Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 86 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २५१

मंजुको लखन ओर सृतीके बारेमे भी पता चल गया था.. की दोनो मील गये हे.. ये बात जानकर मंजु बहुत खुस थी.. बस.. अब उनको सीर्फ चंदा ओर भावनाको लखनसे मीलवानेकी चीन्ता थी.. तो दुसरी ओर वो लता ओर वंदनाकी सादी भी जल्द देवायतके साथ करवाना चाहती थी.. ताकी वो लताको प्रेगनेन्ट कर सके.. ओर वंदना तो अ‍ैसे ही देवायतसे प्रेगनेन्ट हो चुकी थी.. ओर उसने लखनको फोन करदीया.... अब आगे

लखन : (फोन उठाते ही) हां मम्मी.. कहीये मेरे लीये क्या हुकम हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) लखन बेटा.. सुन.. कल सुबह तुम अपनी नइ कार लेकर इधर आना.. ओर पुनो भावु ओर दयाको वहा लेजाना.. ताकी तीनो सादीकी खरीदी कर सके.. फीर दो तीन दिनमे सब खरीदी होजाये तो तीनोको यहा छोडदेना.. अ‍ेक हप्तेमे मे तुम दोनो भाइ बहेनकी सादी करदेना चाहती हु..

लखन : (मनमे खुस होते) जी मम्मी.. मे सुबह ही पहोंच जाउगा.. ओर कुछ..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. कल मील लीया मेरी नइ बहुको..? सुन.. जब पुनो वहा आजाये तो तुम सब लोग हमारे मंदिरमे जाकर सादी कर लेना.. अब सृतीकी जीम्वेवारी तेरी हे..

लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) मोम.. वो आपकी बेटी भी तो हे.. क्या उनको बथ्रडे वीस कीया..?

मंजुला : (मुस्कुराते) नही.. अभीतक तो नही कीया.. लेकीन तुमसे बात करके उसे भी फोन करलुगी.. ओर सुन.. उनके लीयेभी कुछ लेलेना.. क्या राधु अपने घरपे चली गइ..?

लखन : (मुस्कुराते) हां मम्मी.. कल रात ही उन दोनोको छोडके आया.. मोम.. आपने उसे जानेकी परमीशन क्युदी..?

मंजुला : बेटा.. कुछ बाते हे जो मे तुजे नही बता सकती.. सीर्फ इतना कहेती हु.. उनकी मम्मीकी जान उस घरपे अटकी हुइ हे.. तो उनको वहा भेजना जरुरी था.. तु समज गयानां..?

लखन : (थोडा सीरीयस होते) हां मम्मी.. समज गया.. मोम.. उनके पास कीतना वक्त हे..?

मंजुला : (धीरेसे) बेटा कीसीको कहेना नही.. अभी तो कोइ दीकत नही लेकीन उनके पास बहुत कम वक्त हे.. तुम उनकी फीकर मत कर.. वो सब पुनो वहा आयेगी तो देख लेगी.. क्युकी उनको भी बहुत कुछ पता हे.. वो पुनमको आखरी बार मीलेगी.. ठीक हे..? चल मे फोन रखती हु.. सुबह जल्दी आजाना..

लखन : (मुस्कुराते) जी मम्मी..

आज लखनसे बात करके मंजु बहुत खुस होगइ.. क्युकी अब लखन उनको मम्मी कहेने लगा था.. तो दुसरी ओर लखन ओर सृती भी उनको अपनी मां मानने लगे थे.. फीर मंजुने सृतीको भी फोन करदीया ओर उनको जन्म दिनकी बधाइ दी.. तो सृती बहुत खुस होगइ.. फीर मंजुने उसे उनकी सुहागरातके बारेमे पुछा.. तो सृती बहुत सरमा गइ.. ओर वो भी मंजुको जी मम्मी.. कहेते बाते करने लगी..

मंजुला : (फोनपे हसते) क्यु कुती..? हेपी बर्थ डे.. तुजे मेरे बेटेसे बर्थडे गीफ्ट मील गइ..? हें..हें..हें..

सृती : (सरमसे पानी पानी होते धीरेसे) हां मोम.. अब तो गालीया मत दीजीये.. मे भी आपकी बेटी हु..

मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. सुन.. वो बेटा हे मेरा.. तुम सीर्फ मेरी बेटी ही नही.. मेरी बहु भी हो.. अब तुजे पुरी जींदगी अपने भाइके साथ ही गुजारनी हे.. जबतक मेरा विजय बडा नही हो जाता.. तबतक तो बहुत कुछ बदल चुका होगा..

सृती : (मुस्कुराते) येस मोम.. मे समज गइ.. मोम.. आप पुनोदीको यहा कब भेज रही हो..?

मंजुला : (मुस्कुराते) कल.. अभी मेने लखन बेटेसे बात करली हे.. वो सुबह पुनोको लेने आयेगा.. फीर तुम उनसे ही सब जान लेना.. क्युकी मेने पुनो बेटीको सब कुछ बता दीया हे.. ओके.. चल रखती हु.. बाय..

सृती : (सरमाते हसते) बाय मोम.. लव यु..

इधर सृतीसे बात करके मंजुने पुनमको कल सहेर जानेकी तैयारीया करनेको केह दिया.. तो पुनमकी खुसीका कोइ ठीकाना नही था.. ओर वो अपने कपडे पेक करने लगी.. तो इधर आज सारा दिन सृती नीचे ही बैठी रही.. ओर बीच बीचमे वोकर लेकर धीरे धीरे चलते रजीयाके पास चली जाती.. अ‍ैसे ही दिन बीत गया.. ओर साम होते ही लखन भी घरपे आगया.. ओर सृतीके पास आकर बैठ गया..
 
लखन : (होठोपे कीस करते) हाइ बेबी.. अब कैसी हे तबीयत..?





सृती : (सरमाते धीरेसे) बहुत मस्त.. सब नोर्मल.. भाइ.. आज मम्मीका फोन आया था.. मुजे बर्थडे वीस कीया..

लखन : (कमरमे हाथ डालकर उनसे सटाते) दीदी.. कल पुनोदीको लेने जाना हे.. क्या आप ओर रजु चलोगी..? हम उनको लेकर वापस आजायेगे..

सृती : (लखनके कंधेपे सर रखते धीरेसे) नही भाइ.. अब उस घरपे जानेका मेरा मन नही कर रहा.. पुनो दीदीको आप ही लेकर आजाइअ‍े.. मे ओर रजुदीदी इधरही रहेगी.. आप मुजे नीचे छोडदेना..

रजीया : (आकर पास बैठते) अरे लखन.. आप आगये..? तो चलो या नीचे ही फ्रेस होजाइअ‍े मे नीलुको बुलाकर आती हु.. खाना रेडी हे.. फीर बाते करते रहेना..

लखन : (मुस्कुराते खडे होते) रजु.. मम्मीका फोन आया था.. कल सुबह मुजे गांव जाना हे.. पुनोदी भावना भाभी ओर दया भाभी आ रही हे.. तो उनको लेने..

रजीया : (लखनके जाते ही धीरेसे हसते) दीदी.. आज लखन आपको उपर छोडने आये तो सीधी हमारे रुममे ही चली आना.. आज हमारे साथ ही सोना..

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) नही रजुदी.. आज रहेने दोनां.. मुजे बहुत सरम आयेगी.. ओर वैसेभी कल हम दोनो पुरी रात जागे हे.. तो आज जल्दी सोना चाहती हु.. अब मे हमारी सादीके बाद ही आउगी..

रजीया : (खडी होते) दीदी.. मे कुछ सुनना नही चाहती.. अब काहेकी सरम.. इनसे सादीतो होने ही वाली हे.. फीर तो ये रोजका हुआ.. आप होगीतो मुजे थोडी राहत मीलेगी.. हें..हें..हें.. आप बैठो मे नीलुको बुलाकर आती हु..

सृती : (हसते) दीदी.. उसे यहीसे आवाज लगाकर बुलालोनां.. कीतनी बार उपर नीचे जा रही हो..?

फीर रजीयाने नीचेसे ही आवाज लगाकर नीलमको बुलालीया.. फीर चारोने मीलकर खाना खाने बैठ गये.. तो आज लखन सृतीके पास ही बैठ गया ओर रजीया नीलम उन दोनोके सामने बैठे थे.. लखन बडेही प्यारसे सृतीको अपने हाथोसे खीला रहा था.. जीसे लखनका इतना प्यार देखकर अ‍ेक बार सृतीकी आंख गीली होगइ.. तो नीलम उनको देखकर मुस्कुराने लगी.. तभी..

सृती : नीलु.. क्या तेरी अ‍ेक्जाम खतम होगइ..?

