Incest मुझे प्यार करो,,, - Page 122 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest मुझे प्यार करो,,,

अपनी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी को सलवार कमीज में देखकर अंकित की आंखों में वासना की चमक एक बार फिर से फैल चुकी थी और वह अपनी मां के साथ मनमानी कर चुका था वैसे तो सुगंधा ने भी अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए ही सलवार कमीज पहनी थी ऐसा नहीं था कि उसका बेटा उसकी तरफ आकर्षित नहीं था बस वहां रोज नए-नए तरकीब आजमाती थी अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए,,,, सलवार में उसकी बड़ी-बड़ी गांड और ज्यादा कसी हुई और उभार दार लग रही थी। जिसे देखकर अंकित अपने आप को रोक नहीं पाया था और पूरी तरह से अपनी मां की जवानी को अपने काबू में करके उसे उसके ही कमरे में ले जाकर के जमकर उसकी चुदाई किया था।



रात को खाना खाने के बाद,, अंकित ऊपर छत पर जाकर बिस्तर लगा रहा था अब मां बेटे को छत पर सोने में कुछ ज्यादा ही मजा आ रहा था क्योंकि गर्मी का महीना था और छत पर ठंडी हवा चलती थी जिसे गर्मी में राहत मिलती थी और दोनों छत पर खुले आसमान के नीचे संभोग का रोग मजा लेते थे जिसका आनंद दोगुना हो जाता था,,,, ऐसे ही अंकित छत पर बिस्तर लगा रहा था तभी उसकी मां सीढ़ियां चढ़कर छत पर पहुंची तो अपनी मां को देखकर अंकित की आंखें फटी की फटी रह गई क्योंकि इस समय उसकी मां कुछ भी नहीं पहनी थी एकदम नंगी थी और अंकित को देखकर मुस्कुरा रही थी अंकित तो बिस्तर लगाना ही भूल गया था वह अपनी मां को ही पति आंखों से देख रहा था उसका मुंह खुला का खुला रह गया था और गहरी सांस लेते हुए अपनी मां को देखकर बोला।

बाप रे तुम तो पूरी कयामत लग रही हो क्या इरादा है आज,,,



इरादा क्या है जो रोज रहता है वही इरादा आज भी है,,, (इतना कहते हुए सुगंधा एकदम मादक चल भरते हुए छत की दूसरी तरफ जाने लगी जहां पर पीछे मैदान का हिस्सा था और वहां जाकर छत की दीवार पकड़ कर उसे पर अपने हाथ की कोनी लेकर खड़ी हो गई अपनी गांड को पीछे की तरफ निकल कर और पीछे बैठकर बिस्तर लगा रहा अंकित अपनी मां के इस नए रूप को देखकर पूरी तरह से मदहोश हो गया,,,,, और वह अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया,,, और चलता हुआ अपनी मां के पास आया और अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर अपनी हथेली रखकर उसे रगड़ कर सहलाते हुए मदहोश होता हुआ बोला,,,,)

आज तुम्हारा इरादा कुछ ज्यादा ही खतरनाक लग रहा है मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि आज बिना कपड़ों के तुम एकदम नंगी छत पर आ गई हो,,,।

क्यों इसमें नया क्या लग रहा है रोज छत पर कपड़े पहन कर आई थी और जो मेरे कपड़े उतार कर नंगी कर देता था आज तुझे ज्यादा मेहनत नहीं करना पड़ेगा इसलिए पहले ही से कपड़े उतार कर नंगी होकर आई हुं,,,, (अपने बेटे की तरफ देखते हुए मुस्कुरा कर सुगंधा बोली)

कसम से तुम्हारा यह रूप और तुम्हारी अदा मुर्दे के लंड को भी खड़ा कर दे,,, (इतना कहने के साथ ही वह अपनी मां की गांड पर जोर से चपत लगाया)



आऊचच,,,,,, थोड़ा धीरे से तू तो रोज मेरी गांड को लाल कर देता है,,,,।

तुम्हारी गांड है ही इस लायक की क्या बताऊं,,,, (गांड को फिर से सहलाते हुए) लेकिन एक बात बताओ रोज तो तुम इस तरह से खड़ी होने में नाटक करती हो और आज अपने आप से ही इस तरह से खड़ी हो कोई देख लेगा तो,,,.

यहां से भला कौन देखेगा बुद्धू पहले यह तो देख में खड़ी कहां हूं पीछे की तरफ खड़ी हूं यहां पर चारों तरफ मैदान ही मैदान है सामने की तरफ खड़े रहने में डर है,,,।

ओहहह,,,, बात तो सही है,,, लेकिन आज मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है।

तुझसे तो रोज रहा नहीं जाता,,, सुबह भी कहां तुझसे रहा जा रहा था अपनी मनमानी करने के बाद ही तो मुझे छोड़ा ।

तुम छोड़ने लायक नहीं चोदने लायक चीज हो,,,।

वो तो में हुं ही,,,,, (मैदान की तरफ देखते हुए) देख रहा है ये खूबसूरत नजारा,,,, चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा है अगर इस अंधेरे में औरत और मर्द कुछ करना चाहे तो आराम से कुछ भी कर सकते हैं क्योंकि कुछ दिखाई नहीं दे रहा है।

कहीं तुम्हारा तो कुछ करवाने का इरादा नहीं है इस अंधेरे में,,,,।



इरादा तो बहुत कुछ है,,, (इतना कहने के साथ ही सुगंधा घूम गई और गांड को छत की दीवार से टिकाकर अपनी दोनों टांगों को खोल दी ,, यह अंकीत के लिए ईशारा था और अंकीत ईस ईशारे को अच्छी तरह से समझता था और तुरंत अपने घुटनों के बल बैठ गया और अगले ही पल अपने प्यार से होठों को अपनी मां की दहकती हुए बुर पर रखकर उसे चाटना शुरू कर दिया,,,,, सुगंधा एकदम से मस्त हो गई और दीवार को कस के पकड़कर अपनी कमर को थोड़ा सा और आगे की तरफ कर दी ताकि उसका बेटा आराम से उसकी बुर की चटाई कर सके, वैसे ही अपनी मां को नंगी देखकर अंकित की आंखों में मदहोशी छा गई थी वह अपनी मां की मोटी मोटी जांघों को पकड़ कर अपनी मां की बुर को पागलों की तरह चाट रहा था और जैसे-जैसे उसकी जीभ बुर पर फिसल रही थी वैसे-वैसे सुगंधा की हालत खराब हो रही थी वह मदहोश हो रही थी और अपनी आंखों को बंद करके इस पल को पूरी तरह से जी लेने की कोशिश कर रही थी,,,, सुगंधा पूरी तरह से निश्चित थी सबसे ऊंची छत होने का उसे पूरा फायदा मिल रहा था,,,, वह पूरी तरह से नंगी होकर अपनी जवानी का मजा लूट रही थी,,,,, अपने बेटे के सर को रह रहे कर वह सहला दे रही थी और अपनी बुर की किसी एक जगह उसकी जीभ को महसूस करके वही स्थिर भी कर दे रही थी जो कि उसकी तरफ से यह इशारा था कि उसी जगह पर उसे ज्यादा मजा आ रहा है।



छत पर गरमा गरम शिसकारीयो की आवाज गुंज रही थी,,, उसकी सिसकारीयो की आवाज सुनकर अंकित का जोश बढ़ रहा था,,,, और इसी जोश की बदौलत अंकित अपनी मां की बुर में एक साथ दो उंगलियां पेल रहा था। जिससे उसकी मां को भी बहुत मजा आ रहा था। वैसे आज चांदनी रात बिल्कुल भी नहीं थी चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा था इसलिए दूर से भी किसी के देखे जाने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी वैसे तो जिस जगह पर दोनों खड़े थे वहां पर वैसे भी किसी की नजर पडने वाली नहीं थी। कुछ देर तक इसी तरह से अपनी मां को मस्त करने के बाद,,, अंकित धीरे से अपनीमां की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उठकर खड़ा हो गया और अपनी मां के खूबसूरत चेहरे को देखकर गहरी गहरी सांस लेने लगा सुगंधा की भी सांस ऊपर नीचे हो रही थी और अगले ही पल सुगंधा खुद अपने बेटे को अपनी बाहों में भरकर उसके होठों का रसपान करने लगी और अंकित तुरंत उसे भी अपनी बाहों में दबोच कर अपने दोनों हथेलियां को उसकी नंगी गांड पर रखकर जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया वह भी पूरी तरह से जोश से भरा हुआ था, सुगंधा बावली हुई जा रही थी उसकी सांसों की गति के साथ-साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां भी अंकित की छाती से रगड़ खा रही थी। और यह एहसास दोनों को गर्म कर रहा था,, दोनों के बीच चुदाई का खेल रोज चल रहा था लेकिन ऐसा लग रहा था कि जैसे सब कुछ नया-नया सा हो पहली बार सब कुछ हो रहा है दोनों का एहसास इतना गजब का था कि दोनों का मन एक दूसरे से भरता ही नहीं था और यह बहुत जरूरी भी होता है मर्द और औरत के बीच,,,।



अगर सभी मर्दों और औरत के बीच इसी तरह का एहसास होने लगे तो शायद मर्द दूसरी औरत की तरफ कभी देखे बिना लेकिन ऐसा होता है नहीं है मर्द अक्सर एक औरत से मन भर जाने के बाद दूसरी औरत की तरफ आकर्षित हो जाता है लेकिन यहां पर सुगंधा को लेकर अंकित पूरी तरह से वफादार था जब तक की दूसरी औरतों से खुद आगे से निमंत्रण ना दे क्योंकि जो सुख जो संतुष्टि उसे अपनी मां से मिल रहा था ऐसा एहसास उसे दूसरी औरतों से नहीं मिल पाता था हालांकि मजा बहुत आता था लेकिन वह एहसास और संतुष्टि उसे अपनी मां से ही मिलता था इसीलिए वहां जब भी अपनी मां को देखा था तब उत्तेजित हो जाता था और हर बार नया एहसास लेकर उसकी चुदाई करता था,, अपनी मां के लाल-लाल होठों का रसपान करते हुए वह अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से जोर-जोर से दबोच रहा था दबा रहा था इस बीच सुगंधा भी अपने हाथ को नीचे की तरफ ले जाकर के पेंट के ऊपर से ही उसके खड़े लंड को दबा रही थी। और देखते ही देखे अपनी उंगलियों का सहारा लेकर वह पेट के बटन को खोलकर अपने बेटे के लंड को बाहर निकाल और उसे हाथ से मुट्ठीयाने लगी हालांकि इस बीच वह अपने होठों को बिल्कुल भी अपने बेटे के होंठ से अलग नहीं की। अंकित का मन मचल रहा था अपनी मां की बुर में डालने के लिए लेकिन उस पड़ाव पर पहुंचने से पहले का सफर उसे बेहद रोचक और उन्मादित कर देने वाला लग रहा था। इसीलिए तो वह बिल्कुल भी जल्दबाजी नहीं दिख रहा था और वैसे भी दोनों के पास काफी समय था दोनों के पास समय का अभाव बिल्कुल भी नहीं था।



कुछ देर तक इसी तरह से आनंद लेने के बाद अंकित अपनी मां से कुछ पल के लिए अलग हुआ सिर्फ अपने कपड़े उतारने के लिए और जैसे ही वह निर्वस्त्र हो गया फिर से अपनी मां को अपनी बाहों में भर लिया वैसे भी इस खेल को खेलने में सबसे योग्य अवस्था नग्न अवस्था ही होती है इसमें संभोग का एहसास पूरी तरह से मर्द और औरत को डुबो देता है।और ईस समय मां बेटे दोनों इस एहसास में पूरी तरह से डूबे हुए थे दोनों एक दूसरे को बाहों में भरकर एक दूसरे के अंगों को खंगाल रहे थे दबोच रहे थे पकड़ रहे थे ऐसा करने में दोनों को मजा आ रहा था,,,, तभी सुगंधा से रहा नहीं गया और सुगंधा धीरे रे से नीचे की तरफ बैठने लगी और देखते-ही देखते वह अपने घुटनों के बल बैठ गई। अंकित जानता था कि अब उसकी मां क्या करने वाली है इसलिए अंकित अपनी मां की तरह ही छत की दीवार को पकड़ कर जो की 4 फीट की थी,, खड़ा हो गया और अपने लंड को थोड़ा और आगे की तरफ कर दिया,,, सुगंधा मुस्कुराकर अपने बेटे की तरफ देख और बिना अपने बेटे के लंड को हाथ लगाए उसे सीधा अपने लाल-लाल होठों को खोलकर उसे अंदर ले ली,, और चूसना शुरू कर दी अंकित एकदम से गहरी सांस लेता हुआ मदहोश हो गया और अपनी मां की तरफ देखने लगा उसकी मां भी अपने बेटे के लंड को मुंह में लिए हुए उसे ही देख रही थी। अंकित अपनी आंख के इशारे से ही मानो कह रहा हो कि पूरा अंदर तक ले लो,, क्योंकि अगले ही पल सुगंधा पूरा का पूरा लंड अपने गले के नीचे तक उतार ली थी,,, उसे सांस लेने में थोड़ी तकलीफ हो रही थी लेकिन जो आनंद जो उत्तेजना उसे महसूस हो रही थी उसके आगे यह थोड़ी सी तकलीफ कुछ भी नहीं थी इसीलिए तो सुगंधा पूरी तरह से मस्त हो गई थी। सुगंधा घुटनों के बल और थोड़ा आगे की तरफ झुक कर बैठी हुई थी,,, ‍ जिससे अंकित को उसकी मां की बड़ी-बड़ी गाड़ी एकदम साफ दिखाई दे रही थी और वह अपने दोनों हाथों को नीचे की तरफ ले जाकर के उसकी बड़ी-बड़ी गांड को सहलाते हुए उसे जोर-जोर से दबा रहा था और मजा ले रहा था।



