Incest मुझे प्यार करो,,, - Page 46 - SexBaba
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Incest मुझे प्यार करो,,,

सुगंधा अपनी ही हरकत की वजह से काफी उत्तेजना महसूस कर रही थी जिंदगी में पहली बार में किसी जवान लड़कों के सामने अपने अंगों का प्रदर्शन की थी,,,, और वह भी पेशाब करते हुए,,,,,, सुगंधा कभी सोचा नहीं थी कि उसके ही क्लास के लड़के उसके बारे में गंदे ख्यालात रखते हैं,,,, लड़कों की बातों को सुनकर तो खुद उसकी बुर उत्तेजना के मारे कचोरी की तरह फूल गई थी उसे एहसास हो गया कि दुनिया में सारे मर्द चाहे किसी भी उम्र के हो औरतों के बारे में हमेशा गंदे ख्याल ही रखते हैं,,, लेकिन फिर भी बाथरूम के अंदर जो कुछ भी हुआ था बेहद अद्भुत था उसे अनुभव को महसूस करके सुगंधा अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रही थी,,,।

Ankit or uski me ki kalpna



इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि एक औरत को पेशाब करते हुए देखने में मर्द को कितना आनंद आता है क्योंकि वह इस अनुभव से गुजर चुकी थी जिसका ताजा उदाहरण था खुद उसका लड़का जो उसे पेशाब करते हुए बड़े प्यासी नजरों से देखा था उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर नजर टीकाए हुए ना जाने कैसे-कैसे ख्यालात अपने मन में लाता था,,,,, सुगंधा को पूरा यकीन था कि उसका बेटा भी उसके बारे में गांधी कल्पना करके अपने हाथ से ही अपना लंड हिलाकर अपनी गर्मी शांत करता होगा,,, क्योंकि एक औरत को नग्न अवस्था में अर्धनग्न अवस्था में देखने के बाद एक मर्द के मन में किस तरह की हलचल होती है वह अच्छी तरह से जानती थी वह जानती थी कि उसे समय मर्द औरत को चोने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाता है और योग्य रूप से जुगाड़ ना मिलने पर बस एक ही सहारा रहता है अपने हाथ से हिला कर अपनी गर्मी को शांत करना,,,।

Sugandha or uska beta



क्योंकि ऐसे ही ख्यालात बाथरूम के दरवाजे के पीछे छुपकर उसे पेशाब करते हुए देख रहे दोनों लड़कों के मन में भी आ रहा था,,,, लेकिन वह दोनों ऐसा नहीं कर पाए थे,,, क्योंकि मुठ मारने की वह योग्य जगह नहीं थी,,, लेकिन फिर भी उन दोनों की मंशा जानकर ही सुगंधा की बुर से मदन रस टपकने लगा था और वह अपने मन में सोचने लगी थी कि उसके बेटे को छोड़कर बाकी सभी लड़के मौका मिलने पर औरत की चुदाई करने से पीछे नहीं आते लेकिन उसका बेटा इतना मौका मिलने के बावजूद भी अभी तक आगे नहीं बढ़ पाया था लेकिन इस कारण को भी अच्छी तरह से समझ रही थी वह जानती थी कि,,, अगर उसके लड़के के सामने उसकी जगह कोई और होती तो शायद उसका बेटा भी दूसरे लड़कों की तरह ही अपने कदम आगे बढ़ाने में बिल्कुल भी नहीं कतराता ,,,, लेकिन एक मां होने के नाते उसका बेटा इस रिश्ते के लिए आज से आगे बढ़ने से कतरा रहा था झिझक रहा था और यही चीज उसकी दूर करनी थी,,,।





फिर भी बाथरुम के अंदर उसे बहुत ही अद्भुत आनंद की प्राप्ति हुई थी,,, गैर लड़कों के सामने और वह भी अपने ही विद्यार्थियों की आंखों के सामने अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी नंगी गांड दिखाते हुए पेशाब करने के लिए बैठ जाना यह भी काफी हिम्मत की बात है और शायद सुगंधा खुले तौर पर अपने विद्यार्थियों के सामने ऐसा नहीं कर पाती लेकिन उसके और उसके विद्यार्थियों के बीच एक लकड़ी का दरवाजा था और इसीलिए वह आराम से अपनी हरकत को अंजाम दे दी,,वरना वह ऐसा नहीं कर पाती भले ही अपने बेटे के सामने वह अपनी गांड दिखाते हुए पेशाब करने बैठ जाती थी लेकिन दूसरे लड़कों के सामने वह ऐसा कभी नहीं करती,,,। खैर इस बात से उसे इतना तो पता चल गया कि वह जिन लड़कों को पढ़ाती है वही लड़के उसे चोदने के लिए व्याकुल है,,,,।

