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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २४७
वो इतने दिन वहा रही.. लेकीन अेक बारभी भावनाने उनसे अच्छी तराह बात नहीकी.. उनका देवायतके प्रती लगाव ओर जुकाव देखकर समज गइ थी.. की कहीना कही.. भावनाका देवायतके साथ कुछ तो सबंध हे.. ओर उपरसे भानुका रीटाको घरपे लेजाना.. ये सब बातोसे सरलाको यकीन हो गया था.. की अब भावना भानुके साथ कभी नही रहेगी.. लेकीन उनको तो अपने तनकी आग बुजानेसे मतलब था.... अब आगे
तो दुसरी ओर सहेरमे साम होते ही लखन अपनी नइ कार लेकर नीलमको आगे बीठाकर बाजारमे चला गया.. रास्तेमे वो नीलमके साथ छेडखानी करने लगा.. तो नीलम भी सरमाके लखनको सब कुछ करने दे रही थी.. लखन अेक हाथसे ड्राइव करते दुसरे हाथसे नीलमकी चुतको सहेला रहा था.. तो नीलम भी आंख बंध करते चुत सहेलवानेका मजा ले रही थी.. ओर सरमाते हस रही थी..

लखन : (हसते) नीलु.. क्या हस रही हो..
नीलम : (सरमाकर हसते धीरेसे) जीजु.. आप भी धिरेनकी तराह हो.. मुजे गरम करके छोड देते हो.. कीतनी बार आपको कहा.. लेकीन आप समजते ही नही.. इनसे तो अच्छा हे हम अेक बार अच्छेसे मीलले.. क्या कहेते हो..? क्युकी अब तो आपके बीना रहा भी नही जाता..
लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. हम मील तो लेगे.. लेकीन सोचले.. फीर तु दो दिन बीस्तरसे उठ नही पायेगी.. तेरी हालत खराब होजायेगी.. फीर घरपे सबको क्या कहोगी..? थोडा सही समय आनेदे.. फीर सबकुछ होगा.. जो तु चाहती हे.. आज तो तेरी सृती दीदीके साथ सुहागरात मनाउगा.. फीर दो तीन बाद पुनोदी भी आजायेगी.. फीर उनकी बारी.. फीर तेरे बारेमे सोचते हे..
नीलम : (आस्चर्यसे हसते) क्या..? सृतीदीके साथ..? सब तैय हो गया..? क्या इसीलीये हम ये सब लेने जा रहे हे..?
लखन : हां.. आज उनको बर्थडेकी सरप्राइज देनी हे.. ओर गीफ्टमे सुहागरात.. उनको वो सुख चाहीये जो अभी तुजे चाहीये.. सबर करले.. तेरी भी बारी आयेगी..
नीलम : (कामुक नजरोसे सरमाते धीरेसे) ठीक हे जीजु.. मे उस दिनका इन्तजार करुगी.. पता नही वो दीन कब मेरे नसीबमे होगा..
लखन : (मुस्कुराते) अरे होगा.. तु फीकर मत कर.. अैसा होगाकी हम डायरेक्ट हनीमुन ही मनायेगे..
फीर दोनो बाते करते बाजारमे आगये.. वहा बर्थडेके लीये कुछ सजानेका सामान लीया.. फीर दोनो अेक अच्छीसी बेकरीपे चले गये.. वहा लखनने सृतीका नाम लीखवाकर अेक बडासा केक लेलीया.. ओर दोनो वापस कारमे आगये.. ओर घरकी ओर नीकल पडे.. तभी नीलमने सरमाकर लखनको लोंग ड्राइवपे लेजानेका आइडीया दीया.. फीर दोनो घरपे आगये.. नीलमने सभी सामान नीचे अपने वाले रुममे रख दीया ओर केकको भी फ्रिजमे रख दीया..
फीर रजीया ओर नीलम सामका खाना बनानेमे जुट गइ तो लखन अपनी नइ कार लेके होस्टेलपे चला गया.. राधु लखनको देखते ही उनकी बाहोमे समा गइ.. सभी लडकीया खानेके लीये नीचे आगइ थी.. फीर लखन ओर राधीका प्यारकी बाते करने लगे.. राधीकाने लखनको बतायाकी वो ओर उनकी मम्मी.. लखनकी फेमीलीसे मीलकर बहुत खुस हे.. ओर राधीकाने भी सभी रीस्तोको अेक्सेप्ट करलीया हे..
फीर दोनो घरपे आ गये.. राधीका अपनी मम्मीको खाना खीलाने लगी.. तो रजीया भी खाना लेकर सृतीके पास चली गइ.. तो आज रजीयाको देखकर सृतीको अच्छा नही लगा.. उनको लगाथा की लखन उनको खीलाने आयेगा.. लेकीन आज लखन जान बुजकर सृतीको खीलाने नही गया.. तो सृती अपने हाथोसे ही खाने लगी.. ओर रजीया थोडी देर वही खडी रहेते मुस्कुराती रही.. तभी..
