Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 37 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

लखन : हंम.. वो चाची धरकी सफाइ कर रही थी.. फीर..

साहील : भाइ.. चाचा ओर बडे भैया अपनी नोकरीपे गयेथे.. तो दोनो दीदी कोलेज गइथी.. तब चाची उनके कमरेकी सब सफाइ कर रहीथी.. वहा तीनोकी अलमारी अलग अलग हे.. तब चाचीको सायरादीदी की अलमारीमे सफाइ करते बहुत सारी आइपीलकी ओर पेइन कीलरकी गोलीया मीली.. जो उसने अ‍ेक खानेमे छुपाकर रखीथी.. जीसे देखकर चाची चोंक गइ.. ओर उसने वो अपने पास रखली..

लखन : (मुस्कुराते) तो उनसे ये थोडीना साबीत होता हे की वो तेरे कादीर भाइसे चुदवाती हे.. हें..हें..हें..

साहील : (सरमाते धीरेसे) नही भाइ सुनोतो सही.. जब उनको ये सब मीला तो उनको सबाना दीदीपे भी संकाये होने लगी.. तो वहा उनकी अलमारीमे उनको कुछ नही मीला लेकीन भाइकी अलमारी साफ करते उनको वहासे बहुत सारे कोन्डम मीले.. तब चाचीको बहुत कुछ आसंकाये होने लगी.. ओर उसने दोनोके उपर नजर रखने की ठानली.. वो दोनोके उपर नजर रखने लगी.. ओर उस रात चाचाकी नाइट सीफ्ट सुरु होगइ..

लखन : (हसते) हंम.. फीर.. हें..हें..हें..

साहीला : (हसते) क्या भाइ.. आपको हसी आ रही हे..? सुनो.. रातपे चाचा अपनी नोकरीपे चले गये तब चाची भैया ओर दोनो दीदीया खाना खा रहेथे.. तब भैया ओर सायरादीदी आंखोके इसारोसे बाते करने लगे.. भैया दीदीको देर रात उपर छतपे आनेको केह रहेथे.. तब उनको नही पताथाकी आज चाची उन दोनोके इसारोको नोटीस कर रही हे.. फीर खाना खाकर भाइ छतपे सोने चले गये तो चाची ओर दोनो दीदीने घरका सब काम नीपटा लीया ओर फीर थोडी देर टीवी देखकर सब अपने अपने रुममे सोने चले गये..

लखन : (हसते) फीर.. हें..हें..हें.. आज दोनो गये कामसे.. हें..हें..हें..

साहील : (हसते) हां भाइ.. सुनोतो सही.. चाचीने दोनोके इसारे देखलीये तब वो अपने रुमका दरवाजा बंध करके कीचनमे अंधेरेमे फ्रिजके पीछे छुपकर खडी थी.. जब देर रात सबानादीदी सोगइ.. तब सायरादीदी धीरेसे दरवाजा खोलकर बहान नीकली.. फीर उसने अपने रुमका फीर चाचीके रुमके दरवाजेको बहारसे धीरेसे लोक करदीया.. ओर दबे पांव धीरेसे उपर छतपे भैयाके पास चली गइ.. तब उनको नही पताथा की चाची कीचनमे उनपे नजर गडाये खडीथी.. हें..हें..हें..

लखन : (जोरोसे हसते) साला.. तो क्या चाचीने दोनोको रंगे हाथ पकडलीया..?

साहील : (हसते) हां.. जब सायरादीदी उपर चली गइ तो चाचीभी काफी देरके बाद उपर दबे पांव गइ.. ओर सीडीयोके पास छुपकर देखने लगी.. तब कादीर भाइ सायरादीदीके उपर लेटते उनको जोरोसे चुदाइ कर रहेथे.. जब दोनो जडने लगे तब चाची दबे पाव उनके पीछे पास जाकर खडी होगइ.. दोनोने चाचीको खडे पाया.. तो उनकी सीटीबीट गुल होगइ.. चाची उनको कुछ नही बोली..

ओर अ‍ेक अ‍ेक जोरोका तमाचा दोनो के गालपे जड दीया.. फीर दोनोको फटकार लगाकर सुबह उनको मीलकर बात करनेको कहा.. फीर जब सुबह हुइ.. तब भाइ ओर दीदी दोनोही अपने घरपे नही थे.. सुबह चाचीको सायरा दीदीकी चीठी मीली.. जो चाचीके नाम लीखकर गइथी.. की तीन साल पहेलेही दोनो स्कुलमे थे तबही नीकाह करलीया था.. तो उनको ढुढनेकी कोसीस ना करे..

लखन : (हसते) हंम.. तो ये बात हे.. तो इसमे तुम क्या कर सकते हो.. तु अब अपना देख.. ये सबतो होताही रहेगा.. अब ये बता तुम ओर तेरी अम्मा क्या चाहते हो..?

साहील : भाइ.. इतने सालोके बाद अम्माकी गोद भरी हे.. वो बहुत खुस थी.. मे इस बच्चेको गीराना नही चाहता.. बस अब चाचा चाची मानजाये.. उनकोतो पताभी नही हेकी हम दोनो रीलेशनमे हे.. जब उनको पता चलेगा तब पता नही क्या हंगामा करेगे वो.. भाइ.. मुजे सबाना दीदीकी बहुत टेन्शन हे.. बस वो अ‍ेकही हे जो मुजसे सबसे ज्यादा प्यार करती हे.. जब इधर आती हे तो भाइ भाइ करते थकती ही नही..

लखन : (मुस्कुराते) क्यु.. अब उनको क्या हुआ..?

साहील : भाइ.. वो सृतीभाभीकी तराह गायनेक डोक्टर बनना चाहती हे.. लेकीन अब कादीरभाइ चले गये हे.. ओर चाचाके पासभी इतना पैसा नही होगा.. तो अब वो सबाना दीदीको पढायेगे कैसे..? बस.. अब फाइनल यर ही बाकी हे.. उसे अब बेंगलोरमे अ‍ेडमीशन मील रहा हे.. तो वही पढने चली जायेगी.. चाची केह रहीथी इसमे अभी बारह तेरह लाख रुपीये भरने होगे.. चाचा कहासे नीकालेगे इतने पैसे..?

लखन : (कुछ सोचते) हंम.. पहेले ये बता तुमने इस बारेमे क्या सोचा हे..? फीर मे तुजे कुछ सजेस कर सकता हु..

साहील : भाइ.. अबतक खेती बाडीमे मेने पैसे बचाकर रखे हे.. ओर चाचाके हीसेका आधा पुरा हीसा मेरे पास पडा हे.. मेने सोचाथा की जब सायरादीदी या फीर कादीरभाइकी सादी होगी तब उनको दे दुगा.. लेकीन अबतो मामला ही बीगड गया हे.. तो सोच रहा हु.. अब ये पैसे मे सबानादीदीकी पढाइके लीये उनको देदु..

लखन : (मुस्कुराते) साहील.. तुमने बहुतही सही सोचा हे.. ये बता तेरे चाचाका पैसा तेरे पास कीतना पडा हे.. ओर तेरे पास कीतना पैसा पडा हे.. इतने सालसे खेती सम्हाल रहा हे.. तो कुछ तो होगाही..

साहील : (मुस्कुराते) भाइ.. लगता हे बात बन सकती हे.. इन चार सालमे चाचाके हीस्सेका कोइ साडे आठ लाख रुपीये होगे.. ओर मेरे पास घरका सब खर्चा करते चार साडे चार पांच लाख रुपीया होगा..

लखन : (हसते) तो कमीने होगइ तेरी प्रोबलेम सोल्व.. वैसेभी अभी तुम अपनी खेतीका अ‍ेक चोथाइ हीस्सा ही खेड रहे हो.. सोचो.. अभी तीज गुना जमीन तुम्हारी अ‍ैसेही बंजर पडी हे.. जो अभी वापस मीली हे.. अगर वो सभी तुम सही करके खेडोगे.. तब तुम्हारी आमदानी कीतनी बढ जायेगी..

साहील : (हसते) लेकीन भाइ.. इस जमीनमेभी मुजे मजदुर लगवाने पडते हे.. तो इतनी सारी जमीन मे अकेला कैसे सम्हाल पाउगा.. ओर वैसेभी ये जीमीन हमारे पुर्खोकी थी.. तो इसमे भी चाचाका हीसा हे..

लखन : अबे उलुके पठे.. वहा तेरे चाचा कीसी प्राइवेट फेक्टरीमे क्या जख मरवाते हे..? तो कमीने उसे यहा वापस बुला नही सकता..? जब उनके पास इतनी जमीन हे.. जब जमीन नहीथी इसीलीये तो गयेथे यहासे.. अब तो सब वापस मील गइ हे तो वापस बुलाले उसे..

साहील : (सरमाकर मुस्कुराते) भाइ.. क्या बात कर रहे हो..? बाततो आपकी सही हे.. लेकीन वो चाचा हे मेरे.. मे उनसे कैसे बात करुगा..? वो मेरी बात मानेगे नही..

लखन : (मुस्कुराते) साहील.. तुम अ‍ेक काम करो.. अभी कल पहेले तो तेरी चाचीको फोन करके बतादे की सबानाकी कोइ चीन्ता मत करना.. उनका सब इन्तजाम होजायेगा.. ताकी उनकी ये टेन्शन तो खतम होजाये.. ओर मे अ‍ेक दो दीनमे फ्रि होजाउगा तब तुम दोनो मीया बीवी मेरे साथ चलना.. मुजे चाचसे कुछ बात भी करनी हे.. समजले तेरी ओर उनकी दोनोकी सभी समस्या हल होगइ..

साहील : (सरमाते हसते) ठीक हे भाइ.. क्या आप अम्माको मेरी बीवी केह रहे हो..? वो कहा मेरी बीवी हे..? क्या भाइ आपभी..? वो मेरी अम्मा हे.. अभी हमने कहा नीकाह कीया हे.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) साहील.. इसलीये तो तुजे केह रहा हु.. की तेरे चाचा चाचीको इधर बुलाले.. तब बडे भैया उनको समजा देगे.. तो तेरी ओर तेरी अम्माकी सादी आसानीसे होजायेगी.. ओर तुम दोनोको बच्चा गीरानेकी भी जरुरत नही पडेगी.. क्या कहेते हो..? हें..हें..हें..

साहील : (खुस होते हसते) अरे हां भाइ.. बाततो आपकी सही हे.. ठीक हे.. आप फ्रि हो तब बता देना हम तीनो चाचाके घर चले जायेगे.. हें..हें..हें..

अ‍ैसी ही बाते करते दोनो आगेकी प्लानींग करके अपने अपने घरपे चले गये.. इन सबके बीच आज अ‍ेक घरमे अ‍ेक ओर सुहागरातकी तैयारीया फुलोसे बेड सजाते चल रही थी.. वो घरथा डो. सुधीरका.. वहा चारु ओर नीशा दोनो मीलकर अपना बेड सजा रहीथी.. चारु रमेशको नीशा अकेली हे.. कहेकर उनके घर चली गइथी.. तो रमेश भी आज घरपे अकेला था.. आज रस्मी भी वंदनाको लेकर अपने घरपे चल गइ थी..
 
