Incest मुझे प्यार करो,,, - Page 135 - SexBaba
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Incest मुझे प्यार करो,,,

घर पर पहुंच कर अंकित दिनभर बिंदु के ही ख्यालों में खोया रहा क्योंकि वह कभी सपने भी नहीं सोचा था कि उसे बड़े घर की औरत चोदने को मिलेगी,, वैसे तो उसके जीवन में बहुत सी औरतें आई थी लेकिन बिंदु बहुत खास थी क्योंकि वह स्कूल की प्रिंसिपल थी और वह वही स्कूल था जिसमें खुद अंकित की मां शिक्षिका के रूप में कार्य रत थी, यादगार के तौर पर बिंदु की तस्वीर को वह बार-बार देखकर अपनी जेब में रख दे रहा था और जब उसे लगा कि अगर इस तरह से जेब में रखे रह गया तो यह फोटो उसकी मां के हाथ में आ सकता है इसलिए वह उसे फोटो को अपने स्कूल के बैग की किताब में रख दिया,,,।



अंकित का दिन बड़े अच्छे से गुजर रहा था, ऐसा लग रहा था कि हर एक रोज उसके जीवन में एक नई बुर उसे दस्तक दे रही थी, कुछ महीने पहले वह कभी सोचा भी नहीं था कि वह इस तरह से जीवन का आनंद ले पाएगा लेकिन कुछ ही महीनो में उसका जीवन पूरी तरह से बदल चुका था, ऐसे ही दिन गुजरते गए अब समय आ गया था गर्मी की छुट्टियों के पूरा होने का, किसी भी दिन अंकित की बड़ी बहन तृप्ति घरवापस आ सकती थी इस बारे में सोचकर मां बेटे दोनों परेशान रहते थे क्योंकि तृप्ति की गहराई में जो सुख जो समय दोनों ने साथ मिलकर गुजरा था वह काफी यादगार बन चुका था और तृप्ति के आ जाने से इस तरह का मौका फिर कभी मिलने वाला नहीं था, और वैसे भी मां बेटे दोनों ही पति-पत्नी की तरह रहते थे घर में चाहे जहां जब चाहे तब एक दूसरे के खूबसूरत अंगों से खेल लेते थे और यह सब तृप्ति के आ जाने से रुक जाएगा, इस बात कहेंगे एहसास होते ही मां बेटे दोनों उदास हो जाते थे लेकिन कर भी क्या सकते थे,,,



एक दिन सुबह मां बेटे दोनों खाना खाकर आपस में बात कर रहे थे कि तभी दरवाजे पर दस्तक हुआ, इस समय कौन आगे आया सोच कर दो ना एक दूसरे को देख रहे थे कि तभी अंकित अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया दरवाजे के पास जाकर धीरे से दरवाजा खोलने लगा तो सामने ही डाकिया खड़ा था जिसके हाथ में एक लिफाफा था और वह लिफाफे पर लिखा नाम लेते हुए बोला।

श्रीमती सुगंधा,,,,

जी हां,,,,

लीजिए आपका नाम पर लिफाफा आया है,,,।

लिफाफा,,,,! (आश्चर्य से हाथ बढ़ाकर अंकित उसे डाकिया के हाथ से उसे लिफाफे को ले लिया और वह डाकिया वहां से चला गया, अंकित ने लिफाफे पर देखा तो उसकी मां का नाम लिखा हुआ था और पीछे पलट कर भेजने वाले का नाम देखा तो उसे पर सुगंधा के स्कूल का नाम लिखा हुआ था यह देखकर अपनी मां से दरवाजा बंद करते हुए बोला,,,)

यह तो तुम्हारे स्कूल से आया है,,,।

स्कूल से,,, जरा देख तो क्या है,,,! (सुगंधा आपको भी नहीं मालूम था कि आखिरकार स्कूल से लिफाफा किस लिए आया है अपनी मां की बात सुनकर अंकित लिफाफा फाड़ कर अंदर से एक इनविटेशन पत्र निकाला जिस पर लिखा था कि 25 साल पूरे होने की खुशी में स्कूल की तरफ से शिक्षकों को प्रिंसिपल के घर पर पार्टी के लिए आमंत्रित किया गया था यह पढ़ते ही अंकित की आंखों के सामने बिंदु का खूबसूरत है जिस में नजर आने लगा क्योंकि वह जानता था कि उसकी मां के स्कूल की प्रिंसिपल की बिंदु ही है,,,,, अंकित अपनी मां से बोला।)



मम्मी यह तो आमंत्रण पत्र है।

आमंत्रण पत्र किसलिए,,,!

स्कूल के 25 साल पूरे होने की खुशी में प्रिंसिपल ने सभी शिक्षकों के फैमिली को इनविटेशन दिया है,,,,।

ओहहहहह तो स्कूल को 25 साल पूरे हो गए,,,, मुझे खुद 10 साल हो गए पढ़ाते पढ़ाते कितने जल्दी समय गुजर जाता है,,,, अच्छा यह देख फंक्शन कब का है।

कल का ही है,,,,,।

ओहहहहह तब तो कल तैयार रहना साथ में चलने के लिए,,,।

(यह सुनकर अंकित थोड़ा हैरान हो गया क्योंकि वह नहीं जाना चाहता था इसके पीछे कारण यही था कि वह बिंदु को इस बात का पता नहीं चलने देना चाहता था कि वह उनकी स्कूल में पढ़ाने वाली शिक्षिका का लड़का है,,, क्योंकि इस बात से वह शर्मिंदा हो सकती थी इसलिए तभी अपनी मां की बात सुनते ही वह बोल उठा,,,,)



अरे कल सुमन का भी तो जन्मदिन है,,, सुषमा आंटी इनवाइट करके तो गई है,,, ।

अरे हां मैं तो भूल ही गई,,,, अब क्या करें,,,?

अरे करना क्या है प्रिंसिपल के घर पर तुम चली जाना मैं यहां पर चला जाऊंगा और वैसे भी मुझे बड़ी पार्टियों में जाना अच्छा नहीं लगता,,,,।

चल ये भी ठीक रहेगा,,,,,।(इतना कहते हुए सुगंधा मुस्कुरा दी, वह धीरे से उठकर खड़ी हो गई लेकिन तभी ना जाने अंकित के दिमाग में क्या आया वह तुरंत अपना हाथ आगे बढ़कर अपनी मां की कमर में हाथ डाल दिया और उसे अपनी तरफ खींचकर अपनी बाहों में भर लिया और उसके लाल-लाल होठों पर अपनी होठ रख दिया,,,,।)

अरे यह क्या है,,,(आश्चर्य से सुगंध मुस्कुराते हुए बोली)

आई लव यू,,,,

आई लव यू टू,,,(सुगंधा भी मुस्कुराते हुए बोली और फिर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली)

आज इतना प्यार क्यों आ रहा है पहली बार तूने मुझे आई लव यू बोला है,,,,।

मुझे तुम पर प्यार इसलिए आ रहा है क्योंकि मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं तृप्ति के आ जाने के बाद शायद नहीं है तुमसे खुलकर नहीं बोल पाता इसलिए आज का दे रहा हूं आई लव यू,,,,,।



मैं भी आई लव यू टू,,,,,(सुगंधा का इतना कहना था कि अंकित फिर से उसके होठों को अपने होठों में भरकर चुंबन करने लगा और इस बीच अपने दोनों हथेलियां को साड़ी के ऊपर से ही अपनी मां की गदराई गांड पर रखकर जोर-जोर से मसलना शुरू कर दिया,,,, पल भर में ही सुगंधा उत्तेजित होने लगी मां बेटे दोनों मदहोश होने लगे यह चुम्बन और भी ज्यादा गहरा होता चला जा रहा था,,,, अंकित अब पीछे नहीं है सकता था क्योंकि उसके बदन में चुदास की लहर दौड़ रही थी ओ धीरे-धीरे अपनी मां की साड़ी को ऊपर की तरफ उठने लगा और जैसे ही सुगंधा की साड़ी को हुआ कमर तक उठाया वैसे ही अंकित अपनी मां की भारी बर्तन कहां पर अपनी दोनों हथेलियां टिकाकर उसे ऊपर की तरफ उठाने लगा देखते ही देखते अंकित अपनी मां को गोद में उठा लिया था और आश्चर्य की बात यह थी कि उसकी मां साड़ी के अंदर पेंटी नहीं पहनी थी,,,,, सुगंधा समझ गई थी कि उसका बेटा क्या चाहता है इसलिए वह अपने बेटे का भरपूर साथ दे रही थी,,,, दोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी जो कुछ भी कहना था दोनों अपने चुंबन से जाहिर कर दे रहे थे दोनों की इच्छा एक ही थी,,, पेंट के अंदर अंकित का मोटा तगड़ा लंड गुदर मचाने को तैयार था,,, अंकित रहने जा रहा था मौके की नजाकत को समझते हुए अंकित अपनी मां को गोद में उठाए हुए एकदम से दीवार से सटा दिया और फिर एक हाथ अपने पेंट की बटन पर रखकर जल्दी-जल्दी अपनी पेंट को खोलना शुरू कर दिया। ऐसे मौके पर अंकित की ताकत और ज्यादा बढ़ जाती थी अपनी मां के भारी भरकम शरीर को वह बड़े आराम से अपनी गोद में उठाया हुआ उसे दीवार से सटाया हुआ था और एक हाथ से अपना पेंट का बटन भी खोल रहा था। और अगले ही पल वह पेट की बटन को खोलकर पेंट को नीचे की तरफ सरकाने लगा,,, अंकित बिल्कुल भी देर नहीं करना चाहता था बिल्कुल भी समय नहीं लेना चाहता था इसलिए वह अपनी पेट के साथ-साथ अपने अंडरवियर को भी अपने घुटनों तक नीचे सरका दिया था उसका मोटा तगड़ा लंड बुर में जाने के लिए तड़प रहा था।





दोनों के बीच चुंबन खत्म होने का नाम नहीं लगा दोनों एक दूसरे की लार थूक चाटते हुए चुंबन का आनंद ले रहे थे इस बीच अंकित अपने लंड के मोटे सुपाड़े को अपनी मां की पनियाई बुर से सटा दिया और फिर अपनी कमर को आगे की तरफ चलने लगा दीवार का सहारा पाकर सुगंधा अपने आप को स्थिर महसूस कर रही थी और अंकित को भी ज्यादा परेशानी नहीं हुई अपनी मां की बुर में लंड डालने में देखते ही देखते अंकित का मोटा मुसल धीरे-धीरे करके सुगंधा की गुलाबी पर में डूब गया और फिर अंकित दोनों हाथों से अपनी मां की गांड को थामे हुए उसे अपनी गोद में उठाए हुए जोर-जोर से धक्के लगाना शुरू कर दिया अपने बेटे के इसी मर्दाना अदा पर तो सुगंधा पानी पानी हो जाती थी यही हरकत सुगंधा को अपने बेटे का गुलाम बना दिया था,,, सुगंधा अच्छी तरह से जानते हैं तुझे उसका बेटा शिकायत का एक भी मौका नहीं देगा उसे पूरी तरह से संतुष्ट करने के बाद ही झड़ेगा,,,, हर धक्के के साथ अंकित का लंड सुगंधा की बुर की गहराई नाप रहा था,,, हर धक्के के साथ मां बेटे दोनों मस्त हो जा रहे थे,, जिस तरह से अंकित का मोटा तगड़ा लंड मर्दाना ताकत से भरा हुआ था उसी तरह से उसका धक्का उसका तेज प्रहार भी पूरी तरह से ताकत से भरा हुआ था हर धक्के के साथ अंकित का मोटा तगड़ा लंड उसकी मां के बच्चेदानी से टकरा जा रहा था जिससे सुगंधा के मुंह से घुटी-घुटी सी चीख निकल जा रही थी,,,, अंकित तब तक अपनी कमर हिलता रहा जब तक की उसकी मां का पानी नहीं निकल गया और जैसे ही उसे विश्वास हुआ कि उसकी मां झाड़ रही है वह अपने धक्कों को तेज कर दिया और अपनी मां के साथ-साथ वह भी झड़ना शुरू कर दिया,,,, अपनी मां की जबरदस्ती चुदाई करने के बाद वह धीरे से अपनी गोद से अपनी मां को नीचे उतारने लगा तो उसकी मां मुस्कुराते हुए बोली।



क्या हो जाता है तुझे रोज लेता है फिर भी तेरा मन नहीं भरता कभी भी शुरू हो जाता है,,,।(अपने कपड़ों को व्यवस्थित करते हुए सुगंधा बोली,,, तो अपनी मां की बात सुन कर वह भी अपनी पेंट को ऊपर खींचते हुए बोला,,)

अभी मौका मिल रहा है तभी कभी भी ले ले रहा हूं यही तृप्ति आ गई तो मौका ढूंढते रह जाओगी मिलेगा नहीं,,,।

बात तो सही कह रहा है लेकिन अब ऐसा तो है नहीं की तृप्ति के आ जाने के बाद हम दोनों कुछ कर नहीं पाएंगे पढ़ने तो जाएगी ही,,,, उसके बाद मजा करेंगे,,,,।

लेकिन रात को,,,, रात को कैसे कर पाएंगे रात को ही तो ईत्मिनान से मजा आता है,,,।

अब कर भी क्या सकते हैं तृप्ति को आने से तो रोक नहीं सकते,,,,।

जल्दी से उसकी शादी करवा दो ताकि वह अपनी ससुराल चली जाए फिर हम दोनों मजा करते रहेंगे,,,,।

(अंकित की बात सुनकर सुगंधा हंसने लगी और हंसते हुए बोली,,,)

अरे बुद्धू शादी विवाह क्या कोई गुडडे गुड्डी का खेल है,,, कि जब चाहो तब हो गई उसके लिए समय लगता है वैसे भी अभी तृप्ति पढ रही है मुझे नहीं लगता कि इतनी जल्दी वह शादी के लिए तैयार होगी,,,।

(यह सब बात अंकित अच्छी तरह से जानता था वह जानता था कि यह सब जल्दबाजी से नहीं होता समय लगता है इसलिए वह बहस को बढ़ाना नहीं चाहता था और अपने पेट की बटन को बंद करके अपनी मां के गाल पर चुंबन करके वह घर से बाहर निकल गया और जाते हुएबोला,,,)



कल पार्टी में जो पहन कर जाना हो कपड़े पसंद कर लो नहीं तो दो-तीन घंटे तो कपड़े पसंद करने में निकल जाएंगे।

