Incest कर्ज और फर्ज - एक कश्मकश - Page 17 - SexBaba
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Incest कर्ज और फर्ज - एक कश्मकश

बहुत बहुत आभार शुक्रिया अभिनंद, जब से आपके शब्दों का आशीर्वाद प्राप्त हुआ है तब से मेरे हर update के दो पहलू होते है, एक हिस्सा सिर्फ आपको समर्पित अर्थात सिर्फ आपके लिए ही होता है, वास्तविकता, फिलॉशफि, और तथ्यों से परिपूर्ण एवम दूसरा हिस्सा सभी रीडर के लिए..... सेक्स, एरोटिक, न्यूड पिक्स से भरपूर। आपने सही कहा सभी प्यारे रीडर की भावनाओ को ध्यान में रखते हुए कहानी में अब कुछ कमाल करने का वक्त आ गया है। उसी मसाले में शब्दों की रेलगाड़ी मैने दौड़ा दी है। आने वाले update मे सारे रीडर की सम्भत कल्पना पूर्ण हो जायेगी... लेकिन प्रोफेसर अरुण कुमार एक ठरकी दिल्फ़ेंक शक्स है, उनका जनाजा निकलेगा तो जरूर पर वो भी बड़े धूम से.......

धन्यवाद इसी तरह प्यार देते रहिये।
 
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वो झूठ इतनी मासूमियत से बोलती है कि सच जानते हुए भी, झूठ को सच मानकर उसके झूठ पर मर जाने को जी चाहता है।

खैर बड़ी मशक्कत और बहस के बाद मै मान गया। फिर मैने गूगल पर एक टैटू स्टूडियो ढूंढ निकाला।

हम दोनों वहाँ गए। वहाँ पे एक लड़की थी, उस से बात की, एप्पोइंटमेंट फिक्स हो गई।

उस लड़की ने फोन पे किसी गगनप्रीत को बुलाया। एक लड़का आया, उम्र लगभर 25-26 साल, लंबा 6 फीट, और बहुत ही शानदार मसकुलर बॉडी, जिम जा कर पूरी तरह तराशा हुआ बदन, काली आधी बाजू की टी शर्ट और काली ही जीन्स पहने हुआ था। रंग थोड़ा सा सांवला था, मगर नैन नक्श बहुत ही तीखे। एक बार ही उसको देख कर मेरे दिल में जैसे कोई काँटा चुभा हो कि ‘हाय, क्या शानदार नौजवान है। इसको तो किसी फिल्म में शानदार विलेन होना चाहिए।’ उसकी अपनी बाजू, गले और हाथ पर भी कई सारे टैटू बने हुये थे। एक बार तो उसको देख कर मै जलन के भाव से भर गया।

कुसुम के आंखों में भी शरारत थी मुझे पता था की क्या होने वाला था,वो मुस्कुराते हुए मुझे देखने लगी,

“अच्छा सुनो ना मेरा इस तरह बदन पर टैटू बनवाना आपको पसंद तो है ना ,आप बोलोगे तो मैं अपनी इस टैटू की ख्वाइश को अपने मन में दफन कर दूंगी “

वो सच में बहुत ही सीरियस थी।

“पागल हो गयी हो क्या, तुम मेरी वजह से अपनी ख्वाइश को मन में दफन करने की मत सोचो। मेरा प्यार तुम्हारी रूह से है, जिस्म से नही, और वैसे भी ये टैटू बनाने वाला भी बहुत ही हेंडसम है साला ,देखो कही उससे प्यार ना हो जाय तुम्हे “

मैं तो मजाक में कहकर हसने लगा लेकिन जब मेरी नजर कुसुम पर पड़ी तो मेरा दिल घबरा गया उसकी आंखे लाल थी जैसे वो मुझे गुस्से से घुरि जा रही हो,

“क्या हुआ जान “

“आप ऐसे सोच भी कैसे सकते है की मैं आपके सिवा किसी से भी प्यार करूँगी ,मेरे ऊपर आपका बिल्कुल भी भरोसा नही है क्या…”वो रोने लगी मैंने तो बस मजाक किया था और वो लड़की ऐसे बोल रही थी जो अपने ऑफिस कलिग के साथ …..

“अरे नही जान मैं तो बस मजाक कर रहा था तुम तो “मै कुसुम के आँखों से गालो पर गिरने वाले एक एक बून्द आंसुओ को पोछने लगा…

“सॉरी मेरी जान “मैंने कुसुम के होठो में अपने होठो को भरकर एक जोरदार किस किया और तब तक किया जब तक की उसका रोना बंद नही हो गया वो भी मेरे बालो पर अपना हाथ रखकर उसे सहलाने लगी…..

थोड़ी देर में जब हम दोनो अलग हुए

“जान एक बात पुछु इस बार बुरा मत मानना “

“हा बोलो पर याद रखना प्यार तो आपसे ही किया है और हमेशा आपसे ही करूँगी “

“अच्छा लेकिन अगर मानो वो पसंद आ गया तो “

“पसंद तो वो मुझे अब भी है ,पसंद और प्यार में बहुत फर्क होता है समझे “

कुसुम ने मेरे नाक को पकड़कर हिला दिया , पर मैं थोड़ा गंभीर था “और सोचो अगर तुम्हारे बीच कुछ हो गया तो “

कुसुम ने मुझे घूर कर देखा ,

“जान मैं आपकी बीबी हु,और मैं सिर्फ और सिर्फ आपसे ही प्यार करती हु,और रही कुछ होने की बात तो मैं भी एक इंसान हु हो सकता है की मुझसे कुछ गलती कभी हो भी जाय तो भी मैं आपसे ही प्यार करूँगी कभी भी आप ये मत सोचना की मैं आपसे प्यार नही करती ……………..मैं आपकी हु जान सिर्फ आपकी। हो सकता है कोई मेरा जिस्म ले ले पर मेरा मन हमेशा आपका ही रहेगा और वो आपसे कोई भी नही छीन सकता ……….” कुसुम मुझसे ऐसे लिपट गयी जैसे किसी पेड़ से कोई लता लिपटी हो...वो मेरे सीने से अपने सर को रगड़ने लगी…

मेरा मन उसकी बातो से बहुत हल्का हो चुका था पर एक सवाल मेरे दिल में था.. कुसुम की बात का मतलब क्या हुआ,क्या वो अब भी किसी के साथ ...मतलब की वो मुझसे दिल से प्यार करती है पर वो सो किसी के भी साथ सकती है ……

मेरा दिमाग फिर से काम करना बन्द कर रहा था मैंने सोचा की छोड़ो यार पहले तो खुद अपनी जान का मजा लिया जाय बाद में जो लेता है लेने दो ऐसे भी अगर उसे कुछ परेशानी नही है तो मैं उसे क्यो रोकू ऐसे भी प्यार तो वो हमेशा मुझसे ही करती है………

मैंने उस टैटू बनाने वाले से पूछा- क्या नाम है तुम्हारा?

वो बोला- जी गगन प्रीत सिंह है।

मैंने कहा- कितने साल हो गए, टैटू बनाते हुये?

वो बोला- जी 5 साल से बना रहा हूँ।

गगन – तो कैसा टैटू बनवाना है।

मैने कुसुम की तरफ इशारा करते हुए कहा - मुझे नही मैडम को बनवाना है

कुसुम – डिज़ाइन नहीं हैं तुम्हारे पास?

गगन – बहुत सारे हैं लो देखो।

फिर कुसुम डिज़ाइन चूस करने लगती हैं और फिर कुछ डिज़ाइन उसे पसंद आते हैं।

कुसुम – ये डिज़ाइन मुझे पसंद है।

गगन - तो बता दो कौनसा टैटू किस जगह बनाना है।

कुसुम – तुम सजेस्ट कर दो कि कौनसा कहाँ ठीक रहेगा? क्यूंकी तुम्हे ज्यादा नॉलेज होगी इसमे।

गगन - आजकल हाथ का ट्रेंड तो है नहीं क्यूकी सब मॉडर्न और फैशनेबल हो गए हैं तो मोस्टली या तो पेट पर या शोल्डर पर या ब्रैस्ट से ऊपर और पीछे हिप्स पर और आगे थाइस या पेल्विक एरिया में जैसे नोरा फतेही एक्ट्रेस के है.

मै उन दोनों की बातचीत के बीच में अचानक से – हाँ देखा है मैंने। ये सुनकर कुसुम मुझे खा जाने वाली नजरों से घूरने लगी।

गगन – तो आप बता दो कहाँ बनवाना है आपने ?

कुसुम – यहाँ बना दो ब्रैस्ट से ऊपर फ्रंट पर।

गगन – कौनसा डिज़ाइन?

कुसुम – ये दिल वाला जिसमें तीर के एक सिरे पर A और दूसरे सिरे पर K लिख देना।

ये सुनकर मै बीच में मजाकिया लहजे में बोला देवी जी A K-47 बंदूक ही बनवा लो। ह्म्म्म ह्म्म्म

ही ही ही सो फनी... तुम्हे हमेशा मेरी बात को मजाक बनाये बिना चैन कभी नहीं मिलता। और मुझे अब तक ये समझ नहीं आया कि तुम्हे ये चूतियापे वाली बातें सिखाता कौन है। कुसुम मेरी ओर आँखे दिखाते हुए बोली।

मै तो बस AK जो लिखने की बोल रही हो उसके बारे में मजाक कर रहा था और तुम गुस्सा होने लगी..... मै अपनी सफ़ाई देते हुए बोला।

A फॉर अरुण और K फॉर कुसुम in my heart. ये छोटी सी बात तुम्हे नहीं समझ आई.... बस हीहीही करना है, कुसुम अuब की बार मुझे शांत रहने का इशारा करते हुए बोली।

वो हमें अपने साथ अपने स्टूडियो में ले गया।

कुसुम ने कहा- देखो गगन, मुझे पूरी प्राइवेसी चाहिए।

वो बोला- आप चिंता न करें मैडम, यहाँ आप पूरी तरह से निश्चिंत हो कर काम करवा सकती हैं।

टैटू का डिजाइन भी पसंद कर लिया गया।

मै सामने कुर्सी पर बैठ गया, कुसुम को उसने बड़े से काउच पे लेटा दिया। उसने अपने सारे औज़ार और मशीन वगैरह सब रेडी किए।

गगन – ठीक है तो आप यह कपड़े निकाल दो और ये कपड़ा डाल देता हूँ और बनाता हूँ।

फिर कुसुम ने अपनी ब्लाऊस उतार दिया वो बस रेड ब्रा में थी.

गगन – यह ब्रा भी निकालनी होगी आपको।

कुसुम – क्या कह रहे हो तुम पागल हो क्या?

गगन – कहीं और किसी से भी बनवा लो या इंटरनेट पर वीडियो देख लो पहले, यह कोई ऐसा वैसा काम नहीं है बहुत बारीकी का काम है।

फिर कुसुम ऑनलाइन. वीडियोस देखने लग गयी और फिर शांत हो गयी वीडियोस देखकर ।

गगन – क्यू अब यकीन हो गया ना?

कुसुम – पर ऐसे तुम्हारे सामने कैसे?

