हवेली में ठाकुर और मुनीम,,,,
मुनीम _हुजुर, सुना है कल गीता और दिव्या बिटिया, ठकुराइन के साथ सुरज पुर गई थी। जन्मोत्सव कार्यक्रम में।
ठाकुर _राजेश ने दिव्या और ठकुराइन को आने के लिए आमंत्रण भेजा था। मैं उन्हे जाने से मना तो नही कर सकता था। बीबी पर तो हुकुम चला सकते है पर पड़ी लिखी बेटियो पार नहीं।
मुनीम _वो तो है, हुजुर,,,
हुजुर आप भी चले जाते,,
ठाकुर _मुनीम, क्या बक रहे हो,,,
मुनीम _माफ करना हुजूर,,,
सुना है सुनीता आई हुई है,,
आपके मन में तो सुनीता को लेकर अब भी कसक बची हुई है न,,
ठाकुर _क्या, सुनीता आई हुई है?
मुनीम _जी हुजुर किसी ने आपको बताया नही।
ठाकुर _उसे देखना चाहता हूं कैसी लगती है, शाली अब। जवानी में तो कयामत थी।
मुनीम _हुजुर, सुना है वे लोग कल सुबह ही ट्रेन से निकल जायेंगे। शहर के लिए।
ठाकुर _उससे मिलने का कोई जुगाड हो सकता है क्या?मुनीम
मुनीम _हुजुर आप चाहे तो क्या नही हो सकता।
ठाकुर_वो कैसे?
मुनीम _हुजुर, वे स्टेशन से गांव टाटा मैजिक से आए थे। हो सकता है, उसी गाड़ी से वे स्टेशन जाए।
ठाकुर _तो,,,
मुनीम _हुजुर, उस टाटा मैजिक वाले से कह देना की बीच में गाड़ी खड़ा कर दे, गाड़ी खराब होने का बहाना कर, आप पहुंच जाइए गा अपना जीप लेकर।
फिर मुलाकात कर लेना अपनी,,,,,
ह ह ह,,,
ठाकुर _मान गए मुनीम जी क्या दिमाक लगाया है?
अच्छा उस टाटा मैजिक वाले को पता लगा कौन है, उस से सेटिंग कर,,
मुनीम _जी हुजुर अपनी जासूसों से अभी पता करवाता हूं।
पर हुजूर सिर्फ देखकर ही मन बहला लेना, कोई उल्टी सीधी हरकत मत कर देना, नही तो उसका बेटा, पता नही क्या कर डालेगा? वैसे भी सामने चुनाव है।
ठाकुर _उस साले को तो मैं, पहले रास्ते से हटाऊंगा। उसके बाद सुनीता के साथ अपनी कसक पूरी करूंगा। अभी तो शराफत दिखानी पड़ेगी। ह ह ह ह,,,,,
इधर सविता ने मेहमानों के लिए विभिन्न प्रकार के व्यंजन बना रही थी। वह राजेश को भी फोन कर चेता दिया था की घर में सब के लिए भोजन बन रहा है यही आकर भोजन कर लेना। मैं ज्योति के लिए खाना भिजवा दूंगी।
सुनीता _अरी, सविता इतनी सारी व्यंजन क्यू बना रही हो। दाल रोटी सब्जी ही बना देती।
सविता _दीदी पहली बार तो आई है घर में,, कुछ स्पेशल तो बननी चाहिए न।
पूनम सविता की मदद कर रही थी।
उधर केशव और शेखर भी माधव के घर पहुंच गए।
तीनो भाई, एक कमरे में बैठ गए और उनका पीने खाना का प्रोग्राम चलने लगा।
कुछ देर बाद भुवन भी आ गया।
भुवन _चाची, राजेश नही दिख रहा वो नही आया क्या?
