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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - ५५
भानु देवायतसे बात करते नीकल जाता हे.. तब देवायत अपने गोडाउनकी ओफीसमे चला जाता हे ओर भावनाको फोन लगा देता हे तब भावना देवायतका फोन देखतेही मनमे खुस होजाती हे.. ओर अपने रुममे फोन लेकर चली जाती हे फीर दरवाजा बंध करके अपने बेडपे लेटे बात करने लगती हे....अब आगे
भावना : (आंसु बहाते) जीजु.. अब आपको मुजसे बात करनेका टाइम मीला..? क्या मुजे पहेले फोन नही कर सकते थे..? वोभी आपके दोस्तने कहा होगा.. तभी फोन कीया होगा..
देवायत : (हसते) अरे नही मेनेतो अैसेही तेरी तबीयतका पुछने फोन कीयाथा.. बता कैसी हे तुम दोनोकी तबीयत कुछ तकलीफ तो नही..?
भावना : (आंसु पोछते) नही जीजु.. कोइ प्रोबलेम नही हे.. ये बताओ मंजुदीदी कैसी हे..ओर आप कैसे हो..? अबतो ठीकसे खातेभी नही होगे.. सारा दीन दोडधाम..
देवायत : मंजु मौसीके वहा हे सब ठीक हे ओर मेभी मस्त हु.. मेरी बहोत चीन्ता कर रहीहे तु.. ओर बता..
भावना : चीन्तातो करुगीनां मेरे अेक लौते जीजुहो आप.. मेरे फेवरीट.. हें..हें..हें.. सुनो.. जीजु मुजसे आपसे कुछ बात करनी हे.. लेकीन फोनपे बात करना उचीत नही हे आप घर चले आओ.. जब मे अकेली होउगी तब आपको फोन करुगी.. आप फौरन चले आना.. बहुत जरुरी बात हे..
देवायत : भावु.. क्या भानुके बारेमे बात करनी हे..? उनके बारेमे मे भी तुमसे बात करना चाहता हु..
भावना : जीजु मे आपसे बहुत नाराज हु.. आपको सब पताथा तो इनके साथ मेरी सादी क्यु करवाइ..? मे आपपे सबसे ज्यादा भरोसा करती हु.. इतनातो मेरे पतीपे भी नही करती..
देवायत : नही भावु तेरी सादी हुइ तबतक मुजे कुछ नही पताथा.. ये बाततो मुजे कुछ दीन पहेलेही मालुम हुइ.. मेरा यकीन कर.. कहोतो मे मंजुकी कसम खाता हु.. मुजे सचमे नही मालुम था..
भावना : नही जीजु मुजे आपपे पुरा विस्वास हे आप कसम मत खाओ.. मेरी कीस्मतही खराब हे.. अेकतो मुजे अपना प्यार नही मीला.. ओर उपरसे पतीभी अैसा मीला.. जीजु.. कास मेने पहेले ही हीमत करके अपने प्यारका इजहार करदीया होता.. तो मे जीसे प्यार करती थी उनके साथ खुसीसे जींदगी बीता रही होती..
देवायत : व्होट..? भावु क्या तुम सादीसे पहेले कीसीसे प्यार करतीथी..? तो फीर मुजे तब बताया क्यु नही..?
भावना : (आंसु बहाते धीरेसे) जीजु.. केसे बताती.. मे उनसे अपने दीलकी बात कहु इनसे पहेलेही वो कीसी ओरसे प्यारके बंधनमे बंध चुकेथे.. ओर उनकी सादीभी होने वालीथी.. जीजु मे अकेली पड गइ हु.. मुजे यहा घुटनसी हो रही हे आप कुछ कीजीये वरना मे मर जाउगी..
देवायत : पागल होगइ हो क्या..? अरे बाबा मे अेक दो दीनमे मीलने आता हुनां.. भावु तुजे मेरी कसम हे जो कुछ उल्टा सीधा सोचातो.. हमे अेक बार मीलने दे सब ठीक होजायेगा.. क्या अपने जीजुपे इतना भरोसा नही हे..?
भावना : जीजु बस अेक आपही हो जो मे सबसे ज्यादा भरोसा करती हु.. मेने आजतक आपको पुछे बगैर कोइ डीसीजन लीया हे क्या..? जीजु भानुने मुजे धोखा दीया हे.. अब मेभी पीछे नही हटुगी.. मेभी बदला लुंगी..
देवायत : भावु अेक बार हमे मीलके बात कर लेनेदे फीर तु जो डीसीजन लेगी मुजे मंजुर हे.. अेक बार उनकीभी सीचुअेशन समजले ओर इसमे तेरी मामीका कोइ दोस नही हे.. बेचारी अकेली हे क्या करेगी? तु ओरतोकी सीचुअेशन समज सकती हे.. कबतक बेचारी अकेली रेह सकती हे.. तु समज गइनां..?
भावना : (हसते) हां समज गइ.. जीजु मे भोली दीखती हु लेकीन हुं नही.. हें..हें..हें.. जीजु मुजे मामीसे कोइ सीकायत नही.. लेकीन मुजे सब सच बता देते.. ओर आपकल मामीपे बडा प्यार आ रहा हे..? मामीकी सीचुअेशन समज सकते हे तो क्या मेरी सीचुअेशन नही समज सकते..? मे आपकी कुछ नही लगती..?
देवायत : (हसते) हां मेरी अेक लौती सालीजो हो.. हें..हें..हें.., भावु तु समज.. तेरे साथ तेरा पती हे..ओर मामीका पती होनेके बावजुद ना होनेके बराबर हे.. आइ मीन..
भावना : हां.. जीजु मे समज सकतीहु वो आपका खास दोस्त हे तो इनकीही साइड बोलोगे मे कोन होती हु आपकी..? अबतो मेरी भी सीचुअेशन मामीके जैसे होगइ हे.. ठीक हे जीजु मुजे मेरी कीस्मतके भरोसे रहेने दीजीये.. आपसे बात करनाही बेकार हे..
कहेते भावुने फोन काट दीया तो देवायत बडाही दुखी हुआ.. ओर वो वापस भावनाको फोन करने लगा लेकीन हर बार रींगही बजती रही.. तब देवायतको बडी चीन्ता होने लगी की भावना कुछ उल्टा सीधा कदम ना उठाले.. ओर उसने लताको फोन लगा दीया तो लता देवायतका फोन देखके गभरा गइ ओर डरते फोन उठालीया..
लता : (सरमाते धीरेसे) हां भैया.. मे लता बोल रही हु.. कुछ काम था..?
देवायत : लता वो भावनाका फोन नही लग रहा.. जरा उनसे बात करवादे.. लगता हे उनका फोन बंध हे..
लता : (राहतकी सांस लेते) जी भैया.. अभी देती हु आप चालु रखना..
