Incest मुझे प्यार करो,,, - Page 134 - SexBaba
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Incest मुझे प्यार करो,,,

अंकित अब बिंदु के बारे में ही सोच रहा था बिंदु के चरित्र को लेकर उसके मन में बहुत सी बातें चल रही थी,,, इसमें कोई शक नहीं था कि बिंदु काफी अमीर औरत थी उसकी खुद की स्कूल चल रही थी जिसमें उसकी मां भी टीचर के तौर पर कार्यरत थी। लेकिन अंकित ने पहली मुलाकात में उसके पास में कंडोम देखा था और दूसरी बार किताब की दुकान में उसके हाथ में अश्लील किताब थी जैसा कि वह पढ़ चुका था यही सब के बारे में सोचकर उसका दिमाग घूम रहा था‌ ‌ अंकित अब तक बहुत सी औरतों के संपर्क में आ चुका था और इतना तो उसे समझ में आ ही गया था कि औरत का खानदान कैसा भी हो अमीर हो गरीब हो या ऊंचे घराने से ताल्लुक हो पर सब की जरूरत एक ही है संभोग जब तक औरत संभोग से तृप्त नहीं होती तब तक वह इधर-उधर भटकती रहती है और बिंदु भी एक अमीर घर आने की औरत होने के बावजूद भी अंकित को ऐसा ही लग रहा था कि वह अंदर से प्यासी है।



और जब एक औरत अंदर से प्यासी होती है तो अंकित की जरूरत वहां पर अपने आप ही बनने लगती है और जिस तरह से जाने अनजाने में उसके साथ दो-दो मुलाकात हो चुकी थी अंकित को पूरा विश्वास था कि उन दोनों के बीच जरूर कुछ होने वाला है इस बात की खुशी अंकित के चेहरे पर साफ दिखाई देती थी,,,, खाना खाने के बाद अंकित बाहर टहलने नहीं गया था बल्कि अपने कमरे में लेट कर बिंदु के बारे में सोच रहा था। उसका खूबसूरत बदन बदन से उठती परफ्यूम की मादक खुशबू,, ब्लाउज में के नुस्खे दमदार कबूतर और कई हुई साड़ी में उसके नितम्बो का उठाव और घेराव इन सबको याद करके अंकित उत्तेजित हुआ जा रहा था,,,, और बिंदु के साथ हम बिस्तर होने का सपना देखने लगा था वैसे उसका सपना कुछ ज्यादा ही औकात के बाहर निकल गया था क्योंकि बिंदु हैसियत में बहुत बड़ी थी अंकित सामान्य घर का लड़का था और बिंदु ऊंचे घराने की औरत थी,,, किसी से भी दोनों की बीच की तुलना की जाती तो लोग यही कहते हैं कि दोनों में कोई तालमेल नहीं है कहां राजा भोज तो कहां गंगू तेली लेकिन अंकित यह सपना देख सकता था क्योंकि वह औरतों की रग रग से बाकी था वह जानता था की औरतों को क्या चाहिए और जिस तरह से बिंदु से उसकी मुलाकात हो रही थी और बिंदु के मन की प्यास को वह समझ रहा था उसे समझते देर नहीं लगी थी कि अगर दोनों में मुलाकातें इसी तरह से होती रही तो बहुत ही जल्द वह भी उसके नीचे आ जाएगी। अंकित यही सब सो कर उत्तेजित हो रहा था कि तभी सुगंधा घर का काम खत्म करके उसके कमरे में मुस्कुराते हुए दाखिल हुई औरबोली।

क्या बात है आज टहलने के लिए नहीं गया,,,।





क्या करूं आज तुम्हारी याद बहुत तड़पा रही है,,,।

अच्छा बरखुरदार मेरी याद तुम्हें तडपा रही है अरे बेवकूफ याद उनकी तड़पती हो जो दूर रहते हैं मैं तो तेरे पास ही हूं,,,,।

कहां पास हो 2 मीटर की दूरी पर खड़ी और कहती हो कि पास हुं,,,।

(अंकित की बात सुनकर सुगंध मुस्कुराने लगी और दो कदम आगे बढ़कर बोली)

ले अब आ गई तेरे पास,,,।

(मौका देखकर अंकित एकदम से हाथ आगे बढ़ाया और सुगंध का हाथ पकड़ कर उसे एकदम से अपने बिस्तर पर अपने ऊपर खींच लिया और बोला,,)

अब आई हो तुम मेरे पास,,,,।

बहुत शैतान है तू,,,

तुम्हारी जैसी खूबसूरत हसीना हो तो शैतान बनना ही पड़ता है,,,।

आज क्यों ईतना रोमांटिक हो रहा है,,,।



रोमांटिक तुम्हें हमेशा हो जाता हूं लेकिन आज तुम्हारी गांड देखकर कुछ ज्यादा है नशा छा रहा है,,, (एकदम से अपनी दोनों हथेलियां को अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर रखकर उसे जोर-जोर से दबाते हुए अंकित बोला वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था अंकित अपनी बिस्तर पर पीठ के बल लेटा हुआ था और उसके ऊपर उसकी मान लेती हुई थी दोनों टांगों को अंकित खोलकर उसे अपने दोनों कामों के बीच समय हुआ था जिससे उसका खड़ा लंड साड़ी के ऊपर से उसकी बुर पर ठोकर मार रहा था,,, और सुगंधा भी इस ठोकर और रगड़ से मदहोश हुए जा रही थी सुगंधा से रहा नहीं गया और अपनी गुलाबी होठों को अपने बेटे के होठों पर रखकर चुंबन करने लगी,,,, अंकित भी अपनी मां का साथ देने लगा दोनों मत होश हो जा रहे थे अंकित अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड को साड़ी के ऊपर से ही जोर-जोर से दबा रहा था मसल रहा था उसकी चिकनी कमर को दोनों हाथों में लेकर के जोर से दबा दे रहा था वह अपनी उत्तेजना को किसी भी तरह से शांत करने की कोशिश कर रहा था और सुगंधा थी कि अपनी बुर को साड़ी के ऊपर से ही अपने बेटे के पेंट में बने तंबू पर रगड़ रही थी,,, दोनों मदहोशी के चरम पर पहुंच चुके थे देखते ही देखते अंकित अपनी मां की साड़ी को ऊपर की तरफ उठने लगा यह देखकर चुंबन को तोड़ते हुए सुगंधा बोली।



सब यही कर लेगा तो छत पर क्या करेगा,,,

आज तो यही करने का मन है,,,, (और इतना कहने के साथ ही सूरज अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठा दिया लेकिन उसकी पेंटी अभी भी दोनों के बीच बाधा बनी हुई थी लेकिन इस बीच सुगंधा अपने दोनों हाथों को नीचे की तरफ ले जाकर के अपने बेटे के पेंट का बटन को खोलने लगी और देखते ही देखते वह उसके मोटे तगड़े लंड को बाहर निकाल ली थी,,,, दोनों फिर से चुंबन में जुट गए थे दोनों लगातार एक दूसरे के होठों को चूसते हुए आनंद की पराकाष्ठा का अनुभव कर रहे थे अंकित अपनी मां की पेंटिं को अपने हाथों से पदकर नीचे की तरफ खींचने लगा और देखते ही देखते अंकित अपनी मां की पेंटी को उसके घुटनों के नीचे तक लेकरआ गया,,, जिसे सुगंधा अपने पैरों के सहारे से अपने पैर से बाहर निकाल दी और अपने पैर को झांकते हुए अपनी पैंटी को बिस्तर के नीचे गिरा दी,,,,, मां बेटे दोनों मदहोशी के चरम पर पहुंच चुके थे दोनों पागल हो चुके थे और फिर अगले ही पर अंकित कुछ करता है इससे पहले ही सुगंध अपने हाथ को नीचे की तरफ ले गई और अपने बेटे के लंड को पकड़ कर अपनी गुलाबी बुर का द्वार दिखाने लगी,,, अपनी मां की बुर की गरमाहट को महसूस करके अंकित के लंड का सुपाड़ा फूलने लगा और गुलाबी गली में घूमने के लिए मचलने लगा,,,, अंकीत नीचे से अपनी कमर को ऊपर उठकर अपने लंड को अपनी मां की बुर में डालने की कोशिश कर रहा था लेकिन बुर की चिकनाहट पाकर लंड बार-बार फिसल जा रहा था,,, सुगंधा भी मचल रही थी अपने अंदर लेने के लिए इसलिए वह तुरंत अपने हाथ को फिर से नीचे की तरफ लाई और अपने बेटे के लंड को पकड़ कर उसे अपनी बर के छेद पर रख दी और अपनी भारी भरकम गांड का दबाव उस पर बढ़ाने लगी।





देखते ही देखते सुगंधा के प्रयास पर अंकित का मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर की गहराई में घुसना शुरू कर दिया और देखते ही देखते उसका पूरा लंड गुलाबी गली के अंदर खो गया,,, अंकित नीचे से धक्के लगाता इससे पहले ही सुगंधा ऊपर से उछलना शुरू कर दी उसे बहुत मजा आ रहा था उसकी भारी भरकम चूंचियां अभी भी ब्लाउज के अंदर कैद थी और अंकित ब्लाउज के ऊपर से उसकी चूचियों को जोर-जोर से दबा रहा था नीचे से अंकित अब बिल्कुल भी प्रयास नहीं कर रहा था क्योंकि सुगंधा उसका भी काम कर रही थी। अपनी गांड को अपने बेटे के लंड पर पटकते हुए सुगंधा अपने बेटे के होंठ पर से अपने होंठ को हटा ली और गहरी गहरी सांस लेते हुए अपनी काम क्रीड़ा को जारी रख रही लेकिन उसके उछलने की वजह से ब्लाउज में कैद उसकी दोनों चूचियां कैद में पड़े कबूतर की तरह फड़फड़ा रहे थे इन्हें आजाद करना जरूरी था इसलिए अंकित बिल्कुल भी विचार किए बिना अपना दोनों हाथ आगे बढ़कर अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलने लगा,,, उसका मोटा तगड़ा लंड सटा सट बुर में अंदर बाहर हो रहा था,,, सुगंधा अपने हर प्रयास पर आनंदित हो रही थी,,, देखते ही देखते अंकित अपनी मां के ब्लाउज के बटन को खोल दिया और उसकी दोनों चूचियां आजाद हो गई,,, अंकित की उत्तेजना यह देखकर और ज्यादा बढ़ गई कि उसकी मां ब्लाउज के अंदर ब्रा नहीं पहनी थी,,, खुशी के मारे अंकित अपने दोनों हाथों में अपनी मां की दोनों चूचियों को पकड़ कर दशहरी आम की तरह जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया,,,, सुगंधा जोर-जोर से अपनी गांड पटक रही थी जिसकी वजह से बिस्तर से चरर मरर चरर मरर की आवाज आ रही थी। यह मादक ध्वनि इस बात का सबूत था की सुगंधा इस खेल में कितनी माहिर हो चुकी थी।



उत्तेजना बढ़ने के साथ-साथ अंकित नीचे से प्रयास करना शुरू कर दिया अपनी मां की हरकत से उसे मजा तो आ रहा था लेकिन जब तक वह जोर-जोर से खुद से धक्का नहीं लगता था तब तक चुदाई का असली सुख उसे मिलता नहीं था और ना ही उसकी मां को इसलिए कुछ देर तक किसी तरह से प्रयास करने के बाद अंकित अपनी मां को कस के अपनी बाहों में भर लिया उसकी दोनों चूचियां अंकित की चौड़ी छाती से एकदम से दबाने लगी और उसकी भारी भरकम गांड हवा में लहराती हुई ऊपर नीचे हो रही थी,,,,, जिस तरह से अंकित ने अपनी मां को बाहों में कसा हुआ था इसे देखकर सुगंधा को एहसास तो हो गया था कि उसका बेटा कुछ अलग करने वाला है,,, और उसके सोचने के साथ ही अंकित एकदम से अपनी मां को बाहों में भरे हुए ही और अपने लंड को उसकी बुर में डाले हुए ही आसान बदल दिया अगले ही पल कब सुगंधा नीचे आ गई और अंकित उसके ऊपर आ गया खुद सुगंधा को पता नहीं चला,, अपने बेटे की हरकत की वजह से सुगंध आश्चर्य से उसे देख रही थी,,, अपनी मां के चेहरे पर बदलते हाव-भाव को देखकर अंकित समझ गया था कि उसकी मां के मन में क्या चल रहा है इसलिए वह बिना कुछ बोले मुस्कुराते हुए अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया उसके हर एक झटके के साथ सुगंधा को स्वर्ग का सुख प्राप्त हो रहा था,,, सुगंधा अपनी दोनों टांगों को अपने बेटे की कमर से लपेटे हुए थी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अपनी कैद से अपने बेटे को आजाद करना ना चाहती हो,,, अंकित रुकने का नाम नहीं ले रहा था बिंदु की गर्म जवानी ने जो उसके जिस्म में उत्तेजना की आग भड़काई थी। उस आग को अंकित अपनी मां की जवानी से बुझाने की कोशिश कर रहा था इसलिए उसके धक्के बड़े ही जबरदस्त थे जिसका ऐसा सुगंधा को भी पानी पानी कर दे रहा था,,, अंकित तब तक धक्के लगाता रहा जब तक की उसकी मां के साथ-साथ उसका भी पानी नहीं निकल गया झड़ने के बाद वह अपनी मां को बाहों में लिए एकदम से देर हो गया और गहरी गहरी सांस लेने लगा यह सिलसिला छत पर भी जारी रहा।



