Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 84 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

धीरे धीरे करते दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. बंसीके हर सोटके साथ जागृतीके बुब्स तालमेलमे उछलने लगे.. अब तो जागृती भी कामुक सीसकारीया करते बंसीको ओर जोरोसे चोदनेके लीये उक्साने लगी थी.. वो जब भी स्खलीत होनेकी कगारपे होती बंसीको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लेती.. ओर बंसीके होठोसे लीपलोक करलेती.. जब जड जाती तो नीढाल होते अ‍ैसे ही पडी रहेती..





तब भी बंसी उनको जोरोसे चोदता रहेता.. ओर कुछ देरके बाद जागृती फीरसे उतेजीत होजाती ओर बंसीका साथ देने लगती.. अ‍ैसे ही बंसीने जागृतीको दो दो बार जडा दीया.. ओर अब भी उनको जोरोसे चोद रहा था.. अबकी बार वो भी अपनी मंजीलके करीब पहोंच रहा था.. तो वो जागृतीके तनसे चीपक गया.. ओर उनके गलेके मुह डाकर गरदन चुमते जोरोसे अपनी कमर हीलाने लगा..





तो जागृती भी खेली खीलाइ थी.. तो वो भी समज गइ.. की बंसी जडने वाला हे.. तो वो भी अपनी कमर उछालते बंसीको ओर जोरोसे चोदनेके लीये कहेजे लगी.. ताकी वो भी बंसीके साथ अपनी मंजीलपे पहोंच सके.. जागृतीने बंसीकी गरदनपे दोनो हाथ डालकर बंसीको अपने तनसे सटालीया.. ओर उनकी कमरपे दोनो पैर रखके कमरको नीचेकी ओर दबाने लगी.. ताकी बंसीका पुरा लंड उनकी चुतमे घुस जाये..





बंसी जोरोसे कमर हीलाते जागृतीको चोदने लगा.. तो कुछ ही देरमे दोनो अपनी मंजीलके करीब पहोंच गये.. ओर दोनोने अपने होठोसे होठ मीलाके लीपलोक करलीया.. बंसीने पुरा लंड जागृतीकी चुतकी जड तक घुसादीया.. ओर रुक रुकके अपनी कमरको जटके देते लंडसे पीचकारीया छोडने लगा.. तो जागृतीको भी अपनी बच्चेदानीपे गरम महेसुस हुआ.. ओर वो भी उतेजनासे कांपते हुअ‍े बंसीके साथ जडने लगी..





कुछ ही देरमे बंसी जागृतीके सीनेपे ढेर होगया.. ओर जागृती बंसीकी पीठको सहेलाने लगी.. दोनोका जोस ठंडा हो गया.. तभी जागृतीको अहेसास हुआ की बंसीने उनको चोद लीया हे.. वो बहुत ही सरमाने लगी.. ओर बंसीकी पीठ सहेलाते बंसीसे नजरे चुराते इधर उधर देखने लगी.. उसे अपनी चुतपे अब भी बंसीका लंड सख्त महेसुस हो रहा था.. जो रेह रेह अब भी जटके मार रहा था.. तभी..

जागृती : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. अब उपरसे हटीयेनां.. मुजे बाथरुममे जाना हे.. नीचे खराब हो गया हे..

बंसी : (धीरेसे होंठ चुमते) दीदी.. हम सभी दोस्तोकी अ‍ेक आदत हे.. जबतक हम अपनी मासुकाकी चुतको दो बार अपने पानीसे सीच नही देते.. तबतक हम अपना हथीयार बहार नही नीकालते.. तो आप भी दुसरे राउन्डके लीये तैयार होजाइअ‍े.. मुजे आपको वापस चोदना हे..

जागृती : (सरमाते धीरेसे) क्या..? भाइ.. अ‍ेक बारमे ही आपने मेरी हालत खराब करदी हे.. तो दुसरी बामे आपको कैसे जेल पाउगी..? क्या हम थोडी देरके बाद नही कर सकते..? हंम.. थोडा आराम करलो.. फीर हम दुबारा करेगे.. देखो.. मेरी पुरी चुत आपके पानीसे भरी हे.. अ‍ेक बार इसे साफ करलु..? हंम..? हमारे पास पुरी रात पडी हे.. फीर जीतनी मरजी हो चोद लेना..

बंसी : (धीरेसे कमर हीलाते) नही.. मतलब नही.. ओर अब आप भी दो बार चुदवानेकी आदत डाललो.. क्युकी अब हर दिन आपको दो बारसे पहेले मे छोडने वाला नही हु.. ओर सांती बुआको भी मे अ‍ैसे ही दो बार चोदता हु..