सुगंधा अपने बेटे के लंड को मुंह में लेकर चुस चुस कर एकदम मस्त कर दी थी,,,, अंकित पूरी तरह से तैयार था अपनी मां की बुर में घुसने के लिए इसलिए वह अपनी मां के दोनों हाथ को पकड़ कर ऊपर की तरफ उठाया और छत की वही 4 फीट की दीवार को पकड़ कर घोड़ी बना दिया और खुद अपनी मां के पीछे आ गया उसकी बड़ी-बड़ी गांड अंधेरे में भी चमक रही थी जिसे अंकित को कोई परेशानी नहीं हो रही थी और अगले पल वह अपने लंड को उसके गुलाबी बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया,,,, सुगंधा एकदम मस्त हो गई अंकित पागलों की तरह पहले ही धक्के से अपनी मां को पूरी ताकत से चोद रहा था। सुगंधा तो जैसे हवा में उड़ रही थी,, पूरी ताकत से छत की दीवार को पकड़ कर वह अपने बेटे की प्रहार को झेल रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था उसके मुंह से हर धक्के के साथ चीख निकल जा रही थी और वह बहुत खुलकर चीख की आवाज निकल रही थी और शिसकारी भी भर रही थी। अंकित को अपनी मां की चुदाई करने में बहुत मजा आता था वह पूरी तरह से मस्त हो जाता था असली मर्दानी की दिखाने का अवसर उसे अपनी मां के साथ ही मिलता था। जिसमें वह खरा भी उतरता था। अंकित अपनी मां के साथ प्राप्त अनुभव का पूरा उपयोग कर रहा था वह कभी अपनी मां की कमर पकड़ लेता तो कभी दोनों चुचियां को जोर-जोर से दबाता हुआ धक्के पर धक्के लगाता तो कभी कंधों को दोनों हाथों से पकड़ कर लगाम की तरह अपनी तरफ खींचता ऐसा करने में अंकित को तो मजा ही रहा था उसकी मां भी पूरी तरह से मस्त हो जा रही थी। थोड़ी ही देर में दोनों का बदन एकदम से अकड़ने लगा और फिर देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ने लगे,,,,,।



वासना का तूफान शांत हो चुका था अपनी मां से अलग होकर बिस्तर पर नंगा बैठकर अंकित गहरी गहरी सांस ले रहा था उसकी मां दीवार से सट कर खड़ी होकर अपने बेटे को ही मुस्कुरा कर देख रही थी। औरबोली।

तू सच में पूरा सांड है।

तुम भी एकदम छिनार हो,,,,,।

(अपने बेटे के मुंह से इतना सुनकर सुगंधा मुस्कुराने लगी,,,, दोनों के बीच कुछ देर तक ईसी तरह से बातचीत चलती रही तो सुगंधा अपने बेटे से बोली।)

रुक मैं अभी आती हूं,,,।

क्यों कहां जा रही हो,,,?

बाथरूम,,,।

तो यही कर लो ना,,,,।

समझ कर दो नंबर,,,,।

ओहहहहह,,,,, तो यह बात है,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित अपनी जगह पर खड़ा हो गया और खुले मैदान की तरफ देखते हुए बोला) तो बाहर क्यों नहीं चली जाती देखो कोई बाहर देखने वाला भी नहीं है,,,,

इसी तरह से,,,।

तो क्या एकदम नंगी होकर चांदनी रात तो है नहीं की कोई देखेगा तो दिख जाओगी एकदम अंधेरा है देखने पर भी नहीं दिखाई देता और एक नया अनुभव भी मिल जाएगा,,,।

नहीं नहीं मुझे तो डर लगता है,,,।

अरे चलो ना मैं भी इसी तरह से चलता हूं मजा आ जाएगा,,,,।

कोई देख लेगा तो,,,।



कोई नहीं देखने वाला,,,, आधी रात से भी ज्यादा समय हो रहा है सब गहरी नींद में सो रहे होंगे और वैसे भी रात एकदम अंधेरी है चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा है कुछ दिखाई दे रहा है तुम्हें तुम खुद ही देखने की कोशिश करो,,,(मैदान की तरफ इशारा करते हुए अंकित बोल तो सुगंधा भी मैदान की तरफ देखने लगी वाकई में मैदान में कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था और अपने बेटे की बात सुनकर उसके बदन में भी उत्सुकता जागने लगी,,,,,, वह सोच में पड़ गई तो यह देखकर अंकित फिर से बोला,,,,)

तुम बिल्कुल भी मत डरो मैं भी इसी तरह से चलता हूं कोई नहीं देखेगा,,,,।

तू पता नहीं क्या-क्या करवाएगा मुझसे,,,,।

जिस जिस चीज में मजा मिलेगा वह सब करवाऊंगा तुमसे,,,,,,,अब चलो,,,, मजा आ जाएगा,,,(इतना कहकर वह खुद सीढीयो से नीचे उतरने लगा,,, अपने बेटे की हिम्मत देखकर सुगंधा भी हिम्मत करके उसके पीछे-पीछे चल दी,,, देखते ही देखते दोनों घर के पीछे पहुंच चुके थे लकड़ी के छोटे से दरवाजे को खोलकर अंकित सबसे पहले मैदान की तरफ आगे बढ़ा वह भी पूरी तरह से अपनी मां की तरह ही नंगा था उसके पीछे-पीछे सुगंधा भी बाहर निकलने लगी लेकिन वह चारों तरफ नजर घूमाकर देख ले रही थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है जबकि इस समय उसे कोई देखने वाला नहीं था चारों तरफ घना अंधेरा छाया हुआ था,,,, 2 मीटर की दूरी दोनों में हो जाए तो वह दोनों खुद ही नहीं दिखाई दे रहे थे। अंकित को तो बहुत मचा रहा था पहली बार हुआ एक नंगा होकर इस तरह से मैदान में घूम रहा था खुली हवा में उसे अच्छा एहसास हो रहा था उसका लंड झूल रहा था और जब वह चलता था उसका लंड का वजन उसे साफ महसूस हो रहा था सुगंधा भी अपने बेटे के पीछे-पीछे आगे बढ़ रही थी वह भी पूरी तरह से नंगी थी शीतल हवा उसके नंगे बदन को छूकर गुजर जाती तो उसके बदन में सिहरन सी दौड़ जाती थी,,, अंकित आगे आगे चला जा रहा था सुगंधा पीछे-पीछे कभी-कभी अंकित तोड़ने लगता तो सुगंधा भी नंगी उसके पीछे दौड़ने लगती थी वाकई में खूब मदहोश कर देने वाला नजारा था,,, लेकिन इस खूबसूरत नजारे को देखने वाला इस समय वहां कोई नहीं था सिवाय अंकित के,,,,।



अरे बस कर अब झाड़ियों के अंदर तक जाएगा क्या,,,।

हां तो क्या हो गया तुम्हें सौच भी तो करना है,,,,।

लेकिन झाड़ियों के अंदर जाना जरूरी है,,, मुझे डर लग रहा है,,,,,।

किस बात का यहां कोई देखने वाला नहीं है,,, देखो तो सही कितना अच्छा लग रहा है,,,।

अरे मुझे भूत का डर लग रहा है।

(इतना सुनकर अंकित जोर-जोर से हंसने लगा क्योंकि वह जानता था कोई उसके हंसने की आवाज कोई सुनने वाला नहीं था और वह हंसते हुए बोला)

तुम भी कहां यह बेकार की बातों में मानती हो,,, अगर भूत हुआ भी तो तुम्हें डराएगा नहीं,,,।

मुझे क्यों नहीं डराएगा,,,,!

तुम्हारी खूबसूरती देखकर वह भी तुम्हारा दीवाना हो जाएगा और तुम्हारी चुदाई करेगा,,,।

धत् पागल,,,,,, कुछ भी बोलता रहता है अब तु यहीं पर रुक,,,, बड़े जोरों की लगी है,,,,,(इतना कहने के साथ ही पास में बड़ा सा पत्थर था वह उसके पीछे चली गई,,,, और वहीं बैठकर सौच करने लगी,,,, अंकित भी हंसता हुआ वहीं पर रुक गया लेकिन फिर जैसे कुछ याद आया हो वह एकदम से बोला,,,)

अरे लेकिन पानी का डब्बा लाना तो भूल ही गए,,,।

ओहहह,,,(सुगंधा को भी एकाएक याद आया) अब क्या होगा,,,!

तुम चिंता मत करो तुम बैठकर कर लो मैं अभी पानी का डब्बा लेकर आता हूं,,,,।

नहीं नहीं,,,, तू कहीं मत जा मुझे डर लगता है,,,।

लेकिन गांड कैसे धोओगी,,,,।

सुगंधा



मैं कुछ कर लूंगी तु चिंता मत कर लेकिन यहां से जाना नहीं,,,,,।

ठीक है,,,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा को थोड़ी राहत हुई उसे अच्छी तरह से मालूम था की आस स्थिति में क्या करना है,,,, और सौच कर लेने के बाद,,, वह मिट्टी का पत्थर ढूंढने लगी अपनी गांड पोंछने के लिए,,,, और वह खड़ी होकर थोड़ा आगे बढ़ गई और मिट्टी के पत्थर का छोटा सा टुकड़ा ढूंढ़ने लगी अंकित जहां पर खड़ा था वहां से उसकी मैं एकदम साफ दिखाई दे रही थी अंकित भी समझ गया था कि उसकी मां अब क्या करने वाली है,,,, और अगले ही पल सुगंधा को छोटा सा मिट्टी का टुकड़ा मिल भी गया जिससे वह अपनी गांड पोंछ रही थी लेकिन यह देखकर अंकित का लंड फिर से अपनी औकात में आकर खड़ा हो गया,,,, और बिना कुछ बोल सीधा अपनी मां के पीछे पहुंच गया,, और एकदम से उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया सुगंधा तो पल भर के लिए घबरा गई थी क्योंकि उसे नहीं मालूम था कि उसका बेटा उसके पीछे आ गया है अंधेरा ही करना था कि उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन अगले ही पल अंकित ने बोला,,,,)

बस ऐसे ही रहना,,,,।



(खुला वातावरण पाकर और अपने बेटे के सामने सौच करते हुए वह भी उत्तेजित हो गई थी और अंकित अंधेरे में ही अपने लंड के सुपाड़े को इधर-उधर रगड़कर अपनी मां के गुलाबी छेद को ढूंढ ही लिया और अगले ही फल उसका पूरा लंड उसकी मां की बुर की गहराई में था और वह पीछे से अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया था,,, सुगंधा भी पूरी तरह से मदहोश हो गई थी। खुला मैदान पाकर वह जोर-जोर से सिसकारी लेना शुरू कर दी थी क्योंकि अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी इस तरह की आवाजे किसी के कानों में पडने वाली नहीं थी, और अंकित जमकर अपनी मां की चुदाई कर रहा था और तब तक चुदाई करता रहा जब तक कि वह अपनी मां का पानी नहीं निकाल दिया और साथ में खुद भी झड़ नहीं गया,,,, फिर दोनों वापस घर की ओर लौट आए,,, घर पहुंच कर सुगंधा ने पानी से अपनी गांड को साफ की,,,, और अपने बेटे के साथ छत पर आकर बिस्तर पर लेट गई दोनों बहुत खुश थे दोनों को बहुत मजा आया था। सुगंधा अपने बेटे से बोली।)

कहां से आता है तेरे दिमाग में ऐसे ऐसे ख्याल,,,।

क्यों तुम्हें मजा नहीं आया क्या,,,!

मजा तो बहुत आया तभी तो कह रही हूं,,,,, लेकिन अब यह मजा कुछ दिन का ही है,,,,।

(अपनी मां की बात सुनकर अंकित थोड़ा हैरान हो गया और एकदम से अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला)



कुछ दिन का क्यों,,,?

क्योंकि कुछ ही दिन में तेरी बड़ी बहन आ जाएगी फिर ऐसा मौका कहां मिलने वाला है फिर तो पता नहीं मौका मिलेगा भी कि नहीं,,,,।

हां मम्मी मैं तो भूल ही गया था कि अपने दोनों के सिवा तृप्ति भी है,,, हम दोनों जिस तरह से रहते थे मैं तो भूल ही गया था कि मेरी कोई बड़ी बहन भी है।

वही तो कह रही हूं तेरी बड़ी बहन जाएगी तब क्या होगा मुझे तो तेरे बिना एक पल भी रहा नहीं जाता।

मुझे भी कहां रहा जाता है,,,, जब तक तुम्हारी बुर में,,,(अपनी मां की बुर पर हथेली रखकर उसे सहलाते हुए) लंड डालकर पानी नहीं निकाल देता तब तक मुझे नींद नहीं आती,,,,

अब कर भी क्या सकते हैं उसे आने से तो रोक नहीं सकते,,,, मैं सोच रही थी कि,,,।

क्या सोच रही थी,,,?

मैं सोच रही थी कि जब तक तृप्ति नहीं आ जाती क्यों ना हम दोनों कहीं घूमने चलते हैं बहुत मजा करेंगे,,,,।

यह बात तो तुमने बहुत अच्छी कही लेकिन कहां,,,?

नैनीताल चलते हैं पहाड़ियों में वहां मजा आएगा हम दोनों को कोई पहचानेगा भी नहीं हम दोनों कुछ भी कर सकते हैं,,,,,।

तुम सच कह रही हो हम दोनों को कोई वहां जाने वाला भी नहीं होगा जैसे मन वैसे घूमेंगे,,, लेकिन पैसे,,,!