कहेते लता जटसे भावनाके रुमकी ओर जाने लगी देखातो दरवाजा बंध था.. तो लताने दरवाजा खटखटाया तब थोडीही देरमे भावनाने दरवाजा खोला लताने देखातो भावना रो रहीथी ओर आंसु पोछते दरवाजा खोलती हे तब लता उसे जीजुका फोन हे कहेके देती हे ओर वहासे चली जाती हे तब भावना फोनपे
भावना : (रोते) जीजु क्यु फोन कीया मुजे? अब कीसीसे बात नही करनी.. मुजे अपनी कीस्मतपे छोडदो..
देवायत : भावु बस अेक बार मेरी बात सुनले तु जो कहेगी सब करुगा.. मे भानुका पक्ष नही ले रहा.. तुजे मेरी कसम हे.. अगर तुने कुछ कीया तो.. क्या अेक बार मुजसे बात नही करेगी..? मुजे तुमसे मीलना हे..
भावना : (रोते) जीजु मेरीतो समजमे नही आ रहा हे मे क्या करु..? ओर आपने मुजे कसम क्यु दी.. आपको पता हे मेरे सबसे ज्यादा नजदीक आपही हो.. जीजु मे क्या करु? आपकी कसम मे नही तोड सकती.. प्लीज.. अेक बार मुजसे मीललो.. मे कीसीभी तराह आपसे मीलना चाहती हु.. प्लीज..
देवायत : भावु प्लीज.. रो मत.. मुजे नही पताथा बात इतनी सीरीयस होगी.. मे तुजे कलही मीलने आता हु..
भावना : जीजु बस अेक बार मीललो.. फीर मे आपको कभी कुछ नही कहुगी..
देवायत : बस अब रो मत.. मे तुजे कल मीलता हुनां.. भावु तेरी पोजीसन अभी कही घुमने फीरनेकी नही हे.. वरना तुजे अभीके अभी हवेलीपे बुला लेता.. क्या तुजे मौसीके घर जाना हे? मंजुभी वही हे दोनो कुछ दिन साथमे रहेना..
भावना : नही जीजु.. मे यही ठीक हु.. आप कलतो आही रहे हो.. वरना देखती हु.. जीजु में अेक बार अपने प्यारका इजहार ना करनेकी गलती कर चुकी हु.. अब दुबारा नही करुगी.. मे फोन रखती हु कल आपका इन्तजार करती हु.. हो सकेतो आप जल्दीसे आजाइयेगा..
देवायत : भावु तु क्या अबभी उसे प्यार करती हे..? अब तेरी सादी होगइ हे अेक बार सोचना.. मे नही चाहता भानु ओर तेरी लाइफ डीस्टर्ब होजाये.. ये गलत नही हे..?
भावना : नही जीजु.. अब मे मेरी लाइफ खराब नही करुगी.. अबतो यही रहेके सबकुछ करुगी.. अगर वो दुसरी सादी कर सकते हे तो मे अपने प्यारको क्यु नही मील सकती.. जीजु ये सब हम कल मीलके बात करेगे अभी रखती हु.. कोइ सुनलेगा तो गडबड होजायेगी.. चलो बाय..
कहेते भावनाने फोन रख दीया ओर लताको आवाज देके फोन दे दीया तब लता उनके सामने सवालीया नजरोसे देखने लगी.. तो भावनाने हसके उसे गले लगा लीया तो लताने हसके पुछही लीया..
लता : (धीरेसे) भाभी क्या हुआ..? क्या देवायतभाइसे आपकी सब बाते होगइ..? आइ मीन.. क्या आपने अपने दीलकी बात बतादी..?
भावना : (धीरेसे) नहीरे.. लता वो कल मुजे मीलने आ रहे हे तब बता दुगी.. क्या तु खुस हे..?
लता : (सरमाते हसते) हां भाभी..बहुत खुस हु.. कास भाइ आपके प्यारको कबुल करले.. तो सबसे ज्यादा खुसी मुजे होगी.. भाभी अेक बात कहु..? आप भानुभाइको मामीके साथ सादी करने दो.. ताकी आपभी अपनी लाइफ खुलके जीसको.. समज गइनां मेरी बात..
भावना : (सरमाते हसते) चल देखती हु.. तुजे बडी जल्दी हे हमे मीलवानेकी.. हें..हें..हें.. ताकी लखनके साथ मीलनेका तेरा रास्ता साफ होजाये.. हें..हें..हें..
लता : (सरमाते हसते मुका मारते) क्या भाभी..आपभी.. अब मुजे नही मीलना उनसे क्युकी सादीमे दीनभी कीतने रेह गयेहे.. अबतो जोभी मीलना जुलना होगा हम सादीके बादही मीलेगे.. माइ केह रहीथी वो जल्दी हमारी सादी कर देना चाहती हे.. पता नही उनको इतनी जल्दी क्यु हे..
भावना : (जोरोसे हसते) हां तो सही हेना.. वरना पेट फुलाके सादीके फेरे लेती होगी.. हें..हें..हें..
कहातो लता सरमाके हसते हुअे भावनाको पीठमे मुके मारने लगी तो भावना बेडके पीछे भागने लगी ओर लता उनके पीछे मारनेके लीये दोडने लगी दोनोही मस्तीया करते इधर उधर भागती रही तभी भानु अंदर आगया तो लता सरमाके हसते हुअे अपने रुममे चली गइ.. ओर भावनाभी सीरीयस मुह करते धीरे धीरे चलते कीचनमे चली गइ.. तब भानु हाथ मुह धोके अपनी माइके पास चला गया ओर खटीयापे बेठके सरलासे बाते करने लगा..
भानु : माइ वो मामीका फोन आयाथा.. सायद मुजे कल मामाको लेके होस्पीटल जाना पडे.. उनको अब बहुत ही खुनकी उल्टीया होने लगी हे.. सायद तबीयत कुछ ज्यादाही खराब हे..
सरला : (गहेरी सांस लेते) हे भगवान.. अब इनको क्या होगया.. अेकतो इधर सादीकी तैयारीया करनी हे ओर उपरसे तेरा ये मामा.. चल ठीक हे दीखा लेना कही जाके.. सादीमे कोइ बीघन ना आजाये...
भानु : माइ मेने देवुसे कहा हे वो कल बाबाको मीलने जायेगा तो तारीख पकी करवाके आजायेगा ओर मामाकी बातभी कर लेगा.. माइ मेरे खयालसे आप अेक बार मामाको मीललो.. सायद आप उसे दोबारा नही मील सकोगी.. हो सकेतो कल ही मेरे साथ चलो..
सरला : तु ठीक केह रहा हे.. चल ठीक हे.. मे भी चलती हु.. क्या पता दुबारा उसे मीलनेका मौका मीले ना मीले.. कीतने साल होगये हम नही मीले..
