Incest बैलगाड़ी,,,,, - Page 11 - SexBaba
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Incest बैलगाड़ी,,,,,

राजू अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड देखकर ललचाते हुए खेत में पहुंच चुका था,,, शाम के वक्त जो कुछ भी हुआ था उसे देखते हुए राजू को लगने लगा था कि आज खेत में वह अपनी मां की चुदाई कर रही लेगा क्योंकि उसकी मां भी पूरी तरह से राजी थी,,,,,,, खेत में पहुंचने के बाद राजू अपने खेत के बीचो-बीच खड़ा होकर चारों तरफ देख रहा था खेत में काम करने जैसा कुछ भी नहीं था वह अपने मन में सोचने लगा था कि उसकी मां जानबूझकर एक बहाने से उसे खेत में काम करने के लिए इधर लाई है यह सोच कर ही उसके मन में लड्डू फूटने लगा,,, वह अपने मन में सोचने लगा कि उसकी मां का भी मन है उससे चुदवाने का इसीलिए एक बहाने से यहां पर ले कर आई है,,,लेकिन राजू अपनी तरफ से पहल नहीं करना चाहता था वह देखना चाहता था कि उसकी मां पहल करते हुए क्या करती है,,, कौन सी हरकत करती है,,,, चुदाई में औरतों के पहल का भी एक अपना अलग मजा होता है उसी मजा का आनंद लेना चाहता था राजू,,,, राजू इस बात से पूरी तरह से आश्वस्त हो चुका था कि आप उसकी मां उसकीबाहों में है मंजिल दूर नहीं है वह जल्द ही अपनी मां की दोनों टांगों के बीच पहुंच जाएगा यही सोचता हुआ अपनी मां से बोला,,,।





यहां कौन सा काम करना है मां,,,, मुझे नहीं लगता कि खेतों में काम करने की जरूरत है,,,

जरूरत क्यों नहीं है,,,(अपने दोनों हाथों को कमर पर रखते हुए वह जमीदार वाली अंदाज में बोली ऐसा करने से उसकी लाजवाब बड़ी बड़ी छातिया बाहर की तरफ निकल कर राजू को पूरा का पूरा अपने अंदर निकल जाने की तैयारी में दिखाई दे रही थी,,,, जिस पर नजर पड़ते हैं राजू के तन बदन में उत्तेजना की तरह दौड़ने लगी क्योंकि राजू अपनी मां की नंगी चूचियों को बहुत बार देख चुका था और उसे मालूम था कि उसकी मां की चूचियां बड़ी बड़ी खरबूजे जैसी है जो कि उसके ब्लाउज में भी ठीक तरह से समा नहीं पाती हैं,,,,राजू अपने मन में सोच रहा था कि पता नहीं कैसे उसकी मा ईतनी बड़ी बड़ी चूचियों को अपने वश में करके रखती है और उसी चुचियों की वजह से अपने पति को भी पूरी तरह से अपने वश में करके रखी है,,,,अपनी मां की सूचियों के आकार को देखकर राजू को इस बात का एहसास हुआ कि वह स्वयं और उसके पिताजी ही क्यों गांव के सभी बूढ़े बड़े उसकी मां की चुचियों के दीवाने होंगे क्योंकि अपनी कल्पना में अपनी आंखों के पलकों से उसकी मां के एक एक वस्त्र उतारकर नंगी करते होंगे और उसके नंगे बदन से कल्पना में ही खेलते होंगे,,,। अपनी मां की बात सुनकर राजू बोला,,,)

तो बताओ ना क्या करना है मां,,,।

देख नहीं रहा है खेतों में कितनी हरी हरी घास उग‌ आई है इसे उखाड़ना है ताकि इसमें अच्छे से बीज लगाया जा सके,,,,।

हां यह बात तो है,,,,

तो फिर इंतजार किस बात का है उखाड़ना शुरू कर,,,,

(अपनी मां की बात सुनते ही राजू किसी भी प्रकार से पहल ना करते हुए घास को उखाड़ना शुरू कर दिया,,,, उसकी मां राजू को ही देख रही थी उसे लग रहा था कि खेतों में पहुंचकर राजू अपनी हरकत करना शुरू कर देगा और वह उसी समय उसे समझाएगी लेकिन यहां तो ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा था,,, राजू तू अपने ही काम में लगा हुआ था मधु को अपने बेटे की हरकत के बारे में बात करने की शुरुआत करने में भी शर्म महसूस हो रही थी वह अपने मन में सोच रही थी कि आज किसी भी तरह से वह राजू को अपनी हरकत को आगे ना बढ़ाने के लिए समझाएंगी और यही सोचते हुए मधु की खेतों में से घास को उखाड़ना शुरू कर दी,,,, ,,,

राजू घास को भले ही उखाड़ रहा था लेकिन उसका सारा ध्यान अपने मां के ऊपर था क्योंकि उसे हर हाल में अपनी मां को देखना भी उत्तेजित कर देता था,,,, अपनी मां का कसा हुआ बदन देखकर उसके लंड की अकड़ बढ़ जाती थी,,, कभी-कभी तो उसे अपने पिताजी की किस्मत पर गुस्सा आ जाता था क्योंकिवह सोचता था कि इतनी खूबसूरत औरत है उसके पिताजी के किसी कोने कैसे आ गई क्योंकि उसके पिताजी मरियल से शरीर वाले थे लेकिन इस बात को राजू अच्छी तरह से जानता था कि जुदाई में उसके पिताजी पीछे बिल्कुल भी नहीं हटते थे तभी तो उसकी मा टीकी हुई थी वरना ना जाने अब तक गांव के कई मर्दों के सामने अपनी टांग खोल दी होती इस बात को राजू अपने मन में इसलिए सोच रहा था क्योंकि वह गांव की औरतों की भावनाओं को अच्छी तरह से समझ चुका था क्योंकि धीरे-धीरे वह गांव की कई औरतों की चुदाई कर चुका था जो कि अपने घर में अपने पति से संतुष्ट नहीं थी या तो फिर उन्हें चुदाई का सुख चाहिए,,,, राजू अपने कमरे के छोटे से छेद से अपनी मां और अपने पिताजी की कामलीला को अपनी आंखों से कई बार देख चुका था एक भी दिन खाली नहीं जाता था जब दोनों चुदाई नहीं करते थे इसलिए राजू को इस बात का एहसास था कि उसकी मां को भी चुदवाए बिना चैन नहीं आता था,,,, अपनी मां की तरफ देखते हुए राजू को श्याम की किस्मत पर गर्व होता था कि उसकी किस्मत इतनी अच्छी है कि वह जब चाहे तब अपनी मां की चुदाई कर सकता है और एक वो है,,, के सिर्फ इंतजार में हैं,,,,।,,, घास को उखाडते हुए रांची में देखना चाहता था कि उसकी मां के मन में क्या चल रहा है इसलिए वह अपनी मां से बोला,,,।

तुम क्यों आई मां मुझे ही बता दी होती तो मैं कर दिया होता,,,



तेरे अकेले से यह होने वाला नहीं है मेरे बिना तो यह काम नहीं कर सकता था,,,।

(अपनी मां की बात सुनते ही राजू को लगने लगा कि कहीं उसकी मां बातों ही बातों में उसे इशारा तो नहीं दे रही है अपने मन में सोचने लगा कि लगता है उसकी मां चुदाई के बारे में बात कर रही है क्योंकि वह अकेले से नहीं हो सकता उसमें एक मर्द और औरत की जरूरत होती है,,,, राजू अपनी मां की बात सुनकर मन ही मन खुश हो रहा था और वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,)

अरे मां बता दी होती तो मैं खुद अकेला ही कर लेता,,,

मैं बोल रही हूं ना तुझसे अकेले नहीं होने वाला और वैसे भी तुझे बता कर भी कोई फायदा नहीं था तो खेत में खड़ा होकर भी पूछ रहा था कि करना क्या है,,,,।

(मधु सहजता से औपचारिक बात कर रही थी लेकिन राजू की आंखों में वासना की पट्टी पड़ी हुई थी इसलिए उसे अपनी मां की बात भी दो अर्थ वाली लग रही थी,,,,उसे लग रहा था कि जैसे उसकी मां उसे ही पहल करने के लिए बोल रही थी,,,,राजू का मन तो कर रहा था कि अपनी मां को जाकर बाहों में भर दे और उसके होठों पर चुंबन करना शुरू कर दें लेकिन अभी अपने आप को रोक कर रखा हुआ था वह देखना चाहता था कि उसकी मां अगर शुरुआत करेगी तो कैसे करेगी,,,, इसलिए वह भी सहज होता हुआ बोला,,)

चलो कोई बात नहीं हम दोनों मिलकर अच्छे से खेत का काम कर लेंगे,,,,।

(एक तरफ अपनी मां के बातों का गलत अर्थ निकाल कर राजू मन ही मन खुश हो रहा था और दूसरी तरफ मधु अपने मन में यही सोच रही थी कि अपने बेटे को समझाने की शुरुआत कैसे करें हालांकि धीरे-धीरे उसकी पैनी नजरें अपने बदन पर घूमती हुई उसे अच्छी लगने लगी थी,,,अपने बेटे की वासना भरी नजरों से उसे इस बात का एहसास होता था कि अभी भी वह पूरी तरह से जवान है और अपनी जवानी से किसी भी जवान लड़के को अपने बस में कर सकती हैं,,,।यही सब सोचते सोचते हैं वह घास को काटते हुए कब राजू के ठीक सामने आ गई उसे पता ही नहीं चला वह राजू से तकरीबन डेढ़ मीटर की दूरी पर बैठकर घास काट रही थी उसकी पीठ राजू की तरफ थी,,, जब-जब मधु घास काटते हुए आगे की तरफ झुकती थी तब तक उसकी चोडी गांड राजू की आंखों के सामने हाहाकार मचा दी थी राजू अपनी मां का यह रूप देखकर पूरी तरह से पागल हो जा रहा था,,,,उसके आगे की तरफ झुकने की वजह से उसकी गांड की चौड़ाई और ज्यादा बढ़ जा रही थीजिसे देखकर राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी और उसका मन कर रहा था कि आगे बढ़कर अपनी मां की साड़ी कमर तक उठाते और उसकी चुदाई करना शुरू कर दें,,,,,राजू बड़ी मुश्किल से अपने आप को वश में किए हुए था वरना वह अपने आपे के बाहर चला जाता,,,,,,,।

धीरे-धीरे दोनों घास उखाड़ रहे थे मधुबन जाने में उसकी आंखों के सामने अपनी गांड उठा दे रही थी राजू से जब अपनी आंखों से यह सब कुछ देखते-देखते बर्दाश्त नहीं हुआ तो वह भी दो अर्थ वाली बात करते हुए बोला,,,।

हाय कितनी बड़ी बड़ी है,,,,,

क्या कितनी बड़ी बड़ी है,,,, छोटी-छोटी तो है,,,(मधु अपने बेटे की तरफ देखे बिना ही बोली)

अरे मैं तुम्हें छोटी-छोटी लग रही है ना लेकिन मेरे लिए तो बहुत बड़ी-बड़ी है,,,,

(राजू अपनी मां की गांड के बारे में बात कर रहा था लेकिन मधु यह समझ रही थी कि उसका बेटा घास के बारे में बात कर रहा है,,, इसलिए वह बोली,,,)

तो क्या हुआ तेरे में दम नहीं है क्या ताकत लगाकर खींच ले,,,

हां मां ऐसा ही करना होगा,,,, इस काम में दम होना चाहिए तभी यह काम मुमकिन है,,,

तुझे आज पता चल रहा है,,,, जान में दम रहेगी तभी यह का मुमकिन है इस बात को आज समझ लेना,,,,(मधु राजू की तरफ देखे बिना ही अपनी गांड को हल्के हल्के उठाए हुए घास को उखाड रही थी और राजू से बोल रही थी,,,)

दम तो मेरे में बहुत है,,,, लेकिन इतनी बड़ी बड़ी है कि पूरा दम लगाना पड़ेगा,,,,

तो लगाना दम अगर दम नहीं लगा पाएगा तो मर्द कैसे कहलाएगा आखिर तू एकदम जमाने तेरे में तो दम होना चाहिए,,,,

दम तो मेरे में बहुत है मां,,, लेकिन दम दिखाने का मौका नहीं मिल रहा है,,,,

तो आज इस खेत में अपना दम दिखा दे मैं भी जान जाऊंगी कि तू भी असली मर्द है,,,‌

(राजू अपनी मां की बातों को सुनकर पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा था अपनी मां की बातों को सुनकर उसे लग रहा था कि जैसे उसकी मां उसे इशारा कर रही आगे बढ़ने के लिए उसकी मां उसकी मर्दानगी देखना चाहती है,,, इसलिए वह भी जोश में आकर बोला,,)

बहुत हिम्मत का काम है मां मुझे नहीं लगता कि तुम ज्यादा देर तक टिक पाओगी,,,,

पागल है क्या आज तक में ही तो यह सब करते आई हु मैं तेरे से ज्यादा देर तक टिक कर दिखाऊंगी तुझे अभी मेरी हिम्मत का एहसास नहीं है,,,

एहसास तो है लेकिन कभी देखा नहीं हो ना इसके लिए,,,

तो आज देख लेना,,,, चल अब बातें बंद कर और अपना काम कर देख सूरज सर पर आ गया हैं,,,,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपने काम में आगे बढ़ने लगी,,,, राजू से रहा नहीं जा रहा था राजू के तन बदन में अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड देखकर उत्तेजना की वाला हर उठा रही थी जिसमें वह अपनी मां को खींचे लेकर चले जाना चाहता थाइस बात का उस एहसास हो चुका था कि अब तक उसने कई औरतों की चुदाई कर चुका है लेकिन जो मजा उसे अपनी मां की चुदाई करने में मिलेगा वह मजा किसी और में नहीं मिलने वाला क्योंकि वह अपनी मां को देखकर इतना अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव करने लगता था कि इस तरह की उत्तेजना वह कभी महसूस नहीं किया था,,, इस समय भी उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि जैसे उत्तेजना से उसका लंड फट जाएगा,,,, डेढ़ मीटर की दूरी पर यह अपनी मां कोअपनी बड़ी बड़ी गांड उठाकर घास उतारते हुए देखकर राजू से बिल्कुल भी रहा नहीं किया और वहां एक बार फिर से गरम‌‌आहहह भरते हुए बोला,,,।)

हाय कितनी बड़ी बड़ी है मैंने आज तक ऐसा नहीं देखा,,,

(इस बार मधु को अपने बेटे की आवाज में शरारत और मदहोशी नजर आई इसलिए वहअनजाने में ही अपनी गांड को थोड़ा सा हवा में उठाए हुए ही अपने बेटे की तरफ देखते हुए बोली,,)

क्या नहीं देखा बड़ी-बड़ी,,,?

(इस बार वह अपने मन की बात अपनी मां से कह देना चाहता था क्योंकि आज उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था,,, उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी मां चाहती है कि वह पहल करें क्योंकि कई औरतों की तरफ से उसे इस बात का एहसास हुआ था कि बहन उसे ही करना पड़ा था इसलिए अपनी मां की बात सुनकर वह खुले शब्दों में बोला,,)

तुम्हारी गांड में तुम्हारी गांड के जैसी बड़ी बड़ी गांड मैंने आज तक नहीं देखा और मुझे पूरा यकीन है कि साड़ी उतारने के बाद तुम्हारी गांड एकदम खूबसूरत लगती होगी,,,(राजू एक झटके में ही अपनी मां से खुले शब्दों में बोल चुका था और मधुर अपने बेटे की है बातें सुनकर पूरी तरह से सन्न रह गई,,,अपने बेटे के मुंह से अपनी गांड का जिक्र सुनते हैं उसे इस बात का एहसास हुआ कि इसमें भी उसकी गांड हवा में लहरा रही है इसलिए वह तुरंत ठीक से बैठ गई,,,,और आश्चर्य अपने बेटे की तरफ देखने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या बोले अपनी मां की खामोशी को देखकर राजू कीमत बढ़ने लगी और वह अपनी मां से और भी ज्यादा अश्लील शब्द में बात करते हुए बोला,,,)

सच में मां तूम बहुत खूबसूरत हो पूरे गांव में तुम्हारे जैसी खूबसूरत औरत मैंने आज तक नहीं देखा तुम्हारी बड़ी बड़ी गांड देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता है,,,,मैं तुम्हें नंगी देखना चाहता हूं तुम्हारे नंगे जिस्म को अपनी आंखों से देखना चाहता हूं तुम्हारी बड़ी-बड़ी चूचियां तुम्हारी बड़ी बड़ी गांड अपने हाथों से छूना चाहता हूं,,,, सच में मैं तुम्हारे हुस्न में पागल हो चुका हूं,,, तुम्हारा खूबसूरत बदन मुझे चैन से जीने नहीं देता,,,, तुम्हें पता है ना मैं जब भी तुम्हें देखता हूं तो ना जाने क्यों तुम्हारी बुर के बारे में सोचने लगता हूं,,,,(अपने बेटे के मुंह से इतनी गंदी बात सुनकर खास करके अपने बेटे के मुंह से अपनी बुर के बारे में सुनकर जहां एक तरफ वह हैरान हो चुकी थी वहीं दूसरी तरफ उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी और अपने बेटे की बात सुनकर ही उसकी बुर से मदन रस टपकने लगा था,,)
 
मधु पूरी तरह से हैरान थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसका बेटा उसके साथ गंदी हरकत करने की कोशिश तो कर ही चुका था लेकिन आज उसकी आंखों के सामने उसके सामने बैठकर एकदम अश्लील भाषा में उससे गंदी बात कर रहा था उसकी गांड के बारे में उसकी बुर के बारे में,,,मधु अभी भी उसी तरह से बैठे हुए हवा में अपनी गांड उठाए हुए थे और पीछे नजर घुमाकर अपने बेटे की तरफ देख रही थी और उसकी बातों को सुनकर ईरानी के साथ-साथ उत्तेजित भी हुए जा रही थी,,,, वह हैरान इस बात से थी कि उसके बेटे में अब बिल्कुल भी शर्म नहीं रह गई थी उसके साथ गंदी बात कर रहा था उसकी बुर के बारे में बोल रहा था,,, अपने बेटे के मुंह से ,, वो भी अपनी हीबुर के बारे में सुनकर मधु पूरी तरह से आश्चर्यचकित हो चुकी थी वह आंखें फाड़े राजू की तरफ देख रही थी,,,,तब जाकर उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसकी गांड उसके बेटे के ठीक सामने उठी हुई है और एकदम गदराई हुई नजर आ रही है पल भर में ही मधु के गोरे गोरे गाल शर्म से लाल हो गए और वह तुरंत अपनी गांड को नीचे करते हुए बैठ गई,,,वह हैरान थी कि वह अपने बेटे से क्या बोले उसे कैसे समझाएं कि वह जो कुछ भी कह रहा है और करना चाहता है वह सरासर गलत है,,,,अपनी मां की खामोशी को देखकर राजू का हौसला बढ़ता जा रहा था उसे लगने लगा था कि उसकी मां जो अपनी बड़ी बड़ी गांड को हवा में उठाई हुई है वह बड़े आराम से अपनी गांड को उसके लंड पर रख देगी,,,, इसलिए तो वह मन ही मन प्रसन्न हुआ जा रहा था,,,, राजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,,)

मैं सच कह रहा हूं मां,,, साड़ी में कसी हुई तुम्हारी गांड देखे बिना मुझे चैन नहीं आता भले ही कपड़ों में देखु लेकिन फिर भी ऐसा लगता है कि जैसे तू मेरी आंखों के सामने एकदम नंगी खड़ी हो,,, तुम्हारी हाहाकार मचाती चूचियां हमेशा मेरे होश उड़ा दे मन करता है कि तुम्हारी दोनों चूचियों को अपनी हथेली में जोर-जोर से दबाते हुए बारी-बारी से अपने मुंह में लेकर उसका पूरा दूध पी जाऊं,,,,(अपने बेटे की बात सुनकर उसके संपूर्ण बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी उसे अपने बेटे की नीयत ठीक नहीं लग रही थी आज मधु ऐसा महसूस कर रही थी कि जैसे कोई गैर मर्द उससे अश्लील बातें कर रहा हूं क्योंकि जिस तरह की बातें राजू कर रहा था उसके मुंह से कभी भी मधु इस तरह की कल्पना ही नहीं की थी,,,, शर्म के मारे मधु अपनी नजरों को नीचे झुका ली थी,,,फिर भी हिम्मत करके राजू की तरफ देखे बिना ही वह बोली,,,)

यह क्या कह रहा है राजू तुझे शर्म आनी चाहिए अपनी मां के बारे में इस तरह की गंदी बातें करते हुए,,,,,

शर्म तो बहुत आती है मां लेकिन तुम्हारी खूबसूरती के आगे मुझे कुछ सुझता ही नहीं है,,,,,,

(राजू की बात को सुनकर धीरे-धीरे मधु अपनी जगह पर खड़ी होने लगी थी और साथ ही राजू भी अपनी जगह पर खड़े होते हुए अपनी मां से अश्लील बातें कर रहा था,,, राजू की बात सुनकर दूसरी तरफ मुंह फेरे खड़ी मधु बोली,,,)

तेरी आंखों पर जवानी का पर्दा पड़ चुका है तुझे सही कुछ दिखाई नहीं दे रहा है,,,

तुम्हारी खूबसूरती के आगे मुझे कुछ भी दिखाई नहीं देता,,, सच कहूं तो चारों तरफ मुझे तुम ही तुम दिखाई देने लगी हो,,,,,,,

राजू कैसी बहकी बहकी बातें मत कर मैं कभी नहीं सोची थी कि तू इस तरह से बातें करेगा,,,,

इसमें मेरा कोई भी दोष नहीं है मा, मुझे अब इतना तो समझ में आने लगा कि औरत की खूबसूरती क्या चीज होती है मैं दिन भर घाव भर इधर-उधर घूमता रहता हूं लेकिन तुम्हारी जितनी खूबसूरत औरत मैंने आज तक नहीं देखा,,,,,,

(अपने बेटे की बात को सुनकर मधु को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें एक औरत होने के नाते राजू के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ उसे अच्छी भी लग रही थी,,, लेकिन एक मां होने के नाते उसे अपने बेटे की बातें बेहद गंदी लग रही थी,,,, मधु का दिल अपने बेटे की बात मानने से इनकार कर रहा था लेकिन दिमाग उसकी बातों से गिरा हुआ था जिसका असर उसे अपनी दोनों टांगों के बीच होता हुआ महसूस हो रहा था,,,,अपने बेटे की बात को सुनकर उसे गुस्सा भी आ रहा था लेकिन दूसरी तरफ उसकी बातों से उसकी बुर गीली भी हो रही थी,,,, वह खेतों में अपने बेटे को समझाने के लिए लाई थी लेकिन उसकी बातों से उसका मन बहकने लगा था,,, आखिरकार एक मां होने से पहले वह एक औरत थी,,,,,पर एक औरत होने के नाते दूसरी औरतों की तरह उसे भी अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनना बेहद पसंद था,,,, लेकिन यहां पर उसके लिए हालात कुछ और थे उसकी खूबसूरती का तारीफ करने वाला कोई गैर मर्द नहीं बल्कि उसका ही जवान बेटा था,,, अपने बेटे की बात को सुनकर उसके तन बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी थी,,,,, ना चाहते हुए भी वह अपने बेटे से बोली,,,)

तुझे यह सब कहना अच्छा लगता है इस तरह की बातें तुझे शोभा देती है और वह भी अपनी मां के लिए कोई सुनेगा तो क्या कहेगा,,,

यहां कौन सुनने वाला है मां,,, और वैसे भी मैंने कोई गलत बात नहीं कहां हो तुम्हारी खूबसूरती की तारीफ कर रहा हूं और जो कि एक दम सच है,,,

कौन बेटा अपनी मां की खूबसूरती की तारीफ करता है,,,? यह गंदी बात है राजू,,,,

ऐसा तुम समझती हो लेकिन मेरी नजरों से देखोगी तो तुम्हें भी सब कुछ एकदम सही लगेगा,,, तुम सच में बहुत खूबसूरत हो,,,,,

(अपने बेटे की बातों को सुनकर मधु की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसकी सांसों की गति के साथ-साथ उसकी खरबूजे जैसी सूचियां ऊपर नीचे हो रही थी,,,, सूरज सर पर आ गया था दूर दूर तक कोई नजर नहीं आ रहा था और उसी जगह पर दोनों खड़े थे वह जगह जंगली झाड़ियों से गिरी हुई थी किसी के भी देखे जाने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी,,,,)

राजू तु समझने की कोशिश कर,,,(ऐसा कहते हुए मधु राजू की तरफ घूम गई,,) एक मां के लिए बेटा कभी भी इस तरह की बातें नहीं करता तू अपनी राह से भटक गया है,,, तू जितना सोच रहा है उतनी भी खूबसूरत मैं नहीं हूं,,, तीन तीन बच्चों की मां तु यह बात समझता क्यों नहीं है,,, तुझे तो अपनी उम्र की लड़कियों में दिलचस्पी होना चाहिए ना की एक औरत के एक औरत तक भी यह बात ठीक थी लेकिन तू तो अपनी ही मां के पीछे पड़ गया है,,,।

प्यार में उम्र कोई मायने नहीं रखती,,,, लेकिन तुम अपने आप को देखो और गांव की दूसरी औरतों को देखो तुम्हारे लिए और उन में जमीन आसमान का फर्क है तीन बच्चों की मां होने के बावजूद भी तुम,,, अभी भी लड़की की तरह ही नजर आती हो जवान खूबसूरत लड़की उम्र की सीमा को तुम पार कर चुकी हो,,,।

(राजू अपनी मां की खूबसूरती के आकर्षण में इस तरह से कैद हो चुका था कि उसे भी सही गलत का पता नहीं चल रहा था वह अपनी मां से इस तरह से बातें कर रहा था जैसे किसी गैर लड़की से बात कर रहा हूं एकदम आशिकाना मिजाज हो चुका था ना चुका उसकी बातों को सुनकर मधु भी एकदम हो चुकी थी इस तरह से तो जवानी में भी उसके साथ किसी ने भी बातें नहीं की थी ना ही उसके पति ने,,,,,,,, मधु अब तक अपने बेटे को छोटा बच्चा ही समझती थी लेकिन उसकी बातों को और उसकी हरकतों को देखते हुए वह समझ गई थी कि उसका बेटा पूरी तरह से जमा हो चुका है जो कि औरतों की जवानी में रस लेने लगा है,,,, अपने बेटे को समझाने की जगह ना जाने क्यों मधु के तन बदन में अपने बेटों की बातों को सुनकर एक लहर से उठने लगी थी उसे अपने बेटे की बातें ना जाने क्यों अच्छी लगने लगी थी,,, मधु को ऐसा लग रहा था कि जैसे अभी-अभी उसकी जवानी खील कर उभरी है ,, और राजू उसके सपना का राजकुमार की तरह उसके पीछे पड़ा है उसे लुभाने के लिए उसे अपने प्यार में पागल करने के लिए मधु भी अपने बेटे की जालसाज बातों में आते हुए अपने बेटे से बोली,,,)

तू पागल हो गया राजू मुझसे भी ज्यादा खूबसूरत औरतें पूरे गांव में है तो मेरे पीछे पड़ कर मर्यादा की दीवार लांघ रहा है,,,,,

मैं कोई भी मर्यादा की दीवार नहीं लाघ रहा हूं,,,, तुम मुझे बहुत खूबसूरत लगती हो,,,,