नीलम : (मुस्कुराते) हां दीदी.. आज ही हुइ हे.. अब अ‍ेक हप्तेकी छुटी.. हें..हें..हें..

रजीया : (मुस्कुराते) दीदी.. पता भी नही चला नीलुको यहा पढते छे महीना होगया..

लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. अगर अ‍ेक हप्तेकी छुटी हे तो फीर तु भी चल मेरे साथ.. मे कल गांव जा रहा हु.. तो तुजे तेरे घर छोड दुगा.. तो तेरी मम्मी ओर पापा भी खुस होजायेगे..

सृती : (मुस्कुराते) हां नीलु.. तेरे जीजु सही कहे रहे हे.. फीर अ‍ेक हप्तेके बाद ये तुजे लेजायेगे..

नीलम : (मुस्कुराते) दीदी.. यहा बहुत मजा आ रहा हे.. जानेका मन तो नही कर रहा.. लेकीन अ‍ेक हप्तेकी छुटी हे तो चली जाती हु.. लेकीन अ‍ेक सर्तपे..

सृती : (हसते) क्या..?

नीलम : (लखनकी ओर कातील स्माइल करते) अगर जीजु खुद मुजे अपनी नइ कार लेकर लेने आयेगे.. तो ही मे जाउगी.. हें..हें..हें..

सृती : (लखनकी ओर हसते) हां अब तु इनकी आधी घरवाली जो हो.. तो तेरे जीजुतो आयेगे ही..

नीलम : (सरमाकर हसते) क्या दीदी आपभीनां.. नही जाना मुजे..

सृती : (हसते) हें..हें..हें.. अरे चलीजा.. मेतो मजाक कर रही हु.. सुन.. वहा जाकर भी पढना समजी..?

फीर चारोने मस्ती मजाक करते खाना खालीया तो नीलम ओर रजीया घरका काम समेटने लगी.. तो लखन ओर सृती सोफेपे बैठकर टीवी देखने लगे.. सृती लखनकी बाहोमे सटकर बैठी थी.. तो टीवी कम देखते थे.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके होठ चुमते प्यार करने लगे.. फीर काम खतम होगया तो रजीया ओर नीलमने भी थोडी देर टी वी देखा.. फीर घरका दरवाजा बंध करके सब सोने जाने लगे..
 
रजीया : (मुस्कुराते) लखन.. आप दीदीको हमारे रुममे ही लेकर आइअ‍े.. आजसे वो वही सोयेगी..

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) रजु दीदी.. रहेने दीजीयेनां.. मे हमारी सादीके बाद आजाउगी..

नीलम : (हसते जाते) दीदी.. क्यु नखरे कर रही हो.. दोनोने सुहागरात तो मनाली.. फीर काहेकी सरम..?

सृती : (सर्मसार होते हसते जोरोसे) नीलमकी बच्ची.. यहा आतो.. अ‍ेक मारुगीनां..

तो लखनने जोरोसे हसते हुअ‍े सृतीको अपनी गोदमे उठालीया.. ओर सीधा अपने रुममे ही ले गया.. सृती बहुत ही सरमाइ.. फीर रजीया भी रुममे आगइ.. तीनोने चेन्ज करलीया.. ओर बेडपे आ गये.. अ‍ेक बार फीर सृतीका दिल जोरोसे धडकने लगा.. क्युकी सृती साम तक ठीक होगइ थी.. तो उसे पता थाकी आज भी लखन उनको छोडने वाला नही हे..

रजीया : (मुस्कुराते) लखन.. आप पहेले इधर आजाओ.. मे बहुत थक गइ हु.. सीर्फ अ‍ेक बार मेरी अच्छेसे मालीस करदो.. फीर सारी रात दीदीकी मालीस करते रहेनां.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे हसते) दीदी.. क्या सारी रात मालीस करते रहेनां..? ना बाबा नां.. कल पुरी रात हम दोनो जगे हे.. तो मुजे भी नींद आ रही हे..

लखन : (रजीयाके पास जाते मुस्कुराते) जो भी हो.. तुम दोनोको पता हे मे दो बारसे पहेले उतरने वाला नही हु.. तो दोनोको सीर्फ दो बार.. चल रजु.. आजा सुरुआत तुमसे ही करता हु..

ओर प्यारका खेल सुरु होगया.. धीरे धीरे करते तीनोके तनसे वस्त्र हटने लगे.. आज लखन बारी बारी दोनोको प्यार कर रहा था.. कभी सृतीके होठो.. तो कभी रजीयाके होठोको चुमने लगता.. तीनो उतेजीत होने लगे.. जब पुरी तराह मदहोसीमे छा गये तभी लखन रजीयाके उपर चड गया.. तो रजीयाने भी लखनका लंड पकडकर अपनी चुतपे सेट करदीया.. ओर लखनने अ‍ेक ही जटकेमे लंडको रजीयाकी चुतमे घुसा दीया..





रजीया : (जोरोसे चीखते) आइ.... अरे बाबा धीरे धीरे नही डाल सकते क्या..? वो नीलुकी बच्ची सुन लेगी..

लखन : (मुस्कुराते होठ चुमते) सोरी रजु.. क्या हेना आज दीदीको देखकर जोस थोडा ज्यादा होगया..

रजीया : (बाहोमे भीचते) अरे बाबा तो फीर पहेले उनसे ही प्यार करलो.. वरना दीदीके चलकरमे आज मेरी हालत बीगाड दोगे..





कहातो सृती सरमसे पानी पानी होगइ.. ओर वो भी मदहोस होते अपने बुब्सको मसलने लगी.. लखन धीरे धीरे कमर हीलाते रजीयाको चोदने लगा.. ओर आहीस्ता आहीस्ता स्पीड बढाते दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. अबतक रजीया अ‍ेक बार जड चुकी थी.. लखन काफी देरतक रजीयाको चोदता रहा.. तब जाके दोनो अ‍ेक साथ जडने लगे.. ओर लखन रजीयाके सीनेपे ढेर हो गया..





रजीया : (पीठ सहेलाते) लखन.. अब आप दीदीके पास चले जाओनां.. आजतो आपने अ‍ेक ही बारमे मुजे थका दीया.. प्लीज..?

सृती : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. रहेने दीजीयेनां.. ये बहुत जीदी हे.. हमारी बात मानने वाले नही हे..

लखन : (हसते) देख रजु.. अ‍ेक ही रातमे दीदी मुजे कीतना समजने लगी हे.. हें..हें..हें..

सृती : (जुठा गुसा करते अ‍ेक चपत लगाते) भाइ.. मेने देखी हे आपकी जीद हमारी क्लीनीकपे.. सबकुछ अपने मनकी करवाते रहे.. (सरमाते धीरेसे) ओर कल भी आप मेरी बात कहा मानते थे..

रजीया : (मुस्कुराते) दीदी.. अब तो ये रोजका होगया हे.. तो आप भी आदत डाललो..

ओर कुछ देरके बाद लखन रजीयाको अ‍ेक बार ओर पेलने लगा.. ओर रजीयाकी चुतको हरी भरी करदी.. फीर दोनो ही बाथरुममे चले गये.. ओर सही होकर वापस आगये.. तो रजीया अ‍ेक कोनेमे जाकर सोगइ.. लखन सृतीके पास आकर लेट गया ओर अपनी बाहोमे भरलीया.. तो सृती बहुत ही सरमाइ ओर लखनके सीनेपे सर रखके लेट गइ ओर उनका सीना सहेलाने लगी..
 
सृती : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. जबतक मेरा पैर ठीक नही हो जाता मे अपने आप कुछ नही करपाउगी.. जो भी करना हो आपको ही करना पडेगा.. भाइ सोरी.. मे आपकी फेन्टासी अभी पुरी नही कर सकती..

लखन : (मुस्कुराते सरको चुमते) नही दीदी.. मे मेरी फेन्टासी पुरी करनेके लीये आपको प्यार नही करता.. ओर नाही मे हवसका पुजारी नही हु.. मे आप सबको सच्चे दिलसे प्यार करता हु.. अगर आप ठीक नही हुइ हे तो फीर रहेने दीजीये.. बस.. मुजे तो सीर्फ आपकी आगोस जाहीये.. जहा मुजे सुकुन मीलता हे..

सृती : (आंख गीली करते होठ चुमते) भाइ.. मे ओर पुनोदी आपके प्यारको क्यु समज नही पाइ..? हमने कौनसा पुन्य कीया होगा जो आप हमे भाइ ओर पतीके रुपमे मीले.. भाइ आइ लव यु सो मच..

