Incest मुझे प्यार करो,,, - Page 63 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest मुझे प्यार करो,,,

अंकित अपने कमरे में अपने बिस्तर पर बैठा हुआ था और वह धीरे-धीरे अपने बैग को खोलकर उसने छुपी हुई वह किताब निकाल लिया था जो किताब उसे अपनी मां की अलमारी से मिली थी, किताब के मुख पृष्ठ ने उसका ध्यान पूरी तरह से अपनी तरफ आकर्षित कर लिया था,,,, अर्धनग्न और नग्न अवस्था में खड़ी औरत की तस्वीर देखकर वह पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी मां की अलमारी में इतनी अश्लील किताब थी जिसका बीच का पन्ना वह खोलकर एक लाइन पढ़ भी लिया था जिसे पढ़ते ही उसके बाद में झनझनाहट से फैलने लगी थी उसकी आंखों के आगे उत्तेजना के बदले घिरने लगे थे और वहां उससे ज्यादा पढ़ नहीं पाया था और किताब को बंद करके छुपा कर अपनी बैग में रखकर अपने काम के लिए निकल गया था,,,।

Sugandha ki masti apne bete k sath



रास्ते भर वह उसे किताब के बारे में मन ही मन सोच भी रहा था लेकिन रास्ते में उसके साथ से भी कहीं ज्यादा उत्तेजित कर देने वाली चीज उसके साथ थी और वह थी सुमन जो अपनी बातों से अपनी अश्लील हरकतों से उसे अपनी तरफ पूरी तरह से आकर्षित करती चली जा रही थी और एक तरह से वह अपनी जवानी का उसे दीवाना बना ली थी,,,सुमन की हरकत सेवा पूरी तरह से वाकिफ तो हो ही चुका था उसकी हरकतों ने हीं तो उसे और भी ज्यादा उत्तेजना का एहसास दिलाया था वरना गोल गोल और कठोर दिखने वाली चुची अंदर से कितनी रुई की तरह नरम होती है यह उसे कहां मालूम था अगर सुमन उसे अपनी चूची दबाने के लिए ना बोलती तो शायद वह ईस एहसास से अनजान ही रहता,,,, नूपुर सुगंधा के बाद एक समान ही थी जो उसकी जवानी के लावे को पिघलाने मे लगी हुई थी इसलिए तो सुमन के प्रति भी उसका आकर्षण बना हुआ था,,,।



लेकिन इस समय वह अपने बिस्तर पर अपनी मां के अलमारी में पाए हुए स्टील किताब को अपने हाथ में लेकर अपनी मां के बारे में ही सोच रहा था और इस समय उसके आकर्षण का केंद्र बिंदु उसकी मा ही थी।

और जिस तरह के हालात उसके और उसकी मां के बीच बने थे उसे देखते हुए वह पूरी तरह से अपनी मां को छोड़ने के लिए ललाईत था लेकिन उसे चोदने का कोई रास्ता उसे नजर नहीं आ रहा था,,,, वैसे भी अपनी मां की कामुक हरकतों को देखकर वह पानी पानी हो गया था एक तो पहले सही सुगंधा के बदन की बनावट किसी स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा से काम नहीं थी बड़ी-बड़ी गोल चूचियां एकदम तनी हुई पतली कमर बदन पर चर्बी उतनी ही चिकनी जरूरत हो उतनी ही चढ़ी हुई थी और नितंबों का आकार एकदम से जान लेवा था अगर उसे कोई भी देखा तो बस देखता ही रहता था और सपनों में न जाने उसके साथ क्या-क्या कर गुजर कर अपनी जवानी की गर्मी को शांत करता था ऐसे में अंकित का अपनी मां की जवानी पर फिदा हो जाना कोई बड़ी बात नहीं थी उसकी जगह कोई और होता तो शायद अब तक वह अपनी मां की दोनों टांगों के बीच पहुंचकर चुदाई का मजा लूट लिया होता,,,।

Apni ma ki peticoat utarta hua ankit



अंकित का दिल जोरो से धड़क‌ रहा था वह धीरे से उसे किताब के पहले पन्ने को पलट दिया और पढ़ने लगा,,,, राहुल की मां अकेले ही अपने बेटे को पाल-पोसकर बड़ा की थी तकरीबन 10 साल पहले उसके पति का देहांत हो चुका था और इस दौरान उसका बेटा अब पूरा जवान हो चुका था,,, हट्टा कट्टा बदन का मालिक हो जाने पर राहुल पूरी तरह से औरतों और लड़कियों क्या आकर्षण का केंद्र बिंदु बन चुका था जिसमें उसकी मां भी बाकात नहीं थी,,, ऐसा राहुल की मां के साथ पहले कभी नहीं हुआ था लेकिन एक रात में अपने बेटे को देखने का नजरिया उसकी पूरी तरह से बदल चुका था जब उसने पहली बार अपने बेटे को खुले में पेशाब करते हुए देखी थी और वह भी घर के पीछे अनजाने में वह पीछे पहुंच चुकी थी और अपने बेटे को पेशाब करता हुआ देखकर पहले तो उसे कोई खास बात नहीं लगी लेकिन जैसे ही उसकी नजर अपने बेटे के लंड पर पड़ी वैसे ही उसके तो होश उड़ गए,,,।



अपने पति के देहांत के बाद से राहुल की मां अपनी जवानी को किसी गैर मर्द के आगे नहीं परोसी थी,, बरसों से अपनी जवानी को संभाल कर बरकरार रखी हुई थी इसीलिए इस उम्र में भी उसकी जवानी पूरी तरह से कड़क थी कहीं से भी ढीलापन नहीं था। उसकी,, खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी चूचियां ब्लाऊज़ और साड़ी के अंदर होने के बावजूद भी देखने वालों के होश उड़ा देती थी बड़ी-बड़ी गांड किसी का भी लंड खड़ा करने में सक्षम थी,,, ऐसा नहीं था कि मोहल्ले के लड़के और मर्द उसके पीछे ना पड़े हो बहुत से लोग उसके पीछे उसकी जवानी का स्वाद चखने के लिए दिन रात उसके पीछे हाथ धोकर पड़े रहते थे इन सबके बावजूद भी राहुल की मैन किसी को भी अपने करीब नहीं आने दी थी और अपने पति के देहांत के बाद अपनी ख्वाहिशों को अपने सीने में दफन कर चुकी थी,,,।

Ankit or uski ma



लेकिन उसे रात उसकी ख्वाहिशे फिर से उजागर हो गई एक बार फिर से उसे औरत होने का एहसास होने लगा जब वह अपने बेटे के खड़े लंड को देखी इसकी मोटाई उसकी लंबाई उसके होश उड़ा रही थी क्योंकि इतना मोटा और लंबा लंड उसने आज तक नहीं देखी थी ना ही उसके पति का इतना मोटा और लंबा था जितना वह देखी थी उससे आधा ही था,,, और फिर अपने बेटे से ही चुदवाने की इच्छा उसकी जागरूक होने लगी,,, पहले तो अपने ही ख्यालों पर उसे अपने आप पर गुस्सा आने लगा लेकिन दिन रात उसकी आंखों के सामने उसके बेटे का लहराता हुआ लंड सामने नजर आने लगता था जिससे वह अपने मन की मंशा को दबा नहीं पाई थी ,,,।

राहुल इन सब बातो से एकदम अनजान था वह अपनी मां को कभी भी गंदी नजर से नहीं देखा था लेकिन उसकी मां ही उसके प्रति गंदी नजर रखने लगी थी जिसका एहसास उसे तब हुआ जब उसकी आंखों के सामने ही उसकी मां कपड़े बदलने लगी अपने ब्लाउज पहनने लगी उतरने लगी क्योंकि ऐसा वह पहले कभी करती नहीं थी और एक बार तो हद हो गई थी वह घर के पीछे गुसलखाने में नहा रही थी और बिना कपड़ों के एकदम नंगी होकर और ऐसे हालात में भी वह अपने बेटे को आवाज देकर अपनी पीठ पर साबुन मलने के लिए बुलाई थी,,,।

