Incest यह क्या हुआ - Page 24 - SexBaba
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Incest यह क्या हुआ

भुवन ने अपने दोस्तो को फोन किया।

भुवन _अबे रवि, तू कितना समय आएगा बे।

रवि _अरे भाई भुवन मैं और विमल बस आ ही रहे है पहले ये बता खाने पीने की व्यवस्था किया है की नही।

भुवन _, अबे तू उसकी चिन्ता मत कर, चिकन मटन मछली,अंडा देशी और अंग्रेजी सब की व्यवस्था किया है।

रवि _अरे भाई तब तो मजा आ जायेगा।

भुवन _तुम लोग जल्दी , पहुंचो।

रवि _ठीक है भाई।

भुवन _अरे यार राजेश।

राजेश _बोलो भैया।

भुवन _यार, जरा बंसी काका के घर जाकर पता करते। सब चिकन, मटन सब तैयार huwa है कि नही।

राजेश _ठीक है भैया।

बंशी काका का घर बाजू में ही था। दोस्तो एवम पुरुष महमानो जो खाने पीने की शौकीन थे उनके लिए। खाने पीने की व्यवस्था उसी के यहां किया गया था।

क्यों की इस घर में तो मेहमानों की काफी भीड़ थी।

घर की महिलाए, चिकन मटन खाती नही थी तो घर में ये सब चीजें बनाया नही जा सकता था बाजू वाले घर में व्यवस्था किया गया था।

राजेश बंशी काका के घर पहुंचा।

बंशी काका _अरे राजेश बेटा आओ बैठो।

राजेश _पाए लागू काका।

बंशी काका _खुश रहो बेटा।

राजेश _काका, भुवन भैया ने मुझे भेजा है, पता करने की सारी सभी चीजे तैयार हुई है कि नही।

बंशी काका _अरे बेटा तुम्हारी काकी तो दोपहर से ही भिड़ी है सब चीजें बनाने में, मधु बिटिया भी सहयोग कर रही है।

बंशी काका ने मधु को आवाज़ लगाया।

अरे मधु बेटा देखो कौन आया है।

मधु कीचन में अपनी मार, मंगली की मदद कर रही थी।

वह अपनी बापू की आवाज़ सुन कर बाहर आई।

मधु _अरे बापू क्या huwa

बंशी _अरे बिटिया देखो कौन आया है।

मधु _राजेश भैया आप।

राजेश _अरे मधु, मैं पता करने आया था की सारी चीजे तैयार huwa है कि नही और कितना समय लगेगा।

मधु _मां बता रही थी की लगभग सभी चीजे तैयार होने वाली है।

अंदर से मंगली काकी ने आवाज़ दी, कौन है बेटी।

मधु _मां राजेश भैया आया है।

मंगली भी कीचन से बाहर आई,

मंगली _अरे राजेश बबुआ तुम।

राजेश _पाए लागू काकी।

मंगली _जीता रह बेटा।

राजेश_ओ काकी, क्या है न की भुवन भैया ने मुझे पता करने भेजा है कि सारी चीजे तैयार huwa है की नही।

मंगली काकी _बस बेटा कुछ देर में ही सारी चीजे तैयार हो जाएगी।

राजेश_काकी किसी चीज की आवश्यकता तो नही है।

मंगली _अरे बेटा, भुवन दोपहर में ही आकर सारी चीजे छोड़ गया था।

और किसी चीज की आवश्यकता नहीं है।

राजेश _अच्छा काकी मैं भुवन भैया को खबर दे देता हूं की सारी चीजे तैयार होने वाली है।

मंगली _, अरे बेटा कितने दिन बाद तु हमारे घर आया है, आते ही जाने लगे।

थोड़ा बैठो, अपने काका और मधु के साथ बतियाओ। मैं तेरे लिए चाय बनाती हूं।

मधु _हा, राजेश भैया, वैसे तो तुम हमारे घर आते ही नहीं।

काका _हा बेटा, मधु बिटिया और तुम्हारी काकी ठीक कह रही है, थोड़ी देर बैठ लो, चाय पी कर जाना।

राजेश _कुर्सी पर बैठ गया।

राजेश _, अच्छा मधु तुम्हारा तो एक बेटा है न, कही दिखाई नही दे रहा।

मधु _राजेश भैया, मुन्ने को मुहल्ले के बच्चे घूमाने ले गए है।

राजेश _मधु तुम्हारा, स्कूल में बच्चो को पढ़ाने कैसा अनुभव मिल रहा है।

मधु _भैया, मैं तो घर दिनभर घर में ही पड़ी रहती थी। मुझे तो जीवन बेकार लगने लगा था, पर जब से स्कूल जा रही बच्चो को पढ़ाने, बड़ा अच्छा लग रहा है।

राजेश _ये तो बड़ी अच्छी बात है।

मधु _ये सब आपकी मेहरबानी है भईया जो मुझे स्कूल में पढ़ाने का मौका मिल रहा है। मेरी बड़ी इच्छा थी कि मैं एक टीचर बनू।

राजेश _मधु अगर तुम टीचर बनना चाहती थी तो पढ़ाई बंद कर जल्दी शादी क्यू कर ली।

काका _अरे बेटा क्या बताया, मधु के लिए एक अच्छे घर का रिश्ता आया, तो हम लोग बिटिया शादी के बाद खुशी पूर्वक रहेगी करके शादी कर दिया।

पर हमारी यो किस्मत खराब था, लडका शराबी निकल गया। रोज शराब पीता है। इधर उधर पड़ा रहता है।शराब पीता है वो तो ठीक था, पर शराब पीकर मधु से मार पीट भी करता है।

अब मधु हमारी एक ही बेटी है, एक दिन तो मंगली मधु के ससुराल गई थी । उसके सामने ही मधु को पीटने लगा।

मंगली से देखा न गया। वह मधु को अपने साथ घर ले आई।

राजेश _ओह।

तभी मंगली चाय लेकर आई।

मंगली _अरे बाबुवा, इक मां अपनी बिटिया को कैसे उस नर्क में रहने दे सकती है, आखिर मधु के अलावा हमारा और कौन है?

इस ली मैं मधु को घर ले आई।

मधु _राजेश भैया, मेरी बड़ी इच्छा थी मैं पढ़ लिखकर टीचर बनू, क्या मैं माधुरी मैडम की तरह सरकारी शिक्षक नही बन सकती।

राजेश _अरे मधु, अगर तुम चाहो तो,तुम सरकारी शिक्षक अब भी बन सकती हो। पर इसके लिए मेहनत करनी पड़ेगी।

मधु _राजेश भैया, मुझे बताओ सरकारी शिक्षक की नौकरी के लिए मुझे क्या करना पड़ेगा।

राजेश _उसके लिए तुम्हे शिक्षक पात्रता की परीक्षा पास करनी होगी। और प्राथमिक शिक्षा में डिप्लोमा करना होगा। उसके बाद तुम शिक्षक की नौकरी के लिए एप्लाई कर सकती हो।

मधु _भैया ये सब होगा कैसे? कुछ मार्गदर्शन करते तो सदा आभारी रहूंगी आपकी।

राजेश _अरे मधु इसमें आभार वाली बात क्या है? ये तो मेरा फर्ज है। देखो राज्य सरकार हर साल शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन करती है। तुम अच्छे से तैयारी कर परीक्षा आसानी से पास कर सकती जो।

और रही डीपीई डिप्लोमा इन प्राथमिक एजुकेशन की बात ये मुक्त विश्व विद्यालय से घर में ही रहकर कर सकती हो।

मधु _सच भैया।

राजेश _हा, हा , और राज्य में शिक्षकों को भारी कमी है। नई सरकार आयेगी तो शिक्षको की भर्ती भी करेगी। तुम शिक्षक की नौकरी प्राप्त कर सकोगी।

पर थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी।

मधु _भैया, आपने मुझे नया रास्ता दिखाया है। अब आपके मार्गदर्शन में मैं अपनी लक्ष्य तक अवश्य पहुंचूंगी। में जी तोड़ मेहनत करुंगी।

मंगली _राजेश बेटा, हमने तो मधु की जल्दबाजी में शादी कर दी, और उसकी जिंदगी बर्बाद कर दी।

पर अब हम हमारे बेटी के साथ है जो वो चाहती है हम उसमें बाधा नहीं बनेंगे। उसकी सपना पूरी करने में तुम उसकी मदद कर दो बेटा, मैं तुम्हारी आगे हाथ जोड़ती हूं।

राजेश _अरे काकी ये तुम क्या कह रही हो। ऐसा करके मुझे शर्मिंदा न करो।

मधु का सपना जरूर पूरा होगा। ये वादा है आपसे।

मंगली _तू सच मे महान है बेटा, तू गांव के लोगो का उद्धार करने आया है।

राजेश चाय पीने लगा।

राजेश _काकी, चाय तो बहुत अच्छी बनी है।

बंसी काका _अरे बेटा, तुम्हारी काकी के द्वारा बनाई, चिकन, मटन और मछली खा कर देखना। क्या गजब की बनाती है।

राजेश _तब तो आज मजा आ जायेगा।

तभी लाउड स्पीकर में अलाउंस हुआ,कुछ ही देर में नाटक मंडली का कार्यक्रम चालू होने वाला है।

जन्मोत्सव की खुशी में पास के गांव के नाटक मंडली का कार्यक्रम रखा गया था।

वे अपने प्रोग्राम के लिए पहुंच चुके थे, उसके लिए मंच बनाया गया था।

राजेश _अच्छा काका, अब मैं चलता हूं भुवन भैया को जानकारी दे देता हूं सारी चीजे बनकर तैयार हो गया है।

काका _ठीक है बेटा।

राजेश वहा से चला गया।

भुवन को बताया की सारी चीजे बन चुकी है।

भुवन _अच्छी बात है, नाटक मंडली का प्रोग्राम चालू होने दो फिर उधर हम लोग अपना प्रोग्राम शुरू करेंगे।

नाटक मंडली के सदस्यों को चाय नाश्ता कराया गया।

कुछ देर में ही नाटक मंडली वालो का प्रोग्राम शुरू हो गया।

घर की महिलाए, एवम गांव की महिलाए मंच के सामने नाटक देखने बैठ गए।

नाटक शुरू होते ही।

भुवन, अपने चाचा माधव से कहा,,

भुवन _चाचा, पीने खाने की सारी व्यवस्था, बंसी काका के यहां हो चुका है। तुम जितने भी तुम्हारे समधी लोग है जो पीने खाने के शौकीन है उसे काका के घर लेकर चलो।

माधव _यहीं तो मैं पूछने वाला था व्यवस्था huwa है की नही,,

ठीक है सभी मेहमानों को लेकर मैं वहा पहुंचता हूं।

माधव, शेखर, केशव, अपने समधी और बाहर से आए अन्य मेहमान जो पीने खाने के शौकीन थे। उन्हे लेकर बंसी काका के घर ले गया।

भुवन ने बंसी काका के यहां दो कमरों में गद्दे बिछवा दिए थे।

क्यू की सभी मेहमान तो एक घर में आ नही सकते थे। इसलिए सोने की व्यवस्था भी बंसी काका के घर किया गया था।

बंसी काका ने मेहमानों को कमरे में ले गया जहां गद्दा बिछा huwa था।

मधु, नाटक देखने चली गई थी। मंगली कीचन में थी।

सभी मेहमान गद्दे में बैठ गए।

बात चीत करने लगे।

कुछ देर बाद भुवन काका के घर पहुंचा।

भुवन _काका मेहमान लोग, पहुंचगए न।

काका _हां बेटा।

भुवन, ने अंग्रेजी और देशी शराब के कई बाटल लाया था, उसमें से आधे को बंसी काका को दे दिया।

बंसी काका ने डिस्पोजल, शराब का बोतल, पानी लेकर कमरे में गया। माधव को दिया।

माधव ने बोतल खोलकर पैग बनाया।

इधर काकी कीचन में थाली में चिकन, मटन, मछली और अंडा निकाल कर रखी थी उसे बंसी काका

कीचन में जाकर, ले आया।

सभी लोग शराब पीकर, चखने का मजा लेने लगे और चखने की तारीफ करने लगे।

इधर भुवन और राजेश भी अपने दोस्तो और युवा मेहमानों को लेकर काका के यहां पहुंचे।

रवि विमल मोहन धीरज राजेश भुवन और अन्य लोग, दूसरे कमरे में जाकर बैठे, और वहा महफिल जमाया।

भुवन ने अंग्रेजी ओर देशी शराब की बोतल खोली सबके लिए पैग बनाया।

भुवन _राजेश, खाने के लिए कीचन में जाकर चिकन मटन प्याज, अन्य चीजे सब लेकर आओ।

राजेश कीचन में गया।

मंगली थाली में खाने की बनाई चीजे निकालती राजेश उसे कमरे तक पहुंचाता।

इधर भुवन पैग तैयार किया और सभी दोस्त जाम पैग पे पैग पीने और चखने का स्वाद लेने लगे।

धीरज _राजेश, तू भी तो पैग ले हमारे साथ।

भुवन _हा राजेश, ले तू भी ले।

राजेश _अरे भैया, उधर घर में कोइ पुरुष वर्ग है नही किसी चीज की जरूरत पड़ी तो, उन्हे पता चल जाएगा कि मैंने शराब पी है, फिर मां को क्या जवाब दूंगा।

ओ बड़ी नाराज हो जाएगी।

भुवन _हूं, ये भी बात है, अच्छा एक पैग मार ले। और मैने पान के ठेले से पान भी बनवा लिया है उसे चबा ले। शराब की गंध दब जाएगी।

मोहन _हा, राजेश हमारे साथ एक कम से कम एक पैग तो पीना ही पड़ेगा।

नही तो मजा नही आयेगा।

राजेश _अच्छा ठीक है, एक पैग उससे ज्यादा नही।

राजेश ने भी दोस्तो के साथ चेस कहते हुए एक पैग पी लिया।

इधर कुछ देर पीने का प्रोग्राम चलने के बाद,

शेखर _बंसी, चावल की व्यवस्था है की नही, भोजन भी कर लेते है।

बंसी _रोटी और चावल बना बनाया गया है। भैया।

शेखर _यहीं लगवा दो।

बंसी _ठीक है भैया।

बंसी सबके लिए पत्तल लगा दिया और रोटी चावल सब्जी परोस दिया, सभी लोग शराब पी पी कर भोजन का मजा लेने लगे।

सभी लोग को तेज़ नशा चढ़ गया।

भोजन करने के बाद। गद्दे को फिर अच्छे से बिछाकर लुड़क गए नशे में बात चीत करने लगे।

समधी जी मजा आ गया, बहुत अच्छी व्यवस्था किया है आपने। ज्योति के ससुर ने कहा।

इधर राजेश _भुवन भैया मैं घर तरफ जाकर देखता हू, किसी चीज की जरूरत तो नही।

भुवन _ठीक है राजेश, उधर की व्यवस्था देखो।

राजेश वहा से चला गया।

राजेश जब घर पहुंचा,,

सविता _राजेश तुम्हारा चाचा कहा है। अब हमे घर निकालना पड़ेगा। रात काफी हो चुकी है, घर बिल्कुल सुना है, कोइ चोर वगैरा आ गया तो।

जाओ अपने चाचा को बुला लाओ।

राजेश _ठीक है चाची।

राजेश बंसी काका के घर आया।

राजेश _चाचा, आपको चाची बुला रही है।

माधव, मेहमानों के साथ बतिया रहे थे।

माधव _क्यू राजेश कुछ काम था क्या?

राजेश _चाची कह रही थी की घर में कोइ नही है, घर को रात में सुना छोड़ना ठीक नही है।

शेखर _अरे हा माधव तू घर जा, बहु ठीक कह रही है। माधव _ठीक है भैया। मैं तो कहता हू आप लोग भी मेरे घर चलते वही सो जाते।

केशव _अरे माधव हम लोग उठ कर चलने की स्थिति में नहीं है। सभी हसने लगे। तू जा।

माधव _मेहमानों से इजाजत लेकर , वहा से चला गया।

राजेश _अरे चाचा जी, तुम ऐसे हालात में कहा पैदल जाओगे।

चलो तुम्हे बाइक से छोड़ आता हूं।

माधव _अरे बेटा, तुम्हारी चाची भी तो है।

राजेश _उसे भी बाइक से छोड़ दूंगा।

माधव _अच्छा ठीक है।

राजेश अपना बाइक ले आया।

माधव को बिठाकर घर छोड़ आया।

घर आने के बाद,,

सविता _राजेश, तुम तो अपने चाचा को बुलाने गए थे। कहा रह गए थे,,

सुनीता _हां बेटा, जाओ अपने चाचा जी को बुला लाओ। सविता घर जाने के लिए देख रही है।

राजेश _मां मैने चाचा जी को घर छोड़ आया।

सविता _अरे तो मैं किसके साथ जाऊंगी।

राजेश _चाची, चलो आपको भी छोड़ आता हूं।

सविता _अच्छा ठीक है।

सविता सभी से इजाजत ले ली।

राजेश सविता को बिठाकर उसके घर ले गया।

राजेश _अच्छा चाची मैं चलता हूं।

सविता _अरे तू कहा जा रहा है। वहा तो सोने की जगह नही है। घर मेहमानों से भर गया है। तू यहीं सो जा।

राजेश_चाची वहा मेरी जरूरत पड़ सकती है, अभी नाटक मंडली का कार्यक्रम चल रहा है, उन्हे भोजन भी कराना है।

सविता _क्यू बांकी लोग भी तो है घर में,, कहीं तू नाराज तो नही है मुझसे सुबह की बात को लेकर,,

राजेश _अरे नही चाची, मैं भला आपसे क्यू नाराज होने लगा।

वैसे आपका पीछे का दर्द ठीक huwa, हंसते हुवे बोला।

सविता _चुप कर बेशरम, एक तो दर्द देता है और मजाक उड़ाता है अपनी चाची का।

जब तुम्हारे पिछवाड़े में कोइ डालेगा न तब पता चलेगा कितना दर्द होता है।

राजेश _सॉरी चाची । राजेश ने सविता को पीछे से बाहों में भर कर कहा।

राजेश _अच्छा चाची अब मैं चलता हूं। राजेश जाने लगा,,

सविता _मुझे लगता है तुम कुछ भुल रहे हो।

राजेश _क्या?

सविता _तू बड़ा मतलबी है,,,

राजेश सविता को अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसकी ओंठो को चूम लिया।

राजेश _अब चलू।

सविता _हूं।

राजेश वहा से चला गया।

जब वह घर पहुंचा तो नाटक मंडली का प्रोग्राम भी खत्म हो गया।

राजेश ने सभी को भोजन कराया। और उन्हें बिदा किया।

सुनीता ने घर के पुरुष मेहमानों के बारे में पूछा तो।

राजेश _मां, वे सभी बंसी काका के यहां, भोजन करके सो गए है।

सुनीता _अरे, भोजन तो यहां बना है फिर वहा भोजन क्यू किए।

पुनम _अरे भोली चाची, वहा सबके लिए पीने खाने का प्रोग्राम रखा गया था।

सुनीता _अच्छा तो ये बात है तभी तो सारे मर्द नजर ही नहीं आ रहे थे।

राजेश, कहीं तुमने भी तो नही पी है,,

राजेश _न मां, न, सूंघ कर देख लो।

सुनीता _देख, तू घर में जो हरकत किया था न, उस निशा और उसकी मां के चक्कर में वैसी हरकत यहां मत करना। अपनी मां को शर्मिंदा मत करना, सुनीता ने ने फुसफुसाते हुवे कहा।

सुनीता _बेटा यहां तो महिलाओं से घर भर गया है, तू भी वही सो जाना बंसी काका के यहां।

राजेश _ठीक है मां।

राजेश बंसी काका के यहां, पहुंचा।

उसने देखा सभी लोग नशे में आपस में बडबडा रहे थे।

बंसी काका थोड़ा होश में था।

बंसी _अरे बेटा तू आ गया।

तुम्हारी काकी तुम्हारा इन्तजार कर रही थी।

राजेश _क्यू?

काका _पर क्यू काका?

राजेश _सभी लोग भोजन कर लिए है बस तू ही बचा है, इसलिए।

राजेश _ओह।

तुम्हारी काकी अपनी कमरे में है, मैं बता देता हूं।

बंसी अपने कमरे में गया,,

बंसी _मधु की मां, राजेश आ गया है उसे भोजन दे दो।

मंगली कमरे से बाहर आई,,

मंगली _अरे बबुआ तू आ गया, चल कीचन में तू भी भोजन कर ले।

अरे सुनो जी मधु भी भोजन नही की है उसे भी बुला दो।

बंसी मधु के कमरे में जाकर उसे बुला लायर।

मधु और राजेश के लिए मंगली ने भोजन लगाया।

राजेश _अरे मधु तू भी अभी तक खाई नही।

मधु _राजेश भैया, मां ने बताया की आप भोजन नही किए हैं तो मेरी भी इच्छा नही हुई खाने की।

राजेश _ओह, मेरे कारण आप दोनो भूखे है।

काकी _अरे बेटा, हमारे घर में तू एक मेहमान ही तो है, और मेहमान के खाने से पहले हम कैसे खा सकते है?

