Incest मुझे प्यार करो,,, - Page 83 - SexBaba
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Incest मुझे प्यार करो,,,

सुगंधा आज अपने बेटे को नहला रही थी,,,घर के पीछे एक अद्भुत और मादकता से भरा हुआ नजारा देखने को मिल रहा था लेकिन इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए मां बेटे के सिवा तीसरा वहां कोई नहीं था,,, अंकित केतन बादल में उत्तेजना की लहर हिलोरें मार रही थीवह पूरी तरह से मादकता के नशे में डूबता चला जा रहा था वह इस समय इसलिए नहीं खुश था कि उसकी मां उसे आज बरसों के बाद नहला रही थी बल्कि इसलिए खुश था कि यह खूबसूरत औरत उसे अपने हाथों से नहलारही थी और वह खूबसूरत औरत कोई और नहीं उसकी खुद की मां थी जिसके खूबसूरत बदन को देखकर वह हर बार उत्तेजित हो जाता था,,, आज वही खूबसूरत औरत की हथेलियां को अपने बदन पर महसूस करके वह उत्तेजना से फुला नहीं समा रहा था,,, उसकी उत्तेजना मदहोशीतब और ज्यादा बढ़ गई जब उसे एहसास हुआ कि उसकी मां की बड़ी-बड़ी चूचियां उसके सर पर अपना वजन बढ़ा रही थी,,,यह एहसास ही उसे पूरी तरह से मदहोश किए जा रहा था वह पागल हो जा रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें।





ऐसा नहीं था कि अनजाने में सुगंधा की बड़ी-बड़ी चूचीया उसके बेटे के सर पर दबाव बढ़ा रही थी वह ऐसा जानबूझकर कर रही थी अपनी चूचियों के भारीपन का एहसास वह अपने बेटे को करना चाहती थी वह दिखाना चाहती थी कि उसकी खूबसूरत बड़ी-बड़ी चूचियां उसके सर पर है,,,,,,सुगंधा इस तरह से अपने बेटे के पेट पर साबुन लगा रही थी जिसके झाग में वह पूरी तरह से डुबती चली जा रही थी,,, साबुन लगाते समय भी सुगंधा का ध्यान अपने बेटे के अंडर बियर में बने तंबू पर टिकी हुई थी,,,जिसमें उसका हथियार पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा था और अपने होने का एहसास अंडर बियर के बाहर तक करा रहा था,,, सुगंधा के मुंह में पानी आ रहा था,,,,वह अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड को अपने हाथों से पकड़ना चाहती थी उसे पर साबुन लगाना चाहती थी और उसे अपने मुंह में लेकर उसकी जी भरकर चुसाई करना चाहती थी,,,, उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थीठंडे ठंडे पानी से नहाने के बावजूद भी उसे अपने बदन में गर्मी का एहसास हो रहा था,,,वह साबुन को वापस पीठ पर ले जाकर के रगड़ रगड़ कर अपने बेटे की पीठ पर साबुन लगा रही थी,,, और साबुन लगाते हुए बोली,,,।

कैसा लग रहा है अंकीत तुझे आज मेरे हाथों से नहा कर।



सच कहूं तो ऐसा लग रहा है कि जैसे आज मेरा बचपन फिर से लौट आया हो,,,, आज बरसों के बाद तुम्हारे हाथों से नहाने में मुझे बहुत मजा आ रहा है,,,।

तो इसमें क्या हो गया तू कहे तो मैं रोज तुझे अपने हाथों से नहला दूं क्योंकि तू मेरे लिए आज भी वही छोटा सा अंकित है जिसे अपने हाथों से नंगा करके में नहलाती थी,,,(सुगंधा जानबूझकर नंगा शब्द पर भर देते हुए बोल रही थी और इस शब्द का असर अंकित पर भी पढ़ रहा था वह एकदम से अपनी मां की बात सुनकर बोला,,,)

पहले में और अब में बहुत फर्क हो चुका है अब तो मुझे नंगा करके नहीं नहीं ला सकती क्योंकि अब मैं बड़ा हो गया हूं,,,(और मेरा लंड भी बड़ा हो गया है अपने मन में ही इस शब्द को वह बोला उसकी मां उसकी बात सुनकर बोली,,)