तु इसकी चिंता मत कर पैसे है मेरे पास,,,,।

वाह मम्मी तुम तो महान हो,,,,,, मजा आ जाएगा पहाड़ियों में,,,,,ऊममममम,(इतना कहने के साथ है यह वहां एकदम से अपनी मां की गर्दन पर चुंबन करने लगा हथेली से तो वह अपनी मां की बुर को सहला ही रहा था एक बार फिर से सुगंधा की बुर कचोरी की तरह हो गई थी और अपनी खुशी जाहिर करते हुए अंकित अपनी मां के ऊपर चढ़ गया और सुगंधा भी अपनी दोनों टांगें खोलकर अपने बेटे का स्वागत करने लगी अंकित फिर से अपनी मां की बुर में अपने लंड को डालकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था और तीसरी बार चुदाई करने के बाद वह अपनी मां के ऊपर ही ढेर हो गया,,,,, सुबह जब नींद खुली तो वह अपनी मां के ऊपर ही सो रहा था धीरे से वह अपनी मां के ऊपर से हटा दो उसका लंड भी बुरे में से बाहर निकल गया यह देखकर वह मुस्कुराने लगा उसकी मां की भी नींद खुल गई थी और वह मुस्कुराते हुए बोली,,,)



अब जल्दी से नैनीताल चलने की तैयारी करो थोड़े बहुत कपड़े भी खरीदने होंगे,,,,।

मेरे पास तो सब कुछ है तुम बस एक जींस और टॉप खरीद लेना एकदम पटाखा लगोगी,,,।

यह सुनकर सुगंधा मुस्कुराने लगी और धीरे से छत से नीचे चली गई।
 
तृप्ति के आने से पहले सुगंधा अपने बेटे के साथ नैनीताल घूमने जाना चाहती थी वैसे तो वहां घूमने जाने का उसका बहुत पहले से मन था। लेकिन वह कभी जा नहीं पाई थी अब तो उसके पास उसके बेटे के रूप में उसका साथी भी था जिसके साथ वहां पर जाकर वह मजे लूट सकती थी और वहां घूम कर आनंद भी ले सकती थी इस बारे में सुनकर अंकित भी बहुत खुश हुआ था वह भी अपनी बहन के आने से पहले खुलकर अपनी मां के साथ मजा ले लेना चाहता था इसलिए वह भी तैयार हो गया था और अपनी मां को जरूरी कपड़े लेने के लिए भी बोल दिया था।



लेकिन वहां जाने से पहले अंकित को एक जरूरी काम पूरा करना था और वह भी राहुल के साथ मिलकर,,, वह ईस काम को अधूरा नहीं छोड़ना चाहता था,,, सोमवार का दिन था और सुबह जल्दी वह तैयार हो गया था। घर से उसे 10:00 निकलना था,,, जिस तरह से अंकित को सोमवार का बड़ी बेसब्री से इंतजार था उसी तरह से राहुल को भी इस दिन का बड़ी बेसब्री से इंतजार था। घड़ी में 10 बजाते ही वह घर से निकल गया था वह अच्छी तरह से जानता था कि इस समय राहुल के घर पर उसके पापा नहीं होंगे इस बारे में उसने राहुल की मां को कुछ भी नहीं बताया था। अपने घर पर भी बहुत जरूरी काम का बात कर वहां घर से निकल चुका था राहुल के घर जाने के लिए,,, दूसरी तरफ राहुल भी अपने घर से काम का बहाना बनाकर निकल चुका था क्योंकि वह जानता था कि जिस उद्देश्य को पुरा करना था उसके लिए उसे इस समय घर पर होना जरूरी नहीं था वह अपनी मां को अंकित के साथ एकांत देना चाहता था ताकि दोनों अपनी काम लीला में मशगूल हो सके। सब कुछ पहले से ही तय था जैसा अंकित ने बताया था ठीक वैसा ही राहुल कर रहा था इस समय राहुल अंकित के हाथों की कठपुतली बन चुका था उसके पास उसकी बात मानने के सिवा और कोई चारा नहीं था। अपने घर से निकल कर वहां कुछ दूरी पर उसी जगह पर जाकर खड़ा हो गया जहां पर उसे दिन वह अंकित का अपने घर से निकलने का इंतजार कर रहा था।





थोड़ी ही देर में ऑटो पकड़कर अंकित उसके घर पहुंच चुका था राहुल सब कुछ वहीं खड़े खड़े देख रहा था वैसे तो उसका मन नहीं मान रहा था वह अभी इसी समय घर पर पहुंच जाना चाहता था लेकिन वह जानता था कि इस समय उसका घर पर जाना उचित नहीं था अगर खेल का असली मजा लेना है तो कुछ देर बाद ही उसका वहां जाना उचित था इसलिए वह धीरे के साथ वही खड़ा होकर इंतजार करने लगा देखते ही देखते अंकित दरवाजे पर पहुंच कर डोर बेल बजाने लगा,,, चूड़ियों के खनकने की आवाज सुनकर अंकित को एहसास हो गया कि राहुल की मां दरवाजा खोलने के लिए आ रही थी,,, और उसने जल्दी से दरवाजा भी खोल दी उसे लगा कि उसका बेटा वापस आ गया है लेकिन दरवाजे पर अंकित को देखकर एकदम से खुश हो गई अंकित भी राहुल की मां को देखकर एकदम खुश होते हुए बोला।

गुड मॉर्निंग आंटी,,,,।

कितनी बार बोली कि जब अकेले हो तो मुझे नूपुर कहा कर,,।

ओके गुड मॉर्निंग मेरी जान नूपुर,,,,।

(इतना सुनकर नूपुर मुस्कुराने लगी,,,, पीले रंग की साड़ी में उसका गोरा बदन और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था और उसने लो कट ब्लाउज पहनी हुई थी जिसकी वजह से उसकी आधे से ज्यादा चूचियां बाहर दिखाई दे रही थी अंकित की नजर उसकी चूचियों पर ही टिकी हुई थी जिसे देखकर नुपुर बोली,,,)



दूध पीने का इरादा है क्या,,,?

तुम्हारे पास आऊंगा तुम्हारा दूध ना पियूं ऐसा भला कैसे हो सकता है,,, मेरी रानी तुम्हारा दूध पीने के लिए ही तो इतनी दूर से तुम्हारे घर आया हूं,,,।

क्यों आज मम्मी ने चाय नहीं बनाई क्या,,,?

चाय तो बनाई थी लेकिन आज मेरा दूध पीने का मन कर रहा था,,,।

तो अपनी मां का ही पी लिया होता तेरी मां का दूध तो मेरे से भी ज्यादा खूबसूरत और स्वादिष्ट है।

अब यह तो पता नहीं लेकिन मुझे तो तुम्हारा दूध पीने की आदत पड़ गई है,,,।

तो आज़ा मेरे राजा देर किस बात की है,,,।(नूपुर मुस्कुराते हुए बोली,,)

क्यों आज घर पर कोई नहीं है क्या,,,?

तभी तो कह रही हूं,,,,,,, राहुल के पापा ऑफिस गए हैं शाम को 6:00 7:00 बजे ही वापस आएंगे

और राहुल,,,,,!(सब कुछ जानते हुए भी जानबूझकर अंकित बोला)

वह भी अभी-अभी किसी काम से बाहर किया है वह भी दो-चार घंटे से पहले आने वाला नहीं है उसकी आदत ऐसी ही है।





ओहहह तब तो उसकी आदत अच्छी है,,,, लेकिन साला समझ नहीं आता इतनी खूबसूरत घर में औरत है और वह छोड़कर बाहर घूम रहा है।

जैसे तु सुगंधा जैसी खूबसूरत औरत को घर में छोड़कर मेरे पास आया है।

(इतना सुनकर अंकित हंसने लगा और हंसते हुए वह घर में आ गया घर में प्रवेश करते ही वह राहुल की मां को अपनी बाहों में लेकर उसके लाल-लाल होठों का रसपान करने वाला और जानबूझकर अपने पैर से दरवाजा बंद कर दिया लेकिन उसकी कड़ी नहीं लगाया,,, नूपुर को लगा कि अंकित ने दरवाजा बंद कर दिया है वह एकदम से अंकित की बाहों में पिघलने लगी अंकित उसके होठों का रसपान करते हुए,, उसके गोलाकार बड़े-बड़े नितंबों को दोनों हाथ से लेकर दबाना शुरू कर दिया पहले स्पर्श से ही नूपुर के बदन में थरथराहट होने लगी वह मदहोश होने लगी अंकित की बाहों में न जाने कैसी कशिश की वह अंकित की बाहों में आते ही पिघलने लगती थी उसके जवानी का रस धीरे-धीरे उसकी बुर से पिघल रहा था जिसकी वजह से उसकी पैंटी गीली होने लगी थी। अंकित भी पूरे जोश के साथ उसे अपनी बाहों में कसके उसके अंगों से खेल रहा था उसके होठों का रस पी रहा था। अभी कुछ देर पहले ही वह नही हुई थी इसलिए उसके बालों से भीनी-भिनी खुशबू आ रही थी जिससे मदहोशी और ज्यादा बढ़ जा रही थी।



उसकी खूबसूरत बदन से खेलते हुए अंकित उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे एकदम से उठा लिया और डाइनिंग टेबल पर बिठा दिया उसकी ताकत देख कर एक बार फिर से नूपुर एकदम से अचंभित हो गई थी,,, इस तरह से आज तक उसके बेटे ने कभी उसे उठाकर डाइनिंग टेबल पर बिठाया नहीं था शायद इतना उसमें दम ही नहीं था इस बात का एहसास नूपुर को हो रहा था अंकित पूरी तरह से राहुल की मां की जवानी पर छा चुका था वह उसके होठों का रसपान करते हुए उसके ब्लाउज का बटन खोलने शुरू कर दिया था और नूपुर पेंट के ऊपर से ही उसके कड़े लंड को सहला रही थी। अंकित राहुल की मां के ब्लाउज का बटन एक-एक करके खोल रहा था और उसे उसके ब्लाउज का बटन खोलने में बहुत मजा आ रहा था क्योंकि उसकी चूचियां एकदम तनी हुई थी और उसने अपनी चूचियों के आकार से कम ही नाप का ब्लाउज पहनी हुई थी जिससे वह और भी ज्यादा बड़ी लग रही थी,,,, ब्लाउज का आखिरी बटन बंद करते हुए वह मदहोश होता हुआ बोला।)

तुम्हारी चूची बहुत बड़ी है,,,,,।



तेरे लिए ही है।

अंकल को नहीं पिलाती क्या,,,?

अंकल अब पीने लायक नहीं रह गए इसलिए तो तुझे पीला रही हूं,,,।

यह तो और भी अच्छा है माल किसी का मजा कोई और ले रहा है,,,,।

धत् बदमाश,,,, मैं तो तेरी माल हूं,,,,,,।

ओहहहहह मेरी जान,,,(ब्लाउज का आखिरी बटन खोलने के साथ ही ब्लाउज को उसकी बाहों से अलग करते हुए अंकित उसके गर्दन पर चुंबनों की बौछार कर दिया और अगले ही पल उसका ब्लाउज डाइनिंग टेबल के नीचे पड़ा हुआ था लाल रंग की ब्रा उसकी गोल गोल गोरी चुचियों को और भी ज्यादा खूबसूरत बना रही थी,,,, अंकित पूरी तरह से मदहोश हो चुका था दोनों हाथों से उसकी गोलाइयों को पकड़कर हल्के हल्के उसे दबाने के साथ ही एक बार फिर से उसके लाल-लाल होठों को अपने मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया अंकित का मां नूपुर के किसी भी अंक से पूरी तरह से बाहर ही नहीं रहा था वह मदहोश हो रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि एक ही समय में वह क्या-क्या कर डाले राहुल की मां के साथ उसकी आंखों में वासना का तूफान नजर आ रहा था,,,, और अगले ही पल वह ब्रा को नीचे से पड़कर एकदम से उसे ऊपर की तरफ खींचकर चूचियों से ऊपर कर दिया और उसकी खरबूजे जैसी चूचियां एकदम से तन गई उसकी ईस हरकत से नूपुर को थोड़ा दर्द का एहसास हुआ लेकिन जैसे ही अंकित ने उसकी चूची पर अपना मुंह रखकर पीना शुरू किया वह एकदम से मस्त हो गई। अंकित दोनों हाथों से उसकी चूचियां दबाता हुआ दोनों चूचियों को बारी-बारी से मुंह में लेकर पी रहा था और नूपुर मदहोशी भारी निगाहों से अंकित को देखकर गहरी गहरी सांस ले रही थी उसे अपनी उत्तेजना संभाली नहीं जा रही थी,,,, अंकित अपनी हरकतों से उसे मदहोश कर दिया था वह तड़प रही थी मचल रहे थे और अंकित था कि उसकी दोनों चूचियों को गेंद की तरह दबा दबा कर उसका रस चूस रहा था,,,,,,।



अपनी उत्तेजना को काबू में करने के लिए राहुल की मां अपना हाथ पेंट के ऊपर से ही उसके लंड पर रखकर उसे जोर-जोर से दबा रही थी,,, जिससे अंकित का भी जोश बढ़ता चला जा रहा था और वह अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ लाकर उसके ब्रा का होकर एकदम से खोल दिया और उसकी ब्रा को भी निकाल कर डाइनिंग टेबल के नीचे फेंक दिया उसका ब्लाउज और ब्रा फर्श पर पड़े हुए थे उसकी साड़ी का पल्लू डाइनिंग टेबल से नीचे लहरा रहा था और अंकित एकदम से उसे अपनी बाहों में भरकर उसकी गर्दन पर चुंबन करते हुए उसकी नंगी चूचियों को अपनी छाती पर महसूस करके मस्त हो रहा था। औरत को खुश करने की कला अंकित अच्छी तरह से जानता था और इसका एहसास राहुल की मां को भी हो गया था इसलिए तो राहुल की मां उसकी हाथों की कठपुतली बनी हुई थी क्योंकि वह जानती थी कि अंकित जो कुछ भी करेगा उसमें उसका ही भला है। अंकित जोश में अपनी भुजाओं का बल दिखाते हुए उसे करके अपनी छाती से चांप ले रहा था जिससे उसकी हड्डियां भी कडकड़ा जा रही थी। उसकी हरकत और उसका दम देखकर बार-बार राहुल की मां के मुंह से करने की आवाज निकल जा रही थी और वह बोल भी रही थी।

बाप रे एकदम सांड जैसा दम है तेरे में,,,,,, मेरी हड्डियां मत तोड़ देना,,,,।

तुम्हारी हड्डियां नहीं टूटेगी बल्कि तुम्हारी बुर जरूर चौड़ी हो जाएगी आज आज मैं तुम्हारी बुर का भोसड़ा बना दूंगा,,,,।



तो बनते मेरे राजा तुझे रोका किसने है मैं तो चाहती हूं कि तू मेरी बुर को अपने लंड से फाड़ डालें भोसड़ा बना दे मेरी बुर का इसकी अकड़ को ढीली कर दे,,,,सहहहहहह ।