लखन : (सृतीकी आंख पोछते) बस दीदी.. प्यार वो नही जो हम समज लेते हे.. प्यारकी परीभाषा ही त्याग हे.. जो अक्सर हमे प्यारको छोडना पडता हे.. मेनेभी पुनोदीसे प्यार कीया था.. जो भाइके कहेनेपे छोड दीया.. मेने लताको भी दिलो जानसे चाहा था.. जो आज मुजे अपने प्यारकी खातीर छोडकर चली गइ.. ओर मेने उसे खुसी खुसी जाने दीया.. आखीर सच्चे दिल वाले अ‍ेक दिन मील ही जाते हे.. जो आज आप मुजे मील गइ..

सृती : (मुस्कुराते) भाइ.. दिल छोटा मत करो.. अब मे ओर पुनोदी आगइ हे.. आपको कीसीकी कमी महेसुस नही होने दुगी.. आइ प्रोमीस..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. मेने आप दोनोको क्यु स्वीकार कीया हे पता हे..? क्युकी आप दोनो मुजे प्यार करती थी.. तभी तो मेने आप दोनोके प्यारको स्वीकार करलीया.. देखो भगवानने मेरी सुनली.. जो आज मुजे पुनोदी ओर आप मील गइ..बस.. अ‍ेक ही बीनंती हे..

सृती : (सामने देखते) क्या..?

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. कमसे कम आप ओर पुनोदी तो मुजे लताकी तराह छोडकर कभी मत जाना.. वरना मे जी नही पाउगा..

सृती : (जोरोसे बाहोमे भीचते) भाइ.. मत बोलो अ‍ैसा.. मेने अ‍ेक बार गलती की हे.. अब दुबारा कभी नही करुगी.. मे वादा करती हु.. हम दोनोमेसे कोइ आपको छोडकर नही जायेगी.. चाहे हमारी जान भी क्यु ना चली जाये.. ओर लता आपको छोडके नही गइ.. वो अ‍ेक खास मक्सदसे गइ हे..

लखन : (सामने देखते) दीदी.. खास मक्सद..? कोनसा मक्सद..?

सृती : (मुस्कुराते होठ चुमते) भाइ.. वो पुनोदी आयेगी तब उनको पुछ लेना.. वो सब जानती हे..

ओर प्यारकी बाते करते अ‍ेक दुसरेको वादा करते दोनो धीरे धीरे प्यारकी आगोसमे चले गये.. ना जाने कब दोनोके तन अ‍ेक होगये पता ही नही चला.. अ‍ैसा लग रहाथा आज काम ओर रती स्वयंम प्यार कर रहे हे.. ना कोइ वासना थी ओर ना कोइ हवस.. था तो सीर्फ प्यार.. दोनो समुद्रकी गहेरायोमे गोते लगाने लगे.. आज ना जाने लखनने सृतीको कीतनी बार जडा दीया था..





लखन सृतीकी चुतको अपने गाढे पानीसे भरता रहा.. लखन सृतीको तीन बजे तक चोदता रहा.. इस रात लखनने बीना नीचे उतरे ओर बीना लंड बहार नीकाले सृतीको तीन बार चोद लीया.. फीर सृतीको गोदमे उठाकर बाथरुममे ले गया ओर वहा उनको भी नहेलाया ओर खुदने भी नहा लीया.. फीर दोनो नंगे बहार आ गये.. ओर अ‍ेक दुसरेको चीपकर सो गये.. आज सृती पुरी तराह तृप्त हो चुकी थी..

तो आज पुनम भी इन दोनोके उपर नजर जमाये बैठे हुइ थी.. ओर लखनकी बाते सुनकर उनकी आंखोमे भी आंसु आगये थे.. उसे भी अफसोस होने लगाकी दोनो पढते थे तब उसने लखनका प्यार कबुल क्यु नही कीया..? सृती ओर लखन चुदाइ करने लगे.. तब पुनम भी बाथरुममे जाकर लखनको इमेजींग करते चुतमे उंगली करती रही.. आज वो भी दो बार जड चुकी थी.. फीर वो भी कल लखनको मीलनेके सपने देखते सो गइ..





तो दुसरी ओर गांवमे भी आज सांतीने जागृतीको जबरदस्तीसे अपने साथ ही बुला लीया.. इस रात भी बंसी सांती को अ‍ेक बार चोदकर पुरी रात उनकी बहेन जागृतीकी चुतमे धमाका करता रहा.. तो आज दिनमे सुबह ही अपना सब काम देखकर देवायत रश्मीके घरपे चला गया था.. तो अब रश्मीको डोक्टरने सेक्स करनेको मना करदीया तो देवायतने दो बार वंदनाको चोद लीया..

तो वंदना भी बहुत खुस होगइ.. खाना खानेके बाद चार बजे तक आराम करता रहा.. फीर वो चारु ओर नीशाके पास चला गया.. ओर वहा उन दोनोकी ठुकाइ करके अपने खेतो पे चला गया.. तो दुर भानुके गांवमे भी आज वो सुबह सो रहा था.. तब रमा भाभीको काम करते उल्टीया होने लगी.. तो सरला काकी मनमे खुस होते उनकी पीठ सहेलाने लगी.. फीर दोनो कीचनमे आगइ..
 
सरला : (धीरेसे हसते) रमा.. तुम अ‍ेक बार सहेर जाकर सृती बेटीको दीखादे.. मेरी तजुर्बेकार आंखे कभी धोखा नही खा सकती.. तुम पका प्रेगनेन्ट होगइ हो..

रमा : (खुस होते) क्या माजी आपभी.. अ‍ैसा कुछ नही होगा.. अब तक नही हुइ तो अब क्या खाक प्रेगनेन्ट हुगी.. फीर भी आप कहेती हेतो सहेर जाउगी तब दीखा दुगी..

सरला : (कुटील मुस्कानसे धीरेसे) अगर भानुके पास टाइम नही हे तो तुम हमारे जमाइको बुलाले..? सुना हे उसने नइ गाडी लेली हे.. तो आकर तुजे लेजायेगा..

रमा : (लखनका नाम सुनतेही जेंपते जटसे) अरे नही नही.. मतलब.. वो क्यु आयेगे..? वहा उनको दुसरा कोइ काम नही हे क्या..? वहा उनका अच्छा खासा कारोबार हे.. उनको टाइम ही नही मीलता.. अब वहाका सारा धंधा उन्होने ही सम्हाल लीया हे.. ओर मुजे उनके साथ जाकर ये दीखानेकी सरम नही आयेगी..?

सरला : (मुस्कुराते) अरे.. इसमे सरम काहेकी.. वो जमाइ हे हमारा.. तेरा तो ननंदोइ हे.. भाभी कहेता हे तुजे.. ओर तुजे बहुत मानता हे.. तो तेरा उनपे इतना हकतो बनता ही हे.. अब तो सृती बीटीया भी उनके साथ रहेती हे.. तुजे कहा उनको होस्पीटलपे जाना हे.. घरपे ही दिखा देना..

रमा : (कीचनमे जाते) मांजी.. छोडो ये सब हम बादमे देखेगे.. अभी आपका लाडला उठ जायेगे.. चाइ नास्ता बनाने दीजीये..

सरला : (मुस्कुराते मनमे) बडी आइ सरमकी पुछ.. लखनसे सरमा रही हे.. तब सरम नही आइ जब हमे छोडने आया था.. तबतो अपने उपर चडाकर मजेसे ठुकवा रही थी.. लगता हे उसने ही तुजे प्रेगनेन्ट कीया हे.. मजेसे अ‍ेक हप्ता वहा उनके पास रहेकर आइ हे.. वहा ही तेरा टाका उनसे भीड गया होगा..

वरना मेरा भानुतो तु आइ तबसे महेनत कर रहा हे.. उनसे तो कुछ नही हुआ..? जो भी हो.. हेतो वो भी मेरे कीशनका खुन.. बापरे.. कीतना बडा हथीयार हे उनका.. अबतो देवुकी भी इतनी सारी बीवीया होगइ हे.. उनको भी मुजसे मीलनेका टाइम नही मीलता.. तभी तो नही आता.. पता नही कब तक मुजे प्यासी रखेगा..

सरला यही सब सोचते खटीयापे जाकर बैठ जाती हे.. तभी भानु भी उठकर आता हे ओर बाथरुममे जाकर नहाते अपना सभी कार्य खतम करता हे.. फीर वो भी कंपलीट होकर रुमसे बहार नीकला तबतक रमाने चाइ नास्ता बनालीया था.. तो तीनो कीचनके बहारही नीचे बैठ गये.. ओर चाइ नास्ता करने लगे.. तबभी रमा लखनके खयालोमे डुबी हुइ थी.. ओर ये बात सरला भी नोटीस कर रही थी..