पागल मत बन राजू,,,तेरे और मेरे बीच में मां बेटे का पवित्र रिश्ता है कोई मर्द और औरत का नहीं जो इस तरह से मेरे पीछे पड़ा है किसी को पता चल गया तो कितनी बदनामी हो जाएगी तुझे पता है,,,,

कुछ भी नहीं होगा मां,,, किसी को कानों कान तक खबर नहीं पड़ेगी,,,, तुम अगर चाहो तो हम दोनों के बीच मर्द और औरत वाला रिश्ता पनप सकता है,,,

(मधुअपने बेटे की तरफ मुंह करके जरूर खड़ी थी लेकिन वह अपने बेटे से नजर नहीं मिला पा रही थी उसकी आंखों में शर्म भरी हुई थी लेकिन उसके बेटे की आंखों में बिल्कुल भी शर्म नहीं था वह अपनी मां से बेहद अश्लील शब्दों का प्रयोग करते हुए बातें कर रहा था,,,मधु इस बात से हैरान थी कि उसका बेटा सीधे-सीधे उसे चोदने की बात कर रहा था जो कि आज तक शादी की पहली रात को उसके पति ने इस तरह से खुल कर उसे चोदने की बात नहीं किया था बल्कि उसे चोदने की इच्छा भी जाहिर नहीं किया था बस धीरे-धीरे बातों ही बातों में अपने आप ही सब कुछ हो गया था लेकिन यहां तो उसका बेटा एक कदम आगे बढ़ चुका था,,,, मधु को समझ में नहीं आ रहा था कि उसके बेटे में उसे पाने की चाहत इस कदर कैसे बढ़ गई जबकि इस उम्र में लड़के अपनी उम्र की लड़कियों को ढूंढते हैं उनसे प्रेम मिलाप करते हैं प्रेम की बातें करते हैं लेकिन यहां सब कुछ उल्टा हो चुका था यही जानने के लिए वह अपने बेटे से बोली,,,)

राजू में तुझे कितना समझाने की कोशिश कर रही हो कि हम दोनों के बीच इस तरह का रिश्ता कायम नहीं हो सकता आखिरकार तू ऐसा मुझ में क्या देख लिया कि मेरे पीछे ही पड़ गया है बल्कि तुझे तो अपनी हमउम्र लड़कियों के साथ घूमना चाहिए,,,

पहले मैं ऐसा कभी नहीं सोचता था लेकिन जब से मैंने तुम्हें अपनी आंखों से एकदम नंगी देखा हूं तब से मेरे होश उड़ गए हैं,,,(राजू की बात सुनते ही मधु की हालत खराब हो गई आश्चर्य से उसकी आंखें चोडी हो गई,,,उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसके बेटे ने उसे कब पूरी तरह से नग्न अवस्था में देख लिया जबकि वहां इस बात का पूरा ध्यान रखती है कपड़े बदलते समय नहाते समय की कोई उसे देख ना ले,,उससे कहां पर गलती हो गई थी जो उसके बेटे ने उसे नग्न अवस्था में देख लिया यही जानना चाहती थी इसलिए आश्चर्य से वह राजू की तरफ देख रही थी और देखते हुए बोली,,,)

क्या तूने मुझे,,, लेकिन कब,,,,

जब तुम नहा कर अपने कमरे में कपड़े बदल रही थी तब मैं किसी काम से आया था लेकिन मैंने देखा दरवाजा खुला था और तुम्हारे बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था,,,(राजू जानबूझकर बात को बदलते हुए बोल रहा था वह सीधे सीधे अपनी मां को यह कहना चाहता था कि वह तुम्हें चुदवाते हुए देख चुका है,,, वरना कमरे के एक छोटे से छेद का राज जाहिर हो जाता,,,,,)

क्या,,,?(मधु एकदम आश्चर्य से बोली,,)

इससे पहले मेरा इरादा बिल्कुल भी गंदा नहीं था लेकिन उस दिन जब मैं तुम्हें पूरी तरह से नंगी देखा तो मेरे होश उड़ गए मेरे सोचने का तरीका एकदम से बदल गया उस समय है तुम्हारी पीठ मेरे सामने थी और तुम्हारी नंगी गोरी गोरी गांड देखकर मेरे तो होश ही उड़ गए मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं,,,,(मधु की हालत खराब होती जा रही थी राजू जानबूझकर अश्लील शब्दों में अपनी मां को पूरी कहानी जो की मनगढ़ंत की उसे सुना रहा था वह अपनी गंदी बातों से अपनी मां का मन बहलाना चाहता था,,,)मैंने आज तक इतनी खूबसूरत गांड किसी की नहीं देखा था एकदम गोरी मक्खन मलाई की तरह और एकदम गोल-गोल मानो कि जैसे तो बड़े-बड़े खरबूजे लटका दिए गए हो,,, सच कहूं तो मामुझे यह सब देखने का बिल्कुल इरादा नहीं था लेकिन उस समय मेरी नजरों ने जो देखा था मेरे सोचने समझने की शक्ति को पूरी तरह से छीण कर दिया था,,,,, मैं अपने जीवन में पहली बार किसी औरत की नंगी गांड को देख रहा था,,,, मेरी सांसे एकदम तेज चलने लगी थी,,,,मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कुछ देर तक मैं वहीं रुक आ रहा और मैं जैसे जाने क्यों हुआ वैसे ही तुम दूसरी तरफ घूम गई जिसकी वजह से मुझे तुम्हारी चूचियां नजर आने लगी,,,, सच कहूं तो तुम उसी दिन अपनी अदाओं से मेरे दिलो-दिमाग पर वार पर वार कर रही थी,,, जिसको मैं झेल नहीं पा रहा था,,,,,,

(अपने बेटे की मां तक बातों को सुनकर मधु की बुर गीली होने लगी थी,,,, मधु की खुद की सांसो ऊपर नीचे हो रही थी जोकि राजू की आंखों से बची नहीं पाई थी,,, वह अपनी मां की हालत पर गौर कर रहा था उसे अहसास हो रहा था कि उसकी बातों से उसकी मां को मजा आ रहा था उसे अब ऐसा लगने लगा था कि आज उसका काम बन जाएगा वह अपनी बात को और ज्यादा नमक मिर्च लगाते हुए बोला,,,)

पहली बार मुझे एहसास हुआ कि औरत की चुचिया कितनी खूबसूरत और आकर्षक होती हैं मैं तो तुम्हारी चुचियों को देखता ही रह गया,,,(राजू जानबूझकर अपनी मां के सामने उसके चूची शब्द का प्रयोग कर रहा था ऐसा करते हुए उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी पजामे में उसका लंड पूरी तरह से तन चुका था,, जिस पर अभी तक मधु की नजर नहीं पड़ी थी,,,, मधु अपने बेटे की दोनों टांगों के बीच ध्यान नहीं दे रही थी,,, और राजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए,,) कसम से मां जैसे दशहरी आम पकने के बाद कितना खूबसूरत लगता है उससे भी कहीं ज्यादा आकर्षक और खूबसूरत मुझे तुम्हारी चूची लग रही थी खरबूजे जैसी गोल गोल,,,,

तेरा मन क्या कह रहा था,,,(अनजाने में ही मधु के मुंह से यह शब्द निकल गए वह अपने बेटे से इस तरह का सवाल बिल्कुल भी नहीं पूछना चाहती थी क्योंकि इस तरह का सवाल पूछने पर सीधे सीधे उसके बेटे के लिए इशारा होता कि उसे भी उसकी हरकतें अच्छी लग रही है,,,इसलिए तो अनजाने में ही निकले इन शब्दों के कारण शर्म से उसकी गाल एकदम से लाल हो गए थे और वह शर्मिंदगी महसूस करते हुए अपनी नजरों को और ज्यादा नीचे झुका ली थी राजू तो अपनी मां के मुंह से इस सवाल को सुनकर एकदम खुशी से झूम उठा क्योंकि यह सवाल नहीं था बल्कि उत्सुकता थी जानने की और इसीलिए राजू की अपनी बात को नमक मिर्च लगाता हुआ बोला,,,)

मेरा मन तो कह रहा था कि तुम्हारी चूची को अपने दोनों हाथों में पकड़ कर जोर जोर से दबाते रहु मुझे तुम्हारे किसमिस का दाना निकला हुआ है ना उसे मुंह में भरकर दांतो से हल्के हल्के दबाऊ,,,, मेरी तो हालत खराब हो गई थी,,, और तुम्हारा अनजाने में ही मेरी तरफ मुंह करके घूमना यह समझ लो कि मेरी जान निकलते निकलते रह गई थी,,,,

(अपने बेटे की बात सुनकर मधु का मन तो कह रहा था कि अपने बेटे से पूछ ले कि ऐसा क्या हो गया था कि तेरी जान निकलते निकलते रह गई थी लेकिन पूछने की उसमें बिलकुल भी हिम्मत नहीं थी तो राजू ही अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला),

बाप रे मां कसम मैंने जिंदगी में ऐसा नजारा नहीं देखा था पहली बार मैंने,,,, तुम्हारी बुर देखा,,,,(अपने बेटे के मुंह से बुर शब्द सुनते ही अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव करते हुए मधु से अपनी उत्तेजना संभाले नहीं संभली औरउसकी बुर से मदन रस की अमृत बूंद उसकी बुर की गुलाबी पत्तियों से ओस की बूंद की तरह बाहर निकलते हुए नीचे जमीन पर चु गई,,, काश अगर इस समय मधु पूरी तरह से नंगी खड़ी होती तो राजू अपनी मां की मादकता भरी प्रक्रिया को देखकर अपने आप पर काबू नहीं रख पाता और अपने घुटनों के बल बैठकर अपनी मां की बुर से उसकी गुलाब की पत्तियों को चीर कर बाहर निकल रही मदन रस की उस बूंद को अपना जीव लगाकर चाट कर उसे अपने अंदर कर लेता,,,, मधु को अपने बेटे के मुंह से इस तरह के शब्दों का प्रयोग करना बहुत ही अच्छा लग रहा था जबकि वह उसकी बातों से गुस्सा करने वाली थी उसे समझाने वाली थी लेकिन हालात एकदम बदल चुके थे फिर भी वाह अपनी कमजोरी ना दिखाते हुए अपने बेटे से बोली,,,)

हाय दैया यह तु कैसी बातें कर रहा है,,,,,(इतना कहने के साथ ही उसकी नजर अपने बेटे के पजामे पर पड़ गई और उस पर नजर पड़ते ही उसके तो होश उड़ गए वह अपने बेटे के पजामे में बने तंबू को भी देखती रह गई ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके बेटे के पजामे में लंड की जगह खूंटा हो,,,, मधु एकदम से आश्चर्यचकित हो गई थी उसे इस बात का अहसास था कि मर्द का लंड कितना मोटा और लंबा होता है लेकिन अपने बेटे के पजामे मैं बने तंबू को देखकर उसके मन में उथल-पुथल हो रही थीइतना तो मैं तो समझ ही गई थी कि उसके पजामे में हाहाकार मचाने वाला औजार था जिसे देखने के लिए उसका मन मचल उठा था,,, राजू अपनी मां की नजरों को अच्छी तरह से भांप गया था,,,, और यह देख कर मन ही मन प्रसन्न हो रहा था अपनी मां की तरफ को और ज्यादा बढ़ाते हुए अपनी मां की आंखों के सामने पजामे के ऊपर से अपने लंड को मुट्ठी में भरकर खुजलाने लगा यह देखकर मधु की हालत खराब होने लगी और मधु कुछ आगे बोल पाती इससे पहले ही राजू बोला,,,)

कुछ भी गलत नहीं कह रहा हूं मैं जो कुछ भी मैंने देखा जो कुछ भी देखने के बाद मेरे तन बदन में हुआ मैं वही बता रहा हूं उस समय तुम्हारी बुर देखकर मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया था जैसा कि आज,,, खड़ा हो गया है,,(इतना कहने के साथ ही अपनी मां की आंखों के सामने ही वह पजामे को एक झटके में नीचे खींच दिया,,,, राजू की इस हरकत पर उसका मोटा तगड़ा लंबा लंड पजामे की कैद से बाहर आते ही हाहाकार मचाने लगा,,, राजू का लंड रबड़ की तरह ऊपर नीचे हो रहा था जिसे देखकर मधु की आंखों में मदहोशी छाने लगी मधु आज तक इस तरह के लंड की कभी कल्पना भी नहीं की थी,,,,) देखो,,,,,,,

पल भर में ही दोनों की सांसे ऊपर नीचे होने लगी मधु की नजरें हटाए नहीं हट रही थी,,,,राजू का लंड इतना ज्यादा कड़क हो चुका था कि उसकी लंड की नसें उभरकर नजर आ रही थी जिसे देखकर मधु ना चाहते हुए भी अपने मन में यह कल्पना करने लगी और सोचने लगी कि उसके बेटे का लंड बुर में जाते कितना रगड डालेगा ऐसा मधु अपने बेटे के लैंड की मोटाई और खास करके उसकी उभरी हुई नसों को देखकर सोच रही थी अपनी मां को,,, इस तरह से अपने लंड को देखता हुआ पाकर राजू मन ही मन प्रसन्न होने लगा राजु ईस बात को अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां भी आखिरकार एक औरत ही है जैसा वह दूसरी औरतों के साथ करता रहा था उन्हें अपनी बातों में लुभा कर अपने लैंड के दर्शन करा कर चुदाई करने के लिए तैयार कर लेता था उसी तरह से वह अपनी मां को भी अपने बातों की जाल में फंसा कर उसके साथ मनमानी करना चाहता था और उसकी यह चाल कामयाब होती हुई नजर आ रही थी,,,,। अद्भुत अवर्णनीय और कल्पना के परे इस अद्भुत नजारे को अगर कोई देख लेता तो उसका भी लंड खड़ा हो जाता,,, सुनहरी धूप में दूर दूर तक कोई नजर नहीं आ रहा था यह वह समय थाजब खेतों में काम कर रहे लोग अपने अपने घर पर आराम करने के लिए चले जाते थे और ऐसे में राजू और उसकी मां खेत के बीचो बीच खड़े होकर अद्भुत दृश्य रचा रहे थे,,,अपनी मां को इस तरह से अपने लंड के आकर्षण में खोया हुआ देखकर राजू तुरंत अपनी मां का हाथ पकड़ कर उसे अपने लंड पर रख दिया और अपने हाथ की मुट्ठी बनाकर खुद ही जबरदस्ती अपनी मां की हथेली को अपने लंड पर कसने लगा,,,,,,अपने बेटे के लंड की गर्माहट और उसकी मोटाई को अपनी हथेली में महसूस करते ही उसकी गर्मी मधु को सीधे-सीधे अपनी बुर पर महसूस होने लगी उसमें से उसका गर्म लावा पिघलने लगा था और उत्तेजना के मारे मधु से रहा नहीं गया और वह खुद ही अपनी हथेली का कसावा अपने बेटे के लंड पर बढ़ा दी,,, वह उत्तेजना का अनुभव करते हुए अपने बेटे के लंड को अपनी मुट्ठी में दबा दी थी,,लेकिन तभी उसे होश आया कि वह या क्या कर रही है वह तो राजू को यहां समझाने के लिए लेकर आई थी लेकिन वह खुद ही मदहोशी और भावनाओं में बहती चली जा रही है,,, अपने आप को संभालने की यह मधु के लिए बेहद पतली भेद रेखा थी,,, जिसमें से सही गलत का भेद समझते हुए मधु को बाहर निकलना था और वह सही गलत के बीच के फर्क को अच्छी तरह से समझ गई थी,, और वह तुरंत अपने बेटे के लंड पर से अपना हाथ पीछे खींच ली,,, और राजू की तरफ देखते हुए बोली,,,।

नहीं राजू यह गलत है यह बिल्कुल गलत है,,,(इतना कहते हुए वहां अपने कदमों को पीछे लेने लगी घर यह गलत है कहते कहते लगभग दौड़ते हुए वह घर की तरफ जाने लगी,,, मधु की यह हरकत राजू की गर्म जवानी पर ठंडा पानी डाल गई थी राजू अपनी मां को जाते हुए देखता रह गया,,, राजू अपनी मां को भागते हुए देख रहा था और यह सोच रहा था कि भागते हुए भी उसकी मां की गांड कितनी हिलोरे लेती है,,,,अपनी मां की चुदाई करने के मंसूबे पर पानी फिर चुका था लेकिन अभी भी उसका लंड अपनी मां की नरम हथेली की गर्माहट पाकर पूरी तरह से अपनी औकात में खड़ा था राजू से रहा नहीं गया और वह अपनी मां की कल्पना करते हुए मुठ मारने लगा,,,।

मधु जब अपने घर पहुंची तो घर में अपनी बड़ी बेटी को आई हुई देखकर एकदम खुश हो गई,,,
 
मधु घर पर पहुंची तो घर पर उसकी बड़ी बेटी आई हुई थी जिसे देखकर मधु एकदम से खुश हो गई क्योंकि शादी के 2 साल बाद पहली बार वह घर पर आई थी ,,,, मधु अपनी बड़ी बेटी को बरसों बाद देखकर एकदम खुशी से झूम उठी,,,।

महुआ तू,,,, तू कब आई,,,(घर में प्रवेश करते हुए मधु बोली,,, और अपनी मां को देखते ही महुआ अपनी जगह से खड़ी होते हुए अपनी मां की तरफ आगे बढ़ते हुए बोली,,,)

अभी अभी आ रही हूं मां,,,,(इतना कहने के साथ ही महुआ अपनी मां के पैर छूकर आशीर्वाद लेने लगी)

जीती रहो बेटी,,,, लेकिन तुम्हें लेकर कौन आया,,,

छोटा देवर आया था,,,,

रुका नहीं,,,,

नहीं उसे शादी में जाना था इसलिए तुरंत छोड़ कर चला गया,,,,

Mahuaa





चलो कोई बात नहीं,,, गुलाबी,,,, महुआ को पानी पिलाई या नहीं,,,

यह भी कोई पूछने वाली बात है भाभी,,,,,,

बुआ ने आते ही मेरा मुंह मीठा कराकर पानी पिला दी,,, मां,,, बुआ मेरा बहुत ख्याल रखती है,,,

हां सो तो है,,,,

अच्छा राजू नजर नहीं आ रहा है वह कहां गया,,,,,,

(राजू का जिक्र आते ही,,, मधु को कुछ देर पहले का दृश्य याद आने लगा,,,, राजू के मोटे तगड़े लंड को जिंदगी में पहली बार वह अपनी आंखों से देख रही थी,, इसे देखते ही उसकी दोनों टांगों के बीच की खलबली को अभी भी महसूस कर रही थी,,,, इतना मोटा तगड़ा और लंबा लंड उसने आज तक कभी नहीं देखी थी,,,अपने बेटे के लंड की गर्माहट को अभी भी अपनी हथेली के साथ-साथ पूरे जिस्म में महसूस कर पा रही थी,,, अपनी मां को ख्यालों में खोया हुआ देखकर महुआ फिर से बोली,,,)

अरे मां मैं तुमसे पूछ रही हूं,,,,,, राजू दिखाई नहीं दे रहा है कहां है,,,?

अरे होगा कहां,,,अपने आवारा दोस्तों के साथ गांव में घूम रहा होगा कुछ दिनों से अपने पिताजी के साथ बैलगाड़ी पर भी नहीं जा रहा है,,,,

Madhu ki gadrayi gaand





राजू बैलगाड़ी चलाता है,,,(महुआ आश्चर्य से बोली,,)

तो क्या,,,,लेकिन कुछ दिनों से जा नहीं रहा है आज ही इसकी खबर लेती हूं,,,, चल वो जाने दे चल कर कुछ खा ले लंबा सफर तय करके आइ ह6 थक गई होगी,,,

हां मां सो तो हैं,,, मुझे बड़ी जोरों की भूख लगी है,,,।

तो इंतजार किस बात का महुआ,,, चलो खाना लगा देती हूं अपने तीनों साथ में खा लेते हैं,,,,(गुलाबी उत्साहित होते हुए बोली,,,, और तीनों हाथ मुंह धोकर खाना खाने बैठ गए,,,,,,,बातों ही बातों में गुलाबी बात को छेड़ते हुए बोली,,,)

क्यों महुआ रानी 2 साल हो गए हैं खुशखबरी कब सुना रही हो,,,,,

(गुलाबी की बात सुनते ही मधु भी उसके सुर में सुर लगाते हुए बोली,,,)

हां बेटी 2 साल हो गए हैं अभी तक हुआ क्यों नहीं,,,,, गांव वाले बात करते होंगे,,,।

(उन दोनों की बात सुनते ही महुआ थोड़ी उदास हो गई,,,,उसका उदास चेहरा देखकर मधु से रहा नहीं जा रहा था वहां काफी चिंतित नजर आ रही थी इसलिए फिर से बोली,,,)

क्या हुआ महुआ खामोश क्यों हो गई क्या कोई चिंता वाली बात है,,,,,,।

क्या बताऊं मां,,,,(कुछ देर विचार करने के बाद) पिताजी ने जल्दबाजी में मेरी शादी ऐसी जगह कर दी कि मेरी जिंदगी नरक हो गई है पिताजी ने किसी भी प्रकार की जांच पड़ताल किए बिना ही मुझे उस घर में ब्याह दिया,,, और फिर मेरी जिंदगी एकदम खराब हो गई,,,।

(महुआ की बात सुनते ही गुलाबी और मधु दोनों एकदम से चिंतित हो गए और मधु बोली)

क्यों क्या हो गया बेटी,,,,

क्या बताऊं ,,, रोज का झगड़ा,,,

किस बात का झगड़ा,,,(मधु हाथ में निवाला पकड़े हुए ही बोली,,, गुलाबी भी चिंतित मुद्रा में महुआ की तरफ देख रही थी,,,)

,, यही,,,(इतना कहकर महुआ खामोश हो गई,,, तो गुलाबी बोली)

अरे बता ना क्या हो गया किस बात का झगड़ा हमें बताएं कि नहीं तो हम कैसे सुलझाएंगे,,,,

क्या बताऊं बुआ,,,,, शादी को 2 साल हो गए हैं,,,,

तो,,,(मधु बोली)

तो क्या,,, सास को दादी बनना है,,,

तो इसमें कौन सी बड़ी बात है शादी हुआ है तो सब कुछ धीरे-धीरे हो ही जाएगा,,,(गुलाबी बोली)

लेकिन 2 साल गुजर चुके हैं बुआ,,,,

मैं तेरी बात को अच्छी तरह से समझ रही हूं महुआ,,,,,शादी के 2 साल गुजर चुके हैं अब तक तेरे पांव भारी हो जाना चाहिए था,,,(जिस बात को बताने में महुआ झिझक रही थी मधु उसे खुलकर बता दी,,,)

अब तो सांस ननद दोनों ताना कसने लगी है,,,(महुआ एकदम उदास होते हुए बोली मधु अपनी बेटी का दर्द अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए वह बोली,,)

दामाद जी कुछ नहीं बोलते,,,



वह किसी से कम नहीं वह भी मुझे बात-बात पर ताना देता रहता है,,, दिन भर जुआ शराब और रात को घर से बाहर ही रहता है,,,,,,।

तेरे साथ,,,(मधु एकदम गंभीर मुद्रा में बोले मधु के कहने का मतलब को महुआ की तरह से समझ रही थी इसलिए बोली)

होता है लेकिन जोर जबरदस्ती का,,,, और 2 मिनट में ही ढेर,,,,।

(महुआ के कहने के मतलब को मधु अच्छी तरह से समझ रही थी और महुआ को यह बताने में शर्म भी महसूस हो रही थी लेकिन वह किसी भी तरह से अपनी गलती बिल्कुल भी नहीं है यही दर्शना चाहती थी और वास्तव में इस में महुआ की गलती बिल्कुल भी नहीं थी,,, महुआ का पति शराबी था दिनभर शराब के नशे में डूबा रहता था रात में कभी कबार उसके साथ संबंध बनाने की कोशिश भी करता था तो एकदम ढेर हो जाता था,,,,भगवा इस बात को अच्छी तरह से जानती थी और अपने पति की करतूत अपनी सास से वह बताती भी थी लेकिन उसके साथसथी कि उसकी बात मानने को तैयार ही नहीं थी और सारा दोष महुआ को ही देती थी इसलिए वह लड़ झगड़ कर कुछ दिनों के लिए मायके आ गई थी,,,, सारी बात सुनने के बाद महुआ और गुलाबी दोनों चिंतित हो गई थी,,, इसलिए महुआ उसको सांत्वना देते हुए बोली,,,)

कोई बात नहीं बेटी तू चिंता मत कर किसी किसी को थोड़ा समय बाद ही मां बनने का सुख मिलता है,,, तुझे भी जल्द ही मिल जाएगा अब खाना खा चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है,,,,।

(इसके बाद तीनों ने खाना खाई और आराम करने लगी,,, शाम ढलने लगी थी हरिया बैलगाड़ी लेकर घर पर पहुंच गया,,,, बैलगाड़ी के पेर में बने घुंघरू की आवाज को सुनकर,,, मधु उत्साहित होते हुए बोली,,,)

महुआ तेरे बाबूजी आ गए हैं,,,,

(इतना सुनते ही अपनी बुआ के बगल में बैठकर सब्जी काट रहे महुआ तुरंत उठ कर खड़ी हो गई और उस लगभग भागते हुए घर के बाहर गई हरिया बैलगाड़ी को बेल से अलग कर रहा था उसे देखते ही महुवा तुरंत बाबूजी के कहकर आगे बढ़ी और पाव छूने लगी हरिया तो एकदम से चौंक हीं गया क्योंकि उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी महुआ के इधर होने की क्योंकि 2 साल गुजर गए थे कोई हाल समाचार नहीं मिला था और ना ही हरिया ही महुआ के घर पर गया था इसलिए 2 साल बाद महुआ को देखकर वह एकदम खुश हो गया,,)

खुश रहो खुश रहो बेटी तुम कब आई,,,

दोपहर में ही आई हूं बाबूजी,,,,

पूरे 2 साल गुजर गए एक 2 साल में तुम्हें कभी भी हम लोगों का हाल समाचार नहीं ली,,,

ऐसी कोई बात नहीं है बाबू जी,,,,, कोई पहुंचाने को तैयार ही नहीं होता था,,,,

कोई बात नहीं तू अंदर चल में बेल को बांधकर आता हूं,,,,

जी बाबू जी,,,(इतना कहकर महुआ घर में चली गई और हरिया बहन को लेकर घर के पीछे की तरफ उसे बांधने के लिए चला गया,,,, इसके बाद गुलाबी पानी लेकर हरिया के लिए लेकर आई,,, हरिया गुलाबी के हाथ में से पानी का लोटा लेते हुए दूसरे हाथ से उसकी चूची दबाते हुए बोला,,,)

साला मौका नहीं मिल रहा है तुझे चोदने का,,, तेरी बुर का रस अभी तक मेरे लंड पर लगा हुआ है,,,

क्या कर रहे हो भैया जरा धीरे बोलो अब तो महुआ भी आ गई है अगर सुन ली तो बखेडा हो जाएगा,,,

अरे कोई नहीं सुनेगा,,,,(धीरे-धीरे पानी को पीते हुए बोला पानी पी लेने के बाद वापस लौटे को गुलाबी के हाथ में पकड़ाते हुए बोला,,,) अरे सुनना मैं कह रहा था कि चलना घर के पीछे बस सलवार खोल कर खड़ी हो जाना बाकी का काम मैं संभाल लूंगा,,,

अरे पागल हो गए हो क्या भैया,,,(घर के द्वार की तरफ देखते हुए बोले) कोई देख लिया तो गजब हो जाएगा,,,और जब तक महुआ है तब तक ऐसी होती कोई भी हरकत मत करना महुआ हमेशा मेरे पास ही रहती है इसलिए कुछ करने का मौका भी नहीं मिलेगा,,,,