गगन – एक आर्टिस्ट के लिए सब न्यूड ही होता है एंड हम अपने टैटू पर फोकस्ड रहते हैं नहीं तो बनेगा कैसे? और आपके जैसी कितनी गर्ल्स पूरी पूरी न्यूड होती हैं जब नीचे बनवाती हैं तो.

कुसुम – हम्म ओके पर इसमें वीडियोस में तो वह ब्रैस्ट पर कुछ लगा रखा है।

गगन – वह सिलिकॉन टेप होते हैं निप्पल हाईड करने के लिए पर उनसे फायदा क्या है जब पूरे बूब्स सामने है और बस निप्पल हाईड करने है.

फिर दोनों हंसने लग जाते हैं और कुसुम अब अपनी ब्रा निकाल देती है. उसके 36 के गोरे बूब्स गगन देखता रह जाता है और मै भी। फिर वह पीछे होकर लेट जाती है. तो उसके थाइस भी गगन आराम से देख रहा था.

कुसुम – यार बड़ा अजीब लग रहा है ऐसे किसी के सामने बिना ब्रा के.

गगन – अरे एक टैटू बनवाकर आपको आदत हो जाएगी एंड आप जैसी मॉडर्न भाभी ऐसे सोचोगी तो कैसे चलेगा और सोचो आप नीचे पैंटी एरिया में बनवाती तो क्या होता आपका ?

और फिर दोनों हंसने लगते हैं.

गगन – अब हिलना मत।

तभी अचानक से कुसुम का मोबाइल रिंग बजने लगी, लेटे लेटे उसने मोबाइल स्क्रीन पर सासु माँ का नाम पढ़कर मुह बनाते हुए मुझसे बोली ..... अरे सुनिये जरा अपनी मम्मी से बात कर लो पूछ लीजिये कुछ काम याद आ गया होगा।

मैने कुसुम के हाथ से मोबाइल लेकर

हेलो - बोलो

पापा - मम्मी कहाँ है...??? फोन में दूसरी तरफ से रिंकी की आवाज आई ।

मै -- बेटी वो थोड़ा बिजी है। बोलो कुछ काम था क्या???

रिंकी -- पापा, आप मम्मी को जरा फोन देना मुझे उनसे ही बात करनी है।

कुसुम रिंकी है फोन पर, उसे तुमसे कुछ कहना है....! एक मिनिट सुन तो लो। मै कुसुम के पास मोबाइल ले जाकर बोला।

ओफ् ओ अब ये क्या आफत है, तुम ही पूछ लो उससे क्या कहना चाहती है, सुबह सुबह तो दोनों बाप बेटी एक साथ, एक सुर में (राग अलाप) गाने गा रहे थे। और अब मुझे डिस्ट्रब मत करो, वरना मेरा टैटू खराब हो जायेगा। कुसुम झूझलाते हुए मुझसे बोली।

शायद रिंकी ने दूसरी ओर कुसुम की तानो भरी बात सुन ली थी वो मुझसे कुछ नहीं बोलती और फ़ोन काट देती है।

"कहते है न जब तब कोई एहसास न कराये प्यार का पता नहीं चलता।'"

तभी मैने इधर से रिंकी को काल किया।

रिंकी कॉल डिसकनेक्ट कर देति है।

मै दोबारा फिर से कॉल करता हू।

रिंकी इस बार भी कॉल पिक्क नहीं करती

और कॉल डिसकनेक्ट करके मेसेज कर देति है

" घर का काम ख़तम करने के बाद मै नहाने गयी और जब अपने सेनेटरी नेपकीन चेंज किये तो मुझे याद आया ये तो लास्ट है। मेरे सेनेटरी नैपकीन ख़तम हो गये थे इस लिए मम्मी को कॉल कर रही थी की लेते आना "। और फ़ोन रख देति है।

रिंकी का मैसेज पढ़ने के बाद मुझ को समझ नहीं आ रहा था की क्या करू। और मै बुत बना अपनी पत्नी कुसुम के चूचे पर बन रही कला कृति को निहारने लगा।

गगन पहले टैटू का स्टीकर चिपकाता है और फिर जब डिज़ाइन छप जाता है. तो फिर अपना वह टैटू वाला पेन स्टार्ट करने करने लगता है और बीच बीच में जानबूझ कर बूब्स पर हाथ रखते जा रहा था. मै समझ गया की उसने कुसुम के बूब्स का पूरा मज़ा लिया है और फिर आधे घंटे लगभग में टैटू बन गया.

कुसुम मुझे अपने रंगे हुए चूचे दिखाते हुए – देखो। फिर खुद भी टैटू देखती हैं जो बहुत कूल लग रहा था जिसे देखकर कुसुम बहुत खुश हो जाती है.

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गगन – भाभी जी इफ यू डोंट माइंड मै अपने हर बनाये टैटू का फोटो लेता हूँ तो मै ले लूँ?

कुसुम – अरे नहीं ऐसे कैसे मै अपनी ऐसी फोटो लेने दू!

गगन – अरे तुमने गलत समझ लिया तुम्हारा नहीं बस टैटू का सिर्फ टैटू का वह भी बस प्रोफेशनल वर्क के लिए क्यूंकी हमे दिखाना होता है की हमारा रियल वर्क कैसा है और उसमे ना आपका फेस होगा ना ही कुछ और।

कुसुम – ओह्ह अच्छा चलो ठीक है।

मै दूर से देखता हूँ तो गगन मेरी बीवी कुसुम के बूब्स के और उसके पूरे फोटो लेता है और एक टैटू का लेता है और दिखाता है की देखो बस यह लिया है और कुसुम सोचती है ठीक है बस टैटू का लिया है और फिर कुसुम कपड़े पहन लेती है.

कुसुम -कितने रुपये हुए?

गगन – अरे आप भाभी जी हमारी नई कस्टमर है अच्छा फिर 500 रुपये दे दो।

कुसुम – बस?

गगन – हाँ अब डिस्काउंट तो देना पड़ेगा आपको।

और फिर हँसते हुए कुसुम मुझे उसे पैसे देने को कहती है।

" विनाश काले विपरीत बुद्धि " (कहावत को प्रमाणित करते हुए मेरी जुबां से ऐसे शब्द निकले जिसका अफसोस मुझे ताउम्र रहेगा)

मैने कुसुम से कहा – तुमने इतने सब डिज़ाइन पसंद किये तो मुझे लगा ज्यादा टैटू बनवाने है पर तुमने एक ही बनवाया।

कुसुम – हाँ पर और बनवाऊंगी तो आपकी मम्मी यानी मेरी सास को दिख जाएगा और ठीक नहीं बनवाना।

हम पति पत्नी की आपसी बातचीत सुन गगन बीच में बोल पड़ा – वैसे भाभी जी आप मॉडर्न भी हो एंड एक बूब्स पर बनवा चुकी हो तो एक पेट के नीचे या कमर में बनवा लेती एकदम स्टाइल आता और आपकी सासु मा को भी नहीं दिखता।

कुसुम - पेट पर तो दिख जाएगा।

गगन -अरे नोरा फतेही वाला टाइप, वह कैसे दिखेगा आंटी को?

कुसुम – तो वहाँ कोई फायदा भी तो नहीं है जब दिखेगा ही नही!

गगन – अरे सबसे ज्यादा ट्रेंड में तो वही वाला है एंड दिखेगा बिलकुल जब कभी बीच पर जाओगी या वैसी ड्रेस पहनोगी तो दिखेगा।

कुसुम – हाँ यह भी है, तो दिखाओ डिज़ाइन।

गगन – लो देखो।

कुसुम – ये वाला ठीक है?

गगन – हाँ यह ठीक रहेगा।

कुसुम – कैसे बनेगा यह बताओ?

गगन कुसुम के नंगे पेट पर - डिज़ाइन दिखाते हुए, यह ऐसे आएगा।

वह नज़ारा देख कर मेरी हालात खराब हो रही थी.

मै कुसुम के कुछ डिसीजन देने से पहले ही बोला – हाँ ऐसे ठीक रहेगा पर अभी नहीं फिर किसी दिन में बनवा लेना।

गगन – अभी बन भी नहीं सकता क्यूंकी भाभीजी को शेव करनी होगी नीचे एकदम क्लीन।

मै गगन की ये बात सुनकर थोड़ा ओकवर्ड फील कर रहा था।

लेकिन इस बार मेरे कुछ बोलने से पहले कुसुम बोल पड़ी, वो कोई इशु नही मै

घर से अपनी पूरी साफ सफाई करके आई हू।

That's गुड वो बोला- ओ के… पर आपने अचुअल् टैटू बनवाना कहाँ पे है?

कुसुम को पहले तो बड़ी शर्म सी आई, फिर उसने कहा- मैं तुम पर पूरा भरोसा कर सकती हूँ?

वो बोला- बिल्कुल भाभी जी, ये मेरा काम है और काम में, मैं कोई भी बेईमानी नहीं करता।

तो कुसुम ने अपनी नाभि के नीचे की तरफ इशारा करके कहा- वहाँ, वहाँ पर टैटू बनवाना है।

उसने कहा- मैं देख सकता हूँ?

कुसुम ने कहा- हाँ, देख लो, पर प्लीज…

वो कुसुम की बात समझ गया- आप निश्चिंत रहें भाभी जी!

इधर मेरे दिल में बड़ी अजीब सी फीलिंग आ रही थी। मेरी खुद की बीबी किसी बिल्कुल अंजान के सामने नंगी होने की।

मगर होना तो था.....!

और उसने कुसुम की साड़ी ऊपर उठानी शुरू की। सच में मर्द के हाथ का लगना ही औरत के बदन में बिजली दौड़ा देता है, और जबकि उसने सिर्फ कुसुम की साड़ी को ही छुआ था। उसकी साड़ी और पेटीकोट उठा कर उसने उसके पेट पर रख दिया।

नीचे कुसुम ने पेंटी पहनी थी।

वो बोला- ये भाभी जी?

कुसुम ने कहा- उतार दो!