पदमा _अरे बेटा, ज्योति घर में अकेली हो जाती न इसलिए राजेश को रुकना पड़ा।
सविता _भुवन तुम एक काम करना, तुम अपने बापू और चाचा के साथ भोजन करने के बाद, ज्योति के लिए खाना ले जाना और राजेश को यहां भोजन के लिए भेज देना।
भुवन _ठीक है चाची।
वैसे बापू और चाचा लोग दिखाई नही दे रहे।
पदमा _अरे बेटा, तेरा बापू और चचा, कमरे में अपना प्रोग्राम कर रहे हैं ही ही ही ही,, पदमा और सुनीता हसने लगी।
कुछ देर बाद भोजन तैयार हो गया।
सविता _भुवन भोजन तैयार हो गया है जाओ अपने बापू और चचाओ को बुला लाओ भोजन करने।
भुवन _ठीक है चाची।
डाइनिग टेबल पर, शेखर केशव माधव और भुवन खाने के लिए बैठ गए, पदमा उन्हे भोजन परोसने लगी।
उनके भोजन कर लेने के बाद, सविता ने टिफिन डिब्बा में ज्योति के लिए खाना पैक कर दी।
सविता _भुवन मैने ज्योति के लिए खाना, पैक कर दिया है इसे ले जाओ और राजेश को भेज देना वह भी आकर भोजन कर लेगा।
भुवन _ठीक है चाची।
भुवन _चला गया।
सविता _दीदी रात हो चुकी है, चलो तुम लोग भी भोजन कर लो। राजेश आएगा तो वो कर लेगा।
पदमा _सविता ठीक कह रही है, घर जाने में ज्यादा रात हो जायेगी, हम भी भोजन कर लेते है। ये आरती और स्वीटी कहा चली गई है।
पूनम _मां जी दोनो कमरे में है मोबाइल में बिजी है।
पदमा _ये लडकिया भी न, बहु उन दोनो को बुला लाओ।
पूनम ने आरती, स्वीटी को बुला आई।
सभी खाने के लिए बैठ गए।
पूनम भोजन परोस रही थी।
सविता _अरे पूनम जाओ तुम भी भोजन कर लो।
सुनीता _अरे सविता, तुम भी साथ में बैठो न भोजन करने।
सविता _दीदी मैं राजेश के आने के बाद खा लूंगी, नही तो कहेगा। सारे लोग खा डाले तब मुझे खिला रहे है बचा खुचा,, ही ही ही,,,,
पूनम भी भोजन करने बैठ गई।
उधर भुवन घर पहुंचा,,
राजेश उस समय खाट में बैठ कर टीवी देख रहा था ज्योति, मुन्ने को गोद में लेकर कुर्सी में बैठ टीवी देख रही थी।
भुवन _लो दीदी, चाची ने आपके लिए खाना भेजा है। और हा राजेश तुमको चाची ने घर बुलाया है भोजन के लिए।
राजेश _भैया, तुमने भोजन कर लिया।
भुवन _हां, भोजन कुछ ज्यादा हो गया। डकार आने लगी है।
राजेश _चाची ने ज्यादा खिला दी क्या?
भुवन _अरे राजेश चाची ने बड़ी स्वादिष्ट व्यंजन बनाई है। खा कर मजा आ गया। पर कुछ ज्यादा ही खा लिया।
राजेश _ओह, लो खाट पे आराम करो।
भुवन खाट पे लेट गया।
राजेश _दीदी तुम भी भोजन कर लो।
ज्योति _राजेश, चाची ने तो बहुत सारा खाना भेज दिया है, ये तो दोनो के लिए पर्याप्त हो जायेगा। तुम भी यही करलो।
राजेश _दीदी, अगर मैं नही गया न तो चाची मुझसे नाराज हो जाएगी।
मुझे जाना पड़ेगा।
ज्योति _अच्छा ठीक है।
राजेश _अपने कमरे में जाकर, तैयार हो गया अपना बाइक लेकर सविता के घर के लिए निकल पड़ा।
जब वह घर पहुंचा, बांकी लोग भी खाना लगभग खा चुके थे।
पदमा _लो राजेश भी आ गया।
राजेश _क्या क्या बनाई है, चाची ने,
स्वीटी _भैया, चाची ने बड़ी स्वादिष्ट भोजन बनाई है, पुलाव, रोटी पूरी खीर, पकोड़े , पालक पनीर छोले, , और तुम्हारा फेवरेट भी?
राजेश _क्या?
स्वीटी _आमलेट।
राजेश _ओह।
पदमा _राजेश अब हम लोग के जाने के बाद, तुम और तुम्हारी चाची आराम खाना। रात काफी हो गई है, हम लोग निकलेंगे।
कुछ ही देर में सभी लोग भोजन कर लिए।
सुनीता _अच्छा सुनीता हम लोग चलते है, कल सुबह ही निकल जायेंगे, स्टेशन के लिए।
सविता _दीदी इतने दिनो बाद आई हो गांव और इतनी जल्दी जा रही हो कुछ दिन और रुक जाती।
सुनीता _सविता तुम्हे तो बताया था, बैंक वालो की मजबूरी, छुट्टी ही नही मिलती, काम का बोझ भी ज्यादा रहता है।
तुम लोग आओ किसी दिन राजधानी, मुझे अच्छा लगेगा।
सविता _दीदी मौका मिलेगा तो जरूर आयेंगे
। सभी लॉग वहा से बिदा लेकर निकल गए।
मेहमानों के जाने के बाद, माधव भी अपने बेड में जाकर आराम करने लगा।
इधर सविता कीचन में बर्तन धोने लगी,,,
राजेश कीचन में जाकर, उसे बाहों में भर लिया,,,
राजेश _ये क्या हमे भोजन पर बुलाकर काम करने लगी।
सविता _थोड़ा सब्र तो रखो, परोसने के लिए कुछ बर्तन तो धो लेने दे। नही तो बोलोge की जूठे बर्तन में ही परोस दिया।
राजेश _एक हाथ से सविता की पेट सहलाते और एक हाथ से चूची मसलते हुए कहा,, मुझे बड़ी भूख लगी है जल्दी करो।
सविता हसने लगी,,,,
सविता _सुन, खाना सिर्फ तुझे मिलेगा, तुम्हारे घोड़े को नही, जो मेरे पिछवाड़े घुसने की कोशिश कर रहा है।
राजेश _क्यू?