Ankit k lund ko chaddhi k upar se sahlaati huyi sugandha





राहुल को बड़ा अजीब लगता था अपनी मां का व्यवहार देख कर लेकिन न जाने क्यों उसे अपनी मां का नंगा बदन देखकर अच्छा लगने लगा उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी और उसे भी मजा आने लगा लेकिन वह नहीं जानता था कि उसकी मां उसके साथ छुड़वाना चाहती है उसे ऐसा ही लगता था कि शायद यह सब सहज हो रहा है सामान्य तरीके से लेकिन यह बिल्कुल असामान्य था जिसे समझते समझते उसकी भी इच्छा एकदम प्रबलित होने लगी थी,,,, क्योंकि राहुल की मां इतनी मदहोश कर देने वाली जवानी की मालकिन थी कि उसके सामने अस्तव्यस्त हालत में कभी खाना बनाती थी तो कभी टीवी देखने बैठ जाती थी,,,, साड़ी घुटने तक चढ़ जाती थी और अपने बिस्तर पर वह पेट के बल लेटी थी और ऐसे में वह दोनों टांगों को ऊपर उठकर किसी किताब को पढ़ने की कोशिश करती थी जिसकी वजह से उसकी साड़ी उसकी जामुन तक आ जाती थी और उसकी मोंटी मोटी जांघें एकदम से उजागर हो जाती थी जिसे देखकर ना चाहते हुए भी राहुल का लंड खड़ा हो जाता था,,,,।



ऐसे ही राहुल की मां का अंग प्रदर्शन का सिलसिला आगे बढ़ता ही रहा और एक दिन बड़े जोरों की बारिश हो रही थी कच्चा मकान होने की वजह से जगह-जगह से पानी टपक रहा था और सोने की जगह न होने की वजह से राहुल की मां अंदर ही अंदर खुश होते हुए उसे अपनी बिस्तर पर सोने के लिए आमंत्रित कर दी लेकिन इससे पहले वह अपने बदन पर मालिश करवाना चाहती थी और मालिक के बहाने अपने बेटे को अपनी जवानी की झलक दिखाना चाहती थी और जाने अनजाने में उसकी मालिश करते हुए राहुल अपनी मां की रसीली बुर के दर्शन कर लिया जिसे देखते ही उसके चेहरे का रंग एकदम से बदलने लगा,,, आश्चर्य से उसका मुंह खुला का खुला रह गया था अपनी मां को कई बार नंगी देख चुका था लेकिन पहली बार वह अपनी मां की बुर को देख रहा था उसकी बनावट उसकी भूगोल पूरी तरह से उसको लुभा देने वाली थी,,,,

Apne bete k lund se khelti huyi sugandha



ऐसे क्या देख रहा है इस पर भी तेल लगाकर मालिश कर,,,,(अपनी मां के मुंह से इस तरह के शब्द सुनकर तो राहुल के होश एकदम से उड़ने लगे उसकी भी इच्छा जाग रही थी इसलिए अपनी मां की बात मानते हुए सरसों का तेल वह अपनी मां की बुर पर रखकर मालिश करने लगा और देखते ही देखते उत्तेजना के सागर में डूबने लगा उसकी मां अपनी हरकत को बढ़ाते हुए अपना हाथ आगे बढ़कर पेट में तने हुए उसके लंड को पकड़ने लगी बस फिर क्या था राहुल की मां अपने बेटे को अपनी जवानी का दीवाना बनाने में कामयाब हो चुकी थी,,, राहुल पहले तो अपनी मां की हरकत से थोड़ा परेशान हो रहा था वह ऐसा न करने को कह रहा था लेकिन उसकी मां इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहती थी और उसे समझा बूझकर उसके भी कपड़े उतार कर उसे भी पूरी तरह से नंगा कर दी थी उसके मोटे तगड़े लड को देखकर वह अपने आप पर काबू नहीं कर पाई और उसे मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी बस फिर क्या था राहुल भी अपना आपा खो बैठा था लेकिन उसे संभोग की क्रिया की प्रक्रिया नहीं मालूम थी,,,,



लेकिन उसे रात को राहुल की मां उसे संभोग क्रिया में पूरी तरह से पारंगत कर दी थी हर तरीके से वह चुदाई का आनंद ली थी यहां तक की सुबह होते-होते राहुल अपने ही मन से अपनी मां को घोड़ी बनाकर पीछे से उसकी चुदाई कर रहा था,,,,।

(क्या सब पढ़ते ही अंकित के तो होश उड़ गए वह कहानी पूरी तरह से मां बेटे के बीच की थी वह कहानी का पहला अध्याय पढ़ने के बाद पूरी तरह से होशो हवास को खो बैठा था और राहुल और उसकी मां की तरह वह अपनी और अपनी मां के बीच तुलना करने लगा था दोनों का जीवन एक जैसा ही था उसकी मां भी बरसों से प्यासी थी,,, राहुल की कहानी को पढ़कर अंकित राहुल से अपने आप की तुलना करने लगा था वह अच्छी तरह से समझ रहा था कि जिस तरह से राहुल के साथ हो रहा था वैसा ही तो उसके साथ भी हो रहा था उसकी मां भी तो उसके सामने कपड़े बदलने कपड़े उतारना नंगी होकर नहाना उसके सामने पेशाब करना इन सब तरह की हरकत कर रही थी,,,।



इस कहानी को पढ़कर अंकित समझ गया था कि उसकी मां पूरी तरह से चुदवासी है वर्षों से वह अकेले ही जीवन काट रही थी बिस्तर पर करवटें बदल रही थी लेकिन इस समय वह मर्द की जरूरत महसूस कर रही थी,,, ठीक राहुल की मां की तरह लेकिन अपने मुंह से बात कह नहीं पा रही थी कि उसे अपने बेटे का लंड लेना है,,,, अंकित पूरी तरह से मदहोश हो चुका था कहानी पढ़कर वह अपनी मां के बारे में सोचने लगा था और वह इस बारे में भी गौर करने लगा था कि इस तरह की मां बेटे के बीच की गंदी कहानी की किताब उसकी मां की अलमारी में क्या कर रही थी दूसरा कोई ओला नहीं सकता था उसकी मां ही इस तरह की किताब को खरीद कर लाई है और पढ़कर मजा ले रही है और इस कहानी को पढ़कर ही वह भी इस तरह की हरकत करते हुए शायद अपने ही बेटे से चुदवाना चाहती है ऐसा अपने मन में सोचते ही अंकित के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे,,, कहानी के माध्यम से उसे समझ में आना लगा की बहुत ही जल्द वह भी चुदाई का सुख भोग पाएगा वह भी बुर में लंड डाल पाएगा जिसके बारे में सोच सोच कर उसकी तड़प बढ़ती जा रही है,,,,।



धीरे-धीरे करके उसे किताब को पढ़ते पढ़ते तीन बज चुके थे और 3:00 बजाते हैं तक उसे किताब की मदहोशी में राहुल इस कदर खो गया की तीन बार मुठ मार चुका था और इस किताब के माध्यम से वह अपनी मां के मन में क्या चल रहा था वह पूरी तरह से समझ गया था वह समझ गया था कि उसकी मां लंड के लिए तड़प रही है और अपने ही बेटे के लंड को अपनी बुर में लेना चाहती है इससे बड़ी खुशी की बात और क्या हो सकती है अंकित के लिए वह बहुत खुश था,,, वह किताब को वापस अपने बैग में रखकर सोने की कोशिश करने लगा उसके ख्यालों में उसकी मां की जवानी पूरी तरह से छाई हुई थी और बार-बार राहुल और उसकी मां के बारे में सोच सोच कर वह अपने मन में कल्पना करने लगता था कि वह राहुल की तरह ही अपनी मां की चुदाई करेगा उसे पूरा सुख देगा उसे संतुष्ट कर देगा और ऐसा सोचते सोचते कब उसे नींद आ गई उसे भी पता नहीं चला,,,,।

