Incest मुझे प्यार करो,,, - Page 104 - SexBaba
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Incest मुझे प्यार करो,,,

वासना का तूफान गुजर चुका था मां बेटे दोनों हवास में डूबे हुए एक दूसरे की जरूरत को पूरा करने का एक दूसरे को दिलासा देते हुए मां बेटे के पवित्र रिश्ते को तार तार कर दिए थे,,, मां बेटे दोनों एक दूसरे की जरूरत को जानते थे और समझते थे,,, बरसों से बिना पति के दिन गुजारते हुए जिस तरह के मदहोशी भरे अभाव और एकाकीपन में जीवन गुजर रही थीउसे भी एक मर्द की जरूरत थी इस बात को उसका बेटा अच्छी तरह से समझता था और अपनी मां की जरूरत की आवश्यकता कितनी ज्यादा जरूरी है इस बात का एहसास उसे राहुल की मा नुपुर और सुमन की मां से मिलने के बाद है एहसास हुआ जो कि दोनों के पति मौजूद थे जिनमें से एक उसकी मां के साथ एक ही स्कूल में सहअध्यापिका भी थी,,, लेकिन अपनी मां चलती हुई जवानी सेमजबूर होकर अपनी जवानी की प्यास बुझाने के लिए अपने ही बेटे के साथ हम बिस्तर होकर अपनी जरूरत को पूरी कर रही थी और दूसरी पति के होने के बावजूद भी ,, अकेलेपन का फायदा उठाते हुए खुद उसके साथ ही संभोग सुख प्राप्त कर रही थी ,,, दोनों औरतों की जरूरत और मजबूरी को देखते हुएअंकित को अच्छी तरह से एहसास होने लगा था कि उसकी मां को भी एक मर्द की जरूरत हैजिसके चलते हैं उसने अपनी मां के साथ संबंध बनाकर उसे बहुत सुख दिया था जिसके अभाव में वह जी रही थी, और जी सुख के अभाव में उसका जीवन नीरस बन चुका था लेकिन एक बार फिर से उसने अपनी मां के बेरंग जीवन में रंगों की बौछार ला दिया था।



वहीं दूसरी तरफ सुगंधा एक मर्द और औरत के बीच के संबंध को फिल्म के जरिए देखकर धीरे-धीरे अपनी भावनाओं को भड़काने लगी थी अपनी जरूरतों को समझने लगी थी,,उसे इस बात का एहसास होने लगा था कि वाकई में एक औरत का जीवन मर्द के बिना कितना अधूरा है खास करके तब जब औरत पूरी तरह से जवानी से खीली हुई हो,,, अपने जीवनके बारे में सोचकर सुगंधा को एहसास होने लगा था कि उसे भी दूसरी औरतों की तरह जिंदगी के हर एक सुख प्राप्त करने का पूरा अधिकार हैलेकिन अपनी मर्यादा और अपनी सीमा को अच्छी तरह से जानती थी वह जानती थी कि अगर घर के बाहर कदम रखकर वह किसी गैर मर्द के साथ संबंध बनाती है तो वह उसके जीवन और उसके परिवार के लिए अपमानजनक स्थापित हो सकता है और जिसके चलते समाज में वह बेइज्जत हो सकती हैइसलिए वह बहुत समझदारी से कमली और काफी सोच विचार करने के बाद वह अपने ही बेटे के साथ संबंध बनाने के लिए सोचने लगी थी और उसे हिसाब भी होने लगा था कि चार दिवारी के अंदर रिश्तो की मर्यादा कोई मायने नहीं रखती और उसकी यह सोच उसके आत्मविश्वास में तब और ज्यादा बढ़ोतरी करने लगी जब वह सब्जी मार्केट मेंनूपुर को अपनी बेटी के साथ देखी थी और जिस तरह से उसका बेटा उसके नितंबों पर हाथ घुमा रहा था वह देखकरसुगंधा के तन बदन में हलचल सी मच गई थी एक मां बेटे के बीच इस तरह की छेड़खानी को अच्छी तरह से समझने लगी थी और अपने बेटे को पूरी तरह से जवानी की दहलीज पर कदम रखते हुए देखकर उसकी भी भावनाएं भड़कने लगी थी जिसके चलते किसी भी कीमत पर वह अपने बेटे के साथ संबंध बनाना चाहती थी औरइस बात को वह अच्छी तरह से जानती थी कि घर के चार दीवारी के अंदर उसके और उसके बेटे के बीच किस तरह का संबंध है यह भला घर के बाहर के लोग कैसे जान सकते हैं,,, और चोर तभी चोर साबित होता है जब वह पकड़ा जाए और सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि अगर उसके और उसके बेटे के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो जाता है तो इस बारे में ना तो वह किसी से कुछ कहे की और नहीं उसका बेटा इसलिए वह पूरी तरह से निश्चित थी और काफी मशक्कत करने के बाद अपनी मंजिल को प्राप्त कर ली थी।



