Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 107 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २८१

दोनोके पास सामान ही बहुत कम था.. तो सब पेकींग होगइ.. फीर खाना आगया तो दोनोने खाना खालीया.. ओर खानेके बाद सायराने कीचनका काम नीपटा लीया.. फीर फ्लेटका मेइन गेइट अच्छेसे लोक करलीया ओर दोनो कादीर वाले कमरेमे चले गये.. सायराने रुमका दरवाजा भी बंध करलीया क्युकी उसे पता था.. की अब साहील उसे छोडने वाला नही हे.. ओर वो खुद भीतो वोही चाहती थी.... अब आगे

साहील : (मुस्कुराते) अरे मेइन डोरतो लोक करदीया हे.. इसे क्यु बंध कर रही हे..?

सायरा : (सरमाते धीरेसे) करने दो.. मे कोइ रीस्क लेना नही चाहती.. अगर बहार खीडकीसे कीसीने देख लीया तो..? वैसे दीनमे खीडकी बंध करनेसे कीसीको सक हो सकता हे..

दोनो दोपहोर अ‍ेक बजे रुममे घुस गये.. कुछ देर दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे लेटे होठोका रसपान करते रहे.. फीर जो चुदाइका दौर चला जो कभी ना थमने वाला लग रहा था.. साहीलने बीना नीचे उतरे लगातार सायराको दो बार चोद लीया..





फीर कुछ देर बाद दोनो आमने सामने अ‍ेक दुसरेकी कमरपे पैर फैलाके बैठ गये.. ओर बैठे बैठे ही चुदाइ करने लगे.. ओर हर बार साहील अपने ढेर सारे गाढे पानीसे सायराकी चुतको भरता रहा.. फीर दोनो बाथरुममे अ‍ेक साथ नहाने घुस गये.. तो यहा भी साहीलने सायराको खडे खडे चोद लीया..





जैसे दोनो अपना हनीमुन मना रहे हो.. साम साडे पांच बजे रुमका दरवाजा खुला.. देर साम कादीरका फोन आने वाला था तो आज दोनो बहार घुमने नही गये.. साहीलने पीजा ओर्डर कर दीया.. तो बीस मीनीटके बाद पीजा आगये.. दोनोने साथ मीलकर खाया..





फीर बहार होलमे ही दोनो प्यार करते फीरसे बहेक गये.. ओर साहीलने सोफे पेही सायराकी जबर दस्त चुदाइ करली.. आज दीनमे साहीलने सायराको पुरी तराह नीचोड ली.. इतना तो कभी रातमे भी कादीरसे नही चुदी थी.. फीर सायरा रातका खाना बनाने लगी.. तभी कादीरका फोन आगया..

तो सायरा मुस्कुराते साहीलको फोन दीखाते रुममे चली गइ.. ओर रुमका दरवाजा बंध करलीया.. वहा दोनोने फोन सेक्स कीया.. सायरा तो साहीलसे ही संतुस्ट हो चुकी थी.. लेकीन कादीरके सामने अ‍ैसा नाटक कीया जैसे वो सचमे कादीरको मीस कर रही हो..

फीर कादीरने काम फायनल होनेकी खुस खबर सुनाइ तो सायरा बहुत ही खुस हो गइ.. इस रात खानेके बाद फीरसे प्यारका सैलाब उमड पडा.. काम खतम होते ही दोनो फीरसे रुममे घुस गये.. फीर तो चुदाइका तुफान भवंडर बनके बेडपे तबाही मचा रहा था.. देर रात तीन बजे तक साहील सायराकी चुदाइ करता रहा..





ओर आखीर दोनो बाथरुम मे नहाने चले गये तो यहा भी खडे खडे सायराकी फीरसे कुटाइ हो गइ.. सायरा थकके चकना चुर हो चुकी थी.. ओर लंगडाते चल रही थी.. अ‍ैसे चल रही थी जैसे पहेली बार कादीरने उनका सील भंग कीया था.. फीर दोनो ही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे नंगे लेट गये.. तभी..





सायरा : (मुस्कुराते) भाइ.. आज तो तुमने मेरी सारी कशर मीटादी.. मेरी चुतका कचुम्बर बना दीया.. देखो.. कैसे अभी भी खुली चुत फडफडा रही हे..

साहील : (सामने देखते धीरेसे) भाभी.. अगर ये चौडी होगइ हे तो कादीर भाइको पता चल गया तो..? वो आपपे सक तो नही करेगा..?

सायरा : (मुस्कुराते) तु उसकी टेन्शन मत ले.. मेरे पास अ‍ेक इम्पोर्टन्ट ट्युब हे.. मे उसे हर सुबह नहानेके बाद लगाती हु.. इनसे चुत फीरसे कस जाती हे.. इस बारेमे कादीर भाइको भी नही पता.. इसीलीये तो हम दोनो इतने सालोसे मजा ले रहे हे.. भाइको आज भी अ‍ेक कुआरी जैसी चुतका मजा देती हु..

साहील : (मुस्कुराते) क्या..? सचमे अ‍ैसी क्रीम आती हे..? मुजे भी चाहीये..

सायरा : (मुस्कुराते) मे कल दुसरी लाकर दुगी.. यहा पासमे ही अ‍ेक मेडीकल स्टोरमे मीलती हे.. लेकीन तुजे कीस लीये चाहीये..?

साहील : (सामने देखते धीरेसे) भाभी.. हे अ‍ेक ओरत.. तुम तो जानती हो अब गांवमे कीतना बदलाव हो चुका हे.. तो इस बदलावसे हमारा घर भी अछुत नही रहा..

सायरा : (सीरीयस होते सामने देखते) मतलब..?

साहील : (फीकी मुस्कानसे) मतलब.. अब चाचा भी हमारे गांवके रंगमे रंग गये हे.. उन्होने भी इस बदलावको पुरी तराह स्वीकार करलीया हे.. ओर वो मेरी अम्मीसे सादी कर रहे हे.. क्युकी वो प्रेगनेन्ट हे..

सायरा : (चोंकते धीरेसे) क्या..? बडी अम्मी प्रेगनेन्ट हे..? लेकीन वोतो वीधवा हे.. ओर अबु असे सादी कर रहे हे..? लेकीन बडी अम्मी कैसे..? कीसीसे अफैर था..? क्या अबुने तो उसे..?

साहील : नही भाभी.. आपतो जानती हेना.. हमारे गांवमे रीस्तोको लेकर कीतना बदलाव आ गया हे.. वहा कीसीको भी कोइ रीस्तेसे अ‍ेतराज नही.. ज्यादातर घरमे ही सब रीस्तोमे खुलकर सेक्स करने लगे हे.. तो इसमे हमारा घर भी बाकात नही हे.. अम्मा चाचा चाचीके गांव आनेसे पहेले ही प्रेगनेन्ट हो चुकी थी..

सायरा : (आसंकासे देखते) बता कीससे..? कही.. तु..म..

साहील : (मुस्कुराते) हां.. आप तो जानते हे.. मे बचपनसे ही अम्माके साथ सोता हु.. अभी भी दोनो ही साथ सोते हे.. तो अ‍ेक दीन हम दोनोही बहेक गये.. बस.. तबसे चल रहा हे.. वो बडी उमरकी ओरत कोइ ओर नही.. मेरी अम्मा हे.. तो ठाकुर साहेने अम्माकी सादी मुजसे करवानेकी पेसकस की.. तो चाचाने मना करदीया.. ओर खुद अम्मासे सादी करनेको तैयार हो गये..
 
सायरा : (आस्चर्यसे सामने देखते) तो क्या अबु कुछ बोले नही..? तुजे डाटा नही..?

साहील : (मुस्कुराते) भाभी.. अब चाचा काफी बदल गये हे.. उनको भी हमारे गांवकी हवा लग गये हे.. वो खुद अम्मीको ललचाइ नजरोसे देखने लगे हे.. वीधवा होनेके कारण वो खुद अम्मीसे सादी करना चाहते हे.. इसीलीये अम्मीने सबुसे सादीकी सर्त रखी.. ओर चाचा मान गये..

सायरा : (अपना सर पकडते) ओह गोड.. यकीन नही हो रहाकी अबु इतना बदल जायेगे.. ओर तुजे भी सरम नही आइ कमीने.. तुने अपनी ही अम्माके साथ मुह काला कीया.. आइ हेट यु.. साहील.. तुमने मेरा दील तोड दीया.. मेने तेरे साथ क्या क्या सपने सजाकर रखे थे.. जब मेने भाइके साथ रीलेशन रखा तो अम्मी अबुतो हमे बडा ज्ञान दे रहे थे.. अब क्या हुआ..?

साहील : (सामने देखते) भाभी.. मुजसे नफरत हो गइनां..? लेकीन ताली सीर्फ अ‍ेक हाथसे नही बजती.. अम्मा भी तो वीधवा थी.. अकेली थी.. उनकी भी कुछ जरुरते थी.. तो वो कहा जाती..? हम दोनो बहेक गये.. लेकीन चाची..? उनके लीये तो अभी चाचा जीन्दा थे.. ओर आप सीर्फ मुजे ही दोस मत दो.. कादीरभाइ भी कोइ दुधके धुले हुअ‍े नही हे..

सायरा : (सामने देखते) क्या मतलब हे तेरा..? मे कुछ समजी नही.. साहील.. मुजे सबकुछ खुलकर सच सच बता..? की घरमे क्या चल रहा हे..?

साहील : (फीकी मुस्कानसे) रहेनेदो.. सुनोगी तो आपको दुख होगा..

