Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 108 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

इस रात रजीया राधीकाको चोदनेके बाद लखन पुनमके पास चला गया.. पुनम अपनी बच्चीको दुध पीला रही थी.. ओर सृती घोडे बेचकर सो रही थी.. लखनने पुनमके दुसरे बुब्सपे मुह लगा दीया.. ओर पुनमका दुध पीने लगा.. तो पुनम हसते हुअ‍े लखनके बालोमे उंगलीया घुमाने लगी..

पुनम : (मुस्कुराते) मेला बे..बी.. दुध पीना हे.. दोनोको ठंडी करके जी नही भरा क्या..?

लखन : (बैठकर होंठ चुमकर) दीदी.. आपके ओर सृतीके अलावा कही जी नही भरता हे क्या..?

पुनम : (मुस्कुराते) अब ढाइ महीना होगया.. तो अ‍ेक बार सृतीको उनकी सहेलीको दीखा दीजीये.. फीर उनको पुछकर सुरु करदो.. कमीनी बहुत प्यासी हो गइ हे..

लखन : (सामने देखते धीरेसे) दीदी.. आज ही उनका फोन आया था.. कल सुबह मुजे होटेलमे बुलाया हे.. कहेती थी लंच डीनर साथ करेगे.. ओर कीसीको बतान मत..

पुनम : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. कल उनको अच्छेसे मीललो.. कुछ जरुरी बात करके अपना जी हल्का करना चाहती हे.. भाइ.. अ‍ेक ओर बात.. अब उनकी जींदगी बदलने वाली हे.. भवीस्यमे हमारी सौतन होगी.. वो हमारे साथ जुड जायेगी.. तो उनको अच्छेसे सम्हालना..

लखन : (मुस्कुराते) क्या सचमे..? आप मुजे दुसरेके साथ भेजती होतो आपको बुरा नही लगता..?

पुनम : (मुस्कुराते) लगता हे लेकीन आपको भेजना भी जरुरी हे.. अ‍ेक बार उनको अच्छेसे मीललो.. ओर परसो हमे गांव भी जाना हे.. वहा मंजु मोमकी तबीयत भी अच्छी नही हे..

लखन : (आंख गीली करते) दीदी.. हम मोमके बगैर क्या करेगे..?

पुनम : (आंसु टपक गये) भाइ.. हमे हीमत रखनी पडेगी.. ओर वो वापस भीतो आ रही हे.. भावना दीदीकी कोखसे.. क्युकी इस बार वो भाइसे प्रेगनेन्ट हुइ हे.. उनका पांचवा महीना सुरु होते ही मोम उनके गर्भमे चली जायेगी..

लखन : (सामने देखते) तो फीर अभी भावना भाभीका कीतना महीना चल रहा हे..?

पुनम : (मुस्कुराते) तीन महीना.. मोमके पास अभी दो महीने हे..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. इस बच्चीको हम पालेगे.. हमारी बेटीकी तराह.. हमारी मोम..

पुनम : (प्यारसे गाल सहेलाते) भाइ.. आप कीतने अच्छे हे.. अपने परायेमे फर्क नही रखते..

लखन : (मुस्कुराते) यहा कौन पराया हे..? सब अपने हीतो हे.. भाइका खुन भीतो हमारा खुन हे..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. अब वक्त नजदीक आ गया हे.. हो सकता हे हमे हमेसाके लीये गांव वापस जाना पडे.. चंदा भाभी यही रहेगी.. तो अब आप भाभीके साथ आगे बढ सकते हो..

लखन : (मुस्कुराते) अभी उसे पुरी तराह ठीक तो होनेदो..

पुनम : (मुस्कुराते) वो काफी हद तक ठीक हो गइ हे.. देख रही हु आपके साथ ज्यादा घुमने लगी हे.. आके साथ कैसे मस्तीया करती हे.. ओर वो बहुत खुस भी हे.. यहा आकर उसने कोइ अ‍ैसी वैसी हरकत नही की जो गांवमे करती थी.. ओर गुमसुम बैठी रहेती थी.. यहा आकर वो बहुत खुस हे.. बस.. अब आखरी वारकी जरुरत हे..

लखन : (सामने देखते) क्या उनके साथ.. मीन्स.. सब जरुरी हे क्या..?

पुनम : (सामने देखते) अभी भी क्यु सकोच कर रहे हो..? बहुत जरुरी हे.. बल्की सीर्फ इनके साथ नही.. वो सभी जो आपके साथ रीलेशनके लीये राजी होगी.. आपको सबको खुस रखना पडेगा.. खास करके चंदा भाभीको..

लखन : (मुस्कुराते) तो क्या मेरे साथ रीलेशनमे आकर वो ठीक होजायेगी..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. वो पुरी तराह ठीक होजायेगी.. जब आप दोनोका पहेला मीलन होगा.. फीर देखना वो कैसे आपकी दीवानी हो जाती हे.. फीर वो आपके कहेनेसे धिरेनको आसानीसे माफ कर देगी.. ओर नीलुको भी स्वीकार करलेगी.. आखीर उसे नीलुके साथ हीतो रहेना हे..

फीर पुनमने बच्चीको जुलेमे सुला दीया तो लखन ओर पुनम अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे चीपक कर सो गये.. इसी वक्त फीरोज गांवमे अपनी बीवी जरीनाकी चुदाइ करके उनके सीनेपे ढेर होते पडा था.. ओर जरीना प्यासी रेह गइथी.. फीर भी मनमे फीरोजको गालीया देते उनकी पीठ सहेला रही थी..

फीरोज : (सर उचा करते जरीनाकी ओर देखते) जरीना.. आज मेने काजी साहबसे बात करली हे.. वो परसो हमारे घरपे आकर हमारा नीकाह करवा देगे..

जरीना : (सामने देखते) तो फीर आपने दीदीसे नीकाह करनेका फैसला कर ही लीया..

फीरोज : (आस्चर्यसे सामने देखते) हां तो..? हमारी बात तो हुइ थी.. ओर मे हमारी सबानाकी सादी साहीलसे करवानेके लीये राजी भी हु.. तो क्या मे सलमा भाभीको लीखके दु..?

जरीना : (मुह घुमाते) नही.. इनकी कोइ जरुरत नही हे.. जब आपने सब तैय कर ही लीया हेतो मे क्या कहुगी..? अब आप मना करोगे तो भी मे मेरी सबानाकी सादी साहीलसे करवा दुगी.. क्या आपको यकीन हेकी आप दो दो ओरतोको सम्हाल पाओगे..?
 
फीरोज : (सलमाके उपरसे उतरते बैठते) तु कहेना क्या चाहती हे..? की मे तुम दोनोको सम्हालनेमे काबील नही हु..? मत भुल मे असली मर्द हु.. दो क्या मे चार चार बीवीया सम्हाल सकता हु.. ओर ये हमारे समाजमे जाहीज भी हे..

जरीना : (चुतको साफ करते थोडा गुस्सेसे) शुक्र मनाओ हमारे साहीलका.. ओर उन ठाकुरोका.. वरना सहेरमे तो बडी मुस्कीलसे हमारा गुजारा होता था.. अ‍ेक बीवीको सम्हालनेमे भी दीन रात आपको फेक्टरीमे काम करना पडता था.. भुल गये..? अच्छा हुआ साहीलने हमारी मदद की..

फीरोज : (सामने देखते) ताने मार रही हो..? साहील भीतो हमारा ही खुन हे.. ओर इसके लीयेतो सबुका हाथ उनको दे रहा हु.. क्या तुजे अभी जगडा करना हे..?

जरीना : (सामने देखते) मे कौन होती हु जो आपसे जगडा करु.. अब जगडा करना हेतो नइ बीवीके साथ करना.. इस बीवीसे तो आपका मन भर गया हे.. अब सोजाइअ‍े.. मे सुबह सलमा दीदीसे बात कर लुगी.. की वो परसो नीकाहके लीये तैयार रहे..

फीरोज : (बाहोने भरते सोते) अब सोजा.. तेरेसे मन थोडीना भरता हे.. इसीलीये तो अभी तुजे प्यार कीया..

जरीना : (मुह बीगाडते) ठीक हे ठीक हे सोजाइअ‍े..

फीरोज : (हसते सोते) बीवीओके हजार नखरे होते हे.. हें..हें..हें.. सोजा..

जरीना : (सोते मनमे) कमीना.. अ‍ेक बीवीकोतो ठीकसे चोद नही पता.. हर बार मुजे प्यासी रख देता हे.. इनसे तो सलमा दीदी ओर साहीलका अच्छा हे.. मेरा साहील जवान मुंडा हे.. उनका हथीयार भी कीतना दमदार हे.. सलमा दीदी कीतनी खुस रहेती हे.. अब तो सलमा दीदीकी बात माननी ही पडेगी..

क्या फर्क पडता हे वो मेरा खुन हे.. कादीर भीतो मेराही खुन था.. कमीना कैसे मुजे ब्लेकमेइल करके चोदता था.. मुजे भी उनकी आदत लग चुकी थी.. तो फीर साहीलसे चुदवानेमे क्या दीकत हे..? अब कुछभी हो मे साहीलसे चुदवाकर ही रहुगी.. इनसे तो अब कोइ उमीद नही हे..

सोचते सोचते जरीना भी नींदकी आगोसमे चली गइ.. तब मुना अपने घरपे बसंतीको.. ओर श्रीधर अपने घरपे ब्रीन्दाको अब भी चोद रहा था.. अब ब्रीन्दा ओर बसंती हर सुख अपने बेटेसे सादी करके पा रहीथी.. गांवमे अब बीना सादीके भी लोग रीलेशन बनानेमे नही हीचकीचाते थे..

