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सूरज ने अंकित को जो कुछ भी दिखाया था वह सब कुछ अंकित के लिए आप इस स्मरणीय था और अद्भुत था,,, इसके बारे में अंकित ने आज तक कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि कोई इस तरह की भी किताब होती होगी जिसमें आदमी और औरत के संभोग के दृश्य एकदम साफ तौर पर चित्रित होंगे,,, अंकित के लिए वह रंगीन गंदी किताब भी पहली बार था,,और औरत और मर्दों के बीच क्या हुआ संबंध भी पहली बार था पहली बार अंकित इस तरह के दृश्य को देख रहा संभोग की दृष्टि को देख रहा था आम भाषा में कहें तो चुदाई को पहली बार अपनी आंखों से वह रंगीन पन्नों पर देख रहा था,,,, यह सब कुछ अंकित को अंदर तक हिला दिया था उसके कोमल मां पर जो की जवानी के दहलीज पर पहुंच चुके थे बहुत गहरा प्रभाव डाल रहे थे। वह कभी सोचा भी नहीं था कि वह इस तरह के दृश्य को इस तरह की रंगीन किताब को अपनी आंखों से देखेगा।
शाम को घर पहुंचने के बाद भी वह इस रंगीन किताब के ख्यालों में पूरी तरह से खोया रहा अपने कमरे में लेट कर वह उसी गंदे दृश्य के बारे में सोच रहा था जो की औरत और मर्द के बीच के रिश्ते को न जाने कितने आसन से चित्रित किया गया था औरत का मर्दों के लंड को मुंह में लेकर चूसना और वह भी पूरी मस्ती के साथ यह सब अंकित के लिए एक अद्भुत विषय था जो कि उसे बड़ी मुश्किल से यकीन हो पाया था क्योंकि इस बारे में सूरज ने उसे समझाया भी था और जैसा औरतें मर्दों के साथ क्रिया कर रही थी उसी तरह से मर्द भी औरत की बुर को अपने होठों से लगाकर चाट रहे थे,,, यह देख कर तो अंकित का दिमाग पूरी तरह से सन्न रह गया था,,,, वह पहली बार औरत के खूबसूरत अंग को इस रंगीन गंदी किताब में देख भी पाया था वरना औरत की दोनों टांगों के बीच के उसे खूबसूरत अंग के बारे में अंकित के लिए तो कल्पना करना भी मुश्किल था।
लेकिन सूरज के द्वारा लाई गई उस गंदी किताब में औरतों के बहुत से अंगो के बारे में पहली बार अंकित रूबरू हुआ था,,,। औरत की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार को देखकर अंकित के मन में ढेर सारे सवाल उठ रहे थे लेकिन वह उन सवालों का जवाब सूरज से नहीं चाहता था क्योंकि सूरज की नजर में वह एक सीधा-साधा लड़का था और वह अपनी सादगी को अपने दोस्तों के नजरिए में गंदा नहीं करना चाहता था। किताब में वह औरत की बुर को बड़ी गौर से देख रहा था वह एकदम मक्खन की तरह चिकनी थी जिसे देखकर उसके मुंह के साथ-साथ उसके लंड में भी पानी आ चुका था उसने बड़े करीब से गंदे किताब के उसे पढ़ने को देखा था जिसमें औरत की बुर में उसे अंग्रेज का मोटा तगड़ा लंड बड़े आराम से घुसा हुआ था और जिसके घुसने की वजह से उसे औरत के चेहरे पर अजीब सी आभा नजर आ रही थी अंकित को उस औरत के चेहरे पर लंड प्रवेश के बाद दर्द और उन्माद दोनों का भाव एकदम साफ नजर आ रहा था लेकिन इतना तो अंकित समझ गया था कि दर्द से ज्यादा आनंद और उन्माद का असर कुछ ज्यादा ही होता है वरना औरतें इस तरह का काम क्यों करें,,,,।
तभी अपने कमरे में लेते-लेते उसे अपने दोस्त सूरज की बात याद आई जब वह करने किताब देखकर उसे अंग्रेज के लंड की तरफ उंगली रखकर कह रहा था कि काश उसका भी इतना बड़ा होता तो मजा आ जाता उसके कहने के मतलब को वह समझ नहीं पा रहा था क्योंकि अंकित इस बात को नहीं जानता था कि दुनिया में हर मर्दों के लंड का आकार और लंबाई अलग-अलग होती है,,, उसे ऐसा ही लगता था कि सभी मर्दों का लंड एक जैसा ही होता है,,, और इसीलिए उस गंदी किताब में उसे अंग्रेज के लंड को देखकर अंकित को बिल्कुल भी आश्चर्य नहीं हुआ था क्योंकि उसका खुद का लंड अंग्रेज की तरह मोटा और लंबा था जो कि सूरज का बिल्कुल भी नहीं था इसीलिए सूरज ने यह बात कहा था लेकिन अंकित को कुछ समझ नहीं आया था।
खाना खाने के बाद तृप्ति संजू और सुगंधा टीवी देख रहे थे जिसमें धारावाहिक चल रही थी लेकिन तभी टीवी देखते देखते सुगंधा को जैसे कुछ ख्याल आया हो और वह अंकित से बोली,,,।
अरे अंकित टीवी बंद करने के बाद जरा पीछे वाला दरवाजा तो बंद कर देना खुला रह गया है वरना कुत्ते अंदर आ जाएंगे,,,
ठीक है मम्मी,,,,
(और इतना कहने के बाद दोनों फिर से टीवी देखने लगे ,,,, दोनों फिर से टीवी में मग्न हो चुके थे दोपहर वाली बात को बुलाकर अंकित भी टीवी में धारावाहिक देखने में मस्त हो चुका था,,, धारावाहिक के खत्म होने में 10 मिनट समय शेष रह गया था तभी सुगंधा को झपकी आने लगी,,, बहुत कम बार ही ऐसा होता था की सुगंधा को जल्दी नींद आ जाती थी वरना वह देर में ही सोती थी,,, लेकिन झपकी लगने की वजह से वह कुर्सी पर से उठकर खड़ी हो गई और अपने कमरे की तरफ जाने लगी और बोली,,,,।
