Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 7 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ५५

भानु देवायतसे बात करते नीकल जाता हे.. तब देवायत अपने गोडाउनकी ओफीसमे चला जाता हे ओर भावनाको फोन लगा देता हे तब भावना देवायतका फोन देखतेही मनमे खुस होजाती हे.. ओर अपने रुममे फोन लेकर चली जाती हे फीर दरवाजा बंध करके अपने बेडपे लेटे बात करने लगती हे....अब आगे

भावना : (आंसु बहाते) जीजु.. अब आपको मुजसे बात करनेका टाइम मीला..? क्या मुजे पहेले फोन नही कर सकते थे..? वोभी आपके दोस्तने कहा होगा.. तभी फोन कीया होगा..

देवायत : (हसते) अरे नही मेनेतो अ‍ैसेही तेरी तबीयतका पुछने फोन कीयाथा.. बता कैसी हे तुम दोनोकी तबीयत कुछ तकलीफ तो नही..?

भावना : (आंसु पोछते) नही जीजु.. कोइ प्रोबलेम नही हे.. ये बताओ मंजुदीदी कैसी हे..ओर आप कैसे हो..? अबतो ठीकसे खातेभी नही होगे.. सारा दीन दोडधाम..

देवायत : मंजु मौसीके वहा हे सब ठीक हे ओर मेभी मस्त हु.. मेरी बहोत चीन्ता कर रहीहे तु.. ओर बता..

भावना : चीन्तातो करुगीनां मेरे अ‍ेक लौते जीजुहो आप.. मेरे फेवरीट.. हें..हें..हें.. सुनो.. जीजु मुजसे आपसे कुछ बात करनी हे.. लेकीन फोनपे बात करना उचीत नही हे आप घर चले आओ.. जब मे अकेली होउगी तब आपको फोन करुगी.. आप फौरन चले आना.. बहुत जरुरी बात हे..

देवायत : भावु.. क्या भानुके बारेमे बात करनी हे..? उनके बारेमे मे भी तुमसे बात करना चाहता हु..

भावना : जीजु मे आपसे बहुत नाराज हु.. आपको सब पताथा तो इनके साथ मेरी सादी क्यु करवाइ..? मे आपपे सबसे ज्यादा भरोसा करती हु.. इतनातो मेरे पतीपे भी नही करती..

देवायत : नही भावु तेरी सादी हुइ तबतक मुजे कुछ नही पताथा.. ये बाततो मुजे कुछ दीन पहेलेही मालुम हुइ.. मेरा यकीन कर.. कहोतो मे मंजुकी कसम खाता हु.. मुजे सचमे नही मालुम था..

भावना : नही जीजु मुजे आपपे पुरा विस्वास हे आप कसम मत खाओ.. मेरी कीस्मतही खराब हे.. अ‍ेकतो मुजे अपना प्यार नही मीला.. ओर उपरसे पतीभी अ‍ैसा मीला.. जीजु.. कास मेने पहेले ही हीमत करके अपने प्यारका इजहार करदीया होता.. तो मे जीसे प्यार करती थी उनके साथ खुसीसे जींदगी बीता रही होती..

देवायत : व्होट..? भावु क्या तुम सादीसे पहेले कीसीसे प्यार करतीथी..? तो फीर मुजे तब बताया क्यु नही..?

भावना : (आंसु बहाते धीरेसे) जीजु.. केसे बताती.. मे उनसे अपने दीलकी बात कहु इनसे पहेलेही वो कीसी ओरसे प्यारके बंधनमे बंध चुकेथे.. ओर उनकी सादीभी होने वालीथी.. जीजु मे अकेली पड गइ हु.. मुजे यहा घुटनसी हो रही हे आप कुछ कीजीये वरना मे मर जाउगी..

देवायत : पागल होगइ हो क्या..? अरे बाबा मे अ‍ेक दो दीनमे मीलने आता हुनां.. भावु तुजे मेरी कसम हे जो कुछ उल्टा सीधा सोचातो.. हमे अ‍ेक बार मीलने दे सब ठीक होजायेगा.. क्या अपने जीजुपे इतना भरोसा नही हे..?

भावना : जीजु बस अ‍ेक आपही हो जो मे सबसे ज्यादा भरोसा करती हु.. मेने आजतक आपको पुछे बगैर कोइ डीसीजन लीया हे क्या..? जीजु भानुने मुजे धोखा दीया हे.. अब मेभी पीछे नही हटुगी.. मेभी बदला लुंगी..

देवायत : भावु अ‍ेक बार हमे मीलके बात कर लेनेदे फीर तु जो डीसीजन लेगी मुजे मंजुर हे.. अ‍ेक बार उनकीभी सीचुअ‍ेशन समजले ओर इसमे तेरी मामीका कोइ दोस नही हे.. बेचारी अकेली हे क्या करेगी? तु ओरतोकी सीचुअ‍ेशन समज सकती हे.. कबतक बेचारी अकेली रेह सकती हे.. तु समज गइनां..?

भावना : (हसते) हां समज गइ.. जीजु मे भोली दीखती हु लेकीन हुं नही.. हें..हें..हें.. जीजु मुजे मामीसे कोइ सीकायत नही.. लेकीन मुजे सब सच बता देते.. ओर आपकल मामीपे बडा प्यार आ रहा हे..? मामीकी सीचुअ‍ेशन समज सकते हे तो क्या मेरी सीचुअ‍ेशन नही समज सकते..? मे आपकी कुछ नही लगती..?

देवायत : (हसते) हां मेरी अ‍ेक लौती सालीजो हो.. हें..हें..हें.., भावु तु समज.. तेरे साथ तेरा पती हे..ओर मामीका पती होनेके बावजुद ना होनेके बराबर हे.. आइ मीन..

भावना : हां.. जीजु मे समज सकतीहु वो आपका खास दोस्त हे तो इनकीही साइड बोलोगे मे कोन होती हु आपकी..? अबतो मेरी भी सीचुअ‍ेशन मामीके जैसे होगइ हे.. ठीक हे जीजु मुजे मेरी कीस्मतके भरोसे रहेने दीजीये.. आपसे बात करनाही बेकार हे..

कहेते भावुने फोन काट दीया तो देवायत बडाही दुखी हुआ.. ओर वो वापस भावनाको फोन करने लगा लेकीन हर बार रींगही बजती रही.. तब देवायतको बडी चीन्ता होने लगी की भावना कुछ उल्टा सीधा कदम ना उठाले.. ओर उसने लताको फोन लगा दीया तो लता देवायतका फोन देखके गभरा गइ ओर डरते फोन उठालीया..

लता : (सरमाते धीरेसे) हां भैया.. मे लता बोल रही हु.. कुछ काम था..?

देवायत : लता वो भावनाका फोन नही लग रहा.. जरा उनसे बात करवादे.. लगता हे उनका फोन बंध हे..

लता : (राहतकी सांस लेते) जी भैया.. अभी देती हु आप चालु रखना..

कहेते लता जटसे भावनाके रुमकी ओर जाने लगी देखातो दरवाजा बंध था.. तो लताने दरवाजा खटखटाया तब थोडीही देरमे भावनाने दरवाजा खोला लताने देखातो भावना रो रहीथी ओर आंसु पोछते दरवाजा खोलती हे तब लता उसे जीजुका फोन हे कहेके देती हे ओर वहासे चली जाती हे तब भावना फोनपे

भावना : (रोते) जीजु क्यु फोन कीया मुजे? अब कीसीसे बात नही करनी.. मुजे अपनी कीस्मतपे छोडदो..

देवायत : भावु बस अ‍ेक बार मेरी बात सुनले तु जो कहेगी सब करुगा.. मे भानुका पक्ष नही ले रहा.. तुजे मेरी कसम हे.. अगर तुने कुछ कीया तो.. क्या अ‍ेक बार मुजसे बात नही करेगी..? मुजे तुमसे मीलना हे..

भावना : (रोते) जीजु मेरीतो समजमे नही आ रहा हे मे क्या करु..? ओर आपने मुजे कसम क्यु दी.. आपको पता हे मेरे सबसे ज्यादा नजदीक आपही हो.. जीजु मे क्या करु? आपकी कसम मे नही तोड सकती.. प्लीज.. अ‍ेक बार मुजसे मीललो.. मे कीसीभी तराह आपसे मीलना चाहती हु.. प्लीज..

देवायत : भावु प्लीज.. रो मत.. मुजे नही पताथा बात इतनी सीरीयस होगी.. मे तुजे कलही मीलने आता हु..

भावना : जीजु बस अ‍ेक बार मीललो.. फीर मे आपको कभी कुछ नही कहुगी..

देवायत : बस अब रो मत.. मे तुजे कल मीलता हुनां.. भावु तेरी पोजीसन अभी कही घुमने फीरनेकी नही हे.. वरना तुजे अभीके अभी हवेलीपे बुला लेता.. क्या तुजे मौसीके घर जाना हे? मंजुभी वही हे दोनो कुछ दिन साथमे रहेना..

भावना : नही जीजु.. मे यही ठीक हु.. आप कलतो आही रहे हो.. वरना देखती हु.. जीजु में अ‍ेक बार अपने प्यारका इजहार ना करनेकी गलती कर चुकी हु.. अब दुबारा नही करुगी.. मे फोन रखती हु कल आपका इन्तजार करती हु.. हो सकेतो आप जल्दीसे आजाइयेगा..

देवायत : भावु तु क्या अबभी उसे प्यार करती हे..? अब तेरी सादी होगइ हे अ‍ेक बार सोचना.. मे नही चाहता भानु ओर तेरी लाइफ डीस्टर्ब होजाये.. ये गलत नही हे..?

भावना : नही जीजु.. अब मे मेरी लाइफ खराब नही करुगी.. अबतो यही रहेके सबकुछ करुगी.. अगर वो दुसरी सादी कर सकते हे तो मे अपने प्यारको क्यु नही मील सकती.. जीजु ये सब हम कल मीलके बात करेगे अभी रखती हु.. कोइ सुनलेगा तो गडबड होजायेगी.. चलो बाय..

कहेते भावनाने फोन रख दीया ओर लताको आवाज देके फोन दे दीया तब लता उनके सामने सवालीया नजरोसे देखने लगी.. तो भावनाने हसके उसे गले लगा लीया तो लताने हसके पुछही लीया..

लता : (धीरेसे) भाभी क्या हुआ..? क्या देवायतभाइसे आपकी सब बाते होगइ..? आइ मीन.. क्या आपने अपने दीलकी बात बतादी..?

भावना : (धीरेसे) नहीरे.. लता वो कल मुजे मीलने आ रहे हे तब बता दुगी.. क्या तु खुस हे..?

लता : (सरमाते हसते) हां भाभी..बहुत खुस हु.. कास भाइ आपके प्यारको कबुल करले.. तो सबसे ज्यादा खुसी मुजे होगी.. भाभी अ‍ेक बात कहु..? आप भानुभाइको मामीके साथ सादी करने दो.. ताकी आपभी अपनी लाइफ खुलके जीसको.. समज गइनां मेरी बात..

भावना : (सरमाते हसते) चल देखती हु.. तुजे बडी जल्दी हे हमे मीलवानेकी.. हें..हें..हें.. ताकी लखनके साथ मीलनेका तेरा रास्ता साफ होजाये.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते मुका मारते) क्या भाभी..आपभी.. अब मुजे नही मीलना उनसे क्युकी सादीमे दीनभी कीतने रेह गयेहे.. अबतो जोभी मीलना जुलना होगा हम सादीके बादही मीलेगे.. माइ केह रहीथी वो जल्दी हमारी सादी कर देना चाहती हे.. पता नही उनको इतनी जल्दी क्यु हे..

भावना : (जोरोसे हसते) हां तो सही हेना.. वरना पेट फुलाके सादीके फेरे लेती होगी.. हें..हें..हें..

कहातो लता सरमाके हसते हुअ‍े भावनाको पीठमे मुके मारने लगी तो भावना बेडके पीछे भागने लगी ओर लता उनके पीछे मारनेके लीये दोडने लगी दोनोही मस्तीया करते इधर उधर भागती रही तभी भानु अंदर आगया तो लता सरमाके हसते हुअ‍े अपने रुममे चली गइ.. ओर भावनाभी सीरीयस मुह करते धीरे धीरे चलते कीचनमे चली गइ.. तब भानु हाथ मुह धोके अपनी माइके पास चला गया ओर खटीयापे बेठके सरलासे बाते करने लगा..

भानु : माइ वो मामीका फोन आयाथा.. सायद मुजे कल मामाको लेके होस्पीटल जाना पडे.. उनको अब बहुत ही खुनकी उल्टीया होने लगी हे.. सायद तबीयत कुछ ज्यादाही खराब हे..

सरला : (गहेरी सांस लेते) हे भगवान.. अब इनको क्या होगया.. अ‍ेकतो इधर सादीकी तैयारीया करनी हे ओर उपरसे तेरा ये मामा.. चल ठीक हे दीखा लेना कही जाके.. सादीमे कोइ बीघन ना आजाये...

भानु : माइ मेने देवुसे कहा हे वो कल बाबाको मीलने जायेगा तो तारीख पकी करवाके आजायेगा ओर मामाकी बातभी कर लेगा.. माइ मेरे खयालसे आप अ‍ेक बार मामाको मीललो.. सायद आप उसे दोबारा नही मील सकोगी.. हो सकेतो कल ही मेरे साथ चलो..

सरला : तु ठीक केह रहा हे.. चल ठीक हे.. मे भी चलती हु.. क्या पता दुबारा उसे मीलनेका मौका मीले ना मीले.. कीतने साल होगये हम नही मीले..

मा बेटेकी यही सब बाते लता सुन रहीथी ओर मनही मन खुस होते वो कीचनमे चली गइ.. तो भावना वही खडीथी ओर धीरेसे भावनाको माइ ओर भानुके बीच हुइ सब बाते बताने लगी जीसे सुनके भावना मनही मन खुस होने लगी.. क्युकी इन दोनो नही होगे तो कलही देवायतको फोन करके बुला लेगी ओर सब बाते खुलके कर सकेगी.. यही सब सोचते वो मुस्कराती रही ओर खुसीके मारे लताके गालको चुम लीया तो लता भी सरमाके हसने लगी.. ओर भावनाके गले लग गइ.. फीर वही पडी सब्जीया काटने लगी..

लता : (सब्जीया काटते धीरेसे) भाभी कल अच्छा मौका हे.. आप देवायतभाइको बुलालो.. ओर यही सब बाते करलो..

भावना : (सरारतसे हसते) नही.. नही बुला सकती.. क्युकी तुमभी तो होगी.. वो सरमायेगे.. हें..हें..हें..

लता : (जुठ मुठका गुसा दीखाते) हां..हां..बडी आइ सरमकी पुछ.. मुजसे डरनेकी जरुरत नही हे.. मे मेरे रुममे ही रहुगी.. बात करती हे.. वो नही सरमायेगे लेकीन कल आप मत सरमाना.. वरना कलभी अपने दीलकी बात नही करपाओगी.. फीर मत कहेना लता मे बात नही करपाइ मेरी कीस्मत खराब हे वगेरे..वगेरे.. हें..हें..हें..

भावना : (सरमाके हसते पीठमे मुका मारते) चल जुठी कहीकी.. मे नही सरमाती कल पका सब केह दुगी.. बस.. अबतो खुस..? ओर हां खबरदार जो अपने रुमसे बहार नीकलके हमारी बात सुनलीतो..

लता : (हसते) देखना अबतो सब बाते छुपकेसे सुनुगी.. देखुतो सही मेरी सहेली केसे अपने दीलकी बात कहेती हे.. हें..हें..हें..

भावना : (जुठ मुठ बडी आंख करते) लता अ‍ेक मारुगी.. क्या मेरी सहेली नही हो..? प्ली..ज..

लता : (भावनाको गले लगाते) अरे मेरी भाभी नाराज होगइ चलो नही सुनुगी मेतो मजाक कर रहीथी..

दोनोही अ‍ैसी प्यार भरी मस्तीया करते बाते करती रही ओर लता खाना बनाती रही.. तब दुसरी ओर देवायतभी भावनासे बात करके थोडा रीलेक्स होगया ओर वो घरकी ओर नीकलने लगा तो लखनभी साथ चलने लगा ओर दोनो हवेलीपे आगये ओर फ्रेस होगये.. तब पुनम अपने रुममे आज रातकी सब तैयारीया कर चुकीथी वो अच्छेसे पानीमे इतर डालके नहाके हल्कासा शींगार कर रही थी..

तभी लखन ओर देवायतकी आवाज सुनके जटसे बहार आगइ तो देवायत उसे देखता ही रेह गया.. आज पुनम उसे बडी अप्सराकी तराह लग रहीथी जीसे देखतेही उनकी पेन्टमे लंडकी हरकत सुरु होगइ ओर पुनमको देखते जटके मारते खडा होने लगा तो पुनमने देखलीया.. ओर सरमाके देवायतकी ओर हसने लगी तो देवायतभी हसते अपने लंडको पेन्टमे हाथ डालके अ‍ेडजेस्ट करने लगा ओर जटसे अपने रुममे चला गया..

तो लखनभी उपर अपने रुममे चला गया वो आज ट्रेक्टर चलाके काफी थका हुआ लग रहाथा तो जातेही सीधा बेडपे गीर गया ओर आंख बंध करके लेटा रहा.. तब दया ओर रजीया खाना बना रहीथी तो पुनम धीरेसे देवायतके रुममे चली गइ.. तब देवायत चेन्ज कर रहाथा तो पुनम धीरेसे देवायतके पीछे चली गइ ओर पीछेसेही देवायतको बाहोमे भरलीया तब देवायत पलट गया ओर पुनमको जोरोसे बाहोमे भीचलीया





पुनम : (धीरेसे) भाइ आप देर रात सब सोजाये तब मेरे रुममे आजाइअ‍ेगा.. मे दरवाजा खुला रखती हु..

देवायत : (होंठ चुमते) ठीक हे डार्लींग आज तैयार रहेना पुरी रात सोने नही दुगा.. आज क्या मस्त लग रही हे तु.. दील करताहे तुजे अभी प्यार करलु.. बीलकुल मेरी परी लग रही हे..

पुनम : (सरमाते हसते) भाइ तो मेभी कहा सोना चाहती हु.. आज ही मेरा सब काम नीपटाना हे.. आप जल्दी आजाइअ‍ेगा.. ओर ये परी सीर्फ आपकी हे.. आप जब चाहो इस परीको प्यार कर सकते हो..

कहेके देवायतके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी ओर जटसे अलग होते बहार भाग गइ तब देवायत मुस्कराता अपने लंडको सही करते बहार चला गया तो पुनम खाना नीकाल रहीथी ओर देवायत सोफेपे बेठ गया ओर टीवी चालु करके देखने लगा.. ओर सोचता रहा..

देवायत : (मनमे) पीछले अ‍ेक महीनेमे कीतना कुछ बदल चुकाथा जो रीस्तेको मे इमानदारीसे नीभा रहाथा अब उन रीस्तेके माइने ही बदल चुके थे.. आज मेरी बहेन मेरी मासुका.. मेरी हमसफर होगइ हे.. जो पीछले तीन दीनोसे मेरा बीस्तर गरम कर रही हे.. ओर उनकी चुत.. आहा.. क्या कहेना.. कीतनी कसी हुल हे.. जी चाहता हे उस्े दिन रात चोदताही रहु.. ओर दीखनेमेभी कीसी हिरोइनसे कम नही हे.. अ‍ेकदम गोरा बदन संतरे जेसे चुचे.. बस उनको चुसता ही रहु..

पुनम : भाइ चलो खाना रेडी हे.. (जोरोसे आवाज देते) लखनभैया चलो आजाओ खाना रेडी हे..

तब देवायत टीवी बंध करके डाइनींगपे जाके बैठ जाता हे.. तब देवायतको नही मालुमथा की वो जो सोच रहा हे.. वो पीछली दो पीढीयोसे उनके खानदानमे हो रहा हे.. तभी लखन भी दोडके नीचे आजाता हे तो सब अपनी अपनी जगाहपे बेठ गये तो पुनमभी देवायतकी बाजुमे बैठ गइ ओर सबको खाना सर्व करने लगी.. तभी उनको अपने पैरपे देवायतका पैर महेसुस हुआ ओर वो कामुक मुस्कानके साथ सबको खाना देती रही..

उनको पताथा की उनका भाइ उनके पीछे पागल हो चुका हे.. तब उनकी जांगपे देवायतका हाथ महेसुस हुआ जो इनकी जांगको नीचेसे हाथ डालके सहेला रहा था तब पुनमकी सांसे तेज चलने लगी ओर वो आजु बाजु नजर घुमाते सरमाके खाना खाने लगी.. ओर देवायतके हाथपे हाथ रखके उनको पकडके अपनी जांगके बीच फसादीया.. तब इनको कंट्रोल करना मुस्कील होने लगा.. ओर उनकी नाजुक चुतकी पंखडीया फडफडाते पानी छोडने लगी.. तब..





पुनम : (जोरोसे) दया रजीया तुम दोनोभी खाना खाने बेठ जाओ यहा मे भाइको सब दे दुगी..

रजीया : जी छोटी मालकीन..

ओर दोनोभी कीचनके बहार नीचे फर्सपे बेठके खाना नीकालके खाने लगती हे तब उधर आज भानुके घरभी सब खाना खाते बाते कर रहेथे.. तब सरलाने कल भानुके साथ मामाके पास जानेकी बातकी तो लता कातील नजरोसे भावनाकी ओर देखके हसने लगी.. तो बातो बातोमे भावनानेभी लताके साथ सोनेको केह दीया ताकी दोनो मीलके भावेश ओर बच्चीका बरोबर खयाल रख सकेतो सरलाने भी हां केहदी..

सरला : ठीक हे बेटा.. तुम दोनो साथमे सोजाना ताकी भावेश ओर बच्चीका साथमे खयाल रख सको.. हमतो कल जा रहे हे.. देखतेहे साम तक वापस आजायेगे.. तुम दोनो अच्छेसे सब बंध करके सोना ओर रहेना..

लता : (हसते) माइ हम दोनोकी फीकर मत करो.. मे सब सम्हाल लुगी.. ओर भाभीसे कहो आरामभी करती रहे.. सारा दिन घुमती रहेती हे.. आरामही नही करती.. हें..हें..हें..

सरला : हां बहु अभी दो दीन ही हुअ‍े हे इधर उधर मत घुमाकर अभी कमजोरी होगी तो कही गीर बीर जायेगी.. तो लेनेके देने पडेगे..

भावना : (सरमाते हसते) नही माइ मेतो अ‍ैसेही आइथी.. सारा दीन सोतीतो रहेती हु.. बस इनसे बाते करते टाइम पास कर रहीथी.. ताकी इनकोभी अकेलाना लगे..

सरला : बेटी बस अ‍ेक बार डाक्टरको दीखादे फीर भलेही घरमे घुमो.. हमारे जमानेमे तो ओरते डीलीवरी करके सीधेही खेतोमे काम करने चली जातीथी.. तब कहा ये होस्पीटल बोस्पीटल थी बस गांवकी दायणको बुलाके डीलीवरी करवा लेते थे.. सुबह डीलीवरी हुइ ओर सामकोतो ओरते घरका कामभी करने लगती थी.. मे भानुके टाइमभी उसी दीन कामपे लग गइथी..

लता : माइ वो आपका जमाना था.. ओर आजका जमाना अलग हे.. तब आप खोतोमे काम करती थी ओर हम घरमे पडी रहेती हे कुछतो फर्क होगा..

सरला : (हसते) हां तु तो सहेरकी होगइ हेनां.. तेरी भाभीके साथ रहेके तुभी सीख गइ.. हें..हें..हें..

अ‍ेसेही बाते करते सब खाना खा रहेथे.. तब भानु बडाही टेन्शनमे खा रहाथा ओर अपनीही सोचमे डुबा हुआथा उनको पताभी नही थाकी सब क्या बाते कर रहेहे.. वो बहुतही गहेरी सोचमे डुबा हुआथा उनकोतो बस अ‍ेकही विचार आ रहाथा की मामाके जानेके बाद वो मामीसे केसे सादी करे.. ओर घरमे सबको कैसे बात करे.. वोतो रमाको जल्दसे जल्द सादी करके घर ले आना चाहता था..

बस यही सोचमे डुबा हुआथा.. ओर खाना खा रहा था.. अबतो उनको भावनाके बेरुखी बर्तावसे नफरत होने लगीथी वो मनसे ओर दीलसे भावनासे दुर होता जा रहाथा.. उनकोभी पता चल गयाथा की भावना अब उसे माफ नही करेगी.. तो पुरी जींदगी उनके साथ कैसे कटेगी यही सब सोचते उनका दीमाग सुन हो गयाथा..

सरला : भानु क्या सोच रहा हे? खानातो खाले.. अ‍ेसेही नीवाला लेके बैठा हे तेरे मामाका जो होनाहे होगा तु क्यु चीन्ता करता हे.. हम तेरी मामी ओर नीलमको इधर लेआयेगे.. तु फीकर मत कर..

भानु : (खाना खाते मनमे सोचते) माइ अब तुजे कैसे कहु मुजे मामाकी चीन्ता नही हे तेरी दुसरी बहुकी चीन्ता हे.. जो मे उसे सादी करना चाहता हु.. कास तेरी दोनो बहुअ‍े मीलके साथमे रहे तो कीतना अच्छा हे..

सरला : भानु कल सुबह हम जल्दी जायेगे ताकी साम तक वापस आसके.. इधरभी तो काम होगा..

लता : माइ आरामसे मामाको मीलके आना.. ओर हो सकेतो अ‍ेक रात उधर उनके साथ रेहलो.. कीतने साल हो गयेहे आप मायके गइही नही.. हें..हें..हें..

सरला : (हसते) माइके वाली.. अब वहा तेरे मामा मामी के अलावा हे ही कोन..?

लता : माइ फीरभी मायका मायका होता हे.. क्यु भाभी.. आपभी कीतने दीन होगये नही गइ..

भावना : (हसते) माइ ये कबसे हम दोनोको मायके भगानेकी जीद क्यु कर रही हे..? हां अब समजी इनकी सादीजो होने वालीहे ताकी येभी यहा अपने माफकेमे आ सके.. हें..हें..हें.. लखनको कहुगी इनको मत आने देना हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते पीठमे मुका मारते) भाभी.. अ‍ेक मारुगीनां.. टांग खीचनेका अ‍ेकभी मौका नही छोडती.. माइ इनको कुछ कहोनां..

सरला : (हसते) मे तुम ननंद भौजीके बीच नही पडती.. वो तुम दोनो जानो.. बस भगवान करे तुम दोनो ननंद भोजाइका प्यार युही बना रहे..

भावना : (हसते) माइ अब आप लताकी चीन्तातो करना छोड ही दो मे हुनां.. इनका सब खयाल मे रखुगी..

कहातो भानुने सर उठाके अ‍ेक बार भावनाकी ओर देख लीया ओर उसे आशाकी अ‍ेक कीरण नजर आने लगी.. भावना लताका खयाल रखेगी मतलब वो मुने छोडके नही जायेगी.. यही सोचते वो खुस होते पानी पीने लगा ओर हाथ धोके अपने रुममे चला गया.. तब भावना ओर लता दोनोकोही नही मालुम थाकी दोनोके बीच क्या बाते होगइ सब भावनाओमे बहेकते बाते कर रहे थे....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ५६

कहातो भानुने सर उठाके अ‍ेक बार भावनाकी ओर देखलीया ओर उसे आशाकी अ‍ेक कीरण नजर आने लगी भावना लताका खयाल रखेगी मतलब वो मुने छोडके नही जायेगी.. यही सोचते वो खुस होते पानी पीने लगा ओर हाथ धोके अपने रुममे चला गया तब भावना ओर लता दोनोकोही नही मालुम थाकी दोनोके बीच क्या बाते होगइ सब भावनाओमे बहेकते बाते कर रहेथे....अब आगे

इधर हवेलीपे सब खाना खा रहेथे तब देवायतकी हरकतोकी वजहसे पुनम काफी गरम होचुकी थी अब उनसे अ‍ेक मीनीटभी देवायतसे दुर रहेना मुस्कील होने लगा.. ओर डीनर फीनीस कीया तब देवायत पुनमको कहेके गांवमे घुमने चला गया तो पुनमने उसे सबसे छुपके धीरेसे जल्दीसे वापस आजानेकी बातकी तो देवायत हसते हुअ‍े रमेशके घरकी ओर चला गया..

तो लखन उपर अपने रुममे चला गया.. उधर दया ओर रजीयाभी खाना खाके सब बर्तन उठा रहीथी ओर सब काम जल्दीसे नीपटाना चाहती थी.. ताकी मौका मीलेतो देवायतसे अपनी प्यास बुजा सके.. दोनोही बाते करते सब काम जल्दी नीपटाने लगी.. तब पुनम जटसे अपने रुममे चली गइ ओर दरवाजा बंध करके बाथरुममे भाग गइ ओर कमोडपे बेठते ही अपनी चुतमे उंगली डालके आंख बंध करलेती हे ओर देवायतके लंडको इमेजींग करते जोरोसे हीलाने लगी.. जबसे देवायतने छेडाथा तबसे उनको कही चेइन नही मील पा रहाथा..वो जल्दसे जल्द देवायतसे मीलन करना चाहती थी..





उधर देवायत उनके दोस्त रमेशके धर गया तो वोभी खाना खाके टीवी देख रहाथा तो देवायतको देखते ही टीवी बंध करते खुस होगया ओर उनको गले मीलके सोफेपे बीठा दीया तब चारुभी देवायतकी आवाज सुनके खुसीके मारे रुमसे बहा नीकली.. ओर देवायतकी ओर देखते कातील स्माइल करते नमस्ते करते रमेशके साथ बेठ गइ.. आज कीतने दीनोके बाद देवायतको देखा तो खुसीसे हसती रही..

चारु : कहो देवरजी मंजुभाभी ओर बच्चेकी तबीयत कैसी हे..? दोनो ठीकतो हेना..? क्या घरपे आगये..?

देवायत : (हसते) भाभी दोनोही मजेमे हे.. ओर मौसीके घर रुके हे, अ‍ेक बार डोक्टरको दीखाले फीर इधर आजायेगे..

चारु : (हसते) अरे मुजे बुलालीया होता.. मेभी होस्पीटलमे साथ आती.. इधर वंदना हेतो कोइ दीकत नही थी.. मेने मंजुभाभीसे भी कहाथा.. यहाभी घरपे बेठे बेठे क्या करती मे.. सारा दीन फ्रि रहेती हु..

देवायत : नही भाभी वो मौसी आगइ थी तो दीकत नही थी.. खैर कहीये कैसे हे आप सब..?

रमेश : भाइ बस वोही रुटीन चल रहा हे.. आप कहो सादी कब रखी हे..? कमसे कम पुनमदीदी की सादीतो अ‍ेन्जोग करेगे हम.. आपसे ज्यादा हमे ज्लदी हे.. खास करके आपकी भाभीको.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) कल हमारे बाबाको मीलने जाता हु देखता हु वो कोनसी तारीख देते हे.. बस कुछ फ्रि होजाये तो सहेरभी जाना हे अब आप सब सम्हाललो.. ओर हो सकेतो कलही मेरे साथ चलो.. हम बाबाको भी मील लेगे.. ओर सहेर जाके उन अधीकारीकोभी मील लेगे जो मेरे जान पहेचानके हे.. क्या कहेते हो..?

रमेश : (मनमे खुस होते) भाइ नेकी ओर पुछ पुछ.. जरुर.. कहो हमे कब नीकलना हे..?

देवायत : भाइ कल दो पहोरको खाना खाके सीधे ही सहेर नीकल जायेगे.. ओर वापसीमे बाबाको मीलके फीर मंजुके पास होकर आयेगे.. मौसीका गांव हमारे रास्तेमे बीचमे ही आता हे..

चारु : (हसते) तो देवरजी मुजेभी साथ लेजाइअ‍े.. मुजे भाभीके पास छोड देना, ओर दोनो चले जाना फीर वापसीमे मुजे लेते आना.. तो मे भाभीसे भी मील लुगी ओर हमारी पुनमका ससुरालभी देख लुगी हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां ये बढीया रहेगा.. आपभी तैयार होजाना.. हम आपको लेकर जायेंगे.. हें..हें..हें..

रमेश : (हसते) भाइ देखलो अगर सब डीस्टर्ब होता हे तो रहेने दो.. वो यहा मील लेगी..

देवायत : अरे नही नही कोइ डीस्टर्ब नही.. भाभी आप चलना मे दोपहोरको लेने आउगा..

रमेश : चारु अब बाते ही करेगी की हमे चाइ बाइ भी पीलायेगी..

चारु : (देवायतको कातील नजरोसे हसते देखेत) जी.. अभी बनाके लाइ.. कीतने दीनो के बाद आये हे जनाब.. लगता हे हमारे लीये टाइमही नही मीलता.. आते ही नही..

कहेते खडी होके कातील स्माइल करते कीचनमे चली गइ.. तभी ट्युशन देके वंदना घरपे आइ तो देवायतको देखते बडीही सरमाने लगी ओर मुस्कराते नमस्ते करते अपने रुममे चली गइ.. तब देवायतको पुनमकी कही हुइ बात याद आने लगीकी वंदनाभी उसे प्यार करतीहे.. जो मेरी सादीकी वजहसे उसने अपनी सादी नही करनेका फैसला करलीया था.. तब ये सोचते देवायतको बडा ही दुख हुआ.. ओर वो पहेली बार वंदनाकी ओर आकर्सीत हुआ.. ओर मौका मीलतेही उनसे बात करनेका फैसला करलीया..

रमेश : भाइ वो रश्मीभाभीको लेके जाना पडेगा.. उनकाभीतो मुनीमकी जगाह पका करना हे..

देवायत : भाइ अभीतो हम सीर्फ उनको मीलने जा रहे हे.. देखतेहे वो क्या कहेते हे.. रही बात रश्मीभाभीकी तो वो सरपंच ओर कमीटीके ठरावसेही होजायेगा.. तब ठरावके साथ हमे वापस जाना पडेगा तब वंदनाको भी साथ ले लेगे.. क्युकी उनकीभी सरकारी टीचर्सकी नोकरीकी बात करनी हे..