मैं जानती हूं तू अब बड़ा हो गया है लेकिन एक मां के लिए उसका बेटा हमेशा छोटा ही होता है समझ रहा है ना तू,,,,,(लेकिन तेरा लंड अब छोटा नहीं रहा वह मेरी बुर में घुसकर खलबली मचाने के लायक हो गया हैइस बात का सुगंधा अपने मन में बोलकर मुस्कुरा रही थी क्योंकि अपनी बेटी के सामने इस तरह की बात एकदम से खुले शब्दों में नहीं बोल सकती थी,,,, अपनी मां की बात सुनकर अंकित बोला,,,)



मुझे मालूम है मां के लिए उसका जवान बेटा भी छोटा सा बच्चा ही होता है लेकिन वक्त के साथ बेटे मे बहुत से बदलाव आ जाते हैं,,,।

कैसे बदलाव,,,(अपने बेटे की बात को वह समझ रही थी इसलिए एकदम से तपाक से बोली,,, और लगातार उसकी पीठ पर साबुन लगा रही थी।)

अरे बहुत तरह के बदलाव आ जाते हैं तुम्हें तो मालूम ही है की उम्र के साथ-साथ शरीर भी बढ़ने लगता है एकदम मेरी तरह हो जाता है,,,,(वैसे तो अंकित भी अपनी मां के सामने बोल देना चाहता था कि शरीर के साथ-साथ लंड भी बड़ा हो जाता है लेकिन ऐसा कहने में उसे डर लग रहा था,,,,)

वह तो मैं अच्छी तरह देख रही हूं एकदम मर्द बन चुका है तो मर्द की तरह गठीला कसरती बदन हो चुका है,,,(मर्द शब्द बोलने में सुगंधा की उत्तेजना बढ़ जाती थी और उसकी बुर उत्तेजना के मारे फुलने पिचकने लगती थी।)

अब कसरत करता हूं तो शरीर तो मजबूत बनेगा ही ना,,,,।

सच में तेरा बदन एकदम आकर्षक है सच पूछो तो औरतों को मर्द का कसरती बदन ही आकर्षक लगता है,,,।

क्या तुम्हें भी ऐसा शरीर अच्छा लगता है,,,।

मैं बोली तो हर एक औरत को अच्छा लगता है मुझे भी अच्छा लगता है मरियल सा पतला सा दुबला सा शरीर औरत को थोड़ी अच्छा लगता है,,,।

बात तो सही है जैसे हम मर्दों को औरत का गदराया बदन आकर्षित करता है,,,(अंकित एकदम से बेशर्मी दिखाते हुए बोल गया था उसकी बात सुनकर सुगंधा मन ही मन खुश हो गई थी लेकिन फिर भी जानबूझकर अनजान बनते हुए वह अपने बेटे से बोली,,,)

गदराया बदन में कुछ समझी नहीं,,,।





अरे मेरा मतलब है कि तुम्हारे जैसा बदन भरा हुआ,,,,तुम्हारे जैसी औरत हर एक मर्द को अपनी तरफ आकर्षित कर सकती है,,,,(अंकित हिम्मत दिखाते हुएअपनी मां को एक औरत की शक्ल दे रहा था उससे ऐसी बात कर रहा था मानों जैसे उसका बेटा ना हो कर वह उसका प्रेमी हो और यही बात सुगंधा को अच्छी लग रही थी वह अपने बेटे की बात सुनकर प्रसन्न हो रही थी,,,, अपने बेटे की बात सुनकर वह एकदम से खुश होते हुए बोली।।)

क्या सच में मेरा बदन एकदम गदराया हुआ है,,,,!

तो क्या,,,?

