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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - ९७
अभी तब रमा तीनसे चार बार जड चुकीथी.. तो उनकी चुतमेभी जलन महेसुस होने लगी.. तकरीबन २५ मीनीटकी धका पैनी जबरदस्त चुदाइके बाद भानुके लंडने भी जवाब देना मुनासीब समजा.. ओर भानु रमाकी चुतमे जडतक लंड घुसाके जडने लगता हे.. तब रमाभी भानुको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलेती हे.. तभी जडतेही भानु रमाके सीनेपे सर रखते ढेर हो गया.. ओर रमा उनकी पीठ सहेलाते भानुसे नजरे चुराने लगी.. ओर उसने राहतकी सांस ली.. तबतक भावना भी नींदकी आगोसमे चली गइथी....अब आगे
आज देवायतकी हवेलीमे काम ओर रती स्यंम अपनी मौजुदगीका अहेसास करवा रहे थे.. तो जाहीरसी बात हे आज पुरे गांवमे ओर आजु बाजु सब जगाहपे अपनी काम वासनाका असर दीखाता.. पुरे गांवमे कामोतेजनाकी लहेर छागइ.. जीतनेभी जवान ओर आधेड थे.. यहा तक सभी बुढेके तनमे भी हलचल तेज होगइ थी..
सबके तनमे अेक अलगही नसा छाने लगा.. सभी लोग वासनाकी आगमे जलते संमुदरमे डुबकीया लगाने लगे.. तभी नीचेकी ओर दया ओर रजीयाभी आपसमे नंगी होकर लेस्बीयनका खेल खेल रहीथी.. दोनोही सीक्स नाइन पोजीसनमे अेक दुसरेकी चुतको चाट रही थी..

आज पुरे गांवमे वासना इस कदर हावी हो रहीथी.. जैसे पुरे गांवमे कीसीने जादु करदीया हो.. कीसीको कुछ पताही नही थाकी ये सब क्यु हो रहा हे.. ज्यादातर गांव वालोका आपसमे ही कीसीना कीसीके साथ अफेयर चल रहाथा.. कोइ अपनी विधवा बुआके साथ.. तो कोइ अपनी भाभीके साथ.. तो कोइ अपनी चाचीको सेट करते चोदता था.. तो कोइ अपनी कामुक बडी अम्माको सेट करके चोद लेता..
ज्यादातर जवान लडकीया बदनामीके डरसे अपनेही घरमे आपसी रीस्तोमे यानी अपने सगे भाइके साथ अगर सगा भाइ नही होता तो चाचाका लडका या बुआके यातो मामाका या बडे ताउके लडकेके साथ अफेयर करके अपने तनकी प्यास बुजाती थी.. ताकी बहार वालोको उनपे सकभी ना पडे ओर अपने यारको घरमे ही बीन्दास्त मील सके.. ओर लडकेभी कीसी बहारकी लडकीके बजाये अपनी बहेनको सेट करते उनसे प्यारके खेलमे लगे रहेते थे..
अेक घरमे तो लडका सहेरमे नोकरी करताथा तो महीनो तक नही आताथा.. ओर आताभी तो महीनेमे सीर्फ अेक बार.. तो उनकी बीवीका अपने ससुरसेही अफैर होगया था.. जो आये दिन उनसेही अपनी प्यास बुजालेती थी.. तो कोइ विधवा अपने देवरसे या भतीजेसे तो कोइ अपने भांजेको सेट करके उनसे चुदवाकर अपनी प्यास बुजाती.. ज्यादातर घरमे कीसीना कीसीके साथ अफेयर चल रहाथा.. ओर इस बारेके कीसीको भनकभी नही थी की.. गांवमेभी अैसा हो सकता हे..





ओर ज्यादातर कुआरे लडके अपनी सगी बहेन यातो रीस्तेकी कजीन बहेनको सेट करते उनसे अपने तनकी आग बुजा लेतेथे.. जो आये दीन मौका मीलतेही उसे चोद लेते थे.. लेकीन आज सबके रीस्ते खुलकर उजागर होनेकी कगारपे आगये.. आज सबपे काम ओर रतीकी मौजुदगीका अहेसास होने लगाथा.. सबपे काम हावी होने लगा.. सब पागल जैसे होने लगे.. ओर अपने साथीके साथ मीलन करनेको तडपने लगे..




आज काम पुरी तराह सबपे हावी होने लगा तो कोइ अपनी बुआके रुममे चला गया तो कोइ अपनी भाभीको स्टोरेजके रुममे लेजाकर चोदने लगा.. तो कीसीने अपनी चाचीको अपनेही रुममे बुला लीया तो बहुने ससुरको इसारा करके बाथरुममेही बुला लीया ओर वो दोनो वहा खडे खडे चुदाइ करने लगे.. तो अेक लडकेने तो अपनी अम्माको देर रात कीचनमे पानी पीने आइ तबही दबोच लीया.. ओर पीछेसे लंड घुसाके उसे कीचनमेही चोदने लगा..
ओर मजेकी बात आज कोइ ओरत हो या लडकी कीसीको मना नही कर रही थी.. क्युकी आज सबके दिमागमे काम ओर रती हावी थे.. लडके या मर्द कीसीको चोदनेके लीये तडप रहेथे तो लडकीया ओर ओरते अपनी चुतमे अपने यारका लंड लेनेको तडप रहीथी.. ओर जीनके सेप्रेट रुम थे वो अपनी बहेनको वही बुलाकर चोदने लगे.. तो कइ लडके घरोकी छतमे टंकीके पीछे अपनी बहेनको बुलाकर चोदने लगा..
कीसीको कुछ पता नही थाकी आज सब क्या हो रहा हे.. सबके दिमागमे आज वासना हावी होकर तांडव मचा रहीथी.. आज पता चला की गांवमेभी अैसे कइ रीस्ते पनप रहे हे.. आज बाबाने कही हुइ भवीस्य वाणी सचमे साबीत होते दीख रही थी.. जो कुछही महीनोमे सबके रीस्ते सार्वजीक रुपसे उजागहर होनेकी कगारपे थे.. तब पता नही पुरे गांवमे कैसा तांडव मचेगा..
तभी रश्मी ओर चंपाभी अपनी चुतमे जोरोसे उंगली करते अपने आपको सांत करती रही.. तो आज गांवके डो. सुधीरभी अपनी बीवी नीशाको चोद रहाथा.. तब नीशाभी खुस होकर सुधीरसे चुदवाने लगी.. क्युकी सुधीर उनकी गलत आदतोकी वजहसे नीशाको बहुतही कम फीजीकल होताथा.. जीनकी वजहसे नीशाभी देवायतकी ओर ढलने लगी थी.. ओर जब आज उसे सुधीर चोद रहाथा तब नीशा सुधीरकी जगाह देवायतको इमेजींग करते चुदवा रहीथी..
ओर कुछही देरमे सुधीरके लंडने जवाब देदीया.. ओर नीशा सुधीरको मनही मन गालीया देने लगी.. ओर वही बेठकर अपनी चुतमे उगली करने लगी.. क्युकी नीशा बहुतही खुबसुरत ओर अेकदम गोरी पतली लडकीथी.. उनके लंबे बाल उनके घुटने तक लहेराते थे.. जीनकी वजहसे वो बहुतही खुबसुरत ओर आकर्सक दीख रहीथी.. जो नीशाके माबापने नीशाकी सादी सीर्फ सुधीरको डोक्टर होनेकी वजहसे करदी थी..
लेकीन नीशा इतनी खुबसुरतथी की सुधीर नीशाको देखतेही जड जाता था.. ओर नीशाको हमेसाकी तराह प्यासी रख देता था.. ओर इसी बातपे दोनोके बीच अक्सर काना सुनी होजाती.. तब नीशाको उंगलीसे अपने आपको सांत करना पडता था.. सुधीरका लंड बहुतही छोटा ओर पतलाथा.. नीशाने सुधीरको कइ बार अपना इलाज करवानेको कहा लेकीन सुधीर हर बार उनकी बातको बहेस करके टाल देता.. क्युकी उनका असली रीजन सीर्फ वोही जानता था.. वो देवायतके साथ कोलेजमे पढताथा तबसे ही वो गांडु था..
तब ना चाहते हुअेभी नीशा देवायतसे आकर्सीत होकर उनकी ओर ढलने लगी थी.. देवायत जबभी सुधीरको मीलने आता नीशा बस उनकोही देखती रहेती.. ओर उनसे बाते करनेकी कोसीस करती.. ओर मौका मीलतेही देवायतको कामुक इसारा भी करती.. इस बातको देवायतभी भली भांती जान चुकाथा.. की सुधीर नीशाको खुस नही रख पाता.. ओर देवायतभी उनका रीजन जानता था..
तो दुसरी ओर रमेशभी अपनी बीवी चारुकी जबरदस्त चुदाइ कर रहाथा.. लेकीन वो ज्यादा देर टीक नही पाया.. ओर चारुकी चुतमे जल्दी खलास होकर उनके उपरसे उतर गया.. ओर चारुकी गालीया सुनकर सो गया.. तब चारु नंगीही उठकर फटाफट वंदनाके रुममे चली गइ तो वंदनाभी चदरके अंदर उंगली कर रहीथी.. ओर चारुने देख लीया.. तो वोभी दरवाजा बंध करके हसते हुअे नंगीही उनके साथ सोते वंदनाकी चदरमे घुस गइ..
चारु : (हसते) वंदु अकेली अकेली क्या कर रही हे..? तु कीसीको सेट करके सादी करले.. कब तक अैसे उंगलीसे काम चलायेगी.. हें..हें..हें..
वंदना : (सरमाते हसते धीरेसे) मम्मी क्या हुआ..? क्या.. आजभी पापाने फीर आपको अधुरी छोड दीया..? मोम आपनेभी सादी करके क्या तीर मारलीया.. इनसेतो अच्छी मेरी उंगली हे.. हें..हें..हें..
चारु : (जुठा गुसा करते वंदनाको बाहोमे भरते) तु उस कमीनेका नाम ही मत ले.. अगर अैसा पती तुजे मीला होतातो तुजे पता चलता.. चल छोड ये सब बाते.. पहेले मुजे अेक बार ठंडी करदे.. फीर मे तुजे कर दुगी.. तेरे पापाने आजभी मुजे अधुरी छोड दीया.. पता नही तु मर्दके बीना कैसे रेह लेती हे.. मेतो अेक दिनभी लंडके बीना ना रहु.. ओर आज पता नही कैसी आग लगी हुइ हे.. क्या तुजे अेकबारभी इच्छा नही होतीकी कीसी मर्दका लंड अपनी चुतमे लेलु..?
वंदना : (चारुकी चुत सहेलाते) मम्मी तु फीर सुरु होगइ..? तु हे ना.. हम दोनो मां बेटी अेक दुसरेका अैसेही खयालतो रखती हे.. तो फीर मुजे मर्दकी क्या जरुरत हे.. ओर तुमने भी मर्दसे सादी करली हे.. क्या हुआ..?
चारु : (होंठ चुमते) बेटी.. अभी तक तुमने मर्दका स्वाद चखा नही हे इसीलीये तु अैसे बोल रही हे.. बस अेक बार कीसी असली मर्द से पाला पड जायेगा तब तु उनके बीना रहे नही पायेगी.. मेरी मान तु देवायतको पकडले.. वोतो राजा हे वोतो कीतनी भी सादीया कर सकते हे.. मुजे पुरा यकीन हे वो तुजे अपना लेगा.. ओर तुजे बहोत खुस रखेगा.. बस अेक बार उनसे प्रपोज करते तो देख..
वंदना : (सरमाते मुस्कुराते) मम्मी तुम फीर सुरु होगइ..? अरे बाबा उनकी सादी होगइ हे.. अब मुमकीन नही हे.. अगर तेरी बात मान भी लु तो क्या मंजुभाभी पुनो सब क्या सोचेगी..? ओर उसने मुजे युस करके सादी करनेसे मना करदीया तो..? तेरी ओर पापाकीही बदनामी होगी..
चारु : (कीस करते) बेटी जहा तक मे उसे जानती हु वो अैसा नही हे.. वो अेक रोयल फेमीली हे.. वो तुजे खुस रखेगा.. वैसेभी इन तेरे पापा जैसे नामर्दसे तो अच्छा उनकी रखैल बनके रहे.. अगर तुजेभी मेरे जैसा पती मील गया तो हम दोनोकी जींदगी नर्क बन जायेगी.. इनसेतो अच्छा हे तु उनकी बीवी होजा.. अेक बार बात करके तो देख.. वरना मुजे मौका मीलातो मे बात करलुगी..