जागृती : (नैन चुराते ससर्मसार होते मुस्कुराते) सीससस... भाइ.. इस बार धीरेसे करोना.. नीचे अब भी जलन हो रही हे.. पता नही मुना भाइने सबको कोनसी जडी बुटी पीलाइ हे.. जयश्री ओर बरखा केह रही थी उनके भाइ भी उनकी हालत बीगाड देते हे.. भाइ.. मे यही सोउगी.. दीदीके सामने बहुत सरम आयेगी..

सांती : (खीडकीसे धीरेसे) क्यु..? कोइ जरुरत नही हे.. कलसे तुभी हमारे साथ सोयेगी केह देती हु..

बंसी : (हसते खीडकीकी ओर देखते) सांती तुम..? अंदर आजाओनां.. हें..हें..हें..

जागृती : (सरमसे पानीपानी होते धीरेसे) दीदी.. आप..? जाइअ‍े यहासे.. मुजे सरम आ रही हे..

सांती : (हसते धीरेसे) क्यु..? जब हर रात तुम हम दोनोका लाइव सो देखती थी.. तब तो तुजे सरम नही आती थी.. आज पता चलाना हमारे पतीको जेलना इतनी आसान बात नही हे.. देखलीया..? आज तुम दोनोकी सुहागरात हे.. तो मे आज अंदर नही आउगी.. फीर कलसे तो तुजे भी हमारे साथ सुलाउगी.. कमीनी कहीकी.. आज आइ हे हाथमे.. बंसी.. इनको सुबह तक छोडना नही.. वरना सुबह आपकी खैर नही..

जागृती : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. जाइअ‍ेनां.. आपके सामने मुजे बहुत सरम आ रही हे..

सांती : (हसते धीरेसे) हां जा रही हु.. लेकीन तुम दोनोका शो देखनेके बाद.. बंसी.. आप इसे अ‍ेक बार ओर मेरे सामने चोदलो.. फीर कल देखती हु.. कैसे हमारे साथ नही आती..

कहा तो बंसी अ‍ेक बार फीर कमर हीलाते जागृतीको चोदने लगा.. तो दुसरी ओर सहेरमे भी देर रात सृतीका बर्थडे मनाकर रजीया ओर नीलम सोने चली गइ.. तब लखन सृतीको गोदमे उठाकर उनके बेडरुममे लेकर आगया ओर सृतीको उनके बेडपे बीठा दीया.. ओर मुडकर जाने लगा तभी सृतीने सरमाके धीरेसे लखनका हाथ कसके पकड लीया.. तो लखन मुडके हसते हुअ‍े सृतीकी ओर देखने लगा..
 
सृती : (कातील नजरोसे धीरेसे सरमाते) भाइ.. मेरा बर्थडे गीफ्ट..?

लखन : (मुस्कुराते) हां बोलो.. क्या चाहीये..?

सृती : (कातील नजरोसे मुस्कुराते धीरेसे) आजकी रात.. आप यही रुकजाइअ‍ेनां.. सुबह चले जाना..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. देखलो.. फीर कुछ गलत होजायेगा.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते धीरेसे) होजानेदो.. भाइ.. मुजे मेरा बर्थडे गीफ्ट चाहीये.. अभी.. देदो मुजे..

लखन : (मुस्कुराते पास बैठते) हंम.. मागलो.. क्या गीफ्ट चाहीये आपको..?

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) भाइ.. गीफ्ट मे.. हमारी सुहागरात.. देदो मुजे वो सुख.. जीसके लीये मे कइ दिनोसे आपसे मीलनेके लीये तडप रही हु.. भाइ.. मुजे अपनालो.. यही मेरी गीफ्ट हे..

लखन : (मुस्कुराते दरवाजेकी ओर जाते) ठीक हे दीदी.. मे अभी आया..

सृती : (जटसे) भाइ.. आप कहा जा रहे हो..? रुक जाइअ‍ेनां..

लखन : (पीछे मुडकर मुस्कुराते) अरे पहेले दरवाजा तो बंध करलेनेदो.. मे चेन्ज करके आता हु..

सृती : (मुस्कुराते) भाइ रहेने दोना.. यहा कौन आयेगा..? सबको पता हे.. आप सीर्फ चेन्ज करके आजाओ..

कहेते सृती सरमाके हसने लगी.. लखन चेन्ज करने चला गया तो इधर सृतीके दिलकी धडकन बढने लगी.. उनको उमीद नही थी.. की लखन आज उनके साथ रुकेगा.. वो लखनको पुरी तराह समर्पीत होजाना चाहती थी.. सृती तो पहेलेसे अपनी नाइटी पहेनकर सोइ हुइ थी.. फीर कुछ देरके बाद लखन आ गया.. ओर फीर भी दरवाजा खाली बंध करदीया.. सृती बहुत ही सरमाने लगी..

