Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 15 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती





my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 




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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०६/१

फीर किशन ओर भुमीका कारमे आकर बैठ गये.. ओर किशनने कार सहेरकी ओर जाने दी.. तब भुमीका चोर नजरोसे किशनको सर नीचे करते सरमाते देखती रही.. अब वो बहुत सरमा रहीथी.. तो दुसरी ओर किशनभी बार बार भुमीकाकी ओर देख रहाथा.. दोनोको कोइ उमीद नहीथी की बाबा इन दोनोकी सादी करवा देगे.. ओर इस बातपे भुमीका अंदरसे बहुत ही खुस थी.... अब आगे

आखीर किशनने खामोसी तोडते कहा..

किशन : (मुस्कुराते) भुमी क्यासे क्या होगया.. मुजेतो अभीभी यकीन नही हो रहाहे की बाबाने हम दोनोकी सादी करवादी हे.. हम नरेशको क्या जवाब देगे..? इस बारेमे तो हमने कुछ सोचाही नही हे..

भुमीका : (सरमाते नजरे जुकाते धीरेसे) किशन.. मे अबभी तुमपे कोइ फोर्स नही कर रही.. तुम चाहोतो तुम मुजसे आजाद हो.. मे अ‍ैसा कोइ काम जबर दस्तीसे करवाना नही चाहती.. जीनमे आपका मन ना हो.. हम आजभी भाइ बहेन हे.. ओर आगेभी भाइ बहेनही रहेगे.. बस मेनेतो जो बाबाने बात कहीथी वोही बात आपको कहेदी थी.. ओर अब आपने भी सुनलीया की मे जुठ नही बोल रही थी..

किशन : नही भुमी बात सच जुठकी नही हे.. बस मुजे नरेशकी चीन्ता हे..

भुमीका : किशन मेरी बात सुनो.. अगर हम इस रीस्तेको आगे बढाये तबभी मे तुम्हारी बहेन बनके नरेशके साथ रहुगी.. तुमतो जानतेहो बाबाने नरेशके बारेमे क्या कहाहे.. तबभी मे दुनीयाकी नजरमें विधवा होकरभी तुम्हारी बहेन बनकर रहुगी.. मे हमारे रीस्तेको कीसीके सामने उजागर करना नही चाहती.. फीर चाहे कोइभी हो.. तुम्हारी बीवी मिमलाभाभी भी क्यु ना हो.. मे हमारे रीस्तेको सबसे जुपाकर रखना चाहती हु.. हमारी बच्चीसेभी.. इनके लीये तुम मरते दम तक मामाही रहोगे.. आइ प्रोमीस..

किशन : (मुस्कुराते) हंम.. लगता हे तुमने काफी कुछ प्लान करके रखा हे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (सरमाते हसते) हां किशन.. तुम सुरुसे ही मेरे मनके राजकुमार रहे हो ओर आगेभी रहोगे.. चाहे हमारा रीस्ता कुछभी क्यु ना हो.. भाइ.. मे तुम्हे अबभी प्यार करती हु.. नरेशके साथ मेने कोम्प्रोमाइज कीया हे.. तुम आजभी मेरे दिलमे राज करते हो.. मेने अपने दिलमे आपके सीवा कीसीको जगह नही दीहे..

किशन : (हसते) ठीक हे भुमी.. हम अपना रीस्ता आगे बढायेगे.. जा.. देदीया तुजे राखीका तोहफा.. अब तो तु खुस हेनां..?

भुमीका : (किशनको कारमेही लीपटते) ओह.. किशन आइ लव यु.. आज तुमने मेरी जोली खुसीओसे भरदी.. आइ लव यु सो मच.. देखना मे तुम्हारी अ‍ेक अच्छी बीवी बनकर दीखाउगी.. मुंहा..





कहेते भुमीने खुसीके मारे किशनके गालको चुम लीया तब किशनभी हसने लगा.. फीरतो सारे रास्ते भुमी खुस होकर किशनके सामने हसती रही.. आज उनका नरेशको गांव भेजनेका सभी प्लान कामयाब हो गया.. आज फीरसे भुमीकी चुत फडफडाते पानी बहाने लगी.. ताकी ये चार दिन ओर तीन रात वो किशनके साथ हम बिस्तर होके बीता सके.. वो मनही मन खुस होकर बाबाका सुक्रिया अदा करने लगी..

दोनो भुमीकाकी हवेलीपे आगये.. ओर भुमीका कारसे उतरतेही धरकी तरफ लगभग दोडही पडी.. भुमीने जटसे घरका ताला खोल दीया.. तबतक किशनभी उनके पास आगया.. ओर दोनोही अंदर आगये.. तब भुमी जटसे वापस बहार चली गइ ओर हवेलीका मेइन गेइट बंध करके अच्छेसे लोक कर दीया.. ओर वो मुस्कुराते घरके अंदर आगइ.. अंदर आतेही घरकाभी दरवाजा बंध करदीया..

तब किशन उसे हसते हुअ‍े देखता ही रहा.. जब गेट बंध करके पलट गइ तब किशन उनके सामने हस रहाथा.. ओर किशनने अपने दोनो हाथ फैला दीये.. तब भुमीकी खुसीका कोइ ठीकाना नही रहा ओर वो हसती हुइ दोडकर आगइ.. ओर आतेही किशनकी बाहोमे समा गइ.. भुमीने किशनको कसके अपनी बाहोमे भीच लीया ओर उनके सीनेमे सर छुपाते मुस्कुराती रही.. आज वो पहेली बार अने स्वप्नके राज कुमारकी बाहोमे खडी थी..





(अतीतसे बहार)

नीर्मला : (हसते थोडी उची आवाजमें) भुमी.. ओ.. भुमी.. सो गइ क्या..?

भुमीका : (चोंकते तंद्गासे जागते) हां.. हां.. बोल नीमु.. क्या हुआ..? कीतने बजे हे..?

नीर्मला : (हसते) अरे.. देख साम चार बजनेको आये हे.. सो गइथी क्या..? कमीनी.. नींदमे भी हस रही थी.. हें..हें..हें.. कोइ स्वप्न बप्न तो नही देख रहीथी..? हें..हें..हें..

भुमीका : (सरमाते लेटेही नीर्मलाको बाहोमे भरते होंठ चुमते) हाये.. नीमु.. क्या हसीन स्वप्न था.. ओर कमीनी तुमने जगा दीया..

नीर्मला : (जोरोसे हसते) कमीनी.. क्या स्वप्नमे कीसीसे चुदवा रही थी.. जो अ‍ैसा कहेती हे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (सरमाते हसते) नही.. बस हम चुदाइकी ओर बढ ही रहे थे.. ओर कुतीया तुमने मुजे जगा दीया.. खैर छोड सब.. अब बहार नही चलना क्या..? अभी महेमान आते होगे.. चल फ्रेस होजाते हे..

नीर्मला : (हसते) हां.. चल.. इसीलीये तो तुजे जगाया हे.. हें..हें..हें..

कहेते दोनोही बेडसे उतर गइ ओर बाथरुममे जाकर मुह हाथ धोकर फ्रेस होगइ.. फीर बहार आकर अपने कपडे सही करते बाल बनाने लगी.. जब दोनो तैयार होगइ तब अ‍ेक बार फीर अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गइ ओर दोनोके होंठ मील गये.. फीर अलग होतेही हसती हुइ बहार जाने लगी.. जब दोनो बहार नीकली तब राजीव ओर मंजु चंदा तीनोही होलमे सोफेपे बैठे थे.. तब राजीव मंजुके बेटे विजयके साथ खेल रहाथा ओर भुमीका नीर्मलाभी वहा आकर बैठ गइ..

मंजुला : (हसते) अरे बुआ.. आजतो तुम दोनोने खुब आराम कीया.. दोनो सो गइथी क्या..?

भुमीका : (हसते) हां बेटी.. आज सुबह जल्दी उठेथे.. तो नींद आगइ.. वो सभी बच्चे कही दिखाइ नही देते..? कही गये हे क्या..?

चंदा : (हसते) हां दीदी.. वो पुनो वंदना ओर सृतीको रश्मीभाभी अपने घर लेगइ हे.. ओर लखन खेतोपे गया हे.. देवु अभी आते होगे.. बस आप दोनोका वेइट कर रहे थे.. फीर हम चाइ नास्ता कर लेते हे.. अभी भानुभाइ ओर उनके घरके सभी लोग आजायेगे.. दीदी हम सबको उपरकी मंजीलपे सेट कर देगे.. यहा बहुत कमरे हे..

राजीव : (हसते) मंजु बेटा.. वो हमारी समधन बेचारीको नीचेही कीसी कमरेमे ठहेराना.. अब इतनी उमरमे वो कहा उपर नीचे आती जाती रहेगी.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (तीरछी नजरसे राजीवकी ओर देखते) राजीव.. आपको बडी चीन्ता हो रही हे हमारी समधनकी..?

कहातो सभी जोरोसे राजीवकी ओर देखकर हसने लगे.. तब राजीव भी सरमाते मुस्कराने लगा.. तो नीर्मला भी राजीवकी ओर देखते जोरोसे हसने लगी.. तभी देवायतभी अपने रुमसे बहार आगया.. तो सबको अ‍ैसे हसते हुअ‍े देखरकर वोभी मुस्कुराते सबके पास आकर मंजुसे चीपकके बैठ गया.. तभी दयाने सबको चाइ नास्तेके लीये आवाज लगाइ.. तो सभी हसते हुअ‍े खडे होगये ओर डाइनींगकी ओर जाने लगे तब चंदाने भी खडे होते राजीव को कहा..

चंदा : (हसते) बडे भैया आप लगे रहोे दीदीतो अ‍ैसेही आपको चीडा रही हे.. हें..हें..हें..

फीर सभी हसी मजाक करते चाइ नास्ता करने लगे.. सभी लोग दो पहोरको खाना खाकर आराम कर रहेथे तभी पुनम वंदना ओर सृती मंजुके कहेनेपे रश्मीके घर चली गइ थी.. तब जाते वक्त सृतीने अपनी कारमेसे अपनी कीट लेली थी.. तो रश्मी तीनोको देखते ही खुस होगइ.. ओर तीनोको अपने पर्सनल रुममे ले गइ.. वहा सृतीने पहेले रश्मी भाभीको चेक करलीया.. तो उनका सब रीपोर्ट ओके था.. तभी..

रश्मी : (वंदनाकी ओर देखते) वंदु.. देखना यहा जोभी तुम देखो वो कीसीके सामने जीक्र मत करना..

वंदना : (हसते) भाभी आप फीकर मत करो मुजे सब पता हे.. हें..हें..हें.. जा पुनो अब तेरी बारी हे.. हें..हें..हें..

कहातो पुनम सर्मसार होगइ.. ओर सरमाते हुअ‍े बेडपे सो गइ.. जब सृतीने उसे अपना लोअर नीचे करनेको कहा तब वो खुब सरमाइ.. ओर सरमाते अपना लोअर नीचे करते थोडी गभराभी रहीथी तब जाके रश्मी भाभीने उनको हिंमत दीलवाइ.. तो उनकी सरम कम हुइ ओर सृतीने उनकी प्रेगनेन्सी चेक करली.. पुनमका पीसाबका सेम्पल भी अपने पास रखी कीटमे चेक कर लीया ओर बीना कुछ बोलेही अपना सामान पेक करने लगी.. तब तीनोही सृतीकी ओर सवालीया नजरोसे देखती रही..

वंदना : (हसते) सृती दीदी क्या हुआ..? इस कमीनीको कोइ प्रोबलेम तो नही हेनां..?

सृती : (हसते) वंदु तु उनकी खास दोस्त हेना..? तो पार्टी तो हम सब तुजसे ही लेगे.. हें..हें..हें.. देख.. तेरी सहेली हेना..सी इज प्रेगनेन्ट.. हें..हें..हें.. लेकीन इस बातका जीक्र अब कीसीसे मत करना.. मंजुने मना कीया हे.. बस अब सादीके बाद धिरेन इनको लेकर आयेगा तब मे इसे दुबारा चेक करलुगी तब देखती हु धिरेनकी सकल कैसे होती हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते अपने कपडे सही करते) वंदु.. देखना इस बारेमें भुलसेभी कीसीको मत कहेना.. तेरी मम्मी को ओर नीशा भाभीको भी नही.. वरना सब कबाडा होजायेगा.. ओर मेरी सासकातो खास खयाल रखना..

वंदना : (हसते) अरे.. हां बाबा..हां.. अब कीतनी बार मुजसे कहोगी..? आप सभीतो मेरे पीछेही पड गइ हे..

पुनम : (हसते) हां तो तुजेही कहेगेनां कमीनी.. फीर तेरी भी बारी आयेगी.. तब हमेभी छुपाना हे.. हें..हें..हें..

रश्मी : (आस्चर्यसे हसते) क्या.. वंदनाकी बारी..? मतलब..? वंदु आजकल तुम बहुत कुछ मुजसे छुपा रही हो.. सच बताना कमीनी कीसको फसाके रखा हे.. कही उनसे चुदवा बुदवा तो नही लीया..? हें..हें..हें..

पुनम : (जोरोसे हसते) नही रश्मी भाभी मेतो अ‍ैसेही मजाक कर रही हु.. लेकीन ये कीमीनी कीसीको भावही नही देती.. इसे आप ही समजाइअ‍े कबतक अ‍ैसे उंगलीसे काम चलाती रहेगी.. हें..हें..हें..

कहातो वंदना सर्मसार होगइ ओर पुनमको मारनेके लीये दोडी तो पुनमभी भागती हुइ बेडके आसपास चकर लगाती रही तब सृती ओर रश्मी दोनोको हसते हुअ‍े देखती रही.. अ‍ैसेही मस्ती मजाक करते सृतीने पुनम ओर रश्मी दोनोकी प्रेगनन्सी चेक करली.. फीर तीनोके लीये रश्मी भाभीने चाइ नास्ता ठंडा सबकुछ कीया ओर चारोने खुब अन्जोय कीया.. बादमे तीन घंटेके बाद तीनो वहासे हवेली आनेके लीये नीकली..

तो इधर भानुके घरभी सबने अपनी पेकींग करली थी.. ओर साम ४ बजे रमाने चाइ नास्ता बनालीया तो सभी चाइ नास्ता करके नीकलने लगे.. रमाने भानुने नीलम ओर लताने सब समान लेलीया ओर कारकी डीकीमे रखने लगे.. तब सामान रखते लताने अ‍ेक बार अपने घरपे नजर डाली.. ओर उनकी आंखसे आंसु नीकल गये.. क्युकी आज वो इस घरसे विदा हो रहीथी.. ओर भावनाने उनकी मनो दसा समजली..

वो अपनी बच्चीको रमाको थमाकर लताके पास चली गइ ओर उनको गले लगा लीया.. तो लताके आंसु फुट पडे ओर अपनी भाभीको लीपटक जोरोसे रोने लगी.. तो रमा ओर सरलाने उनको समजाकर सांत कीया.. क्युकी इस घरसे उनके बचपनकी ओर बहुत कुछ यादे जुडी हुइ थी.. ओर सभी लोग कारमे बैठने लगे.. ओर रमाने सभी जगाह ताला लगा दीया ओर सब कारमे बैठकर हवेलीकी ओर नीकल गये..

इधर सभी चाइ नास्ता करके होलमे बैठेही थे तभी भानु सबको लेकर आगया.. तो चंदा मंजु ने सबका गर्म जोसीसे स्वागत कीया.. तभी भुमीका ओर नीर्मलाभी बहार आगइ.. लताने भावनाकी बच्चीको अपने हाथोमे लेलीया ओर सभी लोग अंदर आने लगे.. तब नीर्मलाको देखतेही भावनाकी आंखोसे आंसुओकी धारा बहेने लगी.. तो नीर्मलाने भी आंसु बहाते भावनाको जोरोसे अपने गले लगा लीया..

तब भावना फुटफुटकर रोने लगी.. तब केवल रमा ओर भानु ही जानते थे की भावना इतना क्यु रो रही हे.. ओर आज भानु सर्मीन्दा होने लगा.. तभी रमाभी नीर्मलाके सामने हाथ जोडकर खडी होगइ.. ओर नीर्मलाने रमाको भी हसकर गले लगा लीया.. क्युकी उनको पताथा.. की इनमे रमाकी कोइ गलती नही हे.. क्युकी रमा ओर भानु के बारेमें मंजुने नीर्मलाको सबकुछ बतादीया था.. ओर भावना अंदर होलमे चली गइ..

सभी लोग अंदर होलमे आने लगे तब अंदर भावना ओर राजीव आपसमे लीपटकर दोनोही आंसु बहा रहेथे.. ओर राजीव भावनाके सरपे हाथ रखते उसे सहेला रहाथा.. ओर भानुभी देवायतको गले मीलकर राजीवके पैर छुलेता हे.. तब राजीव उसेभी आशीर्वाद देता हे.. ओर सभी लोग सोफेपे ओर खुरसीपे बेठने लगे तब मंजु भावना लता रमा सबको लेकर उपरकी मंजीलपे चली गइ.. ओर सरला राजीवके पास बैठ गइ..

भुमीका : (सरलाके पास बैठते) कैसी हो भाभी..? क्या मुजे पहेचानती हो की नही..? हें..हें..हें..

सरला : (सरमाते भुमीका हाथ पकडते धीरेसे) भुमी दीदी.. क्यु मजाक कर रही हो..? भला मे आपको कैसे नही पहेचानती.. कहो.. कैसीहे आपकी तबीयत..? सृती बेटीको तो मील चुकी हु.. क्या वो आइ हे.. इधर..?

भुमीका : (हसते) हां.. वो ओर पुनम जरा गांवमे कामसे गइ हे अभी आजायेगी..

राजीव : (हसते) कहो सरला भाभी.. आपतो हमारे घर भानुकी सादी करके गइ इनके बादतो दीखती ही नही हो.. सादीके बाद मुस्कीलसे तीनसे चार बार घर आइ हो.. क्या हमसे कोइ गलती हुइ हे..? हें..हें..हें..

सरला : (सरमाते हसते) अरे भाइसाहब ये आप क्या बोल रहे हे.. बस अब बच्चो ओर घर सम्हालनेमे फस गइ हु.. आपकी तबीयत देखने आनातो चाहती थी.. लेकीन मुजे वहा लेकर आये कौन..? ओर मेरी भावुबेटी भी तो बच्चेकी वजहसे नही आपाइ.. कहो.. अब कैसी हे आपकी तबीयत..? वैसे देवुसे आपकी सब खबर हमे मील जाती हे..