तुम दोनों जल्दी से टीवी बंद करके सो जाना,,,
ठीक है मम्मी,,,(टीवी की तरफ देखते हुए तृप्ति बोली और सुगंधा अपने कमरे की तरफ जाने लगी लेकिन तभी उसे याद आया किपीछे वाला दरवाजा तो खुला हुआ है और वह बंद करने के लिए अंकित को बोली थी लेकिन सोची वह खुद ही जाकर बंद कर दे वरना वह भूल जाएगा तो रात भर दरवाजा खुला रह जाएगा इसीलिए वह घर के पीछे की तरफ जाने लगी जो की अंदर से ही जाना था,,,,।
घर के पीछे की तरफ आई तो सचमुच में दरवाजा खुला हुआ था। घर के पीछे कभी कबार जब ज्यादा कपड़े हो जाते थे तो सुगंधा यहीं पर कपड़े धोती थी। और यहां पर वह थोड़ी सी फुलवारी भी लगा कर रखी थी जिससे यहां का नजारा थोड़ा अच्छा लगता था,,, बाकी पीछे एकदम खुला मैदान था और चारों तरफ अंधेरा भी था लेकिन घर में जल रहे बल्ब की रोशनी वहां तक बड़े आराम से पहुंच रही थी। सुगंधा वहीं पर कुछ देर खड़ी होकर आसमान की तरफ देखने लगी आसमान में ढेर सारे तारे टिमटिमा रहे थे ,, वैसे भी सुगंधा को रात को बैठ कर आसमान में चांद और तारों को देखना बड़ा अच्छा लगता था। लेकिन कई वर्षों से उसकी यह आदत छूट सी गई थी। इसलिए आज आसमान पर नजर पड़ते ही पुरानी यादें उसकी ताजा हो गई थी उसे आज भी याद है कि इसी तरह से रात के 2:00 बजे वह और उसका पति चुदाई करने के बाद पेशाब करने के लिए दोनों इसी जगह पर आए थे और कुछ देर तक यही खड़े रहने के बाद आसमान की तरफ देखते हुए दोनों के तन बदन में एक बार फिर से कमाअग्नि भडक उठी और फिर वह दोनों इसी जगह पर खुले आसमान के नीचे चुदाई का अद्भुत सुख प्राप्त किए थे उसे पाल को याद करके अनायास ही सुगंधा की टांगों के बीच हलचल होने लगी,,, और उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई लेकिन अपनी स्थिति का भान होते ही एक बार फिर से उसके चेहरे पर उदासी के बादल छाने लगे,,,,।
उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी और वह तुरंत निश्चिंत होकर अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर वहीं बैठ गई थी,,,, लेकिन आज अंकित भी धारावाहिक के बंद होने के पहले ही अपने कमरे में जाने की तैयारी करने लग गया था अपनी मां के कुर्सी पर से उठकर जाने की तकरीबन 5 मिनट बाद ही वह भी अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया था और तभी उसे भी याद आया था कि पीछे वाला दरवाजा बंद करना है,,, उसे यही लग रहा था कि उसकी मां अपने कमरे में सोने के लिए चली गई है और वह दरवाजा बंद करने के लिए घर के पीछे की तरफ आ गया लेकिन घर के पीछे वाले दरवाजे की दहलीज पर पहुंचते ही उसकी आंखों के सामने जो नजारा दिखाई दिया उसे देखकर उसके होश उड़ गए उसकी आंखें फटी की फटी रह गई और उसके पेट में हरकत होना शुरू हो गया उसकी आंखों के सामने ही उसकी मां कुछ दूरी पर कोने में अपनी साड़ी कमर तक उठाए हुए नीचे बैठी हुई थी और पेशाब कर रही थी,,,।
इस नजारे को देखते ही अंकित के तन बदन में आग लग गई दोपहर में वह गांधी किताब के हर एक पन्ने पर नंगी औरतों को देखा था उनकी गांड को देखा था उनकी बड़ी-बड़ी चूचियों को देखा था और यहां तक कि उनके बुरे के भी दर्शन किया था लेकिन उसे नहीं मालूम था कि आज अपने ही घर में उसे अपनी मां की खूबसूरत गांड के दर्शन करने को मिलेंगे,, उसकी सांस पल भर में ही बड़ी तेजी से चलने लगी थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वहां से चला जाए वहां रुका रहे,,,।
कोने में से आ रही आवाज एकदम जानी पहचानी थी इसी तरह की आवाज अंकित को तब आती थी जब उसकी मां बाथरूम में पेशाब करने के लिए जाती थी और उसकी आवाज को सुनकर उसकी उत्तेजना एकदम से बढ़ने लगी थी उसे अपने पजामे के अंदर अपने लंड का आकार बढ़ता हुआ महसूस हो रहा था। सुगंधा पूरी तरह से अनजान थी उसे नहीं मालूम था कि उसका बेटा इस तरह से दरवाजे पर खड़ा होकर उसकी गांड देख रहा होगा उसे पेशाब करता हुआ देख रहा होगा वह तो अपनी ही धुन में थी उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी और उसकी गुलाबी बुर के गुलाबी छेद से पेशाब की धार बड़ी तेजी से निकलकर सामने की दीवार से टकरा रही थी,,,।
चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था,, आसमान में केवल तारे टिमटिमा रहे थे,,,, और ऐसे में सुगंधा घर के पीछे वाली जगह पर पेशाब करने के लिए बैठी हुई थी और वह भी एकदम बेखबर होकर एकदम अनजान बनकर उसे नहीं मालूम था कि इस जगह पर कोई भी आ सकता है,,,। और वाकई में इस जगह पर कोई आता भी नहीं था और वह भी रात के समय क्योंकि यहां कोई काम ही नहीं पड़ता था लेकिन इस बात को वह भूल चुकी थी कि कुछ देर पहले उसने अपने बेटे को ही पीछे वाला दरवाजा बंद करने की हिदायत देते हुए कैमरे से बाहर निकल गई थी,,,,। कोने में बैठकर पेशाब कर रहे सुगंधा को थोड़ी बहुत आहत महसूस होने लगी उसे ऐसा महसूस होने लगा कि उसके पीछे कोई खड़ा है,,, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा वह एकाएक पीछे मुड़कर देखने की गलती नहीं कर सकती थी क्योंकि जो कुछ भी वह करने जा रही थी पीछे खड़े शख्स को या वह कोई भी हो तृप्ति हो या अंकित उसे ऐसा ही लगना चाहिए कि सब कुछ अनजाने में हो रहा है इसलिए वह हल्का सा अपनी नजर को तिरछी करके देखी तो उसके होश उड़ गए।
सुगंधा को एहसास हो गया था कि ठीक उसके पीछे दरवाजे पर खड़ा होकर उसका बेटा उसी की तरफ देख रहा है वैसे तो यह सब उसके लिए सोने पर सुहागा था क्योंकि वैसे भी वह अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने की कोशिश करती ही थी लेकिन आज तो वह अपनी जवानी पर से पूरा पर्दा उठा दी थी और वह भी अनजाने में ही इसलिए उसका दिल बड़े जोरों से धड़कने लगा था,,, इस बात का अहसास होते हैं कि उसका जवान बेटा ठीक उसके पीछे खड़ा होकर उसे पेशाब करते हुए देख रहा है तो उसका दिल बड़े जोरों से धड़कने के साथ-साथ उसके बदन में उत्तेजना भारी कंपन भी होने लगी उसके पैरों में सुरसुराहट होने लगी खासकर के उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में से जिसमें से अभी भी नमकीन पानी की धार निकल रही थी,,,।
ऐसी हालत में सुगंधा की सिट्टी -पिट्टी गुम हो गई थी,,, वैसे तो वह अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए हर मुमकिन कोशिश करने के लिए तैयार थी लेकिन हम जाने में ही जो कुछ भी अपने आप हो रहा था उसे देखते हुए उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी वह एक तरफ शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी वहीं दूसरी तरफ वह काफी उत्तेजना का अनुभव भी कर रही थी,,, क्योंकि पहली बार उसने अपने बेटे की आंखों के सामने इस तरह की कामुक हरकत की थी और वह भी उसकी आंखों के सामने पेशाब करते हुए,,,, कंधे पर से साड़ी का पल्लू गिरा देना कोई और बात थी और उस हरकत करने में भी उसे एड़ी चोटी का जोर लगा देना पड़ता था,,,।
उत्तेजना और शर्म के मारे सुगंधा बहुत गहरी गहरी सांस ले रही थी जिसकी वजह से उसकी भारी भरकम छाती भी ऊपर नीचे हो रही थी,,, सुगंधा को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें खड़ी हो जाए या पीछे मुड़कर अपने बेटे की तरफ देख ले और बोल दे कि यहां क्या कर रहा है लेकिन ऐसे करने में भी उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी,,, लेकिन वह ऐसा करना भी नहीं चाहती थी क्योंकि वह किसी भी तरह से अपने बेटे को इस तरह की हरकत उसे इस तरह से देखने में इस बात का एहसास नहीं कराना चाहती थी कि वह जो कुछ भी कर रहा है गलत है उसे अपमानित नहीं करना चाहती थी क्योंकि अगर वह ऐसा कह देती है उसे रोक देती है तो शायद उसे खुद ही अपने हाथों से अपने सपनों के पर को काटना पड़ जाए जो कि अभी-अभी लगे हुए थे जिससे वह अपनी जवानी के अरमान पूरा करना चाहती थी। और वह अपने मन में यही सोच भी रही थी कि यही सही मौका भी है यही सही अवसर है अपने बेटे को पूरी तरह से अपनी जवानी के जाल में फंसाने का,, क्योंकि वह जानती थी कि दुनिया में ऐसा कौन सा मर्द होगा जो औरत की नंगी गांड को देखकर उसकी तरफ पूरी तरह से आकर्षित न हो जाए उसे पाने के लिए बेकरार ना हो जाए,,,,। और वह अपने मन में यही सोच भी रही थी कि ईस समय उसके बेटे के मन में भी यही चल रहा होगा वरना वह इस तरह से,,, अपनी ही मन को पेशाब करते हुए उसकी नंगी गांड को किस तरह से रात के समय खड़े होकर घुर ना रहा होता,, अपने बेटे की हरकत पर वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी हालांकि अब उसके गुलाबी छेद में से पेशाब की धार एकदम कमजोर पड़ गई थी और उसमें से बूंद बूंद टपक रही थी लेकिन आज सुगंधा को अच्छी तरह से एहसास हो रहा था की पेशाब करने में भी एक अलग मजा है जब कोई उसे इस क्रिया को करते हुए देखने वाला हो,,। और खास करके कोई अपना सगा बेटा तब तो यह क्रिया करने में आनंद ही आनंद है।