रात भर चुदाई के मजे लेने के बाद सुबह जब नींद से उठी तोउसे नहीं मालूम था कि रात भर उसकी सवारी करने के बाद सुबह खुद उसे अपने बेटे के लंड की सवारी करना पड़ेगा लेकिन यह अनुभव भी बेहद सुखद था जवानी के दिनों मेंअपने पति के साथ जिस तरह का मजा हुआ नहीं ले पा रही थी एक ही रात में वह अपने बेटे के साथ खुलकर जीवन का आनंद ले रही थी,,, एक ही रात में अंकित ने अपनी मां को पूरी तरह से रंडी बना दिया था और यह एहसास दिला दिया था कि जीवन का सुखाकर अच्छी तरह से लेना है तो औरत के शर्म के परदे से पूरी तरह से बाहर आना होगा और एक रंडी की तरह खुलकर मजा लेना होगा,,,,सुगंधा अपने बेटे की लंड की सवारी जिस तरह से कर रही थी वह बेहद आश्चर्य का अनुभव कर रही थी,,, अपने थोड़े भारी भरकमशरीर की वजह से वह कभी सोच भी नहीं सकती थी कि वह बिस्तर पर इतनी फुर्ती दिखा पाएगी लेकिन जिस तरह से वह अपने बेटे के लंड पर अपनी बड़ी-बड़ी गांड को जोश के साथ पटक रही थी वह बेहद उत्साहित कर देने वाला था एक तरह से उसकी यह हरकत उसे पूरी तरह से आत्मविश्वास से भर दी थी। बिस्तर से उतरते उतरते एक बार फिर से उसने अपनी जवानी का रस निचोड़ कर निहाल हो चुकी थी और अपने बेटे को भी तृप्त कर दी थी।गहरी सांस लेते हुए सुगंधा बिस्तर से नीचे उतर चुकी थी वह अभी भी पूरी तरह से नग्नअवस्था में ही थी ,,,कमरे मेंअभी भी ट्यूबलाइट जल रही थी जिसकी दूधिया रोशनी में सबको साथ दिखाई दे रहा था वैसे तो सुबह के 9:00 बज रहे थे दिन का उजाला हो चुका था लोग अपने-अपने काम में लग चुके थे लेकिन सुगंधा बरसों के बाद एक बार फिर से मदहोशी का एहसास कर रही थी,,,, जिस तरह की रात उसकी गुजारी थी ऐसा कहना बिल्कुल रुचि थी ताकि सुगंधा अपने जीवन में दूसरी बार सुहागरात मना रही थी,,,।



क्योंकि औरत के जीवन में सुहागरात उसके लिए पहला अवसर होता है जब वह किसी पुरुष संसर्ग से जिस्मानी तौर पर आनंद लेती है और अपने पति के देहांत के पास बरसों गुजर गए थे इस सुख से वह पूरी तरह से वंचित थी लेकिन उसके जीवन में एक बार फिर से वही रात आई थीजिसमें वह अपने बेटे के साथ चुदाई का मजा लूट रही थी और एक अद्भुत आनंद और उत्साह के साथ जिसमें शर्म की कोई जगह नहीं थी जिसमें वह पूरी तरह से बेशर्म थी,, और बेशर्म बन जाने में कितना आनंद होता है उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था। पानी निकल जाने के बाद भीअंकित का लंड अभी भी छत की तरफ को उठाकर खड़ा था और हवा में लहरा रहा है इसे अंकित अपने हाथ में पकड़ कर उसे हिलाते हुए अपनी मां की तरफ मुस्कुराते हुए बोला।

कैसी लगी सवारी,,,,।

चल हट बदमाश,,,,,(सुगंधा शर्माते हुए बिस्तर पर पड़ी अपनी पेटीकोट को लेने लगी तो अंकित तुरंत अपना पर उसे पर रखकर उसे दबा दिया और बोला,,,)

तुम ऐसे ही खूबसूरत लग रही हो इसे पहनने की जरूरत ही क्या है।

चल अब रहने देबहुत हो चुकी तेरी बदमाशी रात भर तो अपनी मनमानी करता आ रहा है लेकिन दिन के उजाले में मैं तुझे अपनी मनमानी चलाने नहीं दूंगी,,,

मनमानी कहां थी मम्मी,,, सब कुछ तुम्हारी जरूरत के मुताबिक ही तो हुआ है तुम भी तो यही चाहती थी।

चल रहने दे मैं ऐसा कुछ भी नहीं चाहती तू ही न जाने मुझे क्या से क्या बना दिया,,,!(पेटिकोट को अपने हाथ में पकड़ कर अपने बेटे के पैर के वजन के नीचे से छुड़ाने की नाकाम कोशिश करते हुए बोली,,)

क्या बना दिया रात में भी तुम मम्मी थी और इस समय भी मम्मी हो,,,,।

कोई अपनी मम्मी को चोदता है क्या,,,?(अपने चेहरे पर शर्म का लहजा लाते हुए सुगंधा बोली,,)

किसी की मम्मी इतनी खूबसूरत होती है क्या,,?