तो दुसरी ओर आज बसंतीके घरपे सबने खाना खालीया.. तो उनका पती खाना खाकर सो गया था.. तब बसंतीने थोडी देरके लीये मुनाको अपने दोस्तोके यहा भेज दिया था.. ताकी खुद अपने हाथोसे बरखाको अपनी सुहागरातके लीये सजा सके.. तो आज श्रीधरके घरभी रातको जयश्री सबके सामने अपने भाइ श्रीधरके कमरेमे बीन्दास्त सोने चली गइ.. तो उनकी मां वृन्दा उसे देखती ही रेह गइ..

वो उनको कुछ बोलभी तो नही सकती थी.. तो उसने अपने देवर जीतुलालको देर रात उपर छतमे अकेले मीलनेका इसारा कीया.. तो जीतुलालनेभी इसारोसे हां कहेदीया.. वो जीतुलालको मीलकर अब बहोतही कठोर फैसला लेना चाहती थी.. क्युकी पीछली बार जब वो ओर जीतुलाल बच्चा गीरवाने गये तब इस बार डोक्टरने उसे आखरी बार कहेते वोर्नींग देदीथी.. की अब बच्चा गीरारा उनके लीये खतरनाक होगा..

तो राजीवके घरभी सब लोगोने डीनर करलीया तब देवायत भी वहासे नीकल गयाथा.. तो मंजुने चंदाको धिरेनको फोन करनेके लीये कहा.. तो चंदा खुस होते अपना फोन लेकर उपरकी मंजीलपे चली गइ.. आज उनकी खुसीका कोइ ठीकाना नहीथा.. वो ये खुस खबरी अपने बेटे धिरेनको देना चाहती थी.. सब लोग बातो मे बीजीथे तब चंदा उपरकी मंजीलपे जाकर धिरेनको फोन करने लगी.. ओर उसने धिरेनको फोन लगा दीया..

धिरेन : (थोडा मायुस होते) हां मम्मी.. बोल.. क्या हुआ..? आप मौसीके घरपे होनां..?

चंदा : (सरमाते हसते) हां बीटु.. सुन.. अभी पुनम ओर सृती इधर आइ हे.. तो सामको पुनमको उल्टीया हुइ.. ओर उसे सृतीने चेक कीया तो पता चलाकी.. सायद पुनोदीदी प्रेगनेन्ट हे.. बीटु.. कोन्ग्रेच्युलेशन.. तु सायद पापा बनने वाला हे.. पकातो कल सुबह पता चलेगा.. हें.. हें.. हें..

धिरेन : (थोडा परेसान होते) मोम.. आपको नही लगता ये थोडी जल्दबाजी हे.. आप पुनोको समजाइअ‍ेनां..

चंदा : (थोडा गुस्सा होते) क्या समजाओनां.. तु पागल होगया हे क्या..? अरे बेटा यहीतो उमरहे पापा बननेकी.. क्या बुढा होजायेगा तब पापा बनेगा..? अ‍ैसी पागलो जैसी बाते मत कर.. ओर सुन.. यहा तेरी मौसी.. मौसा सब लोग ये बात सुनकर कीतना खुस हे.. ओर तुम होकी..

धिरेन : मोम.. क्या सबलोग उधर हे..? कही मौसाजीकी तबीयत फीरसे तो खराब नही हुइ..?

चंदा : (थोडी मायुस होते) नही बीटु.. अबभी तो सब ठीक हे.. लेकीन तुजेतो पता हेना..? तेरी मंजुदीदीको सब पता चल जाता हे.. तो उसने सबको यहा बुलालीया हे.. बीटु.. मुजेतो कुछ आसंकाये हो रही हे.. तो तुमभी कल यहा आजा.. ओर अ‍ेक बार तेरे मौसीजीको मीलले.. बस मुजे ज्यादा कुछ नही कहेना..

धिरेन : (थोडा चींतीत होते) ठीक हे मोम.. मे कलही उधर आ रहा हु.. आप फीकर मत करना..

चंदा : (मुस्कुराते) हंम.. ओर सुन.. अगर तुम कल आओतो पुनमदीदीसे कुछ अ‍ैसी वैसी बाते मत करना.. समजे..? वोभी कीतनी खुस हे.. हें..हें..हें..

धिरेन : (मुस्कुराते) हां मोम.. वोभी तो यही चाहती थी.. ठीक हे मोम.. आइ अ‍ेम हेप्पी.. मे कल आ रहा हु.. लव यु मोम.. बाय..

चंदा : (सरमाते मुस्कुराते) हंम.. लव यु टु बेटा.. बाय..

कहेते धिरेनने फोन काट दीया.. चंदातो बहुत खुसथी.. लेकीन धिरेन नीलमके साथ रंगे हाथ पकडाजानेकी वजहसे बहुत मायुस हो गयाथा.. ओर उपरसे चंदाने जब पुनमकी प्रेगनन्सीके बारेमे बताया.. तो थोडा ओर परेसान होगया.. क्युकी अब वो नीलमके साथ अपना घर बसानेका सपना देख रहाथा.. ओर इस बारेमे धिरेन ओर नीलमने बहुत सारी प्लानींग भी करलीथी.. अब ना चाहते हुअ‍े भी उसे चंदाकी बात माननी पडी..

तो आज बंसीके घरभी जबसे जागृती जयश्रीको मीलकर आइथी.. वो भी अपने भाइको मीलनेके लीये तरस रहीथी.. सामको सामत घरपे आगया.. तो घरके सभी लोगोने साथमे बैठकर खाना खालीया.. तब जागृती ओर बंसी.. दोनोही अ‍ेक दुसरेके सामने बैठे थे.. तब सबसे छुपकर बंसीने अ‍ेक बार फीर जागृतीको आंख मारदी.. तो जागृती दुसरी ओर मुह करते सरमाते हसने लगी.. ओर इसारोसे सबके होनेका इसारा करने लगी..

तब बंसीकोभी तसली मील गइकी अब मामला पुरी तराह फीट हे.. जब सबने खाना खालीया तो सामत अपने रुममे जाकर सोगया.. तो जया रुममे गरमी लगनेका बहाना बनाकर उपर छतपे सोने चली गइ.. तब सांती ओर जागृतीने मीलकर घरका सब काम फटाफट नीपटा लीया.. तो इस बार सांतीको भी जागृतीका व्यावहार उनके प्रती अ‍ेक सहेली जैसा लगा.. जागृतीभी अब अकेलेमे सांतीको भाभी भाभी कहेकर बुलाने लगीथी..

आज सांती बहुतही सर्मसार हो रहीथी.. बंसी खाना खातेही अपने दोस्तोके पास चला गयाथा.. जब घरका सब काम नीपट गया तो सबलोग सोनेकी तैयारीया करने लगे.. जागृती ओर सांती भी अपने अपने रुममे चली गइ.. जागृती कुछ देर अपने भाइ बंसीके बारेमे सोचने लगी.. जबसे श्रीधर ओर जयश्रीने भागकर सादी करलीथी तबसे जागृतीकी चाहत भी अपने भाइ बंसीकी ओर काफी बढ गइ थी..

वो अब कीसीभी हालमे बंसीको पाना चाहती थी.. ओर दोनोके बीच मामलाभी बहुत आगे बढते दीखाइ दे रहाथा.. वो बंसीको अकेलेमे मीलना चाहती थी लेकीन अभी मीलना संभव नही था.. क्युकी उनको पताथा की अब देर रात बंसीके पास उनकी बुआ सांती चली जायेगी.. ओर सुबह होनेसे पहेले वो बंसीके साथ प्यार करके अपने रुममे आकर सो जाती हे.. तब जागृती खडी होकर सांतीके रुममे चली गइ.. देखातो सांती आयनेके सामने अपने आपको हल्कासा शींगार करते सजा रहीथी.. तभी..
 
जागृती : (मुस्कुराते अंदर आकर दरवाजा बंध करते) भाभी.. क्या कर रही हो..? क्या भाइके लीये रोज अ‍ैसे शींगार करती हो..? क्या मस्त लग रही हे आप.. हें..हें..हें..

सांती : (सर्मसार होते मस्कुराते) अरे आओ आओ.. तारीफके लीये सुक्रिया.. जागु.. क्या बात हे.. आज तो मेरी ननंद खुद मुजसे मीलने आइ हे..? हें..हें..हें.. कहो.. कैसे आना हुआ..?

जागृती : (सरमाते मुस्कुराते पास बैठते) बस कुछ नही.. अभी नींद नही आ रहीथी.. तो मेतो सीर्फ देखने आइथी की मेरी भाभी क्या कर रही हे.. क्या भाइको मीलनेके लीये जानेकी तैयारीया हो रही हे..? हें..हें..हें..

सांती : (सर्मसार होते धीरेसे) हंम.. हां.. बंसीको मीलने मे अ‍ैसेही तैयार होकर जाती हु.. ओर उनकोभी बहुत अच्छा लगता हे.. तुम कहो.. क्या अभी कोइ लडका बडका ढुंढा हे की नही..? हें..हें..हें..

जागृती : (सरमाते मुस्कुराते) क्या भाभी आपभीनां..? नही.. अभी कोइ नही हे.. भाभी.. क्या आपसे अ‍ेक बात पुछु..? आप नाराज तो नही होगीनां..?

सांती : (मुस्कुराते) अरे नही नही.. पुछो.. क्या मेरी प्यारी ननंदसे मे कभी नाराज हो सकती हु..? पुछो..

जागृती : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. मुजे भाइके ओर आपके रीलेशनके बारेमे जानना हे.. की आप दोनो कैसे अ‍ेक दुसरेको प्यार करने लगे..

सांती : (मुस्कुराते) हंम.. क्या करोगी जानकर..? ठीक हे बता दुगी.. लेकीन अभी नही.. क्युकी बात थोडी लंबी हे.. हम दोनो अकेली होगी तब फुरसतमे बतादुगी.. बता..ओर क्या पुछना हे..?

जागृती : (मुस्कुराते मन टटोलते) भाभी.. आपकी तो अ‍ेक बार सादी हो चुकी हेनां..? मानलो अगर कल भाइके साथ आपकी सादी होगइ.. अरे मानलो क्या..? समजोना हो ही जायेगी.. ओर कुछ सालोके बाद भाइको कीसी कुआरी लडकीसे सादी करनेकी इच्छा हुइ.. तो आप क्या करोगी..? इसके बारेमे आपने कभी सोचा हे..? क्युकी हर लडकेके मनमे कहीना कही कीसी कुआरी लडकीसे सादी करनेकी तम्मना होती हे..

सांती : (घुमकर जागृतीकी ओर होते अ‍ेक नजरसे देखते) हंम.. बाततो तेरी सही हे.. लेकीन जागु.. तुम चीन्ता मत कर.. क्युकी बंसी मुजे बहुत चाहता हे.. ओर मेभी उनको इतना ही चाहती हु.. की वो कीसी लडकीकी ओर आंख उठाकर भी नही देखेगा.. ओर अगर बाय चान्स तुम जो केह रही हो.. अ‍ैसा हुआ.. तो मे खुसी खुसी उस लडकीको अपनी सौतनके रुपमे अ‍ेक्सेप्ट करलुगी.. क्युकी बंसीके बारेमे सीर्फ मुजे पता हे..

जागृती : (सरमाते मुस्कुराते) क्या..? आपको भाइके बारेमे क्या पता हे..? भाभी.. प्लीज.. हें..हें..हें..

