Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 10 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ८१

कहेते बाबा ओर किशन हस हसके बाते करते नीचे आगये.. तब विमला ओर सरला दोनोही खुस होते बाबाको भोजन कराने लगी.. तबतक किशन ओर विरजी बाबाकी सेवामे लगे रहे.. जब बाबाने भोजन करलीया तब किशन ओर विरजी दोनोही कार लेकर बाबाको आश्रम छोडने चले गये.. फीर वहा जाकर किशनने बाबाको तगडी दक्षीणा भी देदी.. फीर बाबाको छोडकर दोनो वापस हवेलीपे आगये.. ओर सबने साथ बैठकर भोजन करलीया.. तब रसला बार बार किशनको देखते मुस्कराती रही....अब आगे

जब सबने खाना खालीया तब होलमे आकर बेठ गये तब किशनने कुछ बाते छोडकर बाकीकी सब बाते तीनोको बतादी की बाबाने क्या कहा हे.. ओर सबको तसली होगइकी चलो श्रापका नीवारण होगया.. तभी विरजी खेतोपे चकर लगानेकी बात करते नीकल गया.. ओर विमलाभी थोडी देर बेठकर अभी आती हु.. कहेकर अपने कपडे चेन्ज करने रुममे चली गइ.. तब मौका देखतेही सरला किशनके पास सरकके आगइ.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमने लगे.. फीर सरला थोडी दुर बेठकर धीमी आवाजमे बात करने लगे..





सरला : (धीरेसे मुस्कराते) किशन.. अब जीस कार्यके लीये ये हवन कियाथा वो कामेतो होगया.. अब देर मत करो.. हमारी उमर नीकल जाये इनसे पहेले हम दोनोको फीरसे पे्रगनेन्ट करदो.. मेभी आपसे अ‍ेक ओर बच्चा चाहती हु.. ओर हो सकेतो कलही इनको कही बहार भेजकर घरपे आजाओ.. ओर अभी टाइमभी सही चल रहा हे.. पुरी दिन दोनो मजे करेगे.. क्या कहेते हो..?

किशन : (हसते) भाभी तु बहोत ठरकी होगइ हे.., देखना अबतो विरजीकोभी पता चल गया हे.. की वो बच्चे पैदा करनेमे सक्षम नही रहा.. कही पेटसे होगइ तो गडबड ना होजाये.. हें..हें..हें..

सरला : (सरमाते हसते) अरे कुछ नही होगा.. वो सब मे देख लुगी.. आप टेन्शन मतलो.. इनकातो ठीकसे खडाभी नही होता.. अच्छा हे आप मुजे मील गये वरना मेरीतो जींदगीही बरबाद होजाती.. मे सीर्फ आपकी वजहसे ही इनके घरमे हु.. ओर मत भुलो आपने मेरीभी मांग भरी हे.. तो मेराभी हक बनता हेकी मे आपके बच्चेको जन्म दु.. अब इस नामर्दसे हमे डरनेकी जरुरत नही हे.. अब भलेही इनको सब पता चल जाये..

किशन : (हसते) बडी हिमत आगइ तुजमें.. अरे भानुतो देदीया अब कीतने बच्चे चाहीये तुजे..? हें..हें..हें..

सरला : (सरमाते धीरेसे) वो मे नही जानती.. बस मुजेतो अ‍ेक ओर बच्चा चाहीये.. ओर आपभी भाभीको फीरसे पेटसे करदो.. वोभी यही चाहती हे.. मेरी कुछ देर पहेले ही इनसे बात हुइ हे.. ओर वोतो मुजसेभी ज्यादा ठरकी हे.. हें..हें..हें..

तभी विमलाभी चेन्ज करके आगइ ओर तबतक सरला थोडी दुर जाकर बेठ गइ.. फीर तीनोने बाबाके बारेमे काफी बातचीत करली.. तबतक विरजीभी खेतोसे वापस आगया ओर वो किशनको आराम करनेको कहेते सरलाको लेकर नीकल गया.. तब मौका देखतेही विमलाभी किशनको लेकर अपने बेडरुममे चली गइ.. ओर अंदर जातेही विमलाने दरवाजा बंध करलीया..

अ‍ेकतो किशन सरलाकी बातोसे काफी गरम होगया था.. ओर वो पुरा चुदाइके मुडमे था.. तो उपरसे उनको विमला खीचकर बेडरुममे लेगइ.. फीरतो क्या कहेना.. किशनके बेडरुममे प्यारका तुफान भवंडर बनके तांडव मचाने लगा.. किशनने विमलाको चोद चोद नीचोडही लीया.. विमलाकी चुदाइ करते उनकी हालत बीगाडदी.. उनका अ‍ेक अ‍ेक अंग तोडके रख दीया.. ओर विमलाको रातमे फीरसे तैयार रहेनेको केहकर वो खेतोपे चला गया.. तब बेडपे विमला बेसुध्ध जैसी हालतमे वही ढेर होकर सोगइ..





उधर भावनाके दील दिमागमे भी देवायत घुम रहाथा.. वो अब उन्हीके सपने देखते अपने आपको देवायतकी पत्नीके रुपमे इमेजींग करते उनके नामकी कइ बार चुतमे उगली कर चुकी थी.. तब उनको नही पताथाकी अपनेही घरमे उनकी खुदकी बहेन देवायतसे कीतनी बार चुदवा चुकी हे.. ओर उनकी सादी देवायतसे तैय होगइ हे.. वोतो देवायतको मीलते ही अपने दिलकी बात कहे देना चाहती थी..

दो पहोरको खाना खाकर नीर्मला राजीवको टीफीन देने चली गइ ओर वहा दुकानपे थोडी भीड ज्यादा थी.. तो कुछ देर वही रुक गइ ओर राजीवको मदद करने लगी.. अ‍ैसा वो कइ बार कर चुकी हे.. तब मंजु ओर भावु सभी काम नीपटाके आराम करने अपने रुममें जाही रहीथी.. की देवायत आगया.. तो दोनो उनको देखके खुस होगइ लेकीन भावु खुसीके साथ थोडी सोक्ट भी होगइ.. की ये देवायत यहा कैसे..? तब मंजुने उसे प्यारसे होलमे बीठाया.. ओर देवायतके लीये पानी लेने चली गइ..

तब भावना उपर अपने रुममे दोडके चली गइ ओर फटाफट कागज पेन लेकर लेटर मे अपने दीलकी बाते लीखने लगी.. क्युकी मंजुके सामने देवायतसे बात करनेकी हीमत नही हो रहीथी.. तो सोचा देवायतके जाते ही यातो मंजुसे नजर बचाके वो कैसेभी करके उनको लेटर दे देगी.. तो भावना चली गइ तो मंजुने सोच लीयाकी भावना आराम करने चली गइ हे.. ओर वो देवायतको लेकर नीचे अपनी मम्मी वाले रुममे घुस गइ..

मंजुला : जानु.. मम्मी पापाको टीफीन देने गइ हे.. ओर भावु उपर आराम करने चली गइ हे.. तो साम तक वो नीचे नही आयेगी.. मम्मीके आनेसे पहेले मुजे अ‍ेक बार फटाफट प्यार करलो.. मुजसे रहा नही जात.. यही आजाओ..

तब मंजु अपना लोअर नीचे करते लेट गइ ओर टोप उपर करलीया तब देवायतभी पेन्टको थोडा नीचे सरकाके मंजुके उपर चड गया तब मंजुने लंड पकडके अपनी चुतमे फसालीया ओर देवायतने होंठ चुमते अ‍ेकही जटकेमे लंडको मंजुकी चुतमे घुसा दीया.. तब मंजुकी हल्की चीख नीकल गइ.. ओर देवायत कमर हीलाते मंजुको धनाधन चोदने लगा.. तभी भावना उपरसे लेटर अपने बुब्सकी दरारोमे छुपाके नीचे आगइ..

तो देखा होलमे कोइ नही था.. तब उनको अपने मम्मी पापाके रुममे कुछ अजीब आवाजे सुनाइ दी.. तब जल्द बाजीमे मंजु दरवाजा बंध करना भुल गइथी.. तो भावना धीरेसे अंदर जांकते देखने लगी ओर देखतेही सोक्ट होगइ.. उनकी आंखोसे आंसु बहेने लगे ओर वो चुपचाप दोडके उपर अपने रुममे चली गइ.. ओर बेडपे पेटके बल लेटते फुटफुटकर रोने लगी.. ओर अ‍ेक बारतो लगाकी अभीके अभी वो सुसाइट करले..

तब नीचे मंजुभी दो बार जड चुकीथी ओर उनकी मम्मीके आनेका टाइमभी हो गयाथा.. तो उसने जडतेही देवायतको अपने उपरसे हटा दीया ओर उनको नीचे खडा करके उनके पैरोके बीच नीचे बैठ गइ.. ओर उनका लंड अपने मुहमे लेके तेजीसे अंदर बहार करने लगी.. ताकी बेडभी खराब नाहो ओर देवायतकी प्यास भी बुज जाये.. लेकीन उन दोनोको नही पताथाकी उनकी मम्मी भावनाके उपर जातेही आचुकी हे..





नीर्मला जेसेही अपने रुमके पास पहोंची तो दरवाजा थोडा खुलाथा ओर वो अंदर आही रहीथी की दोनोकी रासलीलाको दरवाजेसे देख लीया.. मंजु देवायतका लंड लोलीपोपकी तराह चुस रहीथी.. ओर वो देखतेही सोक्ट होगइ.. तभी देवायतका ध्यान नीर्मलापे गया.. तो फटाफट अपनी पेन्ट पहेनने लगा..

तबतक मंजुनेभी अपनी मम्मीको देख लीया ओर वोभी खडी होकर सरमके मारे अपने कपडे सही करने लगी.. जब दोनोने कपडे पहेन लीया तब नीर्मला अंदर आगइ.. ओर दोनोको अ‍ेकदम गुसेसे घुरके देखने लगी.. तो मंजु नीचे सर करते सरमाने लगी.. तो देवायत मंद मंद मुस्कराता रहा..

नीर्मला : (थोडी उची आवाजमें) मंजु.. तुम अपने रुममे जाओ.. मुजे देवायतसे अकेलेमे कुछ बाते करनी हे.. (जोरोसे) जा..ओ.. कहानां..

मंजुला : (हींमत करते) मो..म.. वो.. हमने..

नीर्मला : (जोरोसे) चुप.. अ‍ेकदम चुप.. बेसर्म कहीकी.. मेने कहा तुमने सुना नही..? जाओ यहासे..

तब मंजु सर नीचे करके फटाफट दोडके चली गइ.. ओर नीर्मलाने रुमका दरवाजा बंध करलीया तब देवायत समजताथा की अब नीर्मलाभी मुजे प्यार करना चाहती होगी.. इसीलीये मंजुको डाटके भगादीया.. क्युकी वोभी इनकी बीवीथी.. तब देवायत हसते हुअ‍े नीर्मलाकी ओर बढ गया.. ओर उसे बाहोमे भरलीया तब कुछदेर नीर्मला अ‍ैसेही आंख बंध करते खडी रही.. तभी देवायतने उनके होठोपे होठ रख दीये.. तभी नीर्मलाने उसे बाहोसे छुटतेही धका देदीया ओर अ‍ेक जोरोका तमाचा देवायतके गालपे जड दीया.. स..टा..क..





नीर्मला : (गुसेसे धीरेसे) क्यु..? क्यु..? क्यु कीया मेरे साथ अ‍ैसा..? क्या कमी रेह गइथी मेरे प्यारमे..? जो अब मेरी बेटीके साथभी.. छी.. क्या इस बारेमें अ‍ेकभी बार मुजसे बात करनेकी जरुरत नही लगी..? तुम्हारा ओर मंजुका पीछले तीन चार महीनेसे रीलेशन हेनां..? फीर भी यहा आकर तुम मेरे साथ भी वो सब..? छी.. मां बेटी दोनोके साथ..? तुमको सरम भी नही आइ..? तुमने हमारे घरको क्या समज रखा हे..? ये कोइ रंडीखाना हे..? हंम..

देवायत : (उनके कंधेपे हाथ रखते) देखो नीमु..

नीर्मला : (बीचमेही हाथ जटकते) डोन्ट टच मी.. अ‍ेन्ड डोन्ट कोलमी नीमु.. तुमसे घीन आती हे मुजे.. आजके बाद तेरी जुबानसे मेरा नामभी मत लेना.. आजसे मे तुम्हारे लीये मर गइ हु.. मुजसे कभी अकेले मत मीलना.. मुजसे सादी कीथी नां..? मेरीभी मांग भरीथी नां..? तुम दोनोके दोनो अ‍ेकही नीकले.. छी.. सबके सब हवसके पुजारी हे.. कीसीको हमारे जजबातकी नही पडी.. सबको सीर्फ ये सरीरही चाहीये..

देवायत : (थोडा गुसेसे) चुप.. अ‍ेकदम चुप.., तुम समजती क्या हो अपने आपको.. हंमम..? तुमसे ओर तेरी बेटीसे प्यार कीया तो कौनसा गुनाह कीया..? हम दोनोने मंदिरमे सादी कीहे.., सादीतो मेने तुमसे भी कीहे.. क्या तुम मेरे साथ रहेके मेरा संसार चलाओगी..? नही..नां..? चलो मे तुम्हारे लीये मंजुको छोड दुगा.. तुम मेरे घर मेरी बीवी बनके आजाओ.. छोडदो राजीव अंकलको.. मे तुजे अ‍ेसेही अपनानेके लीये तैयार हु.. मे वादा करता हु सारी जींदगी मे तुम्हारे अलावा कीसी ओरसे सादी नही करुगा.. आओगीनां मेरे घर.. मेरी बीवी बनके..? हंमम..

नीर्मला : (थोडा सांत होते) नही.. तुमभी जानते हो मे ये नही कर सकती.. में ओल रेडी सादीसुधा हु.. मेरा पती राजीव हे.. मे उनको छोडके नही आ सकती..

देवायत : हां इसीलीये.., तो तुम क्या चाहती हो..? मे बीना सादीके अ‍ैसेही सारी जींदगी कुआरा रहु ओर तेरे साथ मे अपनी प्यास बुजाता रहु.. हंममं.. बोलनां..? मुजे कीसीना कीसीसे तो सादी करनीही थी तो फीर मंजु क्यु नही..? मेने सोचाथा की मंजुसे सादी करके मे तुमसे भी नजदीक रहुगा ओर मीलता रहुगा ओर खुस रखुगा.. लेकीन..

नीर्मला : (दुसरी ओर मुह करते धीरेसे) स्टुपीड.. तुम समजते क्यु नही..? वो..वो.. मंजुकी सादी तुम्हारे साथ नही होसकती.. वो तुम्हारी.. तुम्हारी.. मे नही बता सकती.. यार जाओ तुम यहासे..

देवायत : हां हां बोलनां वो मेरी क्या..? अ‍ेक बात कान खोलके सुनलो.. हम दोनोने मंदिरमे सादी करली हे.. बाबाने खुद हमारी सादी करवाइ हे.. सायद राजीवअंकल बाबाको जानते हे.. उनकोभी कोइ अ‍ेतराज नही.. तो आपको क्या प्रोबलेम हे..? ओर सुनलो ना मंजु मेरे बगैर रेह सकती हे ओर नाही मे.. आप हमारी सादी करवा रहेहो तो ठीक हे वरना मे मंजुको अ‍ैसेही घर लेजाउगा.. ओर आखरी बात.. अभी जो आपने कहा हे नां.. अब मुजसे कोइ रीस्ता मत रखना.. उन बातपे कायम रहेना.. ओर अ‍ेक बार ठंडे दीमागसे सोचना.. की जो में गुसेमे बोल गइ वो सही हे की नही.. मे चलता हु.. जो भी फैसला लो मेरे बापुको फोन करके बता देना.. ओर तुम मुजसे तो कभी बात ही मत करनां..

कहेते देवायत रुमसे बहार नीकल गया.. तब होलमें मेइन गेइटके पास मंजु खडी थी.. तो दोडके देवायतके गले लग गइ.. ओर फुटफुटके रोते आइ लव यु.. आइ लव यु.. कहेने लगी.. तब नीर्मला दोनोको देखती ही रेह गइ.. तो देवायतभी उनको कसके अपनी बाहोमे भीच लेता हे ओर आइ लव यु टु.. कहेते उनके सरको चुम लेता हे.. फीर अलग होतेही अ‍ेक नजर नीर्मलाकी ओर देखते वहासे जटसे नीकल जाता हे..





तब मंजुभी दोडकर उपर चली जाती हे ओर भावनाके पास बेडपे बेठते जोरोसे रोने लगती हे.. तो भावना उनकी ओर देखती हे.. ओर उनको मालुम होनेके बावजुद रोनेका कारण पुछ लेती हे.. तब मंजुको उनकी मम्मीने भावनाको कहेनेसे मना कीयाथा उनके बावजुद रोते रोते सब बाते भावनाको बता देती हे..

जीसे सुनके भावनाभी सोक्ट होजाती हे.. तब उनको पता चलाकी ये दोनोतो तीन चार महीनेसे रीलेशनमे हे.. ओर मंदिरमे सादीभी करली हे.. ओर यहा उनके मम्मी पापा उनकी सादी करने वाले हे.. तब वो अपने आपको सम्हालती हे फीर मंजुको गले लगाके उसे आस्वासन देती हे..

भावना : (गले लगाते) दीदी आइ अ‍ेम सोरी.. मेने आपको गलत समजा था.. मुजे माफ करदो..

मंजुला : (आंसु बहाते) अरे पगली तुम क्यु सोरी बोलती हे.. क्या तुमभी देवुको पसंद करतीहोनां..?

भावना : सोरी.. दीदी मुजे नही पताथा आप दोनो काफी आगे बढ चुके हो..

मंजुला : भावु इसमे तेरी कोइ गलती नही हे.. मेरा देवु हे ही अ‍ैसा.. मेने उसे पहेली बार देखा तबही मे उसे चाहने लगी थी.. लेकीन तुम फीकर मत करो.. मे देवुसे इस बारेमे बात करुगी..

भावना : (जटसे अलग होते) नही दीदी आपको मेरी कसम.. अब इस बारेमे बात करनेका कोइ फायदा नही.. आपके लीये वो परफेक्ट हे.. आपही उनके साथ सादी करलीजीये..

मंजुला : (भावनाके आंसु पोछते) भावु तु मुजे प्रोमीस कर.. तु कुछ उल्टा सीधा नही सोचेगी.. वरना तुजे मेरी कसम.. मुजे प्रोमीस कर..

भावना : (सर जुकाते आंसु पोछते) जी.. जी दीदी मे प्रोमीस करती हु.. लव यु दीदी..

मंजुला : (बाहोमे कसते) लव यु टु मेरी बहेन.. बस मम्मी मान जाये..





तभी मंजुने देवायतको फोन लगा दीया ओर उनसे बात करने लगी.. तब भावना भी वही बेठी दोनोकी बात सुा रहीथी.. ओर मंजुने उनकी मम्मीको मनानेकी बात कहेदी.. ओर देवायतसे अ‍ेक रीक्वेट करदी की जबतक मम्मी सामनेसे ना कहे तबतक दोनो सादी नही करेगे.. ओर अ‍ैसेही बहार मीलते रहेगे.. तब देवायतभी समजदार थातो उसने मंजुकी सभी बातको मानलीया.. ओर अब घरमे ना मीलते बहार मीलनेका तैय करलीया..

उधर देवायतभी अपने गांव धर चलाजाता हे.. तबतक साम ढल चुकीथी ओर ओर सभी खाना खा रहेथे.. देवायतने किशन ओर विमलासे अभी कुछ समय सादी ना करनेकी बात कहेदी.. तब किशन ओर विमला दोनोही सोक्ट होगये.. ओर दोनोही अनुमान लगाने लगेकी जरुर नीर्मलाने मना कीया होगा..

विमला : बेटा क्या तुम्हारी इस बारेमे कीसीसे बात हुइ हे.. आइ मीन मंजुसे..?

किशन : बेटा लेकीन राजीवने तो हां कहेदी हे.. तु कहेतो इस बारेमे मे राजीवसे बात करलु..?

देवायत : नही बापु.. आप लोग फीकर मत करो मे सादीतो मंजुसेही करुगा.. लेकीन हमे थोडा वक्त चाहीये.. ओर आपभी टेन्शन मतलो मे सामनेसे कहुगा.. तब आप मेरी सादी मंजुसे करवा देना..

किशन : (स्माइल करते) ठीक हे बेटा.. जैसा तुजे ठीक लगे.. तु जब कहेगा तबही करेगे..

देवायत : बापु.. अब मे सहेर जा रहा हु.. सोचता हु वही रहेके अपनी ओफीस खोलके अपना कारोबार थोडा सेट करलु.. वहाभी तो कुछ होना चाहीये..

किशन : (हसते) ठीक हे जैसे तुजे ठीक लगे.. लेकीन बेटा अ‍ेक बातका खयाल रखना.. ये सब विरासत तुजेही सम्हालनी हे.. वहा हमे ज्यादा दिन नही रहेना.. बस सब सेट करके कीसीको सोंपके इधर आजाना..

देवायत : (हसते) अरे बापु मुजे सब पता हे.. सीर्फ दो तीन सालकीतो बात हे.. फीर वही आदमी सेट करके आजाउगा.. ओर मेभी तो आता जाता रहुगा.. हमेसाके लीये थोडी जा रहा हु.. हें..हें..हें..

किशन : (हसते) बेटा.. वहा हमारा अ‍ेक बंगलो हे.. तु वही चलाजा मे विरजीसे आजही कहेके उसे ठीक करवाता हु.. कलही उनको भेजता हु..

देवायत : (हसते) जी बापु.. मेभी विरजीकाका के साथ चला जाता हु..

रातकोही किशनने विरजीको फोन करके दुसरे दिन देवायतके साथ सहेर जानेको बोल दीया.. उस रात किशन ओर विमला पुरी रात चुदाइ करते रहे.. किशनने कामोतेजक की गोली खाकर पुरी रात विमलाकी जमकर चुदाइ करली.. ओर विमलाकी हालत पतली करदी.. अ‍ेकतो दिनमे भी किशनने उनकी चुदाइ करके बेसुध्ध जैसी हालत करदीथी ओर रातमेभी उनकी जबरदस्त धमासान चुदाइ हुइ..





तब विमलाको भी नही पताथा की दिन ओर रातकी उनकी जबरदस्त चुदाइके कारण उनकी चुतको किशन कइ बार भर चुकाथा.. जीसके कारण उनके गर्भमे किशनका बीज आ चुका हे.. ओर वो फीरसे प्रेगनेन्ट होगइ हे.. जब सरलाने उनको कहा तबही किशनने ठान लीयाथा की सरलाकी बात सच हे.. इनके फल स्वरुप आज विमलाकी सारी तम्मना आज पुरी करदी.. अब वो अगले दो दीन बीस्तरसे उठने वाली नही थी.. क्युकी उनकी चुतमे काफी सुजन आगया था..





तब दुसरे दिन देवायत ओर विरजीभी सहेर चले गये.. ओर दोनो वहा बंगलेका मरम्मत करवाने लगे.. तब किशन ओर विमला दोनोही देरसे उठे.. तब विमलाकी चालही बदल चुकीथी.. ओर वो खुब सरमाइ.. तब किशन विमलाको आराम करनेको कहेते तैयार होकर सीधाही विरजीके घर चला गया.. उनको पताथा अभी सरला अकेली होगी.. ओर वो पुरा दिन सरलाकी चुतकी धजीया उडाता रहा.. सरलाकोभी चोद चोदकर उनकी चुत भरता रहा.. ताकी वोभी पेटसे होजाये.. जीनके नतीजेके फल स्वरुप सरलाभी प्रेगनेन्ट होगइ..

ओर दिन बितने लगे.. इसी दौरान देवायतभी सहेर चला गया.. ओर अपने बीजनेसको सेट करने लगा.. सब अपनी नोर्मल लाइफमे बीजी होगये.. इसी बीच मंजुभी सृतीको मीलनेके बहाने देवायतके पास चली जाती ओर देवायतसे जमकर चुदवाके सृतीके घर भुमीका आंटीसे मीलकर वापस आजाती.. तब नीर्मलाभी देवायतसे ना मीलनेकी वजहसे बैचेन रहेने लगी.. अब उसे देवायतकी कमी महेसुस होने लगी..

अब उसे देवायतके साथ बेरुखीका व्यवहारसे पछतावा होने लगा.. वो जबभी अकेली पडती तब देवायतके बारेमे सोचमे डुब जाती.. ओर घरमेभी गुमसुम रहेने लगी.. उसे धीरे धीरे समजमे आने लगाकी वो बहुत बडी गलती कर चुकी हे.. अगर देवायतकी सादी मंजुसे नही करवाती तो देवायत दुसरी लडकीसे सादी करलेता.. ओर उनसे हमेसाके लीये दुर हो जाता.. तो कमसे कम मंजुसे सादी करके वो उनके नजदीकतो रहेगा.. यही सब सोचते वो दो दो तीन तीन घंटे अपने बेडपे लेटते सोचमे डुबी रहेती..

नीर्मला : (मनमे) उसने क्या गलत कहा.. मे थोडीना उनका संसार चला सकती.. सच ही तो कहेता था वो.. अगर मंजु नहीतो दुसरी लडकीसे सादी कर लेता तो फीर मंजुही क्यु नही..? ओर मे भी जलतीथी तो वोभी कीनसे..? मेरी ही बेटीसे..? जालीम मुजे प्यारभी तो बहुत करता था.. मेरी चीखे नीकला देता था.. बीलकुल अपने बापुकी तराह.. मेनेही उनको मुजसे हमेसाके लीये दुर कर दीया हे.. जालीम कहेके गयाकी अब अपनी बातपे कायम रहेना.. तो अब उनसे माफी मांगु.. तोभी कीस मुहसे.. अबतो मुजसे उनको मीलनेकी हीमतही नही होती.. क्या वो कभी मुजे माफ कर पायेगा..? जोभी हो.. जबभी मुजे अकेला मीलजाये.. मे उनके पैरोमे नाक रगडके माफी मांग लुगी.. मुजसे उनके बीना रहाभी तो नही जाता..

अ‍ैसेही समय बीतने लगा तब विमला ओर सरलाका पेटभी काफी नीकल गयाथा.. तब सरलाको प्रेगनेन्ट देखकर विरजीको सरलापे आसंकाये होने लगी.. क्युकी वो जानताथा.. की वो बच्चा पैदा करनेमे सक्षम नही हे.. तो सरला कैसे पेटसे होगइ..? इस बारेमे सरलासे बातभी की तो बच्चा उनकाही हे.. कहेते उल्टा सरलाने उनके साथ जगडा कीया.. तब विरजी उनके उपर नजर रखने लगा.

ओर अ‍ेक दिन वो कामसे सहेर गयाथा.. ओर जल्दी घर लौट आया.. तब घरके बहार किशनकी कार खडी थी.. पहेलेतो वो खुस हुआ.. फीर कुछ याद आतेही उनको संका होने लगी.. ओर वो धरके पीछे चला गया.. ओर अपने रुमकी खीडकीसे देखनेकी जगाह ढुंढते अ‍ेक खीडकीके पास चला गया ओर धीरेसे खीडकी खोलनेकी कोसीसकी तो खीडकी खुल गइ.. ओर थोडीसी खोलके देखने लगा तब उसे बहुत बडा जटका लगा..





क्युकी अंदर सरला किशनके नीचे लेटी हुइ थी ओर किशन सरलाकी जोरोसे कमर उछालते चुदाइ कर रहा था.. ओर सरलाभी नीचेसे कमर उछाल उछालके किशनका साथ दे रहीथी.. विरजी सब देखता रहा.. जब दोनो चुदाइ करके साथमें जडते सांत होगये तब किशन अभीभी सरलाकी चुतमे लंड डालके पडा हुआथा.. ओर सरला किशनके बालको सहेलाते उनसे बाते करने लगी.. तब विरजी दोनोकी बात गौरसे सुनने लगा..





किशन : (हसते) सरला तेरा पेट नीकल गया हे.. क्या विरजीको तुमपे सक नही हुआ..?

सरला : (हसते) किशन.. उनको सकतो होगया हे.. ओर इस बातको लेकर अ‍ेक बार हमारे बीच जगडाभी हुआ हे.. अब उनसे छुपाकर या जुठ बोलके अब कोइ फायदा नही हे.. अ‍ेक बारतो उनसे जगडा करके बातको टालदीया.. लेकीन अब मे सोच रही हुं उसे सबकुछ खुलकर बता दु.. लेकीन आपनेभी अभी तक नही बताया.. की अपने दोस्तको आपने कीस बातकी सजा दीहे.. अबतो बतादो ताकी मे उसे बात कर सकु.. मुजे पता हे जब उनसे बात करुगी तब हम दोनोही अलग होजायेगे.. तब आपकोही मुजे सम्हालना हे.. देखना बाबा मेने आपकोही अपना पती माना हे उनको आज तक पता नही चलने दियाकी भानुभी हमारा लडका हे..

किशन : (होंठ चुमते) सरला.. विरजीने मेरी मुह बोली बहेन भुमीकाके साथ गलत कीया हे.. उनका बलात्कार कीया हे.. बस उसीके कहेनेपे मेने विरजीसे बदला लीया हे.. हम सभी कोलेजमे दोस्त थे.. ओर विरजीने दोस्तीमेही गलत कीया.. अगर वो उनसे प्यार करती या बीना प्यार उनकी सहमतीसे सेक्स करती तो हमे कोइ अ‍ेतराज नही था.. लेकीन विरजीने उनका अपहरण करके उनके साथ बलात्कार कीया..

सरला : (मुस्कराते) सच कहेते हो..? क्या आपकी मुह बोली बहेनके लीये इतना बडा कदम उठालीया.. की अपने दोस्तके साथही.. हालाकी मे मानती हु इसमे मेरीही सहमती थी.. क्युकी सादीके दिनही मुजे पता चल गयाकी विरजी अ‍ेक नामर्द हे.. तभीभो मेने आपसे गांधर्व सादी करली.. ओर आपनेभी मुजे अ‍ेक बीवीही तराह हर सुख दीया ओर मुजे सम्हाला.. फीरभी मनमे कुछ सवाल आ रहे हे.. क्या मुजे सचाइ बताओगे..?

किशन : (हसते) अब कोनसी सचाइकी बात कर रही हे..? मुजे खुलकर बता..

सरला : (हसते) किशन आपकी खुदकी बहेनसे सादीसे पहेलेही आपका रीलेशन हे.. ओर सादीसे पहेलेही आपने उसे प्रेगनेन्ट भी करदीयाथा.. तो फीर येतो मुह बोली बहेन हे.. क्या उनको सचमे बहेन मातने हो..? की बात कुछ ओरही हे.. क्युकी मे जानती हु विरजीके साथ आपकी तीन पीढीयोसे रीलेशन हे ओर आप विरजीको अपना खास दोस्त समजते हो.. धंधेमे भी आपने उनको साथ रखा हे.. फीरभी अ‍ेक मुह बोली बहेनके कहेनेपे इतना बडा फैसला लीया..? बात कुछ समजमे नही आइ.. हें..हें..हें..

किशन : (गंभीर होते) सरला वो मे तुजे अभी नही बता सकता.. बस कुछ दिन इन्तजार करले.. अ‍ेक दिन तुजे सब सचाइ बता दुगा.. ओर कुछ राज हमे राज ही रहेने देना चाहयी.. भुमी आजभी मेरी बहेन हे.. बस मे तुजे अभी सीर्फ इतना ही बता सकता हु..

