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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - ८१
कहेते बाबा ओर किशन हस हसके बाते करते नीचे आगये.. तब विमला ओर सरला दोनोही खुस होते बाबाको भोजन कराने लगी.. तबतक किशन ओर विरजी बाबाकी सेवामे लगे रहे.. जब बाबाने भोजन करलीया तब किशन ओर विरजी दोनोही कार लेकर बाबाको आश्रम छोडने चले गये.. फीर वहा जाकर किशनने बाबाको तगडी दक्षीणा भी देदी.. फीर बाबाको छोडकर दोनो वापस हवेलीपे आगये.. ओर सबने साथ बैठकर भोजन करलीया.. तब रसला बार बार किशनको देखते मुस्कराती रही....अब आगे
जब सबने खाना खालीया तब होलमे आकर बेठ गये तब किशनने कुछ बाते छोडकर बाकीकी सब बाते तीनोको बतादी की बाबाने क्या कहा हे.. ओर सबको तसली होगइकी चलो श्रापका नीवारण होगया.. तभी विरजी खेतोपे चकर लगानेकी बात करते नीकल गया.. ओर विमलाभी थोडी देर बेठकर अभी आती हु.. कहेकर अपने कपडे चेन्ज करने रुममे चली गइ.. तब मौका देखतेही सरला किशनके पास सरकके आगइ.. ओर दोनो अेक दुसरेके होंठ चुमने लगे.. फीर सरला थोडी दुर बेठकर धीमी आवाजमे बात करने लगे..

सरला : (धीरेसे मुस्कराते) किशन.. अब जीस कार्यके लीये ये हवन कियाथा वो कामेतो होगया.. अब देर मत करो.. हमारी उमर नीकल जाये इनसे पहेले हम दोनोको फीरसे पे्रगनेन्ट करदो.. मेभी आपसे अेक ओर बच्चा चाहती हु.. ओर हो सकेतो कलही इनको कही बहार भेजकर घरपे आजाओ.. ओर अभी टाइमभी सही चल रहा हे.. पुरी दिन दोनो मजे करेगे.. क्या कहेते हो..?
किशन : (हसते) भाभी तु बहोत ठरकी होगइ हे.., देखना अबतो विरजीकोभी पता चल गया हे.. की वो बच्चे पैदा करनेमे सक्षम नही रहा.. कही पेटसे होगइ तो गडबड ना होजाये.. हें..हें..हें..
सरला : (सरमाते हसते) अरे कुछ नही होगा.. वो सब मे देख लुगी.. आप टेन्शन मतलो.. इनकातो ठीकसे खडाभी नही होता.. अच्छा हे आप मुजे मील गये वरना मेरीतो जींदगीही बरबाद होजाती.. मे सीर्फ आपकी वजहसे ही इनके घरमे हु.. ओर मत भुलो आपने मेरीभी मांग भरी हे.. तो मेराभी हक बनता हेकी मे आपके बच्चेको जन्म दु.. अब इस नामर्दसे हमे डरनेकी जरुरत नही हे.. अब भलेही इनको सब पता चल जाये..
किशन : (हसते) बडी हिमत आगइ तुजमें.. अरे भानुतो देदीया अब कीतने बच्चे चाहीये तुजे..? हें..हें..हें..
सरला : (सरमाते धीरेसे) वो मे नही जानती.. बस मुजेतो अेक ओर बच्चा चाहीये.. ओर आपभी भाभीको फीरसे पेटसे करदो.. वोभी यही चाहती हे.. मेरी कुछ देर पहेले ही इनसे बात हुइ हे.. ओर वोतो मुजसेभी ज्यादा ठरकी हे.. हें..हें..हें..
तभी विमलाभी चेन्ज करके आगइ ओर तबतक सरला थोडी दुर जाकर बेठ गइ.. फीर तीनोने बाबाके बारेमे काफी बातचीत करली.. तबतक विरजीभी खेतोसे वापस आगया ओर वो किशनको आराम करनेको कहेते सरलाको लेकर नीकल गया.. तब मौका देखतेही विमलाभी किशनको लेकर अपने बेडरुममे चली गइ.. ओर अंदर जातेही विमलाने दरवाजा बंध करलीया..
अेकतो किशन सरलाकी बातोसे काफी गरम होगया था.. ओर वो पुरा चुदाइके मुडमे था.. तो उपरसे उनको विमला खीचकर बेडरुममे लेगइ.. फीरतो क्या कहेना.. किशनके बेडरुममे प्यारका तुफान भवंडर बनके तांडव मचाने लगा.. किशनने विमलाको चोद चोद नीचोडही लीया.. विमलाकी चुदाइ करते उनकी हालत बीगाडदी.. उनका अेक अेक अंग तोडके रख दीया.. ओर विमलाको रातमे फीरसे तैयार रहेनेको केहकर वो खेतोपे चला गया.. तब बेडपे विमला बेसुध्ध जैसी हालतमे वही ढेर होकर सोगइ..

उधर भावनाके दील दिमागमे भी देवायत घुम रहाथा.. वो अब उन्हीके सपने देखते अपने आपको देवायतकी पत्नीके रुपमे इमेजींग करते उनके नामकी कइ बार चुतमे उगली कर चुकी थी.. तब उनको नही पताथाकी अपनेही घरमे उनकी खुदकी बहेन देवायतसे कीतनी बार चुदवा चुकी हे.. ओर उनकी सादी देवायतसे तैय होगइ हे.. वोतो देवायतको मीलते ही अपने दिलकी बात कहे देना चाहती थी..
दो पहोरको खाना खाकर नीर्मला राजीवको टीफीन देने चली गइ ओर वहा दुकानपे थोडी भीड ज्यादा थी.. तो कुछ देर वही रुक गइ ओर राजीवको मदद करने लगी.. अैसा वो कइ बार कर चुकी हे.. तब मंजु ओर भावु सभी काम नीपटाके आराम करने अपने रुममें जाही रहीथी.. की देवायत आगया.. तो दोनो उनको देखके खुस होगइ लेकीन भावु खुसीके साथ थोडी सोक्ट भी होगइ.. की ये देवायत यहा कैसे..? तब मंजुने उसे प्यारसे होलमे बीठाया.. ओर देवायतके लीये पानी लेने चली गइ..
तब भावना उपर अपने रुममे दोडके चली गइ ओर फटाफट कागज पेन लेकर लेटर मे अपने दीलकी बाते लीखने लगी.. क्युकी मंजुके सामने देवायतसे बात करनेकी हीमत नही हो रहीथी.. तो सोचा देवायतके जाते ही यातो मंजुसे नजर बचाके वो कैसेभी करके उनको लेटर दे देगी.. तो भावना चली गइ तो मंजुने सोच लीयाकी भावना आराम करने चली गइ हे.. ओर वो देवायतको लेकर नीचे अपनी मम्मी वाले रुममे घुस गइ..
मंजुला : जानु.. मम्मी पापाको टीफीन देने गइ हे.. ओर भावु उपर आराम करने चली गइ हे.. तो साम तक वो नीचे नही आयेगी.. मम्मीके आनेसे पहेले मुजे अेक बार फटाफट प्यार करलो.. मुजसे रहा नही जात.. यही आजाओ..
तब मंजु अपना लोअर नीचे करते लेट गइ ओर टोप उपर करलीया तब देवायतभी पेन्टको थोडा नीचे सरकाके मंजुके उपर चड गया तब मंजुने लंड पकडके अपनी चुतमे फसालीया ओर देवायतने होंठ चुमते अेकही जटकेमे लंडको मंजुकी चुतमे घुसा दीया.. तब मंजुकी हल्की चीख नीकल गइ.. ओर देवायत कमर हीलाते मंजुको धनाधन चोदने लगा.. तभी भावना उपरसे लेटर अपने बुब्सकी दरारोमे छुपाके नीचे आगइ..
तो देखा होलमे कोइ नही था.. तब उनको अपने मम्मी पापाके रुममे कुछ अजीब आवाजे सुनाइ दी.. तब जल्द बाजीमे मंजु दरवाजा बंध करना भुल गइथी.. तो भावना धीरेसे अंदर जांकते देखने लगी ओर देखतेही सोक्ट होगइ.. उनकी आंखोसे आंसु बहेने लगे ओर वो चुपचाप दोडके उपर अपने रुममे चली गइ.. ओर बेडपे पेटके बल लेटते फुटफुटकर रोने लगी.. ओर अेक बारतो लगाकी अभीके अभी वो सुसाइट करले..
तब नीचे मंजुभी दो बार जड चुकीथी ओर उनकी मम्मीके आनेका टाइमभी हो गयाथा.. तो उसने जडतेही देवायतको अपने उपरसे हटा दीया ओर उनको नीचे खडा करके उनके पैरोके बीच नीचे बैठ गइ.. ओर उनका लंड अपने मुहमे लेके तेजीसे अंदर बहार करने लगी.. ताकी बेडभी खराब नाहो ओर देवायतकी प्यास भी बुज जाये.. लेकीन उन दोनोको नही पताथाकी उनकी मम्मी भावनाके उपर जातेही आचुकी हे..