वंदना : (चारुकी चुत सहेलाते उनके मनको टटोलने लगी) मम्मी.. अेक बार फीर सोचले.., अगर मे इस बारेमे आगे बढु.. तो क्या तुम सहेन कर पाओगी..? ओर मेरा साथ दोगी..? अगर उसने मुजे प्रेगनेन्ट करदीयातो पहेले तुमही मुजे घरसे नीकाल दोगी.. हम दुनीया वालोको क्या मुह दीखायेगे.. हमारी बहुत बदनामी होगी.. ओर वो पापाके खास दोस्तभी हे..
चारु : (सीरीयस होते) नही बेटी.. तुमने मेरे बारेमे अैसा सोचभी केसे लीयाकी मे तेरा साथ नही दुगी..? वंदु अगर तुम सचमे उनके साथ जींदगी बीताना चाहती हे.. तो मे तुम्हारे साथ हु.. बस अेक बार उनसे सादी करले.. फीर तु उनके साथ हवेलीपे रहे या फीर यही हमारे घरमे.. हमे कोइ फर्क नही पडता..
वैसेभी तु हमारी अैकलोती बेटी हे.. हमारे बाद तुजेही तो ये सब सम्हालना हे.. अबतो तेरी नोकरीभी लग जायेगी.. तो वोभी हमे चीन्ता नही हे की तु अकेली कैसे तेरा गुजारा करेगी.. बेटा.. मे हंमेसा तेरे साथ हु.. ओर तेरा साथ देती रहुगी.. ओर रही बात तेरे पापाकी तो उनकोतो मे समजा दुगी.. वो कुछ नही कहेगे..
वंदना : (खुसीसे जोरोसे बाहोमे भीचते) ओह.. मम्मी आइ लव यु, मुजे पुरा यकीन थाकी तुम मेरा साथ जरुर दोगी, मम्मी इस बारेमे हम कल अकेले होगे तब बात करेगे, मुजे आपसे इस बारेमे कुछ बात करनी हे..
चारु : (हसते होंठ चुमते) अच्छा..? ठीक हे बेटा.. मुजे लगता हे इस बारेमे तुम कुछ आगे बढी हो.. हें..हें.. कोइ बात नही.. मे खुस हु.. बस तुम खुस रहेनी चाहीये.. मुजे तुम दोनोके रीस्तेसे कोइ अेतराज नही..
दोनोही मां बेटी अैसेही बाते करते गरम होने लगी ओर थोडी ही देरमे दोनो सीक्सनाइन पोजीसनमे अेक दुसरेकी चुतको चाटने लगी.. तब अचानक वंदना बेडसे उतर गइ ओर अलमारीसे बेल्ट वाला डील्डो नीकाल लीया ओर अपनी कमरपे बांधते चारुके उपर चड गइ ओर रबरका डील्डो चारुकी चुतमे घुसा दीया ओर अपनी मम्मीको अेक मर्दके भांती जोरोसे चोदने लगी.. तब चारु सातवे आसमानपे पहोंच गइ..