"कुछ कुछ तो कुसुम भी हरामी हो रही थी।"

उसने कुसुम की पेंटी के दोनों तरफ अपने अंगूठे फंसाए और खींच कर उसकी पेंटी उसके घुटनो से भी नीचे उतार दी।

अपनी बीवी के किसी गैर के साथ ये दृश्य देखकर मेरे रीढ़ की हड्डी में सौ बार सिहरन जागी हो जैसे। एकदम से जैसे मुझे पसीने आ गए हों।

उसने कुसुम की चूत को देखा और फिर बोला- डोंट वरी भाभी जी, आपको न दर्द होगा, न ही स्वेल्लिंग आएगी। आप बस अपनी टाँगें चौड़ी कर लीजिये, और हो सके तो ये साड़ी और पेटीकोट भी उतार दीजिये।

" गगन के इस व्यावसायिक व्यवहार ने जैसे कुसुम को बहुत प्रभावित कर दिया हो," कुसुम उठी और अपनी साड़ी खोली, पेटीकोट खोला और उतार दिया और सिर्फ ब्लाउज़ पहने उसके सामने काउच पर अपनी टाँगें खोल कर लेट गई। उसने पहले अपने हाथों में दस्ताने पहने, फिर एक स्प्रे किया, उसके बाद एक तेल से मालिश की।

"मगर एक बात थी, बेशक वो कुसुम की चूत को छू रहा था, मगर गगन को चूत को छूने से कोई फीलिंग नहीं आ रही थी, हाँ उसको देख कर मुझे बहुत फीलिंग आ रही थी।" ह्म्म्म ह्म्म्म

उसकी एक बाजू बिल्कुल मेरे पास थी, जिस पर गहरा सा टैटू बना था। पहले उसने कोई एंटीसेप्टिक लोशन सा लगाया, फिर अच्छी तरह से एक तेल से मालिश सी की, फिर उसने जो बटर फ्लाई डिजाइन कुसुम ने पसंद किया, था उसका कागज़ पर बना स्टेंसिल कुसुम की कमर पर रख कर चिपकाया, और जब कागज़ उठाया, तो कुसुम की चूत के ऊपर एक निशान छाप गया। देखने में तो ये भी बड़ा अच्छा लग रहा था, मगर असली काम तो अभी होना था।

फिर उसने उस डिजाइन के एक कोने पर स्याही लगाई और फिर मशीन से जब गोदा तो एक बार तो कुसुम उछल पड़ी।

वो बोला - कम डाउन भाभी, आराम से… अगर ऐसे उछलोगी, तो काम खराब हो जाएगा।

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उसे इस तरह गोदना देखकर मैं फिर परेशान हो गया, कोई उसे चोट पहुचाय मुझे अच्छा नहीं लगता है लेकिन कुसुम के व्यवहार से तो ऐसा नही लग रहा था, और कौन है जो उसे चोट पहुँचा रहा है, कभी मन भारी होने लगता,न जाने क्यों अब हद हो चुकी थी दिल और दिमाग की जंग जारी थी थका देने वाली जंग में आखिर दिल हार ही गया, दिमाग ने कहा एक बार तसल्ली कर ही लेते है दिमाग को तो शकुन मिल जायेगा, यह शुकून कितना दुःख देने वाला था ये तो मैं नही जानता था।

कुसुम आराम से लेटी तो उसने फिर से चालू किया, और धीरे धीरे वो डिजाइन बनाने लगा। बेशक कुसुम को दर्द हो रहा था, मगर असली बात उसके मन की संतुष्टि थी कि उसके बदन पर भी टैटू होगा..

उसने दोबारा से स्टेंसिल रख कर डिजाइन उकेरा और फिर मशीन लेकर लगा टैटू बनाने। मगर इस बार सच में कुसुम को न तो कोई दर्द हुआ, हाँ पर इतना ज़रूर था कि कुसुम को इस काम में बहुत मजा आ रहा था, इतना मजा कि कुसुम की चूत गीली हो गई, और जब उसकी चूत गीली होती है, तो बहुत पानी छोड़ती है। शायद इसी लिए उसने मशीन रोक कर कुसुम को एक नेपकिन दिया और बोला- भाभी, आप साफ कर लीजिये।

मैं समझ तो गया वो क्यों गीली थी,...बस मैं खुश था, और मुझे क्या चाहिए था...कुसुम की कोई भी हरकते मुझे अजीब नहीं लग रही थी,उसका सजना सवरना, मुझे तो बस प्यार ही दिखाई देती थी, हाथो में भरे हुए चुडिया, माथे में मेरे नाम का सिन्दूर, सीने पर मेरे नाम का टैटू, गोरा रंग जो दमकता सा था,होठो में प्यार की लाली,वाह पतली कमर, बलखाता भारी पिछवाडा, मुझे दीवाना बनाने के लिए काफी था,वो बस देख के हस देती तो मेरी सारी तकलीफे ख़तम हो जाती थी,मैं बहुत खुश था..

कुसुम ने उठ कर देखा तो उसकी चूत से पानी बाहर टपक रहा था और नीचे काउच पर भी लग रहा था। बेचारी को बड़ी शर्म आई, उसने कहा- आई एम सॉरी!

और उसने नेपकिन से अपनी चूत का पानी साफ किया।

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वो बोला- कोई बात नहीं भाभी, ऐसा अक्सर हो जाता है।

कुसुम ने अपनी चूत साफ करके उसे फिर से काम शुरू करने को कहा। मगर शायद कुसुम तो उसके स्पर्श से गरम होती जा रही थी। दो मिनट बाद ही उसने कुसुम को फिर से नेपकिन पकड़ा दिया मगर बोला कुछ नहीं।

इस बार कुसुम ने बेशर्मी और बेहयाई की सारी हदें पार कर उससे कहा- तुम ही साफ कर दो।

पर जैसे ही मेरे कानो में कुसुम की इन शब्दों की आवाज गूंजी मेरे पैरो की जमीन ही खिसक गयी, हुम्म्म्मम्म हुम्म्मम्म एक नशीली आवाज कुसुम जैसे पुरे मस्ती में थी, आह आह आह कमरे से सिर्फ सिस्कारियो की आवाज ही नही आ रही थी बल्कि कुसुम की चुडिया और पायल भी एक लय में खनक रहे थे,छम छम की आवाजे सिस्कारियो से लयबद्ध थी, मैं इतना भी नादान तो नहीं था की उन सिसकियो और आहो का मतलब न समझ सकू मेरी चेतना जाने सी हुई, मैं जमीन में गिर ही गया आँखे पथरा गयी मुझे लगा ये कोई दुखद स्वप्न होगा जो कुछ देर में शायद चला जाय,मैं अपने आप को मारने लगा,ये सोच की अभी मैं जागूँगा और अपने को अपने बिस्तर में पाउँगा,लेकिन मैं गलत था, ..आह आह कुसुम के ये शब्द ने मेरे सबर का बांध तोड़ दिया,मेरे आँखों में आंसू थे जो कुछ बूंदों में ही अपना सभी दर्द छिपाए हुए थे,,,,मैं गगन को जान से मारना चाहता था, लेकिन जो आप चाहो कर लो आह, कुसुम की उत्तेजना अपने चरम में थी,आहो की रफ़्तार में तेजी आ रही थी,मैं ठगा सा खड़ा रहा कुसुम कितना मजा ले रही है क्या मेरे प्यार में कुछ कमी है,लेकिन हमेशा उसने ही स्वीकारा था की वो मुझसे और मैं उससे बेतहाशा प्यार करता हु फिर उसकी चूत में बहता पानी क्यों......??

मेरे सवालो का जवाब तो कुसुम ही दे सकती थी या गगन, अपने उत्तेजना के चरम पर वो बस आहे भरती और एक पूरा माहोल उन आहो से गूंज उठता उसके बदन पर चल रही मशीन की आवाज के साथ बहते कामरस के चपचपाने की आवाज, वो सिर्फ वासना से भरी आवाज नहीं थी बल्कि मेरे प्यार का खात्मा था,.... मैं कुछ बोलने के हालत में नहीं रह गया था,मैं आखो में अपने अरमानो की खाख लिए उस कमरे के दरवाजे के पास चला गया,मैं कोई सवाल पूछने या उसका उत्तर जानने के स्थिति में नहीं था,मैं अपने ही खयालो में खोया रहा, बहुत देर हो चुकी थी।

पहले तो गगन ने मेरी तरफ देखा, इस बार उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी। उसने नेपकिन लिया और मेरी ही आँखों के सामने मेरी ही बीवी की चूत के दोनों होंठ खोल कर अंदर तक साफ कर दिया। मगर साफ करते ही फिर पानी आ गया।

वो बोला- भाभी, ये तो बहुत पानी आ रहा है. और उसने एक नेपकिन को तह में (ढक्कन) लगा कर कुसुम की चूत के दोनों होंठों के बीच में फंसा दिया।

मगर मेरे दिल की हालत तो और खराब होती जा रही थी। मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था, एक नौजवान लड़के के सामने मेरी खुद की बीवी का नंगी हो कर बैठना ही मुझे बहुत रोमांचित कर रहा था। मेरा बार बार दिल कर रहा था कि मैं उस से पूछूँ, क्या वो मेरी बीवी को चोदेगा। मेरा दिल बार बार मुझे मजबूर कर रहा था उस से यही सवाल पूछने को।

जारी है........
 
क्या सर जी एक दिन में कितना हसायेंगे 😂🤣😜

आपने कुसुम के बदन के टेट्ट की कीमत एक करोड़ आंकी है 🙏 दरसल कुसुम का पात्र इस समय आजकल insta, पर नग्न और अर्धनग्न नाचकर दुनिया का मनोरंजन करने वाली भाभियो को ध्यान में रखकर लिखने का प्रयास कर रहा हूँ। और अरुण कुमार ऐसी ही भाभियो के पति है, जो खुद बीबी का वीडियो बना कर इंस्टा पर डालते है।

बहुत बहुत शुक्रिया सर आपकी लेखनी से update की खूबसूरती बढ़ जाती है।
 
मगर मेरे दिल की हालत तो और खराब होती जा रही थी। मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था, एक नौजवान लड़के के सामने मेरी खुद की बीवी का नंगी हो कर बैठना ही मुझे बहुत रोमांचित कर रहा था। मेरा बार बार दिल कर रहा था कि मैं उस से पूछूँ, क्या वो मेरी बीवी को चोदेगा। मेरा दिल बार बार मुझे मजबूर कर रहा था उस से यही सवाल पूछने को।

कुसुम को तो उस अनजान टैटू आर्टिस्ट में रत्ती भर भी इंटरेस्ट नहीं था, लेकिन जब उसकी जाँघों पर झुके हुए उसकी चूत पर टैटू बनाते उस लड़के का मुँह उसकी चूत से बस कुछेक इंच कि ही दूरी पर था, तो उसके पेट में एक अजीब सी हलचल, एक अजीब सी बेचैनी हो रही थी ! उस टैटू आर्टिस्ट के प्रति किसी भी प्रकार कि भावना अपने मन में रखे बिना उसे ये सोचना बहुत ही रोमांचक लग रहा था कि उसकी चूत के इतने करीब होने पर उस लड़के के मन में अभी क्या चल रहा होगा, और क्या उसकी नाक में उसकी चूत कि गंध जा रही होगी !!! और शायद इसी वजह से कुसुम कि चूत बार बार गीली हो रही थी !

मैं अपने एडवेंचर से बहुत खुश था है ये मेरे लिए किसी एडवेंचर से कम भी नही था कि मेरी अपनी ही बीवी वो भी ये जानते हुए की वो किसी और के साथ अपने जिस्म का मजा ले रही है या लेने वाली है ये अजीब सी चुभन थी और अजीब सा नशा मेरे अंदर भर रहा था मुझे नही पता कि मैं क्या और क्यो कर रहा हु पर ये तो बात पक्की थी कि मुझे इसमें बहुत ही मजा आ रहा था ,

अभी तक जो बात मुझे जल रही थी अब वही बात में मैंने खुशी और खुशी से बढ़कर मजा खोज लिया था , मैने पैंट की जेब से मोबाइल निकालकर कुसुम के जिस्म पर हो रही कारीगरी का वीडियो बनाने लगा।

" कोई दिक्कत तो नहीं है भाई साहब ??? ". मैने मोबाइल का एंगल ठीक करते हुये बस औपचारिकता के नाते पूछा, जैसे कि मुझे अपने इस सवाल का जवाब नहीं चाहिए हो !