अ‍ैसे ही सुबह होगइ.. सुबह लखन कंपलीट होगया तो सबलोग डाइनींगपे आगये.. रजीया ओर सृतीने सबको चाइ नास्ता दीया ओर खुद भी बैठ गइ.. सबने हसी मजाक करते चाइ नास्ता कीया.. ओर लखनने नीलमको स्कुटी लेकर राधीकाको छोडने ओर लानेका कहे दीया..

राधीका : (मुस्कुराते) क्यु..? आप कही जा रहे हो..?

लखन : (मुस्कुराते) हां.. हमारे धंधेके कामके लीये बहार जा रहा हु.. सायद रातमे भी आनेमे देर होजाये.. तो तुम सबलोग खा लेना.. मे बहार खाकर आउगा..

चंदा : (मुस्कुराते) ठीक हे.. लेकीन वहा पहोंचते ही कोल कर देना..

पुनम : (मुस्कुराते) देखा भाइ.. आजकल भाभी आपकी बहुत चीन्ता करती हे.. हें..हें..हें..

चंदा : (मुस्कुराते) हां तो चीन्ता तो करुगीनां.. मेरा अ‍ेक लौता देवर ओर दामाद जो हे..

फीर अ‍ेक अ‍ेक करते सबलोग लखनको हग करके अपने अपने कामपे जाने लगे.. रजीया ओर पुनम कीचनका काम समेटने लगी.. फीर वो अपनी बच्चीके पास चली गइ.. चंदा लखन सोफेपे बैठे थे.. तब चंदा अ‍ेक आस भरी नजरोसे लखनकी ओर देख रहीथी.. तभी लखन भी खडा होकर जाने लगा..

चंदा : (धीरेसे फुसफुसाते) क्या अपनी गर्लफ्रेन्डको मीलकर नही जाओगे..?

लखन : (वापस बैठते हग करते) हां.. व्हाइ नोट..?

कहेते लखन वापस सोफेपे बैठ गया.. ओर लखनने बैठेही चंदाको हग करलीया.. तभी लखनने अ‍ैसी हरकत की जीनकी चंदाको उमीद नही थी.. हग करके लखनने चंदाके दोनो गालको बारी बारी चुम लीया तो चंदा मुस्कुराती रही.. तभी अचानक लखनने चंदाके होठोपे होठ रख दीया.. सो चंदा सोक्ट हो गइ..

ओर लखन मुस्कुराते खडा हो गया ओर बहार नीकल गया.. चंदा अब भी सोक्ट होते लखनको जाते देखती रही.. तभी उसे खयाल आया तो वो जटसे उठकर अपने रुममे चली गइ ओर दरवाजा बंध करके उनके पीछे अपने सीनेपे दोनो हाथ रखते खडी होगइ.. उनका सीना जोरोसे धडक रहा था..

उनकी सांस तेज चलने लगी.. फीर वो हल्केसे सरमाकर मुस्कुराइ.. उसे अपनी हसीपे आस्चर्य हुआ.. की आज लखनकी इस हरकतसे उनको लखनपे गुस्सा क्यु नही आया..? चंदाके दोनो बुब्स कठोर होगये थे.. ओर उनकी चुत हल्केसे फडफडाते पानी छोडने लगी.. चंदा जटसे बाथरुममे घुस गइ.. ओर सारीको कमर तक करके कमोडपे बैठ गइ.. ओर धीरेसे अपनी चुतपे हाथ रख दीया.. ओर आंख बंध करते अपनी चुतको सहेलाने लगी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २८३

उनकी सांस तेज चलने लगी.. फीर वो हल्केसे सरमाकर मुस्कुराइ.. उसे अपनी हसीपे आस्चर्य हुआ.. की आज लखनकी इस हरकतसे उनको लखनपे गुस्सा क्यु नही आया..? चंदाके दोनो बुब्स कठोर होगये थे.. ओर उनकी चुत हल्केसे फडफडाते पानी छोडने लगी.. चंदा जटसे बाथरुममे घुस गइ.. ओर सारीको कमर तक करके कमोडपे बैठ गइ.. ओर धीरेसे अपनी चुतपे हाथ रख दीया.. ओर आंख बंध करते अपनी चुतको सहेलाने लगी.... अब आगे

दुसरी ओर गांवमे सुबह सुबह फीरोज जल्दी अपने खेतोपे चला गया.. ताकी चाइ नास्ताके वक्त जरीना खुलके सलमा ओर साहीलसे नीकाहकी बात कर सके.. जरीनाने उसे चाइ नास्ता बना दीया था.. तो चाय नास्ता करते उसने जरीनाको सलमासे बात करलेनेको कहा.. ओर चला गया..

घरका कुछ काम नीपटाकर जरीना सलमा फ्री होगइ.. ओर साहीलका इन्तजार करने लगी.. तभी साहील भी कंपलीट होते बहार आगया.. जरीना उसे देखकर सरमा गइ.. फीर तीनो चाइ नास्तेके लीये इकठे बैठ गये.. जरीना असहज महेसुस कर रही थी.. की बातकी सुरुआत कैसे करे..

साहील ओर सलमा बार बार अ‍ेक दुसरेकी ओर देखते मुस्कुरा रहे थे.. तभी सलमाने जरीनासे नजर बचाते साहीलको आंखोसे जरीनाकी ओर इसारा कीया.. ओर हसने लगी.. तो साहील भी सरमाकर मुस्कुराने लगा.. दोनोको हसते हुअ‍े देखकर जरीना भी मुस्कुराने लगी.. तभी..

सलमा : (मुस्कुराते) जरीना.. आज देवरजी जल्दी कैसे चले गये..? खेतोपे ज्यादा काम हे क्या..?

जरीना : (मुस्कुराते धीरेसे) हं..? न..नही.. ब..स.. दीदी.. मुजे आपसे अ‍ेक बात कहेनी हे..

सलमा : (मुस्कुराते) हां हां.. बोल.. इनमे इतना गभरा क्यु रही हे..?

जरीना : (नजरे चुराते धीरेसे) दीदी.. उसने कल काजी साहबसे बात करली हे.. कल वो घरपे आकर आप दोनोका नीकाह करवा देगे.. सीर्फ हम घरवालेके बीच.. कीसीको न्योता नही.. उसने कल सुबह नीकाहके लीये आपको तैयार रहेनेको कहा हे..

सलमा : (साहीलकी ओर दया भावसे देखते) अच्छा.. इसीलीये वो जल्दी चले गये..

इतना सुनते ही साहीलका चहेरा मुरजा गया.. उनकी आंख गीली होगइ.. उसने जल्दी जल्दी पानी पीलीया.. ओर खडा होकर बीना कुछ कहे अपने कमरेमे चला गया.. सलमा ओर जरीना उसे देखती ही रेह गइ.. तभी सलमा जटसे उठकर साहीलके पास चली गइ..

जरीना भी थोडा गभराते सलमाके पीछे पीछे साहीलके रुममे चली गइ.. अंदर जाकर देखा तो साहील ओर सलमा दोनो ही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे आंसु बहा रहे थे.. जरीना थोडी असेहज हो गइ.. फीर भी हींमत करते दोनोके पास चली गइ.. ओर सलमाकी पीठ सहेलाने लगी.. तभी..





सलमा : (आंसु बहाते साहीलकी पीठ सहेलाते धीरेसे) साहील.. आप दील छोटा मत कीजीये.. ये सब आपके बहेतर भवीस्यके लीये नीर्णय लीया गया हे..

साहील : (धीरेसे अलग होते) अम्मी.. चाची हे..

सलमा : (जरीनाकी ओर देखते मुस्कुराते) आप इनकी फीकर मत कीजीये.. इनको हमारे बारेमे सब कुछ पता हे.. मेने ही इनसे सब बता दीया हे..

जरीना : (मुस्कुराते) हां साहील.. फीकर मत करो.. मुजे सब पता हे.. ओर इस बारेमे मुजे कोइ अ‍ेतराज भी नही हे.. मे जानती हु अ‍ेक अकेली ओरतको जींदगी काटना कीतना मुस्कील हे..

साहील : (सामने देखते धीरेसे) लेकीन चाची.. मे सबानासे सादी कर रहा हु.. क्या आपको इस बातसे बुरा नही लगा..?

जरीना : (कुटील मुस्कानसे) बुरा..? बुरा क्यु लगेगा..? यहा तो बुढेको भी फीरसे जवानी चढने लगी हे.. तेरे चाचा भी दो दो सादीया करने तैयार होगये हे.. अ‍ेक तो ठीकसे सम्हाल नही पा रहे हे.. ओर दुसरा नीकाह करना हे.. लगता हे इनको भी गांवकी हवा लग गइ हे..

साहील : (नजर जुकाते) चाची.. अम्मा अकेली थी.. उनकी तडप मुजसे देखी नही गइ.. बस.. हो गया..

जरीना : (सामने देखते) साहील.. मे अच्छी तराह जानती हु.. की अ‍ेक अकेली ओरपकी तडप कैसी होती हे.. फीर भी तुमतो जवान हो.. गलतीया कीससे नही होती.. मुजे यकीन हे तुम मेरी सबुको भी सम्हाल लोगे..

सलमा : (जरीनाका हाथ थामते धीरेसे) जरीना.. तुम मेरे साहीलको सम्हाल लेना.. वो मेरे बगैर नही रेह सकता..

जरीना : (सर्मसार होते धीरेसे फुसफुसाते) दी..दी.. में..

सलमा : (सामने देखते) हां तुम.. तुमने मुजसे वादा कीया था.. हमे भी तुम्हारे अतीतसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. जब आपको कादीर सम्हाल सकता हे तो फीर मेरा साहील क्यु नही..?

जरीना : (नजरे जुकाते धीरेसे) ठीक हे दीदी.. मे साहीलको सम्हाल लुगी..