ऐसा ही होगा मेरी रानी आज सरसों का तेल से मालिश करके आया हूं अपने लंड की आज तेरी बुर में जाकर तेरी नशे ढीली कर देगा,,,,(ऐसा कहते हुए वह अपना शर्ट निकालकर जमीन पर फेंक दिया और अपने पेंट का बटन खोलने लगा,,, नूपुर प्यासी नजरों से अंकित की हरकत को देख रही थी बहुत जल्द से जल्द अंकित के लंड का दर्शन कर लेना चाहती थी,,,, देखते ही देखते अंकित भी जल्दबाजी दिखाता हुआ अपना पेट भी उतार कर फर्श पर फेंक दिया और पूरी तरह से राहुल की मां की आंखों के सामने नंगा हो गया,,,, उसका कसरती बदन जितना आकर्षक था उसे भी कहीं ज्यादा कर सकता उसका मोटा तगड़ा लंबा लैंड जो उसकी टांगों के बीच झूल रहा था,,,, जिसे देखकर नूपुर की बुर पानी पानी हो रही थी। नूपुर से ज्यादा उसकी बुर ललाईत थी अंकित के लंड को अपने अंदर लेनेके लिए,,,, अंकित राहुल की मां के मन की मनसा को अच्छी तरह से समझ रहा था इसलिए वह अपने लंड को पकड़ कर हिला रहा था और इसे देखकर नूपुर की हालत और ज्यादा खराब हो रही थी अंकित डाइनिंग टेबल के करीब अपनी दोनों टांगों को खोलकर अपनी कमर को आगे की तरफ कर दिया था जो की राहुल की मां के लिए एक ही सहारा था और इसी सारे को राहुल की मां अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए डाइनिंग टेबल पर बैठे-बैठे ही वह पूरी तरह से झुक गई और अपने लाल-लाल होठों को खोलकर अंकित के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,,।



बड़ा ही गजब का नजारा था एकदम मदहोशी भरा, वासना से लिप्त,,,,, ऐसा लग रहा है ताकि जैसे कोई गंदी फिल्म चल रही हो लेकिन इस समय यह नजारा देखने वाला तीसरा कोई नहीं था कुछ देर बाद राहुल इस खेल में शामिल होने वाला था लेकिन अभी भी कुछ समय बाकी था। बाहर खड़ा-खड़ा राहुल अपने मन में बहुत सारी बातें सोच रहा था वह भी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था अपने पेट में बने तंबू को छुपाने के लिए वह एक जगह बड़े पत्थर पर बैठ गया था क्योंकि वह अपने मन में ही अपनी मां को लेकर अंकित के साथ कल्पना कर रहा था कि वह इस समय उसकी मां के साथ क्या कर रहा होगा और उसकी मां कितनी बेशर्मी से एक रंडी की तरह उसके साथ मजा ले रही होगी,,, यह सब सो कर उसे रहा नहीं जा रहा था वह भी जल्द से जल्द उन दोनों के बीच शामिल हो जाना चाहता था लेकिन वह जानता था कि जो समय निश्चित किया गया था उसी समय पर उसे जाना था। इसलिए वह भी अपने लंड को पकड़ कर अपने मन को दिलासा दे रहा था,,,,।



कमरे के अंदर डाइनिंग टेबल पर तो घमासान बचा हुआ था अंकित अपनी कमर को जोर-जोर से हिला रहा था इस समय वह राहुल की मां के मुंह को ही छोड़ रहा था उसके लाल-लाल होठों का कसाव अपने लैंड पर महसूस करके वह ऐसा ही सोच रहा था कि जैसे उसका लंड उसकी गुलाबी बुर में जा रहा हो,,,, राहुल की मां भी पूरी तरह से मत हो चुकी थी वह भी एक रंडी की तरह उसके दोनों नितंबों को पकड़कर उसके लंड की चुसाई कर रही थी,,,, अंकित का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था जिससे उसका मुंह भरा हुआ था लेकिन फिर भी वह पूरा का पूरा उसे अपने गले में निगल लेना चाहती थी,,,, अंकित इतना ज्यादा बावला हो चुका था कि वह रुकने का नाम नहीं ले रहा था और नूपुर भी उसका बराबर का साथ दे रही थी इस वजह से अंकित एकदम झड़ने के कगार पर आ चुका था वह अपने लंड को नूपुर के मुंह में से बाहर निकाल लेना चाहता था क्योंकि किसी भी वक्त उसके लंड से पिचकारी निकलने वाली थी और वह राहुल की मां से बोला,,,,।



ओ मेरी जान मेरा निकलने वाला है,,,,, मुझे निकाल लेने दो अपने लंड को,,,,(ऐसा कहकर अंकित अपनी कमर को पीछे लेने की कोशिश किया लेकिन राहुल की मां उसके नितंबों पर अपने हथेलियों का कसाव बढ़ाकर उसे रोके रह गई,,, अंकित समझ गया कि राहुल की मां क्या चाहती है और इसलिए अपनी थकान को और ज्यादा तेज कर दिया और अगले ही पल उसके लंड से पिचकारी निकलना शुरू हो गया जो की नूपुर के गले में सीधा बौछार मार रहा था और वह उसे अपने गले के नीचे उतार रही थी चूस रही थी पी रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था ऐसा उसने आज तक अपने बेटे के साथ नहीं की थी लेकिन अंकित के साथ वह ऐसा करने पर मजबूर हो चुकी थी और वह तब तक अंकित के लंड को अपने मुंह में से नहीं निकाली जब तक कि वह उसके लंड की मलाई को पूरा चूस नहीं ले गई,,,, अंकित के साथ भी ऐसा पहली बार हो रहा था उसके जीवन में ऐसा मौका बहुत बार आया था लेकिन कभी भी उसे नहीं मुंह के अंदर अपनी पिचकारी नहीं निकाला था लेकिन आज वह भी नूपुर की हरकतों के आगे मजबूर हो चुका था और एक नए सुख और एक नए अनुभव के साथ वह झड़ने लगा था,,,,, झड़ जाने के बाद भी अंकित का लंड अभी भी खड़ा ही था जिसे वह बाहर निकाल कर धीरे-धीरे दिला रहा था और उसे पर लगे थुक और लार को फर्श पर गिरा रहा था,,,, मदहोशी में गहरी सांस लेता हुआ वह बोला।)



बाप रे तुमने तो मेरी जान ही निकाल दी थी बहुत मजा आया,,,उफफफ,,,,,

(नूपुर की साड़ी के पल्लू से अपना मुंह साफ करते हुए वासना भरी नजरों से अंकित की तरफ देख रही थी और बोली)

बहुत गरम-गरम था रे,,,,,, बहुत गाढी मलाई है तेरी,,,,।

तो क्या पहली बार में ही तुम मां बन जाओगी,,,,।

चल रहने दे मुझे नहीं बनना मां,,,,(इतना कहने के साथ ही वह डाइनिंग टेबल से नीचे उतर गई,,, और साड़ी के पल्लू को हाथ में लिए हुए ही वह बाथरूम की तरफ जाने लगी तो अंकित बोला,,,)

कहां जा रही हो,,,?

पेशाब करने जा रही हूं कर लो नहीं तो तू अपना लंड डालेगा तो अपने आप पेशाब छुट जाएगी,,,,,,(इतना सुनकर अंकित मुस्कुराने लगा और वह बोला)

चलो मैं भी चलता हूं मुझे भी पेशाब लगी है,,,,(इतना कहने के साथ ही वह भी नूपुर के पीछे-पीछे बाथरुम में आ गया नूपुर का बाथरूम काफी बड़ा था इसलिए दो लोगों की उपस्थिति से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था नूपुर अपनी साड़ी कमर तक उठा ली थी और अपनी लाल रंग की पेटी को एक हाथ से नीचे की तरफ सरका रही थी यह देखकर अंकित आगे पड़ा और खुदाई उसकी पेंटिं को पकड़कर उतारने लगा,,, और अगले ही पल वह घुटनों के बल बैठकर उसकी पेंटि को उतार कर बाथरूम मे हीं छोड़ दिया,,,,, उसकी आंखों के सामने नूपुर की कचोरी जैसी फुली हुई बुर थी एकदम चिकनी उसमें से मादक खुशबू आ रही थी,,,, उसकी कचोरी जैसी फूली हुई बुर और उसमें से आ रही मादक खुशबू की वजह से अंकित अपने आप पर काबू नहीं कर पाया और अगले ही पर अपने प्यास होठों को उसकी बुर पर रख दिया और उसे चाटना शुरू कर दिया यह देखकर नुपुर एकदम से मदहोश हो गई और बोली,,,)



अरे रुक तो जा मुझे पेशाब तो कर लेने दे,,,,।

(लेकिन अब अंकित रुकने को तैयार ही नहीं था वह तो पागलों की तरह उसकी बुर को चाटना शुरू कर दिया था,,,,, उसकी हरकत से नूपुर भी एकदम मदहोश हो गई मस्त हो गई और खुद ही अपनी टांग उठा कर उसके कंधे पर रख ले और उसके सर पर अपने दोनों हाथ रखकर उसे और ज्यादा अपनी बुर से सटाने लगी वह अपने पेशाब को रोक दी थी लेकिन रहाणे कर उसकी बुर से पेशाब की बूंदे बाहर निकल जा रही थी जिसे अंकित मस्त होकर चाट रहा था उसे मजा आ रहा था और बाथरूम में नूपुर की सिसकारी गूंज रही थी,,,, अंकित का लंड फिर से खड़ा हो गया था,,,, वैसे एक बार झड़ने के बाद भी उसमें कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ा था लेकिन इस समय जिस तरह से वह राहुल की मां की बुर की चटाई कर रहा था उसके बदन में उत्तेजना का तूफान उठ रहा था जिसके चलते उसका लंड अपनी औकात से बाहर आ गया था वह जल्द से जल्द राहुल की मां की बुर में घुस जाना चाहता था जिसे अंकित खुद अपने हाथ से मुठीया रहा था और उसकी बुर चाट रहा था। राहुल की मां मदहोश हो चुकी थी उसकी बुर में भी चीटियां रंग रही थी वह राहुल के लंड को अपनी बुर में महसूस करना चाहती थी उसकी गहराई में ले लेना चाहती थी,,,,, कुछ देर इसी तरह से उसकी बुर चाटने के बाद अंकित गहरी सांस लेता हुआ उठकर खड़ा हो गया और अपने लंड को उसकी बुर के आगे रखकर हिलाने लगा और बोला,,,)

अब मुतो ईस पे,,,,।





(इतना सुनकर नूपुर एकदम से शर्मसार हो गई शर्म से पानी पानी हो गई भले ही उसके हरकतें एकदम रंडी वाली थी लेकिन इस तरह से उसने कभी हरकत नहीं की थी अंकित ने उसे अपने लंड पर पेशाब करने के लिए बोली थी यह मदहोशी की चरम सीमा थी,,,, जिसे सुनकर नूपुर का दिमाग काम करना बंद कर दिया था वह आश्चर्य से अंकित की तरफ देख रही थी अंकित समझ गया था कि नूपुर के मन में क्या चल रहा है इसलिए वह एकदम से अपने लंड को पकड़ कर उसके सुपाड़े को उसके गुलाबी छेद से रगड़ते हुए बोला,,,)

मुतो मेरी रानी,,,,,सहहहहह बहुत गर्म बर है तुम्हारी बौछार मारो अपनी पेशाब कैसे पर तैयार कर दो इसे अपनी बुर में लेने के लिए,,,,,,आहहहहह आज तुम्हारी बुर का भोसड़ा बना दूंगा,,,,,, बहुत घमंड है ना तुम्हें अपनी बुर पर आज इसका घमंड चूर-चूर कर दूंगा,,,,, ताकि किसी और के पास जाओ तो उसे फटी बुर मिले,,,,,।

(अंकित की मदहोशी भरी गंदी बातें सुनकर नूपुर से भी रहा नहीं किया और उसकी बुर से अगले ही पर पेशाब की धार निकलने लगी जो सीधा अंकित के लंड के सुपाड़े पर पड़ रही थी और उसके लंड को भिगो रही थी,,,,, अंकित एकदम से मत हो गया अपनी आंखों को बंद करके वह अपने लंड को पकड़े हुए ही बोला,,,)

आहहहहहा गजब,,,,ऊममममम एकदम गरम पैसाब है तुम्हारी,,,,ऊममममम मेरी रानी एकदम धार मारो इस पर,,आहहहहहह ,,,,,,,।

(अंकित की मदहोशी देखकर नूपुर दोनों हाथों से अपनी साड़ी पकड़ कर अपनी कमर को आगे की तरफ करके पेशाब की धार और जोर से मार रही थी और अपनी बुर के गुलाबी छेद को उसके लंड के सुपाड़े से रगड़ भी रही थी जिससे अंकित की उत्तेजना एकदम से बढ़ गई थी और जैसे ही नूपुर के पेशाब की धार कमजोर पड़ी वह एकदम से अपने लंड के सुपाड़े को उसकी बुर के छेद में डाल दिया और दोनों हाथों से उसकी बड़ी-बड़ी गांड पकड़कर अपने तरफ खींच लिया,,,, जिससे एकदम से रगड़ खाता हुआ उसका लंड उसकी बुर में समा गया,, नूपुर एकदम से आश्चर्यचकित हो गई क्योंकि उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि इस समय अंकित उसकी बुर में लंड डाल दूंगा लेकिन यह सब एकाएक हुआ था और आलम यह था कि अंकित का पूरा लंड उसकी बुर की गहराई में घुस चुका था और अंकित उसे अपनी बाहों में लेकर खड़े-खड़े अपनी कमर हिला रहा था,,,,, अंकित की हरकत से नूपुर पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी मस्त हो चुकी थी। वह बाथरूम में चुदाई का मजा लूट रही थी और अंकित पूरा जोश में आकर उसे चोदता हुआ बाथरुम की दीवार से सटा दिया था उसके धक्के एकदम तेज हो चुके थे और वह जोश में उसकी दोनों टांगें उठाकर अपनी कमर पर लपेट लिया था वह राहुल की मां को अपनी गोद में ले लिया था,,,,, नूपुर हैरान थी अचंभित थी वह बार-बार अंकित की भुजाओं का बल देख रही थी वाकई में अंकित में बहुत दम था वह अपने मन में ही ऐसा बोल रही थी अंकित उसे दीवाल से सटाकर उसकी गोद में उठाकर उसकी बुर का भोसड़ा बनाने में लगा था,,,,, एक बार झड़ने के बावजूद अंकित का हौसला बुलंद था वह धक्के पर धक्के लगा रहा था और हर धक्के के साथ नूपुर की बुर की अंदरूनी दीवारें भलभलाकर पानी छोड़ रही थी,,,, और फिर देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ने लगे बाथरूम में नूपुर की चुदाई का कोई इरादा नहीं था लेकिन मदहोशी इस कदर बढ़ की चुकी थी कि अंकित अपने आप को रोक नहीं पाया था और बाथरूम में ही वहां राहुल की मां की जमकर चुदाई कर दिया था।