टैटू आर्टिस्ट हल्के से मुस्कुराया, जैसे कि अपने क्लाइंट्स कि ऐसी उलजलूल हरकतों से वो रोज़ ही मुख़ातिब होता हो, और कुसुम कि चूत को बिना छुए उस पर Tube से जेल कि पतली धार गिराते हुये मेरी ओर बिना देखे हुये ही बोला.

सारे Couples करते हैं सर जी... हमें आदत है ! ". फिर थोड़ा सा रुककर कहा. " बस देखिये कि वीडियो में मेरा चेहरा ना आये तो अच्छा रहेगा ! ".

" फ़िक्र क्यूँ करते हो यार... ". मैने वीडियो बनाना चालू करते हुये कहा. " ये हमारी Private Viewing के लिए है. हमें कौन सा इसे फेसबुक और इंस्टाग्राम पर डालना है ! ".

" अपनी प्राइवेट वीडियो इंटरनेट पर डालता कोई नहीं सर जी... ". टैटू आर्टिस्ट धीरे से हँसकर बोला. " लीक हो जाता है ! ".

मुझ को टैटू आर्टिस्ट कि बकवास में कोई दिलचस्पी नहीं थी, मै उसकी बात अनसुनी कर खड़े खड़े पूरे कमरे में घूम घूम कर अलग अलग एंगल से वीडियो बनाने लगा.

कुसुम को कोई अचंभा नहीं हुआ, उसे पता था कि उसका ठरकी पति इस Erotic Art का वीडियो बनाएगा ही बनाएगा, इनफैक्ट, ऐसा गैरों के साथ मजे लेने की बात मज़ाक मज़ाक में बोलकर ठरकी पति ने टालमटोल करने कि भरसक कोशिश पहले भी की है, पर वो खुद ही नही मानी ! और अब जब ठरकी पति उसकी कामुक कला कृति की रचाई की वीडियो बना रहा था, तो वो एकदम ही सहज़ और नार्मल थी. टैटू भले ही वो खुद के मन से बनवा रही थी, पर ना जाने क्यूँ उसकी वीडियो देखने के लिए वो मन ही मन अभी से ही उतावली हुई जा रही थी !

अपने पति को एक अच्छा सा वीडियो देने के लिए खुलकर हँसती, मुस्कुराती, आँख मारती, लिप किस देती, कुसुम बीच बीच में तकिये पर से अपना सिर उठा उठाकर अपनी चूचियों पर की गयी कारीगरी भी देखती रही. उसे एक बात बढियाँ लगी कि टैटू बनाने के दौरान उस लड़के ने उसके बदन को छुआ तक नहीं था, और तो और, वो अपने काम में इतना मसगुल था कि ऐसा लग रहा था कि उसे कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा हो कि उसके सामने एक सुंदर विवाहिता लड़की नंगी लेटी पड़ी है ! इतना तो तय था कि उसे इन सबकी आदत हो रखी थी, यही उसका काम, उसकी रोज़ी रोटी जो थी, और कुसुम के लिए भले ही ये पहला अनुभव हो, लेकिन वो टैटू आर्टिस्ट तो ना जाने कितनी फीमेल क्लायंट्स के साथ ऐसे प्रोफेशनल सेशन्स से रोज़ाना गुजरता होगा !

पर मेरे साथ ऐसा नहीं था, अपनी पत्नि कि वीडियो बनाते बनाते मै अब आहिस्ते आहिस्ते उत्तेजित होने लगा था !!!

अपने होंठों को अपने दाँतों के बीच दबाकर कुसुम अपनी हँसी रोकने में कामयाब हुई, जब उसने देखा कि टैटू आर्टिस्ट के पीठ पीछे खड़े प्रोफेसर साहब के पैंट में उनका लण्ड ठनका हुआ साफ पता चल रहा है. टैटू आर्टिस्ट पूरी तरह से अपने काम में डूबा, ध्यान लगाए, बारीक़ी के साथ कुसुम के संगमर्मर बदन को सजाने में व्यस्त था, और इस बात का मैने पूरा फायदा उठाया !

एक हाथ में मोबाइल में थामे दूसरे हाथ से मैने अपना खड़ा लण्ड पैंट के ऊपर ऊपर से रगड़ने लगा, और फिर पैंट थोड़ा सा नीचे सरका कर आधा लण्ड बाहर निकालकर धीरे धीरे मसलने लगा. कुसुम को तो विश्वास ही नहीं हुआ कि वो क्या देख रही है !!! मुँह में हँसी दबाये अपनी बड़ी बड़ी आँखें नचाते हुये उसने मुझ को इशारा करके रोकने कि कोशिश कि, ताकि वो टैटू आर्टिस्ट कहीं मुझे ये घिनौनी हरकत करते देख ना ले, मतलब कि घिनौनी हरकत उस टैटू आर्टिस्ट के लिए... मेरे लिए तो ये एक स्वाभाविक सी बात थी, और कुछ हद तक कुसुम के लिए भी !!!

मैने ने कुसुम का संकेत तो समझा, पर उसकी बात मानी नहीं, मोबाइल से कभी मै अपना पैंट से बाहर झाँकता खड़ा लण्ड रिकॉर्ड करता तो कभी काउच पर लेटी अपनी पत्नि का नंगा बदन ! कुसुम को पता था कि ये शायद अब तक का सबसे ज़्यादा गरम वीडियो बनने वाला था , लेकिन उसे डर भी लग रहा था कि कहीं इस बोल्ड हरकत के लिए उस अनजान टैटू वाले लड़के के सामने शर्मिंदगी ना उठानी पड़ जाये !

कुसुम को देखकर मै मुस्कुराया, और अब लण्ड अपने पैंट से थोड़ा और बाहर खींचकर निकाल लिया और अच्छे से मूठ मारने लगा. अपने ठरकी पति के खड़े लण्ड कि हालत देखकर कुसुम को डर था कि अगर उसने अपने लण्ड के साथ अभी के अभी खेलना नहीं छोड़ा, तो जल्दी ही वहीँ खड़े खड़े उसका वीर्य निकल जायेगा ! उसने फिर से मुझे इशारे करके ये सब बंद करने को कहा, लेकिन जब मै अपना मूठ मारना मोबाइल से रिकॉर्ड करने लगा, तो कुसुम समझ गई कि मै रुकना चाहता ही नहीं था - मै अब झड़ना चाहता था !

एक गैर मर्द के सामने नग्नावस्था में पड़े पड़े सामने अपने पति को इस बात से उत्तेजित होकर माल गिराते हुये देखने से ज़्यादा रोमांचक कुसुम के लिए और क्या हो सकता था !!! कुसुम को अपने पति को झड़ते हुये भी देखना था और वो डर भी रही थी. असमंजस में पड़ी कुसुम अपने दोनों पैरों कि उंगलियों को आपस में उलझाकर कुरेदने लगी. उसकी चाहत पर आखिरकार उसका डर हावी हो ही गया, उसे जैसे अभी अभी होश आया हो - अरुण ये अच्छा नहीं कर रहा है , इतना रिस्क लेना दोनों इज़्ज़तदार पति पत्नि के लिए ठीक नहीं है !

उसने इस बार सख़्ती के साथ गुस्से से मुझ को आँखे दिखाकर रुकने का इशारा किया !!!

और ठीक तभी टैटू आर्टिस्ट अपनी गर्दन पीछे घुमाकर मुझ से बोला.

" नीचे का हो गया... भाभी जी कि नाभी का डिज़ाइन भी बता दीजिये सर जी !!! ".

इससे पहले कि टैटू आर्टिस्ट कुछ देख पाता, ठीक ऐन वक़्त पर मैने अपना खड़ा लण्ड वापस से अपनी पैंट में ठूस लिया ! बस दिक्कत ये हो गई थी कि मैने जोश में आकर अपने लण्ड को कुछ ज़्यादा ही रगड़ मसल दिया था - नतीजन, मेरा लण्ड पैंट में ही पिचकारी पर पिचकारी छोड़ने लगा !!!

बड़ी ही चालाकी के साथ मै थोड़ा सा पीछे घूम गया ताकि गीला हो रहा पैंट वो टैटू आर्टिस्ट देख ना सके, और झूठमूठ का मोबाइल इधर उधर करते हुये ज़ोर से बोला.

" अरे यार... बैटरी ख़त्म हो गई ! ".

कुसुम खुद को अब और रोक नहीं पाई, और खिलखिलाकर हँस पड़ी. अपने पति के हावभाव देखकर वो समझ गई थी कि प्रोफेसर साहब का पैंट में "शीघ्रपतन" हो चुका है. टैटू आर्टिस्ट को कोई शक नहीं हुआ, कुसुम के अचानक से हँस पड़ने से उसे लगा कि मोबाइल कि बैटरी ख़त्म हो जाने वाली बात पर ही वो हँस रही होगी. वो चुपचाप एल्बम में अगली डिज़ाइन खोजने लगा.

मेरे पैंट से चू कर थोड़ा सा वीर्य नीचे ज़मीन पर गिर गया था, मैने चुपचाप से अपने पैर से घिस घिस कर चिपचिपा वीर्य ज़मीन पर फ़ैला फ़ैला कर पोछ दिया ! पैंट से रिस रिस कर और वीर्य नीचे ना टपके, इसलिए मैने अपने झड़ते हुये लण्ड को पैंट के ऊपर से ही अपनी मुट्ठी में दबा लिया, और टैटू आर्टिस्ट से नज़र बचाते हुये कमरे से बाहर चला गया, और जाते जाते पीछे झूठमूठ का बोल गया.

" मैं बैटरी चार्ज कर अभी आया भाई... ज़रा रुको ! ".

कुछ देर बाद वापस से कमरे में आया तो कुसुम फिर से हँसने लगी.

" Come on यार... इसमें हँसने कि क्या बात है ? ". मैने चिढ़ते हुये कहा. " बैटरी ख़त्म हो ही सकती है... मैंने चेक नहीं किया था कि कितनी परसेंट बची हुई है ! ".

" Yeah yeah I know... ". कुसुम अपनी हँसी दबाकर आँख मारते हुये बोली.

बहरहाल, हम दोनों पति पत्नि बहुत खुश थें कि टैटू आर्टिस्ट कुछ समझ नहीं पाया था !

कुसुम कि नाभी के लिए एक अच्छी सी डिज़ाइन का चयन करके मै फिर से वीडियो बनाने में व्यस्त हो गया. एक बार वीर्यपात हो जाने के कारण मेरी उत्तेजना एकदम से जाती रही, मै काफ़ी हल्का महसूस कर रहा था, जिसकी वजह से अब मै वीडियो बनाने में पूरी तरह से मन लगा सकता था, ये ज़रूरी भी था, क्यूंकि ये वीडियो आने वाले दिनों और महीनों में कारगर साबित होने वाला था, इसलिए इस प्राइवेट वीडियो का शूट बेहतर से बेहतरीन होना आवश्यक था, इस बात से मै वाकिफ़ था !

नाभी का डिज़ाइन पूरा होते होते अच्छा खासा समय बीत चुका था. एक ही जगह पीठ के बल लेटे लेटे कुसुम का पूरा बदन अकड़ गया था और पैरों में झुनझुनी होने लगी थी.