तो खूबसूरत होने का यह मतलब थोड़ी है कि बेटा ही उस पर चढ़ जाए।

मां की गदराई जवानी देखकर कोई और चढ़ जाए इससे अच्छा तो बेटे को ही चढ़ जाना चाहिए घर की बात घर की इज्जत घर में ही रहेगी,,,

अच्छा यह बात है तुझे लगता है कि मेरे ऊपर कोई और चढ़ जाएगा और मैं उसे चढ़ने दूंगी,,,।

तुम हो ही ऐसी बड़ी-बड़ी गांड बड़ी-बड़ी चूची सड़क पर चलते समय न जाने कितनों का लंड खड़ा हो जाता है तुम्हें देखकर,,,, और वैसे भी जिस तरह से जवानी से भरी हुई हो कोई भी तुम्हें चोदने के लिए तड़पता होगा।



तड़पता है तो तड़पने दो देख कर मन बहलाने वाले को भला क्या बोल सकते हैं,,,, लेकिन मैं किसी को चढ़ने दुं ऐसा हो नहीं सकता,,,।

वैसे कुछ इस तरह से तुम्हारी बुर गीली होती रहती है मुझे तो लगता है कि विवस होकर किसी के लिए भी टांग खोल दो,,,,।

उसका तो काम ही है गीली होना,,,, और मैं इतनी नाड़े की ढीली नहीं हूं कि किसी के लिए भी टांग खोल दुं,,,(सुगंधा इस तरह से अपनी पेटीकोट को अपने बेटे के पैर के नीचे से निकालने की कोशिश कर रही थी लेकिनअंकित था कि उसे छोड़ने को तैयार नहीं था मां बेटे के बीच अब पूरी तरह से खुलकर बातें हो रही थी किसी भी तरह का शर्म नहीं था क्योंकि एक ही रात मेंमां बेटे दोनों ने मिलकर शर्म की दीवार को पूरी तरह से गिरा दिए थेअब दोनों के बीच किसी भी प्रकार का पर्दा नहीं रह गया था और इस तरह की बातें करने में मां बेटे दोनों को बड़ा मजा आ रहा था,,,,जब सुगंध को लगने लगा कि वह अपनी बेटी के पैर के नीचे से अपना पेटिकोट नहीं ले पाएगी तो तंग आकर बोली,,)

चल रहने दे तू ही इसे पहन लेना मैं तो जा रही हूं नहाने,,,(ऐसा कहते हुए सुगंधा एकदम मादक अदा भी खेलते हुए अपनी बड़ी-बड़ी गांड मटकाते हुए दरवाजे तक पहुंच गई,,,, लेकिन फिर दरवाजे पर खड़ी होकर एकदम सेमुस्कुराते हुए अपने बेटे की तरफ नजर घुमा कर देखने लगी तो वह तंग रह गई अंकित बिस्तर के नीचे खड़ा था और अपनी मां की पेटीकोट को अपने शहर से डालकर उसे पहनने की कोशिश कर रहा था यह देखकर सुगंधा अपनी हंसी को रोक नहीं पाई और हंसने लगी लेकिन तब तक अंकित पेटीकोट को पहुंच चुका था और उसकी डोरी को अपनी कमर पर बांध रहा था,,,सुगंधा उसे देखकर जोर-जोर से हंसी जा रही थी और पेटिकोट की डोरी बात लेने के बाद वह अपनी मां की तरफ देखा और बोला,,,)

देख लो अब ठीक लग रहा है ना,,,।



बिल्कुल,,,(एकदम हंसते हुए) बहुत अच्छा लग रहा है लेकिन,,, उसका क्या करेगा (उंगली के ईसारे से अपने बेटे के लंड को दिखाते हुए जो की पेटीकोट में तंबू बनाया हुआ था),,,,, यह जो खड़ा है,,,, इसे तो नीचे कर तभी तो एकदम सही लगेगा,,,,।

जब तक तुम मेरे पास खड़ी रहोगी,,, तब तक यह,,,(पेटिकोट के ऊपर से ही अपने लंड को पकड़ते हुए और जोर से दबाते हुए) बैठने का नाम नहीं लेगा‌ ,,,।

यह बात है तब तो मैं चली जाती हूं,,,,(इतना कहकर वह कमरे से बाहर निकल गई लेकिन पूरी तरह से नंगी हालत में अपनी मां की नंगी जवानी देखकर अंकित की हालत फिर से खराब हो रही थीइस बात से सुगंधा भी काफी हैरान थी की रात भर उसकी जमकर चुदाई करने के बाद भी और सुबह-सुबह उसके जवानी का रस चखने के बाद भी उसके बेटे का लंड बिल्कुल भी ढीला नहीं पड़ा था,,, अभी भी वह उसी तरह से टनटनाया हुआ था। अपने मन में सुगंधा यह सोचकर मुस्कुरा रही थी कि एक औरत को क्या चाहिए एक मोटा तगड़ा लंबा लंड जो दीन रात उसकी चुदाई करके उसकी प्यास बुझाता रहे,,,, ऐसा सोचते हुए सुगंधा बाथरूम में घुस गई थी और पेशाब करने के लिए नीचे बैठ गई थी अभी भी घर में साफ सफाई करना बाकी था,, सुगंधा को अपने बदन में एक अजीब सी हलचल महसूस हो रही थी एक अलग उत्साह उसके चेहरे पर दिखाई दे रहा था,,,, वह पेशाब करते हुए अपने बेटे के बारे में ही सोच रही थी एक ही रात में वह पूरी तरह से बदल गई थी यह भी एक हैरान कर देने वाली बात थी,,,, पेशाब करने के बाद वह तुरंत बात करने से बाहर निकल गई लेकिन देखी तोउसके कमरे से उसका बेटा वही पेटिकोट पहनकर बाहर निकल रहा था,,,, सुगंधा उसे देखकर फिर से हंसने लगी लेकिन अंकित कुछ बोल नहीं रहा था तभी वह बाथरूम के बाहर जहां पर बर्तन धोया जाता है वहीं पर आकर खड़ा हो गया अपनी पेटीकोट को दोनों हाथ से पकड़ कर और अपनी मां की तरफ देखने लगा सुगंधा उसकी हरकत को देखकर पागल हो जा रही थी लगातार वह हंसी जा रही थी। और वह हंसते हुए अपने बेटे से बोली।)

अब क्या करना चाहता है तू,,,,,?

