Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 12 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ९२

तभी मंजु चंदाने अ‍ेक अ‍ेक बेग लेली.. ओर बहार जाकर कारमे रखदी फीर सब कारमे बेठने लगे.. तबतक दया ओर रजीया.. सबको जाते हुअ‍े देखने लगी.. ओर मंजुने दयाको कुछ सुचना देदी ओर कारमे बेठ गइ.. ओर सभी कारसे आश्रमकी ओर नीकलने लगे.. तब पुरे रास्ते पुनम ओर लखन अपने भतीजे विजयके साथ खेलते रहे.. ओर सब चंदाके घरके सामने आगये..

तब धिरेन रेडीही था तो घरको ताला लगाकर वोभी सबके साथ बेठ गया.. तब पुनमसे नजरे मीलतेही हसने लगा तब पुनमभी सर्मसार होकर हसने लगी.. फीर धिरेन जैसेही उनकी मम्मीको सादीके जोडेमे देखता हे तब मां बेटा दोनोही सरमाकर हसने लगे.. ओर कारवा आश्रमकी ओर नीकल गया....अब आगे

मंजुला : (हसते) धिरेन तुने अपनी खरीदीकी लीस्ट बनाइ की नही..? हम आश्रमसे सीधेही सहेर खरीदी करने जा रहे हे..

धिरेन : (सरमाते पुनमकी ओर देखते) जी.. जी दीदी बनाली.. सीर्फ कपडेहीतो लेने हे..

मंजुला : (जोरोसे हसते) क्यु..? अपनी बीवीके लीये कुछ बडीयासी गीफ्ट बीफ्ट लेलेना.. हें..हें..हें..

कहातो धिरेन सरमाकर हसने लगा तो पुनमभी सर्मसार होगइ ओर हसते हुअ‍े दांत पीसते मंजुके कंधेपे अ‍ेक मुका मारदीया.. तब चंदा लखनभी हसने लगे.. सब मस्ती मजाक करते सहेरकी ओर जा रहेथे तब बीचमे आश्रमकी ओर जानेका टर्न आगया.. ओर देवायतने टर्न लगाकर कारको वही रोक दीया क्युकी अभी तक सृती ओर उनकी मम्मी नही आयेथे.. वो कारसे उतरकर रोडपे चला गया.. तब मंजु सृतीको फोन लगाकर उनसे बात करने लगी..

मंजुला : (फोन लगतेही) हेलो.. सृती.. तुम लोग कहा पहोचे..? घरसे नीकलेहो की नही..?

सृती : (फोनपे) हां मंजु बस हम वहा पहोचनेही वालेके हम ओन ध वे हे.. क्या तुम लोग पहोंच गये..?

मंजु : हां.. बस अभी अभी आकर रुके हे.. हम टर्न लगाके खडे हे.. ओर देवु रोडपे ही खडा हे ओर आपका इन्तजार कर रहा हे.. ताकी तुजे ढुंढनेके ज्यादा तकलीफ ना हो.. चल रखती हु..

तभी लखन ओर धिरेनभी कारसे उतर गये ओर दोनो बाते करते देवायतकी ओर टहेलते जाने लगे तभी विजय रोने लगा तो पुनमने उसे मंजुको देदीया.. तो मंजु उसे ब्लाउस उचा करते दुध पीलाने लगी.. तब चंदा ओर पुनम आपसमे सरमाये बीना धीरे धीरे बाते करने लगी..

तबतक धिरेन ओर लखनभी देवायतके साथ जाकर खडे होगये.. तभी अ‍ेक कार तेजीसे आ रहीथी जो तीनोको देखतेही रफ्तार धीमी होगइ.. ओर टर्न लेकर तीनोके पास आकर खडी होगइ.. तब उनमे सृती जो ड्राइव कर रहीथी ओर उनके पास उनकी मम्मी बेठीथी.. आतेही सृती कारसे उतर गइ ओर देवायतके गले लग गइ.. तब उनकी मम्मीको देखतेही लखन ओर धिरेन हसते हुअ‍े उनके पांव छुने लगे तब सृतीने हसते हुअ‍े धिरेनको गले लगा लीया..

सृती : (गले लगाते) अरे मेरा छोटा भाइभी आया हे..? हें..हें..हें.. कैसेहो भाइ.. क्या कर रही हे मौसी..

धिरेन : (हसते) वही कारमे वो ओर दीदी पुनम बैठे हे आपहीका वेइट कर रहेथे.. जाइअ‍े कार मे ले लेता हु..

देवायत : हां सृती कार धिरेनको देदो वो ओर लखन आंटीको आरामसे लेआयेगे तुम मंजुके पास चली जाओ.. अगर आंटीको कोइ दिकत ना होतो.. हें..हें..हें..

भुमीका : (देवायतको डांटते) दिकतके बच्चे तु आश्रम चल वहा मे तेरी खबर लेती हु.. अभीतो हमे जाना हे.. देर हो रही हे..

कहातो सृती देवायतकी ओर देखते जोरोसे हसने लगी ओर कारकी ओर जाने लगी तब देवायतभी हसते हुअ‍े कारकी ओर चलने लगा तब धिरेन सृतीकी जगाहपे बैठ गया ओर लखन हसते हुअ‍े पीछली सीटमे बेठ गया ओर देवायतने कारको जंगलकी ओर जाने दी तब धिरेनभी उनके पीछे पीछे चलने लगा.. तो देवायतकी कारमे सृती ओर चंदा मंजु पुनम सब हसते हुअ‍े जोरोसे बाते करने लगे.. सभी खुस नजर आ रहे थे..

सभी लोग बीस मीनीटकी ड्राइवके बाद आश्रमके परीसरमे पहोंच गये.. ओर कारसे उतरकर अ‍ेक जगाह अ‍ेकठा होने लगे तब चंदाभी सादीके जोडेमे उतरके सरमाती सृतीकी मम्मी भुमीकाके पास आगइ ओर जुककर उनके पैर छुने लगी.. तब भुमीकाने उनको गले लगालीया ओर चंदाका सर चुमलीया.. फीर देवायतके आतेही उनका कान पकडके खीचने लगी.. तब सभी लोग उन दोनोकी ओर देखते हसने लगे फीर देवायतके गले लग गइ..

भुमीका : तुम बहुत बदमास हो गये हो.. कीतनी बार सृतीसे कहेलवाया फीरभी तुजे आनेका टाइम नही मीला.. आज कल कहा रहेते हो..? ना कोइ खबर ना कोइ फोन.. इतने बीजी हो गये हो..?

देवायत : (हसते) कुछ नही आंटी वो थोडा काममे बीजी होगया था.. ओर दो दीन राजीव अंकलके पास होस्पीटल मे था.. उनकी तबीयत बीगड गइथी.. बस आज उनको होस्पीटलसे छुटी मील जायेगी..

भुमीका : (सोक्ट होते) क्यु..? क्या हुआ राजीवको..? तेरी सासकाभी फोन नही आया.. कुछ हुआ हे क्या..? ओर मंजुबेटीनेभी सृतीको नही बताया होगा.. वरना वो मुजे बता देती..

मंजुला : (हसते) सोरी आंटी.. मे थोडा टेन्शनमे भुल गइ..

भुमीका : आंटीकी बच्ची मौसी हु तेरी.. अ‍ैसे कैसे भुल गइ.. अ‍ेकहीतो बहेन जैसी सहेली हे मेरी.. ओर राजीव.. हम सब खास दोस्त हे.. तब चंदातो बहुत छोटी थी.. वैसे राजीव को हुआ क्या हे..?

देवायत : वो उनको हाइ बीपीकी वजहसे थोडा पेरेलीटीक अ‍ेटेक आगयाथा.. अब बीलकुल ठीक हे..

सृती : मोम.. अब अंदर चले..? ताकी ये दुल्हा दुल्हनकी सादी होजाये.. फीर आप आरामसे बाते करते रहीये.. ये लोग सादीके बाद सहेर हमारे घरही आ रहे हे..

तब सभी लोग हसते हुअ‍े अंदरकी ओर जाने लगे.. तब बाबा अपने रुममे थे ओर सभी लोग बाबाके बेठक की ओर चले गये.. ओर वही नीचे बैठने लगे तब बाबाभी बहार आगये ओर सभीको देखके हसते हुअ‍े अपनी जगाहपे आकर बैठ गये.. तब सभी उनके पैर छुकर वापस नीचे बेठने लगे.. तब चंदा खुब सरमा रहीथी ओर वो मंजुके साथ बेठ गइ.. तब बाबा भुमीका ओर सृतीकी ओर देखकर हसते रहे.. तब भुमीकासे रहा नही गया..

भुमीका : (हसते) बाबा क्या आप हमे जानते हे..? मे यहा पहेले सायद अ‍ेक बार आचुकी हु..

बाबा : हां.. बहेनजी आप सायद हमारे किशनकी दोस्त हे.. आप सभी साथमे पढतेथे तब आप अ‍ेक बार सभी दोस्तो किशनके साथ आचुके हे.. इनको भी काफी साल होगये..

मंजुला : (हसते) जी बाबा.. मेरी मम्मी पापा मेरे ससुर ओर भानुभाइके पीताजी भुमीकामौसी ओर उनके पती सभी दोस्त थे.. आज ये आपके दर्शन करनेके लीये उनकी बेटीके साथ आगइ हे.. ओर ये उनकी बेटी हे.. डो. सृती.. लेडीझकी डोक्टर हे.. जो आपको कीतने दिनोसे मीलनेके लीये केह रही थी.. तो आज फायनली आही गइ.. हें..हें..हें..

बाबा : (हसते) हां इनकोतो इधर आनाही था.. हें..हें..हें.. उनके मनमे तुमने कीतने प्रस्न पैदा कीये हे..? तबसे ये मीलनेके लीये उत्सुक हे.. क्युकी कुछ बाते उनके विसय ओर पढाइके बहारकी हे.. हें..हें..हें.. क्यु बेटी ठीक कहाने मेने..?

सृती : (सरमाते हसते) जी.. जी बाबा..

बाबा : बेटी हम बादमे आरामसे बात करेगे.. ओर तेरे सभी प्रस्नोका जवाब हे मेरे पास.. ओर तुजेतो इधर आनाही था.. क्यु आनाथा.. वो रीजन तुजे बादमे बता दुगा.. फीलहाल तो चलो सब मंदिरमे सब तैयारीया होगइ हे.. इन दोनोकी सादी करवादु फीर हम आरामसे बात करेगे.. ओर वो भानु अभी तक नही आया..?

देवायत : (हसते) बस.. बाबा वो पहोंचताही होगा.. सायद रास्तेमे होगे..

बाबा : (हसते) चलो कोइ बात नही तबतक हम तेरी सादी नीपटा लेते हे.. चलो सब..

तब बाबा खडे होगये तो उनके पीछे सब खडे होगये.. ओर बाबाके पीछे मंदिरकी ओर जाने लगे.. तब वहा मंदिरके बहार बाबाने सब तैयारीया करके रखीथी ओर सभी लोय वही आगये ओर मंदिरमे दर्शन करने लगे.. फीर बाबाने सबको वही बीठा दीया.. क्युकी आज गांधर्व सादी नही आज बाबा खुद फेरे वाली सादी करवाने वालेथे.. जीनकी जानकारी कीसीको नहीथी.. ये बात सीर्फ बाबा ओर मंजु पुनमही जानते थे..