2 दिन बीत चुके थे,,, अंकित ने मनगढ़ंत कहानी सुना कर सुमन के मन में जो एक नयापन का एहसास जगाया था उसके बारे में सोच सोच कर सुमन की हालत खराब हो जाती थी सुमन के मन में ढेर सारी बातें चल रही थी एक तरफ वह अपनी मां की हरकत से परेशान भी हो रही थी तो अपनी मां की हरकत को लेकर वह उत्तेजना भी महसूस कर रही थी एक औरत होने उनके नाते उसे रह रहकर इस बात का एहसास हो रहा था कि उसकी मां को भी अपनी तरह से जिंदगी जीने का पूरा हक है जैसा कि वह खुद विवाहित ना होने के बावजूद भी मजे ले रही थी उसकी मां को भी पूरा हक था विवाहित जीवन जीने के बावजूद भी अगर अपने पति से संतुष्टि नहीं मिल रही है तो किसी गैर मर्द का सहारा लेकर अपनी जिस की भूख को शांत करने का। इसलिए अपनी मां की हरकत पर धीरे-धीरे उसे शर्मिंदगी का एहसास नहीं होने लगा और वह इस बात से काफी उत्साहित थी कि अगर वाकई में अंकित जो बोल रहा है कि यह कहीं बिस्तर पर वह और उसकी मां अगर एक साथ मजे ले रही हो तो कितना खूबसूरत नजारा बन जाएगा इस बारे में सोचकर ना जाने कितनी बार उसकी बुर गीली लिए हो चुकी थी,, अपनी मां की उपस्थिति में किसी गैर मर्द के साथ संभोग करने में कैसा एहसास होता है। और उसके साथ खुद उसकी मां भी चुदवाए तो कैसा एहसास होता है इस बारे में सोच सोच कर वाकई में उसकी हालत खराब हो रही थी। ना चाहते हुए भी उसके मन में इस बारे में ख्याल आने लगता था वह कल्पना करने लगती थी कि वाकई में अगर अंकित की बात सच हो जाए तो एक ही बिस्तर पर मां बेटी कैसी नज़र आएगी।



इस कल्पना से वह कभी प्रभावित हुए जा रही थी। अब उसके मन में भी यह बात घर कर गई थी कि उसे भी इस तरह का मजा ले लेना चाहिए,,,,, घर में अब जब भी वह अपनी मम्मी को देखी थी तो एकदम से उसकी आंखों के सामने ऐसा नजर आने लगता था कि जैसे उसकी मां बिना कपड़ों के घर में घूम रही है,,, बार-बार उसकी आंखों के सामने वही दृश्य नजर आता था जब वह अंकित से चुदवा रही थी अभी तक वह अपनी मां के बारे में कभी भी गंदे ख्याल अपने मन में नहीं लाई थी और ना ही कभी वह सोची थी कि उसकी मां इस तरह की हरकत करेगी लेकिन अब सब कुछ इसकी आंखों के सामने था। बार-बार अपनी मां की तरफ देखकर वह कल्पना में उसके चेहरे पर बदलते हाव-भाव को देखतई थी और अपने मन में सोचती थी कि इस उम्र में मां को एक जवान लड़की का मोटा तगड़ा लंबा लंड मिल रहा है मां कितनी खुश नजर आ रही है,,, इस बात से उसे इनकार बिल्कुल भी नहीं था कि उसके पापा से उसकी मां बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हो पाती थी क्योंकि उसके पापा थोड़े उम्र दराज हो चुके थे और पेट बाहर निकला हुआ था लगता ही नहीं था कि उनके बदन में उत्तेजना महसूस होती होगी। पहले सुमन घर पर देर में आती थी लेकिन जब से अपनी मां को अंकित के साथ देखी थी तब से वह रोज घर पर एक जल्दी पहुंच जाती थी ताकि वह अपनी मां को फिर से रंगे हाथ पकड़ सके और खेल में शामिल हो सके एक अद्भुत अनुभव के लिए,,,।



धीरे-धीरे स्कूल खुलने का दिन नजदीक आ रहा था,,, तृप्ति कभी भी घर पर आ सकती थी ऐसा कोई निश्चित नहीं था कि आज आएगी कल आएगी स्कूल खुलने से पहले वहां जरूर आ जाएगी इस बात की उम्मीद मां बेटे दोनों को थी और इसी के चलते वह दोनों जितना हो सकता था उतना खुलकर मजा ले लेना चाहते थे जिसके चलते वह लोग घर के अंदर मुख्य द्वार को बंद करके बिना कपड़ों के ही इधर-उधर घूमते थे क्योंकि वह दोनों जानते थे कि इस तरह का सुख तृप्ति की मौजूदगी में मिलने वाला नहीं है,,,,।

रविवार का दिन था चाय नाश्ता करने के बाद सुबह के 10:00 बजे ही अंकित घर से निकल गया था बाहर घूमने के लिए, स्कूल बंद होने की वजह से सुगंधा भी घर पर आराम कर रही थी धीरे-धीरे अंकित बाजार पहुंच गया,,, गर्मी का दिन था इसलिए वहां एक ठेले पर से बर्फ का गोला खरीद लिया और उसका रस चूसते हुए आगे बढ़ रहा था कि तभी पीछे से कार का होरन सुनाई दिया और वह एकदम से घबराकर पीछे देखने लगा,,,, कार चलाने वाली बिंदु थी,, बिंदु को देखकर उसे राहत महसूस हुई लेकिन जिस तरह से वह घबराया था यह देखकर बिंदु जोर-जोर से हंस रही थी,,,। उसे हंसता हुआ देखकर बर्फ का गोला चुसता हुआ अंकित कार के पास आया और विंडो की खिड़की खुली हुई देखकर उसे पर हाथ की कोहनी रखकर मुस्कुराते हुए बोला।

क्या आंटी आप तो मुझे एकदम से डरा दी,,,।

तुम सच में डर गए मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि तुम इतना घबरा जाओगे सिर्फ होरन सुनकर,,,।



अरे मुझे क्या मालूम कि ठीक मेरे पीछे कोई कर आ जाएगी बल्कि सड़क तो पूरी खुली हुई है इसीलिए तो मैं डर गया,,,,।

चलो कोई बात नहीं लेकिन यहां कहां घूम रहे हो,,,।

कुछ नहीं बस ऐसे ही टहलने आया था,,,।

तुम्हारे पास समय है,,,,?

बिल्कुल आज तो समय ही समय है,,,(अंकित जानबूझकर बिंदु को अपना समय देना चाहता था क्योंकि वह जानता था कि अगर औरत को ज्यादा समय दिया जाए तो जल्द ही औरत उसके साथ हम बिस्तर होने के लिए तैयार हो जाती है,,, और ईसी लालच की वजह से वह बिंदु को इनकार नहीं कर पाया,,,,,, अंकित की बात सुनकर वह मुस्कुराते हुए अपना हाथ आगे बढ़ाकर कर का दरवाजा खोल दी दरवाजा खोलते ही अंकित कार में जाकर बैठ गया यह उसका दूसरा मौका था जब वह कार में बैठ रहा था,,,, कार में बैठते ही वह खुद ही कर का दरवाजा बंद करते हुए बोला,,)

वैसे जाना कहां है,,,,?

मेरे फार्म हाउस पर,,,

फार्म हाउस पर,,,!(आश्चर्य से बिंदु की तरफ देखते हुए अंकित बोला)

वह पीछे फूलों का गमला देख रहे हो,,,

(इतना सुनते ही अंकित पीछे नजर घुमा कर देखा तो पिछली सीट पर दो-तीन गमले रखे हुए थे और बहुत ही खूबसूरत फूल खिले हुए थे अंकित कुछ बोलता है इससे पहले ही वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली)



उसे फार्म हाउस पर ले जाना है वहीं रखना है,,,।

आपका फॉर्म हाउस भी है,,,?

हां,,,(कार का एक्सीलेटर देकर कर को सड़क पर भागते हुए वह बोली,,,) बनकर तैयार हो गया है वही सजावट के लिए ले जाना है वैसे तो वहां पर और भी ज्यादा गमले हैं लेकिन यह मेरी पसंद के हैं इसलिए मैं इसे खुद ही ले जा रही हूं..

कितनी दूर है फार्म हाउस,,,,,?

बस 20 25 किलोमीटर की दूरी पर है वहां पर चलो खुद ही देख लोग बहुत खूबसूरत लगता है चारों तरफ हरे-भरे खेत और बीच में फार्म हाउस क्या नजारा देखने को मिलता है,,,, तुम्हें कोई दिक्कत तो नहीं है,,,।

नहीं मुझे कोई दिक्कत नहीं है मैं भी आपका फॉर्म हाउस देख लूंगा,,,,,।

(कार सड़क पर भागती चली जा रही थी,,, अंकित के मन में बार-बार यही ख्याल आ रहा था कि बिंदु के पास में कंडोम का पैकेट और अश्लील किताब इन दोनों का मतलब साफ था कि बिंदु प्यासी औरत थी अगर सबको सही हुआ तो आज बिंदु की जवानी का रस उसे चने को मिलेगा इस बात की खुशी से ही उसके पेंट में हरकत होने लगी थी,,,, बिंदु के मन में भी अजीब से ख्याल आ रहे थे वह आज एक जवान लड़के को अपने साथ अपने फार्म हाउस पर ले जा रही थी जहां पर उन दोनों के सिवा और कोई नहीं था पिछली मुलाकात में उसने अंकित की नजरों का सामना की थी जो उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों पर टिकी हुई थी इसका मतलब साफ था कि अंकित उसकी तरफ आकर्षित था इस बात का अहसास होते ही बिंदु के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी और वह अपने मन में सोचने लगी की उसने तो देख भी लिया था अश्लील किताब के साथ इतना तो उसे समझ में आ जाना चाहिए कि जब एक औरत अश्लील किताब पढती है तो उसके मन में क्या चल रहा होता है।



बिंदु और अंकित दोनों अपने-अपने तरीके से एक दूसरे के बारे में विचार कर रहे थे एक दूसरे के चरित्र का आकलन कर रहे थे,,,, दोनों एक दूसरे के प्रति प्रभावित थे आकर्षित थे दोनों के मन में एक ही ख्याल आ रहा था कि फार्म हाउस पर क्या होगा? वैसे तो अंकित के विचार एकदम साफ थे अगर मौका मिलेगा तो वह जरूर बिंदु की चुदाई करेगा लेकिन बिंदु स्पष्ट नहीं थी, तभी इधर-उधर की बात करते हुए अंकित की नजर आगे रखे हुए कैमरे पर जाती है और वह हाथ आगे बढ़कर कैमरा उठा लेता है और इधर-उधर घूम कर देखने लगता है यह देखकर बिंदु मुस्कुराते हुए बोली,,,)

ऑटोमेटिक है कैनन कंपनी का,,,।

हां देख तो रहा हूं बहुत खूबसूरत लग रहा है,,,।

इसकी खासियत के बारे में जानते हो,,,?

नहीं तो मैं आज पहली बार तो कैमरा हाथ में ले रहा हूं तो कमरे की खासियत के बारे में कैसे पता चलेगा,,,

मैं बताती हूं इसकी खासियत यह है कि इस कमरे से फोटो खींचे और तुरंत फोटो तैयार,,,,।

मतलब मैं समझा नहीं,,, ।

मतलब की अगर अपने फोटो खिंचवाने जाते हैं तो फोटो कब मिलती है,,,।

दो-तीन दिन बाद,,,, (बिंदु की तरफ देखते हुए अंकित बोला उसकी बात सुनकर मुस्कुराते हुए बिंदु जवाब देते हुए बोली)



लेकिन इसमें फोटो खींचे तो तुरंत फोटो बाहर आती हैं,,,।

क्या,,,? (एकदम हैरान होते हुए अंकित बोला)

तुमने ठीक सुना फोटो खींचते ही फोटो तुरंत बाहर आती है।

आप सच कह रही हो,,,?