सुबह जब उसकी मां किचन में खाना बना रही थी तो वह चोरी छिपे उस कीताब को छुपा कर अपनी मां के कमरे में ले गया और वापस उसी जगह पर रख दिया जहां से वह उस किताब को निकाला था,,,, किताब को लेकर उसके मन में बहुत सारी बातें आ रही थी वह अपने मन में इस बात को भी सोच रहा था कि इस किताब को अपनी मां के सामने रखकर उससे पूछे कि यह सब क्या है अगर मैं उसे चुदवाना चाहती है तो वह उसे चोदने के लिए तैयार है,,, लेकिन यह सब अंकित के मां का केवल खाली पुलाव था जो ख्यालों में ही पक सकता था हकीकत में उसे पकाना नामुमकिन था,, क्योंकि अपनी मां के सामने इस तरह की बात करने की हिम्मत अभी उसमे बिल्कुल भी नहीं थी वैसे एक औरत को चोदने की चाहत उसकी भी बढ़ती जा रही थी और वह इस इच्छा को अपने मन में दबाकर घुटन भी महसूस करता था लेकिन जो कुछ भी चल रहा था उसमें भी उसे बहुत मजा आ रहा था और वह इस खेल को चलने देना चाहता था,,,, इसलिए खामोश रहा,,,।

Blouse k upar se chuchi dabata hua ankit



खाना बनाते समय सुगंधा गाउन पहनी हुई थी जो कि वह अपनी गाउन को तृप्ति के कॉलेज जाने के बाद से ही इस तरह से लपेटकर बंधी हुई थी कि उसके नितंबों का आकार उस गाऊन में एकदम साफ नजर आता था और उसे पर नजर पड़ते ही अंकित के लंड की सुरसुराहट बढ़ने लगी,,,, वह दरवाजे पर एकदम से अपने हाथ बांधकर खड़ा हो गया और अपनी मां को मुस्कुरा कर देखने लगा तृप्ति जा चुकी थी इसलिए उसमें डर नहीं था क्योंकि जो कुछ भी कल हुआ था जिस तरह से वह अपनी मां को अपने हाथों से ब्रा और पेटी पहनाया था वह सब उसकी हिम्मत को और उसके हौसले को बढ़ा रहा था,,,, अंकित को इस तरह से अपनी तरफ मुस्कुराता हुआ देखकर सुगंधा भी उसकी तरफ देखकर मुस्कुराने लगी सुगंध जानती थी कि इस समय उसका बेटा क्या देख रहा होगा वह जानती थी कि उसका बेटा इस समय उसकी गांड को प्यासी नजरों से देख रहा होगा इसलिए हल्के से किचन के फ्लोर पर झुक कर मुस्कुराते हुए बोली और जिसकी वजह से उसकी गांड का आकार और भी ज्यादा बाहर निकल गया,,,,)

ऐसे क्या देखकर मुस्कुरा रहा है,,,,?

मैं इसलिए मुस्कुरा रहा हूं कि तुम बहुत अच्छी लग रही हो,,,,।



मैं अच्छी लग रही हूं इसलिए मुस्कुरा रहा है,,,!(रोटी को तवे पर रखते हुए बोली)

ऐसी बात नहीं है खूबसूरत तो तुम हमेशा ही लगती हो लेकिन इस समय गाऊन में और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही हो,,,।(अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड की तरफ देखते हुए बोला और सुगंधा भी तिरछी नजर से उसकी नजरों को पहचान रही थी कि इस समय वह क्या देख रहा है इसलिए हल्का सा थिरकन अपने नितम्बों में लाते हुए सुगंधा बोली,,,)

गर्मी में गाउन सुकून देता है इसलिए पहन ली और खाना बनाते समय कुछ ज्यादा ही गर्मी लगती है,,,।

लेकिन तुम्हारे ऊपर सब कुछ अच्छा लगता है,,,।

अच्छा तो तूने मेरे ऊपर सब कुछ देख लिया है,,,।

वैसे तो सब कुछ देख लिया हूं लेकिन कल बहुत कुछदेख लिया,,,(अंकित की यह बात सुनते हैं आंखों को नचाते हुए अंकित की तरह देखने लगी तो अंकित अपनी बात को संभालते हुए बोला,,,)

मेरा मतलब है कि तुम ब्रा पेंटी में भी बहुत खूबसूरत लगती हो,,,।

मैं इतनी खूबसूरत नहीं लगती थी उन कपड़ों में लेकिन तेरे द्वारा खरीद कर लाई गई ब्रा पेंटी कुछ ज्यादा ही अच्छी है,,,।



ब्रा पेंटी अच्छी नहीं है पहनने वाली अच्छी है इसलिए ब्रा पेंटी भी अच्छी लगने लगती है,,।

ओहहहह,,,, इशारों इशारों में तू मेरी खूबसूरती की तारीफ कर रहा है या मुझे बना रहा है,,,।

तुम्हें बनाकर क्या मिलेगा मैं तो हकीकत बता रहा हूं,,, मैंने जो देखा है अभी बता रहा हूं अगर उसे हालत में कोई और भी देखेगा तो यही कहेगा।

अच्छा तो,,तु यह चाहता है कि कोई और भी मुझे उसे हालत में देखें जिस हालत में तूने देखा था,,,।

बिल्कुल भी नहीं तुम्हें जो उसे हालत में देखेगा तो उसकी आंख नोच लूंगा,,,,।

ओहहहह,,,, क्या बात है मतलब उसे हाथ में सिर्फ तू ही मुझे देख सकता है और कोई नहीं,,,।

कोई भला क्यों देखेगा आखिरकार तुम मेरी मम्मी हो किसी और की थोड़ी हो जो तुम्हें इस हालत में देखेगा,,,,,।

( सुगंधा अपने बेटे की बात सुनकर मन ही मन खुश हो रही थी,,, क्योंकि उसकी आंखों में साफ़ दिखाई दे रहा था कि वह उसे उसे अवस्था में किसी और को देखने नहीं देना चाहता बस अपना ही सब कुछ देखना चाहता है और यही तड़प और यही चाहत तो सुगंधा अपने बेटे की आंखों में देखना चाहती थी जो कि उसे साफ दिखाई दे रहा था।,, सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी वह फूली हुई रोटी को चिमटे से पकड़कर उसे बर्तन में रखते हुए बोली,, )



अच्छा जहां तक मेरा मानना है कि तो पहली बार किसी औरत को अपने हाथों से ब्रा और पैंटी पहना रहा था,, क्या मेरा मानना सही है या इस तरह से तो किसी और को भी,,,(इतना कह कर वहां चुप हो गई और रोटी को फिर से तुम्हें पर रखकर उसे पकाने लगी और अंकित अपनी मां की बात सुनकर उत्साहित होता हुआ बोला ‌।।)

नहीं बिल्कुल भी नहीं कल मेरा पहला अनुभव था इसलिए तो मेरे पसीने छूट रहे थे,,,।

क्यों पसीने क्यों छूट रहे थे तेरे,,,!(अनजान बनने का नाटक करते हुए सुगंधा बोली ,,)

अरे,,,,,(इतना कहकर वह मुस्कुरा कर शर्माने लगा और यह देखकर सुगंधा का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि वह समझ रही थी कि उसका बेटा किस लिए इतना शर्मा रहा है इसलिए वह फिर से जोर देते हुए बोली,,)

क्या हुआ बताना पसीने क्यों छूट रहे थे तेरे,,,?