जब चारु जड गइ तब उनकी बेटी वंदनाके उपर चड गइ ओर वंदनाके होंठ चुमते अेक उंगली वंदनाकी चुतमे डालकर वंदनाको जडाके सांत करदीया.. फीर दोनो अेक दुसरेको चीपकके सोगइ.. दोनो अक्सर अेक दुसरेको अैसेही सांत करतीथी.. जब चारु बोम्बे गइथी तब वो वहासे अेक रबरका बेल्ट वाला डील्डो लेकर आयी थी.. लेकीन वंदना उसे इस्तेमाल नही करती ताकी वो अपनी वर्जीनीटी बेकरार रख सके.. क्युकी दिलके अेक कोनेमे उसे देवायतको मीलनेकी उमीद आज भी जींदा थी..
जो पुनमके साथ बातोसे उनकी उमीदभी बहुत जल्द पुरी होने वाली थी.. इसीलीयेतो आज उसने मौका मीलतेही चारुको कल अपने दिलकी बात बतानेको केह दीया.. जब पुरे गांवमे वासनाका खेल हो रहाथा.. तब लता ओर लखनभी कैसे दुर रेह सकते थे.... सब सोने चले गये तब लता ओर नीलम दोनोभी अेक बडे बेडपे सोनेकी तैयारीया कर रही थी.. दोनोने अपने नाइडके कपडे पहेन लीये.. तब नीलम ओर लता अेक दुसरेकी ओर मुह करते सोनेकी तैयारीया करने लगी.. तभी मौका मीलतेही लताने नीलमको कहा..
लता : (धीरेसे डांटते) नीलु.. ये सब क्या हे..? मेने देखा हे तुम ओर धिरेन कारमे बहुत कुछ मस्तीया कर रहे थे.. मे तुमसे केह देती हु.. तुम उस धिरेनसे दुर रहेना.. दोनो गाडीमे क्या हरकत कर रहेथे मुजे सब पता हे.. वो तेरे पीछे क्यु पडा हे..? तुने उनको कुछ कहा हे क्या..? देखना अभी उनकी सादी होने वाली हे..
नीलम : (सुनकर गभराते गांड फटने लगी तब धीरेसे) नही.. नही.. दीदी.. वो.. वो.. सीर्फ मेरी मस्ती कर रहे थे.. मैने उनको बहुत मना कीया.. लेकीन वो मानते ही नही थे.. उसमे मेरी कोइ गलती नही हे..
लता : (धीरेसे) नीलु.. मुजे पता हे.. मेने सब देखलीया हे.. वो तुने कहा कहा हाथ लगातेथे.. सच बताना.. तुजे मेरी कसम हे.. उसने तेरे बुब्सकोभी दबाया हेनां..? ओर वहा.. तेरे नीचेभी हाथ डाला थानां..?
नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. वो.. वो.. आप ओर जीजु मस्ती करते प्यार कर रहेथेनां..? तो धिरेन जीजुने मुजे देखनेके लीये कहा.. ओर मे देखकर बहेक गइ.. तभी वो भी मेरे साथ ये सब करने लगे.. इसमे मेरी कोइ गलती नही हे.. मेने उनको बहुत मना कीया.. उनको बहुत रोकनेकी कोसीस की.. लेकीन वो नही माने.. मेरी अेकभी नही सुनते थे..
लता : (थोडी सांत होते) देख नीलु.. मेरी ओर तेरे लखनजीजु की तो सादी होने वाली हे.. वो मेरे मंगेतर हे.. अब तीन चार दीनमे ही धिरेनकी पुनो दीदीके साथ सादी होने वाली हे.. तुम उनसे दुर रहेना.. ओर वो बुलाये तोभी उनके पास अकेली मत जाना.. मुजे या पुनो दीदीको साथ रखके जाना.. मुजे उनकी नीयत ठीक नही लगती.. ओर वैसेभी इन सब चीजोके लीये तु अभी बहुत छोटी हे.. तेरी उमरही क्या हे..? कीतने साल हुअे तुजे..?
नीलम : (सरमाते धीरेसे हसते) दीदी.. वो.. १७ वा साल चल रहा हे.. आपकी सादीके अेक महीनेके बाद अठारवा लगेगा..
लता : (हसते धीरेसे) हंम.. मतलब तुजपे नइ नइ जवानी चड रही हे.. नीलु तुजे इस उमरमे ही अपने आपको सम्हालना हे.. तुजे बहुत खयाल रखना पडेगा.. वरना तेरे कदम कही बहेक गयेतो भाभी भैया.. हम सब कही मुह दीखाने लायक नही रहेगे.. तु अपने आपको सम्हालना.. ओर वहा सहेरमेभी तुजे बहुत सम्हालना हे.. बस अेक बार अच्छेसे पढाइ करले.. फीर मे जेठजीको कहेके तेरे लीये कोइ अच्छा पढा लीखा लडका ढुंढुगी.. ओर उनसे तेरी सादी करवाउगी.. समजी.. इन सब चीजोके लीये अभी तेरी उमर नही हे..
नीलम : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. वो.. वो.. धिरेन जीजुने मुजे कल फोन करनेको कहा हे.. मे क्या करु..?
लता : (चोंकते धीरेसे) क्या..? धिरेनने तुजे फोन करनेको कहा हे..? लेकीन क्युं..? बडा कमीना हे ये धिरेन.. पता नही पुनोदीदीका क्या होगा.. तुजे उसे फोन करनेकी कोइ जरुरत नही.. तु कल मेरे साथही रहेना फीर मे उसे फोनपे बात कर लुगी.. कमीना कहीका.. दिखनेमेतो कीतना भोला भाला लगता हे.. ठरकी कहीका.. मुजे उनकी नीयत ठीक नही लगती.. अब सोजा.. कल हमे जेठजीके साथ वापस गांव जाना हे.. हम वही बात करेगे.. सोजा..
कहा तो नीलमने राहतकी सांस ली.. ओर वो दुसरी ओर करवट लेकर सोगइ.. लेकीन उनके मनमे धिरेनको लेकर विचारोका घमासान युध्ध चलने लगा.. अब वो लताको कैसे कहेकी धिरेनने उनको कहा कहा हाथ लगाकर छेडाथा.. उनके गलेको गालको ओर उनके होठोको चुमलीया था.. ओर कइ बारतो उनके छोटे छोटे सतंरे जैसे बुब्सकोभी दबा लीया था.. तो दो बारतो उनकी चुतकोभी दबोच लीयाथा.. ओर उनके लंडको भी पकडा दीयाथा.. भलेही तब नीलम सरमाइ.. लेकीन इस खेलमे उनकोभी बहुत मजा आ रहाथा..
तब नीलम धिरेनकी हरकतके बारेमे सोचकर बहुतही सरमाइ ओर मुस्कराने लगी.. जीनकी वजहसे उनकी चुतमे पहेली बार हरकत हुइ.. उनको चुतमे मीठीसी खुजली होने लगी.. ओर उनकी चुत फडफडाने लगी.. आज नीलमको पहेली बार कीसीने इस तराह छेडाथा.. ओर नीलम इसे अपनी जींदगीका पहेला प्यार समजने लगी.. यही सब सोचते उनकी चुत आज फीरसे अेक बार फीर फडफडाने लगी.. क्युकी आज उनके उरप भी रतीजो हावी थी..
तब मंजुके अलावा कीसीको नही पताथाकी नीलमभी उन सबकी जींदगीका अेक महत्वका हिस्सा थी.. ओर नीलमका हाथ अनायसही उनकी नीकरमे होते चुतपे चला गया.. ओर नीलम धीरे धीरे चुतको सहेलाने लगी.. फीर वो चदरके अंदरही हाथसे अपनी चडीको थोडी नीचे करलेती हे.. ओर दोनो हाथोकी उंगलीयोसे अपनी चुतकी पंखडीयोके साथ खेलने लगती हे.. ओर खेलते खेलते आज पहेली बार धीरेसे अेक उंगलीसे अपनी चुतको सहेलाते धीरेसे चुतमे डाल देती हे.. तब वो आंख बंध करते स्वर्गकी सेर करने लगती हे..

तो दुसरी ओर नीलमसे बात करके लताभी काफी गरम हो चुकी थी.. क्युकी वो ओर लखनभी कारमे बहुत कुछ कर चुके थे.. ओर ये सब नीलमभी देख चुकीथी.. ओर उपरसे उसे लखनके वो इसारे याद आने लगे जो लखन उपर सोने जाते वक्त उसे करके गया था.. वो इसारोसे लताको अपने रुममे उपर आनेको केह रहाथा लेकीन लताने नीलमकी वजहसे उसे मना करदीया था.. अब वो मना करते बहुत पछता रही थी.. क्युकी उनकाभी मन लखनको मीलनेके लीये कर रहाथा..
तभी वो मुह घुमाकर अेक बार नीलमकी ओर देखकर चेक करने लगी की नीलम सोगइ की नही.. तब नीलमको दुसरी ओर मुह करते सोते देखकर वो धीरेसे बेडसे उतर गइ.. ओर वो हल्की रोसनी वाली लाइटभी बुजाकर वापस बेडपे आगइ.. ताकी उनकी कोइभी हरकत नीलम देखना सके.. ओर अपने नीकरमे हाथ डालकर लखनको याद करते अपनी चुतको सहेलाने लगी.. तभी उसे दरवाजेपे कुछ हल्की आहट सुनाइ दी.. तो लताने देखा कोइ साया उनके दरवाजेको खोलकर अंदर जांक रहाथा ओर वो देखती रही..
तो वो साया अंधेरेमे उनकी ओर बढता नजर आने लगा तो लता समज गइकी ये लखन हे.. तब वो सरमाती खुस होते गभरा गइ.. ओर जटसे नीलमकी ओर देखने लगीकी नीलम सोगइ हे की नही.. लेकीन नीलमकी ओरसे कोइ हलचल महेसुस नही हुइ.. तबतक तो लखन लताके बगलमे आकर लेट गया.. ओर लताको अपनी बाहोमे भरने लगा.. तब लता नीलमकी ओर देखते गभराते लखनसे छुटनेकी कोसीस करने लगी.. ओर लखनने धीरेसे लताके कानमे कहा..
लखन : (धीरेसे) लता.. चलना बहार चलते हे.. क्या नीलु सोगइ..?
लता : (धीमी दबी आवाजमे) मुजे क्या पता.. आप चले जाओनां.. कही नीलु जाग ना जाये.. प्लीज..
लखन : (धीरेसे दबी आवाजमें) अरे सो गइ लगती हे.. चलना बहार कोइ नही हे.. हम सोफेके पीछे चले जायेगे.. कीसीको मालुम नही होगा.. सोफेकी पीठकी आडमे हमे कोइ नही देखेगा..
लता : (दबी आवाजमे) लखन आप समजते क्यु नही.. तीन चार दिनकी तो बात हे.. थोडा सबर करलोनां.. यहा कीसीको पता चलेगातो मेरे बारेमे क्या सोचेगा..? जानु.. थोडा सबर करलो.. प्लीज..
लखन : (धीरेसे कामुक आवाजमें) वही तो नही होता चलनां.. बस अेक बार.. बहुत मन कर रहा हे.. फीर तु वापस यहा आकर सोजाना.. चलनां..
लता : (सहमती वाले अंदाजमें दबी आवाजमे) लखन.. प्लीज.. देखना कीसीको पता ना चले.. सीर्फ अेक बार करना.. फीर तुमतो मुजे छोडते ही नही हो..
लखन : (खुस होते धीरेसे) अरे हां बाबा अेक ही बार करुगा बस..? चल जल्दी..
कहेते लखनने लताके होंठ चुमलीया ओर बेडसे धीरेसे खडा होगया.. ओर लताका हाथ पकडके खीचने लगा.. तो लतानेभी हाथ छुडानेकी नाकाम कोसीसकी ओर वो खेचतान करती तो नीलमके जाग जानेका डरभी था.. ओर वोभी नीलमकी ओर देखते लखनके पीछे पीछे खीची चलने लगी.. तब उनको पता नही थाकी नीलमभी लखनको आते देख रहीथी ओर उसे पहेचान चुकीथी..
ओर लखनने बहार नीकलतेही धीरेसे लताके रुमका दरवाजा खाली बंध करलीया ओर लताको दबे पांव लेकर सोफेपे चला गया.. दोनोही सटकर बैठ गये.. ओर लखनने लताको अपनी बाहोमे भरलीया दोनोके होंठ मील गये ओर अेक दुसरेके होठोको चुमने लगे.. तभी लखनने लताको वही सोफेपे लीटाते खुद उनके उपर चडके लेट गया ओर लताके होंठ चुमने लगा.. तब लताने सरमाते हसते हुअे कहा..
लता : (सरमाते) आप बहुत नोटी हो.. क्या तीन चार दिन नही ठहेर सकते? आखीर अपनी मनमानी कर ही ली.. देखना कोइ इधर ना आजाये.. जोभी करना हे आप फटाफट करलो.. कही नीलु इधरना आजाये..
लखन : (गालको चुमते) अरे लता भाइतो अपनी सुहागरात मनानेमे बीजी होगे.. वोभी नइ भाभीको चोदते होगे.. ओर मंजु भाभी पुनो दीदीभी सो गइ होगी.. यहा कोइ नही आता.. चलना फटाफट कपडे नीकाल..
लता : (सरमाते हसते) अब आपही इधर लाये होतो आपकोही सब महेनत करनी होगी.. हें..हें..हें..
तब लखन लताके उपरसे उतर गया ओर लताके ओर खुदके कपडे नीकालने लगा ओर थोडीही देरमे दोनो बीलकुल नंगे होगये.. तब लता खुब सरमाइ ओर वो वापस सोफेपे लेट गइ.. तब लखनतो पहेलेसेही गरम था.. ओर वोभी लताके पैरके बीच बैठ गया तभी लताने अपने दोनो पैर थोडे फैला दीये ओर लखन लताकी चुतमे अपना लंड पकडकर सेट करने लगा.. तब लता सरमसे पानी पानी होने लगी..
दोनोही चुदाइके लीये बहार नीकल रहेथे तब अंधेरेकी वजहसे दोनोको नही पताथाकी नीलम चदरके अंदरसे दोनोको बहार जाते देख रही हे.. जब दोनोने खाली दरवाजा बंध करलीया तब नीलम फटाफट अपने बेडसे खडी होगइ ओर दरवाजेके पास चली गइ.. ओर हल्कासा दरवाजा खोलके वो अंदरसे ही बहारकी ओर देखने लगीकी दोनो क्या कर रहे हे.. तब लखन लताके ओर खुदके कपडे नीकाल रहाथा.. ओर नीलम दोनोको नंगा होते देखने लगी.. तब उनकी चुतमे अेक बार फीरसे तेज हलचल होने लगी..
ओर नीलम वही खडी रहेते बहारकी ओर देखते अपनी चुतको नीकरके उपरसेही सहेलाने लगी.. उसे अब इस खेलमे बहुत मजा आने लगाथा.. जब लखन नंगा होगया तब नीलमने आज पहेली बार कीसी मर्दका लंड अपनी आंखोसे देखा.. वो लखनके लंडको अेकनेरसे देखने लगी.. तब उनकी आंखोमेभी वासनाके डोरे मंडराने लगे.. तभी लता ओर लखन दोनोही चुदाइकी तैयारीमे मसगुल थे..
लखन ओर लताको नही पताथाकी सीर्फ नीलमकी दो आंखे नही उसे अेक ओर दो आंखे देख रही थी.. वो थी रजीया.. जो देर रात लखनके रुममे जानेके लीये अपने रुमसे दबे पांव नीकल रही थी.. तब लखन लता ओर नीलमके रुमके आसपास चकर लगा रहाथा.. जो बार बार दरवाजेसे जांकते अंदरकी ओर देख रहाथा तब रजीया वही अपने दरवाजेके पास ही रुक गइ ओर लखनकी हरकते देखती रही..
जब लखन अंदर चला गया तो रजीया छुपकेसे लता वाले दरवाजेके पास आगइ.. ओर वो दरवाजेसे अंदर जाकने लगी.. तब लखन लता बहारकी ओर आने लगे तब वो वहासे जटसे हट गइ.. ओर दोडके कीचनमे चली गइ.. क्युकी कीचनकी सर्वीस विन्डोसे पुरा होल दीख रहाथा.. तब लखन लताको सोफेपे लेगया जो रजीया कीचनसे साफ देख रही थी.. ओर वो वही अंधेरेमे खडी होकर दोनोकी हरकत देखने लगी..
तबतक लताभी अपने सब कपडे नीकालकर सोफेपे लेट चुकीथी ओर लखन उनकी चुतमे अपना लंड घुसानेकी कोसीस कर रहाथा.. तभी इधर नीलमने पहेली बार लताकी कामुक आवाजमे सीसकारीया सुनी.. तो नीलम अपने आपको रोक नही पाइ.. ओर वो दरवाजेसे अपना सर नीकालकर बहार देखने लगी.. तो उसे सोफेपे लता ओर लखन नही दीखाइ दे रहेथे.. तब नीलमकी लखन लताको देखनेकी उत्सुक्ता बढ गइ..
वो धीरेसे दबे पांव बहारकी ओर नीकल गइ.. ओर डरते धीरेसे सोफेकी ओर बढने लगी.. तब रजीयाभी नीलमको अैसे जांकते देखकर चोंक गइ.. तबतक लखन लताकी चुतमे अपना लंड डाल चुकाथा.. ओर वो होले होले कमर हीलाते लताकी चुदाइ कर रहाथा.. तब लताकी आंहे.. ओर सीसकारीया साफ सुनाइ दे रहीथी.. दोनोही चुदाइमे मसगुल होगये.. लता आधी आंख चडाते मदहोसीमे लखनसे चुदवाने लगी..