अरुण ... मुझे बाथरूम जाना है ! ". कुसुम ने मुझ से कहा और उठकर बैठने लगी.

" संभाल कर भाभी जी... डिजाइन अभी गीली है, ख़राब ना हो जाये. ". टैटू आर्टिस्ट बोला.

" वेट वेट... तुम यहीं रहो ! ". अपनी पत्नि को हिदायत देकर मै कमरे से बाहर चला गया.

चंद मिनटों बाद मै वापस आया तो मेरे हाथ में नहाने वाली प्लास्टिक कि एक बाल्टी थी, मै बाथरूम से ये बाल्टी उठा ले आया था. बाल्टी देखते ही टैटू आर्टिस्ट सारा माजरा समझ गया और चुपचाप अपना मुँह फेरकर दूसरी ओर कर लिया.

" छी... ऐसे कैसे करुँगी... मुझे बाथरूम ले चलो... धत्त !!! ". कुसुम शर्म से लाल पड़ गई.

" इसमें शर्माने वाली क्या बात है बेबी...... बेकार में डिजाइन ख़राब हो गई तो ? भाई साहब कि सारी मेहनत बेकार चली जाएगी ! आओ... उठो... I will help you... चलो चलो ! ".

कुसुम कि जाँघों पर पड़े तौलिये को हटाकर मैने उसे अपने हाथों का सहारा देकर काउच् पर से उठने में मदद कि, ताकि उसकी चूचियों और नाभी में अभी अभी लगा टैटू का डिज़ाइन लीपा पुती होकर बिगड़ ना जाये. अपने पति के बाहों का सहारा लिए कुसुम उठकर काउच के किनारे तक आई और अपने दोनों पैर नीचे ज़मीन पर रखकर अपनी गांड़ काउच के किनारे टिकाकर अपनी टांगें खोले बैठ गई.

मैने बाल्टी ठीक उसकी टांगों के बीच नीचे ज़मीन पर रख दिया. कुसुम ने एक बार मुड़कर टैटू आर्टिस्ट को देखा, वो उसकी ओर पीठ किये कुर्सी पर बैठा हुआ अपने एल्बम और सामान के साथ बिज़ी था. वो नहीं देख रहा है, इस बात से निश्चिन्त होते ही कुसुम ने अपनी नज़रें उठाकर एक बार मुझ को देखा और मुस्कुराई.

" रिलैक्स बेबी... करो ! ". कुसुम को काउच पर छोड़ मै उसके सामने खड़ा हो गया और अपने मोबाइल को उसकी चूत कि ओर झुका दिया.

" What you doing ??? ". कुसुम एकदम धीमे आवाज़ में बोली ताकि टैटू आर्टिस्ट सुन ना ले. " अब कम से कम इसकी वीडियो तो मत बनाओ ! "

" क्यूँ बेबी ? कितना हॉट मोमेंट है ये कुछ अंदाज़ा है तुमको ? ". मैने कहा. " जब बाद में वीडियो देखोगी तो मुझे थैंक्स बोलोगी... चलो करो ! ".

कुसुम कि चूत में लबालब पेशाब भरा पड़ा था, जो कि कब से बाहर उमड़ने को बेताब था, जिसकी वजह से कुसुम का पेट भी दुख रहा था, उसने अपने ज़िद्दी पति से बेकार में आगे और तर्क किये बिना अपनी मूत को निकल जाने दिया. चूत से निकलते मूत और फिर बाल्टी में गिरते पेशाब से ज़्यादा आवाज़ ना हो, इसलिए शुरू में कुसुम ने शर्म से पेशाब को धीरे धीरे बाहर आने दिया, पर जल्दी ही उसका अपने शरीर पर ये कण्ट्रोल जाता रहा, उसने अपनी जाँघे ढीली छोड़ दी तो उसका पेशाब छरछराकर उसकी चूत से निकलने लगा !!!

साफ पीले पेशाब के झरने को मै वीडियो में ज़ूम करके कैद करता रहा. पेशाब के कुछ छींटे मेरे पैरों और मोबाइल के लेंस पर पड़े, तो थोड़ा बहुत पेशाब बाल्टी से छलककर बाहर नीचे ज़मीन पर भी गिरा, और काउच् के किनारे से झूलते चादर पर भी !

मन भरकर मूतने के बाद कुसुम ने इशारा किया तो मै अपनी पत्नि कि पेशाब से भरी बाल्टी उठाकर ले गया और बाथरूम में पेशाब गिराकर वापस कमरे में आ गया. कुसुम के गाल अभी तक शर्म से लाल पड़े हुये थें, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि अपने ठरकी पति कि बातों में आकर उसने अभी अभी ये क्या किया था, वो भी एक अनजान आदमी के सामने, भले ही वो देख ना रहा हो पर कमरे में मौजूद तो था और सब कुछ जान समझ तो रहा ही था ना ! पता नहीं उसके पति को उससे ये बेशरम हरकत करवाकर क्या Excitement मिल रहा था !!!

मैने बिस्तर पर से तौलिया लेकर पहले अपनी पत्नि कि चूत को अच्छे से पोछ कर साफ किया , फिर उसकी जाँघे, अपना खुद का पैर, मोबाइल का लेंस, और फिर तौलिया वहीँ ज़मीन पर फेंक दिया ताकि नीचे गिरा हुआ थोड़ा बहुत पेशाब भी तौलिया सोख ले.

कुसुम वापस से काउच् पर लेट गई. इतना सब कुछ हो जाने के बाद अब वो पहले के मुकाबले काफ़ी सहज हो चुकी थी. उसने अपनी चूत नंगी खुली छोड़ दी, अगला डिज़ाइन नितंब के ऊपर कमर पर होने वाला था. हर बार कि तरह इस दफा भी मैने अपनी पत्नि के लिए एक अच्छा सा डिज़ाइन चूज़ कर लिया !

कुसुम कि चूचियों, नाभी, और चूत पर सौंदर्यकरण का काम खत्म हो चुका था, अब उसकी पीठ और गांड़ कि बारी थी.

" अब उठ जाइये भाभी जी... ". टैटू आर्टिस्ट ने कहा.

सावधानी के साथ कुसुम को मैने काउच पर से नीचे उतारा, और कुसुम अब नीचे ज़मीन पर खड़ी हो गई. आर्टिस्ट कुसुम के पीछे अपने घुटनो के बल बैठा उसके मटके जैसे नितंबो को थामे उसकी कमर पर कलाकारी करने लगा,

गाढ़ी जेली का ठंडा पेस्ट जब पहली बार Tube से निकलकर कुसुम कि नंगे नितंबो कि त्वचा पर गिरा, तो उसके ठंडेपन से उसने अपनी आँखें भींच ली और हँसने लगी. उसकी हरेक छोटी से छोटी हरकत कि तरह मैने उसकी इस क्यूट सी हरकत कि बारीक़ीयों को भी बड़ी ही निपुणता के साथ अपनी वीडियो में कैप्चर किया. यही सारे हॉट और सेक्सी मोमेंट तो मुझे उत्तेजित कर रहे थें, और शायद कुसुम को भी ! और फिर खड़े खड़े उसके शरीर के बाकि हिस्सों पीठ पर अपना काम करने लगा.

आज कुसुम ने अपनी पूरी ज़िन्दगी में पहली बार अपने पति के सिवाय किसी और को अपनी चूत दिखाई थी, हालांकि ये अवसर सेक्सुअल तो कतई नहीं था. वैसे भी किसी अनजान आदमी, को अपनी नंगी चूत के दर्शन कराने और इस टैटू आर्टिस्ट के सामने कपड़े उतारने में काफ़ी फर्क था. टैटू आर्टिस्ट के लिए तो काम कि ये मांग थी, ना कि कोई जबरदस्ती ! "जिस तरह डॉक्टर के सामने हर कोई तो नँगा होता ही है लेकिन डॉक्टर सिर्फ अपने काम से काम रखता है।" ठीक उसी तरह फिर कुसुम को बिना कपड़ो के देखने में उस टैटू आर्टिस्ट को कोई दिलचस्पी नहीं थी, ये अब तक के उसके हाव भाव तौर तरीको से साफ ज़ाहिर हो गया था, उसे तो बस अपने काम, कलाकारी, और कारीगरी से मतलब था !

मै अब खड़े खड़े थक गया था, सो मै कुर्सी पर ही बैठकर वीडियो बनाने लगा. किसी गैर मर्द के हाथों अपनी बीवी के नितंबो कि सजावट होते देख मेरे लण्ड में फिर से तनाव आने लगा था, पर इस बार मै जल्दबाज़ी में कोई गन्दी बेवकूफ़ी भरी हरकत नहीं करना चाहता था, मै अपने लण्ड कि इस उत्तेजना को रात के समय वीडियो देखते हुये अपनी पत्नि को चोदने के लिए बचाकर रखना चाहता था !

काफ़ी देर तक बुत बनी नंगी खड़ी रहने के बाद आखिरकार जब कुसुम कि पीठ, गांड़, गर्दन, पैर, और हाथों पर कारीगरी ख़त्म हुई, तो उसने राहत कि साँस ली.

मेरा वीडियो भी कम्पलीट हो चुका था, मैने मोबाइल जेब में रख दिया. बेचारी कुसुम का पूरा शरीर अकड़ कर दर्द करने लगा था, लेकिन उसकी असली परेशानी तो अभी शुरू होने वाली थी !

" भाभी जी... अभी कम से कम दस मिनिट के लिए इसे ऐसे ही छोड़ दीजिये... और भूल कर बैठ मत जाइएगा. ". अपना काम खत्म कर टैटू आर्टिस्ट ने अपना सारा बिखरा पड़ा सामान समेटते हुये कहा. " आधे घंटे रुक सकें तो ज़्यादा सही रहेगा, बहुत उम्दा स्याही है ये, जितनी देर बाद धोईयेगा उतना अच्छा है, रंग ज़्यादा निखरेगा और अधिक दिनों तक टिकेगा ! ".

" Oh no !!! ". आधे घंटे खड़े रहने कि शर्त सुनकर कुसुम ने मुँह बनाते हुये मुझ को देखा, तो मैने उसके पास आकर उसके गाल चूम लियें और बोला.

" हो जायेगा बेबी... बस थोड़ा कष्ट कर लो ! ".

कुसुम मुझ को शिकायत भरी नज़रों से देखती रही, फिर टैटू आर्टिस्ट से बोली.

" थैंक यू भाई साहब... ".

और वाशरूम में कपड़े लेकर चली गई.

" जी भाभी जी... ". टैटू आर्टिस्ट ने अपना झोला उठाते हुये पीछे मुड़कर कुसुम को देखते हुये कहा.

वाशरूम की ओर जाती कुसुम के नंगे मटकते कूल्हे लालसा भरी ललचाई आँखों से घूरते हुये मै पीछे से चिल्लाया.

" Be careful बेबी... टैटू मिट ना जाये ! ".

मै अपनी पत्नि को तब तक निहारता रहा जब तक कि वो कमरे के दरवाज़े से वाशरूम में घुस नही गई.

" लगता है भाभी जी को डिज़ाइन पसंद नहीं आये... ". टैटू आर्टिस्ट ने मुस्कुराकर मुझ से कहा.

