अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था अनजाने में ही आज एक और बुर उसे मिलने वाली थी चोदने के लिए,, इतना तो अंकित समझ गया था कि जिस तरह से शर्मा जी की बहू ने सुमन को ताला चाबी दी थी दरवाजे पर लगाने के लिए आज उसकी किस्मत का ताला एक बार फिर खुलने वाला था। लेकिन इस तरह से एकाएक किसी औरत के साथ अंकित ने शारीरिक संबंध नहीं बनाया था बहुत ही कम समय में उसने केवल बस के अंदर सफर के दौरान उसे अनजान औरतों के साथ ही संबंध बना पाया था फिर भी उसके साथ संबंध बनाने में थोड़ी बहुत बातचीत का जरिया बना हुआ था और वह उसे पेशाब करने के लिए बस के नीचे ले गया था इन सब के दौरान दोनों के बीच अच्छी खासी बातचीत हुई थी जिससे अंकित को उसे चोदने में कोई परेशानी नहीं हुई थी,,,।
लेकिन यहां पर मामला कुछ अलग ही था शर्मा जी की बहू को वह ठीक तरह से कभी जनता भी नहीं था भले ही वह उसी मोहल्ले में शादी करके आई थी लेकिन आज शर्मा जी की बहू से अंकित की पहली मुलाकात थी और वह पहली बार ही शर्मा जी की बहू को देख भी रहा था इतने कम समय में किसी औरत के साथ दैनिक सुख प्राप्त करना और उसे प्रदान करना यह बड़ा कठिन कार्य था,,,, और वैसे भी अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि शर्मा जी की बहू इतनी जल्दी तैयार कैसे हो गई उसके साथ हम बिस्तर होने के लिए,,, यह अंकित के मन में सवाल घूम रहा था लेकिन वह शर्मा जी की बहू के बारे में नहीं जानता था शर्मा जी की बहू को इस घर में आए 3 साल गुजर चुके थे इन 3 साल में उसका पति 3 महीने भी उसके साथ बराबर नहीं था घर में उसके ननद की शादी थी और खुद उसका भाई काम में इस तरह से डूबा हुआ था कि हल्दी वाले दिन भी वह घर नहीं आ पाया था वह कल आने वाला था इसी से अंदाजा लगा सकते थे कि शर्मा जी की बहू अपनी जवानी के दौर का खुलकर मजा नहीं ले पा रही थी रोज रात को बिस्तर पर अपनी टांगों को आपस में रगड़कर अपनी भावनाओं को मार कर सोना उसके दिनचर्या हो चुकी थी,,,। लेकिन वह बेहद सीधी शादी और मर्यादा सील औरत थी। सुमन और अंकित को रंगे हाथ पकड़ने के बावजूद भी उसके मन में ऐसा कुछ भी नहीं था कि वह अंकित के साथ जवानी का मजा ले सके लेकिन अनजाने में उसकी नजर अंकित के मर्दाना अंग पर चली गई थी जिसे देखकर उसके होशो हवास उड़ गए थे क्योंकि अपने पति के अंग को देखकर वह अंकित के अंग के बारे में सोच रही थी जिसके आगे उसके पति का कुछ भी नहीं था और यही देखकर उसके मन में भी काम भावना प्रज्वलित होने लगी क्योंकि उसे एहसास हो रहा था कि यही सही मौका है मजा लेने का ना किसी बात का डर क्योंकि वह खुद उसे रंगे हाथ पकड़ चुकी है इससे दोनों का राज राज ही रह जाएगा और वैसे भी अंकित उसके मोहल्ले का लड़का था और अंकित के बारे में सुनी थी कि वह बहुत सीधा-साधा लड़का है लेकिन आज अपनी आंखों से उसका सिधापन देखकर खुद उसकी भावनाएं बहकने लगी थी। अंकित के मोटे तगड़े लंड़ को अपनी बुर में लेने के लिए उसकी भावनाएं तेज हो चुकी थी इसीलिए वह जो नहीं करना था वही करने के लिए तड़प उठी थी।