सायरा : (साहीलके दोनो हाथ थामते) नही साहील.. मुजे सच बता.. मेने तुजे दीलसे अपना दुसरा पती मानलीया हे.. आज जोभी हो सब सच बतादे.. बहेन ना सही.. भाभी ना सही.. कमसे कम अपनी बीवीसे तो मत छुपा.. तुम मेरा दुसरा खसम हे.. क्या अपनी बीवीसे छुपायेगा..?

साहील : (सामने देखते) अभी तो आप मुजे कोस रही थी.. केह रही थी मुजसे नफरत करती हो.. अब भी मुजे अपना सौहर मानती हो..?

सायरा : (अ‍ेक नजरसे देखते) कमसे कम तुमसे अ‍ेक सचाइकी उमीद तो कर ही सकती हु.. वरना तुम मुजे ये सब क्यु बताता..? मुजसे सब छुपा भी सकता था.. तुमसे नफरत नही करती.. तेरी इमानदारीपे कुरबान हु.. बता..

साहील : आप मेरी कसम खाओ.. की ये राज सीर्फ हम दोनोके बीच ही रहेगा.. आपके ओर कादीरभाइसे रीलेशनमे कोइ फर्क नही पडेगा..

सायरा : (साहीलमे सरपे हाथ रखते) मे तेरी कसम खाती हु.. अपने दुसरे सौहरकी कसम.. बता.. ये राज सीर्फ हम दोनोके बीच ही रहेगा.. हमारे रीस्तेमे कोइ फर्क नही पडेगा.. आइ प्रोमीस..

साहील : (सामने देखते धीरेसे) भाभी.. जब आप ओर कादीरभाइ रीलेशनमे आये इनके कुछ ही महीनोके बाद कादीर भाइ ओर चाची भी रीलेशनमे आ चुके थे.. ओर दोनोके बीच जीस्मानी रीस्ता था.. जीस तराह वो आपका खयाल रखता था उसी तराह वो चाचीका भी अ‍ेक बीवीकी तराह खयाल रखते थे..

सायरा : (आस्चर्यसे मुहपे हाथ रखते) या खुदा..? क्या केह रहे हो तुम..? नही ये सच नही हे.. बोलदो तुम जुठ बोल रहे हो..

साहील : (मुस्कुराते) नही भाभी.. ये सच हे.. कादीर भाइने बडी ही सावधानीसे तुम दोनोके साथ रीस्ता रखा.. अ‍ेक दुसरेसे छीपाकर..

सायरा : (आंसु बहाते) इतना बडा धोखा..?

साहील : (सामने देखते) सीर्फ इतना ही नही.. जब तुम ओर कादीर भाइ सेक्स करते पकडे गये तब चाची खुब रोइ.. इसीलीये नही की तुम भाइ बहेन सेक्स करते पकडे गये.. बल्की इसीलीये रोइकी कादीरभाइने उसे भी धोखा दीया था.. उसे तुम दोनोके बारेमे पता नही था..

साहील : (आंसु बहाते) ओर मुजे..? क्या भाइने मुजे धोखा नही दीया..? हम दोनोका तो नीकाह भी होगया था.. इतना बडा राज..?

साहील : (सामने देखते) अब बताओ.. अगर मेरे ओर अम्माके बीच ये सब हुआ तो हमने क्या गलत कीया..? चाचीका तो पती भी था.. ओर अम्मा..? अकेली.. वीधवा..

सायरा : (आंसु पोछते) साहील.. गलत तो गलत ही हे.. इससे तुम सही साबीत नही होजाते.. येतो नाजायज रीस्ता हुआनां..?

साहील : (सामने देखते) वाह.. तुम करोतो सही.. मे करुतो गलत.. तो फीर आप दोनोने क्या कीया..? सगे भाइ बहेनका रीस्ता भीतो गलत हेनां..? ओर हमारे गांजमे तो अब सगे भाइ बहेनकी सादीकी परंपरा भी होगइ हे.. गांव लोगोका मानना हेकी गांवमे अ‍ेक भी वीधवा या त्यक्ता ओरत नही रहनी चाहीये..

सायरा : (फुसफुसाते) पता नही अ‍ैसा नीयम क्यु बनाया..

साहील : (सामने देखते) तो इसमे गलत भी क्या हे..? क्या उस ओरतको अपने तरीकेसे जीनेका हक नही हे..? आप ही बताओ.. क्या अ‍ेक अकेली ओरत इस सुखसे वंचीत रेह सकती हे..?

सायरा : (नामे सर हीलाते धीरेसे) नही.. सायद तुम सचे हो.. गांकी सोच सही हे.. अ‍ेक मीनीट..? तुजे मेरी अम्मा ओर कादीरके बारेमे सब कैसे मालुम हुआ..?

फीर साहील सायराको हीमाचलसे लेकर लखनके घरकी पुरी कहानी बता देता हे.. वो मंजु ओर पुनमकी वो शक्तिओके बारेमे बताता हे.. ओर पुनमसे होते लखनके माध्यमसे बात पता चली वो बताता हे.. जीसे सुनकर सायरा भी सोक्ट हो जाती हे.. ओर आखीर गांवके बदलावको स्वीकार करलेती हे..

सायरा : (सर हीलाते) तो ये बात हे..? तब तो गांवमे सब सही हो रहा हे.. अबु बडी अम्मीसे नीकाह कर रहे हे तो फीर मेरी अम्मी..?

साहील : (मुस्कुराते) दोनो चाचाकी बीवी होगी.. चाचा दोनोको सम्हालेगे..

सायरा : (सामने देखते) भाइ.. क्या तुजे लगता हे अबु इस उमरमे दोनोको सम्हाल पायेगे..? यहा थे तब भी अबु अम्मीको महीनेमे अ‍ेक ही बार वो सुख दे पाते थे.. पता नही इसके लीये अम्मी ओर बडी अम्मी मान कैसे गइ..?
 
साहील : (मुस्कुराते) क्यु चीन्ता करती हो.. मे हुनां.. हें..हें..हें..

सायरा : (सामने देखते) मतलब..? मे कुछ समजी नही..

साहील : (सामने देखते जुठ बोलते) अम्मीने मुजसे भी सर्त रखी हे.. अगर चाचा उनको नही सम्हाल पाये तो मुजे अम्मीको वो सुख देना पडेगा जो मे पहेले देता था..

सायरा : (सामने देखते) तो अबु तेरी ओर सबुकी सादीके लीये मान गये..?

साहील : हां.. अम्मी ओर चाचीने मीलकर मेरा ओर सबुका रीस्ता तैय करलीया था.. ओर इस बारेमे चाचाको नही पता था.. तो अम्मीने चाचाके सामने मेरी ओर सबुकी सादीकी सर्त रखी.. ओर चाचा मान गये.. तो अब अम्मीको चाचासे सादी करनी पडेगी..

सायरा : (सामने देखते) ओर क्या सबुको इस बारेमे पता हे..?

साहील : नही.. ओर उनको अभी बताना भी मत.. समयके रहेते मे उनसे बात करुगा.. मे सब हेन्डल कर लुगा..

सायरा : (मुस्कुराते) ठीक हे भाइ.. उसे पता नही चलेगा.. लेकीन प्रोमीस करो.. की हम दोनोके बारेमे भी कीसीको पता नही चलना चाहीये.. वरना मे कहीकी नही रहुगी..

साहील : (सामने मुस्कुराते) लेकीन आप तो मुजसे नफरत करती होनां..

सायरा : (बाहोमे भीचते) जान... आइ अ‍ेम सोरी.. कमसे कम मेरे साथ तो इमानदार हो.. जो मुजे सब सच बता दीया.. अब नफरत तो मुजे कादीरसे होने लगी हे.. कमीनेने कीतना बडा जुठ मुजसे छुपाया.. भाइ.. प्रोमीस कर हम दोनोके बारेमे उसे कभी पता ना चले..

साहील : (मुस्कुराते होंठ चुमते) ठीक हे.. आइ प्रोमीस.. हम दोनोके बारेमे भाइ तो क्या कीसीको पता नही चलेगा.. सबुको भी नही..

सायरा : (मुस्कुराते बाहोमे आते) भाइ.. आइ प्रोमीस.. आजसे तु मेरा दुसरा खसम नही.. पहेला खसम होगा.. मे कादीरको मे दुसरे नंबरपे रखुगी.. कीतना कमीना नीकला वो.. आजसे हम दोनोकी अ‍ेक अलग ही दुनीया होगी.. मे बहुत लकी हु.. मेरे दोनो भाइ मेरे पती हे.. आइ लव यु..

साहील : (सरको चुमते) आइ लव यु टु.. तो क्या अब मे अम्मीके साथ रीस्ता रखु..?

सायरा : (मुस्कुराते) हां.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. अगर मेरी अम्मी भी चाहे तो तुम उसे भी खुस रख सकते हो.. मेने तेरी स्टेमीना देखली.. तुम चार चार ओरतको भी सम्हाल सकते हो.. बस.. ध्यान रहेकी हम दोनोके बारेमे कीसीको पता ना चले.. आजसे सायरा तेरी होगइ..





फीर दोनो ही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे सो गये.. दुसरे दीन भी वही सब हुआ.. सुबहका गुड मोर्नींग वीस.. वही कीचनके प्लेटफोर्मपे.. आज दोनो ही पुरे नंगे थे.. पेकींग ओल मोस्ट खतम हो चुका था.. साहील अब सायराको अ‍ेक बीवीकी तराह ट्रीट करता रहा.. उसने सायराको वो उपहार भी दीया जो वो उनके लीये खरीदके लाया था..

