Incest मेरी बीवियां, परिवार..…और बहुत लोग… - Page 3 - SexBaba
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Incest मेरी बीवियां, परिवार..…और बहुत लोग…

14th Update - दूसरी सुहागरात

दिव्या: ना बाबा… मैं तुम्हारे इस डंडे को झेल नहीं पाऊँगी. दीपू हस देता है और कहता है आज तो ठीक है लेकिन जब हम घर जाएंगे तो मैं कुछ नहीं सुनने वाला हूँ और फिर तुम्हे भी इसकी आदत डाल लेनी पड़ेगी. दोनों एक दुसरे की बाहों में रहते है और ना जाने कब दोनों को नींद आ जाती है और दोनों चैन की नींद में खो जाते है....

अब आगे..

अगली सुबह दोनों मस्त नंगे एक दुसरे की बाहों में गहरी नींद में होते है. सुबह के ८. ०० बज जाते है लेकिन उनको होश नहीं रहता. रानी दरवाज़ा खटखटाती है तो दिव्या उठ जाती है और अपने आप को नंगा देख कर एकदम शर्मा जाती है और बगल में रखे घडी में टाइम देखती है तो एकदम उठ जाती है. उसे दरवाज़े पे आवाज़ आती है तो जल्दी से ऐसे ही बाथरूम चली जाती है और फिर फ्रेश होकर दरवाज़ा खोलती है. वहां पर दिव्या रानी को देखती है तो शर्मा जाती है.

रानी: उठ जाओ दीदी. ..बहुत टाइम हो गया है. और उसकी टांग खींचते हुए.. लगता है रात को बहुत मजे किये. दिव्या: चुप कर तू भी शैतान हो रही है और फिर रानी कमरे में आकर दीपू को मस्त सोया हुआ देखती है. गनीमत थी की दिव्या बाथरूम में जाने से पहले दीपू पे चादर चढ़ा कर उसको धक देती है. रानी फिर जा कर दीपू को उठाती है. दीपू भी मस्ती में अंगड़ाई लेते हुए बिना देखे रानी को पकड़ कर बिस्तर पे लिटा देता है.

रानी: जीजा जी क्या कर रहे हो? मैं रानी हूँ.. दिव्या दीदी नहीं.

दीपू को भी अहसास होता है और वो रानी को अलग कर के उससे माफ़ी मांगता है और शर्मा जाता है.

रानी: लगता है आपने रात में बहुत मजे किये है और अभी भी वैसे ही सोच रहे हो. दीपू कुछ नहीं कहता और अपने आप को देखता है तो मन में सोचता है की दिव्या ने अच्छा किया की उसपर चादर ओढ़ दिया वरना गड़बड़ हो जाता. फिर दीपू भी अपने आप को ढकते हुए बाथरूम चला जाता है.

दिव्या किचन में सब के लिए चाय बना रही होती है तो मीना भी वहां आ जाती है उसकी मदत करने और रानी की तरह वो भी उसकी टांग खींचती है. दिव्या भी उसको देख कर कुछ नहीं कहती और जब वो काम कर रही होती है तो थोड़ा लंगड़ा के चलती है.

मीना: क्या बात है दीदी.. आप क्यों लंगड़ा रही हो?

दिव्या: चुप कर तू भी.. तू भी तो अपनी सुहागरात के बाद ऐसे ही लंगड़ा के चली होगी.

मीना: नहीं दीदी.. इतना तो नहीं जितना आप लंगड़ा रही हो. काश आपका भाई मुझे रोज़ लंगड़ी बना कर भी रखता तो मैं बहुत खुश रहती और धीरे से कहती.. अब तक मैं माँ बन गयी होती और उसका चेहरा उदास हो जाता है. दिव्या भी उसकी तरफ देख कर उसको अपनी बाहों में लेकर चुप हो जा. आगे सब ठीक होगा. चिंता मत कर..

मीना: वैसे लगता है रात को आपने बहुत ज़ोर से चिल्लाया था. हम सब को भी आवाज़ सुनाई आयी. दिव्या वो बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और कुछ नहीं कहती. मीना फिर से उसकी टांग खींचते हुए..दिव्या के पास आकर धीरे से उसके कान में.. लगता है दीपू का हथियार बहुत ज़बरदस्त है. क्यों ठीक कहा ना?

दिव्या भी कुछ नहीं कहती और मीना की तरफ देख कर हस देती है और फिर दोनों चाय बना कर सब को देने जाते है. दिव्या वसु के पास जाती है चाय लेकर तो वसु उसका खिला हुआ चेहरा और लंगड़ाती चाल देख कर कहती है.. रात को मजा आया क्या?

दिव्या वसु को गले लगा कर: दीदी आपको ही धन्यवाद देना है की आपकी वजह से ही मैं भी औरत बन गयी हूँ. और हाँ.. आज आपकी बारी है तो थोड़ा ध्यान से.. दीपू तो बिस्तर पे शेर बन जाता है.

उसने तो कल मेरा कचुम्बर ही बना दिया था. पहली रात में ही उसने मुझे ४ बार झडा दिया था. वसु जब दिव्या से ये बात सुनती है तो एकदम उसको देखते रहती है.

दिव्या: मैं सच कह रही हूँ. आज रात को आप को भी पता चल जाएगा और हस देती है.

वसु: चुप कर कुछ भी बोलती रहती है तू.

दिव्या भी हस्ते हुए उसके पास आकर कहती है मैं झूट नहीं बोल रही हूँ.

दिव्या: दीदी वैसे एक बात कहूँ?

वसु: हाँ.

दिव्या: दीदी आप कमरे में एकदम बेशर्म रहना तभी आपको भी मज़ा आएगा.

वसु: मतलब?

दिव्या: मतलब ये की कमरे में जब आप दोनों बात करोगे तो झिझकना नहीं. ये दीपू को भी पसंद नहीं है. मैं पहले उनसे बात करने को झिझक रही थी.

वसु: बात करने में क्या झिझक?

दिव्या उसके पास आकर धीरे से वसु के कान मैं: बातें मतलब गन्दी बातें और एक हाथ उसके साडी के ऊपर से चूत पे रख कर और दुसरे हाथ से उसकी एक मस्त ठोस चूची पे रख कर.. मैं इनकी बात कर रही हूँ.. पहले मुझे बहुत शर्म आ रही थी लेकिन वो कहाँ मानने वाला था. और जब मैं भी थोड़ा खुल गयी तो सच में बहुत मज़ा आया हम दोनों को. अब समझ गयी?

और वैसे भी शायद आपको याद होगा जब उसने ये बात घर में जन्मदिन में कही थी.. और उसको आँख मारते हुए कहती है आपने साफ़ तो कर लिया है ना. वसु को समझ नहीं आता तो वो दिव्या की तरफ देखती है तो फिर से दिव्या उसकी साडी के ऊपर से चूत पे हाथ रख कर.. यहाँ...

वसु दिव्या की तरफ देख कर हस देती है और कुछ नहीं कहती.

इतने में दीपू भी फ्रेश हो कर नहा कर कमरे से बाहर आता है तो सब उसका ही इंतज़ार कर रहे थे क्यूंकि सुबह भी हो गयी थी और तब तक सब ने चाय भी पी ली थी. दीपू सब को देख कर कुछ नहीं कहता और बस हस देता है लेकिन उसे दिव्या और वसु दिखाई नहीं देते क्यूंकि वो दोनों अभी भी वसु के ही कमरे में थे.

दीपू भी फिर थोड़ा बाहर घूमने जाता है और फिर दोपहर को आकर खाना खा के सो जाता है क्यूंकि उसे भी पता था की आज रात को भी उसे “थोड़ी मेहनत” करने पड़ेगी.

दीपू दिव्या को ढूंढता है लेकिन उसे नहीं दिखती तो वो अपनी मामी लता से पूछता है तो लता कहती है.. क्यों रे उसके बिना तो सोयेगा नहीं क्या? ज़ाहिर सी बात है. कल ही शादी हुई है तो अकेले कैसे सोयेगा. आज सुबह से वो बेचारी लंगड़ा कर चल रही है. थोड़ा उसे आराम करने दे और ऐसा कहते हुए हस देती है. दीपू भी कुछ नहीं कह पाता है और कमरे में जाकर सो जाता है.

फिर शाम को फिर से घर में चहल पहल होती है और रात को खाना खाने के बाद इस बार कविता और लता वसु को कमरे में सजाते है. लता थोड़ी देर के लिए दीपू के पास जाती है तो कविता वसु को सजाने लग जाती है. गहने, चूड़ियाँ, होटों पे लाल लिपस्टिक और कपडे भी ऐसे ही पहन ने को बोलती है जैसे कल दिव्या ने पहना था. छोटी ब्लाउज जिसमें से उसकी आदि चूचियां बाहर को निकली हुई थी.

कविता वसु को इस रूप में देख कर एकदम खुश हो जाती है और उसे आईने के सामने ले जाकर उसके पीछे खड़े होते हुए वसु की दोनों मस्त बाहर निकली हुई चूचियों को दबा देती है और कहती है तुम कितनी सुन्दर दिख रही हो.

कविता जब वसु की चूचियां दबाती है तो वसु पलट कर कविता तो देखते हुए: ये आप क्या कर रही हो?

कविता: मुझे माफ़ करना वसु.. तुम्हे ऐसा देख कर रहा नहीं गया तो मैंने ऐसा कर दिया और उसकी आँखों में आंसूं जा जाते है.

वसु: अपनी आँखों में आंसूं क्यों?

कविता: तू बड़ी भाग्यशाली है की तेरी फिर से शादी हो गयी है और हम दोनों की उम्र लगभग बराबर है. काश मैं भी शादी कर पाती.

वसु: आप क्यों नहीं शादी कर लेती?

कविता: नहीं मैं बाहर मुँह नहीं मारना चाहती. मीना क्या सोचेगी. मैं हमेशा मीना के लिए भाई/ बेहन देना चाहती थी लेकिन वो नहीं हो पाया ना ही मैं नानी बन पायी. तेरी किस्मत अच्छी है की तुझे चाहने वाला दूसरा पति मिल गया है और अपनी नज़रें नीचे कर लेती है.

वसु कविता के चेहरे को अच्छे से देखती है और पाती है की कितनी आग में जल रही है और उसकी आँखों में प्यार, थोड़ा वासना और चाहत दिख रहा था. वसु कविता को देखकर उसका चेहरा ऊपर कर के.. परेशान मत होईये माजी. सब ठीक हो जाएगा. क्या पता ऊपर वाला आपकी बात मान जाए और शायद आपने जो दोनों बातें कही है वो सच हो जाए. अभी तो मैं ज़्यादा कुछ नहीं कर सकती बस इतना ही..

और ऐसा कहते हुए वसु कविता के होंटो को अपने होंठों से मिला देती है और एक गहरा चुम्बन देती है. कविता कुछ सोचती उसके पहले ही वसु अपना एक हाथ उसकी चूची पे लेजा कर दबा देती है तो कविता भी उत्तेजित हो जाती है और वसु का साथ देती है और दोनों २- ३ मं तक एक गहरे चुम्बन में जुड़ जाते है.

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ठीक उसी वक़्त लता भी कमरे में आती है और दोनों को देख कर हस कर खासते हुए.. क्या बात है.. दोनों सास बहु में बहुत प्यार हो रहा है. लता की बात सुनकर दोनों अलग जो जाते है और दोनों अपना चेहरा नीचे कर लेते है. लता वसु के पास आकर अगर अपना पूरा प्यार मा जी को दोगी तो फिर दीपू का क्या मिलेगा और ऐसा कहते हुए वसु को आँख मार देती है. वसु भी शर्म से अपना चेहरा नीचे झुका लेती है और कुछ नहीं कहती.

लता: वैसे तुम बहुत सुन्दर दिख रही हो वसु और वो वसु के पास आकर मेरी तरफ से ये. ..और ऐसा कहते हुए वो भी वसु के होंठ को चूम लेती है और लता उसकी गांड को भी दबा देती है. और हाँ अच्छे से मझा करना. तू तो किस्मतवाली है की तेरी ये दूसरी सुहागरात है. ये हर किसी को मिलता नहीं है.

फिर लता और कविता वसु को कमरे में छोड़ कर आते है तो वही मीना और रानी भी दीपू को कमरे में छोड़ कर आने से पहले कहते है की थोड़ा आराम से करना. कल की तरह दीदी भी उतनी ज़ोर से ना चिल्लाये और हस्ते हुए दोनों कमरे से बाहर निकल जाते है.

वसु बिस्तर पे एकदम सझ धज कर बैठी हुई होती है. दीपू आज भी कमरे को देख कर ख़ुशी महसूस करता है क्यूंकि कल की तरह आज भी कमरा अच्छे से सजाया हुआ था.

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दीपू भी आकर बिस्तर पे वसु के बगल में बैठ था है और वसु को देख कर: आप तो बहुत खूबसूरत लग रही हो माँ.

वसु: अब हमारी शादी हो गयी है तो मुझे नाम से बुलाया करो.

दीपू: ठीक है जब हम कमरे में रहेंगे तो मैं आपको नाम से बुलाऊंगा लेकिन बाहर और दिन में सब के सामने आप मेरी माँ और दिव्या मेरी मौसी रहोगी. ठीक है?

वसु: हाँ ठीक है. दीपू फिर वसु का घूंघट उठा के उसको देख कर एकदम खुश हो जाता है और प्यार से उसका माथा चूम लेता है.

दीपू: वसु तुम खुश तो हो ना?

वसु: हाँ. सोचा नहीं था की ये दिन भी आएगा जब दिव्या की भी शादी हो जायेगी और मेरी भी जिससे हम दोनों बहुत प्यार करते है.

दीपू: ये बात तो मुझे केहनी चाहिए की मैं इतना किस्मतवाला हूँ की जिनसे मैं सब से ज़्यादा प्यार करता हूँ आज वो मेरी बीवियां बन गयी है. बस ये होनी को कोई नहीं टाल सकता. मुझे इस बात की भी ख़ुशी है की निशा भी अपने चाहने वाले से ही अपना घर बसायेगी.

वसु: हाँ सही कहा.

दीपू फिर ऐसे ही बातें करते हुए वसु के पूरे गहने निकल देता है और जब उसकी चूचियों को देखता है तो रहा नहीं जाता और अपने हाथों से उसकी चूचियों को दबा देता है. वसु की आहह में हलकी सिसकी लेती है.

दीपू: वैसे एक बात कहूँ?

वसु: हाँ.

दीपू फिर वसु के कान में कहता है.. कल दिव्या कह रही थी की उसे एक छोटा दीपू चाहिए. तो तुम्हे क्या चाहिए? और हस देता है.

वसु: इस उम्र में तुमको लगता है की मैं तुम्हे छोटा दीपू दे सकती हूँ?

दीपू वसु की तरफ देखते हुए कुछ सोचता है और फिर बिस्तर से उठ कर खड़ा हो कर वसु को भी आने को कहता है. वसु को कुछ समझ नहीं आता तो वो भी खड़ी हो जाती है. दीपू फिर वसु को आईने के सामने ले जाकर अपना हाथ उसकी चूचियों पे रख कर.. देख रही हो तुम कितनी जवान लग रही हो? ३५ से भी ज़्यादा नहीं दिख रही हो.

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देखो ये तुम्हारी चूचियां.. और ऐसा कहते हुए उसकी चूचियां दबा देता है.. कितनी कड़क और सुडौल है और अपना हाथ पीछे ले जाकर उसकी गांड पे रखते हुए... देखा है तुम्हारी गांड.. क़यामत लग रही हो..

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कोई तुम्हे देख कर ये नहीं कह सकता की तुम्हारी उम्र हो गयी है और तुम २ बच्चों की माँ हो.. और उसके कान में कहता है की अगर तुम कहो तो हर साल बच्चों की गूँज तुम्हारे गोद में सुनाई देगी. दीपू जब ये बात कहता है तो वसु एकदम शर्मा जाती है और कहती है की तू कुछ भी बकवास कर रहा है.

दीपू फिर वसु को पलटा कर उसकी और देखते हुए.. मैं सच कह रहा हूँ और फिर अपने होंठ वसु के होंठों से साथ जुड़ा देता है और दोनों एक गहरे और प्रगाढ़ चुम्बन में जुड़ जाते है.

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अब वसु भी उसका साथ देती है और दोनों एक दुसरे की जीभ को खा जाते है और दोनों के मुँह से लार टपकने लगती है. ये किस ५ min तक चलता है और जब दोनों अलग होते है तो दोनों की सांसें गहरी हो जाती है.

वसु: तुम्हारे पिताजी ने भी मुझे इतना अच्छा किस नहीं किया था कभी. कहाँ से सीखा है तूने ये सब?

दीपू हस देता है और कहता है तुम दोनों बहने एक जैसे ही हो. कल दिव्या भी ऐसा ही कुछ कह रही थी और कल अच्छे से प्रैक्टिस और प्रैक्टिकल भी हो गया है.

फिर दीपू वसु को किस करते हुए उसके कपडे भी निकल देता है और खुद भी नंगा हो जाता है और कान में कहता है.. आज तुम पहले मेरे छोटे महाराज को खुश कर दो..फिर दोनों को जन्नत का सैर मिल जाएगा.

वसु समझ जाती है और दीपू उसे बगल पे दीवार के पास ले जाता है और उसे घुटनों पे बल पे बिठा के अपना लंड उसके मुँह में दाल देता है और अंदर बाहर करता है. वसु भी बड़े मजे से उसका लंड चूसने में लग जाती है.

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थोड़ी देर बाद वसु कहती है की उसके पाँव दुःख रहे है तो दीपू उसे बिस्तर पे बिठा कर फिर से अपना लंड उसके मुँह में दे देता है तो वो बड़े चाव से चूसने लग जाती है. दीपू के तो बहुत ही मजे थे और वो तो जैसे जन्नत में पहुँच गया था.

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दीपू: तुम तो लंड चूसने में एकदम माहिर हो.. ऐसे ही लगे रहो. वसु भी दीपू का लंड चूसते हुए उसका लंड पूरा गीला कर देती है जो अब पूरे आकार में आकर एकदम खम्बे जैसे खड़ा था. वसु उसके खड़े लंड को देख कर कहती है.. दिव्या सही कह रही थी.. तुम तो एकदम खिलाडी निकले हो और मुझे भी बेशरम बना रहे हो.

दीपू: बिस्तर पे तुम जितना अपना शर्म छोड़ डौगी तुम्हेँ ही उतना मजा आएगा. और फिर दीपू कहता है चलो लेट जाओ. मैं भी तुम्हे जन्नत की सैर कराता हूँ.

दीपू फिर उसकी गर्दन को चूमते हुए उसकी चूची पर आ जाता है और बड़ी शिद्दत से उसकी चूचियों पर टूट पड़ता है. एक को मुँह में लेकर चूसता है तो दुसरे को अपने पंजों से दबाते रहता है. वसु भी अब ज़ोर से सिसकियाँ लेने लग जाती है और दीपू के सर को अपनी चूचियों पे दबा देती है. दीपू भी मस्ती में आकर उसके तने हुए निप्पल्स को काटता है तो वसु भी आअह्ह्ह.ऊऊह्ह्ह करके आवाज़ निकलती है लेकिन धीरे से.. क्यूंकि उसे कल के बारे में पता था जब दिव्या ने ज़ोर से चिल्लाया था. ५- १० min तक दीपू उसकी चूचियों को चूसने के बाद नीच जाते वक़्त उसकी गहरी नाभि को भी चूमता और चाटता है. वसु तो सच में जन्नत में पहुँच जाती है. नाभि को चूमने के बाद वो वसु की मस्त गुदाज़ जाँघों को चूमता और चाटता है.