(गुलाबी की बात सुनते ही हरिया लंबी सांस लेते हुए अफसोस भरे स्वर में बोला)

चल कोई बात नहीं तेरी भाभी से ही काम चलाना पड़ेगा,,,,

(और इतना कहकर हरिया और गुलाबी दोनों घर में प्रवेश कर गए मधु जो कि खाना बना रही थी हरिया को रसोई घर की तरफ आता हुआ देख कर बोली),,

अजी सुनते हैं कुछ दिनों से राजू को साथ में क्यों नहीं ले जाते दिनभर यहां-वहां घूमता फिरता है,,,

अरे ले तो जाऊ लेकिन समय पर रहता था वह तो बैल गाड़ी ले जाते समय गायब रहता है,,, अच्छा आने दो आज ईसे बताता हूं,,,यह समय हो गया अभी तक यह घर पर नहीं आया ना जाने कहां घूमता फिरता रहता है,,,।

हां जरा डांटीएगा तो,, लापरवाह होता जा रहा है,,,,,,(तवे पर रोटी को सेंकते हुए वह बोली,,,, थोड़ी देर में सब कोई अपना काम करने लगे खाना बनकर तैयार हो गया था तभी राजू घूमता का घर में प्रवेश किया,,,, उस पर नजर पड़ते ही मधु बोली,,,)

आ गए हैं लाट साहब,,,,

(अपनी मां की बात सुनकर राजू अपनी मां की तरफ देखने लगा उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां ऐसा क्यों बोल रही हो तभी उसके पिताजी बोलें,,,)

राजू दिन भर कहां घूमता फिरता रहता है तुझे मेरे साथ बैलगाड़ी पर चलना चाहिए था ना कुछ दिनों से चल क्यों नहीं रहा है तू,,,।

ओ ओ ,,,, क्या है ना पिताजी,,,वो,,,,

क्या वो वो लगा रहा है दिनभर गांव के आवारा लड़कों के साथ घूमता रहता है,,, तुझे घर की जिम्मेदारी का कुछ भान है या नहीं,,,,

ऐसा कुछ भी नहीं है पिताजी कुछ दिनों से मुझे अपनी तबीयत सही नहीं लग रही थी इसलिए नहीं गया,,,।

(राजू अपनी मां की तरफ देख कर बोल रहा था उसे समझ में आ गया था कि उसके पिताजी उसे डांट क्यों रहे हैं लेकिन इतना तो उसे तसल्ली थी कि उसकी मां ने खेत वाली बात को नहीं बताई थी,,,,,)

अरे तबीयत खराब है तो मुझसे कहा होता अपनी मां से कहां होता किसी से बोला भी तो नहीं,,,

(अभी यह डांट फटकार चल ही रही थी कि बाहर महुआ जोकि पानी लेने गई थी वह घर में प्रवेश करते हुए और पानी भरी बाल्टी को एक कोने में रखते हुए बोली,,,)

क्या बाबू जी मेरे भाई को खामखा डांट रहे हो,,,,।

अरे दीदी तुम,,,, तुम कब आई,,,

घर में रहोगे तब ना पता चलेगा कि घर में कौन आ रहा है कौन जा रहा है,,,,(एक बार फिर से थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए हरिया बोला,,, अपने पिताजी की बात को अनसुना करते हुए वह तुरंत महुआ की तरफ आगे बढ़ा,,,,महुआ अपने भाई से 2 साल बाद मिल रही थी इसलिए प्यार से उसे गले लगा ली,,,, राजू भी 2 साल बाद अपनी बहन को देखकर पूरी तरह से खुश हो गया था इसलिए वहां भी एकदम से अपनी बहन को गले लगा लिया था लेकिन इस हरकत की वजह से राजू की छातियों में उसकी बहन की गोल-गोल खरबूजे जैसी चूचियां चुभती हुई महसूस होने लगी यह एहसास राजू को अंदर तक उत्तेजित कर गया,,,,, लेकिन महुआ सहज बनी रहे और वह राजू को अलग करते हुए बोली,,,।

तू बहुत शैतान हो गया है दिन भर इधर-उधर घूमता रहता है ऐसा नहीं कि बाबू जी के काम में हाथ बटाए,,,

कल से जरूर जाऊंगा दीदी,,,,

हां जरूर जाना तू अब बड़ा हो गया है लेकिन मेरे लिए तो मेरा छोटा भाई ही है,,,,

(महुआ की बात सुनकर गुलाबी अपने मन में बोली देखना छोटे भाई का अब बड़ा हो गया है कहीं तेरी बुर में ना घुसा दे,,,।

थोड़ी ही देर में पूरा परिवार एक साथ खाना खाने के लिए बैठ गया था और खाना खा लेने के बाद मधु ने महुआ को राजू और गुलाबी के साथ सोने के लिए बोली,,, वैसे तो सब कुछ ठीक था नहीं गुलाबी और राजू का एक दूसरे के बिना चलने वाला बिल्कुल भी नहीं था राजू जब तक गुलाबी की चुदाई नहीं करता था तब तक उसे नींद नहीं आती थी और यही हाल गुलाबी का भी था बिना राजू करूंगा अपनी बुर में लिए उसे चैन बिल्कुल भी नहीं आता था इसलिए दोनों परेशान नजर आ रहे थे महुआ की मौजूदगी में ,,,दोनों को अपनी प्यास बुझाने का मौका नहीं मिलता लेकिन फिर भी करके आ सकते थे बेमन से राजू ने खटिया को खड़ी कर दिया और एक कोने में रख दिया क्योंकि वह जानता था एक घटिया पर तीनों नहीं सो सकते इसलिए नीचे चटाई बिछड़ना जरूरी था,,,, गुलाबी बीच में सो गई और राजू और महुआ दोनों किनारे किनारे पर सो गए गुलाबी जानबूझकर बीच में सोई थी क्योंकि वह किसी ना किसी बहाने राजू से चुदाई का आनंद लेना चाहती थी,,,,

दूसरी तरफ हरिया बात करते हो अपने बीवी के कपड़े एक-एक करके उतार रहा था,,, जब वह ब्लाउज का बटन खोल रहा था तभी मधु बोली,,,।

लड़की ब्याने से पहले एक बार लड़के के बारे में पूछताछ कर लिए होते तो शायद यह दिन नहीं देखना पड़ता,,,,

क्यों ऐसा क्या हो गया,,,?(ब्लाउज का आखरी बटन खोलते हुए बोला)

ससुराल में रोज उसे ताना सुनने को मिल रहा है,,,

ताना लेकिन क्यों,,,,?(हरिया अपनी बीवी की चूची को मुंह में लेते हुए बोला)

क्यों क्या पांव भारी नहीं हुए हैं इसलिए,,, आप भी तो बिना सोचे समझे कहीं भी उसका शादी कर दिए,,,

राजू की मां तुम तो अच्छी तरह से जानती हो उस समय के हालात कैसे थे,,, महुआ की हरकतें कितनी गंदी हो चुकी थी तुम्हें मालूम है ना मैंने ही गन्ने के खेत में दो लड़कों के साथ उसे पकड़ा था,,,, अगर आनंद थाना में मैं उसका साथी नहीं करवाता तो शायद बदनामी हो जाती और फिर उसकी शादी कभी नहीं हो पाती,,,

जानती हूं,,,, लेकिन उसका दुख देखा नहीं जाता,,,

अरे राजू की मां तूम खा म खा परेशान हो रही हो,,, किसी किसी को ढेर में बच्चे होते हैं,,,

मैं भी तो उसे यही कह रही थी लेकिन ससुराल के ताने से वह परेशान हो चुकी है,,,

चिंता मत करो सब कुछ ठीक हो जाएगा,,,(और इतना कहने के साथ ही वह मधु को पीठ के बल खटीया पर लिटाते हुए उसकी दोनों टांगों को खोल दिया और उसकी बुर में समा गया,,, दूसरी तरफ चटाई पर तीनों लेटे हुए थे गुलाबी और महुआ आपस में बात कर रहे थे और राजू था कि अपनी बहन की नजर बचाकर गुलाबी जो कि उसकी तरफ मुंह करके बात कर रही थी सलवार के ऊपर से उसकी गांड को जोर जोर से दबा रहा था,,,,राजू की हरकतों से गुलाबी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी,,,,
 
एक तरफ गुलाबी महुआ से बातें कर रही थी और दूसरी तरफ राजू गुलाबी की गोल गोल गांड को सलवार के ऊपर से ही अपने हाथों में ले लेकर दबा रहा था,,,, और साथ में भेजा मैंने अपने खड़े लंड को बार-बार अपनी बुआ की गांड पर धंशा दे रहा था,,,राजू की यह हरकतें गुलाबी के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी को और ज्यादा भड़का रही थी अगर इस समय महुआ साथ में ना होती तो गुलाबी खुद राजु के लंड पर चढ गई होती,,,,,,, बुआ को तो इस बात का आभास तक नहीं था कि उसके बगल में ही है काम क्रीड़ा की शुरुआत हो चुकी है वह तो अपने ही बातों में तल्लीन थी,,,

महुआ



राजू ने अपनी कामुक हरकतों से अपनी बुआ को पूरी तरह से गर्म कर दिया था,,,,, महुआ को नींद आने लगी थी इसलिए वह सोने से पहले राजू से बोली,,,।

राजू लालटेन बुझा देना,,, मुझे उजाले में नींद नहीं आती,,,

ज़ी दीदी,,,,(अपनी बहन की बात सुनते ही राजू प्रसन्न हो गया था क्योंकि अब तो उसका काम और भी आसान हो जाता वह तुरंत खड़ा हुआ और लालटेन की ज्योत को बुझा दिया और वापस आकर चटाई पर लेट गया,,,,थोड़ी ही देर में दोनों को जब इस बात का एहसास हो गया कि महुआ गहरी नींद में सो रही है तो तुरंत गुलाबी राजू की तरफ घूमी और अंधेरे में ही राजू को अपनी बाहों में भरकर अपने लाल-लाल होठों को उसके होंठ पर रख दी दोनों काफी उत्तेजित हो चुके थे और राजू तुरंत अपना एक हाथ गुलाबी की कमर में डालकर उसे अपनी तरफ खींच दिया जिससे दोनों का बदन आपस में एकदम से सट गया और राजू का लंड पजामे में होने के बावजूद भी गुलाबी कि बुर पर ठोकर मारने लगा,,,,, गुलाबी इसी ठोकर के लिए तो मरी जा रही थी वह पूरी तरह से रोमांचित हो उठी,,,, अपनी बुर पर अपने भतीजे के लंड की ठोकर उससे बर्दाश्त नहीं हो रही थी वह जल्द से जल्द अपने भतीजे के लंड को अपनी बुर में ले लेना चाहती थी,,, गुलाबी मदहोश होते हुए अपने भतीजे के होठों का रसपान कर रही थी और राजू कभी गुलाबी की गांड तो कभी चूची को अपनी हथेली में लेकर दबा रहा था,,,,,,,।



राजू अपनी बुआ के कपड़े उतार कर मजा लेना चाहता था,,,इसलिए अपना हाथ सलवार की दूरी पर रखकर उसे खींचने की तैयारी में ही था कि गुलाबी उस पर हाथ रखकर धीरे से बोली,,,,।

मुझे नंगी करेगा क्या,,?

तो क्या हुआ नंगी किए बिना मजा नहीं आएगा,,,

बगल में महुआ सो रही है,,,

तो क्या हुआ दीदी तो गहरी नहीं तुम्हें और वैसे भी कमरे में अंधेरा है कुछ दिखने वाला नहीं है,,,।

(राजू के मुंह से इतना सुनते ही गुलाबी राजू के हाथ पर से अपना हाथ हटा लिया और उसे आगे बढ़ने की इजाजत दे दी अगले ही पल राजू गुलाबी की सलवार की डोरी को हाथ में पकड़ कर खींच दीया था,, अगले ही पल गुलाबी की कमर कसी हुई सलवार एकदम ढीली हो गई राजू की सांसे बड़ी तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी वह तुरंत अपनी बुआ की सलवार में हाथ डालकर उसकी कचोरी जैसी फूली हुई बुर को अपनी उंगलियों से टटोलने लगा,,,, अपने भतीजे की उंगली को अपनी फुली हुई बुर पर महसूस करते ही गुलाबी पूरी तरह से मदहोश होने लगी,,,, उसकी सांसे धुकनी की तरह तेज हो गई,,, राजू अपनी बुआ की बुर टटोल ते हुए उसके गीलेपन को अच्छी तरह से महसूस कर रहा था और उसमें से उठ रही मदक खुशबू पूरे वातावरण को मदहोश बना रही थी रात के अंधेरे में और कमरे के अंधेरे में,,, जमीन आसमान का फर्क था,,,रात के अंधेरे में दिन भर की थकान उतारते हुए लोग चैन की नींद सोते हैं तो कुछ लोग संभोग क्रीडा में पूरी तरह से लिप्त हो जाते हैं,,, और कुछ ऐसा ही गुलाबी और राजू भी कर रहे थे हालांकि दोनों का रिश्ता बेहद पवित्र था लेकिन दोनों बुआ और भतीजा होने से पहले एक मर्द और एक औरत थे जिनके बीच शारीरिक आकर्षण लाजमी था,,,,,,, राजू को अपनी बुआ की खुली हुई बुर गरमा गरम कचोरी की तरह महसूस हो रही थी उत्तेजना का अनुभव करते हुए राजू रह-रहकर गुलाबी की बुर को अपनी मुट्ठी में भींच ले रहा था मानो कि जैसेउसके हाथ में गुलाब जामुन आ गया हो और वह दबाकर उसका सारा रस निकाल देना चाहता हो,,,।



दोनों का प्रगाढ चुंबन जारी था,,,,सलवार की डोरी खोल देने के बाद भी राजू में अभी तक अपने बुआ के बदन से सलवार को अलग नहीं किया था लेकिन उसके नंगे पन को अच्छी तरह से महसूस कर रहा था,,,,,।

ओहहहह बुआ तुम तो एकदम मलाई हो,,,(एक बार फिर से जोर से अपनी बुआ की बुर को अपनी मुट्ठी में दबाते हुए बोला,,,)

सहहहहह धीरे,,,, महुआ जाग जाएगी,,,,

नहीं जागेगी,,,, देख नहीं रही हो कैसे सो रही है,,,, कसम से पूरा तुम्हारे लिए बिना तो मुझे नींद भी नहीं आती इसलिए तुम्हें परेशान हो गया था कि दीदी के रहते मैं तुम्हारी चुदाई कैसे कर पाऊंगा,,,

हारे मैं भी इसीलिए परेशान थी,,,,,जैसा तेरा हाल है वैसा मेरा भी हाल है जब तक तेरा लंड मेरी बुर की गहराई नहीं नापता तब तक मुझे भी नींद नहीं आती,,,

अच्छा हुआ बुआ हम दोनों को जुगाड़ मिल गया,,,।

(ऐसा कहते हुए गुलाबी खुद ही अपने पैरों के सहारे से अपनी सलवार उतारने की कोशिश कर रही थी और यह देखकर राजू चुटकी लेते हुए बोला,,)

हाय मेरी बुआ,,,, बड़ी जल्दी पड़ी है तुम्हें नंगी होने की,,,

क्या करूं रे जब तक नंगी नहीं हो जाती तब तक चुदवाने का मजा ही नहीं आता,,,

सच बोलूं तो गोवा मुझे भी तुम्हें नंगी करके चोदने में ही मजा आता है,,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू अपनी जगह पर उठ कर बैठ गया और अपने हाथों से अपनी बुआ की सलवार को उतारने का था देखते ही देखते राजू ने बगल में सो रही अपनी बड़ी दीदी के पास लेटी हुई अपनी बुआ की सलवार उतार कर कमर से नीचे उसे नंगी कर दिया और उसकी चिकनी जांघ पर अपनी हथेली फिराते हुए बोला,,,)

सहहहहह आहहहहह कितनी मुलायम जांघ है तुम्हारी मन करता है कि तुम्हारा पूरा बदन अपनी जीभ से चाट जाऊं,,,,

तो चाट जाना रे,,,, बोलता क्यों है करके दिखा,,,,

हाय मेरी बुआ रानी तेरी यही अदा तो मुझे दीवाना कर दि‌‌ है,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू नेकुर्ती के ऊपर से ही गुलाबी की चूचियों को इतनी कसके तब आया कि उसकी चीख निकल गई लेकिन वह जल्दी अपनी चीख को दबा दी,,, और गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)

हरामी मादरचोद इतनी जोर से कोई दबाता है क्या,,,

क्या करूं बुआ तुम्हारी बातों से मुझे जोश आ गया था,,,।

जोश आ जाएगा तो क्या गांड मार लेगा,,,

वह तो मैं तुम्हारी मार ही चुका हूं,,,, चलो छोड़ो सब बात मुझे अपना दूध पिला दो,,,

अरे बुद्धू अभी इसमें से दूध निकलता ही कहां है,,,

तो क्या हुआ बुआ मजा तो आता है ना चूसने में,,,

तू सच में बहुत शैतान हो गया है और थोड़ा कम बोल देख नहीं रहा है बगल में महारानी सो रही है,,,,

कसम से बोला अगर आज कमरे में दीदी नहीं होती तो सुबह तक तुम्हारी चुदाई करता,,,

क्यों आज तेरा जोश ईतना ज्यादा बढ़ गया है,,,,

तुम्हारी बातों से बुआ,,,, अब थोड़ा सा उठो और मुझे कुर्ती उतारने दो,,,।

(राजू का इतना कहना था कि गुलाबी धीरे से उठ कर बैठ गई और राजू अपने हाथों से उसकी कुर्ती उतारने लगा देखते ही देखते रात के अंधेरे में कमरे के अंदर गुलाबी पूरी तरह से नंगी हो गई लेकिन उसके नंगे पन को अंधेरे में राजू देख नहीं पा रहा था लेकिन महसूस जरूर कर रहा था क्योंकि उसके दोनों हाथ गुलाबी की दोनों संतरा को थामें हुए थे,,, गुलाबी की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी फुली हुई कचोरी में से नमकीन चटनी निकल रही थी,,,, जिसको चाटने के लिए राजू का मन तड़प रहा था,,,,,, लेकिन राजू के हाथों में गुलाबी के संतरे आ जाने से कुछ देर के लिए उसका मन बदल गया था और वह अगले ही पल,,, गुलाबी के छुहारे को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया,,,, गुलाबी उत्तेजना के मारे गदगद हो गई,,,,।

राजू पूरी मस्ती के साथ गुलाबी की दोनों चूचियों को दबा दबा कर पी रहा था,,,,और गुलाबी मजे लेकर राजू को अपना चूची पीला रही थी,,,।

सहहहहह आहहहहहह ऊईईईईई ,,,,राजु आहहहहहहह बहुत मजा आ रहा है रे,,,(गुलाबी मादकता भरी लेकिन एकदम धीमे श्वर में बोल रही थी,,,,,,यह डर दोनों को था कि कहीं महुआ जागना जाएं लेकिन जवानी के जोश और औरत के भजन की चाहत में इंसान सब कुछ भूल जाता है एक औरत के जिस्म को पाने के लिए वह किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार रहता है वैसा ही कुछ दोनों इस समय कर रहे थे कि बगल में महुआ के होने के बावजूद भी दोनों एक दूसरे से अपनी प्यास बुझाने की खातिर एक दूसरे के अंगों से मजे ले रहे थे एक दूसरे की हरकतों का पूरा लुफ्त उठा रहे थे राजू तो फिर भी अभी पूरे कपड़ों में थाने की गुलाबी पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी उसके कपड़ों को उतारकर राजू बगल में रख दिया था,,,,,।

राजू जल्द से जल्द अपने मोटे तगड़े गंड को अपनी बुआ की बुर में डालकर उसकी चुदाई कर देना चाहता था लेकिन जुदाई से पहले की क्रीड़ा में उसे बेहद आनंद की प्राप्ति होती थी और उसकी हर एक हरकत का मजा गुलाबी पूरे जोश के साथ लेती थी और इसीलिए राजू जल्द ही अपनी बुआ की दोनों टांगों के बीच पहुंच गया रात के अंधेरे में कुछ भी दिख नहीं रहा था लेकिन राजु को इतना तो अंदाजा था ही की गुलाबी चूची और बुर कहां है और इसीलिए वहां अपने दोनों हाथों को गुलाबी की गांड के नीचे डाल कर उसे अपनी तरफ खींच लिया और अपने प्यासे होठों को कमरे के अंधेरे में गुलाबी की बुर पर रख दीया,,,।,, जैसे ही राजू के प्यासे होठ गुलाबी की तपती हुई बुर पर इस पर से हुई वैसे ही गुलाबी के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी और वह अगले ही पर अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठा‌ दी ताकि राजू आराम से उसकी बुर का रस पी सके,,,गुलाबी की इस हरकत पर राजू करके उसकी कमर को अपनी हथेली से दबा दिया और जितना हो सकता था उतनी जीभ को गुलाबी की गुलाबी बुर की गहराई में गाड दिया,,,

राजू की यह हरकत इतनी ज्यादा मादकता भरी थी कि पहली बार में ही गुलाबी राजू की जीभ के कारण अपनी उत्तेजना पर काबू नहीं कर पाई और भल भलाकर अपना मदन रसबहाने लगी,,,,,लेकिन राजू ने अपनी बुआ की बुर में से निकले बदन रस को अमृत की बूंद समझकर जीभ से होले होले पूरा का पूरा चट कर गया,,, और एक बार फिर से अपनी बुआ को उत्तेजित करने में लग गया राजू पागलों की तरह अपनी बुआ की बुर चाट रहा था उसके मदन रस में उसका पूरा चेहरा सन गया था और उसमें से उठ रही मादक खुशबू राजू को और ज्यादा उत्तेजित कर रही थी देखते ही देखते राजू अपनी दो उंगली को उसकी बुर में डालकर अंदर बाहर करने का ऐसा करने से गुलाबी पूरी तरह से चुदवाती हो गई और अपने मुंह से गर्मागर्म सिसकारी की आवाज निकालने लगी वह मदहोशी में भूल गई कि बगल में महुआ सो रही है,,,,।

गरमा गरम सिसकारी की आवाज कानों में पड़ते ही महुआ की नींद खुल गई ,,,,जवानी से भरी हुई महुआ जवानी का खेल खेल चुकी महुआ भला इस काम क्रीड़ा के गरमा गरम सिसकारी की आवाज को कैसे नहीं पहचानती प्यासी औरत के कानों में दूसरी प्यासी औरत की गरमा गरम सिसकारी की आवाज एकदम साफ सुनाई दे रही थी ऐसे में महुआ के होश उड़ गए क्योंकि जब उसे यह ज्ञात हुआ कि कमरे में तो केवल उसका छोटा भाई राजू और उसकी बुआ गुलाबी ही सो रहे थे तो यह आवाज कैसी है,,,, गुलाबी अभी भी राजू की हरकत की वजह से पूरी तरह से मदहोश होकर सिसकारी की आवाज निकाल रही थी कमरे के अंधेरे में भगवा को कुछ नजर नहीं आ रहा था बस दो काली परछाई नजर आ रही थी और उस काली परछाई उसे साफ दिखाई दे रही थी कि एक परछाई लेटी हुई है और दूसरी परछाई दोनों टांगों के बीच झुकी हुई है,,,,,महुआ की हालत खराब होने लगी गरमा गरम सिसकारी की आवाज सुनकर उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह दोनों परछाई है किसकी उसके बगल में तो राजू और गुलाबी सो रहे थे और दोनों के बीच इस तरह के संबंध स्थापित होना नामुमकिन था,,,,,

गुलाबी और राजू



लगातार गुलाबी के मुंह से गर्मागर्म सिसकारी की आवाज आ रही थी दोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी इसलिए दोनों की आवाज सुनने की कोई गुंजाइश महुवा को नजर नहीं आ रही थी क्योंकि दोनों अपने-अपने काम में लगे हुए थे,,,, महुआ के दिमाग में ढेर सारे सवाल उठने लगे वह सोचने लगी कि अगर दोनों परछाई उसके छोटे भाई राजू और उसकी बुआ की हुई तो क्या होगा वह सोचने लगी कि क्या है इसे घरेलू रिश्तो के बीच इस तरह के संबंध मुमकिन है उसे समझ में नहीं आ रहा था उसकी आंखें जो देख रही थी उससेउसे बिल्कुल भी तसल्ली नहीं हो पा रही थी कि आखिरकार दोनों पर चाहिए किसकी यही जानने के लिए वह लालटेन को जलाना चाहती थी,,, उसकी भी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी आखिरकार वह भी जवानी से भरी हुई थी और एक औरत की गरमा गरम सिसकारी की आवाज सुनकर उसके तन बदन में भी चुदवाश की लहर दौड़ रही थी क्योंकि शादीशुदा होने के बावजूद भी वह अभी तक प्यासी ही थी,,,, वह दोनों परछाई की हकीकत जानने के लिए धीरे से उठी और कोने में लटक रही लालटेन को जला दी लालटेन की लौ जलते ही पूरे कमरे में पीली रोशनी फैल गई और उस पीली रोशनी में उसकी आंखें जिस दृश्य को देखी उसे देख कर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई और आश्चर्य से खुला का खुला रह गया,,,,।
 
लालटेन के जलते ही लालटेन की पीली रोशनी में जो दृश्य महुआ की आंखों के सामने नजर आया उसे देखते ही महुआ के होश उड़ गए उसकी आंखें फटी की फटी रह गई और वह आश्चर्य से खुला रह गया क्योंकि उसने कभी सपने में भी इस तरह के दृश्य की कल्पना नहीं की थी,,,,,,। पल भर में ही महुआ की सांसे धुकनी की तरह चलने लगी,,,उसे तो समझ में नहीं आ रहा था कि जो कुछ भी वह देख रही है वह हकीकत है या कोई सपना,,,,लालटेन की पीली रोशनी में उसे साफ नजर आ रहा था कि उसकी बुआ चटाई पर एकदम नंगी होकर पीठ के बल लेटी हुई थी और उसकी दोनों टांगें खुली हुई थी,,, टांगों के बीच उसका छोटा भाई राजू जो कि अब पूरी तरह से जवान हो चुका था वह झुका हुआ था और वह उसकी बुर में अपनी जीभ डालकर चाट रहा था,,,,,,,,।

लालटेन की रोशनी कमरे में फैलते हैं गुलाबी और राजू दोनों हक्के बक्के रह गए दोनों के होश उड़ गए दोनों की चोरी आज पकड़ी गई थी दोनों ने अपनी भावनाओं पर अपनी जवानी पर काबू नहीं कर पाए थे जिसका नतीजा यह था कि आज दोनों अपनी बुआ की आंखों के सामने काम क्रीडा में लिप्त नजर आ गए थे,,, जैसे ही लालटेन की रोशनी कमरे में पहली वैसे ही राजू की जीभ गुलाबी की गुलाबी बुर में धंसी की धंसी रह गई,,, और गुलाबी को समझते देर नहीं लगी कि कमरे में लालटेन की रोशनी किसकी वजह से हुई है क्योंकि उसके बगल वाली जगह खाली थी वह महुआ से नजर तक मिलाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी,,,, महुआ उसी तरह से आश्चर्य से भरी हुई ही बोली,,,।

यह क्या हो रहा है,,,?

