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- Dec 5, 2013
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नयना : (मुस्कुराते) बेटा.. ये मेरी बेटी हे.. नेहा.. उनकी सादी होगइ हे.. वो ओर उनके पतीके साथ केनेडामे रहेती हे.. पती पत्नी दोनो सोफ्टवेर इन्जीनीयर हे.. ओर केनेडामे खुदकी फार्म चलाते हे..
लखन : (मुस्कुराते) लेकीन आंटी येतो बीलकुल भावुकी हम सकल हे.. जैसे दोनो जुडवा बहेने हो.. हें..हें..हें..
नयना : (थोडी जेंपते बातको सम्हालते) हें..हें..हें.. इन्होने भी मेरा दुध पीया हे.. कभी कभी होता हेना कुदरतका करीस्मा.. नेहा नाम हे इनका.. वो ओर भावीका बचपनमे खुब साथ खेले हे.. जब ये होस्टेल चली गइ.. तब मुजसे लीपटकर खुब रोइ थी.. बचपनसे ही दोनो अेक जैसी दीखती हे.. मेभी कभी कभी धोखा खा जाती थी.. हें..हें..हें..
पंकजभाइ : (मुस्कुराते) हां लखनजी.. डीनरके बाद बात करवाता हु उनसे.. वोभी भावु बीटीयाके बारेमे कइ बार पुछ चुकी हे.. दोनो बचनकी खास सहेलीया जो थी..
कहातो भावीका भी तसवीरको देखती हे.. देखते ही चोंक जाती हे.. जो हुबहु उनकी सकलकी हे.. भावीकाको बचपनकी धुंधली याद आती हे.. जो उनके मम्मी पापा उसे होस्टेलमे छोडने जा रहे थे तब अेक लडकी अपनी मम्मीसे लीपटकर उसे रोकनेके लीये कहेते रो रही थी.. भावीका अेक नजरसे देखती रही..
याद आतेही भावीकाकी आंख गीली हो जाती हे.. ओर वो आंसु पोछती हे.. फीर सबने मीलकर डीनर कीया.. तब पंकजभाइ अपनी बीवीको लखनके बारेमे उनके खानदानके बारेमे बताते रहे.. जीसे सुनकर नयना भी लखनको अपने दामादके रुपमे देखते गर्वातीत महेसुस करती हे..
फीर सबलोग सोफेपे बैठ गये.. तो पंकजभाइने अपना मोबाइल टीवीसे कनेक्ट कीया.. ओर अपनी बेटी नेहाको वीडीयो कोल कीया.. जैसे ही नेहाने भावीकाको देखा उनकी आंखसे आंसु नीकल गये.. फीर सबने उनके साथ बातकी.. तब नेहाने भावीकाको अपने पतीके साथ केनेडा आनेका बहुत आग्रह कीया..
ओर वो जब भारत आयेगी तब उनको मीलनेका वादा कीया.. फीर कुछ देर बाते करते लखन ओर भावीका वहासे नीकलने लगे.. तब नयना बार बार भावीकाको फीरसे घरपे आनेका आग्रह करती रही.. फीर लखन ओर भावीका देर रात वापस घरपे आगये..
इस रात लखनने फीरसे सृती राधीका भावीका ओर नीलमको संतुस्ट कीया.. तो नीलम अपनी बारी खतम करके अपने रुममे चली गइ.. ताकी चंदाको पता ना चले.. आखीरमे सृतीकी कुटाइ होने लगी.. तब बीचमे ही सृती लखनको अपने उपरसे हटाके मुहपे हाथ रखते बाथरुममे चली गइ..
तो साथमे भावीका भी मनमे खुस होते पीछे चली गइ.. देखा तो सृती उल्टीया कर रही थी.. फीब अपना मुह साफ करते दोनो बहार आगइ तो सृतीके चहेरेपे कुछ अलगही चमक थी.. वो सरमाकर मुस्कुराते लखनकी बाहोमे समा गइ.. फीर सब लोग सोगये..
सुबह जब सृती जागी तो अेक टेस्ट कीट लेकर बाथरुममे घुस गइ.. ओर उसने अपनी प्राइमरी प्रेगनन्सी टेस्ट कीया.. तो रीजल्ट पोजीटीव देखकर खुसीके बारेमे बाथरुममे उछलने लगी.. ओर उसने बहार आकर ये बात भावीकाको बताइ.. ओर भावीकाने चाइ नास्तेके वक्त सबको बताया..