धीरे-धीरे शर्मा जी की बहू अंकित की तरफ आगे बढ़ रही थी अंकित शर्मा के मारे नजर नीचे झुका ले रहा था वैसे वह शर्मा जी की बहू को नजर भर कर देख चुका था विवाहित होने की वजह से उसका शरीर जवानी से भरा हुआ था उसके अंग अंग में मादकता छलक रही थी ब्लाउज के अंदर कैद उसकी दोनों चूचियां कबूतर की भांति आजाद होने के लिए पंख फड़फड़ा रहे थे वैसे भी शर्मा जी की बहू की चूचियां खरबूजे जैसी बड़ी थी और उन्हें संभालने के लिए ब्लाउज का साइज छोटा था जिसकी वजह से ब्लाउज के बटन जहां लगे होते हैं वहां का कपड़ा कुछ ज्यादा ही खिंचा हुआ था जिससे ऐसा लग रहा था कि शर्मा जी की बहू की जवानी छलक रही हो। मोटी मोटी बांहें मांसल चिकनी कमर और ऊपर से गहरी नाभि कुल मिलाकर जवानी से भरी हुई शर्मा जी की बहू काम देवी लग रही थी। और ऐसी खूबसूरत नारी की जवानी का रस चखने वाला कोई नहीं था लेकिन आज यह सुनहरा मौका अंकित को प्राप्त हुआ था। इसलिए अंकित भी अपने आप को अंदर से तैयार कर रहा था वैसे भले ही वह शर्मा जी की बहू को देखकर घबरा गया था लेकिन वहां अपने लंड को पेट के अंदर छुपा नहीं पाया था उसका लंड अभी भी पेंट के बाहर अपना हुनर दिखाने के लिए सीना ताने खड़ा था,,,, जिस पर शर्मा जी की बहू की नजर बराबर लगी हुई थी,,, दरवाजा बंद होने के बाद दरवाजे पर ताला लगाने की आवाज अंकित को साफ सुनाई दे रही थी उसे इस बात का डर था कि कहीं दोनों पकड़े न जाए,, लेकिन शर्मा जी की बहू की मौजूदगी से उसमें हिम्मत आ रही थी और घर भी उसी का था तो जब सैया कोतवाल तो डर कांहे का यह मुहावरा यहां अंकित पर बराबर फिट बैठ रहा था,,, शर्मा जी की बहू की मुस्कान पूरी कहानी बयां कर दे रही थी कि उसके मन में क्या चल रहा है,,, वह धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हुए अंकित की तरफ आगे बढ़ रही थी उसकी चूड़ियों के खनक की आवाज से पूरा कमरा मदहोश हुआ जा रहा था वैसे भी हल्दी की रस्म थी इसलिए वह भी तैयार हुई थी और सही कहा जाए तो वह खुद एक दुल्हन की तरह लग रही थी पीली साड़ी में उसका गोरा रूप खिल उठा था।
यह तुम क्या कर रहे थे सुमन के साथ,,,?
ककककक,,, कुछ नहीं भाभी,,,!(अंकित थोड़ा डरते हुए बोला)
यह अगर कुछ नहीं था तो बहुत कुछ किया था अब छुपाने की कोई जरूरत नहीं है मैंने सब अपनी आंखों से देख ली हूं सुमन के बारे में तो मैं अपने कानों से सुन चुकी थी और आज अपनी आंखों से देख भी ली लेकिन तुम तो मोहल्ले के सबसे सीधे लड़के थे तुम कैसे ही इन सब पचड़े में पड़ गए,,,,,।
वो ,,,वो,,,, मैं कुछ करना नहीं चाहता था भाभी में तो यहां शरबत के पाउडर के लिए आया था लेकिन सुमन ही यह सब करने पर मजबूर कर दी,,,,।
ऊममम वह तो मैं देख ही रही हूं तुम्हारे पास हथियार ही इतना जानदार है कि कोई भी लड़ने के लिए मैदान में उतर जाए,,,(इतना कहने के साथ ही शर्मा जी की बहू हाथ आगे बढ़कर अंकित के लंड को पकड़ ले जो की पूरी तरह से अपनी औकात में खड़ा था उसकी गर्माहट अपनी हथेली में महसूस करके उसकी पसीजने लगी,,,, और अचानक उसके मुंह से निकल गया,,,,) सहहहहह आहहहहहह इतना मोटा और लंबा तो मैं आज तक नहीं देखी कौन सा तेल लगाता है रे ईस पर,,,,।
कोई भी तो नहीं भाभी यह ऐसा ही है,,,।
बाप रे यानी नेचुरल तौर पर ऐसा ही है अगर इसकी सरसों के तेल की मालिश की जाए तो यह तो और भी ज्यादा लेट्ठ बन जाएगा,,,(मदहोश होते हुए शर्मा जी की बहू अंकित के लंड को अपनी मुट्ठी में भरकर उसे मुट्ठीयाने लगी,,,,, शर्मा जी की बहू की हरकत से अंकित की हालत खराब हो रही थी उसे मजा भी आ रहा था और उसे इस बात का डर था कि कहीं कोई आना जाए इस बात का डर तो उसके मन से निकल चुका था कि शर्मा जी की बहू कुछ करेगी क्योंकि वह शर्मा जी की बहू की हालत को समझ गया था वह जानता था कि अब ये बिना चुदवाए मानने वाली नहीं है,,,,, फिर भी जानबूझकर नाटक करते हुए अंकित बोला,,,)
यह क्या कर रही हो भाभी,,,,?
