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धीरे धीरे करते दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. बंसीके हर सोटके साथ जागृतीके बुब्स तालमेलमे उछलने लगे.. अब तो जागृती भी कामुक सीसकारीया करते बंसीको ओर जोरोसे चोदनेके लीये उक्साने लगी थी.. वो जब भी स्खलीत होनेकी कगारपे होती बंसीको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लेती.. ओर बंसीके होठोसे लीपलोक करलेती.. जब जड जाती तो नीढाल होते अैसे ही पडी रहेती..

तब भी बंसी उनको जोरोसे चोदता रहेता.. ओर कुछ देरके बाद जागृती फीरसे उतेजीत होजाती ओर बंसीका साथ देने लगती.. अैसे ही बंसीने जागृतीको दो दो बार जडा दीया.. ओर अब भी उनको जोरोसे चोद रहा था.. अबकी बार वो भी अपनी मंजीलके करीब पहोंच रहा था.. तो वो जागृतीके तनसे चीपक गया.. ओर उनके गलेके मुह डाकर गरदन चुमते जोरोसे अपनी कमर हीलाने लगा..

तो जागृती भी खेली खीलाइ थी.. तो वो भी समज गइ.. की बंसी जडने वाला हे.. तो वो भी अपनी कमर उछालते बंसीको ओर जोरोसे चोदनेके लीये कहेजे लगी.. ताकी वो भी बंसीके साथ अपनी मंजीलपे पहोंच सके.. जागृतीने बंसीकी गरदनपे दोनो हाथ डालकर बंसीको अपने तनसे सटालीया.. ओर उनकी कमरपे दोनो पैर रखके कमरको नीचेकी ओर दबाने लगी.. ताकी बंसीका पुरा लंड उनकी चुतमे घुस जाये..

बंसी जोरोसे कमर हीलाते जागृतीको चोदने लगा.. तो कुछ ही देरमे दोनो अपनी मंजीलके करीब पहोंच गये.. ओर दोनोने अपने होठोसे होठ मीलाके लीपलोक करलीया.. बंसीने पुरा लंड जागृतीकी चुतकी जड तक घुसादीया.. ओर रुक रुकके अपनी कमरको जटके देते लंडसे पीचकारीया छोडने लगा.. तो जागृतीको भी अपनी बच्चेदानीपे गरम महेसुस हुआ.. ओर वो भी उतेजनासे कांपते हुअे बंसीके साथ जडने लगी..