" अरे नहीं भाई... क्या बोल रहे हो ? ". मै झट से बोला. " असल में उतनी मॉडर्न नहीं है वो, किसी और के सामने ऐसे बिना कपड़ो के... समझ रहे हो ना ? पहली बार है ! बहुत शर्मीली है... और कोई बात नहीं ! मस्त डिज़ाइन बनाया है आपने... जादू है आपके हाथ में भाई साहब...कलाकार हो यार... रियली ! '

" शुक्रिया सर जी... ".

मै अचानक से टैटू आर्टिस्ट के एकदम पास आ गया और उसके कंधे पर हाथ रखकर बोला.

" वैसे बुरा ना मानना, एक बात पूछूं ? आप मसाज वगैरह भी करते हो क्या ? ".

" नहीं सर जी... क्यूँ ??? ".

" नहीं... वो आपकी भाभी जी काफ़ी थक गई हैं, उन्हें थोड़ी Relaxation कि ज़रूरत पड़ेगी, तो... ".

" नहीं सर जी... मैं मसाज नहीं करता ! ". टैटू आर्टिस्ट ने मेरी बात बीच में ही काटते हुये कहा.

" Erotic मसाज ??? ". मैने धीरे से इशारों भरी आवाज़ में पूछा.

" नहीं सर... बस टैटू आर्ट करता हूँ ! ".

" यार मैंने तो सुना है कि Erotic टैटू Art वाले साथ में Erotic Massage वगैरह भी करतें हैं ! "

" आप जो बोल रहें हैं मैं वो सब नहीं करता सर जी !!! ". मेरे मन कि बात भाप कर टैटू आर्टिस्ट ने मुस्कुराते हुये कहा.

" अलग से पैसे ले लो यार ! ".

" सॉरी सर जी... मैं वो सब नहीं करता ! ". टैटू आर्टिस्ट ने फिर से दोहराया, और फिर काफ़ी विनम्रता के साथ बोला. " आप बस टैटू Art के पैसे दे दीजिये... शादियों का सीजन है, बाहर स्टूडियो में दूसरे क्लाइंट भी इंतजार कर रहे है ! ".

" Sure... sure ! ". टैटू आर्टिस्ट कि अनिच्छा और लगातार इंकार को देखकर मै तपाक से बोला और उसके कंधे से अपना हाथ हटा लिया.

टैटू आर्टिस्ट को उसकी फीस देने के बाद मै वापस वाशरूम के दरवाजे पर आया, वॉशरूम के दरवाज़े पर टिककर खड़ा हुआ मै कुसुम को चुपचाप देखने लगा, जो कि आईने के सामने आगे पीछे घूम फिरकर अपना टैटू से सजा नंगा बदन निहार रही थी.

वो काफ़ी खुश नज़र आ रही थी.

लेकिन मै खुश नहीं था, मेरे मन में कुछ खटक रहा था !

मेरी ख्वाहिश अभी भी पूरी नहीं हुई थी... अपनी पत्नि को किसी और मर्द के साथ हमबिस्तर होते देखने कि अजीबोगरीब ख्वाहिश !!!

मेरे दिल में ये अजीबोगरीब ख्वाहिश और ये बदलाव एक दिन में नही आया था इसके लिए कई दिन, कई साल लगे थे और खासकर अपनी किशोरावस्था से ढलती हुई युवावस्था तक जो आश्लील कहानिया, चित्र कथाएँ, पोर्न फ़िल्मों को देखकर मेरे खुद के अंदर एक पोर्न फ़िल्मों का जो निर्देशक छिपा हुआ था, वो आज इस वक्त बाहर आ गया था। मेरी दिली ख्वाइश थी कि मै भी एक कामुक् फिल्म बनाउ जिसके लिए मेरे पास हीरोइन के रोल के लिए अपनी खूबसूरत पत्नी बेस्ट चॉइस थी।

और ऐसा भी नही है ये अकेली मेरी चाहत हो। ये हर लड़का लड़की की दिली ख्वाइश होती जो किशोरावस्था से प्रोणअवस्था तक आश्लील कहानिया, चित्र कथाएँ, पोर्न फ़िल्मों को देखते है उन सभी के दिल दिमाग में हमेशा दो दृश्य घूमते रहते है एक खुद किसी के साथ सेक्स करने का और दूसरा एक voyeurism छिपा रहता है। " ("किसी दुसरे को सेक्स करते देखकर मजे लेना ") बस तलाश रहती है एक हीरोइन की जो बिना किसी झिझक शर्म के उनकी फैंटसी को पूरा करे। और वो हीरोइन रिश्ते में चाहे प्रेमिका हो या पत्नी.......!!

कुसुम की वो प्यार भरी बातें, उसकी टैटू बनवाने की फरमाइश और उसका खुलापन ये सभी, अभी एक साथ मिलकर मुझे मजबूर कर दिए कि मैं ऐसा ही बन जाऊ और अपने प्यार को दूसरों के साथ मजे लेते देखु, कुसुम का मेरे लिए प्यार और सम्मान भी एक कारण था ,अगर वो ये सब ना भी करे तो भी क्या फर्क पड़ता अगर वो मुझे, वो प्यार और सम्मान नही देती,

मैने अपने कई दोस्तो के मुह से सुना था कि शादी के बाद जिंदगी झंड हो जाती है,पत्नियां प्यार की जगह बात बात पर झगड़े करतीं है,कई तरीकों से मर्द को बांधने की कोसिस करती है और मर्दो का भी इंटरेस्ट अपनी पत्नी पर से उठना शुरू हो जाता है,और वो दोनो बाहर मुह मारते है, शायद समाज के बंधनों की फिक्र के कारण वो एक दूसरे से जुड़े रह भी जाय तो क्या ,,जिंदगी तो उनकी नरक की तरह हो जाती है,

लेकिन मेरे साथ ऐसा नही था ,बड़ी अजीब बात थी कि जिसे समाज शायद रंडी का दर्जा देता वो मेरी पत्नी थी,जिसे बदचलन कहता वो मुझे इतना प्यार और सम्मान देती हैं जो मैंने कभी भी किसी औरत को अपने पति को देते नही देखा,वो फूल सी खिली हुई और अपनी खुसबू सब तरफ फैला रही थी,मेरे पास दो ही ऑप्शन थे या तो उस फूल को कुचल कर बस अपना बना कर रखु और उसकी खुसबू को खो जाने दु या उसे युही महकने दु,,, हा उसकी खुसबू सिर्फ मेरी नहीं रह जायेगी पर वो सदा ही महकेगी,,,, मैंने तो चुन लिया मैं उसे सदा महकता देखना चाहता हु…

ये सब आत्म मंथन करते हुए पता ही नही चला कि हम कब घर पहुँच गए। थोड़ी देर बाद डोर बेल बजी। ससुर (मेरे पापा) ने जाकर दरवाजा खोला तो कुसुम को देखकर एकटक निहारते ही रह गये। हरी बंधेज की साड़ी, उस पर मैचिंग ब्लाउज, ब्लाउज में बाहर निकलते हुए बाहों, उभारो, नाभि, कमर पर दिल शेप लिए गुलाबी रंग का टैटू, साथ ही बालों का सुंदर सा जुड़ा बना रखा था और ब्यूटी पालर का डार्क मेकअप। वाकई कुसुम कहर ढा रही थी। पापा जी तो कुसुम को निहारते ही रह गए।

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सासु मा (मेरी मम्मी)," वाह! क्या बात है बहू, आज तो बहुत सुंदर लग रही हो"

सासु की बात सुनकर कुसुम मुस्कुरा दी।

इतने में " बूढ़ी घोड़ी लाल लगाम"

शायद यही कहा रिंकी ने। सुनते ही कुसुम ठिठक गई। और पलट कर बोली

" कुछ कहा तुमने रिंकी "

" नहीं नहीं, मैंने तो कुछ भी नहीं कहा मम्मी"

" हां हां सच में" रिंकी ने झिझकते हुए कहा।

" अच्छा है कि तुमने कुछ नहीं कहा। अगर कुछ कहा होता तो शायद जवाब भी मिल जाता" रिंकी नज़रें नीची कर खड़ी हो गई और कुसुम उसे घूरती हुई वहां से अपने कमरे में निकल गई। कुसुम के जाते ही उसने ने बड़बड़ाना शुरू कर दिया,

" क्या गलत कहती हूं मैं? मुझे तो रोक लेंगी, पर बाहर और भी तो लोग हैं, जो बातें करते हैं। उनका क्या? उनकी जबान पकड़ो तो माने " " सही कहा ना दादी, क्या जरूरत है मम्मी को टैटू बनवाने की? बदन का कोई भी ऐसा हिस्सा नहीं बचा जहाँ रंगाई पुताई बची हो..... इस उम्र में यह सब शोभा देता है क्या?"

" अरे बुढ़ापे में सठिया गई है। कौन समझाएं इन्हें? जब कोई बाहर वाला मजाक उड़ाएगा, तब समझ में आएगा। फिर रोती हुई आएगी घर पर"

" हां हमें क्या? इन्हें खुद का मजाक उड़ाने की लगी है तो शौक से उड़ाए। हम तो खुश है अपनी जिंदगी में"

" वैसे भी किसे फर्क पड़ता है? पापा तो कुछ कहते नहीं। वो तो जोरू के गुलाम बने है..... " यह क्या शोभा देता है मम्मी को? इस उमर में बदन पे टैटू दिखाना। लेकिन पापा और मम्मी को ऐसी टैटू की क्या जरूरत ? क्या वो दोनो इस टैटू की प्रदर्शनी करने वाले है ? क्या ऐसी टैटू पर कोई एकाध करोड़ का इनाम रखा हुआ है ?