वही जो एक औरत को करना चाहिए सच-सच बताना सुमन की कितनी बार लिया है,,,,,।
(यह सुनकर अंकित कुछ बोल नहीं पाया खामोश हो क्या तो शर्मा जी की बहू फिर से अपनी बात को दोहराते हुए बोली,,,)
बताना घबरा क्यों रहा है कितनी बार लिया है सुमन की जिस तरह से तू धक्के लगा रहा था मुझे तो लगता है कि बहुत पहले से यह सब चल रहा है। (शर्मा जी की बहू मादक अदा से अपनी मुट्ठी में भरकर अंकित के लंड को धीरे-धीरे मुठिया रही थी ऐसा करने में उसे तो आनंद ही रहा था अंकित की भी हालत खराब हो रही थी,,, शर्मा जी की बहू के इस तरह के सवाल और उसकी हरकत से अंकित मदहोश हो रहा था उसे मजा आ रहा था फिर वह धीरे से बोला,,,)
तीन बार,,,,
ओहहहहह बहुत मजा आता है यह सब करने में सुमन की गांड भी बड़ी-बड़ी है लेने में तो मत हो जाता है तेरा चेहरा बता रहा है,,,,।
(शर्मा जी की बहू इस तरह की बातें करेगी अंकित को उम्मीद नहीं थी लेकिन इस तरह की बातें सुनकर अंकित के तन बदन में आग लग रही थी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी एक औरत का पहली बार में ही एक जवान लड़के के साथ इस तरह की बात करना कितना मदहोश कर देने वाला पल होता है,,,,,,, फिर वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) वह तो छिनार है लेकिन तुझे भी छिनरपन सीखा दी है,,,, मजा आ रहा था ना उसकी लेने में सच-सच बताना अब मुझसे छुपाने की जरूरत नहीं है,,,,,।(वह उसी तरह से धीरे-धीरे मुठिया रही थी अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या बोले लेकिन मजा बहुत आ रहा था इस सवाल पर भी वह कुछ बोल नहीं पाया,,,,, तो शर्मा जी की बहू फिर से बोली।)
बताना शर्मा क्यों रहा है,,,, मजा आया ना सुमन की लेने में,,,,
जजज,,,जी जी भाभी,,,,,।
(अंकित का जवाब सुनकर वह मुस्कुराने लगी उसकी आंखों में मदहोशी भरी हुई थी उत्तेजना से उसकी आंखें मदहोश हुए जा रही थी,,, और वह मुस्कुराते हुए फिर से बोली,,,)
कितनी बार पानी निकाला,,,,,।
एक भी बार नहीं,,,,।
मतलब तुम दोनों का काम अधूरा रह गया धत् गलत समय पर आ गई,,,,,,।
मेरा मतलब है कि सुमन का निकल गया था मेरा नहीं निकला,,,,,।
(इतना सुनकर शर्मा जी की बहू मादक अंदाज में मुस्कुराते हुए अंकित की तरफ देखकर बोली)
कोई बात नहीं मेरे राजा मैं निकाल दूंगी तेरा,,, वैसे भी लड़कियों से ज्यादा मजा भाभिया देती हैं,,,,, उससे भी बड़ी-बड़ी चूची मेरी है और गांड जो तुझे बहुत पसंद आएगी,,,,,,(और इतना कहने के साथ ही शर्मा जी की बहू एकदम से अपना मुंह अंकित के लंड की तरह बधाई और अगले ही पल उसे मुंह में लेकर चूसना शुरू करती अंकित तो सातवें आसमान में उड़ने लगा उसे यकीन नहीं हो रहा था कि यह सब हकीकत है उसे तो सब कुछ सपना ही लग रहा था,,, क्योंकि भला कौन यकीन कर पाएगा कि शादी वाले घर में जाने पर पहली मुलाकात में ही इस घर की बहू अपनी देने के लिए तैयार हो जाएगी,,,,, लेकिन यह सपना नहीं हकीकत था और इस हकीकत में अंकित डूबने लगा था अपनी आंखों को बंद करके इस पल का मजा लेने लगा था शादीशुदा होने के कारण एक मर्द को खुश करना शर्मा जी की बहु अच्छी तरह से जानती थी,,, वह पूरा का पूरा अपने गले तक उतार कर उसे कस रही थी शायद इस तरह का लंड उसे पहली बार मिला था,,,, और यह हकीकत ही था अंकित के लंड को चूसते हुए शर्मा जी की बहू अपने मन में यही सोच रही थी कि काश ऐसा लंड उसके पति का होता तो कितना मजा आता फिर अपनी मन में सोचने लगी कि अगर उसके पति का ऐसा होता भी तो उसे कौन सा मजा मिलने वाला था साल भर में तो 15 दिन के लिए ही आता है उसमें से ज्यादातर थककर सो जाता है,,,, वह अपने मन ही मन में सोच रही थी कि ऐसे आदमी को पाकर उसकी जिंदगी खराब हो गई। क्योंकि वह जवानी से पूरी तरह से भरी हुई थी ऐसे में हर रात उसे मर्द का साथ चाहिए था जो उसकी जवानी को अपनी बाहों में कस के दबोच कर उसका रस निकाल दे लेकिन यह सब सिर्फ उसका ख्वाब था उसकी कल्पना थी ऐसा मर्द अभी तक उसके जीवन में नहीं आया था लेकिन आज जैसे उसका भाग्य खुल गया था क्योंकि इस तरह के लंड के बारे में वह कभी कल्पना भी नहीं की थी और आज उसे उम्मीद से दुगना कल्पना से परे प्राप्त हो रहा था।