सांती : (हसते) नही.. अ‍ैसी बाते कुआरी लडकीको नही बताइ जाती.. ओर खास करके तुजे.. क्युकी अ‍ेकतो वो तेरा भाइ हे.. ओर उपरसे तेरी जवानी उफानपे हे.. ओर तुजेतो पता हे आज कल सबको अपने भाइको ही प्यार करना हे.. हें..हें..हें.. अगर मेने तुजे बता दीया तो मेरा चान्स तो गया.. हें..हें..हें..

जागृती : (सरमाकर हसते पीठमे अ‍ेक मुका मारते) भाभी.. प्लीीज.. प्लीज.. मजाक नही.. बताइअ‍ेना.. मेरी प्यारी भाभी.. कीतनी क्युट हे.. हें..हें..हें..

सांती : (मुस्कुराते) हंम.. भाभीको मस्का लगा रही हे..? हें..हें..हें.. तु मानेगी नही.. हें..हें..हें.. तो सुन.. बंसी इतना सक्षम हेकी वो हम दोनोको खुस रख सकता हे.. आइ मीन.. हम दोनो सौतनको.. क्युकी कभी कभी तो मुजेभी लगता हे इनको जेलना मुज अकेली का काम नही.. पता नही उनमे इतनी ताकात कहासे आजाती हे.. समज गइ..? ओर फील हालतो मुजे दुर दुर तक अ‍ैसी कोइ संभावना नजर नही आती.. जो कोइ मेरी सौतन बन सके.. हें..हें..हें..

जागृती : (मुस्कुराते) भाभी.. मे अभीकी बात नही कर रही.. कुछ सालोके बादकी बात कर रही हु.. हें..हें..हें..

सांती : (मुस्कुराते अपना शींगार करते) हंम.. तबकी तब देखेगे.. मुजे नही लगता कोइ मुजे टकर दे सकती हे.. हां.. अगर आगे जाकर हमारे गांवमे कुछ बदलाव हुआ.. तो मे कुछ नही कहे सकती.. तब मुजे अ‍ेकही लडकी नजर आती हे जो मेरी सौतन हो सकती हे.. सीर्फ वोही मुजे टकर दे सकती हे.. हें..हें..हें..

जागृती : (सरमाते हसते) अच्छा..? कौन हे वो..? जो आपको टकर दे सकती हे.. बताइअ‍ेनां..?

सांती : (अ‍ेक नजरसे देखते मुस्कुराते) वो लडकी हे.. खुद तुम.. हें..हें..हें..

जागृती : (सर्मसार होते सांतीको मुका मारते) भाभी.. क्या बोल रही हो..? मजाक नही.. वो भाइ हे मेरा..

सांती : (सरारतसे मुस्कुराते) भाइ हेतो क्या हुआ.. तुमने तेरी सहेली जयश्रीको देखा नही..? ओर जब गांवमे बदलाव होगा तो ये सबतो तब आम बाते होगी.. ओर अभी गांवमेभी तो अ‍ैसे कइ रीस्ते देखनेको मील रहे हे.. देखा नही.. आजही बरखाकी सादी उनके भाइ मुनासे होगइ.. तो फीर तेरीभी हो सकती हे.. तो तुम मेरी सौतन बनकर आजाना मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. हें..हें..हें..

जागृती : (सरमाते मुका मारते) क्या भाभी.. आपभी.. आप कैसा मजाक कर रही हे..? आप कुछभी बोलती हे.. अ‍ैसा कभी नही होगा.. हें..हें..हें..

सांती : (सामने देखकर मुस्कुराते) जागु.. अ‍ेक बात पुछु..? अगर बंसी खुद अ‍ैसा चाहेगा तो फीर तुम क्या करोगी..? हें..हें..हें..

जागृती : (सर्मसार होते खडी होगइ) भाभी.. आप बहुत कमीनी हो.. चलो मे जाती हु.. आप जाओ अपने यारको मीलने.. मे चली..

सांती : (जटसे हाथ पकडते) अरे सुननां.. बैठ तो सही.. अ‍ेकतो कीतने दिनोके बाद मुजसे मीलने आइ हो..? तुम बैठो.. मुजे तुमसे कुछ सीरीयसली बात करनी हे..

जागृती : (सरमाते मुस्कुराते) क्या..? हें..हें..हें.. भाभी.. आप कैसी बाते करती हे.. मुजेतो सरम आती हे..

सांती : (मुस्कुराते) नही जागु.. मे तुमसे सीरीयसली बात कर रही हु.. अगर भविस्यमे कुछ अ‍ैसा हुआ तो मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. क्युकी मुजे अ‍ेक डर लग रहा हे.. इस बारेमे मे तुजे बता भी नही सकती.. क्युकी ना सीर्फ हमारे गांवमे.. बल्की मुजेतो लगता हे अब हमारे घरमेभी बदलाव होनेकी संभावना हे.. बस.. अभी मुजे तुमसे सीर्फ इतना ही कहेना हे.. तब मुजे तेरा साथ चाहीये.. क्युकी तब मे ये सब अकेली नही सम्हाल पाउगी..

जागृती : (हाथ थामते वापस बैठते धीरेसे) भाभी.. कुछ मत बोलीये.. मे आपके कहेनेका सब मतलब समज गइ.. आप फीकर मत करना मे आपके साथ हु.. मुजे पता हे आप कीस बारेमे बात कर रही हे.. क्या आप मम्मीके बारेमे बात कर रही हेनां..?

सांती : (अ‍ेक नजरसे देखते) हां.. जागु.. क्या तुजे सब पता हे..? हंम..?

जागृती : (सरमाते धीरेसे) हां भाभी.. मुजे भी दो दिन पहेलेही सब पता चला.. मेने अपनी आंखोसे देखा.. हमारे ही घरमे.. उनके खुदके रुममे.. पता नही मम्मीको क्या होगया हे.. वोभी इस उमरमे..

सांती : (धीरेसे) जागु.. प्रोमीस कर.. अभी इस बारेमे बंसीको या भाइको कुछ पता नही चलना चाहीये.. वरना सब अर्नथ होजायेगा.. मेने उनको समजानेकी बहुत कोसीस की.. लेकीन वो दोनो बहुत आगे बढ चुके हे.. अब अ‍ेक दुसरेके बीना नही रेह सकते.. ओर देखा जायेतो उसमे भाभी भी गलत नही हे..

जागृती : (आस्चर्यसे देखते) भाभी.. क्या केह रही हे आप..? मम्मी गलत नही हे.. मतलब..?

सांती : (हाथ थामते धीरेसे) देख जागु.. मेरे कहेनेका मतलब तुम गलत मत नीकालना.. अब मे जोभी कहु.. उसे ध्यानसे सुनना.. ओर अपने दिमागसे सोचना.. मुजे पता हे मेरी ननंद बहुतही समजदार हे..

जागृती : (अ‍ेक नजरसे देखते) भाभी.. क्या.. बताइअ‍े मुजे..

सांती : (अ‍ेक नजरसे देखते) जागु.. पहेली वजह.. भाइने भाभीके साथ सादी करके कभी भाभीकी ओर ध्यान ही नही दिया.. सारा दिन गांकी सेवामे घुमते रहेते हे.. दुसरी वजह.. जब भाइका भाभीके साथ ब्याह हुआ.. तब भाइकी उमर बहुत बडी थी.. ओर तब भाभीकी उमर सादीके लायक भी नही थी.. तो दोनोके बीच उमरमे बहुत बडा गेप हे..

अब भाइकी उमर होगइ हे.. तो जाहीरसी बात हे अब वो भाभीको वो सुख देनेमे सक्षम नही रहे.. ओर अभी भाभीकी इतनी भी उमरभी नही हेकी वो अब इस सुखसे वंचीत रेह सके.. तुमतो जानती हो हमारे सरीरकी भी कोइ नीड होती हे.. तो इसी वजहसे भाभीके कदम गलत जगहपे पड गये हे..

जागृती : (कुछ सोचते) भाभी.. बात तो आपकी सही हे.. लेकीन.. ये हे तो गलत..?

सांती : हां जागु गलत ही तो हे.. क्युकी इनमे दो दो घर बरबाद हो रहे हे.. अब हम करभी क्या सकते हे..?

जागृती : (कुछ सोचते) भाभी.. सुना हे पापा सहेरमे भी अ‍ेक घर ले रहे हे.. तो क्यु ना हम मम्मी पापाको सहेरमे रहेनेके लीये भेजदे.. क्या कहेती हो..?

सांती : (प्यारसे गाल सहेलाते) अरे.. मेरी प्यारी ननंद.. जागु.. हम इतनेभी बडे नही हुअ‍े की हम ये सब फैसले ले सके.. तुम फीकर मत करो.. मे भाभीको समजा रही हु.. ओके..? चलो अब सो जाओ.. पता नही अब तेरा भाइ मुजे कब सोने देगा.. उनको तो अब रोज चाहीये.. फीकर मत कर तेरी भी बारी आयेगी.. हें..हें..हें.. कहोतो मे बंसीसे बात करु..? हें..हें..हें..

जागृती : (बहुतही सर्मसार होते अ‍ेक मुका मारते) भाभी.. आप बहुत कमीनी हो.. नही सुधरोगी.. मे जाती हु..

कहेते जागृती बहुतही सर्मसार होते खडी होकर सांतीकी पीठमे अ‍ेक मुका मारते अपने रुममे चली गइ.. तो सांतीभी हसते हुअ‍े अपने रुमकी सभी लाइटे ओर दरवाजा बंध करके बंसीके रुममे चली गइ.. तो इधर गांवमेभी सभी दोस्तो अपने अपने घरपे चले गये थे.. तो बसंती भी बरखाको दुल्हनकी तराह तैयार करके मुनाके रुममे छोडकर आगइ.. तब उसने मुनासे इसारोमे कुछ बाते भी करली....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १७१

कहेते जागृती बहुतही सर्मसार होते खडी होकर सांतीकी पीठमे अ‍ेक मुका मारते अपने रुममे चली गइ.. तो सांतीभी हसते हुअ‍े अपने रुमकी सभी लाइटे ओर दरवाजा बंध करके बंसीके रुममे चली गइ.. तो इधर गांवमेभी सभी दोस्तो अपने अपने घरपे चले गये थे.. तो बसंती भी बरखाको दुल्हनकी तराह तैयार करके मुनाके रुममे छोडकर आगइ.. तब उसने मुनासे इसारोमे कुछ बाते भी करली....अब आगे

ओर गांमे अ‍ेक बार फीर चुदाइका दौर चल पडा.. श्रीधर ओर जयश्री के साथ मुना ओर बरखाकी भी बाकायदा अ‍ेक पती पत्नीकी तैरपे अपने घरपे पहेली रात थी.. तो श्रीधर आज बडेही जोसमे बीना डर जयश्रीकी चुदाइ कर रहाथा.. तो यही हाल आज बरखाका भी था.. बसंतीने आज बरखाको फीरसे अ‍ेक दुल्हनकी तराह सजाया था.. तो उनका भी मुना बडेही जोसके साथ चुदाइ कर रहाथा..

तो दुसरी ओर आज रातमे डीनरके वक्तही वृन्दाने इसारोसे अपने देवर जीतुलालको देर रात छतपे मीलनेके लीये बुलाया था.. तो वृन्दा ओर जीतुलालने भी अब हमेसाके लीये अ‍ेक साथ जींदगी बीतानेका फैसला करलीया था.. तो इस वक्त दोनोही अ‍ेक दुसरेके पती पत्नीके सोनेके इन्तजारमे करवटे बदल रहेथे.. तो आज हमारे लखनभैया भी वायग्रा खाकर बडेही जोसमे लताकी चुदाइ कर रहेथे..

