Incest मुझे प्यार करो,,, - Page 101 - SexBaba
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Incest मुझे प्यार करो,,,

सुगंधा के कहने पर अंकित मुव लेने चला गया था और उसके जाते ही सुगंधा मौके का फायदा उठाते हुए जल्दी-जल्दी बिस्तर से नीचे उतरकर अपनी पेंटि उतार दी और उसे बिस्तर के नीचे दबा दी और फिर से उसी तरह से बैठ गई,,, आगे की सोच कर उसके बदन में कसमसाहट बढ़ रही थीक्योंकि आज वह अपने मन में यही सोच रही थी कि आज की रात उसे जरूर कुछ करना होगाताकि दोनों के बीच की शर्म पूरी तरह से खत्म हो जाए और दोनों एक एकाकार हो जाए। बार-बार सुगंधा की नजर दरवाजे पर जा रही थी उसके बदन में गुदगुदाहट हो रही थी,,, और अंकित की भी हालत कुछ ऐसी ही थी मुंह लेने के लिए वह रसोई घर में पहुंच चुका था और थैले में हाथ डालकर वह मूव निकल भी गया था,,, और अपने मन में सोच रहा था कि कशमालिश करने का मौका उसे मिल जाता तो कितना मजा आता है यही सोचता हुआ वह मूव को अपने हाथ में ले लिया और अपनी मां के कमरे की तरफ आगे बढ़ गया,,,, दरवाजे पर पहुंचते ही देखा तो उसकी मां उसी तरह से बैठी हुई थी,,,, अपनी मां को देखते ही वह कमरे के अंदर दाखिल होता हुआ बोला,,,।



ज्यादा दर्द कर रहा है क्या मम्मी,,,,

हा रे शुरू शुरू में तो कुछ भी महसूस नहीं हुआ था लेकिन इस समय बहुत दर्द कर रहा है,,,,।

गेंद ज्यादा जोर से लगी थी ना,,,।

उस समय तो ऐसा नहीं लग रहा था लेकिन अभी दर्द कर रहा है,,,,।

ठीक है ये लो क्रीम,,, लेकिन क्या यह असर करेगी,,,।

करती होगी तभी तो टीवी पर इसकी एडवर्टाइज आती है,,,।

(अपनी मां की बातें सुनकर उसे थोड़ा तोफिक्र हो रहा था कि अगर सच में दर्द कर रहा होगा तो मुसीबत वाली बात हो जाएगी लेकिन फिर भी वह अपनी मां का मन लेने के लिए बोला)

अच्छा ठीक है मम्मी तुम मालिश करो मैं छत पर जाकर बिस्तर लगा देता हूं,,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा को गुस्सा आ रहा था अपने बेटे के भोलेपन पर अंदर ही अंदर गुस्सा कर रही थी और अभी इस बात के लिए कीजिसके लिए वह खुद इतना कुछ कर रही है सब कुछ दिखाने के लिए तैयार है वह खुद कुछ भी देखने की सोच भी नहीं रहा है जबकि खुले शब्दों में बोल भी चुकी हूं कि चोट जांघ के ऊपर लगी है,,, फिर भी कितना नादान है,,,अपने बेटे की बात सुनकर वह थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,)



कैसा बेटा है रे तू देख रहा है कि मां को चोट लगी है और तु बिस्तर लगाने के बारे में सोच रहा है,,।

नहीं मम्मी ऐसी कोई बात नहीं है,,,मैं तो इसलिए कह रहा था कि तुम जल्दी से मालिश कर लो तब तक मैं बिस्तर लगा देता हूं ताकि तुम्हें बिस्तर लगाना ना पड़े,,,,,।

तुझे बिस्तर लगाने की पड़ी है लेकिन मेरे चोट के बारे में कुछ सोच नहीं रहा है।

तो में अब कर भी क्या सकता हूं मम्मी,,,, इस समय तो दवा खाना भी बंद हो गया होगा। नहीं तो मैं इस समय तुम्हें दवा दिलवा दिया होता,,,,।

दवा दिलवाने की जरूरत नहीं है,,,,।

,, तो फिर,,,

ले तू ही अच्छे से मालिश कर दे,,,,( बिस्तर पर रखी हुई ट्यूब को उठाकर अपने बेटे की तरफ आगे बढ़ाते हुए वह बोली,,,, सुगंधा मूव क्रीम के द्वाराअपना निशाना साधना चाहती थी अपनी मंजिल तक पहुंचाना चाहती थी क्योंकि चोट भी ऐसी जगह लगी थी जिस पर मालिश करते हुए उसके बेटे के द्वाराउसकी गुलाबी गली देखने का उसे भरपूर मौका मिलने वाला था और यह मौका खुद सुगंधा अपने बेटे को देना चाहती थी क्योंकि अभी तक वह अपनी गुलाबी गली को सिर्फ उसे दिखाते आ रही थी लेकिन आज वह सोच रही थी कि उसे गुलाबी गली में वह पूरी तरह से घूमे,,,,अपनी मां की बात सुनकर अंकित की भी आंखों में वासना का तूफान उठने लगा जो कुछ भी वह अपने मन में सोच रहा था वह सच होने वाला था इसलिए बिल्कुल भी देर ना करते हुए वह अपना हाथ आगे बढ़ा दिया और अपनी मां के हाथ से वह क्रीम लेता हुआ बोला,,,)



ठीक है इतना तो मैं कर ही सकता हूं तुम्हारी सेवा में,,,, चलो देखु तो सही चोट किस जगह लगी हुई है,,,,।

चोट तो ऐसी जगह लगी है बेटा कि मेरी तो दिखाने की हिम्मत नहीं हो रही है शर्म से मेरी हालत खराब हो रही है,,,,।

तब तो दवा खाने में कैसे दिखाती,,

इसलिए तो मुझे दवा खाने नहीं जाना है मुझे पूरा यकीन है कि तेरी मालिश से मेरा दर्द ठीक हो जाएगा,,,,।

अगर तुम्हें इतना विश्वास है तो जरूर मैं तुम्हारे विश्वास पर खरा उतरूंगा,जो तुमने मुझे मौका दी हो मे भी इस मौके का पूरा फायदा उठाऊंगा,,,,(अंकित जानबूझकरदो अर्थ में बात कर रहा था और उसकी मां उसके कहने के मतलब को समझ रही थी इसके लिए उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी थी,,,और वह भी अपने मन में कह रही थी कि मैं भी तुझे मौका देना चाहती हूं देखना चाहती हूं कि तू सच में पूरा मर्द बन चुका है कि नहीं,,,, सुगंधा दरवाजे की तरफ देख रही थी यह देखकर अंकित बोला,,,)

वहां क्या देख रही हो,,,?

दरवाजा तो बंद कर दे,,,

लेकिन किस लिए यहां कौन सा हम लोग गलत काम करने जा रहे हैं जो दरवाजा बंद करना पड़े और वैसे भी तुम्हारे और मेरे सिवा घर पर तो कोई है नहीं,,,,।

तुझे बहुत गलत काम करने का मन कर रहा है ना,,,, मैं इसलिए कह रही हूं कि जहां पर मालिश करना है,,, वह थोड़ी ऊपरी जगह पर है इसलिए दरवाजा बंद कर दे,,,

(अंकित अपनी मां की हालत को अच्छी तरह से समझ रहा था,,,औरतों की यही बात सबसे अच्छी होती है कि अगर घर में कोई तीसरा शख्स ना हो तो भी फिर कुछ भी करते समय उन्हें दरवाजा बंद करने की आदत रहती है क्योंकि बंद कमरे में चार दिवारी के अंदर वह कुछ ज्यादा ही खुल जाती हैं,,,, इसलिए अपनी मां की बात मानते हुए वह दरवाजे तक गया और दरवाजा बंद करके कड़ी लगा दिया दरवाजा बंद करते समय और उस पर कड़ी लगाते समय अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था क्योंकि वह जानता था कि किस हालत में इस तरह से दरवाजा बंद किया जाता है अगर कमरे के अंदर एक खूबसूरत औरत हो तो,,, धीरे-धीरे अभी से ही अंकित के पेंट में तंबू बनना शुरू हो गया था,,, अंकित दरवाजा बंद करके वापस आ गया था,,,, और अपनी मां से बोला,,,)



अब लेट जाओ ताकि मैं अच्छे से मालिश कर सकूं,,,,,।

नहीं ऐसे ही मालिश करदे रुक,,,(सुगंधा इस तरह से बैठे हुए ही दोनों हाथों से अपनी साड़ी पकड़ कर ऊपर की तरफ उठने लगी वह बिस्तर पर गांड टीका कर बैठी हुई थी और उसकी गांड के वजन से नरम-दनरम गद्दा भी एकदम अंदर तक धंस गया था,,, सुगंधा का दिल जो रास्ता लग रहा था क्योंकि वह जानती थी कि वह अपने बेटे के सामने क्या करने जा रही हैदेखते-देखते वह बैठी अवस्था में ही अपनी साड़ी को घुटनों तक उठा दी थीऔर यह देखकर अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था वह बड़ी बेसब्री से अपनी मां की हरकत को देख रहा था उसकी गोरी गोरी टांग को देख रहा था,,,, और जानबूझकर सहज बनने के लिए बीच-बीच में बात भी कर रहा था)

कुछ ज्यादा ही ऊपर लग गई थी गेंद ऐसा लग रहा है,,

हां रे,,, बहुत ऊपर लगी है पहले से दर्द नहीं कर रहा था लेकिन अभी बहुत दर्द कर रहा है,,,,(ऐसा कहते हुए सुगंधा अपनी साड़ी को दोनों टांग आगे की तरफ किए हुए अपनी ज़ांघो तक साड़ी को उठा दी थी,,, अंकित की आंखें अपनी मां की गहराई जवान देखकर फटी के फटी रहे जा रही थीइस समय वह जिस तरह से बैठी थी उसकी मोटी मोटी जांघें केले के पेड़ के तने की तरह चिकनी चिकनी दिखाई दे रही थी जिसे देखकर पेट के अंदर अंकित का लंड अकड़ने लगा था,,,, अंकित चाहता था कि उसकी मां जल्दी से अपनी जवानी पर से पर्दा हटा दे क्योंकि वह जल्द से जल्द अपनी मां की गुलाबी गुफा को देखना चाहता था अभी उसके मन में यह शंका थी कि उसकी मां साड़ी के अंदर चड्डी पहनी है कि नहीं पहनी है अगर चड्डी पहनी हुई तो सारा मजा कीरकीरा हो जाएगा,,,, इसलिए वह मन ही मन में मना रहा था कि उसकी मां साड़ी के अंदर चड्डी ना पहनी हो,,, देखते देखते सुगंध अपनी साड़ी को जांघों उठा दी थी,,,



साड़ी उठते समय जिस तरह की उत्सुकता उसे देखने में उसके बेटे की हो रही थी उससे कहीं ज्यादा उत्सुक वह खुद थी अपने बेटे को अपनी गुलाबी बुर दिखाने के लिए,,, उसका दील भी बड़े जोरों से धड़क रहा था और मदहोशी उसकी बुर से मदन रस टपक रहा था,,, आधी जांघों तक साड़ी उठ जाने के बाद अंकित बोला,,,,।

यही लगी है क्या,,?(उंगली के इशारे से अंकित बोला)

नहीं रे थोड़ा और ऊपर लगी है,,,,,(गहरी सांस लेते हुए सुगंधा बोली,,,, दोनों किस से ऊपर नीचे हो रही थी दोनों मदहोशी की पराकाष्ठा तक पहुंच रहे थे अपने आप को एकदम उत्तेजित अवस्था में देखकर अंकित वही बिस्तर पर बैठ गया..अपनी मां की दोनों टांगों के बीच देखने की कोशिश करने लगा जो कि इस समय आपस में सटी हुई थी,, जिसे देखकर अंकित अपने आप को रोक नहीं पाया और अपनी मां से बोला,,,)

थोड़ा टांगों को खोलो तब ना पता चलेगा की कहां लगी है,,,,।



(अंकित एकदम उत्साहित होता हुआ बोल रहा था और अपने बेटे की यह बात सुनकर सुगंधा भी मन ही मन में मुस्कुराने लगी थीक्योंकि सुगंधा को इस बात का एहसास अच्छी तरह से था कि उसका बेटा उसके जांघों पर लगी चोट को नहीं बल्कि उसके गुलाबी छेद को देखना चाहता हैं,,,, और यही तो खुद वह अपने बेटे को दिखाने के लिए सारा खेल रच रही थी इसलिए अपने बेटे की बात सुनते ही वह तुरंत अपने पर को घुटनों से एकदम से मोड़ ली और एकदम से तकरीबन डेढ़ फीट की दूरी तक उसे खोल दी उसकी दोनों टांगों के बीच डेढ़ फीट की दूरी बनी हुई थी,,, और उसके ऐसा करते हीअंकित की आंखों के सामने उसकी मां की गुलाबी पर जो एकदम उत्तेजना में कचोरी की तरह फूल गई थी वह एकदम से नजर आने लगी अंकित तो सामने बिस्तर पर बैठा बैठा अपनी मां की गदराई जवानी के प्रमुख ढांचे को देखकर पागल हो गया आश्चर्य से उसका मुंह खुला का खुला रह गया,,, वह पहली बार अपनी मां की बुर नहीं देख रहा था लेकिन फिर भी इस समय वह काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहा था क्योंकि हालात ही कुछ ऐसे थे,,,वह अपनी मां के कमरे में बैठा हुआ था और एक ही बिस्तर पर दोनों बैठे हुए थे उसकी मां अपनी जांघों की चोट दिखाते दिखाते कब अपनी गुलाबी बुर उजागर कर दी कुछ पता ही नहीं चला।अंकित की हालत यह सोचकर और ज्यादा खराब हो रही थी कि उसकी मां साड़ी के अंदर चड्डी नहीं पहनी थी जिसके बारे में वह सोचकर हैरान हो रहा थाअंकित अपने मन में यही चाहता था कि उसकी मां अंदर चड्डी ना पहनी हो ताकि वह सब कुछ अपनी आंखों से देख सके और यही हो भी रहा था इसलिए उसके चेहरे पर उत्तेजना के साथ-साथ प्रसन्नता के भाव नजर आ रहे थे

चोट का ख्यालअंकित और उसकी मां के दिमाग से एकदम से निकल गया था क्योंकि इस समय जिस तरह के हालात में वह बैठी हुई थी अपनी दोनों टांगें खोलकर उसे भी अच्छी तरह से मालूम था कि उसकी गुलाबी बुर एकदम साफ दिखाई दे रही थी,,, और यही तो अपने बेटे को दिखाने के लिए वह मौका देखकर अपनी चड्डी उतार दी थी,,,ताकि उसका बेटा उसकी नंगी बुर को देख सके उसके दर्शन कर सके ना की चड्डी में होने की वजह से वह भी निराश हो जाए क्योंकि उस समय वह अपने बेटे को चोट दिखाते दिखाते अपनी चड्डी तो नहीं उतार सकती थी ना,,,, माहौल पूरी तरह से एक पल में गर्म हो चुका था अंकित की आंखें अपनी मां की दोनों टांगों से बिल्कुल भी नहीं हट रही थी। और सुगंधा खुद अपने बेटे को अपनी बुर दिखाने से पीछे नहीं हट रही थी।अंकित अपनी मां की दोनों टांगों के बीच देख रहा था और सुगंध अपने बेटे की तरफ देख रही थी दोनों की आंखों में वासना का तूफान उठ रहा था दोनों की आंखों में एक दूसरे को पाने की चाहत दिखाई दे रही थी। अंकित को साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां की बुर मदन रस से भीगी हुई थी। अपने बेटे की हालत देखकर सुगंधा को बहुत अच्छा लग रहा था वह मन ही मन प्रसन्न हो रही थी,,,, लेकिन एक बार फिर से सहज बनते हुए वह अपने बेटे से बोली,,,)



दिखाई दिया तुझे चोट,,,,,,

नहीं तो,,,,(अंकित एकदम मदहोश सा अपनी मां की बुर देखते हुए बोल रहा था उसे इस समय और कुछ नहीं दिखाई दे रहा था,,,,, और यह सुगंधा के लिए काफी उत्साहित कर देने वाली बातें थी वह अपने बेटे की हालत को देखकर बहुत खुश हो रही थी लेकिन फिर भी उसका ध्यान चोट पर ले जाना बहुत जरूरी था वरनासुगंधा के मन में हो रहा था कि उसका बेटा यही समझेगा कि उसकी मां अपनी बुर दिखाने के लिए सारा खेल रच रही थी इसलिए वहां अपनी टांग के नीचे से अपनी हथेली को अपनी जांघों तक ले गई और जहां पर दर्द कर रहा था वहां पर अपनी उंगली रखते हुए बोली,,,)

तुझे दिखाई दे रहा है देख यहां पर मुझे दर्द हो रहा है,,,,।

(अपनी मां की इस दिशा निर्देश परवह थोड़ा होश में आया और अपनी मां की बात पर ध्यान देने लगा और वह अपनी मां की बुर के निचले हिस्से की जांघ की तरफ देखने लगा जहां पर वह उंगली से दिखआ रही थीअंकित घुटनों के बल चलते हुए अपनी मां की दोनों टांगों की बेहद करीब तक आया और उसे जगह को देखने लगा जहां पर उसकी मां उंगली से दिखा रही थी और फिर उस जगह को देखते हुए बोला,,,)

हां मम्मी यह तो हल्की-हल्की लाल हो गई है,,,,।

बेटा यह तो उस गेंद की चोट की वजह से हल्की-हल्की लाल हो गई है,,, लेकिन जो तूने जो दर्द दिया है उसकी वजह से तो मेरी पूरी बुर गुलाबी हो गई है,,,(अपने बेटे की बात सुनकर वह अपने मन में ही बोली,,,,)

तभी तो दर्द कर रहा है,,,।

तुम अच्छा हुआ मूव खरीद ली इससे तुम्हें आराम मिल जाएगा लाओ लगा दुं,,,,,।

लगा दे अच्छे से,,,,।

थोड़ा लेट जाओ तब अच्छे से लग जाएगा,,,,,(अंकित जानबूझकर अपनी मां को लेट जाने के लिए कह रहा था क्योंकि वह जानता था कि लेटने से उसकी मां की बुर उसे और अच्छे से दिखाई देने लगेगी,,,, और सुगंधा भी अपने बेटे की बात मानते हुए धीरे से लेट गई,,,, और बोली,,,)

अब तो कर लेगा ना अच्छे से मालिश,,,,।

बिल्कुल एकदम साफ दिखाई दे रहा है,,,(अपनी मां की बुर देखते हुए) की कितनी हालत खराब है,,,,(वह अपनी मां की बुर की हालत को देख कर कह रहा था ना की चोट को देखकर और उसकी बात को सुगंधा भी अच्छी तरह से समझ रही थी। और मन ही मन में खुश भी हो रही थी,,, और वह धीरे से क्रीम का ढक्कन खोलने लगा और अपनी मां से बोला,,,)अब तुम इत्मानाम से लेटी रहो थोड़ी देर में तुम्हें आराम मिल जाएगा,,,,(ऐसा कहते हुएअंकित अपनी मां की दोनों टांगों के बीच देख रहा था जो कि इस समय लेटने की वजह से खुद ही उसकी साड़ी थोड़ा गुलाबी बुर को ढंक ली थी,,, और ऐसा वह जानबूझकर नहीं की थी। जब वह बिस्तर पर पीठ के बल लेट रही थी तभी उसकी साड़ी सरक कर उसके गुलाबी छेंद को ढंक दी थी,,, और अपनी ही साड़ी की यह हरकत सुगंधा को अच्छी नहीं लगी थी,,और वह इस समय अपने हाथों से साड़ी को ऊपर उठा नहीं सकती थी। और यह बात अंकित को भी अच्छी नहीं लगी थी,, लेकिन इस बात से सुगंधा खुश भी थी,,, क्योंकि वह देखना चाहती थी कि अब उसका बेटा क्या करता है,,,अपने हाथों से उसकी साड़ी उठाकर उसकी बुर देखने की कोशिश करता है कि फिर बुद्धू बनकर सिर्फ मालिश ही करता रहेगा,,, फिर भी मौके की नजाकत को समझते हुए सुगंधा अपने बेटे से बोली,,,।





मेरी हालत को ठीक करना अब तेरी जिम्मेदारी है देखती हूं कि तो क्या कर सकता है।

बिल्कुल भी फिक्र मत करो,,,, मैं अभी हालत में सुधार ला देता हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही वह क्रीम दबाकर उसमें से दवा निकालने लगा,,, ऐसा करते हुए उसका दिल जोरो से धड़क रहा था।क्योंकि कुछ ही देर में वह चाहता था कि उसकी हथेली उसकी मां की बुर के बेहद करीब हरकत करने वाली थी,,,, देखते ही देखते अंकित एकदम उत्तेजना से भरे हुएअपने दोनों हाथों से अपनी मां के टांग को थोड़ा सा और खोल दिया और ऐसा करने में जो अद्भुत सुख का उसे एहसास हुआ वह वर्णन करने जैसा नहीं था पूरी तरह से पागल हुआ जा रहा था।क्योंकि इस समय उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अपनी मां की चुदाई करने के लिए उसकी टांगों को खोल रहा हूं क्योंकि अक्सर मर्द औरत की टांग इसीलिए खोलने भी हैं वह तो कभी कबार इस तरह से मदद करने के लिए खोल दिया जाता है वरना अक्सर मर्दों का काम यही होता है और जैसा एहसास अंकीत को हो रहा था वैसा एहसास सुगंधा को भी हो रहा था,,, क्योंकि बरसों गुजर गए थे इस एहसास से गुजरे,, पल भर में ही उसे बीते हुए वह दिन याद आने लगे जब ईसी तरह से अंकित के पापा उसे छोड़ने के लिए इसी तरह से उसकी टांगों को खोलते थे,,,,। इस समय के हालात कुछ और थे,,,, सुगंधा का दिल जोरो से डल रहा था और जिस तरह से वहगहरी गहरी सांस ले रही थी उसके चलते हैं उसकी खरबूजे जैसी चूचियां ब्लाउज में कैद होने के बावजूद भी ऊपर नीचे होकर अपने होने का एहसास कर रही थी जिस पर बार-बार अंकित की नजर चली जा रही थी।



सुगंधा का गुलाबी छेद जो इस समय उसके ही साड़ी के किनारी से हल्का सा ढंक गया था। उसके बारे में सोच कर अंकित पागल हुआ जा रहा थाक्योंकि कुछ पल पहले ही वह अपनी मां के उसे खूबसूरत अंग को देख चुका था और उसकी खूबसूरती उभर कर उसकी आंखों में वासना का तूफान भर रहा था,,,,, उंगली में हल्के से दवा लगाकर वह अपनी हथेली को अपनी मां की जांघ की तरफ आगे बढ़ाने लगा,,,बिस्तर पर लेटे हुए सुगंधा अपने बेटे को ही देख रही थी उसकी हरकत को देख रही थी,,,हल्का सा लाल रंग सुगंधा की जांघों पर दिखाई दे रहा था जहां पर रबड़ का गेंद लगा था और इस लाल रंग पर मूव क्रीम में से निकली हुई दवा अंकित लगाने लगा ,,, अंकित उंगली के सहारे हल्के हल्के दवा को लग रहा था तब तक सुगंधा को कुछ एहसास नहीं हो रहा था लेकिन जब सुगंधा ने कहीं।

अरे थोड़ा जोर लगा ऐसे कैसे आराम मिलेगा,,,,।

(बस इतना सुनते ही अंकित अपनी पूरी हथेली से उसे लाल रंग के हिस्से को दबोच दिया एकदम मदहोश होकर मानो के जैसे वह अपनी मां के साथ संभोग कर रहा हो और अंकित की इस हरकत पर सुगंध एकदम से उत्तेजित होकर सिहर उठी और एकदम से उसकी आंखें मदहोशी में बंद होने लगीजिस तरह का अनुभव उसे अपने शरीर में महसूस हुआ था उसके चलते हुए अपने लाल रंग के निचले हिस्से को दांत से दबा दी थी,,, और अपनी मां की इस एहसास कोअंकित अपनी आंखों से देख लिया था और समझ गया था कि उसकी मां को मजा आ रहा हैअंकित इस तरह से अपनी मां की जांघों को दबाना शुरू कर दिया और दवा को लगाना शुरू कर दिया अपनी मां की मोटी मोटी जांघ को दबाने में उसे इतना मजा आ रहा था कि पूछो मत,,,,अंकित पागल हुआ जा रहा था उसकी आंखों के सामने उसकी मां अधनंगी हालत में लेटी हुई थी,,,, उसकी गुलाबी पर हल्का सा साड़ी से ढंका हुआ था जिसे अंकित अपने हाथों सेउसकी साड़ी हटा देना चाहता था और उसके गुलाबी बुर को जी भर कर देख लेना चाहता था,,,, अंकित को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,, और इसके बारे में सोचता होगा वह अपनी मां की जांघ की मालिश कर रहा था।सुगंधा पीठ के बोल लेते हुए अपनी आंखों को बंद करके इस एहसास में धीरे-धीरे डूब रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था जहां पर वह मालिश कर रहा था बस उससे दो-तीन अंगुल की दूरी पर है सुगंधा का गुलाबी छेद था।और इसका एहसास मां बेटे दोनों को पागल कर रहा था अंकित का लंड उसकी पेंट में गदर मचाने को तैयार था और सुगंधा की बुर बार-बार पानी फेंक रही थी।



अपनी नानी के साथ संबंध लेने के बाद उसे इतना तो पता ही था कि औरत को कैसे मदहोश किया जाता है उसे मजबूर किया जाता है संबंध बनाने के लिए इसलिए वह बार-बार अपनी मां की जांघ को जोर-जोर से दबा रहा था मसल रहा थारह रहे कर सुगंधा के मुंह से सिसकारी भी फूट पड़ रही थी और दर्द से थोड़ा कराह भी ले रही थी लेकिन अपने बेटे से इसकी बिल्कुल भी शिकायत नहीं कर रही थी जिसका मतलब साफ था कि वह भी आगे बढ़ना चाहती थी।अंकित अपनी मां की तरफ देख रहा था उसकी मालिश भी कर रहा था वह देखना चाहता था कि उसकी मां कुछ कहती है कि नहीं क्योंकि वह इस समय अपनी मां की साड़ी को उसकी बुर से थोड़ा सा ऊपर उठाना चाहता था,,,,ताकि वह यह देख सके कि उसकी मां के मन में क्या चल रहा है और वह अपनी मां को इसका एहसास दिला सके कि वह खुद क्या चाहता है लेकिन फिर भी ऐसा करते समय उसका दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था। अपनी मां की जंग को मसल मसल कर वह पूरी तरह से लाल कर दिया,, था,,,,अपनी मां की जान को मालिश करने के बहाने मसलते हुए उसे इतना तो एहसास हो रहा था कि वाकई में औरत के हर एक अंग से अद्भुत आनंद के फुहार फुट दिए जिसमें दुनिया का हर मर्द नहाने के लिए उतावला रहता है और इस समय उस आनंद की फुहार में अंकित अपने आप को भीगता हुआ महसूस कर रहा था।,,,, अंकित अपने मन की करने के लिए अपना मन बना चुका थावह अपनी मां की तरफ देख रहा था जो कि इस समय मदहोश होकर अपनी आंखें बंद करके गहरी गहरी सांस ले रही थी अंकित को इस बात का पता चल रहा था कि उसकी मां के बदन मैं अब बिल्कुल भी दर्द नहीं था बल्कि वह मजा ले रही थी क्योंकि ऐसा एहसास वह अपनी नानी के चेहरे पर देख चुका था।



ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था रात के 11:00 बज रहे थेवैसे तो यह समय मां बेटे दोनों का बिस्तर पर सोने का था,,, लेकिन इस समयबिस्तर पर तो दोनों था लेकिन सोने के लिए नहीं बल्कि एक दूसरे के साथ सोने के लिए मचल रहे थे नींद दोनों की आंखों में बिल्कुल भी नहीं थीऔर ऐसा ही होता है जब मरद और औरत एक साथ बिस्तर पर होते हैं तो दोनों की आंखों से सबसे पहले नींद भाग जाती है ताकि वह दोनों अकेले रह सके,, और इस समय दोनों की हालत उसी तरह की

थी,, मां बेटे दोनों की आंखों में वासना के साथ-साथ उम्मीद की किरण की नजर आ रही थी,,, अंकित गांधी जोरों से धड़क रहा था दिल की धड़कन बड़ी तेजी से चल रही थी मानो कि अंकित से पहले उसे ही मंजिल पर पहुंचने की जल्दबाजी होअपनी मां की सांसों की गति के साथ उठती बैठती ,,चूचियों को देखकर अंकित का मन कर रहा था कि इसी समय हाथ बढ़ाकर अपनी मां की दोनों चूचियों को थाम ले और उनसे जी भरकर खेलें,,, क्योंकि मर्दों के लिए इससे बेहतर खिलौना बना ही नहीं है,,‌ अंकित अपने मन में ठान लिया थावह पूरी तरह से तैयार था अपनी मां की साड़ी को थोड़ा सा ऊपर उठने के लिए ताकिउसके बदन का सबसे खूबसूरत अंग उसे दिखाई दे सके,,,, लेकिन यह कार्य अंकितसहज रूप से बातों के जरिए करना चाहता था इसलिए वह अपनी मां से बात करना चाहता था और अपनी मां की जांघ को अपनी हथेली में दबोचते हुए बोला।)

अब कैसा लग रहा है मम्मी,,,?