ओर लखन उनके पास आ गया तो सृती थोडी साइडमे खीसक गइ.. लखनको अपने पास बैठनेके लीये जगहदी.. तो लखन सृतीसे सटकर बैठ गया.. ओर उनकी कमरमे हाथ डालकर सृतीको अपनी आगोसमे लेलीया.. तो सृती हसने लगी.. ओर लखनकी कमरमे हाथ डालकर उनके कंधेपे सर रखके बैठ गइ.. दोनोने अ‍ेक दुसरेकी कमरपे हाथ रखा था.. तभी लखनने सृतीके होठोको चुम लीया..





लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. आज हम दोनोके बीच अ‍ेक नये रीस्तेकी सुरुआत हो रही हे.. कैसा लगेगा आपको..?

सृती : (जोरोसे बाहोमे भीचते) भाइ.. इस पलका मे कइ दिनोसे इन्तजार कर रही थी.. आज मे बहुत खुस हु.. थेन्क्स.. आज आपने मुजे वाकइ बहुत बडी सरप्राइज दी हे.. थेन्क्यु सो मच..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. कहीये.. ओर क्या गीफ्ट चाहीये आपको..?

सृती : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. आज हम दोनोका मीलन होगा.. यही तो मेरी गीफ्ट हे.. फीर भी आप देना चाहते हो मे जो मांगु वो गीफ्ट दोगे मुजे..?

लखन : (मुस्कुराते गाल चुमते) हंम.. आइ प्रोमीस.. अ‍ेक बार मांगके तो देखो..?

सृती : (लखनकी बाहोमे सरमाते धीरेसे) भाइ.. आज मुजे हमेसाके लीये अपनी रानी बनालो.. करलो मुजसे सादी.. मे पुरा जीवन आपकी अर्धागींनी बनकर बीताना चाहती हु..

लखन : (होंठ चुमकर) दीदी.. सादीतो होही जायेगी.. आप ओर पुनोदी तो कबसे मेरी रानी होगइ हो.. जब भाभीमांने कहा था.. कुछ ओर मांगलो.. उनसे भी बढकर..

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे मुस्कुराते) भाइ.. मुजे ओर कुछ भी नही चाहीये.. मुजे सीर्फ मेरा भाइ चाहीये.. जो मुजे बेइम्तहा प्यार करे.. भाइ.. यही समजलो आज हम दोनोकी सुहागरात हे..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. वोतो यहा आया तब ही पता था.. की आज आपके इरादे कुछ नेक नही हे.. हें..हें..हें.. दीदी.. याद हे आपको..? मेने आपको कुछ कहा था.. जब आपने मेरा टेस्ट कीया था..

सृती : (लखनकी ओर हसते देखते) क्या..? आपने..? हें..हें..हें.. मुजे तो कुछ याद नही.. बताइअ‍ेनां..?

लखन : (हसते) अच्छा..? याद कीजीये.. मेने आपको कुछ चेलेन्ज दीया था.. देखलो.. भाइकी सभी बीवीयोमे पहेली आप हो.. जो आज मे आपसे मीलन करुगा.. हें..हें..हें..

सृती : (थोडी दुर होते सामने देखते हसते) अरे हां यार.. मे तो उस बातको भुल ही गइ थी.. आपकी बात सच होगइ.. हें..हें..हें.. लेकीन भाइ.. फीर भी आप गलत हो.. क्युकी अब मे आपके भाइकी बीवी नही हु.. क्युकी आपके भाइके साथ मेरा सादीका रीस्ता खतम होचुका हे.. ओर दुसरी बात.. तब आप मेरे देवर थे.. तो मे मेरे देवरसे नही.. मे मेरे भाइसे मीलन कर रही हु.. तो आपकी बात जुठ साबीत हुइ.. हें..हें..हें..

लखन : (बाहोमे लेते) दीदी.. आपका पैर.. कही दर्द होने लगातो..?

सृती : (मुस्कुराते) अरे कुछ नही होगा.. आप इनकी परवाह मत करो.. अब दर्द नही हे.. अब कोइ बहाना नही चलेगा.. हां.. आज मे कुछ नही करुगी.. जो भी करना हे आपको ही करना पडेगा.. मे अ‍ैसे ही लेटी रहुगी.. बस.. अ‍ेक बार मुजे ठीक होजाने दीजीये.. फीर देखना मे आपको कीतना प्यार दुगी..

कहातो लखन मुस्कुराने लगा.. ओर खडा होकर सृतीको बेडपे लीटा दीया ओर खुदभी उनकी बगलमे लेट गया.. तो सृती सरमाकर लखनकी ओंखोमे देखने लगी.. ओर लखनके हाथोमे उंगलीया फसाली.. लखनने सृतीकी ओर करवट लेली.. तो सृती भी लखनकी ओर करवट लेकर उनके सामने होगइ.. दोनो अ‍ेक दुसरेकी आंखोमे देखने लगे.. ओर धीरे धीरे करते दोनोके चहेरे नजदीक आगये....