सरला : (मुस्कुराते) भानु बेटा.. अ‍ेक बार रमाको जाकर सृती बीटीयाको दीखादे.. आज सुबह उसे फीर उल्टीया हुइ हे.. लगता हे रमा पेटसे होगइ हे..

भानु : (आस्चर्यसे रमाकी ओर देखते) क्या..? सचमे उल्टया हुइ हे..?

सरला : (थोडा गुस्सा होते) तो क्या मे जुठ बोल रही हु..? अब थोडा अपनी बीवीपे भी ध्यान दीया कर..

भानु : माइ ध्यान तो दे रहा हु.. ओर आजकल देवुभी खेतोपे सीर्फ अ‍ेक दो घंटेके लीये ही आता हे.. ओर रामु काकाकी तबीयत भी कुछ ठीक नही रहेती.. तो मुजे ही वहा ध्यान रखना पडता हे.. लगता हे अब रामुकाका ज्यादा दिन नही नीकालेगे..

सरला : (अफसोस जताते) हां.. तेरे बापु ओर कीशनका दोस्त हे वो.. जो बरसोसे उनके साथ हे.. अच्छा हुआ देवुने उनकी बेटीसे सादी करली.. कमसे कम सुकुनसे तो जायेगे.. अब उमर भी होगइ हे उनकी..

भानु : (सामने देखते) माइ.. आपतो उनको बरसोसे जानती होनां..? बापु भीतो उनके दोस्त थे.. क्या उनके परीवारमे ओर कइ नही हे..? मेने अ‍ेक दो बार पुछा.. लेकीन उन्होने मुजे कुछ बताया नही..

सरला : (अफसोस जताते) अब क्या बताउ तुजे..? उनके बारेमे ज्यादा तो नही पता.. लेकीन इतना पता हे.. उनकी भी दो बहेने थी.. अ‍ेक रामु भाइसे बडी ओर अ‍ेक उनसे छोटी.. सभी देवुके बापुके दोस्त थे तो रामु भाइको भी हवेलीकी हवा लग गइ.. ओर उनकी बडी बहेनसे सादी करली.. छोटी तो सहेरमे पढती थी.. तो उसने भी वहा कीसीसे सादी करली.. फीर उनकी बडी बहेन भी अ‍ेक बच्चीको पैदा करके गुजर गइ..

भानु : (आस्चर्यसे देखेते) क्या..? तो फीर उनकी छोटी बहेन उनको कभी मीलने नही आइ..?

सरला : पता नही.. वहा उसने कोलेक केही कीसी चपरासीसे सादी करली.. सीर्फ इतना पता हे उन्होने रामु भाइके साथ रीस्ता तोड दीया हे.. तबसे उनका कुछ अता पता नही.. ओर रामु भाइकी बेटी बडी होगइ तो उनकी सादी करवादी थी.. जो बेचारी कुछ ही महीनेमे विधवा होगइ.. तबसे वो हजेलीपे काम कर रही हे.. वो दया.. ओर रामुभाइ तबसे खेतोपे ही रहेने लगे हे.. बेटा.. अ‍ेक बार रमाको दीखाकर आजा..

भानु : माइ.. दो दिन बहुत काम हे.. फीर मुजे भी सहेरमे अ‍ेक कामके लीये जाना हे.. तब मे रमाको साथ लेजाउगा.. अब तो सृती भाभी भी वही हे.. तो रमाको उनके घरपे ही छोडदुगा.. वो वही देख लेगी..

सरला : (मुस्कुराते) हां तो फीर ठीक हे.. वहा नीलुको भी मील लेना.. लगता हे वोतो हमे भुल ही गइ हे.. वहा उनको बहुत भागया लगता हे.. हमे फोन तक नही करती..

रमा : (मुस्कुराते) माजी.. वहा सृतीदी.. रजीया दीदी.. सब हे.. तो सबके साथ घुल मील गइ हे.. तो हम उसे कहासे याद आयेगे.. कभी कभी मुजसे फोनपे बात करलीया करती हे..

फीर चाइ नास्ता खतम हो गया तो भानु खेतोकी ओर चला गया ओर रमा घरका काम करने लगी.. ओर सरला खटीयापे जाकर बैठ गइ.. वो रमाको अपने चहेरेपे जाहीर होने देना नही चाहती थी.. की उनको लखन ओर रमाके रीस्तेके बारेमे पता चल गया हे.. क्युकी जबसे लखन उनको गले मीला तब उनके हथीयारका चुंभन.. ओर रमाके साथ उनकी चुदाइ देखकर उनके खुदके दिलमे लखनके लीये चींगारी सुलग चुकी थी.. अ‍ैसे ही रात ढल गइ....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २५२

फीर चाइ नास्ता खतम हो गया तो भानु खेतोकी ओर चला गया ओर रमा घरका काम करने लगी.. ओर सरला खटीयापे जाकर बैठ गइ.. वो रमाको अपने चहेरेपे जाहीर होने देना नही चाहती थी.. की उनको लखन ओर रमाके रीस्तेके बारेमे पता चल गया हे.. क्युकी जबसे लखन उनको गले मीला तब उनके हथीयारका चुंभन.. ओर रमाके साथ उनकी चुदाइ देखकर उनके खुदके दिलमे लखनके लीये चींगारी सुलग चुकी थी.. अ‍ैसे ही रात ढल गइ.... अब आगे

नया सुरज नीकलके अपनी मंजीलकी ओर चल पडा था.. रजीया सुबह जल्दी उठ गइ तो सृती ओर लखन नंगेही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे सोये पडे थे.. रजीया देखकर सरमाते मुस्कुराने लगी.. ओर उसने धीरेसे लखनको जगा दीया.. क्युकी उसे आज गांवपे पुनमको लेने जाना था.. फीर रजीया नीलमको भी जगा देती हे.. ओर उनको भी अपने कपडे पेक करनेको कहेते नीचे कीचनमे चली जाती हे..

जैसे ही लखन जागा सृतीको अपनी बाहोमे नंगा पाया.. ओर लखनसे रहा नही गया.. उनका हथीयार जटके देने लगा.. तो लखनने सृतीके होठोको चुम लीया.. सृतीने भी आंख खोलदी.. ओर लखनके चुमनेसे सरमाके मुस्कुराने लगी.. लखनको प्यारसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. उसे रातका पुरा वाक्या याद आने लगा की लखनने उसे कैसे बीना नीचे उतरे तीन बार चोद लीया था.. तभी..

सृती : (होंठ चुमते) गुड मोर्नीग मेरे प्यारे भाइ.. आइ लव यु..

लखन : (अ‍ेक टांग उपर डालते माथे चडते) मोर्नींग माइ स्वीट हार्ट.. आपको पता हे..? हमारी गुड मोर्नींग अ‍ैसे नही होती.. कुछ स्पेसीयल होजाये..

सृती : (सर्मसार होते लखनकी पीठ सहेलाते) भाइ.. प्लीज.. मत करो.. अ‍ैसे कौन गुड मोर्नींग करता हे..?

लखन : (बुब्सको चुमते) दीदी.. कमसे कम मेतो अ‍ैसे ही मोर्नींग वीस करता हु.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते बाहोमे भीचते) भाइ.. आप बहुत रोमेन्टीक हो.. कोइ अपनी दीदीके साथ अ‍ैसा करता हे..? छोडो प्लीज.. कल भी देर रात तक कीतना प्यार कीया था.. तो अभी भी आपका जी नही भरा क्या..?

लखन : (मुस्कुराते देखते) दीदी.. आप ओर पुनोदीदीसे मेरा जी कभी नही भरेगा.. जी तो चाहता हे पुरा दिन आप दोनोकी आगोसमे सोता रहु..

सृती : (मदहोसीमे जोरोसे भीचते) भाइ.. मत करो इतना प्यार.. थोडा पुनोदीदीके लीये भी बचाकर रखो.. आज वो आ रही हे.. तो आप दोनोके मीलनका पुरा इन्तजाम मेने करलीया हे.. आप दोनो मेरे घरपे चले जाना.. तो आज मुजे भी थोडा आराम मील जायेगा.. आपने तो ये दो दिनमे मेरी सारी कशर पुरी करदी..

लखन : (होंठ चुमते) दीदी.. पता नही साथमे कोन आयेगी.. अगर वो अकेली होगी तो यही सुहागरात मनाउगा.. जहा हम दोनोने मनाइ हे.. आप ओर रजु इधर ही सो जाना.. आजतो नीलु भी जा रही हे.. तो उनका भी रुम खाली होगा.. तो दयाभाभी ओर भावना भाभी उधर सोजायेगी.. तो घरपे सीर्फ हम ही होगे..