सविता _क्यू के मेरे आगे और पीछे दोनो का कबाड़ा कर रखा है। अभी भी ठीक से चल नही पा रही।
राजेश _ये तो निराशा जनक बात है।
मुंह में तो ले सकती हो।
सविता _सोचूंगी। चल अब जा कर बैठ जा, मैं आती हूं।
राजेश डाइनिंग टेबल पर बैठ गया।
सविता कीचन से आई और प्लेट लगा दी।
राजेश _अरे चाची एक ही प्लेट लगाई हो।
सविता _तुम खा लो फिर मैं खाऊंगी।
राजेश _न, दोनो साथ में खायेंगे। एक ही प्लेट में,,
सविता _छी ये कैसी बाते कर रहे हो।
राजेश _नही तो मैं भोजन नही करूंगा।
सविता _तू बड़ा जिद्दी है, हमेशा अपने मन का करता है।
सविता ने प्लेट में विभिन्न प्रकार के व्यंजन परोसी।
राजेश _चाची आओ बैठो,,
सविता _कहा,,
राजेश _मेरी गोद में,,
सविता _छी पागल हो गया है क्या? तुम्हारे चाचा जी आ गए तो।
राजेश _उसका तो नाक बजने लगा है!
सविता _पर मुझे शर्म आएगी।
राजेश _लो सब कुछ तो हो चुकने के बाद भी शर्म बची है।
सविता _तो क्या बेशर्म बन जाऊ।
राजेश_न, शर्म तो औरत की गहना है, चलो शरमाओ मत आके बैठ जाओ।
सविता _तुम मानोगे नही,,
सविता, अपनी कुर्सी से उठी और राजेश के गोद में बैठ गई।
राजेश _ये हुई न बात,, अब मजा आयेगा भोजन करने में।
राजेश_अपने हाथ में भोजन लेकर आधा स्वयं खाता आधा सविता को खिलाता फिर उसका ओंठ चूसने लगता।
कभी चूची पीने लगता दोनो को भोजन करने में बड़ा मज़ा आ रहा था।
कभी राजेश खिलाता तो कभी सविता।
भोजन कर लेने के बाद राजेश का लंद तो अकड़ चुका था।
जाने से पहले सविता ने राजेश का लंदआधे घंटे तक चूसा। उसका लंद फूलकर खूब लंबा और मोटा हो गया।
राजेश _चाची अब चलता हूं।
सविता _अरे यही सो जा, वहा तो जगह नही होगा। सोने के लिए।
राजेश _चाची सुबह मां पापा को स्टेशन छोड़ने जाना है, यहां रुका तो, सुबह जल्दी उठ नही पाऊंगा।
सविता _अच्छा ठीक है।
राजेश वहा से चला गया।
जब वह घर पहुंचा तो सभी लोग सो चुके थे।
भगत खेत जा चुका था।
पूनम ने दरवाजा खोली।
पूनम _आ गया, बड़ी देर लगा दी आने में। मैं तो सोच रही थी, वही तो नही सो गया।
राजेश _चाची तो बोल रही थी, वहीं सो जाने, पर,,
पूनम _पर क्या?
राजेश ने पुनम को बाहों में भर लिया,,
तेरी याद जो आ रही थी,,,
पूनम _हाय दैया तेरा तो खड़ा है re,,,
राजेश _ज्योति दीदी ने तुम्हे कुछ नही बोली,,,
पूनम _बोली न, राजेश आएगा तो उसे बरामदे पे लगा खाट पे सुला कर कंबल ओढ़ा देना।
राजेश _बस इतना ही बोली,,,
पूनम _हा,,,
राजेश, मुंह लटका कर बरामदे में आया और खाट पे लेट गया।
पूनम _क्या huwa देवर जी।
निराश लग रहे हो।
राजेश _कुछ नही जाओ और अपने कमरे में जाकर सो जाओ।
पूनम _दीदी कुछ और बोली है? शर्माते हुवे बोली।
राजेश _क्या?