Sugandha ki jabardast chudai



जैसे तैसे करके दो-तीन दिन गुजर गए,,, लेकिन अभी तक अंकित अपनी मां के लिए पैंटी नहीं खरीद कर लाया था,,, और वो भी इसलिए कि उसे समय नहीं मिल रहा था क्योंकि वह अपनी मां के लिए पेटी खरीदने के लिए पास के बाजार नहीं बल्कि दूर के मार्केट जाना चाहता था ताकि उसे कोई वहां पहचान वाला ना हो क्योंकि इस बात का डर उसे था कि कहीं बाजार में कोई उसे पेंटी खरीदना हुआ देख लेगा तो क्या सोचेगा,,, सुगंधा अपने बेटे से पेंटी के लिए पूछना चाहती थी लेकिन उसे योग्य समय नहीं मिल रहा था क्योंकि तृप्ति साथ में ही रहती थी और जब तृप्ति साथ में नहीं रहती थी तो अंकित नहीं रहता था,,, इसलिए वह अभी अपनी पेंटी के बारे में पूछ नहीं पाई थी लेकिन जब भी वह घर पर आती थी तो अपनी पेंटिं को निकाल कर ड्रोवर में रख देती थी क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा कभी भी उसकी पेंटिं के बारे में पूछ लेगा तो उसे साड़ी उठाकर दिखाना पड़ेगा और वह नहीं चाहती थी कि उसके बेटे को इस बात का पता चले कि उसके पास पहनने के लिए पर्याप्त मात्रा में पहनती है इसलिए तो वह अंकित की हाजिरी में अपनी पैंटी को हमेशा निकाल देती थी और जब बाहर जाती थी तब पैंटी पहन लेती थी,,,,।



रात के तकरीबन 10:00 बज रहे थे और टीवी पर कोई रोमांटिक फिल्म चल रही थी कमरे में दोनों भाई बहन और सुगंधा बैठी हुई थी तीनों फिल्म देख रहे थे,,,,,, एक तरफ सोफे पर मां बेटे दोनों बैठे हुए थे एक ही सोफे पर बैठे होने की वजह से सुगंधा के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी,,, एक तो फिल्म भी बड़ी रोमांटिक थी इसलिए दोहरा सुरूर छा रहा था,,, सुगंधा के मन में हरकत करने को सुझ रही थी लेकिन,, तृप्ति भी वहीं पर मौजूद थी इसलिए वह ऐसा वैसा कुछ करने से डर रही थी लेकिन तभी थोड़ी देर बाद त्रप्ती यह कहकर वहां सेउठकर चली गई कि उसे बहुत नींद आ रही है उसके जाते ही सुगंधा का चेहरा खुशी के मारे खिलने लगा,,, यही हाल अंकित का भी था अंकित भी फिल्म में चल रहे गरमा गरम चुंबन दृश्य की वजह से गर्म हो चुका था,,,,।



फिल्म हॉरर फिल्म लेकिन हॉरर से ज्यादा उसमें उत्तेजक दिल से थे जिन्हें देखने में मां बेटे दोनों को आनंद आ रहा था,,, फिल्म के हीरो हीरोइन का चुंबन दृश्य उनका आलिंगन करना हीरो का पतली कमर पर हाथ रखकर उसे अपनी तरफ खींचना यह सब दोनों मां बेटे को मदहोश किए जा रहा था,,, इस तरह के दृश्य देखकर सुगंधा की तो सांसे ऊपर नीचे हो रही थी अंकित की भी हालत दयनीय होती जा रही थी उसके पेट में भी तंबू बन चुका था,,,, अरे लेकर दोनों मां बेटे एक दूसरे को देख ले रहे थे और वापस टीवी की तरफ देखने लग जाते थे,,,।