और आखिर में जब वो उसकी चूत की तरफ देखता है तो उसकी फूली हुई एकदम साफ़ चिकनी चूत को देख कर दीपू के मुँह में पानी आ जाता है

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और उसकी चूत के लिप्स को खोल कर एकदम उस पर टूट पड़ता है और ऊपर से नीचे तक चूत से गांड तक अच्छे से चाटने लग जाता है. वसु को भी बहुत मजा आ रहा था और अपने हाथ को दीपू के सर के ऊपर रख कर उसे अपनी चूत पे दबा देती है.

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वसु: आह्ह्ह्ह... आआह्ह.. ऐसे ही खा जाओ मेरी चूत को.. तुम तो मुझे सच में जन्नत की सैर करा रहे हो और वो भी उत्तेजित हो जाती है और उसे पता भी नहीं चलता जब वो अपना पानी छोड़ देती है जिसे दीपू पूरे मजे से पी जाता है.

दीपू वसु का पूरा पानी पी कर फिर से उसकी चूत चाटने लग जाता है और कहता है तुम तो बड़ी स्वादिष्ट हो. इतनी स्वादिष्ट तो कल दिव्या भी नहीं थी. वसु दीपू के मुँह से ये बात सुन कर हस देती है और फिर से दीपू का मुँह उसकी चूत पे दबा देती है. दीपू इस बार उसकी चूत छाते हुए अपनी दो उंगलियां उसकी चूत में दाल कर अंदर बाहर करने लगता है लेकिन उसे इस कार्य में थोड़ी तकलीफ हो रही थी क्यों की वसु की चूत एकदम कुंवारी जैसी थी. ऐसा लग ही नहीं रहा था की वो २ बच्चों की माँ है.

वसु फिर से झड़ जाती है और उसे थोड़ी राहत मिलती है तो दीपू उसके ऊपर आकर उसको किस करता है. वसु भी पूरा उसका साथ देती है तो दीपू पूछता है की कैसा लगा? वसु उसे सवालिया नज़र से देखती है तो दीपू कहता है उसके रास का स्वाद कैसे लगा.

वसु ये बात सुनकर शर्मा जाती है और फिर पूरे जोश के साथ दीपू को किस करने लग जाती है.

२ min किस करने के बाद दीपू वसु को देखता है और पूछता है की वो तैयार है क्या? उसका मतलब दोनों को मालूम था. वसु भी हाँ में सर हिला देती है लेकिन कहती है की आराम से डालना क्यूंकि बहुत दिनों से उसकी चूत बंद है. दीपू भी उसको चूमते हुए घबराओ मत. एकदम धीरे और प्यार से डालूँगा.

दीपू फिर अपने लंड को अपने थूक से गीला करता है और वसु को देखते हुए पूरे जोश के साथ लेकिन आराम से अपना पूरा लंड उसकी चूत में दाल देता है और उसका पूरा ८ इन का लंड उसकी चूत की जड़ तक चले जाता है और जब ऐसा होता है तो वसु को एकदम सुकून मिलता है जो की उसके चेहरे पे नज़र आता है. (वसु मन में सोचती है कितने सालो बाद फिर से इस चूत में लंड गया है. बहुत अच्छा लग रहा है)अपना लंड पूरा उसकी चूत में दाल कर दीपू वैसे ही रहता है और झुक कर वसु को चूमता है.

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उसके चूमने से वसु को भी थोड़ी राहत मिलती है और २ min बाद अपनी आँखें खोल कर दीपू को देखती है. दीपू भी समझ जाता है और फिर अपना लंड थोड़ा बाहर निकाल कर फिर से अंदर घुसा देता है और फिर वसु को पेलना शुरू कर देता है. वसु को भी अब मजा आने लगता है और वो भी अपनी गांड उठा कर दीपू का पूरा लंड अपनी चूत में लेती है.

दीपू भी वसु को चोदते हुए.. वसु से: जानू.. मुझे कब अपनी गांड दे रही हो?

वसु: ना बाबा.. वहां से तो मै कुंवारी हूँ.

दीपू: ये तो अच्छी बात है. हर दूल्हे को अपनी सुहागरात में कुछ तो कुंवारा मिलना चाहिए ना.

वसु: उसको मनाते हुए.. नहीं ना..

दीपू: इस बात के लिए मैं ना नहीं सुनने वाला हूँ. हाँ इतना कहूंगा की जब हम घर जाएंगे तो... और वैसे भी कुछ दिनों में तुम्हारा जन्मदिन भी है. मेरे जन्मदिन मैं मैंने पहली बार आपको किस किया था.. तो आपके जन्मदिन पे आपकी गांड खोलने का तोहफा दूंगा और उसको चूम लेता है. १० min तक ऐसे ही वसु को पेलता है. फिर १० min बाद दीपू पलट जाता है. अब वो बिस्तर पे होता है तो वसु उसके ऊपर होती है. वसु भी फिर अपनी चूत को उसके लंड पे रख कर पूरा बैठ जाती है और दीपू का पूरा लंड उसकी चूत में चला जाता है.

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ऐसे ही मजे करते हुए फिर थोड़ी देर बाद दीपू वसु को घोड़ी बनाते हुए पेलता रहता है.

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वसु भी दिव्या की तरह इस दुमदार चुदाई में काफी बार झड़ जाती है और उसे कुछ समय तक पता भी नहीं चलता. जब दीपू वसु को घोड़ी बना कर चोदता रहता है तो उसकी मस्त गांड को देख कर अपनी ऊँगली में थूक लगा कर वहां पर रगड़ते हुए अपना ऊँगली अंदर डालने की कोशिश करता है तो वसु कहती है.. मत करो ना.. मैं सेह नहीं पाऊँगी. दीपू भी उसकी बात मानते हुए झुक कर उसकी चूची को दबाते हुए चोदता है. ऐसे ही १० ..१५ min तक छोड़ने के बाद अब दीपू से भी रहा नहीं जाता तो वो वसु से कहता है की उसका भी होने वाला है तो वसु कहती है की बाहर ही निकाल दो ना.. दीपू उसकी बात सुनता नहीं और कहता है की वो उसके अंदर ही झडेगा या फिर उसके मुँह में.. तो वसु कहती है मुँह में तो अपना लंड जल्दी से निकाल कर लंड उसके मुँह में दाल कर पूरा रास उसके मुँह में दाल देता है.

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उसका लंड बहुत सारा पानी छोड़ती है जिसे वसु पी जाती है और कुछ बूंदे भी उसकी मुँह से निकल कर गले में आ जाता है. वसु अपने आप को देख कर एकदम शर्मा जाती है और कहती है की तू तो बहुत ज़्यादा रस छोड़ता है.

दीपू: और यही रस एक दिन आप दोनों के अंदर डालूँगा और अपना हाथ उसके पेट पे रख कर ये पेट भी फूल जाएगा.

दीपू भी एकदम थका हारा बिस्तर पे गिर जाता है और वसु को अपनी बाहों में लेकर.. मजा आया ना मेरी जान? वसु: पूछ मत.. इतने सालों बाद ऐसा लगता है आज मैं फिर से औरत बन गयी हूँ और बहुत मजा भी आया. फिर दोनों थोड़ी देर बाद बाथरूम में जाकर अपने आप को साफ़ करते है और दोनों नंगे ही बिस्तर पे आकर दोनों एक दुसरे के बाहों में खो जाते है. इस बार वसु दीपू के होंठों को चूमते हुए बस ऐसे ही हमें प्यार करना और देते रहना.

दीपू: ये भी कोई बोलने वाली बात है क्या? और फिर दोनों ऐसे ही बातें करते हुए नंगे ही एक दुसरे की बाहों में गहरी नींद में सो जाते है...
 
दीपू: ये भी कोई बोलने वाली बात है क्या? और फिर दोनों ऐसे ही बातें करते हुए नंगे ही एक दुसरे की बाहों में गहरी नींद में सो जाते है...

अब आगे ...

15th Update - पति पत्नियों में मस्त प्यार ( पहला थ्रीसम)

वसु को सुबह जल्दी उठने की आदत थी तो वो सुबह जल्दी उठ जाती है और आँखें खोल कर अपने आप को देखती है तो शर्मा जाती है क्यूंकि वो दीपू की बाहों में नंगी सोई थी रात को. वसु एक मस्त अंगड़ाई लेते हुए उठ जाती है तो दीपू की भी जाग जाता है और वसु को देखते हुए कहता है इतनी जल्दी कहाँ जा रही हो.

वसु: चुप कर. तुझे पता है मैं जल्दी उठ जाती हूँ फिर भी ऐसे पूछ रहे हो. दीपू फिर वसु को अपनी बाहों में खींच के: ऐसे कैसे जाने दूंगा. सुबह सुबह तो मुँह मीठा करा दो.

वसु: अभी नहीं…पहले फ्रेश हो जाओ.

दीपू: क्यों रात को मज़ा नहीं आया क्या?

वसु भी प्यार से दीपू के गाल को चिमटी देकर.. बहुत मज़ा आया. मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था की मेरी दूसरी सुहागरात भी होगी. दीपू फिर से वसु को चूमने की कोशिश करता है तो वसु मन कर देती है और उठ कर बाथरूम जाकर फ्रेश हो जाती है. दीपू को अभी नींद आ रही थी तो वो फिर से सो जाता है.

फिर वो किचन में जा कर पानी पी कर चाय बना रही होती है तो इतने में दिव्या भी वहां आ जाती है और वसु को पीछे से गले लगा कर.. क्यों दीदी रात कैसी रही? रात को मजा आया क्या?

वसु भी घूम कर दिव्या को देखते हुए.. हाँ.. अच्छा था. मैंने कभी नहीं सोचा था की ऐसे भी दिन देखने को मिलेंगे जब मैं अपने ही बेटे की पत्नी बन जाऊँगी.

दिव्या: मैं भी बहुत खुश हूँ की आप भी बहुत खुश हो. वसु फिर प्यार से दिव्या का माथा चूम लेती है. फिर घर के बाकी लोग भी आ जाते है और वसु की टाँग खींचते है लेकिन प्यार से. येही हाल दीपू का भी होता है. ऐसे ही मस्ती में दिन गुज़र जाता है

तीसरे दिन दिनेश दीपू को फ़ोन करता है.

दिनेश: कहाँ चला गया बे?

दीपू: यार मैं नाना नानी के घर आया था कुछ काम था. बोल क्या हुआ?

दिनेश: हो सके तो जल्दी आ जा यार.. अब काम बढ़ रहा है और जैसे हमने सोचा था अब बिज़नेस को आगे भी बढ़ाना है.

दीपू: हाँ, सही कह रहा है. १- २ दिन मैं आ जाता हूँ और फिर बात करते है.

दिनेश: ठीक है मैं इंतज़ार करता हूँ और फिर फ़ोन रख देता है. दीपू ये बात वसु, दिव्या और निशा को बताता है तो उन लोगों को भी लगता है की घर जाना ही ठीक रहेगा. वसु अपने माँ बाप से बात करके घर निकलने के लिए तैयार हो जाते है.

जाने से पहले सब अपने नाना नानी के पास जाकर उनका आशीर्वाद लेते है और कहते है की जब भी ज़रुरत हो तो उन्हें ज़रूर फ़ोन करना. वो तुरंत ही आ जाएंगे. फिर सब अपना सामान लेकर निकलने की तैयारी करते है. वसु कमरे में जाकर देख रही थी की कुछ छूटा तो नहीं है तो उतने में कविता वहां आकर पीछे से उसको पकड़ कर अपना हाथ उसे पेट और नाभि पे रख कर धीरे से वसु के कान में कहती है की अगली बार जब आओगी तो खुश खबर ज़रूर देना.

वसु को भी इस बात का मतलब पता था तो वो भी मुड कर कविता को देखते हुए उसकी गांड को दबाते हुए कहती है देखते है क्या होता है. वैसे मैं सोच रही थी की आप भी शादी कर लो. फिर मैं भी येही बात आपसे पूछूँगी और हस देती है.

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कविता: मैंने तो तुम्हे बताया था ना.. पता नहीं मेरे किस्मत में क्या लिखा है.

वसु: चिंता मत करो. जो भी होगा अच्छे के लिए ही होगा और वो बाहर की तरफ देखती है तो दरवाज़े पे कोई नहीं था तो वो कविता की आँखों में देख कर मैं तो जा रही हूँ और मुझे पता है आप भी बहुत तड़प रही हो तो मेरी तरफ से ये.. और ऐसा कहते हुए वसु कविता के होंठ चूम लेती है और दोनों एक गहरा चुम्बन लेते है और अलग हो कर..

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इसके आगे मैं और कुछ नहीं दे सकती और अगर आपके मन में भी शादी करने का ख़याल आये तो बताना. आपकी मदत करूंगी. इतने में वहां निशा और मीना भी आ जाते है और मस्ती में पूछते है की सास बहु में क्या बात हो रही है?

जाने से पहले सब सब से मुलाक़ात करते है तो लता भी धीरे से दोनों (दिव्या और वसु) के कान में कहती है की वो उन दोनों से खुश खबर जल्दी ही सुन्ना चाहती है. दोनों शर्म से कुछ नहीं कहते और वो चारों अपने घर निकल जाते है|

कुछ घंटो बाद वसु और सब घर आ जाते है और थके होने के कारण दोपहर को सो जाते है. शाम को जब सब उठते है तो दीपू सब से पहले निशा से कहता है की वो दिनेश को कुछ नहीं बताये और वो ही उसको बताएगा. निशा हाँ कर देती है तो वसु पूछती है.

वसु: बेटा बताना ज़रूरी है क्या?

दीपू: हाँ माँ बताना तो पड़ेगा ही क्यूंकि कुछ दिन में निशा की भी दिनेश के साथ शादी हो जायेगी तो वो भी हमारे रिश्तों में जुड़ जाएंगे. तो उनको पहले ही बता देते है ताकि उनको बाद में कोई surprise ना हो. वसु को भी ये बात सच लगती है तो वो कुछ नहीं कहती.

शाम को फिर दीपू और निशा दोनों अपने दोस्तों से मिलने जाते है तो घर में सिर्फ वसु और दिव्या ही रह जाते है. अब दोनों के रिश्ते भी बदल गए है और दोनों ही एक दुसरे की सौतन है. ये बात दोनों को पता था तो दोनों नार्मल तरीके से बात करने के लिए संकोच में थे. ये बात वसु जान जाती है तो वो दिव्या को अपने कमरे में बुला कर उससे बात करती है.

वसु: क्यों छोटी बात करने में क्या संकोच कर रही हो?

दिव्या: दीदी वो बात नहीं है. पता नहीं आगे क्या होगा. अब हम दोनों तो दीपू की सौतन हो गयी है तो फिर रात कैसे गुज़रेगी? अब हम दोनों तो उसके साथ ही सोना पड़ेगा ना... अलग तो नहीं सो सकते.

वसु: हाँ, ये बात मैंने भी सोचा है लेकिन मेरे लिए तेरी ख़ुशी से ज़्यादा और कुछ नहीं है. अब हमारे माँ बाप भी खुश है और उन्हें भी मन की शान्ति है.

दिव्या: ये बात तो आप सही कह रही हो. बात सिर्फ सोने का नहीं है लेकिन.. और ऐसे कहते हुए दिव्या रुक जाती है क्यूंकि आगे की बात दोनों को पता था की दिव्या क्या कहना चाहती है और क्यों नहीं कह पाती.

वसु: मुझे पता है..देखते है रात कैसे गुज़रती है.. लेकिन शायद हम को इसकी आदत पड़ जायेगी. दिव्या ये बात सुनकर हस देती है और कमरे के बाहर जाने लगती है तो वसु उसका हाथ पकड़ कर उसे अपने पास ला कर.. क्यों तुझे शर्म आ रही है क्या?

दिव्या भी अपने नज़रें नीचे झुका लेती है लेकिन कुछ नहीं कहती. वसु उसको देख कर अपने से गले लगा लेती है और पीछे से उसकी गांड को दबा कर उसके कान में कहती है..चिंता मत कर.. सब ठीक हो जाएगा.. आखिर में अपना पति दीपू ही है.. कोई बाहर का नहीं तो शर्माने की कोई बात नहीं है. वसु फिर प्यार से उसका माथा चूम लेती है तो दिव्या को भी थोड़ा सुकून मिलता है और वसु हलके से उसके होंठ चूम लेती है और अलग कर देती है दिव्या को अपने से.

वसु: आज रात को हम दोनों दीपू को सरप्राइज देते है ना.

दिव्या: मतलब?

वसु धीरे से उसके कान में कुछ कहती है तो दिव्या भी मान जाती है और हाँ कहती है

दोनों एक दुसरे को देख कर हस देते है और फिर अपने काम में लग जाते है.

कुछ समय बाद दोनों दीपू और निशा भी घर आ जाते है और फिर रात को खाना खा कर सब टीवी देखते रहते है तो इतने में निशा को दिनेश का फ़ोन आता है. निशा दिनेश का नंबर देख कर अपने कमरे में भाग जाती है. दीपू निशा को ऐसे जाता देख कर हस देता है और वसु से कहता है की उसके यार का फ़ोन है इसीलिए वो भाग गयी है. ये बात सुनकर दोनों वसु और दिव्या भी हस देते है और फिर थोड़ी देर बाद दीपू टीवी बंद करके अपने कमरे में जा रहा होता है तो वो दोनों वसु और दिव्या की तरफ देख कर.. आप लोग नहीं आ रहे हो क्या? वसु: तू जा.. हम थोड़ी देर में आते है.

वहीँ निशा के कमरे में..

निशा: क्या बात है.. थोड़ी दिन तुमसे बात नहीं की तो उतने उतावले हो रहे हो क्या?

दिनेश: क्यों नहीं.. १- २ दिन बात नहीं किया तो ठीक है लेकिन इतने दिन? वैसे कहाँ चले गए थे? मुझे दीपू ने भी कुछ नहीं बताया.

निशा: (उसको सुबह दीपू की बात याद आती है) वो हम नाना नानी के घर गए थे. उनकी तबियत ठीक नहीं थी तो उन्हें देखे गए थे.

दिनेश: हाँ दीपू कह रहा था. अब कैसे है?

निशा: अब ठीक है. दीपू कह रहा था की वो तुमसे कल मिलेगा.

दिनेश: हाँ, मुझसे भी कहा था.

फिर दोनों ऐसे ही बातचीत कर के अपने यादों में सो जाते है.

इधर दीपू के कमरे में…

दीपू अपने कमरे में बिस्तर पे सोते हुए अपने मोबाइल में कुछ देख रहा था तो थोड़ी देर बाद कमरे का दरवाज़ा खुलता है. दीपू अपनी आँख उठे के देखता है तो उसकी आँखें ख़ुशी से एकदम बड़ी हो जाती है और अपना मोबाइल बगल में रख कर सामने का नज़ारा देखता रहता है क्यूंकि सामने का नज़ारा उतना ही सेक्सी था. दोनों वसु और दिव्या एकदम सेक्सी और ट्रांसपेरेंट साडी पहने हुए एकदम शज धज के दोनों उसके लिए दूध का ग्लास लाते है.

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और कमरे का दरवाज़ा बंद कर के धीरे से अंदर आते है लेकिन फिर भी दोनों शर्मा रहे थे. ये पहली बार था की दोनों ऐसे सझ धज के पहली बार अपने पति के कमरे में आयी थी.