पूनम _बोली है की राजेश को आज तुम्हारी जरूरत है। तुम उसका ख्याल रखना।
बताओ कैसे ख्याल रखूं तुम्हारा।
राजेश _मेरे घोड़े को बड़ी प्यास लगी है उसे अपनी कुआ का पानी पिलाओ।
पूनम _तुम घर के पीछे चलो मैं आती हूं, जितना चाहे अपनी घोड़े को पानी पिला लेना।
राजेश घर के पीछे चला गया। कुछ देर में लाल टेन, चटाई तकिया लेकर पूनम घर के पीछे पहुंची।
झोपड़े में पैरा फैलाकर चटाई बिछाकर तकिया लगा दी।
राजेश लेट गया।
पूनम _लंद चूसना शुरू कर दी।
फिर राजेश के लंद पर बैठ गई और उसके घोड़े को अपनी boor की पानी पिलाना शुरू कर दी।
इधर आज पदमा को भी नींद नहीं आ रही थी क्यों की आज उसने राजेश को चुदने के लिए कहा था। शाम से ही उसकी boor गीली थी।
उसने देखा उसका पति नींद में खर्राटे भर रहा है।
वह पलंग से उठी और दबे पाव कमरे से बाहर निकल आई।
उसे पता था की आज राजेश बरामदे में ही सोएगा।
वह बरामदे में पहुंचा, उसने देखा राजेश खाट में नही है, उसने सोचा, राजेश कही सविता के घर ही तो नही सो गया।
कमबख्त कही का,, मेरी खुजली बड़ा कर, वही सो गया। अब क्या कर सकती हूं। लगता है उंगली से ही खुजली मिटाना पड़ेगा।
वो अपने कमरे में जाने ही वाली थी की, पूनम के कमरे से बच्चे की रोने की आवाज आई।
पदमा _अरे मुन्ना रो रहा है, बहु उसे चुप क्यों नही करा रही, इतनी गहरी नींद में सोई हुई है,,
वह पुनम को उठाने उसके दरवाजे को धकेली तो दरवाजा खुल गया।
अरे दरवाजा तो खुला है, ये पूनम कहा गई। वह बच्चे को गोद में लेकर चुप कराने लगी।
लगता है मुन्ने को भूख लगी है।
पदमा _पता नही ये कलमुही कहा चली गई। तभी उसका माथा ठनका, राजेश भी खाट में नही है और पुनम भी नहीं, कही दोनो घर के पीछे तो नही गए है।
वह बच्चे को गोद में लेकर घर के पीछे गई।
पीछे जाने का दरवाजा तो बंद था, सकल लगा था जो पीछे हाथ डालकर निकाला जा सकता था।
वह हाथ डालकर सकल खोली फिर घर के पीछे गई।
उसने देखा पुनम चीख चिल्ला रही थी राजेश उसे घोड़ी बना कर चोद रहा था।
पदमा _अरे कलमुही, तेरा बच्चा रो रहा है यहां आने से पहले इसे पेट भर दूध पिला कर सुला तो देती। कोई उठ जाता तो।
राजेश _ओह ताई तुम,,, राजेश ने चोदना जारी रखा।
पदमा _अरे छोरा तूने तो दोपहर में मुझे गर्म किया था और कहा था मेरी लेगा, तू इस चुड़ककड़ को घर के पीछे ले आया।
राजेश _ताई, मुझे लगा तुम सो गई हो, अब तुम्हारे कमरे में तो नही जा सकता था न आपको उठाने। तू चिंता मत कर, आ जा तू भी तेरा भी प्यास बुझा देता हूं।
पदमा _अब चुदाती ही रहेगी की बच्चे को दूध भी पिलाएगी।
पूनम _मां जी थोड़ी देर पकड़ी रहो न मैं झड़ने वाली हूं,, आई मां आह उन ई,,,
राजेश तेज तेज ठोकने लगा,,,
पूनम, खुद को रोक न सकी और झड़ने लगी।
कुछ देर सुस्ताने के बाद,,
पूनम _दो मां जी बच्चे को, उसे दूध पिला देती हूं।
राजेश ने पूनम की chut से लंद बाहर निकाल लिया।
पदमा ने मुन्ने को पूनम को दे दिया। पूनम बैठ कर दूध पिलाने लगी।
इधर राजेश का लंद झटके मार रहा था।
राजेश _अब देख क्या रही है।
चल घोड़ी बन जा।
पदमा घोड़ी बन गई।
राजेश ने उसका पेटी कोट साड़ी ऊपर चढ़ा दिया।
अपना लंद उसकी boor में सेट कर एक जोर का धक्का मारा लंद boor को चीरकर फच की आवाज करता huwa,एक ही बार में अंदर घुस गया।
पदमा चीख उठी,,
राजेश ने पदमा को ठोकना शुरू कर दिया।
झोपड़ी में पदमा की सिसकारी गूंजने लगी।
इधर सुनीता भी सोई नही थी। कल वह घर चली जायेगी। राजेश ने शाम को कहा था की आज रात उसकी लेगा।
शेखर नींद में खर्राटे भर रहा था। सुनीता कमरे से बाहर आई,,,
सुनीता ने देखा की खाट तो खाली है,
सुनीता _लगता है राजेश, अपने चाची के यहां ही सो गया। उसे निराशा हुई।
वह वापस अपने कमरे में जाने को मुड़ी,,
तभी वह रुक गई,,
अब उठी हूं तो पेशाब कर लेती हूं।
रात में घर की महिलाए आंगन के मोरी में ही पेशाब कर लेती थी। रात में पीछे जाने के बजाए।
सुनीता ने भी मोरी पे मूतने की सोंची,, पर
सुनीता _कही जेठ जी उठ गए तो मैं मुंह नही दिखा पाऊंगी,,,
वह घर के पीछे जाने की ठानी।
वह घर के पीछे गई दरवाजा खुला था, जब पीछे गई तो उसे सिसकारी सुनाई दी।
वह झोपड़े की ओर गई जिधर से आवाज आ रही थी।
झोपड़े के अंदर का दृश्य देख कर दंग रह गई,,,
राजेश पूनम की गोद में सिर रख कर उसका दूध पी रहा था। और पदमा राजेश के लंद पर उछल उछल कर chud रही थी।
उसका बच्चा चटाई पर सोया हुआ था।
सुनीता _ये सब क्या हो रहा है?