(महुआ के सवाल का जवाब ना तू राजू के पास था और ना ही गुलाबी के पास क्योंकि दोनों आज रंगे हाथ पकड़े गए थे अगर कोई महुआ को उन दोनों के बारे में उन दोनों की बात बताता तो शायद यह जानकर राजु और गुलाबी अपनी तरफ से अपने बचाव में कुछ कह भी सकते थे लेकिन यहां कहने के लिए कुछ भी नहीं था,,,, राजू एक बार अपनी बहन की तरफ देखा और दूसरी बार उसकी तरफ देखने की उसकी हिम्मत नहीं हुई वह धीरे से अपना मुंह गुलाबी की बुर से हटाया और बगल में पड़ी चादर को खुद ही गुलाबी के नंगे बदन पर डाल दिया और वही सर पकड़ कर बैठ गया,,,,महुआ जान चुकी थी कि दोनों के पास कहने के लिए कोई शब्द नहीं थे इसलिए वह उन दोनों की तरफ आगे बढ़ी और दोनों को लगभग डांटते हुए बोली,,,,।)

यह सब क्या हो रहा है बुआ,,,, और वह भी राजू के साथराजू तुझे बिल्कुल भी शर्म नहीं आई इस तरह की हरकत करते हुए और वह भी अपने ही बुआ के साथ,,,,।

दीदी मैं,,,,

बस चुप हो जा मुझे कुछ नहीं सुनना तुम दोनों आपस में ही इस तरह का गलत काम कर रहे हो पवित्र रिश्ते को तार-तार कर रहे हो,,,, मैं कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि मुझे यह सब देखना पड़ेगा,,,,।

(गुलाबी तो महुआ की बात सुनकर रोने लगी थी और राजू वहीं पास में खामोश बेटा सिर्फ अपनी बड़ी दीदी की बातें सुन रहा था,,,,)

तुम दोनों को यह सब करते शर्म नहीं आई,,,,,, अगर मां और बाबू जी को पता चलेगा तो क्या होगा तुम दोनों को पता है,,,,।

(इतना सुनते ही गुलाबी झट से अपनी जगह पर उठ कर बैठ गई और महुआ का पांव पकड़ ली और बोली,,)

नहीं नहीं महुआ ऐसा बिल्कुल भी मत करना,,, नहीं तो मैं मर जाऊंगी,,,,,,।

अरे अरे यह क्या कर रही हो बुआ,,,, तुम पहले मेरा पांव छोड़ो,,,, पागल हो गई हो मेरा पैर पकड़ रही हो,,,,

(अपने पैर छुड़ाने में गुलाबी के बदन से राजू के द्वारा डाली गई चादर हट गई और उसकी नंगी चूचियां महुआ को नजर आने लगी जो कि बेहद खूबसूरत गोलाई लिए हुए थी,,,, और महुआ की खुद की चूची बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी हो गई थी क्योंकि वह लगभग गांव में शादी से पहले रोज ही लड़कों से दबवाती थी और उन्हें पिलाती भी थी,, इसलिए उसे अपनी बुआ की संतरे जैसी चूचियां आकर्षित कर रही थी,,,, महुआ की वहीं बैठ गई थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं लेकिन जिस तरह का नजारा उसने अपनी आंखों से देखी थी उसे देखकर उसके तन बदन में हलचल सी मच ने लगी थी वह भी उत्तेजना महसूस कर रही थी और इसी के चलते उसकी बुर से भी मदन रस टपक रहा था,,,लालटेन की पीली रोशनी में उसने साफ देखी थी कि कितने बजे लेकर उसकी बुआ उसके भाई से अपनी बुर चटवा रही थी,,,। महुआ खेली खाई जरूर थी लेकिन उसने कभी बुर चटाई का आनंद नहीं ली थी क्योंकि गांव में इत्मीनान से चोरी-छिपे चुदवाने का मजा उसने नहीं ले पाई थी बस जहां भी मौका मिलता था वहां पर अपनी सलवार खोल कर खड़ी हो जाती थी,, और चुदवा लेती थी इतना ही उसे मौका मिल पाता था और कभी-कभी केवल कमीज के ऊपर से या कम इसको थोड़ा उठाकर चूची को दबवाने का मजा ले लेती थी,,, हालांकि उसे चुची दबवाने का शुख ज्यादा मिला था लेकिन बुर पर लंड के सिवा होंठों का स्पर्श आज तक नहीं हुआ था,,,इसलिए तो इस अद्भुत दृश्य को देखकर उसके मन में भी भावनाएं जागने लगी उसकी भी इच्छा जोर करने लगी,,,,वह सिर्फ दोनों को डराना धमकाना चाहती थी ताकि उसका भी उल्लू सीधा हो सके आखिरकार शादी के बाद से वह प्यासी ही थे और एक प्यासी औरत को और क्या चाहिए था,,,, सब कुछ उसकी आंखों के सामने ही था,,, बस उसे अच्छी तरह से अपने लिए उपयोग में लाना था,,,,, कुछ देर की खामोशी के बाद महुआ बोली,,,।)

चुप रहो बुआ रोना बंद करो मैं कभी सपने में भी नहीं सोच सकती थी कि तुम दोनों के बीच इस तरह का संबंध स्थापित हो जाएगा मुझे तो देखकर एकदम शर्म आ रही है लेकिन तुम चिंता मत करो मैं मां और बाबू जी को कुछ भी नहीं बताऊंगी,,,।

(इतना सुनते ही दोनों की आंखों में चमक आ गयी दोनों आश्चर्य से; महुआ की तरफ देखने लगी इस बात से उन दोनों को संतुष्टि थी कि महुआ उन दोनों की बात किसी को नहीं बताएगी,,,, महुआ अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली)

मैं किसी को कुछ भी नहीं बताऊंगी लेकिन मुझे यह जानना है कि तुम दोनों के बीच आखिर यह रिश्ता कैसे जन्म ले लिया,,, ऐसा तो बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए था,,,, बोलो बुआ,,,।

महुआ मैं तुझसे बड़ी हूं,,,, लेकिन मेरे से जल्दी तेरी शादी हो गई एक औरत होने के नाते तुझे भी है पता होना चाहिए कि समय आने पर औरत को मर्द की जरूरत पड़ने लगती है,,,मुझे भी ऐसा महसूस होने लगा था लेकिन मैं कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि मेरा रिश्ता अपने ही भतीजे के साथ हो जाएगा,,,,,,, लेकिन यह सब करने का मेरा इरादा बिल्कुल भी नहीं था जो कुछ भी हुआ अनजाने में ही हुआ,,, ना तो इसमें मेरी कोई गलती है और ना ही राजू की,,,

वही तो मैं पूछ रही हूं बुआ कि ऐसा कैसे हो गया क्यों तुम इतना मजबूर हो गई,,,।

(अपनी बड़ी बहन की बातों को सुनकर राजू को भी तसल्ली हो रही थी कि उन दोनों का राज,, राज ही रहेगा उसकी बड़ी दीदी ऐसा कुछ भी नहीं करेगी जिससे दोनों को शर्मिंदा होना पड़े,,,, गुलाबी भी इत्मीनान हो चुकी थी वह खुलकर बताने लगी थी वह बोली,,,)

मजबूर,,,, महुआ ,,, मेरी जगह अगर तू होती तो तेरा भी वही हाल होता जो मेरा उस समय था,,,,,,

ऐसा क्या हो गया था,,,,(महुआ उत्सुकता दिखाते हुए बोली,,)

यह पूछ क्या नहीं हुआ,,,, मेरा तो दिमाग ही घूम गया था,,,

अरे बताएगी भी या ऐसे ही पहेलियां बुझती रहेगी,,,

(राजू बड़े गौर से देने की बातों को सुन रहा था,,, जिस तरह की उत्सुकता महुआ दिखा रही थी उसे देखते हुए राजू का दिमाग घूम रहा,,, था,, गांव की बहुत सी औरतों के संगत में आकर राजू औरतों के मन का हाल समझने लगा था,,, इसीलिए तो वह अपनी बड़ी बहन के मन की जिज्ञासा को भांपकर अंदर ही अंदर प्रसन्न हुआ जा रहा था,,,, महुआ की बात सुनकर गुलाबी बोली,,)

अरे क्या बताऊं महुआ,,,, यह सब बात में किसी को बताती नहीं लेकिन तुझे बताना पड़ रहा है क्योंकि मजबूरी है,,,,

इसीलिए तो कह रही हूं बुआ जल्दी से बता दो,,,(अपने होठों पर कामुक मुस्कान लाते हुए महुआ बोली )

तू तो जानती ही है मैं और राजू एक ही खटिया पर सोते हैं लेकिन उस दिन से पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था कि मेरे मन में राजू को लेकर गलत भावना जागी हो साथ में भले सोते थे लेकिन ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था,,, सुबह जब मेरी आंख खुली तो मैं आलस मरोडते हुए खटिया पर बैठ गई बाहर अभी भी अंधेरा था,,,कमरे में लालटेन चल रही थी और लालटेन की पीली रोशनी पूरे कमरे में जगमगा रही थीमैं सोची सुबह हो गई है तो राजू को भी चढ़ा दूं इसलिए राजू की तरफ देख कर उसे जगाने ही वाली थी कि मेरी नजर उसके लंड पर पड़ी जो कि टुवाल लपेटे होने की वजह से उसका लंड बाहर निकला हुआ था और महुआ कसम से मेरी तो हालत ही खराब हो गई,,, राजू का लंड कितना मोटा और तगड़ा और लंबा है कि पूछो मत,,, छत की तरफ टनटना कर खड़ा था सच कहूं तो महुआ,,, राजू का लंड देखते ही मेरी बुर कुलबुलाने लगी,,, इस तरह से कहने में अब मुझे तेरे सामने किसी भी प्रकार की शर्म नहीं है क्योंकि जो सच है वह सच है,,,,

(अपनी बुआ की बात सुनकर महुआ अपने मन में सोचने लगी कि राजू के पास ऐसा कैसा लंड है किसी से देखकर बुआ रिश्ते नातों को एक तरफ रख कर उसके ऊपर ही चढ़ गई,,,और उसके मन में यह ख्याल आने लगा कि गांव के सभी जवान लड़कों का लगभग उसने लंड को देखी थी और उसे अपनी बुर में ले भी चुकी थी,,, बुआ के बताए अनुसार इतना तो दमदार किसी का भी नहीं था,,, यह सब सोचकर महुआ की उत्सुकता अपने भाई के लंड को देखने के लिए बढ़ने लगी,,, कुछ देर तीनों के बीच शांति छाई रही और फिर गुलाबी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)

सच कहूं तो महुआ राजू के लंड को अपने हाथ में पकड़ने की इच्छा को मैं रोक नहीं पाई और उसे में अपना हाथ बढ़ा कर पकड़ ली राजू खाना कितना गर्म था कि लंड को पकड़ते ही उसकी गर्मी से मेरी बुर का पानी पिघलने लगा,,,

(अपनी बुआ के मुंह से इतनी गंदी बात को सुनकर महुआ के तन बदन में आग लगने लगी,,,) और उसी समय राजू की नींद खुल गई पहले तो वह एकदम से घबरा गया लेकिन सच कहूं महुआ राजू के लंड को छोड़ने की मेरी इच्छा बिल्कुल भी नहीं हो रही थी इसलिए मैं उसके लंड को पकड़ कर ऊपर नीचे करके हिलाने लगी थोड़ी ही देर में राजू मेरी आंखों की भाषा को समझ गया,,, आखिरकार वह भी पूरी तरह से जवान था और आंखों ही आंखों में इशारा होते ही मैं वापस खटिया पर लेट गई और अपनी सलवार उतार कर एक तरफ फेंक दी बाहर अभी भी अंधेरा था इसलिए हम दोनों के पास समय था राजू को कुछ भी नहीं आता था और ना मुझे लेकिन इतना तो मैं जानती थी कि चुदाई कैसे होती है इसलिए मैं खुद ही अपनी टांगे फैलाकर,,, राजू के लंड को अपने हाथ से पकड़ कर अपनी बुर पर रख दिया और उसे अंदर डालकर अपनी कमर हिलाने के लिए बोली बस फिर क्या था यह सिलसिला शुरू हो गया और आज तक चालू ही है,,, मैं आज तुझे बता रही हूं महुआ मैं तुझसे बड़ी हूं सबसे पहले मेरे बदन में जवानी चिकोटि काट रही थीमेरी शादी तुझसे पहले होनी चाहिए थी लेकिन ना जाने क्यों भैया ने तेरी शादी पहले कर दी इसलिए मुझे तुझसे थोड़ी जलन होती थी लेकिन राजू के मिल जाने के बाद मुझे तेरी शादी का कोई भी अफसोस नहीं रह गया मुझे तो राजू के साथ बहुत मजा आता है,,,,

(गुलाबी सब कुछ बिना शर्माए बता दें क्योंकि वह जानती थी कि अब महुआ से शर्म करने का कोई फायदा नहीं है और उसे यकीन था कि राज के लंड के बारे में सुनकर महुआ का भी मन डोल उठेगा भले ही वह उसकी बड़ी बहन हे ,,,,, भाई बहन के रिश्तो के बीच वह पहले से ही चुदाई का सुख भोग चुकी थी इसलिए उसकी नजर में भाई बहन के रिश्ते की मर्यादाऔर पवित्रता कोई मायने नहीं रखती थी और इस बात को भी वह भली-भांति जानती थी कि जब औरत के बदन में चुदास की लहर उठती है तो वह यह नहीं देखती कि सामने वाला मर्द उसका भाई है चाचा है मामा है या बेटा है बस उसे तो अपनी प्यास बुझाने से मतलब होता है,,,, और जिस तरह की बात उसने महुआ को बताई थी पक्के तौर पर उसे यकीन था कि उसकी बुर भी पानी छोड़ रही होगी इसलिए महुआ कुछ बोलती उससे पहले ही गुलाबी अपना दांव खेलते हुए बोली,,,)

देखेगी महुआ अपने भाई के लंड को,,,, बस एक बार देख ले तेरा इरादा ना बदल जाए तो कहना,,,

(इतना सुनते ही राजू का मन प्रसन्नता से झूमने लगा उसे लगने लगा कि उसकी बहन भी अब उससे चुदने वाली है लेकिन फिर भी वह जानबूझकर आनाकानी करते हुए बोला)

नहीं नहीं बुआ ऐसा नहीं हो सकता,,, वह मेरी दीदी है मैं ऐसा नहीं कर सकता,,,

अरे बुद्धू मैं तुझे तेरी दीदी को चोदने के लिए नहीं बोल रही हूं उसे सिर्फ तेरा हथियार दिखाने के लिए बोल रही हु,,,

नहीं बुआ मुझे शर्म आ रही है,,,,

अरे पगले मेरे साथ तुझे शर्म नहीं आती मैं तो तेरी बुआ हूं ना,,,,

(गुलाबी और राज्यों के बीच की बात को सुनकर महुआ से रहा नहीं जा रहा था वह जल्द से जल्द अपने भाई के लंड को देखना चाहती थी,,,, इसलिए वह खुद ही बोली,,,)

दिखा दे राजू नहीं तो मैं तुम दोनों की करतूतें मां और बाबू जी को बता दूंगी,,,,।

(अपनी बहन की बात सुनकर राजू को बिल्कुल भी डर नहीं लगा क्योंकि वह समझ चुका था कि उसकी बहन के मन में क्या चल रहा है लेकिन फिर भी डरने का नाटक करते हुए बोला,,,)

नहीं नहीं दीदी ऐसा बिल्कुल भी मत करना मैं दिखाता हूं,,,

(इतना कहना के साथ ही राजू खड़ा हो गया और पहले से ही अपनी बुआ की गरमा गरम बातों को सुनकर उसका लंड खड़ा हो चुका था जो कि पजामे में पूरी तरह से तंबू बनाया हुआ था इस पर नजर पड़ते ही महुवा के तन बदन में सनसनी सी दौड़ने लगी अपनी बुआ की कही बात उसे सच लगने लगी,,,,खेली खाई महुआ को समझ में आ गया था कि पजामे के अंदर वाकई में गदर मचाने वाला हथियार है,,,,राजू जानबूझकर अपनी दीदी के सामने बिल्कुल भी शर्मनाक करते हुए एकदम से खड़ा हो गया था,,,, गुलाबी पास में बैठ कर मुस्कुरा रही थी,,,,, राजू गुलाबी की तरफ देखा तो गुलाबी बोली,,)

शर्मा मत दिखा दे वैसे भी तेरे जीजा तेरी दीदी की चुदाई नहीं कर पाते हैं,,, इसलिए तो तेरी दीदी प्यासी है,,,,।

(कोई और समय होता तो शायद अपनी बुआ की बात का महुआ को बहुत बुरा लगता लेकिन इस समय का हालात बिल्कुल अलग था इसलिए अपनी बुआ की बात का उसे बिल्कुल भी अफसोस नहीं हो रहा था वह तो वह तो उत्सुक थी अपने भाई के नंगे लंड को देखने के लिए,,,, और राजू भी ललाईत था अपने नंदू को अपनी बहन को दिखाने के लिए इसलिए वह पजामे को पकड़कर एक झटके में नीचे कर दिया और उसका लंड लहरा के एकदम से बाहर आ गया पहचाने से बाहर आकर झूलते हुए लंड को देखकर वाकई में महुआ की बुर से पानी गिरने लगा महुआ तो आश्चर्य से अपनी हथेली को अपने मुंह पर लगा दी,,, उसकी आंखें फटी की फटी रह गई उसने आज तक इस तरह का लंबा तगड़ा मोटा लंड नहीं देखी थी,,,, महुआ के तन बदन में हलचल सी होने लगी और वह अपने मन में सोचने लगी कि वाकई में उसकी बुआ जो कुछ भी कह रही थी सच कह रही थी इस नाम के लंड को देखकर तो कोई भी औरत अपनी राह भटक जाए,,,, इसे अपने अंदर लेने के लिए किसी भी औरत का मन मचल जाए,,,,।)

बाप रे,,,,(महुआ एकदम आश्चर्य जनक शब्दों में बोली राजू अपनी दीदी के मुंह से यह शब्द सुनकर अंदर ही अंदर बहुत खुश होने लगा वह समझ गया था कि उसकी दीदी भी अपनी दोनों टांग उसके लिए खोलने वाली है,,,, महुआ की हालत को देखकर गुलाबी उसकी जवानी की आग में घी डालते हुए बोली,,,,)

पकड़ ले महुआ अपने भाई के लंड को,,,,,, देख क्या रही है मैं जानती हूं तू प्यासी है तेरा पति तुझे ठीक से चोद नहीं पाता इसीलिए तु मां नहीं बन पा रही है अब तो तेरे पास मौका और दस्तूर दोनों है,,,, यह राज हम तीनों के बीच ही रहेगा,,, अपने भाई से चुदवा कर अपने पांव भारी कर ले कहीं ऐसा ना हो जाएगी तेरे ससुराल वाले तेरे पति की शादी दूसरे जगा कर दे और तुझे ठोकर खाने के लिए छोड़ दें,,,,।

(गुलाबी की बातें महुआ के दिमाग पर हथौड़े की तरह बज रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उसके बुआ के कहे अनुसार वास्तव में वह आप एकदम प्यासी थी और मां बनने वाली बात से वह समझ नहीं पा रही थी कि वह क्या करें क्योंकि उसके ससुराल वाले उसके पति की गलती मानने को बिल्कुल भी तैयार नहीं थे जिस तरह का रवैया उन लोगों का था उसे देखते हुए महुवा को भी लग रहा था कि कहीं उसे घर से बाहर ना निकाल दें,,,, लेकिन फिर अपने मन में सोचने लगी कि अगर अपने भाई से चुदवा कर वह गर्भवती हो गई,,तो,,, क्या होगा,,, यह बात अगर किसी को पता चल गई तो क्या होगा,,, अपने ही भाई के बच्चे की मां बनने में कैसा लगेगा,,,, फिर अपने ही सवाल का जवाब अपने आप को देते हुए वह अपने मन में सोची,,,, लोगों को पता ही नहीं चलेगा कि यह बच्चा किसका है उसका घर संसार भी बच जाएगा और एक अद्भुत सुख और तृप्ति का एहसास उसे भी मस्त कर देगा,,, काफी सोच विचार करने के बाद भगवा अपने मन में ठान ली,,,, राजू अभी भी उसी तरह से खड़ा था उसे आप अपनी बहन के सामने अपना लंड दिखाने में बिल्कुल भी शर्म महसूस नहीं हो रही थी बल्कि वह अपनी बहन की उत्तेजना को बढ़ाने के लिए खुद अपने लंड को अपने हाथ से पकड़ कर उसे ऊपर नीचे करके हिलाना शुरू कर दिया जिसे देखकर महुआ से बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा अपना हाथ आगे बनाकर अपने भाई के लंड को थाम ली,,,जवानी और मर्दाना ताकत से भरे हुए राजू के लंड की गर्मी को अपनी हथेली में महसूस करते ही महुआ को वह गर्मी अपनी दोनों टांगों के बीच महसूस होने लगी और उस गर्मी को पाकर उसकी पूर्व से मदन रस पिघलने लगा,,,,, और उत्तेजना के मारे महुआ अपने भाई के लैंड को अपनी मुट्ठी में और जोर से कस ली ऐसा करने से उसके मुख से अनजाने में ही गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,।

सहहहहह आहहहहहहह राजू,,,,
 
महुआ शादी के बाद से एकदम प्यासी थी,,, और रात को अनजाने में ही अपनी आंखों से जो नजारा उसने देखी थी,,, उसे देखकर वह पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी,,, उसे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था अपनी बुआ के कहने पर उसने अपनी आंखों से अपने छोटे भाई के लंड क

को देखकर पूरी तरह से मस्त हो गई उसने कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि किसी का लंड ईतना मोटा लंबा और तगड़ा होता है इसलिए उसे छूने की अपनी लालच को वह दबा नहीं पाई अपनी बुआ के कहने पर वह अपना हाथ बढ़ा कर अपने भाई के लंड को अपनी मुट्ठी में दबा ली,,, लंड की मोटाई और गरम महसूस करते ही उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौडने लगी और साथ ही लंड की गर्मी पाकर उसकी बुर से मदन रस पिघलने लगा,,,,,।

यह बेहद अद्भुत नजारा था जिसके बारे में तीनों में से किसी ने भी कल्पना नहीं किया था वैसे तो सब कुछ कल्पना से परे यह होता जा रहा था लेकिन इस समय कमरे का नजारा जो बना हुआ था वह बेहद कामोत्तेजना से भरा हुआ था,,, गुलाबी जो की पूरी नंगी थी वह बैठी हुई थी और राजू अपने पजामे को घुटनो तक नीचे करके अपने खाने लंड को अपनी बहन को दिखा रहा था और उसकी बहन बिल्कुल भी सोच विचार किया दिलाई अपना हाथ बढ़ा कर उसके लंड को पकड़े हुए थे,,,, उत्तेजना के मारे महुआ के मुंह से गर्म सिसकारी फूट पड़ी थी वह पल भर में ही शादी के पहले के सारे दृश्य को याद करने लगी उसने गांव के लगभग लगभग सभी लड़कों से चुदाई का आनंद लूटी थी लेकिन जिस तरह का लंड उसके भाई का था उस तरह की लंड से वह कभी भी मुखातिब नहीं हो पाई थी इसलिए तो अपने भाई के लंड को पकड़ कर वह पूरी तरह से मचल उठी थी उसकी गरमा गरम सिसकारी की आवाज सुनकर हमको गुलाबी बोली,,,।

क्यों रे महुआ क्या हुआ,,, निकल गई ना तेरी सिसकारी,,,, जब तेरा यह हाल है तो सोच मेरा क्या हुआ होगा,,,,मुझे पूरा यकीन है कि तेरा भी मन इसे अपनी बुर में लेकर चुदवाने को कर रहा होगा,,,,।

(गुलाबी की बातों को सुनकर एक तरफ राजू पूरी तरह से मस्ती से सराबोर हुआ जा रहा था क्योंकि एक तरह से उसकी बुआ उसका ही काम कर रही थी,,, और दूसरी तरफ गुलाबी की बात को सुनकर महुवा हक्की बककी हो गई थी,,, क्योंकि सीधे-सीधे उसकी बुआ उसे अपने भाई से ही चुदवाने के लिए बोल रही थी,, उत्तेजना के मारे महुआ का गला सूखता चला जा रहा था उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था जो कुछ भी उसकी बुआ कह रही थी उसमें उसकी ही भलाई थी,, लेकिन उसे शर्म भी आ रही थी क्योंकि आज तक उसने किसी रिश्ते के बीच अवैध संबंध को ना तो देखी थी और ना ही उसके बारे में कभी सुनी थी इसीलिए अपने भाई के साथ शारीरिक संबंध बनाने में उसे अजीब लग रहा था,,, राजू अपनी बुआ की बात सुनकर अपनी बड़ी दीदी के जवाब का इंतजार कर रहा था और उसे पक्के तौर पर मालूम था कि जिस तरह से उसकी बहन ने उसके लंड को पकड़ कर अपने आप पर काबू न कर पाने कि सूरत में उसके मुख से गरमा गरम सिसकारी फूट पड़ी थी उसे देखते हुए उसे समझ में आ गया था कि उसकी बहन की दोनों टांगें उसके लिए जरूर खुलेगी,,,,,, वह कुछ बोल नहीं रहा था बस स भरी नजर से अपनी बुआ और अपनी दीदी को देख रहा था महुआ को समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या बोलेवह कभी गुलाबी को तो कभी अपने भाई राजू को देख रही थी लेकिन हाथ में अभी भी राजू का लंड पकड़े हुए थे जिससे वह धीरे-धीरे करके हिला रही थी,,, उसे इस तरह से विचार मग्न देखकर गुलाबी फिर बोली,,,।)

क्या सोच रही है रे किसी को कानों कान खबर तक नहीं पड़ेगी तेरा काम भी बन जाएगा और तेरी प्यास भी बुझ जाएगी जानती हो ना ससुराल में बच्चे ना होने से कितने ताने सुनना पड़ता है और तो और ससुराल वाले कहीं तुझे घर से निकाल दिया तब तू क्या करेगी,,,।

(महुआ के लिए उसकी बुआ की बातें सोचने पर मजबूर कर दी थी उसने कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि वह ऐसा दिन भी देखेगी अपने भाई के बारे में तो इस तरह कि उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी भले ही वह बेहद कामुक लड़की होने के साथ-साथ गांव के लड़कों से चुदाई का सुख प्राप्त कर चुकी थी लेकिन अपने भाई के बारे में कभी भी वह गलत नहीं सोची थी लेकिन आज कमरे में अपने भाई के लंड को पकड़कर और पूरी तरह से मचल उठी थी उसे अपनी बुर में लेने के लिए,,,। लंड की गर्मी उसे मदहोश कर रही थी वह अपनी बुआ की तरफ देख कर बोली,,,)

लेकिन बुआ यह मेरा छोटा भाई है,,,

मेरा भी तो भतीजा है,,, लेकिन मैंने तो रिश्ते नाते नहीं देखी अरे पगली जब बुर में आग लगी होती है ना तो बुर भाई बाप नहीं देखती बस देखती है तो उनका लंड क्योंकि उनकी बुर में जाकर उनकी प्यास बुझा सके और मैं दावे के साथ कह सकते हो कि तेरी प्यास को तृप्त करने वाला इस समय से तेरा भाई नहीं है जो तुझे चोद कर तुझे तृप्त भी करेगा और तुझे पेट से भी करेगा ताकि तू अपने ससुराल में सर उठाकर जी सकें,,,,,,,।