वह अपने मन में सोचने लगी थी कि वाकई में पति से ज्यादा मजा तो मोहल्ले के देवर देते हैं अगर सच में वह मोहल्ले के देवर से दिल लगा ले तो रोज रात को बिस्तर पर करोड़ बदल कर सोना नहीं पड़ेगा बल्कि देवर की बाहों में जवानी का असली सुख प्राप्त करके वह चैन की नींद सोएगी,,,,, पल भर में ही शर्मा जी की बहु बहुत कुछ सोच ली थी इस तरह के हालात में वह मर्यादा सील औरत की छवि को पूरी तरह से बदलकर रख दी थी,,, शर्मा जी की बहू संस्कारी औरत थी और उसके संस्कार के बारे में पूरा मोहल्ला जानता था उसकी इज्जत करता था उसे सम्मान देता था लेकिन इसके विपरीत उसका एक ऐसा विरोध था जो माहौल के हिसाब से पूरी तरह से बदल चुका था शर्मा जी की बहू में इस समय एक छिनार जागरूक हो गई थी जो अपने वतन की प्यास बुझाने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हो चुकी थी। वह पागलों की तरह अपने मुंह को ही ऊपर नीचे आगे पीछे करके अंकित के लंड का मजा ले रही थी। अंकित भी धीरे-धीरे खुलने लगा था क्योंकि वह जानता था कि अगर मजा लेना है तो उसे भी मैदान में उतरना पड़ेगा इस तरह से शर्माने का कोई फायदा नहीं है क्योंकि शर्मा जी की बहू खुद मजा लेना चाहती है इसलिए वह एक हाथ शर्मा जी की बहू के सर पर रखकर अपनी कमर को आगे पीछे करके हिलना शुरू कर दिया था उसके ईस हरकत पर शर्मा जी की बहू मदहोश हुई जा रही थी अपने दोनों हाथों को अंकित के नितंबों पर रखकर उसे कसके दबाते हुए उसके लंड की चुसाई कर रही थी,,,,, शर्मा जी की बहू इस बात से भी हैरान थी कि अभी तक अंकित के लंड से पिचकारी नहीं निकली थी इतनी देर में तो उसका पति थककर सो भी ज्यादा उसे प्यासी छोड़कर लेकिन अंकित के मर्दाना ताकत को देखकर उसकी मां प्रसन्नता से चूमने लगा था क्योंकि उसे यकीन हो चला था कि अंकित उसकी प्यास को बुझा सकता है,,,, वह कुछ देर तक इसी तरह से अंकित को खुश करती रही फिर धीरे से उसके लंड को अपने मुंह में से बाहर निकले और धीरे से उठकर खड़ी हो गई उसका चेहरा उत्तेजना से लाल टमाटर की तरह हो गया था लंड मोटा और लंबा होने की वजह से उसे गले तक लेकर जो हिम्मत उसने दिखाई थी उसके चलते उसकी आंखें भी बड़ी-बड़ी हो गई थी। उसका खूबसूरत चेहरा देखकर अंकित की प्रसन्न दिखाई दे रहा था और वह धीरे से अपने लंड को पकड़ कर एक असली मर्द की तरह उसे मुठीयाते हुए मदहोशी भरी नजरों से शर्मा जी की बहू की तरफ देख रहा था। उसकी हरकत को देखकर शर्मा जी की बहू को एहसास होने लगा कि आज उसका पाला असली मर्द से पड़ा है,,, वह मुस्कुराते हुए अंकित से बोली।
क्या ऐसा मजा सुमन देती है,,,,?
बिल्कुल भी नहीं भाभी और तुम्हारी तरह हिम्मत नहीं दिख पाती बस ऊपर ऊपर से चुसती है वह कहती है की उसे इतने मोटे और लंबे लंड से डर लगता है,,,,(अंकित जानबूझकर इस तरह की बातें बना रहा था क्योंकि वह आज शर्मा जी की बहू को जमकर चोदना चाहता था,,,, अंकित की बात सुनकर शर्मा जी की बहू मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली,,,)
इसलिए तो कहती हूं सुमन से ज्यादा मजा मेरी जैसी भाभिया ही दे पाएंगी,,,(, इतना कहने के साथ ही शर्मा जी की बहू अपने ब्लाउस को बिना खोले नीचे से ऊपर की तरफ करने लगी उसकी ब्रा भी साथ में ऊपर सरक रही थी,,,, देखते ही देखते अपने हाथों से ही बिना ब्लाउज खोलें वह अपनी एक बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी च को अपनी ब्लाउज से बाहर निकाल दे जो कि नीचे की तरफ लुभा रहा था शर्मा जी की बहू की हरकत को देखकर वह समझ गया था कि उसे क्या करना है इसलिए अंकित धीरे से आगे बढ़ा और उसे हाथ में लेकर दबाते हुए बिना कुछ बोलेगी उसकी खजूर जैसे निप्पल को अपने मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया उसकी इसी से शर्मा