Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 54 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १९९

इधर लखन धिरेनसे बात करके अपने रुममे आगया.. तब रमा लता ओर नीलम अपने कपडे बेगमे पेक कर रही थी.. जैसेही लखन आया तब रमा ओर नीलम दोनो ही सरमाके मुस्कुराने लगी.. तब रमा कातील नजरोसे लखनकी ओर देखती रही.. तो नीलम भी अपनी मम्मी ओर लखनकी ओर नजर गडाके बैठ गइ.. फीर वो भी लखनकी ओर देखकर सरमाकर मुस्कुराने लगी.. तभी....अब आगे

लता : (मुस्कुराते) अरे लखन आप आगये..? क्या मे आपके सभी कपडे पेक करदु..? हंम..?

लखन : (मुस्कुराते) अरे नही नही.. अभी अ‍ेक हप्तेके बाद श्रीधरकी सादी भी हे.. तब हमे वापस यहा आना पडेगा.. ओर अब यहा आना जाना तो लगा ही रहेगा.. तो हमारे आधे से ज्यादा कपडे यही छोडदे.. हम वहासे नया ले लेगे..

लता : (सरमाते मुस्कुराते) ठीक हे.. आप भाभी ओर नीलुके लीये भी कपडे लेना.. क्या अभी आपको यहा आराम करना हे..? तो आज आप बाजुमे भाभी वाले रुममे चले जाइअ‍े.. आज हमे सब पेकींग करना हे.. ओर नीलु.. तुजे भी जाना हो तो अपने रुममे चलीजा.. ओर कुछ देर आराम करले.. वरना तेरे जीजुसे बाते कर.. तबतक मे ओर भाभी सब पेकींग कर लेगे..

नीलम : (लखनकी ओर देखते मुस्कुराते) जी दीदी.. अभी चली जाउगी..

लखन : (नीलमकी ओर इसारा करते) लता मे भाभीके रुममे चला जाता हु.. तुम लोग अपना काम नीपटालो.. चल नीलु तुभी आजा..

कहेते नीलमको दुसरे रुममे आनेका इसारा करते लखन चला गया.. तो लखनकी इस हरकतको रमाने देख लीया.. तो मन ही मन खुस होते मुस्कुराने लगी.. तब नीलम भी लखनके इसारोसे बहुत ही सर्मसार होने लगी.. उनको लगाकी लखन उनके साथ कुछ छेडखानी करना चाहते हे.. इसीलीये उनको दुसरे रुममे आनेका इसारा करते गये.. तभी रमाने लताकी नजर बचाते नीलमको आंखोका इसारा करते लखनके पास जानेको कीया..

रमा : (मुस्कुराते) नीलु.. अगर आराम नही करना तो थोडी देर जीजुके पास बैठो.. ओर बैठकर दोनो बाते करो.. तबतक मेभी अभी पेकींग करके आती हु..

नीलम : (सरमाते खडी होते) जी मम्मी.. जाती हु मे..

कहेते नीलम बहुत ही सर्मसार होने लगी.. क्युकी खुद उनकी मां भी यही चाहती थी.. की नीलम लखनके साथ अकेलेमे टाइम स्पेन्ड करे.. ओर इस मामलेमे वो खुद आगे बढे.. नीलम रमाके कहेनेपे मजबुरन खडी होगइ.. ओर सरमाते लखनके पीछे जाने लगी.. तब उनके दिलकी धडकन तेज होगइ.. क्युकी आज खुद रमा उनको लखनको मीलनेके लीये भेज रही थी..

तब नीलम सरमाते धीरेसे बहार नीकली ओर लखनके पीछे उनके रुमकी ओर जाने लगी.. अभी वो अंसमजमे थी.. की लखनके रुममे जाये के ना जाये.. क्युकी जाते वक्त नीलमको वो सभी बाते याद आने लगी.. जीस दिन लखन उनको अपने घरपे छोडनेके लीये आरहा था.. तब लखनने उनको अपने खेत दिखानेके बहाने अपनी गोडाउनकी ओफीसमे अमेले कैसे दबोच लीया था..

उनको कीस करते उनके दुधु मसलने लगा था.. यहा तक उनका लंड भी पकडा दीया था.. तभी उनको लास्ट वाले रुमके बहार लखन ओर धिरेन खडे दिखाइ दीये.. तो नीलमको देखते ही धिरेन स्माइल करने लगा.. तभी लखनने नीलमको इसारोसे धिरेनको मीलनेके लीये उनके रुममे साथ जानेको कहा.. तो नीलम बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर सरमाके हसने लगी.. तब लखन भी मुस्कुराते दुसरे रुममे चला गया..

तो नीलम जटसे चलने लगी.. ओर फटाफट पीछे देखकर धिरेनके रुममे घुस गइ.. तो धिरेनने फटाफट दरवाजा बंध करलीया.. ओर पलटकर नीलमको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर दोनो पागलोकी तराह अ‍ेक दुसरेके चहेरेको चुमने लगे.. तब नीलम भी धिरेनका प्यार देखकर मदहोस होते नसेकी हालतमे जाने लगी.. ओर आधी आंख चडाते धिरेनका होठ चुमते साथ देने लगी..





तब धिरेनने नीलमके बुब्सको अपने हाथोमे थाम लीया.. ओर मसलने लगा तो नीलम बहुतही उतेजीत होगइ.. ओर सीसकारीया करने लगी.. उनकी चुत फडफडाने लगी.. ओर उसमेसे पानीका रीसाव होने लगा.. नीलमने सरमाते धिरेनके लंडको पेन्टके उपरसे ही पकडलीया.. ओर मसलने लगी.. उसे लगाकी वो अभी के अभी धिरेनके लंडको अपनी चुतमे घुसादे.. तो धिरेनभी उतेजीत हो चुका था.. तभी..

धिरेन : (कामुक आवाजमे धीरेसे) नीलु.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. कैसी हो तुम..?

नीलम : (सरमाते सामने देखते) जानु.. लव यु टु.. मे आपसे बहुत प्यार करती हु.. बस.. आपके बीना तडप रही हु.. मुजे यहासे लेजाइअ‍े.. ओर सादी कर लीजीये मुजसे.. मे आपके साथ रहेना चाहती हु..

धिरेन : (धीरेसे होंठ चुमते) डार्लींग.. अ‍ैसा ही होगा जैसा तुम चाहती हो.. अब मुजे पुनोके साथ नही रहेना.. नीलु.. मेने हमारे लीये वो घर लेलीया हे.. जीसे हम देखने गये थे.. अब हम दोनो सादीके बाद वही रहेगे.. ओर मेने तुमको कीतनी बार ट्राइ कीया.. तुम्हारा फोन बंध ही आरहा हे.. कहा हे वो..?

नीलम : (सामने देखते) जानु.. सोरी.. वो लता दीदीके हाथ लग गगा.. तो उन्हीके पास हे.. वो हमसे बहुत नाराज हे.. ओर आपका नंबर भी मीस होगया.. अच्छा हे उसने अभी मेरे मम्मी पापाको नही बताया.. जानु.. मुजे अब लता दीदीके साथ रहेकर ही पढना पडेगा.. आप कुछ कीजीयेनां..

धिरेन : (जेबसे चीठी नीकालकर देते) नीलु.. तुम फीकर मत करो.. हम दोनो स्कुल टाइममे मीलेगे.. ये ले मेरा नंबर.. अब तेरे पास ही रखना.. मुजे भी कुछ अ‍ैसी ही आसंकाये थी.. तभी से मेरा नंबर लीखकर जेबमे रख लीया था.. अब इसे सम्हालके रखना.. हम बादमे दुसरा फोन लेलेगे.. तबतक तुम कीसी भी फोनसे बात करलेना..

नीलम : (आस्चर्यसे देखते) जानु.. वो.. वो.. लखन जीजु.. अभी यहा खडे थे.. तो क्याआआ....

धिरेन : (बीचमे ही बात काटते) हां नीलु.. तु उनकी टेन्शन मतले.. वो हमारे साथ हे.. लखन भैया मेरे सालेके साथ साथ मेरे बहुत अच्छे दोस्त भी हे.. हम दोनोके बारेमे सब कुछ जानते हे.. हमारा मीलन उसीने करवाया हे.. उनसे डरनेकी कोइ जरुरत नही.. ओर वहा जब भी तुजे मुजसे मीलनेका मन करे तु लखन भैयाको कहेना.. वो तुजे मुजसे मीलवा देगे..

नीलम : (आस्चर्यसे देखते) जानु.. क्या ये सब उसने कहा हे..? आइ कान्ट बीलीव.. क्या उन्होने ही..? मेरी तो समजमे नही आ रहा.. क्युकी वो खुद पुनम दीदीके सगे भाइ हे.. तो वो क्यु हमारी मदद करेगे..? वो ओर लता दीदीने तो हमे रंगे हाथो पकडा था.. ओर मुजे अपने साथ ले गये थे..

धिरेन : (मुस्कुराते) हां नीलु.. ये सच हे.. लखन भैया लता भाभीके कहेनेपे साथ आये थे.. मुजे लगता हे जबतक लखन भैया हे.. तबतक हमे मीलनेमे कोइ प्रोबलेम नही होगी.. वो मेरे सालेके साथ साथ बहुत अच्छे दोस्त भी हे.. देखा नही..? वो कैसे हमारी मदद कर रहे हे.. पुनोको तो बस.. यही पडे रहेना हे.. उनको अपने पतीकी कोइ चीन्ता नही हे..

नीलम : (चीठी जेबमे रखते) जानु.. मुजे जाना होगा.. मम्मी कभी भी रुममे आ सकती हे.. मुजे वहा नही देखेगी तो सक करेगी.. उनको लखन जीजुपे बहुत भरोसा हे.. तो अब हम सहेरमे ही मीलेगे.. मे आपको कोल करदुगी.. तब आजाना.. मे चलती हु.. ओर हां.. अभी आप बहार मत नीकलना.. वरना लतादीदी ओर मेरी मम्मी यही हे.. वो आपको देखेगी तो उनको भी सक होजायेगा.. वो कभी भी बहार नीकल सकती हे..

कहेते नीलम धिरेनके होठ चुमकर जटसे दबे पांव बहार नीकल गइ.. ओर बहार नीकलते ही दोनो ओर देखने लगी.. तो पासके ही रमा भाभीके रुमके पास लखन अभी भी बहार खडा रहेकर नीलमके बहार नीकलनेका इन्तजार कर रहा था.. जैसे ही नीलम उनके रुमके पास गुजरी लखनने फौरन उनका हाथ पकडकर अपने रुममे खीच लीया.. ओर जटसे दरवाजा बंध करदीया.. तो नीलम बहुत ही गभरा गइ..
 
तभी लखनने पलटकर नीलमको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके चहेरेको पकडकर अपना होंठ नीलमके होठोपे रखते जोरोसे चुसते कीस करने लगा.. तब नीलम छटपटाते लखनकी बाहोसे छुटनेकी कोसीस करने लगी.. तभी लखनने अ‍ेक हाथ उनके टोपमे घुसा दीया ओर नीलमके बुब्सको थामते जोरोसे मसलने लगा.. तब नीलमकी वापस सीसकारीया नीकल गइ.. वो कुछ बोलनेकी स्थीतीमे नही थी..





अ‍ेक तो वो धिरेनको मीलकर पहेलेसे ही उतेजीत हो चुकी थी.. ओर उपरसे अभी लखन उनके होठोको चुमते उनके बुब्सको बुरी तराह मसल रहा था.. तभी नीलमको अपनी मम्मीकी बाते याद आगइ.. ओर उसने फौरन लखनका विरोध करना छोड दीया.. ओर अ‍ैसेही खडी रहेते सरमाकर लखनसे बुब्स मसलवाने लगी.. वो लखनको सब कुछ करने देने लगी..





तभी लखनने उनके बुब्सको छोडकर स्कटके उपरसे ही उनकी चुतपे हाथ रख दीया.. ओर सहेलाते मुठी भरते चुतको धीरेसे दबोच लीया.. बस.. यही हरकत नीलमको बेकाबु करनेके लीये काफी थी.. चुतको छुते ही नीलम मीठे दर्दके कारण सीसकारीया करते उछल पडी.. तबतक लखनने अपने पेन्टकी जीप खोलकर अपने लंडको बहार नीकाल लीया.. तो लखनका लंड हवामे खडा रहेते जटके मारने लगा..