दो पहोरसे रात खाने तक बंसीने भी जागृतीको दो बार आंख मारके छेड दीयाथा.. तो जागृतीने भी सरमाके बंसीको इसारा करके उनके प्यारको कबुल करनेकी अपनी सहमती देदी थी.. तबसे बंसीका लंडभी खडा होकर जागृतीकी नइ चुतमे जानेके लीये तरस रहाथा.. तो इसी वजहसे बंसी भी बहुतही अ‍ेक्साइटेड होकर इस वक्त अपनी सारी गर्मी सांतीकी जबरदस्त चुदाइ करते उनकी चुतमे उडेल रहाथा.. सांतीको भी नही पताथा की आज बंसी उसे इतना जोसमे क्यु चोद रहा हे..?





सांती : (कामुक्तासे चुदवाते) आइ.. आह.. आह.. अहं..अंह.. अहं.. बं..सी.. थोडा धीरेसे चोदीयेनां.. आज आपको क्या होगया हे..?

बंसी : (जोरोसे चोदते बुब्स चुमते) सांती.. आज कुछभी मत बोल.. आजतो पका तुजे प्रेगनेन्ट कर दुगा..

सांती : (होंठ चुमते) बंसी.. आप इतने दिनोसे अ‍ेक ही रट लगाये बैठे हो.. अगर सचमे आपको बच्चा चाहीये तो पहेले मुजसे सादी करलो.. ताकी मे उस बच्चेको आपका नामतो दे सकु.. मेरी भी बच्चेकी बडी तम्मना हे..

बंसी : (जोरोसे चोदते गलेको चुमते) सां..ती.. अभी..तो.. मुजे.. चोदने.. दे.. हम.. बादमे.. बात.. करते.. हे..

कहेते बंसी हाथके बल उचा होकर सांतीको जोरोसे चोदने लगा.. अबतक सांती भी दो बार जड चुकी थी.. फीरभी आज बंसी उसे बडे जोसमे चोदेही जा रहाथा.. तब सांतीकी हालत पतली होने लगी.. सांतीके सारे बाल बीखरे पडे थे.. दोनोही पसीनेसे तरबोर हो चुकेथे.. ओर बंसी अपना पुरा लंड सांतीकी चुतमे अंदर तक घुसाके सांतीसे चीपक गया.. तो सांतीने भी बंसीको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया..

तभी उतेजनाकी वजहसे बंसीकी आंख उपर चड गइ.. ओर वो अपनी कमरको जटके मारते कांपने लगा.. तब उनके लंडसे ढेर सारा कामरस पीचकारीया मारते सांतीकी चुतको भरने लगा.. तो आज सांतीकोभी अपने बच्चेदानीपे गररम महेसुस होने लगा.. ओर वोभी उतेजीत होकर कांपने लगी.. ओर मदहोसीमे आंधी आंख चडाते बंसीको जोरोसे बाहोमे भीच लेती हे.. ओर अपनी कमर उची करके साथमे जडने लगी.. जडतेही बंसी सातीके सीनेपे ढेर हो गया..





कुछही पलके बाद सांतीकी पुरी चुत बंसीके कामरससे लबालब भरी हुइ थी.. ओर सांती धीरे धीरे बंसीकी पीठ सहेला रहीथी.. तब सांतीको नही पताथा की बंसीके कामरससे नीकले लाखो कण उनको गर्भवती करनेके लीये उनके बच्चेदानीके अंदर धुसनेके लीये दोड लगाते आपसमे धमासान मचा रहे थे.. आज सांती पुरी तराह बीखर चुकी थी.. आज बंसीने सांतीके अ‍ेक अ‍ेक अंगको तोडके रख दीया था.. तभी..





सांती : (बालोको सहेलाते मुस्कुराते) बंसी.. आज आपको क्या हो गयाथा..? हंम..? इतना तो जोसमे आपने मुजे कभी नही चोदा..? क्या कहीसे कोइ अ‍ैसी वैसी फील्म बील्म तो देखकर नही आये..? हंम..?

बंसी : (मुस्कुराते होठोको चुमते) नही सांती.. आज मेरे दोस्त श्रीधरने उनकी बहेनके साथ सादी करली.. ओर अपने घरपे भी आगये हे.. दोनोके मम्मी पापाने उनके रीस्तेको कबुल करलीया.. ओर आज मुनाने भी उनकी बहेन बरखासे आश्रमपे जाकर सादी करली हे.. दोनोही अभी अपनी सुहागरात मनाते होगे.. तो मुजे उनके बारेमे सोचकर इतना जोस चड गया.. हें..हें..हें..

सांती : (गाल चुमते मुस्कुराते) जानु.. लेकीन उन चारोकी वजहसे आज मेरी हालत तो आपने खराब करदीनां..? कही मे पेटसे होगइ तो..? अबतो मे आइपील खा खाकर थक गइ हु.. ओर आपको भी वो कोन्डम चडाना अच्छा नही लगता.. प्लीज.. अब आप भी हमारी सादीके बारेमे सोचीयेनां.. क्युकी अब भैयाके अलावा घरमे सबको पता चल गया हे.. की हम दोनो हर रात साथमे सोते हे..

बंसी : (मुस्कुराते) सांती.. श्रीधर ओर मुनाने सादी करली हे.. तो अब मुजमे भी थोडी हिमंत आगइ हे.. क्युना हमभी भागकर सादी करले..? हंम..? लखनके बडे भैया बापुको भी समजा देगे.. क्या कहेती हो..?

सांती : (मनमे खुस होते) हंम.. लेकीन बंसी मुजे आपसे अ‍ेक बात कहेनी हे.. अब भाभी के साथ साथ हमारी जागुको भी हम दोनोके बारेमे पता चल गया हे.. तो उसने भी हम दोनोके रीस्तेको अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे.. अब सीर्फ भाइको नही पता.. तो क्युना हम चारो भी आश्रमपे जाकर सादी करले.. हंम..? भाइको तो बडे ठाकुर मनालेगे.. क्या कहेते हो..? हमे भागनेकी क्या जरुरत हे..

बंसी : (खुस होकर होठोको चुमते) अरे वाह.. डार्लींग.. बाततो तेरी सही हे.. अगर मम्मी ओर जागुको सब पता हे तो हम उन दोनोको लेकर ही आश्रमपे चले जाते हे.. ओर वहा मुना बरखाकी तराह सादी करके वापस आजायेगे.. कीसीको पताभी नही चलेगा.. मे कल सुबह ही लखन भैयासे बात करता हु.. वो आश्रमपे बात करलेगे..

सांती : (सरमाते मुस्कुराते गाल चुमते) जानु तबतो बहुतही अच्छा हे.. तो फीर इस बार मुजे अगर बच्चा ठहेर गया.. तो मे बच्चेके लीये रेडी हु.. अब मुजे नही खानी कोइ आइपील.. आप करदो मुजे प्रेगनेन्ट.. हें..हें..हें..

बंसीका लंड अभीभी सांतीकी चुतमे घुसा हुआथा.. ओर बंसी सांतीके उपर लीटा हुआथा.. दोनोही चुदाइ करके बाते कर रहेथे.. तब उनको नही पताथा की जागृती बहार आंगनसे उनके रुमकी खीडकीके पास खडी रहेकर उन दोनोकी चुदाइ देख रही थी.. ओर चुदाइ देखते बंसीको इमेजींग करते अपनी चुतमे उंगली डालकर जोरोसे हीलाते जड चुकी थी.. दोनोकी जोरोसे बोलनेकी आदतकी वजहसे उन दोनोकी बाते भी सुन रहीथी.. जब दोनो चुखाइ करके सांत होगये तब जागृती भी अपने रुममे चली गइ..
 
आज अ‍ेक बार फीर पुरे गांवमे चुदाइका तांडव मचा हुआथा.. सबलोग अपने अपने घरपे खाना खाकर सोनेकी तैयारीया कर रहेथे.. तब ही देवायत राजीवकी बाइक लेकर गांवमे चुपकेसे आ चुकाथा.. ओर आतेही सीधा सुधीरके घरपे चला गया.. ओर अपनी बाइकको भी घरके आंगनमे अंदर लेलीया.. ओर दरवाजा बंध कर दीया.. तब चारु बाइककी आवाज सुनकर बहार नीकली.. ओर देवायतको देखतेही मुस्कुराने लगी..

चारु ओर नीशा साम ढलतेही अपनी सुहागरातकी तैयारीया कर रहीथी.. दोनोने मीलकर आज बेडको फुलोसे सजा दीया था.. तब दोनोही साथमे बाथरुममे घुस गइ.. ओर नहाकर बहार आतेही अ‍ेक दुसरेका शींगार करने लगी.. फीर दोनोही माथेपे सींदुर गलेमे मंगइसुत्र डालकर दुल्हनकी तराह रेडी होगइ.. बादमे दोनोने डीनर करलीया तब होलमे बैठकर देवायतका इन्तजार करते बाते कर रही थी..







चारु : (मुस्कुराते) नीशा.. तुम अभी तक वर्जीन होनां..? तुजे आज सब पता चल जायेगा.. की सुहागरातमे पतीका सुख क्या होता हे.. आज तेरी वाकइ देवुके साथ फस्ट नाइट हे.. तो पहेले तुम दोनो अकेलेही मीललो.. फीर मे तुम दोनोको बादमे आकर जोइन कर लुगी..

नीशा : (बहुतही सर्मसार होते) नही भाभी आपभी साथमे रहेना.. पहेले आपने उनके साथ सादी कीहे.. मेतो खामखा बीचमे आगइ.. भाभी.. क्या सचमे उनका बहुत बडा हे..? हंम..? मे उसे जेलतो पाउगीनां..?

चारु : (नीशाके गाल चुमते) अरे मेरी बनो.. क्यु खामखा डर रही हे..? अ‍ैसा कुछभी नही होगा जो तु सोच रही हे.. बस.. अबतो हम दोनोके मजेही मजे हे.. क्या हमारी वंदुको कुछ हुआ..? पहेले तुम दोनो अपना नीपटालो.. मे बादमे आजाउगी..

नीशा : (सर्मसार होते मुस्कुराते) भाभी.. मेने वंदुकी हालत देखी हे.. फीरभी वो कीतनी खुस थी.. भाभी.. आपतो हमारे पतीके साथ कइ बार सेक्स कर चुकी हे.. क्या आपको इनके साथ पहेली बार कुछ हुआथा..?

चारु : (बाइककी आवाज सुनतेही) हां नीशा.. उनका रमेशसे बहुत बडा हे.. मेने रमेशके साथ बहुतही कम बार सेक्स कीया हे.. लेकीन जब देवुसे मे पहेली बार बीस्तरमे मीली.. तब उसने फीरसे सुहागरातका अहेसास करवा दीयाथा.. तब मुजे पता चला पतीका सुख क्या होता हे..

तब ही मेने मनही मन देवुको अपना पती मानलीया था.. ओर आज मेरी सारी तम्मना पुरी होगइ.. नीशा.. लगता हे वो आगये हे.. तुम अपने रुममे जाकर रेडी रहो मे घरके सब दरवाजे लाइटे बंध करके उनको लेकर आती हु.. ओर हां बेडपे बीचमे घुंघट नीकालकर बैठना.. समज गइनां..? जा जल्दी..