तब बहार विरजी सब बाते सुनकर सोक्ट हो जाता हे.. ओर उसे बहुत दुख होता हेकी उनके दोस्तने ही उनके साथ धोखा कीया.. ओर उनकी अ‍ेक गलतीकी इतनी बडी सजा देदी..? तभी उनको सीनेमे दर्द होने लगा ओर वो वही सीनेपे हाथ रखके नीचै बेठ गया.. तब कुछही देरमे उसे किशनकी कारकी आवाज आइ तो वो समज गयाकी किशन चला गया हे.. ओर वो बडी मुस्कीलसे घरमे आगया ओर चुपचाप भानुके कमरमे जाके खटीयापे लेट गया.. ओर आंसु बहाते सोचता रहा..

किशनके साथ धमासान चुदाइ करके सरलाभी थक गइथी.. ओर वो नहाने चली गइ तब पीछेसे विरजी आकर सो गयाथा.. ओर सरलाभी नहाकर अपने बेडरुममे चली गइ ओर सो गइ.. तब रातमे भानुभी घर आगया.. तब सरला कीचनमे खाना बना रहीथी.. उनको पताही नही थाकी विरजी भानुके रुममे सोया हुआ हे.. ओर भानु हाथ मुह धोकर अपने रुममे चला गया.. ओर वो जैसेही अंदर गया.. तो अंदर जातेही सोक्ट होगया.. ओर जोरोसे चीलाके सरलाको बुलाने लगा..

क्युकी विरजीके मुहसे जाग नीकल रहेथे.. ओर वो मर चुकाथा.. तब सरलाभी दोडके आगइ ओर विरजीको अ‍ैसी हालतमे देखकर गभरा गइ.. फीरतो सरलाने किशनको फोन करके बुला लीया ओर भानुनेभी डोक्टरको बुला लीया.. तब डोक्टरने उसे चेक करके केह दियाकी उनको दिलका दौरा पडा हे ओर मर चुका हे.. फीरतो सबने मीलकर विरजीको अंतीम विदाइ देकर उनका दाह संस्कार कीया.. ओर सब वापस घरपे आगये.. तब सरलाका पेट देखकर सब यही कहेने लगेकी विरजी अपने दुसरे बच्चेका मुह नही देख पाया..

ओर समय बीतने लगा.. सरला अब दुनीयावालोकी नजरमे विधवाकी जींदगी बीताने लगी.. लेकीन कीसीको ये बातकी भनकभी नही लगीकी वो अभीभी किशनकी सुहागनके रुपमे किशनके साथ उनका बीस्तर गरम करते अपना संसार चला रही हे.. ओर उनके साथ वो हब सुख भोग रही हे जो अ‍ेक सादीसुधा ओरत अपने पतीसे सुख पाती हे.. ओर समयके साथ भानुभी देवायतका दोस्त होकर उनके साथ धंधेमे जुड गया..

ओर अ‍ेक दिन विमलाने बच्चेको जनम देदीया.. ओर वोथा लखन.. तब साथमे सरलानेभी लताको जनम देदीया.. ओर सब अपनी लाइफ रुटीन जीने लगे.. तब लखन अ‍ेक सालका होगया तब किशनने विमलाको फीरसे पेटसे करदीया.. ओर ठीक नव महीनेके बाद विमलाने फीरसे पुनमको जनम देदीया.. ओर इसी तराह समय बीतने लगा ओर बच्चे बडे होते गये.. आज लखन ओर लता पुनम काफी बडे होगये थे..

अबतो देवायतभी सहेरमे सब कुछ सेट करके वहा कीसीको पार्टनरमे रखकर वापस गांवमे आ गयाथा ओर देवायत ओर भानुने मीलकर किशनका पुरा कारोबार सम्हाल लीयाथा.. इसी बीच मंजु ओर देवायत समय समयपे मीलते रहे.. ओर पती पत्नीका हर सुख भोगते रहे.. इस बातका पता अब नीर्मलाकोभी चल गयाथा.. ओर उसने इस बारेमे राजीवसे बात करली.. ओर मंजुसे मीलकर अपनी गलतीको मानली.. फीर नीर्मलाने मंजुकी सादी राजी खुसीसे देवायतके साथ करवानेका फैसला करलीया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ८२

अबतो देवायतभी सहेरमे सब कुछ सेट करके वहा कीसीको पार्टनरमे रखकर वापस गांवमे आ गयाथा ओर देवायत ओर भानुने मीलकर किशनका पुरा कारोबार सम्हाल लीयाथा.. इसी बीच मंजु ओर देवायत समय समयपे मीलते रहे.. ओर पती पत्नीका हर सुख भोगते रहे.. इस बातका पता अब नीर्मलाकोभी चल गयाथा.. ओर उसने इस बारेमे राजीवसे बात करली.. ओर मंजुसे मीलकर अपनी गलतीको मानली.. फीर नीर्मलाने मंजुकी सादी राजी खुसीसे देवायतके साथ करवानेका फैसला करलीया....अब आगे

तब मंजुने देवायतको फोन करके सारी बात बतादी ओर दोनोने सादी करनेका फैसला करलीया.. तब दुसरे दिनही सुबह किशनके फोनकी रींग बज उठी ओर वो खुस होते बाते करने लगा.. तभी देवायत समज गयाकी ये राजीवअंकलका फोन हे.. ओर दोनोके बीच सादीकी बातभी होगइ.. अ‍ेक महीनेके बादकी तारीख भी पकी करली.. तब विमला भी बहुत खुस होगइ.. ओर दोनोके घरपे सादीकी तैयारीया सुरु होगइ..

इसी बीच ना मंजुको पता चलाकी उनमे कुछ शक्तिया आचुकी हे.. जो बाबाने स्थापीत कीथी ओर नाही देवयातको पता चलाकी उनके लींगमे जडी बुटीकी वजहसे कीतना बडा बदलाव आचुका हे.. दोनोके अंदर बहुतही आकर्सण आचुका था.. मंजु कीसी अप्सराकी तरह दीखने लगीथी.. उनके चहेरेपे काफी नीखार आ चुकाथा.. तो अब देवायतभी कामदेवकी तराह दीखने लगाथा..

उनको देखते कोइभी लडकी हो या ओरत उनकी ओर आकर्शीत होने लगी थी.. सब मनही मन देवायतको पानेकी कामना करने लगी थी.. सभी ओरते देवायतके अ‍ेकही इसारेसे उनके नीचे लेटनेको तैयार रहेती थी.. ओर देवायतभी उनका फायदा उठाने लगा.. कोइभी ओरत या लडकी सामनेसे आती तो उनकी हर इच्छा पुरी करदेता.. वो अबतक कइ ओरतो ओर लडकीयोको चुद चुकाथा..

इस बातपे उनकी मां विमलाभी अन्जान नही थी.. उनकोभी देवायतके व्यक्तीत्वपे अभीमान होने लगाथा.. ओर वो अ‍ेक राजाकी फेमीलीहे तो देवायतका सबपे हक बनता हे यही सोचते वो देवायतपे गर्व करती रही.. ओर खुदभी देवायतके व्यक्तीत्वसे प्रभावीत हो चुकी थी.. लेकीन देवायत उनका बेटा था.. तो कुछ मर्यादा माननेको मजबुरथी.. जबभी देवायतको देखकर उतेजीत होजाती तब वो किशनसे जमकर चुदाइ करवा लेती..

उधर जबसे देवायत नीर्मलासे बात करके आया तबसे वो नीर्मलाके घर कभी नही गया.. देवायत ओर मंजु हर दीन फोनपे ही बात करते रहे.. ओर मंजुभी आयेदिन सहेरमे जाकर देवायतसे उनके बंगलेपे मीलती रही.. ओर दोनो वहा मीया बीवीकी तराह पुरे दिन साथमे रहेते ओर जमकर चुदाइ करते.. अब मंजुके सरीरमेभी काफी बदलाव आ चुकाथा.. उनका सरीर अब काफी भरावदार दीखने लगाथा.. जैसे कोइ सादीसुधा ओरत दिखती हो..

तो दुसरी ओर नीर्मलानेभी सादीके कामके लीये अपनी छोटी विधवा बहेन चंदाकोभी अपने घर बुला लीयाथा.. जो उनकी सादीके बाद तीन सालमेही बच्चेको जन्म देकर विधवा हो गइथी.. तो दुसरी ओर सृतीभी अपनी डोक्टरकी पढाइ कर चुकीथी.. तब देवायतने उनकेही मकानपे बने अ‍ेक आलीसान बील्डीगंमे अपने दोस्तको कहेकर सृतीको क्लीनीकके लीये रेन्टपे जगह दीलवादी.. ओर सृतीने वही अपनी लेडीसके लीये क्लीनीक खोलदी थी.. ओर मंजुने अपनी सादीमे सृतीकोभी जल्द घरपे आनेका नीमंत्रण दे दीया..

ये सब माहोल देखते भावनाभी सदमेसे बहार आगइ थी.. ओर उसने सुसाइडका विचार त्याग दीयाथा.. लेकीन उनके दीलसे आजभी देवायत बहार नही नीकल पाया.. उनका बोयफ्रेन्ट नहीतो जीजाजी ही सही.. यही सोचकर वो आजभी देवायतको इमेजींग करते उंगलीसे अपने आपको सांत करती थी.. अ‍ेकको छोडके सभी खुस थे.. बस वो अ‍ेक नीर्मला थी.. जो बहारसे खुस होनेका दीखावा कर रहीथी.. ओर अंदरसे अपने आपको कोस रही थी.. उनको अब देवायतकी कमी महेसुस होने लगी थी..

क्युकी वो देवायतके बारेमे काफी कुछ सोच चुकीथी.. नीर्मलाको देवायतकी अ‍ेक अ‍ेक बात सही लगी.. ओर उनको अपनी गलतीका अहेसास हो चुकाथा.. जब वो ओर राजीव सोने चले जाते तब कभी कभी राजीव उनको प्यार करने लगता.. तब वो राजीवकी जगाह देवायतको इमेजींग करती ओर दोनो चुदाइ करते.. तब यही सोचतीकी वो देवायतसे चुदवा रही हे.. जब वो राजीवसे प्यासी रेह जाती..

तब उसे होस आताकी वो केवल देवायतके सपने देख रही हे.. जब राजीव नीर्मलाको चोदकर उसे प्यासी रखके सो जाता तब वो नंगीही पडी रेहती ओर आंसु बहाते देवायतके बारेमे सोचने लगती.. लेकीन अब बहुत देर होचुकी थी.. वो रातमे करवटे बदल बदलके मनमे सीर्फ अपनी गलतीको कोसती रहेती.. अबतो हर रात यही सब सोचते वो नींदकी आगोसमे चली जाती..

ओर आखीर वो वक्तभी आगया.. जब किशन ओर विमला देवायतकी बारात लेके आये.. तब भानु देवायतकी सादीमे खुब नाचा.. तो सरलाभी सजधजके बारतमे आइथी.. तब चंदाने भी पहेली बार देवायतको देखा ओर उनका व्यक्तीत्व उनका सरीर सब देखके विधवा होनेके बावजुदभी चंदाका दील मचलने लगा.. उनकी दिलकी धडकन बढ गइ.. ओर वो बार बार देवायतको ही देखती रही..

तब उनको नही पताथाकी अ‍ेक दिन उनकी भांजी मंजुलाके कहेनेपेही वो देवायतकी बीवी होजायेगी.. आज कइ महीनोके बाद उनकी चुतमे हलचल तेज होगइ.. उनकी चुत देवायतको देखते लगातार पानी छोडने लगीथी.. जैसे अपने यारको पहेचान गइहो.. ओर वो बार बार बाथरुममे जाने लगी.. ओर दो तीन बारतो अपनी चुतमे उंगली डालकर अपने आपको सांत कर चुकी थी..

तबभी नीर्मलाकी हिंमत नही हुइकी वो कीसीके सामने जाये.. ना वो किशनसे तो नाही विमलासे तो नाही देवायतसे फेइस कर पाइ.. ओर उसने सादीका सब कार्य अपनी बहेन चंदासे करवाया.. वो सीर्फ अ‍ेकही बार राजीवके साथ कन्यादान देने बहार आइ.. तब विमलाने उसे देखा.. ओर वो सोक्ट होगइ.. क्युकी नीर्मला आजभी अ‍ेक अप्सराकी तराह सजधजके आइथी ओर वो पहेलेसेभी ज्यादा खुबसुरत होगइ थी..

लेकीन नीर्मलाने अ‍ेकबारभी सर उठाके कीसीके सामने नही देखा.. तब मंजुके पास सृती ओर चंदाभी सजधजके बैठीथी.. जब नीर्मलाने मंजुका कन्यादान करलीया तब वो वापस अंदर रुममे चली गइ.. ओर उनकी आंखोमे आंसु रुके नही रुकते थे.. कन्यादान देते समय वो बार बार नजर उठाके देवायतकी ओर देखती रही.. तब उनकी आंओमे देवायतको पस्च्यातापके भाव साफ दीख रहे थे.. जीसे देखते देवायतभी अ‍ेक पलके लीये वीचलीत होगया था.. उनको तब नीर्मलापे बडी तरस आने लगीथी..

लेकीन उसनेभी अपने आपको बडी मुस्कीलसे सम्हाल लीया.. अब उसने अकेलेमे नीर्मलासे कभी नही मीलनेकी ठानली.. तो दुसरी ओर चंदाभी देवायतकी ओर आकर्शीत होते अपने कपडे चेन्ज करके आगइ.. आज ब्लेक सारीमे वो कयामत लग रहीथी.. सभी मर्द चंदाको ही देखते रहे.. तो चंदा देवायतको लुभानेकी पुरी कोसीस करनेमे लगी हुइथी.. ओर बार बार देवायतके साथ मस्ती मजाक करते अपने जलवे दीखाते ईधर उधरका कामुक इसारा कर रहीथी.. उन इसारोको देवायतभी भली भांती जान चुकाथा..









ओर मनही मन चंदाकी ओर ढलने लगाथा.. अबतो देवायतका लंडभी चंदाको देकर बगावतपे उतर आयाथा.. जबभी चंदा देवायतके साथ हसी मजाक करती तब देवायतका लंड पेन्टके अंदरही तांडव मचाते खडा होने लगता.. तो दुसरी ओर चंदाभी देवायतको लुभानेमे पुरी तराह कामयाब हो चुकीथी.. इधर सृती ओर भावनाभी देवायतके साथ जीजु जीजु करते हसी मजाक करती रही..

सृती ओर भावनाभी देवायतसे काफी प्रभावीत हो चुकीथी.. देवायतभी सृतीको भली भांती जानता था.. वो पहेली बार सृतीके घरही तीन दिन रुकाथा ओर वही आश्रममे सादी करके सृतीके घरपे मंजुके साथ सुहागरात मनाते पहेली बार मंजुसे फीजीकल हुआथा.. इसीलीये वोभी सृतीके साथ हसी मजाक करता रहा..

ओर सृती ओर चंदा देवायतसे काफी खुल चुकीथी.. ओर जीजा साली वाली मजाक पे उतर आयेथे.. तब विमला सब देखतीही रही.. उनको अ‍ेक अ‍ेक परीको देखके ज्वेलेसी फील होने लगी.. इनकोतो पताही नही थाकी सब लडकीया उनके बेटे देवायतके पीछे इतनी पागल होगी.. तब पहेली बार वो देवायतकी ओर गौरसे देखने लगी..

तब देवायत उनको बहुतही हेन्डसम ओर आकर्सीत दीखने लगा.. ओर वो सरमा गइ.. तब लखन पुनम ओर लता भी काफी बडे दीख रहेथे ओर मंजुके साथ भाभी भाभी कहेते मजाक करते रहे.. कहेते हेना लडकीया जल्दी बडी होजाती हे.. तब पुनम ओर लताभी टीनेजर हो चुकी थी..

लखन ओर पुनम दोनोही सहेरमे रहेकर अपनी पाइ कर रहेथे.. फीरतो फेरे हुअ‍े तो पुनम लता ओर लखनने दोनोके उपर खुब फुल बरसाये.. तो दुसरी ओर राजीव किशन दोनोही बहुत खुस होते अ‍ेक दुसरेके साथ बाते करते रहे.. इसी तराह देवायत ओर मंजुकी सादी संपन होगइ..

तब सृती ओर चंदाने देवायतको पर्सनल मीलके अपने घर आनेका बहुत आग्रह कीया.. तो देवायतनेभी दोनोके आग्रहको सहज स्वीकार करलीया तब दोनोही खुस होगइ तो मंजुभी सरमाकर हसती रही.. जब बिदाइकी बारी आइ.. तब नीर्मला मंजुको गले लगाकर खुब रोइ..

ओर धीरेसे उसे माफ करनेको कहेते देवायतकोभी उसे मांफ करनेको कहेने लगी.. फीर मंजु भावना सृती ओर उनकी चंदामौसीको मीलकेभी खुब रोइ.. तब चंदाने दोनो हसबन्ड वाइफको घरपे खानेके लीये आनेका न्योता दे दीया.. तब देवायतभी उनके साथही था.. जब जानेका समय हुआ तब नीर्मलाने आंसु बहाते देवायतकी ओर देखा.. ओर देवायतकी ओर दोनो हाथ जोडलीये.. तब देवायतके आंखसेभी आंसु टपक गये ओर वो जटसे बहार नीकल गया..

उस रातभी देवायत ओर मंजुने अ‍ैसी ही सुहागरात मनाइ जैसी पहेली बार सृतीके घर सादी करके मनाइथी.. दोनोही पहेली बार मील रहेथे तब सृतीने कैसे मंजुका अ‍ेक दुल्हनकी तराह शींगार कीयाथा.. ओर खुद शींगार करके तैयार होेकर कीसी अप्सरासे कम नही लग रहीथी..

वो बार बार नैन चुराते चोर नजरसे देवायतके पेन्टके उभारको देख रहीथी.. तब अ‍ेक बार देवायतका भी मन बहेक गयाकी वो सृतीको अभीके अभी यही पटकके चोदले.. ओर आजभी सृतीनेही मंजु चंदा ओर भावुको तैयार कीयाथा ओर खुदभी परी लग रही थी..





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जब देवायत देर रात अपने रुममे गया.. तब पहेली सुहागरातकी तराह मंजु बेडके बीच बैठीथी लेकीन तबकी अंजु ओर अबकी मंजुमे सीर्फ इतना फर्कथा की तब वो कुआरी कलीथी.. ओर आजकी मंजु कलीसे फुल बन चुकीथी ओर बहुतही मेच्योर होकर चुदाइके मामलेमे बहुतही अनुभवी हो गइथी.. ना जाने दोनो कीतनी बार चुदाइ कर चुकेथे लीकीन देवायत आजभी मंजुको चोदताहे तो अ‍ैसाही लगता हे वो मंजुको पहेली बार चोद रहा हे..

तब मंजुको नही पताथाकी उनके अंदर कइ शक्तिया वीद्यमान होचुकी हे.. मंजु पीछले जन्मकी तराह इस जन्ममेभी हर बारकी चुदाइके बाद जबभी नहाती अपना कौमार्य फीरसे कुआरी लडकीकी तराह वापस पालेती.. ओर इस बातसे मंजु अंजान थी.. इसीलीये जबभी मंजु चुदवाती तब कुआरी कलीकी तराह चीखती चीलाती.. जैसे पहेली बार चुदाइ करवा रही हो... ओर देवायत बेडपे आगया ओर बेठेही मंजुका घुंघट उठाने लगा.. तब मंजुने उसे हसते हुअ‍े हाथ जटकते रोक लीया..





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देवायत : (हसते) बेबी क्या हुआ..? अ‍ैसा क्यु कर रही हो..?

मंजुला : (हसते) अ‍ेक बार मेरे साथ सुहागरात मना चुके हो.. फीरभी नही पता की पहेले बीवी दुघ पीलाती हे ओर बादमे बीवीको बडीया गीफ्ट देनी पडती हे.. तब जाके बीवीकी मुह दीखाइ होती हे.. लीजीये दुघ पीजीये.. ओर पहेले मेरी गीफ्ट दीजीये.. फीर आप मुजे छु सकते हे.. वरना आज अ‍ैसेही सोजाइअ‍े..

देवायत : (हसते) मंजु अ‍ैसा थोडी चलता हे..? हम कहा पहेली बार सुहागरात मना रहेहे.. येतो..दुसरी..

मंजुला : (जुठा गुसा करते) हां हां पता हे.. आपने तबभी मुजे कोइ गीफ्ट नही दीयाथा.. लेकीन आज अ‍ैसेही मेरा मुह देखनेको नही मीलेगा.. लीजीये पहेले दुध पीलीजीये.. फीर लाइअ‍े मेरी गीफ्ट..

कहेते मंजुने घुंघटमेसे ही अ‍ेक दुधका ग्लास नीकाला ओर देवायतको पीलाने लगी जेसेही आधा ग्लास रेह गया तो मंजुने ग्लास वापस खीच लीया ओर खुद पीने लगी.. फीर ग्लासको साइडमे रख दीया ओर वापस सही बैठ गइ.. तब देवायतभी सब तैयारी करके आयाथा.. ओर उसने मुस्कराते हुअ‍े जेबसे अ‍ेक डायमंड नेकलेस नीकाला.. जो उनकी मां विमलाने उसे मंजुको देनेके लीये दीयाथा.. ओर देवायतने बोक्ष उनके हाथपे रख दीया तब मंजुने खुद घुंघट हटा दीया ओर खुस होकर मुस्कराते देखने लगी..

जैसेही डायमंड सेटको देखा तो उनकी आंख चौडी होगइ ओर खुसीसे देवायतसे बाहोमे लीपट पडी.. तब देवायतभी हसने लगा.. ओर मंजुको कसके बाहोमे भीच लीया.. तब मंजुके मुहसे आउच.. नीकल गया.. ओर मंजुने बोक्षमेसे सेट नीकालके देवायतके हाथोमे थमा दीया.. ओर आंखोके इसारोसे अपने गलेमे पहेनानेको कहेने लगी.. तब देवायतने हसते सेट मंजुके गलेमे पहेना दीया ओर मंजुकी ओर देखने लगा तो मंजु गलेसे सेटको हाथोमे लेकर देखने लगी ओर मुस्कराती रही.. तब देवायत बेडसे उतर गया..

मंजुला : (देवायतको देखते) अरे आप कहा जा रहे हे..? क्यु उतर गये..?

देवायत : (फटाफट अपने कपडे नीकालते) यहा मेरा फटा जा रहा हे ओर तुजे सेट देखनेकी पडी हे आजतो तु गइ.. बहुत नखरे करलीये.. चल फटाफट अपने सब कपडे नीकाल.. कीतना तडपायेगी मुजे..?

मंजुला : (जोरोसे हसते भागनेकी तैयारीमे) अरे आज मे थोडी नीकालुंगी.. हें..हें..हें.. आज आपको जरुरत हे खुद ही नीकाल लीजीये.. हें..हें..हें..

कहेते मंजुभी जोरोसे हसती हुइ दुसरी ओरसे बेडसे उतर गइ ओर भागनेके लीये इधर उधर देखने लगी तब देवायत पेन्ट नीकालतेही बेडपे चड गया ओर मंजुको पकडने उनके पीछे भागने लगा.. तो मंजुभी जोरोसे हसती हुइ बेडके आसपास इधर उधर भागने लगी ओर हसती रही..

तब बेडके बीच उपरसे नीकलते देवायतने मंजुको दबोच लीया.. तो मंजु जोरोसे हसते उनसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. तब देवायतने पीछेसे बाहोमे जकडते उनको दोनो बुब्स मसल दीये ओर मंजु चीखते जटसे आगे पलट गइ ओर बाहोमे समा गइ..

तभी देवायत उसे गोदमे उठालेता हे ओर बेडपे जाके पटक देता हे ओर नंगाही उनके उपर लेट जाता हे तब मंजु हसते हुअ‍े देवायतको जोरोसे अपनी बाहीमे भीच लेती हे.. ओर देवायतकी आंखोमे अ‍ेक नजरसे देखते उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगती हे.. ओर दोनोके होंठ मील जातेहे तब मंजु आंधी आंख चडाके मदहोस होने लगती हे ओर देवायत उनकी सारी हटाके ब्लाउस उचा कर लेता हे..

ओर ब्रा उपर करते बुब्सको बहार नीकाल लेता हे.. तब उनके गोरे बुब्स बहारकी ओर जांकने लगे.. तब मंजु सरमके मारे पानीपानी होने लगी.. ओर देवायत अपना मुह सीधा बुब्सपे लगाते उनकी नीपलको चुसने लगता हे.. तब मंजु अपनी दोनो आंख बंध करते देवायतके सरको बुब्सपे दबाके उनके सरको सहेलाने लगती हे.. ओर सीसकारीया करते कामाग्नीमे जलने लगती हे..

मंजुला : सीससइइइ बस..बस..बस.. जानु पहेले कपडे नीकालदो खराब होजायेगे.. सुबह माजी देख लेगीतो..

देवायत : मंजुउउउ... देखने दो.. मंजु आज मुजे मत रोको.. मुजसे रहा नही जाता.. समाले मुजे तेरी अंदररर.. मंजु आज पुरी रा तुजे सोने नही दुगा..

मंजुला : (मदहोसीमे) हंममम बुच..बुचच.. हां.. आजाओ.. समा.. जाओ.. मुजमे.. इइइइ सीइइइइ आज मंजु आपको पृर्ण समर्पीत होगइ हे.. ओर अब मेरा ये तन.. मन.. धन.. सब आपका हो चुका हे..

तभी देवायत बेडपे बेठ जाता हे ओर मंजुका हाथ खीचके उसेभी बीठा देता हे फीर मंजुकी आंखोमे देखते उनके सब कपडे फटाफट नीकालने लगता हे तब मंजुभी कपडे नीकालनेमे साथ देने लगती हे.. क्युकी मंजुभी काफी गरम हो चुकीथी तो उनकोभी देवायतसे मीलन करनेकी बहुत जल्दी थी.. कुछही देरमे दोनो बीलकुल नंगे होजाते हे तब मंजु सरमाते नंगी होगइ.. वो अबभी पुरे शींगारमे थी.. ओर बेडके बीच बीलकुल नंगी होकर बैठ गइ..





तभी देवायत उसे प्यारसे कंधेसे पकडकर पीठके बल सुलाने लगता हे.. तो मंजुभी पीठके बल लेट जाती हे ओर देवायतभी उन पर जुकते लेट जाता हे ओर मंजुके बुब्स चुमते मसलने लगता हे तब मंजु मदहोसीमे देवायतके सरको सहेलाने लगी.. तभी देवायत चुमते चुमते धीरेसे अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते उनकी चुतपे रख देता हे ओर सहेलाने लगता हे.. तब मंजु मदहोसीमे मचलने लगी.. तो देवायतने धीरेसे अ‍ेक उंगली उनकी चुतमे घुसादी ओर बुब्स चुमते चुतके दानोको उंगलीसे खरोदने लगा..





तब मंजु पागल जैसी होने लगी.. फीर देवायत चुमते चुमते नीचेकी ओर सरकने लगा ओर मंजुकी चुतमे उंगलीसे चोदने लगा.. तो मंजु जोरोसे सीसकारीया करने लगी.. तभी देवायत सीधाही मंजुकी चुतपे मुह लगाते हमला कर देता हे.. तब मंजु छटपटाते चदर पकडके तडपने लगती हे.. ओर देवायत उनकी चुतमे जीभ डालके थोडी देर चाटने लगता हे ओर अचानक जीभको चुतमे घुसा दीया ओर उनकी चुतके भगन्साको छेडने लगा.. तब मंजु पागल जैसी होगइ.. ओर बीन पानी मछलीकी तराह छटपटाने लगी..





तभी उसने हाथ लंबा करते देवायतके बालको पकडलीया ओर अपने उपर खीचके चडाने लगी.. तब देवायत मंजुके होठोको अपनी गीरफ्तमे ले लेता हे.. ओर दोनो वाइल्ड कीस करने लगते हे.. तब मंजुने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया ओर अपनी कमरको जटके देने लगी.. तब उनकी चुतसे अ‍ेक फवारा नीकल गया.. देवायतने उसे बीना चोदेही जडा दीया.. तब मंजुकी सांसे तेज चल रहीथी ओर वो सरमके मारे देवायतसे नजरे चुराने लगी.. तो देवायत अपना लंड मुठीमे पकडते उनके पैरके बीच बैग गया..

मंजुला : (धीरेसे सरमाते) जानु प्लीज.. धीरेसे डालना.. आज आपका ये.. कुछ ज्यादा ही बडा ओर मोटा दीख रहा हे.. क्या कोइ गोली बोली तो नही खाइ..? मुजेतो डर लग रहा हे.. हमारी वो पहेली सुहागरातमे आपनेतो मुजे बेहोस ही करदीया था.. बाबु इनमे कुछ नही होगानां..?

देवायत : नही बेबी.. अ‍ैसा दर्द सीर्फ अ‍ेकही बार होता हे.. बार बार नही.. अब तुजे कुछ नही होगा.. तु क्यु इतना डर रही हे..? हम पहेली बार थोडीना कर रहे हे..

मंजुला : जानु आपसे अ‍ेक बात कहु..? मुजे वो दर्द हर बार होता हे.. जबभी हम फीजीकल होतेहे तब हर बार मे वोही दर्द महेसुस करती हु.. जब हम दोनो पहेली बार मीलेथे तब हुआ था.. क्या मुजमे कोइ प्रोबलेमतो नही होगीनां..?

देवायत : (चुतपे लंड घीसते) नही मंजु.. अ‍ैसा कुछ नही होगा फीरभी तुजे आसंकायेहे तो अ‍ेक बार सृतीके साथ चली जाना.. ओर उसे अच्छी तराह दीखा देना..

अ‍ेक बारतो देवायतभी अपने लंडकी ओर नजर डालके देख लेता हे.. तब उनकोभी अपना लंड पहेलेसे बडा ओर मोटा लगने लगा.. लेकीन अभी मंजुके सामने इन बातोको कहेना उचीत नही समजा.. ओर देवायत मंजुकी चुतमे थोडा लंड फसाके उनपे जुक जाता हे ओर लीपलोक करलेता हे.. तब मंजुभी उनको बाहोमे भीच लेती हे ओर देवायत अपनी कमरको अ‍ेक जोरोका जटका लगा देता हे तब मंजु जोरोसे चीख पडी..

तो लीपलोककी वजहसे चीख देवायतके मुहमे ही दब गइ.. ओर मंजुकी आंखोसे आसुओकी धाराये बहेने लगी.. तभी देवायतने लीपलोक छोड दीया ओर मंजुकी ओर देखा तो मंजु बेहोस हो चुकीथी.. वो आंख बंध करके बेसुध्ध होकर पडीथी.. तब देवायत हाथके बल उचा होगया.. ओर मंजुको कमर हीलाते बेहोसीकी हालतमे ही जोरोसे चोदने लगा.. तबकी मंजुको होसमे ज्यादा तकलीफ ना रहे.. ओर देवायत जोरोसे चोदने लगा तब मंजुके दोनो बुब्स उछलते रहे..





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देवायतने आज मंजुको दुसरी बार बेहोस कर दीयाथा.. वो अपनी पहेली सुहागरातमे भी बेहोस हो चुकीथी.. इसके बाद वो कइ बार देवायतसे चुद चुकीथी.. लेकीन उनको हर बार अ‍ेक कुआरी लडकीकी तराह ही दर्द होताथा.. ओर आजभी वही हुआ.. वास्तमे मंजुमे वो बदलाव बाबाकी दी हुइ शक्तिके बादही आयाथा..

जो मंजु इनको नही पहेचान पाइ.. ओर देवायत उनको चोदताही रहा.. तब थोडीही देरके बाद मंजु दर्दके मारे अपना मुह बीगाडने लगी.. तब देवायत लंडको जडतक घुसाके रुक गया ओर मंजुपे जुकते उनके होंठ ओर बुब्स चुमने लगा..

मंजु : (होंसमे आतेही सीनेपे मुका मारते) कीतने कमीनेहो.. आजभी बेहोसीमे मुजे चोद लीया.. चलो अब सुरु होजाओ.. अब दर्द नही हे.. लगता हे आजतो आप पुरी गीफ्ट वसुल करेगे.. हें..हें..हें..