तब नीलम नीचेकी ओर टेडी नजरसे लंडको देखने लगी.. तो लखनका लंड देखते ही थोडीसी डर गइ.. क्युकी पीछली बारसे इस बार लखनका लंड कुछ ज्यादा ही मोटा ओर बडा दीख रहा था.. नीलम लखनके लंडकी ओर मुह फाडते देखती रही.. तभी अचानक लखनने नीलमका हाथ पकडकर अपने लंडपे रखदीया.. तो नीलमने हिंमत करते लखनके लंडको अपनी मुठीमे पकडलीया..





आखीर वही हुआ जो उनकी मम्मी चाहती थी.. नीलमने अपनी मम्मीकी बाते मानकर अपने आपको लखनके हवाले करदीया.. ओर सरमके मारे उनके कंधेपे सर रख दीया.. उनकी चुतसे फीरसे पानीका रीसाव होने लगा.. उनकी आंखे नसीली होने लगी.. ओर वो अ‍ैसेही लखनकी बाहोमे खडी रही.. तभी अचानक लखनने उसे छोड दीया.. फीर नीलमकी ओर देखते कामुक स्माइल करते अपना लंड मसलते लगा..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) नीलु.. क्या तुमने मेरी सर्त मानली..? हंम..? देखले.. ये हेना धिरेनसे बडा..? ये तुजे धिरेनसे बहुत ज्यादा मजा देगा.. ठीकसे दुबारा देखले..

नीलम : (सर्मसार होते लंडको टेडी नजरसे देखते धीरेसे) जीजु.. पहेली बार देखा था इनसे तो बहुत बडा दीखता हे.. क्या आपकी सर्त ना माननेका इसके अलावा मेरे पास ओर कोइ रास्ता हे..? प्लीज.. आप देखना इस बारेमे कभी धिरेनको या कीसी ओरको पता ना चले.. वरना मेरी इजत मीटीमे मील जायेगी..

लखन : (मुस्कुराते) अरे कीसीको पता नही चलेगा.. तु मान गइ वो ही मेरे लीये काफी हे.. क्या अबभी उनको प्यार करती हे..? सादी करना चाहती हेना उनके साथ..? तु फीकर मत करना मे ही तेरी सादीके लीये तेरा रास्ता साफ कर दुगा.. फीर आरामसे उनसे सादी करके अपनी जींदगी जीना.. बस.. सीर्फ अ‍ेक ही सर्त हे.. तुजे सादीके बाद भी मेरे साथ रीलेशन रखना होगा.. ओर वो भी मे जब चाहु.. बोलो.. सर्त मंजुर हे..?

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते हुअ‍े हां मे गरदन हीलाते) हां जीजु.. मुजे आपकी सभी सर्त मंजुर हे.. बस.. देखना इस बारेमे कीसीको पता ना चले.. वरना मेरी जींदगी बरबाद होजायेगी..

लखन : (मुस्कुराते होठको चुमलेते) नीलु.. जब तक तु मुजे खुस करती रहेगी तबतक तेरी जींदगी बरबाद नही होने दुगा.. मे हुनां.. बाकी तु समजदार हे.. अब जो भी होगा सब सहेर जाकर होगा.. यहा कुछ नही.. इसके लीये तुम तैयार रहेना.. क्या ये तुजे पंसद आया..? हंम..?

नीलम : (बहुत ही सरमाते धीरेसे) जीजु.. ये तो बहुत बडा हे.. मुजे कुछ होगातो नही..?

लखन : (मुस्कुराते) अरे नही नही.. यही समजलेना हमारी सुहागरात हो रही हे.. बस.. सीर्फ अ‍ेक बार दर्दको जेलना पडेगा.. जैसे तुमने धिरेनके साथ पहेली बार जेला था.. फीर देख.. तु कैसे मेरी दिवानी हो जाती हे.. तु धिरेनको भी भुल जायेगी..

नीलम : (सरमाकर धीरेसे) जीजु.. मुजे आपसे अ‍ेक बात कहेनी हे.. वो धिरेन मुजसे सादी करना चाहते हे.. लेकीन मे थोडी दुवीधामे हु.. मे जींदगीका हर मजा लुटना चाहती हु.. इसमे मुजे आपकी मदद चाहीये.. आप मेरी मदद करोगेनां..? तो मे वहा रहेकर आपको खुस रखुगी.. आप मुजे खुस रखना.. बाकी कुछ बाते हे वो मे आपको सहेर जाकर बता दुगी..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे नीलु.. वो हम सब वहा आरामसे बैठकर तैय करेगे.. क्या तुजे ये पसंद आया..? अ‍ेक बार इसे प्यार करके देखले.. तु खुस होजायेगी..

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) जीजु.. यहा नही.. अब तो हम सहेरमे साथ ही रहेगे.. तब आप प्यार करलेना.. दीदी केह रही थी.. वहा तो मेरा कमरा भी अलग होगा.. तो हमे मीलनेमे आसानी रहेगी..

लखन : (होंठ चुमकर) हां नीलु.. वो सब मेने ही इन्तजाम कीया हे.. तेरा कमरा मेने नीचे ही रखवाया हे.. नीलु.. अ‍ेक बार इसे प्यार नही करोगी..? अब तो यही तेरे नसीबमे हे.. देखले.. तुजे देखकर कैसे जटके मार रहा हे..

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते) जीजु.. अभी इस काबुमे रखीये.. यहा नही.. वहा जाकर सबकुछ करुगी.. जो आप कहोगे.. जीजु.. लेकीन अ‍ेक बात मेरी समजमे नही आइ.. मेरी धिरेनके साथ सादी करवानेमे आप हमारी मदद कर रहे हे.. लेकीन पुनमदीदी तो आपकी सगी बहेन हे.. तो क्या आपको बुरा नही लगता..? क्युकी अभी अभी आप हमारी सादीके जो बाधा हे.. उसे दुर करनेकी बात कर रहे थे.. वो कैसे..?





लखन : (मुस्कुराते धीरेसे गाल सहेलाते) नीलु.. तुम सीर्फ आम खाओ.. गुटली मत गीनो.. वो सब मेरे उपर छोडदो.. फीर भी तुजे कुछ आसंका हे.. तो दुर करता हु.. पहेली बात.. धिरेन पुनोदीदीको नही तुमसे प्यार करता हे.. दुसरी बात.. जो आदमी मेरी बहेनको प्यार नही करता.. उनके साथ वो कैसे खुस रेह सकती हे..? इनसे तो बेटर हे वो उनसे अलग होजाये..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) जीजु.. तो फीर इसमेतो पुनमदीदीकी जींदगी खराब होजायेगी.. वो कहा जायेगी..? इसके बारेमे आपने कभी सोचा हे..?

लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. तुम इनकी फीकर मत करो.. वो सब मे उनसे बात करके सम्हाल लुगा.. ओर बाकी सब बाते हम वहा जाकर आरामसे करेगे..(खडे लंडकी ओर इसारा करते आंख मारदी) अभी तो तुम इनके बारेमे सोचो.. देख वो तुजे प्यार करनेके लीये कीतना तरस रहा हे..

कहेते नीलमको लंडकी ओर इसारा करते आंख मार दी.. तब नीलम बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर लखनकी ओर तीरछी नजरोसे देखकर मुस्कुराने लगी.. फीर अपने कपडे ओर बाल सही करते जटसे अपने रुममे चली गइ.. आज नीलम लखनकी सभी हरकत देखकर मुस्कुराइ तो लखनने उनसे अ‍ेक बार फीर सब बाते करली.. तो नीलमकी सहेमतीसे वो बहुत खुस होगया..
 
आज उसने मां बेटी दोनोको अपने नीचे लीटानेके लीये तैयार करलीया था.. तो इधर रुममे आते ही नीलम अपने बेडपे लेट गइ.. आखीर आज उसने लखनको अपने वसमे करही लीया.. अब वो लखन ओर धिरेनसे चुदवाकर आरामसे पैसा नीकलवा सकती हे.. ओर अपनी अ‍ैसो आरामकी जींदगी जी सकती हे.. फीर चाहे उसे धिरेनके साथ ओर लखनके साथ सोना ही क्युना पडे.. ओर आंखोपे हाथ रखते लेटते सोचने लगी..





नीलम : (मनमे) ओ बापरे.. उस दिनसे तो आज लखन जीजुका लंड बहुत बडा लग रहा था.. आज तो लगा की मे गइ कामसे.. वो आजही मुजे चोद लेगे.. लेकीन उसने मुजे छोड क्यु दीया..? सायद बाजुके रुममे धिरेन ओर मम्मी दीदीकी वजहसे छोडा होगा.. की कोइ ओर कारण होगा.? हंम.. अब समजी.. धिरेन भीना.. कीतना भोला हे.. उनको तो कुछ समज ही नही हे.. की लखन जीजु हमारी मदद क्यु कर रहे हे..

कैसे बहार खडे रहेकर मेरा इन्तजार कर रहे थे.. ओर मुजे अपने रुममे खीचकर कैसे प्यार करने लगे.. लगता हे मेरा होंठ भी सुजा दीया हे.. कीतना जोरोसे चुसते थे.. मेरी तो मुनीया ही दबोचली.. आज भी मुजे अपना हथीयार पकडा दीया.. कैसे अपना लंड मसलते कमीनी मुस्कान कर रहेथे.. मुजे आंख भी मारी.. लखन जीजु बीलकुल ठीक केह रहे थे.. धिरेनका तो इनसे आधाभी नही हे.. इनमे बेचारी दीदी चीखेगी नही तो क्या करेगी..

मम्मी भीनां.. कैसे मर्दके स्वभावके बारेमे अच्छी तराह जानती हे.. वो बीलकुल ठीक केह रही थी.. कमीने सभी मर्द अ‍ेक जैसे ही होते हे.. बस.. जरासा मुस्कुराकर इसारा करदो.. तो हमारे पीछे ही घुमने लगते हे.. आज देख भी लीया.. मर्दको रीजाना कोइ मुस्कील काम नही हे.. मुजे इनसे चुदवाकर प्रेगनेन्ट ही तो होना हे.. ताकी मे इनसे सादी कर सकु.. इसीलीये तो मेने उनकी सभी सर्ते मानली.. बापरे.. मुजे भी यही लंडसे चुदवाना पडेगा.. लगता हे ये तो मेरी भी फाडके रख देगा..

लेकीन धिरन भी मुजसे सादी करना चाहते हे.. इसमे खुद जीजु हमारी मदद करनेको तैयार हे.. मे धिरेनको भी नही छोड सकती.. ओर मम्मीकी इच्छाके अनुसार मुजे लखन जीजुसे भी सादी करनी हे.. अगर मे धिरेनके साथ रीलेशन रखुगी.. तो लखन जीजु मुजसे सादी क्यु करेगे..? ओर वो भी तो चाहते हे की मे धिरेनसे सादी करलु.. उनकोतो बस.. सीर्फ मेरे साथ मजे करने हे.. जो भी हो.. वो सब आगे सहेरमे जायेगे तब सोचेगे.. की क्या करना हे.. लेकीन लखन जीजुका लंड हे बहुत मस्त.. कैसा चमक रहा था..

इनसे चुदवाकर तो मजा ही आजायेगा.. बापरे धिरेनकी नुनीसे तो कितना सानदार हथीयार हे.. केह रहेथे.. अब तो जो भी होगा सब सहेर जाकर ही होगा.. ओर बात भी सही हे.. वरना ये तो आज ही मेरी हालत खराब कर देते.. मे सबको क्या जवाब देती..? भले ही सहेर जाकर मुजे दोनोसे चुदवाना पडे.. मे दोनोसे चुदवाकर उनसे पैसे नीकलवाती रहुगी.. मेरी तो लोटरी ही नीकल गइ.. अब तो दो दो लंडसे चुदवार मजा भी मीलेगा ओर साथमे ढेर सारे पैसे भी मीलेगे.. नीलु.. तेरी तो अब बले बले हे.. हें..हें..हें..