(गुलाबी की बातें महुआ को 100 फ़ीसदी सच लग रही थी जो कुछ भी महुआ अपने कानों से सुन रही थी उसमें उसका ही फायदा था आखिरकार वा उसकी बुआ थी कोई गैर तो थी नहीं और वैसे भी अपनी बुआ की बात ना मानती तो भी महुआ का मन अपने भाई से चुदवाने के लिए मचल उठाना,,, फिर भी वह थोड़ी देर खामोश रहने के बाद बोली,,,)

राजू को तो एतराज होगा ना,,,,

अरे तू कैसी बातें कर रही पगली भला राजू को इसमें कौन सा एतराज होगा उसके तो मजे ही मजे हैं एक और वह उसे चोदने को मिल जाएगी,,, और अपने मजे के साथ साथ वह तेरा दुख भी दूर कर देगा,,, क्यों राजू तुझे कोई ऐतराज है,,,(राजू की तरफ देखते हुए गुलाबी बोली,,, राजू की उत्तेजना बढ़ती जा रही क्योंकि अब वह अपनी बहन की चुदाई करने वाला था इसलिए बिना जवाब दिए ही वह,,, अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपनी बहन की छाती पर से उसके साड़ी का पल्लू पकड़ कर नीचे गिरा दिया और उसकी आंखों के सामने उसकी बड़ी बहन की भारी-भरकम चूचियां जोकि ब्लाउज में कह दी थी वह पूरी तरह से अपना आकर्षण जमाने लगे ब्लाउज का ऊपर का एक बटन खुला हुआ था जिसकी वजह से उसकी भारी-भरकम खरबूजे जैसी चूचियां बाहर को निकलने को तैयार थी,,,, इस हरकत से महुआ एकदम शर्म से लाल हो गई क्योंकि उसके भाई ने बिना कुछ बोले ही उसकी जवानी पर से पर्दा हटा दिया था शर्मा कर महुआ ने अपनी नजरों को नीचे झुका ली,,, लेकिन अभी भी उसके हाथ में राजू का लंड था,,, राजू की हरकत देखते हुए गुलाबी बोली,,,)

देखी मेरी महुआ रानी तेरे भाई को कोई एतराज नहीं है उसे तो बस बुर से मतलब है और बुर बुआ की हो या बड़ी दीदी की,,, इसे अगर मौका मिले तो यह तो तेरी मां की भी जुदाई कर दे,,,,(अपनी बुआ की यह बात सुनकर राजू अपनी बुआ की तरफ देख कर मुस्कुराने लगी और अपनी बुआ की बात और राजू का मुस्कुराता हुआ देखकर महुआ शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी उसे समझ में आ रहा था कि उसका छोटा भाई कितना बदल चुका है और उसे बदलने में उसकी बुआ का पूरा हाथ है,,,, इन सब बातों का इस समय कोई मायने नहीं था इस बात को वह भी अच्छी तरह से जानती थी वह भी 2 साल से प्यासी थी इसलिए आज अपने भाई के मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर में लेकर अपनी प्यास बुझाना चाहती थी जिसके लिए वह पूरी तरह से लालायित भी थी,,,वह अपने मन में यही सब सोच रही थी कि राजू अपनी हरकत को आगे बढ़ाते हुए ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया था,,,,,,अपनी बहन की चूची को ब्लाउज के ऊपर से ही अपने हाथ में लेते ही राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी अपनी बहन के बारे में उसने आज तक कभी इस तरह की भावना नहीं रखा था और वह भी शायद इसलिए कि उसकी बहन 2 साल पहले ही शादी करके अपने ससुराल जा चुकी थी और उस समय का राजू मैं और इस समय के राजु में जमीन आसमान का फर्क था ,,,, अगर इस समय महुआ का विवाह ना हुआ होता तो शायद राजू अब तक अपनी बड़ी दीदी को कब से चोद चुका होता,, जब वह अपनी मां को चोदने की लालसा में पूरी तरह से जल रहा था तब तो उसकी बहन खुद ही पूरी तरह से जवानी से भरी हुई थी ऐसे में वह अपनी बहन को जरूर चोदता,,,,,,, क्योंकि राजू अधिकतर औरतों की बड़ी-बड़ी कौन-कौन गांड से आकर्षित होता था और महुआ की गांड तो बवाल थी,,, उसकी गोल-गोल साड़ी में कसी हुई बड़ी बड़ी गांड देखकर,,, राजू का मन जरूर उसके ऊपर मोहित हो गया होता,,,, वैसे भी राजू की मुलाकात उसकी बहन से शाम ढलने के बाद हुई थी अंधेरे में वह अपनी बहन को ठीक से देख नहीं पा रहा था लेकिन इस समय लालटेन की पीली रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था पहली बार वह अपनी बहन की बड़ी बड़ी चूचीयो पर नजर गड़ाया हुआ था जिसे वो खुद अपने हाथों में लेकर जोर जोर से दबा रहा था,,,, महुवाअपने भाई के हथेलियों की ताकत को देखकर रोमांचित हुए जा रही थी क्योंकि उसे इतनी सही समझ में आ गया था कि उसका भाई रात भर उसको रगड़ कर चोदेगा,,, और यही तो वह चाहती थी,,,,,,।

लालटेन की पीली रोशनी में राजू अपनी बहन की मदमस्त कर देने वाली जवानी को अपनी आंखों से देख कर पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था और इसी मदहोशी का कसर वह अपनी बहन की चूची पर उतार रहा था,,,जिसे वो ब्लाउज के ऊपर से ही जोर जोर से दबाता हुआ अपनी बहन की गरमा गरम संस्कारी निकाल रहा था,,, उत्तेजित होते हुए महुआ अपनी बुर से पानी छोड़ रही थी,,,,,, और राजू अपनी बहन की चूची दबाता हुआ मस्त होकर बोला,,,।

सहहहह आहहहहह,,, क्या मस्त चूचियां है दीदी,,,,

(राजू की बात सुनकर गुलाबी बोली,,,)

देखी महुआ रानी तेरे भाई की बेशर्मी और तुझे लगता था कि तेरा भाई तुझे चोदने के लिए तैयार नहीं होगा अरे तूने अभी इसकी बेशर्मी देखी कहां है देखना एक बार जब तेरी बुर में लंड जाएगा ना तो तेरी ऐसी चुदाई करेगा कि तू पानी मांगने लगेगी,,,,,,

(अपनी बुआ की बात सुनकर गुलाबी पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी उससे कुछ बोला नहीं जा रहा था हम अपने बाल की हरकत से पूरी तरह से हैरान थी कि उसके भाई में जरा भी शर्म लिहाज नहीं रह गया था पहली बार में ही वह अपनी बहन के साथ बिना शर्मा इस तरह की हरकत कर रहा था इस बात से महुआ पूरी तरह से हैरान भी थी और आनंदित भी हो रही थी,,,,)

हाय दीदी तेरी चूचियां ब्लाउज में जब इतनी कसी हुई है तो नंगी कितनी मस्त लगती होगी,,,, रुक दीदी मैं तेरा ब्लाउज उतारता हूं,,,।

(महुआ की तो सांसे ऊपर नीचे हो रही थी इतनी भाई की बातों को सुनकर और वह भी बेहद गंदी,,,, शर्म से और उत्तेजना से महुआ की टांगें थरथरा रही थी क्योंकि बिना उसका जवाब सुने ही राजू अपनी ऊंगलीयो को हरकत मे लाते हुए उसके ब्लाउज के बटन खोलना शुरू कर दिया था जैसे-जैसे बटन खुलता जा रहा था वैसे वैसे महुआ की सांसे ऊपर नीचे होती जा रही थी और देखते-देखते राजू अपनी बहन के ब्लाउज का आखिरी बटन खोल दिया उत्तेजना के मारे और इस बात के एहसास से की अब उसकी चूचियां उसके भाई की आंखों के सामने एकदम नंगी हो जाएंगी और वह इस अहसास से पूरी तरह से उत्तेजित हो गई और अपने भाई के लंड को कस कर अपनी मुट्ठी में दबोच ली,,, वह इतनी कसकर लंड को मुट्ठी में दबाई थी कि राजू की चीख निकलने वाली थी लेकिन वह अपने बहन के सामने पहली बार में ही कमजोर नहीं देखना चाहता था इसलिए अपने लंड के दर्द को वह अपनी बहन की चूची को देखने की खुशी में पी गया था,,, और ब्लाउज केखुलते ही जो नजारा उसकी आंखों के सामने दिखाई दिया उसे देखकर उसका मुंह खुला का खुला रह गया,,,,।

Mahua ki badi badi chuchiyo ko dabata hua raju



महुआ की बड़ी-बड़ी और गोल-गोल चुचियां एकदम आकर्षक लग रही थी और वह भी तनी हुई,,, बड़ी होने के बावजूद भी चुचियों में जरा सा भी लचक पन नहीं था,,, अपनी बड़ी बहन की चूची को देखते ही राजू के मुंह में पानी आ गया राजू अपनी बहन की चूची को देखता ही रह गया और यह देखकर कि उसका छोटा भाई उसकी बड़ी बड़ी चूचियों को प्यासी नजरों से देख रहा है महुआ की आंखें शर्म से झुक गई उसके तन बदन में खलबली सी मचने लगी,,, महुआ गांव के बहुत से लड़कों के साथ चुदाई का खेल खेल चुकी थी,,। लेकिन इस तरह से किसी भी लड़की के सामने शर्म से पानी पानी नहीं हुई थी लेकिन अपने भाई के सामने उसे बहुत शर्म आ रही थीक्योंकि चाहे कुछ भी हो रिश्ते से तो वह उसका छोटा भाई ही था इसलिए महुआ के गाल शर्म से लाल हुए जा रहे थे और दूसरी तरफ राजू एकदम बेशर्म बनता हुआ अपने दोनों हाथों को आगे बढ़ाया और अपनी बहन की छाती को दबाना शुरू कर दिया,,,, पल भर में ही महुआ के मुंह से गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,, राजू की हरकतों से महुआ बहुत ही जल्द गर्म होने लगी थी दूसरी तरफ गुलाबी मुस्कुराते हुए दोनों की हरकत को देख रही थी,,, दोनों खड़े थे और गुलाबी घुटनों के बल बैठ गई थी वह अपने ऊपर से चादर को पूरी तरह से हटा चुकी थी कमरे में इस समय गुलाबी ही पूरी तरह से नंगी थी बाकी महुआ अर्धनग्न अवस्था में थी,,, और राजू के बदन पर अभी भी उसके सारे वस्त्र थे,,,, महुआ की गरम सिसकारी की आवाज सुनकर गुलाबी बोली,,,।

देखी ना मेरी रानी तेरी हालत खराब होने लगी ना,,,, अरे तेरा भाई है ही ऐसा किसी भी औरत का पानी निकाल दे,,,,

(इतना कहते हुए गुलाबी खुद ही अपनी नारंगी यों को जोर जोर से दबा रही थी,,,,अपनी बहन की बड़ी बड़ी चूची को दबाते हुए राजू अपने मन में यही सोच रहा था कि उसकी बुआ उसकी बड़ी दीदी से बड़ी होने के बावजूद भी उसकी चूची नारंगी की तरह छोटी थी लेकिन उसकी दीदी की चूची बड़ी-बड़ी थी,,,, जो कि यह बात राजू बिल्कुल भी नहीं जानता था कि उसकी बहन गांव के लड़कों से अपनी चूची दबवा दबवा कर बड़ी कर दी है,,,, अपनी बुआ की बातें सुनकर महुआ कुछ भी बोल नहीं रही थी क्योंकि गुलाबी के कहे अनुसार ही उसकी भी हालत खराब हो रही थी उसकी आंखों में मदहोशी छाने लगी थी होठ हल्के खुले हुए थे,,,, और वह गहरी गहरी सांस ले रही थी और राजू,,, अपनी बड़ी दीदी की चुचियों को दशहरी आम की तरह जोर जोर से दबा रहा था,,,, और अपनी बहन की खूबसूरत चेहरे की तरफ देख रहा था जिसके बदलते हाव-भाव को देखकर समझ गया था कि उसकी हरकत से उसकी बहन को बहुत मजा आ रहा है और उसके मजा को और ज्यादा बढ़ाने के लिए राजू अपने दोनों हाथों को अपनी बहन की चूची पर से हटा कर उसकी कमर पर रखती है और कमर को जोर से पकड़ कर अपनी तरफ एक झटके से खींच लिया,,,, उसकी बहन आह की आवाज के साथ एकदम से उसकी बाहों में आ गई और वह कुछ समझ पाती इससे पहले ही राजू अपनी प्यासी होठों को अपनी बहन की चूची के कड़क खजूर पर रखकर उस का रस चूसना शुरू कर दिया इस हरकत से महुआ पूरी तरह से तिलमिला उठी उसके बदन में उत्तेजना का तूफान उठने लगा और वह अपने भाई के सर पर हाथ रख कर उसे अपनी चूची पर दबाना शुरू कर दिया महुआ की हालत को देखकर गुलाबी बहुत खुश हो रही थी,,, क्योकी वह अब समझ चुकी थी,की उसका राज‌ अब राज ही रहने वाला है,,,,, ।

राजू पागलों की तरह अपनी बहन की चूची को पकड़े बिना ही बारी-बारी से अपने होठों को अपनी बहन की दोनों चुचियों पर रखकर उसे चूस रहा था और दोनों हाथ को जो कि कमर पर थे उन्हें थोड़ा सा नीचे ले जाकर अपनी बहन की बड़ी बड़ी गांड को पकड़कर दबा रहा था,,,,अपनी बहन की गांड पर हाथ रखते ही उसे अब जाकर इस बात का एहसास हुआ कि उसकी बहन की गांड भी बड़ी-बड़ी है क्योंकि वह अपनी बहन को रात के अंधेरे में ठीक से देख नहीं पाया था लेकिन यहां कमरे में लालटेन की पीली रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था,,,, अपनी बहन की बड़ी-बड़ी कांड दबाने में राजू को बहुत मजा आ रहा था,,,, दूसरी तरफ महुआ अपने भाई की हरकत से पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी उसे यकीन ही नहीं हो रहा था,,,की उसका छोटा भाई उसे इस तरह से मजा दे रहा है क्योंकि उसे अपने भाई से इस तरह की उम्मीद ही नहीं थी लेकिन आज उस एहसास हो रहा था कि उसका भाई पूरी तरह से मर्द हो चुका है,,,,महुआ के मुंह से लगातार गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकल रही थी,,,, गुलाबी के तन बदन में भी उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी,,,, गुलाबी घुटनों के बल आगे बढ़ते हुए राजू के करीब पहुंच गई और घुटनों पर अटका हुआ पजामे को पकड़कर उसे उतारना शुरू कर दी और देखते ही देखते राजू कि अपने पैरों का सहारा देकर अपने पजामे को निकाल कर एक तरफ कर दिया,,, अब वह कमर के नीचे पूरी तरह से नंगा था उसका लंड पूरी तरह से टनटनाकर अपनी औकात में आ चुका था,,,, यह शायद राजू के लिए अपनी बहन की जवानी का नशा ही था जो उसके लंड का कड़क पन कुछ ज्यादा ही बढ़ चुका था,,,,

,,महुआ की गरमा गरम सिसकारी की आवाज सुनकर गुलाबी से भी रहा नहीं जा रहा था और वह राजू के लंड को पकड़ कर उसे सीधा अपने मुंह में डालकर चूसना शुरू कर दी,,,, यह देखकर महुआ के तन बदन में आग लग गई महुआ की सांसे ऊपर नीचे होने लगी इतने मोटे तगड़े लंड को गुलाबी बड़े आराम से अपने मुंह में लेकर चूस रही थी,,, यह देखकर महुआ को समझते देर नहीं लगी कि शादीशुदा ना होने के बावजूद भी उसकी बुआ जवानी का पूरा मजा लूट रही थी और वह शादीशुदा होने के बावजूद भी बिस्तर में सिर्फ करवट बदलकर तड़प रही थी,,,,,,, महुआ अपने भाई को तो कभी गुलाबी को देख रही थी,,,, जितना मजा लेकर उसका भाई उसकी चूची को पी रहा था इतना मजा लेकर किसी ने भी उसकी चूची से इतना प्यार नहीं किया था बस उसे जोर-जोर से बेरहमो की तरह दबाया ही था,,,, इसलिए तो महुआ को भी बहुत मजा आ रहा है राजू बारी-बारी से स्तन मर्दन और स्तनपान का मजा ले भी रहा था और उसे दे भी रहा था,,,।

पैरों में घुटनों के बल बैठी हुई गुलाबी को देखकर और उसकी हरकत को देखकर महुआ से रहा नहीं गया और अपना हाथ अपनी बुआ के सर पर रखकर होले होले उसे सह लाते हुए बोली, ्,,।

बुआ तुम तो एकदम छिनार हो गई हो,,,,

आज तुमहे भी तुम्हारा भाई रंडी बना देगा,,,(बाबा की बात का जवाब देने के लिए राजू के लंड को अपने मुंह में से निकाल कर बोली और वापस फिर से बोलने के बाद भी लंड को फिर से मुंह में ले ली मानो कि जैसे लंड के लिए वह अपने मुंह को उसका घर बना दि हो,,,।,, अपनी बुआ के मुंह से अपने लिए रंडी शब्द सुनकर ना जाने क्यों महुआ के तन बदन में उत्तेजना की लहर कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगी,,,,,,क्योंकि उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि वह इस समय जो भी कर रही है एक रंडी का ही काम कर रही है क्योंकि वह रिश्ते नातों को एक तरफ रख कर अपने भाई के साथ रंगरलिया मना रही थी,,,अपनी बुआ को अपने भाई का मोटा तगड़ा लंबा लंड मुंह में लेकर चुसता हुआ देखकर उसकी भी इच्छा कर रही थी कि वह भी अपने भाई के लंड को मुंह में लेकर उसे चूसे,,,हालांकि गांव के कई लड़कों ने उसके मुंह में जबरदस्ती अपना लंड डालकर उसे चुसवाया था लेकिन जितने भी लंड महुआ ने अपने मुंह में ली थी वह सब राजू के लंड से आधा भी नहीं था,,,,।

कुछ देर तक कमरे में पूरी तरह से खामोशी छाई रही तीनों अपने अपने तरीके से आनंद ले रहे थे कमरे का माहौल पूरी तरह से करवा चुका था लालटेन की पीली रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था बगल वाले कमरे में हरिया और मधु दोनों चुदाई का सुख भोग कर गहरी नींद में सो रहे थे,,, उन दोनों को यह कहां मालूम था कि बगल वाले कमरे में ही उनके बच्चे जवानी का मजा लूट रहे हैं,,,,, गुलाबी कुछ देर तक राजू के लंबे-लंबे को अपने गले तक उतार कर रुकी है जाती थी और फिर वापस उसे अपने मुंह से बाहर निकाल दे रही थी ऐसा करने से उसकी सांस ऊपर नीचे हो जा रही थी लेकिन आनंद की कोई पराकाष्ठा नहीं थी उसे बहुत मजा आ रहा था,,,, कुछ देर तक गुलाबी उसी तरह से मजा लेती रही और फिर उसके बाद वह खड़ी हो गई उसके मुंह से लार होंठों से नीचे टपक रही थी,,,।

राजू का जोश बढ़ता जा रहा था वह जल्द से जल्द अपनी बहन के सारे कपड़े उतार कर उसे नंगी करना चाहता था और उसकी नंगी जवानी को अपनी आंखों से देखना चाहता था कि लालटेन की पीली रोशनी में उसे साफ लगने लगा था कि उसकी बहन बला की खूबसूरत थीऔर उसे अपनी किस्मत पर गर्व होने लगा था कि आज परिवार में ही अपनी बुआ के साथ-साथ अपनी बहन की भी चुदाई करने वाला है,,,,उत्तेजना से भरी हुई महुआ राजू की तरफ ठीक से नजर नहीं मिला पा रही थी वह गहरी गहरी सांस ले रही थी और राजू था कि पूरी तरह से जोश से भरा हुआ था वह तुरंत महुआ की कमर में एक बार फिर से हाथ डालकर से अपनी तरफ खींचा और अपनी बाहों में ले लिया लेकिन इस बार हुआ है उसे घुमाकर पीठ की तरफ से उसे अपनी बाहों में कस लिया ऐसा करने से उसकी बड़ी बड़ी गांड एकदम सीधे राजू के लंड से रगड़ खाने लगी,,, लंड की ठोकर और रगड़ महुआ साड़ी के ऊपर से अपनी गांड पर महसूस करते हुए पूरी तरह से मस्त हो गई,,,,,, राजू बेहतरीन अदा से अपनी बहन की दोनों बाहों को पकड़कर,,, गर्दन पर चुंबनो की बौछार कर दिया वैसे भी औरत का सबसे संवेदनशील अंग उसकी गर्दन ही होती है उस पर चुंबन करते ही औरतों के तन बदन में चुदवाश की लहर दौड़ने लगती है,,,, और यही असर महुवा को भी हो रहा था और मैं उत्तेजना के मारे अपनी बड़ी बड़ी गांड को अपनी भाई की तरफ ठेलने लगी जो कि उसका भाई अपनी बहन की गांड की ठोकर को अपने लंड का सहारा देकर रोक दे रहा था,,,,राजू पूरी तरह से मस्त हो जा रहा था उससे एक पल भी रुकना बर्दाश्त नहीं हो रहा था और वहां अपनी बहन का ब्लाउज पकड़ कर उसकी दोनों बाहों में से ब्लाउज को निकालकर नीचे जमीन पर फेंक दिया कमर के ऊपर महुवा पूरी तरह से नंगी हो गई एक बार फिर से राजू अपनी बहन के कंधे को पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और उसके खरबूजे जैसी चुचियों को पकड़कर दबाना शुरू कर दिया और हल्के हल्के साड़ी के ऊपर से अपने लंड को अपनी बहन की गांड पर रगड़ना शुरु कर दिया,,,, उत्तेजना के मारे महुआ का गला सूखता चला जा रहा था,,, राजू की हरकत को देखकर गुलाबी से भी रहा नहीं जा रहा था और वह आगे बढ़कर महुआ की चुची को थामने लगी,,,,,,,,, औरत के अंगों से गुलाबी पहले भी मजे ले चुकी थी और वह भी अपनी सहेली के साथ,,, और उस पल का वह खूब मजा भी ली थी इसलिए वो जानती थी कि महुआ की चूची दबाने ने उसे भी मजा आएगा,,,गुलाबी के द्वारा अपनी चूची पकड़े जाने पर बबुआ फिर से सिहर उठे क्योंकि उसके लिए यह पहला अवसर था जब उसकी चूची को कोई औरत हाथ लगा रही थी राजू अपनी बुआ का हाथ चुची पर लगते ही अपने हाथ को उस पर से हटाते हुए बोला,,,।

दीदी तुम्हारी चूची बहुत बड़ी-बड़ी है बहुत खूबसूरत है तभी तो देखो बुआ भी दबा रही है,,,(इतना कहते हुए साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगा और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) लेकिन समझ में नहीं आता कि तुम्हारी चुची बुआ से बड़ी बड़ी क्यों हो गई,,,,।(इतना कहते हुए राजू अपनी बहन की साड़ी को एकदम कमर तक उठा दिया कमर के नीचे से उसकी नंगी गांड राजू के नंगे लंड से रगड़ खाने लगी,,, और नंगी गांड और लंड की रगड़ से महुआ के तन बदन में गर्मी पैदा होने लगी जिसकी वजह से उसका काम रस पीघलने लगा,,,लेकिन राजू के सवाल का क्या जवाब देना है इस बारे में महुआ को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी चूची बड़ी-बड़ी कैसे हो गई,,,, महुआ कुछ बोल पाती इससे पहले ही गुलाबी चुटकी लेते हैं बोली,,,)

अरे बुद्धू तेरी मां की चूची बड़ी बड़ी है ना इसके लिए तेरी बहन की भी चूची बड़ी-बड़ी है,,,,तेरी बहन की चूची तेरी मां पर गई है देखता नहीं तेरी मां की चूची कितनी बड़ी बड़ी है,,, ऐसा लगता है कि तेरी मां की चूची ब्लाउज फाड़ कर बाहर आ जाएगी,,,,(गुलाबी जानबूझकर ऐसे माहौल में राजू की मां का जिक्र छेड़ देती थी और ऐसा करने पर राजू का जोश और ज्यादा बढ़ जाता था,,,, राजू और ज्यादा उत्तेजित होते हुए अपने लंड को पकड़ कर अपनी बहन की गांड की बीच की गहरी दरार में रगड़ते हुए बोला,,)

बक बुआ ऐसा थोड़ी ना है मां की चूची पिताजी रोज दबाते होंगे इसीलिए तो बड़ी बड़ी हो गई है,,,(महुआ राजू के मुंह से अपनी मां के लिए इतनी गंदी बात सुनकर एकदम से दंग रह गई लेकिन ना जाने क्यों इस समय जो हरकत राजू के लंड से उसकी गांड पर हो रहा था उसे देखते हुए राजू की बात उसे और भी ज्यादा उन्मादीत कर रही थी,,, राजू अपनी बात को और आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

दीदी की भी चूची जीजा दबाते होंगे इसलिए बड़ी बड़ी हो गई है,,,,

अरे बुद्धू तेरे जीजा कर इसे मजा देते तो तेरे साथ यह सब करने की जरूरत ही कहां होती,,,,

,,(इतना सुनते ही राजू अपनी बहन के चेहरे को पकड़कर अपनी तरफ घुमा लिया और उसकी आंखों में देखने लगा कुछ देर तक महुआ भी अपनी भाई की आंखों में देखने लगी लेकिन वह ज्यादा देर तक अपने भाई से नजर नहीं मिला पाई और अपनी नजरों को नीचे झुका ली,,, मानो कि जैसे अपने नजरों को नीचे झुका कर ही वह अपनी बुआ की बातों के साथ होने का प्रमाण दे रही हो अपनी बहन की झुकी हुई नजरों को देखकर राजू समझ गया था और वह अपने पैसे होठों को अपनी बहन को लाल-लाल होठों पर रखकर चुंबन करने लगा,,,, राजू की इस हरकत से महुआ एकदम से सिहर उठी,,, उसके बदन में इस चुंबन से कंपन होने लगा,,, राजू को अपनी बहन के होठों का रस शहद से भी ज्यादा मीठा लग रहा था,,,, राजू पागलों की तरह अपनी बहन के होंठों को चूस रहा था और गुलाबी थी कि महुआ की चूची को पकड़कर मुंह में डालकर चूसना शुरु कर दी,,, महुआ पर दोनों तरफ से कामुकता भरा हमला हो रहा था जिससे वह पूरी तरह से धराशाई होते चली जा रही थी,,, महुआ के लिए हालत एकदम खराब होती चली जा रही थी,,, राजू का लंड लगातार महुआ की नंगी गोरी गोरी गांड पर रगड़ खा रहा था जिससे महुआ के तन बदन में हलचल सी मची हुई थी,,,,, महुवा अपने बदन में अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रही थी वह जल्द से जल्द अपने भाई के लंड को अपनी बुर की गहराई में देखना चाहती थी लेकिन ऐसा इतनी जल्दी हो पाना संभव बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि राजू जब तक अपनी बहन की जवानी का रस अपने होठों से चखना ले तब तक उसमें अपने लंड की हिस्सेदारी बिल्कुल भी नहीं रखता था,,,,,,।

कमरे में वातावरण की नहीं बल्कि तीनों की जवानी की गर्मी छाई हुई थी ,,,, एक तरफ जवानी की गर्मी पिघल कर मांगा और गुलाबी की पूर्व से टपक रही थी और दूसरी तरफ वातावरण की गर्मी से तीनों के माथे से पसीना छूट रहा था,,,, अपनी गांड पर अपने भाई का लंड चुभता हुआ महसूस करकेमहुआ समझ गई थी कि उसके भाई के पास दमदार हथियार हैं क्योंकि उसकी पुर का भोसड़ा बना देगा,,,, अपनी बहन के फोटो का रसपान करते हुए राजू पूरी तरह से कामोतेजीत हो चुका था और दोनों हाथों को नीचे की तरफ लाकर अपनी बहन की बड़ी बड़ी गांड को दोनों हथेलियों में दबोचते हुए बोला,,,।