तो लखन खुसीके मारे सृतीको गोदमे उठालेता हे.. ओर घरमे दोडने लगा.. घरपे सबलोग खुस होते हसने लगे.. ओर भावीकाने फोन करके ये बात पुनमको बताइ.. तो मंजुके जानेके बाद फीरसे घरमे खुसीओकी बहार आगइ.. फीर सृती ओर भावीका क्लीनीकपे चली गइ..
वहा भावीकाने कायदेसे सृतीको चेक करके प्रेगनेन्ट होनेकी पुष्टीकी.. तभी अनायास भावीकाने भी खुदको सृतीको टेस्ट करनेको कहा.. ओर रीजल्ट देखकर भावीकाकी आंखोसे आंसु बहेने लगे.. क्युकी वोभी लखनसे प्रेगनेन्ट हो चुकी थी.. ओर ये बात हवेलीपे भी सबको पता चल गइ..
तो पुनमने इस सेटरडे सन्डेको सबको सेलीब्रेट करनेके लीये हवेलीपे बुला लीया.. ओर सृतीसे फोनपे अकेलेमे बात करली.. ओर पुनमने गांवमे भी देवायतकी सभी बीवीया.. ओर लखनके दोस्तके परीवारको हवेलीपे बुला लीया.. ओर साथमे भानुके परीवारको भी न्योता दीया..
तो सेटरडे सुबह ही सबलोग गांव जानेके लीये तैयार होगये.. सबलोग वहेली सुबह ही घरको ताला लगाकर नीकल गये.. चंदा वीजयको लेकर आगे लखनके पास ही बैठ गइ.. रास्तेपे लखनने कारको जंगलकी ओर जानेदी.. तो सबलोग खुसीसे मुस्कुराने लगे.. लेकीन भावीका आस्चर्यसे सबके सामने देखती रही..
भावीका : (सामने देखते) अरे..? हम लोग इधर कीधर जा रहे हे..? सृती.. क्या हम गांव नही जा रहे..?
सृती : (जोरोसे हसते) कमीनी हम गांव ही जा रहे हे.. तु चुपचाप बैठ.. थोडी देरमे तुजे सब पता चल जायेगा.. हें..हें..हें..
सबलोग भावीकाकी ओर देखकर हसने लगे.. तो भावीका भी मुस्कुराते चीडने लगी.. ओर उसने सृतीकी पीठमे मुका जड दीया.. आखीर सबलोग जंगलके बीच उनके पुर्खोके पुराने मंदीरपे आ गये.. फीर सबने मीलकर वहा कुछ साफ सफाइ करली.. ओर मंदीरमे चले गये..
वहा अगले ही दीन राधीका ओर नीलमने छुपकेसे तैयारीया करली थी.. तो राधीकाने दो फुलोका हार नीकाला.. फीर लखन ओर भावीकाको अेक अेक हार थमा दीया.. तो भावीका अभी भी असमजमे सबकी ओर मुस्कुराते देखती रही.. तब सृतीने हसते कहा..
सृती : (हसते) कमीनी सबको देख क्या रही हे..? अब अपने होने वाले पतीको हार पहेनादे.. आज तुम दोनोका गांधर्व विवाह हे..
भावीका : (सरमाकर धीरेसे) क्या..? हमारी सादी..? वो मंजुदीदीने कहा था वो..?
चंदा : (मुस्कुराते) हां वोही सादी.. लखनकी ज्यादातर बीवीओने उनसे अैसे ही सादी कीहे.. सृतीने भी..
इतना सुनतेही भावीका इमोस्नल होगइ.. उनकी आंख गीली होगइ.. ओर उसने सरमाते लखनको हार पहेना दीया.. तो लखनने भी भावीकाके गलेमे हार डाल दीया.. फीर सृतीने दोनोको सादीकी कसमे खीलवाइ.. ओर आखीरमे लखनने भावीकाको मंगलसुत्र पहेना दीया..