सोचते नीलमकी आंख लग गइ.. तो दुसरी ओर गांवमे आज सुबह बंसी ओर सांती भी देर तक सोते रहे.. तब जागुतीने आज उन दोनोको नही जगाया ओर बाकी रुमकी सफाइ करली.. तब जया कीचनमे काम करती रही.. दोनो मां बेटी अ‍ेक दुसरेके सामने नही बोल रही थी..

तब देरसे सांती भी उठकर कंपलीट होकर बहार आगइ.. आज उसने नइ सारी पहेनी थी.. मांगमे सींदुर ओर पैरमे पायलकी जंकारके साथ सरपे पलु डालकर अ‍ेक नइ नवेली दुल्हनकी तराह लग रही थी.. ओर वो सरमाते कीचनमे चली गइ.. तब जयाने मुस्कुराते उनको गले लगा लीया..

जया : (मुस्कुराते सर चुमते) आगइ मेरी बहु.. चल जा जागुको बुलाकर ला.. फीर हम सब चाइ नास्ता करने बैठ जायेगे.. आज तुजे कोइ काम नही करना.. मेरा बेटा उठ गया क्या..? वरना उनको भी जगादे..

सांती : (सरमाकर मुस्कुराते) जी मम्मीजी.. वो जाग गये हे.. ओर नहाने गये हे..

जया : (सामने देखते) सांती.. क्या बात हे..? आज भाभीकी जगाह सीधा मम्मीजी..? क्या तुमने मुजे माफ करदीया..? हंम..?

सांती : (सरमाते धीरेसे) मम्मीजी.. मे आपसे नाराज ही कब थी..? मे तो बस.. अ‍ैसे ही आपको समजा रही थी.. ओर अब आप मेरी सांस हे.. तो मम्मीजी ही कहुगी.. अब मेरा मायका कहो या ससुराल.. दोनो यही हे..

जया : (सांतीको बाहोमे भरते) बस सांती.. मे तेरे मुहसे यही सुनना चाहती थी.. की तुम मुजे अपनी सांसके रुपमे अ‍ेक्सेप्ट करलो.. आज तेरे मुहसे मम्मीजी सुनकर बहुत अच्छा लगा.. अब मुजे पुरा यकीन हे.. तुम मेरे बंसी ओर मेरी जागुको सम्हाल लोगी..

सांती : (मुस्कुराते पीठ सहेलाते) हां मम्मीजी.. आप जागुकी चीन्ता मत करना.. अब वो मेरी ननंद नही मेरी छोटी बहेन हे.. मे उनको बहेन मानकर उनका खयाल रखुगी.. आप जीलो अपनी जींदगी..

जया : (जटसे अलग होते कंधे पकडकर धीरेसे) बेटा.. सोरी.. क्युकी जीस रास्तेपे मे चल पडी हु.. अब वहासे वापस लौटना मेरे लीये मुमकीन नही हे.. क्युकी अ‍ेक तो उनका बच्चा मेरे उदरमे पल रहा हे.. ओर दुसरा.. उन्होने मेरे लीये अपनी पत्नीको भी छोड दीया हे.. तो मुजे उनके साथ जाना होगा.. अब तुजे ही इस घरको सम्हालना हे.. बस.. कभी कभी फोनपे मुजे सबकी खबर देते रहेना.. ओर तबतक ध्यान रखना.. इस बारेमे मेरे बंसी ओर जागुको पता ना चले..

सांती : (मुस्कुराते) हां मम्मीजी.. बस.. अ‍ैसा ही होगा जो आप चाहती हो.. आप नास्तेकी तैयारी करो मे जागुको बुलाकर आती हु..

कहेते सांती अपने सरपे पलु सही करते छम..छम.. पायलकी आवाजके साथ जागृतीके रुमकी ओर चली गइ.. तब जया मन ही मन खुस होते सांतीको जाते हुअ‍े मुस्कुराते देखती रही.. आज उनको सांती इस घरकी नइ नइ बहुके रुपमे बहुत अच्छी लगने लगी.. तभी सांती जागृतीके रुममे चली गइ.. तो जागृती अपना काम नीपटाकर तैयार होकर अपने बेडपे लेटी हुइ थी.. जैसे ही सांती उनके रुममे आइ जागृती मुस्कुराते जटसे बैठ गइ..

ओर सांतीने आतेही धीरेसे दरवाजा बंध करदीया.. ओर पलटके जागृतीकी ओर देखकर मुस्कुराते पास आने लगी.. तब जागृती जटसे खडी होगइ.. ओर दोडकर सांतीको गले लग गइ.. तब सांतीने भी जागृतीको कसके अपने गले लगा लीया.. ओर दोनो थोडी देर अ‍ैसेही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे खडी रही.. तभी सांती उनसे अलग हुइ.. ओर जागृतीके चहेरेको अपने हाथोमे थामकर मुस्कुराते उनकी आंखोमे देखती रही.. तब..
 
जागृती : (सरमाते हसते) भाभी.. अ‍ैसे क्यु देख रही हे..? आज आप बहुत खुबसुरत लग रही हे.. ओर बडी खुस नजर आ रही हे..? लगता हे आपकी ओर भाइकी सुहागरात बहुच अच्छी रही.. हें..हें..हें.. कैसे उछल उछलकर भाइको प्यार कर रही थी.. हें..हें..हें..

सांती : (हाथ पकडकर बेठपे बैठते) हां.. बहुत अच्छी रही.. कमीनी.. वो तो तुजे भी पता हे.. तुम हमे प्यार करते देख जो रही थी.. बहार उंगली करनेसे तो अच्छा हे तुम भी अंदर आ जाती.. तेरा भाइ मेरे साथ तुजे भी खुस कर देते.. हें..हें..हें..





जागृती : (मुस्कुराते बाजुमे अ‍ेक मुका मारते) नही भाभी.. सुबह सुबह मजाक नही.. प्लीज.. कल आप दोनोकी सुहागरात थी.. मे तो हर रात आप दोनोको प्यार करते देखती हु.. वोतो कल आपने मुजे देख लीया इसीलीये आपको पता चला.. क्या भाइको इस बारेमे पता हे..?

सांती : (सरमाते हसते) हां जागु.. कल उन्होने भी तुजे देख लीया था.. तो तेरे चकरमे कइ गुना ज्यादा जोसमे मुजे प्यार करने लगे.. तेरी वजहसे तो कल मेरी हालत खराब करदी.. हें..हें..हें..

जागृती : (सरमाते हसते) भाभी.. मेरी वजहसे..? मे कुछ समजी नही.. इसमे मे कहासे बीचमे आगइ..?

सांती : (कामुक नजरोसे मुस्कुराते) कल बंसीने तुजे खीडकीमे जांकते देखलीया था.. तब उसने तेरे सामने क्या इसारा कीया था..? सच बताना.. क्युकी मेने उनको इसारा करते देख लीया था.. हें..हें..हें..

जागृती : (सर्मसार होते गले लग गइ) भाभी.. अब मे आपसे जुठ नही बोलुगी.. भाइने भी मुजे अंदर आनेका इसारा कीया था.. तो मुजे बहुत सरम आइ.. ओर मे वहासे सरमाती हुइ चली गइ.. सोरी भाभी..

सांती : (जोरोसे बाहोमे भीचते) अरे पगली इसमे तु क्यु सोरी बोल रही हे..? कोइ अ‍ैसे ही अपनी बहेनको अंदर आनेका इसारा नही करते समजी..? इसका मतलब बंसीभी तुजे प्यार करता हे.. ओर यही तो मे चाहती हु.. की तुम बंसीके साथ आगे बढो..

इसीलीये तो कल सुबह उनको जगानेके लीये तुजे भेजा था..

तब पता चला की तुम दोनो तो बहुत आगे बढ गये हो.. अरे मेरी बहेन उनको जेलना मुज अकेलीका काम नही हेरे.. अब तुम भी करले मेरे बंसीसे सादी.. हम दोनो बहेने मीलकर इस घरको सम्हाल लेगे.. अब हमे कीसीकी परवाह नही करनी.. इस बारेमे मेने कल बंसीसे बात भी करली हे..

जागृती : (जटसे अलग होते सरमाते धीरेसे) भाभी.. क्या केह रही हो..? तो फीर भाइने क्या कहा..?

सांती : (मुस्कुराते) अरे वो क्या कहेगे..? वो भी तो तुमसे सादी करनेके लीये रेडी हे.. अरे मेरी बहेन.. मुजे पता हे वो भी तुजे बहुत प्यार करते हे.. ओर तुम भीतो उनको प्यार करती हो.. मेने सादीमे देखा हे.. की तुम दोनो अ‍ेक दुसरेसे कैसे आंख मीचोली खेल रहे थे.. क्या ये सच हेनां..?





जागृती : (सर्मसार होते हांमे गरदन हीलाते) हां भाभी.. ये सच हे.. भाभी.. मे भाइसे सुरुमे प्यार नही करती थी.. लेकीन जबसे जयश्री उनके भाइको प्यार करने लगी थी.. तबसे मेभी भाइकी ओर आकर्सीत होने लगी थी.. लेकीन तब मुजे पता चला की भाइ आपको प्यार करता हे.. तो मे इस मामलेमे आगे नही बढी..

सांती : (मुस्कुराते फीरसे हग करते) अरे मेरी बहेन.. अब तो कोइ दिकत नही हेनां..? जागु.. आजसे तुम मेरी ननंद नही हो.. अब मे तुजे अपनी छोटी बहेन ही मानुगी.. ओर तुजे बहेन ही कहुगी.. बस.. कुछ दिन इन्तजार करले.. फीर मे ही तुम दोनोकी सादी करवाउगी.. फीर हम तीनो खुब मजे करेगे..

जागुती : (सरमाकर गले लगते) भाभी.. लेकीन मम्मी पापा..?

सांती : (मुस्कुराते चहेरेको थामते) जागु.. उनकी चीन्ता तु मत कर.. वो सब मे देखलुगी.. ओर अब मुजे भाभी नही.. बडी दीदी केहना.. क्युकी मेने तो कल रातसे ही तुजे अपनी सौतनके रुपमे अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे.. बस.. अभी बंसीको इस बारेमे ज्यादा नही बताना.. वरना वो तो तुजे आज ही चोद डालेगा.. हें..हें..हें.. कमीना बहुत ठरकी हे.. हें..हें..हें..

जागृती : (सरमाकर हसते) भाभी.. ओह.. सोरी सोरी.. बडी दीदी.. हमारे पतीको अब गाली तो मत दो.. हें..हें..हें..

सांती : (मनमे खुस होते हसते) हमारे पती..? हमं.. अब ठीक हे.. ये हुइनां बात.. चल.. मम्मी हमे नास्तेके लीये बुला रही हे.. फीर इस बारेमे हम दोनो आरामसे बाते करेगी..

जागृती : (हाथ पकडकर) दीदी.. मुजे उनको देखकर खुनस आने लगता हे.. हम बादमे करेगेनां..

सांती : (हाथ थामते धीरेसे) नही छोटी.. तुम उनसे इतनी नफरत मत कर.. वो मां हे तेरी.. वो भी तो अ‍ेक औरत हे.. क्या सीर्फ हमे ही प्यार करनेका अधीकार हे..? उनको नही..? उनको जब अपने पतीसे प्यार नही मीला.. तभी तो वो बहार गइ हे.. जागु.. अ‍ेक बात पुछु..? तुम बुरातो नही मानोगी..?

जागृती : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. मेने भी आपको अब सच्चे दिलसे बडी बहेन मान लीया हे.. आपका मुजपे पुरा हक हे.. तो मे क्यु बुरा मानुगी..? कहीये क्या कहेना हे आपको..?

सांती : (मुस्कुराते धीरेसे) जागु.. सच बताना.. बंसीसे सादीके बाद क्या तुम लखन भैयाको भुल पाओगी..? हंम..? तुम उनको प्यार करती थीनां..? मुजसे तेरी कोइ बात नही छुपी हे.. तुम जब भी उनको मीलने खंडहरपे जाती थी.. मेरी नजर हमेसा तुजपे रहेती थी.. मुजे सब पता था.. की तुम जयश्रीको साथ रखकर वहा क्यु जाती थी.. ताकी गांवके लोगोको तुमपे सक ना पडे.. जागु.. मुजे पता हे अब तुम वर्जीन नही हो.. बस.. यही हाल आज मम्मीका हे..