अब सामने इतनी खूबसूरत औरत और अभी बिना कपड़ों के एकदम नंगी खड़ी हो तो मेरे तो क्या किसी के भी पसीने छूट जाएंगे,,,।

ओहहहहह,,,, यह बात है क्या मैं सच में बहुत ज्यादा खूबसूरत हूं,,,,(तवे पर रखी हुई रोटी को अपने हाथ से पलटते हुए बोली,,,)

बहुत-बहुत बहुत ज्यादा पूरे मोहल्ले में इतनी खूबसूरत औरत कोई नहीं है और,,,,,,(इतना कहकर फिर से खामोश हो गया तो फिर से सुगंधा बोली)

फिर चुप हो गया बताना क्या,,,,?

मुझे तो शर्म आती है,,,।

अरे शर्माने की कौन सी बात है बता दे,,,, मैं कहां तुझे डांटने वाली हूं,,,,।

सच में डांटोगी तो नहीं,,,.

नहीं बिल्कुल भी नहीं तु बता तो सही,,,,।



ओहहहह मैं कह रहा था कि तुम खूबसूरत तो हो ही कपड़ों में मैं तुम्हें देखे आया हूं तुम बहुत खूबसूरत लगती हो लेकिन कल पहली बार बिना कपड़ों के तुम्हें देखा तो तुम सच में स्वर्ग से उतरी हुई कोई अप्सरा की तरह दिख रही थी इतनी खूबसूरत औरत मैंने अपनी जिंदगी में यहां तक की फिल्मों में भी नहीं देखा हूं,,,।

(अपने बेटे के मुंह से अपने हुस्न की तारीफ सुनकर सुविधा गदगद हुए जा रही थी खास करके अपने नंगेपन की तारीफ सुनकर उसके तो होश उड़े जा रहे थे और वह भी अपने बेटे के मुंह से तो वह एकदम सातवें आसमान में उड़ने लगी थी,,, वह एकदम प्रसन्न होते हुए बोली,,,)

मुझे पहली बार बिना कपड़ों के देख रहा था,,,,।

हां पहली बार मैं तुम्हें बिना कपड़ों के देखा था,,,।

लेकिन अस्पताल में तो तू ही मेरी पेंटि उतारा था और बीमारी की हालत में तू ही मुझे नहलवाया था तब तुझे खूबसूरती नजर नहीं आई थी,,,।

तब तुम बीमार थी तब मेरी नजर में उसे तरह की तुम नहीं दिखाई दी हालांकि तुम खूबसूरत बहुत थी लेकिन उसे समय में इन सब के बारे में नहीं सोचा था लेकिन कल सच में मेरे होश उड़ गए थे और मुझे तो गर्व हो रहा है कि मेरी मां कितनी खूबसूरत है,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना की लहर तो उठा ही रही थी वह मदहोश भी हो रही थी लेकिन किसी तरह से अपने आप को संभाले हुए थे अपने बेटे की बात से वह प्रसन्न भी हो रही थी और नंगी देखने वाली बात पर उसका मन कर रहा था कि कह दे कि उसने बहुत बार मुझे पेशाब करते हुए भी तो देखा है मेरी नंगी गांड को देखा है तब कैसा लग रहा था लेकिन वह ऐसा नहीं कह पाए क्योंकि जो कुछ भी उसका बेटा कह रहा था वह अभी पूरी तरह से आनंददायक था धीरे-धीरे उसे लग रहा था कि उसका बेटा लाइन पर आ रहा है जल्द ही उसकी ख्वाहिश पूरी होने वाली है और,,, सुगंधा और कुछ बोल पाती ईससे पहले अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

दो जोड़ी तुम ट्राई कर चुकी हो लेकिन एक जोड़ी ब्रा पैंटी अभी भी बाकी है कहो तो अभी पहना कर देख लु उसका साइज,,,,।

Ankit or Suman



नहीं नहीं अभी बहुत देर हो रही है घड़ी तो देख तेरा भी समय हो रहा है और मुझे भी स्कूल जाना है,,,।

(किसकी बात है सुनकर सुगंधा अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव करते हुए प्रसन्न हो रही थी क्योंकि उसका बेटा धीरे-धीरे हिम्मत दिखा रहा था लेकिन समय का अभाव होने की वजह से वह इस समय ऐसा कुछ भी नहीं कर सकती थी और घड़ी को देखकर अंकित को भी एहसास हुआ की बहुत देर हो गई है इसलिए जल्दी से नाश्ता करके वह भी बैग लेकर घर से निकल गया और उसके बाद सुगंध भी जल्दी-जल्दी तैयार होकर स्कूल की तरफ चल दी,,,,।)
 
सुगंधा बहुत खुश थी अपने बेटे की हिम्मत को देखकर क्योंकि अब वह खुलकर बातें करने लगा था उसके हुस्न के बारे में उसकी खूबसूरती के बारे में उसके नंगेपन के बारे में धीरे-धीरे उसके मन की झिझक दूर हो रही थी,,, और यही तो वह चाहती थी कि उसका बेटा भी नूपुर के बेटे की तरह एकदम खुले विचार वाला हो जाए ताकि उसकी प्यास बुझा सके,, बरसों से बदन में दबी हुई प्यास कुछ महीनो से उसे बहुत परेशान कर रहे थे इसका इलाज एक ही था संभोग और वह अंकित का साथ मिले बिना,, पूरा नहीं हो सकता अपनी प्यास बचाने के लिए नूपुर को अपने ही बेटे का साथ चाहिए था उसी का सहारा उसके पास था क्योंकि वह जानते थे कि अगर अपनी प्यास बुझाने के लिए अगर उसके पैर घर की दहलीज लांघ गए तो बदनामी होना तय है,,, ऐसे में अपनी प्यास भी बुझ जाए और घर की बदनामी भी ना हो इसलिए अपने बेटे ही का साथ उसे गंवारा था,, और इस बात की खुशी भी थी कि अब इस खेल में उसका बेटा भी पूरी तरह से सहभागी हो चुका था और जाते-जाते अपने मन की बात भी पता क्या था कि अभी एक जोड़ी ब्रा और पेंटी ट्राई करना बाकी है,,,।



इस बात को सुनकर सुगंधा के तन-बदन में हलचल बढ़ गई थी,,, क्योंकि इस बात से वह अपने बेटे की इरादे को जान चुकी थी कि उसका बेटा उसे एक बार फिर से नंगी देखना चाहता है उसके नंगे पति को देखना चाहता है उसके खूबसूरत अंगों को अपनी आंखों से देखकर अपने बदन की प्यास बुझाना चाहता है,,, इसलिए तो अपने बेटे की बात सुनकर उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी,, लेकिन समय का भाव होने की वजह से अपने बेटे की इच्छा को पूरी नहीं कर सकती थी और मां बेटे दोनों अपनी समय से स्कूल के लिए निकल गए थे,,।