लेकिन तू यह शब्द कहां से सीखा,,, गदराया,,,,(कंधों पर साबुन लगाते हुए वह बोली,,,)

वही सुबह जब अलमारी साफ करते हुए किताब मिली थी उसी में इस तरह के शब्द का प्रयोग किया हुआ था,,, गराया बदन ,,,,गदराया जिस्म,,, ग़दराई घोड़ी,,,,इस तरह के शब्द में पहली बार पढ़ रहा था किताब में पहले तो मुझे समझ में नहीं आया इन शब्दों का मतलब क्या होता है,,,।

फिर तुझे कैसे पता चला कि यह शब्द औरत के बदन के लिए उपयोग किया जाता है,,,।

क्योंकि इस तरह के शब्द के सामने ही छोटे-छोटे चित्र बने हुए थे और उन चित्रों मेंतुम्हारी जैसी ही औरत थी उसका भी बदन तुम्हारे जैसा ही था मैं समझ गया कि इस तरह के शब्दों का प्रयोग इस तरह की औरतों के लिए किया जाता है,,,,।(उत्तेजना के मारे अंकित गहरी सांस लेते हुए बोला उसकी बात सुनकर सुगंधा मंद मंद मुस्कुरा रही थी उसे बहुत अच्छा लग रहा था अपने बेटे के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर फिर वह भी गरम आहे भरते हुए बोली,,,)



चलो उस गंदी किताब से कुछ तो सीखने को मिला तुझे,,,,।

तुम सच कह रही हो मम्मी वह गंदी किताब एकदम जादुई किताब की तरह है,,,,

जादुई किताब में कुछ समझी नहीं,,,,।

अरे एक बार पढ़ना शुरू करो तो बिना पढ़े मन नहीं मानता,,,।

तेरा भी मन नहीं मान रहा था क्या,,,?

अब क्या करूं किताब ही कुछ ऐसी थी मेरी जगह कोई भी होता तो उसकी भी यही हालत होती,,,।

बिल्कुल तेरे जैसे ही तेरे पिताजी की भी हालत हुई थी तेरे पापा भी सारी रात जागकर वह किताब पढे थे,,,,।

(सुगंधा एक बार फिर से अपने बेटे के सर पर अपनी चुचियों का भार देकरउसके पेट पर साबुन लगाने लगी थी और उसके पेंट में बने तंबू को देख रही थी जिसकी हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी,,, ऐसा लग रहा था कि अंकित का लंड चड्डी फाड़ कर बाहर आ जाएगा,,,)

क्या कह रही हो मम्मी क्या सच में,,,।

हां मुझे तो नहीं मालूम मैं तो सो गई थी सुबह तेरे पापा ही बताएं की सारी रात जाग कर वह किताब खत्म किए थे,,,, इसीलिए तो उनकी याद के तौर पर वह किताब रखे रह गई,,,,,, अच्छा चल अब खड़ा हो जा तुझे ठीक से साबुन लगा देती हुं,,,,,,।

(अपनी मां की बात सुनते ही अंकित अपनी जगह पर उठकर खड़ा हो गया और सुगंधा ठीक उसके पीछे खड़े होकर उसके बदन पर साबुन लगाने लगी उसे इस तरह से पीछे खड़े होकर साबुन लगा रही थी मानो जैसे उसे पूरी तरह से अपनी बाहों में भर ली हो,,,उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां अंकित की पेट पर रगड़ खा रही थी जिसका एहसास अंकित के तन बदन में आग लग रहा था उसकी हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी अपनी मां की हरकत पर उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह अपने आप पर काबू नहीं कर पा रहा था मन तो उसका कर रहा था कि अपनी मां की आंखों के सामने चड्डी में से अपने लंड को बाहर निकाल ले और जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दे,,,, लेकिन बड़ी मुश्किल से वह अपनी भावनाओं पर काबू किए हुए था।