राजेश _चलो साथ में खाते है।

काकी मुझे मटन मत देना, मुझे पसंद नही, चिकन और मछली, अंडा लगा देना ।

मधु _तू क्या खायेगी।

मां मैं तू मछली खाती हूं, बस वही लगाना।

तीनो आपस में बात चीत करते हुवे भोजन करने लगे।

राजेश _वाह काकी सच में आप तो चिकन, मछली बहुत अच्छा बनाती है। बड़ा स्वादिष्ट बना है।

काकी _अरे बेटा पहले मैं भी नही खाती थी, तुम्हारे काका बड़े शौकीन हैं वह जिद करके मुझे भी खाना सीखा दिया।

भोजन करने के बाद, राजेश कमरे में चला गया जहा भुवन उसके दोस्त सोए हुवे थे।

मधु भी अपने कमरे में जा कर सोने लगी।

बंशी काका, उस कमरे में सोने लगे जहा शेखर,केशव और उसके समधी लोग सोए थे।

सभी लोग नसे में धुत होकर घोड़े बेच कर सोने लगे। सभी की नाक बज रहे थे।

राजेश को ऐसे में नींद नहीं आ रही थी।

वह छटपटाने लगा।

इधर बंशी काका को भी नींद नहीं आ रही थी वह उठ कर अपने कमरे में गया।

मंगली के पास जा कर उसकी चूची मसलने लगा।

मंगली की आंखे खुल गई।

मंगली _मधु की बापू तुम,

बंशी _मुझे नींद नहीं आ रही। बड़ा मन कर रहा है चोदने का।

मटन खाने और दारू पीने के कारण बंशी का लंद खड़ा हो गया था उसका chudai करने का मन कर रहा था।

मंगली _क्या कर रहे हो घर में मेहमान है और,,, न बाबा आज नही।

बंशी _तुम ही तो कहती हो न मैं जल्दी झड़ जाता हूं, देखो आज मेरा बड़ा सख्त हो गया है। आज जल्दी नही झड़ेगा।तुम्हें देर तक मजा दूंगा।

मंगली _ये तो हमेशा ही कहते हो, और कुछ ही देर में ढेर हो जाते हो, और मैं प्यासी रह जाती हूं।

बंसी _और मेरी रानी, आज तो बात ही कुछ है तुम्हे छू कर देखो।

मंगली _अच्छा ऐसी क्या बात है मैं भी तो देखूं।

बंशी काका ने लूंगी हटाकर अपना लंद दिखाया।

मंगली ने उसे हाथ से पकड़ कर देखा।

मंगली _हां जी आज तो बड़ा सख्त लग रहा है।

बंशी _इसलीय तो कह रहा हूं मेरी रानी, आज मैं तुम्हे निराश नही करूंगा। खूब मजा दूंगा।

मंगली _पर बाजू वाले कमरे में मेहमान सोए है। खाट की आवाज सुनकर कोई उठ गया तो।

बंशी _चलो घर के पीछे चलते है।

अच्छा ठीक है तुम चलो मैं आती हूं।

बंशी घर के पीछे झोपड़ी में चला गया जहा जानवरो के लिए पैरा रखा huwa था।

कुछ देर बाद कंडील लेकर मंगली वहा पहुंची।

बंशी मंगली को पैरे पे लिटा दिया।

मंगली अपनी पेटीकोट ऊपर उठा दी।

बंशी, मंगली की boor चाटने लगा।

बंशी बहुत जल्दी झड़ जाता था इसलिए वह चोदने से पहले मंगली की boor चांट चांट कर उसका पानी झाड़ता था।

मंगली,बंशी के द्वारा boor चाटने मादक सिसकारी निकालने लगी।

इधर राजेश को नींद नहीं आ था, उसे

पेशाब लगा। पेशाब करने के लिए घर के पीछे, गया।

उसे किसी के सिसकने की आवाज सुनाई पड़ी।

राजेश आवाज की ओर आगे बड़ा, झोपड़ी में हल्की रोशनी थी।

राजेश आगे जाकर देखा, वह देखता रह गया।

बंशी नीचे लेटा था। और मंगली उसके लंद पर बैठ कर उछल उछल कर chud रही थी।

आज, मटन और दारू का असर था जो बंशी जल्दी झड़ नही था।

मंगली की ब्लाउज खुली ही थी। उसके बड़े बड़े सुडौल स्तन हिल रहे थे।

राजेश का लंद खड़ा हो गया।कुछ देर इस नजारा को देख रहा था, तभी मंगली की नजर राजेश पर पड़ी।

दोनो की नजरे

मिली।

राजेश वहा से चला गया।

इधर बंशी काका ने अपनी हार मान ली और झड़ गया। उसका लंद पानी छोड़कर ढीला हो गया।

मंगली अभी झड़ी नही थीवह झड़ने वाली थी उसके पहले बंशी झड़ गया, वह फिर निराश हो गई।

बंशी _ओ हो माफ करना मधु की मां तुम्हारे झड़ने के पहले ही झड़ गया।

मंगली _ये पहली बार तो नही। अब तो मुझे आदत सी पड़ गई है।

बंशी और मंगली दोनो अपना कपड़ा ठीक किए। और वहा से घर में आ गए।

मंगली अपने खाट पे जाकर लेट गई।

बंशी भी मेहमानों के रूम में जाकर देखा सब ठीक तो है। उसने राजेश को जगा पाया।

बंशी _अरे राजेश बेटा तू अभी तक सोया नही है।

राजेश _अरे काका, इन लोगो के खर्राटे के कारण नींद नहीं आ रही।

बंशी _ओ हो, बेटा एक काम कर तू अपनी काकी के कमरे में जाकर सो जा वहा मेरी खाट खाली है। मुझे तो मेहमानों के साथ सोना है। पता नही किसको क्या जरूरत पड़ जाए।

राजेश _नही काका, काकी को बेवजह तकलीफ होगी।

बंशी _अरे नही, मैं अभी मंगली से बात करता हूं।

बंशी मंगली के पास गया,,

मंगली _क्या huwa जी।

बंशी _मधु की मां, राजेश को नींद नहीं आ रही लोगो के खर्राटे के कारण। मैने उसे मेरे खाट पर सोने को कहा।

पर वह मान नही रहा कह रहा है की काकी को तकलीफ होगी। अब तुम ही उसे बोलो।

मंगली राजेश की पास गई।

मंगली _बाबूवा, इस कमरे में समस्या हो रही है तो मेरे कमरे में आकर अपने चाचा के खाट पर सो जाओ। मुझे कोई समस्या नही होगी।

राजेश, उस कमरे से उठ कर काकी के कमरे मे चला गया।

मंगली ने बंसी के खाट को अपने खाट के बाजू में। लगा कर एक नया चादर बिछा दिया।

लो बाबूवा सो जाओ।
 
आप सभी मित्रो का सपोर्ट के लिए बहुत बहुत शुक्रिया
 
मंगली ने अपने खाट के बाजू अपने पति का खाट लगा दिया, उसमे एक नया चादर बिछा दिया।

मंगली _लो बबुवा , सो जाओ।

राजेश खाट पे सो गया।

मंगली भी अपनी खाट पे सो गई।

राजेश को नींद नहीं आ रहा था, क्यू की उसका land तो अभी अकड़ा हुआ था, उसने मंगली और बंशी की chudai जो देख लिया था।

करीब आधा घंटा बाद,,

राजेश अपनी खाट से उठ कर बैठ गया।

मंगली की नींद भी नहीं लगी थी।

मंगली _बबूवा, अभी तक सोए नही।

राजेश _ओ काकी प्यास लगी थी।

मंगली अपनी अपनी खाट से उठी और कीचन से पानी लाने के लिए जाने लगी।

राजेश की नजर उसकी मटकती गाड़ पड़ पड़ी तो उसका land और झटके मारने लगा।

राजेश ने पानी पिया।

राजेश खाट पर लेट गया

मंगली _अरे बबुआ तुम्हारी तबियत तो ठीक है न।

राजेश _नही काकी मेरी तबियत कुछ ठीक नहीं है। बड़ी तकलीफ हो रही है।

मंगली _अरे बाबुवा, कहा तकलीफ है।

राजेश _रहने दो काकी आप जानकर भी क्या करोगी?

मंगली _अरे बबूवा, तकलीफ क्या है? मुझे तो बताओ हो सकता है मैं तुम्हारी कुछ मदद कर सकू।

राजेश _अरे काकी, अब मैं तुम्हे कैसे बताऊं क्या तकलीफ है, आप मुझे गलत समझने लगोगी।

आप मुझे गंदा लड़का समझोगी।

मंगली _मैं गलत नहीं समझूंगी, तकलीफ क्या है बताओ।

राजेश _काकी, अब क्या बताऊं, मुझे बताने में शर्म आ रहा है।

मंगली _अरे बबुआ शर्माना तो लड़कियों का काम है तुम तो लड़के हो। लड़के होकर शर्मा रहे हो। चलो बताओ बात क्या है अपने काकी से शर्माने की आवश्यकता नही।

राजेश _ओ काकी क्या है न कि मेरे,,,,

मंगली _अरे रूक क्यू गए, बबुआ बताओ,,,

राजेश _ओ काकी,,, मेरे,,, नुनु में,,,,, बड़ा दर्द है,,,

मंगली नुनु शब्द सुनकर शर्मा गई,,,

मंगली _क्यू बाबुवा, क्या huwa तुम्हारे नुनु को,, मुंह छिपाते हुए बोली, और मुस्कुराने लगी।

राजेश _ओ आपको और काका को घर के पीछे, जब से देखा है न, तब से दर्द कर रहा है।

मंगली, शर्म से पानी पानी हो गई।

मंगली _अरे बबुआ अब क्या बताऊं तुम्हे? मैने तुम्हारे काका को मना भी की थी घर में सब मेहमान है ऐसे में, ये करना ठीक नहीं, पर दारू पीने के बाद तो तुम्हारे काका अपने पर काबू ही नही रख पाते।

आखिर वही huwa जिसका डर था तुम वहा आ गए।

राजेश _माफ करना काकी मुझे पता होता की आप आप और काका वहा, कुश्ती लड़ रहे हैं तो मैं वहा नही जाता।

मंगली _कुश्ती शब्द सुनकर, मंगली शर्म से पानी पानी होने लगी।

मंगली _, अरे जो नई होना था वो तो हो गया। अब कर भी क्या सकते हैं?

अब तेरा तकलीफ दूर कैसे होगा? ये बताओ।

राजेश _काकी, आप चाहे तो तकलीफ दूर कर सकती हो,,

मंगली _वो कैसे बबुआ?

राजेश _मेरे नुनु से पानी निकालकर।

मंगली शर्मा गई,,,

राजेश _अरे काकी, थोड़ा तेल लगाकर मालिश कर दोगी तो, मुझे दर्द से राहत मिल जायेगी। और मैं चैन से सकूंगा।

मंगली _मैं तो तुम्हे बड़ा शरीफ लडका समझती थी, तू तो बदमाश निकला, अपनी काकी को मूठ मारने कह रहा है। तुम तो अपनी काकी को गंदी औरत समझने लगे।

मंगली, नाराज होते हुवे बोली।

राजेश _काकी आप तो नाराज हो गई, माफ करना मुझसे गलती हो गई।

राजेश अपनी खाट से उठ गया।

राजेश _काकी मैं दोस्तो के साथ सो ने जा रहा हूं। आप नाराज मत होइए।

राजेश जाने को huwa

मंगली _अरे रुको, बाबुवा।

नाराज हो गए क्या अपने काकी से,,

राजेश _नही तो

मंगली _फिर यहां से जा क्यूं रहे हो।

राजेश _यहां रहने से दर्द तो कम होगा नही, बल्कि और बढ़ेगा, इसलिए यहां से जाना ही अच्छा है।

मंगली _अच्छा ठीक है, दिखाओ अपना नुनु मैं मालिश कर देती हूं।

बबुआ तुम्हारे जगह कोई और होता तो खुद ही यहां से जाने कह देती, पर तुमको निराश करने की हिम्मत मुझमें नहीं है,और मेरी क्या इस गांव की किसी भी औरत में नही होगी।

पर हां यह बात किसी से कहना मत नही तो मेरी बड़ी बदनामी होगी। पता नही गांव के कितने लोगो ने मुझे फसाने की कोशिश की पर पराया मर्द के बारे में कभी सोचा ही नहीं।

राजेश _अरे काकी ऐसी बात है तो मैं आपका पतिव्रता धर्म नही तोड़ना चाहता। मुझे जाने दीजिए।

काकी _अरे बबुआ तुम्हे निराश करके अपनी पतिव्रता धर्म बचा के रखूंगी, तो मेरे दिल को बिलकुल अच्छा नही लगेगा।

राजेश _काकी ठीक से सोच लो बाद में मुझे दोष न देना कि मैने आपका पतिव्रता धर्म को भ्रष्ट कर दिया।

काकी _नही दूंगी बाबा नही दूंगी। चल अब तू खाट में लेट जा मैं सरसो तेल गर्म करके लाती हूं।

मंगली मुस्कुराते हुवे कमरे से जाने लगी तभी राजेश ने उसकी चूतड पे चिकोटी कांट ली।

मंगली _उई मां, बदमाश बड़ा जोर से चिकोटी कांटा, अपनी काकी से शरारत करता है। आती हूं तब बताती हूं तुझे।

मंगली कीचन में जाकर सरसो तेल गर्म कर लें आई।

मंगली _चलो दिखाओ अपना नुनु,

राजेश ने अपना पैंट और चड्डी ने खिसका कर लंद बाहर निकाल दिया। लंद हवा में लहराने लगा।

मंगली , आश्चर्य से देखने लगी।

राजेश _क्या huwa काकी?

मंगली _ये क्या है re इतना बड़ा?

ये नुनु है।

राजेश _तो।

मंगली _इतना बड़ा तो किसी घोड़े का होता है!

राजेश _काकी, जल्दी करो न बड़ा तकलीफ हो रही है।

राजेश का लंद देखकर मंगली की boor पानी छोड़ने लगी।

मंगली, हाथो में तेल लेकर लंद की मालिश करना शुरू कर दी।

काफी देर तक मालिश करने के बाद भी जब लंद से पानी नही निकला।

मंगली _कितने देर से हिला रही, तेरा तो पानी ही नहीं निकल रहा है re, तेरा काका का तो हाथ लगाते ही पानी छोड़ देता है।

मेरा तो हाथ भी दर्द करने लगा।

राजेश _काकी, ये इतना आसानी से पानी नही छोड़ने वाला। मेरे घोड़े को बड़ी प्यास लगी है। जब तक जी भर कर कूवे का पानी नही पिएगा। ये उल्टी नही करेगा। इसे अपने कुवे का पानी पिलाओ।

मंगली _मतलब तू मेरे कुंवे की खुदाई करना चाहता है।

राजेश _अगर आप इजाजत दो।

मंगली _तू अपने इतने बड़े हथियार से खुदाई करेगा न, तो नसे में खर्राटे भरने वाले भी जाग जायेंगे।

राजेश _तो चलो घर के पीछे चलते है।kuwe की खुदाई करने। राजेश ने एक हाथ से मंगली की boor को साड़ी के ऊपर से ही सहलाते हुए कहा।

मंगली की पेटीकोट boor की पानी से गीली हो चुकी थी।

मंगली _अब तेरी इच्छा तो पूरी करनी ही पड़ेगी। नही तो रात भर प्यास से तड़फता रहेगा तेरा घोड़ा।मुस्कुराते हुवे बोली।

तू चल मैं लाल टेन लेके आती हूं। और जाने से पहले एक बार देख लो सब सो तो रहे है न।

राजेश ने कमरे में जाकर देखा जहा मेहमान सी रहे थे। सभी लोग नींद में खर्राटे भर रहे थे।

राजेश _काकी, सभी घोड़े बेच कर सो रहे है, चलो जल्दी। मेरे घोड़े को पानी पिला दो।

मंगली _अरे बबुआ आती हूं, थोड़ा धीरज धर।

राजेश घर के पीछे चला गया, कुछ देर बाद मंगली भी वहा लाल टेन, चादर और तकिया लेकर पहुंच गई।

मंगली _और बबुआ, बाजू वाले झोपड़ी में चलते है वहा दरवाजा लगा huwa है।

इस झोपड़ी में दरवाजा न होने के कारण कोई भी देख सकता है। जैसे तुमने देख लिया।

घर के पीछे झोपड़ी में रखे पैर को जमीन पर बराबर से फैला कर, चादर बिछा दिया और तकिया लगा दिया।

राजेश ने मंगली को खींचकर अपने गोद में बिठा लिया। और उसकी ब्लाउज का बटन खोल कर उसे शरीर से अलग कर दिया।

उसकी बड़ी बड़ीगोरे गोरे सुडौल चुचियों को देखकर उसका लंद झटके मारने लगा।

राजेश ने उसके स्तनों को हाथ में पकड़ कर मसलना और चूसना शुरु कर दिया।

मंगली सिसकने लगी।

राजेश का लंद देखकर उसकी हालत पहले से ही खराब थी।

राजेश ने एक हाथ, मंगली के पिटिकोट के अंदर डाल दिया और उसकी boor को मसलने लगा।

मंगली के हाथ पैर उटेजना के मारे कपकापने लगे।

राजेश एक हाथ से चूची को तो दूसरे हाथ से boor को मसल रहा था।

मंगली उत्तेजना के मारे गहरी गहरी सांस लेने लगी।

मंगली _बबुआ अब बस करो, और kuwe की खुदाई शुरू करो।

राजेश _काकी, आपका kuwa तो, पूरा लबा लब पानी से भर गया है। डुबकी लगाकर खुदाई करने में मजा आयेगा।

राजेश ने मंगली को चादर पे लिटाकर, अपना पैंट और चड्डी उतार दिया।

उसकी टांगे फैला कर बीच में उकडु बैठ गया।

उसकी मस्त चिकनी, गुदाज boor को हाथ से सहलाने लगा।

उसकी मस्त चिकनी chut देख कर लंद झटके मारने लगा।

राजेश देर न करते हुए, अपना लंद को पकड़ा और मंगली के कुंवे का रास्ता दिखाया।

फिर एक जोर का धक्का मारकर, एक ही बार में लंद को boor में आधा से ज्यादा अंदर कर दिया। योनि एकदम गीली थी फिर लंद मोटा होने के कारण boor लंद को जकड़ा हुआ था। धक्के से मंगली के मुंह से उई मां निकल गया।

मंगली _ऐसा कोई धक्का मारता है क्या, एक ही बार में घुसा दिया। मेरी boor फट गई।

राजेश _सॉरी काकी, रहा नही जा रहा था।

राजेश ने, मंगली की चुचियों को मसल मसल कर कुन्वे की खुदाई करना शुरू कर दिया।

राजेश धीरे धीरे स्पीड बढ़ाता गया।

लंद boor में गच गैच अंदर बाहर होने लगा।

लंद लंबा होने के करना,boor की अंतिम छोर तक जा रहा था।

राजेश ने तभी एक जोर का धक्का मारा, लंद का टोपा सीधा मंगली के बच्चे दानी से टकराया।

मंगली का पूरा बदन अंदर से झनझना गया।

राजेश मंगली की boor दनादन ठोकने लगा।

लंद मंगली की boor में कसा कसा अंदर बाहर हो रहा था।

मंगली को अपार आनंद की अनुभूति हो रही थी। वह जन्नत में पहुंच चुकी थी।chudai की ऐसा सुख उसे मिल रहा था जिसकी उसने कभी कल्पना नही की थी

वह राजेश को एकदम से जकड़ ली थी।

राजेश गचा गाच पेले जा रहा था।

मंगली के मुंह से मादक सिसकारी निकल रही थी झोपड़े में उसकी चूड़ियों की खनक गूंज रही थी।

फ़च फाच, खन खन और आह उन आई मां,, मर गई मां,,, आई,, उन,,,

राजेश _अरे काकी सच में तू तो बड़ी मस्त मॉल है, चोदने में बड़ा मज़ा आ रहा है मेरी रानी।

एकदम कसा कसा अंदर जा रहा है।

लगता है काका ठीक से ठुकाई नही किए है

राजेश बड़ी बड़ी मस्त चूचियों को मसल मसल कर पेले जा रहा था।

मंगली के boor का पानी नीचे चादर पर टपक रहा था।

मंगली इतनी ज्यादा उत्तेजी हो गई की वह खुद को ज्यादा देर तक रोक न सकी और राजेश को जोर से जकड़ ली।

आई मां,, मर,, गई,,, आह,,, उसकी आंखो की पुतलियां पलट गई। वह जोर से चीखते हुए झड़ने लगी।

वह राजेश को जोर से जकड़ ली राजेश उसके ऊपर लेट कर उसकी ओंठ चूसने लगा।

इधर मधु अपने कमरे में सोई थी।

उसका बच्चा, अचानक रोने लगा। मधु की नींद खुल गई। वह अपने बच्चे को चुप कराते हुवे, अपनी ब्लाउज खोल कर एक चूची का निपल बच्चे के मुंह में डाल दिया।

लो बेटा दूदू पी ले, लगता है मुन्ने को भूख लगी है। वह उसके बालो को प्यार से सहलाने लगी।

उधर कुछ देर सुस्ताने के बाद राजेश ने मंगली को घोड़ी बना कर। गच गच चोदना शुरू कर दिया।

राजेश इतना जोर जोर से धक्के मारने लगा की। मंगली चीखने चिल्लाने लगी।

झोपड़ा, मधु के कमरे के ठीक पीछे था।

घर की दीवार तो ईट से बना था, लेकिन घर का छत कच्छा था, खपरैल से बना थी। जिसके कारण मंगली की चीखे मधु को सुनाई पढ़ने लगी।

मधु _ये कैसी आवाज है?

वह ध्यान से सुनने की कोशिश करने लगी।

इधर राजेश बड़ी तेजी से लंद को boor में अंदर बाहर कर रहा था झोपड़ी में थप थप, फच फच, खन खन, आह उन आई मां,,,, आई,,,

की आवाज गूंजने लगा।

तभी मंगली इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई।

मंगली _कहा से सीखा है re ऐसा chudai करना,,, आह मां,, पूरा,,, उई मां,,

राजेश _क्या huwa काकी,,, मजा तो आ रहा है न, ले और ले,,, बड़ी मस्त chut है तेरी,

मंगली की कमर पकड़ कर जोर जोर से चोद रहा था।

मंगली _को संभोग का असीम सुख प्राप्त हो रहा था।

उसकी boor से पानी की धार बह रही थी।

लंद बड़ा आसानी से अंदर बाहर हो रहा था।

मंगली खुद को ज्यादा देर रोक न सकी और फिर से जोर से चीखते हुवे झड़ने लगी।

मंगली _आह,,, माई गई re,,,,

मंगली नीचे लुड़क गई, राजेश भी उसके ऊपर लेट गया।

चीख इतनी जोर की थी जिसे सुनकर मधु भी डर गई।

मधु, यह पता करने की पीछे आखिर चल क्या रहा है, और कौन इतनी जोर से चीखी।

वह अपने कमरे से निकल कर अपनी मां को बताने उसके कमरे में गई। उसकी मां कमरे में नही थी।

वह डर गई, कही ये मां की चीखे तो नही थी,

कही उसके साथ कुछ गलत तो नहीं हो गया, वह घबरा गई, वह कमरे में अपने बापू को ढूंढी। बंसी घोड़े बेच कर सो रहा था।

हे भगवान बापू तो यहां सोया huwa है फिर मां,,

वह घबरा गई।

इधर राजेश ने मंगली की चूची मसल मसल और चूस कर फिर गर्म कर दिया।

राजेश लेट गया, और मंगली को अपने लंद पर बैठने को कहा।

इधर मंगली राजेश की मर्दानगी देख हैरान थी, वह दो दो बार झड़ चुकी थी, फिर भी राजेश झड़ा नहीं था। उसका लंद हवा में झटके मार रहा था।

मंगली राजेश के लंद को हाथ में पकड़ी और अपनी boor का रास्ता दिखाते हुए उस पर बैठ गई।

राजेश ने अपने दोनो हाथो से उसके चूतड पकड़ लिया और अपनी कमरे उठा उठा कर चोदना शुरू कर दिया।

इधर मधु मां के साथ कुछ अनहोनी न हो गया हो घबरा कर वह घर के पीछे गई और अपने कमरे के पीछे झोपड़ी की ओर गई। झोपड़ी का दरवाजा अंदर से बंद था।

झोपड़ी के अंदर हल्की रोशनी दिखाई पड़ी।

मधु अंदर क्या चल रहा है जानने के लिए कान दरवाजे से लगा कर सुनने की कोशिश करने लगी।

मंगली की मादक सिसकारी उसे सुनाई पड़ी।

वह अंदर का दृश्य देखने के लिए दरवाजे पर छेद ढूंढने लगी। उसे एक छेद मिल गया। वह जब छेद में आंखे डाल अंदर का दृश्य देखी तो दंग रह गई।

उसकी मां किसी के ऊपर नंगी होकर उछल रही थी।

वह अपनी मां की ऐसा रूप देख कर दंग रह गई।

जो मां हमेशा उसे संस्कार की पाठ पढ़ाया करती थी कि पराया मर्द के बारे में सोचना भी पाप है आज निर्लज होकर chud रही है, हे भगवान उसे यकीन नही हो रहा था।

वह यह जानने के लिए की उसकी मां किसके लंद पर उछल रही है, वह पहचानने की कोशिश करने लगी पर उसका चेहरा दिखाई नही दे रहा था।

जब लाख कोशिश करने के बाद वह जान ने सकी की नीचे कौन लेटा है। वह घर में गई और मेहमानों के कमरे में जाकर देखी सभी लोग नींद में खर्राटे भर रहे थे। सभी लोग तो सोए हुवे थे पर राजेश उसे नजर नहीं आया।

मधु _हे भगवान क्या मां राजेश भैया से chud रही है। उसे घोर आश्चर्य huwa वह अपने कमरे में जाकर लेट गई।

यह सोचते हुए की मां राजेश भैया से chud रही है।

उसकी शरीर रक्त प्रवाह तेज हो गया।

उधर मंगली की मादक सिसकारी और चीखे उसके कानो में अभी भी सुनाई पड़ रही थी।

मधु की boor में पानी भरने लगा, वह अपनी एक उंगली से अपनी boor रगड़ने लगी।

वह राजेश को इमेज कर अपनी boor में उंगली डाल कर अंदर बाहर करने लगी।

वह बहुत अधिक उत्तेजित होने लगी आज तक मधु ने किसी पराया मर्द के बारे में कभी सोची नही थी, गांव के कई लड़के उसे फासने की कोशिश करते है पर वह कभी भी किसी पर ध्यान नहीं दी।

मगर आज उसकी मां को राजेश से chudte देख पता नही क्या हो गया। उसकी शरीर बहुत अधिक गर्म हो गई।

वह तेजी से अपनी उंगली को अपनी boor में अंदर बाहर कर सिसकने लगी।

मधु _राजेश भैया मुझे यकीन नही हो रहा है, तुम अपनी से लगभग दोगुनी उम्र की औरत को चोद रहे हो। क्या तुम्हे chut की कमी है, एक बार बोलेंगे तो पूरी गांव की लडकिया तुम्हारे नीचे लेट जाएगी।

मां तू बड़ी किस्मत वाली है। जो राजेश भैया का सानिध्य तुम्हे मिल रहा है।

Chut में उंगली अंदर बाहर करते हुए मधु इतनी उत्तेजित हो गई की, वह राजेश भैया कहते हुए झड़ने लगी।

आह मां,,,,

उसे ऐसा आनंद तो अपने पति के साथ चुदने में भी नहीं आया था जितना आनंद उसे राजेश के नाम का लेकर boor में उंगली डाल झड़ने में आया।

वह कुछ देर सुस्ताने लगी।

इधर उसके कानो में अभी भी, मंगली की मादक सिसकारी और बीच बीच में चीखने की आवाज सुनाई पड़ रही थी जिससे मधु फिर गर्म हो गई।

मधु _हे भगवान राजेश भैया में कितना पवार है जो एक बुरी औरत की चीख निकाल रहा है, कितने देर से चोदे जा रहा है।

उसकी boor फिर पानी छोड़ने लगी।

मधु फिर से अपनी boor सहलाने लगी।

मधु सोचने लगी _अगर राजेश भैया का सानिध्य पाना है तो यही अच्छा मौका है। नही तो जिंदगी भर उसके सानिध्य के लिए तरसना पड़ेगा। मुझे यह मौका नहीं खोना चाहिए।

वह अपनी पलंग से उठी और कमरे से निकल कर घर के पीछे जाने लगी। पीछे जाने से पहले मेहमानों के कमरे में गई देखा सभी अभी भी घोड़े बेच के सो रहे थे।

वह सीधे घर के पीछे झोपड़ी के पास जाकर छेद से देखी। राजेश मंगली के पीछे करवट लेकर लेट कर मंगली के एक टांग उठा कर दनादन पेल रहा था।

उसने दरवाजा खटखटाया।

मंगली और राजेश चौक गए।

Chudai रोक दिया।

मंगली _राजेश बेटा ये कौन आ गया अब क्या होगा?