जागृती : (सर्मसार होते धीरेस) दीदी.. सोरी.. लेकीन ये सब आपको कैसे पता..? क्या कीसीने आपको कहा हे..? आइ मीन.. जयश्रीने या फीर..

सांती : (मुस्कुराते) नही छोटी.. मुजे कीसीने नही बताया.. मेरी बंसीके साथ सादी कल हुइ हे.. लेकीन मेने तो उनको पहेलेसे ही अपना पती मान लीया था.. ओर खुदको इस घरकी बहु.. तो इस घरकी बहु होनेके नाते इस घरका खयाल रखना मेरा फर्ज हे.. घरकी बेटी कहा जाती हे कीसके साथ बाते करती हे..

मुजे सब ध्यान रखना पडता हे.. लेकीन मुजे सब पता होनेके बावजुद मैने तुजपे कभी पाबंधी नही लगाइ.. क्युकी प्यार करना ओर होना कोइ गुनाह नही हे.. सबको अपनी जींदगी अपने तरीकेसे जीनेका अधीकार हे.. तो मे तुजपे क्यु पाबंधी लगाउ..? क्युकी मे खुद अपने भतीजेसे प्यार करती थी.. ओर हम दोनो हर रात साथ सोते थे..

जागृती : (आंख गीली करते हग करते) हां दीदी ये सच हे.. मे लखनको बहुत प्यार करती हु.. लेकीन उन्होने ही मुजे कहा हे.. की बंसी तुजे प्यार करता हे.. तो मे मेरे दोस्तको धोखा नही दे सकता.. तु करदे उनकी इच्छा पुरी.. ओर करले उनसे सादी.. क्युकी उन सभी दोस्तो अपनी बहेनको चाहते हे.. ओर उनसे सादी कर रहे हे.. ओर जयश्री भी यही चाहती थी.. की मे भी अपने भाइको अपनालु.. बस.. तबसे मे भाइकी ओर आकर्सीत होने लगी.. ओर उनको प्यार करने लगी..

सांती : (मुस्कुराते सर चुमते) छोटी.. लखन भैया बहुत अच्छे हे.. वो तुमसे भी सादी कर सकते थे.. लेकीन अपने दोस्तकी खातीर उन्होने अपने प्यारकी कुरबानी दी.. यही तो सच्चा प्यार हे.. यही तो त्याग हे.. जो लखन भैयाने अपने दोस्तके लीये दीया.. लेकीन अब मुजे सीर्फ यही कहेना हे.. की तुम पुरानी सब बाते भुलकर अपनी नइ जींदगीकी सुरुआत करो..

जागृती : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. आपको मेरे ओर लखनके बारेमे सबकुछ पता था.. तो फीर जब हम दोनो अकेली थी.. तब इस बातका जीक्र क्यु नही कीया..? आप तब भी मुजे सब कुछ पुछ सकती थी..

सांती : (प्यारसे गाल सहेलाते) हां छोटी.. मे तब भी तुमको सबकुछ पुछ सकती थी.. लेकीन लखन भैयाकी बात करके मे तुजे सर्मीन्दा करना नही चाहती थी.. इसीलीये नही पुछा.. अब तो तुम भी समजदार हो गइ हो.. अपना फैसला खुद ले सकती हो.. अब आगे क्या डीसीजन लेना हे.. सब तुजे ही तैय करना हे..

जागृती : (मुस्कुराते हग करते) दीदी.. कल मेने सब फैसला करलीया हे.. मे अब आपकी छोटी बहेन बनकर भाइको अपनाना चाहती हु.. आपका साथ पाकर आपकी छोटी बहेन होकर धन्य होगइ में.. बस.. मुजे अब सीर्फ पापाकी चीन्ता हे.. इसीलीये मम्मीपे खुनस आ रहा था.. लेकीन अब नही..

सांती : (मुस्कुराते गाल चुमते) छोटी.. सबको माफ करनेमे भलाइ हे.. सबको अपनी जींदगी अपने तरीकेसे जीनेका अधीकार हे.. ओर रही बात पापाकी.. तो उनके बारेमे मे तुने अभी नही बता सकती.. अब हमे उनको जीतना प्यार दे सके.. जीतनी खुसीया दे सके देना हे.. बस.. इसके आगे मे तुजे कुछ नही बता सकती.. कुछ दिनमे सब ठीक होजायेगा..

जागृती : (हाथ पकडकर) दीदी.. आप मुजसे कुछ छुपा रही हे.. क्या हुआ हे पापाको..? बताइअ‍ेना..

सांती : (आंख गीली करते) नही छोटी.. बस.. सीर्फ इतना जानले.. आने वाले दिनोमे हम सबको अपने आपको सम्हालना हे.. क्युकी अब पापाके पास कुछ ही दिन बचे हे..

जागृती : (आंसु बहाते) दीदी.. क्या केह रही हो..? क्या पापाको कोइ गंभीर बीमारी हे..? आपको सब कैसे पता..?

सांती : (आंसु बहाते) छोटी.. मे तुजे बताना नही चाहती थी.. लेकीन अपने दिलपे पथर रखले.. क्युकी अब हम दोनोको ही इस घरको सम्हालना हे.. इसीलीये तुजे भी स्ट्रोंग बनना हे..

जागृती : दीदी.. आंसु मत बहाइअ‍े.. मुजे सब सच बताइअ‍े.. मुजे कुछ नही होगा.. मे सब बाते सहेन कर सकती हु.. आइ प्रोमीस.. हम दोनो बंसी भैयाको सम्हाल लेगे..
 
सांती : (अपने आंसु पोछते) छोटी.. कल सबलोग चले गये.. तब पापा अपने रुममे अपनी बीमारीके बारेमे मम्मीको बता रहे थे.. तो सुनकर मम्मी खुब रोइ.. फीर मम्मीकी छोटी उमरका हवाला देते पापाने खुद मम्मीको रमेश अंकलके साथ सादी करलेनेको कहा..

सायद इस रीस्तेके बारेमे पापाभी जानते थे.. तब उनको नही पता थाकी उन दोनोकी बात मे भी सुन रही हु.. लेकीन देख मम्मीको.. सुबह जब मे उनको मीली तो वो अपने दिलपे पथर रखके मुस्कुराती रहेती हे.. ताकी पापाकी बीमारीके बारेमे हमे पता ना चले..

जागृती : (गीड गीडाते) दीदी.. प्लीज.. बताइअ‍ेना पापाको कोनसी बीमारी हे..?

सांती : (सामने देखते धीरेसे) छोटी.. देखना इस बारेमे अभी हमारे पतीको पता ना चले.. वरना वो सुनकर टुट जायेगे.. तब हम दोनोको मीलकर ही उनको सम्हालना हे.. पापाको ब्लड केन्शर हे.. वो भी लास्ट स्टेजका.. उस दिन रमेश भाइ उनको छोडने आयेथेनां..? उस दिन पापाको खुनकी उल्टीया हुइ थी.. छोटी.. अब कभी भी कुछ भी हो सकता हे..

जागृती : (लीपटकर आंसु बहाते) दीदी.. मुजे भी कुछ अ‍ैसी ही आसंकाये थी.. की पापाको जरुर कुछ हुआ हे.. पर क्या हुआ था नही पता था.. सायद इसीलीये उन्होने आपकी ओर भैयाकी सादी इतनी जल्दीसे करवादी..

सांती : (अलग करते आंसु पोछते) हां छोटी.. आंसु मत बहा.. अभी तो तुमने कहा मे सब सहेन कर लुगी.. चल बहार मम्मी हमारा नास्तेपे इन्तजार कर रही हे.. अब उनके सामने आंसु मत बहाना.. ओर उनको कुछ मत कहेना..

जागृती : (फटाफट आंसु बहाते) जी दीदी.. चलीये दोनो बाथरुममे मुह साफ कर लेते हे.. वरना सबको पता चल जायेगा..

फीर दोनो अपना हुलीया ठीक करके बहार आगइ.. तब सामतभाइ कंपलीट होकर डाइनींगपे बैठकर अखबार पढ रहा थे.. ओर साथमे कुछ कागजाते लीफाफे भी थे.. तो जया मुरजाये चहेरे के साथ चाइ नास्ता बहार रख रही थी.. जैसेही उन्होने जागृती ओर सांतीको देखा तो मुस्कुराने लगी.. ओर खुस होनेकी अ‍ेक्टींग करने लगी.. तो जागृती उनको प्यार भरी नजरोसे देखती रही.. जैसेही जया ओर जागृती आंख मीली..

जागुती : मम्मी.. आप बैठीये.. मे सब लेकर आती हु..

कहेते जागृती जयाकी ओर देखते स्माइल करते कीचनमे जाने लगी.. तो जया जागृतीको उनकी ओर मुस्कुराते देखकर बहुत खुस होगइ.. तभी बंसी भी कंपलीट होकर आगया.. तो सांती उनको देखकर बहुत ही सरमाइ.. ओर अपने सरपे पलु डालकर सरको ढक लीया.. जब जागृची चाइ नास्ता लेकर आगइ.. तो सांती भी सरमाते जागृतीके साथ बैठ गइ.. सामत भाइकी हाजरीकी वजहसे कोइ कुछ बोल नही रहा था.. फीर सबने मीलकर चाइ नास्ता करलीया.. तभी..

सामत : (लीफाफेसे कागजातकी फाइल नीकालते) सांती बेटा.. ये लो.. तुम दोनोकी सादीकी भेट.. ये हमारे सहेरके बंगलेकी फाइल हे.. जीसे मैने तुम्हारे ओर मेरी जागुके नाम करदीया हे.. ओर ये दोनो फाइल इस हमारे खानदानी घरकी हे.. ओर ये फाइल हमारे सभी खेतोकी हे.. जो मैने बंसीके नाम करदीया हे.. ओर कुछ पैसे हे बेंकमे.. वो भी मेने तेरे बंसी ओर जागुके नाम करदीया हे.. इनमेसे कुछ पैसे मेने जयाको दीये हे..

बंसी : (आस्चर्यसे) लेकीन पापा अ‍ैसे अचानक ये सब करनेकी क्यु जरुरत पड गइ..? कुछ हुआ हे क्या..?

सामत : (मुस्कुराते) अरे नही नही.. ये तो बस अ‍ैसे ही.. मन हुआ तो करदीया.. क्या हेना बेटा अब तेरी भी सादी हो गइ हे.. तो घरकी सारी जीम्वेवारी अब तुजे ओर बहुको ही सम्हालनी हे.. ओर वैसे भी मेरी उमर हो गइ हे.. तो सोचा तबीयत अच्छी हे तब ही सबकुछ अच्छेसे नीपट जाये.. बाकी कुछ भी नही हुआ..

जया : (धीरेसे) अ‍ेजी.. सुनीये.. मुजे कुछ भी नही चाहीये.. मेरे हीस्सेका पैसा भी आप बच्चोको दे दीजीये..

सामत : (मुस्कुराते) नही जया.. मुजे पता हे मे भी तुम्हारा गुनेगार हु.. तेरी छोटीसी उमर थी.. लगभग मेरेसे भी आधी उमर.. ओर मेने तुमसे सादी करली.. जो सुख तुजे मुजसे मीलना चाहीये वो सुख मे तुजे नही दे सका.. कल अगर मुजे बाय चान्स कुछ होजाये.. तो तुम अपने तरीकीसे जींदगी जीनेके लीये आजाद हो.. अगर तुम कीसीसे सादी कर लेना चाहती हो तो वो भी कर सकती हो.. इसीलीये मेने तुमको अपना हीस्सा दीया हे..

जया : (चोंकते) अ‍ेजी.. ये आप क्या अनाप सनाब बोल रहे हे.. मेरी भी कोइ सादी करनेकी उमर हे..? आपको कुछ नही होगा.. बच्चोके सामने तो अ‍ैसी बाते मत कीजीये..

सामत : (मुस्कुराते अपनी नाकपे उंगली रखते) जया.. चुप.. बस.. कुछ भी मत बोल.. मैने जो फैसला लीया हे सही लीया हे.. खास करके ये बात मे मेरे बच्चोको केह रहा हु.. ताकी तुजे तेरे बारेमे कोइ फैसला करनेमे बाधा ना आये..