मुझे बड़े जोरों की पेशाब लगी है,,,,।



तो,,,, यह पेटिकोट है तेरा अंडरवियर नहीं है जिसके छेद में से लंड बाहर निकाल कर पेशाब करना शुरू कर देगा,,,,(सुगंधा एक ही रात में पूरी तरह से बदल गई थी अब वह अपने बेटे के सामने लंड शब्द का प्रयोग करते हुए नहीं कतरा रही थी,,,, अपनी मां की यह बात सुनकर अंकितबेहद उत्साहित और उत्तेजित होने लगा और वह अपनी मां से बिना कुछ बोले अपनी पेटीकोट को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठाने लगा जिस तरह से सुगंधा उसे रिझाने के लिए बड़ी मादक अदा से पेटिकोट ऊपर की तरफ उठाती थी ठीक उसी तरह से अपनी मां की तरफएक अजीब ही नजर से देखते हुए वह अपनी पेटीकोट को ऊपर की तरफ उठा रही थी और उसकी यह हरकत देखकर सुगंधा की हंसी नहीं रख रही थी और देखते ही देखते वह अपनी कमर तक अपनी पेटीकोट को उठा दिया था,,,, सुगंधा अपने बेटे की नंगी गांड को पहली बार बड़े गौर से देख रही थी जो की पूरी तरह से मर्दाना थी पूरी तरह से गोलाई लिए हुए नितंबों के किनारे की नसें उसकी मर्दाना ताकत की गवाही दे रही थी सुगंधा अपने बेटे के इस रूप को देखते रह गई और अंकित एकदम से नीचे बैठकर पेशाब करने लगा और सुगंधा फिर से जोर-जोर से हंसने लगी,,,, अंकित कुछ नहीं बोल रहा थावह सिर्फ अपनी मां को प्यासी नजरों से देखे जा रहा था अंकित की हरकत को देखकर सुगंधा बोली,,)



अब यह क्या नया नाटक है बहुत तुझे औरत बनने का शौक है,,,,।(ऐसा कहते हुए सुगंधा धीरे-धीरे उसके आगे की तरफ आ रही थी वह देखना चाहती थी कि इस अवस्था में बैठकर वह किस तरह से पेशाब करता है और देखते देखते वह अपने बेटे के ठीक सामने आ गई और अपने बेटे के खड़े लंड को देखकर फिर से अंकित एकदम औरतों की तरह अपनी पेटीकोट उसको संभाले हुए था। वह अपने लंड को इस अवस्था में छोड़े हुए था जो कि एकदम ऊपर की तरफ मुंह उठाए पेशाब की धार फेंक रहा था,,,, इस नजारे को देखकर पल भर में ही सुगंधा की बुर फिर से गीली होने लगी और वह एकदम से हैरान होते हुए बोली,,)

हाय दइया तू तो सच में एकदम बेशर्म हो गया रे लेकिन सच में एक तरफ औरत बैठी हो पेशाब करने और एक तरफ तू बैठा हो तो औरतें शायद तुझे ही देखेंगी,,,,, वैसे एक बात बता तू हम औरतों की तरह इस तरह से बैठकर क्यों पेशाब कर रहा है,,,।



सच में बहुत मजा आ रहा है मुझे आज एहसास हो रहा है कि तुम औरतों को इस तरह से बैठकर पेशाब करने में कितना मजा आता है,,,।

और तुम मर्दों को हम औरतों को पेशाब करते हुए देखने में बहुत ज्यादा मजा आता है ना,,,।

बात तो तुम एकदम ठीक कह रही हो,,,,(इतना कहकर वापस कर चुका था और बैठे-बैठे ही अपने लंड को पकड़ कर ऊपर नीचे करके अपने लंड को झटका देने लगा ताकि पेशाब की बूंदे नीचे गिर जाए और ऐसा ही हुआ और वह लंड पकड़े हुए ही फिर से उठकर खड़ा हो गया,,,,,और अपनी मां की तरफ देख कर उसे हिलाते हुए बोला जो कि इस समय पूरी तरह से नंगी थी,,,) तुम्हें देख कर बार-बार खड़ा हो जा रहा है मुझे लगता है कि यह दिन भर तुम्हारी बुर में रहना चाहता है,,,,।

हां तू भी रहना चाहता है ना इसमें घुसकर अरे हरामि देख रहा है कितना बच गया है अभी घर की सफाई नहीं हुई हैचाय नाश्ता नहीं बना है ना हम दोनों में से किसी ने नहाया है और तू है कि,,,, तेरे दिमाग में यही सब चलता रहता है क्या,,,,(अपनी कमर पर हाथ रखते हुए सुगंधा बोली लेकिन उसकी नजर बार-बार अपने बेटे के लंड पर चली जा रही थी)

तुम जैसी हसीना पास में हो तो भला ऐसा कौन सा मर्दों का जिसके दिमाग में यह सब नहीं चलता होगा अगर जिसके दिमाग में यह सब नहीं चलता होगा तो समझ लो वह मर्द नहीं होगा,,,,।

अच्छा एक ही रात में तु मर्द हो गया,,,,!(

क्यों कोई कसर बाकी है तो बोलो अभी पूरा कर दुं,,,,(अपने लंड को मुठीयाते हुए वह बोला,,,, अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा बोली,,,)

