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- Dec 5, 2013
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Update- 61
नीलम ने दोनों को देखकर शर्माने का दिखावा करते हुए अपना पल्लू उठाकर अपने खजाने को ढका और बगल में रखी मचिया पर बैठ गयी, बिरजू और महेन्द्र नाश्ता करने लगे तो बिरजू ने नीलम के नाश्ते की प्लेट उसको थमाते हुए बोला- बेटी तू भी नाश्ता कर न, बस हमे ही खिलाएगी।
नीलम- बाबू आपलोग कर लीजिए नाश्ता मैं थोड़ी देर बाद कर लूँगी।
बिरजू- अरे अभी कर न हमारे साथ, थोड़ी देर बाद तो दोपहर के भोजन का वक्त हो जाएगा तब क्या नाश्ता लेके बैठेगी क्या?
सब हंसने लगे, नीलम ने भी फिर नाश्ता किया और वो थकी मांदी दोपहर का खाना बनाने की तैयारी करने के लिए घर में जाने लगी तो जाते वक्त उसने पलटकर बिरजू को बोला- बाबू जरा सुनिए
बिरजू- बेटा तुम आराम से खाट पर लेटो, आराम करो मैं आता हूँ।
महेन्द्र- ठीक है बाबू जी।
बिरजू नीलम के पीछे पीछे घर में गया और जैसे ही दोनों आंगन में पहुँचे बिरजू ने नीलम को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया, लंड तो उसका घर में प्रवेश करते वक्त ही खड़ा हो चुका था, लंड सीधा नीलम की मखमली 36 साइज की गाँड़ की दरार में साड़ी के ऊपर से जा के घुसा तो नीलम चिहुँक उठी- कितना खड़ा कर रखे हो बाबू, आपके दामाद है बाहर थोड़ा सब्र रखो, आ गए तो, अनर्थ हो जाएगा।
बिरजू- तूने पल्लू से क्यों ढक लिया था चूची को, कुछ देर तो देखने देती, मेरी रांड
नीलम- हाय...बाबू.... रांड बोलते हो तो मैं गनगना जाती हूँ, अब देखो दोनों ही लोग एक टक घूरे जा रहे थे, कुछ तो शर्म का दिखावा करना पड़ता है न, और वैसे भी रात भर दर्शन तो किया है इनका और दर्शन ही क्या जी भरकर चूसा और सहलाया, दबाया है इसको बाबू अभी मन नही भरा क्या बिटिया की चूची से........आआआआआआआहहहहहह......बाबू......धीरे धीरे.......दबाओ चूची......दर्द होता है।
(बिरजू अपने हांथों को आगे ले जाकर नीलम की दोनों चूची को ब्लॉउज के ऊपर से ही हथेली में भरकर दबाने लगता है, दोनों निप्पल को कस के मसक देता है)
बिरजू- इससे भी कोई मन भरता है क्या, क्या चूची है तेरी बिटिया, तेरे पसीने की खुश्बू ने तो मदहोश कर दिया मुझे।
नीलम- और सूँघोगे बाबू बेटी का पसीना।
बिरजू- सुंघा दे, जल्दी से
