- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 97,002
दूसरे दिन सुबह नाश्ता करके तृप्ति और अंकित दोनों अपने-अपने रास्ते निकल चुके थे,,,,, सुगंधा का भी समय हो रहा था इसलिए वह जल्दी-जल्दी अपना काम खत्म करके कमरे में प्रवेश कर गई और हमेशा की तरह आजम का आने के सामने अपने गाउन को उतारकर एक बार फिर से नंगी हो गई,,,, सुबह-सुबह वह नहाने के बाद गाउन पहन लेती थी क्योंकि उसे खाना बनाना पड़ता था नाश्ता तैयार करना पड़ता था,,,, क्योंकि अगर वह नहाने के तुरंत बाद तैयार हो जाए तो स्कूल जाते-जाते उसे अजीब सा लगने लगता था इसलिए वह सारा काम खत्म करके तैयार होने के बाद स्कूल जाती थी,,,,।
आईने के सामने वह एक बार फिर से नंगी हो चुकी थी उसके बदन पर कपड़े का रेशा तक नहीं था,,,, वैसे तो पति के देहांत के बाद उसके लिए सजना समझना सब कुछ बेकार ही था लेकिन वह स्कूल में पढ़ने का काम करती थी वह टीचर थी स्कूल में और भी टीचर थी जो सज धज कर ही आया करती थी और इसीलिए उसे भी एकदम अप टू डेट होकर ही जाना पड़ता था ऐसा कोई नियम तो नहीं था लेकिन फिर भी सुगंधा अपने मन को मनाने के लिए अपने पति के देहांत के बाद बस थोड़ा सा सज संवर लेती थी,,, जल्दी से उसने अलमारी में से अपने लाल रंग की ब्रा निकाल जो कि उसकी चूचियों की साइज से कम माप की थी,,, वह जानबूझकर अपनी चूचियों के साइज से कम माफ वाली ब्रा पहनती थी ताकि उसकी चूचियां और भी ज्यादा कसी हुई रहे,,,, जल्दी-जल्दी उसे अपनी बाहों में डालकर वहां पीछे से बरा का हक लगने लगी और दोनों कप को अपनी दोनों खरबूजे जैसी चुचियों में समाकर उसे कस ली गोरे बदन पर लाल रंग की ब्रा और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी इसी तरह से वह लाल रंग की पहनती भी अलमारी से निकाली,,, और उसे उलट-पुलट कर देखने लगी पेंटिं में हल्का सा छेद था,,,, और उसे छेद को देखते हुए वह अपने मन में सोचने लगी कि इस बार तनख्वाह मिलेगी तो वह अपने लिए जरूर नई पेटी खरीदेगी,,, और ऐसा सोचते हुए वहां अपनी लंबी-लंबी टांगों को उसे पेटी के दोनों छेद में भारी-बड़ी से डालकर उसे ऊपर की तरफ उठाई और कमर टकला कर अपनी खूबसूरत खजाने को उसे लाल रंग की पेंटिं के परदे में छुपा ली,,,, पेटी को पहनते समय उसकी नजर अपनी बर पर गई थी जिस पर हल्के-हल्के बोल फिर से उग आए थे,,,, पति के न होने के बावजूद भी सुगंध अपने बदन की साफ सफाई की बहुत डरकर रखती थी इसलिए समय-समय पर वीट क्रीम लगाकर अपनी बर को साफ करती थी क्योंकि उसे अपनी बुर पर बाल बिल्कुल भी पसंद नहीं थे क्योंकि घने बाल हो जाने की वजह से उन्होंने खुजली होने लगती थी और स्कूल में पढ़ते समय वह खुजाने में शर्म महसूस करती थी,,, वैसे भी अक्सर मर्दों की नजर औरतों की इस तरह की हरकत पर जरूर रहती है कि वह कब अपना हाथ कौन से अंग पर लगती हैं खास करके जब उनकी हथेली उनकी दोनों टांगों के बीच आती है तो मर्द औरत की हरकत को देखकर तुरंत औरतों की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार के बारे में कल्पना करने लगते हैं कि इसकी कैसी होगी इसकी बर पर बाल होंगे कि नहीं होंगे चिकनी होगी कैसी होगी गुलाबी होगी फूली हुई होगी इस तरह की कल्पना करके मन ही मन में आनंद लेते हैं,,,,।
और ऐसा वह खुद अपनी आंखों से देख चुकी थी क्योंकि स्कूल में पढ़ते समय जब एक बार इसी तरह से उसे खुजली हो रही थी तो वह एक हाथ में किताब लेकर दूसरे हाथ से अनजाने में ही अपनी दोनों टांगों के बीच खुजलाने लगी थी और जब उसे इस बात का एहसास हुआ तो उसकी नजर तुरंत सामने की बेंच पर बैठे लड़के पर गई और वह लड़का उसकी यही क्रिया को देखकर अंदर ही अंदर प्रसन्न हो रहा था और सुगंध को तो तब ज्यादा हैरानी हुई जब उसने उसे लड़के के हाथ को अपने पेंट के आगे वाले भाग पर रखा हुआ देखी,,, तब से वह नियमित रूप से अपनी बुर के बाल,,, को बराबर साफ करती थी,,,।