रमेश : (मनमे खुस होते) स्योर भाइ.. हम चलेगे..वेसे वो लडकेका क्या हुआ वो ठीक हुआ की नही..?

देवायत : अब बेचारेकी हडी टुटी हे.. तो अ‍ेक महीनातो लगेगाही बेचारा खटीयामे पडा हे उनका खर्चा पानी दे रहा हु.. बहुतही अच्छे लोग हे.. पता नही राघवकी चुंगलमे कैसे फस गये.. उनकी बीवीभी बहुत भोली भाली हे.. कमीना उनका भी फायदा उठा रहाथा.. अब खटीयामे पडा हे.. ओर अपना पाप भुगत रहा हे..

रमेश : भाइ आपतो राजा हो.. भलेही यहा कोइ भी सरपंच बनजाये लेकीन आपही राजा रहोगे जो सबका अच्छेसे खयाल रखते हो.. मे आपकी तारीफ नही करता पर सच हे वो बता रहा हु.. आप वो कबीले वालोकाभी बहुत खयाल रखते हो.. सब आपकी बात मानते हे.. बस मुजे गाइड करते रहेना.. ताकी इसी बहाने लोगोकी सेवा करता रहु.. अब जीतना पैसा कमानाथा कमा लीया.. दुकानतो आदमी ही चला रहा हे बडाही इमानदार लडका हे.. बस वंदनाकी नोकरी पकी होजाये.. तो फीर गंगा नहाये..

देवायत : नही भाइ ये सब हमारे पुर्खोकी महेरबानी हे.. आप अ‍ेक काम करो सरपंच बनतेही अ‍ेक नेकीका काम करदो.. गांवमे कीतने लोग हे जो जीनकी जमीन सरपंचने ब्याजके पैसेके बदले धोखेसे लेली.. उनकी लीस्ट मुजे चाहीये.. वो नेक काम आपही अपने हाथोसे उनकी जमीन वापस लौटाके करदो..

रमेश : (खुसीसे) भाइ वोतो मे पता कर लुगा.. क्या राघवके पाससे आपके हाथमे कुछ आया..?

देवायत : नही लेकीन रश्मीभाभीने कहा हे.. वो सबकी जमीन वापस लौटाना चाहती हे.. बडी ही नेक हे..

चारु : (चाइ लाके देते) तबतो सोनेपे सुहागा.. हमारी रश्मीभाभी बहुतही अच्छी हे पता नही इस लंगुरके हाथ कैसे लग गइ.. मेरी मंजु भाभी ओर रश्मीभाभीकी आपसमे बहुत ही पटती हे.. लीजीये चाइ पीजीये..

तभी चारु देवायतको चाइ देते उनेके हाथको छुके दबा देती हे ओर देवायतके सामने सरारतसे हसने लगती हे.. फीर रमेशको चाइ देते वही उनके पीछे साइडमे बैठ जाती हे ताकी देवायतको देखते रमेश उसे देखना ले.. तब रमेश ओर देवायत बात करने लगे तो चारु देवायतको रमेशसे छुपके अकेलेमे मीलनेका इसारा करती रही कभी अपने होंठ अपनेही दातोमे दबाके कामुक इसारा करती तो कभी मौका मीलतेही देवायतको आंख मारके हसने लगती..

चारु बहेतही कामुक ओरत थी.. चारु रमेशके साथ सादी करके आइ.. ओर वंदनाको जन्म देकर ओर ज्यादा खुबसुरत ओर गदराये बदनकी मालीक होगइ.. रमेश देवायतसे उमरमे काफी बडाथा.. लेकीन सरीरसे अ‍ेकदम पतलाथा.. ओर देवायतसे उनकी खुब जमतीथी.. चारुने पहेली बार देवायतको देखा तबसेही वो देवायतके पीछे पागलथी.. ओर देवायतको रीजानेका अ‍ेकभी मौका नही छोडती.. जबभी देवायत रमेशके घर आता वो अपना जलवा दीखानेको नही चुकती..

ओर अ‍ेक दीन घरपे रमेश नही था ओर देवायत उनसे मीलने आगया.. तब चारुने आखीर अपनी मंजीलको पालीया.. वो देवायतसे अपने तनकी आगको बुजानेमे कामयाब होगइ.. ओर उस दिन देवायतने उनकी हालत खराब करदी.. दो दिन ठीकसे चलभी नही पाइ.. तबसे दोनोके बीच अ‍ेक नया रीस्ता बन गया ओर दोनो मौका मीलतेही अ‍ेक होजाते.. ओर सबकुछ कर लेते.. ओर ये रीस्ता आजभी कायम था.. चारु आजभी देवायतके पीछे इतनीही पागल थी..

देवायत : चलो भाइ मे चलता हु कल दोपहोरको दोनो तैयार रहेना..

चारु : (डबल मीनींग) देवरजी मेतो हमेसा रेडी ही रहेती हु.. आप अपने भाइको कहो टाइमपे तैयार रहे..

रमेश : (हसते) हां भाइ हां.. मे भी रेडी रहुगा.. चलो बाय..

तब रमेशभी देवायतको छोडने अपने दरवाजे तक गया तो चारुभी साथ चलने लगी ओर मौका मीलतेही देवायतका हाथ पकडके अपने बुब्सपे रखदेती हे ओर हसने लगती हे.. तब देवायतभी हसते वापस हवेलीपे आगया तो सब सोचुके थे.. जेसेही अंदर आया तो अ‍ेक साया उनका हाथ पकडके उसे लेनाजे लगा..

दया : (धीरेसे) मालीक चुपचाप मेरे साथ चलो.. सब सोगये हे आज अच्छा मौका हे हमे ठंडी करदो..

देवायत : दया लेकीन पुनम जागती होगी.. अभी मे रुममे देखकर आता हु तु चल.. रेडी रहे..

दया : छोटी मालकीनतो रुम बंध करके सोगइ हे.. मे देखके आइ हु ओर छोटे मालीकतो कबसे सो गये हे.. आप फटाफट आइअ‍े हम दोनो रेडी रहेती हे.. कीतने दीनोके बाद मीले हो.. अबतो आतेही नही..

तभी देवायत जाके चेन्ज करने लगता हे ओर अ‍ेक कामोतेजक गोली पानीके साथ ले लेता हे ओर चुपचाप दया ओर रजीयाके रुमकी ओर चला जाता हे.. तब दोनोही बेडपे सब कपडे नीकालके रेडी होके लेटी थी तब देवायतके जातेही दोनो उनपे टुट पडी ओर देवायतके चहेरेको चारो ओर चुमने लगी..

तब देवायतभी अपना गाउन नीकालके दोनोको चुमते प्यार करने लगा.. ओर थोडी ही देरमे रजीयाकी चुतमें पीछेसे लंड डालके जबरदस्त चुदाइ होने लगी.. ओर रजीयाकी हल्की चीखे सुनाइ देने लगी.. तब दयाभी दोनोके नीचे लेटते देवायतके होंठ चुमती रही..





तबतक गोलीनेभी अपना असर दीखाना सुरु करदीयाथा रजीयाकी इतनी धमाकेदार चुदाइकी वो तीन बार जड चुकीथी तब देवायत अबभी उसे चोदेही जा रहाथा तब रजीयाकी हालत पतली होने लगी.. ओर देवायतने उसे कसके बाहोमे भीचलीया ओर रजीयाकी चुतको अपने गाढे पानीसे भरने लगा.. तब रजीया अ‍ेक बार फीर जड गइ तब वो हीलनेकी स्थीतीमे भी नही रही ओर वो अ‍ेसेही लगभग बेहोसीकी हालतमे वही पडी रही.. तब दया देवायतको लेकर साइडमे चली गइ.. ओर खीचके अपने उपर चडालीया..

फीर देवायत दयाको चोदने लगा तो दयाभी सीसकारीया करते बीचबीचमे चीखती रही दोनोही देवायतके लंडको ज्यादा बरदास्त नही करपाती थी.. ओर अ‍ेकही बारमे ढेर होजाती थी.. आज दोनोने ही मन बना लीयाथा की देवायतके आतेही उनसे चुदवायेगी तबसे दया देवायतका वेइट करते आंगनमे बेठीथी ओर अब वो देवायतके नीचे लेटे जबरदस्त तरीकेसे चुदवा रही थी..





अभी तक दयाभी दो बार जडके अबभी देवायतसे चुदवा रहीथी.. तब देवायत उसे कसके बाहोमे भर लेता हे तो दयाभी देवायतको बाहोमे भीच लेती हे ओर दोनोही अ‍ेक साथ जडने लगते हे.. तब दयाकी चीख नीकल गइ क्युकी देवायतका लंड उनकी बच्चेदानीसे टकरा गयाथा फीर दोनोही अ‍ेसे थोडी देर पडे रहे तब दया पुरे पसीनेसे भीग चुकीथी ओर उनका पुरा सरीर दर्द कर रहाथा तब देवायत उपरसे हट गया..





तब दया लेटेही रही.. उनकी चुतकी इतनी जबरदस्त चुदाइ हुइथी की अभीभी फडफडा रहीथी.. ओर चुतसे देवायतका कमरस बहारकी ओर टपक रहाथा.. फीर अपनी चुत अपने नीकरसे साफ करने लगी ओर अ‍ेक नजर रजीयाकी ओर डाली तो रजीया बेसुध जेसी हालतमे पडी सो चुकीथी.. तब दया बेडपे बेठ गइ ओर देवायतका हाथ पकडके अपने पास खीचके बीठा दीया ओर उनसे बेठे ही लीपट गइ ओर धीरेसे बाते करने लगी..

दया : मालीक रजीया केह रही थी अब उसे बच्चा चाहीये.. हो सकेतो उनकी कोख भरदीजीये..

देवायत : लेकीन अब उसे बच्चा क्यु चाहीये क्या करेगी..? यहा कीसीको पता चलेगातो सबको क्या कहेगी?

दया : मालीक आप उसे बच्चा देदो वो सब खुद देख लेगी.. बेचारीको बच्चेकी बडी आस हे ओर वेसेभी यहा सबको पता हे आपने हम दोनोको सम्हाल लीया हे ओर हमारी प्यास बुजाते हो.. तभी तो हमे बहार मुह मारने की जरुरत नही रहेती.. हम आपसेही संतुस्ट होजाती हे बस हम दोनोकी अ‍ेकही तम्मना हे की हम दोनोकी गोद भर जाये.. पता नही हमारे नसीबमे बच्चेका सुख हे की नही.. बस हमारी तम्मना पुरी करदो..

देवायत : वोतो ठीक हे दया लेकीन कोइ केहेगाकी कीसका बच्चा हेतो तुम क्या कहोगी..? कभी सोचा हे..?

दया : मालीक अगर अ‍ैसा हेतो हम दोनो कही दुर चली जायेगी.. बस सहेरमे कोइ छोटा मोटा काम करलेगी आपकीतो सहेरमे बहुत सारी पहेचान हे.. हमे कीसीभी जगाह नोकरीपे रखवा दीजीयेगा..

देवायत : नही दया तुम दोनोको कही जानेकी जरुरत नही.. मे मंजुसे बात कर लुगा फीर कुछ करते हे..

दया : मालीक तबतो बडी महेरबानी आप फीकर मत करना हम आपका नामतो कभी नही लेगी..

देवायत : नही दया मे बच्चेको नाजायज नही रहेने दुगा.. तु फीकर मत कर मे सहेरमे अ‍ेक बंगलो ले रहा हु तब तुम दोनो वही चले जाना.. ओर हमारे बंगलेको सम्हालना कोइ कहेतो कहेना ये मेरे बच्चे हे..

दया : (खुस होते) तबतो आपकी बडी महेरबानी लेकीन आपका नाम बतानेकी नोबत नही आयेगी.. हम लोगोको जवाब दे देगे.. बस आजकी तराह हमे खुस करते रहीये हमारे लीये यही बहुत हे..

देवायत : दया मे मौसीसे सादी कर रहा हु.. तब पुनो धिरेनके साथ वहा अकेली होगी.. तो मे चाहता हु तुम इनके साथ चली जाना.. ताकी पुनोको अकेला ना लगे ओर उनका काममे हाथभी बट जायेगा..

दया : (होंठ चुमते) मालीक ये आप क्या केह रहे हे..? हमारे होते हुअ‍े हम छोटी मालकीनसे थोडी काम करवायेगे.. ठीक हे मेही चली जाउगी.. लेकीन वहाभी आपको आके मुजे अ‍ेसेही खुस करना पडेगा..हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) चल ठीक हे आगे देखते हे.. क्या होता हे.. बस तु अ‍ेकही हे जो मेरी राजदार हे.. ओर सुन चाहे कुछभी होजाये.. तुम हमारी बात कीसीको मत कहेना.. क्युकी अब बहुत कुछ नया होने वाला हे..

दया : ठीक हे मालीक.. वो चंपाभाभी आइथी.. आपका पुछ रही थी.. अब आयेतो क्या कहु..?

देवायत : बस मंजुको आने दे फीर तु चली जायेगीतो इनको इधर बुला लुगा.. वोभी तो तेरी तराह मेरी दीवानी हे.. हें..हें..हें..

दया : (हसते) हां..तभीतो.. क्या गदराया माल ढुंढा हे आपने.. क्या वो सरपंचकी बीवीकोभी..

देवायत : हां दया.. वो भी मेरी सीक्रेट वाइफ हे.. जेसे तुम हो.. जब तु पुनमके साथ उनके ससुराल जायेगी.. तब तेराभी सब काम होजायेगा..

दया : मालीक अ‍ेसे नसीब हमारे कहा जो आपकी बीवी बन सके.. बस हमे अ‍ेसे खुस करते रहीये हमारे लीये ये भी बहुत हे.. इसीलीयेतो हम दोनो आपका बच्चा चाहती हे जो नेक दील इन्सान होगा..

देवायत : बस दया कुछ दीन तुम दोनो इन्तजार करलो फीर वोभी दे दुगा.. बस अबतो खुस..?

दया : (बाहोमे भरते चुमते) हां अब खुस..ये हुइना बात कल रजीयाको कहुगी बेचारी खुस होजायेगी..

देवायत : बस बात तुम दोनोके बीच ही रखना कीसीको अभी बताना नही हे..

कहेते देवायत वहासे अपने रुममे चला जाता हे ओर नहाने बाथरुममे घुस जाता हे.. तब दया वापस रजीयाके पास लेट जाती हे ओर थोडी ही देरमे वोभी गहेरी नींदकी आगोसमे चली जाती हे क्युकी देवायतसे चुदवाके वोभी काफी थक गइ थी.. दोनोही हवेलीमे तबसे हे जब देवायतकी सादीभी नही हुइथी.. ओर तबसेही दोनो देवायतकी दीवानीथी ओर देवायतसे अपने तनकी प्यास बुजाती थी..

इधर देवायत नहाके गाउन पहेनके अंधेरेमे ही रुमा दरवाजा बंध करके धीरेसे पुनमके रुमकी ओर चला जाता हे.. तब वहा जाके हल्कासा दरवाजेको धका मारता हे तब दरवाजा खुल जाता हे.. ओर देवायत अंदर जाके दरवाजा धीरेसे बंध करके लोक करदेता हे.. ओर पलटके देखता हेतो पुनम अपने उपर चदर डालके लेटी हुइ हे.. ओर जागते हुअ‍े देवायतका इन्तजार कर रही हे..

पुनम : (धीरेसे) भाइ आजाओ बहुत लेट करदी आपने.. क्या दया ओर रजीयाके पास गये थे..?

देवायत : (पुनमके पास बेडपे बेठते) हां बेबी तुमतो जानती हो सब.. बेचारी मुजसेही उमीद लेके बैठी हे..

पुनम : भाइ अ‍ेक त्यक्ता हे ओर अ‍ेक बेचारी वीधवा हे.. तो कहा जायेगी.. ये आग बडी चीज हे.. ओरत अ‍ेक बार इनका स्वाद चख जाये फीर इनके बगैर रेहभी नही सकती.. अच्छा हे उन दोनोका आप खयाल रखते हे.. अब मुजेही देखलो.. जबसे हमने सुहागरात मनाइ हे तबसे आपसे अलग होनेका मनही नही करता..

देवायत : (जुकते होंठ चुमते) तो बेबी मेभी कहा तुमसे अलग रहेना चाहता हु.. हमारी सुहागरातके बादतो मेरी तेरे प्रती चाहत ओरभी बढ गइ हे.. मेतो प्राथना करता हुकी मुजे हर जन्ममे तुम ओर मंजु मीलती रहे..

पुनम : (मुस्कराते) भाइ.. आपको नही पता.. हम दोनो हर जन्ममे मीलतेहे.. ओर वोभी भाइ बहेन बनके.. फीर हम इसी तराह पती पत्नी होकर पुरी जींदगी बीता देते हे..

देवायत : (हसते) अच्छा..? तुम ओर तेरी बाते.. ओर वो मंजुभी अ‍ैसी बात करती रहेती हे.. मेरीतो कुछ समजमेभी नही आता.. चल अब बादमे बाते करेगे.. अभीतो मेरी बहेनको प्यार करना हे..

कहेते देवायत पुनमके उपरसे चदर खीच लेता हे तो पुनम सब कपडे नीकालके पुरी नंगी लैटी हुइ थी.. जेसे देवायतसे मीलन करनेकी जल्दी हो.. तब पुनमको नंगी देखके देवायतभी अपना गाउन नीकाल देता हे ओर वोभी नंगा होके पुनमके पास लेट जाता हे.. तब पुनम उसे कसके अपनी बाहोमे भीच लेती हे ओर उनके होंठ चुमने लगती हे दोनोही अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमते मदहोसीकी ओर बढने लगते हे..





तभी रुममे अचानक सुगंध फैलने लगी.. जो देवायत ओर पुनम दोनोको मदहोसीकी ओर बढाते कामातुर करने लगी.. ओर दोनोही अपने होंस गंवाके अ‍ेक दुसरेमे समा जानेको बेकरार होने लगे.. क्युकी आज जीस कार्यका बाबा बरसो से इन्तजार कर रहेथे वो शुभ घडी आगइ थी.. जीहां.. रुममे स्यंम काम ओर रती दोनोही कामुक सुगंधके माध्यमसे अपनी मौजुदगीका अहेसास करवा रहेथे.. तभी काम देवायतके सरीरमे तो रती पुनमके सरीरमे वीलीन होगये.. ताकी अपने अपने अंसको संभोगके माध्यमसे पुनमके गर्भमे मीलन करवा सके..

पुनम : (कामुक आवाजमे) भाइ.. अब नही रहा जाता.. आप जटसे सुरु करो मे अ‍ेक पलभी आपसे जुदा नही रेह सकती.. प्ली..ज.. मेरे उपर आजाओ.. ओर डालदो अपना दमदार हथीयार मेरे अंदर..

देवायत : (कीस करते लडखडाती कामुक आवाजमे) हां बेबी.. मेभी तुमसे दुर नही रहेना चाहता.. आज मुजे अपने आपमे समाले.. अ‍ेक बार तेरे उपर चडुगा तो सुबह तक नही उतरुगा.. अ‍ेक बार सोचले..

पुनम : (मदहोसीमे होंठ चुमते) भाइइइइ मेभी आपको उतरने नही दुगी.. आज मुजे पेटसे करदो.. देदो अपना बच्चा मेरी कोखमे.. मे हमारे बच्चेको जन्म देना चाहती हु.. ये मेरी भी आरजु हे.. ओर बाबाका भी मक्सद पुरा होजाये.. पता नही आपका बच्चा पैदा करनेकी मुजे बहुत ही तडप हे.. डालदो अपना बीज मेरे अंदर..

देवायत : (कामुक नजरसे देखते) पुनो.. सच बताना.. क्या ये बच्चेके लीये बाबानेही तुजे कहा हेनां..?

पुनम : हां भाइ.. मुजे बाबाने कहा हे.. ओर मेरीभी बहुत इच्छा हे.. तभीतो आपसे बच्चा चाहती हु.. वरना मेरी सादी होजायेगी तो मे धिरेनको कीसी बातके लीये मना नही कर सकती.. इसीलीये अभी आपसे सादीसे पहेले प्रेगनेन्ट होना चाहती हु.. मुजे आजही प्रेगनेन्ट होना हे.. हमारे पास ये अ‍ेक हप्ता हे जो हम दोनो अकेले हे.. मे अपनी पुरी जींदगी जी लेना चाहती हु..

तभी देवायत अपनी अ‍ेक टांग पुनमके उपर डालके उपर चड जाता हे तब पुनम देवायतको कसके बाहोमे भीच लेती हे.. ओर दोनोही अपने होंठ मीलाके स्मुच करने लगते हे तब बीच बीचमे देवायत पुनमके गाल, बुब्स, ओर गलेको चुमने लगता हे.. जीनकी वजहसे पुनम बहुतही कामातुर होने लगी.. ओर देवायत चुमते चुमते नीचेकी ओर सरकने लगा.. तब पुनम छटपटाने लगी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ५७

तभी देवायत अपनी अ‍ेक टांग पुनमके उपर डालके उपर चड जाता हे तब पुनम देवायतको कसके बाहोमे भीच लेती हे.. ओर दोनोही अपने होंठ मीलाके स्मुच करने लगते हे तब बीच बीचमे देवायत पुनमके गाल, बुब्स, ओर गलेको चुमने लगता हे.. जीनकी वजहसे पुनम बहुतही कामातुर होने लगी.. ओर देवायत चुमते चुमते नीचेकी ओर सरकने लगा.. तब पुनम छटपटाने लगी....अब आगे





पुनम देवायतका सर पकडके उसे वापस अपने मुहकी ओर खीच लेतीहे ओर मुह खोलके देवाततके मुहमे अपनी जीच डाल देती हे ओर दोनोही अ‍ेक दुसरेके मुहके रसको पीने लगे.. तब पुनमकी आंख लाल होने लगी.. ओर अ‍ेकदम कामुक होके देवायतके होठोको लीपलोक करते जोरोसे चुंबन करने लगी.. तभी देवायतने चुंबन करते अ‍ेक हाथ नीचे लेजाके पुनमकी चुतपे रख दीया ओर सहेलाने लगा तो पुनम छटपटाते सीसकारीया करने लगी ओर आधी आंख चडाके नसेकी हालतमे जाने लगी..

पुनम : (कामुक होते) बससस.. बससस.. बसस.. भाइ कुछ हो रहाहाहाहेहेहे डालदोनां.. उंहु..उंहु..ससइइइ..

देवायत : अभीसे..? अरे बेबी आजतो पुरी रात मजा करना हे.. तुजे पुरी रात बीना नीचे उतरेही चोदता रहुगा.. आज पुरी रात तेरी चुतमे लंडको अंदर रखना हे.. देखुतो सही मेरी बहेन कीतना मजा देती हे..

कहातो पुनम लंडका नाम सुनतेही बुरी तराह सर्मसार होते देवातकी आंखोमे वासनाभरी नजरोसे देखने लगी.. ओर अ‍ेकदम देवायतके होंठ चुम लीये.. ओर देवायतको वाइल्ड कीस करने लगी.. फीर..

पुनम : (मदहोसीमे) भाइइइइ हम दोनोके लीये ये नया अनुभव होगा.. मेभी आपको नीचे नही उतरने दुगी.. बस अ‍ेक बार मुने मेरी मरजीसे करने दो.. फीर आप मेरे उपर चड जाना ओर पुरी रात मुजे चोदते रहेना..

कहातो देवायतने कीस करतेही चुत सहेलाते अपनी अ‍ेक उंगली पुनमकी चुतमे घुसादी ओर चुतके दानेको टटोलने लगा तब पुनम कमर हीलाते पागल जेसे होगइ ओर देवायत उंगलीको अंदर बहार करने लगा तो पुनमने उनका हाथ पकडलीया ओर वासना भरी नजरोसे देवायतको देखने लगी तभी देवायत उनके बुब्सको मुहमे लेके चुसने लगा ओर नीपलको दांतोसे दबाके खीचने लगा.. पुनम वापस छटपटाने लगी..





ओर देवायत धीरे धीरे नीचेकी ओर सरकने लगा ओर आखीर अपनी मंजीलपे पहोंच ही गया.. उसने पुनमकी चुतपे अपना मुह लगा दीया.. ओर जीभसे चुतको पांच छे बार चाटते चुतमे घुसा दीया ओर चुतके दानेको छेडने लगा.. तो पुनम आधी आंख चडाके नसेकी हालतमे चली गइ.. आज दोनोही पुरी तराह कामाग्नीमे जलते प्यारके आगोसमे चले गये थे.. क्युकी आज खुद काम ओर रती दोनोके सरीरमे प्रवेस करके पुनम देवायतके तनपे कब्जा करलीयाथा..





ओर दोनोसे प्यारका खेल खेलवा रहेथे.. तब पुनम पुरी तराह कामातुर होके आंख बंध लेती हे ओर जोरोसे सीसकारीया करते अ‍ेक हाथ देवायतके सरपे सहेलाते दुसरे हाथसे चदर पकडके कमर उछालते छटपटाने लगती हे..





पुनम : सीइइइइइ बससस बससस बससस भाइइइइ आहहहइइइइइइइ उउउउइइइइइ सीससइइइइइइ..

तब देवायत उनकी कुछ नही सुनता वोतो बस पुनमकी चुतमे मुह लगाते स्वर्गकी सैर कर रहाथा.. अब पुनमसे बरदास्तसे बहार होने लगा.. ओर वो अचानक बैठ गइ ओर दुर हटते देवायतको धका मारते बेडपे सुला देती हे ओर खुद उनकी कमरपे चडके बेठ जाती हे.. देवायत कुछ समज पाता उसे पहेले ही पुनम देवायतका लंड पकडके अपनी चुतपे सेट करने लगती हे ओर धीरेसे लंडको अपनी चुतकी गीरफ्तमे कर लेती हे.. ओर आंख बंध करते थोडी देर अ‍ेसेही बेठी रही.. फीर देवायतपे जुकते होंठ चुमते कमरको धीरे धीरे उपर नीचे करने लगी ओर देवायतको चोदने लगती हे..





तब थोडी देरकी चुदाइके बाद पुनम बेठ जाती हे ओर देवायतका हाथ खीचके उसेभी बीठा देती हे.. फीर खुद उनके पेरपे बेठ जाती हे तब देवायत उसे बाहोमे भरके अपने तनसे चीपका लेता हे ओर दोनोके होंठ अ‍ेक बार फीरसे मील जाते हे.. तो पुनम अपने बालको सही करते आगेकी ओर कर देती हे जीनकी वजहसे देवायत उनका ये रुप देखकर ओर कामातुर होगया.. ओर अपनी कमरको हीलाते पुनमको चोदने लगा..





फीर कुछही देरमे दोनोने अपनी रफ्तार पकडली ओर देवायत जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा तब पुनमने उसे कसके बाहोमे भीचलीया ओर होठोको लीपलोक करलीया.. तभी देवायतको अपने लंडपे गरमाहट महेसुस होने लगी.. तब उसे समजनेमे देर नही लगीकी पुनम जड चुकी हे.. तब देवायत दोनो पैर मोडके घुटनोके बल बैठ गया ओर पुनमको अपनी गोदमे रखते जोरोसे कमरको हीलाते सोट मारने लगा..

तब पुनमसे बरदास्त करना मुस्कील होगया ओर वो जोरोसे सीसकारीया करते देवायतसे चदवाती रही.. ओर आखीर दोनोही अपनी मंजीलपे पहोच गये तब देवायतने पुनमकी कमरमे हाथ डालके अपने लंडकी ओर खीच लीया ओर लंडको पुनमकी चुतमे जडतक घुसा दीया ओर पुनकी चुतको विर्यकी बौछार करते भरने लगा तब पुनम अ‍ेक बार फीर साथमे जडने लगी ओर दोनोही अपनी मंजीलपे पहोचके सांत होगये..

दोनो काफी देर अ‍ेक दुसरेको बाहोमे भीचते बैठे रहे.. फीर होंठ चुमते अलग होगये तब पुनमकी चुतसे दोनोका कामरस चुतसे बहार नीलते बहेने लगा ओर पुनमने अपने नीकरसे चुतको साफ करलीया.. फीर देवायतका लंड पकडके उसेभी साफ करने लगी फीर देवायतका हाथ पकडके उसे बाथरुममे लेजाने लगी..

पुनम : भाइ चलो अ‍ेक बार नहा लेते हे फीर हम बेडसे उतरेगे ही नही.. मुजे पीसाब भी लगी हे..

देवायत : (हसते) हां चलो सही कहा तुने.. आजतो मेरी बीवीकी सब आज्ञाका पालन करना हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (हाथ पकडके बाथरुमकी ओर लेजाते) भाइ सीर्फ बीवी ही नही बहेनभी हु आपकी बीवी बनके हमने सुहागरात मनाली.. आज मुजे अपने भाइके साथ सुहागरात मनानी हे ओर भाइसे बच्चा चाहीये.. समजे..

देवायत : (पीसाब करते) पुनो.. तुजे भाइसे चुदवानेका बडा सौक हे..? कहासे सीखा सब..

पुनम : (सरमाते हसते) भाइ पता नही.. लेकीन मे छोटीथी तबसेही आपको पसंद करती थी ओर जब होस्टेलमे गइ तब सुरुआतमे वो हिमाचलके राजाकी कीताब हाथ लग गइ.. ओर उनकी पुरी कहानी पढीली.. तबसेही मे आपकी ओर पुरी तराह आकर्सीत होगइ ओर आपसे चुदवानेका मन बनालीया था.. ओर किस्मत देखो वोही राजा हमारे यहा जन्म लेने वाला हे.. ओर आज मे आपकी बीवीभी होगइ.. भाइ जवानीपे कदम रखा ओर ये सब ज्ञान होने लगा तबसेही मुजे अपने भाइसे चुदवानेकी फेन्टासी हे..

देवायत : (हसते) चल आज तेरी सब फेन्टासी आज पुरी कर दुगा.. मेनेभी क्या कीस्मत पाइ हे.. मेरी ही बहेन मेरी बीवी होकर मुजसे चुदवाना चाहती हे.. मेतो धन्य हो गया.. हें..हें..हें..

फीर दोनोही बाते करते नहा लेते हे ओर बहार आके बेडपे लेट जाते हे.. तब देवायत पीछे पुनमसे चीपकके सोगया ओर अ‍ेक हाथ उनके सीनेपे रखके बुब्सको दबाते पुनमके गलेको चुमने लगा.. तो पुनमने करवट लेली ओर देवायतके सामने मुह करदीया.. ओर दोनोके होंठ अ‍ेक बार फीर मील गये.. तब देवायत पुनमके बुब्सको मसलते कीस करने लगा तो पुनमने देवायतकी कमरमे हाथ डालके उसे अपने उपर खीचलीया..

तो देवायतभी अ‍ेक पैर पुनमकी कमरमे डालके उनके उपर चड गया.. तब पुनम पीठके बल लेट गइ ओर दोनोही आपसमे होंठ मीलाते कीस कर रहेथे तब पुनमने हाथ नीचे लेजाते देवायतके लंडको मुठीमे पकडलीया ओर अपनी चुतमे घीसते लव होलमे सेट करलीया.. फीर देवायतको कसके बाहोमे भीचते जोरोसे होंठ चुमने लगी.. तब देवायतने कमरपे दबाव बनाके अ‍ेक जटका मारा तो लंड सीधाही पुनमकी चुतमे चला गया तो पुनमके चहेरे पे हसी आगइ..





पुनम : (हसते) भाइ धीरे डालोनां.. आपनेतो अ‍ेकही बारमे धुसा दीया.. भाइ येतो अभीभी अ‍ेसेही कडक लग रहा हे अभीतो हम साथमे जडेथे .. फीरभी अ‍ेसे ही रहेता हे..?

देवायत : (धीरे धीरे सोट मारते) हां बेबी.. पता नही कैसे.., लेकीन ये हमेसा खडा ही रहेता हे.. अच्छा हेनां..? जी तो चाहता हे तुजे चोदताही रहु.. चुदवाते हुअ‍े क्या मस्त लग रही हे तु..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ तो मे आपको कहा मना कर रही हु.. आपकी जबभी इच्छा हो मुजे चोद लीया करे.. मे आपको कभी मना नही करुगी बस मुजे इसारा करदेना.. मे खुद चली आउगी..

तभी देवायत अ‍ेक हाथ पुनमके गलेमे डालके धीरे धीरे कमर हीलाते पुनमको चोदने लगता हे.. तब पुनमभी मदहोसीमे छाने लगती हे ओर आंख बंध करते देवायतके लंडको अपनी चुतमे महेसुस करते मजेसे चुदवाने लगती हे.. तभी देवायतभी उनके गलेमे मुह डालके चुमते होले होले सोट मारते मजेसे पुनमकी चुदाइ करने लगा तब दोनोही मदहोसीकी आलममे जाने लगे ओर दोनोपे चुदाइका नसा छाने लगा..





दोनोही प्यारके भवंडरमे चुदाइ करते गोते लगाने लगे.. आज काम ओर रती दोनोही देवायत ओर पुनमके उपर हावी होगये थे.. पुरे रुममे सनाटा छाया हुआथा.. तब पुनमकी हल्की सीसकारीया सुनाइ दे रहीथी.. फीर धीरे धीरे चुदाइ करते दोनोने अपनी रफ्तार पकडली ओर देवायत पुनमको जोरोसे चोदने लगा तब पुनम पुरी तराह मदहोसीमे चली गइ जैसे उनपे कोइ नसा छा गया हो.. वो बडबडाने लगी..

पुनम : (आंख बंध करते चुदवाते) भाइइइइ सीससइइइ आहहह आहह आहह आजजज नीचोडडड डालोओओ मुजेजेजे अपना बच्चाचाचाआआ देदोओओ हंममममम उउउइइइइ सीसससइइइइइइइ उहु..उहु..उहु.. आइइइ..

देवायत : (नसेमे चोदते) हंमममम हां.. मजाजाजाज आररररहाहाहा हेहेहे.. हंममम...बोलललल बोलललनां..

पुनम : हंमम हाहाहा आरररहाहाहा हेहेहेहे ओरर जोरररसेसे चोदोदोदो भाइइइ.. मुजे.. अपने.. बच्चेकीइइ मां.. सीइइइइ बनादोओओ... आहह.. आहह.. आहह.. आहह.. आइइइइ हंमममम अअअअअउउउउससससइइइ..