अपनी गोद में से उतर कर वह नूपुर की साड़ी को भी खोल दिया और उसकी पेटिकोट का नारा खींचकर उसकी साड़ी को भी बाथरुम में गिरा दिया और नंगी ही उसका हाथ पकड़ कर उसे बाथरूम से बाहर ले आया अंकित जानता था कि नूपुर का कमरा कौन सा है,,,, ऐसा लग रहा था कि आज वह नूपुर को बिल्कुल भी आराम करने नहीं देगा वह नूपुर को बाथरूम से बाहर आते ही गोद में उठा लिया था। और गोद में उठाए हुए ही वह उसे कमरे की तरफ ले जा रहा था कमरे का दरवाजा पहले से ही खुला हुआ था वहां कमरे में पहुंचते ही नरम गद्दे पर राहुल की मां को पटक दिया,,,,, राहुल की मां एकदम से मस्त हो चुकी थी क्योंकि अंकित ने इसकी जबरदस्त चुदाई किया था,,,,, अपने लंड को हिलता हुआ वह बिस्तर की तरफ आगे बढ़ने लगा लेकिन एक नजर घूमर वह खिड़की की तरफ देखने लगा कि कहीं खिड़की बंद तो नहीं है लेकिन खिड़की उसे दिन की तरह ही खुली भी थी और दरवाजा की कड़ी भी नहीं लगी थी क्योंकि इस समय दरवाजा बंद करना जरूरी नहीं था क्योंकि नूपुर को ऐसा ही लग रहा था कि घर का मुख्य दरवाजा बंद है ‌। लंड को हिलाता हुआ वह घुटनों के बाल बिस्तर पर चढ़ने लगा और बोला,,)

कैसा लगा मेरी जान,,,,,

बाप रे तूने तो मेरी हड्डियां चूर-चूर कर दिया,, क्या खाता है रे जो तेरे में इतना दम है।



खाता नहीं हूं पीता हूं और वह भी तुम्हारा दूध इसलिए मेरे में इतना दम है,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित दोनों हाथों से राहुल की मां की टांगे पकड़ कर खोल दिया और फिर उसकी बुर पर अपना मुंह लगाकर चाटना शुरू कर दिया जो कुछ देर पहले उसकी बुर की मलाई और उसके लंड की मलाई से सना हुआ था,,,, बाहर खड़ा राहुल भी अब समय हो चुका था यह सोचकर अपने घर की तरफ आगे बढ़ने लगा पेट में अभी भी उसके तंबू बना हुआ था अपनी मां के बारे में सोच सोच कर देखते ही देखते वह अपने घर के दरवाजे पर पहुंच गया और धीरे से उसे खोला तो आराम से दरवाजा खुल गया वह समझ गया कि यह सब अंकित का ही करा धरा है वह मुस्कुराने लगा,,,, धीरे से दरवाजा बंद करके वह आगे बढ़ा तो देखा डाइनिंग टेबल के नीचे उसकी मां की ब्रा और ब्लाउज पड़ा हुआ था और पास में ही अंकित के कपड़े भी पड़े हुए थे इतना तो वह समझ गया था कि इस समय उसकी मां और अंकित दोनों नंगे ही है और दोनों की काम लीला शुरू हो चुकी है और फिर बाथरूम की तरफ देखा तो बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ था,,,, अंदर झांक कर देखा तो उसकी मां की साड़ी पेटीकोट और चड्डी तीनों पड़ी थी वह समझ गया कि अंकित कितना बड़ा हरामी है क्योंकि जाते समय वह देखा था उसकी मां पीले रंग की साड़ी पहनी हुई थी और इस समय साड़ी बाथरूम में पड़ी थी जिसका मतलब साफ था कि दोनों खुलकर मजा लूट रहे थे,,,,।



राहुल के पेंट में बना हुआ तंबू उसे परेशान करने लगा था,,,,, राहुल इधर-उधर देख रहा था लेकिन कहीं भी वह दोनों दिखाई नहीं दे रहे थे वह समझ गया था कि इस समय वह दोनों कमरे में ही है उसका दिन चोरों से धड़क रहा था वह धीरे-धीरे कमरे की तरफ आगे बढ़ रहा था और देखते ही देखते हैं वह अपनी मां के कमरे के पास पहुंच चुका था हल्की सी खुली खिड़की में से अंदर झांक कर देखा तो हैरान रह गया उसका सोचना बिल्कुल सही था,,, इस समय उसकी मां और अंकित दोनों पूरी तरह से नंगे थे उसकी मां अपनी टांगें खोलकर अंकित से अपनी बर चटवा रही थी और यही सही समय था कमरे के अंदर दाखिल होने का और वह एकदम से दरवाजा खोलकर कमरे में दाखिल हो गया एकदम से दरवाजा खुलने की आवाज से अंकित और राहुल की मन एकदम से दरवाजे की तरफ देखने लगे तो राहुल को दरवाजे पर खड़ा देखकर नूपुर एकदम से हैरान हो गई उसकी आंखें फटी की फटी रह गई और अंकित हैरान होने का नाटक करने लगा वह एकदम से नूपुर की टांगों के बीच से हटके और बिस्तर पर बैठ गया उसके चेहरे पर एकदम डर के भाव आ गए थे ऐसा हुआ जानबूझकर कर रहा था और नूपुर भी एकदम से घबराकर बिस्तर पर पड़ी चादर को उठाकर अपने नंगे बदन को छुपाने की कोशिश कर रही थी।
 
सब कुछ नाटक के तहत चल रहा था राहुल और अंकित सब कुछ जानते थे नूपुर बिल्कुल अनजान थी वह तो एकदम से घबरा गई थी क्योंकि उसे उम्मीद नहीं थी कि इस समय राहुल घर पर आ जाएगा। और वह कभी सोची नहीं थी कि उसका बेटा उसे इस हालत में किसी अजनबी के साथ दिखेगा अजनबी क्या उसके ही दोस्त के साथ दिखेगा यह देखकर उसके दिल पर क्या गुजर रही होगी यह सोचकर नूपुर एकदम से घबरा गई थी उसे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें,,, राहुल को यह सब देखकर गुस्सा होने का नाटक करना था वह अपनी मां के चेहरे पर डर के भाव को अच्छी तरह से देख रहा था और उसे यह सब देखकर मजा भी आ रहा था लेकिन मन में यही सोच रहा था कि यह उसकी वही मन है जिसने उसे वादा की थी किस तरह की हरकत में किसी और के साथ कभी सपने में भी करने की नहीं सोच सकती लेकिन आज उसकी आंखों के सामने सब कुछ साफ वह अपने वादे से मुकर गई थी अपनी जवानी की प्यास बुझाने के लिए उसके ही दोस्त का सहारा ले रही थी शायद इसलिए कि उसका लंड कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा था जिसे राहुल अपनी आंखों से देख चुका था और उसे भी इस बात का एहसास था कि उसकी मां को उससे भी ज्यादा सुख वह दे रहा था फिर भी नाटक करते हुए राहुल जोर से चिल्लाया।

यह सब क्या हो रहा है,,,,?

(इतना के करवा कभी अपनी मां की तरफ देखा है तो कभी अंकित की तरफ दोनों शर्मसार होकर अपनी नजरों को नीचे झुकाए हुए थे किसी को कुछ भी कहने की हिम्मत नहीं हो रही थी और वैसे भी अंकित को ऐसा ही जताना था कि जैसे वह पकड़ा गया हो और पकड़े जाने पर ऐसी हालत में एक मर्द की क्या दशा होती है बस वही उसे यहां पर दर्शाना था,,,,, नूपुर के तो चेहरे का रंग ही उड़ गया था वह चादर में अपना मुंह छुपा ली थी। यह सब देख कर राहुल फिर से जोर से बोला,,,,)

यह क्या हो रहा है मम्मी मेरी पीठ पीछे तुम यह सब करती हो मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है,,, मुझे तो ऐसा लग रहा है कि जैसे मैं कोई सपना देख रहा हूं क्योंकि हकीकत की तो मुझे उम्मीद ही नहीं थी कि तुम इस तरह से गिर जाओगी,,,,,। और टू अंकित तू तो मेरा सबसे अच्छा दोस्त था ना तूने दोस्त की पीठ पीछे ही यह कांड कर डाला मैं तो तुझे अपना भाई जैसा समझता था मैं कभी सोच भी नहीं सकता था कि तू इस तरह की हरकत करेगा मेरे ही घर में घुसकर अपने ही दोस्त की मां के साथ इस तरह का व्यवहार करेगा। और मम्मी तुम यह तुमने क्या कर डाला,,,, अगर यह सब पापा को पता चलेगा तो क्या होगा कुछ सोची हो अगर यह सब बातें बाहर पहुंच गई तो समझ में क्या इज्जत रह जाएगी इस बारे में कभी सोची हो।

नहीं ऐसा कभी नहीं होगा यह सब बातें बाहर नहीं जाएंगे मुझ पर भरोसा कर राहुल,,,।

हरामजादे तू तो चुप ही रहे,,,,, तुझे शर्म नहीं आई अपनी मां जैसी औरत के साथ इस तरह का व्यवहार करते हुए,,,,, अरे यही सब करना था तो अपनी मां के साथ कर लिया होता,, वह तो अकेली थी ना उनको तो यह सबकी ज्यादा जरूरत थी,,,,,।

यह क्या कह रहा है राहुल को तू बात को समझने की कोशिश कर इस तरह से चिल्ला मत कोई सुन लेगा तो गजब होजाएगा,,,।

गजब क्या हो जाएगा गजब तो हो गया है,,,,। मैं जिसे सीधी-सादी औरत समझता था वह खुलकर यहां मजा ले रही है मेरे घर से बाहर जाती ही वैसा हो रहा है इसका मतलब यह सब पहले भी हो चुका था है ना मम्मी,,,,,,।

(इतना सुनकर नूपुर अपना मुंह चादर में छुपा कर रोने लगी उसके सिसकने की आवाज कमरे में गूंज रही थी,,,,, वह इस बात से रो रही थी कि वह कभी सोची नहीं थी कि वह अपने बेटे को छोड़कर किसी दूसरे मर्द के साथ अपनी जवानी की प्यास बुझाएगी,,,, वह इस बात से रो रही थी कि उसके बेटे को सब कुछ पता चल गया था कि उसकी मां अपनी प्यास बुझाने के लिए किसी भी मर्द का सहारा ले सकती है। जबकि राहुल नाटक कर रहा था और इस बात का उसे बिल्कुल भी पता नहीं था क्योंकि वह नहीं जानती थी कि अंकित अपनी आंखों से दोनों की काम लीला को देख चुका है,,, अगर इस बात का उसे पता होता तो यह सब की नौबत ही नहीं आती। नूपुर रोए जा रही थी यह देखकर अंकित राहुल को समझाने की कोशिश करता हुआ बोला,,,)

इसमें आंटी की कोई गलती नहीं है राहुल तो समझने की कोशिश कर।

हां इसमें तुम दोनों की कोई गलती नहीं है इसमें तो सारी गलती मेरी ही है यही कहना चाहता है ना तो तुम दोनों मेरे पीठ पीछे रंगरलिया मना रहे हो,,, और सारी गलती मेरी है हां मेरी ही गलती है कि मैं तुम दोनों को यह सब करने का मौका दे दिया मुझे घर से बाहर जाना ही नहीं चाहिए था तुझे मैं अपने घर पर ले आया यही मेरी सबसे बड़ी गलती थी तुझे घर पर लाना ही नहीं चाहिए था तुझे मैं घर पर लाया अपनी मां से मिलाया यही मुझसे गलती हो गई और यही मेरी गलती भी है,,,,।

सब गलती तेरी ही है राहुल,,,, (अंकित इस तरह से बिस्तर पर से उठकर खड़ा हो गया एकदम नंगा वह अपने बदन को छुपाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रहा था उसका लंड अभी भी अकड़ में था जिस पर बार-बार राहुल की नजर चली जा रही थी और वह अंकित के लड को देखकर मन ही मन जल भी रहा था,,, अंकित की बात सुनकर राहुल बोला)

मेरी गलती पागल हो गया है क्या तू,,,?

हां तेरी ही गलती दिमाग को शांत कर ले तब मैं तुझे बताता हूं कि तेरी गलती कहां पर है,,,,

यह सब तु क्या बकवास कर रहा है,,,,।

मैं बकवास नहीं कर रहा हूं राहुल बिल्कुल सच कह रहा हूं,,,, (ऐसा कहते हुए अनूपपुर की तरफ देख ले रहा था नूपुर जो अभी भी चादर से अपना मुंह ढके हुए थी और रो रही थी,,,,, वह धीरे से राहुल को आंख मारता हुआ बोला,,,)

तो पूरी तरह से जवान हो चुका है हो चुका है कि नहीं सच-सच बताना,,,,।

हां हो चुका हूं तो,,,,,।

मेरी पूरी बात तो सुन अब तुझे इतना तो समझ में आता ही होगा कि मर्द और औरत के बीच किस तरह का रिश्ता होता है,,,,।

चलिए अभी मैं जानता हूं लेकिन इस तरह की बात करके क्या फायदा,,,।

अरे बेवकूफ यही तो मैं बताना चाहता हूं,,,, तेरी मम्मी कितनी खूबसूरत है इस बात से तू अनजान नहीं है और तू यह भी जानता होगा कि,,, तेरी मां को देखकर ना जाने कितने लड़कों का लंड खड़ा हो जाता होगा,,,,।

(अंकित जानबूझकर यह सब बातें कर रहा था और नूपुर चादर में मुंह छुपाए अंकित की बात को सुनकर हैरान थी कि यह क्या बकवास कर रहा है राहुल के साथ और उसकी बात सुनकर राहुल भी बोला)

यह क्या बकवास है अंकित तू इस तरह से कैसे मुझसे बात कर सकता है,,,।

मैं तुझे बताता हूं मैं सिर्फ तुमसे पूछ रहा हूं यह एकदम सहज है सच-सच बताना ऐसा होता है कि नहीं।

हां होता ही होगा मुझे क्या मालूम,,,।

और मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि अपनी मां को देख कर तेरा भी लंड खड़ा हो जाता होगा कभी कबार हां या ना में जवाब देना ज्यादा कुछ मत बोलना,,,।

हां,,,,,, (राहुल अपनी मां की तरफ देखा हुआ बोला जो की चादर में मुंह छुपाए हुए अभी भी बैठी हुई थी और रो रही थी,,, राहुल का जवाब सुनकर अंकित उसे आंख मारते हुए बोला)

बस यही तो मैं कहना चाहता था तेरी मां अभी भी पूरी तरह से जवान है और तू अपने पापा को देख क्या तुझे लगता है कि तेरे पापा तेरी मम्मी की प्यास को बुझा सकते होंगे उनकी जरूरत को पूरी कर सकते होंगे,,,।

(इतना सुनकर एकदम से बोल पड़ी)

यह तु क्या कह रहा है अंकित,,,!