,,, अपनी बुर के बारे में सोच कर सुगंधा अपनी हथेली को पेटी के ऊपर से ही अपनी बर पर रखकर उसे हल्के से थपथपा दी मानो कि जैसे उसे शाबाशी दे रही हो,,, और वैसे भी सुगंधा जैसी खूबसूरत हसीन और गदराई जवानी की मालकिन की बुर शाबाशी देने लायक ही थी क्योंकि आज तक पति के देहांत के बाद उसकी बुर ने उसे कभी भी इस कदर मजबूर नहीं की थी कि उसके कदम बहक जाएं या अपने मन में किसी गैर मर्द के बारे में कल्पना करें,,,, वरना जिस तरह के हालात सुगंधा के थे जिस तरह से वह जवानी से भरी हुई थी अगर ऐसी कोई और औरत होती तो अब तक उसके कदम जरूर डगमगा गए होते और वह अपनी जवानी की प्यास बुझाने के लिए किसी गैर मर्द का सहारा ले ली होती लेकिन सुगंधा के मामले में ऐसा कुछ भी नहीं था,,,। पति के देहांत के बाद ही जैसे कि वह अपने दोनों बच्चों की परवरिश करने हेतु अपनी ख्वाहिश अपनी जवानी को अपने अरमानों को बंदिश का ताला लगा दी थी जिसकी चाबी तो उसके हाथों में थी लेकिन कभी भी उसने उसे चाबी का गलत उपयोग नहीं की थी इसीलिए आज इस उम्र में भी उसकी जवानी बरकरार थी उसके बदन का कसाव भर करार था उसका बदन और भी ज्यादा निखर गया था,,,,।
सुगंधा अलमारी में से पीले रंग की साड़ी निकली जो कि उसके ऊपर और भी ज्यादा खूबसूरत लगती थी,,,, जिसे वह अपनी बिस्तर पर रख दी थी और पीले रंग के ब्लाउज को पहनना शुरू कर दी थी ब्रा की तरह वह ब्लाउज भी अपनी चूचियों से कम माप वाला कप का ही पहनती थी,,, देखते ही देखते सुगंधा अपने आप को आईने में निहारते हुए,,, अपने ब्लाउज का बटन बंद करने लगी और जैसे ही ब्लाउज के सारे बटन बंद हुए उसके दोनों खूबसूरत खरबूजे ब्लाउज में कैद हो गए लेकिन अपनी आभा ब्लाउज के ऊपर बिखेर रहे थे और देखने वालों की हालत खराब करने के लिए तैयार हो चुके थे इसी तरह से वह जल्दी से पेटीकोट भी पहन कर उसे अपनी कमर पर कली और फिर साड़ी पहनने लगी,,,,,।
साड़ी पहनने के बाद वह अपने आप को आईने में देख रही थी एकदम आसमान से उतरी हुई परी लग रही थी बदन भरा हुआ था लेकिन बेहद खूबसूरत चर्बी का कहीं भी ज्यादा जमावड़ा नहीं था जहां भी चर्बी थी अपने हिसाब से थी जिसे देखने पर कोई भी मर्द मदहोश हो जाता था,,,, वह जल्दी से कंघी लेकर अपने बालों को संवारने लगी और तुरंत ही उसका जुड़ा बनाकर पीछे एक बड़ा सा बकल लगा ली जिससे उसके खूबसूरत बाल और भी ज्यादा खूबसूरत नजर आने लगे वह तैयार हो चुकी थी मन में कोई गाना गुनगुनाते हुए वह अपना पर्स उठाई और घर से बाहर आ गई घर में ताला लगा कर वह स्कूल के लिए निकल गई स्कूल आने जाने के लिए उसे बस का सहारा लेना पड़ता था और कभी कभार तो वह पैदल ही आया जाया करती थी जब कभी ज्यादा देर होती थी तो वह बस का उपयोग करती थी,,, लेकिन आज कोई जल्दबाजी नहीं थी इसलिए वह पैदल ही स्कूल के लिए निकल गई थी इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि सड़क पर चलते समय आने जाने वालों की नजर उसे पर ही टिकी रहती थी क्योंकि एक तो उसका खूबसूरत बदन खूबसूरत चेहरा किसी फिल्म की हीरोइन से कम नहीं लगता था ऊपर से पीले रंग की साड़ी उसे पर तो और भी ज्यादा कयामत लगती थी आने जाने वालों की नजर भेज जब उसके ऊपर ही पड़ जाती थी आगे से आने वाला इंसान उसकी गोलाकार चूचियों को देखकर मस्त होता था और पीछे से आने वाला इंसान उसकी गदराई आई हुई मदमस्त कर देने वाली गांड को देखकर पागल हुआ जाता था,,,,, और अपने मन में यही सोचता था कि इसको छोड़ने वाला मर्द कितना खुश नसीब होगा जो रोज इसकी लेता होगा,,,,,,,,,।
Sugandha
शाम को अंकित घर पर पहुंचा तो उसकी मां पहले सही तैयार बैठी थी उसे मार्केट जो जाना था खरीदी करने के लिए क्योंकि घर में राशन खत्म हो रहा था,,,। अंकित जैसे ही घर में प्रवेश किया उसे देखकर उसकी मां बोली,,।
चल जल्दी से तैयार हो जा मार्केट जाना है खरीदी करने,,,
मेरे लिए नए जूते भी लोगी ना,,,
अरे बेवकूफ राशन की खरीदी करने जाना है नए जूते तुझे तनख्वाह मिलेगी तब खरीदूंगी बस,,,, आप जल्दी से तैयार हो जाओ वैसे भी बहुत देर हो चुकी है आते-आते शाम ढल जाएगी,,,,
अच्छा रुको बस 2 मिनट में आता हूं,,,,,