जी की बहू मदहोश होने लगी मत होने लगी उसकी आंखें अपने आप बंद होने लगी और अंकित अपनी हरकत को बढ़ाते हुए दूसरे हाथ को ब्लाउज के ऊपर रखकर ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चूची को दबाना शुरू कर दिया लेकिन अंकित जानता था कि इस तरह से पूरा मजा मिलने वाला नहीं है इसलिए वह कुछ देर तक किसी तरह से मजा लेने के बाद एकदम से गहरी सांस देता हुआ उसकी चूची से अपना मुंह हटाया और अपने हाथों से उसके ब्लाउज का बटन खोलने लगा,,,, शर्मा जी की बहू मदहोश हो चुकी थी मस्त हो चुकी थी उत्तेजना और कुमारी उसकी आंखों में सवार हो चुकी थी क्योंकि महीनों बाद उसे इस तरह का सुख मिल रहा था,,, क्योंकि तकरीबन 8 महीने जैसा समय गुजर गया था उसके पति को बाहर गए, तब से वहां बिस्तर पर अकेले ही करवट बदलकर अपने दिन गुजर रही थी लेकिन आज उसका दिन था आज उसकी मनोकामना पूरी होने वाली थी क्योंकि आज वहां असली मर्द की बाहों में थी असली मर्द के हाथों में खेल रही थी।
देखते ही देखते अंकित उसके ब्लाउज के सारे बटन खोलकर उसकी ब्रा को नीचे से पकड़ कर ऊपर की तरफ कर दिया और उसके दोनों दशहरी आम एकदम से आजाद हो गए शर्मा जी की बहू की बड़ी-बड़ी चूचियों को देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था वह दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियों को पकड़ कर जोर-जोर से दबाने लगा और इस बार अपने होठों को एकदम से उसके लाल-लाल होठों पर रखकर उसके होठों पर रसपान करने लगा अंकित की हरकत से शर्मा जी की बहू भी एकदम मदहोश और व्याकुल हो गई उसके दोनों हाथ अंकित की पीठ पर चली गई और वह भी उसका साथ देते हुए एक दूसरे के मुंह में अपनी जीभ को डालकर मजा लेने लगे,,, अंकित इस खेल का असली खिलाड़ी था भले ही शर्मा जी की बहू शादीशुदा थी लेकिन फिर भी वह अच्छी तरह से समझता था की चुदाई के मामले में शर्मा जी की बहू अनुभव हीन चुदाई के असली सुख सेवा वंचित थे उसे नहीं मालूम था की असली चुदाई किसे कहते हैं इसलिए अंकित अपने काम कला के सारे दांव पेच इधर आजमा लेना चाहता था,,, इसलिए तो उसकी चूचियों पर से हाथ हटाकर वह एकदम से अपने दोनों हाथों को उसके भारी भर के पिछवाड़े पर ले गए और साड़ी के ऊपर से ही उसकी बड़ी-बड़ी गांड को मसलने लगा दबाने लगा उसकी हरकत से, शर्मा जी की बहू के तन बदन में चुदाई का रंग चढ़ने लगा,,,, वह आनंदित होने लगी और वह भी उत्तेजना से अपने दोनों हाथों को अंकित के नितंबों पर रखकर जोर-जोर से दबाने लगी हालांकि इसकी हरकत से अंकित को भी बहुत मजा आ रहा था। दोनों पागलों की तरह एक दूसरे के अंगों को दबोच रहे थे इस दौरान अंकित का खड़ा लंड साड़ी के ऊपर से ही शर्मा जी की बहू की बुर पर ठोकर मार रहा था। जिसका एहसास शर्मा जी की बहू को मदहोश कर रहा था वह जल्द से जल्द अंकित के लंड को अपनी बुर की गहराई में महसूस करना चाहती थी,,,,,, इसलिए वह मादक स्वर में बोली।
ओहहह अंकीत सहहहहह आहहहहहह मुझसे रहा नहीं जा रहा है रे,,,,,,आहहहहहह,,,,, कुछ कर अंकित मैं पागल हो जा रही हूं डाल दे अपने लंड को मेरी बुर में,,,,,(ऐसा कहते हुए शर्मा जी की बहू अंकित के लंड को अपने हाथ से पकड़ ली और साड़ी के ऊपर से ही अपनी बुर वाली जगह पर जोर-जोर से रगड़ने लगी उसका दबाव बनाने लगी.. उसकी हरकत से अंकीत भी मदहोश हुआ जा रहा था,,,,, लेकिन फिर भी इससे भी शर्मा जी की बहू को बर्दाश्त नहीं हो रहा था देखते-देखते वह अपने दोनों हाथों से अपनी साड़ी पड़कर उसे कमर तक उठा दी कमर तक साड़ी उठते ही उसकी आसमानी रंग की चड्डी दिखाई देने लगी क्योंकि आगे से काफी फली हुई थी और एकदम गीली भी हो चुकी थी जो कि उसके मदन रस के बदौलत ही वह भीग गई थी,,,, अपनी चड्डी के ऊपर से ही शर्मा जी की बहू अंकित के लंड को उसके सुपाड़े को जोर-जोर से अपनी बुर वाली जगह पर रगड़ रही थी। उसका गीलापन अंकित को अपने सुपाड़े पर अच्छे तरीके से महसूस हो रहा था। अंकित अभी भी उसकी दोनों चूचियों को