अब तो बहुत अच्छा लग रहा है ऐसा लग ही नहीं रहा है कि यहां दर्द है,,,, बस थोड़ी देर और मालिश करता रे एकदम से दर्द निकल जाएगा,,,,।

तुम चिंता मत करो तुम कहोगी तो मैं रात भर मालिश करता रहूंगा,,,।

अच्छा यह बात है थकेगा नहीं,,,।

औरतों की सेवा मेरा मतलब है कि तुम्हारी सेवा करने में अगर थक जाऊं तो मैं मर्द किस बात का,,,।

ओहहहह,,,, क्या बात है,,,(अंकित की बात सुनकर सुगंधा एकदम गदगद हो गई थी,,, अच्छी तरह से जानते थे कि उसके बेटे के कहने का मतलब क्या है इसलिए तो उसके कहने का मतलब को समझ कर वह पानी पानी हो रही थी,,,)



तो क्या ऐसे ही थोड़ी ना कह रहा हूं मैं पहले जैसा अंकित नहीं हूं अब पूरी तरह से बदल गया हूं पूरा मर्द बन चुका हूं,,,,(अंकित जानबूझकर मर्द शब्द कहकर अपनी मां को यह जैसा ना चाहता था कि अब वह पूरी तरह से तुम्हारे लिए तैयार हो गया है चाहे जैसे उसका उपयोग कर सकती हो,,,सुगंधा भी अपने बेटे की बात सुनकर अपने मन में ही बोली यह तो वक्त बताएगा बेटा कि तू पास होता है या फेल होता है,,, क्योंकि अच्छे-अच्छे औरतों की बीच नाली में ही डूब गए,,, अपने बेटे की बात सुनकर वह बोली,,)

वह तो दिखाई देता है,,, तू बहुत जोर-जोर से मालिश कर रहा है,,,।

तुमको पूरी तरह से आराम मिल जाए इसलिए कर रहा हूं क्या तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा है,,,?(इतना कहने के साथ ही अपनी बीच वाली उंगली को एकदम से अपनी मां की बुर के करीब ले जाते हुए जो कि इस समय साड़ी से ढकी हुई थी)

सहहहहह ,,,,,आहहहहहहह बहुत अच्छा लग रहा है,,,,(अपने बेटे की हरकत से ना चाहते हुए भी उसके मुंह से सिसकारी निकल पड़ी थी,,, और अपनी मां की गरमा गरम सिशिकारी की आवाज सुनकर अंकित का लंड पागल हुआ जा रहा था,,,,, अपनी मां की हालत और अपनी चाहत देखकर उसे रहा नहीं गया और वह तुरंत अपनी मां की साड़ी जो हल्का सा उसकी बुर को ढंक ली थी,,, उसे पकड़कर ऊपर की तरफ नहीं बल्कि उसे नीचे की तरफ कमर पर जहां पेटिकोट की डोरी से कई होती है उसे धीरे-धीरे उसके अंदर डाल दिया ताकि दोबारा उसकी साड़ी की कीनारी बुर के ऊपर ना आएऐसा करते हुए उसकी उंगलियां कांप रही थी उसकी अजीब सी हालत हो रही थी उसे ऐसा था कि उसकी हरकत पर उसकी मां जरूर कुछ बोलेगी,,, लेकिन उसके हेरान के बीच उसकी मां उसे कुछ नहीं बोली बस उसी तरह सेआंख बंद करके लेटी रही लेकिन उसे पल का एहसास अंकित को हुआ था जब उसने अपनी मां की साड़ी को उठाकर उसकी पेटिकोट की डोरी के नीचे डाला था तब उसकी मां के बदन में अजीब सी कसमसाहट हुई थी जिसको महसूस करके अंकित को लगने लगा था कि आज की रात जरूर कुछ काम बनने वाला है,,,,, साड़ी केएक बार फिर से बुर की जगह से हटने से एक बार फिर सेवा खूबसूरत अद्भुत नजारा दिखाई देने लगा था,,, बुर की चिकनाहट बता रही थी कि जल्दी में ही उसकी मां ने क्रीम लगाकर उसकी सफाई कीऔर सफाई करने के बाद वाकई में उसकी मां की बुर चमकते चांद की तरह हो गई थी जिसे पाने के लिए दुनिया का हर प्रेमी हर मर्द उत्सुक रहता है,,,,,। एक बार फिर से अंकित अपनी फटी आंखों से अपनी मां की गुलाबी बर को देख रहा था जो पूरी तरह से मदन रस के पानी से लबालब भरी हुई थी और उसे मदन रस की गगरी छलक रही थी जिससेवह कांग्रेस पूरी तरह से उसकी बुर के निचले स्तर को भी होता चला जा रहा था और आलम यह था कि नीचे लगाया गया बिस्तर भी गीला हो रहा था इतना अदभुत और इतना ज्यादा सुगंधा बुर से पानी बहा रही थी यह सुगंधा की स्थिति की गवाही थी कि उसकी हालत क्या हो रही थी किस कदर वह मर्द के साथ के लिए तड़प रही थी।



सुगंध को भी इस बात का एहसास था कि उसके बेटे ने उसकी साड़ी को एक बार फिर से उसकी बुर पर से हटा दियाहै और इस समय फिर से उसकी गुलाबी बुर उसके बेटे की आंखों के सामने उजागर हो गई होगी जिसे देखकर उसके बेटे के मन में न जाने कैसी कैसी कल्पना हो रही होगी,,,, यही सोच करसुगंधा की सांस फिर से ऊपर नीचे होने लगी थी उसकी हालत फिर से खराब होने लगी थी वह जानती थी कि उसकी बुर से लगातार पानी निकल रहा था जिसकी वजह से नीचे बिछाया गया चादर भी गीला हो रहा था,,,, अपनी मां की नमकीन और पनियाई बुर को देखकर अंकित जानबूझकर अपना भोलापन का नाटक दिखाते हुए बोला,,,,।

बाप रे तुम्हारी यह तो गिली हो गई है,,,,,

क्या गीली हो गई है,,,(सुगंधा जानते हुए भी उसका बेटा किस बारे में बात कर रहा है वह जानबूझकर अनजान करने का नाटक करते हुए बोल रही थी)

अरे यही तुम्हारी देखो तो कितना पानी छोड़ रही है,,,,

तो यही वही क्या कर रहा है नाम लेकर बोल,,,।

धत्,,,,, इसका नाम लेने में शर्म आ रही है,,,।

चल अब रहने दे शर्म का नाटक करने को गंदी किताब मेंन जाने कितनी बार गंदे शब्द आए थे लेकिन तू बेझेक उसे पढ़ना चला जा रहा था मेरे सामने और इस समय नाटक कर रहा है शर्माने का,,,।

अरे वह तो सिर्फ किताब की बात थी,,,।

किताब की बात थी तो क्या हो गया शब्द तो वही थे ना जो आमतौर पर लड़के प्रयोग में लेते हैंऔर इस समय तेरी हालत खराब हो रही है उसका नाम लेने में और अपने आप को कहता है कि पूरा मर्द बन गया हूं,,,,।

(सुगंधा जानबूझकर अपने बेटे को उपसह रही थी उसकी जवानी की दुहाई दे रही थी उसकी मर्दानगी को ललकार रही थी जिसे सुनकर वाकई में अंकित अपने आप को अपनी मां के सामने लाचार साबित होता हुआ नहीं देखना चाहता था इसलिए वह एकदम से हिम्मत जुटाकर बोला,,,)

बबबबब,,,बुर,,,,,,(अंकित हकलाते हुए बोलावह पहले भी अपनी मां के सामने इस तरह के शब्दों का प्रयोग कर चुका था लेकिन आज की बात को छोड़ता हालत कुछ ओर थे,, आज अंकित को सच में लग रहा था कि आज उसकी मां के साथ उसका जरूर कुछ होने वाला है,,,, अपने बेटेके मुंह से अपने खूबसूरत और संवेदनशील अंग का नाम सुनते ही सुगंध के चेहरे का रंग एकदम से बदलने लगा उसके होठों पर मादक मुस्कान छाने लगी,,,, और फिर वह अपने बेटे का हौसला बढ़ाते हुए बोली,,,)

यह हुई ना बात इसे कहते हैं असली मर्द,,,,,,कुछ दिनों में हम दोनों के बीच जो कुछ भी हुआ है जिस तरह से वार्तालाप हो रही है उसे देखते हुए हम दोनों को अभी एक दूसरे से इस तरह की बात करते हुए इस तरह के शब्दों का प्रयोग करते हुए शर्म नहीं करना चाहिए,,, सच कहूं तो बरसों से मेरी ख्वाहिश थी कि अपने पास भी कोई ऐसा साथी हो जिससे मैं इस तरह के शब्दों का प्रयोग करके बात कर सकूं तेरे पापा के जाने के बाद मेरी एक ख्वाहिश मेरे सीने में ही दब कर रह गई,,,

क्या सच में मम्मी तुम इस तरह के शब्दों का प्रयोग करना चाहती थी इस तरह से आमतौर पर जिस तरह से हम लड़के लोग बात करते हैं इस तरह से तुम भी बात करना चाहती थी,,,(अपनी मां की जांघों को अपनी हथेली में दबोचते हुए,,)

आहहहह,,,, बहुत जोर से मसलता है तू,,,, तु बिल्कुल सच कह रहा है,,,,ऐसा बिल्कुल भी नहीं है किस तरह के शब्दों का प्रयोग करके जो आपस में बात करते हैं वह गंदे होते हैं गंदे आदमी या गंदी औरत ऐसा कुछ भी नहीं है आमतौर पर मर्द और औरत आपस में इस तरह की बातें करते ही रहते हैं हमारे स्कूल में भी कुछ औरतें हैं जो इस तरह से ही बातें करती है,,,।

तब तुम अभी तुम भी उन लोगों के साथ इस तरह की बात कर सकती थी ,,,,।

कर तो सकती थी लेकिन मैं जानबूझकर ऐसी बातें नहीं करती थीअगर मैं उन लोगों से इस तरह की बातें करती तो सारे दिन लोगों को मेरे बारे में गलत भावना ही जाती वह लोग मेरे बारे में गलत धारणा बांध लेते क्योंकि फिर उन्हें लगने लगता है कि मैं पति के जाने के बाद भी किसी के साथ रिलेशनशिप में हूं तभी इस तरह की बातें करते हैं और इसीलिए मैंने इस तरह की बातें उन औरतों से कभी नहीं की जो कि मेरी सहकर्मी ही है,,,।

नूपुर आंटी से भी नहीं,,,,(अपनी मां की बुर को देखकरअंकित को राहुल की मां याद आने लगी थी इसी तरह से उसकी खुली टांगों के बीच अपना मुंह डालकर वह उसकी बुर को अपनी जीभ से चाटा था,,,, और इस समय भी उसका मन कुछ ऐसा ही करने को कर रहा था इसलिए वह अपनी मां के सामने नूपुर का जिक्र छेड़ दिया था,,,, लेकिन नूपुर की बात आने पर भी उसकी मां सहज बनी रही और बोली।)

नहीं उसके साथ भी ईस तरह की बातें में नहीं करती थी,,, क्योंकि वह अभी सीधी शादी सी थी किसी से ज्यादा बोलती चालती नहीं थी,,,,,,,



(अपनी मां से बात करने के दौरान भी अंकित की नजर अपनी मां के गुलाबी बुर पर थी जिसे देखकर उसके मुंह से लार टपक रही थी अंकित अपनी मम्मी बहुत सी बातें सोच रहा थाउसे इतना तो एहसास हो रहा था कि उसकी मां क्या चाहती है अगर उसके मन में भी गंदी भावना ना होती तो वह उसके सामने इस तरह से टांग खोल कर लेटी ना होती,,,,इसलिए वह जानता था कि उसे थोड़ी हिम्मत दिखाने की जरूरत है और अगर आज की रात वह भी कुछ नहीं कर पाया तो उसके जैसा बुद्धू इंसान दुनिया में कोई नहीं,,, है।इसलिए वह अपनी मां से बात करने के दौरान तुरंत अपनी हथेली को एकदम से अपनी मां की बुर पर रख दिया और उसके गुलाबी लकीर को अपनी हथेली के नीचे ढक लिया एकदम से अपनी बर पर अपने बेटे की हथेली महसूस करते ही सुगंधा गनगना गई,,, और वह एकदम से उठ कर बैठ गई और अपने बेटे की आंख में आंख मिलाकर बोली,,,)

यह क्या कर रहा है अंकित,,,,(सुगंधा की सांसें उपर नीचे हो रही थी ऐसा कहते हुए वह अपनी टांगों के बीच तो कभी अंकित के चेहरे को देख ले रही थी,,, सुगंधा का चेहरा साफ बता रहा था कि वह क्या चाहती है वह सिर्फ ऊपर से अपने बेटे को जाने की कोशिश कर रही थी जबकि वह अपने बेटे से यही उम्मीद लगा कर बैठी थी,,)
 
ककककक,,,, कुछ नहीं मम्मी यह पूरी गीली हो गई है अगर तुम्हें पेशाब लगा है तो जाकर करके आ जाओ धीरे-धीरे इसमें से पेशाब निकल रही है,,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर ही सुगंधा मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली)

अरे तू सच में बुद्धू है इतना बड़ा हो गया और मर्द बनने का ढोंग कर रहा है यह पैसाब नहीं है यह कुछ और है,,,।

कुछ और मैं कुछ समझा नहीं,,,,(अंकित सब कुछ समझ रहा था जानता था कि उसकी मां की बुर से निकलने वाला तरल पदार्थ क्या है वह अच्छी तरह से जानता था कि यह उसके पेशाब की बूंद बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन फिर भी अनजान बनने का नाटक कर रहा था अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा बोली,,,)



तू सच में अभी छोटा ही है इसलिए तुझे समझ में नहीं आएगा कि यह क्या हैजब तू औरतों को समझने लगेगा तो तुझे खुद में खुद पता चल जाएगा कि यह क्या चीज निकल रहा है,,,,

तुमको तो मैं समझता हूं तो फिर क्यों नहीं समझ में आ रहा है मुझे ,,,,।

अच्छी तरह से नहीं समझता अभी तो मुझे सिर्फ अपनी मां की तरह समझता है जब एक औरत की तरह समझने लगेगा तो तुझे पता चल जाएगा फिर तुझे कुछ भी पूछने की जरूरत नहीं पड़ेगी,,,,

(अंकित अपनी मां के कहने का मतलब कुछ समझ कर पूरी तरह से अंदर ही अंदर प्रसन्न हो रहा था उत्साहित हो रहा था यह शब्द उसकी मां की तरफ से आगे बढ़ने का इशाराजिसे अंकित समझ गया था और आज की रात अनजान बनने का ढोंग उसे बिल्कुल भी नहीं करना था नहीं तो यह सिलसिला न जाने कब तक चलता ही रहेगा आज खत्म कर देना चाहता था इसलिए वह बोला)

कोई बात नहीं ये भी करके देख लेते हैं तब तो समझ में आ जाएगा ना,,,।

बिल्कुल समझ में आ जाएगा,,,(सुगंधा अपने चेहरे पर मादक मुस्कान बिखेरते हुए बोली,,,,,)

लेकिन अभी तो लग रहा है कि तुम्हारी इसको साफ करने की जरूरत है,,,

फिर से इसको,,,,

मेरा मतलब है कि तुम्हारी,,,बबबब,बुर को,,,(अंकित का हकलाना देखकर उसे खूबसूरत शब्द को कहते हुए सुगंधा मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली,,)





अभी डर के यह शब्द निकल रहा है जब तु मुझे समझने लगेगा तो मजे से यह सब निकलेगा,,,,।

(अंकित अपनी मां की बात सुनकर मदहोश हो रहा था वह उसकी आंखों में वासना का तूफान देख रहा था जिसमें वह डुब जाना चाहता था और फिर धीरे से अपनी हथेली का दबाव अपनी मां की बुर पर बढ़ाने लगा,, जो कि इस समय कचौड़ी की तरह फुल चुकी हैअंकित को मजा आ रहा था उसकी मां को भी मजा आ रहा था,,,, सुगंधा कुछ भी नहीं बोल रही थीक्योंकि वह भी यही चाहते थे और आज पूरी तरह से बहक जाने वाली रात थी आज के दिन वह अपने बेटे को रोकना नहीं चाहती थी वह देखना चाहती थी कि उसका बेटा अब क्या करता है,,, अंकित की पूरी हथेली उसके कामरस से भीग गई थी। यह देख कर सुगंधा बोली,,)

तेरी हथेली पूरी तरह से गीली हो रही है,,,।

तुम अपनी ही इतना छोड़ रही हो मैं तो दबा कर उसका पानी निकलने से रोक रहा हूं,,,,।

पानी रोक कर क्या करेगा,,,,।

तब तुम्हारी बुर और मेरी हथेली गीली नहीं होगी,,,,।

लेकिन इसे तो रोक नहीं जा सकता इसे तो निकल जाने दिया जाता है जैसे पैसाब को निकल जाने दिया जाता है,,,,।

तभी तुम इसको रोकने की कोशिश नहीं कर रही हो,,,।

नहीं,,,,(गहरी सांस लेते हुए सुगंधा बोली)



लेकिन इससे तो कपड़े गीले हो रहे हैं देखो चादर कितने गीली हो गई है अगर तुम्हें समय पैंटी पहनी होती तो वह भी पूरी तरह से भीग गई होती तुम्हारी साड़ी भी गीली हो जाती होगी ऐसे दिन में न जाने कितनी बार तुम अपने कपड़े गीला कर लेती होगी,,,(अंकित इस तरह से अपनी मां की बुर पर अपनी हथेली का दबाव बनाते हुए बोला और हल्के हल्के उसे हथेली से ही सहला रहा था एक तरह से वह अपनी मां को गर्म कर रहा था,,,,)

यह हमेशा थोड़ी ना निकलता है,,,,

फिर कब निकलता है,,,(अंकित अच्छी तरह से जानता था कि औरत की बुर से काम रस कब निकलता है लेकिन वह अपनी मां के मुंह से सुनना चाहता था वह देखना चाहता था उसकी मां क्या कहती है,,,)

जब औरत को कुछ कुछ होता है जब वह किसी मर्द के करीब होती है और मर्द उसके अंगों को सहलाता है उसका हाथ रखता है तब औरत की ऐसी हालत हो जाती है तब ईसमें से ऐसा रस निकलता है,,,(अपनी बुर की तरफ उंगली से इशारा करते हुए बोली)

तो क्या इस समय तुम्हें ऐसा ही लग रहा है कि तुम किसी मर्द के साथ हो,,,,।

ऐसा तो नहीं लग रहा है लेकिनतेरे में कुछ बात तो है जो मेरी हालत ऐसी हो रही है पूरा मर्द है कि नहीं यह तो बाद में ही पता चलेगा,,,,।

(अपनी मां की तरफ से खुला निमंत्रण पाकर अंकित की भावनाएं भड़क रही थी उसका मन बहक रहा था और वह अपनी हथेली का दबाव एकदम से अपनी मां की बुर पर बढ़ाता हुआ बोला,,)

मम्मी अगर तुम्हें बुरा ना लगे तो एक बात कहूं,,,।

क्या बोल,,,,

हम दोनों की स्थिति भी उस गंदी कहानी के उस परिवार की तरह ही है,,,,।

कैसे,,,?

अब देखो ना मम्मी,,,(अपनी हथेली का दबाव अपनी मां की बुर पर एकदम से बढ़ाते हुए जिसकी वजह से सुगंधा की हालत खराब होने लगी,,) कहानी में उसके बेटे को बाथरूम के अंदर क्या दिखाई दे रहा था,,,।

उसकी मां पेशाब करते हुए दिखाई दे रही थी,,,।

पेशाब करते हुए दिखाई तो दे रही थी लेकिन वह अपनी मां की गांड देख रहा था और अपनी मां की नंगी गांड देखकर उसकी हालत खराब होने लगी थी,,,,।



और इस समय मेरी आंखों के सामने क्या है,,,?(अपनी मां की तरफ सवालिया नजरों से देखते हुए अंकित बोल तो उसकी मां अपने बेटे की बात समझ कर मुस्कुरा दी और बोली,,,)

तू बहुत शैतान है,,,।

वह तो जब तुम्हारे साथ होता हूं तो न जाने क्यों ऐसा सुझने लगता है,,,, मेरी आंखों के सामने तुम्हारी बुर है उसके सामने उसकी मां की गांड थी नंगी और मेरे सामने मेरी मां की बुर है एकदम नंगी,,,, और वह अपनी मां की नंगी गांड देखकर कैसे-कैसे विचार अपने मन में ला रहा था यह तो तुम सुन ही चुकी हो,,,।

हां वह तो मैं जानती हूं लेकिन क्या तेरे मन में भी उसी तरह के विचार आ रहे हैं क्या,,?(अपनी आंखों को नचाते हुए सुगंधा बोली,,,)

नहीं ऐसी कोई बात नहीं है मैं तो उसकी स्थिति में और अपनी स्थिति में कितनी समानता है उस बारे में बता रहा था,,,,,,।

लेकिन इस बात पर भी गौर करना कि उसने अपनी मां को उंगली करते हुए देखा था तब जाकर उसकी उत्तेजना और ज्यादा भड़क गई थी लेकिन मैं यहां पर ऐसा कुछ नहीं कर रही हूं,,,, इसलिए अपनी भावनाओं पर काबू रखना,,,,,(अपनी आंखों को गोल-गोल नचाते हुए वह बोली,,,)

मैं अच्छी तरह से समझ रहा हूं लेकिन न जाने मुझे कुछ अजीब सा हो रहा है,,,,,(हल्के से अपनी बीच वाली उंगली से अपनी मां की बुर की पतली लकीर के गुलाबी पत्तियों को कुरेदते हुए) ऐसा लग रहा है कि कुछ भी मेरे बस में नहीं है.

(अपने बेटे की बात और उसकी हरकत को देखकर सुगंधा पागल हुए जा रही थीक्योंकि इस समय उसका बेटा उसकी बुर के गुलाबी पत्तियों से खेल रहा था जो औरत के उत्तेजना को परम सीमा तक ले जाती हैं उसकी आंखें नशा में बंद होने लगी थी,,,, और वह सिर्फ इतना ही बोल पाई,,)

तु कहना क्या चाहता है,,,,।

हम दोनों उसे कहानी के मां बेटे की तरह तो नहीं लेकिन,,(धीरे से अपने बीच वाली उंगली को अपनी मां की बुर में प्रवेश कराते हुए) इतना तो कर ही सकते हैं ना,,,,,।



सहहहहह,,,,आहहहहहहह,,,,,,,(अपने बेटे की हरकत से एकदम मदहोश होते हुए) यह क्या कर रहा है अंकित यह गलत है,,,,, मैं उसकी मां की तरह नहीं हूं,,,वह मजबूर थी अपने बदन की प्यास की वजह से लेकिन मैं मजबूर रही हूं मुझे इसकी कोई जरूरत नहीं है,,,,(सुगंधा ऐसा बोल भी जा रही थी और अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ लेकर अपनी आंखों को मदहोशी में बंद करके गहरी सांस भी ले रही थी जो कि इस बातको जाहिर कर रहा था कि उसे इस समय किस चीज की जरूरत है और अंकित अच्छी तरह से अपनी मां की प्यास को समझ रहा था इसलिए वह लगातार अपनी उंगली को अंदर बाहर करते हुए अपनी मां को और ज्यादा मदहोश कर रहा था और बोला)

तुम उसे औरत की तरह नहीं हो मम्मी मैं अच्छी तरह से जानता हूं लेकिन मैं ज्यादा कुछ करने को नहीं कह रहा हूं सिर्फ उंगली को अंदर बाहर करने दो तुम सच में बहुत खूबसूरत हो,,,, वह कहानी वाली उसकी मां भी तुम्हारी जैसी खूबसूरत नहीं होगी,,, उसने तो सिर्फ अपनी मां की गांड देखकर उसे चोदने का विचार बना लिया था,,,, तुम जरा सोचो तुम तो सर से पांव तक एकदम क़यामत ही कयामत उसने तो अपनी मां की नंगी गांड देखकर भावनाओं में बह गया था लेकिन तुम पूरी तरह से साड़ी में रहती हो तो भी तुम्हारी कसी हुई गांड साड़ी के ऊपर से देख कर किसी की भी हालत खराब हो जाए,,,(अपनी मां की बुर में अपनी बीच वाली उंगली को अंदर बाहर करते हुए अंकित बोल रहा था उसकी बातें सुनकर मदहोशी के आलम में सुगंधा बोली)

तो यह बात सच कह रहा है या मुझे बहकाने के लिए कह रहा है,,,।

तुम छोटी बच्ची थोड़ी ना हो कि मेरी बातों से बैठ जाओगी अच्छा बुरा सब जानती हो स्कूल की टीचर हो तुम्हें कोई कैसे बहका सकता है मैं तो सिर्फ अपने मन की बात बता रहा हूं,,,,।

तो क्या तुझे उंगली करने में मजा आ रहा है,,,(इस तरह से अपनी आंखों को बंद किए हुए मदहोशी भरे स्वर में बोली)



सच पूछो तो उस कहानी वाले लड़के को भी मजा नहीं आया होगा जितना मजा मुझे आ रहा हैतुम इससे ज्यादा आगे बढ़ने की इजाजत न भी दो तो भी है मेरे लिए बहुत है,,,सससहहहह कितनी गर्म बर है तुम्हारी अंदर कितनी चल रही है ऐसा लग रहा है कि मैं अपनी उंगली को किसी भट्टी में डाल दिया है,,,,।

सहहहहहह क्या सच में इतनी गरम है,,,,।

तो क्या,,, बहुत ज्यादा गर्म है,,,,, लेकिन मैं एक बात कहना भूल गया,,,,,(धीरे से अपनी मां की उठती बैठी चूचियों पर वह अपनी हथेली रख दिया जो कि इसमें ब्लाउज के अंदर कैद थी अपनी चूचियों पर ब्लाउज के ऊपर से अपने बेटे की हथेली महसूस करते ही सुगंधा पूरी तरह से गनगना गई,,,, और अपने मुंह से एकदम मादक स्वर निकालते हुए बोली,,)

सहहहहहह,,,ं अब यह क्या है अंकित,,,, अब ईससे ज्यादा मत बढ़ हटा ले अपना हाथ,,,

मैंने कोई जानबूझकर नहीं कियातुम्हारी छाती ऊपर नीचे हो रही है मुझे लगा कि तुम्हें तकलीफ हो रही है इसलिए ब्लाउज के ऊपर से मैंने थाम लिया।

नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है,,,,,

तो फिर कैसा है मम्मी,,,(बातोंके बहाने अंकित अपनी हथेली को अपनी मां की चूची पर से बिल्कुल भी नहीं हटाया जो इसमें ब्लाउज में कैद थी उसकी गर्माहट उसकी नरमाहट पूरी तरह से अंकित की भावनाओं को भड़का रही थी उससे रहा नही गया और वह धीरे-धीरे ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की चूची को दबाना शुरू कर दिया,,,,, उत्तेजना के मारे सुगंधा का गला सूखने लगा वह अंदर ही अंदर बहुत खुश थी क्योंकि उसका बेटाअपनी हरकत को अंजाम दे रहा था आगे बढ़ रहा था हिम्मत दिखा रहा था और सच में एक मर्द वाला काम कर रहा था,,, उत्तेजना से अपने सूखते हुए गले को अपने थूक से गिला करते हुए वह बोली,,,)