(इतना कहकर संजू बाथरूम में चला गया और उसकी मां वही कुर्सी पर बैठकर उसका इंतजार करने लगी और मन में सोचने लगी कि क्या-क्या खरीदना है क्या बाकी रह गया है वैसे तो वह राशन की लिस्ट तैयार कर ली थी लेकिन फिर भी सोच रही थी कि कुछ और लेना हो तो वैसे तो पति के देहांत की बात थोड़ी बहुत दिक्कत घर चलाने में हो रही थी लेकिन फिर भी टीचर होने के नाते उसे इतनी तनख्वा तो मिल ही जाती थी कि वह आराम से अपना घर चला सके,,,, सुगंधा ने बड़े सलीके से अपना घर संभाल ली थी,,,, थोड़ी ही देर में अंकित तैयार होकर आ गया था और उसकी मां कुर्सी पर से उठकर कमरे से बाहर आ गई संजू भी अपनी मां के पीछे-पीछे चल दिया वैसे तो जब कभी भी सुगंधा आगे आगे चलती थी तो हर मर्द की नजर उसकी गोल-गोल गांड पर ही टिकी रहती थी क्योंकि चलते समय उसकी गांड मटती बहुत थी और मटकनी हुई गांड देखकर हर मर्द का लैंड खड़ा हो जाता था लेकिन ऐसा कुछ भी अंकित के साथ नहीं होता था हालांकि उसके नजर अपनी मां की गांड पर जाकर जरूर थी लेकिन वह कभी भी अपनी मां के बारे में गलत भावना पैदा नहीं करता था और नहीं कभी अपने मन में गलत सोचता था,,,, बस उसकी सहज रूप से नजरे उसकी मां की गांड पर चली जाती थी और वह सहज रूप से अपनी नजरों को घुमा भी लेता था उसने कभी सोचा नहीं था कि उसकी मां की गांड दूसरी औरतों की तुलना में छोटी है या बड़ी है ढीली है या कसी हुई है,,,, चलते समय मटकती है कि सामान्य रहती है चुचियों का आकार कैसा है बड़ा है कि छोटा है ब्लाउज का बटन बंद करने पर उसकी दरार दिखती है कि नहीं दिखती है इन सब पर तो उसकी नजर जाती जरूरी थी लेकिन इन सबको देखकर उसके मन में गलत भावना नहीं आती थी इसीलिए वह आज तक दूसरे लड़कों से बिल्कुल अलग था,,,,।
Sugandha apna blouse utarte huye
दोनों बाजार के लिए निकल गए थे बाजार ज्यादा दूर नहीं था केवल 10 मिनट के रास्ते पर ही था इसलिए जल्द ही दोनों बाजार में पहुंच गए और राशन की दुकान पर जाकर खड़े हो गए राशन की दुकान पर थोड़ी बहुत भीड़ थी ज्यादातर औरतें ही खड़ी थी,,,, जो कि अपना राशन खरीद रही थी,,,, अंकित दुकान के एक तरफ खड़ा हो गया था जहां उसके आगे दो-तीन औरतें खड़ी थी और ठीक बगल में उसकी मां भी खड़ी हो गई थी हाथ मे राशन का लिस्ट लिए,,,,
दुकान वाला बारी-बारी से सब की लिस्ट लेकर राशन का सामान निकाल रहा था,,, अभी सुगंधा का नंबर है या नहीं था वह वहीं खड़ी होकर अपने नंबर का इंतजार कर रही थी और दुकान में इधर-उधर देखकर और भी चीजों को देख रही थी दुकान पूरी तरह से राशन से भरी हुई थी दोनों तरफ कांच के कपाट लगे हुए थे जिसमें महंगी महंगी चीज रखी हुई थी,,,, अंकित की नजर बार-बार कंप्लेन के डिब्बे पर चली जा रही थी,,, बहुत दिनों से उसकी मां कंप्लेन पीने का कर रहा था और इस बारे में उसने अपनी मां को भी कई बार कह चुका था लेकिन उसकी मां जानती थी कि वह महंगा आता है इसलिए बार-बार जानकारी देती थी लेकिन इस बार वह भी अपने मन में यही सोच रही थी की तनख्वाह पर अंकित के लिए जरुर कंप्लेन खरीदेगी,,,,।
अंकित के आगे जो औरत खड़ी थी उसका ब्लाउज पीछे से काफी खुला हुआ था और उसकी नंगी चिकनी पीठ दिख रही थी और वह काफी गोरी भी थी अंकित की जगह अगर कोई और लड़का होता तो अब तक वह उसे औरत को स्पर्श करने की बहुत कोशिश कर चुका होता क्योंकि अक्सर दुकानों पर यही स्थिति होती है या तो वह उसे औरत को स्पर्श करने की कोशिश करता है या तो अपने आगे वाले भागों को उसके नितंबों पर स्पर्श करने की कोशिश करता लेकिन इन सब में अंकित नहीं था वह दूसरों से अलग था उसकी आंखों के सामने भले यह खूबसूरत औरत खड़ी थी खुला ब्लाउज पहनकर लेकिन फिर भी उसकी खूबसूरती पर अंकित की नजर नहीं पड़ रही थी उसका ध्यान जा रहा था तो उसे खूबसूरत औरत के बदन से उठती हुई मादक खुशबू पर उसे औरत ने बहुत ही सुगंधित परफ्यूम लगाई हुई थी जिसकी खुशबू अंकित को बहुत ही अच्छी लग रही थी और वह अपने मन में सोच रहा था कि काश उसके पास भी इस तरह का परफ्यूम होता तो मजा आ जाता वह भी इतना सोच ही रहा था कि वह औरत जो सामान ले रही थी उसके हाथ से हाथ में लिया हुआ साबुन छूट कर नीचे गिर गया और उसे उठाने के चक्कर में वजह से झुकी उसकी गांड एकदम से पीछे हुई और सीधे जाकर अंकित के लंड से टकरा गई,,, उसे औरत की गांड अंकित के लंड के आगे वाले भाग के एकदम बीचो-बीच स्पर्श हुई थी कि ना चाहते हुए भी अंकित के लंड में अजीब सी हलचल होने लगी थी,,, जैसे ही उसे औरत की गांड अंकित के आगे वाले भाग पर स्पर्श हुई अंकित तुरंत अपने आप को संभालने की कोशिश करता हुआ पीछे होने लगा लेकिन