सभी लोग बेठ गये तब बाबाने देवायत ओर चंदाको बुलाकर सादीकी जगाह अ‍ेक साथ बीठा दीया.. तब चंदा सादीके जोडेमे अ‍ेक दुल्हनकी तराह सजी हुइथी ओर खुब सरमा रहीथी.. जैसे आज पहेली बारही उनकी सादी हो रही हो.. आज वो बहुतही खुस थी.. तब उनको देखकर धिरेनभी खुस होने लगा.. क्युकी आज उन्होने पहेली बार अपनी मम्मीको इतना खुस होते देखाथा.. ओर वो पुनमकी ओर देखते हसने लगा..





तो पुनमभी सर्मसार होते धिरेनके सामने मुस्कराने लगी.. तभी धिरेनने कुछ इसारा कीया तब पुनम सरमाते धिरेनके पास सरक गइ.. तभी धिरेनने पुनमका हाथ पकड लीया.. तब पुनम सरमसे पानीपानी होने लगी.. ओर दोनो सादी देखने लगे.. ओर बाबाने मंत्र बोलना आरंभ करदीया तब सभी लोग सादी देखने लगे..

फीर बाबाने हवन चालु करदीया ओर देवायत चंदासे आहुती डलवाते गये.. तब चंदा काफी खुल चुकीथी ओर वो देवायतकी ओर देखते मुस्कराती रही.. तभी धिरेन अपना मोबाइल नीकालकर सादीकी विदी सुट करने लगा.. ओर अ‍ेक हाथसे पुनमको थामके रखा..





तब मंजु पुनम ओर धिरेनको अ‍ेक दुसरेका हाथ पकडते देखकर बहुत खुस होने लगी.. तो दुसरी ओर सृती थोडी मायुस होगइ उसे दखकर उनकी मम्मी भुमीकाकी भी आंख गीली होगइ.. क्युकी सृतीकी सादीके कुछही दिनोके बाद सृती डिवोर्स लेकर घर वापस आगइ थी.. तभी मंजुने सृतीका हाथ थाम लीया ओर उनकी आंखोमे देखने लगी.. तब सृती उनके सामने देखकर मुस्कराने लगी.. ओर भुमीकाने भी जटसे अपनी आंखे पोछली.. आखीर बाबाने चंदा ओर देवायतको फेरेके लीये खडा करदीया..





तभी आश्रममे अ‍ेक कार आकर रुकी उनमेसे भानुकी फेमीली उतरने लगी ओर सब कारसे उतरतेही सीधे मंदिरकी ओर आने लगे.. तब रमाके हाथमे भावनाकी बच्चीभी थी.. ओर भानु रमा आज सजधजके आयेथे.. तो सब अ‍ेक दुसरेको गले मीलने लगे ओर सरलाके पांव छुने लगे.. तब सरला कामुक नजरोसे देवायतकी ओर देखते हसने लगी.. तो दुसरी ओर लता लखनको देखकर सरमाने लगी..

तभी पुनमने हसते हुअ‍े उनका हाथ पकडकर लताको लखनके पास खडा करदीया.. तो लता सरमाके हसने लगी.. फीर पुनमने सबको हाथोमे फुल थमा दीया.. तो आज नीलमधी सजधजके पटाका बनकर आइथी.. वो बहुतही सेक्सी ओर आकर्सक लग रहीथी.. जीसे देखकर अ‍ेकबार तो लखन ओर धिरेनका दिलभी अपनी धडकन चुक गया.. ओर नीलमभी हसते हुअ‍े पुनम लताके पास जाकर खडी होगइ..





तभी बाबाने चंदा ओर देवायतको फेरे लेनेके लीये केह दीया तो चंदा देवायतने अ‍ेक दुसरेका हाथ थाम लीया ओर धीरे धीरे चलते फेरे लेने लगे.. तब पुनम लता नीलम धिरेन लखन सब दोनोके उपर फुल बरसाने लगे.. चंदा आज बहुत खुस हो रहीथी.. ओर देवायतके पीछे धीरे धीरे हसती हुइ चल रहीथी.. फीर लास्ट फेरेमे बाबाने चंदाको आगे करदीया.. ओर दोनो फेरे लेने लगे.. ओर आखीर फेरे सम्पन हुअ‍े..





तब नीलम धिरेनसे बीलकुल नजदिक खडीथी.. जब धिरेनने उनकी ओर देखातो नीलम सरमाकर उनके सामने हसने लगी.. तभी अचानक धिरेनने नीलहका हाथ पकडकर उनके साथ चीपकाकर खडा करदीया तब नीलम सरमसे पानीपानी होगइ ओर सरमाती धिरेनसे सटकर खडी होगइ.. आज पहेली बार नीलमको कीसी लडकेने इस तराह छुआथा.. तो वो खुब सरमाइ.. ओर उसे धिरेनकी इस हरकत अच्छीभी लगी..

तभी मंजुने बेगसे अ‍ेक मंगलसुत्र नीकालकर देवायतको थमा दीया.. तब देवायतने चंदाको मंगलसुत्र पहेना दीया ओर आखीरमे चंदाकी मांग भरदी.. तब चंदाके आंसु नीकल आये.. तो सृतीने हसते हुअ‍े उनके आंसु पोछ दीये.. ओर इसी तराह दोनोकी सादी संपन हुइ तब दोनोने पहेले मंरिमे फीर बाबाके आशीर्वाद लीये.. ओर दोनो भुमीकाके पैर छुने लगे तब भुमीकाने दोनोको पैर नही छुने दीया ओर दोनोके सर चुमते गले लगा लीया.. तो सरलानेभी वोही कीया.. ओर इसी तराह सादी संपन होगइ..

बाबा : (हसते) भानु.. चल तुभी आजा आज तेराभी कल्याण कर देते हे.. हें..हें..हें..

कहातो सभी हसने लगे तब भानु ओर रमाभी हसने हुअ‍े देवायत चंदाकी जगाहपे बेठ गये.. तब चंदा ओर सृती भुमीका सब सोक्ट होकर आस्चर्यसे भानु रमाकी ओर देखने लगे.. क्युकी इन लोगोको तो मालुमही नही थाकी भानु रमासे यानीकी उनकी मामीसे सादी करने वाला हे.. तब मंजुकी नजर उनकी छोटी बहेनकी ओर चली गइ तब उनकी आंख गीली होगइ थी.. तब मंजु सबकी नजर बचाते धीरेसे भावुके पास चली गइ.. जो सबसे थोडी दुर बेठकर बच्चीको दुध पीला रही थी.. तब मंजुको देखकर वो मुस्कराने लगी..

मंजुला : (उनके पास जाकर बेठते धीरेसे) भावु क्या हुआ..? क्या तुम इस सादीसे खुस नही हे..?

भावना : (अपने आंसु पोछते हसते) अरे नही नही.. दीदी अ‍ैसी कोइ बात नही हे.. मे बहुत खुस हु.. आप चीन्ता मत करो..

मंजुला : (हसते प्यारसे सरको सहेलाते) मेरी छोटी बहेनकोतो जुठ बोलनाभी नही आता.. क्या मुजको इतनी पराइ करदी की अपने दिलकी बात तक मुजसे केह नही पाइ..? हंम.. बहुत प्यार करतीहे मेरे देवुसे..?

भावना : (सकपकाते धीरेसे) नही नही.. दीदी.. वो.. वो.. अ‍ैसा कुछ भी नही हे.. आपको गलत फेहमी हुइ हे.. आपको कीसने कहा..?

मंजुला : (धीरेसे हसते) कोइ बात नही.. इस बारेमे अभी बात करना उचीत नही हे.. इस बारेमे हम दोनो फुरसतमे बात करेगे.. बस अभी जोभी हो रहा हे होने दे.. ओर इस सादीसे दुखी मत होना.. ये सबतो होनेही वालाथा.. अभी तेरी बडी दीदी जींदा हे.. मे सब ठीक करदुगी.. ओके..?

भावना : (हसते) जी.. दीदी.. लव यु.. बस हमारे मम्मी पापाको इस बातका पता ना चले..

मंजुला : तु उनकी चीन्ता मत कर.. मे सब सम्हाल लुगी.. वो कुछ नही कहेगे.. बस अपने बच्चे पालनेमे ध्यान दे.. क्युकी तु नही जानती आगे क्या होने वाला हे.. हम इस बारेमे बादमे बात करेगे.. अब चल सबके साथ बेठजा.. ओर हम सहेर जा रहे हे.. तुजे कुछ चाहीये..? हंम..

भावना : नही दीदी हम कलही सब खरीदी करके आयेहे.. सब लेलीया हे.. फीरभी कुछ चाहीयेतो मे आपसे केह दुगी.. (हसते) दीदी आज मौसी कीतनी खुस दीख रही हेनां..? मेने उनको इतनी खुस कभी नही देखा.. दीदी.. आपका दिल बहुत विशाोल हे.. कास मेभी आपकी तराह सोचती..

मंजुला : (हसते) हां अब मौसी मेरी सौतनजो होगइ हे.. तो खुसतो होगीनां.. हें..हें..हें.. तुभी खुस रहा कर..

दोनो बहेने बाते करके सबके पास आकर बेठ गइ.. तब लखन ओर लता दोनोही अ‍ेक दुसरेके साथ धीमी आवाजमे बाते कर रहेथे.. जीसे देखकर मंजुकी हसी नीकल गइ.. तब चंदा बच्चे (विजय)को लेकर आगइ ओर मंजुको थमाके उसे दुध पीलानेको कहेने लगी.. तो मंजु सारीका पलु डालके विजयको दुध पीलाने लगी.. तभी पुनमभी उनके पास आकर बैठ गइ.. तब इधर बाबा भानु ओर रमाको आहुती डलवाते मंत्र बोल रहेथे..

जब पुनम धिरेनके पाससे चली गइ तब धिरेनको नीलमसे बात करनेका पुरा मौका मील गया.. ओर नीलमके सामने देखकर हसने लगा.. तब नीलम सरमाकर हसने लगी.. ओर धिरेन उनके साथ सटकर खडा हो गया तब नीलम थोडा अन्कम्र्फोटेबल फील करने लगी.. तब धिरेनने नीलमको आंखोके इसारेसे भनु ओर उनकी मम्मी रमाकी ओर इसारा करदीया तब नीलम सरमाकर हसने लगी.. तब मौका देखतेही धिरेनने धीरेसे नीलमके कानमे कहा..

धिरेन : नीलु.. देख तेरी मम्मी आज सादीके जोडेमे कीतनी खुबसुरत लग रही हे.. बीलकुल तेरी तराह..

नीलम : (सरमाते हसते) जीजु.. आज इनकी सादी हे.. तो खुबसुरततो लेगेगीही.. हें..हें..हें..

धिरेन : (उनके कानमे) तो क्या तेरीभी इधर सादी हे..? तुमभीतो बहोत खुबसुरत लग रही हो.. हें..हें..हें..