नीर्मला जेसेही अपने रुमके पास पहोंची तो दरवाजा थोडा खुलाथा ओर वो अंदर आही रहीथी की दोनोकी रासलीलाको दरवाजेसे देख लीया.. मंजु देवायतका लंड लोलीपोपकी तराह चुस रहीथी.. ओर वो देखतेही सोक्ट होगइ.. तभी देवायतका ध्यान नीर्मलापे गया.. तो फटाफट अपनी पेन्ट पहेनने लगा..
तबतक मंजुनेभी अपनी मम्मीको देख लीया ओर वोभी खडी होकर सरमके मारे अपने कपडे सही करने लगी.. जब दोनोने कपडे पहेन लीया तब नीर्मला अंदर आगइ.. ओर दोनोको अेकदम गुसेसे घुरके देखने लगी.. तो मंजु नीचे सर करते सरमाने लगी.. तो देवायत मंद मंद मुस्कराता रहा..
नीर्मला : (थोडी उची आवाजमें) मंजु.. तुम अपने रुममे जाओ.. मुजे देवायतसे अकेलेमे कुछ बाते करनी हे.. (जोरोसे) जा..ओ.. कहानां..
मंजुला : (हींमत करते) मो..म.. वो.. हमने..
नीर्मला : (जोरोसे) चुप.. अेकदम चुप.. बेसर्म कहीकी.. मेने कहा तुमने सुना नही..? जाओ यहासे..
तब मंजु सर नीचे करके फटाफट दोडके चली गइ.. ओर नीर्मलाने रुमका दरवाजा बंध करलीया तब देवायत समजताथा की अब नीर्मलाभी मुजे प्यार करना चाहती होगी.. इसीलीये मंजुको डाटके भगादीया.. क्युकी वोभी इनकी बीवीथी.. तब देवायत हसते हुअे नीर्मलाकी ओर बढ गया.. ओर उसे बाहोमे भरलीया तब कुछदेर नीर्मला अैसेही आंख बंध करते खडी रही.. तभी देवायतने उनके होठोपे होठ रख दीये.. तभी नीर्मलाने उसे बाहोसे छुटतेही धका देदीया ओर अेक जोरोका तमाचा देवायतके गालपे जड दीया.. स..टा..क..

नीर्मला : (गुसेसे धीरेसे) क्यु..? क्यु..? क्यु कीया मेरे साथ अैसा..? क्या कमी रेह गइथी मेरे प्यारमे..? जो अब मेरी बेटीके साथभी.. छी.. क्या इस बारेमें अेकभी बार मुजसे बात करनेकी जरुरत नही लगी..? तुम्हारा ओर मंजुका पीछले तीन चार महीनेसे रीलेशन हेनां..? फीर भी यहा आकर तुम मेरे साथ भी वो सब..? छी.. मां बेटी दोनोके साथ..? तुमको सरम भी नही आइ..? तुमने हमारे घरको क्या समज रखा हे..? ये कोइ रंडीखाना हे..? हंम..
देवायत : (उनके कंधेपे हाथ रखते) देखो नीमु..
नीर्मला : (बीचमेही हाथ जटकते) डोन्ट टच मी.. अेन्ड डोन्ट कोलमी नीमु.. तुमसे घीन आती हे मुजे.. आजके बाद तेरी जुबानसे मेरा नामभी मत लेना.. आजसे मे तुम्हारे लीये मर गइ हु.. मुजसे कभी अकेले मत मीलना.. मुजसे सादी कीथी नां..? मेरीभी मांग भरीथी नां..? तुम दोनोके दोनो अेकही नीकले.. छी.. सबके सब हवसके पुजारी हे.. कीसीको हमारे जजबातकी नही पडी.. सबको सीर्फ ये सरीरही चाहीये..
देवायत : (थोडा गुसेसे) चुप.. अेकदम चुप.., तुम समजती क्या हो अपने आपको.. हंमम..? तुमसे ओर तेरी बेटीसे प्यार कीया तो कौनसा गुनाह कीया..? हम दोनोने मंदिरमे सादी कीहे.., सादीतो मेने तुमसे भी कीहे.. क्या तुम मेरे साथ रहेके मेरा संसार चलाओगी..? नही..नां..? चलो मे तुम्हारे लीये मंजुको छोड दुगा.. तुम मेरे घर मेरी बीवी बनके आजाओ.. छोडदो राजीव अंकलको.. मे तुजे अेसेही अपनानेके लीये तैयार हु.. मे वादा करता हु सारी जींदगी मे तुम्हारे अलावा कीसी ओरसे सादी नही करुगा.. आओगीनां मेरे घर.. मेरी बीवी बनके..? हंमम..
नीर्मला : (थोडा सांत होते) नही.. तुमभी जानते हो मे ये नही कर सकती.. में ओल रेडी सादीसुधा हु.. मेरा पती राजीव हे.. मे उनको छोडके नही आ सकती..
देवायत : हां इसीलीये.., तो तुम क्या चाहती हो..? मे बीना सादीके अैसेही सारी जींदगी कुआरा रहु ओर तेरे साथ मे अपनी प्यास बुजाता रहु.. हंममं.. बोलनां..? मुजे कीसीना कीसीसे तो सादी करनीही थी तो फीर मंजु क्यु नही..? मेने सोचाथा की मंजुसे सादी करके मे तुमसे भी नजदीक रहुगा ओर मीलता रहुगा ओर खुस रखुगा.. लेकीन..
नीर्मला : (दुसरी ओर मुह करते धीरेसे) स्टुपीड.. तुम समजते क्यु नही..? वो..वो.. मंजुकी सादी तुम्हारे साथ नही होसकती.. वो तुम्हारी.. तुम्हारी.. मे नही बता सकती.. यार जाओ तुम यहासे..
देवायत : हां हां बोलनां वो मेरी क्या..? अेक बात कान खोलके सुनलो.. हम दोनोने मंदिरमे सादी करली हे.. बाबाने खुद हमारी सादी करवाइ हे.. सायद राजीवअंकल बाबाको जानते हे.. उनकोभी कोइ अेतराज नही.. तो आपको क्या प्रोबलेम हे..? ओर सुनलो ना मंजु मेरे बगैर रेह सकती हे ओर नाही मे.. आप हमारी सादी करवा रहेहो तो ठीक हे वरना मे मंजुको अैसेही घर लेजाउगा.. ओर आखरी बात.. अभी जो आपने कहा हे नां.. अब मुजसे कोइ रीस्ता मत रखना.. उन बातपे कायम रहेना.. ओर अेक बार ठंडे दीमागसे सोचना.. की जो में गुसेमे बोल गइ वो सही हे की नही.. मे चलता हु.. जो भी फैसला लो मेरे बापुको फोन करके बता देना.. ओर तुम मुजसे तो कभी बात ही मत करनां..
कहेते देवायत रुमसे बहार नीकल गया.. तब होलमें मेइन गेइटके पास मंजु खडी थी.. तो दोडके देवायतके गले लग गइ.. ओर फुटफुटके रोते आइ लव यु.. आइ लव यु.. कहेने लगी.. तब नीर्मला दोनोको देखती ही रेह गइ.. तो देवायतभी उनको कसके अपनी बाहोमे भीच लेता हे ओर आइ लव यु टु.. कहेते उनके सरको चुम लेता हे.. फीर अलग होतेही अेक नजर नीर्मलाकी ओर देखते वहासे जटसे नीकल जाता हे..

तब मंजुभी दोडकर उपर चली जाती हे ओर भावनाके पास बेडपे बेठते जोरोसे रोने लगती हे.. तो भावना उनकी ओर देखती हे.. ओर उनको मालुम होनेके बावजुद रोनेका कारण पुछ लेती हे.. तब मंजुको उनकी मम्मीने भावनाको कहेनेसे मना कीयाथा उनके बावजुद रोते रोते सब बाते भावनाको बता देती हे..
जीसे सुनके भावनाभी सोक्ट होजाती हे.. तब उनको पता चलाकी ये दोनोतो तीन चार महीनेसे रीलेशनमे हे.. ओर मंदिरमे सादीभी करली हे.. ओर यहा उनके मम्मी पापा उनकी सादी करने वाले हे.. तब वो अपने आपको सम्हालती हे फीर मंजुको गले लगाके उसे आस्वासन देती हे..
भावना : (गले लगाते) दीदी आइ अेम सोरी.. मेने आपको गलत समजा था.. मुजे माफ करदो..
मंजुला : (आंसु बहाते) अरे पगली तुम क्यु सोरी बोलती हे.. क्या तुमभी देवुको पसंद करतीहोनां..?
भावना : सोरी.. दीदी मुजे नही पताथा आप दोनो काफी आगे बढ चुके हो..
मंजुला : भावु इसमे तेरी कोइ गलती नही हे.. मेरा देवु हे ही अैसा.. मेने उसे पहेली बार देखा तबही मे उसे चाहने लगी थी.. लेकीन तुम फीकर मत करो.. मे देवुसे इस बारेमे बात करुगी..
भावना : (जटसे अलग होते) नही दीदी आपको मेरी कसम.. अब इस बारेमे बात करनेका कोइ फायदा नही.. आपके लीये वो परफेक्ट हे.. आपही उनके साथ सादी करलीजीये..
मंजुला : (भावनाके आंसु पोछते) भावु तु मुजे प्रोमीस कर.. तु कुछ उल्टा सीधा नही सोचेगी.. वरना तुजे मेरी कसम.. मुजे प्रोमीस कर..
भावना : (सर जुकाते आंसु पोछते) जी.. जी दीदी मे प्रोमीस करती हु.. लव यु दीदी..
मंजुला : (बाहोमे कसते) लव यु टु मेरी बहेन.. बस मम्मी मान जाये..