तब तक उसे औरत की गांड अपना कमाल दिखा चुकी थी उसे औरत की गर्म जवानी और उसकी मदहोश कर देने वाली गांड का स्पर्श अंकित के तन बदन में अजीब सा हलचल पैदा कर गया था और वह औरत साबुन उठाने के बाद तुरंत खड़ी हुई और पीछे देखकर अंकित की तरफ मुस्कुराई और सॉरी बोल दी अंकित उसे औरत को देखा ही रह गया उसके चेहरे पर मुस्कान देखकर और उसके द्वारा सॉरी कहने पर एक अजीब सी हलचल अंकित ने अपनी तंबदन में महसूस किया और जवाब में अंकित ने भी मुस्कुराते हुए कोई बात नहीं कह कर बात को टाल दिया,,,, बगल में खड़ी सुगंधा उसे औरत की गांड और अपने बेटे के लंड का स्पर्श उसे औरत की गांड पर तो देख नहीं पाई थी लेकिन उसे औरत को सॉरी कहते हुए देख ली थी और जवाब में अपने बेटे का जवाब सुनकर वह सहज रूप से मुस्कुरा दी थी और वापस अपने नंबर का इंतजार करने लगी थी,,,,।
थोड़ी ही देर में वह औरत थैली में अपना सामान लेकर जाने लगी थी संजू ना चाहते हुए भी पीछे मुड़कर उसे औरत की तरफ देखने लगा और पहली बार उसने किसी औरत के नितंबों को बड़े ध्यान से देख रहा था उसका मटकना हो उसे बेहद लुभाने लग रहा था पल भर में उसके मन में अजीब सी हलचल होने लगी थी उसका मन बदल गया था,,, वह तब तक उसे औरत को देखता रहा जब तक कि वह औरत बाजार की भीड़ में गुम नहीं हो गई,,,, थोड़ी ही देर में उसकी मां वजन किया हुआ सामान अपने ठेले में रखना शुरू कर दी सूजी बेसन डाल गरम मसाले मिर्ची हल्दी थोड़ा-थोड़ा करके वह सब सामान थेले में भर चुकी थी,,, तभी उसकी मां नहाने का एक सामान्य साबुन लेने लगी तो अंकित बोला,,,,)
यह वाला नहीं मम्मी लीरील साबुन खरीद लो उसकी खुशबू बहुत अच्छी है,,,,
नहीं संजु यही ठीक है बार-बार साबुन बदल के नहीं लगना चाहिए वरना नुकसान करता है,,,
क्या मम्मी तुम भी,,,,
(साबुन खरीदने की बात टाल दी गई थी दुकान वाला बिल बना रहा था और भी ग्राहक खड़े थे,,, दुकान में काम करने वाला कारीगर बार-बार सुगंधा की तरफ देख रहा था खास करके उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों की तरफ उसकी निगाह जा रही थी पहले तो संजु इस तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं देता था लेकिन आज पहली बार उसे कम करने वाले की निगाह को देख रहा था जो कि उसकी मां की खूबसूरती और उसकी चूचियों पर घूम रही थी यह देखकर अंकित को गुस्सा आने लगा लेकिन वह कुछ कह नहीं सकता था क्योंकि दुकान पर बहुत से लोग थे अगर इस बारे में वह जरा सा भी कुछ कहता तो जिसकी नजर उसकी मां पर नहीं जा रही है उन लोगों की भी नजर उसकी मां पर पहुंच जाती थी और ऐसा अंकित बिल्कुल भी नहीं चाहता था,,, फिर भी वह अपनी मां से बोला,,)
जल्दी करो ना मम्मी बहुत देर हो रही है,,,
बस बेटा हो गया,,,,।
(अंकित बार-बार दुकान में काम करने वाले आदमी को ही देख रहा था उसकी नज़रें उसकी मां के बदन पर घूम रही थी और अंकित को तुरंत उसके दोस्तों की बात याद आ गई,,, जॉकी चाय की दुकान पर बैठकर सड़क पर जाती हुई औरत के बारे में गंदी-गंदी बात कर रहे थे और उसका वह दोस्त जिसके साथ लड़ाई हुई थी उसकी मां के बारे में गंदी बात कर रहा था उसे समझते देर नहीं लगी की सब मर्दों की नजर औरत की खूबसूरती पर ही उसके अंगों पर ही रहती है ,,, थोड़ी ही देर में सुगंधा पैसे देकर हाथ में थैला लेकर चलने लगी तो अंकित खुद अपनी मां के हाथ में से वजनदार थैला को ले लिया और चलने लगा,,,
बाजार के नुक्कड़ पर पानी पुरी का ठेला लगा हुआ था दूसरी औरतों की तरह सुगंधा को भी पानी पुरी बहुत पसंद था इसलिए वह तुरंत उसे ठेले के पास खड़ी हो गई और अपने बेटे के साथ मिलकर पानी पुरी खाने लगी पानी पुरी का चटकारा मसाला उसे बहुत पसंद था,,,,,,, अंकित को भी पानी पुरी अच्छी लगती थी इसलिए वह भी खाने लगा दोनों पानी पुरी खाने के बाद तृप्ति के लिए भी पानी पुरी पैक करवा दिए थे और घर पर पहुंचने के बाद तृप्ति को उसके हिस्से की पानी पुरी दे दिए थे जिसे देखकर वह बहुत खुश हुई थी,,,,।