सलमा : (मुस्कुराते) हंम.. गुड.. साहील.. आपको जाना हेतो जाइअ‍े.. मुजे जरीनासे कुछ बात करनी हे.. ओर हां.. अब कोइ रोना धोना नही.. मे हमेसा आपकी थी.. आपकी हु.. ओर आपकी ही रहुगी.. बल्की अब तो मे ओर जरीना दोनो आपका खयाल रखेगी.. वो भी तुम्हारे चाचासे संतुस्ट नही हे..

साहील : (सरमाते मुस्कुराते बहार जाते) ठीक हे अम्मा..

जरीना : (जाते ही मुस्कुराते) दीदी.. क्या ये अब भी आपको अम्मा केह रहा हे..?

सलमा : (हाथ पकडते बेडपे बीठाते) हां.. चल बैठ इधर.. मे तुजे कुछ ओर बताती हु..

जरीना : (सरमाते हसते धीरेसे बैठते) क्या..?

सलमा : (हसते) जरीना.. पता हे..? इनके सभी दोस्तोको अपनी बहेन ओर मां ही अच्छी लगती हे.. कीसीको कहेना नही.. वो मुना भाइ.. ओर श्रीधर भाइने उनकी बहेन ओर मां.. दोनोसे सादी करली हे.. ओर ये भी बीस्तरमे मुजे अम्मा अम्मा कहेते ही.. तु समज गइनां..

जरीना : (सरमाकर हसते धीरेसे) हां दीदी.. ये तो मेने भी सुना हे..

सलमा : (जरीनाके दोनो हाथ थामते) जरीना.. कल अगर हमारा नीकाह हेतो हमारी सुहागरात भी होगी.. तो मे चाहती हुकी तुम कल रात मेरे साहीलको सम्हाललो.. क्युकी जडीबुटीकी वजहसे उनको हर रात चाहीये.. वरना उनको नीचे दर्द होने लगता हे.. इसीलीये तो उनके सभी दोस्तोमे दो दो सादीया कीहे.. बहेन ओर मां के साथ..

जरीना : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. उनका तो बहुत बडा हे.. अगर आपके देवरको पता चल गया तो..?

सलमा : (मुस्कुराते) तु उनकी फीकर मत कर.. मेरे पास अ‍ेक ट्युब हे.. लगालेना.. फीरसे कस जयेगी.. मे साहीलको केह दुगीकी ध्यानसे धीरे धीरे करेगा.. तुजे कोइ तकलीफ नही होगी.. बाकी देवरजीका इलाज हे मेरे पास.. बस.. तुम मेरे साहीलको सम्हालले.. फीर देख हम दोनोकी जींदगीमे कैसे बहार आती हे..

जरीना : (सरमाकर मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. मे कोसीस करुगी.. बहुत सरम आ रही हे..

सलमा : (मुस्कुराते) अरे सरमा मत.. कोसीस नही.. तु देर रात बीन्दास्त साहीलके कमरेमे चली जाना.. मे उनको सब समजा दुगी.. बस.. मे कहु अ‍ैसा करती जा.. हम दोनोकी जींदगी सवर जायेगी.. हो सकेतो तु आजसे ही साहीलको रीजानेमे लगजा.. सरम दुर होजायेगी..
 
दुसरी ओर सहेरमे दस बजे लखन उसी होटेलमे चला गया जहा उनको भावीकाने मीलनेके लीये बुलाया था.. लखनने नीचेसे उनको फोन कीया तो भावीकाने उसे कमरा नंबर ३१२ मे आनेके लीये कहा.. तो रीसेपनीस्टने मुस्कुराकर लखनको लीफ्टका रास्ता दीखाया..

लखन उपर चला गया ओर ३१२ मे नोक कीया.. तभी भावीका सीधे ही बाथरुमसे सरपे ओर सीनेपे टोलीया लपेटकर आगइ.. ओर उसने दरवाजा खोला तो सामने लखन मुस्कुराते खडा था.. भावीका साइडमे हट गइ.. ओर लखन अंदर चला गया..

तो भावीकाने बहार डु नोट डीस्टर्बका टेग लटका दीया ओर दरवाजा बंध करके लोक करदीया.. लखन कमरेकी सजायट देख रहा था.. तभी भावीका दोटकर लखनकी ओर चली गइ तो लखनने जोरोसे उनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. दोनो अ‍ेक दुसरेके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगे..





तभी लखनने उनको अपनी गोदमे उठा लीया ओर बेडकी ओर चल पडा.. भावीका बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर लखनके गलेमे बाहे डालकर हसती रही.. लखनने उसे बेडपे लीटा दीया.. ओर खुद भी उनकी बगलमे लेट गया तो भावीकाने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया..

भावीका : (मुस्कुराते होठ चुमते) स्वीट हार्ट कोइ ज्लदी नही.. आज पुरा दीन हमारा हे.. बस.. मुजे अपने जानुके लीये थोडी तैयार होनेदो..

लखन : (मुस्कुराते देखते) कोइ सजने सवरनेकी जरुरत नही हे.. आप वैसे भी बहुत खुबसुरत हो.. पता नही धृव इतनी खुबसुरत बीवीपे ध्यान क्यु नही देता..

भावीका : (सामने देखते) वो सब मे बादमे बताउगी.. बस.. थोडासा सजने सवरने दो.. फीर सीर्फ प्यार ही प्यार.. आज आप मेरी गीरफ्तमे हो..

लखन : (मुस्कुराते) वैसे भी कुछ देरमे सभी कपडे नीकलने ही वाले हे तो फीर क्यु पहेनना..?

भावीका : (सरमाकर मुस्कुराते) यार थोडा बालतो बनानेदो.. ठीकठाक लगुगी..

लखन : (होंठ चुमते) नही.. आज इस टोलीयामे ही खुबसुरत ओर सेक्सी लग रही हो.. कुछ भी करनेकी कोइ जरुरत नही हे.. वैसे ये टोलीया भी हटने वाला हे..

भावीका : (मुस्कुराते) बीलकुल पागल हो.. जैसा सृतीने कहा था.. क्या उसे पता हे..?

लखन : (सामने देखते) अरे ना बाबा.. उसे बताना भी मत.. उसे पता चलाकी मे तुम्हारे साथ था.. तो वो जलके भस्म होजायेगी.. सीर्फ पुनोदीको पता हे..

भावीका : (मुस्कुराते) दोनो भाइ बहेनमे अच्छी अंडर स्टेन्डींग हे.. आज हम दोनोका पहेला मीलन हे.. तो जरा ध्यानसे.. फोनमे तो बहुत बार दीदार करलीये.. आज रुबरु देखुगी.. क्या अ‍ैसे ही प्यार करोगे..? कपडे नही नीकालना क्या..?





कहेते भावीका लखनके कपडे नीकालने लगी.. तो लखनने उनके सीनेसे टोलीया खीच लीया तो भावीका सरमाके हसने लगी.. लखन भावीकाका गोरा बदन देखकर पागल होने लगा.. कुछ ही देरमे दोनो नंगे अ‍ेक दुसरेके जीस्मके साथ खेलने लगे.. पुरा कमरा भावीकाकी सीसकारीयोसे गुंजने लगा..





भावीका लखनका हथीयार देखते ही पागल होने लगी.. उसने लखनको ब्लु जोब दीया.. ओर लखनने भी उनकी चुतका रस चखा.. लखनने बीना चोदे ही भावीकाको दो दो बार जडा दीया.. फीर सुरु हुआ असली खेल.. लखन भावीकाके उपर छागया ओर उनके दोनो हाथ कसके पकड लीये..





भावीकाको अपनी चुतपे लखनका लंड ठोकर मारते महेसुस हुआ.. उनकी आंखे वासनासे लाल हो चुकी थी.. ओर लखनकी ओर वासना भरी नजरोसे देखते आखरी वारकी प्रतीक्षा कर रही थी.. तभी लखनने उनके होठोको चुमवे लीप लोक करलीया.. भावीका समज गइ.. उसने डरके मारे अपनी आंख भीचली..

तभी लखनने अपनी कमर उठाकर अ‍ेक जोरोका जटका मारा.. तो लखनका आधा लंड भावीकाकी चुतको चीरते अंदर घुस गया.. भावीकाकी जोरोसे चीख नीकलते लखनके मुहमे ही दब गइ.. उनकी आंखसे आंसु बहेने लगे.. ओर वो अपने दोनो पैर बेडपे पटकने लगी..





लखन इस मामलेमे बहुत माहीर था.. उसने बडी ही सावधानीसे भावीकाको सम्हाल लीया.. ओर धीरे धीरे करते पुरा लंड भावीकाकी चुतकी गहेराइओमे गोते लगाने लगा.. भावीकाकी दर्द भरी चीखे अब कामुक सीसकारीओमे तबदील होने लगी.. वो लखनका साथ कमर उछालते देने लगी..





लखनका पहेली बार उभार देखते उनकी काम इच्छा जागृत हुइ थी.. तबसे लखनके लीये उसने सपने सजाये थे.. भावीकाका वोही सपना आज हकीकतमे तबदील होगया था.. ओर लखनकी वो ही आदत.. प्यार करनेकी अ‍ेक ही स्टाइल.. भावीकाको संतुस्ट करनेमे काफी थी..

लखनने बीना नीचे उतरे ही भावीकाकी चुतको दो दो बार अपने पानीसे सीच दीया था.. ओर लखन अभी भी लंड चुतमे डालकर भावीकाके उरोजोके साथ खेल रहा था.. भावीका बहुत ही सर्मसार हो रही थी.. ओर लखनसे नजरे चुराते उनकी पीठ सहेला रही थी.. तभी..





लखन : (होंठ चुमते) मेडम.. आज अचानक अ‍ैसी हीमत कैसे करली..? कुछ खास बात..?