कुछ ही देरमे बंसी जागृतीके सीनेपे ढेर होगया.. ओर जागृती बंसीकी पीठको सहेलाने लगी.. दोनोका जोस ठंडा हो गया.. तभी जागृतीको अहेसास हुआ की बंसीने उनको चोद लीया हे.. वो बहुत ही सरमाने लगी.. ओर बंसीकी पीठ सहेलाते बंसीसे नजरे चुराते इधर उधर देखने लगी.. उसे अपनी चुतपे अब भी बंसीका लंड सख्त महेसुस हो रहा था.. जो रेह रेह अब भी जटके मार रहा था.. तभी..
जागृती : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. अब उपरसे हटीयेनां.. मुजे बाथरुममे जाना हे.. नीचे खराब हो गया हे..
बंसी : (धीरेसे होंठ चुमते) दीदी.. हम सभी दोस्तोकी अेक आदत हे.. जबतक हम अपनी मासुकाकी चुतको दो बार अपने पानीसे सीच नही देते.. तबतक हम अपना हथीयार बहार नही नीकालते.. तो आप भी दुसरे राउन्डके लीये तैयार होजाइअे.. मुजे आपको वापस चोदना हे..
जागृती : (सरमाते धीरेसे) क्या..? भाइ.. अेक बारमे ही आपने मेरी हालत खराब करदी हे.. तो दुसरी बामे आपको कैसे जेल पाउगी..? क्या हम थोडी देरके बाद नही कर सकते..? हंम.. थोडा आराम करलो.. फीर हम दुबारा करेगे.. देखो.. मेरी पुरी चुत आपके पानीसे भरी हे.. अेक बार इसे साफ करलु..? हंम..? हमारे पास पुरी रात पडी हे.. फीर जीतनी मरजी हो चोद लेना..
बंसी : (धीरेसे कमर हीलाते) नही.. मतलब नही.. ओर अब आप भी दो बार चुदवानेकी आदत डाललो.. क्युकी अब हर दिन आपको दो बारसे पहेले मे छोडने वाला नही हु.. ओर सांती बुआको भी मे अैसे ही दो बार चोदता हु..
जागृती : (नैन चुराते ससर्मसार होते मुस्कुराते) सीससस... भाइ.. इस बार धीरेसे करोना.. नीचे अब भी जलन हो रही हे.. पता नही मुना भाइने सबको कोनसी जडी बुटी पीलाइ हे.. जयश्री ओर बरखा केह रही थी उनके भाइ भी उनकी हालत बीगाड देते हे.. भाइ.. मे यही सोउगी.. दीदीके सामने बहुत सरम आयेगी..
सांती : (खीडकीसे धीरेसे) क्यु..? कोइ जरुरत नही हे.. कलसे तुभी हमारे साथ सोयेगी केह देती हु..
बंसी : (हसते खीडकीकी ओर देखते) सांती तुम..? अंदर आजाओनां.. हें..हें..हें..
जागृती : (सरमसे पानीपानी होते धीरेसे) दीदी.. आप..? जाइअे यहासे.. मुजे सरम आ रही हे..
सांती : (हसते धीरेसे) क्यु..? जब हर रात तुम हम दोनोका लाइव सो देखती थी.. तब तो तुजे सरम नही आती थी.. आज पता चलाना हमारे पतीको जेलना इतनी आसान बात नही हे.. देखलीया..? आज तुम दोनोकी सुहागरात हे.. तो मे आज अंदर नही आउगी.. फीर कलसे तो तुजे भी हमारे साथ सुलाउगी.. कमीनी कहीकी.. आज आइ हे हाथमे.. बंसी.. इनको सुबह तक छोडना नही.. वरना सुबह आपकी खैर नही..
जागृती : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. जाइअेनां.. आपके सामने मुजे बहुत सरम आ रही हे..
सांती : (हसते धीरेसे) हां जा रही हु.. लेकीन तुम दोनोका शो देखनेके बाद.. बंसी.. आप इसे अेक बार ओर मेरे सामने चोदलो.. फीर कल देखती हु.. कैसे हमारे साथ नही आती..
कहा तो बंसी अेक बार फीर कमर हीलाते जागृतीको चोदने लगा.. तो दुसरी ओर सहेरमे भी देर रात सृतीका बर्थडे मनाकर रजीया ओर नीलम सोने चली गइ.. तब लखन सृतीको गोदमे उठाकर उनके बेडरुममे लेकर आगया ओर सृतीको उनके बेडपे बीठा दीया.. ओर मुडकर जाने लगा तभी सृतीने सरमाके धीरेसे लखनका हाथ कसके पकड लीया.. तो लखन मुडके हसते हुअे सृतीकी ओर देखने लगा..

तब भी बंसी उनको जोरोसे चोदता रहेता.. ओर कुछ देरके बाद जागृती फीरसे उतेजीत होजाती ओर बंसीका साथ देने लगती.. अैसे ही बंसीने जागृतीको दो दो बार जडा दीया.. ओर अब भी उनको जोरोसे चोद रहा था.. अबकी बार वो भी अपनी मंजीलके करीब पहोंच रहा था.. तो वो जागृतीके तनसे चीपक गया.. ओर उनके गलेके मुह डाकर गरदन चुमते जोरोसे अपनी कमर हीलाने लगा..

तो जागृती भी खेली खीलाइ थी.. तो वो भी समज गइ.. की बंसी जडने वाला हे.. तो वो भी अपनी कमर उछालते बंसीको ओर जोरोसे चोदनेके लीये कहेजे लगी.. ताकी वो भी बंसीके साथ अपनी मंजीलपे पहोंच सके.. जागृतीने बंसीकी गरदनपे दोनो हाथ डालकर बंसीको अपने तनसे सटालीया.. ओर उनकी कमरपे दोनो पैर रखके कमरको नीचेकी ओर दबाने लगी.. ताकी बंसीका पुरा लंड उनकी चुतमे घुस जाये..

बंसी जोरोसे कमर हीलाते जागृतीको चोदने लगा.. तो कुछ ही देरमे दोनो अपनी मंजीलके करीब पहोंच गये.. ओर दोनोने अपने होठोसे होठ मीलाके लीपलोक करलीया.. बंसीने पुरा लंड जागृतीकी चुतकी जड तक घुसादीया.. ओर रुक रुकके अपनी कमरको जटके देते लंडसे पीचकारीया छोडने लगा.. तो जागृतीको भी अपनी बच्चेदानीपे गरम महेसुस हुआ.. ओर वो भी उतेजनासे कांपते हुअे बंसीके साथ जडने लगी..

