Incest कर्ज और फर्ज - एक कश्मकश - Page 21 - SexBaba
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Incest कर्ज और फर्ज - एक कश्मकश

ऐसा नही था कि मुझे अपनी सास किसी आम औरत की भाँति नज़र आ रही थी, मैने कभी अपनी सास को उत्तेजना पूर्ण शब्द के साथ जोड़ कर नही देखा था. वह मेरे लिए उतनी ही पवित्र, उतनी ही निष्कलंक थी जितनी कि कोई दैवीय मूरत. बस एक कसक थी या अजीब सा कौतूहल जो मुझ को मजबूर कर रहा था कि मै उनके विषय में और अधिक जानकारी प्राप्त करू भले वो जानकारी मर्यादित श्रेणी में हो या पूर्न अमर्यादित.. . . . ....!

कौतूहल चंचल मन अश्व समान होता है, विचारों की वल्गा चाहे जितनी भी ज़ोर से तानो लेकिन वह दौड़ता ही जाता है. मेरी सास अधीर हो उठी थी, अवाक हो कर मेरे चेहरे के भाव पढ़ने का प्रयत्न कर रही थी.चाहती थी कि उसका दामाद अत्यंत तुरंत स्वीकार कर ले कि वो उसको सारे शारीरक् सुख देने की काबिलियत इस अधेड़ यौवन में भी रखती है। निश्चित तौर पर तो नही परंतु हमेशा की तरह ही वह अपनी चूत की गहराई में अत्यधिक सिहरन की तीव्र लहर दौड़ती महसूस करने को बेहद आतुर हो चली थी, जिसके एहसास से वह काफ़ी दीनो से वंचित थी.

उन्होंने मंन ही मंन सोचा और मेरे मुख से ही पूर्ण रूप से सच सुनने की प्रतीक्षा करने लगती है.

" मम्मी! मैं परेशान हूँ" मै हौले से बुद्बुदाया, मेरा कथन और स्वर दोनो एक-दूसरे के परिचायक थे.

मेरी सास को पुष्टिकरण चाहिए था वह भी एक मर्द से, फिर चाहे वह मर्द उसका सगा दामाद ही क्यों ना था. उन्होंने अपने चेहरे की शरमाहट को छुपाने का असफल प्रयास किया और फॉरन चहेक पड़ी.

"हां हां बोल ना, मैं सुनना चाहती हूँ अरुण " उनके अल्फाज़ो में महत्वाकांक्षा की प्रचूरता व्याप्त थी जैसे अपने दामाद के व्यक्तिगत रहस्य अपनी सगी सास के साथ सांझा होने पर उन्हें बेहद प्रसन्नता हो रही हो.

मैने अपनी सास के हैरत भरे चेहरे को विस्मय की दृष्टि से देखते हुए कहा.

"वैसे मम्मी! क्या मैं जान सकता हूँ कि एक अच्छे संभोग सुख की चाहत पूरी करने के लिए मुझे क्या करना चाहिए ?" मैने प्रश्न किया.

कुच्छ वक़्त पिछे जिस नकारात्मक सोच से सामना हुवा था अब वो नकारात्मकता प्रबलता से अपने पाँव फ़ैलाने लगी थी.

"कुच्छ ख़ास नही! सासु कुर्सी के हैंडल की सतह पर अपने दाएँ हाथ के नाखूनो को रगड़ते हुवे बोली. उनकी आँखें जो अब तक अपने दामाद की आँखों में झाँक कर वार्तालाप कर रही थीं, गहेन मायूसी, अंजाने भय की वजह से उनकी गर्दन समेत निच्चे झुक जाती हैं.

"अक्सर नौकरी पेशा बीवी होने पर तुम्हारी उमर में अक्सर पति पत्नी को सेक्स संबंधी प्राब्लम'स फेस करनी पड़ती हैं बेटा! लेकिन इसमें बुरा कुच्छ भी नही" स्पष्ट-रूप से ऐसा बोल कर वह मेरी गतिविधियों पर गौर फरमाने लगती है.

अरुण बेटा कितने समय से कुसुम तुम्हारी संभोग सुख की चाहत पूरी नही कर रही है... कुछ पल की चुप्पी के बाद वो फिर से बोली????

महीने भर से मम्मी, आप तो समझ लीजिये जब से उसकी नौकरी लगी है तब से... ;

"क्या! महीने भर से" सास चोंकते हुए.

"उससे भी पहले से" मैने दोबारा विस्फोट किया.

"तो .. तो तुमने मुझे कुच्छ बताया क्यों नही बेटा ?" सास ने व्याकुल स्वर में पुछा, उनके मस्तिष्क में अचानक से चिंता का वास हो गया था. पति पत्नी के बीच होने वाले संभोग में इतने लंबे समय तक का अंतराल बने रहना बहुत ही गंभीर परिणामो का सूचक माना जाता है और जो वाकाई संदेह से परिपूर्ण विषय था.

"कैसे बताता मम्मी ? जब किसी अन्य को नही बता पाया तो फिर तुम तो मेरी मम्मी समान हो" बोलते हुए मेरी आँखें मूंद जाती हैं.

मेरे हाथ पर हाथ रखते हुए सास बोली "तो क्या सिर्फ़ घुट'ते रहने से तुम्हारा दर्द समाप्त हो जाता ?"

"बेशरम बनने से तो कहीं अच्छी थी यह घुटन"

अरुण बेटा "तुम किस युग में जी रहे हो ! क्या तुम्हे ज़रा सा भी अंदाज़ा है ?"

मम्मी "युग बदल जाने से क्या इंसान को अपनी हद्द भूल जानी चाहिए ?"

"हद में रह कर ही तो तुम्हारी इतनी गंभीर हालत हुई है, बेटा! काश की तुमने समय रहते ही सही, मुझे अपना दर्द बया कर दिया होता तो आज कुछ देर पहले जो तू अपनी बेटी रिंकी के साथ कर रहा था, वो करने की नौबत ही नही आती। कुच्छ हद्द तक तू बाप बेटी के रिश्ते को बदनाम करने से मुक्त हो गया होता" सास के दुइ-अर्थी शाब्दिक कथन के उपरांत तो जैसे पूरे मेरे दिल दिमाग में सन्नाटा छा जाता है. मेरी जुबां से बस एक ही शब्द बाहर निकला " सॉरी "

"खैर भूल जाते है,उसे जो हुआ सो हुआ! मुझे अपने दामाद की भावनाओ को भी समझने का प्रयास करना चाहिए था और जिसे मैने पूरी तरह से नज़र-अंदाज़ कर दिया था" "तो क्या अब तुम अपनी उस छोटी सी भूल का इस तरह शोक मनाओगे ?" हमारे बीच बहुत देर से छाई शांति को भंग करते हुवे सास बोली.

अजीब सी स्थिति का निर्माण हो चुका था, मेरे बगल में बैठी स्त्री मेरी सगी सास थी जो अपनी ही सगी बेटी के स्त्रीतत्व पर ही दोषा-रोपण कर रही थी और अपने दामाद को आज के परिवेश में ढल जाने की शिक्षा दे रही थी. उत्तेजना अपनी जगह और मान-मर्यादा, लिहाज, सभ्यता, संस्कार अपनी. हर मनुश्य के खुद के कुच्छ सिद्धांत होते हैं और बुद्धिजीवी वो अपने नियम, धरम के हिसाब से ही अपने जीवन का निर्वाह करता है.

माना सास की दुनिया शुरूवात से बहुत व्यापक रही थी, एक अच्छी ग्रहिणी होने के साथ-साथ वह निचले स्तर की मध्यम वर्गीय गरीव घर की काम-काज़ी महिला भी थी. पति व पुत्र के अलावा ऐसे कयि मर्द रहे जिनके निर्देशन में उन्हे छोटे छोटे चूड़ी के कारखानों में काम करना पड़ा था.

वह यौवन से भरपूर अत्यंत सुंदर, कामुक नारी थी. कयि तरह के लोभ-लालच उनके बढ़ते परंतु बंधन-बढ़ते कदमो में खुलेपन की रफ़्तार देने को निरंतर अवतरित होते रहे थे मगर वह पहले से ही इतनी संतुष्ट थी कि किसी भी लालच की तरफ उनका झुकाव कभी नही हुवा था.

हमेशा वस्त्रो से धकि रहना लेकिन पति संग सहवास के वक़्त उन्ही कपड़ो से दुश्मनी निकालना उनकी खूबी थी, चुदाई के लगभग हर आसान से वह भली भाँति परिचित थी. विवाह के पश्चात से अपने पति की इक्षा के विरुद्ध उन्होंने कभी अपनी झांटो को पूर्न-रूप से सॉफ नही किया था बल्कि कैंची से उनकी एक निश्चित इकाई में काट-छांट कर लिया करती थी और तब से ले कर मेरे ससुर के बीमार होने तक हर रात उनसे अपनी चूत चटवाना और स्खलन के उपरांत पुरूस्कार-स्वरूप उन्हें अपनी गाढ़ी रज पिलवाना उनके बेहद पसंदीदा कार्यों में प्रमुख था, चुदाई से पूर्व वह दो बार तो अवश्य ही अपने पति के मूँह के भीतर झड़ती थी क्यों कि उससे कम में उनकी कामोत्तेजना का अंत हो पाना कतयि संभव नही हो पाता था.

अपनी सास के टुकड़ो में बाते कथन को सुनकर मैने एक गहरी सांस ली और अपने दोनो हाथो को कैंची के आकार में ढाल कर उनके अत्यंत सुंदर चेहरे को बड़ी गंभीरता-पूर्वक निहारने लगा परंतु अब वह चेहरा सुंदर कहाँ रह गया था. कभी मायूस तो कभी व्याकुल, कभी विचार-मग्न तो कभी खामोश, कभी ख़ौफ़ से आशंकित तो कभी लाज की सुर्ख लालिमा से प्रफुल्लित.

हां! मुख मंडल पर कुच्छ कम उत्तेजना के लक्षण अवश्य शामिल थे और जो मेरी ठरकी अनुभवी निगाहों से छुप भी नही पाये मगर चेहरे का बेदाग निखार, शुद्ध कजरारी आँखें, मूंगिया रंगत के भरे हुवे होंठ और उनकी क़ैद में सज़ा पाते अत्यधिक सफेद दाँत, तोतपुरि नाक और अधेड़ यौवन के बावजूद खिले-खिले तरो-ताज़ा गालो के आंकलन हेतु अनुभव की ज़रूरत कहाँ आन पड़नी थी और पहली बार मैने जाना कि किसी औरत के सही मूल्यांकन की शुरूवात ना तो उसके गोल मटोल मम्मो से आरंभ होती है और ना ही उभरे हुवे मांसल चूतडो से, चेहरा हक़ीक़त में उसके दिल का आईना होता है.

निराशा, उदासी, उत्तेजना आदि कयि एहसासो से ओत-प्रोत सास कुछ मन ही मन सोचें जा रही थी कि तभी मेरी आवाज़ से उनकी तंद्रा टूट गयी, विवशता में भी उन्होंने अपनी पलकों को उठा कर कर पुनः अपनी गर्दन ऊपर उठा कर अपने दामाद के चेहरे का सामना करना पड़ता है और जिसके लिए वह ज़रा सी भी तैयार नही थी.

"तो कहो मम्मी! मुझे कुसुम की अनुपस्थि में अपनी शारीरिक जरूररतो की पूर्ति किसके साथ करनी चाहिए ? मैने पुछा.

मेरे सवाल के जबाब में कहे जाने वाले मेरी सास के वे अगले लफ्ज़ शायद अब तक के उनके सम्पूर्न बीते जीवन के सबसे हृदय-विदारक अल्फ़ाज़ बनने वाले थे और खुद ब खुद उनकी आँखें क्षण मात्र में खुल कर मेरे चेहरे को निहारने लगती हैं.

म... म.... मुझे नही पता...???

सास हकला सी गयी, उन्हें अपने दामाद द्वारा ऐसे अट-पटे प्रश्न के पुच्छे जाने की बिल्कुल उम्मीद नही थी...! उनके चेहरे का रंग उड़ गया और वो तेज़ी से दूसरी ओर घूम गयी. वो मेरे पास से उठ कर जल्दी जल्दी मुझसे दूर भाग गयी. मैं कह नही सकता था कि वो घबरा गयी है या शर्मिंदा है मगर मैने इतना ज़रूर देखा था कि मेरी साली जूली की विदा होने तक वो जब भी मेरे नज़दीक आती या जब भी मैं उनके पास जाता तो वो अपनी आँखे फेर लेती थी. उनके रवैये में किसी बढ़ाव की बात उस समय पक्की हो गयी ।

मै तो जैसे उनका मन पढ़ लिया था.कड़ी मेहनत के बाद फल की प्राप्ति होती है और जिसकी शुरूवात मै कर चुका था किंतु फल मिलने में अभी काफ़ी वक़्त लगेगा इस बात से भी मै अच्छी तरह परिचित था. दूसरी ओर सास ने मन ही मन सोचा होगा, अभी भी उनके लिए संभावनाए उतनी प्रबल नही थी कि वह निर्लज्जता-पूर्ण तरीके से अपने दामाद के समक्ष अपनी काम-पीपासा का बखान कर पाती... .. !

साली की विदा के बाद दोपहर तक मेहमानों का जाने का सिलसिला लगातार जारी रहा। कुसुम अपनी नौकरी के कारण शाम को ही अपनी ससुराल और अगली सुबह ड्यूटी पर जाने की मुझसे कह रही थी। कुसुम को जब मैने बड़े प्यार से अपने बालों को सवारते हुए देखा वो तो एक जिज्ञासु की तरह पूछ ही लिया।

कुसुम एक बात बताओ महिलाएं, कभी बाल खुले रखती हैं, कभी एक चोटी, कभी दो ,तो कभी जूड़ा,। इसका कोई गूढ़ रहस्य है, या यह फैशन से है जुड़ा,?

वो मुस्कुराते हुए कहने लगी, जब हमारी शादी नही हुई थी, हम अकेले थे,जैसे दो अलग चोटी , फिर शादी हुई एक हुए ,तो एक चोटी। फिर हम दोनो जूडे के जैसे, ऐसे मिल गए कि, अपना सब कुछ ,

एक,दूसरे को दे दिया।

मैने पूछा फिर ये खुले बाल,,,,?

जवाब मिला,एक हो कर भी, हमारा अपना अलग अस्तित्व है, ये खुले बाल,हमारे अलग विचार, अधिकार, वजूद और शख्सियत का प्रतीक हैं ! जो एक दूसरे के सम्मान से उपजता है!

मैने प्रभावित होकर,माहौल को हल्का करने के लिए ,पूछा,,,,और ये जो तुम बालों में ऊपर रबर बैंड लगा कर खुला छोड़ देती हो,यह तो भ्रमित करता है, कि बंधन या आजादी ?

जवाब मिला,एक दूसरे को स्वतंत्रता तो देनी है,पर पतंग और डोर जैसे, स्वतंत्रता में भी मर्यादा का अंकुश। बालों को पहले मर्यादा के रबर बैंड से बांधा,फिर,स्वछंद छोड़ दिया।!

अपनी पत्नी के मुख से केस विन्यास के गूढ़ रहस्य को जान मैं हतप्रभ, विस्मित, प्रभावित, और नतमस्तक हो गया😜।

जारि है........ ✍️
 
केस विज्ञान " की फिलोषपी रजाई में खुजाते हुए उपजी है, 🤣😜🤣😜 जो एक हद में लिखा है, सही है या गलत मुझे खुद नही पता।🤣😜 इस फोरम की सबसे अच्छी खासियत यह है कि ये जो दुनिया है वो एकदम मस्ती भरी है, यहाँ हम सभी खुजाते हुए, खाते हुए, हिलाते हुए, हगते हुए कुछ भी जो दिमाग में आया उसे फोरम की term के अनुरूप लिख सकते है, अन्य जगह नहीं....!

कहानी में शब्दों के चयन के लिए आपके शुजाव सही है, आगे से सुगम और सरल भाषा का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करने का प्रयास करूँगा... ✍️

धन्यवाद शुक्रिया आभार.......
 
अध्याय - 22 --- " पश्चाताप ""

अपनी पत्नी के मुख से केस विन्यास के गूढ़ रहस्य को जान मैं हतप्रभ, विस्मित, प्रभावित, और नतमस्तक हो गया।

रात के आठ बजे करीब मै और कुसुम वापस अपने घर आ गये। रिंकी को मेरे ससुर ने जूली के जाने से घर सूना सूना लग रहा और दो तीन बाद वापस भेजने की बात कह कर उसे वही रोक लिया था।

घर वापस आकर अपने मम्मी पापा से शादी में मिले नेग और लीफाफा वगेरा की बातें करने के बाद मै अपने बेडरूम आ गया। थोड़ी देर बाद कुसुम भी आ गयी और चुप सी बिसतर पर बैठ गयी। कुसुम के व्यव्हार मुझे थोड़ा बदलाव लगा वरना वो मेरे साथ बहस करना पसंद करती है , जब वो कुछ देर तक यु ही गुमसुम बैठी रहीं तो मैं उससे लिपट गया ..

“क्या मेरी जान आज अपना मोबाइल नही देख रही हो ..”

