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इस रात रजीया राधीकाको चोदनेके बाद लखन पुनमके पास चला गया.. पुनम अपनी बच्चीको दुध पीला रही थी.. ओर सृती घोडे बेचकर सो रही थी.. लखनने पुनमके दुसरे बुब्सपे मुह लगा दीया.. ओर पुनमका दुध पीने लगा.. तो पुनम हसते हुअे लखनके बालोमे उंगलीया घुमाने लगी..
पुनम : (मुस्कुराते) मेला बे..बी.. दुध पीना हे.. दोनोको ठंडी करके जी नही भरा क्या..?
लखन : (बैठकर होंठ चुमकर) दीदी.. आपके ओर सृतीके अलावा कही जी नही भरता हे क्या..?
पुनम : (मुस्कुराते) अब ढाइ महीना होगया.. तो अेक बार सृतीको उनकी सहेलीको दीखा दीजीये.. फीर उनको पुछकर सुरु करदो.. कमीनी बहुत प्यासी हो गइ हे..
लखन : (सामने देखते धीरेसे) दीदी.. आज ही उनका फोन आया था.. कल सुबह मुजे होटेलमे बुलाया हे.. कहेती थी लंच डीनर साथ करेगे.. ओर कीसीको बतान मत..
पुनम : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. कल उनको अच्छेसे मीललो.. कुछ जरुरी बात करके अपना जी हल्का करना चाहती हे.. भाइ.. अेक ओर बात.. अब उनकी जींदगी बदलने वाली हे.. भवीस्यमे हमारी सौतन होगी.. वो हमारे साथ जुड जायेगी.. तो उनको अच्छेसे सम्हालना..
लखन : (मुस्कुराते) क्या सचमे..? आप मुजे दुसरेके साथ भेजती होतो आपको बुरा नही लगता..?
पुनम : (मुस्कुराते) लगता हे लेकीन आपको भेजना भी जरुरी हे.. अेक बार उनको अच्छेसे मीललो.. ओर परसो हमे गांव भी जाना हे.. वहा मंजु मोमकी तबीयत भी अच्छी नही हे..
लखन : (आंख गीली करते) दीदी.. हम मोमके बगैर क्या करेगे..?
पुनम : (आंसु टपक गये) भाइ.. हमे हीमत रखनी पडेगी.. ओर वो वापस भीतो आ रही हे.. भावना दीदीकी कोखसे.. क्युकी इस बार वो भाइसे प्रेगनेन्ट हुइ हे.. उनका पांचवा महीना सुरु होते ही मोम उनके गर्भमे चली जायेगी..
लखन : (सामने देखते) तो फीर अभी भावना भाभीका कीतना महीना चल रहा हे..?
पुनम : (मुस्कुराते) तीन महीना.. मोमके पास अभी दो महीने हे..
लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. इस बच्चीको हम पालेगे.. हमारी बेटीकी तराह.. हमारी मोम..
पुनम : (प्यारसे गाल सहेलाते) भाइ.. आप कीतने अच्छे हे.. अपने परायेमे फर्क नही रखते..
लखन : (मुस्कुराते) यहा कौन पराया हे..? सब अपने हीतो हे.. भाइका खुन भीतो हमारा खुन हे..
पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. अब वक्त नजदीक आ गया हे.. हो सकता हे हमे हमेसाके लीये गांव वापस जाना पडे.. चंदा भाभी यही रहेगी.. तो अब आप भाभीके साथ आगे बढ सकते हो..
लखन : (मुस्कुराते) अभी उसे पुरी तराह ठीक तो होनेदो..
पुनम : (मुस्कुराते) वो काफी हद तक ठीक हो गइ हे.. देख रही हु आपके साथ ज्यादा घुमने लगी हे.. आके साथ कैसे मस्तीया करती हे.. ओर वो बहुत खुस भी हे.. यहा आकर उसने कोइ अैसी वैसी हरकत नही की जो गांवमे करती थी.. ओर गुमसुम बैठी रहेती थी.. यहा आकर वो बहुत खुस हे.. बस.. अब आखरी वारकी जरुरत हे..
लखन : (सामने देखते) क्या उनके साथ.. मीन्स.. सब जरुरी हे क्या..?
