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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २८१
दोनोके पास सामान ही बहुत कम था.. तो सब पेकींग होगइ.. फीर खाना आगया तो दोनोने खाना खालीया.. ओर खानेके बाद सायराने कीचनका काम नीपटा लीया.. फीर फ्लेटका मेइन गेइट अच्छेसे लोक करलीया ओर दोनो कादीर वाले कमरेमे चले गये.. सायराने रुमका दरवाजा भी बंध करलीया क्युकी उसे पता था.. की अब साहील उसे छोडने वाला नही हे.. ओर वो खुद भीतो वोही चाहती थी.... अब आगे
साहील : (मुस्कुराते) अरे मेइन डोरतो लोक करदीया हे.. इसे क्यु बंध कर रही हे..?
सायरा : (सरमाते धीरेसे) करने दो.. मे कोइ रीस्क लेना नही चाहती.. अगर बहार खीडकीसे कीसीने देख लीया तो..? वैसे दीनमे खीडकी बंध करनेसे कीसीको सक हो सकता हे..
दोनो दोपहोर अेक बजे रुममे घुस गये.. कुछ देर दोनो अेक दुसरेकी बाहोमे लेटे होठोका रसपान करते रहे.. फीर जो चुदाइका दौर चला जो कभी ना थमने वाला लग रहा था.. साहीलने बीना नीचे उतरे लगातार सायराको दो बार चोद लीया..

फीर कुछ देर बाद दोनो आमने सामने अेक दुसरेकी कमरपे पैर फैलाके बैठ गये.. ओर बैठे बैठे ही चुदाइ करने लगे.. ओर हर बार साहील अपने ढेर सारे गाढे पानीसे सायराकी चुतको भरता रहा.. फीर दोनो बाथरुममे अेक साथ नहाने घुस गये.. तो यहा भी साहीलने सायराको खडे खडे चोद लीया..

जैसे दोनो अपना हनीमुन मना रहे हो.. साम साडे पांच बजे रुमका दरवाजा खुला.. देर साम कादीरका फोन आने वाला था तो आज दोनो बहार घुमने नही गये.. साहीलने पीजा ओर्डर कर दीया.. तो बीस मीनीटके बाद पीजा आगये.. दोनोने साथ मीलकर खाया..

फीर बहार होलमे ही दोनो प्यार करते फीरसे बहेक गये.. ओर साहीलने सोफे पेही सायराकी जबर दस्त चुदाइ करली.. आज दीनमे साहीलने सायराको पुरी तराह नीचोड ली.. इतना तो कभी रातमे भी कादीरसे नही चुदी थी.. फीर सायरा रातका खाना बनाने लगी.. तभी कादीरका फोन आगया..
तो सायरा मुस्कुराते साहीलको फोन दीखाते रुममे चली गइ.. ओर रुमका दरवाजा बंध करलीया.. वहा दोनोने फोन सेक्स कीया.. सायरा तो साहीलसे ही संतुस्ट हो चुकी थी.. लेकीन कादीरके सामने अैसा नाटक कीया जैसे वो सचमे कादीरको मीस कर रही हो..
फीर कादीरने काम फायनल होनेकी खुस खबर सुनाइ तो सायरा बहुत ही खुस हो गइ.. इस रात खानेके बाद फीरसे प्यारका सैलाब उमड पडा.. काम खतम होते ही दोनो फीरसे रुममे घुस गये.. फीर तो चुदाइका तुफान भवंडर बनके बेडपे तबाही मचा रहा था.. देर रात तीन बजे तक साहील सायराकी चुदाइ करता रहा..

ओर आखीर दोनो बाथरुम मे नहाने चले गये तो यहा भी खडे खडे सायराकी फीरसे कुटाइ हो गइ.. सायरा थकके चकना चुर हो चुकी थी.. ओर लंगडाते चल रही थी.. अैसे चल रही थी जैसे पहेली बार कादीरने उनका सील भंग कीया था.. फीर दोनो ही अेक दुसरेकी बाहोमे नंगे लेट गये.. तभी..