“क्या देखू ,कुछ रह नही गया..”

“क्यो वो तुम्हारा पुराना प्रेमी दिनेश तो है ना बात नही हुयी क्या “ मैने उसे छेड़ते हुए हस्ते हुए कहा।

वो मेरी आंखों में थोड़ी देर तक देखने लगी

“आप सच में चाहते हो की मैं उससे बात करू ..या कुछ और आगे जाऊ..”

“ऐसे क्यो बोल रही हो “

वो मुझसे अलग हुई.. .. .. ... ..... ‘क्योकि कल रात जो आपकी आंखों में गुस्सा देखा था वो सच्चा था,और मैं नही चाहती की कुछ ऐसा हो जाए की आपको फिर से उस रूप में आना पड़े ..”

अब मैं समझा की मेरी बीवी इतनी शरीफ क्यो बन रही है , मैंने उसे फिर से जकड़ लिया ..

“मेरी जान वो मामला ही अलग था,गुस्सा होना स्वाभाविक था,लेकिन अगर तुम मेरी जानकारी में ऐसे शक्स को पसंद करो जो मुझे भी पसंद आये तो, मैं तो तुम्हे सेक्स भी करने को नही रोकूंगा ..”

वो गुस्से से मुझे घूरने लगी “चुप रहो बड़े आये ..”

वो बाथरूम में चली गई और मैं उसके पीछे पीछे पहुचा ..

‘मैं मजाक नही कर रहा..”

“पता है मुझे आप क्या कर रहे हो,हवसी तो हो ही, पागल भी हो रहे हो ..”

उसने अपने कपड़े खोले,उसे उस लाल रंग की अंतःवस्त्रों में देख कर मेरा मन मचल उठा,और लंड ने पूरे उठकर सलामी दी जो मेरे शार्ट से बाहर निकलने को बेताब था ,उसे देखकर कुसुम के होठो में मुस्कान आ गई

“हवसी कही के ..” वो वापस बेड की ओर बढ़ रही थी लेकिन मैंने उसे पीछे से पकड़ लिया मेरा लंड उसके कूल्हों में जा धंसा ,

“आह" ऐसा है अब मुझे सो जाना चाहिए,नही तो मेरी ही सामत है ,जब देखो खड़ा करके रखते हो "आह" अब छोड़ भी दो, मुझे सोने दो “

“ऐसे कैसे मेरी जान एक राउंड तो हो जाए “

“नही ना प्लीज़ ..”

मैंने उसे उठाकर बिस्तर में पटक दिया और खुद उसके ऊपर आ गया,हमारे होठ मिले और करवा चल पड़ा ..

“सोचो अगर मैं दिनेश होता तो “

“छि प्लीज् ना “वो बेहद धीमे स्वर में बोली क्योकि वो बहुत ही उत्तेजित थी।

“बताओ ना ..” “तो क्या “

मैं उसकी पेंटी से उसकी योनि को सहलाने लगा सच में वो बहुत गीली हो चुकी थी ,मैं उसे हटा कर सीधे उसकी गीली योनि में अपने लंड को प्रवेश करवाया ..

“आह दिनेश ..”

उसके मुह से ऐसी आवाज सुनकर मुझे ऐसा लगा की मेरा वीर्य ही निकल जाएगा,उसकी सेक्सी आवाज में किसी दूसरे मर्द का नाम सुनने का ये मेरा पहला एक्सपीरियंस था लेकिन कसम से उसने मुझे बेहद ही उत्तेजित कर दिया .,मेरा पूरा लंड आराम से उसके अंदर चला गया ,

वो भी आंखे खोल कर मुस्कुराई क्योकि उसे मेरी बड़ी हुई उत्तेजना का पता चल चुका था,

“ दिनेश करो ना मेरे पति बाहर गये है, आज बहुत टाइम है “

कुसुम की बातो ने मेरा जोश आसमान में पहुचा दिया था ,मैं उसे बुरी तरह से ठोकने लगा ,वो भी बुरी तरह से हांफ रही थी और सच में बेहद ही उत्तेजित लग रही थी ,कमरा हमारे धक्के की आवाज से भर चुका था,साथ ही हमारे आहो से भी ,उत्तेजक आवाजे दोनो के मुह से ही निकल रही थी , कुसुम अब दिनेश को भूल कर बस अरुण अरुण कह रही थी ,पहला राउंड बहुत ही तेजी से खत्म हो गया मैं कुसुम की योनि को पूरी तरह से भिगो चुका था …

“मजा आया उसका नाम सुनकर “

“बहुत मजा आया “

“आप सच में पागल हो......है ना “

मैं उसके होठो में हल्का किस किया “हो सकता हु लेकिन सच बताना पूरे राउंड के दौरान कभी उसका चहरा तेरे दिमाग में आया “

वो झूठे गुस्से से मुझे देखने लगी लेकिन फिर उसके होठो में शरारती सी मुस्कान आ गई, “सच कहु तो हा,कोशिस तो किया की आपके जगह उसे याद करके देखु लेकिन थोड़ी ही देर में वो गायब हो गया और आप ही रह गए,पता नही, आप मुझे क्या बनाने में तुले हुए हो ..”

वो फिर से हल्के गुस्से से मुझे देख रही थी

“कुछ भी नही बनाना है बस मैं चाहता हु की तू जीवन के पूरे मजे ले ..”

“आप साथ रहो तो जीवन में कभी दुख आएगा ही नही ,मेरे लिए तो आप ही सब कुछ हो ..” हम दोनो के होठ फिर से मिल गए । ” वो बस मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी।

"एक औरत एक ही समय में दो पुरुषों से कभी प्यार नहीं कर सकती। यह हमेशा एक होता है। अगर तुम नहीं हो, तो तुम नहीं हो। चारों ओर कोई दो रास्ते नहीं हैं। यही कारण है कि आप आम तौर पर दो महिलाओं को एक आदमी के लिए लड़ते हुए देखते हैं "

मैने आज तक कुसुम से कोई भी बात नहीं छुपाई थी, उसके बारे में, मै क्या सोचता था, मेरी सारी कि सारी Fantasies, चाहे जितनी भी गंदी और शर्मनाक क्यूँ ना हो, मै बेझिझक शेयर करता था ! लेकिन मैने कुसुम से अपने और प्रीति के बीच पनपते अवैध रिश्ते के बारे छुपाये रखा था, और छुपाया इसलिए कि मुझे पता था कि ये गलत है,

अब इसे Cheating कहेँगे या नहीं !!! ये Cheating ही थी - इसमें कोई शक नहीं था !!!

मेरी अंर्तरात्मा मुझे कचोट रही थी, मेरे लंड का जोश अब खत्म हो चुका था, मैं कुसुम के प्रेम को महसूस कर रहा था। या यूं कहूँ कि मेरे दिल में चोर था मैंने अपनी प्यारी पत्नी को धोखा जो दिया था।

"यह ठीक है कि यौन संबंध में शायद प्रेयसी पत्नी से अधिक आनन्द विभोर करती है पर पत्नी के प्रेम की तुलना किसी से भी करना शायद पति की सबसे बड़ी बेवकूफी होगी।"

मेरे अंडकोष छोड़ अब मेरे ढीले पड़े लण्ड को सहलाते हुये कुसुम मेरे सीने को चूमते हुये मासूमियत के साथ ज़िद करती हुई बोली.

" और नहीं चोदोगे ? प्लीज् यार... एक बार और करो ना ! आज कितना कम कम चोद रहे हो !!! "

मुझ को भी कुसुम को नाराज़ करना अच्छा नहीं लगता था, सच में मै उससे बेइंतहा प्यार करता था. मैने हँसते हुये कुसुम का सिर चूमा, और बोला.

" सुबह जल्दी उठकर सामान वगैरह पैक करना होगा तुम्हे ! "." मैने बेमन से कहा. " अब सो जाओ... बहुत रात हो चली है ! ".

मेरे सीने पर से अपना मुँह उठाते हुये मुझे अवाक नज़रों से देखते हुए धीरे धीरे कुसुम नींद के गहरे आगोश में चली गई, मेरी आंखों से नींद गायब थी। फिर भी आँखों के आगे बार बार अंधेरा छा रहा था, जीवन धुंधला सा दिखाई देने लगा।

मैं उठकर टायलेट गया, पेशाब करके वापस आया, और एक सख्त निर्णय ले लिया, कि कुछ भी हो जाये मैं अपनी प्यारी पत्नी से कुछ नहीं छुपाऊँगा। फिर भी मैं इससे होने वाले नफे-नुकसान का आंकलन लगातार कर रहा था। हो सकता है यह सब सुनकर कुसुम कुछ ऐसा कर ले कि मेरा सारा जीवन ही अंधकारमय हो जाये।

यह भी संभव था कि कुसुम मुझे हमेशा के लिये छोड़कर चली जाये या शायद मुझसे इतनी लड़ाई करे कि मैं चाहकर भी उसको मना ना पाऊँ ! कम से कम इतना तो उसका हक भी बनता था।

इन सब में कहीं से भी कोई उम्मीद की किरण दिखाई नहीं दे रही थी। मैं कुसुम को सब कुछ बताने का निर्णय तो कर चुका था। पर मेरे अंदर का चालाक प्राणी अभी भी मरा नहीं था। वो सोच रहा था कि ऐसा क्या किया जाये कि कुसुम को सब कुछ बता भी दूं पर कुछ ज्यादा अनिष्ट भी ना हो।

बहुत देर तक सोचने के बाद भी कुछ सकारात्मक सुझाव दिमाग में नहीं आ रहा था। इसी पश्चाताप की कशमकश में मेरी आँख लग गयी।

जारी है...... ✍️
 
इसी पश्चाताप की कशमकश में मेरी आँख लग गयी...........!

सुबह करीब 5.30 बजे मेरे बदन में हरकत होने के कारण मेरी आंख खुल गई। मैंने देखा मेरे बराबर में कुसुम लेटी हुई थी। रात की अलसाई सी अवस्था में, जुल्फें कुसुम के हसीन चेहरे को ढकने की कोशिश कर रही थी। पर कुसुम इससे बेखबर मेरी बगल में लेटी थी मेरी चड्डी में हाथ डालकर मेरे लंड को सहला रही थी।

मुझे जागता देखकर कुसुम की हरकत थोड़ी से तेज हो गई, मैं जाग चुका था, कुसुम की इस हरकत को देखकर मैंने उसको सीने से लगाया, मैंने पूछा- आज जल्दी उठ गई?

कुसुम बोली, “रात तुम्हारा मूड था, और अभी मेरा मूड है, अभी पानी पीने को उठी थी तो तुमको सोता देखकर मन हुआ कि मौका भी है और कुछ देर बाद मुझे अपनी नौकरी पर वापस दिमापुर जाना है ,

तो क्यों ना इश्क लड़ाया जाये।”

बोलकर कुसुम ने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। पर रात की थकान मुझ पर हावी थी। या यूं कहूँ कि मेरे दिल में एक सच छिपा था जो उसे बताना मेरे लिए बहुत जरूरी था। कुछ देर कोशिश करने के बाद कुसुम ने ही पूछा लिया, “क्या हुआ मूड नहीं है क्या?”

अब मैं क्या जवाब देता कुसुम मुझसे बार बार पूछ रही थी, “बोलो ना क्या हुआ? मूड खराब है क्या?”

पर मैं कुछ भी नहीं बोल पा रहा था, मेरी चुप्पी कुसुम को बेचैन करने लगी थी आखिर वो मेरी पत्नी थी। मैं कुसुम के प्रेम को महसूस कर रहा था। कुसुम को लगा शायद मेरी तबियत खराब है, यह सोचकर कुसुम बोली- डाक्टर को बुलाऊँ या फिर चाय पीना पसन्द करोगे?

मैंने बिल्कुल मरी हुई आवाज में कहा, “एक कप चाय पीने की इच्छा है तुम्हारे साथ।”

मुझे लग रहा था कि अगर कुसुम को सब कुछ पता चल गया तो शायद यह मेरी उसके साथ आखिरी चाय होगी। जैसे जैसे समय बीत रहा था मेरी बेचैनी बढ़ती जा रही थी।

कुसुम उठकर चाय बनाने चली गई।

तभी किसी ने मुझे झझकोरा। मैं जैसे होश में आया, कुसुम चाय का कप हाथ में लेकर खड़ी थी, बोली- क्या बात है? आज सुबह से ही बहुत खोये खोये हो? कुछ ना कुछ सोच रहे हो। मेरे वापस जाने से परेशान हो? आप बोलो तो मै दों दिन बाद चली जाऊंगी? मेरे आफिस में सब ठीक चल रहा है मुझे कुछ परेशानी नहीं है? जानू, तुम्हे कोई भी परेशानी है तो मुझसे शेयर करो कम से कम तुम्हारा बोझ हल्का हो जायेगा। आखिर मैं तुम्हारी पत्नी हूँ।

कुसुम की अन्तिम एक पंक्ति ने मुझे ढांढस बंधाया पर फिर भी जो मैं उसको बताने वाला था वो किसी भी भारतीय पत्नी के लिये सुनना आसान नहीं था। मैंने चाय की घूंट भरनी शुरू कर दी, कुसुम अब भी बेचैन थी, लगातार मुझसे बोलने का प्रयास कर रही थी।

पर मैं तो जैसे मौन ही बैठा था, शेर की तरह से जीने वाला पति अब गीदड़ भी नहीं बन पा रहा था। तभी अचानक पता नहीं कहाँ से मुझमें थोड़ी सी हिम्मत आई, मैंने कुसुम को कहा, “मैं तुमको कुछ बताना चाहता हूँ?”

कुसुम ने कहा- हाँ बोलो।

मैंने चाय का कप एक तरफ रख दिया और कुसुम की गोदी में सिर रखकर लेट गया, वो प्यार से मेरे बालों में उंगलियाँ चलाने लगी। मैंने अपनी आँखें बंद कर ली और मेरी साली प्रीति और मेरे बीच जो कुछ भी हुआ था, "साली जीजा" के बीच की हर वो बात जो मैंने कुसुम से छुपाई थी कुसुम को एक-एक करके बता दी।

वो चुपचाप मेरी हर बात सुनती रही, मैं किसी रेडियो की तरह लगातार बोलता जा रहा था। मैंने किसी बात पर कुसुम का प्रतिक्रिया जानने की भी कोशिश नहीं कि क्योंकि उस समय मुझे उसको वो सब कुछ बताना था जो मैंने छुपाया था।

सारी बात बोलकर मैं चुप हो गया और आँख बंद करके वहीं पड़ा रहा। तभी मेरे गाल पर पानी की बूंद आकर गिरी, मैंने आँखें खोली और ऊपर देखा तो कुसुम की आंखों में आंसू थे तो टप टप करके मेरे गालों पर गिर रहे थे !

मैं अन्दर से बहुत दुखी था, कुसुम के आंसू पोंछना चाहता था पर वो आंसू बहाने वाला भी तो मैं ही था। मैंने कुसुम की खुशियाँ छीनी थी मैं कुसुम का सबसे बड़ा गुनाहगार था।

मैंने बोलने की कोशिश की, “जानू !”

“चुप रहो प्लीज !” बोलकर कुसुम ने और तेजी से रोना शुरू कर दिया।

मेरी हिम्मत उसके आँसू पोंछने की भी नहीं थी। मैं चुपचाप कुसुम की गोदी से उठकर उसके पैरों के पास आकर बैठ गया और बोला, “मैं तुम्हारा गुनाहगार हूँ, चाहे तो सजा दे दो, मैं हंसते हंसते मान लूंगा, एक बार उफ भी नहीं करूंगा, पर तुम ऐसे मत रोओ प्लीज…” कुसुम वहाँ से उठकर बाहर निकल गई, मैं कुछ देर वहीं बैठा रहा।

बाहर कोई आहट ना देखकर मैं बाहर गया तो देखा कुसुम वहाँ नहीं थी। मैने कुसुम को पूरे घर में ढूंढा पर वो कहीं नहीं थी। मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई, इतनी सुबह कुसुम कहाँ निकल गई।

मैंने मोबाइल उठाकर कुसुम के नम्बर पर फोन किया उसका मोबाइल मेरे बैड रूम में रखा था। तो क्या फिर कुसुम सब कुछ यहीं छोड़कर चली गई? वो कहाँ गई होगी? मैं उसको कैसे ढूंढूंगा? कहाँ ढूंढूंगा? सोच सोच कर मेरी रूह कांपने लगी। मुझे ऐसा लगा जैसी जिदंगी यहीं खत्म हो गई। अगर मेरी कुसुम मेरे साथ नहीं होगी, तो मैं जी कर क्या करूंगा? पर मेरा जो भी था कुसुम का ही तो था। सोचा कम से कम एक बार कुसुम मिल जाये तो सबकुछ उसको सौंप कर मैं हमेशा के लिये उसकी जिंदगी से दूर चला जाऊँगा।

बाहर निकला तो लोग सुबह सुबह टहलने जा रहे थे। किससे पूछूं कि मेरी बीवी सुबह सुबह कहीं निकल गई है किसी ने देखा तो नहीं? मन में हजारों विचार जन्म ले रहे थे। शायद कुसुम अपने मायके चली गई होगी। तो बस स्टैण्ड पर चलकर देखा जाये?