नीलम ने अपने दोनों हाँथ ऊपर करके पीछे बिरजू के गले से लपेट दिए और बिरजू मस्ती में चूर होकर अपनी बेटी की दोनों चूचीयों को मसलते हुए उसकी दोनों कांख में नाक लगा कर बारी बारी से दोनों कांख से आ रही पसीने की मदहोश कर देने वाली महक सूंघने लगा। नीलम अपनी आवाज को गले में ही दबा कर होने वाली हल्की हल्की मादक गुदगुदी से सराबोर होकर हल्का हल्का सिसकने लगी। जोश में आकर बिरजू साड़ी के ऊपर से ही नीलम की गाँड़ में जब जब गच्च से अपना लन्ड मारता तो नीलम भी गाँड़ उठा उठा के अपने बाबू के लन्ड का पूरा मजा लेती। साड़ी न होती तो न जाने कब का पूरा लन्ड नीलम की गाँड़ में समा गया होता।
नीलम- बाबू बस करो क्या पता वो घर में ही आ जाएं, अब बस, मैं जरा दोपहर का खाना बना लूं।
(नीलम ने बड़ी मुश्किल से बिरजू को रोका)
बिरजू- बेटी, अभी हम दामाद जी की बात कर ही रहे थे और वो आ भी गए।
नीलम- हाँ बाबू आ तो गए, पर आज उन्हें जाने मत देना, आज रात रोकना, फिर लेंगे हम दोनों असली मजा, एक अलग ही अनुभूति के साथ।
(ऐसा कहते हुए नीलम ने कातिल मुस्कान के साथ अपने बाबू के गाल को हाथों से सहला दिया तो बिरजू के चेहरे पर भी व्यभिचार से मिलने वाले आनंद की अनुभूति को महसूस कर मुस्कान फैल गयी)
नीलम ने बिरजू के कान में कहा- अपनी सगी शादीशुदा बेटी को एक ही बिस्तर पर अपने दामाद के सामने भोगकर पाप का अद्भुत मजा लोगे न बाबू।
बिरजू- आह.... क्यों नही मेरी रांड...जरूर.....तेरी इच्छा जरूर पूरी करूँगा, कितना मजा आएगा बगल में मेरा दामाद लेटा होगा और मैं अपनी ही सगी बेटी की बूर चोदूंगा.....हाय...बेटी के साथ....पाप का मजा
(ऐसा कहते हुए बिरजू ने एक हाँथ आगे ले जाकर साड़ी के ऊपर से ही नीलम की फूली हुई बूर को दबोच लिया, बूर पर अपने सगे बाबू का हाथ लगने से नीलम वासना से भर गई और
अपने बाबू के मुँह से '"बूर" और "पाप" शब्द सुनकर नीलम की भी सिसकी निकल गयी)
नीलम उखड़ती सांसों से बोली- पर बाबू ये होगा कैसे, कैसे ये इच्छा पूरी होगी? सोच तो लिया हमने पर....
(नीलम ने अपने एक हाँथ से अपने बाबू का वो हाँथ पकड़ा जो उसकी बूर को साड़ी के ऊपर से सहला रहा था और खुद भी अपने हाँथ से अपने बाबू के हाँथ को अपनी बूर पर दबाने लगी पर थोड़ा उदास सी हो गयी, बिरजू भी सोचने लगा, पर कुछ देर बाद)
बिरजू- एक रास्ता है।
नीलम - क्या?
बिरजू- मेरा एक मित्र है बहुत पुराना, उसका जड़ी बूटियों से बहुत लगाव है, अक्सर वो मुझे अपनी खोजी हुई जड़ी बूटियों के बारे में बताता रहता है, की ये जड़ी बूटी ये काम करती है, ये वाली इस चीज़ पर असर करती है, उस चीज़ को ठीक कर देती है वगैरह वगैरह, पर मैं ज्यादा ध्यान नही देता था, मैं सोच रहा हूँ उसके पास जाऊं, क्या पता कुछ उपाय हो उसके पास।
नीलम- पर बाबू आप उनसे कहेंगे क्या?, और वैसे भी रात भर बारिश हुई है, खेत खलिहान में पानी भरा है, वो आपका मित्र रहता कहाँ है?, घर कहाँ है उसका?