फीर जब उनकी मांग सींदुरसे भरदी.. तब भावीका सृतीसे लीपटकर फुटफुटके रोने लगी.. उसने कभी लखनके साथ सादीकी कल्पना नही कीथी.. ओर जब मंजुने उसे सादीका कहा था तो भावीकाने उसे मजाक समजके हल्केमे लीया था.. आज उनकी सचमे लखनसे सादी होगइ..
भावीका आज बहुत खुस थी.. क्युकी अब उनके गर्भमे पल रहा लखनका बच्चा नाजायज नही कहेलायेगा.. सबलोग वहासे बाबाके आश्रमपे चले गये.. तो बाबा सबको देखकर खुस हो गये.. फीर सृती चंदाने बाबाको भावीकाका परीचय करवाया.. ओर लखनसे सादीकी बात करली..
सृती : (मुस्कुराते) बाबा.. आज इस महासयकी अेक ओर सादी करवादी.. हें..हें..हें..
बाबा : (हसते) हां बेटी.. सही कीया तुमने.. लगता हे तुमने मंजु बीटीया ओर पुनम बीटीयाका काम बखुबी सम्हाल लीया हे.. बहुत अच्छा कर रही हो..
सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) बाबा.. सब आपहीकी कृपा हे..
बाबा : (चंदाकी ओर देखते) बेटी.. क्या अब तो तुम खुस होनां..?
चंदा : (सर्मसार होते मुस्कुराते) जी बाबा.. मे बहुत खुस हु.. आपको तो सब पता हे.. क्या मे कुछ गलत तो नही कर रही..?
बाबा : (मुस्कुराते) कोइ गलती नही बेटा.. बस.. तेरी आखरी मंजील यही थी..
फीर सबलोग बाबाको दक्षीणा देकर उनका आशीर्वाद लेकर वहासे नीकल जाते हे.. ओर सीधे हवेलीपे आगये.. तो सबके आस्चर्यके बीच पुनमने उनके स्वागतकी सभी तैयारीया करली थी.. लखनने देखा तो देवायतकी सभी बीवीया उनके सभी दोस्तके परीवाल वाले.. ओर भानुका परीवार मोजुद था..
सबने खुसीसे तालीया बजाते लखन ओर भावीकाका स्वागत कीया.. तो भावीकाकी आंख खुसीके मारे गीली होगइ.. फीर नीर्मलाने भावीका ओर लखनका कलश घुमाते स्वागत कीया.. तो लखन ओर भावीकाने मीलकर नीर्मला ओर देवायतके पांव छुअे.. तब देवातने गीली आंख करते दोनोको आशीर्वाद दीया..
आज पुनम सबके सामने खुलकर लखनको गले मीली.. फीर वो सृती सब लेडीस भावीकाको लेकर अंदर चली गइ.. भावीका आज नइ दुल्हकी तराह बहुत ही सरमा रही थी.. फीर सभी लेडीसने मीलकर भावीकाको दुल्हनकी तराह सजाया.. फीर होलमे लखन ओर भावीकाको साथ बीठाया..
पुनमने लखन ओर भावीकाकी सादीकी सबके सामने घोसणा करदी.. तो वहा सबने दोनोको आशीर्वाद ओर उपहार दीये.. फीर पुनमने सबको सृती ओर भावीकाकी प्रेगन्सीकी खबर सुनाइ.. जीसे सुनकर सृती ओर भावीका दोनो ही सरमा गइ.. तभी ब्रीन्दा सबसे छुपकर अपने पेटपे हाथ घुमाते लखनकी ओर कातील नजरोसे देखकर मुस्कुराने लगी..
तो लखन हसने लगा.. तो आज रमा भी लखनसे बहुत सरमा रही थी.. इस बातपे सरला दोनोके बीच नजर गडाये लखनकी ओर ललचाइ नजरोसे देख रही थी.. उनका ध्यान बार बार लखनके पेन्टकी उभारकी ओर जा रहा था.. लेकीन सरलाको पता नही चला की लखनने सरलाकी नजरको पहेचान लीया..
इस दीन नाच गान खाना पीना सबकुछ हुआ.. सामका प्रोग्राम चल रहा था.. तब अचानक जरीनाकी तबीयत बीगड गइ.. ओर वो खडी होकर अपने मुहपे हाथ रखते पुनम वाले रुममे दौडकर चली गइ.. सब लोग उसे अैसे जाते देखकर बहुत कुछ समज गये.. पीछे सलमा पुनम ओर सृती भी चली गइ.. देखा तो जरीना उल्टीया कर रही थी.. ओर सृतीने उसे चेक कीया....