सृती : (लंडको पकडकर अपनी चुतपे सेट करते) भाइ.. आपने तो हमारी सुहागरातकी याद दीलाकर गरम करदीया मुजे.. फीर आपको जाना भी हे.. तो प्लीज.. सीर्फ अ‍ेक बार.. मुजे पता हे गुडमोर्नीग कीये बगैर आप मानोगे नही.. धीरेसे डालदो अंदर..





जैसे ही सृतीने लंडको अपनी चुतमे फसाया लखनने धीरेसे अपनी कमरको पुस कीया.. ओर लंडको सृतीकी चुतमे घुसा दीया.. तो सृती आखोंकी पुतलीया पलटते मदहोस होगइ.. ओर लखनको जोरोसे बाहोमे भीचने लगी.. ओर धीरे धीरे कमर हीलाते लखन सृतीको चोदने लगा.. इसी दौरान नीलमभी बाथरुममे जाचुकी थी.. ओर नहा रहीथी.. इधर रुमका दरवाजा खुला था.. ओर लखन सृतीकी चुदाइ कर रहा था..

नीलम कंपलीट तैयार होगइ.. ओर अ‍ेक बेगमे अपने कुछ अपने मोर्डन नये ड्रेस डालदीये जो उसे लखनने दिलवाये थे.. ओर वो बेग लेकर दरवाजा बंध करके नीचेकी ओर जाने लगी.. तभी उसे लखनके रुमसे सृतीकी सीसकारीयोके साथ कुछ अजीब आवाज सुनी.. ओर उनके पैर अपने आप रुक गये.. ओर बहारसे अंदर जाकने लगी.. तो लखन ओर सृतीके बीच घमासान चुदाइ चल रही थी..





लखन जोरोसे कमर हीलाते सृतीको चोद रहा था.. ओर सृती भी जोरोसे सीसकारीया करते लखनका साथ दे रही थी.. जीसे देखकर नीलमकी चुत भी हरकतमे आगइ.. उनकी आंखोमे भी वासनाके डोरे मंडराने लगे.. उनका हाथ अनायास ही अपनी चुतपे चला गया ओर स्कर्टके उपरसे ही चुतको सहेलाने लगी.. वो वहा खडी होकर चुपकेसे दोनोकी चुदाइ देखने लगी.. तभी लखनने भी नीलमको देखलीया..

नीलमको सीडीपे कीसीके आनेकी आहट सुनाइदी.. तो नीलम सतर्क होगइ.. ओर जटसे नीचेकी ओर जाने लगी.. उसे सीडीया चडते रजीया दीखाइ दी.. तो नीलम सरमाकर मुस्कुराते नीचे चली गइ.. ओर रजीया रुममे आगइ.. लखन ओर सृती दोनो अपने चरमोपे पहोंच चुके थे.. ओर सृती लखनकी पुठ सहेला रही थी.. दोनो परसीनेसे भीग चुमे थे.. रजीया वही आकर खडी होगइ..
 
रजीया : (थोडे जुठे गुस्सेसे) लखन.. दोनो ही सुबह सुबह सुरु होगये.. अरे बाबा कमसे कम दरवाजा तो बंध कर लेते.. लगता हे तुम दोनोको हमारी छोटी महारानीने भी देख लीया हे.. नीचे आते कैसे सरमा रही थी..

सृती : (सरमसे पानी पानी होते) दीदी.. इसे कहीयेनां मुजे छोडदे.. ये मानते ही नही.. ओर सुबह सुबह सुरु होगये..

रजीया : (हसते) दीदी.. ये अ‍ैसे ही हे.. मेरी भी कइ बार सुबहमे कुटाइ होजाती हे.. अब दोनोका होजाये तो फटाफट नहा लीजीये चाइ बन गइ हे.. तो गरमा गरम नास्ता बनादु.. वो महारानी भी इनका इन्तजार करते बैठी होगी..

सृती : (रजीयाके जाते ही) भाइ.. आज दुसरी बार रहेने दो.. बादमे करलेना.. देखो.. नीचे.. पुरी मुनीया भरी पडी हे.. प्लीज.. मेरे अच्छे भाइ.. मान जाओनां आप रातमे कर लेना..

लखन : (होंठ चुमते लंडको बहार खीचते) दीदी.. आपको अ‍ैसे मनते करनेकी जरुरत नही हे.. ठीक हे.. रातको देख लुगा.. लेकीन आजतो पुनोदी आ रही हेनां..?

सृती : (अपनी चुत साफ करते हसते) भाइ.. फीकर मत करो.. मे कुछ जुगाड कर लुगी.. ओके..?

फीर लखन सृतीको गोदमे उठाकर बाथरुममे ले गया.. ओर सृतीको भी नहेलाया ओर खुदने भी नहा लीया.. सृतीका बदन पोछकर गोदमे ही उठाकर बेडपे बीठा देता हे.. फीर सृतीके कपडे भी उनके रुमसे जाकर लेआता हे.. ओर सृतीको पहेना देता हे.. फीर वो भी कंपलीट होजाता हे.. तबतक सृतीने अपने बालोको भी पोछ लीया.. ओर सरपे टोलीया लपेटर लखनकी ओर मुस्कुराते देखती रही..

तभी लखन उनको गोदमे उठाकर नीचे लेआया ओर सीधा डाइनींगपे बीठादीया.. ओर खुदभी उनसे सटकर बैठ गया.. नीलम लखन ओर सृतीकी ओर देखते सरमाते हसती रही.. तो लखनने उनके सरपे अ‍ेक टपली मारदी.. सृती भी सबकुछ समज गइकी नीलमने उन दोनोका लाइव सो देखलीया हे.. तो सृती भी नीलमकी ओर देखते सरमाके हसने लगी.. तभी रजीयाने सबको चाइ नास्ता परोसा ओर बैठ गइ..

रजीया : (मुस्कुराते) नीलु.. इधर उधर ध्यान मतदे.. ओर चुपचाप चाइ नास्ता करले.. क्या तुने पेकींग करली..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे हसते) हां दीदी.. लेकीन घरपे अच्छा नही लगा तो मे वापस चली आउगी.. केह देती हु.. यहा पुनोदी ओर छोटी मम्मी दया दीदी सब आ रहे हे ओर मे जा रही हु.. तो अच्छा नही लगता..

सृती : (मुस्कुराते) अरे अब तेरी पुनोदी हमेसाके लीये यही रहेने आने वाली हे..तो बादमे मील लेना..

फीर चाइ नास्ता खतम होगया तो लखन ओर नीलम जानेकी तैयारीया करने लगे.. लखनने नीलमकी हाजरीमे ही सृती ओर रजीयाके होठोको चुम लीया.. तो दोनो सर्मसार होगइ.. ओर रजीयाने तो नीलमकी हाजरीकी वजहसे लखनपे जुठा गुस्सा करते अ‍ेक पीठमे मुका भी मार दीया ओर हसने लगी.. तो नीलम भी सरमाते हसने लगी ओर लखनके साथ बहार कारकी ओर चली गइ..

लखन : (कारमे बैठते हसते) चल छोटी रानी.. आगे बैठजा..

नीलम : (हसते आगे बैठते सरमाते धीरेसे) जीजु.. आप भीनां.. अभी मे आपकी रानी नही हुइ हु.. समजे..?

लखन : (दोनो बैठ जाते हे तो कार चालु करते) अरे नही हुइ हे तो होजायेगी.. तु फीकर मत कर..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) जीजु.. आप पहेले कारको जाने दीजीये.. मुजे आपसे कुछ बात करनी हे..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे.. नीलु.. हमे रास्तेसे मीठाइआ भी लेजानी हे.. हमारी नइ कारकी.. घरके लीये.. तेरे घरके लीये.. मेरी सासुमां ओर तेरी मम्मी भी कार देख लेगी..

कहेते लखनने कारको गांवकी ओर जानेदी.. तो नीलम लखनकी ओर तीरछी नजरोसे कामुक्तासे देखते हसती रही.. आज उसने लखन ओर सृतीकी खुलम खुला चुदाइ देखली थी.. तबसे वो बहुत गरम होचुकी थी.. अब वो कीसी भी हालमे लखनसे चुदवानेका मन बना चुकी थी.. तभी लखनने उनकी ओर देखा तो नीलम सरमा गइ.. ओर अपनी नजरे जुकाली.. लखनने उनकी जांगपे अ‍ेक हाथ रख दीया.. फीर कुछ दुर जाके अ‍ेक हलवाइकी दुकानसे लखनने तीन चार बोक्ष मीठाइके लेलीये.. ओर कारको जानेदी..