नहीं नहीं इसकी कोई जरूरत नहीं है और जल्दी से कपड़े पहन कर जाकर दूध लेकर आ चाय बनानी है तुझे तो कोई फिक्र नहीं है अगर दिन रात तेरे सामने टांग फैला है लेती रहूं तो दिन भर बस करता ही रहेगा खाने पीने की तो तुझे सुध है ही नहीं,,,,।

तुम्हारी जवानी से पेट भर जाता है तो फिर खाने-पीने की जरूरत ही क्या है,,।



चल अब रहने दे फिल्मी डायलॉग मारने को जा जल्दी से कपड़े पहन कर दूध लेकर तब तक मैं घर साफ कर देती हूं नहा कर तैयार हो जाती हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही सुगंधा अपनी गांड मटकाते हुए अपने कमरे में चली गई अंकित भी कपड़े पहन कर दूध लेने के लिए घर से बाहर चला गया,,,, सुगंधा अपने बदन पर गाउन डालकर घर का काम करने में लग गई और रात भर जो कुछ भी हुआ उसके बारे में सोचने लगी,,,,घर की सफाई करते हुए अपने बेटे के बारे में सोच रही थी कि वह अपने बेटे को कितना बुद्धू समझ रही थीलेकिन उसे क्या मालूम था कि उसका बुद्धू बेटा पूरा मर्द बन चुका है और रात भर जो ठुकाई किया है उसे उसके बदन में अभी भी दर्द हो रहा था खास करके उसकी बुर की अंदरूनी भाग में,,,उसे अच्छी तरह से ऐसा सो रहा था कि वाकई में उसके बेटे का लैंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा है,,,, अभी तक उसे महसूस हो रहा था कि जैसे उसकी बुर में उसके बेटे का लंड घुसा हुआ है,,,,झाड़ू लगाते लगाते हुए अपनी कमर पर हाथ रख ले रही थी क्योंकि अपने बेटे की जबरदस्त धक्को को उसकी कमर झेल नहीं पा रही थीजिसके चलते उसे अपनी कमर में थोड़ा-थोड़ा दर्द महसूस हो रहा था लेकिन इस दर्द के आगे वह सुख जो आनंद उसे मिला था वह बेहद अनमोल था जिसके बारे में उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी।वाकई में चुदाई में इतना सुख मिलता है उसे पहली बार एहसास हो रहा था वरना अपने पति के साथ भले ही वह संभव को सुख प्राप्त की थी लेकिन इस तरह का अद्भुत तृप्ति का एहसास उसे कभी नहीं हुआ था।



उसे अच्छी तरह से मालूम था कि उसका बेटा कैसा उसकी बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर जमकर धक्के लगा रहा था वह यह सोचकर हैरान थी और उसके चेहरे पर शर्म भरी मुस्कान तैरने लगती थीवह अपने बेटे की मर्दाना ताकत से पूरी तरह से हैरान्त रात भर चुदाई करने के बाद भी और सुबह तक चुदाई करने के बावजूद भी उसका लंड बिल्कुल भी ढीला नहीं पड़ा था यह उसके लिए गर्व करने वाली बात थी और अब उसे इस बात से और ज्यादा संतुष्टि मिल रही थी कि अब दिन रात उसका बेटा उसकी जमकर चुदाई करेगा जिस सुख को पाने का सपना वह देखते आ रही थी वह सपना एक ही रात में सच हो गया था,,,उसे इस बात से भी हैरानी हो रही है कि सुबह-सुबह अपने बेटे के खड़े लंड को देखकर उसका खुद का मन एकदम से बहक गया था और वह कमरे से बाहर जाते-जाते एकदम से रुक गई थी और वह अपनी बेशर्मी से खुद हैरान थी की कैसे वह पूरी रंडी की तरह अपने बेटे के लंड पर अपनी गांड पटक रही थी,,,यह सब सोते हुए और घर में झाड़ू मारते हुए उसकी बुर फिर से पानी छोड़ने लगी थी और वह सारे काम निपटाकर नहाने के लिए बाथरुम में चली गई थी जहां पर वह अपना गाऊन निकालकर एकदम नंगी होकर नहा रही थी,,,और सबसे ज्यादा अपनी बुर पर साबुन लगाकर उसकी सफाई कर रही थी क्योंकि वह जानती थी की बुर की सफाई करना ज्यादा जरूरी है।