पढ़ाई में होशियार अंकित का मन पढ़ाई में बिल्कुल भी नहीं लगता था उसकी आंखों के सामने रात दिन उसकी मां का नंगा बदन हीं घूमता रहता था और साथ में सुमन की मदहोश कर देने वाली जवानी,, जिसकी चूचियों को दबाकर वह जवानी का मजा थोड़ा बहुत ले चुका था और इस खेल में वह आगे पढ़ना चाहता था इससे ज्यादा मजा लेना चाहता था वह जानता था कि इससे ज्यादा क्या होता है लेकिन चूचियों से मजा लेने के बाद के आगे का मजा लेने का मौका नहीं मिल पा रहा था आंखों से तो बहुत कुछ हो चुका था लेकिन अपने हाथों से और अपने मर्दाना अंग से जो काम करना बाकी था वह शायद अभी उसकी सोच से ज्यादा कठिन लग रहा था क्योंकि वहां तक पहुंचने में उसे काफी समय लग रहा था,,,। बाकी औरतों के अंगों को देखने की ख्वाहिश तो उसकी रोज ही पूरी हो जा रही थी बाहर से ना सही घर में ही अपनी मां के खूबसूरत अंगों को देखकर उसकी आंखों की प्यास बुझने की जगह और ज्यादा बढ़ती जा रही थी,,,। अंकित को इस बात की खुशी थी कि वह अपनी मां की खूबसूरत बुर को बेहद नजदीक से देख चुका था,,, लेकिन उसे स्पर्श करने का मौका उसे नहीं मिला था हालांकि अपनी मां को गिरने से बचते वक्त वह अपनी मां के बुरे पर अपनी हथेली रखकर उसे दबा भी दिया था रगड़ दिया था लेकिन खुले दिल से उसे स्पर्श करने का सुख अभी तक उसे नहीं प्राप्त हुआ था,,,।



कभी कभार वह अपने मन में यह सोचकर परेशान भी हो जाता था की मां बेटे के बीच इस तरह का संबंध जायज है या नहीं क्योंकि मजा तो उसे बहुत आता था लेकिन जब कभी भी वह इस रिश्ते के बारे में सोचता था तो अंदर से उसका मन उसे कचोटता था,,, एक मन उसका उसे धिक्कारता था,,, उससे कहता था कि यह तो क्या कर रहा है अपनी मां के बारे में इतनी गंदी-गंदी बातें सोचता है उसके साथ गलत करने की भावना रखता है उसके हमको कुछ देखकर खुश होता है उसकी चूची उसकी गांड उसकी बुर देखने के लिए हमेशा तड़पता रहता है क्या ऐसा एक बेटे को करना शोभा देता है क्या एक बेटे के लिए यह जायज है कि वह अपनी मां को गंदी नजर से देखें अपनी मां को संभोग सुख का वस्तु समझे,,, भला यह कैसे संभव है कि एक बेटा अपनी मां को चोदना चाहता हो अपनी मां के साथ गंदे संबंध स्थापित करना चाहता हो,, उसके बारे में गंदे ख्याल रखता हो किसी न किसी बहाने उसके खूबसूरत अंगों को स्पर्श कर देता हो,,, पकड़ लेता हो रगड़ देता हो,,, यह भला एक आदर्श बेटे के लिए उचित है,,,।





अंकित का मन उससे ही सवाल पूछता था कि जो तू कर रहा है क्या यह सही है तू अपनी मां को चोदना चाहता हैं क्या एक बेटा अपनी मां को कभी चोदने के बारे में सोच सकता है,,, भला तो यह कैसे कर सकता हूं तुझे अपनी मां को नंगी देखने में मजा आता है उसके खूबसूरत अंगों को देखने में मजा आता है उसे पेशाब करते हुए देखने में मजा आता है भला यह कैसे संभव है कोई भी बेटा अपनी मां को नग्न अवस्था में नहाते हुआ या पेशाब करते हुए नहीं देखना चाहता तो तू कैसे देखता है,,, तुझे क्यों इन सब चीजों में मजा आ रहा है,,,, अगर इन सब बारे में किसी को पता चल गया तो तेरा क्या होगा कभी सोचा है घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा घर से बाहर निकलेगा तो सब तुझे मादरचोद कहेंगे तेरी मां को भी गंदी नजरों से देखेंगे तेरी मां में और रंडी में कोई फर्क नहीं रह जाएगा समाज के लोग तेरी मां को भी गंदी नजर से देख कर हमेशा उसके साथ संबंध बनाने की सोचेंगे उनके मन में यही चलता रहेगा कि जब यह अपने बेटे से चुदवा सकती है तो उनसे क्यों नहीं चुदवाएगी,,, सो जरा तेरा क्या हाल होगा,,,?



और अपने मन में उठ रहे इस तरह के सवाल का वह जवाब खुद ही नहीं दे पाता था कुछ पल के लिए उसे भी अपनी किए पर पछतावा होने लगता था कुछ पल के लिए उसे भी एहसास होता था कि वह दुनिया का सबसे गंदा बेटा है जो अपनी मां को ही गंदे नजर से देखा है और यह सब दोबारा न करने की मन में ही कसम खाकर वह यही सोचता था कि अब वह ऐसा हरकत कभी नहीं करेगा अपनी मां को गंदी नजर से कभी नहीं देखेगा अपनी मां के बारे में कभी भी गलत ख्याल आता अपने मन में नहीं आएगा लेकिन जब भी वह अपने घर पहुंचता था और अपनी मां को किसी भी हालत में देखा था तो उसके मन में फिर से वही भावना जागृत होने लगती थी साड़ी में कसी हुई अपनी मां की गांड देखकर फिर से उसके मन में काम भावना जागरूक होने लगती थी काम करते समय अपनी मां की चूचियों की झलक उसके मन में फिर से वासना पैदा कर देती थी उसका झुकना उसका चलना उसका काम करना हर एक क्रिया में उसे अपनी मां की मादकता ही नजर आती थी उसकी कामुकता झलकती थी और ऐसे हालात में वह फिर उत्तेजित होने लगता था और फिर से अपनी मां के बारे में गंदे ख्याल अपने मन में लाने लगता था और ऐसा करने में उसे आनंद भी आता था और फिर वह सब कुछ भूल जाता है जो ऐसा न करने की अपने मन में कसम खाया करता था,,,।



आज भी उसके मन में इसी तरह की दुविधा हो रही थी,,, स्कूल में बैठे-बैठे वह यही सोच रहा था कि क्या वह अपनी मां के साथ इस खेल में आगे बढ़े या अपने आप को यहीं रोक ले लेकिन इतना तो उसे समझ में आ रहा था कि अभी खेल में रुकना एकदम नामुमकीन हो गया था,,, क्योंकि ना चाहते हुए भी उठते बैठते सोते जागते उसके मन में बस अपनी मां के बारे में ही ख्याल आते थे इसलिए वह किसी भी तरह से अपने आप को रोक नहीं पा रहा था लेकिन फिर भी अपने आप को रोकने की वह बहुत कोशिश कर रहा था अपने दोस्त राहुल से लेकर उसे बहुत कुछ सीखने को मिला था राहुल के संगत का असर ही था जो वह अपनी मां के साथ खुलकर बातें करने लगा था,,,, इसलिए वह राहुल से मिलना चाहता था उसे एक बार मुलाकात करना चाहता था वह देखना चाहता था कि राहुल और उसकी मां के बीच वाकई में

इस तरह का रिश्ता है जैसा कि वह उन दोनों के बीच सब करता था और उसी तरह का रिश्ता वह अपनी मां के साथ काम करना चाहता था वह पूरी तरह से तसल्ली कर लेना चाहता था,,,, और उसे छुट्टी की घंटी बजने का इंतजार था,,,,।