जागृती : (आंख गीली करते) पापा.. आप अ‍ैसा सब क्यु बोल रहे हे.. आपको कुछ नही होगा..

सामत : (हसते) अरे मेरी बच्ची.. मुजे क्या हुआ हे..? जो तुम आंसु बहा रही हो.. अभी तेरे पापा जीन्दा हे.. में अ‍ैसे जाने वाला नही हु.. अभी तो तेरी भी सादी करवानी हे.. फीर मेरे पोतेका मुह भीतो देखना हे.. हें..हें..हें.. बस.. तुम तीनो बच्चोको सीर्फ यही कहेना हे.. अगर कल जया कही भी सादी करना चाहे तो तुम तीनो उनको कुछ नही कहोगे.. ओर इसीलीये मेने जयाको १० लाख रुपीये दीये हे.. जो उनका ओर मेरा अलग अ‍ेकाउन्ट हे.. उनमे रख दीये हे.. बाकी सब मेने तुम तीनोके खातेमे डाल दीये हे..

सांती : (सरमाते धीरेसे) पापा.. मत कीजीये अ‍ैसी बाते.. आप क्यु हमे डरा रहे हे.. आपको कुछ नही होगा..

सामत : (हसते खुस होते) अरे वाह मेरी बेटीने मुजे पापा कहा.. खुस रहो बेटा.. बस.. अब जल्दीसे अ‍ेक प्यारासा पोतेका मुह दीखादो.. तो गंगा नहाये.. हें..हें..हें..

जया : (सरमाकर मुस्कुराते) क्या आप भी..? बहुको सरमा रहे हे.. हें..हें..हें.. थोडा सब्र कीजीये.. हमे बहुत जल्दी ये भी खुस खबरी मील जायेगी.. हें..हें..हें..

सामत : (खुस होते) अच्छा..? तब तो ठीक हे.. बंसी बेटा.. आज मुजे तुजपे गर्व हे.. तुमने मेरी विधवा बहेनको सम्हाल लीया.. जीते रहो बेटा.. बस.. अब मेरी जागृतीका कोइ अच्छे घरमे रीस्ता होजाये..

सांती : (जागृतीकी ओर मुस्कुराते) पापा.. अब आप इनकी चीन्ता तो छोडही दो.. इनकी सादी करवानेकी जीम्वेवारी अब मेरी ओर आपके बेटेकी.. क्यु जागु.. हें..हें..हें..

सामत : (हसते) अच्छा अच्छा.. समज गया.. मतलब मेरी बेटीको कोइ पसंद हे.. ठीक हे बेटा.. तुम जहा सादी करना चाहो कर सकती हो.. बस.. लडकेका खानदान अच्छा होना चाहीये..

सांती : (मुस्कुराते) पापा.. आप उनके खानदानकी चीन्ता मत करना.. वो बहुत अच्छे खानदानसे हे.. हें..हें..हें..

कहा तो जागृती ओर बंसी दोनो सरमाने लगे.. तो बंसीने मौका देखकर जागृतीको आंख मारदी.. तब जागृती सर्मसार होगइ.. ओर खडी होकर मुस्कुराते दोडकर अपने रुममे चली गइ.. तो जया ओर सामत जोरोसे हसने लगे.. तभी सांती तीरछी नजरोसे देखते बंसीकी ओर कामुक स्माइल करती रही.. तब बंसीने सामत ओर जयाकी नजर बचाते सांतीको भी आंख मारदी.. तब सांती भी बहुत सर्मसार होगइ.. ओर वो भी सरमाकर मुस्कुराते जागृतीके पास उनके रुममे चली गइ....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २००

कहा तो जागृती ओर बंसी दोनो सरमाने लगे.. तो बंसीने मौका देखकर जागृतीको आंख मारदी.. तब जागृती सर्मसार होगइ.. ओर खडी होकर मुस्कुराते दोडकर अपने रुममे चली गइ.. तो जया ओर सामत जोरोसे हसने लगे.. तभी सांती तीरछी नजरोसे देखते बंसीकी ओर कामुक स्माइल करती रही.. तब बंसीने सामत ओर जयाकी नजर बचाते सांतीको भी आंख मारदी.. तब सांती भी बहुत सर्मसार होगइ.. ओर वो भी सरमाकर मुस्कुराते जागृतीके पास उनके रुममे चली गइ....अब आगे

जागृती : (अंदर जाते ही हसते) दीदी.. हमारे पतीतो बहुत ही कमीने हे.. हें..हें..हें..

सांती : (हसते) क्यु..? क्या हुआ..? उन्होने तुम्हारे साथ कोइ सरारत की क्या..? अरी बतानां..

जागृती : (सरमाकर हां मे गरदन हीलाते धीरेसे) दीदी.. मम्मी पापा थे.. ओर आप पापासे बात कर रही थी.. फीर भी उन्होने मुजे आंख मारी.. अगर मम्मी पापाने देख लीया होता तो..? मेरा भांडा तो वही फुट जाता.. अच्छा हुआ पापाने लडकेका नाम ओर उनके घरके बारेमे नही पुछा.. मुजे तो बहुत सरम आइ..

सांती : (जोरोसे हसते धीरेसे) छोटी.. वो बहुत कमीने हे.. मुजे भी आंख मारी.. उनसे जरा सम्हालके रहेना.. लगता हे बहुत ही जल्द तुम दोनोका मीलन होने वाला हे.. हें..हें..हें..

जागृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते अ‍ेक मुका मारते) दीदी.. आप भी बहुत कीमीनी हो.. मे कोइ मीलन बीलन करने वाली नही हु.. मुजे तो बहुत सरम आ रही हे..

सांती : (गले लगाते) अरे मेरी बनो तो सरमा भी रही हे..? हें..हें..हें.. सुन छोटी.. आज पापाने जो भी कहा तुजे समजमे आया..? लगता हे उन्होने हमारी बहुत सारी टेन्शन खतम करदी.. अब हमे हमारे पतीको इतना नही समजाना पडेगा..

जागृती : (अलग होकर धीरेसे) बडीदीदी.. लगता हे इस बारेमे पापाभी सब कुछ जानते होगे.. ओर आज उसने सबके सामने अपनी गलतीको भी मान लीया.. चलो.. जो भी हुआ अच्छा ही हुआ.. चलो.. अब काम करते हे.. मम्मी बेचारी अकेली सब कर रही होगी.. मे उनकी मदद करती हु..

सांती : (मुस्कुराते) हंम.. चल.. आज सीर्फ तुजे ही काम करना हे.. मम्मी तो मुजे आज काममे हाथ भी नही लगाने देती.. कहेती थी कल तेरी सादी हुइ हे.. तो आज मुजे कोइ काम नही करना.. हें..हें..हें..

जागृती : (दांत पीसकर मुस्कुराते अ‍ेक मुका मारते) हां.. सही तो कहा उसने.. कल महारानीकी सादी जो हुइ हे.. देखना मेरी सादीके बाद मे भी कोइ काम नही करुगी.. हें..हें..हें.. चलो..

सांती : (हाथ पकडकर बहारकी ओर जाते धीरेसे) हां मत करना.. मे भी तुजे काम नही करने दुगी.. क्युकी हमारे पती तुजे दुसरे दिन काम करने लायक छोडेगा तब तुम काम करोगीनां.. हें..हें..हें..

कहातो जागृती फीर अ‍ेक बार सर्मसार होगइ.. ओर वो सांतीको मारनेके लीये दोडी तो सांती भी हसती हुइ दोडकर बहार भाग गइ.. ओर जागृती सांतीकी ओर कातील नजरोसे हसती हुइ कीचनमे चली गइ.. ओर जयाकी मदद करने लगी.. तो जया भी बहुत खुस होगइ.. आज जागृती उनके साथ हस हसके बाते करने लगी.. तब जयाने भी राहतकी सांस ली.. सामत भाइके घरपे इस तराह हसी खुसीसे दिनकी सुरुआत होगइ थी..

तो दुसरी ओर आज श्रीधरके घरपे भी सब लोग मीलकर हसी खुसी श्रीधर जयश्रीकी सादीकी तैयारीया करने मे जुट गये.. आज वृन्दा ओर जीतुलाल भी सादीकी तैयारीया करते खुस हो रहे थे.. क्युकी जीतुलालको सादीके बाद हमेसा हमेसाके लीये ब्रीन्दासे छुटकारा मीलने वाला था.. ओर हमेसाके लीये अपनी भाभीके साथ रहेकर उनको अपनी बीवी बनानेकी तैयारीया कर रहा था..

तो दुसरी ओर ब्रीन्दा श्रीधर ओर जयश्री भी बहुत खुस थे.. ब्रीन्दा भी अब हमेसाके लीये अपने बेटेकी बीवी होजानेके लीये तैयार थी.. बंसीकी दो दिनकी सादी ओर उनकी सादीकी खरीदारी.. ये तीन दिनमे ब्रीन्दा ओर श्रीधर काफी बार मील चुके थे.. जीनकी वजहसे अब ब्रीन्दाके तनकी आग ओर भडक गइ थी.. ओर वो अब हमेसाके लीये श्रीधरकी होजाना चाहती थी.. सबको अपनी अपनी खुसीकी अलग अलग वजह थी..

गांवमे सबकुछ हो रहा था.. तब इन सबसे दुर मुम्बइमे.. सुधीर नीशा ओर चारु यहासे नीकलते ही दुसरे दिन मुम्बइ पहोच गये थे.. ओर जाते ही सुधीर सीधा होस्पीटलमे अ‍ेडमीट हो चुका था.. उन्होने अ‍ेक स्पेसीयल रुम ले रखा था.. ताकी नीशा चारु उनके साथ ही रेह सके.. जाते ही सुधीरका सभी टेस्ट दुबारा हुआ.. ओर आज सुबह उनका ओपरेशन भी होगया था.. तो अब वो सुधीरसे वसुधा बन चुका था..

सुधीरको होर्मोन्स चेन्जके काफी इन्जेक्शन दीये गये.. ताकी उनके बुब्स.. ओर बालोमे भी चेन्ज आ सके.. ओर संभोग करते उनको लडकीकी तराह सभी तराहकी फीलींग्स आसके.. सुधीर अभी भी बेहोस था.. ओर आइ.सी.यु. मे उनको ओब्जर्वेशनमे रखा गया था.. तब नीशा ओर चारु उनके रुममे बैठकर गपे लगा रही थी.. ओर फोन करके रश्मी ओर वंदनाको सब जानकीया दे रही थी..

जीसे सुनकर वंदना ओर रश्मी हस रही थी.. फीर चारुने देवायत ओर मंजुसेभी सब बाते करली.. अ‍ैसे ही साम ढल गइ.. तब दुसरे गांवमे खाना खाते मुना ओर बरखाके मामा विनोद ओर उनकी बीवी गीता आपसमे बसंतीके बारेमे बाते कर रहे थे.. बसंती देवायत ठाकुरके गांवमे रहेती हे सुनकर विनोदकी आंखमे अ‍ेक बार फीर हवसकी चमक आने लगी.. ओर वो मन ही मन बसंतीको मीलनेका प्लान सोचने लगा..

लेकीन उनको नही पता था की इस बार उनका दाव उल्टा पडने वाला था.. तो विनोद भी गीताको लखनने कही बडी स्कुल खुलनेकी बात बता देता हे.. ओर गीताको उसी स्कुलमे जोबकी ओफरकी बात करता हे.. जीसे सुनकर गीता भी बहुत खुस होने लगी.. ओर वो अप डाउन करके भी इस बडी स्कुलमे जोब करनेके लीये तैयार होगइ.. तब उनको नही पता थाकी आने वाले वक्तमे उनके साथ क्या होने वाला हे..
 
साम होते ही सबने चाइ नास्ता करलीया.. फीर सब लोग होलमे बैठे बाते करते रहे.. तब धिरेन जानेके लीये खडा होगया.. फीर सबकी इजाजत लेके पांव छुते बहार नीकल गया.. तो उनको उपरकी मंजीलपे नीलम दिखाइ दी.. तो सबसे छुपकर नीलमको इसारोसे फोनपे बाते करनेको कहेता हे.. तो नीलम भी इनको इसारा करते सहेरमे मीलनेकी बात करती हे.. ओर धिरेन अपने घरकी ओर नीकल जाता हे..