नीलम : (सरमाते) धत्.. जीजु आप बहुत नोटी हो.. मेरीभी क्या सादीकी उमर हे..? मेतो अभी बहुत छोटी हु.. हें..हें..हें..

धिरेन : (धीरेसे कानमे) नीलु.. तुम इतनीभी छोटी नही हो.. अगर तुम मुजे पहेले मील गइ होती तो मे तुमसेही सादी करलेता.. तुम आज वाकइ बहुत खुबसुरत लग रही हो.. क्या मुजसे दोस्ती करोगी..?

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) जीजु.. प्लीज.. अ‍ैसी बाते मत करो.. कोइ सुनलेगातो क्या कहेगे..

धिरेन : (धीरेसे कानमे) नीलु.. कोइ नही सुनेगा.. मे तुमसे दोस्ती करना चाहता हु.. मेरी दोस्ती कबुल करले..

नीलम : (सरमाते हसते) जीजु.. आप मेरे जीजाजी हे.. ओर जीजा सालीमेतो दोस्ती होतीही हे.. हें..हें..हें..

धिरेन : (धीरेसे) नीलु.. अब मे तुजे कैसे समजाउ.. मे कीस दोस्तीकी बात कर रहा हु.. तुम समजतीही नहीहो..

तभी लता नीलमको आवाज लगाती हेतो नीलम धिरेनके सामने हसती हुइ लताके पास चली जाती हे.. तब धिरेनभी उनको हसते हुअ‍े देखता रहा.. तभी कुछ देरके बाद दोनोके फेरे हुअ‍े ओर सादी संपन होगइ.. तबतक पुनम धिरेनके पास आकर उनसे बात करते उनकी बेंककी जोबके बारेमे सब जानकारीया लेने लगी.. ताकी वो देवायतको अपने घरपे मीलने की प्लानींग कर सके.. धिरेननेभी फीरसे पुनमका हाथ थामलीया..

दोनोही अ‍ेक दुसरेका हाथ पकडके अभीभी बाते कर रहेथे.. तब पुनम बीच बीचमे देवायतकी ओर देखते मुस्कराने लगती थी.. तब देवायतभी समज गयाकी पुनम धिरेनसे बाते करते क्या खीचडी पकार रही हे.. तब उनको नही पताथाकी दो आंखे पुनमकी ओर धिरेनकी सब हरकतोपे ध्यान लगाये देख रही हे..

जीं..हां.. ये नीलम थी.. जो अभी अभी धिरेनसे बात करके लताके पास बैठीथी.. आज धिरेनके साथ बाते करते उनके दिलकी धडकन तेज हो गइथी.. उनकोतो पताही नही थाकी प्यार क्या होता हे.. वो टीनेजर थी ओर अभी अभी जवानीकी ओर कदम बढा रहीथी..

वो लगातार लखन लता ओर पुनम धिरेनपे नजर गडाये चारोकी हरकत देख रहीथी ओर जवानीके पाठ सीख रहीथी.. जब भानु ओर रमाकी सादी संपन होगइ तब दोनोने बाबा सरला ओर भुमीकाके पैर छुकर आशीर्वाद लीये.. फीर सभी मंदिरमे दर्शन करके होलकी ओर जाने लगे..

तबभी लता लखन ओर धिरेन पुनम आपसमे बाते करते जा रहेथे जैसे उन चारोको कीसीकी परवाह ही नही थी.. तब नीलम पुनम ओर धिरेनके साथ चलते दोनोकी बाते सुननेकी कोसीस करती रही.. आज उनको पहेलीबार पुनमसे ज्वेलेसी फील होने लगी.. वो पुनमकी जगाह धिरेनके साथ अपने आपको इमेजींग करने लगी.. ओर सब होलमे आगये..

तब बाबाने मंजु सृती ओर पुनमको अपने पास रोकते बाकी सबको भोजनके लीये भोजन खंडमे भेज दिया.. तब चंदाने मंजुके बच्चेको अपनी गोदमे लेलीया ओर सब भोजन करनेके लीये नीकल गये.. तब नीलम जटसे धिरेनके पास चली गइ ओर उनके साथ चलने लगी.. फीर उनकी ओर देखते हसते हुअ‍े साथमे चलने लगी.. आज उनको धिरेनका साथ बहुतही अच्छा लगने लगाथा.. लेकीन उनको पता नही थाकी आगे क्या होने वाला हे.. तभी..

बाबा : मंजु बेटा तुम ये दोनोको लेकर मेरे रुममे आजाओ तुम तीनोसे मुजे कुछ जरुरी बात करनी हे..

सृती : (हसते) बाबा.. क्या मेभी.. आजाउ..?

बाबा : (हसते) हां बेटा.. तुमसे भी कुछ जरुरी बात करनी हे.. तुभी आजा.. फीर तुम लोगभी भोजन कर लेना..

कहेके बाबा अपने रुममे चले गये.. तब पुनम ओर सृती आस्चर्यसे मंजुकी ओर देखने लगी तो मंजु हसती हुइ दोनोको अपने साथ चलनेका इसारा करते बाबाके रुमकी ओर जाने लगी.. तो सृती ओर पुनम अ‍ेक दुसरोके सामने आस्चर्यसे देखते मंजुके पीछे चलने लगी.. ओर तीनो बाबाके रुममे चली गइ तब मंजुने बाबाके रुमका दरवाजा धीरेसे बंघ करदीया.. तब बाबा अपनी खटीयापे बेठे थे.. वहा जाकर तीनो उनके चरणोके पास नीचे बैठ गइ.. ओर बाबाकी ओर प्रस्नार्थभरी नजरोसे देखने लगी..

बाबा : (हसते) हां डाक्टरनी साहब.. बोलो आपके मनमे क्या प्रस्न थे..? मेरी मंजु बेटीकी बाते सुनके तुम कुछ उलजनमे फस गइथी.. क्या ये सच हेनां..?

सृती : (हसते मंजुकी ओर देखते) जी.. जी बाबा.. ये कुछ बाते कर रही थी.. जो मुजे रहस्यमय लगी.. ओर मेने कुछ ओरभी देखा जो आजके जमानेमे मुमकीन नही हे.. क्या आजके जमानेमे अ‍ैसा कुछ हो सकता हे..?

बाबा : (हसते.. फीर थोडा गंभीर होते) बेटी.. तु जो कहेना चाहती हे मे सब समज गया.. मुजे अ‍ेक बात बता.. क्या तुमने वो हिमाचलके राजा.. ओर वो वहाके भव्य मंदिरके बारेमे कुछ सुना हे..?

सृती : (हसते) जी बाबा.. उनकी पुरी कहानी मे जानती हु.. ओर सायद अभीभी वो किताब मेरे घरपे हे..

बाबा : उनमे जो वो माइका केरेक्टर हे उनके बारेमे जानती हे..?

सृती : (हसते) जी.. वो पुजारीकी बीवी थी.. जो बादमे वो राजासे सादी करलेती हे.. सायद वोही सबकी जननी थी.. ओर वो अप्सरालोककी सबसे बडी रानी थी.. क्या उनकी ही बात कर रहे हेनां..?

बाबा : (हसते) हां वोही.. तुम बीलकुल ठीक समजी.. बस वोही सब लोग अ‍ेक खास मक्सदसे फीरसे वापस इस धरतीपे देवायतके घर जन्म लेने वाले हे.. अभी कुछ परीया ओर सबकी जनेता यहा जन्म लेचुकी हे.. जो तेरी खास सहेली हे.. मेरी मंजु बीटीया..

सृती : (सोक्ट होते आस्चर्यसे मंजुकी ओर देखते) क्या.. मंजु.. वो देवयानी.. अ‍ैसा कैसे हो सकता हे..?

पुनम : (आस्चर्यसे) बाबा.. क्या भाभी.. वोही देवयानीदेवी हेनां..? (तब मंजु सरमाते हस रही थी)

बाबा : (हसते) हां.. बीटीया.. क्युकी आज कुछ रहस्य आप तीनोको बताना जरुरी हे.. क्युकी आने वाले समयमे तुम तीनोको बहुत कुछ सम्हालना हे.. ओर वास्तवमे तुम तीनोही परीया हो.. मेरे देवायतकी बीवीया..

इतना सुनतेही सृतीको अ‍ेक ओर जटका लगा.. ओर वो पुनमकी ओर मुह फाडके देखती रही..

सृती : (आस्चर्यसे) बाबा.. हम तीनो.. मतलब.. में.. ओर पुनमभी..? पुनमतो उनकी बहेन हे.. नही नही.. मुजे कोइ गलत फेहमी हुइ हे.. अ‍ैसा नही हो सकता.. आजके जमानेमे ये सब कैसे पोसीबल हे..?

बाबा : (हसते) बेटी.. सब पोसीबल हे.. उन राजाकोभी कुछ ज्यादा साल नही हुआ.. उनकी पीढीया आजभी हिमाचलमे हे ओर वहा राज कर रहेहे.. तब वहा सब हो सकता हे तो फीर अभी यहा क्यु नही..? ओर उनकी सुरुआत देवायतसे तीन पीढी पहेले सुरु होगइ हे.. ओर सायद तुम्हारी मम्मीभी इस बारेमे कुछ बाते जानती हे.. कभी फुरसतमे उनसे पुछ लेना.. की देवायतके पीता ओर उनकी माता वास्तवमे कौन थे..

मंजुला : (हसते) बाबा.. क्या ये सब बाते करनेका वक्त आ गया हे..?

बाबा : हां.. मंजु बीटीया.. अब वक्त आगया हेकी मे तुम तीनोको सब सचाइसे वाकेफ करदु.. सीर्फ देवायतके माता पीता नही.. देवायतके दादा फीर उनके पीता ओर अब खुद देवायत उनकी बहेनोसे सादी कर चुका हे.. ओर देवायतनेतो उनकी दोनो बहेनसे सादी करली हे.. क्यु मंजु बीटीया ठीक कहानां मेने..? बस हम दोनोका मक्सद कुछ हद तक पुरा हो चुका हे.. इसीलीये मे आज तुमको ये बात खुलके बता रहा हु.. वरना मेरी मंजु बेटीतो सब जानती ही हे..

सृती : (आस्चर्यसे) बाबा.. इसका मतलब देवायत अपनी बहेन.. पुनमसे भी..

बाबा : हां बेटी.. अभी तुम तीनोको कुछ बाते अपने तक सीमीत रखके बाकीसे छुपाके रखनी हे.. मेरी मंजु बीटीया तुम दोनोको सबकुछ बता देगी.. बस ये बाते तुम दोनो अभी अपने तक सीमीत रखना..

सृती : (पुनमकी ओर दखते) जी बाबा.. आपनेतो हमे बडा जटका देदीया.. हें..हें..हें..

पुनम : (आस्चर्यसे सोक्ट होते धीरेसे सरमाते) बाबा आपने कहा दोनो बहेनसे.. मतलब.. मे कुछ समजी नही.. हम दो बहेन.. अ‍ेकतो में.. तो फीर दुसरी कौन..?