अंकित की हालत पल-पल खराब होती जा रही थी यहां तक कि वह अपनी मां की गांड को देखते हुए अनजाने में ही उत्तेजना के चलते पेंट के ऊपर से ही अपने लंड को मुट्ठी में पकड़ कर दबा दिया था,, वह पूरी तरह से मदहोशी के आलम में डूब चुका था उसे इस बात का भी डर नहीं था कि अगर उसकी मां उसे देख लेगी तो क्या सोचेगी वह पूरी तरह से इस पल के एहसास में अपने आप को डुबो दिया था क्योंकि इससे बेहतरीन और मदहोश कर देने वाला नजारा उसने आज तक कभी भी नहीं देखा था इसलिए तो उसका हल बेहाल हो चुका था,,,। अंकित की सांस इतनी तेजी से और गहरी चल रही थी कि इस सुनसान वातावरण में उसकी सांसों की गति और आवाज सुगंध को एकदम साफ सुनाई दे रही थी और अपने बेटे की सांसों की गति को सुनकर हीवह एकदम मस्त हो चुकी थी क्योंकि वह समझ चुकी थी कि उसकी नंगी गांड को देखकर उसका बेटा मदहोश हो रहा है उसकी तरफ आकर्षित हो रहा है उसे पाने के लिए लड़ाई हो रहा है और ऐसा ही तो वह चाहती ही थी आज अनजाने में ही इस खेल में उसे बहुत मजा आ रहा था लेकिन देखते ही देखते पेशाब की बूंद भी गुलाबी छेद से टपकना बंद हो चुकी थी अब ज्यादा देर तक वहां बैठे रहने में भलाई बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि अंकित को शक हो सकता था कि वह जानबूझकर ऐसा कर रही है और वह नहीं चाहती थी कि उसके बेटे को उसकी हर एक हरकत जो उसे अपनी तरफ आकर्षित करने वाली लगती हो उसे ऐसा एहसास हो कि उसकी मां जानबूझकर ऐसा कर रही है।
अपनी जगह से उठाना आप बेहद जरूरी हो चुका था इसलिए वह अपने बेटे को वहां से हट जाने के लिए चेतावनी देने हेतु वाहन पास में ही पलटी में से मग भरकर पानी निकाल ली और उसे पानी की मार को अपनी बुर पर मारने लगी ताकि उसकी बुर पेशाब करने के बाद साफ हो जाए,,, लेकिन देखने वाली बात यह थी कि अभी भी उसका बेटा वही डटकर खड़ा था ऐसा लग रहा था कि जैसे आज वह अपनी आंखों से ही उसकी जवानी के रस को निचोड़ कर पी जाएगा एक तरह से सुगंध को अपने बेटे की यह हरकत मदहोश करने वाली लग रही थी वहीं दूसरी तरफ वह थोड़ा घबरा भी रही थी कि कहीं उसका बेटा उतेजित अवस्था में कुछ गलत ना कर दे जिसके लिए वह तैयार भी थी लेकिन वह नहीं चाहती थी कि जो कुछ भी हो वह उसके बेटे की तरफ से जोर जबरदस्ती में हो वह चाहती थी कि जो कुछ भी हो वह दोनों की सहमति से और वह भी एकदम रंगीन तरीके से हो,,, जो जिंदगी भर दोनों के जेहन में बसा रहे,,,।
अंकित अच्छी तरह से जानती थी कि जिस तरह से उसकी मां पानी डालकर अपनी बुर को साफ कर रही है वह थोड़ी देर में उठकर खड़ी हो जाएगी,,, और ऐसे में उसकी मां की नजर उसे पर पडना लाजमी है,,, लेकिन फिर भी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह कुछ और देखना चाह रहा हो,,, इसलिए मंत्र मुग्ध दिशा वह अपनी नजर हटाए बिना ही कोने वाली जगह पर अपनी मां को देख रहा था,, उसकी मां के बदन में भी अजीब सी हलचल हो रही थी उठना जरूरी था इसलिए वह धीरे से अपनी जगह पर उठकर खड़ी हो गई अभी भी,,, उसकी साड़ी उसके दोनों हाथों में थी और वह कमर तक उठाकर खड़ी थी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अब अपने बेटे को पूरी तरह से अपनी आकर्षक की जाल में फसना चाहती हो इसलिए वहां अपने बेटे की हालत खराब करने के लिए वह एक हाथ पीछे की तरफ ले जाकर अपनी बड़ी-बड़ी गांड पर रखकर उसे धीरे-धीरे सहलाने लगी मानो की जैसे उसे खुजला रही हो,,, और अंकित को अपनी मां की यह हरकत बहुत अच्छी लग रही थी वह उत्तेजित हो जा रहा था और पेट के ऊपर से अपने लंड को जोर-जोर से दबा रहा था,,,, कुछ देर तक सुगंध इसी हरकत को अपने दोनों हाथों से बड़ी-बड़ी से करने लगी और फिर धीरे से एक खूबसूरत नाटक पर पर्दा गिरते हुए अपनी साड़ी को कमर से ही अपने दोनों हाथों से छोड़ दिया और उसकी साड़ी नाटक के परदे की तरह उसके कदमों में जाकर गिर गई और एक खूबसूरत नाटक पर पर्दा पड़ गया,,,,।
सुगंधा जो अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करना चाहती थी उसे अपने पास बुलाना चाहती थी किसी भी तरह से उसके साथ संबंध बनाना चाहती थी इस समय वह शर्म के मारे एकदम लाल हो चुकी थी,, और वह चाहती थी कि समय उसका बेटा वहां से चला जाए क्योंकि वह ऐसे हालात में अपनी बेटी से नजर नहीं मिलना चाहती थी और ना ही उसे सवाल जवाब करना चाहती थी कि वह दरवाजे पर क्यों खड़ा है क्या देख रहा है,,,,। लेकिन अपनी मां के खड़े होते ही और साड़ी को पैरों में गिराते ही अंकित समझ गया था कि अब उसका भी वहां देर तक खड़े रहना उचित नहीं है इसलिए वह पेट के ऊपर से ही अपने लंड को जोर से दबे हुए ही वहां से दबे कदमों से अपने कमरे की तरफ चला गया और उसके जाते ही सुगंध राहत की सांस लेने लगी और फिर धीरे से दरवाजे को बंद करके,,,अपने कमरे में आ गई आज उसकी हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी लेकिन उससे भी ज्यादा हालत खराब थी अंकित की क्योंकि दोपहर का नजारा और इस समय का नजारा भले ही अलग-अलग था लेकिन इस समय का नजारा उसकी जिंदगी में बदलाव लाने के लिए काफी था और गांधी किताब में देखे गए गंदे चित्र के मुताबिक इस समय का नजारा कुछ ज्यादा ही उत्तेजनात्मक और मदहोश कर देने वाला था जिसका असर उसे अपने पेंट में बराबर दिख रहा था,,,।