कन्टीन्यु
 
सभी पाठको को दिपावली की शुभ कामनाये
 
my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २४९

लखन मुस्कुराने लगा.. ओर खडा होकर सृतीको बेडपे लीटा दीया ओर खुदभी उनकी बगलमे लेट गया.. तो सृती सरमाकर लखनकी ओंखोमे देखने लगी.. ओर लखनके हाथोमे उंगलीया फसाली.. लखनने सृतीकी ओर करवट लेली.. तो सृती भी लखनकी ओर करवट लेकर उनके सामने होगइ.. दोनो अ‍ेक दुसरेकी आंखोमे देखने लगे.. ओर धीरे धीरे करते दोनोके चहेरे नजदीक आगये....अब आगे





ओर आखीर दोनोके होठ मील गये.. लखन बडे ही प्यारसे सृतीके होठोको चुमने लगा.. तो सृती भी प्यारसे लखनकी ओंखोमे वासना भरी नजरोसे देखते उनके होठोको चुमने लेगी.. अंदरसे सृती बहुत ही उतेजीत हो चुकी थी.. अब उनसे थोडासा भी सब्र नही हो रहा था.. ओर वो लखनकी आंखोमे देखते उनके सर्टके बटन खोलने लगी.. तो लखन भी उनकी नाइटीको नीकालने लगा..





सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) भाइ.. आज सबकुछ होजाने दो.. मे बहुत प्यासी हु.. मीटादो मेरी प्यास..

लखन : (सामने देखते मुस्कुराते) दीदी.. अगर आप मेरी भाभी होती तो बहुत संकोच होता.. लेकीन अब आप मेरी दीदी हो.. मेरी मालती.. आज आपको छोडने वाला नही हु..

दोनो ही अ‍ेकदुसरेकी ओखोमे देखते अ‍ेक दुसरेके कपडे नीकाल रहे थे.. कुछ ही देरमे दोनो बीलकुल नंगे होगये.. सृतीकी चुत काफी गीली होचुकी थी.. तो लखनका लंड हवामे उपरकी ओर जटके मार रहा था.. ओर उनमेसे प्रीकम बहार नीकल रहा था.. जो अंधेरेमे भी चमक रहा था.. जीसे देखकर सृतीसे रहा नही गया.. ओर सृतीने उसे अपनी मुडीमे पकड लीया.. फीर बगलमे आकर होले होले उपर नीचे करते सहेलाने लगी..





सृती : (मुस्कुराते) भाइ.. जडी बुटीकी वजहसे ये वाकइ बहुत बडा हो गया हे.. मुजे कुछ होगा तो नही..?

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. हमारी सुहागरात हे.. तो कुछ भी हो सकता हे.. अब डरनेसे कोइ फायदा नही.. क्युकी आज मे कीसी भी तराह आपको छोडने वाला नही हु..

सृती : (सर्मसार होते हसते) भाइ.. आपको सचमे मुजे डरा रहे हो.. अब बाते मत करो.. आजाओ मेरे उपर.. मे कबसे आपके साथ मीलन करनेके लीये तरस रही हु.. मुजे ओर मत तडपाओ..

कहातो लखन आहीस्तासे अ‍ेक पैर सृतीकी कमरपे डालते धीरेसे सृतीके उपर चड गया.. तो सृतीने अपने दोनो पैर फैलादीये.. ओर लखन सृतीके बुब्सके साथ खेलते उनके होठोको तो कभी उनके बुब्सकी नीपलको चुमने लगा.. सृती मदहोस होने लगी.. वो आंखोकी पुतलीया पलटते अ‍ेक हाथ लखनकी गरदनमे डालकर दुसरे हाथसे लखनकी पीठ सहेलाने लगी.. ओर बीच बीचमे लखनके तनको अपने तनपे दबाने लगी.. जैसे केह रही हो मुजमे समा जाओ..





लखन : (बुब्सको चुमते) दीदी.. आपके बुब्स बहुत ही मस्त हे.. ना छोटा ना बडा.. मेतो इनका दीवाना हो गया.. देखना मे अ‍ेक दिन इनका दुध पीउगा.. मेरी दीदीका दुध..

सृती : (मदहोसीमे धीरेसे) सीसस... आह.. भा..इ.. पी लेना.. जब मेरा बच्चा होगा.. भाइ.. अब ओर बरदास्त नही होता.. डालदो अंदर.. ओर नीचे अपनी बीवी होनेकी महोर लगादो.. आज मे मेरे भाइकी बीवी होजाउगी.. आजसे मे अपना ये तन आपको सोंपती हु.. अब इस तनको ओर कोइ हाथ नही लगायेगा..