बिल्कुल सच अभी फार्म हाउस पर चलना वही तुम्हारी फोटो खींचकर तुम्हें दिखाती हूं,,,।

(इस बात से अंकित बहुत खुश हो रहा था उसे हैरानी भी इस बात से थी कि क्या वाकई में तुरंत फोटो खींचकर तुरंत फोटो निकल जाता है यह तकनीक उसे देखनी थी अपनी आंखों से वह कैमरे को बार-बार अपने हाथों से लेकर इधर-उधर देख रहा था और विंडो से बाहर देखते हुए फोटो खींचने की कलाबाजी कर रहा था। उसकी मासूमियत देखकर बिंदु को बहुत अच्छा लग रहा था बिंदु बार-बार मुस्कुरा कर उसकी तरफ देख रही थी लेकिन अंकित जब भी उसकी तरफ देखा है तो उसकी नजर उसकी चूचियों की बीच की खाई की तरफ चली जा रही थी,,,, वह जिस तरह से बैठी हुई थी उसकी मोटी मोटी जांघों के बारे में अंकित कल्पना करके मस्त हुआ जा रहा था। तकरीबन 1 घंटे के बाद कर मुख्य सड़क से उतारकर कच्ची सड़क की तरफ जाने लगी थी वाकई में नजारा बेहद खूबसूरत था दोनों तरफ हरे-भरे खेत बीच में से कच्ची सड़क तकरीबन तीन-चार किलोमीटर अंदर की तरफ आने पर सामने ही फार्म हाउस दिखाई देने लगा अंकित तो देखकर हैरानी रह गया था वाकई में बहुत खूबसूरत करता है ऐसा लग रहा था कि जैसे महल हो यह देखकर अंकित अपने मन की शंका दूर करते हुए बोला,,,)

यही सामने है,,,?



हां यही अपना है देखो कितना खूबसूरत नजारा है ना चारों तरफ खेत ही खेत,,,,।

सच में बहुत खूबसूरत नजारा है,,,,,,।

(गेट पर पहुंचते ही कर खड़ी हो गई गेट बंद था,,, फार्म हाउस की रखवाली के लिए बिंदु ने चौकीदार रखा हुआ था,,, जो कर की होरन की आवाज सुनकर एकदम से दौड़ा चला है और गेट खोलने लगा गेट खोलने के साथ ही वह सलाम करते हुए अपना फर्ज निभाया और कर जैसे ही गेट के अंदर प्रवेश की वह वापस गेट बंद कर दिया,,,,, कर खड़ी करके बिंदु और अंकित दोनों कर से बाहर आ गए अभी भी अंकित के हाथ में वह कैमरा था बिंदु मुस्कुराते हुए आगे आगे चलने लगी और पीछे-पीछे अंकित,, चलते हुए उसकी कसी हुई साड़ी में उसकी गांड कुछ ज्यादा ही मटक रही थी जिसे देखकर अंकित मस्त हो रहा था सीढ़ियां चढ़कर अंकित और बिंदु दोनों ऊपर आ गए वाकई में फार्म हाउस काफी आलीशान था सब कुछ बड़े सलीके से सजाया हुआ था और रखा हुआ था यह देखकर अंकित खुश होता हुआ बोला,,,)

ऐसा लग रहा है कि जैसे मैं किसी महल में आ गया हूं मैं कोई सपना तो नहीं देख रहा हूं ना,,,,।

बिल्कुल भी नहीं है सपना नहीं है हकीकत है आओ मैं तुम्हें अपना कमरा दिखाती हूं,,,(इतना क्या करो साड़ी के पल्लू को संभालते हुए अपने कमरे की तरफ जाने लगी और पीछे-पीछे अंकित भी जाने लगा और जैसे ही बिंदु अपने कमरे में प्रवेश की अंदर की चकाचौंध बाहर से ही अंकित को नजर आने लगी थी अंकित आश्चर्य से देखते हुए कमरे में प्रवेश किया वाकई में कैमरा बेहद खूबसूरत ऐसा लग रहा था जैसे वह होटल का कमरा हो इस तरह से तो फाइव स्टार होटल का भी कैमरा नहीं होता वैसे तो अंकित कभी फाइव स्टार होटल में गया नहीं था लेकिन इतना तो उसे मालूम ही था कि कैमरा कैसा होना चाहिए और यह कमरे की सजावट तो उसके सोच के बिल्कुल विरुद्ध थी, वह कभी सपने भी नहीं सोचा था कि इस तरह का भी कमरा हो सकता है,,, अंकित बिना कुछ बोले इधर से उधर घूम घूम कर पूरा कमरा देख रहा था कमरे के अंदर ही अटैच बाथरूम था ताकि कहीं बाहर जाना ना पड़े,,, बिल्कुल उसी होटल की तरह जिस होटल में वह और उसकी मां रुके हुए थे,,,,, दोनों तरफ खिड़कियां थी जिस पर कीमती परदे लगे हुए थे जैसे ही बिंदु ने पर्दों को अपने हाथ से हटाई बाहर की रोशनी कमरे में फैल गई और सब कुछ जैसे एकदम से चमकने लगा हो क्योंकि सब कुछ नया था बेड नया था अलमारी नहीं थी लैंप नया था सब कुछ नया था सजावट का हर एक समान नया था क्योंकि अभी यहां पर रहने नहीं आए थे,,,, खिड़की पर खड़े होकर बाहर का नजारा देखा तो देखा ही रह गया बाहर हरे भरे खेत नजर आ रहे थे दूर-दूर तक खेत ही खेत थे,,, हरियाली होने की वजह से, ठंडी ठंडी हवा कमरे में फैल गई थी,,,, मुस्कुराते हुए सुगंधा नरम-नरम बिस्तर पर बैठ गई उसकी भारी भरकम गांड के वजन की वजह से नरम नरम गद्दा एकदम से धंसने लगा इस पर अंकित की नजर चली गई थी और वह अपने मन में ही सोचने लगा था कि वाकई में जवानी पूरी गदरा गई है,,, अंकित बिंदु की तरफ देखकर बोला ,,,।



यहां पर रहने कब आओगे,,,?

हमेशा के लिए नहीं लेकिन जब कभी शहर की जिंदगी से थोड़ा मन उबने लगेगा तो कुछ दिनों के लिए यहां परआ जाएंगे,,,।

ओहह मतलब की कुछ दिनों के लिए ही रहने के लिए इतना खर्च की हो बाप रे मुझे तो लगा था कि हमेशा के लिए यहां आ जाओगी,,,।

नहीं ऐसा कोई इरादा नहीं है रोज स्कूल भी तो जाना है कामकाज तो सब शहर में ही है,,,,, अच्छा तुम बैठो मैं आती हूं,,,,।(इतना कहकर वह बिस्तर से उठकर खड़ी हुई थी कि तभी अंकित ने पूछ लिया)

कहां जा रही हो,,,,?

(इतना सुनकर वह मुस्कुराती तीन-चार कदम पर ही बाथरूम का दरवाजा था वह बिना कुछ बोले दरवाजे के पास पहुंची और बाथरूम का दरवाजा पकड़कर खोल दे यह देखकर अंकित समझ गया और कुछ बोला नहीं वह शर्म के मारे दुसरी तरफ नजर घुमा लिया,,,, अंकित को शरमाता हुआ देखकर वह मुस्कुरा कर बाथरूम में चली गई और दरवाजा बंद कर दी उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी,,,।

Sugandha
 
बिंदु बाथरूम के अंदर जा चुकी थी और ठीक बाथरूम के बाहर अंकित बिस्तर पर बैठा हुआ था,,,,, दरवाजा बंद करने की आवाज एकदम साफ सुनाई दी थी अंकित का दिल जोरो से धड़क रहा था उसे इस बात की उम्मीद थी कि बिंदु के साथ जरूर कुछ ना कुछ करने को मिलेगा लेकिन फिर उसके मन में यह सवाल घूमने लगा कि अगर जो कुछ वह सोच रहा है ऐसा बिल्कुल भी नहीं हुआ तो उसका सपना सपना ही रह जाएगा,,, इस दौरान वह अपने मन में सोचने लगा कि भले ही अगर वह बिंदु की चुदाई नहीं कर पाया अगर सिर्फ उसकी नंगी जवानी को देखने भर मिल जाए फिर भी बात बन जाए ऐसा लगेगा कि उसने बिंदु को पा लिया और यही सोच कर वह धीरे से बिस्तर से उठकर खड़ा हो गया,,, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था वह चोरी छुपे बिंदु की नंगी जवानी को देखना चाहता था,,,।



बाथरूम में झांकने का दरवाजे के के होल के सिवा और कोई रास्ता नहीं था इसलिए वह दबे पांव बाथरूम के दरवाजे की तरफ आगे बढ़ने लगा और अगले ही पलवा बाथरूम के दरवाजे के पास पहुंचकर की हॉल में से अंदर की तरफ देखने की कोशिश करने लगा उसकी किस्मत अच्छी थी कि बाथरूम के अंदर ट्यूब लाइट जल रही थी जिसकी सफेद रोशनी में सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था लेकिन अभी कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,, लेकिन धीरे-धीरे चित्र स्पष्ट होने लगा बिंदु का पिछवाड़ा उसे दिखाई देने लगा जो कि कई हुई साड़ी में कहर ढा रही थी वह आईने में अपने आप को देख रही थी,,, इतना तो साफ था कि वह बाथरूम के अंदर मेकअप करने नहीं आई थी वह आई तो थी पेशाब करने लेकिन आईने को देखकर अपने आप को निहार रही थी और वह कोई गीत गुनगुना रही थी,,,, अंकित की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,, उसने आज तक जिस किसी के साथ भी संभोग करने का ख्वाब देखा था वह ख्वाब उसका पूरा हुआ था और यही ख्वाब वह बिंदु के लिए भी सोच रहा था लेकिन उसके मन में इस बात की सकती कि अगर बिंदु उसका सहयोग नहीं की तो भले ही वह उसके साथ संभोग नहीं कर पाएगा लेकिन उसकी नंगी जवानी को अपनी आंखों से देख कर थोड़ा बहुत संतुष्ट तो हो पाएगा,,। इसीलिए वह अपनी नजरों को की होल से बिल्कुल भी हटा नहीं रहा था,,, यह जगह पूरी तरह से शांति थी दूर-दूर तक ना तो कोई घर था और ना ही कोई सड़क थी इसीलिए किसी भी प्रकार का शोर सराव यहां बिल्कुल भी नहीं था इसलिए छोटी सी भी आहट एकदम साफ सुनाई देती थी इसीलिए अंकित भी कोई गलती नहीं करना चाहता था वह नहीं चाहता था कि बिंदु को इस बात का एहसास हो कि दरवाजे के बाहर अंकित खड़ा होकर उसकी जवानी को देख रहा है।



ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में सबकुछ साफ दिखाई दे रहा था,,, गीत गुनगुनाते हुए बिंदु अपनी साड़ी को दोनों हाथों से पकड़ ली और ऊपर की तरफ उठाने लगी यह देखकर अंकित की आंखों की चमक बढ़ने लगी बड़े घराने की होने के साथ-साथ बिंदु खूबसूरती का खजाना थी उसका गोरा बदन कुछ ज्यादा ही मखमली और चमकीला था इसलिए वह देखना चाहता था कि बिंदु की गांड किस कदर खूबसूरत है वह जानता था कि आज बिंदु की नंगी जवानी खूबसूरती की सारी मिसाल को एक तरफ रख देगी,,, इस बात से अनजान की बाथरूम की की हाल से अंकित उसकी जवानी को देखने की कोशिश कर रहा है बिंदु अपने ही धुन में अपनी साड़ी को दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर की तरफ उठाना शुरू कर दी थी और देखते ही देखते साड़ी घुटनों तक आ गई थी,,,, मोटी मोटी मांसल पिंडलियां देखकर ही अंकित की पेंट में हरकत होना शुरू हो गया था वह इतनी गोरी थी कि उसकी पिंडलियां हल्का गुलाबी रंग लिए हुए नजर आ रही थी जिसे देखकर अंकित की आंखों की चमक बढ़ने लगी धीरे-धीरे साड़ी ऊपर की तरफ उठ रही थी मोटी मोटी जांघों के दर्शन होना शुरू हो गए थे अंकित बिंदु की मोटी जांघों को देखकर अपने मन में यही सोच रहा था कि अगर इन्हें हल्का सा छुना भर हो तो भी एकदम से लाल हो जाए,,,, बिंदु की नंगी मोटी जांघों को देखकर अंकीत के मुंह में पानी आ रहा था। अंकित से रहा नहीं जा रहा था देखते ही देखते बिंदु अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी थी कमर तक साड़ी उठते ही उसकी भारी भरकम मदहोश कर देने वाली गांड एकदम से नजर आने लगी,,,,।