कहातो नीशाके दिलकी धडकन बढ गइ.. वो बहुतही सरमाते हसते हुअ‍े हां मे गरदन हीलाते अपने रुममे चली गइ.. तब चारु देवायतको लेने बहार चली गइ.. फीर उनको अंदर लेकर घरके सभी दरवाजे लाइटे बंध करने लगी.. तो देवायतभी चारुको दुल्हनके लीबासमे देखकर पागल होने लगा.. जैसेही चारु उनके पास आइ दोनोने अ‍ेक दुसरेको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमने लगे..

चारु : (खुस होते मुस्कुराते धीरेसे) देवु.. आइ लव यु.. आइअ‍े आपकी दुल्हन अपने रुममे रेडी हे.. जानु.. उनका अ‍ेक हप्ते पहेलेही पीरीयड होचुका हे.. तो बच्चेका पुरा चान्स हे.. हो सकेतो आजही उनका सब काम तमाम करदो.. ओर हां.. आप दरवाजा खुला रखना.. अगर उनको कुछ हुआ तो मे आजाउगी..

देवायत : (होंठ चुमते) चारु.. तुमभी साथ चलनां.. हम तीनोही अ‍ेक साथ..

चारु : (जटसे धीरेसे) नही जानु.. आप समजोना.. वो बहुत ही सर्मीली हे.. ओर उपरसे पुरी तराह वर्जीन.. आप समज गयेनां.. मेने कपडे बपडे सब रेडी रखे हे.. आजही उसे औरत बनाकर अपना बीज डालदो.. वो भी प्रेगनेन्ट होनेके लीये रेडी हे.. ओर हां.. आज उनपे कोइ रहेम मत करना.. आज उनकी रीयलमे सुहागरात हे.. पहेले आप दोनो मीललो.. फीर मेभी आकर आप दोनोको जोइन करलुगी..

देवायत : (होठोको चुमते बुब्स मसलते) चारु.. तुम जल्दी आना.. मुजे तेरे साथ मीलन करना हे..

चारु : (सीसकारीया करते सरमाते धीरेसे) जानु.. समजोना मे आती हु.. आपनेतो आतेही मुजे गरम करदीया.. अब जाइअ‍े फटाफट वरना मे यही आपसे चुदवा लुगी.. हें..हें..हें..

कहेते चारुने हसते हुअ‍े देवायतको नीशाके रुमकी ओर धका मार दीया.. तो देवायत भी मुस्कुराते नीशाके रुममे चला गया.. तो वहा अंदर नीशा बेडके बीच अपने दोनो पैर घुटनोसे मोडकर घुंघटमे देवायतका इन्तजार करते बैठीथी.. जैसेही देवायतके कदमोकी आवाज सुनी.. अ‍ेक बारतो उनकी दिलकी धडकन रुक गइ.. तभी देवायत नीशाके पास आकर बैठ गया.. ओर उनका घुंघट हटाकर उनकी ओर देखने लगा..





तब नीशा बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर अपनी नजरे जुकाते बैठी रही.. जैसेही देवायतने प्यारसे नीशाके गालपे हाथ रखा.. नीशा सरसे पांव तब हील गइ.. ओर अपनी आंखे बंध करते देवायतके स्पर्सको महेसुस करने लगी.. उनकी चुत हरकतमे आगइ.. ओर दोनो बुब्स कठोर होगये.. आज सबकुछ होने वाला था.. देवायतने धीरेसे नीशाके होठोपे अपना होंठ रखदीया.. तो नीशा पागल जैसी होगइ..

ओर उसने सभी सरम त्यागके देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. पुरे घरमे अंधेरा छाया हुआथा.. धीरे धीरे प्यार करते दोनोही आगे बढते प्यारकी आगोसमे चले गये.. तब उनको पता नही थाकी चारु बहारसे उन दोनोको देख रही हे.. ओर अपनी चुतको सहेला रही हे.. धीरे धीरे करते देवायत ओर नीशाके तनसे कपडे नीकलते गये.. देवायत नीशाके गलेको होठोको ओर उनके उरोजोको चुमता रहा.. ओर नीशा मदहोस होने लगी..





दोनोही सीर्फ अपने अंतर वस्त्रोमे रेह गये थे.. देवायतने नीशाकी चडीमे उंगलीया फसाली.. ओर जटकेसे नीशाकी चडी नीकाल दी.. तो नीशा पुरी नंगी होगइ.. उसने सरमके मारे दोनो हाथ अपनी चुतपे रख दीया.. ओर सरमाकर इधर उधर देखते देवायतसे नजरे चुराने लगी.. देवायत नीशाके उपर जुकते उनके उरोजोको मुहमे लेकर चसने लगा.. तो नीशा छटपटाने लगी.. ओर देवायतके सरको पकड लीया..





नीशा बहुत सरमा रहीथी.. देवायत बारी बारी दोनो उरोजोकी नीपलको अपने होठोपे दबाते खीच रहाथा.. देवायतकी इसी हरकत नीशाको पागल बनानेमे काफी थी.. वो पुरी तराह मदहोस होकर सीसकारीया करते देवायतके बालोको सहेलाने लगी.. ओर देवायतके सरको अपने बुब्सपे दबाने लगी.. तभी देवायत उनके उरोजोको चुमते नीचेकी ओर सरकने लगा.. देवायतने उनकी नाभीको चुमलीया.. तो नीशा अपनी कमर उछालते मुस्कुराने लगी..

नीशा : (सरमाते धीरेसे) देवु.. प्लीज.. वहा नही.. बहुत गुदगुदी होती हे.. हें.. हें.. हें..

देवायत : (सामने देखते) नीशा.. आज मुजे जी भरके इस तनके साथ खेलने दे.. अब ये तन सीर्फ मेरा हे..

नीशा : (सरमाते धीरेसे) हां जानु.. सीर्फ ये तन ही नही.. अब पुरी नीशा आपकी हो चुकी हे..

तभी देवायत नीशाके पैरोके बीच बैठ गया.. ओर नीशाकी कमरमे हाथ फसाके उनको थोडा अपने मुहके पास खीच लीया.. तो नीशा बहुत कुछ समज गइ.. ओर वो सरमके मारे अपने हाथोमे अपना मुह छुपा लेती हे.. तभी देवायतने जुकते अपना मुह नीशाकी चुतपे रख दीया.. ओर नीशाकी चुतमे जीभ डालकर चाटने लगा.. तब नीशा बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर मदहोसीके आलममे चली गइ..





उनकी चुतसे पानीका रीसाव होने लगा.. वो अपनी कमरको धीरे धीरे उछालने लगी.. देवायतकी इस हरकतने नीशाको पुरी तराह कामातुर करदीया.. दवायत नीशाकी चुतमे अपनी जीभ घुसाके उनके चुतके दानेको छेडने लगा.. तो नीशाने अपने दोनो हाथ देवायतके सरपे रख दीया.. ओर सरपे हाथ रखकर अपनी चुतपे दबाने लगी.. बहार चारु दोनोकी हरकत देखते अपनी चुत ओर बुब्सको मसलती रही..
 
चारुसे अब अपने आपको कंट्रोल करना मुस्कील होने लगा.. ओर वो फटाफट अंदर आगइ.. तो नीशा उसे देखकर बहुतही सरमाने लगी.. चारु अंदर आतेही अपनी सारीको नीकालने लगी.. फीर ब्लाउस पेटीकोट नीकालकर सीर्फ ब्रा पेन्टीमे रेह गइ.. ओर वो बेडपे चडकर नीशाके मुहके पास बैठ गइ.. फीर जुकते नीशाके होठोको चुमते उनके बुब्स मसलने लगी.. तब थोडीही देरमे नीशाकी भी सभी सरम चली गइ..

ओर वो चारुके होठोको चुमते उनका साथ देने लगी.. तभी देवायत नीशाकी चुतको चाटते अ‍ेक उंगलीसे चुतके दानेको छेडने लगा.. तब नीशा पागल जैसी होगइ.. ओर चारुके होठोको जोरोसे चुमते उनके बुब्सको मसलने लगी.. अब नीशासे बरदास्त करना मुस्कील होने लगा.. ओर उनकी चुतसे अ‍ेक फवारा नीकल गया.. वो अब जल्दसे जल्द देवायतके लंडको अपनी चुतमे लेना चाहती थी.. ओर वो सब सरम त्यागकर बेडपे बैठ गइ..





नीशा : (देवायतके सरको पकडते अपने उपर खीचते) जानु.. बस.. बस.. अब ओर नही.. आप मेरे उपर जल्दी आजाइअ‍े.. बुजा दीजीये मेरी बरसोकी अधुरी प्यास.. प्लीज.. देर मत कीजीये.. बना दीजीये मुजे ओरत..

चारु : (सरमाते धीरेसे) नीशा.. जल्दबाजी मत कर.. अभी तो असली खेल बाकी हे.. (देवायतकी ओर देखते) जानु.. आप इधर आजाइहे.. हमे भी आपका रस पीना हे.. नीकाल दीजीये ये आपकी चडी..

देवायत घुटनोसे चलकर चारुके पास आगया.. तो चारुने उंगलीया फसाकर देवायतकी चडीको खीचकर नीचे सरकादी.. तब उनका तगडा लंड हवामे लेहराते जटके मारने लगा.. तब नीशा उसे देखती ही रेह गइ.. वो मुह फाडकर लंडको देखती रही.. उसे सुधीरके लंडके आगे देवायतका लंड अ‍ेक गध्धेके लंड जैसा दीखने लगा.. ओर वो थोडासा डरके थोडी पीछे बैठ गइ.. तो चारु सब समज गइ..

चारु : (मुस्कुराते) नीशा.. डर मत.. देखले.. यहीतो हमे असली मजा देगा.. चल दोनो मीलकर अ‍ेक बार इनके रसको नीचोड लेती हे.. फीरतो ये हम दोनोको सुबह तब नीचोडते ही रहेगे.. क्यु जानु..? हें.. हें.. हें..





कहेते चारु नीशाको हाथ पकडकर अपने पास खीच लेती हे.. फीर देवायतके लंडको पकडकर अपनी मुठीमे थामते उनपे अपनी जीभ फीराने लगती हे.. ओर नीशाके बाल पकडकर उनका मुहभी लंडके पास लेजाती हे.. ओर नीशाको आंखोके इसारेसे इसे मुहमे लेनेको कहेती हे.. तब नीशाभी सरमाकर मुस्कुराने लगी.. ओर धीरेसे अपनी जीभ नीकालकर देवायतके लंडको चाटने लगी.. दोनो लंडको चाटने लगी..





कुछही देरके बाद नीशा पुरी तराह खुल चुकीथी.. वो चारुको हटाकर देवायतका पुरा लंड मुहमे लेकर जोरोसे चुसने लगती हे.. दोनोही बारी बारी लंडको चुसती रही.. तब अचानक देवायतके लंडसे पीचकारीया छुट पडी.. तो चारु ओर नीशाने दोनोने अपना मुह खोल दीया.. ओर देवायतके रसको पीने लगी.. अब दोनोही देवायतको खुलकर प्यार करने लगी.. फीर तीनो बाथरुममे जाकर सही हो गये.. ओर बहार आगये..

चारु : (मुस्कुराते) नीशा.. अब तुम औरत बननेके लीये तैयार होजा.. मे इधरही बैठी हु.. तुजे कुछ हुआ तो मेतुजे सम्हाल लुगी.. चल बीचमे लेटजा..