तीनो चौंक गए,,,
पदमा लंद पर उछलना बंद कर दी। और उसके लंद से उठ गई।
पदमा _सुनीता तुम यहा।
सुनीता _मुझे तो अपनी आंखो पर विश्वास नहीं हो रहा है। दीदी आप ऐसी हरकत करेंगी।
पूनम और पदमा शर्म से गड़ी जा रही थी।
राजेश भी उठ कर बैठ गया।
राजेश _मां आप यहां,,
सुनीता _अच्छा तो तुम यहां गांव में रंगरेलिया मानने आया है।
तीनो खामोश थे।
कुछ देर बाद,,
पदमा _सुनीता,, तुम यह बात किसी को मत बताना, मैं तुम्हारी पैर पकड़ती हूं, नही तो हम किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे।
सुनीता _दीदी, इतना सब होने के बाद अब बचा ही क्या है मुंह दिखाने लायक,,,
जेठ जी और भुवन को पता चलेगा तो , उनके पीठ पीछे तुम दोनो क्या गुल खिला रही हो।
आखिर ये सब शुरू huwa कैसे?
पदमा _सुनीता अब तुम्हे क्या बताऊं, एक दिन मुझे और राजेश को भारी बारिश के कारण खेत में ही रुकना पड़ गया,,, पदमा ने पूरी कहानी बता दी की किस तरह राजेश और उसके बीच संबंध बन गए।
सुनीता _और पूनम तुम, तुम्हारा पति तो अभी जवान है, फिर भी राजेश के साथ ये सब,,,
पूनम _चाची अब तुम्हे क्या बताऊं? वो तो खेत में मुजदूरो को चोद चोद कर अपनी प्यास बुझाता है। और मैं घर में प्यासी रहती हूं।
ऐसे में मैं और राजेश करीब आ गए।
सुनीता _मतलब अगर तुम्हारा पति, तुम दोनो का प्यास नही बुझाता तो पराया मर्द से chudo ge
पदमा _सुनीता ये कैसी बाते कर रही हो, हम रण्डी नही है जो किसी से भी chud जाय।
हमे भी अपने घर सम्मान का ख्याल है। मैं कसम खा रही हूं घर के बाहर किसी पराए मर्द के बारे में कभी हमने सोचा ही नहीं है। वो तो राजेश अपने घर का है।
सुनीता _मेरे भी पति मेरी प्यास नही बुझा पाते तो क्या मैं भी अपने बेटे के साथ सो जाऊं, जैसे तुम लोग कर रही हो,,, मैं इतनी गिरी हुई नही हूं।
पदमा _क्या देवर जी तुम्हारी प्यास नही बुझाते।
तब तो तू भी तड़फती होगी हम लोगो की तरह,,,
अरे सुनीता राजेश तो कामदेव है कामदेव, इसके रहते तू प्यासी तडफती है, तुम्हे तो कब की chud जाना था राजेश से।
घर में घोड़ा है है तड़फ तड़फ के जी रही हो,,
एक बार तुम भी राजेश से करवा कर देखो, ऐसा मजा देता है की जिसकी कल्पना भी तुमने कभी नही की होगी।
एक बार जो इसके लंद से chud जाती है न उसका गुलाम बन जाती है।
सुनीता _दीदी ये तुम क्या कह रही हो मुझे अपने ही बेटे से चुदने के लिए बोल रही हो।
पदमा _माना राजेश तुम्हारा बेटा है, पर एक मर्द भी है। और बेटा होने के नाते इसका फर्ज भी है। अपनी मां की प्यास बुझाए।
घर में ही घोड़ा हो तो औरत बाहर बदनाम होने क्यू जाए।
एक बार कर लो अपने बेटे से, उसकी दीवानी न हुई तो कहना।
राजेश बेटा क्या तुम्हे यह जानकर अच्छा लगेगा की तुम्हारी मां रात भर प्यार के तड़फटी रहे।
राजेश _नही ताई, मैं तो यही चाहूंगा कि मां हमेशा खुश रहे। उसे हर खुशी मिले।
पदमा _तो तुम अपनी मां की खुशी के लिए उसके साथ सो सकते हो।
राजेश _अगर मां चाहे तो, मैं तैयार हू।
पदमा _लो, अब तो राजेश भी तैयार हो गया है। अब तो तू भी रात रात भर तड़फना छोड़, बेटे को अपना ले।
सुनीता _पर दीदी किसी को पता चल गया तो क्या होगा?