कहेते दोनोही चुदाइ करते हस पडे.. ओर देवायत मंजुके गलेको चुमते धीरे धीरे सोट मारते मंजुको चोदने लगा तो मंजुभी फीरसे मदहोसीमे छागइ.. ओर सीसकारीया करते देवायतके सरको सहेलाते चुदाइमे साथ देने लगी.. उसने अपने दोनो पैर फैला दीये ओर आंख बंध करते चुदाइका मजा लेने लगी.. मंजु उनकी अ‍ैसीही धमाकेदार चुदाइ तो चाहती थी.. इस चुदाइके लीये वो कीसीभी हदतक जानेको तैयार थी..

चाहे इस चुदाइके लीये उनको अपनी मम्मी पापाका घरही क्यु ना छोडना पडे.. उनकोतो बस देवायतका दमदार ओर तगडा लंडही चाहीयेथा.. जो अभी आंख बंध करके देवायतसे मजेसे चुदवा रहीथी.. तब उनको नही पताथाकी उनकी मम्मी नीर्मलाभी यही तगडे लंडसे कइ बार चुदवा चुकीथी.. ओर आजभी इसी लंडके लीये वो तरस रही हे.. जो उनकी अ‍ेक गलतीने खुदको इस दमदार लंडसे अलग करदीया था..





इस सुहागरात मे मंजु चीखती रही.. चीलाती रही.. फीरभी देवायत उनको आज छोडनेके मुडमे नही था.. अबतक मंजु तीन बार जड चुकीथी फीरभी आज देवायत जडनेका नामही नही ले रहाथा.. वोतो बस हाथके बल मंजुकी चुदाइ कीयेही जा रहाथा.. तब मंजुकोभी देवायतके लंड लेनेको मुस्कील होने लगा..वोभी चाहतीथी की देवायत उनकी चुतको जल्द अपने गाढे पानीसे भरदे.. तभी देवायतने अपनी चोदनेकी स्पीड बढादी..

तो मंजुने अपने दोनो पैर मौडलीये ओर देवायतके कंधोको बाजुसे पकडलीये.. तो देवायत उनके लंडको मंजुकी चुतमे जडतक घुसाके उनके तनसे चीपकनेकी कोसीस करता हे.. ओर वो मदहोसीमे कमरको जडका देते कांपने लगा.. तभी मंजुको अपनी बच्चेदानीपे देवायतका गरम रस महेसुस हुआ.. ओर वोभी उतेजनामे कांपने लगी.. उनका मुह खुलाही रेह गया.. मानो वो कीसी स्वर्गमे चली गइ हो.. ओर वोभी कांपते हुअ‍े देवायतके साथ जडने लगी.. तब देवायत जडते ही मंजुके सीनेपे ढेर होगया..





तब दोनोही पसीनेसे पुरे भीग चुकेथे.. तब मंजु देवायतकी पीठ सहेलाते अ‍ेसेही सीथील पडी रही.. दोनोका कामरस अपनी जगाह बनाते मंजुकी चुतसे नीकलते बहारकी ओर टपकने लगा.. लेकीन आज मंजुको अभी भी अपनी चुतमे देवायतका लंड सख्त महेसुस हो रहाथा.. ओर उनको आस्चर्यभी हो रहाथा.. तभी उनको बाबाने दी हुइ जडी बुटीकी याद आगइ.. जो देवायतको सृतीके घर उनकी पहेली सुहागरातमे ही दुधमे मीलाकर देदी थी.. तब उनके चहेरेपे सरमके मारे हसी आगइ.. ओर मनही मन खुस होने लगी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ८३

तब दोनोही पसीनेसे पुरे भीग चुकेथे.. तब मंजु देवायतकी पीठ सहेलाते अ‍ेसेही सीथील पडी रही.. दोनोका कामरस अपनी जगाह बनाते मंजुकी चुतसे नीकलते बहारकी ओर टपकने लगा.. लेकीन आज मंजुको अभी भी अपनी चुतमे देवायतका लंड सख्त महेसुस हो रहाथा.. ओर उनको आस्चर्यभी हो रहाथा.. तभी उनको बाबाने दी हुइ जडी बुटीकी याद आगइ.. जो देवायतको सृतीके घर उनकी पहेली सुहागरातमे ही दुधमे मीलाकर देदी थी.. तब उनके चहेरेपे सरमके मारे हसी आगइ.. ओर मनही मन खुस होने लगी....अब आगे

तब दुसरी ओर बाजुके रुममे आज विमला किशनके साथ सोइथी.. तो पुरा दिन सब लेडीसको देवायतके पीछे पागल होते देखकर विमलाभी देवायतके बारेमे सोचने लगीकी उनके बेटेके पीछे सब क्यु इतनी पागल हे..? विमला जानती थी अभी देवायत उनकी बीवीके साथ सुहागरात मना रहा होगा.. ओर वो येभी जानती थीकी उनकी बहु मंजुला वास्तमे उनके पती किशनकी ही लडकी हे ओर इस नाते देवायतकी बहेन हे.. विमलाको इस रीस्तेसे कोइ अ‍ेतराज नही था.. क्युकी खुद उसने अपने भाइके साथ सादी कीथी..

अंदर अभी उनका बेटा देवायत उनकीही बहेनके साथ सुहागरात मनाते उनको चोद रहा होगा.. यही सब सोचते विमलाभी उतेजीत होने लगी.. क्युकी वोभी अपने भाइकी बीवी थी ओर उसनेभी सादीसे पहेले अपने भाइसे खुदकी खुब चुदाइ करवाइथी.. जब किशनके साथ पहेलीबार फीजीकल हुइ तब वो कैसे चीलाते बेहोस होचुकीथी.. वही सब सोचते उसे मंजुकी चीखे सुननेकी इच्छा होने लगी..

ओर तब देर रात किशनके सोजानेके बाद देवायतके पास वाले रुममे आके सोगइ.. तब उनको मंजुकी चीखे सुनाइ देने लगी तो मनही मन खुस होगइ.. ओर कातील मुस्कान करने लगी जैसे कोइ नीर्मलासे पुराना हीसाब चुक्ते कर रही हो.. मंजुकी चीखे सुनते वोभी उतेजीत होने लगी..

ओर अपनी चुतको सहेलाते दिवालके सहारे खडी रहेके चुत सहेलाने लगी.. अपनी जवानीके पुराने दिनको मनमे याद करते अपनी चुतमे उंगली घुसाके आंख बंध करके उंगली अंदर बहार करने लगी.. ओर उसे पुरानी सब बात याद आने लगी..





विमला : (चुत सहेलाते मनमे सोचते) क्या दिन थे वो.. मे आश्रममे थी.. तब वहीके लोगोसे पता चलाकी मुजे बचपनमे ---गांवकी ठकुराइन इधर छोडके गइथी.. ओर पहेली बारही मुजे पीरीयड हुआ था.. तब वोही ठकुराइन मुजे मनते करते वापस हवेलीपे लेकर आइ.. तब मुजे सीर्फ इतनाही कहाथाकी तु मेरी कोखसे पैदा हुइ हो.. तुम मेरी बेटी हो.. ये बात सीर्फ हमारी फेमीली तकही सीमीत रखना.. अ‍ैसा मुजे क्यु कहा..? ये बात आजतक मेरी समजमे नही आइ.. तब बाबाभी अपनी साधना पुरी करके वापस आये थे.. मेरे गुरुथे.. उन्हीके कहेनेपे मे ठकुराइनके साथ वापस आगइ..

तब मेने जवानीके देहलीजपे नया नया कदम रखाही था.. तब मेरा किशन.. हाये.. क्या हेन्डसम दीखताथा.. उनका कसरती गठीला बदन.. उनका व्यक्तीत्व.. उनका आकर्षण.. किशनने मुजे पागल करदीया था.. ओर मेभी उनकी ओर खीचतीही चली गइ.. तब सीर्फ मुजेही पताथा की किशन मेरा भाइ हे.. फीरभी मे उनकी ओर खीचती चली गइ.. ओर पताही नही चलाकी मुजे उनसे कब प्यार होगया..

तब मुजे नही पताथाकी वो निर्मलासे भी प्यार करता हे ओर किशन उनकी हरदिन चुदाइ करता हे.. तब दोनो बहुतही आगे बढ चुके थे.. तो मेभी किशनकी ओर ढलने लगीथी.. ओर उनके नजदीक रहेने लगी.. उनका हर काम मे खुद करने लगी.. जैसे वो मेरा पती हो.. मे उनको अपने जलवे दीखानेका अ‍ेकभी मौका नही छोडतीथी.. मे उनके प्यारमे इतनी पागल हो चुकीथी की मै भुल गइकी वो मेरा भाइ हे.. ओर मे उनकी बहेन.. बस यही मनमे थाकी पहेले वो अ‍ेक मर्द हे ओर मे अ‍ेक औरत..

जब प्यार चरमपे होताहेनां? तो मर्द ओर औरतमे रीस्तोकी कोइ अ‍ेहमीयत नही रहेती.. बस दोनोके बीच अ‍ेकही रीस्ता होता हे.. वो हे सेक्स.. मे किशनको रीजानेमे कामयाब रही.. जीनके फल स्वरुप किशनभी धीरे धीरे मेरी ओर ढलने लगा.. धीरे धीरे मेरी मस्तीया करते छेडखानी तक पहोंच गया.. कामके बहाने मुजे कहा कहा छुलेता.. कभी अपने रुममे तो कभी कीचनमे मुजे पकड लेता ओर मेरी मस्तीया करते कभी मेरी चुचीओसे खेलता तो कभी मेरे होंठ चुम लेता.. अ‍ेक दिन नहाने गइथी तब जालीम मेरे साथ बाथरुममे घुस गया..

ओर जालीमने वही पहेली बार मेरी मुनीयाको दबोच लीया.. तब हम दोनोही काम वासनामे जलने लगेथे.. ओर उसी दिन हमने देर रात मेरे रुममे मीलनेका तैय कीया.. तब मेने बडी मुस्कीलसे उनको रातमे मीलनेका वादा करते बाथरुमसे नीकाला था.. तब जाकर वो माना.. ओर मेभीतो उनको मीलनेके लीये तरस रहीथी.. जालीम उसी रात सबके सोनेके बाद मेरे रुममे घुस आया.. ओर दरवाजा बंध करलीया..

तब पहेलीबार रातमे कीसी लडकेको में अकेली रुममे मील रहीथी.. जैसे मेरी सुहागरात हो.. ओर किशनने वही मेरी मांग भरकर मुजसे क्या क्या वादे कीये.. ओर उस रात किशनने अपने विकराल लंडसे पहेली बार मेरा कौमार्य भंग कीया.. ओर मुजे बेहोस कर दीयाथा.. फीरतो हमारे बीच सबकुछ होगया.. जालीम पुरी रात मेरी चुदाइ करता रहा.. में दो दिन ठीकसे चलभी नही पाइथी..

फीरतो अ‍ेक रातभी अ‍ैसी नही गइ की हम दोनोने चुदाइ नहीकी.. मैनेभी किशनको मेरे पीछे इतना पागइ करदीया था की मेरे बगैर उनका जीना मु्स्कील होने लगा.. तब इस बातका हमारी मांकोभी पता चल गया.. ओर दुसरेही दिन सुबह ठाकुर ओर ठकुराइनके बीच क्या बाते हुइ मुजे नही पता.. दोनोही अ‍ेक दुसरोके साथ चुदाइ करते मरे हुअ‍े मीले.. सुबह नही उठे.. बस तब हवेलीमे सीर्फ किशन ओर मेही रेह गयथे..

हम दोनोही सुबह पहेले पहुंचे.. ओर हमने दोनोको अलग करके कपडे पहेनाकर सही कीया.. ओर दोनोका अग्नीसंस्कार कीया.. फीरतो किशन ओर मे दोनोही बीन्दास्त होगये थे.. ओर मौका देखकर दिनमेभी चुदाइ करने लगे.. ओर अ‍ेक दिन मुजे उल्टीया होने लगी.. ओर हम दोनो सहेर जाके सब चेक करवाके आगये.. तब पता चला मे किशनसे प्रेगनेन्ट होगइ हु.. ओर मेने उसे हमारे बच्चेका वास्ता देके बडी मुस्कीलसे मेरे साथ सादीके लीये मजबुर कीया.. ओर हम दोनोने मंदिरमे जाकर सादी करली..

तब गांवमे कीसीको नही पताथाकी वास्तवमे हम दोनो भाइ बहेन हे.. सब यही समजतेथे की ठाकुराइन इस लडकीको आश्रमसे लेकर आइ हे.. ओर मेने निर्मलाको मेरे किशनसे श्रापका बहाना करके दुर करदीया.. तब मुजे उनके साथ क्या क्या जुठ नही बोलना पडा.. ओर किशनको पानेमे मे कामयाब होगइ.. तब मुजे क्या पताथा की नीर्मलाभी मेरी तराह किशनसे प्रेगनेन्ट होचुकी हे.. मेने मेरे किशनको पानेके लीये क्या क्या हथकंडे नही अपनाये.. तब जाकर मुजे मेरा भाइ पतीके रुपमे मीला..

यही सब सोचते विमला जोरोसे चुतमे उंगली करने लगी.. ओर विमलाकी चुतसे फवारा नीकल गया.. तब वो सरमींदगी महेसुस करते जटसे अपने रुममे चली गइ.. फीर किशनके पास लेटतेही उनकी धोती उची करदी तब किशन ओर उनका लंड दोनोही सोया हुआथा.. फीरभी विकराल लंडको अपनी मुठीमे पकड लीया ओर होले होले सहेलाने लगी तब कीशनका लंड हरकतमे आने लगा ओर खडा होगया..

तब विमलाने देर ना करते किशनके लंडको अपने मुहमे लेलीया ओर जोरोसे अंदर बहार करते चुसने लगी.. तब किशनभी नींदसे जाग गया ओर विमलाकी हरकत देखने लगा ओर कोनीके बल बैठ गया.. वो बेठते मुस्कराते हुअ‍े विमलाकी हरकतको देखता रहा.. जब लंडने सख्त होते अपना विकराल स्वरुप लेलीया तब विमला लंडको मुहमे अंदर बहार करते कीशनकी ओर देखती हे तब लंडको मुससे बहार नीकालते कहा..

विमला : (लंड मुहसे नीकालते) जाग गये आप..? चलीये मुजे जल्दसे अ‍ेक बार ठंडी कर दीजीये.. लगता हे देवा बीलकुल आपपे गया हे.. हमारी बहु कीतनी चीलाती हे.. सालीने चीख चीखकर मुुजेभी गरम करदीया..

किशन : (हसते) विमु तो फीर तु वहा उनकी चीखे सुनने गइ ही क्यु..? तु आजभी उतनी ही चुदकड हे..

विमला : (पैर फैलाके लेटते) हां हां पता हे मुजे.. मे चुदकड हु लेकीन सीर्फ आपके लीये.. समजे.. कच्ची कलीथी मे.. तबसे आपसे चुदवा रही हु.. तो आपके दमदार लंडकी आदत पड गइ हे.. अब डालभी दो कीतना तडपाओगे.. वहा वो अपनी बहेनको चोद रहा हे तो आपभी यहा अपनी बहेनको चोद दीजीये.. चलीये..

कहातो किशन हसते हुअ‍े विमलाके पैरके बीच बैठ गया ओर लंड पकडके विमलाकी चुतपे सेट करते बेठे बेठेही घुसा दीया तब जाके विमलाको राहत महेसुस हुइ ओर वो आंख बंध करते मु्सकराती रही.. विमला आजभी अ‍ेक गदराये बदनकी मालीकथी.. उनकी चुत अभीभी अ‍ेक लडकीकी तराह कसी हुइथी.. पुरे दिनमे ओर रातमे किशन उनको अ‍ेक बार चोद नही लेता तबतक उनको चेइनही नही मीलता..

वो किशनसे हर वक्त चुदवानेके लीये तैयार ही रहेती.. उन्होने बडीही सीफततासे अपने ओर किशनके बीचके कांटेको नीकाल दीयाथा.. जब वो आश्रमसे आइ तब नीर्मला ओर किशनका प्यार चरमो पर था.. ओर उनको नीर्मलासे बहुत जलन हो रहीथी.. जब उनके माता पीताकी गैरसमज दुर होते ही उनको वापस हवेलीपे लेकर आये तब कुछही दीनोमे दोनो गुजर गये ओर कुछ राज अपने साथ ले गये..

तब सीर्फ विमलाकोही पताथाकी किशन उनका भाइ हे फीर भी उनका गठीला बदन देखके उनकी ओर आकर्सीत होगइ ओर हमेसा हमेसाके लीये भाइके साथ रहेके चुदवानेका फैसला कर लीयाथा.. ओर नीर्मलाको बडी सीफततासे अपने रास्तेसे हटा दीयाथा.. किशन विमलाकी धमासान चुदाइ कर रहा था.. तबतक विमला दो बार जड चुकीथी ओर आखीर किशनने मिलाकी चुतको अपने पानीसे सीचके हरी भरी करदी तब जाके विमलाको राहत महेसुस हुइ.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सो गये..





तब देवायतके रुममे मंजु करवट लेके सोइ हुइथी हुइथी तब देवायत उनको पीछेसे चुतमे लंड डालके अभी भी धनाधन चोदेही जा रहा था.. तब बीच बीचमे मंजु सर उठाके देवायतके होंठ चुम लेतीथी.. आज दोनोकी ओरसे आग बराबर लगी हुइ थी.. दोनोही सुबह तक अ‍ेक दुसरेको छोडनेके मुडमे नही थे.. ओर छोडेभी क्यु आखीर आज उन दोनोकी सुहागरातजो थी.. मंजुभी पुरी रात देवायतसे चुदवानेका मन बना चुकी थी..





देवायत कभी मंजुको घोडी बानते चोदता रहा तो कभी पेटके बल सुलाके पीछेसे लंड घुसाके चोद लेता आज मंजुकी हर अ‍ेन्गलसे चुदाइ हो रहीथी.. अबतक मंजु कीतनी बार जडी होगी उनकोभी नही पताथा.. तो देवायतभी अभी तक मंजुकी चुतको चार बार अपने कामरससे भर चुकाथा.. दोनोके बीच रात भर चुदाइ होती रही.. ओर सुबह ४.३० बजे दोनो नहाने चले गये तब अक बार वहाभी मंजुकी खडे खडे चुदाइ होगइ..

मंजुला : (थकी हुइ आवाजमे) जानु.. अब बसभी करो.. आजतो आपने मुजे तृप्त करके थका दीया.. इतनी चुदाइतो हमने हमारी पहेली सुहागरातमे भी नहीकी.. आज आपको क्या हो गयाथा..? मुजे छोडते ही नहीथे.. देखो मेरी चुतकी क्या हालत करदी हे आपने..

देवायत : (हसते) बस बेबी अब यही प्यार तुजे रोज मीलने वाला हे.. अब तु मेरी बीवी बनके घरजो आगइ हे.. अबतो हर रात हमारी सुहागरात होगी.. ओर दिनमेभी तैयार रहेना.. तुजे कभीभी चोद लुगा..

मंजुला : (हसते) बीलकुल पागल होगये हो.. सच बताना वहा सादीमे कीसको देखके इतने गरम होगये.. कही मौसी या फीर आपकी दोनो सालीया सृती भावना.. कौन थी कमीनी जो मेरी चुतकी धजीया उडानेको आपको मजबुर कीया.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) यार कोइ नही थी.. तुम ओरते आपसमे सक करते जलती बहुत हो.. हें..हें..हें..

मंजुला : (सरमाते हसते) हां तो सक तो करुगीनां.. कमीनी फटाका बनके आपके आसपासही घुम रही थी.. ओर मौसीतो.. हदही करदी.. आपको कैसे कैसे इसारा करती थी.. जानु अ‍ेक बात कहु.. मेने मौसीको विधवा होनेके बाद इतना खुस कभी नही देखा.. वो सीर्फ मेरी मौसीही नही मेरी सहेलीभी हे..

देवायत : (हसते) हां वो बहुतही खुबसुरतभी हे.. ओर मेरी दोनो सालीयाभी कम नही थी..

मंजुला : (जुठे गुसेसे सीनेमे मुका मारते) कीतने कमीनेको.. पहेले मुजेतो ठीकसे चोदलो फीर दुसरीके बारेमे सोचना.. बस कोइ अच्छी लडकी देखी नही ओर लाळ टपकाना सुरु.. हें..हें..हें..

अ‍ैसेही मजाक मस्ती करते दोनोने नहा लीया.. ओर नाइट सुट पहेनके दोनो अ‍ेक दुसरोकी बाहोमे चीपकके सो गये.. ओर अ‍ैसेही दिन गुजरने लगे.. इसी बीच नीर्मलाने देवायतसे फोनसे कोन्टेक्ट करनेकी बहुत कोसीसकी लेकीन देवायतने कभी उनका फोन नही उठाया..

तब नीर्मलाने कइ बार छुपकेसे फुट फुटके आंसु बहाते रो भी लीया.. सादीके कुछ दीनके बाद मंजु अपने माइके गइ तब नीर्मलाने मंजुसे बात करते देवायतकी माफी मागनेकी मनतेभी की.. लेकीन मंजुने देवायतसे मीलके बात करेगी.. कहेके बातको टाल दीया..

जब देवायतको मंजुको माइकेमे पहेली बार लेने जानाथा तोवो आधे घंटे पहेलेही सामको चला गया ताकी राजीव अंकल ओर घरके सभी सदस्य घरपे हो.. तब वो वहा गया तब नीर्मला बहुत खुस होगइ ओर देवायतसे बात करनेकी हर कोसीस की लेकीन देवायतने उनके सामने देखा तक नही.. तब निर्मला बहुत नीरास होगइ.. ओर सबके होते हुअ‍े वो ज्यादा कोसीसभी नही कर सकती.. फीर देवायत मंजुको लेकर वापस आगया तब वो अकेली रुममे जाकर खुब रोइ..

मंजु हर दीन आइपील लेना नही भुलती थी.. उनकी सादीको आज १० साल होगये थे लेकीन आजभी वो हवेलीमे नइ ब्याहके आइ दुल्हनकी तराह सज धजके रहेती ओर अपने पतीकी हर रात चुदाइ करवाके रंगीन करती.. इसी बीच उनकी छोटी बहेन भावनाकी सादीभी देवायतके दोस्त भानुसे करदी गइ..

तब लखन पुनम ओर लताभी काफी जवान हो गयेथे ओर लखन पुनम सहेरमे पढ रहेथे.. तब देवायतको नही पताथा जबसे उनकी बहेन पुनममे जवानीके देहलीपे कदम रखा तबसे वोभी अपनेभाइ देवायतको पसंद करने लगी थी.. इन १० सालो मे देवायत मजहब दश से बाराह बार अपने ससुरके घर गया होगा.. ओर आज तक उनकी सासुमां यानी नीर्मलासे बात तक नहीकी..

अ‍ैसा नहीथा की वो वहा नही जाता वो हर महीने राजीवअंकलसे मीलने दुकानपे जाता.. ओर वही हिसाब किताब करके मीलकर लौट आता.. अब नीर्मला बीलकुल टुट चुकीथी.. उनको अपने कीयेपे बहुतही पस्च्याताप हो रहाथा.. वो आजभी अपने दीलसे देवायतको बहार नही नीकाल पाइ..

बल्की अबतो देवायतके प्रती उनकी चाहत ओर भी गेहरी होगइ थी.. लेकीन क्या करे..? उनका आसीक उनसे रुठा हुआ जो था.. आज उनका पती होस्पीटलमे जींदगी ओर मौतसे जंग लड रहाथा.. तब अ‍ेक घंटेके लीये वो नर्सको ध्यान रखनेको कहेके धरपे खाना बनाने चली गइथी.. तब उनको देवायतसे आनेकी बीलकुल उमीद नही थी..

(फ्लेसबेक खतम)

इधर होसस्पीटलमे अपने अतीतके बारेमे सोचते देवायत आंख बंध करते राजीवके पास चेयरपे बेठा था, आज उनको मजबुरन आना पडा.. क्युकी भानुके मामाकी वीधीथी.. तो वो नही आ सकता.. तो दुसरी ओर धिरेनकोभी नोकरीमे छुटीकी प्रोबलेम थी.. ओर मंजु भावनाकी डीलीवरी हुइथी.. तब देवायतही अ‍ेक विकल्प बचाथा.. ओर उपरसे कल मंजुनेभी परमीशन देदी ओर उनकी मम्मीको माफ करनेकी बात कहेदी.. तो उनको आनाही था.. ओर नीर्मला मीलेतो उनसे बात करनेको तैयार था..

तभी दरवाजा खुलनेकी आवाज आइ तो देवायत विचारोकी तंद्रासे बहार आगया ओर उसने सर उठाके देखा तब नर्मला अंदर आतेही दरवाजा बंध कर रहीथी.. जैसे ही वो पलटी तब देवायतको देखतेही सोक्ट होके वही खडी रेह गइ.. उनको देवायतको यहा होनेकी बीलकुल उमीद नही थी.. ओर देवायतको देखतेही उनकी आखोसे अनायासही आंसुओकी धारा बहेने लगी.. ओर वो देवायतके सामने हाथ जोडके खडी रेह गइ..

तब देवायतको उनकी आंखोमे अपने लीये माफीके मनतके भाव नजर आये.. देवायतको आज अपने सामने नीर्मला नही दो बेटीओकी अ‍ेक लाचार मां.. ओर बीस्तरमे पडे बीमार लाचार पतीकी पत्नी नजरमे आइ.. तब देवायतकी आंओसेभी आंसु टपक गये.. ओर देवायतके दोनो हाथ अनायासही फैल गये..

तो नीर्मला जटसे दोडके आगइ.. ओर देवायतकी बाहोमे समा गइ.. तब देवायतनेभी नीर्मलाकल जोरोसे बाहोमे कस लीया.. ओर नीर्मला बाहोमे समाकर फुटफुटके रोने लगी.. तब देवायत उनकी पीठ ओर सरको सहेलाने लगा.. तब उनकी आंखभी गीली होगइ थी.. ओर वोभी फीरसे आंसु बहाने लगा..





नीर्मला : (सीनेमे सर रखते आंसु बहाते) देवु मुजे माफ करदो.. मुजे माफ करदो.. मेने आपको पहेचानने मे बहुत बडी गलती की.. (रोते हुअ‍े..) मे गलत थी.. में गलत थी.. मुजे माफ करदो..

देवायत : (सीनेमे सर भीचते) बस.. बस.. सांत होजाओ.. मेने आपको माफ करदीया.. बस.. देखो अंकलकी तबीयत ठीक नही हे.. अ‍ैसे नही रोते.. बस मेतो सीर्फ आपको अपनी गलतीका अहेसास करवाना चाहता था.. अब सांत होजाओ..

नीर्मला : (सर उठाके देवायतकी ओर देखते) देवु.. मुजे माफ तो करदीया हेनां..? अब मे कभी भी अ‍ैसी गलती नही करुगी.. वो मेरी सबसे बडी नादानी थी.. मुजे बस अ‍ेक बार माफ करदो..

देवायत : (उनहे आंसु अपने हाथसे पोछते) हां माफ करदीया हे.. बस अब रोना नही.. मे आगया हुनां..? चलो बैठो इधर.. पहेले कहो अंकलको क्या हुआ हे..?

तब नीर्मला देवायतका हाथ पकडके वही पडे अ‍ेक छोटे सोफेपे लेगइ ओर दोनो अ‍ेक दुसरोसे सटकर बैठ गये तभी नीर्मलाने अ‍ेक हाथ देवायतकी कमरमे डालके उनके कंधेपे सर रखदीया ओर दुसरे हाथसे उनके हाथको बाजुसे पकड लीया.. तब देवायतनेभी नीर्मलाकी कमरमे हाथ डालके उसे अपने आपसे चीपकालीया..

नीर्मला : देवु.. ये ठीक तो होजायेगेनां..?

देवायत : (नीर्मलाके गालको अ‍ेक हाथसे थामते) हां मम्मीजी.. भगवानपे भरोसा रखीये.. सब ठीक हो जायेगे.. वरना हम इनको सहेर लेजाकर बडेसे बडे डोक्टरसे इलाज करवायेगे..

नीर्मला : (देवायतकी ओर देखते सरमाते मुस्कराते) मम्मी..जी.. क्या अभी तक मुजे माफ नही कीया..?

देवायत : (हसते) हां करतो दीया.. हें..हें..हें.. आप अ‍ैसा क्यु पुछ रही हे..

नीर्मला : (सरमाते हसते नजर जुकाते धीरेसे) आप मत भुलो.. मेरे जमाइ होनेके साथ आप कुछ ओरभी हो..

देवायत : (हसते) ओर क्या हु..? मुजेतो इतना पता हे आप मेरी सासुमां हो.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (जटसे देवायतके चहेरेको अपने दोनो हाथोमे थामते आंखोमे देखते) बस सीर्फ सासुमां..? ओर कुछ नही..? देवु मत भुलो आपने मेरी मांग भरी हे.. ओर हमने जींदगीभर साथ नीभानेकी कसमे खाइ हे.. आप जमाइतो बादमे हुअ‍े..

देवायत : (उनकी आंखोमे अ‍ेक नजरसे देखते) नीर्मलाजी.. क्या ये सही होगा..? अब मे आपका दामाद हु..

नीर्मला : (आंखोमे देखते) देवु.. दामाद तो बादमे हुअ‍े.. ओर मेने कभी आपको अपना दामाद नही माना.. मे आजभी हर दिन आपके नामका सींदुर अपनी मांगमे भरती हु.. ओर जींदगीभर भरती रहुगी.. मे आजभी अपने वादेपे कायम हु..

देवायत : (चहेरेको सीनेमे थामते) तो फीर मंजुको लेकर मुजसे इतना जगडा क्यु कीया..?

नीर्मला : देवु.. आइ अ‍ेम सोरी.. देवु मे क्या करती..? जब पता चला आप ओर मंजु अ‍ेक दुसरेसे प्यार करते हो ओर काफी आगे बढ चुके हो.. फीर मेने अपनी आंखोके सामने आप दोनोको देखभी लीया.. तब मुजे मेरी ही बेटीसे ज्वेलेसी होने लगी.. मुजे अ‍ैसा लगाकी मेरी ही बेटी आपको मुजसे छीन रही हे.. ओर मेने गुसेमे आकर आपको उल्टा सीधा केह दीया.. ओर.. ओर आपपे हाथभी उठालीया.. भगवान मुजे कभी माफ नही करेगा.. मेने मेरेही पतीपे हाथ उठाया हे..

देवायत : (हसते) हां बहुत जोरोसे चाटा पडाथा.. पुरा गाल लाल होगया था.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते गाल सहेलाते) क्या बहुत लगीथी..? आइ अ‍ेम सोरी.. यार इनके लीये भगवान मुजे कभी माफ नही करेगे.. मेने अपने पतीपेही हाथ उठालीया.. सोरी देवु.. तब आपने कहाथानां की अ‍ेक बार ठंडे दीमागसे सोचनां..? तो मेने उसी रात बहुत सोचा.. ओर मुजे मेरी गलतीका अहेसास तभी होगया था.. ओर मे उस रात खुब रोइ.. मेने कीतनी राते आपकी यादोमे आंसु बहाये.. आपसे बात करनेकी कीतनी कोसीसे की.. यहा तककी मंजुसेभी कहेलवाया फीरभी आपने मेरे सामने देखा तक नही.. आपभी बहुत जीदी हो..

देवायत : (सीनेमे सर रखते सहेलाते) चलो.. अबतो सब ठीक हेनां..? अबतो कोइ गीला सीकवा नहीनां..?

नीर्मला : नही.. आज आपकी बाहोमें बडा सुकुन मील रहा हे.. देवु मे चाहती हु मुजे मेरा वोही प्यार वापस मील जाये.. मे अपने वादेपे आजभी कायम हु.. ओर हम दुनीयासे छुपके अ‍ैसेही पती पत्नी बनके रहे..