लखन : (गलेको चुमते धीरेसे कानमे) दीदी.. मेरी फेन्टासी मेरी बीवीकी चुतमे महोर लगानेकी नही हे.. मेरी बहेनकी चुतपे महोर लगानेकी हे.. जो इस वक्त मेरी बडी बहेनकी चुतमे लगाने जा रहा हु.. ओर कुछही दिनोमे दुसरी बहेनकी चुतपे लगा दुगा.. दीदी.. क्या मस्त चुत हे आपकी.. मेतो पागल होजाउगा..

सृती : (कामुक्तासे जोरोसे बाहोमे भीचते) हां भाइ.. आपको पागल करने ही बुलाया हे.. तो फीर आज चोदलो अपनी बहेनको.. जब दुसरी आये तो उनको भी चोद लेना.. अब हम दोनो बहेन अपने भाइसे साथमे ही चुदवायेगी.. अभी चोदलो मुजे.. बहुत तडपाया हे आपने मुजे.. उस दिन घरपे मुजे लेने आये थे.. तो भाग क्यु गये..? आजाते अंदर.. मे तब ही आपसे चुदवानेके लीये रेडी थी.. उस दिन चोद लेते मुजे.. मे मना नही करती..

लखन : (मुस्कुराते) नही.. क्युकी मे आपको ओर तडपाना चाहता था.. तभी तो आज आप मुजसे इतना प्यार करती हो.. चलीये अब बाते बादमे.. पहेले मे मेरी बहेनसे प्यार तो करलु..

दोनो ही कामुक्त सब्दका इस्तमाल करते अ‍ेक दुसरेको प्यार करनेमे उक्सा रहे थे.. सृतीके उपर वासना पुरी तराह हावी हो चुकी थी.. तो दुसरी ओर लखन बडे ही सावधानीसे आगे बढ रहा था.. जब सृती बेकाबु होने लगी.. ओर लखनको बार बार चोदनेकी मनते करने लगी.. तब लखन धीरे धीरे चुमते नीचेकी ओर सरकने लगा.. ओर सृतीके बुब्सको मसलते उनकी चुतपे मुह लगा देता हे..



 
तो सृती अ‍ेक बार कांप जाती हे.. लखन सृतीकी चुतके दानेको अपनी जीभसे खरोदने लगा.. तो सृती पागलो जैसी होने लगी.. ओर वो अपनी कमर हीलाते लखनके बालोको खीचने लगी.. इस फोरप्ले खेलमे लखन काफी माहीर था.. वो कीसी भी लडकी या ओरतको अ‍ेसे ही फोरप्लेय खेलते चुदवानेके लीये मजबुर कर देता.. ओर आज भी वो सृतीको हमेसाके लीये उनकी दिवानी बनाना चाहता था..





सृती : (कामुक्त आवाजमे मनते करते) आइइ.. आह.. आह.. सीसससस... भा..इ.. मत ..करो.. मे पागल होजाउगी.. अब आजाओ मेरे उपर.. आइइइ.. सीससस... अंह.. अंह.. उइइइइ.. भाइ.. प्ली..ज.. अब चोदलो मुजे.. नही रहा जाता.. अंह.. अंह.. भाइ.. अपनी बहेनको चोद लीजीये.. सीइइइ...





सृती लखनको चोदनेके लीये मनते करती रही.. ओर लखन उनके बुब्सको मसलते उनकी चुतको खरोदता रहा.. तो कुछ ही देरमे सृतीका तन अकडने लगा.. ओर वो अपनी कमर उछालने लगी.. उसने जोरोसे लखनके बालोको खीचा ओर अपनी कमरको जटके मारते जडने लगी.. तो लखनका पुरा मुह सृतीके पानीसे भीग गया.. फीर भी लखन उनकी चुतके रसको चाटता रहा.. सृती उनकी ओर देखते बहुत ही सर्मसार होगइ..





सृती : (कामुक्तासे देखकर सरमाते धीरेसे) भाइ.. मत चाटो इसे.. बहुत गंदा हे..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. ये गंदा नही.. मेरी दीदीका अमृत रस हे.. जब आपका पैर सही होजाये ओर हमारी सादी होजाये तब आप दोनोको भी मेरा अमृत रस पीलाउगा.. आप तैयार रहेना..

सृती : (सरमाते हसते धीरेसे) भाइ.. अ‍ेक बार तो पीला दीया था.. वो क्लीनीकपे.. आप पुनो दीदीके साथ कहा तक आगे बढे..? कुछ कीया की नही..?

लखन : (खडा होते) नही दी.. हमे कीससे आगे बढनेका मौका ही नही मीला.. तो कहासे आगे बेढेगे.. अभी तो हम फोन सेक्स से ही काम चला रहे हे.. उन्होने भी सादीसे पहेले मीलनेका वादा कीया हे.. देखते अब हम कैसे मीलते हे.. मे मुह साफ करके आता हु..