कन्टीन्यु
लखन : (मुस्कुराते) लेकीन आंटी येतो बीलकुल भावुकी हम सकल हे.. जैसे दोनो जुडवा बहेने हो.. हें..हें..हें..
नयना : (थोडी जेंपते बातको सम्हालते) हें..हें..हें.. इन्होने भी मेरा दुध पीया हे.. कभी कभी होता हेना कुदरतका करीस्मा.. नेहा नाम हे इनका.. वो ओर भावीका बचपनमे खुब साथ खेले हे.. जब ये होस्टेल चली गइ.. तब मुजसे लीपटकर खुब रोइ थी.. बचपनसे ही दोनो अेक जैसी दीखती हे.. मेभी कभी कभी धोखा खा जाती थी.. हें..हें..हें..
पंकजभाइ : (मुस्कुराते) हां लखनजी.. डीनरके बाद बात करवाता हु उनसे.. वोभी भावु बीटीयाके बारेमे कइ बार पुछ चुकी हे.. दोनो बचनकी खास सहेलीया जो थी..
कहातो भावीका भी तसवीरको देखती हे.. देखते ही चोंक जाती हे.. जो हुबहु उनकी सकलकी हे.. भावीकाको बचपनकी धुंधली याद आती हे.. जो उनके मम्मी पापा उसे होस्टेलमे छोडने जा रहे थे तब अेक लडकी अपनी मम्मीसे लीपटकर उसे रोकनेके लीये कहेते रो रही थी.. भावीका अेक नजरसे देखती रही..
याद आतेही भावीकाकी आंख गीली हो जाती हे.. ओर वो आंसु पोछती हे.. फीर सबने मीलकर डीनर कीया.. तब पंकजभाइ अपनी बीवीको लखनके बारेमे उनके खानदानके बारेमे बताते रहे.. जीसे सुनकर नयना भी लखनको अपने दामादके रुपमे देखते गर्वातीत महेसुस करती हे..
फीर सबलोग सोफेपे बैठ गये.. तो पंकजभाइने अपना मोबाइल टीवीसे कनेक्ट कीया.. ओर अपनी बेटी नेहाको वीडीयो कोल कीया.. जैसे ही नेहाने भावीकाको देखा उनकी आंखसे आंसु नीकल गये.. फीर सबने उनके साथ बातकी.. तब नेहाने भावीकाको अपने पतीके साथ केनेडा आनेका बहुत आग्रह कीया..
ओर वो जब भारत आयेगी तब उनको मीलनेका वादा कीया.. फीर कुछ देर बाते करते लखन ओर भावीका वहासे नीकलने लगे.. तब नयना बार बार भावीकाको फीरसे घरपे आनेका आग्रह करती रही.. फीर लखन ओर भावीका देर रात वापस घरपे आगये..
इस रात लखनने फीरसे सृती राधीका भावीका ओर नीलमको संतुस्ट कीया.. तो नीलम अपनी बारी खतम करके अपने रुममे चली गइ.. ताकी चंदाको पता ना चले.. आखीरमे सृतीकी कुटाइ होने लगी.. तब बीचमे ही सृती लखनको अपने उपरसे हटाके मुहपे हाथ रखते बाथरुममे चली गइ..
तो साथमे भावीका भी मनमे खुस होते पीछे चली गइ.. देखा तो सृती उल्टीया कर रही थी.. फीब अपना मुह साफ करते दोनो बहार आगइ तो सृतीके चहेरेपे कुछ अलगही चमक थी.. वो सरमाकर मुस्कुराते लखनकी बाहोमे समा गइ.. फीर सब लोग सोगये..
सुबह जब सृती जागी तो अेक टेस्ट कीट लेकर बाथरुममे घुस गइ.. ओर उसने अपनी प्राइमरी प्रेगनन्सी टेस्ट कीया.. तो रीजल्ट पोजीटीव देखकर खुसीके बारेमे बाथरुममे उछलने लगी.. ओर उसने बहार आकर ये बात भावीकाको बताइ.. ओर भावीकाने चाइ नास्तेके वक्त सबको बताया..