बिंदु ने जालीदार पैंटी पहनी हुई थी जो की पीले रंग की थी गोरी गोरी गांड पर पीला रंग एकदम से कहर ढा रहा था,,,, अंकित की सांसे ऊपर नीचे होने लगी,, अंकित समझ गया था कि इसकी पेटी भी काफी महंगी है,,, इसी तरह की पेंटिं कर खरीद कर अपनी मां को गिफ्ट करना चाहता था,, वैसे तो अब इसकी कोई जरूरत नहीं थी क्योंकि वह अपनी मां को हर हाल में देख चुका था और उसका मजा ले चुका था लेकिन फिर भी अपनी मां को वह इस तरह की जालीदार पैंट में देखना चाहता था पहले भी वह इस तरह की पेंटिंग अपनी मां को खरीद कर दे चुका था लेकिन जो पेंटी बिंदु ने पहन रखी थी उसे पेंटि की बात ही कुछ और थी,,,, बिंदु इस बात से अनजान थी कि दरवाजे के बाहर कोई खड़ा होकर उसकी जवानी को देख रहा है वह इस बात से नीचे थी इसलिए धीरे से अपनी पेंटिं को दोनों हाथों से पकड़ कर नीचे की तरफ सरकाने लगी,,, देखते ही देखते पेंटी धीरे-धीरे नीचे की तरफ आ रही थी और बिंदु की नंगी जवानी उजागर होती चली जा रही थी,,,, घुटनों तक पेंटि सरकाने के बाद उसकी कसी हुई गांड देखकर अंकित को इस बात का एहसास हो रहा था की उम्र का इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा था जबकि बिंदु सुगंधा से तीन-चार साल बड़ी थी,,,, अपनी आंखों के सामने कसी हुई गांड देखकर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था और लंड लार टपका रहा था,,,,। इस समय अगर दरवाजा खुला होता तो शायद बाथरूम में घुसने की हिम्मत अंकित कर सकता था लेकिन दरवाजा बंद था इसलिए वह सिर्फ देख कर ही अपने मन को संतुष्ट करने में लगा था।



देखते देखते बिंदु बैठ गई और पेशाब करने लगी दो-तीन सेकंड के बाद से ही उसकी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज बाथरूम का दरवाजा चीरते हुए अंकित के कानों में पहुंचने लगी और यह अवाज ईतनी मधुर और मादकता से भरी हुई थी कि अंकित के लंड को पूरी तरह से अपनी औकात में खड़ा होने में बिल्कुल भी समय नहीं लगा,,, माहौल पूरी तरह से शांत था ऐसे में उसकी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज कुछ ज्यादा ही शोर मचा रही थी इस बात का एहसास शायद बिंदु को हो रहा था और वह पेशाब करते हुए इधर-उधर देख रही थी जबकि वह जानती थी कि वह बाथरूम के अंदर है लेकिन इस बात से भी वह इनकार नहीं कर सकती थी कि उसकी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज कुछ ज्यादा ही तेज शोर मचा रही थी। और उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि जिस तरह से उसकी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज शोर मचा रही थी यह बाहर बैठे अंकित के कानों में जरूर पहुंच रही होगी इस बात का अहसास होते ही वह शर्म से पानी पानी होने लगे लेकिन,, इस बात को सोचकर उसके तन-बदन में मदहोशी छाने लगी कि अगर सच में बाहर बैठा अंकित उसकी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज सुन रहा होगा तो वह क्या सोच रहा होगा वह तो अपने मन में कल्पना करने लगा होगा कि एक खूबसूरत औरत बैठकर पेशाब करते हुए कैसी दिखाई देती है,, इस बात का ख्याल मन में आते ही बिंदु के तन बदन में मदहोशी का रस घुलने लगा आंखों में चमक बढ़ने लगी उसे एहसास होने लगा कि वह अपने फार्म हाउस पर एक जवान लड़के के साथ अकेली है। और उस लड़के ने उसे अश्लील किताब के साथ देख लिया था और एक औरत को अश्लील किताब के साथ देखने पर एक जवान लड़का उसके बारे में क्या सोचता होगा,,,, यह ख्याल मन में आते ही बिंदु की बुर उत्तेजना के मारे फुलने पीचकने लगी,,,



थोड़ी ही देर में इस तरह की मदहोशी भरे ख्यालों के बीच बिंदु पेशाब कर चुकी थी और खड़ी होकर अपने कपड़ों को व्यवस्थित कर रही थी अब अंकित का वाहन बैठकर इस नजारे को देखना उचित नहीं था क्योंकि वह किसी भी समय का बाथरूम से बाहर आ सकती थी इसलिए वह तुरंत बिस्तर पर जाकर बैठ गया और जैसे ही दरवाजा खुला वह बिंदु की तरफ देखकर मुस्कुराने लगा उसकी मुस्कुराहट में शरारात छुपी हुई थी बिंदु उसकी मुस्कुराहट देखकर अंदर ही अंदर प्रसन्न होने लगी क्योंकि उसकी मुस्कुराहट देखकर वह समझ गई थी कि उसकी बुर से निकलने वाली सिटी की आवाज को वह जरूर सुन लिया होगा,,, बिंदु भी मुस्कुराते हुए पंखे का स्विच ऑन करते हुए बोली।

आज थोड़ी गर्मी लग रही है,,,।

नहीं खिड़की से कितनी ठंडी हवा रही है देखो शहर में तो इस तरह की हवा नहीं चलती लेकिन यहां कितनी ठंडक है मुझे तो यह जगह बहुत अच्छी लग रही है।

मुझे भी यह जगह बहुत अच्छी लगती है अच्छा रुको मैं तुम्हारे लिए कुछ ठंडा लेकर आता हूं खाने के लिए तो यहां कुछ होगा नहीं फ्रिज में लेमन सोडा पड़ा होगा,,,।



अरे इसकी कोई जरूरत नहीं है रहने दीजिए,,,।

नहीं नहीं रुको मैं लेकर आती हूं,,,,।

(इतना कहने के साथ ही बिंदु कमरे से निकाल कर बाहर चली गई और किचन में रखें फ्रिज को कॉल कर अंदर से दो लेमन सोडा निकाल ली उसके ढक्कन को पांच से खोलकर वह दोनों बोतल को लेकर अपने कमरे में पहुंच गई और एक बोतल को अंकित की तरह भाग्य बढ़ती अंकित मुस्कुरा कर अपना हाथ आगे बढ़ाया और लेमन सोडा का बोतल अपने हाथ में ले लिया लेकिन इस दौरान उसकी उंगलियां बिंदु की नाजुक उंगलियों से स्पर्श होने लगी और एकदम से अंकित के तन बदन में मदहोशी भरी कंपन होने लगा,,, और यही एहसास बिंदु को भी हो रहा था दोनों बैठकर सोडा पीने लगे सोडा खत्म करने के बाद अंकित का ध्यान फिर से कमरे पर गया और वह बिस्तर पर से कैमरा उठाकर बिंदु की तरफ देखकर बोला।)

आप मुझे इसका कमाल दिखाने वाली थी ना।

अरे हां यह तो मैं भूल ही गई,,, रुको मैं अभी दिखाती हूं,,, (बाकी बचे सोडे को एक ही बार में गटक कर बिंदु खाली बोतल को टेबल पर रख दिया और अंकित के हाथ से कैमरे को लेकर वह उसे ऑन कर दी और सामने के टेबल पर रखकर तुरंत चलते हुए अंकित के पास आई और उसके पास बैठ गई थोड़ी ही सेकंड में एकदम से कैमरे से आवाज आई और कुछ सेकेंड बाद उसमें से एक रंगीन कागज बाहर निकला, बिंदु बिस्तर से उठकर मुस्कुराते हुए कैमरे से निकले हुए इस कागज को लेने के लिए कैमरे की तरफ गई और कागज को लेकर अंकित के पास आई और अंकित को दिखाते हुए बोली।)



यह देखो अंकित इस कमरे का कमाल,,,।

(अंकित तो फोटो को देखकर भौंचक्का रह गया उसे तो अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था कभी वह फोटो को देखा तो कभी बिंदु को एकदम हैरान होते हुए वह बोला,,,)

बाप रे यह कैसे मुमकिन है तुरंत फोटो मैं तो कभी सोच भी नहीं सकता था,,।

बहुत कीमती कैमरा है अंकित,,, मेरी फ्रेंड लंदन रहती है उसी से मैंने यह कैमरा मंगाई हुं,,,,।

क्या बात है सच में यह तो अजूबा है चलो एक बार फिर से फोटो लेते हैं,,,,।

जरूर लेकिन इस बार खड़े होकर रुको मैं जल्दी से कैमरा ऑन कर देती हुं,,,,, (इतना कहने के साथ ही फिर से बिंदु कैमरे के तरफ गई और उसे ऑन करके तुरंत अंकित के पास आकर खड़ी हो गई लेकिन इस बार दोनों खड़े थे बिंदु आगे खड़ी थी और अंकित उसके पीछे खड़ा था दोनों मुस्कुरा रहे थे इस बीच अपना पोस बनाने के चक्कर में बिंदु थोड़ा पीछे की तरफ आए तो अगले ही पल अपनी भारी भरकम गांड पर कुछ चुभता हुआ महसूस की, उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी बिंदु खेली खाई और अनुभव से भरी हुई थी उसे समझने देने लगी कि उसकी गांड पर चुभती हुई चीज क्या है वह एकदम से मदहोश हो गई,,,, सकपकाहाट में वह थोड़ा सा और पीछे आ गई और इस बार उसे अपनी गांड के पीछे-पीछे अंकित का लंड चुभता हुआ महसूस हो रहा था,,, अंकित को भी मालूम हो रहा था कि इस समय क्या हो रहा है लेकिन वह अनजान बनने की पूरी कोशिश कर रहा था क्योंकि वह जानता था कि यही सही मौका है अपने मन की बात जाहीर करने का,,, इसलिए वह अपने कदम को पीछे नहीं लिया और वहीं पर खड़ा रहा जिसकी वजह से उसके पेट में बना तंबू बिंदु को अपनी गांड पर बराबर एहसास करवा रहा था। अगले ही पल हल्की सी रोशनी हुई और आवाज के साथ ही एक खूबसूरत फोटो कैमरे से बाहर निकल गई बिंदु अपनी जगह से हटना नहीं चाहती थी क्योंकि गांड के बीचों बीच चुभता हुआ अंकित का लंड उसे मदहोश बना रहा था,,, लेकिन ज्यादा देर तक इस तरह से खड़े रहना उचित नहीं था इसलिए वह बेमन से आगे बड़ी और कैमरे से निकले हुए फोटो को अपने हाथ में ले ली और मुस्कुरा कर फिर से अंकित को दिखाने लगी इस बार की फोटो भी बहुत खूबसूरत आई थी अंकित देखकर हैरान हुआ जा रहा था इस बार वह बिंदु की तारीफ किए बिना नहीं रह पाया और बोला।



तुम्हारा फोटो कितना सुंदर आता है देखो तुम बहुत खूबसूरत हो,,,,, (अंकित एकदम से आप ऊपर से तुम पर आ गया था लेकिन इस बात से बिंदु को बिल्कुल भी दिक्कत नहीं थी क्योंकि आपस में आप शब्द दो लोगों को इतना नजदीक नहीं लाता जितना तुम शब्द करीब लाने में मदद करता है,,,, अंकित की बात सुनकर बिंदु को गर्व महसूस हो रहा था लेकिन फिर भी वह जानबूझकर बोली,,,)

धत् मैं कहां खूबसूरत हूं अब तो मेरी उम्र देखो पहले की बात कुछ और थी,,,।

यह तुम्हारा सोचना है लेकिन देखने वालों का सोचा तुम्हारी सोच से बिल्कुल विपरीत है देखने वाले तुम्हें इस हालत में देखते हैं तो वाकई में तुम्हारी खूबसूरती के प्रति आकर्षित हो जाते हैं तुम सच में बहुत खूबसूरत हो उम्र का प्रभाव तुम पर बिल्कुल भी नहीं पड़ा है ऐसा लगता है कि तुम्हारे पर ही समय आकर थम गया है,,,।

तुम तो एकदम कवि की तरह बात करते हो,,,।

बस तुम्हें देखकर अपने आप ही मुंह से निकल जा रहा है मेरी नजर में तो तुम बहुत खूबसूरत हो और मुझे पूरा यकीन है कि मेरी उम्र के लड़के से अगर पूछोगी तो वह भी यही कहेंगे कि तुम सच में बहुत खूबसूरत हो,,,,।

(अंकित के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर बिंदु गदगद हुए जा रही थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या जवाब दें बस मुस्कुरा रही थी शर्मा रही थी उसका चेहरा सुर्ख लाल हो चुका था,,, लेकिन इस बीच बार-बार उसकी नजर अंकित के पेंट में बने तंबू पर चली जा रही थी उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी बिंदु जो कि अनुभव से भरी हुई थी उसे इतना तो ज्ञात ही था कि अंकित के पेंट में छुपा हथियार कितना दमदार है,,,, इसलिए जब-जब उसकी नजर पेट में बने तंबू पर जाती थी तब तक उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगती थी वह शर्म के मारे अपनी नजर को दूसरी तरफ घूमाने की कोशिश करती थी लेकिन अंकित के पेंट का तंबू इस कदर भूल हुआ था कि उसकी तरफ आकर्षित हुए बिना बिंदु से रहा नहीं जा रहा था। अंकित को भी इस बात का एहसास हो गया था कि बिंदु की नजर बार-बार उसकी पेंट पर चली जा रही है और इस बात की खुशी अंकित को अंदर से महसूस हो रही थी क्योंकि वह जानता था कि दो अनजान लोगों के बीच आपसी मेल जोल बढ़ाने का यही एक आसान तरीका होता है अंकित फिर से बिंदु की तारीफ करते हुए बोला,,)



क्या तुम्हें नहीं लगता कि तुम्हें देखकर कोई तुम्हारी तारीफ करता होगा,,,।

नहीं तो ऐसा तो आज तक नहीं हुआ,,,?