सृती : (थोडी देरके बाद मुह साफ करके वापस आया तब) भाइ.. दो तीन दिनमे वो यहा खरीदी करने आ रही हे.. कहोतो मे आप दोनोके मीलनका इन्तजाम करदु..? हंम..?

लखन : (पास आकर लेटते होठोको चुमते) दीदी.. साथमे दया भाभी ओर भावना भाभी भी होगी.. तो कैसे..? आइ मीन.. यहा पोसीबल नही हे.. ओर उनमे टाइम भी बहुत लगेगा.. आप समज गइनां..?





सृती : (हसते होठोको चुमते) भाइ.. मे कुछ जुगाड कर लुगी.. ओर आप दोनोके मीलनेका इन्तजाम भी हे.. तो आप फीकर मत करो.. मे पुनो दीदीसे बात करलुगी.. आप दोनो वहा चले जाना..

लखन : (बुब्सको चुमते) लेकीन कहा..?

सृती : (लखनको अपने उपर खीचते हसते धीरेसे) हे अ‍ेक जगह.. आपके लीये सरप्राइज होगी.. हें..हें..हें.. बस.. आप तो अब पुनो दीदीको मीलनेके लीये तैयार रहीयो.. ओर अभी तो इस बहेनको खुस करदो..

कहातो लखन खुस होते सृतीके बुब्सको मसलते उनके होठोको चुमने लगा.. तो सृती अ‍ेक बार फीर उतेजीत होने लगी.. वो जल्द से जल्द लखनका लंड अपनी चुतमे लेना चाहती थी.. तो सृतीने हाथ नीचे लेजाकर लखनके लंडको पकडलीया.. ओर अपनी चुतपे घीसने लगी.. तो लखन भी उतेजीत होते सृतीके गलेको चुमने लगा.. सृती बहुत ही मदहोस होने लगी..





ओर उसने लंडको घीसते घीसते जब गीला हो गया.. तो अपनी चुतके लव होलमे फसा दीया.. ओर लखनकी नीतंबपे हाथ रखकर अपनी चुतपे दबाने लगी.. जैसे केह रही हो.. अब लंडको चुतमे घुसादो.. लेकीन लखनको पता था क्या होने वाला हे.. तो लखनने सृतीके दोनो हाथके पंजोमे उंगलीया फसाकर पकड लीया.. ओर सृतीके होठोको चुमते लीपलोक करलीया.. तो सृतीकी आंख बडी होगइ..





वो समज गइकी अब वो घडी आगइ हे.. जीनका वो कइ दिनोसे इन्तजार कर रही थी.. वो लखनकी आंखोमे देखती रही.. जब लखनने लीपकीस करते उनकी ओर देखा तो सृतीने गरदन हांमे हीलाते लखनको लंडको घुसानेकी मुक सहेमती देदी.. ओर लखनने अ‍ेक जोरका जटका मारा.. तो आधा लंड सृतीकी चुतको चीरते अंदर घुस गया.. तो सृतीकी जोरोकी चीख नीकल गइ.. जो मुहमे ही दब गइ..





सृतीकी आंखसे आंसु नीकलने लगे.. वो छटपटाने लगी.. वो कुछ समज पाती इनसे पहेले ही लखनने अ‍ेक ओर जटका मार दीया.. तो लखनका पुरा लंड सृतीधी चुतमे घुस गया.. सृती जोरोसे चीखते बेहोस होगइ.. ओर लखनने उनके दोनो हाथ छोड दीये ओर लीपलोक छुडालीया.. फीर हाथके बल उचा होते सृतीको जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा.. सृतीके दोनो बुब्स तालमेलमे उछलने लगे.. ओर सृती बेहोसीमे चुदने लगी..



 
अ‍ैसा नही थाकी सृती पहेली बार चुदवा रही हो.. वो देवायतके बडे लंडसे काफी बार चुदवा चुकी थी.. लेकीन जबसे वो देवायतके साथ रीलेशन खतम करके आइथी तबसे वो लंडके लीये तरस रही थी.. जीसे उनकी चुतमे कसाव हो गया था.. ओर दुसरा.. देवायतके लंडसे लखनका लंड थोडा मोटा भी था.. जो सृतीके लीये उनको जेलना आसान बात नही थी.. इस बातको रमा भाभी तीन दिन बीस्तरमे आराम करते भली भांती जान चुकी थी..





लखन काफी देर तक सृतीको चोदता रहा.. तभी धीरे धीरे करते सृतीको होस आने लगा तो लखनने चुदाइ रोकदी.. ओर सृतीके उपर लेटते उनके होठोको चुमने लगा.. सृतीकी अंखोसे आंसु बहेने लगे.. उसने देखा तो लखन उनके उपर लेटते पुरी तराह छाया हुआ था.. ओर उनका लंड अपनी चुतमे जड तक धुसा हुआ था.. तो वो लखनसे नजरे चुराने लगी..