भावीका : (सामने देखते धीरेसे) लखन.. दो दीनसे घरपे अकेली हु.. कल पेसन्टमे बीजी थी.. आजकी कोइ अ‍ेपोइमेन्ट नही ली.. सीर्फ तुम्हारे लीये.. मे आपसे मीलना चाहती थी..

लखन : (सामने देखते) क्या ये धृवको धोखा नही हे..? वो मेरा सबसे अच्छा दोस्त हे..

भावीका : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. लेकीन आपका दोस्त मुजे धोखा दे रहा हे वो..? आप सब जानते थेनां..? फीर भी मुजे नही बताया..?

लखन : (मुस्कुराते) जानता हु.. लेकीन वचनसे भी बंधा हुआ हु.. दोस्तका भरोसा कैसे तोडता..?

भावीका : (मुस्कुराते) सबसे सच्चे दोस्त.. सही कहा आपने.. लेकीन मुजे सब पता हे.. की घरमे सब क्या हो रहा हे.. मे धृवकी सेकन्ड वाइफ हु..

लखन : (मुस्कुराते) ओह.. तो आपको सब पता हे.. सब कब पता चला..?

भावीका : कुछ दीन पहेले.. धृव पुरा दीन बहार था.. अ‍ेक होटेलमे.. अपनी बहेनके साथ..

लखन : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. दोनो अ‍ेक होटेलमे खाना खाते मुजसे मीले थे.. जब मे खाना पेक करवा रहा था..

भावीका : (फीकी मुस्कानसे) देर रात धृव सो रहा था.. तब उनके फोनपे चेटका नोटीफीकेशन आया.. मेने देख लीया.. मुजे उनका पासवर्ड पता था.. फीर तो सबकुछ पढलीया.. उनकी ड्राइव भी देखली.. तो कुछ ओर भी पता चला.. बस.. उसी दीनसे मेने ठानलीया.. की मे भी उसे धोखा दुगी..
 
लखन : (सामने देखते) ये क्या बात हुइ..? धोखेके बदले धोखा..?

भावीका : (सामने देखते) तो क्या आप अपनी बीवीओको धोखा नही देते..?

लखन : (सामने देखते) नही.. कभी नही.. मे जीसके साथ भी रीलेशन बनाता हु मेरी बीवीओको पुछकर.. पुनोदीको हमारे बारेमे सब पता हे.. लेकीन सृतीको इसीलीये नही बताया की वो नही चाहती हम दोनो मीले.. पता नही उनको तुमसे क्यु ज्वेलेसी हे..

भावीका : (मुस्कुराते) क्युकी वो मेरी खास दोस्त हे.. उनको मेरे अतीतके बारेमे सबकुछ पता हे.. वो नही चाहती की हम दोनोके रीलेशनकी वजहसे मेरा घर टुटे.. क्युकी मेने बडी मुस्कीलसे मेरा घर बसाया हे..

लखन : (मुस्कुराते) तुम अपनी दोस्तको कीतनी अच्छी तराह जानती हो.. मुजे आपके बारेमे जानना हे.. सबकुछ.. आपके घरके बारेमे.. आपके अतीतके बारेमे भी.. की आपने मुजे क्यु चुना..

भावीका : मेरे अतीतके बारेमे तो आप जानते हो.. क्या पुनोदी ओर सृतीने आपको नही बताया..?

लखन : (मुस्कुराते) बताया.. इतना बताया हे आप अ‍ेक बहुत ही बडे उद्योगपतीकी बेटी हो.. लेकीन मेने आपके बारेमे उनको डीटेइलमे नही पुछा..

भावीका : (मुस्कुराते) ठीक हे.. मे आपको बोर नही करुगी.. इस सोर्ट बताती हु.. मेरे पीता अ‍ेक बहुत बडे उद्योगपती थे.. वीधुर थे.. नीसंतान थे.. ओर मम्मी उनकी पर्सनल सेक्रेटरी थी.. दोनोके बीच अफैर चल रहा था.. ओर अ‍ेक दीन पता चला.. मोम उनसे प्रेगनेन्ट होगइ हे..

लखन : (मुस्कुराते) तो क्या दोनोने सादी नही की..?

भावीका : पता नही.. बहुत बडे उद्योगपती थे तो अपनी इजतके कारण सादी नही कीहोगी.. लेकीन दोनो उनके घर साथ रहेने लगे.. मीन्स.. लीव इन रीलेशनमे.. फीर मेरा जन्म हुआ.. तो उसने मम्मीके लीये अ‍ेक अलग बंगला खरीद लीया.. ओर हम मां बेटी वही रहेने लगे..

लखन : (सामने देखते) तो क्या उसने आपकी मम्मीको छोड दीया..?

भावीका : (मुस्कुराते) नही.. फीर पापा रेग्युलर मेरी मम्मीको मीलने आते.. ओर पतीका हर फर्ज पुरा करते.. मे बहुत छोटी थी.. मेरे स्कुलमे जानेसे पहेले ही वो इस दुनीयासे चले गये.. फीर पता नही क्या हुआ.. मे होस्टेलमे चली गइ थी.. लेकीन मम्मी केह रही थी.. पापाने अ‍ेक वील भी बनाया हे.. लेकीन उनके बारेमे मुजे नही पता.. बस.. मम्मीने अ‍ेरे अ‍ेकाउन्टमे कुछ पैसे डाले थे.. उसीमे मेने पढाइ की..

लखन : (मुस्कुराते) अच्छा.. समज गया.. तभी आपको पढाइमे कोइ तकलीफ नही हुइ..

भावीका : (मुस्कुराते) हां.. मम्मीने मुजे अच्छी स्कुलमे पढाया.. होस्टेलमे रहेनेका इन्तजाम कीया.. लेकीन मे पढनेमे इतनी अच्छी नही थी.. ओर उपरसे होस्टेलमे रहेकर पढती थी.. मुजपे पाबंदी लगाने वाला कोइ नही था.. ओर नाही कोइ मुजे डांटने वाला.. क्युकी मेरे कोलेजमे आनेसे पहेले मम्मी भी इस फानी दुनीया छोड चुकी थी..

लखन : (सामने देखते) तो फीर सब मेनेज कैसे कीया..?

भावीका : मम्मीके अ‍ेकाउन्टमे सीर्फ इतने ही पैसे थे जीनमे मेरी होस्टेलका ओर पढाइका खर्चा मेनेज हो सकता था.. तब मुजे पता चला इसके बाद सीर्फ मुजे ही संघर्स कना पडेगा.. इनमे मे मंहेगे ट्युसन भी अफोर्ट नही कर सकती.. मेरा अतीत बहुत खराब हे.. बहुत महेनतसे डोक्टर बनी हु.. इसके लीये मेने सोर्टकटका रास्ता अपना लीया..

लखन : (सामने देखते) सोर्टकट का रास्ता..? मतलब..?

भावीका : (फीकी मुस्कानसे) खुबसुरत थी.. जवानी उफानपे थी.. बस.. जींदगीकी जंग लडनेके लीये इसी खुबसुरत बदनको हथीयारके तौरपे इस्तमाल कीया.. जहा जरुरत पडी प्रोफेसरो प्रीन्सीपाल ओर डीनका बीस्तर गरम कीया.. ओर इस मुकामको हासील कीया.. जींदगीकी जंग जीतनेके लीये मेरे पास ओर कोइ रास्ता नही था.. ओर मुजे कीसीसे भीख मांगना मंजुर नही था.. सृती मेरे बारेमे सबकुछ जानती हे..

लखन : (मुस्कुराते) मे इसे आपकी मजबुरी कहु या आपकी हींमत..?

भावीका : (मुस्कुराते) मजबुरीसे ही तो हींमत आइ थी.. अ‍ेक ही सपना था.. खुब पैसे बनाना.. ओर सीक्योर लाइफ जीना.. ओर आज मेने दोनो मुकाम हासील करलीये हे.. आप जानते हे मे इलीगल काम करती हु.. मे जानती थी धृव अ‍ेक अयास आदमी हे.. लेकीन उनके बापकी पोजीसनसे मुजपे कोइ उंगली भी नही उठा सकता.. मुजे धृवसे प्यार नही था.. बस.. उनसे सादी करना मेरी मजबुरी थी..

लखन : (मुस्कुराते) आप जानती थीनां इनके पापा पोलीटीक्शमे हे.. इसीलीयेनां..?

भावीका : (फीकी मुस्कानसे) हां.. ओर इसके लीये मुजे इसकी कीमत भी चुकानी पडी.. उनके पापाका बीस्तर गरम करके.. वो भी दो बार.. कमीना साराका सारा खानदान ही सडा हुआ हे..

लखन : तो फीर वो बंगला..? जो आपकी मम्मी रहेती थी.. क्या वो बेच दीया..?

भावीका : (मुस्कुराते) नही.. उनमे मेरा बचपन ओर मम्मीकी याद बसी हुइ हे.. डोक्टर बनके थोडा सेटल होनेके बाद उनको मेरे नाम रजीस्टर करवा लीया हे.. ओर धृवसे सादीसे पहेले वही रहा करती थी.. अब ससुरालमे हु.. तो अ‍ैसे ही बंध रखा हे.. महीनेमे दो तीन बार साफ सफाइ करवाती हु.. क्युकी पता नही मुजे कब वहा वापस रहेना पडे..

लखन : (सामने देखते) क्यु..? अ‍ैसा क्यु सोचती हो..?

भावीका : लखन.. मुजे इस बाप बेटेपे बीलकुल भरोसा नही हे.. अ‍ेक को अपनी पार्टी वर्कर महीलाओसे फुरसत नही हे.. ओर धृव अपनी मां ओर बहेनके बीच फसा हुआ हे.. पुनोदीने मुजे इनकी मां ओर बहेनके बारेमे भी बहुत कुछ बताया हे.. वो अ‍ेक बार मेरे पुराने घरपे आना चाहती हे..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? पुनोने अ‍ैसा कहा आपको..? लेकीन क्यु..?