जीसे देखकर सायरा बहुत ही खुस हो गइ.. दोनोने मीलकर कइ वादे कीये.. फीर तो पुरा दीन ओर रात सीर्फ प्यार ओर चुदाइका दौर ही चला.. सायरा साहीलसे पुरी तराह संतुस्ट हो चुकी थी.. दुसरे दीन कादीरके कामका अ‍ेग्रीमेन्ट हुआ.. ओर उसने सायरासे बात करली..

सामको सायरा ओर साहील मार्केट घुमने गये.. दोनो मीया बीवीकी तराह घुमे.. फीर सायराने साहीलको मेडीकल स्टोरसे दो वो क्रीम लाकर देदी.. जीसे लगानेसे चुतमे हमेसा कसाव रहेता हे.. फीर दोनो वापस घर आगये.. तो खानेके बाद देर रात फीर कादीरका फोन आगया.. सायरा साहीलकी ओर हसते फोन लेकर रुममे चली गइ..

फीर कादीरसे फोन सेक्स कीया.. दुसरे दीन सुबह कादीर वहासे नीकल गया.. ओर देर रात घरपे पहोंचने वाला था.. उसी दीन ओर रात साहील ओर सायराने खुब जमकर फायदा उठाया.. सायराने ज्यादासे ज्यादा साहीलके साथ सेक्स कीया.. ताकी उनका काम होजाये..





वो हर बार साहीलका पानी अपनी चुतमे लेती थी.. लेकीन सायराको पता नही थाकी उनका काम पहेले दीन ही होगया था.. जब साहीलने पहेली बार रातको उनको जमकर दो बार चोद लीया था.. तब ही साहीलका बीज सायराके बीजसे मील चुका था.. उस पुरी रात साहीलने सायराको जमकर आखरी बार चोद लीया..





फीर सुबह सात बजे कादीरका फोन आगया.. तो दोनो ही नंगे सोये थे.. सायराने फटाफट बेडको सही कर दीया ओर नहाने चली गइ.. तो साहील भी नाइट ड्रेस पहेनकर अपनी बाइक लेकर कादीरको लेने स्टेशन चला गया.. दोनो गले मीले.. तो कादीरने ट्रेन लेटसे चलनेकी बात कही..

फीर दोनो घर आगये.. कादीरने सायराको मीलकर कीस कीया.. ओर नहाने चला गया.. फीर तीनोने मीलकर चाइ नास्ता कीया.. घरकी पेकींग देखकर कादीर खुस होगया.. ओर टेम्पोको बुला लीया.. फीर तीनो सामान लेकर अपने पुराने घरपे चले गये..

कादीर ओर सायरा अपने घरको देखकर भावुक होगये.. कादीर उन रुमको देखकर रुक गया.. जहा उनके अम्मी अबु सोते थे.. रुमकी ओर देखकर कादीरकी आंख गीली होगइ.. उस रुममे कादीरने कइ बार अपनी अम्मी जरीनाकी चुदाइ की थी.. सायरा टेडी नजरसे कादीरको देखती रही..

ओर कादीरने उन रुमको छोडकर अपने ओर सायराके रुममे रहेनेका फैसला कीया.. लेकीन सायरा ओर साहीलने मीलकर फैसला कीया थाकी कादीर ओर जरीनाके बीच रीस्तोके बारेमे कादीरसे कभी बात नही करेगे.. उसे भवीस्यमे हथीयारके तोरपे इस्तेमाल करेगे..

उस दीन साहीलने थोडा बहुत सामान सेट करनेमे मदद की.. फीर साम होते ही वो वहासे गांवके लीये नीकलनेके लीये रेडी था.. तब सायरा साहीलके गले लग गइ.. ओर आंसु बहाये.. क्युकी वो अब साहीलसे दीलसे अ‍ेटेच हो चुकी थी.. फीर कादीरभी गले मीला.. ओर साहील बाइक लेकर गांवकी ओर नीकल गया..
 
दीन बीतने लगे.. अब सृती भी काफी ठीक हो गइ थी.. ओर अ‍ेक दीन उसने घरपे आनेकी जीद की.. तो लखन पुनम ओर चंदा मीलकर सृतीको लेकर घर आगये.. लेकीन अभी भी पंद्नह दीन उनको लखनसे दुर रहेना था.. फीर भी लखनको देखकर उनकी कामाग्नी भडक जाती..

अब सृतीने धीरे धीरे फीरसे क्लीनीकपे जाना भी सुरु करदीया था.. अ‍ेक दीन देर रात पुनमको लेबर पेइन हुआ.. तो लखन सृती ओर चंदा पुनमको लेकर क्लीनीकपे चले गये.. वहा सृतीने पुनमकी डीलीवरी करदी.. ओर पुनमने अ‍ेक बहुत ही सुंदर बच्चीको जन्म दीया..

लखन डीलीवरीके वक्त पुनमके साथ ही रहा.. पुनमने डीलीवरी तक लखनका हाथ थामे रखा.. ओर लखन उनके सरको सहेलाते पुनमका होसला बढाता रहा.. जब सृतीने बेबीको कंपलीट करके पुनमकी गोदमे दीया.. तो पुनमकी आंखसे खुसीके मारे आंसु नीकल गये..

पुनम : (बेबीको सहेलाते मुस्कुराते) भाइ.. मेरा बेबी..

लखन : (सरपे हाथ घुमाते मुस्कुराते) नही दीदी.. सीर्फ आपका नही.. हमारा बेबी कहो..

पुनम : (सामने देखते) क्या आप भाइके बेबीको स्वीकार करोगे..?

लखन : (आंख गीली करते मुस्कुराते) हां क्यु नही.. हम कहा अलग हे.. हेतो हमारा ही खुन.. फीर भाइका हो या मेरा.. क्या फर्क पडता हे..? समजलो ये बेबी हमारा हे.. ना भाइका ना मेरा.. सीर्फ हमारा..

कहा तो पुनमने लेटेही लखनको हग करलीया ओर आंसु बहाने लगी.. फीर पुनमको स्पेसीयल रुममे रखा.. पुनम अब भी लखनसे चीपकी रही.. चंदा दुर खडी थी.. पुनम ओर लखनका प्यार देखकर चंदाकी आंख भी भर आइ.. तो सृतीने भी लखनको हग कर लीया..

सृती : (मुस्कुराते) जानु.. हमारा परीवार बढने लगा.. आज मे बहुत खुस हु..

पता चलते ही मंजु देवायत होस्पीटल आगये.. इस बातसे मंजु बहुत खुस थी.. उसने बच्चीका नाम पुजा रखा.. तो देवायतने भी बेबीको अपनी गोदमे लीया.. उनकी आंख भी गीली होगइ.. वो उनका ओर पुनमका बेबी था.. इस बातसे चंदा अब भी अनजान थी..

वो बार बार बच्चीको देखकर आंसु बहाती रही.. क्युकी उसे लगता थाकी ये बच्ची उनकी पोती हे.. अपने धिरेनकी बच्ची.. ओर सब लोग भी बडी सावधानी रखते बाते करते थेकी इस बच्चीके बारेमे चंदाको पता नाचले.. फीर सामको पुनमको छुटी देदी तो सबलोग बेबीको लेकर घर आगये..

फीर देवायतने चंदाको भी गले लगा लीया.. लेकीन आज पहेली बार चंदाको देवायतसे गले मीलना उतना अच्छा नही लगा जीतना पहेले लगता था.. देवायत मंजुने देखा तो चंदा यहा बहुत खुस थी.. नीलम रजीया ओर राधीका भी बहुत खुस होगइ.. ओर सब लोग बेबीको लेनेके लीये तरसने लगे..

आगे वाला कुछ वक्त अ‍ैसी ही सीचुअ‍ेशनमे गुजरने वाला था.. कइ लडकीया ओर ओरते गर्भवती थी.. भुमीका वक्त भी बहुत नजदीक आ रहा था.. इसी बीच श्रीधर बार बार सहेर जयश्रीको मीलने आता.. लेकीन जयश्रीतो अ‍ेक बहाना थी.. जयश्री श्रीधरके साथ ही रहेती..

मौका मीलते ही कीसी भी कामके बहाने वृन्दा श्रीधरको कीचनमे या दुसरे रुममे बुला लेती.. ओर श्रीधर ओर वृन्दा सीर्फ चुमा चाटी तक ही सीमीत रहेते.. इधर मुना ओर बसंती बरखाकी लाइफ भी अच्छेसे चलने लगी थी.. मुनाके सभी दोस्तो अब बसंतीको आंटीकी जगह भाभी कहेकर बुलाने लगे थे..

जीसे बसंती बहुत ही सरमा जाती.. गांवमे ओल मोस्ट सबको पता चल गयाथा की मुनाने बसंतीसे सादी करली हे.. अब मुना बरखा ओर बसंती साथ ही सोते.. तब मुना बसंतीकी खुब चुदाइ करता.. क्युकी अब बरखाके दीन नजदीक थे तो बरखा कइ दीनोसे मुनाको हाथ भी नही लगाने देती थी..

जीसे मुना सारी कसर बसंतीकी ज्यादासे ज्यादा चुदाइ करते पुरी कर लेता.. ओर बसंती भी अ‍ेक बीवीकी तराह मुनाका खुब साथ देती.. बरखा बस दुरसे ही मुना बसंतीकी चुदाइ देखती रहेती.. ओर अ‍ेक दीन सुबह सुबह बरखाको भी लेबर पेइन होने लगा..

मुना देवायतकी कार लेकर सहेरकी ओर दौड पडा.. बसंती ओर श्रीधर ब्रीन्दाको भी साथ लेलीया.. रास्तेमे ही उसने लखनको फोन कर दीया.. लखनने उनसे बात कीतो पता चला वो देवायतकी कार लेकर बरखाको होस्पीटल लेकर आ रहे थे.. तो लखन भी सृतीको लेकर क्लीनीक पहोंच गया..