नहा कर वह तैयार हो चुकी थी। और रसोई घर में चली गई थी तब तकअंकित भी दूध लेकर आ गया था रसोई घर में अपनी मां को देकर वह भी नहाने के लिए चला गया था,,,,उसे भी इस बात की खुशी थी कि अब वह जब चाहे तब अपनी मां की चुदाई कर सकता था कोई रोकने वाला नहीं था कोई रोकने वाला नहीं था दोनों के मिलन मेंजो थोड़ी बहुत बाधा रूप थी उसकी बड़ी बहन वह अपनी नानी के घर जा चुकी थी,,,,इसलिए अंकित कुछ ज्यादा ही खुश नजर आ रहा था थोड़ी देर में वह भी नहा कर तैयार हो चुका था। रात भर अपनी पूरी ताकत का जोर अपनी मां पर दिखाने के बाद सुबह उसे भूख लग रही थीइसलिए वह नहा कर सीधा कपड़े पहन कर अपनी मां के पास रसोई घर में पहुंच गया लेकिन रसोई घर में पहुंचने से पहले वह दरवाजे पर ही खड़ा हो गया और अपनी मां को देखने लगा और उसकी मां अपने बेटे की तरफ देखकर हल्के से मुस्कुरा दी और खाना बनाने में लग गई,,, अपने बेटे की उपस्थिति में बार-बार उसकी बुर पानी छोड़ दे रही थी। पूरी तरह से बेशर्म बनने के बावजूद भीइस समय न जाने क्यों अपने बेटे से नजर नहीं मिल पा रही थी बस उसकी तरफ हल्के से देख कर मुस्कुराते रही थी और अपने काम में लग जा रही थी दरवाजे पर खड़ा अंकित अपनी मां की जरूरत रेखा को देख रहा था उसकी भरी जवानी को दिख रहा था जिस रात भर उसने अपने मर्दाना अंग से रौंदा था,,,,खाना बनाते समय सुगंध अपनी साड़ी को थोड़ा सा उठाकर उसे कमर में खोज दी थी और साड़ी को कस के बंधी हुई थी जिसकी वजह से उसकी भारी भरकम गांड बंधी हुई साड़ी में और भी ज्यादा बड़ी लग रही थी और अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड देखकर एक बार फिर से अंकित के पेंट में हलचल होने लगी थी,,,, काफी देर तक अंकित दरवाजे पर खड़ा होकर अपने हाथ कोआपस में बांधकर अपनी मां की जवानी कोई देख रहा था यह देखकर सुगंधा के तन-बदन में भी अजीब सी हलचल हो रही थी वह हिम्मत जुटाकर अपने बेटे की तरफ देखते हुए बोली।

दरवाजे पर खड़े-खड़े क्या देख रहा है नाश्ता तैयार है,,,,।

देख रहा हूं कि नाश्ता तो तैयार है लेकिन तुम भी तैयार दिखाई दे रही हो,,,।

क्या मतलब,,,!(अपने बेटे की तरफ देखे बिना ही वह आश्चर्य से तवे पर रोटी को पलटते हुए बोली)



मेरा मतलब है कि,,,(इसे कहते हुए रसोई घर में प्रवेश करते हुए) पेट पूजा के लिए नाश्ता तो तैयार हो गया है लेकिन,,,(एकदम से अपनी मां के पीछे पहुंच गया और उसे पीछे से अपनी बाहों में भरते हुए) जो जवानी फुट रही है,,,(इतना कहने के साथ ही अपने पेट में बना तंबू को हुआ अपनी मां की गांड पर दबाते हुए,,,,, सुगंधा अपने बेटे के मतलब को अच्छी तरह से समझ गई थी एकदम से अंकित को रोकने की कोशिश करते हुए बोली)

नहीं नहीं अभी बिल्कुल भी नहीं अभी-अभी नहा कर आई हूं रात भर तो मजा लिया है अभी भी तेरा मन नहीं भर रहा है,,,।

मैं भी यही सोचा था कि अभी कुछ भी नहीं करूंगा लेकिन तुम्हारी यह बड़ी-बड़ी,,,(साड़ी के ऊपर शायरीअपने दोनों हाथों को अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर रखकर जोर से दबाते हुए) गांड ने फिर से मेरे मन को बहकने पर मजबूर कर दिया है,,,(और ऐसा करते हुए अपनी मां की गर्दन पर चुंबनों की बारिश कर दिया सुगंधा एकदम से मचल उठी लेकिन फिर भी अपने बेटे को रोकने की कोशिश करते हुए बोली)

देखा भी बिल्कुल भी नहीं बाद में तेरा मन करे उतना कर लेना लेकिन अभी नहीं,,,,।

कैसे नहीं मेरी रानी,,,(एकदम से अपनी दोनों हथेलियां को ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की चुचीयों पर रखकर दबाते हुए और एकदम मादकता भरी आवाज में उसके कान के पास धीरे से बोला) तुम्हारी भरी हुई जवानी देखकर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया है।

तो तेरा मैंने ठेका लेकर नहीं रखी हूं,,, जो तेरा बार-बार खड़ा हो जाए तो मैं साड़ी कमर तक उठा लुं,,(प्यार से गुस्सा दिखाते हुए सुगंधा बोली)

अब तो तुम ही मेरी ठेकेदार हो जब-जब खड़ा होगा यह तुम्हारी बुर में ही जाएगा,,,,,,,(ऐसा कहते हुए धीरे-धीरे अपनी मां की ब्लाउज का बटन खोलने लगा तो सुगंधा उसे रोकते हुए बोली)

अरे हरामि इतनी जल्दबाजी क्यों दिखा रहा हैपूरा दिन तो पड़ा है सुबह-सुबह सब करना जरूरी है क्या और अभी सुबह-सुबह ही तो मजा लिया है फिर भी,,,(ऐसा कहते हुए सुगंधा अपने ब्लाउस पर से अपने बेटे का हाथ पकड़ कर उसे झटक दी लेकिन फिर से अंकित अपनी मां की चूची को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाते हुए बोला)