राजीव : (हसते) बस अब ठीक हु.. इश्वरकी महेरबानीसे बच गया.. मेरे देवुने मेरी खुब सेवा की..

सरला : (देवुकी ओर हसते) हां.. हमारा देवु हे ही अ‍ैसा.. सबकी मदद करता रहेता हे.. मुजेभी कोइ प्रोबलेम यातो कोइ मुस्केली आती हे तो मे भानुसे पहेले देवुकोही बुला लेती हु.. हें..हें..हें..

कहातो नीर्मला ओर भुमीका दोनोही देवायतकी ओर जुठे गुस्सेसे घुरने लगी.. जैसे उन दोनोकी तराह सरलाके साथ भी उनको रीस्ता हो.. लेकीन उन दोनोको नही पताथाकी उन दोनोसे पहेलेही देवायतका सरलाके साथ बहुत पुराना चकर हे.. ओर वो सरलाको कइ बार चोद चुका हे.. तब देवायत भुमीका ओर नीर्मलाको उनकी ओर अ‍ैसे देखते ही हसी आगइ.. तो नीर्मला ओर भुमीका ओर भडक गइ.. ओर भुमीकाने कहा..

भुमीका : (देवुको घुरते) सरला भाभी आप इस मामलेमे बहुत लकी हे.. देवुने हमारी कदद तो कभी नही की.. क्यु नीर्मला..? क्या वो तेरी मदद करता हे..?

नीर्मला : (देवुको घुरते) मेरी मदद कहा करता हे.. येतो बस राजीव बीमार होगया तबही इनको उधर देखा..

राजीव : (समज गया दोनो देवुकी टांग खीच रही हे तो हसते) अरे.. वो सबकी मदद करता तो हे.. क्यु बेचारेकी टांग खीच रही हो..? हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) रहेने दीजीये पापा.. मे ये दोनोसे तो चुन चुनकर बदला ले लुंगा.. आज कल दोनो बहुत बोलती हे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (खडी होकर सारीका पलु कमरमे खोसते) अच्छा हम बहुत बोलती हे..? अभी तुजे दीखाती हु..

कहेते देवायतको मारनेके लीये उनकी ओर जाने लगी तो देवायत हसते हुअ‍े जटसे खडा होगया ओर भुमीकासे बचनेके लीये सोफेके पीछे चला गया.. तो वहा बैठे सभी लोग हसते हुअ‍े दोनोका तमासा देखने लगे.. ओर भुमीका देवायतको भागते देखकर वापस हसते हुअ‍े अपनी जगाहपे बैठ गइ ओर देवायतभी वापस आकर बैठ गया.. तभी गांवकी कइ ओरते हवेलीपे आगइ.. ओर सब उनमे बीजी होगये..

तबतक मंजु चंदा रमा लता नीलमभी अपने रुममे सामान रखकर नीचे आगइ.. ओर सभी ओरते होलमे बीचमे बीछाना बीछायाथा.. वहा बैठ गइ तो नीर्मला सरला ओर भुमीकाभी सबके पास जाकर नीचे बैठ गइ.. तब रजीया दया ओर चंपाभाभी सबको पानी देने लगी.. तब सभी ओरते लखन लता ओर पुनम धिरेनका नाम लेकर सादीके गाने गाने लगी.. तब मंजु ओर चंदा बहुतही खुस होने लगी.. तो लताभी वही बैठी सरमाती हस रही थी..

तभी पुनम सृती ओर वंदना रश्मीभाभी भी आगइ.. रश्मी सबके साथ बैठ गइ तो पुनम सृती ओर वंदना पुनमके रुममे सरमाती चली गइ.. तो उनके पीछे लता ओर नीलमभी खडी होकर चली गइ.. तो दोनोके अंदर आतेही पुनम सृती ओर वंदना लता ओर नीलमको गले मील गइ.. फीर पुनमने अपने रुमका दरवाजा बंध करलीया.. तब लता ओर सृती आपसमे हस हसके बाते करने लगी.. तभी वंदनाने कहा..

वंदना : (हसते) सृतीदीदी.. अब चलो अब हमे हमारी तैयारीया करलेनी चाहीये.. ये दोनोको आज सही करदे.. चलो पुनो तुम ओर लताभाभी बाथरुममे आजाओ.. ओर दोनोको चीकनी कर देगे.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते धीरेसे) क्या..? मे भी..? मतलब.. मे..

सृती : (हसते) हां.. अब सादी तुम दोनोकी हे तो तुम दोनोको ही सब तैयारीया करनी पडेगी.. चलो दोनो बाथरुममे जाओ.. ओर वंदु तुमभी अपनी कीट लेले मे भी तेरी मदद करने आती हु..

तब लता ओर पुनम सरमाते हसती हुइ बाथरुममे चली गइ.. तो पीछे वंदनाभी कुछ हेर रीमुवर क्रिम ओर कुछ रेजर वगैरे सामान लेकर अंदर चली गइ.. तभी सृती ओर नीलमभी हसते बेडपे बैठ गइ.. दोनो बाते करने लयी.. तो सृती नीलमके बारेमे उनके अभ्यासके बारेमे सब जानकारीया लेते उनसे पुछती रही.. तो नीलमने उसे सहेरमे दाखीला लेनेकी बात करने लगी..

सृती : (हसते) क्या तुम नीलम होनां..? भानुभाइकी बेटी.. पढती हो क्या..?

नीलम : (सरमाते हसते) जी.. वो.. अभी सादीके बाद मेरा सहेरमे दाखला करवा रहे हे.. जहा पुनमदीदी ओर लखन जीजु पढते थे..

सृती : (हसते) अच्छा.. तो तुम वहा होस्टेलमे रहोगी.. चलो कोइ बात नही मेभी सहेरमे ही हु.. कभी कुछ काम होतो मुजसे मीलने आजाना.. मे तुजे अपना अ‍ेड्रेस दे दुगी.. क्या वही कोइ ओर पहेचान वाले हे..?

नीलम : (सरमाते हसते) जी.. वो.. वो.. धिरेनजीजु हे नां.. वो वहीतो जोब करते हे.. उसने भी मुजे मददके लीये कहा हे..

सृती : (खुस होकर हसते) कौन.. धिरेन..? अरे वोतो मेरा भाइ हे.. चलो तबतो कोइ चीन्ता नही हे.. वो तेरा बहुत अच्छेसे खयाल रखेगा.. (बाथरुमकी ओर देखते जोरोसे) वंदना.. क्या कुछ मदद करने आजाउ..?

वंदना : (अंदरसे) अरे नही दीदी.. बस अभी होगया.. आप वहा नीलमके पास बैठो हम अभी आते हे..

तभी बहारकी ओर रमेश सुधीर ओर गांवके दुसरे पंचायतके सदस्य सभी लोग आकर बैठे.. तब दया रजीया ओर चंपाभाभी सबको पानी ओर चाइ नास्ता देकर सबका आउभगत करती रही.. तो रुममे वंदना ओर सृती पहेले पुनम लताको नीचेसे साफ सफाय करके उसे वेक्सीन बगैरे करती रही फीर दोनोके साथ साथ सृती नीलम वंदना खुदको भी तैयार करती रही.. तो बहार सभी जेन्टस होलमे बैठकर गपे लगा रहेथे..

सभी लेडीस सादीका गाना गाते नाच भी रहीथी.. आज पुरी हवेलीमे सादीका माहोल बन गया था.. सभी ओर खुसीया ही खुसीया नजर आ रहीथी.. तो चारु ओर नीशा आपसमे देवायतकी ओर छुपकेसे देखते धीरेसे बाते करते हस रही थी.. तभी देवायतकी नजर नीशाकी ओर चली गइ.. ओर उसे नीशाका दीया हुआ लेटर याद आगया जो कारमे ही रेह गयाथा.. ओर वोही कार भानु अपने घर लेकर गयाथा..

तबतो ये लेटर कही भानुके हाथतो नही लग गया.. ये सोचते अ‍ेकबार तो देवायतकी भी गांड फट गइ ओर वो जटसे खडा होगया ओर भानुसे अपनी कारकी चाबी लेकर कारकी ओर चला गया.. ओर कारके अंदर बेठकर आगेके डेस्कबोड मे खाना खोलकर देखने लगा तो कवर वही सीलबंध पडा हुआथा ओर देवायतने राहतकी सांसली.. उसने कवर सीफततासे लेकर अपनी पेन्टकी जेबमे रख लीया..

ओर कार लोक करके वापस सबके पास आकर बैठ गया.. सबके साथ बाते करता रहा लेकीन उनका मन अब नीशाके कवरपे था.. तभी वो खडा होकर अपने रुममे चला गया ओर बाथरुममे घुसतेही कवर नीकालकर देखा तो उनमे से अ‍ेक चीठी नीकली.. तभी देवायत फटाफट गडी खोलकर चीठीको पढने लगता हे.. देखा तो वो नीशाकी लीखी हुइ चीठी थी.. जो उन्होने देवायतके नामपे लीखीथी.. ओर देवायत चीठी पढने लगा..

मेरे प्रिय देवायतजी..

मुजे पता हे आपको मेरे प्रिय कहेना थोडी जल्दबाजी होगी.. लेकीन अब सीर्फ यही सब्द मेरी आने वाली जींदगीको तैय करेंगे.. मे अपनी जींदगीकी जंग हार चुकी हु.. आपतो आपके भाइके बारेमे सब जानते हे.. फीरभी मे उनके साथ अ‍ेक उमीद लेकर कोम्प्रोमाइज करके जी रही हु.. लेकीन वोभी मेरा दुख भली भांती जानते हे.. ओर उसने मुजे दुसरेके साथ सादी करलेनेको या दुसरे मर्दसे सबंध बनानेको कहा.. इसीलीये वो मुजे डीवोर्स देना चाहते हे.. ताकी मे अपनी लाइफ अपने तरीकेसे जी सकु..

ओर मेने इसी हतासामे सुसायड करनेकी ठानली.. ओर अ‍ेन्ड वक्तपे मुजे चारुभाभीने आकर बचा लीया.. क्युकी सीर्फ वोही थी.. जो मेरी सब तकलीफके बारेमे जानती थी.. ओर उसीने मुजे आपके बारेमे बताकर अ‍ेक नइ उमीद जगाइ.. बस अबतो आपही मेरी उमीद हे.. मुजे चारुभाभीने अ‍ेक बार अपने दिलकी बात आपसे कहेनेको कहा.. लेकीन मेरी आपसे बात करनेकी हिमंत नही हुइ.. इसीलीये मे ये चीठीके माध्यमसे आपको अपने दिलकी बात बता रही हु.. बस अब आपपे नीर्भर हे..

मे येतो नही केह सकती की आप मुजसे सादी करलो.. हम ओरतोको चाहीये भीतो क्या..? बस आपसे केवल वो सुख चाहती हु जो आप चारुभाभी को देते हो.. क्युकी मे ओर चारुभाभी दोनो लगभग अ‍ेकही कस्तीमे सवार हे.. उन्होने आपके साथ रीलेशनमे आकर अपनी जींदगी सवांरली.. तो अब आपका उतर ही तैय करेगा की मुजे इस दुनीयामे जीना हेकी नही..

क्युकी मेरे मा बापकी भी अ‍ैसी हालत नही हेकी मे वहा वापस चली जाउ.. उमीद हे आप मेरी समस्याओको अच्छी तराह जानते मुजे नीरास नही करोगे.. आपके उतरकी प्रतीक्षामे.. आपको हमंसा चाहने वाली आपकी प्यारी नीशा.. आइ लव यु..

ओर चीठी पढतेही देवातकी आंख गीली होगइ.. नीशाने देवायतके लीये इतना बडा कदम उठालीया था देवायतको उनकी उमीद नही थी.. वो अपनी आंख पोछते पानीसे मुहको साफ करलेता हे ओर बहार आतेही अ‍ेक पेन लेकर वोही चीठीमे नीचेकी जगाह पे कुछ लीखने लगता हे.. फीर चीठीको वापस कवरमे डालकर जेबमे रख लेता हे.. फीर बहार नीकलते ही वो नीशाकी ओर अ‍ेक नजर डालकर सबके साथ आकर बैठ जाता हे..

जब सादीका नाच गाना चल रहाथा तब अ‍ेक बार नीशा ओर देवायतकी नजर मील गइ.. तब नीशाको देवायतकी आंखोमे अपने लीये बेसुमार प्यार नजर आया.. कहेते हेना कोइभी ओरतहो या लडकी सबमे अ‍ेक शक्ति होती हे जीसे हमलोग सीक्षसेन्स कहेते हे.. ओर नीशाने वही देवायतकी नजर पढली.. ओर उसे आशाकी अ‍ेक नइ किरण नजर आने लगी. ओर मनही मन खुस होने लगी..

सामको नाच गान खतम होगया तब दया रजीया सबको बडीयासा नास्ता देने लगी.. तो मंजु चंदा ओर भावना रमा सबको बडीयासी गीफ्ट देजे लगी.. तो गांवकी सभी ओरते ओर लडकीया खुस होगइ.. ओर धीरे धीरे करते सब अपने घरकी ओर जाने लगी.. तो मंजु ओर चंदाने सबको कल फीर जल्दी आजानेको कहा.. ओर धीरे धीरे करते सब लोग चले गये.. तो सुधीर ओर रमेशभी अपनी बीवीओको लेकर चले गये..

फीर सभी घरकेही लोग रेह गये.. ओर दया रजीया चंपाभाभी ओर रश्मी मीलकर रातका डीनर बनाने लगी.. तब घरके सभी लोग होलमे आकर बैठ गये.. ओर सभी आजके फंक्शनके बारेमे बाते करने लगे.. फीर साम ढलतेही सबने डनर करलीया.. ओर कुछ देर होलमे बैठकर बाते करने लगे..

तो रश्मीनेभी सरपंचके लीये अ‍ेक टीफीन लेलीया.. बाते करते सब अपने रुममे सोनेके लीये जाने लगे.. उपर भानु ओर रमा अ‍ेक ही रुममे सोने चले गये.. तो भावनाको मंजुने बच्चीकी वजहसे नीचेही सरलाके रुम मे सेट करदीया.. तभी भुमी ओर नीर्मला....कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०६/२

भुमीका : (हसते) नीमु.. ये गांवमे तो सब बहुत जल्दी सो जाते हे.. अभी तो इसी समय सृती होस्पीटलमे होती हे.. फीर आकर खाना बनाती हे ओर हम मां बेटी देरसे १० बजे खाना खाती हे.. ओर देखो.. यहातो अभी नव बजनेको आया ओर हमने खानाभी खा लीया ओर येतो सोनेभी जा रहे हे.. बाबा मुजे इतनी जल्दी नींद नही आयेगी.. क्या तुम लोग भी वहा जल्दी सो जाते हो..?

नीर्मला : (हसते) हां.. हमभी राजीवके आतेही खाना खा लेते हे.. ओर ज्यादासे ज्यादा दस बजते हे.. क्यु..? तुजे अभी जागना हे..? तो हम बैठते हेनां..

भुमीका : (हसते) अरे तो क्या करुगी..? मुजेतो अभी नींद ही नही आयेगी.. देर तक जागनेकी आदतजो हे..

मंजुला : (सुनतेही हसते) बुआ.. तो क्या हुआ.. अभी देवु रश्मीभाभीको उनके घर छोडने जायेगे तो आपभी उनके साथ चली जाओ.. ओर वोकींग करते जाना ताकी आपका टाइमभी पास होजाये.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) हां ये सही हे.. नीमु तुमभी चलोना.. दोनो साथमे वोकींग करलेगी.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (सरमाते हसते) ना बाबा ना.. मुजे नही करनी वोकींग.. तुमही अकेली चली जाओ.. फीर आकर सो जाना.. मुजे राजीवको दवाइ भी पीलानी हे.. कुछ देर उनके पास बैठुंगी.. फीर तेरे रुममे आकर सो जाउगी.. तो आकर सो जाना..

तभी लता भावनाके बडे बेटे भावेशको लेकर उपर चली गइ तो उनके साथ नीलमभी चली गइ.. नीचे पुनमके बेडपे सृती ओर वंदना सेट होगइ.., ओर तीनो लेटकर आपसमे बाते करने लगी.. तभी मंजुने देवायतको भुमी बुआको साथ लेकर रश्मीभाभीको उनके घर छोडनेको केह दीया.. तो भुमीका कातीलाना हसते हुअ‍े खडी होगइ ओर तीनो चलकर रश्मीके घरकी ओर जाने लगे.. तब आज रश्मी कुछ नीरास होगइ..

क्युकी साथमे आज भुमीकाथी तो वो देवायतसे अकेली मीलनेका चान्स गवा चुकी.. तभी भुमीकाने रश्मीके बारेमे जानना चाहा तब घरतक पहोंचते रश्मी इन सोर्ट अपने बारेमे सबकुछ बता देती हे.. बस सीर्फ उनके ओर देवायतके रीलेशनके बारेमे नही बताती.. तब देवायतका गांवके लीये इतना कुछ करना.. भुमीको देवायतपे गर्व महेसुस होने लगा.. ओर वो साथमे चलते देवायतके बारेमे सोचने लगी..

(बस थोडा अतीतमे)

आज कितने दिनोके बाद वो देवायतसे अकेली मील रही थी.. जबसे देवायतने उनका बडा घर बीकवा दीया ओर भुमीको अच्छी खासी तगडी कीमत दीलवाइ.. ओर उसे अ‍ेक नया बंगलो भी सस्ते दामोपे दीलवा दीया.. तबसे भुमीका देवायतपे आंख बंध करके विस्वास करने लगी थी.. तब कुछही दिनोके बाद अ‍ेक दिन अचानक नीर्मला उनको ढंढते हुअ‍े भावनाके साथ सहेरमे आगइ.. ओर उसे मीली..

दोनोही अ‍ेक दुसरेको गले लगाकर खुब रोइ.. तब सृती अपने क्लीनीकपे थी.. फीर दोनोही अपने कोलेज लाइफको याद करते बाते करती रही.. ओर बातो बातोमे भुमीको पता चलाकी देवायतही किशनका बेटा हे.. तबसे भुमीका देवायतको अपने घरका लडका समजने लगी.. ओर अ‍ेक बार फीरसे उनके मनमे सृतीके लीये अ‍ेक नइ उमीद बढने लगी..





फीर भावनाके साथ होनेकी वजहसे नीर्मलाने भुमीकाके साथ ज्यादा बाते नही की.. ओर भुमीकाको जल्द दुबारा मीलनेको कहेकर वापस अपने गांव चली गइ.. ओर अ‍ेक हप्तेके बाद नीर्मला वापस भुमीको मीलने आइ.. उस दिन भुमीका ओर नीर्मलाने वोही पुराना लेस्बीयन खेल खेला.. भुमीका आजभी उतनीही जवान ओर खुबसुरत दीख रहीथी वो आजभी बहुत कामुक ओर प्यासी ओरत थी..