आधे घंटेमे ही मुना बसंतीके साथ श्रीधर ओर ब्रीन्दा बरखाको लेकर होस्पीटल आगये यहा सृतीने बरखाकी डीलीवरी की.. ओर बरखाने भी अ‍ेक सुंदर बच्चीको जन्म दीया.. तीनो दोस्त गांवकी बाते करते रहे.. ओर बसंती ब्रीन्दा बरखाकी देख भाल करती रही..

सब नोर्मल था तो दुसरे दीन सुबह सृतीने बरखाको छुटी देदी.. ओर अ‍ेक हप्तेके बाद वृन्दाका फोन आते ही श्रीधर ओर ब्रीन्दा आनन फाननमे अपनी कार लेकर वापस सहेर आगये.. ओर सीधा वृन्दाके घर पहोंच गये.. जयश्रीको लेबर पेइन होरहा था..

तो तीनो जयश्रीको लेकर सृतीकी क्लीनीकपे पहोंच गये.. इस बातका लखनको पता ही नही था.. सृतीने जयश्रीकी डीलीवरी की.. लेकीन नोर्मल नही.. कुछ क्रीटीकल कंडीशनकी वजहसे उनका सीजीरयन करना पडा.. ओर जयश्रीने अ‍ेक लडकेको जन्म दीया..

तबतक श्रीधरने लखनको फोन करते बताया तो लखन सीधा मीठाइ लेकर क्लीनीकपे पहोंच गया.. ओर सबका मुह मीठा करवाया.. लखनने जब ब्रीन्दाकद अपने हाथोसे मीठाइ खीलाइ तब ब्रीन्दा लखनको देखकर सरमा गइ.. ओर कातील नजरोसे देखते हसने लगी.. वो बहुत खुस थी..

वृन्दा : (ब्रीन्दाको गले लगाते हसते) बधाइ हो.. आप दादी बन गइ.. आ गया हमारे घरका चीराग.. हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (जोरसे गले लगते) आपको भी नानी बननेकी बधाइ.. (मनमे) कमीनी.. अब कैसे कहु..? मे उनकी दादी नही उनकी बडी मम्मी बन गइ हु.. अब तेरी बेटी मेरी बहु नही मेरी सौतन हे.. अ‍ेक साल ठहेरजा तुजे भी जटका लगेगा.. जब मेरा बेटा मुजे भी पेटसे कर देगा.. लेकीन पता नही कब करेगा.. हम महेनत तो बहुत करते हे.. अब तो आइपील लेना भी बंध करदीया हे..
 
लेकीन वृन्दाका मक्सद तो कुछ ओर ही था.. उनको तो बस श्रीधरसे गले मीलनेका बहाना चाहीये था.. ओर वो ब्रीन्दासे अलग होते श्रीधरकी ओर घुम गइ.. ओर उसे कातीलाना मुस्कुराते गले लग गइ.. तो वृन्दाको वही अहेसास फीरसे हो गया.. इस बार नीचे बहुत ज्यादा चुभन हुइ..

वृन्दा : (कानमे फुसफुसाते) जीयो मेरे शेर.. आखीर तुमने अपना दम दीखा ही दीया.. बनादी मुजे नानी.. बधाइ हो.. बस.. अ‍ैसे ही कारनामे करते रहो..

श्रीधर : (मुस्कुराते धीरेसे) अभी कहा कारनामे कीये हे..? मौका तो मीलने दो.. अभी तो बहुत कुछ करना हे.. हें..हें..हें..

वृन्दा : (हसते अलग होते धीरेसे कानमे) समज गया तु.. बहुत समजदार हे तु.. कब करेगा..?

ब्रीन्दा : (जोरोसे हसते) दीदी.. सासु दामाद क्या बाते कर रहे हो..? जरा हमे भीतो सुनाओ..

वृन्दा : (श्रीधरकी ओर कातीलाना हसते) नही.. ये हम सास दामादकी बात हे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) आंटी आप बाते करो तबतक हम खानेका इन्तजाम करके आते हे..

वृन्दा : (मुस्कुराते) बेटा माफ करना हम आपको तकलीफ दे रहे हे.. तेरे अंकलका भी कुछ नही बनाया..

श्रीधर : (मुस्कुराते) आप उनकी चीन्ता मत करो.. उसे ओर पापाको भी टीफीन पहोचाकर आते हे.. उनको भी खुसखबर सुनानी हे..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) अरे उनको फोन करके बतायाकी नही..? तो जरा उनसे भी बात कर लेना..

श्रीधर : (ब्रीन्दाकी ओर हसते) जी.. मम्मीजी.. हें..हें..हें.. चल लखन..

कहा तो ब्रीन्दा श्रीधरकी ओर दात भीचते बडी आंख करते हसती हे.. जैसे केह रही हो अकेले मीलो तब बताती हु.. मम्मीके बच्चे कहीके.. फीर श्रीधर ओर लखन चले जाते हे.. लखनने अपने घरसे खाना लानेकी पेसकस की तो श्रीधरने मना करदीया.. ओर दोनो अ‍ेक होटेलपे पहोंच गये..

जहा उन्होने पांच पार्सल पेक करवाया ओर श्रीधर अपनी दुकानपे चला गया.. वहा उन्होने दोन पार्सल छोडे ओर बनवारीलाल ओर जीतुलालको लडका होनेकी बात कही.. तो सुनकर दोनो ही खुस हो गये.. दोनोने अपनी जेबसे पांचसो पांचसोके दो नोट नीकाले..

ओर बच्चेको सगुनके तोरपे दे दीये.. फीर दोनो वहासे नीकल गये.. तभी रास्तेपे अ‍ेक होटल आइ तो लखनने कुछ देखकर अचानक अपनी कार साइडमे रोकदी.. ओर श्रीधरकी ओर हसते होटेलकी ओर देखनेका इसारा कीया.. तो श्रीधर भी होटेलकी तरफ देखने लगा.. देखते ही..

श्रीधर : (धीरेसे) अरे बापरे.. कमीना कहीका.. अच्छा हुआ पकडा गया.. वरना भोसडीका हमे तो बताता ही नही.. इनके साथमे कौन हे..? कोइ नया माल लगता हे.. इनको कही देखा हे..

लखन : (हसते) कमीना उनकी मामी हे.. बंसीकी सादीमे देखा नही था क्या..? हें..हें..हें..

श्रीधर : (अपना सर पीटते) अरे हां.. यार.. उनकी मामी ही हे.. इनको तो मुनाने पटालीया हेनां..? तो यहा क्या कर रहा हे दोनो..

लखन : (हसते) क्या करेगा..? कमीना उसे ठोकने लाया होगा.. चल फीर उनकी खबर लेते हे.. अभी तो दोनोको मजे करने दे..

श्रीधर : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. तुमसे अ‍ेक बात कहेनी थी..

लखन : (मुस्कुराते) हां बोल..

श्रीधर : (सरमाते मुस्कुराते) भाइ.. आजकल मेरी सास मुजपे कुछ ज्यादा ही कहेरबान हे.. सायद मेरे साथ रीलेशनमे आना चाहती हे..

लखन : (आस्चर्यसे मुस्कुराते) क्या..? वृन्दा भाभी..? कहा तक..? कमीना सच बताना..

श्रीधर : (मुस्कुराते) बस.. सीर्फ चुमा चाटीतक आगे बढे हे.. हमारे घरपे आइ थी तब अ‍ेक बार ब्लुजोब.. बस.. इससे बात आगे नही बढी.. क्युकी हर बार कोइना कोइ साथ होता हे.. उनके घर जाउ तो जयश्री मुजे नही छोडती.. तो बात सीर्फ चुमा चाटीपे अटकी हुइ हे..

लखन : (कातील मुस्कानसे) कमीना.. तेरी दोनो बीवीया क्लीनीकपे हे.. आज अच्छा मौका हे तुम दोनोके पास.. तेरे बडे पापा ओर पापा भी अपनी दुकानपे हे.. तो कोइ बहाना बनाकर उसे घर लेजाओ.. आज घरपे कोइ नही होगा.. ठोकले सालीको.. वो भी क्या अपने दामादको याद करेगी.. हें..हें..हें..

श्रीधर : (मुस्कुराते) ठीक हे भाइ हम कुछ जुगाड करते हे.. देखो ये दोनो तो मजे करने होटेलमे जा रहे हे..

देखा तो सचमे मुना ओर उनके मामा वीनोदकी बीवी यानीकी मुनाकी मामी गीता सजधजके होटेलमे जा रहेथे.. गीता आज बहुत कयामत लग रही थी.. फीर श्रीधर ओर लखन क्लीनीकपे चले गये.. जयश्रीको आज साम तक खानेमे कुछ नही देना था.. तो श्रीधर वृन्दा ओर ब्रीन्दा वही रुममे ही खानेपे बैठ गये.. लखन सृतीको लेकर अपने घर चला गया..

वृन्दा : (खाना खाते श्रीधरकी ओर देखते) हे भगवान.. जल्दबाजीमे तो मे बच्चेके लीये कपडे भी घरपे भुल गइ.. उसे पोछनेके लीये.. मेने अलगसे रखे थे.. ओर घरपे भी कोइ नही हे.. हमारे सब जवेरात मेरी अलमारीमे पडे हे.. उसे बेन्कके लोकरमे रखोका टाइम ही नही मीला..

ब्रीन्दा : (थोडी चीन्तासे) दीदी.. अ‍ैसी लापरवाही क्यु करती हो..?