सायरा : (मुस्कुराते) भाइ.. आज तो तुमने मेरी सारी कशर मीटादी.. मेरी चुतका कचुम्बर बना दीया.. देखो.. कैसे अभी भी खुली चुत फडफडा रही हे..
साहील : (सामने देखते धीरेसे) भाभी.. अगर ये चौडी होगइ हे तो कादीर भाइको पता चल गया तो..? वो आपपे सक तो नही करेगा..?
सायरा : (मुस्कुराते) तु उसकी टेन्शन मत ले.. मेरे पास अेक इम्पोर्टन्ट ट्युब हे.. मे उसे हर सुबह नहानेके बाद लगाती हु.. इनसे चुत फीरसे कस जाती हे.. इस बारेमे कादीर भाइको भी नही पता.. इसीलीये तो हम दोनो इतने सालोसे मजा ले रहे हे.. भाइको आज भी अेक कुआरी जैसी चुतका मजा देती हु..
साहील : (मुस्कुराते) क्या..? सचमे अैसी क्रीम आती हे..? मुजे भी चाहीये..
सायरा : (मुस्कुराते) मे कल दुसरी लाकर दुगी.. यहा पासमे ही अेक मेडीकल स्टोरमे मीलती हे.. लेकीन तुजे कीस लीये चाहीये..?
साहील : (सामने देखते धीरेसे) भाभी.. हे अेक ओरत.. तुम तो जानती हो अब गांवमे कीतना बदलाव हो चुका हे.. तो इस बदलावसे हमारा घर भी अछुत नही रहा..
सायरा : (सीरीयस होते सामने देखते) मतलब..?
साहील : (फीकी मुस्कानसे) मतलब.. अब चाचा भी हमारे गांवके रंगमे रंग गये हे.. उन्होने भी इस बदलावको पुरी तराह स्वीकार करलीया हे.. ओर वो मेरी अम्मीसे सादी कर रहे हे.. क्युकी वो प्रेगनेन्ट हे..
सायरा : (चोंकते धीरेसे) क्या..? बडी अम्मी प्रेगनेन्ट हे..? लेकीन वोतो वीधवा हे.. ओर अबु असे सादी कर रहे हे..? लेकीन बडी अम्मी कैसे..? कीसीसे अफैर था..? क्या अबुने तो उसे..?
साहील : नही भाभी.. आपतो जानती हेना.. हमारे गांवमे रीस्तोको लेकर कीतना बदलाव आ गया हे.. वहा कीसीको भी कोइ रीस्तेसे अेतराज नही.. ज्यादातर घरमे ही सब रीस्तोमे खुलकर सेक्स करने लगे हे.. तो इसमे हमारा घर भी बाकात नही हे.. अम्मा चाचा चाचीके गांव आनेसे पहेले ही प्रेगनेन्ट हो चुकी थी..
सायरा : (आसंकासे देखते) बता कीससे..? कही.. तु..म..
साहील : (मुस्कुराते) हां.. आप तो जानते हे.. मे बचपनसे ही अम्माके साथ सोता हु.. अभी भी दोनो ही साथ सोते हे.. तो अेक दीन हम दोनोही बहेक गये.. बस.. तबसे चल रहा हे.. वो बडी उमरकी ओरत कोइ ओर नही.. मेरी अम्मा हे.. तो ठाकुर साहेने अम्माकी सादी मुजसे करवानेकी पेसकस की.. तो चाचाने मना करदीया.. ओर खुद अम्मासे सादी करनेको तैयार हो गये..
अध्याय - २८१
दोनोके पास सामान ही बहुत कम था.. तो सब पेकींग होगइ.. फीर खाना आगया तो दोनोने खाना खालीया.. ओर खानेके बाद सायराने कीचनका काम नीपटा लीया.. फीर फ्लेटका मेइन गेइट अच्छेसे लोक करलीया ओर दोनो कादीर वाले कमरेमे चले गये.. सायराने रुमका दरवाजा भी बंध करलीया क्युकी उसे पता था.. की अब साहील उसे छोडने वाला नही हे.. ओर वो खुद भीतो वोही चाहती थी.... अब आगे
साहील : (मुस्कुराते) अरे मेइन डोरतो लोक करदीया हे.. इसे क्यु बंध कर रही हे..?
सायरा : (सरमाते धीरेसे) करने दो.. मे कोइ रीस्क लेना नही चाहती.. अगर बहार खीडकीसे कीसीने देख लीया तो..? वैसे दीनमे खीडकी बंध करनेसे कीसीको सक हो सकता हे..
दोनो दोपहोर अेक बजे रुममे घुस गये.. कुछ देर दोनो अेक दुसरेकी बाहोमे लेटे होठोका रसपान करते रहे.. फीर जो चुदाइका दौर चला जो कभी ना थमने वाला लग रहा था.. साहीलने बीना नीचे उतरे लगातार सायराको दो बार चोद लीया..

फीर कुछ देर बाद दोनो आमने सामने अेक दुसरेकी कमरपे पैर फैलाके बैठ गये.. ओर बैठे बैठे ही चुदाइ करने लगे.. ओर हर बार साहील अपने ढेर सारे गाढे पानीसे सायराकी चुतको भरता रहा.. फीर दोनो बाथरुममे अेक साथ नहाने घुस गये.. तो यहा भी साहीलने सायराको खडे खडे चोद लीया..

जैसे दोनो अपना हनीमुन मना रहे हो.. साम साडे पांच बजे रुमका दरवाजा खुला.. देर साम कादीरका फोन आने वाला था तो आज दोनो बहार घुमने नही गये.. साहीलने पीजा ओर्डर कर दीया.. तो बीस मीनीटके बाद पीजा आगये.. दोनोने साथ मीलकर खाया..