नहीं, हो सकता है वो स्टेशन गई हो।

पर कैसे जायेगी, वो आज तक घर का सामान लेने वो मेरे बिना नहीं गई, इतने बड़े शहर में वो कहीं खो गई तो?कहीं किसी गलत हाथों में पड़ गई तो मैं क्या करूंगा? मैंने कुसुम को ढूंढने का निर्णय किया।

घर के अन्दर आकर उसकी फोटो उठाई, सोचा कि सबसे पहले पुलिस स्टेशन फोन करके पुलिस को बुलाऊँ वहाँ मेरा एक मित्र भी था।

घर के अंदर मेरे पापा मम्मी सो रहे थे अगर उनको ये सब पता चल गया कि मेरे और मेरी साली प्रीति के नजाजज् संबंधों की वजह से कुसुम घर से चली गई है तो पता नहीं वो क्या करेंगे?

मेरी तो जैसे जान ही निकली जा रही थी। आंखों से आंसू टपकने लगे। मैंने टेलीफोन वाली डायरी ओर अपना मोबाइल उठाया ताकि छत पर जाकर शांति से अपने 2-4 शुभचिन्तकों को फोन करके बुला लूं। बता दूंगा कि पति-पत्नी का आपस में झगड़ा हो गया था और कुसुम कहीं चली गई है।

कम से कम कुछ लोग तो होंगे मेरी मदद करने को। सोचता सोचता मैं छत पर चला गया। छत कर दरवाजा खुला हुआ था जैसे ही मैंने छत पर कदम रखा। सामने कुसुम फर्श पर दीवार से टेक लगाकर बिल्कुल शान्त बैठी थी।

मुझे तो जैसे संजीवनी मिल गई थी, मैं दौड़ कुसुम के पास पहुँचा, हिम्मत करके उससे शिकायत की और पूछा, “जानू, बिना बताये क्यों चली आई। पता है मेरी तो जान ही निकल गई थी।”

उसने होंठ तिरछे करके मेरी तरफ देखा जैसे ताना मार रही हो। पर गनीमत थी की उसकी आंखों में आंसू नहीं थे। मैं कुसुम के बराबर में फर्श पर बैठ गया, मोबाइल जेब में रख लिया और कुसुम का हाथ पकड़ लिया। मैं एक पल के लिये भी कुसुम को नहीं छोड़ना चाहता था पर चाहकर भी कुछ बोल नहीं पा रहा था।

अभी मैं कुसुम से बहुत कुछ कहना चाहता था पर शायद मेरे होंठ सिल चुके थे। मैं चुपचाप कुसुम के बराबर में बैठा रहा, उसका हाथ सहलाता रहा। मेरे पास उस समय अपना प्यार प्रदर्शित करने का और कोई भी रास्ता नहीं था।

कुसुम बहुत देर तक रोती रही थी शायद उसका गला भी रूंध गया था। मैं वहाँ से उठा नीचे जाकर कुसुम के पीने के लिये पानी लाया गिलास कुसुम को पकड़ा दिया।

वो फिर से सिसकने लगी। मैं उसके बराबर में बैठ गया और उसका सिर अपनी गोदी में रख लिया।

अचानक रोतीरोती उसने होंठ तिरछे करके मेरी तरफ देखा और ताना मारते हुए हंस पड़ी, ‘‘तुम्हें तो ठीक से बेवफाई करनी भी नहीं आती.’’

‘‘क्या?’’ मैंने चौंक कर उस की ओर देखा.

‘‘अपनी साली साहिबा को भला ऐसे मैसेज किए जाते हैं? कल रात क्या मैसेज भेजा था तुमने?’’

‘‘तुम ने लिखा था, डियर प्रीति, जिंदगी हमें बहुत से मौके देती है, नई खुशियां पाने के, जीवन में नए रंग भरने के… मगर वह खुशियां तभी तक जायज हैं, जब तक उन्हें किसी और के आंसुओं के रास्ते न गुजरना पड़े. किसी को दर्द दे कर पाई गई खुशी की कोई अहमियत नहीं. प्यार पाने का नहीं बस महसूस करने का नाम है. मैंने तुम्हारे लिए प्यार महसूस किया. मगर उसे पाने की जिद नहीं कर सकता, क्योंकि मैं अपनी बीवी को धोखा नहीं दे सकता. तुम मेरे हृदय में खुशी बन कर रहोगी, मगर तुम्हें अपने अंतस की पीड़ा नहीं बनने दूंगा. तुम से मिलने का फैसला मैंने प्यार के आवेग में लिया था मगर अब दिल की सुन कर तुम से सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि रिश्तों में सीमा समझना जरूरी है.

‘‘हम कभी नहीं मिलेंगे… आई थिंक, तुम मेरी मजबूरी समझोगी और खुद भी मेरी वजह से कभी दुखी नहीं रहोगी… कीप स्माइलिंग…’’

मैंने चौंकते हुए पूछा, ‘‘पर यह सब तुम्हें कैसे पता…?’’

‘‘क्योंकि जिस कॉलेज के तुम प्रोफेसर हो मै उस कॉलेज की प्रिंसिपल हू.... ह्म्म..........

मै तुम्हारी बीवी हूं और सुबह सुबह जब मै उठी तो तुम्हारे मोबाइल पर प्रीति का reply मैसेज शो हो रहा था, जब तुम मेरे मैसेज पढ़ सकते हो, तो मैने भी तुम्हारे मैसेज पढ़ लिए… मै तो बस तुम्हारे मुह से सच सुनने का इंतजार कर रही थी’’ कह कर कुसुम मुसकराते हुए मेरे सीने से लग गई और मैंने भी पूरी मजबूती के साथ उसे बांहों में भर लिया.

तब कुसुम बोली, “मुझे पता है तुम मुझसे बहुत प्यार करते हो, इसीलिये शायद जो प्रीति और तुम्हारे बीच हुआ वो तुमने सुबह ही मुझे बता दिया तुम्हारी जगह कोई भी दूसरा होता तो शायद इसकी भनक तक भी अपनी पत्नी को नहीं लगने देता। मुझे तुम्हारे प्यार के लिये किसी सबूत की जरूरत नहीं है, ना ही मुझे तुम पर कोई शक है पर खुद पर काबू नहीं कर पा रही हूँ मैं क्या करूं?”

मैं चुप ही रहा।

थोड़ी देर बाद कुसुम फिर बोली, “मुझे नहीं पता था कि कभी कभी किसी की जुबान से निकली बात सच भी हो जाती है?”

इस बार चौंकने की बारी मेरी थी, मैंने पूछा,

“मतलब?”

“ प्रीति और मैं बचपन से ही हम एक साथ खाते थे एक साथ पढ़ते थे एक साथ ही सारा बचपन गुजार दिया हमने। मम्मी, बुआ और ताई वगेरा अक्सर हम पर कमेंट करते थे और बोलते थे कि तुम दोनों बहनो की शादी भी किसी एक लड़के से ही कर देंगे और हम दोनों हंसकर हाँ कर देते थे। मुझे भी नहीं पता था कि एक दिन हमारा वो मजाक सच हो जायेगा।”

“नहीं कुसुम, तुम गलत सोच रही हो, ऐसा कुछ भी नहीं है, मेरी पत्‍नी बस तुम हो और तुम ही रहोगी। मैं मानता हूँ मुझसे गलती हुई है पर मैं जीवन में तुम्हारा स्थान कभी किसी को नहीं दे सकता।” बोलकर मैं कुसुम के सिर को सहलाने लगा। कुछ देर बैठने के बाद मैंने कुसुम को नीचे चलने के लिये कहा। वो भी उठकर मेरे साथ नीचे चल दी। हम लोग अन्दर पहुँचे तब तक 7.30 बज चुके थे।

मेरी मम्मी भी जाग चुकी थी और हम दोनों को ढूंढ रही थी। जैसे ही हमने हॉल पैर रखा, मम्मी बोली, “कहाँ चले गये थे तुम दोनों? मैं कितनी देर से ढूंढ रही हूँ।”

“ऐसे ही आंख जल्दी खुल गई थी तो ठण्डी हवा खाने चले गये थे छत पर।” कुसुम ने तुरन्त जवाब दिया।

मैं उसके जवाब से चौंक गया। वो बिल्कुल सामान्य व्यव्हार कर रही थी। मैंने भी सामान्य होने की कोशिश की और अपने नित्यकर्म में लग गया। अब मुझे अपना मन बहुत हलका महसूस हो रहा था. "बेवफाई के इलजाम" से आजाद जो हो गया था मैं.

जारी है...... ✍️
 
अब मुझे अपना मन बहुत हलका महसूस हो रहा था. "बेवफाई के इलजाम" से आजाद जो हो गया था मैं.

"" स्त्रियाँ किसी से प्यार करती हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप उन्हें क्या बताते हैं। कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह क्या कहती है, शर्म और आँसू यह निर्धारित करने के लिए एक वैध प्रमाण नहीं हैं कि क्या वह एक अच्छी महिला है, क्योंकि एक महिला इसे एक बॉस की तरह नकली कर सकती है। वे ऐसा करने में सक्षम हैं। जब आप उसे धोखा देते हैं और वह आपसे नफरत नहीं करती है, तो वह उस महिला से नफरत करती है जिसके साथ आपने धोखा दिया था। ऐसा इसलिए है क्योंकि महिलाएं अस्वीकृति, शर्मिंदगी और अपमान का सामना नहीं करना चाहती हैं, चाहे वे हमेशा कुछ भी चाहती हैं, जब तक कोई उन्हें बचा ले और दोष नहीं लेता....""

इस पश्चाताप की अग्नि में अकेला मै नही जला था, एक शक्स और था जो मेरी तरह इस वक्त पश्चाताप करते हुए खुद को कोस रही है... जी हाँ वो थी मेरी सास.....!

"क्या अब मैं ऐसी निर्लज्ज स्त्री बन गयी हूँ, सास तो दामाद की माँ समान होती है, जिसके दामाद को पता है कि उसकी सास अपने जिस्म की अधूरी प्यास की वजह से परेशान है. अरे! जिस उमर में उस मा को अपने पुत्र (मेरे साले) की शादी, उसके भविश्य के बारे में सोचना चाहिए वह बेशरम तो अपनी ही चूत के मर्दन-रूपी विचारो में मग्न रहती है" सास कुढते हुए सोच रही थी, हलाकी फोन पर बातों के ज़रिए वह अब भी दामाद के अनुमान को असत्य साबित कर सकती थी परंतु उससे कोई लाभ नही होता उनके मन में भी ग्लानि का अंकुर फुट चुका था और उसकी वर्द्धि बड़ी तीव्रता से हो रही थी.

अपने दामाद को इस तरह अपनी भावनाओ को बता कर उन्होंने ठीक नही किया था, उनसे ना तो उगलते बन रहा था ना ही निगलते. पल प्रतिपल वह उसी ख़याल में डूबती जा रही थी, चाहकर भी उस विचार से अपना पिछा नही छुड़ा पा रही थी. उनके नज़रिए से इस तरह अपनी चोरी पकड़े जाने के भय से एक पल के लिए सास काँप सी गयी थी........!!!!

दूसरी ओर अपने नित्य कर्म से मुक्त होकर जब मै वापस आया, सब कुछ सामान्य हो गया था और तब तक कुसुम ने अपनी पैकिंग कर ली थी, आधे घंटे बाद मै उसे बस स्टैंड पर दिमापुर वाली बस में बैठा कर अपने कॉलेज (नौकरी) निकल गया...!!

अब ऐसे ही दिन निकलने लगे, मुझे कुसुम की id पासवर्ड पता थी जिससे मै उसके हर रोज मैसेज पढ़ता ज्यादतर चार लोगो के मेसेज थे , शर्मा, राज, दिनेश और उसके ऑफिस का नया कलिग रिजवान ..मैं सोच में पड़ गया की ये अब कुसुम को हो क्या गया है सभी को लाइन में ला रही है........ शर्मा के साथ कुछ हँसी मजाक तक ही सीमित थी ,वही राज ने कई बार उसे कहा की तुम आजकल ज्यादा बात क्यो नही करती जवाब में कुसुम ने उसे कहा था की अब से करूंगी फिक्र मत करो…! !! !!

रिजवान कही साथ जाने की जिद में था , कुसुम ने उसे भी आश्वासन दे रखा था , लेकिन मेरे दिल के किसी कोने से ये आवाज भी आ रही थी की कुसुम इन सबके साथ कुछ नही करने वाली,उसका उद्देश्य बस मुझे जलाना था .... .. .... ! !!

मेरा इंटरेस्ट था कुसुम का पुराना प्रेमी दिनेश ,आखिर दिनेश के साथ वो कैसे विहेब करेगी , दिनेश को मेसेज में उसने बस हमेशा यही लिखा था की जल्द ही किसी दिन मिलते है , दिनेश कभी कभी खुशी और थोड़े गुस्से में मैसेज भेजता था और कुसुम भी उसे बड़े से प्यार से मनाती, और जल्द ही किसी दिन मिलने और साथ थोड़ा वक्त बिताने की बात कहती थी …......और अब तक अपनी बीवी के इन फ्लिर्टिंग मैसेजिंग में मुझे कुछ भी बुरा, जलन, अजीब या गलत नहीं लगा था।

मेरी बेटी रिंकी भी वापस आ चुकी थी, इस दरम्यान हमारें बीच बातचीत अब ठहरने लगी थी। मेरे कमरें में अब वो पांव दाब कर आती थी। मैं वहां रहता तो आहिस्ते कोई किताब उठा मद्धम रोशनी में पढ़ने लगती थी। फिर आकर बगल में लेट जाती थी। रुई के मानिंद वो अपने बदन को बिस्तर पर रखती थी कि मुझे कोई खलल न हो। पर इसके पहले ऐसा नही था, वो बगल में फिर लेटती फिर मुझे कोंचने लगती थी। शायद वो मुझे वापस बोलते हुए देखना चाहती थी।

एक रोज वो गुनगुनाते हुए कमरें में दाखिल हुयी और बेड पर आकर पसर गयी। उस रोज तबियत मेरी भी अच्छी थी पर जाने क्या हुआ कि जब उसने मुझे छूने की कोशिश की तो मैं बिफ़र पड़ा और ऐसे बिफरा जिस की उम्मीद मुझे खुद न थी। मैने कहा तुम्हारें जैसी कमसिन कम उम्र की लड़कियों को रोज मै कॉलेज में पढ़ाता हू और मैं बहुत अच्छे से जानता हूँ, और ऐसे प्यार को भी। आगे से मेरे कमरे में मत आना। मुझे तुम्हारी किन्हीं बातों से नही, अब बस तुमसे दिक्कत होती है। पास आती हो तो किसी अनहोनी होने का डर लगता है, हमारे बाप बेटी के रिश्ते को अपवित्र करने की कोशिश मत करो ।

जवाब में वो कुछ न बोली बस मेरे ओर देखती रही। आंख में शायद पानी भी भरा था। पर मैं देख न पाया। मेरा क्रोध पश्चाताप नही हुआ था लेकिन ऐसा कुछ मैं बोल सकता हूँ इसका मुझे भान न था।

वो उठकर चलने को हुई। मैंने इशारा किया .... तुम्हारा नोट बुक छूट रहा। उसने हाथ डाला और उसमें एक पेपर निकालकर बढ़ाया और चली गई।

मैंने सिगरेट जलाई और पेपर पढ़ने लगा। थोड़ी खुशी हुई पर आज जो हुआ था उसके गम में वो खुशी जाती रही।

फिर मैं छत पर आकर खड़ा हो गया। सिगरेट जलती रही और मैं रास्ते को देखता रहा। देखते देखते फिल्टर भी जल गया और मेरा फेफड़ा भी सुलगने लगा अब बस आत्मा भी जलने वाली थी कि अचानक ख्याल आया वो इतनी गलत भी तो नही है। फेफड़ा वापस से हरा होने लगा।

वो अगले आठ-दस दिनों तक मेरे कमरे में नही आई। गए तीन-चार महीनों में ऐसा कभी नही हुआ था। पर दसवें दिन वो मेरे कमरे में आई। पांव दबाए और बगल में किताब दबाएं। उसने आकर कमरें की खिड़की आहिस्ते से खोली किताब पढ़ने की नाटक कि फिर फोन चलाया। उससे भी ऊब गई तो पुराने अखबार निकाल पढ़ने लगी।

फिर मेरी पसन्दीदा कहानियों को उठाकर पढ़ने लगी। उसमें जिन पंक्तियां को मैंने अंडरलाइन किया था। उसे बोलकर पढ़ती थी। वो किसी को सुनाना चाहती थी। खुद को... कमरें को या शायद मुझे। ऐसा बदस्तूर कई रोज तक चलता रहा। उसने इन आदतों में एक नई चीज जोड़ ली। अब वो मेरे सिगरेट के डब्बे में से सिगरेट निकालकर फूंकने लगती थी। उसने कभी सिगरेट नही पी थी। ये देख मुझे हंसी आती थी पर मैं निर्विकार भाव से पड़ा रहता था। कभी सोफे पर कभी बिस्तर पर।

एक दुपहर वो आई तो गुनगुनाते हुए मगर कमरें से पहले पैर दबा लिए शायद कमरें के अंदर कुछ सुनना चाहती थी। फिर कुछ देर में दाखिल हुई और वहीं उटपटांग हरकतें शुरू कर दी। जब उसने सिगरेट का पहला दम भरा तो मुझे हंसी आ गई।

जाने क्यों वो बिफ़र पड़ी। जाने क्या कहती रही इसी रौ में उसने कहा कि पापा आपने सिर्फ दिखावा किया कभी मुझसे प्यार नही किया। मैं मुस्कुराने लगा। वो मुरझा गई और वहीं जलकर राख हो गई। मैं भी वहीं भस्म हो गया। मैं उदासी का देवता था, मेरा हंसना मुस्कुराना मना था।

मैं जबाब में रिंकी से कुछ कह पाता कि कुसुम का काल मेरे मोबाइल में आ गया.. “हैलो मेरी जान “

मोबाइल से बाहर निकलते हुए अपनी मम्मी के प्यार भरे शब्दों को सुनकर वो हल्के से मेरी ओर देख कर गुर्रायी और कमरे से बाहर चली गई।

“जूली की शादी रात वाली बात याद है ना ..” कुसुम ने सीधे ही कहा

“हाँ क्यो ..”