तब उनको नही पताथाकी नीलम बहार नीकलके चुपकेसे दोनोकी चुदाइ देख रही हे.. ओर उन तीनोको रजीया कीचनसे देख रही हे.. नीलम लताकी कामुक सीसकारीया सुनकर अेकदम गरम होगइ.. ओर नीलमकी चुतभी गीली होने लगी.. आज वो पहेली बार कीसी लडके ओर लडकीको अपनी आंखोसे अपने सामने चुदाइ करते देख रही थी.. तब नीलमको ये सब देखते बरदास्त नही हुआ.. ओर उसने नीकरमे हाथ डालकर अपनी चुतमे उंगली घुसादी.. ओर दोनोकी चुदाइ देखते उंगली होसाने लगी.. जब उनकी बरदास्तसे बहार हो गया तब..
वो जटसे दबे पांव अपने रुममे चली गइ.. ओर सीधी बाथरुममे घुस गइ.. वही अपने नीकरमे हाथ डालके अेक उंगली अपनी चुतमे घुसा देती हे ओर आंधी आंख बंध करते जोरोसे उंगली अंदर बहार करने लगी.. उसे नही पताथाकी हस्तमैथुन कैसे करना हे.. ओर वो थोडीही देरमे कांपने लगी उनके पुरे सरीरमे अेक तेज सुरसुराहट होने लगी जैसे हजारो चीटीया उनकी चुतकी ओर दोड रहीहो.. ओर वो आंधी आंख चडाते जडते हुअे परम आनंदकी अनुभुती करने लगी.. ओर आज नीलमकी जींदगीमे ये सब पहेली बार था..

तब उनकी चुतसे अेक तेज धारका फवारा नीकल गया जो उनके पुरे नीकरको भीगो दीया.. तब नीलम पुरी तराह कांप गइ तभी उनको होंस आयाकी उन्होने क्या कीया.. तब वो खुब सरमाइ.. ओर सरमाते हुअे मुस्कराते अपने नीकरको नीकालने लगी.. फीर चुतको पानीसे साफ करने लगी.. ओर फटाफट अपनी पेन्ट पहेनकर हाथमे नीकर लेकर बहार आगइ ओर नीकरको अपनी बेगमे छुपालीया.. फीर अपने बेडपे जाकर सोगइ.. आज उनकी जींदगीका ये पहेले ओर्गेजम था.. जीसे वो बेहद खुस थी..
तब बहारकी ओर लखन आज लताको बडेही जोरोसे चोद रहाथा.. तो लताभी लखनकी अैसी चुदाइसे खुस होने लगी.. लखनने उनको इतनी देरतक कभी नही चोदाथा.. ओर वो मनही मन खुस होते अपनी कमर उछाल उछालके लखनका साथ देने लगी.. आज लताको लखनसे चुदवाते लखनका अनाडी पन नही लगा.. लखन अब इस चुदाइके मामलेमे काफी अेक्सपर्ट हो गया था..
लखनकी अैसी दमदार चुदाइ देखकर आज लताभी खुस होने लगी.. ओर वो लखनसे अपनी कमर उछाल उछालके चुदवाती रही.. अबतक लताभी बीचमे अेब बार जड चुकी थी फीरभी लखन उसे चोदेही जा रहाथा.. ओर काफी धकापैनी चुदाइके बाद लखन लतासे चीपक गया तो लतानेभी लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर लखन कमरको जटका देते लताकी चुतको भरने लगा..

जब दोनो जड गये तब लता लखनकी पीठको सहेलाती रही.. तब दोनोही पसीनेसे तरबोर हो चुके थे.. ओर लखन लताके उपरसे हट गया.. तब लता सोफेपे बेठकर अपने नीकरसे अपनी चुतको साफ करने लगी.. फीर खडी होकर अपने कपडे पहेनने लगी.. जैसेही कपडे पहेनके चली.. उनके पेर डगमगाने लगे.. ओर लताने सोफेको पकडलीया.. ओर वो लखनकी ओर आस्चर्यसे देखती रही.. क्युकी उनकी इतनी जबरदस्त चुदाइ आज तक नही हुइ थी..
लता : (धीरेसे) जानु.. आपनेतो मेरी हालत खराब करदी.. अब मे अंदर कैसे जाउगी..? क्या कोइ गोली बोली खाकरतो नही आयेथे..?
लखन : (हसते) क्यु..? मेने तो कुछभी नही खाया अैसा क्यु पुछ रही हो..
लता : (सरमाते हसते धीरेसे) लखन आपने इतनी देरतक तो मुजे कभी नही चौदा.. इसीलीये पुछ रहीथी..
तभी लखन अपनी मर्दांगीपे गर्व करते लताको अपनी गोदमे उठा लेता हे ओर धीरेसे दरवाजा खोलकर लताको अपने बेडकी ओर लेजाता हे.. तब नीलम आंख खोलके दोनोको रजाइमेसे देखती रही.. ओर लखन लताको धीरेसे बेडपे सुलाके उनके होंठ चुमने लगता हे तो लतानेभी लखनको अेक बार जोरोसे अपनी बाहोमे भरलीया.. ओर दोनोने कीस करली.. तब लखन लताके उपर चदर डालके बहार नीकल गया ओर दरवाजा बंध करके उपर अपने रुममे चला गया.. देखातो उनके बेडपे रजीया नंगी होकर लेटी हुइ थी....
कन्टीन्यु
अध्याय - ९७
अभी तब रमा तीनसे चार बार जड चुकीथी.. तो उनकी चुतमेभी जलन महेसुस होने लगी.. तकरीबन २५ मीनीटकी धका पैनी जबरदस्त चुदाइके बाद भानुके लंडने भी जवाब देना मुनासीब समजा.. ओर भानु रमाकी चुतमे जडतक लंड घुसाके जडने लगता हे.. तब रमाभी भानुको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलेती हे.. तभी जडतेही भानु रमाके सीनेपे सर रखते ढेर हो गया.. ओर रमा उनकी पीठ सहेलाते भानुसे नजरे चुराने लगी.. ओर उसने राहतकी सांस ली.. तबतक भावना भी नींदकी आगोसमे चली गइथी....अब आगे
आज देवायतकी हवेलीमे काम ओर रती स्यंम अपनी मौजुदगीका अहेसास करवा रहे थे.. तो जाहीरसी बात हे आज पुरे गांवमे ओर आजु बाजु सब जगाहपे अपनी काम वासनाका असर दीखाता.. पुरे गांवमे कामोतेजनाकी लहेर छागइ.. जीतनेभी जवान ओर आधेड थे.. यहा तक सभी बुढेके तनमे भी हलचल तेज होगइ थी..
सबके तनमे अेक अलगही नसा छाने लगा.. सभी लोग वासनाकी आगमे जलते संमुदरमे डुबकीया लगाने लगे.. तभी नीचेकी ओर दया ओर रजीयाभी आपसमे नंगी होकर लेस्बीयनका खेल खेल रहीथी.. दोनोही सीक्स नाइन पोजीसनमे अेक दुसरेकी चुतको चाट रही थी..