चंदा धिरेनके नये घरको लेकर बहुत खुस थी.. तो दुसरी ओर पुनम ओर मंजु धिरेनके बारेमे बहुत कुछ जान चुकी थी.. ओर पुनम इसी बातको जरीया बनाकर धिरेनसे अलग होना चाहती थी.. तो आज कल घरपे सबके होनेकी वजहसे देवायत भी उनको टाइम नही देपा रहा था.. जीनकी वजहसे पुनकी वासना भी बहुत बढ चुकी थी.. आज चंदा अपने रुममे कल जानेकी तैयारीया कर रही थी.. तब उनकी मदद पुनम ओर भावना कर रही थी.. तभी..

चंदा : (मुस्कुराते पेकींग करते) दीदी.. हम वापस आयेगे तब सहेरमे धिरेनके नये घरपे वो कुंभ रखनेकी वीधीया करेगे.. ओर आप धिरेनका खयाल रखना.. आज कल अकेला रहेता हे.. तो जरा उनपे ध्यान देना.. देखना उनको कोइ गलत आदत तो नही लग गइ.. क्युकी अब तो वो फोन भी नही करता ओर यहा आता भी नही.. जब हम फोन करते हे तभी आता हे..

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) जी भाभी.. वो अ‍ैसे नही हे.. फीर भी मे सब देख लुगी.. आप उनकी फीकर मत करना.. मे उनका खयाल रखुगी..

भावना : (हसते) मौसी.. आप बहु सासके बीच अच्छी अंडर स्टेन्डींग हे.. हें..हें..हें.. कीतना अजीब हे.. अपनी बहुको दीदी कहेना.. ओर पुनोदी सासुमाको भाभी कहेती हे.. हें..हें..हें..

चंदा : (हसते सरमाके अ‍ेक मुका मारते) भावु.. तु बहुत बीगड गइ हो.. भले ही इनकी सादी मेरे बेटेसे हुइ हो.. लेकीन हे तो मेरी ननंद.. अब ननंदको दीदी नही कहुगी तो क्या कहुगी..? अब यही मेरा घर हे.. तो ससुरालके ही सब रीस्ते नीभाना पडेगा.. मुजे अब धिरेनकी नही मेरे विजयकी चीन्ता हे.. पता नही इतने दिन मेरे बगैर रेह पायेगा या नही..

भावना : (मुस्कुराते धीरेसे) मौसी.. लगता ही नही की वो मंजु दीदीका बेटा हे.. वो आपका ही लडका लगता हे.. ओर सारा दिन आपके साथ ही खेलता रहेता हे.. आपको नही लगता अब आपको भी अ‍ेक बच्चा कर लेना चाहीये..? हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाते हसते) चल हट.. कुछ भी बोलती हे.. लेकीन जो भी हो.. मे मेरे विजयको मेरे पास ही रखुगी.. वो मंजुका नही मेरा बेटा हे.. समजी..

पुनम : (सरमाकर हसते) भाभी.. फीकर मत करो.. हमे बहुत जल्दी खुस खबर मीलने वाली हे.. हें..हें..हें.. क्यु भाभी..? हें..हें..हें..

कहातो चंदा सर्मसार होगइ.. ओर मुहको दुसरी ओर करते मुस्कुराने लगी.. तब भावना ओये.. होये.. कहेते खुस होकर चंदाको गले लग गइ.. तो पुनम उनको देखकर हसने लगी.. तब चंदा अ‍ेक बार फीर सरमाकर हसते हुअ‍े भावनाकी पीठमे मुका मारने लगी.. ओर अ‍ैसेही मस्ती मजाक करते सबका पेकींग हो गया.. तीनोने मीलकर भुमी नीर्मला ओर सरलाका भी सब पेकींग करलीया..

तब बहारकी ओर देवायत मंजु नीर्मला भुमीका ओर सरला बैठकर जानेकी चर्चा कर रहे थे.. देवायत नीर्मलासे सटकर ही बैडा था.. तो इस मौकेको नीर्मला कैसे हाथसे जाने देती.. वो बाते करते बार बार देवायतकी जांगोपे हाथ रख देती थी.. ओर सबसे छुपकर पैरसे पैरभी सहेलाती थी.. इतने दिन हो गये वो ओर भुमीका देवायतको नही मील सकी.. तो दोनो ही मीलनेके लीये पागल हो रही थी.. तभी..

मंजुला : (मुस्कुराते) देवु.. चारुभाभी ओर नीशा नही हे.. तो आप रश्मी भाभीके घर जाकर अ‍ेक बार वंदनाका हाल चाल जान लीजीये.. उनको कुछ चाहीये तो नही..? तो कल आप सहेर तो जाही रहे हो.. तो उनको जो भी चाहीये उनके लीये ले लीजीये..

नीर्मला : (धीरेसे) मंजु.. तो चारु ओर नीशा कहा गइ हे..? बहार गांव गइ हे क्या..?

मंजुला : (मुस्कुराते धीरेसे) हां मम्मी.. तीनो मुम्बइ गये हे.. सुधीर भाइको कुछ काम था तो दोनो भी साथमे घुमने चली गइ.. वहा चारु भाभीने सब कुछ देखा हे.. वो वहीकी तो हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (खडा होते) आप लोग बाते करो.. मे जरा खेतोपे चकर लगाकर आता हु.. तब वापसीमे रश्मीके घर होते हुअ‍े आउगा.. ओर सामत भाइके घरपे भी चकर लगाना हे.. फीर जवेरी भाइके घरपे भी सादी हे.. तो उनको भी मीलकर आउगा.. मुजे आनेमे देर होजायेगी.. तो मेरा खानेपे इन्तजार मत करना.. मे रश्मी भाभीके घरपे खा लुगा..

मंजुला : (मुस्कुराते) जी.. सुबह आप लोगोको जल्दी जाना भी हे.. तो टाइमपे आजाइअ‍ेगा..?

भुमीका : (हसते) अरे आजेयेगा.. तु पतीकी बहुत चीन्ता करती हे.. गांवमे ही तो हे.. वरना मे ओर नीमु जागती होगी.. हम बाते करेगे.. फीर पता नही अ‍ेक हप्तेके बाद हमे मीलेगा.. क्यु देवु..? हें..हें..हें..

कहातो देवायत ओर मंजु दोनो समज गये की भुमीका ओर नीर्मला जानेसे पहेले उनको मीलना चाहती हे.. तो मंजुने भी देवायतको आंखोके इसारोसे दोनोको मीलनेके लीये कहा.. ओर हसने लगी.. तो देवायत भी हसते हुअ‍े बहार चला गया.. ओर सीधा ही अपने खेतोपे चला गया.. तो वहा सीर्फ रामु काका बैठे थे.. उनसे पुछा तो भानु अपने घरपे चला गया था.. तब उसे भानुका खयाल आया.. जो पीछले कुछ दिनोसे उनको कम ही मीलता था.. तब..
 
देवायत : (ओफीसकी ओर जाते जोरोसे आवाज लगाते) हरीया.. जरा अंदर आनां..

हरीया : (दोडकर आते) आया मालीक..

देवायत : (ओफीसमे बेठते जैसेही हरीया अंदर आया) हरीया.. कैसा चल रहा हे सब..? बैठ इधर..

हरीया : (खडा रहेते) जी.. इधरही खडा हु.. मालीक.. सब काम ठीक चल रहा हे.. कुछ हुआ हे क्या..?

देवायत : (मुस्कुराते) अरे कुछ नही हुआ.. कहा गया भानु..? क्या घर चला गया..?

हरीया : (रहस्च मुस्कानसे) जी मालीक.. वो आज कल थोडा जल्दी घरपे चले जाते हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (सामने देखते) जल्दी चला जाता हे..? मतलब..? क्या उनकी तबीयत खराब हे..?

हरीया : (मुस्कुराते) अरे नही नही मालीक.. उनकी तबीयत तो अच्छी हे.. हें..हें..हें.. लगता हे आज कल वो घरपे अकेले हे.. यहा मालती या तो फीर रीटा उनको खाना बना देती हे.. फीर साम होते ही कीसीको भी लेकर घरपे चले जाते हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (आस्चर्यसे हसते) हां.. आज कल कुछ दिनोसे उनके घरवाले हमारे यहा ही हे.. हरीया.. कीसीको भी लेकर घरपे चला जाता हे मतलब..? जरा खुलकर बता..

हरीया : (हसते) मालीक.. देखना उनको पता ना चले.. की मैने आपको सब बताया हे.. कीसीको भी मतलब.. हमारी अ‍ेक दो जवान मजदुरन हे.. जो भानु भाइ अक्सर उनको ट्युबवेल वाली रुममे मीलते हे.. ओर आज कल छोटुकी बीवी रीटा उनकी बहुत दिवानी होगइ हे.. पीछले दो दिनसे वो रीटाको ही ले जाते हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) तो क्या छोटु उनको कुछ नही कहेता..?

हरीया : (हसते) अरे मालीक.. छोटु उनको क्या कहेगा..? मालीक.. अब आपसे क्या कहु..? लगता हे आज कल यहा क्या क्या होता हे आपको पता ही नही.. कमीना वो भी हरामी ओर पैसोका लालची हे.. भानु भाइ उनको अक्सर पैसे देते हे.. ओर उनको भी अ‍ेक दो मजदुरनका स्वाद चखा दीया हे.. तो सारा दिन उनके पीछे ही लगा रहेता हे.. ओर भानु भाइ इनकी बीवीके साथ उनके ही घरमे मजे करते हे.. हें..हें..हें.. तो कमीना अपनी रुमके बहार ही बैठकर उन दोनोकी रखवाली करता हे.. ताकी कोइ अंदर ना चला जाये.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) अच्छा.. तो ये माजरा हे.. कमीना अपनी बीवी ओर अपनी माके घरपे ना होनेका अच्छा फायदा उठा रहा हे.. हें..हें..हें.. चल कोइ बात नही.. ये बता क्या कर रही हे तेरी दोनो बीवीया..

हरीया : (हसते) मालीक आपकी दयासे दोनो ही खुस हे.. वो मालती आपको याद कर रही थी.. तो क्या उनको भेजु..? ओर मालती केह रही थी.. की आप भी कबीलेपे जाने वाले थे.. वो आपकी जमीलाके साथ सादी जो हे.. मालीक.. अब आप जमीलासे सादी करके उनको कबीलेकी रानी बना दीजीये..

देवायत : (हसते) हां.. लेकीन मेरे ससुर गुजर जानेसे अभी टाइम ही नही मीलता.. जब वहा जाउगा.. तो तुम तीनोको भी साथ लेते जाउगा.. मुजे तुम लोगोके रीवाजके बारेमे क्या पता..? क्या तुजे कुछ मालुम हे.. तो बता.. हें..हें..हें..

हरीया : (हसते) मालीक.. क्यु मजाक कर रहे हे.. हें..हें..हें.. आपको तो हमारे सब रीती रीवाजके बारेमे पता हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) फीर भी कुछ तो बता.. मुजे सचमे नही पता.. की वहा जाकर क्या करना हे..

हरीया : (हसते) मालीक.. कुछ नही.. वो सब वहा वो बुढी माइ थी.. वोही सब सम्हाल लेगी.. आप दोनोको हमारे वो ही मंदिरमे जाकर सादी करनी हे.. जीन मंदिरको आपके पुर्खोने बनवाया हे.. फीर तो कबीलेपे रातमे सब लोगोका नाच गान ओर भोजन होगा.. पुरी रात सब लोग धमाल करेगे.. ओर तब आपको पुरी रात जमीलाके साथ रात बीतानी हे.. ओर उनको सुबह तक प्यार कना हे.. ओर कुछ नही.. क्युकी आप उनको प्रेगनेन्ट तो पहेलेसे ही कर चुके हो.. वरना उसी रात आपको जमीलाको प्रेगनेन्ट करना होता हे..

देवायत : (हसते) क्या तो तुमने भी अपनी दुसरी बीवीको प्रेगनेन्ट करदीया हे..?

