलना शुरू कर चुकी है |

50 साल की खूबसूरत मेरी मम्मी बाथरूम से नहाकर बाहर निकलती है और तेजी से खुद के नंगे बदन को तौलिये से लपेट लेती है, लेकिन आईने तक आते आते तौलिया फिसल जाता है | खुद को नंगे आईने में देखते हुए अपनी हल्की भूरी चूची को रगड़ने लगती है, कुछ ही सेकंडो में मम्मी चुचियाँ कड़ी हो जाती है, वो अपने उरोजो को अपने हाथ में लेकर प्यार से मसलती है, और मम्मी के शरीर में कामसुख की एक लहर दौड़ जाती है |

मम्मी को पता है वो उत्तेजित होती है और सेक्स चाहिए | एक खूबसूरत कामुक अधेड़ उम्र की औरत के लिए उच्च चरित्र का जीवन जीना आसान नहीं होता | उसके सामाजिक दायरे में किसी भी भद्र पुरुष की तरफ वो कभी आकर्षित नहीं हुई सिवाय अपने बेटे के, जिसका नाम अरुण है | समाज में मम्मी को लोग बेहद उच्च चरित्र की महिला मानते है और काफी सम्मान भी देते है | मम्मी ने भी इस गरिमा को बनाकर रखा हुआ है, अपने बेटे अरुण को छोड़कर आजतक किसी और पुरुष के लिए मम्मी मन में कभी विचार नहीं आया, हालाँकि वो अपने बेटे अरुण को भी वो अपने दिल की बात ये सोच कर नहीं बता पाई, कि पता नहीं क्या सोचेगा |

मै बाजार से सब्जी लेकर घर पहुँचा।

मम्मी चाय पी रही थी, मुझे देखकर उन्होंने कोई reaction नही दिया, थोड़ी देर बाद मैने पूछा मम्मी और चाय है क्या ???

वो शांत रही, मै किचिन अपने लिए चाय ग्लास में लेकर वापस मम्मी के पास आकर बैठ गया।

इंतजार करता रहा मम्मी कुछ बोले पर वो खामोश रही, तो मैने ही फिर से पूछा क्या हुआ मम्मी आप इतनी चुप सी क्यों हो???

मम्मी थोड़े गुस्से में सच हलक में अटक गया है, उसे बाहर कैसे निकालू???

कैसा सच मम्मी???

कड़वा सच

मुझे कुछ समझ नही आ रहा है आप क्या बोल रही हो???

बेटा अरुण पिछले दो तीन दिनों में हम दोनों के बीच जो बातें हुयी कैसे तुमने मुझे अपनी बीवी की तरह प्यार से बात की, मेरे ब्रा पैंटी धोये, और भी जो हमारे बीच हुआ वो भूल जा, बेटा वो गलत था और मै भी तुझे रोकने की वजह उकसा रही थी।

""शायद कल रात अपने सगे बेटे और बहू की संभोग करते हुए कामुक सिसकियों की आवाज फोन में सुनकर कुछ ऐसा हुआ जिसने गंभीरतापूर्वक विचार करने पर मजबूर कर दिया, कि मम्मी अपने बेटे के साथ जो कर रही थी, और जो करने की सोच रही थी वो गलत है ""

एक मम्मी अपने शादी शुदा बेटे के उसकी बीवी के रहते हुए उसकी बीवी बनने की सोच भी कैसे सकती है, मुझे माफ कर दे बेटा। मै बहक गयी थी।

मै मम्मी के आँखों के आँसू पौछते हुए बोला मम्मी इसमें गलती आपकी नही मेरी थी, मै आपसे माफी मांगता हू।

हम दोनों अब आगे से कोई भी ऐसा काम नही करेंगे जिससे आपको अपने पति के सामने और मुझे अपनी पत्नी के सामने शर्मिंदा होना पड़े।

थोड़ी देर बाद मम्मी किचिन में खाना बनाने चली गई,

मै आराम से वेबसाइट में कुछ स्टोरी पड़ने लगा,मुझे उससे कुछ आइडियाज मिले की कैसे एक पति अपने पत्नी के पास काम के वक्त फोन करता है ,मुझे खुद पर हँसी भी आ रही थी की मैं ये क्या पागलपन करने में लगा हुआ हु…

लेकिन फिर भी मैंने कुसुम को काल लगाया ..