“कुछ नही बस आज से जलना शुरू कर दो ..”

“मतलब “

“मतलब.....मेरे सारे मेसेज तो पढ़ ही लिए होंगे..” मैं बुरी तरह से चौक गया आखिर इसे कैसे पता ..?? “क्या बोल रही हो ..”

वो खिलखिलाई “जान मैं एक प्रोफेसर की बीवी हु,आपके जबाब देने के अंदाज से ही थोड़ा शक सा हो गया। तो आज की तारीख तक आपको मेसेज पढा दिया,लेकिन माफ करना अब से कोई मेसेज और काल आप तक नही पहुचेगा “

वो बेहद ही शरारत से हँसी ,

“अरे जान तुम तो ..”

“हो गया आपका बहुत ,अब देखती हु मेरे जान की हालत क्या होगी ,जलने का इतना शौक था ना, तो जलो अब, और करो मेरी जासूसी... मुझसे कोई उम्मीद मत रखना की मैं कुछ बतलाने वाली हु …” उसने हंसते हुए काल काट दिया,

मैं सर खुजाते रह गया,आखिर ये करने क्या वाली है ,क्या ये सच में किसी के साथ अफेयर करने वाली है...मुझे तो नही लगता की कुसुम कुछ ऐसा करेगी लेकिन फिर भी एक शख्स के ऊपर थोड़ा डाउट जरूर था वो था "दिनेश" …

कुसुम जल्द ही किसी दिन उससे मिलने वाली थी ,मेरा दिमाग बार बार वही जा रहा था की आखिर वो दोनों क्या प्लान कर रहे होंगे,मैंने एक रिस्क तो ले लिया था अब इस पाप की सजा भी तो मुझे ही भुगतनी थी, कुसुम एक मेच्योर लड़की थी लेकिन दिनेश के सामने भावनात्मक रूप से कमजोर हो जाती थी ,वही उसे ये भी पता था की मैं अगर गुस्से में आ जाऊ तो क्या करूंगा लेकिन फिर भी उसने मुझे जलाने की सोची , वो अपने कदम बेहद ही फूंक फूंक कर रखने वाली थी ,मुझे उसके दिमाग पर भरोसा था लेकिन ये खेल कही ऐसे मुकाम में ना पहुच जाय की हमारे रिश्ते में दरार आ जाए ,ये एक चिंता शायद हम दोनो को ही थी..........!!!!!!!

जारी है....... ✍️
 
अध्याय - 23 --- " Hide & Seek ""

वो अपने कदम बेहद ही फूंक फूंक कर रखने वाली थी ,मुझे उसके दिमाग पर भरोसा था लेकिन ये खेल कही ऐसे मुकाम में ना पहुच जाय की हमारे रिश्ते में दरार आ जाए ,ये एक चिंता शायद हम दोनो को ही थी..........!!!!!

कुसुम की बात से मै अपना सर पकड़े हुए बैठा था की मेरे मोबाइल पर एक काल आया वो काल कार्तिक का था, मैंने अपने सर को झटका ये साली फिर से एक नई मुसीबत आ गई ..

“हैलो कार्तिक “

“क्या बड़े भाई हमारे काम पर ध्यान नही दे रहे हो यार, अब तो "कुसुम भाभी" भी साथ नही रहती हैं, “

“बस क्या... कार्तिक तेरे ही काम के बारे में सोच रहा था,”

“सोचो मत करो अब समय आ गया है बड़े भाई, कि तुम आज मेरे घर आकर डॉली से मिल ही लो, अगर कोई परेशानी हो तो कहो मैं डॉली के साथ तुम्हारे घर आ जाऊ …”

कार्तिक की बात सुनकर मैंने एक गहरी सांस ली ,

“नही कार्तिक मेरे घर में पापा मम्मी, और बेटी रहती हैं ..”

“इसलिए तो अपने घर को चुना है ,लेकिन तुम्हे भी इसमें इमोशनल नही होना है ,और इसे पर्सनल में मत ले लेना वरना काम हमारा ही बिगड़ जाएगा ,”

“ offcourse कार्तिक लेकिन इस सबसे पहले मुझे तुम्हारी भी मदद की जरूरत होगी, मुझे कुछ सी सी टीवी कैमरा और अन्य छुपे हुए कैमरे और जासूसी कैमरे चाहिए। जिनका खर्चा मै नही कर सकता यार “

कार्तिक की हल्की सी हँसी सुनाई दी ..

“ बड़े भाई मै समझ गया ये सी सी टीवी कैमरा और अन्य छुपे हुए कैमरे और जासूसी कैमरे तुम्हे कहाँ लगाने है " जो चाहिए, जैसा चाहो, वैसा मिलेगा ,जरूरत हो तो और बताना …” बस तुम तो आज अपने छोटे भाई के लिए आकर एक बार डॉली से मिल ही लो।

“ठीक है कार्तिक मैं आज शाम ही तेरे घर आकर मिलता हु “

****

कार्तिक एक हार्डवेयर इंजिनियर जो सिक्युरिटी सिस्टम प्रोवाइड करने वाली कम्पनी में टेक्नीकल हेड है, इसका काम सी सी टीवी कैमरा लगाना और अन्य छुपे हुए कैमरे और जासूसी कैमरे लगाने का था।

कार्तिक उम्र में मुझसे छोटा है, कॉलेज के पास की पान की तपरी पर हमारी मुलाकात हुयी थी। हम शुरवाती बातों से दोस्त बन गये थे, और एक दूसरे से काफी खुल गये थे

सेक्स चैट के दौरान कार्तिक मेरे सेक्स अनुभव और मेरी बिंदास सेक्स कल्पनाओं का कायल हो गया, इसे मैंने कुसुम की टैटू आर्टिस्ट के सामने 'जिस्म की नुमाइश' करने वाली घटना और अपनी साली 'प्रीति' की डिलीवरी बॉय के सामने नंगी होकर 'जिस्म की नुमाइश' करने वाली घटना भी बताई थी।

उसे सुन कर तो यह बन्दा पागल ही हो गया और फिर जब उसने मुझसे बातें की तो उसकी भी एक रोमांचक और उत्तेजक फेंटेसी मेरे सामने आई, जो मेरी भी है और अब नए ज़माने के बहुत से मर्दों और शादीशुदा जोड़ों की भी है, कि खुद की पत्नी को किसी दूसरे मर्द के साथ प्रेमालाप करते, नग्नावस्था में देखने की, यहाँ तक कि सम्भोगरत देखने की कामना रखना और उत्तेजित होना !

और अब हर बार जब भी वो मुझसे बात करता अपनी बीवी ‘डॉली’ के बारे में करने लगता, उसके सौंदर्य, उसके जिस्म के नाज़ुक और कामुक अंगों के बारे में ! मुझ से पूछता कि उसे कैसे निर्वस्त्र करना चाहिए, कहाँ चूमना और चाटना चाहिए, दबाना चाहिए, और चूंकि यह सेक्स चैट ही होती है और मैं बहुत लोगों के साथ करता भी रहा हूँ, इसलिए उसे विस्तार से बताया करता और इससे वो बहुत उत्तेजित हो जाता था।

अब वो मुझसे यह तक कहने लगा कि तुम यानि मै, उसकी बीवी को कैसे उत्तेजित करूँगा, आलिंगन करूँगा, चूमूँगा-चूसूँगा वगैरा वैगरा, और यह मामला कब गम्भीर हो गया हमें पता ही नहीं चला। और आखिर हम एक ही शहर से थे तो वो मिलने की जिद करने लगा, और मुझे भी उसने डॉली के बारे में इतना कुछ सेक्सी सेक्सी बताया था कि डॉली से मिलने उसे देखने के लिए मेरे मन में भी लड्डू फूटने लगे थे, और फिर 'मेरी बीवी कुसुम' में उसकी कोई रुचि नहीं थी इसलिए यह पत्नियों की 'अदला बदली' वाला मामला भी नहीं था।

उनकी शादी को दो साल हुए थे और अभी कोई बच्चा नहीं था और न वो गर्भवती थी, उसने मुझे पहले ही बता दिया था कि वो मुझे उससे ननिहाल पक्ष के दूर के एक रिश्तेदार की हैसियत से मिलवायेगा।

इसलिए मैंने एक ना एक दिन मिलने का निश्चय कर ही लिया था।

****

मुझे अपने कॉलेज भी जाना था ,मैं अपने कॉलेज पहुचा और मुझे कुसुम की बातें याद आ गई ,मैंने अपना मोबाइल निकाला और देखने लगा, लेकिन उसके कोई भी सोशल मीडिया अकाउंट ओपन नही हो रहे थे, उसने सभी के पासवर्ड बदल लिये थे। अब मै कुसुम पर नजर कैसे रखुंगा ??? वो मेरी गैर जानकारी में क्या क्या गुल खिला रही होगी ये सोच सोच कर मेरा दिल बैठा जा रहा था। मुझे बस एक आईडिया ही सूझ रहा था कि उसके सरकारी क्वाटर में किसी तरह छिपे हुए जासूसी कैमरे, बिना उसकी जानकारी के लगा दिये जाये। जिससे घर के अंदर होने वाली हर गतिविधि पर मै नजर रख सकूँ। यही कैमरो की जुगाड़ करने की मै सोच रहा था ।

और फिर जो आज कार्तिक का काल आया, तो मै सीधा कॉलेज से छुट्टी के बाद मैं उसके घर पहुँचा, घण्टी बजाई, अंदर से एक पुरुष आवाज आई- डॉली, जाओ तुम देखो कौन है !

अब मेरा दिल धड़कने लगा, क्यूँकि शायद डॉली ही गेट खोलने आ रही थी, मैंने अपने आपको संयत किया।

गेट खुलते ही मेरे सामने लेगिंग और कुरता पहने और खुले बालों में एक युवती खड़ी थी, उसे महिला कहना गलत होगा, यहाँ तक कि वो शादीशुदा भी नहीं लग रही थी, उसका चेहरा देखते ही मुझे वो एक टीवी सीरियल ‘उतरन’ में आने वाली अभिनेत्री ‘तपस्या’ जैसी लगी, हूबहू तो नहीं पर काफी कुछ उससे मिलती जुलती सी थी वो !

मैंने उसे हेल्लो बोला और कहा- तुम? डॉली?

बोली- हाँ और आप??

मैं कुछ बोलता उसके पहले ही पीछे से कार्तिक आ गया- ये अरुण भैया ! डॉली तुम्हें बताया था इनके बारे में, इनके और मेरे दादाजी आपस में भाई थे ! और ये इसी शहर में हैं लेकिन परिचय अभी हुआ !

डॉली बोली- हाँ, तुमने बताया था !

और कार्तिक ने क्या बताया होगा इसका मुझे खूब आइडिया था, क्यूँकि उसने मुझे एक जिंदादिल, आधुनिक और सेक्सी मूड वाले व्यक्ति के रूप में परिचित कराया होगा, और यह भी कि हम whatsp पर वयस्क और अश्लील सामग्री शेयर करते रहते हैं, और यह इसलिए भी जरूरी था कि जो वो मुझसे करवाना चाहता था उसके लिए ऐसी भूमिका बनाना जरूरी था।

डॉली ने मुस्कराहट से अभिवादन किया और हाथ जोड़ के नमस्ते करने का उपक्रम किया, लेकिन मैंने उसे तुरंत उसे रोका और कहा- प्लीज़ प्लीज़ डॉली ! ऐसा करके मुझे बड़ा मत बनाओ यार ! प्लीज़ शेक हैण्ड !

और यह कहते हुए मिलाने के लिए हाथ बढ़ा दिया, वो बुरी तरह से शरमा गई और अचकचा सी गई, लेकिन शायद मुझे बुरा न लगे इसलिए उसने भी हाथ बढ़ा दिया।

अब मेरा हाथ उसके हाथ में था, मैंने भी सभ्यता दिखाते हुए हाथ मिलाया और फिर कार्तिक से भी ! और कहा- तुम लोगों से मिल कर बहुत अच्छा लगा, तुम दोनों की जोड़ी कमाल की है !

और कार्तिक के हाथ को दबाते हुए और शरारत से उसे आँख मारते हुए मैंने कहा- तेरी तो लॉटरी लग गई साले ! बहुत खूबसूरत वाइफ मिली है तुझे !

डॉली मुस्कुरा दी।

कार्तिक मेरी इस एंट्री से संतुष्ट नज़र आ रहा था, मैं जिस काम से आया था उसी हिसाब से अपने आप को दर्शा रहा था और घर का मुआयना करते हुए मैंने फिर एक बार डॉली की तारीफ की- यार घर तो बहुत सलीके से जमाया हुआ है, लगता है तुझे नौकरी के साथ साथ होम सर्विस भी करनी पड़ती होगी !

यह सुनते ही डॉली तुनक कर बोली- ‘ये’ और घर के काम? रहने दो, सब मुझे ही करना पड़ता है ! इन्हें तो इनके ऑफिस से ही फुर्सत नहीं है, और तो और घर आकर भी लेपटॉप ले के बैठ जाते हैं ऑफिस का काम करने !

मैंने फिर शरारत से कहा- डॉली देख लिया करो, लेपटॉप पे यह काम कर रहा है या कोई पोर्न देख रहा है !

वो हंसते हुए बोली- हाँ, बिल्कुल ! मेरे आते ही लैपटॉप बंद जो कर लेते हैं।

मैंने कार्तिक के एक धौल जमाते हुए कहा- साले, इतनी सुंदर और सेक्सी बीवी मिली है, इसमें ध्यान लगाया कर, वो लैपटॉप वाली उसमें से बाहर निकल कर नहीं आएँगी और यह तो लाइव तेरे सामने है।

मैंने जानबूझ कर डॉली के लिए सेक्सी शब्द बोला था और मैंने नोटिस किया कि उसे शर्म तो आई पर सुनने में अच्छा भी लगा। कुल मिला कर मैंने कुछ समय में उन दोनों के साथ ख़ास तौर से डॉली के साथ एक दोस्ताना, बे-तकल्लुफ़ और कुछ हद तक सेक्सुअल बातों वाला माहौल बना लिया था।

लेकिन वो मुझे एक निश्छल, खुश मिजाज़, लेकिन बहुत ही ज्यादा शर्मीली और अपने में सिमटी सिमटी सी लड़की लगी। मैं चिंता में पड़ गया कि इसके साथ कैसे वो सब करूँगा और क्या इस सीधी-सादी और भोली लड़की के साथ यह सब करना उचित होगा, क्यूँकि मेरी बेबाक और सेक्सी बातों पर भी वो शरमा रही थी।

जबकि कार्तिक जानबूझ कर मुझे उसके साथ अकेला छोड़ कर बाज़ार से नाश्ता लेने चला गया था, तब हमने खूब बातें की इस बारे में, लेकिन मुझे अब कुछ अच्छा नहीं लग रहा था। और यह बात मैंने कार्तिक को भी बताई, डॉली के वहाँ से जाने के बाद क्यूँकि नाश्ते के बाद डॉली ब्यूटीपार्लर चली गई थी और तब हम दोनों अकेले थे।

मैंने उसे साफ़ कह दिया कि डॉली के साथ ऐसा करना गलत होगा, वो मासूम है, वो खुद नहीं चाहती होगी यह सब करना ! और करवाना !

कार्तिक बोला- अरुण, तुम प्लीज़ मुझे गलत मत समझो, मैं भी डॉली से बहुत प्यार करता हूँ और कुछ सोच समझ कर तुम्हें बुलाया है।

और फिर वो एकाएक उठा, मेन-गेट बंद किया और फिर अपना लैपटॉप लेकर आया और बोला- पहले तुम इसे देखो, फिर फैसला करना ! ओके !