तब नीर्मला ओल रेडी देवायतके साथ रीलेशनमे आचुकी थी.. फीरतो नीर्मला अक्सर भुमीको मीलने लगी.. कइ बारतो भुमीका नीर्मलाको फोन करके अपने पास बुला लेती.. तब मीलतेही दोनोके बीच लेस्बीयन खेल होता.. तभी अ‍ेक दिन अ‍ेक दुसरेकी चुतमे उंगली करते बातोही बातोमे नीर्मलाने उनके देवायतके साथ रीलेशनकी बात कहेदी.. ओर उस दिन देवायतके लंडकी ओर उनके चोदनेकी स्टेमीनाकी बहुत तारीफ करदी.. तबसे भुमीका का देवायतकी ओर देखनेका नजरीया बदल गया..





फीरतो भुमीका देवायतसे ज्यादा नजदीक रहेने लगी.. ओर उनके मीलतेही घंटो तक दोनो बाते करते.. समय बीतने लगा.. तबतक तो देवायत भी मंजुके साथ सादी कर चुकाथा.. ओर उसने नीर्मलाके साथ भी ब्रेकअप करलीया था.. इसी बीच भुमीका ओर देवायतके बीच नजदीकीया बढने लगी.. देवायत ओर भुमीका बार बार मीलने लगे.. जबसे नीर्मलासे देवातके लंडके बारेमे सुना तबसे भुमीका बार बार उसे देखने लगती..

फीर तो अक्सर देवायत महीनेमे तीनसे चार बार भुमीको उनके घर मीलने चला जाता.. तब सृती अपनी क्लीनीकपे होती ओर देवायत भुमीका पुरानी सब बाते करते रहे.. तब कइ बार भुमीकाकी नजर देवायतके पेन्टके उभारपे चली जाती.. आखीर वोभी तो किशनका खुन हे.. तो भुमीकाको ये सब बाते सहज लगने लगी.. ओर उनके किशनके साथ बीताये हर पलको याद करने लगती.. तब वो बहुत सरमा जाती.

देवायतका भुमीको बार बार मीलना.. ओर ये सब बाते बार बार याद आती रहेना.. भुमीके लीये.. अब सरमकी बाते नही रही.. ओर वो धीरे धीरे देवायतसे खुलकर बीना सरमाये बाते करने लगी.. तब कभी कभी बातोमे वो देवायतकी मस्तीयाभी करने लगती तो देवायतभी भुमीके साथ खुलकर बाते करते भुमीके साथ मजाक मस्ती कर लेता.. दोनो हर विसय पे खुलकर चर्चा करते..

अ‍ेक दिन दोनोही बाते कर रहेथे तब देवायतने अपने बापु ओर उनकी सास नीर्मलाके रीलेशनके बारेमे पुछ लीया.. तो भुमीकाने बीना सरमाये देवायतको सबकुछ बता दीया.. की कैसे नीर्मला ओर उनके बापु.. उनकी हाजरीमे मीलते थे.. ओर उनके सामनेही सबकुछ करते थे.. सब बाते अ‍ैसे बताती रही की दोनो बहुत पुराने दोस्त हो.. तब सेक्सकी बाते करते अ‍ेक बार फीर भुमीकाकी काम वासना बढने लगी..

भुमीकाको देवायतसे अ‍ैसी बाते करते देवायतका साथ अच्छा लगने लगा.. कइ बार दिनमे वो देवायतको फोन करके उनके घर बुला लेती.. ओर दोनो खुब अ‍ेक दुसरेकी मस्ती करते बाते करते रहेते.. अबतो मस्ती करते हाथोसे भी अ‍ेक दुसरे को छु लेते.. कभी भुमी देवायतको मारने लगती तो देवायतभी भुमीके दोनो हाथ मजबुतीसे पकड लेता.. तो कभी भुमीको अपनी गोदमेभी उठा लेता.. तो कभी भुमीकाके नीतंबपे चपत लगा देता.. तब भुमीका खुब सरमाती ओर जोरोसे हसने लगती..





भुमीको भी देवायतके साथ अ‍ैसी मस्ती करनेमे बहुत मजा आने लगा.. फीर भुमीका देवायतके लीये उनकी मन पसंद डीस बनाती.. ओर दोनो साथमे खाना खाते.. बात यहा तक बढ गइकी दोनो ही जरुरतसे ज्यादा मस्ती करने लगे.. ओर बात अ‍ेक दुसरेके साथ छेडछाड तक आगइ.. दोनोही धीरे धीरे करते अ‍ेक दुसरेके साथ छुटछाट लेने लगे.. जैसे ये दोनो कोइ प्रेमी हो.. तब भुमीका तीरछी कामुक नजरोसे देवायतको देखकर हसती..

जब देवायत घर आनेके लीये वापस आता तब भुमीका नीरास होजाती ओर देवायतसे फीरसे मीलनेका वादा लेकर वक्त तैय कर लेती.. भुमीको पताही नही चलाकी वो देवायतकी ओर काफी ढल चुकी हे.. भुमीका देवायतको तबभी बुलाती जब सृती अपनी क्लीनीकपे होती हे.. अ‍ैसा वो क्यु कर रही हे उनकोभी नही पताथा.. बस उनकोतो सीर्फ देवायतसे हर वीसय पे बारे करना.. उनके साथ मस्तीया करना देवायतका उनके साथ छेडछाड करना.. यही सब बातेसे देवायतका साथ अच्छा लगने लगा था..

तब अ‍ेक बार देवायत उनके कामोकी वजहसे दो महीने तक भुमीकाको नही मील पाया.. तब भुमी बेचेन रहेने लगी.. ओर सृतीपे भी बात बातपे चीडने लगी.. तब उसे अहेसास होगया की जो देवायतको अपना दिल दे बैठी हे.. ओर वो सोचतेही खुब सरमाइ.. फीर भी देवायतके बगैर नही रहेपाइ.. तब उसे नही पताथा की देवायतके दिलमे भी भुमीके प्रती चाहत बढ गइ थी..

देवायत भी भुमीकाको पसंद करने लगाथा.. उसे बडी उमरकी ओरतोको प्यार करना बहुत पसंदथा.. ओर वो भली भांती जानता था की भुमीका रीस्तोमे उनकी बुआ हे.. लेकीन भुमीकाकी खुबसुरती आजभी कहेर ढाल देती थी.. ओर भुमीका भी देवायतको पसंद करने लगी थी.. ओर अ‍े दिन उसने देवायतको फोन करदीया.. तब देवायतने उसे दो दीनके बाद मीलने आउगा कहेकर बात करने लगा..

भुमीका : (धीरेसे) देवु.. मुजसे नाराज हो क्या..? जो दो महीनोसे मुजे मीलने भी नही आता..

देवायत : (हसते) आंटी.. बस थोडा काममे फसाथा.. (हसते) क्या मेरी बहुत याद आ रही हे..? आप मेरे बगैर नही रेह सकती..? कही आपको मुजसे प्यार तो नही हो गया.. हें..हें..हें..

भुमीका : (सरमाते हसते) कमीने.. अ‍ेक मारुगी.. प्यार कीतो बातही मत करना.. मेने देखा तेरा प्यार.. तभीतो मुजे दो महीनोसे मीलने नही आया.. ओर कुते.. मे बुआ हु तेरी कोइ तेरी गर्लफ्रेन्ड नही हु.. ओर तु आंटी कीसको कहेता हे..? कीतनी बार कहा मे तेरी बुआ हु.. फीरभी जान बुजकर मुजे आंटी कहेकर चीडाता हे.. तु अ‍ेक बार आकर मील मुजे.. फीर मे तेरी खबर लेती हु.. कब आ रहा हे तु..?

देवायत : (जोरोसे हसते) तबतो आंटी मुजे आनाही नही.. खामखा मुजे मार पडेगी.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) अरे.. क्यु तंग करता हे मुजे.. अरे अ‍ेक बार आजानां.. वो तेरा बील्डर दोस्त हेना उनके आदमी इस महीने किरायाभी लेने नही आया.. तुमही उसे पहोंचादे.. बस ये दो दिनमे आजा.. क्या तेरी बुआको भुल तो नही गया..? चल तेरे लीये बढीया खाना बनाउगी.. ओर साथमे आइसक्रिम भी खीलाउगी.. बस अब खुस..? अब तो आयेगानां..?

देवायत : (हसते) हंम.. तो ठीक हे.. अबतो आपकी आइसक्रिम खानेके लीये आनाही पडेगा.. बस कल तक वैइट करलो मे कल ही आता हु.. वहा मुजे सहेरमे आधे दिनका काम भी हे..

भुमीका : (सरमाते हसते धीरेसे) सुन देवु.. वो पहेले तेरा काम खतम करके इधर आना.. कल सृतीभी कही बहारगांव कोन्फरन्समे जाने वाली हे.. वो परसो सामको आयेगी.. तो तुम यही रुक जाना.. मंजुको कहे देना.. भुमी बुआ अकेली हे इसीलीये मुजे अपने घर बुलाया हे.. कहो तो मे उसे फोन करदु..?

देवायत : (हसते) हंम.. नही मंजुकोतो मे कहे दुंगा.. मतलब आपके लीये मुजे वहा रुकना हे.. ओर वोभी सीर्फ अ‍ेक आइसक्रिमके लीये.. ओर कुछ नही मीलेगा..? हें..हें..हें..

भुमीका : (स्र्मसार होते समज गइ) कमीने ओर क्या चाहीये तुजे..? बदमास.. तेरी बीवी तुजे नही देती..? जोभी चाहीये तेरी बीवीको कहेना.. वो दे देगी.. मेरी मस्ती करता हे.. अ‍ेब बार आकर मील मुजे.. फीर देती हु तुजे.. चल फोन रख.. कमीना कहीका..

कहेते जुठे गुस्सेके साथ भुमीकाने फोन रख दीया.. ओर थोडी देर सोफेपे बैठी रही.. फीर कुछ सोचते सरमाते हसने लगी.. आज देवायतने उनके साथ कैसी बाते करलीथी.. भुमीका यही सोचते सरमाती रही ओर मुस्कुराती रही.. आज देवायतने अनजानेमे ही सही भुमीकाके दिलके तार छेड दीये थे.. ओर भुमीका रोमांचीत होने लगी.. जैसे जैसे देवायतके बारेमे सोचती रही उनकी देवायतको मीलनेकी बैचेनी बढने लगी..

ये पहेली बार नही था.. अ‍ैसी मस्तीया दोनो कइ बार कर चुके थे.. ओर भुमीकाको भी देवायतके साथ अ‍ैसी मस्तीया करना पसंद था.. भुमीका कइ बार कामुक नजरोसे देखते देवायतकी जांग सहेलाते उनको उतेजीत करते उनकी मस्तीया करती.. तो देवायतभी कइ बार भुमीकाके नीतंबको अपने हाथोसे दबा देता तब भुमीका उसे मारनेके लीये दोडती ओर वो भागता.. फीर भुमीकाको अपनी गोदमे उठा लेता..

तब भुमीकाके उरोज देवायतके सीनेमे दब जाते.. तब उनकी कामवासना बढ जाती ओर वो खुब सरमाती.. वो चाहतीकी देवायत उसे अभी मसलके चोदले.. लेकीन देवायत अपने भतीजे होनेकी वजहसे उनको कहेनेकी हिमंत नही करपाती.. तब वो देवायतके गाल चुम लेती.. ओर देवायतभी उनको अपनी गोदमे उठाकर पुरे घरमे घुमता.. तब वो उनका कोइ विरोध नही करती ओर हसते हुअ‍े मजे लेती..

आखीर वो दिनभी आगया.. जब देवायत सहेरका सभी काम नीपटाकर दो पहोर तीन बजे भुमीके घर आगया.. तबतक सृतीभी खाना खाकर कोन्फरन्समे जा चुकी थी.. जब दरवाजा खटखटा तब भुमीका जटसे आगइ ओर दरवाजा खोल दीया.. तो सामने देवायत मुस्कुराते खडाथा.. ओर भुमीने सरमाकर हसते उसे रास्ता देदीया जब देवायत अंदर आगया तब भुमीने दरवाजा बंध करके लोक करदीया ओर पलटकर देखा..

तो देवायत उनके पीछे सोफेके पास खडा भुमीको देखते हस रहाथा ओर भुमीका कुछ बोले बगैर ही दोडकर देवायतकी बाहोमे समा गइ.. तो देवायतनेभी भुमीकाको कसके अपनी बाहोमे भीच लीया.. दोनोही इस तराह आज पहेली बार मील रहेथे.. ओर भुमीका काफी देर देवायतके सीनेमे सर रखके उनकी बाहोमे खडी रही.. फीर धीरेसे सर उठाकर देवायतके चहेरेकी तराह देखा.. तब देवायत उनकी ओर देखते मुस्कुराता रहा.. ओर भुमीका अचानक उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. फीर देवायतकी ओर देखकर कहा..

भुमीका : देवु.. इस बार तुमने मुजे बहुत इन्तजार करवाया.. तुमने क्या जादु करदीया हे.. तेरे चहेरेको देखे बगैर मुजे कही चेइनही नही मीलता.. कहा फस गयाथा तु.. क्या अ‍ेक बारभी इस बुआकी याद नही आइ..?

देवायत : बुआ बहुत आतीथी.. लेकीन क्या करु..? काममे जो फस गयाथा.. आपतो जानती हे.. जबसे बापु गुजर गये तबसे बहुत काम बढ गया हे.. अबतो भानुभी हमारे साथ खेतोपे आगया हे..

भुमीका : (अलग होते दोनो हाथ थामते) चल बोइ बात नही.. अब कल साम तक तुजे जाने नही दुगी.. सृतीभी नही हे.. कल सामकोही आयेगी.. बस इस लडकीकी सादी होजाये.. तो गंगा नहाये..

देवायत : बुआ हो जायेगी.. कोइ अच्छा लडकाभी मीलना चाहीयेना.. जो यहा रेह सके.. ओर आप दोनोकी अच्छी तराह देख भाल कर सके..

भुमीका : (सरमाते हसते) मीलाथा अ‍ेक.. लेकीन.. उसनेभी कही ओर सादी करली.. वैसे वो अबभी मेरी सृतीको अपना सकता हे.. बस उनसे बात करनेकी देरी हे..

देवायत : (हसते) अच्छा..? कौन हे वो खुसनसीब लडका मुजसे कहीये मे उनसे बात करता हु..

भुमीका : (हसते) अरे नही नही.. जब जरुरत पडेगी तब तुमस ेही कहुगी.. चल पहेले कुछ खा पीले.. सुबहसे घरसे नीकला होगा.. तो भुख लगी होगी.. मेने तेरे लीये तेरी पसंदकी सब्जी बनाइ हे..

देवायत : नही बुआ मे होटेलमे हमारे अ‍ेक व्यापारीके साथ खाकर आया हु.. बस चाइ ही बनालो.. मेरी यादमे कीतनी दुबली होगइ हो.. हें..हें..हें..

भुमीका : (सरमाते हसते अ‍ेक मुका मारते) चल बदमास.. हर वक्त तुजे मस्ती ही सुजती हे.. चल मेरे साथ कीचनमे.. कंपनी दे मे चाइ बना देती हु.. कुछ नास्ताभी करले..

कहेते दोनोही कीचनमे चले गये.. भुमीका आजभी मटकते चलती तो कहेर ढाल देती.. देवायत उनके नीतंबको देखते उनके पीछे चलने लगा.. तब भीमुकाने पीछेकी ओर मुह घुमाते देखा.. तो देवायतको उनके नीतंबको ताडते वोभी देवायतकी नजरसे घायल होगइ.. वो भली भांती जानती थी की देवायत उनके पीछवाडेको देखेगा..

ओर भुमीकाको भी देवायतका इस तराह उसे ताडना अच्छा लगता था.. वो मुस्कुराते कीचनमे चली गइ.. तब देवायत वही प्लेटफोर्मपे बैठ गया ओर भुमीका चाइ बनाने लगी.. वो चाइ बनाते तीरछी नजरोसे देवायतको देखते मुस्कराती रही.. तभी रश्मीकी आवाजने उनको अपने अतीतकी यादोसे बहार नीकाल दीया ओर वो रश्मीकी आवाजसे चोंक गइ..

(अतीतसे बहार)

रश्मी : लोजी बुआजी.. आगया मेरा घर.. आइअ‍े अंदर फीर चाइ बाइ पीकर आरामसे चले जाना..

भुमीका : (उनके पीछे अंदर जाते) अरे रश्मी.. घरतो तुमने बडा बनवाया हे..

रश्मी : (हसते) हां.. तो बुआ हरामकी कमाइसे तो बडाही बनेगानां.. आइअ‍े देखीये अपने पापोकी सजा अब खटीयामे पडे भुगत रहे हे.. बहुत गरीबोकी जमीन पैसे ओर ओरतोको लुटा हे.. इश्वर भला करे इस देवरजीका.. जो सबको अपनी जमीन वापस दे रहे हे.. आइअ‍े अंदर..

कहेते रश्मी देवायतके पीछे भुमीकाभी अंदर आगइ ओर सीधेही तीनो सरपंच वाले रुममे चले गये.. तो वहा खडीयापे सरपंच मुह टेडा करते पडा था.. जैसेही सरपंचने भुमीकाको देखा सरपंचकी आंख बडी होगइ.. ओर वो खटीयापे ही उछल कुद करने लगा.. क्युकी किशन भुमीकाके रीस्तेके बारेमे छानभीन करके दोनोके रीस्तेको गांवके सामने उजागर करना चाहता था.. ओर इनके बदले किशनकी कीतनी जमीन किशनको ब्लेक मेइल करते हडप चुकाथा.. जीनके बारेमे भुमीका भी जानती थी..

भुमीका : (सरपंचको देखतेही स्माइल करते) क्युजी.. सरपंचजी.. पहेचाना मुजे.. अब कैसा लग रहा हे..? मेरे किशनको बहुत परेसान कीयाथानां..? अब देखो.. इश्वरने उनकी सजा दे दी आपको..

देवायत : (आस्चर्यसे) अरे.. बुआ.. आप पहेचानती हो..इसे..?

भुमीका : (सरपंचकी ओर कुटील मुस्कानसे) हां देवु.. बहुत अच्छी तराह.. मेरे किशनको खुब परेसान कीया हे.. उनकी बहुत सारी जमीनभी हडप चुका हे.. ये कुता अभी तब जींदा हे वोही बहुत बडी बात हे..