दीपू दोनों को देख कर एकदम खुश हो जाता है तो दोनों शर्म से दीपू को दूध देती है तो दीपू भी दूध पी कर दोनों को भी दूध पिलाता है. दोनों अब भी बहुत शर्मा रहे थे तो दीपू को इस बात का पता था तो वो दोनों को अपनी बाहों में लेकर धीरे से उनके कान में कहता है की बाहर तो आप दोनों मेरी माँ और मौसी हो..

लेकिन कमरे के अंदर तुम दोनों मेरी जान हो तो ये शर्माना छोड़ दो और जैसे मैंने पहले ही कहा था.. जब हम यहाँ कमरे में रहेंगे तो कोई झिझक नहीं. इसीलिए मैं चाहता हूँ की अगर तुम दोनों की शर्म को दूर करना है तो मेरी दोनों बीवियां एक दुसरे से प्यार करे.

दोनों ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाते है लेकिन दीपू नहीं मानता और बगल में रखे सोफे पे बैठ जाता है और दोनों को देखता रहता है. दोनों भी शर्म से एक दुसरे के साथ आते है और फिर पहले धीरे से एक दुसरे को चूमते है. एक मं बाद जब दोनों को थोड़ा अच्छा लगता है तो फिर से दोनों एक दुसरे के होंठों को जोड़ देते है और इस बार एक अच्छे लम्बे किस में डूब जाते है जिसे देख कर दीपू को भी बड़ा मजा आ रहा था.

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दोनों को पता भी नहीं चलता जब दोनों किस में रहते हुए एक दुसरे के कपडे भी निकाल देते है और दोनों अब सिर्फ ब्रा और पैंटी में रहते हुए एक दुसरे के मजे ले रहे थे.

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५ Min तक दोनों एक दुसरे को किस करते है तो इतने में दीपू भी अपने कपडे निकल कर उन दोनों के पास आता है और फिर बारी बारी से दोनों को किस करता है और फिर दोनों को बाहों में लेता है. दोनों वसु और दिव्या एक दुसरे को देखते है और ऐसा पहली बार था की दोनों दीपू की बाहों में रहते हुए दोनों एक दुसरे को फिर से होंठों पे किस करते है और साथ में दीपू को भी किस करते है.

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दीपू फिर दोनों को बिस्तर पे ले जाकर दोनों की ब्रा पैंटी निकल कर दोनों को नंगा कर देता है और फिर दिव्या को सुला कर उसकी चूत पे टूट पड़ता है. दिव्या भी मजे में दीपू का सर अपनी चूत पे दबा देती है तो वही वसु भी उसका साथ देते हुए दीपू का सर उसकी चूत पे दबा देती है.

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५ Min में जब दिव्या आह आह आह करते हुए झड़ जाती है तो वो अपना पानी छोड़ देती है जिसे दीपू बड़े चाव से पी जाता है और दिव्या गहरी सांसें लेने लगती है और निढाल हो जाती है. दीपू फिर वसु को भी सुला कर वैसे ही करता है लेकिन इस बार वो वसु की गांड से लेकर चूत तक अच्छे से चूस चूस कर उसका पूरा पानी निकल देता है.

जहाँ दीपू वसु की चूत चूस रहा था तो वहीँ दिव्या भी उठ कर वसु के होंठों पे किस करती है. वसु को अब दोनों जगह से मजा मिल रहा था.

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५-७ Min में वसु का भी वही हाल होता है जो कुछ समय पहले दिव्या का हुआ था. वो भी दीपू का सर उसकी चूत पे दबाते हुए अपना पानी छोड़ देती है.

दीपू भी मस्त में उसका पानी पी कर दोनों को देख कर कहता है की तुम दोनों तो बड़ी मीठी और खटी हो. दोनों वसु और दिव्या ये सुनकर थोड़ा शर्मा जाते है तो दीपू अपना लंड उनके सामने लेकर जाता है. लंड पहले से ही थोड़ा तना हुआ था लेकिन पूरी तरह नहीं.

अब दोनों वसु और दिव्या भी अपना शर्म छोड़ देते है और दोनों दीपू के लंड पे टूट पड़ती है. दोनों बारी बारी से उसका लंड मुँह में लेकर मस्त चूसती है जिसे दीपू बहुत मस्त एन्जॉय कर रहा था. वो तो जैसे जन्नत में पहुँच गया था.

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अब एक लंड चूसती तो दूसरा उसकी गोटियां चूसती.

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ऐसे ही ५- ७ मं तक दोनों दीपू को खुश करते है तो दीपू को लगता है की अगर वो दोनों ऐसे ही और कुछ देर करे तो वो झड़ जाएगा जो वो चाहता नहीं था.

दीपू फिर अपना लंड दोनों के मुँह से निकालता है तो दोनों एक दुसरे को देख कर हस रहे थे जैसे नहीं चाहते थे उसका लंड छोड़ने को.

दीपू फिर वसु को सुला कर उसकी चूत पे अपना लंड रख कर वसु की तरफ देखता है और पाता है की वसु भी इसके लिए तैयार है तो वो दिव्या को कह कर उसके मुँह पे बैठने को कहता है और वो एक ज़ोरदार झटका मारता है और एक बार में ही उसका पूरा लंड वसु की चूत में जड़ तक चले जाता है. वसु भी ज़ोर से चिल्लाती है लेकिन उसकी आवाज़ दिव्या की चूत में ही दब जाता है क्यूंकि दीपू को पहले ही पता था इसीलिए वो दिव्या की चूत को उसके मुँह पे रखने को कहता है.

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दीपू अब मस्त तरीके से उसका लंड वसु की चूत पे अंदर बाहर करता रहता है और ५ Min के अंदर वसु भी ना चाहते हुए अपना पानी छोड़ देती है जिससे दीपू का लंड भी गीला होने की वजह से फिर से आराम से अंदर बाहर होने लगता है. वहीँ दिव्या भी उत्तेजित होते हुए अपना पानी वसु के मुँह में दाल देती है.

जब वसु थक जाती है तो वो दीपू से कहती है तो दीपू भी मान जाता है और इस बार दिव्या को घोड़ी बना कर उसकी ठुकाई करता है और पेलते रहता है. दिव्या भी वसु की एक चूची को मुँह में लेकर उसको मजा देने लगती है तो वसु भी आगे हो कर दीपू को चूमती है. दीपू को भी अब मजा आने लगा था. वो दिव्या को पेलते हुए वसु को भी मजे दे रहा था

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ऐसे ही दुमदार चुदाई काफी देर तक चलती है जहाँ दीपू बदल बदल कर दोनों को ठोकता है और इन सब में तीनो को भी बहुत मजा आता है. ये चुदाई का सफर लगभग ४५ Min तक चलता है और आखिर में दीपू को भी लगता है की वो भी आने वाला है तो जब ये बात कहता है तो दोनों कहते है की वो अपना पानी उनके मुँह में दे दे. अब दीपू भी बहुत नज़दीक था तो वो अपना लंड दोनों के मुँह के पास ले जाता है और आह... आह... करते हुए अपना रास दोनों के मुँह में झड़ जाता है जिसे दोनों बड़े चाव से पीने लगते है.

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तीनो अब थक जाते है तो दीपू भी थक कर बिस्तर पे गिर जाता है. दोनों वसु और दिव्या भी थक जाते है और बड़े सुकून के साथ दोनों दीपू के बगल में उसके साथ सो जाते है.

दीपू: मजा आया क्या? अब तो दोनों में शर्म नहीं है ना? वसु ये बात सुनकर धीरे से दीपू के कंधे पर प्यार से मारती है तो वहीँ दिव्या भी ऐसे ही करती है और दिव्या कहती है की पहले तो उसे बहुत शर्म आ रही थी लेकिन दीदी के साथ बहुत मजा आया.

वसु का भी कुछ ऐसे ही हाल था और फिर दोनों दीपू के सीने में अपना सर रख कर सो जाते है. दीपू को भी आज बड़े चैन से नींद आ जाती है और वो भी ख़ुशी से सो जाता है..

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वहीँ निशा के कमरे में ..

निशा दिनेश से बात करने के बाद जब वो बाहर आती है तो वहां कोई नहीं दीखता और वो मन में हस्ते हुए अपने कमरे में चली जाती है. उसे पता था की दीपू के कमरे में क्या हो रहा होगा और वो उन सब को याद करते हुए अपना हाथ अपने पैंटी में दाल कर अपनी चूत को मसलते हुए सोचती रहती है... मेरा क्या. कब और कैसे होगा.. और पता भी नहीं चलता जब उसकी चूत भी गीली हो जाती है और पानी छोड़ देती है...

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मेरा क्या. कब और कैसे होगा.. और पता भी नहीं चलता जब उसकी चूत भी गीली हो जाती है और पानी छोड़ देती है

अब आगे ...

16th Update

निशा भी अपने मन में: तेरा क्या है भाई तू तो अपनी बीवियों के साथ मजे कर रहा है और मैं यहाँ प्यासी तड़प रही हूँ. माँ मौसी की आवाज़ों से लग रहा है की उनको भी बहुत मजा आ रहा है. अच्छा है की उनको भी अब सुख मिल रहा है.. काश ऐसा सुख मुझे भी मिल जाए.. दिनेश के अलावा तू ही तो है जिसे मैं प्यार करती हूँ... और ऐसे ही बातें अपने मन में करती हुई निशा भी सो जाती है.

अगले दिन सुबह वसु जल्दी ही उठ जाती है और वो खुद को और दिव्या को दीपू की बाहों में नंगी पड़ी देख कर एकदम शर्मा जाती है और उठ कर बाथरूम जाती है लेकिन इस बार वो थोड़ा लंगड़ाती हुई जाती है. अपने आप को लंगड़ाते हुए देख कर वो शर्मा जाती है क्यूंकि उसे पता था की पिछली रात तो दीपू ने उसे और दिव्या को जबरदस्त पेला था.

वसु मन में: दीपू भी ना.. रगड़ रगड़ कर पेल दिया और अब मैं ठीक से चल भी नहीं पा रही हूँ और ऐसे ही हस्ते हुए बाथरूम चली जाती है और फिर थोड़ी देर बाद फ्रेश हो कर नाहा कर बाहर आती है तो वो एकदम क़यामत लग रही थी. भीगे हुए बाल टाइट ब्लाउज और उसके बदन में कासी हुई साडी. अपने आप को आईने में देख कर है देती है और फिर वो दिव्या को भी उठा देती है.

वसु: दिव्या उठ. कितना देर सोयेगी. सुबह हो गयी है. दिव्या भी थोड़ी अंगड़ाई लेते हुए उठ जाती है और वो भी अपने आपको एकदम नंगी पा कर शर्मा जाती है.

दिव्या: दीदी आप भी ना.. और शर्मा जाती है.

वसु धीरे से: चल उठ और जा.. फ्रेश हो जा. कल रात को तो तू खूब चुद रही थी और तब शर्म नहीं आयी. दिव्या भी शर्माते हुए बाथरूम चले जाती है और वो भी वसु की तरह लंगड़ाते हुए जाती है.

वसु किचन में चाय बना रही होती है तो इतने में निशा और दीपू भी उठ जाते है. निशा किचन में आकर वसु को छेड़ते हुए.. कल रात को तो बहुत आवाज़ निकल रही थी आपके कमरे से. वसु ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाती है और निशा को प्यार से डाटते हुए कहती है.. जब तेरी भी शादी होगी ना तो तुझे पता चलेगा.

दीपू भी वहां आ जाता है और वसु को देख कर जो एकदम सेक्सी लग रही थी वहीँ निशा के सामने वसु को पीछे से अपनी बाहों में ले लेता है और उसकी चूची को दबाते हुए उसके गले को चूमता है.

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वसु: क्या कर रहा है? तुम तो एकदम बेशरम हो गए हो. दिखता नहीं है क्या? निशा भी यहीं कड़ी है.

दीपू निशा को देख कर उसे आँख मारते हुए.. तो क्या हुआ? मैं अपनी बीवी से प्यार कर रहा हूँ. कोई गलती तो नहीं. क्यों निशा मैं झूट बोल रहा हूँ क्या?

निशा भी उन दोनों को देख कर हस देती है और वसु से कहती है: माँ चाय थोड़ी जल्दी बना देना अगर आप दोनों का प्यार हो गया तो और बाहर चले जाती है.

निशा के जाते है दीपू वसु को पलट कर उसकी आँखों में देखते हुए अपने होंठ आगे करता है तो वसु भी समझ जाती है और दोनों एक गहरे किस में डूब जाते है और साथ में दीपू वसु को चूची भी दबाते रहता है.

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ये किस काफी देर तक चलता है तो इतने में दिव्या भी वहां आ जाती है और उन दोनों को वहां देख कर हलके से उनका ध्यान हटाने के लिए खास्ती है तो दोनों अलग होते है.

वसु दिव्या को देख कर दीपू से: मुझे चाय बनाने दो तो दीपू दिव्या को बाहों में लेकर उसको चूमने लगता है जिसमें दिव्या भी उसका साथ देती है और इस बार दीपू अपनी जुबां दिव्या के मुँह में डालता है तो दिव्या भी उसकी जुबां को अपने मुँह में ले लेती है. वसु उन दोनों को देख कर अगर ऐसे ही चलता रहा तो अबसे घर में ना चाय बनेगी या फिर खाना. चलो दोनों बाहर तो सब हस्ते हुए हॉल में आ जाते है और सब चाय पीने लग जाते है.

दीपू भी फिर कुछ देर बाद तैयार हो कर कहता है की वो दिनेश के ऑफिस जा रहा है तो आज वो उन दोनों को इस घर के नए रिश्ते के बारे में बताएगा. वसु कहती है की बताना ज़रूरी है क्या तो दीपू भी हाँ कहता है और कहता है की कभी तो उनको पता चल ही जाएगा और बेहतर यहीं होगा की उनको हम से ही पता चले. आखिर में वसु मान जाती है और दीपू तैयार होकर दिनेश से मिलने उसके ऑफिस चला जाता है.

दीपू जाने से पहले कहता है.. जब ये बात दोनों को पता चलेगा तो मुझे पता है की दिनेश तुम दोनों ( याने मेरी “भाभी” ) के बारे में पूछेगा तो मैं उन दोनों को शाम को बुला रहा हूँ और हम सब मिल कर आज रात को खाना यहीं खा लेते है. क्या आईडिया है? इस सब पैर तीनो भी मान जाते है और कहते है की वो सब शाम को तैयार हो जाएंगे और सब मिल कर रात को खाना यहीं पर खाएंगे.

ऋतू के ऑफिस में

दीपू जब तैयार हो कर दिनेश से मिलने जाता है तो वो इस वक़्त उसकी माँ ऋतू के ऑफिस में था. (ऋतू ने सोच लिया था की जब दिनेश और दीपू उसके बिज़नेस को अच्छे से संभाल लेंगे तो वो फिर घर में ही रहेगी और तब तक दोनों को उनके काम में मदत करेगी.)

दिनेश को एकदम मस्त और ख़ुशी चेहरे को देख कर दिनेश कहता है: क्यों बे इतने दिन कहाँ था? ऋतू: दिनेश बेटा ऐसे बातें ऑफिस में ना कर. अगर हमारा कोई क्लाइंट या खरीददार रहा और उनके सामने तेरी आदत की वजह से ऐसे बात करेगा तो अच्छा नहीं होगा. दिनेश को भी अपनी गलती का एहसास होता है और फिर वो दीपू से गले मिलता है और पूछता है की उसके चेहरे पे इतनी ख़ुशी का क्या बात है?

दीपू दोनों को देखता है और कहता है... मैं जो कह रहा हूँ तूने शायद कभी सोचा नहीं होगा लेकिन गुस्सा मत होना. दिनेश: ऐसा क्या किया की मैं तुझ पे गुस्सा करूंगा. दीपू दोनों को फिर से देखता है और कहता है: यार कैसे कहूँ.. लेकिन कहता तो पड़ेगा ही. तो सुन मेरी शादी हो गयी है.

जब ऋतू और दिनेश दीपू से ये बात सुनते है तो उन्हें यकीन नहीं होता की दीपू ने शादी कर ली है. दीपू फिर दोनों को कहता है की उनके नाना नानी की वजह से जल्दी ही शादी करनी पड़ी क्यूंकि उनकी तबियत ठीक नहीं लेकिन विस्तार से दोनों को नहीं बताता. दिनेश: तू सही कह रहे है.. तूने तो एकदम गुस्सा दिला देने वाली बात की है. तूने शादी कर ली और हम दोनों को बताया भी नहीं.

दीपू: हाँ पता है.. लेकिन ये सब इतनी जल्दी हो गया ही तुझे फ़ोन करने का समय भी नहीं मिला और उसी तरह से ऋतू को देखते हुए आंटी को भी बताने का समय नहीं मिला क्यूंकि हम सब को उनकी तबियत का ख़याल रखना था.

दिनेश: कोई नहीं यार तूने तो सुबह सुबह ही एकदम खुश कबर दी है और फिर वो दीपू से गले लगता है. ऋतू भी खुश हो जाती है और वो भी दीपू से गले लग कर उसको बधाई देती है.

दिनेश: चल कोई नहीं... भाभी से कब मिला रहा है?

दीपू: शाम को आप दोनों घर आ जाओ तो भाभी से भी मिल लेना… और हाँ आज रात को खाना भी खा कर जाना. हम सब को बहुत अच्छा लगेगा.

फिर इसी ख़ुशी में दिनेश सब के लिए कुछ मिठाई मंगवाता है और दोनों ऋतू और दिनेश दीपू को मिठाई खिलाते है.

ऋतू: ज़रूर आएंगे.. हम भी तो देखे तुम्हारी बीवी को. दीपू मन ही मन है दिया और सोचा.. जब आप देखोगे तो होश उड़ जाएंगे आपके.

दीपू के घर

दीपू जल्दी ही दिनेश और ऋतू से कह कर आज जल्दी घर आ जाता है. शाम को वसु और दिव्या भी अच्छे से सझ कर खाना बनाती है और ऋतू और दिनेश का इंतज़ार करते है.

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शाम को सिर्फ ऋतू ही दीपू के घर आती है. जब वो अंदर आती है तो ऋतू को अकेले देख कर दीपू पूछता है तो ऋतू कहती है की उसे कुछ काम आ गया है तो थोड़ी देर बाद आएगा. मेरा काम हो गया तो मैं जल्दी आ गयी. ऋतू फिर अंदर आ कर सोफे पे बैठ जाती है और दीपू की तरफ देखती है (जैसे पूछना चा रही हो की तुम्हारी बीवी कहाँ है).

इतने में दोनों वसु और दिव्या भी किचन से बाहर आ जाते है और सोफे पे बैठ जाती है.

ऋतू उनको देखती है लेकिन नार्मल तरीके से देखती है (ज़्यादा ध्यान नहीं देती)और वसु से कहती है की आपके लड़के ने बताया है की उसने शादी कर ली है. तो आपकी बहु कहाँ हैं?

दीपू: लगता है आंटी आपने ठीक से देखा नहीं.

ऋतू: मतलब? मैं समझी नहीं.

दीपू: फिर से एक बार माँ को देख लो. ऋतू जब फिर से वसु और दिव्या को देखती है तो देखते ही रह जाती है..क्यूंकि अब वो गौर से दोनों को देखती है तो पाती है की वसु और दिव्या दोनों तो सझ के आये है लेकिन देखती है की उनके गले में मंगलसुरत्रा है और उन दोनों की मांग भी भरी हुई है.