हाय मेरी रानी आज देखना मैं कैसे निकालता हूं तेरा पानी,,,।

(अपने छोटे भाई के मुंह से अपने लिए इस तरह के असली शब्दों को सुनकर महुआ उत्तेजना से गदगद हो गई,,,, राजू अपनी बहन की गांड को दोनों हाथों से मसलते हुए एक हाथ को आगे की तरफ लेकर उसके चिकने पेट पर रख दिया और उसे अपनी हथेली में उत्तेजना के मारे दबोच लिया,,, जिससे महुआ के मुंह से दर्द के कराह के साथ-साथ मदहोशी भरी सिसकारी भी फुट पड़ी,,,,।)

सससहहहह आहहहहहहह ,,,, दीदी तू कितनी अच्छी है तेरा बदन कितना खूबसूरत है एकदम मक्खन से बना हुआ है तेरी गदराई जवानी की खुशबू मेरे लंड को बहुत तड़पा रही है,,,,,(ऐसा कहते हुए राजू,, अपनी हथेली को अपनी बहन की बुर पर रखते हुए एकदम से गर्म होते हुए बोला,,,)

सहहहहह हाय दीदी तेरी बुर कितनी गरम है और कितना पानी छोड़ रही है,,,, लगता है तेरा चुदवाने का बहुत मन कर रहा है,,,,।(इतना कहते हुए राजू अपनी बहन की बुर पर अपनी पूरी हथेली रखकर उसे अपनी हथेली में दबा लिया उत्तेजना के मारे महुआ की बुर कचोरी की तरह पूरी हुई थी और उसमें से उसकी चटनी बाहर निकल रही थी,,,अपने भाई के मुंह से इतने अश्लील शब्दों को सुनकर महुआ से रहा नहीं जा रहा था वह पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसका भाई उसके साथ ऐसी बातें कर रहा है जैसे कि वह किसी रंडी के साथ कर रहा हो लेकिन ना जाने क्यों महुआ को अपनी भाई की बातें इस समय बिल्कुल भी गलत नहीं लग रही थी बल्कि उसे तो अपने भाई की बात सुन कर बहुत मजा आ रहा था,,,लेकिन अपने भाई के बात का बिल्कुल भी जवाब नहीं दे पा रही थी इस तरह की गंदी बातें तो प्यार करते समय उसका पति ने भी नहीं किया था इसलिए इस तरह की बातें महुआ को और ज्यादा उत्तेजित कर रही थी,,,,,,।

दूसरी तरफ गुलाबी पूरी तरह से महुआ की चूचियों पर छाई हुई थी वह बारी-बारी से लगातार महुआ की चूची को मुंह में लेकर पी पीकर टमाटर की तरह लाल कर दी थी,,, वह भी अपना एक हाथ नीचे की तरफ लाकर महुआ की बुर से निकल रहा है पानी को देखना चाहती थी लेकिन उस पर राजू की हथेली चिपकी हुई थी इसलिए राजू की हथेली को हटाते हुए बोली,,,

Mahua apne bhai k lund se khelti huyi



हटा तो राजू मैं भी तो देखूं तेरी दीदी कितना पानी छोड़ रही है,,,

उतना ही पानी छोड़ रही है बुआ जैसा कि तुम पहली बार छोड़ रही थी,,,(ऐसा कहते हुए राज्य अपनी बहन की बुर पर से अपनी हथेली को हटा दिया लेकिन अपने भाई की बात सुनकर महुवा समझ गई थी कि यह दोनों एकदम बेशर्म हो चुके हैं,,,, राजू की हथेली हटते ही गुलाबी अपनी हथेली महुआ की बुर पर रख दी और वाकई में उसने से बहुत पानी छोड़ रहा था,,, महुआ की बुर पर हाथ रखते ही गुलाबी आसरे जताते में बोली,,,,,।

हाय रे दैया तेरी बुर में तो बाढ आया हुआ है,,,, राजू इसका कुछ कर नहीं तो यह इस बाढ में बह जाएगी,,,,

मुझे भी ऐसा ही लग रहा है बुआ लगता है दीदी काफी दिनों से चुदी नहीं है इसलिए इतना पानी छोड़ रही है,,,(राजू एकदम से बेशर्मी की सारी हदें पार करता हुआ बोला,,,अपने भाई की बातें सुनकर महुआ शर्म से लाल हुई जा रही थी वह एक शब्द भी नहीं बोल पा रही थी और गुलाबी और राजू थे कि गंदी से गंदी बातें किए जा रहे थे ऐसे माहौल में इस तरह की गंदी बातें माहौल को और ज्यादा गर्म कर देती है,,,, इसका एहसास महुआ को अच्छी तरह से हो रहा था,,,,,राजू अपनी बात पूरी करने के साथ ही अपने दोनों हाथों को आगे की तरफ लाकर अपनी बहन की शादी की गिठान खोलने लगा और अपनी बहन की साड़ी को खोलकर उसे नंगी करना चाहता था और देखते-देखते राजू अपने हाथों से अपनी बहन की साड़ी को खोलने लगा यह एहसास महुआ के लिए बेहद अद्भुत था क्योंकि वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसके जीवन में ऐसा फल आएगा कि मैं उसका भाई भी उसकी साड़ी उतारकर उसे नंगी करेगा,,,,उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी जिसके साथ उसकी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी और यही ऊपर नीचे होती हुई चूचियां गुलाबी का मनमोह ले रही थी,,, देखते ही देखते राजू अपनी बहन की शाडी को खोल दिया और पेटीकोट कीडोरी को एक झटके में ही खींच दिया डोरी के खुलते ही पेटीकोट का कसाव महुआ की कमर से एकदम ढीला हो गया और वह झरझरा कर उसके कदमों में गिर गया लालटेन की पीली रोशनी में एक ही झटके में महुआ पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी शर्म के मारे को अपने नंगे पन को छुपाने के लिए अपनी हथेली को अपनी बुर पर रखकर उसे ढकने की नाकाम कोशिश कर रही थी,,, यह देखकर गुलाबी और राजू दोनों हंसने लगे और राजू हंसते हुए बोला,,,।

इसे छुपाने का अब कोई फायदा नहीं है दीदी इसे छुपाओगी तो मेरा लंड अंदर कैसे लोगी,,,,(राजू ठीक अपनी बहन के सामने आकर अपने लंड को हिलाते हुए बोला अपने भाई के हाथ में उसके हिलते हुए लंड को देखकर महुआ पूरी तरह से मचल उठी,,,,और गहरी सांस लेते हुए शर्मा कर अपने भाई के लंड पर से अपनी नजरों को दूसरी तरफ घुमा ली,,,, राजू अपनी बहन की जवानी का स्वाद चखना चाहता था इसलिए ठीक उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया,,, महुवा के दिल जोरों से धड़क रहा था उसे कुछ कुछ समझ में आ रहा था कि उसके भाई उसके साथ क्या करने वाला है,,,, लेकीन हैरान थी महुआ यह देखकर की उसके भाई का लंड अभी तक उसी तरह से खड़ा का खड़ा है और उसे बिल्कुल भी जल्दबाजी नहीं है बुर में डालकर शांत होने की क्योंकि 2 घंटे से ज्यादा गुजर चुके थे अभी तक वहां सिर्फ और बदन से ही खेल रहा था,,,,,महुआ से अपना धड़कता दिन काबू में नहीं हो रहा था वह गहरी सांस लेते हुए राजू की तरफ देखने लगी राजू भी अपनी बहन की तरफ देख रहा था दोनों की नजरें आपस में टकराई और महुआ शर्मा कर अपनी नजरों को दूसरी तरफ घुमा ली गुलाबी यह सब देखकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,,।राजू भी अपनी बहन की नंगी बुर को देखना चाहता था उसकी बनावट को देखना चाहता था,,,इसलिए अपना हाथ बढ़ाकर अपनी बहन का हाथ पकड़कर उसे बुर से हटाने लगा,,, तो शर्मा कर महुआ बोली,,,।

नहीं,,,,,,,

(इतना कहकर वह गहरी गहरी सांस लेने की तकरीबन 2 घंटे बाद उसके मुंह से यह शब्द निकले थे,,,, जिसमें उसकी लगभग लगभग हामी ही थी वह तो सिर्फ शर्मा कर ना बोल रही थी,,,,राजू अब अपनी बहन की कहां सुनने वाला था वह अपनी बहन की कलाई कस के पकड़ कर उसे हटा दिया और उसकी नंगी बुर को लालटेन की पीली रोशनी में जी भर कर देखने लगा अपनी बहन की बुर को देखकर उसके तन बदन में हलचल सी होने लगी अपनी बुआ के बाद यह दूसरी बार था कि वह अपने परिवार में अपनी बहन की बुर को इतने नजदीक से देख रहा था,,,,दूर से तो वह अपनी मां की बुर को भी देख चुका था और उस पर हाथ भी लगा चुका था लेकिन इतने करीब से अभी तक अपनी मां की बुर के दर्शन नहीं कर पाया था,,,,,, इसलिए अपनी बहन की मदमस्त कर देने वाली कसी हुई बुर को देखकर राजू बोला,,,।)

वाह रे दीदी क्या मस्त बुर है तेरी लगता ही नहीं है कि तू शादीशुदा है ऐसा लगता है कि तेरी बुर में अभी तक लंड गया ही नहीं है,,,,।(राजू को देखने पर अपनी बहन की बुर कुंवारी लड़की की तरह ही लग रही थी एकदम कसी हुई है पत्नी दरार की तरह उसमें से अभी भी गुलाबी पत्ती बाहर नहीं निकली थी,,,,, इसलिए राजू को ऐसा ही लग रहा था कि उसकी बहन की बुर कुंवारी लड़की कि तरह है राजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

लगता है जीजा जी तुझे चोदते नहीं और मुझे नहीं लगता कि उनका लंड मोटा तगड़ा लंबा होगा वरना तेरी बुर अब तक तो भोसड़ा बन गई होती,,,,,(महुआ अपने भाई के कामुक शब्दों के बाण को झेल नहीं पा रही थी वह पल पल उत्तेजना के सागर में डूबती चली जा रही थी अपने भाई की अश्लील बातें उसे बेहद आनंदित कर रही थी और देखते ही देखते राजू अपने प्यासे होठों को अपनी बहन की तपती हुई बुर पर रख दिया जिसमें से लावा बह रहा था,,,, अपने भाई के होठों को अपनी बुर पर महसूस करते ही महुआ के तन बदन में हलचल सी मच ने लगी उसके पैरों में कंपन होने लगा वह किसने ही वाली थी कि तुरंत गुलाबी उसके पीछे जाकर उसे बाहों में भर लिया और उसकी चूची पर अपने दोनों हाथ रख दी,,,इस तरह से वह महुआ को गिरने से तो बचा ली लेकिन उत्तेजना के सागर में ऐसा लग रहा था कि वह खुद उसका सिर पकड़ कर डुबो रही हो वह तुरंत चूची को दबाना शुरू कर दी और अपनी नंगी बुर को उसकी बड़ी बड़ी गांड पर रगड़ना शुरु कर दी महुआ दोनों तरफ से पीस रही थी जिसमें से पीसने के बाद आनंद का फुवारा फूट रहा था,,, राजू अपनी बहन की नमकीन बुर को चाटने शुरू कर दिया था हल्के हल्के बालों से सुसज्जित महुआ की बुर मादक खुशबू बिखेर रही थी जिस के नशे में राजू मदहोश हुआ जा रहा था वह अपनी दोनों हथेली को अपनी बहन की गांड पर रखकर जोर से दबाते हुए जितना हो सकता था उतना अपनी जीभ को उसकी बुर के अंदर डालकर उसकी मलाई को चाट रहा था,,,,।





यह अनुभव महुआ के लिए बिल्कुल नया था वह पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी सांसो की गति एकदम तेज चल रही थी जिस पर अब महुआ का बिल्कुल भी काबू नहीं था वह उत्तेजना के मारे अपने दोनों हाथों को अपने भाई के सिर पर रखकर उसके बाल को अपनी मुट्ठी में कस के भींच ली थी और उसके होठों को कस के अपनी बुर पर दबा‌ ली थी,,,,,,, महुआ के मुंह से लगातार सिसकारी की आवाज फुट रही थी और दूसरी तरफ गुलाबी हल्के हल्के अपनी कमर हिला रही थी मानो कि जैसे महुआ की चुदाई कर रही हो,,,,राजू पूरी तरह से अपनी बहन की जवानी का रस पीने में लगा हुआ था जिस बात का एतराज गुलाबी को बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि वह जानती थी कि इस समय महुआ को अग्रिमता देना बेहद जरूरी है,,,,।

सहहहह आहहहहह राजू तू तो मुझे पागल कर दिया है रे आहहहहह राजू,,,,,ऊमममममम ऊममममममम,,,( ऐसा कहते हुए महुआ अपनी गांड को गोल गोल घुमा‌ रही थी,,,,

राजू भी अपनी बहन की बुर को चाट कर मस्त हुआ जा रहा था कुछ देर तक यह क्रीडा चलती रही अब समय आ गया था महुवा को असली चुदाई का सुख देने का इसलिए राजू अपनी बहन की बुर पर से अपना मुंह हटा कर उसकी कमर पकड़ कर खड़ा हुआ और एक बार अपनी बहन की आंखों में जाते हुए फिर से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिया,,, होंठों पर अभी भी महुआ के बुरका रस लगा हुआ था जो कि इस तरह के चुंबन से वह काम रस महुआ के भी होंठों से लग कर उसके गले लग जा रहा था,,, पहली बार महुआ के होठों पर बुर का रसलग रहा था और पहली बार उसे ही इस बात का एहसास हुआ कि बुरके रस का स्वाद कितना कसैला और नमकीन होता है लेकिन फिर भी मर्द लोग कितना जी जान लगाकर उसे चाटते रहते हैं,,, थोड़ी ही देर में महुआ को भी अपनी बुर का स्वाद अच्छा लगने लगा,,,

देखते ही देखते राजू महुआ के कंधों पर दोनों हाथ रखकर उसे नीचे की तरफ बैठाने लगा महुवा को समझ में नहीं आ रहा था कि उसका भाई ऐसा क्यों कर रहा हैथोड़ी ही देर में अपने घुटनों के बल आने पर ही उसे समझ में आ गया कि उसका भाई उससे क्या करना चाहता है,,,, राजू अपने लंड को अपने हाथ में पकड़ कर उसके सुपाड़े को अपनी बहन के होठों पर रख देना शुरू कर दिया इससे महुआ एकदम से मदहोश होने लगी और अगले ही पल अपने होठों को खोल कर अपनी बहन के लंड को अपने मुंह में आने का निमंत्रण दे दी देखते ही देखते महुआ को इस खेल में मजा आने लगा,,,,,,, वह अपने भाई के मोटे तगड़े लंबे लंड को अपने गले तक उतार कर मजा ले रही थी अपने मुंह में लेने पर ही उसे पता चला कि उसके भाई का लंड कितना दमदार है,,,,, धीरे-धीरे राजू अपनी कमर ही रहना शुरू कर दिया और गुलाबी पूरी तरह से मस्त होकर राजू के कंधे में हाथ डालकर उसे अपनी तरफ खींच कर उसके मुंह को अपनी चूची पर रख दी जिसे राजू बड़े चाव से मुंह में लेकर पीना शुरु कर दिया तीनों आनंद के सागर में गोते लगा रहे थे कुछ देर तक यह क्रीडा इसी तरह से चलती रही,,,, महुआ की बुर में आग लगी हुई थी,,,, राजू अब समझ गया था कि उसकी बहन को लंड चाहिए इसलिए अपने लंड को अपनी बहन के मुंह में से बाहर निकाल कर उसे चटाई पर लेटने के लिए बोला,,,,।

अपने भाई के द्वारा दिए जा रहे इस तरह के निर्देश महुवा को शर्मसार कर रहे थे लेकिन क्या करें उसे भी तो मजा आ रहा था और उसे भी तो मां बनना था ताकि वह अपने ससुराल वालों का मुंह बंद कर सके वह जानती थी कि उसके पति से कुछ होने वाला नहीं है जो एक ही झटके में झड़ जाता हो वह क्या मां बनाने की क्षमता रखता है,,, महुआ अपने मन में सोचने लगी कि उसका भाई उसे उसके ससुराल में इज्जत दिलाएगा उसे मां बना कर,,,,इसलिए अपने भाई की बात मानते हुए अपने सर के नीचे तकिया रखकर वह पीठ के बल लेट गई राजू अपनी बुआ की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए बोला,,,।

बुआ अब देखना मैं दीदी की कैसे चुदाई करता हूं दीदी देखना पानी मांगने लगेगी,,,

(राजू की बातें सुनकर महुवा शर्म आ रही थी,,, और दूसरी तरफ गुलाबी महुआ का हौसला बढ़ाते हुए बोली,,,)

अरे तभी तो वह तेरे नीचे आने को तैयार हो गई है अब देखना अपनी बहन का ख्याल रखना ससुराल में उसकी इज्जत खराब ना होने पाए,,,,जितने दिन यहां रहेगी उतने दिन तुझे इसे चोदना होगा,,,

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो बुआ अब यह जिम्मेदारी मेरी है,,,(इतना कहने के साथ ही राजू अपनी बहन के दोनों टांगों के बीच घुटनों के बल बैठ गया और अपने लिए जगह बनाने लगा महुआ का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि कुछ ही देर में उसके भाई का मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर की सैर करने वाला था,,,महुआ के मन में एक शंका थी कि ईतना मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में घुस पाएगा कि नहीं इसलिए अपनी शंका को दूर करने के लिए वह बोली,,,।)

अरे दीदी तो बिल्कुल भी चिंता मत करो देखना एकदम सरपट दौड़ेगा,,,,

अरे पगली तो बिल्कुल भी चिंता मत कर मुझे भी पहले इसी तरह का डर लगता था लेकिन अब देख बड़े आराम से ले लेती हूं,,,, तुझे तेरा भाई देखना जन्नत की सैर कराएगा ऐसा पेलेगा की तु जिंदगी भर याद रखेगी,,,,।

(इतना कहकर वह हंसने लगी और राजू अपने लंड के सुपाड़े को अपनी बहन की गुलाबी बुर पर रख दूया जोकी पूरी तरह से पानीयाई हुई थी,,,, महुआ की सबसे बड़ी तेजी से चल रही थी उसका दिल जोरों से धड़क रहा था राजू अपने लंड के मोटे से पानी को जो कि आलू बुखारा की तरह एकदम गोल था,,, वो धीरे धीरे पनियाई बुर के अंदर सरकना शुरू कर दिया,,,देखते ही देखते राजू के लंड का सुपाड़ा बाबा की गोरकी अंदर प्रवेश कर गया यह देखकर महुआ के चेहरे पर सुकून नजर आ रहा था लेकिन दर्द की भी रेखाएं खींची हुई थी,,, क्योंकि पहली बार उसकी बुर के अंदर इतना मोटा लंड जो जा रहा था,,,। उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी राजू बड़ी समझदारी से काम ले रहा था,,, वह एक झटके में ही पूरा का पूरा लंड अपनी बहन की बुर में डाल सकता था लेकिन ऐसा करने से उसकी बहन को बहुत दर्द होता,,, इसलिए राजु ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहता था ,,,, लेकिन धीरे-धीरे राजू अपने मोटे तगड़े लंड को अपनी बहन की बुर की गहराई में पहुंचा ही दिया,,,, महुआ धीरे से अपना सर उठा कर अपनी दोनों टांगों के बीच देखी तो हैरान रह गई,,, क्योंकि वह सोची भी नहीं थी कि उसके भाई का मोटा तगड़ा लंबा लंड इतने आराम से उसकी दूर की गहराई में प्रवेश कर जाएगा लेकिन जो कुछ भी हो अपनी आंखों से देख रही थी वह बिल्कुल सच था दर्द तो थोड़ा हुआ ही था लेकिनअंदर घुसते हुए बुर की अंदरूनी दीवारों पर रखकर खाकर जिस तरह का आनंद दिया था उस तरह की आनंद की कल्पना भी उसने कभी नहीं की थी,,,,अपना पूरा लंड अपनी बहन की बुर की गहराई में उतार कर रहा है जो लंबी सांस लेते हुए बोला,,,।

देख दीदी बोला था ना आराम से चला जाएगा,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू अपना दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी बहन की चुची पर रख दिया और उसे ज़ोर से दबाते हुए अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया,,,, या देखकर गुलाबी भी उत्तेजित हो गई और वह आगे की तरफ मुंह करके अपनी बड़ी बड़ी गांड को महुआ के चेहरे पर रखने लगी महुआ को तो पहले समझ में नहीं आया कि उसकी बुआ क्या कर रही है लेकिन जैसे ही गुलाबी की बुर उसके होठों से स्पर्श हुई उसे समझते देर नहीं लगी कि उसे क्या करना है वह भी राजू की तरह अपनी जी बाहर निकाल कर अपनी बुआ की बुर को चाटना शुरू कर दी अद्भुत दृश्य कमरे के अंदर अपनी गर्मी फैला रहा था इसके बारे में उन तीनों ने कभी कल्पना भी नहीं किए थे,,, गुलाबी की गरमा गरम सिसकारी गूंजने लगी और अपनी बुआ की गांड को अपनी आंखों के सामने देखकर राजु की उत्तेजनाऔर ज्यादा बढ़ने लगी वहां अपनी बुआ की चूची को पकड़कर अपनी बुआ की गांड दबोच लिया और उस पर जोर जोर से चपत लगाता हुआ धक्के लगाने लगा,,,,, महुआ की हालत खराब हो रही थी,,, महुआ के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी लगातार फूट रही थी आज जाकर उसे अपने भाई से चुदाई का असली सुख मिल रहा था,,,, वह सही मायने में अपने भाई को असली मर्द मानने लगी क्योंकि वाकई में वहां उसकी बुर को रगड़ रगड़ कर चोद रहा था,,, अपने भाई की दमदार चुदाई को देखकर वह समझ गई थी कि उसका मां बनना एकदम तय है इस बात की खुशी उसके चेहरे पर साफ नजर आई थी इसलिए वह अपने भाई के दमदार धकको को खुशी-खुशी झेल रही थी,,,,

राजू को भी अपनी बहन चोदने का बहुत मजा आ रहा था वह लगातार अपनी कमर हिला रहा था और अपने लंड की तरफ भी देख रहा था जो कि महुआ की बुर में गोल छल्ला बनाए हुए था,,,,पहली चुदाई में हीं राजू ने अपनी बहन की बुर को चौड़ा कर दिया था,,,,, राजू के माथे से पसीना छूट रहा था और यही हाल गुलाबी और महुवा का भी था,,, राजू का जोश बढ़ता जा रहा था दूसरी तरफ महुआ की सिसकारी की आवाज भी बढतू जा रही थी,, अपनी बुआ की बड़ी बड़ी गांड अपनी आंखों के सामने देखकर उससे रहा नहीं जा रहा था,,,इसलिए उसके दिमाग में कुछ और चल रहा था और अपना दोनों हाथ अपनी बुआ की कमर पर रखकर उसे अपनी तरफ खींच लिया देखते ही देखते उसकी बुआ अपने घुटनों के बल बैठकर घोड़ी बन गई और राजू अपनी बहन की बुर में से अपना लंड बाहर निकाल कर अपनी बुआ की बुर में डाल दिया और उसे घसा घसा चोदना शुरु कर दिया,,,, महुआ देखकर हैरान थी 10 15 धक्कों के बाद वह अपना लंड वापस निकाल करअपनी बहन की बुर में डाल दिया और उसे चोदना शुरु कर दिया यही क्रिया पर बार-बार कर रहा था कभी अपनी बुआ को तो कभी अपनी बहन को चोद रहा था एक ही लंड से वह एक साथ दो दो औरतों को संतुष्ट करने में लगा था,,, महुआ की सबसे बड़ी तेजी से चल रही थी या देखकर गुलाबी समझ गई थी कि महुआ का पानी निकलने वाला है इसलिए वह राजू से बोली,,,,

राजू तू हम दोनों को एक साथ भले चोदलेकिन अपना पानी अपनी बहन की बुर में ही निकालना देखना यह जिम्मेदारी तेरी है उसे मां बनाना है उसे पेट से करना है,,,

ठीक है बुआ,,,(और इतना कहने के साथ ही एक बार अपनी बुआ की बुर में 10 15 धक्के एक साथ मारने के बाद वह अपना लंड अपनी बुआ की बुर में से बाहर निकाल कर अपनी बहन की बुर में डाल दिया और जबरदस्त धक्के पर धक्का पेलने लगा,,, महुआ का बदन अकड़ने लगा था उसका पानी किसी भी पर निकलने वाला था इसीलिए गुलाबी भी एक बार फिर से अपनी बुर को उसके होठों पर रखकर दबाना शुरू कर दी,,,और राजू अपनी बहन की कमर पकड़कर जोर-जोर धक्के लगाने लगा और अगले ही पल दोनों एक साथ गरमागरम आह के साथ झड़ना शुरू कर दिए राजू अपने लंड को तब तक अपनी बहन की बुर से बाहर नहीं निकाला जब तक उसका पानी पूरा का पूरा पानी में नहीं गिर गया,,, और वह भी अपनी बहन के ऊपर गिर कर हांफने लगा,,,,
 
राजू अपनी बहन की जबरदस्त चुदाई करते हुए उसके ऊपर ढह चुका था उसके लंबे का लावा,,, अपनी बहन की गरम जवानी की आंच में पिघल चुका था लेकिन पिघलने से पहले अपनी बहन की जवानी को दो-तीन बार पिघला चुका था,,,राजू कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वह अपनी बहन की चुदाई करेगा और वह भी अपनी बड़ी बहन की,,, 2 साल पहले ही वह शादी करके ससुराल जा चुकी थी और 2 साल पहले राजू में औरतों को समझने का हुनर बिल्कुल भी नहीं था औरतों के अंगों के प्रति आकर्षण बिल्कुल भी नहीं था लेकिन इन 2 वर्षों में सब कुछ बदल चुका था,,,2 साल बाद पहली बार रात के अंधेरे में अपनी बहन से मिल रहा था इसलिए अपनी बहन के अंगों और बदन की बनावट को वकील से देख नहीं पाया था लेकिन कमरे के अंदर लालटेन की रोशनी में वह अपनी बहन की दहकती जवानी को देखकर अपने ऊपर काबू नहीं रख पाया था,,,,,, ना ही उसकी बहन अपने भाई के मोटे तगड़े लंड को देखकर सब्र कर पाई थी और उसे अपनी बुर में लेकर 2 साल की प्यास को तृप्त कर चुकी थी अपने भाई के लंड को अपनी बुर में लेने का एक अलग ही लालच था मां बनने का और दूसरा चुदाई का संपूर्ण आनंद लेने का,,, जिस तरह से राजू ने जमकर चुदाई किया था उसे देखते हुए महुआ को लग रहा था कि वह जरूर अपने भाई के द्वारा,,, पेट से हो जाएगी,,,, उन दोनों के साथ में ही गुलाबी भी अपनी गुलाबी बुर का स्वाद महुआ को चखाते हुए झड़ चुकी थी,,,,,।





गुलाबी अपनी गुलाबी बुर को महुआ के मुंह पर से हटा कर एक तरफ होकर गहरी गहरी सांस ले रही थी,,, और महुआ की तरफ देखते हूए बोली,,,।