बाबा : (हसते) हां.. ये तेरी मंजु भाभी.. वास्तवमे तुम्हारी बडी बहेनही हे.. जो तुमको मंजु सब फुरसतमे बता देगी.. अभी ये सब बाते कहेनेका वक्त नही हे.. क्युकी तुम लोगोको जानाभी हे.. पुनम बेटा तुमने मेरा खुब साथ दिया हे.. कोइ ओर लडकी होतीतो ये काम करनेके लीये कतइ राजी नही होती.. जीस मक्सदसे तुमने तेरे भाइसे सादी कीहे वो काम हो चुका हे.. बस अ‍ेक बार सबसे छुपके इस डाक्टरनीको दीखा देना.. क्युकी आने वाले समयमे कुछही दिनोमे ये भी तुम दोनोकी सौतन होगी.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते आस्चर्यसे) बाबा.. ये आप क्या बोल रहे हे.. मे.. मे कैसे देवायतजीसे सादी कर सकती हु..? मेनेतो कभी इस बारेमे सोचाभी नही हे.. मुजेतो ये सब बाते बहुत अजीब लग रही हे..

मंजुला : (हसते सृतीके कंधेपे हाथ रखते) हां सृती.. बाबा सच केह रहे हे.. में ये बात सुरुसे ही जानती थी.. मेरे देवुकी अ‍ैसी कइ बीवीया होगी.. जो कीसीना कीसी मक्सदसे उनके साथ जुडेगी.. ओर कइओने उनको पीछले कइ जन्मोसे पानेकी कामनाभी कीथी.. इनमेसे तुमभी अ‍ेक हो..

ओर वो राजा मेरे देवुके बेटे विजयका ही अंस होगा.. जो इस घरतीपे खास मक्सदसे जन्म लेगा.. ओर हमारे घरमे मेरी ही कोखसे पैदा होकर राजा बनके आयेगा.. ओर उनके आगे कुछ कहेना अभी उचीत नही हे.. क्युकी तब तुम दोनो ही मौजुद होगी.. ओर अपनी आंखोसे सब देखोगी.. तुम दोनोको तब सब कुछ ज्ञात होजायेगा.. वो कैसे..? ये बात मे तुम दोनोको अभी नही बता सकती.. बस कुछ दिन इन्तजार करलो.. अभी मुजे सीर्फ इतना ही कहेना हे..

बाबा : बेटी.. आगे जाकर तुजेभी अ‍ेक बच्ची होगी.. वोभी तेरी तराह डाक्टरनी होगी.. तब उसे तु अपनी मम्मीकाही नाम देगी.. जो उस राजाको प्यार करते तेरीही तराह सबसे छुपकर उनकी बीवी होजायेगी.. ओर आगे जाकर तुमको अ‍ैसे कइ रीस्ते देखनेको मीलेगे.. तब तुम विचलीत नही होगी..

क्युकी उसी समय समाजमे बहुत कुछ बदलाव आचुका होगा.. ओर इस देवुके खानदानके संपर्कमे जीतनीभी ओरते लडकीया आयेगी ज्यादातर सब परीया ओर अप्सरायेही होगी.. जो उन राजाकी रानीया होगी.. तब सबकी डीलीवरी तुजे ओर तेरी बेटीको ही करनी पडेगी.. बस इनके आगे मे कुछ ओर नही बता सकता.. ओर तुजे कभीभी मनमे कुछ संचय हो तब तुम मेरी मंजु बेटीसे पुछ लेना.. वो तुजे सबकुछ बता देगी.. ओर ये बाते तुम तीनो अपने तक ही सीमीत रखना..

सृती : (अपना सर पकडते) ओह माय गोड.. बाबा आपनेतो मुजे जंजोरके रख दीया.. बाबा मे इन सब बातोपे विस्वास नही करतीथी.. लेकीन मंजुकी कुछ बाते ओर कुछ चीजे देखकर मे इन बातोको मानने मे विवस होगइ हु.. सायद आपजो कहे रहे हे वो बातेभी सच हो.. मुजेतो अभीभी ये सब अ‍ेक स्वप्नकी तराह लग रहा हे.. यकीनही नही होता..

बाबा : (हसते) बेटी.. कोइ स्वप्न नही हे.. जोभी कुछ हुआहे..ओर अभी जो हो रहा हे.. ओर आगे होने वाला हे.. वो सब होकरही रहेगा.. क्युकी ये सब प्रकृतीके हीसाबसे चल रहा हे.. इनमे आप सब लोग केवल अ‍ेक कठपुतलीकी तराह नीमीत मात्र हो.. वास्तवमे आप सभीका जीवन आपके होथोमे हेही नही.. ये सब कोइ ओरही चला रहा हे.. ओर मेभी सीर्फ आप लोगोके मागदर्शनके लीयेही इधर हु.. जो समय समयपे मुजे उनका मार्गदर्शन करते सब कार्य करवाना पडता हे.. वरना सोचो कोइ साधु महात्मा कीसी लडकीको उनके भाइसे सादी करनेको थोडीनां कहेता हे..

सृती : बाबा.. यहातो हम सभी अ‍ेक सभ्य समाजमे जी रहे हे.. तो क्या उनको रीस्तोकी कोइ अ‍ेहमीयत नही..?

बाबा : (हसते) बेटी.. वो दोनोके लोक बडा वीचीत्र हे.. वहा कोइ रीस्ते नाते नही होते.. बस.. सब अ‍ेक स्त्री.. ओर पुरुषकोही अ‍ेहमीयत देते हे.. वहा कोइ कीसी बहार वालोके साथ सादी नही करते.. ओर पता नही पीछले कइ जन्मोसे भाइ बहेनही अ‍ेक दुसरेको प्यार करते पती पत्नीके रुपमे मांगते हे..

वजह सीर्फ अ‍ेकही हे.. वो हे काम.. जो केवल अ‍ेक लडकी हो या ओरत चाहे रीस्तोमे उनकी कोइभी लगती हो.. वो सबमे सीर्फ स्त्री देखता हे.. ओर रती तुम सबमे विद्यमान हे जो कामको पुर्ण समर्पीत हे.... बाकी कुछभी नही.. ओर तुम सबलोग उन दोनोका ही अंस हो.. वो राजा.. ओर वो सबकी जननी.. ये मेरी मंजु बीटीया..

सृती : (सरमाते हसते) ठीक हे बाबा मे काफी हद तक समज गइ.. अब हमारा जीवन हमारे हाथोमे हेही नहीतो इस बारेमे ज्यादा क्या सोचना.. बस मनमे अ‍ेक भाव या डर लगा रहेता हे की हम कीसीको धोखातो नही देते.. बस इसीलीये आपको सब पुछ लीया..

मंजुला : (हसते) नही सृती कोइ धोखा नही हे.. जोभी कुछ हो रहा हे हमे होने देना हे.. बस मुजेतो इतना पता हे वो हम सबका बरोबर खयाल रखते सबको बरोबर न्याय देते हे.. हम सब उनसे खुस हे.. क्यु पुनो..

पुनम : (अ‍ेकदम सर्मसार होते हसते) जी.. भाभी आपने सही कहा.. हमे अ‍ैसाही लगता हे वो सबसे ज्यादा हमे प्यार करते हे.. ओर हम सबके मनमे उनके प्रती पुर्ण समर्पण भाव हे.. ओर हमंसा रहेगा..

बाबा : (हसते) अरे वाह.. मेरी बेटी तो काफी समजदार होगइ हे.. हें..हें..हें..

इतना सुनतेही तीनो हसने लगी.. तब पुनम सर्मसार होते सर नीचे करते हसने लगी.. आज बाबाकी बातोने सृतीको जंजोरके रख दीया.. ओर वो मंजु ओर पुनमको अपनी सौतनके रुपमे इमेंजीग करने लगी.. ओर उनके मनमे देवायतके लीये जो फीलींग्सथी वो काफी हद तक बढ गइ..

ओर उनको मनमे देवायतके वो पेन्टका उभार नजर आने लगा.. जो कभी मंजुकी बाते सुनते उनपे गोर कीयाथा.. ओर यही सब सोचते उनकी चुतमे हलचल तेज होगइ ओर चुत फडफडाने लगी.. उनकी देवायतके साथ संभोग करनेकी तडप बढने लगी.. बस यहीतो काम हे.. जो सबके दिलमे प्यारका बाण बरसाता रहेता हे..

मंजुला : (हसते) बाबा.. अब हमारे लीये अगला क्या आदेश हे..? क्या अब मे आपकी कसमसे मुक्त हो गइ..? हें..हें..हें..

बाबा : (हसते) हां बेटी.. तुम दोनोका जोभी कर्तव्य था ज्यादातर तुम दोनोने पुरा करलीया हे.. ओर कीसीको जरुरत पडे तो तुम दोनो सबको सचाइ बता सकती हो.. बाकी कुछ जानना होतो इधर आजाना.. अब तुम सब अपने संसारपे ध्यान देकर कार्यमे लग जाओ.. ताकी समय समयपे सब इस धरतीपे आ सके..

सृती : (सरमाते हसते) बाबा.. तो फीर अब मे क्या करु..? आजतो आपने मुजे हिलाकर रखदीया.. हें..हें..हें..

बाबा : (हसते) बेटी तुजे पता ही नही हे.. वो तेरा कीतना खयाल रखता हे.. बस कुछ ही दीनोमे तुम खुद उनसे सादी करलोगी.. क्या तुम्हारी होस्पीस्टल हे वो कीरायेपे हे..? क्या नाम हे उनका..?

सृती : (आस्चर्यसे मंजुकी ओर देखते हसते) जी.. बाबा.. दरसल वो हमारा ही पुराना मकान था.. जो देवायतजीने मम्मीके कहेनेपे कीसी बील्डरको अच्छे दामोसे बीकवाया था.. वोही जमीनपे अ‍ेक आलीसान बील्डींग बनी उसीमे देवायतजीमे हमे कीरायेपे दीलवा दीया.. ओर मेरी क्लीनीक मेरी मम्मीके नामसेही चल रही हे.. भुमीका क्लीनीक..

बाबा : (हसते) तो फीर तुमने बिल्डींगके नामपे कभी गौर नही कीया..? हें..हें..हें..

सृती : (जोरोसे हसते) अरे हां.. उनमे भी मेरी मम्मीका नामही आता हे.. भुमी.. हें..हें..हें..

बाबा : (हसते) बेटी तो उसीमे तुजे समज जाना चाहीयेथा.. खैर ये सब बाते अब अपने होने वाले पतीसे पुछ लेना.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते आस्चर्यसे मंजुकी ओर देखते) मतलब..? क्या..? हें..हें..हें.. मंजु तु इस बारेमे कुछ जानती हे..?

मंजुला : (जोरोसे हसते) अरे मुजे क्या पता.. तुम देवुसे ही सब पुछ लेना.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) लेकीन बाबा मे बहुत कुछ समज गइ.. हें..हें..हें..

बाबा : (जोरोसे हसते) ठीक हे.. अब तुम तीनो जाओ भोजन करलो.. फीर आपको सहेरभी जाना हे..

मंजुला : (हसते खडी होते) जी बाबा.. सादीकी खरीदारी करने जाना हे.. आज्ञा दिजीये..