देवायत : (हसते) चारु.. क्यु बेचारीको डरा रही हो.. उसे कुछभी नही होगा.. मे प्यारसे करुगा.. नीशा.. आजा.. आज तेरा कल्याण करही देता हु..

नीशा : (पैर फैलाकर लेटते) जानु.. प्यारसे.. हंम..? देखना.. मे अभीतक वर्जीन हु..

चारु : (हसते) अरे हां तु लेटजा.. आज सही मायनेमे ये तेरा पती होजायेगा.. फीर तेरे सुधीर भाइको खुस खबर सुनाना.. हें.. हें.. हें.. की आप मामा बनने वाले हे.. हें.. हें.. हें..

कहातो तीनोही हसने लगे.. नीशा लेट गइ तब देवायत उनके पैरोके बीच आकर बैठ गया.. ओर अपना लंड पकडकर नीशाकी चुतपे धीरे धीरे घीसने लगा.. तो नीशा बहुतही कामुक होगइ.. ओर आधी आंख चडाते सीसकारीया करने लगी.. जब लंड गीला होगया तो देवायतने उनकी चुतमे थोडासा फसादीया.. तो नीशाकी आंख बडी होगइ.. ओर वो मुह फाडके देवातकी ओर देखने लगी..





तभी देवायत नीशाके उपर जुकते उनपे लेट गया ओर नीशाके दोनो हाथ पंजोसे पकड लीया.. फीर उनके बुब्सको चुमते चुमते उनके होठोको चुमने लगा.. ओर नीशाके होठोको लीपलोक करलीया.. तब चारु जटसे नीशाके सरके पास बैठ गइ.. ओर उनके सरको सहेलाने लगी.. ओर देवायतकी ओर देखते मुस्कुराकर आंखोसे इसारा कर दीया.. तो देवायतने अपनी कमरको उची करते अ‍ेक जोरोका जटका मारदीया..
 
नीशाकी जोरोकी चीखके साथ उनकी आंख बडी होगइ.. ओर उनमेसे आंसु नीकलने लगे.. वो दोनो पैर बेडपे पटकते देवायतसे लीपलोक छुडवानेकी कोसीस करने लगी.. नीशा कुछ समजे उनसे पहेले ही देवायतने अ‍ेक ओर जटका मारदीया.. तो नीशा चीखकर बेहोस होगइ.. उनकी चीख देवायतके मुहमे ही दब गइ.. ओर देवायत लीपलोक छोडके हाथके बल उचा होगया.. ओर नीशाको बेहोसीमे जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा..





चारु : (मुस्कुराते नीसाके बालोको सहेलाते) जानु.. इसे होस आजाये उनसे पहेले आप फटाफट चोदलो.. अभी आपके हथीयारके लायक होजागेथी.. क्या आपने वंदुके साथ भी अ‍ैसे कीयाथा..? हंम..?

देवायत : (जोरोसे चोदते) हंम.. अभी कुछ मत बोल.. मुजे चोदने दे.. उनके साथ भी यही कीयाथा.. वोभी बेहोस होगइ थी.. जैसे तुम यहा हो.. वहा रश्मी उनके पास थी..

चारु : (जुठे गुस्सेसे) कीतने कमीनेहो आप.. मेरी बेटीको भी बेहोस करदीया.. चोदो फटाफट..

ओर देवायत कुछ बोले बीना ही नीशाको जोरोसे चोदता रहा.. उनका पुरा लंड नीशाकी चुतसे नीकले खुनसे रंगा हुआ था.. आज सचमे नीशाका कौमार्य भंग हुआथा.. काफी देर देवायत नीशाकी चुदाइ करता रहा.. तब नीशा दर्दसे अपना मुह बीगाडने लगी.. ओर बेहोसीमे ही देवायतको हाथसे रोकनेकी कोसीस करने लगी.. तब देवायतने पुरा लंड नीशाकी चुतमे घुसाकर चोदना रोक दीया.. ओर नीशाके उपर लेटते उनके होठो ओर बुब्सको चुमने लगा..





चारु : (धीरेसे मुस्कुराते) बस.. बस.. बेबी.. होगया.. अभी दर्द चला जायेगा.. मेरी प्यारी बच्ची..

नीशाने धीरेसे अपनी आंख खोलदी.. तब उनके पास चारु बैठीथी ओर नीशाके सरको सहेला रहीथी.. नीशा उनकी ओर देखते अपने आंसु बहाने लगी.. ओर मुस्कुरानेकी कोसीस करते बहुतही सरमाने लगी.. लेकीन उनको दर्दभी हो रहाथा.. तो वो अपना मुह थोडा बीगाडते.. अपना मुह इधर उधर करने लगी.. उनको भी पताथा की ये दर्द थोडी देरके लीयेही हे.. देवायत उनके होठो ओर बुब्सको चुम रहाथा.. तब नीशा बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर वो देवायतके बालोको सहेलाने लगी.. तो चारुभी खुस होते मुस्कुराने लगी..

नीशा : (धीरेसे सरमाते) भाभी.. नीचे बहुत जलन हो रही हे.. क्या पुरा अंदर हे..?

चारु : (खुस होते मुस्कुराते) हां नीशा.. तु अब वाकइ अ‍ेक कलीसे फुल होगइ हे.. आज तुमने औरत होनेका सुख पालीया हे.. बस अब हमे जल्दीसे अ‍ेक प्यारेसे बच्चेकी खुसखबरी सुनादे.. तो गंगा नहाये.. हें..हें..हें..

नीशा : (सरमाते धीरेसे) देवु.. थेन्क्स.. आज मे बहुत खुस हु.. आप मुजे पहेले क्यु नही मीले..? आज पता चला.. इस सुखके लीये सरम नही.. हिमंत चाहीये.. जो मुजे चारुभाभीने दी.. थेन्क्स भाभी..

देवायत : (मुस्कुराते होठ चुमते) नीशा.. अब कैसा लग रहा हे..?

नीशा : (सरमाते मुस्कुराते) पहेलेसे बेटर.. जानु.. आज पता चला सुहागरातमे क्या क्या होता हे.. अंदर हेतो भलेही थोडा दर्द हो लेकीन फीरभी अच्छा लग रहा हे.. अ‍ैसा लगता हे मे जनतकी सैर कर रही हु..

चारु : (खुस होते मुस्कुराते) नीशा.. अगर अच्छा लग रहा हे तो फीर सुरु करे..? हंम..?

नीशा : (सरमाते धीरेसे) हंम.. जानु.. लेकीन धीरे धीरे.. हंम..? क्युकी अभीभी थोडा दर्द हे..

देवायत : (होठोको चुमते) अरे मेरी प्यारी रानी.. प्यारसे करुगा.. लेकीन अभी नही.. थोडी देरके बाद.. जब तेरा पुरा दर्द खतम होजाये.. चल रेडी होजा.. आज तो जब तक तुजे प्रेगनेन्ट नही करदुगा.. तबतक मे तेरे उपरसे उतरने वाला नही हु.. फीर आराम करती रहेना.. चल..

नीशा : (बहुतही सर्मसार होते) भाभी.. क्या पहेली बारमे ही सब होजायेगा..?

चारु : (मुस्कुराते) हां नीशा.. तुम बहुत नसीब वाली हो.. तुम फीकर मत कर.. आज ही सबकुछ होजायेगा..

कहातो नीशा बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर चारुकी ओर देखते मुस्कुराती रही.. तो चारुभी खुस होते उनके सरको सहेलाने लगी.. ओर कुछ देरके बाद देवायतभी धीरे धीरे कमर हीलाते नीशाको चोदने लगा.. तब कुछही देरमे नीशाके मुहसे कामुक सीसकारीया नीकलने लगी.. ओर वो फीरसे मदहोस होते चुदाइका आनंद लेने लगी.. तब चारुभी नीशाके होठो ओर उनके उरोजोको चुमते उनकी कामवासनाको ओर भडकाने लगी..
 
जब ये तीनो अपनी सुहागरात मनाते चुदाइका आनंद ले रहेथे.. तो उनको पता ही नही थाकी आज रमेश अपने घरपे अकेला हे.. उनको पता थाकी आज कल वंदना रश्मीभाभीके घरपे रुकी हुइ हे.. तो उसने चारुके नीशाके घर जातेही अपने घरके बहारके दरवाजेको बंध करके लोक करदीया.. ओर घरमे आकर फोन लगाकर उसने जयाभाभीसे घरपे अकेले होनेकी बात करली.. तो सुनकर जयाभाभी भी बहुत खुस होगइ..

ओर जयाभाभीने खाना खातेही सबको आज बहुत गरमी हे.. कहेकर अपनी घरकी छतपे सोनेकी प्लानींग करली.. जयाको लगता थाकी उनकी बात कोइ ध्यानमे नही लेगा.. लेकीन अ‍ेक सख्स था जो उनकी हर हरकतपे नजर रख रहाथा.. वो जयाके छतपे सोनेकी बात सुनकर अ‍ेलर्ट होगइ.. उनको लगाकी जया अकेली छतपे क्यु सोने जा रही हे..? इसमे जरुर कुछ दाल मे काला होगा.. ध्यान रखना पडेगा..

यही सब सोचते वो तीरछी नजरसे जयाको देखने लगी.. तो जया मनही मन बहुत खुस हो रहीथी.. वो सख्स कोइ ओर नही उनकी बेटी जागृती थी.. जबसे उन्होने जया ओर रमेशको लाइव चुदाइ करते देखलीया था.. तबसे वो अपनी मां जयाके उपर बरोबर नजर रख रहीथी.. लेकीन उनको बंसीको भी सेट करना था.. तो वो आज बंसी ओर सांतीकी चुदाइ भी देखना चाहती थी..

जागृतीने पहेले ही बंसीके रुमकी खीडकी थोडीसी खुली रखदी थी.. जब जागृती ओर सांती घरका काम नीपटा रहीथी.. तबही जया अपना बीस्तरा लेकर घरकी छतपे चली गइ.. तो जागृती उसे टेडी नजर करके देखती रही.. फीर सबलो अपने अपने रुमपे चले गये.. तब जागृती कुछ देरके लीये सांतीसे बात करने उनके रुमपे चली गइ थी.. लेकीन जब वापस नीकली तब वो छुपकेसे घरकी सीडीया चडने लगी..

ओर उपर छतकी सीटीयो तक जाकर अपना सर थोडासा नीकालते देखने लगीकी उनकी मां सोइ हेकी नही.. तब जया अपने बीस्तरपे करवटे ले रहीथी.. तो जागृती धीरेसे वापस नीचे आगइ.. ओर अपने रुममे चली गइ.. ओर दरवाजेसे सांतीके रुमकी ओर नजर गडाये खडी रही.. तब कुछही देरमे सांती सज धजके रुमसे बहा नीकली.. ओर रुमका दरवाजा धीरेसे बंध करके बंसीके रुममे चली गइ..

तो जागृती फटाफट बहार नीकलकर अपने रुमका दरवाजा धीरेसे बंध करती हे.. ओर कीचनमे जाकर उनके छोटेसे दरवाजेसे घरके बहार आंगनमे चली जाती हे.. ओर घुमकर बंसीके रुमके पास आकर उनकी खीडकीसे अंदरके सब नजारे देखने लगीती हे.. देखातो बंसी ओर सांती दोनोही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे खडे रहेते अ‍ेक दुसरेके चहेरेको पागलोकी तराह चुम रहेथे.. जीसे देखाकर जागृती मुस्कुराने लगी..