अच्छा यहबात है,,,, तो तू ही मेरे लिए पसंद कर दे की क्या पहन कर जाऊं,,,,।

तो ठीक है जब मैं आऊंगा तब बताऊंगा कि क्या पहन कर जाना,,,(और इतना कहकर अंकित घर से बाहर निकल गया,,,,,, दूसरे दिन सुगंधा पार्टी में जाने की तैयारी कर रही थी 5:00 बज रहे थे और वह अभी-अभी बाथरुम से नहा कर अपने कमरे में आई थी बिल्कुल नंगी बिना कपड़ों के उसके बदन से पानी की बूंदे गिरकर नीचे फर्श को भिगो रही थी,,,, अंकित ने पहले से ही अपनी मां के लिए पीले रंग की साड़ी जो की पारदर्शी थी उसे पसंद करके बिस्तर पर रख दिया था जब वह अपने कमरे में आई तो बिस्तर पर पीले रंग की साड़ी पेटीकोट और पीले रंग का ब्लाउज के साथ-साथ पीले रंग की ब्रा और पैंटी को देखकर सुगंधा मुस्कुराने लगी,,,, और अपने आप से ही बोली,,,)

हम दोनों की पसंद कितनी मिलती-जुलती है नहाते समय में यही सोच रही थी की पीले रंग की साड़ी पहन कर जाऊं और देखो मेरे बेटे ने मेरे लिए पीले रंग की साड़ी के साथ-साथ सब कुछ पीले रंग का ही मैचिंग करके रख दिया है,,,, भगवान सबको ऐसा ही बेटा दे,,,,ओहहहहो अगर सच में भगवान ऐसा बेटा सबको देगा तो हर घर में चुदाई शुरू हो जाएगी,,,(अपनी कहीं बात पर वह खुद ही मुस्कुराने लगी और धीरे से अलमारी में लगे आईने के सामने खड़ी होकर अपने हुस्न को देखने लगी,,,, तब तक अपने कमरे से निकाल कर अंकित भी अपनी मां के कमरे में आ गया और वह देखा तो उसकी मां कमरे में बिल्कुल नंगी खड़ी थी या देखकर उसके बदन में सुरसुराहट सी होने लगी और वह तुरंत जाकर अपनी मां को पीछे से बांहों में भर लिया,,,, अपनी मां की नंगी जवान को देखकर उसका लंड तुरंत हरकत में आ गया था जिसका एहसास सुगंध को अपने भारी भरकम पिछवाड़े पर हो रहा था और यह महसूस करके वह अपने बेटे से बोली,,,)



अभी कुछ मत करना अभी-अभी नहा कर आई हूं,,,।

तो इसमें क्या हो गया,,,, मेरे प्यार के रंग से नहाओगी तो और भी ज्यादा निखर जाओगी,,,।

नहीं नहीं रहने दे इससे ज्यादा मुझे नहीं निखरना है,,,।

(उसकी मां उसे रोकने की कोशिश करती रही लेकिन फिर भी वह पीछे से अपनी मां को बाहों में भरकर अपनी मां की नंगी पीठ पर चुंबनों की बारिश कर दिया अपने बेटे की हरकत से सुगंधा खुद चुदासी हो गई थी,,, उसका मन भी देखने को कर रहा था लेकिन इस समय उसे पार्टी में जाने के लिए तैयार होना था इसलिए वह अपने बेटे को रोक रही थी अंकित भी समझता था इसलिए वह अपनी मां को अपनी बाहों की कैद से आजाद करता हुआ बोला,,,)

चलो कोई बात नहीं कुछ कर नहीं सकते लेकिन तुम्हें कपड़े तो पहना सकता हूं ना।

हां यह ठीक रहेगा,,,,।

(सुगंधा के ईतना कहते ही अंकित बिस्तर पर पड़ी अपनी मां की पीले रंग की ब्रा को उठा लिया और उसे अपनी मां के हाथ में डालकर उसे पहनने लगा अपनी मां की ब्रा के कप को दोनों हाथों से पकड़ कर वह अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियों से उसे हटा दिया और एक गलती करते हुए वह उसे एकदम उसमें चूचियों को बैठा दिया और पीछे से ब्रा का हुक लगाने लगा,,, और इस बीच सुगंध भी दोनों हथेलियां को अपनी गोलाइयों पर रखकर उसे व्यवस्थित करके आईने में अपने आप को देख रही थी,,,,,, ब्रा पहनाने के बाद अंकित अपनी मां का डोरी वाला ब्लाउज ले लिया और उसे पहनने लगा लेकिन पीछे से ब्लाउज की डोरी बंद करते समय वह इतना ज्यादा कामोत्तेजित हो गया कि वह अपने अाप पर बिल्कुल भी सबर नहीं कर पाया और धीरे से अपने पेंट की बटन खोलकर पेंट को नीचे कर दिया और अपनी खड़े लंड को पीछे से अपनी मां की गुलाबी छेद से सटा दिया आईने में अपने बेटे की हरकत और उसे अपनी बुर पर अपने बेटे के मोटे सुपाड़े को महसूस करके वह इतना तो समझ गई थी कि उसका बेटा क्या करने जा रहा है इसलिए अपने बेटे को रोकने की कोशिश करती रह गई लेकिन अंकित कहां रुकने वाला था वह एकदम से अपनी मां की पीठ पर दोनों हाथ रखकर उसे झुका दिया और पीछे से अपनी मां की बुर में डालकर उसे चोदना शुरू कर दिया,,,,, और अपनी मां की चुदाई करता हुआ बोला।)



इतनी खूबसूरत लग रही हो कहीं पार्टी में कोई चोद ना दे इसलिए मैं ही तुम्हें चोद दे रहा हूं,,,,।

हरामजादे तो क्या मुझे इतना गिरा हुआ समझा है कि किसी के भी सामने टांग खोल दूंगी,,,।

अब मुझे मत सीखा छिनार मैं जानता हूं तेरी आदत,,,, कोई थोड़ी सी मस्ती कर लिया तो तू अपनी टांगें खोल कर उससे चुदवा लेगी,,,,।

मादरचोद मेरी बुर इतनी भी सस्ती नहीं है कि किसी के भी सामने टांगे खोल दुं,,,,,,।

तेरी बुर सस्ती नहीं है लेकिन हरामजादी तेरी नियत फिसल गई तो क्या होगा,,, मैं तो ठगा रह जाऊंगा और कोई दूसरा मजा ले जाएगा,,,(अंकित पीछे से जोर-जोर से धक्के लगाता हुआ बोला अपने बेटे की गंदी बातें और उसके मदहोश कर देने वाले धक्कों के असर में सुगंधा भी पूरी तरह से बहकने लगी थी,,,, और वह भी अपने बेटे को जवाब देते हुए बोली,,,)

तो क्या हो गया अगर दूसरा कोई मजा ले लेगा तो ऐसा भी तो हो सकता है तेरे से ज्यादा दमदार मरद मिल गया तो,,,,,। तुझसे ज्यादा मजा देने वाला मिल गया तो,,,,।

तु पूरी छिनार बन गई है,,, मुझे मालूम है वहां पर जाकर किसी पहचान वाले टीचर के साथ खुल्लम-खुल्ला चुदाई का मजा लुटेगी,,,, कोई मास्टर मिल गया तो तेरी खोल कर बजा देगा या फिर मेरे जैसा स्टूडेंट जोकिंग हमेशा तुझे लेने के बारे में सोच कर हाथ से हिलता होगा मौका देखकर तेरी बुर में डालकर जन्नत का मजा लुटेगा,,,।

(इस तरह की अश्लील बातें करके मां बेटे दोनों को और ज्यादा मजा आ रहा था यह सब बातें मां बेटे दोनों उत्तेजित अवस्था में बोल रहे थे जो की वास्तविकता बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन इस तरह की बातें करके दोनों और भी ज्यादा बढ़ जाती थी जिससे अंकित जोर-जोर से धक्के लगाता था और सुगंधा भी पीछे से अपनी बड़ी-बड़ी गांड को जोर-जोर से ठेल देती थी। पार्टी में जाने से पहले अंकित अपनी मां की जमकर चुदाई कर रहा था पीछे से उसकी मदहोश करने वाली गांड और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी अंकित तब तक अपनी मां की चुदाई करता रहा जब तक की दोनों झड़ नहीं गए,,, मां बेटे दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे,,,,, अंकित ने धीरे से अपने लंड को अपनी मां की बुर से बाहर निकाला जो की पूरी तरह से उसके मदन रस में,सना हुआ था सुगंधा भी अपने आप को व्यवस्थित करते हुए और अपनी सांसों की गति को दुरुस्त करते हुए आईने में अपने खूबसूरत उत्तेजना से तमतमाए हुए चेहरे को देखते हुए बोली,,,)

बाप रे तेरी हरकतें ना जाने कब बंद होगी एकदम पसीना पसीना कर दिया,,,,।

रुको मैं अभी पंखा चला देता हूं,,,(इतना क्या कर अंकित पंखा चालू कर दिया और सुगंधा तैयार होने लगी थोड़ी देर में सुगंधा पीली साड़ी में आसमान से उतरी हुई अप्सरा लग रही थी,,,,, देखते ही देखते छः बच चुके थे पार्टी शुरू होने में एक घंटा का समय रह गया था,,, घर से निकलते निकलते वह अपने बेटे को हिदायत देते हुए बोली,,,।)



देख मुझे आने में लेट भी हो सकता है तो सुमन के घर से आकर अंदर से दरवाजा बंद कर लेना है ऐसा नहीं कि मैं आने वाली हूं तो इसलिए दरवाजा खुला छोड़ दे समझ गया ना दरवाजा बंद करके रखना,,,,।

अरे मम्मी में समझ गया तुम चिंता मत करो तुम आराम से जाओ,,,,,। वैसे मम्मी,,,(पीली साड़ी में अपनी मां की कई हुई बड़ी-बड़ी गांड की तरह देखते हुए) आज तो न जाने कितनों का लंड खड़ा कर दोगी तुम।

धत् बेशरम,,,,(इतना कहकर सुगंधा अपनी गांड मार्केट हुए घर से बाहर निकल गई और कुछ दूरी पर जाकर वह रिक्शा पकड़ कर प्रिंसिपल के घर की तरफ चल दी,,,,, अब उसे सुमन के घर जाना था सुमन का बर्थडे था वैसे कोई खास मेहमान आने वाले नहीं थे दो-चार दिने चुने ही मेहमान थे ऐसा सुमन की मां ने ही पहले ही बता दी थी लेकिन उसने अभी तक सुमन के लिए कोई गिफ्ट नहीं खरीदा था बिना गिफ्ट के जाना ठीक नहीं था इसलिए वहां हाथ में धोकर फ्रेश हो गया और घर पर ताला लगा कर मार्केट की तरफ निकल गया सुमन के लिए गिफ्ट खरीदने के लिए।
 
अंकित घर से निकल गया था सुमन के लिए गिफ्ट लेने के लिए, सुमन के साथ वह काफी घुल मिल गया था वैसे तो सुमन के घर से उसका कुछ गहरा रिश्ता बन चुका था सुमन के साथ भी और उसकी मां के साथ भी सुमन ने तो अपनी मां को अंकित के साथ मजे लेते हुए देखा भी चुकी थी जिसके बारे में उसने अंकित के साथ बहस भी की थी लेकिन अंकित अपनी सूझबूझ से उसे मना लिया था। अंकित को ज्यादा समय नहीं लगा था सुमन के लिए गिफ्ट खरीदने में उसने एक खूबसूरत गुलाब और सुमन के लिए ब्रा और पेंटि खरीद कर उसे गिफ्ट पैक करवा लिया और अपने घर वापस आ गया,,,,।



दूसरी तरफ सुगंधा अपनी प्रिंसिपल के घर पहुंच चुकी थी 25 साल स्कूल के पूरे होने की खुशी में प्रिंसिपल ने अपने घर को बहुत खूबसूरत तरीके से सजा रखी थी, चारों तरफ रोशनी ही रोशनी थी बंगले के हर एक दीवार पर छोटी-छोटी लाइटों की झड़ियां लगी हुई थी जो की दर से बहुत ज्यादा खूबसूरत दिखाई दे रही थी। सुगंधा इस सजावट से काफी प्रभावित हुई और ऑटो से नीचे उतारकर उसे किराया देकर बंगले की तरफ आगे बढ़ गई बंगले के बाहर बहुत सारी गाड़ियां खड़ी थी मोटर गाड़ी के साथ-साथ मोटरसाइकिल भी खड़ी थी स्कूल की प्रिंसिपल ने बहुत लोगों को इनवाइट की थी,,,, देखने सही लग रहा था कि स्कूल के स्टाफ के साथ-साथ निजी मेहमान का भी जमावड़ा बना हुआ था। अपनी साड़ी के पल्लू को ठीक करते हुए सुगंधा बंगले के अंदर प्रवेश करने लगी बंगले के गेट पर ही मेहमान के स्वागत के लिए परी के रूप में लड़कियां खड़ी थी जो मेहमान पर फूल बरसा रही थी उन लड़कियों ने सुगंधा पर भी गुलाब के फूल बरसाए तो सुगंध दोनों की तरफ देखकर मुस्कुराने लगी और आगे बढ़ गई लेकिन जाते-जाते सुगंधा को इस बात का एहसास जरूर हुआ था कि दोनों लड़कियां उसे ही देख रही थी,,, क्योंकि परी का वस्त्र पहन कर तो वह दोनों लड़कियां तैयार हुई थी लेकिन स्वर्ग की अप्सरा तो सुगंधा लग रही थी।