तुम चुप रहो आंटी तुम कुछ मत बोलो मैं सबको समझा देता हूं तुम्हें कुछ बोलने की जरूरत नहीं है।

लेकिन अंकित यह तो क्या बकवास कर रहा है,,,, मैं भला यह सब कैसे बोल सकता हूं।

तुझे बोलना पड़ेगा राहुल क्योंकि तू अब बड़ा हो चुका है जवान हो चुका है बिल्कुल मेरी तरह एक औरत के मन को तू समझता होगा अगर नहीं समझता होगा तो तो सबसे बड़ा बेवकूफ है,,,, इस उम्र में औरतों की ख्वाहिश कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है और मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि आंटी अंकल से बिल्कुल भी खुश नहीं रहती और अंकल कभी कोशिश भी नहीं करते होंगे कि आंटी को खुश कर सके आखिरकार उम्र का तकाजा ही ऐसा है क्यों आंटी जी अंकल के साथ कभी हम बिस्तर होती हो,,(यह सुनकर नूपुर को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या बोल कभी अपने बेटे की तरफ तो कभी अंकित की तरफ देख रही थी यह देखकर अंकित बोला) घबराओ मत आंटी बस सच बताओ हां या ना में जवाब दो,,,।

नहीं,,,(कितना का कर हुआ फिर से अपनी नजर को नीचे झुका ली यह देखकर राहुल अंकित की तरफ देखने लगा पर अंकित मुस्कुराता हुआ बोला,,,)

देख लिया सुन लिया अपनी मम्मी का जवाब अरे पागल इस उम्र में औरत को मर्द की ज्यादा जरूरत होती है और इस उम्र में तेरे पिताजी तेरी मम्मी के साथ कुछ नहीं कर सकते हैं ऐसे में औरत भला क्या करेगी,,,,।

तेरे कहने का मतलब है कि अगर आदमी खुश ना कर सके तो औरत किसी को भी घर मत बुलाकर मजा ले सकती है,,, (यह बात राहुल गुस्से में बोल रहा था और उसकी बात सुनकर अंकित बोला)

अरे बेवकूफ तू जरा सा ध्यान दिया होता तो ऐसी नौबत ही ना आती,,,,।

क्या मतलब,,,,?

मेरा मतलब साफ है अब तुझे बुरा लगेगा अच्छा यह मैं नहीं कह सकता लेकिन बात एकदम खरी है,,,।

क्या,,,?

अगर तू अपनी मां का ध्यान दिया होता उसकी जरूरत को पूरा करता है तो शायद मेरी जगह इस समय तू बिस्तर पर होता,,,,।

(इतना सुनकर राहुल एकदम हैरान होने का नाटक करने लगा और यही हाल नूपुर का भी था दोनों मां बेटे एक दूसरे को देख रहे थे दोनों नाटक कर रहे थे राहुल अपनी तरफ से नाटक कर रहा था और नूपुर अपनी तरफ से नाटक कर रही थी इस बात को अंकित अच्छी तरह से जानता था एक दूसरे को देखने के बाद नूपुर बोली)

यह तु क्या कह रहा है अंकित,,,? (यही बात राहुल ने भी बोला)

तू पागल हो गया क्या भला एक बेटा अपनी मां के साथ,,,,,

क्यों नहीं इस उम्र में हम लड़कों को क्या चाहिए,,,, बुर,,,,,, और इस समय तेरे घर में तेरी जरूरत कौन पूरा कर सकता है,,,,,, तेरी मां,,,,,, तुझे बुर चाहिए और तेरी मां को लंड चाहिए दोनों एक दूसरे की जरूरत पूरी कर सकते हैं,,,,।

(मां बेटे दोनों एक दूसरे को देखकर हैरान थे दोनों एक दूसरे को आश्चर्य से देख रहे थे तभी राहुल बोला)

तू सच में पागल हो गया है क्या तू भी अपने घर में ऐसा ही करता है क्या,,,?

देख राहुल अगर सच में तेरी मां की तरह प्यासी अगर मेरी मां होती तो मैं भी यही करता लेकिन मेरी किस्मत खराब है कि मेरी मां इस तरह की हरकत नहीं करती।(अंकित की बात सुनकर राहुल जानबूझकर नाटक करते हुए बोला)

नहीं नहीं मुझसे ऐसा नहीं होगा,,,,।

चल रहने दे अपने आप को झूठा दिलासा मत दे मैं जानता हूं कि इस समय अपनी मां को नंगी देखकर तेरा भी मन उसे चोदने को कर रहा है,,,,।

नहीं यह झूठ है,,,, मैं भला ऐसा कैसे सोच सकता हूं,,,।

(राहुल की बात सुनकर अंकित मुस्कुरा था उसकी तरफ आगे बढ़ा नूपुर दोनों को देख रही थी और तभी अंकित अपना हाथ आगे बढ़कर पेट के ऊपर से ही राहुल के लंड को पकड़ लिया जो कि इस समय खड़ा था और पेट में तंबू बनाया हुआ था अंकित की हरकत पर राहुल बोला,,,)

यह क्या कर रहा है तू,,,,,।

मैं बता रहा हूं कि तेरा मन इस समय क्या कर रहा है,,,, (एकदम से उसके पेंट के तंबू को अंगूठे और उंगली से पड़कर उसे तंबू को हिलाते हुए नूपुर की तरफ देखा और बोला,,,) देख रही हो आंटी तुम्हारे बेटे को तुम्हें नंगी देखकर इसका भी लंड खड़ा हो गया है तो बताओ तुम क्या कह सकती हो,,,,,।

(नूपुर बड़े ध्यान से राहुल के पेट में बने तंबू को देख रही थी और अंकित को देख रही थी वैसे तो वह अपने बेटे से रोज चुदवाती थी लेकिन अंकित के सामने वह अनजान बनने की कोशिश कर रही थी क्योंकि उसे ऐसा ही लग रहा था कि अंकित को यह सब नहीं मालूम है लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रही थी अंकित फिर से अपना पासा फेंकते हुए बोला,,,)

अच्छा राहुल तू मेरा अच्छा दोस्त है लेकिन जो कुछ भी तूने इस समय कमरे में देखा है क्या तू अपने पापा को बता देगा,,,,,।

जरूर बता दूंगा मैं पापा से कुछ भी नहीं छुपाऊंगा कि तुम्हारे पीठ पीछे मम्मी यह सब करती है,,,।

नहीं नहीं बेटा ऐसा बिल्कुल भी मत करना,,,,,।

नहीं मैं तो बता दूंगा मम्मी क्योंकि तुम अच्छी मम्मी नहीं हो,,,,,,

(राम की बात सुनकर अंकित उसे समझाने की कोशिश करता हुआ बोला,,,)

यह क्या कर रहा है राहुल अभी-अभी तो तूने बोला कि तू बड़ा हो गया जवान हो गया है और तू इतनी नादानी वाली बात कर रहा है यह सब जो तूने देखा अपने पापा को बता देगा तो फिर क्या तेरी मां इस घर में रह पाएगी कभी खुशी से रह पाएगी,,,।

चाहे जो भी हो लेकिन मैं बता दूंगा,,,,,,।

अच्छा एक बात बता तेरा तो खड़ा हो गया अपनी मां को नंगी देखकर अगर तुझे मौका मिल जाए अपनी मां के ऊपर चढ़ने का उसे चोदने का तो क्या फिर भी बता देगा,,,,,।

(अंकित की बात सुनकर राहुल कुछ देर तक सोचने लगा वह कभी अपनी मां की तरफ तो कभी अंकित की तरफ देख रहा था,,,,, यह देखकर अंकित बोला)

ज्यादा सोच विचार मत कर ऐसा मौका बार-बार नहीं आता सच बता क्या तू अपनी मां को चोदना चाहेगा,,, (अंकित राहुल को आंख मारते हुए बोला और वह भी ज्यादा देर ना लगाते हुए बोला)

क्या मम्मी ऐसा करने देगी,,,,।(अपनी मां की तरफ देखते हुए राहुल बोला)

बिल्कुल करने देगी तो अगर अपने पापा को यह सब नहीं बताया तो तेरी मम्मी भी तेरे लिए अपनी टांगें खोल देगी,,,, और तू ही सोच तेरा भी जुगाड़ हो जाएगा और तेरी मां का भी जुगाड़ हो जाएगा तुम दोनों जब चाहे तब एक दूसरे की प्यास बुझा सकते हो और इस बात का किसी को कानों कान खबर तक नहीं पड़ेगी चार दिवारी के अंदर तुम दोनों पति-पत्नी की तरह रहोगे तेरे पापा को भी नहीं पता चलेगा,,,,,।

(इतना सुनकर राहुल के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और वह अपनी मां की तरफ देखने का वैसे तो दोनों के बीच पहले से ही सब कुछ चल रहा था लेकिन इस समय दोनों अपनी अपनी तरफ से अनजान बनने का नाटक कर रहे थे और नूपुर हैरान थी,,,, इसलिए अंकित नूपुर की तरफ आगे बढ़ा और बोला,,,)

क्या सोच रही हो आंटी देख नहीं रही हो तुम्हें नंगी देखकर तुम्हारे बेटे का लंड खड़ा हो गया है क्योंकि साथ ही सारा है कि अगर मौका मिले तो यह तुम्हारी चुदाई कर सकता है और अगर ऐसा हो गया तो घर में ही तुम्हारे लिए जुगाड़ बन जाएगा,,,,,।

(इस पल नूपुर के लिए हां कहना कोई ज्यादा बड़ी बात नहीं थी वलेकिन वह इस तरह से अंकित के सामने खुलकर हां कहने में हिचकीचा रही थी। वह कभी अपने बेटे को तो कभी अंकित को देख रही थी यह देखकर अंकित फिर से बोला,,,)

देखो आंटी जो काम तो मेरे साथ कर रही हो वहीं काम तुम अपने बेटे के साथ भी कर सकतीहो,,, बस टांगे खोलकर लंड ही तो अंदर बाहर करवाना है।(अंकित की बात सुनकर नूपुर के बदन में अजीब सी लहर उठ रही थी वह आश्चर्य से अपने बेटे की तरफ देख रही थी राहुल की अपनी मां की तरफ देख रहा था यह देखकर अंकित अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया और बोला)

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो आंटी हम जैसे लड़कों को सिर्फ बुर चाहिए और इस समय तुम्हारे बेटे के लिए तुम्हारी बुर से अच्छी बुर हो ही नहीं सकती,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित राहुल की तरफ आगे बढ़ने लगा और वह पूरी तरह से बेशर्मी दिखाते हुए अपने हाथों से ही राहुल के पेंट को खोलने लगा अंकित की हरकत देखकर राहुल के तन्मय में अजीत की हलचल होने लगी देखते ही देखते अंकित उसके पेट को उसके घुटने तक खींच दिया वाकई में उसका लंड खड़ा हो गया था,,,,,, और अंकित अपने हाथ से उसके लंड को पकड़ कर ऊपर नीचे करके हिलाते हुए बोला,,,) आंटी तुम्हारे बेटे का लंड तैयार हो चुका है तुम्हारी बुर में घुसने के लिए,,,,(यह सुनकर नूपुर शर्म के मारे अपनी नजरों को नीचे झुका ली और अंकित इस तरह से घुटनों के बल फिर से बिस्तर पर चढ़ गया और राहुल की मां की तरफ आगे बढ़ने लगा देखते ही देखते वह एकदम से राहुल की मां को अपनी बाहों में भरकर बिस्तर पर लेट गया और उसके ऊपर चढ़कर उसके होठों का रसपान करने लगा अपने बेटे के सामने नूपुर को शर्म महसूस हो रही थी लेकिन अंकित की हरकत उसके बदन में बेशर्मी का रस घोल रहा था वह मस्त हो रही थी,,,, अंकित उसके लाल लाल होठों का रसपान करते हुए उसकी चूची को दबा रहा था और फिर उसके एक तरफ लुढ़क गया और उसकी चूची को हाथ में पकड़ कर दबाते हुए राहुल को इशारा करके अपने पास आने के लिए बोला,,,,, नूपुर शर्म के मारे अपनी आंखों को बंद कर ली थी अपनी मां की बंद आंखों को देखकर राहुल भी जल्दी-जल्दी अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया और अपनी मां के बगल में आकर लेट गया वह धीरे से अपनी मां की चूची पर हाथ रख तो उसकी मां अपनी आंखों को खोलकर उसे देखने लगी और फिर से अपनी आंखों को बंद कर ले यह इशारा था कि वह अंकित के सामने अब कुछ भी कर सकता है,,,, अंकित राहुल को दिखाते हुए उसकी मां की चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया फिर से देखकर राहुल भी दूसरी चूची को अपने मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया यह देखकर अंकित बोला,,,,)