देवायत : (कामुक आवाजमे) पुरीरीरी रातततत चुदेदेगीगीगी.. हंममम.. पुरी रात...चोदुगा... हंमममम..

पुनम : हांहाहा.. चोदतेतेते रहेहेनानाना बहुतततत मननन हेहेहे.. रोजजज चोदददनानाना...

देवायत : (मदहोसीके नसेमे) मेरारारा..बच्चाचाचा चाहीहीयेयेयेये हंमममम हांहाहा.. बोललल हमंमममम..

पुनम : (आधी आंख चडाके नसेमे) हंममम हांहाहा..आपपकाकाका बच्चाचाचा..देदोदोओओ सीसीइइइइइ..

दोनोही मदहसीके नसेमे बडबडाते धमासान चुदाइमे मसगुल थे..तो देवायतभी जोरोसे कमर हीलाते पुनमको चोद रहाथा तभी पुनमने जोरोसे देवायतको बाहोमे भीचलीया ओर देवायतसे होंठ मीलाके लीपलोक करलीया.. फीर दोनो आंखे बडी करतेदेवायतकी आंखोमे देखती रही.. तभी देवायतको अपने लंडपे पुनमका गरम पानी महेसुस होने लगा ओर उनका पुरा सरीर कांपने लगा.. जेसे कीसीने लंडको गरम भठीमे डाल दीया हो.. तब पुनमने कीस तोडके अपना सर बेडपे पटक दीया ओर वो सीथील होकर अ‍ेसेही पडी रहेके देवायतसे चुदवाती रही..





तब पुरे रुममे सनाटा छाया हुआथा.. सीर्फ दोनोकी चुदाइकी आवाज आ रहीथी पुरे रुममे सीर्फ फचच फचच फचच फचच फचच फचच फचच फचच थपप थपप थपप थपप थपप थपप थपप की आवाजका संगीत गुंज रहाथा.. तब बीच बीचमे पुनमकी चुडीयोकी खनखनाहट देवायतको ओर कामातुर करते ओर जोरोसे चुदाइके लीये उकसा रहीथी..

आज कीसीभी हालमे सुबह तक प्यारका तुफान थमने वाला नहीथा.. क्युकी दोनोके सरीरमे आज खुद काम ओर रतीने कब्जा करलीया था.. जो अपने अपने अंसको कीसीभी तराह पुनमके गर्भमे स्थापीत करना चाहते थे..

देवायत अबभी पुनमको जबरदस्त तरीकेसे चोदेही जा रहाथा तब धीरे धीरे पुनम फीरसे गरम होने लगी.. अभी तब वो दो बार जड चुकीथी ओर फीरसे कामुक्ताकी ओर बढते अपनी कमर हीलाते देवायतका साथ देने लगी.. आज दोनोही कामातुर होके चुदाइ कर रहेथे.. दोनोही थकनेका नाम नही ले रहेथे क्युकी आज दोनोके सरीरमे स्यंम काम ओर रतीने प्रवेस करके मोर्चा सम्हाल लीयाथा.. तब पुनम ओर देवायत के सरीर सीर्फ माध्यम रेह गये थे..

तभी देवायत हाथके बस थोडा उचा होगया ओर जोरोसे कमर हीलाते पुनमको जोरोसे सोट मारते चोदने लगा तब पुनमकी इतनी जबरदस्त चुदाइ होने लगीकी पुनमसे बरदास्त करना मुस्कील होने लगा.. ओर वो जोरोसे सीसकारीया करते आधी आंख चडा लेती हे ओर दोनो हाथसे चदर पकडते छटपटाने लगती हे.. उनके मुहसे आवाजभी नीकलना बंध होगइ ओर वो पुरी तराह चुदाइके नसेमे चली गइ..





तभी दोनोके सरीरमे लाखो चीटीया रेदती हुइ लंड ओर चुतकी तरफ दोडती महेसुस होने लगी.. तो देवायत जोरोसे पुनमको बाहोमे भरते उनके सरीरसे चीपक जाता हे तो पुनमभी देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचते देवायतके होठोको लीपलोक करते उनकी ओर बडी आंख करते देखने लगती हे.. तब देवायत कमरको जटके मारते पुरा लंड पुनमकी चुतमे जडतक घुसा देता हे.. तो लंड पुनमकी बच्चेदानीसे टकरा जाता हे..

तब पुनमकी जोरोकी चीख नीकल गइ जो देवायतके मुहमेही दब जाती हे.. ओर दोनोही सातवे आसमानपे पहोचते अपनी अपनी कमरको जटके देते जडने लगते हे.. तभी पुनमको अपनी बच्चेदानीपे देवायतका गरम विर्यकी बौछार महेसुस होती हे तो वो उतेजनामे कांपने लगती हे.. ओर देवायतके लंडको अपने पानीसे भीगोने लगती हे.. दोनोही अपनी कमरको रुक रुककर जटके मारते जडने लगते हे.. तब दोनोके सरीर पसीनेसे तरबोर होते बीलकुल अ‍ेक दुजेसे चीपक जाता हे..

आज दोनोही इस बातसे अन्जान थे की दोनोके कामरससे देवायतके सेंकडो बीज पुनमके बीजसे मीलन करनेके लीये उनके गर्भकी ओर दोडेही जा रहेथे.. जीनमे रती अपना अंस छोड चुकीथी.. तब दोनोही जडके सांत होगये तो पुनमने अपने दोनो पैर उचा करते देवायतकी कमरमे आंटी लगाके रख दीये.. ओर अपनी कमर उची करते नीचे तकीया सरका दीया ओर वो देवायतकी पीठ ओर सरको सहेलाती रही..





दोनोही सांत होगये तब देवायत पुनमके बुब्सपे सर रखके ढेर होके पडाथा तब पुनम उनके सरको सहेलाते नजर चुराते इधर उधर देखती मुहको घुमाती रही.. तब उसे नही मालुम थाकी जीस तराह दोनो बहार सांत होकर पडेथे तब अंदर देवायतके सेंकडो बीज रतीके अंसको मीलनेके लीये धमासान मचाते दौड रहेथे.. ओर आखीर अ‍ेक बीज पुनमके गर्भके अंडेमे घुसने मे कामयाब होगया.. आखीर वो बीज कमका जो था.. ओर पुनमके गर्भके अंडेमे जाकर रतीके बीजसे मील गया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ५८

दोनोही सांत होगये तब देवायत पुनमके बुब्सपे सर रखके ढेर होके पडाथा तब पुनम उनके सरको सहेलाते नजर चुराते इधर उधर देखती मुहको घुमाती रही.. तब उसे नही मालुम थाकी जीस तराह दोनो बहार सांत होकर पडेथे तब अंदर देवायतके सेंकडो बीज रतीके अंसको मीलनेके लीये धमासान मचाते दौड रहेथे.. ओर आखीर अ‍ेक बीज पुनमके गर्भके अंडेमे घुसने मे कामयाब होगया.. आखीर वो बीज कमका जो था.. ओर पुनमके गर्भके अंडेमे जाकर रतीके बीजसे मील गया....अब आगे

पुनम : (धीरेसे मुस्कराते सरमाते) भाइ आज आपको क्या हो गयाथा.. मेरी इतनी जबरदस्त चुदाइतो आपने हमारी सुहागरातमे भी नहीकी थी.. आपने तो अ‍ेकही बारमे मुजे नीचोड लीया.. मेरी अ‍ेक अ‍ेक नब्स आपने चोद चोदके ढीली करदी.. कोइ अपनी बहेनको इतनी बहेरमीसे चोदता हे..?

देवायत : (पुनमकी ओर देखते हसते) हां जब तेरे जैसी हसीन बहेना होतो मे तुजे अ‍ैसेही चोदुगा.. हें..हें..हें.. पुनो पता नही मुजे कुछ होस ही नही था.. मेने तुजे कैसे चोदाहे वोभी मुजे नही पता.. क्या बहुत दर्द हो रहा हे..? तो आइ अ‍ेम सोरी..

पुनम : (सरमाते) भाइ सोरी मत बोलो.. मेतो अ‍ैसेही केह रहीथी लेकीन मजा बहुत आया.., जो हाल आपका था वोही मेरा था.. पता नही मे कीतनी बार पानी छोड चुकी हु.. अ‍ैसा लगता हे आपने मुजे पुरी नीचोडली..

देवायत : (धीरेसे हसते) पुनो जो भी हो अब ये लंड सुबहसे पहेले बहार नीकलने वाला नही हे.. हें..हें..हें..





पुनम : (सरमसे पानीपानी होते) भाइ तबतो जोसमे हम दोनो क्या क्या वादे कर चुकेथे लेकीन अब लगता हे बहुतही मुस्कील होगा.. क्या मे आपको सुबह तक जेल पाउगी..? आपनेतो अभी से मुजे थका दीया हे..

देवायत : (हसते) बेबी जोभी हो मे तुजे सुबह तक छोडने वाला नही हु.. क्या मस्त चुत हे तेरी जी चाहता हे तुजे दीन रात चोदता ही रहु.. कास तुजे प्यारका इजहार पहेलेही कर दीया होता.. अब तकतो मे तुजे कीतनी बार चोद चुका होता..

पुनम : (सर्मसार होते हसते) भाइ तबतो मे कबकी कुआरी मां बन चुकी होती.. ओर वोभी छोटी उमरमे.. जोभी हुआ हे सही टाइमपे हुआ हे.. आपके गधे जैसे हथीयारको जेलना बहुतही मुस्कील हे.. पता नही पुरी रात कैसे अंदर रख पाउगी.. देखना वो चौडी ना होजाये..

देवायत : (होंठ चुमते) पुनो अब तो मे तुजे जींदगी भर अ‍ेसेही चोदता रहुगा.. फीर भलेही तेरी सास से मेरी सादी होजाये.. फीरभी मे तुजे अ‍ेसेही सुख देता रहुगा आइ प्रोमीस.. आइ लव यु बेबी..

पुनम : (सरमाते हसते) लव यु टु.. भाइ वोतो मेभी आपको छोडने वाली नहीहु.. हमजे सादीजो कीहे.. मेरे पहेले पती आपही रहोगे.. ओर हर जन्ममे आपही मेरे पती बनके आये हो ओर आपही मेरे पती होगे.. मे इश्वरसे यही प्रार्थना करती हु.. भाइ पता हे मुजे कोनसा स्वपन आता था..?

देवायत : नही पुनो वो सबतो तुम बाबाको बतातीथी मुजे कहा कुछ बताया हे..? बता कोनसा स्वप्न आता था..

पुनम : भाइ बार बार बस अ‍ेकही स्वप्न आता था की मे परी हु ओर आप हमारे राजा थे ओर मुजे पाने के लीये बार बार मुजे लेके हवामे उडके सैर करने लेजाते तो कभी अ‍ेकही कस्तीमे सवार होकर सीर्फ हम दोनो नदीके बीच जाकर हम दोनो प्यार करते.. फीर वहा आप मेरे साथ प्यारका खेल खेलते संभोग कर लेते.. फीर हम दोनो वापस आजाते थे.. तब आप मेरे प्यारमे ओर मे आपके प्यारमे बीलकुल दीवाने हो चुकेथे..





ओर यही स्वप्न बार बार मुजे आके परेसान कर रहाथा की जो राजा थे वो आपकी सकलकाथा तो मे सोचमे डुबी रहेती की आप तो मेरे भाइ हो फीर मुजे ये स्वप्न क्यु आरहा हे.. बस यही सोचते मे परेसानीमे रहेने लगी ओर धीरे धीरे आपके बारेमे सोचते आपकी ओर ढलने लगी.. फीरतो आपकी कसरती बोडी.. ओरअपका आकर्सण मुजे आपकी ओर खीचताही गया.. ओर आखीर अ‍ेक दीन बाबाको सब पुछही लीया..

देवायत : (हसते) तो फीर बाबाने क्या कहा..?

पुनम : बस भाइ अ‍ेक बार उन्होने मुजे सब कुछ ज्ञात करा दीयाकी हम दोनो कोन थे ओर कोन हे.. ओर आगे क्या होगे.. लेकीन वो मे आपको अभी नही बता सकती.. क्युकी बाबाके सामने मेने कुछ कसम खाइ हे.. बस इतना जानलो हम दोनो कही जन्मोसे साथ जुडे हे ओर हमेसा जुडे रहेगे.. बस इतना ही केह सकती हु.. हम दोनो भाइ बहेन होते हुअ‍े भी हर जन्ममे पती पत्नीका सुख भोगते आये हे..

देवायत : (हसते) अच्छा.. तबतो तु हमेसा मुजे अ‍ेसेही मीलती रहेगी ओर में तुजे चोदता रहुगा हें..हें..हें..

पुनम : (सर्मसार होते) भाइ आप बहुत गंदे हो कीतना खुलके बोलते हो.. क्या सचमे पुरी रात अ‍ेसेही मेरे उपर रहोगे..?

देवायत : हां डार्लींग आजतो तेरे साथ कुछ नया अनुभव करना हे.. देखु तो सही हम कहा तक कर पाते हे..

पुनम : (सरमाते हसते) भाइ तबतो मेरी हालत बीगड जायेगी आपतो थकते ही नही.. ओर मेरा बार बार पानी नीकाल देते हो.. पता नही सुबह तक मेरी क्या हालत होजायेगी.. देखना फीर आपको ही मुजे सम्हालना पडेगा..

दोनो ही अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमते प्यारभरी बाते कर रहेथे तब देवायत अबभी पुनमकी चुतमे लंड डालके उनसे बाते कर रहाथा तब बीच बीचमे उनके गले ओर बुब्सभी चुम लेताथा अबतो पुनमकोभी मजा आरहा था.. वो अपने भाइके लंडको अपनी चुतमे अभीभी सख्त महेसुस कर रहीथी.. तो वोभी बीच बीचमे अपने भाइको बाहोमे भीच लेतीथी ओर उनके होंठ चुम लेतीथी.. दोनोही कामुक्ता भरी बाते करते फीरसे धीरे धीरे गरम होने लगे तब पुनमकी चुत फीरसे फडफडाते हरकतमे आने लगी तो देवायतके होंठ जोरोसे चुसने लगी..





तभी देवायतभी पुनमके होठोको अपनी गीरफ्तमे लेके चुसने लगता हे ओर धीरे धीरे कमर हीलाने लगता हे ओर कुछही देरमे दोनो अ‍ेक बार फीर अपनी रफ्तार पकड लेते हे.. दोनोके बीच होले होले चुदाइ होने लगती हे इस बारभी पुनम दो बार जड चुकीथी फीरभी देवायत उसे चोदे ही जारहा था.. अब देवायतने पुनमको जोरोसे चोदना सुरु कर दीयाथा तब पुनम आंधी आंख चडाके मदहोसीकी आलममे चली गइ ओर देवायतके नीतंबपे हाथ रखते अपनी चुतकी ओर दबाव बनाते उनसे चुदवाने लगी..





दोनोही कामाग्नीमे जलते अ‍ेक बार फीरसे चुदाइके बवंडरमे खो गये.. अ‍ेक बार फीर दोनोके बीच फीरसे घमासान चुदाइ होने लगी.. काफी धकापैनी चुदाइके बाद अ‍ेक बार फीरसे देवायत पुनमकी चुतको भरने लगा तब पुनमने देवायतको कसके अपनी बाहोमे भीचलीया ओर दोनो होठो लीपलोक करते साथमे जडने लगे.. अ‍ेसेही देवायत बीना नीचे उतरे पुनमको लगातार चोदता रहा ओर पुनमकी चुतको भरते हरी भरी करता रहा.. आज पुनम तृप्त हो चुकीथी.. फीरभी अपने भाइका लंड अपनी चुतमे अंदर रखके लेटीथी..

अबतक देवायत पुनमकी चुतको तीन बार भर चुकाथा ओर जब भी पुनम जडनेको आती तब देवायतको कसके अपनी बाहोमे भीच लेती.. जब दोनो ही जड जाते तब बीचमे दोनो प्यार भरी बाते करते आराम करते रहे.. अब देवायत आखरी वार करते पुनमको जोरोसे चोद रहाथा.. अबतक पुनम कीतनी बार जड चुकीथी उसेभी पता नहीथा आज पुनमकी चुदवा चुदवाके सारी कसर पुरी होचुकी थी.. वो थक कर चकनाचुर हो चुकी थी.. उनके सरीरका अ‍ेक अ‍ेक अंग दर्द कर रहाथा..

तभी देवायत हाथके बल उचा होते उसे जोरोसे चोदने लगा.. वो कमर हीलाते लंबे लंबे सोट मारने लगा.. तब देवायतका लंड पुरा जडतक घुस जाता ओर पुनमकी बच्चेदानीपे ठोकर मारते उनके मुखको खोल देता तब पुनम दर्दके मारे हल्केसे चीखने लगी अब पुनमसे बरदास्त करना मुस्कील होने लगा.. वो दर्दके मारे मुह बीगाडते चुदवाती रही ओर देवायतने उनकी चुतमे जडतक घुसा दीया.. ओर अचानक रुक गया..

तभी पुनमने अ‍ेक पैर देवायतके कंधेपे रख दीया ताकी चुत थोडी खुल जाये ओर उसे कम दर्द हो.. ओर उसने देवातके गलेमे हाथ डालके उसे अपनी उपर खीचलीया ओर अपने तनसे चीपका लीया.. तभी देवायत पुनमके गलेमे मुह डालते कीस करते जडने लगा.. तब पुनमकी चीख नीकल गइ ओर वो करवट लेके छटपटाने लगी तभी देवायत जडतेही पुनमकी चुतसे लंड नीकाल लेता हे..

तो पुनम चुतमे जलनकी वजहसे करवट लेते साइडमे होजाती हे ओर दर्दसे सीसकारीया करने लगती हे.. आज वाकइ देवायतने उसे चोद चोदके उनकी चुतकी धजीया उडा दीथी.. पुनमको चुतमे बहुतही जलन महेसुस होरही थी..





तब देवायत बेडसे उतर गया ओर पुनमको सोते हुअ‍े ही अपनी गोदमे उठा लीया फीर बाथरुममे ले गया.. वहा पुनमको नहेलाके उनकी चुतकी सीकाइ करदी फीर खुदनेभी नहालीया तबतक पुनम दर्दसे मुह बीगाडते अ‍ेसेही बेठी रही.. फीर दोनोही बहार आगये ओर पुनमको उनका गाउन पहेना दीया ओर अच्छेसे सुलाके उनके उपर चदर डालदी तब पुनम बेहोस जेसे होगइ थी ओर नींदकी आगोस मे चली गइ..

फीर देवायतभी अपना नाइग गाउन पहेनके बहार आगया ओर धीरेसे पुनमके रुमका दरवाजा बंध कर दीया.. अपने रुममे जाके वोभी सो गया.. तब सुबहके साडे चार बजनेको आयेथे.. आज पुनमकी हर इच्छा पुरी हो चुकीथी फीरभी उनके पास मंजुके आने तब देवायतसे मीलके प्यार करनेका पुरा मौकाथा वो अपनी हर रात देवायतके साथ चुदवाकर रगींन करना चाहती थी..

जब आज दोनो मीलन करने जा रहेथे तब उनकी सांस यानी चंदाके धरभी कुछ नया हुआ.. जो अ‍ेकना अ‍ेक दिन होना ही था.. वहा आज चंदा रातको मंजुके पास सोने आगइ तब बच्चेको बीचमे सुलाके मंजुने चंदाको जबरदस्तीसे अपने साथ सुला दीया ओर मंजु करवट लेके अपना ब्लाउस उचा करके बच्चेको दुध पीलाने लगी.. तब चंदाभी अपना गाउन पहेनके मंजुकी ओर करवट लेके सोइथी ओर मंजुको बच्चेको दुध पीलाते देखती रही..

मंजुला : (हसते) दीदी मे चाहती हु धिरेन ओर पुनमके पहेले आप दोनोकी सादी होजाये..

चंदा : (सरमाते हसते) नही मंजु बच्चोके सामने बडी सरम आयेगी.. तुम क्यु इतना जल्दी कर रही हे..? बस कुछ दीनोकी तो बात हे फीर मे खुद तेरे पास चली आउगी.. आइ प्रोमीस..

मंजुला : (हसते) दीदी क्या फर्क पडता हे कुछ दीन बाद आओ या अभी.. कमसे कम हमारे देवुकोतो आप सम्हाल सकोगी.. पता नही मेरे बीना रहे पाता होगा या नही..

चंदा : तुजे देवुकी इतनीही चीन्ता थीतो इतना बडा रीस्क क्यु लीया..? नही करती बच्चा.. कमसे कम देवुके साथ रेह तो पाती.. बहुत प्यार करती हे अपने देवुसे..? फीरभी इतना बडा रीस्क ले लीया..?

मंजुला : (हसते चंदाकी आंखोमे देखते) तो दीदी क्या आप नही करती हमारे देवुसे प्यार..? क्या आप उनके बीना रेह पाती हो..? मेने देखीहे मेरे देवुके लीये आपकी आंखो वो तडप.. ओर मेरे लीये ये बच्चा पैदा करना बहुतही जरुरी था.. तभी तो मे इस दुनीयामे वापस आ सकुगी..

चंदा : (हसते) मंजु बस यही तेरी रहस्य भरी बाते मेरी समजमे नही आ रही.. क्या तुजे पता हे तु वापस आयेगी..? ओर आयेगी तो इसी घरमे आयेगी.. क्या जानती हे तु..जो हम नही जानते.. मुजे लगता हे तुम हमसे बुहत कुछ छुपा रही हे..

मंजुला : (सीरीयस होते) दीदी कुछ बाते हे जो सीर्फ मेही जानती हु.. ओर मेरे जानेसे पहेले मे आपको सब ज्ञात करवाके जाउगी.. असलमे हम सब कोन हे.. आप कोन हो.. वो मे अभी आपको नही बता सकती.. क्युकी मे बाबाके साथ वचनसे बंधी हु.. मेरा देवु ओर मेरा ये बच्चा फीर मेरा पौता.. मे सबके साथ रहुगी.. तब मेरा पोता आपकोभी सब ज्ञात करवा देगा.. की हम वास्तमे कोन हे.. बस अभी इतनाही बता सकती हु..

चंदा : (अ‍ेक नजरसे मंजुको देखते) अच्छा तभी तेरे मनमे मोतका भय नही हे.. तो फीर तु दुसरा जन्म लेके कहा आयेगी.. वोभीतो तुजे पता होगा..

मंजुला : (हसते) दीदी कहानां मे कुछ बात आपको अभी नही बता सकती.. क्युकी आप सब जानके वीचलीत हो सकती हे.. बस यही समजलो वो हीमाचलके राजाकी पुरी कहानी हमारे यहा सुरु हो चुकी हे.. जो आगे जाकर हवेलीपे आपको बहुत कुछ दीखनेको मीलेगा.. जो आप अभी सोचभी नही सकती..

चंदा : (कुछ सोचते) तो क्या यहाभी वो सब कुछ होगा? जो उन राजाके यहा हुआ था.. मतलब कोइ रीस्ते नातेको नही मानते होगे.. क्या वो सब यहा पोसीबल लगता हे..? तेरी कुछ बाते मेरी समजमे आ रही हे..

मंजुला : (हसते) जी दीदी तब सब पोसीबल होगा.. तब सब प्रकृतीकी ओर ढलने लगेगे.. हमारे गांवमेभी अ‍ेसे कइ रीस्ते अभीसे पनपते हे जो तब खुलके सामने आयेगे.. बस मे इतनाही केह सकती हु.. आपकी ओर हमारे देवुकी भी अ‍ेक बेटी होगी.. बस इनके आगे मे अभी कुछ नही बता सकती..

कहेते मंजु अपने बच्चेका प्यारसे गाल सहेलाने लगी.. तब चंदा उसे सोक्ट होते अ‍ेक नजरसे देखती ही रही.. आज उसे मंजु बहुतही रहस्यमयी लगने लगी.. तब बच्चा दुध पीते नींदकी आगोसमे चला गया तो मंजुने बच्चेको अपने स्तनसे दुध पीते हटा लीया ओर अपना ब्लाउस ठीक करते उसे जुलेमे डालने खडी होने लगी.. तब चंदा जटसे खडी होगइ ओर बच्चेको अपने हाथोमे लेके जुलेमे सुला दीया..

ओर मंजुको वापस बेडमे सुला दीया फीर खुदभी आके मंजुके पास सो गइ.. तब मंजु चंदाकी ओर करवट लेके चंदाको अ‍ेक नजरसे देखती रही.. तब चंदाभी उनकी ओर करवट लेके सोइथी तो मंजुको अपनी ओर अ‍ैसे देखते वो सरमा गइ.. तो मंजु हसके उनके नजदीक पासमे सरक गइ..

चंदा : (सरमाते हसते) अ‍ेसे क्या देख रही हो.. अब सोना नही हे क्या..? चल सोजा..

मंजुला : (हसते) दीदी सच बताना.. क्या हमारे देवुके बगैर आप सो पाती हे.. सच बताना.. हें..हें..हें..

चंदा : (सरमसे पानीपानी होते मुस्कराते) चल.. कैसा सवाल पुछती हे.. क्या तु सो पाती हे..?

मंजुला : नही दीदी मे मेरे देवुके बगैर अ‍ेक पलभी नही रेह सकती.. उनकी बाहोमे बडा सुकुन मीलता हे.. बस यही लगता हे हमेसा उनकी बाहोमेही सोती रहु.. क्या आपको नही लगता..? सच बताना..

चंदा : (सरमाते हसते) हां.. लगता हे.. मंजु आज सच कहु.. जबसे हम दोनो रीलेशनमे आये हे तबसे देवुके बीना रहेना मुस्कील होगया हे.. सच कहुतो मेभी ज्यादा वेइट करना नही चाहती.. जब वो हमे यहा छोडने आयेथे तब धिरेनको जाना पडा ओर हम दोनो मील गये.. तबसे इनके बीना रहेना मुस्कील होगया हे.. लेकीन बच्चोकी बहुत सरम आ रही हे.. मे कीसीसे केहभीतो नही सकती.. आज तुमने पुछ लीयातो बता दीया..

मंजुला : (हसते चंदाकी कमरमे हाथ डालते) दीदी मे जानती हु.. तभीतो आपको केह रही हुकी आकर मेरे देवुको सम्हाललो.. मे चाहती हु पुनम धिरेनकी सादीसे पहेले आपकी देवुके साथ सादी होजाये ओर आप वहा आजाओ.. फीर बच्चोकी सादी हम वहा मीलके कर देगे ओर उसे यहा भेज देगे.. क्या कहेती हो आप..?

चंदा : (अ‍ेकदम सर्मसार होते हसते) मंजु.. अब मे सब केसे कहु.. तु जो सोचती हे वही करना हे.. मे देवुके बगैर नही रेह सकती.. पता नही उनको देखतेही हमे क्या होजाता हे.. कीतना आकर्सण हे उनमे..

मंजुला : (हसते) हां दीदी तभीतो मे इनकी दीवानी होगइ थी.. ओर उनपे सब कुछ लुटानेको तैयार होगइ थी.. ओर उनपे सब लुटाभी दीया.. वोभी हमारी सादीसे पहेले.. हम सादीसे पहेले बहुत बार सेक्स कर चुकेहे.. अभीभी इनको याद कर रहीहु तो अभीभी मुजे कुछ होने लगता हे.. पर क्या करु मुजे दो तीन महीना कुछ नही करना.. वो सृतीने मना कीया हे.. तभी तो आपसे केह रही हु मेरे देवुको सम्हाललो.. हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाते हसते) तेरे पतीकी तराह तुभी बीलकुल पागल हे हें..हें..हें.. सब खुलके कहेती हे..

मंजुला : (हसते) दीदी अब हम दोनोके बीच क्या पर्दा.. आगे देखती जाओ हमे हमारे रुममे रातको अ‍ेक साथ बहुत कुछ देखनेको मीलेगा.. तब आप क्या करोगी..? मेरा देवु आपको छोडने वाला नही हे हम दोनोको अ‍ेक साथ अ‍ेही बीस्तरमे पटक पटकके चोदेगा.. हें..हें..हें..

चंदा : (सर्मसार होते हसते अ‍ेक मुका मारते) छी.. तु बीगड गइ हे.. हें..हें..हें.. कीतना गंदा बोलती हे.. मुजेतो बहुत सर्म आ रही हे..

मंजुला : (जोरोसे हसते) दीदी अ‍ेक बात बताउ.. होसकता हे हम दोनोको देवु आपसमे प्यार करनेको कहे.. तब आप क्या करोगी..? हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाते अ‍ेक मुका मारते) नही.. मे मना करदुगी.. हें..हें..हें.. तु बहोत बेसर्म हो गइ हे.. हें..हें..हें..

कहातो मंजु चंदाके उपर जुकके उनके होठोपे अपना होंठ रख देती हे तो चंदा छटपटाते उनसे छुटनेकी कोसीस करने लगी.. ओर मंजुने होंठ चुमते उनके बुब्सको मसल दीया तब चंदा आंख बंध करते मंजुको मना करने लगी.. लेकीन उनका वीरोध लेसमात्र रेह गया.. क्युकी तबतक मंजुने चंदाकी चुतको अपनी मुठीमे भीच लीयाथा तब चंदा सरसे पांव तक हील गइ ओर छटपटाते सीसकारीया करते मदहोस होने लगी.. वो मंजुसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. तब वो कामुह होने लगी ओर उसे इस खेलमे मजा आने लगा..

चंदा : (मदहोसीमे आंख बंध करते) मंजुजुउउउ क्यायाआआ कररर रहीही हेहेहे.. छोडडड मुजेजेअ‍ेअ‍े....

मंजुला : हुंममम बुचचच बुचचच हंमममम.. दीदीइइइइ करररनेनेने दोदोओओओ.. बहुत.. मन कर रहा हेहे..

दोनोही कामुक हो चुकीथी तभी मंजुने खुदके ओर चंदाके सब कपडे नीकाल दीये तब चंदाभी मदहोस होते मंजुको वासना भरी नजरोसे देखती रही ओर अपने कपडे नीकालनेमे साथ देने लगी.. तब थोडीही देरमे दोनो नंगी हो चुकीथी तब मंजु फीरसे चंदाके उपर चड गइ ओर देवायतकी माफीक चंदाके गले होंठ ओर गाल बुब्सको चुमने लगी तब चंदा पागल जेसे होगइ ओर छटपटाते मंजुके बुब्सको मसलने लगी..

तभी अचानक मंजु चंदाकी नाभीकी ओर सरक गइ ओर नाभीमे जीभ डालके चाटने लगी ओर पैरके बीच आगइ ओर सीधाही चंदाकी चुतमे मुह लगाके हमला बोलदीया.. ओर चंदाकी चुतको अपनी जीभसे खरोदते चाटने लगी.. तो चंदा पागल जैसी होगइ ओर चदर पकडते छटपटाने लगी.. फीर मंजुका सर पकडलीया ओर अ‍ेक हाथ अपनी चुतके पास लेजाते सहेलाने लगी ओर अपनी कमरको आगे पीछे करते जोरोसे जटके मारते हीलाने लगी..





तो मंजु चुतको चाटते वापस उपर सरक गइ ओर चंदाके उपर चडके अ‍ेक हाथकी उंगलीको चंदाकी चुतमे घुसा दीया.. ओर जोरोसे अंदर बहार करने लगी तब चंदा छटपटाते जोरोसे सीसकारीया करने लगी.. ओर आंख बंध करते देवायतको इमेजींग करने लगी जेसे अभी देवायत उनकी चुतको जोरोसे चोद रहा हो.. तभी अचानक उनकी चुतसे अ‍ेक जोरदार पानीका फवारा नीकल गया ओर मंजुके हाथको भीगोने लगा..

तब मंजुके चहेरेपे स्माइल आगइ तो चंदा धडामसे अपनी कमरको पटकाते सांत होगइ.. तब दोनोकी सांसे तेज चल रहीथी तब मंजु साइडमे लुढकके सोगइ.. दोनोही अपनी सांसे दुरस्त करते अ‍ेसेही सांत पडी रही.. फीर मंजु धीरेसे करवट लेके चंदाकी ओर लेट गइ तो चंदाभी मंजुकी ओर मुह घुमाके देखने लगी ओर दोनोके चहेरेपे हसी आगइ तब चंदा करवट लेते मंजुकी पीठमे मुके मारते हसने लगी..

चंदा : (सरमाते हसते) तुम बहोत कमीनी हो.. कोइ अ‍ेसेभी करता हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) दीदी क्या आपको मजा नही आया? मेरे देवुके लीये आपकी तडपको नही देख सकती इसीलीये आपको सांत कीया.. हो सकता हे आगे हमे अ‍ेक दुसरेका अ‍ेसेही खयाल रखना पडे..

चंदा : (सरमाते हसते) क्यु..? हमारे साथ देवु नही होगा क्या..?

मंजुला : (कुछ सोचते) दीदी वोतो होगे.. लेकीन कइ बार हमे अ‍ेसेही अ‍ेक दुसरेकी आगको ठंडी करना पडेगा.. आपतो जानती हो देवुको कइ बार दुसरे सहेरमे रातको दुसरी जगाह रुकना पडता हे..

चंदा : (हसते) हंममम.. ठीक हे अब सोजा.. देख तेरा हाथ गंदा होगया हे ठहेर मे अभी साफ करवाती हु..

कहेते चंदा बेडसे उतर गइ ओर बाथरुममे चली गइ फीर अ‍ेक बाल्टीमे पानी लेके मंजुका हाथ साफ करवाया फीर वोभी चुतको पानीसे साफ करके वापस आके मंजुके पास लेट गइ.. तो मंजु अ‍ेक पैर उनके उपर डालते उनसे बाते करते सोचते सोचते सोने लगी तब चंदाभी धीरे धीरे बाते करते नींदकी आगोसमे चली गइ..