ऊममममम,,,,,, ऐसा मत कर तेरी हरकत से मुझे भी न जाने क्या हो रहा है,,,।

क्या हो रहा है मम्मी मुझे भी तो बताओ तुम्हें अच्छा लग रहा है कि खराब लग रहा है,,,,।



(अंकित का इतना कहना था कि सुगंधा धीरे से अपनी आंखें खोल कर अपने बेटे की तरफ देखने लगी,,, मदहोशी उसकी आंखों में पूरी तरह से छाई हुई थी वह पूरी तरह से अपने बस में नहीं थी वह बेकाबू हुए जा रहे थे वह कुछ बोलने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं थी। क्योंकि उसे पर अंकित दोहरा दबाव बनाए हुए थाएक तरफ से वहां उसकी दोनों टांगों के बीच की पत्ली दरार में अपनी उंगली डालकर अंदर बाहर कर रहा था और ऊपर से वह ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की चूची को धीरे-धीरे दबा रहा था,,,,यह दोनों औरतों के लिए उत्तेजना के केंद्र बिंदु होते हैं जिससे उसकी उत्तेजना बढ़ती जाती है,,, अगर औरत का मरना भी कर रहा हो और मर्द का हाथ उसकी चूची या किसी तरह से उसकी बुर तक पहुंच जाए और वह हल्के हल्के सहला कर उसे मजा देने लगे तो वह तुरंत चुदवासी हो जाती है,,,,और यही हाल ही समय सुगंधा का भी हो रहा था सिर्फ अपने मुंह से बोल नहीं पा रही थी,,,, हालात पूरी तरह से बेकाबू हुए चले जा रहे थे। बुर की गर्मी अंकित अपनी उंगली पर महसूस तो कर रहा था लेकिन उसका सीधा असर उसके लंड पर पड़ रहा था,,,, जो कि इस समय गदर मचाने को तैयार थालेकिन अभी उसे बंदिश में रहना जरूरी था क्योंकि अंकित को मालूम था कि अभी उसकी बारी नहीं आई है,,,,।

अंकित और उसकी मां दोनों खामोश हो चुके थे दोनों एक दूसरों को देख रहे थे,उत्तेजना से लाल हुआ सुगंधा का चेहरा और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था जो की ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में एकदम साफ दिखाई दे रहा था,,, सुगंधा के काम रस से भरे हुए उसके लाल-लाल होठ एकदम धधक रहे थे,,, और अपनी मां के होठों को देखकर अंकित के मन में प्यास जाग रही थी दो हाथ तो उसके व्यस्त ही थे पहले से ही लेकिन अब वह अपने होठों को भी व्यस्त करना चाहता था। पहले भी दो बार चुंबन हो चुका था इसलिए उसे मालूम था कि इस हरकत पर भी उसकी मां बिल्कुल भी ऐतराज नहीं करेगी जब बुर में उंगली डलवा ली चुची दबवाली तो चुंबन करने से कैसा एतराज,,,, दोनों एक दूसरे को देख ही रहे थेअंकित पूरी तरह से कामवासना से लिप्त हो चुका था और यही हाल उसकी मां का भी था वह भी मदहोशी के हर में डूबने लगी थी वह इस समय अपने बेटे के हाथों की कठपुतली बन जाना चाहती थीक्योंकि उसे ऐसा ही लगता था कि उसका बेटा औरतों के मामले में अभी भी नादान है जबकि वह नहीं जानती थी कि वही नादान बेटा उसकी मां की चुदाई कर चुका था पड़ोस कि उसकी सहेली की भी चुदाई कर चुका था,,,, गहरी गहरी सांस लेते हुए सुगंधा और भी ज्यादा मतवाली घोड़ी लग रही थी,,,, अंकित लगातार अपने बीच वाली उंगली को अपनी मां की बुर के अंदर बाहर कर रहा थासुगंधा पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी अपने बेटे की हरकत से उसकी हिम्मत को देखकर वह गदगद हुई जा रही थीउसे लगने लगा था कि आज उसकी अभिलाषा पूरी होने वाली है वर्षों से जिस चाहत को अपने सीने में दबा कर रखी थी आज उसकी चाहत पूरी होने वाली है,,, अभी तक तो सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा है आगे भी इसी तरह से चलता रहे तो मजा आ आए सुगंधा अपने मन में ऐसा सोच रही थी और गरम आंहे भर रही थी।



तभी अंकित एकदम मदहोश होता हुआअपने होठों को तुरंत अपनी मां के लाल लाल होठों पर रख दिया,,,उसे लग रहा था कि उसकी मां अपने होठों को हटा लेंगे लेकिन उसके सोच के विपरीत उसकी मां भी तुरंत अपने लाल-लाल होठों को खोल दी और खुद ही अंकित के होठों को चूसना शुरू कर दी,,,,अंकित एकदम पागल हो गया अपनी मां के लिए शहर का से उसे रहने की और अपने हथेली कादबाव अपनी मां की चूची पर एकदम से बढ़ाना शुरू कर दिया सुगंधा भी मदहोश होने लगी उसकी बुर से लगातार मदन रस का भा हो रहा था जो कि अंकित की उंगलियों को पूरी तरह से अपने रस में डुबो दे रहा था अंकित अपनी मां की चूची को जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया था जिसका आनंद सुगंधा बड़ी मस्ती के साथ लेते हुए उसके असर को अपने बेटे के होठों को चुस कर दिखा रही थी,,, चुंबन बेहद गहरा होता चला जा रहा था अंकित की उंगलियां लगातार उसकी मां की गुलाबी गली में अंदर बाहर हो रही थी उसकी गर्माहट खुद उसके लंड को पिघलने के करीब ला चुकी थी अपने बेटे की उंगलियों की हरकत से सुगंधा एकदम से चुदवासी हो गई थी,,,, मन तो उसका कर रहा था कि इसी समयअपने बेटे का पेंट खोलकर उसके खड़े लंड को अपनी बुर में ले ले और अपनी प्यास बुझा ले,,, लेकिन सुगंधा बड़ी मुश्किल से अपनी भावनाओं पर काबू किए हुए थीक्योंकि वह बेहद आशावादी थी अपनी किसी भी हरकत से हुआ या नहीं जताना चाहती थी कि वह इसके लिए तड़प रही है क्योंकि अभी तक जो कुछ भी हो रहा था उसके मन का ही हो रहा था और वह यही सोच रही थी कि आगे भी जो कुछ भी होगा इसमें दोनों का ही फायदा होगा । इसलिए वह सब कुछ हालात पर ही छोड़ दी थी और उसे अब अपने बेटे पर पूरा विश्वास हो चुका था कि वही उसकी नैया पार लगाएगा।



धीरे-धीरे घड़ी में 12 बज चुका थामोहल्ले में पूरी तरह से सन्नाटा छाया हुआ था सब लोग अपने-अपने घरों में चैन के नीचे सो रहे थे लेकिन सुगंधा के घर में मां बेटे दोनों की नींद हराम की दोनों का चैन लूटा हुआ था और मां बेटे दोनों एक दूसरे में अपना चैन सुकून खोज रहे थे सुगंधा अधनंगी हालत में अपने बेटे के साथ मस्ती के सागर में डुबकी लगा रही थीइतने से ही उसे एहसास हो रहा था कि इतने वर्षों में उसने कितना कुछ खो दिया था इतनी अनमोल पल सिर्फ जिम्मेदारी निभाने में वह गुजार दी थी कभी अपने बारे में नहीं सोची थी लेकिन अब वह अपने लिए जीएगी अपने शरीर के लिए उसकी जरूरतों को पूरी करेगी,,, ऐसा अपने मन में सोचकर सुगंधा मदहोश में जा रही थी अपने बेटे की हरकत की पूरी तरह से मजा ले रही थी अब वह उसे रोकने की हालत में बिल्कुल भी नहीं थी,,, सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि इन सब हरकतों के बाद क्या होता है,,। और वह आने वाले पल के लिए बेहद उत्सुक भी थी,,,,

दोनों के बीच अब किसी भी प्रकार की वार्तालाप की सत्यता बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि दोनों के होंठ एक दूसरे के होठों में चपे हुए थे,,,, दोनों मदहोश हो रही थीसुगंधा का मन भर-भर कर रहा था कि अपना हाथ आगे बढ़कर पेंट के ऊपर से अपने बेटे के लंड को थाम ले लेकिन ऐसा करने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी,,,वह केवल चुंबन करते समय अपने बेटे के चेहरे को दोनों हाथों से थामे हुए थे उसके बालों को सहला रही थी और उत्तेजना से खींच रही थी।जिसकी वजह से अंकित की उत्तेजना की ओर ज्यादा बढ़ती चली जा रही थी वह बारी बारी से एक ही हाथ से अपनी मां की दोनों चूचियों से खेल रहा था ब्लाउज पहने होने केबावजूद भी अंकित को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी और उसकी मां को भी,,,,यह पहला मौका था जब ब्लाउज के ऊपर से अंकित अपनी मां की चूचियों को खुले तौर पर दबा रहा था। इसलिए तो वह ज्यादा उत्तेजित और आनंदित नजर आ रही थीउसे बहुत मजा आ रहा था लेकिन अंकित की उंगलियों का कमल बढ़ता जा रहा था वह अपनी उंगली को अपनी मां की बुर में डालकर गोल गोल घूमा रहा था,जिसकी वजह से वह अपनी चरम सुख के करीब पहुंचने की कगार पर आ चुकी थी,,,,सुगंधा की सांस ऊपर नीचे हो रही है उसकी हालत खराब हो रही थी क्योंकि वह झढ़ने वाली थी और अंकित भी अपनी मां के बदन में बढ़ रही हलचल को पहचान चुका था,,,वह और तेजी से अपने बीच वाली मेरे को अपनी मां की बुर की गहराई में अंदर बाहर कर रहा था एक तरह से वह अपनी मां की बुर में अपने लंड के लिए जगह बना रहा था।



सुगंधा की सांसें फुल रही थी, उसके मुंह से गरमा गरम सिसकारियां निकालने को तैयार थी लेकिन अपने बेटे के होंठों के बीच अपने होंठ देकर वह सिसकारी भी नहीं ले सकती थी,,लेकिन उसकी चूचियां बहुत तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी जो एहसास दिला रही थी कि अब वह झड़ने वाली है,,,, और फिर एकदम से उसकी बुर से मदन रस का फव्वारा फुट पड़ा अंकितबड़ी तेजी से अपनी उंगली के अंदर बाहर कर रहा था वह अपनी मां को जो मजा दे रहा था उसमें उसका भी सुख छुपा हुआ था वह जानता था कि औरत की बुर में उंगली से ज्यादा लंड डालने में मजा आता है,,,,और वह इस बात को भी अच्छी तरह से जानता था कि जब उसकी मां इस समय उसे अपनी बुर में उंगली डालने दिए तो उसके समझाने पर जरूर लंड भी डालने देगीभले ही वह अपने मुंह से कुछ ना बोल रही हो लेकिन अंदर ही अंदर वह भी यही चाहती है क्योंकि औरतों के मन के बारे में उनकी जरूरत के बारे में वह अच्छी तरह से जानता था । अंकित पागल हुआ जा रहा था सुनैना की सांस बड़ी तेजी से चल रही थी और लगातार उसका शरीर झटका मार रहा था और हर झटका के साथ उसकी बुर से मदन रस बाहर झटक दे रहा था,,,,

उनकी धीरे से अपने होठों से अपनी मां के होठों को अलग किया औरनशीली आंखों से अपनी मां की दोनों टांगों के बीच देखने लगा इसके अंदर अभी भी उसकी उंगली खुशी हुई थी और उसकी पूरी हथेली उसके मदन रस से भीगी हुई थी अंकित जानता था कि उसकी बुर से निकलने वाला द्रव्य क्या है लेकिन फिर भी वह जानबूझकर अनजान बनता हुआ अपनी मां से बोला,,,।



सससससहहहह,,, ओहहहहह मम्मी तुम तो मुतने लगी,,,(अंकित यह शब्द अपनी मां से एकदम से अश्लील भाषा में बोला थाजिसे सुनकर सुगंधा के भी तन बदन में आग लग गई थी उसे अपने बेटे के मुंह से मुतना शब्द सुनकर बेहद उत्तेजित कर देने वाला लग रहा था,,,, सुगंधा अंकित की तरफ नशीली आंखों से देख रही थी और उसकी बात पर मुस्कुराते हुए बोली,,)

अरे बुद्धु यह मुत नहीं है,,,,।

मुत नहीं है तो फिर क्या है,,,?(जानबूझकर अनजान बनता हुआ अंकित बोला)

और जब ऐसे हालात में मर्द के साथ होती है और जब उसे अच्छा लगने लगता है तो इसी तरह से निकलता है,,,,।

ओहहहह,,,,आज तो मैं बिल्कुल नई बात सुन रहा हूं मुझे तो इसके बारे में कुछ भी पता नहीं था मुझे तो लगता था कि सिर्फ इसमें से पेशाब निकलती है,,,,,।

धीरे-धीरे औरतों के बारे में तु सब कुछ सीख जाएगा,,,,(सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली)

लेकिन मम्मी जो कुछ भी है बहुत ढेर सारा निकला है देखो तो सही मेरी पूरी हथेली गीली हो गई,,,(धीरे से अपनी मां की बुर में से उंगली को बाहर निकाल कर वह अपनी मां के मदन रस में डूबी हुई पूरी हथेली को थोड़ा सा ऊपर करके अपनी मां को दिखाने लगा जिसमें से उसका मदन रस उसकी उंगलियों से उसकी हथेलियां से नीचे टपक रहा था यह देखकर सुगंधा शर्म से लाल हो गई, शर्म से लाल हुआ अपनी मां का चेहरा देखकर अंकित मुस्कुराता हुआ बोला,,,) देखो तो सही तुम्हारी जांघें भी पूरी तरह से गीली हो गई है,,,,

(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा अपनी जांघों की तरफ देखने लगी वाकई में वह पूरी गीली हो चुकी थी और नीचे बिस्तर पर बिछी चादर भी गीली हो चुकी थी,,,, चादर पर अपनी मदन रस का धब्बा देखकर सुगंधा शर्म से गड़ी जा रही थी,,,, उसे बड़े जोरों की पेशाब भी लगी थी इसलिए वह धीरे से बोली,,,)

मैं अभी आती हूं,,,(इतना कहते हुए वह घुटनों के बाल वेट करें लेकिन साड़ी को अपने हाथ से पकड़ कर कमर तक उठाए हुए थे और घुटनों से चलते हुए वह बिस्तर से नीचे उतर रही थी यह देखकर अंकित की हालत खराब हो रही थी एक तो पहले से ही उसका लंड पूरी तरह से बेहाल हो चुका था,,,,अपनी उंगली और अपनी हरकतों से उसने अपनी मां को तो ठंडा कर दिया था लेकिन खुदगर्म होकर तड़प रहा था इसका इलाज उसकी मां के पास ही था लेकिन कब हुआ इसका इलाज करेगी या अंकित जानता नहीं था लेकिन उसे उम्मीद थी कि आज की रात को ही जो होना ही हो जाएगा,,,सुगंधा कमर तक साड़ी अपने हाथ में पड़े वह बिस्तर से नीचे उतर चुकी थी ऐसे हालात में कमर से नीचे वह पूरी तरह से नंगी थी उसकी बड़ी-बड़ी गांड ट्यूबलाइट की दुधिया रोशनी में चमक रही थी,,,, वह दरवाजे की तरफ जा रही थी अपनी गांड मटका कर यह देखकर अंकित देखना चाहता था कि उसकी मां के मन में अब क्या चल रहा है इसलिए वह बोला,,,)

ऐसे में कहां जा रही हो,,,।



मुझे बड़े जोरों की पेशाब आई है,,,,

(अंकित बहुत खुश था क्योंकि उसकी मां खुले शब्दों में पेशाब करने की बात कर रही थी और उसकी बात सुनकर अंकित मुस्कुराता हुआ बोला)

मैं यही रुकूं की छत पर बिस्तर लेकर चलु,,,(ऐसा कहकर वह अपनी मां का मन टटोलना चाहता था,,, वह देखना चाहता था कि उसकी मां अब क्या चाहती हैं,,,, अपने बेटे का सवाल सुनकर सुगंधा भी कुछ देर के लिए असमंजस में पड़ गई थी कि अब वह अपने बेटे से क्या बोले,,,,,लेकिन फिर थोड़ा हिम्मत दिखा कर वह अपने मन में सोची कि जो कुछ भी होगा देखा जाएगा इतना कुछ तो मां बेटे के बीच हो चुका हैजो कि नहीं होना चाहिए और जब इतना होकर आए तो थोड़ा और होने में क्या दिक्कत है इसलिए वहां दरवाजा खोलकर कमरे से बाहर जाते हुए बोली,,,)

अभी यही रूक में आती हूं,,,,।

(इतना कहकर हुआ कमरे से बाहर निकल गई थी लेकिन अपने बेटे के लिए खुशखबरी छोड़ गई थी क्योंकि उसकी मां की तरफ से यह है खुला आमंत्रण था कि आज की रात बहुत खास थी मर्यादा की दीवार गिरा देने की रात थी अपने संस्कारों का पर्दा हटा देने की रात थी अपनी मां का जवाब सुनकर अंकित मन ही मन बहुत खुश हो रहा था।)
 
अंकित को अभी कमरे में रुकने का बोलकर सुगंधा कमर तक साड़ी उठाए हुए अपनी गांड मटकाते हुए और अपने बेटे को अपनी गांड दिखाते हुए पेशाब करने के लिए चली गई थीजो कुछ भी कमरे में हुआ था यह मंजिल तक पहुंचने का सीधा रास्ता था मां बेटे दोनों को समझ में आ गया था कि अब मंजिल दूर नहीं थी,,, सुगंधा यह भी जानती थी कि मंजिल इतने करीब दिखाई दे रही है तो उसे भी संभाल कर अपनी जबान पर लगाम लगाना होगा क्योंकि ऐसे ही हालत में वह अपनी संस्कार अपनी मर्यादा की दुहाई देकर खेल को पूरी तरह से बर्बाद कर देती थी,,, इस बारे में भीवह सोच रही थी कि भले ही वह आगे से पहले नहीं करेगी लेकिन अपने बेटे की हरकत को रोकने की कोशिश भी नहीं करेगी,,, वैसे भी जिस तरह से वह बिस्तर से उठकर खड़ी हुई थी अपनी साड़ी को कमर तक उठाएं यह पूर्ण रूप सेअपने बेटे के लिए आमंत्रण था आगे बढ़ाने के लिए वह अपने इशारे से ही कह चुकी थी कि अब रुकना नहीं अब सीधा मंजिल पर ही जाकर रुकना है रास्ते का सफर बेहद रोमांचक रोमांचक हो चुका था मंजिल पर पहुंचने की कितनी खुशी होती है यह देखना बाकी था।



सुगंधा कमरे से बाहर जा चुकी थी अंकित जानता था कि उसकी मां घर के पीछे वाले हिस्से में पेशाब करने के लिए गई होगी वैसे तो उसे भी बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी और यही सही मौका भी था अपनी मां को अपना नंगा और खड़ा लंड दिखाने का,,, इस तरह की हरकत हो पहले भी एक बार कर चुका था लेकिन कसम कस में बात आगे नहीं बढ़ी थी,,,लेकिन आज का दिन कुछ और था आज के यह हालात कुछ और थे आज अंकित पूरी तरह से अपनी मां की जवानी पर छा जाना चाहता थाउसे समझ में आ गया था कि उसकी मां उसकी हर खुशियों को बिल्कुल भी रोक की नहीं बस हल्का सा जानबूझकर विरोध करेगी बाकी वह भी यही चाहती होगी कि वह आगे बढ़ने और आगे बढ़ने का मतलब अंकित समझ गया था कि अब उसका लंड और उसकी मां की बुर दोनों एकाकर होने वाली है,,,, अंकित बिल्कुल भी देर नहीं करना चाहता था अपनी मां के पास पहुंचने में इसलिए वह भी धीरे से बिस्तर पर से नीचे उतराऔर अपने पेट की तरफ देखा तो उसके पेट की हालात पूरी तरह से खराब थी आगे वाला हिस्सा उसके लंड से निकलने वाले रस से गिला हो चुका था,,, वह अपने पेंट की हालत को देखकर मुस्कुरा रहा थाऔर अपने आप से कह रहा था कि जैसे स्वादिष्ट भोजन को देखकर मुंह में पानी आ जाता है इस तरह से औरत और मर्द की भी हालत यही होती है औरत लंड को देखकर बुरे से लार टपकाती है और मर्द बुर देखकर अपने लंड से लार टपकाता है,,,अभी तक की मिली सफलता से अंकित बहुत खुश था क्योंकि वह उंगली से ही अपनी मां का पानी निकाल चुका थाऔर यह दूसरी बार था जब अपनी उंगली के सहारे से अपनी मां का पानी निकला था पहले तो वह साबुन लगाने के बहाने अपनी मां की बुर में उंगली डाल चुका था उसका पानी को झाड़ चुका था लेकिन आज का दिन संभोग से पहले की क्रिया थी जिसमें वह पूरी तरह से सफल हो चुका था,,,, अंकित अपनी उंगलियों की तरफ देख रहा था जो अभी भी उसकी मां के मदन रस में भीगी हुई थी,,, बुर के नमकीन स्वाद को अच्छी तरह से अंकित चखा हुआ था,,,, सुमन,,, सुमन की मां,,, राहुल की मां,,, और खुद की नानी के बुरे का नमकीन साथ वाले चुका था और अपनी मां की भी बुर पर वह अपनी जीभ घूमा चुका था,,,और औरत की बुर चाटने में मर्द को कितना मजा आता है इस बात का एहसास अंकित को अच्छी तरह से था इसलिए तो अपनी मां की बुर चाटने के लिए वह ललाईत था,,,,।



अंकित दरवाजे की तरह आगे बढ़ रहा था यह सोचकर कि कहीं उसकी मां पेशाब करके वापस ना आ जाए और उसे अपने लंड दिखाने का मौका हाथ से गंवाना ना पड़े,,,हालात को देखते हुए अंकित अच्छी तरह से जानता था कि ऐसे माहौल में अगर उसकी मां उसके टनटनाए हुए लंड को देखेगी तो पागल हो जाएगी और बिना उसे अपनी बुर में लिए नहीं मानेगी,,,,यही सोचकर वह धीरे से अपनी मां के कपड़े से बाहर निकल गया और घर के पीछे की तरफ जाने लगा पीछे पहुंचे उसने देखा कि उसकी मां उसी अवस्था में बैठी हुई है और मुत रहीं हैं,, वाकई में इस समय उसकी मां जिस अवस्था में बैठी हुई थी एकदम काम देवी लग रही थी जिसे देखकर किसी की भी भावनाएं एकदम से भड़क जाए,,,किताब वाली कहानी का नायक कुछ गलत नहीं सोच रहा था अपनी मां को पेशाब करते हुए देखकर कोई भी इस अवस्था में अपनी मां को देख रही तो उसका लंड खड़ा हो जाए और उसे चोदे बिना नहीं रह पाए,,,,अंकित को अपनी मां की बुर में से निकलने वाली सीधी की आवाज एकदम साफ सुनाई दे रही थी क्योंकि मोहल्ले में पूरी तरह से सन्नाटा छाया हुआ था और उसकी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज वातावरण में गुंज रही थी और अंकित को मदहोश बना रही थी,,,, सुगंधा को नहीं मालूम था कि उसका बेटा उसके पीछे-पीछे आ जाएगा वह एकदम मगन होकर पेशाब कर रही थी क्योंकि काफी देर से वह अपने पेशाब को रोकी हुई थी,,,,अपने बेटे के पैरों की आहट सुनकर वह पीछे नजर घुमा कर देती तो अंकित ठीक उसके पीछे ही खड़ा था अंकित को देखा करवा थोड़ा सा असहज महसूस की लेकिन फिर वह एकदम से सहज हो गई क्योंकि अब उसे भी लगने लगा था कि आप उसके बेटे से शर्माने कैसे कोई जरूरत नहीं है। वह पेशाब करते हुए ही अपने बेटे की तरफ देखते हुए बोली,,,।

क्या हुआ तु क्यों आ गया तुझे तो रुकने के लिए बोली थी,,,,।

Pesaab karti huyi Sugandha



मुझे भी बड़े जोरों की पेशाब लगी है,,,।

तो कर लेना,,,,, यहीं बगल में,,,,।

तुम्हारे पास में,,,

तो क्या हो गया,,,,,,।

(अंकित अपनी मां के कहने का मतलब कोई अच्छी तरह से समझ रहा था वह यह भी जानता था कि उसके मन में क्या चल रहा है,,,इसलिए वह इस समय कोई भी बेवकूफी नहीं करना चाहता था कि उसकी बयान बाजी से फिर से खेल का रुख बदल जाए इसलिए वह तुरंत अपनी मां की बात मान गया था,,,, और ठीक अपनी मां के बगल में खड़ा हो गया थायह देखकर सुगंधा का भी दिल जोरो से धड़क रहा था क्योंकि कुछ ही देर में उसे अपने बेटे का लंड देखने को मिलने वाला था,,,, जो कि अक्सर काम बार ही देखने को मिला था । सुगंधा का दिल जोरो से धड़क रहा था,, एक तो वातावरण की गर्मी और ऊपर से दोनों की मदहोशी की गर्मी और भी ज्यादा मां बेटे दोनों को व्याकुल बना रहे थे,,,, माहौल पूरी तरह से सन्नाटा में बिखरा पड़ा था जहां पर वह दोनों थे पीछे खुला मैदान था और चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा अगल-बगल में किसी कामकान नहीं था जहां से देखा जा सके इतनी रात को कि वह दोनों क्या कर रहे हैं इसलिए दोनों निश्चिंत थे।

उत्तेजना से सूखते हुए गले को गीला करते हुए अंकित अपने पेंट की बटन खोलने लगा,,उसके पेंट में अच्छा खासा तंबू बना हुआ था और वह अच्छी तरह से जानता था की ईस स्थिति में चैन खोलकर उसका लंड उसमें से बाहर नहीं निकल पाएगा,,, इसलिए वह सीधे पेट की बटन खोलकर अपने पेंट को ही उतारने जा रहा था जांघों तकजैसे ही उसने पेंट के साथ-साथ अपने अंडरवियर को भी दोनों हाथों से पकड़ कर नीचे करने लगा यह देखकर सुगंधा का दिल बड़े जोरों से धड़कने लगा और वह अपने मन में सोचने लगी की क्या वह पूरा पेंट उतार कर नंगा हो जाएगा,,,, और वह अपनी मन में अभी सो रही थी कि देखो उसकेकहने पर वह तुरंत वहीं पर खड़े होकर के साथ करने के लिए तैयार हो गया अगर उसके मन में भी कुछ ना चल रहा होता तो वह इस समय इस तरह से पेशाब करने को तैयार ना होता इस बात को सोचकर उसकेमन में उत्तेजना के भाव जाग रहे थे वह मदहोश हो रही थी कि उसका बेटा भी कहानी वाले बेटे की तरह उसे चोदना चाहता है,,,,देखते ही देखते अंकित अपने पेट और अंडरवियर को एक साथ पकड़ कर नीचे की तरफ करने लगालेकिन लंड पूरी तरह से आसमान की तरफ मुंह उठाए खड़ा था इसलिएआगे वाले हिस्से को हुआ थोड़ा सा आगे की तरफ खींचकर उसमें से अपने लंड को बाहर निकलने दिया और जैसे ही उसका लंड पेंट की कैद में से बाहर निकाला सुगंधा का तो कलेजा मुंह को आ गया,,, आजाद होते ही वह पूरी तरह से हवा में लहरा उठा था अंकित अपनी पेंट को और अंडरवियर को जांघों तक खींच दिया था,,, अपने बेटे के मुसल जैसे लंड को देखकर उत्तेजना के मारे सुगंधा की बुर फूलने पिचकने लगी,,, वह अपने बेटे के लंड को देखते ही रह गई।



अंकित अपनी मां की मनोदशा को अच्छी तरह से समझ रहा था।वह जानता था कि इस समय उसकी मां की हालत क्या हो रही होगी उसके मोटे तगड़े लंड को देखकर,,,, उसके लंड को ही देख कर तो उसकी नानी भी उसके आगे घुटने टेक दी थी और अपना सब कुछ उस पर निछावर कर दी थी अौर यही हाल सुमन की मां का भी था,,, चीनी मांगने आई थी लेकिन उसके लहराते लंड को देखकर अपनी बुर उसके सामने परोस कर चली गई,,, और अब उसकी मां की बारी थीअपने बेटे के लंड को देखकर कुछ देर के लिए सुगंधा की पेशाब एकदम से रुक गई थी,,जिस तरह से सुगंध देख रही थी उसकी आंखों में उसे पाने की चाहत दिखाई दे रही थी उसे अपने अंदर लेने की तड़प दिखाई दे रही थी,,,इस समय अंकित को कुछ भी कहने की जरूरत नहीं थी क्योंकि अब उसके होठ नहीं उसका लंड सब कुछ बोल रहा था।अंकित धीरे से अपने लंड को पकड़ा और उसे एक बार हवा में ऊपर नीचे करके लहराते हुए पेशाब करना शुरू कर दिया उसे इतनी जोर की पेशाब लगी हुई थी कि उसके पेशाब की धार बुर दीवार तक जा रही थी जिसे देखकर सुगंधा की बर पानी छोड़ने लगी थी,,, उत्तेजना की असमंजस्यता में सुगंधा की बुर से निकलने वाली पेशाब रूक चुकी थीऔर उसमें से निकलने वाली सिटी की आवाज भी खामोश हो चुकी थी इसलिए अंकित अपनी मां से बोला,,,।

क्या हुआ मम्मी तुम कर चुकी हो क्या,,,?