इसी बीच सुगंधा सामने पड़े टेबल पर अपनी एक टांग उठा कर रखी और फिर उसके ऊपर दूसरी टांग भी रख दी और इसी के साथ वह अपनी साड़ी को थोड़ा सा घुटनों तक खींच दी वह जान बुझकर इस तरह की हरकत कर रही थी वह अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी,,, और अपनी मां की हरकत पर अंकित की नजर अपनी मां पर गई थी,,, तो वह गहरी सांस लेते हुए फिर से टीवी की तरफ देखने लगा था,,, गर्मी का महीना पंखा तेजी से चल रहा था लेकिन फिर भी इतनी ठंडक नहीं थी और इसी का फायदा उठाते हुए सुगंधा फिर से अपने दोनों हाथों से अपनी साड़ी पड़कर उसे घुटनों के ऊपर तक खींच दी और उसकी मोटी ताजी जांघ एकदम से दिखने लगी,,, और ऐसा करते हुए सुगंधा बोली,,,।

पंखा इतनी तेज चल रहा है फिर भी कितनी गर्मी लग रही है,,,,।

तुम सही कह रही हो मम्मी मुझे भी बहुत गर्मी लग रही है,,,,( और ऐसा कहते हुए अंकित अपने मन में बोला कि अगर ज्यादा गर्मी लग रही है तो अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो जाओ,,,)

क्या करें कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,,,(तभी फिल्म में फिर से चुंबन दृश्य शुरू होने लगा इस बार चुंबन दृश्य को देखकर सुगंधा के होठों पर मुस्कान तैरने लगी,,,और वह अंकित से बोली,,,)

देख रहा है अंकित दोनों किस तरह से चुंबन चाटी कर रहे हैं,,,,,(सुगंधा जानती थी कि इस तरह की बात अपने बेटे से नहीं किया जाता लेकिन फिर भी वह अपने मां पर काबू नहीं कर पा रही थी इसलिए वह जानबूझकर अपने बेटे से इस तरह की बात की थी उसका बेटा भी अपनी मां की बात सुनकर बोला,,,)

तुम सही कह रही हो मम्मी जब से फिल्म शुरू हुई है तब से न जाने कितनी बार इस तरह का दृश्य आ चुका है कहानी से ज्यादा तो यही सब भरा हुआ है,,,, देखो देखो कैसे दोनों चुंबन कर रहे हैं मैं तो पहली बार इस तरह से देख रहा हूं,,,,(फिल्म में हीरो हीरोइन दोनों एक दूसरे के मुंह में मुंह डालकर एक दूसरे की जीभ को मुंह में डालकर चुंबन चाटी कर रहे थे,,,,)

मैं भी तो पहली बार देख रहीहूं,,,(ऐसा कहते हुए सुगंधा टेबल पर अपने दोनों टांगों को हल्के से खोल दी और उसकी साड़ी एकदम जांघों के ऊपर तक आ गई जहां से उसकी जांघों का कटाव तक दिखने लगा था,,, जिस पर अंकित की नजर बार-बार चली जा रही थी अब वहां फिल्म से ज्यादा अपनी मां की दोनों टांगों के बीच नजर गड़ाए हुए था लेकिन अभी उसे अपनी मां की बुर नजर नहीं आई थी लेकिन फिर भी वह इसी कोशिश में था की मां की दूर नजर आ जाती है क्योंकि फिल्म में बहुत कुछ था लेकिन हीरोइन के अंगों को खुलकर नहीं दिखाया था वह कपड़े में ही थी,,, इसीलिए फिल्मों के गरमा गरम दृश्य को देखकर उसे अपनी मां की बुर देखने की लालसा जाग गई,,,,।

अौर सुगंधा अपने बेटे की तड़प को समझ गई थी,,, लेकिन जानबूझकर साड़ी को अब थोड़ा सा और ऊपर नहीं ले रही थी क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा क्या देखना चाह रहा है और इसीलिए वह उसे तड़पाना चाहती थी उसके बदन में उत्तेजना की आग जलाना चाहती है उसे विवस करना चाहती थी,,, और इसीलिए वह अपनी दोनों जांघों पर अपनी हथेली रखकर हल्के से सहलाते हुए बोली ,,।)