कहेते तीनो हसते हुअ‍े खडी होगइ ओर बाबाके पैर छुकर आपसमे हस हसके बाते करते बहारकी ओर जाने लगी.. ओर तीनोही खुस होकर हसती हुइ भोजन खंडकी ओर चली गइ.. तब वहा सब भोजन कर रहेथे.. तो तीनोभी सबके साथ बैठ गइ.. ओर सभी भोजन करने लगे..

तब भोजन करते सृती बार बार चोर नजरसे देवायतकी ओर देखते सरमाती रही.. अब देवायतमे उसे मंजुका पती नही.. पर खुदका पती नजर आ रहाथा.. तभी पुनमकी नजर धिरेनकी ओर चली गइ तो धिरेनके पास नीलक बैठीथी ओर दोनो हस हसकर धीरेसे बाते कर रहेथे.. जब सबने भोजन करलीया तब सभी होलमे आगये.. तब देवायत बाबाको मीलने ओर दक्षीणा देने उनके रुममे चला गया.. तभी....

कन्टीन्यु
 
aap ko kya lagta hai..? dhiren or nilam ka rilation hoga..? kya vandna devayat mil payegi..? ek or aurat devayat ko milneke liye tadap rahi he.. jo vakai bahut hi khubsurat hai.. jara sochakar koment me btado vo kon hai..
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ९३

कहेते तीनो हसते हुअ‍े खडी होगइ ओर बाबाके पैर छुकर आपसमे हस हसके बाते करते बहारकी ओर जाने लगी.. ओर तीनोही खुस होकर हसती हुइ भोजन खंडकी ओर चली गइ.. तब वहा सब भोजन कर रहेथे.. तो तीनोभी सबके साथ बैठ गइ.. ओर सभी भोजन करने लगे.. तब भोजन करते सृती बार बार चोर नजरसे देवायतकी ओर देखते सरमाती रही.. अब देवायतमे उसे मंजुका पती नही.. पर खुदका पती नजर आ रहाथा.. तभी पुनमकी नजर धिरेनकी ओर चली गइ तो धिरेनके पास नीलक बैठीथी ओर दोनो हस हसकर धीरेसे बाते कर रहेथे.. जब सबने भोजन करलीया तब सभी होलमे आगये.. तब देवायत बाबाको मीलने ओर दक्षीणा देने उनके रुममे चला गया.. तभी....अब आगे

बाबा : (हसते) आओ बेटा.. मेने तेरी सब बीवीओके साथ बात चीत करली हे अब तुम लोग जाओ वरना रातमे आनेकी देरी होजायेगी..

देवायत : (दक्षीणा देते) जी बाबा हम नीकलही रहे हे.. ओर कोइ आज्ञा होतो कहीये..

बाबा : (हसते) बस कुछ नही ये सादीका सब काम नीपटाकर तु अ‍ेक बार अकेले आजाना.. अब तुजे सब बतानेमे कोइ दिकत नही.. मे तेरे सारे सवालोके जवाब दुंगा.. जो तुम मेरी बेटीको पुछ रहाथा.. यहीना की मे अ‍ेक साधु होकर अ‍ैसा काम क्यु करवा रहा हु.. यही प्रस्नथानां तेरे मनमे..? मे सबका उतर दुंगा.. ओर तुजे पुरी बात बता दुंगा ताकी आगे जाकर तेरे मनमे कोइ संचय ही ना रहे.. ओर तु अपना कर्तव्य पुरा कर सके..

देवायत : (हसते) जी.. बाबा.. क्या आपको सब पता चल गया..? मे पुनोकी सादीके बाद अकेला मीलने आउगा.. तब हम बात करेगे.. अब आज्ञा दिजीये हमे..

बाबा : (हसते) हां जाओ आरामसे जाना.. कोइ जल्दबाजी मत करना.. ओर कभी टाइम मीलेतो अ‍ेक बार वो कबीलेमे चले जाना.. वहा तेरी दिवानी तेरा इन्तजार कर रही हे.. बेचारी तेरे पीछे बीलकुल पागल हे..

देवायत : (सरमाते हसते) जी बाबा.. मे उसे मील लुंगा.. अब चलता हु.. प्रणाम..

कहेते देवात हसते हुअ‍े वहासे नीकल गया ओर सबके पास चला गया.. तबतक मंजुने भावना ओर सरलासे लता ओर नीलमको साथ लेजानेकी बात करली.. तब भानु देवायतके पास आगया..

भानु : भाइ वो बाबाको दक्षीज्ञा देनी हे..

देवायत : वो सब मेने दे दीया हे.. अब हम लोग नीकलते हे.. क्या तुम लोगोको आना हे..?

भानु : नही भाइ हम कलही सब खरीदी कर चुके हे.. आप लता ओर नीलमको साथ लेजा रहे हो तो रातमे आनेकी देरी होजायेतो इनको वही रोक लेना.. कल मे खेतोपे आउगा तब वापसीमे दोनो मेरे साथ चली आयेगी.. आप उनको घर छोडनेकी टेन्शन मत लेना.. चलो हमतो अब घर चलते हे आप जाओ सहेर..

देवायत : (हसते) चलो यार ठीक हे.. अभी सब खरीदी करनी हेतो देरतो होजायेगी.. देखते हे अब..

कहेते दोनोने सबको जानेके लीये केह दीया तो सब खडे होगये ओर बहारकी ओर अपनी अपनी कारकी ओर चलने लगे.. भानु सरला भावना ओर रमा सब अपनी कारमे बैठने लगे तब कारमे बैठते भावना मंजुकी ओर देखती रही.. तब मंजुने आंखोके इसारोसे कुछ बाते करली तब भावुके चहेरेपे स्माइल आगइ.. ओर सब अपनी अपनी कारमे बेठ गये सृतीकी कार धिरेनने लेली ओर उनमे लखन लता पुनम ओर निलम बैठ गइ..

ओर बाकीके सब देवायतकी बडी गाडी मे बेठ गये.. तभी सृतीने सबको पहेले अपने घर आनेकी बात कहेदी.. ओर सब सहेरकी ओर नीकल गये.. भानुने कारको अपने गांवकी ओर मोडदी.. मंजु देवायतकी बगल वाली सीटमे बच्चेको लेकर बेठीथी तो उनके पीछे भुमीका चंदा ओर सृती बैठेथे तब सृती बार बार सेन्ट्रल मीररसे देवायतकी ओर देखती रही.. तब देवायत इन सब बातोसे बीलकुल अन्जान था.. ओर सब आधे पोने घंटेकी ड्राइवके बाद सृतीके बंगलोपे आगये..

भुमीका : (कारसे उतरते) आइअ‍े सब.. चाइ नास्ता करके जीनको खरीदी करने जाना हो चले जाना.. फीर रातको डनर इधरही करना हे.. फीर घर जाना होतो चले जाना.. वरना रात इधरही रुकजाना..

चंदा : (हसते) बडी दीदी.. खानेकी तकललीफ क्यु लेते हो.. हम बहारही खाना खा लेगे.. पता नही वहा मार्केटमे कीतनी देर लगे..

सृती : (हसते) मौसीजी जीतनीभी देर लगे खानातो इधरही खाकर जाना हे.. कीतने दिनोके बादतो सब आये हे.. हमेभी नये दुल्हा दुल्हनकी खातीरदारीका कुछ मौका दीजीये.. हें..हें..हें.. ओर आजतो आप दोनोकी सादी हुइ हे.. तो दुल्हा दुल्नको भोजन करनातो बनताही हे.. हें..हें..हें..

कहातो चंदा सरमाकर हसने लगी तब सृती घरका ताला खोलने लगी ओर सभी लोग बंगलेमे आने लगे.. तब अंदर आतेही सब घरको देखने लगे.. क्युकी सृतीका घर अ‍ेक आलीसान बंगलेमे तबदील हो गयाथा.. ओर ये बंगलाभी उसे देवायतनेही दिलवाया था.. सब अंदर सोफेपे बेठ गये.. तब मंजु चंदाको सृती अपने रुममे ले गइ.. तब अंदर जातेही मंजु बच्चेको दुध पीलाने लगी.. ओर सृती सबको पानी देने चली गइ.. तब..

चंदा : (हसते) मंजु सृतीने घरतो बडा लेलीया हे.. क्या तुम इधर पहेले आइ हो..?

मंजुला : (हसते) हां दीदी.. ये बंगला देवुनेही दिलवाया हे.. इन मां बेटीका हेही कोन..? भुमी आंटी देवुको अपना बेटा मानती हे.. ओर इनकी सब प्रोर्पटीको देवुही देखता हे..

चंदा : (हसते) मंजु हमारा देवु सबका खयाल रखता हे.. वो बडी दीदीकाभी अ‍ैसे खयाल रखता हेनां..?

मंजुला : हां दीदी.. पता नही सबके साथ उनका कैसा रुणानुबंध हे.. दीदी आज हम तीनो बाबाको मीलने गइ थी.. अब मे उनकी कसमसे मुक्त होगइ हु.. अब मे आपको फुरसतमे सब बाते बता दुगी.. की ये सब क्यु हो रहा हे.. बस इतना जानलो हम सब कोइ सामान्य ओरते नही हे..

चंदा : (हसते) हां मेने देखा.. तुम पुनो ओर साथमे सृतीभी आइथी.. अब उनके मनमे क्या प्रस्न थे..?

मंजुला : (हसते) दीदी अभीके लीये ये बात कहेना थोडी जल्दबाजी होगी.. फीरभी आपको बता रही हु.. ये जो सृती हेनां.. वो आगे जाके हमारी सौतन होजायेगी.. अ‍ैसा बाबाने कहा हे.. बस अब सब देखती जाओ..

चंदा : (हसते) मंजु अबतो ये सब सुनके मुजे कुछभी अजीब नही लगता.. ओर तुमभी तो सब काफी कुछ जान जाती हो.. क्या तुम्हे इस बातका पता नही था..?

मंजुला : (हसते बच्चेको दुध पीलाते) जी.. मुजे सब पता था.. ओर बहुत कुछ पता हे जो सायद कोइ नही जानता.. लेकीन अभी इन बातोका कोइ मतलब नही हे.. क्युकी समय समयपे सब होकरही रहेगा.. तो आप कीसीभी बातोसे कभीभी विचलीत मत होना.. क्युकी आगे जाकर आपको बहुत कुछ दिखनेको मीलेगा.. क्युकी सब प्रकृतीका खेल हे ओर वो सब होकरही रहेगा..

चंदा : (हसते) हां अब तुम्हारे साथ रहेकर मे इतनातो जान ही चुकी हु.. की हम सब कोइ सामान्य ओरते नही हे.. कोइभी कीसीना कीसी मकस्दसे हमारे देवुके साथ जुडी हे.. अब इन बातोका मुजपे कोइ असर नही पडता.. बस मुजे इतना पता हे हम सभी हमारे देवुसे ओर देवु हम सबको खुब प्यार करते हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां दीदी.. मेभी इसी बातको मानके चल रही हु.. आपभी ये मानके चलीये..