और जैसे ही छुट्टी की घंटी बजी वह जल्दी से अपना बैग लेकर निकल गया राहुल के घर की तरफ पैदल ही,,, वैसे भी नूपुर से मिले काफी दिन हो गए थे अगली मुलाकात जिस तरह से गुजरी थी उसे मुलाकात को लेकर अंकित के मन में ढेर सारी यादें बसी हुई थी और भावनाएं जागरूक हो चुकी थी इसलिए वह कई दिनों से नूपुर से मिलना चाहता था लेकिन मुझे समय नहीं मिल रहा था लेकिन आज वह समय निकालकर उसके घर जाना चाहता था और अपने मन की शंका को अपने मन की दुविधा को दूर कर लेना चाहता था,,, लेकिन उसके मन में इस बात को लेकर समझती थी कि कहीं घर पर राहुल ना मिला तो राहुल से मुलाकात ना हुई तो केवल उसकी मां से ही मुलाकात हुई तो वह भले ही एक और मुलाकात में नूपुर के साथ आंखों से मजा ले लेगा लेकिन उसकी शंका दूर नहीं हो पाएगी मां बेटे के बीच के रिश्ते को लेकर यह सब सोचता हुआ वह कब राहुल के घर पहुंच गया उसे भी पता नहीं चला,,,। उसका दिल जोरो से धड़क रहा था क्योंकि वह अनजान था कि घर में कौन-कौन मौजूद होगा राहुल होगा उसकी मां होगी या उसके पापा होंगे या तो फिर केवल उसकी मां अकेली ही होगी यही सब सो कर वह दरवाजे तक पहुंच गया था,,,।



दरवाजे की बेल बजाकर वह खड़ा हो गया,,, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आ रहा था वह दूसरी बात बेल बजाने ही वाला था कि उसे एहसास हुआ कि दरवाजा हल्का सा खुला हुआ है,,, और वह बेल ना बजा कर धीरे से दरवाजे पर हाथ रख तो दरवाजा खुद व खुद खुलता चला गया,,,, इस तरह से दरवाजा खुला पाकर उसके दिल की धड़कन ओर तेज बढ़ने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अंदर कोई है भी या नहीं,,,,,, धड़कते दिल के साथ बहुत घर में प्रवेश कर गया वैसे तो उसे घर के लोग जानते ही थे इसलिए उसे इस बात की फिक्र नहीं थी कि कोई अगर देख लेगा तो क्या सोचेगा कि बिना बेल बजाए घर में प्रवेश कर गया,,, इस बात की चिंता उसके मन में नहीं थी क्योंकि राहुल और उसकी मां से वह भली भांति परिचित था और वह दोनों भी उसे अच्छी तरह से जानते थे,,,, लेकिन फिर भी घर में किसी भी प्रकार का शोर शराबा या किसी भी प्रकार की हाथ नहीं थे एकदम शांति थी उसे थोड़ा अजीब लगा,,,।



कुछ देर तक वहीं खड़ा रह कर वह सोचता रहा कि घर में रुके या यहां से चला जाए लेकिन फिर उसे समझ में आया कि घर का दरवाजा खुला हुआ है तो जरूर कोई ना कोई तो होगा या हो सकता है कि सो गया हो जब उसके मन में ख्याल आया तो तो उसके दिमाग में नूपुर घूमने लगी और बिस्तर पर गहरी नींद सोई हुई उसकी मुद्रा उसके मन की कल्पना में आने लगी,,, वह अपनी मम्मी सो नहीं लगा कि अगर वाकई में राहुल की मां गहरी नींद में सो रही होगी तो उसे सोई हुई देखने में भी बहुत आनंद आएगा और वह उसे जगाएगा क्योंकि वह जानता था कि राहुल की मां उसकी हरकत से बिल्कुल भी नाराज नहीं होगी और अगर कुछ बोली भी तो बोल देगा कि वह तो राहुल से मिलने आया था और घर का दरवाजा खुला हुआ था इसलिए उसे थोड़ी चिंता भी थी इसलिए वह घर से वापस गया नहीं बल्कि तसल्ली कर लेना चाहता था कि घर में कोई है भी या नहीं यही सब अपने मन में सोच रहा था,,,। और सोचते सोचते वह अपने दोस्त की मां के कमरे की पास पहुंच गया वह पहले से ही जानता था कि उसकी मां का कमरा कौन सा है,,,।



पहली बार अंकित इस तरह की हरकत किसी अनजान घर में कर रहा है उसे थोड़ा डर भी लग रहा था लेकिन राहुल की मां को निद्रा अवस्था में देखने की चाहत उसके मन में बढ़ती जा रही थी और इसी चाहत की वजह से उसके मन में हिम्मत भी मिल रही थी जिसके चलते वह इस तरह की हरकत करने पर उतारू हो चुका था,,, अंकित की सांस बड़ी तेजी से चल रही थी उसे इस बात का डर था कि कहीं कोई आना चाहिए कहीं कोई देख ना ले कहीं कोई उसके बारे में गलत ना सोचने लग जाए ,,, यही सब सोता हुआ वहां राहुल की मां के कमरे के दरवाजे के पास पहुंच गया था लेकिन जल्दी उसे एहसास हो गया कि दरवाजा अंदर से तो बंद है,,,, आप क्या करें उसे लगने लगा कि वाकई में राहुल की मां गहरी नींद में सो रही है अब इस तरह से दरवाजा खटखटाना उचित नहीं है वह निराश होकर वहां से चलने वाला था कि अंदर से खिल खिलाकर हंसने की आवाज आ रही थी,, जो कि किसी औरत की ही थी अंकित को समझते देर नहीं लगी की वह आवाज राहुल की मां की ही थी उसे बड़ा अजीब लगा दरवाजा अंदर से बंधे हैं और अंदर से हंसने की आवाज आ रही है आखिरकार अंदर हो क्या रहा है,,,,,। उत्सुकता बस वह अपना काम दरवाजे पर टिककर अंदर की आवाज सुनने के लिए आतुर होने लगा और कोशिश करने लगा कि आखिरकार अंदर हो क्या रहा है लेकिन तभी जो उसके कानों में आवाज आई उसे सुनकर उसके होश उड़ गए,,,



आहहहह,,, धीरे से,,,, न जाने क्यों जल्दबाजी दिखा रहा है,,,,,।

(यह आवाज राहुल की मां नूपुर की ही थी जिसे अंकित अच्छी तरह से पहचानता था,,, कानों में पड़ी इतनी सी बात उसकी शंका को और ज्यादा मजबूत करने लगे लेकिन अंदर राहुल की मां के साथ कौन है यह अंकित को नहीं मालूम था और यही वह देखना चाहता था ,,, तसल्ली कर लेना चाहता था कि आखिरकार अंदर साथ में है कौन और हो क्या रहा है लेकिन दरवाजा तो बंद था अंदर देख पाना मुश्किल हुआ जा रहा था,,, अंकित दरवाजे के की होल से भी अंदर देखने की पूरी कोशिश किया लेकिन उसमें भी उसे सफलता हासिल नहीं है उसका दिल जोरो से धड़क रहा था अंदर खिलखिलाहट की आवाज बढ़ती जा रही थी और रह रहकर,,,सससहहहहह ,,,,आहहहहहह की आवाज भी आ रही थी और इस तरह की आवाज सुनकर तो उसके होश उड़ रहे थे और साथ में उसके लंड की हालत भी खराब हो रही थी,,,, अंदर देखने का जुगाड़ उसे मिल नहीं रहा था तभी उसकी नजर खिड़की पर गई और वह तुरंत खिड़की के पास पहुंच गया और उसकी किस्मत अच्छी थी की खिड़की का एक पल्ला हल्का सा खुला हुआ था उसने उस पल्ले में अपनी नजर टिकाकर अंदर की तरफ देखने लगा,,, दोपहर का समय होने के बावजूद भी अंदर ट्यूब लाइट जल रही थी और ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में अगले ही पल जो उसे नजर आया उसे देखकर उसके होश उड़ गए,,,,।