आज पुरे गांवमे वासना इस कदर हावी हो रहीथी.. जैसे पुरे गांवमे कीसीने जादु करदीया हो.. कीसीको कुछ पताही नही थाकी ये सब क्यु हो रहा हे.. ज्यादातर गांव वालोका आपसमे ही कीसीना कीसीके साथ अफेयर चल रहाथा.. कोइ अपनी विधवा बुआके साथ.. तो कोइ अपनी भाभीके साथ.. तो कोइ अपनी चाचीको सेट करते चोदता था.. तो कोइ अपनी कामुक बडी अम्माको सेट करके चोद लेता..
ज्यादातर जवान लडकीया बदनामीके डरसे अपनेही घरमे आपसी रीस्तोमे यानी अपने सगे भाइके साथ अगर सगा भाइ नही होता तो चाचाका लडका या बुआके यातो मामाका या बडे ताउके लडकेके साथ अफेयर करके अपने तनकी प्यास बुजाती थी.. ताकी बहार वालोको उनपे सकभी ना पडे ओर अपने यारको घरमे ही बीन्दास्त मील सके.. ओर लडकेभी कीसी बहारकी लडकीके बजाये अपनी बहेनको सेट करते उनसे प्यारके खेलमे लगे रहेते थे..
अेक घरमे तो लडका सहेरमे नोकरी करताथा तो महीनो तक नही आताथा.. ओर आताभी तो महीनेमे सीर्फ अेक बार.. तो उनकी बीवीका अपने ससुरसेही अफैर होगया था.. जो आये दिन उनसेही अपनी प्यास बुजालेती थी.. तो कोइ विधवा अपने देवरसे या भतीजेसे तो कोइ अपने भांजेको सेट करके उनसे चुदवाकर अपनी प्यास बुजाती.. ज्यादातर घरमे कीसीना कीसीके साथ अफेयर चल रहाथा.. ओर इस बारेके कीसीको भनकभी नही थी की.. गांवमेभी अैसा हो सकता हे..





ओर ज्यादातर कुआरे लडके अपनी सगी बहेन यातो रीस्तेकी कजीन बहेनको सेट करते उनसे अपने तनकी आग बुजा लेतेथे.. जो आये दीन मौका मीलतेही उसे चोद लेते थे.. लेकीन आज सबके रीस्ते खुलकर उजागर होनेकी कगारपे आगये.. आज सबपे काम ओर रतीकी मौजुदगीका अहेसास होने लगाथा.. सबपे काम हावी होने लगा.. सब पागल जैसे होने लगे.. ओर अपने साथीके साथ मीलन करनेको तडपने लगे..




आज काम पुरी तराह सबपे हावी होने लगा तो कोइ अपनी बुआके रुममे चला गया तो कोइ अपनी भाभीको स्टोरेजके रुममे लेजाकर चोदने लगा.. तो कीसीने अपनी चाचीको अपनेही रुममे बुला लीया तो बहुने ससुरको इसारा करके बाथरुममेही बुला लीया ओर वो दोनो वहा खडे खडे चुदाइ करने लगे.. तो अेक लडकेने तो अपनी अम्माको देर रात कीचनमे पानी पीने आइ तबही दबोच लीया.. ओर पीछेसे लंड घुसाके उसे कीचनमेही चोदने लगा..
ओर मजेकी बात आज कोइ ओरत हो या लडकी कीसीको मना नही कर रही थी.. क्युकी आज सबके दिमागमे काम ओर रती हावी थे.. लडके या मर्द कीसीको चोदनेके लीये तडप रहेथे तो लडकीया ओर ओरते अपनी चुतमे अपने यारका लंड लेनेको तडप रहीथी.. ओर जीनके सेप्रेट रुम थे वो अपनी बहेनको वही बुलाकर चोदने लगे.. तो कइ लडके घरोकी छतमे टंकीके पीछे अपनी बहेनको बुलाकर चोदने लगा..
कीसीको कुछ पता नही थाकी आज सब क्या हो रहा हे.. सबके दिमागमे आज वासना हावी होकर तांडव मचा रहीथी.. आज पता चला की गांवमेभी अैसे कइ रीस्ते पनप रहे हे.. आज बाबाने कही हुइ भवीस्य वाणी सचमे साबीत होते दीख रही थी.. जो कुछही महीनोमे सबके रीस्ते सार्वजीक रुपसे उजागहर होनेकी कगारपे थे.. तब पता नही पुरे गांवमे कैसा तांडव मचेगा..
तभी रश्मी ओर चंपाभी अपनी चुतमे जोरोसे उंगली करते अपने आपको सांत करती रही.. तो आज गांवके डो. सुधीरभी अपनी बीवी नीशाको चोद रहाथा.. तब नीशाभी खुस होकर सुधीरसे चुदवाने लगी.. क्युकी सुधीर उनकी गलत आदतोकी वजहसे नीशाको बहुतही कम फीजीकल होताथा.. जीनकी वजहसे नीशाभी देवायतकी ओर ढलने लगी थी.. ओर जब आज उसे सुधीर चोद रहाथा तब नीशा सुधीरकी जगाह देवायतको इमेजींग करते चुदवा रहीथी..
ओर कुछही देरमे सुधीरके लंडने जवाब देदीया.. ओर नीशा सुधीरको मनही मन गालीया देने लगी.. ओर वही बेठकर अपनी चुतमे उगली करने लगी.. क्युकी नीशा बहुतही खुबसुरत ओर अेकदम गोरी पतली लडकीथी.. उनके लंबे बाल उनके घुटने तक लहेराते थे.. जीनकी वजहसे वो बहुतही खुबसुरत ओर आकर्सक दीख रहीथी.. जो नीशाके माबापने नीशाकी सादी सीर्फ सुधीरको डोक्टर होनेकी वजहसे करदी थी..
लेकीन नीशा इतनी खुबसुरतथी की सुधीर नीशाको देखतेही जड जाता था.. ओर नीशाको हमेसाकी तराह प्यासी रख देता था.. ओर इसी बातपे दोनोके बीच अक्सर काना सुनी होजाती.. तब नीशाको उंगलीसे अपने आपको सांत करना पडता था.. सुधीरका लंड बहुतही छोटा ओर पतलाथा.. नीशाने सुधीरको कइ बार अपना इलाज करवानेको कहा लेकीन सुधीर हर बार उनकी बातको बहेस करके टाल देता.. क्युकी उनका असली रीजन सीर्फ वोही जानता था.. वो देवायतके साथ कोलेजमे पढताथा तबसे ही वो गांडु था..
तब ना चाहते हुअेभी नीशा देवायतसे आकर्सीत होकर उनकी ओर ढलने लगी थी.. देवायत जबभी सुधीरको मीलने आता नीशा बस उनकोही देखती रहेती.. ओर उनसे बाते करनेकी कोसीस करती.. ओर मौका मीलतेही देवायतको कामुक इसारा भी करती.. इस बातको देवायतभी भली भांती जान चुकाथा.. की सुधीर नीशाको खुस नही रख पाता.. ओर देवायतभी उनका रीजन जानता था..
तो दुसरी ओर रमेशभी अपनी बीवी चारुकी जबरदस्त चुदाइ कर रहाथा.. लेकीन वो ज्यादा देर टीक नही पाया.. ओर चारुकी चुतमे जल्दी खलास होकर उनके उपरसे उतर गया.. ओर चारुकी गालीया सुनकर सो गया.. तब चारु नंगीही उठकर फटाफट वंदनाके रुममे चली गइ तो वंदनाभी चदरके अंदर उंगली कर रहीथी.. ओर चारुने देख लीया.. तो वोभी दरवाजा बंध करके हसते हुअे नंगीही उनके साथ सोते वंदनाकी चदरमे घुस गइ..
चारु : (हसते) वंदु अकेली अकेली क्या कर रही हे..? तु कीसीको सेट करके सादी करले.. कब तक अैसे उंगलीसे काम चलायेगी.. हें..हें..हें..
वंदना : (सरमाते हसते धीरेसे) मम्मी क्या हुआ..? क्या.. आजभी पापाने फीर आपको अधुरी छोड दीया..? मोम आपनेभी सादी करके क्या तीर मारलीया.. इनसेतो अच्छी मेरी उंगली हे.. हें..हें..हें..
चारु : (जुठा गुसा करते वंदनाको बाहोमे भरते) तु उस कमीनेका नाम ही मत ले.. अगर अैसा पती तुजे मीला होतातो तुजे पता चलता.. चल छोड ये सब बाते.. पहेले मुजे अेक बार ठंडी करदे.. फीर मे तुजे कर दुगी.. तेरे पापाने आजभी मुजे अधुरी छोड दीया.. पता नही तु मर्दके बीना कैसे रेह लेती हे.. मेतो अेक दिनभी लंडके बीना ना रहु.. ओर आज पता नही कैसी आग लगी हुइ हे.. क्या तुजे अेकबारभी इच्छा नही होतीकी कीसी मर्दका लंड अपनी चुतमे लेलु..?
वंदना : (चारुकी चुत सहेलाते) मम्मी तु फीर सुरु होगइ..? तु हे ना.. हम दोनो मां बेटी अेक दुसरेका अैसेही खयालतो रखती हे.. तो फीर मुजे मर्दकी क्या जरुरत हे.. ओर तुमने भी मर्दसे सादी करली हे.. क्या हुआ..?
चारु : (होंठ चुमते) बेटी.. अभी तक तुमने मर्दका स्वाद चखा नही हे इसीलीये तु अैसे बोल रही हे.. बस अेक बार कीसी असली मर्द से पाला पड जायेगा तब तु उनके बीना रहे नही पायेगी.. मेरी मान तु देवायतको पकडले.. वोतो राजा हे वोतो कीतनी भी सादीया कर सकते हे.. मुजे पुरा यकीन हे वो तुजे अपना लेगा.. ओर तुजे बहोत खुस रखेगा.. बस अेक बार उनसे प्रपोज करते तो देख..
वंदना : (सरमाते मुस्कुराते) मम्मी तुम फीर सुरु होगइ..? अरे बाबा उनकी सादी होगइ हे.. अब मुमकीन नही हे.. अगर तेरी बात मान भी लु तो क्या मंजुभाभी पुनो सब क्या सोचेगी..? ओर उसने मुजे युस करके सादी करनेसे मना करदीया तो..? तेरी ओर पापाकीही बदनामी होगी..
चारु : (कीस करते) बेटी जहा तक मे उसे जानती हु वो अैसा नही हे.. वो अेक रोयल फेमीली हे.. वो तुजे खुस रखेगा.. वैसेभी इन तेरे पापा जैसे नामर्दसे तो अच्छा उनकी रखैल बनके रहे.. अगर तुजेभी मेरे जैसा पती मील गया तो हम दोनोकी जींदगी नर्क बन जायेगी.. इनसेतो अच्छा हे तु उनकी बीवी होजा.. अेक बार बात करके तो देख.. वरना मुजे मौका मीलातो मे बात करलुगी..