चंदा : मंजु अ‍ेक बात समजमे नही आइ.. ये भानुने अचानक सादीका क्यु सोचा..? क्या हमारी भावुसे तो कोइ प्रोबलेम नही..? अचानक उनकी दुसरी सादीसे मुजेतो सोक्ट लगा.. कीसीको पताही नही था..

मंजुला : नही दीदी.. भानुभाइसे अ‍ेकही गलती हुइ हे.. उनको भावुके साथ सादी करनेसे पहेले देवुको सब सच बाते बता देनी चाहीये थी.. की उनका उनकी मामीके साथ सादीसे पहेलेही रीलेशन हे.. बस यही बात भावुको अच्छी नही लगी.. इसीलीये वो अभी थोडी भानुभाइसे नाराज हे.. ओर ये सादी सरलाचाचीने करवाइ हे.. मुजे भावुकी चीन्ता नही हे.. उसे हमारे पतीही समजा देगे..

चंदा : उन लोगोका भी कुछ समजमे नही आता.. खैर जानेदे.. बस मुजे बडी दीदी ओर भैयाकी चीन्ता हे..

मंजुला : दीदी सायद आज पापाको होस्पीटलसे छुटी मील जायेगी.. मे चाहती हु कल देवुसे कहुगी उन दोनोको कुछ दिनोके लीये हमारे घर लेआये.. तब सादीमे बीजी होजायेगे ओर नया माहोलमे रहेगे तो उनकोभी अच्छा लगेगा.. अबतो इनको हमारे यहा आनेमे कोइ प्रोबलेम नही हे..

दोनोही अ‍ैसी बाते करते सृतीके रुममे बेठीथी तब बहारकी ओर सृती पानी देने चली गइ तब उनकी मदद करने लता ओर पुनमभी कीचनमे चली गइ तो सृतीके चहेरेपे स्माइल आगइ ओर दोनो सबके लीये पानी लेकर चली गइ फीर सृती चाइ नास्ता बनाने लगी.. तब देवायत भुमीका लखन धिरेन नीलम सब सोफेपे बेठकर भुमीका ओर देवायतकी बाते सुन रहेथे.. तब भुमीका देवायतको ना आनेका कारण पुछ रही थी..

भुमीका : देवु बेटा मेने कीतनी बार सृतीसे कहा की तुमको बुलाये लेकीन मेने सुना तुम आजकल बहुत काममे फसे हो..? क्या इतना काम बढ गया हे..?

देवायत : हां आंटी.. आप कहीयेना क्या कामथा.. बस अ‍ेकके बाद अ‍ेक काम नीकलता गया तो कामेही फसाथा.. ये चारोकी सगाइ फीर भानुमे मामा गुजर गये.. ओर देखोना लास्टमे दो दीनोसे मे मेरे सुसरके पास होस्पीटलमे हु..

भुमीका : हां.. तुमने कहा राजीवको प्रोबलेम हो गइहे.. लेकीन क्या हुआ राजीवको..? नीर्मलाका फोन भी नही आया..

देवायत : आंटी उनको ब्रेइनमे स्ट्रोक आ गयाथा जीनकी वजहसे उनको पेरेलीसीस होगया.. अब कुछ ठीक हुआ हे सायद आज उनको होस्पीटलसे छुटी मीलजाये..

भुमीका : (अफसोस करते) हे भगवान.. तबतो मुजेही नीमुसे फोनपे बात करनी पडेगी.. बेचारी वहा अकेली क्या करेगी..

देवायत : नही आंटी मे दो दीनसे वही था.. आजभी जाने वाला था लेकीन मंजुने सब प्रोग्राम फीक्स करलीया था.. ओर अभी इन चारोकी अ‍ेक हप्तेके बाद सादीभी हे ओर सब खरीदीभी बाकीथी तो सब आगये.. आजही सब खरीदी नीपटा लेगे.. आप दोनोकोभी वहा सादीमे आना हे..

भुमीका : हां जरुर आयेगे.. बेटा अच्छा कीया तुम यहा सब आगये.. आज हमे बुहत अच्छा लगा.. कीतने सालोके बाद बाबाके दर्शनभी हुअ‍े.. देखा इतने सालोके बादभी मुजे कैसे पहेचान गये.. हम सभी दोस्तोको अ‍ेक बार तेरे पापा ले गयेथे.. हम कोलेजमे थे अबतक हम सब वहा अ‍ेक दो बार जा चुके हे.. ओर तबभी बाबा अ‍ैसे ही दीखतेथे जो आज दीख रहे हे.. अ‍ैसा लगता हे.. उनकी उमरमे तो कोइ फर्कही नही आया..

देवायत : (हसते) आंटी पीछली चार पीढीसे वही हमारे कुलगुरु हे.. पता नही कोनसा मक्सद लेकर आये हे.. मेभी बचपनसे उनको अ‍ैसेही देखता आ रहा हु..

भुमीका : बेटा जब हम तेरे पापाके साथ उनको मीलने जातेथे तब तेरे पापा हमे बताते थे की बाबाने कहा हे मेरे बेटेकी कइ रानीया होगी.. ओर अ‍ैसी बहुतसी बाते तेरे पापा कहेतेथे.. ओर मुजे आज उनकी सब बाते सच होते दीख रही हे.. अच्छा हुआ तुमने चंदासे सादी करली.. अ‍ेक विधवाको सम्हालके तुमने बहुत बडे पुन्यका काम कीया हे.. कास मेरी सृतीकी जींदगीभी अ‍ैसे संवर जाये.. पता नही ये लडकी कब सादी करेगी..

सृती : (पुनम लताके साथ चाइ नास्ता लाते) मोम.. आप फीर वोही बाते लेकर बैठ गइ..?

भुमीका : (हसते) अरे नही मेतो सीर्फ देवुसे बात कर रही थी.. क्या बन गया चाइ नास्ता..? तो सबको इधर ही बुलाले.. हम सब यही नीचे ही बेठ जाते हे.. चलो बच्चो आजाओ..

पुनम : सृतीदीदी आप सबको देना सुरु करो मे दोनो भाभीओको बुलाकर आती हु हें..हें..हें.. पता नही दोनो अंदर घुसके कबसे क्या बाते कर रही हे.. हें..हें..हें..

कहेते पुनम हसती हुइ सृतीके रुममे चली गइ ओर थोडी देरके बाद तीनोही सबके साथ आकर बैठ गइ ओर सब चाइ नास्ता करने लगे.. ओर बाते करते रहे. .मंजुने अपने बच्चेको वही सृतीके बेडपे सुला दीयाथा.. जब सबने चाइ नास्ता खतम कीया तब सब खरीदी करने जानेकी तैयारीया करने लगे पुनम लता चंदा नीलम सब फ्रेस होकर तैयार होने लगी.. तब मंजु सृती ओर भुमीका घरपे रहेने वाली थी.. ओर देवायत ओर चंदा सबको लेकर जा रहे थे.. थोडी ही देरमे सभी तैयार होकर बहार आगये..

पुनम : (हसते मंजुको) भाभी आप ओर सृतीदीदीभी चलोनां बडा मजा आयेगा.. आप भी कुछ लेलेनां..

मंजुला : (हसते) नही बीटु.. तुम सब चले जाओ विजय अभी छोटा हे.. ओर भुमी आंटी अकेली इनको कैसे संभालेगी.. फीर तुम सबका डीनरभी तो बनाना हे.. तो मे ओर सृती इधरही हे आप लोग आरामसे सब खरीदी कर लेना.. तबतक हम दोनो आप लोगोके लीये खाना बनालेगी..

चंदा : हां पुनम बेटा.. तेरी भाभी भलेही इधर रहेती हम उन दोनोके लीये कपडे ले लेगे.. तुम चलो.. वरना आनेमेभी देर होजायेगी..

कहातो पुनम चंदाके साथ हसते हुअ‍े चलने लगी.. ओर सभी कारमे बेठने लगे.. सभी लोग देवायतकी बडी कारमे अ‍ेडजेस्ट होते बेठ गये ओर देवायतने कारको मार्केटकी ओर जानेदी.. तब मंजु ओर सृती सब खाली बर्तन लेकर कीचनमे चली गइ.. जब दोनोने बर्तन वोसमे रख दीया तब मंजुने घरपे फोन लगा दीया ओर अपने रुममे कुछ तैयारीया करनेकी दयाको सुचना देदी.. फीर फोन रखतेही सृतीकी ओर मुस्कराते देखती हे.. दोनो अ‍ेक दुसरेकी आंखोमे देखने लगी.. ओर अचानक दोनोने अ‍ेक दुसरेको गले लगा लीया..

तब सृतीकी आंखसे खुसीके मारे आंसु नीकल गये.. तब मंजुने हसते हुअ‍े अपने हाथोसे सृतीके आंसु पोछ लीया.. ओर सृतीसे अलग होतेही उनके चहेरेको अपनी हथेलीओमे थाम लीया.. तब सृतीने सरमाकर अपनी नजरे जुकाली.. ओर अ‍ैसेही खडी रही.. तब सृती ज्यादा देर मंजुकी नजरोका सामना नही करपाइ ओर वो फीरसे मंजुके गले लग गइ.. तब मंजु उनकी पीठ सहेलाती रही फीर उनसे अलग होते उनका दोनो हाथ अपने हाथोमे थामलीया..

मंजुला : (हसते) सृती आज मे बहोत खुस हुं.. क्यु.. मेरे देवुका हाथ तु थामेगीनां..? देखना वो तुजे बहुत खुस रखेगा.. आइ प्रोमीस..

सृती : (सरमाते धीरेसे) मंजु.. आइ नो.. बाबाने अचानक क्या केह दीया.. मुजेतो अभीभी अ‍ेक स्वप्नकी तराह लग रहा हे.. क्या ये सब पोसीबल हे.. ओर उनकीतो तीन तीन सादीया होचुकी हे.. क्या पुनमसेभी सादी कर चुके हेनां..? ओर आज चंदामौसी.. क्या तुम लोगोको बुरा नही लगता.. खासतो तुमको..? हंमम..

मंजुला : (दोनो हाथ थामते) नही सृती.. अभी सीर्फ तुजे बता रही हु.. बाबाकी दी हुइ शक्तिओके माध्यमसे मे अपने आपको पुर्ण पहेचान चुकी हु.. कुछ राजकी बाते हे जो अभी सीर्फ तुजे ओर मेरी पुनोकोही बताउगी.. क्युकी तब तुम चंदामौसी ओर पुनमही इस बातकी साक्षी होगी.. सृती.. आगे जाकर बहुत कुछ होने वाला हे..

सृती : (मुस्कुराते) मंजु अगर तुजे अ‍ैतराज ना होतो क्या मुजे थोडा बहुत बता सकती हे..? प्लीज..

मंजुला : सृती.. में तुजे सीर्फ मेरी सहेलीही नही मेरी बहेनभी मानती हु.. वो क्यु.. तुजे बादमे पता चल जायेगा.. अगर ये बाते में तुजे नही बताउगीतो कीसको बताउगी.. अबतो बाबानेभी बतानेकी परमीसन देदी हे.. मे तुजे ओर मेरी पुनोको सबकुछ बता दुगी.. पर अभी नही.. हम जब खाना बनायेगी तब सीर्फ हम दोनोही कीचनमे होगी.. तब हम बाते करेगे अभीतो बहार चल.. मुजे आंटीसे कुछ जरुरी बाते करनी हे.. क्या तु चलेगी..?