हरीया : (सरमाकर हसते) मालीक क्यु मजाक कर रहे हे.. हें..हें..हें.. मेने तो उनको पहेले ही प्रेगनेन्ट करदीया था.. तभी तो हमे भागकर सादी करनी पडी.. अभी उनका छठा महीना चल रहा हे..

देवायत : (हसते) चल ठीक हे.. तुम जाओ.. अगर तेरी बीवीको कोइ दिकत होतो मेरी बीवीको दीखा देना.. मे उनको केह दुगा..

हरीया : (हसते) मालीक हम उन्हीको दिखाते हे.. वो हमारे कबीलेकी जानी पहेचानी डोक्टर हे.. कबीलेकी सभी ओरते उनसे ही अपनी डीलीवरी करवाती हे.. मालीक.. हमने सुना हे आप यहा बडी होस्पीटल खोल रहे हे..?

देवायत : हां हरीया.. उनको अभी अ‍ेक साल लगेगा.. फीर तुम लोगोको सहेर जानेकी जरुरत नही हे.. ओर सुन.. तुम हमारे खेतोका ओर कामका ध्यान रखना.. क्युकी कल तो लखन भी हमेसाके लीये सहेरमे रहेने जा रहा हे.. अब वहाका हमारा सब कारोबार हमारा लखनही देखेगा..

हरीया : (हसते) जी मालीक.. ये तो बहुत अच्छी बात कही आपने.. मालीक अगर होस्पीटल खुलजाये तबतो बडी महेरबानी.. चलो मे चलता हु.. आप यहाकी फीकर मत करना.. कुछ चाइ बाइ पीनी होतो कहेना.. मालती लेकर आजायेगी..

देवायतने कुछ देर बैठकर वहाका काम काज देखलीया.. फीर वो रश्मीके घरपे चला गया तो वहा रश्मी ओर वंदना पंचायतकी ओफीससे आकर खाना बनानेकी तैयारीया कर रही थी.. जैसेही दोनोने देवायतको देखा खुसीके मारे उछल पडी.. ओर दोडकर दोनो देवायतकी बाहोमे समा गइ.. तो देवायत भी हसने लगा फीर बारी बारी दोनोके होठ चुम लीये.. अब वंदनाकी सारी सरम मीट चुकी थी.. ओर देवायतको खुलकर मील रही थी..
 
फीर तीनो ही सोफेपे बैठ गये तब रश्मी देवायतकी गोदमे बैठ गइ ओर उनके गलेमे हाथ डालकर उनके होठोको चुमने लगी.. तब वंदनाकी हसी नीकल गइ.. फीर दोनोने पंचायतकी सारी जानकारी देदी की वहा काम काज कैसा चल रहा हे.. फीर रश्मीने भी अपने नये मकानके प्रोग्रेसके बारेमे बता दीया.. फीर तीनोके बीच सुधीरको लेकर भी चर्चा हुइ.. ओर बात रमेश तक आगइ.. तभी..

वंदना : (रुहासी आवाजमे) भाइ.. सुना हे सामत भाइको लास्ट स्टेजका बल्ड केन्शर हे.. वो जब चले जायेगे तब पापा जया आंटीसे सादी कर लेगे..

रश्मी : (समजाते धीरेसे) वंदु.. बार बार क्यु इसे याद कर रही हे..? वो अब तेरी मम्मीको डिवोर्स भी दे रहे हे.. मत भुलो अब हम चारो इनकी पत्नीया हे.. क्या देवु.. हमे प्यार नही करता..?

वंदना : (आंसु पोछकर मुस्कुराते) दीदी ये हमे बहोत प्यार करते हे.. बस.. मे तो सीर्फ इनको बता रही थी..

देवायत : (मुस्कुराते गाल चुमते) बेबी मुजे सब पता हे.. तु फीकर मत कर.. कुछ दिनोमे सब कुछ ठीक होजायेगा.. कल चंदा सृती पुनो सब चले जायेगे.. अब घरपे सीर्फ मंजु भावु ही होगी.. तो मे चाहता हु तुम दोनो उन लोगोके वापस आने तक हमारे साथ हवेलीमे रहो.. ताकी तुम दोनोको भी कुछ चेन्ज मीले..

रश्मी : (होंठ चुमते) थेन्कस पतीदेव.. आपने हमारे बारेमे इतना सोचा वही हमारे लीये काफी हे.. क्या हेना.. वहा मंजुभाभीके सामने हमे बहोत सरम आती हे.. तो आप यही आकर हमे प्यार देते रहेना.. क्यु वंदु..? हें..हें..हें..

वंदना : (सरमाकर मुस्कुराते) हां भाइ.. पुनो दीदी भी नही हे.. तो हम यही रहेगे.. आप यहा आते जाते रहेना.. अब तो मुजे भी यहा बहुत अच्छा लगता हे..

रश्मी : (खडी होते) देवु आप दोनो बाते करो मे हम तीनोका खाना यही बनालेती हु.. वंदु.. तुम हमारी बडी सौतनको फोन करदे की देवु इधरही खाना खाकर आयेगे.. हें..हें..हें..

देवायत : (मुस्कुराते) कोइ जरुरत नही हे.. मे मंजुको कहेकर ही आया हु.. की खाना इधर खालुगा..

फीर देवायत ओर वंदना कुछ देर अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमते बाते करते रहे.. ओर बातोही बातोमे देवायत वंदनाके बुब्ससे खेलने लगा.. तब वंदना बहुत ही उतेजीत हो गइ.. ओर वो खडी होकर देवायतको हाथ कडकर अपने रुममे ले गइ.. ओर फटाफट अपने कपडे नीकाल दीये.. फीर देवायतके कपडे नीकालकर उसे बेडपे ले गइ.. ओर लेटते ही देवायतको अपने उपर खीचलीया..





वंदना : (वासना भरी नजरोसे देखते) भाइ.. अ‍ेक बार मुजे प्यार करलो.. अब मुजे आपकी आदत हो चुकी हे.. मे अपके प्यारके बीना पागल होजाती हु.. प्लीज जल्दीसे अंदर डाल दीजीये..

देवायत : (मुस्कुराते माथे चडते) वंदु.. अब तुम काफी खुल चुकी हो.. अबतो कोइ सरम नही हेनां..?

वंदना : (सरमाकर होठ चुमते) नही भाइ.. सब रश्मी भाभीका कमाल हे.. जब आप नही आते हो तब वो मेरा बहुत खयाल रखती हे.. ओर पतीसे प्यार करनेमे कैसी सरम..? भाइ.. कीतने दिन होगये हम नही मीले.. क्या आपको हमे मीलनेका टाइम नही मीलता..? हंम.. भाइ.. बहोत मन कर रहा हे.. पहेले आप फटाफट अंदर डालदो.. ओर अ‍ेक बार अच्छेसे अपनी इस बहेनको चोदलो.. फीर हम आरामसे बात करेगे..





कहातो देवायतके लंडने अपने बीलका रास्ता ढुंढलीया.. तो अ‍ेक ही जटकेमे देवायतने पुरा लंड वंदनाकी चुतममे धुसा दिया.. तो वंदनाकी चोरोसे चीख नीकल गइ.. ओर उनका मुह खुलाही रेह गया.. तो बहार कीचनमे रश्मी खाना बनाते हसने लगी.. ओर इधर वंदनाने जोरोसे देवायतको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके होठोको जोरोसे चुसने लगी.. तब देवायत जोरोसे कमर हीलाते वंदनाकी जोरोसे चुदाइ करने लगा..





वंदना : (आधी आंख चडाते) येस.. येस.. भाइ.. अपनी इस बहेनको अ‍ैसे ही चोदो.. बहुत मजा रहा हे.. भाइ.. फक मी हार्ड.. अपनी इस बहेनकी हालत बीगाडदो.. मे आपके बडे लंडसे इस दर्दको महेसुस करना चाहती हु.. मुजे जोरोसे चोदो भाइ.. आपने मुजे पहेले क्यु नही चोद लीया..

कहेते वंदनाके दोनो उरोज तालमेलमे उछलने लगे.. ओर पुरे रुममे सीर्फ फच.. फच.. फच.. की आवाज सुनाइ देने लगी.. वंदना बहुत ही कामुक ओर मदहोस होते सीर्फ देवायतकी आंखोमे देखती रही.. ओर देवायत हाथके बल वंदनाकी जबरदस्त चुदाइ करता रहा.. तब कुछ ही देरमे वंदनाने अपने दोनो पैर देवायतकी कमरमे आंटी लगाकर देवायतको जोरोसे बाहोमे भीच लीया ओर लीप लोक करलीया..





फीर अपनी कमरको जटके मारते जडने लगी.. फीर भी अ‍ैसेही देवायत वंदनाको चोदता रहा.. तब कुछ ही देरमे वंदना वापस उतेजीत होकर देवायतका साथ देने लगी.. अ‍ैसेही घमासान चुदाइ करते देवायतने वंदनाको दो बार जडाकर नीचोड लीया.. तब वंदना पसीने पसीने होगइ थी.. ओर आखीर देवायतने वंदनाकी चुतमे जड तक अपना लंड घुसा दीया..





ओर वंदनाके उपर जुकते उनके होठोको अपनी गीरफ्तमे लेलीया.. तब वंदनाने भी देवायतको कसके अपनी बाहोमे भीच लीया.. फीर दोनो ही अ‍ेक साथ अपनी कमरको जटके मारते अ‍ेक दुसरेके अंदर समा जानेकी कोसीस करते जडने लगे.. तब वंदनाकी चुतमे देवायत लंडसे पीचकारीया छोडते चुतको अपने पानीसे लबालब भरने लगा.. फीर दोनो ही सांत होगये तब वंदना भारी सांसोसे देवायतकी पीठ सहेलाती रही..





वंदना : (सांस कंट्रोल होते ही कुछ देरेके बाद) भाइइइ.. आपने.. तो.. अ‍ेक.. ही.. बार मे.. मुजे.. पुरी.. नीचोड ली.. इतनी मस्त चुदाइ.. आपने कभी नही की.. बस.. मुजे.. अ‍ैसे ही चोदते रहेना..

देवायत : (बुब्स मसलते होठोको चुमकर) वंदु.. पुनोकी तराह मे भी तुजे बहेन मानता था.. जीतना पुनोको चोदनेमे मजा आता हे उतना ही तुजे चोदनेमे आता हे.. कल तेरी सहेली चली जायेगी.. उनके बीना अच्छा नही लगेगा.. इस बार मे उनको बहुत ही कम समय दे पाया..

वंदना : (मुस्कुराते) भाइ.. इनकी कमी तो मे पुरी नही कर सकती.. लेकीन कोसीस करुगी.. की मेरे भाइको पुनो जैसा प्यार दे सकु.. भाइ वो जानेसे पहेले मुजे मीलने आने वाली थी.. सायद खाना खाकर आये..

देवायत : वंदु मे कल सहेर जा रहा हु.. सबको छोडने.. तो क्या तुजे कुछ चाहीये..? क्युकी मंजुने मुजे कहा हे..

वंदना : (होंठ चुमकर) भाइ.. हमे आपके प्यारके अलावा कुछ भी नही चाहीये.. बस.. आप हमे अ‍ैसे ही प्यार देते रहीये..

देवायत : वंदु.. तुम मुजसे कुछ कहेने वाली थी.. बता.. क्या कहेना था..

वंदना : (मुस्कुराते) भाइ.. आज पापा ओफीसपे आये थे.. तो मेने उसे बता दियाकी मे आपसे सादी कर रही हु.. वो अपना सब काम नीपटाना चाहते हे.. सायद वो इस गांवको छोडकर सहेरमे रहेने जा रहे हे..

देवायत : (होठ चुमकर) हां.. मुजसे इनकी बात हुइ.. वो जया भाभीसे सादी कर रहा हे..

वंदना : भाइ.. वो सरपंचके पदसे इस्तीफा देना चाहते हे.. ओर उसने यहाका हमारा घर मेरे ओर मम्मीके नाम करदीया हे.. ओर पैसेमे आधा हीस्सा भी मेरे ओर मम्मीके अ‍ेकाउन्टमे डाल दीया हे.. भाइ.. तो फीर उस दुकानका हम क्या करे..?