अगर एक ही बार में या एक ही दिन में औरत और मर्द को एक दूसरे से संतुष्टि मिल जाए तो सारा झमेला ही खत्म हो जाए,,,,(इतना कहने के साथ ही अपनी मां के कान पर हल्के से अपनी जीभ को घुमाते हुए वह एकदम मदहोशी भरे स्वर में बोला ,,,) तुम ही बताओ मेरी रानी क्या दोबारा तुम अपनी बुर में मेरा लंड नहीं चाहती हो,,,,,(अपने बेटे की हरकत से सुगंधा मदहोश होने लगी एक बार फिर से उसकी बुर पानी छोड़ने लगी लेकिन फिर भी अपने बेटे की बात सुनकर वह गहरी सांस लेते हुए बोली,,)

बिल्कुल भी नहीं,,,,,,

(सुगंधा का इतना कहना था कि अंकितअपनी मां की चूचियों पर से अपनी हथेलियां हटाकर सीधा उसकी साड़ी को दोनों हाथों से थाम लिया और उसे धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठने लगा लेकिन इस बीच में लगातार अपनी मां के कान के नीचे उसकी गर्दन परचुंबनों की बारिश जारी रखा जिसे उसकी मां पूरी तरह से मदहोश होने लगी थी मस्त होने लगी थी और अपने बेटे की मर्दाना ताकत के आगे विवस होने लगी थी,,,, अपनी मां की बात सुन कर वह फिर से उसी अंदाज में बोला,,,)

झूठ बोल रही है मेरी जान मैं चाहता हूं तेरी बुर ईस समय पानी छोड़ रही होगी,,,, तेरी जवानी का रस तेरी बुर से टपक रहा होगा,,,(इतना कहने के साथ हीअंकित अपनी मां की साड़ी को एकदम से कमर तक उठा दिया था और अपनी मां की नंगी गांड पर अपनी हथेली रखते हुए उसे उत्तेजना से दबोचते हुए बोला) देखी मेरी जान तू भी तैयार है मैं भी तैयार हूं मैं जानता हूं तु बिना चुदवाए नहीं रह सकती,,,,(इतना कहने के साथ नहीं अंकित अपने पेंट की बटन खोलकर एक झटके से अपना अंडरवियर और पेंट घुटनों तक नीचे खींच दिया,,,, और उसका टनटनाया हुआ लंड एकदम से हवा में झूलने लगा,,,, जिसकी चुभन सुगंधा को अपनी गांड पर महसूस हो रही थी वह मस्त होने लगी मदहोश होने लगी और अपनी आंखों को एकदम से बंद कर ली,,,,अंकित पूरी तरह से उत्तेजना से भर चुका था क्योंकि साड़ी के अंदर उसकी मां चड्डी नहीं पहनी थी,,,, जो कि उसकी मां की तरफ से साफ ईसारा था कि उसका बेटा जब चाहे तब उसकी चुदाई कर सकता है,,, और फिर अंकित धीरे से अपनी मां की टांग उठा कर उसे किचन के लंबी पत्थर पर रख दिया,,, जिससे सुगंधा की बड़ी-बड़ी गांड की दरार एकदम से खुल गई और उसका गुलाबी छेद नजर आने लगा सुगंधा अपने बेटे के हाथों के कठपुतली बन चुकी थी जैसा वह कर रहा था वैसा वह होती जा रही थी,,,, किचन के बड़े से पत्थर पर सुगंधा एकदम से झुक गई थी उसकीएक टांग ऊपर उठी हुई थी जो किचन के पत्थर पर रखी हुई थी और घुटनों से मुड़ी हुई थी जिसे अंकित के लिए उसका रास्ता एकदम साफ हो गया थाअंकित धीरे से अपने लंड की सुपाडै को अपनी मां के गुलाबी छेद से लगायासुगंधा की बुर पहले से ही इतना पानी छोड़कर चिकनाहट से भर गई थी कि अंकित को थूक लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ी,,,,, अंकित धीरे से अपनी कमर को आगे की तरफ ठेला और पहले ही प्रयास में अंकित का मोटा तगड़ा लंड आधा उसकी बुर में समा गया,,,, इसके बावजूदसुगंधा के मुंह से हल्की दर्द भरी करने की आवाज निकल गई रात भर बनेगी वह अपने बेटे के लंड से मस्त हुई थी लेकिन फिर भी अंकित का लंड इतना मोटा था की पहली बार में दर्द दे ही देता था भले ही अंकित के लंड का सांचा उसकी मां की बुर में बन चुका था।



आहिस्ता आहिस्ता,,,, दर्द करता है।

मजा भी तो देता है मेरी रानी,,,(और इतना कहकर अपनी मां की कमर से दोनों हाथों से थाम लिया और जोरदार धक्का मारा इस बार बाकी बचा लंड भी एक झटके से बुर की अंदरूनी अड़चनों को दूर करता हुआ सीधे जाकर सुगंधा के बच्चेदानी से टकरा गया एकदम से सुगंधा के मुंह से चीख निकल गई,,,,।

हाय दइया मर गई रे,,,,,।

चुप भोसड़ा चोदी रात भर चुदवाई है और अब कह रही है हाय दऐया मर गई रे,,,,,।

अरे हरामजादे सच में दुखता है तेरा कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा है,,,,, फाड़ डालेगा क्या मेरी बुर,,,,सहहहहह आहहहहहहहह,,,(दर्द से सुगंधा थोड़ा कहरा रही थी कि तभी,,,,अंकित अपनी मोटे लंड को बाहर की तरफ खींचने लगा था कि जोर से धक्का लगा सके लेकिन सुगंध समझ गई इसलिए वह एकदम से अपना हाथ पीछे की तरफ लाकर उसके लंड को पकड़ने की कोशिश करते हुए बोली,,,)