रश्मी : (हसते) बुआ फीकर मत करो.. अब ये ज्यादा दीनके महेमान नही हे..

भुमीका : (हसते) रश्मी बेटा.. तुमतो बहुत अच्छी लडकी हो.. इस कीमीनेके पले कैसे पड गइ..?

रश्मी : (हसते) बुआ.. नसीब फुटाथा मेरा.. अब जाके.. इनसे छुटकारा मीला हे.. कमीनेका इनकी बहेनके साथ ही चकर था.. मेरी ही पडोसमे रहेती थी.. ओर मेरीही खास सहेली थी.. फीरभी मुजे मालुम नही हुआ.. खैर आप आइअ‍े मेरे रुममे बैठीये मे कुछ बनाके लाती हु.. क्या पीयोगे..?

भुमीका : रश्मी कुछ ठंडाही बनादे चाइमे फीर नींद नही आती.. हें..हें..हें..

रश्मी : (देवायतकी ओर इसारा करते हसते जाते) हां तो इनके साथ बाते करते रहीयेगा.. ये कीस कामके हे.. हें..हें..हें..

तब देवायत ओर भुमीका दोनोही बहार आगये ओर होलमे सोफेपे अ‍ेक दुसरेके साथ चीपककर बैठ गये.. ओर रश्मी देवायतकी ओर कातील मुस्कान करते कीचनमे जाने लगी तो देवायतने उसे आंख मारते इसारा करदीया.. तब बहुत कुछ समज गइ.. ओर कीचनमे जाकर आरामसे देर लगाते ठंडा बना रही थी.. तब भुमीका देवायतकी ओर देखते सरमाकर हसने लगी..

तभी देवायतने भुमीकाके पीछे हाथ लेजाते उनको कमरसे पकडा ओर अपने नजदीक खीचते बाहोमे भरलीया तब भुमीका बहुत डरते सरमा थइ.. वो देवायतको कुछ कहेती उनसे पहेलेही देवायतने उनके चहेरेको अपनी ओर करते थाम लीया.. वो कुछ समज पाती इनसे पहेलेही देवातने अपने होठ भुमीकाके होंठसे मीला दीया ओर उसे चुमने लगा.. तब कुछ देरके लीयेतो भुमीकाभी सोक्ट होते गभरा गइ..





फीर वोभी देवायतका साथ देने लगी.. ओर दोनो लगातार अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमते होठोका रसपान करते रहे.. ओर देवायतने अ‍ेक हाथ भुमीके उरोजोपे रख दीया ओर उसे हल्केसे दबाकर मसलता भुमीके होठोका रसपान करता रहा.. तब भुमीका खुब सरमाइ ओर उनको होस आया की वो कहा हे.. ओर जटसे देवायतसे अलग होगइ.. ओर उनकी ओर तीरछी नजरोसे सरमाते हसने लगी.. तब..

देवायत : (हसते) भुमी क्या हस रही हो..? यहा डरनेकी कोइ जरुरत नही हे.. आप आरामसे बैठो.. रश्मीभाभी मेरे बारेमे सब कुछ जानती हे.. ओर यही मेरी सीक्रेट जगाह हे.. (बात बदलते) लगता हे आप मुजसे बहुत कुछ छुपाती हो.. इन सरपंचको पहेचानती हो.. मुजसे तो कभी नही कहा..? क्या मुजपे विस्वास नही हे..?

भुमीका : (देवायतको कसके गले लगाते धेरसे) नही देवु.. बात विस्वासकी नही हे.. मेरी मंजु सबकुछ जानती हे.. बस कभी वो बताना चाहे तो आप उनसे पुछ लेना.. मे आपको मेरे अतीतके बारेमे अभी नही बता सकती.. बस अ‍ेक काम बाकी रेह गया हे.. फीर में आपको मेरे बारेमे सबकुछ बता दुगी.. या सब मंजुसे जान लेना.. क्युकी अब मेरा आपके ओर सृतीके अलावा इस दुनीयामे हे ही कौन..? आइ लव यु देवु..

देवायत : (उनको अपनी बाहोमे भीचते) लव यु टु.. भुमी.. तुम अ‍ैसी बाते मत करो.. पता नही मुजेभी तुमसे कैसा लगाव होगया हे.. मे तुमको बहुत चाहता हु.. मेरी मंजुकी तराह तुमभी मेरी सबकुछ हो.. अ‍ेक मां अ‍ेक बुआ.. मेरी मौसी.. यहा तक मेरी पत्नी भी.. तुमने मुजे हर तरहका प्यार दीया हे.. मुजे तुम्हारे बारेमे कुछ नही जानना.. बस तुम जैसीभी हो मुजे स्वीकार हे..

भुमीका : (जोरोसे बाहोमे भीचते) ओह.. देवु.. मेतो आपको पाकर धन्य होगइ.. आइ लव यु सो मच.. बस अब आपको मेरा सीर्फ अ‍ेक काम करना हे.. आशा हे इनमे भी आप मुजे नीरास नही करेगे.. देवु मंजुतो सब कुछ जानती हे.. तो क्या उसने कभी हमारे रीस्तेके बारेमे नही पुछा..? मुजेतो बहुत डर लग रहा हे.. कही हमारे रीस्तेके बारेमे उसे पता चल गयातो..?

दुवायत : नही भुमी.. मेरी मंजु मुजे मेरे कीसीभी रीस्तोके बारेमे नही पुछती.. उसे हमारे रीस्तेके बारेमेभी पता होगा.. पता नही वो कौन हे.. भुमी.. मे उसे ओर तुम सबको हर जन्ममे पाना चाहता हु.. तुम सभीका प्यारमे कभी नही भुलुगा..

भुमीका : देवु.. वादा करो अगले जन्ममे आप फीरसे मुजे मीलोगे.. फीरभी मे आपसे सादी कर लुगी.. ताकी पुरी जींदगी हम दोनो साथ गुजार सके.. मुजे आप प्रोमीस करो.. मे यहा सीर्फ आपके लीयेही आइ हु..





देवायत : (बाहोमे भीचते होंठ चुमते) हां भुमी.. आइ प्रोमीस.. तुम जो कहेती हो वोही होगा.. आइ लव यु..

भुमीका : (सरमाते हसते) आइ लव यु टु मेरी जान..

रश्मी : (कोल्डींक की ट्रे लाते हसते) अरे वाह बुआको भतीजेपे बहुत प्यार आ रहा हे.. लीजीये ठंडा पीजीये..

भुमीका : (सही होते हसते) रश्मी.. यही तो मेरा भतीजा हे.. तो प्यारतो आयेगा ही.. तु बता.. अब आगे क्या करोगी..? तुमने तुम्हारे भविस्यके बारेमे कुछ सोचा हे..?

रश्मी : नही बुआ.. इन्होने मुजे पंचायतमे ही नोकरी दीलवादी हे.. तो वहीसे मेरा गुजारा होजायेगा.. बस देखते हे भगवान मुजे क्या देता हे.. तो इनके ही सहारे जींदगी जी लुंगी.. बाकी ये देवरजी तो हे ही.. हें..हें..हें..

भुमीका : (ठंडा पीते) हंम.. तो तुम प्रेगनेन्ट हो.. देखना तेरे बच्चेको इस तेरे पती जैसा मत होने देना.. आखीर खुनभी तो इनका हे..

तब रश्मी खुब रसमाइ.. उनको समजमे नही आयाकी वो भुमीकाको क्या कहे.. वो देवायतकी ओर देखकर सरमाते हसने लगी.. तो भुमीकाकोभी दालमे कुछ काला लगा.. तो वो आस्चर्यसे हसते देवायतकी ओर सवालीया नजरोसे देखती रही.. तभी देवायतने भुमीकाको सब सचाइ बताना उचीत लगा.. ताकी वो भुमीकाको भी यहा लाकर उनके साथ हम बीस्तर हो सके.. ओर वो धीरेसे कहेता हे..

देवायत : (हसते) बुआ.. आप बुरा मत मानना.. ये रश्मीके पेटमे जो बच्चा पल रहा हेनां.. वो उनके पती ये सरपंचका नही हे.. मेरा हे.. आपकी तराह रश्मीभी मुजे प्यार करती हे..

भुमीका : (खुसीसे सोक्ट होते) क्या.. मतलब.. तुम दोनोभी.. कबसे..?

रश्मी : (सरमाते हसते) हां बुआ.. जब मे सादी करके इस गांवमे आइ तब कुछ दो तीन सालके बाद ही मे इनको पसंद करने लगी थी.. ओर तबसे हम दोनो रीलेशनमे हे.. इस बारेमे मंजुभाभी भी जानती हे.. अब यही मेरे भी पती हे.. हम दोनोने सबसे हमारे रीस्तेको छुपाकर रखा हे.. यहा कीसीको पता नही की ये बच्चा हम दोनोका हे.. सब यही समजतेहे की सरपंचका हे.. तो बी केरफुल..

भुमीका : (सरमाते हसते) हंम.. रश्मी तु फीकर मत कर.. मेरा देवु हे ही अ‍ैसा.. अपने बापुकी तराह.. सबका खयाल रखता हे.. मेराभी खयाल रख रहा हे.. हें..हें..हें..

रश्मी : (सरमाते हसते धीरेसे) बुआ.. क्या आपको मीलना हे इसे..? तो जाइअ‍े दोनो मेरे रुममे चले जाइअ‍े.. वहा कोइ खतरा नही हे.. फीर दोनो आरामसे चले जाना..

भुमीका : (अ‍ेकदम सर्मसार होते) नही रश्मी.. थेन्क्स.. प्लीज.. खयाल रखना हम दोनोके बारेमे कीसीको पता ना चले.. अगर इनसे मीलना होगा तब मे इनको लेकर यहा आजाउगी.. ओके..?

फीर तीनोने साथ बैठकर ठंडा पीया तब देवायत ओर भुमीने बातको डायवर्ट करदीया ओर गांवकी बाते करते रहे आज भुमीका साथमे थी तो रश्मी ओर देवायत कुछ नही कर सके तो भुमीकाभी रश्मीके सामने देवायतको मीलना नही चाहती थी.. तीनो ही अपनी मर्यादामे रहे.. फीर ठंडा पीतेही देवायत ओर भुमीका वहासे नीकल गये.. ओर चलते बाते करने लगे.. तब भुमीकाने देवायतसे सृतीकी बात करना उचीत लगा.. बस इनके लीये सही मौकेका इन्तजार था....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०७

फीर तीनोने साथ बैठकर ठंडा पीया तब देवायत ओर भुमीने बातको डायवर्ट करदीया ओर गांवकी बाते करते रहे आज भुमीका साथमे थी तो रश्मी ओर देवायत कुछ नही कर सके तो भुमीकाभी रश्मीके सामने देवायतको मीलना नही चाहती थी.. तीनो ही अपनी मर्यादामे रहे.. फीर ठंडा पीतेही देवायत ओर भुमीका वहासे नीकल गये.. ओर चलते बाते करने लगे.. तब भुमीकाने देवायतसे सृतीकी बात करना उचीत लगा.. बस इनके लीये सही मौकेका इन्तजार था....अब आगे

दोनोही बाते करते रातके घने अंधेरेमे चलके आ रहेथे.. गांवमे पुरी तराह अंधेरा छाया हुआथा.. ओर अ‍ेकभी आदमी बहार नही दीखताथा.. सब सो चुके थे.. तब मौका देखतेही भुमीने देवायतका हाथ पंजा फसाकर पकड लीया.. ओर उनसे अ‍ेब बीवीकी तराह सटकर चलने लगी.. तब देवायतभी हस पडा.. दोनोही अ‍ैसे चलके आ रहेथे जैसे कोइ दो प्रेमी हो..

भुमीका : (हसते) देवु.. वो आपकी सास नीर्मला हम दोनोके बारेमे घुमा फीराके पुछ रही थी.. लगता हे उनको हम दोनोपे सक होगया हे.. क्या कहेते हो आप..? मे उनको हम दोनोकी सचाइ बतादु..?

देवायत : (चोंकते) क्या..? भुमी.. वो मुजसे भी पुछ रहीथी.. वो मुजे तेरे साथ रीलेशनमे आनेके लीये फोर्स कर रही हे.. ताकी हम तीनो आसानीसे मील सके.. कही तुमने उसे कुछ बताया तो नही..?

भुमीका : (हसते) अरे पागल हो गये हो क्या..? मे उसे क्यु बताउगी..? बस मेने बातको बडी सीफततासे टाल दीया.., मेतो आपको सीर्फ आगाह कर रहीथी.., देवु.. अब आपको नही लगता हम दोनोको कही मीलना चाहीये.. १० १२ दिन हो गये हे.. हम अकेले मीले ही नही.. अब आपकी आदतजो हो गइ हे..

ओर यहा सादीके माहोलमे हमारा मीलना उचीत नही हे.. अब आपके बीना अकेला जी नही लगता.. कुछ अ‍ैसा करोनां की हम दोनो साथ रेह सके.. दो तीन दिनसे आपको मीलनेके लीये बुहत बैचेनी लग रही हे.. लास्ट टाइममे हम दोनो ने पुरे दिन कीतना मजा कीया था.. पता नही अब अ‍ैसा मौका दुबारा कब मीलेगा..

देवायत : (हसते) भुमी.. तो पहेले कहेना चाहीयेनां.. हम रश्मीके घरमेही मील लेते.. इसीलीये तो रश्मीको मेने अपनी सीक्रेट वाइफ बनाकर रखा हे.. तुमतो जानती हो.. मेरे पीछे कइ ओरते पागल हे.. तो मे उनको वही मीलता हु.. वहा उनके कमरेमे ही चले जाते.. तु खामखा रश्मीसे डर रही हे..

भुमीका : (सरमाते हसते) नही देवु.. दुसरोके घर अ‍ैसे मीलना उचीत नही हे.. मे जीतना हो सके हम दोनोका रीस्ता सबसे छुपाकर रखना चाहती हु.. पता नही आपके बापुकी तराह आपमेभी कोनसी कसीस हे.. मे आपसे सादी करतेही आपको पुर्ण समर्पीत होगइ.. ओर मेने अपना सबकुछ आपको सोंप दीया.. बस अब अ‍ेक ही काम रेह गया हे.. फीर हम दोनो बीना कोइ संकोच आरामसे मील सकते हे..

देवायत : (हसते) हां तो बताओना अब कौनसा काम बाकी रेह गया हे.. मुजसे होगातो मे जरुर कर दुंगा.. लगता हे तुमने कुछ प्लानींग करके रखी हे.. आज कल तुम भी बहुत ठरकी होगइ हे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (सरमाते हसते) हां तो ठरकी तो होउगीनां.. मेरा पतीजो इतना काबील ओर होनहार हे.. मेरी इस उमरमे भी आप मेरी चीखे नीकलवा देते हो.. हें..हें..हें.. देवु.. अ‍ैसा लगता हे मेरी जवानी फीरसे वापस लौटकर आगइ हे.. मेतो आपके पीछे पागइ होगइ हु.., जानु.. बस मुजे आपसे अ‍ेक बात कहेनी थी.. जो हम सादीके बाद अकेले मीलेगे तब केह दुगी..

देवायत : भुमी.. क्या वो बात तुम अभी मुजे नही बता सकती..? बताओनां..

भुमीका : (सरमाते) नही.. अभी नही.. वो बात मे अ‍ेक खास वक्तमे ओर खास पोजीसनमे बताना चाहती हु.. हें..हें..हें.. आप समज गयेनां..? जानु.. आपने मेरी हर फेन्टासी पुरी की हे.. तो बस येभी फेन्टासी आप पुरी कर देनां.. हें..हें..हें.. हमारे फायदेकी हे..

देवायत : (हसते) हंम.. समज गया.. इसके लीये मुने तेरे घर तुजे अकेले मीलने आना होगा.. हें..हें..हें..

भुमीका : (तीरछी नजरसे कामुक मुस्कानसे) हंम.. आप काफी समजदार हो.. हें..हें..हें.. वैसे आपतो राजा हो.. देवु.. आपकी सासके चहेरेपे काफी नीखार आगया हे.. क्या अभी आप दोनो मीले बीले की नही..? कमीनी बहुत होट ओर कामुक दीख रही हे.. बस अ‍ेक बार मेरे सामने उनको अपने नीचे लीटादो.. ओर मेरे सामनेही उसे पटक पटककर चोदलो.. फीर हम तीनोही खुलकर मील सकते हे.. आप समज गयेनां..

देवायत : (आस्चर्यसे) भुमी..? तुम ठीक तो हेनां..? वो मेरी बीवीके साथ सासभी हे.. कही मंजुको देखा हे..? ओर तुमतो हम दोनोका रीस्ता सबसे छुपाकर रखना चाहती थीनां..? देखले.. इसके लीये हमारा रीस्ता उनके सामने तुजे उजागर करना पडेगा.. तभी तो ये सब संभव हे.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे..

भुमीका : (हसते दुसरे हाथसे बाजुको थामते) अरे इसमे मंजु कहासे बीचमे आगइ.. वोतो सब जानती ही होगी.. मे तो सीर्फ आपको पुछ रही थी.. कमीनी आजभी पटाका लग रही हे.. आपके बापु अ‍ैसेही उनके पीछे पागल नही थे.. जानु उनका बस चले तो वोतो आपके बच्चेभी पैदा करलेती.. आपके पीछे इतनी पागल हे..

देवायत : भुकी.. कमतो तुमभी नही हो.. आजभी इतनी होट हो.. इसीलीयेतो मे तेरे पीछे पागल हु.. मे नीर्मलासे ज्यादा तो तुमसे मीलता हु.. ओर मत भुलो.. मेरी मंजुको हम सबके बारेमे सब पता चल जाता हे.. पता नही कौन हे वो..

भुमीका : (हसते) देवु.. बस मुजे उन्ही बातोका डर लग रहा हे.. जब आप सब चंदाकी सादीके दिन खरीदी करने आये तब मंजुने मुजे उनके बारेमे ओर ओरोके बारेमे बहुत कुछ बताया हे.. मेरी सृतीके बारेमभी बात हुइ.. बस सीर्फ हमारे रीस्तोके बारेमे कभी मेरे साथ चर्चा नहीकी.. उनकी बातोसे पता चला..

यही समजलो हम सभी कोइ सामान्य इन्सान नही हे.. हम सभी कइ जन्मोसे साथ हे.. देवु मुजे सीर्फ इतना पता हे आपकी बहुत सारी रानीया होगी.. अभी आप.. फीर आपके बेटेको.. फीर उनके बेटेको ही सबको सम्हालना होगा.. ओर मुजे इतना पता हे आप हम सबको संतुस्ट कर सकते हो.. बस..