रास्ते भर और घर पर पहुंचने के बात भी अंकित के मन में उसे औरत की छवि बस गई थी और वह उसे औरत के बारे में सोच रहा था उसके बदन से उठने वाली मादक को खुशबू को महसूस कर रहा था और फिर उसके नितंबों से अपने लंड का टकराना और फिर हाथ में थैला लिए बाजार के भीड़ में गुम हो जाना सब कुछ सोचते हुए उसे अजीब सा महसूस हो रहा था उसके तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी लेकिन जैसे-जैसे वह पढ़ने में मन लगने लगा वैसे-वैसे उसके दिमाग से औरत एकदम से खो गई और वह एकदम से सामान्य हो गया,,,।
आईने के सामने वह एक बार फिर से नंगी हो चुकी थी उसके बदन पर कपड़े का रेशा तक नहीं था,,,, वैसे तो पति के देहांत के बाद उसके लिए सजना समझना सब कुछ बेकार ही था लेकिन वह स्कूल में पढ़ने का काम करती थी वह टीचर थी स्कूल में और भी टीचर थी जो सज धज कर ही आया करती थी और इसीलिए उसे भी एकदम अप टू डेट होकर ही जाना पड़ता था ऐसा कोई नियम तो नहीं था लेकिन फिर भी सुगंधा अपने मन को मनाने के लिए अपने पति के देहांत के बाद बस थोड़ा सा सज संवर लेती थी,,, जल्दी से उसने अलमारी में से अपने लाल रंग की ब्रा निकाल जो कि उसकी चूचियों की साइज से कम माप की थी,,, वह जानबूझकर अपनी चूचियों के साइज से कम माफ वाली ब्रा पहनती थी ताकि उसकी चूचियां और भी ज्यादा कसी हुई रहे,,,, जल्दी-जल्दी उसे अपनी बाहों में डालकर वहां पीछे से बरा का हक लगने लगी और दोनों कप को अपनी दोनों खरबूजे जैसी चुचियों में समाकर उसे कस ली गोरे बदन पर लाल रंग की ब्रा और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी इसी तरह से वह लाल रंग की पहनती भी अलमारी से निकाली,,, और उसे उलट-पुलट कर देखने लगी पेंटिं में हल्का सा छेद था,,,, और उसे छेद को देखते हुए वह अपने मन में सोचने लगी कि इस बार तनख्वाह मिलेगी तो वह अपने लिए जरूर नई पेटी खरीदेगी,,, और ऐसा सोचते हुए वहां अपनी लंबी-लंबी टांगों को उसे पेटी के दोनों छेद में भारी-बड़ी से डालकर उसे ऊपर की तरफ उठाई और कमर टकला कर अपनी खूबसूरत खजाने को उसे लाल रंग की पेंटिं के परदे में छुपा ली,,,, पेटी को पहनते समय उसकी नजर अपनी बर पर गई थी जिस पर हल्के-हल्के बोल फिर से उग आए थे,,,, पति के न होने के बावजूद भी सुगंध अपने बदन की साफ सफाई की बहुत डरकर रखती थी इसलिए समय-समय पर वीट क्रीम लगाकर अपनी बर को साफ करती थी क्योंकि उसे अपनी बुर पर बाल बिल्कुल भी पसंद नहीं थे क्योंकि घने बाल हो जाने की वजह से उन्होंने खुजली होने लगती थी और स्कूल में पढ़ते समय वह खुजाने में शर्म महसूस करती थी,,, वैसे भी अक्सर मर्दों की नजर औरतों की इस तरह की हरकत पर जरूर रहती है कि वह कब अपना हाथ कौन से अंग पर लगती हैं खास करके जब उनकी हथेली उनकी दोनों टांगों के बीच आती है तो मर्द औरत की हरकत को देखकर तुरंत औरतों की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार के बारे में कल्पना करने लगते हैं कि इसकी कैसी होगी इसकी बर पर बाल होंगे कि नहीं होंगे चिकनी होगी कैसी होगी गुलाबी होगी फूली हुई होगी इस तरह की कल्पना करके मन ही मन में आनंद लेते हैं,,,,।
और ऐसा वह खुद अपनी आंखों से देख चुकी थी क्योंकि स्कूल में पढ़ते समय जब एक बार इसी तरह से उसे खुजली हो रही थी तो वह एक हाथ में किताब लेकर दूसरे हाथ से अनजाने में ही अपनी दोनों टांगों के बीच खुजलाने लगी थी और जब उसे इस बात का एहसास हुआ तो उसकी नजर तुरंत सामने की बेंच पर बैठे लड़के पर गई और वह लड़का उसकी यही क्रिया को देखकर अंदर ही अंदर प्रसन्न हो रहा था और सुगंध को तो तब ज्यादा हैरानी हुई जब उसने उसे लड़के के हाथ को अपने पेंट के आगे वाले भाग पर रखा हुआ देखी,,, तब से वह नियमित रूप से अपनी बुर के बाल,,, को बराबर साफ करती थी,,,।,,, अपनी बुर के बारे में सोच कर सुगंधा अपनी हथेली को पेटी के ऊपर से ही अपनी बर पर रखकर उसे हल्के से थपथपा दी मानो कि जैसे उसे शाबाशी दे रही हो,,, और वैसे भी सुगंधा जैसी खूबसूरत हसीन और गदराई जवानी की मालकिन की बुर शाबाशी देने लायक ही थी क्योंकि आज तक पति के देहांत के बाद उसकी बुर ने उसे कभी भी इस कदर मजबूर नहीं की थी कि उसके कदम बहक जाएं या अपने मन में किसी गैर मर्द के बारे में कल्पना करें,,,, वरना जिस तरह के हालात सुगंधा के थे जिस तरह से वह जवानी से भरी हुई थी अगर ऐसी कोई और औरत होती तो अब तक उसके कदम जरूर डगमगा गए होते और वह अपनी जवानी की प्यास बुझाने के लिए किसी गैर मर्द का सहारा ले ली होती लेकिन सुगंधा के मामले में ऐसा कुछ भी नहीं था,,,। पति के देहांत के बाद ही जैसे कि वह अपने दोनों बच्चों की परवरिश करने हेतु अपनी ख्वाहिश अपनी जवानी को अपने अरमानों को बंदिश का ताला लगा दी थी जिसकी चाबी तो उसके हाथों में थी लेकिन कभी भी उसने उसे चाबी का गलत उपयोग नहीं की थी इसीलिए आज इस उम्र में भी उसकी जवानी बरकरार थी उसके बदन का कसाव भर करार था उसका बदन और भी ज्यादा निखर गया था,,,,।