अंदर पहुंचते ही स्कूल का स्टाफ नजर आने लगा सुगंधा उन लोगों से बातचीत करके अपने आप को मशगूल करने लगी,,,, तभी दूर से स्कूल की प्रिंसिपल बिंदु आई हुई दिखाई थी जो की लाल रंग की साड़ी में बहुत खूबसूरत लग रही थी वह सुगंधा और बाकी के स्टाफ के पास आई और सबका अभिवादन की और फिर दूसरे मेहमानों की देखरेख के लिए आगे बढ़ गई,,,,, पहुंचते ही वेटर सबको शरबत का ग्लास थमाते हुए आगे बढ़ रहे थे, सुगंधा भी शरबत का गिलास हाथ में ले ली और धीरे-धीरे शरबत का मजा लेने लगी इस बीच इधर-उधर नजर घुमा कर देखने भी लगी की कौन-कौन आया है वैसे तो उसे स्कूल का सारा स्टाफ दिखाई दिया था लेकिन नूपुर अभी तक नहीं दिखाई दी थी,,,, तभी थोड़ी देर बाद नूपुर भी बंगले के अंदर प्रवेश करते हुए दिखाई दी अपने पति के साथ उसके पति को देखकर सुगंधा अपने मन में ही सोचने लगी की,,, ऐसी खूबसूरत बेलगाम घोड़ी पर लगाम लगाने वाला घुड़सवार कमजोर हो तो घोड़ी को बहकने में ज्यादा समय नहीं लगता,,, नूपुर की जवानी को देखकर सुगंधा को अब उस पर तरस आता था,, लेकिन तभी उसे नूपुर के बेटे का ख्याल आया उसे पक्का यकीन था कि जिस तरह से वह अपने घर में अपने बेटे के साथ मजा लूट रही थी उसी तरह से नूपुर भी अपने बेटे के साथ जवानी का खुलकर मजा लुटती होगी लेकिन इस बारे में वह नूपुर से बात नहीं कर सकती थी। अंदर आते ही नूपुर की भी नजर सुगंधा पर पड़ गई और वह मुस्कुराते हुए सुगंधा की तरफ आगे बढ़ गई दोनों एक दूसरे से मिलकर काफी खुश नजर आ रहे थे दोनों आपस में बात करने लगे,,, और नूपुर के पति पास में ही पड़ी कुर्सी पर जाकर बैठ गए,,, पार्टी में काफी बड़े-बड़े लोग आए थे जिस बात से अंदाजा लगाया जा सकता था कि स्कूल की प्रिंसिपल की पहचान काफी हद तक बड़े लोगों से ज्यादा थी,,,।



दूसरी तरफ अंकित सुमन के जन्मदिन पर जाने के लिए तैयार हो रहा था। अच्छे से तैयार होकर अपने आप को आईने में देखते हुए वह मुस्कुरा दिया और गिफ्ट को अपने हाथ में ले लिया और अपने मन में सोचने लगा कि सुमन गिफ्ट देखेगी तो खुश हो जाएगी,,, वैसे भी सुमन के अंगों का नाप उसे अच्छी तरह से मालूम था इसलिए सुमन से पूछने की जरूरत भी नहीं थी और वह गिफ्ट लेकर अपने कमरे से बाहर निकल गया और दरवाजे पर ताला लगा दिया सुमन का घर बगल में ही था इसलिए वह निश्चिंत था। सुमन के घर पहुंच कर देखा तो, जन्मदिन की पार्टी का इंतजाम छत पर किया गया था छत पर पहुंच कर देखा तो गिनती के केवल 10 12 लोग ही थे,,, सुमन ने खास लोगों को ही इनवाइट किया था,,, अंकित को देखते ही सुमन और उसकी मां दोनों खुश हो गए सुमन की मन खुश होते हुए बोली।

अरे आओ अंकित बेटा मैं तुम्हें बुला नहीं जा रही थी,,, केक काटने का समय जो हो गया है,,,।

जी आंटी हो थोड़ा देर हो गया इसलिए,,,।

(दोनों की बात सुनकर समान अपने मन में ही बोली कितनी हारामी है मम्मी अभी कैसा बेटा बेटा कह रही है और मौका मिलते ही लंड पर चढ़ जाती है,,,,, पास में ही कुर्सी पर सुमन के पिताजी बैठे थे अंकित उन्हें भी नमस्कार किया,,,, थोड़ी ही देर में सुमन जोक फूलों वाले फ्रॉक में अप्सरा की तरह दिख रही थी वह केक पर जली हुई मोमबत्ती को बूझाकर केक काटने लगी और अंकित के साथ सभी लोग हैप्पी बर्थडे सुमन का गाना गाने लगे,,,,, छत पर जितने भी लोग थे सभी लोगों में केक बांटने का काम अंकित ने खुद किया, यह देखकर सुमन और उसकी मां बहुत खुश हो गए क्योंकि उनके काम में अंकित फैमिली मेंबर की तरह काम कर रहा था। केक खाने के बाद कुछ लोग फिल्मी गानों पर डांस करने लगे सुषमा भी अपनी गांड हिला हिला कर नाच रही थी और ऐसा हुआ सिर्फ जानबूझकर कर रही थी अंकित को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए क्योंकि ऐसे माहौल में उसका मन कुछ और ही कर रहा था। डांस का भी कार्यक्रम खत्म होने के बाद सुषमा ने सबको छत पर एक लाइन से बिठा दिया अौर सबको खाना परोसने लगी, अंकित नहीं जानता था कि भोजन का भी प्रबंध किया गया है यह देखकर अंकित मन ही मन बहुत खुश हुआ क्योंकि , उसे इस बात की चिंता थी कि आज वह खाना नहीं खा पाएगा लेकिन सुषमा ने उसकी चिंता को दूर कर दी थी खीर पुरी और कद्दू की सब्जी खाकर अंकित बहुत खुश हुआ।



धीरे-धीरे करके सब लोग अपने-अपने घर जाने लगे, सुमन के पिताजी भी काफी थक चुके थे इसलिए वह धीरे-धीरे छत से नीचे उतर गए,,, मौका देखकर अंकित सुमन से बोला,,,।

मेरा दिया हुआ गिफ्ट सबके सामने मत खोल देना अकेले अपने कमरे में खोलना,,,।

क्यों ऐसा क्या है गिफ्ट में,,,?

बता दूंगा तो गिफ्ट, गिफ्ट नहीं रह जाएगा।

चलो यह भी सही है,,,, आंटी नहीं आई,,,।

अरे हां में बताना भूल गया, वह क्या है ना की मम्मी जी से स्कूल में पड़ता है उसे स्कूल को 25 साल पूरे होने की खुशी में प्रिंसिपल ने पार्टी रखा था आज वही जाना था तो मम्मी वहां चली गई मैं इधर आ गया।

ओहहह आंटी आती तो और मजा आता,,,, देखा था ना शर्मा जी के घर पर शादी में आंटी कितना अच्छा नाची थी,,,,।

हां,,,,, इसका मतलब है कि तुम मम्मी को नचाना चाहती थी,,,,।

हां क्यों नहीं जब तुम मेरी मम्मी को चोद सकते हो तो मैं तुम्हारी मम्मी को नचा भी नहीं सकती।

इतना तो हक है तुमको,,,, (अंकित मुस्कुराते हुए बोला,,,, अंकित का इतना कहना था कि तभी सुषमा छत पर आई हुई दिखाई थी और वह सुमन से बोली,,,,)

सुमन वो चटाई और वह टेबल पर जो कपड़ा बढ़ा है उसे लेकर मेरे कमरे में रख दो और बिस्तर लगा देना तुम्हारे पापा को नींद आ रही है।

ठीक है मम्मी,,,,, (इतना कहकर सुमन चटाई और टेबल पर बिछा कपड़ा ले ली और छत से नीचे जाने लगी,,, वह जा ही रही थी कि कभी सुषमा फिर से बोली,,,)

और हां सुमन झूठे बर्तन पड़े हैं उसे साफ करो मैं आती हूं बड़ी गर्मी लग रही है मुझे,,,,।



ठीक है मम्मी,,,, (इतना कहकर वह सीढीओ से नीचे उतर गई,,,,, उसके चाहते ही अंकित मुस्कुराते हुए बोला,,,)

आज तो कयामत लग रही हो आंटी ऐसा लग रहा है कि जैसे तुम्हारा ही जन्मदिन था।

सच में मैं अच्छी लग रही हूं,,, (दोनों हाथों को आगे की तरफ फैला कर साड़ी के पल्लू को हाथों में लिए हुए गोल घूम कर हुआ अपने आप को अंकित को दिखाते हुए बोली,,,,,)

सच में आंटी आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो।

इस तरह से मेरी तारीफ मत किया कर कुछ कुछ होने लगता है,,,।

और तुम्हें देखकर मुझे कुछ-कुछ हो रहा है उसका क्या,,,?

हमममममम बहुत शैतान हो गया है तो अच्छा यह बता सुमन के लिए तो तूने गिफ्ट ले आया और से दे भी दिया मेरे लिए क्या लाया है,,,,।

तुम्हारे लिए,,, तुम्हारे लिए तो मैं हूं ना सबसे बड़ा गिफ्ट,,, (हथेली से अपने लंड को खुजलाते हुए वह बोला तो यह देखकर सुषमा शर्मा गई,,,, और फिर सीढीओ की तरफ देखते हुए बोली,,,)

चल फिर ला मेरा गिफ्ट मेरे लिए लाया है तो,,,।

यहां,,,? (चारों तरफ नजर घुमा कर देते हुए अंकित बोला,,,)

तो क्या मेरे कमरे में जाकर देगा क्या,,, रुक अच्छा... (और इतना क्या कर रहा है छत पर जल रही लाइटों को बुझा दी छत पर एकदम से अंधेरा हो गया,,, यह देखकर अंकित का दिल जोरो से धड़कने लगा वह सुषमा की बेचैनी और उसका उतावलापन देखकर उत्तेजित हुआ जा रहा था उसे एहसास हो रहा था कि अगर वाकई में ऐसी औरत हो तो मर्द को तो मजा ही मजा आ जाए जो सामने से टांगे फैलाने के लिए मचल रही हो,,,, सुषमा भी बिल्कुल भी देर नहीं की लाइट के बंद होते ही और तुरंत अंकित की तरफ आई और उसे अपनी बाहों में भरकर उसके होठों पर अपनी हॉट रख दी सुषमा की हरकत को देखकर अंकित कहां पीछे हटने वाला था उसके बदन में भी उत्तेजना का तूफान उठने लगा और वह तुरंत अपने दोनों हथेलियां को एकदम से उसकी भारी भरकम नितंबों पर रखकर दबाना शुरू कर दिया। होठों से होठों का मिलन होते ही दोनों के बदन में मदहोशी का तूफान उठने लगा,,, सुषमा जानती थी कि उसकी बेटी कुछ देर तक छत पर आने वाली नहीं थी क्योंकि उसे काम जो उसने दे दी थी बिस्तर लगाने का और झूठे बर्तन साफ करने का तब तक वह अपना काम निपटा देती,,,, अंकित सुषमा की गांड को जोरों से मसल रहा था और सुषमा धीरे से एक हाथ पेंट के ऊपर रखकर पेंट के ऊपर से ही अंकित के लंड को जोर-जोर से दबा रही थी मसल रही थी। अंकित का जोश करता जा रहा था वह पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डुबकी लगाने को तैयार हो चुका था छत पर पूरी तरह से अंधेरा छाया हुआ था जिसका लाभ दोनों को मिल रहा था रोशनी की वजह से ही अंकित अपने आप को तैयार नहीं कर पाया था लेकिन सुषमा की चालाकी से वह एकदम से मत हो गया था,,,,। साड़ी के ऊपर से गांड को मसलते मसलते अंकित धीरे-धीरे साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगा,,, देखते ही देखते अंकित सुषमा की साड़ी को कमर तक उठा दिया था,,, और उसकी नंगी गांड के बीच अभी भी उसकी पैंटी आ रही थी जिसमें वह अपने दोनों हाथ डालकर उसकी नंगी जवानी का मजा लूट रहा था,,,।

अंकित की हरकतों से मदहोश होती हुई सुषमा धीरे से अंकित के पेंट का बटन खोलने लगी,, क्योंकि वह भी बिल्कुल भी देर नहीं करना चाहती थी देखते ही देखते वहां अंकित के पेट का बटन खोल कर उसके पेंट को अंडरवियर सहित नीचे की तरफ सरकाने लगी,,, जैसे ही अंकित का जवान लंड पेंट की कैद से आजाद हुआ सुषमा मस्त होते हुए अंकित के नंगे लंड को पकड़ लिया और उसे हिलाना शुरू कर दी नंगा लंड की गर्माहट पाकर सुषमा की बुर पानी छोड़ने लगी सुषमा से बर्दाश्त नहीं हो रहा था वह मदहोश हुए जा रही थी और चुदवासी हुए जा रही थी उसका खुद पर काबू बिल्कुल भी नहीं था,,,, इसलिए वह धीरे से अपने होंठ को अंकित के होंठ से अलग की और अगले ही पल वह अपने घुटनों के बल बैठकर अंकित के खड़े लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,, अंकित मदहोश होने लगा उसकी आंखें बंद होने लगी और वह अपने दोनों हाथ सुषमा के सर पर रखकर धीरे-धीरे अपनी कमर को आगे पीछे करके हिलना शुरू कर दिया,,, अंकित इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि सुषमा लंड बहुत अच्छे से चुसती थी इसलिए उसे इस बात का डर भी बना रहता था की कहानी उसका पानी सुषमा के मुंह में ही ना निकल जाए वैसे तो मुंह में पानी निकालने से कोई दिक्कत नहीं थी लेकिन फिर भी वह अपनी मर्दाना ताकत को ऐसे ही बर्बाद होने देना नहीं चाहता था क्योंकि वह जानता था कि और तो मैं वह इसीलिए लोकप्रिय है क्योंकि उसका पानी जल्दी नहीं निकलता,,,, और इसीलिए वह अपनी लोकप्रियता पर बिल्कुल भी दाग लगने देना नहीं चाहता था लेकिन फिर भी जिस अंदाज से सुषमा से मदहोश कर रही थी यह अंदाज अंकित को बहुत पसंद था।

कुछ देर तक सुषमा इसी तरह से अंकित को मजा देता रहे लेकिन मौके की नजाकत को समझते हुए सूरज मदहोश होता हुआ बोला,,,।

इसी में सारा समय व्यर्थ मत कर दो मेरी जान हम दोनों के पास समय बहुत कम है कहीं सुमन आ गई तो गजब हो जाएगा,,,,

अरे कुछ नहीं होगा उसे जो काम दिए हैं उसे करने में उसे आधे घंटे से ज्यादा समय लग जाएगा। (इतना कहने के लिए सुषमा ने अपने मुंह में से अंकित के लंड को निकाली थी और फिर इतना कहने के बाद तुरंत फिर से उसे अपने मुंह में भर ली और मजा लेने लगी ऐसा लग रहा था कि जैसे आज वह अंकित के लंड को अपने मुंह में से निकालना ही नहीं चाहती थी,,,, अंकित इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि सुषमा ऐसी हालत में भावनाओं में बह रही थी क्योंकि ऐसे मौके पर कुछ भी हो सकता था,,,, तभी अंकित के दिमाग में कुछ ख्याल आया और वह है इसी मौके का फायदा उठाते हुए बोला।)