देवायत : वो सब हम बादमे देख लेगे.. वैसे भी वो दुकान विभुभाइ ही चला रहे हे.. तो अ‍ैसेही चलने दो.. रही बात सरपंचकी.. तो वो भी सब मैने तैय करलीया हे.. की कीसको सरपंच बनाना हे.. इन सबकी फीकर तुम मत करो.. चल अब बहार नही चलना हे क्या..?

वंदना : (सर्मसार होकर मुस्कुराते धीरेसे) भाइ.. अ‍ेक बार ओर अच्छेसे चोदलोनां.. कीतने दिनोके बाद तो मीले हो.. तो बहुत इच्छा होती हे.. लेकीन इस बार धीरेसे करना.. आपतो हमे अ‍ेक ही बारमे थका देते हो..

कहातो देवायत हसने लगा.. लंडको पहेलेसेही वंदनाकी चुतमे था.. देवायत वंदनाके बुब्सको चुमने लगा तो वंदना फीरसे सीसकारीया करते उतेजीत हो गइ.. ओर अ‍ेक बार फीर दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. इस बार भी देवायतने वंदनाको चोद चोदकर दो दो बार जडा दीया तब वंदनाका अ‍ेक अ‍ेक अंग ढीला होगया.. ओर आखीर दोनो साथमे जड गये.. तब वंदना हीलनेकी स्थीतीमे भी नही थी..





तबतक रश्मीने सब खाना बनालीया था.. ओर सब डाइनींग टेबलपे रख रही थी.. तब देवायत वंदनाको बाथरुममे ले गया.. ओर वहा दोनोने साथमे सावर लीया फीर कंपलीट होकर बहार आगये.. तब वंदना थोडा लंगडाते चल रही थी.. तो रश्मी उनको देखकर जोरोसे हसने लगी.. तो वंदना सर्मसार होते हसने लगी.. ओर रश्मीको मुका मारते उनके गले लग गइ.. फीर तीनो खानेके लीये बैठ गये तब खाना खाते..
 
रश्मी : (खाना खाते) जानु.. आज टीनाका फोन आया था.. उसने मुजे ओर वंदुको उनके घरपे बुलाया हे.. तो सोचा जबतक चारुभाभी ओर नीशा नही आजाते तबतक तीन चार दिन मे ओर वंदु वहा होकर आते हे..

देवायत : (मुस्कुराते) डार्लींग.. क्या इस हालतमे वहा जाओगी..? देखो पेट कीतना नीकल आया हे.. अगर कारमे जा रही होतो जाना.. लेकीन अपना ध्यान रखके जाना..

रश्मी : (मुस्कुराते) जानु ये भी सही हे.. लेकीन आप मेरी चीन्ता मत करना क्युकी उनके पास कार हे.. तो वोही हम दोनोको लेने आ रही हे.. जानु.. अब उनको बहुत पछतावा हो रहा हे.. फोनपे भी मेरी बार बार माफी मांग रही थी..

देवायत : नही रश्मी.. टीना वाकइ अच्छी लडकी हे.. तुम अ‍ेक बार उनसे मीललो.. उनको भी अच्छा लगेगा.. अब मे तुमको तेरी डीलीवरीके बाद ही हाथ लगाउगा.. तबतक तु वंदुसे काम चला.. हें..हें..हें..

रश्मी : (मुस्कुराते खाना खाते) देवु.. तभी तो आज मे आपको मीलने नही आइ.. अच्छा हुआ आपने मेरे हीस्सेका प्यार भी वंदुको देदीया.. हें..हें..हें.. दीखता हे मुजे.. हें..हें..हें.. बेचारीकी हालत खराब करदी आपने.. हें..हें..हें..

वंदना : (सरमाके हसते) दीदी.. ये हमे कीतने दिनोके बाद तो मीले हे.. तो इनको छोडनेका मन ही नही करता.. अ‍ैसा लगता हे.. मे उनको मेरे उपर ही रखु.. हें..हें..हें..

देवायत : अरे.. कीतने दिन हुअ‍े..? मे तीन चार दिन पहेले ही मीलके तो गया था.. वंदु.. तुम भी रश्मीकी तराह ठरकी होगइ हे.. हें..हें..हें.. वंदु.. तुम रश्मीके साथ चली जाओ.. क्या हेना थोडा माहोल बदलेगा तो तुजे भी अच्छा लगेगा.. ओर अब तु तेरी मम्मीकी चीन्ता तो छोड ही दे.. अब तुम चारो मेरी जीम्वेवारी हो.. अब मे फ्रि होगया हु.. तो हम बहुत ही जल्द सादी कर लेगे..

चारो खाना खाते बाते करते रहे.. फीर देवायत सामत भाइके घरपे चला गया.. तो वहा भी सब लोग खाना खाकर बैठे थे.. ओर बंसी सभी दोस्तोको मीलने चौराहेपे चला गया था.. वहा देवायतने सामत भाइका हाल चाल पुछा.. तो जया सांती ओर जागृतीके चहेरेपे मायुसी छा गइ..

तब देवायतने सामतभाइ को उनके घरकी चीन्ता ना करनेको कहा.. ओर बंसीका खयाल रखनेको कहा.. तब सामत भाइने राहतकी सांस ली.. फीर सांतीने सबके लीये चाइ बनादी.. ओर सब लोग चाइ पीने लगे..तब देवायतको नही पता थाकी.. वो सामत भाइके साथ आखरी चाइ पी रहे हे.. ओर उनको आखरी बार मील रहे हे..

दुसरी ओर हवेलीपे भी सबलोग खानेके लीये बैठे थे.. तो आज रमा नीलमके साथ लखनके सामने ही बैठी थी.. ओर लता लखनके बील कुल बगलमे बैठी थी.. तो उनकी दुसरी साइड आज पुनम बैठ गइ.. ओर पुनके पास सृती बैठी थी.. सब लोग खाना खा रहेथे.. तब दया ओर रजीया सबको खाना परोस रही थी.. तो लता आज बडे प्यारसे लखन ओर रजीयाको देखकर मुस्कुरा रही थी.. तब रजीया बहुत ही सरमाइ..

ओर रमा नीलम सामने बैठे थे तब लखनको भी आज आगे बढनेका अच्छा मौका मील गया था.. वो धीरेसे अपना पैर आगे लेजाते रमाके पैरोको सहेलाने लगा.. तब रमा समज गइकी ये लखनकी सरारत हे.. तो वो जटसे आजु बाजु नजर धुमाकर देखने लगी.. की कोइ देख तो नही रहा.. फीर वो लखनकी ओर देखते सम्माइल करते सरमाने लगी.. तो लखन अपना पैर सहेलाते उनकी जांगो तक उपर लेजाने लगा..

तो रमा बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर हाथ नीचे लेजाकर लखनके पैरोको हटाने लगी.. तब लखनने अपने पैर वापस लेलीये.. ओर पासमे धीरेसे नीलमके पैरोके पास लेजाने लगा.. ओर पैरको थोडा उचा करके नीलमके दोनो पैरोके बीच जांगोमे धुसा दीया.. जो पैरोका अनुठा सीधा नीलमकी चुतपे रख दीया.. तो नीलम चौकते थोडी सक पकाइ.. लेकीन बहुत ही जल्द अपने आपको सम्हाल लीया.. ओर वो समज गइकी ये सब हरकते लखन कर रहा हे..

लेकीन नीलम सबकी हाजरीसे कुछ नही करपाइ.. ओर अपने दोनो होठोको जोरोसे अपने दांतोसे दबाते आंख बंध करली.. तभी लखन अनुठेसे नीलमकी चुतको कपडोके उपरसे ही खरोदने लगा.. तब नीलमकी हालत पतली होने लगी.. ओर उसने अपने दोनो पैर सीकुड लीये.. फीर हपना मुह बीगाडते धीरेसे अ‍ेक हाथ डाइनींगके नीचे लेगइ.. ओर हाथसे लखनके पैरोको हटानेकी कोसीस करने लगी..

जब लखनने पैर नही हटाया तब नीलम प्यारसे उनकी ओर देखते दया भावसे लखनको आंखोके इसारोसे पैर हटानेकी मनते करने लगी.. तो लखनने फौरन अपना पैर हटा लीया.. तब नीलमने राहतकी सांस ली.. फीर वो अपना सर जुकाते सरमके मारे मुस्कुराने लगी ओर जटसे खाने लगी.. सब लोग बाते करते खानेमे बीजी थे.. तब यही हरकत लखनने दुबारा की..

लेकीन इस बार नीलमकी जांगोपे नही उसने अपना पैर उचा करते सीधा ही रमाकी जांगमे फसा लीया.. ओर अनुठेसे चुतको सहेलाते सीधा ही उनकी चुतपे हमला बोल दीया.. तब लखनकी इस हरकतसे रमाकी सीसकारीया नीकल गइ.. तो उसने फौरन पानीका गीलास उठालीया ओर पानी पीने लगी.. ताकी सबको लगेकी रमाको सब्जीया थोडी तीखी लगी हे.. लखन रमाकी हालत देखकर मुस्कुराने लगा..

तब रमा नसीली आंखोसे लखनको देखती रही.. मानो वो लखनकी इस हरकतसे मदहोस ओर उतेजीत होगइ हो.. रमा आंख बंध करते लखनकी इस हरकतको अ‍ेन्जोय करने लगी.. तब कुछही देरमे उनकी चुतसे पानीका रीसाव होने लगा.. ओर रमा बहुत ही उतेजीत होने लगी.. वो अपनी कमर धीरे धीरे हीलाते अपनी दोनो जांगोसे लखनके पैरोको जकडने लगी.. तब कुछही देरमे उनकी चुतसे फवारा नीकल गया..

ओर रमा सांत होगइ.. तब रमाको सबके साथ होनेका अहेसास हुआ.. ओर उसने भी सरमाते धीरेसे लखनके पैरोको हटानेकी कोसीसकी.. तभी लखनकी जांगपे कीसीने हाथ रखते चीमटी काटी.. तो लखनने फौरन अपना पैर वापस खीच लीया.. ओर अपनी जांगपे देखने लगा.. तो वो हाथ पुनमका था.. जो सृतीसे हस हसके बाते करते खाना खा रही थी.. तब लखन समज गयाकी उनकी सभी हरकते पुनम जान गइ हे..





तो आज लखनने भी पहेली बार हिंमत करते पुनमके हाथपे अपना हाथ रखते उंगलीओमे उंगलीया फसाकर पकड लीया.. तो पुनम फौरन अपना हाथ वापस खीचने लगी.. लेकीन लखनने उनका हाथ कसके पकड रखा था.. तब पुनमको लगाकी वो बुरी तराह फस गइ हे.. उसने अ‍ेक दो बार हाथ खीचनेकी कोसीसकी.. लेकीन लखन आज उनके हाथको छोडनेके मुडमे नही था.. तब पुनमने हाथ छुडानेकी कोसीस छोडदी..

ओर अपना हाथ अ‍ैसेही रखा.. तो लखनने पुनमके हाथोमे दबाव बनाकर कसके पकडके रखा.. तो पुनमको अ‍ैसा लगने लगाकी दोनो अ‍ेक प्रेमी जोडा हो.. जो सबसे छुपकर प्यार करते हे.. तो वो यही सोचते ही उनकी चुतसे पानीका रीसाव होने लगा.. तो पुनम थोडा अनकंम्फोटेबल फील करने लगी.. ओर लखनकी ओर तीरछी नजरोसे देखते गुस्सा करने लगी.. तब लखनने उनका हाथ छोड दीया..

तो पुनमने हाथ खीचकर राहतकी सांस ली.. ओर थोडा गुस्सेसे लखनकी ओर देखने लगी.. तब लखन मुस्कुराते सर जुकाते खाने लगा.. तो पुनम मनमे बडबडाते लखनको गालीया देने लगी.. तब उनके पास बैठी सृतीको भी पता चल गया..की लखनने जरुर कुछना कुछ पुनमके साथ सरारत कीहे.. तो वो पुनमसे पुछने लगी.. तो पुनमने सृतीको सब बता दीया.. जीसे सुनकर सृती लखनकी ओर कातील नजरोसे देखते हसने लगी....

कन्टीन्यु
 
Back
Top