और जब लेपटॉप में उसने काफी सारे वीडियो में से एक वीडियो प्ले किया, तो मेरी आँखें खुली कि खुली रह गई।

लेपटॉप स्क्रीन पर जो दृश्य उभरा वो शायद उनके बेडरूम का था, जिसमें डॉली और कार्तिक प्रेमालाप करते हुए दिख रहे थे, डॉली ने सिल्क का बिना बाहों का गाउन पहन रखा था और कार्तिक पायज़ामे और टीशर्ट में था।

कार्तिक, डॉली को आलिंगन में लेकर चूमने का प्रयास कर रहा था, उसके चेहरे गर्दन, खुले हुए कंधे सब जगह ! और कुछ देर बाद उसने डॉली के गाउन के अंदर हाथ डाल कर उसे उतारने का प्रयास किया, लेकिन डॉली उसे रोकती रही और जहाँ जहाँ से गाउन हट भी जाता था, वो अपने बदन के उस अनावृत हिस्से को फिर छुपा लेती !

वो नग्न होने में शरमा रही थी लेकिन कार्तिक बहुत उत्तेजित हो चुका था, प्रकृति ने पुरुष को ताकतवर बनाया है इसलिए कार्तिक ने बलपूर्वक उसका पूरा गाउन उसके जिस्म से अलग कर ही दिया !

अब उसके जिस्म पर पेंटी और ब्रा ही थी लेकिन उसने तुरंत ही पास पड़ी चादर से अपने बदन को ढक लिया और कार्तिक ने उस चादर के अंदर से ही उसकी पेंटी और ब्रा निकाल फेंकी, लेकिन डॉली ने और अच्छे से अपने बदन पर चादर लपेट ली।

कार्तिक ने चादर हटाने की कोशिश की लेकिन डॉली विरोध करती रही और उसे लाइट बंद करने को बोलती रही।

पुरुष के साथ एक कमज़ोरी है कि वो बहुत ही जल्दी उत्तेजित हो जाता है, जो अभी कार्तिक के साथ भी हो रहा था, उसने तुरंत अपने सभी कपड़े उतार कर अपने आपको पूर्ण नग्न कर लिया, इसमें कोई शक नहीं था कि कार्तिक का शारीरिक गठन और उसका लिंग जबर्दस्त है लेकिन उधर उस डॉली ने अपनी आँखें ही बंद कर ली, बेचारे कार्तिक ने अपना लंड उसके होंठों पर रखना चाहा कि वो चुम्बन ले या शायद मुँह में ले ले लेकिन डॉली ने चादर से अपना चेहरा ढक कर उसकी कोशिश नाकाम कर दी।

और आखिर कार्तिक को उठ कर लाइट ऑफ करनी ही पड़ी, फिर सब कुछ धुंधला सा हो गया।

फिर कार्तिक ने लैपटॉप बंद किया और मेरी तरफ मुखातिब होते हुए बोला- देखा तुमने? यह समस्या है हमारे साथ ! क्या अब तुम मेरी सहायता करोगे?

मैं सोच में पड़ गया और एक गहरी सांस लेते हुए बोला- यह सिर्फ तुम्हारे अकेले की नहीं, तुम दोनों की समस्या है। डॉली के साथ भी गलत हो रहा है और वो स्वाभाविक यौन-सुख से वंचित है, और मैं ये सब करूँगा तुम दोनों के लिए, लेकिन तुम्हें मेरे डॉली के साथ किये किसी भी यौन प्रयास पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए !

वो तपाक से बोला- नहीं, बिल्कुल नहीं !

मैंने कहा- सोच लो ! मैंने इस वीडियो में जो महसूस किया है, उस हिसाब से मुझे उसके साथ पूरी छूट चाहिए।

“मिलेगी, तुम्हें सब कुछ करने की आज़ादी होगी ! लेकिन मेरी भी एक शर्त है।” कार्तिक बोला।

“वो क्या?”

“मैं वो सब लाइव देखना भी चाहूँगा ! क्यूँकि अरुण, मैं तुम्हें पहले ही बता दूँ कि बेडरूम में मैंने सी सी टीवी कैमरे लगा रखे हैं, मैं तुम दोनों को सब करते हुए देखूँगा भी, जो मेरी फेंटसी तो है ही, साथ ही साथ तुम्हारे सेक्स करने के तरीके भी मुझे सीखने हैं ! तुम 'सेक्स गुरु' जो हो मेरे !”

उसकी इस आखिरी बात पर मुझे हंसी आ गई !

“ओके !”

अब मुझे उसके नज़दीक आने का और उसके साथ अकेले रहने का कोई वाज़िब कारण सोचना होगा जिसमें डॉली का ज्यादा इंटरेस्ट हो और जो स्वाभाविक भी लगे !

हम लैपटॉप देखने में ऐसे बिजी हुए कि समय का ध्यान ही नहीं रहा, फिर ध्यान आया कि डॉली को काफी ज्यादा समय हो गया था गए हुए, कार्तिक को चिंता भी हुई, उसने उसे फोन लगाया तो दूसरी तरफ से वो बहुत परेशानी में बोल रही थी कि उसे ऑटो रिक्शा नहीं मिला और जो मिला वो भी खटारा !

खैर, कोई 15 मिनट बाद वो घर पहुँची और बुरी तरह से झुंझला रही थी।

मैंने कहा- डॉली, तुम अपनी कार लेकर क्यूँ नहीं गई? और मैंने घर में कार खड़ी भी देखी है ! वो किसलिए है?

यह सुनते ही वो और बिफर गई और कार्तिक की तरफ गुस्सा करते हुए बोली- यह अपने इन भाई से पूछो जनाब, क्या इनके पास टाइम है मुझे कार सिखाने के लिए?

अब कार्तिक बगलें झाँकने लगा। मैंने कहा- ड्राइविंग स्कूल से क्यूँ नहीं सीखी?

तो वो बोली- सीख चुकी हूँ उनसे मैं ! लेकिन अब कोई प्रेक्टिस तो करवाये मुझे !

अब कार्तिक बोला- यार, इस प्राइवेट जॉब में सच में टाइम ही नहीं मिलता मुझे ! मैं भी क्या करूँ?

एकाएक मेरी आँखों में चमक आ गई, मैंने कहा- डोंट वरी, यदि तुम चाहो तो मैं प्रेक्टिस करा सकता हूँ तुम्हें !

“सच !??!” वो चहक कर बोली।

कार्तिक के चेहरे पर भी चमक आ गई और वो सारा माज़रा समझ गया, लेकिन अनजान बनता हुआ बोला- आप क्यूँ परेशान होते हैं?

कार्तिक की बात का जवाब मैंने नहीं बल्कि डॉली ने ही दिया- खुद तो सिखाते नहीं, अरुण जी सिखाना चाहते हैं तो भी तुम्हें परेशानी है? क्यों?

वो हड़बड़ा कर बोला- मुझे नहीं, मैं तो इनकी परेशानी के लिए बोल रहा हूँ !

अब मैंने जवाब दिया- और मुझे कोई परेशानी नहीं ! अब तुम बस अपने आप को शाम के 5 बजे के आसपास फ्री रखना, उस दौरान मैं फ्री रहता हूँ 8 बजे तक ! यह कैसा रहेगा?

वो बोली- हाँ, ठीक है !

इसके बाद डॉली हम दोनों को बैठा छोड़ किचिन में चली गई, और मै और कार्तिक बातचीत करने लगे।

मैंने पिछले दिनों अपनी बीवी कुसुम और साली प्रीति से सम्बन्धित दो रोमांचक घटनाएँ कहानी के रूप में सेक्स चैटिंग में उसे भेजी थी, जिसमें एक टैटू आर्टिस्ट द्वारा मेरी बीवी को पूर्णतया नग्न करके बदन पर टैटू बनवाना और गुप्तांगो का सम्पूर्ण मुआयना, और साली के एक डिलीवरी बॉय के सामने 'नग्न जिस्म की नुमाइश' की घटना का जिक्र था। जिसे बार बार दोहराता हुआ याद कर कार्तिक मेरी तारीफ करते नही थक रहा था।

इसलिए अब मैने कार्तिक को अपनी और कुसुम के बीच फोन पर हुयी बातचीत बताई... और उससे कुछ छिपे हुए जासूसी कैमरो की फार्माईश् की।

मेरी बात को सुनते ही कार्तिक ने यह सवाल उठाया कि अरुण भईया जब आपकी बीवी अपने ऑफिस के कलिग और दोस्तों के साथ इतने मजे ले सकती है तो आपके साथ भी कुछ तो करती होगी, उसके बारे में भी तो बताओ।

कार्तिक मेरे दोस्त तेरी सोच एकदम वाजिब है, मेरे साथ तो वो गज़ब ढाती है और उसकी मांग पर मैंने बीवी के साथ अपने उन्मुक्त यौन संबंधों की एक एक घटना को याद किया और कुछ प्रेमालाप और सहवास के क्षण तो इतने रोमांचक हैं कि जिन्हें सोचते ही मैं अभी भी उत्तेजित हो जाता हूँ।

फिर मैने उसे हमारी शादी के लगभग 15 दिनों के बाद की घटना बताई और इस दौरान हम दोनों 24 घंटो लगभग साथ ही रहे क्योंकि मेरा कोई टूरिंग जॉब नहीं है मेरे माता पिता मेरी 36 की उम्र में दूसरी शादी होने वाली मन्नत पूरी हो जाने की खुशी में तीर्थ यात्रा पर गये थे और मेरी कमसिन जवानी से भरी हुई सौतेली बेटी रिंकी, अपनी नानी के घर गयी हुई थी तो हमें भरपूर एकांत भी मिला हुआ था।

कई बार कुसुम दिन में मेरे कॉलेज में भी फोन कर लेती थी और सेक्सी बहाने बनाती थी जैसे नहाने गई थी सारे कपड़े उतार कर सर्फ़ में डाल दिए पूरे शरीर पर साबुन लगा है और जाने कैसे नल में पानी ही नहीं आ रहा है, ऊ ओह्ह्ह आ आउच और ठण्ड से काम्पने जैसी उत्तेजक आवाजें निकालती, मुझे आना ही पड़ता, और वास्तव में जब में घर आता तो वो मुझे उसी हालत में मिलती बस सिर्फ एक बात झूठ निकलती वो यह कि नल बिल्कुल ठीक होता था और वो दरवाजे के पीछे साबुन समेत नंग धडंग छुपी मिलती और झपट कर पीछे से मुझे पकड़ लेती, यह भी नहीं देखती कि मेरे जॉब के नए कपड़े खराब हो जायेंगे। और फिर वासना का जो खेल चलता तो मैं कॉलेज जाने में लेट हो जाता और कपड़े बदल कर जाना पड़ता शरमाते हुए।

मेरी बातों को सुन कार्तिक बड़ी जोर से हँसने लगा... ह्म्म्म ह्म्म्म ह्म्म्म और बोला

अरुण भईया तुम्हारे कहने का मतलब है कि ऐसी सेक्स के मामले में इतनी हाहाकारी बीवी के साथ रहने वाले पति को अगर 2-3 महीनों तक अलग रहना पड़े तो यह तकलीफदेह तो होना ही था।

आप फिक्र न करो और मेरे पास कुछ सी सी टीवी कैमरा और अन्य छुपे हुए कैमरे और जासूसी कैमरे है, इन्हे मै आपके मोबाइल एप में इंस्टाल कर देता हूँ, आप तो उन्हें दिमापुर में भाभी के घर में लगा दे और सीधा प्रसारण अपने मोबाइल फोन पर देखे।

कहे अनुसार कार्तिक ने कैमरो को मोबाइल में इंस्टाल कर दिया और ये कह कर कि बड़े भईया तुम जल्द से जल्द कुसुम भाभी वाला काम निबटा कर मेरे काम पर ध्यान दो।

वीकेंड होने की वजह से मैंने अपने आने जाने की सूचना घर पर और कुसुम को देकर उसी शाम बस से दिमापुर के लिए निकल गया।

*****

90-100 km का सफर करते हुए लगभग दो घंटे के बाद आखिरकार मै दिमापुर आ ही गया, मेरी बस रात नौ बजे पहुँचने वाली थी, मैंने कुसुम से कहा था कि मैं ऑटो लेकर घर आ जाऊँगा पर उसकी जिद थी कि वो खुद ही लेने आएगी।

मेरी बीवी की यह जिद मुझे भी अजीब लग रही थी, साथ ही साथ चिंता भी हो रही थी पर वो नहीं मानी। मैंने काफ़ी मना किया पर फिर लगा कि उसका इतना मन है तो आने देता हूँ।

बस सही समय पर आ गई थी, मुझमें भी उससे मिलने का, उसे इतने लम्बे समय बाद देखने का उतावलापन था। मैं अटैची बैग लेकर बाहर ऑटो स्टैंड और पार्किंग में आया पर मुझे मेरी बीवी कहीं नहीं दिखी।

मैंने सोचा कि चलो अच्छा है कि कुसुम नहीं आई। फिर मैं बस अड्डे से बाहर गया पर बाहर भी वो नज़र नहीं आई तो मैंने उसे फोन लगाया।

तो वो चहकते हुए बोली- हाँ मैं आगे हूँ, लाल रंग की अल्टो कार के सामने सीधे चले आओ !

मैं तेज़ कदमों से उस ओर बढ़ चला, दूर मुझे एक अल्टो लाल रंग की कार दिखाई दे गई पर वो नहीं दिखी।

अब मुझे थोड़ा अजीब लगा, मैं सोचे बैठा था कि वो मेरे पीछे से दौड़ कर मेरे पास आएगी और लिपट जायेगी, पर वो दुर दुर तक दिखाई ही नहीं दे रही थी।

मैं अनमने मन से भारी बैग को उठाये उस अल्टो कार के पास पहुँचा तभी अचानक से कार का दूसरा दरवाज़ा खुला, एक शानदार खुशबू का झोंका आया, साथ ही मेरी बीवी का हाथ एक बेहद खूबसूरत गुलाब के फूल के साथ बाहर आया, साथ ही उसकी खनकती हुई चूड़ियों के साथ दिलकश आवाज आई- वेलकम माई डार्लिंग !

जब मैंने अन्दर झाँक कर देखा तो हक्का बक्का रह गया, वो ड्राइविंग सीट पर सिर्फ बिना बाहों वाली और बहुत ही डीप गले की नाइटी पहने ही बैठी हुई थी। मैंने घबरा क़र अन्दर बैठते हुए फ़ौरन दरवाज़ा बंद क़र लिया, मुझे लगा कि आसपास के लोगों को झलक मिल गई तो क्या सोचेंगे। और अन्दर आते ही उसने अपनी अनावृत बाहों में मुझे जकड़ लिया, और मै इतने लम्बे समय बाद उसके जिस्म से लिपटते ही रास्ते की सारी थकान, चिंता सब भूल गया, मेरे हाथ भी उसके बदन को कसने लगे और फिर उसकी तरफ से चुंबनों की जो बारिश शुरू हुई तो मैं अभिभूत हो गया, अब मैं भी उसके माथे, गाल, नाक, ठोड़ी रसीले होठों को चूमते हुए उसका सर ऊपर उठाते हुए उसकी सुराहीदार गर्दन को भी चूमता हुआ उसके उन्नत वक्षस्थल पर आ पहुँचा और वक्ष का जितना भी हिस्सा बाहर निकल रहा था, उसे भी चूमा या कहो कि चाट ही डाला।

तभी पास से कोई अन्य कार गुजरी तो उसकी आवाज से हमारा ध्यान बंटा और मौजूदा स्थिति का अहसास भी हुआ। मैंने अपने आप को संभाला पर वो अभी भी वासना के आवेश में दिख रही थी।

मैंने उसे पुचकारते, सहलाते, समझाते हुए कहा- जानू, ये कार तुम्हे कब और कैसे मिल गयी, और तुमने गाड़ी चलाना कब सीखा...????

वो प्यार से मेरी नाक पकड़ते हुए बोली अरे मेरे भोले बलम, मै सरकारी क्लर्क हू, बस एक बिल्डर की टेंडर की फाइल पास करा दी.... और कार मिल गयी। मेरा अपने ऑफिस के सभी जूनियर और सीनियर से व्यव्यहार ही ऐसा है कि जिस फाइल को पास करने की बोलू वो सभी हँस हँस कर कर देते है। ... और आज मेरे प्रोफेसर साहब आने वाले थे तो मैने सोचा मेरी नई गाड़ी ले जाकर उन्हें सरप्रिज कर दू।

मुझे कुसुम की बातें आश्चर्य चकित कर रही थी, लेकिन उस पर प्यार भी बहुत आ रहा था मैने उससे कहा अभी घर पहुँच क़र मै तुम्हे रात भर पलंग तोड़ प्यार दूंगा !