तो लखन खुसीके मारे सृतीको गोदमे उठालेता हे.. ओर घरमे दोडने लगा.. घरपे सबलोग खुस होते हसने लगे.. ओर भावीकाने फोन करके ये बात पुनमको बताइ.. तो मंजुके जानेके बाद फीरसे घरमे खुसीओकी बहार आगइ.. फीर सृती ओर भावीका क्लीनीकपे चली गइ..
वहा भावीकाने कायदेसे सृतीको चेक करके प्रेगनेन्ट होनेकी पुष्टीकी.. तभी अनायास भावीकाने भी खुदको सृतीको टेस्ट करनेको कहा.. ओर रीजल्ट देखकर भावीकाकी आंखोसे आंसु बहेने लगे.. क्युकी वोभी लखनसे प्रेगनेन्ट हो चुकी थी.. ओर ये बात हवेलीपे भी सबको पता चल गइ..
तो पुनमने इस सेटरडे सन्डेको सबको सेलीब्रेट करनेके लीये हवेलीपे बुला लीया.. ओर सृतीसे फोनपे अकेलेमे बात करली.. ओर पुनमने गांवमे भी देवायतकी सभी बीवीया.. ओर लखनके दोस्तके परीवारको हवेलीपे बुला लीया.. ओर साथमे भानुके परीवारको भी न्योता दीया..
तो सेटरडे सुबह ही सबलोग गांव जानेके लीये तैयार होगये.. सबलोग वहेली सुबह ही घरको ताला लगाकर नीकल गये.. चंदा वीजयको लेकर आगे लखनके पास ही बैठ गइ.. रास्तेपे लखनने कारको जंगलकी ओर जानेदी.. तो सबलोग खुसीसे मुस्कुराने लगे.. लेकीन भावीका आस्चर्यसे सबके सामने देखती रही..
भावीका : (सामने देखते) अरे..? हम लोग इधर कीधर जा रहे हे..? सृती.. क्या हम गांव नही जा रहे..?
सृती : (जोरोसे हसते) कमीनी हम गांव ही जा रहे हे.. तु चुपचाप बैठ.. थोडी देरमे तुजे सब पता चल जायेगा.. हें..हें..हें..
सबलोग भावीकाकी ओर देखकर हसने लगे.. तो भावीका भी मुस्कुराते चीडने लगी.. ओर उसने सृतीकी पीठमे मुका जड दीया.. आखीर सबलोग जंगलके बीच उनके पुर्खोके पुराने मंदीरपे आ गये.. फीर सबने मीलकर वहा कुछ साफ सफाइ करली.. ओर मंदीरमे चले गये..
वहा अगले ही दीन राधीका ओर नीलमने छुपकेसे तैयारीया करली थी.. तो राधीकाने दो फुलोका हार नीकाला.. फीर लखन ओर भावीकाको अेक अेक हार थमा दीया.. तो भावीका अभी भी असमजमे सबकी ओर मुस्कुराते देखती रही.. तब सृतीने हसते कहा..
सृती : (हसते) कमीनी सबको देख क्या रही हे..? अब अपने होने वाले पतीको हार पहेनादे.. आज तुम दोनोका गांधर्व विवाह हे..
भावीका : (सरमाकर धीरेसे) क्या..? हमारी सादी..? वो मंजुदीदीने कहा था वो..?
चंदा : (मुस्कुराते) हां वोही सादी.. लखनकी ज्यादातर बीवीओने उनसे अैसे ही सादी कीहे.. सृतीने भी..
इतना सुनतेही भावीका इमोस्नल होगइ.. उनकी आंख गीली होगइ.. ओर उसने सरमाते लखनको हार पहेना दीया.. तो लखनने भी भावीकाके गलेमे हार डाल दीया.. फीर सृतीने दोनोको सादीकी कसमे खीलवाइ.. ओर आखीरमे लखनने भावीकाको मंगलसुत्र पहेना दीया..

फीर जब उनकी मांग सींदुरसे भरदी.. तब भावीका सृतीसे लीपटकर फुटफुटके रोने लगी.. उसने कभी लखनके साथ सादीकी कल्पना नही कीथी.. ओर जब मंजुने उसे सादीका कहा था तो भावीकाने उसे मजाक समजके हल्केमे लीया था.. आज उनकी सचमे लखनसे सादी होगइ..