मा बेटेकी यही सब बाते लता सुन रहीथी ओर मनही मन खुस होते वो कीचनमे चली गइ.. तो भावना वही खडीथी ओर धीरेसे भावनाको माइ ओर भानुके बीच हुइ सब बाते बताने लगी जीसे सुनके भावना मनही मन खुस होने लगी.. क्युकी इन दोनो नही होगे तो कलही देवायतको फोन करके बुला लेगी ओर सब बाते खुलके कर सकेगी.. यही सब सोचते वो मुस्कराती रही ओर खुसीके मारे लताके गालको चुम लीया तो लता भी सरमाके हसने लगी.. ओर भावनाके गले लग गइ.. फीर वही पडी सब्जीया काटने लगी..
लता : (सब्जीया काटते धीरेसे) भाभी कल अच्छा मौका हे.. आप देवायतभाइको बुलालो.. ओर यही सब बाते करलो..
भावना : (सरारतसे हसते) नही.. नही बुला सकती.. क्युकी तुमभी तो होगी.. वो सरमायेगे.. हें..हें..हें..
लता : (जुठ मुठका गुसा दीखाते) हां..हां..बडी आइ सरमकी पुछ.. मुजसे डरनेकी जरुरत नही हे.. मे मेरे रुममे ही रहुगी.. बात करती हे.. वो नही सरमायेगे लेकीन कल आप मत सरमाना.. वरना कलभी अपने दीलकी बात नही करपाओगी.. फीर मत कहेना लता मे बात नही करपाइ मेरी कीस्मत खराब हे वगेरे..वगेरे.. हें..हें..हें..
भावना : (सरमाके हसते पीठमे मुका मारते) चल जुठी कहीकी.. मे नही सरमाती कल पका सब केह दुगी.. बस.. अबतो खुस..? ओर हां खबरदार जो अपने रुमसे बहार नीकलके हमारी बात सुनलीतो..
लता : (हसते) देखना अबतो सब बाते छुपकेसे सुनुगी.. देखुतो सही मेरी सहेली केसे अपने दीलकी बात कहेती हे.. हें..हें..हें..
भावना : (जुठ मुठ बडी आंख करते) लता अेक मारुगी.. क्या मेरी सहेली नही हो..? प्ली..ज..
लता : (भावनाको गले लगाते) अरे मेरी भाभी नाराज होगइ चलो नही सुनुगी मेतो मजाक कर रहीथी..
दोनोही अैसी प्यार भरी मस्तीया करते बाते करती रही ओर लता खाना बनाती रही.. तब दुसरी ओर देवायतभी भावनासे बात करके थोडा रीलेक्स होगया ओर वो घरकी ओर नीकलने लगा तो लखनभी साथ चलने लगा ओर दोनो हवेलीपे आगये ओर फ्रेस होगये.. तब पुनम अपने रुममे आज रातकी सब तैयारीया कर चुकीथी वो अच्छेसे पानीमे इतर डालके नहाके हल्कासा शींगार कर रही थी..
तभी लखन ओर देवायतकी आवाज सुनके जटसे बहार आगइ तो देवायत उसे देखता ही रेह गया.. आज पुनम उसे बडी अप्सराकी तराह लग रहीथी जीसे देखतेही उनकी पेन्टमे लंडकी हरकत सुरु होगइ ओर पुनमको देखते जटके मारते खडा होने लगा तो पुनमने देखलीया.. ओर सरमाके देवायतकी ओर हसने लगी तो देवायतभी हसते अपने लंडको पेन्टमे हाथ डालके अेडजेस्ट करने लगा ओर जटसे अपने रुममे चला गया..
तो लखनभी उपर अपने रुममे चला गया वो आज ट्रेक्टर चलाके काफी थका हुआ लग रहाथा तो जातेही सीधा बेडपे गीर गया ओर आंख बंध करके लेटा रहा.. तब दया ओर रजीया खाना बना रहीथी तो पुनम धीरेसे देवायतके रुममे चली गइ.. तब देवायत चेन्ज कर रहाथा तो पुनम धीरेसे देवायतके पीछे चली गइ ओर पीछेसेही देवायतको बाहोमे भरलीया तब देवायत पलट गया ओर पुनमको जोरोसे बाहोमे भीचलीया

पुनम : (धीरेसे) भाइ आप देर रात सब सोजाये तब मेरे रुममे आजाइअेगा.. मे दरवाजा खुला रखती हु..
देवायत : (होंठ चुमते) ठीक हे डार्लींग आज तैयार रहेना पुरी रात सोने नही दुगा.. आज क्या मस्त लग रही हे तु.. दील करताहे तुजे अभी प्यार करलु.. बीलकुल मेरी परी लग रही हे..
पुनम : (सरमाते हसते) भाइ तो मेभी कहा सोना चाहती हु.. आज ही मेरा सब काम नीपटाना हे.. आप जल्दी आजाइअेगा.. ओर ये परी सीर्फ आपकी हे.. आप जब चाहो इस परीको प्यार कर सकते हो..
कहेके देवायतके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी ओर जटसे अलग होते बहार भाग गइ तब देवायत मुस्कराता अपने लंडको सही करते बहार चला गया तो पुनम खाना नीकाल रहीथी ओर देवायत सोफेपे बेठ गया ओर टीवी चालु करके देखने लगा.. ओर सोचता रहा..
देवायत : (मनमे) पीछले अेक महीनेमे कीतना कुछ बदल चुकाथा जो रीस्तेको मे इमानदारीसे नीभा रहाथा अब उन रीस्तेके माइने ही बदल चुके थे.. आज मेरी बहेन मेरी मासुका.. मेरी हमसफर होगइ हे.. जो पीछले तीन दीनोसे मेरा बीस्तर गरम कर रही हे.. ओर उनकी चुत.. आहा.. क्या कहेना.. कीतनी कसी हुल हे.. जी चाहता हे उस्े दिन रात चोदताही रहु.. ओर दीखनेमेभी कीसी हिरोइनसे कम नही हे.. अेकदम गोरा बदन संतरे जेसे चुचे.. बस उनको चुसता ही रहु..
पुनम : भाइ चलो खाना रेडी हे.. (जोरोसे आवाज देते) लखनभैया चलो आजाओ खाना रेडी हे..
तब देवायत टीवी बंध करके डाइनींगपे जाके बैठ जाता हे.. तब देवायतको नही मालुमथा की वो जो सोच रहा हे.. वो पीछली दो पीढीयोसे उनके खानदानमे हो रहा हे.. तभी लखन भी दोडके नीचे आजाता हे तो सब अपनी अपनी जगाहपे बेठ गये तो पुनमभी देवायतकी बाजुमे बैठ गइ ओर सबको खाना सर्व करने लगी.. तभी उनको अपने पैरपे देवायतका पैर महेसुस हुआ ओर वो कामुक मुस्कानके साथ सबको खाना देती रही..
उनको पताथा की उनका भाइ उनके पीछे पागल हो चुका हे.. तब उनकी जांगपे देवायतका हाथ महेसुस हुआ जो इनकी जांगको नीचेसे हाथ डालके सहेला रहा था तब पुनमकी सांसे तेज चलने लगी ओर वो आजु बाजु नजर घुमाते सरमाके खाना खाने लगी.. ओर देवायतके हाथपे हाथ रखके उनको पकडके अपनी जांगके बीच फसादीया.. तब इनको कंट्रोल करना मुस्कील होने लगा.. ओर उनकी नाजुक चुतकी पंखडीया फडफडाते पानी छोडने लगी.. तब..