बारी-बारी से अपने मुंह में लेकर चूस रहा था उसकी चुसाई करने में उसे बहुत मजा आ रहा था,,,,, फिर देखते ही देखते अंकित अपने एक हाथ को सीधा उसके चड्डी के अंदर डाल दिया और उसकी कचोरी जैसी फुली हुई बुर पर रखकर उसे अपनी हथेली में दबोचने लगा जिससे शर्मा जी की बहू की हालत और ज्यादा खराब होने लगी वह एकदम से मदहोश होने लगी और खुद ही अपनी गांड को गोल गोल घूमा कर अपनी बुर को अंकित की हथेली पर नचाने लगी,,,,, शर्मा जी की बहू के मुख से हल्की-हल्की शिसकारी की आवाज निकल रही थी जिससे पूरा कमरा मदहोशी में डूबा हुआ था,,,, अंकित की हथेली पूरी तरह से चिपचिपी हो चुकी थी अंकित शर्मा जी की बहू की बुर की गहराई और कसाव का जायजा लेना चाहता था इसलिए धीरे से अपनी बीच वाली उंगली को उसमें प्रवेश कराने लगा,,,, अंकित की हरकत से शर्मा जी की बहू एकदम से मचलने लगी। उसकी मदहोशी बढ़ती जा रही थी उसे अपनी जवानी की गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी।
धीरे-धीरे अंकित अपना हुनर दिखाता हुआ अपनी उंगली को पूरा का पूरा उसकी बुर में प्रवेश कर दिया था उंगली के प्रवेश करते ही शर्मा जी की बहू एकदम से मदहोश होने लगी उसे मजा आने लगा ऐसा लग रहा था कि जैसे अंकित ने अपनी उंगली नहीं बल्कि अपना लंड डाल दिया हो,,, और वैसे भी जो औरत पूरी तरह से जवानी से भरी हुई है और रात को करोड़ बदल कर अपनी रात गुजर रही हो ऐसी औरत के लिए तो मर्द की उंगली भी लंड के बराबर होती है,, बुर के अंदर की गर्माहट और कसाव पन महसूस करके अंकित बेहद खुश नजर आ रहा था क्योंकि शादीशुदा होने के बावजूद भी आज उसे कई हुई बुर मिलने वाली थी चोदने के लिए,,, शर्मा जी की बहू की जवानी की धधक और अपनी तड़प देखकर अंकित से सब्र करना मुश्किल हुआ जा रहा था इसलिए वह एकदम से शर्मा जी की बहू को अपनी गोद में उठा लिया वह एकदम से घबरा गई लेकिन तुरंत उसके कंधे का सहारा ले ली उसने यह बात बोली भी कि कहीं गिर मत देना लेकिन अंकित जानता था कि उसे अब क्या करना है वह बिना कुछ बोले उसे कमरे में बिछे हुए नरम-नरम गद्दे पर उसे ले जाकर के पटक दिया,,,, अंकित की हरकत से उसकी साड़ी एकदम कमर तक उड़ गई थी उसकी मोटी मोटी जांघें ट्यूबलाइट की रोशनी में चमक रही थी,,,,, शर्मा जी की बहू की गदराई जवानी और गदराई जांघें अंकित के होश उड़ा रही थी उसे बर्दाश्त करना आप मुश्किल हुआ जा रहा था वह एकदम से बिस्तर के ऊपर झुका और शर्मा जी की बहू की चड्डी को दोनों हाथों से थाम लिया और एक झटके से उसे नीचे की तरफ सरकने लगा जिसमें खुद शर्मा जी की बहू उसकी मदद करते हुए अपनी भारी भरकम गांड को हवा में उठा ली और अंकित अगले ही पल उसके बदन से उसकी चड्डी को अलग कर चुका था।
शर्मा जी की बहू का दिल जोरो से धड़क रहा था क्योंकि अब उसे लगने लगा इसलिए अब उसके बरसों की ख्वाहिश पूरी होने वाली है एक मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में प्रवेश करने वाला है,,,, और ऐसा होना ही था अगर अंकित की जगह कोई और होता तो अब तक उसकी बुर में लंड डालकर झढ़ भी गया होता लेकिन ऐसे ही नहीं औरतें अंकित की दीवानी हो जाती है क्योंकि अंकित को औरत को खुश करने का काम कला अच्छी तरह से मालूम था वह औरत को खुश करने में महारथ हासिल किया था उसका यह हुनर हमेशा औरतों को घुटना टेकने पर मजबूर कर देता था। अंकित बिस्तर के नीचे खड़ा था और शर्मा जी की बहू बिस्तर पर पीठ के बल लेटी हुई थी अपनी दोनों टांगें फैलाएं उसकी गुलाबी बुर एकदमसाफ दिखाई दे रही थी अंकित तो उसकी बुर को देखता ही रह गया था,,,, उसकी कसी हुई बुर की बनावट देखकर कोई कह नहीं सकता था कि यह शादीशुदा है अभी भी एकदम कुंवारी बुर की तरह दिखाई दे रही थी हल्के हल्के बल से सुशोभित उसकी गुलाबी बुर खड़े-खड़े किसी भी मर्द का पानी निकाल देने में सक्षम थी। अंकित से रहा नहीं गया और वह उसकी बुर की तारीफ करते हुए बोला,,,।
वह भाभी क्या बुर हैं तुम्हारी सुमन तो तुम्हारे आगे कुछ भी नहीं है,,,,,।