“मैं उसे ऑफिस टाइम में तब ही फोन करता था जब मुझे बाहर जाना होता या कोई इम्पार्टेंट काम होता ,

“हैलो आज इस वक्त सब ठीक तो है ना

“बस सोच रहा था की आज राज का क्या रिएक्शन रहा होगा..”वो चुप तो थी लेकिन उसकी हल्की हँसी की आवाज मेरे कानों में पड़ रही थी ,

“आप सच में पगला गए हो ,चलो आपको तो कोई काम है नही लेकिन मेरे पास बहुत काम होता है ,”

“अरे मेरी जान कुछ तो बताओ “

“क्या …? क्या बताऊँ बस साला अजीब से घूर रहा था और पास आने की बात करने की कोशिस कर रहा था लेकिन मैंने उसे कोई चांस नही दिया ,अब वो अपना काम कर रहा है और मैं अपना और आप भी अपना काम करो , लेकिन अब अपनी बीवी की जासूसी करने में मत लग जाओ “वो खिलखिलाई और मैंने भी उसे प्यार से लव यू बोलकर फोन रख दिया,लेकिन जाने अनजाने कुसुम ने मेरे दिमाग में एक दूसरे आईडिया को जन्म दे दिया था, ""कुसुम की जासूसी ….""

मेरे दिमाग में बहुत सारे सवाल उथल पुथल कर रहे थे कि आखिर मै अपनी बीवी की जासूसी करने की शुरुआत कैसे करू???

इसी उधेड़बुन में मै खाना खा कर नीचे आ गया और एक मोबाइल शॉप पर चला गया। मैने एक हेडफोन खरीद कर उससे पूछा एक मोबाइल में दो whatsup, fb, isnta चल सकते है, वो बोला हा।

किसी और का व्हाट्स up चलाना है,

वो हस्ते हुए बोला अपनी बीवी का????

हाहाहा हाहाहा हाहाहा

मै भी हँस गया।

वो बोला हा, आप paraell space मे wahtsup fb insta जो भी चाहे download करे और अपनी बीवी का मोबाइल no. डालकर otp से चालू कर ले। उनके सारे मैसेज pics, वीडियो आप के मोबाइल में आने लगेगे।

मै बहुत खुश हो गया और उसको एक vimal की तंबाकू खिला कर कुसुम के मना करने के बाद भी उसे ऑफिस से लेने चला गया।

आधे घंटे ऑफिस के बाहर इंतजार करने के बाद कुसुम आ गयी और बोली आप कैसे टपक पड़े। मै बोला फ्री था time पास नही हो रहा तो तुम्हे लेने आ गया।

मै उसे बैठा कर घर की ओर चल दिया। मैने उससे पूछा कैसा रहा ऑफिस में आज का दिन।

वो बोली मस्त,

ऑफिस में सभी अपने-अपने काम में व्यस्त थे. मैं भी अपने काम में लग गयी. तभी मेरी नजर sdm साहब के साथ बात करते हुए राज पे पड़ी. वो भी मुझे घूर-घूर के देख रहा था.

थोड़ी देर हम एक दूसरे को चोर निगाहों से देखते रहे. फिर मैंने अपनी नज़र हटाली. Sdm साहब अपने cabin में चले गए। एक बजे लंच की शुरुवात हो गयी. सब उठ कर कैंटीन में जाने लगे, मैं मेरी कलिग रोशनी के साथ कैंटीन एक कोने में खड़ी रह कर सब देख रही थी और लंच करने के लिए बैठने के लिए कुर्सी को ढूंढ रही थी. तभी मेरे सामने हाथ में कुर्सी को लाते हुए. देखा तो वही राज था.

“शायद इसे ढूंढ रही है आप”- कुर्सी की तरफ इशारा करते हुए वो बोला.

मैं- “अअ.. हाँ!. इसे ही ढूंढ रही थी. थैंक यू.” और उसे स्माइल दी.

राज – आप कमाल की खूबसूरत हैं.

मैं- थैंक यू.

राज - आपके शानदार हुस्न का राज क्या है??

मैं- शायद आप गलत नंबर डायल कर रहे है.

राज – तो आप ही दीजिये अपना सही नंबर.

मैं- मैं शादीशुदा हूँ.

राज – तो क्या? शादी शुदा लोग क्या मोबाइल नहीं इस्तेमाल करते?

मुझे गुस्सा तो बहुत आया पर रोशनी बोली कुसुम ये ऐसा ही है, सबके साथ flirt करता है। और इतना तो चलता है।

मै बोली mr राज ये पंतरे मुझ पर मत चलाना और फिर हम वापस अपने काम में लग गये।

कुसुम मेरे पीठ से पूरी तरह लिपट कर बोली एक बात कहु

मै हाँ बोलो

“जान सच में वो बहुत हैंडसम है ,आज उसके साथ ही लंच किया मजा आ गया ,पूरे ऑफिस की लडकिय उसकी दीवानी है .. मै सोच रही हु .........