राजेश_काकी तुम घबराओ मत मैं देखता हूं।

राजेश ने अपना चड्डी और पैंट पहना।

मंगली ने अपनी शरीर को साड़ी से ढक ली।

राजेश दरवाजे से बाहर निकला।

राजेश _अरे मधु तुम, यहां।

मधु _भैया, मां अंदर है क्या? घर में देखी तो कही नजर नहीं आई। घर के पीछे किसी की चीखने की आवाज सुनाई पड़ी तो इधर देखने आई।

मां ठीक तो है न, मुझे उसकी बड़ी चिन्ता हो रही थी।

राजेश कुछ देर सोचा,,,

मधु _राजेश भैया मुझे पता है अंदर क्या हो रहा है, आपको घबराने की आवश्यकता नही है। मैं किसी से इस बारे में कुछ नही कहूंगी।

राजेश _फिर आई क्यू?

मां की चीख सुनकर उसकी चिंता होने लगी तो पूछने आई हूं वह ठीक तो है न।

राजेश _काकी बिल्कुल ठीक है।

मधु _मुझे मां से मिलना है।

राजेश _ठीक है आ जाओ।

मधु अंदर गई, तो मंगली नीचे चादर पे लेटी थी और शरीर को साड़ी से ढक ली थी।

मंगली _अरे मधु तुम, बेटी तुम्हे यहां नही आना था।

मधु _मां मैने किसी की चीखे सुनी तो डर गया आपके कमरे में गया आप नही मिली, मुझे आपकी चिंता होने लगी कही आपके साथ कुछ अनहोनी तो नही हो गया। आपको ढूंढते यहां आ गई।

मंगली _अरे बेटी तुम्हारे आने से मैं कितना लज्जित महसूस कर रही हूं, तुमको यहां नही आना था। मैं बड़ी शर्मिंदगी महसूस कर रही हूं। तुमयहां से चली जाओ बेटीऔर हा अपनी बापू को इस बारे में मत बताना, नही तो उसे मुंह नही दिखा पाऊंगी।

मधु _मां मैं बापू को कुछ नही बताऊंगी पर आपको भी मेरी एक बात माननी पड़ेगी।

मधु _कैसी बात बेटी?

मधु _मुझे भी राजेश भैया के साथ सोना है। भैया से बोलो की मेरे सोए।

मंगली _बेटी ये तू क्या कह रही है?

मधु _मां जब आप सो सकती है राजेश भैया के साथ तो मैं क्यू नही?

मंगली _बेटी किसी पराया पुरुष के साथ सोना अच्छी बात नहीं है। आज तुम राजेश के साथ सोवोगी कल राजेश नही होगा तो, गांव के किसी दूसरे लड़को को बुलाने लगोगी।

इससे घर के बड़ी बदनामी होगी। किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे। इससे अच्छा तो तू अपनी ससुराल चली जा।

मधु _मां, मैं आपसे वादा करती हूं की मैं किसी दूसरे लड़के के साथ सोने के बारे में कभी सोचूंगी भी नहीं। बापू की मान सम्मान का ध्यान रखूंगी। पर राजेश भैया के साथ मुझे सोने दो।

देखो न आप ही तो मुझे हमेशा संस्कार की पाठ सिखाती थी और खुद ही राजेश भैया के साथ सोने लगी।

मंगली _अरे बेटी, तुम्हारे बापू के अलावा किसी पराया मर्द के बारे में कभी सोचा नही था। पर राजेश को मैं मना नही कर पाई बेटी, इसके लिए मुझे माफ कर दो।

मधु _जानती हू मां तुम शायद ही गांव में कोई महिला हो जो राजेश को मना करे।

मां मैं भी तो एक महिला हू मै भी राजेश भैया का सानिध्य चाहती हूं।

मंगली _ठीक है बेटी पर वादा कर की तू राजेश के अलावा गांव के किसी भी पुरुष के साथ सोने के बारे में नही सोंचेगी।

मधु _मां मैने कहा न मैं घर की मान मर्यादा का हमेशा ध्यान रखूंगी।

मंगली _तो फिर ठीक है, राजेश, तुम मधु की इच्छा पूरी कर देना।

बेटी अब तुम कमरे से जाओ मैं साड़ी पहन लूं। मैं यहां से चली जाऊंगी, उसके बाद तुम अपनी इच्छा पूरी कर लेना।

बबुआ तुम मधु के साथ सोकर उसकी इच्छा पूरी कर देना।

राजेश _काकी, मुझे आपके साथ अभी और करना है, मेरा मन अभी नही भरा है, तुम भी यही रहो न हम तीनो साथ में सोएंगे।

मंगली _babuwa तू ये क्या कह रहा है, मैं क्या मधु के सामने ही नंगी होकर तुम्हारे साथ सो जाऊं, न बाबा मुझसे नही हो पाएगा।

राजेश _अरे काकी, बहुत मजा आएगा। प्लीज मेरी भी बात मान लो तुम दोनो।

मधु _मां, अब भैया कह रहा है तो मान लो न उसकी बात।

मंगली _अरे बेटी, मुझे तुम्हारे सामने बड़ी शर्मिंदगी महसूस होगी।

मधु _मां मैने देखा किस तुम राजेश भैया के ऊपर नंगी बैठ कर उछल रही थी। इतना होने के बाद अब क्या शर्माना।

मंगली _अरे बबुआ दरवाजा बंद कर दे कोई और न आ जाए।

राजेश ने दरवाजा बंद कर दिया।

मधु राजेश के पास जाकर उसके गले में अपना हाथ डाल दिया।

राजेश ने अपने दोनो हाथ से मधु की चूतड को पकड़ लिया। फिर उसकी ओंठ को मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दिया।

मधु भी राजेश का सहयोग करने लगी।

उसके बाद मधु राजेश के गाल सीने को चूमता huwa नीचे बड़ा।

राजेश के पैंट का बटन खोल कर नीचे कर दिया उसका अंडरवियर भी खीच दिया।

राजेश का मोटा और लंबा लंद उसके आंखो के सामने आ गया। वह आश्चर्य से देखने लगी।

मधु _हाय दईया इतना बड़ा। तभी कहूं मां इतनी चीख चिल्ला क्यू रही थी।

मंगली _अरे बेटी तू नही ले पाएगी, राजेश का, तेरे बस की बात नहीं,मंगली हसने लगी।

मधु _मां, मैं भी कुवारी नही हूं एक बच्चे की मां हूं।

मधु राजेश का लंद हाथ में लेकर हिलाने लगी।

राजेश _मधु, मुंह में लेकर चूसो।

मधु _भैया, आपका तो बहुत बड़ा है, मुंह में नही आ पाएगा।

राजेश _अरे जितना आ सकता है उतना लेके चूसो। मधु राजेश के टट्टो को चाटने लगी।

फिर लंद का टोपा मुंह में भर कर चूसना शुरु कर दी, उसके बाद जितना अंदर जा सकता था, मुंह में लेकर चूसने लगी।

राजेश _हां ऐसे ही, तुम बहुत अच्छे से चूस रही हो। मजा आ रहा है।

मंगली _अरे बबुआ हमे तो नही चुसवाया अपना मूसल। आज तक कभी चूसी नही। मैं भी तो देखूं कैसा लगता है।

राजेश _काकी, आ जाओ तुम भी।

मंगली उठ के बैठ गई।

रामधु _लो मां अब तुम चूसो।

मंगली ने राजेश का लंद मुंह में डाल कर चूसने लगी।

इधर राजेश मधु की साड़ी खींचने लगा।

मधु अब पेटीकोट और ब्लाऊज़ में रह गई। मधु ने अपनी ब्लाउज भी निकाल दी। वह अब सिर्फ पेटीकोट में रह गई। उसकी दूध से भरी मस्त बड़ी बड़ी चूचियां को देखकर राजेश का लंद मंगली के मुंह में झटके मारने लगा।

राजेश मधु को अपने पास खींचा और उसकी चूचियां पकड़ कर मसल मसल कर दूध निचोड़ निचोड़ कर पीना शुरू कर दिया। फिर एक हाथ से पेटीकोट के ऊपर से ही उसकी boor मसलने लगा।

मधु के मुंह से मादक सिसकारी निकलने लगी। उसकी boor से पानी निकल कर पेटीकोट को गीला करने लगा।

इधर मंगली राजेश के के लंद को मुंह में भर कर चूस रही थी राजेश उसके मुंह में हल्का हल्का धक्का भी मार रहा था।

राजेश ने मधु की पेटीकोट का नाडा खीच दिया। पेटी कोट सरसराकर मधु के पैरो में गिर गया।

राजेश अपने हाथ से मधु की boor को सहलाया। मधु की boor में झांटे थी।

राजेश ने एक उंगली उसकी boor में डाल दिया।

मधु चिहुंक उठी।

फिर अंदर बाहर करने लगा।

राजेश ने अब दो उंगली अंदर डाल दिया। और boor में अंदर बाहर करने लगा।

मधु की boor पानी फेकने लगी। मधु के मुंह से, आह उन आन माई,,,

निकलने लगी।

राजेश _मधु चल अब तो घोड़ी बन जा।

मधु घोड़ी बन गई।

राजेश दो उंगली boor में डाल कर फिर अंदर बाहर करने लगा।

राजेश _काकी अब डाल दो अपनी बेटी के boor में मेरा लंद।

मंगली राजेश के लंद को पकड़ कर मधु की boor में सेट कर दी।

राजेश ने एक धक्का मारा।

मधु _उई मां,,,,

लंद का टोपा अंदर चला गया।

राजेश झुककर मधु की स्तन पकड़ कर मसलने लगा उसकी चूची से दूध फुहारा निकल नीचे गिरने लगा।

अब राजेश एक जोर का धक्का मारा,

मधु _उई मां,,,

भैया थोड़ा आराम से डालो तुम्हारा बहुत बड़ा और मोटा है।

लंद boor फाड़कर,आधा अंदर चला गयाथा ।

अब राजेश मधु की कमर पकड़ कर लंद को boor में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

लंद boor में सर सर अंदर बाहर होने लगा।

मधु को बहुत मजा आने लगा।

इधर राजेश अपना धक्का बढ़ाने लगा।

राजेश एक जोर का धक्का मारा लंद, मधु की बच्चेदानी से टकराया।

मधु का पूरा शरीर झनझना गया।

राजेश मधु की boor की दनादन ठुकाई करने लगा। मधु चीखने चिल्लाने लगी। मादक सिसकारी निकालने लगी।

वह संभोग की परम सुख को प्राप्त कर रही थी। उसे इतना मजा आ रहा था की अपनी कमर को आगे पीछे कर राजेश का सहयोग करने लगी

झोपड़ी में मधु की मादक सिसकारी,, आह उन आई,,, चूड़ियों की खनक खन खन,,,,

लंद का boor में जाने की फ्च फच की आवाज गूंजने लगी।

राजेश को भी मधु को चोदने में बड़ा मजा आ रहा था। लंद boor में कसा कसा अंदर बाहर आ जा रहा था।

इधर मधु की chudai देख मंगली बहुत गर्म हो गई वह अपनी उंगली अपनी boor में डालकर अंदर बाहर करने लगी।

राजेश _काकी, मधु को चोदने में बहुत मजा आ रहा है, देखो ना लंद मधु की boor में कितना कसा कसा अंदर बाहर हो रहा है।

तभी राजेश ने अपना लंद बाहर निकाल दिया।

काकी, थोड़ा चूस कर फिर से अंदर डाल दो।

मंगली राजेश केboor के रस से भीगा लंद मुंह में लेकर चूसने लगी कुछ देर चूसने के बाद राजेश के लंद को फिर से मधु की boor ने सेट कर दिया।

राजेश फिर एक जोर का धक्का मारा लंद एक ही बार में जड़ तक boor में घुस गया।

मधु चीख उठी।

राजेश अब मधु की कमर पकड़ कस कस कर चोदने लगा। मधु फिर से जन्नत की सैर करने लगी।

राजेश तेज रफ्तार से चोदने लगा। मधु का पूरा शरीर कपकपाने लगा, वह खुद को रोक न सकी और चीखते हुवे झड़ने लगी।

मधु नीचे लुड़क गई।

राजेश का लंद अभी अकड़ा हुआ था। वह झटके मार रहा था।

उसने मंगली को कमरा पकड़ कर उठा लिया और अपना लंद उसकी boor में डालकर हवा में उछाल उछाल कर चोदने लगा।

मंगली _चीखने चिलाने लगी।

इधर मधु आंखे खोली, उसने राजेश को अपनी मां को गोद में उठा कर चोदते हुवे आश्चर्य से देखने लगी।

और फिर गर्म होने लगी।

इधर मंगली की हालत खराब हो गई वह फिर ऐसी chudai भी होता है वह सांची न थी, वह कुछ देर की chudai में ही झड़ने लगी। राजेश से बच्ची की तरह चिपक गई। आह मां,, आह माई,,,,

राजेश उसे कुछ देर अपने से चिपकाया रखा फिर से नीचे लिटा दिया।

उसके बाद उसने मधु को अपनी गोद में उठा लिया और हवा में उछाल उछाल कर चोदने लगा।

मंगली राजेश की मर्दानगी देख कर दंग रह गई।

राजेश मधु को हवा में उछाल उछाल कर कुछ देर चोदने के बाद राजेश मधु को लेकर लेट गया।

मधु लंद में उछल उछल कर चुदने लगी।

राजेश मधु की हिलती चुचियों को थाम लिया और मुंह में भर कर उसकी दूध पीने लगा। और नीचे से अपनी कमर उठा उठा कर लंद को boor में अंदर बाहर करने लगा।

मधु को ऐसा सेक्स सुख मिल रहा था जिसकी कल्पना नही की थी वह कुछ देर में चीखतेहुए फिर से झड़ने लगी।

वह राजेश से कस कर लिपट गई थी। कुछ देर बाद राजेश उसे बाजू लिटा दिया।

और मंगली के ऊपर आ गया।

मंगली के चूतड के नीचे तकिया रख दिया। और लंद को एक ही बार में फाच से अंदर कर दिया।

उकड़ू बैठ कर उसकी चूचियों मसल मसल कर चोदना शुरू कर दिया।

मंगली की चीखे फिर से कमरे में गूंजने लगी। वह मंगली को तब तक चोदता रहा जब तक वह फिर से न झड़ गई।

मंगली के झड़ने के बाद राजेश मधु के ऊपर आ गया और उसकी चूतड के नीचे तकिया रखकर,boor चोदना शुरू कर दिया।

लंद पूरी जड़ तक अन्दर बाहर होने लगा।

मधु चीखने लगी।

उसका रोम रोम झनझनाने लगा। राजेश तेज गति से चोदने लगा। अब वह झड़ने की स्थिति में आ चुका था।

राजेश जोर जोर से चोदते हुवे एक करारा धक्का मारा और,,,

आह मां आह,,, आह ह ह,, आ,,,

राजेश मधु की boor में लंबी लंबी पिचकारी मार कर उसकी योनि को पूरी तरह भर दिया।

गर्म गर्म वीर्य मधु की boor में जाने से मधु भी एक बार फिर झड़ने लगी।

राजेश मधु के ऊपर ढेर हो गया। मधु अपनी सीने से राजेश को कस लिया।

कुछ देर बाद राजेश बाजू में लुड़क गया।

तीनो सुस्ताने लगे।

कुछ देर बाद, मधु और मंगली दोनो राजेश से लिपट कर सोने लगी।

राजेश को मां बेटी को एक साथ चोदने में बड़ा मज़ा आया था।

कुछ देर बाद तीनो नार्मल हुवे।

राजेश _काकी मजा आया की नही।

मंगली _बबुआ तुमने तो मेरी बरसो की प्यास बुझा दी, लगता है भगवान ने मेरी बरसो की प्यास बुझाने के लिए ही यहां भेजा था।

राजेश _और मधु तुमको।

मधु _भैया तुमने तो पूरी जन्नत की सैर करा दी।

मंगली _मधु बेटा, अब ज्यादा देर तक यहां रुकना ठीक नही कोई आ न जाए, कपड़े पहन कर अपनी कमरे में जाओ।

मधु , और कमली उठ कर अपने अपने कपड़े पहनने लगी, उसने अपनी boor की हालात देखी। उनकी boor बुरी तरह फट चुकी थी।

उसका मुंह ऐसा खुल गया था की जब कोई स्त्री बच्चे को जन्म देने पर boor की हालत हो जाती है।

दोनो कपड़े पहनने लगे राजेश उन्हे कपड़े पहनता देखने लगा।

मंगली _अरे बबुआ तू यही सोएगा क्या?

तू भी कपड़े पहन ले।

राजेश भी उठा और कपड़े पहनने लगा।

तीनो वहा से चले गए।

घर मे पहुंचे तो सभी अभी भी गहरे नींद में सोए हुवे थे।

राजेश खाट में जाकर सो गया। मधु भी अपने कमरे में जाकर सो गई। और मंगली भी।

इधर सुबह होते ही सभी लोग उठ गए।

सबसे पहले मंगली उठी वह साफ सफाई करने लगी।

इधर भुवन और उसके दोस्त भी उठ गए।

भुवन _अरे राजेश कहा है, कही दिख नही रहा।

बंशी _अरे बेटा राजेश को नींद नही आ रही थी तो तुम्हारी काकी के कमरे में सोने को बोल दिया था। वह कमरे में सो रहा होगा।

भुवन _चलो भई तालाब की ओर चलते है फ्रेस होने।

काका _राजेश को भी उठा देता हूं ।

मंगली _बबुआ का नींद रात में काफी लेट से लगा है, मधु के बापू उसे सोने दो।

सभी मेहमान तालाब की ओर चले गए।

सुबह के आठ बजे ,,

घर का काम निपटाने के बाद,,,

मंगली, मधु के कमरे में गई।

अरे बेटी और कितनी देर तक सोएगी। सुबह के आठ बज गए है।

मधु _क्या? मेहमान लोग चले गए क्या?

मंगली _वे सभी तालाब की ओर गए है। राजेश कमरे में सोया huwa है।

मैं उसे उठाने जा रही तू भी उठ जा।

मधु उठने को हुई, दर्द से आह,,,

मंगली _क्या huwa बेटी।

मधु _मां boor सूज गई है दर्द कर रहा है।

मंगली _बेटी, कुछ दिनों में ठीक हो जाएगी। मेरी भी boor सूज गई है।

बुरी तरह ठोका है बदमाश ने।

मंगली हस्ते हुवे कमरे से बाहर आई,,,

अपने कमरे में गई,,,

उसने देखा राजेश अभी भी खाट में गहरी नींद में सोया था। मूत भर जाने के कारण उसका लंद अभी भी खड़ा था।

मंगली _राजेश के खाट में बैठ गई,,,

अरे बेटा और कितने देर तक सोएगा।

राजेश का नींद खुला।

राजेश _अरे काकी सब उठ गए क्या?

मंगली _सब उठ कर तालाब की ओर चले गए हैं।

राजेश _ओह, मेरे बारे में पूछे होंगे।

मंगली _हां, मैने कहा की तू रात में काफी लेट से सोया है, उसे सोने दो।

चलो तुम भी उठो और पीछे जाकर फ्रेश हो जाओ मैं चाय बनाकर लाती हूं।

तभी मधु भी कमरे में आ गई।

वह अपने बच्चे को गोद में लेकर दूध पिला रही थी।

राजेश _मधु थोड़ा मुझे भी पिलाओ।

काकी _बबुआ, रात भर निचोड़ा है फिर भी मन नही भरा है क्या?

राजेश _नही।

काकी _पिला दे बेटी, इसे भी।

राजेश खाट में बैठ गया।

और मधु को अपने गोद में बिठा लिया।

मधु एक चूची को अपने बच्चे को पिला रही थी राजेश दूसरा चूची, मुंह में भर कर पीने लगा।

तभी लोगो की आने की आवाज आई।

काकी _बबुआ लगता है मेहमान लोग आ रहे है, अब जाओ तुम भी फ्रेश होकर आ जाओ। मैं चाय बनाती हूं।

राजेश _ठीक है काकी।
 
दोपहर तक सभी मेहमान, बिदा लेकर अपने अपने घर चले गए। घर के सभी लोग घर के बरामदे में ही बैठे थे।

भुवन _अच्छा मां, मैं खेत जा रहा हूं। कल कोई खेत गए नही थे, जानवर कही खेत में नुकसान न पहुंचा दिया हो।

शेखर _अरे भुवन रुको मैं भी चलता हूं, काफी दिन हो गए खेत को देखे।

केशव _ये तो बड़ी अच्छी बाट है। चलो खेत की ओर टहल कर आते हैं।

भुवन _राजेश कहा है दिख नही रहा है।

सुनीता _वो तो कमरे में लेटा हुआ है।

भुवन _अच्छा उसे आराम करने दो, चलो चाचाजी हम लोग, खेत चलते है।

भुवन, केशव और शेखर तीनो खेत के लिए निकल पड़े।

पदमा _स्वीटी और आरती नही दिख रही है।

पूनम _वो तो मधु और आरती भी अपने कमरे में आराम कर रही है।

पदमा _सुनीता, तुम भी थक गई होगी, मेहमान नवाजी में, तुम भी कुछ देर आराम कार लो। मैं भी अपने कमरे में जा रही आराम करने।

पदमा अपने कमरे में आराम करने चली गई।

पूनम कीचन में कुछ काम था, वह कीचन का काम निपटाने चली गई।

सुनीता भी अपने कमरे में आई ।

राजेश पहले से ही लेटा हुआ था।

सुनीता _अरे बेटा सो गया है क्या मुझे भी थोड़ा आराम करने है, उठो।

राजेश _अरे मां मुझे नींद आ रही है सोने दो।

सुनीता _मुझे भी थोड़ा आराम करने है तुम कही और चले जाओ।

राजेश _अरे मां कोई भी कमरा खाली नहीं है कहा जाऊं। तुम भी बाजू में सो जाओ।

सुनीता _बदमाश, तेरा कोई भरोसा नहीं, कही गंदी हरकत करने लगा तो, किसी ने पकड़ लिया तो मुंह दिखाने लायक नहीं रहूंगी।

चल जा यहां से।

राजेश बेमन से उठा?