भावीका : (मुस्कुराते) पता नही.. लेकीन कहा.. अ‍ेक बार मुजे मेरे पुराने घरपे लेजाओ.. आपके लीये कुछ सरप्राइज हे.. तो आप अ‍ेक बार पुनो सृतीको लेकर आये.. आप भी मेरा घर देखले..

लखन : (सामने देखते) आयेगे.. तो फीर मेरे साथ रीलेशनका भी कोइ मक्सद होगा..

भावीका : (मुस्कुराते होंठ चुमते) हां.. हे अ‍ेक मक्सद.. जींदगीमे आप पहेले अ‍ैसा मर्दहो.. जीससे मुजे सच्चा प्यार हुआ हे.. ओर मे मेरी पीछली लाइफ सीक्योर करनेके लीये आपके साथ रीलेशन बना रही हु.. वो भी सच्चे दीलसे.. क्या आपको मुजपे कोइ ओर सक हे..?

लखन : (नांमे गरदन हीलाते) नही.. मे मेरी पुनमसे परमीशन लेकर आया हु.. उसने कहा था आप भी हमसे जुडी हे.. बस.. आप अपना दीलका बोज हल्का करना चाहती हे.. उनको अ‍ेक बार अच्छेसे सुन लेना..

भावीका : (मुस्कुराते) मुजे पता हे उनको सबके बारेमे सबकुछ पता चल जाता हे.. आप लोग कीतने अच्छे हे.. क्या आपको पता हे धृव इस वक्त कहा हे..?

लखन : (मुस्कुराते) नही.. सायद.. अपनी दीदीके पास.. अहेमदाबाद मीलने गया होगा..

भावीका : (मुस्कुराते) नही.. पासही के सहेरमे हे.. अपनी मम्मीजीके साथ.. कहेकर गये हे.. कीसी रीस्तेदारके यहा जरुरी कामसे जा रहे हे.. अब उपरसे उतरीये.. तो मे कुछ आपको दीखाती हु..
 
लखन : (होंठ चुमते) नही.. आज आपकी इमानदारीपे बहुत प्यार आरहा हे.. अ‍ेक बार ओर होजाये..?

भावीका : (हसते) क्या ओर होजाये.. अरे बाबा.. जींदगीमे पहेली बार लगातार दो दो बार संतुस्ट हुइ हु.. ओर ना जाने कीतनी बार जडी हु.. जींदगीमे अ‍ैसा पहेली बार हुआ हे.. मुजे पुरी नीचोडली.. ओर जनाबको अ‍ेक बार ओर करना हे.. हटीये.. पुरा दीन पडा हे.. फीर करते रहीये..

लखन : (होंठ चुमते कमर हीलाते) बस अ‍ेक बार.. फीर कुछ खा पीलेते हे.. तब दीखाना..

भावीका : (हसते) मानोगे नही.. बहुत जीदी हो.. ठीक हे कर लीजीये.. लेकीन धीरेसे..

कहेते भावीकाने लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनकी कमरपे पैरोसे आटी लगादी.. इस बार भी भावीकाको दो दो बार जडाके उनकी धमासान चुदाइ करली.. ओर अंतमे दोनो साथमे जड गये.. भावीकाकी पुरी चुत लबालब भरी हुइ थी..





लखन उसे गोदमे उठाकर बाथरुममे ले गया.. तो दोनोका कामरस फर्सपे टपकते जा रहा था.. वहा अंदर बाथ लेते भी दोनो अ‍ेक दुसरेको साबुनसे मल रहेथे.. जीसे दोनो फीरसे उतेजीत होगये.. लखनने वहा भी भावीकाको खडे खडे चोद लीया.. फीर दोनो नहाकर नंगे ही बहार आ गये..





भावीका : (बदन पोछते मुस्कुराते) पता नही था आप इतने रोमांन्टीक होगे.. अब इतनी सारी बीवीया होना लाजमी हे.. यहातो धृव अ‍ेक ही बारमे फुस हो जाता हे.. वोभी कभी कभी मुजे प्यासी रख देता हे.. पता नही उनकी बहेनको तीन तीन बार कैसे प्रेगनेन्ट कर दीया..

लखन : (सर पोछते मुस्कुराते) आप भी आइपील लेलेना.. वरना गडबड होजायेगी..

भावीका : (बाहोमे आते सीनेमे सर रखते धीरेसे) नही लखन.. कोइ जरुरत नही.. मेरा अ‍ेक हप्ते पहेले ही पीरीयड हुआ था.. अभी सही समय हे.. आइ वोन्ट टु बेबी.. सीर्फ हमारा बच्चा..

लखन : (मुस्कुराते) क्या ये सही हे..? वोतो धृव भी दे सकता हे.. सीर्फ हमारा ही क्यु..?

भावीका : (मुस्कुराते) कुछ तो कारण होगा.. उन बाप बेटेको सीर्फ मेरे पीछवाडेसे ही मतलब हे.. जैसे मे कोइ अ‍ैयासीका साधन हु.. तो बच्चा कहासे होगा..? जबसे मेने आपके उभारको देखा ओर सृतीसे आपके बारेमे सुना.. तबसे मेने ठान लीया थाकी चाहे कुछ भी होजाये.. बच्चा तो मे आपसे ही करुगी..

लखन : (हसते) अच्छा..? अ‍ैसा क्या खास हे मेरे हथीयारमे..

भावीका : (हसते लंड पकडते) खांस..? अरे बाबा कीपना बडा ओर दमदार हथीयार हे आपका.. अगर हमारा बच्चा होगा तो उनका भी अ‍ैसा ही होगानां..? तो मेरी पीछाली लाइफमे काम आ सकता हे.. हें..हें..हें..

लखन : (जोरोसे हसते) क्या..? तो क्या आप अपने बेटेसे ही.. हें..हें..हें..

भावीका : (सरमाते हसते) हां तो क्यु नही..? आपके गांवमे तो ये सब आम बात हेनां..? ओर यहा तो घरमे ही अ‍ैसा हो रहा हे.. चलो मे आपको कुछ दीखाती हु.. आप समज जाओगे..

कहेते भावीका लखनका हाथ पकडते उसे टेबलके पास लेगइ.. ओर अपने मोबाइलसे कुछ वीडीयो क्लीप दीखाने लगी.. जीनमे धृव अपनी मम्मीकी भुदाइ कर रहा था.. ओर कुछ क्लीप धृव ओर उनकी बहेन पुजाकी भी थी.. जब वो मायकेमे आती तब धृव उनकी चुदाइ कर रहा था..

फीर भावीका वोट्सअपपे स्क्रोल करते अ‍ेक नाम ढुंढकर चेटको ओपन करदी.. ओर फोटोपे क्लीक करते लखनको दीखाने लगी.. देखा तो धृवकी मम्मी कीसी होस्पीटलके बेडपे लेटी थी.. ओर धृव बाजुमे टेबलपे बैठा था..

लखन : (देखते) ये तो कोइ होस्पीटलकी तसवीर हे.. क्या आंटीकी तबीयत खराब हे..? इनको अ‍ेडमीट कीया हुआ हे..

भावीका : (मुस्कुराते) हां.. लेकीन खराब तबीयतकी वजहसे नही.. इनका अ‍ेबोर्सन हुआ हे.. धृव इसीलीये रीस्तेदारको मीलनेका बहाना बनाकर उनको दुसरे सहेरमे लेगया हे.. ताकी यहा कीसीको पता नाचले.. ना मुजे.. ओर नाही उनकी बहेनको.. अब बात समजमे आइ..?

लखन : (तसवीर देखते) कमीना.. साला ये तो मुजसे भी दो कदम आगे नीकला.. क्या अंकलको इस बारेमे पता हे..?

भावीका : (फीकी मुस्कानसे) उस कमीनेको अपनी पार्टीकी ओरतोसे फुरसत मीले तब पता होगानां.. पार्टी वर्कर ओरतोको लेकर अ‍ेक अ‍ेक दो दो हप्ते बहार रहेता हे.. ओर यहा उनकी बीवी अपने बेटेसे ही ठुकवा रही हे.. प्रेगनेन्ट नही होगी तो क्या होगी..? आपको पता हे वो अपनी मम्मीका इनसे पहेले भी दो बार अ‍ेबोर्सन करवा चुका हे..

लखन : (मुस्कुराते) क्या..? लेकीन ये सब आपके पास कैसे आया..?

भावीका : (मुस्कुराते) उनको पता नही हे.. की वो जीसकी होस्पीटलमे गये हे वो मेरी क्लासमेन्ट थी.. ओर हमारी सादीमे भी आइ थी.. तभी तो वो मम्मीजी ओर धृवको पहेचानती हे..

लखन : (मुस्कुराते) अच्छा तो आपकी फ्रेन्डने भेजा हे.. अच्छा पकडलीया..

भावीका : (मुस्कुराते) कल अ‍ेबोर्सन हुआ.. दो दीन आराम करेगी.. फीर कहा जायेगी..? लेकीन मे कुछ नही कहुगी.. क्युकी मुजे भी अपनी सीक्योरीटी चाहीये.. सब कुछ जानते हुअ‍े भी मुजे नजर अंदाज करना पड रहा हे.. बस.. अ‍ेक बार हमारा बच्चा हो जाये.. फीर कोइ दीकत नही..

लखन : (मुस्कुराते) क्या सचमे आप अ‍ैसा चाहती हे..? आर यु सीरीयस.?

भावीका : (मुस्कुराते हां मे गरदन हीलाते) हां.. मैने बहुत सोच समजकर ये फैसला लीया हे.. लेकीन याद रहे.. ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच ही रहेनी चाहीये.. मे धृवसे कन्वीस करा लुगी की ये बच्चा उनका हे.. हमे कुछ दीन ओर कोसीस जारी रखनी पडेगी.. फीर मे आपको फोर्स नही करुगी.. हां अगर आप मुजे कभी मीलना चाहो तो मेरा दरवाजा हमेसा खुला हे..