तभी मंजुने देवायतको फोन लगा दीया ओर उनसे बात करने लगी.. तब भावना भी वही बेठी दोनोकी बात सुा रहीथी.. ओर मंजुने उनकी मम्मीको मनानेकी बात कहेदी.. ओर देवायतसे अेक रीक्वेट करदी की जबतक मम्मी सामनेसे ना कहे तबतक दोनो सादी नही करेगे.. ओर अैसेही बहार मीलते रहेगे.. तब देवायतभी समजदार थातो उसने मंजुकी सभी बातको मानलीया.. ओर अब घरमे ना मीलते बहार मीलनेका तैय करलीया..
उधर देवायतभी अपने गांव धर चलाजाता हे.. तबतक साम ढल चुकीथी ओर ओर सभी खाना खा रहेथे.. देवायतने किशन ओर विमलासे अभी कुछ समय सादी ना करनेकी बात कहेदी.. तब किशन ओर विमला दोनोही सोक्ट होगये.. ओर दोनोही अनुमान लगाने लगेकी जरुर नीर्मलाने मना कीया होगा..
विमला : बेटा क्या तुम्हारी इस बारेमे कीसीसे बात हुइ हे.. आइ मीन मंजुसे..?
किशन : बेटा लेकीन राजीवने तो हां कहेदी हे.. तु कहेतो इस बारेमे मे राजीवसे बात करलु..?
देवायत : नही बापु.. आप लोग फीकर मत करो मे सादीतो मंजुसेही करुगा.. लेकीन हमे थोडा वक्त चाहीये.. ओर आपभी टेन्शन मतलो मे सामनेसे कहुगा.. तब आप मेरी सादी मंजुसे करवा देना..
किशन : (स्माइल करते) ठीक हे बेटा.. जैसा तुजे ठीक लगे.. तु जब कहेगा तबही करेगे..
देवायत : बापु.. अब मे सहेर जा रहा हु.. सोचता हु वही रहेके अपनी ओफीस खोलके अपना कारोबार थोडा सेट करलु.. वहाभी तो कुछ होना चाहीये..
किशन : (हसते) ठीक हे जैसे तुजे ठीक लगे.. लेकीन बेटा अेक बातका खयाल रखना.. ये सब विरासत तुजेही सम्हालनी हे.. वहा हमे ज्यादा दिन नही रहेना.. बस सब सेट करके कीसीको सोंपके इधर आजाना..
देवायत : (हसते) अरे बापु मुजे सब पता हे.. सीर्फ दो तीन सालकीतो बात हे.. फीर वही आदमी सेट करके आजाउगा.. ओर मेभी तो आता जाता रहुगा.. हमेसाके लीये थोडी जा रहा हु.. हें..हें..हें..
किशन : (हसते) बेटा.. वहा हमारा अेक बंगलो हे.. तु वही चलाजा मे विरजीसे आजही कहेके उसे ठीक करवाता हु.. कलही उनको भेजता हु..
देवायत : (हसते) जी बापु.. मेभी विरजीकाका के साथ चला जाता हु..
रातकोही किशनने विरजीको फोन करके दुसरे दिन देवायतके साथ सहेर जानेको बोल दीया.. उस रात किशन ओर विमला पुरी रात चुदाइ करते रहे.. किशनने कामोतेजक की गोली खाकर पुरी रात विमलाकी जमकर चुदाइ करली.. ओर विमलाकी हालत पतली करदी.. अेकतो दिनमे भी किशनने उनकी चुदाइ करके बेसुध्ध जैसी हालत करदीथी ओर रातमेभी उनकी जबरदस्त धमासान चुदाइ हुइ..

तब विमलाको भी नही पताथा की दिन ओर रातकी उनकी जबरदस्त चुदाइके कारण उनकी चुतको किशन कइ बार भर चुकाथा.. जीसके कारण उनके गर्भमे किशनका बीज आ चुका हे.. ओर वो फीरसे प्रेगनेन्ट होगइ हे.. जब सरलाने उनको कहा तबही किशनने ठान लीयाथा की सरलाकी बात सच हे.. इनके फल स्वरुप आज विमलाकी सारी तम्मना आज पुरी करदी.. अब वो अगले दो दीन बीस्तरसे उठने वाली नही थी.. क्युकी उनकी चुतमे काफी सुजन आगया था..

तब दुसरे दिन देवायत ओर विरजीभी सहेर चले गये.. ओर दोनो वहा बंगलेका मरम्मत करवाने लगे.. तब किशन ओर विमला दोनोही देरसे उठे.. तब विमलाकी चालही बदल चुकीथी.. ओर वो खुब सरमाइ.. तब किशन विमलाको आराम करनेको कहेते तैयार होकर सीधाही विरजीके घर चला गया.. उनको पताथा अभी सरला अकेली होगी.. ओर वो पुरा दिन सरलाकी चुतकी धजीया उडाता रहा.. सरलाकोभी चोद चोदकर उनकी चुत भरता रहा.. ताकी वोभी पेटसे होजाये.. जीनके नतीजेके फल स्वरुप सरलाभी प्रेगनेन्ट होगइ..
ओर दिन बितने लगे.. इसी दौरान देवायतभी सहेर चला गया.. ओर अपने बीजनेसको सेट करने लगा.. सब अपनी नोर्मल लाइफमे बीजी होगये.. इसी बीच मंजुभी सृतीको मीलनेके बहाने देवायतके पास चली जाती ओर देवायतसे जमकर चुदवाके सृतीके घर भुमीका आंटीसे मीलकर वापस आजाती.. तब नीर्मलाभी देवायतसे ना मीलनेकी वजहसे बैचेन रहेने लगी.. अब उसे देवायतकी कमी महेसुस होने लगी..
अब उसे देवायतके साथ बेरुखीका व्यवहारसे पछतावा होने लगा.. वो जबभी अकेली पडती तब देवायतके बारेमे सोचमे डुब जाती.. ओर घरमेभी गुमसुम रहेने लगी.. उसे धीरे धीरे समजमे आने लगाकी वो बहुत बडी गलती कर चुकी हे.. अगर देवायतकी सादी मंजुसे नही करवाती तो देवायत दुसरी लडकीसे सादी करलेता.. ओर उनसे हमेसाके लीये दुर हो जाता.. तो कमसे कम मंजुसे सादी करके वो उनके नजदीकतो रहेगा.. यही सब सोचते वो दो दो तीन तीन घंटे अपने बेडपे लेटते सोचमे डुबी रहेती..
नीर्मला : (मनमे) उसने क्या गलत कहा.. मे थोडीना उनका संसार चला सकती.. सच ही तो कहेता था वो.. अगर मंजु नहीतो दुसरी लडकीसे सादी कर लेता तो फीर मंजुही क्यु नही..? ओर मे भी जलतीथी तो वोभी कीनसे..? मेरी ही बेटीसे..? जालीम मुजे प्यारभी तो बहुत करता था.. मेरी चीखे नीकला देता था.. बीलकुल अपने बापुकी तराह.. मेनेही उनको मुजसे हमेसाके लीये दुर कर दीया हे.. जालीम कहेके गयाकी अब अपनी बातपे कायम रहेना.. तो अब उनसे माफी मांगु.. तोभी कीस मुहसे.. अबतो मुजसे उनको मीलनेकी हीमतही नही होती.. क्या वो कभी मुजे माफ कर पायेगा..? जोभी हो.. जबभी मुजे अकेला मीलजाये.. मे उनके पैरोमे नाक रगडके माफी मांग लुगी.. मुजसे उनके बीना रहाभी तो नही जाता..
अैसेही समय बीतने लगा तब विमला ओर सरलाका पेटभी काफी नीकल गयाथा.. तब सरलाको प्रेगनेन्ट देखकर विरजीको सरलापे आसंकाये होने लगी.. क्युकी वो जानताथा.. की वो बच्चा पैदा करनेमे सक्षम नही हे.. तो सरला कैसे पेटसे होगइ..? इस बारेमे सरलासे बातभी की तो बच्चा उनकाही हे.. कहेते उल्टा सरलाने उनके साथ जगडा कीया.. तब विरजी उनके उपर नजर रखने लगा.
ओर अेक दिन वो कामसे सहेर गयाथा.. ओर जल्दी घर लौट आया.. तब घरके बहार किशनकी कार खडी थी.. पहेलेतो वो खुस हुआ.. फीर कुछ याद आतेही उनको संका होने लगी.. ओर वो धरके पीछे चला गया.. ओर अपने रुमकी खीडकीसे देखनेकी जगाह ढुंढते अेक खीडकीके पास चला गया ओर धीरेसे खीडकी खोलनेकी कोसीसकी तो खीडकी खुल गइ.. ओर थोडीसी खोलके देखने लगा तब उसे बहुत बडा जटका लगा..