इधर मंजु ओर चंदा प्यारका खेल खेल रहीथी.. तब चंदाको नही पताथा की हवेलीपे आज देवायत पुनमकी जमकर चुदाइ कर रहाथा.. देवायत ओर पुनम पती पत्नी होनेके बावजुद अ‍ेक भाइ बहेन होकर अपनी फेन्टासी पुरी करते जबरदस्त चुदाइमे मसगुल थे.. आज दोनोके सरीरपे काम ओर रतीने कब्जा करलीया था ओर घमासान चुदाइ मे काम ओर रतीने अपना अंस पुनमके गर्भमे स्थापीत करदीया था.. इस बातसे देवायत पुनम दोनोही अन्जान थे लेकीन इस बातको मंजु अच्छी तराहसे जानती थी क्युकी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ५९

इधर मंजु ओर चंदा प्यारका खेल खेल रही थी तब उनको नही पताथा की हवेलीपे आज देवायत पुनमकी जमकर चुदाइ कर रहाथा देवायत ओर पुनम पती पत्नी होनेके बावजुद अ‍ेक भाइ बहेन होकर अपनी फेन्टासी पुरी करते जबरदस्त चुदाइमे मसगुल थे.. आज दोनोके सरीरपे काम ओर रतीने कब्जा करलीया था ओर घमासान चुदाइ मे रतीने अपना अंस पुनमके गर्भमे स्थापीत करदीया था.. इस बातसे देवायत पुनम दोनोही अन्जान थे लेकीन इस बातको मंजु अच्छी तराहसे जानती थी क्युकी....अब आगे

क्युकी वो सब जानती थी वो स्वयंम सबकी जननीथी जीसका ज्ञान बाबाने उसे करवा दीयाथा ओर कीसीको ना कहेनेका वचनभी ले लीयाथा मंजुको येभी पताथा की उनका अगला जन्म कहा होगा ओर उनके बेटे ओर पोतेके साथ उनका क्या रीस्ता होगा.. वो येभी जानतीथी की अपने पतीका कीतनी ओरतोके साथ रीलेशन हे ओर आगे होगा.. ओर येभी जानतीथी की पुनम ओर देवायत आपसमे सादी करके सुहागरातभी मना चुके हे ओर इस वक्त क्या कर रहे हे..

बस अ‍ेक रीस्ता अ‍ैसाथा की जो जानते हुअ‍े भी इस रीस्तेसे अन्जान बने रहेना चाहतीथी.. क्युकी वो कीसीके सामने उनका जीक्र करना नही चाहती थी.. वो प्रकृतीको पुरी तराह पहेचान चुकीथी तभी तो देवायतके कीसी भी रीलेशनसे उनको कोइ अ‍ेतराज नही होताथा.. कभी कभी फुरसतमे अकेली होती तब ये सब रीस्तोके बारेमे सब सोचते वो बहुतही रोमांचीत होती थी.. क्युकी आगे जाके वो खुद अ‍ैसे रीस्तोसे बंधने वालीथी.. इसी लीये उनको बच्चा पैदा करनेकी बहुत जल्दी थी.. आजभी यही सब सोचते सोगइ..

सुबह देवायत ओर पुनम अभीभी सो रहेथे तब दया ओर रजीया सब काम नीपटाते काम कर रहीथी.. फीर रजीया उपरके सब रुमकी सफाइ करने चली गइ तब लखनभी रातमे लताके साथ फोन सेक्स करते नंगाही सो गयाथा.. तो रजीया लखनके रुमके पास गुजरने लगी तो खुली खीडकीसे लखनको अपना लंड मुठीमे पकडते नंगा सोते देख लीया.. तो लखनका लंड हवामे लहेराते खडाथा.. तो रजीया उसे देखतेही वही रुक गइ.. ओर उनकी आंखोमे अ‍ेक अजीबसी चमक आगइ..

वो जानतीथी की लखन अब जवान हो चुका हे.. ओर देवायत अब उसे ज्यादा टाइम नही देपाता तो लखन आसानीसे उनको चोदनेके लीये तैयार होजायेगा.. ताकी जब देवायत ना मीलेतो वो अपने तनकी प्यास लखनसे चुदवाके ठंडी कर सके.. बस अभी थोडा नखरा करना पडेगा.. यही सब सोचते उनकी कामवासना फीरसे जागृत होगइ.. ओर वो कातील मु्सकानके साथ वापस जटसे नीचे आगइ..

ओर अ‍ेक बार सबके रुमको देखने लगी तो सब सो रहेथे ओर दया कीचनमे काम कर रहीथी.. तब वो दबे पांव वापस उपर चली गइ.. ओर जाडु लेकर धीरेसे लखनका दरवाजा खोलके अंदर चली गइ.. फीर दरवाजा बंध करके लखनके बेडके पास चली गइ ओर वही खडी रेहते थोडी देर लखनके लंडको वासनाभरी नजरोसे देखने लगी तब उनका हाथ अनायासही अपने बुब्सपे चला गया..

ओर खुद अपनेही दोंठ दातोसे चबाते अख बंध करके बुब्सको मसलने लगी.. तभी लखनकी आंख खुल गइ ओर रजीयाको अ‍ैसे देखते वो पहेलेतो गभरा गया.. तब रजीयाभी लखनको अ‍ैसे देखके वही जाडु लगाने लगी.. तब लखन वापस आंख बंध करते थोडी खुली रखके देखने लगा की रजीया क्या कर रही हे.. आज पहेली बार लखनने रजीयाके जोबनको अच्छेसे देखा.. तो उनका लंड जटके मारने लगा..

तब रजीया जुक जुककर अपने जोबनके जलवे दीखाते जाडु लगा रहीथी उनके दोनो बुब्स आधेसे ज्यादा बहारकी ओर जांकते लखनको उतेजीत कर रहेथे.. जेसेही जाडी लगाते रजीया नजदीक आगइ तो आज लखनने हींमत करते उनका हाथ पकडलीया ओर अपने पास बेडपे बीठा दीया.. तो रजीयाभी जाडु नीचे रखके धीरेसे सरमाती बेडपे बेठ गइ.. तभी लखनने रजीयाका हाथ पकडके अपने लंडपे रखदीया..

जेसेही लखनके लंडको छुआ तो लंडने अ‍ेक जटका मारा तब रजीयाने फोरन अपना हाथ वापस खीच लीया ओर खडी होगइ.. लेकीन लखनको आज रजीयाको देखतेही ठरक चड गइ.. ओर फीरसे रजीयाको खीचके बेडपे बीठा दीया ओर वापस हाथ पकडके अपने लंडपे रख दीया.. तो रजीयाने हाथ अ‍ेसेही रखा ओर धीरेसे मुठीमे भरलीया ओर धीरेसे सहेला दीया तब लखन आंख बंध करते लेटा रहा.. ओर रजीया लखनको तीरछी नजरोसे देखते बहेकने लगी.. ओर वासनाकी आगमे जलने लगी..

तब लंखनके लंडको हीमत करते जोरोसे मसल दीया.. तो लखनसे बरदास्त करना मुस्कील होगया ओर वोभी वासनाकी आगमे जलते कामुक होगया.. ओर जटसे आंख खोलते रजीयाने जो हाथसे लंडको मुठीमे भरके रखाथा उसे जोरोसे पकड लीया तो रजीया अ‍ेकदम गभरा गइ ओर जटसे बेडसे खडी होते बहार जानेके लीये लखनसे हाथ छुडवाने लगी लेकीन लखनने हाथको कसके पकडके रखा.. तब रजीया आंसु बहाने लगी ओर लखनसे माफी मांगने लगी..

रजीया : (धीरेसे रोते) छोटे मालीक माफ करदीजीये मे बहेक गइथी आइन्दा अ‍ैसी गलती नही होगी.. मुजे माफ कर दीजीये.. छोड दीजीये मुजे काम करने जाना हे..

लखन : (धीरेसे) चुप.. अ‍ेकदम चुप.. ये बता यहा मेरे रुममें क्या कर रहीथी..? तुजे मना नही कीयाकी जब कोइ रुममे होतो नही जाना.. क्यु मेरे रुममे आइ..?

रजीया : (रोते हाथ छुडानेकी कोसीस करते) माफ कीजीये वो..वो..मे खीडकीसे आपको अ‍ैसे देख लीया ओर मे बहेक गइतो अंदर आगइ आइन्दा अ‍ेसी गलती नही होगी..

लखन : (कातील स्माइल करते) चुप अ‍ेकदम चुपहोजा वरना भाइको बता दुगा..

रजीया : (रोते चुप होते धीरेसे) नही.. कीसीको नही कहेना वरना मेरी इजतके साथ नोकरीभी चली जायेगी..

लखन : (कुटील मुस्कान करते) ठीक हे.. लेकीन इनकी सजा तुजे मीलेगी.. क्या तुजे ये अच्छा लगा..?

रजीया : (मनते करते) अ‍ैसा जुल्म मत कीजीये गलती होगइ.. आप मुजे सजा दे दीजीये लेकीन कीसीको कहेयेगा नही.. वरना मेरा यहा रहेना मुस्कील होजायेगा.. प्लीज... (जुठ मुठ मनते करने लगी)

लखन : (हसते) ठीक हे नही कहुगा.. लेकीन तुजे सजातो मीलेगी.. हें..हें..हें..

रजीया : (मनमे खुस होते नजरे जुकाते) ठीक हे आप जोभी सजा देनीहो दे दीजीये लेकीन कीसीको कहेना नही.. वरना हम दोनोकी इजत चली जायेगी..

लखन : (हसते हाथ छोडते) ठीक हे तो चल फटाफट अपने सब कपडे नीकाल.. जल्दी..

रजीया : (सरमाते गभरानेका नाटक करते) ये आप क्या केह रहेहे कोइ देख लेगा.. प्लीज मुजे जाने दीजीये..

लखन : (हसते) ठीक हे जाओ.. फीर मत कहेना.. मेने तुजे चान्स नही दीया.. हें..हें..हें..

रजीया : (गभराते) नही नही प्लीज.. आप जोभी कहेगे करुगी.. कीसीको कहेना मत.. लेकीन.. यहा..कोइ..

लखन : (हसते) यहा कोइ नही आता तुजे हमारे घरका नीयमतो पता हे.. चल जल्दी कर मुजे नहाने जाना हे

कहातो रजीया नजरे जुकाते धीरे धीरे अपना टोप नीकालने लगी तो उपर केवल ब्रामे रेह गइ.. जब टोप नीकाल रहीथी तब लखनने उनके लंहेगेका नाडा खीच लीया तब लहेंगा सरकके नीचे गीर गया तो रजीयाने जटसे अपने दोनो हाथ चुतपे रख दीये क्युकी वो चडी नही पहेनतीथी.. तब लखन उनका हाथ पकडते अ‍ेक बहारकी खीडकीकी ओर लेगया ओर उसे खीडकीके पास खडा करके पीछेसे अपनी बाहोमे जकड लीया..

तब रजीया समज गइकी उनके साथ अब क्या होने वाला हे.. तो मनही मन खुस होने लगी.. क्युकी लखनको फसानेमे वो अपने प्लानमे कामयाब हो रहीथी.. लेकीन चहेरेपे जाहीर नही होने दीया.. तभी लखन पीछेसे बाहोमे भरते उनके दोनो बुब्स ब्राके उपरसेही मसलने लगा तो रजीया दर्दके मारे मुह बीगाडते लखनके हाथोमे हाथ रखते उसे रोकनेकी जुठ मुठकी कोसीस करने लगी.. तभी लखनने रजीया को थोडा जुकादीया ओर लंड पकडके सीधेही पीछेसे चुतमे घुसाने लगा तब रजीया थोडी ओर जुक गइ..

अ‍ेक दो बारकी कोसीसके बाद लखन रजीयाकी चुतमे लंडको घुसानेमे कामयाब होजाता हे.. ओर उनकी कमरको पकडते जोरोसे चोदने लगता हे तब रजीया आंख बंध करते चुपचाप चुदवाते मजा लेने लगी तब उनके छोटे छोटे बुब्स उनकी ढीली ब्राके अंदरही उछलने लगते हे ओर लखन लगातार धीरे धीरे कमर हीलाते रजीयाको चोदने लगता हे.. रजीयाका मुह खीडकीसे बहारकी ओर था ओर वो खीडकीपे हाथ टीकाते मजेसे चुदवाती रही.. ओर मनही मन खुस होने लगी..





तब थोडीही देरकी धकम चुदाइके बाद लखनने अपना लावा रजीयाकी चुतमे उडेल दीया.. ओर फटसे लंडको बहार खीच लीया तब लखनका कामरस रजीयाके पेरसे उतरने लगा तो रजीया बाथरुममे भाग गइ ओर फटाफट अपनी चुत साफ करके बहार आगइ.. ओर अपने कपडे मुह नीचा करते पहेनने लगी.. तब लखन अपना लंड कपडेसे साफ करते रजीयाको देखते हस रहाथा.. जब दोनोकी नजर मीलीतो रजीया सरमसे पानीपानी होगइ.. ओर मंद मंद मुस्कराती रही..

लखन : रजीया क्या मस्त माल हे तु.. अब मे जबभी कहु तु मेरे रुममे आजाना..

रजीया : (धीरेसे सरमाते हसते)) मालीक अ‍ेसा जुल्म मत कीजीये कीसीको पता चल गयातो? मेरे साथ आपकीभी इजत चली जायेगी.. मेतो चली आउगी.. लेकीन अभी आपकी सादीभी होने वाली हे.. कुछतो सोचीये..

लखन : नही रजीया जबतक सादी नही होती तबतक तुही मेरी आगको सांत करेगी.. अब मे हमेसा मेरे रुमका दरवाजा तेरे लीये खुला रखुगा तु देर रातको आजाना.. बस तु मुजे खुस करती रहे मे तुजे खुस कर दुगा.. तु बहुतही मस्त लगती हे.. पहेले मुजे क्यु नही मीली..?

रजीया : (सरमाते हसते) ठीक हे मालीक आजाउगी.. मुजे क्या पता.. आपको मे अच्छी लगती हु.. वरना पहेलेही आपके पास आजाती.. लेकीन देखना कीसीको पता ना चल जाये..

कहेते रजीया कपडे पहेनके फटाफट दुसरे रुममे चली गइ ओर कातील मुसकान हसने लगी.. क्युकी जबसे देवायतका लंड लीया हे तो उनको अपनी चुतमे लखनका लंड कोइ खास फील नही हुआ.. ओर लखन थोडीही देरमे जड गयातो उनके अनाडीपनपे रजीयाको हसी आ रहीथी.. फीरभी उनकी आग सांत करनेके लीये लखन काफीथा.. क्युकी अपने तनकी आग मीटानेके लीये वो सब हथकंडे अजमाना जानती थी..

रजीयाकोतो बस अ‍ेक लंड चाहीयेथा.. आज रजीया लखनको फसानेके अपने प्लानमे कामयाब रही.. उनको आज अपने तनकी आग बुजानेके लीये दुसरा मर्द मील गयाथा.. जो ये रीस्ता वो दयासे भी छुपके रखना चाहती थी.. तबवो खुस होते गाना गुनगुनाते काम करने लगी.. तो लखनभी नहाने चला गया ओर कंपलीट होके नीचे आगया.. तो देवायत ओर पुनम अभी भी सो रहेथे.. जीसे देखके उनको आस्चर्य हुआ..

लखन : दया क्या बात हे भाइ अभी तक सोये हुअ‍े हे.. तबीयततो ठीक हेनां..?

दया : छोटे मालीक आपही जाके देखलो हमतो अंदर नही जा सकते..

तो लखन देवायतके रुमकी ओर चला गया ओर हल्कासा दरवाजा खोलके देखातो देवायतका बेड खाली था तब उसे बाथरुममेसे पानीकी आवाज आने लगी तो समज गयाकी भाइ नहा रहे हे.. तब वो दरवाजा बंध करके पुनमके रुमकी ओर चला गया.. वहा देखातो पुनम घोडे बेचके सो रहीथी.. तब लखन उसे देखने चला गया.. ओर धीरे से पुनमके सरपे हाथ रख दीया तो पुनमके सरमे थोडा टेम्रेचर फील हुआ ओर वो देखकर बहार आगया..

लखन : दया लगता हे दीदीकी तबीयत कुछ ठीक नही हे उसे सोने देना.. थोडा बुखार जैसा दीख रहा हे..

दया : (लखनको देखते) क्या हुआ..? ज्यादा बुखारतो नही हे..?

लखन : (हसते) अरे नही नही.. हल्का बुखार जेसा लग रहा हे.. आराम करेगीतो ठीक होजायेगी..

दया : छोटे मालीक आपको चाइ नास्ता करनाहे की बडे मालीकका वेइट करना हे..? तो चलो बैठ जाओ मे चाइनास्ता दे देती हु..

लखन : नही दया भाइ जाग गये हे हम साथमेही नास्ता करेगे.. मे यही उनका वेइट करते बेठा हुं..

कहेते लखन डाइनींगपे बेठ गया तब थोडीही देरमे देवायतभी तैयार होके आगया तब लखनने पुनमकी तबीयतके बारेमे बताया तो देवायत सीधेही पुनमके रुममे चला गया ओर उनके सरपे हाथ लगाके चेक करने लगा तो पुनमकी आंख खुल गइ ओर देवायतको देखतेही हाथ लंबा करते उसे अपने उपर खीचलीया ओर देवायतके होंठ चुमलीया.. फीर उनकी ओर देखते मुस्कराती रही.. तब देवायत उनकी बगलमे बैठ गया..

देवायत : (हसते) बेबी क्या हुआ..? बुखार आगया क्या..? हें..हें..हें.. अभी दवाइ देता हु..

पुनम : (सरमाते हसते धीरेसे) भाइ कल पुरी रात बीना नीचे उतरेही मेरी बजाते रहेहे.. ओर आपकी सब गरमी मेरे अंदर डालदी हे तो बुखारतो आयेगाही.. बस कुछ नही मामुली टेम्परेचर हे आराम करतेही दुर होजायेगा.. भाइ आज मे आपके साथ नही आ सकती आपको अकेले जाना पडेगा.. सोरी..

देवायत : (सरको चुमते) चल ठीक हे सो जा आज आराम करले हम कल चलेगे.. ओके..

पुनम : (गलेमे हाथ डालके होंठ मीलाते चुमकर) भाइ आइ लव यु.. लव यु सो मच.. मे आपको बहोत बहोत बहोत प्यार करती हु..

देवायत : (हसते) हंमम लव यु टु बेबी.. मेभी तुमसे बहोत प्यार करता हु.. चल सोजा बहार लखन बैठा हे.. अगर अंदर आगया तो गडबड होजायेगी..

पुनम : (सरारतसे धीरेसे) कौन मेरा देवर..? हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां तेरा देवर.. तुनेतो सब रीस्ता ही बदल दीया.. चल आराम करले..

कहेते देवायत पुनमके उपर चदर डालके बहार आगया ओर लखनके साथ डाइनींगपे बेठ गया.. तब दया दोनोको चाइनास्ता देने लगी ओर देवायतके सामने तीरछी नजरोसे कातील स्माइल करती रही तभी रजीयाभी सब सफाइ करके उपरसे आगइ तो देवायतके सामने मुस्कराते अंदरकी ओर जाने लगी.. तब पीछे मुडके लखनको कातील नजरोसे देखते हसते हुअ‍े आंख मारके अंदर चली गइ तब लखन सरमा गया..

लखन : भाइ मेरा कुछ काम हे? वरना मे खेतोपे जा रहा हु.. आज कुछ कटाइ करवानी हे भानुभाइ भी नही हे..

देवायत : हा लखन उनके मामाकी तबीयत खराब हे वो देखने गया हे.. तु सब ध्यान रखना मेभी बहार जा रहा हु सायद रातको लोटुगा.. ओर पुनमका खयाल रखना उसे आराम करने देना अगर ज्यादा बुखार होतो मुजे फोन करना हम उसे होस्पीटल लेके जायेगे..

दया : मालीक आप दीदीकी चीन्ता मत करो अगर मामुली बुखार हुआ तो साम तक ठीक कर देगे.. वरना वो हमारे सुधीर डाक्टरको दीखा देगे..

देवायत : दया उनका खयाल रखना.. जरुरत पडेतो रश्मीभाभी या चारुभाभीको बुला लेना ओर सुधीरके यहासे दवाइ ले लेना.. मे उनसे बात करलुगा..

कहेते जरुरी सुचन देकर देवायत भावनाको मीलने नीकल गया ओर आज बडी कार लेके भानुके गांवकी ओर चला गया ओर रास्तेसे भानुको फोन करदीया..

देवायत : (फोनपे) हां भानु क्या हुआ पहोंच गया मामाके गांव..? कैसीहे उनकी तबीयत..?

भानु : (फोनमे) हां भाइ मे ओर माइ सुबहही नीकल गयेथे अभी पहोंचेहे मामाकी तबीयत कुछ ज्यादा ही खराब हे सायद मुजे होस्पीटल लेकर जाना पडे..

देवायत : भानु अगर मेरी जरुरत होतो मे आजाउ..?

भानु : नही भाइ मे कार लेकेही आया हु आप टेन्शन मत लो.. यहा बहुत सारे लोग हे.. मे मेनेज करलुगा..

कहेते फोन रखदीया ओर देवायत सीधाही भानुके गांव चला गया जेसेही अंदर गया तो भावना ओर लता दोनोही बाते करते खटीयापे बेठे हस रहीथी जेसेही देवायतको देखा तो लता सरमाते हसते अपने रुममे भाग गइ तब भावना खुस होते मुस्कराती रही ओर देवायतको गले मील गइ.. फीर उनका हाथ पकडके अपने रुममे चली गइ ओर उसे बेडपे ही बीठाके खुद उनके पास बैठ गइ ओर लताको जोरोसे आवाज लगाइ..

तभी लता देवायतके लीये पानी लेके आगइ ओर देवायतने पानी पीया तब लता वही खडे रहेते खुब सरमा रहीथी.. आखीर उनके जेठजो थे.. तब देवायतने ग्लास वापस दीया तब भावनाने उसे चाइ बनानेके लीये बोल दीया ओर कहा.. देवायतसे छुपके लताको हसके आंख मारदी.. तो लताभी सरमाते हसने लगी..

भावना : लता वो बहारका दरवाजा बंध रखना मुजे जीजुसे कुछ जरुरी बात करनी हे..

लता : (सरमाते) जी भाभी.. मे चाइ बनाती हु आप आवाज लगा देना.. तब मे चाइ देजाउगी..

कहेते लता सरमाती हसते हुअ‍े चली गइ तब देवायत भावनाकी ओर प्रस्नार्थभरी नजरोसे देखता रहा तो भावनाभी सरमा गइ ओर नजर जुकाते मुस्कराते देवायतके पास बेठे पेरोसे जमीनको खरोदने लगी..

देवायत : हां भावु बोल क्या बातथी जो तु इतना रो रहीथी मीया बीवीमे छोटे मोटे जगडेतो होतेही रहेते हे..

भावना : (सीरीयस होते अ‍ेक नजरसे देखते) जीजु क्या ये आपको छोटा मोटा जगडा लग रहा हे..? आप सब जानतेहो फीरभी..? जीजु इनमे कीसीकी गलती नही हे मेरी सुरुसे ही कीस्मत खराब हे..

देवायत : (सीरीयस होते) भावु मुजे सचमे नही पताथाकी भानुका उनकी मामीके साथ सादीसे पहेलेही रीलेशन हे वरना मेही तेरी सादी इनसे नही करवाता.. आइ अ‍ेम सोरी, मुजे पता हे तुम मुजसे भी नाराज हो..

भावना : (देवायतका हाथ पकडते) नही जीजु अपने आपको दोस मत दो.. वरना सबसे ज्यादा दुख मुजे होगा.. मेरी कीस्मतमे यही लीखाहे तो कीसीको क्या दोस दे.. ओर रही बात भानुकी तो अब मुजे कोइ अ‍ेतराज नहीकी वो इनकी मामीसे रीलेशन रखे या कीसी ओरसे.. मुजे मेरी कीस्मतसे समजोता करना आ गया हे.. अब मुजे कीसीसे कोइ सीकायत नही हे..

देवायत : नही भावु.. कीस्मतको दोस मत दे.. भानुसे बात करके पता चला की सीचुअ‍ेशन ही अ‍ेसी थी की दोनोके बीच रीलेशन होगया.. ओर तबसे ये रीलेशन चालु हे वो अपनी मामीके साथ सादी करना चाहता हे लेकीन मामाकी वजहसे नही करपा रहा.. अब सायद दोनो सादी करले.. क्या तुजे कोइ अ‍ेतराज हे..?

भावना : (अ‍ेक नजरसे देखते) जीजु क्या ये सब आपको भानुने कहा हेनां..?

देवायत : हां भावु अब मे तुमसे कुछ नही छुपाउगा.. वो केह रहाथा उनके मामके जाते ही दोनो मा बेटीको इधर लेकर आयेगा ओर मामीसे सादी करलेगा.. क्युकी उन दोनो बेचारेका हे भी कोन..? ओर अ‍ेक बात ओर.. जो सायद कोइ ओर नही जानता..

भावना : (प्रस्नार्थ भरी नजरोेसे देखते) क्या..? क्या ओर कोइभी बात हे..? जो हम कोइ नही जानते..?

देवायत : हां भावु ओर मे चाहता हु ये बात तुभी तेरे तकही सीमीत रखे.. मुजसे वादा कर अभी कीसीको नही कहेगी.. जबतक सब सही नही होजाता..

भावना : (देवायतका हाथ थामते) जीजु मेरे दीलके सबसे ज्यादा करीब आपही हो.. भानुभी नही.. आइ प्रोमीस मे कीसीसे कुछ नही कहुगी.. बताइअ‍े मुजे..

देवायत : (लंबी सांस लेते) भावु वो नीलम.. भानु ओर उनकी मामीकी बेटी हे..

भावना : (आंखमे आंसु आगये) जीजु.. क्या इतनी बडी बच्ची होगइ.. फीरभी मुजसे सादीकी..? मेरे साथ इतना बडा धोखा..? क्या आपकोभी मालुम नही था..? जीजु पता हे जब मेरे प्यारसे इजहार नही करपाइ ओर उनकी सादी होगइ तब मे उस रातको ही सुसाइड करने वालीथी.. लेकीन तब आपकी सादी ओर मम्मी पापाकी वजहसे नही करपाइ.. ओर कीस्मतसे समजोता करलीया ओर कलभी वोही करने वालीथी.. लेकीन आपने मुजे अपनी कसम देदी.. जीजु आपको नही पता आपकी मेरे दीलमे क्या अ‍ेहमीयत हे..

देवायत : (भावुके आंसु पोछते) भावु मेरा यकीन कर मुजे कुछभी मालुम नहीथा.. ओर अ‍ेक जापट लगाउगा जो अ‍ेसी उल्टा सीधा कभी सोचा तो.. क्या मुजपे भरोसा नही हे..? मे सब ठीक कर दुगा यकीन कर मेरा.. तुजे कुछ प्रोबलेम नही होगी.. करनेदे दोनोको सादी.. मे हुनां.. तेरी सब जीम्वेवारी मे लेता हु..

भावना : (आंसु पोछते हसते) जीजु आपका हक बनता हे मुजे डांटना मारना.. लेकीन आप सब केसे ठीक करोगे..? अब सब टाइम नीकल चुका हे.. ओर हां अब कुछ उल्टा सीधा नही सोचुगी.. बस अबतो मेनेभी ठानली हे.. यही रहेके उनसे बदला लेना हे.. आप देखते जाओ.. बस मुजे मेरा पुराना प्यार मील जाये.. ओर ये आपही सब ठीक कर सकते हो.. मे उसीके सहारे अपनी जींदगी जी लुगी..

देवायत : भावु क्या ये सही होगा..? तुम सब साथ मीलके नही रेह सकते..?

भावना : (हसते) जीजु वोभी हम रेह लेंगे.. लेकीन अगर वो मुजे धोखा दे सकेते हे ओर दो बीवीया रख सकते हे.. तो मे क्यु नही.. क्या ओरत दो मर्दोसे रीस्ता नही रख सकती..? क्या सब गलतीका अधीकार पुरुषकोही मीलता हे? क्या सीर्फ पुरुषही आजादीमे रेह सकता हे हम ओरते नही..?

देवायत : बाततो तेरी सही हे लेकीन अ‍ेक बार फीर ठंडे दीमाग से सोचले.. अगर भानुको सब पता चल गातो तु क्या करेगी..? तब मुजेही तुजे सम्हालना होगा.. क्युकी मम्मी पापाको अब टेन्शन नही देना.. तु बात उनतक नही पहोचाना..

भावना : जीजु आप फीकर मत करो मेने सब सोच लीया हे.. अबतो जोभी करना हे इनके साथ रहेकेही करना हे.. ओर मुजे खुसी हुइ आप हमारे मम्मी पापाके बारेमे इतना अच्छा सोचते हे ओर उनका खयाल रखते हे.. आज मे आपकी कायल होगइ.. जीजु आइ अ‍ेम प्राउड फोर यु.. कोन कहेता हे मेरे मम्मी पापाका बेटा नही हे आप उनसे बेटेसे बढकर हो..

देवायत : भावु उनका खयाल हम नही रखेगे तो कौन रखेगा..? भावु क्या मुजे बता सकती हे तुने क्या सोचा हे..?

भावना : जीजु अब आपको नही बताउगी तो कीसको बताउगी.. जीजु मे चाहती हु मेभी आजादीके साथ जीउ.. मे यही रहेके मेरे पुराने प्यारको वापस पाउगी.. ओर उनके साथ सब रीलेशन रखुगी.. आज समज गयेनां..? यही भानुकी सजा हे.. जो सीर्फ आपकोही बता रही हु..

देवायत : लेकीन तुमतो केह रहीथी उनकी अब सादी होगइ हे.. तो क्या उनकी बीवीके बारेमे सोचा हे..? ओर तुजे यकीन हे की वो तेरा प्यार कबुल करलेगा.. उनकी लाइफ नही डीस्टर्ब होगी..?

भावना : नही होगी.. क्युकी वोभी रंगीन मीजाजके हे मुजे मालुम हे.. उनकी कइ ओरतोके साथ रीलेशन हे तो अ‍ेक ओर सही.. क्या पता सायद वोभी मुजे सच्चे दिलसे चाहते हो.. हें..हें..हें..

लता : (बहारसे आवाज लगाते) भाभी चाइ बन गइ हे देदु..? वरना ठंडी होजायेगी..

भावना : हां लता लेकर आ ओर देदे तेरे जेठको हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) क्या भावु.. बेचारी सरमा जायेगी..हें..हें..हें..

भावना : जीजु ये कोइ सरमाने वाली नही हे.. वरना सगाइसे पहेले कैसे आपसे बाते करती थी..

लता : (हसते अंदर आते) लीजीये भैया इनकोतो टांग खीचनेकी आदत पड गइ हे.. अब आपही इनको अच्छेसे समजाओ.. हें..हें..हें.. मेरी बहुत टांग खीचती हे..

भावना : (हसते) देखा जीजु कोइ सरमाने वाली नही.. केसे केचीकी तराह जुबान चलती हे हें..हें..हें..

लता : (चाइ देते) लीजीये भैया चाइ पीजीये.. अब कैसी हे मंजुभाभीकी तबीयत..? मौसीके वहा हेनां..?

देवायत : हां लता सब मजेमे हे.. अब तुभी तैयार रहेना मौसीके साथ कभीभी खरीदी करने जाना पडे.. अबतो सादी होजाये ओर तुम जल्दी घर आजाओ.. तो हमे पुनमकी कमी महेसुस ना हो..

भावना : (हसते) जीजु आप फोन कर देना या लखनभैयाको लेने भेज देना मे यहासे भेज दुगी..

लता : (सरमाते हसते) आप कप यही रख देना.. मे बादमे ले लुगी आप आरामसे बात करलो..

कहेते लता सरमाते हसते अपने रुममे भाग गइ तो देवायत ओर भावना दोनोही हसने लगे.. ओर देवायत आधी चाइ भावनाको देता हे तब दोनोही चाइ पीने लगे तबतक चाइ पीते भावना सीर्फ देवायतको देखती रही.. आज उनके मनमे बडाही घमासान युध्ध चल रहा था.. वो कीसीभी हालमे आज देवायतसे अपने दीलकी बात बतानेका मन बना चुकीथी.. तब दोनोने चाइ पीके कप वही रख दीये तब देवायतने प्रस्नार्थ भरी नजरोसे भावनाकी ओर देखके कहा....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ६०

कहेते लता सरमाते हसते अपने रुममे भाग गइ तो देवायत ओर भावना दोनोही हसने लगे.. ओर देवायत आधी चाइ भावनाको देता हे तब दोनोही चाइ पीने लगे तबतक चाइ पीते भावना सीर्फ देवायतको देखती रही.. आज उनके मनमे बडाही घमासान युध्ध चल रहा था.. वो कीसीभी हालमे आज देवायतसे अपने दीलकी बात बतानेका मन बना चुकीथी.. तब दोनोने चाइ पीके कप वही रख दीये तब देवायतने प्रस्नार्थ भरी नजरोसे भावनाकी ओर देखके कहा....अब आगे

देवायत : हां भावु बोल क्या केह रहीथी तुम..? कोन हे वो खुसनसीब इन्सान जीनपे मेरी इस खुबसुरत सालीका दील आ गयाथा.., हें..हें..हें..

भावना : (सरमाते हसते) जीजु मे ओर खुबसुरत..? क्या सचमे आपको खुबसुरत लगती हु..?

देवायत : (जोरोसे हसते मजाकके लहेजेमे) हां तु बहोत खुबसुरत हे अगर मंजुसे पहेले मुजसे मीली होती तो तुमसे ही सादी कर लेता.. हें..हें..हें..

भावना : (सरमसे पानीपानी होते हसते) जीजु आप अच्छा मजाक कर लेते हो.. तो मुजसे भी सादी कर लेनी चाहीयेनां.. आपतो राजा हो दो बीवीया रख सकते हो.. तो फीर क्यु नहीकी मुजसे सादी..? हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) अरे तुम तो सचमे राजी होगइ.. अरे बाबा तेरी दीदीको देखा हे..? मार डालेगी मुजे.. हें..हें..हें..

भावना : (हसते) नही.. जीजु दीदी बहोत अच्छी हे.. क्या आप मौसीसे सादी कररहे होनां..? ओर वोभी दीदीसे कहेने पे..? तो फीर मेतो खुद उनकी बहेन हु..