फीर बहार होलमे ही दोनो प्यार करते फीरसे बहेक गये.. ओर साहीलने सोफे पेही सायराकी जबर दस्त चुदाइ करली.. आज दीनमे साहीलने सायराको पुरी तराह नीचोड ली.. इतना तो कभी रातमे भी कादीरसे नही चुदी थी.. फीर सायरा रातका खाना बनाने लगी.. तभी कादीरका फोन आगया..
तो सायरा मुस्कुराते साहीलको फोन दीखाते रुममे चली गइ.. ओर रुमका दरवाजा बंध करलीया.. वहा दोनोने फोन सेक्स कीया.. सायरा तो साहीलसे ही संतुस्ट हो चुकी थी.. लेकीन कादीरके सामने अैसा नाटक कीया जैसे वो सचमे कादीरको मीस कर रही हो..
फीर कादीरने काम फायनल होनेकी खुस खबर सुनाइ तो सायरा बहुत ही खुस हो गइ.. इस रात खानेके बाद फीरसे प्यारका सैलाब उमड पडा.. काम खतम होते ही दोनो फीरसे रुममे घुस गये.. फीर तो चुदाइका तुफान भवंडर बनके बेडपे तबाही मचा रहा था.. देर रात तीन बजे तक साहील सायराकी चुदाइ करता रहा..

ओर आखीर दोनो बाथरुम मे नहाने चले गये तो यहा भी खडे खडे सायराकी फीरसे कुटाइ हो गइ.. सायरा थकके चकना चुर हो चुकी थी.. ओर लंगडाते चल रही थी.. अैसे चल रही थी जैसे पहेली बार कादीरने उनका सील भंग कीया था.. फीर दोनो ही अेक दुसरेकी बाहोमे नंगे लेट गये.. तभी..

सायरा : (मुस्कुराते) भाइ.. आज तो तुमने मेरी सारी कशर मीटादी.. मेरी चुतका कचुम्बर बना दीया.. देखो.. कैसे अभी भी खुली चुत फडफडा रही हे..
साहील : (सामने देखते धीरेसे) भाभी.. अगर ये चौडी होगइ हे तो कादीर भाइको पता चल गया तो..? वो आपपे सक तो नही करेगा..?
सायरा : (मुस्कुराते) तु उसकी टेन्शन मत ले.. मेरे पास अेक इम्पोर्टन्ट ट्युब हे.. मे उसे हर सुबह नहानेके बाद लगाती हु.. इनसे चुत फीरसे कस जाती हे.. इस बारेमे कादीर भाइको भी नही पता.. इसीलीये तो हम दोनो इतने सालोसे मजा ले रहे हे.. भाइको आज भी अेक कुआरी जैसी चुतका मजा देती हु..
साहील : (मुस्कुराते) क्या..? सचमे अैसी क्रीम आती हे..? मुजे भी चाहीये..
सायरा : (मुस्कुराते) मे कल दुसरी लाकर दुगी.. यहा पासमे ही अेक मेडीकल स्टोरमे मीलती हे.. लेकीन तुजे कीस लीये चाहीये..?
साहील : (सामने देखते धीरेसे) भाभी.. हे अेक ओरत.. तुम तो जानती हो अब गांवमे कीतना बदलाव हो चुका हे.. तो इस बदलावसे हमारा घर भी अछुत नही रहा..
सायरा : (सीरीयस होते सामने देखते) मतलब..?
साहील : (फीकी मुस्कानसे) मतलब.. अब चाचा भी हमारे गांवके रंगमे रंग गये हे.. उन्होने भी इस बदलावको पुरी तराह स्वीकार करलीया हे.. ओर वो मेरी अम्मीसे सादी कर रहे हे.. क्युकी वो प्रेगनेन्ट हे..
सायरा : (चोंकते धीरेसे) क्या..? बडी अम्मी प्रेगनेन्ट हे..? लेकीन वोतो वीधवा हे.. ओर अबु असे सादी कर रहे हे..? लेकीन बडी अम्मी कैसे..? कीसीसे अफैर था..? क्या अबुने तो उसे..?
साहील : नही भाभी.. आपतो जानती हेना.. हमारे गांवमे रीस्तोको लेकर कीतना बदलाव आ गया हे.. वहा कीसीको भी कोइ रीस्तेसे अेतराज नही.. ज्यादातर घरमे ही सब रीस्तोमे खुलकर सेक्स करने लगे हे.. तो इसमे हमारा घर भी बाकात नही हे.. अम्मा चाचा चाचीके गांव आनेसे पहेले ही प्रेगनेन्ट हो चुकी थी..
सायरा : (आसंकासे देखते) बता कीससे..? कही.. तु..म..
साहील : (मुस्कुराते) हां.. आप तो जानते हे.. मे बचपनसे ही अम्माके साथ सोता हु.. अभी भी दोनो ही साथ सोते हे.. तो अेक दीन हम दोनोही बहेक गये.. बस.. तबसे चल रहा हे.. वो बडी उमरकी ओरत कोइ ओर नही.. मेरी अम्मा हे.. तो ठाकुर साहेने अम्माकी सादी मुजसे करवानेकी पेसकस की.. तो चाचाने मना करदीया.. ओर खुद अम्मासे सादी करनेको तैयार हो गये..