फीर दोनो कपडे पहेनकर कुछ खानेका ओर्डर करते हे.. फीर कुछ देर आराम करते देर रात तक दोनोने खुब प्यार कीया.. अबतक लखनने भावीकाकी सारी कशर पुरी करदी थी.. उनको अबतक छेसे सात बार चोद लीया था.. लखनने इतनी चुदाइ कीसीकी नही कीथी..

फीर रातका डीनर करके लखन वापस घर आगया.. ओर भावीका वही सो गइ.. तब भावीकाको पता नही था की उसने लखनसे जीतनी उमीद कीथी उनसे कही ज्यादा पा लीया था.. बस.. इस बारेमे तो उनको अगली महावारी आने तक इन्तजार करना था..
 
तो गांवमे भी साहीलके घरपे नीकाहकी तैयारीया गुपचुपसे चल रही थी.. बीचमे सलमाने मौका मीलते ही साहीलको सबकुछ समजा दीया तो साहील सरमाके हसने लगा.. दो पहोरको खानेके बाद आराम करते मौका मीला तो साहीलने सलमाको चोद लीया..

सलमा साहील ओर जरीनाको अकेले मीलनेका मौका दे रही थी.. तो जरीना भी सलमाके कहेनेपे साहीलको रीजानेकी कोसीस करने लगी.. वो अब बीना सरम साहीलकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराने लगी.. ओर मौका मीलतेही साहीलकी हल्कीसी मजाक करते उसे छेड देती..

तो साहील भी कम नही था.. वोभी काम करते कभी कभी जरीनाको छु लेता.. तो जरीना बहुत ही सरमा जाती.. ओर मंद मंद मुस्कुराने लगती.. फीर साहीलकी पीठपे हसकर मुका मारती.. तो साहील भी उनकी खुली कमरपे चीमटी काट लेता.. तो जरीना साहीलको मारने आती तो साहील उनके दोनो हाथ पकडते बाहोमे भर लेता..





जरीना जोरोसे हसते साहीलकी बाहोसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करती.. फीर साहीलकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराते छोडनेकी मनते करती.. सलमा दोनोकी मस्तीया देखकर सबकुछ समज गइ.. की जरीना ओर साहील दोनोही आगे बढ रहे हे.. जब फोरोज काजी साहबको कलके लीये मीलने गया तो साहीलको मौका मील गया..

सलमा साहीलकी ओर मुस्कुराते बहाना बनाकर कमरेसे बहार चली गइ.. तो जरीना ओर साहील दोनो कमरेमे अकेले रेह गये.. जरीनाके दीलकी धडकन बढ गइ.. वो बहुत ही सर्मसार होने लगी.. वो साहीलको तीरछी नजरोसे देखते हसने लगी.. तभी साहीलने अ‍ैसा कुछ कीया..

जीसे जरीना सरमसे पानी पानी होगइ.. साहीलने अचानक जरीनाका हाथ पकडते अपनी ओर खीच लीया.. ओर जरीनाको अपनी बहोमे भीच लीया.. जरीना सरमाते जोरसे हसने लगी.. ओर साहीलकी बाहोसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करने लगी..

तभी साहीलने उनके गालको चुम लीया.. तो जरीना सरमाके हसते हुअ‍े साहीलकी बाहोसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करते अपना मुह इधर उधर करने लगी.. तभी साहीलने जरीनाके चहेरेको अपनी हथेलीओमे थाम लीया.. तो जरीनाने अपनी मुस्कुराते पलके जुकाली.. ओर साहीलने उनके होठोपे होठ रख दीया..





जरीनाने आंख बंध करते जोरोसे होठ भीच लीये.. उसने साहीलकी बाहोसे छुटनेकी कोसीस छोडदी.. फीर धीरेसे आंख खोलदी.. ओर अपने होठोको थोडे ढीले कर दीये.. फीर साहीलको चुमनेमे साथ देने लगी.. जब साहीलने होठ छोडा तो जरीना सरमसे पानी पानी होगइ..

जरीना : (फुसफुसाते धीरेसे) साहील.. प्लीज.. अभी नही.. दीदी यही हे.. हम कल रात आरामसे मीलते हेनां.. अभी छोडीये मुजे..

साहील : (मुस्कुराते) चाची.. क्या आप राजी तो होनां..? क्युकी मे आपकी बेटीसे सादी कर रहा हु..

जरीना : (सरमाते हांमे गरदन हीलाते) हां.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. बाकी सब बाते कल करेगे.. हभी छोडो मुजे कोइ आजायेगा..

साहील : (मुस्कुराते बाहोमे भीचते) अ‍ैसे नही.. मुजे खुलकर बोलीये.. आइ लव यु..

जरीना : (हसते) अरे छोडीयेनां.. आप बहुत बदमास हो.. वो सब कल.. अकेलेमे..

साहील : (उरोजोको थामते) कल नही.. अभी.. सीर्फ अ‍ेक बार..

जरीना : (सीहरते फुसफुसाते) बहुत जीदीहे आप.. ठीक हे.. आइ लव यु टु बा.. अब तो छोडीये..

फीर तो दोनोके बीच हल्कीसी छेडखानी सुरु होगइ.. हर बार जरीना हसते साहीलको जवाब देती.. इधर फीरोजभी बहुत अक्साइटेड था.. क्युकी कल उनके लीये अ‍ेक नइ चुतका इन्तजाम होने वाला था.. लेकीन उनको पता नही थाकी उनकी पीठ पीछे यहा क्या क्या प्लानींग हो चुकी थी..

सलमाने साहीलके लीये भी नइ चुतका इन्तजाम करलीया था.. ओर जरीना भी नये जवान लंडके लीये बहुत ही उत्साहीत थी.. वो अपने पती ओर अपने बडे बेटेसे चुदवा चुकी थी.. ओर कल उसे अपना छोटा बेटा भी चोदने वाला था.. तो इस रात उनको जरीनाने हाथ नही लगाने दीया..

तो इधर सहेरमे लखन देर रात घरपे आगया.. घरमे अंधेरा छाया हुआ था.. सब लोग अपने अपने कमरेमे जा चुके थे.. लखन दरवाजा बंध करके उपरकी मंजसकी ओर जाने लगा.. तभी उसे अ‍ेक आवाज आइ.. लखनने देखा तो चंदा अंधेरेमे सोफेपे अकेली बैठकर उनका इन्तजार कर रही थी..

चंदा : (धीरेसे) लखन..

लखन : (सोफेकी ओर देखते) अरे भाभी.. आप अभी तक जाग रही हे..? सोइ नही क्या..?

चंदा : (सामने देखते धीरेसे) नही.. आपका इन्तजार कर रही थी.. इधर आइअ‍े.. मुजे आपसे कुछ जरुरी बात करनी हे..

लखन : (सुबहकी हरकत याद आते ही थोडा डरते पास जाते) जी.. जी भाभी.. कहीये..

चंदा : (सामने देखते) बैठीये इधर.. मुजे आपसे बात करनी हे..

लखन : (बैठते धीरेसे) भाभी.. आइ अ‍ेम सोरी..

चंदा : (अ‍ेक नजरसे देखते धीरेसे) तो आपको सब पता हे की सुबह आपने क्या कीया था..

लखन : (नजरे जुकाते धीरेसे) जी.. मे थोडा भावनाओमे बहेक गया था.. सोचा हम गर्ल फ्रेन्ड बोय फ्रेन्ड हे तो आपको बुरा नही लगेगा.. आइ अ‍ेम सोरी..

चंदा : (सामने देखते) अगर हम गर्लफ्रेन्ड बोयफ्रेन्ड हे तो कुछ भी..? गर्लफ्रेन्ड बोयफ्रेन्डसे पहेले मे आपकी भाभी हु.. ओर गर्लफ्रेन्ड बोयफ्रेन्डकी भी अ‍ेक सीमा होती हे.. ओर मुजे लगता हे हमे अपनी सीमा तय करनी होगी..
 
लखन : (नजरे जुकाते धीरेसे) ठीक हे भाभी.. आप सीमा बता दीजीये.. मे इनसे आगे नही बढुगा.. आइ अ‍ेम सोरी..

चंदा : (सामने देखते मनमे मुस्कुराते) हंम.. गुडबोय.. अगर मे सीमा तैय करदु तो आप मान लोगे..?

लखन : (नजरे जुकाते धीरेसे) जी.. जी भाभी..

चंदा : (हाथ थामते मनमे मुस्कुराते) फीर मुकर तो नही जाओगे..?

लखन : (नजर उठाकर) नही.. आपको भी पता हे मे वादेका पका हु..

चंदा अ‍ेक नजरसे लखनको देखती रही.. लखन अ‍ेक पल उनके सामने देखकर नजर जुका लेता हे.. उनको मनमे थोडी गभराहट महेसुस हो रही थी.. लेकीन कोइ डर नही था.. तभी चंदाने कुछ अ‍ैसा कीया जीनकी लखनको उमीद नही थी.. चंदाने लखनके दोनो हाथ थाम लीये..

तो लखन नजर उठाके चंदाकी आंखोमे देखने लगा.. चंदा मंद मंद मुस्कुराते लखनकी आंखोमे देख रही थी.. उसने लखनका चहेरा थाम लीया.. ओर धीरेसे मुह आगे करते लखनके होठोपे अपने होंठ रख दीये.. लखन आंख बडी करते चंदाकी ओर देखता रहा..





लखन कुछ समजे इनसे पहेले ही अचानक चंदा लखनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. धीरे धीरे करते कइ दीनोसे लखन उनकी कामाग्नीको भडका रहा था.. ओर आज सुबहकी कीसने उनके सब्रका बांध तोड दीया था.. वो पुरा दीन बैचेन रही.. ओर उसने अ‍ेक फैसला करलीया था..