शाम को घर पहुंचने के बाद भी वह इस रंगीन किताब के ख्यालों में पूरी तरह से खोया रहा अपने कमरे में लेट कर वह उसी गंदे दृश्य के बारे में सोच रहा था जो की औरत और मर्द के बीच के रिश्ते को न जाने कितने आसन से चित्रित किया गया था औरत का मर्दों के लंड को मुंह में लेकर चूसना और वह भी पूरी मस्ती के साथ यह सब अंकित के लिए एक अद्भुत विषय था जो कि उसे बड़ी मुश्किल से यकीन हो पाया था क्योंकि इस बारे में सूरज ने उसे समझाया भी था और जैसा औरतें मर्दों के साथ क्रिया कर रही थी उसी तरह से मर्द भी औरत की बुर को अपने होठों से लगाकर चाट रहे थे,,, यह देख कर तो अंकित का दिमाग पूरी तरह से सन्न रह गया था,,,, वह पहली बार औरत के खूबसूरत अंग को इस रंगीन गंदी किताब में देख भी पाया था वरना औरत की दोनों टांगों के बीच के उसे खूबसूरत अंग के बारे में अंकित के लिए तो कल्पना करना भी मुश्किल था।
लेकिन सूरज के द्वारा लाई गई उस गंदी किताब में औरतों के बहुत से अंगो के बारे में पहली बार अंकित रूबरू हुआ था,,,। औरत की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार को देखकर अंकित के मन में ढेर सारे सवाल उठ रहे थे लेकिन वह उन सवालों का जवाब सूरज से नहीं चाहता था क्योंकि सूरज की नजर में वह एक सीधा-साधा लड़का था और वह अपनी सादगी को अपने दोस्तों के नजरिए में गंदा नहीं करना चाहता था। किताब में वह औरत की बुर को बड़ी गौर से देख रहा था वह एकदम मक्खन की तरह चिकनी थी जिसे देखकर उसके मुंह के साथ-साथ उसके लंड में भी पानी आ चुका था उसने बड़े करीब से गंदे किताब के उसे पढ़ने को देखा था जिसमें औरत की बुर में उसे अंग्रेज का मोटा तगड़ा लंड बड़े आराम से घुसा हुआ था और जिसके घुसने की वजह से उसे औरत के चेहरे पर अजीब सी आभा नजर आ रही थी अंकित को उस औरत के चेहरे पर लंड प्रवेश के बाद दर्द और उन्माद दोनों का भाव एकदम साफ नजर आ रहा था लेकिन इतना तो अंकित समझ गया था कि दर्द से ज्यादा आनंद और उन्माद का असर कुछ ज्यादा ही होता है वरना औरतें इस तरह का काम क्यों करें,,,,।
तभी अपने कमरे में लेते-लेते उसे अपने दोस्त सूरज की बात याद आई जब वह करने किताब देखकर उसे अंग्रेज के लंड की तरफ उंगली रखकर कह रहा था कि काश उसका भी इतना बड़ा होता तो मजा आ जाता उसके कहने के मतलब को वह समझ नहीं पा रहा था क्योंकि अंकित इस बात को नहीं जानता था कि दुनिया में हर मर्दों के लंड का आकार और लंबाई अलग-अलग होती है,,, उसे ऐसा ही लगता था कि सभी मर्दों का लंड एक जैसा ही होता है,,, और इसीलिए उस गंदी किताब में उसे अंग्रेज के लंड को देखकर अंकित को बिल्कुल भी आश्चर्य नहीं हुआ था क्योंकि उसका खुद का लंड अंग्रेज की तरह मोटा और लंबा था जो कि सूरज का बिल्कुल भी नहीं था इसीलिए सूरज ने यह बात कहा था लेकिन अंकित को कुछ समझ नहीं आया था।
खाना खाने के बाद तृप्ति संजू और सुगंधा टीवी देख रहे थे जिसमें धारावाहिक चल रही थी लेकिन तभी टीवी देखते देखते सुगंधा को जैसे कुछ ख्याल आया हो और वह अंकित से बोली,,,।
अरे अंकित टीवी बंद करने के बाद जरा पीछे वाला दरवाजा तो बंद कर देना खुला रह गया है वरना कुत्ते अंदर आ जाएंगे,,,
ठीक है मम्मी,,,,
(और इतना कहने के बाद दोनों फिर से टीवी देखने लगे ,,,, दोनों फिर से टीवी में मग्न हो चुके थे दोपहर वाली बात को बुलाकर अंकित भी टीवी में धारावाहिक देखने में मस्त हो चुका था,,, धारावाहिक के खत्म होने में 10 मिनट समय शेष रह गया था तभी सुगंधा को झपकी आने लगी,,, बहुत कम बार ही ऐसा होता था की सुगंधा को जल्दी नींद आ जाती थी वरना वह देर में ही सोती थी,,, लेकिन झपकी लगने की वजह से वह कुर्सी पर से उठकर खड़ी हो गई और अपने कमरे की तरफ जाने लगी और बोली,,,,।
तुम दोनों जल्दी से टीवी बंद करके सो जाना,,,
ठीक है मम्मी,,,(टीवी की तरफ देखते हुए तृप्ति बोली और सुगंधा अपने कमरे की तरफ जाने लगी लेकिन तभी उसे याद आया किपीछे वाला दरवाजा तो खुला हुआ है और वह बंद करने के लिए अंकित को बोली थी लेकिन सोची वह खुद ही जाकर बंद कर दे वरना वह भूल जाएगा तो रात भर दरवाजा खुला रह जाएगा इसीलिए वह घर के पीछे की तरफ जाने लगी जो की अंदर से ही जाना था,,,,।