क्या मां आप भी न, थोड़ा देर सोने देती तो क्या बिगड़ जाता।

सुनीता _न न तुम्हारा कोई भरोसा नहीं, पता नही क्या करने लगो।

राजेश ने सुनीता को खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया।

सुनीता _अरे गंदा लड़का छोड़ मुझे। कोई आ गया तो।

राजेश_अरे मां तुम कल चली जावोगी। मुझे थोड़ा आज प्यार तो कर लेने दे।

राजेश, सुनीता की गर्दन चूमता huwa उसकी स्तन को मसलने लगा।

सुनीता _अरे बेटा, कोई आ जाएगा समझा कर, तू यही चाहता है क्याकि तुम्हारी मां किसी से नजरे न मिला सके, तो ठीक है करके अपनी मनमर्जी।

राजेश, सुनीता को छोड़ दिया। सुनीता गोद से उठ गई।

राजेश मुंह फूला कर जाने लगा ।

सुनीता, मुस्कुराने लगी।

राजेश, कमरे से बाहर आया। आंगन में खाट था उसे बरामदे में ले आया। उसे बरामदे में लगाकर लेट गया।

तभी वहा कीचन का काम निपटा कर पूनम आई।

पूनम _अरे देवर जी तुम तो कमरे के अंदर सो रहे थे। बाहर खाट लगा कर क्यू सोने लगे। चाची ने भगा दिया क्या?

पूनम हसने लगी,,,

राजेश _तो, तुम हस क्यू रही हो,,,

राजेश को गुस्सा आया, उसने पुनम की हाथ खीच कर, खाट में गिरा दिया और जकड़ लिया।

पूनम _देवर जी ये क्या कर हो, छोड़ो मुझे, किसी ने देख लिया तो किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहूंगी।

राजेश _चलो अपनी दूदू पिलाओ काफी दिन हो गए हैं तुम्हारे दूदू पिए।

पूनम _पागल हो गए हो क्या? घर में इतने लॉग है और,,,

मुझे बदनाम करना चाहते हो क्या?

कल पी लेना जब घर में कोई नहीं होगा। अभी छोड़ो कोई भी आ सकता है।

तभी ज्योति कमरे से निकली। उसे प्यास लगी थी, तो पानी पीने,,

ज्योति _पूनम,,, उसने गुस्से से आवाज दी।

पूनम हड़बड़ाते हुए खाट से उठी।

ज्योति _घर में इतने लोग है और गंदी हरकत,,,

पूनम _माफ करना दीदी, देवर जी को ही समझाओ, जबरदस्ती पकड़ रखा था।

ज्योति _तू भी कम नहीं है,,

पूनम, अपने कमरे चली गई।

ज्योति _ये क्या राजेश, घर में इतने लोग है और कुछ मान मर्यादा का तो ख्याल रखो। कही चाची को पता चल गया तो यहां की औरतों को तुमने अपना रखैल बना रखा है।

राजेश _माफ करना दीदी।

राजेश करवट लेके सो गया।

ज्योति कीचन में जाकर, पानी पी और अपने कमरे में गई। एक तकिया और चादर ले आई।

ज्योति _राजेश ये खाट पे ऐसा ही सो गया है। उठो मैं चादर बिछा देती हूं।

राजेश, खाट से उठ गया।

ज्योति ने चादर बिछा कर तकिया लगा दिया।

ज्योति _लो अब सो जाओ।

राजेश बिना कुछ बोले खाट पे करवट लेकर लेट गया।

ज्योति को लगा कि राजेश उससे नाराज हो गया है।

वह खाट मैं बैठी,,

ज्योति _नाराज हो गए क्या अपनी दीदी से।

राजेश _नही तो,

ज्योति _तो मुंह क्यू फूला लिया है?

देखो बात को समझा करो, चाची को ये सब पता चला न तो वो क्या समझेगी? वह तुम्हे गांव में रहने नही देगी, अपने साथ शहर ले जायेगी।

राजेश _सॉरी _दीदी।

आप ठीक कह रही है मुझे अपनी जज्बातों पर काबू रखना चाहिए।

ज्योति _ज्योति उसकी बालो को सहलाते हुए,,,

चल अब सो जा, और अभी ऐसा कोई हरकत ना करना जिससे घर में तमाशा हो जाए।

राजेश _जी दी।

ज्योति वहा से चली गई। करीब एक घंटे के बाद राजेश को सविता का फोन आया।

सविता _अरे राजेश तू तुम कहा हो।

राजेश _घर में ही हूं चाची।

सविता _सुनीता दीदी को फोन देना मुझे कुछ काम था।

राजेश _ठीक है चाची।

राजेश कमरे में गया, मां,,

सुनीता _क्या huwa बेटा?

राजेश _चाची का फोन है, वो आपसे बात करना चाहती हैं।

सुनीता _हां बोलो सविता।

सविता _दीदी, सुना है की आप लोग कल घर जा रही है।

सुनीता _हा सविता ।

सविता _दीदी कितने दिनों बाद गांव आई हो और इतनी जल्दी जा भी रही, मेरे घर तो आई ही नहीं।

सुनीता _अब क्या बताऊं सविता, बैंक वालो को छुट्टी के लिए बड़ी दिक्कत होती है, बड़ी मुश्किल से तीन दिनों की छुट्टी मिली थी।

सबिता _अगर ऐसी बात है तो आज रात का भोजन सबको यही करना है, मैं कुछ नहीं जानती।

सुनीता _ठीक है सविता हम लोग शाम को तुम्हारे घर आ रहे है।

सबिता _सुनिता दीदी, मन मुटाव के कारण पदमा दीदी अभी तक मेरे घर नही आई है उसे जरूर लेके आना।

सुनीता _हा तू चिंता मत कर सभी लोग आयेंगे।

सविता _ठीक है दीदी, मैं इंतजार कर रही हूं आप सभी का। मैं फोन रखती हूं।

सुनीता _ठीक है सविता।

राजेश _क्या बात है मां? चाची क्यू फोन लगाई थी।

सुनीता _अरे बेटा, तुम्हारी चाची सबको अपना घर बुलाई है। आज रात का भोजन वही करने बोल रही है।

बेटा जाओ अपनी ताई को उठा दो,,, बोलना सविता के घर जाना है सबको,,

राजेश _ठीक है मां,,

राजेश, पदमा के कमरे की दरवाजा खटखटाया,,

पदमा _, अरे कौन है?

राजेश _अरे ताई मैं हूं, राजेश।

पदमा, बाहर आई।

पदमा _क्या huwa,कुछ काम था क्या?

राजेश _हूं,,

पदमा _बोलो क्या काम था!

अंदर चलो फिर बताता हूं।

राजेश कमरे के अंदर गया और पलंग पे लेट गया।

पदमा _पलंग किनारे बैठ गया और बोली

क्या काम था बोलो?

राजेश _सविता चाची का फोन था। मां पापा कल घर चलेजाएंगे न तो, सबको अपने घर बुला रहे है।

मां ने आपको बता ने और तैयार होने के लिए कहा है।

पदमा _ओह ठीक है अपनी मां से कहना मैं तैयार होकर आती हूं। बच्चो को भी बोल दे तैयार होने।

राजेश को शरारत सूझी।

अच्छा कौन सी साड़ी पहन कर जावोगी। मुझे दिखाओ।

पदमा _अच्छा तुम ही बता दो कौन सी साड़ी पहनू।

पदमा ने अपने आलमारी से कुछ साड़ी निकाल कर दिखाने लगी।

राजेश ने उसमे से एक पसंद किया।

पदमा _ये ठीक है।

राजेश _चलो इसे पहन कर दिखाओ।

पदमा _क्या मैं तुम्हारे सामने ही कपड़े बदलू।

राजेश _तो क्या huwa?

आप तो ऐसे चौंक रही है जैसे बिना कपड़ो के आपको देखा ही नहीं है।

पदमा शर्म से पानी पानी हो गई,,

पदमा _धत बदमाश।

राजेश _चलो अपनी साड़ी उतारो,,

पदमा _कोई आ गया तो,,

राजेश _सब अपने अपने कमरे में आराम कर रहे हैं। अभी कोई नही आयेगी।

राजेश _अच्छा ठीक है आप नही उतार रही तो मैं आपकी मदद कर देता हूं।

राजेश ने पदमा की साड़ी का पल्लू पकड़ लिया।

पदमा _बेटा, तू बाहर जा न, मत कर, कोई आ जाएगा।

राजेश ने साड़ी को खींचा, पदमा गोल गोल घूमने लगी। पूरा साड़ी राजेश के हाथो में आ गया।

राजेश _आओ ब्लाउज को भी निकाल देता हूं।

पदमा _अरे बेटा अब जाओ न समझा करो कोई आ जायेगा।

राजेश पदमा के पास गया और पदमा को अपनी बाहों में जकड़ लिए उसकी ओंठ चूसने लगा।

पदमा के हाथ पैर कपकपने लगे।

उसके बाद

राजेश ने ब्लाउज का बटन खोल कर उसकी स्तन नंगे हो गए।

उसकी बड़ी बड़ी सुडौल मस्त चूचियों को देखकर राजेश का लंद तन गया।

राजेश चुचियों को हाथ से पकड़ कर मसलते हुवे ओंठ चूसने लगा।

एक हाथ नीचे ले जाकर boor सहलाने लगा।

पदमा की हालत खराब हो गई। उसकी boor पानी छोड़ने लगा।

अब राजेश उसकी चूची को बारी बारी मुंह में भर कर चूसने लगा।

पदमा _अरे बेटा अभी मत कर, कोई आ जाएगा समझा कर, रात में कर लेना।

राजेश _सच में आज रात में देगी। कोई बहाना तो नही करेगी।

पदमा _न,कोई बहाना नही करूंगी। ले लेना, अभी छोड़।

राजेश _अच्छा ठीक है, मेरा थोड़ा सा चूस दे।

खड़ा हो गया है।

राजेश ने अपना लोवर नीचे पैंट का चैन खीच दिया चड्डी से लंद बाहर निकाल दिया।

राजेश का मोटा लंद मुंह में भर कर चूसने लगी।

राजेश प्यार से उसकी बाल सहलाने लगा।

राजेश को मजा आने लगा,,

कुछ देर चूसने के बाद,,,

पदमा _अब जाओ,,, रात में कर लेना जो भी करना है।

राजेश _अच्छा ठीक है। जाता हूं। एक किस तो दे दो, जानेमन ।

पदमा शर्मा गई। राजेश ने पदमा की गालों को चूम लिया, और वहा से चला गया।

वह अपने मां के कमरे में गया।

सुनीता भी कपड़े बदल रही थी।

राजेश _मां ये कोई दूसरी साड़ी पहनो न, ये उतनी अच्छी नहीं है।

सुनीता_अच्छा कौन सी साड़ी पहनू तुम ही बताओ।

राजेश ने सूटकेस से साड़ी छांट कर निकाल कर दी, इसे पहनो।

सुनीता _अच्छा अब जाओ, मुझे साड़ी पहनना है।

राजेश ने सुनीता को पीछे से बाहों में भर लिया।

अपना खड़ा लंद उसकी गाड़ में धसा दिया।

सुनीता _हे भगवान तेरा तो खड़ा है re

राजेश _तो ठंडा करदो न। एक हाथ से उसकी चूची मसलते हुवे कहा। एक हाथ से boor मसलने लगा।

सुनीता _ उई मां, नही न, कोई आ जायेगा, तुम जाओ यहां से। सुनीता के हाथ पैर कपकपाने लगी। उसकी boor में पानी भरने लगा।

राजेश _मां, करने दो न।

सुनीता _नई न समझा कर कोई आ जायेगा।

राजेश _अच्छा ठीक है, थोड़ा चूस दो फिर चला जाऊंगा।

राजेश _ने अपना पैंट का चैन खीच दिया। चड्डी खिसका कर लंद बाहर निकाल। जो हवा में झटके मार रहा था।

सुनीता ने लंद को सहलाया फिर नीचे बैठ गई और लंद को मुंह में भर कर चूसने लगीं।

राजेश को बहुत मजा आने लगा।

वह सुनीता की बालो को प्यार से सहलाने लगी।

कुछ देर बाद सुनीता ने चूसना बंद कर दिया।

सुनीता _चल अब जा।

राजेश _न, पहले बोलो, रात में देगी न, बोलो।

सुनीता _कोशिश करुंगी, अगर हो सके तो।

राजेश _ठीक है।

राजेश _जाओ स्वीटी और आरती को भी कह दो, अपने चाची के यहां जाने के लिए तैयार होने।

राजेश आरती के कमरे में गया।

ज्योति ने दरवाजा खोला।

ज्योति _राजेश तुम, कुछ काम था।

राजेश _दीदी, आरती और स्वीटी को तैयार होने के लिए बोली है मां ने, सविता चाची के यहां जाना है।

ज्योति _ठीक है उन दोनो को उठा देती हूं।

ज्योति ने दोनो को उठाया वे भी तैयार होने लगी।

इधर पदमा तैयार होकर आई,

राजेश _अरे ताई बड़ी सुंदर लग रही हो इस साड़ी में, आंख मारते हुवे कहा

पदमा शर्मा गई।

वह,

पुनम को आवाज दी।

पूनम कमरे से बाहर आई।

पूनम _मां जी तुमने मुझे आवाज दी।

पदमा _अरे बहु हम लोग सविता के घर जा रहे है तुम ज्योति और घर का ख्याल रखना।

पूनम _मां जी मेरी भी बड़ी इच्छा थी।

चाची के यहां जाने की। मुझे भी जाना है।

अरे बहु तू भी चली गई तो, ज्योति अकेली हो जायेगी।

राजेश _अरे ताई, भाभी का मन है तो उसे भी जाने दो। मैं रह जाता हूं, घर में। मैं तो चाची के घर आता जाता रहता हूं।

पदमा _अच्छा ठीक है, जाओ बहु तू भी जल्दी तैयार हो जा।

पूनम खुश हो गई वह भी तैयार होने लगी।

सभी लोग तैयार होकर अपने अपने कमरे से निकले।

सुनीता _4बज गए है चलो, बेचारी राह देख रही होगी।

राजेश तुम भुवन को फोन लगाकर बता दो की हम सब सविता के घर जा रहे है। तुम्हारे पापा और ताऊ जी को भी वही भेजना, और उसे भी वही भोजन करने के लिए कह देना।

राजेश _ठीक है मां।

आरती के साथ ज्योति की लड़की, मुन्नी भी चली गई। अब घर में ज्योति राजेश और उसकी छोटा बच्चा ही रह गया।

राजेश बरामदे में लगा टीवी चालू कर न्यूज देखने लगा।

ज्योति राजेश के पास आई।

ज्योति _राजेश, तुम्हारे लिए चाय बना दू।

राजेश _ठीक है दीदी।

ज्योति ने दोनो के लिए चाय बना लाई।

राजेश खाट में बैठा था। ज्योति भी वही पर कुर्सी लगाकर बैठ गई।

दोनो चाय पीने लगे।

राजेश _अरे दीदी चाय तो बहुत अच्छी बनी है। पहली बात आपके हाथो का बना चाय पी रहा हूं।

ज्योति _हा, पूनम रहती है तो घर का काम मुझे करने ही नही देती।

राजेश _चलो अच्छा huws जो मैं यहां रह गया आपके हाथो का बना चाय, जो पीने को मिला।

ज्योति _तुम कहो तो तुम्हारे लिए कुछ खाने को बना दू।

राजेश _दीदी, एक घंटे बाद प्याज पकोड़े बना देना मेरे लिए।

ज्योति _ठीक है, मैं पकोड़े के लिए बेसन का घोल तैयार करके राख देती हूं।

उधर सविता, बड़ी खुश थी।

वह मेहमानों के लिए चाय नाश्ता की तैयारी करने लगी।

सुनीता _अरे सविता घर तो बहुत अच्छा बनाया है तुम लोगो ने। शहरो की तरह।

सविता _शुक्रिया दीदी।

सुनीता _ये फोटो तुम्हारी लड़कियों की है न।

, बड़ी प्यारी है। सविता _हा दीदी, ये मेरी लड़कियों की फोटो है।मेरी लडकिया घर में होती तो आप लोगो से मिलकर बड़ी खुश हो जाती।

सविता, मेहमानों के लिए चाय नाश्ता बनाती है।

इधर ज्योति भी राजेश के लिए पकोड़े तलने लगती हैं।

पकोड़े तल कर, चाय बनाती है और ले आती है।

राजेश पकोड़े खाने लगता है।

राजेश _दीदी वाह सच में पकोड़े बड़ा स्वादिष्ट बना है। तुम नही खा रही हो।

ज्योति _नही, डॉक्टर ने 2माह तक तले भुने चीजे खाने से मना किया है।

राजेश _ओह।

राजेश ने पकोड़े खा कर चाय पी लिया।

ज्योति _अच्छा राजेश मैं थोड़ा बर्तन धो रही थोड़ा कीचन का काम निपटा रही तुम मुन्ने की तरफ ध्यान रखना।

राजेश _ठीक है दीदी।

ज्योति _बर्तन धोने चली गई।

कुछ देर बाद मुन्ने की रोने की आवाज आने लगी।

राजेश कमरे में गया और मुन्ने को चुप कराने की कोशिश करने लगा। मुन्ना बहुत छोटा था इसलिए वह उसे गोद में उठा ने से डर लगा। कही गड़बड़ न हो जाए।

वह कीचन में जाकर ज्योति को बताया मुन्ना रो रहा है।

ज्योति _मैं अभी आती हू।

राजेश मुन्ने को फिर चुप कराने की कोशिश करने लगा।

आले आहे लगता है मुन्ने को भूख लगी है, मम्मी अभी आयेगी मुन्ने को दूदू पिलाएगी। उसे प्यार से पुचकारने लगा। ज्योति कमरे में आई और राजेश को बच्चो जैसी हरकत करता देख हसनी लगी।

ज्योति _अरे तू तो बच्चो जैसी हरकत करने लगा है।

राजेश _दीदी बच्चे को खुश करने के लिए बच्चा बनना पढ़ता है न।

लगता है मुन्ने को भूख लगी है।

ज्योति को देखते ही मुन्ना फिर रोने लगा।

ज्योति मुन्ने को गोद में लेकर खाट में बैठ गई।

अ ले अ ले मुन्ने को भूख लगी है।

ज्योति ने अपना पल्लू हटाया और ब्लाउज का बटन खोल दिया एक चूची मुन्ने के मुंह में डाल दिया।

मुन्ना चूची पीने लग गया।

राजेश ने जब ज्योति के दूध से भरी भारी स्तन को देखा।

राजेश _दीदी आपके दूदू तो पहले से और बड़े बड़े हो गए है।

ज्योति हसने लगी,,,

ज्योति _हूं, इसमें दूध भरे है न, इसलिए।

राजेश_दीदी इसमें तो खूब दूध निकलता होगा।

ज्योति _हा re, इसमें इतना दूध बन रहा है की, दर्द करने लगता है।

राजेश _अरे दीदी मुन्ना दूध नही पीता क्या?

ज्योति _मुन्ना अभी छोटा है न ज्यादा दूध नही पी पाता।

राजेश _फिर क्या करती हो।

ज्योति _स्तन जब भारी हो कर दर्द करने लगता है तो उसे हाथो से निकलना पड़ता है।

राजेश_ओह, फिर क्या करती हो दूध का।

ज्योति _अब क्या कर सकती हु, दूध को निकाल कर घर में जो बछड़ा है न उसे दे देती हूं।

राजेश _ओह, दीदी मुझे क्यू नही दे देती, मैं पी लूंगा।

ज्योति हसने लगी,,,

ज्योति _अच्छा तू पिएगा।

राजेश _औरत का दूध, बड़ा पौष्टिक होता है। सुना है इसे पीने से पुरषों को बहुत ताकत मिलती है और उसका पुरुषत्व भी बढ़ता है।

ज्योति _तू पीना चाहता है तो बछड़े को न पिलाकर मैं तुम्हे पीने दे दूंगी।

तभी मुन्ना कुछ देर दूध पीने के बाद पीना बंद कर दिया।

ज्योति _लो मुन्ने का पेट भर गया।

स्तन काफी भारी हो गया है दूध निकालना पड़ेगा नही तो दर्द करने लगेगा।

ज्योति _तू पिएगा दूध।

राजेश _हा दीदी!

ज्योति _ठीक है, जा कीचन से जाकर गिलास ले आ मैं निकाल देती हूं फिर तुम पी लेना।

राजेश _अरे दीदी, अभी तो घर में कोई नहीं है, मुंह से ही पिला दो न।

ज्योति _कोई आ गया तो,,

राजेश _दीदी सभी रात में सविता चाची के घर से भोजन करके ही लौटेंगे।

ज्योति _फिर भी कोई आ गया तो, एक काम करो बाहर का दरवाजा बंद कर दो,,

राजेश _ठीक है दीदी मैं अभी आया।

राजेश दरवाजा बंद करने चला गया और ज्योति मुन्ने को खाट पे सुला दी।

राजेश दरवाजा बंद कर कमरे में आया।

ज्योति आरती के पलंग में बैठ राजेश का वेट कर रही थी।

राजेश ज्योति के बगल में बैठ गया।

राजेश ज्योति के गोद में सर रख के लेट गया।

ज्योति ने अपनी ब्लाउज का बटन खोल दी दूध से भरे बड़ी बड़ी स्तन राजेश के आंखो के सामने झूलने लगा।

राजेश का लंद टन टना गया।

राजेश ने एक स्तन हाथ से पकड़ा और उसकी निप्पल मुंह में भर लिया और मसल मसल कर चूसने लगा।

दूध की फौवारा निकल कर राजेश के मुंह में जाने लगा।

राजेश दूध को गटक गटक कर पीने लगा।

राजेश _दीदी आपके दूध तो बड़े ही स्वादिष्ट है। एकदम मीठा है।

ज्योति हसने लगी।

ज्योति _क्या तुम्हे पसन्द आया?

राजेश _हूं, बहुत।

राजेश ने बारी बारी से मसल मसल कर निचोड़ निचोड़ कर पीने लगा।

इधर राजेश का लंद खड़ा होकर दर्द करने लगा।

राजेश ने दूध को चूस चूस कर खाली कर दिया।

ज्योति _तुम तो बिल्कुल बच्चो की तरह पी रहा है re, कही तुम पुनम का दूध तो नहीं पीता।

राजेश _कभी कभी देती है तो पी लेता हूं।

ज्योति _तभी तो कहूं, एकदम अनुभवी की तरह कैसे पी रहे हो ।

मेरा पूरा दूध ही निचोड़ डाला। अब हल्का लग रहा है स्तन।

अब बस करो।

राजेश _दीदी थोड़ा और पीने दो न बड़ा मज़ा आ रहा है।

ज्योति _इतना पीने के बाद भी जी नही भरा है क्या?

राजेश _नही।

राजेश, दोनो चुचियों को पी कम और उससे खेल ज्यादा रहा था। उसका लंद तो पहले से ही लंबा मोटा होकर दर्द कर रहा था। इधर दूध मसलने से ज्योति भी गर्म हो गई।

ज्योति _राजेश अब बस करो, दूध अब हल्की लग रही है। जब भारी हो जायेगा तो फिर पी लेना।

राजेश _दीदी आपका तकलीफ तो दूर हो गया, मेरा बड़ गया।

ज्योति _कैसी तकलीफ।

राजेश _पैंट के अंदर दर्द करने लगा है।

ज्योति _क्यू क्या हो गया?