"और देखा नहीं, कैसे ब्यूटी पालर में डार्क मेक अप करवा कर तैयार होकर आ रही हैं। इनकी बेटी की शादी की उम्र होने को आई और इन्हें इस उम्र में देखो, इनका शृंगार देखो वो खुद "हेमा मालनी" बनी घूम रही है। कम से कम पूछ तो लेना चाहिए था दादी आप से "शादी के फंक्शन में कौन सा पापा निहार रहे हैं उन्हें, जो इतना सज धज कर तैयार हो रही है"

" यह तो है दादी। 'जिसने ना देखी हो कान की बाली उसके हाथ लग जाए खजाने की चाबी' वाली कहावत है ना। मम्मी का भी यही हाल है। अब वह पैसे के रंग में रंग चुकी है।" और आप दोनों दादा दादी कुछ कहते भी नहीं"

इतने में मेरी मम्मी (दादी) बोली, " क्यों इसमें गलत क्या है? मम्मी और पापा दोनों पति-पत्नी है। एक दूसरे के साथ समय बिताना उनका हक है। इसके लिए भला किसी की इजाजत की क्या जरूरत है"

" और रही बात उम्र की, तो उम्र का क्या है? वह तो सिर्फ एक अंक है। उम्र के साथ क्या भावनाएं बदल जाती है। बिटिया तेरे हिसाब से तो कल को वो लोग पति पत्नी ही नहीं रहेंगे। और अब बच्चे डिसाइड करेंगे कि मम्मी पापा को क्या करना है और क्या नहीं" आखिर पति पत्नी का रिश्ता तो उम्र के साथ प्रगाढ़ होता है, तो उसे उम्र के बंधन में बांधने की क्या जरूरत है।

अरुण की मम्मी नातिन को तो उम्र का अंक गणित बता दिया.... लेकिन अपनी बहू को मर्यादा और संस्कार का गणित भी थोड़ा सा सिखा दो...... पापा (दादा) रिंकी का पक्ष लेते हुए मम्मी (दादी) से बोले।

ऐसी कोनसी मर्यादा और संस्कार तोड़ दिये आपकी बहू कुसुम ने.... मैने मम्मी के सुर में सुर मिलाते हुए कुसुम की तरफदारी करते हुए पापा से कहा।

पापा को मुझे इस तरह बीच में बोलना खटका और मुझसे व्यंग की शैली में बोले

"प्रोफेसर अरुण साहब मर्यादा और संस्कार विरासत में नही मिलते इन्हे कमाना पड़ता है........! जिस प्रकार किसी को मनचाही स्पीड में गाड़ी चलाने का अधिकार नहीं है, क्योंकि रोड सार्वजनिक है। ठीक उसी प्रकार किसी भी लड़की को मनचाही जिस्म की नुमाइश दिखाने का अधिकार नहीं है क्योंकि जीवन सार्वजनिक है। एकांत रोड में स्पीड चलाओ, एकांत जगह में अर्द्धनग्न रहो। मगर सार्वजनिक जीवन में नियम मानने पड़ते हैं। दोनों में एक्सीडेंट होगा ही।

भोजन जब स्वयं के पेट मे जा रहा हो तो केवल स्वयं की रुचि अनुसार बनेगा, लेकिन जब वह भोजन परिवार खायेगा तो सबकी रुचि व मान्यता देखनी पड़ेगी। अपनी इच्छा केवल घर की चारदीवारी में ही उचित है। घर से बाहर सार्वजनिक जीवन मे कदम रखते ही सामाजिक मर्यादा लड़का हो या लड़की उसे रखनी ही होगी। घूंघट और बुर्का जितना गलत है, उतना ही गलत अर्धनग्न होकर इस तरह जिस्म को रंगवा कर नुमाइश करना है।

पापा आज के आधुनिक युग में आप सन् 1947 की सोच वाली बातें कर रहे है, ये मॉडर्न युग है, यहाँ हर घर में लड़के लड़किया, बहू बेटी इसी तरह खुलकर अपनी जिंदगी जी रही है.... आपनी आँखों से ये पुरानी दकियानोओसी सोच का चश्मा उतारो.... और जरा मॉडर्न बनिये....!! मैने पापा के श्लोक बीच में काटते हुए अपनी बात कही।

नग्नता यदि मॉडर्न होने की निशानी है, तो सबसे मॉडर्न जानवर है जिनकी संस्कृति में कपड़े ही नही है। कुत्ते को अधिकार है कि वह कहीं भी मूत सकता है, सभ्य स्त्री पुरुष को यह अधिकार नहीं है, उसे मर्यादा में रहकर बन्द टॉयलेट का उपयोग करना होगा। अतः प्रोफेसर अरुण साहब आप से विनम्र अनुरोध है, अपनी और अपनी लुगाई कुसुम को रंगवा पुतवा कर जिस्म दिखाने की नुमाइश की चुल्ल मेरे घर के बाहर मिटाये कृपा कर मेरे गांड में उंगली ना करे।😜

जारी है.......
 
Hahahaha. सर जी आप अपने मंतव्य के शब्दों से भटक रहे है, क्योकि हास्य और comedy का ठेका मेने लिया हुआ 🤣😂 आप इस तरह अब हँसा हँसा कर मेरी दुकान बंद करा रहे है 🤣

आपके एक एक शब्द पढ़कर हँसी रुक नही रही है, वैसे अरुण के पिता को बहू के लक्षण ठीक नहीं लगे, शायद इसीलिए ज्ञान चर्चा कर रहे है।

बहुत बहुत बहुत बेहतरीन rivew के लिए धन्यवाद 🙏
 
अध्याय - 20 --- " बेवफ़ाई या बेहयाई ""

प्रोफेसर अरुण साहब आप से विनम्र अनुरोध है, अपनी और अपनी लुगाई कुसुम को रंगवा पुतवा कर जिस्म दिखाने की नुमाइश की चुल्ल मेरे घर के बाहर मिटाये कृपा कर मेरे गांड में उंगली ना करे।

अब खतम भी करो ये बेफिजूल की बहस, रिंकी बेटी तुझे मौसी के संगीत कार्यक्रम में नही जाना क्या....??? जा बिटिया अब तैयार हो जा.....तेरी मम्मी अगर तेरे से पहले तैयार हो गयी तो बड़ी आफत हो जायेगी, और तुझे छोड़ कर ही चली जायेगी जा जल्दी...... और अरुण तुम अपने कमरे में जाओ बहू से पूछो कितने बजे जायेगी। मेरी मम्मी, बाप बेटे की ज्ञान चर्चा का अंत करते हुए बोली।

इससे पहले मै कमरे दाखिल हो पाता पीछे से रिंकी की आवाज आई।

पापा... मैने आपको मैसेज किया था वो चीज लाये क्या....???

मै अपना माथा पकड़ते हुए ओह्ह शिट मुझे याद नही रहा मै अभी लेकर आता हू। मै शादीशुदा जरूर हू लेकिन अभी तीन महीने ही हुए है और कुसुम ही हमेशा खुद के use होने वाली चीज पैड, अंडर गारमेंट, हेयर removal etc जैसी खुद ही खरीदती है।

मेरे लिये लाइफ का ये पहला अनुभव था,

मैने आज तक कंडोम नही खरीदा और कुसुम को बिना कॉंडोम के ही चोद रहा हूँ।

मेरे जैसे शर्मीले लड़को के लिए कंडोम खरीदना ही मुश्किल था और अब पैड खरीदना से मुश्किल क्या होगा।

""मेरी हालत वैसी थी जैसे हमारे छोटे शहरों में शराब की दुकान पर पहली बार मजबूरी में शराब खरीदने पर होती है ""

मै मेडिकल शॉप पर पहुँच गया।

शॉप कीपर एक लेडी थी मै उससे धीरे से शर्माते हुए बोला व्हिस्पर देना।

शॉप कीपर -- कोनसा साइज

मै-- मैं चोंकते हुए स स स साइज क्या,

शॉप कीपर-- कितना बड़ा

मै-- मन ही मन बेहनचोद इसमें भी साइज आता है, कोन कौन सा साइज है।

शॉप कीपर-- normal, large, extra large

मै-- मन ही मन अब रिंकी का साइज तो मुझे पता ही नही है अब क्या करू कही छोटा पेड ले लिया तो leekage की प्रॉब्लम हो सकती है और बड़ा ले लिया तो रिंकी की पैंटी में सेट नही हो पायेगा अब क्या करू रिंकी को फोन कर के पूंछू।

शॉप कीपर-- क्या सोच रहे हो भाई साहब बोलो जल्दी कोनसा साइज देना,

मै--- अटकते हुए वो साइज

शॉप कीपर-- किसके के लिए चाहिए

मै-- चिढ़ते हुए इससे तुम्हे मतलब क्या है ।

शॉप कीपर-- हस्ती हुयी अरे भाई मै पूछ रही हूँ जिसके लिए चाहिए उसकी उम्र और शरीर कैसा है पीरियड पैड उमर और शरीर के हिसाब से साइज दे देती हूँ।

मै-- फिर फँस गया। सच बोल नही सकता कि बिटिया के लिए चाइये नही तो शॉप कीपर क्या सोचेगी।

शॉप कीपर-- मेरी चुप्पी देखकर बोली आप ये नॉर्मल वाला ले जाये।

मै-- दे दो जो होगा वो देखा जायेगा।

मै क़ाली थैलि में पेड लेकर अपने घर से कुछ दूर ही पहुँचा था कि ज्ञान प्रकाश गुप्ता मेरे वकील दोस्त का काल आ गया,

“कैसे हो दोस्त आ गयी भाभी”

“हा यार वो तो उसी दिन आ गयी थी जब मैं तेरे से मिलकर आया था,”

“अच्छा है साले तभी मैं बोलू साले कोई फोन कैसे नही कर रहा है,अभी क्या हालत है ,सब कुछ ठीक ही होगा तभी तो तेरा कोई पता नही है अभी तक,,”

“हा भाई सब ठीक ही लग रहा है,कोई भी ऐसी बात तो नही हुई जिससे मुझे कुछ शक हो,”

मैंने आवेश में आकर गलती से आज टेट्ट स्टूडियो वाली पूरी बात ज्ञान प्रकाश को बता दी,,,

मुझे ज्ञान प्रकाश की जोरो की हँसी की आवाज सुनाई दी,

“मादरचोद तू भी आखिर बन ही गया ना cuckold ,मुझे तो उस दिन बहुत ही ज्ञान दे रहा था” “अबे चुतिया, …. तुझे नही पता कि तू क्या था और क्या बन गया है... आज तक खुद की बीवी के अलावा किसी लड़की को चूमा तक नही तूने....बड़ी मुश्किल से 36 कि उम्र में अभी नई नई शादी हुयी है तेरी, अभी ठीक से तूने अपनी बीवी को भोगा भी नही होगा। और तू अपनी बीवी को गैर मर्दो के सामने परोसने की सोचने लगा। "साले जब बंदा नई गाड़ी भी खरीदता है, तो साल दो साल तक खुद रगड़ कर चलाता है, तब कही जाकर किसी मांगने वाले को देता है।" और तू तो अपनी नयी नवेली बीवी को इस तरह...... क्या यार मुझे तेरी मर्दान्दगी पर शक हो रहा है। 36 की उम्र में गुप्त रोग का शिकार तो नही हो गया।

ज्ञान प्रकाश की बात का मुझे बिलकुल भी बुरा नही लगा, मैंने एक गहरी सांस छोड़ी साथ ही ज्ञान प्रकाश ने भी ..अब हम दोनों के मन शांत थे,,,पर एक अजीब सी झुनझुनाहट भी मेरे शरीर मे दौड़ गयी ये सोचकर कि अपनी नई नवेली बीवी को दूसरे मर्दो के साथ….साला क्या मैं सच मे नामर्द ( गुप्त रोगी ) हो रहा हु… इसलिए अपनी बीवी को किसी गैर मर्द के साथ...!