अगर आ ही गई तो क्या कर लोगी,,,, सोचो अगर सुमन तुम्हें ईस हालत में देख लेगी तो क्या होगा इस बारे में कभी सोची हो,,,।

अरे ऐसा नहीं हो सकता होगा कभी नहीं दिखेगी,,, मैं यह सब पूरा इंतजाम करके करवाती हूं। (इतना कहने के लिए वह फिर से लंड को बाहर निकाली और कहने का तुरंत बाद फिर से मुंह में भर ली,,, यह देखकर अंकित अपने मन में ही बोला कितनी बड़ी छिनार है,,,, अंकित अपनी बात से पीछे नहीं हटना चाहता था वह आगे की रणनीति को यहीं पर तय करना चाहता था क्योंकि वह जानता था कि ऐसे हालात फिर से बनने वाले हैं कि सुमन अपनी मां को इस अवस्था में देख ले और फिर अंकित मां बेटी दोनों के साथ एक साथ मजा लूटे,,,, इसलिए वह फिर से बोला ,,)

तुम समझने की कोशिश नहीं कर रही हो अगर सच में सुमन ने देख ली तब क्या करोगी अगर यह बात उसने अंकल को बता दिया था इस उम्र में बदनामी हो जाएगी इस बारे में कभी सोचती हो अपनी ही बेटी की नजर में गिर जाओगी इस बारे में कभी सोची तो नहीं होगी,,,,।

मैं इस बारे में कभी नहीं सोचा क्योंकि मैं जानती हूं कि ऐसा कभी कुछ होने वाला नहीं है,,,,।(इतना कहने के लिए हुआ फिर से अपने मुंह में से लंड को बाहर निकाली लेकिन इस बार कहने के बाद लंड को मुंह में नहीं ली गहरी सांस लेते हुए वह धीरे से उठकर खड़ी हो गई और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) मैं कभी ऐसी गलती करूंगी ही नहीं कि यह सब किसी को पता चले,,,,

तुम समझने की कोशिश नहीं कर रही हो,,,,, कुछ देर के लिए सोचो अगर सच में सुमन देख ले और यह सब अंकल जी को बता दे तो घर में धमाल मच जाए तुम्हारी जिंदगी सच में खराब हो सकती है,,,,,, क्या तुम्हें लगता है कि सुमन अगर यह सब देख लेगी तो अंकल जी को बता देगी,,,,।

(अंकित की बात को सुनकर इस बार सुषमा थोड़ा सोच में पड़ गई उसे इस तरह से विचार मग्न होता हुआ देखकर अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

अगर सच में आंटी ऐसा हो गया तो तुम तो बदनाम होगी मैं भी बदनाम हो जाऊंगा अगर यह सब मम्मी को पता चल गया तो मैं कभी मम्मी से आंख मिला नहीं पाऊंगा,,,, मम्मी मेरे बारे में क्या सोचेगी यह सब मैं कहां से सीखा यह सब क्या करने लगा मैं,,,,,।

क्या ऐसा हो सकता है,,,?

क्यों नहीं हो सकता आंटी,,,, लेकिन एक बात है,,, अगर सुमन ने कभी हम दोनों को इस अवस्था में देख ली तो उसका मुंह बंद करने का एक ही तरीका है कि उसे भी इस खेल में शामिल कर लिया जाए।

धत् क्या बकवास करता है,,,, ऐसा कभी नहीं हो सकता,,,,।

लेकिन जिस तरह की सिचुएशन के बारे में मैं बता रहा हूं ऐसे हालात में यही युक्ति काम करेगी तभी हम सब का भला है वरना सब कुछ तहस-नहस हो जाएगा,,,।

यह सब कह कर तू मजा किरकिरा मत कर,,, (इतना कहते हुए वह फिर से अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर छत की 3 फीट की दीवार को दोनों हाथों से पड़कर अपनी गांड को अंकित के सामने करके खड़ी हो गई,,,, अंकित मौके की नजाकत को अच्छी तरह से समझता था वह धीरे से अपने दोनों हाथ आगे बढ़कर सुषमा की चड्डी को पकड़ कर नीचे की तरफ खींचने लगा और उसे देखते ही देखते उसके घुटनों तक लाकर छोड़ दिया,,,, सुषमा की भारी भरकम गांड एकदम से नंगी हो चुकी थी अंकित भी अपने आप को रोक नहीं पा रहा था क्योंकि लंड चूस कर जिस तरह से सुषमा ने अंकित को मदहोश की थी अब उसका हरजाना चुकाने का समय आ चुका था,,, अंकित भी अपने लिए जगह बनाने लगा और देखते ही देखते सुषमा की गुलाबी बुर में अपने लंड डालकर उसको चोदना शुरू कर दिया लेकिन अंकित को इस बात से संतुष्टि थी कि उसने अपने मन की बात को सुषमा के कानों में डाल दिया था क्योंकि वह जानता था कि कभी भी इस तरह की हालात बनेंगे तो उसकी कई बात सुषमा को जरूर अच्छी लगने लगेगी,,, भले ही वह इस समय इस तरह की बातें सुनकर गुस्सा कर रही हो और उसे इस तरह की बातें पसंद ना हो लेकिन जब इस तरह के हालात बनेंगे तो अंकित की यही कही बात उसके काम आएगी क्योंकि ऐसी हालत में बदनाम होने से अच्छा है की इज्जत बचाने में जो कुछ भी किया जाए वह सही लगने लगता है।

अंकित बड़े जोरों से धक्के लगाया था सुषमा हर धक्के के साथ हल्की-हल्की सिसकारी की आवाज छोड़ रही थी अंकित दोनों हाथ आगे बढ़ाकर ब्लाउज के ऊपर से ही उसके दोनों घर बच्चों को जोर जोर से दबा रहा था,,,, एक तरफ सुमन के जन्मदिन पर सुमन की मां की चुदाई शुरू हो चुकी थी और दूसरी तरफ स्कूल के 25 साल पूरे होने की खुशी में पार्टी पूरे शबाब में थी अभी तो केवल शरबत और नाश्ता का ही तो और शुरू था लोग स्टेज पर जा जाकर नाच रहे थे खुशियां मना रहे थे। सुगंधा भी अपनी जगह पर खड़ी होकर धीरे-धीरे अपने पर हिला रही थी लेकिन वह स्टेज पर जाकर नाचने की हिम्मत बिल्कुल भी नहीं कर सकती थी। लेकिन इस बीच उसे पर बार-बार एक शख्स की नजर चली जा रही थी और वह शख्स था बिंदुओं का पति जो की पार्टी मनाने के लिए ही दूसरे शहर से अपने घर आया था लेकिन आज उसकी नजर सुगंधा पर थी क्योंकि पहले साड़ी में उसका निखरता हुष्न और मदहोश कर देने वाली जवानी उसे पागल बना रही थी खुद उसकी बीवी बिंदु भी बहुत खूबसूरत थी लेकिन सुगंधा उसे एक कदम आगे थी इसीलिए बिंदु का पति अपनी नजरों को सुगंधा के ऊपर जाने से रोक नहीं पा रहा था और इस बात की खबर सुगंध को बिल्कुल भी नहीं थी वह अपने में ही मस्त थी एक कोने में खड़ी होकर धीरे-धीरे शरबत पी रही थी और पार्टी का मजा ले रही थी।

दूसरी तरफ सुषमा की चुदाई पूरे शबाब में थी,,,, अंकित बिल्कुल भी रहम नहीं दिख रहा था उसके धक्के बड़े तेज चल रहे थे नीचे सुमन बर्तन साफ कर रही थी लेकिन उसे एहसास हो रहा था कि काफी देर से उसकी मां नीचे नहीं आई थी उसे लग रहा था कि अंकित अपने घर जा चुका होगा लेकिन फिर अपने मन में वह सोचने लगी कि अगर अंकित अपने घर चला गया होता तो उसकी मां इतनी देर से छत पर नहीं होती जरूर कुछ ना कुछ गड़बड़ है और वह एकदम से बर्तन को वहीं छोड़कर अपने हाथ को अपने ही कपड़ों से साफ करते हुए वह धीरे-धीरे छत की तरफ आगे बढ़ने लगी वह दबे पांव सीढ़ियां चढ़ रही थी। सीढ़ियां चढ़ते हुए उसे एहसास होने लगा की छत की लाइट बंद थी,, छत पर पूरी तरह से अंधेरा था लेकिन चांदनी रात होने की वजह से हल्का-हल्का सब कुछ दिखाई दे रहा था,,,, तीन-चार सीढ़ियां चढ़ने पर ही उसे चूड़ियों के खनकने की आवाज सुनाई देने लगी जो की एक लय में बज रही थी,,,, इस तरह की आवाज को सुनकर सुमन का दिल जोरो से धड़कने लगा वह धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी धीरे-धीरे सीढ़ियां चल रही थी,,,,, और फिर जैसे ही वह छत के ऊपर पहुंची तो सामने अपनी आंखों के सामने का नजारा देखकर दंग रह गई,,, छत की लाइट बंद होने के बावजूद भी चांदनी रात होने की वजह से सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था,,, वह साफ देख पा रही थी कि उसकी मां छत की दीवार को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी भारी भरकम गांड को पीछे की तरफ लहराते हुए अंकित से चुदाई का मजा लूट रही थी। अपनी मां की बेशर्मी और उसका छीनरपन देखकर सुमन को एकदम से गुस्सा आ गया और वह जोर से बोली।

यह सब क्या हो रहा है,,,?

(इतना सुनते ही सुषमा के तो होश उड़ गए, अंकित भी एकदम से घबरा गया लेकिन वह अगले पल अपने आप को सहज करते हुए अपने लंड को निकालते निकलते तीन-चार धक्के और लगा दिया क्योंकि उसे बहुत मजा आ रहा था और ऐसे मौके पर सुमन आ गई थी,,,, सुषमा तो एकदम से दंग रह गई थी सुमन को अपनी आंखों के सामने देखकर और जिस अवस्था में वह खड़ी थी वह एकदम से शर्म से पानी पानी हो गई,,,, अंकित सुषमा को ज्यादा शर्मिंदा होने देना नहीं चाहता था इसलिए तुरंत अपने लंड को उसकी बुर से बाहर निकाल लिया,,, और खुद ही अपने हाथ से सुषमा की साड़ी को पड़कर कमर से नीचे गिरा दिया भले उसकी पेंटि उसकी घुटनों में फंसी हुई थी लेकिन इस समय वह सुषमा की नंगी जवानी को ढंक दिया था,,,, सुमन एक बार फिर से जोर से चिल्लाई)

यह सब क्या हो रहा है,,,?

(सुमन के सवाल का जवाब दोनों के पास नहीं था दोनों में से कोई भी इस सवाल का जवाब देने में समर्थ नहीं था दोनों खामोश खड़े थे सुषमा की आंखों में आंसू आ गए थे वह रोना शुरू कर दी थी अंकित जानबूझकर सुषमा के सामने घबराने का नाटक कर रहा था लेकिन अंदर ही अंदर खुश हो रहा था क्योंकि उसे अब उसकी युक्ति काम करने वाली थी क्योंकि इस बारे में उसने सुमन से भी पहले बात कर लिया था।)
 
बिंदु के पति की नजर सुगंधा पर बराबर बनी हुई थी। सुगंधा का पति शराब भी पिया था और शराब के नशे में उसकी आंखों में कामुकता भर चुकी थी पीली साड़ी में स्वर्ग की अप्सरा सी दिखने वाली सुगंधा उसकी आंखों में बस गई थी सुगंधा का खूबसूरत जिस्म पाने के लिए उसका मन तड़पने लगा था। लेकिन अभी भी वह पूरी तरह शराब के नशे में नहीं था लेकिन सुगंधा की जवानी के नशे में पूरी तरह से डूब चुका था। मेहमानों से बात करते हुए उसकी नजर सुगंधा पर ही टिकी हुई थी, और वह सुगंधा के अकेले होने का इंतजार कर रहा था क्योंकि इस समय उसके साथ नूपुर थी जो इधर-उधर जाकर वापस उसके पास आ जाती थी और बात करने लगती थी। बिंदु का पति सुगंधा को निहार रहा था कि तभी उसका दोस्त आ गया और वह बिंदु के पति से बोला।



मैं देख रहा हूं माथुर तुम बहुत देर से उसे औरत को निहार रहे हो कहीं उसके साथ मजे लेने का तो इरादा नहीं है,,,,,, (वह चुटकी लेता हुआ बोला अपने दोस्त की बात सुनकर बिंदु का पति मुस्कुराते हुए बोला)

अब तुझसे क्या छुपाना यार मैंने आज तक ईसकी जैसी औरत नहीं देखा ,देख रहा है कितनी गदराई हुई है,, बिस्तर पर तो धमाल मचा देती होगी,,,,।

मैं भी वही देख रहा हूं,

लेकिन यह है कौन,,,?

यह तो मुझे भी नहीं मालूम भाभी जी जरुर जानती होंगी उनसे ही पूछ कर देख ले,,,।

पागल हो गया है क्या तू,, बेवजह बात का बतंगड़ बन जाएगा, तू तो औरतो की आदत को जानता ही है। मुझे ही कुछ जुगाड़ करना होगा,,,,,।

(ऐसा कहकर वह कुछ देर तक इंतजार करता रहा और जैसे ही नूपुर उसके पास से थोड़ा डर गई वह तुरंत मौका देखकर सुगंधा के पास पहुंच गया और मुस्कुराते हुए बोला)

हाय यंग लेडी,,,,,।

(अपने लिए इस तरह के शब्द सुनकर और वह भी अपने स्कूल की प्रिंसिपल के पति के मुंह से, सुगंधा एकदम से झेप गई उसे तो कुछ समझ में नहीं आया कि वह क्या कहे,,, वह कुछ बोल नहीं पाई बस खामोश खड़ी रही और वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) मैं काफी देर से तुम्हें देख रहा हूं,,,, तुम पार्टी में अकेली आई हो क्या,,?