सुगंधा अलमारी में से पीले रंग की साड़ी निकली जो कि उसके ऊपर और भी ज्यादा खूबसूरत लगती थी,,,, जिसे वह अपनी बिस्तर पर रख दी थी और पीले रंग के ब्लाउज को पहनना शुरू कर दी थी ब्रा की तरह वह ब्लाउज भी अपनी चूचियों से कम माप वाला कप का ही पहनती थी,,, देखते ही देखते सुगंधा अपने आप को आईने में निहारते हुए,,, अपने ब्लाउज का बटन बंद करने लगी और जैसे ही ब्लाउज के सारे बटन बंद हुए उसके दोनों खूबसूरत खरबूजे ब्लाउज में कैद हो गए लेकिन अपनी आभा ब्लाउज के ऊपर बिखेर रहे थे और देखने वालों की हालत खराब करने के लिए तैयार हो चुके थे इसी तरह से वह जल्दी से पेटीकोट भी पहन कर उसे अपनी कमर पर कली और फिर साड़ी पहनने लगी,,,,,।
साड़ी पहनने के बाद वह अपने आप को आईने में देख रही थी एकदम आसमान से उतरी हुई परी लग रही थी बदन भरा हुआ था लेकिन बेहद खूबसूरत चर्बी का कहीं भी ज्यादा जमावड़ा नहीं था जहां भी चर्बी थी अपने हिसाब से थी जिसे देखने पर कोई भी मर्द मदहोश हो जाता था,,,, वह जल्दी से कंघी लेकर अपने बालों को संवारने लगी और तुरंत ही उसका जुड़ा बनाकर पीछे एक बड़ा सा बकल लगा ली जिससे उसके खूबसूरत बाल और भी ज्यादा खूबसूरत नजर आने लगे वह तैयार हो चुकी थी मन में कोई गाना गुनगुनाते हुए वह अपना पर्स उठाई और घर से बाहर आ गई घर में ताला लगा कर वह स्कूल के लिए निकल गई स्कूल आने जाने के लिए उसे बस का सहारा लेना पड़ता था और कभी कभार तो वह पैदल ही आया जाया करती थी जब कभी ज्यादा देर होती थी तो वह बस का उपयोग करती थी,,, लेकिन आज कोई जल्दबाजी नहीं थी इसलिए वह पैदल ही स्कूल के लिए निकल गई थी इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि सड़क पर चलते समय आने जाने वालों की नजर उसे पर ही टिकी रहती थी क्योंकि एक तो उसका खूबसूरत बदन खूबसूरत चेहरा किसी फिल्म की हीरोइन से कम नहीं लगता था ऊपर से पीले रंग की साड़ी उसे पर तो और भी ज्यादा कयामत लगती थी आने जाने वालों की नजर भेज जब उसके ऊपर ही पड़ जाती थी आगे से आने वाला इंसान उसकी गोलाकार चूचियों को देखकर मस्त होता था और पीछे से आने वाला इंसान उसकी गदराई आई हुई मदमस्त कर देने वाली गांड को देखकर पागल हुआ जाता था,,,,, और अपने मन में यही सोचता था कि इसको छोड़ने वाला मर्द कितना खुश नसीब होगा जो रोज इसकी लेता होगा,,,,,,,,,।
Sugandha
शाम को अंकित घर पर पहुंचा तो उसकी मां पहले सही तैयार बैठी थी उसे मार्केट जो जाना था खरीदी करने के लिए क्योंकि घर में राशन खत्म हो रहा था,,,। अंकित जैसे ही घर में प्रवेश किया उसे देखकर उसकी मां बोली,,।
चल जल्दी से तैयार हो जा मार्केट जाना है खरीदी करने,,,
मेरे लिए नए जूते भी लोगी ना,,,
अरे बेवकूफ राशन की खरीदी करने जाना है नए जूते तुझे तनख्वाह मिलेगी तब खरीदूंगी बस,,,, आप जल्दी से तैयार हो जाओ वैसे भी बहुत देर हो चुकी है आते-आते शाम ढल जाएगी,,,,
अच्छा रुको बस 2 मिनट में आता हूं,,,,,
(इतना कहकर संजू बाथरूम में चला गया और उसकी मां वही कुर्सी पर बैठकर उसका इंतजार करने लगी और मन में सोचने लगी कि क्या-क्या खरीदना है क्या बाकी रह गया है वैसे तो वह राशन की लिस्ट तैयार कर ली थी लेकिन फिर भी सोच रही थी कि कुछ और लेना हो तो वैसे तो पति के देहांत की बात थोड़ी बहुत दिक्कत घर चलाने में हो रही थी लेकिन फिर भी टीचर होने के नाते उसे इतनी तनख्वा तो मिल ही जाती थी कि वह आराम से अपना घर चला सके,,,, सुगंधा ने बड़े सलीके से अपना घर संभाल ली थी,,,, थोड़ी ही देर में अंकित तैयार होकर आ गया था और उसकी मां कुर्सी पर से उठकर कमरे से बाहर आ गई संजू भी अपनी मां के पीछे-पीछे चल दिया वैसे तो जब कभी भी सुगंधा आगे आगे चलती थी तो