देखी महुआ रानी तेरे भाई की करामत आखिर अपनी बहन को चोद ही दिया,,,,,

(महुआ के पास अपने बुआ के इस बात का कोई जवाब नहीं था क्योंकि जो कुछ भी हो कह रही थी वह सच था,,, राजू अपनी बहन के ऊपर लेटा हुआ था उसका लंड अभी भी उसकी बुर की गहराई में घुसा हुआ था,,,, राजू की तरफ देखते हुए गुलाबी बोली,,,) अरे बस कर तेरा भी निकल चुका है और तेरी बहन का भी फिर भी अपनी बहन की बुर में लंड डाला हुआ है,,, लगता है अपनी दीदी की बुर में से लंड निकालने का मन नहीं कर रहा है,,,।

Raju or uski maa





हां सच कह रही हो बुआ दीदी की बुर में से लंड निकालने का मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा है,,,

तो इतना ही अच्छा लग रहा है तो खुद क्यों नहीं घुस जाता और जाकर बैठ जा अपनी बहन की बुर में,,,

मेरा बस चलता तो दीदी की बुर में जाकर बैठ ही जाता,,,

चल अभी तू रहने दे तू कभी बाद में जाकर बैठ जाना लेकिन पहले तू अपनी दीदी की बुर में एक छोटा सा लल्ला बैठा दे ताकि ससुराल में खुशी से रह सकें,,,

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो बुआ दीदी जितने दिन यहां रहेगी उतने दिन में रोज दीदी की चुदाई करूंगा देखना फिर दीदी के जीवन में खुशहाली आ जाएगी,,,, क्यों दीदी,,,(अपनी बहन के चेहरे की तरफ देखते हुए) तुमको चाहिए ना छोटा सा लल्ला,,,।

(अपने भाई के मुंह से यह सुनकर महुआ एकदम शर्म से लाल हो गई वह कभी सपने में नहीं सोचा थी कि उसका भाई इतना बड़ा हरामि होगा कि उससे इस तरह की बातें एकदम खुलकर करेगा महुआ शर्मा कर अपने चेहरे को दूसरी तरफ घुमा ली तो गुलाबी यह देख कर बोली,,,)

Madhu apne bete k sath



देख रही है महुआ 2 साल में तेरा भाई कितना बदल गया है यह वही राजू नहीं रहा जो लड़कियों से औरतों से शर्मीता था उनसे बात करने से भी घबराता था,,,,, अब देख तो औरतों की बुर में लंड डालने में कितना मजा आता है यहां तक कि अब तो अपनी बहन को भी चोदने लगा है अब देखना वह दिन दूर नहीं जब क्या खुद अपनी मां की टांग चौड़ी करके उसकी बुर में लंड डालेगा,,,।

(अपनी बुआ के मुंह से इस तरह की बातें और वो भी खास करके अपनी मां के लिए इतनी गंदी बातें सुनकर महुआ शर्म और उत्तेजना से लाल हुए जा रही थी और मुस्कुराते हुए अपनी बुआ की तरफ देखे बिना ही बोली)

इसकी बेशर्मी में तुम्हारा ही हाथ है बुआ,,, तुम ही ने इसे इतना बेशर्म और हरामि बना दी हो,,,

तो क्या हो गया ,,, अच्छा ही हुआ कि मैंने इसे इतना बेशर्म बना दी हूं इसलिए तो आज यह इतना काम आ रहा है,,, और तुम्हारे भी काम आ रहा है,,, देखी नहीं कितना मजा देता है,,, साले का लंड नहीं मुसल है,,, जो तेरी चुदाई कर करके तुझे मां बनाएगा,,,, देख नहीं रही है अभी भी उसका लंड तेरी बुर में घुसा हुआ है पानी निकाल दिया है लेकिन लंड है कि ढीला पड़ने का नाम ही नहीं लेता,,,।

(अपनी बुआ की बातें सुनकर महुआ अपनी बुर की गहराई में अपने भाई के लंड को महसूस करते हुए बोली,,)

सच में बुआ इसका लंड तू अभी भी पूरा खड़ा हुआ है,,।

(अपनी बहन की बात सुनकर उसकी दोनों सूची को अपने हाथ में लेकर दबाते हुए बोला)

Raju or mahua



तो क्या दीदी इसी को तो कहते हैं मर्दाना ताकत इतनी ताकत मुझ में ना होती मेरे लंड में ना होती तो क्या तुम मेरे नीचे आती क्या बुआ मुझसे चुदवाती,,, यह सब मेरे लंड के बदौलत ही मुमकिन है,,,,(इतना कहते हुए जोश में राजू अपनी बहन की चूची को कसकस कर दबा रहा था उसके इस तरह से दबाने से महुआ को दर्द महसूस हो रहा था तो वह बोली)

अरे इतनी जोर से क्यों दबा रहा है,,, अब उतर तो मेरे ऊपर से मेरा बदन दर्द करने लगा,,,,।

(अपनी बहन की बात सुनकर राजू अपनी बहन के बदन के ऊपर से उठने को हुआ लेकिन उठते हुए वह अपने लंड को अपनी बहन की बुर से निकलता हुआ देखना चाहता था इसलिए हल्के से अपने सर को उठा कर अपनी नजरों को नीचे करके अपनी बहन की दोनों टांगों के बीच देखने लगा जहां पर उसका मोटा तगड़ा लंड अभी भी उसकी बुर की गहराई में घुसा हुआ था,,, महुआ की भी नजर अपनी दोनों टांगों के बीच चली गई थी और राजू धीरे-धीरे अपने लंड को बाहर खींचने लगा बुर में से मोटा तगड़ा लंड निकलता हुआ बहुत ही अच्छा लग रहा था जिसे देखकर महुआ के बदन में फिर से उत्तेजना की लहर उठ रही थी और देखते ही देखते राजू ने अपने लंड को अपनी बहन की बुर से बाहर निकाल लिया महुआ हैरान थी कि उसके भाई का लंड अभी भी अपनी पूरी औकात में था बस हल्का सा लचक आ गया था,,,,,अपने लंड को अपनी बहन की बुर में से निकालकर राजू वही बगल में ही पीठ के बल लेट गया महुआ की नजर अपने भाई के लंड पर पड़ी तो वहां अभी भी छत की तरफ मुंह उठाए खड़ा था,,, यह देख कर हैरानी से वह अपनी बुआ की तरफ देखी तो उसकी बुआ समझ गई कि महुआ के मन में क्या चल रहा है इसलिए वह बोली,,,)



देख कर हैरान हो रही है ना,,, तुझे यकीन नहीं हो रहा होगा,, लेकिन अपनी आंखों से देख रही है ना मुझे पूरा यकीन है कि जब तेरा पति तुझे चोदता होगा जो कि तूने खुद ही बताई है कि एक दो झटके में ही ढेर हो जाता है लेकिन पानी निकलने के बाद उसका तुरंत सिकुड़ जाता होगा लेकिन देख तेरे भाई का झड़ने के बाद भी वह दो-तीन बार तेरा पानी निकाल सकता है,,,,(अपनी बुआ की बातें सुनकर राजू गर्व से फूला नहीं समा रहा था इसलिए अपने हाथ में अपने लंड को पकड़ कर हिलाते हुए अपनी बहन की तरफ देख कर मुस्कुराने लगा और उसकी बहन शर्मा कर अपनी नजरों को नीचे झुका ली,,, चुदवाने के बाद उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी इसलिए वह उठ कर बैठ गई और अपनी बुआ की तरफ देखते हुए बोली,,,।

मैं अभी आती हूं,,,

तू कहां जा रही है,,,,

बाहर जा रही हूं,,,,

क्या करने,,,

अरे समझा करो बुआ अभी आती हूं,,,

(गुलाबी समझ गई थी कि महुआ पेशाब करने के लिए जा रही है इसलिए वह बोली)

अरे अब तो शर्म मत कर इतना तो खुलकर अपने भाई से चुदवा ली है ठीक से क्यों नहीं कहती कि मुतने जा रही है,,,

क्या बुआ तुम भी,,,,(इतना कहते हुए महुआ पास में पड़ी अपनी साड़ी को उठाने लगी तो गुलाबी बोली)

रुक मैं भी चलती हूं मुझे भी जोरों की लगी हुई है,,,

(इतना कहते हुए गुलाबी भी उठने लगी और एक चादर लेकर अपने बदन पर डालने लगी,,, यह देख कर राजू भी खड़ा हो गया लेकिन तुरंत इन दोनों के हाथ में से कपड़े छीन कर एक तरफ फेंक दिया,,, यह देखकर दोनों एक साथ बोली,,,)



यह क्या कर रहा है,,,,

मुझे भी चोरों की पेशाब लगी हुई है,,,

तो,,,

तो क्या मुझे भी चलना है,,,

हम दोनों के साथ,,,

तो क्या हुआ,,,,

अच्छा चल लेकिन कपड़े तो पहनने दे,,,(गुलाबी कपड़ों की तरफ आगे बढ़ते हुए बोली तो राजू फिर से उसे रोकते हुए बोला)



ऐसे नहीं बिना कपड़ों के,,,(अपने लंड को हाथ में पकड़ते हुए बोला)

क्या पागल हो गया क्या तू बिना कपड़ों के बाहर जाना अगर किसी ने देख लिया तो तुझे कुछ पता भी है,,,(गुलाबी थोड़ा गुस्सा दिखाते हैं बोली,,,)

अरे बुआ तुम भी खामखा डरती हो,,, देख रही हो समय कितना हो रहा है और ऊपर से अंधेरी रात है कुछ भी नजर आने वाला नहीं है और वैसे भी हमें घर के आगे थोड़ी जाना है घर के पीछे जाना है जोकि चारों तरफ गिरा हुआ है अपनी जगह पर कौन आने वाला है,,,,

नहीं नहीं बिना कपड़ों के एकदम नंगी और वह भी बाहर,,,, नहीं राजू,,,,(महुआ घबराते हुए बोली,,,)

क्या दीदी तुम भी बच्चों की तरह घबरा रही हो इतनी रात को सब गहरी नींद में सो रहे होंगे कि तुम्हें नंगी देखने के लिए बाहर घूम रहे होंगे,,,, क्यों बुआ सच कहा ना,,,(अपनी बुआ की तरफ देखते हुए बोला,,,, गुलाबी भी सोच में पड़ गई थी राजू की बात मानने में किसी के देखे जाने का खतरा बहुत ज्यादा था लेकिन इसमें रोमांचित कर देने वाला एहसास भी था इसलिए अंदर ही अंदर गुलाबी भी यही चाहती थी आधी रात को बिना कपड़ों की घर के पीछे नंगी होकर घूमना और के साथ करना एक अद्भुत एहसास था और इस एहसास को गुलाबी भी महसूस करना चाहती थी वह सोच में पड़ गई थी इसलिए राजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) क्या बुआ ज्यादा मत सोचो,, बल्कि यह सोचो की नंगी होकर घूमने में कितना मजा आएगा जब तुम मैं और दीदी तीनों नंगे ही घर के पीछे पेशाब करेंगे बहुत ही मजा आएगा दीदी,,,(अपनी दीदी की तरफ देखते हुए) सोचो मत चलो,,,,,

(इतना कहने के साथ ही राजू दोनों के साथ जबरदस्ती करने के दोनों हाथ पकड़ लिया और कमरे से बाहर ले कर जाने लगा,,,, उन दोनों के मन में भी इस नए एहसास का अनुभव करने की जिज्ञासा जाग रही थी इसलिए वह भी राजू के साथ चलने लगी राजू ने इस बार लालटेन साथ में नहीं दिया ताकि अंधेरा ही रहे देखते ही देखते राजू दोनों का हाथ पकड़े हुए घर से बाहर निकल आया,,,, घर से बाहर निकलते ही उन तीनों ने चारों तरफ नजर घुमा कर देखने लगे चारों तरफ अंधेरे के सिवा कुछ नजर नहीं आ रहा था इसलिए थोड़ा तीनों को इत्मीनान होने लगा,,,,दूर दूर तक कुछ भी नजर नहीं आ रहा था दूर क्या 2 मीटर की दूरी पर ही कुछ नजर नहीं आ रहा था इतना अंधेरा था बस कुत्तों के भौंकने की आवाज आ रही थी और वैसे भी तीनों को घर के पीछे की तरफ जाना था जो कि वहां पर कोई आता जाता नहीं था क्योंकि वह जगह हरिया की ही थी,,,,

देख रही है दीदी और बुआ डरने जैसा कुछ है चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा है कोई देखना चाहेगा तो भी नहीं देख पाएगा,,, क्या कहती हो बुआ,,,?

हारे कह तो तू सच ही रहा है,,,, चारों तरफ सिर्फ अंधेरा ही अंधेरा है और यह हवा कितनी ठंडी लग रही है,,,,

हां क्योंकि कुछ भी पहनी नहीं हो ना इसके लिए,,,(महुआ भी चारों तरफ नजर घुमाते हुए बोली,,,)

कसम से आधी रात को इस तरह से बिना कपड़ों के में पहली बार घर से बाहर निकली हु और कितना अच्छा लग रहा है,,, काश सब लोग बिना कपड़ों के ही घूमते रहते तो कितना मजा आता जिसका मन चाहे तब किसी के भी लंड को बुर को चूची को या गांड को देखकर हीलाकर शांत हो जाता,,,

सच बुआ अगर तुम्हारी यह बात सच हो जाती तब तो हम लड़कों की तो जिंदगी बदल जाती सोचो किसी के बीच में किसी भी प्रकार का पर्दा नहीं रहता किसी की भी खूबसूरती किसी से छुपी नहीं रहती,,,, घर में भी सब नंगे घूमते ,,, दीदी बुआ मां,,,,,

हाय तब तो कितना मजा आ जाता है ना,,, तेरी मां की बड़ी बड़ी गांड बड़ी बड़ी चूची उसकी रसीली बुर कसम से राजू तू अपनी मां बुर देखकर ही पानी छोड़ देता,,, जो हम लोगों की बुर में डालकर आधा आधा घंटा पेलता है ना तब अपनी मां की बुर देखकर ही पानी फेंक देता,,,,

हाय बुआ यह क्या कह रही हो,,, मेरे लंड की हालत खराब होने लगी,,,, देखो तो,,,(इतना कहने के साथ ही राजू गुलाबी और महुआ दोनों का हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिया वाकई में अपनी मां का जिक्र सुनते ही उसके लंड में कुछ ज्यादा ही कड़कपन आ गया था,,, जिसे अपनी मुट्ठी में महसूस करके महुआ भी आश्चर्यचकित हो गई थी क्योंकि उसे यकीन नहीं हो रहा था कि राजू अपनी मां के बारे में इस तरह की गंदी बात सुनकर उत्तेजित हुआ जा रहा है उसे समझते देर नहीं लगी कि अगर उसके भाई को मौका मिलेगा तो वह अपनी मां को भी चोदने से पीछे नहीं हटे गा जिस तरह से आज की रात वह उसकी पिटाई कर चुका है,,,, गुलाबी के साथ-साथ महुआ भी उत्तेजना के मारे अपने भाई के लंड को कस के पकड़ ली और यही मौका देख करराजू अपना हाथ पीछे की तरफ लाकर एक हाथ अपनी बुआ की गांड पर और दूसरा हाथ अपनी दीदी की गांड पर रखकर उसे अपनी हथेली में द पहुंचते हुए बोला,,,)

अब चलो मेरी रंडीयो घर के पीछे चलते हैं,,,, कहीं ऐसा ना हो कि दीदी यहीं पर मुत दे,,,

धत् राजु कैसी बातें करता है,,, तुझे बिल्कुल भी शर्म नहीं आती,,,

क्या दीदी तुम भी और वह भी मुझे बोल रही हो जो कुछ देर पहले तुम्हारी बुर में अपना लंड डालकर धकाधक धक्का मार कर पानी निकाल दिया,, है,, जब मुझे अपनी दीदी की बुर में लंड डालने में शर्म नहीं आई तो उसे इस तरह की बात करने में कैसी शर्म आएगी और सच कहूं तो दीदी इस तरह की बातें करने में और भी ज्यादा मजा आता है,,, हाय मेरी रानी क्या मस्त बड़ी-बड़ी गांड है (अपनी दीदी की बड़ी-बड़ी गांड पर हाथ रखे हुए ही उत्तेजित होते हुए अपनी दीदी की गांड को हथेली में जोर से दबाते हुए,,,)साला जीजा ही गांडू है जो इतनी खूबसूरत औरत को छोड़कर दुनियादारी में खप रहा है,,,,सच कहूं तो मेरी अगर इतनी खूबसूरत औरत होती तो मैं तो दिन रात उसकी बुर में लंड डालकर सोए रहता,,,

(अपने भाई की बात सुनकर महुआ मुस्कुरा दी और गुलाबी बोली)

चिंता मत करें मेरे राजा जब तक तेरी दीदी यहां पर है समझ ले तेरी बीवी है और वैसे भी इसे मां बनाने का जिम्मा तेरे सर पर है इसलिए तो इसका पति ही है जिस पर तेरा पूरा हक है,,,,,,,

क्या बात कही हो बुआ तब तो तुम भी मेरी बीवी की तरह ही हो,,, क्योंकि रोज रात को तुम्हारी भी लेती ही हु,,

हां जब तक मेरी शादी नहीं हो जाती तब तक तू ही मेरा पति है,,, चल‌अब जल्दी पीछे चलते हैं,,, नहीं तो यहीं पेशाब छूट जाएगी,,,,

,,,

तो चलो मेरी रानियों रोका किसने है मैं भी तो तुम दोनों को पेशाब करते हुए देखने के लिए तड़प रहा हूं,,,(इतना कहने के साथ ही राजू अपनी बुआ और अपनी बहन की गांड को हथेली में दबोच ते हुए दोनों को पीछे की तरफ ले जाने लगा,,,
 
अंधेरी रात गहराई हुई थी चारों तरफ सिर्फ अंधेरा ही अंधेरा नजर आ रहा था रात का तीसरा पहर चल रहा था इसलिए इस शहर में गांव के सभी लोग गहरी नींद में सो रहे थे लेकिन राजू उसकी बड़ी दीदी और उसकी बुआ की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी बल्कि रात भर जागने का नशा छाया हुआ था,,, और यह नशा था अपनी वासना की प्यास बुझाने का इसीलिए तो राजू की बात मानते हुए उसकी बुआ और उसकी बड़ी दीदी,,, संपूर्ण रुप से ले बस अवस्था में एकदम नंगी होकर घर से बाहर निकल आई थी राजू दोनों के कारण पर अपनी हथेली रखते हुए घर के पीछे लेकर चले जा रहा था,,,,अंधेरी रात में इस तरह से नग्नावस्था में भ्रमण करने में तीनों को अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,, तीनों के बदन पर कपड़े का रेशा तक नहीं था,,,, अपनी बहन और अपनी बुआ की गांड पर हाथ रखने पर राजू के लंड में जान आ गई थी,,,, कुछ देर पहले ही अपनी बुआ औरअपनी बड़ी दीदी की बुर में लंड डालकर अपनी गर्मी को शांत कर चुका था लेकिन अपनी बहन और अपनी बुआ की गर्म जवानी से एक बार फिर से और गर्म हो चुका था,,,।

देखते ही देखते दोनों घर के पीछे पहुंच चुके थे घर के पीछे वाला भाग हरिया का ही था जहां पर गाय भैंस बकरियां बांधी जाती थी और इस जगह को चारों तरफ से लकड़ियों से और जंगली झाड़ियों से गहरा बनाया हुआ था इसलिए यहां पर किसी के देखे जाने की बिल्कुल भी संभावना नहीं थी इसलिए तीनों निश्चिंत थे,,,।

अब मुतना शुरू करो मेरी रंडियो,,,(दोनों की गांड पर एक साथ चपत लगाते हुए बोला,,, लेकिन अपने छोटे भाई की बात सुनकर महुआ शर्म से पानी-पानी होने लगी,,,,,,उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें गुलाबी महुआ की हालत को अच्छी तरह से समझ रही थी,,,, इसलिए गुलाबी मुस्कुराते हुए मुतने के लिए सबसे पहले बैठ गईक्योंकि उतारने के लिए कपड़े तो उसने पहने ही नहीं थे इसलिए बड़े आराम से वह बैठ गई थी,,,, अभी उसने अपनी गुलामी पुर से पेशाब की धार मारना शुरू नहीं की थी और वह महुआ से बोली,,,।

अब क्यों शर्मा रही है मेरी रानी शर्म करने का अब कोई फायदा नहीं है शर्म का पर्दा हम तीनों के बीच से हट चुका है बैठ जा मेरी तरह वरना खड़े-खड़े मुतने लगेगी,,,,(इतना कहने के साथ ही गुलाबी अपनी गुलाबी छूत में से पेशाब की धार मारना शुरू कर दी और उसमें से मधुर संगीत फूट पड़ी जोकि राजू और महुवा दोनों के कानों में साफ सुनाई दे रही थी राजू तो पूरी तरह से मदहोश हो गया अपनी बुआ की पेशाब की मधुर धुन सुनकर और यही हाल महुआ का भी हो रहा था,,,, यह सब उसके साथ पहली बार हो रहा था उसकी बुआ उसकी आंखों के सामने एकदम नंगी बैठकर पेशाब कर रही थी राजू से बिल्कुल भी शर्म आ नहीं रही थी इतने सही होगा समझ गई थी कि दोनों के बीच कितना गहरा रिश्ता है,,,, गुलाबी अपना हाथ ऊपर की तरफ करके राजू के लंड को पकड़ ली और बोली,,,।

तू भी शुरू कर तू क्यों रुका है,,,,, मैं पकड़कर तुझे मुताती हुं,,,,

मैं तो कर लूंगा बुआ लेकिन दीदी तो शुरू ही नहीं कर रही है,,,, और देख नहीं रही हो इनको कितनी जोर की लगी हुई है,,,,

क्या महुआ तु शर्माती बहुत है,,,।

मुझसे नहीं होगा बुआ,,,,

क्या यार नंगी होकर अपने भाई से चुदवा ली लेकिन उसके सामने मुतने में शर्म आ रही है,,,

चुदवाने की बात कुछ और थी लेकिन पेशाब करने में मुझे शर्म आ रही है,,,।

यार लगता यह काम भी मुझे ही करना होगा,,,(इतना कहने के साथ ही राजू अपने घुटनों के बल बैठ गया ना तो यह बात गुलाबी को समझ में आई और ना ही महुवा को,, राजू तुरंत अपना दोनों हाथ अपनी बहन की गांड पर रखकर उसे अपनी तरफ खींच लिया,,,, इतने से ही महुआ को समझ में आ गया था कि उसका भाई क्या करने वाला है और इस बात के एहसास से ही उसके तन बदन में कंपन सा होने लगा उसके घुटनों में ऐसा लग रहा था कि बिल्कुल भी दम नहीं है पल भर में ही महुआ की सांसे तेज चलने लगी,,, वह राजू को रोकना चाहती थी लेकिन उसके कुछ कहने से पहले ही रांजु अपने प्यासे होठों को तुरंत अपनी बहन की बुर पर रख दिया,,, राजू की इस हरकत पर महुआ उत्तेजना से तिलमिला उठी और ना चाहते हुए भी तुरंत ही उसके दोनों हाथ राजू के सर पर आ गए और वह कसके राजू के होठों को अपनी बुर से चिपकाते हुए अपनी कमर को आगे की तरफ ठेल दी ,,,,, महुआ पूरी तरह से उत्तेजना से भर चुकी थी यह देख कर गुलाबी भी हैरान थी कि राजू यह क्या कर रहा है,,,,,।

राजू अपनी बहन की बुर में से उठ रही मादक खुशबू के नशे में पूरी तरह से खोने लगा था,,, उसकी बुर से बेहद मदहोश कर देने वाली खुशबू उठ रही थी जिसमें वह अपने आप को बेहद उत्तेजना का अनुभव करते हुए मदहोश हुआ जा रहा था राजू तुरंत अपनी जी बाहर निकाल कर अपनी बहन की बुर में डाल कर चाटना शुरू कर दिया था,,,, जिसमें कुछ देर कल रहेगी उसका ही लंड गदर मचा आया हुआ था और अपना पूरा गरम लावा महुआ की गुलाबी छेद में उड़ेल दिया था,,,। गुलाबी राजू को इस तरह से अपनी बहन की बुर चाटते हुआ देखकर हैरान रह गई थी क्योंकि गुलाबी समझ गई थी कि जिस तरह से उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई है,,, वह राजू की हरकत की वजह से जरूर उसके मुंह में ही पेशाब करना शुरू कर देंगे इस बात को सोच कर ही गुलाबी पूरी तरह से दंग रह गई थी उसकी आंखें उन दोनों पर जम चुकी थी अपना तो वह खुद ही अपने गुलाबी छेद से पेशाब की धार दूर तक फेंक रही थी लेकिन उसके लिए यह देखना बेहद दिलचस्प हुआ जा रहा था कि अब आगे क्या होने वाला है,,,,,,

राजू एकदम मजे लेकर अपनी बहन की बुर में जीभ डालकर चाट रहा था उसे भी इस बात का एहसास था ,, महुआ तो पूरी तरह मदहोशी में डूबी जा रही थी इस तरह का आनंद उसने जिंदगी में कभी नहीं ले पाई थी भले ही चोरी-छिपे गांव के लड़कों के साथ सारी संबंध बनाई थी लेकिन किसी भी लड़के ने इस तरह का मजा उसे कभी नहीं दिया था लड़कों को तो बस उसकी गुलाबी बुर से मतलब रहता था बस उस में लंड डाला मिलाया और निकाल दिया लेकिन राजू सबसे अलग था वह औरतों को खुश करने का संतुष्ट करने का हुनर अच्छी तरह से जानता था इसीलिए तो उसकी बात मानते हो उसकी बड़ी दीदी इस समय घर के पीछे संपूर्ण रूप से नंगी होकर खड़ी थी और राजू उसे आनंद के सागर में गोते लगवाने पर मजबूर किए जा रहा था राजू अपने दोनों हथेली को अपनी बहन की बड़ी बड़ी गांड पर रखकर से जोर से दबाते हुए उसकी गुलाबी छेद में अपनी जीभ को अंदर बाहर कर रहा था,,, महुआ को भी इस बात का एहसास हो चुका था किया वह ज्यादा देर तक थार नहीं पाई थी और ना होने का हो जाएगा वह कभी सपने भी नहीं सोची थी कि वह अपने भाई के साथ इस तरह की हरकत करेगी लेकिन आज वह हालात के आगे मजबूर हो चुकी थी उसके भाई ने उसे जो आनंद की परिभाषा का व्याख्यान अपनी हरकतों से दिया था उससे वह पूरी तरह से संतुष्ट हुए जा रहे थे इसलिए पीछे हटने का अब सवाल ही नहीं था लेकिन फिर भी अपने भाई को एक बार चेताते हुए,,, वह अपने भाई के बालों को पकड़ कर उसे पीछे करने की कोशिश करने लगे लेकिन ऐसा करने पर भी उसके बदन में जिस तरह की कंपन हो रही थी उससे उसकी कमर आगे की तरफ ही दबाव दे रही थी,,,, जिससे राजू की हरकत और ज्यादा बढ़ती जा रही थी गुलाबी की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसे यह नजारा देखा नहीं जा रहा था,,, उससे रहा नहीं गया और वह बोली,,,।