क्युकी अंदर सरला किशनके नीचे लेटी हुइ थी ओर किशन सरलाकी जोरोसे कमर उछालते चुदाइ कर रहा था.. ओर सरलाभी नीचेसे कमर उछाल उछालके किशनका साथ दे रहीथी.. विरजी सब देखता रहा.. जब दोनो चुदाइ करके साथमें जडते सांत होगये तब किशन अभीभी सरलाकी चुतमे लंड डालके पडा हुआथा.. ओर सरला किशनके बालको सहेलाते उनसे बाते करने लगी.. तब विरजी दोनोकी बात गौरसे सुनने लगा..

किशन : (हसते) सरला तेरा पेट नीकल गया हे.. क्या विरजीको तुमपे सक नही हुआ..?
सरला : (हसते) किशन.. उनको सकतो होगया हे.. ओर इस बातको लेकर अेक बार हमारे बीच जगडाभी हुआ हे.. अब उनसे छुपाकर या जुठ बोलके अब कोइ फायदा नही हे.. अेक बारतो उनसे जगडा करके बातको टालदीया.. लेकीन अब मे सोच रही हुं उसे सबकुछ खुलकर बता दु.. लेकीन आपनेभी अभी तक नही बताया.. की अपने दोस्तको आपने कीस बातकी सजा दीहे.. अबतो बतादो ताकी मे उसे बात कर सकु.. मुजे पता हे जब उनसे बात करुगी तब हम दोनोही अलग होजायेगे.. तब आपकोही मुजे सम्हालना हे.. देखना बाबा मेने आपकोही अपना पती माना हे उनको आज तक पता नही चलने दियाकी भानुभी हमारा लडका हे..
किशन : (होंठ चुमते) सरला.. विरजीने मेरी मुह बोली बहेन भुमीकाके साथ गलत कीया हे.. उनका बलात्कार कीया हे.. बस उसीके कहेनेपे मेने विरजीसे बदला लीया हे.. हम सभी कोलेजमे दोस्त थे.. ओर विरजीने दोस्तीमेही गलत कीया.. अगर वो उनसे प्यार करती या बीना प्यार उनकी सहमतीसे सेक्स करती तो हमे कोइ अेतराज नही था.. लेकीन विरजीने उनका अपहरण करके उनके साथ बलात्कार कीया..
सरला : (मुस्कराते) सच कहेते हो..? क्या आपकी मुह बोली बहेनके लीये इतना बडा कदम उठालीया.. की अपने दोस्तके साथही.. हालाकी मे मानती हु इसमे मेरीही सहमती थी.. क्युकी सादीके दिनही मुजे पता चल गयाकी विरजी अेक नामर्द हे.. तभीभो मेने आपसे गांधर्व सादी करली.. ओर आपनेभी मुजे अेक बीवीही तराह हर सुख दीया ओर मुजे सम्हाला.. फीरभी मनमे कुछ सवाल आ रहे हे.. क्या मुजे सचाइ बताओगे..?
किशन : (हसते) अब कोनसी सचाइकी बात कर रही हे..? मुजे खुलकर बता..
सरला : (हसते) किशन आपकी खुदकी बहेनसे सादीसे पहेलेही आपका रीलेशन हे.. ओर सादीसे पहेलेही आपने उसे प्रेगनेन्ट भी करदीयाथा.. तो फीर येतो मुह बोली बहेन हे.. क्या उनको सचमे बहेन मातने हो..? की बात कुछ ओरही हे.. क्युकी मे जानती हु विरजीके साथ आपकी तीन पीढीयोसे रीलेशन हे ओर आप विरजीको अपना खास दोस्त समजते हो.. धंधेमे भी आपने उनको साथ रखा हे.. फीरभी अेक मुह बोली बहेनके कहेनेपे इतना बडा फैसला लीया..? बात कुछ समजमे नही आइ.. हें..हें..हें..
किशन : (गंभीर होते) सरला वो मे तुजे अभी नही बता सकता.. बस कुछ दिन इन्तजार करले.. अेक दिन तुजे सब सचाइ बता दुगा.. ओर कुछ राज हमे राज ही रहेने देना चाहयी.. भुमी आजभी मेरी बहेन हे.. बस मे तुजे अभी सीर्फ इतना ही बता सकता हु..
तब बहार विरजी सब बाते सुनकर सोक्ट हो जाता हे.. ओर उसे बहुत दुख होता हेकी उनके दोस्तने ही उनके साथ धोखा कीया.. ओर उनकी अेक गलतीकी इतनी बडी सजा देदी..? तभी उनको सीनेमे दर्द होने लगा ओर वो वही सीनेपे हाथ रखके नीचै बेठ गया.. तब कुछही देरमे उसे किशनकी कारकी आवाज आइ तो वो समज गयाकी किशन चला गया हे.. ओर वो बडी मुस्कीलसे घरमे आगया ओर चुपचाप भानुके कमरमे जाके खटीयापे लेट गया.. ओर आंसु बहाते सोचता रहा..
किशनके साथ धमासान चुदाइ करके सरलाभी थक गइथी.. ओर वो नहाने चली गइ तब पीछेसे विरजी आकर सो गयाथा.. ओर सरलाभी नहाकर अपने बेडरुममे चली गइ ओर सो गइ.. तब रातमे भानुभी घर आगया.. तब सरला कीचनमे खाना बना रहीथी.. उनको पताही नही थाकी विरजी भानुके रुममे सोया हुआ हे.. ओर भानु हाथ मुह धोकर अपने रुममे चला गया.. ओर वो जैसेही अंदर गया.. तो अंदर जातेही सोक्ट होगया.. ओर जोरोसे चीलाके सरलाको बुलाने लगा..
क्युकी विरजीके मुहसे जाग नीकल रहेथे.. ओर वो मर चुकाथा.. तब सरलाभी दोडके आगइ ओर विरजीको अैसी हालतमे देखकर गभरा गइ.. फीरतो सरलाने किशनको फोन करके बुला लीया ओर भानुनेभी डोक्टरको बुला लीया.. तब डोक्टरने उसे चेक करके केह दियाकी उनको दिलका दौरा पडा हे ओर मर चुका हे.. फीरतो सबने मीलकर विरजीको अंतीम विदाइ देकर उनका दाह संस्कार कीया.. ओर सब वापस घरपे आगये.. तब सरलाका पेट देखकर सब यही कहेने लगेकी विरजी अपने दुसरे बच्चेका मुह नही देख पाया..
ओर समय बीतने लगा.. सरला अब दुनीयावालोकी नजरमे विधवाकी जींदगी बीताने लगी.. लेकीन कीसीको ये बातकी भनकभी नही लगीकी वो अभीभी किशनकी सुहागनके रुपमे किशनके साथ उनका बीस्तर गरम करते अपना संसार चला रही हे.. ओर उनके साथ वो हब सुख भोग रही हे जो अेक सादीसुधा ओरत अपने पतीसे सुख पाती हे.. ओर समयके साथ भानुभी देवायतका दोस्त होकर उनके साथ धंधेमे जुड गया..
ओर अेक दिन विमलाने बच्चेको जनम देदीया.. ओर वोथा लखन.. तब साथमे सरलानेभी लताको जनम देदीया.. ओर सब अपनी लाइफ रुटीन जीने लगे.. तब लखन अेक सालका होगया तब किशनने विमलाको फीरसे पेटसे करदीया.. ओर ठीक नव महीनेके बाद विमलाने फीरसे पुनमको जनम देदीया.. ओर इसी तराह समय बीतने लगा ओर बच्चे बडे होते गये.. आज लखन ओर लता पुनम काफी बडे होगये थे..
अबतो देवायतभी सहेरमे सब कुछ सेट करके वहा कीसीको पार्टनरमे रखकर वापस गांवमे आ गयाथा ओर देवायत ओर भानुने मीलकर किशनका पुरा कारोबार सम्हाल लीयाथा.. इसी बीच मंजु ओर देवायत समय समयपे मीलते रहे.. ओर पती पत्नीका हर सुख भोगते रहे.. इस बातका पता अब नीर्मलाकोभी चल गयाथा.. ओर उसने इस बारेमे राजीवसे बात करली.. ओर मंजुसे मीलकर अपनी गलतीको मानली.. फीर नीर्मलाने मंजुकी सादी राजी खुसीसे देवायतके साथ करवानेका फैसला करलीया....
कन्टीन्यु
अध्याय - ८१
कहेते बाबा ओर किशन हस हसके बाते करते नीचे आगये.. तब विमला ओर सरला दोनोही खुस होते बाबाको भोजन कराने लगी.. तबतक किशन ओर विरजी बाबाकी सेवामे लगे रहे.. जब बाबाने भोजन करलीया तब किशन ओर विरजी दोनोही कार लेकर बाबाको आश्रम छोडने चले गये.. फीर वहा जाकर किशनने बाबाको तगडी दक्षीणा भी देदी.. फीर बाबाको छोडकर दोनो वापस हवेलीपे आगये.. ओर सबने साथ बैठकर भोजन करलीया.. तब रसला बार बार किशनको देखते मुस्कराती रही....अब आगे
जब सबने खाना खालीया तब होलमे आकर बेठ गये तब किशनने कुछ बाते छोडकर बाकीकी सब बाते तीनोको बतादी की बाबाने क्या कहा हे.. ओर सबको तसली होगइकी चलो श्रापका नीवारण होगया.. तभी विरजी खेतोपे चकर लगानेकी बात करते नीकल गया.. ओर विमलाभी थोडी देर बेठकर अभी आती हु.. कहेकर अपने कपडे चेन्ज करने रुममे चली गइ.. तब मौका देखतेही सरला किशनके पास सरकके आगइ.. ओर दोनो अेक दुसरेके होंठ चुमने लगे.. फीर सरला थोडी दुर बेठकर धीमी आवाजमे बात करने लगे..