घर के पीछे की तरफ आई तो सचमुच में दरवाजा खुला हुआ था। घर के पीछे कभी कबार जब ज्यादा कपड़े हो जाते थे तो सुगंधा यहीं पर कपड़े धोती थी। और यहां पर वह थोड़ी सी फुलवारी भी लगा कर रखी थी जिससे यहां का नजारा थोड़ा अच्छा लगता था,,, बाकी पीछे एकदम खुला मैदान था और चारों तरफ अंधेरा भी था लेकिन घर में जल रहे बल्ब की रोशनी वहां तक बड़े आराम से पहुंच रही थी। सुगंधा वहीं पर कुछ देर खड़ी होकर आसमान की तरफ देखने लगी आसमान में ढेर सारे तारे टिमटिमा रहे थे ,, वैसे भी सुगंधा को रात को बैठ कर आसमान में चांद और तारों को देखना बड़ा अच्छा लगता था। लेकिन कई वर्षों से उसकी यह आदत छूट सी गई थी। इसलिए आज आसमान पर नजर पड़ते ही पुरानी यादें उसकी ताजा हो गई थी उसे आज भी याद है कि इसी तरह से रात के 2:00 बजे वह और उसका पति चुदाई करने के बाद पेशाब करने के लिए दोनों इसी जगह पर आए थे और कुछ देर तक यही खड़े रहने के बाद आसमान की तरफ देखते हुए दोनों के तन बदन में एक बार फिर से कमाअग्नि भडक उठी और फिर वह दोनों इसी जगह पर खुले आसमान के नीचे चुदाई का अद्भुत सुख प्राप्त किए थे उसे पाल को याद करके अनायास ही सुगंधा की टांगों के बीच हलचल होने लगी,,, और उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई लेकिन अपनी स्थिति का भान होते ही एक बार फिर से उसके चेहरे पर उदासी के बादल छाने लगे,,,,।
उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी और वह तुरंत निश्चिंत होकर अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर वहीं बैठ गई थी,,,, लेकिन आज अंकित भी धारावाहिक के बंद होने के पहले ही अपने कमरे में जाने की तैयारी करने लग गया था अपनी मां के कुर्सी पर से उठकर जाने की तकरीबन 5 मिनट बाद ही वह भी अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया था और तभी उसे भी याद आया था कि पीछे वाला दरवाजा बंद करना है,,, उसे यही लग रहा था कि उसकी मां अपने कमरे में सोने के लिए चली गई है और वह दरवाजा बंद करने के लिए घर के पीछे की तरफ आ गया लेकिन घर के पीछे वाले दरवाजे की दहलीज पर पहुंचते ही उसकी आंखों के सामने जो नजारा दिखाई दिया उसे देखकर उसके होश उड़ गए उसकी आंखें फटी की फटी रह गई और उसके पेट में हरकत होना शुरू हो गया उसकी आंखों के सामने ही उसकी मां कुछ दूरी पर कोने में अपनी साड़ी कमर तक उठाए हुए नीचे बैठी हुई थी और पेशाब कर रही थी,,,।
इस नजारे को देखते ही अंकित के तन बदन में आग लग गई दोपहर में वह गांधी किताब के हर एक पन्ने पर नंगी औरतों को देखा था उनकी गांड को देखा था उनकी बड़ी-बड़ी चूचियों को देखा था और यहां तक कि उनके बुरे के भी दर्शन किया था लेकिन उसे नहीं मालूम था कि आज अपने ही घर में उसे अपनी मां की खूबसूरत गांड के दर्शन करने को मिलेंगे,, उसकी सांस पल भर में ही बड़ी तेजी से चलने लगी थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वहां से चला जाए वहां रुका रहे,,,।
कोने में से आ रही आवाज एकदम जानी पहचानी थी इसी तरह की आवाज अंकित को तब आती थी जब उसकी मां बाथरूम में पेशाब करने के लिए जाती थी और उसकी आवाज को सुनकर उसकी उत्तेजना एकदम से बढ़ने लगी थी उसे अपने पजामे के अंदर अपने लंड का आकार बढ़ता हुआ महसूस हो रहा था। सुगंधा पूरी तरह से अनजान थी उसे नहीं मालूम था कि उसका बेटा इस तरह से दरवाजे पर खड़ा होकर उसकी गांड देख रहा होगा उसे पेशाब करता हुआ देख रहा होगा वह तो अपनी ही धुन में थी उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी और उसकी गुलाबी बुर के गुलाबी छेद से पेशाब की धार बड़ी तेजी से निकलकर सामने की दीवार से टकरा रही थी,,,।
चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था,, आसमान में केवल तारे टिमटिमा रहे थे,,,, और ऐसे में सुगंधा घर के पीछे वाली जगह पर पेशाब करने के लिए बैठी हुई थी और वह भी एकदम बेखबर होकर एकदम अनजान बनकर उसे नहीं मालूम था कि इस जगह पर कोई भी आ सकता है,,,। और वाकई में इस जगह पर कोई आता भी नहीं था और वह भी रात के समय क्योंकि यहां कोई काम ही नहीं पड़ता था लेकिन इस बात को वह भूल चुकी थी कि कुछ देर पहले उसने अपने बेटे को ही पीछे वाला दरवाजा बंद करने की हिदायत देते हुए कैमरे से बाहर निकल गई थी,,,,। कोने में बैठकर पेशाब कर रहे सुगंधा को थोड़ी बहुत आहत महसूस होने लगी उसे ऐसा महसूस होने लगा कि उसके पीछे कोई खड़ा है,,, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा वह एकाएक पीछे मुड़कर देखने की गलती नहीं कर सकती थी क्योंकि जो कुछ भी वह करने जा रही थी पीछे खड़े शख्स को या वह कोई भी हो तृप्ति हो या अंकित उसे ऐसा ही लगना चाहिए कि सब कुछ अनजाने में हो रहा है इसलिए वह हल्का सा अपनी नजर को तिरछी करके देखी तो उसके होश उड़ गए।