देवायत : (गालपे चुमते) चलो ठीक हे.. सासुमां जैसे आपकी मरजी.. हें..हें..हें..

कहतो नीर्मला सरमाते हसने लगी ओर देवायतके सीनेपे मुके मारने लगी.. तब देवायतने हसते हुअ‍े नीर्मलाको जोरोसे बाहोमे भीचलीया.. तो नीर्मला आउचच... करते हसने लगी.. तभी देवायतकी नजर राजीव अंकलकी ओर गइ तो राजीवका हाथ हील रहाथा तो वो जटसे खडा होगया.. ओर बहारकी ओर दोड पडा.. ओर काउन्टरपे इन्फोर्म कीया तो अ‍ेक नर्स दोडके आगइ ओर राजीवको चेक करने लगी..

नर्स : लगता हे इनको होस आ रहा हे.. मे अभी डाक्टरको बुलाके आइ..

कहेते वो दोडके चली गइ तब थोडीही देरमे तीन चार लोग आगये ओर राजीवको चेक करने लगे ओर उनका ओक्सीजन बढा दीया तब थोडीही देरमे राजीवने आंख खोलदी ओर वो अ‍ेसेही पडे रहे.. तब अ‍ेक डोक्टर उनको ड्रीप लगाने लगा.. तबतक नीर्मला गभराकर देवायतका हाथ पकडते उनकोही देखती रही.. फीर सभी डोक्टर बहार नीकल गये तब अ‍ेक डोक्टर देवायतके पास आगया ओर दोनोको अपनी केबीनमे आनेको कहा.. तब नीर्मला गभराते देवायतकी ओर देखती रही....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ८४

कहेते वो दोडके चली गइ तब थोडीही देरमे तीन चार लोग आगये ओर राजीवको चेक करने लगे ओर उनका ओक्सीजन बढा दीया तब थोडीही देरमे राजीवने आंख खोलदी ओर वो अ‍ेसेही पडे रहे.. तब अ‍ेक डोक्टर उनको ड्रीप लगाने लगा.. तबतक नीर्मला गभराकर देवायतका हाथ पकडते उनकोही देखती रही.. फीर सभी डोक्टर बहार नीकल गये तब अ‍ेक डोक्टर देवायतके पास आगया ओर दोनोको अपनी केबीनमे आनेको कहा.. तब नीर्मला गभराते देवायतकी ओर देखती रही....अब आगे

नीर्मला : (गभराते) देवु आपभी चलो.. वो क्या कहेना चाहते होगे..? आप जाके पुछ लोनां..

देवायत : अरे कुछ नही होगा गभराती क्यु हे.. मे साथ चल रहा हुनां.. चलो..

ओर दोनो अ‍ेक नजर राजीवपे डालके बहार नीकल गये.. जीर्मलाने अभीभी देवायतका हाथ बाजुसे थामके रखाथा.. ओर दोनो डोक्रकी केबीनमे चले गये तब वो डोक्टर जो अ‍ेम.आइ.आर. करवाया था उनकी रीपोर्ट अ‍ेक्सरेके साथ देख रहाथा.. ओर दोनोही उनके सामने बैठ गये..

डोक्टर : (दोनोके सामने देखते) जी.., आप लोग उनके रीस्तेदार हे नां..?

नीर्मला : जी.. मे..मे..उनकी.. वाइफ हु.. ओर ये हे इनके दामाद.. ठाकुर देवायत.. ---गांवसे हे..

डोक्टर : (मुस्कुराते हाथ मीलाते) माफ कीजीये ठाकुरसाहब मे आपको पहेचान नही पाया.. क्या आप किशन अंकलके बेटे हेनां..? मे उनको जानता हु.. मेने आपको कभी देखा नही हे.. सायद हमारी मुलाकातही नही हुइ.. आप लोगोका इस होस्पीटलमे बहुत बडा योगदान रहा हे.. क्या आप इनके ही दामाद हे..?

देवायत : (मुस्कराते) जी डोक्टर साहेब.. क्या हुआ हे मेरे ससुरको.. ओर आप..?

डोक्टर : माफ कीजीये मे वोही रीपोर्ट देख रहाथा.. उनके हाइ बीपीकी वजहसे उनके दिमागकी अ‍ेक नस डेमेज हुइ हे जीनकी वजहसे उनको पेरेलेटीक अ‍ेटेक आगया हे.. उनका आधा अंग अभी काम नही कर रहा.. हम दवाइआ दे रहे हे.. तो साम तक पता चल जायेगा.. फीर ही हम कुछ केह सकते हे.. सुक्र मनाइअ‍े उनको होस आगया हे.. वरना अ‍ेसे केसीस मे कहेना मुस्कील हे.. आदमी कोमामे भी चला जाता हे..

देवायत : सर.. आपसे अ‍ेक नीवेदन हे.. क्या हम इसे सहेर लेजा सकते हे..? कुछ फर्क पडता हेतो..

डोक्टर : (हसते) स्योर.. आपकी मरजी.. लेकीन वहा आप कीसको दीखायेगे.. न्युरो सर्जनकोनां..? वहा का डोक्टर कौन हे..? क्या आप जानते हे उनको..?

देवायत : (हसते) जी.. जानता तो नही.. लेकीन मेने इनके लीये स्पेसीयल न्युरोसर्जन डोक्टर राजेन्द्गका नाम सुना हे.. उन्हीको कन्सल्ट करेगे.. अगर इनकी पोजीसनमे कुछ सुधार होतो..

डोक्टर : (जोरोसे हसते) ठाकुर साहब.. कही जानेकी जरुरत नही हे.. मेही वो डोक्टर हु जीसकी आप बात कर रहे हे.. मेरा नामही राजेन्द्ग हे.. जो मेरी वहा कन्सल्टींग क्लीनीक हे.. ओर आपकी जानकारीके लीये बतादु.. आपहीके पीताजीके बदौलत मे डोक्टर बना हु.. मेरे पीता आपके पीता सब दोस्त थे.. क्या ये वोही राजीव अंकल हेनां..?

देवायत : (खुसीसे हसते) जी वोही हे.. अब इनको कही नही लेजाना.. हें..हें..हें..

डोक्टर : सच केह रहा हु.. ये लोग आये तब उनको नही पहेचान पाया.. लेकीन अभी आपसे बात हुइतो पहेचानमे आगया.. आप चीन्ता मत कीजीये ये घरकी ही होस्पीटल हे.. अब राजीव अंकलको ठीक करनेकी सब जीम्वेवारी मेरी.. बस.. ओर फरमाइअ‍े..

देवायत : (हाथ मीलाते) जी.. सुक्रिया..

फीर देवायत ओर नीर्मला हसते हुअ‍े बहार आगये.. तब नीर्मला पहेलेसे काफी खुस दीख रहीथी ओर वो देवायतका हाथ पकडते चल रहीथी जैसे दुनीयाको जता रहीहो की हम दोनो मीया बीवी हे.. ओर दोनो अंदर आगये तब उसने हाथ छोड दीया तब राजीव होसमे आ चुकाथा.. ओर देवायतको देखतेही उनके चहेरेपे स्माइल आगइ लेकीन वो मास्ककी वजहसे कुछ बात नही कर सकताथा.. तो देवायतको इसारोसे पास बुला लीया..

देवायत : (मुस्कराते) कैसेहो पापा.. वो डोक्टरतो आपके दोस्तका बेटा नीकला.. हें..हें..हें..

तब राजीवने मुस्कराते सीर्फ सरको हां मे हीलाया.. ओर वो नीर्मलाकी ओर देखने लगा.. तब उनकी आंखोसे आंसु नीकल गये.. तो नीर्मलाभी दुखी होगइ ओर वोभी आंसु बहाते राजीवकी दुसरी साइडमे उनका हाथ थामकर बैठ गइ.. तब राजीवने सरको नां मे हीलाते उनको आंसु बहानेको मना कीया.. तब नीर्मला आंसु होते भी मुस्कराते राजीवके चहेरेकी ओर देखती रही..

नीर्मला : अब आप चीन्ता मत कीजीये अबतो देवु आगये हे.. ओर साम तक यही रहेगे.. हम दोनो अबी अबी डोक्टरको मीलकर आये हे.. आपको कुछ नही हुआ हे..

देवायत : (हसते) पापा आप जबतक होस्पीटलमे हे.. रोज आउगा.. अबतो आपको घर लेकर ही जाउगा..

नर्स : (हसते अंदर आते) हेलो अंकल.. कैसे हो..? अब बाते कम करना.. चलो इन्जेक्शन लगाना हे आप आराम कीजीये.. अब कोइ टेन्शन नही.. आपके सब रीपोर्ट अच्छे हे.. अ‍ेक दो दीनमे आपको छुटी मील जायेगी..

तभी देवायत ओर नीर्मला सोफेपे जाके बैठ गये ओर नर्सने राजीवको इन्जेक्शन लगा दीया.. ओर ड्रीप चेक करके चली गइ.. तब भीरे धीरे करते राजीव नींदमे चला गया.. तब नीर्मला देवायतका हाथ पकडके बहार लेगइ ओर दोनो रीसेपनीस्टसे दुर अ‍ेक सोफेपे जाकर बेठ गये.. ओर नीर्मलाने देवायतके कंधेपे सर रखदीया ओर उनका हाथ अपने हाथोमे थाम लीया.. आज वो देवायतसे दुर रहेना नही चाहती थी..

नीर्मला : देवु.. मेरी मंजु ओर भावु कैसी हे..? इस टाइम मुजे इनके साथ होना चाहीये लेकीन देखो.. मे उनकी खबर तक नही पुछ पाइ.. हांलाकी मेरी चंदासे मंजुसे फोनपे बात होती रहेती हे.. चंदा आपकी बहुत तारीफ कर रही थी.. हें..हें..हें..

देवायत : नीर्मलाजी.. मुजे आपसे अ‍ेक जरुरी बात कहेनी हे.. पर कैसे कहु..? समजमे नही आता..

नीर्मला : (जांगपे चपत लगाते) फीर नीर्मला..जी.., आप मुजे पहेले की तराह नीमु कहके नही बुला सकते..? कहो क्या बात करनी हे..? क्या आपकी सादीके बारेमे हे नां..? मुजे पता हे.. मेरी चंदासे इस बारेमे बात होगइ हे.. कमीनी वोभी मुजपे गइ हे.. हें..हें..हें.. आखीर आपको फसाही लीया..

देवायत : (आस्चर्यसे देखते) तो क्या आपको बुरा नही लगा..? पता हे मे कीससे सादी कर रहा हु..?

नीर्मला : (जांगपे चपत लगाते) फीर आप..? अरे बाबा तुम या तु नही केह सकते..? मे आपकी बीवी हु.. मुजे इतना रीस्पेक्ट मत दो.. ओर मुजे आपके बारेमे सब पता हे मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. बल्की मेतो खुस हु.. की आपने समाजके कु रीवाजोसे हटके अ‍ेक विधवाकी जींदगीको सवार दीया.. वो मेरी छोटी बहेन हे.. देवु.. उनको खुब प्यार देना..

देवायत : (हसते) तो क्या आपको बुरा नही लगा में आपकी छोटी बहेन यानी मेरी सालीसे भी सादी कर रहा हु..?

नीर्मला : (गाल चुमते) नही.. बीलकुल नही.. बल्की मुजेतो बहुत खुसी हुइ.. अरे बाबा मेरी बेटीसे सादी करलीतो फीर येतो मेरी बहेन हे.. ओर सालीभी आधी घरवालीतो होतीही हे.. तो फीर पुरी घरवाली करनेमे क्या हर्ज हे.. ओर वोभी छोटी उमरकी विधवा.. जानु अब मे आपकी वो नीमु नही हु.. जो आप उसे छोडकर गयेथे.. जो सौतनोसे जलती थी.. ओर आपतो राजा हो.. कीतनी भी सादी करलो.. चाहे हमारे घरकी सारी ओरतोसे सादी करलो.. भावुका रीस्ता आप लेकर आये वरना उनकी भी सादी आपसे कर देती.. बस हमे हमारे हिसेका प्यार हमे देते रहीये.. हम सीर्फ इतनाही मांगती हे..

देवायत : नीमु मे चाहता हु.. धिरेन पुनमकी सादीसे पहेले चंदा हमारे घर सादी करके आजाये.. क्या कहेती हो तुम..?

नीर्मला :(हसते) अरे आजायेगी.. मे उसे फोनपे बात करलुगी.. देवु अ‍ेक बात कहु..? अ‍ैसा कहेनातो नही चाहीये.. लेकीन भगवान ना करे.. पर यही सीचुअ‍ेशन मेरी हुइ तो आप क्या करोगे..?

देवायत : पागल होगइ हो क्या..? अ‍ैसा सोचना ही क्यु..? भगवान अंकलको लंबी उम्र दे.. फीरभी.. अ‍ेसी सीचुअ‍ेशन आइ तो मे चंदाकी तराह तुजे भी अपना लेता.. बस.. वही सुनना थानां..?

नीर्मला : (बेठेही बाहोमे भीचते) देवु आइ अ‍ेक प्राउड फोर यु.. मुजे आपपे गर्व हे.. ओर अपने आपको खुसकिस्मत समजती हु की मेने आपको पतीके रुप मे चुना हे.. आजसे ये नीमु आपको पुरी समर्पीत होती हे.. अब मेरे पुरे जीवनपे सीर्फ आपका ही अधीकार रहेगा.. इसके लीये चाहे मुने कुछभी ना क्यु करना पडे..

देवायत : नीमु तुजे पता हे.. मेरी मंजु.. वो कोइ सामान्य ओरत नही हे.. उनपे हमारे बाबाकी बडी कुपा हे..

नीर्मला : (देवायतकी ओर देखते) मंजु..? सामान्य ओरत नही हे.. मतलब.. मे कुछ समजी नही..

देवायत : नीमु.. मेरे खयालसे उनके पास वो शक्ति हे जो हम सबके बारेमे सबकुछ जानती हे.. हमारा भुतकाल..वर्तमान..ओर हमारे भविस्यके बारेमे भी.. उन्होने ही मुजे तेरे पास भैजा हे.. ओर पता हे क्या कहा..? कहा की मम्मीको माफ करदो.., मुजे लगता हे वो हमारे रीस्तेके बारेमे सबकुछ जानती हे..

नीर्मला : (सोक्ट होते अ‍ेक नजरसे देखते) व्होट..? देवु ये आप क्या केह रहे हे.. तो फीर हम दोनो..फीरसे..

देवायत : नही नीमु.. आसंकाअ‍े मत कर.. अब हमे कोइ जुदा नही कर सकता.. वक्तके साथ मे तुजे सबके सामने भी अपनाउगा.. बस कुछ समय इन्तजार करले.. आगे जाकर बहुत कुछ होगा..

नीमु : नही देवु.. मुजे हमारे रीस्तोको दुनीयाके सामने उजागर नही करना.. मे अ‍ेक बार अ‍ैसा करके देख चुकी हु.. उनमे केवल दु:ख ही मीलता हे.. मे आपकी अ‍ैसेही सीक्रेट बीवी बनके रहेना चाहती हु.. क्युकी सबसे छुपके प्यार करने ओर मीलन करनेमे जो मजा हे वो खुले रीस्तोमे नही हे.. आपको नही पता.. जबसे हमारे बीच डीसप्युट हुआ हे.. तबसे मे दिन रात आपके बारेमे ही सोचती रहेती हु.. मेरी आपके प्रती चाहत ओर बढ गइ हे.. इसीलीये हम हमारे रीस्तोको सबसे छुपायेगे..

देवायत : (हसते) अब बातेही करेगीकी कुछ खीलायेगी पीलायेगी भी.. भुख नही लगी क्या..? तुम अंदर बैठो मे कुछ खानेको लेकर आता हु..

नीर्मला : (हसते) कही जानेकी जरुरत नही हे मे घरपे खान बनाने ही गइथी.. टीफीन लेके आइ हु.. चलो आज दोनो मीया बीवी साथमेही खाते हे.. हें..हें..हें..

ओर दोनो हसते हुअ‍े अ‍ेक दुसरेका हाथ पकडते अंदर आगये राजीव तबभी गहेरी नींद सोये हुअ‍ेथे ओर दोनो ने अ‍ेकही डीसमे खाना खाया.. आज नीर्मला बडे प्यारसे देवायतको अपने हाथोसे खीलाने लगी.. तो देवायतने भी उनको खाना खीलाया.. फीर साम तक देवायत वही रहा.. ओर दोनो प्यारभरी बाते करते रहे.. सामकोभी देवायत बहारसे चाइ नास्ता लेकर आगया.. ओर दोनोने मील कर चाइ नास्ताभी कीया..





नीर्मला इसी बीच अ‍ेक बार देवायतको हाथ पकडकर खीचके रुमके अ‍ेटेच बाथरुममेभी लेगइ.. ओर देवायतकी बाहोमे समा गइ.. फोर देवायतका चहेरा दोनो हथेलीमे थामकर उसे देखती रही.. ओर दोनोके चहेरे अ‍ेक दुसरेकी नजदीक आने लगे.. पताही नही चला दोनोके होंठ कब मील गये.. अ‍ेक दुसरेके होठोके रसपान करने लगे.. तभी नीर्मला अचानक देवायतके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी..





ओर देवायतभी उतेजीत होकर नीर्मलाके बुब्सको मसलते दबाते प्यार करने लगा.. आज कइ अरसोके बाद नीर्मला देवायतको प्यार कर रहीथी.. तब नीर्मलाकी सांसे तेज चलने लगी.. ओर वो कनमनग्नीमे जलने लगी.. दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे काफी देर खडे रहे.. ओर प्यार करते रहे.. ओर आखीर देवायतने नीर्मलाके नीतंबपे हाथ रखकर उसे अपने आपसे सटालीया ओर अ‍ेक हाथसे उनकी चुतको सहेलाते दबोच लीया..





तब नीर्मला सरसे पांवतक हील गइ.. ओर सरमके मारे पानीपानी होने लगी उसने फोरन देवायतके हाथको पकड लीया.. ओर जोरोसे देवायतको बाहोमे भीचलीया.. ओर उनके चहेरेपे चुंबनोकी बारीस करदी.. फीर अचानक रुककर देवायतकी आंखोमे देखती रही.. तब देवायतको नीर्मलाकी आंखोमे अपने लीये बेसुमार प्यार नजर आने लगा.. ओर देवायतने अ‍ेक बार फीरसे नीर्मलाको अपनी बाहोमे भीचलीया..

नीर्मला : (उखडी सांसोसे) दे..वु.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. अब मुजे कभी मत छोडना.. अब मे आपके बीना नही जी पाउगी..

देवायत : नीमु.. आइ लव यु टु.. अबतो मुजसे दुर होगी तो तेरी टांगे तोड दुगा.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) हां.. तोड देना.. ये हुइना बात.. अब आप मेरे पती लगते हो.. बस इसी तराह मुजे टांडकर सही करते रहेना.. देवु यहा नही.. हम घर जाकर खुब प्यार करेगे.. इतने सालोकी सारी कशर मे पुरी कर दुगी.. में आपके लीये बहुत तडपी हु.. मुजे वोही प्यार चाहीये जो मेरा देवु मुजे दे चुका हे..

देवायत : (हसते) हंम.. हां नीमु.. हम जबभी अकेले मीलेगे तुजे यही प्यार मीलता रहेगा.. बल्की इनसेभी ज्यादा प्यार मीलेगा.. अ‍ेक प्यार मेरी नीमुको मीलेगा ओर अ‍ेक प्यार मेरी सासको मीलेगा.. हें..हें..हें.. अब चल बहार राजीव अंकल कभीभी जाग सकते हे..

नीर्मला : (हाथ पकडके हसते बहार नीकलते) देवु.. क्या अपनी सासकोभी प्यार करोगे..? कीतने कमीने हो.. हें..हें..हें.. लेकीन आज मे बहुत.. बहुत.. खुस हु.. मेरा पतीजो मील गया हे..

इनके आगे दोनोने कुछभी नही कीया ओर साम ढलने लगी.. तब देवायत नीर्मलाको कल दोपहोरके बाद फीरसे आनेका वादा करके वहासे नीकलने लगा.. तब नीर्मला उनको कार तक छोडने गइ वहाभी कीसी को ना पाकर मोका मीलतेही देवायतके होंठ चुम लेती हे.. फीर कल सामको फीर आनेका कहेते देवायत वहासे नीकल जाता हे.. क्युकी कल सुबह देवायतको मंजुको दीखानेके लीये होस्पीटलमे सृतीके पास जाना था..

तब देवायतको कुछ याद आगया ओर उसने कारको सीधे भानुके गांवकी ओर जानेदी.. जब देवायत वहा पहुंचा तब भानुके मामाका अ‍ेक कार्य अभी अभी संम्पन हो चुकाथा.. तो घरके सभी लोग अ‍ेकठे बैठे थे तब देवायत वहा गया.. तो सबके चहेरे खील उठे ओर देवायतको बडे प्यारसे अवाकार दीया.. ओर देवायतभी अ‍ेक चैरमे सबके साथ बेठ गया.. तब सरला देवायतकी ओर देखते मुस्कराती रही..

भानु : अरे आगये.. भाइ सही मौकेपे आये हो.. अभी अभी मामाका सांती हवन रखाथा.. वो पुरा हुआ.. अभी सब पंडीत गये की तुम आगये.. कहो होआये ससुराल.. हें..हें..हें.. हमारे ससुरकी तबीयत कैसी हे..?

देवायत : (हसते) अब ठीक हे यार..

सरला : (हसते जोरोसे) अरे लता.. ओर लता.. देख तेरे जेठजी आये हे.. कुछ चाइ पानीतो पीला.. हें..हें..हें..

तब देवायतका नाम सुनतेही लता ओर भावना जटसे भावनाके रुमसे बहार आगइ.. ओर देवायतके सामने देखके मुस्कराने लगी तब भावना बहुतही सरमा रहीथी.. तब लता हसते हुअ‍े पानी लेने चली गइ.. ओर पानी लेकर आगइ.. लता कुछ अलगही नजरोसे देवायतको देखते मुस्कराती रही.. क्युकी अंदर रुममे लता ओर भावना देवायतके बारेमेही बात कर रहीथी.. ओर देवायत हाजीर होगया..

लता : (सरमाते मुस्कराते) लीजीये भैया.. अब भाभीकी तबीयत कैसी हे..?

देवायत : (पानी लेते हसते) अच्छी हे..

रमा : (जोरोसे हसते) देखा दीदी.. जेठके सामने कैसे सीधे मुह बात करती हे.. अ‍ैसा देखा हे कभी..? पहेले तो कैसे बात करनेमे सरमातीथी.. हें..हें..हें..

लता : भाभी.. (सरमाते हसते रमाकी पीठमे मुका मारते) हां.. करती हु.. ये सीर्फ मेरे जेठ ही नही हे मेरे भैया भी हे.. जेठतो बादमे हुअ‍े.. तुम अपनी कहो.. अभीभी सासको दीदी केहेके बुला रहीहो अबतो ये तुम्हारी सास हे दीदी नही.. बात करती हे.. हें..हें..हें..

कहातो रमा सरमाके हसती हुइ लताको मारनेके लीये खडी होगइ.. तब लता जोरोसे हसते अपने रुममे दोडके भाग गइ ओर रुमका दरवाजा बंध करलीया.. तो सभी तमासा देखते हसते रहे.. तब रमा सरमाती हसती हुइ भावनाके पास चली गइ ओर उनका हाथ पकडके उसे अंदर लेगइ तो भावनाभी देवायतकी ओर हसती हुइ उनके साथ अंदर चली गइ.. ओर दोनो बेडपे जाके बैठ गइ ओर हस हसके बाते करने लगी..

सरला : देखा देवु.. अबतो सारा दीन यही मस्ती मजाक चलता रहेता हे.. कीसीको पताही नही की मामा गुजर गया हे.. ओर ये रमा भी.. बीलकुल छोटी बच्चीकी तराह लताके साथ मस्तीया करती रहेती हे..

देवायत : (हसते) अच्छा हेना.. दुख जीतना जल्दी भुलजाओ उतना ही अच्छा हे.. जाने वाला तो चला गया.. तो उनके पीछे कबतक सौक मनाते रहेगे.. मुजेभी अच्छा लगा.. सब हसी मजाक करते हे..

भानु : भाइ वो अंकलकी तबीयत खराब हे तो.. फीर..

देवायत : तु फीकर मत कर मे वहीसे आरहा हु अब तबीयत ठीक हे.. ये बता कल भावुको लेकर होस्पीटल जाना हेकी नही..? कौन आरहा हे..? अबतो रमाभाभी आगइ हे तो रमाभाभी को साथ लेले..

सरला : हां ये तुने सही कहा.. वोही आयेगी.. ओर इनके मामाका फुलभी विसर्जन करना हे.. तो बीचमेही वो जगाह आतीहे वहा होजायेगा.. अ‍ेक घंटेका काम हे.. बस वही अ‍ेक आखरी वीधी बची हे.. तो नीलम लताभी साथ चल रही हे तो भावना बहुको दीखाके कुछ खरीदी भी होजायेगी.. सब सुबह जल्दी नीकलेगे..

भानु : हां भाइ कल साम तकका सब प्रोग्रम इन लगोने बनालीया हे.. आप कौन आ रहेहो..?

देवायत : देखता हु यार.. वो मंजुको दीखाके मुजे अंकलके पासभी जाना हे.. तुम आरामसे खरीदी करके आना मे सब देख लुगा.. फीर हम आरामसे खरीदी करते रहेगे.. कल मंजु ओर.. सब घर आजायेगे..

रमा : (बहार आते हसते) देवरजी.. आपको भावना बुला रहीहे.. उनके पीताके बारेमे कुछ पुछना हे..

सरला : हां देवु तु अंदर जाके उसे बात करले दो दीनसे वो अपने बापुकी बहुत चीन्ता कर रही हे..





तब देवायत उठकर भावनाके रुममे चला गया तो वो दरवाजेके पासही साइडमे खडीथी.. जो वहा कीसीको नही देख सकते थे ओर बहारसेभी कोइ नही देख सकता था.. जेसेही देवायत उनके पास गया भावनाने उसे खीचकर जोरोसे बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. फीर जटसे देवायतसे अलग होगइ ओर अ‍ेक नजरसे देवायतको देखती रही तब उनकी आंखसे आंसु टपक गये ओर इतनाही बोल पाइ..

भावना : (धीरेसे) जानु.. वो पापा.. होस्पीटलमे हे.. कैसे हे वो..? आप मम्मीसे मीले..? उनसे कोइ बात की..? मुजे पापाके पास ले चलो.. मुजे उनको देखना हे..

देवायत : बस भावु आंसु मत बहा.. वो अब काफी ठीक हे मे वहीसे आरहा हु.. ओर तेरी मम्मी भी ठीक हे..

भावना : क्या आप दोनो बोलेने लगे..? मतलब.. आप मम्मीसे नाराज थे..तो..

देवायत : भावु सब ठीक होगया.. हमने साथमे खानाभी खाया.. अब हमारे बीच कोइ गीला सीकवा नही हे.. तु अब उनकी चीन्ता मत कर.. ओर इस हालतमे तुने वहा नही जाना.. वो हमारे घर सादीमे आयेगे.. तब मील लेना.. बोल अब क्या जानना हे तुजे..?

भावना : जानु बस मे ठीक होजाउ.. फीर आपको खुब प्यार करुगी.. हम कही अकेले मीलेगे.. आप सब इन्तजाम करलो.. अब आपके बगेर अ‍ेकभी दीन काटना मुस्कील हे.. आपकी बहुत याद आती हे..

देवायत : भावु अभी ये सब करना जोखीम हे.. हम मीलेगेना.. पहेले तुम ठीक होजाओ.. फीर मे तेरी सारी तम्मना पुरी कर दुगा.. चल अब बहार चलता हु.. वरना कीसीको सक होजागेगा..

भावना : (बहारकी ओर नजर डालते) होने दो.. अब मे कीसीसे नही डरती.. समज गयेनां..? हें..हें..हें..

देवायत : (चोंकते) क्या समज गयेना..? तु बहोत डेन्जर हे.. हें..हें..हें.. लगता हे तु कुछ उनके बारेमे जान गइ हे.. हें..हें..हें..

भावना : (सरमाते हसते) जानु.. वो हम बादमे डीसकस करेगे.. अभी आप जाइअ‍े.. हें..हें..हें..

फीर देवायत बहार आके सबके साथ बैठ गया.. तभी लता सबके लीये चाइ लेकर आगइ ओर सबको चाइ देकर बाकीकी चाइ लेके भावुके रुममे चली गइ.. फीर देवायत चाइ पीते सबसे उनके ससुरकी सादीकी तैयारी वगैरे वगैरे बाते करने लगा.. फीर साम ढलने आइतो वहासे नीकल गया ओर अपने गांवमें आगया..

तब काफी साम ढल चुकीथी ओर काफी अंधेरा छा गयाथा.. तब वो सीधाही चंपाभाभीके धर चला गया.. तो वो खाना खा रहीथी.. तो देवायतको देखतेही खडी होगइ.. ओर बीना कुछ बोलेही घरका दरवाजा बंध करलीया.. फीर देवायतका हाथ पकडके जबरदस्तीसे अपने साथ खानेको बीठा दीया..

चंपा : देवरजी आपतो बहुत बीजी होगये हो.. आतेही नही.. मे कीतनी बार हवेलीपे आइ फीरभी आप नही मीले.. क्या हमारी देवरानी आगइ..?

देवायत : भाभी उनको कल दीखाने होस्पीटल जाना हे फीर सीधे घरही आयेगे.. तब आप आजाना..

चंपा : देवरजी अब सोच रहीहु मे वही रहेने आजाउ.. क्या कहेते हो..?

देवायत : (पानी पीते) मेतो कबसे केह रहा हु आप ही नही आती..

चंपा : (सरमाते धीरेसे) वोतो इसीलीयेकी हम दोनो यहा आरामसे मील सके.. वहा सबके होते थोडी प्रोबलेम होगी.. अ‍ेक डरसा लगता हे.. ओर यहा हम खुलके मील सकेगे.. क्या कहेतेहो आप..?

देवायत : हां येभी ठीक हे.. आप यही रहीये.. दीनमे वहा रहेना ओर रातमे इधर आजाना.. फीरतो कोइ दीकत नही हेनां..?

चंपा : हा ये सही हे.. हम यही करेगे.. अब आप अंदर जाइअ‍े मे अभी आती हु.. कामतो बादमे करलुगी..

देवायत : (हसते) भाभी अभी मुजे घर जाना हे काफी देर होगइ हे.. हम दाबमे मीलते हेनां..

चंपा : (सरमाते हसते) क्या बादमे मीलते हे.. आप बैठो मे अभी आइ इतने दिनोके बादतो मीले हो.. बस अ‍ेक बार करेगे.. फीर आप चले जाना.. अबतो मुजेभी आपकी आदत होगइ हे.. बाबा यहा आया करो..

कहेते चंपाभाभी फटाफट सब लाइट दरवाजा बंध करलेती हे ओर रुममे आजाती हे ओर फटाफट अपने कपडे नीकालने लगती हे तब देवायतभी अपनी पेन्ट नीकाल देता हे तब चंपाभाभी बेडपे पैर फैलाके लेट जाती हे ओर देवायत उनके पैरके बाच बैठते अपना दमदार तगडा लंड चंपाभाभीकी चुतपे सेट करते उनपे जुक जाता हे ओर अ‍ेक जोरोसे जटका मारता हे तब चंपाभाभीकी चीख नीकल गइ.. ओर तडपने लगी..





चंपा : उइइइ.. मां.. धीरेसे.. डालोनां.. दर्द होता हे.. अब धीरे धीरे चोदो मुजे.. कीतने दीन होगये..