या तो फिर किसी की हिम्मत नहीं होती होगी तुम्हारी खूबसूरती की तारीफ करने की,,, या फिर तुम्हारी खूबसूरती से जलनवस कोई तारीफ नहीं करता होगा।

लेकिन तुम्हारी तो हिम्मत हो गई मेरी खूबसूरती की तारीफ करने की।

यही तो बात है आंखों के सामने कोई खूबसूरत चीज हो और उसकी तारीफ ना की जाए तो देखने वालों की सबसे बड़ी गलती होती है पाप लगता है पाप,,,।

(जिस अंदाज में अंकित ने यह बात कही थी उसका अंदाज देखकर बिंदु अपने आप को रोक नहीं पाई और जोर-जोर से हंसने लगे हंसते हुए और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी लेकिन जिस तरह से वह खुलकर हंस रही थी उसकी दोनों चूचियां ऐसा लग रहा था कि ब्लाउज फाड़ कर बाहर निकल आएंगे और अंकित की नजर उसकी चूचियों पर ही टिकी हुई थी इस बात का एहसास बिंदु को होते ही बिंदु एकदम से शर्म से पानी पानी हो गई, ,,,,,,, फिर धीरे से मुस्कुराते हुए बोली,,)



इसका मतलब है कि अब तुम्हें आप नहीं लगेगा,,,।

बिल्कुल नहीं तुम्हारी खूबसूरती की तारीफ जो कर दिया हुं,,,।

चलो अच्छा है कि तुम्हें पाप नहीं लगेगा वरना मेरी वजह से तुम्हें पाप लग जाता तो मुझे बुरा लगता।

सच अंकल बहुत खुशनसीब होंगे तुम्हें पाकर,,,,

(इस बात का जवाब बिंदु नहीं दे पाई वह खिड़की के पास आई और बाहर देखने से जिस तरह से वह बाहर की तरफ देख रही थी उसका पिछवाड़ा उभरा हुआ था अंकित यह देखकर अपने मन में सोच रहा था की खास की कमर पकड़ कर अपनी कमर हिलाने का मौका मिल जाता तो कितना मजा आ जाता,,,, अंकित भी धीरे-धीरे चलता हुआ उसके पास पहुंच गया और बोला,,)

देख रही हो यहां कितना सन्नाटा है कितनी शांति है की हवा चलने की भी आवाज आ रही है,,,,।

यहां सुकून मिलता है,,,,,।

सच कह रही हूं जब से मैं यहां आया हूं मन को इतनी शांति मिल रही है कि पूछो मत,,,,।

अच्छा वह तुम मिल गई वरना अकेले आना पड़ता और अकेले में यहां मन नहीं लगता किसी का साथ होना बहुत जरूरी है,,,।

मुझे भी तुम्हारा साथ बहुत अच्छा लग रहा है तभी तो मैं तुम्हारे साथ यहां आने के लिए तैयार हो गया,,,।



चलो यह तो अच्छी बात है,,, (इतना कहते हुए बिंदु अंकित की तरफ देखकर मुस्कुराई और अपने कमरे से बाहर की तरफ जाने लगी और जाते हुए बोली) रुको मैं आती हूं बड़ी प्यास लगी है,,,,,,।

(अंकित उसे जाता हुआ देखा है क्या और अपने मन में ही बोला क्या चीज है यार कसम से सवारी करना हो तो ऐसी औरत की वरना हाथ से हिला कर ही काम चला लो क्या औरत है,,,,, अपने मन में ऐसा कहते हुए वह धीरे से बाथरूम की तरह आगे बढ़ा और दरवाजा खोल कर बाथरूम में चला गया,,, उसे बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी लेकिन वह जानबूझकर दरवाजा खुला छोड़ दिया था,,,,, क्योंकि इस बात का एहसास उसे अच्छी तरह से था कि जब दो लोगों के बीच कुछ होने की संभावना होती है तो इसी तरह के मौके उन्हें करीब आने देने के लिए बनाए जाते हैं और यही सोचकर वह बाथरूम में घुस गया और पेट की बटन खोलकर अपने मोटे तगड़े लंड को बाहर निकाल और पेशाब करने लगा,,, आज उसे अपने लंड में कुछ ज्यादा ही उत्तेजना महसूस हो रही थी वह कुछ ज्यादा ही कड़क हो चुका था शायद यह बिंदु की मदहोश कर देने वाली जवानी का असर था,,, वह पेशाब करने में मगन हो चुका है अपनी आंखों को बंद करके वह बिंदु के बारे में ही सोच रहा था तब तक बिंदु फ्रिज में से पानी की बोतल और गिलास लेकर कमरे में आ चुकी थी कमरे में अंकित को न देखकर करवा इधर-उधर देखने लगी थी कि तभी बाथरूम का दरवाजा खुला देखकर उसके मन में न जाने क्या हुआ वह गिलास और पानी की बोतल टेबल पर रखकर बाथरूम की तरफ आगे बढ़े बाथरूम के पास खड़ी होकर उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह दरवाजा खोल की ना खुले कुछ देर पहले अपनी गांड पर अंकित के लंड की चुभन महसूस करके वह पानी पानी हो चुकी थी उसे एहसास हो रहा था कि उसकी बुरे भी पानी छोड़ चुकी थी उसी समय,,,, पल भर में ही बिंदु के मन में बहुत से सवाल पैदा हो रहे थे और उन सवालों का जवाब उसके पास शायद नहीं था वह अपने मन में यही सोच रही थी कि अगर इस समय वह किसी भी तरह से अंकित के साथ संबंध बना देती है तो इस बारे में किसी को कानो कान खबर तक नहीं पड़ेगी आखिरकार उसका भी तो जीवन है,,,,।



कब तक बैगन और केले पर कंडोम लगाकर अपने बुर में डालती रहेगी,,,, वह अपने मन में खुद अपने सवालों का जवाब दे रही थी वह अपने आप से ही बात करते हो बोल रही थी कि यह मौका खुद उसके आगे चलकर आया है इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना ऐसा मौका फिर कभी नहीं मिलेगा,,,, और इस उम्र में इतना जवान लड़का मिलना मुश्किल भी है और अगर मिल भी गया तो भरोसा करने लायक नहीं है अंकित पर वह भरोसा कर सकती थी‌। काफी सोच विचार करने के बाद वह फैसला कर चुकी थी वह तय कर ली थी कि जो होगा देखा जाएगा क्योंकि अंकित की उत्तेजना को देखकर वह भी समझ गई थी कि कहीं ना कहीं उसके मन में भी उसको लेकर कुछ चल रहा होगा तभी तो पेट में तब्बू बना हुआ था वरना सामान्य तौर पर ऐसा होता नहीं है जब कभी मरद किसी औरत के बारे में गंदी बातें सोचता है कभी उसकी उत्तेजना बढ़ती है और पेंट में तंबू बनता है,,, इसी बात को वह मुख्य कारण बनाकर बाथरूम के दरवाजे के हैंडल पर हाथ रख दिया और एकदम से खोलते हुए बाथरूम में प्रवेश कर गई और बोली,,,।



अरे तुम यहां और मैं तुम्हें,,, (उसका इतना कहना था कि उसकी आवाज एकदम से उसके गले में ही अटक गई क्योंकि उसकी नजर अंकित के मोटे तगड़े लंड पर पड़ चुकी थी जीवन में उसने ऐसा मोटा तगड़ा लंबा लंड पहली बार देख रही थी उसकी आंखें फटी की फटी रह गई वह आगे कुछ बोल नहीं पाए बस अंकित के मोटे-तगड़े लंड को ही देखते रह गए जिसमें से पेशाब की धार फूट रही थी और अंकित उसे हाथ में पकड़कर हल्के हल्के हिला रहा था,,,, उसकी आंखें बंद थी क्योंकि वह बिंदु के ख्यालों में खोया हुआ था लेकिन बाथरूम का दरवाजा खोलने की आवाज के साथ ही उसकी आंखें खुल चुकी थी और वह हैरानी से बिंदु को देख रहा था और जिस हालत में बिंदु ने उसे अच्छी थी वह मन ही मन प्रसन्न हो रहा था लेकिन फिर भी जानबूझकर अपने चेहरे पर हैरानी के भाव लाते हुए वह हैरानी से बिंदु की तरफ देख रहा था,,,,, इस समय यह पल मानो एकदम थम सा गया था दोनों के बीच किसी पर प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी दोनों एक दूसरे को देखे जा रहे थे अंकित बिंदु के खूबसूरत चेहरे के बदलते भाव को देख रहा था तो बिंदु अंकित के मोटे तगड़े लंड को देख रही थी,,,, क्योंकि आज तक कुछ नहीं ऐसा मोटा तगड़ा लंड अच्छी नहीं थी अगर अच्छी भी थी तो सिर्फ किताबों में रंगीन पन्नों में अश्लील कहानियां में जो कि उसे कल्पना ही लगती थी लेकिन आज अपनी आंखों के सामने मोटा तगड़ा लंड देखकर उसकी सोच पूरी तरह से बदल चुकी थी,, ना चाहते हुए भी उसके मुंह से आखिरकार निकल ही गया,,)



बाप रे इतना मोटा और लंबा,,,।

(इतना सुनकर अंकित मुस्कुरा दिया क्योंकि उसे लगने लगा कि आप उसका काम बन जाएगा वह जानबूझकर बिंदु के सामने उसे ऊपर नीचे करके ही जाते हुए बोला)

क्या सच में यह ज्यादा मोटा और लंबा है।

बिल्कुल मैं तो आज तक ऐसा नहीं देखी मुझे तो सब कुछ कल्पना ही लग रहा है कौन से तेल से मालिश करते हो यार।

मैं किसी भी तेल से मालिश नहीं करता यह तो शुरू से ऐसा ही है मुझे क्या मालूम था कि मेरा सबसे अलग है यह तो मैं आज तुम्हारे मुंह से सुन रहा हूं,,,।

हां मैं सच कह रही हूं तुम्हारा दूसरों से बिल्कुल अलग है तभी तो मैं हैरान हूं क्या मैं इसे छू कर देख सकती हुं,,,,।

(बिंदु किस तरह की बातें अंकित के तन बदन में आग लग रहे थे वह खुले तौर पर आगे बढ़ना चाहती थी और अंकित इस बात से इनकार बिल्कुल भी नहीं करना चाहता था। अंकित कुछ बोला नहीं और उसके खामोशी बहुत कुछ कह रही थी बिंदु को इजाजत मिल चुकी थी बिंदु धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी उसकी हालत खराब हो रही थी उसकी नजर अंकित के लंड से बिल्कुल भी नहीं है रही थी देखते ही देखते हो अंकित के करीब पहुंच गई और अपना हाथ आगे बढ़कर जैसे ही अंकित के मोटे तगड़े लंड पर रखी वह एकदम से मदहोश हो गई,,, क्योंकि वह एकदम गरम था पूरा तैयार,,,, बिंदु एकदम मदहोश होते हुए उसे एकदम से मुट्ठी में भर ली और बोली,,,)



बाप रे यह तो एकदम गरम है भट्टी की तरह मेरी हालत खराब हो रही है,,,,,, देख रहे हो मेरी मुट्ठी में ठीक तरह से नहीं आ रहा है,,,,।