(अंकित के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ खासकर के अपनी बुर की तारीफ सुनकर शर्मा जी की बहू फुले नहीं समा रही थी,,,,,, वह शर्म के मारे अपनी नज़रें इधर-उधर घूमा ले रही थी नीचे से ढोलक की आवाज लगातार आ रही थी लोगों के हंसने की नाचने गाने की आवाज आ रही थी नीचे का माहौल पूरी तरह से शादी वाला था और ऊपर के कमरे का माहौल शादी के बाद का सुहागरात वाला था,,,, जिसमें आज दुल्हन ननद की भाभी बनी हुई थी और पति मोहल्ले का जवान लड़का था। अपनी जवानी की गर्मी शर्मा जी की बहू से बर्दाश्त नहीं हो रही थी इसलिए वह अंकित से बोली।)
अंकित अब डाल दे अपना लंड मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,।
मुझसे भी रहा नहीं जा रहा है भाभी,,,(ऐसा कहते हुए अंकित घुटनों में फंसी अपनी पेट को नीचे छुपाकर दोनों हाथों से निकाल कर अलग कर दिया कमर के नीचे हो पूरी तरह से नंगा हो चुका था शर्मा जी की बहू को लगने लगा कि अब उसके अरमान पूरे होने वाले हैं और अंकित धीरे-धीरे घुटनों के बाल उसकी दोनों टांगों के बीच पहुंच गया लेकिन शर्मा जी की बहू की सोच के विपरीत अगले ही पर अंकित अपने प्यास होठों को उसकी बुर पर रख दिया और उसे चाटने लगा अंकित की इस हरकत के लिए शर्मा जी की बहू बिल्कुल भी तैयार नहीं थी उसे उम्मीद नहीं थी कि जवान लड़का उसकी बुर की चटाई करेगा जो कि उसकी यह दिली ख्वाहिश थी क्योंकि आज तक उसके पति ने उसे इस तरह का सुख कभी नहीं दिया था। इसलिए मोहल्ले के लड़के से इस तरह का सुख प्रकार शर्मा जी की बहू उत्तेजना और खुशी से गदगद हुए जा रही थी वह एकदम से अपने दोनों हाथ को अंकित के सर पर रखकर उसके मुंह को अपनी बउुर के ऊपर दबाना शुरू कर दी और अंकित भी जितना हो सकता था उतनी अपनी जीत को इसकी गहराई में डालकर उसकी मलाई को चाट रहा था कुछ देर तक अंकित इसी तरह से शर्मा जी की बहू को मदहोश बनाता रहा व्याकुल बनाता रहा वह बिस्तर पर तड़प रही थी छटपटा रही थी अंकित के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए लेकिन अंकित उसे तड़प रहा था असली खेल से वाकिफ कर रहा था और शर्मा जी की बहू भी इस तरह की छटपटाहट और तड़प कभी भी बिस्तर पर महसूस नहीं की थी आज वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी,,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे वह साक्षात कामदेव के हाथों में मदहोश हुए जा रही है उसे यकीन हो चला था कि अंकित कामकला में पूरी तरह से माहिर था।
लेकिन अब शर्मा जी की बहू की मदद कर देने वाली जवानी की चमक में अंकित भी होने लगा था वह भी जल्द से जल्द शर्मा जी की बहू को भोगना चाहता था क्योंकि धीरे-धीरे समय व्यतीत होता चला जा रहा था कोई भी किसी भी समय यहां आ सकता था,,,, इसलिए धीरे से अंकित शर्मा जी की बहू की गुलाबी पर से अपने मुंह को ऊपर की तरफ उठाया उसके हॉट पर उसके मुंह पर उसका मदन रस लगा हुआ था जो कि उसके मुंह से टपक रहा था यह देखकर शर्मा जी की बहू शर्म से पानी पानी होने लगी उसका चेहरा और का लाल हो गया अंकित यह देखकर मदहोश होने लगा और अगले ही पर उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपनी जांघो पर चढ़ा लिया,,, धीरे-धीरे वह अपने मोटे सुपर को शर्मा जी की बहू के नाजुक गुलाबी बुर के अंदर प्रवेश करने लगा जैसे-जैसे लंड अंदर की तरफ आगे बढ़ रहा था वैसे-वैसे शर्मा जी की बहू के चेहरे के भाव बदलते जा रहे थे,,,, शर्मा जी की बहू को भी इस बात का हिसाब से हो रहा था कि वाकई ने उसकी बुर में आज मर्दाना लंड घुस रहा था उसकी हालत खराब हो रही थी उसे दर्द महसूस हो रहा था लेकिन ना तो वह रुकने वाली थी और ना ही अंकित को अपने वाला आधा लंड घुसने के बाद अंकित ने करारा चोट लगाया और अंकित का पूरा का पुरा लंड सडसडाता हुआ उसकी बुर की गहराई में खुशियां उसके बच्चेदानी से टकरा गया और उसके मुंह से चीख निकल गई लेकिन उसकी चीख की आवाज ढोलक की आवाज के बीच दब गई अगर शादी वाला करना होता तो उसके चिखने की आवाज जरूर कोई ना कोई सुन लेता,,, लंड की मोटाई और लंबाई के घुसने का दर्द शर्मा जी की बहू के चेहरे पर एकदम साफ दिखाई दे रहा था,,, लेकिन अंकित यह देखकर हैरान था कि वह बिल्कुल भी उसे रोकने के लिए नहीं कह रही थी शायद यह पल उसके लिए बेहद कीमती था ऐसा मजा उसने जिंदगी में कभी नहीं ली थी इसलिए वह अपने दर्द को पी गई थी इस अद्भुत अवसर को जीने के लिए,,,,।