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ऋतू को फिर भी समझ नहीं आता और वसु को देख कर कहती है: भाभी आपने भी शादी कर ली है?

वैसे ही दिव्या को देख कर भी ऐसे ही पूछती है. दोनों कुछ नहीं कहते लेकिन हस कर अपना सर झुका लेते है. ऋतू फिर दीपू को देख कर पूछती है की तेरी बीवियां कहाँ है?

दीपू फिर दोनों वसु और दिव्या के पीछे जाता है और उनके पीछे खड़े हो कर दोनों के कन्धों पर हाथ रख देता है और ऋतू की तरफ देखता है. ऋतू को तब समझ आता है और जब वो समझती है तो उसे बहुत बड़ा झटका लगता है और अपनी मुँह खोले बड़ी आँखें कर के तीनो को एक साथ देखती है.

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ऋतू: मैं जो सोच रही हूँ वही है क्या?

दीपू: हाँ आप जो सोच रही हो वही है. यहीं है मेरी एक नहीं लेकिन दो बीवियां. ऋतू को जब बात पूरी समझ आती है तो उसका सर चकराने लगता है और वो अपना सर पकड़ कर वहीँ सोफे पे बैठ जाती है.

निशा ऋतू को देख कर उसके लिए पानी लाती है. इतने में दिनेश भी आ जाता है और अपनी माँ को देख कर उसे डर लगता है की उसे क्या हुआ है. निशा दिनेश से कहती है की चिंता की कोई बात नहीं है क्यूंकि उसे थोड़ा झटका लगा है. इसीलिए वो बैठी हुई है.

दिनेश ऋतू को देख कर पूछता है की हुआ क्या है? फिर दीपू धीरे से उसे बताता है की वसु और दिव्या ही उसकी बीवियां है. दिनेश जब ये बात सुनता है तो उसकी बार थी झटका खाने की और वो भी ऋतू की तरह अपना मुँह खोले और बड़ी आँखों से उसे देखता है .

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दिनेश: अबे साले तूने तो सच में बड़ा झटका दिया है. मैंने तो कभी नहीं सोचा था की कुछ ऐसा हो सकता है. दीपू: हाँ सही कहा लेकिन वक़्त और ज़रुरत ऐसे आ गए की हम भी कुछ सोच नहीं पाए और नाना नानी की तबियत का ख्याल भी हमको रखना था.

अब बात ये थी की कोई कुछ नहीं कह रहा था और घर में थोड़ा सन्नाटा छा जाता है. फिर सब बैठ जाते है और फिर वसु बताती है की ये सब कैसे हुए. ऋतू और दिनेश सब बात जान कर भी उन्हें विश्वास नहीं होता लेकिन दोनों वसु और दिव्या को देख कर मान जाते है की दीपू की सच में उन दोनों से शादी हो गयी है.

ऋतू अब भी शॉक में थी तो दिनेश माहौल को थोड़ा हल्का करते हुए वसु से कहता है: मैं आपको आंटी कहूँ या फिर भाभी?

वसु हस देती है और कहती है की आंटी ही कहो. दिनेश कुछ और नहीं कहता और तिरछी नज़र से निशा को देखता है और उसे आँख मार देता है.

निशा भी उसको चिडाके वहां से किचन में चली जाती है.

फिर थोड़ी देर बाद जब वसु और दिव्या kitchen में जाते है खाने का सामन लाने के लिए तो तो दोनों थोड़ा लंगड़ा के चलते है और ये चीज़ ऋतू देख लेती है.

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(ठीक उसी वक़्त वसु पलट कर ऋतू को देखती है कुछ पूछने के लिए लेकिन वो देखती है की ऋतू उन्हें ही देखे जा रही है). ऋतू अपने मन में सोचती है की शायद दीपू ने उन दोनों की बहुत बजायी है इसीलिए वो दोनों लँगड़ाके चल रहे है. फिर थोड़ी देर बाद सब खाने के लिए बैठ जाते है और खाने के बाद दिनेश और ऋतू अपने घर जाने के लिए तैयार हो जाते है. दिनेश और दीपू घर से बाहर जाते है तो वसु ऋतू को गले लग कर: मुझे पता है आपके मन में बहुत सवाल है. हम फिर कभी फुरसत में बात करते है. ऋतू भी मान जाती है और दोनों अपने घर निकल जाते है लेकिन उनके और उनके मन में बहुत से बातें चल रही थी.

रात को दोनों ऋतू और दिनेश अपने कमरे में सोने चले जाते है और जहाँ दिनेश सोचता है की दीपू कितना किस्मत वाला है की उसे २ बीवियां मिल गयी है वहीँ ऋतू भी दीपू के बारे में सोचती है ख़ास कर के वसु के बारे में जब वो लंगड़ा कर चल रही थी. ये सब सोचते सोचते ऋतू की चूत एकदम गीली हो जाती है और उसकी पैंटी पूरी भीग जाती है. ऋतू को समझ नहीं आ रहा था की उसके साथ ऐसा क्यों हो रहा है और वो इतनी उत्तेजित और चुददककड क्यों होती जा रही है? उसे भी पता था की वो एक विधवा है और बहुत दिनों से जिस्म की प्यासी है.. लेकिन फिर दीपू ही क्यों....

उसी वक़्त..

मनोज के ऑफिस में एक पार्टी होती है तो मनोज को जाना पड़ता है तो वो मीना को भी ले जाता है.

पार्टी में ऑफिस के कई लोग भी होते है जिनमे मनोज के कुछ दोस्त और उनका परिवार भी होता है. उनमें से कुछ लोगों लो पता था की मनोज अभी तक बाप नहीं बन पाया है तो ऐसे ही कुछ महिलाएं मीना को देख कर आपस में खुसुर फुसुर करते है की शायद मीना में ही कुछ गड़बड़ है और वो कहीं बांझ तो नहीं है. वो लोग ये बात धीमी गति से कहते है लेकिन उनकी किस्मत ख़राब थी की ये बात मीना और मनोज को सुनाई देती है और उसे बहुत बुरा लगता है.

मीना तिरछी नज़र से मनोज को देखती है तो मनोज भी समझ जाता है और फिर दोनों को बुरा लगता है तो कुछ बहाना बना कर वो दोनों पार्टी से निकल कर अपने घर चले जाते है. रास्ते में दोनों के बीच कोई बात नहीं होती और वो लोग जब जल्दी घर आ जाते है तो कविता (जो अब तक वही उनके घर में थी और अपने घर नहीं गयी थी) पूछती है की वो लोग जल्दी कैसे आ गए?

मीना कुछ नहीं कहती और अपने कमरे में चली जाती है. मनोज भी कमरे में चले जाता है और फिर वहां दोनों में बहुत बहस होती है. मीना को पता था की उसमें कोई कमी नहीं है माँ बनने में लेकिन कमी मनोज में है जो बात मनोज को भी पता था. मनोज भी मीना को बहुत मनाने की कोशिश करता है लेकिन मीना बहुत गुस्से में थी. जब मनोज भी कमरे में जाता है तो कविता को कुछ गड़बड़ लगता है और वो सोचती है की वो मीना से बात करेगी इस बारे में. कविता उनके कमरे के पास आ कर वो मीना को बाहर आने के लिए आवाज़ लगाने की सोचती है की उसे अंदर दोनों की बहस सुनाई देती है. दरवाज़ा बंद होने के कारण उसे ज़्यादा कुछ समझ नहीं आता और वो चले जाती है की कल सुबह वो मीना से बात करेगी इस बारे में.

अगली सुबह जब मनोज ऑफिस चला जाता है तो कविता मीना के कमरे में जाकर पूछती है तो मीना से रहा नहीं जाता और वो कविता को पकड़ कर रो देती है और कल रात पार्टी में जो हुआ उसे बता देती है. कविता भी गंभीर सोच में पड़ जाती है इस बात को लेकर.

वसु के घर

दीपू रोज़ की तरह वो ऑफिस जाने के लिए तैयार हो जाता है और जाने से पहले दोनों को चूम कर निकल जाता है. जब वो ऑफिस जाता है तो वहां पहले से ही ऋतू थी जो अपना काम कर रही थी. दीपू जब दिनेश के बारे में पूछता है तो ऋतू कहती है की वो कुछ देर में आ जाएगा.

ऋतू के मन में अभी भी बहुत सवाल थे लेकिन उसे लगता है की ये वक़्त सही नहीं है उसके बारे में बात करने का तो वो दीपू से कुछ नहीं बात करती उसके शादी के बारे में. लेकिन वो अंदर ही अंदर बहुत चुदास होती जा रही थी दीपू, वसु और दिव्या के बारे में सोच कर. उसे पता था की उसकी सोच शायद गलत है की वो अपने बेटे के दोस्त के बारे में ऐसा सोच रही है लेकिन दीपू था ही इतना हैंडसम और आकर्षक की ऋतू उसके बारे में बिना सोचे नहीं रह पाती. लेकिन उसके मन में ये ख़याल अब तक नहीं आया की जब दीपू अपनी माँ से शादी कर सकता है तो क्या वो भी दिनेश के साथ…. लेकिन अभी भी उन दोनों के बीच में माँ बेटे का ही रिश्ता था.

सुबह जब दीपू घर से निकलता है तो उसके जाने के कुछ देर बाद वसु को कविता का फ़ोन आता है...
 
17th Update

सुबह जब दीपू घर से निकलता है तो उसके जाने के कुछ देर बाद वसु को कविता का फ़ोन आता है...

अब आगे ..

जब दीपू घर से निकल जाता है तो वसु को कविता का फ़ोन आता है. दोनों फिर ऐसे ही हाल चाल की बात करते है और फिर कविता वसु से पूछती है की एक बार वो उनके घर आ सकती है क्या. (कविता अभी भी मीना के पास ही थी. वो अब तक अपने घर नहीं गयी थी)

वसु: क्यों क्या हुआ माँ जी जो मुझे आप बुला रहे हो? कुछ दिन पहले ही तो हम वापस आये है.

कविता: मैं जानती हूँ...लेकिन बात ऐसी है की मैं फ़ोन पे तुम्हे नहीं बता सकती. वसु को थोड़ा चिंता होती है तो पूछती है: वहां सब ठीक तो है ना?

कविता: हाँ ऐसा सोच सकती हो.

वसु: तो फिर मुझे क्यों बुला रही हो वहां पर?

कविता: एक बार तुम आ जाओ... मैं तुम्हे फिर सब बताती हूँ.

वसु: माँ पिताजी ठीक है ना? उनकी तबियत कैसी है?

कविता: माँ पिताजी सब ठीक है.. मैं तुम्हे और कोई काम के लिए बुला रही हूँ. वसु फिर सोचती है और कहती है की वो घर में बात कर के कुछ देर बाद उन्हें फ़ोन कर के बताएगी.

दिव्या को बुलाती है और कहती है की कविता का फ़ोन आया है और उसे उनके घर जाना है. दिव्या भी थोड़ा चिंतित हो जाती है और पूछती है की सब ठीक तो है ना? वसु कहती है माँ पिताजी ठीक है लेकिन और कुछ बात करने के लिए बुलाई है.

दिव्या: वो बात फ़ोन पे नहीं हो सकती है क्या?

वसु: मैंने भी यहीं बात पूछी थी तो उन्होंने कहा था की बात फ़ोन पे नहीं हो सकती है और खुद मिलकर बात करना चाहती है. मैं एक बार उनसे मिलकर आती हूँ.

दिव्या: हाँ जाओ... क्या पता कुछ हुआ है क्या वहां पर.

वसु: ठीक है.. लेकिन एक बार दीपू से भी बोल देती हूँ.

वसु फिर वसु दीपू को फ़ोन करती है और उसे बताती है की उसे अपने माँ के घर जाना है और कविता से फ़ोन पे हुए बाते बताती है. दीपू काम कर रहा था तो वसु से बात करने के लिए बाहर आता है.

दीपू: जाना ज़रूरी है क्या? मैं तो घर आने के लिए तड़प रहा हूँ.

वसु को ये बात समझ आती है लेकिन हलकी मुस्कान के साथ पूछती है की ऐसा क्यों तड़प रहे हो?

दीपू भी फिर ऐसे ही मस्ती के साथ कहता है: मैं नहीं मेरा छोटा यार और तुम्हारी मुनिया तड़प रही है. सही कहा ना? अगर आप चले जाओगे तो आपकी मुनिया रो देगी.

वसु भी हस्ते हुए: सही कहा लेकिन जाना ज़रूरी है. मेरी मुनिया तो तडपेगी लेकिन आज के लिए दिव्या की मुनिया के आंसूं को पोछ दो. वो भी खुश हो जायेगी.

दीपू: ठीक है अगर आप कहती है तो मैं आपको मन तो नहीं कर सकता है.

वसु भी मस्ती में: मेरे छोटे राजा को बोलो की थोड़ा सबर करे. मैं आने के बाद उसकी अच्छे से ख्याल रखूंगी.. और फिर थोड़ा सीरियस होते हुए कहती है की उसे जल्दी ही निकल जाना चाहिए वरना देर हो जायेगी.

दीपू: हाँ सही कहा आपने. निकल जाओ और वहां जा कर फ़ोन करना. अगर ज़रुरत पढ़ा तो मैं भी आ जाऊँगा.

वसु: ठीक है.

वसु फिर दिव्या को बताती है की उसने दीपू से बात कर ली है और वो निकल रही है. वसु तैयार हो कर निकलने से पहले दिव्या को कमरे में बुला कर कहती है..उसको धीरे से कहती है मैं जा रही हूँ..१-२ दिन में आ जाऊँगी और दीपू का ख्याल रखना.

दिव्या: ये भी कोई पूछने वाली बात है क्या? वो तो अब हम दोनों का पति है तो मैं उसका ख्याल रखूंगी ही ना. वसु: अरे पगली और दिव्या को खींच कर अपनी बाहों में लेते हुए ख्याल मतलब ये और ऐसा कहते हुए दिव्या की साडी के ऊपर से उसकी चूत को मसल देती है और कहती है आज तेरी मुनिया को समझा दो की आज उसकी बजने वाली है और हस देती है.

दिव्या: आप भी ना.. आप जा रही हो तो मुझे और मेरी मुनिया को ही दीपू का ख्याल रखना पड़ेगा ना और शर्मा कर अपनी नज़रें खुआ लेती है.

वसु: अब हम दोनों के बीच शर्म कैसी? जब उसने हम दोनों को किस करने को कहा तो तुझे अच्छा नहीं लगा क्या? दिव्या: मुझे तो बहुत अच्छा लगा. पहली बार था लेकिन..

वसु: चल मैं चलती हूँ. बस और ऐसा कहते हुए वसु दिव्या की गांड दबा देती है और कहती है की इसका ख्याल रखना. कहीं वो ये दरवाज़ा भी ना खोल दे.

दिव्या: यहीं तो डर है दीदी. लेकिन मैं संभाल लूंगी. आप चली जाओ. वसु फिर दिव्या को देखते हुए उसके होंठ चूम लेती है जिसमें दिव्या भी साथ देती है और दोनों एक गहरी किस लेकर एक दुसरे की गांड दबाते हुए अलग हो जाते है.. वसु फिर अपने घर के लिए निकल लेती है.

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जब दीपू को पता चलता है की वसु घर पे नहीं है और सिर्फ दिव्या ही है तो उसे भी थोड़ी ठरक चढ़ती है और वो दिनेश से कहता है की उसे घर में कुछ काम है और वो आज जल्दी जाना चाहता है. दिनेश भी अपने काम में लगा रहता है तो हाँ कह देता है.

वहीँ निशा को पता चलता है की उसकी माँ भी उनके घर गयी है तो वो भी दिनेश से मिलने की सोचती है और दिनेश को फ़ोन कर के उसे कॉफ़ी के लिए बुलाती है. दिनेश भी निशा का फ़ोन देख कर एकदम खुश हो जाता है और उससे मिलने के लिए वो भी अपने ऑफिस से चला जाता है.

दीपू अपना काम जल्दी ख़तम कर के दिव्या से कहता है की वो घर आ रहा है तो दिव्या भी समझ जाती है और फिर वो भी अपना काम कर के थोड़ा तैयार हो जाती है.

दीपू जब घर आता है तो देखता है की दिव्या एक सेक्सी अदा में कड़ी हो कर उसका ही इंतज़ार कर रही थी. दीपू दिव्या को देखता है तो उसी वक़्त उसका लंड एकदम तन जाता है जो की उसके पैंटमें भी दिख रहा था क्यूंकि दिव्या उतनी ही ज़्यादा सेक्सी लग रही थी.

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दीपू दिव्या को देख कर दरवाज़ा बंद कर के कहता है: जानू तुम तो आज मेरी जान ही ले लोगी. इतनी क़यामत लग रही हो.

दिव्या: वो भी फुल मूड में आकर (क्यूंकि निशा घर में नहीं थी) तुम्हारी जान तो नहीं लेकिन और कुछ लेना चाहती हूँ इसीलिए तो ऐसे तैयार हुई हूँ क्यूंकि मुझे पता है तुम मुझे ऐसे ही देखना चाहते हो.

दीपू: एकदम सही कह रही हो मेरी जान और जा कर दिव्या को अपनी बाहों में लेकर उसके होंठ पे टूट पड़ता है. दिव्या भी उसका साथ देती है और दोनों एक दुसरे का रास पीने में लग जाते है. दीपू भी अपनी जुबां उसके मुँह में दाल देता है तो दिव्या भी अपना मुँह खोल कर उसकी जुबां को अंदर ले लेती है और दोनों एक मस्त French Kiss में डूब जाते है. दीपू उसको किस करते हुए अपना एक हाथ उसके ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी चूची को दबाने लग जाता है.

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दिव्या भी मस्त हो जाती है और वो भी आँहें भरने लगती है लेकिन उसकी आवाज़ दीपू के मुँह में ही डाब जाती है. दीपू फिर दिव्या को कमरे में ले जाकर बिस्तर पे बिठाते हुए फिर से उसे किस करने लग जाता है. दिव्या को अब उसका मुँह दुखने लगता है तो कहती है: जानू अब मेरा मुँह दुःख रहा है.

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दीपू: अभी तो तुम्हारा मुँह ही दुःख रहा है लेकिन थोड़ी देर बाद और भी कुछ दुखेगा और ऐसा कहते हुए अपना हाथ उसके पेट पे रखते हुए उसकी नाभि को मसल देता है.

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अब दिव्या भी सिसकियाँ लेना शुरू कर देती है और आहह ओहह करते हुए आवाज़ निकालती है लेकिन दीपू कहाँ मानने वाला था. देखते ही देखते दीपू दिव्या की ब्लाउज और ब्रा निकल कर उसे ऊपर से नंगा कर देता है और उसकी मस्त उभरी हुई चूचियों पे टूट पड़ता है. एक को मुँह में लेकर चूसता है तो दुसरे को अपने अंघूठे से दबाता है और उसके निप्पल को भी मरोड़ता है. दिव्या को भी इसमें बहुत मजा आ रहा था.

दिव्या: ओह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम ओह्ह्ह्ह..जानू ऐसे ही चूसो ना... अच्छा लग रहा है और दीपू का सर अपने चूचियों पे दबा देती है.

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और ५- १० मं तक ऐसे ही चूसने और चाटने और काटने के बाद जब दिव्या के निप्पल में दर्द होता है तो कहती है: जानू थोड़ा दर्द हो रहा है. आराम से पियो ना.. कहीं नहीं भाग रहे है.