फीर कुछही देरमे दोनोके बीच धमासान चुदाइ हो रहीथी तब चंपाभाभीभी अपनी कमर उछालके देवायतका साथ देती रही.. देवायतने चपांभाभीको चोद चोदके दो बार जडा दीया ओर आखीर अपना लंड उनकी चुतमे धुसाके उनसे चीपक गया तब चंपाभाभीने देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचलीया ओर दोनो अ‍ेक साथ जडने लगे तब चंपाभाभी तेज सांसको दुरस्त करते देवायतकी पीठ सहेलाती रही..

चंपा : (सरमाते नजर चुराते) देवरजी.. आपतो अ‍ेकही बार मे मुजे थका देते हो.. कीतना जोसमे करतेहो.. मुज जेसी आधेडकी चीखे नीकलवा देते हो.. जो बेचाारी मुजसे छोटी हे उनकी क्या हालत होती होगी..

देवायत : भाभी जब तु हवेलीपे आजायेगीनां तब तुजे वहा अ‍ैसा बहुत कुछ दीखनेको मीलेगा.. तैयार रहेना..

चंपा : (मुस्कराते) हां पता हे.. आपतो राजा हो.. बस मुजे कीसीसे कोइ मतलब नही.. आप मेरा खयाल अ‍ैसेही रखीयेगा.. मेतो आपकी सचमे दीवानी होगइ हु.. क्या रश्मीको मीलते हो की नही..?

देवायत : (हसते) हां मीलता हु.. वोभी आपकी तराह मेरी दिवानी हे..

चंपा : (मुस्कराते) हां तो दिवानीतो होगीनां अभी जवान हे.. अबतो उस कमीना कीसी कामका नही रहा.. अबतो हम दोनोको आपकाही सहारा हे.. हो सकेतो उनको अ‍ेक बच्चा देदो..

देवायत : (हसते) कहोतो आपकोभी देदु.. हें..हें..हें..

चंपा : अबतो मे आधेड होचुकी हु.. ओर आपके भाइभी चल बसे.. तो मे दुनीयाको क्या जवाब दुगी.. की ये बच्चा कीसका हे.. अरे बाबा हमतो अ‍ैसेही मजे करेगे.. अगर आपके भाइ होतेतो मे जरुर आपका बच्चा पैदा करती.. अब उपरसे उतरना नही हे क्या.. देखो मेरी पुरी चुत भरदीहे आपने.. कही मे पेटसे ना होजाउ..

तब देवायत उपरसे हट गया तो लंड फचच.. आवाजके साथ नीकल गया तब चंपाभाभी खुब सरमाइ ओर जटसे अपनी चुतपे अपनी चडी रखदी ओर चुत साफ करने लगी.. फीर देवायतका लंड पकडकर उसेभी साफ करने लगी.. ओर दोनोने अपने कपडे पहेन लीये तब देवायतने उनको घरके खर्चेके लीये कुछ पैसे दीये तो चंपाभाभी देवायतकी बाहोमे लीपट गइ ओर आंसु नीकल गये.. फीर दोनोने होंठ मीलाके कीस कीया ओर देवायत वहासे नीकल कर हवेलीपे आगया....

कनटीन्यु
 
my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ८५

तब देवायत उपरसे हट गया तो लंड फचच.. आवाजके साथ नीकल गया तब चंपाभाभी खुब सरमाइ ओर जटसे अपनी चुतपे अपनी चडी रखदी ओर चुत साफ करने लगी.. फीर देवायतका लंड पकडकर उसेभी साफ करने लगी.. ओर दोनोने अपने कपडे पहेन लीये तब देवायतने उनको घरके खर्चेके लीये कुछ पैसे दीये तो चंपाभाभी देवायतकी बाहोमे लीपट गइ ओर आंसु नीकल गये.. फीर दोनोने होंठ मीलाके कीस कीया ओर देवायत वहासे नीकल कर हवेलीपे आगया....अब आगे

तब रातके १० बज चुकेथे ओर पुरी हवेलीमे अंधेरा छाया हुआथा.. आज हवेलीपे कोइ नही था.. जो था तो सीर्फ पुनम लखन ओर रजीया.. आज पुनम अपने रुम मे शीशेके सामने शींगार कर रहीथी तबही देर रात होतेही रजीया छुपकेसे उपर लखनके पास चली गइ.. अब वो पुरी तराह लखनको उनकी बीवी होनेका अहेसास करवा रहीथी.. अंदर जातेही लखनकी बाहोमे समा गइ.. ओर दोनो प्यार करने लगे..

तब देर रात देवायतभी हवेलीमे पहोंच गया.. देवायत अपनी कारसे उतरकर अपने रुममे चला गया.. ओर लाइट जलादी तो उनके बेडपे पुनम दुल्हनकी तराह सजधजके शींगार करते हुइ जाग रहीथी.. जो बेडके कोनेपे बेठकर देवायतका इन्तजार कर रहीथी.. जेसेही देवायत अंदर आगया वो जटसे खडी होगइ.. ओर दोडके देवायतकी बाहोमे समा गइ तब देवायतने पुनमको कसके अपनी बाहोमे भीचलीया..

पुनम : भाइ आज आनेमे बहुत देर करदी..? क्या अंकलकी तबीयत बहुत खराब हे..?

देवायत : हां पुनो.. उनको बडी मुस्कीलसे होस आया हे.. उनको पेरेलीसीस होगया हे..

पुनम : (होंठ चुमते) भाइ चलो पहेले खाना खालो.. मेने आपका बहुत वेइट कीया.. बहुत भुख लगी हे..

देवायत : (पुनमके सरको चुमते) तो क्या तुमने अभी तक नही खाया..?

पुनम : नही मे मेरे पतीके बगैर केसे खा सकती हु.. अबतो आपही मेरे पती हे.. चलीये.. जबतक मे यहा हुं मे पत्नीका हर फर्ज नीभाउगी.. आइअ‍े..

देवायत : बेबी अ‍ेसा नही करते.. अगर अंकलकी तबीयत ज्यादा खराब हो ओर मे वहा रुक गया होतातो..?

पुनम : भाइ.. मेरा इस पती इतनाभी लापरवहा नही हे.. मुजे यकीन हे.. मुजे फोन करके बता देता..

देवायत : (बाहोमे भीचते होंठ चुमते) ओह.. बेबी तु मेरा कीतना खयाल रखती हे बीलकुल मंजुकी तराह.. वोभी अ‍ेसेही बात करती हे.. लगता हे अब मुजे तेरा बहुत खयाल रखना पडेगा..

पुनम : भाइ.. मत भुलो मे भी आपकी बीवी हु.. बाबाने खुद हमारी सादी करवाइ हे.. में आपसे कभी अलग होना नही चाहती..

देवायत : (पुनमको गोदमे उठाते बहारकी ओर लेजाते) सोरी.. चल आजतो मे मेरी इस बीवीको अपने हाथसे खीलाउगा.. क्या लखनने खालीया..? ओर वो रजीया.. सो गये दोनो..?

पुनम : (सरारतसे हसते) हा दोनोही खाना खाके सो गये हे.. उपर.. लखनके रुममे.. हें..हें..हें..

देवायत : (डाइनींग टेबलपे बीठाते आस्चर्यसे हसते) दोनो उपर सो गये हे..? मतलब..?

पुनम : (हसते) भाइ.. पहेले खाना खालो मे आपको बादमे अंदर सब बताती हु.. चलीये इधर बेठीये मे खाना लेकर आती हु.. फीर हम दोनोही मीया बीवी साथमे खाते हे..

कहेते पुनम डाइनींगसे उतर गइ ओर कीचनमे चली गइ तब उनके पैरोमे आज जांजरकी खनक ओर हाथोकी कलाइमे चुडीओकी खनकार सुनाइ दी.. तो देवायत तो देखताही रेह गया.. आज पुनम बीलकुल देवायतकी सुहागनकी तराह सजी हुइ थी.. जैसे इस हवेलीमे नइ नइ ब्याह करके आइ दुल्हन हो.. वो देवायतके लीये अ‍ेक पत्नीकी तराह अपना हर फर्ज पुरा कर रहीथी..

जो कलसे उनकी सांस आनेके बाद उनका इस तराह रहेना मुमकीन नही था.. फीर तो उनकी धिरेनके साथ सादी होनेके बाद ही सब सौक पुरा कर सकती थी.. इसीलीये आज उसने पुरी रात जागके देवायतसे प्यार करनेका फैसला करलीया था.. आज वो अपना सबकुछ देवायतपे लुटाना चाहती थी.. पुनम आज देवायतके साथ अ‍ेक बहेनकी तराह नही उनकी नइ नइ बीवीकी तराह पेस आ रहीथी..

पुनम : (खाना लाते) भाइ आपको फ्रेस होना हेतो जाइअ‍े तबतक मे सब खाना नीकालती हु..

तब देवायतको याद आयाकी वोतो आतेही पुनमके साथ चीपक गयाथा.. तो वो जटसे हाथ मुह धोकर फ्रेस होकर वापस आके बेठ गया.. तबतक पुनमभी खाना नीकाल रहीथी ओर देवायतके पास आकर बैठ गइ तभी देवायतने हाथ पकडके उसे अपनी गोदमे बीठा दीया तब वो खुब सरमाइ.. ओर देवायतकी जांगोपे बैठ गइ.. अ‍ेकही थालीमे खाना नीकालके रख दीया ओर अपने हाथोसे देवायतको खीलाने लगी तब देवायतभी पुनमको खीलाता रहा.. ओर दोनोही प्यारभरी बाते करते अ‍ेक दुसरेको खीलाते रहे..

पुनम : भाइ.. बस यही कुछ हसीन पल हे जो मेरी सादीके बाद बहुत मीस करुगी..

देवायत : (हसते मजाक करते) क्यु..? तु धिरेको भी अ‍ैसे खीला देना.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते अ‍ेक मुका जांगपे मारते) नही.. नही खीलाना मुजे कीसीको.. ये हक सीर्फ आपके लीयेही हे..

देवायत : बेबी धिरेनको अ‍ैसा कभी फील मत होने देनाकी तु उनको प्यार नही करती.. वो तुजे बहुत चाहता हे.. बाकीतो तु हमेसा मेरी बीवीही रहेगी.. ओर हमारा प्यार अ‍ैसेही बरकरार रहेगा.. आइ प्रोमीस..

पुनम : (गाल चुमते) भाइ.. आइ नो.. मुजे सब पता हे आप मुजे धिरेनसेभी ज्यादा प्यार करते हे.. लेकीन मेरे सामने जताते नही.. मुजे पता हे आपने अभी जोभी कुछ बोला वो दिलपे पथ्थर रखके बोला हे..

तब देवायत पुनमको जोरोसे बाहोमे भीचलेता हे ओर उनकी आंखसे आंसु नीकल जाता हे.. क्युकी पुनमने अभी जोभी कहाथा वो सब सचथा.. देवायतभी मनसे नही चाहता थाकी उनकी बहेन उनको छोडके चली जाये.. लेकीन दिलपे पथ्थर रखके वो सबकुछ करनेको तैयार था.. तब पुनमभी आंसु बहाते देवायतके आंसु पोछने लगती हे ओर देवायतका सर अपने सीनेमे भीच देती हे.. ओर उनके सरको चुम लेती हे..

पुनम : (आंसु पोछते) भाइ.. कुदरतने हम दोनोकी कैसी कीस्मत लीखी हे.. आपसे जुदा होनेका मनही नही करता.. पता नही मे वहा आपके बगैर कैसे रहुगी.. सोचते ही दिल गभरा जाता हे..

देवायत : पुनो.. मे तुजे इतना चाहता हुकी ये सीर्फ तेरे लीये नही.. मेरे लीयेभी उतनाही तकलीफ देही हे.. लेकीन मे वादा करता हु.. वहा में तेरे पास रेग्युलर आता जाता रहुगा ओर तुजे यही प्यार देता रहुगा..

दोनोही अ‍ैसी इमोश्नल प्यार भरी बाते करते खाना खा रहेथे.. तब उपरकी मंजीलपे लखनके रुममे प्यारका भवंडर तुफान बनके चुदाइका तांडव मचा रहा था.. आज लखन बडीही बेहरेमीसे रजीयाको चोदेही जा रहाथा ओर रजीयाभी चीखते चीलाते लखनसे उछल उछलके चुदवा रहीथी.. क्युकी रजीयाने आजभी लखनको आतेही वायग्राकी गोली उनसे छुपकर दुधमे मीलाकर पीलादी थी..

ओर उनका नतीजाभी रजीयाको आज दीख रहाथा.. नतीजेके फल स्वरुप रजीया लखनसे बेहरेहमी से चुदवाते भुगत रही थी.. तब रजीयाकी चीखे सुनने वाला उपरकी मंजीलमे कोइ नही था.. लखन हाथके बल उचा होकर कमर उछाल उछालकर रजीयाको जोरोसे बेहरहेमीसे चोद रहाथा.. तब रजीया के मुहसे आवाज तक नही नीकल रहीथी.. उनका मुह खुलाही रेह गया ओर वो लखनके हर धकेको सहेन करते चुदवा रहीथी..

रजीया : (दर्दसे रोने जैसे सुरतमे) उंहु.. उंहु.. बसस.. बसस.. मरर गइइइ.. धीरे... चोदोनां.. लखन.. मे मर.. जाउगी... उइइइ मां... आह..आह..आह..आह.. उइइइ.. सीइइइइइइइ.. हंम..हहहहहममममममम...

लखन : (जोरोसे सोट मारते) बीवी हेनां..तुउउउ मेरीइइइ..? हंम.. हमने.. कल सुहागरात मनाइइइ हेनां... हंममम.. अब तुजे.. में अ‍ैसे हीइइइ चोदुगाआआ... क्या.. मस्त मालल हेअ‍ेअ‍े.. तुतुउउउ..हंममम हंममम.. तुजे.. ओर लताको.. साथ..में.. चोदुगा...





लखन रजीयाको जोरोसे चोदेही जा रहाथा तब रजीया तीलमीलाती लखनके हर जटकेको चदर पकडते छटपटाते जेल रहीथी.. अब लखन रजीयाकी ओर पुरा ढल चुकाथा.. अबतो रजीयाको देखतेही उनके लंडमे हरकत होने लगती थी.. वो रजीयाके पीछे इतना पागल हो चुकाथा की पीछले पांच छे दिनसे लताको फोन ककरनाही भुल गयाथा.. तब लताभी लखनके फोनके इन्तजारमे तीलमीला गइथी.. ओर बेचैन रहेने लगीथी..

तभी नीचेकी ओर पुनम ओर देवायत अ‍ेक दुसरेको खाना खीलाते प्यार ओर इमोश्नल बाते करते रहे ओर खाना फीनीस कीया तब पुनम सब बरतन समेटके कीचनमे रखके आगइ.. तब देवायत उनकी चुडीया ओर पायलकी जनकारसे पागल होने लगा.. आज उनको पुनम अ‍ेक अप्सराकी तराह दीख रहीथी.. ओर उसने वहीसे पुनमको अपनी गोदमे उठा लीया..

तब पुनम सरमके मारे देवायतके गलेमे हाथ डालमे उनके सीनेमे सर छुपा लेती हे ओर देवायत उसे अपने रुममे लेजाता हे.. फीर दोनोही अपने बेडपे आगये.. तब दोनोही अ‍ेक दुसरेसे मीलन करनेके लीये तडपने लगे ओर अ‍ेक दुसरेके होठोका रसपान करते प्यारके के भवंडरमे गोते लगाने लगे..

तब कुछही देरमे दोनोके कपडे अ‍ेक अ‍ेक करते तनसे अलग होते गये.. ओर अ‍ेक टेबलपे इकठा होते जीस तनसे अलग हुअ‍े उसी तनको अ‍ेक होते देखते रहे.. अ‍ैसा लग रहाथा आज देवायत ओर पुनम नही खुद काम ओर रती अपनी क्रिडा करनेमे मग्न हो गये हे.. पुरे रुममे अ‍ेक सनाटा छाया हुआथा ओर पुरे रुममे कामुक सुगंध फैल गइ.. जो दोनोके जीस्मसे आ रहीथी..

तब दोनोही अपनी सुध बुध खो चुकेथे ओर प्यारके महासागरमे गोते लगाते हल्केसे कमर हीलाते चुदाइका आनंद ले रहेथे तब दोनोकी आंखोमे केवल अ‍ेक दुसरेके लीये गहेरा बेसुमार प्यार दीख रहाथा.. ना कोइ वासना.. ओर नाही कोइ हवस.. बस थातो केवल अ‍ेक नीर्दोस प्यार.. जो दोनोही आंख बंध करते अ‍ेक दुसरोके अंदर समा जानेको बेकरार थे.. दोनोही पहेली बार अ‍ेक अलगही अ‍ैसी अनुभुती फील कर रहेथे..





तब देवायतको पुनमको चोदते हुअ‍े उनके चहेरेमे कभी अपनी मासुम नीर्दोष बहेन पुनम दीखती थी जो इनके प्यारमे पागलथी.. तो कभी उनको बेसुमार प्यार करने वाली उनकी पत्नी मंजु दीखती थी.. आज देवायत ओर पुनम दोनोके लीये ये नया अनुभव था.. आज दोनोको चुदाइ करते अ‍ेक नइ अनुभुती फील हो रहीथी.. ओर आज अ‍ैसा क्यु हो रहाथा वो कीसीको पता नही था..

जो येसब कर रहीथी उनकोभी इस बातका पता नही था.. जोभी कुछ हो रहाथा वो सब अनायासही हो रहाथा.. वो थी.. मंजुला.. जो आज देवायतसे ना मीलनेकी वजहसे बहुतही बेचेन हो रहीथी.. ओर वो देवायतसे आज ना मीलनेकी वजहभी जानतीथी.. जो देवायत उनके पीताके पास गयाथा.. वो देवायतसे फोनके माध्यामसे सब जानकारी ले सकतीथी लेकीन नही लेपाइ ओर देवायतकाभी फोन नही आया..

ओर वो बच्चेकी देखभालमे बीजी रही.. तब रातमे सबने डीनर करलीया ओर सभी काम नीपडाके सब सो गये तब वो देवायतको याद करते अपने बेडपे करवटे बदलती लेटी रही.. अ‍ेक बार साइडमे मुह घुमाके देखा तो चंदा उनके पास गहेरी नींदमे सो रहीथी ओर मंजु अपने बेडपे उठकर बैठ गइ.. ओर वो आंख बंध करते देवायतके बारेमे सोचते बेठी रही.. तब उनके मनमे विचारोका धोध बहेने लगा..

ओर वो देवायतसे मीलन करनेकी कल्पनामे खो गइ.. ओर मनही मन देवायतसे मीलनकी प्रार्थना करने लगी.. तब उनको अपनी इस शक्तिके बारेमे पता नहीथा.. जो बाबाने उनके अंदर स्थापीत कीथी.. तब मंजुलाकी प्रार्थनाकी वजहसे देवायतने जीतनीभी लडकी ओर ओरतसे गांधर्व विवाह करते उनकी मांग भरीथी वो सभी ओरते संभोगकी अनुभुतीमे चली गइ..

इस बारेमे मंजुकोभी नही पताथा.. की उनकी अ‍ेक प्रार्थनाकी वजहसे सबको अनुभुती होने लगेगी.. ओर वो बैठे बैठे आंख बंध करते देवायतसे संभोगकी कल्पना करने लगी.. की वो देवायतके लीये शींगार करके बैठी हे ओर देवायत उनके पास आकर उसे प्यार करने लगता हे ओर पुरी रात अ‍ेक दुसरे प्यारकी आगोसमे साथ मे संभोग करते हे.. अ‍ैसी कल्पना करने लगी..





ओर वो कल्पना करते ध्यानमे चली गइ तब उनकोभी नही पताथा.. देवायतने जीनकोभी अपनी पत्नी मानाथा वो सबकी चुत हरकतमे आगइ ओर चुतकी नाजुक पंखडीया जैसे संभोगमे अंदर बहार होते कामरस बहाने लगी.. अ‍ैसाही मंजुकी चुतमे होने लगा.. तब बेडपे चंदा गहेरी नींदमे सोइथी इसके बावजुद वोभी अपनी कमर हीलाते देवायतके साथ संभोगके सपने देखने लगी ओर अपनी कमर हीलाने लगी..

तब गांवमे रश्मी.. चारु.. चंपा दया रजीया ओर नीर्मलाभी होस्पीटलमे अपने अपने रुममे देवायतके साथ संभोगकी अनुभुती महेसुस करने लगी.. ओर हवेलीपे देवायत ओर पुनमभी आंख बंध करते अनुभुतीमे लीप्त अभीभी बेहोसीकी हालतमे संभोग कर रहेथे.. तब सबके मनमे संभोगकी अ‍ेक परम आंनदकी अनुभुती होती रही.. ओर सभी ओरत देवायतको अपना पती परमेश्वर मानते उनको पुरी तराह समर्पीत होने लगी..

अ‍ैसा आज सबके जीवनमे पहेली बार हो रहाथा.. ओर ये सीलसीला तबतक चलता रहा.. जबतक मंजु ध्यानमे बैठी रही.. तभी उनका बच्चा विजय रोने लगा.. तब नीर्मलाकी आंख खुल गइ.. ओर उसने मंजुको बेडपे ध्यानमे बैठे देखा तो वो आस्चर्यसे उसे देखती रही.. ओर हाथ लंबा करते मंजुको हीलाने लगी.. तब मंजु अचानक नींदसे जागी.. ओर डरके चंदाकी ओर आंख खोलते देखने लगी..

तब उनको विजयके रोनेकी आवाज सुनाइ दी.. तब मंजुने जटसे विजयको अपनी गोदमे उठा लीया ओर अपनी गोदमे लेके उसे दुध पीलाने लगी.. तभी चंदाको अपनी चुतके पास चीपचीपासा लगने लगा.. ओर वो जटसे बैठ गइ ओर नीचे नजर करते देखने लगी.. तब उनका मुह आस्चर्यसे खुलाही रेह गया क्युकी उनकी चुतके आसपास बहुत गीला हो चुकाथा.. जैसे कीसीने उनकी चुतको छेडा हो..

ओर वो मंजुकी ओर कुछ आसंकासे देखने लगी.. की कही मंजुनेतो नींदमे उनकी चुतको नही छेडा..? तब उनको नही पताथाकी अभी मंजुकी चुतसेभी बहुतसा पानी बेह रहा हे.. ओर कुछही देरमे मंजुकोभी अपने नीचे गीला महेसुस होने लगा.. ओर वो जटसे विजयको साइडमे सुलाके बेडसे उतरके खडी होगइ ओर अपना पेटीकोट उठाके देखने लगी.. तब पानी पैरसे उतरते महेसुस करने लगी ओर दोडके बाथरुममे घुस गइ..

फटाफट अपना पेटीकोट नीकालके नहाने लगी.. तबतक चंदाभी बेडसे उतरके अपने कपडे नीकालकर देखती रही.. उनको अभीभी कुछ समजमे नही आ रहाथा की ये सब क्या हो रहा हे.. तब वोही हाल आज नीर्मला.. रश्मी ओर चारुका भी हुआ.. कीसीको कुछ समजमे नही आ रहाथा.. लेकीन सबके जहेनमे सीर्फ अ‍ेकही सख्स धुम रहाथा ओर वो हे देवायत.. जो सभी उनके साथ संभोंगका स्वप्न देख चुकीथी..

देवायत अभी पुनमके सीनेपे सर रखके ढेर हो गया था.. ओर पुनम उनका सर सहेला रहीथी.. ओर सोच रहीथी की आज क्या हुआ.. भाइ कबसे उनके उपर पडेहे ओर अभी ४.३० बज गयेहे ओर अबभी मेरी चुतमे लंड डालके उपर पडे हे.. क्या अबतक वो बीना नीचे उतरे मेरी चुदाइ कर रहे थे..? ओर आज मेने क्या देखलीया..? भाइ मुजे कीतना प्यार करते हे.. मेरी पुरी रात चुदाइ करते रहे.. वो थकतेभी नही हे..





तो फीर मुजे पता क्यु नही चला.. चुदाइके वक्त कीतना आनंद आ रहाथा.. मेरी आज तक अ‍ैसी चुदाइ भाइने कभी नहीकी.. कोन हे ये.. जो मुजे आज परम आनंदकी अनुभुती करवा रहाथा.. तब उनको बाबाकी याद आगइ जो अ‍ेक बार कहाथा की तुम लोग कोइ सामान्या इन्सान नही हो.. तब पुनमके मनमे कइ सवाल आने लगे.. ओर पुनमने तभी मंजुको ओर बाबाको अ‍ेक बार मीलकर सब पुछलेनीकी ठानली..

तबभी देवायत पुनमकी चुतमे लंड डालकर उनके सीनेपे ढेर होकर पडाथा.. ओर पुनम सब सोचते उनका सर सहेला रहीथी.. तो दुसरी ओर आज नीर्मलाभी रातमे देवायतके बारेमे सोचते होस्पीटलमे अपने पतीके बेडके पास नीचे चदर डालके लैटी हुइ थी.. तब उनको सुबह अपनी चुतके पास चीपचीपासा गीला फील होने लगा.. ओर वो जटसे बैठ गइ ओर आजु बाजु नजर घुमाके देखने लगी..

तब राजीव गहेरी नींदमे सो रहाथा तब उसने अपना गाउन उठाकर चुतकी ओर नजर डालके चेक कीया तो चुतसे पानी बहेकर चदरको गीला करदीया था.. ओर वो सरमसे पानी पानी होगइ.. ओर जटसे खडी होकर चदर लेकर बाथरुममे धुस गइ.. आज वोभी स्वप्नमे देवायतके साथ जबरदस्त तरीके चुदवाकर संभोगकी अनुभुती कर चुकीथी.. ओर वो चदरको पानीमे डालकर साफ करते सोचती रही..

नीर्मला : (मनमे सोचते) हे भगवान ये सब क्या हो रहा हे..? कल मेरे सामनेही मेरी इजाजत लेकरतो गयेथे.. तो क्या रातमे वापस आये होगे..? अ‍ैसा लग रहा हे पुरी रात मेरे साथ.. नही नही.. वो अ‍ेसे छुपकेसे मेरे साथ क्यु करेगे..? मे उनकी बीवी हु.. वो मुजे बोलके सब कर सकते हे.. तो फीर..

यही सब सोचते नीर्मला चदर धोती रही.. फीर अपना गाउन नीकालके नहाने लगी.. तब जाकर उनकी चुतपे कुछ राहत महेसुस हुइ.. ओर वो नहाके कंपलीट तैयार होगइ.. तभी राजीवभी जाग गया तो नीर्मला उनकोभी ब्रस करवाके कंपलीट करने लगी.. तो दुसरी ओर आज चंपाभाभी चारु ओर रश्मीकाभी यही हाल था.. कीसीको कुछ समजमे नही आरहा था की ये सब कैसे हुआ.. सब अपनी अपनी दुवीधामे थी..

तब हवेलीपे आज लखन ओर रजीया नंगेही अ‍ेक दुसरेसे चीपकके गहेरी नींदमे सो रहेथे, जैसे दोनो मीया बीवी हो.. लेकीन देर रात रजीयाभी अनुभुतीमे चली गइ.. ओर उसे फील होने लगाकी इस वक्त वो लखनसे नही देवायतसे चुदवा रही हे.. तो दुसरी ओर लखन रजीयाकी चुतकी सुबह चार बजे तब धजीया उडाता रहा.. अबतक वो रजीयाकी तीन बार धमासान चुदाइ कर चुकाथा..





ओर गोलीकी वजहसे चुदाइका दोरभी लंबा चलाथा.. ओर ये सब पीछली दो रातोसे हो रहाथा.. हर चुदाइके बीच दोनो अ‍ेक घंटे आराम करतेथे.. लेकीन लखनका लंड बैठनेका नामही नही ले रहाथा.. ओर वो रजीयाको वापस चोदने लगता.. पुरी रातमे रजीयाभी कीतनी बार जडीथी उनकोभी नही पताथा.. ओर तीसरी बारतो रजीया चुदवाते चुदवाते लगभग बेहोसीकी हालत मे चली गइथी..





तब उनको नही पताथाकी वो मंजुकी प्रार्थनाकी वजहसे अनुभुती मे चली गइ हे.. अब वो लखनके साथ पुरा जीवन बीतानेके रंगीन सपने देखने लगीथी.. तो दुसरी ओर देवायत अभीभी पुनमके सीनेपे सर रखते सो गाथा.. तो पुनमने उसे कंधेसे पकडकर धीरेसे साइडमे सुला दीया.. तब उनकी चुतसे लंड फचचच.. आवाजके साथ नीकल गया.. तो पुनमकी हसी नीकल गइ..

ओर वो उठकर धीरे धीरे लंगडाते चलते बाथरुममे धुस गइ.. ओर कमोडपे बेठके अपनी चुत चेक करने लगी तो दोनो पेरपे कमरस बेहते नीचेकी ओर उतर रहाथा तब पुनम पीसाब करने लगी.. फीर नहाके बहार आगइ.. ओर अपना गाउन पहेनकर वापस देवायतके पास बेडपे चली गइ.. देखातो पुरा बेड गीला होगया था.. ओर वो देवायतको जगाने लगी.. तब मुस्कीलसे उसने आंख खोलदी ओर पुनमकी ओर देखने लगा..

तब पुनमने सरमाते हसते हुअ‍े हाथके इसारेसे बेडको दीखाया.. तो देवायत देखतेही जटसे बैठ गया ओर पुनमकी ओर आस्चर्यसे देखने लगा.. तब पुनम मुस्कुराते सरमाते बेडका बीछाना खीचने लगी.. तब मजबुरन देवायतको बेडसे उतरना पडा.. तबतक पुनम बीछाना लेकर बाथरुममे चली गइ तो देवायतभी उनके पीछे चला गया.. तब पुनम बीछानेको वोशींग मशीनमे डाल रहीथी..

आज पुनम गाउनमे भी पायल ओर चुडीओमे अ‍ेक सादीसुधा ओरत दीख रहीथी.. देवायतको आज अपनी बहेनमे उनकी बीवी दीख रहीथी.. जो उनको पुरी तराह समर्पीत हो चुकीथी.. उस्े पुनमको अ‍ैसे देखतेही उनपे प्यार आने लगा.. ओर तभी देवायतने पुनमको पीछसे अपनी बाहोमे भरलीया..

पुनम : (सरमाते हसते) भाइ.. क्या अभी आपका जी नही भरा..? आपको पता हे क्या हुआ हे..?

देवायत : (पुनमके कंधेपे सर रखते मुस्कराते) हां.. मुजे सीर्फ इतना पता हे आज हम दोनोने खुब प्यार कीया हे.. मे पुरी रात तेरे उपरसे उतरा नही हु..

पुनम : (मशीन का ढकन बंध करते) सीर्फ प्यार..? अरे जनाब आप पुरी रात बीना नीचे उतरे सुबह ४.३० बजे तक आप मेरी बजाते रहे हे.. ओर भाइ.. पता नही आज क्या हो गयाथा.. मुजेतो कुछ पताही नही.. की हम सुबह तक प्यार करते रहे.. कीतना आनंद मील रहाथा जैसे हम स्वर्गमे चले गये हो.. भाइ.. अ‍ेक बार बाबाको मीलने जाना हे.. आप जबभी उधर जाओ मुजे लेकर जाना.. वरना वंदनाको लेकरतो जाही रहे हे..

देवायत : (पीछसे गाल चुमते) ठीक हे बेबी.. हम तबही चलेगे.. थोडा जल्दी घरसे नीकलेगे..

तब पुनम पलट जातीहे ओर देवायतकी बाहोमे समा जाती हे.. तभी देवायत उसे जोरोसे बाहोमे भीचते उनके गलेको चुमने लगता हे तो पुनमकी चुडीयोकी खनखनाट उसे ओर पागल करदेती हे.. तब पुनम अपना सर उचा करते आंख बंध करलेती हे.. ओर दोनो मदहोस होने लगते हे.. तभी देवायत पुनमसे अलग होकर उनका गाउन नीकाल देता हे ओर वोशींग मशीनपे रख देता हे..