पुनम : (सामने देखते) अभी भी क्यु सकोच कर रहे हो..? बहुत जरुरी हे.. बल्की सीर्फ इनके साथ नही.. वो सभी जो आपके साथ रीलेशनके लीये राजी होगी.. आपको सबको खुस रखना पडेगा.. खास करके चंदा भाभीको..
लखन : (मुस्कुराते) तो क्या मेरे साथ रीलेशनमे आकर वो ठीक होजायेगी..?
पुनम : (मुस्कुराते) हां.. वो पुरी तराह ठीक होजायेगी.. जब आप दोनोका पहेला मीलन होगा.. फीर देखना वो कैसे आपकी दीवानी हो जाती हे.. फीर वो आपके कहेनेसे धिरेनको आसानीसे माफ कर देगी.. ओर नीलुको भी स्वीकार करलेगी.. आखीर उसे नीलुके साथ हीतो रहेना हे..
फीर पुनमने बच्चीको जुलेमे सुला दीया तो लखन ओर पुनम अेक दुसरेकी बाहोमे चीपक कर सो गये.. इसी वक्त फीरोज गांवमे अपनी बीवी जरीनाकी चुदाइ करके उनके सीनेपे ढेर होते पडा था.. ओर जरीना प्यासी रेह गइथी.. फीर भी मनमे फीरोजको गालीया देते उनकी पीठ सहेला रही थी..
फीरोज : (सर उचा करते जरीनाकी ओर देखते) जरीना.. आज मेने काजी साहबसे बात करली हे.. वो परसो हमारे घरपे आकर हमारा नीकाह करवा देगे..
जरीना : (सामने देखते) तो फीर आपने दीदीसे नीकाह करनेका फैसला कर ही लीया..
फीरोज : (आस्चर्यसे सामने देखते) हां तो..? हमारी बात तो हुइ थी.. ओर मे हमारी सबानाकी सादी साहीलसे करवानेके लीये राजी भी हु.. तो क्या मे सलमा भाभीको लीखके दु..?
जरीना : (मुह घुमाते) नही.. इनकी कोइ जरुरत नही हे.. जब आपने सब तैय कर ही लीया हेतो मे क्या कहुगी..? अब आप मना करोगे तो भी मे मेरी सबानाकी सादी साहीलसे करवा दुगी.. क्या आपको यकीन हेकी आप दो दो ओरतोको सम्हाल पाओगे..?
पुनम : (मुस्कुराते) मेला बे..बी.. दुध पीना हे.. दोनोको ठंडी करके जी नही भरा क्या..?
लखन : (बैठकर होंठ चुमकर) दीदी.. आपके ओर सृतीके अलावा कही जी नही भरता हे क्या..?
पुनम : (मुस्कुराते) अब ढाइ महीना होगया.. तो अेक बार सृतीको उनकी सहेलीको दीखा दीजीये.. फीर उनको पुछकर सुरु करदो.. कमीनी बहुत प्यासी हो गइ हे..
लखन : (सामने देखते धीरेसे) दीदी.. आज ही उनका फोन आया था.. कल सुबह मुजे होटेलमे बुलाया हे.. कहेती थी लंच डीनर साथ करेगे.. ओर कीसीको बतान मत..
पुनम : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. कल उनको अच्छेसे मीललो.. कुछ जरुरी बात करके अपना जी हल्का करना चाहती हे.. भाइ.. अेक ओर बात.. अब उनकी जींदगी बदलने वाली हे.. भवीस्यमे हमारी सौतन होगी.. वो हमारे साथ जुड जायेगी.. तो उनको अच्छेसे सम्हालना..
लखन : (मुस्कुराते) क्या सचमे..? आप मुजे दुसरेके साथ भेजती होतो आपको बुरा नही लगता..?
पुनम : (मुस्कुराते) लगता हे लेकीन आपको भेजना भी जरुरी हे.. अेक बार उनको अच्छेसे मीललो.. ओर परसो हमे गांव भी जाना हे.. वहा मंजु मोमकी तबीयत भी अच्छी नही हे..
लखन : (आंख गीली करते) दीदी.. हम मोमके बगैर क्या करेगे..?