जी हां सर,,,, मैं अकेली आई हु,,,,।



मैं माफी चाहता हूं लेकिन इससे पहले मैंने तुम्हें कभी देखा नहीं,,,,, मैं तुम्हारा नाम जान सकता हूं,,,,।

जी मेरा नाम सुगंधा है और मैं आपकी बीवी के स्कूल में पढ़ाती हूं,,,,।

(इतना सुनते ही वह एकदम से खुश होता हुआ बोला)

ओहहहहह हो तभी हम दोनों की मुलाकात कभी नहीं हुई चलो कोई बात नहीं आज तो मुलाकात हो ही गई है,,,,, तुम कुछ लेती क्यों नहीं,,,,, कब से खाली शरबत का ग्लास पकड़कर खड़ी हो,,,, रुको मैं तुम्हारे लिए नाश्ता लेकर आता हूं,,,,।

अरे नहीं इसकी जरूरत,,,, (सुगंधा इतना ही बोलते ही थी कि वह बिना कुछ सुने आगे बढ़ गया सुगंधा को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि इस हालात से कैसे निपटा जाए, मर्दों की फितरत को अच्छी तरह से समझते थे वह समझ चुकी थी कि उसके मन में क्या चल रहा है लेकिन प्रिंसिपल का पति होने की वजह से वह कुछ बोल नहीं पा रही थी,, तभी वह अपने हाथ में भेल की डिस लेकर आया और सुगंधा को थमाते हुए बोला,,,,।)

लो खाओ,,,,, यह पार्टी सबको खाने पीने और मजा करने के लिए रखी गई है,,,,,।

( सुगंधा इनकार नहीं कर पाई क्योंकि वह जानती थी कि यह शख्स कौन है इसलिए वह उसके हाथों से भेळ की डिश ले ली और मुस्कुराकर खाने लगी,,, पहले तो सुगंधा को यह अच्छा लग रहा था कि उसके स्कूल के प्रिंसिपल का पति उसके पास आकर बात कर रहा है लेकिन जैसे ही सुगंधा ने उसकी नजरों का पीछा की तो वह तंग रह गई क्योंकि वह मुस्कुराते हुए बात करते हुए उसके ब्लाउज के बीच से झांकते हुई उसकी गहरी लकीर कोई देख रहा था उसके ब्लाउज के आकार को देख रहा था और मन ही मन उत्तेजित हो रहा था इस बात का आभास होते ही सुगंधा अपने आप को असहज महसूस करने लगी,,, लेकिन इस समय वह मजबूर थी कुछ कर नहीं सकती थी वह भी खुश होने का नाटक करते हुए मुस्कुरा कर भेल खा रही थी,,,, सुगंधा को मुस्कुराते हुए देखकर, माथुर साहब को लग रहा था की उसका काम बनने लगा है,,, वह भी मन ही मन खुश हो रहा था सुगंधा की बड़ी-बड़ी चूचियां उसकी आकर्षण का केंद्र बिंदु बनी हुई थी बार-बार उसकी नजर सुगंधा की लाजवाब छातियों पर फिसल जा रही थी,,, तभी वह कुछ कहने वाला था कि तभी दूर से उसे किसी ने पुकार लिया,,,, वैसे तो उसका जाने का मन नहीं था लेकिन जिसने भी उसे बुलाया था वह शायद उसके लिए बहुत खास था इसलिए वह इनकार नहीं कर पाया और वह सुगंधा से बोला।)



मैं माफी चाहता हूं,,,,।

जी कोई बात नहीं,,, (सुगंधा मुस्कुराकर बोली और वह भी मुस्कुराया कर वहां से चला गया उसके जाते ही तुरंत उसके पास नूपुर आई और हाथ की कोहनी से उसके हाथ पर मजाकिया अंदाज में मारते हुए बोली,,,)

क्या बात है प्रिंसिपल के पति तो तुम्हारे ऊपर फिदा हो गए हैं,,,, तुम्हारी जवानी देखकर पानी पानी हो रहे हैं,,,।

(नूपुर की आवाज सुनकर सुगंधा एकदम से सकपका गई और असहज होते हुए बोली,,)

नहीं तो ऐसी कोईबात नहीं है,,,।

ऊमममम मुझसे छुपाने की कोशिश मत करो मैं दूर खड़ी यह सब देख रही थी, देखी नहीं कैसे तुम्हारे लिए भेल की डीश लेकर आए खाने के लिए,,, तुम्हारे लिए स्पेशल वैटर बन गए,,,,

यह क्या कह रही हो,,, ऐसा कुछ भी नहीं है,,,,।

बिल्कुल ऐसा ही है मैं अपनी आंखों से देख रही हूं इसलिए मुझसे छुपाने की कोशिश मत करो,,, ऐसे भी मुझे तो लगता है कि अपनी मैडम के पति साहब तुम्हारी जवानी पर फिदा हो गई मैं दूर खड़ी देख रही थी कि कैसे तुम्हारी छाती को निहार रहे थे और वैसे भी यह पूरी महफ़िल में तू ही सबसे ज्यादा खूबसूरत लग रही हो तो भंवरों का खूबसूरत फूल के आसपास मंडराना तो बनता है,,,।

तुम खामखा बात का बतंगड बना रही हो,,,।

अरे इसमें क्या है यह तो अच्छी बात है,,, मैडम जी के पति अगर तुम पर फिदा रहेंगे तो तुम्हारा काम भी बनता रहेगा,,,,।



नहीं नहीं मुझे कोई काम नहीं बनवाना है,,,,,,।

(दोनों के बीच बहस बाजी हो ही रही थी कि तभी नूपुर के पति वहां पर मुस्कुराते हुए आ गए और दोनों के बीच की यह बहस एकदम से खत्म हो गई और तीनों महफिल के बारे में बात करने लगे,,, नूपुर की बातो को सुनकर सुगंधा मन ही मन शर्मिंदा हो रही थी क्योंकि वह कभी नहीं चाहती थी कि उसका नाम किसी मर्द से जुड़े,,, भले ही वह भला की खूबसूरत थी लेकिन किसी गैर के हाथों अपनी इज्जत नीलाम होने देना नहीं चाहती थी,, इसलिए नूपुर की बातें उसे अच्छी नहीं लग रही थी लेकिन नुपुर का मुंह कैसे बंद करें क्योंकि नूपुर सब कुछ अपनी आंखों से देखी थी,,, सुगंधा अपने मन में सोच रही थी कि वह खामखां इस पार्टी में आ गई उसे आना ही नहीं चाहिए था,,,,, मैडम के पति को लेकर उसके मन में थोड़ा डर की भावना पैदा होने लगी थी वह नूपुर उसके पति से बातचीत के दौरान इधर-उधर नजर घुमा कर देख ले रही थी कहीं वह आ तो नहीं रहा है,,,।

और दूसरी तरफ घर पर माहौल पूरी तरह से बिगड़ने के कगार पर आ चुका था क्योंकि सुमन अपनी आंखों से अपनी मां को अंकित के साथ चुदवाते हुए देख चुकी थी वैसे वह पहली बार नहीं देख रही थी इससे पहले भी वह अपनी मां को अंकित के साथ अस्तव्यस्त हालत में देख चुकी थी,,,, लेकिन इस बार की बात कुछ और थी पहली बार तो वजह से कैसे अपने मन से वह बात को निकल चुकी थी लेकिन आज उसका जन्मदिन था और जन्मदिन के अवसर पर भी उसकी मां पड़ोस के जवान लड़के के साथ जवानी का मजा लूट रही थी,,,, सुषमा अपनी बेटी के द्वारा पकड़े जाने पर पूरी तरह से सर में से पानी पानी होने लगी थी उसकी आंखों से शर्म का पानी बह रहा था वह अपने दोनों हाथों से अपना मुंह छुपाए हुए थी मौके की नजाकत को समझते हुए अंकित तो उसकी कमर पर से साड़ी को नीचे गिरा कर उसकी नंगी जवानी को ढंक दिया था लेकिन अभी भी उसकी पैंटी उसके दोनों टांगों में फंसी हुई थी,,,, अंकित कुछ बोल नहीं पा रहा था क्योंकि जिस तरह का माहौल था उसे अंजान बने रहना था और यह दिखाना था कि वह भी पकड़ा गया है ताकि सुषमा को बिल्कुल भी शक ना हो कि अंकित यह सब जानता था वैसे तो अंकित को भी नहीं मालूम था कि इस समय छत के ऊपर वह पकड़ा जाएगा,,,, दोनों की खामोशी देखकर सुमन फिर से जोर से चिल्लाते हुए बोली,,,)



तुम दोनों में से कोई बताएगा यह सब क्या हो रहा है,,,?

(अपनी बेटी कि ईस तरह की बात को सुनकर सुषमा जोर जोर से रोने लगी लेकिन अंकित अपने आप को और मौके को संभालते हुए बोला,,,)

देख नहीं रही हो क्या हो रहा था फिर भी पूछ रही हो तुम्हें तो शांत रहना चाहिए अपनी मां को इस तरह की अवस्था में देखकर इस तरह की बातें पूछ कर क्यों अपनी मां को शर्मिंदा कर रही हो,,, (पेंट से बाहर लटक रहे अपने लंड को पकड़ कर पेंट के अंदर डालकर पेंट का बटन बंद करते हुए अंकित बोला,,, और अंकित किस तरह की बात को सुनकर समान थोड़ा गुस्से में बोली,,,)

अच्छा तो तुम्हारे कहने का मतलब यह है कि जो कुछ भी नहीं अपनी आंखों से देखी तो उसके बाद कुछ बोलना नहीं चाहिए बल्कि मुझे चुपचाप वापस चले जाना चाहिए ताकि तुम दोनों आराम से मजे ले सको यही ना,,,,,,,।

(सुमन की आवाज सुनकर फिर से सुषमा जोर-जोर से रोने लगी वह घबराई हुई थी वह शर्मिंदा थी क्योंकि वह अस्त-व्यस्त हालत में अपनी बेटी के हाथों पकड़ी गई थी जिस तरह से सुषमा रो रही थी उसे रोता हुआ देखकर अंकित फिर से सुमन से बोला)



यह क्या कह रही हो सुमन थोड़ा तो अपनी मम्मी का लिहाज करो मैं मानता हूं कि तुम अपनी मम्मी को ही हालत में देख ली हो लेकिन जरूरी है कि अपनी मम्मी को अपमानित करो,,,, उनकी हालत देखो शर्मिंदा है तभी तो रो रही है तुम्हें तो थोड़ा विचार करना चाहिए,,,,,।

विचार तो तुम दोनों को करना चाहिए जब यह बात पापा को बताऊंगी पर पापा यह सब बातें तुम्हारी मां को बताएंगे तब पता चलेगा कि तुम दोनों क्या कर रहे थे,,,, और तुझे तो मैं शरीफ समझती थी अच्छा लड़का समझती थी और तू अपनी मां की उम्र की औरत के साथ ही मजे लूट रहा है।

यह कैसी बातें कर रही हो जो होना था हो गया अब इस बारे में बात करने से कोई फायदा नहीं है।

क्यों नहीं अभी तो बात हो रहा की जाएगी मैं सच में यह सब बातें पापा को बता दूंगी,,, तुम तो हो ही हरामि लेकिन मम्मी तुम तुम्हें तो समझदारी दिखाना चाहिए था यह तुमने क्या कर बैठी,,,, यह सब बातें अगर समाज में फैलने लगेंगी तो क्या होगा कुछ सोची हो,,, ,,,,

( सुमन की बातों का सुषमा के पास बिल्कुल भी जवाब नहीं था उसे भी एहसास होने लगा था कि वह भावनाओं में बहकर अपनी मर्यादा को लांघ चुकी थी,,, वह बस रोए जा रही थी सुषमा को रोते हुए देखकर अंकित आगे बढ़ा और सुमन से बोला,,,)



यह क्या पागलपन है सुमन दीदी,,,, (कुछ पल के लिए अंकित सुषमा के सामने दीदी का संबोधन नहीं किया था और जैसे उसे एहसास हुआ वह फिर से दीदी कहकर बुलाने लगा ताकि सुषमा को दोनों के बीच के रिश्ते के बारे में जरा भी भनक न लगे,,,) कोई इस तरह से अपनी मां से बात करता है क्या,,,?

मुझे सिखाने की कोशिश मत कर उनकी मुझे मालूम है कि किस समय कैसी बात करनी चाहिए यह सब का कर तू अपनी गलती को छुपा नहीं सकता अगर यही सब तेरी मम्मी को पता चलेगा तो वह तेरे साथ क्या करेंगी तुझे अंदाजा है,,,, यह बात मेरे पापा को पता चलेगा तो क्या होगा तुझे पता है अभी तो बहुत मजा आ रहा है लेकिन यही बात जब लोगों को पता चलने लगेगा तब वह तेरी हरकत की किस तरह की प्रतिक्रिया देंगे तुझे कोई अंदाजा है बाहर भी नहीं निकल सकेगा तु,,,,, (सुमन गुस्से में थी उसकी बात को सुनकर अंकित को एहसास हो रहा था कि वह यह सब जानबूझकर नहीं कह रही थी बल्कि गुस्से में उसके मुंह से यह सब निकल रहा था क्योंकि सुमन जिस तरह के हालात बने हुए थे उसका हिस्सा बिल्कुल भी नहीं थी यह सब पहले से तय किया हुआ नहीं था,,,, मौके की नजाकत को समझते हुए अंकित सुमन को समझाने की कोशिश करता हुआ बोला,,,)

समझने की कोशिश करो क्या तुम अपनी मम्मी को बदनाम करना चाहती हो क्या तुम यही चाहती हो कि तुम्हारी मम्मी समाज में सर उठा कर ना जी सके,,,,। अपने हाथों से तुम अपनी मम्मी का जीवन बरबाद कर रही हो,,,,।



तुम्हें क्या लगता है कि यह सब का कर मुझे अच्छा लग रहा है मुझे भी बहुत बुरा लग रहा है मुझे मम्मी पर बहुत विश्वास था लेकिन आज अपनी आंखों से यह सब देख कर मुझे समझ में नहीं आ रहा कि मैं क्या करूं,,,,, यह क्या कर दी मम्मी तुमने इस उम्र में और वह भी एक जवान लड़के के साथ,,,,।

तो क्या हो गया अगर आंटी ने मेरे साथ कुछ कर ली तो,,,, सुमन दीदी,,,,, तुम समझने की कोशिश नहीं कर रही हो एक मां एक पत्नी होने के पहले वह एक औरत है उनके भी कुछ जज्बात है चाहत है जरूरत है,,,, जिंदगी भर तो वह तुम्हारे लिए जी रही है आज अपने लिए जी ली तो,,, तुम्हें दुख क्यों हो रहा है,,,

अपनी गलती छुपाने का अच्छा बहाना बनाया है तुने क्या तुझे नहीं मालूम कि जो कुछ भी हो रहा है गलत हो रहा है,,,,?