नननन,,नही रे,,,(मदहोशी भरे स्वर में बोली और फिर अपने आप ही फिर से बुर से सिटी की आवाज आने लगी,,, और एक बार फिर से अंकित की हालत खराब होने लगी,,,अंकित काफी किस्मत वाला था इसीलिए तो अपनी मां के बगल में खड़ा होकर उसके साथ ही पेशाब कर रहा था वरना ऐसा मौका कहां किसी बेटे को मिलने वाला था और अभी खास करके जब बेटा पूरी तरह से जवान हो जाए और मां जवानी से भरी हुई हो,, मां, बेटे दोनों पेशाब कर रहे थे,,,अंकित जहां खड़ा था वहां से तो उसकी मां का कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था ना तो बोलना तो गांडक्योंकि वह ठीक अपनी मां के बगल में खड़ा था और उसकी मां बैठकर पेशाब कर रही थी लेकिन उसकी मां को अंकित का सब कुछ दिखाई दे रहा था खास करके उसका वह अंग जो औरतों के लिए उसका सबसे पसंदीदा खिलौना होता है। जिसे देखकर वह पानी पानी हो रही थी और अपनी मां को तड़पाने के लिए अंकित भी अपने लंड को पकड़ कर उसे बार-बार झटका दे रहा था हिलता हुआ लंड और भी ज्यादा भयानक लग रहा था। इस समय सुगंधा अपने बेटे के लंड को देखकरअपनी बुर की हालत के बारे में सोच रही थी वह सोच रही थी कि अगर सच में उसके बेटे का लंड उसकी बुर में जाएगा तो पहली बार में ही उसकी बुर फट जाएगी,,, यह सोचकर सुगंधा एकदम से गनगना गई,,,,,।



थोड़ी देर में दोनों पेशाब कर चुके थे सुगंधा इस स्थिति में अपनी साड़ी को कमर तक पकड़े हुए ही उठकर खड़ी हो गई,,,अंकित अपनी मां को देखकर फिर से मदहोश होने लगा क्योंकि उसे लगा रहा था कि इस बार उसकी मां साड़ी नीचे गिरा देगी लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था वह खोलकर अपनी बुर के दर्शन से कर रही थी जिसमें कुछ देर पहले ही उसने अपनी उंगली डालकर उसका पानी निकाल चुका था,,, अंकित अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां बोले कि नहीं लेकिन इशारे से सब कुछ बता रही है कि उसे लंड चाहिए उंगली से तुम्हें कुछ भी अपनी प्यास बुझा सकती है,,,, अंकित भी पेशाब कर चुका था और वह आगे अपनी मां की तरफ देख रहा था दोनों की नजर आपस में टकरा रही थी दोनों की आंखों में हवा साफ दिखाई दे रहा था रात का अकेलापन दोनों को मां बेटा नहीं बल्कि मर्द और औरत होने का एहसास दिला रहा था,,,, सुगंधा पूरी तरह से काम विह्वल हो रही थी उसे अपनी जवानी की गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी जिसे बरसों से संयोज कर रखी थी,आज वही बदन की गर्मियों से पूरी तरह से परेशान किए हुए थी,,,,सुगंधा अपने बेटे के बेहद करीब थी वह उसकी आंखों में देख रही थी अंकित भी अपनी मां की आंखों में देख रहा थाआंखों ही आंखों में इशारा हो रहा था और सुगंध अपने आप को रोक नहीं पाई और एक बार फिर से अपने होठों को अपने बेटे के होठों के करीब ले जाने लगी और अगले ही पल दोनों के होंठ आपस में मिलन करने लगे यही वापस था जब एक दूसरे के होठों का स्पर्श बातें ही दोनों एकदम से बहकने लगे,,,,,।



अपनी मां की हरकत का जवाब अंकित भी उसी की भाषा में देने लगा था दोनों के होठ आपस में भिड़ चुके थे दोनों के होंठ खुले हुए थे दोनों एक दूसरे की जीभ चाट रहे थे,,, इस दौरान भीसुगंधा अपने दोनों हाथों से साड़ी पड़े हुए खड़ी थी कमर के नीचे को पूरी तरह से नंगी थी और अंकित की कमर के नीचे नंगा था उसका लंड हरकत में आ चुका था क्योंकि बार-बार अंकित के लंड का सुपाड़ा उसके गुलाबी छेद से टकरा जा रहा था और यह स्पर्श यह रगड़,, आग में घी का काम कर रहा था दोनों की वासना भड़कने लगी थी,,,,अंदर तुरंत अपनी मां को अपनी बाहों में कस लिया था और उसके लाल लाल होठों का रसपान कर रहा था और इस दौरान नीचे से ,, अपनी नन्हे सैनीक को भी कार्य में लगा दिया थाजो कि अपने कर्तव्य को अच्छी तरह से जानता था कि उसे क्या करना है बार-बार सुपाड़ा उसकी बुर की दरार से टकरा जा रहा था रगड़ खा जा रहा थाजिसकी वजह से सुगंधा पानी पानी हो रही थी उसकी बुर से नमकीन पानी टपक रहा था जिससे अंकित के लंड का सुपाड़ा पूरा गीला होते चला जा रहा था,,,, और इस गीलेपन का लाभ उठाते हुए अंकितअपने लंड की सुपारी को बराबर अपनी मां की बुर की दरार में रगड़ रहा था और हल्का सा अंदर की तरफ ले जाने की कोशिश कर रहा था क्योंकि वह जानता था कि उसकी इस क्रिया से उसकी मां पूरी तरह से मस्त हो जाएगी और टांगें खोलकर उसके लंड को अंदर ले लेगी,,,अपनी हरकत से और अपनी चुंबन से वह अपनी मां को कुछ भी बोलने का मौका नहीं दे रहा था क्योंकि वह जानता था कि अगर ऐसी हालत में उसकी मां फिर से अपनी संस्कार की दुहाई देने लगी तो मामला बिगड़ जाएगा,,,,



सुगंधा पागल हो जा रही थी उससे रहा नहीं जा रहा था वह खुद अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए तड़प रही थी,,,,, वह इतनी मदहोश हो चुकी थी कि उसके हाथों से उसकी साड़ी छूट चुकी थी,,,, लेकिन फिर भीउसकी साड़ी कमर पर ही टिकी हुई थी क्योंकि अंकित दोनों हाथों से अपनी मां की गांड पकड़कर उसे दबा रहा था। और उसे अपनी तरफ खींचकर अपने लंड को बुर के अंदर डालने की कोशिश कर रहा था,,,सुगंधा इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि इतनी आराम से उसकी बुर में इतना मोटा लंड जाने वाला नहीं है क्योंकि बरसों से उसका दरवाजा बंद पड़ा था,,, अब दरवाजे पर तेल पानी लगने पर ही वह किसी को अपने अंदर लेने के काबिल हो पाएगी,,, लेकिन यहां पर सुगंधा का मन थोड़ा इस बात से बहक रहा था कि अगर सीधे-सीधे अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में ले लेगी तो उसके बारे में उसका बेटा क्या सोचेगा,,,, यही सोचकर वह तुरंत अपने हाथ को नीचे की तरफ ले गई और अपने बेटे के लंड को पकड़ ली और अपने होठों को अपने बेटे के होठों से अलग करते हुए बोली।)

क्या यह सही है,,,,,,,,(ऐसा कहते हुए भी अपने बेटे के लंड को उत्तेजना से जोर-जोर से अपनी मुट्ठी में दबोच रही थी क्योंकि उसके लिए पहला मौका था जब वह अपने जवान बेटे के लंड को अपने हाथ में ली हुई थी अपने आप पर काबू उससे भी नहीं हो रहा था लेकिन वह बीच में इस तरह से खेल रोक करया जताना चाहती थी कि वह एक मन है और उसके संस्कार उसे आगे न बढ़ने की दुहाई दे रहे हैं। अपनी मां का इस तरह का व्यवहार अंकित को अच्छा नहीं लग रहा था वह उत्तेजना से भरा हुआ थाऔर चाहता तो इसी समय अपनी मां को यही पटक कर उसकी चुदाई कर देता लेकिन सब कुछ हुआ शांति से प्यार से होने देना चाहता था ताकि उसमें मजा आए,,, अपनी मां के ईस सवाल पर वह उसे समझाते हुए बोला,,,,)



मुझे तो इसमें कुछ भी गलत नहीं लग रहा है,,,, कहानी में भी वह मां बेटे चार दीवारी के अंदर अपने बदन की प्यास बुझाने से पीछे नहीं हटे थे,,,,।

लेकिन हम दोनों मां बेटे हैं हम दोनों के बीच पवित्र रिश्ता है,,,।

कहानी में भी दोनों मां बेटे ही थे,,,, मां बेटे होने से पहले वह दोनों सबसे पहले मर्द और औरत थे और इस समयमैं एक मर्द हूं और एक तुम्हारा था अगर हम दोनों के बीच समय मां बेटे का पवित्र रिश्ता होता तो तुम्हारी हालत देखकर मेरा लंड कभी खड़ा नहीं होता और मेरी हरकत से मेरे लंड को देखकर तुम्हारी बुर कभी पानी न छोड़ती,,,,।

लेकिन किसी को पता चल गया तो,,,,(सुगंधा ज्यादा ना नुकुर नहीं करना चाहती थी इसलिए सीधे मुद्दे की बात पर आ चुकी थी,,अंकित अपनी मां के मुंह से ईस तरह का सवाल सुनकर समझ गया था कि अब आगे क्या होने वाला है इसमें उसकी मां की हामी थी,,,, इसलिए वह अपनी मां को समझाते हुए बोला,,,)

किसी को कैसे पता चलेगा मम्मी क्या तुम अपने मुंह से बताओगी क्या मैंअपने मुंह से किसी को बताऊंगा कि चार दिवारी के अंदर हम मां बेटे किस तरह से रह रहे हैं ऐसा कभी नहीं होने वाला किसी को कानो कान तक खबर नहीं पडने वाली है,,,,,।

लेकिन तु समझ नहीं रहा है,,, अभी मैं इसके लिए तैयार नहीं हूं मैं थोड़ा बहक गई थी लेकिन,,,, अच्छा एक काम कर किसी और दीन यह करते हैं,,,, मेरा मन नहीं मान रहा है मैं कैसे अपने बेटे के साथ यह सब कर सकती हूं भले ही दूसरों घरों में मां बेटे के बीच इस तरह का रिश्ता होता होगा लेकिन मुझे बड़ा अजीब लग रहा है,,,,।(ऐसा कहने के बावजूद भी वह अपने हथेली में अपनी मुट्ठी में अपने बेटे के लंड को दबोची हुई थी उसका मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा था कि अपने बेटे के मुसल जैसे लंड को अपने हथेली से आजाद कर दे,,,, अपनी मां की बात सुनकर वह बोला,,,)



मुझे तो इसमें कुछ भी अजीब नहीं लग रहा है कुछ देर पहले ही मैं तुम्हारी बुर में उंगली डालकर तुम्हारा पानी निकाल चुका हूं,,,,, तुम्हें बहुत मजा आया,,, आया कि नहीं मम्मी,,,,।

में जानती हुं की मुझे अच्छा लगा,,,,। लेकिन आगे बढ़ना ठीक नहीं है,,,,।(सुगंधा खुद हैरान थी की वह यह क्या बोल रही है,,,, उसे अपने आप पर गुस्सा आ रहा था क्योंकि वह एक बार फिर से इस खेल का रुख बदल रही थी,,,,, क्योंकि किसी की तरह से यह जो कुछ भी हो रहा था उसमें अपनी पहल नहीं चाहती थी।वह चाहती थी कि अंकित ही पहल करे जो कुछ भी करना होगा खुद करेंऔर जो कुछ भी वह करेगा उसमें उसका बराबर साथ देगी लेकिन पहल नहीं करेगी,,,,उसके मन में यही चल रही असमंजसता उसे परेशान कर रही थीअंकित को गुस्सा आ रहा था अपनी मां की बातों को सुनकर वह पूरी तरह से अपनी मां को लाइन पर लाना चाहता था इसलिए वह हाथ आगे बढ़कर अपनी मां के ब्लाउज के ऊपर से अपनी मां की चूची दबाते हुए बोला,,,)

क्यों अपने मन को बहका रही हो तुम भी जरा सोचो एक मां के पहले तुम एक औरत हो तुम्हारी भी जरूरत नहीं तुम्हारी भी ख्वाहिश है अगर तुम्हारी जरूरत ना होती तो इस समय तुम मेरे लंड को कस कर ना पकड़ी होती देखो,,, कैसे पकड़ी हो,,,,(ऐसा कहते हुए अंकित अपनी मां का ध्यान अपने लंड पर ला रहा था क्योंकि इस समय उसकी हथेली में पूरी तरह से दबोचा हुआ था और इस समय उसकी नशे एकदम फुली हुई थी जो एकदम साफ ऊभर कर दिखाई दे रही थी,,,, अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा,,,, अपनी नजरों को नीचे करके देखी तो वह पानी पानी होने लगी,,,,, इस समय उसकी साड़ी उसकी जांघों तक जाकर अटकी हुई थी,,,, और जिस तरह से सुगंधा अपनी बेटे के लंड को प्यासी नजरों से देख रही थी अंकित इस मौके का फायदा उठाना चाहता था और उसे फिर से चुदवासी बनाना चाहता था,,,,इसलिए तुरंत अपना हाथ नीचे की तरफ लेकर और साड़ी को ऊपर की तरफ उठाते हुए अपनी हथेली को अपनी मां की बुर पर रखकर उसे हल्के हल्के सहलाने लगा और सहलाते हुए बोला,,) तुम्हें मेरी कसम है मम्मी सच-सच बताना,,,,(ऐसा सुनते ही सुगंधा अपने बेटे की तरफ देखने लगी,,,,उसे समझ में नहीं आ रहा था किसका बेटा क्या पूछना चाह रहा है तभी अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,)

मेरा लंड पापा के लंड से कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा है ना सच सच बताना तुम्हें मेरी कसम है,,,,।



(अपने बेटे का इस सवाल को सुनकर सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फूटने लगेयह बात सही थी कि वाकई में उसके बेटे का लंड उसके पति से कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था,,,,लेकिन वह अपने बेटे से कुछ बोल नहीं पा रही थी बस उसे देखे जा रही थी और अपनी हथेली में अपने बेटे के लंड पर उसका दबाव बढ़ाती जा रही थी,,,,यह देख कर अंकित फिर से अपनी हरकत को दोहराते हुए अपनी मां की बुर को सहलाते हुए बोला,,,)

बोलो ना मम्मी खामोश क्यो हो सच-सच बताना,,,,।

बहुत मोटा और लंबा है,,,(कुछ पल के खामोशी के बाद सुगंधा बोल पड़ी,,, अपनी मां का जवाब सुनकर अंकित गर्व से गदगद होने लगा और फिर धीरे से बोला)

तब तो तुम्हें ज्यादा मजा आएगा,,,,।

नहीं मुझे डर लग रहा है तेरा लंड सच में कुछ ज्यादा ही मोटा है मेरी तो फट जाएगी,,,,मैं तुझे इसमें डालने नहीं दूंगी बाकी अगर तुझे जो कुछ भी करना है कर ले लेकिन डालना नहीं,,,,,

यह क्या कर रही हो मम्मी,,,,,,,

मैं सच कह रही हूं मैं दूसरी औरतों की तरह नहीं बनना चाहती मैं नहीं चाहती कि हम दोनों के बीच का पवित्र रिश्ता खराब हो,,,।

तो क्या जो कुछ भी है हम दोनों ने कीया-क्या उससे रिश्ता खराब नहीं होगा,,,।

नहीं,,,, तू सब कुछ कर सकता है लेकिन डालना नहीं एक बार तेरा लंड मेरी बुर में घुस गया तो फिर हम दोनों के बीच का सारा पवित्र रिश्ता खत्म हो जाएगा और मैं ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहती,,,,

(सुगंधा ऐसा जानबूझकर बोल रही थी वह भी अपने बेटे से चुदवाना चाहती थीलेकिन इस बहाने से वह देखना चाहती थी कि उसका बेटा अपनी तरफ से पहल करता है कि नहींइतना कुछ मां बेटे के बीच हो जाने की वजह से एक बेटे को इतना तो समझ में आ जाना चाहिए कि उसकी मां उससे क्या चाहती है अगर ऐसा हुआ नहीं समझ पाया तो समझ लो वह दुनिया में सबसे बड़ा बुद्धू बेटा है,,,,और अपनी मां की बात सुनकर अंकित भी समझदारी से काम लेना चाहता था वह इस समय जरा भी गुस्सा दिखाना नहीं चाहता था ताकि बना काम बिगड़ जाए क्योंकि इसमें उसे बहुत मजा आ रहा था और इस समय उसका लंड उसकी मां के हाथ में भी था उसे बड़े समझदारी से काम लेना था वह औरतो के बारे में अच्छा खासा समझने लगा था,,,,ऊपर से चरित्र की धनवान दिखने वाली औरतें बिस्तर पर कैसी हो जाती है इसका अंदाजा उसे लग चुका था जिसका ताजा उदाहरण उसकी खुद की रानी थी सुमन की मां थी सुमन खुद थी और नूपुर की मां थी अगर सही समय पर उसे दिनराहुल के पापा ना आ गए होते तो शायद उसी दिन पहली बार में ही वह नुपुर की चुदाई कर दिया होता। इसलिए अंकित समझदारी से काम लेते हुए अपनी मां से बोला,,,लेकिन इस बीच में लगातार अपनी मां की बुर को सजा रहा था और उसमें से लगातार पानी बह रहा था जिसका मतलब साथ था कि वह ऊपर मां से यह सब कुछ कह रही थी अंदर से वह भी उसके लंड लेना चाहती थीलेकिन अंकित भी कोई जोर जबरदस्ती नहीं करना चाहता था वह चाहता था कि उसकी हरकतों से उसकी मां खुद उसके लिए अपनी दोनों टांगें खोल दे और यह निश्चित भी था की ऐसा ही होगा बस उसे थोड़ी समझदारी दिखानी होगी,,, इसलिए वह अपनी मां से बोला,,,)



तुम्हें क्या लगता है कि मैं यह सब करने के लिए तड़प रहा हूं मैं तो तुमसे प्यार करने लगा हूं तो मुझे सबसे ज्यादा खूबसूरत लगती हो किसी फिल्म की हीरोइन की तरह सच में तुम्हारी खूबसूरती मुझे तुम्हारा दीवाना बना दि है मम्मीमैं बहुत पहले तुमसे यह बात कर देना चाहता था लेकिन डरता था कि कहीं तुम नाराज ना हो जाओ,,,,।

क्या सच में तू,,,,

हां मैं सच में तुमसे प्यार करने लगा हूं एक बेटे की तरह नहीं बल्कि एक मर्द की तरह,,, तुम शायद नहीं जानती कि मैं किसी लड़की की तरफ आकर्षित नहीं होता मैं सिर्फ तुम पर ही आकर्षित होता हूं तुम दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत हो,,,,।

(अपने बेटे के मुंह से यह सुनकरसुगंधा खुशी से गड़बड़ हो रही थी क्योंकि उसका बेटा उसके सामने अपने प्यार का इजहार कर रहा था, लेकिन इस बीच लगातार वह धीरे-धीरे उसकी बुर की गुलाबी पत्तियों को कुरेद रहा था,,,, अंकित अपनी बात को बढ़ाते हुए बोला,,,) तुम अगर कहानी वाली मां की तरह नहीं हो तो मैं भी कहानी वाले बेटे की तरह नहीं हूं मैं तुमसे सच्चा प्यार करता हूं,,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित तुरंत अपनी मां को अपनी तरफ खींच कर उसे अपनी बाहों में भर लिया और फिर से अपने देखते हुए होठों को अपनी मां के लाल लाल होंठों पर रखकर उसका रस चूसने लगा,,,सुगंधा अपने बेटे की बात सुनकर एकदम मस्त में जा रही थी और उसकी हरकत से तो वह पानी पानी होने लगी वह अपने हाथ में से अपने बेटे के लंड को छोड़ दी थी और वह भी अपने बेटे को अपनी बाहों में भर ली थी,,,, सुगंधा अपने मन में यह सोचकर अपने आप ही गुस्सा कर रही थी कि यह क्या कर दिया तुने बनते हुए खेल को बिगाड़ दीलेकिन उसे पूरा विश्वास है कि उसका बेटा सबको संभाल लेगा और उसकी बात भी रह जाएगी,,,

मां बेटे दोनों एक दूसरे की बाहों में एक दूसरे के अंगों से खेल रहे थे हालांकि सुगंधा ने अपने बेटे के लंड को अपनी हथेली से आजाद कर दी थी लेकिन उसके पेट पर हाथ रखकर उसका हौसला बढ़ाते हुए उसे होले होले सहला रही थी लेकिन अंकितपागलों की तरह अपने दोनों हथेलियां से अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पकड़कर उसे जोर-जोर से दबा रहा था और उसकी गांड की फांको को आपस में रगड़ रहा था,,,, जिससे सुगंध गर्म हो रही थी मदहोश हो रही थी मां बेटे दोनों घर के पीछे वाले हिस्से में एक दूसरे की जवानी से खेल रहे थेऔर एक बार फिर से अंकित का टनटनाया हुआ लंड उसकी बुर से रगड़ खाने लगा जिससे सुगंधा एकदम मदहोश होने लगी,,,, अंकित का जोश भरत जा रहा था वह एक हाथ अपनी मां की गांड से हटकरदूसरे हाथ से उसे सहला रहा था लेकिन एक हाथ से वह धीरे-धीरे अपनी मां का ब्लाउज खोलना शुरू कर दिया था ऐसा लग रहा था कि यहीं पर खड़े-खड़े आज वह अपनी मां की चुदाई कर देगा,,,सुगंधा भी अपने बेटे की हरकत से मदहोश हो जा रही थी अपने बेटे की हिम्मत देखकर आज उसे अपने बेटे पर गर्व हो रहा था,,, उसके मन में यही हो रहा था कि चलो देर आए दुरुस्त आए।



ओहहहह मम्मी तो मुझे पागल कर दोगी तुम्हारा यह खूबसूरत बदन मुझे दीवाना बना रहा है,,,(अपनी मां के होठों से अपने होठों को थोड़ी देर के लिए अलग करते हुए वह ऐसा बोला और फिर वापस अपनी हरकतों में जुड़ गयाचुंबन में उसकी मां भी उसका बराबर का साथ दे रहे थे वही हाथ से धीरे-धीरे करके अपनी मां के ब्लाउज का चार बटन खोल चुका था बस आखरी बटन रह गया था,,,,,देखते ही देखते वह आखरी बटन भी खुलने लगा लेकिन एक हाथ से उसकी मां के ब्लाउज का बटन खोल नहीं रहा था तो मौके की नजाकत को समझते हुए सुगंधा खुद ही अपने बेटे का हाथ हटाकर अपने ब्लाउज का आखिरी बटन खोलने लगीअपनी मां की इस हरकत को देखकर उसे उम्मीद की किरण नजर आ रही थी वह जानता था कि उसकी मां आप उसकी हरकत हो उसका बिल्कुल भी विरोध नहीं करेगी बस थोड़ा बहुत दिखावा करेगी।थोड़ी देर में वह अपने हाथों से अपना ब्लाउज का बटन खोलकर अपने ब्लाउज को खोल चुकी थी। अपनी मां की अंकित पागल हो गया था ब्लाउज की खोलने के बाद भी अंदर उसकी लाल रंग की ब्रा थी जिसे देखकरअंकित और ज्यादा उत्तेजित हो गया और ब्रा के ऊपर से अपनी मां की चूची को दबाना शुरू कर दिया सुगंधा मदहोश होने लगी,,,,, और धीरे से बोली,,,।

क्या यही खड़े-खड़े सब कुछ करेगा,,,,,(सुगंधा धीरे से अपने बेटे के होठों पर से अपने होंठ को हटाते हुए बोली यह सुनकर अंकित अपनी मां को प्यासी नजरों से देखने लगा,,,, और उससे यह पल एकदम से बर्दाश्त नहीं हुआ वह तुरंत बिना कुछ बोले अपनी मां को गोद में उठा लिया सुगंधा अपने बेटे की हरकत से एकदम घबरा गई उसे कुछ समझ में नहीं आया अगले ही पल वह अपने बेटे की गोद में थी यह देखकर वह एकदम से बोली,,,)



यह क्या कर रहा है उतार मुझे नीचे गिर जाऊंगी,,,।

तुम्हें क्या लगता है कि मैं तुम्हें गिरने दूंगा तुम्हें मेरी ताकत पर विश्वास नहीं है,,,, ऐसे ही थोड़ी ना कसरत करता हूं दंड पेलता हूं,,,,।

तुझे मैं भारी नहीं लग रही हूं,,,

भला पसंदीदा औरत कभी भारी लगती है,,,।

तुझे बहुत फिल्मी डायलॉग सुझ रहे हैं।

जब आंखों के सामने हीरोइन हो तो डायलॉग तो निकलेंगे ही हीरो के मुंह से।

तो तू हीरो है,,,।

तुम हीरोइन हो तो मैं हीरो ही हूं,,,,(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा बहुत खुश हो रही थी।अपने बेटे की ताकत पर वह गर्व महसूस कर रही थी और जिस तरह से बड़ी आराम से अपनी गोद में उठाया हुआ था वह कभी सोच भी नहीं सकती थी कि कोई मर्दों से इस तरह से गोद में उठा सकता है क्योंकि वाकई में उसका शरीर थोड़ा भारी था,,,,अंकित अपनी मां की खूबसूरत चेहरे को देख रहा था और सुगंधा भी अपने बेटे की तरफ देख रही थी दोनों एक दूसरे को देख रहे थे,, इस तरह से गोद में उठाए हुए अंकित अपनी मां को उसके कमरे की तरफ ले जाने लगा सुगंधा की साड़ी कमर तक थी उसकी नंगी गांड पर अंकित का लंड बराबर ठोकर लग रहा था जिसका एहसास उसे पानी पानी कर रहा था,,,,अपनी मां को गोद में उठाए हुए और दरवाजे पर पहुंच चुका था दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था उसे पूरा खोल दिया और अपनी मां को गोद में लेकर वह कमरे में दाखिल हो गयाअपने बेटे की हरकत से वह पूरी तरह से शर्म से पानी पानी हो रही थी और उत्तेजित भी कुछ ज्यादा ही हो रही थी वह अपनी मां के बिस्तर के करीब आया और उसे नरम नरम गद्दे पर पटक दिया,,,, सुगंधा एकदम से डर गई लेकिन वह एकदम सुरक्षित थी,,,बिस्तर के नीचे अंकित खड़ा था उसका पेंट उसकी घुटनों में फंसा हुआ था उसका लंड छत की तरफ मोटा ही खड़ा था जिसे सुगंधा प्यासी नजर से देख रही थी,, अपनी हालत पर गौर करते हुए सुगंधा दरवाजे की तरफ देखी और अपने बेटे से बोली ,,,,)