राजेश _खुद ही देख लो।

राजेश ने अपना पैंट का चैन खीच दिया और लंद को चड्डी से बाहर निकाल लिया।

ज्योति _बदमाश तेरा तो खड़ा हो गया है।

राजेश का लंद हवा में झटके मार रहा था।

लंद को देखकर ज्योति की boor पानी छोड़ने लगा।

राजेश _दीदी मेरी तकलीफ तो दूर करो।

ज्योति ने राजेश का लंद पकड़ कर हिलाने लगी।

कुछ देर बाद राजेश दूध चूसना बंद कर, पलंग पर पीठ केबल लेट गया और अपना पैंट उतार दिया।

ज्योति लंद के पास बैठ गई और मुंह में लेकर चूसने लगी। उसके अंडकोष को चाटने लगी।

राजेश ज्योति का बाल सहलाने लगा।

कुछ देर लंद चूसने के बाद,,

ज्योति _तेरा तो आसानी से झड़ता नही है re कब तक चूसती रहूंगी।

चोदेगा क्या?

राजेश _दीदी शुभ काम में देरी क्यू,

ज्योति _पर मेरी chut अभी बच्चे जनने के बाद ढीली हो गई है, अभी ठीक होने में थोड़ा समय और लगेगा। तुम्हे मजा आयेगा की नही,,

राजेश _अरे दीदी, तुम्हारी इच्छा हो रही है क्या डलवाने की तो कर लो।

ज्योति _मन तो कर रहा है।

राजेश _फिर कर लो न अगर तुम्हे दिक्कत न हो तो।

ज्योति _, वैसे तो डॉक्टर लोग महीने दिन तक चुदने से मना करती हैं, पर तेरे दूध पीने और लंद देखकर बड़ी इच्छा हो रही है।

राजेश _तो कर लो न अपनी इच्छा पूरी।

ज्योति _पर तुम ज्यादा तेज मत चोदना।

राजेश _ठीक है।

ज्योति _बेड पर चढ़ गई और अपनी चड्डी उतार कर राजेश का लंद पकड़ी और अपनी boor पर रख कर बैठ गई।

लंद boor में आसानी से समा गया।

ज्योति _धीरे धीरे उछल उछल कर चुदने लगी।

राजेश ज्योति के कूल्हे को थाम लिया था।

ज्योति _धीरे धीरे उछल रही थी।

लंद फैच फुच की आवाज करता huwa अंदर बाहर हो रहा था।

दोनो को बहुत मजा आ रहा था।

ज्योति लंद पर तब तक उछलती रही जब तक वह झड़ नही गई।

आह माई,, आह,, करते हुए राजेश के ऊपर लेट गई।

राजेश अपनी बाहों मे जकड़ लिया।

कुछ देर सुस्ताने के बाद राजेश ने ज्योति को करवट लेकर लिटा दिया और उसकी टांगे उठा कर लन्ड को बर में पेल दिया।

हल्के हल्के धक्के मारने लगा, लन्ड boor में अंदर बाहर होने लगा।

एक बार फिर से दोनो को मजा आने लगा।

कुछ देर तक इसी आसन में चोदने के बाद, राजेश ने ज्योति को घोड़ी बना दिया और पीछे से लन्ड boor में पेल दिया,,

राजेश ज्योति की कमर पकड़ कर लंद अंदर बाहर करने लगा।

कमरे में ज्योति की सिसकारी और चूड़ियों की खनक गूंजने लगा,, आह उन आई मां आह,,, खन खन खन खन,,,, दोनो को बहुत मजा आ रहा था।

कुछ देर बाद ज्योति फिर से झड़ गई।

ज्योति थक गई,,,

ज्योति _राजेश बस करो अब मैं थक गई,,,

राजेश ने अपना लन्ड ज्योति की boor से बाहर निकाल दिया।

उसका लंद ज्योती की boor का पानी पीकर और मोटा लंबा हो गया था।

राजेश का मन अभी और चोदने का था पर ज्योति की स्थिति को देखकर उसने अपने मन में काबू रखना ही उचित समझा।

ज्योति जब नार्मल हुई उसने देखा राजेश का अभी भी खड़ा है।

ज्योति _राजेश, आज रात तुम पूनम को चोद लेना मैं उसे खुद ही बोल दूंगी तुमसे चुदने।

राजेश _ठीक है दीदी।
 
आप सभी मित्रो का सपोर्ट के लिए शुक्रिया। कुछ नए मित्र,इस थ्रेड में जो पहली बार आए हैं ,आप सभी का स्वागत है।
 
हवेली में ठाकुर और मुनीम,,,,

मुनीम _हुजुर, सुना है कल गीता और दिव्या बिटिया, ठकुराइन के साथ सुरज पुर गई थी। जन्मोत्सव कार्यक्रम में।

ठाकुर _राजेश ने दिव्या और ठकुराइन को आने के लिए आमंत्रण भेजा था। मैं उन्हे जाने से मना तो नही कर सकता था। बीबी पर तो हुकुम चला सकते है पर पड़ी लिखी बेटियो पार नहीं।

मुनीम _वो तो है, हुजुर,,,

हुजुर आप भी चले जाते,,

ठाकुर _मुनीम, क्या बक रहे हो,,,

मुनीम _माफ करना हुजूर,,,

सुना है सुनीता आई हुई है,,

आपके मन में तो सुनीता को लेकर अब भी कसक बची हुई है न,,

ठाकुर _क्या, सुनीता आई हुई है?

मुनीम _जी हुजुर किसी ने आपको बताया नही।

ठाकुर _उसे देखना चाहता हूं कैसी लगती है, शाली अब। जवानी में तो कयामत थी।

मुनीम _हुजुर, सुना है वे लोग कल सुबह ही ट्रेन से निकल जायेंगे। शहर के लिए।

ठाकुर _उससे मिलने का कोई जुगाड हो सकता है क्या?मुनीम

मुनीम _हुजुर आप चाहे तो क्या नही हो सकता।

ठाकुर_वो कैसे?

मुनीम _हुजुर, वे स्टेशन से गांव टाटा मैजिक से आए थे। हो सकता है, उसी गाड़ी से वे स्टेशन जाए।

ठाकुर _तो,,,

मुनीम _हुजुर, उस टाटा मैजिक वाले से कह देना की बीच में गाड़ी खड़ा कर दे, गाड़ी खराब होने का बहाना कर, आप पहुंच जाइए गा अपना जीप लेकर।

फिर मुलाकात कर लेना अपनी,,,,,

ह ह ह,,,

ठाकुर _मान गए मुनीम जी क्या दिमाक लगाया है?

अच्छा उस टाटा मैजिक वाले को पता लगा कौन है, उस से सेटिंग कर,,

मुनीम _जी हुजुर अपनी जासूसों से अभी पता करवाता हूं।

पर हुजूर सिर्फ देखकर ही मन बहला लेना, कोई उल्टी सीधी हरकत मत कर देना, नही तो उसका बेटा, पता नही क्या कर डालेगा? वैसे भी सामने चुनाव है।

ठाकुर _उस साले को तो मैं, पहले रास्ते से हटाऊंगा। उसके बाद सुनीता के साथ अपनी कसक पूरी करूंगा। अभी तो शराफत दिखानी पड़ेगी। ह ह ह ह,,,,,

इधर सविता ने मेहमानों के लिए विभिन्न प्रकार के व्यंजन बना रही थी। वह राजेश को भी फोन कर चेता दिया था की घर में सब के लिए भोजन बन रहा है यही आकर भोजन कर लेना। मैं ज्योति के लिए खाना भिजवा दूंगी।

सुनीता _अरी, सविता इतनी सारी व्यंजन क्यू बना रही हो। दाल रोटी सब्जी ही बना देती।

सविता _दीदी पहली बार तो आई है घर में,, कुछ स्पेशल तो बननी चाहिए न।

पूनम सविता की मदद कर रही थी।

उधर केशव और शेखर भी माधव के घर पहुंच गए।

तीनो भाई, एक कमरे में बैठ गए और उनका पीने खाना का प्रोग्राम चलने लगा।

कुछ देर बाद भुवन भी आ गया।

भुवन _चाची, राजेश नही दिख रहा वो नही आया क्या?

पदमा _अरे बेटा, ज्योति घर में अकेली हो जाती न इसलिए राजेश को रुकना पड़ा।

सविता _भुवन तुम एक काम करना, तुम अपने बापू और चाचा के साथ भोजन करने के बाद, ज्योति के लिए खाना ले जाना और राजेश को यहां भोजन के लिए भेज देना।

भुवन _ठीक है चाची।

वैसे बापू और चाचा लोग दिखाई नही दे रहे।

पदमा _अरे बेटा, तेरा बापू और चचा, कमरे में अपना प्रोग्राम कर रहे हैं ही ही ही ही,, पदमा और सुनीता हसने लगी।

कुछ देर बाद भोजन तैयार हो गया।

सविता _भुवन भोजन तैयार हो गया है जाओ अपने बापू और चचाओ को बुला लाओ भोजन करने।

भुवन _ठीक है चाची।

डाइनिग टेबल पर, शेखर केशव माधव और भुवन खाने के लिए बैठ गए, पदमा उन्हे भोजन परोसने लगी।

उनके भोजन कर लेने के बाद, सविता ने टिफिन डिब्बा में ज्योति के लिए खाना पैक कर दी।

सविता _भुवन मैने ज्योति के लिए खाना, पैक कर दिया है इसे ले जाओ और राजेश को भेज देना वह भी आकर भोजन कर लेगा।

भुवन _ठीक है चाची।

भुवन _चला गया।

सविता _दीदी रात हो चुकी है, चलो तुम लोग भी भोजन कर लो। राजेश आएगा तो वो कर लेगा।

पदमा _सविता ठीक कह रही है, घर जाने में ज्यादा रात हो जायेगी, हम भी भोजन कर लेते है। ये आरती और स्वीटी कहा चली गई है।

पूनम _मां जी दोनो कमरे में है मोबाइल में बिजी है।

पदमा _ये लडकिया भी न, बहु उन दोनो को बुला लाओ।

पूनम ने आरती, स्वीटी को बुला आई।

सभी खाने के लिए बैठ गए।

पूनम भोजन परोस रही थी।

सविता _अरे पूनम जाओ तुम भी भोजन कर लो।

सुनीता _अरे सविता, तुम भी साथ में बैठो न भोजन करने।

सविता _दीदी मैं राजेश के आने के बाद खा लूंगी, नही तो कहेगा। सारे लोग खा डाले तब मुझे खिला रहे है बचा खुचा,, ही ही ही,,,,

पूनम भी भोजन करने बैठ गई।

उधर भुवन घर पहुंचा,,

राजेश उस समय खाट में बैठ कर टीवी देख रहा था ज्योति, मुन्ने को गोद में लेकर कुर्सी में बैठ टीवी देख रही थी।

भुवन _लो दीदी, चाची ने आपके लिए खाना भेजा है। और हा राजेश तुमको चाची ने घर बुलाया है भोजन के लिए।

राजेश _भैया, तुमने भोजन कर लिया।

भुवन _हां, भोजन कुछ ज्यादा हो गया। डकार आने लगी है।

राजेश _चाची ने ज्यादा खिला दी क्या?

भुवन _अरे राजेश चाची ने बड़ी स्वादिष्ट व्यंजन बनाई है। खा कर मजा आ गया। पर कुछ ज्यादा ही खा लिया।

राजेश _ओह, लो खाट पे आराम करो।

भुवन खाट पे लेट गया।

राजेश _दीदी तुम भी भोजन कर लो।

ज्योति _राजेश, चाची ने तो बहुत सारा खाना भेज दिया है, ये तो दोनो के लिए पर्याप्त हो जायेगा। तुम भी यही करलो।

राजेश _दीदी, अगर मैं नही गया न तो चाची मुझसे नाराज हो जाएगी।

मुझे जाना पड़ेगा।

ज्योति _अच्छा ठीक है।

राजेश _अपने कमरे में जाकर, तैयार हो गया अपना बाइक लेकर सविता के घर के लिए निकल पड़ा।

जब वह घर पहुंचा, बांकी लोग भी खाना लगभग खा चुके थे।

पदमा _लो राजेश भी आ गया।

राजेश _क्या क्या बनाई है, चाची ने,

स्वीटी _भैया, चाची ने बड़ी स्वादिष्ट भोजन बनाई है, पुलाव, रोटी पूरी खीर, पकोड़े , पालक पनीर छोले, , और तुम्हारा फेवरेट भी?

राजेश _क्या?

स्वीटी _आमलेट।

राजेश _ओह।

पदमा _राजेश अब हम लोग के जाने के बाद, तुम और तुम्हारी चाची आराम खाना। रात काफी हो गई है, हम लोग निकलेंगे।

कुछ ही देर में सभी लोग भोजन कर लिए।

सुनीता _अच्छा सुनीता हम लोग चलते है, कल सुबह ही निकल जायेंगे, स्टेशन के लिए।

सविता _दीदी इतने दिनो बाद आई हो गांव और इतनी जल्दी जा रही हो कुछ दिन और रुक जाती।

सुनीता _सविता तुम्हे तो बताया था, बैंक वालो की मजबूरी, छुट्टी ही नही मिलती, काम का बोझ भी ज्यादा रहता है।

तुम लोग आओ किसी दिन राजधानी, मुझे अच्छा लगेगा।

सविता _दीदी मौका मिलेगा तो जरूर आयेंगे

। सभी लॉग वहा से बिदा लेकर निकल गए।

मेहमानों के जाने के बाद, माधव भी अपने बेड में जाकर आराम करने लगा।

इधर सविता कीचन में बर्तन धोने लगी,,,

राजेश कीचन में जाकर, उसे बाहों में भर लिया,,,

राजेश _ये क्या हमे भोजन पर बुलाकर काम करने लगी।

सविता _थोड़ा सब्र तो रखो, परोसने के लिए कुछ बर्तन तो धो लेने दे। नही तो बोलोge की जूठे बर्तन में ही परोस दिया।

राजेश _एक हाथ से सविता की पेट सहलाते और एक हाथ से चूची मसलते हुए कहा,, मुझे बड़ी भूख लगी है जल्दी करो।

सविता हसने लगी,,,,

सविता _सुन, खाना सिर्फ तुझे मिलेगा, तुम्हारे घोड़े को नही, जो मेरे पिछवाड़े घुसने की कोशिश कर रहा है।

राजेश _क्यू?

सविता _क्यू के मेरे आगे और पीछे दोनो का कबाड़ा कर रखा है। अभी भी ठीक से चल नही पा रही।

राजेश _ये तो निराशा जनक बात है।

मुंह में तो ले सकती हो।

सविता _सोचूंगी। चल अब जा कर बैठ जा, मैं आती हूं।

राजेश डाइनिंग टेबल पर बैठ गया।

सविता कीचन से आई और प्लेट लगा दी।

राजेश _अरे चाची एक ही प्लेट लगाई हो।

सविता _तुम खा लो फिर मैं खाऊंगी।

राजेश _न, दोनो साथ में खायेंगे। एक ही प्लेट में,,

सविता _छी ये कैसी बाते कर रहे हो।

राजेश _नही तो मैं भोजन नही करूंगा।

सविता _तू बड़ा जिद्दी है, हमेशा अपने मन का करता है।

सविता ने प्लेट में विभिन्न प्रकार के व्यंजन परोसी।

राजेश _चाची आओ बैठो,,

सविता _कहा,,

राजेश _मेरी गोद में,,

सविता _छी पागल हो गया है क्या? तुम्हारे चाचा जी आ गए तो।

राजेश _उसका तो नाक बजने लगा है!

सविता _पर मुझे शर्म आएगी।

राजेश _लो सब कुछ तो हो चुकने के बाद भी शर्म बची है।

सविता _तो क्या बेशर्म बन जाऊ।

राजेश_न, शर्म तो औरत की गहना है, चलो शरमाओ मत आके बैठ जाओ।

सविता _तुम मानोगे नही,,

सविता, अपनी कुर्सी से उठी और राजेश के गोद में बैठ गई।

राजेश _ये हुई न बात,, अब मजा आयेगा भोजन करने में।

राजेश_अपने हाथ में भोजन लेकर आधा स्वयं खाता आधा सविता को खिलाता फिर उसका ओंठ चूसने लगता।

कभी चूची पीने लगता दोनो को भोजन करने में बड़ा मज़ा आ रहा था।

कभी राजेश खिलाता तो कभी सविता।

भोजन कर लेने के बाद राजेश का लंद तो अकड़ चुका था।

जाने से पहले सविता ने राजेश का लंदआधे घंटे तक चूसा। उसका लंद फूलकर खूब लंबा और मोटा हो गया।

राजेश _चाची अब चलता हूं।

सविता _अरे यही सो जा, वहा तो जगह नही होगा। सोने के लिए।

राजेश _चाची सुबह मां पापा को स्टेशन छोड़ने जाना है, यहां रुका तो, सुबह जल्दी उठ नही पाऊंगा।

सविता _अच्छा ठीक है।

राजेश वहा से चला गया।

जब वह घर पहुंचा तो सभी लोग सो चुके थे।

भगत खेत जा चुका था।

पूनम ने दरवाजा खोली।

पूनम _आ गया, बड़ी देर लगा दी आने में। मैं तो सोच रही थी, वही तो नही सो गया।

राजेश _चाची तो बोल रही थी, वहीं सो जाने, पर,,

पूनम _पर क्या?

राजेश ने पुनम को बाहों में भर लिया,,

तेरी याद जो आ रही थी,,,

पूनम _हाय दैया तेरा तो खड़ा है re,,,

राजेश _ज्योति दीदी ने तुम्हे कुछ नही बोली,,,

पूनम _बोली न, राजेश आएगा तो उसे बरामदे पे लगा खाट पे सुला कर कंबल ओढ़ा देना।

राजेश _बस इतना ही बोली,,,

पूनम _हा,,,

राजेश, मुंह लटका कर बरामदे में आया और खाट पे लेट गया।

पूनम _क्या huwa देवर जी।

निराश लग रहे हो।

राजेश _कुछ नही जाओ और अपने कमरे में जाकर सो जाओ।

पूनम _दीदी कुछ और बोली है? शर्माते हुवे बोली।

राजेश _क्या?

पूनम _बोली है की राजेश को आज तुम्हारी जरूरत है। तुम उसका ख्याल रखना।

बताओ कैसे ख्याल रखूं तुम्हारा।

राजेश _मेरे घोड़े को बड़ी प्यास लगी है उसे अपनी कुआ का पानी पिलाओ।

पूनम _तुम घर के पीछे चलो मैं आती हूं, जितना चाहे अपनी घोड़े को पानी पिला लेना।

राजेश घर के पीछे चला गया। कुछ देर में लाल टेन, चटाई तकिया लेकर पूनम घर के पीछे पहुंची।

झोपड़े में पैरा फैलाकर चटाई बिछाकर तकिया लगा दी।

राजेश लेट गया।

पूनम _लंद चूसना शुरू कर दी।

फिर राजेश के लंद पर बैठ गई और उसके घोड़े को अपनी boor की पानी पिलाना शुरू कर दी।

इधर आज पदमा को भी नींद नहीं आ रही थी क्यों की आज उसने राजेश को चुदने के लिए कहा था। शाम से ही उसकी boor गीली थी।

उसने देखा उसका पति नींद में खर्राटे भर रहा है।

वह पलंग से उठी और दबे पाव कमरे से बाहर निकल आई।

उसे पता था की आज राजेश बरामदे में ही सोएगा।

वह बरामदे में पहुंचा, उसने देखा राजेश खाट में नही है, उसने सोचा, राजेश कही सविता के घर ही तो नही सो गया।

कमबख्त कही का,, मेरी खुजली बड़ा कर, वही सो गया। अब क्या कर सकती हूं। लगता है उंगली से ही खुजली मिटाना पड़ेगा।

वो अपने कमरे में जाने ही वाली थी की, पूनम के कमरे से बच्चे की रोने की आवाज आई।

पदमा _अरे मुन्ना रो रहा है, बहु उसे चुप क्यों नही करा रही, इतनी गहरी नींद में सोई हुई है,,

वह पुनम को उठाने उसके दरवाजे को धकेली तो दरवाजा खुल गया।

अरे दरवाजा तो खुला है, ये पूनम कहा गई। वह बच्चे को गोद में लेकर चुप कराने लगी।

लगता है मुन्ने को भूख लगी है।

पदमा _पता नही ये कलमुही कहा चली गई। तभी उसका माथा ठनका, राजेश भी खाट में नही है और पुनम भी नहीं, कही दोनो घर के पीछे तो नही गए है।

वह बच्चे को गोद में लेकर घर के पीछे गई।

पीछे जाने का दरवाजा तो बंद था, सकल लगा था जो पीछे हाथ डालकर निकाला जा सकता था।

वह हाथ डालकर सकल खोली फिर घर के पीछे गई।

उसने देखा पुनम चीख चिल्ला रही थी राजेश उसे घोड़ी बना कर चोद रहा था।

पदमा _अरे कलमुही, तेरा बच्चा रो रहा है यहां आने से पहले इसे पेट भर दूध पिला कर सुला तो देती। कोई उठ जाता तो।

राजेश _ओह ताई तुम,,, राजेश ने चोदना जारी रखा।

पदमा _अरे छोरा तूने तो दोपहर में मुझे गर्म किया था और कहा था मेरी लेगा, तू इस चुड़ककड़ को घर के पीछे ले आया।

राजेश _ताई, मुझे लगा तुम सो गई हो, अब तुम्हारे कमरे में तो नही जा सकता था न आपको उठाने। तू चिंता मत कर, आ जा तू भी तेरा भी प्यास बुझा देता हूं।

पदमा _अब चुदाती ही रहेगी की बच्चे को दूध भी पिलाएगी।

पूनम _मां जी थोड़ी देर पकड़ी रहो न मैं झड़ने वाली हूं,, आई मां आह उन ई,,,

राजेश तेज तेज ठोकने लगा,,,

पूनम, खुद को रोक न सकी और झड़ने लगी।

कुछ देर सुस्ताने के बाद,,

पूनम _दो मां जी बच्चे को, उसे दूध पिला देती हूं।

राजेश ने पूनम की chut से लंद बाहर निकाल लिया।

पदमा ने मुन्ने को पूनम को दे दिया। पूनम बैठ कर दूध पिलाने लगी।

इधर राजेश का लंद झटके मार रहा था।

राजेश _अब देख क्या रही है।

चल घोड़ी बन जा।

पदमा घोड़ी बन गई।

राजेश ने उसका पेटी कोट साड़ी ऊपर चढ़ा दिया।

अपना लंद उसकी boor में सेट कर एक जोर का धक्का मारा लंद boor को चीरकर फच की आवाज करता huwa,एक ही बार में अंदर घुस गया।

पदमा चीख उठी,,

राजेश ने पदमा को ठोकना शुरू कर दिया।

झोपड़ी में पदमा की सिसकारी गूंजने लगी।

इधर सुनीता भी सोई नही थी। कल वह घर चली जायेगी। राजेश ने शाम को कहा था की आज रात उसकी लेगा।

शेखर नींद में खर्राटे भर रहा था। सुनीता कमरे से बाहर आई,,,

सुनीता ने देखा की खाट तो खाली है,

सुनीता _लगता है राजेश, अपने चाची के यहां ही सो गया। उसे निराशा हुई।

वह वापस अपने कमरे में जाने को मुड़ी,,

तभी वह रुक गई,,

अब उठी हूं तो पेशाब कर लेती हूं।

रात में घर की महिलाए आंगन के मोरी में ही पेशाब कर लेती थी। रात में पीछे जाने के बजाए।

सुनीता ने भी मोरी पे मूतने की सोंची,, पर

सुनीता _कही जेठ जी उठ गए तो मैं मुंह नही दिखा पाऊंगी,,,

वह घर के पीछे जाने की ठानी।

वह घर के पीछे गई दरवाजा खुला था, जब पीछे गई तो उसे सिसकारी सुनाई दी।

वह झोपड़े की ओर गई जिधर से आवाज आ रही थी।

झोपड़े के अंदर का दृश्य देख कर दंग रह गई,,,

राजेश पूनम की गोद में सिर रख कर उसका दूध पी रहा था। और पदमा राजेश के लंद पर उछल उछल कर chud रही थी।

उसका बच्चा चटाई पर सोया हुआ था।

सुनीता _ये सब क्या हो रहा है?