नहीं मुझे नहीं लगता कि जो कुछ भी हुआ इसमें कुछ भी गलत है क्योंकि मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि औरत की भी जरूरत होती है और उन्हें भी समय पर पूरा करना उनका हक है,,,,,।

तू बेशर्म हो चुका है,,,,,, तभी इस तरह की बातें कर रहा है,,,, और जिस तरह की तो बातें कर रहा है कल को अगर कोई दूसरा तेरे जैसा जवान लड़का है आदमी तेरी मां के साथ इस तरह से मजे लेगा तो तू भी अपनी मां की जरूरत का खयाल कर आंखो को बंद कर लेगा,,,,।



बिल्कुल सुमन दीदी मैं ऐसा ही करूंगा क्योंकि मैं जानता हूं औरत को अपनी मर्जी से भी जीना चाहिए और तुम सब तो अपनी आंखों से देख रहे हो कि मेरी मां किस तरह से हम दोनों का पालन पोषण करती आ रही है क्या उनकी जरूरत नहीं है और वैसे भी आज जो कुछ भी हुआ उसमें आंटी की गलती नहीं है ज्यादातर गलती मेरी है मैं अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पाया,,,,,(ऐसा कहते हुए अंकित सुषमा की तरफ देखा उसने शर्म के मारे अपनी नज़रें नीचे झुकी हुई थी लेकिन इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि अंकित जो कुछ भी कह रहा है उसमें सच्चाई नहीं थी छत पर वह खुद बहक गईथी लेकिन इस समय वह इस तरह से बयान बाजी नहीं कर सकती थी क्योंकि ऐसा कहना खुद की इज्जत उछालने के समान था इसलिए खामोश रहना ही वह उचित समझी और अंकित अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) आंटी तो मुझे चटाई और बर्तन नीचे ले जाने के लिए बोल रही थी और जब मेरी नजर आंटी पर पड़ी तो वह झुकी हुई थी झुकी होने की वजह से उनके भारी भरकम गांड को देखकर मेरा ही मन बह गया और मैं उन्हें पीछे से पकड़ लिया तुम्हारी मम्मी का इसमें कोई दोस्त नहीं है वह तो इंकार कर रही थी मना कर रही थी लेकिन मैं ही नहीं माना,,,,,।



तेरा मन किया और मेरी मम्मी मान गई वह तुझे इनकार भी तो कर सकती थी अगर जबरदस्ती तू कर रहा था तो शोर तो मचा सकती थी इस तरह से बड़े आराम से अपने आप को तेरे सामने परोस दी,,,, ऐसा तो बिल्कुल नहीं हो सकता ताली एक हाथ से बिल्कुल भी नहीं बजती,,,,,।

सुमन दीदी तुम बात का बतंगड़ बना रही हो तुम करना क्या चाहती हो बताओ,,,।

मैं यह सब पापा को बता देना चाहती हूं और तुम्हारी मां को भी ताकि जो दुनिया को लगता है कि तुम बहुत सीधे-साधे लड़के हो उन्हें भी पता चलना चाहिए कि तुम कितने बड़े हरामि हो,,,,,।

(जिस तरह की कहानी अंकित में अपने मन पर काबू न करने के लिए बताया था उसकी वजह से सुमन का भी मन बहकने लगा था,,, उसे अंकित की कई बात याद आने लगी थी कि कभी इस तरह की स्थिति सामने आ गई तो एक साथ मां बेटी दोनों की चुदाई करेगा,,, और इस तरह के एहसास के लिए उसका भी मन बहकने लगा था,,,, सुमन की बातों को सुनकर अंकित मुद्दे पर आते हुए बोला,,,)



तो तुम नहीं मानोगी दीदी,,,,, देखो मेरा बस इतना कहना है कि जब आंटी इस उम्र में चुदाई का मजा लूटने के लिए मदहोश हो सकती है तुम तो अभी जवान हो रही हो ,,,,।

तु कहना क्या चाहता है,,,?(आश्चर्य से वह अंकित और अपनी मां की तरफ देखते हुए बोली,,,)

मैं यह कहना चाहता हूं कि तुम भी मजा ले सकती हो,,,,।(इतना सुनते ही सुमन हैरान होने का नाटक करने लगी और यह सुनकर सुमन की मां एकदम से बोल पड़ी,,,)

यह क्या कह रहा है अंकीत,,,।

मैं जो कुछ भी कह रहा हूं ठीक ही कह रहा हूं आंटी,,

नहीं ऐसा नहीं हो सकता,,,,

हो सकता है अगर सुमन चाहे तो,,,,,।

यह तू क्या कह रहा है,,,(रोते हुए सुषमा बोली)

इसी में हम दोनों की भलाई है और सुमन की भी तुम ही सोचो अगर यह बात अंकल जी को पता चल गई तो उनकी नजर में तुम कितना गिर जाओगी शायद फिर तुम दोनों के बीच पहले जैसा रिश्ता ना हो इसलिए मैं कह रहा हूं ,,,,,



यह तो क्या कह रहा है मैं तेरी बात मानने वाली नहीं हूं,,, मुझे क्या ऐसी वैसी लड़की समझा है क्या,,,?

अगर ऐसा है तो फिर हम दोनों को जाने दो यह बात तुम किसी को मत बताना,,,।

नहीं ऐसा तो बिल्कुल नहीं हो सकता,,,, पापा के साथ धोखा हुआ है पापा को तो बताना ही होगा,,,,।

जा बता दे लगा दे आग मेरी जिंदगी में,,, मै भी कहीं जाकर मर जाऊंगी,,(सुषमा रोते हुए बोली तो अंकित एकदम से बोल पड़ा,,,)

नहीं आंटी ऐसा कुछ भी नहीं होगा, सुमन दीदी तुम समझने की कोशिश क्यों नहीं कर रही हो क्यों अपने परिवार में आग लगाना चाहती हो क्यों सब कुछ बर्बाद करना चाहती हो बस एक छोटी सी गलती से तुम चाहो तो तुम भी मजा ले सकती हो,,,,।

नहीं मुझे मजा नहीं लेना है,,,,,,

लेकिन मुझे तो लेना है,,,,।

(अंकित की बात सुनकर सुषमा हैरान होते हुए अंकित की तरफ देखने लगी, और जोर से बोली,,,)

यह तू क्या कह रहा है अंकित,,,

मैं बिल्कुल ठीक कह रहा हूं आंटी मुझे सुमन दीदी से मजा लेना है तुम शायद नहीं जानती थी मैं बहुत पहले से तुम दोनों के साथ मजा लेना चाहता था तुम्हारे साथ तो ले लिया लेकिन सुमन दीदी रह गई,,,.



हरामजादे,,, मतलब तू पहले से ही हरामी था मेरी मां की कोई गलती नहीं है तू ही इन्हें अपने जाल में फंसाया है,,,,।

बिल्कुल सही,, मैं ही तुम्हारी मम्मी को अपने जाल में फसाया हूं और उनके साथ मजा ले रहा हूं और यह पहली बार नहीं है मैं 5-6 बार मचा ले चुका हूं नजर तो तुम्हारी आज पड़ी है,,,, मैं कर भी क्या सकता था पड़ोस में इतनी खूबसूरत औरत गांड मटकाते हुए वह चलती रहेगी तो कब तक मेरा लंड आंहे भरता रहेगा,,,, कब तक में तुम्हारी और तुम्हारी मम्मी के बारे में सोच सोच कर सिर्फ मुठ मार कर काम चलता है मेरा लंड भी तड़प रहा था तुम्हारी और तुम्हारी मम्मी की बुर में जाने के लिए तुम्हारी मम्मी की बुर में तो चला गया लेकिन अब तुम्हारी बारी है,,,,।

(अंकित एकदम बेशर्म बनता हुआ अपने मन की बात बता रहा था वैसे इसका कोई इरादा नहीं था सुषमा की चुदाई का जो कुछ भी हुआ था पहले से ही अनजाने में हुआ था और जिसमें सुषमा की मर्जी थी वह तो इस समय पूरा खेल पलटने के लिए यह सब बातें बोल रहा था और इस समय पूरा खेल पलटता हुआ दिखाई भी दे रहा था और सब कुछ अंकित के पक्ष में होने जा रहा था। अंकित की बात सुनकर सुमन जानबूझकर गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)



देख रही हो मम्मी कितना बेशर्म और निर्जला जी लड़का है मैं इसे कितना सीधा-साधा समझती थी,,,, लेकिन इसकी सच्चाई में सबको बता दूंगी,,,, तब पता चलेगा,,,,,।

जाओ बता दो किसको बताओ कि अंकल को बताओ कि मेरी मम्मी को बताओगी या आस पड़ोस वालों को बताओगी जो बता दो लेकिन इतना ध्यान रखना मैं तो लड़का हूं थोड़ी बहुत बातें बनेंगे लेकिन फिर सब कुछ शांत हो जाएगा लेकिन तुम्हारी मम्मी बदनाम हो जाएगी आते जाते लोग तुम्हारी मम्मी को न जाने किसी कैसी नजर से देखेंगे मेरे जैसे जवान लड़की तुम्हारी मम्मी को देखकर मजे लेंगे मजाक करेंगे और फिर मैं खुद सबको बता दूंगा की तुम्हारी मम्मी ही मुझे अपने घर बुलाती थी और तो और तुम भी मेरे साथ मजे ले चुकी हो,,,,,।

हाय दइया,,,, यह क्या कह रहा है अंकित,,,, तू सच में इतना बड़ा बेशर्म है,,,,,।

हां आंटी में बहुत बेशर्म हूं तभी तो तुम्हारे साथ मजा ले रहा हूं अगर शर्म वाला होता तो यह सब मजा में नहीं ले पाता,,,, और देखो आज की रात मुझे तुम मां बेटी दोनों के साथ मजा लेना है,,,,, अब तुम दोनों आपस में फैसला कर लो क्या करना चाहती हो मुझे खुशी-खुशी देना चाहती हो या समाज में बदनाम होना चाहती है अगर खुशी-खुशी मुझे दे दोगी तो यह मजा बराबर मिलता रहेगा वरना,,,, तुम दोनों बदनाम होने के लिए तैयार हो जाओ,,,, वैसे भी आंटी अंकल ने तुम्हारी जी भर कर चुदाई नहीं की तभी तो इस उम्र में भी तुम्हारी बुर एकदम कसी हुई है,,,,।

(अंकित के मुंह से अपनी बेटी के सामने इस तरह की बातें सुनकर सुषमा एकदम शर्म से पानी पानी हो गई वह शर्म के मारे अपनी नज़रें नीचे झुका दी वहीं दूसरी तरफ सुमन बड़े आश्चर्य से अंकित की तरफ देख रही थी अंकित ने धीरे से आंख मार कर सुमन को शांत रहने के लिए इशारा कर दिया,,,,, अंकित की बात सुनकर सुषमा शांत हो चुकी थी तो कुछ बोल नहीं पा रही थी क्योंकि अंकित ने सुमन के सामने एकदम गंदी बात कुछ देर की खामोशी के बाद अंकीत फिर से बोला,,,,)



बोलो आंटी तुम मां बेटी क्या करना चाहती है मजे लेना चाहती हो या बदनाम होना चाहती हो वैसे तो आज की रात पूरा मन है मेरा मजा लेने का वैसे भी सुमन दीदी ने सारा मजा किरकिरा कर दी,,, कितना मजा आ रहा था धक्के लगाने में,,,,,ऊमममम तुम्हारी बड़ी बड़ी गांड पीछे से लेने में कुछ ज्यादा ही मजा देती है,,,,।

चुप हो जा बेशर्म तुझे बिल्कुल भी पता नहीं है कि तु क्या बक रहा है,,,,।

मैं सब जानता हूं कि मैं क्या कह रहा हूं जो कुछ भी कह रहा हूं एकदम सच कह रहा हूं,,, मैं क्या मेरी जगह कोई भी होगा तो इस बात से इनकार नहीं कर पाएगा कि तुम इस उम्र में भी कितना मजा देती हो,,, अब जल्दी से फैसला कर लो तुम दोनों क्या करना चाहते हो,,,।

नहीं अंकित बेटा ऐसा बिल्कुल भी मत करना मेरे साथ तो तू कर ही रहा था सुमन के साथ ऐसा कुछ मत कर,,,,।

ऐसा कैसे हो सकता है आंटी लंड को हमेशा बुर की तलाश रहती है और इस समय मेरे सामने दो-दो बुर है,,,,, ऐसा मौका में भला अपने हाथ से कैसे जाने दूं,,,,,, तुम्हें याद है ना जब मैं परीक्षा की तैयारी करने के लिए तुम्हारे घर आया था सुमन दीदी से पढ़ाई कर रहा था तो अनजाने में मैं तुम्हें नंगी नहाते हुए देख लिया था तब से मेरे मन में तुम्हारे खूबसूरत जिस्म को पाने की लालसा बनी हुई थी और उसके बाद से फिर ना जान मैंने कितनी बार तुम्हें याद करके मुठ मारा हूं,,,, और मेरी किस्मत देखो जिसपर के बारे में सोच सोच कर पानी निकाला करता था वहीं बुर मुझे बार-बार चोदने को मिलने लगी,,,।





मम्मी तुम इसके सामने नंगी नहा रही थी,,,,।

अरे मुझे क्या मालूम था कि यह आ जाएगा मैं तो रोज की तरह नहा रही थी और यह मेरे सामने आ गया।

और तुमने इस बारे में मुझे बताया तक नहीं,,,।

अब तुझे क्या बताती कि पड़ोस का लड़का मुझे नंगी नहाते हुए देख लिया है,,,,, और मुझे क्या मालूम था कि यह मेरे पीछे पागल हो जाएगा,,,,, देख बेटा तू जा यहां से इस बारे में अगर सुगंधा को पता चल गया तो तुझे बिल्कुल भी नहीं छोड़ेगी,,,, वह सीधी साधी औरत है तेरी कम लीला के बारे में सुनेगी तो सदमे से कहीं मर ना जाए।