सरला : (धीरेसे मुस्कराते) किशन.. अब जीस कार्यके लीये ये हवन कियाथा वो कामेतो होगया.. अब देर मत करो.. हमारी उमर नीकल जाये इनसे पहेले हम दोनोको फीरसे पे्रगनेन्ट करदो.. मेभी आपसे अेक ओर बच्चा चाहती हु.. ओर हो सकेतो कलही इनको कही बहार भेजकर घरपे आजाओ.. ओर अभी टाइमभी सही चल रहा हे.. पुरी दिन दोनो मजे करेगे.. क्या कहेते हो..?
किशन : (हसते) भाभी तु बहोत ठरकी होगइ हे.., देखना अबतो विरजीकोभी पता चल गया हे.. की वो बच्चे पैदा करनेमे सक्षम नही रहा.. कही पेटसे होगइ तो गडबड ना होजाये.. हें..हें..हें..
सरला : (सरमाते हसते) अरे कुछ नही होगा.. वो सब मे देख लुगी.. आप टेन्शन मतलो.. इनकातो ठीकसे खडाभी नही होता.. अच्छा हे आप मुजे मील गये वरना मेरीतो जींदगीही बरबाद होजाती.. मे सीर्फ आपकी वजहसे ही इनके घरमे हु.. ओर मत भुलो आपने मेरीभी मांग भरी हे.. तो मेराभी हक बनता हेकी मे आपके बच्चेको जन्म दु.. अब इस नामर्दसे हमे डरनेकी जरुरत नही हे.. अब भलेही इनको सब पता चल जाये..
किशन : (हसते) बडी हिमत आगइ तुजमें.. अरे भानुतो देदीया अब कीतने बच्चे चाहीये तुजे..? हें..हें..हें..
सरला : (सरमाते धीरेसे) वो मे नही जानती.. बस मुजेतो अेक ओर बच्चा चाहीये.. ओर आपभी भाभीको फीरसे पेटसे करदो.. वोभी यही चाहती हे.. मेरी कुछ देर पहेले ही इनसे बात हुइ हे.. ओर वोतो मुजसेभी ज्यादा ठरकी हे.. हें..हें..हें..
तभी विमलाभी चेन्ज करके आगइ ओर तबतक सरला थोडी दुर जाकर बेठ गइ.. फीर तीनोने बाबाके बारेमे काफी बातचीत करली.. तबतक विरजीभी खेतोसे वापस आगया ओर वो किशनको आराम करनेको कहेते सरलाको लेकर नीकल गया.. तब मौका देखतेही विमलाभी किशनको लेकर अपने बेडरुममे चली गइ.. ओर अंदर जातेही विमलाने दरवाजा बंध करलीया..
अेकतो किशन सरलाकी बातोसे काफी गरम होगया था.. ओर वो पुरा चुदाइके मुडमे था.. तो उपरसे उनको विमला खीचकर बेडरुममे लेगइ.. फीरतो क्या कहेना.. किशनके बेडरुममे प्यारका तुफान भवंडर बनके तांडव मचाने लगा.. किशनने विमलाको चोद चोद नीचोडही लीया.. विमलाकी चुदाइ करते उनकी हालत बीगाडदी.. उनका अेक अेक अंग तोडके रख दीया.. ओर विमलाको रातमे फीरसे तैयार रहेनेको केहकर वो खेतोपे चला गया.. तब बेडपे विमला बेसुध्ध जैसी हालतमे वही ढेर होकर सोगइ..

उधर भावनाके दील दिमागमे भी देवायत घुम रहाथा.. वो अब उन्हीके सपने देखते अपने आपको देवायतकी पत्नीके रुपमे इमेजींग करते उनके नामकी कइ बार चुतमे उगली कर चुकी थी.. तब उनको नही पताथाकी अपनेही घरमे उनकी खुदकी बहेन देवायतसे कीतनी बार चुदवा चुकी हे.. ओर उनकी सादी देवायतसे तैय होगइ हे.. वोतो देवायतको मीलते ही अपने दिलकी बात कहे देना चाहती थी..
दो पहोरको खाना खाकर नीर्मला राजीवको टीफीन देने चली गइ ओर वहा दुकानपे थोडी भीड ज्यादा थी.. तो कुछ देर वही रुक गइ ओर राजीवको मदद करने लगी.. अैसा वो कइ बार कर चुकी हे.. तब मंजु ओर भावु सभी काम नीपटाके आराम करने अपने रुममें जाही रहीथी.. की देवायत आगया.. तो दोनो उनको देखके खुस होगइ लेकीन भावु खुसीके साथ थोडी सोक्ट भी होगइ.. की ये देवायत यहा कैसे..? तब मंजुने उसे प्यारसे होलमे बीठाया.. ओर देवायतके लीये पानी लेने चली गइ..
तब भावना उपर अपने रुममे दोडके चली गइ ओर फटाफट कागज पेन लेकर लेटर मे अपने दीलकी बाते लीखने लगी.. क्युकी मंजुके सामने देवायतसे बात करनेकी हीमत नही हो रहीथी.. तो सोचा देवायतके जाते ही यातो मंजुसे नजर बचाके वो कैसेभी करके उनको लेटर दे देगी.. तो भावना चली गइ तो मंजुने सोच लीयाकी भावना आराम करने चली गइ हे.. ओर वो देवायतको लेकर नीचे अपनी मम्मी वाले रुममे घुस गइ..
मंजुला : जानु.. मम्मी पापाको टीफीन देने गइ हे.. ओर भावु उपर आराम करने चली गइ हे.. तो साम तक वो नीचे नही आयेगी.. मम्मीके आनेसे पहेले मुजे अेक बार फटाफट प्यार करलो.. मुजसे रहा नही जात.. यही आजाओ..
तब मंजु अपना लोअर नीचे करते लेट गइ ओर टोप उपर करलीया तब देवायतभी पेन्टको थोडा नीचे सरकाके मंजुके उपर चड गया तब मंजुने लंड पकडके अपनी चुतमे फसालीया ओर देवायतने होंठ चुमते अेकही जटकेमे लंडको मंजुकी चुतमे घुसा दीया.. तब मंजुकी हल्की चीख नीकल गइ.. ओर देवायत कमर हीलाते मंजुको धनाधन चोदने लगा.. तभी भावना उपरसे लेटर अपने बुब्सकी दरारोमे छुपाके नीचे आगइ..
तो देखा होलमे कोइ नही था.. तब उनको अपने मम्मी पापाके रुममे कुछ अजीब आवाजे सुनाइ दी.. तब जल्द बाजीमे मंजु दरवाजा बंध करना भुल गइथी.. तो भावना धीरेसे अंदर जांकते देखने लगी ओर देखतेही सोक्ट होगइ.. उनकी आंखोसे आंसु बहेने लगे ओर वो चुपचाप दोडके उपर अपने रुममे चली गइ.. ओर बेडपे पेटके बल लेटते फुटफुटकर रोने लगी.. ओर अेक बारतो लगाकी अभीके अभी वो सुसाइट करले..
तब नीचे मंजुभी दो बार जड चुकीथी ओर उनकी मम्मीके आनेका टाइमभी हो गयाथा.. तो उसने जडतेही देवायतको अपने उपरसे हटा दीया ओर उनको नीचे खडा करके उनके पैरोके बीच नीचे बैठ गइ.. ओर उनका लंड अपने मुहमे लेके तेजीसे अंदर बहार करने लगी.. ताकी बेडभी खराब नाहो ओर देवायतकी प्यास भी बुज जाये.. लेकीन उन दोनोको नही पताथाकी उनकी मम्मी भावनाके उपर जातेही आचुकी हे..