तीनो चौंक गए,,,

पदमा लंद पर उछलना बंद कर दी। और उसके लंद से उठ गई।

पदमा _सुनीता तुम यहा।

सुनीता _मुझे तो अपनी आंखो पर विश्वास नहीं हो रहा है। दीदी आप ऐसी हरकत करेंगी।

पूनम और पदमा शर्म से गड़ी जा रही थी।

राजेश भी उठ कर बैठ गया।

राजेश _मां आप यहां,,

सुनीता _अच्छा तो तुम यहां गांव में रंगरेलिया मानने आया है।

तीनो खामोश थे।

कुछ देर बाद,,

पदमा _सुनीता,, तुम यह बात किसी को मत बताना, मैं तुम्हारी पैर पकड़ती हूं, नही तो हम किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे।

सुनीता _दीदी, इतना सब होने के बाद अब बचा ही क्या है मुंह दिखाने लायक,,,

जेठ जी और भुवन को पता चलेगा तो , उनके पीठ पीछे तुम दोनो क्या गुल खिला रही हो।

आखिर ये सब शुरू huwa कैसे?

पदमा _सुनीता अब तुम्हे क्या बताऊं, एक दिन मुझे और राजेश को भारी बारिश के कारण खेत में ही रुकना पड़ गया,,, पदमा ने पूरी कहानी बता दी की किस तरह राजेश और उसके बीच संबंध बन गए।

सुनीता _और पूनम तुम, तुम्हारा पति तो अभी जवान है, फिर भी राजेश के साथ ये सब,,,

पूनम _चाची अब तुम्हे क्या बताऊं? वो तो खेत में मुजदूरो को चोद चोद कर अपनी प्यास बुझाता है। और मैं घर में प्यासी रहती हूं।

ऐसे में मैं और राजेश करीब आ गए।

सुनीता _मतलब अगर तुम्हारा पति, तुम दोनो का प्यास नही बुझाता तो पराया मर्द से chudo ge

पदमा _सुनीता ये कैसी बाते कर रही हो, हम रण्डी नही है जो किसी से भी chud जाय।

हमे भी अपने घर सम्मान का ख्याल है। मैं कसम खा रही हूं घर के बाहर किसी पराए मर्द के बारे में कभी हमने सोचा ही नहीं है। वो तो राजेश अपने घर का है।

सुनीता _मेरे भी पति मेरी प्यास नही बुझा पाते तो क्या मैं भी अपने बेटे के साथ सो जाऊं, जैसे तुम लोग कर रही हो,,, मैं इतनी गिरी हुई नही हूं।

पदमा _क्या देवर जी तुम्हारी प्यास नही बुझाते।

तब तो तू भी तड़फती होगी हम लोगो की तरह,,,

अरे सुनीता राजेश तो कामदेव है कामदेव, इसके रहते तू प्यासी तडफती है, तुम्हे तो कब की chud जाना था राजेश से।

घर में घोड़ा है है तड़फ तड़फ के जी रही हो,,

एक बार तुम भी राजेश से करवा कर देखो, ऐसा मजा देता है की जिसकी कल्पना भी तुमने कभी नही की होगी।

एक बार जो इसके लंद से chud जाती है न उसका गुलाम बन जाती है।

सुनीता _दीदी ये तुम क्या कह रही हो मुझे अपने ही बेटे से चुदने के लिए बोल रही हो।

पदमा _माना राजेश तुम्हारा बेटा है, पर एक मर्द भी है। और बेटा होने के नाते इसका फर्ज भी है। अपनी मां की प्यास बुझाए।

घर में ही घोड़ा हो तो औरत बाहर बदनाम होने क्यू जाए।

एक बार कर लो अपने बेटे से, उसकी दीवानी न हुई तो कहना।

राजेश बेटा क्या तुम्हे यह जानकर अच्छा लगेगा की तुम्हारी मां रात भर प्यार के तड़फटी रहे।

राजेश _नही ताई, मैं तो यही चाहूंगा कि मां हमेशा खुश रहे। उसे हर खुशी मिले।

पदमा _तो तुम अपनी मां की खुशी के लिए उसके साथ सो सकते हो।

राजेश _अगर मां चाहे तो, मैं तैयार हू।

पदमा _लो, अब तो राजेश भी तैयार हो गया है। अब तो तू भी रात रात भर तड़फना छोड़, बेटे को अपना ले।

सुनीता _पर दीदी किसी को पता चल गया तो क्या होगा?

पदमा _अरे कैसे किसी को पता चलेगा।

हम भी तो राजेश से chud रहे है।

हम सब यह राज अपने तक ही सीमित रखेंगे।

अब आ जाओ, अपनी जवानी की प्यास बुझा लो।

पदमा ने राजेश का लंद पकड़ कर चूसना शुरू कर दिया।

पदमा _पूनम देख क्या रही है, जा अपनी चाची को गर्म कर।

पूनम उठी और सुनीता की हाथ पकड़ कर उसे चटाई तक ले आई। फिर सुनीता को चटाई में लिटा कर उसकी चड्डी उतार दी और boor चाटने लगी।

इधर राजेश ने पदमा को घोड़ी बना कर ठोकना शुरू कर दिया।

पदमा के मुंह से कामुक सिसकारी निकलने लगी, आह उन आई ई, आह माई,,,

पदमा को राजेश तब तक ठोकता रहा जब तक वह झड़ न गई।

पदमा के झड़ने के बाद,,

पूनम _राजेश, अब डाल दो चाची की boor में खुब पानी छोड़ रही है।

राजेश, सुनीता के टांगो के बीच आ गया, पूनम ने उसके कूल्हे के नीचे तकिया लगा दिया।

रपूनम ने राजेश का लंद अपने हाथो से पकड़ कर सुनीता की योनि में रख दिया।

राजेश ने एक जोर का धक्का मारा। लंद boor को चीर कर पूरा अंदर चला गया।

सुनीताके मुंह से, आह मां,,,

राजेश सुनीता की चूची को हाथ से पकड़ कर मसलते हुए लंद को योनि में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

पूनम राजेश के कूल्हे पे अपने हाथो से धक्का देने लगा।

सुनीता, जन्नत की सैर करने लगी, कुछ देर बाद राजेश ने सुनीता को घोड़ी बना दिया और दना दन चोदने लगा।

झोपड़ी में सुनीता की कामुक सिसकारी आह उन आह, मां, चूड़ियों की खनक खन खन,,, फच फच गच गच की आवाज गूंजने लगा।

पदमा _क्यू re मजा आ रहा है अपनी मां को चोदने में।

राजेश _हा ताई बहुत मजा आ रहा है।

पदमा _, तू किस्मत वाला है जो मां चोदने को मिल रहा है। बहुत कम लोगो को ऐसा नसीब मिलता है।

क्यू सुनीता, कैसा लग रहा है अपने बेटे से चुदने में,,

सुनीता शर्म से पानी पानी होने लगी,, उसके मुंह से आह उन निकल रही थी।

पदमा _तेरी सिसकारी बता रही हैं की तुम्हे भी खूब मजा आ रहा है।

सुनीता _दीदी तुम भी अपने बेटे से क्यू नही chudwa लेती।

पदमा _उस मुवे को, मजदूरों से फुर्सत मिले तब तो, वैसे भी राजेश के लंद से chud जाने के बाद किसी दूसरे से चुदने का मन नही करता, पूरा अंदर तक गदर मचा देता है इसका घोड़े जैसा लंद।

राजेश बारी बारी तीनो औरतों को करीब दो घंटे ठोकता है, उन तीनो की सारी प्यास बुझा देता है। अंत में सुनीता की योनि में अपना वीर्य छोड़ देता है।

को वीर्य योनि से बाहर निकलता है उस पदमा और पूनम चांट लेती है।

चारो थक चुके होते है, वे सुस्ताने लगते है।

सुनीता _दीदी, अब समझ आया की तुम इतनी सजती संवरती क्यू हो पहले तो इतनी सजती संवरती नही थी। कमर मटका मटका कर भी चलती हो।

पदमा _रेजर को अपनी और आकर्षित करने के लिए सब करना पड़ता है, सुनीता।

तुम भी तो इस उम्र में पहले जैसी ही खूबसूरत, और जवान हो। कही ठाकुर तुम्हे देख लेगा तो फिर से पीछा न पड़ जाए।

सुनीता _अब तो मेरा बेटा है उसे सबक सिखाने के लिए।

उसमे दम है तो मुझे हाथ लगाकर दिखाए।

पदमा _चलो अब सभी अपने अपने कमरे में जाकर सो जाओ, कोई और यहां आ गया तो अनर्थ हो जायेगा।

सब्जी अपने अपने कपड़े पहन कर, अपने अपने कमरे में जाकर, सो जाते है।

राजेश भी अपने खाट पर जाकर सो जाता है।

सुबह, सुनीता राजेस को उठाती है।

सुनीता _अरे बेटा और कितना देर तक सोएगा। चल उठ जा हमे स्टेशन छोड़ने जाना है की नही।

राजेश की नींद खुल जाता है,,

राजेश _ओह, मां क्या टाइम huwa है।

सुनीता _हूं, 7बज चुका है। 9बजे की ट्रैन है।

राजेश खाट से उठ जाता है।

शेखर स्वीटी और सुनीता नहा चुके होते है, जाने की तैयारी कर रहे होते है।

राजेश भी उठता है और नहाने चला जाता है। पदमा और पुनम नाश्ता बना रही होती है।

पदमा _सुनीता, चलो तुम लोग नाश्ता कर लो, समय पर स्टेशन जो पहुंचनी है।

कुछ देर बाद भुवन भी खेत से आ गया।

इधर राजेश नहाकर आ गया।

राजेश _अरे भुवन भैया आटो वाले को काल कर दिए हो ना। आने के लिए।

भुवन _हा राजेश जिस टाटा मैजिक से आए थे उसी को आने के लिए कह दिया हूं वह कुछ देर में पहुंच जाएगा।

राजेश _ठीक किया आपने।

सुनीता, शेखर और स्वीटी तीनो नाश्ता करने लगे।

नाश्ता करते तक, टाटा मैजिक वाला भी पहुंच गया।

भुवन _लो भई गाड़ी भी आ गई।

शेखर _भुवन बेटा सारा बैग गाड़ी में रख दो।

भुवन _ठीक है चाचा।

शेखर _राजेश बेटा कहा रह गया जल्दी करो।

राजेश कमरे से बोला _पापा अभी आया।

राजेश कपड़ा पहन कर तैयार हो गया।

सुनीता _अच्छा दीदी अब हम चलते है। आप लोग भी आइए गा हमारे यहां मुझे अच्छा लगेगा।

पदमा _जरूर आयेंगे सुनीता, तुम लोग अपना ख्याल रखना।

सभी लोग एक दूसरे से गले मिल कर विदा ले रहे थे। सबकी आंखे भर आए थे।

तीनो टाटा मैजिक से स्टेशन के लिए निकल गए।

राजेश पीछे पीछे अपने बाइक से जाने लगा।

भानपुर से आगे निकलने के बाद, आधे रास्ते में वाहन रुक गया।

ड्राइवर ने गाड़ी आगे बढ़ाने की कोशिश किया पर गाड़ी स्टार्ट नही huwa।

राजेश _क्या बात है ड्राइवर काका गाड़ी क्योंरुक गई।

ड्राइवर _पता नही बाबू, लगता है इंजन में कुछ खराबी आ गई है।

शेखर _ओ हो, राजेश बेटा अगर हम समय पर स्टेशन नही पहुंचे तो, ट्रैन छूट जायेगी।

राजेश _पापा इधर तो कोई दूसरा वाहन मिलना मुस्किल लगता है।

सुनीता _ड्राइवर भैया कोशिश करो, शायद गाड़ी स्टार्ट हो जाए।

ड्राइवर _कोशिश कर रहा हूं भाभी जी,,, पर पता नही क्या दिक्कत आ गई है।

तभी वहा ठाकुर अपने जीप से आया,,

राजेश _एक जीप आ रही है उससे मदद मांगते है।

पा ये तो ठाकुर की गाड़ी लग रही है,,,

सुनीता _बेटा उस कलमुहे से मदद मत मांगना।

भले ट्रैन छूट जाए।

शेखर _हा राजेश तुम्हारी मां ठीक कह रही है।

राजेश _ठीक है पापा।

ठाकुर की गाड़ी वहा पहुंची,,

ठाकुर _ड्राइवर गाड़ी रोको,,,

ड्राइवर जीप रोक दिया,,

ठाकुर _अरे राजेश, क्या बात है,? इस तरह रोड में,, कोई समस्या है क्या?

राजेश _कुछ नही, ठाकुर साहब हम स्टेशन जा रहे थे की, रास्ते में गाड़ी खराब हो गया।

ठाकुर _अरे मैं भी लक्ष्मण पुर ही जा रहा हूं अपना पार्टी कार्यालय।

अपनी मां पापा को जीप में बिठा दो उन्हे स्टेशन छोड़ दूंगा।

सुनीता _नही, हमे नही बैठना है किसी के गाड़ी में,,, आप चले जाइए।

ठाकुर _भाभी, जी मैने आपके साथ जो पहले हरकत किया था उसके लिए आज भी बहुत शर्मिंदा हूं। मुझे माफ कर दीजिए। अब मैं बदल गया हूं।

राजेश और दिव्या तो अच्छे दोस्त है।

आप लोगो को ऐसी मुसीबत में छोड़कर जाना अच्छा नही लग रहा है। राजेश ने अपनी जान की बाजी लगाकर मेरी बेटी का जान बचाया है कृपया मुझे भी उस अहसान का बदला चुकाने का मौका तो दीजिए।

रसुनीता _नही मुझे आपकी गाड़ी में नही बैठनी है।

ठाकुर _राजेश बेटा, आप ही समझाओ अपनी मां को,,

रराजेश _मां बैठ जाओ,,,

सुनीता _पर बेटा,,,

राजेश के कहने पर सुनीता तैयार हो गई।

शेखर, सुनीता, और स्वीटी, जीप में बैठ गई।

ठाकुर _ड्राइवर गाड़ी को स्टेशन ले चलो।

ड्राइवर _जी हुकुम।

ड्राइवर जीप को स्टार्ट किया।

राजेश उसके पीछे पीछे जाने लगा।

कुछ देर में गाड़ी स्टेशन पहुंच गया।

तीनो गाड़ी से उतर गए।

राजेश _शुक्रिया ठाकुर साहब।

ठाकुर _इसमें शुक्रिया कैसी राजेश, तुमने भी तो हम पर अहसान किया है।

भाभी जी मैं अपने किए पर आज भी बहुत शर्मिंदा हूं। हो सके तो मुझे माफ कर दीजिएगा, अब मै चलता हूं।

वहा से जाने के बाद,,,

ठाकुर _साली आज भी कमाल की लगती है, इसके नखरे अभी तक वैसे ही है, इससे मिलने के बाद तो इसको पाने की कसक और बड़ गई।

पहले राजेश को ठिकाने लगा दू, फिर तुम्हे अपना बनाकर, अपनी कसक पूरा करूंगा, हा हा हा,,,,

टाटा मैजिक खराब होना ये मुनीम का प्लान था जो कामयाब हो गया।

इधर,,,

सुनीता _बेटा, उस कलमूहे की गाड़ी में बैठने के लिए क्यू बोले सब कुछ जानते हुए भी,,

राजेश _मां, मुक्का मारने के लिए, गुंडे के करीब जाना पढ़ता है।

सुनीता _कही गाड़ी लिफ्ट देने में उसकी कोई चाल न हो।

राजेश _उसकी कोई चाल होगा भी तो, वो कुछ बिगाड़ नही पाएगा, मां तुम चिंता मत करो।

शेखर स्वीटी और सुनीता तीनो ट्रेन में बैठ गए।

राजेश ने अपने मां पापा का पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

सुनीता _बेटा अपना ख्याल रखना। उस ठाकुर से बच के रहना।

राजेश _मांआप लोग मेरी चिंता न करें। मुझे कुछ नहीं होगा।

ट्रैन छूट गई।

राजेश घर लौट आया।

इधर लंदन में निशा सीमा और आर्यन कालेज के कैंटीन में बैठकर काफी पी रहे थे।

निशा _सीमा, मुझे लगता है की पढ़ाई के साथ हमे बिजनेस भी शुरू कर देना चाहिए। फूफा जी से बिजनेस के बारे में हमे अनुभव भी मिल गया है।

सीमा _लेकिन स्टार्ट अप के लिए नई आइडिया भी तो होनी चाहिए, तुमने कुछ सोचा है। कुछ नया।

निशा _अब तक तो नही।

आर्यन _आने वाले सन्डे को साइंस कालेज में, नए वैज्ञानिकों का सेमिनार होने वाला है जिसमे विज्ञानिक अपने नवाचार के बारे में बताएंगे।

अगर कोई आइडिया हमे पसंद आ गया तो हम उस उस आइडिया को अपने लिए पेटेंट करा लेंगे।

निशा _हां ये ठीक रहेगा।

आर्यन _निशा जी, शहर के मूवी थियेटर में नई हिंदी मूवी लगी है। चलो आज शाम को देखने चलते हैं।

सीमा _हा निशा, चलो न चलते है मूवी देखने।

निशा _नही सीमा, मेरा मूवी देखने में रुचि नही है।

सीमा _यार हम दोनों का मन रखने के लिए चलो कम से कम, अब तुम्हारे बिना तो हम मूवी देखने जा नही सकते।

निशा _तुम लोगो का इतना मन है, तो ठीक है।

आर्यन और सीमा खुश हो गए।

सीमा _ये हुई न बात,,,

शाम को निर्धारित समय में, निशा और सीमा दोनो तैयार हो गए। निशा का मन तो नही कर रहा था पर सीमा और आर्यन का मन रखने, जाने राजी हुई थी। आर्यन अपने कार लेकर निशा की बुवा के घर पहुंच गया।

तीनो कार से थियेटर पहुंचे।

थामा मूवी लगी हुई थी।

आर्यन और सीमा मूवी को खूब इंजॉय किया।

निशा मूवी देखकर भावुक हो गई।

मूवी देखकर वे घर पहुंचे खाना खा कर वे अपने कमरे में सोने लगे।

सीमा _निशा क्या बात है जब से मूवी देखी हो, चुप सी हो।

दरसल निशा की कानो में उस मूवी का वही धुन बज रहा था।

दिलबर की आंखो का इजहार न किया।

क्या खाक वो जिया जिसने प्यार न किया

प्यार सच्चा अगर चाहिए।

तो दुआ में असर चाहिए।

इश्क huwa पर खुलके इजहार न किया।

क्या खाक वो जिया जिसने प्यार न किया।

यह धुन उसकी कानो में अब भी गूंज रही थी।

सीमा _तुम खामोश क्यू हो, कुछ बोलती क्यों नहीं। अपना चेहरा क्यू छुपा रही,मेरी तरफ देखो।

सीमा ने निशा का सिर पकड़ कर अपने तरफ घुमाया।

सीमा _निशा तुम्हारी आंखों में आंसू।

निशा, सीमा से लिपट कर रोने लगी,,,

निशा _सीमा, मेरी दुवाओ में, असर नहीं था।

मुझे सच्चा प्यार नही मिला,,,

सीमा _निशा तुम राज को याद कर रही हो,,,

हे भगवान पता नही इसका क्या होगा एक तरफ तो राज का सकल भी देखना नही चाहती दूसरी तरफ उसे भुल भी नहीं पा रही,,,,,
 
अगले दिन राजेश, मोहन के पास गया। वे दोनो पास के गांव जहां फौजी रामसिंग काका रहता था, उसके घर पहुंचे।

मोहन ने दरवाजा खटखटाया।

मोहन _घर में कोई है।

राम सिंग अपनी पत्नी से _देखो तो कोई दरवाजा खटखटा रहा है।

रामसिंग की पत्नी दरवाजा खोलती है।

फौजी की पत्नी _, की आप लोग कौन है?

राजेश _,, चाची हम सूरज पुर के रहने वाले है। फौजी काका से मिलना चाहते है, वो घर में है क्या,,?

फौजी की पत्नी _हा, अभी उन्हें खबर देती हूं।

फौजी की पत्नी ने अपने पति को जाकर बताया कि सूरज पुर से दो लड़के आपसे मिलने आए है।

रामसिंग _, सूरज पुर से दो लड़के मुझसे मिलना चाहते हैं। उन्हें अंदर बुला लो।

रामसिंग की पत्नी राजेश और मोहन को अंदर आने को कहा।

मोहन _नमस्ते काका जी।

रामसिंग _नमस्ते, आओ बैठो। बोलो किस काम से आए हो तुम दोनो।

मोहन _काका, ये राजेश है।

राजेश _नमस्ते काका जी।

रामसिंग _नमस्ते,तुम तो शहरी बाबू लगते है। बोलो क्या काम था मुझसे।

राजेश _जी काका हम लोग गांव में प्रशिक्षण केंद्र खोलना चाहते हैं, जहां गांव के युवाओं को पुलिस एवम आर्मी में भर्ती हेतु प्रशिक्षित किया जा सके।

रामसिंग _ये तो बड़ी अच्छी बात है।

राजेश _, काका, इसके लिए आपकी मदद की जरूरत है।

रामसिंग _कैसी मदद चाहिए?

राजेश _इसके लिए एक कुशल अनुभवी प्रशिक्षक की आवश्यकता है, अगर युवाओं को आप प्रशिक्षित करे तो। हमारी योजना सफल हो जायेगी।

रामसिंग _तुम लोग बड़े अच्छे कार्य कर रहे हैं इसलिए मैं युवाओं को प्रशिक्षण देने तैयार हूं।

पर आर्मी और पुलिस में भर्ती के लिए फिजिकल के साथ रिटन टेस्ट भी होता है, मैं युवाओं को फिजिकल के लिए तैयार तो कर दूंगा पर रिटन टेस्ट मुझसे नहीं हो पाएगा।

राजेश _काका आप उसकी चिंता न करे। उसके लिए हम कोई दूसरा ट्यूटर ढूंढ लेंगे।

रामसिंग _अरे सुनती हो भाग्यवान, बच्चो के लिए चाय बना बना दो।

रामसिंग ने अपनी पत्नी से कहा।

राजेश _काका जी काकी को काहे तकलीफ उठाने बोल रहे हैं। रहने दीजिए न चाय।

रामसिंग _अरे यार पहली बार आए हो, घर ऐसे ही चले जाओगे तो हमे अच्छा नही लगेगा।

कुछ देर में

रामसिंग की पत्नी ने चाय बना कर ले आई। राजेश और मोहन, राम सिंग से योजना पर बातचीत करते हुवे चाय पीने लगे।

उसके बाद रामसिंग से इजाजत लेकर वे सूरज पुर वापस आ गए।

वे स्कूल पहुंचे।

राजेश _नमस्ते मैम।

माधुरी _, नमस्ते राजेश आओ बैठो। बड़े दिन बाद आए।

राजेश _जी, बच्चो की पढ़ाई लिखाई कैसी चल रही है, देखने आया था। सब ठीक तो चल रहा है न, कोई समस्या तो नही।

माधुरी _पढ़ाई बड़ी अच्छी चल रही है तुम खुद ही देख लो क्लास में जाकर। आओ मेरे साथ।

माधुरी ने राजेश को आरती के क्लास में ले गई। आरती बच्चो को पड़ा रही थी।

बच्चो ने माधुरी और राजेश का अभिवादन किया।

राजेश _आरती, पढ़ाई ठीक चल रहा है न।

आरती _जी भैया।

राजेश _कोई समस्या तो नही।

आरती _नही भैया।

राजेश ने बच्चो से कुछ प्रश्न किया, बच्चो ने बड़े अच्छे से उत्तर दिया।

उसके बाद माधुरी ने एक एक कर सभी कक्षाओं में राजेश को ले गई। वहा राजेश ने बच्चो की पढ़ाई का अवलोकन किया।

बच्चो की पढ़ाई से संतुष्ट हुवा।

राजेश _मैम बच्चो की पढ़ाई तो बड़ी अच्छी चल रही हैं। मुझे बड़ा अच्छा लगा। मैम इन शिक्षकों से आपको कोई शिकायत तो नही।

माधुरी _, नही राजेश, सभी बड़ी मेहनत कर रहे हैं वे लगन और निष्ठापूर्वक अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं।

राजेश _ये तो बड़ी अच्छी बात है।

दरअसल मैं लाला जी द्वारा दिए गए 3एकड़ जमीन को खेल मैदान बनाने के लिए, जेपीसी वाले को बुलाया है। उसी का निरीक्षण करने आया था।

जेसीबी वाले अभी तक पहुंचा नही। मोहन जरा फोन लगाकर पता करो, कहा रह गया।

मोहन ने फोन लगकर पता किया।

मोहन _राजेश, ड्राइवर ने कह की वह बस पहुंचने वाला है।

माधुरी _राजेश तुम स्कूल के लिए कितना कुछ कर रहे हो।

राजेश मैम, शिक्षा ही तो बच्चो का भविष्य तय करता है। अगर बच्चो को अच्छी शिक्षा मिलेगा तो बच्चे पढलिख कर कुछ बन पाएंगे। इससे ने केवल इन गरीब बच्चो का भला होगा, बल्कि गांव का नाम भी रौशन होगा।

मोहन _लो जेसीबी वाला भी पहुंच गया।

ड्राइयर _बताओ भैया क्या करना हैं?