पुनम : (जोरोसे) दया रजीया तुम दोनोभी खाना खाने बेठ जाओ यहा मे भाइको सब दे दुगी..
रजीया : जी छोटी मालकीन..
ओर दोनोभी कीचनके बहार नीचे फर्सपे बेठके खाना नीकालके खाने लगती हे तब उधर आज भानुके घरभी सब खाना खाते बाते कर रहेथे.. तब सरलाने कल भानुके साथ मामाके पास जानेकी बातकी तो लता कातील नजरोसे भावनाकी ओर देखके हसने लगी.. तो बातो बातोमे भावनानेभी लताके साथ सोनेको केह दीया ताकी दोनो मीलके भावेश ओर बच्चीका बरोबर खयाल रख सकेतो सरलाने भी हां केहदी..
सरला : ठीक हे बेटा.. तुम दोनो साथमे सोजाना ताकी भावेश ओर बच्चीका साथमे खयाल रख सको.. हमतो कल जा रहे हे.. देखतेहे साम तक वापस आजायेगे.. तुम दोनो अच्छेसे सब बंध करके सोना ओर रहेना..
लता : (हसते) माइ हम दोनोकी फीकर मत करो.. मे सब सम्हाल लुगी.. ओर भाभीसे कहो आरामभी करती रहे.. सारा दिन घुमती रहेती हे.. आरामही नही करती.. हें..हें..हें..
सरला : हां बहु अभी दो दीन ही हुअे हे इधर उधर मत घुमाकर अभी कमजोरी होगी तो कही गीर बीर जायेगी.. तो लेनेके देने पडेगे..
भावना : (सरमाते हसते) नही माइ मेतो अैसेही आइथी.. सारा दीन सोतीतो रहेती हु.. बस इनसे बाते करते टाइम पास कर रहीथी.. ताकी इनकोभी अकेलाना लगे..
सरला : बेटी बस अेक बार डाक्टरको दीखादे फीर भलेही घरमे घुमो.. हमारे जमानेमे तो ओरते डीलीवरी करके सीधेही खेतोमे काम करने चली जातीथी.. तब कहा ये होस्पीटल बोस्पीटल थी बस गांवकी दायणको बुलाके डीलीवरी करवा लेते थे.. सुबह डीलीवरी हुइ ओर सामकोतो ओरते घरका कामभी करने लगती थी.. मे भानुके टाइमभी उसी दीन कामपे लग गइथी..
लता : माइ वो आपका जमाना था.. ओर आजका जमाना अलग हे.. तब आप खोतोमे काम करती थी ओर हम घरमे पडी रहेती हे कुछतो फर्क होगा..
सरला : (हसते) हां तु तो सहेरकी होगइ हेनां.. तेरी भाभीके साथ रहेके तुभी सीख गइ.. हें..हें..हें..
अेसेही बाते करते सब खाना खा रहेथे.. तब भानु बडाही टेन्शनमे खा रहाथा ओर अपनीही सोचमे डुबा हुआथा उनको पताभी नही थाकी सब क्या बाते कर रहेहे.. वो बहुतही गहेरी सोचमे डुबा हुआथा उनकोतो बस अेकही विचार आ रहाथा की मामाके जानेके बाद वो मामीसे केसे सादी करे.. ओर घरमे सबको कैसे बात करे.. वोतो रमाको जल्दसे जल्द सादी करके घर ले आना चाहता था..
बस यही सोचमे डुबा हुआथा.. ओर खाना खा रहा था.. अबतो उनको भावनाके बेरुखी बर्तावसे नफरत होने लगीथी वो मनसे ओर दीलसे भावनासे दुर होता जा रहाथा.. उनकोभी पता चल गयाथा की भावना अब उसे माफ नही करेगी.. तो पुरी जींदगी उनके साथ कैसे कटेगी यही सब सोचते उनका दीमाग सुन हो गयाथा..
सरला : भानु क्या सोच रहा हे? खानातो खाले.. अेसेही नीवाला लेके बैठा हे तेरे मामाका जो होनाहे होगा तु क्यु चीन्ता करता हे.. हम तेरी मामी ओर नीलमको इधर लेआयेगे.. तु फीकर मत कर..
भानु : (खाना खाते मनमे सोचते) माइ अब तुजे कैसे कहु मुजे मामाकी चीन्ता नही हे तेरी दुसरी बहुकी चीन्ता हे.. जो मे उसे सादी करना चाहता हु.. कास तेरी दोनो बहुअे मीलके साथमे रहे तो कीतना अच्छा हे..
सरला : भानु कल सुबह हम जल्दी जायेगे ताकी साम तक वापस आसके.. इधरभी तो काम होगा..
लता : माइ आरामसे मामाको मीलके आना.. ओर हो सकेतो अेक रात उधर उनके साथ रेहलो.. कीतने साल हो गयेहे आप मायके गइही नही.. हें..हें..हें..
सरला : (हसते) माइके वाली.. अब वहा तेरे मामा मामी के अलावा हे ही कोन..?
लता : माइ फीरभी मायका मायका होता हे.. क्यु भाभी.. आपभी कीतने दीन होगये नही गइ..
भावना : (हसते) माइ ये कबसे हम दोनोको मायके भगानेकी जीद क्यु कर रही हे..? हां अब समजी इनकी सादीजो होने वालीहे ताकी येभी यहा अपने माफकेमे आ सके.. हें..हें..हें.. लखनको कहुगी इनको मत आने देना हें..हें..हें..
लता : (सरमाते हसते पीठमे मुका मारते) भाभी.. अेक मारुगीनां.. टांग खीचनेका अेकभी मौका नही छोडती.. माइ इनको कुछ कहोनां..
सरला : (हसते) मे तुम ननंद भौजीके बीच नही पडती.. वो तुम दोनो जानो.. बस भगवान करे तुम दोनो ननंद भोजाइका प्यार युही बना रहे..
भावना : (हसते) माइ अब आप लताकी चीन्तातो करना छोड ही दो मे हुनां.. इनका सब खयाल मे रखुगी..
कहातो भानुने सर उठाके अेक बार भावनाकी ओर देख लीया ओर उसे आशाकी अेक कीरण नजर आने लगी.. भावना लताका खयाल रखेगी मतलब वो मुने छोडके नही जायेगी.. यही सोचते वो खुस होते पानी पीने लगा ओर हाथ धोके अपने रुममे चला गया.. तब भावना ओर लता दोनोकोही नही मालुम थाकी दोनोके बीच क्या बाते होगइ सब भावनाओमे बहेकते बाते कर रहे थे....