भावीका आज बहुत खुस थी.. क्युकी अब उनके गर्भमे पल रहा लखनका बच्चा नाजायज नही कहेलायेगा.. सबलोग वहासे बाबाके आश्रमपे चले गये.. तो बाबा सबको देखकर खुस हो गये.. फीर सृती चंदाने बाबाको भावीकाका परीचय करवाया.. ओर लखनसे सादीकी बात करली..
सृती : (मुस्कुराते) बाबा.. आज इस महासयकी अेक ओर सादी करवादी.. हें..हें..हें..
बाबा : (हसते) हां बेटी.. सही कीया तुमने.. लगता हे तुमने मंजु बीटीया ओर पुनम बीटीयाका काम बखुबी सम्हाल लीया हे.. बहुत अच्छा कर रही हो..
सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) बाबा.. सब आपहीकी कृपा हे..
बाबा : (चंदाकी ओर देखते) बेटी.. क्या अब तो तुम खुस होनां..?
चंदा : (सर्मसार होते मुस्कुराते) जी बाबा.. मे बहुत खुस हु.. आपको तो सब पता हे.. क्या मे कुछ गलत तो नही कर रही..?
बाबा : (मुस्कुराते) कोइ गलती नही बेटा.. बस.. तेरी आखरी मंजील यही थी..
फीर सबलोग बाबाको दक्षीणा देकर उनका आशीर्वाद लेकर वहासे नीकल जाते हे.. ओर सीधे हवेलीपे आगये.. तो सबके आस्चर्यके बीच पुनमने उनके स्वागतकी सभी तैयारीया करली थी.. लखनने देखा तो देवायतकी सभी बीवीया उनके सभी दोस्तके परीवाल वाले.. ओर भानुका परीवार मोजुद था..
सबने खुसीसे तालीया बजाते लखन ओर भावीकाका स्वागत कीया.. तो भावीकाकी आंख खुसीके मारे गीली होगइ.. फीर नीर्मलाने भावीका ओर लखनका कलश घुमाते स्वागत कीया.. तो लखन ओर भावीकाने मीलकर नीर्मला ओर देवायतके पांव छुअे.. तब देवातने गीली आंख करते दोनोको आशीर्वाद दीया..
आज पुनम सबके सामने खुलकर लखनको गले मीली.. फीर वो सृती सब लेडीस भावीकाको लेकर अंदर चली गइ.. भावीका आज नइ दुल्हकी तराह बहुत ही सरमा रही थी.. फीर सभी लेडीसने मीलकर भावीकाको दुल्हनकी तराह सजाया.. फीर होलमे लखन ओर भावीकाको साथ बीठाया..
पुनमने लखन ओर भावीकाकी सादीकी सबके सामने घोसणा करदी.. तो वहा सबने दोनोको आशीर्वाद ओर उपहार दीये.. फीर पुनमने सबको सृती ओर भावीकाकी प्रेगन्सीकी खबर सुनाइ.. जीसे सुनकर सृती ओर भावीका दोनो ही सरमा गइ.. तभी ब्रीन्दा सबसे छुपकर अपने पेटपे हाथ घुमाते लखनकी ओर कातील नजरोसे देखकर मुस्कुराने लगी..
तो लखन हसने लगा.. तो आज रमा भी लखनसे बहुत सरमा रही थी.. इस बातपे सरला दोनोके बीच नजर गडाये लखनकी ओर ललचाइ नजरोसे देख रही थी.. उनका ध्यान बार बार लखनके पेन्टकी उभारकी ओर जा रहा था.. लेकीन सरलाको पता नही चला की लखनने सरलाकी नजरको पहेचान लीया..
इस दीन नाच गान खाना पीना सबकुछ हुआ.. सामका प्रोग्राम चल रहा था.. तब अचानक जरीनाकी तबीयत बीगड गइ.. ओर वो खडी होकर अपने मुहपे हाथ रखते पुनम वाले रुममे दौडकर चली गइ.. सब लोग उसे अैसे जाते देखकर बहुत कुछ समज गये.. पीछे सलमा पुनम ओर सृती भी चली गइ.. देखा तो जरीना उल्टीया कर रही थी.. ओर सृतीने उसे चेक कीया....
कन्टीन्यु