यह हुई ना बात अब तो अपनी मां को रात दिन खुश करते रहना,,,(ऐसा कहते हुए फिर से उसकी मां की चूची को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया और अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर उसकी मोटी मोटी जांघों को पकड़कर सहलाने लगा,,,, राहुल बहुत खुश नजर आ रहा था क्योंकि वह आज अपने दोस्त के साथ मिलकर अपनी मां की चुदाई करने जा रहा था एक नया सुख एक नया अनुभव को महसूस करने जा रहा था और इस अनुभव को महसूस करने के लिए तीनों एकदम ललाईत थे,,,,, कुछ देर राहुल की मां की चूची को पीने के बाद अंकित धीरे-धीरे फिर से उसकी दोनों टांगों के बीच पहुंच गया और उसकी बुर को चाटना शुरू कर दिया,,,,, और राहुल अपनी मां के सिरहाने घुटनों के बल बैठकर अपने लंड को पकड़ कर हिला रहा था यह देखकर नूपुर अपने आप से ही अपना हाथ आगे बढ़कर अपने बेटे के लंड को पकड़ ली और उसे हिलने लगी,,,, अंकित जानता था कि यह सब उन दोनों के लिए नया बिल्कुल भी नहीं था वह दोनों पक्के खिलाड़ी थे,,, देखते ही देखते नूपुर धीरे से अपना सर उठा कर अपने बेटे के लंड को मुंह में भर ली और उसे चूसना शुरू कर दी वैसे तो अपने बेटे को रोज ही इस तरह का सुख प्रदान करते थे लेकिन आज वह अपने बेटे को कुछ ज्यादा ही खुश कर देना चाहती थी क्योंकि आज वह उसकी उम्मीदों पर खड़ी नहीं उतरी थी क्योंकि वह कभी सोचा नहीं थी कि उसका बेटा उसे ही हालत में दिखेगा इसलिए वह अपनी नजरों में थोड़ा शर्मिंदगी का एहसास कर रही थी इसलिए अपने बेटे को की जान से मजा दे रही थी,,,,

राहुल मस्त होने लगा था अपनी आंखों को बंद करके अपनी कमर पर हाथ रखकर वह इस एहसास में पूरी तरह से डूब चुका था,,,, अंकित यह सब देखकर और भी ज्यादा उत्तेजित होकर उसकी बुर को चाट रहा था पागलों की तरह उसे पर अपनी जीभ को घुमा रहा था अपनी उंगली डालकर अंदर बाहर कर रहा था,,,, नूपुर को दोनों तरफ से आनंद ही आनंद प्राप्त हो रहा था लेकिन इस समय उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि ज्यादा मजा अंकित ही दे रहा था उसकी हरकतें पूरी तरह से उसे काम विभोर कर दे रही थी,,,, वह मस्त हो चुकी थी और रह कर अपनी कमर को ऊपर की तरफ उछाल दे रही थी जिसे अंकित अपनी दोनों हाथों से पकड़ कर उसे काबू में किए हुए था रहे रह कर वह अपनी नाक के आगे वाले भाग को भी उसकी बुर में डालकर रगड़ रहा था जिससे नूपुर का मजा दुगना हो जा रहा था,,,,,, अंकित एक साथ अपनी दो उंगलियों को उसकी बुर में डालकर बड़ी तेजी से अंदर बाहर कर रहा था वह जानता था कि इस तरह से नूपुर झड़ जाएगी और ऐसा ही हो रहा था उसके बदन की अकड़ बढ़ने लगी थी वह अपने बेटे के लंड को पूरा अपने मुंह में लेकर चूस रही थी और अंकित की उंगलियों का मजा लूट रही थी,,, फिर देखते ही देखते हो एकदम से अपनी कमर ऊपर की तरफ उठा दी और उसकी बुर से मदन रस की पिचकारी फूट पड़ी जो की सीधा अंकित के मुंह में गिर रही थी अंकित पूरी तरह से मस्त होकर नूपुर के मदन रस को चाट रहा था पी रहा था गले के अंदर उतर रहा था और फिर धीरे-धीरे बस शांत होने लगी लेकिन इस दौरान भी वह अपने बेटे के लंड को मुंह में भरी हुईथी,,, यह सब देख कर अंकित वह भी घुटनों के पास नूपुर के सिरहाने पहुंच गया और अपने लंड को हाथ में पकड़ कर उसके चेहरे पर रगड़ने लगा उसके गरम सुपाड़े से उसके गोरे-गोरे गाल की मालिश करने लगा। यह एहसास नूपुर को मदहोश कर रहा था अपने बेटे के लंड को मुंह में लेकर चूसने में इतना मजा नहीं आ रहा था जितना कि अंकित की हरकत से आ रहा था,,,,

वह पागल हो रही थी मस्त हो रही थी,,,, मदहोशी के सागर में डुबकी लगा रही थी अंकित अपनी कला बजिया से नूपुर की मां को पूरी तरह से अपने काबू में करने की कोशिश कर रहा था भले हुआ इस समय दो मर्दों के साथ थी लेकिन वह इस कोशिश में पूरी तरह से लगा हुआ था कि उसकी मां को उसकी तरफ से ही ज्यादा मजा आए और ऐसा हो भी रहा था अंकित अपने लंड को छोर से पकड़कर हथौड़े की तरह अपने सुपाड़े को उसके गाल पर पटक रहा था उसके चेहरे पर रगड़ रहा था,,,, हालांकि इससे नूपुर को हल्की चोट तो महसूस हो रही थी लेकिन मजा भी बहुत आ रहा था,,, यह सब देखकर राहुल के भी तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी वह अंकित की हरकत को देख रहा था उसके मोटे-मोटे लंड को देख रहा था और महसूस कर रहा था कि उसकी मां एकदम से गदगद हो जा रही थी जब जब उसके लंड का सुपाड़ा उसके गाल से रगड़ खाता था। अंकित अपने लंड के सुपाडे को उसके लाल-लाल होठों से रगड़ने लगा तो नूपुर अंकित की तरफ देखने लगी और धीरे से अपने बेटे के लंड को अपने मुंह में से बाहर निकाल दी और अंकित के लंड को अपने मुंह में भर ली ,,,,, और से चूसना शुरू कर दी अंकित पागल हुआ जा रहा था उसके बेटे के सामने इस तरह की हरकत करते हुए उसे और भी ज्यादा उत्तेजना का एहसास हो रहा था और वह एक हाथ से उसकी बड़ी-बड़ी चूची को दबा रहा था यही हरकत राहुल भी कर रहा था और अंकित की तरफ देख रहा था दोनों की आंखों में वासना का तूफान नजर आ रहा था दोनों एकदम मस्त हो चुके थे,,,,, कुछ देर तक लंड चुस्वाने के बाद,,,, अंकित धीरे से अपने लंड को अपने मुंह में से बाहर निकाला और फिर पीठ के बल लेट गया,,,, और नूपुर से बोला)

अब ऊपर आ जाओ मेरी जान,,,,(इतना सुनकर नूपुर उठकर बैठने लगी और उसके ऊपर आने लगी तो वह फिर से बोला,,,) ऐसे नहीं गांड मेरी ऊपर रखो,,,,(इतना सुनकर वह समझ गई कि उसे क्या करना है वह तुरंत अपनी गांड को अंकित के मुंह के ऊपर रख दी और उनकी दोनों हाथों से उसकी बड़ी-बड़ी गांड को पकड़ कर पहले जोर-जोर से चपत लगाना शुरू कर दिया और देखते ही देखते उसकी बेटे की आंखों के सामने ही उसकी मां की गांड को लाल कर दिया,,,,, और फिर उसकी बुर को चाटना शुरू कर दिया राहुल यह सब अपनी आंखों से देख रहा था वह भी मत हुआ जा रहा था वह अपनी मां की गांड को धीरे-धीरे सहला रहा था और बार-बार उसकी कमर पर उसकी पीठ पर चुंबन कर ले रहा था और नूपुर अंकित के लंड को फिर से मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी थी,,, धीरे से राहुल फिर से नीचे की तरफ गया और घुटनों के बल बैठकर अपने लंड को अपनी मां के चेहरे पर रगड़ना शुरू कर दिया अपने बेटे को खुश करने के लिए वह धीरे से अंकित के लंड को बाहर निकाल और अपने बेटे के लंड को चूसने लगी और बारी-बारी से यह मजा वह दोनों को दे रही थी,,,,, लेकिन राहुल की हालत खराब हो रही थी वह अपने आप को ज्यादा देर तक रोक नहीं पाया और उसके लंड से पिचकारी निकल गई,,,,,, वह झड़ने लगा अपनी मां के मुंह के अंदर ही,,,,, उसका पानी निकल चुका था लेकिन अंकित अभी भी बरकरार था काफी देर से वह इसी स्थिति में था और यह देखकर राहुल भी हैरान था,,,,, झड़ जाने के बाद वह गहरी सांस लेता हुआ एक किनारे पर बैठ गया और दोनों की काम लीला को अपनी आंखों से देखने लगा यह देखकर अंकित जानबूझकर बोला,,,)

क्या राहुल इतनी जल्दी झड़ गया तुझे पता है ना तेरी मम्मी को जमकर चुदाई की जरूरत है ऐसे ही रहा तो फिर कैसे काम चलेगा मुझे ही बार-बार आना पड़ेगा,,,,(यह सुनकर राहुल शर्मिंदा हो गया और नूपुर शर्म के मारे अपनी आंखों को बंद कर ली वह फिर से अंकित के लंड को चूसना शुरू कर दी थी,,,,, अंकित नूपुर की गांड पर जोर से चपत लगाता हुआ बोला,,,)

बस मेरी रानी अब उठ जाओ अब तुम्हारी चुदाई का समय आ चुका है राहुल का तो खड़ा होने में समय लगेगा,,,, तब तक नहीं तुम्हारी चुदाई करुं,,,,।(अंकित की बात सुनकर राहुल की मां धीरे से उसके ऊपर से उठकर बैठ गई वह शर्म के मारे कुछ बोल नहीं पा रही थी जैसा अंकित कह रहा था वैसा ही कर रही थी देखते ही देखते वह अपने घुटनों को अंकित के कमर के इर्द-गिर्द रखकर धीरे से एक हाथ नीचे की तरफ ले गई और अंकित के लंड को पकड़कर उसे अपने गुलाबी छेद से सटा दी और अपनी भारी भरकम गांड का वजन उसके लंड पर धीरे-धीरे बढ़ने लगा जिसकी वजह से उसका मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर की गहराई में सरकना शुरू कर दिया था,,, और देखते ही देखते नूपुर अंकित के लंड पर पूरी तरह से बैठ गई और उसका मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर की गहराई में खो गया,,,, यह देखकर राहुल हैरान हो गया,,,, क्योंकि राहुल के लंड से अंकित का लंड 2 इंच ज्यादा लंबा था और मोटा भी था लेकिन उसकी मां बड़े आराम से उसे अपने अंदर ले ली थी। देखते ही देखते वह धीरे से अपनी गांड को ऊपर उठाती और फिर नीचे गिरा देती ऐसा करते हुए अपनी मां को देखकर उत्तेजित होने लगा था और अंकित उसकी दोनों चूचियों को पकड़ कर उसका जोश बढ़ाते हुए बोला,,,)

बस मेरी रानी ऐसे ही बहुत मजा आ रहा है तुम्हारी बड़ी-बड़ी गांड देखकर ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है,,,, अब देखना तुम्हारा बेटा भी रोज तुम्हारी चुदाई करेगा,,,,, क्यों राहुल अब चोदेगा ना अपनी मां को रोज,,,,(इतना सुनकर राहुल शर्म के मारे अपनी नज़रें नीचे झुका लिया यह देखकर अंकित बोला) ऐसे शर्माएगा तो कैसे काम चलेगा तुझे मालूम होना चाहिए कि तेरी मां मत चुदवाती है उसे रोज सुबह शाम लंड चाहिए अब यह जिम्मेदारी तेरे पर है,,,,,,आहहहहहह आहहहहह देख राहुल कितना मजा आ रहा है तेरी मां कितनी रंडी की तरह अपनी गांड पटक रही है। आहहहह आहहहहह आहहहहह ऐसे ही मेरी रानी।

(इस तरह के शब्दों को सुनकर और अपनी मां के लिए इस तरह की बात अंकित के मुंह से सुनकर राहुल के तन-बाद में अजीब सी हलचल हो रही थी वह उत्तेजित हो रहा था फिर से उसका लंड खड़ा हो रहा था वैसे तो कोई और समय होता है तो इस तरह की बातें किसी और के मुंह से अपनी मां के लिए सुनकर वह उसे मारने के लिए तैयार हो जाता लेकिन इस समय महोली कुछ ऐसा था कि राहुल के तन बदन में उत्तेजना का तूफान उठ रहा था उसे मजा आ रहा था खास करके अपनी मां के लिए अंकित के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर तो उसकी उत्तेजना और भी ज्यादा बढ़ती जा रही थी। और वह फिर से बिस्तर पर खड़ा हो गया था और अपनी मां के सामने आकर कमर पर हाथ रखकर वह अपनी मां को देख रहा था उसकी मां समझ गई कि उसके बेटे को क्या चाहिए इसलिए वह धीरे से अपने मुंह को आगे बढ़ाकर अपने बेटे के लंड को मुंह में ले ली और चूसना शुरू कर दी,,,,, अंकित उसकी मां की दोनों चूचियों को पकड़ कर दशहरे आम की तरह दबाता हुआ नीचे से भी अपनी कमर को ऊपर की तरफ उछाल दे रहा था जिससे हर बार अंकित का लंड उसके बच्चेदानी से टकरा जा रहा था और वह एकदम से मस्त हो जा रही थी,,,,,, बिस्तर पर घमासान मचा हुआ था नूपुर अपने बेटे और बेटे के दोस्त के साथ मिलकर अपनी जवानी की प्यास बुझाने में लगी हुई थी,,,, राहुल की मां को खुश करने में अंकित बिल्कुल भी कसर बाकी नहीं रख रहा था,,,, एक बार झड़ जाने के बाद उसका लंड दोबारा झड़ने के लिए तैयारी नहीं था वह जोर-जोर से धक्के लगा रहा था झटका लगा रहा था और राहुल की मां भी जोर-जोर से अपनी गांड पटक रही थी फिर भी उसका लंड खड़ा का खड़ा था लेकिन राहुल का लंड फिर से खड़ा हो चुका था,,,,, यह देखकर अंकित राहुल की मां से बोला,,,)