लखन : (जांगको सहेलाते) हां नीलु बोल.. क्या केह रही थी तुम..?

नीलम : (मदहोसीमे आंख बंध करली) सीसससस... जी..जु.. वहा मत छुइअ‍े.. मुजे कुछ हो रहा हे.. कमसे कम अपने रुमका दरवाजा तो बंध रखते.. घरपे आपकी जवान साली हे.. तो कुछ तो सरम कीजीये..

लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. तुम सीर्फ साली नही.. मेरी आधी घरवाली भी हो.. कैसा लगा हम दोनोका लाइव सो.. देख लीया तुमने..? हें..हें..हें..

नीलम : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) हां जीजु.. क्या आपको पता था मे देख रही हु..? हंम..?

लखन : (मुस्कुराते जांग सहेलाते) हां.. मुजे मेरी हर रानीपे ध्यान रखना पडता हे.. ओर तुम तो मेरी सबसे छोटी रानी हो.. बता.. कैसी हे तेरी सृती दीदी..? हेना मस्त..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे) जीजु.. अ‍ेक दम मस्त.. सेक्सी.. क्या पटाका माल मीला हे आपको.. हें..हें..हें..

नीलम : (जोरोसे हसते) अच्छा..? मस्त माल मीला हे मुजे..? ठीक हे.. मे तेरी सृती दीदीको कहुगा.. की नीलु तेरी बहुत तारीफ कर रही थी.. हें..हें..हें..

नीलम : (दांत पीसते लखनकी जांगपे अ‍ेक मुका मारते) जीजु.. आपभीनां.. आप वाकइ कमीने हो.. कोइ अ‍ैसी बात करता हे क्या..? मे तो बस आपने पुछा तो अ‍ैसे ही केह रही थी..

लखन : (हसते) अरे मेतो मजाक कर रहा हु.. अ‍ैसी बाते कही जाती हे क्या..? लेकीन तुम भी कुछ कम नही हो.. इन कपडोमे तु मस्त लग रही हे.. जीतो चाहता हे तुजे अभी कच्ची चबा जाउ..

नीलम : (सर्मसार होते कामुक नजरोसे धीरेसे) तो चबालोना... आपको कीसने मना कीया हे.. इसीलीये तो आपके साथ आइ हु.. कीतनी बार कहा हे.. लेकीन आपतो मानते ही नही हो.. अ‍ैसी कोइ साली देखी हे जो सामनेसे कहेती हे की मुजे पुरी घरवालीका प्यार चाहीये.. देखलो.. आज मस्त मौका हे..

लखन : (मुस्कुराते) नही नीलु.. सही समय आनेदे.. वोभी होजायेगा जो तु चाहती हे.. सुन.. तुम मुजे कुछ कहेने वाली थी.. बता क्या बात हे..?
 
नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) हां जीजु.. कल पुनो दीदीसे फोनपे बात हुइ.. पुनो दीदीने मुजे कुछ नही कहा.. उल्टा वोतो मुजे बहेन मानके प्यार कर रही हे.. वो यहा आ रही हु ओर मे गांव जा रही हु.. मुजे अच्छा नही लग रहा..

लखन : (मुस्कुराते) अरे वोतो सीर्फ सादीकी खरीदारी करने आ रही हे.. दो तीन दिनमे चली जायेगी.. फीर तो वो सादीके बाद इधर ही रहेगी.. तो आरामसे मीलती रहेना..

नीलम : (आंखोमे चमकके साथ) जीजु.. क्या वो सीर्फ दो तीन दिनके लीये ही आ रही हे..? तो फीर उनको छोडने वापस भी जाओगेनां..?

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. सायद..? लगता हे भैया बहुत बीजी होगे.. तो मुजे ही छोडने जाना पडेगा..

नीलम : (कातील मुस्कानसे) जीजु.. तो फीर मुजे भी घरसे वापस लेजाना.. मे घरपे सीर्फ तीन दिनकी छुटी थी अ‍ैसा केह दुगी..

लखन : (सामने देखते) लेकीन तेरी तो अ‍ेक हप्तेकी छुटी हुइ हे.. तो फीर घरपे जुठ क्यु बोलेगी..?

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) जीजु.. आपभीनां.. समजते ही नही.. आप बीलकुल बुध्धु हो.. अभी भी नही समजे..? हंम..? हम लोंग ड्राइवपे चलेगेनां.. वहा हम कीसी होटलपे ठहेरेगे.. क्या कहेते हो..?

लखन : (कातील स्माइल करते) नीलु.. तेरा इरादातो नेक हेनां..? जबसे आइहे अ‍ेक ही बात करती हे.. लेकीन क्या दिमाग पाया हे तुमने.. वैसे घरपे तेरी दीदीओको क्या कहेगे..? पुनोदीको सब पता चल जाता हे.. तुजे सब पता हेनां..?

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) जीजु.. वो सब आप ही देख लेना.. इसीलीये तो आजकल मे धिरेनको नही मीलती.. अ‍ेक तो मे आपसे प्यार करने लगी हु.. ओर उपरसे आज सुबह आप दोनोको देखालीया.. तो बहुत मन कर रहा हे.. आप समज गयेनां..?

लखन : (जांग सहेलाते) नीलु.. फीर वोही बात..? अरे बाबा मन तो मेरा भी बहुत कर रहा हे.. लेकीन कमसे कम तु दो दिन बीस्तरसे उठ नही पायेगी.. अ‍ेक बार फीर सोचले.. हम अभी ओरलसे काम चला रहे हे वोही ठीक हे.. इसके लीये हमे खास मौका भी तो मीलना चाहीये..

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे तीरछी नजरोसे) जीजु.. मौका मीलता नही.. मौका बनाना पडता हे.. इसीलीये तो केह रही हु.. इनसे अच्छा मौका हमे कहा मीलेगा..? यहीतो खास मौका मीला हे.. मेरी छुटी भी चल रही हे.. फीर तो सादीके बाद आप भी दोनो नइ बीवीओमे बीजी होजाओगे.. लोंग ड्राइव तो अ‍ेक बहाना हे.. फीर मत कहेना आधी घरवालीने पुरी घरवालीका प्यार नही दीया..

लखन : (बुब्स सहेलाते) नीलु.. क्या तुम धिरेनको धोखा नही दे रही हो..? हंम..?

नीलम : (मदहोस होते) जीजु.. काहेका धोखा..? उसने पुनो दीदीके साथ ओर अपनी मांके साथ क्या कीया आपको नही पता..? हंम..? मेतो वहा थी.. आज चंदा दीदी जोभी हालत हे.. उनके लीये धिरेन जीम्वेवार हे.. कल अ‍ेक्जामके बाद आया था उनका फोन.. मुजे अपने नये घरपे लेजाना चाहता था.. तो मेने मना कर दीया.. केह दीया अब जोभी होगा हमारी सादीके बाद..

लखन : (सामने देखते) अरे पागल हेतु..? मील लेती उसे.. तेरा होने वाला पती हे वो..

नीलम : (फीकी मुस्कानसे) पती..? मुजे सीर्फ उनसे सादी करके अपना घर बसाना हे ताकी मे कायदेसे उनकी पत्नी कहेलवा सकु.. ओर कुछ नही.. जो मेरी भी मजबुरी हे.. बाकी असली जींदगी तो मे आपके साथ गुजारना चाहती हु.. मेरे असली पती आप ही होगे.. जो मेरा हर सुख आपसे पाउगी.. सीससस... जीजु.. धीरे दबाओनां.. बहुत मजा आता हे..

लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. लगता हे तुमने तेरी जींंदगीकी पुरी प्लानींग करके रखी हे..

नीलम : (सर्मसार होते हसते) हां जीजु.. ओर नही तो क्या..? जीजु.. वो बहुत जल्द खलास हो जाता हे.. मुजे हर बार प्यासी छोड देता हे.. आपके हथीयारके सामनेतो उनकी नुनी दीखती हे.. तो वो क्या खाक संतुस्ट करेगा मुजे..? तो आप ही सोचो.. क्या मे अ‍ैसे आदमीके साथ पुरी लाइफ गुजार सकती हु..? इसीलीये मेरे आपसे वादा कीया हे.. की मे पुरी लाइफ आपकी होना चाहती हु.. फीर चाहे मुजे आपकी रखेल बनके ही क्यु ना रहेना पडे..

लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. तुजे पता हेनां.. पुनोदी को सब पता चल जाता हे.. हंम..?