सुगंधा को एहसास हो गया था कि ठीक उसके पीछे दरवाजे पर खड़ा होकर उसका बेटा उसी की तरफ देख रहा है वैसे तो यह सब उसके लिए सोने पर सुहागा था क्योंकि वैसे भी वह अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने की कोशिश करती ही थी लेकिन आज तो वह अपनी जवानी पर से पूरा पर्दा उठा दी थी और वह भी अनजाने में ही इसलिए उसका दिल बड़े जोरों से धड़कने लगा था,,, इस बात का अहसास होते हैं कि उसका जवान बेटा ठीक उसके पीछे खड़ा होकर उसे पेशाब करते हुए देख रहा है तो उसका दिल बड़े जोरों से धड़कने के साथ-साथ उसके बदन में उत्तेजना भारी कंपन भी होने लगी उसके पैरों में सुरसुराहट होने लगी खासकर के उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में से जिसमें से अभी भी नमकीन पानी की धार निकल रही थी,,,।
ऐसी हालत में सुगंधा की सिट्टी -पिट्टी गुम हो गई थी,,, वैसे तो वह अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए हर मुमकिन कोशिश करने के लिए तैयार थी लेकिन हम जाने में ही जो कुछ भी अपने आप हो रहा था उसे देखते हुए उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी वह एक तरफ शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी वहीं दूसरी तरफ वह काफी उत्तेजना का अनुभव भी कर रही थी,,, क्योंकि पहली बार उसने अपने बेटे की आंखों के सामने इस तरह की कामुक हरकत की थी और वह भी उसकी आंखों के सामने पेशाब करते हुए,,,, कंधे पर से साड़ी का पल्लू गिरा देना कोई और बात थी और उस हरकत करने में भी उसे एड़ी चोटी का जोर लगा देना पड़ता था,,,।
उत्तेजना और शर्म के मारे सुगंधा बहुत गहरी गहरी सांस ले रही थी जिसकी वजह से उसकी भारी भरकम छाती भी ऊपर नीचे हो रही थी,,, सुगंधा को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें खड़ी हो जाए या पीछे मुड़कर अपने बेटे की तरफ देख ले और बोल दे कि यहां क्या कर रहा है लेकिन ऐसे करने में भी उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी,,, लेकिन वह ऐसा करना भी नहीं चाहती थी क्योंकि वह किसी भी तरह से अपने बेटे को इस तरह की हरकत उसे इस तरह से देखने में इस बात का एहसास नहीं कराना चाहती थी कि वह जो कुछ भी कर रहा है गलत है उसे अपमानित नहीं करना चाहती थी क्योंकि अगर वह ऐसा कह देती है उसे रोक देती है तो शायद उसे खुद ही अपने हाथों से अपने सपनों के पर को काटना पड़ जाए जो कि अभी-अभी लगे हुए थे जिससे वह अपनी जवानी के अरमान पूरा करना चाहती थी। और वह अपने मन में यही सोच भी रही थी कि यही सही मौका भी है यही सही अवसर है अपने बेटे को पूरी तरह से अपनी जवानी के जाल में फंसाने का,, क्योंकि वह जानती थी कि दुनिया में ऐसा कौन सा मर्द होगा जो औरत की नंगी गांड को देखकर उसकी तरफ पूरी तरह से आकर्षित न हो जाए उसे पाने के लिए बेकरार ना हो जाए,,,,। और वह अपने मन में यही सोच भी रही थी कि ईस समय उसके बेटे के मन में भी यही चल रहा होगा वरना वह इस तरह से,,, अपनी ही मन को पेशाब करते हुए उसकी नंगी गांड को किस तरह से रात के समय खड़े होकर घुर ना रहा होता,, अपने बेटे की हरकत पर वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी हालांकि अब उसके गुलाबी छेद में से पेशाब की धार एकदम कमजोर पड़ गई थी और उसमें से बूंद बूंद टपक रही थी लेकिन आज सुगंधा को अच्छी तरह से एहसास हो रहा था की पेशाब करने में भी एक अलग मजा है जब कोई उसे इस क्रिया को करते हुए देखने वाला हो,,। और खास करके कोई अपना सगा बेटा तब तो यह क्रिया करने में आनंद ही आनंद है।
अंकित की हालत पल-पल खराब होती जा रही थी यहां तक कि वह अपनी मां की गांड को देखते हुए अनजाने में ही उत्तेजना के चलते पेंट के ऊपर से ही अपने लंड को मुट्ठी में पकड़ कर दबा दिया था,, वह पूरी तरह से मदहोशी के आलम में डूब चुका था उसे इस बात का भी डर नहीं था कि अगर उसकी मां उसे देख लेगी तो क्या सोचेगी वह पूरी तरह से इस पल के एहसास में अपने आप को डुबो दिया था क्योंकि इससे बेहतरीन और मदहोश कर देने वाला नजारा उसने आज तक कभी भी नहीं देखा था इसलिए तो उसका हल बेहाल हो चुका था,,,। अंकित की सांस इतनी तेजी से और गहरी चल रही थी कि इस सुनसान वातावरण में उसकी सांसों की गति और आवाज सुगंध को