देवायत : भावु ये कीसने कहा तुजे..? क्या इस बारेमे तेरी मंजु या मौसीसे बात हुइ हे..?

भावना : हां जीजु होस्पीटलमे हम तीनो अकेलीथी तब मंजुदीदीने मुजे सब बता दीया हे.. ओर ये अच्छाभी हे.. अ‍ेक विधवाको सहारा मील जायेगा.. ओर मौसीकी उमरभी क्या हे.. मे बहुत खुस हु जीजु.. आप उनसे सादी करलो..

देवायत : वो सब छोड ये बता तुने क्या सोचा हे..? क्या सचमे उनसे मीलना चाहती हे जीसे प्यार करती थी..? कहा रहेता हे वो..?

भावना : (सरमाते धीरेसे) मेरे दिलमे.. जीजु अब अ‍ेक वोही आखरी रास्ता हे.. अगर उसने मेरा प्यार कबुल नही कीया तो मे जी नही पाउगी.. मेरी सब उमीदे खतम होजायेगी.. फीर कुछ नही हो सकता.. बस अब वोही अ‍ेक आखरी सहारा हे..

देवायत : नही भावु अ‍ैसी बाते मत कर.. अ‍ेक डरसा लग रहा हे.. कोन हे वो जीसे तुम इतना प्यार करती थी या करती हो..? क्या उसे सब मालुम हे..? बता मुजे..

भावना : नही जीजु यही तो प्रोबलेम हे की मे मेरी दीलकी बात उन तक नही पहोचा पाइ.. वरना उनकी बीवीकी जगाह आज मे वहा होती.. मे आजभी उसे मेरे दिलसे नही नीकाल पाइ.. वो आजभी मेरे दिलपे राज करते हे..

देवायत : लेकीन उनका नामतो बता.. जो मेरी इस खुबसुरत सालीके दिलपे कब्जा करके बैठा हे.. क्या तुजे मुजपे भरोसा नही हे..?

भावना : (अ‍ेकदम सरमाते) नही जीजु अबतो सीर्फ आपके भरोसेही बेठी हु.. पता नही केसे कहु..

देवायत : भावु तु मेरी साली हे ओर जीजा सालीमे दोस्ती आम बात हे तो हम दोस्तभी हे.. मुजे सब खुलके बता सकती हे बता कोन खुसनसीब इन्सान हे जीनपे मेरी सालीका दील आगया हे..

भावना : (नजर जुकाते सरमाते) जीजु..वो.. जीसे मे प्यार करतीहु.. वो..वो..आप हो.. जीजु आइ लव यु..

देवायत : (चोंकते धीरेसे) व्होट..? भावु तु ये क्या केह रही हे..? मे..? तेरा दीमाग तो ठीक हेनां..?

भावना : (जटसे देवायतका हाथ पकडते धीरेसे) हां जीजु वो आपही थे जीसे मे प्यार करतीथी लेकीन मेरे दीलकी बात आप तक पहोचाउ इससे पहेले आप ओर मंजुदीदी बहोत आगे बढ चुके थे.. जब मे अपने प्यारका इजहार करने आपके पास आइ तब आप दोनो मंजुदीदीके रुममे मीले हुअ‍े थे.. ओर मे आंसुओके साथ वापस चली गइ.. ओर उसी रात खुब रोइ ओर मेने नाजाने क्या क्या सोच लीया.. जींदगी भी खतम करनेकी सोचली..

देवायत : (धीरेसे) लेकीन भावु.. इतना कुछ सोच लीयाथा.. तो मुजसे बादमे तो मील सकती थी.. मीली क्यु नही..?

भावना : (आंसु बहाते) जीजु..(कुछ देर बाद) केसे..मीलती.. आप दोनो बहोत आगे बढ चुके थे.. ओर दीदीभी आपसे दीलोजानसे प्यार करतीथी.. ओर घरपे आपकी सादीकी बातभी होने लगी..

देवायत : (गहेरी सांस लेते) भावु फीरभी अ‍ेक बार तो मुजसे बात कर लेती.. हो सकता हे मे मंजुसे बात करते तुजेभी अपना लेता.. क्युकी मेरे बा बापुजी इस बातकी कभी मना नही करते.. ओर मेरी मंजुभी खुले वीचारोकी हे.. मेरे बारेमे उनको सब पता हे.. फीरभी मुजसे इस बारेमे कभी मना नही कीया..

भावना : (हसते) जीजु तो अबभी क्या बीगडा हे..? ओर मे कोनसे आपसे सादीकी बात कर रही हु.. बस मेरा प्यार कबुल करलो मेरे लीये यही बहोत हे.. पता हे जीजु मेने भानुके लीये क्यो हां की..? क्युकी जब आप इनका रीस्ता लेकर आये तो मेने यही सोचके हां कहेदी की चलो आपके खास दोस्तहे तो कमसे कम आपसे नजदीक रहेने का ओर बार बार मीलनेका मोकातो मीलेगा.. बस यही सोचके मेने हा करदी..

देवायत : लेकीन भावु अब वो सीचुअ‍ेशन नही हे.. भानु मेरा अच्छा दोस्त हे तो मे तुजे कैसे हां केह सकता हु.. क्या ये भानुको धोखा देनेकी बात नही हे..? अ‍ेक बार ठंडे दिमागसे सोचले..

भावना : जीजु अ‍ेक बात कहु..? जब आपने भानुको मेरे रीस्तेकी बातकी तो उसने आपको तब अपनी मामीके बारेमे क्यु नही बताया..? भानुका रीलेशनतो तबभी उनकी मामीके साथ था.. क्या उसने आपकोभी धोखा नही दीया..? वो येभी जानताथा की अ‍ेक दीन उसे अपनी मामीको अपनाना पडेगा फीरभी मुजसे सादी करली..? क्या मुजेभी अंधेरेमे रखके धोखा नही दीया..? अगर वो सबको धोखा दे सकता हे तो हम क्यु नही..? बस.. मुजे इतना पता हे मे आपको प्यार करती हु.. ओर हंमेसा करती रहुगी..

देवायत : (कुछ सोचते) वोतो ठीक हे भावु लेकीन.. उसे धोखा देना मेरा दील नही मानता.. जीस दीन उसे पता चल जायेगा उस दीनसे हमारे सबके रीलेशन खतम होजायेगे.. कभी सोचा हे..?

भावना : (देवायतका हाथ पकडते धीरेसे) जीजु यकीन मानो इस बातका कीसीको कभी पता नही चलेगा.. क्युकी मेतो यही रहुगी.. हम सबसे छुपके हमारा रीलेशन रखेगे आपभी कीसीको मत बताना.. मे आपसे बहोत प्यार करती हु प्लीज.. मेरा यकीन करो..

कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. मेरी कसम.. हम सबके सामने सामान्य वहेवार करेगे.. बस अ‍ेक बार मेरा प्यार कबुल करलो.. प्लीज.. वरना मे जी नही पाउगी..

देवायत : (भावनाके हाथोपे हाथ रखते) प्लीज भावु तु जीनेकी बात मत कर.. डर लगता हे.. बस मेरी अ‍ेक बात मानले.. तु भानु ओर उनकी मामीकी सादी होने दे.. इस बारेमे हम फीर बात करेगे..

भावना : (देवायतकी आंखोमे देखते) जीजु अब मुजे उन दोनोकी सादीसे कोइ अ‍ेतराज नही मुजेतो अब सीर्फ आपसे मतलब हे.. अगर आप मेरा प्यार कबुल नही करतेहो तो मेरे पास ओर कोइ रास्ता नही..

देवायत : (धीरेसे) भावु येतो ब्लेकमेइल हे.. क्या तुजे मुजपे भरोसा नही..?

भावना : जीजु भरोसेकी बात नही हे.. मेरे पास सीर्फ अ‍ेकही रास्ता हे यातो मेरा प्यार कबुल करो या फीर..

देवायत : (भावनाको अ‍ेक नजरसे देखते) भावु.. ठीक हे जो तु चाहती हे वोही सब होगा बस.. आजसे मे तेरा प्यार कबुल करता हु.. अ‍ेक बातका खयाल रखना मरते दम तक ये बात सीर्फ हम दोनोके बीचही रहेगी..

भावना : (खुसीसे गले लगते) ओह.. जीजु थेन्क्यु.. थेन्कयु वेरी मच.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच..

देवायत : (भाहोमे भीचते हसते) हंमम.. आइ लव यु टु.. चल अब बता आगे क्या करेगी तु..

भावना : (हसते) क्या करेगी मतलब.. मे मेरे जीजुसे प्यार करुगी ओर क्या.. हें..हें..हें..

देवायत : (दरवाजेकी ओर देखते) धीरे बोल वो लता सुन लेगीतो अभीसे पंगे हो जायेगे.. हें..हें..हें..

भावना : (हसते) नही सुनेगी.. ओर सुनभी लीयातो इनसे डरनेकी जरुरत नही वो मेरी बेस्ट सहेलीभी हे.. ओर क्या पता कमीनी अभी हमारी बात सुनभी रही हो.. हें..हें..हें..

देवायत : (जोरोसे हसते) यार तुम दोनो बहोत डेन्जर हो.. लगता हे दोनोकी मीलीभगत तो नही? हें..हें..हें..

भावना : (सरारतसे हसते) वेरी स्मार्टबोय..हें..हें..हें.. जीजु आप फीकर मत करो अगर उसे पता चलभी गयातो बात सीर्फ हम तीनोके बीच ही रहेगी.. क्युकी उनकीभी सब रजा मंदी हे वोभी चाहती हे मुजे मेरा पुराना प्यार मील जाये.. क्युकी वोभी लखनसे बहोत प्यार करती हे.. समज गयेनां हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां सब समज गया.. तभी लखन कुछ दीनोसे अ‍ेटी केटी मे घुमता हे हें..हें..हें.. लगता हे अब मुजे इन सबकी जल्द सादी करवानी पडेगी हें..हें..हें..

भावना : (सरमाते हसते धीरेसे) जीजु अभीतो हम दो तीन महीने प्यार नही कर सकते लीकीन बादमे तैयार रहेना.. अब हम खुब प्यारक करेगे.. आइ मीन.. हमारा मीलन.. जीजु सरम आ रही हे केसे कहु..? बस वो दीन कुछ खास होगा.. जो हम मीलेगे.. आप समज गयेनां..

कहेते भावना सरमाते नजरसे जुकाने लगी ओर मुस्कराती रही तब देवायत हसते खडा होगया तब अचानक भावना खडी होगइ ओर देवायतकी बाहोमे समा गइ.. तो देवायतभी उसे कसके बाहोमे भीच लेता हे ओर भावनाका चहेरा पकडते उनकी आंखोमे प्यारभरी नजरोसे देखने लगता हे तब भावना सरमाते नजरे जुका लेती हे तब उसे अपने होठोपे देवायतका होंठ महेसुस हुआ तो वो आंख बंध करते खडी रही..





ओर देवायत उनके होठोका रसपान करता रहा.. ओर भावनाभी आंख बंध करते देवायतका साथ देने लगी.. ओर दोनो मदहोसीमे प्यारके आगोसमे खोगये.. तब भावनाके उरोजोपे देवायतका हाथ चला गया ओर उसे धीरेसे मसलने लगा तब भावनाका तन कांपने लगा.. वो सीसकारीया करते बेकाबु होगइ ओर देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचलीया.. ओर होंठ मीलाके पागलोकी तराह जोरोसे चुसने लगी.. दोनोही काम वासनामे जलते अ‍ेक दुसरेमे समा जानेको बेकरार होने लगे.. तभी..





भावना : (जटसे अलग होते सरमाते) बस..बस जीजु अभी यही तक ठीक हे.. वरना मे बहेक जाउगी.. ओर अभीके लीये ये ठीक नही हे.. लेकीन वादा कीजीये अब हम जबभी मीलेगे मुजे यही प्यार चाहीये.. बस मुजे ओर कुछ नही चाहीये.. अब भलेही आपका दोस्त कीसीसे भी सादी करले.. आप उनको केह दीजीये अपनी मामीसे सादी कर सकते हे.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. आजसे ये भावना सीर्फ आपकी अमानत हे..

देवायत : (हसते) चल ठीक हे.. लेकीन ध्यान रखना कोइ होतो तब मुजसे अ‍ेसे मत मीलना.. हें..हें..हें..

भावना : (सरमाते हसते) हां मीलुगी.. हें..हें..हें.. मेने आपसे प्यार कीयाहे.. कोइ गुना थोडी कीया हे.. हें..हें..हें.. जीजु मे मजाक कर रही हु.. हां बाबा सब खयाल रखुगी.. बडी मुस्कीलसे मुजे मेरा प्यार मीला हे मे कोइ जोखीम नही लुगी.. आप फीकर मत करो.. ओर मे आपको यही मीलुगी जब आपको फोन करुतो आजाना.. हम दोनो खुब प्यार करेगे..

कहेते दोनो अ‍ेक बार फीर अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा जाते हे ओर दोनोके होठ मील जाते हे तब देवायत अलग होगया.. ओर बहार जाने लगा तब उसे बहार कीसीके कदमोकी आवाज आइ तो जरासीभी समजनेमे देर नही लगीकी लता उन दोनोकी बाते छुपकेसे सुन रहीथी.. वो मुस्कराते बहार चला गया.. तब भावनाभी उसे छोडने बीन्दास्त बहार तक आइ ओर देवायतकी ओर कातील स्माइल करती रही.. फीर उनको अ‍ेक फ्लाइन्ग कीस कीया ओर प्यारसे हाथ हीलाके बाय कहा...

जब देवायत चला गयातो भावनाने गेइट बंध करदीया ओर जेसेही पलटी.. लता अपने कमरपे हाथ रखकर मुस्कराते अपने रुमके पास खडीथी जो दोडके भावनाके गले लग गइ.. तब दोनोही खुस होते हसने लगी ओर अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे खडी रही.. फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेका हाथ पकडते भावनाके रुममे चली गइ ओर बेडपे सटकर बेठ गइ तब भावना सरमसे सर जुकाते मुस्कराती रही तो लताने उनके चहेरेको हाथोमे थामके उचा कीया.. ओर भावनाकी आंखोमे हसती हुइ देखने लगी..

भावना : (सरमाते नजर जुकाते हसते) कमीनी अ‍ैसे क्या देख रही हे..? क्या यही खडी हमारी बाते सुन रहीथीनां..? मुजे पता हे..

लता : (जोरोसे हसते) अरे मेरी भाभीतो बडी समजदार नीकली हें..हें..हें.. देखो केसे गालोमे लाली छा गइ हें..हें..हें.. क्या सबकुछ होगया.. आइ मील सब बाते होगइ..? भाइने आपका प्यार कबुल करलीया..?

भावना : (लताको बाहोमे भरते) हां लता.. जीजुने मेरा प्यार कबुल करलीया.. लेकीन ध्यान रखना इस बातका कीसीको पता नाचले.. वरना तुम मेरा मुह नही देख पायेगी..

लता : (जटसे अलग होते कंधेपे हाथ रखते) भाभी पागल होगइ हो क्या..? मे क्यु बताउगी.. बल्की मेतो आज बहुत खुस हु..की आपको आपका पुराना प्यार मील गया.. बस भगवान करे आप दोनोका प्यार युही बरकरार रहे.. भाभी अ‍ेक बात कहु..? अब आप पीछे हट मत करना.. मे आपके साथ हु.. ओर हंमेसा रहुगी..

भावना : (लताको गले लगाते) बस लता अ‍ेक तुही हे जो मेरे दीलकी बात समजती हे.. आजसे तु मेरी ननंद नही मेरी सहेलीके साथ मेरी छोटी बहेनभी हे.. मे तुजसे हर बात सेर करुगी.. हर बात.. समज गइ..

लता : (सरारतसे हसते) हां दीदी हें..हें..हें.. क्यु ठीक कहाने मेने..हें..हें..हें.. दीदी अ‍ेक बात कहु? अब मेभी आपसे अपनी हर बात सेर करुगी.. आइ प्रोमीस.. भाभी देवायतभाइ क्या मस्त लग रहेहे हेनां..? कोइभी लडकी या ओरत उसे देखेगी तो पागल होजायेगी.. हें..हें..हें..

भावना : (जोरोसे हसते) कमीनी देखना कही तेरा मनतो नही डोलने गया.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते) क्या भाभी आपभी.. मेरे तो जेठजी हे.. मेरे लीये मेरा लखनही काफी हे हें..हें..हें..

भावना : (सरारतसे हसते) क्या लखनको मीलना हे..? तो बोल अभी मौका हे.. घरपे कोइ नही हे.. मे उसे फोन करके बुलाती हु.. दोनो तेरे रुममे मील लेना.. जा जीले अपनी जींदगी..

लता : (सरर्मसार होते मुस्कराते) नही भाभी.. चुप होजाइअ‍े बडी सर्म आ रही हे नही मीलना.. अब सब कुछ सादीके बाद.. जब मीलनाथा तब मील लीया.. पुरा दीन ओर रात यही थे.. हमने सबकुछ करलीया.. अब नही..





दोनोही अ‍ैसी मस्ती भरी रोमेन्टीक बाते करते बैठी रही.. फीर लता खानेकी तैयारीया करने चली गइ ओर भावना अपने बेडपे आराम करने लेट गइ.. ओर देवायतके बारेमे सोचते रोमांचीत होती रही..

तब दुसरी ओर सुबह इस गांवसे दुर आज दोनोही मां बेटा अपने मामाके घर पहोंच गये तो जेसेही रमाने सरलाको देखा उसे गले लग गइ ओर रोने लगी.. तब नीलमभी आंसु बहाते वही खडी रही तब भानुका मामा बीस्तरमे सोया हुआ था.. तो सरला रमाके सरमे हाथ घुमाते उसे आस्वास देती रही.. फीर धीरेसे उनके भाइके पास खटीयापे बेठ गइ तब उनका भाइ सरलाको प्यारभरी नजरोसे देखता रहा..

सरला : (आंखमे आंसुके साथ) कैसेहो भाइ.. देखो दारु पी पीके क्या हालत बनादी.. अपने बीवी बच्चीकाभी खयाल नही आया..? कमसे कम इस बच्चीके सामनेतो देख लेता.. देख कीतनी मासुम हे..

स.भाइ : (थकी आवाजमे धीरेसे) सरला क्या कहु तुमसे..? सब अपनी गलतीका पाप भुगत रहा हु..

सरला : (धीरेसे) भाइ अभी कुछ मत बोल.. हम इस बारेमे बादमें बात करेगे.. अभी थोडा आराम करले..

रमा : दीदी आप बेठो मे खेतोसे सब्जी लेके आती हु..

भानु : नही आप बेठो मे ओर नीलम गाडी लेके चले जायेगे.. अभी लेकर आजायेगे..

नीलम : भैया आपभी रुक जाओ.. मे अभी खेतोसे होकर चली जाउगी.. अभी लेकर आजाउगी..

सरला : नीलु बेटा अब तु बडी होगइ हे.. अब अ‍ैसे अकेले मत घुमा कर.. जा तेरे भाइको साथ लेकर जा..

नीलम : (सरमाते हसते) जी बुआ.. चलो भैया.. अब गाय भेंस यहा घरपेही हे मम्मी दुध नीकाल लेगी..

कहातो भानु कारकी ओर चल पडा तो नीलमने उसे पैदल चलनेको कहा.. तो दोनो पैदलही चलने लगे.. तब रमा बरतन लेके दुध नीकालने गमारमे चली गइ.. तब सरलाको अपने भाइसे बात करनेका मौका मील गया.. तब उनका भाइ सरलाको नजदीक बेठनेको कहेता हे तो सरला उनके सर के पास सरकके बेठ गइ..

स.भाइ : सरला मुजे लगता हे हमने जवानीमे जो गलती कीहे उसीकी सजा मुजे मील गइ हे..

सरला : (आंसु बहाते प्यारसे सरको सहेलाते) नही भाइ.. इनमे अपने आपको दोस मत दे मेभीतो इनमे बरोबरकी जीम्वेवार हु.. ओर मे इनको आजभी गलत नही मानती.. हमने प्यार कीयाथा कोइ गुनाह थोडी कीयाथा.. येतो मां को पता चल गया.. वरना मे सादीही नही करने वालीथी.. मे आजभी तुमको इतनाही प्यार करती हु.. जीतना पहेले जवानीमे करती थी.. फीरतो तुमभी मुजसे मीलने नही आया.. मां मर गइ तो बादमे तो आसकता था.. हम मेरे घरपेही मीलते ओर खुब प्यार करते..

स.भाइ : (हसते) सरला तो फीर तुमने हमारा बच्चा क्यु गीरवा दीया..? पैदा कर लेती हम भागके सादी कर लेते.. बस तुमने हमारे प्यारकी नीशानी गीरवादी तो में तुमसे थोडा नाराज हो गयाथा.. इसीलीये तुमसे मीलने नही आया..

सरला : (हसते) हां तु जो बोलता हे वो इतना आसान थोडीना था..? मुजे पता हे मुजे कीतनी मार पडी थी हें..हें..हें.. क्या ये बात कीसी ओरको तो पता नही चली..? मांने तो मुजसे रीस्ताही तोड दीया था.. तो मे कैसे इधर आती..? ओर तुमनेभी तो रमासे सादी करली थी..

स.भाइ : नही सरला.. तुम्हारी सादी होतेही माने मेरी सादी जल्दीमे रमासे करवादी.. लेकीन फीर मुजसे कोइ बच्चाही नही हुआ.. क्युकी तेरे जानेके बाद तेरे गममे पीने लगाथा.. ओर इनकी बुरी आदत लग गइ.. तो फीर बच्चा पैदा करनेके काबीलही नही रहा.. ओर उपरसे मेरा अ‍ेक्सीडन्ट होगया.. तबतो डोक्टरनेभी केह दीयाथा की लींगमे अंदरुनी चोटके कारण अब आप बच्चा पैदा नही कर सकते.. फीरभी..

सरला : (अ‍ेक नजरसे धीरेसे) फीरभी मतलब.. अ‍ेक मीनीट.. तो फीर ये नीलम कैसे पैदा हुइ..? कीसकी बच्ची हे ये..? क्या छुपा रहा हे तु..? क्या तेरे लींगमे चोट आइथी..?

स.भाइ : (मुह घुमाते) छोडना सरला.. अब इन सब बातका कोइ मतलब नही हे.. तुजे जानकर दुख होगा.. मेरी नीलम मुजे बापु बापु कहेते थकतीही नही हे.. मुजे बहोत प्यार देती हे, दीलही नही मानाताकी वो मेरी बच्ची नही हे.. बस सायद इनकी वजहसे ही मे जींदा हु..

सरला : (धीरेसे) भाइ मुजे बता वो कीसकी लडकी हे.. हम रमाको कुछ नही कहेगे.. बता..

स.भाइ : (आजु बाजु देखते धीरेसे) सरला अ‍ेक बात कहु.. मेरे मरने के बाद तु रमाकी सादी करवा देना.. ताकी मेरी नीलमको अपने असली बापका प्यार मील जाये.. ओर रमाकोभी अपना प्यार मील जाये कमसे कम वो सुखीतो रहेगीे.. मुजसे सादी करके उसे केवल दुखही मीला हे.. अच्छा हे वो जीनसे प्यार करती हे इनकी बच्चीतो पैदा करली.. हम दोनोके नसीबमे वो सुखभी नही था..

सरला : ठीकहे भाइ.. लेकीन उनका नामतो बतादो हमारी नीलम कीसकी ओलाद हे..?

स.भाइ : (धीरेसे) सरला..वो..वो हमारे भानुकी बेटी हे.. मुजे लगता हे भानु जब इधर रहेने आयाथा तबसेही उन दोनोकी जनर मील गइ होगी.. फीर तुजो हमे इनके हाथो मदद भेजती थी.. तब दोनो मीलते होगे.. तभी अ‍ेक दीन मेने दोनोको मीले हुअ‍े देख लीया.. ओर मे वहासे चुपचाप चला गया.. ब्या करता.. अब मेतो रमाको वो सुख नही दे सकता.. बस तबसे मे ज्यादा पीने लगा.. तु भानुको कुछ मत कहेना.. उन दोनोकी सादी करवा देना ताकी मेरी नीलमको ओर रमाकोभी सहारा मील जाये.. बस यही मेरी आखरी इच्छा हे..

सरला : (प्यारसे गाल सहेलाते) ठीकहे भाइ तुजो कहेताहे वोही करुगी.. बस मुजे भानुकी बीवी भावनासे अ‍ेक बार बात करके मनाना पडेगा.. बाकी मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे..

स.भाइ : (सरलाका हाथ पकडते) सरला हम इस जन्ममे नही मील सके.. क्या अगले जन्ममे नही मील सकते..? तु वादा कर.. मे आजभी तुजे इतनाही प्यार करता हु.. कास तु इस जन्ममे मेरी बहेन ना होती वरना मे सबसे बगावत करकेभी तुमसे सादी कर लेता..

सरला : (हसते धीरेसे) तबतो तुजे उस जन्ममेभी मेरा भाइ बनके आना पडेगा..हें..हें..हें.. क्युकी मे प्यार सीर्फ अपने भाइसेही करुगी.. ओर हमेसा करती रहुगी.. हें..हें..हें.. भाइ बुरा मत मानना.. पता नही मुजे मेरे भाइसे प्यार करनेकी अ‍ेक फेन्टासी हे..

स.भाइ : (हसते) चल ठीक हे भाइ ही सही.. कमसे कम मुजे मीलेगीतो सही.. अच्छा हुआ तु आज आगइ वरना दीलमे अ‍ेक बोज लेके मरता.. अब मुजे मरनेका कोइ गम नही.. सारे गीले सीकवे तुमसे बात करते दुर होगये.. वरना में तुमसे नाराज था..

सरला : भाइ भानुतो इधर आताथा.. बस अ‍ेक बार उनसे कहेलवा दीया होता.. तो दोडी दोडी चली आती.. मे आपसे आज पका वादा करती हु अगले जन्ममे हमे भाइ बहेन होते हुअ‍ेभी प्यार करेगे.. अब हमे कोइ नही रोक सकता.. मे तुमसे सादीभी कर लुगी ओर तुम्हारे ढेर सारे बच्चेभी पैदा करुगी.. बस.. ये मेरा वादा हे..

स.भाइ : (हसते हाथ पकडते) हां.. ये हुइनां बात.. अब मेरे कलेजेमे ठंडक पहोंची.. बस आजके दीन यही रुक जाओ सामको चली जाना..

तब रमा दुध नीकालके आगइ, तो थोडी देरके बाद भानु ओर नीलमभी सब्जी लेके बाते करते आगये फीर रमा ओर नीलमने मीलकर खाना बना लीया.. ओर सरलाने अपने भाइको अपने हाथोसे खाना खीलाया.. फीर सब अ‍ेक साथ नीचे खानेको बेठ गये ओर रमा सबको परोसने लगी.. तब सरला रमा ओर भानुको चोर नजरोसे देखती रही.. आज उन दोनोकी सब सचाइ सरलाके सामने आ गइथी.. इन बातका अब सरलाको भी कोइ अ‍ेतराज नही था....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ६१

तब रमा दुध नीकालके आगइ, तो थोडी देरके बाद भानु ओर नीलमभी सब्जी लेके बाते करते आगये फीर रमा ओर नीलमने मीलकर खाना बना लीया.. ओर सरलाने अपने भाइको अपने हाथोसे खाना खीलाया.. फीर सब अ‍ेक साथ नीचे खानेको बेठ गये ओर रमा सबको परोसने लगी.. तब सरला रमा ओर भानुको चोर नजरोसे देखती रही.. आज उन दोनोकी सब सचाइ सरलाके सामने आ गइथी.. इन बातका अब सरलाको भी कोइ अ‍ेतराज नही था....अब आगे

सब खाना खाने लगे तब रमा भानुको आग्रह कर करके खीलाने लगी ओर दोनो नजरोसे बातेभी करने लगे इस बातकी सरला नोटीस करती रही.. ओर मनही मन खुस होती रही आज उसे रमामे अपनी भाभी नही भानुकी दुसरी बीवी ओर अपनी बहु नजर आ रहीथी.. जो रमाभी सरलाके साथ अ‍ेक सासु जेसा व्यवहार कर रही थी.. जेसे सरपे पलु ढकके रखना ओर कभी कभी दीदी की बजाये माजी बोल देती थी..

भानु : (खाना खाते) मामा हम खाना खाके होस्पीटल जा रहे हे आप तैयार होजाओ.. हम सहेरमे दीखाके आते हे..

स.भाइ : नही भानु अब कही नही जाना अबतो भगवान जो चाहेगा वोही होगा.. बस आज सरला मीलने आ गइ मेरे लीये यही बहुतहे ओर अब इस बीमारमे कोइ फर्क पडने वाला नही तो क्यु खामखा खर्चा करना..

भानु : अरे अ‍ैसा थोडी चलता हे.. हम अ‍ेक बार दीखाकेतो आये..

स.भाइ : नही भानु कही नही जाना बस तुम मेरी नीलमका खयाल रखना.. बाकी मुजे कही नही जाना..

सबने खाना खा लीया ओर रमा नीलम सब काम नीपटाने लगी तो भानु रुममे जाके आराम करने लगा तब सरला उनके भाइके पास बेठ गइ ओर उनके भाइके सरको सहेलाती अतीतमे चली गइ.. ओर सोचने लगी जब उनकी जवानी उफानपे थी तब उनका भाइ जवानीके दहेलीजपे कदम रख रहाथा तब कैसे अपने भाइसे रीलेशन होगये.. जब उनके भाइको प्यारका कुछ ज्ञान नहीथा तब वो अपने भाइ ओर मां के साथ खेतोमे जाती ओर दोनोका हाथ बटाती.. यही सब सोचते वो अतीतमे चली गइ..

(थोडा अतीतमे सोचते..)

तब उनका भाइभी उनसे कुछ सालही छोटाथा वो अपनी मांके साथ ना रहेकर अपने भाइके साथ रहेते उनका हाथ बटाती.. ओर उनसे जान बुजकर लडकीओके बारेमे उल्टी सीधी बाते करते मस्तीया करती.. तब उनका भाइ बहुत सरमाता ओर हसने लगता.. ओर धीरे धीरे करते उनको छुकर मस्तीया करती.. फीरतो आगे बढते उनके अंगोके साथ खेलने लगी..

तभी अ‍ेक दीन मौका मीलतेही उनकी लुलीसे खेलने लगी तो लुली हवामे लहेराती जटके मारने लगी ओर लुलीसे लंड होगइ.. ओर सरला अपने भाइको सब ज्ञान देते उनसे खेलने लगी.. ओर लंड सहेलाकर पहेली बार उनके भाइको जडा दीया तब उनके भाइकोभी ये खेलमे मजा आने लगा.. फीरतो आये दीन वोभी उनके भाइके साथ ये खेल खेलने लगी ओर अपनी चुतभी उनके भाइसे चटवाने लगी.. ओर दोनो जड जाते..













फीर उसने अपने भाइकोभी कीसीको ना कहेनेके विस्वासमे लेलीया ओर अ‍ेक दीन मौका मीलही गया उस दीन अपनी मां कीसी कारणवस जल्दी घर चली गइ.. तब सरला अपने भाइको लेके ट्युबवेल वाले रुममे चली गइ ओर खटीयापे लेटकर अपने भाइको आखीर अपने उपर चडाही लीया ओर तब उसने अपना सब कुछ अपने भाइपे लुटा दीया.. उनका कौमार्य पहेली बार भाइसे चुदवाके खो दीया.. ओर अपने तनकी आगको सांत कीया.. तब उनके भाइकोभी इस खेलमे बहुत मजा आने लगा..





फीरतो जबभी मौका मीलता दोनो भाइ बहेन मील जाते ओर जमकर चुदाइ करते.. सरला इसी तराह अपनी आग अपने भाइसे चुदवाके सांत करने लगी.. फीरतो सरलाको चुदवानेकी आदत लग गइ.. जबतक दिनमे अ‍ेक बार उनका भाइ उसे चोद नही लेता तबतक उसे कही चेइनही नही मीलता.. ओर ये सीलसीला लगातार तीन साल तक चलता रहा.. सरला बहोत कामी लडकी होगइ थी.. अबतो उनका भाइभी जवान हो चुकाथा फीरतो वोही मौका देखते सरलाकी जबरदस्त चुदाइ करने लगता.. फीरतो चुदाइ करते दोनोने कइ कसमे वादे कर लीये.. ओर दोनो घरपे सबसे छुपके अ‍ेक पती पत्नीकी तराह रहेने लगे..





सरलाभी अपने भाइका अ‍ेक बीवीकी तराह खयाल रखने लगी.. ओर धरमेभी मौका देखके हर रात चुदाइ करने लगते.. सरला देर रात अपने भाइके पास आजाती ओर रातभर चुदाइ करवाके सुबह चली जाती.. अबतो सरलाका सरीर अ‍ेक सादी सुधा ओरतकी तराह भरावदार होगया था.. ओर आखीर अ‍ेक दीन दोनोका भांडा फुटही गया.. जब सरला सुबह उल्टीया करने लगी.. अ‍ेक बारतो उनकी माने नोर्मल उल्टीया मानके नजर अंदाज कीया.. लेकीन तीन चार दीन लगातार उल्टीया हुइ..

तब जाके उनकी मांके मनमे आसंकाअ‍े होने लगी.. ओर वो कीसीको कहे बगैर सरलाको लेकर सहेरमे चली गइ ओर सब चेक करवाया.. तब पता चलाकी सरला प्रेगनेन्ट हे.. तब उनकी माने पैसे देकर वही उनका बच्चा गीरवा दीया.. ओर घर आके सरलाको खुब मारा.. लेकीन सरलाने उनके भाइका नाम तक नही बताया.. लेकीन दोनो भाइ बहेनका सब व्यवहार देखके उनकी मांको सब पता चल गया.. ओर सरलाकी आनन फाननमे जल्दसे विरजीसे सादी करदी गइ..