नीर्मला जेसेही अपने रुमके पास पहोंची तो दरवाजा थोडा खुलाथा ओर वो अंदर आही रहीथी की दोनोकी रासलीलाको दरवाजेसे देख लीया.. मंजु देवायतका लंड लोलीपोपकी तराह चुस रहीथी.. ओर वो देखतेही सोक्ट होगइ.. तभी देवायतका ध्यान नीर्मलापे गया.. तो फटाफट अपनी पेन्ट पहेनने लगा..
तबतक मंजुनेभी अपनी मम्मीको देख लीया ओर वोभी खडी होकर सरमके मारे अपने कपडे सही करने लगी.. जब दोनोने कपडे पहेन लीया तब नीर्मला अंदर आगइ.. ओर दोनोको अेकदम गुसेसे घुरके देखने लगी.. तो मंजु नीचे सर करते सरमाने लगी.. तो देवायत मंद मंद मुस्कराता रहा..
नीर्मला : (थोडी उची आवाजमें) मंजु.. तुम अपने रुममे जाओ.. मुजे देवायतसे अकेलेमे कुछ बाते करनी हे.. (जोरोसे) जा..ओ.. कहानां..
मंजुला : (हींमत करते) मो..म.. वो.. हमने..
नीर्मला : (जोरोसे) चुप.. अेकदम चुप.. बेसर्म कहीकी.. मेने कहा तुमने सुना नही..? जाओ यहासे..
तब मंजु सर नीचे करके फटाफट दोडके चली गइ.. ओर नीर्मलाने रुमका दरवाजा बंध करलीया तब देवायत समजताथा की अब नीर्मलाभी मुजे प्यार करना चाहती होगी.. इसीलीये मंजुको डाटके भगादीया.. क्युकी वोभी इनकी बीवीथी.. तब देवायत हसते हुअे नीर्मलाकी ओर बढ गया.. ओर उसे बाहोमे भरलीया तब कुछदेर नीर्मला अैसेही आंख बंध करते खडी रही.. तभी देवायतने उनके होठोपे होठ रख दीये.. तभी नीर्मलाने उसे बाहोसे छुटतेही धका देदीया ओर अेक जोरोका तमाचा देवायतके गालपे जड दीया.. स..टा..क..

नीर्मला : (गुसेसे धीरेसे) क्यु..? क्यु..? क्यु कीया मेरे साथ अैसा..? क्या कमी रेह गइथी मेरे प्यारमे..? जो अब मेरी बेटीके साथभी.. छी.. क्या इस बारेमें अेकभी बार मुजसे बात करनेकी जरुरत नही लगी..? तुम्हारा ओर मंजुका पीछले तीन चार महीनेसे रीलेशन हेनां..? फीर भी यहा आकर तुम मेरे साथ भी वो सब..? छी.. मां बेटी दोनोके साथ..? तुमको सरम भी नही आइ..? तुमने हमारे घरको क्या समज रखा हे..? ये कोइ रंडीखाना हे..? हंम..
देवायत : (उनके कंधेपे हाथ रखते) देखो नीमु..
नीर्मला : (बीचमेही हाथ जटकते) डोन्ट टच मी.. अेन्ड डोन्ट कोलमी नीमु.. तुमसे घीन आती हे मुजे.. आजके बाद तेरी जुबानसे मेरा नामभी मत लेना.. आजसे मे तुम्हारे लीये मर गइ हु.. मुजसे कभी अकेले मत मीलना.. मुजसे सादी कीथी नां..? मेरीभी मांग भरीथी नां..? तुम दोनोके दोनो अेकही नीकले.. छी.. सबके सब हवसके पुजारी हे.. कीसीको हमारे जजबातकी नही पडी.. सबको सीर्फ ये सरीरही चाहीये..
देवायत : (थोडा गुसेसे) चुप.. अेकदम चुप.., तुम समजती क्या हो अपने आपको.. हंमम..? तुमसे ओर तेरी बेटीसे प्यार कीया तो कौनसा गुनाह कीया..? हम दोनोने मंदिरमे सादी कीहे.., सादीतो मेने तुमसे भी कीहे.. क्या तुम मेरे साथ रहेके मेरा संसार चलाओगी..? नही..नां..? चलो मे तुम्हारे लीये मंजुको छोड दुगा.. तुम मेरे घर मेरी बीवी बनके आजाओ.. छोडदो राजीव अंकलको.. मे तुजे अेसेही अपनानेके लीये तैयार हु.. मे वादा करता हु सारी जींदगी मे तुम्हारे अलावा कीसी ओरसे सादी नही करुगा.. आओगीनां मेरे घर.. मेरी बीवी बनके..? हंमम..
नीर्मला : (थोडा सांत होते) नही.. तुमभी जानते हो मे ये नही कर सकती.. में ओल रेडी सादीसुधा हु.. मेरा पती राजीव हे.. मे उनको छोडके नही आ सकती..
देवायत : हां इसीलीये.., तो तुम क्या चाहती हो..? मे बीना सादीके अैसेही सारी जींदगी कुआरा रहु ओर तेरे साथ मे अपनी प्यास बुजाता रहु.. हंममं.. बोलनां..? मुजे कीसीना कीसीसे तो सादी करनीही थी तो फीर मंजु क्यु नही..? मेने सोचाथा की मंजुसे सादी करके मे तुमसे भी नजदीक रहुगा ओर मीलता रहुगा ओर खुस रखुगा.. लेकीन..
नीर्मला : (दुसरी ओर मुह करते धीरेसे) स्टुपीड.. तुम समजते क्यु नही..? वो..वो.. मंजुकी सादी तुम्हारे साथ नही होसकती.. वो तुम्हारी.. तुम्हारी.. मे नही बता सकती.. यार जाओ तुम यहासे..
देवायत : हां हां बोलनां वो मेरी क्या..? अेक बात कान खोलके सुनलो.. हम दोनोने मंदिरमे सादी करली हे.. बाबाने खुद हमारी सादी करवाइ हे.. सायद राजीवअंकल बाबाको जानते हे.. उनकोभी कोइ अेतराज नही.. तो आपको क्या प्रोबलेम हे..? ओर सुनलो ना मंजु मेरे बगैर रेह सकती हे ओर नाही मे.. आप हमारी सादी करवा रहेहो तो ठीक हे वरना मे मंजुको अैसेही घर लेजाउगा.. ओर आखरी बात.. अभी जो आपने कहा हे नां.. अब मुजसे कोइ रीस्ता मत रखना.. उन बातपे कायम रहेना.. ओर अेक बार ठंडे दीमागसे सोचना.. की जो में गुसेमे बोल गइ वो सही हे की नही.. मे चलता हु.. जो भी फैसला लो मेरे बापुको फोन करके बता देना.. ओर तुम मुजसे तो कभी बात ही मत करनां..
कहेते देवायत रुमसे बहार नीकल गया.. तब होलमें मेइन गेइटके पास मंजु खडी थी.. तो दोडके देवायतके गले लग गइ.. ओर फुटफुटके रोते आइ लव यु.. आइ लव यु.. कहेने लगी.. तब नीर्मला दोनोको देखती ही रेह गइ.. तो देवायतभी उनको कसके अपनी बाहोमे भीच लेता हे ओर आइ लव यु टु.. कहेते उनके सरको चुम लेता हे.. फीर अलग होतेही अेक नजर नीर्मलाकी ओर देखते वहासे जटसे नीकल जाता हे..

तब मंजुभी दोडकर उपर चली जाती हे ओर भावनाके पास बेडपे बेठते जोरोसे रोने लगती हे.. तो भावना उनकी ओर देखती हे.. ओर उनको मालुम होनेके बावजुद रोनेका कारण पुछ लेती हे.. तब मंजुको उनकी मम्मीने भावनाको कहेनेसे मना कीयाथा उनके बावजुद रोते रोते सब बाते भावनाको बता देती हे..
जीसे सुनके भावनाभी सोक्ट होजाती हे.. तब उनको पता चलाकी ये दोनोतो तीन चार महीनेसे रीलेशनमे हे.. ओर मंदिरमे सादीभी करली हे.. ओर यहा उनके मम्मी पापा उनकी सादी करने वाले हे.. तब वो अपने आपको सम्हालती हे फीर मंजुको गले लगाके उसे आस्वासन देती हे..
भावना : (गले लगाते) दीदी आइ अेम सोरी.. मेने आपको गलत समजा था.. मुजे माफ करदो..
मंजुला : (आंसु बहाते) अरे पगली तुम क्यु सोरी बोलती हे.. क्या तुमभी देवुको पसंद करतीहोनां..?
भावना : सोरी.. दीदी मुजे नही पताथा आप दोनो काफी आगे बढ चुके हो..
मंजुला : भावु इसमे तेरी कोइ गलती नही हे.. मेरा देवु हे ही अैसा.. मेने उसे पहेली बार देखा तबही मे उसे चाहने लगी थी.. लेकीन तुम फीकर मत करो.. मे देवुसे इस बारेमे बात करुगी..
भावना : (जटसे अलग होते) नही दीदी आपको मेरी कसम.. अब इस बारेमे बात करनेका कोइ फायदा नही.. आपके लीये वो परफेक्ट हे.. आपही उनके साथ सादी करलीजीये..
मंजुला : (भावनाके आंसु पोछते) भावु तु मुजे प्रोमीस कर.. तु कुछ उल्टा सीधा नही सोचेगी.. वरना तुजे मेरी कसम.. मुजे प्रोमीस कर..
भावना : (सर जुकाते आंसु पोछते) जी.. जी दीदी मे प्रोमीस करती हु.. लव यु दीदी..
मंजुला : (बाहोमे कसते) लव यु टु मेरी बहेन.. बस मम्मी मान जाये..