अंकित पूरा काम कर चुका था उसका पूरा का पूरा लंड उसकी बुर की गहराई में घुस चुका था वह भी हैरान थी क्योंकि वह अपने मन में इस बात की शंका जाता रही थी कितना मोटा और लंबा लंड उसकी बुर में घुस पाएगा कि नहीं लेकिन सब कुछ बढ़िया आराम से हो गया था थोड़ा दर्द झेल लेना जरूर पड़ा था लेकिन उसके बाद सब कुछ आनंद के सागर में गोते लगाने जैसा था अंकित शर्मा जी की बहू की कमर पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था वह उसे चोद रहा था,, कसी हुई बुर में लंड डालने का अपना अलग ही मजा होता है इस बात का एहसास अंकित को भी था इसलिए अंकित के चेहरे पर प्रसन्नता और उत्तेजना के भाव एकदम साफ दिखाई दे रहे थे। अंकित पसीने से तरबतर हो चुका था आखिरकार कोई भी चीज पाने के लिए मेहनत तो करनी पड़ती है,,, लेकिन यह मेहनत रंग ला रही थी अंकित शर्मा जी की बहू पर पूरी तरह से छा चुका था उसे अपनी बाहों में भरकर धक्के लगना शुरू कर दिया था क्योंकि अब समय दोनों के लिए बहुत कम था कुछ देर तक इसी तरह से अंकित शर्मा जी की बहू की चुदाई करता रहा और शर्मा जी की बहू का बदन करने लगा वह करने वाली थी उसके मुख से अजीब अजीब सी आवाज निकल रही थी,,,, और अंकित के धक्के तेज हो गए वह झड़ने लगी थी वह एकदम से अंकित को अपनी बाहों में कस ली थी जिंदगी में पहली बार वह इस तरह का चरम सुख प्राप्त की थी वह एकदम गदगद हुए जा रही थी।
शर्मा जी की बहू एक बार झड़ चुकी थी और अंकित धीरे से अपने लंड को बाहर निकाल दिया था शर्मा जी के बहू को लग रहा था कि काम खत्म हो गया है वह बिस्तर से नीचे उतरकर अपने कपड़े पहन रही थी कि अंकित उसे पकड़कर घोड़ी बना दिया और बोला,,।
कहां जा रही हो भाभी अभी तो मेरा निकला नहीं है,,,।
(यह सुनकर शर्मा जी की बहू हैरान हो गई क्योंकि अभी कुछ देर पहले ही वहां सुमन की चुदाई करके उसे संतुष्ट कर चुका था और एक बार उसे खुद संतुष्ट कर चुका था लेकिन उसका खुद का पानी नहीं निकला था शायद यही असली मर्द की पहचान होती है और वह खुशी-खुशी फिर से घोड़ी बन गई उसकी गोल-गोल बड़ी-बड़ी गांड देखकर अंकित की उत्तेजना बढ़ने लगी और वह एकदम से पीछे से शर्मा जी की बहू की गुलाबी बुर में अपना लंड डाल दिया और अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया और तब तक उसकी चुदाई करता रहा जब तक उसका पानी नहीं निकल गया लेकिन इस दौरान उसका पानी निकालते निकालते दरवाजे पर दस्तक होने लगी थी सुमन बाहर आ चुकी थी क्योंकि दस्तक देते हुए वहां बता रही थी कि वह समान है नहीं तो दोनों घबरा जाते की कही कोई आ तो नहीं गया,,,,, दोनों अपने-अपने कपड़े पहन कर अपने आप को दुरुस्त कर लिए थे शर्मा जी की बहू के चेहरे पर संतुष्टि के भाव एकदम साफ दिखाई दे रहे थे,,,, कपड़े पहन लेने के बाद शर्मा जी की बहू बोली।
दरवाजा खोलो सुमन,,।
(अगले ही पल दरवाजा खुला और सुमन ने शर्मा जी की बहू की तरफ देखकर चुटकी लेते हुए बोली)
वह भाभी तुम्हारा चेहरा तो खिला-खिला दिखाई दे रहा है इसका मतलब है कि आज बहुत मजा ली हो,,,।
तो क्या मेरी लाडो आज तो मजा ही आ गया,,,,(गाल पर चुटकी भरते हुए शर्मा जी की बहू बोली और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,)
अब धीरे से दरवाजा बंद कर दे और नीचे आजा किसी को शक ना होने पाए,,,,,।(इतना कहकर शर्मा जी की बहू नीचे चली गई और थोड़ी देर बाद सुमन और अंकित दोनों मुस्कुराते हुए नीचे आ गए अभी भी हल्दी की रस्म जारी थी और वह दोनों हल्दी की रस्म में शामिल हो गए।