सृती : हां मंजु मुजेभी मम्मीसे कुछ बाते करनीहे जो आज हमे बाबाने कही हे.. चल.. बहार..

तब मंजु ओर सृती दोनोही भुमीकासे बात करनेके लीये उत्सुक थी.. ओर दोनोही बहार आकर भुमीकाके पास अगल बगलमे सोफेपे बैठ गइ.. तब भुमीका प्यारसे मंजुके सरमे हाथ घुमाते प्यार करने लगी..

भुमीका : मेरी बच्ची.. क्या अब अपनी मम्मीसे बात करती हेकी नही..? की अभी भी दोनो रुठी हुइ हो.. हें..हें..हें.. मेरा देवु ओर तुम दोनोही बहुत बदमास हो.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) नही आंटी.. अब मम्मीकी देवुसे सब गीले सीकवे दुर होगये हे.. अब उनसे रुबरु मीलुगी तब मेभी बात करुगी.. फोनपेतो बात होती रहेती हे.. आंटी आपको मेरी मम्मी मीलीथीनां..? आप बता सकती हे दोनोके बीच क्या बाते हुइ..? प्लीज.. क्युकी आज बाबासे हमारी भी बहुत कुछ बाते हुइ.. कहेतेथे सृतीकी मम्मीको सब मालुम हे..

भुमीका : (हसते) हां.. जब तुम दोनो पहेली बार आयेथे ओर सादी करके गये.. तब कुछही दिनोके बाद अ‍ेक दिन अचानक मुजे ढुंढते नीमु इधर आगइ.. तब हम कीतने सालोके बाद मीलथे.. तब हम दोनोने खुब आंसु बहाये.. फीर तेरी ओर देवुके बारेमे सारी बात मेने बताइ.. ओर मेने उसे केहदिया की तुम दोनोने सादी करली हे.. फीर हम दोनोके बीच बहुत सारी बाते हुइ..

मंजुला : अच्छा तो सब आपके यहासे मालुम हुआ.. फीर..?

भुमीका : तब वो खुब रोइ.. क्युकी उसने मुजे जो सचाइ बताइ.. वो मे तुजे नही बता सकती..

मंजुला : (हसते) आंटी मुजे सब पता हे आपकी उनके साथ क्या बाते हुइ.. यहीनां की वास्तवमे मे ओर देवु आपसमे भाइ बहेन हे..? मे सब जानती हु..

भुमीका : (आस्चर्यसे हसते) हां.. यही कहा मुजे.. क्या इस बारेमे तुजे सब पता था..? फीरभी तुमने देवुसे सादी करली..?

मंजुला : नही आंटी.. जब मे देवुसे प्यार करतीथी तब मुजे इस बातका पता नही था.. लेकीन जब मे यहासे देवुके साथ आश्रममे सादी करने गइ तब वहा बाबाने मुजे कुछ शक्तिया दी.. जो इस बारेमे मुजे धिरे धिरे करते सब ज्ञात होने लगा.. ओर आज मे सबके बारेमे सबकुछ जान जाती हु.. अब मुजे आप सबकी पुरी कोलेज लाइफके बारेमे सब कुछ पता हे.. ओर मुजे येभी पता हे मेरे असली पीता मेरे ससुर ही हे..

भुमीका : (आस्चर्यसे हसते) क्या..? तुम हम सबके बारेमे सबकुछ जानती हो..? अगर तुजे सबकुछ पता हे.. तो फीर तु तेरे सास ससुर ओर मम्मी पापाके बारेमेभी सब जानती होगी.. इनफेक्ट मेरे बारेमे भी सब जानती होगी.. तो फीर मुजसे सब क्यु पुछ रही हे..? क्या तुजे हम सबकी सचाइ जानकर बुरा नही लगा..?

मंजुला : (हसते) नही आंटी.. अगर मे आप सबके बारेमे जानती हुतो मेरे बारेमे भी मुजे सब पता हे.. अगर मे खुदको नही पहेचानती तो सायद मुजे बुरा लगता.. लेकीन अब कुछभी बुरा नही लगता.. ये सब प्रकृतीका खेल हे.. जो मे उसे भली भांती पहेचान गइ हुं.. ओर मे कुछ राज सीर्फ मेरे तकही सीमीत रखुगी.. आप चीन्ता मत कीजीये ओर मुजपे यकीन कीजीये..

सृती : (हसते) मम्मी कुछ बाते हे जो मंजुतो जानती हे लेकीन मुजे आपसेभी कुछ सचाइ जाननी हे जो आपने मुजेभी नही बताइ.. मुजे आपके सब दोस्तोके बारेमे सब जानना हे.. प्लीज.. बताइअ‍ेनां..

भुमीका : (जोरोसे हसते) अरे.. तो फीर तेरी सहेलीसे ही सब जानलेती.. मेरे पीछे क्यु पडी हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) आंटी आज आपसे अ‍ेक बात कहेनी थी.. जो हमे बाबाने आज बताइ हे.. हमे आपसे मुहसे कुछ बाते जाननी हे फीर मे आपको कुछ बाते बताती हुं.. क्युकी इनमे आपकी राय जानना बहुत जरुरी हे..

भुमीका : (हसते) अच्छा अच्छा.. कहो क्या जानना हे..?

सृती : (हसते) मम्मी आपके सब दोस्तोके बारेमे.. खास करके किशन अंकलके बारेमे.. कोनथे वो..?

भुमीका : (गहेरी सांस लेते आंखमे आंसु छलकते) कीशन.. मेरे जीगरका टुकडा.. मेरा भाइ.. मेरा सबकुछ.. उस गांवके राजा.. सृती तुजे पता हे..? जब उनकी बहेन नही थी.. तब वो मुजसे राखी बंधवाते थे.. मेरा सगा भाइतो नही था.. पर सगे भाइसे बढकर था.. जब हम कोलेजमे थे तबसे मुजे बहेन मानते थे.. ओर मेरी हर जरुरतको पुरी करतेथे..

सृती : (हसते) मोम.. किशन अंकल ओर नीमु मौसीके बारेमे बताइअ‍ेनां.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) तुजे उन दोनोकी बातोमे बडा इन्ट्रेस हे.. हें..हें..हें.. सुन.. तब वो ओर नीर्मला दोनो खुब प्यार करते थे.. इस बातकी सीर्फ मेही साक्षी थी.. जबभी नीमु उनको मीलने जाती मुजे हमेसा अपने साथ रखती.. ताकी कीसी ओरको नीमुपे सक ना हो.. ओर दोनो आपसमे सादी भी करने वाले थे.. लेकीन कीस्मतको कुछ ओरही मंजुर था.. ओर दोनो सादी नही करपाये.. क्युकी तभी उनकी असली बहेन विमलाको उनके माता पीता आश्रमसे वापस लेकर आगये.. जो उसे बचपनमे ही आश्रममे छोडके आगये थे..

सृती : (हसते) मम्मी तो क्या उस टाइम किशन अंकलको नही पताथाकी ये उनकी बहेन हे..?

भुमीका : नही.. किशनतो क्या.. इस बातका गांवमेभी कीसीको नही पताथा की ये किशनकी बहेन हे.. ओर उनके आनेके बाद कुछही हप्तोमे अ‍ेक दीन किशनके माता पीता दोनोकी रहस्यमय तरीकेसे मोत होगइ.. ओर ये राज सीर्फ किशन ओर उनकी बहेन विमला तकही सीमीत रेह गया.. ओर वो किशन ओर नीर्मलाके रीस्तोके बीच खाइ बन गइ.. क्युकी उनको पताथाकी किशन मेरा सगा भाइ हे.. फीरभी वो किशनको चाहने लगीथी..

सृती : (हसते) मोम.. विमलाको पताथाकी ये मेरा भाइ हे फीरभी उनकी ओर कैसे आकर्सीत होगइ..?

भुमीका : (सरमाते हसते) अब तुजे क्या बताउ.. तब मेरा किशनका आकर्सणही इतना था.. वो तब बहुतही हेन्डसम दीखता था.. जैसे आज मेरा देवु दिखता हे.. बीलकुल मेरे देवुकी तराह.. कोलेजमेभी कइ लडकीया उनको प्रपोज कर चुकी थी.. तो विमलाभी कम नही थी..

उनका जोबन.. उनकी खुबसुरती.. वो नीर्मलाकोभी टकर दे सकती थी.. फीर धीरे धीरे करते विमला अपने जलवे दिखाकर किशनको अपने जालमे फसाकर अपना सबकुछ उनपे लुटा चुकी.. ओर हर रात दोनो मीया बीवीकी तराह साथमे गुजारने लगे.. तब नीर्मला को नही पताथाकी वो ओल रेडी किशनसे प्रेगनेन्ट हो चुकीहे.. फीर कुछ दिनोके बाद विमलाभी प्रेगनेन्ट होगइ.. दोनोही किशनसे प्रेगनेन्ट होगइ थी.. ओर विमलाने नीर्मलाको छलसे जुठ बोलके अपने रास्तेसे हटाकर किशनसे सादी करली..

सृती : मोम तो फीर किशन अंकलको पता नही चलाकी ये उनकी बहेन हे..?

भुमीका : हां.. उनको सब बाते आश्रमसे पता चली तबतक बहुत देर होचुकी थी.. वो दोनो भाइ बहेन सारीरीक सबंधमे कइ बार बंध चुके थे ओर काफी आगे बढ चुके थे.. तब किशनभी विमलाके पीछे बीलकुल पागल हो चुकाथा.. तब उनकोभी सीर्फ उनकी बहेन विमलाही दीखती थी.. उनको कोइ फर्क नही पडाकी ये मेरी बहेन हे.. ओर दोनो भाइ बहेन होकरभी वासनामे अंधे हो चुके थे..

सृती : (सीरीयस होते) मोम.. क्या किशन अंकल अपनीही बहेनके साथ.. उन्होने कुछभी नही सोचा..?

भुमीका : (हसते) नही बेटा.. क्युकी तब बाबानेभी कहाकी ये सब होनेही वालाथा.. ओर किशनको येभी बतादीया की उनके माता पीताभी भाइ बहेनही थे.. तब किशनने सब अ‍ेक्सप्ट करलीया था.. इसीलीये वो विमलाको खुलकर प्यार करने लगा.. यहा तक की उनके माता पीताभी ये बात जान चुकेथे..

तब उनके पास विमलासे सादी करनेके अलावा कोइ चारा नही था.. उसी समय मे ओर तेरे पापा भी आपसमे प्यार करते थे.. तब मुजे नही पताथाकी भानुके पीता विरजीभी मुजे चाहने लगेथे.. ओर मेने उनका तेरे पापाकी वजहसे प्यार ठुकरा दीया.. हमारे गृपमे सबसे सनकी आदमी वोही था.. ओर ये बात वो बरदास्त नही करपाया.. ओर इसी बीच मेरे साथ अ‍ेक हादसा होगया.. जब किशनको इस बातका पता चला तब उनहोने विरजीको खुब मारा.. ओर विरजीको अपनी गलतीका अहेसास होगया..