नीलम : (मुस्कुराते) हां जीजु.. मुजे सब पता हे.. सीर्फ पुनोदीदीको नही.. मंजु मोमको भी सब पता चल जाता हे.. उनसे मेरी काफी बाते होगइ हे.. अभी सीर्फ इतना पता हे.. की मेभी आप लोगोकी जींदगीका अ‍ेक हीस्सा हु.. मेरी मम्मी भी भटक गइ थी.. मोमने कहा हे.. वो भी सुधर जायेगी.. ओर उसने मुजे ये भी कहा हेकी मेरा लखन तेरा खयाल रखेगा.. उनको हमारे फ्युचरके बारेमे सब कुछ पता हे..

लखन : (मुस्कुराते) ओह.. इसीलीये.. नीलु.. लगता हे मम्मीके साथ तेरी काफी बाते होगइ हे.. नीलु.. तेरी मम्मीके साथ तेरी बहुत अच्छी अन्डर स्टेन्डींग हे.. तेरी सहेली भी हेना वो..? तो तुम उसे मीलो तो उनको समजाना ये सब साजीस करना छोडदे.. वरना वो ही बरबाद होजायेगी.. मे नही चाहता उनका घर बरबाद होजाये.. क्युकी भानु भाइको मे अपना बडा भाइ मानता हु.. ओर तेरी मम्मी भी मुजे प्यार करती हे.. ठीक हे..?

नीलम : (कामुक्तासे सरमाते धीरेसे) ठीक हे जीजु.. अगर आप कहेते होतो मे उनको समजा दुगी.. जीजु.. देखो.. इधर जंगल हे.. क्या वहा हम चले..? हंम..? थोठी देर.. सीर्फ ओरल ही करलेगे.. बहुत मन कर रहा हे..

लखन : (होठ चुमते) नही नीलु.. हमे देर हो रही हे.. अभी तो तेरी ये आग सम्लाके रख.. मे तीन दीनके बाद तुजे लेजाउगा.. अब इस आगको मेही बुजाउगा.. तुम तैयार रहेना.. चल पुनोदीको छोडने आउ तो सायद सब लोग साथमे होगे.. तब तुजे लेजाउगा.. फीर हम कुछ प्लानींग करते हे.. ओके..?

नीलम : (खुस होते) जीजु.. आप सच केह रहेहोनां..? मे आपका इन्तजार करुगी..

लखन : (मुस्कुराते) तेरी कसम.. अब खुस..?

दोनो अपने मीलनकी प्लानींग करते जा रहेथे.. तभी उसे सामने मुना बरखा.. जयश्री श्रीधर.. ओर बंसी सांती ओर जागृती मीले.. जो आश्रमकी ओर जा रहे थे.. बंसीके बाइकमे सांती ओर जागृती बैठे हुअ‍े थे.. लखनने अपनी कार रोकदी.. तो मुनाने लखनको देख लीया.. ओर वापस आकर लखनकी कारके पास रुक गया.. तो बरखा लखनकी ओर देखते सरमाकर हसने लगी..
 
मुना : (हाथ मीलाते) हाइ लखन.. अच्छा हुआ इधर ही मील गया.. क्या गांव जा रहा हे..?

लखन : (हसते) हां मुना.. वो पुनो दीदीको लेने ओर इसे छोडने जा रहा हु.. सुबह सुबह तीनोकी टोली कीधर जा रही हे..? नमस्ते भाभी..

बरखा : (सरमाते हसते) नमस्ते देवरजी.. हें..हें..हें..

मुना : (हसते) यार वो अपना बंसी हेनां.. वो जागुसे सादी कर रहा हे.. तो हम आश्रम जा रहे हे.. तुभी चल..

लखन : (मुस्कुराते) अच्छा..? नही यार आज बहुत काम भी हे.. ओर लेट हो रहा हु.. तुम लोग चले जाओ.. बादमे मीलते हे.. चलो फाइनली बंसीको उनकी बहेन मील गइ..

बरखा : (हसते) ये सब आप हीकी क्रिपासे हो रहा हे.. सबको अपनी बहेनके पीछे लगा दीया हे.. हें..हें..हें.. आपकी भी बारी आगइनां..? सुनाहे पुनम दीदीका डीवोर्स होगया हे.. ओर आप दोनो सादी कर रहे हो..?

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. सही सुना भाभी आपने.. पुनोदी सादीकी खरीदी करने आ रही हे.. इसीलीये उसे लेने जा रहा हु.. चलो बाय.. मीलते हे..

मुना : (मुस्कुराते) हंम.. मीलते हे.. रातको रुका हे..?

लखन : नही यार.. पुनोदीको लेकर नीकल जाउगा.. दो तीन बाद मीलते हे.. चल बाय..

कहेते लखन वहासे नीकल गया ओर सीधे नीलमके गांव पहोंच गये.. तबतक भानु चाइ नास्ता करके खेतोपे जा चुका था.. रमा कीचनका काम समेटकर कपडे धो रही थी.. तो सरला खटीयापे बैठकर उनसे बाते कर रही थी.. तभी दोनो वहा पहोंच गये.. ओर अंदर चले गये.. तो रमा नीलमको देखतेही खडी होगइ.. ओर दोडकर उनके गले लग गइ.. तबतक लखन भी सरलाके पास जाके उनके पैर छुलेता हे..

सरला : (खुस होते) अरे लखन बैटा.. आ गये तुम..? जीते रहो.. आओ.. आओ.. बैठो इधर.. क्या नीलु भी आइ हे..?

लखन : (मीठाइका बोक्ष देते) हां काकी.. ये लीजीये मुह मीठा कीजीये.. हमने नइ कार ली हे..

सरला : (हसते) अच्छा..? जीते रहो बेटा.. बस.. अ‍ैसेही तरकी करते रहो.. ओर अपने भाइका नाम रोशन करो..

नीलम : (आकर पैर छुते) प्रणाम दादीमां.. तीन दिनकी छुटी थी तो जीजुके साथ आगइ..

रमा : (लखनकी ओर सरमाते हसते) अच्छा कीया जो तेरे जीजुके साथ आगइ.. जा तेरे जीजुको पानी पीला.. मे चाइ बनाती हु..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. फटाफट चाइ पीलादो.. मुजे जाना भी हे.. मे पुनोदीको लेने आया हु..

रमा : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) अरे..? अभी अभी तो आये हे.. इतनी भी क्या जल्दी हे..?

नीलम : (मुस्कुराते) मोम.. जीजुको पुनम दीदीको लेकर वापस सहेर भी जाना हे..

सरला : (मुस्कुराते) बेटा.. हमने पुनम बीटीयाके बारेमे सुना.. सुनकर बहुत दुख हुआ.. अच्छा हुआ तुम उनसे सादी कर रहे हो..

लखन : (हसते) काकी.. अ‍ेक बात पुछु..? आपकी बेटी भी वहा हे.. मे आपका दामाद हु.. ओर हम दोनो भाइ सादी कीये ही जा रहे हे.. तो सुनकर आपको बुरा नही लगता..?

रमा : (कीचनकी ओर जाते सरमाते हसते धीरेसे) लोजी.. इसमे बुरा माननेकी क्या बात हे.. आप अ‍ेक राजाके परीवार हो.. ओर उनमे ये सब होना अ‍ेक सामान्य बात हे.. कमसे कम हमारी ननंद वहाकी रानी तो कहेलाती हे.. हें..हें..हें..

सरला : (मुस्कुराते) हां बेटा.. मुजे पता हे आप लोग कौन हो.. जीतना आप लोग बाबाको माने हो इतना हम भी मानते हे.. ओर बाबाने हमे पहेलेसे ही सब कुछ बता दीया था.. की ये सब होने वाला हे.. तो फीर काहेका दुख..? वैसे भी भानुने भी तो दो सादीया करली हे.. अब तो ये घर घरकी कहानी होजायेगी.. तो हमे इस बातमे कोइ बुराइ नही लगती.. जो प्यार आपसी रीस्तोमे हे.. वो प्यार अन्जान रीस्तोमे नही..

लखन : (मुस्कुराते) काकी.. जानकर खुसी हुइ.. की आप भी अ‍ैसे रीस्तेको मानती हो..

नीलम : (मुस्कुराते) जीजु.. लीजीये पानी.. मम्मी चाइ बना रही हे.. कहेती हे जीजुको कहेना खाना खाकर जाये.. मेने मना कर दीया की जीजुको देर हो रही हे.. अच्छा मे चेन्ज करके आती हु..

लखन : (मुस्कुराते पानी पीते) सही कीया.. पुनोदीको लेकर वापस भी जाना हे.. देर होगइ हे.. अभी गांवभी नही गया सीधा नीलुको छोडने इधर ही आगया.. जब पुनोदीको छोडने आउगा तो नीलुको लेकर जाउगा..

सरला : (मुस्कुराते) अच्छा बता.. घरपे सब कैसे हे..? क्या कर रही हे हमारी लता..?