ओर बिदाइके वक्त उनकी मांने सरलाको अपने घर कभी वापस ना आनेको केह दीया.. फीर कुछ महीनेके बाद सरलाकी मांने उनके भाइकी भी सादी रमासे करवादी.. जो अ‍ेक बहुत गरीब परीवारसे थी.. सरला यही सब सोचते उन रुमको ओर उसी बेडको देखने लगी.. जहा अभी भानु सोया हुआ था.. उसी रुममे ओर उसी बेडमे दोनो भाइ बहेनने चुदाइ करते कीतनी राते रंगीन कीथी.. ओर उनके भाइने यही बेडपे उनकी चुदाइ करते उसे प्रेगनेन्ट करदीया था.. यही सब सोचते सरला उनके भाइके सरको सहेलाती रही..

(अतीतसे बहार आते..)

तभी अचानम उनके भाइको अ‍ेक जोरोकी खुनकी उल्टी हुइ तो खुनके साथ कुछ माउस के टुकडे जेसे भी बहार आगये ओर सरलाकी गोदमे गीरे तो सरलाके सब कपडे खराब कर दीये.. तब उनके भाइने अ‍ेक तरफ आंख बंध करते अपना सर डालदीया.. तो सरलाकी चीख नीकल गइ जीसे सुनके भानु ओर रमा नीलमभी दोडके अंदर आगये.. तो भानु उनके मामाकी हालत देखके पहेलेतो गभरा गया फीर उनको गोदमे लेके अपनी कारकी ओर दोड पडा.. ओर अपने मामाको पीछली सीटमे सुला दीया..

तब साथमे सरला ओर रमाभी फटाफट कारमे बेठ गइ.. ओर कार लेजाते नीलमको घरका ध्यान रखनेको केह गइ.. तब रमाने पहेले पासके गांवके डोक्टरके पास जानेको कहा तो भानुने उसी गांवकी ओर कार मोड दी.. थोडीही देरमे चारो उस गांवके होस्पीटलमे पहोंच गये तब वहाके डोक्टर बहार आके कारमेही चेक करने लगे ओर भानुके मामाको मृत घोसीत करदीया.. तब सरला ओर रमा दोनोही फुटफुटके रोने लगी..

जब डोक्टरने भानुको इनके मामाके बारेमे सब बाते करके सर्टीफीकेट देदीया तब भानु वोही कार लेके वापस गांवमे धर आगया.. तबतक आजु बाजु सबको पता चल गया.. ओर सभी लोग अ‍ेकठा हो गये.. तब नीलम खुब रोइ ओर सबने मीलके रमाके पतीका स्मसानमे जाके दाह संस्कार करदीया.. फीर सब घर वापस आगये ओर अपने अपने धर चले गये.. ओर अ‍ेसेही साम होगइ तब सरलाने रमाको सब सामान समेटनेको केह दीया तो रमानेभी ओल मोस्ट सब पैक करही लीयाथा.. क्युकी डोक्टरने उसे अपने पतीके बारेमे सब कुछ बता दीयाथाकी अब ये सीर्फ दो तीन दीनके ही महेमान हे..

सरला : रमा अब जोभी क्रिया कर्म करना हे हमारे गांव जाके करेगे जो होनाथा वो होगया हम सब जल्दी नीपटाना चाहते हे ताकी लताकी भी सादी होसके.. क्या सब पेक करलीया हे..

रमा : (सरमाते नजर जुकाते) जी..वो..वो.. वो डोक्टरनेभी हमे अ‍ेक दो दीनका कहाथा तो भानुके कहेनेपे हमने सब पेक करलीया था.. बस कुछ सामान हे जो पेक करना हे ओर कुछ इधर छोडना हे..

सरला : चलो ठीक हे वो सब पेक करलो ओर अभी बाजु वालेको माल ढोरका खयाल रखनेको केहदो हम इसेभी दो चार दीनमे ले जायेगे..

रमा : जी माजी.. अभी कहेके आइ..

तब रमा पडोसमे चली गइ ओर उनकी भेस गाइका चार पांच दीन खयाल रखनेको कहेके आइ.. फीर कुछ सामान पेक करलीया ओर भानु सरला रमा ओर नीलमको लेके अपने गांवकी ओर नीकल गया.. तब सरला बडी दुवीधामे थी की अपनी बहु भावनाको कैसे मनाये वो यही सब सोचते पुरे रास्ते खामोस बेठी रही तब पीछली सीटमे रमाभी गमगीन होके बेठीथी तो नीलमभी उनके कंधेपे सर रखके खामोस बेठी रही..

भानु : माइ मेने देवाको फोन ही नही कीया.. सुबह उनसे बात हुइ थी अब उसेभी बताना पडेगा.. वोतो आज बाबाके पास गया होगा.. वो सादीकी तारीख नीकलवाने.. क्या उसे मना करदु..?

सरला : नही.. जो होनाथा वो होगया.. हम सादीमे कोइ फेरबदल नही करेगे.. वेसेभी अ‍ेक दीन ये सब होनेही वालाथा सो आज होगया.. चलो कमसे कम रमा ओर मेरी बेटी नीलमतो अब सुखमे रहेगी.. मरनेसे पहेले बहोत केह रहाथा की नीलमका ध्यान रखना अ‍ेक बारभी ये नही कहाकी रमाका ध्यान रखना.. तुम देवासे घर जाके बात करलेना..

भानु : जी माइ..

कहेते वो अपने गांवकी ओर जा रहेथे तब दुसरी ओर देवायत भानुके घरसे भावनासे बात करके नीकलके सीधाही अपने गांवमे पहोच गया ओर कारको लेके सीधा रमेशके घर चला गया.. तो रमेश उसे अपनी दुकानमे ही बहार मील गया ओर देवायतको देखतेही स्माइल करने लगा..

रमेश : (हसते) आ गये भाइ..? कहो कब नीकलना हे..?

देवायत : (कारमे बेठेही) भाइ खाना खाके नीकलते हे.. आप ओर भाभी खाना खाके तैयार रहीयो.. मे घर जा रहा हु..

रमेश : (हसते) यार आज यही खालो आपकी भाभीने आज देसी खाना बनाया हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) नही यार भाभीका हाथका फीर कभी खा लेगे.. अभी जाने दो मीलता हु..

कहेके देवायत हसते हुअ‍े हवेलीपे आगया तबतक १२ बज चुकाथा तो आतेही सीधा फ्रेस होने चला गया.. फीर फ्रेस होके पुनमके रुममे चला गया वहा पुनम अभीभी सो रहीथी तो जातेही उनके सरपे हाथ रखके चेक कीया तो बुखार नही था.. तब उनके हाथपे हाथ महेसुस हुआ देखातो पुनमने आंख खोलके उनके हाथको पकडलीया ओर खीचके देवायतको अपने पास बीठा दीया ओर अपने सरको देवायतकी गोदमे रख दीया..

देवायत : (हसते) अच्छा तो मेरी बहेन जाग रही हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) नही भाइ मे अभी आपकी बीवी हु.. मेरा सब उल्टा हे.. हें..हें..हें.. बहेन सीर्फ रातको बीस्तरमे ही मीलेगी.. बाकी दीनमे आपकी बीवी ही मीलेगी हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) तु ओर तेरी फेन्टासी.. चल ठीक हे.. खाना नही खाना..? चल लखनभी नही आया..

पुनम : (हसते) कौन..? मेरा देवर.. हें..हें..हें.. मीलने गये होगे अपनी बीवीको.. आज वहा कोइ नही होगा तो जनाबको खुला मेदान मील गया होगा.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) अब जा जल्दीसे फ्रेस होजा फीर खाना खाके आराम करती रहेना.. मे रमेशके साथ सहेर जा रहा हु कुछ चाहीये तो नही..? तो बोल तेरे लीये लेकर आउगा..

पुनम : (धीरेसे) नही भाइ आप आरामसे आना कुछ नही चाहीये.. आज सीर्फ आरामही करना हे ताकी रातको फीरसे मेरे भाइको प्यार दे सकु.. क्या रातको देरसे आओगेनां..?

देवायत : (हसते जुककर होंठ चुमते) हें.. अब मेरी बहेनको मेरा बच्चा चाहीयेतो आनातो पडेगाही.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाके हसते) भाइ रातको आपने मेरी हालत खराब करदीथी.. अब कुछ राहत हुइ हे अब मुजे बाथरुममे छोडदो अभी नहाके आइ.. फीर हम साथमे खाना खाते हे तबतक लखनभैयाभी आजायेगे.. चलो..

तब देवायत बेडसे खडे होजाता हे ओर पुनमको अपनी गोदमे उठाके बाथरुम तक छोडने जाता हे.. तो पुनम हसते हुअ‍े बाथरुममे चली गइ.. ओर फ्रेस होके नहाने लगी तबतक देवायतभी बहार आके सोफेपे बेठ गया तभी लखनभी आके फ्रेस होने चला गया वोभी खेतोपे काम करते थक गयाथा.. तबतक पुनमभी नहाके कंपलीट होके बहार आगइ ओर तीनो खानेके लीये बैठ गये तब पुनम देवायतसे सटकर बेठ गइ..

तभी दया ओर रजीयाने तीनोको खाना परोस दीया तब रजीया लखनको खाना देते उनकी ओर कातील स्माइल करने लगी तो लखनभी सरमाते हसते हुअ‍े सर नीचे करते चुपचाप खाने लगा.. तो पुनम ओर देवायत अ‍ेक दुसरेके पैरसे पैरको सहेलाते खाना खाने लगे तब दयाभी देवायतके सामने खडी रहेके उनसे ओंखोके इसारोसे बाते करती रही ओर तीनोने खाना खालीया तब देवायत पुनम ओर लखनको कहेके रमेशके घरकी ओर नीकलते लखनको कहेने लगा..

देवायत : लखन तु सामको जल्दी आजाना मुजे सायद रातको आनेमे देर होजाये..

लखन : ठीक हे भैया.. आप आरामसे जाओ मे इधर सब खयाल रखुगा..

पुनम : (सरमाते हसते) भाइ आप वापसीमे भाभीके पास होकर आना.. उनके बीना हमे यहा अच्छा नही लगता.. ओर कल मे आपके साथ आजाउगी मुजे वही छोड दीजीयेगा..

देवायत : हंमम.. चल ठीक हे..

दया : मालीक आप मालकीनको इधरही ले आइअ‍ेनां हम सब दोनोको सम्हाल लेगी अबतो चंपाभाभीभी हर दीन आती हे तो क्या दीकत हे.. आप मालकीनको कहेना ओर हो सकेतो मौसीकोभी साथ लेकर आना..

देवायत : अरे हां बाबा पहेले मुजे जाकर उनसे बाततो करनेदो.. फीर आके बताता हु.. ओके चलो बाय..

कहेते देवायत हसते हुअ‍े चला गया तबतक पुनम उसे कातील स्माइल देते हसती रही.. ओर अपने रुममे चली गइ तो लखनभी आराम करने उपर अपने रुममे चला गया.. तब देवायत सीधा रमेशके घर चला गया तो वहा रमेश चारु तैयारही बेठे थे.. जेसेही कारके होर्नकी आवाज सुनी तो रमेशके साथ चारुभी बहार आगइ ओर रमेश देवायतके साथ बैठ गया ओर चारु पीछली सीटमे बेठते देवायतकी ओर कामुक मुस्कान करते उसे देखती रही.. तो देवायतको मस्ती सुजी..

देवायत : (हसते) नमस्ते भाभी.. कैसीहो आप..? क्या आपभी मेरे भाइके साथ चल रही हो दोनो वहा घुमलेना कुछ फील्म बील्म देख लेना.. हें..हें..हें..

चारु : (जुठा गुसा करते) फील्म ओर आपके भाइ..? पुछो इनको मुजे कभी लेकर गये हे..? बस इनकोतो धंधेसेही फुरसत नही मीलती.. हमारे नसीबमे घुमना फीरना कहा..? बस वही काम करते सडते रहो..

रमेश : (हसते) अरे वो जुठ बोल रहे हे.. हम कहा घुमने जा रहे हे.. बाबा हम कामसे जा रहे हे ओर फील्म देखने मे तुजे अ‍ेक दीन कभी लेजाउगा.. अभी चल तु मंजुभाभीको मीलले.. हें..हें..हें.. भाइ जानेदो.. कार..

चारु : (मुह बनाते) हां हा जाओ सादीके इतने साल होगये.. आपका वो अ‍ेक दीन अभी तक नही आया.. जाओ दोनो अ‍ैस करो हमारी कीसको पडी हे..

देवायत : (कार चलाते हसते) भाभी फीकर मत करो अबतो आये दीन इनको सहेर जाना पडेगा.. तब दुसरी बार आपको लेकर जायेगे क्यु भाइ हें..हें..हें..

चारु : (कातील स्माइल करते) हां हां देखती हु कब लेजातेहे वरना आपकोही मुजे घुमाने लेजाना पडेगा केह देती हु..

रमेश : हां बाबा चली जाना.. भाइ आपतो खामखा हम मीया बीवीमे जगडा करवा दोगे.. हें..हें..हें..

कहातो देवायत चारुकी ओर हसते हुअ‍े देखते कारको चंदाके गांवकी ओर जाने देता हे तो चारु कारके सेन्ट्रल मीररसे देवायतके सामने कातील स्माइल करते आंखोसे इसारा करने लगती हे.. तब देवायत कार चलाते जीले के अधीकारीसे बात करने लगता हे ओर दोनोने काफी बाते करली.. ओर देवायतने कारको स्पीडसे चलादी..

रमेश : भाइ आरामसे जाते हेनां.. क्या जल्दी हे..

देवायत : यार हमे टाइमपे पहोचना पडेगा वो अधीकारी बहार नीकल रहा हे तो हमे जल्दी जाके मीलना हे वो सब तैयार करके रखेगे.. अभी हमारे लीये रुक गया हे..

तब कुछही देरमे कार चंदाके घरके सामने रुकी तो चारु फटाफट उतरके देवायतकी ओर कातील स्माइल करते चंदाके घरमें अंदर चली गइ.. फीर आधे पोने घंटेमेही दोनो जीलाकी ओफीसमे पहाच गये तो वो अधीकारी खुद देवायतको लेने बहार आगया ओर दोनो बडे गर्म जोसीसे गले मीले.. ओर देवायतका हाथ पकडके उसे अंदर लेगया तो रमेशभी खुस होते उनके साथ चलने लगा.. आज वो देवायतकी इतनी इजत देखके इनसे काफी प्रभावीत हुआ ओर अपनी बेटी वंदनाकी नोकरीके लीयेभी वो नीस्चीत होगया..

जी.अधीकारी : आइअ‍े ठाकुर साहेब बडे दीनोके बाद दर्शन दीये..? कहो सब खेरीयततो हे.. मेने सुना आपके पीताजीका देहांत होगया हे.. सुनके बडा दुख हुआ..

देवायत : जी सही सुना.. बस उमरकी वजहसे चल बसे.. कहो आपके घरमे सब कैसे हे भाभीसाहेब ओर बच्चे सब मजेमे..?

जी.अधीकारी : (हसते) जी सब मजेमे आपकी भाभी आपको बहोत याद कर रहीथी.. वेसे क्या हुआ वो सरपंचजीको..? कुछ हुआ हे क्या..?

देवायत : (हसते) जी वो काफी बीमार होगये हे अब बीस्तर पकड लीया हे तो काम नही कर सकते.. इनसे मीलीये हमारे गांवमे सबसे प्रतीष्ठीत व्यक्ती रमेशभाइ हे ओर हमारे खास दोस्तभी हे ओर बीना सरपंच ही गांवके लोगोकी खुब सेवा करते हे.. तो हम सब गांव वालोने इनको सरपंच बनानेका फैसला लीया हे..

जी.अधीकारी : (हसते) अरे ठाकुर साहब वोतो सीर्फ आप कहोगे तोभी सब होजाता .. बस इनको सोंगंधनामेमे ओर हमारे यहा कुछ पेपरमे दस्तखत करने हे मेने सब रेडी करवा दीया हे बस अभी आतेही होगे तबतक क्या पीयेगे..? चाइ की कुछ ठंडा मंगवाउ..

देवायत : (हसते) बस चाइ ही पीला दीजीये..

तभी अ‍ेक क्लार्क फाइल लेके आता हे ओर उनमे जी.अधीकारी रमेशके कुछ दस्तखत करवाते हे तबतक चाइभी आगइ ओर रमेशका कामभी होगया फीर जी.अधीकारी देवायतको कुछ पेपरके लीस्ट देते समजाते हे ओर देवायत पुरी बाते समजने लगा.. ओर सब चाइभी पीते रहे..

जी.अधीकारी : (हाथ मीलाते) तो रमेशजी कोन्ग्रेच्युलेशन.. अब आप कायदेसे सरपंच होगये हे बाकी मेने सब ठाकुर साहेबको समजा दीयाहे आपको अ‍ेक अरजी करनी हे ताकी आपके गांवमे स्कुल खुल जाये बस जमीनके लीये ओर स्कुलकी मंजुरी के लीये कुछ ठराव करके अरजी देनी हे.. ओर ठाकुर साहेब आपने जो कहाथा उन लडकीके सब कागजात भी भीजवा दीजीये.. ताकी आगेकी कार्यवाही हम कर सके.. बस अ‍ेक दीन उन लडकीको उनके सब डोक्युमेन्ट लेके इधर आना पडेगा बाकी हम सब सम्हाल लेगे..

रमेश : (हसते) जी सुक्रिया बस कलसे जातेही सब करवा दुगा..

फीर देवायत ओर रमेश वहाका सब काम नीपटाके वापस गांवकी ओर चल देते हे तब रमेश खुसीके मारे समा नही रहाथा.. उनको पताही नहीथा की सहेर जातेही वो सीधा सरपंच होजायेगा.. इनके लीये देवायतने भी पहेलेसे सब तैयारीया करके रखीथी.. उसने रास्तेमे अ‍ेक मीठाइकी दुकानपे कार रुकवाकर ढेर सारी मीठाइया लेली ओर दोनो वापस गांवके रास्तेमे जा रहेथे..

देवायत : रमेश इतने सारे बोक्ष लेलीये..? सब कीसके लीये हे..?

रमेश : क्या भाइ.. सब मीठाइ हे हमे कहा कहा जाना पडेगा तो सबको देनी हे.. क्या हम आश्रमभी जा रहेहेना तो वहा कीतने सारे भक्त होगे.. ओर हमे भाभीको मीलनेभी जाना हे तो वहाके लीयेभी लेली..

देवायत : (हसते) तुनेतो पुरी दुकान ले रखी हे.. चल कोइ बात नही..

रमेश : (अंदाजाथा फीरभी पुछलीया) भाइ.. वो अधीकारी कीस लडकीकी बात कर रहे थे..?

देवायत : (हसते) हमारी वंदनाके बारेमे.. उनकी नोकरी पकी होगइ हे.. बस उनके कुछ पेपर सबमीट करने हे उसे मे सब समजा दुगा बस अ‍ेक बार उनको यहा आना पडेगा.. बाकी तुजे जो कहाहे कर देना ओर हां कल सबसे पहेले अ‍ेक ठराव करके वो रश्मीभाभीको मुनीमकी जगाह अ‍ेपोइन्ट करलो बाकी कुछ समजमे ना आयेतो मुजसे पुछ लेना.. ओर होसके इतनी जल्दी ठराव करके वो स्कुलके लीये जगाह मांगलो..

रमेश : (हसते) जी भाइ वेसेभी ये सब मेरे लीये नया हे तो आपको कुछ दीन परेसान करता रहुगां, हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) साले कुछ मुफ्तमे नही करुगा.. भाभीके हाथकी चाइ पीलानी पडेगी.. हें..हें..हें..

रमेश : (जोरोसे हसते) अरे चाइ क्या आपको उनके हाथोका बढीयासा खानाभी खीलाउगा.. हें..हें..हें..

दोनोही अ‍ेसी बाते करते जा रहेथे तब रास्तेमे आश्रमका बोर्ड आगया.. तो देवायतने कारको उसी तराफ मोडली ओर दोनो आश्रम पहोंच गये तब रमेशने बहुत सारे मीठाइके बोक्ष लेलीये ओर दोनो बाबाके पास चले गये तब बाबा दो सेवकसे बाते कर रहेथे जेसेही देवायतको देखा उनके चहेरेपे चमक आगइ ओर वो हसने लगे तब देवायत ओर रमेश बाबाको दंडवत करके वही उनके चरणोके पास बेठ गये तब....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ६२

दोनोही अ‍ेसी बाते करते जा रहेथे तब रास्तेमे आश्रमका बोर्ड आगया.. तो देवायतने कारको उसी तराफ मोडली ओर दोनो आश्रम पहोंच गये तब रमेशने बहुत सारे मीठाइके बोक्ष लेलीये ओर दोनो बाबाके पास चले गये तब बाबा दो सेवकसे बाते कर रहेथे जेसेही देवायतको देखा उनके चहेरेपे चमक आगइ ओर वो हसने लगे तब देवायत ओर रमेश बाबाको दंडवत करके वही उनके चरणोके पास बेठ गये तब....अब आगे

बाबा : आओ बेटा आगया..? ओर ये नये सरपंचकोभी ले आया वो तुने अच्छा काम कीया.. हें..हें..हें..

रमेश : (हसते) जी बाबा हम सीधे वहीसे आ रहेहे मेरा सौभाग्य हे जो सरपंच बनतेही आपके आशीर्वाद मील गये.. लीजीये इनमे कुछ मीठाइया हे जो आपके चरणोमे अर्पण करता हु आशीर्वाद दीजीये..

बाबा : ठीक हे बेटा आशीर्वाद.. आशीर्वाद.., तुजे बस सब गांव वालोकी अच्छेसे सेवा करना हे.. ओर ध्यान रखना कुछ गलत मत करना ओर गरीबोका हक तो कभीभी मत मारना.., तुने देखी हेनां उस सरपंचकी हालत.. बस इश्वरसे डरना.. बाकी तुजे कुछ नही केहना.. ओर तु बहोत समजदार हे.. बस इनका साथ कभी मत छोडना.. हें..हें..हें..

रमेश : (हसते) जी.. बाबा वेसे इनकी बदलौतही सरपंच बनना नसीब हुआ हे.. वरना मेतो अ‍ेक छोटीसी दुकानका व्यापारी हु..

बाबा : बेटा तुजे नही पता ये कोन हे ओर तुम्हारे खानदानसे क्या रीस्ता हे.. वो अभीभी यहाकी सब वीरासतके राजा हे.. बस इनका दामन कभी मत छोडना बाकी मे तुजे कुछ नही कहुगा..

रमेश : (हसते) जी बाबा मे सब समज गया.. (खडा होते) बाबा आप बाते कीजीये तबतक मे सब जगाह दर्शन करके आता हु.. आज इनके दर्शन करना भी जरुरी हे हें..हें..हें..

बाबा : (हसते) हां जा.. सब जगाह अच्छेसे आशीर्वाद मांग लेना.. ओर इन सबको भी लेजा जाओ सब जगाह मीठाइ बांट देना, हें..हें..हें..

देवायत : (सबके जातेही) हां बाबा कहीये क्या हुकुम हे मेरे लीये..? बाबा पीछले कुछ दीनोमे काफी कुछ बदल गया हे.. पता नही अब कोन कोनसे काम करने पेडेगे.. यहा तक मेभी बदल गया हु.. हें..हें..हें..

बाबा : (हसते) बस बेटा कुछ नही.. तुम दोनो भाइ बहेनने मेरा काम करदीया.. सब प्रकृतीके हीसाबसे चल रहा हे.. ओर अ‍ेसेही चलने दे.. तु कुछ मत सोचकी वो रीस्तेमे मेरी क्या लगती हे.. जो होताहे होने दे.. ओर अपना कार्य करताजा.. क्युकी पीछले कइ जन्मोसे वो सब तुजेही पानेकी कामना करती हे.. बस अभी तुजे सीर्फ इतनाही कहेना हे.., क्या सादीकी तारीख लेने आया हे..?

देवायत : (हसते धीरेसे) जी बाबा.. अबतो पुनमभी उल्जनमे हे.. ओर मेभी उल्जनमे फस गया हु.. बाबा अब कैसे कहु आपसे..? अब मुजे पुनमसे बीछडनेका दिल नही करता.. मेरी तो कुछ समजमे ही नही आता..

बाबा : बेटा वो जो कहे तु करता जा.. उस लडकीने मेरी सब जीम्वेवारी उठाइ हे.. यहा तक अपनी आने वाली जींदगीके लीयेभी तैयार होगइ.. बडी ही होनहार लडकी हे.., ओर बदलेमे मांगतीभी हेतो क्या? बस तुमसे थोडा प्यारहीतो मांगती हे.. बेटा वो तुजे पुरी समर्पीत होगइ हे.. ओर तुजेही अपना सब कुछ मानने लगी हे.. बस उनकी आशा कभी मत तोडना.. तु मुजे बाप समजता हे अ‍ेक बापकी ओरसे.. ओर गुरु समजता हेतो अ‍ेक गुरुकी ओरसे बस तुमसे अ‍ेक यही बिनंती हे..

देवायत : (बाबाके पैर छुते) बाबा ये आप क्या केह रहेहे..? आपतो मेरा सबकुछ हे.. मे क्यु उनकी आशा तोडुगा.. अबतो मेभी उनको दीलोजानसे चाहने लगा हु.. ओर भगवानसे यही प्रार्थना करता हु की हर जन्ममे पुनम मुजे बीवीके रुपमे मीले..

बाबा : बस इसेतो सच्चा प्यार कहेते हे.. बेटा तुजे नही मालुम पीछले कइ जन्मोसे तुम दोनो भाइ बहेन होते हुअ‍े भी अ‍ेक पती पत्नीकी तराह जीवन बीताते आयेहो.. तु वो राजाके बारेमेतो सब जानता ही हे.. जो उस राजाने ओर उनकी दोनो रानीओने अपनी दादीकी खुब सेवा कीथी.. बस वही दादीतो हमारी पुनम हे.. उनके दादा दादी तुम दोनोही तो थे.. उनके दादा दादी तबभी भाइ बहेनथे जो पती पत्नीकी तराह जीवन बीताते चले गये ओर आजभी तुम दोनो वोहीतो हो.. तु जरासा भी संकोच मत करना..

देवायत : बाबा संकोचतो नही.. बस अ‍ेक डरसा लग रहा हे.. की मे मेरी मंजुकोभी इतनाही प्यार करता हु.. अगर उनको हम दोनो भाइ बहेनके बारेमे पता चल गया तो क्या होगा.. बस यही डर सता रहा हे..

बाबा : (जोरोसे हसते) बेटा उनकी चीन्ता तुम मत करना.. क्युकी वो सब कुछ जानती हे.. हें..हें..हें.., बस अ‍ेक तेरी मौसीजो अब तेरी बीवी हे वो नही जानती.. ओर उसे क्या कीसी ओरको पताभी नही चलेगा तु नीस्चीत रहे.. तुजे पताही नही मेरी मंजु बीटीया कौन हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (चोंकते) क्या मेरी मंजु सब जानती हे..? पर कैसे..? हमने तो कीसीको भनकभी नही लगनेदी..

बाबा : (हसते) हां बहुत कुछ जानती हे.. जो सायद तुम भी नही जानते.. बस अभी सीर्फ इतनाही कहुगा वास्तमे तुम सब इन्हीकी संतान हो.. उनकाही अंस हो.. बस अभी इतनाही कहुगा..

देवायत : तो फीर बाबा वो सादीकी तारीख नीकालदो.. बस उसी दीन चारोकी सादी करदेनी हे..

बाबा : (कुछ उंगलीसे केल्क्युलेशन करते) बेटा.. आजसे पंदरवे दीनको रखदे वार ओर तीथीभी अच्छी हे.. तबतक वो भानुकाभी सब काम नीपट जायेगा..

देवायत : (हसते) बाबा भानुका काम..? अब कोनसा काम बाकी हे..? हें..हें..हें..

बाबा : तो क्या तुजे नही पता..? अरे आजही उनका मामा चला गया.. काममे होगा तभी तुजे फोन नही कीया होगा.. ओर हां अब तुभी तेरी नइ बीवीको घर लेआ.. वोभी तेरे पास आनेके लीये तैयार हे..

देवायत : (सरमाते हसते) जी बाबा.. कहेतीथी सादीके बाद आजाउगी..

बाबा : नही कोइ सादीके बाद नही.. अभी तु वहा जाही रहाहे तो मंजुबेटी ही तुजे कहेगी.. मना मत करना..

देवायत : बाबा मुजे मेरे बारेमे सब जानना हे.. कोन हे हम..? कोन हे मंजु..? ओर कोन हे पुनम..? जो सब मेरे पीछे पागल हे.. ओर कुछ ओरते तो अ‍ेसी हे मे आपसे केह भी नही सकता..

बाबा : (सांत होते आंख बंध करते धीरेसे) बेटा तुभी उनकाही अंस हो.. जो अ‍ेक कार्यके लीये सबको जन्म देने आये हो.. लेकीन तुम सीर्फ जन्म देने आयेहो तु पुर्ण परीपकव नही हो.. तेरा बेटा परीपकव होगा.. ओर उनका बेटा यानी तेरा पोता पुर्ण परीपकव होगा जो इनकेही हाथो सब कार्य होगे.. वो सब प्रकृतीको मानते होगे.. तब तेरे गांवमेभी सब रीस्ते चरमोपे होगा जो उन रीस्तोके बंधनको आजाद करवाके सब उन हीमाचल की तराह होगा.. जहा उसने सबकी आपसमे सादीया करवाइ थी.. बस मेरी मंजु बीटीया तुम सबकी जननी हे ओर उनकी ही पत्नी हे.. बस तुजे इतनाही बता सकता हु..

देवायत : बाबा क्या यहा सब मुमकीन हे..?

देवायत : नही बेटा अभीतो मुमकीन नही हे.. लेकीन इनकी सुरुआत तुम्हारे घरसे ही पीछली दो पीढीसे सुरु होगइ हे.. ओर आने वाले वक्तमे तुभी अ‍ेसे कइ रीस्तोको पहेचानेगा ओर अपनी आंखोसे देखेगा.. तब तुजे ही सब सम्हालना हे..

बाबा : बाबा क्या मे सब कर पाउगा..? तबतो गांववाले मुजे नोचही डालेगे.. हें..हें..हें..

बाबा : नही बेटा तुजे मंजु बेटीने जो गलेमे तावीज पहेनाया हे सब उसीका कमाल हे.. ओर तुजे अ‍ेक जडी बुटीभी पीलाइ हे तभीतो तु इतनी ओरतोको संतुस्ट कर सकता हे.. वो सब मेने ओर मेरी मंजु बेटीने तुमसे छुपाकर कीया हे.. वरना तु इनके लीये कभी नही मानता.. मेरी मंजु बीटीया तेरे हर रीस्तोके बारेमे ओर सबके बारेमे सबकुछ जानती हे.. उसे अभी बहुत कुछ कार्य करने हे..

देवायत : (हसते) तबतो बाबा आप दोनोने मीलके बहुत कुछ डीसाइड करलीया होगा.. मुजेतो भनकभी नही लगनेदी.. तभी मे सोचु कोइभी लडकीहो या ओरत मेरे पीछे इती पागल क्यु होती हे.. अब सब बाते मेरी समजमे आगइ.. हें..हें..हें.. मंजु इतनी ओरतोके साथ रीलेशनमे होनेके बावजुद मुजे मना क्यो नही कर रही..

बाबा : (हसते) हां अब जाके समजा.. बेटा तु विचलीत मत होना.. अभीभी तेरी जींदगीमे बहोत ओरते ओर लडकीया आयेगी जो कुछतो तुमसे सादी करके पत्नीका दरजाभी पायेगी.. बस मे तुजे अभी इतनाही केह सकता हु.. कीसीकी भावनाओका अपमान मत करना.. सबकी भावनाओका तुजे सन्मान करना हे.. जेसे पुनमका कीया.. फीर चाहे वो रीस्तेमे कोइ भी क्यु ना हो..

देवायत : (सरमाते) बाबा वो पुनम कुछ जीद कर रही हे.. लेकीन उनकी सादीभी हे.. तो कोइ प्रोबलेमतो नही होगी..? मेने कहा तो कहेती हे ये बाबाका आदेश हे..

बाबा : हां बेटा मुजे सब पता हे.. वो तुमसे अ‍ेक बच्चा चाहती हेनां..? बस मेभी वोही चाहता हु.. तभीतो तेरी सादी उनसे करवादी, उस लडकेके साथतो अ‍ेक नामकीही सादी होगी.. बाकी पुरी जींदगी तुजेही पुनमको अ‍ेक पत्नीकी तराह स्महालना हे.. दुनीया वालोके सामनेतो वो कुछ ओर ही होगी.. जो तुजे अभी बताना उचीत नही हे.. वरना तुम सबलोग थोडा वीचलीत हो सकते हो.. मेरी मंजु बेटी ओर पुनम बेटी सबकुछ जानती हे.. बस वो दोनो कहे अ‍ैसा करताजा.. ओर कुछ नही कहेना..

रमेश : (आकर बेठते) बाबा.. सब जगाह दर्शन करलीये कहीये मेरे लीये ओर क्या हुकुम हे..? हें..हें..हें..

बाबा : (हसते) आ बेठ.. बस कुछ नही लोगोकी सेवा ओर विकास कार्य करता जा ओर ये जोभी कहे उनका सपोर्ट करता जा तु सुखी होगा.. ओर तेरी बेटी भी राज करेगी.. बस इतनाही कहेना हे..

देवायत : बाबा वो हमारे लडकेका नाम करण करना हे वो कब करना हे..?

बाबा : बेटा वो पुनमको कहेना उनका नाम विजय रखदे.. ताकी तेरी चारो ओर विजय हो.. हें..हें..हें..

रमेश : (हसते) वाह.. बाबा क्या मस्त नाम दीया हे.. वि..ज..य.. ये राजाओके लीये बीलकुल फीट बैठता हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) बाबा अब हमे इजाजत दीजीये.. बस खासतो ये सादीकी डेट लेनेही आया था.. अब आपने कहा हे वोही तीथीपे चारोकी सादी रख देगे.. चलीये हम चलते हे आशीर्वाद दीजीये..

बाबा : सुखी रहो.. ओर सांतीसे जाना.. कोइ जल्दी नही हे.. समजे.. खामखा इस सरपंचको डरा दीया.. हें..हें..हें..