मैं क्या बोलूं मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है,,,, (अंकित एकदम प्रसन्न होता हुआ बोला बिंदु से रहने जा रहा था वह अपनी मुट्ठी में दबे हुए अंकित के लंड को मुठीयाना शुरू कर दी धीरे-धीरे,,,, अंकित मदहोश हुआ जा रहा था। अंकित की आंखें बंद होने लगी जो कुछ भी वह सोच रहा था वह सच होने जा रहा था बिंदु के चेहरे पर उत्सुकता और उत्तेजना साफ दिखाई दे रही थी,,, बिंदु की हथेली पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी और उसकी गर्माहट से उसकी टांगों के बीच की पतली दरार से उसका लावा पिघल रहा था,,,, बिंदु की हिम्मत बढ़ने लगी उसकी मन खुलने लगा,,, वह धीरे से घुटनों के बल बैठ गए अंकित की आंखें बंद थी उसे मजा आ रहा था वह आनंदित हुआ जा रहा था लेकिन बिंदु के मन में कुछ और चल रहा था वह धीरे से अपने लाल-लाल होठों को खोली और अंकित के आलू बुखारे जैसे मोटे सुपाड़े को अपने लाल लाल होठों के बीच दबा दी,,, और उसे पर अपनी जीभ घूमाना शुरू कर दी,,, इस एहसास से अंकित की आंखें एकदम से खुल गई और वह अपने आप को पीछे खींचने की कोशिश करते हुए बोला,,,)

इसे क्या कर रही हो किसी को पता चल गया तो,,,।



किसी को कुछ पता नहीं चलेगा,,,, (और इतना कहने के साथ ही फिर से बिंदु अपने मुंह में अंकित के लंड को भर ली और चूसना शुरू कर दी,,, अंकित का लंड इतना मोटा था कि बिंदु के लाल-लाल होठों का छल्ला बन चुका था। ठीक तरह से उसके मुंह में समा भी नहीं रहा था लेकिन फिर भी वह जबरदस्ती उसे कस रही थी लंबा इतना था कि उसके गले के नीचे तक उतर जा रहा था जिससे उसके सांस लेने में तकलीफ हो रही थी लेकिन फिर भी वह पीछे हटने का नाम नहीं ले रही थी। अंकित को पूरी तरह से मदहोश करते हुए वह खुद पागल हुए जा रही थी,, लंड की चुदाई कैसे की जाती है इस क्रिया को अच्छी तरह से करना जानती थी इसलिए अंकित को बहुत मजा आ रहा था वह पागलों की तरह एक मजे हुए हुनरदार खिलाड़ी की तरह अपना खेल खेल रही थी अंकित अपने दोनों हाथों को उसके रेशमी बालों में उलझा कर हल्के-हल्के अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया था,,,, मन ही मन बिंदु बहुत खुश हो रही थी क्योंकि वह कभी सोच ही नहीं थी कि वह इस तरह की हरकत कभी करेगी हालांकि बहुत बार उसका मन बहकने को किया था लेकिन वह अपने आप को संभाल ले गई थी क्योंकि वह एक मानी जानी स्कूल की प्रिंसिपल थी लेकिन आज अंकित के मोटे कपड़े लंड को देखकर वह अपने आप पर काबू नहीं कर पाई,,, और पागलों की तरह अंकित के लंड की चुसाई करना जारी रखें रही,,, अंकित को मजा आ रहा था उसके मुंह से अजीब अजीब सी आवाज आ रही थी जिसे सुनकर बिंदु की उत्तेजना और बढ़ती जा रही थी उसे साफ महसूस हो रहा था कि उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार से मदन रस का बहाव हो रहा था उसकी पेंटि गीली हो रही थी,,, बार-बार वह अंकित के लंबे लंड को अपने गले तक उतार कर कुछ देर तक इस तरह से चूसने के बाद जब सांस अटकने लगती थी तो उसे बाहर निकाल देती थी और गहरी गहरी सांस लेने लगती थी इस क्रिया को वह बार-बार दोहरा रही थी जिसमें अंकित को भी मजा आ रहा था कुछ देर तक वह इसी तरह से मजा लेने के बाद धीरे से अंकित कैलेंडर को बाहर निकाल और अंकित की तरफ आश्चर्य से देखने लगी क्योंकि जहां तक उसका मानना था कि इतनी देर में तो एक मर्द ना जाने कितनी बार पानी निकाल देता लेकिन अंकित बरकरार था वह बिल्कुल भी झडा नहीं था,,,,।



अंकित गहरी सांस लेता हुआ बिंदु की तरफ देख रहा था बिंदु के चेहरे पर आगे बढ़ने की उत्सुकता एकदम साफ दिखाई दे रही थी और अब अंकित अपने असली रूप में आना चाहता था क्योंकि अभी तक वह बिंदु के सामने नादान बना हुआ था लेकिन नादान बनने में अब ज्यादा मजा नहीं था उसे अपना रूप दिखाना भी था ताकि वह खुलकर मजा ले सके और बिंदु को तृप्त कर सके,,,, इसलिए वह बिंदु की बांह पकड़कर उसे कड़ी किया और उसकी आंखों में देखते हुए धीरे से अपने होठों को उसके लाल और होठों के करीब ले जाने लगा बिंदु अपने होठों को बिल्कुल भी हटाने की कोशिश नहीं की और अगले ही फल दोनों एक दूसरों को पागलों की तरह चुंबन कर रहे थे इस बीच अंकित एकदम से उसे अपनी बाहों में भरकर साड़ी के ऊपर से उसकी भारी भरकम नितंबों को दबा रहा था मसल रहा था उनसे खेल रहा था। बिंदु की बड़ी-बड़ी चूचियां अंकित की छाती से चंपी हुई थी उसके कड़क निप्पल बार-बार उसकी छाती में चुप रहे थे जिससे अंकित की उत्तेजना और बढ़ती जा रही थी देखते-देखते अंकित उसके होठों का रसपान करते उसकी साड़ी को कमर तक उठने लगा और कमर तक साड़ी उठाकर उसकी गांड को जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया इस बीच वह बार-बार उसकी गांड पर चपत भी लगा दे रहा था जिससे उसकी गोरी गोरी गांड एकदम टमाटर की तरह लाल हो गई थी,,,, अंकित अपने आप पर काबू कर सकते सक्षम था वह एक औरत को कैसे खुश किया जाता है वह अच्छी तरह से जानता था इसलिए वह धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहता था लेकिन बिंदु से सफल नहीं हो रहा था वह एकदम से अपने होठों को अंकित के होठों से अलग की और उसकी तरफ पीठ करके अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर अपनी पेंटी को उतारने लगी पेंटी को उतारते समय वह आगे की तरफ झुक गई थी जिससे उसकी भारी भरकम गोलाकार गांड हवा में तोप की तरह उठी हुई थी यह किसी फिल्म के नजारे जैसा था अंकित से रहने की और पीछे से एकदम से उसकी गांड से सात गया और पेट में बने तंबू को उसकी नंगी गांड पर जोर-जोर से रगड़ना शुरू कर दिया पेट में बना तंबू उसकी गांड पर उसकी जवानी की गर्मी को और भी ज्यादा गर्म कर रहा था वह मदहोश हुए जा रही थी वह झुके हुए ही अपनी भारी भरकम गांड को गोल-गोल घूमते हुए अंकित के लंड पर रगड़ना शुरू कर दी भले ही वह पेट के अंदर था लेकिन फिर भी अपने होने का एहसास बराबर दिला रहा था,,,,।



बिंदु अपनी साड़ी को कमर तक उठाए हुए ही सीधी खड़ी हो गई और अंकित की तरफ देखकर मुस्कुराने लगी वह बाथरूम की दीवार से पीठ के बाल सेट गई और अपनी दोनों टांगों को खोलकर अपनी गुलाबी बुर को दिखाते हुए बोली,,,।

अब तुम्हारी बारी,,,,।

(अंकित अच्छी तरह से जानता था कि आप उसे क्या करना है बिंदु की तरफ से खुला आमंत्रण पाकर वह अपने आप को बिल्कुल भी रोक नहीं सकता था वह धीरे से आगे बढ़ा और एक बार फिर से उसे बाहों में भरकर धीरे-धीरे नीचे की तरफ आने लगा और जैसे ही वह अपने घुटनों के बल बैठ गया वह एकदम से बिंदु की एक टांग उठाकर अपने कंधे पर रख दिया जिससे उसकी बुर का मुख्य द्वार हल्का सा खुल गया ऐसा लग रहा था कि जैसे कल ही क्रीम लगाकर उसने अपनी बुर के बाल को साफ कि हो एकदम चिकनी मखमल की तरह से देख कर अंकित के मुंह में पानी आ रहा था और वह ज्यादा देर तक अपने आप को रोक नहीं पाया और अगले ही पल वह अपने होठों को एकदम से उसकी बुर से सटाकर उसकी मलाई को चाटना शुरू कर दिया,,,, अंकित की हरकत से बिंदु की सांस अटकने लगी उत्तेजना के मारे उसका गला सूखने लगा जिसे वह अपने थूक से गिला करने की पूरी कोशिश कर रही थी उसके मुंह से घुटी घुटी सी सिसकारी की आवाज निकल रही थी जिसे सुनकर अंकित और भी ज्यादा उत्तेजित हुआ जा रहा था क्योंकि उसकी हरकत से बिंदु को मजा आ रहा था और एक औरत को सुख देना ही उसका काम था जितना हो सकता था उतनी अपनी जीभ को उसकी बुर की गहराई में डालकर उसकी मलाई को चाटने की कोशिश कर रहा था दोनों हाथों की उंगलियों से उसकी बुर के द्वारा को खोलकर उसमें अपनी जीभ डाल रहा था,,,, बुर से निकलने वाली मदहोश कर देने वाली खुशबू को अपने अंदर खींचकर वह पागल हुआ जा रहा था,,,, धीरे-धीरे अंकित उसकी बुर को चाटते हुए अपनी उंगली को प्रवेश करने लगा और उसे एहसास हो रहा था कि उसकी बुर कसी हुई थी इसका मतलब सांप था कि काफी दिन से उसने अपनी बुर में लंड नहीं ली थी इस बात की खुशी अंकित के चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी अंकित अपनी एक उंगली से उसकी बुर की चुदाई भी कर रहा था और अपने होठों से चुसाई भी,,,,। अंकित की मदहोश कर देने वाली हरकत से बिंदु का बदन अकड़ने लगा वह झड़ने के कगार पर पहुंच चुकी थी और देखते ही देखते अंकित के सर पर दोनों हाथ रख कर उसे अपनी बुर पैर दबाते हुए वह झड़ने लगी,,,, झड़ते समय उसके मुंह से अजीब अजीब सी आवाज निकल रही थी वह पूरी तरह से तृप्त हुआ जा रही थी अंकित उसकी बुर से बिल्कुल भी अपने मुंह को हटा नहीं रहा था उसकी बुर से मदन रस का फवारा फूट रहा था जिसे वह अमृत की धार समझ कर अपने गले के अंदर गटक रहा था।



यह अंकित की सूझबूझ और उसके अनुभव का ही नतीजा था कि बिना लंड डाले वह बिंदु का पानी निकाल दिया था बिंदु भी इस बात से हैरान थी वह गहरी गहरी सांस ले रही थी अंकित धीरे से अपने होठों को उसकी बुर पर से अलग किया और प्यासी नजरों से उसकी तरफ देख रहा था दोनों की नजर आपस में टकराई और बिंदु शर्मा कर अपनी आंखों को बंद कर ली यह देख कर अंकित मुस्कुराने लगा और धीरे से उठकर खड़ा हो गया उसके साड़ी के पल्लू को उसके कंधे से हटाते हुए बोला,,,।

सच में तुम बहुत खूबसूरत हो,,, (जवाब में बिंदु मुस्कुरा दे और अंकित अगले ही पल उसकी साड़ी को खोलना शुरू कर दिया देखते ही देखते वह उसके बदन पर से उसकी साड़ी को खोलकर अलग कर दिया और बाथरूम में एक कोने में फेंक दिया वह इस समय ब्लाउज और पेटीकोट में खड़े थे अंकित उसे पकड़कर एकदम से अपनी तरफ खींच दिया और उसे पीछे से अपनी बाहों में भर लिया बिंदु इसके लिए तैयार नहीं थी वह एकदम से हैरान हो गई थी अंकित की पूर्ति को देखकर अब उसके पास बोलने के लिए कोई शब्द नहीं थे वह अंकित के हाथों की कठपुतली बनने को तैयार हो चुकी थी अंकित पीछे से उसे अपनी बाहों में भरे हुए ब्लाउज के ऊपर से उसके दोनों चुचियों का दबाना शुरू कर दिया और कुछ देर दबाने के बाद वह धीरे-धीरे उसका बटन खोलने लगा इसी बीच लगातार वह उसके गर्दन पर चुंबनों की बारिश कर रहा था क्योंकि वह जानता था की कनपटी के पास चुंबन करने से औरत पिघल जाती है और यही हो रहा था बिंदु को बहुत मजा आ रहा था वह कभी सोची नहीं थी कि वह किसी जवान लड़के के साथ इस कदर से मजा लुटेगी,,,, देखते ही देखते अंकित ब्लाउज का बटन खोलकर ब्लाउज को उसके बांहों से बाहर निकालने लगा जिसमें बिंदु उसका सहयोग कर रही थी और ब्लाउज को अलग करने के बाद ब्लाउज को भी वह एक कोने में फेंक दिया,,,, ब्रा को उतारने में उसे बिल्कुल भी समय नहीं लगा कमर के ऊपर वह पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी उसकी नंगी जवान देखकर अंकित की आंखें चौंधिया रही थी,,,,, पेटिकोट की डोरी पर हाथ रखते हुए वह बोला,,,)