दरवाजा तो बंद कर दे,,,

दरवाजा बंद करने की जरूरत है मम्मी कोई तो नहीं है घर में हम दोनों के सिवा,,,, भले कोई नहीं हो लेकिन मुझे खुले दरवाजे के अंदर शर्म आती है तु दरवाजा बंद कर दे,,,,

ठीक है मैं अभी बंद कर देता हूं ,,,,(इतना कहने के साथ ही वहां घुटनों में फंसी अपनी पैंट और अंडरवियर को एकदम से उतार कर कमर के नीचे नंगा हो गया और इस स्थिति में वह दरवाजे की तरफ जाने लगा चलते समय उसका हिलता हुआ लंड देखकर सुगंधा की सांस अटक रही थी,,,, थोड़ी देर में दरवाजा बंद करके बिस्तर की तरफ आने लगा सुगंधा अपने बेटे को देख रही थी ,,,ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में सब को साफ दिखाई दे रहा था उसके बेटे का हिलता हुआ लंड मानो उसे चुदवाने के लिए मना रहा हो,,,, वह अपनी मां के करीब आ गया वह बिस्तर पर उसकी तरफ टांग फैलाए लेटी हुई थी लेकिन वह शर्म के मारे अपनी टांगों को आपस में सिकोड़ ली थी। अपनी मा की इस स्थिति को देखकर अंकित मुस्कुराने लगा,,,, धीरे से झुक कर वह अपनी मां की दोनों टांगों को धीरे से पकड़ कर खोलने लगा अपने बेटे के द्वारा अपनी टांगे खोलने पर सुगंधा शर्म से पानी पानी हो रही थीवह कुछ बोल नहीं पा रही थी और अंकित बिस्तर पर घुटनों के बाल आगे बढ़ रहा था वह अपनी मां के ऊपर पूरी तरह से छा जाने के लिए तैयार था और देखते ही देखे अपनी मां की दोनों टांगों को खोलकर टांगों के बीच दोनों पैर के घुटने रखकर आगे की तरफ बढ़ने लगा और रख दे पर अपनी मां के ऊपर एकदम से पसर गया उसे अपनी बाहों में भरकर उसके लाल लाल होठों को चूसना शुरू कर दिया,,,,जिस तरह से अंकित अपनी मां के ऊपर लेटा हुआ था उसका लंड सीधा उसकी मां की बुर पर ठोकर मार रहा था यह सुगंधा के लिए आसानी नहीं था वह पागल हो जा रही थी क्योंकि समय को पूरी तरह से अपने बेटे की बाहों में थीकमर के नीचे से नंगी ब्लाउज पूरी तरह से खुला हुआ था लाल रंग की ब्रा में कैद उसकी दोनों चूचियां फड़फड़ा रहे थे बाहर आने के लिए,,, जिसे अपनी मां के होंठों का रसपान करते हुए अंकित जोर-जोर से दबा रहा थाउसे अपनी मां की चूची की जवानी बहुत मजा आ रहा था क्योंकि वह खरबूजे के आकार की थी बड़ी-बड़ी जो पूरी तरह से उसकी हथेली में समा भी नहीं रही थी,,,,,।



ब्रा के ऊपर से चूची दबाने मेंइतना मजा अंकित को नहीं आ रहा था लेकिन फिर भी यह मजा उसके लिए काफी थालेकिन शायद सुगंधा के लिए यह काम था इसलिए वह अपने हाथ से ही अपनी ब्रा को दोनों हाथों से नीचे की तरफ पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठाती है और उसकी दोनों घर पहुंचे जैसी चुचिया एकदम से हवा में लहर उठी,,,,,और अंकित अपनी मां की नंगी चूचियों को चोरी से दबाने लगा गोरी गोरी नंगी चूची में हाथ में आते हैं उसकी उत्तेजना और बढ़ने लगी और उसके लंड का आकार ऐसा लग रहा था कुछ ज्यादा ही मोटा होने लगा जो बार-बार उसकी बुर के गुलाबी मुहाने पर ठोकर मार रहा था रगड़ खा रहा था जिससे सुगंधा पानी पानी हो रही थी।कमरे का माहौल पूरी तरह से गर्म हो चुका था मां बेटे दोनों की आंखों में चार बोतलों का नशा छाया हुआ था दोनों वासना में डूब चुके थे,,,,, अंकित लगातार अपनी मां की होठों का रसपान कर रहा था लेकिन काफी देर तक पर होठों का रस पी रहा था इसलिए सुगंधा बिना कुछ बोले उसके चेहरे को अपने हाथों में पकड़ कर उसे अपने होठों से अलग की और गहरी सांस लेते हुए उसकी तरफ देखने लगी अंकित भी अपनी मां को देख रहा था दोनों की आंखें आपस में कुछ बातें कर रही थी,,, और फिर सुगंध अपने बेटे का बाल अपने हाथों में पकड़ कर उसे नीचे की तरफ ले जाने लगी और अपनी चूचियों पर लाकर अटका दीअंकित एक बार अपनी मां की तरफ देखा और अपनी मां की दोनों चूचियों की तरफ देखा ऐसा लग रहा था कि अंकित अपनी मां के इशारे को समझ रहा था लेकिन वह अपनी तरफ से कुछ कर पाता इससे पहले ही सुगंधा अपने हाथ में अपनी चूची पकड़ कर उसे अपने बेटे के मुंह से लगा दी और सिर्फ इतना ही बोली।

ले पी,,,,।



फिर क्या था अंकित तोपागल हो गया वह अपनी मां की चूची को जितना हो सकता था उतना अपने मुंह में लेकर दबा दबा कर पीना शुरू कर दिया हालांकि उसमें से बात तो नहीं निकल रहा था लेकिन जो मजा नहीं कर रहा था जो आनंद की फुहार निकल रही थी वह बयान करना बहुत मुश्किल था वह बारी बारी से अपनी मां की दोनों चूचियों को दबाकर अपने मुंह में लेकर पी रहा था,,,, बरसों बाद सुगंधा की चूचियों पर किसी मर्द ने मुंह लगाया थाऔर वह कोई गैर मर्द नहीं बल्कि उसका हिस्सा का बेटा था जो पूरी तरह से जवान हो चुका था मर्द बन चुका था और अपनी मर्दानगी अपनी मां पर दिख रहा था पागलों की तरह अपनी मां की चूचियों को दबा दबा कर उसे टमाटर की तरह लाल कर दिया था।जितनी जोर-जोर से अंकित अपनी मां की चूची को दबा रहा था उतना ही आनंद सुगंध को मिल रहा था सुगंधा बाल पकड़ पकड़ कर उसे अपनी चूची पर दबा रही थी और नीचे अंकित का लंड उसका गरम सुपाड़ा सुगंधा की बुर की दरार में फंसा हुआ था जिसे अंकित हल्के हल्के से अपनी कमर आगे पीछे करते हुए उसे चोदने की कोशिश कर रहा था उसे एहसास दिला रहा था कि वह क्या चाहता है। बिस्तर परपूरी तरह से घमासान मचा हुआ था हालांकि यह संभोग के पहले का घमासान थासुगंधा भी अच्छी तरह से जानते थे कि जिस तरह के हालात पैदा हो चुके हैं जिस तरह की उत्तेजना उसके बेटे के बदन में छाई हुई है आज उसकी चुदाई तय थी,,,,,।

थोड़ी देर तक अपनी मां की चूचियों को दबा दबा कर पीने के बाद वह धीरे से अपनी मां की चूची को दोनों हाथों में पकड़ कर अपने मुंह से अलग किया और अपनी मां की तरफ गहरी सांस लेते हुए बोला।

सच में तुम कयामत हो पागल कर दे रही हो मुझे अपने हुस्न की जादू से आज की रात लगता है कि मैं पागल हो जाऊंगातुमसे ज्यादा खूबसूरत औरत मैंने जिंदगी में कभी नहीं देखा,,,।



क्या तुझे मे इतनी खूबसूरत लगती हूं।

मुझे क्या तुम सबको खूबसूरत लगती होगी,,, तुम्हारी बड़ी-बड़ी चूचियां,,(दोनों हाथों में पकड़ कर उसे दबाते हुए और हिलाते हुए)ऐसा लगता है कि मेरे लिए यह अनमोल खजाना है और इस खजाने को मैं खोना नहीं चाहता इस पर सिर्फ मेरा ही अधिकार है,,,,।

तेरा ही अधिकार है मेरे बेटे,,,,,

ओहहहह मम्मी,,,,, यह सुनकर तो मैं पागल हो रहा हूं,,,,।

नहीं नहीं पागल मत होना अगर तू पागल हो गया तो मेरा क्या होगा,,,,

वही होगा जो मै चाहूंगा,,,।

और तू क्या चाहता है,,,,?(सुगंधा मुस्कुराते हुए अपने बेटे की तरफ देख कर बोली,,,, अपनी मां का यह सवाल सुनकर अंकित मुस्कुराने लगा और धीरे-धीरे अपनी मां की चूची पकड़ कर वालाउसके पेट पर चुंबन करने लगा धीरे-धीरे वह नाभि तक पहुंच चुका था नाभि में अपनी जीभ डालकर उसे गोल-गोल घुमा कर चाट रहा था,,,, वह बिना कुछ बोले बता रहा था कि वह क्या करना चाहता है,,, देखते देखतेवह अपनी मां की दोनों टांगों के बीच आ गया था और अपनी मां की तरफ देखते हुए इसकी मोटी मोटी जांघों पर अपने होठ रखकर चुंबन कर रहा था,,,, जब जब वह उसकी जांघों पर अपने होंठ रखता था तब तब सुगंधा उत्तेजना से सिहर उठती थी।देखते ही देखते अंकित उसकी बुर की तरफ आगे बढ़ रहा था और सुगंधा यह अपनी खुली आंखों से देखा है कि वह कहां बढ़ रहा है इसका एहसास होते ही उसका बदन कसमसा रहा था,,,,उसके सांस ऊपर नीचे हो रही है उसकी हालत खराब हो रही थी और देखते ही देखते अंकित अपनी मां की गुलाबी लकीर की तरफ आ चुका था उसकी बुर की तरह आ चुका था और वह अपने होंठ को अपनी मां के बुर के एकदम करीब ला दिया था जहां से उसकी गर्मी का एहसास उसके होठों पर एकदम बराबर हो रही थी,,,,अपनी मां की बुर चाटने का उसका बहुत मन कर रहा है और अब समय आ गया था अपनी इच्छा को पूरी करने की,,,,सुगंधा पागल हो जा रही थी अपने बेटे के होठ को अपनी बुर के इतने करीब पाकर उसकी भावनाएं भड़क रही थी,,,,मन तो उसका कर रहा था कि अपना हाथ आगे बढ़कर अपने बेटे के होठों को अपनी बुर से सटा देलेकिन वह ऐसा कुछ कर नहीं पा रही थी बस अपने बेटे को देख रही थी और अंकित भीअपनी मां की तरफ देखने लगा दोनों की नजर आपस में टकराई दोनों पागल होने लगे,,,,,लेकिन फिर भी आगे बढ़ने से पहले अंकित अपनी मां की इजाजत ले लेना चाहता था इसलिए वह अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला,,,,।



मैं तुम्हारी बुर को चूमना चाहता हूं क्या मैं ऐसा कर सकता हूं,,,,,(जवाब में सुगंधा कुछ देर तक अपने बेटे की आंखों में देखती रही और फिर शर्मा कर अपनी नजर को दूसरी तरफ घुमा ली यह सुगंधा की तरफ से हामी थी जिसे स्वीकार करके मुस्कुराते हुए अंकित अपने होठों को अपनी मां की दहकते हुए बुर पर रख दिया जो कि समय भट्टी की तरह तप रही थी और उसे चुंबन करने लगा धीरे-धीरे वह दो-तीन बार बुर पर अपने होंठ सटाकर चुंबन कर रहा था अपनी मां की तरफ देख रहा था उसके चेहरे के बदलते भाव को देख रहा था अंकित जानबूझकर इस तरह से चुंबन कर रहा थाऔर सुगंधा यह चाहती ज थी कि वह अपनी जीभ को उसकी बुर में डाल दे और उसकी मलाई को कहते लेकिन बार-बार अंकित सिर्फ तड़पा रहा थावह जानता था किसकी मां की हालत खराब हो रही है इसलिए बार-बार उस पर चुंबन करके अपने होठ को हटा दे रहा था,,,,लेकिन इस बार जैसे ही अंकित अपने होंठ को अपनी मां की बुर पर रखा उसे चुंबन किया सुगंधा का सब्र का बांध एकदम से टूट पड़ा। वह तुरंत अपना हाथ अपने बेटे के सर पर रख दिया एकदम से उसे अपनी बुर पर दबा दीऔर अपनी टांगों को घुटनों से मोड़ कर उसे तुरंत अपने बेटे के कंधों पर रखकर उस पर अपना दबाव बनाने लगी,,,,,इस हरकत से अंकित एकदम बावला हो गया वह अपनी मां की तरफ देख रहा था लेकिन सोचा नहीं था कि उसकी मां इस तरह की हरकत करेगी,,,, अब तो अंकित की हालत एकदम से खराब हो गई,,,,

और वह पागलों की तरह अपनी मां की बुर को चाटना शुरू कर दिया जिसमें से मदन रस लगातार बह रहा था उसे रस को अपनी जीभ से चाटने लगा उसका कड़वा और कसैला स्वाद उसे अमृत की तरह लग रहा था,,,, नमकीन खारा पानी उसे मध की धार लग रही थी,,,,अंकित पागलों की तरह अपनी मां की बुर को चाट रहा था और सुगंधा ने दोनों हाथ से अपने बेटे के बाल को पकड़कर उसके मुंह का दबाव अपनी बुर पर बना रही थी,,,,अंकित जितना हो सकता था उतनी अपनी जीभ को अपनी मां की बुर में डालकर उसकी चटाई कर रहा था यह क्रिया उसके लिए पहली बार कि नहीं थी ईससे पहले भी सुमन और सुमन की मां के साथ-साथ,,,,अपनी नानी और राहुल की मां की बुर की चटाई कर चुका था इसलिए बुर चाटने का उसे अच्छा खासा अनुभव था,,, लेकिन यह सुगंधा के लिए नया था बेहद अद्भुत और अविस्मरणीय पल था वह पागल हो जा रही थी क्योंकिआज तक उसके पति ने भी उसके साथ ऐसा नहीं किया था उसकी बुर को कभी होठों से नहीं लगाया था लेकिन अंकित अपने आप से एक कदम आगे था वह संपूर्ण रूप से एक मर्द था तभी औरत को खुश करना जानता था,,,,सुगंधा कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसका बेटा उसके साथ ऐसा करेगा ऐसा अद्भुत सुख उसे प्रदान करेगा,,, इसका अंदाजा तो उसे उसी दिन लग गया था जब वह सुबह अपने कमरे में निर्वस्त्र होकर सो रही थी और उस समय उसे जगाने के लिए,अंकित कमरे में आया था और उसे नंगी देखकर उसकी हालत खराब हो गई थी और उसी पल का फायदा उठाते हुए वह उसकी बुर पर अपने होंठ लगाया था सुगंधा अपने बेटे की हरकत से पूरी तरह से सिहर उठी थी,,,और इस समय हमसे एहसास हो गया था कि अगर उन दोनों के बीच कुछ हुआ तो अंकित इसी तरह से उसे अद्भुत सुख प्रदान करेगा।



और आज उसका सोचना एकदम सही साबित हो रहा था,,,, अंकित मदहोश होकर अपनी मां की बुर मेंडूबा चला जा रहा था उसकी गहराई भले ही डेढ़ 2 इंच की थी लेकिन ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई झरना हो और वह उसमें पूरी तरह से उतरता चला जा रहा था। अंकित की अभिलाषा आज पूरी हो रही थी वह अपनी मां की दोनों जांघों को अपनी हथेली में दबोचा हुए उसके गुलाबी बुर को अपने होठों से अपनी जीभ से चाट रहा था। उसका मादक गंध अंकित की उत्तेजना को और बढ़ा रहा था। सुगंधा मचल रही थी मछली की तरह पानी के बिना तड़प रही थी वह बिस्तर पर कसम खा रही थी और अपने बेटे की तरफ देख रहे थेलेकिन साड़ी कमर तक उठी होने की वजह से उसे कुछ ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था तो वह अपने बेटे की सद्भूत हरकत को देखने के लिए अपने हाथ की कहानी का सहारा लेकर अपने आपको ऊपर की तरफ उठा ली थी और अपनी दोनों टांगों के बीच देख रही थी जहां पर उसका बेटा पूरी तरह से उस पर छाया हुआ था,,,,।

सहहहहह आहहहहहहहह,,,,,,ऊममममममम,,,,,ओहहहह अंकित मेरे बेटे तू तो मुझे पागल कर दे रहा है,,,,सहहहहह आहहहहहहहहहह,,,,चाट ,,,(अपने बेटे के सर पर हाथ रखते हुए उसे पर थोड़ा दबाव बनाते हुए) पुरी जीभ अंदर डालकर चाट बहुत मजा आ रहा है रे,,,,,ऊममममममम,,,,,,उफ्फ,,,,,,,,,,।

(अपनी मां की गरमा गरम सिसकारी ओर उसकी उत्तेजना भरी बातें अंकित के हौसले को बढ़ा रही थी अपनी मां की बात सुनकर अंकित पूरी तरह से जोश में आ गया था और जितना हो सकता था उतनी अपनी जीभ को अंदर डालकर उसे गोल-गोल घूमा रहा था,,,,, अंकित की हरकत से उसकी मां पूरी तरह से बेचैन हो रही थी मदहोश हो रही थी और अंकितऔर भी ज्यादा उत्तेजित हो क्या जब उसकी मां अपनी कमर को थोड़ा ऊपर की तरफ उठाकर खुद गोल गोल घूमाकर उसके चेहरे को अपनी बुर से रगड़ रही थी,,,, अंकित समझ गया था कि अब यह लंड लेने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुकी है। लेकिन अभी समय था अभी तो अंकित को अपनी मां के खूबसूरत बदन से जी भर के खेलना था जिसे देख देखकर वह पागल हुआ जाता था,,,, जिसके बारे में सोच सोच कर वह ना जाने कितनी बार मुठ मार चुका था,,,,, ऐसे खूबसूरत बदन को किया इतनी जल्दी कैसे वह अपनी गिरफ्त से छोड़ सकता था। आज तो मौका मिला था उसे अपनी मां की जवानी से जी भर कर खेलने का,,,,। अंकित इस मौके को गंवाना नहीं चाहता बल्कि इसका जी भर कर मजा लुटना चाहता था। इसलिए तो अंकित पागलों की तरह अपनी मां की बुर की चटाई कर रहा था,,,, अपनी मां की मोटी मोटी जांघों को पकड़ कर उसका गुदाजपन का एहसास उसे और ज्यादा उत्तेजित कर रहा था। इस तरह का मजा तो वह पहले भी ले चुका थाअपनी नानी के साथ एकदम खुलकर रात भर मजा लिया था लेकिन उसेअच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि जो मजा उसकी मां की बुर में मिल रहा था वह मजा उसकी ना तो नानी की बुर में और ना ही सुमन और सुमन की मां की बुर में मिला था और ना ही राहुल की मां की बुर में,,,,वह इस बात पर गर्व कर रहा था कि वाकई में उसकी मां की बात ही कुछ और है,,,।



आधी रात से ज्यादा का समय हो चुका था घर में अभी भी ट्यूबलाइटअपनी रोशनी भी खेल रही थी और उसकी दूधिया रोशनी में सब कुछ साफ दिखाई दे रहा थाअभी नंगी अवस्था में लेटी हुई उसकी मां अपनी टांगे फैलाकर अपने बेटे को अपनी बुर चटाई का आनंद दे रही थीभले ही औरत अपनी संस्कार की अपनी मर्यादा की चाहे जितनी भी दवाई दे आखिरकार बिस्तर पर आने के बादवह पूरी तरह से एक रंडी हो जाती है और जी भर कर मजा लेती भी और मजा देता भी है इस समय सुगंधा का यही हाल था सुगंधा कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि इस तरह से वह अपने बेटे को मजा देगी लेकिन जब से अपने बेटे की हरकत को देखकर और अपने मन में दबी हुई भावनाएं उजागर होता हुआ महसूस की थी तब से वह इस पल के लिए तड़प रही थी। और आज उसकी यह तड़प उसकी पाया एस बुझाने वाली थी उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था,,,, लेकिन सुगंधा अपनी ही बात पर थोड़ा परेशान थे कि वह अपने बेटे को चाहे कुछ भी हो जाए अपनी बुर में लंड डालने के लिए ना बोली थी क्योंकि उसका कहना था कि वह गंदी किताब वाली मां नहीं है,,,, लेकिन अपने मन में यही सोच रही थी कि उसका बेटा जरूर उसकी बुर में लंड डालने की कोशिश करेगा जिसके लिए वह तड़प रही है और अपने मन में साफ उद्देश्य बना ली थी कि उस समय वह अपने बेटे को बिल्कुल भी नहीं रोकेगी,,,,,सुगंधा अपनी दोनों टांगों के बीच अपने बेटे की हरकत को देखकर पागल हुए जा रही थी वहजैसे बिल्ली दूध की मलाई चाहती है इस तरह से वह उसकी बुर चाट रहा था यह देखने में उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी और पागलों की तरह मदहोश हो रही थी उसकी आंखों में चार बोतलों का नशा छाया हुआ था।

और अंकित यहां पर अपना अनुभव कम लग रहा था अपनी मां की बुर चाटते हुए वह अपनी एक उंगली को धीरे से अपनी मां की बुर में डालकर उसे अंदर बाहर करते हुए उसके मजा को दुगुना करने लगा,,, सुगंधा वाक्य में अपने बेटे की इस हरकत से इस कलाबाजी से पूरी तरह से मदमस्त मदहोश होने लगी वह अपना दोनों हाथ अपने बेटे के सर पर रख दि और उसके सर को दबाते हुए अपनी टांगों को एकदम से घुटनों से मोड़कर पुरा खोल दी,,,पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी इस समय जिस तरह से वह बिस्तर पर हरकत कर रही थी वह पूरी तरह से छिनार बन चुकी थीअंकित भी पागलों की तरह अपनी मां की बुर में उंगली करते उसे चाट रहा था वह जिस तरह से मचल रही थी अंकित धीरे से अपने दोनों हाथों को आगे की तरफ लाया और उसकी दोनों खरबूजा को पकड़कर जोर-जोर से दबाने लगा जिससे सुगंधा की हालत और ज्यादा पतली होने लगी वह अपने चरम सुख के करीब पहुंच रही थी उसकी सांसों की गति बड़ी तेजी से चलने लगी थी,,, पूरा कमरा उसकी गरमा गरम सिसकारीयो से गूंज रहा था,,,और इस समय वह इतनी मदहोश हो चुकी थी कि अपनी गरमा गरम सीसकारीयो पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पा रही थी,,,,

सरहहहह आहहहहहहह,,,,,,,सईईईईईईईई,,,,,ऊईईईईईईईई, मां मर गई रे तू तो मुझे पागल कर दिया है,,,आहहहहहहह,,,,, यह सब कहां से सीखा तु,,,,,,ऊममममम मैं तो तुझे पूरा नादान समझ रही थी हाय दइया तू तो मुझे पागल किए जा रहा है,,,,,(ऐसा कहते हुए वह जोर लगाकर अपनी कमर को ऊपर की तरफ उछाल रही थी अंकित समझ गया था कि उसकी मां झड़ने वाली हैइसलिए अपने दोनों हाथों को अपनी मां की चूची पर से हटकर वह धीरे से अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड के नीचे अपनी दोनों हथेलियां रख दिया और उसे ऊपर की तरफ उठाते हुए अपने होठों से एकदम से सटा दिया और पागलों की तरह नाक डालकर उसे चाटना जरूर कर दियावह अपनी मां की गुलाबी छोड़ के गुलाबी पत्तियों को अपनी नाक से जीव से जैसा हो सकता था वैसे कुरेद कुरेद कर अपनी मां को मस्त कर रहा थाऔर उसकी मां थी की पूरी तरह से मदहोश ले जा रही थी आज पहली बार अपनी गदराई जवानी का आनंद ले रही थी,,,, उसकी सिसकारियां थी कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। वह अपना सर उत्तेजना से दाएं बाएं पटक रही थी,,,।



सहहहहह आहहहहह। मेरे लाल मैं पागल हो रही हूं मुझे कुछ हो रहा है तेरी हरकत से मुझे लग रहा है जैसे मैं हवा में उड़ रही हूं मुझे पकड़ ले दोनों हाथों से दबोच ले में कहीं उड़ ना जाऊं,,,,,आहहहहहहह आहहहहहहह ऊईईईईई मां,,,, ऐसा कहने के साथ ही सुगंध जोर से अपने बेटे के कर के बाल को पकड़ कर अपनी बुर से सटा दी और भलभला कर झड़ने लगी,,, उसके गुलाबी छेद से मदन रस का फव्वारा एकदम से फूट पड़ाऔर सीधे अंकित के मुंह के अंदर उसकी धार लगने लगी लेकिन अंकित बेझिझक अपनी मां के मदन रस को अमृत की धार समझ कर चाटना शुरू कर दिया अपने गले के अंदर उतारना शुरू कर दिया,,,,अौर सुगंधा दोनों हाथों से अपने बेटे के बालों को पकड़ कर उसे अपनी बुर पर दबाए जा रही थी,,, उसे मजा आ रहा था मदहोश हो रही थी बरसों के बाद वह इस तरह से झड़ रही थी यह सुख उसके लिए उसके जीवन का सबसे अनमोल सुख थाइस तरह के सुख की कल्पना उसने कभी कि नहीं थी पति के देहांत के बाद तो उसने कभी इस बारे में सोचा भी नहीं थी कि अब उसे इस तरह का सुख कभी प्राप्त होगा लेकिन वर्षों के बाद उसके बेटे ने भी उसे जो सुख दिया था उससे वह पूरी तरह से निहाल हो चुकी थी।

सुगंधा के मदन रस से अंकित का गला तर तो हो रहा था लेकिन उसका चेहरा पूरी तरह से भेज चुका थाधीरे-धीरे जब सुगंध शांत होने लगी उसकी सांसों की गति थमने लगी तो वह धीरे से अपने होठों को अपनी मां की बुर पर से अलग किया और गहरी सांस लेते हुए अपनी मां की तरफ देखने लगा,,,,सुगंधा भी अपने बेटे की तरफ ही देख रही थी दोनों की आंखें एक दूसरे से टकराई और सुगंधा शर्म के मारे अपनी आंखों को बंद कर ली,,,, इस समय अपने बेटे से नजर नहीं मिल सकती थी क्योंकि जो सुख एक पति या प्रेमीके द्वारा मिलता है वह सुख उसे उसके बेटे ने दिया था और यही बात से वह शर्म से गड़ी जा रही थी लेकिन जो आनंद मदहोशी उसने अपने अंदर महसूस की थी उसे वहां अपने बेटे पर गर्व महसूस कर रही थी,,,,अपनी मां की हालत को देखकर अंकित मन ही मन बहुत खुश हो रहा था उसके जीवन में बाहर आ चुकी थी जिसके बारे में सोचकर वहां न जाने कितनी बार मुठ मार कर अपनी गर्मी को शांत किया था आज उसकी बाहों में थी आज वह उसके साथ कुछ भी कर सकता था।अंकित को साथ दिखाई दे रहा था कि अभी भी उसकी मां की सांस थोड़ी गहरी चल रही थी जिसकी वजह से उसकी नंगी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी जिसे देखकर उसके मुंह में फिर से पानी आने लगा था क्योंकि अभी तक वह सिर्फ अपनी मां को संतुष्ट कर रहा था अभी वह प्यासा का प्यासा ही था उसके पास हुआ था लेकिन अभी भी उसकी प्यास बुझी नहीं थी उसकी प्यास बढ़ती ही जा रही थी,,,लंड किया कर देख कर अंकित को ऐसा ही लग रहा था कि आज वह अपनी मां की बुर का भोसड़ा बना देगा।