रमेश : (बाबाको प्रणाम करते जोरोसे हसते) तो फीर.. अरे बाबा कारको कीतनी फास्ट चलाइ.. हमतो आधे पोने घंटेमेही सहेर पहोच गये.. हें..हें..हें.. मेरातो बीपी बढा दीया.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) बाबा क्या करता.. उन अधीकारीको बहार जाना था तो..

बाबा : (हसते) चल कोइ बात नही अब सांतीसे ओर आरामसे जाना..

फीर दोनोही हसते हुअ‍े बहार आगये ओर कार लेके गांवकी ओर चल पडे ओर जेसेही हाइवे पर पहोच गये तब सामने मोटरसाकल लेके भवान आ रहाथा जो चंदाको परेसान करताथा तब उनको देखतेही देवायतको खुनस बढ गया ओर पारा सातवे आसमानपे चला गया.. ओर कार सीधी उनके सामनेही लेजाकर रोकदी ओर फटाफट नीचे उतर गया.. तब भवान अ‍ेकदम गभराते कारसे टकराते टकराते बच गया ओर मोटरसाइकलसे उतर गया.. फीर जेसेही देवायतको देखा..

उनकी सीटी बीटी गुल होगइ ओर वो कांपने लगा.. तबतक देवायत उनके पास पहोंच गया ओर भवानका कोलरही मुठीमे पकड लीया.. भवान कुछ बोले इनसे पहेलेही उनके गालमे सटाककक.. सटाकक.. तो तमाचे जड दीये तब रमेशभी कारमे बेठे तमासा देखते गभरा गया.. ओर भवान देवायतके सामने हाथ पैर जोडने लगा.. तब देवायत उसे घसीटके कारसे थोडा दुर लेगया ओर अ‍ेक पेडके नीचे लेजाकर उसे गलेसे पकडके रखा ओर गुसेसे कहा..

देवायत : क्युबे मादर--, तुजे बहोत चरबी चड गइ हे..? क्या केह रहाथा तु.. तेरे गांवकी वो सरपंचको..? जानता हे.. वो कोन हे..? समधी हे वो मेरी.. ओर मेरी मौसीजी भी.. समजे.. क्या केह रहाथा तु उनके बारेमे..? क्या वो रंडी हे..? साले मादर--, ओर तु क्या हे? तेरे गांवमे आके सबको बतादु..? की तु तेरी भाभीको ठोकता हे.. क्या इस बारेमे तेरे भाइ भीमाको पता हे..? साले जाके बोलना उसे की देवायत मीलाथा.. फीर वो तुजे बतादेगाकी देवायत कौन हे..

भवान : (हाथ जोडते गभराते) माफ करदो ठाकुरसाब मुजे नही पताथाकी वो आपकी समधन हे.. मेभी आपको अच्छेसे जानता हु..

देवायत : आजतो भीमाकी वजहसे तु बच गया.. जानता हे हम स्कुलसे दोस्त हे.. तु उनकीही बीवीको चोदता हेना..? बतादु भीमाको..? साले मार मारके तुजे घरसे क्या इस गांवसे भी नीकाल देगा.. साला.. हरामी..

भवान : नही ठाकुर साहब मुजसे गलती होगइ अब माफ करभी दो.. आप भाइको कुछ मत बताना मुजे नही बनना सरपंच.. अब मे कभी उस घरकी तरफ आंख उठाके देखुगा भी नही.. मुजे सचमे नही पताथा की वो आपकी समधन हे.., ओर मेभी आपको जानता हु.. यार अ‍ेक बार माफ करदो.. गलती होगइ..

देवायत : साला तुजे सरपंच बननाथा तो मुजसे कहेना चाहीयेनां.. ओर अच्छा हे तु सरपंच नही हे वरना तेरे गांवकी मां बेटीओकी इजत चली जाती.. अगर तेरे जैसा सरपंच होतो पहेले गांवकीही बहु बेटीयोको लुटता..

भवान : (गभराते हाथ जोडते) भाइ नही बनना मुजे सरपंच.. आप भाइको कुछ मत कहेना वरना मेरी इजत चली जायेगी.. मे गांवमे कीसीको मुह दीखाने लायक नही रहुगा.. प्लीज.. अ‍ेक बार जानेदो..

देवायत : (उनका कोलर छोडते) चल जा.. आइन्दा तेरी अ‍ेकभी सीकायत आइनां.. समजले मुजसे बुरा कोइ नही होगा.. तुजे वही जींदा जमीनमे गाड दुगा.. चल जा यहासे..

कहातो भवान दोडके अपना स्कुटर उठा लेता हे ओर चालु करतेही स्पीडसे भाग जाता हे तब देवायत धीरे धीरे चलते कारकी ओर आगया ओर कारमे बेठते कारको चंदाके गांवकी ओर जाने दी.. तब..

रमेश : भाइ कोन था वो.. जो इतना गभरा रहा था.. आपने उसे मारा क्यु..?

देवायत : (हसते) कुछ नही यार..वो पुनमकी सांस हेनां..? वो उनके गांवकी सरपंच हे साला सरपंच बननेके लीये उनके बारेमे कुछ उल्टा सीधा बोल रहाथा.. आज हाथ लग गया.. अब कभी उनके सामनेभी नही देखेगा.. हें..हें..हें..

रमेश : (जोरोसे हसते) साला सब गांवमे अ‍ेक राघव होता हे.. इनका यही इलाज हे.. हें..हें..हें..

देवायत : छोड उसे.., रमेश तुजे उन अधीकारीसे मुलाकात करवादी हे.. अब जबभी काम पडे उनके पास चले जाना ओर मेरा नाम देना हमारा सब काम होजायेगा.. ओर वंदनाको कहेना उनका सब पेपर तीन तीन कोपीमे तैयार रखे.. अ‍ेक बार मुजे उनके साथ जाना पडेगा.. फीर वहा जानेकी जरुरत नही हे.. हमारे गांवकीही स्कुलमे पढायेगी.. ओर वोही सब सम्हालेगी.. बस उनको पांच साल तब फीक्स सेलेरीमे काम करना हे.. अब उनकी नौकरी पकीही समजो..

रमेश : भाइ समज गया लेकीन आपभी अ‍ेक बार घर आकर उनसे सब पेपरके बारेमे बात करलो.. तो ठीक रहेगा..

देवायत : चल ठीक हे मे ही आके समजा दुगा..

अ‍ेसे बाते करते दोनो चंदाके घर चले गये तो चंदा देवायतको देखतेही सरमा गइ जीतो चाहता थाकी अभी दोडकर देवायतकी बाहोमे समा जाये.. लेकीन साथमे रमेशको देखके वो सरमा गइ ओर उनको नमस्ते करके अंदर चली गइ.. ओर मंजु चारुको बता दीयाकी कोन आया हे तो मंजु धीरे धीरे चलते बहार तक आगइ तो पीछे चारुभी खुस होते आगइ.. तबतक देवायत ओर रमेश सोफेपे बेठ गये थे.. तब मंजुने आके रमेशको नमस्ते कीया ओर रमेशनेभी उनका हाल चाल पुछा.. तबतक चारु देवायतकी ओर देखते हसती रही..

रमेश : भाभीजी अब कैसीहे आप दोनोकी तबीयत..?

मंजुला : (हसते) बस रमेशभाइ सब ठीक हे.. आप चारुभाभीक लेआये.. बहुत अच्छा लगा..?

रमेश : नही भाभी हम दोनोतो सहेर जा रहेथे तो सोचा इनकोभी साथ लेले ताकी आपको मीलकर खुद हालचाल जानलेगी.. तो हम उधर छोडके चले गये.. ओर वापसीमे इसे साथ लेकर चले जायेगे.. वही सोचके उसे लाये.. अब आपभी उधर चले आओ चारु आपका सब खयाल रखेगी..

मंजुला : (हसते) बस सुक्रिया.. अ‍ेक बार वो डोक्टरको दीखादु फीर वहा चली आउगी.. तब घरपे चारु भाभीको भेजदेना.. ओर हमारी वंदना..? क्या उनका कुछ हुआ..?

देवायत : (हसते) नही मंजु इसीलीये हम गये थे.. अब रमेश बाकायदा सरपंच होगया हे.. ओर वंदनाके सब पेपर सबमीट करना हे.. फीर उनकीभी नोकरी पकी.. बस अ‍ेक बार उनको लेकर सहेर जाना पडेगा..

मंजुला : (हसते) अरे वाह.. रमेश भाइ तबतो नये सरपंचके लीये ओर वंदनाकी नोकरीके लीये.. आपको खुब खुब अभीनंदन.. तबतो पार्टी बार्टी देनी पडेगी.. हें..हें..हें..

चारु : (मुह बीगाडते) हां जरुर देगे पार्टी आपको.. अ‍ेकदम कंजुस हे.. ओर मुजेभी यहा ये लेकर नही आये.. हमारे देवरजीके कहेनेपे इनके साथ आइ हु..

रमेश : (खुस होते हसते) अरे चुपकर.. तु कहां बीचमे कुद पडी.. भाभी पार्टी जरुर रखेगें.. फील हालतो ये मुह मीठा कीजीये लीजीये मीठाइ.. फीर पार्टी क्या घरपे सबका खानाही रखेगें चारु मस्त खाना बनाती हे.. हें..हें..हें..

कहेते रमेशने अ‍ेक बोक्ष मंजुको देदीया ओर मंजु वापस अपने रुममे चली गइ.. तब चंदा बच्चेको लेके बहार आगइ ओर देवायतके हाथोमे थमा दीया तब रमेश ओर देवायत उनको देखते रहे तब चंदा ओर चारु कीचनमे चाइ बनाने चली गइ.. तो बच्चेको रमेशके हाथोमे थमाके देवायत मंजुके पास चला गया.. तब मंजु साइडमे खडी होते देवायतका इन्तजार कर रहीथी जेसेही देवायत अंदर आया तो मंजु उनकी बाहोमे लीपट गइ..

मंजुला : जानु यहा आपके बीना अच्छा नही लगता.. मुजे आपके साथ ही आना हे..

देवायत : (मंजुके होंठ चुमते) बस बेबी अ‍ेक दो दीन ठहेर जाओ हम यहासे सीधे डोक्टरको दीखाके घर चले जायेगे.. पुछलो अपनी सहेलीको.. कब दीखाना हे..

मंजुला : ठीक हे आप रमेशभाइके पास बैठो मे फोन करके पुछ लेती हु..

तब देवायत बहार आके बेठ गयातो चंदा दो कप चाइ लेके आगइ ओर चाइ देकर बच्चेको लेकर वापस चारुके साथ अंदर चली गइ ओर मंजुसे बात करने लगी तो मंजु बाते करते सरमा रही थी.. तब चंदा कप लेने वापस आगइ ओर देवायतकी ओर देखके आंखोसे कुछ इसारा कर दीया ओर सरमाती चली गइ.. तब देवायत खडा होगया ओर मंजुको आवाज देके जानेकी बात कहेने लगा.. तो मंजु चारु ओर चंदा तीनोही बहार आगइ ओर देवायतकी ओर सवालीया नजरोसे देखने लगी..

देवायत : मंजु मे ओर रमेश घरकी ओर नीकल रहे हे.. कुछ काम हे क्या..? मुजे जाना पडेगा..

मंजुला : अरे मे सृतीसे बात कर रहीथी.. हमे दो दीनके बाद बुलाया हे आप सुबह इधर चले आना.. ओर वो भावुकोभी दीखाना हे.. आप भानुभाइको फोन करदो.. भावुको भी दीखा दे..

देवायत : मंजु सायद भानुका मामा गुजर गया.. मुजे आज बाबाने बताया.. सायद उनको सब मालुम होगया.. बस इन लोगोको घर छोडके सायद मुजे वहा जाना पडे..

मंजुला : चलो अ‍ेक दीनतो ये सब होनाही था.. तो क्या आप वहा जाओगे..? तो हम दो दीनके बाद सृतीको दीखाने चले जायेगे आपही भावुको लेकर आना.. वो लोगभी बीजी होगे.. क्यु मौसी..?

चंदा : हां भानुभाइ बीजी होगे तो आपही उनको लेकर आइअ‍े फीर हम इधरसे चले जायेगे..

मंजुला : (रमेश बहार चला गया तब धीरेसे) देवु.. अब मौसी भी उधर आ रही हे.. हमेसाके लीये..

देवायत : (चंदा सरमा गइ ओर अंदर चली गइ) मंजु आज बाबानेभी वोही कहा.. अभी मे तुजे घर जाके फोन करता हु बहार रमेश ओर चारुभाभी खडे हे हम फोनपे बात करते हे.. ओके.. चल बाय..

कहेते देवायत कारमे बेठ गया तो रमेशभी साथ बेठ गया ओर चारु पीछेकी सीटमे बेठ गइ ओर मंजु चंदाको हाथ हीलाते बाय करने लगी ओर तीनो गांवकी ओर नीकल गये.. तब चारु मीररसे देवायतको आंखोसे इसारा करती रही.. तब रास्तेमे भानुका फोन आगया तो देवायत कार चलाते उनसे बाते करने लगा..

देवायत : हां भानु बोल.. क्या मामा चले गये..? मुजे बाबाने बताया.. कहाहे तु..?

भानु : (फोनपे) भाइ अभी अभी मे ओर माइ रमा ओर नीलमको लेके घर आगये.. मामा दो पहोरकोही गुजर गये माइके हाथो खाना बाना खाके गये.. तो रमा ओर नीलमको लेकर अभी घर पहुचा.. ओर बहार नीकलके आपको फोन कीया.. क्या तुम सहेरसे वापस आगये..?

देवायत : नही यार हम रास्तेमे हे अभी पहोंच जायेगे.. आकर मीलता हु.. तु अपने घरपेही हेनां..?

भानु : हां भाइ अभी अभी घर आये हे.. अभी नहानाभी बाकी हे.. आप इधरही आजाओ.. मे घरपेही हु..

कहेते भानुने फोन काट दीया ओर अपने रुममे चला गया.. ओर सीधा बाथरुममे घुस गया तब थोडीही देरकी ड्राइवके बाद देवायत ओर रमेश चारुभी अपने गांव पहोंच गये तो देवायत रमेशको उनके घर छोडते कारमेही बेठा रहा तभी रमेश चारु कारसे उतर गये.. ओर चारु देवायतको देखके कातील स्माइल करने लगी.. फीर उनको कारमेही बेठे देखते घरमे आनेका आग्रह करने लगी..

चारु : (हसते) अरे देवरजी आपतो बहारसेही चले जाओगे.. आइअ‍ेना अंदर कुछ चाइ बाइ पीकर जाइअ‍े..

देवायत : (हसते) नही भाभी अभी जल्दीमे हु आपको तो सब मालुम हे.. मे कल आपके घर आउगा मुजे वंदनासे भी कुछ बाते करनी हे चलो बाय कल मीलते हे..

कहातो चारुका चहेरा थोडा सेड होगया ओर हाथ हीलाते देवायतको बाय.. कहेने लगी.. तब रमेश मीठाइके बोक्ष लेके अंदर चलने लगता हे तो चारुभी कुछ बोक्ष लेके अंदर चली गइ तब अंदर जातेही रमेश चारुको सब बाते बताने लगता हे.. तब दुसरी ओर देवायतभी भानुके गांवकी ओर जाते वक्त पुनमको रास्तेसे फोन कर देता हे तब पुनम अपने रुममे आराम कर रहीथी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ६३

कहातो चारुका चहेरा थोडा सेड होगया ओर हाथ हीलाते देवायतको बाय.. कहेने लगी.. तब रमेश मीठाइके बोक्ष लेके अंदर चलने लगता हे तो चारुभी कुछ बोक्ष लेके अंदर चली गइ तब अंदर जातेही रमेश चारुको सब बाते बताने लगता हे.. तब दुसरी ओर देवायतभी भानुके गांवकी ओर जाते वक्त पुनमको रास्तेसे फोन कर देता हे तब पुनम अपने रुममे आराम कर रहीथी....अब आगे

पुनम : (फोन देखतेही स्माइल करते उठाते) हां भाइ आप कब आ रहे हो..? काम होगया..?

देवायत : हां पुनो कामभी होगया ओर हम यहा पहोंचभी गये.. मे भानुके घर जा रहा हु उनका मामा गुजर गया हे.. तो आनेमे थोडी देर होजायेगी.. तुम सब खाना खा लेना..मे आकर खा लुगा..

पुनम : भाइ सुनो.. आप मुजे जगा देना मे आपको खाना दे दुगी.. फीर हम मेरे रुममे चले जायेगे.. तब सब सो गये होगे.. समज गयेनां.. आज मुजे अपने पतीको अपने हाथोसे खीलाना हे..

देवायत : (हसते) चल ठीक हे तेरीभी क्या क्या फेन्टासी हे, हें..हें..हें..

पुनम : (हसते धीरेसे) हां तो फीर.. इतना अच्छा मौका हे.. मे पतीकी इतनी सेवातो कर ही सकती हु.., क्या अपनी दोनो बीवीओको मीलने गये थे..?

देवायत : हां पुनो दो दीनके बाद तेरी भाभीको दीखाने जाना हे.. फीर तेरी दोनो भाभीया सायद हमारे घर आजायेगी..

पुनम : (हसते) क्या.. मेरी दुसरी भाभी..? भाइ क्या आपने मेरी साससे सादी करली..? हें..हें..हें..

देवायत : नही लेकीन लगता हे हम जल्दही सादी करलेगे.. हमारे पास सीर्फ तीन रात हे.. फीर हमे रश्मीके घरही मीलना होगा..चल अब रखता हु..

पुनम : भाइ कोइ बात नही ये तीन रात हम जी भरके प्यार कर लेगे.. बाकी रश्मीभाभीका घरतो हे ही.. चलो बाय.. आप घर आओगे तब बात करेगे..

कहेते पुनमने फोन काट दीया ओर फोनको चुमते हसने लगी.. तब दुसरी ओर भानु नहाके बाथरुमसे नीकला तो भावनाने उनके कपडे बहार रख दीयेथे ओर आज वो सबके साथ नोर्मल बीहेव कर रहीथी.. जीसे देखते भानुको बडा आस्चर्य हुआ.. ओर वो मनही मन खुस होते अपने कपडे पहेनके बहार आगया..

तब सरलाके पास रमा भावना लता नीलम सब बेठे थे.. ओर भानुभी तैयार होके बहार आगया ओर अपनी माइके पास बेठ गया, तब सरला भावु ओर लताको सब बाते बता रहीथी.. तभी थोडी देरके बाद देवायत भी अपनी कार लेके आगया.. जीसे देखते सरला भावना ओर लताके चहेरे दमक उठे.. तो लता सरमाते देवायतके लीये कीचनमे पानी लेने चली गइ..तो नीलमभी उनके साथ चली गइ..

सरला : आओ देवु बेटा तुम सही टाइमपे आगये.. हो आये सहेर..?

देवायत : (उनके पास बेठते) जी काकी.. सहेरभी हो आया ओर बाबाको भी मीलके आगया..

सरला : (हसते) अच्छा क्या कहा बाबाने..? कुछ बात हुइ उनसे..?

देवायत : (लताके हाथसे पानी लेते गंभीर होते) हां काकी बाबाने हमे पंद्गह दीनके बाद सादीके लीये कहा हे.. लेकीन अब केसे मुमकीन होगा..? मुजेतो कुछ पताही नही था.. उधर बाबाकोभी पता चल गया की अब मामा नही रहे.. हमे उसीने बताया तब जाके पता चला.. तभी वहासे सीधाही इधर आगया.. भानुसेतो बातभी नही हुइ.. मुजे फोन करदेते.. या सुबह ही बात हुइ तब मुजे बुला लीया होता..

भानु : भाइ तबतो हम वहा पहोचे थे.. ओर तब मामाकोभी कुछ नही हुआथा.. वो ओर माइतो बडे आरामसे बाते कर रहेथे.. फीर माइने उनको खानाभी खीलाया ओर हम आराम कर रहेथे तबही सब हुआ.. ओर हम उसे होस्पीटल लेके भागे तबही वो गुजर गयेथे.. तो फोन करनेका टाइमही नही मीला.. फीर होस्पीटलसे वापस आकर उनकी सब वीधीओमे पड गये.. ओर मामाका अग्नीसंस्कार करके आगये..

रमा : (आंसु बहाते) देवायतजी मुजे डोक्टरने दो दीन पहेलेही बता दीयाथा की ये दो तीन दीनके महेमान हे.. तभीतो दीदी ओर भानुको उधर बुला लीया.. ओर आप सादीको मत रोकना.. जो होनाथा वो होगया..

सरला : हां देवा.. हम इस बातके लीये पहेलेसे ही तैयार थे.. हम भानुके मामाका सब कार्य ये पांच दीनमे नीपटा लेगे.. ओर हम घरकेही लोग सब कार्य कर लेगे.. तुम सादीकी तैयारीया सुरु करदो ओर जरुरत पडेतो लता ओर नीलमकोभी साथ लेकर जाना.. हमे बाबाने दीये हुअ‍े टाइमपे ही सादी करदेनी हे..

भानु : हां भाइ.. आप तैयारीया सुरु करदो.. ओर जरुरत पडे वहा मेभी आजाउगा.. ओर हम सादीभी उसी तराह करेगे जीस तराह सगाइ रखीथी.. सब अ‍ेकही जगाह.. हमे कोइ तामजाम नही करना.. क्यु माइ..?

सरला : हां देवा वहा सादी रखेगे तो इधर कोइ बोलेगाभी नही की अभी अभी मामा गुजर गया ओर सादी कर रहे हे.. ओर हमे सादी बाबाके दीये हुअ‍े टाइमपेही करनी हे.. वोभी सादाइसे..

देवायत : (हसते) ठीक हे.. वो सबतो ठीक हे लेकीन दो दीनके बाद हमे मंजु ओर भावुको डोक्टरको दीखाने जाना हे.. मंजुने आज सृतीको फोन कीयाथा.. तो दो दीनके बाद बुला लीया..

भानु : (भावनाकी ओर देखते) भाइ आप जाही रहेहो तो आप इधरसे भावुकोभी साथ लेके जाना.. तबतक मे इधर मामाका काम नीपटालु..

रमा : अगर अ‍ैसा हेतो मे साथ चली जाउगी.. भावु बच्चीको लेकर कहा अकेली जायेगी.. अभी कीतनी कमजोरी होगी.. मेही साथ चली जाउगी.. ओर अब मेही उनका खयाल रखुगी..

सरला : (हसते) ठीक हे तुभी चली जाना.. ओर लता नीलम सब इधर आओ तुम सबसे अ‍ेक जरुरी बातभी करनी हे.. अच्छा हुआ देवुभी इधर हे..

तो लता ओर नीलमभी सबके पास आके बेठ गइ तब भावनाको आज पहेली बार अपनी मामीके प्रती प्यार आने लगा.. क्युकी अब रमा भानुकी सादीसे उसे कोइ अ‍ेतराज नहीथा उसे उनका पुराना प्यारजो मील गया था.. ओर सभी लोग आस्चर्य भावसे सरलाकी ओर देखने लगे लेकीन तभी लता ओर भावनाको कुछ अंदाजा होगया की माइ सबको क्या कहेना चाहती हे.. जीनके बारेमे भानु ओर रमाकोभी नही पता था.. बस.. सभी लोग सरलाको देखते रहे की वो क्या बोलेगी..

सरला : देखीये अब जो होनाथा वोतो हो चुका.. अब रमा ओर नीलम बेटी हमेसाके लीये यही रहेगी.. ओर अबतो रमा विधवा हो गइ हे.. ओर अ‍ेक विधवाको सब केसे अ‍ेक भेडीयेकी नजरसे देखते हे.. तो मे नही चाहती की रमा अ‍ेक विधवाकी जींदगी जीये.. इसीलीये मेने आजही अ‍ेक फैसला करलीया हे.. ओर वो मेरे भाइकी भी आखरी इच्छा थी.. की मे रमाकी दुसरी सादी करवा दु..

रमा : (अ‍ेकदा आस्चर्र्यसे सरला ओर भानुकी ओर देखते) दीदी ये आप क्या केह रही हे..? मेरी दुसरी सादी..?

सरला : (हसते) हां रमा, दो पहरको वो मुजसे वोही बात कर रहेथे की मेरी रमाकी दुसरी सादी करवा देना ताकी मेरी नीलमको अ‍ेक बापका सहारा मील जाये.. ओर येभी कहाकी कीसके साथ सादी करवानी हे..

लता : (आस्चर्यसे) कीसके साथ..?

सरला : (मुस्कुराते) मेरे भानुके साथ.. बस अ‍ेक बार मुजे भावनाबहुसे बात करनी हे.. फीर हम कुछ डीसीजन लेगे.. आप सब लोग यही बैठो मे बहुके साथ बात करके आपको बता दुगी की क्या करना हे.. चल बहु..

कहेते वो अपने रुममे चली गइ.. तो भावनाभी भारी मनसे उनके पीछे जाने लगी.. तब लताने उसे आंखोके इसारेसे कुछ केह दीया तो भावनाके चहेरेपे स्माइल आगइ.. क्युकी उसेभी पता थाकी आगे क्या करना हे.. ओर वो सरलाके रुममे यली गइ तब सरलाने उसे दरवाजा बंध करके आनेको कहा तो भावना दरवाजा बंध करके सरलाके पास चली गइ.. ओर सरलाके पास जाकर खडी रही..

सरला : बेटा इधर बैठजा अभी ज्यादा देर खडी नही रहेना.. अभी बहुत कमजोरी होगी.. यहा बेडपे बेठजा..

भावना : (बेडपे बैठते धीरेसे) जी माजी..

सरला : देख बेटी अभी जो मेने बहार कहा वोतो तुमने सुनही लीया.. क्युकी तुमभी भानुकी बीवीहो तो तुमसे बात करना जरुरीथा इनमे तेरी रजामंदी भी जरुरी हे.. बोल क्या कहेना चाहती हो तुम..?

भावना : (थोडे सख्त लहेजेमे) आपने इतना बडा डीसीजन लीयातो कुछ सोचकेही लीया होगा.. ओर मेरी राय जरुरीथी तो बहार सबको कहेनेसे पहेले अ‍ेक बार मुजसे अकेलेमे बात बात कर लेती.. अब सबको बताके मुजसे अकेलेमे बात करनेका नाटक क्यु करना.. आपने फैसला तो करही लीया हे.. अब मेरी रायका क्या मायना..?

सरला : (अ‍ेक नजरसे भावनाको देखते) बेटी.. मे कोइ नाटक नही कर रही.. मुजे आजही कुछ बातोका पता चला.. आज मुजे जो बाते मालमु हुइ वो हमे पहेले पता होतीतो हम आपकी सादी भानुसे कभी नही करवाते.. इसीलीये मेने पहेले आपसे बात करना उचीत समजा.. ओर इन सबका जीम्वेवार भानुही हे.. उसने गलती की हे.. लेकीन अब हम उसे सजाभी तो नही दे सकते..

भावना : (आस्चर्यसे देखते) कोनसी बात..? क्या मे जान सकती हुं की कीस बातका पता चला आपको..?

सरला : (भावनाकी ओर देखते धीरेसे) हां.. देख बहु जो बात आज मेरे भाइने कही वो तुजे बता रही हु.. की वो बच्चे पैदा करनेमे सक्षम नहीथा.. ये नीलम रमा ओर भानुकी बेटी हे.. भानुका सादीसे पहेलेही रमाके साथ रीलेशन था.. जब उनके मामा होस्पीटलमे थे तबही उनको पता थाकी मे बच्चे पैदा नही कर सकता फीरभी रमा प्रेगनेन्ट होगइ.. तब जाके उनके मामाको सब पता चल गया ओर नीलम आगइ.. ये सब बात हमे नही मालुम थी.. वरना तुम्हारी सादी भानुसे थोडी करवाते.. ओर सायद देवायतकोभी नही मालुम होगा.. वरना वो तुम्हारा रीस्ता लेके यहा क्यु आते..?

भावना : माइ वो मामीसे प्यार करतेथे तो फीर मुजसे दो दो बच्चा क्यु पैदा क्यु करलीया..? क्या मे कोइ बच्चा पैदा करनेका मशीन हु..? उसने गलती कीहे तो फीर उनकी गलतीकी सजा मे क्यु भुगतु..? अब मे दो बच्चे पैदा करके माइकेभीतो नही जा सकती.. वरना इनसे डीवोर्स लेके चली जाती.. वहाभी पापाकी तबीयत ठीक नही रेहती.. बस जीजुकी मददसे ही मम्मी घर चलाती हे.. अब आपही बताओ मे क्या करु?

सरला : (सरपे हाथ घुमाते) बेटी मे तेरी सब बाते समजती हु.. इसमे गलती सीर्फ भानुकी ही हे.. उसे तुमसे कोइ बात नही छीपानी चाहीयेथी.. अब तुही बता तु क्या चाहती हे..? तु जो कहेगी मे वोही करुगी.. तु ना कहेतो मे अभी सबको मना कर देती हु.. मे तेरा संसार तोडना नही चाहती..

भावना : नही माइ.. अब उसे मना करनेकी जरुरत नही.. ओर अबतो वैसेभी मेरा संसार भानुके साथ बीगडही गया हे.. जीस दिन मुजे मामी ओर भानुके रीस्तोके बारेमे पता चला.. तबतक बहुत देर होचुकी थी.. मुजे पुरे महीने होगये थे.. वरना मे इस बच्चीको जन्मही नही देती.. लेकीन अब मेनेभी अ‍ेक फैसला करही लीया हे.. अब मे रहुगीतो इधर ही.. अब मे मेरी मरजीसे रहुगी.. अब भानुसे मेरा कोइ लेना देना नही.. यही रहेके मे मेरे बच्चोको पालुगी.. अब नाही भानु मुजेसे कुछ पुछेगा ओर नाही आप.. मे मेरी मरजीसे अपने तरीकेसे खुलके जीना चाहती हु..

सरला : तो बेटा हमभी कहा तुजे अपने तरीकेसे जीनेको मना करते हे.. अबतक हमने तुजपे कीसीभी तरीकेकी कोइ पाबंदी लगाइ हे क्या..? तु अपने तरीकेसे तो जीती आ रही हे.. फीरभी तुजे जो अच्छा लगे वोही करना.. हम तुजपे कोइ जबरदस्ती नही करेगे.. इस बातपे मे तुम्हारे साथ हुं..

भावना : (आखीर हिंमत करके नजर जुकाते केह देती हे) हां.. मे मानती हु मुजपे कोइ पाबंदी नही हे.. लेकीन माइ आपकोभी पता हे हम ओरतोकी भी कुछ जरुरते हे.. जो आपसे बेहतर कोइ नही जानता.. ओर मे अपनी जरुरत अपने तरीकेसे पुरी करुगी.. जेसे आप कर रही हे.. समज गइनां..?

सरला : (थोडा गभराते) जेसे मे कर रही हु..? मे समज गइ..? मतलब..? बहु.. तु ये क्या बोल रही हे..? ओर मुजसे बहेतर कोइ नही जानता इसका मतलब..? मुजसे साफ साफ सब्दोमे बता तु कहेना क्या चाहती हे..?

भावना : (कातील मुस्कानके साथ) माइ कुछ राज राजही रहेने देना चाहीये.. इस बातको नाही जानोतो बेहतर हे.. जो बात मे केह रही हु वो आपभी जानती हे.. की मे कीस बारेमे बात कर रही हुं.. बस इतना जानलो.. आपके बारेमे मुजे सब कुछ पता हे.. बस.. मुजेभी अपने तरीकेसे जीने दो.. जैसे आप जी रही हे.. अब मेभी आपही की तराह आजाद पंछी बनके जीना चाहती हु.. आप मेरी बात समज गइनां..?

ये सुनके सरला अ‍ेकदम सोक्ट होगइ.. ओर बेडपे बेठते आस्चर्यके साथ अ‍ेक नजरसे भावनाको देखती ही रही.. तब भावनाने उनके कंधेपे हाथ रख दीया.. तो सरलाकी आंखसे आंसु नीकल आये.. तो भावनाने अपने सारीके पलुसे उनके आंसु पोछ दीया.. ओर सरलाके गले लग गइ.. तब सरलाभी सब समज गइ की मेरी बहु मेरे बारेमे सबकुछ जानती हे.. ओर वो क्या कहेना चाहती हे.. तब उनके पास हालातसे समजोता करनेके अलावा ओर कोइ चारा नही था.. अब उनके पास भावनाकी सब बाते माननेके अलावा कोइ रास्ता नही था..

सरला : (भारी मनसे) ठीक हे बहु.. मे तेरी सब बात समज गइ.. लेकीन ध्यान रखना.. ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच रहेनी चाहीये.. सायद यही मेरे भानुकी गलतीकी सजा हे.. जो सजा मेभी अपने मा बापको ओर अपने पतीको दे चुकी हु, तब मेरी भी कुछ मजबुरी थी.. जो आज तेरी मजबुरी हे, मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे..

भावना : माइ दील छोटा मत कीजीये.. हम दोनो अ‍ेकही कस्तीमे सवार हे.. जो सीचुअ‍ेशन आपकीथी आज वोही मेरी हे.. ओर आप फीकर मत कीजीये ये बात सीर्फ हम दोनोके बीचही रहेगी.. आप अपने तरीकेसे जींदगी जीयो.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. ओर मुजे मेरे तरीकेसे जीनेदो.. हम दोनो अ‍ेक दुसरेके रीस्तोमे इन्टरफेयर नही करेगे.. जाइअ‍े कर दीजीये भानुकी सादी मामीसे.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही..

सरला : बहु.. बस तुमसे सीर्फ अ‍ेकही बीनंती हे.. तुम कीसीभी तरीकेसे जीओ.. बस अ‍ेक बातका खयाल रखना इनमे हमारे खानदानकी इजतमे आंच नही आनी चाहीये.. बस यही खयाल रखना..

भावना : (हसते) माइ फीकर मत करो.. मे इतनीभी गीरी हुइ ओरत नही हु.. मे मेरी मर्यादा अच्छी तराहसे जानती हु.. जीस तराह आपने खानदानका खयाल रखा हे मेभी उसी तराह रखुगी.. अब खुस..?