Bindoo ki jawani



बाप रे तुम तो नंगी होने के बाद और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही है मैं तो कभी सोच भी नहीं सकता था कि किसी स्वर्ग की अप्सरा जैसी औरत के साथ इस तरह से मजा लूंगा,,,, (इतना कहने के साथ ही अंकित पेटिकोट की डोरी को खींच दिया और उसकी पेटिकोट एकदम से ढीली पड़ गई लेकिन नितंबों के उभार पर टिकी रह गई अंकित की हरकत और उसकी बातों से बिंदु को मजा आ रहा था वह मन ही मन प्रसन्न हो रही थी अंकित अपने हाथों से उसकी पेटीकोट को ढीली करके एकदम से कमर के पास से ही पेटीकोट को छोड़ दिया पेटिकोट उसके कदमों में जागीर वह पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी ट्यूबलाइट की द्वितीय रोशनी में उसकी नंगी जवान और भी ज्यादा चमक रहे थे अंकित से रहा नहीं क्या हुआ एकदम से उसकी नंगी जवान को अपनी बाहों में लेकर उससे प्यार करने लगा बिंदु के बदन पर एक भी वस्त्र नहीं थे और अंकित अभी भी वस्त्र में था,,,, केवल उसका लंड बाहर लटक रहा था। इस बात को अंकित भी अच्छी तरह से समझता था इसलिए धीरे से अपने कपड़े को उतारना शुरू कर दिया और देखते-देखते वह भी बिंदु की तरह पूरी तरह से नंगा हो गया दोनों इस समय बाथरूम में नग्न अवस्था में थे अंकित का लंड अभी भी फुंफकार रहा था। अंकित फिर से बिंदु का हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और उसे अपनी बाहों में भरकर उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों से खेलना शुरू कर दिया क्योंकि अभी चूचियों से वह खेल नहीं था बड़ी-बड़ी चूचियां उसके हाथ में ठीक तरह से समा नहीं रही थी,,,,।



सहहहहह ऊममममम,,,,, आहहहहहहहह,,,, सहहहहहहहह इस तरह की आवाज़ बिंदु के मुंह से बार-बार निकल रही थी इस तरह की आवाज को सुनकर अंकित का जोश बढ़ता चला जा रहा था वह बिंदु की दोनों चूचियों को बारी-बारी से मुंह में लेकर पी रहा था दबा रहा था और बिंदु को आनंदित कर दे रहा था बिंदु को इस बात का एहसास था कि अगर अंकित की जगह कोई और होता तो अब तक ढेर हो चुका होता लेकिन फिर आने की बात यह थी कि अंकित अभी बरकरार था अभी तक उसने उसकी बुर में लंड डाला नहीं था लेकिन फिर भी उसे पूरी तरह से पागल बना दिया था। लेकिन अब समय आ गया था असली खेल का अंकित एकदम से उसे बाथरूम की दीवार से सताती और उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी तरफ खींच दिया इस तरह से वह घोड़ी बन गई बिंदु को अंकित का यह अंदाज बहुत अच्छा लगा था क्योंकि वह अपने तरीके से घोड़ी बनाया था उसकी भारी भरकम गोलाकार गांड एकदम से अंकित की तरफ परोसी हुई थी। जिसे देखकर अंकित से रहा नहीं गया और वह धीरे से अपने लंड के मोटे सुपाड़े को उसकी बुर के गुलाबी छेद से सटा दिया,,,, उसकी गर्माहट महसूस करके वह पूरी तरह से मचल उठी,,, उसकी सांस अटकने लगी क्योंकि काफी दिनों बाद वह सुपद को अपनी बुर पर स्पर्श होता हुआ महसूस कर रही थी। उसकी सांसे अटक रही थी बदन कसमसा रहा था अंकित अपने हाथ में लंड को पकड़े उसकी बुर के अंदर अपने लंड को दिशा दिखा रहा था,,,, बुर की चिकनाहट प्रकार धीरे-धीरे लंड अंदर की तरफ प्रवेश करने लगा,,, बिंदु को एहसास हो रहा था कि वाकई में अंकित का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा था इसलिए उससे रहा नहीं गया और वहां बोल दी।)

बिंदु की मदक अदा और अंकीत



बाप रे तेरा तो सच में बहुत मोटा है मेरी तो हालत खराब हो रही है,,।

थोड़ी देर रुको मजा भी बहुत आएगा,,,,।

(अंकित के इस बात को सुनकर बिंदु समझ गई कि यह भले ही देखने में सीधा-साधा लड़का है लेकिन सीधा-साधा है नहीं अपनी उम्र की अपेक्षा वह औरत के मामले में कुछ ज्यादा ही होनहार और हुनर से भरा हुआ है,,,, अंकित धीरे-धीरे फिर से आगे बढ़ने लगा देखते ही देखे उसका मोटा सुपाड़ा बिंदु की गुलाबी बुर में प्रवेश कर गया,,,, अनुभव से भरी हुई लेकिन लंड के मामले में बिंदु इतनी नसीबदार नहीं थी जिंदगी में पहली बार उसे एक जवान लड़के का मोटा तगड़ा लंबा लंड मिल रहा था जिसके प्रवेश के साथ ही उसके चेहरे के हाव-भाव बदलते जा रहे थे कभी वह प्रसन्न मुद्रा में दिखाई देती तो कभी दर्द की रेखा उसके चेहरे पर साफ दिखाई देने लगती लेकिन अंकित रुकने का नाम नहीं ले रहा था वह धीरे-धीरे बिंदु की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी कमर को आगे की तरफ ठेल रहा था बुर की चिकनाहट उसकी काफी मदद कर रही थी,,,, अंकित की मेहनत रंग ला रही थी। पसीने से तरबतर अंकित अच्छी तरह से जानता था कि औरत को किस तरह से काबू में किया जाता है देखते ही देखे उसका आधा लंड बिंदु की बुर में घुस चुका था और वह उसकी नंगी चूचियों को दोनों हाथों में पकड़ कर उसे जोर-जोर से दबाता हुआ चुंबनों से उसकी पीठ पर बौछार कर दे रहा था,,,, अंकित इतना तो समझ गया था कि बिंदु की बुर में इतना मोटा लंबा लैंड कभी घुस नहीं था इसलिए वह हैरान भी थी इसलिए अंकित बिल्कुल भी जल्दबाजी नहीं करना चाहता था धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहता था वह धीरे-धीरे सहला रहा था उसकी चूचियों को उसकी पीठ को जिससे उसका दर्द कम हो सके,,, और उसकी यही कामकला दूसरों से उसे अलग बनाती थी तभी तो औरतें उसकी दीवानी थी,,,,



आधा लंड घुस जाने के बाद अंकित आधे लैंड से बिंदु की चुदाई कर रहा था अपनी कमर को आगे पीछे करके हिला रहा था इतने से ही बिंदु मदहोश हुए जा रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था क्योंकि इससे बड़ा उसकी बुर में अभी तक घुसा भी नहीं था। अंकित को भी मजा आ रहा था क्योंकि बिंदु की बुर कसी हुई थी और कसी हुई बुर में अंकित को कुछ ज्यादा ही मजा आता था,, बिंदु दीवार से दोनों हाथ सटाए हुए घोड़ी बनी हुई थी सही मायने में देखा जाए तो वह अपने बेटे की उम्र के लड़के के साथ जवानी का मजा लूट रही थी किसी को कानो कान शक भी नहीं हो रहा था कि एक माने जाने स्कूल की प्रिंसिपल अपने बेटे की उम्र के लड़के के साथ जवानी का मजा लूट रही थी। अंकित की सांस ऊपर नीचे हो रही थी वह दोनों हाथों से बिंदु के दशहरी आम को पकड़े हुए अपनी कमर हिला रहा था लेकिन जैसे ही उसे एहसास हुआ कि बिंदु को मजा आ रहा है उसके मुंह से सिसकारी फूट रही है तब वह समझ गया कि अब सही समय आ गया है पूरा का पूरा अंदर डालने के लिए। अंकित अपने आप को तैयार कर चुका था माहौल पूरी तरह से ठंडक से भरा हुआ था लेकिन बाथरूम के अंदर का पर बिल्कुल ग्राम था क्योंकि अंदर बिंदु की मदद कर देने वाली जवानी गर्मा चुकी थी,,,, अंकित अपने दोनों हाथों को बिंदु की चूचियों से हटाकर उसकी चिकनी कमर पर रख दिया क्योंकि अब अगला प्रहार होने वाला था,,,,, बिंदु को लग रहा था बस इतना ही है और वह इस भ्रम में थी कि उसने पूरा लंड को अपनी बुर में ले ली है लेकिन बहुत ही जल्द उसका यह भ्रम टूटने वाला था गहरी सांस लेता हुआ अंकित कचकचा कर प्रहार किया,,, बुर की अंदरूनी अडचनो को दूर करता हुआ अंकित का मोटा तगड़ा मुसल एकदम से घुसता हुआ उसके बच्चेदानी से जा टकराया, अंकित का लंड वहां तक पहुंच चुका था जहां तक आज तक उसकी बुर में कोई उसे स्पर्श तक नहीं कर पाया था,,, बिंदु पल भर में ही दर्द से बिलबिला उठी, वह सोची नहीं थी कि अंकित इस तरह से प्रहार करेगा और इस बात से तो वह बिल्कुल अनजान थी कि अभी आधा बचा हुआ था जो अब पूरा घुस चुका था,,,,



हाय दइया मार डाला रे,,,, (एकदम से बिंदु अपनी कमर पकड़ ली वाकई मुझे बहुत दर्द हुआ था उम्र की पढ़ाओ पर पहुंचने के बावजूद की चुदाई में उसे इतना दर्द महसूस हो रहा था मानो कि जैसे आज पहली बार ले रही हो,,,, और सही मायने में देखा जाए तो यह पहली बार ही ले रही थी इतना मोटा तगड़ा लंबा लैंड वरना आज तक तो पतले छोटे लंड से ही वह काम चला रही थी,,,,, अंकित स्थिति को संभालना अच्छी तरह से जानता था खास करके इस तरह की स्थिति का तो वह मास्टर बन चुका था वह एकदम से अपने दुखों को रोक दिया इस स्थिति में उसके बदन से प्यार करने लगा खेलने लगा पीठ पर चुंबन करते हुए उसकी दोनों खरगोश को पड़कर दबाने लगा,,, अंकित की यही होशियारी बिंदु को अच्छी लग रही थी कि वह बिल्कुल भी जल्दबाजी नहीं दिख रहा था और इस बात से हैरान भी था कि पर की गर्माहट प्रकार कोई भी जवान लड़का अगर लंड डालता तो वह झड़ जाता लेकिन अंकित अभी तक बरकरार था और जी भरकर उसकी चुदाई कर रहा था। अंकित की सूझबूझ और उसकी हरकतों की वजह से बिंदु सामान्य होने लगी उसकी कराहने की आवाज धीरे-धीरे मदहोशी भरी शिसकारी में बदलने लगी,,,, उसकी गर्दन पर चुंबन करते हुए अंकित धीरे से बोला,,,)



अब कैसा लग रहा है मेरी जान,,,,, (पहली बार अंकित नहीं बिंदु को जान कहकर संबोधित किया था क्योंकि उन दोनों के बीच की सारी मर्यादा की दीवारें गिर चुकी थी अब दोनों के बीच केवल मर्द और औरत का ही संबंध रह गया था इसलिए अंकित प्यार से उसे जान कहकर पुकार रहा था और अपने ही बेटे की उम्र के लड़के के मुंह से अपने लिए जान शब्द सुनकर बिंदु शर्म से पानी पानी हो गई कोई जवाब उसे सुझ नहीं रहा था क्योंकि वह इस समय पूरी तरह से बेशर्म बन चुकी थी उसे नहीं मालूम था कि ऐसे हालात में क्या जवाब देना है क्या बोलना है वह एकदम हैरान थी क्योंकि उसे चोदने वाला लड़का उसके बेटे की उम्र का था,,,, वह कुछ बोली नहीं तो उसकी ख़ामोशी कोशिश का जवाब समझ कर अंकित धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया धीरे-धीरे फिर से वह आगे बढ़ना शुरू कर दिया बिंदु को हमेशा आने लगा बिंदु के चेहरे के हाव-भाव बदलने लगे वह बाथरूम की दीवार पड़े मजे लेकर एक जवान लड़के से चुदवा रही थी,,,।

मुझे मालूम है अब तुम्हें बहुत मजा आ रहा है बस थोड़ी देर का दर्द और उसके बाद मजा ही मजा लेकिन मैं हैरान हूं कि इस उम्र में भी तुम्हारी बुर एकदम कसी हुई है,,,, क्या अंकल तुम्हें प्यार नहीं करते,,,,,।

(व्यवहार से तो अंकित खुल ही चुका था अब बातचीत से भी खुलना शुरू कर दिया था वह खुले तौर पर बुर शब्द का प्रयोग कर रहा था,,, बिंदु भी उसके सवाल का जवाब देते हुए बोली)



बहुत दिनों से यह सब हुआ नहीं है,,, इसलिए कई हुई है,,,।

और अंकल,,,,,( अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाते हुए वह बोला)

वह तो ज्यादातर बाहर ही रहते हैं बाहर भी हमारा कारोबार है इस सिलसिले में उन्हें ज्यादातर बाहर रहना पड़ता है इसलिए हम दोनों के बीच यह सब जल्दी हो नहीं पाता,,,,,,।

तभी मैं बोलु की इतनी कसी हुई क्यों है,,?