पुनम : (आंसु टपक गये) भाइ.. हमे हीमत रखनी पडेगी.. ओर वो वापस भीतो आ रही हे.. भावना दीदीकी कोखसे.. क्युकी इस बार वो भाइसे प्रेगनेन्ट हुइ हे.. उनका पांचवा महीना सुरु होते ही मोम उनके गर्भमे चली जायेगी..
लखन : (सामने देखते) तो फीर अभी भावना भाभीका कीतना महीना चल रहा हे..?
पुनम : (मुस्कुराते) तीन महीना.. मोमके पास अभी दो महीने हे..
लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. इस बच्चीको हम पालेगे.. हमारी बेटीकी तराह.. हमारी मोम..
पुनम : (प्यारसे गाल सहेलाते) भाइ.. आप कीतने अच्छे हे.. अपने परायेमे फर्क नही रखते..
लखन : (मुस्कुराते) यहा कौन पराया हे..? सब अपने हीतो हे.. भाइका खुन भीतो हमारा खुन हे..
पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. अब वक्त नजदीक आ गया हे.. हो सकता हे हमे हमेसाके लीये गांव वापस जाना पडे.. चंदा भाभी यही रहेगी.. तो अब आप भाभीके साथ आगे बढ सकते हो..
लखन : (मुस्कुराते) अभी उसे पुरी तराह ठीक तो होनेदो..
पुनम : (मुस्कुराते) वो काफी हद तक ठीक हो गइ हे.. देख रही हु आपके साथ ज्यादा घुमने लगी हे.. आके साथ कैसे मस्तीया करती हे.. ओर वो बहुत खुस भी हे.. यहा आकर उसने कोइ अैसी वैसी हरकत नही की जो गांवमे करती थी.. ओर गुमसुम बैठी रहेती थी.. यहा आकर वो बहुत खुस हे.. बस.. अब आखरी वारकी जरुरत हे..
लखन : (सामने देखते) क्या उनके साथ.. मीन्स.. सब जरुरी हे क्या..?
पुनम : (सामने देखते) अभी भी क्यु सकोच कर रहे हो..? बहुत जरुरी हे.. बल्की सीर्फ इनके साथ नही.. वो सभी जो आपके साथ रीलेशनके लीये राजी होगी.. आपको सबको खुस रखना पडेगा.. खास करके चंदा भाभीको..
लखन : (मुस्कुराते) तो क्या मेरे साथ रीलेशनमे आकर वो ठीक होजायेगी..?
पुनम : (मुस्कुराते) हां.. वो पुरी तराह ठीक होजायेगी.. जब आप दोनोका पहेला मीलन होगा.. फीर देखना वो कैसे आपकी दीवानी हो जाती हे.. फीर वो आपके कहेनेसे धिरेनको आसानीसे माफ कर देगी.. ओर नीलुको भी स्वीकार करलेगी.. आखीर उसे नीलुके साथ हीतो रहेना हे..
फीर पुनमने बच्चीको जुलेमे सुला दीया तो लखन ओर पुनम अेक दुसरेकी बाहोमे चीपक कर सो गये.. इसी वक्त फीरोज गांवमे अपनी बीवी जरीनाकी चुदाइ करके उनके सीनेपे ढेर होते पडा था.. ओर जरीना प्यासी रेह गइथी.. फीर भी मनमे फीरोजको गालीया देते उनकी पीठ सहेला रही थी..
फीरोज : (सर उचा करते जरीनाकी ओर देखते) जरीना.. आज मेने काजी साहबसे बात करली हे.. वो परसो हमारे घरपे आकर हमारा नीकाह करवा देगे..
जरीना : (सामने देखते) तो फीर आपने दीदीसे नीकाह करनेका फैसला कर ही लीया..
फीरोज : (आस्चर्यसे सामने देखते) हां तो..? हमारी बात तो हुइ थी.. ओर मे हमारी सबानाकी सादी साहीलसे करवानेके लीये राजी भी हु.. तो क्या मे सलमा भाभीको लीखके दु..?
जरीना : (मुह घुमाते) नही.. इनकी कोइ जरुरत नही हे.. जब आपने सब तैय कर ही लीया हेतो मे क्या कहुगी..? अब आप मना करोगे तो भी मे मेरी सबानाकी सादी साहीलसे करवा दुगी.. क्या आपको यकीन हेकी आप दो दो ओरतोको सम्हाल पाओगे..?