देवायत : हां भुमी.. पता नही बाबाने मंजुको कोनसी जडी बुटी दी हे.. बस ये बेठनेका नाम ही नही लेता.. मे कीतनी बार करलु.. फीरभी मे थकता ही नही.. ये हमेसा चोदनेके लीये खडाही रहेता हे..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) देवु.. आप सही केह रहे हो.. जबसे मेने इनका स्वाद चखा हे.. तबसे आपसे अलग होनेका जी ही नही चाहता.. अ‍ैसा लगता हे हम दोनो कभी अलगही ना हो.. बस करतेही रहे.. जानु.. आपने तो मुजे बातोसे ही गरम करदीया.. चलोना इधर कही चले जाते हे.. क्या आपका मन नही हो रहा..? मेरातो बहुत मन कर रहा हे.. कीतने दिन होगये.. हम मीलेही नही..

देवायत : (हसते गाल चुमते) भुमी.. तुजे देखकर तो मन तो मेराभी बहुत कर रहा हे.. पर यहा..? बस तुम सादी तक रुक जाओनां.. सादीके बाद मे तुमको अ‍ेक स्पेसीयल पुरा दिन ओर रात दुगा.. तब तुम अपनी सारी कशर ओर अपनी सब फेन्टासी पुरी करलेना.. पता नही आजभी तुजमे इतनी कसीस हे.. जो देखतेही मे पागल होजाता हु..

भुमीका : (सर्मसार होते हसते) तो चलोना.. यही कही चले जाते हे.. बस कैसे भी अ‍ेक बार करलो.. मुजे ये अंदर लेना हे.. अ‍ेक बार मुजे जमकर चोदलो.. तबही मेरे तनकी आग सांत होगी..

कहेते भुमीका अ‍ेकदम उतेजीत होगइ.. ओर देवायतको हाथ पकडकर अ‍ेक साइडमे छोटी घने अंधेरी गलीमे लेकर चली गइ ओर देवायतके चहेरे हथेलीमे थामकर उसे पागलोकी तराह चुमने लगी.. ओर आखीर दोनोके होंठ मील गये.. तब भीमुका की सारीका पलु भी गीर गया.. ओर देवायतने भुमीके होंठ चुमते उनके उरोजोको अपनी हथेलीमे थाम लीया.. वो लगातार कीस करते बारी बारी दोनो बुब्सको मसलने लगा..





भुमीकाभी पुरी तराह मदहोस होकर कामाग्नीमे जलने लगी.. भुमीकाने अपने कपडे नीकलनेकी कोइ परवा नही की.. उनकी सारी नीकल गइ तो वो देवायतके पेन्टकी क्लीप खोलने लगी.. ओर जल्दीसे उनके वीकराल लंडको बहार नीकालकर मुठीमे पकड लीया.. ओर जोरोसे हिलाने लगी.. तबतक देवायतने भुमीकी सारीको नीकाल दीया ओर वही अ‍ेक जगाहपे रखकर उनके पेटीकोटको आगेसे उचा कर लीया..

फीर भुमीको को अपनी गोदमे उठाकर दिवालके सहारे सटाकर खडी करदीया.. ओर अपनी बाहोमे भरते अपनी कमर भुमीकी चुतसे सटाते भुमीके होंठ चुमने लगा.. तो भुमीका देवायतके लंडको पकडकर अपनी चुतका रास्ता दीखाने लगी.. ओर देवायतने अपनी कमरको पीछे करते अ‍ेक जटका मार दीया.. तो खडे खडे ही आधा लंड भुमीकी चुतमे घुस गया तो भुमीका मुह खुलाही रेह गया.. ओ वो जोरोसे देवायतको अपनी बाहोमे भीचने लगी..





ओर देवायत भुमीकी दोनो टांगोको पकडकर तेजीसे अपनी कमर हीलाते भुमीको चोदने लगा.. तो भुमी अपना सर देवायतके कधेपे डालते धीरेसे आहे भरते सीसकारीया करती रही.. ओर दोनोके बीच कामातुर चुदाइ होने लगी.. दोनोही कामवासनामे जलते बहुत गरम होगये थे.. तब कुछ ही देरकी धमाकेदार चुदाइकी वजहसे दोनो ही आहे भरते जडने लगे.. देवायतने भुमीकी पुरी चुत अपने पानीसे भरदी..

तब दोनोने अ‍ेक दुसरेको अपनी बाहोमे भीच लीया ओर अपने होंठ लीपलोक करलीये.. जब दोनो जडके सांत होगये तब भुमी खुब सरमाने लगी.. ओर देवायतने जेबसे अपना रुमाल नीकालकर भुमीको दे दीया.. तो भुमीका अपनी चुत साफ करने लगी..

फीर देवायतके लंडको भी साफ करते रुमाल देवायतको वापस दे दीया.. ओर दोनो अपने अपने कपडे पहेनकर सही करने लगे.. भुमीने वही खडे रहेकर अपनी सारी पहेनली.. जब दोनोने कपडे सही करलीये तब देवायतने अ‍ेक बार फीर भुमीको अपनी बाहोमे भीचलीया ओर उनके होंठ चुमने लगा..

भुमीका : (लडखडाती आवाजमे) अंह..अंह.. बस.. बस.. देवु ओर नही.. वरना मे फीरसे बहेक जाउगी.. अभी यहा ये सब ज्यादा करना उचीत नही हे.. मे सादी तक इन्तजार कर लुगी चलो.. मुजे यहा कोइ रीस्क नही लेना.. मुजे तो यकीनही नही हो रहा की हमने रातमे इस खुली गलीमे सब करलीया.. कीतना मजा आया.. आपनेतो मुजे जनतकी सेर करादी..

देवायत : (हसते) हां तो तुजे ही जल्दी थी.. हम उपरकी मंजीलपे चले जाते.. वहा आरामसे करते..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) नही देवु.. हम मेरे घर मीले उसे १० से १२ दिन हो गये.. तो मे आपसे मीलन करनेके बीना रेह नही पाइ.. अब कुछ राहत हुइ.. आप कीतना जडते हो.. देखना आप अ‍ेक दिन पका मुजे प्रेगनेन्ट कर दोगे.. चलीये अब..

कहेते भुमीका बहुतही सर्मींदा होगइ.. ओर अपने कपडे सही करते चलने लगी.. ओर देवायतभी चलते उनके साथ होगया.. तब इस बार देवायतने भुमीको पीछे हाथ डालकर कंधेसे पकड लीया ओर अपने साथ सटाकर चलने लगा.. तो भुमीका सर्मसार होकर देवायतकी कमरमे हाथ डालकर हसने लगी.. ओर तीरछी नजरसे देवायतको देखते उनके साथ चलने लगी.. जैसे कोइ दो प्रेमी सब दुनीयादारी भुलकर चल रहे हो..

देवायत : (हसते) तो क्या हुआ.. करलेती हमारा बच्चा पैदा.. इनमे कोनसी बडी बात हे.. अब तुम मेरी बीवी हो..

भुमीका : (सरमाते हसते) नही देवु.. मे सृतीको क्या जवाब दुगी..? बस उन्हीका डर लग रहा हे..

देवायत : भुमी इनमे सृतीसे क्या डरना..?

भुमीका : नही देवु.. इस उमरमे उसे बच्चा पैदा करना हे.. ओर में..? नही.. अगर अ‍ैसा कुछ हुआ तो हम तब सोचेगे.. अभीतो चलीये..

भुमीको अभीभी यकीन नही होरहा था की देवायतने अभी अभी गांवकी सुनसान गलीमे उनकी खडे खडे ही जबरदस्त चुदाइ करली हे.. तब देवायतने चलते चलते भुमीको अ‍ेक बार फीरसे गालपे चुम लीया.. तब भुमीकाने उसे सरमाते सीनेपे मुका मारदीया.. ओर देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखते हसने लगी.. उनकी चुत अबभी फडफडा रहीथी.. दोनोही मस्तीया ओर अ‍ेक दुसरेके साथ छेडखानी करते हवेलीके पास आगये..

भुमीका : (सरमाते हसते) अब बसभी करो.. घर आगया हे.. आपतो अ‍ेक बार सुरु होजाते हो.. फीरतो मुजे छोडते ही नही हो.. बहुत बदमास होगये हो.. क्या कोइ अपनी बुआके साथ अ‍ैसा करता हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां.. अगर बुआ अ‍ैसी होट होतो मेतो करता हु.. हें..हें..हें.. भुमी.. क्या मस्त लग रही हे तु..

भुमीका : (जुठे गुस्सेसे हसते मुका मारते) हटो.. बदमास.. आप बहुत कमीने होगये हो.. चलो घर आगया..

फीर दोनो ही हसते हवेलीमे आगये.. तब सभी लोग अपने रुममे चले गये थे.. ओर हवेलीमे भी अंधेरा छाया हुआथा.. दोनोही अ‍ेक दुसरेकी ओर देखते अपने अपने रुमकी ओर बढने लगे.. ओर अचानक भुमीका रुक गइ.. ओर देवायतकी ओर अपने दोनो हाथ फैला दीये.. तब देवायतभी रुक गया तो भुमीका दोडके देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर देवायतके होठोसे होठ मीलाके उसे पागलोकी तराह चुमने लगी..





दोनोही अ‍ेक दुसरेकी जीभको अ‍ेक दुसरेके मुहमे डालने लगे.. भुमीका फीरसे बहुतही उतेजीत हो चुकी थी.. लेकीन यहा वो कोइ ओर रीस्क लेना नही चाहती थी.. ओर वो देवायतसे जटसे अलग ओगइ ओर अपने रुमकी ओर जाने लगी.. तबतक देवायत वही खडे रहेते उनको देखता रहा.. जब भुमीका अपने रुमके पास पहोच गइ.. तब रुकते पलटते देवायतकी ओर देखते उसे फ्लाइंग चुमी देती हे ओर अपने रुममे चली जाती हे..





देवायतभी अपने रुममे चला गया.. मंजु ओर चंदा दोनोही गहेरी नींदमे सो चुकी थी.. दया ओर रजीयाभी चंपाभाभीकी वजहसे कुछ कीये बगैरही सोगइ.. तो उपरकी ओर लता ओर नीलम दोनोही साथमे सोते बाते कर रहे थे.. तो लताके साथ भावेसभी उनकी बगलमे सोया हुआ था.. तब बाजुके रुममे भानु रमाके उपर चडते उसे जोरोसे चोद रहा था.. तो रमाभी अपनी कमर उछाल उछालके भानुसे मजेसे चुदवा रही थी..

तब नीचेकी ओर पुनम सृती ओर वंदनाभी बाते करते कब सो गइ तीनोको पताही नही चला.. तो बाजुके रुममे सरलाभी सो गइथी.. तब भावना अपनी बच्चीको दुध पीलाते अपने आने वाले वक्तके बारेमे प्लानींग करते सोच रही थी.. राजीवभी दवाइकी वजहसे गहेरी नींद सो रहाथा.. देवायत अपने कपडे चेन्ज करके धीरेसे मंजुके साथ सो गया.. तो मंजुकी आंख खुल गइ ओर वो पलटकर देवायतकी बाहोमे समा गइ..





मंजुला : (होंठ चुमते हसते धीरेसे) आ गये आप..? मील लीया मेरी सौतनको..?

देवायत : (हसते बाहोमे भीचते) हां.. बस.. मंजु हम अभी यही बात कर रहेथे.. तुजे सब पता कैसे लग जाता हे..? कौन हो तुम..? कौन हे हम..? बस.. सीर्फ तेराही डर लग रहा हे.. मंजु.. मेरा कीतनी ओरतोके साथ नाजाइज रीस्ता हे.. फीरभी तुमने मुजसे आजतक अ‍ेक बारभी फरीयाद नही की.. इसीलीये तुमसे डरता हु..

मंजुला : (जोरोसे बाहोमे भीचते सीनेमे सर छुपाते) नही देवु.. आपका कोइ रीस्ता नाजाइज नही हे.. आप सीर्फ मेरे स्वामी नही हो.. हम सबके स्वामी हो.. जीतना हक आपपे मुजे हे.. इतनाही हक उन सभी ओरतो ओर लडकीयोका हे.. हम सबका आपके उपर बरोबरका अधीकार हे.. इसीलीये आपसे मीलनेके लीये ये सब इधर जन्म लेकर आइ हे.. देवु अब वक्त आगया हे मे आपको सब अनुभुतीके माध्यमसे ज्ञात करवादु.. वरना आप अ‍ैसेही दुखी होते रहोगे..

देवायत : (सरपे चुमते) मंजु.. पता हे मुजे.. इतनातो मालुक हो गया की हम सबका तुम्हारे साथ कोइना कोइ तो कनेक्शन हे.. तभी तो बाबाने तुजे इतनी शक्तिया दी होगी.. ओर मुजेभी कैसी जडीबुटी देदी..? मंजु.. अ‍ेक बात कहु..? मुजे सबसे ज्यादा आपसी रीस्ता ही पसंद हे.. मेरा ज्यादातर रीलेशन आपसी रीस्तोमे ही हे.. फीर चाहे कोइभी उमरकी हो.. फीर भी मुजे कोइ अफसोस नही होता.. अ‍ैसा क्यु..?

मंजुला : (सर उचा करते आंखोमे प्यारसे देखते) जानु.. इसीलीयेकी आप हम सबके स्वामी हो.. अभी तो ओरभी ओरते ओर लडकीया आपके जीवनमे आयेगी.. तब आपको सभीको न्याय देना पडेगा.. जब तक हमारा पोता नही आजाता.. देवु.. आगे तो बहुत कुछ होगा.. तब आपको पुनो ओर सृती चंदा दीदीको ही सब सम्हालना पडेगा.. ओर तब मेभी आपके साथ होउगी.. अ‍ैसे दुखी मत हो..

देवायत : (अ‍ेक नजरसे देखते) मंजु.. सृती भी..? तुमने उनका नाम क्यु लीया..? पता हे मे अभी कीसको मीलकर आया हु..? तो वोभी..?

मंजुला : (हसते होंठ चुमते धीरेसे कानमे) हां जानु.. जीस तराह हम मां बेटी आपकी बीवीया हे उसी तराह वो दोनो मां बेटी भी आपकी बीवीया हे.. क्या आपने बुआके साथ सादी करली हेनां..? मुजे सब पता हे.. ओर ये बाबाका ओदश भी हे.. की सृती आपसे सादी करले.. देवु वोभी आपको बहुत चाहती हे.. आपको पता नही बुआ कौन हे.. पीछले जन्ममे वोभी तो डोक्टरथी.. ओर आगेभी हमारे पोतेकी बीवी हे.. ओर आपभी तो वही हो.. तो उनकोतो आपसे मीलनाही था..

देवायत : (थोडा सर्मीन्दा होते) मंजु.. आइ अ‍ेम सोरी.. मेने तुमसे पुछे बगैरही ये सब करलीया.. कमसे कम मुजे तुजेतो बताना चाहीये था.. मे भुल गयाकी तुजे सब पता चल जाता हे.. मे बुआको ओर बुआ भी मुजसे जी जानसे प्यार करती हे.. हमारी सादीके कुछही महीनो के बाद हम दोनो रीलेशनमे आगये थे.. आइ अ‍ेम सोरी..

मंजुला : (आंख गीली करते जोरोसे बाहोमे भीचते) नही देवु.. आप माफी मत मांगो.. जब आप दोनो रीलेशनमे नही आये थे तबभी मुजे पताथाकी अ‍ेक दिन आप दोनो रीलेशन मे आजाओगे..आप गील्टी फील मत करो.. वहा हिमाचलमे उस राजाका जोभी कर्तव्य था.. वो ही कर्तव्य यहा आपका हे.. आपको कीतनी बांजोको मां का सुद देना पडेगा.. ओर वोही काम मेरा पोता भी तो करेगा.. हम सभी आपसी रीस्तो मे बंधे हुअ‍े हे.. अभी आपको अ‍ैसे कइ रीस्तोको अपनाना पडेगा..

देवायत : (होंठ चुमते) मंजु तुजे सब ज्ञात होजाता हे.. ओर मुजे कुछभी मालुम नही हे.. इसीलीये मुजे गील्टी फील हो रही हे.. क्या अ‍ैसा नही हो सकताकी मुजे सब पता हो ताकी मुजे गील्टी फील नां हो.. हंम..?

मंजुला : (हसते चुमते) हंम.. अब हो सकता हे.. लेकीन अभी नही.. ये सादी नीपटजानेके बाद.. तब मे आपको सब ज्ञात करवा दुगी.. पर याद रखीयेगा . ये बात पुनम सृतीके अलावा कीसीको पता नही चलनी चाहीये.. सीर्फ वो दोनो ही मेरे बारेमे सब जानती हे.. ओर मेने भी आपसे वादा कीयाथा की मे जानेसे पहेले अपनी पहेचान आपको करवा दुगी.. तब आप मुजे पहेचान जायेगे.. देवु.. आप सृतीको जल्दसे जल्द अपना लीजीये.. हो सकेतो पुनोकी सादीके बाद ही आप उनसे सादी कर लीजीये..

देवायत : मंजु इतनी जल्दी क्यु.. कोइ खास वजह..?

मंजुला : (आंख गीली करते) नही.. लेकीन जो मे केह रही हु अ‍ैसा कर लीजीये.. तब आपको पता चल जायेगा.. बस अभी ओर कोइ सवाल नही.. सो जाइअ‍े बहुत देर होगइ हे.. सुबह हमे जल्दी उठनाभी हे..





कहेते मंजु देवायतकी बाहोमे उनके सीनेपे सर रखके सोने लगी तो देवायतने भी उनको अपनी बाहोमे भर लीया ओर दोनो सोगये.. तब उनके बाजुके रुममे नीर्मला सो रहीथी तो भुमीका अपना गाउन पहेनकर धीरेसे उनकी बगलमे लैट गइ.. ओर आज देवायतसे मीलकर बहुतही खुस थी.. ओर नीर्मलाके पास लेटतेही अपनी आंखोपे हाथ रखते देवायतसे अपने पहेले मीलनको याद करते सोचने लगी..

(थोडा अतीतमे)

जब दो महीनेकी जुदाइके बाद देवायत उनको मीलने आयाथा.. दोनोही कीचनमे थे ओर वो देवायतके लीये चाइ नास्ता बना रहीथी.. तब पहेली बार उनके दिलकी धडकन बढ गइ थी.. जैसे आज उनको मीलने उनका भतीजा नही उनका प्रेमी आया हो.. तब देवायतभी उनको प्यार भरी नजरोसे देखता रहा.. ओर भुमीका देवायतको उनको इस तराह देखते ओर सरमा गइ.. ओर वो नास्ता बनाने लगी..