कन्टीन्यु
अध्याय - ५५
भानु देवायतसे बात करते नीकल जाता हे.. तब देवायत अपने गोडाउनकी ओफीसमे चला जाता हे ओर भावनाको फोन लगा देता हे तब भावना देवायतका फोन देखतेही मनमे खुस होजाती हे.. ओर अपने रुममे फोन लेकर चली जाती हे फीर दरवाजा बंध करके अपने बेडपे लेटे बात करने लगती हे....अब आगे
भावना : (आंसु बहाते) जीजु.. अब आपको मुजसे बात करनेका टाइम मीला..? क्या मुजे पहेले फोन नही कर सकते थे..? वोभी आपके दोस्तने कहा होगा.. तभी फोन कीया होगा..
देवायत : (हसते) अरे नही मेनेतो अैसेही तेरी तबीयतका पुछने फोन कीयाथा.. बता कैसी हे तुम दोनोकी तबीयत कुछ तकलीफ तो नही..?
भावना : (आंसु पोछते) नही जीजु.. कोइ प्रोबलेम नही हे.. ये बताओ मंजुदीदी कैसी हे..ओर आप कैसे हो..? अबतो ठीकसे खातेभी नही होगे.. सारा दीन दोडधाम..
देवायत : मंजु मौसीके वहा हे सब ठीक हे ओर मेभी मस्त हु.. मेरी बहोत चीन्ता कर रहीहे तु.. ओर बता..
भावना : चीन्तातो करुगीनां मेरे अेक लौते जीजुहो आप.. मेरे फेवरीट.. हें..हें..हें.. सुनो.. जीजु मुजसे आपसे कुछ बात करनी हे.. लेकीन फोनपे बात करना उचीत नही हे आप घर चले आओ.. जब मे अकेली होउगी तब आपको फोन करुगी.. आप फौरन चले आना.. बहुत जरुरी बात हे..
देवायत : भावु.. क्या भानुके बारेमे बात करनी हे..? उनके बारेमे मे भी तुमसे बात करना चाहता हु..
भावना : जीजु मे आपसे बहुत नाराज हु.. आपको सब पताथा तो इनके साथ मेरी सादी क्यु करवाइ..? मे आपपे सबसे ज्यादा भरोसा करती हु.. इतनातो मेरे पतीपे भी नही करती..
देवायत : नही भावु तेरी सादी हुइ तबतक मुजे कुछ नही पताथा.. ये बाततो मुजे कुछ दीन पहेलेही मालुम हुइ.. मेरा यकीन कर.. कहोतो मे मंजुकी कसम खाता हु.. मुजे सचमे नही मालुम था..
भावना : नही जीजु मुजे आपपे पुरा विस्वास हे आप कसम मत खाओ.. मेरी कीस्मतही खराब हे.. अेकतो मुजे अपना प्यार नही मीला.. ओर उपरसे पतीभी अैसा मीला.. जीजु.. कास मेने पहेले ही हीमत करके अपने प्यारका इजहार करदीया होता.. तो मे जीसे प्यार करती थी उनके साथ खुसीसे जींदगी बीता रही होती..
देवायत : व्होट..? भावु क्या तुम सादीसे पहेले कीसीसे प्यार करतीथी..? तो फीर मुजे तब बताया क्यु नही..?
भावना : (आंसु बहाते धीरेसे) जीजु.. केसे बताती.. मे उनसे अपने दीलकी बात कहु इनसे पहेलेही वो कीसी ओरसे प्यारके बंधनमे बंध चुकेथे.. ओर उनकी सादीभी होने वालीथी.. जीजु मे अकेली पड गइ हु.. मुजे यहा घुटनसी हो रही हे आप कुछ कीजीये वरना मे मर जाउगी..
देवायत : पागल होगइ हो क्या..? अरे बाबा मे अेक दो दीनमे मीलने आता हुनां.. भावु तुजे मेरी कसम हे जो कुछ उल्टा सीधा सोचातो.. हमे अेक बार मीलने दे सब ठीक होजायेगा.. क्या अपने जीजुपे इतना भरोसा नही हे..?
भावना : जीजु बस अेक आपही हो जो मे सबसे ज्यादा भरोसा करती हु.. मेने आजतक आपको पुछे बगैर कोइ डीसीजन लीया हे क्या..? जीजु भानुने मुजे धोखा दीया हे.. अब मेभी पीछे नही हटुगी.. मेभी बदला लुंगी..
देवायत : भावु अेक बार हमे मीलके बात कर लेनेदे फीर तु जो डीसीजन लेगी मुजे मंजुर हे.. अेक बार उनकीभी सीचुअेशन समजले ओर इसमे तेरी मामीका कोइ दोस नही हे.. बेचारी अकेली हे क्या करेगी? तु ओरतोकी सीचुअेशन समज सकती हे.. कबतक बेचारी अकेली रेह सकती हे.. तु समज गइनां..?
भावना : (हसते) हां समज गइ.. जीजु मे भोली दीखती हु लेकीन हुं नही.. हें..हें..हें.. जीजु मुजे मामीसे कोइ सीकायत नही.. लेकीन मुजे सब सच बता देते.. ओर आपकल मामीपे बडा प्यार आ रहा हे..? मामीकी सीचुअेशन समज सकते हे तो क्या मेरी सीचुअेशन नही समज सकते..? मे आपकी कुछ नही लगती..?
देवायत : (हसते) हां मेरी अेक लौती सालीजो हो.. हें..हें..हें.., भावु तु समज.. तेरे साथ तेरा पती हे..ओर मामीका पती होनेके बावजुद ना होनेके बराबर हे.. आइ मीन..
भावना : हां.. जीजु मे समज सकतीहु वो आपका खास दोस्त हे तो इनकीही साइड बोलोगे मे कोन होती हु आपकी..? अबतो मेरी भी सीचुअेशन मामीके जैसे होगइ हे.. ठीक हे जीजु मुजे मेरी कीस्मतके भरोसे रहेने दीजीये.. आपसे बात करनाही बेकार हे..
कहेते भावुने फोन काट दीया तो देवायत बडाही दुखी हुआ.. ओर वो वापस भावनाको फोन करने लगा लेकीन हर बार रींगही बजती रही.. तब देवायतको बडी चीन्ता होने लगी की भावना कुछ उल्टा सीधा कदम ना उठाले.. ओर उसने लताको फोन लगा दीया तो लता देवायतका फोन देखके गभरा गइ ओर डरते फोन उठालीया..
लता : (सरमाते धीरेसे) हां भैया.. मे लता बोल रही हु.. कुछ काम था..?
देवायत : लता वो भावनाका फोन नही लग रहा.. जरा उनसे बात करवादे.. लगता हे उनका फोन बंध हे..
लता : (राहतकी सांस लेते) जी भैया.. अभी देती हु आप चालु रखना..