वंदना : (चारुकी चुत सहेलाते उनके मनको टटोलने लगी) मम्मी.. अेक बार फीर सोचले.., अगर मे इस बारेमे आगे बढु.. तो क्या तुम सहेन कर पाओगी..? ओर मेरा साथ दोगी..? अगर उसने मुजे प्रेगनेन्ट करदीयातो पहेले तुमही मुजे घरसे नीकाल दोगी.. हम दुनीया वालोको क्या मुह दीखायेगे.. हमारी बहुत बदनामी होगी.. ओर वो पापाके खास दोस्तभी हे..
चारु : (सीरीयस होते) नही बेटी.. तुमने मेरे बारेमे अैसा सोचभी केसे लीयाकी मे तेरा साथ नही दुगी..? वंदु अगर तुम सचमे उनके साथ जींदगी बीताना चाहती हे.. तो मे तुम्हारे साथ हु.. बस अेक बार उनसे सादी करले.. फीर तु उनके साथ हवेलीपे रहे या फीर यही हमारे घरमे.. हमे कोइ फर्क नही पडता..
वैसेभी तु हमारी अैकलोती बेटी हे.. हमारे बाद तुजेही तो ये सब सम्हालना हे.. अबतो तेरी नोकरीभी लग जायेगी.. तो वोभी हमे चीन्ता नही हे की तु अकेली कैसे तेरा गुजारा करेगी.. बेटा.. मे हंमेसा तेरे साथ हु.. ओर तेरा साथ देती रहुगी.. ओर रही बात तेरे पापाकी तो उनकोतो मे समजा दुगी.. वो कुछ नही कहेगे..
वंदना : (खुसीसे जोरोसे बाहोमे भीचते) ओह.. मम्मी आइ लव यु, मुजे पुरा यकीन थाकी तुम मेरा साथ जरुर दोगी, मम्मी इस बारेमे हम कल अकेले होगे तब बात करेगे, मुजे आपसे इस बारेमे कुछ बात करनी हे..
चारु : (हसते होंठ चुमते) अच्छा..? ठीक हे बेटा.. मुजे लगता हे इस बारेमे तुम कुछ आगे बढी हो.. हें..हें.. कोइ बात नही.. मे खुस हु.. बस तुम खुस रहेनी चाहीये.. मुजे तुम दोनोके रीस्तेसे कोइ अेतराज नही..
दोनोही मां बेटी अैसेही बाते करते गरम होने लगी ओर थोडी ही देरमे दोनो सीक्सनाइन पोजीसनमे अेक दुसरेकी चुतको चाटने लगी.. तब अचानक वंदना बेडसे उतर गइ ओर अलमारीसे बेल्ट वाला डील्डो नीकाल लीया ओर अपनी कमरपे बांधते चारुके उपर चड गइ ओर रबरका डील्डो चारुकी चुतमे घुसा दीया ओर अपनी मम्मीको अेक मर्दके भांती जोरोसे चोदने लगी.. तब चारु सातवे आसमानपे पहोंच गइ..