फीर पुनमको कमरसे पकडके मशीन पर बीठाके उनके पैरके बीच चला जाता हे.. तब पुनम सरमके मारे पानी पानी होने लगी.. ओर वो समज जाती हेकी आज अ‍ेक बार फीरसे उनकी चुदाइ होने वाली हे.. तभी देवायत अपना लंड पुनमकी चुतपे सेट करते धीरेसे चुतमे सरका देता हे तब पुनम देवायतके चहेरेको पकडके उनके होंठ चुमने लगती हे ओर देवायत धीरे धीरे कमर हीलाते खडे खडेही पुनमको चोदने लगता हे..





अबतो पुनमभी देवायतके लंडको बडी आसानीसे अपनी चुतमे अंदर बहार करते देख रही थी.. जब देवायत पुनमको कमर हीलाते चोद रहाथा तब पुनम उनके होठोको चुमेही जा रहीथी.. तब थोडीही देरमे पुनम अकडने लगी.. ओर उसने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर अपनी कमरको जटके देने लगी तब देवायतने कसके पुनमको बाहोमे भीचलीया ओर दोनोके होंठ लीपलोक होगये..

ओर पुनम कमरको जटके देते जडने लगी.. तब उनकी पायल ओर चुडीयोकी जनकार जोरोसे सुनाइ देने लगी.. जब वो सांत होगइ तब देवायतने उसे मशीनसे उतार दीया.. ओर पुनमको दीवालसे सटा लीया तब पुनम पलटकर धुम गइ ओर थोडा जुक कर खडी होगइ.. तो देवायतने उनकी कमरको पकडकर पीछसे उनकी चुतमे लंड उतार दीया..

ओर पुनमको पीछेसे धनाधन चोदने लगा.. तब पुनम नलको पकडके जुककर खडी होगइ ओर जोरोसे दर्दके मारे आहे भरने लगी.. आज वो अपनी सारी कशर पुरी करना चाहती थी.. क्युकी आज मंजु ओर उनके साथ चंदाभी घर वापस आ रहीथी.. फीर पता नही उनका भाइ कब उनके हाथ आयेगा यही सोचते वो देवायतसे हर अ‍ेन्गलसे चुदवा रहीथी..





पुनम : (कामुक आवाजमे) भाइ.. आज जीतनी मरजी हो अपनी बहेनको चोदलो.. फीर पता नही हमे कब ये मौका मीलेगा.. आज मुजे तृप्त करदो.. आइ होप..की भाभीकी बात सच होजाये..

देवायत : (चोदते) हां मेरी डार्लींग सीस्टर.. अबतो तेरी चुत मुजे रोज चाहीये.. मे कुछभी जुगाड करके तुजे चोदता रहुगा.. अब मे तेरी चुतके बगैर नही रेह सकता.. मे तुजे बहुत प्यार करता हु.. मे तेरी ससुरालमे आकर चुदाइ करता रहुगा..

कहेते देवायत पुनमको जोरोसे जोरदने लगा तो पुनमका मुह खुलाही रेह गया.. ओर उनको देवायतके लंडको बरदास्त करना मुस्कील होने लगा.. तब वो दोनो आंख उपर चडाके देवायतके धकेको सहेन करने लगी ओर थोडीही देरमे देवायतने अपना कामरस पुनमकी चुतमे उडेल दीया.. ओर लंडको बहार खीच लीया तब पुनमकी चुत अभीभी फडफडा रहीथी.. ओर चुतसे देवायतका रस बहार नीकलके नीचे फर्सपे टपकने लगा..





तब पुनम बडी मुस्कीलसे खडी रेह पाइ.. तब देवायतने उसे अपनी गोदमे उठालीया ओर दोनो सावरके नीचे खडे होगये ओर सावर चालु करदीया तब दोनोही पानीमे भीगते अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये.. ओर होंठ मीलाके स्मुच करने लगे.. फीर अ‍ेक दुसरेको मसल मसलके नहेलाने लगे जब नहा लीया तब पुनमने अ‍ेक बार फीरसे देवायतको अपनी बाहोमे भीचलीया ओर होंठ चुमते उनसे अलग होगइ....

कन्टीन्यु
 
my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ८६

तब पुनम बडी मुस्कीलसे खडी रेह पाइ.. तब देवायतने उसे अपनी गोदमे उठालीया ओर दोनो सावरके नीचे खडे होगये ओर सावर चालु करदीया तब दोनोही पानीमे भीगते अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये.. ओर होंठ मीलाके स्मुच करने लगे.. फीर अ‍ेक दुसरेको मसल मसलके नहेलाने लगे जब नहा लीया तब पुनमने अ‍ेक बार फीरसे देवायतको अपनी बाहोमे भीचलीया ओर होंठ चुमते उनसे अलग होगइ....अब आगे

पुनम : भाइ.. मे ये पांच छे दीन कभी नही भुलुगी.. ये दिन मेरी जींदगीके सबसे अनमोल दिन थे.. आज आपने मुजे खुस करदीया..

देवायत : पुनो.. जीतो चाहता हे मे तुमसे कभी अलगही नाहुं.. बस दिन रात तुजे प्यार करता रहु.. तुमभी मंजुकी तराह मेरी बेस्ट वाइफ हे.. बस अ‍ेक बार तु धिरेनसे सादी करके वापस इस घरमे आजा.. मे तुजे इतना प्यार दुगाकी तु तेरा सारा गम भुल जायेगी..

पुनम : भाइ.. मुजे सीर्फ वहा जानेकीही चीन्ता हे.. मे वहा नही जाना चाहती.. फीरभी मुजे वहा सादी करके जाना पडेगा.. मे खुसनसीब हु की मेरा भाइ ही मेरा पहेला पती हे.. अब चलीये बहार.. आजतो आपने मेरी चुदाइ करके हालत खराब करदी हे..

फीर दोनो अपने तनको पोछ लेते हे ओर नंगेही बहार आजातेहे तब पुनम आयनेके सामने खडी हो गइ ओर अपने आपको संवारने लगी.. तब देवायतको पुनम अ‍ेक मासुम अप्सराकी तराह दीख रहीथी जो अपना शींगार करते बहुतही कामुक लग रहीथी.. तब देवायत उनके पीछे चला गया ओर उनसे सटकर दोनो हाथ पुनमके पेटपे रख दीया ओर हल्कासा सहेलाने लगा तब पुनमको अपने पीछवाडेमे देवायतका लंड दरारमे महेसुस होने लगा.. ओर वो आंख बंध करते मदहोस होने लगी..





वो आंख बंध करते देवायतके बालोको पीछे हाथ लेजाते सहेलाने लगी.. ओर देवायतने उनके कंधेपे सर रख दीया.. पुनम मदहोसीमे अपना तन देवायतके तनसे रगडने लगी.. ओर दोनो मीररसे अ‍ेक दुसरेके दिदार करने लगे.. तभी देवायत अ‍ेक हाथ बुब्सपे रखकर दुसरे हाथसे पुनमकी जांगको चुतके पास सहेलाने लगा.. तो पुनम आंख बंध करते फीरसे मदहोस होने लगी.. ओर वो धीरे धीरे सीसकारीया करने लगी..

पुनम : सीससइइइइ उंहु.. उंहु.. उहु.. बस बस.. भाइ.. अब ओर नही.. वरना मे फीरसे बहेक जाउगी.. मेरी चुत अब आपके हथीयारको नही जेल पायेगी.. वरना मे अभी आपसे फीरसे चुदवा लेती.. मेराभी बहुत मन कर रहा हे.. की आप मुजे दिन रात प्यार करते रहो.. लेकीन नही.. नीचे अभी बहुत जलन हो रही हे.. सोरी भाइ..

देवायत : पुनो.. मेराभी वोही हाल हे.. जीतो चाहता हे तुमसे मे कभी अलगही ना होउ.. पता नही तेरे जानेके बार मेरा क्या होगा..

कहातो पुनम जटसे पलट गइ ओर देवायतको जोरोसे बाहोमे भीच लीया ओर आंसु बहाने लगी.. वो देवायतके सीनेमे सर छुपाते रोने लगी.. तब देवायत उनके आंसु पोछने लगा ओर प्यारसे गालको सहेलाने लगा तब पुनमने अ‍ेक नजर उठाके देवायतके चहेरेको देखलीया तब देवायतकी आंखभी गीली थी.. तब पुनम देवायतके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. फीर रुकते ही उनके आंसु पोछने लगी..

पुनम : (देवायतके आंसु पोछते) भाइ.. आप अ‍ैसी बात करके मुजे कमजोर मत करो.. वरना मे सादी नही करपाउगी.. मे भी आपसे दुर नही रेह सकती..

देवायत : सोरी बेबी.. क्या करु.. मे तुमसे बहुत चाहने लगा हु.. मे वहा आता रहुगा.. तु फीकर मत कर..

पुनम : भाइ जबजक मेरी सादी नही होती हम हररोज रश्मीभाभीके घर मीलेगे.. वहा आकर कमसे कम मुजे आपको अ‍ेक बार प्यार करना पडेगा मे केह देती हु..

देवायत : बेबी वोतो तु नही कहेती तबभी मे तुजे वहा बुला लेता.. अब मे तेरे बीना नही रेह सकता..

पुनम : भाइ मे आपके साथ रेह सकु अ‍ैसा दुसरा कोइ रास्ता नही हे..? मेरी भी हालत आपहीकी तराह हे..

देवायत : नही पुनो.. मे तुजे मेरी कमी कभी महेसुस नही होने दुगा.. मे वहा आता जाता रहुगा.. ओर फीर दो तीन सालकी तो बात हे.. फीर मे तुजे हमेसा मेरे साथ रखुगा मेरी चहीती रानी बनाकर.. आयेगीनां..?

पुनम : (हसते) भाइ रानीतो मे अब भी आपकी हुं.. आपकी सीस्टर रानी.. हें..हें..हें..

देवायत : चल आज मंजुको दीखाने जाना हे.. तु साथ चल रही हेनां..?

पुनम : नही भाइ आज आपही चले जाओ.. मत भुलो आप मुजे पुरी रात बीना नीचे उतरे प्यार करते रहे हो.. आज मेरा पुरा सरीर दर्द कर रहा हे.. आपने मुजे चोद चोदके मेरा अ‍ेक अ‍ेक अंग ढीला करदीया हे.. हमने सुबह तक प्यार कीया हे तो थोडा आराम करलु.. वरना मेरी सासको आज यकीनन मुजपे सक होजायेगा.. ओर ओर.. मे वहा आकर धिरेनको फेइस करना नही चाहती.. रीजन आपभी जानते हे..

देवायत : बेबी इनको कभी ना कभी तो तुजे अपनाना पडेगा.. चल ठीक हे.. मे ही चला जाता हु.. फीर दोनोको सीधे यही लेकर आउगा.. तबतक तु आराम करले..

पुनम : भाइ.. अब आपभी तैयार होजाओ.. देखो सात बज गयेहे.. मे चाइ नास्ता बना देती हु.. ओर हां तैयार होकर आजाइअ‍े मेरी मांग भरनी हे आपको.. जबतक यहा हु हम दोनो पती पत्नीका फर्जतो पुरा करे..

देवायत : (हसते) चल ठीक हे.. ओर तु क्यु चाइ बनायेगी..? रजीया कीधर गइ..? वो तो सुबह पहेले उठती हेनां..?

पुनम : (सरारतसे सरारत भरी मुस्कानसे) भाइ.. आज वो ज्लदी नही उठेगी.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) क्यु..?

पुनम : वो..वो.. उपर होगी.. मेरे देवरके पास.. हें..हें..हें.. कल आप नही आयेथे तबसे वो मेरे देवरके पास चली गइ हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (जोरोसे हसते) ओह.. गोड.. लेकीन कब..? मेरा मतलब कबसे..? लगता हे तेरा देवर बीगड गया हे.. उनकी सादी जल्दी करवानी पडेगी.. हें..हें..हें.. ओर रजीयाभी..?

पुनम : (हसते) हां भाइ.. उनकोभी मजे करने दोना.. बेचारी अकेली होगइ हे.. कहा जायेगी..? मुजे लगता हे जबसे दया वहा गइ हे.. मतलब पीछले दो तीन दीनसे ही.. मुजे कल सुबह ही दोनोपे सक होगया था.. ओर रातके डीनरके बाद सब काम नीपटाके वो अपने रुममे तैयार होने चली गइ.. फीर मेरे रुममे अंधेरा होते ही वो छुपकेसे सींगार करके उपर चली गइ.. तब उनको नही पताथाकी मेने उसे देखलीया हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) चल ठीक हे.. देखना लखनकी सादीके बाद कुछ गडबड ना होजाये.. तु रजीयाको सब समजा देना.. बाकी दोनो भलेही मजे करे.. ये साली आगही अ‍ैसी हे..

पुनम : भाइ आप टेन्शन मतलो.. वो सब मे देख लुगी.. मेरी लताभाभी से अच्छी पटती हे..

फीर देवायत अपना गाउन पहेनके तैयार होने चला गया तो पुनमभी सारी पहेनके अ‍ेक सुहागनकी तराह तैयार होगइ.. तब देवायत तैयार होकर वापस पुनमके रुममे आगया.. ओर पुनमकी मांग भरदी.. तब पुनम देवायतके पांव छुकर उनके सीनेसे लग गइ ओर दोनोके होंठ अ‍ेक बार फीर मील गये.. काफी देरतक अ‍ेक दुसरेके होठोके रस पीते रहे.. फीर दोनोही साथ बहार आगये.. तब देवायत डाइनींगपे जाकर बैठ गया..









ओर पुनम चाइनास्ता तैयार करने कीचनमे चली गइ.. ओर चाइ नास्ता बनाने लगी.. उसने फटाफट चाइनास्ता बनालीया.. ओर सब लेके बहार आगइ.. ओर देवायतके पास बैठ गइ.. तो देवायतने उसे हाथ खीचकर अपनी जांगपे बीठा दीया तब पुनम जटसे सरमाते आजु बाजु सब देखने लगी फीर थोडा गभराते देवायतकी गोदसे उतर गइ.. ओर पासमे खुरसीपे उनसे सटकर बैठ गइ..

पुनम : (चाइ नास्ता देते) भाइ.. अभी नही.. रजीया कभी भी आ सकती हे.. ओर हां.. आप भाभीको दीखाकर जल्दी आजाना.. मे आपका वेइट करुगी.. अब मुजे आपसे दुर नही रहा जाता..

देवायत : (हसते) हंम.. आजाउगा.. मेभी मेरी बहेनसे दुर रहेना नही चाहता.. पुनो मुजे अंजु ओर चंदाको उधर छोडके मेरे ससुरके वहाभी जाना हे.. वो अभीभी होस्पीटलमे हे..

पुनम : भाइ.. अ‍ेक बात कहु..? वहा सीर्फ वो दोनोही हे.. तो फीर आप उनको इधर लेकर आइअ‍ेनां.. हम उनकी अच्छेसे देखभाल तो कर सकेगे.. ओर भाभीको भी तसली मील जायेगी..

देवायत : चल देखता हु.. मेरी सास नही मानेगी.. फीरभी उनसे बात करलुगा..

दोनोही बाते करते चाइनास्ता करलेते हे.. फीर देवायत अपने रुममे चला गया तो पुनम जटसे उनके पीछे चली गइ ओर अ‍ेक बार फीरसे देवायतको अपनी बाहोमे भीचलीया ओर दोनो होंठ मीलाके स्मुच करने लगे.. फीर देवायत उनके सरपे चुमते बहार नीकल गया ओर कारमे बैठ गया तबतक पुनम भी उनको छोडने बहार तक गइ ओर उनको वही खडे रेहेते देखती रही.. ओर देवायतको हाथ हीलाते बाय कहेने लगी.. ओर देवायत नीकल गया..





तब पुनम अपने रुममे चली गइ ओर रुमका दरवाजा बंध करके फीरसे सो गइ.. तभी उपरकी ओर रजीयाकी आंख खुल गइ.. तो घडीमे देखातो चोंक गइ.. ओर डरकर सीधे बेडसे उतर गइ ओर फटाफट अपने कपडे पहेनके नीचेकी ओर भागकर आगइ.. तो नीचे कीसीको ना देखकर अपने रुममे चली गइ.. ओर फटाफट नहाके तैयार होगइ.. ओर बहार आके सब काम करने लगी.. क्युकी तब सुबहके ९ बजनेको आयेथे..

ओर रजीयाको पुनमका डर लगने लगा.. क्युकी बहार देवायतकी कार नहीथी.. ओर उनको चाइनास्ता कीसने बना दीया होगा..? वही सोचके वो डर रहीथी.. ओर मनही मन अपने आपको कोसने लगी.. क्युकी पीछली दो रातोसे वो लखनके साथ सोतीथी.. ओर पुरी रात अ‍ेक बीवीकी तराह लखनसे चुदवातीथी.. जीनकी वजहसे आज जागनेमे देर होगइ थी.. तब लखनभी जाग गया ओर नहाके तैयार होकर नीचे आगया..

तब रजीयाने उसे फटाफट चाइनास्ता बनाके दीया.. तभी लखनने रजीयाको खचकर अपनी गोदमे बीठा दीया तो रजीया अ‍ेकदम डरते आजु बाजु नजर घुमाते देखने लगी.. ओर फटाकसे लखनकी गोदसे उतर गइ.. ओर वो गभराती वापस कीचनमे चली गइ.. वो लखनकी इस बीन्दास्त सरारतसे बहुतही गभरा गइ थी.. ओर कीचने जाकर खडी रहेते सोचती रही.. तब लखनभी उनके पीछे आगया..

लखन : रजीया.. क्या हुआ..? इतना क्यु डरी हुइ हे.. कीसीने कुछ कहा क्या..? चल.. तुमको चाइनास्ता नही करना..? चल मेरे साथही करले.. अभी यहा कोइ नही हे..

रजीया : लखन आप पागलतो नही होगये..? घडीमे देखाहे..? कीतने बज गये हे अभी पुनमदीदी उठ जायेगी.. अच्छा हुआ वो अभी तक सो रही हे वरना मेतो आज गइथी कामसे.. ओर मालीकभी चले गयेहे.. पता नही उनको चाइनास्ता कीसने बनादीया होगा.. कही पुनमदीदीने बना दीया तो मेतो गइ कामसे.. मे उनको क्या जवाब दुंगी..? की आज सुबह मे कहा थी..

लखन : (हसते) अरे कुछ नही होगा मे हुंना.. मे पुनमको समजा दुगा तु टेन्शन मतले चल चाइनास्ता करले..

रजीया : लखन आप वहा करलो मे यही करलुगी.. आज नही प्लीज.. जब हम दोनो अकेले हो तब बात अलग हे.. ओर आजतो सायद मालकीनभी आजायेगी.. लगता हे अब हमारा मीलना मुस्कील होगा.. ओर आपभी ध्यान रखना.. हमारे बारेमे कीसीको पता ना चले.. वरना मुजे यहासे नीकाल देगे.. ओर आपभी ध्यार रखना अब आपकीभी सादी होने वाली हे..

लखन : अरे अ‍ैसा कुछ नही होगा मे देख लुगा तु डरती बहुत हे.. ओर अगर अ‍ैसा हेतो मेही तुम्हारे रुममे देर से आजाउगा.. वहातो कोइ दिकत नही हेनां..? रजीया अब मे तेरे बीना नही रेह सकता..

रजीया : (जटसे) नही नही.. वहा दयाभी होगी.. मे ही देरसे सब देखके आजाउगी आप मत आना.. मुजे अब कोइ रीस्क नही लेना.. मे ही आजाउगी..

लखन : चल ठीक हे.. अब चाइ नास्ता करले.. अगर अ‍ैस लगेतो मुजे कहेना मे पुनमसे बात करलुगा..

रजीया : (सरमाते) जी.. ठीक हे आप जाइअ‍े.. वरना पुनमदीदी कभीभी आ सकती हे.. कही हमे साथमे देखना ले..

लखन : (हसते) चल ठीक हे तु यही नास्ता करले.. ओर हां.. आइपील लेना मत भुलना.. हें..हें..हें..

कहातो रजीया सर्मसार होगइ ओर मुस्कराते गरदन हांमे हीलाने लगी.. ओर लखन बहार आगया ओर चाइनास्ता करने लगा.. तब रजीयाभी कीचनमे चाइनास्ता करने लगी फीर लखन अपने खेतोपे चला गया.. फीर रजीया सभी काम नीपटाने लगी.. तबभी पुनम बहार नही आइ.. तो वो पुनमको देखने चली गइ ओर बहारसेही खडी रहेके खीडकीसे देखलीया.. तो पुनम घोडे बेचके सो रहीथी.. तब उसने राहतकी सांस ली..

उधर देवायत सीधेही चंदाके गांव चला गया तो वहा मंजु ओर चंदा तैयार होकर बैठीथी.. मंजुने ओर चंदाने अपने सभी कपडे बेगमे भरलीये थे.. तो धिरेनभी बेंक जानेकी तैयारीया कर रहाथा.. ओर वो तैयार होकर नीचे आगया.. तो मंजु अपने बच्चेके साथ बहार सोफेपे बेठके बच्चेके साथ खेल रहीथी.. तो धिरेनभी आकर उनके साथ बैठ गया ओर विजयके साथ खेलने लगा..

मंजुला : (धीरेसे मुस्कराते) भाइ.. आज हम सृतीको दीखाने जा रहेहे.. ओर वहीसे सीधे घरपे चले जायेगे.. मे मौसीको भी साथ लेजा रही हु.. (थोडी देर रुकते) हमेंसा के लीये.. क्या तु खुस तो हेनां..?

धिरेन : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. आप अ‍ैसा क्यु पुछ रही हो..? मेतो कबसे खुस हु.. मेने मम्मीको इतना खुस कभी नही देखा.. उनकी हर खुसीमे मेरी खुसी हे.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. आप बीन्दास्त मम्मीको लेजा सकती हे..

मंजुला : (हसते) फीरभी सोचा अ‍ेक बार तुजे पुछलु.. चल कोइ बात नही अब तु सामको छुटतेही वहा आजाना.. ओर तेरी सादी तक वहीसे अपडाउन करना.. ओर सादीके लीये तेरी छुटीका भी देख लेना..

धिरेन : दीदी.. वोतो मेने कबका अ‍ेप्लीकेशन देदीया हे.. आप मेरे खाने पीनेका टेन्शन मतलो..ओर माको खुसी खुसी लेजाओ.. बल्की मेतो बहुत खुस हु आपने इनके बारेमे इतना अच्छा सोचा.. ओर मे यही रहुगा..

तभी चंदा उपरसे अपनी बेग लेकर आगइ तो धिरेन उसे देखते ही खडा होगया.. ओर जाकर उनके पैर छुने लगा.. तब चंदाने उसे जटसे खडा करके उसे जोरोसे गले लगालीया ओर आंखसे आंसु बहाने लगी.. तो धिरेनभी आंसु बहाने लगा.. तब मंजु बच्चेको सोफेपे सुलाके उनके पास चली गइ ओर धिरेनके आंसु पोछने लगी.. तो चंदाभी अपने आंसु खुदके रुमालसे पोछने लगी.. ओर सरमाते धिरेनको देखने लगी..

चंदा : (रुआंसी आवाजमे) धिरेन.. अपना खयाल रखना.. ओर वहा आते रहेना..

धिरेन : (आंसु पोछते हसते) मोम.. मेरी बीलकुल चीन्ता मत करो.. ओर खुसीसे अपनी जींदगी जीलो.. मे वहा आता जाता रहुगा.. आप कहा कीसी अन्जान जगाहपे जा रही हे..? दीदीके घरही तो जा रही हे..

मंजुला : धिरेन कलतो सन्डे हे.. तेरी छुटी हेनां..? तो कल तु इधर तैयार रहेना हम तुजे यहीसे पीकअप करलेगे.. कल हम सब आश्रम जा रहे हे.. मौसी ओर तेरे जीजाकी वही मंदिरमे सादी कर देगे.. आओगेनां..?

धिरेन : (जोरोसे हसते) हां दी जरुर आउगा.. मेने मोमकी सादी नही देखी.. तो इस बार देख लुगा.. हें..हें..हें.. कल पहेली बार होगा जो कोइ बेटा अपनी मोमकी सादीमे जायेगा.. हें..हें..हें..

कहा तो चंदा सरमसे पानी पानी होगइ ओर हसते हुअ‍े धिरेनको पीठमे अ‍ेक मुका जड दीया.. ओर मंजु चंदा धिरन सब हसने लगे तब दयाभी तैयार होकर रुमसे बहार आगइ.. तभी देवायत भी कार लेके बहार रुका तो सबके चहेरे खील उठे.. सबके चहेरेपे स्माइल आगइ तभी देवायत अंदर आगया तो धिरेन उनको गर्मजोसीसे गले मीला तब दयानेभी उसे पानी पीलाया..तब..

धिरेन : जीजु कैसे हे मौसाजी..? सब ठीक हेनां..? कोइ दिकततो नही..?

देवायत : (हसते) अरे मस्त हे तु टेन्शन मत ले.. मे हुनां.. ओर आजभी इन सबको छोडके वहा जा रहा हु.. ओर डोक्टर छुटी देगेतो दोनोको इघर हवेलीपे लेकर आउगा.. यहा उनकी अच्छेसे देख भालतो हो सकेगी..

मंजुला : (सीरीयस होते) देवु.. क्या मोम इधर आनेके लीये मानेगी..? क्या आपसे उनकी बात हुइ..?

देवायत : (हसते) अरे हां तुम लोग टेन्शन मत लो.. हमने कल दोपहरको साथमे खाना भी खाया.. उनसे पहेलेही अंकलको होस आगया था.. ओर रीपोर्टमे भी कुछ खास नही हे.. हम दोनोही डोक्टरको मीलने साथमे गये थे..

चंदा : (हसते) चलो अच्छा हुआ दोनो मे सुलहतो होगइ.. हें..हें..हें.. बडीदी बहुत जीदी हे.. बीलकुल आपहीकी तराह.. हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते) थेनक्स जीजु.. आपने मेरी बहुतसी टेन्शन खतम करदी..

देवायत : (हसते) यार तु टेन्शन मतले मे हुनां..? तो चले..? सब रेडी हे..? ओर दया तुभी आ रही हे..? क्या इधर नही रुकनां..? रुकना हम तुजे यहा मीलने आते रहेगे.. हें..हें..हें..

दया : (जोरोसे हसते) अरे ना बाबा नां.. अभी यहा नही रुकना.. कुछ दिनतो मालकीनके साथ रहेलु फीरतो पुनमदीदीके साथ दहेजमे मुजे इधर ही आना हे..

कहातो सभी जोरोसे ठहाका मारके हसने लगे.. ओर सब बहारकी ओर चलने लगे तब चंदा अ‍ेक बार फीरसे धिरेनके गले लग गइ.. ओर धिरेनका सर चुमलीया.. उनको लगाकी आज वो मायका छोडके हमेसाके लीये अपने ससुराल जा रही हे.. फीर धिरेनने हसते हुअ‍े बच्चेको उठालीया ओर सबके साथ बहार आगया..

सब कारमे बेठने लगे तो धिरेनने बच्चेको चंदाकी गोदमे देदीया तब मंजु धिरेनके गले लग गइ ओर कल तैयार रहेनेको केह दीया तो धिरेन हां मे सर हीलाके हसने लगा.. ओर कार सहेरकी ओर दोड पडी.. तब कारमे ही..

देवायत : मंजु अ‍ेक बार तुमने सृतीको फोन तो करदीया हेनां..?

मंजुला : तो क्या अभी तक आपने उसे फोन नही कीया..? अरे बाबा वो कीतना चीलाती हे.. आप उनसे फोनपे बात क्यु नही करते..? वो कोइ चुडेल हे क्या.. जो उनसे इतना डरते हो.. अब मीलेगी तब देना जवाब उनको.. ना जाने मुजे क्या क्या सुनायेगी.. कमीनी..

देवायत : (हसते) यार मे काममे भुल जाता हु.. ओर कीतने दीन होगये मे.. भुमी आंटीको भी नही मीला.. वो मीलेगीतो उनकीभी डांट पडेगी.. हें..हें..हें..

मंजुला : देवु.. आप बीलकुल भुलकड हो.. देखना वोभी मीलेगी तो आपको कान खीचकर डांटेगी.. अब देते रहेना जवाब उनको.. ओर हां.. अ‍ेक खास बात.. कल आप कही मत जाना.. हम सबको आश्रम जाना हे.. आपका जोभी प्रोग्राम हो सब केन्शल.. हें..हें..हें..

देवायत : अरे अचानक आश्रम क्यु..? विजको लेकर जाओगी..? इतना छोटा बच्चा हे.. हें..हें..हें..

दया : मालीक इनकी चीन्ता आप मत करो.. मे इनको रखुगी.. अबतो मेरे पासभी रहेता हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : वहा क्यु जाना हे वो आपको वहा जाकर पता चल जायेगा.. बस ओर कुछ नही कहेना..

कहातो चंदा सरमसे पानीपानी होगइ.. ओर सर बहारकी ओर घुमाते मुस्कराती रही.. तब मंजुने सृतीको फोन लगा दीया ओर उनसे बात करने लगी.. तो फोन अपने मुहके पास लेजाते धीरेसे कहा.. कुती कमीनी गालीतो मत दे.. तेरे जीजु ओर हम सब साथमे हे.. तब चंदा देवायत ओर दया मंजुकी ओर देखते जोरोसे हसने लगे तब मंजुभी बात करते हसने लगी.. उसने फौरन फोन कट करदीया तब चंदा उनकी ओर देखते अबभी हस रही थी..

मंजुला : (हसते देवायतको पीठमे अ‍ेक मुका मारते) देखानां..? सब आपकी वजहसे हुआ.. मुजे खामखा इनकी गाली सुननी पडी.. देखना अ‍ेक दिन मे इनका जरुर बदला लुगी.. हें..हें..हें..

अ‍ैसेही मजाक मस्ती करते सब होस्पीटलपे पहोंच गये तब भानु भावना सबलोग नही आयेथे.. तो देवायत कार पाार्क करतेही उनसे बात करने लगा तो पता चलाकी वो लोग अपने मामाका कार्य खतम होगया हे बस नीकलते हीहे.. कहा तो देवायतने फोन काट दीया तबतक मंजु चंदा दया सब कारसे उतर गयेथे ओर अंदरकी ओर जा रहेथे.. तो देवायतभी कार लोक करके उनके पीछे अंदरकी ओर जाने लगा.. ओर सब अंदर चले गये.. अंदर जातेही..

रीसेपनीस्ट : (हसते) आइअ‍े मंजु मेडम.. अब कैसीहे आपकी तबीयत.. आप इधर बैठीये मेडम अभी अ‍ेक पेसन्टको देख रहेहे वो चले जाये तब आप चलेजाना..

मंजुला : (हसते) जी.. कोइ बात नही हम यही बेठे हे..

तब सब वहा सोफेपे बैठ गयेतो बच्चा चंदाके हाथमे था तो वो ओर दया कच्चेके साथ खेलने लगी.. तो मंजु देवायतके कंधेपे सर रखके बैठ गइ ओर हसने लगी.. तो देवायतभी हसने लगा.. तभी दरवाजा खोलके अ‍ेक कपल हसते हुअ‍े नीकलने लगा जो लेडीथी उनका पेट काफी बहार नीकल गयाथा.. तब रीसेपनीस्टने मंजुको अंदर जानेके लीये हसकर इसारा कीया.. तो चंदा बच्चेको लेकर खडी होगइ ओर मंजुभी उनके साथ अंदर चली गइ..