आखिरकार ज्ञान प्रकाश ने मुझे फिर से टोका

“क्या हो गया बे किस सोच में पड़ा है”

कुछ नहीं तू बोलता जा... तेरी कड़वी बातें आज मुझे उतनी कड़वी नही लग रही है।

जो cuckold का कीडा तुम्हारे दिमाग में चल रहा है उसका परिणाम सोचा है अगर भाभी को किसी और का लंड रास आ गया और उन्होंने तेरे गांड पर लात मार दी तो.....! फिर तू क्या सारी जिंदगी हाथ से हिलायेगा। प्रोफेसर अरुण कुमार औरत के अंदर एक बहोत बड़ी खूबी होती एक बार उसे कुछ पसंद आ गया तो उसे आखिरी दम तक सजो के रखती है वो चाहे रिश्ते हो या चूड़ी........ चूड़ी का रंग उतर जाएगा, चमक खत्म हो जाएगी पर खुद से जुदा नहीं करेगी....बस यही खूबी औरत को विशिष्ट बनाती है....अभी तक तुमसे भाभी को कोई बच्चा भी नही है, लेकिन कल को जो जब तुम बाप बनोगे तो क्या गारंटी होगी वो बच्चा तुम्हारा ही होगा। मान भी लो वो तुम्हारा ही बच्चा हो, लेकिन तुम जिंदगी भर उस बच्चे को शक की नजर से देखोगे। पति के cuckold बनने के तीन कारण होते है... पहला जब उसकी बीवी उससे संतुष्ट नही होती। दूसरा जब उसकी बीवी चरित्रहीन छिनार हो जाती है। तीसरा उसके खुद के affair को छिपाने के लिए पत्नी को षड्यंत्र पूर्वक दूसरो के बिस्तर पर भेज देता है। इन तीनों मे से तेरे cuckold बनने का कोई कारण तो मुझे समझ नहीं आता।

ज्ञान प्रकाश से बात करके कुसुम के लिए दिल मे इज्जत जागी, पर साथ ही एक डर भी था,क्या मैं वाकई कुसुम को संतुष्ट नहीं कर पा रहा.... .. .शायद हा..! भावनात्मक रूप से तो कुसुम मेरी है पर शायद शारिरिक रूप से उसे और ज्यादा की जरूरत है जो मैं उसे नही दे पाता,या शायद मुझसे शादी पहले के वो दिन जिसमे कुसुम ने बहुत ही मजे किये थे या दर्द झेला था (वो तो वही जानती है) ने उसे इस कदर सेक्स के प्रति पागल बना दिया है कि वो भी अपनी मर्यादाओ से बाहर जाने से नही कतराती…

वैसे ज्ञान प्रकाश तूने अचानक से फोन क्यों किया ????

भाभी के ऑफिस के कुछ इनफार्मेशन निकले थे ,शायद अब तुझे उसकी जरूरत नही है,” क्योकि अब तू खुद ही अपनी बीवी को गैरों के बिस्तर पर देखने को तैयार है तो भाभी के चरित्र का आकलन करने का कोई मतलब नहीं.....!

साला वकील फिर से दिल की धड़कने बड़ा गया

“क्या पता चला तुझे”

“वही तेरे बीबी के ऑफिस में उसके हुस्न के चर्चे ”

अब मेरे माथे में पसीना था पता नही ये वकील क्या बताने वाला था, मैंने मन मे सोचा की यार ठीक है वो मुझसे ही गलती हो गयी, और अब cuckold की बात मै सपने भी नही सोचूँगा, और हिम्मत कर कह गया

“बता दे यार अब मुझे डर नही.... बीबियाँ हमेशा से ही ताकतवर रही है, चाहे बिस्तर हो या दफ्तर, इन्होंने दोनों ही जगह मर्दों को परास्त किया है।"

वकील की तो जोरो से हँसी छूट गयी और मुझे भी बड़ी शर्म महसूस हुई..

“साले मादरचोद “मैंने धीरे से कहा पर उस ने इसे सुन के अनसुना कर दिया,

“सुन एक काम कर जब भी फ्री हो तो मेरे घर आजा वही बैठ कर पीते पीते बात करते है।

वाह ये तो मेरे लिए कमाल ही हो गया

“थैंक्स यार ”

“कोई बात नही बेटा, लेकिन सिर्फ तू ही मजे ले अपनी बीवी के…. किसी और को ना लेने दे” और मौका मिले तो किसी और की बीवी को जरूर रगड़ दे...!

इतना कहकर वो जोरो से हसने लगा,साला बड़ा कमीना था पर आज ना जाने क्यों उसके कमीनेपन में मुझे गुस्सा नही आ रहा था,,,,

वकील के फोन कटने के बाद से ही मैं वापस घर आ गया।

मै वापस घर पहुँच गया अब मुझे दो टेशन थी एक whisper मै रिंकी के हाथ में दू या कुसुम के कुछ समझ नही आ रहा था। मैने whisper का पैकेट थैली में अपने पास ही रख लिया। और दूसरी टेंशन मुझे डर था कि अभी थोड़ी देर पहले हॉल में जो बाप बेटे की बीच जो बहस हुयी थी उन बातों को कुसुम ने तो नही सुन लिया, क्योकि पूरी बहस का मुद्दा तो एक मात्र वो ही तो थी। मैने रिंकी के पास ना जाते हुए कुसुम के पास जाने का फैसला लिया। अपने कमरे में डरते डरते मै अपने कदम बढ़ा रहा था,

जबकि दूसरी ओर अपने कमरे में आने के बाद कुसुम नहाने चली गयी थी उसने उसके पीठ पीछे जो बहस हुयी थी उसको जरा सा भी नही सुना था। जब वो गिले बालो के साथ बाथरूम में से निकली जैसे कोई ओश की बूंद ताजा हरी घास पर अटखेलिया कर रहा हो,मेरे सामने अपने बेडरूम का पूरा नजारा था पर मैं अपनी कुसुम के चहरे को देखकर दीवाना हो रहा था, उसकी लाली ताजा सेब की तरह,टबेल में लिपटी हुई बलखाती कमर उन्नत वक्ष जो तोलिये मे लिपटे हुए भी अपने शबाब की झलक दिखा रहे थे,उसने अंग अंग को आईने में निहारा और बड़ी शरमाते हुए अपने कपडे उठा लिए मुझे लगा था की वो अपना तोलिया गिरा देगी लेकिन उसकी शर्म ने मेरी जान की इज्जत मेरी नजरो में और बढ़ा दी,वो अकेले में भी अपने नग्नता से शर्मा रही थी, वही नग्नता जिसका भोग मै हर रोज करता आ रहा हूं, उसने बड़े सलीके से अपनी साड़ी पहन ली और पुरे मनोयोग से सजने लगी, उसने मेरे नाम का गहरा सा सिंदूर अपनी मांग मे भर लिया, फिर लाल चमकती हुयी एक छोटी सी बिंदी अपने माथे में लगाई और चूडियो को हाथो में डाल कर चूम लिया ये देख मेरे दिल में ऐसा प्यार जगा की अभी जा कर उसे चूम लू , जब वो सजके तैयार हो गयी तो उठकर बिस्तर के पास आई और मेरी और उसकी फोटो को उठा कर चूम लिया मेरा दिल तो भर आया की कोई किसी को इतना प्यार कैसे कर सकता है, और मैं अपनी ही सोच में डूब गया,की मैं कितना खुश किस्मत हु,

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इस दृश्य ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया की क्या सच में कुसुम के ऑफिस में कुछ हो रहा है जिसकी मुझे भनक नहीं हो पा रही है,दिल कुछ गलत सोचने से भी इंकार कर रहा था पर दिमाग ने एक अंतर्द्वंद की स्तिथि पैदा कर दी थी, कुसुम का प्यार महसूस कर और देखकर मैं सोच भी नही पा रहा था की वो मुझे कभी धोखा भी देगी,मैंने आँखों देखि साँच पर ही विश्वाश करने की ठान ली,और भगवान से दुआ की की मेरा वकील दोस्त गलत हो,..........।

आज मैं एक बोझ में था उस हकीकत का बोझ जो अभी मेरी सिर्फ कल्पनाओ में था, कुसुम के चहरे पर कोई सिकन न थी न ही कोई ग्लानी के भाव,वही मुस्कुराता मासूम सा चहरा,वही नश्छल आँखे,मैं उसका चहरा देखता ही रहा अपलक निर्विचार,

क्या देख रहे है आप, कुछ खामोश से है, कोई प्रोब्लम है क्या घर में, नहीं बस सोच रहा था की तुम इतनी सुंदर क्यों हो, क्यों हो इतनी मासूम, इतनीं निश्छल, इतनी पावन,

कुसुम ने मुझे घुर कर देखा,.

क्या हुआ है आपको. . . . . ???

कुछ नहीं ....!

कुसुम को शक तो था की मुझे कुछ हुआ है पर मैं उससे क्या कहता की मैं तुमपे शक कर रहा हु, क्या पूछता उससे की क्या वो अपने ऑफिस में गुल्छरे उड़ा रही है ,,

छि छि मैं इतना कैसे गिर सकता हु की कुसुम के बारे में ऐसा सोचु..

मैं प्यार से कुसुम के पास गया और उसे अपनी बाहों में भर लिया,मेरे आलिंगन में एक गहरा प्यार था जिसका आभाष कुसुम को हो गया था,उसने अपना सर पीछे करते हुए मेरे होठो को अपने होठो से रगड़ना शुरू कर दिया मैंने भी अपना मुह खोल उसके प्यारे गुलाबी लबो के रस का पान करने लगा...

हम मेक अप टेबल के पास खड़े होकर अपनी प्रेम लीला में खोये हुए थे,

ये तन्द्रा तब टूटी जब रिंकी ने खासते हुए कमरे में प्रवेश किया, कुसुम की आँखे शर्म से झुक गयी, मैं भी थोडा शर्मिन्दा हुआ पर जब मैंने रिंकी को देखा तो मै निश्चिंत हो गया क्योकि वो एक आश्चर्य से मुझे निहार रही थी जैसे पूछ रही हो अगर पति पत्नी की रास लीला समाप्त हो गयी हो तो मेरे सेनेटरी पेड मुझे मिले..??? रिंकी तो मेरा ही वेट कर रही थी की मै सेनेटरी पैड़ लाऊँ तो वो चेंज करे काफी टाइम हो गया है सुबह वाला यूज करते हुए।

कुसुम: बोलो रिंकी

रिंकी के कुछ बोलने से पहले मै.....ये लो रिंकी को दे देना मै कुसुम के हाथ मैं एक पैकेट पकड़ा कर और कमरे से बाहर चला आया।

कुसुम पैकेट को देखति है और खोलती है

उसमे जो था उससे देख कर शॉकड हो गयी।

एक तो इसलिए की उसमे व्हिस्पर था दुसरा व्हिस्पर का सबसे महंगा प्रोडक्ट था जो उसने आज तक यूज नहीं किया था।

कुसुम को समझ नहीं आ रहा था की क्या करे। पर रिंकी को इसकी ज़रूरत थी इसलिए वो उसे यूज करने के लिए दे देती है, और जल्द तैयार होकर फंक्शन में चलने के लिए केहकर बेड पर लेट जाती है। कुसुम अब इसी उधेड़बुन में थी मेरी जैसी मिडिल क्लास फैमिली कि औरत जो अपने mc पीरियड कि बात अपने पति के अलावा सबसे छिपाती है, खाना नही बनाने पर बच्चो से तबियत खराब होने का बहाना बना कर टाल देती है। पर मेरी जवान बेटी ने आज अपने पापा को mc पीरियड कि बात बता दी। भले अरुण उसका सौतेला बाप है पर आखिर है तो एक मर्द.... और इस तरह अब इतनी बाप बेटी को ज्यादा छूट देना ठीक नहीं है। अब कुसुम को अपनी बेटी का अपने पति के साथ ज्यादा खुलापन खटक रहा था।

जारी है.......!
 
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