वृन्दा : (श्रीधरकी ओर मुस्कुराते) अरे.. जयश्रीकी देखभालमे याद ही नही रहा.. मे अभी खाना खाकर श्रीधरके साथ चली जाती हु.. कपडे भी ले आउगी.. ओर गहेने भी लोकरमे रखके आजायेगे.. हम जीतनी जल्दी होसके वापस आजायेगे..

ब्रीन्दा : (चीन्तासे) हां बाबा.. आज कल घरको अकेला छोडना कीतना जोखीम भरा हे.. ओर वोभी सहेरमे.. (श्रीधरकी ओर देखते) श्रीधर.. आप.. मीन्स.. तुम दीदीके साथ कार लेकर चले जाओ.. कपडे तो यहा सृतीदीदीके पास मील जायेगे.. लेकीन गहेने सेइफ रखना बहुत जरुरी हे..

कहेते तीनो खाने लगे.. जयश्री बच्चेके साथ सो गइ थी.. तभी वृन्दाने ब्रीन्दाकी नजर बचाते श्रीधरकी ओर कातील स्माइल करते आंख मारदी.. जीसे श्रीधर बहुत कुछ समज गया.. ओर मुह नीचे करते मुस्कुराते खाना खाने लगा.. जब तीनोने खाना खालीया तो वृन्दा श्रीधरको लेकर उनकी कारमे चली गइ.. ओर उनके पास बैठ गइ....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २८२

कहेते तीनो खाने लगे.. जयश्री बच्चेके साथ सो गइ थी.. तभी वृन्दाने ब्रीन्दाकी नजर बचाते श्रीधरकी ओर कातील स्माइल करते आंख मारदी.. जीसे श्रीधर बहुत कुछ समज गया.. ओर मुह नीचे करते मुस्कुराते खाना खाने लगा.. जब तीनोने खाना खालीया तो वृन्दा श्रीधरको लेकर उनकी कारमे चली गइ.. ओर उनके पास बैठ गइ.... अब आगे

श्रीधर : (मुस्कुराते पासमे वृन्दाकी ओर मुह करते) क्या सचमे गहेने घरपे पडे हे..?

वृन्दा : (श्रीधरकी ओर देखते) क्या तुजे लगता हे मे इतनी लापरवाह हु..? बुध्धु कहीके.. तुमने मेरी बेटीको हमारा वारीस दीया हे.. तो तुजे इनाम तो देना ही पडेगा.. इसीलीये गहेने बेन्कमे रखनेका बहाना बनाया.. ताकी थोडी देर होजाये तोभी कोइ दीकत नही..

श्रीधर : (मुस्कुराते) तो क्या रास्तेमे मे कुछ प्रोटेक्शन लेलु..? वरना गडबड होजायेगी..

वृन्दा : (मुस्कुराते कामुक नजरोसे) कोइ जरुरत नही हे.. अगर गडबड होजाती हेतो होने दो.. तेरे पापा हेनां सम्हालने के लीये.. उनसे तो कुछ नही हुआ.. कमसे कम तुमसे ही कुछ होजाये..





श्रीधर : (आस्चर्यसे) क्यु नही हुआ..? क्या मे ओर जयश्री पापाकी ही संतान हेनां..? ओर मेने सुना हे आप तीन चार बार ओर प्रेगनेन्ट हो गइ थी.. ओर आपने अ‍ेबोर्सन करवाया था..

वृन्दा : (चोंकते धीरेसे) हां लेकीन ये सब तुजे कैस पता..?

श्रीधर : (मुस्कुराते) छोडीये वो सब बादमे.. आपकी जमीन तो बहुत ही उपजाव हे.. थो फीर अब क्या प्रोबलेम होगइ..?

वृन्दा : (सरमाकर मुस्कुराते) ये सब गलती मेरी ही थी.. हर बार लडकी ठहेर जाती थी.. ओर मुजे अपना वारीस चाहीये था.. इसी वजहसे तेरे पापाके मना करनेके बाद भी मे बार बार अ‍ेबोर्सन करवाती थी.. ओर सायद उसीका नतीजा हे.. की अब मे गर्भवती नही हुइ..

श्रीधर : (आस्चर्यसे फुसफुसाते) क्या सचमे आप अ‍ैसा चाहती हो..? इस उमरमे..?

वृन्दा : (मुस्कुराते) हां.. मुजे भी अ‍ेक वारीस चाहीये.. मेरी उमर मत देखो.. बस.. मेरा परफोर्मस देखना.. तुम जयश्रीको भुल जाओगे..

श्रीधर : (मुस्कुराते) हां.. उस दीन आपका ब्लुजोबका परफोर्मस देखा.. बहुत बडीया था.. हें..हें..हें..

वृन्दा : (मुस्कुराते) हां.. लेकीन आज कोइ फोरप्ले नही.. सीर्फ असली मजा.. फोरप्लेके लीये कइ बार मौका मीलेगा.. अब तो तुम जयश्री ओर बच्चेको देखने बार बार आओगे ही.. तब करलेना..

श्रीधर : (मनमे) कमीनीको कीतनी आग लगी हुइ हे.. जब मेरा अ‍ेक अंदर लेगीनां तब तुजे पता चलेगा.. देखता हु कैसे चीलाती हे.. आज तो चाल ही बदल दुगा.. फीर तु मेरे बापको भी भुल जायेगी.. ओर बार बार मेरा लंड मांगेगी.. फीर कमीनी पेट फुलाकर घुमती रहेगी..

दोनो अंतरंगकी बाते करते घर पहोंच गये.. वृन्दाने फटाफट दरवाजेका ताला खोला.. जैसे ही श्रीधर अंदर आगया वृन्दाने फटाफट गेइट बंध करके लोक करलीया.. ओर श्रीधरको लेकर सीधे अपने बेडरुममे चली गइ.. ओर फटाफट अपनी सारी हटाकर बाकीके कपढडे नीकालने लगी..

वृन्दा : (मुस्कुराते धीरेसे) तुम भी कपडे नीकालदो.. लेकीन सावधानीसे वरना तेरी माको हमपे सक होजायेगा.. इधर खुटेपे लटकादो..

श्रीधर : (सर्टके बटन खोलते) लगता हे इन सब चीजोमे आप माहीर होगइ हे..

वृन्दा : (मुस्कुराते) हां.. तेरे बापने मुजे माहीर करदीया हे.. उनकी सादीसे पहेले ही मुजे ठोकता हे.. आज बापना सही.. बेटा तो हे.. आज दीखादे अपनी ताकत.. देखती हु तु तेरी सासको कहा तक लेजाता हे.. अगर आज आपने मेरा दील जीत लीया.. तो समजो बेटीके साथ उनकी मां भी मील जायेगी..

कपडे नीकालकर वृन्दा पुरी नंगी होगइ.. ओर बेडपे दोनो पैर फैलाकर पीठके बल लेट गइ.. तो श्रीधर भी नंगा होगया.. उनका हथीयार तनके सख्त हो गयाथा ओर हवामे उपरकी ओर जटके मार रहा था.. वृन्दा टेडी ललचाइ नजरोसे उसे देखती रही.. तभी श्रीधर बेडपे आकर उनके दोनो पैरोके बीच बैठ गया..





वृन्दा : (धीरेसे मुस्कुराते) श्रीधर.. तेरा जीतुसे भी बहुत बडा हे.. तो जरा ध्यानसे..

श्रीधर : (मुस्कुराते चुतपे लंड घीसते) अरे.. ध्यानसे करुगा.. अ‍ेक बार अंदर तो जानेदो.. फीर आप अपने जीतुको भी भुल जायेगी..

वृन्दा : (धीरेसे हसते) तब तो फीर तुजे ही मुजे ठंडी करने बार बार आना पडेगा.. मेरा जीतुभी कुछ कम नही हे.. बस.. आजकल थोडा कमजोर हो गया हे.. हें..हें..हें..





वृन्दाकी चुत पानी छोडने लगी.. जब लंड गीला हो गया तो श्रीधरने चुतमे थोडासा हाथसे पुस कीया.. तो वृन्दाका मुह सीसकारीया करते बीगड गया.. श्रीधरने थोडा ओर धका मारा.. ओर लंडको चुतमे फसालीया.. तो वृन्दाकी हल्कीसी चीख नीकल गइ.. वो मुह इधर उधर करते श्रीधरसे नजरे चुराने लगी..
 
फीर श्रीधर वृन्दाके उपर लेट गया.. ओर उनके दोनो हाथके पंजे कसके पकड लीये.. क्युकी वो जानता थाकी आगे क्या होगा.. वो वृन्दाके होठोको चुमने लगा.. ओर उसने लीपलोक करते कमरको अ‍ेक जटका मारा.. तो श्रीधरका आधा लंड वृन्दाकी चुतमे घुस गया..

तो वृन्दाकी चीख श्रीधरके मुहमे ही दब गइ.. उनकी आंखसे आंसु नीकल गये.. ओर वो सरको इधर उधर करते लीपलोक छुडानेकी कोसी करते अपने दोनो पैर बेडपे पटकने लगी.. तो श्रीधरने लोपलोक छोड दीया ओर होठोको चुमने लगा.. वृन्दाने श्रीधरको कसके अपनी बाहोमे भीच लीया..





वृन्दा : (दर्दमे फुसफुसाते) जालीम कीतना बडा हे तेरा.. मेरी तो अ‍ेक ही बारमे फाडके रखदी.. पता नही मेरी बेटी तुजे कैसे जेलती होगी.. क्या अभी बाकी हे..?