बिरजू- अरे वो मैं उससे अपने तरीके से बात कर लूंगा, वो दूसरे गांव में रहता है, उत्तर की तरफ जो गांव है न बंसीपुर उसी गांव में है उसका घर, ज्यादा दूर नही है, तीन चार घंटे में होके वापिस आ सकते हैं।
नीलम- तो जाइये न बाबू, कैसे भी करके।
बिरजू- हाँ बेटी जाता हूँ, मुझे न जाने क्यों ऐसा लग रहा है कि हो न हो उसके पास कोई ऐसी जड़ी बूटी तो जरूर होगी जो इंसान को बेसुध या नशे में कर दे।
नीलम- बाबू.....पर मेरी इच्छा हो रही है कि वो होश में रहें और सब देखें, पर कुछ कर न सकें, अगर वो सोते रहेंगे तो क्या फायदा, और अगर नशे में भी रहेंगे तो भी क्या फायदा, काश ऐसा हो जाये की हम उन्हें दिखाकर पाप करें.....बाबू उस पाप का नशा ही कुछ और होगा, एक अद्बुत अहसास एक अलग आनंद।
बिरजू नीलम को चूमते हुए- तू चिंता न कर मेरी बेटी, कुछ न कुछ हल होगा जरूर उसके पास, दामाद जी को दिखाकर ही अपनी बिटिया को चोदूंगा।
नीलम के चेहरे पर वासना भारी मुस्कान फैल गयी- ठीक है आप जाइये, तब तक मैं दोपहर का खाना बनाती हूँ।
बिरजू- मैं वहां दोपहर में जाऊंगा ताकि शाम तक आ जाऊं, अभी मैं दामाद को लेकर खेत वगैरह दिखाने जाता हूँ, तू तबतक खाना बना लेना और हां थोड़ा आराम कर लेना, सो जाना....ठीक है....मेरी बच्ची
नीलम- मेरी बच्ची नही.....मेरी रांड बोलो....रांड...... आपकी रांड हूँ न
बिरजू- हाय.... मेरी रांड
नीलम- हाँ अब ठीक.........तो ठीक है आप जाइये बाबू मैं खाना बनाती हूँ।
बिरजू नीलम के होंठों को चूमकर अपना खड़ा लंड सही करता हुआ बाहर निकल जाता है और नीलम अपने पिता को ऐसा करता देखकर हंस पड़ती है और अपनी जाँघों को आपस में दबाकर रिसती हुई अपनी बूर को हल्का सा जाँघों से भींच देती है।
नीलम ने दोनों को देखकर शर्माने का दिखावा करते हुए अपना पल्लू उठाकर अपने खजाने को ढका और बगल में रखी मचिया पर बैठ गयी, बिरजू और महेन्द्र नाश्ता करने लगे तो बिरजू ने नीलम के नाश्ते की प्लेट उसको थमाते हुए बोला- बेटी तू भी नाश्ता कर न, बस हमे ही खिलाएगी।
नीलम- बाबू आपलोग कर लीजिए नाश्ता मैं थोड़ी देर बाद कर लूँगी।
बिरजू- अरे अभी कर न हमारे साथ, थोड़ी देर बाद तो दोपहर के भोजन का वक्त हो जाएगा तब क्या नाश्ता लेके बैठेगी क्या?