दीपू: मैं जानता हूँ जानू.. लेकिन क्या करून.. जब इनको देखता हूँ तो रहा नहीं जाता.. क्यों तुम्हे मजा नहीं आ रहा है क्या?

दिव्या: मजा तो बहुत आ रहा है लेकिन थोड़ा दुःख भी रहा है.. और तुम्हे तो और भी जगह है जहां तुम्हे और मजा आएगा.

दीपू: दिव्या को देख कर कहाँ?

दिव्या: तुम्हे पता नहीं है क्या?

दीपू: मुझे पता है लेकिन मैं तुम्हारे मुँह से सुन्ना चाहता हूँ. मैंने क्या कहा था? यहाँ जब हम बिस्तर पे होंगे तो कोई शर्म नहीं. तो बोलो और कहाँ मजा आएगा मुझे? दिव्या भी अब दीपू की आँखों में देख कर थोड़ा आगे आते हुए उसके कान में कहती है.. तुम्हे मेरी चूत में और मजा आएगा. बहुत रो रही है तुम्हारे ध्यान के लिए.

दीपू: ये हुई ना बात और ऐसा कहते हुए दीपू दिव्या की साडी और पेटीकोट निकाल देता है. दिव्या अब सिर्फ एक छोटे पैंटी में रह जाती है और जैसे वो कहती है उसकी पैंटी एकदम गीली थी.

दीपू फिर दिव्या की गीली पैंटी पे अपनी जुबां रख कर उसको चाट लेटा है. दिव्या भी एकदम उत्तेजित हो जाती है और उसे पता था की अब घर में और कोई नहीं है तो ज़ोर से चिल्लाने और चीकने लगती है क्यूंकि वो भी पूरी उत्तेजित हो गयी थी. उसे इस वक़्त कोई डर नहीं था की उसकी आवाज़ कोई सुन लेगा. ओह्ह्ह रुको मत ... ओह्ह्ह्ह उम्ममम..

दीपू को भी मज़ा आ रहा था तो वो दिव्या की पैंटी उतार फेंकता है जिसमें दिव्या भी उसकी मदत करती है क्यूंकि वो भी अब खुल कर मज़ा लेना चाहती थी और अपनी गांड उठा कर आँखों से दीपू को कहती है की पैंटी निकल दे. अब दीपू की आँखों के सामने दिव्या की एकदम चिकनी और गीली चूत थी जो दीपू को एकदम उकसा देती है और दीपू भी बिना समय गवाए उस पर टूट पड़ता है और ऊपर से नीचे तक उसकी चूत चाटने में लग जाता है. अपनी जुबां उसकी गीली हुई चूत के अंदर डाल कर अच्छे से चाटने लग जाता है

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दिव्या भी आंहें भरते हुए अपनी गांड उठा के अपनी चूत दीपू के मुँह में देती है और उसी तरह से अपना हाथ दीपू के सर के ऊपर रख कर उसे अपनी चूत में दबा देती है.

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दिव्या जब दीपू की जीब अब अपनी चूत पे महसूस होता है तो जोर से आह करते हुवे बिस्तर को पकड़ लेती है

दिव्या भी मदहोशी में बड़बड़ाते: हाँ ऐसे ही मेरी चूत खा जाओ. इसी मस्ती में दिव्या भी काफी बार झड़ जाती है और अपनी पानी काफी बार निकल देती है जिसे दीपू बड़े चाव से पी जाता है.

दिव्या झड़ कर जब पस्त हो जाती है और ज़ोर ज़ोर से सांसें लेने लगती है और उसी के साथ दिव्या के चूचे भी उपर नीचे हो रहे थे. दीपू भी अपना चेहरा उसकी चूत से हटा कर ऊपर आता है तो दिव्या भी समझ जाती है और उसके होंठ चूम लेती है क्यूंकि दिव्या को पता था की दीपू उसे अपनी चूत रास का स्वाद दिलाना चाहता था.

दिव्या भी दीपू के मुँह से अपना स्वाद लेती है और उसे चूम के कहती है.. अब ठीक?

दीपू: तुम तो बड़ी समझदार हो गयी हो. तुम्हे भी पता था की मैं ऊपर क्यों आया. चलो अब तुम्हारी बारी है और अपने लंड को दिव्या के मुँह के पास ले आता है तो दिव्या उसे देख कर समझ जाती है उसके लंड को पहले अपने मुट्ठी में लेती है और हिलाने लगती है.

५ min तक ऐसे ही हिलाती रहती है और दीपू का लंड भी अब थोड़ा खड़ा हो जाता है.

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दीपू: सिर्फ हिलती ही रहोगी क्या? उसे चूमो चाटो और मुँह में लेकर मुझे भी मजे दो ना.

दिव्या: हाँ मुझे भी पता है. थोड़ा सबर तो करो और फिर दीपू की आँख में देखते हुए उसका लंड को चूमते हुए मुँह में लेती है. पहले धीरे लेकिन आहिस्ता आहिस्ता पूरा मुँह में ले लेती है. जब दीपू का लंड पूरा मुँह में ले लेती है तो दीपू को भी मजा आता है और अपना हाथ दिव्या के सर के पीछे रख कर अपने लंड को एक धक्का मारता है तो पूरा लंड दिव्या के मुँह में चला जाता है. दिव्या ने ऐसा सोचा नहीं था और जब पूरा लंड उसके मुँह में चला जाता है तो वो थोड़ा खास्ती है और कहती है इतना ज़ोर के धक्का क्यों लगा रहे हो और उसके आँख से पानी आ जाता है.

दिव्या: तुम मेरी जान लेने वाले हो क्या? देखो पूरा गले पे लग रहा है और थोड़ा दर्द भी हो रहा है.

दीपू जब देखता है तो उसे उसकी गलती का एहसास होता है और कहता है सॉरी यार तुमने इतना अच्छे से लिया था तो मुझ से रहा नहीं गया.. इसीलिए एक बार में ही पूरा डाल दिया. अब दीपू धीरे धीरे लेकिन प्यार से उसके लंड को आगे पीछे करता है. इसमें दोनों को मजा आता है और ५- ७ min के बाद जब लगता है की दीपू भी झड़ने के करीब है तो अपना लंड उसके मुँह से निकाल लेता है..

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दीपू: चलो जानू तैयार हो जाओ जन्नत की सैर करने के लिए. तुमने अब तक मुझे जन्नत की सैर कराई थी तो अब तुम्हे सैर कराना मेरा भी फ़र्ज़ है और फिर दीपू दिव्या को बिस्तर पे सुला कर उसके पेअर को अपने कंधे पे रखते हुए दिव्या को देखते हुए लंड को चूत पे रख कर एक ज़बरदस्त शॉट मारता है तो उसका ८ इन का पूरा तना हुआ लंड एक बार में ही उसके जड़ तक चला जाता है.

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दिव्या की आंखें थोड़ी बाद हो जाती है दर्द के मारे लेकिन दीपू को पता था तो इसिलए वो झुक कर दिव्या के होंठ चूम लेता है और दिव्या की आवाज़ गले में घुट कर ही रह जाती है.

दीपू: हो गया जानू... तुम्हे जो दर्द होना था अब हो गया है. अब मजे ही मजे होंगे. दिव्या को अभी भी दर्द हो रहा था तो वो अपनी दोनों मुट्ठियाँ बिस्तर पे चादर को पकड़ लेती है.

इतने में ही दिव्या एक बार फिर से झड़ जाती है और उसका पानी निकल जाता है. उसका फायदा दीपू को होता है की चूत के पानी निकलने से अब उसका लंड चूत में बड़े आराम से चला जाता है और फिर ऐसे ही दीपू मस्त दाना दान पेलने लगता है दिव्या को. दिव्या को भी अब दर्द काम हो गया था और उसे भी अब मजा आने लगता है.

दिव्या: जानू मेरे पाँव दुःख रहे है. दीपू फिर उसका लंड निकल कर बिस्तर से उठ जाता है.

दिव्या: मैंने तो सिर्फ अपने पाँव नीचे रखने को कहा था. अभी ही मुझे मजा आ रहा है तो तुम बिस्तर से क्यों उठ गए? दीपू हस्ता है कहता है तुम भी उठ जाओ. आज कुछ नया करते है. दिव्या को समझ नहीं आता तो वो भी उठ जाती है. फिर दीपू दिव्या को पकड़ कर उसको चूमते हुए उसका एक पाँव को उठा कर खड़े खड़े ही लंड चूत में डाल कर पेलने लगता है. दिव्या को भी इस पोज़ में मजा आता है और दीपू की तरफ देख कर हस देती है. दीपू ऐसे ही दिव्या को ठोकते रहता है और दिव्या फिर से झड़ जाती है और अब पानी उसकी जांघ पे भी गिर जाता है.

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दिव्या: जानू मैं फिर से झड़ गयी हूँ. तुम्हारा हुआ नहीं है क्या?

दीपू: कहाँ जान इतनी जल्दी कैसे? तुम जैसे गदराये घोड़ी को एक घंटे तक ना पेलून तो फिर मजा क्या है? दीपू फिर दिव्या को घोड़ी बना देता है और दिव्या अपना हाथ दीवार पे रख कर झुक जाती है और दीपू घोड़ी के पोज़ में फिर शुरू हो जाता है. इस सब में पूरे कमरे में फच फच की आवाज़ें आती रहती है. उनकी किस्मत अच्छी थी की घर में इस वक़्त निशा नहीं थी वर्ण उसे पता चल जाता. ५- १० min तक ऐसे ही घोड़ी बना कर छोड़ने के बाद दीपू भी कहता है की उसका होने वाला है तो दीपू कहती है फिलहाल बाहर ही निकालो. दीपू भी मान जाता है और फिर आखिर में ४- ५ ज़बरदस्त झटके मारने के बाद अपना लंड निकल लेता है और दिव्या की गांड के ऊपर ही अपना पूरा माल निकल देता है. दोनों अब बहुत थक चुके थे क्यूंकि दोनों की चुदाई ऑलमोस्ट १ घंटा चलता है जहाँ दीपू दिव्या को अलग अलग स्टाइल में चोदता है और फिर दोनों बिस्तर पे गिर जाते है और दिव्या दीपू की बाहों में सर रख कर एकदम सुकून पाती है.

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दिव्या: जानू तुम तो एकदम पूरा जान ही निकल देते हो.

दीपू: क्यों तुम्हे मजा नहीं आता क्या? दिव्या दीपू को देख कर उसके होंठ चूमते हुए नहीं बहुत मजा आता है लेकिन थक भी जाती हूँ.

दीपू: उसी थकन में तो मजा भी है ना.. और दिव्या दीपू को देख कर हस्ते हुए उसके सीने में थपकी मारती है. दोनों बहुत थक गए थे तो दोनों की आँख लग जाती है.

नानी के घर:

वसु २- ३ घंटे में बस के सफर में अपने गाँव पहुँच जाती है और फिर अपने माँ बाप के घर चले जाती है. उसकी माँ वसु को देख कर पूछती है की फिर से कैसे आना हुआ? वसु कुछ बहाना बनाती है और कहती है की वो कुछ काम से बाहर आयी थी तो उसी के चलते मैं आप से भी मिलने आ गयी. अब आप और बाबा की तबियत कैसी है? माँ: हम ठीक है बीटा. तू और दिव्या को खुश हो ना? वसु अपनी माँ को गले लगा कर.. एकदम खुश है माँ.. आप हमारी चिंता मत करो और अपनी और बाबा की तबियत का ख्याल रखना. ठीक है? उसकी माँ भी हाँ में सर हिला देती है

वसु: मीना और माँ जी दिख नहीं रहे है?

माँ: वो दोनों अपने कमरे में होंगे. तेरे बाबा तो सो गए.. मैं भी सोने जा रही हूँ.

वसु: हाँ आप सो जाओ. मैं उनसे मिल लेती हूँ. शाम को चाय पीते वक़्त बाबा से भी मिल लूंगी..

वसु फिर कविता के कमरे में जाती है तो अपने सोच में डूबी रहती है. वसु को देख कर वो भी उसे मिलने आती है और प्यार से गले मिलती है.

वसु: तो कहिये माजी क्यों बुलाया है? ऐसी क्या बात है की बात फ़ोन पे नहीं हो सकती थी.

कविता: बैठो बेटी बताती हूँ. २- ३ दिन पहले मनोज और मीना ऑफिस के एक पार्टी में गए थे... और फिर वहां पर जो भी हुआ कविता वसु को बताती है. मीना बहुत परेशान और दुखी में है. उसे समझ नहीं आ रहा है की वो क्या कर सकती है और आज कल तो बहुत रो भी रही है.

वसु पूरी बात सुन कर: हाँ उसके साथ तो अच्छा नहीं हुआ है. अभी वो कहाँ हैं और मनोज कहाँ है?

कविता: मीना तो अपने कमरे में सो रही है और मनोज ऑफिस गया है. वसु: ठीक है उसे सोने दो. शाम को मैं दोनों से बात करती हूँ. मुझे भी जल्दी जाना होगा क्यूंकि अब दीपू भी काम करने लगा है.

कविता: तुम्हारा चेहरा तो काफी खिला खिला लग रहा है. तुम को खुश हो ना? वसु भी कविता की बात पे हस देती है और कहती है की वो और दिव्या दोनों खुश है. दोनों फिर ऐसे ही कुछ और बातें करते है और फिर वसु भी वहीँ कविता के कमरे में सो जाती है.

शाम को सब उठते है और बैठ कर बाते करते रहते है...मीना वसु को देख कर आश्चर्य हो जाती है क्यूंकि उसे पता नहीं था की वसु वहां उनके घर आ रही है. वसु अपने पिताजी से भी मिलती है और उनसे भी बात करती है. वैसे ही कुछ देर बाद मनोज भी ऑफिस से आ जाता है और वो भी वसु को देख कर आश्चर्य हो जाता है. सब फिर फ्रेश हो कर चाय पीते हैं और फिर वसु मनोज और मीना को इशारे से ऊपर छत पर आने को कहती है. दोनों मनोज और मीना एक दुसरे को देखते है और फिर वो भी छत पे चले जाते है. शाम का वक़्त था.. सूरज ढल रहा था और अच्छी ठंडी हवा भी चल रही थी. जब तीनो छत पे होते है तो दोनों एक दुसरे को देख कर वसु से पूछते है की उन्हें यहाँ क्यों बुलाया है.

वसु फिर दोपहर को कविता से हुई बात बताती है और मनोज से पूछती है की बात क्या है. मनोज थोड़ा झिझकता है तो वसु कहती है की डरो मत मैं तुम दोनों की मदत करने आयी हूँ. अगर मेरे से कुछ हो सकता है तो मैं तुम दोनों की परेशानी दूर करने की कोशिश करूंगी.

मनोज फिर पार्टी में जो हुआ वो बताता है और कहता है की जब से उसका एक्सीडेंट हुआ है वो मीना पे ज़्यादा "ध्यान" नहीं दे पा रहा है.

वसु: तो तुम इसका इलाज क्यों नहीं करवाते?

मनोज: कोशिश किया था लेकिन डॉक्टर ने कहा की ज़्यादा कुछ नहीं कर सकते क्यूंकि एक्सीडेंट की वजह से जो चोट आयी है वो बहुत गहरी है और ऐसी की कुछ बातें बताता है.

वसु मीना से: फिर तुम एक बच्चे को गोद क्यों नहीं ले लेती? आजकल तो बहुत लोग बच्चे को गोद ले लेटे है.

मीना: नहीं दीदी मुझे गोद नहीं लेना है और आंसूं बहाती है तो वसु उसे अपने गले से लगा लेती है. चुप हो जा... मैं हूँ ना.. कुछ ना कुछ हल निकल आएगा. चिंता मत करो.

वसु: तो फिर इसका इलाज क्या कर सकते है? दोनों एक दुसरे को देखते है और दुखी चेहरे से वसु की तरफ देखते है. इतने में कविता भी वहां छत पे आ जाती है और तीनो को देखती है. अब कविता को भी कुछ समझ नहीं आता की क्या किया जाए. वसु फिर कुछ सोचती है और कहती है की मुझे आज रात तक सोचने का समय दो. मैं कुछ सोच कर बताती हूँ. सब मान जाते है लेकिन मनोज और मीना अपने मन में सोचते है की वसु के मन में क्या चल रहा है.

यहाँ दीपू के गाँव में:

निशा और दिनेश कॉफ़ी पीने के लिए मिलते है और एक दुसरे के बारे में जानते है... उनको क्या पसंद है क्या पसंद नहीं है.. उस वक़्त होटल में ज़्यादा लोग नहीं रहते और होटल लगभग खाली ही रहता है. दिनेश कॉफ़ी का बिल पाय करके दोनों निकलने को होते है तो दिनेश निशा को देख कर: यार एक बात पूछूं?

निशा: हाँ कहो..

दिनेश: यार अब रहा नहीं जाता. तुम्हारे मम्मी से पूछो की शादी कब होगी. मेरी माँ भी तुझे अपनी बहु बनाने के लिए देख रही है. निशा: ठीक है. माँ अभी नाना के घर गयी है तो मैं आज उनसे बात करके तारिक पक्का करवाती हूँ. दिनेश: ये ठीक रहेगा और निशा की तरफ एक कामुक नज़र से देख कर.. तब तक के लिए मुझे एक छोटा गिफ्ट तो दे दो. निशा को समझ नहीं आता तो पूछती है क्या? दिनेश चारो तरफ देखता है और वहां कोई नहीं होता तो वो अपनी ऊँगली अपने होंठ पे रखता है और दूसरी ऊँगली उसके होंठ की तरफ इशारा करता है. निशा समझ जाती है और वो भी चारो तरफ देख कर जब कोई नहीं दीखता तो दिनेश को पकड़ कर उसके होंठ पे एक गहरा चुम्मा देती है.

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२ min बाद.. अब खुश. दिनेश भी एकदम मस्त हो जाता है और जान तुम तो मुझे पागल कर डौगी. अब तो मुझे अपनी शादी और सुहागरात का इंतज़ार रहेगा. निशा भी थोड़ा शर्मा जाती है और कहती है सबर का फल मीठा होता है और हस्ते हुए दोनों होटल से बाहर आ जाते है और फिर दोनों अपनी घर की और निकल जाते है.

रात को जब दीपू और दिव्या कमरे में एक दुसरे की बाहों में रह कर बात करते है की वसु क्यों गयी है. इतने में दीपू का फ़ोन बजता है और देखता है की उसे वसु ने कॉल लिया था. दीपू फ़ोन पिक कर के कहता है बोलो माँ... क्या बात है और वहां इतनी जल्दी क्यों गयी. वसु: बेटा मुझे तेरे से एक बात करनी नहीं....
 
Friends, update posted on Pg 150. Pls read, like and comment. Look forward to it.

मैंने Pg 150 पे नया अपडेट पोस्ट किया है. अपडेट को पढ़े, लाइक करे और कमैंट्स भी कीजिये. आपके कमैंट्स का इंतज़ार रहेगा.

kamdev99008 prkin komaalrani vakharia JTN rajeev13 AGENT x SHADOW Pitaji Sushil@10 sandy4hotgirls Random2022
 
Wishing You and your Family a very Happy and Safe Deepawali!!