अंदर का नजारा वाकई में उसके होश उड़ा देने वाला था और उसके संस्कारों उसकी मर्यादा को तार-तार कर देने वाला था जिस तरह की धारणा वह अपने मन में कभी कभार बांध कर अपने आप पर ग्लानि महसूस करता था उस धारणा को तोड़ देने वाला था,,, अंदर का नजारा देखकर उसके पैर वहीं पर चल रहे थे उसकी आंखें फटी के फटी रह गई थी जिस बारे में वह केवल कल्पना किया करता था अपने मन में सोचा करता था वही दृश्य उसकी आंखों के सामने नजर आ रहा था,,,, अंदर का दृश्य था ही कुछ ऐसा कि अगर अंकित की जगह कोई और देखा तो उसकी भी आंखें फटी की फटी रह जाती,,,।

अंदर कमरे में बिस्तर पर राहुल की मां एकदम नंगी देती हुई थी उसकी दोनों टांगें खुली हुई थी और टांगों के बीच जो शख्स था उसे देखकर वाकई में अंकित की हालत खराब हो गई थी और उसके मन में भी एक उम्मीद की नहीं किरण जगी थी क्योंकि नूपुर की दोनों टांगों के बीच कोई और नहीं बल्कि उसका ही सगा बेटा राहुल था और वह भी पूरी तरह से नंगा था और वह अपनी मां की बुर चाट रहा था इस दृश्य को देखकर पल भर में ही अंकित का लंड एकदम से खड़ा हो गया,,, और जिस उद्देश्य से वह राहुल के घर आया था अपने प्रश्नों का जवाब ढूंढने अपने आप ही उसके सारे सवाल का जवाब बिस्तर पर ही मिल गया था अब उसे ज्यादा कुछ सोचने की जरूरत नहीं थी क्योंकि उसकी आंखों के सामने ही एक मां अपनी दोनों टांगें खोलकर अपनी बुर अपने ही बेटे से चटवा रही थी,,,,। अंकित की तो हालत खराब होने लगी वह अंदर ही अंदर खुश भी हो रहा था इस तरह के दृश्य को देखकर क्योंकि जिस रिश्ते के बारे में सोचकर वह परेशान हो रहा था वही रिश्ता बिस्तर पर मजे ले रहा था,,,।



अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि वह वहीं रुके या वहां से चला जाए वह ईस खेल को आगे भी देखना चाहता था क्योंकि पहली बार वह इस तरह के दृश्य को देख रहा था अपनी आंखों के सामने ही एक औरत और एक जवां मर्द को नग्न अवस्था में एक ही बिस्तर पर मजे लेते हुए देख रहा था,,, उसके लिए यह सब कल्पना जैसा ही था क्योंकि आज तक वह इस तरह का सिर्फ कल्पना ही किया था लेकिन हकीकत में देखा नहीं था केवल किताबों में ही इस तरह की दृश्य को देखा था लेकिन आज हकीकत में अपनी आंखों से देख रहा था,,,। अंकित को सबकुछ साफ नजर आ रहा था नूपुर पूरी तरह से नंगी होकर बिस्तर पर लेते हुई थी उसकी दोनों टांगें खुली हुई थी और राहुल पागलों की तरह अपनी मां की बुर चाट रहा था यह देखकर अंकित अपने से अच्छी किस्मत राहुल की समझ रहा था जो अपनी मां की बुर को अपनी जेब लगाकर चाट रहा था जबकि वह अपनी मां की बुर देखने के लिए तड़प जाता था,,,।

नुपुर और राहुल



कमरे में राहुल की मां की गरमा-गरम शिसकारी की आवाज गूंज रही थी,, जिसे सुनकर अंकित की हालत खराब हो रही थी नूपुर अपना हाथ आगे बढ़कर उसके बाल को कस के अपनी मुट्ठी में भींच कर रह रह कर अपनी कमर ऊपर उठा दे रही थी। जो कि उसकी उत्तेजना को दर्शा रहा था,,, अंकित को साफ नजर आ रहा था कि राहुल पागलों की तरह अपनी मां की बुर को चाट रहा था,,,। अंकित को बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि उसे ऐसा कुछ देखने को मिल जाएगा वह तो कुछ सीखने आया था राहुल से क्योंकि राहुल के साथ रहकर ही वह और तो क्या आकर्षण के बारे में समझ पाया था उसे क्या मालूम था कि उसके घर पर आकर आज उसे जिंदगी का एक नया सबक सिखाने को मिलेगा इसके बारे में सोचकर उसकी मां उसे कभी-कभी का कचोटता था,,, कमरे के अंदर की हालात पूरी तरह से मदहोशी भरी थी जिसे देखकर के अंकित के तन बदन में भी आग लग रही थी उसकी जवानी सुलग रही थी वही समय कुछ कर तो नहीं सकता था लेकिन अपने जीवन का अनमोल सुख जो आंसू आंखों से लिया जाता है उसे पूरी तरह से महसूस कर रहा था उसे सुख को भोग रहा था,,,।

अंकित भी इसी तरह से बुर चाटना चाहता था



गलती किताबों के चित्र में उसने कई चित्र ऐसे भी देखे थे जिसमें नायक नायिका की बुर को अपने होठों से अपनी जीभ से चाट रहा था,,, लेकिन कभी सोचा नहीं था कि वाकई में कोई ऐसा भी कर सकता है लेकिन आज वह अपनी आंखों से देख रहा था और अपने मन में सोच भी रहा था कि जब औरत की बर देखने में इतना आनंद आता है तो वास्तव में उसे होठों से चाटने में और भी ज्यादा मजा आता होगा तभी तो राहुल अपनी मां की बुर चाट रहा था और उसकी इस क्रिया पर उसकी मां भी उसका पूरा सहयोग देते हुए मजा लूट रही थी,,,, उसे साफ दिखाई दे रहा था की बिस्तर पर उसकी मां आनंद के सागर में गोते लगाते हुए अपने सर को दाएं बाएं पटक रही थी,,,।

सहहहहहह,,, आहहहहहहहह,,,,, मेरे राजा तूने तो मुझे पागल कर दिया,,,,आहहहहहह,,,,, पुरी जीभ अंदर डालकर चाट,,,,आहहहहह,,,,,।

राहुल का अपनी मां क साथ मदहोश करदेने वाला नजारा देखकर अंकित की हालत खराब हो रही थी



तु बिल्कुल भी चिंता मत कर रानी तुझे मत कर दूंगा,,,,,बहुत करारी बुर है तेरी,,,,ऊमममममम,,,(जोर जोर से चाटते हुए राहुल बोला उन दोनों की बातें भी बेहद मद भरी थी जिसे सुनकर अंकित को भी नशा छा रहा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि एक मां अपनी बेटी को मेरे राजा और बेटा अपनी मां को रानी करके संबोधन कर रहा था यह सब भी अंकित के लिए बिल्कुल नया था,,,,, यह सब देखकर,, अंकित के तन बदन में हलचल मच रही थी,,, उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था अंदर का गरमा गरम दृश्य देखकर अंकित से अपने मन पर काबू नहीं हो रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह वहीं रुक रहे या वहां से चला जाए आंखों के सामने इतना मधुर मनोहर दृश्य देखकर उसका वहां से जाने का भी मन नहीं कर रहा था,,,। धड़कते दिल के साथ अंकित कमरे के अंदर के एक-एक पल के दृश्य को अपनी आंखों में कैद कर रहा था,,, इस तरह का नजारा उसने केवल चित्र के जरिए किताबों में देखा था लेकिन आज उसकी आंखों के सामने वही चित्र एकदम सजीव होकर उसकी आंखों के सामने नाच रहे थे,,,।

नुपुर और राहुल



पागलों की तरह अपनी मां की बुर चटाई करने के बाद,,, राहुल धीरे से खड़ा हुआ और घुटनों के बल हो गया अंकित को एकदम साफ नजर आ रहा था कि राहुल का लंड खड़ा था और उसे प्यासी नजरों से उसकी मां देख रही थी,,,, अंकित को ऐसा लग रहा था कि अब दोनों के बीच चुदाई का खेल शुरू हो जाएगा लेकिन तभी उसकी सोच के विरुद्ध राहुल की मां उठकर वह भी राहुल की तरह घुटनों के बल बैठ गई और सीधे अपना हाथ आगे बढ़ाकर अपने बेटे के लंड को पकड़ते हुए बोली,,,,।