पर वो गाड़ी में ही मुझसे लिपटे ही जा रही थी।

तब मैंने उसे कहा- जानू मेरा तो अभी सामान भी सड़क पर ही पड़ा है, उसे तो डिक्की में रखने दो।

तब जाकर वो मुझसे अलग हुई, मैंने जल्दी से सामान डिक्की में रखा, तब तक वो ड्राइविंग सीट खाली क़रके वो पास वाली सीट पर अन्दर से ही पहुँच गई।

मैंने आकर स्टीयरिंग सम्भाला और बस अड्डे से निकल पड़े और वो अपने आप को रोक नहीं सकी और फिर मेरी बाहों में झूल गई उसने एक हाथ मेरी शर्ट के अन्दर घुसा दिया और मेरी छाती के बालों में उंगलियाँ फिराने लगी और दूसरे हाथ से अपनी नाइटी को खुद की जांघों से भी ऊपर सरका लिया, दोनों टाँगें नग्न क़र ली और उसमें से एक टांग मेरी टाँग के ऊपर पसरा दी। ऐसा करने से नाइटी इतनी ज्यादा ऊँची हो गई की उसकी पैंटी तक दिखाई देने लग गई। अब मैं भी और बेचैन हो गया मैंने एक हाथ से स्टीयरिंग संभालते हुए दूसरा हाथ उसकी नंगी जांघों पर रख दिया और कार की गति थोड़ी कम क़र दी ताकि कार काबू में रहे क्योंकि मैं अब अपने ही काबू से बाहर होता जा रहा था।

उस बदमाश ने अपने घुटने से पैंट के ऊपर से ही मेरे लण्ड पर रगड़ देना शुरू कर दिया। उसकी इस हरकत से मेरे लण्ड में भी उत्तेजना की चिंगारी सुलग उठी, वो आकार में बढ़ने लगा, सख्त होने लगा, अभी तक वो एक तरफ़ को दुबका पड़ा था। कड़क होते ही उसने ऊपर की दिशा में भी होना शुरू कर दिया और जब लिंग उत्तेजित हो जाता है तो वो दिमाग को भी अपने काबू में कर लेता है।

मैंने हाथ बढ़ाया तो था उसकी जांघ को हटाने के लिए लेकिन लण्ड की तरफ से इशारा हुआ उसे सहलाने का और मैं आहिस्ता-आहिस्ता दबाते हुए जांघ को सहलाने लगा।

ऐसा करने से उसकी आग और भी बढ़ गई और उसने दूसरा पैर भी मेरे उपर इस तरह से रख दिया कि क़ार का गियर हेंडल उसकी जांघो के बीचों बीच आ गया।

तो अब मेरे हाथ भी गियर संभालते संभालते उसकी पैंटी तक जा पहुँचे। वो उत्तेजना के मारे और पसर गई मैंने भी अब आहिस्ता से अपना हाथ उसकी पैंटी में सरका दिया और जैसे ही मैंने उसकी घनी, काली, घुंघराले और मुलायम बालों वाली चूत को स्पर्श किया, उसके मुख से गहरी सिसकारियाँ निकलने लगी। अब मेरे लिए सड़क पर ध्यान लगाना मुश्किल हो रहा था, उसकी चूत सहलाते सहलाते अचानक स्पीड ब्रेकर की वजह से गियर बदलने की वजह से मुझे उसकी चूत में से हाथ बाहर हटाना पड़ा तो वो उत्तेजना में इतनी पागल हो गई कि अपने कूल्हे ऊँचे उठा कर अपनी चूत को गियर के हत्थे में घुसा दिया और रगड़ने लगी।

अब मुझसे उसकी हालत देखी नहीं जा रही थी, वो अपने वक्ष भी अपने ही हाथों से मसल रही थी, उसकी नाइटी भी अस्त-व्यस्त हो चली थी, एक कंधे से ढलक गई थी और नीचे से भी पेट की नाभि तक साफ़ दिखाई दे रही थी। मैं खुद उत्तेजित हो गया था मेरे लण्ड का अब पैंट में समाना मुश्किल हो गया था, मुझसे बैठा भी नहीं जा रहा था इसलिए मैंने ज़िप खोल कर अंडरवियर में से लण्ड बाहर निकाल लिया।

अब हमारी हालत ऐसी हो गई थी कि घर तक पहुँचना भी मुश्किल लग रहा था। मेरी बीवी वासना की आग में तप रही थी और उसकी ऐसी उत्तेजना और अस्त-व्यस्त अर्धनग्नावस्था में अश्लीलता से पसरा हुआ उसका शरीर मुझ से भी देखा नहीं जा रहा था।

रात के दस बज चुके थे, सड़क पर इक्का-दुक्का वाहन ही नज़र आ रहा था, उसी समय मन में एक विचार कौंधा कि थोड़ा आगे जाते ही सुनसान बाय-पास है जो एक सरकारी बिल्डिंग की तरफ जाता है और जो रात को बंद रहती है इसलिए रात को वहाँ कोई नहीं जाता।

उस तरफ चलते हैं, वहाँ कोई भी नहीं होगा दूर दूर तक ! और वो जगह एकदम उपयुक्त है वासना की आग मिटाने के लिए !

यही सोच कार मैंने कार को उस दिशा में ही घुमा दिया और वहाँ से मुख्य सड़क छोड़ कर उस बाय-पास वाली सड़क में भी आगे जाकर थोड़ा सा कच्चे में चल कर एक ऊँचाई वाली खुली जगह में जाकर मैंने अपनी कार रोक दी।

वहाँ किनारे पर ऊँची ऊँची झाड़ियाँ थी जिससे किसी के देखे जाने का भी डर नहीं था और आने का रास्ता भी वही था जिससे हम आये थे, और फिर मैं अपनी बीवी के साथ था, किसी कालगर्ल के साथ नहीं और उसके पास खुद का आईडी प्रूफ भी था उसका ड्राइविंग लाइसेंस !

वहाँ जाकर जब मैंने अपनी कार रोकी तब जाकर बीवी उठ कर बैठी और खिड़की से बाहर झाँक कर बोली- यह कहाँ आ गये?

मैंने कहा- जानू, मैं इस हालत और कार नहीं चला सकता, घर अभी दूर है ! और इन सब की कसूरवार तुम हो जो इतनी उत्तेजक और सेक्सी ड्रेस पहन कर आ गई ! और तुम्हे यह खूब सूझी, तुमने गज़ब का सरप्राइज़ दिया यार ! कुछ भी कहो, मज़ा आ गया !

यह कहते हुए मैंने उसे अपनी बाहों में खींच लिया और अब हम एकांत में थे, गाड़ी भी रुकी हुई थी, जिसके मैंने हैंडब्रेक और गियर भी लगा दिया था ताकि ऊंचाई पर भी सुरक्षित रहे।

बीवी से इतने दिनों का अलगाव अब उत्तेजना के साथ बाहर आ रहा था। मेरे हाथ उसकी नाइटी में अन्दर पहुँच गए और उसके बदन पर फिसलने लगे। वो भी जब मेरे आलिंगन में आई तो उसके गर्म बदन से मेरा तना हुआ लण्ड छू गया और लण्ड में सरसराहट सी दौड़ गई। उसने अपने हाथ में मेरा लण्ड पकड़ लिया तो मेरी सिसकारी निकल गई और लण्ड झटके मारने लगा।

मैंने तुरंत होश से काम लिया और अपने लण्ड को उसके हाथ से छुड़ाया, अगर मैं ऐसा नहीं करता तो मेरा वीर्य स्खलित होने को ही था।

मैं अब उसको अपने से अलग किया- जानू, क्या कर रही हो? इतने दिनों से यह ताव खा रहा है ! रुको, वरना अभी पानी छूट जाएगा।

वो भी इस बात को समझ गई क्योंकि नई नई शादी के बाद मेरे साथ कई बार ऐसा हो चुका था और मुझे शर्मिंदगी उठानी पड़ी थी।

पर अब मैंने बहुत से तरीके अपना कर अपनी स्तम्भन शक्ति को काफी बढ़ा लिया है पर आज बात कुछ और थी, आज बीसो दिनों बाद मेरा अपनी गर्म बीवी से सामना हुआ था और वो भी वो इतने बोल्ड अंदाज़ में आई थी कि मैं अपने ऊपर काबू खो रहा था। इसलिए मैं उससे अलग होकर बाहर आया और पानी की बोतल अपने तन्नाते हुए लण्ड पर उड़ेल ली, फ़िर मूत कर उसे शांत किया और वापिस पैंट में डाल कर चेन चढ़ा ली क्योंकि आज मुझे लम्बे समय तक इसे रोकना था। जब जब भी मेरी बीवी इतनी गर्म हो जाती है तो हम बहुत ही उत्तेजक और गन्दी गन्दी काम क्रीड़ाएँ करते हैं, और आज भी यहाँ वही माहौल बन रहा था।

मैं वापिस उसके पास आया, उसे बाँहों में समेट लिया, लेकिन इस बार मेरे हाथ उसके कपड़ों के अन्दर थे और बदन को सहला रहे थे, मसल रहे थे। वो भी कसमसा रही थी।

अब मैंने उसकी नाइटी उसके बदन से उतार कर अलग कर दी, अब उसके गदराये जिस्म पर सिर्फ दो अंतर्वस्त्र ही बचे थे उन्हें भी मैंने आहिस्ता-आहिस्ता उसके शरीर से अलग कर दिया और उसे पूर्ण नग्नावस्था में ला दिया।

अब वो बोली- पीछे की सीट पर चलें?

मैं मुस्कुराया, मुझे शरारत सूझ रही थी, मैंने कहा- नहीं ! पहले बाहर चलो, मैं तुम्हें खुले आसमान में चाँदनी रात में नग्न देखना चाहता हूँ।

वो बोली- छोड़ो, यह क्या बचपना है !

मैंने कहा- प्लीज़ एक बार मेरी खातिर !

“ओ के !” वो बोली और अपने भारी भारी कूल्हे मटकाती हुई बाहर निकल आई।

चाँदनी रात में नहाया हुआ उसका मादक और निर्वस्त्र शरीर क़यामत ढा रहा था, खुले में जाकर उसने एक मादक अंगडाई लेकर अपने बदन को सीधा किया। बाहर बहुत ही शीतल और तेज़ हवा चल रही थी।

उसने दोनों बाहों को फैला कर अपनी कांख में ठंडी हवा ली फिर वो नग्नावस्था में ही बाहर इधर उधर दौड़ने लगी। उसे बाहर मज़ा आ रहा था !

फिर उसने वो हरकत की कि आपको पढ़ कर अजीब लगेगी, मुझे भी हंसी आ गई जब उसने भागते भागते ही पेशाब भी कर डाला और बच्चो की तरह हवा में धार को लहराने लगी।

मेरे इस वाक्या को पढ़ने वाले मेरे शादीशुदा मित्र या वो लोग जो अपनी प्रेमिका से बहुत दिन अलग रह चुके होंगे, वे इस बात को समझ रहे होंगे कि प्रेमी स्त्री-पुरुष जब लम्बे समय बाद मिलते हैं तो उनकी क्या हालत हो जाती है, उनके लिए सारी दुनिया सिर्फ उन दोनों में ही सिमट जाती है, समय, स्थान और अवस्था का उन्हें कोई होश नहीं रहता।

ऐसा ही कुछ मेरी पत्नी के साथ भी हो रहा था, वो मेरी कोई भी बात टालने के मूड में नहीं थी और मेरे ज़रा से आग्रह पर ही ना सिर्फ पूर्ण निर्वस्त्र हो गई बल्कि कार से बाहर खुले में भी भाग गई।

यहाँ मैं बता दूँ कि मुझे सेक्स को लेकर उन्मुक्त और अजीबोगरीब कल्पनाएँ करने का शौक है और आज एकाएक विचार आया कि खुले आसमान के नीचे प्रकृति के बीच किसी सुन्दर नारी को उसकी प्राकृतिक अवस्था में यानि पूर्णतया नग्न देखना कितना उत्तेजक होगा।

आज यही दृश्य मेरे सामने था, बाहर निकल कर मैदान में दौड़ते हुए अब उसे भी अहसास हो गया था कि दूर दूर तक कोई देखने सुनने वाला नहीं था, तो वो और मस्ती में आ गई थी।

खुले में ही मूत्र धारा छोड़ने का उसका अंदाज़ इसी बात का सबूत था कि वो अब पूरी मस्ती में थी क्योंकि वो अब अश्लील और उत्तेजक इशारे करके मुझे भी बाहर बुला रही थी, कभी दोनों हाथों से अपने वक्ष पकड़ कर मेरी तरफ हिला रही थी तो कभी पीछे घूम कर नीचे झुक कर अपने बड़े बड़े तरबूज जैसे चूतड़ मटका रही थी।

अब भला मैं कहाँ रुकने वाला था, मैं भी भाग कर उस समय उसके पीछे पहुँचा जब वो अपने कूल्हे उठाए झुकी हुई थी, उसे पता ही नहीं चला कि मैं कब उसके पीछे आ गया। मैंने पास जाकर उसके दोनों कसे-उभरे-फैले हुए कूल्हों पर जोरदार चपत लगाई, वो आउच करके पलटी और वो संभलती उससे पहले ही मैंने उसके मादक, नग्न जिस्म को अपनी बाहों में समेट लिया, गोद में उठा कर मैदान के किनारे पर बैचनुमा एक चट्टान पर ले गया और बैठ कर उसे अपनी गोदी में उलट कर इस तरह से लेटा लिया कि उसके कूल्हे मेरी गोदी में कुछ इस तरह से आ गए जैसे कोई दो तबले अपनी गोदी में लेकर बैठा हो।

'आदरणीय संजू भैया' मेरी इस बात से सहमत होंगे कि स्त्री के कूल्हे नारी-सौन्दर्य का महत्त्व पूर्ण हिस्सा होते हैं और उत्तेजक शारीरिक नाप में इसका बड़ा योगदान होता है, मर्द इन्हें प्यार करने, चूमने के साथ साथ इस पर निर्दयता भी करते हैं जैसे दबाना, हिलाना, मसलना और चपत लगाना !

यही सब कुछ मैं भी कर रहा था और वो मजे ले रही थी, जैसे ही में चपत लगाता, वो चिहुंक कर चिल्लाती ! पर मैं जानता था कि यह मजे की चिल्लाहट है, तो मैं फिर और जोर से लगाता।

पर उसके इस तरह लेटने से उसकी चूत बिल्कुल मेरे लण्ड के करीब आ गई, उसकी गुच्छेदार झांटे और चूत का गीलापन में अब अपने लण्ड पर महसूस कर रह रहा था। मैं सोचा करता था कि लण्ड में दिमाग नहीं होता पर अभी जाने मेरे लण्ड को चूत की खुशबू आ गई या क्या हुआ, वो अपने विकराल रूप में आने लगा, ऊपर उठने लगा और पैंट के अन्दर से ही उसने चूत को अहसास करा दिया कि चूत रानी, फ़िक्र मत कर तेरा लण्ड राजा आ रहा है और अब मैं इस अरुण के रोके भी ना रुकुँगा, ना शांत होऊँगा, चाहे जितना भी पानी डाले !

मैं भी लण्ड के ऐसे तेवर देख कर डर गया कि अब तो चुदाई करनी ही पड़ेगी वर्ना बिना किये ही झड़ गया तो बीबी बहुत मारेगी !

और इतने दिनों बाद जो मिले हैं, उसका सब मज़ा खराब हो जाएगा।

मैंने उसे उठाया और कहा- जानू चलो, कार में चलते हैं ! मुझसे अब रहा नहीं जा रहा !

तो वो शरारत से बोली- तो करो ना ! मैंने कब मना किया? तुम्हें तो तबला बजाने से ही फुर्सत नहीं है, एक बार तो जंगल में से निपट कर निकल लो, फिर घर जाकर चाहे पूरी रात ही तबला बजाना ! वैसे भी मेरे चूतड़ों में इन दिनों बहुत दर्द रहता है। पर अभी तो मेरी चूत की सोचो, गीली हो कर कब से टपक रही है, सारा पानी टपक जाएगा तो क्या सूखी चुदाई करोगे?

मैं उसकी बातें सुन कर हंस पड़ा, बिंदास कामुक बातें करती हुई वो बहुत ही अच्छी लगती है, मैंने फ़िर कहा- चलो कार की पिछली सीट पर चलते हैं।

वो बोली- नहीं यहाँ खुले में ही करेंगे, कार में तुम्हें तो मज़ा आयेगा पर मेरी तो जान ही निकल जायेगी और मैं कुछ नहीं कर पाऊँगी, फंस के रह जाऊंगी, कार में जगह कम होती है ना।

मैंने उसे कहा- यहाँ कैसे करेंगे? नीचे मिटटी है, गन्दगी है, और तुम एकदम नंगी हो और तुम्हें ही नीचे आना है ! सोचो ज़रा !

वो कूल्हे मटकाती हुई उठी और बोली- सब सोच लिया !

और कार के पास गई, डिक्की खोली, कार का तिरपाल का कवर डिक्की में से निकाला, आज वो काम आने वाला था क्योंकि वो नंगी-पुंगी उस तिरपाल को उठाये हुए और अपनी चूत के दीदार कराती हुई चली आ रही थी।

इसलिए जब वो नज़दीक आई तो मैंने शरारत से उसकी चूत सहलाते हुए कहा- यानि चुदाई का सारा इंतजाम है?

वो बोली- और क्या ! हमें ही सब सोचना पड़ता है, तुम्हें क्या, जब चाहो इसे तैयार कर लेते हो !