धीरे-धीरे वह अपनी मां के ऊपर की तरफ जाने लगा नीचे का काम तो वह तमाम कर चुका था,,,, देखते देखते वह अपनी मां के ऊपर छा गया और अपने हाथ को अपनी मां के छाती के ईर्द-गिर्द रखकर उसे एक टक देखने लगाअभी भी उसकी मां की आंखें बंद थी वह मदहोशी में डूबी हुई थी उसका खूबसूरत चेहरा उत्तेजना से तमतमाया हुआ था,,,,, उसके लाल लाल होठ खुले हुए थे जिसमें से सांसों का आवागमन हो रहा था,,,,लाल-लाल होठों को देख कर अंकित से रहा नहीं गया और वह धीरे से अपनी मां के होठों पर अपनी होठ रख दिया और उसे फिर से चुसना शुरू कर दिया,,,,सुगंधा की आंखें खुल गई क्योंकि होठों पर उसके बुर का रस लगा हुआ था जो थोड़ा कसैला और नमकीन था,,,, सुगंधा को झट से एहसास हो गया कि ऐसा स्वाद किसका है,,,और वह अपने होंठों को अपने बेटे के होठ से अलग करने की कोशिश करते हुए बोली,,,।

ऊमममममम,,,, हटना,,,,,,

(अपनी मां की इस हरकत को देखकर अंकित मुस्कुराने लगा गहरी सांस लेता हुआ वह अपनी मां को देख रहा था उसकी मां अपनी आंखों को खोल दी थी और अपने बेटे की तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी। अपनी मां को मुस्कुराते हुए देखकर अंकित बोला,,,)

मेरे होठों पर लगा रस तुम्हारी बुर का ही है,,,(और इतना कहने के साथ ही फिर से उसके होठों को अपने होठों में भर लिया और चूसना शुरू कर दिया,,,
 
ईस बार वह अपने होंठों को अपने बेटे के होठ से बिल्कुल भी नहीं हटाई बल्कि इस बार तो वह खुद अपनी बुर का स्वाद लेने के लिए अपने होठों को खोल के अपने बेटे के होंठों को चूसना शुरू कर दी उसे भी अपनी बुर का स्वाद अच्छा लग रहा था उसका कसैला और नमकीन स्वाद उसे भी मदहोश कर रहा था दोनों एक बार फिर से गुत्थम गुत्था हो गए थे,,, सुगंधाअपने बेटे का स्वागत करते अपने दोनों टांगें फिर से खोल दी थी और इस बार भी उसका टनटनाया हुआ लंड उसकी बुर पर ठोकर मार रहा था सुगंधा फिर से गर्म होने लगी थी,,,दो बार वह खुद छोड़ चुकी थी लेकिन उसका बेटा अभी तक सिर्फ उसे ही संतुष्ट कर रहा था अभी तक उसके लंड से पानी नहीं निकला था इस बात की खुशी और गर्व दोनों सुगंधा के चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था,,, क्योंकि एक औरत होने की नाते वह अच्छी तरह से जानती थी किशुरू-शुरू में मर्द अगर पहली बार किसी नंगी औरत को देख मिले तो भी उनके लंड से पानी निकल जाता है यहां तो उसका बेटा उसके अंगों से खेल रहा था दबा रहा था पी रहा था इसलिए बुर को चाट रहा था लेकिन फिर भी ज्यों का त्यों बना हुआ था,,,, और सुगंधा अपने मन में यही सोच रही थी कि अगर उसके बेटे का लंड उसकी बुर में जाएगा तो उसे पूरी तरह से मस्त कर देगालेकिन कभी उसे याद आया कि उसने तो अपने बेटे को बोली थी कि चाहे जो भी करना है कर लेना लेकिन अंदर मत डालना,,,,इस बात से उसके चेहरे पर थोड़ी सी उदासी आ गई थी लेकिन अगले ही पर वह अपने मन में सोचने लगी कि भला इस अवस्था में बिस्तर पर मर्द औरत की बात मानते हैं क्याबिल्कुल भी नहीं मानते वह बिस्तर पर औरत के साथ मनमानी करने से बिल्कुल भी पीछे नहीं हटते खास करके ऐसे मदहोशी भरे लम्हे में,,,,।





अंकितअपनी मां को बाहों में कसके बिस्तर पर उसके होठों का रसपान कर रहा था उसकी नंगी चूचियां उसकी छाती से चपी हुई थी और चुचियों का छुहारे जैसा निप्पल किसी भाले की तरह उसकी छाती से चुभ रही थी,,, लेकिन फिर भी उसकी चुभन अंकित को मदहोश कर रही थी अंकित बार-बार अपनी कमर हिला कर अपने लंड का एहसास अपनी मां की बुर पर बराबर करा रहा था,,,मदन रस से चिपचिपी हुई सुगंधा की बुर बार-बार उसे अपने अंदर लेने के लिए ललाईत नजर आ रही थीलेकिन अंकित चला कर दिखा रहा था वह अपने लंड को अपनी मां की बुर में जाने नहीं दे रहा था वह पसंद कैसे उसे पर रगड़ खिलाकर ऊपर की तरफ ले ले रहा था,,,अंकित अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां उसके लंड को लेने के लिए मचल रही है भले ही वह अपने मुंह से कुछ भी बोल चुकी हो लेकिन इस समय वह पूरी तरह से पागल हुई जा रही थी चुदवाने के लिए लेकिन अंकित अपनी मां को तड़पाना चाहता था। उसे इस कदर मजबूर कर देना चाहता था किवह खुद है उसके लंड को अपनी बुर में लेने के लिए तड़पे और गिड़गिड़ाए,,, अंकित अपनी मां के शब्दों को की अंदर नहीं डालने नहीं दूंगी वह इस बात को चुनौती की तरह स्वीकार कर लिया था,,,, और इसलिए वह इस समय भीबार-बार अपने लंड के सुपाड़े को अपनी मां की बुर पर रगड़ कर हटा दे रहा था,,,, और उसकी ईस हरकत से सुगंधा एकदम मचल जा रही थी,,,,।

दोनों का चुंबन जारी था लेकिन सुगंधा को फिर से पेशाब लग चुकी,,, थी,,, इसमें उसकी कोई गलती नहीं थी क्योंकि अंकित उसकी बुर को इतना गर्म कर दिया था कि उसका लावा बार-बार पिघल रहा था। वह धीरे से अपने होठों को अपने बेटे के होठ से अलग की और अपने बेटे की आंखों में देखते हुए बोली,,,।



तू इतना बड़ा शैतान है मुझे मालूम नहीं था मैं तो तुझे बुद्धु समझती थी,,,, कहां से सीखा यह सब,,,,।

(अंकित अपनी मां को सच नहीं बताना चाहता था कि यह सब कहां से सीखा इसलिए अपनी मां की खूबसूरत चेहरे की तरफ प्यासी नजरों से देखते हुए वह बोला)

यह सब पढ़कर मैं सिखा हूं,,,।

कहां पढ़कर,,,?

वही गंदी किताब उसमें और भी कहानीया है,,,,, उसमें ही यह सब लिखा हुआ था तभी तो मुझे पता चला नहीं तो मुझे कभी मालूम ही नहीं पड़ता की औरत की बुर भी चाटी जाती है,,,(अंकित उसी तरह से अपनी मां के ऊपर पसरे हुए ही बोलाअभी भी उसका खड़ा लंड उसकी मां की बुर पर ठोकर मार रहा था जिससे सुगंधा मचल जा रही थी,,, और तभी अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) लेकिन तुम तो जानती होगी ना की बुर को मर्द चाटते भी हैं,,,,

नहीं मुझे भी नहीं मालूम था,,,

अब रहने दो झूठ बोलने को,,,

सच में मैं झूठ नहीं बोल रही हूं,,,

पापा तो चाटे होंगे ना,,,,

अगर चाटे होते तो मुझे पता तो होता कि इस तरह का सुख मिलता है उन्होंने कभी ऐसा किया ही नहीं,,,,

ओहहहह ,,,, इसका मतलब है कि पापा एक अद्भुत अविष्मरणीय सुख से वंचित रह गए,,,,।

क्या सच में यह इतना अच्छा सुख देता है।

तो क्या मम्मी मैं तो किताब में पढ़ा था तभी सोच रहा था कि कैसा लगता होगा और काफी उत्सुक भी था इस सुख को प्राप्त करने के लिए।

किसके साथ,,,(मुस्कुराते हुए अपने बेटे की तरफ देखकर बोली)

तुम्हारे साथ,,,,

तुझे ऐसा क्यों लग रहा था कि यह सुख तुझे मुझसे ही मिलेगा,,,,।

पता नहीं क्यों लेकिन मुझे ऐसा ही लग रहा था कि जो कुछ भी सुख मुझे पहले मिलेगा अगर तुमसे ही मिलेगा क्योंकि तुम दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत हो और ऐसी खूबसूरत औरत को में छोड़ना नहीं चाहता,,, बिना सुख लिए,,,

तुझे मजा आया,,,,



बहुत मजा आया मैं तो कभी सोच भी नहीं सकता था की पेशाब करने वाली जगह इतना ज्यादा मजा देती होगी,,, तुम भी तो पागल हो रही थी तुम्हें भी तो बहुत मजा आया।

(इस बात पर सुगंधा कुछ बोली नहीं बस शर्मा कर दूसरी तरफ नजर घुमा ली,,,,अपनी मां को शरमाता हुआ देखकर अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,)

सच में तुमको भी बहुत मजा आ रहा था तभी तो अपनी गांड उठा उठा कर बुर चटवा रही थी,,,,।

सससहहहहह,,,, कैसी बातें कर रहा है,,, पहली बार में ही तु इतना खुल गया,,,,

खोलने वाली भी तो तुम ही हो,,,,।

चल अच्छा हट अब,,,,

क्यों अब क्या हुआ,,,?(अंकित धीरे से अपनी मां के ऊपर से हटते हुए)

मुझे फिर से जोरों की पेशाब लगी है,,,।

बाप रे तुम्हारे पेशाब की टंकी तो बार-बार भर जाती है,,,

अब इसमें मेरा कोई दोष थोड़ी ना है अब लग जाती है तो क्या करूं,,,,(इतना कहकर वह उठकर बैठ गई और वह बिस्तर से उतरने की तैयारी में थी कि तभी अंकित उसका ब्लाउज पकड़ लिया और उसे उतारने लगा)

अब यह क्या कर रहा है,,,?

उतार रहा हूं,,,(इतना कहते हुए वह ब्लाउज को दोनों हाथों से पकड़ कर पीछे की तरफ खींचने लगा जिसमें उसकी मां भी उसका सहकार देते हुए अपने हाथ को पीछे कर दी और अंकित आराम से उसके ब्लाउज को उतार कर एक तरफ रख दिया और फिर ब्रा के हुक को दोनों हाथों से पकड़ कर खोलने लगा यह देखकर वह फिर से बोली,,)

अब ईसे भी उतारेगा क्या,,,?



क्यों नहीं अब समय आ गया है कि मैं तुम्हें पूरी तरह से नंगी देखूं,,,,।

(अपने बेटे कि ईस तरह की बात सुनकर वह शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी। एकदम से हैरान थी की उसका बेटा एक हीं दिन में इतना ज्यादा खुल गया,, लेकिन उसे अच्छा भी लग रहा था अपने बेटे का बदला हुआ रूप देखकरसुगंधा अपने मन में अभी यही सोच रही थी कि तब तक अंकित उसकी ब्रा का हुक खोलकर उसे भी उसके बदन से अलग कर दिया,,,, और फिर उसकी साड़ी को भी खोलना शुरू कर दिया यह देखकर फिर से वह बोली,,,)

क्या अब मुझे पूरी तरह से इसी समय नंगी कर देगा क्या,,,,

तो क्या नंगी होने के बाद तुम और ज्यादा खूबसूरत लगती हो,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपनी मां की कमर से उसकी साड़ी को खोलकर अलग कर दिया था और उसकी पेटिकोट की डोरी कोई कोई झटके से खींचकर उसे कमर से ढीली कर दिया था लेकिन इस बारसुगंधा खुद ही अपनी पेटीकोट को पड़कर अपनी भारी भरकर गांड को थोड़ा सा ऊपर उठे और उसे आगे की तरफ खींच कर अपने पैरों से बाहर निकाल दी और बिस्तर पर एकदम नंगी हो गई,,,, और शर्मा का अपने बेटे की तरह देखे बिना ही अपनी नजर को नीचे झुका कर बोली)

अब खुश है तू,,,,,।

वाह रे मेरी जवानी से भरी हुई मम्मी,,, यही देख देख कर तो मेरे लंड की हालत खराब हो रही है,,,,(अपने लंड को पकड़ कर ऊपर नीचे करके हिलाते हुए वह बोला अपने बेटे की बात सुनकर वहउसकी तरह देखने लगी और उसके हाथ में पकड़ा हुआ लंड देखकर करवा एकदम से शर्मा गई और जैसे वह अपने बेटे को याद दिलाती हो ऐसे बोली,,)

कुछ भी हो इसे डालने नहीं दूंगी,,,,।

तुम तो ऐसे ही मुझे इतना मजा दे रही हो डालने की जरूरत ही क्या है,,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर मुस्कुरा करसुगंधा बिस्तर पर से नीचे उतर गई ट्यूबलाइट में उसकी ड्यूटी और रोशनी में उसका नंगा बदन चमक रहा था उसका गदराया जिस्म अंकित को पागल कर रहा थाअपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड उसकी खरबूजा जैसी चूचियां और केले के तने की तरह चिकनी मोटी मोटी जांघें उसके होश उड़ा रही थी और सुगंध बिस्तर पर से चादर अपने हाथ में पकड़ कर उसे खींचने लगी यह देखकर अंकित तुरंत चादर पकड़ लिया और उसे अपनी तरफ खींचने लगा तो उसकी मां बोली,,)



इसे तो लपेटने दे,,, इस अवस्था में जाने में मुझे शर्म आती है,,,।

अफसर में कैसे शर्म का पर्दा तो पूरी तरह से हट चुका है तुम्हें बेपर्दा होकर ही पेशाब करने जाना होगा,,,।

तू सच में बहुत शैतान हो गया है कोई इस तरह से अपनी मां को परेशान करता है।

किसी की मां इतनी खूबसूरत होती भी तो नहीं है ना परेशान करने लायक मेरी मां परेशान करने लायक है इसलिए परेशान कर रहा हूं,,(इतना कहने के साथ ही चादर को फिर से खींच लिया उसे बिस्तर पर रख दिया एक बार फिर से उसकी मां पूरी तरह से नंगी उसकी आंखों के सामने खड़ी थी सुगंधा जान गई थी कि अब उसकी एक नहीं चलने वाली है,,,,इसलिए वह मुस्कुरा कर अपने बेटे की तरफ देखने लगी और फिर अपनी कमर पर दोनों हाथ रखकर अपनी गांड मटकाते हुए दरवाजे की तरफ जाने लगी मानो कि जैसे वह भी अब पूरी तरह से अपने आप को तैयार कर चुकी थी बेशर्मी पर उतर आने के लिए,,,अपनी मां को इस तरह से जाता हुआ देखकर अंकित पूरी तरह से मस्त हो गया और देखते ही देखते सुगंधा दरवाजे की सीटकनी खोलकर कमरे से बाहर निकल गई,,,,अपनी मां को इस मादक अदा से गांड मटकाते हुए जाता हुआ देखकर अंकित अपने आप को रोक नहीं पायाऔर अभी जल्दी से बिस्तर से नीचे उतर गया और अपने पेंट और अंडरवियर जो कि उसके घुटनों में अटका हुआ था,,, उसे झटके से अपने पैर से बाहर निकाल कर कमर से नीचे नंगा हो गया और अपने शर्ट को भीउतारकर फेंक दिया और वह भी कमरे के अंदर पूरी तरह से नंगा हो गया उसका लंड छत की तरफ मुंह उठाए खड़ा था वह तड़प रहा था अपनी मां की बुर में जाने के लिए और अंकित उसे अपने हाथ में पकड़कर उसे दिलासा देते हुए बोला।

बिल्कुल भी चिंता मत कर आज की रात तेरी ख्वाहिश जरूर पूरी होगी,,,,(और इतना कहकर वह भी कमरे से बाहर निकल गया और घर के पीछे के तरफ पहुंच गया जहां पर उसकी मां एकदम नंगी बैठकर पेशाब कर रही थी इस रूप में तो वह और भी ज्यादा कामुक और भरे हुए जिस्म की लग रही थी,,,, अंकित अपनी मां का यह रोड देखकर पागल हुआ जा रहा था अपनी मां की भरी हुई जवान देखकर करवाना अपनी किस्मत पर गर्व कर रहा था,,,, और अपने आप से ही बोल कितना किस्मत वाला हूं मैं कि मेरी मां इतनी खूबसूरत और जवानी से भरी हुई है,,, सच में यह बहुत मजा देगी,,, अपने आप से ईस तरह की बात करते हुए वह एकदम से अपनी मां के पास उसके बगल में पहुंच गया वह भी पूरी तरह से नंगा थासुगंधा उसे अच्छी तो शर्म से पानी पानी हो गई पहली बार अपने बेटे को पूरी तरह से नंगा देख रही थी उसका नंगा लंड उसके करीब ही झूल रहा था उसका मन तो कर रहा था उसे पकड़ कर वह भी उसे मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दे लेकिन उसका ऐसा करनाइस समय उचित नहीं था ऐसा उसका मानना था क्योंकि जिस तरह से उसने कही थी कि कुछ भी हो जाए लंड को डालने नहीं दूंगी इसलिए उसका पहला करना जरूरी नहीं था ऐसा वह सोच रही थी,,,, लेकिन फिर भी वह अपने बेटे से बोली,,,)

तुझे भी पेशाब लग गई,,,।

तुम इतनी गरम हो की बार-बार पेशाब लग जा रही है,,,

लेकिन कपड़े उतार कर आना जरूरी था,,,।

जब मम्मी कपड़े उतार कर नंगी पेशाब करने आ सकती है तो भला बेटा क्यों नहीं आ सकता।

देख रही हूं तुझे बहुत बातें बनाने आ गया है,,,,।



तुम्हारी खूबसूरती देख-देख कर मेरे मुंह से बस निकल जाता है,,,,और यह तुम्हारी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज तो मुझे पागल कर देती है,,,,( ईतना कहने के साथ ही अंकित अपने लंड पर से अपना हाथ हटाकर कमर पर रख दिया और पेशाब करना शुरू कर दिया,,,, सुगंधाबेशर्म की तरह अपने बेटे के लंड को देख रही थी उसमें से निकलने वाली पेशाब की धार को देख रही थी,,,और उसकी खुद की बुर में से पेशाब की धार निकल रही थी जिसमें से सिटी की आवाज पूरे वातावरण को मदहोशी से भर दे रही थी,,, अंकित अपने पेशाब को रोक-रोककर बाहर निकाल रहा था जिसकी वजह सेउसका लंड बिना पकड़े ही ऊपर नीचे हो रहा था और अंकित की हरकत देखकर सुगंधा की बुर पानी छोड़ रही थी,,,,,सुगंधा पेशाब कर चुकी थी लेकिन अपने बेटे को देख रही थी उसके लंड की लंबाई और मोटाई उसे पूरी तरह से मदहोश कर रही थी,,,, वह कभी सोची भी नहीं थी कि किसी का लंड इतना मोटा और लंबा हो सकता है,,,, सुगंधा अपने बेटे के लंड की आकार की आकर्षण में पूरी तरह से खो चुकी थी,,,, थोड़ी ही देर में अंकित भी पेशाब कर चुका था,,, लेकिन अचानक ही उसके मन में एक युक्ति सुझने लगीवह तुरंत अपने लंड को पकड़ कर अपनी मां के एकदम करीब पहुंच गया और अपने लंड के सुपाड़े को अपनी मां के गाल पर रगड़ने लगा,,, अचानक से अपने बेटे की तरफ से हुई हरकत से सुगंधा एकदम से बावली हो गई यहां पर वह अपने संस्कार नहीं दिखाना चाहती थी वह अपना मजा किरकिरा नहीं करना चाहती थी,,,,इसलिए अपनी बेटी की हरकत पर गहरी सांस लेने लगी और अपनी आंखों को मदहोशी में बंद करने लगी अपनी मां की हालत को देखकर उनकी समझ गया था कि उसकी मां भी पूरी तरह से तैयार है,,, और वह तुरंत अपने लंड को पकड़े हुए ही अपनी मां के ठीक सामने खड़ा हो गया सुगंधा की आंखें बंद थी और अंकित अपने लंड के गरम सुपाड़े को अपनी मां के होठों पर रगड़ना शुरू कर दिया,,,, सुगंधा उत्तेजना से मरी जा रही थी कुछ देर पहले जो होगा खुद सोच रही थी उसका बेटा अपने से ही पहल करके गई हरकत कर रहा था।



अब यह मत कहना कि पापा ने यह भी नहीं किया था तुम्हारे साथ,,,(अपने लंड के सुपाड़े को अपनी मां के लाल होठों पर रगड़ हुआ वह बोलासुगंधा अपने बेटे के कहने का मतलब को समझ चुकी थी और वह भी यही चाहती भी थीइसलिए वह तुरंत अपने होठों को खोलकर अपने बेटे के लंड को अपने मुंह में आने के लिए आमंत्रण दे दी,,, और अपनी मां के ईस हरकत पर,,, अंकितगदगद हो गया और वह धीरे से अपनी कमर को आगे की तरफ ठेल दिया उसकी मां तुरंत अपने बेटे के लंड को पकड़ कर अपने होंठों के बीच भर ली,,,, और कुछ देर तक उसे अपने होठों के बीच रखी रह गई वह इस अद्भुत पल को पूरी तरह से जी लेना चाहती थी। इस एहसास में पूरी तरह से डूब जाना चाहती थी वह काफी उत्साहित और उत्सुक नजर आ रही थी उत्तेजना से वह भर चुकी थीवर्षों के बाद एक मोटा तगड़ा लंड जो कि उसके ही बेटे का था वह उसके मुंह में था और वह धीरे-धीरे उस पर अपनी जीभ घूमाना शुरू कर दी,,, अंकित मदहोश हुआ जा रहा थाअंकित पागल हुआ जा रहा था अपनी कमर पर हाथ रखकर इस तरह से खड़ा था और अपनी मां को देख रहा था अंधेरी रात होने के बावजूद भी उसे सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था। देखते ही देखते उत्तेजना में लिप्त होकर सुगंधा अपने बेटे के लंड को चूसना शुरू कर दी धीरे-धीरे वह उसे अपने अंदर ले रही थी,,,, उसकी सांस फूल रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था वह पेशाब करने की मुद्रा में बैठी हुई थी,,,, देखते देखते धीरे-धीरे अंकित अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था और उसका मोटा तगड़ा लंबा लंड उसकी मां के मुंह के अंदर बाहर हो रहा था। सुगंधा को जितना मजा आ रहा थाउससे ज्यादा मजा अंकित कह रहा था क्योंकि वह इस बात से और ज्यादा उत्तेजित था की उसका लंड उसकी मां चूस रही थी,,,



देखते ही देखते सुगंधा बड़े अच्छे से अपनी बेटी के लैंड को चूस रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई आइसक्रीम का कोन उसके मुंह में घुसा हुआ हो और उसे जीभ से चाट रही थी,,, मां बेटे पूरी तरह से बेशर्म बन चुके थेअंकित तो अपनी मां की जवानी में पूरी तरह से खो गया थालेकिन उसकी मां भी पूरी तरह से बेशर्मी पर उतर आई थी उसे भी समय लगने लगा था कि मजा लेना है तो पूरी तरह से बेशर्म बना ही पड़ेगा,,,, शर्म का घूंघट ओढ़े रहने से कुछ फायदा नहीं है,,,इसलिए वह अभी पूरी तरह से पैसा नहीं बन चुकी थी और उत्तेजना के मारे अपनी चूची को दोनों हाथों से पकड़ कर वह खुद दबा रही थी यह देखकर उनकीअपना हाथ खुद नीचे की तरफ ले जाकर के उसकी चूची को थाम लिया था उसे जोर-जोर से दबा रहा था,,,,सुगंधा की मदहोशी और उसकी लंड चुसाई से अंकित पूरी तरह से मत हो चुका था और अब शिसकारी लेने की बड़ी अंकित की थी।

सससहहह,,,,,आहहहहहहहह,,,ऊमममममम मम्मी तुम कितना मस्त चुस रही हो आहहहहहह तुम्हारा हर एक रूप मुझे पागल कर दे रहा है मैं कभी सोचा नहीं था कि तुम इस तरह से मेरा लंड चूसोगी,,,(, ऐसा कहते हैं अंकित उत्तेजना से भरकर अपना पूरा लंड उसके गले तक ठुंस दिया था,,,,जिसकी वजह से सुगंधा के साथ रखने लगी थी और वह फिर से उसे बाहर खींच लिया था ऐसा हुआ दो-तीन बार किया था हालांकि ऐसे सुगंधा को तकलीफ होती थी लेकिन उसे बहुत मजा आता था हैरानी की बात सुगंधा के लिए यह थी कि उसके बेटे का लंड बड़े आराम से उसके गले के अंदर तक पहुंच जा रहा था,,, और वह यही सोच कर हैरान हो रही थी कि जब उसका बेटा अपना लंड उसकी बुर में डालेगा का तो उसकी क्या हालत होगी,,,,सुगंधा पूरी तरह से अपने बेटे के रंग में रंग गई थी वह पागलों की तरह अपने बेटे के लंड को अपने मुंह में अंदर बाहर ले रही थी,,,,कुछ देर तक यह सिलसिला ऐसा ही चला रहा लेकिन अभी तक अंकित का लंड पानी नहीं फेंका था यह हैरान कर देने वाली बात थी सुगंधा के लिए,,,, इसलिए वह कुछ ज्यादा ही उत्साहित हैक्योंकि वह जानती थी कि जब उसका पति उसकी चुदाई करता था तोबहुत जल्दी पानी फेंक देता था भले ही उतने से ही उसे आनंद आ जाता था लेकिन चुदाई की जो सीमा थी वह बहुत कम थी,,,,



थोड़ी देर तक और चुदाई करने के बाद अंकित सही बर्दाश्त नहीं हुआ और वह अपनी मां की बांह पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठने लगा उसकी मां भी अपने मुंह में से अपने बेटे के लंड को बाहर निकाल कर गहरी सांस लेते हुए उठकर खड़ी हो गई,,,,अंकित मदहोशी तब अपनी मां को देख रहा था दोनों एक दूसरे को देख रहे थे और अंकित तुरंत उसके लाल लाल हो तो को फिर से चूसना शुरू कर दिया इस दौरान वह अपने दोनों हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को पकड़कर जोर-जोर से पहुंचने लगा और अपने लंड को आगे से अपनी मां की बुर पर रखना शुरू कर दिया वह एक तरह से अपनी मां को पूरी तरह से पागल बना रहा था चुदवाने के लिए,,,सुगंधा खुद अपने बेटे के लंड को ले लेना चाहती थी उसका बस चलता तो इस समय अपने बेटे के लंड को पकड़ कर उसे अपनी बुर पर रखकर उसे अपनी पतली गली का रास्ता दिखा देती लेकिन वह अपनी बात से ही मजबूर थी,,,, कुछ देर तक इसी तरह से वह मजा लेकरआना वह जानता था कि आप लोहा गरम हो चुका है ,,,हथौड़ा मारने की आवश्यकता अब पड़ चुकी हैं,,,, अंकितफिर से अपनी मां को अपनी गोद में उठा दिया इस बार सुगंधा बिल्कुल भी नहीं घबराई क्योंकि उसे अपने बेटे की ताकत पर पूरा भरोसा था,,, अंकित अपनी मां को गोद में उठाए हुए ही वह उसे कमरे की तरफ ले जाने लगा,,,सुगंधा के कमरे का दरवाजा खुला हुआ था और वह तुरंत अपनी मां को कमरे में लेकर प्रवेश कर गया लेकिन इस बार कमरे का दरवाजा उसे बंद नहीं किया और अपनी मां को ले जाकर के नर्म बिस्तर पर फिर से पटक दिया,,, सुगंधा की हालत खराब थी उसकी बुर की भी हालत खराब थी उसकी बुर बार-बार पानी छोड़ रही थी अंकित बिस्तर के नीचे खड़ा थाअपने लंड को पकड़ कर हिला रहा था और अपनी मां की दोनों टांगों के बीच किसके गुलाबी छेद को देखकर और भी ज्यादा उत्तेजित हो रहा थाअपने बेटे की हरकत को देखकर वह समझ गई थी कि अब उसका बेटा उसकी बुर में लंड डालने के लिए तैयार है लेकिन फिर से वह अपने बेटे को अपनी बात याद दिलाते हुए बोली।