भुमीका : (सर्मसार होते हसते धीरेसे प्यारसे) देवु.. अ‍ैसे क्या देख रहे हो..? अ‍ैसे मत देखो मुजे सर्म आ रही हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) बुआ देखने दोनां.. आज कितने दिनोके बाद मे आपको देख रहा हु.. बस मुजे अपनी इस प्यारीसी बुआको अपनी आंखोमे बसा लेने दो.. तुम आज कीतनी खुबसुरत लग रही हो.. जैसे अभी अभी आपकी नइ नइ सादी हुइ हो.. हें..हें..हें..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) देवु.. अ‍ेक मारुगी तुजे.. मे बुआ हु तेरी.. कोइ तेरी बीवी नही.. समजे..? जो मेरी अ‍ैसी तारीफ करते मुजे इस तराह देखता हे.. जा जाकर अपनी बीवीकी तारीफ कर.. ओर उसे देख.. सेतान कहीका.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) बुआ.. इसमे मेरी गलती क्या हे जो मे देरसे पैदा हुआ.. वरना आप ही मेरी बीवी होती.. मे नरेश अंकलका चान्स थोडीना लगने देता.. हें..हें..हें..

भुमीका : (सर्मसार होते जुठे गुस्सेसे) देवु.. तु फीर सुरु होगया..? क्या करु इस लडकेका..? (धीरेसे हसते सरमाते) देवु.. क्या तुजे अपनी बुआके साथ फ्लर्ट करते सरम नही आती..? देखले.. मे तो अब बुढी होगइ हु.. अ‍ैसा तुमने मुजमे क्या देखलीया जो मुजे बीवी बनाने चला हे.. तो पहेले पैदा होना थानां..?

देवायत : (आहे भरते) हाये.. बुआ कौन कमबख्त कहेता हे आप बुढी होगइ हे.. आजभी बाजारमे नीकलोगी तो दो तीनको तो अ‍ैसेही घायल कर दोगी.. हें..हें..हें.. बुआ.. सच केह रहा हु.. आजभी आप इतनी खुबसुरत दीखती हो.. लगता हे मुजे सचमे आपसे प्यार होगया हे.. आप मुजसे सादी करलो.. हें..हें..हें..

भुमीका : (अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे) देवु.. प्लीज.. तुमभीनां.. अपनी हरकतोपे बाज आओ.. वरना तेरी बीवीसे सीकायत करनी पडेगी.. की देख तेरा पती मुजपे लाइन मार रहा हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां.. जाओ कहेदो.. वोभी खुस होजायेगी.. वोभी आपकी खुबसुरतीसे जलती हे.. बुआ आप आज सचमे बहुत खुबसुरत लगती हो.. कसमसे.. मे जुठ नही बोलता.. सादी करलो मुजसे..

भुमीका : (सर्मसार होते धीरेसे) देवु.. प्लीज.. अब बस भी करो.. चलो नास्ता बन गया हे अब चाइ बनालु फीर दोनो मीलकर चाइ नास्ता करते हे.. अब कुछभी मत बोलना चुपचाप इधर बैठे रहो.. हें..हें..हें.. बडे आये आसीक बनने.. तो पहेले पैदा होनाथानां..

कहेते भुमीका चाइ बनाने लगी.. देवायतकी अ‍ैसी रोमेन्टीक बातोसे उनकोभी अच्छा लगता था.. लेकीन वो उनका भतीजा था.., भुमीका अपनी ओरसे कोइ पहेल करना नही चाहती थी.. तो अपने दिलकी बात उनसे कैसे कहे..? यह सब सोचते वो चाइ बनाने लगी.. तभी उनके पेटपे दो हाथ महेसुस हुअ‍े.. ओर उनके कंधेपे देवायतके सरको महेसुस कीया तब वो समज गइ की ये देवायत हे.. जो उनको पीछेसे बाहोमे भरते खडा हे.. तो वो जटसे सरमाते पलट गइ..

भुमीका : (देवायतकी बाहोमे सरमाते धीरेसे) देवु प्लीज.. ये क्या कर रहे हो..? तुम मुजे चाइ बनाने दो.. जाओ वहा अपनी जगाहपे जाकर बैठ जाओ.. कोइ आगया तो क्या समजेगा..? ये गलत हे..

देवायत : (बाहोमे कसते धीरेसे भुमीकाकी आंखोमे देखते) बुआ.. प्लीज.. कुछभी गलत नही हे.. सचमे मुजे आपसे प्यार हो गया हे.. आप मेरा प्यार कबुल करलो.., बुआ.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. मे आपको जींदगीभर खुस रखुगा.. सादी करलो मुजसे.. ओर ये कोइ मजाक नही हे.. मे सचमे आपसे प्यार करने लगा हु.. मेरा प्यार कबुल करलो..

भुमीका : (सर्मसार होते बाहोसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करते) देवु.. प्लीज.. ये तुम क्या केह रहे हो..? मे तुम्हारी बुआ हु.. छोडदो मुजे.. ये गलत हे.. अ‍ैसा नही हो सकता.. कीसीको पता चलेगातो हम दोनोकी क्या इजत रेह जायेगी..

देवायत : नही बुआ.. कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. मुजे सचमे आपसे प्यार हो गया हे.. ओर आपभी तो मुजे चाहती हो.. मेने आपकी आंखोमे मेरे लीये प्यार देखा हे.. अगर आप मुजे नही चाहती तो मेरी कसम खाकर कहो.. की आप मुजे नही चाहती.. तो मे अभी के अभी आपको छोडकर चला जाउगा..

कहेते देवायत भुमीको छोड देता हे.. तब भुमी देवायतसे अलग होतेही दो कदम पीछे होजाती हे.. ओर देवायतकी आंखोमे अ‍ेक नजरसे देखती रहेती हे.. आज देवायतने कसमकी बात करते उसे असंमजमे डाल दीया था.. वो कैसे जुठ कहेतीकी मे तुजे नही चाहती.. वो अ‍ेक नजरसे देवायतको देखती रही.. तभी अचानक देवायत आगे बढकर भुमीके होठोपे अपने होठ रख देता हे.. ओर भुमीका जटसे उनसे दुर हटते देवायतको अ‍ेक चाटा लगाती हे..





तब देवायत अपने गालको सहेलाते भुमीको देखता ही रेह गया.. ओर भुमीकी आंखोसे आंसु बहेने लगे.. ओर वो जटसे आते देवायतको अपनी बाहोमे भीच लेती हे.. ओर देवायतके चहेरे पे चुंबनोकी बारीस करने लगती हे.. फीर देवायतका चहेरा अपनी दोनो हथेलीमे थामते उनकी आंखोमे प्यार भरी नजरोसे देखती रही.. तबभी भुमीके आंखसे आंसु बेह रहे थे.. ओर उसने देवायतके होठोपे अपना होठ रख दीया ओर चुमने लगी.. फीर..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) देवु.. तुम सचमे बहुत कमीने हो.. क्या कभी अपनी बुआका प्यार पहेचान नही पाया..? तुमने आइ लव यु कहेने मे इतनी देर क्यु लगादी..? अरे पगले तेरी बुआ भी तुजे चाहती हे.. पर मे पहेल कैसे करु..? तुमभी तो मेरा भतीजा हो.. बस मे तेरे आइ लव यु कहेनेका इन्तजार कर रही थी.. अरे पगले मेतो कबसे तेरी होगइ थी.. मुजे पताही नही चलाकी मुजे तुमसे कब प्यार होगया.. ओर मे भी तुजे चाहने लगी हु.. आइ लव यु देवु.. आइ लव यु सो मच..

देवायत : (हसते) बस बुआ तेरे अ‍ेक चांटेका इन्तजार था.. हें..हें..हें.. आइ लव यु टु..

भुमीका : (आंसु बहातेभी हसते गालको सहेलाते) क्या सचमे तुजे बहुत जोरसे लगी हे..? आइ अ‍ेम सोरी..

देवायत : (हसते) कोइ बात नही.. अबतो मे इसे वसुल करलुगा.. इसीलीये तो मे इधर आया हु..

कहातो भुमीका सर्मसार होगइ ओर देवायतके सीनेपे सर छुपाते मुस्कुराने लगी.. तभी चाइ उबलने लगी तो भुमीका देवायतसे जटसे अलग होकर चाइ पकाने लगी.. वो अब बहुतही सरमा रहीथी.. फीर चाइ बनतेही चाइ नास्ता लेकर बहार डालनींगपे लेकर आगइ.. तब दोनोही पासमे सटकर बैठ गये.. ओर भुमीका अपने हाथोसे देवायतको नास्ता खीलाने लगी.. जब दोनोने चाइ नास्ता करलीया तब भुमीका खडी होने लगी.. तब देवायतने उनका हाथ पकड लीया..

भुमीका : (सरमाते हसते) देवु.. प्लीज.. मे अभी इसे रखकर आती हु तुम जाकर होलमे बैठो.. प्यारमे इन्तजार करना अच्छा लगता हे.. तुमनेभी मुजे बहुत इन्तजार करवाया हे.. हें..हें..हें..

तब देवायत हसकर उनका हाथ छोड देता हे.. ओर सोफेपे जाकर बैठ जाता हे.. तब थोडीही देरमे भुमीकाभी अपना हाथ पोछते आगइ.. ओर देवायतके साथ उनसे सटकर बैठ गइ.. तभी देवायत पलटकर उनकी ओर होगया ओर भुमीके गलेमे हाथ डाल दीया.. तो भुमीकाभी थोडा देवायतकी ओर पलट गइ.. ओर अ‍ेक दुसरेकी आंखोमे देखने लगे.. आज वो अ‍ेक कुआरी लडकीकी तराह सरमाते नजर जुकाते बैठी रही.. तभी दवायतने भुमीकाको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके होठोको पागलोकी तराह चुमने लगे..





देवायतने होंठ चुमतेही धीरेसे अ‍ेक हाथ भुमीके उरोजोपे रख दीया.. ओर हल्केसे दबाते मसलने लगा तब भुमीका सीहरसी गइ.. वो कांपने लगी.. कीतने सालोके बाद आज कोइ इनको इस तराह प्यार कर रहाथा.. तब वो बहुतही उतेजीत होकर कामातुर होगइ.. किशनके बाद बरसो तक वो इस प्यारसे वंचीत रही.. ओर आज उनकाही अंस इसे इस तराह प्यार कर रहाथा.. भुमीकाकी चुत आज फीरसे फडफडाने लगी.. ओर चुतसे पानीका रीसाव होने लगा.. उसने देवायतको कुछ सोच समजकरही धर बुलाया था..

आज वो अपना सबकुछ देवायतपे लुटाना चाहती थी.. वोभी नीर्मलाकी तराह तीन तीन लंडको अपनी चुतमे ले चुकी थी.. तो अब लंडके बगैर कैसे रेह सकती थी.. जबसे नीर्मलासे जानाकी मंजुका पती किशनका बेटा हे.. तबसे वो बडे ओर तगडे लंडकी कल्पना करने लगी थी.. फीरतो जबभी देवायत उनको मीलने आता तब उनके पेन्टके उभारको देखती रहेती.. ओर उसे पेन्टके उभारको देखकर ही अंदाजा लगा लीया था..

की देवायतका लंडभी उनके बापुकी तराह बडा लगता हे.. ओर तबसे वो मनही मन देवायतकी ओर जुकने लगी थी.. ओर जान बुजकर देवायतके साथ हर तराहकी चर्चा करती.. ओर उनकी मस्तीया करती.. देवायतको चाइ देते वक्त अपनी सारीका पलु गीराते अपने आधे बुब्सके दर्शन करवाती.. तो धीरे धीरे देवायत भी उनके साथ हल्की मजाक करते छेडछाड करने लगता.. तब भुमीका बहुतही सरमाती.. भुमीकाने देवायतको उनकी छेडछाड करनेसे कभी नही रोका..





देवायतको हर तराह रीजानेकी पुरी कोसीस करती रहेती.. ताकी दवायतकी भी उनके प्रती चाहत बढे.. ओर आज नतीजा उनके सामने था.. जबसे सृतीने कहाकी मुजे दो दीन कोन्फरन्समे जाना हे तबसे वो देवायतसे मीलनेका प्लानींग करने लगी थी.. भुमीका इतने बरसोसे प्यासी थी.. ओर जबसे नीर्मलाने उनके रीस्तेके बारेमे बात की तबसे भुमीका देवायतको पानेका अ‍ेकभी मोका नही छोडती.. ओर आज वो देवायतको पानेमे कामयाब होगइ..

देवायत लगातार भुमीकाके होठ चुमते उनके दोनो बुब्स बारी बारी मसल रहाथा तो आज भुमीकाके दोनो बुब्सभी अ‍ेक कुआरी लडकीकी तराह उतेजनाकी वजहसे कठोर होगये थे.. दोनोही अ‍ेक दुसरेके मुहमे जीभ डालते अ‍ेक दुसरेके मुहका रस पी रहेथे.. जैसे कोइ अमृत हो..

भुमीका इतनी उतेजीत हो गइथी की अपनी पेन्टी भी गीली करली.. बस.. वो अब देवायतकी अगली पहेलका इन्तजार करने लगी.. आज भुमीका देवायतसे खुदको लुटानेको तैयार थी.. अगर देवायत उनको चोदभी ले तो वो उनसे चुदनेके लीये भी तैयार थी.. उनकी चुत लगातार पानी बहाने लगी..





वो देवायतकी हरकतोकी कीसीभी बातका विरोध नही कर रहीथी.. वो चाहती थी देवायत आज उसे पुरी तराह मसलदे.. आज वो देवायतको पुरी तराह समर्पीत होजाना चाहती थी.. ओर हो भी क्युना हो..? आखीर वोभी तो अप्सरा लोककी परी थी.. जो अपने स्वामीका प्यार पाना चाहती थी.. तब ना देवायतको पता था ओर नाही भुमीकाको.. की दोनोके मीलनकी असली वजाह क्या हे.. बस दोनोही प्यार करने मे मसगुल थे.. दोनोही अ‍ेक दुसरेके अंदर समा जानेकी कोसीसमे लगे रहे.. तभी....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १०८

वो देवायतकी हरकतोकी कीसीभी बातका विरोध नही कर रहीथी.. वो चाहती थी देवायत आज उसे पुरी तराह मसलदे.. आज वो देवायतको पुरी तराह समर्पीत होजाना चाहती थी.. ओर हो भी क्युना हो..? आखीर वोभी तो अप्सरा लोककी परी थी.. जो अपने स्वामीका प्यार पाना चाहती थी.. तब ना देवायतको पताथा ओर नाही भुमीकाको.. की दोनोके मीलनकी असली वजाह क्या हे.. बस दोनोही प्यार करने मे मसगुल थे.. दोनोही अ‍ेक दुसरेके अंदर समा जानेकी कोसीसमे लगे रहे.. तभी....अब आगे

भुमीका : (कीस तोडते कामुक लडखडाती आवाजमे) देवु.. कही मुजे छोडतो नही दोगे..?

देवायत : (उनकी आंखदमे प्यारसे देखते) क्यु..? मुजपे विस्वास नही हे क्या..?

भुमीका : (सरमाकर मुस्कुराते) खुदसे भी ज्यादा हे.., बस फीरभी मुजे यकीन दीलवाओ.. की तुम जींदगीभर मेरा साथ नही छोडोगे..

देवायत : (आंखोमे देखते) कैसे..? बुआ.. यही बात मे आपसे कहु तो..? क्या आप जींदगी भर मेरी बनके रहोगी..? मुजे आप कैसे यकीन दिलवायेगी..?





भुमीका : (होंठोपे चुमते) हां.. कोइ सक..? कहो मे क्या करु जो तुजे यकीन होजाये.. मेरा सबकुछ तुजपे लुटा दुंगी.. मेरा सबकुछ तुजे सोंप दुंगी.. मेरा मन ओर दिलतो तुजे कबसे दे दीया हे.. बोलो अब क्या चाहीये..? मे मेरी सब धन दौलत.. ओर उनसेभी ज्यादा कीमती मेरा ये तन.. आजसे सब कुछ तुजे सोंप दुगी.. अब तो यकीन आगयानां.. की मे तेरा साथ कभी नही छोडुगी.. देवु.. आइ लव यु सो मच..

देवायत : (हसते) हंम.., लव यु टु.. मुजेतो आपपे पुरा यकीन हे.. अब आप कहो.. मे कैसे आपको यकीन दीलवाउ..? मेरा भी सब कुछ आपको सोप दुगां.. क्या ये सब काफी हे..?

भुमीका : (सरारतसे हसते) नही.., पहेले तो तुम मुजे आप आप कहेना छोडदो.. आजसे ये भुमी तेरी होगइ.. तुम मुजे तुम कहेकर बुलाओ.. आजसे मेने तुजे अपना मानलीया हे.. ओर मुजे तेरी धन दोलत नही चाहीये.., क्युकी तुम खुद मेरे हो.. मेरे अपने.. मेरे किशनका अंस.. आजसे मेरे भतीजेके अलावा तुम मेरा बोयफ्रेन्ड भी हो.. मुजे तुम कुछ ओर तरीकेसे यकीन दीलवाओ..हें..हें..हें..

देवायत : (हसते होंठ चुमते) ओर कीस तरीकेसे यकीन दिलवाउ..?

भुमीका : (जोरोसे हसते) अरे.. मुजे क्या पता..? तुम तो काफी होशीयार हो.. थोडा दिमाग लगाओ.. हें..हें..हें.. ये भुमीका तुमको अ‍ैसेही नही मीलेगी.. हें..हें..हें.. तुमने मुजे बहुत इन्तजार करवाते तडपाया हे..

देवायत : (कुछ सोचते ही) हंम.. चलो मेरे साथ.. घरको ताला लगादो.. हम कही जा रहे हे..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) नही.. अब हम कल साम तक इस दरवाजेके बहार कदम भी नही रखेगे.. मुजे यही यकीन दिलवाओ.. फीर यहा सबकुछ होगा.. जो मे चाहती हु.. तुम चाहते हो.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते होठोपे चुमी लेकर) हंम.. बुआ.. तुमको यहाभी यकीन दिलवा सकता हु.. लेकीन मे कोइ काम कच्चा नही करता.., आज तुमको हर तराह यकीन दिलवा दुंगा.. बस मुजपे विस्वास करो.. चलो तैयार होजाओ.. हमे कही जाना हे.. हम सामको बहारही खाना खाकर आजायेगे.. अब आप कुछ मत बोलना मे जो कहु करती जाओ ओर सब देखती जाओ.. चलो..