श्रीधर : (गलेको चुमते कानमे धीरेसे) डार्लींग अभी तो आधा ही गया हे.. बस.. ,पुरा लेनेके लीये तैयार रहीयो..

वृन्दा : (फुसफुसाते) लगता हे जालीम आज मेरी चुत फाडके ही दम लेगा..

कहेते वृन्दाने दोनो पैरसे श्रीधरकी कमरको आंटी लगादी.. ताकी श्रीधर हीलना सके.. श्रीधर लगातार वृन्दाके होठोको ओर उनके दोनो बुब्सको बारी बारी चुमता रहा.. फीर कुछ देरके बाद वृन्दाने पैर हटा लीये ओर श्रीधरको धीरे धीरे सुरु करनेको कहा..

तो श्रीधर धीरे धीरे कमर हीलाते वृन्दाको चोदने लगा.. ओर धीरे धीरे करते अपने लंडको वृन्दाकी चुतमे ओर गहेराइओमे धकेलता रहा.. अब वृन्दा श्रीधरका पुरा लंड अपनी चुतमे ले चुकी थी.. दोनोकी सासे तेज चल रही थी.. ओर कमरेमे सीर्फ थप..थप.. ओर फच..फच.. की आवाजे आ रही थी..





वृन्दा जब भी जडनेकी कगारपे आती श्रीधरको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लेती.. ओर लीपलोक करते आंख बडी होजाती.. अबतक वो दो बार जड चुकी थी.. वृन्दाके लीये ये चुदाइ अबतककी चुदाइसे बहुत ही अलग थी.. अ‍ैसा अहेसास उनको जीतुके साथ पहेले होता था जब वो ओर जीतु जवान थे.. ओर वो भी सीर्फ अ‍ेक बार..





ओर अभी तो श्रीधरने उसे दो दो बार जडा दीया था.. ओर अभी भी उनकी जबरदस्त चुदाइ कर रहा था.. वृन्दा मन ही मन श्रीधरकी कायल हो चुकी थी.. आज उनको कोइ होस नही था.. जब श्रीधरने लंडको जडतक घुसाके वृन्दाको बाहोमे भीच लीया ओर लीपलोक करलीया तो वृन्दाने भी श्रीधरको कसके बाहोमे भीच लीया..





श्रीधर अपनी कमरको जटके देने लगा.. तो वृन्दाको पहेली बार अपनी बच्चेदानीपे गरम गरम महेसुस हुआ.. ओर वो उतेजनामे कांपने लगी.. तभी उतेजनाकी वजहसे उनकी चुतने भी जवाब देदीया.. अपने फवारेसे श्रीधरके लंडको भीगोने लगी.. दोनो पसीनेसे तरबोर हो चुके थे..

श्रीधर वृन्दाके सीनेपे ढेर होगया.. वृन्दा अपनी सासको दुरस्त करते श्रीधरकी पीठ सहेलाती रही.. दोनो काफी देर अ‍ैसे ही पडे रहे.. वृन्दा इधर उधर मुह करते श्रीधरसे नजरे चुराने लगी.. क्युकी आज श्रीधरने इतने सालोके बाद उसे फीरसे अ‍ेक लडकी जैसा अहेसास करवाया था..





जब सास थोडी सामान्य होगइ.. देखा तो श्रीधरका लंड अब भी वृन्दाको चुतके अंदर सख्त महेसुस हो रहा था.. ओर चुतके अंदर रेह रेहके जटके मार रहा था.. वृन्दा को ये महेसुस होते ही आस्चर्य हुआ.. वो सर्मसार होते टेडी नजरोसे श्रीधरकी ओर देखती रही.. आखीर उसने हीमत करके केह दीया..

वृन्दा : (सरमाते नजरे चुराते धीरेसे) साबास मेरे सेर.. आज तुमने साबीत करदीया.. की मेरी बेटीको चोदनेका हकदार सीर्फ तुम ही हो.. देखो.. अभी भी अंदर सख्त लग रहा हे.. ये सब कैसे..?

श्रीधर : (मुस्कुराते) मेरा अ‍ेक दोस्त हे.. मुना.. उन्होने हम सभी दोस्तोको अ‍ेक जडी बुटी पीलाइ हे.. तभी हम सबका अ‍ैसा हो गया हे.. हम दो बार चोदनेसे पहेले बहार नही नीकालते..

वृन्दा : (थोडा गभराते) हाइ दया..? तुमने तो अ‍ेक ही बारमे मुजे पुरी नीचोड ली.. दुसरी बार कैसे जेलुगी..? कौन हे ये मुना..?

श्रीधर : मेरी सादीमे मेरी मम्मीके साथ वो बसंती आंटी नही थी..? उनका लडका हे.. उन्होने भी अपनी बहेनसे सादी करली हे.. ओर हाल हीमे उनके पीता गुजर गये.. तो बसंती आंटी वीधवा होगइ.. तो मुनाने उनसे भी सादी करली..

वृन्दा : (आस्चर्यसे) हाय राम.. क्या उनकी मांके साथ..? क्या सचमे गांवमे अ‍ैसा होने लगा हे..? ब्रीन्दा सब बता रही थी तो मेने सोचा ये मजाक कर रही हे..

श्रीधर : (मुस्कुराते होठ चुमते) कोइ मजाक नही था.. अब ज्यादातर लडके अपनी बहेनसे ही सादी कर रहे हे.. सीर्फ हमारे गांवमे नही बल्की आजुबाजुके गांवमे भी.. ज्यादातर वीधवा ओर त्यक्ताने घरके ही कीसी मर्दसे सादी करली हे..

कुछ बाते करनेके बाद श्रीधरने वृन्दाको फीरसे गरम करदीया.. ओर अ‍ेक बार फीर वृन्दाकी जबरदस्त धमासान चुदाइ कर डाली.. इस बार भी श्रीधरने वृन्दाको दो दो बार जडा दीया.. जब दोनो साथमे जड गये तब वृन्दाका अ‍ेक अ‍ेक अंग श्रीधरने तोडके रख दीया था..



 




फीर दोनोने साथमे सावर लीया.. तो श्रीधरने वहा भी वृन्दाके मना करनेके बावजुद उनको फीरसे खडे खडे चोद लीया.. ओर वृन्दाको पुरी तराह संतुस्ट करदीया.. फीर दोनो बहार आकर कंपलीट हो गये.. वृन्दाकी चालमे कुछ खास फर्क नही पडा.. बस.. वो धीरे धीरे चल रही थी.. फीर दोनो बच्चेके कपडे लेकर घरको ताला लगाकर नीकल गये.. तो रास्तेमे..

वृन्दा : (मुस्कुराते) श्रीधर.. आज तुमने मेरा दील जीत लीया.. समजले आजसे बेटीके साथ तेरी सास भी तेरी होगइ.. अ‍ेक बार जयश्री तुम्हारे घर आजाये.. फीर यहा कोइ डर नही.. तुम जब भी मेरे घर आना चाहो आ सकते हो.. लेकीन दीनमे.. दोपहोरके वक्त.. तब दोनो भाइ अपने धंधेपे होते हे..

श्रीधर : (मुस्कुराते) ठीक हे.. आजाउगा..

वृन्दा : (मुस्कुराते) क्या सचमे लोग अपनी मांसे सादीया कर रहे हे..?

श्रीधर : (मुस्कुराते) हां.. लेकीन वीधवा ओर त्यक्ता होनेके बाद..

वृन्दा : (मुस्कुराते कामुक नजरोसे) तो फीर तेरी मां भीतो त्यक्ता हे.. तु क्यु उनसे सादी नही करलेता..

श्रीधर : आप पागल होगइ हो क्या..? वो मेरी मां हे.. मे कैसे..? (मनमे) अब आपसे कैसे कहु.. वो भी तेरी बेटीकी सौतन होगइ हे..

वृन्दा : (मुस्कुराते) क्यु.. अभी अभी तो तुमने कहा.. की तेरे दोस्तने उनकी मांसे सादी करली.. तो क्या दीकत हे..? कमीनी अभीभी पटाका लग रही हे.. सीर्फ मजेही तो करने हे..

श्रीधर : (सामने देखते) तो फीर आपको बुरा नही लगेगा..? सोचलो आपकी बेटी मेरी बीवी हे..

वृन्दा : (मुस्कुराते) इसमे बुरा लगनेकी क्या बात हे..? कीतना दमदार हथीयार हे तेरा.. अ‍ेक को क्या तु चार चार ओरतोको सम्हाल सकता हे.. अभी अभी बीवीकी मांको तो तीन तीन बार चोद लीया.. तब तो तुजे बुरा नही लगा.. मेभी तो तेरी सासके साथ बडी मम्मी ओर मौसी भी हु.. जब मुजे चोदलीया तो तेरी मांको चोदनेमे क्या दीकत हे..? मुजसे तो काफी जवान ओर खुबृसुरत भी हे.. अ‍ेक बार सोचले..

श्रीधर : (मुस्कुराते) मौसी.. पता नही था आप इतने खुले सोच वाली होगी.. तो फीर आपकी बेटीकी सादीसे क्यु नाराज थी..?

वृन्दा : (मुस्कुराते) तुजे तो सब पता हे फीर भी बतादु.. जयश्री मेरी ओर तेरे पापाकी ओलाद हे.. ओर इस नाते तुम दोनो सगे भाइ बहेन हो.. इसीलीये मे मना कर रही थी.. अब गांवमे ही सगे भाइ बहेन सादी कर रहे हे तो फीर मुजे क्या अ‍ेतराज हे..? इसीलीये मेने सबकुछ अ‍ेक्सेप्ट करलीया..