सब हंसने लगे, नीलम ने भी फिर नाश्ता किया और वो थकी मांदी दोपहर का खाना बनाने की तैयारी करने के लिए घर में जाने लगी तो जाते वक्त उसने पलटकर बिरजू को बोला- बाबू जरा सुनिए
बिरजू- बेटा तुम आराम से खाट पर लेटो, आराम करो मैं आता हूँ।
महेन्द्र- ठीक है बाबू जी।
बिरजू नीलम के पीछे पीछे घर में गया और जैसे ही दोनों आंगन में पहुँचे बिरजू ने नीलम को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया, लंड तो उसका घर में प्रवेश करते वक्त ही खड़ा हो चुका था, लंड सीधा नीलम की मखमली 36 साइज की गाँड़ की दरार में साड़ी के ऊपर से जा के घुसा तो नीलम चिहुँक उठी- कितना खड़ा कर रखे हो बाबू, आपके दामाद है बाहर थोड़ा सब्र रखो, आ गए तो, अनर्थ हो जाएगा।
बिरजू- तूने पल्लू से क्यों ढक लिया था चूची को, कुछ देर तो देखने देती, मेरी रांड
नीलम- हाय...बाबू.... रांड बोलते हो तो मैं गनगना जाती हूँ, अब देखो दोनों ही लोग एक टक घूरे जा रहे थे, कुछ तो शर्म का दिखावा करना पड़ता है न, और वैसे भी रात भर दर्शन तो किया है इनका और दर्शन ही क्या जी भरकर चूसा और सहलाया, दबाया है इसको बाबू अभी मन नही भरा क्या बिटिया की चूची से........आआआआआआआहहहहहह......बाबू......धीरे धीरे.......दबाओ चूची......दर्द होता है।
(बिरजू अपने हांथों को आगे ले जाकर नीलम की दोनों चूची को ब्लॉउज के ऊपर से ही हथेली में भरकर दबाने लगता है, दोनों निप्पल को कस के मसक देता है)
बिरजू- इससे भी कोई मन भरता है क्या, क्या चूची है तेरी बिटिया, तेरे पसीने की खुश्बू ने तो मदहोश कर दिया मुझे।
नीलम- और सूँघोगे बाबू बेटी का पसीना।
बिरजू- सुंघा दे, जल्दी से
नीलम ने अपने दोनों हाँथ ऊपर करके पीछे बिरजू के गले से लपेट दिए और बिरजू मस्ती में चूर होकर अपनी बेटी की दोनों चूचीयों को मसलते हुए उसकी दोनों कांख में नाक लगा कर बारी बारी से दोनों कांख से आ रही पसीने की मदहोश कर देने वाली महक सूंघने लगा। नीलम अपनी आवाज को गले में ही दबा कर होने वाली हल्की हल्की मादक गुदगुदी से सराबोर होकर हल्का हल्का सिसकने लगी। जोश में आकर बिरजू साड़ी के ऊपर से ही नीलम की गाँड़ में जब जब गच्च से अपना लन्ड मारता तो नीलम भी गाँड़ उठा उठा के अपने बाबू के लन्ड का पूरा मजा लेती। साड़ी न होती तो न जाने कब का पूरा लन्ड नीलम की गाँड़ में समा गया होता।
नीलम- बाबू बस करो क्या पता वो घर में ही आ जाएं, अब बस, मैं जरा दोपहर का खाना बना लूं।
(नीलम ने बड़ी मुश्किल से बिरजू को रोका)
बिरजू- बेटी, अभी हम दामाद जी की बात कर ही रहे थे और वो आ भी गए।
नीलम- हाँ बाबू आ तो गए, पर आज उन्हें जाने मत देना, आज रात रोकना, फिर लेंगे हम दोनों असली मजा, एक अलग ही अनुभूति के साथ।
(ऐसा कहते हुए नीलम ने कातिल मुस्कान के साथ अपने बाबू के गाल को हाथों से सहला दिया तो बिरजू के चेहरे पर भी व्यभिचार से मिलने वाले आनंद की अनुभूति को महसूस कर मुस्कान फैल गयी)
नीलम ने बिरजू के कान में कहा- अपनी सगी शादीशुदा बेटी को एक ही बिस्तर पर अपने दामाद के सामने भोगकर पाप का अद्भुत मजा लोगे न बाबू।
बिरजू- आह.... क्यों नही मेरी रांड...जरूर.....तेरी इच्छा जरूर पूरी करूँगा, कितना मजा आएगा बगल में मेरा दामाद लेटा होगा और मैं अपनी ही सगी बेटी की बूर चोदूंगा.....हाय...बेटी के साथ....पाप का मजा
(ऐसा कहते हुए बिरजू ने एक हाँथ आगे ले जाकर साड़ी के ऊपर से ही नीलम की फूली हुई बूर को दबोच लिया, बूर पर अपने सगे बाबू का हाथ लगने से नीलम वासना से भर गई और
अपने बाबू के मुँह से '"बूर" और "पाप" शब्द सुनकर नीलम की भी सिसकी निकल गयी)
नीलम उखड़ती सांसों से बोली- पर बाबू ये होगा कैसे, कैसे ये इच्छा पूरी होगी? सोच तो लिया हमने पर....