वह सब मैं देख लूंगा लेकिन इस समय मुझे क्या चाहिए यह तुम दोनों अच्छी तरह से जानते हो,,,,,, (इतना कहने के साथ ही एकदम से अंकित अपना हाथ आगे बढ़ाया और सुमन का हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच लिया और अपनी बाहों में भर लिया क्योंकि बातचीत में ज्यादा वक्त खराब हो रहा था और वह यह मौका अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था अपनी बाहों में भरते ही अंकित अपने दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियों को कुर्ती के ऊपर से दबाना शुरू कर दिया अंकित सुमन को पीछे से अपनी बाहों में भरे हुए था और जिस तरह की वह बातें कर रहा था उसका लंड पेट के अंदर तंबू बनाया हुआ था और सीधे सुमन की सलवार के ऊपर से ही उसकी गांड के बीचों बीच हरकत कर रहा था अंकित की हरकत देखकर सुमन एकदम से सकपका गई थी,,,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था अंकित उसकी मां के सामने ही उसके साथ कामूक हरकत कर रहा था यह देखकर सुषमा बोल पड़ी,,,)



यह क्या कर रहा है अंकित छोड़ उसे,,, वह बहुत सीधी-सादी लड़की है ऐसा मत कर,,,,।

क्या आंटी तुम भी मुझे मालूम है कि यह सीधी शादी है लेकिन उसके खूबसूरत अंग सीधे-साधे बिल्कुल भी नहीं है वह मजे लेने के लिए तड़प रहे हैं और इस उम्र में अगर मजा नहीं मिला तो यह अंदर ही अंदर घुटती रहेगी,,,,, (ऐसा कहते हुए अंकित सुमन के गर्दन पर चुंबनों की बारिश करते हुए लगातार उसकी चूची को जोर-जोर से भाग रहा था यह देखकर सुषमा से रहा नहीं किया और वह तेजी से आगे बढ़ते हुए बोली,,)

तू रूप में अभी इसके पापा को बुलाकर लाती हूं,,,।

ना आंटी ना ऐसी गलती बिल्कुल भी मत करना,, अगर अंकल छत पर आ जाए तो मैं खुद सब कुछ बता दूंगा और फिर जवाब देते रहना अंकल को,,,,,

हे भगवान में क्या करूं मैं तो पूरी तरह से फंस चुकी हूं,,,।

सब कुछ भूल कर मजा लो आंटी,,,,, देखो सुमन हालात को समझ रही है इसलिए कुछ बोल नहीं रही है वह जानती है कि अगर मैं यह सब सबको बता दिया तो क्या अंजाम होगा तुम सबकी इज्जत दाग दाग हो जाएगी तुम लोग किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रह जाओगे,,,, इसलिए सुमन को देखकर लग रहा है कि यह मेरी बात मान ली है तुम भी मान जाओ,,,, (और इतना कहने के साथ ही एक हाथ सुमन की छाती से हटकर वह अपने हाथ को आगे बढ़ाया और सुषमा का हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच लिया और उसे भी अपनी बाहों में भर लिया एक साथ मां बेटी को अपनी बाहों में भरकर भर उन दोनों के जिस्म से खेलना शुरू कर दिया,,,,, सुमन तो जानती थी कि यह सब उन दोनों की सोच का हिस्सा था लेकिन सुषमा अनजान थी उसे तो ऐसा ही लग रहा था कि अंकित इज्जत का वास्ता लेकर मौके का फायदा उठा रहा है,,,,,।

दूसरी तरफ नूपुर की बातों को सुनकर सुगंधा मन ही मन घबरा गई थी क्योंकि वह जानती थी कि अगर नूपुर के मन में यह सब ख्याल आ सकते हैं तो दूसरो के मन में भी यह सब ख्याल जरूर आ सकते हैं इस तरह से तो वह बदनाम हो जाएगी,,, यही सोच कर वह भीड़भाड़ में अपनी मौजूदगी बढ़ाने लगी,,,, पार्टी अपने पूरे शबाब में थी,,,, कुछ देर तक सुगंधा अपने आप को अपनी मैडम के पति की नजरों से बचाती रही लेकिन कब तक बचाती वह खुद सुगंधा को ढूंढ रहा था और जैसे ही उसकी नजर सुगंधा पर पड़ी वह एकदम से मुस्कुरा दिया और जल्दी-जल्दी वह सुगंधा के पास आया,,, और मुस्कुराते हुए बोला,,,)

मैं कब से तुम्हें ढूंढ रहा हूं कहां चली गई थी तुम,।

कहीं तो नहीं मैं यही तो थी,,,,, (ना चाहते हुए भी सुगंधा को उससे बात करना पड़ रहा था उससे बात करते समय सुगंध अपने आप को असहज महसूस कर रही थी क्योंकि बात करते समय उसकी नजर उसकी छाती पर ही टिकी हुई थी बार-बार पल्लू को ठीक करके वह अपनी चूचियों के बीच की लकीर को छुपाने की कोशिश कर रही थी लेकिन जाकर भी वैसा नहीं कर पा रही थी क्योंकि वह साड़ी पारदर्शी थी सब कुछ दिखाई दे रहा था,,,,, दूर खड़ी नूपुर फिर से दोनों को देख चुकी थी इसलिए वह धीरे से अपनी प्रिंसिपल मैडम के पास गई और बोली।

देख रही है मैडम,,,,?

अरे नुपुर तुम,,,, एंजॉय कर रही हो ना पार्टी,,,,।

जी मैडम मैं तो ऐंजॉय कर रही हूं लेकिन सुगंधा कुछ अलग ही इंजॉय करने के मूड में लग रही है।

सुगंधा मैं कुछ समझी नहीं,,,।

वो देखिए मैडम,,,(दूर से अपनी उंगली से इशारा करके सुगंधा और मैडम के पति को दिखाते हुए) मैं बहुत देर से देख रही हूं सर और सुगंधा दोनों हंस-हंसकर बातें कर रहे हैं,,,,।

(जैसे ही बिंदु की नजर सुगंधा और उसके पति पर पड़ी वह सारा माजरा समझ गई लेकिन वह कुछ बोल पाती से पहले ही किसी ने उसे बुला लिया और वह वहां चली गई लेकिन नूपुर ने अपना काम कर चुकी थी,,, वह जानबूझकर ऐसा कर रही थी क्योंकि अंकित के सामने उसका चरित्र उजागर हो चुका था इस तरह से अंकित ने उसके बेटे को जलील करते हुए उसके साथ मजा लिया था थोड़ा बहुत कसक उसके मन में जरूर था इसीलिए वह उस कसक का थोड़ा सा भड़ास निकाल रही थी,,,,,

दूसरी तरफ सुषमा के घर पर उसके छत पर मामला पूरी तरह से गरमा चुका था मां बेटी दोनों अंकित की बाहों में थी और अंकित बारी बारी से दोनों को चुम्मन करते हुए दोनों को चूचियों से खेल रहा था,,,,, अपनी मां के सामने जानबूझकर सुमन अंकित का विरोध करते हुए बोली।

मुझे जाने दे अंकित में यह बात किसी से नहीं कहूंगी,,,,, तुझे मम्मी के साथ मजा लेना है तो ले ले मैं किसी को नहीं बताऊंगी लेकिन मुझे छोड़ दे,,,,।(जानबूझकर सुमन अंकित की कैद से छुटने का नाटक कर रही थी,,, अंकित उसकी चूची को जोर से दबाते हुए बोला,,,)

पागल हो गई हो सुमन दीदी तुम अच्छी तरह से जानती हो कि ऐसा मौका फिर कभी मिलने वाला नहीं है , मैं तो पहले से ही तुम दोनों की जवानी का दीवाना था भला मैं कैसे अपने हाथ में आई हुई दोनों कबूतर को छोड़ सकता हूं,,,,।

नहीं नहीं अंकित ऐसा मत कर जाने दे सुमन को,,,, हम दोनों किसी को नहीं बताएंगे,,,, उसे जाने दे मैं तो हूं ना,,,,।

आज किसी को नहीं जाने दुंगा तुम दोनों से मजा लूंगा ,,,(इतना कहने के ही अंकित एक साथ मां बेटी दोनों की चूचियों को जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया,,,, मां बेटी दोनों एक दूसरे के सामने शर्म से पानी पानी हो जा रहे थे लेकिन अंकित पूरी तरह से बेशर्म हो चुका था उसकी आंखों में शर्म बिल्कुल भी नहीं थी वह हमारी बेटी दोनों के साथ मजा लेना चाहता था एक साथ दोनों की चुदाई करना चाहता था,,,, और यह उसके जीवन का पहला मौका था जब वह मां बेटी दोनों की चुदाई करने जा रहा था और उसे पूरा यकीन था की मां बेटी इससे बिल्कुल भी इनकार नहीं करेंगे इससे पहले वह राहुल के साथ मिलकर राहुल की मां की चुदाई कर चुका था लेकिन उसे समय दो मर्द और एक औरत थी लेकिन आज एक मर्द और दो औरत थी। आज का अनुभव उसके लिए बेहद यादगार होने वाला था और एक तरह से उसकी तैयारी भी हो जाने वाली थी और उसे खुद को अपनी मर्दानगी का मापदंड का एहसास होने वाला था कि वह एक साथ दो औरतों को खुश कर सकता है कि नहीं क्योंकि उसे पूरा यकीन था कि आगे चलकर उसके घर में इसी तरह का नजारा देखने को मिलने वाला है,,,, सुमन की चूची को दबाते हुए बोला,,,)

तुम्हारी चूची से बड़ी-बड़ी तो तुम्हारी मम्मी की चूची है,,,,, क्यों आंटी सही कह रहा हूं ना,,,(दूसरे हाथ से ब्लाउज के ऊपर से सुषमा की चूची को दबाते हुए वह बोला,,,,, मां बेटी दोनों खामोश थे दोनों एक दूसरे के सामने शर्मिंदा थे इसलिए दोनों कुछ बोल नहीं पा रहे थे और अंकित इसी मौके का फायदा उठा रहा था दोनों की शर्मनाक स्थिति का वह भरपूर मजा ले रहा था वह एक हाथ से सुमन की चूची को कुर्ती के ऊपर से दबा रहा था और दूसरे हाथ से उसकी मां की चूची को ब्लाउज के ऊपर से मसलते हुए उसके ब्लाउज का बटन एक हाथ से खोल रहा था देखते-देखते वह सुषमा के ब्लाउज का बटन खोल दिया और सुषमा की चुची लाल रंग की ब्रा में केद नजर आने लगी,,,, लाल रंग की ब्रा में के सुषमा की बड़ी-बड़ी चूचियों को देखकर अंकित उत्साहित हो गया और बोला,,,)

वह आंटी तुम्हारी पसंद का जवाब नहीं लाल रंग की बारात तुम्हारी दोनों चुचियों पर और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही है आज तो मजा ही आ जाएगा,,,,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित कुछ देर के लिए सुमन को अपनी बाहों से अलग कर दिया और सुषमा के ब्लाउज को खींचकर उतारना शुरू कर दिया,,, इस समय सुषमा अंकित के हाथों की कठपुतली बन चुकी थी, वह अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ कर दिया और अंकित बड़े आराम से, सुमन की आंखों के सामने ही उसकी मां का ब्लाउज खोल दिया यह सब समान तिरछी नजर से देख रही थी,,, सुमन की सांस अटक रही थी क्योंकि वह कभी सोचा नहीं थी कि उसके जीवन में ऐसा पल आएगा कि कभी वह अपनी मां के साथ ही इस तरह का आनंद ले पाएगी,, वैसे तो जिस तरह का पूरा खेल चल रहा था इस तरह की संभावना सुगंधा के घर में होने वाली थी लेकिन इससे पहले ही यह खेल सुषमा के घर पर शुरू हो चुका था अंकित पूरी तरह से बेशर्म बन चुका था वैसे भी वह मां बेटी दोनों के साथ मजा ले चुका था इसलिए शर्माने का कोई फायदा नहीं था सुषमा ही इस खेल से अनजान थे और अंकित उसे ही पूरी तरह से मदहोश बनाने में लगा हुआ था ब्लाउज उतारने के बाद वह फिर से पीछे से सुषमा को अपनी बाहों में भरकर लाल रंग की ब्रा में कैसे के दोनों कबूतरों को अपनी हथेली में लेकर जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया इतना जोर से अंकित दबा रहा था कि सुषमा के मुंह से सिसकारी की आवाज फूट जा रही थी और वह अपने मुंह से निकलने वाली इस तरह की आवाज को सुनकर खुद ही शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी अंकित भी उसे शर्मसार करने में बिल्कुल भी कसर नहीं छोड़ रहा था वह ब्रा के ऊपर से ही चूची को दबाते हुए बोला,,,)

सच में आंटी चुची हो तो तुम्हारी तरह कितनी बड़ी-बड़ी है बहुत मजा आ रहा है तुम्हारे मुकाबला तो ऐसा लग रहा है कि तुम्हारी बेटी की चूचियां अभी संतरे जैसी ही है और तुम्हारी तो पूरा खरबूजा बन चुका है,,,।

सहहहहह यह कैसी बेशर्मी भरी बातें कर रहा है थोड़ा तो लिहाज कर वह मेरी बेटी है और उसके सामने ही है सब कह रहा है,,,,,।

मजा भी तो दोनों का साथ मिलेगा तो इस तरह की बातें भी तो साथ में होनी चाहिए तुम शायद जानती नहीं हो इस तरह की बातें आपस में खुलने में मदद करती है,,, इस तरह की बातें सुनकर मां बेटी दोनों मस्त हो जाओगी तभी तो खुलकर टांगे फैला कर मेरा लंड अपनी बुर में लोगी,,,,(पीछे से ब्रा का हुक खोलते हुए अंकित बोला यह सब बेहद शर्मनाक था मां बेटी दोनों के लिए लेकिन धीरे-धीरे दोनों के मन की उत्सुकता बढ़ने लगी थी दोनों मजा लेने की भावना से ग्रस्त होने लगी थी,,,,, एक बात से सुषमा इनकार नहीं कर सकती थी कि वाकई में औरतों के मामले में अंकित पूरी तरह से किसी जादूगर से कम नहीं था,,,, औरतों के मन से औरतें दोनों से खेलना अच्छी तरह से जानता था इसीलिए तो छत पर मां बेटी दोनों के साथ मजा लूटने में लगा था,,,, ब्रा का हुक खोलते ही वह सुषमा की नंगी चूचीयो पर चुंबन की बौछार कर दिया,,, यह सब देखकर सुमन उत्तेजना से गदगद हुए जा रही थी और सुषमा मदहोशी के परम शिखर पर चली जा रही थी उसकी टांगों के बीच से बदन रस झरने की तरह बह रहा था उसकी पेंटि अभी भी उसके घुटनों में फंसी हुई थी बातचीत के दौरान भी वह अपनी पेंटि को व्यवस्थित नहीं कर पाई थी और अब उसे व्यवस्थित करने का कोई फायदा भी नहीं था क्योंकि जिस तरह की हालत थे वह समझ गई थी कि थोड़ी ही देर में पेंटी भी उतरने वाली है,,,,, देखते ही देखते हैं अंकित सुषमा की ब्रा भी निकाल कर एक तरफ फेंक दिया कमर के ऊपर वह पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी उसकी नंगी चूचियों को देखकर एकदम से अंकित इसका कंधा पकड़ कर घुमा दिया और उसे ठीक अपने सामने कर दिया उसकी नंगी चूचियां पपाया की तरह बड़ी-बड़ी थी,,, ऐसा लग रहा था की छाती नुमा वृक्ष पर पपाया का फल लटका हुआ है,,,, सुषमा की चूचियों को देखकर अंकित की आंखों की चमक बढ़ने लगी और वह मुस्कुराते हुए सुमन की तरफ देखकर बोला,,,)