सुगंधा जानबूझकर अपने बेटे को पूरी तरह से उत्तेजित कर रही थी अपनी चूचियां जो की पेटीकोट में कैद थी जिस पर पेटिकोट की डोरी बंधी हुई थी उस अधनंगी चूची को अपने बेटे की पीठ पर रगड़ रगड़ कर उसके अरमानों को जगा रही थी,,, और उसके अरमान मचल भी रहे थे,,,एक बेटा होने के नाते वह अपनी मां के साथ इस तरह की हरकत करने से अपने आप को रोक रहा था अपनी भावनाओं पर काबू किए हुए था अगर उसकी मां की जगह कोई और औरत होती तो अब तक शायद उसका मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में घुस गया होता,,,, लेकिन फिर भी जो कुछ भी हो रहा था वह मां बेटे दोनों के सब्र के बांध को तोड़ने के लिए काफी था,,, लेकिन मां बेटे दोनों जिस तरह से अपनी भावनाओं पर अपनी उत्तेजना परअपनी जरूरत पर काबू किए हुए थे वह बेहद काबिले तारीफ थी और शायद इसी में अत्यधिक आनंद की प्राप्ति भी हो रही थी वरना अब तक दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो चुका होता तो शायद इस तरह का आनंद उन्हें प्राप्त नहीं होता या फिर इस तरह के कामुक खेल में उन्हें इस तरह का आनंद कभी नहीं मिलता।सुगंधा धीरे-धीरे अपने बेटे के बदन पर साबुन लगाकर पूरी तरह से उसे झाग से नहला दी थीऔर खुद उसकी पीठ पर अपनी चूची रगड़ रगड़ कर अपने बदन पर भी अपने बेटे के बदन का झाग लगाकर मस्त हो रही थी,,,,।



अब कैसा लग रहा है बेटा,,,?

पूछो मत मम्मी बहुत अच्छा लग रहा है क्या बचपन में भी तुम इसी तरह से मुझे नहलाती थी,,,।

नहीं अब थोड़ा नहलाने का तरीका बदल गया है क्योंकि अब तु बड़ा हो गया है,,,,(ऐसा कहते हुए अपने बेटे के तंबू की तरफ देखने लगी,,,,, अंकित अपनी मां के कहने के मतलब को समझ रहा था,,, वह जानता था कि दोनों के बीच एक पतली सी मर्यादा की रेखा पर हैऔर उसे समझ में नहीं आ रहा था कि ना जाने यह मर्यादा की रेखा कितनी मजबूत है कितना कुछ होने के बावजूद भी वह टूट नहीं रही है बस उसके टूटने की देरी बाकी दो जिस्म एक जान हो जाते ,,,, अपनी मां की बात सुनकर अंकित मदहोश होता हुआ बोला,,,)

तुम्हारे इस तरीके में मुझे बहुत मजा आ रहा हैकाश जिंदगी भर तुम इस तरह से मुझे नहलाती तो नहाने का मजा ही कुछ और होता,,,।

सच कह रहा है रे तूमुझे भी ऐसा ही लग रहा है कि काश में जिंदगी भर तुझे अपने हाथों से नहलाती तू भी मुझे अपने हाथों से साबुन लगा लगा कर नहलाता तो कितना मजा आता,,,।

तृप्ति के आने तक ऐसा हो सकता है हम दोनों एक दूसरे को नहला सकते हैं,,,।



(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा मुस्कुराने लगी वह जानती थी कि उसका बेटा अच्छी तरह से जानता है कि इस तरह नहलाना धुलानाकिसी तीसरी के सामने नहीं कर सकते और तृप्ति तो उसकी बहन थी उसकी बेटी थी,,भला उसकी आंखों के सामने एक मां बेटा इस तरह के हालात में कैसे उपस्थित हो सकते थे,,, और वह भी एक साथ नहाने के लिए,,, अपने बेटे की बात सुनकर पूरी तरह से उसे अपनी बाहों में कसते हुए साबुन लगाने के बहाने,,,, वह अपने बेटे के नितंबों पर अपनी बुर वाला हिस्सा एकदम से सटा दी,,, अपनी मां की ही हरकत से अंकित पूरी तरह से गर्म हो गया,,,,, और सुगंधा उसकी मोटी मोटी जांघो तक अपना हाथ ले जाकर के उसे साबुन लगाते हुए बोली,,)

बिल्कुल ठीक कह रहा है तू त्रप्ति के आने तक हम दोनों एक दूसरे को इसी तरह से नहला सकते हैं,,,, वैसे मैं साबुन तो ठीक से लगाई हुं ना तु इसी तरह से नहाता है ना,,,।

हां लेकिन थोड़ा सा रह गया है लाओ में साबुन लगा देता हूं,,,(अपनी मां की बात सुनकर वह थोड़ा सा विचार करने के बाद बोला उसके मन में गुदगुदी हो रही थी वह इतना कहते हुए बेहद उत्तेजना का अनुभव कर रहा था क्योंकि उसके मन में अब कुछ और चल रहा था,,,,)