लखन : (दोनो अकेले होते ही मोका देखते) काकी.. मुजे आपसे अ‍ेक बात कहेनी हे.. लताके बारेमे..

सरला : (फीकी मुस्कानसे) जानती हु में.. यहीना की वो तुजे छोडकर देवुसे सादी कर रही हे.. पता हे मुजे.. मेरी मंजु बीटीयासे सब बाते होगइ हे..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) क्या.. आपको सब पता था..?

सरला : हां बेटा.. मेने जमाना देखा हे.. मुजे नही पताथा की वो देवुसे प्यार करती थी.. लेकीन उसने तुम्हारा इस्तमाल करके गलत कीया.. मे उसे माफ नही करुगी.. अगर देवुसे प्यार करती थी तो हमे बता देना चाहीये.. उन्होने क्युकी तुम्हारे साथ सादी..? हम करवा देते देवुसे सादी..
 
लखन : (मुस्कुराते) काकी.. छोडो ये बात.. मुजे दुख नही हे.. क्युकी भाभीमांने भी कुछ फैसले लीये हे.. खैर.. ओर बताइअ‍े.. यहा आपको कोइ तकलीफ तो नही..?

सरला : (मुस्कुराते) नही बेटा.. सुन.. तुजे अ‍ेक खुस खबर देनी हे.. सायद दो तीन दिनके बाद वहा भानु ओर रमा आयेगे.. वो.. हमारी सृती बीटीयाको दीखाने.. सायद रमा पेटसे हे.. क्या सृती बेटी वहा हेनां..?

लखन : (मुस्कुराते) अरे वाह.. तब तो मेरा भतीजा या भतीजी आने वाली हे.. हें..हें..हें.. काकी.. सृतीदीदी आजकर घरपे ही हे.. उनको अ‍ेक हाथ पैरमे चोट लग गइ थी.. तो घरपे आराम कर रही हे.. भानु भाइको कहेना.. दोनो हमारे घरपे ही आजाये.. वहीसे सब होजायेगा..

सरला : (धीरेसे) लखन बेटा.. अब तुमसे क्या छुपाउ.. तुम जरा भानुको समजाओनां.. अब बेटी जवान होगइ हे.. इधर रमा भी भावेससे मन बहेला रही हे.. ओर उपरसे अब पेटसे हो गइ हे.. तो भानुको समजादे ये सब घरपे ठीक नही हे.. उसे जो भी करना हे बहार रहेकर करे.. समज गयानां..?

लखन : (जानते भी अनजान बनते) काकी.. मे कुछ समजा नही.. क्या कीया भानुभाइने..?

सरला : (धीरेसे) लखन बेटा.. अब तुमसे क्या कहु..? तुभी सहेर चला गया हे तो तुजे भी नही पता होगा.. सुन.. हम सब वहा थे.. तब भानु कीसी मजदुरनको रोज यहा लेकर आता था.. ओर आज कल उनके उपर बहुत पैसा खर्च कर रहा हे.. तो उसे कहे थोडा घरपे भी ध्यान दे.. अब दुसरे बच्चेकी भी जीम्वेवारी आयेगी..

लखन : (मुस्कुराते) काकी.. आप घरकी ओर बच्चोकी चीन्ता मत करो.. वो सब हम देख लेगे.. क्या हेनां.. इतने दिनोसे भानुभाइकी दोनो बीवीया नही थी.. तो आदमी कीतना दिन अकेला रहेगा..?

सरला : (मुस्कुराते सरमाते) बेटा.. बात तो तेरी सही हे.. दो दो बीवीया रहेते भी आदमी कीतना दीन अकेला रहेगा..? मुजे भी पता हे अकेले जींदगी काटना कीतना मुस्कील हे.. मेने भी अकेली जींदगी काटी हे.. लेकीन ये सब बहार करे तो अच्छा हे..

लखन : (मुस्कुराते) काकी.. आप तो अभी भी जवान दीखती हो.. पता नही आपने दुसरी सादी क्यु नही की.. तब भो भानु भाइ ओर लता भी छोटे थे.. करलेती दुसरी सादी.. हें..हें..हें..

सरला : (सरमाते बाजुमे मुका मारते) चल हट बदमास.. अब मे तेरी सास हु.. ओर सांसके साथ अ‍ैसी बाते नही करनी चाहीये.. समजे..?

लखन : (हसते धीरेसे) काकी.. सांसतो बादमे हुइ.. पहेलेतो आप हमारी काकी थी.. ओर अभी भी हो.. तो थोडा अपने बारेमे भी बताइअ‍ेनां.. सुनकर बहुत मजा आता हे..

सरला : (हसते) अरे.. तुम तो पीछे ही पड गया.. सुन.. वो सब तुजे बादमे बता दुगी.. वैसे भी तेरी भाभीमां ओर पुनो बीटीयाको तो सब पता चल जाता हे.. तो तुम तेरी नइ बीवीसे ही सब पुछ लेनां.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) काकी.. क्या आपको भी पता चल गयाकी वो दोनोको सबकुछ पता चल जाता हे..?

सरला : (मुस्कुराते) बेटा.. मे इतने दिन वहा रही हु.. तो मुजे सब पता हे.. की वहा क्या हो रहा हे.. मुजसे कोइ बात छीपी नही हे.. लेकीन अच्छा हे.. सबको अपनी अपनी जरुरत हे.. तो सब चलता हे..

लखन : (हसते) अरे वाह.. काकी.. आपतो छुपी रुस्तम नीकली.. ठीक हे.. आपके बारेमे मे मेरी नइ बीवीसे ही जान लुगा.. लेकीन देखना.. इसमे आपके कही राज जान जाउगा.. हें..हें..हें..

सरला : (कामुक नजरोसे हसते) हां जानलेनां.. मेभी तो देखु तेरी नइ बीवी क्या क्या जानती हे.. सुन.. लेकीन जोभी जानो.. सीर्फ अपने तक सीमीत रखना.. कीसीको कहेना नही.. सीर्फ मुजे आकर बताना तुमने क्या जानलीया.. समजे..?

लखन : (हसते धीरेसे) ठीक हे काकी.. आजसे ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच रहेगी.. आइ प्रोमीस..

रमा : (मुस्कुराते चाइ देते) अरे दोनो सासु जमाइ क्या बाते कर रहे हो..? लीजीये लखनजी चाइ पीजीये.. ओर हां.. खाना खाकर जाइअ‍ेगा..

लखन : (चाइ लेते सामने देखकर हसते) अरे मुजे देर हो रही हे.. भाभी.. कोन्ग्रेच्युलेशन.. मुजे अभी अभी पता चला.. कब भतीजा दे रही हे..? हें..हें..हें..

रमा : (जुठा गुसा करते अ‍ेक मुका मारते) आप होनां.. बहुत ही.. क.. अब माजी बैठी हे तो क्या बोलु..?

सरला : (जोरोसे हसते) बहु.. तु कुछ मत बोल.. अब इनसे क्या सरमाना.. नंनदोइ हे तेरा.. अभी लखन बेटेको देरी हो रही हे.. उसे जानेदे.. उनसे बादमे लडलेनां.. हें..हें..हें..

रमा : (लखनकी ओर कातीलना मुस्कुराते) माजी.. आपहीने कहा होगा इसे..

सरला : (हसते) हां.. रमा.. सुन.. लखन बेटा केह रहा हे.. सृती बीटीयाको थोडी चोट लगी हे.. तो आजकल वो घरपे ही हे.. तो तुन ओर भानु सीधे उनके घरपे ही चले जाना.. वो वहा देख लेगी तुजे..

लखन : (खाली कप देते खडा होते) लीजीये भाभी.. काकी.. मे चलता हु.. देर हो रही हे.. ओर हां.. पुनोदीको छोडने आउगा तब नीलुको लेजाउगा..

सरला : (मुस्कुराते) ठीक हे बेटा.. रमा.. जा लखनको बहार तक छोडदे.. मुजे बाथरुम जाना हे..

कहेते सरला रमा ओर लखनकी ओर मुस्कुराते जान बुजकर बाथरुमकी ओर जाने लगी.. क्युकी वो लखन ओर रमाको अकेलेमे बात करनेका मौका देना चाहती थी.. ताकी कन्फर्म होजायेकी ये बच्चा कीसका हे.. क्युकी बाथरुम दरवाजेके पास ही था.. जो उनकी खीडकी बहारकी दीवारसे लगी हुइ थी.. सरला अंदर जाके खीडकीसे देखने लगी.. तो रमा बहार नीकलते ही जटसे लखनके पास आगइ.. तो लखन भी वही रुक गया..
 
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