जारी है......
 
बहुत बहुत शुक्रिया bittu bhai अपने विचार रखने के लिए,

जुली की sagai ke samay bhi mene aapko bataya tha ki KUSUM ko cheretrless nhi dikha raha hu. Bas aapka manobhaav usko galat samajh rahe h.

Arun jo अत्यधिक umr me shadi hone ki wajh se uski porn wagera dekhkar uttejna aana ek bimaari si ho gayi hai. Or wo apni patni KUSUM ko jab is tarah dekhta h to use wo usme apni patni ek kisi film ki हीरोइन tarah lagti hai or wo uttejit hota h.

KUSUM un ladkiyo me se jo ladko ke majaak ko serious nhi leti or na hi chidhti hai, balki unko unhi ke hissab se jabab dekar apna matlab nikaalti hai. Aisi ladkiya aajkal har office or college me milegi.

थोड़ा धर्य रखे कहानी को और रिंकीया के पापा को असली रंग मे आने दे और इसी तरह अपने सुझाव देते रहे धन्यवाद
 
बहुत बहुत शुक्रिया bhaalekar bhaau. मी तुमी sangito..... एक कहावत है... मुलगी शिखली तरक्की झाली... KUSUM ab duniya daari सीख चुकी हैं और तरक्की के रास्ते पर चल रही हैं।

जुली की sagai ke samay bhi mene aapko bataya tha ki KUSUM ko cheretrless nhi dikha raha hu. Bas aapka manobhaav usko galat samajh rahe h.

Arun jo अत्यधिक umr me shadi hone ki wajh se uski porn wagera dekhkar uttejna aana ek bimaari si ho gayi hai. Or wo apni patni KUSUM ko jab is tarah dekhta h to use wo usme apni patni ek kisi film ki हीरोइन tarah lagti hai or wo uttejit hota h.

KUSUM un ladkiyo me se jo ladko ke majaak ko serious nhi leti or na hi chidhti hai, balki unko unhi ke hissab se jabab dekar apna matlab nikaalti hai. Aisi ladkiya aajkal har office or college me milegi.

थोड़ा धर्य रखे कहानी को और रिंकीया के पापा को असली रंग मे आने दे और इसी तरह अपने सुझाव देते रहे धन्यवाद
 
Bahut bahut dhanyavaad dost.

Aapka review padh kar mujhe accha laga.

((Aisi biwi ke baare me padh kar Incest ki feeling kam aur Insecurity jyada mehsoos hoti hai ki kaise ek biwi apne pati ke saamne aisi aisi harkate kar sakti hai) )

Chehre par halki si mukuraaht dene के धन्यवाद। Lekin ye bhi ek had tak sach hai aksar jo pati apni patniyo ki kamaayi khaane ki sochte hai. Unki पत्नियों ke kadam hamesha behak jaate hai. Or ye baat un patiyo ko bhi pata hoti hai. Lekin patni ke कमाए paise ke aage uske saare दोष छिप जाते है।

Kahani incest theme ki hi hai. Aur aage bhi usi par chalne waali hai. Aap isi tarah apna साथ देते रहिये।

Bahut bahut shukriya.
 
Bhaai aap...... 100 percent sahi keh rahe hain.

((Mujhe lagta h ki writter ne hame is kahani ka hero bana diya h woh cahta h ki ham soche ki kusum kuch galat kar rahi h yaa galat karne wali h) )

हर लेखक की कहानी का असली हीरो उसका रीडर ही होता है, अगर readr nhi hoga तो कहानी के साथ न्याय नही हो सकता है, कहानी कहा बेहक रही है, या ठीक रास्ते पर जा रही है ये पढ़ने वाले ही बेहतर बता सकते हैं।

आपने कुसुम के बारे में लोगो की सोच के विषय में लिखा है, तो ये भी सच है कुसुम का charectr ऐसा है जो अक्सर हर शादी शुदा महिला जो मर्दो के साथ काम करती है और वहा उसके साथ क्या क्या flrt वगेरा होता है, जो वो कभी भी अपने पति को नही batatati hai. ये राज छिपाये रहती हैं। लेकिन कुसुम यहाँ सब बता रही है, ये कहानी की डिमांड थी।

खैर कहानी incest relation par ही है, और वो ही सभी को ज्यादा से ज्यादा पढ़ने को मिलेगा...

धन्यवाद भाई
 
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