राजेश _खेत को खेल मैदान बनाना हैं। मिट्टी को बराबर करनी है।

ड्राइवर _ठीक है, भैया।

ड्राइवर ने अपना काम शुरू कर दिया।

राजेश _, अच्छा मैम अब मैं चलता हूं, दोपहर का भोजन का समय भी होने को है घर में भाभी इंतजार कर रही होगी। कोई समस्या आती हैं मुझे फोन कर बताइएगा।

माधुरी _ठीक है राजेश।

राजेश और मोहन अपने घर चले गए।

राजेश भोजन करने के बाद, अपने कमरे में पढ़ाई कर रहा था।

तभी पूनम कमरे में आई।

राजेश _क्या बात है भाभी कुछ काम था क्या?

पूनम _राजेश, लाला की बेटी तुमसे मिलने आई हैं।

राजेश, अपने कमरे से बाहर आया।

लाजो राजेश से लिपट गई।

राजेश _, अरे लाजो तुम, कुछ काम था क्या? बड़ी खुश लग रही हो।

लाजो _हा,राजेश भैया, मैं आपको खुशखबरी सुनाने आई थी। लो पहले मिठाई खाओ। लो भाभी आप भी।

राजेश _किस बात की मिठाई खिलाई जा रही हैं भई, हम भी तो जाने।

लाजो _भैय्या मैं पास हो गई। पता हैं मेरे कितने मार्क्स आए हैं। सौ में पूरे 99

राजेश _ओह ये तो बड़ी खुशी की बात हैं।

लाजो _, भईया, मैं तो सपने में भी कभी नहीं सोंची थी की गणित में मेरे कभी इतने मार्क्स आयेंगे। भईया ये सब आपके कारण संभव हो पाया।

राजेश _मुझे पता था तुम अच्छे मार्क्स लाओगी, तुम काफी मेहनत जो कर रही थी।

अब आगे क्या करना चाहती हो।

लाजो _भईया अब मैं कालेज में एडमिशन लेकर अपनी आगे की पढ़ाई पूरी करना चाहती हूं। आप ही की तरह मैं भी अफसर बनने पीएससी फाइट करना चाहती हूं।

राजेश,_ये तो बड़ी खुशी की बात हैं। तुम्हारी लगन मैने देखा हैं तुम अपनी लक्ष्य में जरूर कामयाब होगी।

लाजो _अच्छा भईया अब मैं चलती हूं, सबको मिठाई बाटनी है। सबसे पहले आपही के पास आई थी खुशखबरी सुनाने।

राजेश _ठीक है जाओ,अपने सभी दोस्तो के साथ अपनी खुशियां शेयर करो।

लाजो वहा से चली गई।

कुछ देर बाद ज्योति राजेश के कमरे में आई।

ज्योति _राजेश क्या कर रहा है?

राजेश _कुछ नही दीदी, थोड़ी पढ़ाई कर रहा था। कुछ काम था क्या?

ज्योति _वो तुमने कहा था न मेरी परेशानी दूर करोगे।

राजेश _हा दीदी बोलो कैसी परेशानी है?

ज्योति _दूदू फिर से भारी हो गए हैं। दर्द करने लगा है।

राजेश _ओह, मुझे दिखाओ दीदी, आपकी तकलीफ दूर कर दू।

ज्योति ने अपनी ब्लाउज का बटन खोल दिया।

राजेश ने उसकी चूचियां बारी बारी से चूसना शुरु कर दी।

उसके दूध गटक गटक कर पीने लगा।

ज्योति, प्यार से उसका बाल सहलाने लगी।

तभी कमरे में पूनम भी आ गई।

पूनम _क्या चल रहा है दीदी भाई के बीच?

ज्योति _मेरे दूध भारी हो गए थे, राजेश से दूध खाली करा रही हूं।

पूनम _हूं, दीदी आपके दूध पीने के बाद, देखो उसका लोअर , में फिर तंबू बन गया हैं।

लगता हैं फिर मेरी ठुकाई होगी।

ज्योति हसने लगी ,,

ज्योति _ये तो अच्छी बात हैं, तुम्हारे लिए।

कर ले मजे,,,

पूनम _सच दीदी।

ज्योति _हा हा, तू तो मरी जा रही है राजेश का लेने,,,

पूनम ने राजेश का लोअर नीचे कर उसका लंद बाहर निकाल कर चूसना शुरु कर दी।

राजेश, पूनम को घोड़ी बनाकर चोदना शुरू कर दिया। वह ज्योति का दूध चूस चूस कर खाली कर रहा था साथ में पूनम कि ठुकाई भी कर रहा था। कमरे में पूनम कि सिसकारी गूंज रही थी।

दूध खली होने के बाद।

एक राउंड ज्योति को भी चोदा, फिर पूनम कि जमकर ठुकाई कर उसकी गाड़ मारते हुए झड़ गया।

राजेश कुछ देर सुस्ताने के बाद स्कूल की ओर चला गया, मैदान एक काम देखने।

इधर प्रशिक्षण केंद्र खोलने की भी सारी तैयारी हो गई।

वह दिन भी आ गया। आज केंद्र का उद्घाटन था। सभी युवा प्रशिक्षण स्थल पर इकठ्ठे हो गए।

पंचायत के सभी पधाधिकारी एकत्रित हुए थे। जिला पंचायत अध्यक्ष होने के नाते गीता ठाकुर को और विधायक होने के नाते ठाकुर बालेंद्र सिंह को भी आमंत्रित किया गया।

ठाकुर तो नहीं आया, पर गीता निर्धारित समय पर पहुंच गई।

गीता ने गीता और सविता दोनो ने संयुक्त हाथो से रिबन कांट कर, केंद्र का उद्घाटन किया।

उद्घाटन के बाद सविता और गीता दोनो ने मंच से सभा को संबोधित किया और युवाओं को प्रेरित किया। राजेश को उसके कार्य की प्रशंसा की।

अगले दिन से फौजी रामसिंग के नेतृत्व मे युवाओं का प्रशिक्षण शुरू हो गया। प्रशिक्षण का समय था सुबह 6से 8बजे।

इधर राजेश ने स्कूल को लाला जी के द्वारा दिए गए खेत का समतली करण कर, उसके किनारे किनारे चारो क्यारी बनाकर पेड़ पौधे लगाए।

बच्चो के खेलने के लिए झूले, फिसल पट्टी भी लगाए गए। कबड्डी प्रतियोगिता से मिले पैसे से सारी व्यवस्था किया गया। कुछ दिन में ही मैदान बन कर तैयार हो गया।

उसका भी उद्घाटन गांव की सरपंच सविता देवी के हाथो से कराया गया।

अब बच्चे पढ़ाई के समय पढ़ाई करते शेष समय मैदान मे खेलते।

एक दिन संडे को दिव्या ने राजेश को फ़ोन किया।

दिव्या _राजेश कहां हो।

राजेश _मैं घर मे ही हूं दिव्या जी नहा रहा कर आया हूं। कुछ काम था क्या?

दिव्या _तुमने तो अपनी नई बाइक पे घुमाने की बात कही थी, भूल गए क्या? कितने दिन हो गए मिले ही नहीं।

राजेश _नही दिव्या जी? कहिए कब चलना हैं घूमने।

दिव्या _आज संडे हैं दोपहर बाद खाली रहूंगी तुम दोपहर मे स्वास्थ्य केंद्र आ जाना। वही से घूमने चलेंगे बाइक पे कही।

राजेश _ठीक हैं दिव्या जी।

राजेश दोपहर मे भोजन करने के बाद। अपनी बाइक लेकर लक्ष्मण पुर के लिए निकल गए।

जब वह स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा।

दिव्या अपनी केबिन पे नही थी। उसने एक नर्स से पूछा। दिव्या मैम कहा हैं?

नर्स ने बताया कि वह पेसेंट को देखने गई हैं।

राजेश केबिन के बाहर बैठकर उसके आने का इंतजार करने लगा।

राजेश _जब दिव्या आई।

दिव्या _राजेश तुम कब आए।

राजेश _बस कुछ ही देर पहले दिव्या जी।

दिव्या _आओ अंदर बैठो।

राजेश दिव्या के साथ उसके केबिन में चला गया। वहा लगा चेयर पर बैठ गया।

दिव्या _क्या लोगे चाय या काफी।

राजेश _रहने दो दिव्या जी।

दिव्या _क्यू?

राजेश _अब घूमने जा रहे हैं उधर ही पी लेंगे किसी रेस्टो रेंट में।

दिव्या _अच्छा, कहा ले जाओगे मुझे घुमाने।

राजेश _, आप जहां चाहे।

दिव्या _यहां से 40km दूर एक फूलों की घाटी हैं। चलो वही चलते हैं।

राजेश,_चलो जैसे आपकी ईच्छा जी।

दिव्या और राजेश स्वास्थ्य केंद्र से निकल पड़े।

जाते समय दिव्या ने अपने ड्राइवर को हवेली चले जाने को कहा,,,

ड्राइवर कार को लेकर भानपुर चला गया।

और इधर राजेश और दिव्या बाइक से फूलो की घाटी के लिए निकल पड़े।

रास्ते में दोनो सड़क के दोनो साइड मनोरम दृश्य देखकर, दोनो रोमांच का अनुभव करने लगे।

करीब एक घंटे बाद वे फूलो की पहुंचे।

घाटी में रंग बिरंगे फूल खिले थे।

दिव्या _राजेश देखो, कितने सुंदर सुंदर फूल खिले हैं। ऐसा लग रहा हैं जैसे स्वर्ग धरती पर उतर आया हो।

राजेश _हा, सही कहा आपने।

कालेज के कई लड़के लड़कियां। घाटी में घूमने आए थे।

दिव्या _, देखो तो उन लड़के लड़कियों को तो बिलकुल शर्म नही। कैसे झाड़ी के पीछे चूमा चाटी कर रहे हैं।

राजेश _दिव्या जी, आप उन लोगों पर ध्यान न दो,,

दिव्या _क्यों, तू भी निशा को ऐसी जगह ले जाकर, ऐसी हरकत करता था क्या?

राजेश _नही दिव्या जी? मैने तो निशा जी को आज तक कभी छूए भी नही।

दिव्या _अच्छा, इतनी मोहब्बत करता है उससे और उसे अभी तक छूए नही।

राजेश _दिव्या जी, क्या तुमने कभी किसी से प्यार नहीं किया?

दिव्या _,, मुझे कोई ढंग का मिला ही नहीं।

राजेश _क्यों लडको की कमी है क्या दुनिया में?

, दिव्या _, कुछ लोग मुझे प्रपोज किए, लेकिन मैने उसका प्रपोज ठुकरा दिया। क्यों कि वे लोग मुझे पसंद नही थे?

राजेश _कैसा लड़का चाहिए आपको, मैं ढुढूंगा आपके लिए लड़का?

दिव्या _अच्छा मेरे लिए तुम लड़का ढुढोगे,। दिव्या हसने लगी।

राजेश _, बताओ ना कैसा लड़का चाहिए तुम्हे?

दिव्या _ऐसा लड़का, जो सबका चहेता हो, जो सबकी मदद करे। दूसरो का दर्द समझे। जो दूसरो के लिए अपनी प्राण की परवाह न करे।

क्यों ,हैं तुम्हारी नजर में ऐसा लड़का?

राजेश _अभी तक तो नही पर ढूंढने से मिल जायेगा।

दिव्या _ठीक हैं जब मिल जायेगा तो मुझे बता देना।

चलो वहा पर बैठते है।

राजेश और दिव्या दोनो वहा बैठने के लिए, बेंच रखा था वहा जाकर बैठ गए।

उधर जब ड्राइवर घर पहुंचा। दिव्या कार से नही उतरी,,

ठाकुर _क्यों बे, दिव्या बेटी कहा है? तू अकेला कैसे आ गया।

ड्राइवर _जी, मालिक वो दिव्या बेटी राजेश के साथ बाइक में कही घूमने निकल गई। मुझे हवेली जाने बोल दी।

ठाकुर _क्या? ठाकुर गुस्से से आग बबूला हो गया।

मुनीम _हुजूर अब पानी सिर से ऊपर चढ़ता जा रहा है। कुछ कीजिए नही तो हवेली की इज्जत पर,,,

ठाकुर _मुनीम जी,, अपने जुबान पर लगाम दो,,,

ठाकुर ने चीखते हुए कहा।

मुनीम _माफ करना हुजूर? हवेली की इज्जत, मुझे अपने घर की इज्जत की तरह प्यारी है आखिर मैंने आपका नमक खाया है।

ठाकुर _ठकुराइन ने अपनी बेटियों सर पे कुछ ज्यादा ही चढ़ा रखी है।

कुछ करना ही पड़ेगा।

इधर गार्डन में राजेश और दिव्या, बेंच पर बैठ कर प्रकृति का आनंद ले रहे थे।

राजेश _दिव्या जी, आप यही बैठो मैं कैंटीन से काफी लेकर आता हूं।

दिव्या _ठीक है।

दिव्या राजेश को जाते हुवे देखने लगी,,,,

और सपनो में खो गई,,,,

सपनो में देखी की राजेश गाना गा रहा है।

ये मौसम आया है।

कितने सालों में,,

आजा खो जाए खाबो खयालों में,,,,

कि आजा खो जाए खाबो खयालों में,,,

कुछ डर बाद राजेश काफी लेकर आया।

R

राजेश_दिव्या जी,,,

दिव्या, जैसे नींद से जागी।

राजेश _कहा खो गई थी आप।

दिव्या _कहीं तो नही।

राजेश _, लीजिए कॉफी लीजिए।

राजेश और दिव्या दोनो कॉफी पीने लगे।

कॉफी पीने के बाद कुछ देर और गार्डन में रहे उसके लिए दोनो वहा से निकल गए।

रास्ते में एक रेस्टोरेंट आया वे नाश्ता करने के लिए रुक गए।

दोनों वहा नाश्ता करने के बाद घर के लिए निकल पड़े।

इधर हवेली में,,

ठाकुर _ठकुराइन, फ़ोन लगाओ दिव्या को शाम ढल चुकी है अभी तक उसका कुछ पता नहीं है।

ठकुराइन _ठीक है जी।

रत्नावती ने दिव्या को फ़ोन लगाया,,,

दिव्या _,, हा मां,,,

रत्नावति _बेटी तू कहां है? शाम ढल चुकी है अभी तक घर नहीं लौटी, तुम्हारेपिता जी बड़े चिंतित हो रहे है।

दिव्या _, मां मैं राजेश के साथ हूं, काफी दिनों बाद मन किया कही घूमने का तो, राजेश के साथ चली गई। हम आ ही रहे है बस आधे घण्टे में पहुंच जायेंगे।

रत्नावती _ठीक है बेटा तुम जल्दी घर आ जाओ।

ठाकुर _, क्या बोल रही थी? दिव्या।

रत्नावती _वो राजेश के साथ कही घूमने गई थी। आधे घण्टे में पहुंच जाएगी।

ठाकुर _देखो ठकुराइन, दिव्या कोई साधारण लड़की नही है। इस गांव क्षेत्र की राजकुमारी है। इस तरह उसका घूमना ठीक नहीं है। तुम उसे अपना सर पे बिठा रखी हो।

रत्नावती _, देखो जी, दिव्या कोई छोटी बच्ची है नही, पड़ी लिखी समझदार लड़की है, उसे अपना भला बुरा सब पता है। तुम्हे उसकी चिन्ता करने की जरूरत नहीं।

ठाकुर _क्यों, क्या मैं उसका बाप नही। मैं उसका भला बुरा नहीं सोचूंगा तो और कौन सोचेगा।

रत्नावती _आपकी करतूतों को बेटियों से छुपाती हू तो आपकी इज्जत बेटियों के सामने बनी हुई है, कही बेटियों को आपकी करतूतों का पता चल गया न तो अपने बेटियों को मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे।

ठाकुर _अरे मेरी जान क्यों नाराज होती हो। वो तो एसपी साहब ने बोला है।

सावधान रहने के लिए की नक्सली लोग कुछ बड़े मूवमेंट को अंजाम देने वाले है। इसलिए मुझे दिव्या की चिंता हो रही थी।

इधर करीब आधे घण्टे बाद, राजेश और दिव्या दोनो हवेली पहुंचे।

दिव्या _आओ राजेश मां और दीदी से मिलकर जाना।

राजेश _दिव्या जी फिर कभी बाद में मिल लूंगा। घर वाले। चिंतित न हो। मुझे निकलना चाहिए।

दिव्या _ठीक है राजेश, फिर मिलेंगे।

राजेश सूरज पुर चला गया।

दिव्या हवेली के अंदर गई।

ठाकुर _अरे बेटी, बड़ी देर कर दी आने में। हम चिंतित थे।

दिव्या _पिता जी, काफी दिनों से मै घर में और अपने ड्यूटी के कारण बोर हो गई थी तो राजेश के साथ टहलने चली गई थी।

ठाकुर _बेटी कही जाती हो तो बता दिया करो, हमे तुम्हारी चिन्ता हो रही थी।

दिव्या _सारी पिता जी।

ठाकुर _कोई बात नही बेटा, अब ख्याल रखना।

जाओ अपने कमरे में जाकर आराम करो, थक गई होगी।

दिव्या _ठीक है पिता जी।

दिव्या अपने कमरे में चली गई।

ठाकुर _मुनीम जी, अब तो कुछ करना ही पड़ेगा,,,

मुनीम _हुजूर, आप कहे तो मेरे पास एक प्लान है, इस राजेश को रास्ता से हटाने का।

ठाकुर _कैसा प्लान मुनीम जी?

मुनीम जी _एसपी साहब ने, सावधानी बरतने कहा है न, नक्सलियों को लेकर।

ठाकुर _हा,

मुनीम _तुम राजेश को, गीता बेटी का बॉडीगार्ड बना दो।

ठाकुर _मुनीम जी,, ये तुम क्या कह रहे हो अपने दुश्मन को अपने बेटी का बॉडीगार्ड। तुम पागल हो गए हो क्या?

मुनीम _यही तो प्लान है हुजूर, हमारे आदमी नक्सली बनकर, गीता बेटी पर अटैक करेंगे। राजेश उसे बचाने की कोशिश करेगा। हमारे आदमी राजेश को मार देगा। गीता को अगवा कर लेंगे। और पैसे का डिमांड करेंगे।

हम जाकर पैसे दे आयेंगे। हमारे आदमी बिटिया को छोड़ देगा। किसी को शक नही होगा। पुलिस को भी।

ठाकुर _क्या दिमाक लगाया है, मुनीम जी मान गए। अब तो राजेश को रास्ते से हटना ही पड़ेगा।

ह ह ह ह,,,

रात में भोजन करते समय,,,

ठाकुर _गीता बेटी, आज जिले के एसपी साहब ने फोन किया था, बता रहा था कि नक्सली लोग किसी बड़े ऑपरेशन को अंजाम देने वाले है। हमे सावधान रहने कहा है?

माखन तो मेरा साथ रहेगा,,,

मै तो कहता हु तुम अपने लिए भी एक बॉडी गार्ड रख लो,,,

गीता _, पिता जी मुझे किसी से कोई डर नहीं।

ठकुराइन तुम ही समझाओ गीता को।

रत्नावती _अगर एसपी साहब का कहना सही हो तो, गीता बेटी तुम्हारे पिता जी ठीक कह रहे हैं,,, तुम भी कोई बॉडीगार्ड रख लो।

दिव्या _हा दीदी, मां पिता जी ठीक कह रहे हैं। नक्सलियों का क्या भरोसा।

गीता _, ठीक है आप लोग जैसा उचित समझे।

ठाकुर _बेटा, मैने यहां के आई जी साहब से बात किया है कोई बॉडी गार्ड के लिए। उसने कहा है कि उसके जानकारी में है एक बॉडी गार्ड, अभी वह बाहर गया huwa है। २माह लगेंगे। तब तक तुम यही हमारे आसपास के किसी ताकतवर पुरुष को अपना बॉडीगार्ड बना लो।

दिव्या _हमारे क्षेत्र में तो सबसे ताकतवर अभी एक ही पुरुष है।

गीता _कौन?