श्रीधर : (मुस्कुराते) तो फीर आपका ओर पापाका अफैर कब सुरु हुआ..?

वृन्दा : (मुस्कुराते) चल आज तुजे ये राज भी बता देती हु.. लेकीन याद रखना.. ये बात कीसीको मत कहेना.. ना तेरी मांको.. ना जीतुको ओर नाही तेरी बीवीको.. आज मेरा दील तुजपे आगया इसीलीये तुजे बता रही हु..

श्रीधर : (मुस्कुराते) आइ प्रोमीस.. कीसीको नही बताउगा.. क्या आप आइसक्रीम खाओगी..?

वृन्दा : (मुस्कुराते) हां लेले.. देख आइसक्रीम पार्लर इधर ही हे.. आज हम दोनोके नये रीस्तेकी सुरुआत हुइ हे.. तो कुछ मीठा तो बनता ही हे.. चल तुजे वहा आरामसे बैठकर बताती हु..

श्रीधर : (दोनो अंदर जाकर बैठते हे तब आइसक्रीमका ओर्डर देनेके बाद) हां तो सासुमा.. अब बताइअ‍े..

वृन्दा : (सरमाकर मुस्कुराते) क्या बताउ..? सुन.. मेने जवानीके देहलीजपे कदम रखा तबसे ही मे अ‍ैसी हु.. बहुत ही कामुक.. चुदकड.. मतलब तबसे ही मुजे चुदाइकी लत लग चुकीथी.. मेने घरमे ही अपनी चुदाइका जुगाड करलीया था.. मेरा छोटा भाइ.. उन्होने मुजे खुब चौदा हे.. दोनोका रुम अ‍ेक ही था तो कीसीको सक भी नही हुआ..

श्रीधर : (मुस्कुराते) लेकीन मैने सुनाहे आप मायके बहुत ही कम जाती थी..?

वृन्दा : (सरमाकर मुस्कुराते) हां.. इसी वजहसे.. अ‍ेक दीन मेरी माने हम दोनोको चुदाइ करते पकडलीया.. मुजे खुब मारा.. ओर भाइको भी बहुत डाट पडी.. फीर आनन फाननमे मेरी सादी करवादी.. तुम्हारे बडे पापासे.. हम दोनोकी उमरमे काफी फर्क हे.. वो मुजसे दस साल बडे हे..

श्रीधर : (मुस्कुराते) ओह.. समजा.. पापाके साथ क्यु रीलेशनमे आइ..

वृन्दा : (जब आइसक्रीम आगइ तब खाते मुस्कुराते) हां.. क्युकी तेरे बडे पापा मुजे सतुस्ट नही करपा रहे थे.. ओर मुजे चुदाइकी लत लग चुकी थी.. मे इसी वजहसे आपके बडे पापाको छोडने भी वाली थी.. तभी अ‍ेक दीन मेने जीतुका लंड देखलीया.. तब उनकी सादी भी नही हइ थी.. वो मेरे भाइकी उमरका ही था..
 
श्रीधर : (मुस्कुराते) फीर..?

वृन्दा : (मुस्कुराते) तो फीर क्या..? जवान लडकोको फसाना कौनसा मुस्कील काम हे.. बस.. मेने जीतुको सेट करलीया.. वो मुजे संतुस्ट करने लगा.. बल्की मेरे भाइसे भी ज्यादा वो मेरी चुदाइ करने लगा.. तब वो कोलेजमे था.. तेरे बडे पापा धंधेपे चले जाते तो वो दीनमे भी मेरी दो तीन बार चुदाइ कर लेता.. ओर हर रात हम दोनो उनके रुममे या फीर घरकी छतपे मीलकर कमसे कम अ‍ेक बारतो चुदाइ कर ही लेते..

श्रीधर : (मुस्कुराते) तो फीर उनकी मेरी मम्मीसे सादी क्यु करवाइ..?

वृन्दा : (मुस्कुराते) क्या करती..? जीतुने मुजे प्रेगनेन्ट करदीया तो मेरी डीलीवरीमे देखभालके लीये मेरी माने मेरे चाचाकी लडकी यानीकी ब्रीन्दाको भेज दीया.. ओर तेरे बडे पापाको वो जीतुके लीये भा गइ.. उसने डायरेक्ट मेरे मायकेमे बात चलाइ.. ओर तेरी माका ब्याह जीतुसे हो गया.. ओर फीर तेरा भी जन्म हुआ..

श्रीधर : (मुस्कुराते) पापाके तो बडे मजे थे.. दोनो बहेने.. हें..हें..हें..

वृन्दा : (मुस्कुराते) हां.. लेकीन मुजे ये सब अच्छा नही लगता था.. मे जीतुको कीसी ओरके साथ नही बाटना चाहती थी.. ओर मेरा तेरी मांसे इसी वजहसे जगडा होता था.. ओर मायके मेभी भाइकी सादी होगइ थी.. सादीमे हम सब गये थे.. कमीने ने सादीके अगले दीन रातमे मुजे खुब रगड रगडके चौद लीया.. कीसीको पता भी नही चला..

श्रीधर : (मुस्कुराते) क्या आपके भाइने..? मीन्स.. मामाने..?

वृन्दा : (मुस्कुराते) हां.. कमीनेकी सादी होगइ फीर भी मुजे नही भुला.. फीर मे जब भी दो तीन दीनके लीये मायके जाती कमीना कुछना कुछ जुगाड करते दो तीन बारतो मुजे चोद ही लेता.. ओर मेभी मजेसे चुदवाती.. आखीर मेरा पहेला प्यारजो था.. बस.. तबसे चुदवानेकी लत लग चुकी हे.. लगता हे अब ये चुदवानेकी लत तुमसे ही खतम होगी.. हें..हें..हें..

श्रीधर : (मुस्कुराते) तो सुरुसेही आप अपने भाइसे चुदवाती थी.. तो फीर मेने जयश्रीको चोदलीया तो क्या गुनाह करदीया..? आप भी तो अपने भाइसे चुदवाती थी..

वृन्दा : (हसते धीरेसे हाथ थामते) अरे यार.. समज.. बुरा मत मान.. मुजे सती सावीत्री होनेका नाटक तो करना ही था.. लेकीन अंदरसे मे बहुत ही छीनाल हु.. बडी वाली चुदकड.. बस.. अब मे तुमसे ही चुदवाउगी.. हम सास दामाद हेतो कोइ हमपे सक भी नही करेगा.. चल अब आइसक्रीम खाली हेतो.. देर होजायेगी..

फीर दोनो खडे हो गये ओर आइसक्रीमका बील पे करके कारमे बैठ जाते हे.. फीर दोनो होस्पीटलकी ओर बाते करते नीकल जाते हे.. वृन्दा अपनी लाइफके ओर कीस्से भी श्रीधरको सुनाती हे.. की वो कैसे अपने पतीको चकमा देते जीतुके साथ हनीमुन मनाने चली जाती थी..

वृन्दा : (मुस्कुराते) देख बातो ही बातोमे होस्पीटल आगइ.. बस.. याद रखना मेरी बेटीको मीलनेके लीये दोपहोरके वक्त अकेले आया करो.. दोनो खुब मजे करेगे.. ओर फोनपे भी चेट करेगे.. मेने तुजे अपना नंबरतो देदीया हे..

इधर लखन सृतीको लेकर घर चला गयाथा.. वहा सबने खाना खाया.. उस रात वृन्दा रातमे घर चली गइ.. ओर ब्रीन्दा श्रीधर वही जयश्रीके पास रहे.. उनको सृतीने स्पेसीयल रुम दीया था.. तो तीनो रुम बंध करके सोने लगे.. देर रात श्रीधरने वही अपनी मां ब्रीन्दाको जमकर दो बार चोद लीया..

जयश्रीको दो दीन क्लीनीकपे रखा फीर उनको भी छुटी दे दी गइ.. दीन बीतने लगे.. अब पुनम भी अपनी बच्चीको सम्हालनेमे व्यस्त रहेने लगी.. लेकीन लखनका खयाल रखना नही भुलती.. इसी बीच रजीया राधीका भावना ओर कभी कभी नीलन लखनकी प्यास बुजाती रही..

तो गांवमे भी सब रुटीन चलने लगा.. जयश्री अभी भी अपनी मम्मीके वहा मायकेमे थी.. तो इस बातका फायदा ब्रीन्दा ओर श्रीधर खुब उठाते रहे.. दोनो अब खुलकर पती पत्नीकी तराह रहेने लगे.. ब्रीन्दा हर सुबह श्रीधरके नामका सींदुर अपने सरपे लगाती..

तो श्रीधर हप्तेमे तीन चार बार सुबह सहेर जयश्रीको मीलने चला जाता.. फीर वही खाना खालेता.. जयश्री खाना खाकर आराम करते सो जाती तो श्रीधर चुपकेसे वृन्दाके कमरेमे चला जाता.. ओर वृन्दाकी जमकर चुदाइ कर लेता.. जीसे वृन्दा भी खुस रहेने लगी..

बरखा बसंतीके अलावा अब मुना भी अपनी मामीके साथ रीलेशनमे आ चुका था.. हालाकी उनकी मामी उमरमे मुनासे काफी बडी थी.. दोनो फोनपे चेट ओर प्यार भरी बाते करते काफी आगे बढ चुके थे.. अ‍ेक दीन बातो ही बातोमे उनकी मामी गीतासे पता चलाकी उनका पती अभी घरपे नही हे.. ओर देर रात आयेगा..