कहेते लता जटसे भावनाके रुमकी ओर जाने लगी देखातो दरवाजा बंध था.. तो लताने दरवाजा खटखटाया तब थोडीही देरमे भावनाने दरवाजा खोला लताने देखातो भावना रो रहीथी ओर आंसु पोछते दरवाजा खोलती हे तब लता उसे जीजुका फोन हे कहेके देती हे ओर वहासे चली जाती हे तब भावना फोनपे
भावना : (रोते) जीजु क्यु फोन कीया मुजे? अब कीसीसे बात नही करनी.. मुजे अपनी कीस्मतपे छोडदो..
देवायत : भावु बस अेक बार मेरी बात सुनले तु जो कहेगी सब करुगा.. मे भानुका पक्ष नही ले रहा.. तुजे मेरी कसम हे.. अगर तुने कुछ कीया तो.. क्या अेक बार मुजसे बात नही करेगी..? मुजे तुमसे मीलना हे..
भावना : (रोते) जीजु मेरीतो समजमे नही आ रहा हे मे क्या करु..? ओर आपने मुजे कसम क्यु दी.. आपको पता हे मेरे सबसे ज्यादा नजदीक आपही हो.. जीजु मे क्या करु? आपकी कसम मे नही तोड सकती.. प्लीज.. अेक बार मुजसे मीललो.. मे कीसीभी तराह आपसे मीलना चाहती हु.. प्लीज..
देवायत : भावु प्लीज.. रो मत.. मुजे नही पताथा बात इतनी सीरीयस होगी.. मे तुजे कलही मीलने आता हु..
भावना : जीजु बस अेक बार मीललो.. फीर मे आपको कभी कुछ नही कहुगी..
देवायत : बस अब रो मत.. मे तुजे कल मीलता हुनां.. भावु तेरी पोजीसन अभी कही घुमने फीरनेकी नही हे.. वरना तुजे अभीके अभी हवेलीपे बुला लेता.. क्या तुजे मौसीके घर जाना हे? मंजुभी वही हे दोनो कुछ दिन साथमे रहेना..
भावना : नही जीजु.. मे यही ठीक हु.. आप कलतो आही रहे हो.. वरना देखती हु.. जीजु में अेक बार अपने प्यारका इजहार ना करनेकी गलती कर चुकी हु.. अब दुबारा नही करुगी.. मे फोन रखती हु कल आपका इन्तजार करती हु.. हो सकेतो आप जल्दीसे आजाइयेगा..
देवायत : भावु तु क्या अबभी उसे प्यार करती हे..? अब तेरी सादी होगइ हे अेक बार सोचना.. मे नही चाहता भानु ओर तेरी लाइफ डीस्टर्ब होजाये.. ये गलत नही हे..?
भावना : नही जीजु.. अब मे मेरी लाइफ खराब नही करुगी.. अबतो यही रहेके सबकुछ करुगी.. अगर वो दुसरी सादी कर सकते हे तो मे अपने प्यारको क्यु नही मील सकती.. जीजु ये सब हम कल मीलके बात करेगे अभी रखती हु.. कोइ सुनलेगा तो गडबड होजायेगी.. चलो बाय..
कहेते भावनाने फोन रख दीया ओर लताको आवाज देके फोन दे दीया तब लता उनके सामने सवालीया नजरोसे देखने लगी.. तो भावनाने हसके उसे गले लगा लीया तो लताने हसके पुछही लीया..
लता : (धीरेसे) भाभी क्या हुआ..? क्या देवायतभाइसे आपकी सब बाते होगइ..? आइ मीन.. क्या आपने अपने दीलकी बात बतादी..?
भावना : (धीरेसे) नहीरे.. लता वो कल मुजे मीलने आ रहे हे तब बता दुगी.. क्या तु खुस हे..?
लता : (सरमाते हसते) हां भाभी..बहुत खुस हु.. कास भाइ आपके प्यारको कबुल करले.. तो सबसे ज्यादा खुसी मुजे होगी.. भाभी अेक बात कहु..? आप भानुभाइको मामीके साथ सादी करने दो.. ताकी आपभी अपनी लाइफ खुलके जीसको.. समज गइनां मेरी बात..
भावना : (सरमाते हसते) चल देखती हु.. तुजे बडी जल्दी हे हमे मीलवानेकी.. हें..हें..हें.. ताकी लखनके साथ मीलनेका तेरा रास्ता साफ होजाये.. हें..हें..हें..
लता : (सरमाते हसते मुका मारते) क्या भाभी..आपभी.. अब मुजे नही मीलना उनसे क्युकी सादीमे दीनभी कीतने रेह गयेहे.. अबतो जोभी मीलना जुलना होगा हम सादीके बादही मीलेगे.. माइ केह रहीथी वो जल्दी हमारी सादी कर देना चाहती हे.. पता नही उनको इतनी जल्दी क्यु हे..
भावना : (जोरोसे हसते) हां तो सही हेना.. वरना पेट फुलाके सादीके फेरे लेती होगी.. हें..हें..हें..
कहातो लता सरमाके हसते हुअे भावनाको पीठमे मुके मारने लगी तो भावना बेडके पीछे भागने लगी ओर लता उनके पीछे मारनेके लीये दोडने लगी दोनोही मस्तीया करते इधर उधर भागती रही तभी भानु अंदर आगया तो लता सरमाके हसते हुअे अपने रुममे चली गइ.. ओर भावनाभी सीरीयस मुह करते धीरे धीरे चलते कीचनमे चली गइ.. तब भानु हाथ मुह धोके अपनी माइके पास चला गया ओर खटीयापे बेठके सरलासे बाते करने लगा..
भानु : माइ वो मामीका फोन आयाथा.. सायद मुजे कल मामाको लेके होस्पीटल जाना पडे.. उनको अब बहुत ही खुनकी उल्टीया होने लगी हे.. सायद तबीयत कुछ ज्यादाही खराब हे..
सरला : (गहेरी सांस लेते) हे भगवान.. अब इनको क्या होगया.. अेकतो इधर सादीकी तैयारीया करनी हे ओर उपरसे तेरा ये मामा.. चल ठीक हे दीखा लेना कही जाके.. सादीमे कोइ बीघन ना आजाये...
भानु : माइ मेने देवुसे कहा हे वो कल बाबाको मीलने जायेगा तो तारीख पकी करवाके आजायेगा ओर मामाकी बातभी कर लेगा.. माइ मेरे खयालसे आप अेक बार मामाको मीललो.. सायद आप उसे दोबारा नही मील सकोगी.. हो सकेतो कल ही मेरे साथ चलो..
सरला : तु ठीक केह रहा हे.. चल ठीक हे.. मे भी चलती हु.. क्या पता दुबारा उसे मीलनेका मौका मीले ना मीले.. कीतने साल होगये हम नही मीले..