उनको अ‍ैसा लगता थाकी उनकी चुतमे बहुत बडा डंडा घुसा हो.. जो धीरे धीरे जटके मार रहा था.. ओर आखीर कुछ देरके बाद सृतीका दर्द कम हो गया.. तो वो नजरे चुराते लखनकी ओर देखने लगी.. ओर धीरे धीरे लखनकी पीठ सहेलाने लगी.. फीर पीठ सहेलाते लखनके बदनको अपने तनसे दबाते चीपकानेकी कोसीस करने लगी.. तो लखन समज गयाकी अब मामला बीलकुल सही हो गया हे..

सृती : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. वाकइ आपको जेलना इतनी आसान बात नही हे.. रमा भाभीकी तराह आपने मेरी भी चीखे नीकलवादी.. मुजे बेहोस तक करदीया.. भाइ.. आपका बहुत बडा हे..

लखन : (सृतीके होठ चुमते) दीदी.. ये सीर्फ मेरी दोनो बहेनेके लीये ही हे.. क्या अंदर हेतो आपको मजा आ रहा हे..? हंम..?

सृती : (जोरोसे बाहोमे भीचते धीरेसे) हां भाइ.. बहोत.. बहोत मजा आ रहा हे.. भाइ.. अब धीरे धीरे सुरु करो.. बहुत मन हो रहा हे..

कहा तो लखन धीरे धीरे कमर हीलाते सृतीको चोदने लगा.. तो सृती मदहोस होने लगी.. जैसे वो लखनके साथ हवामे उड रही हो.. वो आंखोकी पुतलीया पलटते चुदाइका मजा लेने लगी.. हर बार लखनका लंड सृतीकी बच्चेदानीसे टकरा रहा था.. जीसे हर सोटके साथ सृतीकी आहे नीकल जाती थी.. जीतना मजा उनको देवायतसे चुदवानेमे आता था इनसे कइ गुना ज्यादा मजा लखनसे साथ चुदवानेमे आने लगा.. उनका मुह खुला ही रेह गया.. ओर लखनकी ओर देखते जटकेको जेलती रही..





लखनने थोडी स्पीड बढाइ.. ओर थोडा जोरोसे चोदने लगा.. तो सृतीने अचानक लखनको अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर उनके होठोसे लीपलोक करलीया.. फीर अपनी कमरको जटके देने लगी.. तभी लखनको अपने लंडपे गरमाहट महेसुस हुइ.. ओर वो उतेजनामे कांपने लगा.. वो बहुत ही अ‍ेक्साइटेड होगया.. ओर सृतीको जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा.. तो सृती हल्कासा चीखने लगी..





दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. सृती जीतनी बार जडती लखनको अपनी बाहोमे भीच लेती.. आज लखनने तीन तीन बार सृतीको जडा दीया.. ओर अभी भी सृतीकी धमाकेदार चुदाइ जारी थी.. दोनो काफी देरसे चुदाइ कर रहे थे.. तभी लखनका तन कांपने लगा.. ओर वो जोरोसे सृतीसे चीपक गया.. तो सृती भी लखनको अपनी बाहोमे कस लेती हे.. ओर लखनसे लीपलोक करलेती हे..





तभी लखनने पुरा लंड सृतीकी चुतमे जड तक घुसा दीया तो सृतीकी चीख नीकल गइ.. ओर उसे अपनी बच्चेदानीपे गरम गरम महेसुस होने लगा.. लखन अपनी कमरको जटकाते सृतीकी चुतमे पीचकारीया मारते अपना गाढा पानी उडेल रहा था.. तो सृती भी कांपने लगी.. ओर वो भी लखनके साथ जडने लगी.. फीर कुछ देरके बाद दोनो सांत होगये.. ओर लखन सृतीके सीनेपे ढेर हो गया..





दोनो पसीनेसे तरबोर हो चुके थे.. ओर सृती लखनकी पीठ ओर उनके बालोको सहेला रही थी.. वो अपना मुह दुसरी ओर करते लखनसे नजरे चुरा रही थी.. आखीर आज सृती लखनसे चुद ही गइ.. उसे अपनी चुतमे अब भी लखनका लंड सख्त महेसुस हो रहा था.. जो अभी भी रेह रेहके अंदर जटके मार रहा था.. सृती लखनकी स्टेमीना देखकर बहुत ही खुस होगइ.. तभी लखनने उनकी आंखोमे देखा..
 
सृती : (नजरे चुराते सरमाते धीरेसे) भाइ.. अ‍ैसे ना देखो.. मुजे बहुत सरम आ रही हे..

लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते) दीदी.. मुजे तो अब भी ये अ‍ेक सपने जैसा लग रहा हे.. मुजे यकीन नही हो रहा की मेने मेरी दीदीको चोद लीया हे.. ओर अभी भी उनके उपर लेटा हु..

सृती : (सरमसे पानी पानी होते धीरेसे) भाइ.. मुजे भी.. ये आपकी कैसी फेन्टासी हे..? जो हमे जीदगी भर आपकी बीवी बनकर नही.. आपकी बहेन बनकर आपसे चुदवाना पडेगा..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे कानमे) हां.. कमसे कम बीस्तरमे तो आप दोनो मेरी बहेन ही रहेगी.. बाकी आप दोनो जो समजो.. हें..हें..हें.. देखना आज आपको पुरी रात सोने नही दुगा..

सृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते) हां.. वो तो जब आपने हमारी सुहागरात कहा तब ही मे समज गइ थी.. की आज मेरी खैर नही.. भाइ.. आज मेरे पैरकी वजहसे मे कुछ कर नही पाउगी.. वरना आपकी हर फेन्टासी मे पुरी करती.. आइ लव यु सो मच.. जो मेरी तम्मना आपने पुरी करदी..

लखन : (मुस्कुराते कमर हीलाते) दीदी.. अभी कहा पुरी हुइ हे..? अभी तो सुरुआत हे.. चलीये.. अब दुसरे राउन्डके लीये तैयार होजाइअ‍े..

सृती : (सामने देखते) अभी..? इतनी जल्दी..? थके नही हो क्या..? मुजेतो पुरी नीचोडली..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. अभी कहा..? जय हो मुनाने ओर पुनो दीदीने दी हुइ जडी बुटी की..

कहेते लखन सृतीको फीरसे चोदने लगा.. सृतीकी पुरी चुत लखनके पानीसे भरी हुइ थी.. तो अब रुममे फच.. फच.. फच.. की आवाजसे अ‍ेक नया ही संगीत गुंजने लगा.. इस बार सृती भी कमर उछालते लखनका साथ देते फीरसे उतेजीत होने लगी.. ओर अ‍ेक बार फीर दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. इस बार हाथके बल लखन सृतीको चोद रहा था.. लखनने सृतीको दो बार जडा दीया..





ओर तीसरी बार दोनो कांपते हुअ‍े साथमे जड गये.. लखन सृतीके उपर ढेर हो गया.. ओर सृती उनकी पीठको सहेलाने लगी.. लखनका लंड अब भी सृतीकी चुतमे था.. फीर भी उनका पानी अपनी जगाह बनाते बहार नीकलने लगा.. सृतीकी पुरी चुत भरी हुइ थी.. फीर लखन जटसे सृतीके उपरसे हट गया.. तो सृतीने अपना नीकर अपनी चुतपे साफ करने लगी.. तभी लखन उसे अपनी गोदमे उठाकर बाथरुममे ले गया..

तो दुसरी ओर बंसीने भी बीना लंड नीकाले जागृतीको दुसरी बार चोद लीया.. फीर जागृतीको घोडी बनाकर पीछेसे लंड घुसाके भी चोद लीया.. इस पुरी रातमे बंसीने जागृतीको अलग अलग पोजीसनमे तीन बार ओर चोद लीया.. तो आज जागृती पुरी तराह थक चुकी थी.. बंसीने उनका अ‍ेक अ‍ेक अंग तोडके रख दीया.. उनकी चुत सुजके पांव जैसी हो गइ थी.. फीर दोनो भाइ नंगेही अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सो गये..

तो इधर पहेले लखनने सृतीको नहेलाया ओर खुदने भी सावर लीया.. फीर सृतीको गोदमे उठाकर वापस बेडपे लेकर आगया.. ओर लखन सृतीके पीछे चीपककर लेट गया.. ओर सृतीको पीछेसे बाहोमे लेकर उनके बुब्सके साथ खेलता रहा.. फीर अ‍ेक घंटे आराम करनेके बाद लखनने सृतीके पीछेसे ही उनकी चुतमे लंड घुसा दीया.. ओर सृतीको पीछेसे ही चोदने लगा.. तो सृती भी उनका साथ देने लगी..





पुरी रात लखन सृतीकी चुतमे धमाका करता रहा.. ओर सृतीके अ‍ेक अ‍ेक अंगको चोद चोदके ढीला करदीया.. सृतीकी सारी आग आज लखनने मीटादी.. पुरी रात ना जाने सृती कीतनी बार जड चुकी थी.. उनकी इतनी जबरदस्त चुदाइ तो देवायतने भी नही कीथी.. आज सृती लखनकी दिवानी हो चुकी थी.. ओर वो लखनसे नंगी ही चीपक गइ.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे सो गये..



 
Back
Top