जब चारु जड गइ तब उनकी बेटी वंदनाके उपर चड गइ ओर वंदनाके होंठ चुमते अेक उंगली वंदनाकी चुतमे डालकर वंदनाको जडाके सांत करदीया.. फीर दोनो अेक दुसरेको चीपकके सोगइ.. दोनो अक्सर अेक दुसरेको अैसेही सांत करतीथी.. जब चारु बोम्बे गइथी तब वो वहासे अेक रबरका बेल्ट वाला डील्डो लेकर आयी थी.. लेकीन वंदना उसे इस्तेमाल नही करती ताकी वो अपनी वर्जीनीटी बेकरार रख सके.. क्युकी दिलके अेक कोनेमे उसे देवायतको मीलनेकी उमीद आज भी जींदा थी..
जो पुनमके साथ बातोसे उनकी उमीदभी बहुत जल्द पुरी होने वाली थी.. इसीलीयेतो आज उसने मौका मीलतेही चारुको कल अपने दिलकी बात बतानेको केह दीया.. जब पुरे गांवमे वासनाका खेल हो रहाथा.. तब लता ओर लखनभी कैसे दुर रेह सकते थे.... सब सोने चले गये तब लता ओर नीलम दोनोभी अेक बडे बेडपे सोनेकी तैयारीया कर रही थी.. दोनोने अपने नाइडके कपडे पहेन लीये.. तब नीलम ओर लता अेक दुसरेकी ओर मुह करते सोनेकी तैयारीया करने लगी.. तभी मौका मीलतेही लताने नीलमको कहा..
लता : (धीरेसे डांटते) नीलु.. ये सब क्या हे..? मेने देखा हे तुम ओर धिरेन कारमे बहुत कुछ मस्तीया कर रहे थे.. मे तुमसे केह देती हु.. तुम उस धिरेनसे दुर रहेना.. दोनो गाडीमे क्या हरकत कर रहेथे मुजे सब पता हे.. वो तेरे पीछे क्यु पडा हे..? तुने उनको कुछ कहा हे क्या..? देखना अभी उनकी सादी होने वाली हे..
नीलम : (सुनकर गभराते गांड फटने लगी तब धीरेसे) नही.. नही.. दीदी.. वो.. वो.. सीर्फ मेरी मस्ती कर रहे थे.. मैने उनको बहुत मना कीया.. लेकीन वो मानते ही नही थे.. उसमे मेरी कोइ गलती नही हे..
लता : (धीरेसे) नीलु.. मुजे पता हे.. मेने सब देखलीया हे.. वो तुने कहा कहा हाथ लगातेथे.. सच बताना.. तुजे मेरी कसम हे.. उसने तेरे बुब्सकोभी दबाया हेनां..? ओर वहा.. तेरे नीचेभी हाथ डाला थानां..?
नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. वो.. वो.. आप ओर जीजु मस्ती करते प्यार कर रहेथेनां..? तो धिरेन जीजुने मुजे देखनेके लीये कहा.. ओर मे देखकर बहेक गइ.. तभी वो भी मेरे साथ ये सब करने लगे.. इसमे मेरी कोइ गलती नही हे.. मेने उनको बहुत मना कीया.. उनको बहुत रोकनेकी कोसीस की.. लेकीन वो नही माने.. मेरी अेकभी नही सुनते थे..
लता : (थोडी सांत होते) देख नीलु.. मेरी ओर तेरे लखनजीजु की तो सादी होने वाली हे.. वो मेरे मंगेतर हे.. अब तीन चार दीनमे ही धिरेनकी पुनो दीदीके साथ सादी होने वाली हे.. तुम उनसे दुर रहेना.. ओर वो बुलाये तोभी उनके पास अकेली मत जाना.. मुजे या पुनो दीदीको साथ रखके जाना.. मुजे उनकी नीयत ठीक नही लगती.. ओर वैसेभी इन सब चीजोके लीये तु अभी बहुत छोटी हे.. तेरी उमरही क्या हे..? कीतने साल हुअे तुजे..?
नीलम : (सरमाते धीरेसे हसते) दीदी.. वो.. १७ वा साल चल रहा हे.. आपकी सादीके अेक महीनेके बाद अठारवा लगेगा..
लता : (हसते धीरेसे) हंम.. मतलब तुजपे नइ नइ जवानी चड रही हे.. नीलु तुजे इस उमरमे ही अपने आपको सम्हालना हे.. तुजे बहुत खयाल रखना पडेगा.. वरना तेरे कदम कही बहेक गयेतो भाभी भैया.. हम सब कही मुह दीखाने लायक नही रहेगे.. तु अपने आपको सम्हालना.. ओर वहा सहेरमेभी तुजे बहुत सम्हालना हे.. बस अेक बार अच्छेसे पढाइ करले.. फीर मे जेठजीको कहेके तेरे लीये कोइ अच्छा पढा लीखा लडका ढुंढुगी.. ओर उनसे तेरी सादी करवाउगी.. समजी.. इन सब चीजोके लीये अभी तेरी उमर नही हे..
नीलम : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. वो.. वो.. धिरेन जीजुने मुजे कल फोन करनेको कहा हे.. मे क्या करु..?
लता : (चोंकते धीरेसे) क्या..? धिरेनने तुजे फोन करनेको कहा हे..? लेकीन क्युं..? बडा कमीना हे ये धिरेन.. पता नही पुनोदीदीका क्या होगा.. तुजे उसे फोन करनेकी कोइ जरुरत नही.. तु कल मेरे साथही रहेना फीर मे उसे फोनपे बात कर लुगी.. कमीना कहीका.. दिखनेमेतो कीतना भोला भाला लगता हे.. ठरकी कहीका.. मुजे उनकी नीयत ठीक नही लगती.. अब सोजा.. कल हमे जेठजीके साथ वापस गांव जाना हे.. हम वही बात करेगे.. सोजा..
कहा तो नीलमने राहतकी सांस ली.. ओर वो दुसरी ओर करवट लेकर सोगइ.. लेकीन उनके मनमे धिरेनको लेकर विचारोका घमासान युध्ध चलने लगा.. अब वो लताको कैसे कहेकी धिरेनने उनको कहा कहा हाथ लगाकर छेडाथा.. उनके गलेको गालको ओर उनके होठोको चुमलीया था.. ओर कइ बारतो उनके छोटे छोटे सतंरे जैसे बुब्सकोभी दबा लीया था.. तो दो बारतो उनकी चुतकोभी दबोच लीयाथा.. ओर उनके लंडको भी पकडा दीयाथा.. भलेही तब नीलम सरमाइ.. लेकीन इस खेलमे उनकोभी बहुत मजा आ रहाथा..
तब नीलम धिरेनकी हरकतके बारेमे सोचकर बहुतही सरमाइ ओर मुस्कराने लगी.. जीनकी वजहसे उनकी चुतमे पहेली बार हरकत हुइ.. उनको चुतमे मीठीसी खुजली होने लगी.. ओर उनकी चुत फडफडाने लगी.. आज नीलमको पहेली बार कीसीने इस तराह छेडाथा.. ओर नीलम इसे अपनी जींदगीका पहेला प्यार समजने लगी.. यही सब सोचते उनकी चुत आज फीरसे अेक बार फीर फडफडाने लगी.. क्युकी आज उनके उरप भी रतीजो हावी थी..
तब मंजुके अलावा कीसीको नही पताथाकी नीलमभी उन सबकी जींदगीका अेक महत्वका हिस्सा थी.. ओर नीलमका हाथ अनायसही उनकी नीकरमे होते चुतपे चला गया.. ओर नीलम धीरे धीरे चुतको सहेलाने लगी.. फीर वो चदरके अंदरही हाथसे अपनी चडीको थोडी नीचे करलेती हे.. ओर दोनो हाथोकी उंगलीयोसे अपनी चुतकी पंखडीयोके साथ खेलने लगती हे.. ओर खेलते खेलते आज पहेली बार धीरेसे अेक उंगलीसे अपनी चुतको सहेलाते धीरेसे चुतमे डाल देती हे.. तब वो आंख बंध करते स्वर्गकी सेर करने लगती हे..

तो दुसरी ओर नीलमसे बात करके लताभी काफी गरम हो चुकी थी.. क्युकी वो ओर लखनभी कारमे बहुत कुछ कर चुके थे.. ओर ये सब नीलमभी देख चुकीथी.. ओर उपरसे उसे लखनके वो इसारे याद आने लगे जो लखन उपर सोने जाते वक्त उसे करके गया था.. वो इसारोसे लताको अपने रुममे उपर आनेको केह रहाथा लेकीन लताने नीलमकी वजहसे उसे मना करदीया था.. अब वो मना करते बहुत पछता रही थी.. क्युकी उनकाभी मन लखनको मीलनेके लीये कर रहाथा..
तभी वो मुह घुमाकर अेक बार नीलमकी ओर देखकर चेक करने लगी की नीलम सोगइ की नही.. तब नीलमको दुसरी ओर मुह करते सोते देखकर वो धीरेसे बेडसे उतर गइ.. ओर वो हल्की रोसनी वाली लाइटभी बुजाकर वापस बेडपे आगइ.. ताकी उनकी कोइभी हरकत नीलम देखना सके.. ओर अपने नीकरमे हाथ डालकर लखनको याद करते अपनी चुतको सहेलाने लगी.. तभी उसे दरवाजेपे कुछ हल्की आहट सुनाइ दी.. तो लताने देखा कोइ साया उनके दरवाजेको खोलकर अंदर जांक रहाथा ओर वो देखती रही..
तो वो साया अंधेरेमे उनकी ओर बढता नजर आने लगा तो लता समज गइकी ये लखन हे.. तब वो सरमाती खुस होते गभरा गइ.. ओर जटसे नीलमकी ओर देखने लगीकी नीलम सोगइ हे की नही.. लेकीन नीलमकी ओरसे कोइ हलचल महेसुस नही हुइ.. तबतक तो लखन लताके बगलमे आकर लेट गया.. ओर लताको अपनी बाहोमे भरने लगा.. तब लता नीलमकी ओर देखते गभराते लखनसे छुटनेकी कोसीस करने लगी.. ओर लखनने धीरेसे लताके कानमे कहा..
लखन : (धीरेसे) लता.. चलना बहार चलते हे.. क्या नीलु सोगइ..?
लता : (धीमी दबी आवाजमे) मुजे क्या पता.. आप चले जाओनां.. कही नीलु जाग ना जाये.. प्लीज..
लखन : (धीरेसे दबी आवाजमें) अरे सो गइ लगती हे.. चलना बहार कोइ नही हे.. हम सोफेके पीछे चले जायेगे.. कीसीको मालुम नही होगा.. सोफेकी पीठकी आडमे हमे कोइ नही देखेगा..
लता : (दबी आवाजमे) लखन आप समजते क्यु नही.. तीन चार दिनकी तो बात हे.. थोडा सबर करलोनां.. यहा कीसीको पता चलेगातो मेरे बारेमे क्या सोचेगा..? जानु.. थोडा सबर करलो.. प्लीज..
लखन : (धीरेसे कामुक आवाजमें) वही तो नही होता चलनां.. बस अेक बार.. बहुत मन कर रहा हे.. फीर तु वापस यहा आकर सोजाना.. चलनां..
लता : (सहमती वाले अंदाजमें दबी आवाजमे) लखन.. प्लीज.. देखना कीसीको पता ना चले.. सीर्फ अेक बार करना.. फीर तुमतो मुजे छोडते ही नही हो..
लखन : (खुस होते धीरेसे) अरे हां बाबा अेक ही बार करुगा बस..? चल जल्दी..
कहेते लखनने लताके होंठ चुमलीया ओर बेडसे धीरेसे खडा होगया.. ओर लताका हाथ पकडके खीचने लगा.. तो लतानेभी हाथ छुडानेकी नाकाम कोसीसकी ओर वो खेचतान करती तो नीलमके जाग जानेका डरभी था.. ओर वोभी नीलमकी ओर देखते लखनके पीछे पीछे खीची चलने लगी.. तब उनको पता नही थाकी नीलमभी लखनको आते देख रहीथी ओर उसे पहेचान चुकीथी..
ओर लखनने बहार नीकलतेही धीरेसे लताके रुमका दरवाजा खाली बंध करलीया ओर लताको दबे पांव लेकर सोफेपे चला गया.. दोनोही सटकर बैठ गये.. ओर लखनने लताको अपनी बाहोमे भरलीया दोनोके होंठ मील गये ओर अेक दुसरेके होठोको चुमने लगे.. तभी लखनने लताको वही सोफेपे लीटाते खुद उनके उपर चडके लेट गया ओर लताके होंठ चुमने लगा.. तब लताने सरमाते हसते हुअे कहा..
लता : (सरमाते) आप बहुत नोटी हो.. क्या तीन चार दिन नही ठहेर सकते? आखीर अपनी मनमानी कर ही ली.. देखना कोइ इधर ना आजाये.. जोभी करना हे आप फटाफट करलो.. कही नीलु इधरना आजाये..
लखन : (गालको चुमते) अरे लता भाइतो अपनी सुहागरात मनानेमे बीजी होगे.. वोभी नइ भाभीको चोदते होगे.. ओर मंजु भाभी पुनो दीदीभी सो गइ होगी.. यहा कोइ नही आता.. चलना फटाफट कपडे नीकाल..
लता : (सरमाते हसते) अब आपही इधर लाये होतो आपकोही सब महेनत करनी होगी.. हें..हें..हें..
तब लखन लताके उपरसे उतर गया ओर लताके ओर खुदके कपडे नीकालने लगा ओर थोडीही देरमे दोनो बीलकुल नंगे होगये.. तब लता खुब सरमाइ ओर वो वापस सोफेपे लेट गइ.. तब लखनतो पहेलेसेही गरम था.. ओर वोभी लताके पैरके बीच बैठ गया तभी लताने अपने दोनो पैर थोडे फैला दीये ओर लखन लताकी चुतमे अपना लंड पकडकर सेट करने लगा.. तब लता सरमसे पानी पानी होने लगी..
दोनोही चुदाइके लीये बहार नीकल रहेथे तब अंधेरेकी वजहसे दोनोको नही पताथाकी नीलम चदरके अंदरसे दोनोको बहार जाते देख रही हे.. जब दोनोने खाली दरवाजा बंध करलीया तब नीलम फटाफट अपने बेडसे खडी होगइ ओर दरवाजेके पास चली गइ.. ओर हल्कासा दरवाजा खोलके वो अंदरसे ही बहारकी ओर देखने लगीकी दोनो क्या कर रहे हे.. तब लखन लताके ओर खुदके कपडे नीकाल रहाथा.. ओर नीलम दोनोको नंगा होते देखने लगी.. तब उनकी चुतमे अेक बार फीरसे तेज हलचल होने लगी..
ओर नीलम वही खडी रहेते बहारकी ओर देखते अपनी चुतको नीकरके उपरसेही सहेलाने लगी.. उसे अब इस खेलमे बहुत मजा आने लगाथा.. जब लखन नंगा होगया तब नीलमने आज पहेली बार कीसी मर्दका लंड अपनी आंखोसे देखा.. वो लखनके लंडको अेकनेरसे देखने लगी.. तब उनकी आंखोमेभी वासनाके डोरे मंडराने लगे.. तभी लता ओर लखन दोनोही चुदाइकी तैयारीमे मसगुल थे..
लखन ओर लताको नही पताथाकी सीर्फ नीलमकी दो आंखे नही उसे अेक ओर दो आंखे देख रही थी.. वो थी रजीया.. जो देर रात लखनके रुममे जानेके लीये अपने रुमसे दबे पांव नीकल रही थी.. तब लखन लता ओर नीलमके रुमके आसपास चकर लगा रहाथा.. जो बार बार दरवाजेसे जांकते अंदरकी ओर देख रहाथा तब रजीया वही अपने दरवाजेके पास ही रुक गइ ओर लखनकी हरकते देखती रही..
जब लखन अंदर चला गया तो रजीया छुपकेसे लता वाले दरवाजेके पास आगइ.. ओर वो दरवाजेसे अंदर जाकने लगी.. तब लखन लता बहारकी ओर आने लगे तब वो वहासे जटसे हट गइ.. ओर दोडके कीचनमे चली गइ.. क्युकी कीचनकी सर्वीस विन्डोसे पुरा होल दीख रहाथा.. तब लखन लताको सोफेपे लेगया जो रजीया कीचनसे साफ देख रही थी.. ओर वो वही अंधेरेमे खडी होकर दोनोकी हरकत देखने लगी..
तबतक लताभी अपने सब कपडे नीकालकर सोफेपे लेट चुकीथी ओर लखन उनकी चुतमे अपना लंड घुसानेकी कोसीस कर रहाथा.. तभी इधर नीलमने पहेली बार लताकी कामुक आवाजमे सीसकारीया सुनी.. तो नीलम अपने आपको रोक नही पाइ.. ओर वो दरवाजेसे अपना सर नीकालकर बहार देखने लगी.. तो उसे सोफेपे लता ओर लखन नही दीखाइ दे रहेथे.. तब नीलमकी लखन लताको देखनेकी उत्सुक्ता बढ गइ..
वो धीरेसे दबे पांव बहारकी ओर नीकल गइ.. ओर डरते धीरेसे सोफेकी ओर बढने लगी.. तब रजीयाभी नीलमको अैसे जांकते देखकर चोंक गइ.. तबतक लखन लताकी चुतमे अपना लंड डाल चुकाथा.. ओर वो होले होले कमर हीलाते लताकी चुदाइ कर रहाथा.. तब लताकी आंहे.. ओर सीसकारीया साफ सुनाइ दे रहीथी.. दोनोही चुदाइमे मसगुल होगये.. लता आधी आंख चडाते मदहोसीमे लखनसे चुदवाने लगी..