दिव्या _राजेश।

गीता _वो तो है पर क्या वो मेरा बॉडीगार्ड बनेगा।

दिव्या _मै बोलूंगा तो वो न नही कहेगा।

रत्नावती _अपने पिता जी से पहले पूछ लो उसे कोई आपत्ती तो नही।

ठाकुर _, भाई तुम लोगो कि इच्छा में मुझे भला क्या आपत्ति हो सकती है।

रत्ना वती _तो ठीक है दिव्या बेटा तुम राजेश को मना लेना कम से कम दो माह गीता के साथ रहकर उसकी सुरक्षा करे।

दिव्या _मुझे विश्वास है मां, राजेश मेरा कहना जरुर मानेगा।
 
निशा और उसके दोस्त निर्धारित दिन और समय पर, साइंस कालेज पहुंचे, जहा सेमिनार का आयोजन किया गया था। जिसमे कुछ वैज्ञानिक अपना नवाचार पर प्रस्तुतीकरण करने जा रहे थे।

एडम नाम का एक युवक ने अपने नवाचार के बारे में अपना प्रस्तुति करण दिया। उसने एक पावर फूल बैटरीमॉडल पर प्रस्तुतीकरण दिया था। जिसकी क्षमता अधिक होने के साथ, काफी सुरक्षित था। हालाकि जिस टेकनीन का उसमे उपयोग किया गया था। उससे बैटरी की लागत, अन्य के मुकाबले अधिक आ रही थी।

कई कंपनी के अधिकारी भी सेमिनार में पहुंचे थे।

वैज्ञानिकों ने अपने अपने आइडिया पर प्रस्तुतीकरण करना शुरू किया।

जब सेमिनार खत्म हुआ।

कंपनी के अधिकारियोंको जिस वैज्ञानिक का आइडिया पसंद आया वे उससे संपर्क करने लगे।

आर्यन _निशा ,आपको कोई आइडिया पसंद आया।

निशा _मुझे एडम का आइडिया पसंद आया।

सीमा _ओ पावरफुल बैटरी वाली।

निशा _हा।

आर्यन _पर उस बैटरी को बनाने की लागत अधिक आयेगी। लोग महंगी बैटरी खरीदेंगे।

निशा,_तुम लोगो ने ध्यान नहीं दिया, बैटरी महंगी तो बनेगी पर, सुरक्षा की दृष्टि से अन्य बैटरी के मामले में सबसे बेहतर होगी।

लोग सुरक्षा को पहली प्राथमिकता देते हैं।

चलो हमे एडम से मिलना है।

तीनो एडम के पास पहुंचते है।

निशा _हेलो एडम ।

एडम _हेलो मैम।

निशा _एडम हमे तुम्हारा आइडिया बहुत पसंद आया।

एडम _थैंक यू मैम।

निशा _एडम क्या तुम हमारे साथ काम करोगे। हम आपके आइडिया पर काम करना चाहते हैं।

एडम _मैम, मेरे आइडिया पर ज्यादा लोग उत्साहित नहीं हुवे। आपका शुक्रिया जो, मुझ पर भरोसा किया। मै आपके साथ काम करने तैयार हूं।

निशा _good

इसके बाद निशा, आर्यन, सीमा और एडम ने मिलकर एक कंपनी बनाया।

कंपनी का नाम रखा गया, निशा ग्रुप्स

जिसकी डायरेक्टर थी _निशा

सीईओ _आर्यन

मार्केटिंग ऑफिसर _सीमा

और तकनीकी अधिकारी एडम को बनाया गया।

निशा ने अपनी मां सुजाता से अपनीकंपनी के लिए वित्त प्रबंधन के बात की।

सुजाता _बेटी, हमारा जो कुछ भी है सब तुम्हारा ही है। तुम कुछ नई करने जा रही हो यह जानकर मुझे बड़ी खुशी हुई। तुम अपनी कंपनी के लिए फाइनेंस की चिंता मत करो।

निशा _थैंक यू मॉम, मुझे आपसे यही अपेक्षा थी।

निशा _लो भाई, फाइनेंस की समस्या तो खत्म हो गई।

सीमा_प्रोडक्शन यूनिट लगाने के लिए, जगह ओर यहां कि प्रशासन से अनुमति।

आर्यन _प्रशासन से अनुमति के लिए मै अपने डैड से बात करूंगा। यहां के नेताओं से अच्छे बनते हैं उनके।

निशा _फूफा जी, बता रहे थे कि एक कारखाना उनका बंद पड़ा है। क्यों न हम वहा अपना यूनिट लगाए। मै फूफा जी से बात करूंगी।

इधर सुरज पुर मे, दोपहर के समय स्कूल से माधूरी मैडम ने राजेश को काल किया।

रमाधूरी _, राजेश कहां हो।

राजेश _मै घर पर ही हू मैम कुछ काम था क्या?

माधूरी _राजेश, स्कूल में हमारे विकासखंड शिक्षा अधिकारी, स्कूल निरीक्षण के लिए आए है, वो आपसे मिलना चाहते हैं।

राजेश _ठीक है मैम मै अभी पहुंचता हूं।

कुछ देर में ही राजेश स्कूल पहुंचा।

माधूरी _सर ये है राजेश।

राजेश ये हमारे विकास खंड के शिक्षा अधिकारी है।

राजेश _नमस्ते सर।

अधिकारी _नमस्ते राजेश।

माधूरी मैडम ने बताया, स्कूल का जो कायाकल्प किया है उसमे तुम्हारा हाथ है।

मै तुम्हारे काम से काफी प्रभावित huwa हू। इसलिए तुमसे मिलने की ईच्छा हुई।

राजेश _, शुक्रिया सर।

अधिकारी _इस स्कूल को मॉडल स्कूल बनाने के लिए मै, जिला शिक्षा अधिकारी को प्रस्ताव भेजूंगा। ताकि हमारे जिले के अन्य स्कूल शिक्षकों और गांव के लोगो को प्रेरणा मिल सके।

अन्य गांव के लोगो को प्रेरित करने के लिए हमारे विभाग को तुम्हारी मदद की आवश्यकता होगी।

राजेश _सर, गांव के बच्चो को बेहतर शिक्षा मिल सके उसके लिए मै जितना हो सके, करने का प्रयास करूंगा।

विकास खंड शिक्षा अधिकारी _अब तो, विकासखंड के अन्य स्कूलों के शिक्षकों को, इस स्कूल के अवलोकन करने ले लिए भेजा जाएगा। ताकि वे भी प्रेरित हो सके।

कुछ देर और रुकने के बाद,,,

अधिकारी _अच्छा अब मै चलता हूं, अब तो यहां आना जाना लगा रहेगा।

अधिकारी के जाने के बाद,,,

माधूरी _राजेश, अब तो हमारे स्कूल की चर्चा, जिला तक होने लगी है।

राजेश _यहां किए गए कार्य सफल तभी माने जायेंगे, मैम जब यहां से पढ़कर निकले बच्चे कुछ बन जायेंगे।

माधूरी _, तुम्हारे जैसे मार्गदर्शक हो तो, जरुर यहां से बच्चे निकल कर अपने लक्ष्य को प्राप्त करेंगे।

थैंक यू राजेश, आज पहली बार किसी अधिकारी के सामने अपने को गौरांवित अनुभव की। ये सब तुम्हारे कारण है।

राजेश _मैम आप है ही प्रशंसा की पात्र, आप अपनी जिमेदारी, पूरी निष्ठा पूर्वक निभा रही है, यहां अतरिक्त समय देकर, नए शिक्षकों को अध्यापन कौशल सीखा रही है। सभी शिक्षक ऐसे नही करते।

माधूरी _इसकी प्रेरणा भी मुझे आपसे ही मिली।

राजेश _अच्छा मैम, अब चलता हू, कोई समस्या हो तो, फोन कीजिएगा।

माधूरी _, ठीक है राजेश।

इधर हवेली में,, ,,

रात्रि भोज के समय,,,

ठाकुर _दिव्या बेटी तुम राजेश से बात करने वाली थी।

क्या huwa ,वह माना कि नही बॉडीगार्ड बनने के लिए।

दिव्या _नही पापा अभी उससे बात नही हो पाई है।

रत्नवती _बेटी तुम राजेश को कल हवेली ही बुला लो।

दिव्या _ठीक है मां।

रात में सोने के समय अपने बेड पर लेट कर दिव्या ने राजेश को फ़ोन किया।

दिव्या _, क्या कर रहे हो जनाब?

राजेश _, दिव्या जी, इतनी रात को, कुछ काम था क्या?

दिव्या _क्यों,नही कर सकती क्या?

राजेश _, ऐसी बात नही है, आप कभी भी फोन कर सकती हो। वो रात में पहली बार की न इसलिए,,,

कुछ काम था क्या?

दिव्या _कल हवेली आ सकते हो,मेरे ड्यूटी जाने से पहले, कुछ बाते करनी थी।

राजेश _ कुछ अर्जेंट था क्या?

दिव्या _, हा।

राजेश _ठीक है, मै 10बजे के पहले पहुंच जाऊंगा।

दिव्या _अच्छा घर में नाश्ता करके मत आना, कल का नाश्ता हम लोगो के साथ करोगे। ठीक है।

राजेश _मतलब,, आपके घर वाले बुला रहे हैंमुझे हवेली।

दिव्या _हूं ।

राजेश _, ठीक है दिव्या जी।

अगले दिन सुबह राजेश उठकर प्रशिक्षण केंद्र गया । वहा सिर्फ गांव के युवा ही नहीं अब आसपास के गांव के युवा भी, पुलिस एवम आर्मी में भर्ती हेतु प्रशिक्षण लेने के लिए आने लगे थे।

मोहन _राजेश, हमारे केंद्र में तो युवाओं की संख्या बढ़ती ही जा रही है।

राजेश _ये तो बड़ी अच्छी बात है।

मोहन _,, राजेश, फिजिकल तैयारी के साथ, इन युवाओं को रिटन टेस्ट के लिए भी तैयार करना जरूरी है।

अब उसकी तैयारी आपको ही करानी होगी। क्यों की आप तो यूनिवर्सिटी के टॉपर रहे हो।

फिजिकल के बाद एक घंटा रिटन टेस्ट की तैयारी आप करा देना।

राजेश _, अच्छा ठीक है, जैसे ही कोई विकेंसी आयेगी। लिखित परीक्षा की तैयारी शुरू करा देंगे।

तैयार huwa घर में बता दिया कि वह हवेली जा रहा है दिव्या ने उसे बुलाया है।

पदमा _बेटा तुम भुवन को भी ले जाओ, मुझे हवेली नाम सुनकर ही डर लगता है।

राजेश _, अरे ताई, तुम भी न, बेकार में ही डरती हो,,,

वो ठाकुर तुम्हारे राजेश का कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा।

भुवन _राजेश, कोई समस्या आए तो मुझे मिस काल कर देना, पूरे गांव के लोगो को ले आऊंगा, हवेली, अगर तुम्हे हाथ भी लगाया तो।

राजेश हसने लगा,,,

राजेश _, जरुर भुवन भईया,,,

राजेश हवेली के लिए निकल गया,,

पदमा _भुवन बेटा पता नहीं मेरे मन को ये क्यूं लगने लगा है। गांव वालो और हवेली के बीच कभी भी जंग छिड़ सकती है।

भुवन _, मां मुझे भी कुछ ऐसा ही लगने लगा है।

इधर राजेश हवेली पहुंचा,,,

दिव्या, राजेश का वेट कर रही थी।

राजेश _नमस्ते दिव्या जी, नमस्ते मां जी

रत्नवती _, आओ राजेश, हम आप ही का वेट कर रहे थे।

राजेश_जी कुछ काम था।

रत्नवती _, रत्नवती _आओ बेटा पहले नाश्ता कर लो फिर बात करेंगे।

रत्नावती ने नौकरानी से गीता को नाश्ता करने के लिए बुला लाने को कहा।

कुछ देर में गीता भी आ गई,

गीता _नमस्ते गीता दीदी।

गीता _नमस्ते राजेश कैसे हो?

राजेश _अच्छा हूं दीदी।

वे तीनों नाश्ता करने लगे।

दिव्या _दरअसल राजेश, यहां के एसपी साहब का फोन आया था, नक्सली मूवमेंट बड़ गया है। वे किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के फिराक में है।

एसपी साहब ने सावधान रहने के लिए कहा है।

दीदी को जिला पंचायत अध्यक्ष होने के नाते पूरे जिले के गांव में किसी दौरे या उद्घाटन कार्यक्रम में जाना पड़ता है। इस लिए हमे दीदी की सुरक्षा की चिंता हो रही है।

पिता जी ने बॉडीगार्ड के लिए बात की है। पर दो माह वह बॉडीगार्ड उपलब्ध नहीं हो पाएगा।

इसलिए मैं और मां चाहते है अगर तुम दीदी के साथ रहते तो हमारी चिंता कम हो जाएगी।

जानती हू तुम आई ए एस की तैयारी कर रहे हो, अभी मुख्य परीक्षा के रिजल्ट आने में माह तो लगेंगे।

राजेश _, आप लोगो को लगता है कि मैं दीदी की सुरक्षा कर पाऊंगा।

दिव्या _हमे तो पूरा भरोशा है , तुम्हारी ताकत तो कबड्डी के खेल में सभी ने देखा है।

राजेश _पर, नक्सली, हाथ पैर नहीं बंदूक चलाते है।

बंदूक से कैसे बचा पाऊंगा।

रत्नावती _, राजेश, मै भैरव सिंह से कह दूंगी, वह हमारे सुरक्षा कर्मियों को बंदूक चलाना सिखाते है वह तुम्हे भी सीखा देंगे।

रत्नवती ने अपने नौकर को भैरव सिंह को बुलाने भेजा।

कुछ देर बाद भैरव सिंह आया।

भैरव सिंह _रानी मां आपने मुझे बुलाया।

रत्नवती _आओ भैरव सिंह।

हम चाहते है की राजेश को तुम अस्त्र शस्त्र चलाना सिखाओ।

भैरव _जो आज्ञा रानी मां।

भैरव _ राजेश बाबू चलो चलते है।

राजेश _ठीक है भैरव काका।

गीता _मां, मै भी जाऊं, मै भी कुछ सीख पाऊं।

रत्नवती _अच्छा ठीक है, भोजन के समय आ जाना दोनो।

दिव्या _अच्छा राजेश मै ड्यूटी पर जा रही हू।

राजेश _ठीक है दिव्या जी।

गीता और राजेश भैरव सिंह के साथ चला गया।

भैरव सिंह राजेश को बंदूक, पिस्तौल चलाना सिखाने लगा।

गीता देखने लगी। बंदूक कैसे चलाते है।

दोपहर हो जाने के बाद,,,

गीता _राजेश चलो, भोजन का समय हो चुका है, अब चलो हवेली चलते है। बाकी कल सीखना।

राजेश और गीता हवेली पहुंचे, रत्नवती, राजेश और गीता तीनो ने साथ में लंच किया।

रत्नवती _क्यो राजेश कैसा रहा तुम्हारा ट्रेनिंग,?

गीता _मां, राजेश ने तो एक ही दिन मे बहुत कुछ सीख लिया।

भैरव काका कह रहा था की इतना जल्दी आज तक कोई नहीं सीखा।

रत्नवती _ये तो बड़ी अच्छी बात है।

भोजन करने के बाद ,,

राजेश _अच्छा मां जी अब मुझे इजाजत दीजिए।

रत्नवती _ठीक है राजेश, कल फिर आ जाना सुबह ही।

राजेश _ठीक है मां जी।

राजेश अपना घर चला गया।

शाम को जब पदमा खेत से घर आई।

भुवन भी आ गया।

राजेश और भुवन घर के आंगन में बैठ कर चाय पी रहे थे।

पदमा _, राजेश बेटा तुमने बताया नहीं, दिव्या ने तुम्हे हवेली क्यों बुलाया था।

भुवन _, हा राजेश क्यों बुलाया था। तुम्हे हवेली।

राजेश _वे चाहते है की मैं गीता दीदी के दौरे मे जाने पर उसके साथ रहु। उसकी सुरक्षा के लिए।

भुवन _ठाकुर तो तुम्हे अपना दुश्मन समझता है, फिर वह अपनी बेटी की सुरक्षा के लिए कैसे रख सकता है कही उसकी कोई चाल तो नहीं।

पदमा _हा बेटा, भुवन ठीक कह रहा है।

राजेश _शक तो मुझे भी हो रहा है, इसमें ठाकुर की कोई चाल न हो। पर उसका हर चाल नाकामयाब होगा। दादा जी के मौत की सच्चाई जानने के लिए उनके करीब तो जाना ही पड़ेगा।

पदमा _पर बेटा इसमें तुम्हारे जान को खतरा हो सकता है।

राजेश _खतरा तो मोल लेना ही पड़ेगा ताई। तभी सच्चाई पता चल पाएगी।

इधर हवेली में रात्रि भोज के समय,,

ठाकुर _, राजेश तैयार huwa, गीता की सुरक्षा हेतु साथ रहने।

दिव्या _हा पिता जी, गीता दीदी जब भी बाहर जायेगी। राजेश भी साथ जायेगा, उसकी सुरक्षा के लिए।

अगले दिन राजेश सुबह हवेली पहुंचा। दिव्या, गीता और रत्ना वती तीनो नाश्ता किए। दिव्या ड्यूटी पर चली गई। राजेश भैरव सिंह के पास ट्रेइंग लेने।

कुछ ही दिनों में राजेश अस्त्र शस्त्र चलाने में निपुण हो गया।

शाम के समय,

मुनीम _हुजूर एक बुरी खबर है।

ठाकुर _, कैसी बुरी खबर?

मुनीम _हमारे आदमियों से पता चला है कि यहां का नक्सली कमांडर पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद

हमारे दुश्मन लाखन सिंह को यहां का कमांडर बना कर भेजा गया है।

ठाकुर _,,, मुनीम जी ये क्या कह रहे हो?

मुनीम _जी हुजूर ये सच्ची खबर है। पुराना कमांडर को तो हम पैसे भेजते थे इसलिए हमे कभी कोई नुकसान नहीं पहुंचाया।

लेकिन लाखन तो हमारा दुश्मन है। ये हमे जरुर नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा।

ठाकुर _शाला एक दुश्मन रास्ते से हटा नहीं दूसरा आ गया। कोई बात नहीं, आई जी से बात करेंगे, उस लाखन को निपटाने के लिए।

पहले इस राजेश को निपटा लेते हैं।

अगले दिन गीता को किसी उद्घाटन कार्यक्रम में जाना था।

गीता के साथ राजेश भी उसकी सुरक्षा के लिए गया।

वह गीता के साथ साए की तरह रहता।

रत्नावती और दिव्या भी गीता की सुरक्षा की चिंता से मुक्त हो गई ।

इधर ठाकुर राजेश को रास्ते से हटाने का प्लान बनाने लगा।

एक दिन जब गीता, राजेश के साथ आ रही थीं तो ठाकुर के आदमियों नक्सली भेष में रास्ते में घात लगाए, बैठे थे। जैसे ही जीप निर्धारित स्थान पर पहुंची।

रास्ते पर बड़े बड़े पत्थर रखे हुए थे।

जीप में गीता और राजेश के अलावा दो और लॉग जीप में बैठे थे।

राजेश सावधान हो गया।

गीता _राजेश,ये पत्थर किसने रखे होंगे।

राजेश _मुझे कुछ गड़बड़ लग रहा है।

राजेश ने पीछे बैठे अपने साथियों से पत्थर हटाने के लिए कहा।

जैसे ही वे पत्थर हटाने के लिए आगे आए। झाड़ी में छिपे हुए लोग निकल आए और उन दोनो को गोली मारकर ढेर कर दिया।

राजेश ने गन निकाल लिया। दोनो हाथो से गन चलाने लगा।

वह जीप से उतरा और गीता

नक्सली करीब 15लोग थे। वे जीप को घेरने आगे बढ़े।

राजेश ने गीता जीप में नीचे झुका दिया। और खुद जीप से कूद कर पीछे छुप गया।

फिर छुप कर एक एक कर सभी लोगों को ढेर कर दिया।

जब वे हवेली पहुंचे, गीता ने ठाकुर को इस बात की जानकारी दी।

मुनीम _हुजूर, हमारा प्लान तो नाकामयाब हो गया।

ये शाला राजेश हमारे सभी साथियों को मार डाला।

ठाकुर _कब तक बचेगा शाला।

रत्ना वती _बेटी तुम्हे कोई चोट तो नही आई।

गीता _नहीं मां। मै बिल्कुल ठीक हूं।

राजेश ने उन सभी नक्सलियों को ढेर कर दिया।

इधर पुलिस वालो ने भी उन हमला वरो, को नक्सली समझा।

और अखबारों में छापा गया कि मुठभेड़ में 15नक्सली मारे गए।

इधर जब नक्सली कमांडर लाखन को पता चला की, ये नकली नक्सली थे जो मारे गए।

उसने सपने साथियों को सच क्या है?पता लगाने के लिए कहा।

रात्रि में भोजन के समय _

रत्नावती _गीता बेटी, ये नकसली अपने साथियों की मौत का बदला लेने की कोशिश करेंगे।

तुम अभी कुछ दिनों तक हवेली में ही रहो।

दिव्या _हा दीदी, मां ठीक कह रही है।

गीता _पर मां, ये नक्सली मुझे क्यों मारना चाहते है, मुझसे इनकी क्या दुश्मनी होगी।

ठाकुर _लोगों में अपनी खौफ पैदा करने के लिए, ये लोग ऐसी हरकत करते हैं बेटी। उसके कमांडर अभी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया न इसलिए हो सकता है वे बदला लेना चाहते हो।

रत्नवती _पर पुलिस मुठभेड़ में मारा गया है तो उसका बदला मेरी बेटी से क्यों?

ठाकुर _ये नक्सली कुछ भी कर सकते हैं।

अगले दिन ठाकुर,,,

मुनीम से कहा,,,

मुनीम जी हमारा प्लान फैल नहीं huwa है?

मुनीम _वो कैसे हुजूर?

ठाकुर _पुलिस वाले समझेंगे की ये काम लाखन ने कराया, हम भी यही कहेंगे। इससे हम आई जी साहब पर दबाव बनाएंगे की लाखन को जल्दी खत्म कर दे।

दूसरा, हम राजेश को अकेले पाकर खत्म भी कर सकते हैं हम पर शक नही होगा।

क्यू की पुलिस वाले समझेंगे की राजेश ने नक्सलियों को मारा है इसलिए उसको मारकर अपने साथियों की मौत का बदला लिया है।

ठाकुर हसने लगा, ह ह ह,,,

कुछ दिन निकल गए,,,

माधूरी ने राजेश को फ़ोन किया,,

माधूरी _राजेश कहा हो?

राजेश _मै घर पर हूं मैम।

कुछ काम था क्या?

माधुरी _स्कूल आना फिर बताऊंगी।

राजेश _ठीक है मैम, मै अभी पहुंचता हूं।

राजेश कुछ देर में ही स्कूल पहुंचा।

माधूरी _आओ राजेश? बैठो।

राजेश _बोलो मैम कुछ काम था क्या?

माधूरी _राजेश, शिक्षा अधिकारी का फ़ोन आया था।

इस साल जिले में बेस्ट शिक्षक के लिए मेरे नाम चयन किया गया है। कलेक्टर महोदय के हाथो मुझे सम्मानित किया जाएगा।

राजेश _ये तो बड़ी खुशी की बात है मैम बधाई हो।

माधूरी _शिक्षा अधिकारी ने ये भी कहा है की शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर योगदान देने वाले युवा ओ को भी सम्मानित किया जाएगा, जिसके लिए तुम्हारे नाम का चयन किया गया है।

तो हमे धरमपुर जाना होगा।

राजेश _कब जाना है मैम।

माधूरी _तीन रोज बाद।

राजेश _ठीक है मैम,,,

तीन दिन बाद माधुरी ने राजेश को फ़ोन किया?

माधूरी _राजेश, तुम्हे पता है ना आज धरमपुर जाना है।

राजेश _हां मैम, मुझे याद है।

माधूरी _राजेश, मैं तुम्हारे साथ ही जाऊंगी।

वहा 12बजे तक पहुंचना है तुम 10बजे लक्ष्मण पुर में मेरे घर पहुंच जाना हम यही से निकलेंगे, साथ में।

राजेश _ठीक हैं मैम।

राजेश _10बजे के पहले लक्षमण पुर पहुंच गया।

उसने माधूरी मैडम से फ़ोन कर घर का एड्रेस पूछा।

माधूरी ने एड्रेस बताया।

राजेश माधूरी का घर पहुंचकर दरवाजा खटखटाया।

माधूरी ने दरवाजा खोला।

माधूरी _आओ राजेश मै तुम्हारा ही वेट कर रही थीं।

राजेश डाइंग रूम में जाकर बैठ गया।

माधूरी _क्या पियोगे चाय या काफी।

राजेश _रहने दीजिए न मैम हम उधर ही कही पी लेंगे।

माधूरी हसने लगी,,

माधूरी _अरे पहली बार घर आए हो, ऐसे ही कैसे चले जाने दू। मुझे अछा नहीं लगेगा।

मैं काफी बना देती हूं।

माधूरी किचन में जाकर काफी बनाने लगी।

राजेश की नजर ड्राइंग रूम के दीवार पर लगे फोटो पर गया।

माधूरी काफी लेकर आई।

माधूरी _, लो राजेश, कॉफी लो।

राजेश _मैम ये फोटो में कौन है?

माधूरी _ये मेरे पति और बेटी की फोटो है।

राजेश _,, वे दिखाई नहीं दे रहे है।

माधूरी _मेरे पति बैंक में क्लर्क है, थोड़ी देर पहले आते तो उनसे मुलाकात हो जाती। वह ड्यूटी पर चला गया।

अब घर में बेटी की देखभाल करने वाला कोई नहीं इसलिए उसे आवासीय विद्यालय में भर्ती करादिए हैं ।

राजेश_ओह।

माधूरी_अच्छा राजेश तुम थोड़ी देर रुको, मै तैयार होकर आती हूं फिर निकलेंगे ।

राजेश,_ठीक है मैम।,,,,
 
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