आप को और आपके परिवार को शुभ दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें

rajeev13


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18th Update (Mega Update)

रात को जब दीपू और दिव्या कमरे में एक दुसरे की बाहों में रह कर बात करते है की वसु क्यों गयी है. इतने में दीपू का फ़ोन बजता है और देखता है की उसे वसु ने कॉल लिया था. दीपू फ़ोन पिक कर के कहता है बोलो माँ... क्या बात है और वहां इतनी जल्दी क्यों गयी.

वसु: बेटा मुझे तेरे से एक बात करनी नहीं....

अब आगे ...

चलिए थोड़ा पीछे चलते है कुछ घंटे पहले:


समय तब का था जब वसु मनोज और मीना से बात कर रही थी उनके साथ.

वसु मीना से: तो तुम किसी को गोद नहीं लेना चाहती और मनोज अब तुमको संतुष्ट नहीं कर सकता लेकिन तुम्हे माँ बनना है और बात भी सही है की तुम्हे जो ताने सुनने को मिल रहे है वो अच्छा नहीं है. तो क्या कर सकते है.. वसु ऐसा पूछते हुए दोनों मनोज और मीना की तरफ देखती है.

दोनों एक दुसरे की और देखते है लेकिन कुछ नहीं कह पाते और मनोज ही कहता है: दीदी: तुम ही कोई उपाय बताओ ना.

वसु: मेरे पास एक उपाय तो है... थोड़ा अलग है लेकिन पता नहीं तुम लोग क्या सोचोगे.

मनोज: आप पहले बताओ तो सही.. फिर सोचेंगे उसके बारे में.

वसु दोनों की तरफ देख कर: तुमको दीपू कैसा लगता है?

मनोज: ये भी कोई पूछने की बात है क्या? वो तो बहुत अच्छा लड़का है सुन्दर है आप सब की देखभाल ही अच्छा करता है.. तो उसमें पूछने वाली क्या बात है?

वसु फिर अपना गला ठीक करते हुए मीना की तरफ देख कर.. तुम्हारा क्या ख्याल है? मीना भी वही जवाब देती है जो मनोज देता है.

वसु फिर मीना को देख कर.. मैं जो कह रही हूँ फिर से सुनो. तुम लोगों को पता है की मेरी और तुम्हारी मौसी की दीपू से शादी हुई है और… इतना कह कर वसु रुक जाती है.

मनोज: और?

वसु: शायद ये बात बताना सही नहीं होगा लेकिन फिर भी बताती हूँ की वो बिस्तर पे बहुत अच्छा है. हम दोनों को बहुत प्यार करता है. और ऐसा कह कर रुक जाती है. इस बात पे मनोज और मीना एक दुसरे को देखते है तो उनको वसु की बात समझ में आती है और दोनों खुला मुँह करते हुए वसु को देखते है.

वसु: देखो मैं तुम्हारे साथ जो हुआ मुझे अच्छी तरह से पता है. उसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है और मीना की बात भी सही है. हर शादी शुदा लड़की जल्दी ही माँ बनना चाहती है. और बच्चा जब गोद में होता है और वो उसे अपना दूध पिलाती है.. ये अहसास दुनिया का सबसे सुखद अहसास है जो एक औरत हमेशा चाहती है.

वसु: हाँ तुम जो सोच रहे हो मैं वही कहना चाहती थी. मीना की तरफ देख कर... अगर तुम्हे माँ बनना है और किसी को गोद भी नहीं लेना है तो यही एक अच्छा उपाय है. घर की बात घर पे ही रहेगी. अगर तुम फिर कहीं पार्टी या अपने दोस्तों के पास गयी और लोग फिर से तुम्हे ताने मारेंगे तो ये तुम्हारे लिए भी अच्छा नहीं होगा ना ही इस घर के लिए. माँ पिताजी भी कह रहे थी की वो भगवान् के घर जाने से पहले अगर वो अपने पोते को देख ले और दादा दादी बन जाए तो वो बहुत सुख शांति से अपने बाकी दिन गुज़ार लेंगे.

दोनों एक दुसरे को देखते है लेकिन कुछ नहीं कहते.

वसु: मुझे जो सुझाव अच्छा लगा मैंने बताया. इसके अलावा मुझे भी और कुछ नहीं दिखता. मैं चाहती हूँ की तुम दोनों एक बार इस बारे में बात कर लो और मुझे बताओ. मैं फिर दीपू से भी बात करती हूँ.

मीना: दीदी २ बातें मैं पूछना चाहती हूँ आपसे.

वसु: हाँ पूछो.

मीना: क्या दीपू राज़ी हो जाएगा इस बात के लिए?

वसु: तुम उसकी चिंता मत करो. वो मेरा काम है.

मीना: आपको और छोटी दीदी (दिव्या) को कैसा लगेगा की मेरी गोद में उसका ही बच्चा है.

वसु: मुझे तो ख़ुशी होगी की मैं दादी बन जाऊँगी और हस देती है. जैसा मैंने कहा तुम उसकी चिंता मत करो (वसु को बाबा की बातें याद आती है की दीपू की कई शादियां होने वाली है और वो बहुत बच्चों का बाप बनने वाला है)

वसु: दूसरी बात?

मीना: अगर मैं इस बात के लिए मान भी जाऊं की मैं दीपू के साथ हम बिस्तर हो जाऊँगी तो माँ कैसे मानेगी? वो तो बहुत संस्कारी है. वसु जब मीना से ये बात सुनती है तो वो मन में सोचती है कविता संस्कारी नहीं बहुत चुदकड़ औरत है.

वसु: तुम उसकी भी चिंता मत करो. तुम्हारी माँ को मनाना मेरा काम है (क्यूंकि वसु को पता था की कविता को “कैसे” मनाना है). और भी कुछ शंकाएं है क्या?

मैं फिर से कहती हूँ की तुम दोनों एक बार फिर से सोच लो क्यूंकि एक बार आगे बढ़ गए तो फिर पीछे नहीं हट सकते.

मनोज: दीदी हमें थोड़ा समय दो. हम बात कर के आपको बताते है.

अब present रात में:

सब खाना खा कर वसु निशा की बात करती है तो उसकी माँ कहती है की निशा की शादी २-३ महीने के अंदर कर दो. वसु भी इस बात को मान जाती है और वो कहती है की वो जल्दी ही उसकी समधन से बात कर के तैयारी कर लेंगे. फिर ऐसी वैसी कुछ बातें कर के सब अपने कमरे में जाते है सोने के लिए. जाने से पहले वसु मीना और मनोज की तरफ देखती है तो दोनों भी हाँ में सर हिला कर अपने कमरे में चले जाते है.

वसु अपने कमरे में जाकर दीपू को फ़ोन करती है. उस वक़्त दीपू और दिव्या दोनों नंगे थे और दीपू दिव्या की एक चूची को मुँह में लेकर उसके निप्पल को काटते हुए उसकी मस्त चुदाई कर रहा था. इतने में फ़ोन बजता है तो दीपू फ़ोन on कर के वसु से बात करने लगता है.

दीपू: माँ तुम कहाँ हो?

वसु: मैं कहाँ रहूंगी. कमरे में हूँ और अकेली हूँ और तुमसे बात कर के कविता से बात करने जाना है.

दीपू: ठीक है मैं वीडियो कॉल कर रहा हूँ और वीडियो कॉल करता है. वीडियो कॉल में दोनों दीपू और दिव्या को देख कर वसु भी उत्तेजित हो जाती है और अपने आप अपनी एक ऊँगली अपनी चूत पे रख कर पैंटी को हटाते हुए ऊँगली करने लगती है क्यूंकि scene ही कुछ ऐसा था. दिव्या की दोनों टांगें अपने कंधे पे रखते हुए दीपू दाना दान उसको ठोक रहा था.

दिव्या: देखो ना दीदी.. जब से आप गयी हो ये तो मुझे ठीक से बैठने और काम करने भी नहीं दे रहा है. दोपहर को आकर एक घंटे तक जम के चोदा और जब मैंने उसे कहा की मैं बहुत थक गयी हूँ और थोड़ा आराम करने दो तो वो माना नहीं और फिर से अभी देख रही हो ना.. पिछले आधे घंटे से लगा हुआ है. मैं थोड़ा थक गयी थी तो अभी मेरी चूत चाट रहा है और मैं भी उत्तेजित हो रही हूँ.





कुछ दिन पहले कुंवारी चूत थी तो अब तो इसे पूरा खोल ही दिया है. अब तक मैं चार बार झड चुकी हूँ लेकिन ये है की रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है.

दीपू; क्या करून माँ.. जब इतनी गदरायी हुई बीवी है और एक गदरायी हुई बीवी घर पे नहीं है तो ये तो होना ही था ना. वैसे आप कब आ रही हो? इस बार जब आओगी तो आपको सोने नहीं दूंगा. उस वक़्त दिव्या घर का काम करेगी तो मैं आप का काम करूंगा. समझ गयी न? वसु भी ये सब बातें और वीडियो देख कर बहुत गरमा जाती है और आँहें भरते हुए बात करती रहती है.

और हाँ दिव्या की चूत अभी भी टाइट है... पूरी तरह खुली नहीं है. एक महीने के अंदर थोड़ा और खुल जाएगा. वैसे भी अभी तो सिर्फ चूत ही थोड़ी खुली है. गांड भी बाकी है. उसको भी जल्दी ही खोलूँगा और माँ तुम्हे याद है ना... मैंने क्या कहा था. दीपू जब ये बात कहता है तो दिव्या वसु से पूछती है की दीपू ने क्या कहा है. वसु ये बात सुनकर शर्मा जाती है और उसका चेहरा एकदम लाल हो जाता है.

दिव्या: बताओ ना दीदी दीपू ने क्या कहा है आपसे?

वसु: तू चुप कर.. ये कुछ भी बकवास करता है.

दीपू ये बात सुनकर हस देता है और वसु से कहता है की मैं उसे बता रहा हूँ और धीरे से झुक कर दिव्या के कान में कहता है: मैंने तुम्हारी दीदी से कहा था की उसके जन्मदिन पे उसकी गांड मारूंगा और उसी तरह तुम्हारा भी जल्दी ही गांड खोल दूंगा. चिंता मत करो. दिव्या ये बात सुनकर अपनी आँखें बड़ी करती हुई वीडियो में वसु को देखती है तो वसु एकदम शर्मा जाती है और कुछ नहीं कहती.

दीपू वसु से: जैसे मैं दिव्या को चोद रहा हूँ वैसे ही तुम भी मुझे याद करते हुए अपनी चूत मसलो ना. मैं देखना चाहता हूँ.

वसु: छी तुम बहुत गंदे हो रहे हो. मैं नहीं करने वाली.

दीपू: फिर से थोड़ा नाटक करते हुए उदास मुँह बनाता है तो वसु के चेहरे पे हसी आ जाती है और दीपू को देखते हुए.. देख मैं क्या कर रही हूँ? २ उंगलियां अपनी चूत पे डालते हुए कहती है की तुम्हारे लंड को याद करते हुए मैं ऊँगली कर रही हूँ.

दीपू: ये हुई ना बात. ऊँगली करते हुए मेरे नाम पे झड जाओ. वसु भी ज़ोर ज़ोर से ऊँगली करते हुए पहली बार झड जाती और उसके चेहरे पे एक राहत दिखाई देता है.

दीपू वसु को ऐसा देखते हुए फ़ोन पे ही एक किस देता है जिसे देख वसु शर्मा जाती है.

ठीक उसी समय कविता को वसु से कुछ काम था तो वो उसके कमरे के पास आकर अंदर जाने की कोशिश करती है तो उसको फ़ोन की आवाज़ आती है. वो चुपके से अंदर देखती है तो वो भी बहुत उत्तेजित हो जाती है और वहीँ बाहर रह कर अपनी साडी के ऊपर से ही अपनी चूत मसलने लगती है और उन तीनो के बारे में सोचती रहती है.

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वसु दिव्या से: मजे कर मेरे आने तक.

दिव्या: क्या मजे दीदी.. मुझे तो ये पूरा थका ही देता है. आजकल चलने में भी दिक्कत आ रही है. निशा देख कर हस्ती रहती है लेकिन कुछ नहीं कहती.

और ऐसे ही तीनो कामुक बातें करते हुए आधा घंटा तक बात करते है जिसमें वीडियो में ही दीपू वसु को दिखाते हुए दिव्या की चूत चाटता है और फिर दिव्या से अपना लुंड चुसवाता है और फिर उसको घोड़ी बना कर दाना दान पेलता है. वसु की बहुत उत्तेजित हो जाती है लेकिन फिर उसे याद आता है की उसे कविता से बात करनी है क्यूंकि वो कल ही वापस अपने घर जाने वाली थी. वसु ये भी बात भूल गयी थी की उसके दीपू को किस लिए फ़ोन किया था. लेकिन अपने मन में सोचती है की वो घर तो जा ही रही है तो सब के साथ बैठ कर बात कर लेगी.

वसु: चलो तुम लोग भी सो जाओ. रात बहुत हो गयी है. मुझे कविता के पास जाना है उनसे कुछ बात करने के लिए. बाहर खड़ी कविता ये बात सुनती है तो वो भी जल्दी से अपने आप को ठीक कर के अपने कमरे में चली जाती है.

वसु दीपू से कहती है की वो कल वापस आ जायेगी और उससे बहुत ज़रूरी बात करनी है. दीपू भी बात मान जाता है और फिर फ़ोन ऑफ कर देता है और दिव्या को चोदने लगता है.

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दिव्या: जानू अब बस करो ना. मैं भी बहुत थक गयी हूँ. दीपू का भी होने वाला था तो वो भी २- ३ ज़बरदस्त झटके मारते हुए अपने लंड बाहर निकाल कर अपना रास उसे पीला देता है.

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वसु भी फिर फ़ोन ऑफ कर के बाथरूम जाती है और अपनी ब्रा और पैंटी उतार कर एक nighty पहन कर कविता के कमरे की तरफ जाती है.

कविता के कमरे में:

कविता अपने कमरे में आकर बिस्तर पे लेट जाती है और अभी जो वसु के कमरे में जो हुआ था उसको याद करते हुए अपना हाथ अपनी चूत पे लगा के रगड़ती रहती है और बडबडी रहती है दीपू और वसु के बारे में. वो भी इतनी उत्तेजित हो गयी थी की अपने कमरे का दरवाज़ा पूरा ठीक से बंद नहीं करती और आकर बिस्तर पे ही लुढ़क जाती है और अपनी चूत मसलते रहती है.

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वसु भी अब चल के कविता के कमरे के पास आती है और देखती है की दरवाज़ा खुला है. उसे लगता है की शायद कविता जाग रही है और वो अंदर जा कर उससे बात करेगी. जैसे ही वो कमरे में आती है तो सामने का नज़ारा देख कर थोड़ा चकित हो जाती है लेकिन साथ में उत्तेजित भी हो जाती है क्यूंकि इस वक़्त कविता भी अपनी दो उंगलियां चूत में दाल कर मस्ती में आंहें भर रही थी.

वसु उसको देख कर थोड़ा खास्ती है तो कविता की नज़र भी वसु पे पड़ती है और अपने आप को ठीक करती है.

वसु: मा जी क्या बात है? अकेले अकेले ही..

कविता: क्या करून... मैं तुमसे बात करने तुम्हारे कमरे में आयी थी लेकिन अंदर का नज़ारा देख कर मुझसे भी रहा नहीं गया. कविता की ये बात सुनकर अब वसु को भी आश्चर्य होता है.

वसु फिर धीरे से चल कर कविता के बिस्तर के पास आकर... मैं कुछ मदत कर दूँ?

कविता सवालिया नज़र से वसु को देखती है तो वसु उसकी उँगलियों को अपने मुँह में लेकर.. आपकी उंगलियां तो बहुत जायकेदार है तो असली चीज़ तो और अच्छा रहेगा.

वसु: लेकिन पहले मुझे आपके होंठों का रस पीना है. आपके होंठ बहुत लचकदार लग रहे है और ऐसा कहते हुए वसु कविता के ऊपर आकर अपने होंठ उसके होंठों से मिला देती है और किस करती है. कविता को पहले थोड़ा अजीब लगता लेकिन वो भी इस किस में घुल जाती है और दोनों फिर एक प्रगाढ़ चुम्बन में मिल जाते है. कुछ देर बाद..

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वसु: आपके होंठ तो बहुत स्वादिष्ट है.. अपनी जुबां खोलो ना.. कविता ये सुनकर एकदम शर्मा जाती है लेकिन अपना मुँह खोल कर जुबां निकालती है तो वसु उसकी जुबां अपने मुँह में लेकर खूब चूसती है जिसमें कविता भी पूरा साथ दे रही थी और इसमें अब कविता को भी बहुत मज़ा आ रहा था और वो भी बड़ी शिददत से वसु की जुबां चूस रही थी.

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५ min तक दोनों एक दुसरे के जुबां की लार एक दुसरे को पीला रहे थे और दोनों को भी बहुत मज़ा आता है. ५ min बाद..

वसु: आप तो बहुत अच्छे से चूमती हो.. मेरी पूरी जुबां अपने मुँह में ले लिया था. कविता कुछ शर्मा कर तुम भी तो बहुत अच्छे से चूमती हो. वैसे भी तुम्हे तो थोड़े दिन पहले ही प्रैक्टिस हो गयी होगी ना.. और ऐसा कहते हुए धीरे से हस देती है.

मनोज और मीना के कमरे में:

वहीँ बगल में मनोज और मीना का कमरा था जहाँ मीना मनोज की बाहों में थी और दोनों आज सुबह जो बातें वसु के साथ हुई थी उसके बारे में सोचते रहते है.

मनोज मीना से: तुम क्या चाहती हो?

मीना: मैं भी वही सोच रही हूँ मनोज. तुम्हारी क्या राय है?

मनोज: तुम जो निर्णय करोगी उसमें मेरी भी मंज़ूरी रहेगी.

मीना: जैसे दीदी कह रही थी उनको दीपू में बहुत confidence भी है क्यूंकि उनकी तो कुछ दिन पहले ही सुहागरात हुई थी.

मनोज: हाँ बात तो सही है. मीना मनोज की तरफ देखते हुए मुझे बहुत बुरा लगा जब लोग मुझे बाँझ कह रहे थे. मनोज: हाँ वो बात मैंने भी सुनी थी और मुझे भी अच्छा नहीं लगा.

मीना: मैं एक बार दीदी से फिर से बात करती हूँ लेकिन लगता है मुझे दीदी की बात माननी पड़ेगी.

मनोज: अगर तुम यही चाहती हो तो ठीक है.

मीना तुम्हे बुरा तो नहीं लगेगा ना.. की मैं तुम्हारे भांजे के साथ बिस्तर हो रही हूँ.

मनोज: शायद थोड़ा बुरा लगे लेकिन और कोई रास्ता भी तो नहीं है. तुम किसी को गोद नहीं लेना चाहती हो और माँ भी बनना चाहती हो. ठीक है मैं अपने आप को संभाल लूँगा. मेरी चिंता मत करो. बस इतना याद रखना की ये बात बाहर नहीं जाए और ये बात सिर्फ हमारे घर में ही रहेगी.

मीना: हाँ तुम्हारी बात भी सही है. मैं दीदी को हाँ करने से पहले इस बारे में भी बात कर लूंगी.

फिर दोनों कुछ और बातें करते है और सो जाते है. सोते वक़्त मीना के मन में दीपू ही बार बार आ रहा था. वो कितना तंदुरुस्त है दिखने में कितना सुन्दर है और वसु की बात सुनकर लगता है उसका लंड भी बहुत बड़ा है. ऐसे ही उसके बारे में सोचते हुए वो भी अपना एक हाथ चूत पे रख कर मसलती रहती है और २ मं बाद देखती है की उसका हाथ भी पूरे उसके चुतरस से भीगा हुआ है. वो दीपू को याद कर के ही झड गयी थी.