यह कहते हुए उसने भी मेरे लण्ड पर एक धौल जमा दी और कहा- इसे निकालो जल्दी ! अब रहा नहीं जा रहा है।

और फिर उसने तिरपाल को इस तरह से बिछाया कि उसके सर के नीचे एक तकिया जैसा बन गया और वो उस पर बहुत ही कामुक, उत्तेजक और अश्लील अवस्था बना कर पसर गई।

मैं क्या लिखूँ ! उसकी इस अवस्था को शब्दों में बयान करना मेरे लिए मुश्किल है, मैं सोच रहा था कि उसके नंगे बदन से और खेलूँगा, सताऊँगा लेकिन मेरे लण्ड ने मेरा साथ नहीं दिया, वो उत्तेजना के मारे उछालें मारने लगा।

फिर मैंने आव देखा ना ताव ! सिर्फ नीचे के कपड़े हटा कर अपने लण्ड को उसकी एकदम गीली चूत में समां दिया। वो भी अपनी चूत में लण्ड लेने को व्याकुल थी क्योंकि उसने लण्ड डालते समय अपने दोनों पैर पूरे फैला लिए थे इसलिए लण्ड चूत के अन्दर तक जा धंसा और उसकी आनंदमिश्रित और गगन भेदी उत्तेजक चीख से आसमान गूँज गया, आसपास पेड़ों पर सो चुके बेचारे पक्षी भी फड़फड़ा कर उड़ गए और उड़ते ही रहे क्योंकि चुदाई ने अपनी गति पकड़ ली थी और अब उसकी चीखों में मेरी भी चीखें शामिल हो गई थी।

इस घटना को लिखते लिखते मैं खुद इतना उत्तेजित हो गया हूँ कि बस बता नहीं सकता !

वो बिंदास पैर पटक पटक कर कूल्हे उछाल-उछाल कर सेक्स में मेरा साथ दे रही थी।

तूफ़ान थमने के बाद भी हम करीब आधे घंटे तक वहीं पड़े रहे।

और इसी के साथ यह अद्भुत और रोमांचक आउट डोर सेक्स समाप्त हुआ, घर से दूर, बाहर खुले आसमान के नीचे चांदनी रात में किया सम्भोग हम दोनों के लिए ही एक यादगार अनुभव है और रहेगा !

मुझे उसकी यह बेकरारी और बिंदास स्वागत भूले नहीं भूलता।

जारी है....!
 
और इसी के साथ यह अद्भुत और रोमांचक आउट डोर सेक्स समाप्त हुआ, घर से दूर, बाहर खुले आसमान के नीचे चांदनी रात में किया सम्भोग हम दोनों के लिए ही एक यादगार अनुभव है और रहेगा ! मुझे उसकी यह बेकरारी और बिंदास स्वागत भूले नहीं भूलता।

सब कुछ खुशहाली से हुआ था, पति पत्नी की काम वासना का मिलन खुले आसमान में जोरो में हुआ था। कुसुम की खुशी उस रात मुझे बिस्तर में भी दिखाई दे रही थी, उसका जिंदगी में बहुत पैसा कमाने का सपना पूरा होना भी चालू हो चुका था, और घर के आसपास के लोग कुसुम को बड़ा अफसर समझते थे ,क्योकि वो सबको बड़ा ही रौब झाड़ कर बात करती थी , खासकर के आसपास के नवजवान लड़के , कुसुम का मस्ताना और मादक शरीर को देखकर सबको उसे अपना बनाने की हसरत पैदा हो जाती और उन्हें कुसुम के घर के चक्कर लगाने पर मजबूर कर देती।

ये बात मुझे पता चली अगले दिन मैं जब सुबह 10-11 बजे ऐसे ही कुसुम के क्वाटर (सरकारी आवास) के सामने टहलता हुआ चाय पीने चला गया ,ऐसे भी घर में काम तो कुछ खास नही था, और मैं घर में कुर्सियां तोड़ता हुआ बोर हो रहा था।

क्वाटर के सामने वाले ही चाय ठेले की टपरी में पहुचा वहां वो टपरी वाला मुझे नही पहचानता था….।

“एक चाय पिलाओ ,और एक सिगरेट” मैंने मुस्कुराते हुए कहा,

“साहब बैठिए ना “

उसने एक कुर्सी आगे की ,वहाँ अधिकतर सभी सरकारी कुवाटरों में रहने वाले कर्मचारी चाय पीने आते थे , पास में ही एक दो कॉलेज भी था, जिसके अधिकतर लड़को के लिए वो अड्डा हुआ करता था, इसलिए वहां थोड़ी भीड़ भी थी, चाय वाला भी मेरी ही उम्र का रहा होगा शायद मुझसे कुछ कम ही रहा होगा और उसकी कमाई शायद मुझ 'प्राइवेट कॉलेज के हिंदी के प्रोफेसर से भी ज्यादा' थी।

वहां का माहौल देखकर मुझे मेरे कॉलेज के दिन याद आ गए,कॉलेज गोइंग लड़को की वहां भीड़ लगी थी ,जो लगभग हमेशा लगी रहती थी , इसलिए उसे पुलिस और नगर निगम के लोगो को भी पैसे खिलाने पड़ते थे,

“यार मेरे लिए तू लेमन टी बना ,अच्छी मसाला वाली “

“जैसा आप कहे सर “

मैं चाय और सिगरेट पीता हुआ फिर से उन्ही कालेज के दिनो में पहुच गया , कि अचानक से मेरी नजर रोड के उस पार अपने क्वाटर की छत पर ट्रांसपेरेंट मैक्सी पहनी हुई गीले कपड़ो को डोरी पर सूखने के लिए डालती हुयी अपनी बीवी कुसुम पर पड़ी,

कुसुम शायद नहा कर आई थी उस ने अंदर ब्रा नही पहने हुयी थी जिससे उसके मैक्सी में निप्पल की बड़ी बड़ी चुचुक दूर से ही नजर में आ रही थी और गीले कपड़ो को फटकार लगाते हुए इस तरह डोरी पर डाल रही थी कि उसके बड़े बड़े उरोज उछल कूद कर रहे थे।

मैं कुसुम को बड़ी ही प्यारी नजरो से निहार रहा था की वो चायवाला बोल पड़ा ,

“अरे सर इसने तो तबाही ही मचा दी है यहां रहकर.... जो लौण्डे कभी चाय सिगरेट् के नाम सुनकर भी मुह बनाते थे साले सजधज कर सुट्टा मारने आते है , इसने तो यहाँ बवाल ही मचाया हुआ है ,साली रांड कही की “

मेरा दिमाग फिर गया ,इस मादरचोद की इतनी औकात की ये मेरे सामने मेरी ही बीवी को ….लेकिन उसे थोड़ी ना पता होगा की ये मेरी बीवी है नही तो ये हिमाकत वो नही करता..

“तमीज से बात करो ,एक औरत है वो …”मेरे चहरे पर गुस्से के भाव साफ दिखे जिसे देखकर वो डर ही गया …

“अरे साहब आप तो गुस्सा हो गए मेरा वो मतलब नही था ,असल में मैं एक छोटे से जगह से आया हुआ हु और यहां इतने सालो से मैं ये काम कर रहा हु पहली बार ये हुआ है की कोई शादी शुदा औरत को ऐसे कपड़ो में देखता हु, और जब ये अपनी नौकरी पर जाती है तो इसकी ब्लाउस में एक एक चूचे बाहर निकलते हुए साफ साफ दिखाई देते है। अब आप ही बताओ ना साहब ,सभी लड़के उसे घूरते रहते है , कोई कही इसके चूचे पर कुछ कॉमेंट करता है, तो कोई कही इसकी स्कूटर की स्टेपनी जितनी बड़ी बड़ी गांड पर , सब कुछ तो इसके कपड़ो से दिखता है ,

और साहब मेरी तपरी पर भी लड़को की भीड़ देख कर.. रोज रोज आ जाती है कभी नॉन खटाई बिस्किट लेने, कभी चिप्स लेने, इतना पैसा कमाती है फिर भी पांच पांच रु की सौदा के लिए 10-15 मिनिट तक यहाँ खड़ी होकर खिच खिच करती हैं। भले घर की औरतो को क्या ये सब सोभा देता है और साथ में ये और आसपास के क्वाटर में रहने वाली औरतो/लड़कियों को भी बिगाड़ रही है , रोज ऑफिस जाती किसी जवान लड़के के साथ और वापस आती है आप जैसी उम्र के आदमी के साथ। ना जाने कितने खसम पाल रखे है। इस औरत ने तो साला सरकारी क्वाटर को रंडी खाना बना के रखा है “

उस चाय वाले की इतनी छोटी सोच ने मेरा दिमाग ही घुमा दिया ,मैं वहां से उठा और उसका कांच का गिलास जोरो से फोड़ दिया,उसके पसीने छूटने लगे, शायद वो ये भी समझ रहा था की मैं 'एक सरकारी अधिकारी' हु,,और उसका ये टपरी सरकारी महकमे के कृपा से ही चल रहा है ,मैं अगर चाहू तो एक कंप्लेन से ही उसका ये टपरी उखाड़वा सकता हू।

“साहब गलती हो गयी ,दो जूते मार लो पर माफ कर दो ऐसे गुस्सा मत हो साहब “

“गुस्सा मैं तुझपर नही तेरी सोच पर हु,इसीलिए हमारी औरते अपनी मर्जी से कही जा नही सकती ,कुछ पहन नही सकती ,वो तो अच्छा काम करना चाहती है पर तुम जैसी सोच के लोगो के कारण बेचारियों को हर जगह बस ताने मिलते है और साथ में छेड़छाड़ का शिकार होती है ,वो जो भी पहने मुझे ये बता जो यहाँ तेरी तपरी पर उसे देखने आते है वो गलत हुए या जो पहनती है वो ….????

साले देखना ही बन्द कर दो ना तुम्हे देखना भी घूर कर है और साथ ही दोष भी तुम लड़कियों पर ही लगाते हो ...आज के बाद तेरे मुह से ऐसे शब्द सुना तो तू और तेरा टपरी दोनो उठवा दूंगा “

मेरे इस कदम से वहां लोगो की भीड़ इकठ्ठा हो चुकी थी ,मैंने आगे कहा,इस बार मेरी आवाज थोड़ी धीरे और समझाने वाला लहजा था ,

“देखो लड़की या औरत को देखना गुनाह नही है ,ये तो स्वाभाविक है,लेकिन ऐसी धारणा बहुत गलत है...हमे अपने को देखना चाहिये की हम क्या करते है...हा यार उसकी फिगर सेक्सी है (मेरे चहरे पर एक मुस्कान आ गयी ,वो भी मुझे अजीब नजरो से देखने लगा ) लेकिन इसका मतलब ये नही की वो रंडी है ,और हा हो सकता ही की वो लड़को को उत्तेजित कर देती हो ,और उन्हें टीस करती हो पर यार अपनी भाषा सुधारो और कम से कम लड़कियों और महिलाओं का सम्मान करना सीखो ,क्योकि तुम्हारी भी बेटी, माँ ,बीवी,बहन होगी ... ।

जब तुम ही लड़कियों का सम्मान नही करोगे तो तुम दुसरो से कैसे आशा कर सकते हो की वो सम्मान करे ,,और इसी सोच के कारण तुम अपनी बहनों को भी अच्छा काम करने से रोकते होंगे क्योकि तुम्हे लगता है की दूसरे उन्हें इन्ही नामो से बुलाएंगे जबकि तुम्हे भी पता है की वो गलत नही है,,तो पहले खुद को सुधार लो फिर दुसरो से उम्मीद करना ,चल अब एक और चाय बना और एक सिगरेट दे “

मैं हल्के से मुस्कुरा दिया ,किसी का धंधा खराब करना मेरा मकसद बिल्कुल भी नही था ,मेरे चहरे पर मुस्कान देख कर वो भी थोड़ा सा रिलेक्स हुआ और डरते हुए मुझे एक चाय दी….

“तेरा नाम क्या है “ मै उससे पूछा

“साहब भुवन “

“हम्म अच्छा है ,डरने की जरूरत नही है ,और यार बात तो तेरी सही है ऐसी सेक्सी लड़की बवाल तो मचा ही देगी “

वो हल्के से हँसा पर अभी भी थोड़ा सा डर रहा था ...

**********

मैं फिर से चाय पीता हुआ छत पर अपने गीले बाल सुखाती हुई अपनी प्यारी बीवी कुसुम को निहारने लगा………………।

दिमापुर शहर छोटा था,लेकिन कुसुम के चर्चे बड़े हो गये थे , कुसुम के यहाँ इस नये सेक्सी अवतार के बारे में वैसा अगर सोचा जाये तो चाय वाला ज्यादा गलत नहीं था ।क्योकि जैसे एक डोरी से कटी हुई पतग आसमान मे भटक भटक के धरती पर जा गिरती है ! ठीक उसी तरह पति से अलग रहकर दूसरे शहर में नौकरी करने वाली एक अकेली/छुटेली औरत शुरुआत मे तो वो लोगो की बहुत सहानुबूती बटोरती है परन्तु वक़्त के साथ साथ लोगो की सहानुबूती घृणा मे बदल जाती है ! वो ही लोग उसे उसके पीठ पीछे उसे रंडी और वेश्या बोलते है!!..

ऐसी औरतें शादी करके सबसे पहले पति को इस बात के लिए राज़ी करती हैं कि मैं भी गृहस्थी में आपके साथ हाथ बटाउंगी और मैं भी कोई काम-काज करूंगी...

ताकि उन्हें घर से बाहर निकलने का मौका मिले और वो अपने आशिकों से मिल-जुल सकें..!!

कभी-कभी तो ऐसा भी होता है कि

धन की भूखी लालची लड़कियां जहां काम करती हैं, वही अपने से बड़े कर्मचारी या अधिकारी पर ही डोरे डालने लगती हैं... जबकि वो अच्छी तरह जानती है कि वो भी शादीशुदा व्यक्ति हैं फिर भी...लगी रहती हैं उसको रिझाने में..

वो भी सिर्फ इसलिए ताकि तरक्की/प्रमोशन हो जाएं... मेरे पैसे बच जाएं और वो ही सारे मेरे शौक और ब्रांडेड कपड़े, मेकअप और घूमने फिरने का खर्च पूरे करें...!!

अपने फायदे के लिए किसी के भी साथ हमबिस्तर हो जाने पर इन्हें कोई अफसोस नहीं होता है....!!

बाकी गृहणियों की तरह इनकी सोच नही होती है क्योंकि इनको मर्यादा में रहना गंवार पन लगता है...!! संस्कारी गृहणियों को ये गुलाम समझती हैं..!!

लिव इन रिलेशनशिप में रखैल बनकर रह लेंगी मगर इज्जत से ससुराल में नही रह पाएंगी क्योंकि... ससुराल में मर्यादा से रहना पड़ता है और बड़े-बुजुर्गों की रोक-टोक एवं हिदायतें सुननी पड़ती हैं..!!

आखिरकार इस समय मैं भी तो कुसुम को ताड़ने और सेक्सी माल (रांड) कहने वालो के साथ ही खड़ा था....और मुझे भी इसमें कोई भी इंटरेस्ट नही था की कोई क्या कहता है ,मेरे लिए तो यही अच्छा था की मैं किसी के नजर में ना आउ,...। और फिर मै वहा से चुप चाप, उस चाय वाले से छिप कर अपने क्वाटर के गेट के अंदर दाखिल हो गया।

**********

तभी मेरा फोन बजा ,

“हलो “

“हलो अरुण भईया मैं कार्तिक बोल रहा हु “

कार्तिक की आवाज तो मैं पहचान गया था, पर उसका ये नम्बर मेरे पास नही था,

“कैसे हो “ कार्तिक..???

ठीक नहीं हू भईया, आपका काम हो गया हो तो, आज शाम की बस पकड़ कर वापस आ जाओ। वो मुझसे दुखी होते हुए बोला।

तुम टेंशन ना लो, मै कल ही वहा आकर तुझसे और डॉली से मिलता हू.... मैने उसे सात्वाना देते हुए कहा।

ठीक भैया बाय...

बाय..!

जब मै घर के अंदर पहुँचा तो देखा कुसुम बन सवर कर, कही जाने के लिए तैयार खड़ी थी।

मैडम कहाँ जाने का प्लान आज... मैने मुस्कुरा कर पूछा...???

और कहाँ जाऊंगी... सिवाय ऑफिस के..! उसने जबाब दिया।

आज तो इतवार है... आज भी ऑफिस क्यों.. ????

अरे बस दो तीन घंटे का काम है, सालाना ऑडिट रिपोर्ट बनानी है... कुछ खास स्टाफ् को बुलाया है। इतना कह वो मेरे गाल पर एक प्यारी सी चुम्मी देते हुए चली गई।

कुसुम का जबाब सुन मुझे समझ आ गया.. औरत पढ़ लिख कर अगर घर से बाहर काम या नौकरी करेगी, तो हिस्से में एक इतवार भी आयेगा.. जो घर के काम में नही आता....!

कुसुम के जाते ही मैने तुरंत दरवाजा बंद किया.... अब कुसुम का मोबाइल का एक्सेज तो मेरे पास नही था ,और जासूसी तो मुझे करनी ही थी ,मैंने पूरे घर में 5 जगह कैमरे लगा दिए …ऐसे घर में 4 ही कमरे थे ,2 बेडरूम एक हाल और एक किचन...और एक कैमरा मैंने घर के इंट्री में लगा दिया था, सभी को मैं अपने मोबाइल या लेपटॉप से कंट्रोल कर सकता था, मैं अपने पर थोड़ा इतरा कर वँहा से निकल गया…।

रास्ते में ही मैंने कुसुम को फोन कर दिया।

जान मुझे अभी वापस से जाना पड़ रहा है, मम्मी का फोन आया था। वहा पर क्या हुआ है ज्यादा मैं अभी नही कह सकता ,”

“क्या..?? ठीक है ,लेकिन आप तो मेरी जासूसी करने वाले थे क्या हुआ,और मुझे ऐसे खुली छोड़कर जा रहे हो,इस बीच कुछ हो गया तो “

उसकी शरारती आवाज मेरे कानो में पड़ी ,कितनी कमीनी हो गई थी ये ..