हर मर्द की नजर उसकी गोल-गोल गांड पर ही टिकी रहती थी क्योंकि चलते समय उसकी गांड मटती बहुत थी और मटकनी हुई गांड देखकर हर मर्द का लैंड खड़ा हो जाता था लेकिन ऐसा कुछ भी अंकित के साथ नहीं होता था हालांकि उसके नजर अपनी मां की गांड पर जाकर जरूर थी लेकिन वह कभी भी अपनी मां के बारे में गलत भावना पैदा नहीं करता था और नहीं कभी अपने मन में गलत सोचता था,,,, बस उसकी सहज रूप से नजरे उसकी मां की गांड पर चली जाती थी और वह सहज रूप से अपनी नजरों को घुमा भी लेता था उसने कभी सोचा नहीं था कि उसकी मां की गांड दूसरी औरतों की तुलना में छोटी है या बड़ी है ढीली है या कसी हुई है,,,, चलते समय मटकती है कि सामान्य रहती है चुचियों का आकार कैसा है बड़ा है कि छोटा है ब्लाउज का बटन बंद करने पर उसकी दरार दिखती है कि नहीं दिखती है इन सब पर तो उसकी नजर जाती जरूरी थी लेकिन इन सबको देखकर उसके मन में गलत भावना नहीं आती थी इसीलिए वह आज तक दूसरे लड़कों से बिल्कुल अलग था,,,,।
Sugandha apna blouse utarte huye
दोनों बाजार के लिए निकल गए थे बाजार ज्यादा दूर नहीं था केवल 10 मिनट के रास्ते पर ही था इसलिए जल्द ही दोनों बाजार में पहुंच गए और राशन की दुकान पर जाकर खड़े हो गए राशन की दुकान पर थोड़ी बहुत भीड़ थी ज्यादातर औरतें ही खड़ी थी,,,, जो कि अपना राशन खरीद रही थी,,,, अंकित दुकान के एक तरफ खड़ा हो गया था जहां उसके आगे दो-तीन औरतें खड़ी थी और ठीक बगल में उसकी मां भी खड़ी हो गई थी हाथ मे राशन का लिस्ट लिए,,,,
दुकान वाला बारी-बारी से सब की लिस्ट लेकर राशन का सामान निकाल रहा था,,, अभी सुगंधा का नंबर है या नहीं था वह वहीं खड़ी होकर अपने नंबर का इंतजार कर रही थी और दुकान में इधर-उधर देखकर और भी चीजों को देख रही थी दुकान पूरी तरह से राशन से भरी हुई थी दोनों तरफ कांच के कपाट लगे हुए थे जिसमें महंगी महंगी चीज रखी हुई थी,,,, अंकित की नजर बार-बार कंप्लेन के डिब्बे पर चली जा रही थी,,, बहुत दिनों से उसकी मां कंप्लेन पीने का कर रहा था और इस बारे में उसने अपनी मां को भी कई बार कह चुका था लेकिन उसकी मां जानती थी कि वह महंगा आता है इसलिए बार-बार जानकारी देती थी लेकिन इस बार वह भी अपने मन में यही सोच रही थी की तनख्वाह पर अंकित के लिए जरुर कंप्लेन खरीदेगी,,,,।
अंकित के आगे जो औरत खड़ी थी उसका ब्लाउज पीछे से काफी खुला हुआ था और उसकी नंगी चिकनी पीठ दिख रही थी और वह काफी गोरी भी थी अंकित की जगह अगर कोई और लड़का होता तो अब तक वह उसे औरत को स्पर्श करने की बहुत कोशिश कर चुका होता क्योंकि अक्सर दुकानों पर यही स्थिति होती है या तो वह उसे औरत को स्पर्श करने की कोशिश करता है या तो अपने आगे वाले भागों को उसके नितंबों पर स्पर्श करने की कोशिश करता लेकिन इन सब में अंकित नहीं था वह दूसरों से अलग था उसकी आंखों के सामने भले यह खूबसूरत औरत खड़ी थी खुला ब्लाउज पहनकर लेकिन फिर भी उसकी खूबसूरती पर अंकित की नजर नहीं पड़ रही थी उसका ध्यान जा रहा था तो उसे खूबसूरत औरत के बदन से उठती हुई मादक खुशबू पर उसे औरत ने बहुत ही सुगंधित परफ्यूम लगाई हुई थी जिसकी खुशबू अंकित को बहुत ही अच्छी लग रही थी और वह अपने मन में सोच रहा था कि काश उसके पास भी इस तरह का परफ्यूम होता तो मजा आ जाता वह भी इतना सोच ही रहा था कि वह औरत जो सामान ले रही थी उसके हाथ से हाथ में लिया हुआ साबुन छूट कर नीचे गिर गया और उसे उठाने के चक्कर में वजह से झुकी उसकी गांड एकदम से पीछे हुई और सीधे जाकर अंकित के लंड से टकरा गई,,, उसे औरत की गांड अंकित के लंड के आगे वाले भाग के एकदम बीचो-बीच स्पर्श हुई थी कि ना चाहते हुए भी अंकित के लंड में अजीब सी हलचल होने लगी थी,,, जैसे ही उसे औरत की गांड अंकित के आगे वाले भाग पर स्पर्श हुई अंकित तुरंत अपने आप को संभालने की कोशिश करता हुआ पीछे होने लगा लेकिन तब तक उसे औरत की गांड अपना कमाल दिखा चुकी थी उसे औरत की गर्म जवानी और उसकी मदहोश कर देने वाली गांड का स्पर्श अंकित के तन बदन में अजीब सा हलचल पैदा कर गया था और वह औरत साबुन उठाने के बाद तुरंत खड़ी हुई और पीछे देखकर अंकित की तरफ मुस्कुराई और सॉरी बोल दी अंकित उसे औरत को देखा ही रह गया उसके चेहरे पर मुस्कान देखकर और उसके द्वारा सॉरी कहने पर एक अजीब सी हलचल अंकित ने अपनी तंबदन में महसूस किया और जवाब में अंकित ने भी मुस्कुराते हुए कोई बात नहीं कह कर बात को टाल दिया,,,, बगल में खड़ी सुगंधा उसे औरत की गांड और अपने बेटे के लंड का स्पर्श उसे औरत की गांड पर तो देख नहीं पाई थी लेकिन उसे औरत को सॉरी कहते हुए देख ली थी और जवाब में अपने बेटे का जवाब सुनकर वह सहज रूप से मुस्कुरा दी थी और वापस अपने नंबर का इंतजार करने लगी थी,,,,।