पंद्नह बीस मीनीटके बाद जब बंसीके रुममे चुदाइका तांडह हो रहाथा तब जागृतीभी उतेजीत होकर अपनी चुतमे उंगली कर रहीथी.. उसी वक्त देर रात रमेश अपने घरकी छतपे आगया.. देखतो उपर घना अंधेरा छाया हुआ था.. पुरे गांवमे सनाटा लग रहाथा.. उनके घर ओर सामतके घरके बीच सीर्फ तीन मकानही थे.. तब रमश अ‍ेक छतसे दुसरी छतपे जाते सामतके घरकी छतपे चला गया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १७२

पंद्नह बीस मीनीटके बाद जब बंसीके रुममे चुदाइका तांडह हो रहाथा तब जागृतीभी उतेजीत होकर अपनी चुतमे उंगली कर रहीथी.. उसी वक्त देर रात रमेश अपने घरकी छतपे आगया.. देखतो उपर घना अंधेरा छाया हुआ था.. पुरे गांवमे सनाटा लग रहाथा.. उनके घर ओर सामतके घरके बीच सीर्फ तीन मकानही थे.. तब रमश अ‍ेक छतसे दुसरी छतपे जाते सामतके घरकी छतपे चला गया....अब आगे

तो वहा जया रमेशके इन्तजारमे अपने बीस्तरपे लेटी हुइ थी.. जैसेही रमेशके आनेका आभास हुआ तो वो जटसे सीडीओकी ओर नजर डालते उठकर बीस्तरपे बैठ गइ.. तभी रमेशभी उनके पास आकर बैठ गया.. ओर बैठेही जयाको जोरोसे अपनी बाहोमे भरलीया.. फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमने लगे.. दोनोही मदहोस होगये.. रमेश जोरोसे जयाके बुब्सको मसलते होठोको चुम रहाथा..

जैसेही रमेशने जयाके बुब्सको पकडके मसला जया पुरी तराह कामातुर होगइ.. ओर रमेशके लंडको पकडते धीरेसे मसलने लगी.. दोनोही अ‍ेक दुसरेके अंदर समाजानेके लीये मचलने लगे.. तभी..





जया : (भारी सांस लेते धीरेसे) बस.. बस.. रमेश.. यहा छोडो.. कोइ आजायेगा.. हम बादमे मीलेगे.. यहा हमारा मीलना मतलब बहुत बडा रीस्क हे..

रमेश : (होंठ छोडते धीरेसे) पागल हो गइहो क्या..? क्या बादमे मीलेगे.. चल आज कीतना अच्छा मौका हे..

जया : (सरमाते धीरेसे) रमेश.. आप समजते क्यु नही..? मेभी आपसे मीलनेके लीये तरस रही हु.. ओर मुजे आपसे अ‍ेक बातभी कहेनी थी.. इसीलीये मेने आपको मीलनेकी हां कहेदी.. समजो इस वक्त सबलोग नीचे सो रहे हे.. सीर्फ सांती ओर बंसीही जागते होगे.. कही वो देरसे इधर ना आजाये.. यहा मीलन करनेमे बहुत बडा खतरा हे.. अबतो मेरी जागुभी मुजपे सक करने लगी हे..

रमेश : (धीरेसे) अरे तो मे यहा मीलनेके लीये थोडीना केह रहा हु.. चल मेरे घरपे.. आज घरपे कोइ नही हे.. सीर्फ मे अकेलाही घरपे हु.. वहा हम दोनो आरामसे मील सकेगे..

जया : (धीरेसे) क्यु..? आपकी बीवी कहा गइ..? क्या वो घरपे नही हे..?

रमेश : (धीरेसे) हां जया.. वोभी घरपे नही हे.. इसीलीये तो तुजे मीलनेके लीये फोन कीया था.. सुन वो सुधीर उनके कामके लीये कही दो दिनके लीये सहेर गया हे.. तो नीशा भाभी घरपे अकेली हे.. तो चारु उनके घर सोने चली गइ हे.. तो हमारे पास ये दो राते हे.. तु कलभी इधर सोना मे देर रात तुजे लेजाउगा.. ओर सुबह होनेसे पहेले तुजे यहा छोड जाउगा.. चल मेरे साथ.. कोइ पुछे तो केह देना मे टंकीके पीछे सोइ हुइ थी.. चल हम घरपे आरामसे बाते करेगे.. तुजे जोभी कहेना हे उघर कहेना.. चल..

जया : (सरमाते धीरेसे खडी होते) रमेश.. देखना अभी कुछ गडबड ना होजाये.. अगर कुछ हुआ तो आप सम्हाल लेना.. मुजेतो बहुत डर लग रहा हे.. अगर कीसीको पता चल गयातो मेतो गइ कामसे.. चलो..

कहातो रमेशभी खडा हो गया.. ओर जयाका हाथ पकडकर उसे अ‍ेक छतसे दुसरी छतपे लेजानेमे मदद करता रहा.. ओर आखीर दोनोही रमेशके घरपे आ गये.. तो आतेही रमेशने घरका दरवाजा भी लोक कर दीया.. तो दोनो वही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये.. ओर अ‍ेक दुसरेके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगे.. तभी रमेशने वहीसे जयाको अपनी गोदमे उठालीया.. तो जया बहुतही सर्मसार होने लगी.. ओर रमेश उनको गोदमेही उठाते अपने बेड रुमकी ओर चला गया..

अंदर जातेही जयाको बेडपे लीटाकर खुदभी उनकी बगलमे लेट गया.. तो जयाने उसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. क्युकी जयाको रमेशने आतेही छेडाथा.. तबसे वो बहुत ही कामातुर होगइ थी.. ओर रमेशके साथ जल्दसे जल्द मीलन करना चाहती थी.. जयाने रमेशको जटसे अपनी बाहोसे आजाद कीया ओर रमेशकी ओर वासना भरी नजरोसे देखते फटाफट उनके सर्टके बटनको खोलने लगी..

तो रमेशभी जयाकी सारीको खीचकर नीकालने लगा ओर उनके ब्लाउसके बटनको खोलने लगा.. तब कुछही देरेके बाद दोनोके अंगपे अ‍ेकभी कपडे नही थे.. जया रमेशके बगलमे लेटकर उनके लंडको सहेला रही थी.. तो रमेशभी जयाकी चुतमे उंगली डालकर उनके होठोको चुम रहाथा.. फीर वो नीचेकी ओर चला गया ओर जयाकी चुतको चुमते उनके उरोजोके साथ खेलने लगा.. तो जया फीरसे मदहोस होगइ..





जया : (सरमाते धीरेसे) बस.. बस.. रमेश.. अब जल्दीसे उपर आजाओ.. मुजे अ‍ेक बार अच्छेसे चोदलो.. बहुत मन कर रहा हे.. फीर मुजे आपसे कुछ बाते भी करनी हे.. चलोना.. ओर हां.. आज कोइ गोली मत खाना.. वरना आपतो मुजे चोदते ही रहेते हो.. आज मुजे बीना गोली खाये अ‍ैसेही अ‍ेक बार चोदलो..

रमेश : (जयाके उपर आते होठ चुमते) जया.. आजतो पुरी रात हमारे पास मौका हे.. अ‍ेक गोली खाने देना..

जया : (सरमाते धीरेसे) नही रमेश.. मुजे जाना होगा.. लगता हे घर वालोको मुजपे सक होगया हे.. सबको पता चल जाये उनसे पहेलेही हमे कुछ करना होगा.. लेकीन अभी अ‍ेक बार मुजे ठंडी करदो.. फीर हम आरामसे बाते करेगे.. मुजे आपसे बहुत कुछ कहेना हे.. चलो.. डालदो अंदर.. आपने क्या जादु करदीया हे.. मे आपके बीना रेह ही नही सकती.. डालोनां..





कहतो रमेशने पुरा लंड जयाकी चुतमे उतार दीया.. ओर कुछही देरमे दोनोके बीच धमासान चुदाइ होने लगी.. इधर रमेश जयाको चोद रहाथा.. तो दुसरी ओर जयाके घरपे बंसीने सांतीकी अ‍ेक बार जबरदस्त चुदाइ करते सांतीकी चुतको अपने पानीसे भरदीया था.. ओर बंसी अ‍ैसेही बीना लंड नीकाले सांतीके उपर लैटा हुआथा.. फीर कुछ देरके आरामके बाद बंसी दुबारा दुसरी बार सांतीको चोद रहाथा..





आज सांती समज गइथी.. की आज उनकी खैर नही हे.. क्युकी आज सांतीको बंसीका मुड कुछ ओरही लग रहाथा.. ओर उनके मुडका अ‍ैसा होनेका रीजनभी सांतीको पताथा.. सांती अपनी हालत बीगाडनेके लीये मानसीक तौरपे पुरी तराह तैयार थी.. तब जागृती भी अपनी चुतमे उंगली डालकर जोरोसे हीलाते जड चुकी थी.. ओर वो वापस कीचसे होकर अपने रुमकी ओर आने लगी..

तभी उसे अपनी मां जयाका खयाल आया.. ओर वो अ‍ेक बार फीर दबे पांव सीडीया चडते छतकी ओर चली गइ.. ओर वहा देखा तो सांतीका बीस्तर अस्त व्यस्त खाली पडा था.. तो जागृतीका माथा घुम गया.. ओर वो छतपे जाकर इधर उधर टंकीके पीछे सभी जगाहपे चेक करने लगी.. उनको अपनी मां जया कही नजर नही आइ.. ओर वो जटसे सीडीया उतरके नीचेभी उनके रुममे चेक करने लगी.. जया वहा भी नही थी..

सामत अपने रुमका दरवाजा हमेसा खुलाही रखता हे.. जयाको वहाभी नही देखकर जागृती अपने रुममे चली गइ.. ओर बेडपे लेटकर सोचने लगी.. की जया गइतो कहा गइ..? कही वो छतसे रमेशभाइके घरतो नही गइ..? खयाल आतेही जागृती जटसे वापस बेडसे खडी होगइ.. ओर अपने रुमका दरवाजा धीरेसे बंध करके वापस दबे पांव छतपे चली गइ.. ओर हिमंत करते अ‍ेक छतसे दुसरी छत कुदते वो रमेशकी छतपे आगइ..
 
ओर धीरेसे सीडीया उतरते उनके आंगमे आगइ.. देखातो आंगनका दरवाजा ओर घरका मुख्य दरवाजा बंध था.. तो वो आजु बाजु देखते घरके आंगनमे पीछेकी ओर जाने लगी.. ओर अ‍ेक अ‍ेक खीडकीसे देखनेकी कोसी करने लगी.. तब उसे अ‍ेक खीडकीसे कुछ अजीबसी आवाज आने लगी.. ओर जागृती खीडकीमे कोइ छेद हेकी नही देखने लगी.. लेकीन उनको कहीसे भी कोइ छेद नजर नही आया..

तो जागृती धीरेसे खीडकी खोलनेकी कोसीस करने लगी.. तो खीडकीका अ‍ेक दरवाजा लोक था.. ओर अ‍ेक दरवाजा धीरेसे खुल गया.. जैसेही दरवाजा खुला तो जागृतीके चहेरेपे मुस्कान आगइ.. ओर वो पैरोसे उची होते अनुठेपे खडी होकर अंदर जांकने लगी.. तो अंदर हल्कीसी रोसनी जल रहीथी.. ओर जागृती अंदरके नजारेको देखने लगी.. अंदर देखतेही जागृतीको उनके पैरोसे जमीन खीसकनेका अहेसास होने लगा..