कहेते देवायत खडा होगया.. ओर भुमीकाके दोनो पैरके बीच हाथ डालकर उसे अपनी गोदमे उठा लेता हे.. तब भुमीका देवायतके गलेमे हाथ डालकर उनकी ओर देखते सर्मसार होकर मुस्कुराती रही.. ओर उसने देवायतके सीनेमे सर छुपा लीया.. देवायत उसे लेकर भुमीकाके बेडरुममे चला गया.. तो भुमीकाकी दिलकी धडकन तेज होगइ.. वो समजने लगी की अब देवायत उसे बेडरुममे लेजाकर उनकी चुदाइ कर लेगा..

यही सब सोचकर वो बहुतही सर्मसार होने लगी.. ओर देवायतके सीनेमे सर छुपाते मुस्कुराती रही.. तभी देवायत बेडरुमके अंदर जातेही भुमीकाको बाथरुमके पास लेजाते गोदसे उतारकर दरवाजेके पास खडी करदीया.. भुमीको अपनी बाहोमे भरते उनके होठोको चुमने लगा.. तब भुमीकाकी सांसे तेज चलने लगी.. उसे अब पुरा यकीन हो गयाकी अब देवायत उनकी चुदाइ करलेगा.. लेकीन भुमीका का अंदाज गलत नीकला..





ओर देवायतने उसे अपनी बाहोसे आजाद करते बाथरुममे धकेल दिया.. तब भुमीका देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखते अंदर जाने लगी.. उनकी चुत फडफडाते हरकतमे आ गइथी.. उसे लगाकी देवायतभी उनके साथ बाथरुममे आजायेगा.. ओर वही उनके साथ छेडखानी करते उनकी चुदाइ करलेगा.. लेकीन देवायत उसे बाथरुममे धकेलकर बहार ही बेडपे बैठ गया.. तो भुमीको बडाही आस्चर्य हुआ..

भुमीका अंदर जातेही बाथरुमका दरवाजा बंध करते उनसे सटकर आंख बंध करते अपने दोनो उरोजोपे हाथ रखकर खडी होगइ.. ओर अपनी भारी सांसोको कंट्रोल करने लगी.. उसे अभी भी यकीन नही हो रहाथा की देवायतने उनके साथ बाथरुममे घुसनेकी हिमायत नही की..

आज देवायतके प्रती उनकी चाहत ओर बढ गइ.. ओर वो सरमाते मुस्कुराकर फटाफट नहाने लगी.. जब नहा लीया तब उसे याद आयाकी उसने टोलीया तो लीया ही नही.. ओर अ‍ेक बार फीर भुमीकाकी दिलकी धडकन बढ गइ.. वो सोचने लगीकी अब वो अ‍ैसेही बहार कैसे नीकलेगी..? ओर वो सरमाते नंगीही दरवाजा धीरेसे खोलती हे..

फीर दरवाजेके पीछे अपना नंगा तन छीपाते धीरेसे थोडा सर नीकालकर देखती हे तो सामने ही देवायत उनके बेडपे वहा पडा कोइ मेगेजीन पढ रहाथा.. तब वो खुब सरमाइ.. ओर धीरसे भारी दिलकी धडकरनसे देवायतको आवाज लगाते अलमारीसे टोलीया नीकालकर देनेको कहा.. तब उसे लगाकी देवायत टोलीया देनेके बहाने अंदर आजायेगा.. लेकीन देवायतने टोलीया देते भी भुमीका की ओर नही देखा.., तब भुमीका को थोडा अजीब लगा.. ओर वो अ‍ेक बार फीर नीरास होगइ..

हमेसा उनके साथ मजाक मस्तीया ओर छेडछाड करने वाला देवायत.. उनके प्रती आज अ‍ैसा व्यवहार देखते भुमीकाको अभी भी यकीन नही हो रहाथा.. की ये वही देवु हे..? ओर वो अपना तन पोछकर अपने उरोजोपे टोलीया लपेटकर बहार आगइ.. तब देवायतने उनके कपडे खोजकर बहार रखदीया था.. ओर वो अपने कपडे देखकर आस्चर्यसे देवायतको देखती रही.. क्युकी आज देवायतने उनके लीये अ‍ेक फेन्सी ड्रेस नीकालकर बेडपे रखाथा.. तो भुमीका बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर देवायतको देखती रेह गइ.. फीर..

भुमीका : (धीरेसे सरमाते) देवु.. ये मेरे कपडे आपने.. प्लीज.. मुजे चेन्ज करना हे.. मुजे ये कपडे नही पहेनना.. अब मे ये नही पहेनती..

देवायत : (हसते खडा होते) हां.. क्यु नही पहेनना..? आज आप यही पहेनोगी.. ओर फटाफट तैयार होकर बहार आजाओ.. हमे देर हो रही हे..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे हीचकीचाते) दे..वु.. मे ये कपडे.. प्लीज.. सारी पहेन लुगीनां.. तुम जीद मत करो..

देवायत : (हसते) क्यु..? क्या खराबी हे इन कपडोमे..? नही मतलब नही.. आज आप यही ड्रेस पहेनोगी.. अगर नये नही पहेनती तो उसे अबतक अपनी अलमारीमे क्यु रखा हे..? क्या ये कपडे मेरे बापुने दिलवाया हेनां..?

कहेते देवायत बहार चला गया.. तब भुमीका उसे आस्चर्यसे मुह फाडके देखती ही रही.. की देवायतको इस कपडेके बारेमे कैसे मालुम..? की यें ड्रेस उसे किशनने दिलवाया था.. उनके मनमे कही सवाल आने लगे.. ओर वो कुछभी बोले बीना चुपचाप देवायतने नीकाला हुआ ड्रेस पहेनने लगी.. फीर ड्रेस पहेनकर अपने बालोको सवांरने लगी.. आज उसने अपने बाल खुले रख दीये.. जीसे वो बहुतही छोटी ओर कामुक दीखने लगी.. तब अ‍ेकबार तो खुदको आयनेमे देखकर सरमा गइ.. ओर सरमाते मुस्कुराने लगी..





फीर सरमाते धीरेसे दरवाजा खोलकर बहार आगइ.. ओर अपनी नजर जुकाते दरवाजेके पास खडी रेह गइ.. तो देवायत उसे देखतेही सोफेसे खडा होगया.. ओर अ‍ेक नजरसे भुमीकाको देखताही रहा.. तब वो बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर धीरे धीरे चलकर देवायतके पास आकर खडी होगइ.. तो अचानकही दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये.. ओर भुमीका देवायतके सीनेमे सर छुपाकर सरमाती मुस्कुराने लगी.. फीर देवायतने भुमीका चहेरा अपनी हथेलीमे थामलीया.. ओर उनकी आंखोमे देखता रहा..

तब वो आंख बंध करते खडी रही.. जैसे देवायतका उनके होठोपे कीस करनेका इन्तजार कर रही हो.. तभी उसने अपने होठोपे देवायतके गरम होंठ महेसुस हुअ‍े.. ओर वो भी देवायतका होंठ चुमते उनका साथ देने लगी.. आज वो कच्ची कुआरी लडकीकी तराह सरमा रही थी..

अ‍ैसा प्यार उसे कीसीसे भी नही मीला था.. तभी देवायतने उनके उरोजोपे हाथ रख दीया ओर हल्केसे मसल दीया तो वो सरसे पांव तक हील गइ.. उनकी चुतकी नाजुक पंखडीया फडफडाने लगी.. ओर भुमीने जोरोसे देवायतको अपनी बाहोमे भीच लीया..

देवायत : (हसते) बुआ.. तो अब चले..? ताला कहा हे..? मे लगा देता हु..

भुमीका : (धीरेसे सरमाते) वही हे.. दरवाजेके पीछे.. चलीये..

कहेते दोनोही अ‍ेक दुसरेकी बाहोसे अलग होकर बहार आगये.. देवायतने दरवाजा बंध करके घरको ताला लगा दीया.. तबतक भुमीका वहा खडी रहेते देवायतको तीरछी नजरोसे देखते सरमा रहीथी.. आज वो कीतने बरसोके बाद अ‍ैसे कपडे पहेनकर बहार नीकल रहीथी.. तभी अचानक देवायतने फीरसे भुमीकाको अपनी गोदमे उठालीया.. ओर अपनी कारकी ओर चल पडा.. तब भुमीका सर्मसार होते देवायतकी ओर देखती रही.. ओर उसने भुमीकाको कारमे आगे बीठा दीया.. फीर वोभी कारमे ड्रइवींग सीटपे जाकर बैठ गया..

भुमीका : (सरमाते हसते) देवु.. हम कहा जा रहे हे..? कुछतो बताओ..? मुजेतो इन कपडोमे बहुत सरम आ रही हे.. कोइ हमे देखना ले..

देवायत : (हसते) देखने दो.. ओर आपभी देखती जाओ.. आज आपके लीये खास दिन हे.. आज आपको बहुत बडी सरप्राइज मीलने वाली हे.. फीर आपको मुजपे पुरा यकीन हो जायेगा.. की मे आपको कभी नही छोडुंगा.. वोभी जींदगी भरके लीये..

भुमीका : (हसते धीरेसे सरमाते) देवु.. मेतो मजाक कर रहीथी.. मुजे पुरा यकीन हे.. तुम मुजे कभी नही छोडोगे.. बस मेतो सीर्फ अपने दिलको तस्सली देने तुमसे यकीन दिलानेको कहाथा.. जब मुजे पता नहीथा की तुम मेरे किशनके बेटे हो फीरभी मेने तुजपे विस्वास कीयाथा.. ओर तुमनेभी हमारा बहुत काम कीया हे.. ओर अब तो तुम मेरे अपने हो.. मेरे किशनका खुन.. तो अबतो पका यकीन तो होगा ही..

देवायत : (हसते) बुआ.. पता हे जब मे ओर मंजु पहेली बार आपके घर आयेथे..? तबही मे आपको पहेचान गयाथा.. बस आप मंजुकी मम्मीको हमारे बारेमे सब बता ना दे.. इसीलीये मेने अपनी पहेचान आपसे छुपाइ थी.. जब आप पहेचानकी नीकली तब ही हम दोनोने सादी करनेका फैसला करलीया था..

ताकी आप कभी मंजुकी मम्मीको मीले ओर उसे हमारे बारेमे बोलदे ओर हमे सादी करनेमे कोइ मुस्केली होजाये.. तो उसी दिन हम दोनोने आश्रममे जाकर सादी करली.. ओर आपके रुपरके रुममे ही हम दोनोने अपनी सुहागरात मनाली..

भुमीका : (हसते बाजुमे मुका मारते) हंम.. तुमने ओर सृतीने मीलकर मुजे उलु बनाया.. वहा आकर मुजसे जुठ बोला की तुम दोनो सादी सुधा हो.. ओर सहेरमे घुमने आये हो.. वैसे तुम भी तो मेरे किशनकी तराह राजा हो.. अब तक तुमने कीतनी सादिया कीहे.. हें..हें..हें.. कमसे कम दो तीनतो करली होगी..? सच बताना.. अगर जुठ बोलातो तुजे खुब पीटुगी.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) बुआ.. आपसे मे कभी जुठ नही बोलता.. कायदेसे लीगल.. दो.. ओर सीक्रेट बीवी भी दो हे.. ओर सबके बारेमे मेरी मंजु जानती हे.. मे सब काम मेरी मंजुको कहेकर ही करता हु.. अगर नही भी कहु.. फीर भी उसे सब पता चल जाता हे.. इनसेतो अच्छा हे सब उनको कहेकर ही करो.. हें..हें..हें..

भुमीका : (सरमाते हसते) तो क्या आजके बारेमे भी.. मतलब हम दोनोके बारेमे भी उसे पता चल जायेगा..?

देवायत : (हसते) हंम.. सायद.., लेकीन आप फीकर मत करो.. मंजुको मेरे कीसीभी रीलेशनसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. अगर उसे नही पता होगा फीरभी मे सीर्फ उसे मौका मीलतेही सब कुछ बता दुगा..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) नही देवु.. तुम उसे कुछ मत बताना.. मे हम दोनोका रीस्ता सबसे छुपाकर रखना चाहती हु.. तुम मेरे भतीजे हो.. फीरभी मे तेरी ओर आकर्सीत होगइ.. देवु.. जबसे तुमको देखा हे तबसे ही मे तुजे पसंद करने लगी थी..

तभी देवायत सहेरसे बहार नीकलनेसे पहेले अ‍ेक मार्केटमे अ‍ेक जगाह कार खडी कर देता हे.. ओर भुमीकाको कारमेही बैठे रहेनेको कहेकर दो तीन दुकानमे जाकर कुछ खरीदी करके केरी बेग लेआते पीछेकी सीटमे रख देता हे.. ओर कार अपने गांवके रास्तेकी ओर ले जाता हे.. तब ये रास्ता भुमीकोभी जाना पहेचाना लगा.. वो किशनके साथ ये रास्तेपे कइ बार उनकी हवेलीपे या आश्रमपे जा चुकीथी.. ओर उसने देवायतकी ओर सवालीया नजरोसे देखा..

भुमीका : देवु..? क्या हम तेरे गांव या आश्रम जा रहे हे..?

देवायत : (हसते) नही बुआ.. नाही.. हम हमारे गांव जा रहे हे.. ओर नाही आश्रम.. बस आप सीर्फ बैठी रहो.. ओर देखती जाओ.. आज आपको अ‍ेक नइ जगाह ही दीखाता हु.. मे वहा कइ बार जा चुका हु..

भुमीका : (जोरोसे हसते) मुजे यकीन दिलवानेके चकरमे कही मे फसतो नही गइ..? हें..हें..हें.. तुम कहा कहा घुमाओगे.. मुजे तो कुछ पताही नही चलता.. हें..हें..हें.. क्या जंगलमे लेजाकर प्यार करोगे..? हें..हें..हें..

देवायत : (हसते कारको जंगलकी ओर मोडते) नही बुआ.. आप यकीन करो.. आज आप अ‍ैसी फसोगी.. अ‍ैसी फसोगी.. की मुजसे कभी छुट नही पाओगी.. आप मुजे जींदगीभर याद करोगी.. आजका दिन आप कभी नही भुलोगी.. आज आपके लीये बहुतही खास दिन हे.. आज आपको मुजपे पुरा यकीन हो जायेगा..

कहेते दोनोही हसने लगे.. जैसे जैसे कार धने जंगलकी ओर जाने लगी.. भुमीकाकी दिलकी धडकन बढने लगी.. उनके मनमे कइ तराहके सवाल आने लगे.. उसे लगाकी देवायत उसे जंगलमे चोदनेके लीये तो नही लेआया.. ताकी इनकी मेरे साथ पहेली चुदाइ मे याद रख सकु.. वही सब सोचते वो फीरसे रोमांचीत होने लगी.. ओर अ‍ेक बार फीरसे उनकी चुत फडफडाते पानीका रीसाव करने लगी..

वो बहुतही सर्मसार होने लगी.. जैसे जैसे आगे बढते गये.. भुमीकाकी सांसे भारी होने लगी.. उनके दोनो उरोज उतेजनाकी वजहसे कठोर होने लगे.. तब साम होनेको आइथी.. तभी जंगलके बीचमे अ‍ेक खंडहर जैसा बडा मंदिर नजर आया.. ये वोही मंदिर था.. जहा देवायतने चंदासे सादी करली थी.. ओर आज भुमीको लेकर आया था.. ओर देवायतने कारको वही लेजाकर रोक दी.. तब दोनो ही कारसे उतर गये..

तब देवायतने पीछली सीटसे केरी बेग अपने होथोमे लेली तब भुमीका भी कारकी दुसरी ओरसे उतरते आस्चर्यसे सभी ओर नजर घुमाते देखती रही.. तो चारो ओर बडे बडे पेडके अलावा कुछ नही देख रहाथा.. साम होनेकी वजहसे जंगलमे अंधेरे जैसे लगने लगाथा.. वहा सीर्फ पक्षीओकी आवाज ही सुनाइ दे रहीथी.. तो अ‍ेक बारतो भुमीका भी डरने लगी.. पेडकी वजहसे वहा धना अंधेरा लग रहाथा तो भुमीका जटसे देवायतके पास आकर खडी होगइ.. ओर उनका हाथ बाजुसे पकड लीया..

भुमीका : (हसते देवायतके पास आकर उनका हाथ पकडते) देवु.. ये तुम मुजे कहा लेकर आये हो..? मे तो इधर कभी नही आइ.. क्या तुम इधर आ चुके हो..? ये किसका मंदिर हे..?

देवायत : (भुमीका हाथ कसके पकडते) बुआ.. ये हम सबके आराध्य देवका मंदिर हे.. पता नही इस मंदिरसे मुजे बहुत लगाव हे.. मे यहा बहुत बार आ चुका हु.. यहा आतेही मुजे बहुत बडा सुकुन महेसुस होता हे.. चलीये अंदर.. यहा बहुतही कम लोग आते हे.. ओर ये आदीवासी कबीले वालोका मंदिर हे.. तो आपको डरनेकी जरुरत नही हे.. चलीये अंदर..

दोनोही अंदर चले गये.. भुमीकाने अबभी देवायतका हाथ थामकर पकडके रखाथा.. तब मंदिरके अंदर पुरे परीसरमे पेडोके सुखे पते चारो ओर चादर बनाते बीखरे पडे थे.. तब भुमीका कसके देवायतके हाथको पकड लेती हे.. वो चारो ओर नजर घुमाते देखती रहेती हे.. ओर दोनो मंदिरके अंदर आगये.. तब बीचमे अ‍ेक बडा शीवलींग दीखा.. वहाभी सुखे पते ओर सुखे हुअ‍े फुल बीखरे पडे थे.. तभी देवायत उसे हाथसे साफ करने लगा.. तब भुमीका वही खडे रहेते उसे देखती ही रही..

भुमीका : देवु.. लगता हे इधर कोइ आता नही होगा.. क्या मे आपकी कुछ मदद करु..?

देवायत : (हसते) अरे नही बुआ.. बस होगया.. हमे कहा पुरा मंदिर साफ करना हे.. सीर्फ यहीतो साफ करना हे.. बुआ.. मे जबभी परेसान होता हु यहा आजाता हु.. तो यहा आकर मनको सांती ओर बहुत सुकुन मीलता हे.. मे घंटो तक यहा अकेला बेठता हु.. ओर साम होतेही वापस घर चला जाता हु.. यहा मुजे अ‍ेक अपनापन लगता हे.. ये कबीले वालोका मंदिर हे.. वो लोग लडकीको भगाकर यही आकर सादी कर लेते हे.. ओर सब उस सादीको मान लेते हे.. मेरी सब कबीले वालोसे ओर उनके सभी सरदारोसे जान पहेचान हे..