(नीलम ने अपने एक हाँथ से अपने बाबू का वो हाँथ पकड़ा जो उसकी बूर को साड़ी के ऊपर से सहला रहा था और खुद भी अपने हाँथ से अपने बाबू के हाँथ को अपनी बूर पर दबाने लगी पर थोड़ा उदास सी हो गयी, बिरजू भी सोचने लगा, पर कुछ देर बाद)
बिरजू- एक रास्ता है।
नीलम - क्या?
बिरजू- मेरा एक मित्र है बहुत पुराना, उसका जड़ी बूटियों से बहुत लगाव है, अक्सर वो मुझे अपनी खोजी हुई जड़ी बूटियों के बारे में बताता रहता है, की ये जड़ी बूटी ये काम करती है, ये वाली इस चीज़ पर असर करती है, उस चीज़ को ठीक कर देती है वगैरह वगैरह, पर मैं ज्यादा ध्यान नही देता था, मैं सोच रहा हूँ उसके पास जाऊं, क्या पता कुछ उपाय हो उसके पास।
नीलम- पर बाबू आप उनसे कहेंगे क्या?, और वैसे भी रात भर बारिश हुई है, खेत खलिहान में पानी भरा है, वो आपका मित्र रहता कहाँ है?, घर कहाँ है उसका?
बिरजू- अरे वो मैं उससे अपने तरीके से बात कर लूंगा, वो दूसरे गांव में रहता है, उत्तर की तरफ जो गांव है न बंसीपुर उसी गांव में है उसका घर, ज्यादा दूर नही है, तीन चार घंटे में होके वापिस आ सकते हैं।
नीलम- तो जाइये न बाबू, कैसे भी करके।
बिरजू- हाँ बेटी जाता हूँ, मुझे न जाने क्यों ऐसा लग रहा है कि हो न हो उसके पास कोई ऐसी जड़ी बूटी तो जरूर होगी जो इंसान को बेसुध या नशे में कर दे।
नीलम- बाबू.....पर मेरी इच्छा हो रही है कि वो होश में रहें और सब देखें, पर कुछ कर न सकें, अगर वो सोते रहेंगे तो क्या फायदा, और अगर नशे में भी रहेंगे तो भी क्या फायदा, काश ऐसा हो जाये की हम उन्हें दिखाकर पाप करें.....बाबू उस पाप का नशा ही कुछ और होगा, एक अद्बुत अहसास एक अलग आनंद।
बिरजू नीलम को चूमते हुए- तू चिंता न कर मेरी बेटी, कुछ न कुछ हल होगा जरूर उसके पास, दामाद जी को दिखाकर ही अपनी बिटिया को चोदूंगा।
नीलम के चेहरे पर वासना भारी मुस्कान फैल गयी- ठीक है आप जाइये, तब तक मैं दोपहर का खाना बनाती हूँ।
बिरजू- मैं वहां दोपहर में जाऊंगा ताकि शाम तक आ जाऊं, अभी मैं दामाद को लेकर खेत वगैरह दिखाने जाता हूँ, तू तबतक खाना बना लेना और हां थोड़ा आराम कर लेना, सो जाना....ठीक है....मेरी बच्ची
नीलम- मेरी बच्ची नही.....मेरी रांड बोलो....रांड...... आपकी रांड हूँ न
बिरजू- हाय.... मेरी रांड
नीलम- हाँ अब ठीक.........तो ठीक है आप जाइये बाबू मैं खाना बनाती हूँ।
बिरजू नीलम के होंठों को चूमकर अपना खड़ा लंड सही करता हुआ बाहर निकल जाता है और नीलम अपने पिता को ऐसा करता देखकर हंस पड़ती है और अपनी जाँघों को आपस में दबाकर रिसती हुई अपनी बूर को हल्का सा जाँघों से भींच देती है।