सुबहसे अबतक वो तीन बार अपनी उंगलीसे अपने आपको सांत कर चुकी थी.. ओर लखनका बेसब्रीसे इन्तजार कर रही थी.. जब लखन देर रात आगया तब उनके दीलकी धकडन बढ गइ थी.. ओर आखीर उसने लखनको सबकुछ बतानेका फैसला करलीया..

उसने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. लखनके सीनेपे हाथ घुमाते सरको सीनेमे छीपालीया.. फीर सीनेको चुमते सरको लखनके तनसे रगडते उपर लेजाने लगी.. ओर उसने लखनके कंधेपे सर रख दीया.. फीर लखनके कानकी बुट चुमते कानमे फुस फुसाने लगी..

चंदा : (धीरेसे कानमे) लखन.. सोरी.. मेने आपको डरा दीया.. हमारे प्यारमे कोइ सीमा नही होगी.. मे प्यारकी सारी सीमा लांघना चाहती हु.. हमारी सीमाकी कोइ हद नही होगी.. बस.. मुजे सीर्फ आपका प्यार चाहीये.. वही प्यार.. जो प्यारसे मे कइ दीनोसे वंचीत हु..

लखन : (बाहोमे भीचते) भाभी.. आ यु स्योर..? कही मे गलत तो नही सुन रहा..?

चंदा : (कंधेपे सर छुपाते) नही.. कोइ गलत नही.. मेने बहुत ठोकर खाइ हे.. मे सीर्फ प्यार चाहती हु.. ओर इसीलीये यहा आइ हु.. बस अ‍ेक ही बीनंती हे..

लखन : (बाहोमे भीचते) क्या..? आज खुलकर बतादो..

चंदा : (आंख गीली करते) अ‍ेक पती मुजे मजधारमे छोडकर उपर चला गया.. देवुने भी मुजे मजधारमे छोडा.. बस.. तुम मुजे मजधारमे मत छोडना.. वरना इस बार मे बीखर जाउगी..

लखन : (चहेरा थामथे) नही भाभी.. आइ प्रोमीस.. मे आपको मजधारमे नही छोडुगा.. पुरी जींदगी आपका साथ नीभाउगा.. लेकीन आप तो मेरे बारेमे सब जानती हे.. की मेरी कीतनी बीवीया हे..

चंदा : (आंखोमे देखते धीरेसे) हां.. ओर ये भी जानती हु.. की आपका अपनी बीवीओके अलावा ओरोके साथ भी रीलेशन हे.. आप अपनी सभी बीवीओको अ‍ेक जैसा प्यार देते हे.. तो मुजे भी उमीद हेकी आप मुजे भी नीरास नही करोगे..

लखन : (मुस्कुराते) क्या आपको मेरे बारेमे सब पता हे..?

चंदा : (मुस्कुराते) हां.. आज पता चला मंजुने अ‍ैसा फैसला क्यु लीया था.. वो हम सभी ओरतोकी भावनाओका खयाल रखना जानती हे.. आज पता चला मंजुने सही फैसला लीया हे.. उसी फैसलेकी वजहसे हमारी भावु भी हेनां..? मेने कइ बार आपको देर रात उनके रुममे जाते देखा हे.. ओर वो सब कुछ देखा हे वो अ‍ेक मीया बीवीमे होता हे.. लेकीन मुजे इनसे कोइ मतलब नही हे.. बस.. मुजे मेरे हीस्सेका प्यार चाहीये.. जो आपने हमारी भावुको दीया हे..

लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते) भाभी.. मीलेगा.. जरुर मीलेगा..

चंदा : (बाहोमे समाते) अब भाभी नही.. सीर्फ चंदा.. आपकी चंदा.. जो जींदगी भर आपकी बाहोमे गुजारना चाहती हे.. बस.. सही वक्तका इन्तजार कीजीये.. सही वक्त आयेगा.. तब ये चंदा हमेसाके लीये आपको पुर्ण समर्पीत होजायेगी.. अब आप जाइअ‍े.. थक गये होगे.. सो जाइये..

लखन : (मुस्कुराते) नही भाभी.. कुछ देर आपकी आगोसमे रहेना चाहता हु..

चंदा : (मुस्कुराते) भाभी नही.. सीर्फ चंदा.. जाइअ‍े वरना अभी कुछ गलत होजायेगा.. मे इसे यादगार पलोमे जीना चाहती हु.. पुरी रात हमारी होगी.. मंजुने सही फैसला कीया हे.. आज उनके फैसलेका मतलब समजमे आया.. आइ लव यु..

लखन : (होंठ चुमते) आइ लव यु टु.. अब आप सोजाइअ‍े.. कल हमे गांव जाना हे.. मोमकी तबीयत खराब हे..

चंदा : (मुस्कुराते) हंम.. पुनोदीसे बात हुइ.. लखन.. अब मे यही रहुगी.. मेरे वीजयको यही रहेकर पढाउगी.. सहेरमे.. हमारी अ‍ेक अलग ही दुनीया होगी.. बस.. मे उनको अ‍ेक मांका प्यार दुगी.. ओर आप अ‍ेक बापका फर्ज नीभाना.. हमारी मंजुका सपना हम पुरा करेगे..

दोनो खडे हो गये.. तब चंदाने अ‍ेक बार फीर लखनको अपनी बाहोमे भर लीया.. तो लखनने इस बार अ‍ेक हाथ उनके बुब्सको थामते होंठ चुम लीये.. तो चंदाके तनसे अ‍ेक बीजलीसी लहेर दोड गइ.. वो बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर मुस्कुराते जटसे लखनकी बाहोसे आजाद होते अपने रुममे दोडकर भाग गइ..

लखन मुस्कुराते उपर रुममे चला गया.. ओर चेन्ज करके पुनमके पास जाकर लेट गया तो पुनम करवट लते लखनकी बाहोमे आगइ.. लखनने उनका सर चुम लीया तो पुनम नींदमे ही मुस्कुराने लगी.. सब सोगये.. लखन सुबह सबको लेकर दो दीनके लीये गांव जाने वाला था.. पता नही अगली सुबह सुरज कौनसा नया दीन लेकर आने वाला था.. बहुत कुछ नया होने वाला था....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २८४

लखन मुस्कुराते उपर रुममे चला गया.. ओर चेन्ज करके पुनमके पास जाकर लेट गया तो पुनम करवट लते लखनकी बाहोमे आगइ.. लखनने उनका सर चुम लीया तो पुनम नींदमे ही मुस्कुराने लगी.. सब सोगये.. लखन सुबह सबको लेकर दो दीनके लीये गांव जाने वाला था.. पता नही अगली सुबह सुरज कौनसा नया दीन लेकर आने वाला था.. बहुत कुछ नया होने वाला था.... अब आगे

सुबह कीसीको पता नही थाकी आज फीरोज ओर सलमाका नीकाह हे.. काजी साहब ठीक आठ बजे दो गवाहको लेकर घरपे आगये.. सलमाने फीरोजका लाया हुआ सादीका लंहेगा चोली पहेन लीया था.. ओर जरीनाने सलमाका हल्कासा सींगार करदीया था..

साहील मायुस नजरोसे सलमाको देखता रहा.. तो साहीलके मायुसीसे सलमाकी आंख गीली होगइ.. जरीना भी दोनोका प्यार देखकर भावुक होगइ.. ओर वो साहीलके पास जाकर खडी हो गइ फीर उनका हाथ थाम लीया.. फीर पंजोमे फसाके कस लीया ओर आंखोसे इसारा कीया..

जैसे सलमाको केह रही हो की मे साहीलको सम्हाल लुगी आप चीन्ता ना करे.. फीरोज अपनी नइ सेरवानीमे बहुत खुस था.. काजीसाहबने कलमा पढकर फीरोज ओर सलमाका नीकाह करवा दीया.. सबने दस्तखत कीये.. फीरोजने काजी साहबको अच्छी खासी रकम दी..

जीसे काजी साहब भी बहुत खुस होगये.. फीर चाइ पानी ओर नास्तेका दौर चला.. तब कीसीको पता नही थाकी साहील चुपकेसे अपने मोबाइलसे वीडीयो बना रहा हे.. फीर काजी साहब अपने दोनो आदमीओको लेकर चुपकेसे चले गये.. कुछ लोगोने देखा.. तो कुछने नजर अंदाज कर लीया..

दुसरी ओर बरखाकी डीलीवरीकी वजहसे कुछ दीन मुनाको बरखासे दुर रहेना था.. जीनकी भरपाइ मुना अपनी मां बसंती जो अब उनकी पत्नी थी उनसे करने लगा.. मुना ओर बसंती अब ज्यादा मीलने लगे थे.. मुना बसंतीको दीनमे भी चोदने लगा..





कभी कीचनमे तो कभी नहाने जाती तब बाथरुममे ही दबोच लेता.. ओर कइ बारतो बरखाके सामने बीस्तरमे ही बसंतीको रगड रगडके चोदने लगता.. तो यही हाल श्रीधर ओर ब्रीन्दाका था.. दोनो घरपे अकेले थे तो भरपुर मजा ले रहे थे.. अब रातके साथ दीनमे भी अ‍ेक दो बार ब्रीन्दाकी कुटाइ हो जाती थी..

ओर आज रात भी श्रीधरने ब्रीन्दाको मुस्कीलसे सोने दीया.. श्रीधर रात चार बजे तक आगे पीछे ओर मुहमे तीनो छेदोके साथ खेलता रहा.. ओर ब्रीन्दाकी हालत पतली करदी.. फीर दोनो देरसे जागे.. ब्रीन्दा बडी मुस्कीलसे चल पा रही थी.. दोनोने चाइ नास्ता कीया.. तब..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) जानु.. रातको क्या होगया था आपको..? पुरी रात सोने नही दीया.. ओर मेरी हालत खराब करदी.. लगता हे आज पुरा दीन आराम करना पडेगा..