पदमा _अरे कैसे किसी को पता चलेगा।
हम भी तो राजेश से chud रहे है।
हम सब यह राज अपने तक ही सीमित रखेंगे।
अब आ जाओ, अपनी जवानी की प्यास बुझा लो।
पदमा ने राजेश का लंद पकड़ कर चूसना शुरू कर दिया।
पदमा _पूनम देख क्या रही है, जा अपनी चाची को गर्म कर।
पूनम उठी और सुनीता की हाथ पकड़ कर उसे चटाई तक ले आई। फिर सुनीता को चटाई में लिटा कर उसकी चड्डी उतार दी और boor चाटने लगी।
इधर राजेश ने पदमा को घोड़ी बना कर ठोकना शुरू कर दिया।
पदमा के मुंह से कामुक सिसकारी निकलने लगी, आह उन आई ई, आह माई,,,
पदमा को राजेश तब तक ठोकता रहा जब तक वह झड़ न गई।
पदमा के झड़ने के बाद,,
पूनम _राजेश, अब डाल दो चाची की boor में खुब पानी छोड़ रही है।
राजेश, सुनीता के टांगो के बीच आ गया, पूनम ने उसके कूल्हे के नीचे तकिया लगा दिया।
रपूनम ने राजेश का लंद अपने हाथो से पकड़ कर सुनीता की योनि में रख दिया।
राजेश ने एक जोर का धक्का मारा। लंद boor को चीर कर पूरा अंदर चला गया।
सुनीताके मुंह से, आह मां,,,
राजेश सुनीता की चूची को हाथ से पकड़ कर मसलते हुए लंद को योनि में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।
पूनम राजेश के कूल्हे पे अपने हाथो से धक्का देने लगा।
सुनीता, जन्नत की सैर करने लगी, कुछ देर बाद राजेश ने सुनीता को घोड़ी बना दिया और दना दन चोदने लगा।
झोपड़ी में सुनीता की कामुक सिसकारी आह उन आह, मां, चूड़ियों की खनक खन खन,,, फच फच गच गच की आवाज गूंजने लगा।
पदमा _क्यू re मजा आ रहा है अपनी मां को चोदने में।
राजेश _हा ताई बहुत मजा आ रहा है।
पदमा _, तू किस्मत वाला है जो मां चोदने को मिल रहा है। बहुत कम लोगो को ऐसा नसीब मिलता है।
क्यू सुनीता, कैसा लग रहा है अपने बेटे से चुदने में,,
सुनीता शर्म से पानी पानी होने लगी,, उसके मुंह से आह उन निकल रही थी।
पदमा _तेरी सिसकारी बता रही हैं की तुम्हे भी खूब मजा आ रहा है।
सुनीता _दीदी तुम भी अपने बेटे से क्यू नही chudwa लेती।
पदमा _उस मुवे को, मजदूरों से फुर्सत मिले तब तो, वैसे भी राजेश के लंद से chud जाने के बाद किसी दूसरे से चुदने का मन नही करता, पूरा अंदर तक गदर मचा देता है इसका घोड़े जैसा लंद।
राजेश बारी बारी तीनो औरतों को करीब दो घंटे ठोकता है, उन तीनो की सारी प्यास बुझा देता है। अंत में सुनीता की योनि में अपना वीर्य छोड़ देता है।
को वीर्य योनि से बाहर निकलता है उस पदमा और पूनम चांट लेती है।
चारो थक चुके होते है, वे सुस्ताने लगते है।
सुनीता _दीदी, अब समझ आया की तुम इतनी सजती संवरती क्यू हो पहले तो इतनी सजती संवरती नही थी। कमर मटका मटका कर भी चलती हो।
पदमा _रेजर को अपनी और आकर्षित करने के लिए सब करना पड़ता है, सुनीता।
तुम भी तो इस उम्र में पहले जैसी ही खूबसूरत, और जवान हो। कही ठाकुर तुम्हे देख लेगा तो फिर से पीछा न पड़ जाए।
सुनीता _अब तो मेरा बेटा है उसे सबक सिखाने के लिए।
उसमे दम है तो मुझे हाथ लगाकर दिखाए।
पदमा _चलो अब सभी अपने अपने कमरे में जाकर सो जाओ, कोई और यहां आ गया तो अनर्थ हो जायेगा।
सब्जी अपने अपने कपड़े पहन कर, अपने अपने कमरे में जाकर, सो जाते है।
राजेश भी अपने खाट पर जाकर सो जाता है।
सुबह, सुनीता राजेस को उठाती है।
सुनीता _अरे बेटा और कितना देर तक सोएगा। चल उठ जा हमे स्टेशन छोड़ने जाना है की नही।
राजेश की नींद खुल जाता है,,
राजेश _ओह, मां क्या टाइम huwa है।
सुनीता _हूं, 7बज चुका है। 9बजे की ट्रैन है।
राजेश खाट से उठ जाता है।
शेखर स्वीटी और सुनीता नहा चुके होते है, जाने की तैयारी कर रहे होते है।