मा बेटेकी यही सब बाते लता सुन रहीथी ओर मनही मन खुस होते वो कीचनमे चली गइ.. तो भावना वही खडीथी ओर धीरेसे भावनाको माइ ओर भानुके बीच हुइ सब बाते बताने लगी जीसे सुनके भावना मनही मन खुस होने लगी.. क्युकी इन दोनो नही होगे तो कलही देवायतको फोन करके बुला लेगी ओर सब बाते खुलके कर सकेगी.. यही सब सोचते वो मुस्कराती रही ओर खुसीके मारे लताके गालको चुम लीया तो लता भी सरमाके हसने लगी.. ओर भावनाके गले लग गइ.. फीर वही पडी सब्जीया काटने लगी..
लता : (सब्जीया काटते धीरेसे) भाभी कल अच्छा मौका हे.. आप देवायतभाइको बुलालो.. ओर यही सब बाते करलो..
भावना : (सरारतसे हसते) नही.. नही बुला सकती.. क्युकी तुमभी तो होगी.. वो सरमायेगे.. हें..हें..हें..
लता : (जुठ मुठका गुसा दीखाते) हां..हां..बडी आइ सरमकी पुछ.. मुजसे डरनेकी जरुरत नही हे.. मे मेरे रुममे ही रहुगी.. बात करती हे.. वो नही सरमायेगे लेकीन कल आप मत सरमाना.. वरना कलभी अपने दीलकी बात नही करपाओगी.. फीर मत कहेना लता मे बात नही करपाइ मेरी कीस्मत खराब हे वगेरे..वगेरे.. हें..हें..हें..
भावना : (सरमाके हसते पीठमे मुका मारते) चल जुठी कहीकी.. मे नही सरमाती कल पका सब केह दुगी.. बस.. अबतो खुस..? ओर हां खबरदार जो अपने रुमसे बहार नीकलके हमारी बात सुनलीतो..
लता : (हसते) देखना अबतो सब बाते छुपकेसे सुनुगी.. देखुतो सही मेरी सहेली केसे अपने दीलकी बात कहेती हे.. हें..हें..हें..
भावना : (जुठ मुठ बडी आंख करते) लता अेक मारुगी.. क्या मेरी सहेली नही हो..? प्ली..ज..
लता : (भावनाको गले लगाते) अरे मेरी भाभी नाराज होगइ चलो नही सुनुगी मेतो मजाक कर रहीथी..
दोनोही अैसी प्यार भरी मस्तीया करते बाते करती रही ओर लता खाना बनाती रही.. तब दुसरी ओर देवायतभी भावनासे बात करके थोडा रीलेक्स होगया ओर वो घरकी ओर नीकलने लगा तो लखनभी साथ चलने लगा ओर दोनो हवेलीपे आगये ओर फ्रेस होगये.. तब पुनम अपने रुममे आज रातकी सब तैयारीया कर चुकीथी वो अच्छेसे पानीमे इतर डालके नहाके हल्कासा शींगार कर रही थी..
तभी लखन ओर देवायतकी आवाज सुनके जटसे बहार आगइ तो देवायत उसे देखता ही रेह गया.. आज पुनम उसे बडी अप्सराकी तराह लग रहीथी जीसे देखतेही उनकी पेन्टमे लंडकी हरकत सुरु होगइ ओर पुनमको देखते जटके मारते खडा होने लगा तो पुनमने देखलीया.. ओर सरमाके देवायतकी ओर हसने लगी तो देवायतभी हसते अपने लंडको पेन्टमे हाथ डालके अेडजेस्ट करने लगा ओर जटसे अपने रुममे चला गया..
तो लखनभी उपर अपने रुममे चला गया वो आज ट्रेक्टर चलाके काफी थका हुआ लग रहाथा तो जातेही सीधा बेडपे गीर गया ओर आंख बंध करके लेटा रहा.. तब दया ओर रजीया खाना बना रहीथी तो पुनम धीरेसे देवायतके रुममे चली गइ.. तब देवायत चेन्ज कर रहाथा तो पुनम धीरेसे देवायतके पीछे चली गइ ओर पीछेसेही देवायतको बाहोमे भरलीया तब देवायत पलट गया ओर पुनमको जोरोसे बाहोमे भीचलीया

पुनम : (धीरेसे) भाइ आप देर रात सब सोजाये तब मेरे रुममे आजाइअेगा.. मे दरवाजा खुला रखती हु..
देवायत : (होंठ चुमते) ठीक हे डार्लींग आज तैयार रहेना पुरी रात सोने नही दुगा.. आज क्या मस्त लग रही हे तु.. दील करताहे तुजे अभी प्यार करलु.. बीलकुल मेरी परी लग रही हे..
पुनम : (सरमाते हसते) भाइ तो मेभी कहा सोना चाहती हु.. आज ही मेरा सब काम नीपटाना हे.. आप जल्दी आजाइअेगा.. ओर ये परी सीर्फ आपकी हे.. आप जब चाहो इस परीको प्यार कर सकते हो..
कहेके देवायतके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी ओर जटसे अलग होते बहार भाग गइ तब देवायत मुस्कराता अपने लंडको सही करते बहार चला गया तो पुनम खाना नीकाल रहीथी ओर देवायत सोफेपे बेठ गया ओर टीवी चालु करके देखने लगा.. ओर सोचता रहा..
देवायत : (मनमे) पीछले अेक महीनेमे कीतना कुछ बदल चुकाथा जो रीस्तेको मे इमानदारीसे नीभा रहाथा अब उन रीस्तेके माइने ही बदल चुके थे.. आज मेरी बहेन मेरी मासुका.. मेरी हमसफर होगइ हे.. जो पीछले तीन दीनोसे मेरा बीस्तर गरम कर रही हे.. ओर उनकी चुत.. आहा.. क्या कहेना.. कीतनी कसी हुल हे.. जी चाहता हे उस्े दिन रात चोदताही रहु.. ओर दीखनेमेभी कीसी हिरोइनसे कम नही हे.. अेकदम गोरा बदन संतरे जेसे चुचे.. बस उनको चुसता ही रहु..
पुनम : भाइ चलो खाना रेडी हे.. (जोरोसे आवाज देते) लखनभैया चलो आजाओ खाना रेडी हे..
तब देवायत टीवी बंध करके डाइनींगपे जाके बैठ जाता हे.. तब देवायतको नही मालुमथा की वो जो सोच रहा हे.. वो पीछली दो पीढीयोसे उनके खानदानमे हो रहा हे.. तभी लखन भी दोडके नीचे आजाता हे तो सब अपनी अपनी जगाहपे बेठ गये तो पुनमभी देवायतकी बाजुमे बैठ गइ ओर सबको खाना सर्व करने लगी.. तभी उनको अपने पैरपे देवायतका पैर महेसुस हुआ ओर वो कामुक मुस्कानके साथ सबको खाना देती रही..
उनको पताथा की उनका भाइ उनके पीछे पागल हो चुका हे.. तब उनकी जांगपे देवायतका हाथ महेसुस हुआ जो इनकी जांगको नीचेसे हाथ डालके सहेला रहा था तब पुनमकी सांसे तेज चलने लगी ओर वो आजु बाजु नजर घुमाते सरमाके खाना खाने लगी.. ओर देवायतके हाथपे हाथ रखके उनको पकडके अपनी जांगके बीच फसादीया.. तब इनको कंट्रोल करना मुस्कील होने लगा.. ओर उनकी नाजुक चुतकी पंखडीया फडफडाते पानी छोडने लगी.. तब..