श्रीधर : (मुस्कुराते) हां तो करती रहेना.. वैसे भी तेरी सौतनसे ओर बच्चेको देखने जा रहा हु.. सामको देरसे लौटुगा..

ब्रीन्दा : (सरमाते मुस्कुराते) जानु.. अब जयश्रीका बच्चा आ चुका हे.. तो अब आपको नही लगता अब हम दोनोको भी बच्चेके बारेमे सोचना चाहीये..? मुजे हमारे प्यारकी अ‍ेक नीशानी चाहीये..

श्रीधर : (मुस्कुराते होठ चुमते) मोम.. अगर आपको लगताहे की अब सही वक्त आगया हे.. तो अब हम प्रोटेक्शन युज नही करेगे..

श्रीधर : (मनमे) मोम.. अब क्या बताउ.. जो आप चाहती हे वोही मेरी सास भी चाहती हे.. कहेती थी अब पापामे दम नही रहा.. तो वो अपने दामादसे ही अपना वारीस चाहती हे.. बस.. अ‍ेक बार उनकी कोख भरदु फीर आपकी बारी..

फीर श्रीधर सहेरमे जयश्री ओर अपने बच्चेको देखने चला गया.. बस.. जयश्री ओर बच्चेको मीलनेका तो अ‍ेक बहाना था.. असलमे वो अपनी सास वृन्दाको मीलने जा रहा था.. ओर इस बातसे आज तक ब्रीन्दा ओर जयश्री अनजान थे.. अबतक श्रीधर ओर वृन्दा काफी बार मील चुके थे.. ओर इनके कुछ नतीजे भी आने वाले थे..

तो इधर सहेरमे सुबह सब जल्दी जाग गये.. भावना भुमीके घरपे थी.. तो लखन पुनम रजीया सृती चंदा राधीका ओर नीलमको लेकर गांवकी ओर नीकल गया.. सेटरडे सन्डे था.. तो होस्टेलमे अभी कोइ लडकी नही थी.. तो आज राधीका पहेली बार अपने ससुराल जा रही थी..

जैसे ही लखनकी कार हजेलीपे पहोंची मंजु धीरे धीरे हसते बहार आगइ.. उनके चहेरेपे कमजोरी साफ दीखाइ दे रही थी.. वो सबको गर्म जोसीसे गले मीली.. फीर पुनमकी बच्चीको अपनी गोदमे लेलीया.. ओर उसे दुलार करने लगी.. तबतक दया लता भी बहार आ चुकी थी.. ओर सबको गले मील रही थी..

देवायत अभीतक अपने खेतोपे था.. सब लोग होलमे आगये.. दयाने सबको पानी पीलाया.. लखन वीजयको लेकर मंजुकी गोदमे सर रखकर लेट गया.. ओर वीजयके साथ खेलने लगा.. बच्ची अभी भी मंजुकी गोदमे थी.. पुनम ओर सृतीकी आंख मंजुको देखकर गीली होगइ..
 
लखन : (मुस्कुराते) मोम.. आप बहुत कमजोर हो गइ हे.. कुछ दीन हमारे साथ रहेने चलो..

चंदा : (हसते) हां मंजुदी.. आप हमारे साथ रहेने चलो.. आप ठीक होजायेगी..

मंजुला : (हसते) मेरा तो पता नही.. लगता हे वहा जाकर आप काफी बहेतर हो गइ हे.. हें..हें..हें..

चंदा : (लखनकी ओर देखकर सरमाते हसते) हां.. वहा समयका पता ही नही चलता.. ओर हमारा देवर हमे बहुत घुमाते हे.. कभी इधर तो कभी उधर.. वीजय ओर लखन भैयाके साथ टाइम नीकल जाता हे..

लखन : (जोरोसे हसते) हां देखोना.. काम बाम तो कुछ करना नही.. सारा दीन घुमना ओर खाना खाना.. खा खाके कीतनी मोटी होगइ हे.. हें..हें..हें..

कहा तो सब जोरोसे ठहाका माते हसने लगे.. तो चंदा भी हसते जुठमुठका नाराज होते लखनको अपने दांत पीसते मुका मारने लगी.. तो लखन वीजयको उनके हाथोमे थमाते खडा हो गया.. ओर चंदाकी पीठमे अ‍ेक मुका जडते बहार भाग गया.. तो सब फीरसे हसने लगे..

पुनम : (हसते) मोम.. बस सारा दीन यही मस्ती मजाक चलते रहेता हे..

सृती : (हसते) अरे..? लखन कहा चले गये..?

मंजुला : (मुस्कुराते) कहा जायेगा..? बहुत दीनोके बाद आया हेतो दोस्तोको मीलने चला गया होगा.. अब तो दो दीन यहा हेतो घुमता ही रहेगा.. (चंदाकी ओर देखते) कहो दीदी.. अब यही रहेना हे..? की वापस जाना हे..?

चंदा : (मुस्कुराते) नही.. मे तो वापस जाउगी.. यहा बहुत मजा आता हे.. ओर अ‍ेक सालके बाद वीजयको वही नर्सरीमे दाखला दीलवा दुगी..

सबलोग बाते करते रहे.. तो दया रजीयाको लेकर कीचनमे चली गइ.. लता आज भी बहुत मायुस थी.. क्युकी आज भी लखनने उनकी ओर नही देखा.. जैसे लखनने हमेसाके लीये उनसे नाता तोड लीया हो.. फीर सृती पुनमने मीलकर राधीकाको पुरी हवेली दीखाइ.. तो अंदरकी सजाछट देकर राधीका भी दंग रहे गइ..

उनको पहेली बार अहेसास हुआ.. की वो कीतने बडे खानदानकी बहु हे.. ओर वो मन ही मन अपने आपपे गर्व महेसुस करने लगी.. राधीका ओर दया दोनोको पता थाकी दोनो अ‍ेक दुसरेकी मौसीकी बेटीया यानी बहेने हे.. दया उसे दीदी दीदी कहेकर बुलाती थी..

तो दुसरी ओर लखन अपने दोस्तोको मीलने चला गया.. सबसे पहेले अपने करीबी दोस्त श्रीधरको मीलने उनके घरपे चला गया.. ओर दरवाजा खटखटाया.. ब्रीन्दाने दरवाजा खोला.. ओर सामने लखनको देखकर उनकी आंखोमे चमक आगइ.. वो कइ दीनोसे लखनको अकेलेमे मीलनेका प्लान कर रही थी..

र्बीन्दा : (खुसीसे हसते लखनको हाथ पकडकर अंदर खीचते) आइअ‍े.. आइअ‍े महाराज.. आखीर आप हमारे हाथ लग ही गये.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते अंदर जाते) भाभी.. क्या श्रीधर घरपे नही हे..?

र्ब्रीन्दा : (मुस्कुराते दरवाजा बंध करते) नही.. क्या आपने दोस्तको ही मीलने आ सकते हो.. अपनी भाभीको मीलने नही..? वो तो अपनी बीवी बच्चेको देखने सहेर गये हे.. सामको लोटेगे.. आइअ‍े बैठीये..

लखन : (सोफेपे बैठते मुस्कुराते) आप भीतो उनकी बीवी हो.. दोनो अकेले होनेका खुब फायदा उठाते होगे.. हें..हें..हें..

र्ब्रीन्दा : (कातीलाना मुस्कुराते) बडे ही नोटी हो.. ये भी कोइ पुछनेकी बात हे..? सभी दोस्तो अ‍ेक जैसे ही हो.. क्या आप अपनी बीवीओका लाभ नही उठाते..? इनफेक्ट आपकी तो कइ सारी बीवीया भी हे..

लखन : (मुस्कुराते) हां.. अब मेरा तो काम ही यही रेह गया हे.. हें..हें..हें..

ब्र्रीन्दा : (पास सटकर बैठते) हां पता हे मुजे.. उस दीन आपकी बीवीने तो पैसे ही नही लीये.. सीजीरयन था.. खर्च तो हुआ होगा..?

लखन : (मुस्कुराते) आप सब मेरी भाभीया हे.. आपसे पैसे थोडीनां लेगे.. इसीलीये तो उन डोक्टरनीसे सादी कीहे.. ताकी आप सब भाभीओको पैसे ना देने पडे.. हें..हें..हे..

ब्रीन्दा : (सरमाते धीरेसे) सोरीनां.. उस दीन हमे ठीकसे मीलनेका.. मतलब.. बात करनेका मौका भी नही मीला.. ओर श्रीधर जयश्रीकी सादीमे भी आप भाग गये थे.. क्या मे इती बुरी लगती हु आपको..?

लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) नही भाभी.. बस.. थोडा डर लग रहा था.. क्युकी श्रीधर मेरा खास दोस्त हे.. ओर तब सीर्फ मुजे ही पता थाकी आपने श्रीधरसे सादी करली हे.. ओर आप मेरी भाभी हे.. तो मे श्रीधरको धोखा देना नही चाहता था..

र्ब्रीन्दा : (सरमाकर मुस्कुराते) लेकीन आप कहा जबरदस्ती कर रहे हे.. मे सामनेसे केह रही हुनां..? ओर आपको पता हे..? मे सुरुसे ही आपको पसंद करती थी.. बस.. अ‍ेक ही तमाम थी.. की अ‍ेक बार आपसे मीलन करुगी.. ओर मेने सुना हे.. आप ओरतोकी भावनाओका बहुत सन्मान करते हे..?

लखन : (मुस्कुराते) हां.. ये मंजुमोम.. ओर पुनमदीदीका आदेश भी हे.. ले..की..न..
 
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