क्यों तुझे मजा नहीं आया क्या,,,?

,,, मजा तो इतना आया मेरी रानी की मैं तो पागल हो जा रहा हूं यह तो सोने पर सुहागा हो गया है कि यह खूबसूरत जवान भोगने को तो मिल ही रही है साथ में कसी हुई बुर भला इससे ज्यादा मेरे जैसे लड़के को क्या चाहिए,,,,,, ‌



(अंकित के मुंह से इस तरह से अपनी तारीफ सुनकर बिंदु मन ही मन प्रसन्न हो रही थी और अब तो वह धीरे-धीरे अपनी गांड को पीछे की तरफ ठेल रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अंकित को ललकार रही हो और अंकित भी उसकी हरकत को देखकर जोर-जोर से अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था कुछ देर तक वह इसी तरह से उसकी चुदाई करता है लेकिन फिर धीरे से अपने लंड को उसकी बुर से बाहर निकाल लिया,,,,, लंड के बाहर निकलने से उसकी बुर एकदम छल्ला नुमा दिखाई दे रही थी एकदम गोलाकार आकार में खुली हुई,,,, बिंदु आश्चर्य से नजर पीछे घूमर अंकित की तरफ देख रही थी उसे लग रहा था कि शायद उसका पानी निकल गया है लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था वह बिना कुछ बोले बिंदु कहां पकड़ कर उसे अपनी तरफ घूम लिया और उसे अपनी बाहों में भरकर उसके होठों का रसपान करते हुए फिर से उसे बाथरूम की दीवार से सटा दिया और उसकी एक टांग ऊपर की तरफ उठाकर अपनी कमर पर लपेट लिया बिंदु समझ गई थी कि अंकित क्या करने वाला है। उसका दिल जोरो से धड़क रहा था क्योंकि अंकित ने जिस तरह से उसे आनंदित किया था वह कभी सोच भी नहीं सकती थी कि संभोग में इतना अत्यधिक आनंद की अनुभूति होती है अगले ही पल अंकित में एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर के अपने लंड को फिर से उसकी गुलाबी द्वार पर रख दिया और हल्के से कमर आगे की तरफ ठेला, अब तो बिंदु की बुर में अंकित के लंड का सांचा बन चुका था इसलिए उसे ज्यादा दिक्कत नहीं हुई और बड़े आराम से उसकी बुर मे लंड घुस गया,,,, और फिर से अंकित अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया इस बार शुरू से ही अंकित जोरों से अपनी कमर हिला रहा था विद्युत वह आसमान में उड़ रही थी ऐसा सोचे कभी नहीं ली थी इसलिए आज वह जी भरकर इस खेल का मजा लूट रही थी,,, धीरे-धीरे बिंदु फिर से अपने चरम सुख के करीब पहुंचने लगी वह अपने पैर को कस के अंकित की कमर से लपेटी हुई थी अंकित भी समझ गया था कि वह झड़ने वाली है इसलिए वह भी जोर-जोर से धक्के लगा रहा था क्योंकि वह भी झड़ने के कगार पर पहुंच चुका था लेकिन यह अंकित की मर्दाना ताकत का सबूत था कि पहले औरत का पानी निकलता था फिर खुद झढ़ता था,,, इस बार भी बिंदु एकदम से भलभला कर झड़ने लगी,,, और फिर दो-चार धक्को के बाद, अंकित भी झड़ने लगा लेकिन तब तक धक्के लगातार जब तक कि वह पूरी तरह से छेद नहीं किया बिंदु कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसे इतना सुख मिलेगा वह पूरी तरह से निहाल हो चुकी थी इसके बाद धीरे से अंकित अपने लंड को बाहर निकाला वह मुस्कुरा रहा था,,, और बिंदु शर्मा रही थी लेकिन जो सुख उसे अंकित ने दिया था ऐसा सुख अपने जीवन काल में उसने कभी प्राप्त नहीं की थी इसलिए वह अंकित का शुक्रगुजार थी।



बिंदु की आंखों के सामने ही अंकित पेशाब करने लगा और यह शायद बिंदु का पहला मौका था जब वह किसी मर्द को अपनी आंखों के सामने इस तरह से पेशाब करते हुए देख रही थी,,,, बिंदु कपड़े पहनाना चाहती थी लेकिन अंकित ने इनकार कर दिया,, बोला कि।

अभी इसकी क्या जरूरत है अभी तो यहां थोड़ा रुकोगी ना,,,।

डेढ़ 2 घंटे तो अभी रूकना है,,,।

फिर क्या है अभी तो खेल बाकी है,,,, ।

(इतना कहते हुए अंकित बिंदु कहां से पकड़ लिया और उसे बाथरूम से बाहर लेकर आया और उसे अपने साथ लेकर बिस्तर पर पसर गया बिंदु उसके ऊपर थी और वह उसकी पीठ को सहला रहा था बिंदु शर्म के मारे अपनी आंखों को बंद करके उसकी नंगी छाती पर सिर रख कर लेटी हुई थी। अंकित इस बात से बहुत खुश था कि उसके जीवन में इतनी अमीर और खूबसूरत औरत आई थी जिसकी जवानी का रस वह चख लिया था वाकई में उसे बिंदु की चुदाई करने में बहुत मजा आया था यही सब बहुत सोच रहा था कि एक बार फिर से उसके लंड में हरकत होना शुरू हो गया था अंकित बिना अपने लंड को हाथ लगाए उसे ऊपर नीचे करके हिला रहा था,,, यह देखकर बिंदु मंत्र मुग्ध हो गई और अपना हाथ आगे बढ़ाकर अंकित के लंड को थाम ली,,, और उसे मुस्कुरा कर हिलाना शुरू कर दी उसकी हरकत देखकर अंकित बोला,,,।

अरे ऐसा गलती मत करो,,,

क्यों क्या हुआ,,,?

वह फिर खड़ा हो जाएगा फिर तुम्हें मेहनत करनी पड़ जाएगी,,,,।

इतनी जल्दी नहीं खड़ा होगा,,,,।

अच्छा तो फिर देख लो फिर मुझे मत कहना,,,,,



(अंकित की बात सुनकर मुस्कुराते हुए बिंदु फिर से उसे हिलाना शुरू करती है मुठायाने लगी,,, और थोड़ी ही देर में बिंदु को अंकित की कई बात साबित होती दिखाई दे रही थी उसकी हथेली में अंकित का लंड फूल रहा था जो उसे साफ महसूस हो रहा था देखते ही देखते वह फिर से अपना विकराल रूप धारण कर लिया यह देखकर अंकित मुस्कुराते हुए बोला,,,)

देखो मैंने बोला था ना अब तुम्हें फिर मेहनत करनी पड़ेगी,,,।

(इतनी जल्दी फिर से लंड का खड़ा हो जाना बिंदु के लिए हैरानी की बात थी वह आश्चर्य से अंकित के लंड को देख रही थी और फिर मदहोश होने लगी वह पीना कुछ बोले इस मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दी अंकित मदहोश होने लगा,,,,, तभी उसकी नजर टेबल पर पड़े कमरे पर गई जो कि बिस्तर के पास में ही था वह अपना हाथ आगे बढ़ाया और कैमरे को ले लिया बिंदु को वह कैमरा स्टार्ट करते हुए देखा था इसलिए वह जानता था कि कैसे स्टार्ट किया जाता है कैसे फोटो लिया जाता है वह एकदम से उसे अपनी आंख पर लगाया और कैमरा ऑन कर दिया अगले ही पल कैमरे में से एक छोटा सा फोटो बाहर निकला जिसे देखकर अंकित खुश हो गया,,, यह सब बिंदु भी देख रही थी,,,, अंकित फोटो को बार-बार देख रहा था उसमें उसका मोटा तगड़ा लंड और भी ज्यादा विकराल और आकर्षक लग रहा था और बिंदु बेहद खूबसूरत जैसे किसी फिल्म की हीरोइन हो,,,, धीरे से बिंदु अपने मुंह में से अंकित के लंड को बाहर निकाली और बोली,,,)



फोटो को फाड़ देना कहीं कोई देख लिया तो दिक्कत हो जाएगी।

तुम चिंता मत करो मैं अच्छी तरह से जानता हूं मैं यह किसी के लिए नहीं खींच रहा हूं बल्कि अपने लिए खींच रहा हूं,,,, ।

(अंकित की बात सुनकर बिंदु मुस्कुरा दि और फिर से अपने काम में लग गई,,,, अंकित मदहोश होने लगा और उस फोटो को वही टेबल पर रख दिया,,,, थोड़ी देर बाद अंकित दिशा बदलने को बोला और इस बार बिंदु उसके ऊपर चढ़ गई लेकिन 69 की पोजीशन में,,,, इस पोजीशन के बारे में बिंदु अच्छी तरह से जानती थी लेकिन इसका उपयोग नहीं कर पाई थी आज अंकित के साथ वह इस पोजीशन का मजा लेना चाहती थी अगले ही पल दोनों एक दूसरे के अंगों को कस रहे थे चाट रहे थे उनसे खेल रहे थे दोनों को बहुत मजा आ रहा था,,,, अपनी हरकतों से अंकित ने एक बार फिर से बिंदु को चुदवासी बना दिया था कुछ देर तक इसी तरह से मजा लेने के बाद बिंदु धीरे से अपने मुंह में से लंड को बाहर निकाली और फिर अंकित के लंड के ऊपर सवार हो गई और फिर अपनी गांड को जोर-जोर से पटकना शुरू कर दी,,, इस तरह की हरकत करने में बिंदु को कुछ ज्यादा ही मजा आता था और बिस्तर पर बिंदु का यह सबसे पसंदीदा आसान था लेकिन इस आसन में मर्द कभी ज्यादा देर तक टिक नहीं पता था इसलिए वह इस आसन का मजा नहीं ले पाती थी लेकिन आज उसकी ख्वाहिश जाग चुकी थी उसे यकीन हो रहा था कि यह ख्वाहिश अंकित जरूर पूरी करेगा इसलिए वह अंकित के कंधों को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी भारी भरकम गांड को जोर-जोर से पटक रही थी अंकित भी उसकी हरकत का पूरा मजा ले रहा था,,, उसके लटकते हुए पपाया को दोनों हाथों से पकड़ कर वह नीचे से भी धक्के लगाने की कोशिश कर रहा था।



दोनों किसी से काम नहीं थे दोनों एक दूसरे पर हावी होना चाहते थे तकरीबन 20-25 मिनट जैसा समय गुजर चुका था और बिंदु जोर-जोर से अपनी गांड को पटक रही थी आज उसका मन प्रसन्न हो गया था इस आसन का मजा लेने के लिए,,,,, और फिर देखते ही देखते वह अंकित के ऊपर झुक कर उसे अपनी बाहों में कम इतनी कमर के नीचे वाले भाग को जोर-जोर से हिला रहे थे वह झड़ने वाली थी और अंकित का पानी निकलने वाला था अंकित ने भी अपने दोनों हाथों को उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर रखकर उसका दबाव अपने लंड पर बढ़ाने लगा और देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ने लगे,,,,,।

दोनों कपड़े पहन कर तैयार हो चुके थे टेबल पर रख फोटो को अंकित ने धीरे से अपनी पेंट के जेब में रख लिया था यादगार के तौर पर और फिर दोनों अपने कमरे से बाहर आ गए यहां की सजावट के लिए लाया गया कमल अभी भी कार के अंदर था,,, दरवाजा खोलते समय बिंदु की नजर पीछे वाली सीट पर गई तो उसे याद आया और वह तुरंत गमले को कार में से निकाल कर बाहर रख दी और चौकीदार को उसे छत के ऊपर रखने के लिए बोलकर वहां से निकल गई।
 
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