कविता के कमरे में:

वसु कविता के कान में: आपके होंठ का स्वाद तो बहुत अच्छा है.. लेकिन अभी और भी जगह है जहां का स्वाद मुझे चकना है.

कविता: तो रोका किसने है और चक लो ना.

वसु फिर कविता के कपडे निकल कर उसे भी पूरा नंगा कर देती हाय और फिर उसकी ठोस और कड़क हो चुकी चूची पे टूट पड़ती है. एक निप्पल को मुँह में लेकर चूसते हुए.. आपके निप्पल तो एकदम तन गए है. कविता: तनेंगे ही ना.. पिछले १० min में हम दोनों एक दुसरे का रस पी रहे हाय तो मैं तो उत्तेजित हो जाऊँगी ना... क्यों तुम नहीं उत्तेजित हो क्या?

वसु: क्यों नहीं शायद आपकी तरह मेरी चूत भी एकदम गीली हो गयी है. उसका रस तो आपको चकाऊँगी ही लेकिन थोड़ी देर बाद. पहले मुझे अपना काम करने दीजिये और फिर वो उसकी चुकी पे टूट पड़ती है. ५ min तक बारी बारी से दोनों चूचियों को चूसने और काटने के बाद वो नीचे झुकती हाय और उसकी नाभि में अपनी जुबां दाल कर उसको भी चूमती है.

कविता से ये अब बर्दाश्त के बाहर था और वो पूरी तरह झड जाती हाय और उसका पानी वसु की जांघ पे भी गिर जाता है. वसु को ये अहसास होते ही हस देती हाय और उकसी नाभि को चूमती रहती है.

जब वो उसकी नाभि को चूमती हाय तो वो देखती हाय की उसके बगल में एक छोटा सा तिल है. उसको देख कर वसु मन में सोचती है... हाय रे... क्या देख रही हूँ? कहीं ये भी मेरी सौतन ना बन जाए. तभी तो मैं सोचूँ ये भी मेरी तरह इतनी चूड़ाकड कैसे है... ऐसा सोचते हुए वो कविता की तरफ देखती है और उसको देख कर हस देती है.

कविता वसु को देख कर एकदम शर्मा जाती है और पूछती है की वो क्यों हस रही है. वसु कुछ नहीं कहती और फिर चूमते हुए उसकी मस्त ठोस और थोड़ा भारी जांघ को चूमती और काटती है.

कविता: aaahhh…ooohhh…ooouuucchh…. करते हुए धीरे से चिल्लाती है लेकिन उसे पता था की बगल के कमरे में मीना और मनोज है तो वो खुद ही अपना हाथ अपने मुँह पे रख कर उसकी आवाज़ को दबा देती है.

वसु: आखिर में उसके रस से लबालब उसकी चूत को देखती है जो पूरी भीगी हुई थी और एकदम साफ़ और चिकना दिख रही थी.

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वसु कविता की तरफ देख कर.. इतनी प्यारी चूत... अब तक आप इसे कहाँ छुपा रखी थी और ऐसा कहते हुए उसकी चूत को पूरा ऊपर से नीचे तक चाट लेती है और कविता भी अपना हाथ वसु का सर पकड़ कर अपनी चूत पे रख देती है क्यूंकि कविता भी बहुत चुदास हो गयी थी और उसे भी राहत चाहिए था

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वसु अपनी जुबां उसकी लाल और रस छोड़ती हुई चूत के अंदर दाल कर अच्छे से चूसती है और कविता भी अपने दोनों हाथों को चादर से थाम लेती है. उससे फिर से रहा नहीं जाता और फिर से एक और बार झड जाती है. वसु अपना काम जारी रखती है और इस बार अपनी दो उंगलियां उसकी चूत में दाल कर अंदर बाहर करती रहती है और साथ ही उसकी चूत को भी चूसती रहती है. एक ऊँगली उसकी गांड में डालने की कोशिश करती है तो कविता मन कर देती है तो वसु फिर उसकी चूत में ही उंगलियां करती है.

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कविता फिर से एक और बार झड जाती है तो वसु उसका पूरा रस पी कर फिर से ऊपर आकर कविता को चूमती है.

वसु: कैसा लगा आपका रस? कविता उसको देख कर कुछ नहीं कहती तो वसु कहती है अब मेरी बारी... और कविता को अपनी चूचियों पे उसका सर दबा देती है.

कविता ये पहली बार कर रही थी लेकिन जैसे कुछ देर पहले वसु के किया था वो भी वैसे ही करती है और वसु की चूचियों को अपने मुँह में लेकर चूसती है. वसु भी उसका सर अपनी चूचियों पे दबा कर आंहें भर्ती है. कविता भी वसु की तरह उसके पूरे बदन को चूम कर उसकी टांगों के बीच आती है और देखती है की उसी की तरह वसु की चूत भी एकदम भीगी और साफ़ चिकना है.

कविता: तुम्हारी चूत भी मेरी तरह ही है. वसु जान भूझ कर कविता की और देख कर धीरे से कहती है... दीपू को ऐसे ही पसंद है. कविता ये बात सुन कर एकदम शर्मा जाती है की उसने वसु से क्या पूछ लिया है.

कविता भी अब मस्ती में वसु की चूत चूसती है और ५ min के अंदर वसु भी झड जाती है. वसु से अब रहा नहीं जाता तो वो कविता से कहती है की उसे उसकी चूत फिर से चाटनी है. कविता को समझ नहीं आता तो वसु कहती है... आप मेरी चूत चूसिये और मैं आपकी. और फिर दोनों ६९ पोजीशन में आकर दोनों एक दुसरे का रस निकल निकल कर पीते है और दोनों एक दुसरे को आनंदित करते है. ५- १० min बाद दोनों जब कई बार झड जाते है तो दोनों भी थक जाते है और ज़ोर ज़ोर से सांसें लेने लगते है.

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वसु कविता को अपनी बाहों में लेकर.. क्यों माँ जी मज़ा आया क्या? कविता वसु को देख कर.. अब तो मुझे माँ जी मर कह.. और वैसे भी हम दोनों की उम्र लगभग एक ही है.. तो तू मुझे मेरे नाम से बुला. मुझे भी अच्छा लगेगा. वसु: ठीक है माँ जी.. और हस्ते हुए.. ठीक है कविता.

कविता: ऐसा मैंने पहले कभी नहीं किया था लेकिन तुम्हारे साथ कर के मुझे बहुत अच्छा लगा और मुझे उसकी ज़रुरत भी थी. मैं भी बहुत दिनों से तड़प रही हूँ और जब तुम्हारी फिर से शादी हो गयी और सुहागरात हुई तो एक तरह से मैं तुमसे थोड़ी जली की मेरी उम्र की हो कर फिर से शादी कर ली और मजे कर रही हो. वसु ये बात सुनकर हस देती है और कहती है की चिंता मत करो... जल्दी ही तुम्हारी भी शायद शादी हो जाए और क्या पता तुम भी मजे करो. वसु जब ये बात कहती है तो कविता उसकी तरफ सवालिया नज़र से देखती है तो वसु कुछ नहीं कहती. २ min बाद वसु कहती है: सुनो कविता मुझे तुमसे एक बात केहनी है. पता नहीं तुम क्या सोचोगी लेकिन तुम्हे बताना ज़रूरी है और शायद मंज़ूरी भी. कविता एकदम से उसकी तरफ देखती है तो वसु कहती है...

वसु: आज सुबह मैंने मनोज और मीना से बात की है जो तुमने मुझे बताया था.

कविता: क्या कहा उन दोनों ने?

वसु: मीना एकदम दुखी है की वो अब तक माँ नहीं बन पायी और लोग उसे ताने मार रहे है.

कविता: ये बात तो सही है. अब क्या कर सकते है? मनोज से शायद हो नहीं पा रहा है और वो किसी बच्चे को गोद भी नहीं लेना चाहती.

वसु: ठीक कहा तुमने. मैंने भी इस बारे में बात की और उनको एक उपाय बताया है. वही मैं तुमसे बात कर के तुम्हारी इच्छा जानना चाहती हूँ.

कविता: कौनसी बात?

वसु: बात ये है की मैंने उन दोनों को दीपू के बारे में बताया है और ऐसा कह कर वो रुक जाती है और कविता की तरफ देखती है. कविता को कुछ समझ नहीं आता तो तो पूछती है की क्या बताया है दीपू के बारे में?

वसु: तुम्हे तो पता है.. कुछ दिन पहले ही हमारी सुहागरात हुई है.. और कविता की तरफ देख कर.. उसका बहुत दमदार है और बहुत बड़ा भी है और धीरे से कविता के कान में.. उसका बहुत लम्बा और मोटा है ..मुझे और दिव्या को उसने खूब मस्त चोदा और हमें इतना मज़ा आया की मैं बता नहीं सकती. उसका लंड तो मेरी बच्चेदानी तक जा रहा था. लेकिन बात वो नहीं है.

कविता थोड़ा आश्चर्य से देख कर: तो बात क्या है?

वसु: बात ये है की हमने अब तक जितनी बार भी मिले है हमने हर बार उसका माल मुँह में लिया है. कहने की बात है की उसका माल बहुत गाढ़ा है और अगर वो हमारे अंदर ही छोड़ता तो शायद हम दोनों जल्दी ही प्रेग्नेंट हो जाते. मैं चाहती हूँ की मीना भी दीपू के साथ.. और ऐसा कह कर वसु फिर से रुक जाती है.

कविता अपना मुँह खोले वसु को देखती है जब उसे वसु की बात समझ आती है. वसु कविता को देख कर हाँ कहती है.

कविता: तुम सोच समझ कर तो बात कर रही हो ना? अगर दुनिया वालों को पता चलेगा तो लोग क्या कहेंगे?

वसु कविता की तरफ देख कर उसके होंठ चूमते हुए और एक चूची को ज़ोर से दबाते हुए.. हम दोनों अभी मिले है और शायद आगे भी मिलेंगे.. तो क्या दुनिया को पता है क्या? बात घर पे ही रहेगी और किसीको पता भी नहीं चलेगा और मीना को माँ बनने का सुख भी मिलेगा और उसे ताने भी सुनने को नहीं मिलेगा.. तुम क्या कहती हो? कविता: तुम्हारी बात भी सही है. तुमने मीना से बात की है क्या?

वसु: हाँ मैंने दोनों से बात की है और अभी इसीलिए तुमको भी बोल रही हूँ. वो मुझे कल सुबह जाने से पहले बता देंगे.

कविता: तुम्हारी बात तो ठीक है लेकिन ये कब और कैसे होगा?

वसु: तुम उसकी चिंता मत करो. २ महीने बाद निशा की शादी है... तुम सब तो आओगे ना... उसी वक़्त हम इसके बारे में सोचेंगे.

कविता: ठीक है. ये भी अच्छा है.

कविता: अगर वो दोनों राज़ी है तो फिर उनकी इच्छा है. मुझे भी कोई दिक्कत नहीं है. वैसे तुमने मेरी चूची को बहुत ज़ोर से मरोड़ा है और हस देती है.

वसु: तुम जैसी गदरायी घोड़ी को ऐसे ही मरोड़ना और पेलना है तभी तुमको संतुष्टि होगी. वैसे हम तो मिलते रहेंगे लेकिन मुझे लगता है तुम्हे भी जल्दी ही लंड की ज़रुरत पड़ने वाली है.

कविता: हाँ सही कहा लेकिन कैसे?

वसु उसकी तरफ देख कर कुछ नहीं कहती जैसे आँखों से इशारा कर रही हो की वो कुछ करेगी इसके बारे में.

चलो रात बहुत हो गयी है. मैं अपने कमरे में जाती हूँ और कल सुबह जाने से पहले मिलती हूँ तुमसे. हाँ एक और बात.. जब हम दोनों अकेले में रहेंगे तो ऐसी बातें करेंगे लेकिन बाकी सब के सामने तुमको मैं माँ जी ही कह कर बुलाऊंगी. ठीक है?

कविता: ठीक है.

वसु भी उठती है और जाने से पहले एक बार फिर से दोनों एक दुसरे को चूमते है और होंठों का रस फिर से आदान प्रदान करते है.

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वसु: तुम्हारे होंठ को छोड़ने का मन नहीं करता.

कविता: मेरा भी कुछ ऐसा ही हाल है.

वसु: चलो मैं निकलती हूँ और अपनी nighty पेहेन के अपनी गांड मटकाते हुए और अपने चेहरे पे एक हसी के साथ अपने कमरे में चली जाती है मन में ये सोच के की जिस काम के लिए वो यहाँ आयी थी... वो काम हो गया है……
 
Friends, update लिखना स्टार्ट किया है. क्यूंकि मैं अपने काम में थोड़ा busy हूँ और ज़्यादा टाइम नहीं मिल रहा है तो सोचा जब अपडेट दे रहा हूँ तो लम्बा अपडेट ही दूँ. अब तक मैंने 2750 words का अपडेट लिख दिया है. सोच रहा हूँ की 4000 words का पूरा अपडेट लिख कर एक साथ पोस्ट करून. Hopefully वो मैं कल तक पोस्ट कर दूंगा. साथ बने रहने के लिए बहुत धन्यवाद और आभार!
 
19th Update:

वसु: चलो मैं निकलती हूँ और अपनी nighty पेहेन के अपनी गांड मटकाते हुए और अपने चेहरे पे एक हसी के साथ अपने कमरे में चली जाती है मन में ये सोच के की जिस काम के लिए वो यहाँ आयी थी... वो काम हो गया है……

अब आगे..

अगली सुबह सब लोग फ्रेश हो कर अपना काम करते रहते है. मनोज ऑफिस चले जाता है लेकिन जाने से पहले वो वसु को कहता है की एक बार मीना से मिल ले. वसु भी मनोज से कहती है की वो ऑफिस से आने से पहले ही वो अपने घर चले जायेगी और सब का ख्याल रखना और उसे ये भी कहती है की अगले महीने होली है तो वो होली मनाने उसके घर आये.

मनोज: अभी मैं कह नहीं सकता. छूट मिलेगी तो ज़रूर आऊंगा.

वसु: देख लो... अगर तुम सब आओगे तो अच्छा लगेगा. वैसे भी शादी के बाद पहली होली रहेगी.

मनोज: ठीक है दीदी, मैं कोशिश करता हूँ..

वसु फिर सुबह नाश्ता करने के बाद अपने घर निकलने के लिए तैयार हो जाती है. और जैसे मनोज ने कहा था वो जाने से पहले मीना से मिलती है जो किचन में काम कर रही थी. मीना वसु को देख कर... दीदी आप एक बार मेरे कमरे में आना तो वसु भी मीना के साथ उसके कमरे में चली जाती है.

कमरे में पहुंच कर मीना बिस्तर पे बैठ जाती है और वसु भी उसके साथ बिस्तर पे बैठ जाती है और मीना की तरफ देखती है तो वो थोड़ा शर्मा जाती है लेकिन कुछ नहीं कहती. वसु उससे पूछती है की उसने उसे वहां क्यों बुलाया है (वसु जानती थी की मीना ने उसे वहां क्यों बुलाया था) मीना थोड़ा हिचखिचाती है और धीरे से कहती है की कल रात हम दोनों ने बात की है और वो मान गए है. वसु भी समझ जाती है की ये थोड़ा नाज़ुक मामला है तो वो भी हाँ में सर हिला देती है लेकिन कहती है…

वसु: देखो मुझे पता है ये तुम दोनों के लिए पहले थोड़ा कठिन होगा लेकिन ऊपर वाले पे भरोसा रखो. सब ठीक हो जाएगा. मैं एक और बात कहना चाहती हूँ.

मीना क्या?

वसु: यही की कोशिश तुम्हे ही करनी है.

मीना मतलब?

वसु: मतलब ये की जब तुम वहां आओगी तो तुम्हे ही दीपू को अपनी अदाओं से रिझाना होगा और उसे अपने थोड़े करीब लाना होगा. ऐसा मत करना की आते ही तुम सीधा दीपू के ऊपर चढ़ जाओ. उसे बहुत झटका लगेगा और समझ में भी नहीं आएगा... क्यूंकि तुम उसकी मामी हो. जैसे तुम राज़ी हुई वैसे ही तुम उसे राज़ी करो और फिर तुम्हे भी वो ख़ुशी मिलेगी जो शायद मनोज ने ना दिया हो.

मीना मैं तो राज़ी हो गयी हूँ बूत माँ को कैसे समझाऊँ?

वसु: उनको समझाने की ज़रुरत नहीं है. मैंने कल उनसे बात कर ली है और वो भी बात मान गयी है मेरे समझाने से. तुम उनकी चिंता मत करो.

वसु फिर मीना को अपनी बाहों में लेकर उसके कान में धीरे से कहती है की वो भी जल्दी ही दादी बनना चाहती. मीना ये बात सुनकर शर्मा जाती है तो वसु भी प्यार से उसका माथा चूम लेती है और फिर दोनों कमरे से बाहर आ जाते है.

फिर वसु भी अपने घर जाने के लिए तैयार हो जाती है और अपने माँ बाप से बात कर के उनका आशीर्वाद लेकर जाने के लिए होती है तो वो देखती है की कविता बहुत दुखी थी जो वो समझ सकती थी. वसु उसको देखती है और कहती है

वसु: माँ जी एक बार कमरे में आना... मुझे आपसे कुछ बात करनी है. कविता को समझ नहीं आता तो वो भी वसु के साथ उसके कमरे में जाती है. दरवाज़ा बंद कर के वसु कविता को अपनी बाहों में लेकर उसकी आँखें में देखते हुए कहती है तुम दुखी क्यों हो??

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कविता: तू तो चली जा रही है ना..और रोज़ रात को खूब मस्ती करोगी मेरे दीपू के साथ. बुरा मत मानना की दीपू को मैंने “मेरे” कहा है. वसु ये बात सुनकर हस देती है लेकिन कुछ नहीं कहती.

वसु: इसमें क्या है... अगले महीने होली है ना तो तुम सब आ जाओ और फिर खूब मजे करेंगे और हाँ जाने से पहले तुम्हारे लिए मेरी तरफ से ये... और ऐसा कहते हुए अपने होंठ उसके होंठों से जोड़ देती है और एक हाथ से उसकी चूची दबाती है तो दुसरे हाथ से उसकी गांड को मसल देती है. कविता हहह करती है तो वसु उसकी जीभ को अपने मुँह में लेकर पूरा रस निचोड़ लेती है और अपना रस भी उसके मुँह में छोड़ देती है और २ मिन बाद अलग होती है.

वसु:अब ठीक. इसको याद करते हुए अपने आप को गरम रखना और उसको आँख मार देती है. अब अपने आंसूं पोछ लो और चलो बाहर .

कविता: सुन मैं देखना चाहती हूँ की जल्दी से तेरी गोद में एक नन्हा मुन्हा आ जाए. वसु ये बात सुनकर थोड़ा शर्मा जाती है लेकिन कहती है की उसका तो पता नहीं लेकिन मैं ये भी चाहती हूँ की तुम जल्दी ही नानी बन जाओ. ठीक है और दोनों फिर हस्ते हुए बाहर आ जाते है.

वसु फिर अपने घर निकल जाती है और दोनों मीना और कविता के मन में ढेर साड़ी बातें छोड़ के जाती है की आगे क्या और कैसे होने वाला है.