“खबरदार ..ऐसे भी तुम कुछ भी करो मुझे उसका पता चल जाएगा ..”मैंने अपनी होशियारी दिखाई ।

“ओहो मिस्टर अरुण कुमार उर्फ प्रोफेसर साहब देखते है ..ऐसे अभी मैने अपने सीनियर शर्मा को तुम्हारे आने के बारे में बताया था और वो तुमसे मिलने के बहाने आज रात का डिनर हमारे घर पर आकर साथ ही करने वाले थे। अब आप नही होंगे तो वो मेरे साथ ही डिनर कर लेंगे, और रात को घर में …”

मेरा खून खोल गया …

मुझे चुप देखकर वो हल्के से हँसी ..

“जली ना.... जली ना....जान ..”वो हँस पड़ी ।

“चुपकर" उस शर्मा के साथ कुछ की तो देखना मैं क्या करता हु “

“अच्छा मैंने क्या किया है आपको कैसे पता चलेगा ..”

“मैं पता कर लूंगा ..”

“देखते है,..बेस्ट ऑफ लक ,और एक चीज जो कभी मत भूलना ..”

वो थोड़ी देर तक शांत रही

“आई लव यू जान ..”उसने पूरी शिद्दत से कहा ,मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई ,मेरी बीवी है तो लाजवाब .....!

“लव यू मेरी जान,..अपना ख्याल रखना कही मुझे जलाने की चक्कर में खुद को मत फंसा लेना “

वो हँस पड़ी

“अगर फंसी तो इतना भरोसा है की आप मुझे निकाल लोगे ,आपके ही दम पर खतरा उठा रही हु ,अब तो आपको भरपूर जलाऊंगी और खुद भी मजे लुंगी ,आप बैठ कर अपना मसलते रहना ..”वो जोरो से हँसी मेरे चहरे पर भी एक मुस्कान आ गई

“तू बहुत ही बदमाश हो गई है ..”

“आपने ही तो बनाया है ..”

“चलो जाना है लव यू ख्याल रखना ..”

“लव यू मेरी जान आप भी अपना ख्याल रखना और ज्यादा जलना मत..”एक हँसी के साथ हम दोनो थोड़ा इमोशनल हो गए और फोन कट गया… ।

......✍️जारी है
 
स्त्रियों के अपने घर की छत पर किस तरह वस्त्र पेह्हने चाइये, अब इसका फैसला चाय के ठेले वाले करेंगे 😁। एक मर्द जब सिर्फ लुंगी के छत पर टेहलता तो लोग उसे dude कहते है, किंतु स्त्रियो को nude... वस्त्रो के ऊपर दोहरी मानसिकता मेरे हिसाब से ठीक नहीं।

हर बार की तरह बड़े भाई आपके प्यारे से मंतव्य के लिए बहुत बहुत शुक्रिया...!
 
अध्याय - 24 --- " आख़िर क्यों ""

“लव यू मेरी जान आप भी अपना ख्याल रखना और ज्यादा जलना मत..”एक हँसी के साथ हम दोनो थोड़ा इमोशनल हो गए और फोन कट गया… ।

अपने घर पहुँच कर मैंने फोन उठा के कुसुम को डायल किया लेकिन मेरे दिल में अजीब सी कसक उठी की अभी मेरी जान क्या कर रही होगी,अगर मैंने उसे ये बता दिया की उसकी रिकॉर्डिंग चालू है तो कुसुम कैमरे बंद कर देगी, मैंने उसे कुछ न बताने और चुपके से उसके लाइव विडिओ को देखने का प्लान बना लिया...।

रात को वो अकेली ही थी, शायद शर्मा के साथ dinner वाली बात उसने मुझे जलाने के लिए बताई थी। सफर की थकान से मै भी बेचिंत होकर कुसुम को बिस्तर पर सोता देख मै भी सो गया। सुबह जब मै सो कर उठा तो मैं आदत के मुताबिक तैयार हुआ लेकिन लेपटॉप को देखकर उसे खोल कर विडियो रिकाडिंग चालू कर दी,मैं बस चेक कर रहा था लेकिन जल्बाजी में उसे बंद करना भूल गया और नास्ता करने चला गया, मुझे क्या पता था की ये छोटी सी गलती मेरे जीवन का नया अध्याय लिखने वाली है।

वापस जब कमरे में आया और वीडियो में देखा तो सोकर उठने के बाद कुसुम नहाने चली गयी जब वो गिले बालो के साथ बाथरूम में से निकली जैसे कोई ओश की बूंद ताजा हरी घास पर अटखेलिया कर रहा हो,मेरे सामने कुसुम के रूम का पूरा नजारा था पर मैं अपने जान के चहरे को देखकर दीवाना हो रहा था, उसकी लाली ताजा सेब की तरह, टबेल में लिपटी हुई बलखाती कमर उन्नत वक्ष जो तोलिये मे लिपटे हुए भी अपने शबाब की झलक दिखा रहे थे।

उसने अंग अंग को आईने में निहारा और बड़ी शरमाते हुए अपने कपडे उठा लिए मुझे लगा था की वो अपना तोलिया गिरा देगी लेकिन उसकी शर्म ने मेरी जान की इज्जत मेरी नजरो में और बढ़ा दी,वो अकेले में भी अपने नग्नता से शर्मा रही थी, वही नग्नता जिसका भोग मै महीनों से करता आ रहा था,उसने बड़े सलीके से अपनी साड़ी पहन ली और पुरे मनोयोग से सजने लगी,उसने गहरा सिन्दूर अपने माथे में लगाया और चूडियो को हाथो में डाल कर चूम लिया ये देख मेरे दिल में ऐसा प्यार जगा की अभी फोन कर उसे चूम लू।

जब वो सजके तैयार हो गयी तो उठकर बिस्तर के पास आई और मेरी और उसकी फोटो को उठा कर चूम लिया मेरा दिल तो भर आया की कोई किसी को इतना प्यार कैसे कर सकता है,वो कमरे से बहार किचिन मे चली गयी और मैं अपनी ही सोच में डूब गया,की मैं कितना खुश किस्मत हु,लगभग 1 घंटे तक कमरा खाली रहा।

लेकिन अचानक किसी के हसने की आवाज आई मैं विडिओ फॉरवर्ड करके देख रहा था लेकिन कुछ परछाई सी कमरे में हुई जैसे कोई हाल में चल रहा हो,मैंने विडिओ फिर से देखा मुझे आवाजे भी सुनाई दी, जैसे कुसुम हँस हस कर वीडियो काल पर चलते हुए बातें कर रही है...मेरा माथा खनका,मैंने कुछ बुरा नहीं सोचा था न ही सोचना चाहता था,पर ये अजीब था,क्योंकि मेरी बीवी कुसुम किसी गैर मर्द से वीडियो काल पर ऐसे हँस हस कर बातें कर रही थी।

लगभग 1 घंटे के सन्नाटा के बाद, कुसुम रूम में आई आते ही उसने मेरे फोटो को ऐसे ही चूमा जैसे जाने के पहले,उसके चहरे में संतोष के भाव थे तब......वो फिर से बाथरूम चली गयी और घर में ताला लगाकर शायद ऑफिस चली गई,.....।

इस विडियो ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया दिल कुछ गलत सोचने से भी इंकार कर रहा था पर दिमाग ने एक अंतर्द्वंद की स्तिथि पैदा कर दी थी, कुसुम का प्यार महसूस कर और देखकर मैं सोच भी नही पा रहा था की वो मुझे कभी धोखा भी देगी,मैंने आँखों देखि साँच पर ही विश्वाश करने की ठान ली,और भगवान से दुआ की की मेरा दिमाग गलत हो,..........।

और इधर मेरा दोस्त कार्तिक मुझ पर जल्दी ही ‘कुछ’ करने का दबाव बनाने लगा और मैं भी अब कुछ करने को बैचैन हो रहा था क्यूँकि उसकी बीवी डॉली वाकयी बहुत ही हसीन और सेक्सी थी इसमें कोई शक नहीं था और ऊपर से भोली-भाली और निहायत शर्मीली भी ! अगले दिन से मैने अपने मित्र कार्तिक के घर शाम के समय उसकी पत्नी डॉली को कार driving सिखाना शुरु कर दिया।

कुछ बातें मैं संक्षेप में बता देता हूँ, उनके पास एक पुरानी वेगन आर कार थी जिसमे डॉली को मैंने ले जाना शुरू किया, उसका ध्यान सही में ड्राइविंग में था और मेरा उसमें, मुझे उसको छूने पकड़ने के बहुत मौके मिलते थे, शुरू में उसे अज़ीब लगा उसने कार्तिक को भी इस बारे में मेरी शिकायत कि पर उसने नज़रअंदाज़ भी किया और उसे कहा भी कि ‘अरुण ऐसा ही है और फिर तुम अपना मतलब देखो कार सीखने का और थोड़ी बिंदास बनो !’ और फिर उसे ड्राइविंग में मज़ा भी आ रहा था और धीरे धीरे डॉली को मेरा हंसी मज़ाक, मेरा बिंदास व्यवहार पसंद भी आने लगा।

किसी छिनार के साथ बैठने से भी ज्यादा मज़ा डॉली के साथ चिपक कर बैठने उसे छूने और उसके साथ शरारतें करने में आ रहा था मुझे, पर यह सब कार्तिक नहीं देख पा रहा था क्यूंकि वेब कैम तो घर में लगे हुए थे।

आखिर कार्तिक के दवाब के आगे झुकते हुए मैंने एक दिन सच में डॉली के वक्ष-उभार दबा ही दिए ! हुआ यूँ कि उससे सीट-बेल्ट नहीं लग रही थी, वो परेशान होकर बोली- न जाने क्यूँ नहीं लग रही? सीट-बेल्ट छोटी है शायद !

मैंने शरारत से उसके बूब्स दबाते हुए कहा- सीट-बेल्ट छोटी नहीं है मैडम, तुम्हारे ये चूचे बहुत बड़े बड़े हैं, एकदम मस्त और टाइट।

वो हक्की-बक्की रह गई और ‘धत्त !!! ये क्या कर रहे हो?’ कहते हुए मेरा हाथ हटा दिया।

मैंने कहा- इसमें गलत क्या कहा मैंने? ये तो नारी की सुंदरता के ‘उभार’ हैं !

वो बोली- मुझे ऐसी बातें अच्छी नहीं लगती !

मैं चुप हो गया और फिर उस दिन कुछ नहीं बोला और अगले दिन से डॉली के पास जाना बंद कर दिया। यह बात कार्तिक को बता भी दी वो बोला कि इंतज़ार करो, डॉली खुद ही मुझे बुलाएगी।

इस से मुझे थोड़ी आस बँधी कि शायद मुझे कल कोई डॉली का मैसेज या काल से इशारा मिल जाएगा. मगर कयि दिनो के इंतज़ार के बाद भी ना उम्मीदी और हताशा ही हाथ आई. आख़िरकार एक साप्ताह बाद मैने हार मान ली, शायद इस विषय पर हम दोनों दोस्त आपस में अब ज्यादा बातचीत नही कर सकते थे.

कार्तिक से उम्र में बड़ा और अधिक समझदार होने के कारण मैने भी बढ़ावा देने की बजाए चुप रहने में ही भलाई समझी, और कार्तिक ने भी शायद कोई इशारा ना देकर उसने मुझे उसकी पत्नी से दूर रहने का संकेत दिया था. खैर कुछ भी हो अब वो विषय बंद हो चुका था. अंत में जब मैने एक साप्ताह गुजर जाने के बाद उसके इशारे की उम्मीद छोड़ी तो मेरा मन कुछ शांत पड़ गया था. मैं अपने सपनो, अपनी रंग बिरंगी काल्पनिक दुनिया में लौट गया जहाँ कार्तिक की बीवी डॉली की मौजूदगी अब बहुत कम हो गयी थी और मैं अब सिर्फ़ अपनी बीवी कुसुम को ही छिपे केमरो में देख कर अपनी सपनो की ख़याली दुनिया में मुट्ठ मारता. और यह थोड़ा अच्छा भी था क्योंकि 'मैं कम से कम खुद को किसी मन पसंद स्त्री के द्वारा ठुकराया हुआ महसूस तो नही करता था'.

मेरी यह चुप्पी मेरी असली ज़िंदगी में भी दिखाई देने लगी थी. मेरी लाडो रिंकी का ध्यान भी इस ओर गया और कुछ दिनो बाद जब हम खाना खा रहे थे तो उसने पूछा " पापा तुम ठीक तो हो?"

"मैं ठीक हूँ" मेने जवाब दिया "बस यह हल्का सा सरदर्द कयि दिनो से परेशान कर रहा है"

उस रात जब मैं अपने बेड में लेटा हुआ था तो वो मेरे कमरे में आई. उसके एक हाथ में पानी का गिलास था और दूसरे हाथ में कुछ देसी दवाई थी जिसका नुस्ख़ा मेरे पूज्य पिताजी ने इज़ाद किया था.

"यह लो, इससे तुम्हे राहत मिलेगी. मेरे सरदर्द में मुझे हमेशा इससे आराम आता है" दोनो चीज़ें मुझे पकड़ाते हुए वो बोली.

"मेरे सरदर्द" उसका क्या मतलब था मैं नही जानता था. या तो उसे मेरे जैसा सिरदर्द था जिसका मतलब उसे भी मेरे वाली ही बीमारी (मनपसंद पुरुष से ठुकराई हुई लड़की) थी. या वो साधारण सरदर्द की बात कर रही थी और वो बस मेरी बेटी होने के नाते मेरी मदद कर रही थी.

उस रात सपना देखते हुए मेरे जिस्म से असीम वीर्य निकला जब मैं अपनी बेटी को सपने में चोदते हुए उस गहराई तक पहुँच गया. अपनी बेटी के साथ चुदाई के सपने देखना ठीक था मगर उसे असलियत में करना मेरे लिए ठीक नही था.

अगली सुबह मैं देर तक सोता रहा. वो मेरे रूम में आई और मेरे पास बैठ गयी.

"कुछ फरक पड़ा?' उसने पूछा.

मैं उसके जिस्म से निकलने वाली गर्मी को महसूस कर रहा था. वो मेरे इतने नज़दीक बैठी थी कि मेरा दिल करता था कि हाथ आगे बढ़ा कर बस उसे छू लूँ. "नही अभी भी पहले जैसा ही है" मेने उसे जवाब दिया

उसने हाथ बढ़ा कर मेरे माथे को छुआ और बोली "शुक्र है तुम्हे बुखार नही है, इसलिए चिंता मत करो जल्दी ठीक हो जाओगे"

उसका हाथ नाज़ुक और गरम महसूस हो रहा था. हाथ की कोमलता का एहसास बिल्कुल नया था. ना जाने कितने समय बाद हम दोनो किसी शारीरिक संपर्क में आए थे. और हमारे बीते दिनों की घटनाओ के बाद मेरी बेटी का स्पर्श बहुत सुखद था.

आज सुबह के नाश्ते समय एक अजीब सी शांति थी, कोई किसी से बात नहीं कर रहा था। मै चोरी छुपे रिंकी की छाती पर नज़र फिरा कर टॉप के अंदर तक झांक लेना चाहता था।

वहीं रिंकी भी जानती थी कि पापा क्या देख रहे हैं। आज वो ज्यादा तन कर बैठी थी।

पापा देख रहे हैं इसलिए वो शेप खराब नही होने देना चाहती।

नाश्ता कर मै उठा और रोजाना की तरह अपने कॉलेज का बैग लेकर ड्यूटी पर जाने से पहले रिंकी से बाय बाय किया लेकिन आज उसके नजदीक जाते समय बाय करते वक़्त मैने रिंकी के गाल पर हाथ भी फिरा दिया।

उसी दोपहर जब मै कॉलेज में लेक्चर दे रहा था मेरे पिताजी का फोन आया वो और मम्मी किसी दूर के रिश्तेदार के यहाँ 'गमी' में जा रहे थे और अगले दिन सुबह तक वापिस आने वाले थे। ये मौका मेरे लिए "आज नही तो कभी नही" वाला था।

जारी है.... ✍️
 
बहुत बहुत आभार प्यारे से मंतव्य के लिए, मेरे लिए आप रीडर के एक एक शब्द बहुत कीमती है, और हर राइटर लालची होता है, वो चाहता है उसके शब्द कोश में आप रीडर्स के शब्दों का भंडार हो। बस इतना फर्क है। वैसे मुझ जैसे नवोदित लेखक के लिए आपके लिखे गए एक दो शब्द ही बहुत होंसला देते है। इसी तरह होंसला देते रहिये 🙏

धन्यवाद भाई
 
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