तभी मंजुने देवायतको फोन लगा दीया ओर उनसे बात करने लगी.. तब भावना भी वही बेठी दोनोकी बात सुा रहीथी.. ओर मंजुने उनकी मम्मीको मनानेकी बात कहेदी.. ओर देवायतसे अेक रीक्वेट करदी की जबतक मम्मी सामनेसे ना कहे तबतक दोनो सादी नही करेगे.. ओर अैसेही बहार मीलते रहेगे.. तब देवायतभी समजदार थातो उसने मंजुकी सभी बातको मानलीया.. ओर अब घरमे ना मीलते बहार मीलनेका तैय करलीया..
उधर देवायतभी अपने गांव धर चलाजाता हे.. तबतक साम ढल चुकीथी ओर ओर सभी खाना खा रहेथे.. देवायतने किशन ओर विमलासे अभी कुछ समय सादी ना करनेकी बात कहेदी.. तब किशन ओर विमला दोनोही सोक्ट होगये.. ओर दोनोही अनुमान लगाने लगेकी जरुर नीर्मलाने मना कीया होगा..
विमला : बेटा क्या तुम्हारी इस बारेमे कीसीसे बात हुइ हे.. आइ मीन मंजुसे..?
किशन : बेटा लेकीन राजीवने तो हां कहेदी हे.. तु कहेतो इस बारेमे मे राजीवसे बात करलु..?
देवायत : नही बापु.. आप लोग फीकर मत करो मे सादीतो मंजुसेही करुगा.. लेकीन हमे थोडा वक्त चाहीये.. ओर आपभी टेन्शन मतलो मे सामनेसे कहुगा.. तब आप मेरी सादी मंजुसे करवा देना..
किशन : (स्माइल करते) ठीक हे बेटा.. जैसा तुजे ठीक लगे.. तु जब कहेगा तबही करेगे..
देवायत : बापु.. अब मे सहेर जा रहा हु.. सोचता हु वही रहेके अपनी ओफीस खोलके अपना कारोबार थोडा सेट करलु.. वहाभी तो कुछ होना चाहीये..
किशन : (हसते) ठीक हे जैसे तुजे ठीक लगे.. लेकीन बेटा अेक बातका खयाल रखना.. ये सब विरासत तुजेही सम्हालनी हे.. वहा हमे ज्यादा दिन नही रहेना.. बस सब सेट करके कीसीको सोंपके इधर आजाना..
देवायत : (हसते) अरे बापु मुजे सब पता हे.. सीर्फ दो तीन सालकीतो बात हे.. फीर वही आदमी सेट करके आजाउगा.. ओर मेभी तो आता जाता रहुगा.. हमेसाके लीये थोडी जा रहा हु.. हें..हें..हें..
किशन : (हसते) बेटा.. वहा हमारा अेक बंगलो हे.. तु वही चलाजा मे विरजीसे आजही कहेके उसे ठीक करवाता हु.. कलही उनको भेजता हु..
देवायत : (हसते) जी बापु.. मेभी विरजीकाका के साथ चला जाता हु..
रातकोही किशनने विरजीको फोन करके दुसरे दिन देवायतके साथ सहेर जानेको बोल दीया.. उस रात किशन ओर विमला पुरी रात चुदाइ करते रहे.. किशनने कामोतेजक की गोली खाकर पुरी रात विमलाकी जमकर चुदाइ करली.. ओर विमलाकी हालत पतली करदी.. अेकतो दिनमे भी किशनने उनकी चुदाइ करके बेसुध्ध जैसी हालत करदीथी ओर रातमेभी उनकी जबरदस्त धमासान चुदाइ हुइ..

तब विमलाको भी नही पताथा की दिन ओर रातकी उनकी जबरदस्त चुदाइके कारण उनकी चुतको किशन कइ बार भर चुकाथा.. जीसके कारण उनके गर्भमे किशनका बीज आ चुका हे.. ओर वो फीरसे प्रेगनेन्ट होगइ हे.. जब सरलाने उनको कहा तबही किशनने ठान लीयाथा की सरलाकी बात सच हे.. इनके फल स्वरुप आज विमलाकी सारी तम्मना आज पुरी करदी.. अब वो अगले दो दीन बीस्तरसे उठने वाली नही थी.. क्युकी उनकी चुतमे काफी सुजन आगया था..

तब दुसरे दिन देवायत ओर विरजीभी सहेर चले गये.. ओर दोनो वहा बंगलेका मरम्मत करवाने लगे.. तब किशन ओर विमला दोनोही देरसे उठे.. तब विमलाकी चालही बदल चुकीथी.. ओर वो खुब सरमाइ.. तब किशन विमलाको आराम करनेको कहेते तैयार होकर सीधाही विरजीके घर चला गया.. उनको पताथा अभी सरला अकेली होगी.. ओर वो पुरा दिन सरलाकी चुतकी धजीया उडाता रहा.. सरलाकोभी चोद चोदकर उनकी चुत भरता रहा.. ताकी वोभी पेटसे होजाये.. जीनके नतीजेके फल स्वरुप सरलाभी प्रेगनेन्ट होगइ..
ओर दिन बितने लगे.. इसी दौरान देवायतभी सहेर चला गया.. ओर अपने बीजनेसको सेट करने लगा.. सब अपनी नोर्मल लाइफमे बीजी होगये.. इसी बीच मंजुभी सृतीको मीलनेके बहाने देवायतके पास चली जाती ओर देवायतसे जमकर चुदवाके सृतीके घर भुमीका आंटीसे मीलकर वापस आजाती.. तब नीर्मलाभी देवायतसे ना मीलनेकी वजहसे बैचेन रहेने लगी.. अब उसे देवायतकी कमी महेसुस होने लगी..
अब उसे देवायतके साथ बेरुखीका व्यवहारसे पछतावा होने लगा.. वो जबभी अकेली पडती तब देवायतके बारेमे सोचमे डुब जाती.. ओर घरमेभी गुमसुम रहेने लगी.. उसे धीरे धीरे समजमे आने लगाकी वो बहुत बडी गलती कर चुकी हे.. अगर देवायतकी सादी मंजुसे नही करवाती तो देवायत दुसरी लडकीसे सादी करलेता.. ओर उनसे हमेसाके लीये दुर हो जाता.. तो कमसे कम मंजुसे सादी करके वो उनके नजदीकतो रहेगा.. यही सब सोचते वो दो दो तीन तीन घंटे अपने बेडपे लेटते सोचमे डुबी रहेती..
नीर्मला : (मनमे) उसने क्या गलत कहा.. मे थोडीना उनका संसार चला सकती.. सच ही तो कहेता था वो.. अगर मंजु नहीतो दुसरी लडकीसे सादी कर लेता तो फीर मंजुही क्यु नही..? ओर मे भी जलतीथी तो वोभी कीनसे..? मेरी ही बेटीसे..? जालीम मुजे प्यारभी तो बहुत करता था.. मेरी चीखे नीकला देता था.. बीलकुल अपने बापुकी तराह.. मेनेही उनको मुजसे हमेसाके लीये दुर कर दीया हे.. जालीम कहेके गयाकी अब अपनी बातपे कायम रहेना.. तो अब उनसे माफी मांगु.. तोभी कीस मुहसे.. अबतो मुजसे उनको मीलनेकी हीमतही नही होती.. क्या वो कभी मुजे माफ कर पायेगा..? जोभी हो.. जबभी मुजे अकेला मीलजाये.. मे उनके पैरोमे नाक रगडके माफी मांग लुगी.. मुजसे उनके बीना रहाभी तो नही जाता..
अैसेही समय बीतने लगा तब विमला ओर सरलाका पेटभी काफी नीकल गयाथा.. तब सरलाको प्रेगनेन्ट देखकर विरजीको सरलापे आसंकाये होने लगी.. क्युकी वो जानताथा.. की वो बच्चा पैदा करनेमे सक्षम नही हे.. तो सरला कैसे पेटसे होगइ..? इस बारेमे सरलासे बातभी की तो बच्चा उनकाही हे.. कहेते उल्टा सरलाने उनके साथ जगडा कीया.. तब विरजी उनके उपर नजर रखने लगा.
ओर अेक दिन वो कामसे सहेर गयाथा.. ओर जल्दी घर लौट आया.. तब घरके बहार किशनकी कार खडी थी.. पहेलेतो वो खुस हुआ.. फीर कुछ याद आतेही उनको संका होने लगी.. ओर वो धरके पीछे चला गया.. ओर अपने रुमकी खीडकीसे देखनेकी जगाह ढुंढते अेक खीडकीके पास चला गया ओर धीरेसे खीडकी खोलनेकी कोसीसकी तो खीडकी खुल गइ.. ओर थोडीसी खोलके देखने लगा तब उसे बहुत बडा जटका लगा..