अरे कहां रह गया है मुझे तो बता मुझे तो नहीं लग रहा है कि कहीं साबुन लगाना रह गया हो,,,,(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा ठीक उसके सामने जाकर खड़ी हो गई और इधर-उधर देखने लगी,,,)



अरे रहने दो ना मैं लगा देता हूं,,,(साबुन के लिए हाथ बढ़ाते हुए मुस्कुराते हुए अंकित बोला उसके चेहरे पर शर्म की लकीरें साफ दिखाई दे रही थी,,, उसके चेहरे को देखकर सुगंधा समझ गई कि कुछ तो बात है इसलिए वह फिर से बोली,,,)

अरे क्या बात है मुझे तो बताकहां रह गया है साबुन लगाना में लगा देता हूं और वैसे भी आज मैं ही तुझे नहलाऊंगी,,,,।

मैं मना थोड़ी ना कर रहा हूं लेकिन लाओ में साबुन लगा लूं,,,,,।

देख अब मुझे अच्छा नहीं लग रहा है,,, बता दे कहां साबुन लगाना रह गया है जहां तू अपने हाथ से लगाना चाहता है,,,(बार-बार सुगंधा की नजर अपने बेटे के चड्डी में बने तंबू पर चली जा रही थी वाकई में उसके तंबू का आकार ऐसा लग रहा था थोड़ा और बढ़ चुका था जिसे देखकर बार-बार सुगंधा की बुर पानी छोड़ रही थी।अंकित जी अपनी चड्डी में बने तंबू को अपनी मां की नजर से छुपाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रहा था ऐसा लग रहा था कि वह जानबूझकर अपनी मां की नजर को अपनी चड्डी के अंदर तक लाना चाहता था,,,इसलिए तो रह रह कर वह अपनी कमर को हल्का सा गोल-गोल घुमा दे रहा था जिसके चलते उसके चड्डी में बना तंबू लहराने लगता था,,,, अपनी मां की बात सुनकर वह शर्माने का नाटक करते हुए बोला,,,)

क्या बोलूं कैसे बोलूं मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है मुझे थोड़ा शर्म महसूस हो रहा है,,,।

देख मेरे सामने शर्माने की जरूरत तुझे बिल्कुल भी नहीं है इसलिए बता कहां साबुन लगाना रह गया है,,,,।





चड्डी के अंदर,,,(अंकित एकदम से बोल पड़ा)मुझे वहां भी सफाई पसंद है क्योंकि अगर वहां साबुन लगाकर अच्छे से साफ ना करो तो खुजली होने लगती है,,,,।

ओहहहह यह बात है,,,, बरखुरदार को सफाई पसंद है,,,, तू सच में तेरे बाप पर ही गया है,,,,।

ऐसा क्यों,,,?

क्योंकि तेरे पापा को भी सफाई पसंद थी वह भी चड्डी में हाथ डालकर साबुन लगा लगा कर साफ करते थे,,,,।

(अपनी मां की आवाज सुनकर अंकित मजाकीया अंदाज में बोला,,,)

तुम देखती थी मम्मी पापा को नहाते हुए,,,,।

तो इसमें कोई बड़ी बात थोड़ी थी ज्यादातर हम दोनों साथ में रहते थेक्योंकि सब कोई बच्चे नहीं थे और हम दोनों घर पर अकेले ही रहते थे इसलिए नहाते समय में कपड़े धोती थी और वह नहाते थे वह मुझे देखते थे मैं उन्हें देखती थी,,,(सुगंधा जानबूझकर यह बात बोली थी,,,,, वह यह जताना चाहती थी की नहाते समय उसके और उसके पति में कितना खुलापन था,,,, और फिर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) तभी तो आज तेरे साथ नहा कर मुझे तेरे पापा याद आ गए,,,, अच्छा हुआ तु बता दिया,,,, ला मैं साबुन लगा देती हूं,,,,,





( अपनी मां की बात सुनक अंकित के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी वह मदहोश होने लगा वह जानता था कि उसकी मां क्या कह रही थी उसका ऐसा कहने का मतलब था कि उसकी चड्डी में हाथ डालकर साबुन लगाना जिसमें उसकी मां की हथेलियां का स्पर्श उसके लंड पर भी हो सकता है यह सोचकर ही अंकित का लंड उत्तेजना के मारे ठुनकी मारने लगा,,,, और फिर भी जानबूझकर अपनी मां को ऐसा न करने के लिए बोला,,,)