सृती : (दोनोको देखतेही हसते) आइअ‍े आइअ‍े.. मौसी.. इस कमीनीको भी साथ लेआये.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते चेरपे बेठते) कुतीया.. गालीयातो मत दे.. तेरे जीजाजी भी बहार बैठे हे.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) चल पहेले तुमसे तो नीपटलु.. उनकोतो बादमे देख लुगी.. उनको बहुत चरबी चड गइ हे.. मौसी आप यही बैठो मे इनको अंदर चेक करके आती हु.. फीर बच्चेको देख लेगे..

तब चंदा बच्चेको लेके वही बैठी रही ओर उनके साथ खेलने लगी.. तब मंजु ओर सृती दोनोही अंदरकी केबीनमे चले गये.. ओर मंजुको बेडपे सुलाके उनका लोअर नीकालने लगी ओर सरकाके नीचे करदीया.. फीर सृती टोर्च लेकर उनकी योनी चेक करने लगी.. तो उनको बडा आस्चर्य हुआ ओर वो चेक करते बार बार कभी मंजुको तो कभी मंजुकी योनीको देखती रही.. फीर चेक करके उनके कपडे सही करलीये.. ओर मंजु खडी होगइ..तो..

सृती : (धीरेसे) मंजु.. तु दो मीनीट इधर बैठ मुजे तुमसे कुछ जरुरी बात करनी हे..

मंजुला : (हसते) क्यु कोइ सीरीयस मेटर हे..? तो फीर डर क्या.. जोभी हे साफ साफ बतादे..

सृती : नही मंजु तु गभरा मत.. ये कोइ सीरीयस मेटर नही हे.. लेकीन मेने अ‍ैसा मेरी जींदगीमे पहेली बार देखा..

मंजुला : (थोडा सीरीयस होते) क्या देखा..? सृती सच बताना तु कुछ मत छुपाना.. क्या देखा तुने..

सृती : (धीरेसे) मंजु तु कोइ ओर दवाइ या कुछ आयुर्वेदिक दवाइतो नही ले रही..?

मंजुला : (आस्चर्यसे) नही.. तेरी दी हुइ दवाइके अलावा कुछभी नही लीया.. क्यु..? क्या बात हे..?

सृती : मंजु जब कोइ ओरत बच्चे पैदा करलेती हे.. वो उनकी योनी अ‍ैसी नही रहेती.. उनमे काफी बदलाव आजाता हे..

मंजुला : मतलब.. तु कहेना क्या चाहती हे.. कुछ प्रोबलेम हे क्या..?

सृती : (हसते) अरे नही नही.. मंजु तेरी योनी इतनी जल्दी ठीक कैसे होगइ..? ओर देख अभी कीसी कुआरी लडकी जैसी होगइ हे.. अ‍ेकदम वर्जीन.. जैसे तुमने कोइ बच्चा पैदा ही नही कीयाहो.. गजब हे यार..

मंजुला : (तभी बाबाकी कुछ शक्तिकी बात याद आती हे) सृती.. मुजे लगता हे वो सब उन शक्तियोके कारण हुआ होगा.. मेने तुजे वो बाबाके बारेमे कहाथानां..? लगता हे उन्हीकी कारण हुआ होगा.. सृती तुजे आज अ‍ेक बात बताती हु.. पता नही मेने अभी तक कीसीको नही बताया..

सृती : (धीरेसे हसते) अब कोनसी बात हे..?

मंजुला : सृती कुछ महीनोसे मुजे जीबसा फील होने लगता हे.. मे ओर तेरे जीजु जब करते हे.. तब मुजे हब बार पहेलीबारकी तराह दर्द होता हे मानो मे पहेली बार करवा रही हु..

सृती : (आस्चर्यसे धीरेसे) मंजु..? अ‍ैसे कैसे हो सकता हे..? इस नोट पोसीबल.. दर्द सीर्फ पहेली बारही होता हे..

मंजुला : पता नही सृती लेकीन यही सच हे.. ओर अ‍ेक बात.. आज कल मुजे सबके जीवनके बारेमे पता चल जाता हे.. उनका भुतकाल, वर्तमान ओर भविष्य.. मे कीसीकोभी देखती हु तो उनके बारेमे मुजे सब ज्ञात हो जाता हे.. मुजे लगता हे ये सब बाबाने दि हुइ शक्तिके कारण हो रहा हे..

सृती : अरे हां.. तु उस दिनभी कुछ बता रही थी.. मुजे उनसे मीलाने भी वाली थी.. बता कब जाना हे वहा..

मंजुला : सृती कल.. तु कल फ्रि हे क्या..? हम कल मौसीकी सादी तेरे जीजुके साथ वहा करने जा रहेहे तु साथ चलेगी..? चलना तेरा उनसे दर्शनभी करवा दुगी.. तु आन्टीको भी साथ लेले.. वोभी दर्शन कर लेगी.. मुजे तुजे लेकरही जाना हे.. तु अ‍ेक बार बाबाको मीलले.. फीर मे तुजे कुछ बताउगी.. ओर सोच रहीहु कल यहा खीरीदी भी नीपटालु..

सृती : (हसते) हां.. ये ठीक रहेगा.. कीतने दिन होगये मम्मीको कही नही लेगइ.. चल ठीक हे आजायेगे.. में अपनी कार लेलुगी बोल हम कहा मीलेगे..?

मंजुला : (हसते) वो रास्ता तु तेरे जीजुसे पुछलेना.. मुजे रास्तेके बारेमे ज्यादा कुछ नही मालुम.. बस इतना पता हे हमारे गांव ओर इस सहेरके बीचमे अ‍ेक रास्ता हे वहीसे हम जाते हे..

सृती : चल अभी जीजुसे ही पेुछ लेती हु.. ओर बता कुछ पुछना हे..? वैसे तु मेरे बारेमेभी सब जानती होगी..? हें..हें..हें..

मंजुला : (सरमाते हसते) सृती.. हां सब जानती हु.. लेकीन आज नही.. बस तु अ‍ेक बार बाबाको मीलले.. फीर तुमसे कुछ बातभी करनी हे.. (सरमाते हसते) वैसे तु कहेती हे मेरी ये ठीक होगइ हे तो क्या मे ओर तेरे जीजु कुछ कर सकते हे.. आइ मी..न.. मतलब.. हमारा मीलन..

सृती : (जोरोसे हसते धीरेसे) कमीनी.. सीधे सीधे बोलना तुजे जीजसे चुदवाना हे.. कुती कहीकी.. तुजे कीतनी आग लगी हुइ हे.. कुछतो सरम कर.. अभी पांच दिन पहेले तेरी डीलीवरी हुइ हे.. (हसते) चल ठीक हे.. मीलना.. क्या अभी मीलना हे..? तो जीजुको अंदर लेके चलीजा.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) नही.. यहा कोइ जोखीम नही लेना वरना कमीनी तुभी आजायेगी.. हें..हें..हें..

सृती : (अ‍ेकदम सरमाते मुका मारते) कमीनी.. कुछतो सरम कर.. मे सालीहु उनकी.. तुजे जलन नही होती..?

मंजुला : (हसते) तो क्या हुआ साली भी तो आधी घरवाली होती हे.. तु उपर उपरसेही मजे करना.. हें..हें..हें.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. कमीनी मेनेतो तुजे पहेलेभी साथमे आनेको कहाथा.. लेकीन तुमही नही आइ सरमकी पुछ.. वरना मेरा देवुतो तुजे चोदकर तेरे पीछे पागल होजाता.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) कमीनी.. कुती.. कुछतो सरम कर.. चल चल.. बहार.. कमीनी बीलकुल बेसर्म होगइ हे तु.. मौसी अकेली बैठी हे.. चल बहार..

फीर दोनो हसते हुअ‍े बहार आगइ तो चंदा उनकी ओर देखते हसने लगी.. ओर बच्चेको मंजुके हाथमे थमा दीया तो मंजु बच्चेको दीखाने लगी.. ओर सृतीने उनकोभी चेक करलीया.. फीर बच्चेको वापस देदीया..

सृती : मौसी येतो मस्त हे.. ओर दोनो बीलकुल ठीक हे, अब १५ दीनके बाद दीखाने आजाना ओर वोभी सीर्फ बच्चेको चेक करना हे इनको अब चेक करनेकी कोइ जरुरत नही हे (मंजुकी ओर कातील स्माइल करते)

चंदा : सृती.. अब तु घर कब आ रही हे..? तेरी मम्मीको लेकर आ.. वहा बडी दीदीकोभी बुला लेगे..

सृती : (हसते) ठीक हे मौसी.. मे उनको आपसे जल्द मीलवाउगी.. हें..हें..हें.. ओर हां कहा गये जीजु.. मम्मी उनको बहुत याद कर रही हे.. जनाब दीखतेही नही.. फोन तक नही कीया.. बहुत आलसी हे.. हें..हें..हें..

चंदा : सृती.. तेरी मम्मीको मंजुके बच्चेके बारेमे बतायाकी नही..?

सृती : बताया..? अरे वोतो सुनके पागल होगइ..? इसीलीये तो वो जीजाजीसे मीलना चाहती हे.. ओर कुछ उनको ओर कामभी हे..

चंदा : (बच्चेको लेकर उठते) ठीक हे तुम लोग बाते करो मे उनको अंदर भेजती हु.. यही हे.. हें..हें..हें..

सृती : (चंदाके बहार जातेही धीरेसे हसते) मंजु.. मौसीतो उनका नाम भी नही ले रही.. हें..हें..हें.. लगता हे अभीसे उनको अपना पती मान चुकी हे.. हें..हें..हें.. दोनोने कुछ कीया बीया हेकी नही..? हें..हें..हें..

मंजु : (हसते धीरेसे) कमीनी धीरे बोल वो आतेही होगे.. लोजी.. आगये.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते अंदर आते) क्यु.. दोनो मेरे बारेमे क्या बाते कर रही हो..? मंजु सच बताना..

मंजुला : (जोरोसे हसते) अरे कुछ नही.. ये सृतीको आपसे कुछ कामथा.. हें..हें..हें..

सृती : (जोरोसे हसते) कमीनी मेरा नाम क्यु ले रही हे.. नही जीजु मेने कुछ नही कहा.. हें..हें..हें..

देवायत : (चेयरपे बेठते) हां.. तुम दोनो कीतनी सातीर हो मुजे सब पता हे.. बोल सृती क्या कामथा..?

सृती : (कातील नजरोसे स्माइइ करते) क्यु..? आपको फोन करनेको कहाथा कुछ याद नही रहेता आपको..? मुजे नही मम्मीको आपसे कुछ काम था.. वो कबसे आपको याद कर रही हे.. लगता हे नजाबको टाइमही नही मीलता.. कहो घरपे कब आ रहे हो.. जीजु वो आपको बहुत याद कर रही हे.. अ‍ेक बार आकर उनसे मीललो.. ताकी मेरा दिमाग ना खाये.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) मीलनेदे उसे फीर कहेता हु तुम्हारी लडकी तुम्हारे बारेमे क्या केह रहीथी.. हें..हें..हें.. सृती आज देर हो रहीहे वरना आजही मील लेता.. मुजे राजीव अंकलके पास जाना हे.. वो होस्पीटलाइ हे.. उनको पेरेलेटीक स्ट्रोक आया हे.. कलही होसमे आये हे..

सृती : (गंभीर होते आस्चर्यसे) क्या.. राजीव अंकलको..? कमीनी.. तु तो कहेती भी नही हे..?

मंजुला : (आंख गीली करते) सृती.. मुजेभी परसो पता चला.. वोभी धिरेनसे.. ओर मे इस हालमे कैसे जाती.. तो तेरे जीजुको ही भेज दीया.. अब उनकी हालत काफी बहेतर हे.. कलही मम्मीसे मेरी बात हुइ..

सृती : (सरमाते हसते धीरेसे) जीजु.. क्या.. आंटीसे आपकी सुलाह होगइ..? दोनो नही बोलतेथे..

देवायत : (हसते) हां होगइ.. अब कोइ गीला सीकवा नही.. बस मेरी मंजु खुस रहेनी चाहीये..

कहातो मंजु अ‍ेकदम इमोस्नल होगइ ओर खडी होकर देवायतके गले लग गइ ओर आंसु बहाने लगी.. तो सृतीभी खडी होके उनके पास आगइ ओर मुस्कराते मंजुकी पीठ सहेलाती रही.. फीर मंजुके आंसु पोछके उनको पानी पीलाया ओर तीनो वापस चैयरपे बेठ गये.. तब सृती देवायतकी ओर देखके हसने लगी..

सृती : जीजु आइ अ‍ेम हेपी.. की मंजुको आप मीले.. दोनोके बीच कीतना गहेरा प्यार हे..

मंजुला : (हसते) तो तुभी आजा.. मेरा देवु तुजेभी इतना ही प्यार देगा.. हें..हें..हें.. क्यु देवु..?

सृती : (अ‍ेकदम समस्सार होते) कीतनी कमीनी हो.. कुछतो खयाल कर.. जीजु इधर बैठेहे.. कुछभी बोलती हे.. बेसर्म कहीकी.. ये सब छोड मुजे जीजुसे कुछ पुछना था..

देवायत : (हसते) क्या..? क्या..? अब क्या पुछना बाकी रेह गया.. हें..हें..हें.. ये बताओ आंटी कैसी हे..?

सृती : (हसते) अ‍ेकदम मस्त.. जीजु कल आप सब आश्रम जा रहेहे.. अगर मुजे आश्रम जाना होतो मे आपका वेइट कहा करु..? मे मेरी कारसे मम्मीको लेकर आ रही हु..

देवायत : अरे हमारे गांवके रोडपे बीचमे वो ---नाका आता हेनां..? वहीसे अ‍ेक रास्ता जंगलकी ओर जाता हे.. सायद वो रास्ता तुमने देखा होगा.. बस वही रास्तेसे हमे आश्रम जाना हे..

सृती : अरे हां वो तो मेने देखा हे.. वहां..?

देवायत : हां बस वही तुम आंटीको लेकर ९.३० बजे पहोंच जाना पहेले तुम आजाओतो हमारा वेइट करना वरना हम वही खडे रहेगे.. फीर दोनो साथ चले जायेगे.. ओर हां.. वहीसे सीधा हवेलीपे आना हे तेरा जोभी अ‍ेडजेस्टमेन्ट हे वो कर लेना मुजे कुछ बहाना नही चाहीये..

सृती : (हसते) जीजु हम सब वहीसे इधर आजायेगेनां.. आप सब कल हमारे घर आ रहेहे.. ओर रातका डीनर करके चले जाना.. क्ये कल यहा खरीदी करने नही आ रहे..? वहा हवेलीमे फीर कभी आउगी.. क्या वहा आप अंकल ओर नीर्मला आंटीको लेकर आ रहे होनां.. तो मम्मीको तभी वहा लेकर आजाउगी.. दोनो फ्रेन्ड वही मील लेगी.. क्या कहेते हो..?

मंजुला : (हसते) चल जैसे तेरी मरजी.. लेकीन तब आंटीको लेकर आना ओर वहा कमसे कम दोनोको तीन दीन रोकुंगी.. तब कुछ नखरे मत करना अभीसे केह देती हु..

सृती : (हसते) पका.. तब मे वहा रुकुगी.. ओर अभी तेरे देवर ओर पुनमकी सादी भी हेनां.. तबही आजाउगी..

देवायत : हां ये बेटर रहेगा.. तब अंकल आंटीभी वहा होगे.. तबही मील लेना.. ओर हां वो भावु लोग अभी आ रहेहे बीच रास्तेपे ही हे.. उनको जरा देख लेना..

सृती : जीजु आप भावुकी चीन्ता मत करो वो मेरी भी बहेन हे.. मे सब देख लुंगी..

मंजुला : (खडी होते) सृती.. चल अब हम चलते हे.. फीर तेरे जीजुको भी नीकलना हे.. चलो बाय..

तब सृती ओर देवायतभी खडे होगये ओर मंजु आगे चली गइ.. तब सृती जटसे देवायतके पीछे आगइ ओर उनसे सटकर उनका हाथ पकडलीया.. तो देवायतने हसते हुअ‍े उनकी ओर देखातो जटसे उनकी ओर आज पहेली बार आंख मारते इसारोसे फोन करनेको कहेने लगी.. ओर हाथ दबाकर छोड दीया तो देवायतने अचानक पीछे मुह करते सृतीके होंठ चुमलीये ओर हसने लगा..

तब सृतीको पहेली बार देवायतने होंठ चुमकर कीस करदी तो सृती सोक्ट होते मुह फाटते उनकी ओर देखती रही.. क्युकी पीछले कुछ महीनोसे वो सीर्फ देवायतके बारेमे ही सोचती रहेती हे.. ओर जबसे देवायतके पेन्टके उभारको देखलीया हे तबसे वो पागल हो रही हे.. ओर आज मंजुकी बातो ने आगमे घी डालनेका काम कीया.. तबतक देवायत बहार नीकल चुकाथा तो वो जटसे उनके पीछेकी ओर दोड पडी.. जैसे उनसे उनका पुराना यार बीछड रहा हो....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ८७

तब सृतीको पहेली बार देवायतने होंठ चुमकर कीस करदी तो सृती सोक्ट होते मुह फाटते उनकी ओर देखती रही.. क्युकी पीछले कुछ महीनोसे वो सीर्फ देवायतके बारेमे ही सोचती रहेती हे.. ओर जबसे देवायतके पेन्टके उभारको देखलीया हे तबसे वो पागल हो रही हे.. ओर आज मंजुकी बातो ने आगमे घी डालनेका काम कीया.. तबतक देवायत बहार नीकल चुकाथा तो वो जटसे उनके पीछेकी ओर दोड पडी.. जैसे उनसे उनका पुराना यार बीछड रहा हो....अब आगे

सृती दोडकर गेइट तक आइ तब सभी लोग कारमे बेठ रहेथे.. तो सृती वही रुककर सबको देखने लगी.. ओर देवायतने कार स्टार्ट करदी ओर गेइटकी ओर देखने लगा तब दोनोकी आंख मीलतेही सृती उनको हाथ हीलाकर मुस्कराते बाय.. कहेने लगी.. आज सुतीके दिलके तार संगीतके सुर छोडकर प्यारकी धुन बजाने लगे.. तब सृती बहुतही रोमांचींत होते सबके जाने तक वही खडी रही..

इधर देवायत सबको लेकर अपने गांवकी ओर चला गया.. तो मंजु ओर चंदाने बीच रास्तेमे अ‍ेक कपडे ओर ज्वेलेरीकी दुकानमे मंगलसुत्र खरीद लीया ओर अपने गांवकी ओर चले गये.. तो दुसरी ओर भानुभी अपने मामाका अस्थी विसर्जन करके वहासे नीकल गयाथा.. ओर आधे घंटेके बाद वोभी सृतीकी होस्पीटल आगया वहा सृतीने भावनाको ओर बच्चीको चेक करलीया देखातो भावनाकी योनीमे रेग्युलर सुधार हुआथा..

ओर उसने भावनाको अभी दो महीने सेक्स करनेको मना कीया.. फीर वो भी सृतीको दीखाकर बाजारमे सादीकी खरीदी करने चले गये.. तो वहा भावना अपनी बच्चीको लेकर कारमे ही बैठी रही ओर रमा नीलम लता सब अपने अपने कपडे लेने लगे तो रमाने सरला ओर भावनाके लीयेभी महेंगी महेंगी सारी खरीदली.. फीर सब अ‍ेक ज्वेलेरी सोपमे चले गयेतो वहाभी रमा जबरदस्तीसे भावुको साथ ले गइ ओर उन्होने लताके लीये कुछ ज्वेलरी लेली..

फीर नीलम लता ओर रमाने लताके लीये सादीका जरुरी सामन खरीद लीया सभी देर साम तक खरीदी करते रहे.. ओर बीचमे अ‍ेक होटेलमे खानाभी खा लीया.. तबतक रातमे देर होगइ.. सभी आजही सब खरीदीका काम नीपटाना चाहते थे.. तो इधर घरपे सीर्फ सरला अकेली थी..

तो उधर देवायत मंजु चंदा दया सबको लेकर दो पहरकोही हवेलपे आगया.. तो पुनमतो देखतेही बच्चेको गोदमे उठाकर अंदर चली गइ.. वो आराम करके काफी हद तक ठीक होगइ थी.. ओर सोफेपे बेठकर विजयके साथ खेलने लगी.. फीर सबने खाना खालीया.. ओर देवायत राजीवके पास जानेके लीये नीकलने लगा.. तब..

मंजुला : देवु.. अगर पापाको होस्पीटलसे डीस्जार्ज मील जाये तो आप उन दोनोको इधर ही लेकर आना..

चंदा : हां देवु.. अगर दीदी हानाकानी करेतो मुजसे बात करवाना.. वो बहुतही जीदी हे.. अ‍ेक बार मनमे ठानली.. फीर कीसीकी नही सुनती..

देवायत : हां ठीक हे.. आप टेन्शन मत लो वो जरुर आयेगे.. चलो मे चलता हु.. सायद रातको मुजे आनेमे देर होजाये..

कहेते देवायत वहासे अपनी बडी कार लेकर नीकल गया.. वो आज बहुत खुस था.. रीजन बस अ‍ेकही था.. आज चंदा हमेसा हमेसाके लीये उनके पास आ गइथी.. ओर उधर नीर्मलासे भी सुलेह होगइ थी.. तो आज सृतीने भी उनको हाथ दबाकर जटका दे दीयाथा.. तो मनही मन हसते खुस होते वो अपने ससुरके पास होस्पीटलपे पहेच गया.. ओर कार पार्क करके सीधाही अंदर चला गया.. ओर जेसेही दरवाजा खोला..

तो देखा नीर्मला राजीलको ज्युस पीला रही थी.. तो दोनोकी नजर देवायतकी ओर गइ.. ओर दोनोके चहेरे देवायतको देखतेही खील उठे.. तब देवायत राजीवके बेडके पास खाली चेयरपे बेठ गया ओर उनके सामने देखकर मुस्कराने लगा.. तब नीर्मलाभी सरमाते उनकी ओर देखते हसती रही.. राजीव अब पहेलेसे काफी बहेतर था.. ओर धीरे धीरे थोडा बोलनेभी लगाथा.. ओर सरीरमेभी काफी सुधार था..

देवायत : (हसते) कैसेहो पापा..? लगाहे अब काफी ठीक हो गेये हो.. हें..हें..हें..

राजीव : (धीरेसे हसते) हां.. अब तुम जो आगये हो.. तो ठीकतो होना ही पडेगा.. हें..हें..हें..

नीर्मला : सुनीये राजीव.. आप अभी कम बोलना.. डोक्टरने मना कीया हेनां..? मे देवुसे बात करती हु..

देवायत : क्या कहेते हे डोक्टर..? क्या सुबह देखने आये थे..?

नीर्मला : हां देवु.. यहा बहुत अच्छी ट्रीटमेन्ट हो रही हे बहुतही फास्ट रीकवरी आ रही हे.. फीरभी आप अ‍ेक बार डोक्टरसे मील लेनां.. अभी अपनी केबीन मे होगे.. क्या मे साथमे चलु..?

देवायत : (हसते खडे होते) हां हां.. चलो अ‍ेक बार मील लेते हे देखु तो सही वो क्या कहेते हे..

कहेते वो बहार जाने लगातो राजीव दोनोको आपसमे बात करते देखकर खुस होने लगा.. तभी नीर्मलाभी खडी होकर उनके साथ बहार नीकल गइ.. ओर जटसे देवायतके साथ जाके चलने लगी ओर उनका हाथ पकडलीया.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके सामने देखके हसने लगे.. ओर रीसेप्नीस्टको कहेके वो डोक्टरको मीलने उनकी ओफीसमे चले गये.. तब नीर्मलाने देवायतका हाथ छोड दीया..

डो. राजेन्द्ग : (हसते) आइअ‍े आइअ‍े ठाकुर साहेब.. कैसेहे आप.. मजेमे..?

देवायत : (हसते हाथ मीलाते बेठते) बस अ‍ेकदम मजेमे.. कहीये क्या कहेते हे मेरे ससुरजी.. तबीयतमे तो काफी सुधार लग रहा हे.. अभी मुजसे बात भी की.. हें..हें..हें..

डो. राजेन्द्ग : (हसते) अरे आप टेन्शन मतलो.. उनकोतो मे वापस खडा करदुगा.. ओर अपने धंधे पे भेज दुंगा.. काफी अच्छी रीकवरी हे.. टाइमपे पहोंच गये ओर दवाइभी असर कर गइ.. बस अ‍ैसेही सुधार हुआ तो सायद कल छुटी देदुगा.. कल सामको देखते हे.. बस आज रात तक ड्रीप लगी रहेगी.. फीरतो सुबह वोभी नीकाल देगे.. लगता हे वो टेन्शनमे बहुत रहेते होगे.. तभी उनका बीपी हाइ हुआ हे..

देवायत : सायद.. पता नही उनको कोनसा टेन्शन होगा.. सर.. मे उनको अपने घर लेजाउगा वहा सब होगेतो अच्छे माहोलमे ठीक रहेगा.. वहा उनकी बेटी हे तो उनकोभी देख लेगे..

डो. राजेन्द्ग : (हसते) हां ये ठीक सोचा हे आपने.. हवा पानी भी बदल जायेगातो जल्दी ठीक होजायेगे..

देवायत : (हसते) सर वो आपकी फीस जमा करवानी थी.. तो बहार रीसेपनीस्टपे देदु..?

डो. राजेन्द्ग : (हसते) ठाकुर साहेब कल घरपे बाबुजीसे बात हुइ.. तो आज सुबह वो अंकलको देखने आयेथे.. दोनो पुराने दोस्त हेनां.. ओर उसने मुजे फीस लेनेके लीये बीलकुल मना करदीया हे.. तो मे नही ले सकता.. सोरी..

देवायत : अरे अ‍ैसे थोडी चलता हे.. आपने दवाइमे इतना बडा खर्चा कीया हे.. ओर सर वैसेभी पैसेकी कोइ प्रोबलेम नही हे..तो..

डो. राजेन्द्ग : (हसते) पता हे मुजे.. आप इतनी बडी वीरासतके मालीक हेतो पैसोकी प्रोबलेम कहा होगी.. लेकीन ये मेरे भी अंकल हे.. ओर हां मुजे सर मत कहीये आप मुजे नामसेही बुला सकते हे..

देवायत : (हसते हाथ मीलाते) ठीक हे मी. राजेन्द्ग तो आजसे आप मुजेभी ठाकुरसाहब मत कहेना.. मेरा नाम देवायत हे.. सीर्फ उन्हीसे काम चल जायेगा हें..हें..हें..

डो. राजेन्द्ग : (हसते) जी देवायतजी.. आपसे मीलकर मजा आगया.. आपके जैसे बहुत कम दोस्त मीलते हे..

फीर देवायत ओर नीर्मला बहार आगये तो नीर्मला बहुतही खुस थी.. ओर देवायतका हाथ पकडलीया ओर दोनो अपने रुमकी ओर आने लये तब नीर्मलाने वापस हाथ छोड दीया.. ओर दोनो राजीवके पास आकर बैठ गये तो नीर्मला राजीवको सबकुछ बताने लगी.. तबतक देवायत ओर राजीव हसते रहे.. फीर..

देवायत : (हसते) पापा डोक्टर केह रहेथे आपको टेन्शनकी वजहसे ये सब हुआ.. तो कहीये आपको कीस बातकी टेन्शन हे..? सब अच्छेसे तो चल रहा हे अबतो बेटीओकी भी चीन्ता नही हे..

राजीव : (थोडी देर आंख बंध करलेता हे फीर) बेटा.. नीमु तुमसे बात नही कर रहीथी.. ओर मे सोचता रहेताथा की मेरे जानेके बाद इनका क्या होगा..? वो अकेली कैसे रहेगी..? बस यही भीन्ता खाये जा रहीथी.. लेकीन अब ये चीन्ता बीलकुल नही हे.. क्युकी मेने देखा आप दोनो बोल रहेहे.. हें..हें..हें.. बस मेरा अ‍ेक काम करदो.. फीर कोइ चीन्ता नही..

नीर्मला : (आंख गीली होतेभी हसते) अब कोनसा काम बाकी रेह गयाहे हे आपका..? ओर हमारे बीच भी कोइ मनमोटाव नही था.. बस हम कुछ कम बोलते थे.. बस यही.. ओर कुछ नही..

देवायत : पापा आप अब कोइ टेन्शन मत लेना.. अबी आपका बेटा जींदा हे.. कहो क्या काम करना हे मुजे..

राजीव : (गहेरी सांस लेते) भगवान आपको लंबी उम्र दे.. बस अ‍ेक वादा चाहीये मुजे.. वोभी आपसे..

देवायत : (उनका हाथ थामते) पापा बाप भी कभी बेटेसे वादा लेता हे..? बस हुकुम कीजीये.. वोतो हुकुम करता हे.. मे आपको अ‍ैसेही पापा नही कहेता..

तभी राजीव कुछ अ‍ैसा करता हे जीससे देवायत ओर नीर्मला दोनोही सोक्ट होते अचंभीत होजाते हे.. ओर तीनो अ‍ेक दुसरेकी ओर देखते ही रहेते हे.. कीसीके मुहसे अ‍ेक सब्दभी नही नीकल रहाथा.. दरसल राजीवने अ‍ेक हाथसे नीर्मलाका हाथ थामलीया.. ओर दुसरे हाथसे देवायतका हाथ थामते नीर्मलाका हाथ देवायतके हाथोमे थमा दीया.. जीसकी वजहसे दोनोही सोक्ट होके राजीवकोही देखते रहे तब राजीवने हसते हुअ‍े कहा..

राजीव : बस बेटा.. यही वादा चाहीये मुजे.. अगर मुजे कुछ होजाताहे तो आप मेरी नीमुका खयाल रखीयेगा.. ताकी मुजे तसली होजायेकी मेरे जानेके बाद नीमु अकेली नही रहेगी.. उनकी देखभालके लीये उनका दामाद हे.. बस मुजे ओर कुछ नही चाहीये.. यही टेन्शन खाये जा रहीथी..

देवायत : (मम्मी बोलनेसे हीचकीचाते) पापा आप इनकी बीलकुल टेन्शन मतलो.. मे आपसे वादा करता हु.. म..मम्मी..का मे मरते दमतक खयाल रखुगा.. उनको मेरे पासही रखुगा.. लेकीन आप अ‍ैसा गलत क्यु सोचतेहो की मुजे कुछ होजायेगा.. आपको कुछ नही होगा हम सब हेना.. हम आप दोनोका खयाल रखेगे..

राजीव : (हसते) बस बेटा.. बुढापा हे ही अ‍ैसा.. मुजे कभीभी कुछभी हो सकता हे.. ओर नीमुकोतो अभी लंबा सफर काटना हे..

नीर्मला : (आंसुके साथ) ये आप कैसी बेहकी बेहकी बाते कर रहे हे..? आपको कुछ नही होने वाला..

राजीव : (हसते) नीमु.. हमारा देवा बहुतही अच्छा हे.. सबका खयाल रखता हे.. उनके बापुकी तराह.. मेरा जीगरजान भाइ.. मेरा सबकुछ.. जो जींदगीभर मेरा साथ नीभानेका वादा कीयाथा वो उसने पुरा कीया..

देवायत : पापा अब आप कुछ देर आराम कीजीये मे अब साम तक यही हु.. ओर कल सायद आपको यहासे छुटी मीलजाये.. तब आप दोनको मेरे साथ हवेलीपे आना हे वहा कुछ दिन आराम करलो.. जब बीलकुल ठीक होजाओ तब इधर आना होतो आजाना वरना वही रहेनां..

राजीव : बेटा बेटीके घरभी कोइ रहेता हे.. हम यहा ही ठीक हे.. आप हमारी चीन्ता मत करना..

नीर्मला : अब आप सोजाइअ‍े वो हम बादमे देख लेगे.. अगर आप मेरी वजहसे अ‍ैसा केह रहे हो तो अब मुजे वहाभी जानेमे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. हम वही चले जायेगे..

राजीव : (मुस्कुराते खुस होते) अच्छा..? तो फीर हम दोनो वहा मेरी मंजुके पास चलेगे..