क्युकी अंदर सरला किशनके नीचे लेटी हुइ थी ओर किशन सरलाकी जोरोसे कमर उछालते चुदाइ कर रहा था.. ओर सरलाभी नीचेसे कमर उछाल उछालके किशनका साथ दे रहीथी.. विरजी सब देखता रहा.. जब दोनो चुदाइ करके साथमें जडते सांत होगये तब किशन अभीभी सरलाकी चुतमे लंड डालके पडा हुआथा.. ओर सरला किशनके बालको सहेलाते उनसे बाते करने लगी.. तब विरजी दोनोकी बात गौरसे सुनने लगा..

किशन : (हसते) सरला तेरा पेट नीकल गया हे.. क्या विरजीको तुमपे सक नही हुआ..?
सरला : (हसते) किशन.. उनको सकतो होगया हे.. ओर इस बातको लेकर अेक बार हमारे बीच जगडाभी हुआ हे.. अब उनसे छुपाकर या जुठ बोलके अब कोइ फायदा नही हे.. अेक बारतो उनसे जगडा करके बातको टालदीया.. लेकीन अब मे सोच रही हुं उसे सबकुछ खुलकर बता दु.. लेकीन आपनेभी अभी तक नही बताया.. की अपने दोस्तको आपने कीस बातकी सजा दीहे.. अबतो बतादो ताकी मे उसे बात कर सकु.. मुजे पता हे जब उनसे बात करुगी तब हम दोनोही अलग होजायेगे.. तब आपकोही मुजे सम्हालना हे.. देखना बाबा मेने आपकोही अपना पती माना हे उनको आज तक पता नही चलने दियाकी भानुभी हमारा लडका हे..
किशन : (होंठ चुमते) सरला.. विरजीने मेरी मुह बोली बहेन भुमीकाके साथ गलत कीया हे.. उनका बलात्कार कीया हे.. बस उसीके कहेनेपे मेने विरजीसे बदला लीया हे.. हम सभी कोलेजमे दोस्त थे.. ओर विरजीने दोस्तीमेही गलत कीया.. अगर वो उनसे प्यार करती या बीना प्यार उनकी सहमतीसे सेक्स करती तो हमे कोइ अेतराज नही था.. लेकीन विरजीने उनका अपहरण करके उनके साथ बलात्कार कीया..
सरला : (मुस्कराते) सच कहेते हो..? क्या आपकी मुह बोली बहेनके लीये इतना बडा कदम उठालीया.. की अपने दोस्तके साथही.. हालाकी मे मानती हु इसमे मेरीही सहमती थी.. क्युकी सादीके दिनही मुजे पता चल गयाकी विरजी अेक नामर्द हे.. तभीभो मेने आपसे गांधर्व सादी करली.. ओर आपनेभी मुजे अेक बीवीही तराह हर सुख दीया ओर मुजे सम्हाला.. फीरभी मनमे कुछ सवाल आ रहे हे.. क्या मुजे सचाइ बताओगे..?
किशन : (हसते) अब कोनसी सचाइकी बात कर रही हे..? मुजे खुलकर बता..
सरला : (हसते) किशन आपकी खुदकी बहेनसे सादीसे पहेलेही आपका रीलेशन हे.. ओर सादीसे पहेलेही आपने उसे प्रेगनेन्ट भी करदीयाथा.. तो फीर येतो मुह बोली बहेन हे.. क्या उनको सचमे बहेन मातने हो..? की बात कुछ ओरही हे.. क्युकी मे जानती हु विरजीके साथ आपकी तीन पीढीयोसे रीलेशन हे ओर आप विरजीको अपना खास दोस्त समजते हो.. धंधेमे भी आपने उनको साथ रखा हे.. फीरभी अेक मुह बोली बहेनके कहेनेपे इतना बडा फैसला लीया..? बात कुछ समजमे नही आइ.. हें..हें..हें..
किशन : (गंभीर होते) सरला वो मे तुजे अभी नही बता सकता.. बस कुछ दिन इन्तजार करले.. अेक दिन तुजे सब सचाइ बता दुगा.. ओर कुछ राज हमे राज ही रहेने देना चाहयी.. भुमी आजभी मेरी बहेन हे.. बस मे तुजे अभी सीर्फ इतना ही बता सकता हु..
तब बहार विरजी सब बाते सुनकर सोक्ट हो जाता हे.. ओर उसे बहुत दुख होता हेकी उनके दोस्तने ही उनके साथ धोखा कीया.. ओर उनकी अेक गलतीकी इतनी बडी सजा देदी..? तभी उनको सीनेमे दर्द होने लगा ओर वो वही सीनेपे हाथ रखके नीचै बेठ गया.. तब कुछही देरमे उसे किशनकी कारकी आवाज आइ तो वो समज गयाकी किशन चला गया हे.. ओर वो बडी मुस्कीलसे घरमे आगया ओर चुपचाप भानुके कमरमे जाके खटीयापे लेट गया.. ओर आंसु बहाते सोचता रहा..
किशनके साथ धमासान चुदाइ करके सरलाभी थक गइथी.. ओर वो नहाने चली गइ तब पीछेसे विरजी आकर सो गयाथा.. ओर सरलाभी नहाकर अपने बेडरुममे चली गइ ओर सो गइ.. तब रातमे भानुभी घर आगया.. तब सरला कीचनमे खाना बना रहीथी.. उनको पताही नही थाकी विरजी भानुके रुममे सोया हुआ हे.. ओर भानु हाथ मुह धोकर अपने रुममे चला गया.. ओर वो जैसेही अंदर गया.. तो अंदर जातेही सोक्ट होगया.. ओर जोरोसे चीलाके सरलाको बुलाने लगा..
क्युकी विरजीके मुहसे जाग नीकल रहेथे.. ओर वो मर चुकाथा.. तब सरलाभी दोडके आगइ ओर विरजीको अैसी हालतमे देखकर गभरा गइ.. फीरतो सरलाने किशनको फोन करके बुला लीया ओर भानुनेभी डोक्टरको बुला लीया.. तब डोक्टरने उसे चेक करके केह दियाकी उनको दिलका दौरा पडा हे ओर मर चुका हे.. फीरतो सबने मीलकर विरजीको अंतीम विदाइ देकर उनका दाह संस्कार कीया.. ओर सब वापस घरपे आगये.. तब सरलाका पेट देखकर सब यही कहेने लगेकी विरजी अपने दुसरे बच्चेका मुह नही देख पाया..
ओर समय बीतने लगा.. सरला अब दुनीयावालोकी नजरमे विधवाकी जींदगी बीताने लगी.. लेकीन कीसीको ये बातकी भनकभी नही लगीकी वो अभीभी किशनकी सुहागनके रुपमे किशनके साथ उनका बीस्तर गरम करते अपना संसार चला रही हे.. ओर उनके साथ वो हब सुख भोग रही हे जो अेक सादीसुधा ओरत अपने पतीसे सुख पाती हे.. ओर समयके साथ भानुभी देवायतका दोस्त होकर उनके साथ धंधेमे जुड गया..
ओर अेक दिन विमलाने बच्चेको जनम देदीया.. ओर वोथा लखन.. तब साथमे सरलानेभी लताको जनम देदीया.. ओर सब अपनी लाइफ रुटीन जीने लगे.. तब लखन अेक सालका होगया तब किशनने विमलाको फीरसे पेटसे करदीया.. ओर ठीक नव महीनेके बाद विमलाने फीरसे पुनमको जनम देदीया.. ओर इसी तराह समय बीतने लगा ओर बच्चे बडे होते गये.. आज लखन ओर लता पुनम काफी बडे होगये थे..
अबतो देवायतभी सहेरमे सब कुछ सेट करके वहा कीसीको पार्टनरमे रखकर वापस गांवमे आ गयाथा ओर देवायत ओर भानुने मीलकर किशनका पुरा कारोबार सम्हाल लीयाथा.. इसी बीच मंजु ओर देवायत समय समयपे मीलते रहे.. ओर पती पत्नीका हर सुख भोगते रहे.. इस बातका पता अब नीर्मलाकोभी चल गयाथा.. ओर उसने इस बारेमे राजीवसे बात करली.. ओर मंजुसे मीलकर अपनी गलतीको मानली.. फीर नीर्मलाने मंजुकी सादी राजी खुसीसे देवायतके साथ करवानेका फैसला करलीया....
कन्टीन्यु











