अध्याय - २४७
वो इतने दिन वहा रही.. लेकीन अेक बारभी भावनाने उनसे अच्छी तराह बात नहीकी.. उनका देवायतके प्रती लगाव ओर जुकाव देखकर समज गइ थी.. की कहीना कही.. भावनाका देवायतके साथ कुछ तो सबंध हे.. ओर उपरसे भानुका रीटाको घरपे लेजाना.. ये सब बातोसे सरलाको यकीन हो गया था.. की अब भावना भानुके साथ कभी नही रहेगी.. लेकीन उनको तो अपने तनकी आग बुजानेसे मतलब था.... अब आगे
तो दुसरी ओर सहेरमे साम होते ही लखन अपनी नइ कार लेकर नीलमको आगे बीठाकर बाजारमे चला गया.. रास्तेमे वो नीलमके साथ छेडखानी करने लगा.. तो नीलम भी सरमाके लखनको सब कुछ करने दे रही थी.. लखन अेक हाथसे ड्राइव करते दुसरे हाथसे नीलमकी चुतको सहेला रहा था.. तो नीलम भी आंख बंध करते चुत सहेलवानेका मजा ले रही थी.. ओर सरमाते हस रही थी..

लखन : (हसते) नीलु.. क्या हस रही हो..
नीलम : (सरमाकर हसते धीरेसे) जीजु.. आप भी धिरेनकी तराह हो.. मुजे गरम करके छोड देते हो.. कीतनी बार आपको कहा.. लेकीन आप समजते ही नही.. इनसे तो अच्छा हे हम अेक बार अच्छेसे मीलले.. क्या कहेते हो..? क्युकी अब तो आपके बीना रहा भी नही जाता..
लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. हम मील तो लेगे.. लेकीन सोचले.. फीर तु दो दिन बीस्तरसे उठ नही पायेगी.. तेरी हालत खराब होजायेगी.. फीर घरपे सबको क्या कहोगी..? थोडा सही समय आनेदे.. फीर सबकुछ होगा.. जो तु चाहती हे.. आज तो तेरी सृती दीदीके साथ सुहागरात मनाउगा.. फीर दो तीन बाद पुनोदी भी आजायेगी.. फीर उनकी बारी.. फीर तेरे बारेमे सोचते हे..
नीलम : (आस्चर्यसे हसते) क्या..? सृतीदीके साथ..? सब तैय हो गया..? क्या इसीलीये हम ये सब लेने जा रहे हे..?
लखन : हां.. आज उनको बर्थडेकी सरप्राइज देनी हे.. ओर गीफ्टमे सुहागरात.. उनको वो सुख चाहीये जो अभी तुजे चाहीये.. सबर करले.. तेरी भी बारी आयेगी..
नीलम : (कामुक नजरोसे सरमाते धीरेसे) ठीक हे जीजु.. मे उस दिनका इन्तजार करुगी.. पता नही वो दीन कब मेरे नसीबमे होगा..
लखन : (मुस्कुराते) अरे होगा.. तु फीकर मत कर.. अैसा होगाकी हम डायरेक्ट हनीमुन ही मनायेगे..
फीर दोनो बाते करते बाजारमे आगये.. वहा बर्थडेके लीये कुछ सजानेका सामान लीया.. फीर दोनो अेक अच्छीसी बेकरीपे चले गये.. वहा लखनने सृतीका नाम लीखवाकर अेक बडासा केक लेलीया.. ओर दोनो वापस कारमे आगये.. ओर घरकी ओर नीकल पडे.. तभी नीलमने सरमाकर लखनको लोंग ड्राइवपे लेजानेका आइडीया दीया.. फीर दोनो घरपे आगये.. नीलमने सभी सामान नीचे अपने वाले रुममे रख दीया ओर केकको भी फ्रिजमे रख दीया..
फीर रजीया ओर नीलम सामका खाना बनानेमे जुट गइ तो लखन अपनी नइ कार लेके होस्टेलपे चला गया.. राधु लखनको देखते ही उनकी बाहोमे समा गइ.. सभी लडकीया खानेके लीये नीचे आगइ थी.. फीर लखन ओर राधीका प्यारकी बाते करने लगे.. राधीकाने लखनको बतायाकी वो ओर उनकी मम्मी.. लखनकी फेमीलीसे मीलकर बहुत खुस हे.. ओर राधीकाने भी सभी रीस्तोको अेक्सेप्ट करलीया हे..
फीर दोनो घरपे आ गये.. राधीका अपनी मम्मीको खाना खीलाने लगी.. तो रजीया भी खाना लेकर सृतीके पास चली गइ.. तो आज रजीयाको देखकर सृतीको अच्छा नही लगा.. उनको लगाथा की लखन उनको खीलाने आयेगा.. लेकीन आज लखन जान बुजकर सृतीको खीलाने नही गया.. तो सृती अपने हाथोसे ही खाने लगी.. ओर रजीया थोडी देर वही खडी रहेते मुस्कुराती रही.. तभी..

