२- ३ घंटे बाद वसु अपने घर पहुँच जाती है. उस वक़्त दोपहर हो गया था. घर में दिव्या और निशा थे. दीपू अपने काम के लिए निकल गया था. वसु को वापस देख कर दोनों बहुत खुश हो जाते है.

निशा: क्यों माँ.. नानी के घर गयी थी लेकिन एक बार भी फ़ोन नहीं किया.

वसु: बेटा थोड़ा काम था तो मुझे समय नहीं मिला तो तुझे फ़ोन नहीं कर पायी. दिव्या: वैसे दीदी वहां क्यों गयी थी और क्या काम आ गया था?

निशा: क्या काम था? वसु को लगता है की वहां की बात अभी निशा को बताना सही है है तो वो कुछ बहाना बना कर उस बात को फिलहाल निशा से टाल देती है और फिर अपने कमरे में जाकर आराम करने लगती है.

वसु बिस्तर पे लेटी रहती है तो फिर वहां दिव्या भी आ जाती है और उसके बगल में सो जाती है. वसु दिव्या को देख कर तूने तो ये २ दिन बहुत मजे किये होंगे ना.

दिव्या:क्या दीदी तुम भी.. २ दिन से उसने ठीक से सोने भी नहीं दिया. खूब पेला मुझे. मैं थोड़ा मना करती भी रही लेकिन जनाब कहाँ सुनने वाला था. कल दोपहर को ऑफिस से जल्दी आ गया था तो दोपहर में ही १ घंटे खूब चोदा और फिर रात को तो तुम्हे भी पता चल गया ना. फ़ोन पे तुमसे बात कर रहा था और मेरी ले रहा था.

वसु: लेकिन तुझे मजा भी तो बहुत आया होगा ना.

दिव्या: हां दीदी दर्द के साथ बहुत मजा भी आया और उसी को याद करते हुए देखो ना.. और ऐसा कहते हुए वो वसु का हाथ अपने चूची पे रख कर देखो कैसे मेरे निप्पल भी तन गए है और मेरी पैंटी भी पूरी गीली हो गयी है. वसु भी दिव्या की तरफ देखती है तो उसकी आँखों में भी बहुत वासना नज़र आया तो वो झुक कर दिव्या के होंठ चूम लेती है जिसमें दिव्या भी उसका पूरा साथ देती है.

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दोनों एक दुसरे के होंठ चूसते हुए अपने हाथ को भी काम में लाते है और फिर दोनों ही जल्दी ही नंगी हो कर एक दुसरे को मजा देते है. दोनों से रहा नहीं जाता तो दोनों ही जल्दी से 69 पोजीशन में आकर दोनों एक दुसरे की चूत चाटते हुए दोनों एक दुसरे को थोड़ा शांत करते है और दोनों जल्दी ही झड जाते है.

दिव्या: अच्छा किया जो तुमने मेरा अभी पानी निकल दिया. आज रात को तो मैं जल्दी ही सो जाऊँगी. तुम ही अपने पति को संभाल लेना आज और हस देती है और फिर थोड़ी देर बाद दोनों ऐसी ही घर की बातें करते है.

वसु: अच्छा सुन तुझे एक बात बतानी है.

दिव्या: बोलो ना दीदी क्या बात है.

वसु: बात ये है की शायद तेरी एक और सौतन आने वाली है.

दिव्या ये बात सुनकर एकदम चक्र जाती है और पूछती है की कौन?

वसु: मैं अभी तो बता नहीं सकती लेकिन कुछ दिनों में तुझे ही पता चल जाएगा. अगले महीने होली है तो मैंने उन सब को यहां आने को कहा है तो शायद वो लोग यहां आएंगे.

दिव्या: फिर भी बताओ ना..

वसु: अरे थोड़ा सबर रख. जैसे मैंने कहा तुझे ही पता चल जाएगा. अब और ज़्यादा बात नहीं. दोनों थक गए है तो आराम करते है.. वैसे भी रात को आज सोने में समय लग जाएगा. वसु उसे आँख मार देती है और फिर दोनों सो जाते है.

वहीँ दीपू और दिनेश अपने काम में थोड़ा बिजी रहते है और अपने दूकान में क्या कमी है और क्या चाहिए और अपने बिज़नेस को कैसे आगे बढ़ाना है यही सब सोचते हुए काम करते है और ऋतू से भी इस बारे में बात करते है.

दीपू आज थोड़ा जल्दी घर जाना चाहता था क्यूंकि वसु जो घर आ गयी थी. दीपू: यार दिनेश आज मैं थोड़ा जल्दी घर जा रहा हूँ... माँ आ गयी है नानी के घर से. दिनेश उसकी टांग खींचते हुए.. बोल ना बीवी घर आ गयी है तो जाना है और हस देता है. दीपू: दीपू भी उसी लय में जवाब देते हुए..साले जब तेरी शादी तो तू तो अपना बिज़नेस भी भूल जाएगा और बीवी के साथ ही चिपका रहेगा.. और वो भी हस देता है. दोनों ही ऐसी मजाक बातें करते रहते है और फिर दीपू भी आज जल्दी घर निकल जाता है.

दीपू जब घर आता है तो तब तक वसु भी उठ जाती है लेकिन दीपू वसु को देख कर एक मस्त सीटी मारता है क्यूंकि वो इतनी सेक्सी लग रही थी की उसको देख सीटी मारे बिना नहीं रह सका.

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होठों पे लाल लिपस्टिक, एकदम टाइट ब्लाउज जिसमें से उसकी चूचियां बाहर आने को तड़प रही हो. साडी इतना नीचे बाँधा की उसकी गोल और गहरी नाभि भी नज़र आ रही थी और उसे देख कर कहता है की रात तक रहना मुश्किल है और वो देखता है की फिलहाल वहां पर कोई नहीं है तो जाकर वसु को अपनी बाहों में लेकर एक ज़बरदस्त किस उसके होंठों पे करता है जिसमें वसु भी उसका साथ देती है. २ min बाद दोनों अलग होते है तो वसु कहती है.. क्या कर रहा है.. दिव्या और निशा भी घर में ही है. इतने में निशा भी आ जाती है और कहती है क्या चल रहा है..

दीपू: तू देख नहीं रही है... मैं अपनी बीवी के साथ हूँ. जब तेरी शादी होगी ना तो तू दिनेश को शायद ऑफिस भी नहीं आने देगी.. रोज़ उसे अपने बाहों में छुपा रखेगी और हस देता है तो निशा भी ये बात सुनकर शर्मा जाती है. वसु भी इस बात पे हस देती है और दीपू को अलग कर देती है.

फिर सब मिलकर चाय पीते है तो दीपू वसु से पूछता है की वो नानी के घर क्यों गया था.

निशा: मैंने भी माँ से पुछा था तो कुछ नहीं बताया.

वसु: अरे ऐसे ही कुछ छोटा मोटा काम था तो बुलाया था मुझे. इस बात पे और ज़्यादा बात नहीं होता और फिर पूरा शाम और रात ऐसे ही गुज़र जाता है.

रात को खाना खाने के बाद वसु और दिव्या किचन और घर साफ़ कर के कमरे में आते है तो दीपू उनका ही इंतज़ार कर रहा था. दिव्या दीपू को देख कर कहती है की आज उसे परेशान ना करे और २ दिन से उसका मूसल वो झेल रही है और बहुत थक भी गयी है. दीपू हस देता है और कहता है की थका देता है लेकिन मजे भी तो देता है ना. दिव्या भी हाँ कहती है लेकिन आज उसे बक्शने को कहती है.

इतने में वसु भी अपनी गांड मटकाते हुए बिस्तर पे दीपू के पास आती है और कहती है की आज दिव्या को सो जाने दो. दीपू उसे बाहों में भर लेता है और कहता है की शाम से तुमने मेरा लंड खड़ा कर के रखा है. आज तो तुम्हारी पूरी कसरत निकाल दूंगा. क्यों क्या कहती हो?

वसु: ठीक है और फिर दिव्या को देख कर उसे भी दीपू के पास बुलाती है तो दिव्या भी दीपू से सात के सो जाती है. वसु दोनों से: सुनो मुझे तुम दोनों से कुछ बात करनी है जो मैं निशा के सामने नहीं करना चाहती थी. वसु की सीरियस tone सुन कर दोनों उसकी तरफ देखते है की शायद मामला कुछ गड़बड़ है.

दीपू: क्या हुआ?

वसु: यही की मैं वहाँ क्यों गयी थी बताना चाहती हूँ और उससे ज़्यादा की उसने वहां क्या कहा है...

वसु फिर दोनों को वहाँ जाने की बात बताती है और कैसे मीना को लोगों ने insult किया है बाँझ बोल कर और वो कितना दुखी है.

दीपू: हम्म्म... बात तो सही है. उसके साथ अच्छा नहीं हुआ है.

वसु: मैंने उन्हें इस बात को सुलझाने के लिए उपाय भी बताया है.

दिव्या: क्या उपाय?

वसु दीपू की तरफ देखती है और उसके लंड को पकड़ कर.. इस मूसल को काम पे लगा और बताना की ये क्या क्या कर सकता है. दीपू को थोड़ा एहसास होता है की वसु क्या कहना चा रही है लेकिन फिर भी पूछता है की उसे क्या करना है.

वसु: अरे मेरे बुद्धू पतिदेव तुझे ही मीना को वो सुख देना है जो मनोज नहीं दे पा रहा है और तुझे ही उसे माँ बनाना है.

वसु की ये बात सुनकर दोनों चकरा जाते है ख़ास कर के दिव्या जो अपने मुँह पे हाथ रख कर कहती है... क्या कह रही हो दीदी? ये कैसे हो सकता है? मनोज कैसे मानेगा?

वसु: ये वैसे ही हो सकता है जैसे की उसने हम दोनों से शादी कर के अपनी बीवियां बनाया है. रिश्ते में तो हम इसके माँ और मौसी है लेकिन अब इसकी पत्नियां है.

दीपू हस देता है और कहता है की मनोज कैसे मानेगा?

वसु: मैंने दोनों से बात की है और फिर आज सुबह यहां आने से पहले मीना ने बताया की उन दोनों ने इस बात पे बात की है और वो भी तैयार है और उसे आँख मार देती है.

वसु: एक और बात.. मैंने मीना से कह दिया है की पहल उसको ही करना है और वो ही तुझे रिझाये. ऐसा मर करना की मैंने तुम्हे ये बात बतायी है तो उसे देखते ही उस पर छड़ जाओ. वो फिर वासना का खेल जो जाएगा जो मैं नहीं चाहती. ठीक है?

दीपू: हम्म्म... बात तो तुम्हारी सही है.

वसु: वैसे भी मैंने तुझे बताया था ना की जब तू छोटा था तो बाबा ने क्या कहा था? तू बहुत बच्चों का बाप बनने वाला है और तेरी और भी बीवियां होगी. शायद उनकी बात सच हो रही है. वो लोग अगले महीने होली पे शायद यहां आएंगे. देखते है फिर क्या होता है.

दिव्या दीपू के छाती पे एक मुक्का मार कर.. तेरे तो मजे ही मजे है. वैसे तू मुझे कब माँ बना रहा है?

दीपू: तुम कहो तो आज ही करता हूँ. तुम ही कहती हो की थक जाती हो तो मैं क्या करून और दिव्या के होंठ चूम लेता है. दीपू दोनों को देख कर.. जल्दी ही मुझे बाप बनना है. तुम लोगों को माँ नहीं बनना है क्या?

दोनों वसु और दिव्या एक साथ: हाँ.

वसु: मैं चाहती हूँ की पहले दिव्या पेट से हो जाए. क्यूंकि अगर दोनों एक साथ हो गए तो फिर तेरे इस मूसल को कौन संभालेगा? दोनों पेट से एक साथ हो गए तो तुझे काफी दिन सूखा रहना पड़ेगा.

दीपू: दोनों की तरफ देख कर.. अगर चूत नहीं है तो क्या हुआ? दोनों की गांड तो मैं मार ही सकता हूँ ना. दोनों ये बात सुनकर एकदम शर्मा जाते है.

वसु: वैसे दिव्या के साथ मीना भी पेट से हो जायेगी तो उसे भी अच्छा लगेगा.

दिव्या: उसको फिर से प्यार से मारते हुए.. तू बहुत बिगड़ रहा है. दीपू दिव्या का हाथ पकड़ कर अपने लंड पे रखते हुए.. अगर ये बिगड़ गया है तो इसे संभालना तुम्हारा ही काम है ना...

दिव्या: आज तो दीदी ही इसे संभालेगी. मैं तो सो रही हूँ और वो हट कर बगल में सोने की कोशिश करती है. दीपू वसु को अपनी गोद में बिठा लेता है और कहता है दिव्या से पहले तुझे कर दूँ तो... और ऐसा कहते हुए दीपू वसु के होंठ चूमता है तो वसु भी उसका साथ देती है.

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५ मं तक दोनों एक दुसरे का रस निचोड़ कर आदान प्रदान करते है. जब दोनों अलग होते है तो गहरी सांसें लेने लगते है.

दीपू वसु की आँखों में देख कर: मुझे तुम्हारे दूध पीना है.

वसु: फिलहाल तो इसमें दूध नहीं आता लेकिन ये लो और अपना ब्लाउज निकल कर अपना एक चूची उसके मुँह में दे देती है जिसे दीपू बड़े चाव से पीना लगता है.

दीपू एक निप्पल को मुँह में लेकर चूसते रहता है तो दुसरे हाथ से दुसरे चूची को ज़ोर से दबाता है. वसु को भी बहुत मजा आ रहा था और आंहें भरते हुए ही अपना पानी छोड़ देती है और पहली बार झड जाती है. और फिर थोड़ी देर बाद दीपू वसु को पूरा नंगा कर के बिस्तर पे लिटा था है और फिर उसकी कमर नाभि जांघ को चूमते हुए एकदम गीली और रसीली चूत पे आता है जो पहले से ही पानी बहा रही थी.

दीपू: आज तो पूरा पानी पी जाऊँगा...

वसु: पी जाओ ना... तुम्हारे लिए ही तो ये पानी बह रहा है. और फिर दीपू भी बड़ी शिददत से वसु की चूत चाटता है ऊपर से नीचे तक और जब वो अपनी जीब उसकी गांड की छेद पे लाता है तो वसु को एकदम से झुरझुरी होती है और अपना हाथ वसु के सर के ऊपर रख कर उसे अपनी चूत पे पूरा दबा देती है. दीपू भी मस्त हो कर उसकी चूत को चूसते रहता है और एक हाथ से उसकी चूची को भी दबाते रहता है.

५- ७ min तक दीपू वसु को बहुत मजा देता है जिसमें वसु पता नहीं कितना पानी निकालती है जिसे दीपू पूरा पी जाता है. दीपू: चलो अब अपने मूसल को तैयार करो ताकि अभी तुम्हारी सेवा कर सके और जैसा तुमने कहा था आगे जा कर मीना की भी सेवा करने वाला है और आँख मार देता है.

वसु भी फिर बड़ी शिददत से दीपू का पूरा लंड एक बार में ही पूरा जड़ तक ले लेती है और दीपू तो मानो जन्नत में पहुँच गया था. वसु भी लंड को मस्त चूसती है और अपने थूक से उसे पूरा गीला कर देती है जो एक सांप की तरह पूरा खडा हो गया था और पूरे जोश में दिख रहा था. ऐसा सांप जिसे अब बिल में घुसने के सिवा और कोई चारा नहीं था. वसु दीपू के खड़े लंड को देख कर वो भी थोड़ा दर जाती है की इतना बड़ा और खतरनाक लग रहा है.

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दीपू फिर बिस्तर पे लेटते हुए ही वसु को अपने लंड पे बिठा लेता है और एक फक की आवाज़ से उसका लंड पूरा एक ही बार में चूत की जड़ तक घुसा देता है. वसु भी आह्ह आह्ह करते हुए लंड पे बैठ जाती है और फिर ऊपर नीचे होने लगती है और दीपू भी उसकी मस्त और तानी हुई चूचियां को पकड़ कर दबाते हुए उसे चोदते रहता है. वसु को भी इसमें बहुत मजा आ रहा था और वो भी ज़ोर ज़ोर से आंहें भर्ती रहती है.

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काफी देर तक उसे ऐसे चोदने के बाद उसे घोड़ी बना देता है और पूरा लंड फिर से एक बार में ही पूरा घुसा देता है. वसु की तो जैसे जान ही निकल गयी थी.

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दीपू झुक कर उसकी चुकी दबाते हुए चोदने लगता है. इस चुदाई में अब बिस्तर पे भी हलचल होती है जिससे दिव्या की नींद टूट जाती है और वो पलट कर दोनों को देखती है तो वो भी उत्तेजित हो जाती है.

दिव्या दीपू से: क्यों रे अब तक लगे हो.. तकरीबन एक घंटा हो गया है और तू तो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है.

वसु को देखते हुए... दीदी बताया था ना आज तुम्हारी हड्डी पसली एक कर देगा. वसु भी अब पूरे पसीने में थी और दिव्या को देख कर कहती है.. चुप कर.. ये एक घंटे से लगा हुआ है और तुझे मजा आ रहा है. चल इधर एक बार मेरे पास आ.. दिव्या उठ कर वसु के पास जाती है तो वसु उसको पकड़ कर उसके होंठ चूमती है और उसकी जीभ को लेकर अपने मुँह में ले लेती है. अब दिव्या भी गरम हो रही थी और वो भी वसु का साथ देती है. दीपू उन दोनों को देख कर और बावला हो जाता है और तेज़ तेज़ वसु को चोदने लगता है. वसु की तो अब जैसे जान ही निकल रही थी.

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वसु भी थक जाती है तो इस बार दीपू दिव्या को अपने नीचे लेता है और अब वो उसे चोदने लग जाता है. वसु बेचारी बगल में लेट कर अपनी सांसें संभालने में लगी रहती है. १० मं तक दिव्या को मस्त चोदने में ना जाने कितनी बार दिव्या भी झड जाती है और फिर दीपू भी नज़दीक आ जाता है और कहता है की उसका भी होने वाला है. दिव्या: हमें आज तुम्हारा रस पीना है. कुछ दिन और ठहर जाओ... हम दोनों के अंदर डालने के लिए. फिर दोनों वसु और दिव्या दीपू का लंड मुँह में लेकर चूसते है और देखते ही देखते दीपू भी अपना पानी निकाल लेता है और दोनों के मुँह में भर देता है जिसे वो बड़ी चाव से पी लेते है. कुछ बूंदे उनकी चूचियों भी गिर जाता है तो दोनों एक दुसरे की चुकी को चूसते हुए वो भी निगल लेते है और फिर तीनो थक हार के बिस्तर पे लुढ़क जाते है.

उनको पता नहीं होता लेकिन निशा भी बाहर दरवाज़े पे खड़ी हो कर उनकी आवाज़ें सुनती है और अपनी चूत मसलते हुए सोचती है... जल्दी ही मेरी शादी भी हो जाए और दिनेश भी मुझे ऐसे ही चोदे....

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वहीँ दूसरी तरफ मीना सोते हुए सोचती है की जब वो वहां जायेगी तो सब कैसे होगा... और कविता भी वसु के साथ बिताये पल को याद करते हुए अपनी चूत मसलती है और सोचती है जब वो वहां जायेगी तो दीपू, वसु और दिव्या से कैसे नज़रें मिलाएगी और क्या होगा....
 
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