एकदम साफ सुनाई दे रही थी और अपने बेटे की सांसों की गति को सुनकर हीवह एकदम मस्त हो चुकी थी क्योंकि वह समझ चुकी थी कि उसकी नंगी गांड को देखकर उसका बेटा मदहोश हो रहा है उसकी तरफ आकर्षित हो रहा है उसे पाने के लिए लड़ाई हो रहा है और ऐसा ही तो वह चाहती ही थी आज अनजाने में ही इस खेल में उसे बहुत मजा आ रहा था लेकिन देखते ही देखते पेशाब की बूंद भी गुलाबी छेद से टपकना बंद हो चुकी थी अब ज्यादा देर तक वहां बैठे रहने में भलाई बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि अंकित को शक हो सकता था कि वह जानबूझकर ऐसा कर रही है और वह नहीं चाहती थी कि उसके बेटे को उसकी हर एक हरकत जो उसे अपनी तरफ आकर्षित करने वाली लगती हो उसे ऐसा एहसास हो कि उसकी मां जानबूझकर ऐसा कर रही है।
अपनी जगह से उठाना आप बेहद जरूरी हो चुका था इसलिए वह अपने बेटे को वहां से हट जाने के लिए चेतावनी देने हेतु वाहन पास में ही पलटी में से मग भरकर पानी निकाल ली और उसे पानी की मार को अपनी बुर पर मारने लगी ताकि उसकी बुर पेशाब करने के बाद साफ हो जाए,,, लेकिन देखने वाली बात यह थी कि अभी भी उसका बेटा वही डटकर खड़ा था ऐसा लग रहा था कि जैसे आज वह अपनी आंखों से ही उसकी जवानी के रस को निचोड़ कर पी जाएगा एक तरह से सुगंध को अपने बेटे की यह हरकत मदहोश करने वाली लग रही थी वहीं दूसरी तरफ वह थोड़ा घबरा भी रही थी कि कहीं उसका बेटा उतेजित अवस्था में कुछ गलत ना कर दे जिसके लिए वह तैयार भी थी लेकिन वह नहीं चाहती थी कि जो कुछ भी हो वह उसके बेटे की तरफ से जोर जबरदस्ती में हो वह चाहती थी कि जो कुछ भी हो वह दोनों की सहमति से और वह भी एकदम रंगीन तरीके से हो,,, जो जिंदगी भर दोनों के जेहन में बसा रहे,,,।
अंकित अच्छी तरह से जानती थी कि जिस तरह से उसकी मां पानी डालकर अपनी बुर को साफ कर रही है वह थोड़ी देर में उठकर खड़ी हो जाएगी,,, और ऐसे में उसकी मां की नजर उसे पर पडना लाजमी है,,, लेकिन फिर भी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह कुछ और देखना चाह रहा हो,,, इसलिए मंत्र मुग्ध दिशा वह अपनी नजर हटाए बिना ही कोने वाली जगह पर अपनी मां को देख रहा था,, उसकी मां के बदन में भी अजीब सी हलचल हो रही थी उठना जरूरी था इसलिए वह धीरे से अपनी जगह पर उठकर खड़ी हो गई अभी भी,,, उसकी साड़ी उसके दोनों हाथों में थी और वह कमर तक उठाकर खड़ी थी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अब अपने बेटे को पूरी तरह से अपनी आकर्षक की जाल में फसना चाहती हो इसलिए वहां अपने बेटे की हालत खराब करने के लिए वह एक हाथ पीछे की तरफ ले जाकर अपनी बड़ी-बड़ी गांड पर रखकर उसे धीरे-धीरे सहलाने लगी मानो की जैसे उसे खुजला रही हो,,, और अंकित को अपनी मां की यह हरकत बहुत अच्छी लग रही थी वह उत्तेजित हो जा रहा था और पेट के ऊपर से अपने लंड को जोर-जोर से दबा रहा था,,,, कुछ देर तक सुगंध इसी हरकत को अपने दोनों हाथों से बड़ी-बड़ी से करने लगी और फिर धीरे से एक खूबसूरत नाटक पर पर्दा गिरते हुए अपनी साड़ी को कमर से ही अपने दोनों हाथों से छोड़ दिया और उसकी साड़ी नाटक के परदे की तरह उसके कदमों में जाकर गिर गई और एक खूबसूरत नाटक पर पर्दा पड़ गया,,,,।
सुगंधा जो अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करना चाहती थी उसे अपने पास बुलाना चाहती थी किसी भी तरह से उसके साथ संबंध बनाना चाहती थी इस समय वह शर्म के मारे एकदम लाल हो चुकी थी,, और वह चाहती थी कि समय उसका बेटा वहां से चला जाए क्योंकि वह ऐसे हालात में अपनी बेटी से नजर नहीं मिलना चाहती थी और ना ही उसे सवाल जवाब करना चाहती थी कि वह दरवाजे पर क्यों खड़ा है क्या देख रहा है,,,,। लेकिन अपनी मां के खड़े होते ही और साड़ी को पैरों में गिराते ही अंकित समझ गया था कि अब उसका भी वहां देर तक खड़े रहना उचित नहीं है इसलिए वह पेट के ऊपर से ही अपने लंड को जोर से दबे हुए ही वहां से दबे कदमों से अपने कमरे की तरफ चला गया और उसके जाते ही सुगंध राहत की सांस लेने लगी और फिर धीरे से दरवाजे को बंद करके,,,अपने कमरे में आ गई आज उसकी हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी लेकिन उससे भी ज्यादा हालत खराब थी अंकित की क्योंकि दोपहर का नजारा और इस समय का नजारा भले ही अलग-अलग था लेकिन इस समय का नजारा उसकी जिंदगी में बदलाव लाने के लिए काफी था और गांधी किताब में देखे गए गंदे चित्र के मुताबिक इस समय का नजारा कुछ ज्यादा ही उत्तेजनात्मक और मदहोश कर देने वाला था जिसका असर उसे अपने पेंट में बराबर दिख रहा था,,,।