राजेश भी उठता है और नहाने चला जाता है। पदमा और पुनम नाश्ता बना रही होती है।
पदमा _सुनीता, चलो तुम लोग नाश्ता कर लो, समय पर स्टेशन जो पहुंचनी है।
कुछ देर बाद भुवन भी खेत से आ गया।
इधर राजेश नहाकर आ गया।
राजेश _अरे भुवन भैया आटो वाले को काल कर दिए हो ना। आने के लिए।
भुवन _हा राजेश जिस टाटा मैजिक से आए थे उसी को आने के लिए कह दिया हूं वह कुछ देर में पहुंच जाएगा।
राजेश _ठीक किया आपने।
सुनीता, शेखर और स्वीटी तीनो नाश्ता करने लगे।
नाश्ता करते तक, टाटा मैजिक वाला भी पहुंच गया।
भुवन _लो भई गाड़ी भी आ गई।
शेखर _भुवन बेटा सारा बैग गाड़ी में रख दो।
भुवन _ठीक है चाचा।
शेखर _राजेश बेटा कहा रह गया जल्दी करो।
राजेश कमरे से बोला _पापा अभी आया।
राजेश कपड़ा पहन कर तैयार हो गया।
सुनीता _अच्छा दीदी अब हम चलते है। आप लोग भी आइए गा हमारे यहां मुझे अच्छा लगेगा।
पदमा _जरूर आयेंगे सुनीता, तुम लोग अपना ख्याल रखना।
सभी लोग एक दूसरे से गले मिल कर विदा ले रहे थे। सबकी आंखे भर आए थे।
तीनो टाटा मैजिक से स्टेशन के लिए निकल गए।
राजेश पीछे पीछे अपने बाइक से जाने लगा।
भानपुर से आगे निकलने के बाद, आधे रास्ते में वाहन रुक गया।
ड्राइवर ने गाड़ी आगे बढ़ाने की कोशिश किया पर गाड़ी स्टार्ट नही huwa।
राजेश _क्या बात है ड्राइवर काका गाड़ी क्योंरुक गई।
ड्राइवर _पता नही बाबू, लगता है इंजन में कुछ खराबी आ गई है।
शेखर _ओ हो, राजेश बेटा अगर हम समय पर स्टेशन नही पहुंचे तो, ट्रैन छूट जायेगी।
राजेश _पापा इधर तो कोई दूसरा वाहन मिलना मुस्किल लगता है।
सुनीता _ड्राइवर भैया कोशिश करो, शायद गाड़ी स्टार्ट हो जाए।
ड्राइवर _कोशिश कर रहा हूं भाभी जी,,, पर पता नही क्या दिक्कत आ गई है।
तभी वहा ठाकुर अपने जीप से आया,,
राजेश _एक जीप आ रही है उससे मदद मांगते है।
पा ये तो ठाकुर की गाड़ी लग रही है,,,
सुनीता _बेटा उस कलमुहे से मदद मत मांगना।
भले ट्रैन छूट जाए।
शेखर _हा राजेश तुम्हारी मां ठीक कह रही है।
राजेश _ठीक है पापा।
ठाकुर की गाड़ी वहा पहुंची,,
ठाकुर _ड्राइवर गाड़ी रोको,,,
ड्राइवर जीप रोक दिया,,
ठाकुर _अरे राजेश, क्या बात है,? इस तरह रोड में,, कोई समस्या है क्या?
राजेश _कुछ नही, ठाकुर साहब हम स्टेशन जा रहे थे की, रास्ते में गाड़ी खराब हो गया।
ठाकुर _अरे मैं भी लक्ष्मण पुर ही जा रहा हूं अपना पार्टी कार्यालय।
अपनी मां पापा को जीप में बिठा दो उन्हे स्टेशन छोड़ दूंगा।
सुनीता _नही, हमे नही बैठना है किसी के गाड़ी में,,, आप चले जाइए।
ठाकुर _भाभी, जी मैने आपके साथ जो पहले हरकत किया था उसके लिए आज भी बहुत शर्मिंदा हूं। मुझे माफ कर दीजिए। अब मैं बदल गया हूं।
राजेश और दिव्या तो अच्छे दोस्त है।
आप लोगो को ऐसी मुसीबत में छोड़कर जाना अच्छा नही लग रहा है। राजेश ने अपनी जान की बाजी लगाकर मेरी बेटी का जान बचाया है कृपया मुझे भी उस अहसान का बदला चुकाने का मौका तो दीजिए।
रसुनीता _नही मुझे आपकी गाड़ी में नही बैठनी है।
ठाकुर _राजेश बेटा, आप ही समझाओ अपनी मां को,,
रराजेश _मां बैठ जाओ,,,
सुनीता _पर बेटा,,,
राजेश के कहने पर सुनीता तैयार हो गई।
शेखर, सुनीता, और स्वीटी, जीप में बैठ गई।
ठाकुर _ड्राइवर गाड़ी को स्टेशन ले चलो।
ड्राइवर _जी हुकुम।
ड्राइवर जीप को स्टार्ट किया।
राजेश उसके पीछे पीछे जाने लगा।
कुछ देर में गाड़ी स्टेशन पहुंच गया।
तीनो गाड़ी से उतर गए।
राजेश _शुक्रिया ठाकुर साहब।
ठाकुर _इसमें शुक्रिया कैसी राजेश, तुमने भी तो हम पर अहसान किया है।