थोड़ी ही देर में वह औरत थैली में अपना सामान लेकर जाने लगी थी संजू ना चाहते हुए भी पीछे मुड़कर उसे औरत की तरफ देखने लगा और पहली बार उसने किसी औरत के नितंबों को बड़े ध्यान से देख रहा था उसका मटकना हो उसे बेहद लुभाने लग रहा था पल भर में उसके मन में अजीब सी हलचल होने लगी थी उसका मन बदल गया था,,, वह तब तक उसे औरत को देखता रहा जब तक कि वह औरत बाजार की भीड़ में गुम नहीं हो गई,,,, थोड़ी ही देर में उसकी मां वजन किया हुआ सामान अपने ठेले में रखना शुरू कर दी सूजी बेसन डाल गरम मसाले मिर्ची हल्दी थोड़ा-थोड़ा करके वह सब सामान थेले में भर चुकी थी,,, तभी उसकी मां नहाने का एक सामान्य साबुन लेने लगी तो अंकित बोला,,,,)
यह वाला नहीं मम्मी लीरील साबुन खरीद लो उसकी खुशबू बहुत अच्छी है,,,,
नहीं संजु यही ठीक है बार-बार साबुन बदल के नहीं लगना चाहिए वरना नुकसान करता है,,,
क्या मम्मी तुम भी,,,,
(साबुन खरीदने की बात टाल दी गई थी दुकान वाला बिल बना रहा था और भी ग्राहक खड़े थे,,, दुकान में काम करने वाला कारीगर बार-बार सुगंधा की तरफ देख रहा था खास करके उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों की तरफ उसकी निगाह जा रही थी पहले तो संजु इस तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं देता था लेकिन आज पहली बार उसे कम करने वाले की निगाह को देख रहा था जो कि उसकी मां की खूबसूरती और उसकी चूचियों पर घूम रही थी यह देखकर अंकित को गुस्सा आने लगा लेकिन वह कुछ कह नहीं सकता था क्योंकि दुकान पर बहुत से लोग थे अगर इस बारे में वह जरा सा भी कुछ कहता तो जिसकी नजर उसकी मां पर नहीं जा रही है उन लोगों की भी नजर उसकी मां पर पहुंच जाती थी और ऐसा अंकित बिल्कुल भी नहीं चाहता था,,, फिर भी वह अपनी मां से बोला,,)
जल्दी करो ना मम्मी बहुत देर हो रही है,,,
बस बेटा हो गया,,,,।
(अंकित बार-बार दुकान में काम करने वाले आदमी को ही देख रहा था उसकी नज़रें उसकी मां के बदन पर घूम रही थी और अंकित को तुरंत उसके दोस्तों की बात याद आ गई,,, जॉकी चाय की दुकान पर बैठकर सड़क पर जाती हुई औरत के बारे में गंदी-गंदी बात कर रहे थे और उसका वह दोस्त जिसके साथ लड़ाई हुई थी उसकी मां के बारे में गंदी बात कर रहा था उसे समझते देर नहीं लगी की सब मर्दों की नजर औरत की खूबसूरती पर ही उसके अंगों पर ही रहती है ,,, थोड़ी ही देर में सुगंधा पैसे देकर हाथ में थैला लेकर चलने लगी तो अंकित खुद अपनी मां के हाथ में से वजनदार थैला को ले लिया और चलने लगा,,,
बाजार के नुक्कड़ पर पानी पुरी का ठेला लगा हुआ था दूसरी औरतों की तरह सुगंधा को भी पानी पुरी बहुत पसंद था इसलिए वह तुरंत उसे ठेले के पास खड़ी हो गई और अपने बेटे के साथ मिलकर पानी पुरी खाने लगी पानी पुरी का चटकारा मसाला उसे बहुत पसंद था,,,,,,, अंकित को भी पानी पुरी अच्छी लगती थी इसलिए वह भी खाने लगा दोनों पानी पुरी खाने के बाद तृप्ति के लिए भी पानी पुरी पैक करवा दिए थे और घर पर पहुंचने के बाद तृप्ति को उसके हिस्से की पानी पुरी दे दिए थे जिसे देखकर वह बहुत खुश हुई थी,,,,।
रास्ते भर और घर पर पहुंचने के बात भी अंकित के मन में उसे औरत की छवि बस गई थी और वह उसे औरत के बारे में सोच रहा था उसके बदन से उठने वाली मादक को खुशबू को महसूस कर रहा था और फिर उसके नितंबों से अपने लंड का टकराना और फिर हाथ में थैला लिए बाजार के भीड़ में गुम हो जाना सब कुछ सोचते हुए उसे अजीब सा महसूस हो रहा था उसके तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी लेकिन जैसे-जैसे वह पढ़ने में मन लगने लगा वैसे-वैसे उसके दिमाग से औरत एकदम से खो गई और वह एकदम से सामान्य हो गया,,,।