हाय मेरी महुआ रानी अपने भाई के मुंह में मुत देगी क्या रे,,,

( गुलाबी का इतना कहना था कि महुआ से अपनी उत्तेजना और अपने पेशाब का दबाव बिल्कुल भी काबू में नहीं रहा और उसकी गुलाबी छेद से पेशाब की धार फूट पड़ी,,,छर्र्ररर,, की आवाज के साथ ही राजू के मुंह में उसकी बड़ी बहन की पेशाब की धार पिचकारी की तरह पड़ने लगी लेकिन राजू पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में मदहोश हुआ जा रहा था यह जानते हुए भी कि उसकी बहन की पेशाब उसके मुंह में गिर रही है वह अपने मुंह को बिल्कुल भी नहीं हटाया,,,, महुआ शर्म से लाल हो जा रही थी वह पूरी तरह से शर्मिंदगी के एहसास में पानी पानी हुए जा रही थी और यह पानी उसके गुलाबी चैन से निकल रहा था वह अपने पेशाब पर पूरी तरह से काबू करने की लाख कोशिश कर रही थी लेकिन पेशाब की धार थी कि मयान से निकली तलवार थी जो कि अपने लक्ष्य को प्राप्त किए बिना वापस जाने वाली बिल्कुल भी नहीं थी और यह देखकर गुलाबी के तन बदन में आग लग गई और वह तुरंत अपनी दो उंगली एक साथ अपनी गुलाबी छेद में घुसा दी,,,,

यह कामुकता भरा नजारा बेशर्मी की सारी हदों को पार कर चुका था इस नजारे को देखकर किसी भी औरत या मर्द का पानी छोड़ जाए ,, आधी रात से ज्यादा समय हो रहा था पूरा गांव चैन की नींद सो रहा था लेकिन तीनों की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी,,,,, राजू छल छल करता हुआ अपनी जीत का सहारा लेकर अपनी बहन की पेशाब की धार को अपने गले में दटक रहा था पैसाब का खारा पानी उसे और ज्यादा मदहोश कर रहा था,,,, महुआ की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी क्योंकि अपने भाई की हरकत की वजह से ना चाहते हुए भी उसकी गुलाबी छेद से पेशाब की धार तो फूट पड़ी थी लेकिन वह इतनी ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी की उसका पानी निकलने वाला था और देखते ही देखते वह अपने भाई के सर को बड़े जोरों से पकड़ लिया और उसे अपने गुरु पर जोर से दबाते हुए गरमा गरम सिसकारी लेने लगी,,,

ससससहहह आहहररहह ,,,,,राजु,,,,ऊममममममम,आहहह,,,,।

राजू समझ गया था कि उसकी बहन का पानी भी निकल रहा है इसी के चलते वह अपना एक हाथ अपने लंड पर पकड़ कर उसे हिलाना शुरू कर दिया था लेकिन वह जानता था कि बिना उसकी बहन की बुर में लंड डाले वह शांत होने वाला नहीं है अभी भी उसकी बहन की बुर से पेशाब की धार निकल रही थी और वह तुरंत खड़ा हुआ और अपनी बहन को आगे से अपनी बाहों में भरते हुए,,,

उसकी एक टांग को पकड़ कर ऊपर की तरफ उठाया और अपनी कमर पर लपेट दिया और एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर अंधेरे में ही अपनी बहन की गुलाबी बुर के छेद को टटोलना शुरू कर दिया,,, अपनी बहन के गुलाबी छेद को ढूंढने में उसे परेशानी हो रही थी इसलिए अपने भाई की मदद करते हुए महुआ ही एक हाथ नीचे की तरफ लाकर अपने भाई के लंड को पकड़ लिया और उसे अपनी गुलाबी बुरके छेद पर रख दी,,,,

एक भटके हुए राही को उसकी मंजिल मिल गई थी और वह अपनी बहन की गांड को दोनों हाथों से पकड़कर अपनी तरफ खींचा और अपने कमर को आगे की तरफ ठेला ऐसा करने से,,, उसका मोटा तगड़ा लंबा लंड बुर का गीलापन पाते ही एक झटके में ही अंदर घुस गया और पहली बार में ही बहुवा की बच्चेदानी से जा टकराया,,,, बच्चेदानी पर ठोकर लगते ही महुआ के मुंह से हल्की सी चीख निकल गई लेकिन जो आनंद उसे प्राप्त हुआ उसके आगे यह दर्द कुछ भी नहीं था उसे हैरानी हो रही थी कि उसके भाई का लंड बड़े आराम से उसके बच्चेदानी तक पहुंच जा रहा था और देखते ही देखते राजू एक बार फिर से अपनी बहन को चोदना शुरू कर दिया था राजू की अद्भुत ताकत को देखकर महुआ हैरान थी उसकी मर्दाना ताकत के आगे वह घुटने टेक चुकी थी अब तक गांव के कई लड़कों ने उसके साथ शारीरिक संबंध बना चुका था लेकिन उसे इस तरह की तृप्ति का एहसास किसी ने नहींकराया था इसलिए महुआ अपनी भाई की दीवानी हो गई थी राजू अपनी बहन को चोदना शुरू कर दिया था और रह-रहकर उसकी बुर।से पेशाब की धार निकल जा रही थी यह एहसास ही बेहद अद्भुत था,,,, महुआ इस मदहोशी भरे दृश्य को देखकर आश्चर्यचकित हुए जा रही थी महीनों से राजू उसकी चुदाई करता आ रहा था लेकिन इस तरह से कभी नहीं चोदा था,,, गुलाबी की उंगली अभी भी उसकी बुर में थी और वह बैठी हुई थी वह अपनी बुर में उंगली डाले हुए ही खड़ी हो गई और अंदर बाहर करते हुए महुआ के ठीक पीछे आकर खड़ी हो गई और अपनी बुर को उसकी गद्देदार गांड पर रखकर रगड़ना शुरू कर दी,,,, महुआ के तन बदन में आग लगी जा रही थी आगे से राजू और पीछे से उसकी होगा दोनों के बीच में वह पीस रही थी लेकिन,, इस तरह से पिसाने में भी मजा आ रहा था,,,।

ओह राजू लगता है कि तुम आज अपनी बहन की बुर फाड़ डालेगा उसकी बुर का भोसड़ा बना देगा,

हां बुआ मेरा भी ईरादा कुछ ऐसा ही है,, क्या करूं दीदी की बुर इतनी कसी हुई है कि इस में लंड डालने में बहुत मजा आ रहा है,,,,

( दोनों की बातें सुनकर महुआ की हालत खराब हो रही थी अपने भाई की बेशर्मी भरी बातें उसे और ज्यादा आनंदित कर रही थी सचमुच में वह समझ गई थी कि उसका भाई पूरी तरह से जवान हो गया है और पूरा मर्द बन चुका है,,, अपनी बहन के लाल-लाल होठों पर अपने होंठ रखते हुए वह उसके होठों का रसपान करने लगा यह महुआ के लिए और भी ज्यादा शर्मिंदगी का अहसास दिला रहा था बड़ी-बड़ी चूचियां राजू की छाती से रगड़ खा रही थी जिससे दोनों का मजा दुगना हुआ जा रहा था पीछे से महुआ की गद्देदार गांड पर गुलाबी अपनी गुलाबी बुर को रगड़ रही थी वह भी गरम सिसकारी के साथ,,,,)

कैसा लग रहा है दीदी ,,?राजू अपने होठों को अपनी बहन के होठों से अलग करते हुए बोला,,, अपने भाई के द्वारा पूछे जाने वाला यह सवाल महुआ के तन बदन में आग लगा रहा था क्योंकि महुआ के लिए उसका भाई अभी भी छोटा था वही राजू था जिसे वह गोद में लेकर खिलाया करती थी इसीलिए उसके मुंह से इस तरह की अश्लील बातें सुनकर उसे आनंद तो आ रहा था लेकिन शर्म से उसका मुखड़ा लाल हुआ जा रहा था अपनी बहन की तरफ से चुप्पी को देखकर राजू फिर से बोला,,)

क्या हुआ दीदी मेरा मोटा लंड तुम्हारी बुर में मजा तो दे रहा है ना कहीं ऐसा ना हो कि मैं भी जीजा की तरह तुम्हारी प्यास बुझाने में नाकामयाब हो जाऊं,,,।

आहहहहर ,,,, नहीं रे राजू तू बहुत मजा दे रहा है मैं तो कभी सोची भी नहीं थी कि किसी का लंड ईतना मोटा और लंबा होता है,,,

क्यों दीदी जीजाजी का कैसा है,,?

तेरे से आधा भी नहीं होगा राजू,,, और तो और 2 धक्के में तो उनका काम हो जाता है,,, लेकिन मैं बिस्तर पर तड़पती रह जाती हूं,,,( राजू के धागों का मजा लेते हुए) और इसीलिए मैं तुझे मामा नहीं बना पा रही हूं,,

l

हाय मेरी दीदी तू बिल्कुल भी चिंता मत करो मैं देखना अब दुनिया की नजर में मामा भी बनूंगा और तेरे बच्चे का बाप ही बनूंगा,,,

( अपनी भाई की यह बात सुनकर महुआ शर्म से पानी पानी हो गई लेकिन राजू की यही बातें उसे सांत्वना भी दे रही थी और मजा भी राजू अपने धक्के को तेज करने लगा उसकी कमर बड़ी तेजी से आगे पीछे हो रही थी महुआ की बुर में से फच्च फच्च की आवाज आना शुरू हो गई थी जिससे अंधेरी रात में और भी ज्यादा आनंद का एहसास हो रहा था गुलाबी जो क्रिया मर्द अपना लंड औरत की बुर में डालकर करता है वही क्रिया गुलाबी महुआ की गद्देदार गांड पर अपनी कमर हिला कर कर रहे थे गुलाबी के बुर बहुत पानी छोड़ रही थी इसलिए गुलाबी के धागों की वजह से भी फच्च फच्च की आवाज आ रही थी,,,,, देखते ही देखते एक बार फिर से महुआ की सांसें उखड़ने लगी और राजू उसे कस के आगे से अपनी बाहों में जकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया और देखते ही देखते दोनों एक साथ अपना गर्म लावा छोड़ दिए,,,, राजू झटके खाता हुआ अपना पानी छोड़ रहा था और यही हाल महुआ का भी था,,,।

थोड़ी देर बाद राजू अपनी बहन को अपने से अलग किया और अपने लंड को झटक कर उस पर लगा पानी गिराने लगा,,, और अपनी बहन की आंखों के सामने ही पेशाब करता हुआ बोला,,,।

क्यों दीदी कैसा लगा अब तो तुम्हें कोई चिंता नहीं है ना,,,

किस बात की,,,

अरे मां बनने की,,, मुझ पर तो भरोसा है ना,,,

धत् कैसी बातें कर रहा है,,,

अरे सच कह रहा हूं,,,( ऐसा कहते हुए राजू अपने लंड को पकड़ कर पेशाब की धार दूर तक मार रहा था और यह देखकर गुलाबी और महुआ दोनों की हालत खराब हो रही थी महुआ पहली बार किसी मर्द को अपने इतना करीब खड़े होकर पेशाब करते हुए देख रही थी,, महुआ तो शर्मा भी नहीं थे लेकिन गुलाबी बिल्कुल भी शर्म नहीं कर रही थी,,, वह राजू के पास आई और वह अपना हाथ आगे बढ़ाकर राजू के लंड को पकड़ लि और बोली,,,।)

आज तू अपनी दीदी की सेवा करता रहेगा या मुझ पर भी रहम करेगा तुम दोनों की गरमा गरम चुदाई देखकर मेरी बुर में आग लगी हुई है,,,

तुम आओ बुआ तुम्हारी भी आग बुझा दु,,,,

यहां नहीं कमरे में चलकर,,,,

ठीक है मेरी रानी,,( पेशाब की बाकी बची हुई बहुत तो अपना लंड को झटका देकर गिराते हुए राजू बोला और फिर आगे बढ़कर गुलाबी को अपनी गोद में उठा लिया,,)

अरे अरे यह क्या कर रहा है बुआ गिर जाएगी,,,।

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो दीदी बुआ को मैं आराम से कमरे तक ले जाऊंगा आखिर इनकी सेवा कर कर मुझे भी तो मजा आएगा इसलिए थोड़ी बहुत तो मेहनत तो करनी ही पड़ेगी ना,,,,

( और इतना कहने के साथ ही राजू रात के अंधेरे में अपनी बुआ को अपनी गोद में उठाए हुए आगे आगे चले लगा और पीछे पीछे महुआ महुआ अपने चारों तरफ नजर घुमा कर देख रही थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है क्योंकि अगर कोई देख लेगा तो गजब हो जाएगा लेकिन इतनी रात को कौन हूं वहां आने वाला था लेकिन मैं राजू की ताकत पर पूरी तरह से फिदा हो चुकी थी अपने भाई के मर्दाना अंग और उसकी ताकत के आगे उसकी जवानी पानी भरते हुए नजर आ रही थी,,, देखते ही देखते तीनो वापस अपने कमरे में आ गए और राजू,, अपनी बुआ को चटाई पर बैठा कर अपने लंड को हिलाता हुआ उसकी आंखों के सामने कर दिया,,, महुआ यह देखकर हैरान थी कि दो दो बार चुदाई करने के बावजूद भी उसके भाई का लंड खड़ा था बस थोड़ा सा ढीला पड़ चुका था जिसे उसकी बुआ अपने हाथ में लेकर चलाते हुए उसे मुंह में लेकर चूसने शुरू कर दी थी और देखते ही देखते एक बार फिर से उसके भाई का लंड घुड़सवारी करने के लिए तैयार हो चुका था,,,,

राजू एक बार फिर से अपनी बहन की आंखों के सामने बेशर्मी दिखाते हुए अपनी बुआ की दोनों टांगों को अपने हाथों से फैलाते हुए अपने लिए बीच में जगह बना लिया और देखते ही देखते अपने मोटे तगड़े लंड को अपनी बुआ की बुर में डालकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया राजू की खबर बड़ी रफ्तार से खेल रही थी पहली बार सही राजू अपनी बुआ की जमकर चुदाई कर रहा था और उसकी बुआ मस्त होकर गरमा गरम सिसकारी ले रही थी,,,,

यह सिलसिला एक बार शुरू हुआ तो जब तक महुआ अपने घर वापस नहीं चली गई तब तक यह सिलसिला चलता रहा लेकिन इस कामुकता भरे सफर मैं उन तीनों को छोड़कर कोई चौथा राहगीर नहीं मिला और महुआ को किसी दूसरे की जरूरत ही नहीं पड़ी क्योंकि उसका भाई ही उसे पूरी तरह से मस्त कर देता था उसे पूरी तरह से थका देता था,,,,,, महुआ 15 दिन जैसा अपने मायके में थी फिर उसका देवर उसे लेने आ गया और मन ना होने के बावजूद भी उसे जाना पड़ा,,। लेकिन इतने दिनों में राजू ने अपनी बहन को एक भी बात छोड़ा नहीं था रोज उसकी चुदाई करता था जितना मौका मिलता था उतना क्योंकि उसके सर पर उसे मां बनाने की जिम्मेदारी भी थी,,,,

राजू फिर से अपने पिताजी के साथ बैलगाड़ी लेकर जाने लगा था कभी-कभी तो वह खुद है अकेला ही चला जाता था,,,,,, शाम को लौटते समय आज उसे लाला के ब्याज के पैसे देने थे वह सोचा कि लाला के घर जाकर उसके बाद के पैसे भी दे देगा और सोनी से मुलाकात भी हो जाएगी क्योंकि काफी दिन हो गए थे सोनी को उसने गांव में देखा नहीं था और ना ही उससे मिला था,,, इसलिए राजू बेल गाड़ी लेकर लाला के घर की तरफ चल दिया अंधेरा हो चुका था वह ऊंचे नीचे रास्तों पर से बैलगाड़ी लेकर चला जा रहा था और अपने दोनों में ही गाना गुनगुनाता हुआ अपनी मस्ती में आगे बढ़ता चला जा रहा था,,,
 
राजू बैलगाड़ी हांकता हुआ लाला की हवेली की तरफ चला जा रहा था,,, शाम ढलने की लगी थी और धीरे-धीरे अंधेरा कह रहा था जा रहा था सड़क पर इक्का-दुक्का लोग ही नजर आ रहे थे बाकी दूर दूर तक सन्नाटा पसरा हुआ था,,,

राजू बैलगाड़ी हांकता हुआ लाला की हवेली की तरफ चला जा रहा था,,, शाम ढलने की लगी थी और धीरे-धीरे अंधेरा कह रहा था जा रहा था सड़क पर इक्का-दुक्का लोक ही नजर आ रहे थे बाकी दूर दूर तक सन्नाटा पसरा हुआ था,,,

राजू अपनी धुन में था बेल गाड़ी चलाने में उसे मजा आने लगी थी रोज नई-नई सवारी को रेलवे स्टेशन से उनके गंतव्य स्थल तक पहुंचाना अब रोज का उसका काम हो गया था,,, और इस काम को वह बखूबी निभा रहा था,,,, गांव की कई औरतों के साथ शारीरिक संबंध बनाकर उनकी जवानी का मजा लूटने के बावजूद भी राजू पूरी तरह से प्यासा जवान मर्द था इसलिए पगडंडी पर अपने बेल को ले जाते समय वह दूर दूर तक निगाह डालता रहता था क्योंकि वह जानता था कि शाम धरने के बाद गांव की औरतें शौच करने के लिए खेतों में जाती हैं,,, और वह शौच करते समय उन औरतों की नंगी गांड की झलक लेना चाहता था बस इतने मात्र से ही उसे उत्तेजना का साधन मिल जाता था,,, और यह वास्तविक ही है की मर्द को दुनिया की चाहे कितनी भी खूबसूरत औरत मिल जाए लेकिन उसकी प्यास कभी बुझती नहीं है,,,, औरतों की मदमस्त कर देने वाली बड़ी बड़ी गांड से लेकर उसकी खरबूजे जैसी चुचियों के साथ-साथ दोनों टांगों के बीच की पतली दरार को देखकर मर्द हमेशा से लार टपका ता ही रहता है,,, इसीलिए राजू भी इन सब से अछूता नहीं था,,,,,, कमला चाची से लेकर अपनी बड़ी दीदी तक की बुर का स्वाद वह चख चुका था,,, लेकिन नई बुर की तलाश उसे हमेशा रहती थी,,,,।

वह बैलगाड़ी को लाला की हवेली की तरफ ले जाते हुए अपनी बड़ी दीदी के बारे में सोच रहा था,,, अपने मर्दाना ताकत से भरे हुए लंड के आगे अपनी बहन को बड़ी आसानी से घुटने टेकता हुआ देखकर उसे पक्का यकीन हो गया था कि हर औरत की यही स्थिति होती है,,, औरत जवान मर्द की प्यासी होती है उनके मर्दाना ताकत से भरे हुए लंड के आगे वह अपने आप को बेबस समझने लगती है,,,,,।

शादी के 2 साल गुजरने के बावजूद भी उसकी दीदी मां नहीं बन पाई थी और यह सारी जिम्मेदारी राजू के सर आ चुकी थी इस बात का अंदाजा और एहसास उसे अच्छी तरह से था इसीलिए वह अपनी बहन पर पूरी मेहनत निछावर कर देता था रात भर अपनी बहन पर मेहनत करके पसीना बाहर आया था और उसे पूरा यकीन था कि उसकी यह मेहनत जरूर रंग लाएगी,,,,,, अपनी बहन की कसी हुई बुर में अपने लंड की रगड़ को देखकर वह समझ गया था कि उसका लंड औरो के लंड से कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा है तभी तो औरतें उससे चुदवाने के लिए तड़पती रहती थी,,,,,,,,, वह अपने मन में यह सोच कर अपने बदन में और भी ज्यादा उत्तेजना और व्याकुलता का एहसास करने लगा था कि अभी तक वह गांव की सभी औरतों की चुदाई कर चुका था लेकिन उसके हाथ अभी तक उसकी मां नहीं आई थी,,, खेत में अपनी मां की आंख के सामने ही जिस तरह से अपनी मां को दिखाते हुए वह अपने लंड को हिला रहा था और हिम्मत दिखाते हुए अपनी मां का हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिया था,,, उस समय वह अपनी मां के चेहरे पर उस लंड को अपनी बुर में लेने की वकील ता को अच्छी तरह से पढ़ पाया था,,, राजू इस बात से भी अच्छी तरह से वाकिफ था कि उसके पिताजी से भी ज्यादा मोटा तगड़ा और लंबा लंड उसका था पर इस बात का एहसास उसने अपनी मां को भी करा दिया था लेकिन इस बात से हैरान था कि अभी तक उसकी मां,,, उसके नीचे नहीं आई थी वह अपने आप को संभाल ले गई थी,,,, यही बात उसे हैरान कर रही थी क्योंकि आज तक उसने जिसे को भी अपने लंड के दर्शन कराया था वह औरत या लड़की उसके नीचे आने से बिल्कुल भी मना नहीं कर पाई थी,,,, अपने ही सवाल का जवाब अपने ही मन में ढूंढते हुए वह अपने आप से बोला,,,।

सभी औरतों में और उसकी मां में जमीन आसमान का फर्क है एक तो गांव की औरतों से सबसे ज्यादा खूबसूरत उसकी मां है और दोनों के बीच मां-बेटे का पवित्र रिश्ता है और दूसरी औरतों से उतना खास रिश्ता नहीं था केवल बुआ और दीदी को छोड़कर लेकिन बुआ और उसकी दीदी की भी मजबूरियां और जरूरत थी इसके लिए वह दोनों ने लंड लेने में बिल्कुल भी नानुकुर नहीं की,,, लेकिन उसकी मां के आगे कोई भी मजबूरी नहीं थी क्योंकि रोज रात को उसके पिताजी जमकर उस की चुदाई करते थे उसे रोज लंड अपनी बुर में मिल रहा था,,, इसलिए राजू के आगे वह विश्वास नहीं हुई,,,,, एक गर्म आहा भरते हुए राजू अपने मन में आए अपनी मां के ख्याल के आगे पुण्रविराम लगा दिया,,,, लेकिन मायूस बिल्कुल भी नहीं हुआ निराश होना उसे बिल्कुल भी पसंद नहीं था उम्मीद की किरण उसे हर जगह नजर आती थी इसीलिए तो आज वह इस मुकाम पर पहुंच चुका था कि गांव की औरतों से लेकर हवेली की महारानी जैसी जिंदगी जीने वाली औरत की भी चुदाई कर चुका था,,, इसीलिए उसे पूरा विश्वास था कि,,, वह पूरी कोशिश करता रहेगा और उसकी कोशिश जरूर रंग लाएगी एक न एक दिन जरूर वह अपनी मां की मदमस्त जवानी का स्वाद चखेगा,,,, यही सब अपने मन में सोचता हुआ लाला की हवेली पर कब पहुंच गया उसे पता ही नहीं चला,,, लाला की हवेली के आगे बड़ा सा बगीचा बना हुआ था जिसमें लंबे लंबे पेड़ लगे हुए थे,,,,,,, दूर से देखने पर लाला की हवेली खूबसूरत तो लगती ही थी लेकिन पास से इसकी खूबसूरती और ज्यादा बढ़ जाती थी,,,,,,।

राजू बैलगाड़ी को हवेली के बाहर खड़ा कर दिया और नीचे उतर कर चारों तरफ देखने लगा दरवाजे पर कोई नजर नहीं आ रहा था एक दो बार उसने आवाज भी दिया लेकिन कोई दरबान वहां खड़ा नहीं था इसलिए वह खुद ही बड़े से दरवाजे को अपने हाथ से खोल कर अंदर की तरफ जाने लगा,,, बिना काम के अगर वह लाला के पास आता तो शायद इस तरह से उसके हवेली में प्रवेश करने की उसकी हिम्मत ना होती लेकिन वह तो लाला को उसके ब्याज के पैसे देने आया था इसलिए किसी भी हाल में वह हवेली में प्रवेश करने का हकदार था,,, वह अपने चारों तरफ नजर घुमाता हुआ हवेली की तरफ आगे बढ़ रहा था,,,, रात में उजाले के लिए जगह जगह पर मसाल चल रही थी जिससे चारों तरफ उजाला नजर आ रहा था,,,, देखते ही देखते राजू हवेली के मुख्य द्वार पर पहुंच गया जहां से वह सीधा हवेली में प्रवेश कर सकता था उधर भी खड़े होकर चारों तरफ नजर घुमाया तो कोई नहीं था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आज हवेली के नौकर चाकर गए कहां,,, फिर अपने मन में ही यह सोचकर खैर उससे क्या मतलब उसे तो ब्याज के पैसे देने हैं और इसी बहाने वह सोनी से भी मिल लेगा,,,,,।

हवेली के मुख्य द्वार पर खड़ा होकर राजू को एकाएक उस दिन वाली बात याद आ गई जब वह हवेली में लाला की गैर हाजिरी में उसकी बहन की जबरदस्ती चुदाई कर रहा था और उसी समय लाला घर वापस आ गया था बाल-बाल उस दिन बचा था लेकिन हवेली में सोनी की चुदाई करने का एक अलग ही मजा था इस बात को याद करके उसके पजामे में हलचल होने लगी,,,,। हवेली के मुख्य द्वार पर खड़ा होकर एक बार फिर से उसने आवाज लगाई लेकिन कोई जवाब ही नहीं मिला तो खुदा ही हवेली में प्रवेश कर गया और हवेली में प्रवेश करते ही हवेली की खूबसूरती को देखकर दंग रह गया,,,, अपने मन में सोचने लगा कि लाला किसी राजा से बिल्कुल भी कम नहीं था,,,,,, राजू जहां पर खड़ा था वह जगह काफी बड़ी थी उसे समझते देर नहीं लगी कि यह बैठक खंड था जहां पर लाला गांव वालों से और मेहमानों से मुलाकात करता था लेकिन यहां पर भी कोई नजर नहीं आ रहा था सामने ही सीढ़ी बनी हुई थी जो ऊपर की तरफ जा रही थी,,,, राजू को समझ में नहीं आ रहा था कि वह रुके या जाए,,,, फिर अपने मन में सोचने लगा कि उसके पिताजी उसे ब्याज के पैसे देख कर ही आने के लिए कहे थे इसलिए वह सीढ़ियों से ऊपर की तरफ जाने लगा और अपने मन में सोचने लगा कि जो होगा देखा जाएगा उसे इस बात का डर था कि कहीं लाला उस पर चोरी का इल्जाम ना लगा दे कि चोरी-छिपे वह उसके हवेली में घुस रहा है लेकिन वह भला क्या चुराने वाला था,,,, औरतों के जवान बदन और उनकी खूबसूरती के सिवा वह किसी और धन में बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं लेता था,,,,

एक एक सीढ़ियां चढ़ता हुआ राजू ऊपर के मंजिलें पर पहुंच गया जहां पर चारों तरफ ढेर सारे ‌कमरे बने हुए थे,,,

तभी उसे ख्याल आया कि यह सहेली में तो वह पहले भी सोनी के साथ आ चुका था लेकिन उस समय सोनी को छोड़ देने के चक्कर में वह हवेली पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया था आज वह हवेली की खूबसूरती और उस की जगमगाहट को पहली बार अपनी आंखों से देख रहा था और यही सोच रहा था कि,,, औरत की जवानी के आगे एक मर्द को और कुछ नहीं दिखाई देता और यही उसके साथ भी हुआ था उस दिन वह सोनी की खूबसूरत बदन को प्राप्त करने के चक्कर में किसी और चीज पर ध्यान नहीं दिया था सीधा उसके कमरे में प्रवेश कर गया था,,,, वहीं खड़ा होकर राजू यही सब सोच ही रहा था कि तभी उसे एक कमरे से हंसने और बात करने की आवाज आने लगी और राजू उस कमरे की ओर जाने लगा,,,,,।
 
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