देख रही हो सुमन दीदी चुची हो तो तुम्हारी मां की तरह कसम से मर्दों को इसी तरह की चूची अच्छी लगती है जब से तुम्हारी मां को नंगी नहाते हुए देखा था तब से मेरी आंखों के सामने तुम्हारी मां की दोनों चूचियां लहराती हुई दिखाई देती थी न जाने कितनी बार मैंने तुम्हारी मम्मी की चूचियों के बारे में सोच सोच कर मुठ मारा हूं लेकिन आज तुम्हारे सामने तुम्हारी मम्मी की चुदाई करूंगा और तुम्हारी मम्मी के सामने तुम्हारी चुदाई करूंगा देखना कितना मजा आता है,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित सुमन की मां की चूची को दोनों हाथ से पकड़ कर दबाते हुए उसे मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया,,,,, यह सब देख कर सुमन गहरी सांस लेने लगी उसके तन बदन में मदहोशी छाने लगी,,,, सुषमा की चूचियों को पीता हुआ बहुत तिरछी नजर से सुमन की तरफ देख रहा था सुमन प्यासी नजरों से अपनी मां और उसे देख रही थी यह देखकर अंकित तुरंत उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और बिना कुछ बोले,,, उसके सर पर हाथ रखकर उसके होठों को उसकी मां की चूचियों की तरफ आगे बढ़ाने लगा अंकित के मनसा को जानकर सुमन सिहर उठी उसका दिल जोरो से धड़कने लगा लेकिन वह कुछ सोच पाती समझ पाती या कुछ कह पाती से पहले ही जोर लगाते हुए अंकित सुमन के होठों को उसकी मां की चूचियों पर रख दिया था,,,,,,, और तब तक वह अपना हाथ उसके सर से नहीं हटाया जब तक की समान भी अपनी मां की चूची को पीना नहीं शुरू करती इस बीच लगातार वह सुमन के सामने उसकी मां की चूची के निप्पल को मुंह में भरकर छुहारे की तरह चूस रहा था और जैसे ही सुषमा को एहसास हुआ कि उसकी बेटी भी उसकी चूची को पी रही है वह पूरी तरह से मदहोशी के सागर में डुबकी लगाने लगी उसकी आंखें बंद होने लगी,,,, सुमन और अंकित दोनों सुषमा की चुचियों का रसपान करने लगे इस बीच में अंकित दूसरे हाथ से साड़ी के ऊपर से उसकी बड़ी-बड़ी गांड को दबोच रहा था मसल रहा था सुमन खुद ही मदहोशी से अपनी मां की चूची को पीने लगी तो अंकित दूसरे हाथ को उसकी गांड पर रखकर सलवार के ऊपर से उसे दबाने लगा वह एक साथ मां बेटी दोनों की गांड को दबा रहा था मसल रहा था,,,, सुमन भी मजे लेकर अपनी मां की चूची को पी रही थी,, आज से पहली बार एहसास हो रहा था कि मर्द लोग क्यों औरतों की चूची को जोर-जोर से दबा दबा कर पीते हैं क्योंकि उसकी खुद की चूची को अंकित और जिन-जिन के साथ उसके संबंध थे वह लोग ज्यादातर उसकी चुचियां से ज्यादा मजा लेते थे क्योंकि इसमें मजा बहुत उत्तेजना बहुत था इसलिए तो अभी आज अपनी मां की चूची को पी रही थी और मजा ले रही थी। और सुषमा गरमा गरम सिसकारी ले रही थी,,,।

सहहहहह आहहहहहह ऊमममममममम,,,,,,,(ऐसा कहते हैं उत्तेजना से अपने निचले होंठ को दांत से काट रही थी। कुछ देर तक अंकित इसी तरह से मजा लेता रहा,,,, और फिर अपने मुंह में से सुषमा की चूची को बाहर निकाल कर उसकी साड़ी को खोलना शुरू कर दिया,,,, सुमन ने अपनी आंखों से यह सब नहीं देखी थी तब वह सिर्फ साड़ी को कमर तक उठाकर चुदाई कर रहा था लेकिन अब सब कुछ साफ हो चुका था इसलिए अबवह खुलकर मजा लेना चाहता था और देखते ही देखते सुषमा की साड़ी को खोल दिया और वह पेटीकोट में खड़ी थी सुमन अभी तक अपनी मां की चूची से खेल रही थी और उनकी तरह रहकर दूसरी चूची को अपने हाथ से मसल दे रहा था दबा दे रहा था,,,, यह सब कुछ बेहद मदहोशी से भरा हुआ था छत पर पूरी तरह से अंधेरा छाया हुआ था लेकिन फिर भी चांदनी रात होने की वजह से तीनों एक दूसरे को बड़े आराम से देख पा रहे थे। सुषमा अपनी बेटी की हरकत को देख रही थी क्योंकि वह बड़े मजे लेकर उसकी चूचियों को पी रही थी और दबा भी रही थी,,,,

, वैसे कुछ देर पहले अंकित के प्रस्ताव पर उसकी नाराजगी थी लेकिन अब उसे मजा आ रहा था,,,, अंकित पूरी तरह से अपनी काम में लगा हुआ था क्योंकि वह मौके की नजाकत और समय की कमी को अच्छी तरह से समझ रहा था वह जानता था कि उसकी मां कभी भी आ सकती है इसलिए वह ईस खेल को जल्द ही समेटना चाहता था और इसीलिए जल्दबाजी दिखाता हुआ वहां सुषमा की पेटिकोट का नाडा पड़कर खींच लिया और अगले ही पल उसकी कमर पर भरी हुई पेटिकोट एकदम से ढीली पड़ गई,,,,,, अंकित की हरकत अपनी बेटी के सामने सुषमा मदहोशी के आलम में भी शर्मा गई और अपना एक हाथ पेटिकोट पर रखकर अंकित को रोकने की नाकाम कोशिश करने लगी क्योंकि अंकित मानने वाला नहीं था अंकित अपना हाथ से सुषमा का हाथ पकड़ कर पेटीकोट से हटा दिया और पेटीकोट को दिल्ली करके कमर के ऊपर से ही छोड़ दिया अगले ही पल पेटिकोट भरभरा कर उसके कदमों में जा गिरी और सुषमा नंगी हो गई हालांकि अभी उसकी घुटनों में उसकी पैंटी फंसी हुई थी जिसे देखकर अंकित मुस्कुराने लगा,,,, लेकिन सुषमा शर्मा होने लगी उसे शर्म आ रही थी वह अपनी बेटी के सामने इस अवस्था को झेल नहीं पा रही थी,,,, वह अपनी दोनों जांघों को आपस में सिकोड़कर अपनी पतली दरार को छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगी,,,, क्योंकि मदहोश होता हुआ अंकित अगले ही पर अपनी हथेली को सीधा उसकी बुर पर रखकर जोर-जोर से मसलना शुरू कर दिया जो कि कुछ देर पहले उसकी बुर में उसका लंड अंदर बाहर होकर मजे दे रहा था। अंकित की हरकत से एक बार फिर से उसके मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकलने लगी।

सहहहहह आहहहहहह,,,,ऊमममममममम,,,,,आहहहहहहहह,,,,,,,

(अपनी मां के मुंह से इस तरह की सिसकारि‌ की आवाज को सुनकर सुमन की हालत खराब हो रही थी,,,,,, अंकित की हथेली पूरी तरह से सुषमा के मदन रस से भीग चुकी थी इस बीच लगातार सुमन अपनी मां की दोनों चूचियों को पीना शुरू कर दी थी,,,, धीरे-धीरे मां बेटी पूरी तरह से बेशर्म बनते जा रहे थे और अंकित धीरे से घुटनों के बाल भेद किया और सुषमा की एक टांग को उठाकर अपने कंधे पर रख दिया ऐसा करने पर उसकी गुलाबी को एकदम से खुलकर सामने आ गई जिसे देखकर अंकित के मुंह में पानी आ गया और अंकित अगले ही पल अपने प्यास होठों को उसकी दहकती हुई बुर पर रखकर उसकी मलाई को चाटना शुरू कर दिया। शर्मिंदगी के एहसास में डूबी सुषमा मदहोशी के आलम में मस्त हुए जा रही थी अपनी बेटी की आंखों के सामने सब कुछ होता हुआ देख कर धीरे-धीरे वह भी इस एहसास को स्वीकार करना शुरू कर दी थी कि इस समय वह पूरी तरह से छिनार बन चुकी है क्योंकि उसकी बेटी भी उसकी चूचियों से खेलने में पूरी तरह से मशगुल हो चुकी थी,,,, सुषमा की मोटी मोटी जांघ अंकित के कंधे पर थी और अंकित अपनी दो उंगलियों को एक साथ उसकी बुर में अंदर बाहर करते हुए उसकी बुर को चाट रहा था या बेहद उत्तेजना से भरा हुआ दृश्य था जो कि सुषमा मदहोशी में अपनी आंखों को बंद किए हुए थे लेकिन सुमन अपनी नजरों को नीचे करके अंकित किया हरकत को देख रही थी सुमन को भी एहसास हो रहा था कि उसकी मां कितनी बड़ी छिनार है मौका मिलने पर वह मजा लेने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार हो जाती है,,,। अपनी मां की बेशर्मी को देखकर सुमन जोर-जोर से अपनी मां की चूची को दबाते हुए बारी-बारी से स्तनपान करने लगी,,, लेकिन इस बीच सुषमा ने ऐसी हरकत कर दी कि जिससे मां बेटी दोनों का मजा दुगना हो गया और दोनों आपस में खुलने लगे,,, जिस तरह से सुमन अपनी मां की चूची को जोर से दबा रही थी बिल्कुल भी रहम नहीं दिखा रही थी इसलिए सुषमा भी अपना हाथ आगे बढ़कर कुर्ती के ऊपर से ही अपनी बेटी के संतरे को दबा दी सुषमा की हरकत पर सुमन अपनी मां की तरफ देखने लगी दोनों की नजर आपस में टकराई और सुषमा मुस्कुरा दी,,, अपनी मां के चेहरे पर क्यों उत्तेजना और उसकी हरकत को देखकर सुमन भी मुस्कुरा दे और फिर पागलों की तरह अपनी मां की चूची को जोर-जोर से दबाकर पीते हुए अपने हाथ को अपनी मां की गांड पर रखकर दबाते हुए उस पर चपत लगाने लगी,,, बेटी के द्वारा इस तरह का मजा देने का आनंद क्या होता है इस समय सुषमा अच्छी तरह से महसूस कर रही थी उसे बड़ा अच्छा लग रहा था। सुषमा का एक हांथ अंकीत के सर पर था और वह सर पर दबाव बनाकर अपनी बुर चटवा रही थी यह सब सुमन से छुपा नहीं था,,, माहौल पूरी तरह से गरमा चुका था,,, सुमन के पापा को तो इस बात की भनक तक नहीं लगी थी कि छत पर क्या चल रहा है वह इतने थके हुए थे कि अपने कमरे में पहुंचते ही बिस्तर पर आराम करने के लिए सो गए थे और उनकी पीठ के पीछे उनकी बीवी और बेटी दोनों जवानी का मजा लूट रहे थे,,,, सुषमा की हालत खराब हो रही थी ऐसा लग रहा था कि अंकित अपनी उंगली और अपने जीभ से ही उसका पानी निकाल देगा और ऐसा ही हुआ,,, सुषमा की सांस बड़ी तेजी से चलने लगी उसके बदन में अकड़न से बढ़ने लगी वह अपनी उत्तेजना को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी और तुरंत वहां सुमन के चेहरे को दोनों हाथों में भरकर उसे अपनी तरफ खींची और उसके होंठ पर अपने होंठ रखकर चुंबन करने लगी,,, इस चुंबन से मां बेटी दोनों का बदन एकदम से गनगना गया। और उसी क्षण वह झड़ने लगी, यह अंकित के कलाबाजी का एक छोटा सा उदाहरण था जो अपनी उंगली और अपने होठों से ही अपनी जीभ का आधार लेकर सुषमा जैसी उम्र दराज औरत को चरम सुख प्रदान किया था।

मां बेटी के बीच शर्म और मर्यादा की दीवार धीरे-धीरे टूटती चली जा रही थी सुषमा का अपनी बेटी को करीब लाकर उसके होठों पर चुंबन करना यह बची कुची शर्म की दीवार को भी गिरा दी थी। सुषमा का यह स्खलन गजब कथा वह पूरी तरह से गनगना गई थी,,, उसकी सांसे उखड़ने लगी थी लेकिन फिर भी वहां अपनी बेटी के होठों का रसपान लगातार कर रही थी,,,, अंकित धीरे से उठकर खड़ा हो गया था उसके चेहरे पर सुषमा के मदन रस की बौछारें फैली हुई थी जिसे वह सुषमा की पेटीकोट को उठाकर उससे ही अपना चेहरा साफ कर रहा था। अंकित को बहुत मजा आ रहा था अभी तो खेल की शुरुआत हुई थी लेकिन वह यह भी जानता था कि उसके पास समय का अभाव है जो कुछ भी करना है जल्दी करना है इसलिए वह धीरे-धीरे अपने कपड़े उतारने लगा और देखते ही देखते एकदम से नंगा हो गया।
 
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