भुमीका : (हसते) अच्छा..? लेकीन वो लोग भागते क्यु सादी करते हे..? क्या वो अ‍ेरेन्ज मेरेज नही करते..?

देवायत : (हसते) नही बुआ.. वहा अ‍ेरेन्ज मेरेज नही होती.. सब भागकर ही सादी करते हे.. उनकी यही परंपरा हे.. वो मे सब आपको बादमे बता दुंगा.. थोडी लंबी कहानी हे.. चलीये सब साफ होगया.. आप इधर आजाइअ‍े.. ओर मे जैसा कहु करती जाइअ‍े.. आज अभी आपको सब पता चल जायेगा.. अब आपकी सरप्राइजका वक्त आगया हे.. इस दिनको आप कभी नही भुलेगी.. आइअ‍े.. ओर लीजीये इसे पकडीये..

कहेते देवायतने केरी बेगसे अ‍ेक हार नीकालकर भुमीकाको दीया.. तब भुमीका नजदीक आगइ ओर हारको हाथमे लेकर देवायतकी ओर सवालीया नजरोसे हसते हुअ‍े देखती रही.. तभी देवायतभी भुमीकाके साथ उनसे सटकर खडा होगया.. ओर वोभी भुमीने पकडे हुअ‍े हारको हाथ लगाता हे..

फीर दोनोही हारको शीवलींगपे चडा देते हे.. फीर दोनो ही कुछ फुल ओर बेलपत्र लींगपे चडाकर उनका वही पडे पानीसे अभीसेक करते हे.. फीर दोनोही अ‍ेक हाथ जोडकर अ‍ेक साथ खडे होकर दर्शन करते हे.. तभी देवायत दुसरी केरी बेगसे दो हार नीकालता हे..

देवायत : (हसते) लीजीये बुआ.. इसे पकडीये.. आज हम दोनोकी सादी हे.. मे आपसे गांधर्व विवाह कर रहा हु.. आजसे आप हमेसाके लीये मेरी होजायेगी.. कैसा लगा मेरा सरप्राइज..? हें..हें..हें..

भुमीका : (सोक्ट होकर अ‍ेक नजरसे देवायतको देखते) देवु..? ये सब.. लेकीन क्यु..?

देवायत : (मुस्कुराते) बुआ.. आपको यकीन दिलवानेके लीये मे आपसे सादी कर रहा हु.. आपको यकीन दिलवानेका मेरे पास दुसरा कोइ ओर रास्ता नही था.. आप मेरी पत्नी होजायेगी तो मे आपको कैसे छोड सकता हु..? अबतो यकीन होजायेगानां..?

भुमीका : (अ‍ेक नजरसे देखते) लेकीन देवु मेतो अ‍ेक विधवा हु.. तुमसे उमरमेभी बडी हु.. अ‍ेक आधेडसे सादी करोगे..? मत करो ये पाप.. मुजे तुमपे पुरा यकीन हो गया हे.. मत करो मुजसे सादी..

देवायत : (हसते) बुआ.. मेरे तनकी आग मीटानेके लीयेतो गांवमे बहुत सारी ओरते ओर लडकीया हे.. मेने तो आपको दिलसे चाहा हे.. ओर कहेते हे अ‍ेक विधवासे सादी करना बहुत बडा पुन्यका काम हे.. आप आधेड नही हो.. मेरी नजरमे आप मेरी मंजुकी तराह अ‍ेक सुसील कन्या हो.. ये कोइ पाप नही.. ओर सच्चे दिल वालोकी सादीसे तो भगवान भी खुस होते हे.. मे आपको हमेसाके लीये अपनाना चाहता हु.. आजसे आप अ‍ेक विधवा नही अ‍ेक सुहागन होजायेगी.. मेरी प्रीग पत्नी.. बुआ मे आपको बहुत चाहता हु..

इतना सुनतेही भुमीका देवायतके सीनेमे सर रखते उनसे लीपट गइ.. ओर फुटफुटके जोरोसे रोने लगी.. तब देवायत हसते हुअ‍े उनकी पीठ सहेलाता रहा.. ओर भुमीका आंसु बहाती रही.. फीर भुमीका देवायतका चहेरा थामते उनकी आंखोमे प्यार भरी नजरोसे देखती रही.. आज वो मनही मन अपने आपको देवायतको पुर्ण समर्पीत कर बैठी.. आज भुमीने मनही मन देवायतपे अपना सबकुछ न्योछावर करने की ठानली..

भुमीका : (प्यारसे गाल सहेलाते) देवु.. तुजे मुजसे सादी करनेकी जरुरत नही हे.. आज मुजे पुरा यकीन हो गया की तुम जींदगी भर मेरा साथ नही छोडोगे.. मेरा इतना बडा इम्तहान मत लो.. आजसे अभीसे मे तुमको पुर्ण समर्पीत होती हु.. मेभी वादा करती हु जींदगीभर मे तेरा साथ कभी नही छोडुगी.. चाहे कुछभी परीणाम क्युना आये.. आजसे ये बुआ.. तेरी होगइ.. मत कर मुजसे सादी.. हम दोनोके रीस्तेमे ये सब जरुरी नही हे..

देवायत : (मुस्कुरते सर चुमते) नही बुआ.. मेने आपको दिलसे प्यार कीया हे.. ओर प्यारकी कोइ हद नही होती.. तो दिलके अ‍ेक कोनेमे मुजे क्षोभ होगा की मेने मेरी बुआके साथ कुछ गलत कीया हे.. तब मे आपसे नजरे नही मीला पाउंगा.. बुआ मे प्यारमे सारी हदे पार करना चाहता हु.. जबसे आपको पहेली बार देखा तबसे ही आप मेरी क्रस रही हे.. मे आपको पाना चाहता था.. आपके साथ सारी हदे मीटाना चाहता था.. मे आपके अंदर आपकी आगोसमे पुर्ण समा जाना चाहता हु.. इसीलीये ये सादी जरुरी हे..

भुमीका : (प्यारसे गालपे हाथ रखते) फीरभी देवु.. अ‍ेक बार फीर सोचले.. तु जो चाहता हे तुजे सबकुछ मीलेगा.. मे अपने आपको तुजे समर्पीत कर चुकी हु.. तुम जैसेभी प्यार करना चाहते हो मेरे साथ कर सकते हो.. आजसे ये तनभी तेरा हे.. तो फीर सादी करनेकी क्या जरुरत हे.. क्युकी ये बहुतही पवित्र बंधन हे..

देवायत : (हसते) बुआ मुजे सब पता हे.. मे सीर्फ आपको इस जन्ममे नही हर जन्ममे पाना चाहता हु.. सादीतो करुगाही.. भलेही हमे हमारा रीस्ता दुनीयासे छीपाना पडे.. जबतक आप नही चाहोगी तबतक हम दोनो हमारे रीस्तेको छुपायेगे.. मे वादा करता हु.. इस बातका कीसको पता नही चलेगा..

भुमीका : (हसते) अरे मेरा पागल मजनु.. तेरी बुआसे इतना प्यार करता हे..? देवु तु बहुत अच्छा हे.. तेरा दिल बहुत साफ ओर नेक हे.. मेभी तुजे अंधेरेमे रखना नही चाहती थी.. आज मुजेभी अपने मनके बोजसे हल्का करने दो.. मे भी इस भगवानकी साक्षीमे तुमसे कुछ कन्फेस करना चाहती हु..

देवायत : कहो बुआ.. आज हमारे लीये बहुतही पवित्र दिन हे.. अ‍ेक भी बात अपने मनमे मत रखो..

भुमीका : (सरमाते नजरे चुुराते) देवु.. जबसे तुजे पहेली बार देखा तबसेही तेरी ओर मे आकसीर्त हो गइथी.. फीर जब नीर्मलासे जाना की तुम मेरे किशनका बेटा हो.. ओर नीमुका तेरे साथभी फीजीकल रीलेशन हे.. तबसे मेभी तुजे हर हालमे पाना चाती थी.. मे जान बुजकर तेरे साथ मस्तीया करती थी..

तुजे इसीलीयेतो मेरे साथ छेडछाड करते नही रोका.. क्युकी मुजे भी नीमुकी तराह तेरे साथ फीजीकल अ‍ेक्ट्रेसन होगया था.. मे सीर्फ अपने तनकी प्यास बुजानेके लीये ये सब कर रहीथी.. मे बहुत सालोसे प्यासी हु.. ओर तेरी सासके साथ भी मेरा लेस्बीयन रीस्ता हे..

देवायत : (हसते) क्या..? मतलब..? आप..

भुमीका : (अ‍ेकदा सर्र्मसार होते धीरेसे) हां.. देवु.. में.. मे तेरे साथ फीजीकल होना चाहती थी.. मे जबभी तुजे देखती वासनामे अंधी होजाती.. ओर तुमसे जान बुजकर छेडखानी करती.. ताकी तुमभी मेरे साथ छेडखानी करते आगे बढो.. लेकीन तेरा ओर मेरा रीस्ता बुआ भतीजेका था.. तो मे पहेल करनेसे डर रही थी.. इसीलीयेतो आज तुजे मौका मीलतेही बुला लीया..

ताकी मे तेरे साथ सारी हदे पार कर सकु.. लेकीन तुमने तो आज मेरे प्यारका मायना ही बदल दीया.. इसीलीये मे सादी करनेसे हीचकीचा रहीथी.. लेकीन अब नही.. देवु.. मुजे सचमे तुमसे प्यार होगया हे.. ओर मे वादा करती हु.. पत्नीका हर फर्ज मे नीभाउगी.. आजसे तेरी बुआ तुजे समर्पीत होती हे.. बनाले मुजे अपनी बीवी.. मे आजसे बीवीका हर फर्ज नीभाउगी..

देवायत : (हसते) हंम.. तो चले.. हम दोनो सादी करले..? बुआ मे जो करु ओर जो भी कहु आप मेरे साथ दोहराती जाइअ‍े.. यही समजलो.. ये सादी करके हम दोनो सीर्फ इस जन्मके लीये नही.. अगले सभी जन्मोके लीये जुड रहे हे.. मे आपको हर जन्मके लीये पाना चाहता हु..

भुमीका : (हसते गाल सहेलाते) बीलकुल पागल हो.. देवु अ‍ेक बात ओर.. हम दोनो हमारे इस रीस्तोको सबसे छुपायेगे.. मरते दम तक.. ओर अब सीर्फ सबकी हाजरीमे ही तुम मुजे बुआ कहोगे.. अकेलेमे मे सीर्फ तुम्हारी भुमी हु.. आजसे ये भुमी तेरी होगइ.. समज गयेनां..?

तब देवायत हां मे गरदन हीलाते हसने लगता हे.. फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेके सामने हो जाते हे तब भुमीका अ‍ेक कुआरी लडकीकी ओर नइ नवेली दुल्हनकी तराह खुब सरमाने लगती हे.. वो कुछ ओर सोचे समजे इनसे पहेलेही देवायतने उनके गलेमे हार पहेना दीया.. तब भुमीकाभी अ‍ेक बार अपने दिलकी धडकन चुक गइ.. फीर वोभी अपनी नजरे जुकाते देवायतको हार पहेना देती हे..

तभी देवायत जेबसे अ‍ेक डीबी नीकालते उनमेसे अ‍ेक मंगलसुत्र नीकालकर भुमीकाको पहेना देता हे.. जो अभी मार्केटसे कुछ सामान खरीदके लाया था.. तब भुमीकाकी आंख गीली होने लगी.. ओर देवायत केरी बेगसे अ‍ेक ओर डीबी नीकालकर उनमेसे चुटकी भर सींदुर नीकालता हे.. तो भुमी आस्चर्यसे देवायतको प्यारसे देखती रही.. ओर उनके आंसु छलकने लगे.. तभी देवायत भुमीकाकी मांगमे सीदुर लगाते उनकी मांगको भर देता हे.. तब भुमीकाके सब्रका बांध टुट गया..

ओर वो देवायतके सीनेमे सर छुपाते जोरोसे फुटफुटकर रोने लगी.. तो देवायतने भी उसे अपनी बाहोमे भरलीया.. जीस लडकेको भुमीका अपनी वासना संतोसीके लीये युज करना चाहती थी.. वोही लडकेने आज उसे प्यारके पवित्र बंधनमे बांध लीया था.. ओर भुमीका मनही मन रोते हुअ‍े भगवानसे देवायतको हर जन्ममे पतीके रुपमे मांगनेकी प्रार्थना करने लगी.. तब उसे नही पताथाकी वो ये प्रार्थना हर जन्ममे करती हे.. जीहां.. वो पीछले जन्मकी डोक्टर माधवी हे.. ओर इस जन्ममे भी इसे देवायत पतीके रुपमे मील गया था.. तभी..

देवायत : बुआ.. अब चलीये मे जोभी कहु मेरे साथ दोहराइये..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) देवु.. प्लीज.. अब मे आपकी बुआ नही हु.. आजसे मे आपके लीये सीर्फ आपकी भुमी हु.. भुमी आजसे आपकी बीवी होगइ हे.. अब मुजे आप नामसे बुलाइअ‍े.. अब आप ही मेरे पती हो..

देवायत : (हसते) हंम.. भुमी.. तो फीर सुरु करे..?

भुमीका : (सरमाते हसते हां मे गरदन हिलाते) हंम..

देवायत : (लींगके सामने हाथ जोडकर) आजसे मे भगवानको साक्षी मानकर आपको हर जन्मके लीये पत्नी के रुपमे स्वीकार करता हु.. ओर पत्नीका पालन पोसनसे लेकर पतीकाजो भी फर्ज होता हे.. वो हर फर्ज नीभाउगा.. ओर आपका साथ कभी नही छोडुगा..

भुमीका : (दोहराते) आजसे मेभी भगवान को साक्षी मानकर आपको हर जन्मके लीये अपने पतीके रुपमे स्वीकार करती हु.. ओर अपना पत्नीधर्म समजकर पत्त्नीका जोभी धर्म होता हे वो हर धर्म नीभाउगी.. ओर मेभी जींदगीभर आपका साथ नही छोडुयी.. चाहे कुछभी होजाये..

दोनोही वहा साथमे हाथ जोडकर पती पत्नीकी हर कसम खाते हे.. तब कसम खाते खुसीके मारे भुमीकाकी आंख गीली होती रही.. देवायतने हाथ जोडकर दर्शन करलीये फीरभी भुमी आंख बंध करते अबभी प्रार्थना कर रही थी.. वो समजने लगी.. की आज उसे भगवानके रुपमे अपना पती मील गया हे..

वो बहुतही रोमांचीत होने लगी.. अ‍ैसी फीलींग्स उसे नरेशके साथ सादी करनेके बावजुद ओर किशनके साथ भी बहेन ओर पत्नीका फर्ज नीभाते भी नही आइ थी.. ओर वो बार बार देवायतको समर्पीत होनेकी प्रार्थना करने लगी.. तब देवायत उसे प्रार्थना करते हसते हुअ‍े देखता ही रहा..

देवायत : (हसते) भुमी.. अब चले..? आजतो तुमने भगवानसे बहुत कुछ मांगलीया.. हें..हें..हें..

भुमाका : (सरमाते हसते देवायतकी बाहोमे समाते) हां.. आज मेने अपने देवुको हमेसाके लीये मांगलीया हे.. ओर वोभी आने वाले सभी जन्मोके लीये.. देवु.. कितना अदभुत हेनां..? हम दोनोके बीच उमरका इतना फर्क होनेके बावजुदभी हम दोनोका प्यार कीतना गहेरा हे.. आज मे आपके प्यारको महेसुस कर रही हु.. कास मे आपको हमारा वारीस दे पाती.. बस अ‍ेक यही अफसोस रेह जायेगा.. की मे आपको हमारा बच्चा नही दे पाउगी..

देवायत : (भुमीका सर चुमते) नही भुमी.. अफसोस करनेकी कोइ जरुरत नही हे.. हम दोनोही आज इश्वरके सामने खडे हे.. मे वादा करता हु.. हम दोनो इस दीनीयाको छोडडर वापस जन्म लेकर आयेगे.. ओर अगले जन्ममे हम दोनोही मीलेगे.. ओर तब हमारा बच्चा भी होगा.. ओर क्या पता इस जन्ममेभी हो.. हें..हें..हें..

भुमीका : (सरमाते हसते सर उठाकर देवायतकी आंखोमे देखते) नही देवु.. इस जन्ममे मुमकीन नही हे.. हांलाकी मुजे अभीभी पीरीयड आ रहा हे.. इस जन्ममे होगातोभी मे आपका बच्चा पैदा करुगी.. बस सीर्फ सृतीका डर लग रहा हे.. मे उसे क्या जवाब दुगी..? लेकीन मेभी आपसे वादा करती हु..

अगले जन्ममे मे मेरी सृतीके कोखसे ही पैदा होना चाहती हु.. ओर तब मे आपके प्यारका इन्तजार करुगी.. ओर हमारा मीलन भी होगा.. ओर हमारा बच्चाभी पैदा करुगी.. आइ प्रोमीस.. बस आप तब मुजे अपनी पहेचान करवा दीजीयेगा..





देवायत : भुमी.. अगर इस जन्ममे बच्चा होता हे तो हम सृतीको सबकुछ सचाइ बता देगे.. मे कीसीसे छुपकर कुछ करना नही चाहता.. तु फीकर मत कर मेरी मंजु सब सम्हाल लेगी.. वो कोइ सामान्य ओरत नही हे..

कहा तो भुमी देवायतके गले लगतेही उनके होठ चुम लेती हे.. फीर दोनोही प्यार भरी बाते करते अपने फ्युचरकी प्लानींग करते वहा काफी देर तक बैठे रहे.. फीर उठकर कारकी ओर चलने लगते हे.. तब दोनोही सहेरकी ओर वापस नीकल गये.. वहा सहेरमे पहोंचतेही देवायतने अ‍ेक बडी आलीसान होटेलकी ओर कारको जाने दीया.. तब पुरे रास्ते भुमीका सीर्फ देवायतको देखती ही रही.. आज वो देवायतको अपनी आंखोमे बसालेना चाहती थी.. उसे अबभी यकीन नही हो रहाथा.. की कोइ लडका उसे इतना प्यार भी कर सकता हे....

कन्टीन्यु
 
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