अंदर मत डालना बाकी जो करना है कर ले,,,,।

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मैं अंदर नहीं डालूंगा लेकिन मेरा पानी निकालना जरूरी है नहीं तो मैं पागल हो जाऊंगा,,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा मुस्कुराने लगे उसे यकीन हो गया था कि उसका बेटा पूरी तरह से मर्द बन चुका है पानी निकलने वाली बात सुनकर उसकी छाती एकदम चोडी हो गई थी,,,,,देखते ही देखते घुटनों के बाल अंकित अपनी मां की दोनों टांगों के बीच आगे बढ़ने लगा और जैसे-जैसे वह आगे बढ़ रहा था उसकी मां अपनी टांगों को खोल रही थी। यह उसकी तरफ से आमंत्रण था,देखते ही देखते वह पूरी तरह से अपनी मां की दोनों टांगों के बीच पहुंच चुका था लेकिन उसकी मां खुद ही अपनी टांगों को घुटनों से मोड़कर उसे खोल चुकी थीअपनी मां का यह रूप देखकर अंकित एकदम गदगद हुआ जा रहा था उसे मालूम था कि उसकी मां चुदवाने के लिए तैयार है बस नाटक कर रही है,,,,,अंकित पूरी तरह से मदहोशी में डूबा हुआ था उसकी आंखों के सामने सिर्फ उसकी मां की गुलाबी फोटो दिखाई दे रही थी और वह एकदम उत्तेजना से लाल हो चुकी थीअंकित अपने मोटे तगड़े लंड को पकड़ा और उसके सुपाड़े को अपनी मां की बुर पर पटकना शुरू कर दिया,,,,,,, जैसे ही उसका सुपाड़ा उसकी बुर पर पड़ा सुगंधा एकदम से सिहर उठी,,,,।

सहहहहह आहहहहहह,,,, यह क्या कर रहा है रे तु,,,,।

अब तुम कुछ मत बोलो तुम बोली थी ना की अंदर मत डालना बाकी सब कुछ कर लेना बस वही कर रहा हूं,,,,।

लेकिन तेरा तो एकदम हथौड़े जैसा है,,,,

अब इसमें मेरी क्या गलती है,,,( और ऐसा कहते हुए वह फिर से सुपाड़े को बुर पर पटक दिया,,,,, वह फिर से सिहर उठी ऐसा अंकीत दो-चार बार और किया तो सुगंधा की बुर से नमकीन पानी की फुहार फूटने लगे जिसे देखकर अंकित और ज्यादा उत्तेजित होने लगासुगंधा की तो हालत एकदम खराब हुई थी वह चाहती थी कि उसका बेटा उसके लंड को उसकी बुर में डाल दे लेकिन अंकित उसे तड़पाना चाहता था इसलिए अपने सुपारी को अपनी मां की गुलाबी क्षेत्र में हल्के से प्रवेश करा कर उसे ऊपर नीचे करके रगड़ रहा था,,,, उसकी गुलाबी लकीर पर पूरी तरह से अपने लंड के सुपाड़े की छाप छोड़ रहा था,,,, वह अपनी मम्मी की तरफ देख कर बोला।

कैसा लग रहा है मम्मी,,,।



(सुगंधा कुछ बोली नहीं उत्तेजना से उसका चेहरा पूरी तरह से लाल हो चुका था और वह अपनी नजर को दूसरी तरफ घुमा दीऔर अंकित फिर से अपनी हरकत के दौरान आने लगा वह बार-बार अपने लंड को उसकी बुर के ऊपर हिस्से में हल्के से डालता और उसे खींचकर ऊपर कि तरफ निकाल लेता,,, ऐसा हुआ बार-बार कर रहा था सुगंधा समझ गई थी कि उसका बेटा उसे तड़पा रहा है,,,,वह पागल हो जा रही थी जिस तरह से उसके लंड का सुपाड़ा उसकी बुर के ऊपरी भाग पर प्रवेश करता था वह पागल हो जाती थीऔर वह तुरंत खींचकर उसे बाहर निकाल लेता था यह उसकी तड़प को एर ज्यादा बढ़ा रहा था सुगंधा अपने मुंह से नहीं बोल सकती थी और अपनी ही बात पर उसे पछतावा हो रहा था। उसका बस चलता तो अपने हाथ से अपने बेटे का लंड पकड़ कर उसे अपनी बुर में डाल दी थी लेकिन अपने कहने पर ही वह पछता रही थी,,,, और अंकित था की हर बार अपनी हरकत को दोहराता और अपनी मां को मदहोश कर देता अब सुगंधा से बर्दाश्त नहीं हो रहा थावह जानती थी कि उसका बेटा सिर्फ नाटक कर रहा है वह भी अपने लंड को उसकी बुर में डालना चाहता है बस उसे तड़पा रहा हैवह जानती थी कि जब इतना कुछ हो गया है तो अब आगे बढ़ने में कोई हर्ज नहीं है इतनी तो बेशर्म बन चुकी है एक बार फिर अपने बेटे के सामने बेशर्म बन जाएगी तो क्या हो जाएगा,,,।

इसलिए आप वहां अपने आप को पूरी तरह से तैयार करके जब उसका बेटा,,,, अपने लंड को उसकी बुर के मुंहाने पर लाता तब वह अपनी कमर एकदम से ऊपर उठा लेती,,, ऐसा हुआ बार-बार अपनी गांड उपर उठाकर अपने बेटे को इशारा दे रही थी,,, अपनी मां की हालत को देखकर अंकित मन ही मन खुश हो रहा थाअब वह अपनी मां को और ज्यादा नहीं तो उठाना चाहता था लेकिन एक बार उसके मुंह से जरूर सुनना चाहता था कि बस कर अब डाल दे इसलिए वह अपने लंड को इस बार थोड़ा सा अंदर तक उसकी बुर की गहराई में उतरा ,,,उसका पूरा सुपाड़ा उसकी गहराई में समा गया था,,,सुगंधा एकदम से मचल उठी पर फिर से अपनी गांड ऊपर की तरफ उठा दे जैसे ही वह अपनी गां ऊपर की तरफ उठाई अंकित तुरंतइस स्थिति में उसकी गांड को दोनों हाथों से पकड़ लिया और अपनी मां की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोला।



बोलो अब क्या करूं मम्मी,,,।

तू सच में बहुत शैतान है और जिद्दी भी है मेरे मुंह से ही सुनना चाहता है ना,,,,।

तो क्या जब तक तुम बोलोगी नहीं तब तक मैं तुम्हारी चुदाई कैसे कर सकता हूं,,,,।

तो डाल दे अपने लंड को मेरी बुर में कर मेरी चुदाई,,,,,,,(इतना कहते हुए वह शर्म से पानी पानी हो गई क्योंकि वह अपनी ही बात से मुखर गई थीअपने बेटे के आगे घुटने टेक दी थी अपने बेटे के लंड की ताकत को देखकर उसकी बुर खुद पानी फेंक रही थी वह अपनी बुर की हालत को देखकरअपने बेटे के आगे झुक गई थी अपनी मां के मुंह से इतना सुनकर अंकित मदहोश हो गया गड़बड़ हो गया पूरी तरह से जोश से भर गया और वह अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से थाम लिया... और फिर अपने लंड को अपनी मां की बुर में अंदर डालने लगा उसे साफ एहसास हो रहा था की उम्र के इस दौड़ में पहुंचने के बावजूद भी उसकी मां की बुर कसी हुई थी,,,, अपनी नानी और सुमन की मां के मुकाबले उसकी मां की बुर वाकई में एकदम कसी हुई थी जिसमें डालने में उसे बहुत मजा आ रहा था। धीरे-धीरे होले होले वह अपने लंड को अपनी मां की बुर की गहराई में डाल रहा था और जैसे-जैसे अंकित का लंड सुगंधा की बुर में प्रवेश कर रहा था वैसे-वैसे सुगंधा के चेहरे का हाव-भाव पूरी तरह से बदलता चला जा रहा था,,,,सुगंधा इस पल को अपने बेटे की सरकार को अपनी आंखों से देखना चाहती थी इसलिए वह फिर से अपने दोनों हाथ की कोनी का सहारा लेकर अपना मुंह ऊपर उठा ली थी और अपनी दोनों टांगों के बीच अपनी नजर को स्थिर कर ली थी।और उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसके बेटे का मोटा तगड़ा लंबा लंड उसकी बुर की गहराई में धीरे-धीरे घुस रहा था,,,, ऐसा लग रहा था कि उसके गुलाबी बिल में कोई अजगर धीरे-धीरे प्रवेश कर रहा हैवह जिस तरह से अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में ले रही थी आश्चर्य से उसकी आंखें फटी की फटी रह गई थी,,,, अपने बेटे की मेहनत देखकर उसे उसके ऊपर गर्व महसूस हो रहा था कि उसका बेटा जरा भी जल्दबाजी नहीं कर रहा था बड़ी आराम से उसकी बुर लेने के लिए तैयारी कर रहा था,,,,।



अंकित की मेहनत रंग ला रही थी लेकिन इस बीच मां बेटे दोनों पसीने से तर-बतर हो चुके थे,,,, मौसम की गर्मी तो ठीक है उसे पर से सुगंधा की जवानी की गर्मी अलग कहर ढाह रही थी,,,,लेकिन फिर भी मां बेटे दोनों को इस गर्मी की बिल्कुल भी परवाह नहीं थी भले ही वह दोनों पसीने से तर-बतर हो चुके थे लेकिन अपनी मंजिल पर पहुंचने के लिए पूरी तैयारी बना लिए थे।अंकित का आधा लंड सुगंधा की बुर में कुछ चुका था लेकिन सुगंधा को ऐसा लग रहा था कि उसकी बुर पूरी तरह से उसके बेटे के लंड से बढ़ चुकी है इसलिए आश्चर्य से उसका मुंह खुला का खुला रह गया था,,,,, वह कभी अपने बेटे को तो कभी उसके लंड को देख रहे थे उसके ऊपर का गुलाबी छेद एकदम से गोल हो चुका था किसी छल्ले नुमा,,, बरसों के बाद उसकी बुर में लंड प्रवेश कर रहा था वह पूरी तरह से मदहोशी में डूबी हुई थी,,,, अंकित को एहसास हो रहा था कि उसकी मां की बुर वाकई में ज्यादा कसी हुई थी इसलिए उसे थोड़ा धैर्य से काम लेना था,,,, इसलिए वह अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से पकड़ेआधा लंड है धीरे-धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया आधे लंड से भी सुगंधा को पूरे लंड का मजा मिल रहा था,,,,उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी उसकी चुचीया उसके हर एक धक्के के साथ लहरा रही थी,,,, सुगंधा पागल हुए जा रही थीवह कभी सोची भी नहीं थी कि उसके जीवन में ऐसा भी पल आएगा कि जब वह अपने हीं बिस्तर पर अपने ही बेटे के साथ चुदवा रही होगी,,,,अंकित मदहोश हुआ जा रहा था अपने आधे लंड से अपनी मां की चुदाई करते हुए वह बोला,,,)

अब कैसा लग रहा है मम्मी,,,,,!

सहहहहहह,,,,ऊममममममम,,,,आहहहहह,,,,(जवाब में उसके मुंह से बस इतना ही निकल रहा था क्योंकि बरसों के बाद उसकी बुर में लंड गया था तो उसे दर्द के साथ-साथ मजा भी आ रहा था दर्द और आनंद का मिला-जुला असर उसके चेहरे पर दिखाई दे रहा था,,, अंकित को अपनी मां के चेहरे का बदलता भाव बहुत अच्छा लग रहा था,,, अंकित से ज्यादा कुछ बोला नहीं क्योंकि पूछने की जरूरत नहीं थी उसकी मां का चेहरा सब कुछ बयां कर रहा था अंकित को मालूम था कि उसकी मां को मजा आ रहा है बरसों बाद औरत का पसंदीदा खिलौना अगर उसे मिल जाए तो उससे ज्यादा खुशी उसे किस बात की होगी,,,, अंकित के पसीने छूट रहे थे वह बराबर मेहनत कर रहा था मां बेटे दोनों पसीने से तरबतर होते हुए भी एक दूसरे को मजा देने से पीछे नहीं हट रहे थे,,,,,, अंकित अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से कस के पकड़ा हुआ था।और उसकी चुदाई कर रहा था।वह अपनी मां के उत्तेजना और दर्द से तमतमाए हुए चेहरे की तरफ देखते हुए बोला,,,)



सच मैं मम्मी यकीन नहीं हो रहा है कि इस उम्र में भी तुम्हारी बुर इतनी कसी हुई है।

ऐसा क्यों लग रहा है तुझे,,,,(मदहोश होते हुए सुगंधा बोली,,,)

पूरा घुस नहीं रहा है,,,।

घुसेगा कैसे तेरा लंड ज्यादा लंबा और मोटा है,,,,,(मदहोशी के आलम में सुगंधा एकदम से खुले शब्दों में अपने बेटे के अंग का नाम लेते हुए बोली)

तो क्या घुस नहीं पाएगा,,,,

मुझे क्या मालूम तू जाने अब तो तो पूरा मर्द बन गया है मुझसे क्यों पूछ रहा है,,,सहहहहहह,,आहहहहह,,,(सुगंधा मस्त होकर अपने बेटे को उकसा रही थी।और अपनी मां की बात सुनकर अंकित जोश में आ रहा था वह आधे लंड से भी अपनी मां की जबरदस्त चुदाई कर रहा था अंकित को अपनी मां के चेहरे पर मस्तीभारी झलक दिखाई दे रही थी वह समझ गया था कि अभी से दर्द नहीं हो रहा है और समय आ गया था पूरी मर्दानगी दिखाने का इसलिए वह अपनी मांकी कमर नहीं बल्कि इस बार उसके दोनों लहराते हुए खरबुजो को पकड़ लिया और फिर कचकचा के धक्का मारा और इस प्रयास में अंकित का पुरा लंड उसकी मां की बुर की गहराई में समा गया,,,लंड की ठोकर सीधे सुगंधा के बच्चेदानी पर लगी थी,,, एकदम से सुगंधा दर्द से बिल बिला उठी,,,,)

ऊईईईईई,, मां,,मर गई रे,,,आहहहहह यह क्या किया रे हरामजादे,,,, तू तो मेरी बुर फाड डालेगा,,,आहहहबह निकाल जल्दी इसे,,, मुझसे रहा नहीं जा रहा है मेरी जान चली जाएगी,,,आहहहहहहह,,,, निकाल मादरचोद,,,,(गुस्से में और दर्द में अचानक से सुगंधा के मुंह से मादरचोद गाली निकल गई लेकिन अंकित को बुरा नहीं लगा बल्कि अपनी मां के मुंह से गाली सुनकर तो वह एकदम से मदहोश हो गया और अपनी मां को मनाने के चक्कर में उसके मुंह से भी निकल गया।)



नखरा मत दिखा मेरी रानी कुछ नहीं हुआ है इतना तो घुसता रहता है,,,,,, अभी तेरे दर्द को मजे में बदल देता हूं,,,,(अंकित भी मस्त होता हुआ अपनी मां से इस तरह से बातें कर रहा था मानों जैसे किसी रंडी से बात कर रहा हो और उसकी बातें सुनकर सुगंध भी हैरान थी,,, अंकित तुरंत अपनी मां के दर्द को कम करने के लिए उसकी चूची को दबाते उसे मुंह में भरकर पीना शुरू कर दिया और उसी तरह से अपना लंड उसकी बुर में घुसाए पड़ा रहा थोड़ी देर में सच मेंउसकी युक्ति काम करने लगी और उसकी मां का दर्द दूर होने लगा उसे मजा आने लगा,,,,,और थोड़ी ही देर में उसके मुंह से सिसकारी की आवाज निकलने लगी,,,, अंकित समझ गया कि अब काम बनने लगा है,,,और वह फिर से अपने लंड को अपनी मां की बुर में से बाहर खींचा और फिर उसे अंदर जड़ दिया लेकिन इस दौरान वह अपनी मां की चूची को मुंह में भरकर पी रहा था,,,, जिससे सुगंधा को दर्द ना हो धीरे-धीरे अंकित अपना कमर हिलाना शुरू कर दिया था सुगंधा भी मस्त होने लगी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वाकई में उसके बेटे का लंबा लंड पूरी तरह से उसकी बुर की गहराई में घुस गया है। कुछ देर तक अंकित उसी तरह से कमर हिलाता रहा,,,, सुगंधा को मजा आने लगा वह मस्त होने लगी,,, अंकित मजा लेते हुए अपनी मां की चुदाई कर रहा था।

धीरे-धीरे उसके धक्के की रफ्तार बढ़ने लगी सुगंधा को और ज्यादा मजा आने लगा,,, वह उसका जोश बढ़ाते हुए बोली।

और जोर से,,, और जोर से चोद मेरे राजा,,,आहहहहह मत कर दिया है रे तूने मुझे,,,आहहहहह जोर-जोर से डाल मेरी बुर में,,,,,

अभी डालता हूं मेरी रानी पर देखना तेरी बुर फट न जाए,,,,।

फट जाए तो फट जाए फाड़ डाल मेरी बर लेकिन जोर-जोर से चोद मुझे बहुत मजा आ रहा है,,,।

तुझे मजा मिले तभी तो तेरी चुदाई कर रहा हूं,,,,।

तु आज पूरा मादरचोद बन गया है,,,

और आज तो पूरी रंडी बन गई है मेरी रंडी अपने बेटे की छिनार,,,आहहहहह,,, तेरी कसी हुई बुर में डालने में मजा आ रहा है।आहहहहहह (ऐसा कहते हुए अंकित जोर-जोर से अपनी मां की चुदाई कर रहा था उसकी मां एकदम मस्त हो रही थीअपने बेटे के मुंह से उसके लिए रंडी और छिनार शब्द सुनकर उसे पर भर के लिए तो अजीब लग रहा था लेकिन जिस तरह से उसकी चुदाई कर रहा था वह इन शब्दों से और ज्यादा मदहोशी का अनुभव कर रही थी. उसे मजा आ रहा था,,,,अंकित आप अपने मुंह में से अपनी मां की चूची को निकाल दिया था और उसकी कमर पकड़ कर जोर-जोर से चुदाई कर रहा था काफी देर से उसका लंड खड़ा था इसलिए उसे लग रहा था कि उसका पानी निकलने वाला है लेकिन सुगंधा का भी यही हाल था वह तीसरी बार झड़ने के कगार पर थी,,,,।



सहहहहह आहहहहहहहह,,,,, मुझे कुछ हो रहा है,,, जोर-जोर से चोद मेरे राजा,,,आहहहहहह तु पूरा मादरचोद बन गया है आज और मुझे अपनी छिनार बना दिया,,,,।

औरत को छिनार बनाकर चएदने में कुछ ज्यादा ही मजा आता है,,,,।

लेकिन तू तो अपनी मां को छिनार बना दिया है,,,,।

बिस्तर पर तुम्हारा यही असली रूप है,,,, देख कितनी मस्त लग रही है तू चुदवाते समय एकदम नंगी होकर,,,।

आहहहहब आगहहहहह मेरा हो रहा है मेरा निकलने वाला है मेरे राजा,,,,।

अपनी मां की जल्दबाजी देखकर अंकित उसे करके अपनी बाहों में झगड़ा लिया उसका भी निकलने वाला था इसी आसन में वह पहली बार अपनी मां की चुदाई करते हुए चढ़ने वाला था वरना वह आसन बदल बदल कर अपनी मां की चुदाई करता लेकिन अभी पूरी रात बाकी थीइसलिए अंकित जोर-जोर से धक्के लगाकर वह भी अपनी मां के साथ झड़ जाना चाहता था और ऐसा ही हुआ दोनों एक साथ झड़ने लगे,,,,, अंकित और उसकी मां दोनों मंजिल पर पहुंच चुके थे जिसकी महीनो से दोनों को तलाश थी।

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बेहद अद्भुत और अविस्मरणीय पल को मां बेटे दोनों एक साथ महसूस कर रहे थे जी रहे थे,, सुगंधा की बुर से मदन रस का फव्वारा फूट पड़ा था,, अंकित भी अपने वीर्य से अपनी मां की गुलाबी बुर को भर दिया था,,, दोनों का बदन हिचकोले खा रहा था अंकित पूरी तरह से अपनी मां को अपनी बाहों में जकड़ा हुआ था और रह रहकर जोर से धक्के लगा दे रहा था,,, सुगंधा की आंखें मदहोशी में बंद थी वह गहरी गहरी सांस ले रही थी,,, अंकित के मोटे तगड़े लंड से अपनी बुर को चुदवा कर सुगंधा तृप्ति के एहसास में डूब रही थी उसकी टांगें पूरी तरह से खुली हुई थी टांगों के बीच में अंकित उसे अपनी बाहों में भरकर चरम सुख के एहसास मैं डूब रहा था और उसे अच्छी तरह से इस बात का भी एहसास हो रहा था कि अपनी नानी और सुमन की मां की चुदाई से भी कहीं ज्यादा आनंद उसे अपनी मां की चुदाई करने में आया था,,,, जब जब सुगंधा को लग रहा था कि उसका बेटा शांत हो चुका है तब तक अंकित जोर से धक्के लगा दे रहा था और सुगंधा पूरी तरह से आश्चर्यचकित थी कि झड़ने के बावजूद भी उसके बेटे का लंड पूरी तरह से खड़ा था और उसकी बुर में घुसा हुआ था।



थोड़ी ही देर में दोनों सामान्य हो गए लेकिन बिस्तर पर दोनों उसी स्थिति में थे,,,,, ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में मां बेटे पूरी तरह से जवानी का मजा लूट रहे थे। दोनों की तेज चलती सांसों की गति सामान्य होने लगी लेकिन अभी भी सुगंधा की बड़ी-बड़ी चूचियां अंकित की चौड़ी छाती के नीचे दबी हुई थी और इसका एहसास अंकित को मदहोश कर रहा थाअंकित अपनी मां के खूबसूरत चेहरे को अपने दोनों हाथों में ले लिया था उसे अपनी मां पर बहुत प्यार आ रहा था क्योंकि उसने उसे अद्भुत सुख दिया था,,, उसे मर्द बनाने में पूरा सहकार दी थी। शर्म के मारे सुगंधा की आंखें अभी भी बंद थी वासना का तूफान गुजर चुका थाऔर एक बार वासना का तूफान गुजर जाने के बाद सुगंधा को हकीकत का एहसास हो रहा था,,, वासना और मदहोशी में जिनकी बाहों में मचल कर वह चुदाई का मजा ले रही थीवासना का तूफान गुजर जाने के बाद वह उसी की बाहों में शर्म से पानी पानी हो रही थी वह अपने बेटे से आंख मिलाने से कतरा रही थी,,,,और अंकित थकी अपनी मां के लाल लाल होठों को बार-बार चुम ले रहा था उसके गाल को चुम ले रहा था उसके माथे को चुम ले रहा था उसे अपनी मां पर बहुत प्यार आ रहा था,,,,लेकिन ईस अभी भी उसका लंड उसकी मां की बुर में समाया हुआ था,,,, जवानी और चुदाई के जोश में वह अपने बेटे के वचन को अपने ऊपर झेल गई थी लेकिन झड़ जाने के बाद उसेअपनी बेटे के वजन का एहसास हो रहा था और वह अपने बेटे के वजन के नीचे कसमसा रही थी लेकिन अंकित था कि अपनी मां के ऊपर से उतरने का नाम ही नहीं ले रहा था।



रात के 2:30 बज रहे थे लेकिन अभी भी दोनों की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी महीनो की मेहनत का यह फल था, जिस पल के लिए वह दोनों महीनो से तड़प रहे थे वह पल उनके जीवन में आ चुका था,,,, अंकित बहुत खुश था उसने अपनी मां की जवानी पर फतह हासिल किया था अंकित की मुस्कान में विजय की आभा दिखाई दे रही थी क्योंकि आज उसने अपनी मां की बुर में भी अपनी जीत का झंडा लहरा दिया थाअपनी मां को संपूर्ण रूप से संतुष्ट करने के बाद उसे अपनी मर्दाना ताकत पर गर्व महसूस हो रहा था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां की जवानी बेलगाम घोड़ी की तरह है जिस पर काबू पाना सबके बस की बात नहीं थी भले ही उसने अपनी नानी की चुदाई कर चुका था उसे संतुष्ट कर चुका था और साथ ही सुमन की मां की भी चुदाई कर चुका था लेकिन एक मर्द होने के नाते उसे अच्छी तरह से ज्ञात था कि उन दोनों औरतों की तुलना में उसकी मां की गदराई जवानी कुछ ज्यादा ही उछाल मारती है। लेकिन अंकित उस पर भी काबू पा चुका था,,,, दोनों के बीच खामोशी छाई हुई थीसुगंधा अपने बेटे के वजन के नीचे कसमसा रही थी,, और उसका मोटा लैंड अभी उसकी बुर के अंदर घुसा हुआ था,,,, लेकिन शर्म के मारे वह कुछ बोल नहीं पा रही थी,,, और अपनी मां का शरमाता हुआ चेहरा देखकर अंकित उसके लाल-लाल होठों पर चुंबन करते हुए बोला।

तुम बहुत खूबसूरत हो,,,,

(ऐसा कहकर फिर से उसके होंठ पर चुंबन किया और बोला)

तुम्हें कुछ ऐहसास हो रहा है,,,(ऐसा कहते हुए और फिर से उसकी कान के करीब चुंबन करने लगा उसके इस चुंबन से सुगंधा फिर से मदहोश होने लगी और बोली)

क्या,,,?