रुक जा,,,, थोड़ा रुक जा जल्दबाजी मत दिखा मैं कहीं भागी नहीं जा रही हूं,,,,।

(शायद अपनी मां की बात को अंकित अच्छी तरह से समझ रहा था उसकी हालत को समझ रहा था इसलिए इस स्थिति में अपने आप को रोक रहा लेकिनअपनी मां की ब्लाउज का बटन खोलने लगा और इस बार सुगंध उसे रोकने की कोशिश नहीं की और अगले ही पलअंकित अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलकर ब्रा को दोनों हाथों से पकड़कर ऊपर की तरफ खींच दिया जिससे उसके दोनों खर्च हवा में लहराने लगे और वह दोनों खरबुजो को हाथ में पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया ताकि उसकी मां को मस्ती चढ़ सके,,,, और थोड़ी ही देर में अंकित की हरकत रंग लाने लगी उसकी मेहनत का फल दिखाई देने लगा सुगंधा को मजा आने लगा और उसके मुंह से दर्द की जगह मस्ती भरी आवाज निकलने लगी जिसे सुनकर अंकित उसकी चूची को इस तरह से दबाते हुए बोला,,,)

अब चोदु ना तुम्हें,,,,।

हां अब लगा धक्के मेरे राजा,,,

ले मेरी रानी संभाल,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित फिर से अपने लंड को बाहर की तरफ खींचा और फिर लंड के सुपाड़े को गुलाबी छेद में ठहरा कर एक बार फिर से कचकचा कर धक्का माराइस बार भी उसका लंड पूरी तरह से उसके बच्चेदानी से टकरा गया लेकिन इस बार उत्तेजना से वह सिहर उठी और एकदम मस्त हो गई अंकित अपनी कमर हीलाना शुरू कर दिया अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया,,,, सुगंधा अपनी एक टांग ऊपर उठाए हुए अपने बेटे से चुदवा रही थी,,,,अंकित पागलों की तरह अपनी मां की नंगी चूचियों को दबा दबा कर अपनी मां को चोद रहा था। मां बेटे फिर से मस्ती के सागर में गोते लगाने लगी दोनों मदहोशी के सागर में डूबने लगेतवे पर रखी हुई रोटी जलने लगी थी लेकिन उसकी शुध मां बेटे दोनों को बिल्कुल भी नहीं थी,,, अंकित तो पागल हुआ जा रहा थारसोई घर में अपनी मां की चुदाई कर रहा था यह वही रसोई घर था जिसमें वह अपनी मां की मदहोश कर देने वाले रूप को देखकर मन में कल्पनाएं किया करता था। कसी हुई साड़ी में अपनी मां की कई हुई बड़ी-बड़ी गांड देखकर उसके नंगेपन की कल्पना करके मुट्ठ मारा करता था वह कभी सोचा नहीं था कि उसके जीवन में ऐसा भी पल आएगा कि वह रसोई घर में ही अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठाकर उसकी चुदाई करेगा।वो काफी उत्साहित और उत्तेजित नजर आ रहा था सुगंधा की तो हालत खराब हो रही थी शर्म और उत्तेजना के मारे उसका चेहरा टमाटर की तरह लाल हो गया थाजिस तरह से उसका बेटा उसकी चुदाई कर रहा था वह पागल हुए जा रही थी हर एक धक्का उसे मदहोश कर रहा था।

सहहहह आहहहह मेरे राजा,,, और जोर-जोर से धक्के मार फाड़ दे मेरी बुर को घुस जा मेरी बुर में बहुत मस्त चुदाई करता है रे तू,,,,आहहहहहह,,,आहहहहहह एकदम पक्का मादरचोद हो गया है।

तू भी मादरचोद बेटे की रंडी मन हो गई है,,,, देख कैसे गांड उठा उठा कर लेती है।आहहहह देख कैसे गांड उठा रही है,,,, साली छिनार,,,,।



(अपने बेटे के मुंह से अपने लिए गली और इसकी बात सुनकर सुगंधा का जोश बढ़ने लगा था और वह सच में अपनी गांड उठा उठा कर अपने बेटे के लंड को ले रही थी,,,,सुगंधा की बुर में अंकित का लंड एकगम रगड़ रगड़कर अंदर बाहर हो रहा था जिससे सुगंधा को और ज्यादा मजा आ रहा था,,,, रसोई घर में सुगंधा की गरमा गरम सिसकारी की आवाज गूंज रही थी जिससे रसोई घर का वातावरण पूरी तरह से गर्म हो चुका था,,,,, अंकित की कमर किसी मशीन की तरह आगे पीछे हो रही थी और बार-बार सुगंधा की बुर पानी फेंक दे रही थी जिसकी चिकनाहट पाकर बड़े आराम से अंकित का लंड उसकी मां की बुर में अंदर बाहर हो रहा था। सुगंधा और अंकित दोनों चरम सुख के करीब पहुंच चुके थे सुगंधा की सांस ऊपर नीचे हो रही थी और अंकित अपनी मां की चूचियों को छोड़कर उसकी कमर को थाम लिया था और जोर-जोर से धक्के लगा रहा था और अगले ही पल मां बेटे दोनों फिर से एक साथ झढ़ने लगे।)
 
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