तब उनको नही पताथाकी नीलम बहार नीकलके चुपकेसे दोनोकी चुदाइ देख रही हे.. ओर उन तीनोको रजीया कीचनसे देख रही हे.. नीलम लताकी कामुक सीसकारीया सुनकर अेकदम गरम होगइ.. ओर नीलमकी चुतभी गीली होने लगी.. आज वो पहेली बार कीसी लडके ओर लडकीको अपनी आंखोसे अपने सामने चुदाइ करते देख रही थी.. तब नीलमको ये सब देखते बरदास्त नही हुआ.. ओर उसने नीकरमे हाथ डालकर अपनी चुतमे उंगली घुसादी.. ओर दोनोकी चुदाइ देखते उंगली होसाने लगी.. जब उनकी बरदास्तसे बहार हो गया तब..
वो जटसे दबे पांव अपने रुममे चली गइ.. ओर सीधी बाथरुममे घुस गइ.. वही अपने नीकरमे हाथ डालके अेक उंगली अपनी चुतमे घुसा देती हे ओर आंधी आंख बंध करते जोरोसे उंगली अंदर बहार करने लगी.. उसे नही पताथाकी हस्तमैथुन कैसे करना हे.. ओर वो थोडीही देरमे कांपने लगी उनके पुरे सरीरमे अेक तेज सुरसुराहट होने लगी जैसे हजारो चीटीया उनकी चुतकी ओर दोड रहीहो.. ओर वो आंधी आंख चडाते जडते हुअे परम आनंदकी अनुभुती करने लगी.. ओर आज नीलमकी जींदगीमे ये सब पहेली बार था..

तब उनकी चुतसे अेक तेज धारका फवारा नीकल गया जो उनके पुरे नीकरको भीगो दीया.. तब नीलम पुरी तराह कांप गइ तभी उनको होंस आयाकी उन्होने क्या कीया.. तब वो खुब सरमाइ.. ओर सरमाते हुअे मुस्कराते अपने नीकरको नीकालने लगी.. फीर चुतको पानीसे साफ करने लगी.. ओर फटाफट अपनी पेन्ट पहेनकर हाथमे नीकर लेकर बहार आगइ ओर नीकरको अपनी बेगमे छुपालीया.. फीर अपने बेडपे जाकर सोगइ.. आज उनकी जींदगीका ये पहेले ओर्गेजम था.. जीसे वो बेहद खुस थी..
तब बहारकी ओर लखन आज लताको बडेही जोरोसे चोद रहाथा.. तो लताभी लखनकी अैसी चुदाइसे खुस होने लगी.. लखनने उनको इतनी देरतक कभी नही चोदाथा.. ओर वो मनही मन खुस होते अपनी कमर उछाल उछालके लखनका साथ देने लगी.. आज लताको लखनसे चुदवाते लखनका अनाडी पन नही लगा.. लखन अब इस चुदाइके मामलेमे काफी अेक्सपर्ट हो गया था..
लखनकी अैसी दमदार चुदाइ देखकर आज लताभी खुस होने लगी.. ओर वो लखनसे अपनी कमर उछाल उछालके चुदवाती रही.. अबतक लताभी बीचमे अेब बार जड चुकी थी फीरभी लखन उसे चोदेही जा रहाथा.. ओर काफी धकापैनी चुदाइके बाद लखन लतासे चीपक गया तो लतानेभी लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर लखन कमरको जटका देते लताकी चुतको भरने लगा..

जब दोनो जड गये तब लता लखनकी पीठको सहेलाती रही.. तब दोनोही पसीनेसे तरबोर हो चुके थे.. ओर लखन लताके उपरसे हट गया.. तब लता सोफेपे बेठकर अपने नीकरसे अपनी चुतको साफ करने लगी.. फीर खडी होकर अपने कपडे पहेनने लगी.. जैसेही कपडे पहेनके चली.. उनके पेर डगमगाने लगे.. ओर लताने सोफेको पकडलीया.. ओर वो लखनकी ओर आस्चर्यसे देखती रही.. क्युकी उनकी इतनी जबरदस्त चुदाइ आज तक नही हुइ थी..
लता : (धीरेसे) जानु.. आपनेतो मेरी हालत खराब करदी.. अब मे अंदर कैसे जाउगी..? क्या कोइ गोली बोली खाकरतो नही आयेथे..?
लखन : (हसते) क्यु..? मेने तो कुछभी नही खाया अैसा क्यु पुछ रही हो..
लता : (सरमाते हसते धीरेसे) लखन आपने इतनी देरतक तो मुजे कभी नही चौदा.. इसीलीये पुछ रहीथी..
तभी लखन अपनी मर्दांगीपे गर्व करते लताको अपनी गोदमे उठा लेता हे ओर धीरेसे दरवाजा खोलकर लताको अपने बेडकी ओर लेजाता हे.. तब नीलम आंख खोलके दोनोको रजाइमेसे देखती रही.. ओर लखन लताको धीरेसे बेडपे सुलाके उनके होंठ चुमने लगता हे तो लतानेभी लखनको अेक बार जोरोसे अपनी बाहोमे भरलीया.. ओर दोनोने कीस करली.. तब लखन लताके उपर चदर डालके बहार नीकल गया ओर दरवाजा बंध करके उपर अपने रुममे चला गया.. देखातो उनके बेडपे रजीया नंगी होकर लेटी हुइ थी....
कन्टीन्यु









