कुछ ही देरमे बंसी जागृतीके सीनेपे ढेर होगया.. ओर जागृती बंसीकी पीठको सहेलाने लगी.. दोनोका जोस ठंडा हो गया.. तभी जागृतीको अहेसास हुआ की बंसीने उनको चोद लीया हे.. वो बहुत ही सरमाने लगी.. ओर बंसीकी पीठ सहेलाते बंसीसे नजरे चुराते इधर उधर देखने लगी.. उसे अपनी चुतपे अब भी बंसीका लंड सख्त महेसुस हो रहा था.. जो रेह रेह अब भी जटके मार रहा था.. तभी..
जागृती : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. अब उपरसे हटीयेनां.. मुजे बाथरुममे जाना हे.. नीचे खराब हो गया हे..
बंसी : (धीरेसे होंठ चुमते) दीदी.. हम सभी दोस्तोकी अेक आदत हे.. जबतक हम अपनी मासुकाकी चुतको दो बार अपने पानीसे सीच नही देते.. तबतक हम अपना हथीयार बहार नही नीकालते.. तो आप भी दुसरे राउन्डके लीये तैयार होजाइअे.. मुजे आपको वापस चोदना हे..
जागृती : (सरमाते धीरेसे) क्या..? भाइ.. अेक बारमे ही आपने मेरी हालत खराब करदी हे.. तो दुसरी बामे आपको कैसे जेल पाउगी..? क्या हम थोडी देरके बाद नही कर सकते..? हंम.. थोडा आराम करलो.. फीर हम दुबारा करेगे.. देखो.. मेरी पुरी चुत आपके पानीसे भरी हे.. अेक बार इसे साफ करलु..? हंम..? हमारे पास पुरी रात पडी हे.. फीर जीतनी मरजी हो चोद लेना..
बंसी : (धीरेसे कमर हीलाते) नही.. मतलब नही.. ओर अब आप भी दो बार चुदवानेकी आदत डाललो.. क्युकी अब हर दिन आपको दो बारसे पहेले मे छोडने वाला नही हु.. ओर सांती बुआको भी मे अैसे ही दो बार चोदता हु..
जागृती : (नैन चुराते ससर्मसार होते मुस्कुराते) सीससस... भाइ.. इस बार धीरेसे करोना.. नीचे अब भी जलन हो रही हे.. पता नही मुना भाइने सबको कोनसी जडी बुटी पीलाइ हे.. जयश्री ओर बरखा केह रही थी उनके भाइ भी उनकी हालत बीगाड देते हे.. भाइ.. मे यही सोउगी.. दीदीके सामने बहुत सरम आयेगी..
सांती : (खीडकीसे धीरेसे) क्यु..? कोइ जरुरत नही हे.. कलसे तुभी हमारे साथ सोयेगी केह देती हु..
बंसी : (हसते खीडकीकी ओर देखते) सांती तुम..? अंदर आजाओनां.. हें..हें..हें..
जागृती : (सरमसे पानीपानी होते धीरेसे) दीदी.. आप..? जाइअे यहासे.. मुजे सरम आ रही हे..
सांती : (हसते धीरेसे) क्यु..? जब हर रात तुम हम दोनोका लाइव सो देखती थी.. तब तो तुजे सरम नही आती थी.. आज पता चलाना हमारे पतीको जेलना इतनी आसान बात नही हे.. देखलीया..? आज तुम दोनोकी सुहागरात हे.. तो मे आज अंदर नही आउगी.. फीर कलसे तो तुजे भी हमारे साथ सुलाउगी.. कमीनी कहीकी.. आज आइ हे हाथमे.. बंसी.. इनको सुबह तक छोडना नही.. वरना सुबह आपकी खैर नही..
जागृती : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. जाइअेनां.. आपके सामने मुजे बहुत सरम आ रही हे..
सांती : (हसते धीरेसे) हां जा रही हु.. लेकीन तुम दोनोका शो देखनेके बाद.. बंसी.. आप इसे अेक बार ओर मेरे सामने चोदलो.. फीर कल देखती हु.. कैसे हमारे साथ नही आती..
कहा तो बंसी अेक बार फीर कमर हीलाते जागृतीको चोदने लगा.. तो दुसरी ओर सहेरमे भी देर रात सृतीका बर्थडे मनाकर रजीया ओर नीलम सोने चली गइ.. तब लखन सृतीको गोदमे उठाकर उनके बेडरुममे लेकर आगया ओर सृतीको उनके बेडपे बीठा दीया.. ओर मुडकर जाने लगा तभी सृतीने सरमाके धीरेसे लखनका हाथ कसके पकड लीया.. तो लखन मुडके हसते हुअे सृतीकी ओर देखने लगा..






