नर्स : (अंदर आते) अंकल खाना खालीया हे..? तो लीजीये दवाइ पी लीजीये ओर आराम कीजीये.. आप बाते बहुत करते हे.. हें..हें..हें..

कहेते नर्सने राजीव अंकलको दवाइ पीलादी ओर चली गइ.. तो कुछ ही देरमे वो नींदकी आगोसमे चले गये.. तब नीर्मला देवायत हाथ पकडके उसे बहार लेगइ.. ओर वो दोनो होस्पीटलके बहार अ‍ेक पैडके नीचे बेन्च रखीथी वहा जाकर बैठ गये.. तब नीर्मला देवायतके कंधेपे सर रखके बैठ गइ.. ओर देवायतका हाथ थाम लीया.. जेसे कोइ दो प्रेमी बेठे हो..

नीर्मला : देवु क्या कर रही हे मंजु ओर चंदा..? क्या दोनो घरपे आगइ? ओर आप दोनो सादी कब कर रहे हो..?

देवायत : हां अभी मंजुको दीखाके आयेहे.. ओर दोनोको घरपे हे.. उसे घरपे छोडके ही आया हु.. ओर सादीका पता नही.. कल मंजुने मुजे घरपे रहेनेका ओर्डर दीया हे.. सायद कलही हमारी सादी होजायेगी.. आज छुटी नही मीली.. वरना आप लोगभी सामील होते.. मंजुने मुजे आप दोनोको साथ लेकर आनेको कहा हे..

नीर्मला : (हसते) कीतना अजीब हेना..? ये सब पुराने रीती रीवाज.. पता नही इनसे हम ओरतोको कब छुटकारा मीलेगा..? चंदातो बुहत छोटी थी.. मेरी गोदमे बीठाकर मेने उसे खेलाया खीलाया ओर बेचारी भर जवानीमे विधवा होगइ.. इनसेतो आपका घर अच्छा हे.. इतनी बडी रोयल फेमीली हे.. फीरभी वहा बहुत कुछ छुट हे.. ओरतको अपनी मरजीसे सादी करनेकी छुट.. मर्द कीतनीभी सादी करले कोइ कुछ पुछने वाला नही.. जीसे जैसी मरजीमे जीना हो.. सब खुलकर जींदगी जीतेहे..

देवायत : (हसते) तो फीर आप वहासे क्यु चली गइ..? मुजे कुछतो अंदाजा हे आपके साथ वहा जरुर कुछना कुछ गलत हुआ होगा.. बस मुजे आपके बारेमे ज्यादा नही पता..

नीर्मला : (आंख गीली करते अ‍ेक नजरसे) देवु.. आप मेरे बारेमे क्या जानते हे? जो मेरे इस अतीकके बारेमे पुछ रहे हे..

देवायत : नीमु.. बुरा मत मानना.. मेरी भुमी आंटीसे काफी बात चीत होचुकी हे.. तब मे इतना जान पायाकी आप ओर मेरे बापु आपसमे बहुत प्यार करते थे.. ओर आप सब अ‍ेकही कोलेजमे साथ पढते थे.. बस इतनाही.. पता हे.. नीमु मुजे तेरे अतीतके बारेमे जानना हे.. आइ प्रोमीस बात सीर्फ मेरे तकही सीमीत रहेगी.. मुजे जानना हे मेरी नीमु वहासे सबको छोडकर क्यु इधर आगइ..

नीर्मला : (फीकी मुस्कानके साथ) देवु क्यु गडे मुदे उखाड रहेहो.. जो वो केवल हमे दुख ही देता हे.. भुल जाओ सब.. मेभी सब भुल चुकी हु.. बडी मुस्कीलसे इन सब बातोसे बहार नीकलपाइ हु.. कुछ बाते अ‍ैसीहे जो वो राज रहे उसीमे हम सबकी भलाइ हे.. बस यही समजलो मे आपकी ओर मंजुकी सादीके खीलाफ थी.. उनका कारण भी यही था.. वरना मुजे आपकी ओर मंजुकी सादीसे क्या अ‍ेतराज हो सकता हे..

देवायत : नीमु.. आज तुमसे अ‍ेक बात कहेना चाहता हु.. तेरी मंजु कोइ सामान्य ओरत नही हे.. जीस दीन हमने बाबाके आश्रममे जाकर सादी करली उसी दीन बाबाने उनको बहुत कुछ बतादीया हे ओर उनके अंदर बहुत सारी शक्तिीया स्थापीत करदी हे.. वो हम सबके बामरेमे सब कुछ जानती हे.. बस कुछ बोलती नही.. क्युकी वो बाबाके साथ वचनसे बंधी हे.. वरना वो मुजे सबकुछ नही बता देती..? मेभी उनको फोर्स नही करता.. समय आनेपे वो मुजे धीरे धीरे सब बताती रहेती हे..

नीर्मला : (आस्चर्यसे अ‍ेक नजरसे देखते) तबतो वो मेरे बारेमे सब कुछ जान चुकी होगी.. फीरभी कुछ नही बोली..? क्या उसीने बोला हेना.. मम्मीको माफ करदेनां..? देवु.. मेरी मंजुका दिल कीतना विशाल हे.. मे उनको कभी समजही नही पाइ.. सब आपहीकी बदौलत हुआ हे.. आइ अ‍ेम सोरी.. आप दोनो मुजे माफ कर देना.. मे सब कुछ जानते हुअ‍ेभी अन्जान रही.. ओर आप अन्जान होते हुअ‍ेभी सब कुछ जानते हो..

देवायत : (हसते) नीमु.. पती पत्नीके बीच माफी नही मांगी जाती.. तु आजभी मेरी पहेली बीवी हे.. मे आजभी तुमको इतनाही चाहता हु. जीतना पहेले चाहता था.. बस तुमको हमारे बीच कुछ गलतफेहमी हो गइ थी.. जो अब दुर होगइ..

नीर्मला : (बेठेही हग करते) जानु.. मे आपको सबकुछ बता दुगी.. ओर मुजे यकीन हे.. आप मेरी बात सुनके वीचलीत नही होगे.. ओर हमारे रीस्तेमे आगेभी कोइ फर्क नही पडेगा.. आप प्रोमीस करो मुजे..

देवायत : (हसते) अरे बाबा कीतनी बार प्रोमीस करु..? हें..हें..हें.. ठीक हे फीरभी आइ प्रोमीस.. हमारे रीस्तेमे कोइ फर्क नही पडेगा.. जो भी कहेना हो बीन्दास्त कहेना.. आज भलेही सब राज खुलजाये.. मे वीचलीत नही होउगा.. ओर राजीव अंकल अभी सोये हे.. तो मुजे नही लगता दो घंटेसे पहेले वो जागेगे.. हमारे पास काफी टाइम हे..

नीर्मला : (गेहेरी सास लेते कंधेपे सर रखते) जानु तो सुनो.. आप मेरी जींदगीमे पहेले सख्स हो जो उनको मे सब सचाइ बताने जा रही हु.. ओर आपनेभी मुजे प्रोमीस कीया हे कीसीको नही बतायेगे.. मेरी कुछ बाते हे जो राजीवको भी नही पता.. जो आज आप जानोगे..

देवायत : हां नीमु.. मेतो यही मानता हु पती पत्नीके बीच कोइ पर्दा नही होना चाहीये.. बोलो..

(थोडा अतीतमे..)

नीर्मला : बात तबकी हे जो मेरे पीताजी आपके दादाके वहा मुनीम थे.. मां तो चंदा छोटीथी तबही गुजर गइथी.. ओर हम दोनो बहेने ओर अ‍ेक बडाभाइ वही हवेलीमे रहेते थे.. में.. मेरे बडेभाइ राजीव..आपके पीता किशन.. भानुके पीता वीरजी.. सृतीके मम्मी पापा यानी भुमीका ओर नरेश हम सब अ‍ेकही कोलेजमे अ‍ेकही क्लासमे साथमे पढते थे.. वो तीन लडके हमसे अ‍ेक साल आगे पढ रहेथे लेकीन अ‍ेटी केटीकी वजहसे आगे नही जापाये ओर हमारे साथ होगये ओर मे भुमी ओर किशन.. अ‍ेक साथ अ‍ेकही क्लासमे पढ रहेथे..

भुमी वही होस्टेलमे रहेती थी ओर नरेश सहेर मेही उनकी माताके पास रहेताथा.. उनके पीताजी नही थे.. ओर किशन राजीव विरजी ओर में हम चारो किशनकी कारसेही कोलेज जातेथे.. हम पढाइके साथ साथ बहुत धमाल करतेथे.. खासकर वो चारो लडके.. हमारे गृपमे सीर्फ हम दो लडकीया ही थी.. कोइ हमारी ओर आंख उठाके नही देखते.. अगर कीसीने हमे छेडा.. तो गया कामसे.. ये चारो उनकी हडी पसली अ‍ेक करदेते थे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) अच्छा..? पीताजी दीखनेमे तो कीतने भोले थे.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) नही वो सचमे बहुत भोले भाले थे.. लेकीन हम सबमे सबसे होशीयार वोही थे.. तभीतो मे उनसे दिल लगा बैठी.. किशनने मुजे क्लासमेही चीठी देकर अपने प्यारका इजहार करलीया.. ओर मेभीतो उनको चाहने लगीथी.. बस तबसे हम दोनोकी प्रेम कहानी सुरु होगइ..





ओर भानुके पीता विरजी.. वो बहुत सनकी थे.. ओर दिखनेमेभी काफी क्रुर थे.. वो कीसीके सामने देखते तो आधी तो सामने वालेकी अ‍ेसेही फट जाती.. कोलेजसे बन्क मारके हम कीतनी बार सीनेमा ओर होटेलमे जाते ओर वो चारो बीन्दास दारु पीकर धमाल करते.. तब हम दोनो उनसे दुर ही रहेती.. ओर भाइ भी बहुत भोले थे.. ओर अभी भी अ‍ैसेही हे.. हें..हें..हें..





हम सभीमे सबसे ज्यादा पढनेमे किशन होशीयार था.. घरपेभी मे भाइ ओर कीशन सब साथमेही पढते तो कभी कभी वीरजीभी पढने आजाता.. ओर भाइ पीताजीकी हेल्पभी करता.. ज्यादातर मे ओर किशन ही साथमे पढते.. ओर मुजे पढनेमे कोइ सवालमे प्रोबलेम होतीतो किशन मुजे पढाकर सोल्व कर देता.. ओर दोनोको अकेलेमे साथमे रहेनेका बहुत मौका मीला..





ओर जीनकी वजहसे हम अ‍ेक दुसरेसे नजदीक आते गये.. ओर बात आगे बढती गइ.. फीरतो पढाइके अलावा बहुत कुछ होने लगा.. मुजेतो बतानेमे भी सर्म आ रही हे.. लेकीन आप काफी समजदार हो.. मेरी बातको समज गये होगे.. हमे जबभी मौका मीलता हम दोनो मस्तीया करने लगे.. ओर धीरे धीरे आगे बढने लगे.. हम दोनोही अ‍ेक दुसरेके बगैर दुर नही रेह सकते थे.. दोनोही साथमे रहेते..





जब फाइनल यरमे आये तबतक मे ओर किशन काफी आगे बढ चुके थे.. अ‍ेक बार हवेलीपे सीर्फ हम दोनोही अकेले थे.. तब हमारे बीच सब दुरीया खतम होगइ.. ओर हम दोनोके बीच सब कुछ होगया.. उसी दिन किशनने मेरा कौमार्य भंग कीया.. ओर मेरा किशनने मुजे लडकीसे ओरत बनादीया.. फीरतो हम दोनोको जबभी मौका मीलता हम दोनो मील जाते.. हम दोनोने ये बातकी कीसीको भनकभी नही लगने दी.. किशन मौका मीलतेही मुजे कहीभी पकड लेता.. ओर हम दोनो अ‍ेक हो जाते..









तब वो बिलकुल आपही की तराह दीखतेथे.. ओर अ‍ेक दिन तुम्हारे दादा ओर दादी.. अ‍ेक खुबसुरत लडकीको तुम्हारे पुर्खोके आश्रमसे लेकर आगये.. बस.. यहीसे मेरी कीस्मतने करवट लेली.. ना हवेलीपे ओर नाही गांवमे, कीसको ये नही पताथा की ये लडकी कौन हे.. बस सब लोग यही कहेतेथे की लडकी गरीब हे ओर आश्रममे अकेली रहेतीथी तो तुम्हारी दादीको दया आगइ.. इसीलीये वो लडकीकी देखभाल करने इधर लेआये हे..

फीरतो वो लडकीभी किशनको पसंद करने लगीथी.. ओर पता नही उसने किशनपे कोनसा जादु करदीया.. मेरा किशन उनके पीछे पागल होने लगा.. ओर उनको सीर्फ वो लडकीही नजर आती थी.. फीर पता नही अ‍ेक दिन क्या हुआ.. आपके दादा ओर दादी दोनोही सुबह नही जागे.. ओर वो चल बसे..

देवायत : क्या वो लडकी मेरी मां थी नां..?





नीर्मला : हां.. वोही आपकी मां विमलादेवी.. वोभी किशनकी ओर ढलने लगी ओर मेरा किशनभी उनके पीछे तो अ‍ैसे पागल होगया की.. कुछही दिनोमे वो लडकी अपना सबकुछ लुटा बैठी.. ओर पता नही किशनभी उनके पीछे लग गया.. फीरतो नीत्यक्रम बन गया.. दिनमे मेरे साथ तो रातमे हम सब सो जाते तब किशन देर रात उनके रुममे चला जाता.. ओर दोनो पती पत्नीकी तराह रहेने लगे.. इस बातकी भनक मुजेभी नही लगने दी.. ओर वो लडकी किशनको मेरे खीलाफ उल्टी सीधी बाते करके भडकाने लगी..

ओर किशनभी धीरे धीरे मुजसे दुर रहेने लगा.. ओर विमलाका पेट धीरे धीरे बहार नीकलने लगा.. तब ना विमलाको पताथा ओर नाही मुजे की हम दोनो किशनसे प्रेगनेन्ट हो चुकी हे.. तब मेरे पेटमे मेरी मंजु पलने लगी.. ओर विमलाके पेटमे आप पलने लगे.. हम दोनोकोही नही पता था.. हम दोनो किशनसे प्रेगनेन्ट होचुकी हे..

इसी जमेलेमे अ‍ेक घटना ओर होगइ.. जो हम सबभी दोस्तोके मनमे दरार होगइ.. उनका कारण था भानुके पीता वीरजी.. तब हमे नही पताथाकी वो मनही मन भुमीकाको प्यार करने लगा हे.. ओर भुमी तब नरेशको प्यार करती थी.. जब उसने भुमीको अपने प्यारका इजहार करदीया तो भुमीने उसे सनकी कहेकर काफी भला बुरा कहेके मना करदीया ओर केह दीयाकी मे ओर नरेश काफी आगे बढ चुके हे.. तो अ‍ेक तो वो सनकी था ओर उपरसे भुमीने उनको बहुत जलील करते उनके प्यारको ठुकरा दीया.. तब वो पागल जैसा होगया..





ओर घर जाकर उसने गुसेमे सीसेमे हाथ दे मारा.. ओर उनके हाथकी नस कट गइ.. जब किशनको मालुम हुआ तो भाइ ओर किशन उसे होस्पीटल लेगये ओर उनका इलाज करवाया.. ओर वो ज्यादा सनकी होगये.. ओर मनही मन भुमीसे बदला लेनेकी ठानली.. अ‍ेक दिन पता चला.. वो अकेलाही हम सबसे छुपके भुमीको होस्टेलसे जबरदस्ती उठा लाया.. ओर उनके घरपे जबरदस्तीसे लेगया.. ओर उसी दिन उसने भुमीके साथ जबर दस्ती की.. ओर उनका रेप कर दीया..









तब नरेश ओर किशनने उनको खुब मारा.. फीर पता नही नरेश ओर भुमी दोनोही कोलेज छोडके चले गये.. ओर उनका कीसीको अता पता नही मीला.. ओर अ‍ेक दीन मुजेभी खुब उल्टीया हुइ.. ओर मुजे किशन होस्पीटल लेगया.. तब वहा चेक कीयातो पता चला मे भी पेटसे होगइ हु.. ओर उपर दो महीना होगया हे.. तब किशन परेसान होगया.. ओर उसने मजबुरन मुजे सबकुछ सचाइ बतादी..

देवायत : कोनसी सचाइ..?

नीर्मला : यहीकी वो लडकी विमला जो उनके माता पीता आश्रमसे लेकर आये हे.. दरसल उन्हीकी सगी बहेन थी.. जो उनके जन्मके बाद उनकी माता यानी आपकी दादी उसे आश्रममे छोडके आइथी.. रीजन बस अ‍ेकही था.. जो आपके खानदानमे वो श्राप.. जो अ‍ेकही बच्चा होता था.. ओर दुसरा बच्चा करनेसे उनके पीताकी मौत होजाती थी.. तब उनको ये नही पताथाकी दोनो लडके ही होने चाहीये लडकी नही.. ओर वो इसी गलत फेहमीकी वजहसे सबसे छुपके बच्चीको आश्रम छोडके आगइ..

देवायत : तो क्या तब किसीको नही पताथाकी मेरी मां पेटसे हे.. कीसीको कुछ पता नही चला..?

नीर्मला : नही.. तब पता नही आपके दादा ओर दादीका कीसी गांव वालोसे कोइ रीस्ता नही था.. सब आपके खीलाफ थे.. रीजन मुजे नही पता.. लेकीन आपकी दादी हवेलीसे कभी बहार नही नीकली.. फीरतो जब काफी सालो बाद आपके गुरुजी आये ओर उसने सचाइ बतादी.. तब आपकी दादी वो लडकीको वापस हवेलीपे लेकर आगइ.. तबतक वोभी जवानीके देहलीजपे कदम रख चुकीथी.. ओर विधीके विधान देखो..

उन विमलाके आनेके बाद कुछही दिनोमे आपके दादा दादीभी चल बसे.. ओर पता नही उनके मनमे क्या चल रहाथा.. विमलाको सब सचाइ मालुम होनके बावजुद भी अपने ही भाइसे दिल लगा बैठी.. ओर उनपे सबकुछ लुटाकर वो मुजसेभी पहेले अपने भाइसे प्रेगनेन्ट होगइ.. ओर उसे पांचवा महीना चल रहाथा.. ओर दोनो भाइ बहेन आपसमे सादी करने वाले थे..

तभी ये सब बाते सुनकर मुजपे तो पहाड ही टुट पडा.. तब किशनने मुजे बहुत समजाया ओर दोनोके साथ सादी करनेकी बात करने लगा.. तब अ‍ेक बारके लीये तो मेभी मान गइ.. की चलो दोनो बहेने साथमे रेह लेगी.. लेकीन उसी रात मुजे विमला अकेली मीलने आइ.. ओर मुजे किशनको छोड देनेके लीये कहेने लगी.. कहेतीथी..

विमला : देख नीर्मला.. अगर तु किशनसे सादी करलेगी तो हम दोनो उनकी लीगल बीवी होजायेगी.. ओर तुभी पेटसे हे ओर मे भी पेटसे हु.. अगर हम दोनोको लडका होगया तो हमारा कीशन वो श्रापकी वजहसे नही बचेगा.. ओर हम दोनोही विधवा होजायेगी.. अब फैसला तुजे करना हे उनको छोड देना हेकी किशनको मार देना हे.. क्युकी वो किशनको छोडने वाली नही थी.. ओर मे उनके श्रापकी वजहसे बडी दुवीधामे पड गइ.. ओर दिन नीकलते रहे.. ओर मेराभी पेट बढने लगा..

अब ये बात लोगोसे कीतने दीन छुपी रहेती की मे प्रेगनेन्ट हु.. ओर मेरे पापाको ओर बडेभाइको पता चल गयाकी मे कीसीसे पेटसे हुइ हु.. लेकीन मेने किशनका नाम नही बताया.. ओर मेरे बापु परेसान रहेने लगे.. ओर अ‍ेक दिन मेरी चिन्ताकी वजहसे उनको दिलका दौरा पडा.. ओर वोभी चल बसे..

बस उसी रात हम दोनो भाइ बहेनने हवेली छोडनेका फैसला करलीया.. तब चंदा बहुत छोटी थी.. आइ थींक १२ सालकी होगी.. ओर हम दोनो भाइ बहेन कीसीको कहे बगैर देर रात चंदाको लेकर हवेलीसे नीकल गये.. ओर सबसे छुपकर इसी गावमे आगये..

देवायत : तो फीर पापा ओर मेरे बापु फीरसे कैसे मीले..? क्या आप उनको दुबारा नही मीली..?

नीर्मला : (हसते) हां फीर उनसे सीर्फ अ‍ेकही बार मुलाकात हुइ.. हमारे जानेके बाद उन्होने हमे बहुत ढुंढा.. लेकीन हम तीनो यहा अ‍ेक किरायेके रुममे गांवसे दुर रहेने लगे थे.. ओर वो हमे नही ढुढ पाये.. तब भाइभी गावमे अ‍ेक कीरानेकी दुकानपे काम करने लगा.. ओर हमारा गुजारा बडी मुस्कीलसे होने लगा.. ओर वक्त बीतने लगा.. तबतक विमला आपको जन्म देचुकी थी.. ओर आखीर मेनेभी नौ महिने पुरे होते अ‍ेक बच्चीको जन्म दे दीया.. वो थी मेरी मंजु.. आपकी सौतेली बहेन.. जो आज आपकी बीवी हे..

देवायत : (हसते) मेने भी क्या कीस्मत पाइ हे.. मेने भी मेरी ही बहेनसे सादी करली.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (सरमाते हसते) हां.. तभीतो मे आप दोनोकी सादीके खीलाफ थी.. लेकीन मे कीसीको केहभी नही सकतीथी की ये दोनो भाइ बहेन हे.. इनकी सादी नही हो सकती.. फीर सोचा आपके खानदानमे तो यही सब चलता हे ओर मेने भी अपने भाइसे सादी करली हे तो फीर मे क्यु अ‍ेतराज करु..? ओर मेने आपकी सादीके लीये हां कहेदी.. हें..हें..हें..

देवायत : तो फीर आप लोगोको बापुने कैसे ढुंढ लीया..?

नीर्मला : क्या आपको नही पता..? आपके बापुका कीतना बडा नेटवर्क हे.. उन्होने बहुत गावोमे हमे ढुंढा ओर सभीको कहेके रखाथाकी ये लोग मीलेतो उनसे इन्फोर्म करदे.. ओ यहाभी यही हुआ.. कीसी जान पहेचान वालेने राजीवको दुकानपे देखलीया ओर किशनको बता दीया.. तब उसी वक्त अपनी कार लेके सीधेही राजीवकी दुकानपे चले गये.. जहा वो नौकरी करता था.. ओर किशनने राजीवको सब सचाइ बतादी.. ओर येभी बता दीयाकी नीर्मलाकी बच्चीका बापभी मेही हु..

देवायत : तो फीर पापा कुछ नही बोले..?

नीर्मला : क्या बोलते..? आपके दादाका हमपे बहुत अहेसान था.. जब मां गुजर गइ तब आपकी दादीनेही हम सबको सम्हालाथा ओर हम सबकी पढाइका खर्चा वोही दे रहेथे.. ओर वो खुद कइ बार किशनके लीये मेरे बापुसे मेरा हाथ मांग चुकीथी.. लेकीन देखो.. कीस्मतको कुछ ओरही मंजुर था..

वरना किशन जब राजीवसे मीला तब मुजे पहेली बार मीला ओर मुजे अपनानेको तैयार था.. लेकीन मेनेही मना करदीया.. तब हम यहा इस गांवमे आगये थे.. तो मुजे नही पताथा की आपके गरुदेव हवेलीमे आकर वो श्रापका नीवारण कर चुकेथे.. वरना मे जरुर वापस आजाती.. ओर किशनसे सादी करलेती..

ओर मेने किशनकी जानकी खातीर उसे मना कर दीया.. ओर आपकी मां विमलाभी नही चाहतीथी की मे वहा वापस आजाउ.. ओर किशनने हमारे लीये हमसे छुपके यहा घरभी लेलीया ओर राजीवके साथ पार्टनरमे कीरानेका होलसेलका बीजनेसभी सुरु करदीया.. तब हमे नही पताथाकी वो ये सब हमारी मदद करनेके लीये कर रहा हे.. ओर येभी पता चलाकी वो विरजीभी आपकी खेतीबाडी सम्हालने लगाहे.. ओर उनकीभी सरलासे सादी होगइ हे.. इस बातका पता आप ओर मंजुकी सादीसे पहेलेही मुजे राजीवसे पता चला.. तबतक मेभी सबकुछ भुल चुकीथी..

देवायत : (हसते) तो फीर पापाके साथ आपकी सादी कैसे होगइ..? वोभी तो आपके बडे भाइ थे..

नीर्मला : (अ‍ेदम सर्मसार होते धीरेसे) वो..वो.. बस होगइ.. अ‍ेकतो मेरी वजहसे ओर दुसरा तब हमारी आर्थीक परीस्थीती अच्छी नहीथी.. तो भाइ कहेताथा हमारा गुजाराभी मुस्कीलसे हो रहा हे तो सादी करके क्या करुगा..? इसी वजहसे भाइने सादी ना करनेका फैसला करलीयाथा..

ओर कहेताथा अब इन बच्चीको मेरी ही बच्ची मानके पालुगा.. ओर दुसरा ओरत ओर मर्द जब साथ होतेहे ओर उनको बार बार अ‍ेकांत मीलता हेनां.. तो अ‍ेक दिन सबकुछ होही जाता हे.. फीर चाहे भाइ बहेन हो या मां बेटा.. ओर हम सब अ‍ेकही रुममे रहेते थे.. खाना पीना नहाना सोना सब अ‍ेकही रुममे होताथा.. फीर आपतो जानतेहे ओरत होया मर्द उनकीभी कुछ नीड होती हे.. बस यही मुजे ओर भाइको अ‍ेक दुसरेसे नजदीक लानेका कारण बनी..

ओर धीरे धीरे मे ओर भाइ अ‍ेक दुसरेकी ओर आकर्सीत होकर नजदीक आते गये.. मे भाइका अ‍ेक पतीकी तराह खयाल रखने लगी.. ओर हम दोनो धीरे धीरे खुलते गये.. अ‍ेक दुसरेसे छेडखानीसे सुरुआत होकर दोनोही आपसमे प्यार करने लगे.. ओर अ‍ेक दिन चंदा स्कुलमे थी..

तब हम दोनोही घरपे अकेलेथे ओर बहेक गये.. फीर सबकुछ होगया.. उस दिन हमने दो बार सेक्स कीया.. तब मे भुल चुकीथी की ये मेरा भाइ हे.. ओर भाइभी भुल चुकाकी ये मेरी छोटी बहेन हे.. बस हम दोनोही अ‍ेक दुसरेमे अ‍ेक मर्द ओर ओरतको देखते थे.. साली ये तनकी आग बहुतही खतरनाक हे.. कोइ रीस्ते नाते नही देखती..





फीर तो हम दोनो भाइ बहेन काफी खुल चुके थे.. जबभी चंदा घरमे नही होती तब आये दीन भाइ मुजे पकड लेता ओर हम अ‍ेक दुसरेके साथ छेडखानी करते.. फीर हम दोनो अ‍ेक होजाते.. ओर ये सीलसीला रोजका होगया.. ओर मुजेभी भाइसे सेक्सकी आदत लग गइथी.. अब मे भी भाइसे सेक्स करनेके बगैर नही रेह सकती थी.. ओर हम दोनो अ‍ेक पती पत्नीकी तराह रहेने लगे.. जबभी चंदा सोजाती मे देर रात सरकके भाइके पास उनके बीस्तरमे चली जाती ओर हम दोनो अ‍ेक होजाते ओर अपनी प्यास बुजा लेते..





हम दोनोके बीच प्यार ब्यार कुछ नहीथा.. बस अ‍ेक दुसरेकी तनकी जरुरत समजकर दोनोने हमेसाके लीये साथमे रहेनेका फैसला करलीया.. ओर अ‍ेक दिन मे ओर भाइ साथमे सेक्स कर रहेथे तब सोचा.. अगर किशन उनकी बहेनके साथ सादी कर सकता हे तो हम क्यु नही..? ओर हमने दुसरे ही दीन मंदिरमे जाकर आपसमे सादी करली.. ओर हमारा पती पत्नी वाला संसार अच्छेसे चलने लगा.. तब अ‍ेक दिन पता चला मे भाइसे प्रगनेन्ट होगइ हु.. तब हम दोनोही बहोत खुस हुअ‍े.. ओर पुरे नव महीनेके बाद मेरी भावुका जन्म हुआ..

तब चंदाभी काफी समजदार हो चुकीथी.. लेकीन मेरे ओर भाइके बीच जो नया रीस्ता हुआ इनसे उनको कोइ अ‍ेतराज नही कीया.. ओर हमारे रीस्तेको अ‍ेक्सेप्ट करलीया.. फीर तो वोभी कभी कभी मजाकमे राजीवको जीजु कहेते चीडाती.. ओर जब जवान होगइ.. तब अ‍ेक दिन किशनही रीस्ता लेकर आया.. ओर हमने चंदाकी सादी करदी.. फीरतो हम दोनोको खुली छुट मील गइ.. फीर काफी समय बीतता गया..

फीर अ‍ेक दिन मुजेभी भाइसे पता चलाकी मेरी मंजुके जन्मसे पहेले विमला आपको जन्म दे चुकीथी.. जब आप उनके पेटमे छे महीनेके थे तब उन्होनेभी अपने भाइसे सादी करली.. फीर तो आप यहा पहेली बार आये तो मेतो आपको देखके हैरान होगइ.. वोही चहेरा जो मेरे किशनका था..

वोही आंखे वोही कसरती बदन.. ओर मेरा पहेला प्यार फीरसे जाग गया.. ओर मे धीरे धीरे आपकी ओर आकर्शीत होती गइ.. आप बार बार हमारे घर आने लगे.. ओर हमारी नजरे मीलती रही.. मे आपके अंदर मेरे किशनको ढुंढती रही.. ओर आखीर अ‍ेक दिन आपने भी अपने बापुकी तराह मुजसे अपने प्यारका इजहार करदीया.. फीर उसके बाद क्या हुआ वोतो आप जानते ही हे.. हें..हें..हें.. बस यही मेरी कहानी हे..

(अतीत से बहार..)

देवायत : (हसते) हंम.. काफी इन्ट्रेस्टेड स्टोरी हे आपकी.. चलो जानकर खुसी हुइ.. की मेने मेरी बहेनसे ही सादी करली हे.. मेरी मंजु.., नीमु.. हमारे खानदानमे अ‍ैसा क्यु हो रहा हे तुजे पता हे..?

नीर्मला : (सरमाते हसते) नही.. आज आपभी कुछ राज बतादो.. हें..हें..हें..

फीर देवायत नीर्मलाको उन हीमाचलके राजाकी पुरी स्टोरी सुनाने लगता हे.. तब नीर्मला बडेही गौरसे सुन रहीथी.. जीनकी वजहसे उनकी चुतमे हलचल तेज होगइ ओर चुतके नाजुक होस्ट फडफडाने लगे.. ओर पानी छोडने लगे.. लेकीन नीर्मलाने उनपे कुछ खास ध्यान नही दीया.. ओर देवायत उनको पुरी स्टोरी सुना देता हे.. जीसे सुनके नीर्मला काफी अ‍ेक्साइटेड होगइ.. ओर देवायत नीर्मलाको वोही राजा रानी फीरसे उनके घर जन्म लेकर आने वालेहे बता देता हे.. तब नीर्मला सुनक बहुतही अ‍ेक्साइटेड होगइ.. तब जाके उनको अपने नीकरमे गीलापन महेसुस हुआ....

कन्टीन्यु
 
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