पुनम : (जोरोसे) दया रजीया तुम दोनोभी खाना खाने बेठ जाओ यहा मे भाइको सब दे दुगी..
रजीया : जी छोटी मालकीन..
ओर दोनोभी कीचनके बहार नीचे फर्सपे बेठके खाना नीकालके खाने लगती हे तब उधर आज भानुके घरभी सब खाना खाते बाते कर रहेथे.. तब सरलाने कल भानुके साथ मामाके पास जानेकी बातकी तो लता कातील नजरोसे भावनाकी ओर देखके हसने लगी.. तो बातो बातोमे भावनानेभी लताके साथ सोनेको केह दीया ताकी दोनो मीलके भावेश ओर बच्चीका बरोबर खयाल रख सकेतो सरलाने भी हां केहदी..
सरला : ठीक हे बेटा.. तुम दोनो साथमे सोजाना ताकी भावेश ओर बच्चीका साथमे खयाल रख सको.. हमतो कल जा रहे हे.. देखतेहे साम तक वापस आजायेगे.. तुम दोनो अच्छेसे सब बंध करके सोना ओर रहेना..
लता : (हसते) माइ हम दोनोकी फीकर मत करो.. मे सब सम्हाल लुगी.. ओर भाभीसे कहो आरामभी करती रहे.. सारा दिन घुमती रहेती हे.. आरामही नही करती.. हें..हें..हें..
सरला : हां बहु अभी दो दीन ही हुअे हे इधर उधर मत घुमाकर अभी कमजोरी होगी तो कही गीर बीर जायेगी.. तो लेनेके देने पडेगे..
भावना : (सरमाते हसते) नही माइ मेतो अैसेही आइथी.. सारा दीन सोतीतो रहेती हु.. बस इनसे बाते करते टाइम पास कर रहीथी.. ताकी इनकोभी अकेलाना लगे..
सरला : बेटी बस अेक बार डाक्टरको दीखादे फीर भलेही घरमे घुमो.. हमारे जमानेमे तो ओरते डीलीवरी करके सीधेही खेतोमे काम करने चली जातीथी.. तब कहा ये होस्पीटल बोस्पीटल थी बस गांवकी दायणको बुलाके डीलीवरी करवा लेते थे.. सुबह डीलीवरी हुइ ओर सामकोतो ओरते घरका कामभी करने लगती थी.. मे भानुके टाइमभी उसी दीन कामपे लग गइथी..
लता : माइ वो आपका जमाना था.. ओर आजका जमाना अलग हे.. तब आप खोतोमे काम करती थी ओर हम घरमे पडी रहेती हे कुछतो फर्क होगा..
सरला : (हसते) हां तु तो सहेरकी होगइ हेनां.. तेरी भाभीके साथ रहेके तुभी सीख गइ.. हें..हें..हें..
अेसेही बाते करते सब खाना खा रहेथे.. तब भानु बडाही टेन्शनमे खा रहाथा ओर अपनीही सोचमे डुबा हुआथा उनको पताभी नही थाकी सब क्या बाते कर रहेहे.. वो बहुतही गहेरी सोचमे डुबा हुआथा उनकोतो बस अेकही विचार आ रहाथा की मामाके जानेके बाद वो मामीसे केसे सादी करे.. ओर घरमे सबको कैसे बात करे.. वोतो रमाको जल्दसे जल्द सादी करके घर ले आना चाहता था..
बस यही सोचमे डुबा हुआथा.. ओर खाना खा रहा था.. अबतो उनको भावनाके बेरुखी बर्तावसे नफरत होने लगीथी वो मनसे ओर दीलसे भावनासे दुर होता जा रहाथा.. उनकोभी पता चल गयाथा की भावना अब उसे माफ नही करेगी.. तो पुरी जींदगी उनके साथ कैसे कटेगी यही सब सोचते उनका दीमाग सुन हो गयाथा..
सरला : भानु क्या सोच रहा हे? खानातो खाले.. अेसेही नीवाला लेके बैठा हे तेरे मामाका जो होनाहे होगा तु क्यु चीन्ता करता हे.. हम तेरी मामी ओर नीलमको इधर लेआयेगे.. तु फीकर मत कर..
भानु : (खाना खाते मनमे सोचते) माइ अब तुजे कैसे कहु मुजे मामाकी चीन्ता नही हे तेरी दुसरी बहुकी चीन्ता हे.. जो मे उसे सादी करना चाहता हु.. कास तेरी दोनो बहुअे मीलके साथमे रहे तो कीतना अच्छा हे..
सरला : भानु कल सुबह हम जल्दी जायेगे ताकी साम तक वापस आसके.. इधरभी तो काम होगा..
लता : माइ आरामसे मामाको मीलके आना.. ओर हो सकेतो अेक रात उधर उनके साथ रेहलो.. कीतने साल हो गयेहे आप मायके गइही नही.. हें..हें..हें..
सरला : (हसते) माइके वाली.. अब वहा तेरे मामा मामी के अलावा हे ही कोन..?
लता : माइ फीरभी मायका मायका होता हे.. क्यु भाभी.. आपभी कीतने दीन होगये नही गइ..
भावना : (हसते) माइ ये कबसे हम दोनोको मायके भगानेकी जीद क्यु कर रही हे..? हां अब समजी इनकी सादीजो होने वालीहे ताकी येभी यहा अपने माफकेमे आ सके.. हें..हें..हें.. लखनको कहुगी इनको मत आने देना हें..हें..हें..
लता : (सरमाते हसते पीठमे मुका मारते) भाभी.. अेक मारुगीनां.. टांग खीचनेका अेकभी मौका नही छोडती.. माइ इनको कुछ कहोनां..
सरला : (हसते) मे तुम ननंद भौजीके बीच नही पडती.. वो तुम दोनो जानो.. बस भगवान करे तुम दोनो ननंद भोजाइका प्यार युही बना रहे..
भावना : (हसते) माइ अब आप लताकी चीन्तातो करना छोड ही दो मे हुनां.. इनका सब खयाल मे रखुगी..
कहातो भानुने सर उठाके अेक बार भावनाकी ओर देख लीया ओर उसे आशाकी अेक कीरण नजर आने लगी.. भावना लताका खयाल रखेगी मतलब वो मुने छोडके नही जायेगी.. यही सोचते वो खुस होते पानी पीने लगा ओर हाथ धोके अपने रुममे चला गया.. तब भावना ओर लता दोनोकोही नही मालुम थाकी दोनोके बीच क्या बाते होगइ सब भावनाओमे बहेकते बाते कर रहे थे....
कन्टीन्यु













