मुझे नहीं लगता था की फिल्मों में इस तरह का भी नजर होता होगा आज तक तुम्हें साफ सुथरी फिल्म देखी आई हूं लेकिन पहली बार इस तरह की फिल्म देख रही हूं,,,(सुगंधा जानबूझकर अपनी बातों को आगे बढ़ा रही थी वह जानबूझकर अंकित से इस तरह की बातें कर रही थी वह चाहती तो अपने बेटे से यह बता सकती थी कि वह इस तरह की भी फिल्म देख चुकी है जिसमें मर्द और औरत दोनों नंगे होकर चुदाई का खेल खेलते हैं लेकिन वह इस तरह की बात अपने बेटे को नहीं बताना चाहती थी क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि उसके बेटे को पता चले कि उसकी मां गंदी फिल्म भी देख चुकी है,,,,और अपनी मां की बात सुनकर अंकित बोला,,)

मम्मी क्या ईन दोनों को खराब नहीं लगता होगा जिस तरह से चुंबन कर रहे हैं एक दूसरे की जीभ एक दूसरे के मुंह में डाल रहे हैं इससे तो एक दूसरे का थुक एक दूसरे के मुंह में चला जाता होगा,,,।

अरे मजा ही आता होगा तभी तो कर रहे हैं वरना ऐसा थोड़ी ना करते,,,,।

(दोनों के बीच बड़े आराम से इस तरह की बातें हो रही थी इसलिए मौका देखकर अंकित थोड़ा हिम्मत दिखा कर बोला)

अच्छा मम्मी बुरा ना मानो तो एक बात कहूं,,,।

बोल क्याबात है,,,।

क्या तुम भी इस तरह से चुंबन कभी की हो,,,।

(अंकित की बात सुनकर सुगंधा के तन बदन में हलचल होने लगी उसके मन में प्रसन्नता के भाव जगाने लगे क्योंकि उसका बेटा बड़ी अंदरूनी बात पूछ रहा था और उसकी हिम्मत के लिए सुगंधा मन ही मन प्रसन्न हो रही थी और उसके सवाल का जवाब देते हुए बोली,,,)

नहीं ऐसा कभी कि नहीं हूं,,,, तेरे पापा कभी इस तरह से चुंबन किए ही नहीं,,,,

(अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था क्योंकि उसके सवाल का जवाब उसकी मां बढ़िया आराम से दे रही थी दोनों के बीच ऐसा लग रहा था की दूरियां खत्म होती जा रही है दोनों के बीच से पर्दे उतरते जा रहे हैं और ईसी बीच बार-बार सुगंधा अपनी दोनों जांघों पर अपनी हथेली को जोर से दबोच लेती थी तो कभी शपथ लगा देती थी ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई पहलवान इस तरह की हरकत करके दूसरे पहलवान को अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है या उसे चुनौती दे रहा है और यह एक तरह से सुगंधा की तरफ से अपने बेटे के लिए आमंत्रण और चुनौती दोनों ही थी लेकिन फिर भी अंकित अपनी मां के सारे को समझ नहीं पा रहा था अगर उसकी जगह शायद कोई और होता राहुल ही होता तो शायद अब तक उसकी दोनों टांगों के बीच घुटनों के बल बैठकर उसकी बुर को चाट रहा होता,,,, अभी दोनों के बीच गरमा गरम बरता पी कोई और मोड लेकर इससे पहले ही घर के पीछे कुछ गिरने की आवाज आई और दोनों एकदम से चौक गए,,,,।

पल भर के लिए सुगंधा को लगा कि कहीं कोई चोर तो नहीं है क्योंकि पीछे एकदम खुली जगह है एकदम अंधेरा या अंधेरा इसलिए वह जल्दी से अपनी साड़ी को व्यवस्थित करके सोफे पर से उठकर खड़ी हो गई,,, अंकित भी थोड़ा चौकन्ना हो हो गया था क्योंकि उसे भी ऐसा लगा कि कहीं कोई आ तो नहीं रहा है इसलिए वह भी जल्दी से उठकर खड़ा हो गया था और अपनी मां से बोला,,,)

कहीं कोई है तो नहीं मम्मी,,,।

मुझे भी ऐसा लग रहा है चलकर देखना पड़ेगा,,,, तू यही रूक में देखती हूं,,,,

नहीं अकेले जाना ठीक नहीं है मैं भी चलता हूं,,,,,।

हाथ में वह कोने में पड़ा मोटा डंडा ले ले,,(उंगली से कोने में पड़े डंडे की तरफ इशारा करते हुए सुगंधा बोली,,, और इतना कहने के साथ ही टीवी को बंद कर दी,,,,
 
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