रहने दो मम्मी में लगा लेता हूं वहां पर लगाना ठीक नहीं है,,,।

क्यों ठीक नहीं है,,,! बचपन में मैं तेरे पूरे बदन में साबुन लगा कर तुझे नहलाती थी,,,।

फिर वही बात मैं फिर से कह रहा हूं की बचपन की बात कुछ और थी अभी तुम वहां पर अपने हाथ से साबुन नहीं लगा सकती,,,,।

क्यों नहीं लगा सकती तो तब भी मेरे लिएवही अंकित था और आज भी मेरे लिए वही छोटा सा अंकित ही है मुझे मत सीखा मैं जानती हूं कि तेरा अब वह बड़ा हो गया है,,,(चड्डी में बने तंबू की तरफ देखते हुए,,,)

अंकित अपनी मां की मादक नजर और इस तरह की बात से एकदम से सनसना गया था,,,, वह कुछ बोल नहीं पाया और उसकी मां उसकी आंखों में देखते हुए मुस्कुराते हुए आगे बढी और धीरे से बोली,,,,।

तु चिंता मत कर मैं अपनी आंख बंद कर लूंगी,,,,।

(अपनी मां की यह बात सुनकर अंकित मन ही मन में तड़प उठा,,,,और अपने मन में ही खुल ऐसा क्यों मम्मी आंखें क्यों बंद करोगे आंखें खोल कर मेरी चड्डी में हाथ डालकर साबुन लगाओ मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ो,,,,आहहहहह मम्मी,,,,,, अंकित मन ही मन में उत्तेजित हुआ जा रहा था और वह कुछ बोल पाता है इससे पहले ही सुगंधाअपना साबुन वाला हाथ अपने बेटे की चड्डी में डाल दी और वादे के मुताबिक वह अपनी आंखों को बंद कर ली थी,,,, क्योंकि सुगंधा जानती थी कि आंखें खोल कर तो वह खुद अपने बेटे से नजर नहीं मिल पाएगी इस तरह से साबुन लगाते हुए आंखें बंद करके वह अपनी बेटी के लंड को अच्छी तरह से टटोल तो लेगी,,,, पल भर में ही अंकित के बदन में मस्ती की लहर उठने लगी वह मदहोश होने लगा,,,, अपनी चड्डी में अपनी मां की हथेली महसूस करते ही वह सातवें आसमान पर पहुंच गया। एक अजब सा एहसासमैं वह पूरी तरह से डूबने लगा वह कभी सोचा नहीं था कि उसके जीवन में ऐसा भी पल आएगा कि उसकी मां पूरी तरह से जवान हो जाने पर उसे अपने हाथों से नहलाएगी उसकी चड्डी में अपना हाथ डालकर साबुन लगाएगी,,, इसलिए अंकित को यह सब किसी सपने से कम नहीं लग रहा था।

अंकित से भी ज्यादाहालत खराब सुगंधा की हो रही थी अपने बेटे की छुट्टी में हाथ डालते ही उसे जल्दी एहसास हो गया कि उसकी चड्डी में किस तरह का हथियार है अपनी हथेली पर उंगलियों पर अपने बेटे के गम लंड का रगड़ उसका स्पर्श महसूस करते ही सुगंधा की बुर से पानी झड़ने लगा,,,,और पल भर में उसे एहसास हो गया कि वाकई में अगर उसके बेटे का लंड उसकी बुर में घुस गया तो तबाही मचा देगा,,, बरसों की प्यास को एक ही बार की चुदाई में बुझा देगा,,,,, सुगंधा गहरी गहरी सांस ले रही थीअपनी आंखों को बंद किए हुए वह अपने बेटे की चड्डी में हाथ डालकर उसके मोटे तगड़े लंड का एहसास कर रही थी,,,, और अंकित भी अपनी मां की नरम नरम उंगलियों का स्पर्श अपने गरम लंड पर पाकर घबरा सा गया था की कहीं उसका लंड पानी न छोड़ दे।
 
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