जब देखो तब तेरा खड़ा हो जाता है,,,, इससे किसी और की बुर की चुदाई तो नहीं किया है ना,,,,।

बिल्कुल भी नहीं मम्मी तेरी बुर की सिवा और किसी की बुर मुझे अच्छी नहीं लगती,,,, लेकिन अंकित की मां की बड़ी-बड़ी गांड देखकर मेरा मन बहुत चोदने को करता है उसे,,,,।

(अंकित को तो अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे वह कुछ और सुन रहा हो उसे भरोसा नहीं हो रहा था इसलिए वह एकदम से कम लगाकर सुनने की कोशिश करने लगा और उसकी बात सुनकर नूपुर बोली ,,)

अंकित की मां,,,, वह तेरी इच्छा कभी पूरी नहीं करेगी वह दूसरी औरतों की तरह नहीं है,,,,।

लेकिन उसका भी तो जवान बेटा है मेरी तरह और जहां तक मेरा मानना है उनके तो पति भी नहीं है बरसों से वह ऐसे ही थोड़ी रहती होगी जरूर अपने घर में मेरी तरह ही जैसे मैं तुम्हें चोदता हूं वैसे वह भी अपने बेटे से चुदवाती होगी,,,।

(इतना सुनकर अंकित को यकीन हो गया था कि वह दोनों उसके और उसकी मां के बारे में ही बातें कर रहे थे अपनी मां का जिक्र सुनकर अंकित की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी क्योंकि उसने जो सुना था ठीक ही सुना था राहुल उसकी मां को चोदने की इच्छा रखता था जिसे कहने का मतलब साफ था कि उसे अपनी मां से ज्यादा खूबसूरत और सेक्सी उसकी मां लग रही थी,,, एक तरह से राहुल की बात सुनकर अंकित अपने आप पर करो महसूस कर रहा था कि उसकी मां वाकई में सबसे ज्यादा खूबसूरत है वह फिर से कान लगाकर अंदर की बात सुनने की कोशिश करने लगा,,,।)

मुझे तो नहीं लगता लेकिन हो भी सकता है चार दिवारी के अंदर मां बेटे के बीच क्या खिचड़ी पक रही है किसे पता अब हम दोनों कोई देख लो हम दोनों मां बेटा होने के बावजूद भी पति-पत्नी की तरह मजा ले रहे हैं इस बात को भला कोई क्या जानता होगा,,,(नूपुर अपने बेटे के लंड को पकड़कर हिलाते हुए बोली,,,, राहुल की मां की बात सुनकर अंकित भी सोच में पड़ गया था कि वाकई में वह जो भी कह रही है सच कह रही है चार दीवारी के अंदर किसी भी रिश्ते के पीछे क्या हो रहा है यह भला चारदीवारी के बाहर किसे पता चलेगा जब तक की बताया ना जाए अंकित अपने मन में सोचने लगा कि अगर वाकई में चार दिवारी के अंदर उसके और उसकी मां के बीच संबंध स्थापित हो जाएंगे तो भी इस बात का पता किसी को नहीं चलने वाला जैसा कि राहुल अपनी मां के साथ कर रहा है अंकित अपने मन में यही सोच कर खुश हो रहा था कि अगर वह अपनी आंखों से ना देखा तो उसे कभी भरोसा नहीं होता की चार दीवारी के अंदर मां बेटे के बीच-बीच तरह का रिश्ता कायम होता है,,,, अपनी मां की बात सुनकर राहुल अपनी मां के दोनों कद्दू पर हाथ रखकर उसे अपने लंड की तरफ झुकाते हुए बोला,,)

क्या खबर पर मुझे नहीं लगता कि दोनों शांत रहते होंगे बेटा भी पूरी तरह से जवानी और मां भी पूरी तरह से जवानी से भरी हुई है दोनों के बीच हम दोनों जैसा ही रिश्ता होगा,,,,।

चल जाने दे हमें उनसे क्या मतलब,,,,(ऐसा कहते हुए नूपुर खुद अपने बेटे के लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी और यह देखकर तो अंकित की हालत और ज्यादा खराब होने लगी,,, क्योंकि इस तरह के दृश्य को वह किताब के चित्र में ही देखा था लेकिन आज अपनी आंखों से देख कर उसे समझ में आ गया था कि औरत और मर्द इस तरह से भी सुख प्राप्त करते हैं,,, उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था लेकिन जो कुछ भी उसकी आंखों के सामने हो रहा था वह कोई कल्पना और सपना नहीं था वह हकीकत था देखते ही देखते राहुल की मां पागलों की तरह अपने बेटे के लंड को मुंह में अंदर बाहर करके चूसने लगी अंकित का भी धैर्य जवाब दे रहा था,,,, और देखते ही देखते वह भी अपनी पेंट की बटन खोलकर अपने लंड को बाहर निकाल लिया जो की पूरी तरह से अपनी औकात में खड़ा था,,,, और उसे धीरे-धीरे वह मसल रहा था,,,)

बस अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है मेरी बुर में आग लगी हुई है जल्दी से अपना लंड डालकर मेरी आग बुझा दे,,,,(ऐसा कहते हुए नूपुर लंड को अपने मुंह से बाहर निकाल ली और फिर से चित होकर लेट गई और राहुल भी एकदम मदहोश होता हुआ अपनी मां की दोनों टांगों को खोलकर उसकी दोनों टांगों के बीच जगह बना लिया और अपने लंड को हाथ में पकड़ कर उसकी गुलाबी छेद पर रखते हुए बोला,,,)

बिल्कुल भी चिंता मत कर मेरी रंडी आज तेरी बुर का भोसड़ा बना दूंगा,,,,(और ऐसा कहने के साथ ही एक झटके में अपने लंड को पूरी तरह उसकी बुर में डाल दिया जैसे ही उसका लंड उसकी बुर में प्रवेश किया उसकी मां के चेहरे का रंग बदलने लगा हुआ मदहोश होने लगी और देखते ही देखते वह तेज तेज धक्के मारना शुरू कर दिया और यह देखकर अंकित अपने लंड को मुठीयाना शुरू कर दिया,,,। और यह खेल तब तक चलता रहा जब तक कि वह दोनों घमासान चुदाई के बाद पानी न फेक दिए हो और तब तक अंकित का भी मुठीयाना जारी रहा,,,।

थोड़ी देर में सब कुछ शांत हो चुका था राहुल अपनी मां के ऊपर लाकर गहरी गहरी सांस ले रहा था अंकित समझ गया था कि आप उसका वहां रुकना बिल्कुल भी उचित नहीं है इसलिए वह दबे पांव घर से बाहर निकल गया और सड़क पर आकर गहरी सांस लेने लगा जिस काम के लिए आया था उसका काम हो चुका था जिस सवाल का वह जवाब ढूंढ रहा था उसकी आंखों के सामने अपने आप ही उसका जवाब मिल गया था उसके सारे प्रश्नों का हल मिल चुका था,,, इसके बारे में सोचकर उसे अपने मन में ग्लानि महसूस होती थी बहुत सारे गिरे से कोई दूर हो चुके थे एक नई ऊर्जा का संचार उसके तन बदन में हो रहा था उसका मन मस्तिष्क पूरी तरह से आगे बढ़ने के लिए तैयार हो चुका था,,, वह प्रसन्नता के साथ अपने घर की तरफ आगे बढ़ रहा था,,,।
 
Back
Top