रुक जाओ मेरी रानी अब तुम्हारे बेटे की बारी है मैं भी तो देखो एक बेटा अपनी मां को चोदता है तो कैसा दिखाई देता है,,,,,(अंकित के मुंह से ऐसा सुनकर नूपुर अपने मन में ही बोल रही थी कि ऐसा क्यों कर रहा है मुझे तेरे साथ ज्यादा मजा आता है मेरे मजा को किरकिरा मत कर लेकिन ऐसा हुआ खुलकर नहीं बोल सकती थी इसलिए धीरे से अपनी गांड को ऊपर की तरफ उठा ले जिससे अंकित का लंड उसकी बुर से बाहर निकल गया,,,,, अपनी बारी का नाम सुनकर राहुल के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आ रहे थे,,,,, और वह खुशी के मारे अपनी मां के लाल-लाल होठों को चूसना शुरू कर दिया था और यही मौका देखकर अंकित अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया था और अपने लंड को उसी समय नूपुर के होठों पर रगड़ना शुरू कर दिया था जिससे उसके लंड का सुपाड़ा राहुल के भी होठों से रगड़ खा रहा था उसकी गर्मी राहुल को और ज्यादा मदहोश कर रही थी और फिर अचानक ही राहुल अपने प्यासे होठों को खोल दिया पर मौका देखकर अंकित अपने लंड के सुपाड़े को राहुल के मुंह में डाल दिया,,,, यह देखकर नूपुर एकदम से हैरान हो गई और उसकी हैरानी तब बढ़ गई जब उसका बेटा बड़े आराम से अंकित के लंड को चूसना शुरू कर दिया क्योंकि राहुल का भी आकर्षक अंकित के लंड की तरफ कुछ ज्यादा ही बढ़ चुका था वह उसे पकड़ना चाहता था दबाना चाहता था उसे मुंह में लेकर चूसना चाहता था ऐसा वह पहले कभी नहीं किया था और नहीं कभी ऐसा उसका करने का मन करता था लेकिन अंकित के लंड को देखकर उसके मन में अजीब सी अभिलाषा जाग गई थी और अपनी वही अभिलाषा को इस समय राहुल पूरी कर रहा था,,,, अंकित के साथ भी ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था लेकिन इस समय उसे मजा आ रहा था राहुल जिस तरह से उसके लंड को चूस रहा था वह पूरी तरह से गदगद हुआ जा रहा था और फिर और ज्यादा मजा को बढ़ाने के लिए वह राहुल के मुंह में से लंड को बाहर निकाल कर सीधा नूपुर के मुंह में डाल दे रहा था नूपुर भी उसके लंड का स्वागत करते हुए अपने लाल-लाल होठों को खोल दे रही थी ऐसा वह बारी से कर रहा था मां बेटे दोनों मजे लेकर उसके लंड को चुस रहे थे। कुछ देर इसी तरह से मजा लेने के बाद अंकित ही नूपुर को लेट जाने के लिए बोला और नूपुर की पीठ के बल लेट गई अपनी दोनों टांगें खोलकर,,,,,, यह देखकर राहुल घुटनों के बल बैठकर अपनी मां की बुर को चाटना शुरू कर दिया और अंकित के मन में न जाने क्या सुझी,,,, वह सीधा राहुल के पीछे पहुंच गया और उसकी गांड को दोनों हाथों से थाम लिया,,,, और ढेर सारा थुक अपने लंड पर चुपडने लगा,,,,, और उसकी गांड के छेद पर भी ठोक उंगली से लगने लगा जब वह थूक लगा रहा था तो राहुल को मजा आ रहा था उसके बदन में अजीब सी सरसराहट हो रही थी,,,,,।

इस बारे में नूपुर को कुछ मालूम ही नहीं था वह अपनी आंखों को बंद करके मजा ले रही थी। लेकिन राहुल को अंदेशा हो गया था कि अंकित क्या करना चाहता है लेकिन वह न जाने क्यों उसे रोक नहीं पा रहा था क्योंकि उसके बदन में मदहोशी छा चुकी थी मस्ती की लहर उठ रही थी,,,,, और अगले ही पल अंकित अपने मोटे सुपाड़े को उसकी गांड के छेद पर सटा दिया,,,,, राहुल एकदम से मचल उठा अंकित उसकी कमर पड़कर अपनी कमर को आगे की तरफ ठेलने लगा थुक की चिकनाहट पाकर अंकित के लंड का सुपाड़ा धीरे-धीरे अंदर की तरफ सरकने लगा,,,,, ऐसा राहुल ने पहले कभी करवाया नहीं था इसलिए उसे दर्द हो रहा था उसके चेहरे के भाव बदल रहे थे लेकिन इस बीच लगातार वह अपनी मां की बुर की चटाई कर रहा था,,,,, अंकित अच्छी तरह से जानता था कितने जल्दी उसका सुपाड़ा उसकी गांड के छेद में घुसने वाला नहीं है इसलिए वह धीरे-धीरे बार-बार अपने थूक से उसे और ज्यादा चिकना बना रहा था। और अंकित की हरकत से राहुल का बदन थरथरा रहा था,,,, देखते ही देखते अंकित की मेहनत रंग ला रही थी और उसका मोटा सुपाड़ा काफी मशक्कत के बाद राहुल की गांड में प्रवेश कर चुका था,,,,, और फिर अंकित का हौसला बढ़ने लगा वह राहुल की कमर पड़कर एक बार फिर से जोर से धक्का मारा और उसका आधा लंड उसकी गांड के अंदर प्रवेश कर गया लेकिन राहुल दर्द से ठीक पड़ा उसकी चीखने की आवाज सुनकर नूपुर अपनी आंखों को खोलकर देखने लगी तो राहुल के चेहरे का अभाव पूरी तरह से बदल चुका था वह अपनी नजर पीछे की तरफ घूम कर देखी तो हैरान रह गई उसकी गांड के पीछे अंकित उसकी कमर पकड़ कर खड़ा था उसे समझने देने लगी कि अंकित यह क्या कर रहा है और वह एकदम से बोल पड़ी।

यह क्या कर रहा है अंकित,,,,,?

क्या करूं मेरी रानी तुम्हारे बेटे की गांड भी तुम्हारी जैसी खूबसूरत है मुझसे रहा नहीं गया,,,,,।

(अंकित का जवाब सुनकर वह राहुल की तरफ देखने लगी राहुल गहरी गहरी सांस ले रहा था उसका मुंह खुला हुआ था और अंकित देख देख आधा बचा लंड की उसकी गांड में ठेल दिया एक बार फिर से राहुल चेक पड़ा उसकी चीज की आवाज सुनकर नूपुर अंकित से बोली,,,)

इसकी गांड मत फाड़ देना,,,,, तू तो सच में बहुत हारामी है मेरे बेटे की गांड मारने लगा मेरे सामने,,,,।

इसके बाद तुम्हारी बारी है मेरी जान,,,,, ।

(इतना सुनकर नूपुर एकदम से सहम गई क्योंकि आज तक उसने कभी गांड नहीं मरवाई थी और अपने बेटे की हालत देखकर उसका हौसला पस्त हो चुका था लेकिन थोड़ी देर में उसके बेटे के चेहरे का हाव-भाव बदलने लगा उसके चेहरे पर दर्द की जगह आनंद की रेखाएं साफ दिखाई देने लगी उसके चेहरे पर मस्ती की आभा नजर आने लगी,, अंकित उसकी कमर पकड़ कर उसकी गांड मार रहा था अब आराम से उसका लंड पर बाहर हो रहा था और यह सब देखकर नूपुर अपने घुटनों के बल बैठ गई और अपनी बुर को अपने बेटे के मुंह से सटा दी और उसका बेटा उसकी बुर को चाटना शुरू कर दिया और अंकित से गांड मारने का मजा लूटने लगा,,,, राहुल की गांड मारने का इरादा अंकित का बिल्कुल भी नहीं था लेकिन वह जानबूझकर ऐसा कर रहा था वह राहुल को उसकी मां की आंखों के सामने जरूर करना चाहता था ताकि भविष्य में वह कभी उसकी मां के बारे में कुछ बोल ना सके,,,,, लेकिन राहुल की गांड में लंड डालकर उसे भी बहुत मजा आ रहा था क्योंकि यह उसका पहला मौका था जब वह किसी लड़के की गांड में लंड डाला था,,,,, देखते ही देखते नूपुर भी घोड़ी बन गई और उसका बेटा राहुल पीछे से अपनी मां की बुर में लंड डालने लगा क्योंकि गांड में लंड डालने की औकात उसमें बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि वह अपने लंड की क्षमता को अच्छी तरह से जानता था और वह अपनी मां को छोड़ रहा था और पीछे अंकित उसकी गांड मार रहा था।

लेकिन इस बार भी राहुल ज्यादा देर तक टिक नहीं पाया और झड़ने लगा और अंकित अभी भी बरकरार था,,,,,, अंकित का काम हो चुका था वह राहुल को उसकी मां के सामने ही जलील कर चुका था उसकी गांड मार कर इसलिए उसकी गांड में से धीरे से लंड को बाहर निकाला और उसे उसकी मां के ऊपर से हटा दिया और खुद पीछे जगह बना लिया नूपुर को लग रहा था कि अंकित उसकी गांड में लंड डाल देगा लेकिन इस बार उसने उसके गुलाबी छेद में ही डालकर उसकी प्यास को बुझाने की पूरी कोशिश करने लगा और धक्के पर धक्का लगाने लगा राहुल की मन एकदम मस्त हो चुकी थी उसे बहुत मजा आ रहा था अंकित से चुदवाने में उसके मुंह से गरमा गरम शिसकारी की आवाज गुंज रही थी,,,, और इस बार राहुल की मां के साथ-साथ अंकित का भी गरम लावा निकलने लगा और राहुल की मां की बुर को पूरी तरह से भर दिया,,,,, और उसके ऊपर पसर गया तीनों बिस्तर पर लेटे हुए थे। नूपुर के ऊपर अंकित लेटा हुआ था और राहुल एक तरफ लेटा हुआ था तीनों मत हो चुके थे राहुल को अपनी गांड के छेद में दर्द महसूस हो रहा था लेकिन जो मजा उसे मिला था वह कभी सोचा भी नहीं था,,,,, राहुल को खुश करने के लिए अंकित लेटे हुए ही अपना हाथ आगे बढ़ाया और राहुल के लंड को पकड़ कर हिलाते हुए बोला,,,)

क्यों मेरे राजा मजा आया ना,,,,,।

(इतना सुनकर वह मुस्कुराने लगा नूपुर को बड़ी जोर की पेशाब लगी हुई थी,,,,, वह धीरे से उठकर बैठ गई और चादर अपने बदन पर लपेट कर जाने ही वाले थे कि अंकित अपना हाथ आगे बढ़कर उसके बदन से चादर को खींच लिया और उसे नंगी कर दिया और बोला,,,,)

अब हम दोनों के सामने तुम्हें यह सब पहनने की जरूरत नहीं है,,,,, (इतना सुनकर नूपुर शर्मा गई और कमरे से बाहर निकल गई अंकित जानता था कि वह कहां गई है इसलिए वह राहुल से बोला)

तू भी चलेगा,,,,।

कहां,,,?

बाथरूम तेरी मां मुतने गई है,,,,, । चल बाथरूम में उसकी चुदाई करते हैं,,,,,।

(इतना सुनकर वह उठकर खड़ा हो गया अंकित भी बिस्तर से नीचे उतर गया और दोनों बाथरूम की तरफ जाने लगे बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ था अंदर राहुल देखा तो सच में उसकी मां बैठकर पेशाब कर रही थी,,,,, वह दोनों भी अंदर घुस गए और दोनों भी पेशाब करने लगे तीनों एक साथ पेशाब कर रहे थे,,,, और जैसे ही नूपुर के साथ करके उठकर खड़ी हुई अंकित तुरंत उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया उसे बाहों में भरकर फिर से उसके होठों का रस पीने लगा फिर से उसकी गांड पर अपने हाथ घुमा कर उसे मदहोश करने लगा उसे उत्तेजित करने लगा देखते ही देखते हो फिर से उत्तेजित होने लगी और इस बार अंकित पहले की तरह उसे अपनी गोद में उठा लिया और उसकी बुर में लंड डालकर चोदना शुरू कर दिया यह देखकर राहुल एकदम हैरान हो गया था क्योंकि वह बड़े आराम से उसकी मां को गोद में लेकर उसकी चुदाई कर रहा था पीछे की जगह खाली थी यह देखकर अंकित राहुल को बोला,,,,)

पीछे से तू भी डाल,,,,,,

(इतना सुनकर वह अपनी मां के पीछे पहुंच गया और अपनी मां की गांड के छेद में लंड डालने की कोशिश करने लगा,,,,, अपनी मां का भूरे रंग का छेद देखकर वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था और लंड का सुपड़ा उसे पर रगड़ रहा उसमें डालने की कोशिश कर रहा है और अंकित था कि जोर-जोर से गोद में उठाई हुई उसकी मां को चोद रहा था उसकी मां पूरी मस्ती के साथ मजा ले रही थी। लेकिन राहुल के लिए मंजिल तक पहुंचना बड़ा मुश्किल था वह अपने लंड के सुपारी को अपनी मां की गांड के छेद पर ही रगड़ रहा था और ऐसा करते हो इतना ज्यादा मदहोश हो गया था कि वह फिर से झड़ गया,,,,, लेकिन अंकित पूरा जोर लगाकर चुदाई कर रहा था अंकित की गोद में भी राहुल की मां पूरी तरह से मशाल जा रही थी अपनी भारी भरकम गांड को वह अपनी तरफ से भी कोशिश करके ऊपर उठा रही थी लेकिन ऐसा वह कर नहीं पा रही थी जो कुछ भी कर रहा था उनकी कोई कर रहा था जब राहुल चढ़ गया तो वह गोद में उठाए हुए ही बाथरूम की दीवार से उसकी मां को सत दिया और फिर से अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया और तब तक हिला था जब तक कि वह एक बार फिर से राहुल की मां का पानी नहीं निकाल दिया,,,,,,।

मां बेटे दोनों एकदम से थक चुके थे,,,,, नूपुर की हालत को देखकर अंकित अपने कपड़े पहनने लगा था,,,,,, आज जो मजा तीनों को मिला था इस बारे में तीनों ने कभी कल्पना भी नहीं किया था अंकित अपना काम करके जा चुका था।
 
Back
Top