बस.. मुना सीधा ही गीताके घर चला गया.. मुनाको देखते ही पहेलेतो गीता थोडी गभरा गइ.. फीर कुछ ही देरके बाद दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे अ‍ेक दुसरेके होठोको चुम रहे थे.. आधे घंटेके बाद गीताके बेडरुमसे उनकी हल्कीसी चीखे कमरेमे गुंज रही थी..

ओर कुछ ही देरके बाद वोही कमरेसे गीताकी जोरोसे कामुक सीसकारीया सुनाइ दे रही थी.. ये दोनोकी पहेली चुदाइ थी.. मुना गीताकी घमासान चुदाइ कर रहा था.. सभी दोस्तोकी अ‍ेक आदतके कारण मुनाने भी गीताको बीना लंड बहार नीकाले दो बार चोद लीया.. ओर गीताकी हालत बीगाडदी..





फीर तो दो तीन बार ओर मुनाको अ‍ैसा मौका मीला.. ओर वो दीनमे गीताकी चुदाइ करके आजाता.. अब गीताको भी मुनाका साथ अच्छा लगने लगा था.. जब भी उनका पती घरपे नही होता गीता फोन करके मुनाको घर बुला लेती.. ओर अपनी प्यास मुनासे बुजा लेती..

गांवमे भी स्कुल ओर होस्पीटलका काम तेजीसे हो रहा था.. ओर आधेसे ज्यादा काम खतम हो चुका था.. चारुके सरपंच होते ही गांवमे काफी सुधार होगया था.. तो मंजुकी तबीयत भी लडखडाने लगी थी.. देवायतको दया ओर लताने सम्हाल लीया था.. वो अक्सर चारु नीशा वंदना ओर रश्मीको भी मीलने चला जाता.. तो दुसरी ओर वसुधाकी कामाग्नी भडकने लगी थी..

अब वो अक्सर बाथरुममे जाकर उंगलीसे अपने आपको सांत करने लगी थी.. वो मुनाके बारेमे सोचती थी.. लेकीन उनके मनमे अ‍ेक डरसा होने लगा था.. कही कीसीको पता चल गया तो..? खास करके बरखा ओर बसंतीका डर.. क्युकी वो जानती थी की अब दोनो मुनाकी बीवीया हे..
 
इसी बीच लखन ओर चंदा भी दोस्तीके नामसे काफी करीब आचुके थे.. अब तो दोनो हल्कीसी छेडखानी भी करने लगे थे.. चंदाको फीरसे जींन्दा महेसुस होने लगा.. चंदाके मामलेमे लखन कोइ जल्दबाजी करना नही चाहता था.. वो चंदाको योजना बध्ध तरीकेसे धीरे धीरे ट्रेससे बहार नीकाल रहा था..

तो चंदा भी लखनके साथ अब बहुत खुस रहेने लगी थी.. जबभी उनकी कामाग्नी भडक जाती वो लखनकी ओर कातील नजरोसे हसते उनके दोनो गाल खीच लेती.. या लखनकी पीठमे मुका मारते उनकी मस्तीया करती तो जवाबमे लखन भी चंदाकी पीठमे मुका जड देता..

या उनकी कमरमे चीमटी काटता.. ओर कभी कभी चंदाके पीछवाडेमे चपत लगा देता.. ओर मौका मीलते ही चंदाकी मस्तीया करते उनको पीछेसे बाहोमे भीचलेता.. ओर उपर उठा लेता तब वो चंदाके बुब्सको छु लेता.. तब चंदा बहुत ही सर्मसार होजाती.. ओर जोरोसे हसते लखनसे छुटनेकी कोसीस करती..

फीर छुटतेही वो लखनकी ओर तीरछी नजरोसे हसती.. अ‍ेक साम लखन नीलम चंदा ओर राधीका दीयाकी सादीमे चले गये.. दीयाका रीसेप्शन था.. तोवो नीलम ओर लखनको देखकर बहुत खुस होगइ.. उसने अपने पतीसे लखन नीलम राधीका सबका परीचय भी करवाया.. तो उनकी सासने राधीकाका हाथ थाम लीया..

दीयाकी सास : (मुस्कुराते) राधीकाजी.. थेन्कयु वेरी मच.. आपने हमारी दीयाका अ‍ेक मांकी तराह बहुत खयाल रखा..

राधीका : (मुस्कुराते) अरे.. ये तो मेरा फर्ज था..

दीयाकी सांस : (मुस्कुराते) ये तो दीयाकी फ्रेन्ड नीलम हे लेकीन ये हेन्डसम लडका कौन हे..?

राधीका : (मुस्कुराते) ये --गांवके छोटे ठाकुर हे.. मेरे पती..

दीयाकी सांस : (फुसफुसाते) क्या..? ये आपके पती हे..? अरे हां.. मे इनके बडे भाइको जानती हु.. मेरे साथ ही पढते थे.. क्या ये देवायतके छोटे भाइ हे..?

राधीका : (मुस्कुराते) हां.. ये उनके छोटे भाइ हे.. लखन नाम हे इनका.. ओर ये मेरी जेठानी हे.. चंदा भाभी.. उसी देवायतजीकी पत्नी..

दीयाकी सास : (हसते) अरे.. तब तो आप लोग हमारे स्पेसीगल गेस्ट हे.. आइअ‍े..

फीर दीयाकी सासने अपने पतीसे सबका गहेराइमे परीचय करवाया तो उनके पतीकी आंख भी चमक गइ.. उसने लखनका फोन नंबर भी अ‍ेक्सचेन्ज करलीया.. फीर सबने वहा डीनर कीया.. तभी नीलम दीयाको मीलने चली गइ.. फीर सबलोग वापस घर आगये..

अ‍ेक दीन सुबह लखन अपनी ओफीसमे बैठा था.. ओर उसे अ‍ेक टेक्स मेसेज आया.. मेसेजमे लखनको फ्री होते ही कोल करनेको कहा था.. ओर ये टेक्स मेसेज सृतीकी डो. सहेली भावीका का था.. क्युकी भावीका ओर लखन काफी दीनोसे बाते कर रहे थे..

जबसे सृतीका हादसा हुआ तबसे ही दोनो मेसेज ओर फोनपे बाते करते काफी आगे बढ चुके थे.. हर टेक्समे दोनो दील वाला इमोजी भेजना नही चुकते थे.. लखन जो भी करता सबकुछ पुनमको बता देता.. ओर पुनम भी लखनको आगे बढनेमे पुरा साथ देतीथी.. लखनने बहार नीकलकर फोन कर दीया..

लखन : (मुस्कुराते) हेलो डोक्टर साहीबा.. कहो.. कैसे याद कीया..? हमारी बहुत याद आ रही हे क्या..?

भावीका : (सरमाते धीरेसे) हां.. तभी तो फोन करनेको कहा.. कहो.. कलका क्या प्रोग्राम हे..?

लखन : (मुस्कुराते) कुछ खास नही.. हुकुम फरमाइये..?

भावीका : (मुस्कुराते) मे अ‍ेक अ‍ेड्रेस सेन्ड कर रही हु.. वहा सुबह दस बजे पहोंच जाना..

लखन : (मुस्कुराते) क्यु..? कोइ खास बात हे..?

भावीका : (मुस्कुराते) हां.. बहुत खास बात हे.. अब ज्यादा सवाल नही.. हम लंच ओर डीनर साथमे करेगे.. घरपे कुछ भी बहाना बनाकर छोटे बच्चेकी तराह आजाना..

लखन : (मुस्कुराते) हुकुम तो अ‍ैसे कर रही हो.. जैसे तुम मेरी बीवी हो..

भावीका : (मुस्कुराते) हुकुमके बच्चे जीतना कहा हे उतना ही करो.. ओर अगर जरुरत पडी तो आपकी बीवी भी होजाउगी.. कल.. दस बजे.. भुलना मत..

लखन : (मुस्कुराते) जो हुकुम डोक्टर डार्लींग.. ओर कुछ..?

भावीका : (मुस्कुराते) हां.. बस अ‍ैसे ही बुलाया करो.. अब तो सीर्फ आपके मुहसे ही सुननेको मीलता हे..

लखन : (मुस्कुराते) क्यु..? अब धृव आपको अ‍ैसे नही बुलाता..?

भावीका : (मुस्कुराते) नही.. वो सब बाते हम कल मीलकर करेगे.. आपको कुछ खास बताना हे.. अच्छा ये बताओ.. सृतीसे मीलना सुरु करदीया..?

लखन : (मुस्कुराते) नही.. अभी कहा..? आप नेही तो मना कीया हे.. ढाइ महीना होगया..

भावीका : (मुस्कुराते) अब धीरे धीरे सुरु कर सकते हो.. दो दीन बाद उनको लेकर आना.. आपके सामने ही उसे बता दुगी.. वैसे भी वो खुद डोक्टर हे.. आपको मना नही करेगी..

लखन : (मुस्कुराते) ओर हम कब मील रहे हे..? मीन्स.. कुछ स्पेसीयल..

भावीका : (सरमाते मुस्कुराते) वो आपको कल पता चल जायेगा.. सुबह.. दस बजे.. आइ लव यु.. माय लव..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. लव यु टु..

भावीका : (मुस्कुराते) ओर हां.. इस बारेमे कीसीको पता ना चले.. धृवको भी नही.. बाय..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. बाय..

फोन कट करते लखन मुस्कुराने लगा.. तब कुछ ही देरमे उनके फोनमे मेसेजका टोन बजा.. लखनने वोट्सअ‍ेप खोलकर देखा तो भावीका का मेसेज आगया था.. उनमे अ‍ेक आलीशान होटेलका अ‍ेड्रेस था.. ओर साथमे कमरा नंबर भी था.. तो लखन सबकुछ समज गया..
 
Back
Top