मेरा लंड अभी भी तुम्हारी बुर में घुसा हुआ है,,,



(अपने बेटे के मुंह से यह बात सुनकर वह शर्म से पानी पानी होने लगी उसे एहसास होने लगा कि एक ही रात में वह कितनी बदल चुकी हैकल तक उसका बेटा उसके सामने इस तरह के शब्दों का प्रयोग भी नहीं कर पता था उसकी इतनी इज्जत करता था लेकिन एक ही रात में एक ही चुदाई के बाद वह पूरी तरह से बदल गया है और उसके सामने कुछ भी बेशर्मों की तरह बोल दे रहा हैलेकिन इसमें भी सुगंधा को बुरा नहीं लग रहा था बल्कि अपने बेटे के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ जा रही थी। अपनी बेटी की बातें सुनकरहल्की सी मुस्कान अपने होठों पर लाते हुए लेकिन अपनी आंखों को बंद किए हुए ही वह बोली,,,)

तो बाहर निकाल ले उसे अब उसका काम खत्म हो गया है,,,

इतनी जल्दी खत्म हो गया है अभी तो पूरी रात बाकी है देखो घड़ी में कितना बज रहा है,(दीवार पर टंगी घड़ी की तरफ देखते हुए अंकित बोला तो सुगंधा की भी नजर उसे पर चली गई और जब वह देख की घड़ी में घड़ी बज रहा है तो उसके होश उड़ गए वह एकदम से चोंकते हुए बोली)

हाय दइया यह तो अढी बज रहे हैं,,,।

तो क्यातुम्हारी बुर इतनी मलाई वाली है कि पता ही नहीं चलता कि कब समय गुजर जाता है,,,,(हल्के से अपनी मां की चूची को दबाते हुए बोला अपने बेटे की हरकत से और उसकी बात से सुगंधा फिर से शर्मा के अपनी आंखें बंद कर ली अपनी मां को इस तरह से शर्माता हुआ देखकर वह फिर से बोला,,)

अब क्यों शर्मा रही हो,,,, अब तो खुलकर जवानी का मजा लो बरसों से तुम्हारी बुर सूखी जमीन की तरह पड़ी हुई थी उस पर हल नहीं चला थातुम्हें तो खुश होना चाहिए था कि आज रात तुम्हारी सूखी जमीन को मैं हल चला कर जोत दिया हुं,,,।

अच्छा तो तु किसान बन गया है ना,,,।

किसान भी और तुम्हारा मादरचोद बेटा,,,,।

(अपने बेटे किस बात पर सुगंधा अपनी आंखें खोल दी और अपने बेटे की तरफ देखकर मुस्कुराने लगी और बोली,,,)

सच में तू मादरचोद हो गया है,,,।

और तु मेरी छिनार,,,,।

(अपने लिए अपने बेटे के मुंह से छिनार शब्द का प्रयोग सुनकर सुगंधा की बुर कुल बुलाने लगा रही थी,,, उत्तेजना के मारे फिर से उसकी बुर फुलने पिचकने लग रही थी,,,,उसे अपने बेटे के मुंह से यह सब सुनना अच्छा लग रहा था लेकिन हैरान वह ईस बात से थी कि यह सब वह सीखा कहां,,, इसलिए वह हैरान होते हुए बोली,,)



तु यह सब कहां से सीख गया,,,,

मोहल्ले में बहुत से लोग हैं जो इस तरह की गाली देते रहते हैं। तुम्हें अच्छी नहीं लगी क्या मेरे मुंह से गाली,,,।

मैं इसीलिए तो हैरान हूं कोई और समय होता तो शायद इस तरह की खाली तेरे मुंह से सुनकर तेरे गाल पर थप्पड़ लगा दी होती लेकिन इस समय न जाने क्यों तेरे मुंह से इस तरह की गाली मुझे अच्छी लग रही है।

इस समय मतलब किस समय चुदवाते समय ना,,,,(अपनी मां की आंख में आंख डालते हुए अंकित शरारती अंदाज में बोला और इस बात को सुनकर सुगंधा थोड़ा गुस्सा दिखाने लगी तो अंकित फिर से बोला,,,)

शर्मा क्यों रही हो बोलो ना चुदवाते समय इस तरह की गाली अच्छी लगती है।

तू बहुत शैतान हो गया है मैं तो तुझे बहुत सीधा-साधा समझ रही थी लेकिन तू तो एक नंबर का हरामि है।

मैं भी तुमको सीधी शादी औरत समझ रहा था लेकिन बिस्तर में तुम पूरा रंडी की तरह मजा देती हो।

अच्छा तो मैं रंडी हूं,,,

हां तुम हो,,,(ऐसा कहकर अंकितफिर से अपनी मां के लाल-लाल होठों पर अपनी होठ रखकर उसके होठों का रसपान करने लगा उसे इस बात का डर था कि कहीं इस शब्द से उसकी मां नाराज ना हो जाए लेकिन उसकी होठों पर चुंबन करने वाली युक्तिकाम कर गई थी हो और वह फिर से मदहोश होने लगी थी अपने लिए रंडी शब्द का प्रयोग सुनकर उसके बदन में एक अजीब सी हलचल होने लगती थी जिसके चलते वह अपनी बाहों में अपने बेटे को कस ली और चुंबन में उसका साथ देने लगी अपनी मां की उत्तेजना को देखकरअंकित अपनी मां के होठों से अपने होंठ हटा दिया और उसकी आंखों में देखते हुए फिर से बोला,,)

बिस्तर में सच में तुम एकदम छिनार लगती हो,,,,(और ऐसा कहकर अंकित एक हाथ से अपनी मां की चूची को दबाने लगा अपनी बेटे की हरकत और उसकी बातें उसकी गाली सुनकर सुगंधा उत्तेजना से सिहरने लगीउसकी बुर फिर से पानी छोड़ रही थी और हैरानी की बात यह थी कि अभी भी उसके बेटे का लंड उसकी बुर में घुसा हुआ था और टनटनाया हुआ था। अपने बेटे का जोश बढ़ाते हुए वह बोली,,,)

तो तुझे मैं मां के सिवा सब कुछ लगूंगी रंडी लगूंगी छिनार लगूंगी क्योंकि तेरे सामने टांगें खोल दि हुं ना इसके लिए,,,,।

ओहहह मेरी रानी इसी अदा पर तो मैं पागल हो जाता हूं,,,,,(ऐसा कहने के साथ ही वह इस बार अपनी मां की चूची को मुंह में लेकर पीने लगा सुगंधा अपने बेटे के नीचे कसमसा रही थी लेकिन जिस तरह की वार्तालाप दोनों के बीच हो रही थी उसके चलते सुगंधा के बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी एक बार फिर से उसका मन बहकने लगा था,,,,और अंकित भी फिर से तैयार हो चुका था एक बार फिर से अपनी मां की चुदाई करने के लिएऔर वह अपनी मां की चूचियों को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे पीता हुआ धीरे-धीरे अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया था,,,, सुगंधा की सांसे फिर से गहरी होने लगी। उसे अच्छा लगने लगा था,,,, लेकिन उसका बदन दर्द करने लगा था इसलिए वह बोली ,,)



थोड़ा रुक जा मेरा बदन दर्द करने लगा है,,,।

यह तो बदन दर्द का इलाज है मेरी जान और तुम मुझे रुकने के लिए कह रही हो,,,,अब तो यह घोड़ा अपनी मंजिल पर पहुंचने के बाद ही रुकेगा तुम्हारे मैदान में घोड़ा दौड़ाने में मुझे अच्छा लगता है,,,

तेरा घोड़ा बहुत तेज तर्रार है,,,, मेरे मैदान को खदान कर देगा,,,।

तभी तो मजा आता है मेरी रानी बुर का भोसड़ा बनाने में,,,,।

भोसड़ा मत बना देना नहीं तो दोबारा तुझे मजा नहीं आएगी,,,,

तुम्हारी बुर तो मुझे हर हाल में मजा देगी,,,(ऐसा कहते हुए अंकित अपनी कमर हीलाना शुरू कर दिया था,,,, अंकित का जोश पूरी तरह से परम शिखर पर था उसकी मां की मदहोश कर देने वाली जवानी उसे पागल कर रही थी,,,अंकित अपनी मां के दोनों चूचियों को पड़कर अपनी कमर हिलाता हुआ उसकी चुदाई करना शुरू कर दिया था,,,, और सुगंधा के मुंह से फिर से गरमा गरम शिसकारी की आवाज निकलना शुरू हो गई थी,,,,)

सहहहहब आहहहहहहहह,,,,आहहहहहहह,,,, मेरे राजा तुने फिर से मुझे गर्म कर दिया है,,,,आहहहहह,,,

मैं तेरा राजा हूं ना मेरी रानी,,,

हा रे तु मेरा राजा बेटा है,,,,सरहहहह

और तु मेरी रानी मा है रंडी मां छिनार मा है,,,(अंकित पूरी तरह से जोश में हर एक शब्द के साथ रह रहकर जोर-जोर से धक्के लगा रहा था और हर धक्के के साथ सुगंधा के मुंह से आहहहह आहहहह निकल रहा था।सुगंधा अपने बेटे के मुंह से रंडी छिनार शब्द सुनकर और ज्यादा जोश में आ जाती थी और नीचे से अपनी गांड ऊपर की तरफ उछाल देती थी अपने बेटे का साथ देती थी। अंकित को इसमें बहुत मजा आता है वह इतना जोश में आ गया था कि वह अपनी बाकी दोनों चूचियों कोघोड़ियों की लगाम की तरह पकड़ कर जोर-जोर से अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था सुगंधा को अपने बेटे की इस हरकत से थोड़ा दर्द तो होता था लेकिन उसका जोश देखकर पूरी तरह से मस्त हो जाती थी,,,, एक बार फिर से दोनों बिस्तर पर पागल हुए जा रहे थे,,,, सुगंधा हैरान थी अपने बेटे की ताकत देखकर,, उसका मुसल जैसा लंड उसके परखच्चे उड़ा रहा था,,,, वह इस बात से भी हैरान थी की अभी कुछ देर पहले ही उसके बेटे का लंड पानी फेंक दिया था लेकिन बुर में से लंड निकाले बिना ही एक बार फिर से उसका लंड उसे चोदने के लिए तैयार हो गया था और उसे चोद रहा था,,,,।



आहहहह आहहहहह आईईईई ,,,,,,ऊईईई मा बड़ा जाल मेरे तो बिल्कुल भी रहम नहीं करता है अपनी मां को चोदने में,,,।

अगर तुम्हें चोदने में रहम करने लगूंगा तो बुरचोदी कैसे बनोगी,,,।

क्या कहा तूने,,,

बुरचोदी,,,,,

हाय दईया,,,,, ऐसी ऐसी गंदी गाली कहां से सीख रहा है तु ,,,, भोसड़ी वाले,,,(सुगंधा की जोश में अपने बेटे को गाली देने लगी तो जवाब में उसका बेटा जोर से अपने लंड को उसकी बुर में पेलता हुआ बोला,,)

भोसड़ा छोड़ी बोल रहा हूं कि मोहल्ले में गाली देने वाले कम नहीं है उन्ही से सीख रहा हूं,,,।

तो क्या मादरचोद सारी गलियां मुझे ही देगा क्या,,,?

बहुत दिन से सोच रहा था कि इस तरह की गाली में किसी दो दूसरों को तो दे नहीं सकता था,,, क्योंकि मैं एक टीचर का लड़का हूंऔर एक शिक्षिका का लड़का होने की वजह से थोड़ा बहुत तो संस्कार होना चाहिए जो किसी को गाली ना दे इज्जत से बात करें,,,।

तो मादरचोद अपनी मां को इस तरह की गाली दे रहा है,,,।

और कोई है भी नहीं जिसे मैं गाली दे सकूंऔर सच कहूं तो तुम्हें चोदते समय इस तरह की गाली अपने आप मेरे मुंह से निकल रही है,,, और सच मानोइस तरह की गली तुम्हें देते हुए इतना जोश बढ़ जा रहा है कि मन कर रहा है कि तुम्हारी बुर में मैं खुद घुस जाऊं,



तो घुस जा ना मादरचोद,,,, तुझे रोका किसने है,,,,।

अगर घुस गया तो तेरी बर फट जाएगी छिनार,,,

फट जाने दे भोसड़ी वाले मेरे राजा,,,।

अगर फट गई तो मेरी भोसड़ा चोदी रानी कोई देखेगा तो यही कहेगा कि ना जाने कितने लोगों का लेती है,,,

तो क्या हुआ उसके सामने भी अपनी टांगें खोल दूंगी वह भी मेरी ले लेगा,,,।

तब तो तू पक्का छिनार बन जाएगी,,,।

छीनार तो मैं बन ही गई हूं,,,मेरे से बड़ी छिनार कौन होगी जो अपने ही बेटे के सामने टांगें खोलकर उसके लंड को अपनी बुर में ले रही है,,,,।



सच कह रही है साली रंडी तु, तेरे से बड़ी छिनार कौन होगी,,,(इतना कहने के साथ हीअंकित अपने लंड को अपनी मां की करने से बाहर निकाल लिया यह देखकर सुगंधा उसे सवालिया नजरों से देखने लगी तो अपनी मां की आंखों में उठ रहे सवाल को देखकर अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,)

देख क्या रही है भोसड़ा चोदी चल पलट जा घोड़ी बन जा,,,, तुझे चोदने के लिए घोड़ा तैयार है,,, आज तुझे घोड़ी बनाकर चोदुंगा पीछे से तेरी लूंगा,,,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा की हालत खराब हो रही थी,,,उसे मालूम था कि उसका बेटा उसे बहुत मचा देने वाला है पीछे से अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेने वाली बात से वह काफी उत्साहित थी क्योंकि शादीशुदा जिंदगी में उसके पति ने कभी भी उसे घोड़ी बनाकर नहीं छोड़ा था और उसकी ख्वाहिश थी कि उसका पति उसे पीछे से चोदे वहपीछे से भी मजा लेना चाहती थी लेकिन उसके पति ने उसके साथ ऐसा नहीं किया था लेकिन आज अपने बेटे के मुंह से घोड़ी बनाकर चोदूंगा इस शब्द को सुनकर ही उसका रोम रोमप्रफुल्लित होने लगा था वह मचलने लगी थी और अपने बेटे की बात मानते हुए वह तुरंत अपने आप से ही पलट गई थी और घोड़ी बन गई थी अपने हाथ की कोहनी को नरम गद्दे पर टिकाकर और अपनी भारी भरकम गांड को हवा में लहराते हुए वह पीछे की तरफ देख रही थी,,अपने बेटे की हरकत को देख रही थी वह देखना चाहती थी कि उसका बेटा क्या करता है और अंकित तुरंत अपनी मां के पिछवाड़े अपने आप को जमा लिया था और उसकी भारी भरकम गांड पर दो-तीन चपत लगाते हुए बोला,,,)



आज मजा आएगा तुझे चोदने में यही गांड मटका मटका कर पूरे दिन घर में इधर-उधर घूम कर मेरी हालत खराब करती थी मैं दिन रात सोचता था कि कब मुझे मौका मिलेगा तेरी पीछे से लेने का,,,,आहहहह और आज देखो दिन आ गया बहुत तड़पाती थी तू अपनी इसी गांड से रंडी,,,,तेरे बारे में सोच सोच करना जाने कितनी बार मुझे हाथ से हिला कर काम चलाना पड़ा था,,,,,(अपने बेटे की यह बात सुनकर सुगंधा को और भी ज्यादा मजा आने लगा थाउसे पूरा यकीन हो गया था कि उसका बेटा सिर्फ भोला भाला बनने का नाटक करता था दूसरे लड़कों की तरह वह भी उसे चोदना चाहता था और दूसरे लड़कों की तरह वहवभी उसके नाम की मुठ मारता था,,,,,अपने बेटे की बात सुनकर वह अभी जोश में आ गई थी और अपनी बड़ी-बड़ी गांड को हवा में दाएं बाएं लहराते हुए बोली,,)

तो कर ले अपनी ख्वाहिश पूरी मेरे राजा तेरे सामने तेरे हुस्न की रानी की नंगी गांड है डाल दे अपने लंड को मेरी बुर में फाड़ दे मेरी बुर को पीछे से मैं भी तो देखु कितना दम है तेरे लंड में,,,,।

दम की बात करती है मादरचोद,,, रंडी छिनार अभी दिखाता हूं तुझे कि मेरे लंड में कितना दम है,,,(और इतना कहने के साथ ही ढेर सारा थुक अपने सुपाड़े पर लगाकर वह अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को थाम लियाऔर फिर धीरे-धीरे उसे अपनी मां की गुलाबी खेत में डालना शुरू कर दिया देखते ही देखते अंकित का लंड सुगंधा की बुर में पूरी तरह से समा गया था और फिर वह अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से कस के पकड़ कर बोला,,,)



ले रंडी अब संभाल,,,(और इतना कहने के साथ ही बहुत जोरदार धक्का मारा सुगंधा पूरी तरह से तैयार नहीं थी इसलिए एकदम से अपने बेटे के इस प्रहार से एकदम से आगे की तरफ लुढ़क गई और अंकित का लंड उसकी बुर से बाहर निकल गया,,, यह देखकर अंकित फिर से उसकी कमर पकड़ कर अपनी तरफ खींचते हुए बोला,,)

क्या करती है छिनार इतना भी नहीं संभाल पाती और मेरे लंड का दम देखेगी,,, अभी तेरी बुर का भोसड़ा बनाता हूं भोसड़ा चोदी,,,,(और इतना कहने के साथ ही फिर से अंकित अपनी मां की बुर में पूरा लंड डाल दिया और उसे दे दना दन चोदना शुरू कर दिया अंकित का लंड को ज्यादा ही मोटा थाजिसकी वजह से सुगंधा को अपनी बुर की अंदरूनी दीवारों पर अपने बेटे का लंड रगड़ता हुआ अंदर बाहर होता हुआ महसूस हो रहा था जिससे उसका मजा दुगना होता जा रहा था,,,,सुगंधा एकदम मदहोश हो चुकी थी वह पागल हो जा रही थी पीछे से चुदवाने में वाकई में उसे बहुत मजा आ रहा था उसके हर एक धक्के के साथ उसकी पपैया जैसी बड़ी-बड़ी चूचियां हवा में लहरा रही थी,,,जिसे अंकित अपना दोनों हाथ आगे बढ़ाकर उसे थाम लिया और उसे दबाता हुआ अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया।

पूरे कमरे में सुगंधा की सिसकारी की आवाज गूंज रही थीवह पागल हुए जा रही थी वह कभी सोची नहीं थी की चुदाई में इतना ज्यादा मजा आता है अपने पति के साथ जो सुख ली थी वह उसके लिए अब बहुत ही कम लग रहा था वाकई में इस तरह से वह चुदाई का मजा ली ही नहीं थी,,,, हर धक्के के साथ सुगंधा को स्वर्ग का आनंद मिल रहा था आज के हाथों सेसारे संस्कार मर्यादा को एक तरफ रख दी थी आज वह पूरी तरह से औरत बन चुकी थी और औरत भी ऐसी की पूरी रंडी बन चुकी थी अपने बेटे से वह खुलकर चुदाई का मजा लूट रही थीअंकित भी कुछ काम नहीं था अंकित भी पूरा मादरचोद बन गया था एक ही रात में अपनी मां को रंडी बनाकर चोद रहा था ऐसा बिल्कुल भी नहीं लग रहा था कि वह अपनी मां की चुदाई कर रहा है बिल्कुल भी शर्म और हया उसकी आंखों में नहीं थी,,,उसकी आंखों के सामने केवल एक नंगी औरत थी और उसके गुलाबी बुर थी जिसमें वह पूरी तरह से डूबता चला जा रहा था,,,,



मां बेटे दोनों की सांसों की गति तेज होने लगी थी अंकित की हथेलियां का कसाव उसकी मां की चूचियों पर बढ़ता जा रहा था औरसुगंधा के सांस उखड़ती हुई महसूस हो रही थी क्योंकि वह फिर से अपने चरम सुख के करीब पहुंच रही थी वह इतनी जोश में और उत्तेजना में थी कि बार-बार पीछे की तरफ अपनी बड़ी-बड़ी गांड ठेल दे रही थी इस तरह से वह अपने बेटे के धक्के का जवाब दे रही थी और अंकित अपनी मां की इस हर हरकत से पूरी तरह से जोश से भर चुका था और धक्के पर धक्के लगा रहा था और अगले ही पल वह एकदम से अपने लंड में से वीर्य का फव्वाराअपनी मां की बुर के अंदर मारना शुरू कर दिया और सुगंधा को अपने बच्चेदानी पर अपने बेटे के लंड की धार गिरती हुई महसूस होने लगी और वह भी एकदम से भलभलाकर झड़ने लगी,,,,, दोनों मदहोशी के सागर में डुबकी लगा रहे थे। कुछ देर तक अंकित इस तरह से अपनी मां की पीठ पर पसरा रह गया और फिर धीरे से अपने लंड को अपनी मां की बुर में से बाहर निकाल लियासुगंधा भी अपने बेटे का लंड अपनी बुर में से निकल जाने के बाद वह भी धीरे से बिस्तर पर बैठ गई और गहरी गहरी सांस लेने लगी,,,, अंकित अपनी मां को देखकर मुस्कुरा रहा था और अपने लंड को पकड़ कर हिला रहा था यह देखकर सुगंधा बोली,,,)

बस कर हरामजादे तू तो पूरा सांड है,,,,।

तेरी जैसी गदराई गांड वाली औरत को चोदने के लिए सांड की ही जरूरत है।मेरी छिनार मम्मी,,,।

चल अच्छा हट घड़ी में देख कितना बज रहा है 3:10 हो चुका है,,, (इतना कहकर वह बिस्तर से नीचे उतर गई यह देखकर अंकित बोला)

तो क्या हो गया सुबह कौन सा जल्दी उठना है स्कूल तो जाना नहीं है,,,,।

फिर भी एक डेढ़ घंटे में सुबह हो जाएगी और अभी तक हम दोनों सोए नहीं है,,,।

जो सोवत है वह खोवत है,,,, इतना तो सुनी होना अगर सो गई होती तो इतना मजा कैसे ले पाती,,,,,।



चल अब रहने दे मैं तो एकदम थक गई हूं तूने मुझे थका दिया है,,,(इतना कहते हुए वह नंगी ही दरवाजे की तरफ जाने लगी तो अंकित फिर से बोला,,,)

अब कहां जा रही हो,,,।

मुतने,,,,,,।(इतना कहकर वह कमरे से बाहर निकल गई क्योंकि दरवाजा बंद था ही नहीं,,, अपनी मां के मुंह से मुतने शब्द सुनकर अंकित का लंड फिर से सर उठाने लगा और वह भी अपनी मां के पीछे-पीछे जाता हुआ बोला,,,)

बाप रे तुम कितना मुतती हो,,,,,।

(इतना कहते हुए वह भी करके पीछे पहुंच गया जहां पर उसकी मां खड़ी होकर ठंडी हवा ले रही थी,,,, घर के पीछे वाली जगह थोड़ा खुली हुई थी जहां परठंडी हवा बहती थी और जिस तरह से जवानी के जोश में दोनों गर्मी से पसीने से तरबतर हुए थे यहां पर आकर सुगंधा को थोड़ा आराम मिल रहा था,,, अंकित भी अपनी मां के पीछे आगे से अपनी बाहों में भर लिया दोनों अभी भी पूरी तरह से नंगे थे इसलिए अंकित का जो हल्का सा लंड ढीला पड़ गया था वह जैसे ही उसकी मां की गांड से सटा उसमें फिर से जान आने लगी और वह फिर से लहराने लगा अपने बेटे की हरकत को देखकर सुगंधा बोली,,,)

अभी भी तेरा मन नहीं भरा है क्या,,,,

(अपनी मां की बातें सुनकर अपनी हथेली को उसके गुलाबी बुर पर रखते हुए बोला,,)

दुनिया में कोई ऐसा है जिसका मन इससे भर जाए,,,,।



चल अब रहने दे मुझे पेशाब करने दे अब मैं एकदम थक गई हूं,,,(इतना कहकर वह नीचे बैठने लगी तो उसकी भारी भरकम गांड पीछे की तरफ निकल गई जो सीधा अंकित के लंड से टकरा गईऔर अंकित के लंड का सुपाड़ा उसकी बुर की दरार से रगड़ते हुए आगे की तरफ निकल गया,,,, सुगंधा इस स्थिति में पेशाब करने के लिए बैठ गई और अंकित जोर से भरता हुआ सीधा अपनी मां के आगे आ गया और अपने लंड को लहराता हुआ उसके चेहरे पर रगड़ने लगा सुगंधा जानती थी कि उसे क्या करना है क्योंकि वह भी फिर से गर्म होने लगे थे लेकिन उसकी बुर से पेशाब के धार निकल रही थी जिससे बचने के लिएअंकित अपनी टांग को थोड़ा सा फैला दिया था उसकी टांगों के बीच से उसकी मां की पेशाब की धार उसकी टांगों के बीच से गिर रही थी सुगंधा अपने होंठों को खोल दीऔर अंकित अपने लंड को जो उसके वीर्य और उसकी मां के मदन रस से सना हुआ था उसे सीधा अपनी मां के होंठों के बीच डाल दिया और सुगंधा उसे चूसना शुरू कर दी,,, एक तरफ सुगंधा मुत रही थीदूसरी तरफ अपने बेटे के लंड को मुंह में लेकर चूस रही थी यह मां बेटे दोनों के लिए बेहद उत्तेजना से भर देने वाला पल था,,,,जब तक सुगंधा पेशाब करती रही तब तक अंकित अपने लंड को उसके मुंह में डालकर चुस्वाता रहा,,, और जैसे ही उसकी बुर से सिटी की आवाज आना बंद हो गई अंकित समझ करके उसकी मां पेशाब कर चुकी है इसलिए वह धीरे से अपने लंड को उसके मुंह में से बाहर निकाला और उसकी बांह पकड़ कर उसे खड़ी करने लगा,,, सुगंधा समझ गई थी कि अब उसका बेटा उसके साथ क्या करने वाला है।

हैरानी वाली बात यह थी की सुगंधा पूरी तरह से थक चुकी थी लेकिन उसके बेटे की हरकत ने उसे फिर से गर्म कर दिया थालेकिन अब क्या करना है कैसे करना है यह सब कुछ उसने अपने बेटे पर छोड़ दी थी और अंकित उसे खड़ी करके उसे अपनी बाहों में लेकर उसे लाल-लाल होठों का रसपान करते हुए धीरे से उसकी एकदम उठाया औरउसे अपनी कमर पर लपेट लिया और अपने हाथ को नीचे की तरफ ले जाकर अपने लंड कै सुपाड़े को उसकी बुर की गली का रास्ता दिखा दियाऔर फिर अपने दोनों हाथों को अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर रखकर उसे थाम कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया और ईस उसके लाल नोटों का रस चूसता रहा,,, सुगंधा हैरान थी अपने बेटे की कामलीला को देखकर उसकी कलाबाजीया उसे पूरी तरह से पागल बना रही थी,,, वह कभी सोची भी नहीं थी कि उसका बेटा कामक्रीड़ा में इतना निपुण होगा जिसे वह बुद्धू समझती थी वह पूरा खिलाड़ी निकल गया था,,सुगंधा को मजा आ रहा था वह पूरी तरह से अपने बेटे की बाहों में थी उसकी हरकतों का मजा ले रही थी अपने बेटे की मजबूत हथेलियों को अपनी भारी भरकम नितंबों पर महसूस करके वह गदगद हुए जा रही थीअंकित जोर-जोर से धक्के लगा रहा था लेकिन उसकी गांड को थामे हुए था वरना वह गिर जाती,,,, और फिर 20 मिनट बाद मां बेटे फिर से एक साथ झड़ने लगे,,,,।

दोनों एक दूसरे से अलग हुए और अंकित भी पेशाब करने लगा सुगंधा पानी से अपनी बुर धोने लगीपूरी तरह से थक चुकी थी और सीधा बिस्तर पर आकर लेट गई बिना कपड़े पहने एकदम नंगी और अंकित भी अपनी मां को बाहों में भरे हुए वह भी उसके साथ लेट गयासुबह जब सुगंधा की नींद खुली तो घड़ी में 9:00 बज रहे थे वह एकदम से उठकर खड़ी हो गई थी अंकित अभी भी सोया हुआ था लेकिन नींद में भी उसका लंड खड़ा था अपने बेटे के लंड को देखकर सुगंधा को न जाने क्या सोच और वह सहज रूप से अपने बेटे के लंड को पकड़ लीइतने में अंकित की नींद खुल गई और वह अपनी मां की हरकत को देखकर फिर से उत्तेजित हो गया और उसका हाथ पकड़ कर अपने ऊपर खींच लियाइस समय उसकी मां उसके ऊपर थी और वह अपनी मां के रसपान फिर से करना शुरू कर दिया और उसकी नंगी गांड को जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया उसकी मां उसकी खेत से आजाद होना चाहती थी लेकिन वह ऐसा होने नहीं दे रहा था।

अंकित बहुत देर हो गई है 9:00 बज गया है घर के सारे काम बाकी हैं,,,।

कहीं जाना भी तो नहीं है इसलिए बिल्कुल भी चिंता मत करो,,,।

Sugandha maja leti huyi



नहीं मैं थक गई हूं मुझे जाने दे,,,,।

नहीं जाने दूंगा तुमने फिर से मुझे गर्म कर दि हो,,,

रात भर तो पेला है तूने मुझे,,,,

एक बार और पेलवा लो,,,,(इतना कहते हैं कोई अंकित अपना हाथ नीचे की तरफ लाकर अपने लंड को पकड़ लिया और उसे नीचे से अपनी मां की बुर से रगड़ना शुरू कर दिया जो कि उसके ऊपर बैठी हुई थी अपने बेटे की हरकत से वह भी गर्म होने लगी और खुद-ब-खुद उसकी टांगें खुल गई और धीरे से वह अपने बेटे के खड़े लंड को अपनी बुर में ले ली,,,,भले ही वह अपने पति के साथ ऐसी हरकत कभी नहीं की थी लेकिन एक औरत होने के नाते उसे मालूम था कि आप उसे क्या करना है वह भी अपने बेटे की जीत के आगे विवश होकर उसके कंधे को दोनों हाथों से पकड़ कर उसके लंड के ऊपर उठक बैठक करने लगी जिसमें सुगंधा को मजा आने लगा,,, और वह भी मजा लेते हुए सब कुछ भूल गई और अपने बेटे के लंड पर अपनी गांड को जोर-जोर से पटकने लगी। और तब तक पटकती रही जब तक दोनों का पानी न निकल गया।
 
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