भाभी जी मैं अपने किए पर आज भी बहुत शर्मिंदा हूं। हो सके तो मुझे माफ कर दीजिएगा, अब मै चलता हूं।
वहा से जाने के बाद,,,
ठाकुर _साली आज भी कमाल की लगती है, इसके नखरे अभी तक वैसे ही है, इससे मिलने के बाद तो इसको पाने की कसक और बड़ गई।
पहले राजेश को ठिकाने लगा दू, फिर तुम्हे अपना बनाकर, अपनी कसक पूरा करूंगा, हा हा हा,,,,
टाटा मैजिक खराब होना ये मुनीम का प्लान था जो कामयाब हो गया।
इधर,,,
सुनीता _बेटा, उस कलमूहे की गाड़ी में बैठने के लिए क्यू बोले सब कुछ जानते हुए भी,,
राजेश _मां, मुक्का मारने के लिए, गुंडे के करीब जाना पढ़ता है।
सुनीता _कही गाड़ी लिफ्ट देने में उसकी कोई चाल न हो।
राजेश _उसकी कोई चाल होगा भी तो, वो कुछ बिगाड़ नही पाएगा, मां तुम चिंता मत करो।
शेखर स्वीटी और सुनीता तीनो ट्रेन में बैठ गए।
राजेश ने अपने मां पापा का पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
सुनीता _बेटा अपना ख्याल रखना। उस ठाकुर से बच के रहना।
राजेश _मांआप लोग मेरी चिंता न करें। मुझे कुछ नहीं होगा।
ट्रैन छूट गई।
राजेश घर लौट आया।
इधर लंदन में निशा सीमा और आर्यन कालेज के कैंटीन में बैठकर काफी पी रहे थे।
निशा _सीमा, मुझे लगता है की पढ़ाई के साथ हमे बिजनेस भी शुरू कर देना चाहिए। फूफा जी से बिजनेस के बारे में हमे अनुभव भी मिल गया है।
सीमा _लेकिन स्टार्ट अप के लिए नई आइडिया भी तो होनी चाहिए, तुमने कुछ सोचा है। कुछ नया।
निशा _अब तक तो नही।
आर्यन _आने वाले सन्डे को साइंस कालेज में, नए वैज्ञानिकों का सेमिनार होने वाला है जिसमे विज्ञानिक अपने नवाचार के बारे में बताएंगे।
अगर कोई आइडिया हमे पसंद आ गया तो हम उस उस आइडिया को अपने लिए पेटेंट करा लेंगे।
निशा _हां ये ठीक रहेगा।
आर्यन _निशा जी, शहर के मूवी थियेटर में नई हिंदी मूवी लगी है। चलो आज शाम को देखने चलते हैं।
सीमा _हा निशा, चलो न चलते है मूवी देखने।
निशा _नही सीमा, मेरा मूवी देखने में रुचि नही है।
सीमा _यार हम दोनों का मन रखने के लिए चलो कम से कम, अब तुम्हारे बिना तो हम मूवी देखने जा नही सकते।
निशा _तुम लोगो का इतना मन है, तो ठीक है।
आर्यन और सीमा खुश हो गए।
सीमा _ये हुई न बात,,,
शाम को निर्धारित समय में, निशा और सीमा दोनो तैयार हो गए। निशा का मन तो नही कर रहा था पर सीमा और आर्यन का मन रखने, जाने राजी हुई थी। आर्यन अपने कार लेकर निशा की बुवा के घर पहुंच गया।
तीनो कार से थियेटर पहुंचे।
थामा मूवी लगी हुई थी।
आर्यन और सीमा मूवी को खूब इंजॉय किया।
निशा मूवी देखकर भावुक हो गई।
मूवी देखकर वे घर पहुंचे खाना खा कर वे अपने कमरे में सोने लगे।
सीमा _निशा क्या बात है जब से मूवी देखी हो, चुप सी हो।
दरसल निशा की कानो में उस मूवी का वही धुन बज रहा था।
दिलबर की आंखो का इजहार न किया।
क्या खाक वो जिया जिसने प्यार न किया
प्यार सच्चा अगर चाहिए।
तो दुआ में असर चाहिए।
इश्क huwa पर खुलके इजहार न किया।
क्या खाक वो जिया जिसने प्यार न किया।
यह धुन उसकी कानो में अब भी गूंज रही थी।
सीमा _तुम खामोश क्यू हो, कुछ बोलती क्यों नहीं। अपना चेहरा क्यू छुपा रही,मेरी तरफ देखो।
सीमा ने निशा का सिर पकड़ कर अपने तरफ घुमाया।
सीमा _निशा तुम्हारी आंखों में आंसू।
निशा, सीमा से लिपट कर रोने लगी,,,
निशा _सीमा, मेरी दुवाओ में, असर नहीं था।
मुझे सच्चा प्यार नही मिला,,,
सीमा _निशा तुम राज को याद कर रही हो,,,
हे भगवान पता नही इसका क्या होगा एक तरफ तो राज का सकल भी देखना नही चाहती दूसरी तरफ उसे भुल भी नहीं पा रही,,,,,