उनका मुह गुस्सेसे लाल टमाटर जैसा होगया.. वो सरमसे पानी पानी होने लगी.. क्युकी अंदर रमेश अपनी कमर उछाल उछालके जयाको चोद रहाथा.. ओर जयाभी रमेशका साथ देते पुरे ताल मेलमे कमर उछालते रमेशको ओर जोरोसे चोदनेके लीये उकसा रहीथी.. अंदरका नजारा देखते जागृतीकी अ‍ेक बार फीर चुत गीली होने लगी.. अंदर रमेश ओर जया दोनोकी आवाज जागृतीको साफ सुनाइ दे रहीथी..





तो वो अंदरकी ओर कान लगाकर सुननेकी कोसीस करने लगी.. तो अंदर जयाके सीसकारीवोकी आवाज साफ सुनाइ देरही थी.. तो जागृती समज गइकी उनकी मां ओर रमेश जडनेकी कगारपे हे.. तब कुछही देरमे जयाकी हल्कीसी चीख सुनाइ दी.. दोनोही घरपे अकेले थे तो बीन्दास्त जोरोसे आवाज करते चुदाइमे मसगुल थे.. जब रमेशने जयाकी चुतको भरदी तब रमेश जयाके सीनेपे ढेर होगया.. तब जया उनके बालोको सहेलाते उनसे बाते करने लगी..

जया : (सरमाते मुस्कुराते) रमेश.. जब आप मुजे चोदते हे तो अ‍ेक बडा सुकुन मीलता हे.. इसे अंदरही रखना.. बस मुजे अ‍ैसेही प्यार देते रहेना.. अब मुजे सीर्फ आपसे मतलब हे.. अब मुजे कीसीका डर नही हे..

रमेश : जया.. तुम मुजसे कुछ बाते करना चाहती थी.. तो बोलना क्या बात हे..

जया : (सरमाते) रमेश.. उस दिन हम सहेरसे मीलकर आये तब गांवमे मुजे चारुभाभी मीली थी.. वो मुजे भला बुरा कहेने लगी.. तो उस दिनतो मेने उसे जुठ बोल दियाथा.. की मे आपसे पेटसे होगइ हु.. लेकीन कुछ दिनसे मुजे सचमे पेटमे कुछ गडबड लग रही हे.. मे हर बार आइपील खा लेती हु.. फीरभी मुजे लगता हे मे सचमे प्रेगनेन्ट हो चुकी हु.. हमे सहेर जाकर अ‍ेक बार चेक करवाना होगा.. वरना बहुत बडी गडबड होजायेगी..

रमेश : (थोडा परेसान होते) जया.. तुजे इतना कुछ समजाया फीर भी तु आइपील लेनेमे लापरवाही क्यु करती हे..? अ‍ैसे बार बार बच्चा गीराना अच्छी बात नही हे.. हम अ‍ेक बार तो बच्चा गीरवा चुके हे.. तु समजती ही नही.. ठीक हे हम अ‍ेक दो दिनमे सहेर जायेगे तब देख लेगे.. ओर तो कुछ नही हे नां.. तेरी उसी बहेसकी वजहसे अब चारु मुजसे दुर होगइ हे.. कीतनी बार कहाथा उनसे कोइ बहेस मत करना..

जया : (धीरेसे) आइ अ‍ेम सोरी रमेश.. अब मे खयाल रखुगी.. जानु.. प्लीज.. चलोना हम कही भाग चले.. हम सहेरमे कहीभी रेह लेगे.. मुजे आपके साथ रहेना हे.. वैसेभी सांतीको तो सब पता चलही गया हे.. मुजे लगता हे मेरी जागुकोभी मुजपे सक होगया हे..

वोभी आज कल मुजसे ठीक मुहसे बातभी नही करती.. रमेश.. सबको पता चले उनसे पहेले आप कुछ करीयेनां.. मुजे आपके साथ रहेना हे.. इसके लीये मे सबकुछ छोडनेको तैयार हु.. मुजे कही भगाकर ले चलो.. मे आपके साथ पुरी जींदगी बीताना चाहती हु..

रमेश : (होठोको चुमते) ठीक हे जया.. मुजे कुछ सोचनेके लीये टाइम दे.. मे कुछ करता हु.. पहेलेतो हमे इस बच्चेका कुछ करना होगा.. फीर हम आरामसे कुछ सोचेगे.. मुजे नही लगता अब चारुभी मेरे साथ कोइ रीलेशन रखे.. तो फीर मे कहा जाउगा.. मुजेभी तुमसे प्यार होगया हे.. अबतो मुजेभी तेरा साथ चाहीये..

जया : (खुस होते) रमेश.. तो फीर चलोना.. हम कही भाग जाये.. मेरे मायकेमे भी अब मुजे कोइ पुछने वाला नही हे.. तो फीर इस बार बच्चा ठहेर गया हे तो हमे इसे गीरवानेकी जरुरत नही हे.. मे आपका बच्चा पैदा करुगी.. हम दोनो अपना नया संसार बसायेगे..

रमेश : (थोडा सोचते) जया.. मुजे सोचनेका थोडा वक्त दे.. मुजे सामतभाइको भी धोखा देना अच्छा नही लगता.. वैसेभी हम दोनो पंचायतके कामसे सहेरमे जाते हे.. तो मे दो तीन बार उनके साथ कीसी डोक्टरको दिखाने गया था.. लेकीन वो मुजे कुछ बतातेभी तो नही हे.. की उनको क्या हुआ हे.. कहेते हे मे दुसरेके लीये दवाइ लेने आया हु..

जया : (आस्चर्यसे देखते) रमेश.. क्या वो सचमे कीसी डोक्टरको दीखाने जाते हे..? तो फीर आपने पुछा नही कीसके लीये दवाइ लेने जाते हे..? मुजे ही उनसे बात करनी पडेगी..

रमेश : (जटसे) अरे नही नही.. तुम उसे इस बारेमे कुछभी मत पुछना.. वरना उनको सब पता चल जायेगा की ये सब मेनेही तुने बताया हे.. उसने मुजे कीसीको ना कहेनीकी कसम खीलाइ हे..

जया : येभी सही हे.. ठीक हे में नही पुछती.. रमेश.. मे सोच रही हुकी अब सांतीकी सादी बंसीसे करवादु.. ताकी वो घरको सम्हालले.. तो मुजेभी आपके साथ आनेका सुकुन मीलेगा.. क्या कहेते हो..?

रमेश : (मुस्कुराते) हां.. अ‍ेक बार मे ओर सामतभाइ आश्रमपे गयेथे.. तब बातोही बातोमे बात छीड गइ थी.. तो बाबानेभी उसे यही कहाकी तेरी विधवा बहेनकी सादी अपने बेटेसे करदे.. तो वो कुछ नही बोले.. क्युकी उनको भी पता हे अब गांवमे बहुत कुछ बदलने वाला हे.. तु अ‍ेक बार सामत भाइसे इस बारेमे बात करले.. सायद वो मान जाये..

जया : (होठोको चुमते) रमेश.. लास्ट टाइम हम सहेरमे मीलने गये तब उसी दिन मेने भी अ‍ेक बार उनका मन जाननेके लीये पुछा था.. तो कहाकी अगर बंसी चाहेगा तो मे जरुर दोनोकी सादी करवा दुगा..

रमेश : (मुस्कुराते) जया.. तो फीर क्या प्रोबलेम हे..? सामतभाइ हमारे गांवमे अ‍ेक मीसाल बन सकते हे.. तुम सीर्फ घरके लोग आश्रमपे जाकर दोनोकी सादी करवादो.. मे देवुभाइसे बात करलुगा..

जया : (मुस्कुराते) ठीक हे.. मे कलही इस बारेमे बंसी ओर सांतीसे बात करलेती हु.. अगर वो हां कहेते हे तो फीर हम उन दोनोकी सादी करवा देगे.. अब चलीयेनां.. अ‍ेक बार चोद लोजीये.. बहुत मन कर रहा हे.. फीर मुजे जानाभी हे.. वरना कोइ जागते उपर आगया ओर मुजे नही देखातो गडबड होजायेगी..

रमेश : अरे.. अभी अभी तो कीया हे.. आज मेने गोली थोडीना खाइ हे.. जो तुजे दुबारा चोदने लगु.. थोडा आरामतो करेने दे.. फीर मे तुजे चोदता हु.. बादमे तुजे तेरी छतपे छोड दुगा..

जया : (मुस्कुराते) रमेश.. जब आप मेरे उपर होते हो तब कीतना अच्छा लगता हे.. बस.. मन करता हे आपसे चुदवाती ही रहु.. पता नही आपने मुजपे क्या जादु करदीया हे..

रमेश : (मुस्कुराते होठ चुमते) जया जादु मेने नही तुमने मुजपे कीया हे.. कास.. तेरी तराह चारु भी मुजसे प्यार करती.. वादा कर अब हर जन्ममे हम दोनोही मीलेगे..

जया : (सरमाते मुस्कुराते) हां जानु.. मेभी यही प्रार्थना करती हु.. की अब हर जन्ममे आपही मुजे पतीके रुपमे मीले.. जब आपका हथीयार अंदर होता हे तब बडा सुकुन मीलता हे.. चलीये.. मे इसे फीरसे खडा करनेके लीये रेडी करती हु..

कहातो रमेशका लंड अ‍ेक बार चोदकर फीरसे ठीकसे खडाभी नही हुआथा.. तो जया उसे अपनी मुठीमे पकडकर सहेलाने लगी.. ओर सहेलाते सहेलाते अपने मुहमे लेलीया ओर लोलीपोपकी तराह चुसने लगी.. उनको पताथा की रमेशके लंडको कैसे खडा करना हे.. कुछही महेनतके बाद रमेशका लंड फीरसे तावमे आने लगा.. ओर खडा होकर जटके मारने लगा.. तब जया फटाफट लंडको मुहसे नीकालकर बेडपे लेट गइ..

फीर रमेशने हाथोसे अपने लंड पकडकर जयाकी चुतमे घुसा दीया..ओर वो अ‍ेक बार फीर जयाको चोदने लगा.. तब बहार जागृतीका इन दोनोकी बाते सुनकर माथाही घुम गया.. वो भारी मनसे वहासे नीकल गइ.. आज उसे जयाके बारेमे बहुत कुछ पता चल चुकाथा.. उनके बापुके बारेमे सुनकर उनको सामतकी चीन्ता होने लगी.. तो बंसी सांतीके सादीकी बात सुनकर अ‍ेक बार फीर उसे सांतीसे ज्वेलेसी फील होने लगी..

वो अब कीसीभी हालमे बंसीको पानेका मन बना चुकीथी.. जागृतीने इस मामलेमे अब खुद आगे बढनेका फैसला करलीया.. वो धीरे धीरे सीडीया चडते अ‍ेक छतसे दुसरी छत कुदते अपने रुममे आगइ.. ओर अपने बेडपे जयाके बारेमे सोचते कब उसे नींद आगइ पताही नही चला.. तो रमेशने भी जयाको दो बार चोदलीया.. तो वोभी जयाको वापस उनकी छतपे छोड गया ओर वापस चला गया.. फीर दोनोही सोगये..
 
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