कहातो सरलाके चहेरेपे स्माइल आगइ.. ओर वो भावनाके गले लग गइ.. फीर दोनोही बहार आगइ.. तब भावना बिन्दास्त हसते हुअ‍े अपने रुममे चली गइ जैसे कुछ हुआही नही.. ओर सरला सबके पास आकर खटीयापे बेठ गइ तब सब लोग सरलाकी ओर सवालीया नजरोसे देखते रहे.. तो सरलाने नीलमको बुलाके अपने पास बीठा लीया.. ओर उनके सरपे प्यारसे हाथ रखके सहेलाने लगी.. तो नीलमभी सरमाते लताकी ओर देखकर मुस्कराती रही..

सरला : (धीरेसे) नीलम बेटा तेरी मम्मीकी सादीसे तुजेतो कोइ अ‍ेतराज नही हेनां..?

नीलम : (सरमाते हसते) नही.. मुजे क्या अ‍ेतराज होगा.. जैसे आप ठीक समजे..

सरला : सुनो सब.. मेरी भावुबहुकोभी कोइ अ‍ेतराज नही.. वोभी राजी हे ओर नीलमभी राजी हे.. तो मेने फैसला कर लीया हे इनके मामाका सब कार्य खतम होतेही मे भानुकी सादी रमासे करवा रही हु.. इनमे कीसीको कुछ कहेना हे..?

लता : (हसते) नही.. माइ आपने सही फैसला कीया हे.. अब जल्दीसे सादी करदो ताकी मे मामीको भाभी कहेना सुरु करदु.. हें..हें..हें..

कहातो सब हसने लगे तब रमा सरमसे पानीपानी होगइ ओर खडी होके मुस्कराते अंदर भावनाके पास चली गइ.. तो भानुभी सरमा रहाथा तभी देवायतने कहा..

देवायत : सुन नीलम.. अब सबकी सादी होजायेगी तब वेकेशन खत्म होतेही तुजे सहेरमे पढनेके लीये जाना होगा.. तेरा सब इन्तजाम हम करलेगे.. तु अपनी पढाइकी तैयारीया करना सुरु करदे..

नीलम : (सरमाते हसते) जी भैया..

लता : (जोरोसे हसते) भैया वाली.. अब वो तेरे चाचा हो जायेगे.. हें..हें..हें..

सरला : (लताकी पीठमे हसते हुअ‍े मुका मारते) लता अ‍ेक मारुगी.. हें..हें..हें.. क्यु मेरी बच्चीकी टांग खीच रही हे.. जा तेरे जेठ आये हे.. इनको चाइ तो पीला.. पता नही इन्होने खानाभी खायाहे की नही..?

देवायत : (हसते) नही वहा पुनमने सब तैयार रखा हे.. वरना उनकी डांट खानी पहेगी.. हें..हें..हें.. तो काकी अब मामा की वीधीका क्या करना हे..?

सरला : कुछ नही.. बस सांती हवन करना हे.. वोभी पांच दीनमे ब्राह्मनको बुलवाके कर देगे..

इधर सब बाते कर रहेथे तब लता नीलमको लेके कीचनमे चली गइ.. ओर सबके लीये चाइ बनाने लगी तब नीलम खुब सरमा रहीथी तो दुसरी ओर रमाभी सरमाके भावनाके रुममे चली गइ.. तब भावना बच्चीको जुलेमे डाल रहीथी जेसेही रमाको देखा वो जटसे खडी होगइ ओर रमाकी ओर देखने लगी.. तब रमा सरमाती हसती हुइ अंदर आगइ ओर भावनाके गले लग गइ.. तो भावना सब समज गइ ओर हसते हुअ‍े रमाकी पीठ सहेलाती रही.. फीर रमाका हाथ पकडके उसे अपने बेडपे बीठा दीया.. तब रमासे रहा नही गया ओर भावनाको पुछ ही लीया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ६४

इधर सबभी बाते कर रहेथे तब लता नीलमको लेके कीचनमे चली गइ ओर सबके लीये चाइ बनाने लगी तब नीलम खुब सरमा रहीथी तो दुसरी ओर रमाभी सरमाके भावनाके रुममे चली गइ तब भावना बच्चीको जुलेमे डाल रहीथी जेसेही रमाको देखा वो जटसे खडी होगइ ओर रमाकी ओर देखने लगी तब रमा सरमाती हसती हुइ अंदर आगइ ओर भावनाके गले लग गइ तो भावना सब समज गइ ओर हसते रमाकी पीठ सहेलाती रही.. फीर रमाका हाथ पकडके उसे अपने बेडपे बीठा दीया.. तब रमासे रहा नही गया ओर भावनाको पुछ ही लीया....अब आगे

रमा : भावु बहार वो सब बाते कर रहेहे.. मुजेतो बहोत सरम आइ तो इधर चली आइ.. क्या मे तुमसे कुछ पुछ समती हुं..?

भावना : (हसते) अरे मामी अबतो मेरी दीदी होने वाली हो.. तो हम दोनोमे कैसा पर्दा? पुछलो बीन्दास्त जो पुछना हो..

रमा : भावु..वो..वो.. बहार बडी दीदीने जोभी कुछ कहा.. क्या तुम खुसतो होनां..? मतलब.. तुजे कोइ अ‍ेतराज तो नही..? मुजेतो ये सब सुनके बहोत सरम आ रहीहे.. पता नही दीदीसे उनकी क्या बाते हुइ हे..

भावना : (उनके पास सटकर बेठते) दीदी अ‍ेक बात पुछु..? क्या आप भानुसे प्यार करती होनां..? मुजे माइने बताया की नीलम आपकी ओर भानुकी बेटी हे.. ये बात सीर्फ हम तकही सीमीत रखेगे.. मुजे सब जानना हे.. क्युकी वो आपसे प्यार करता था.. तो फीर मुजसे सादी क्यु की..?

रमा : (सीरीयस होते) भावु मे तुमसे कुछ नही छुपाउगी सब कुछ बता दुगी.. भानुका मामा जब मे सादी करके आइ तबही नपुसंक थे.. वो मुजे संतुस्ट नही कर पा रहेथे.. ओर मे उसे छोडभी नही सकतीथी.. क्युकी मेरे बापुने हमारे घर ओर खेतको भानुके नानाके पास गीरवी रखकर उनसे कुछ पैसे उधर लीयेथे.. बस यही समजलो मेरे बापुने मेरे बदले खेतो ओर पैसोका सोदा कीया.. पता नही भानुके नानाके घरवालोको उन दोनो भाइ ओर बहेनकी सादीकी इतनी जल्दी क्यु करनी पडी.. ससुराल आतेही पहेली रातकोही मुजे पता चलाकी वो मुजे वो सुख देनेमे सक्षम नही हे.. इतनी सराब पीते थे..

भावना : तो फीर भानु आपके संपर्कमे केसे आया आइ मीन.. आप दोनोका रीलेशन..

रमा : हां अ‍ेक दीन उनके मामा दारु पीकर मोटरसाइकलपे आ रहेथे.. उन्होने उस दिन बहुत सराब पी रखीथी.. ओर उनका अ‍ेक्सीडन्ट होगया.. ओर उनकी कमरमे अंदरुनी काफी चोट आइ.. तब भानु उधर होस्पीटलमे हमारी मदद करने आयाथा.. हम दोनो साथही होस्पीटलमे थे.. ओर भानुने उनके मामा ओर डोक्टरकी बात सुनलीकी वो कभी बाप नही बन सकते.. अ‍ेकतो भानु जवान थे.. ओर मेरी बजबुरी भलीभांती जान चुकेथे, मेभी सादीके बाद अ‍ेक कुआरी लडकीकी तराह कामाग्नीमे जल रहीथी..

तब मुजेभी अ‍ेक साथीकी जरुरत महेसुस हो रहीथी, जो मुजे संतुस्ट कर सके.. बस तबसे मे भानुकी ओर ढलने लगी ओर हमारी आंख मील गइ.. मुजे भानुसे प्यार होगया.. फीर भानुभी मेरी ओर ढल चुकाथा ओर मुजसे प्यार करने लगे.. हम दोनो पुरी रात जागते ओर अ‍ेक दुसरेके साथ छेडखानी करने लगे.. ओर हमारा प्यार पनपने लगा.. अ‍ेक दीन मेरी सास होस्पीटल रुकी ओर हम दोनोको आराम करने घर भेज दीया.. तब हम दोनोही अ‍ेक दुसरेको मीलनेके लीये कामाग्नीमे तडप रहेथे.. ओर उस रात सब कुछ होगया.. ओर भानुने मुजे कुआरी लडकीसे अ‍ेक औरत बना दीया..





भावना : सब कुछ मतलब.. क्या दोनोने सेक्स..













रमा : (अ‍ेकदम सरमाते धीरेसे) हां.. भानुने मुजे हमारी सादीका जोडा पहेननेको कहा ओर हमारे धरके मंदिरके सामने हम दोनोने गांधर्व सादी करली.. ओर उस दिन भानुने मेरी मांग भरदी.. तब हम दोनोने जींदगीभर अ‍ेक दुसरेका साथ नीभानेकी कसमे खाइ ओर मे भानुकी सीक्रेट पत्नी बन गइ.. फीर उस रात हम दोनोने सब कुछ करलीया.. मे दुुल्हनकी तराह सजीथी.. ओर हमने उसी रात सुहागरात मनाली..





बस फीरतो हम आये दीन मीलने लगे ओर पती पत्नीकी तरह सबकुछ करते रहे.. तबतक तो मेरी सासभी गुजर चुकीथी.. फीरतो हम दोनोको खुला दौर मील गया हम दोनो पती पत्नीकी तराह मीलने लगे जबभी हमे मौका मीलता हम दोनो मील जाते.. फीरतो भानुके मामाका भी डर नही रहा.. ओर में भानुसे प्रेगनेन्ट होगइ.. ओर उनका नतीजा मेरी नीलम आगइ.. बस यही हम दोनोकी प्रेम कहानी हे..

भावना : (हसते) अच्छा.., तो फीर भानुके मामाको पता नही चला..? की वो बाप नही बन सकते तो नीलम कहासे आगइ.. क्या कभी आपको पुछा नही..?

रमा : (सरमाते हसते) कहासे पुछते..? भानु उनका घर चलाता था.. ओर उनकोभी पताथाकी मे मेरी बीवीको वो सुख देनेके सक्षम नही हुं.. फीर अ‍ेक दीनतो मुजे ओर भानुको अ‍ेकसाथ मीले हुअ‍े देखभी लीया.. तबसे मुजसे दुर रहेने लगे ओर सराबभी ज्यादा पीने लगे.. फीरतो भानु जबभी घरपे आते वो बहार चले जाते.. ये समजलो वो हम दोनोको मीलनेका पुरा मौका देने लगे.. फीरतो हमभी अ‍ेक मीया बीवीकी तराह खुलके उनके सामनेही मीलने लगे.. ओर प्यारका खेल खेलने लगे.. भानु उनके सामनेही मुजे लेकर रुममे चला जाता ओर हम दोनो अंदर जाकर अ‍ेक मीया बीवीकी तराह मीलके खुब प्यार ओर सेक्स करते..





भावना : दीदी आप दोनो इतना प्यार करते थे तो फीर भानुने मुजसे सादी क्युकी..?

रमा : वो क्या करते..? मे भलेही इनकी सीक्रेट वाइफ थी पर इनके साथ यहा आकर उनका संसारतो नही चला सकती.. दुनीया वोलोको क्या कहेती..? ओर क्या कहेते भानुको की उनकी सादी क्यु नही हो रही.. बस हम दोनोने हालातसे समजोता करलीया ओर भानुकी सादी होनेके बावजुद हमने हमेसा मीलनेका वादा करलीया.. ओर आपकी सादी भानुसे होगइ.. फीरभी हम मौका मीलतेही मील जाते.. भानु आजभी मेरी हर जरुरतोको पुरा करते हे.. ओर मेरी नीलमकोभी अ‍ेक बापकी तराह प्यार करते हे.. बस अ‍ेकही अफसोस हो रहा हे इनमे आपकी जींदगी हमने खराब करदी.. (हाथ जोडते) हो सकेतो आप हमे माफ करदो..

भावना : (रमाका हाथ पकडते) दीदी ये आप क्या बोल रही हे.. इसमे आप गलत नही हे.. जब मेरी कीस्मत ही अ‍ेसी हे तो आपको मे क्या दोस दु..? मुजे भी मेरा प्यार नही मीला.. ओर मे भानुके पले पड गइ.. ओर मुजे भानुसे दो दो बच्चेभी होगये.. मेनेभी अब हालतसे समजोता करना सीख लीया हे..

रमा : (भावुका हाथ पकडते धीरेसे) भावु क्या हम दोनो बहेन बनके साथ नही रेह सकती..?

भावना : जी.. बीलकुल रेह सकती हे.. तभीतो आपकी ओर भानुकी सादीके लीये मेन हां कहेदी हे.. लेकीन भानुने मुजे जानबुजकर अंधेरेमे रखा हे.. तो मे इनके साथ पहेलेकी तराह नही रेह सकती.. बस अब मे मेरी मरजीके मुताबीक रहुगी.. इनमे आपसे मुजे कोइ गीला सीकवा नही हे.. हम दोनो अ‍ेक सहेलीकी तराह अ‍ेक बहेनकी तराह ही रहेगी.. बस मे भानुसे थोडी दुर रहुगी..

रमा : (आंखमे आसुके साथ) भावु क्या तुम भानुको अ‍ेक बार माफ नही कर सकती..? प्लीज.. मेरी खातीर..

भावना : (रमाके आंसु पोछते) दीदी आप आंसु मत बहाइअ‍े.. भानुने मेरा विस्वास तोडा हे.. बस मुजे कुछ वक्त लगेगा.. आप फीकर मत करो.. कोइना कोइ रास्ता जरुर नीकलेगा..

लता : (अंदर चाइ लेके आते) लोजी.. दोनो भाभीया यहा बैठी हे लीजीये चाइ पीजीये..हें..हें..हें..

रमा : (हसते मुका मारते) भाभीकी बच्ची अभी नही हुइ हु तेरी भाभी.. जब हम सादी करले तब कहेना..

भावना : (हसते) दीदी कहेने दीजीये.. अब आप सादी करही रही हे तो क्या प्रोबलेम.. हें..हें..हें..

लता : (हसते) लोजी भाभी अबतो इस प्यारी भाभीसेभी परमीसन मील गइ.. अबतो कोइ अ‍ेतराज नही..?

रमा : (सरमाते हसते) चल ठीक हे कहेना भाभी.. मेरी अ‍ैक लोती ननंद जो हो.. हें..हें..हें..

उधर देवायतभी चाइ पीकर नीकलनेके लीये खडा होगया.. तब साथमे भानुभी खडा होके बहार देवायतको छोडने नीकलने लगा.. तब मोका देखतेही सरला देवायतकी ओर देखती रही जेसेही दोनोकी नजर मीली तो सरलाने उसे अपने रुमकी ओर इसारा करते मीलनेका इसारा करदीया.. ओर हसने लगी तो देवायतभी हसने लगा.. ओर वो बहार कारकी ओर नीकल गया तब भानु कारके पास बात करने खडा था..

भानु : भाइ क्या आपकी भावुसे बात होगइ..? लगतातो हे वो मान गइ हे..

देवायत : हां कलही भावुसे बात हुइ.. ओर उसे महा मुस्कीलसे मनाया.. वो तुमसे अभी बात नही करेगी.. तुमसे बहोत नाराज हे.. अभी मान गइ वोही बहुत हे.. धीरे धीरे करते सब सही होजायेगा.. बस उनसे अभी इस बारेमे ज्यादा बात मत करना..

भानु : भाइ देखना वो कोइ हंगामा खडा ना करदे.. वरना मेरी इजतकी वाट लग जायेगी..

देवायत : अरे कुछ नही बोलेगी तु फीकर मत कर.. ओर जरुरत पडेतो मुजसे फोनपे बात करवा देना..

भानु : भाइ अ‍ेक बात पुछनीथी.. आप मौसीसे सादी करके कब घर लेआ रहेहो..? इस बारेमे कुछ बात हुइ..?

देवायत : भानु मुजे लगताहे पुनमकी सादीसे पहेले हम मंदिरमे सादी करलेगे.. आगे देखतेहे क्या होता हे..

भानु : ठीक हे भाइ अगर आप सादीके लीये जाओतो मुजे कहेना.. अगर मामाका कार्य पुरा होगया होगा तो मेभी आपके साथ आजाउगा.. सोचता हु अब रमासे बाकायदा सादी करलु.. अब बहुत देर होगइ हे.. अब आप जाओ.. वहा पुनम ओर लखनभी अकेले होगे.. आपभी सफरसे थक गये होगे.. अच्छा हुआ आप आगये सब बातेतो होगइ.. कल मीलते हे..

तब देवायत कार लेके नीकल जाता हे तो भानुभी वापस अंदर चला गया तब सरला अपने रुममे जा चुकीथी तो भानु अपने रुममे चला गया.. तभी रमाने उसे लताके रुममे सोनेके लीये भेज दीया तब भानु भावुकी ओर देखते चुपचाप लताके रुममे सोने चला गया तो लता नीलम भावु ओर रमा सब भानुवाले रुममे सोने लगे.. तब लता ओर नीलम अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया करती रही ओर सब सोनेकी तैयारीया करने लगे..

उधर देर रात देवायत हवेलीपे पहोचा तब रातके १० बज चुकेथे.. दया ओर रजीयाभी अपने रुममे सोनेके लीये चली गइथी तो लखनभी उपरकी मंजीलमे अपने रुममे बेडपे लेटे लताको फोन कर रहा था.. लेकीन आज लतानेभी सबके साथ होनेकी वजहसे अपना फोन बंध रखाथा.. तो पुनमभी अपने रुममे धिरेनका फोन आयाथा तो उनसे बात कर रहीथी.. जो धिरेन अपने उपरके रुममे अकेला बेडपे लेटे पुनमसे बात कर रहाथा..

जेसेही देवायतकी कार आइ पुनमने फटाफट फोनपे बात खतमकी ओर बहारकी ओर आगइ.. तब देवायत अपने रुममे फ्रेस होने चला गया तो पुनम कीचनमे जाकर देवायतके लीये खाना नीकालने लगी.. आज उसने दया ओर रजीयाको केह दीयाथाकी भाइको मे खाना खीला दुगी.. तब रजीया ओर दया दोनोही नंगी होकर अ‍ेक दुसरेकी चुतमे उंगली कर रहीथी तो बहार नही नीकली ओर अ‍ेक दुसरेको संतुस्ट करती रही..





तभी देवायत फ्रेस होकर अपना नाइट ड्रेस पहेनके बहार आगया तो पुनम उनका खाना डाइनींग टेबलपे रख रहीथी.. तो देवायत स्माइल करते डाइनींगपे चला गया ओर बेठ गया तो पुनम उनकी ओर देखते सरमाते हसने लगी.. ओर देवायतको खाना सर्व करने लगी फीर उनके पास सटकर बेठ गइ तब होलमे कोइ नही थातो देवायतने उसे हाथ खीचके अपनी गोदमे बीठा दीया तो पुनम सरमसे पानीपानी होगइ ओर देवायतकी गोदमे बेठ गइ ओर उनके गलेमे हाथ डालके उनके गालको चुमलीया..

देवायत : (हसते धीरेसे) क्या मेरी इस खुबसुरत बहेनने खाना खा लीया..?

पुनम : (सरमाते धीरेसे गाल चुमते) नही.. मेरे पतीके बगैर मे केसे खा सकती हु.. आपहीका वेइट कर रहीथी.. आप मुजे अपने हाथोसे खीलाओगे.. ओर मे आपको खीलाती हु.. हें..हें..हें..

कहेते पुनम अ‍ेक नीवाला लेके देवायतको खीलाने लगी.. तब देवायतभी पुनमको खीलाने लगा.. दोनोही अ‍ेक दुसरेको खीलाते रहे ओर पुनम अबभी देवायतकी गोदमे बेठीथी तब देवायतका लंड हरकतमे आकर जटकेपे जटका मारने लगा.. तो पुनमभी उनका लंड अपने दोनो पैरोके बीच ठोकर मारते महेसुस करने लगी ओर उतेजीत होने लगी.. ओर उनकी चुत गीली होने लगी.. दोनोही अंधेरेमे नाइट बल्बकी रोसनी मे अ‍ेक दुसरेको खीलाते मस्तीया करते रहे ओर खाना खीलाते रहे..

जब दोनोने खा लीया तो पुनमने देवायतको वही बेठनेके लीये कहा ओर सब बरतन फटाफट कीचनमे रखके सब काम समेट लीया ओर बहार आके देवायतके रुममे जाकर सब लाइट दरवाजा अच्छेसे बंध करके वापस देवायतके पास आके उनका हाथ पकडके अपने रुममे लेगइ.. ओर दरवाजा बंध करके सब लाइटे बुजादी ओर अ‍ेक छोटा नाइट लेम्प जलाके चेन्ज करने चली गइ.. फीर सभी कपडे नीकालके सीर्फ नाइट गाउन पहेन लीया.. ओर देवायतके पास आके उनकी बाहोमे समा गइ.. दोनो काफी देर अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे खडे रहे.. फीर दोनो बेडपे आगये ओर अ‍ेक दुसरेको लीपटते लेट गये..





पुनम : भाइ.. अब हमारे पास सीर्फ तीन नाइट हे.. हम ये तीन रात हमारी सुहागरात की तराह मनायेगे.. आप कोइ कसर मत छोडना.. इस बीस्तरमे मे आपके हवाले हु.. आप जीस तराह प्यार करना चाहे कर सकते हे.. मुजपे कोइ रहेम मत करना.. बस मुजे आपसे खुबसुरत बच्चा चाहीये.. मेरी सादीसे पहेले कर दीजीये मुजे प्रेगनेन्ट.. ताकी मुजे धिरेनसे कोइ खतरा ना रहे.. मे सीर्फ हमारे बच्चेको जन्म देना चाहती हु..

देवायत : (प्यारसे गाल चुमते) हंममम.. पता हे मुजे तु बाबाके आदेशका पालन कर रही हे..

पुनम : (हसते होंठ चुमते) लगता हे मेरा जानु बाबाको मीलके आया हे.. क्या आप गये थे वहां..?

देवायत : हां.. डार्लींग.. बाबाने काफी कुछ बताया.. तुमने ओर मंजुने बहुत कुछ जानलीया हे.. क्या तेरी इस बारेमे कभी मंजुसे बात हुइ हे..?

पुनम : (सीरीयस होते) हां भाइ.. मे आपको बतानातो नही चाहती थी.. लेकीन आपने पुछ लीया तो बता रहीहु.. क्युकी अब आपही मेरे पती हो ओर आपही रहोगे.. मे धिरेनसे सादी सीर्फ नामकी ही कर रही हु.. ताकी दुनीयाके सामने हम हमारे रीस्तेको छुपा सके.. मे आपसे जुठ नही बोल सकती.. भाइ भाभीके पास कुछ बाबाकी दी हुइ शकितीया हें.. वो सब कुछ जानती हे.. मेरे बारेमे.. आपके बारेमे.. धिरेनके बारेमे.. लखनके बारेमे.. मानलोना हम सबके बारेमे जानती हे.. बस उनकी कुछ मजबुरी हे.. जो वो आपको नही बता पायेगी.. भाइ यही मानलो वो हम सबकी मां हे..

देवायत : बेबी वो आपके बारेमे भी कहे रहेथे.. की आप वास्तमे मेरी बीवी होगी.. ओर दुनीया वालोके सामने कुछ ओरही होगी.. मुजे सुनके बडा अजीब लगा..

पुनम : (उनके सीनेपे सर रखते) भाइ अ‍ेक बात कहु..? आप येसब ना जानो तो ही बेहतर हे.. क्युकी आप अभीसे दुखी रहोगे.. भाइ आपका दील करे वो करते जाइअ‍े ये सब चकरमे मत पडीये.. वो सब मे ओर भाभी हेन्डल कर लेगी.. ओर वेसे देखा जायेतो हमेभी क्या कुछ करना हे सब अपने आपही होरहा हे.. हम सब प्रकृतीके हीसाबसे जी रहे हे हमे इनमे इन्टरफेयर नही करना.. अ‍ेसा बाबा कहेते थे..

देवायत : (सरको चुमते) हंमम चल ठीक हे.. जेसा तुम कहो.. बस अपने आपको कभी अकेली मत समजना.. अबतो मे तुजे हर जन्ममे पाना चाहता हु.. मे तुजे इतना प्यार करने लगा हु.. आइ लव यु सो मच..

पुनम : (होंठ चुमते) बस भाइ मुजे आपका यही प्यार चाहीये.. मेभी आपको हर जन्ममे पाना चाहती हु..

दोनोही प्यार भरी बाते करते बहेकने लगे.. तब थोडीही देरमे दोनोके जीस्मसे अपने नाइट गाउन नीकलके अ‍ेक कोनेमे साथमे पडे थे ओर बेडपे दो जीस्म अ‍ेक दुसरोमे समा जानेके लीये तडप रहेथे.. आज पुनमका जीस्म कीसी कांचकी पुतलीकी तराह चमक रहाथा जीसे देखते देवायत उनसे मीलनके लीये पागल हो रहाथा.. दोनोही अ‍ेक दुसरेके होठोका रसपान करने लगे.. फीर देवायत पुनमके गाल होंठ उनके गलेको ओर बुब्सको चुमते नीचेकी ओर सरकने लगा ओर पुनमकी चुतमे उंगली डालके उनके चुतके दानेको छेडने लगा..





तब पुनमसे बरदास्त करना मुस्कील होने लगा ओर वो मदहोसीमे आंख बंध करते नसेकी हालतमे चली गइ ओर देवायतसे मीलन करनेके लीये तडपने लगी.. तब देवायतकी पीठमे हाथ लेजाते उसे अपने उपर खीच लीया ओर देवायतको अपने उपर चडा लीया.. फीर अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते उनके लंडको मुठीमे पकड लीया ओर अपनी चुतपे रखके धीसने लगी.. तब देवायत उनके बुब्सको मसलते उनके होंठ चुमने लगा..





ओर पुनमने लंड पकडके अपनी चुतके लव होलमे पुस करदीया ओर देवायतको जोरोसे बाहोमे भीच लीया.. तब देवायतने अ‍ेकही जटकेमे अपना पुरा लंड पुनमकी चुतमे उतार दीया तब पुनमकी हल्की चीख नीकल गइ ओर आंखमे आंसु आगये तो देवायतने उनके गालको चुमते उनके आंसुभी चाटके साफ करदीया तब पुनमने अपने दोनो पैर देवायतकी कमरमे आंटी लगाके उसे अपने तनसे चीपका लीया..

ओर दोनो अ‍ेक होगये.. दोनोही अ‍ेक दुसरेको चुमते प्यारकी आगोसमे चले गये.. आज पुनम ओर देवायत दोनोमेसे कोइ अ‍ेक दुसरेसे अलग होना नही चाहते थे.. देवायत होले होले कमरको हीलाके पुनमको चोदने लगा.. पुनमकी चुतके दोनो होठ फडफडाते अंदर बहार होने लगे ओर देवायतके लंबे तगडे लंडको अपनी चुतके बीलमे नीगलने लगे.. तब पुनमभी काम अग्नीमे जलते देवायतके हर धकेका जवाब अपनी कमर उछालके देने लगी.. वो आंख बंध करते देवायतके कंधेपे अपने दांत गडाके देवायतको चोदनेके लीये उतेजीत करती रही.. ओर देवायत उतेजीत होकर पुरा लंड खीचके जड तक धुसाते पुनमको चोदने लगा..





तब दुसरी ओर दया ओर रजीयाभी अ‍ेक दुसरेकी चुतमे उंगली करके सांत होगइ थी.. तब दया थकके नंगीही सो गइ तो रजीयाभी आंख बंध करके लेटी रही.. तब उसे लखनकी वो चुदाइ याद आने लगी.. जो लखनके रुममे सफाइ करने गइथी तब उसे पकडके चोद लीया था.. ओर येबात याद करते अ‍ेक बार फीरसे काम अग्नीमे जलने लगी.. तभी लखनकी कही हुइ बात याद आने लगी की लखनने उसे कभीभी अपने रुममे आनेको कहा हे.. तो अ‍ेक बार नजर धुमाके दयाकी ओर देखने लगी.. तब दया गहेरी नींदमे सो रही थी..

तो रजीया हींमत करके बेडसे उतरके धीरेसे खडी होगइ ओर अपना नाइट गाउन पहेन लीया.. फीर धीरेसे दरवाजा खोलके बहार नीकल गइ ओर दरवाजा बहारसे बंध करलीया.. ताकी दया उसे ढुंढते हुअ‍े बहार ना नीकले ओर वो आजु बाजु जनर करते धीरेसे दबे पांव सीडीयोकी ओर नजरे धुमाती चल पडी.. तब देवायत ओर पुनमके रुममे अंधेरा छाया हुआ था.. तो वो धीरेसे सीडीया चडके उपरकी ओर जाने लगी..

जब लखनके रुमके पास पहोंची उनकी दिलकी धडकन बढ गइ.. ओर उसने धीरेसे दरवाजेको धका मारा तो दरवाजा खुल गया ओर वो अंदर जाकने लगी तो लखन हाथोमे अपना लंड पकडके सोयाथा.. तो रजीया धीरेसे अंदर चली गइ ओर दरवाजा बंध करलीया.. फीर वही अपना गाउन नीकालके धीरेसे लखनके पास बेठ गइ ओर लंडको देखते उतेजीत होने लगी ओर अपनी चुतपे हाथ लेजाते उसे सहेलाने लगी.. ओर आंख बंध करते सीसकारीया करने लगी..





जब उनसे रहा नही गया तब धीरेसे लखनकी कमरकी ओर जुक गइ ओर लंडपे जीभ नीकालके उनके टोपेको चाटने लगी.. तब लखनभी कची नींदमे था तो लंडपे गीलापनकी वजहसे आंख खुल गइ ओर रजीयाको देखते ही मनही मन खुस होगया.. ओर रजीयाकी हरकतको देखने लगा तब रजीयाने धीरेसे लंडको मुंहमे भरलीया तो लखनने अपना हाथ हटा लीया ओर रजीयाके सरको सहेलाने लगा..

तब रजीया अ‍ेकदम डर गइ.. ओर मुहसे लंड नीकालते लखनकी ओर देखने लगी.. तब लखन उनके गालपे हाथ रखते हस रहा था तो रजीयाकीभी हसी नीकल गइ.. ओर वो वापस लखनके लंडको मुहमे भरके चुसने लगी.. तब लखनका लंड तनके सख्त होने लगा ओर उनसे बरदास्त करना मुस्कील होने लगा तो वो फटसे बेडपे बेठ गया ओर रजीयाको खीचके अपने उपर चडाके लीटा दीया तब दोनोही पागल होके अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमने लगे.. ओर मुह खोलके अ‍ेक दुसरेके रसको पीने लगे..





लखन : (धीरेसे होंठ छोडते) आखीर मेरी रानी आही गइ.. क्या तुजे मेरा लंड पसंद आया..?

रजीया : (सरमाते हसते) हां.. मे मेरे मालीकको कैसे मना कर सकती हु.. तभीतो सबसे छुपके आगइ.. अबतो मौका मीलतेही में रोज आउगी.. ओर हम खुब प्यार करेगे.. देखना सादीके बाद मुजे भुल मत जाना..

लखन : (हसते) अरे.. मेरी रजीया डार्लींग फीकर मत करो.. तुम कोइ भुलनेकी चीज हे.. पहेले क्यु नही आइ..? वरना तुजे पहेलेही चोद लेता.. अब तुजेतो मेरी पर्सनल रखैल बनाके रखुगा.. आजा मेरा लंड तेरी चुतमे जानेके लीये फटा जा रहा हे.. चल लेट जा आज पुरी रात तुजे चोदना हे..

कहातो रजीया हसते हुअ‍े पीठके बल अपने दोनो पैर फैलाके लेट गइ.. ओर लखन उनके पैरके बीच आगया ओर अपना लंड रजीयाकी चुतपे धीसने लगा.. तब रजीयाकी चुतभी पानी छोडने लगी ओर वो सरमके मारे मुहको इधर उधर करने लगी तबतक लखनका लंडभी गीला होगया तो चुतमे फसाके रजीयाके उपर जुकते लेट गया.. ओर रजीयाके होंठ चुमते अ‍ेकही जटकेमे पुरा लंड रजीयाकी चुतमे घुसा दीया तब रजीयाकी आहे नीकलने लगी ओर वो मदहोसीमे छाके कामातुर होने लगी.. ओर लखनको जोरोसे बाहोमे भीच लीया..

तब लखन कमर हीलाके रजीयाको चोदने लगा.. ओर रजीयाभी लखनको अपने तनसे चीपकाते अपनी कमर उछालते चुदवाने लगी.. लखनको रजीयाकी चुत कीसी गरम भठीकी तराह महेसुस हो रही थी.. क्यु ना हो..? क्युकी रजीया दयासे भी कामुक ओरत थी.. वो देवायतका लंड कइ बार अपनी चुतमे ले चुकीथी तो लखनका लंड उसे खास फीलभी नही हो रहा था.. लेकीन अब देवायत उन दोनोको कम टाइम दे पाताथा.. तो देवायत नही तो लखनका लंडही सही.. मानके वो लखनको अपनी प्यास बुजवानेमे कामयाब रही..





भलेही लखनका लंड देवायतसे काफी छोटा ओर पतला था.. लेकीन अपनी प्यास बुजानेके लीये काफी था यही सोचते वो लखनसे चुदवानेके लीये राजी होगइ.. तब थोडी देरकी धकापैनी चुदाइके बाद लखन रजीयाकी चुतको पानीसे भरके उनके सीनेपे ढेर होगया.. तब रजीया लखनकी कमरको पकडते अपनी चुतको आडी टेडी करने लगी.. ओर थोडी कसरतके बाद वोभी जड गइ.. ओर दोनो अ‍ेसेही पडे रहे.. तब लखनका लंड सीकुडके रजीयाकी चुतसे अपने आपही बहार नीकल गया.. तब रजीया अपनी चडीसे चुतको साफ करने लगी.. ओर लखनके लंडकोभी अपने हाथोसे पोछ दीया.. फीर लखन ओर रजीया बाथरुममे चले गये ओर पानीसे साफ होके बहार आगये....

कन्टीन्यु
 
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