सृती : (सोक्ट होते) क्या.. आपके साथ..? क्या.. भानुभाइके पीताने.. आपके साथ जबरदस्तीकी..?

भुमीका : हां बेटी.. अच्छा हुआ तुम्हारे पीताको कहीसे पता चल गया ओर किशनको कहेकर मुजे बचालीया.. तब किशनने विरजीको खुब मारा.. फीर विरजी मेरे पैर पकडके मुजसे माफी मांगने लगा.. तब नरेशके कहेनेपे मेने उसे माफ करदीया.. फीर किशनने मेरी ओर नरेशकी सादी करवादी..

तबसे में कीसीको नही मीली.. बस अ‍ेक किशनकोही मेरे बारेमे सब पताथा की मे ओर नरेश कहा रहेते हे.. ओर वो अक्शर हमे मीलने आता वो हर साल मेरे घर मुुजसे राखी बंधवाने आजाता.. ओर सबकी खबर मुजे सुनाता.. तब अ‍ेक दिन मुजे पता चलाकी नीर्मलाने अ‍ेक बच्ची यानी मंजुको जन्म दीया हे.. ओर उसनेभी अपने भाइके साथ सादी करली हे..

सृती : (हसते) मम्मी ये बात तो समजमे आइ..की किशन अंकलके घरमे तो भाइ बहेनके बीच सादी करेनेका कुछ रीजनथा.. लेकीन निमु आंटीने उनके भाइके साथ क्यु सादी करली..? राजीवअंकल उनके भाइ हेनां..? हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) बेटी.. अब तुजे क्या कहु..? हम ओरत जब जीदपे आजाती हे तब हम अच्छे बुरेका कुछभी नही सोचती.. उनके मनमे अ‍ेकही बातथी की किशनको पताथा फीरभी किशनने उनकी बहेनसे क्यु सादी करली..? बहेनकी खातीर उसे कीशनको छोडना पडा..

उसने सोचा जब किशन उनकी बहेनके साथ सादी कर सकता हे तो मे क्यु अपने भाइके साथ सादी नही कर सकती..? बस यही सोचकर उसनेभी अपने भाइके साथ सादी करली.. ओर दुसरी वजाह.. वो तुम दोनोभी जानती हो.. जब जवानी उफानपे होती हे.. तब ओरतको भी अ‍ेक साथीकी कमी महेसुस होती हे.. ओर नीमुने अपने भाइसे ही सादी करके वो कमी पुरी करली.. ओर अपने भाइके साथ अपना घर बसा लीया.. ओर उनसेभी अ‍ेक बेटी पैदा करली.. हमारी भावु..

सृती : (हसते) मोम.. तो फीर विरजी अंकलका क्या हुआ..? मेने सुनाथाकी वोभी किशन अंकलके साथ धंधेमे खेतोमे आगये थे.. अंकलने उसे इतना मारा फीरभी उनके साथ काम करते थे..?

भुमीका : (हसते) बेटी हम सबको पताथा वो सनकी था.. लेकीन दिलका बुरा नही था.. वो अच्छाभी था.. ओर किशनकी बहुत रीस्पेक्ट करता था.. उनकी ओर किशनकी वजहसे कोलेजमे हमारे सामने कोइ देखताभी नही था.. हम दोनोके लीये वो कइ बार अपनी जानकी परवाह कीये बगैर दुसरोके साथ लडाइ करलेता था.. मेरे साथ हादसेके बाद उनकीभी सरलासे सादी होगइ.. फीर क्या हुआ मे तुजे नही बता सकती..

कभी मंजु बेटी बताना चाहेतो उनसे पुछ लेना.. क्युकी अबतो येभी उनके बारेमे सब जानती होगी.. किशनने हमारी बहुत मदद कीहे.. ओर तेरी पढाइकाभी पुरा खर्चा किशननेही कीया हे.. ओर देखो.. खुनतो आखीर खुनही होता हे.. मेरा देवुभी उनके बापसे बढकर नीकला.. जब वो मंजुके साथ पहेली बार यहा आया तब मुजे पताही नही थाकी देवु किशनका बेटा हे.. लेकीन वो सब जानता था.. उसने हमे तब जुठ बोला जब तुम दोनो यहा सादी करके आयेथे.. ये बात तो मुजे नीमु मीली तब पता चली.. की देवु मेरे कीशनका बेटा हे..

मंजुला : (हसते) आंटी.. अगर किशन अंकल आपके भाइ हे.. तबतो आप रीस्तेमे हमारी बुआ होगइ.. हें..हें..हें..

भुमीका : हां.. तु भी मेरे किशनकी बेटी हे.. ओर मेरा देवुभी.. तो में तुम दोनोकी बुआ ही हु.. हें..हें..हें.. लेकीन मंजु.. तुम भी मुजे कुछ बाते बताने वाली थी.. बतानां.. कोनसी बात कहेना चाहतीथी..?

मंजुला : (हसते) आंटी.. ओह.. सोरी.. सोरी.. बुआजी.. हें..हें..हें.. बात दरसल येहे की आज बाबाने भोजनके समय मुजे पुनम ओर सृतीको अपने रुममे बुलायाथा.. तब उनसे ढेर सारी बाते हुइ.. तो अ‍ेक बात उसने अ‍ैसी कही की मुजे इस बारेमे आपसे बात करना जरुरी लगा..

सृती : (सर्मसार होते मुस्कराते) मंजु.. प्लीज.. ये बात अभी मम्मीसे कहेना जरुरी हे..?

मंजुला : (हसते) हां सृती.. आज इश्वरने मुजे मेरी बुआ दे दीहे.. तो बुआसे बात करनेमे अब काहेका संकोच.. आज बतानेदे..

भुमीका : (हसते) अरी बतानां.. दोनो कबसे कीस बारेमे बात कर रहीहो.. बता मुजे.. वरना डांटुगी.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) नही बुआ.. आपतो जानती हो.. वो हिमाचलके राजाकी कहानी.. (ये केसी अनुभुती) कभी सुना हे इस बारेमे..?

भुमीका : अरे हां.. किशन अक्सर इनके बारेमे हमसे बाते करता रहेता था.. कहेताथा वो राजा अ‍ेक दिन मेरे घरमे जन्म लेकर आयेगा.. ओर तब उनकी बहुत सारी रानीयाभी आयेगी.. अ‍ैसा उसे बाबाने कहाथा.. ओर हम सभी दोस्त अक्सर इस बारेमे बाते करते रहेते थे..

मंजुला : हां.. बुआ वोही.. वोही राजा अब मेरा पोता बनके आयेगा.. ओर उनकी बहुत सारी रानीयाभी होगी.. ओर उनकी सुरुआत देवुसे तीन पीढी पहेलेही सुरु होगइ हे.. तभीतो देवुके दादा फीर उनके पीता ओर अब खुद देवुने उनकी बहेनसे सादी करली हे.. आपतो जानती हे मेभी देवुकी बहेनही हु..

भुमीका : (आस्चर्यसे) अरे हां.. ये बातपे तो मेने गौरही नही कीयाथा.. बाबाकी सब बाते सच होगइ.. तो फीर बाबाने आज तुमसे क्या कहा..? क्या मुजे बता सकती हो..?

मंजुला : हां.. बुआ जीस तराह उस राजाकी बहुत सारी रानीयाथी उसी तराह मेरे देवुकीभी कइ सादीया होगी.. आज उसने मौसीके साथ सादी करली हे.. ओर उनके जीवनमे अ‍ेक ओर बीवी आने वाली हे..

भुमीका : (हसते) अरे मेरा देवुतो राजा हे.. उनमे कोनसी नइ बात हे.. अगर वो राजा मेरे देवुका पौत्र होगातो ये सब बाते तो लाजमी हे.. इस बारेमे तो हम सभी दोस्त जानते थे.. बस ये नही पताथाकी वो राजा मेरे देवुका पोता होगा.. क्या बाबाने ये बात कही हे..?

मंजुला : (मंजु धीरे धीरे बातको आगे बढाते.. तब सृती सरमाते हस रहीथी) नही बुआ.. बाबने आज देवुकी तीसरी बीवीके बारेमे बातकी.. ओर उसने उनकी तीसरी बीवीके बारेमे हमे बता दीया..

भुमीका : (जोरोसे हसते) अच्छा..? कोन हे वो खुसनसीब जो मेरे देवुसे सादी करेगी.. हें..हें..हें.. वो तो मेरे देवुकी रानी होकर धन्य होजायेगी.. बतानां.. कोन हे वो खुसनसीब लडकी..

मंजुला : (सरमाते हसते धीरेसे) वो.. बुआ.. वो.. हमारी सृती हे..

भुमीका : (चोंकते) क्या..? मेरी सृती..? नही.. नही.. क्या बाबाने सृतीके बारेमे तुमसे बातकी..? मेरे देवुकी रानी.. मेरी सृती हे..? (कुछ सोचते) मेरी सृती.. देवुकी रानी.. वो.. मंजु बेटी.. तुजेतो सब पता चल जाता हेनां..? तो फीर..

मंजुला : (भुमीका दोनो हाथ थामते) हां बुआ.. हमारी सृती.. प्लीज बुआ.. मे आज मेरे देवुके लीये हमारी सृतीका हाथ आपसे मांगती हु.. प्लीज मना मत करना.. मुजे पता हे आपके मनमे क्या उलजन हे.. लेकीन सृतीकी कीस्मतमे मेरा देवुही हे.. तो प्लीज.. आप हां कहेदो..

इतना सुनतेही भुमीका अपने दोनो हाथोमे अपना चहेरा छुपाके जोरोसे रोने लगी.. जीसे देखकर अ‍ेक बारतो मंजु ओर सृती दोनोही डरने लगी.. ओर विचलीत होने लगी.. तब सृती जटसे खडी होगइ ओर पानी लेने कीचनमे चली गइ.. तबतक मंजु भुमीकाकी पीठको सहेलाते उनके सामने देखती रही..

तभी सृती पानी लेकर आगइ ओर अपनी मम्मीको पानी दीया.. तब भुमीकाने पानी पीकर ग्लास सृतीको वापस दीया ओर सृती ग्लास रखने चली गइ फीर वापस आकर अपनी जगाहपे बैठ गइ तब भुमीका उनके सामने देखती रही.. फीर मंजुका हाथ थामते उनके सामने देखकर मंजुके हाथको उठाकर अपने सरपे रखके जुक गइ.. फीर....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ९४

इतना सुनतेही भुमीका अपने दोनो हाथोमे अपना चहेरा छुपाके जोरोसे रोने लगी.. जीसे देखकर अ‍ेक बारतो मंजु ओर सृती दोनोही डरने लगी.. ओर विचलीत होने लगी.. तब सृती जटसे खडी होगइ ओर पानी लेने कीचनमे चली गइ.. तबतक मंजु भुमीकाकी पीठको सहेलाते उनके सामने देखती रही..

तभी सृती पानी लेकर आगइ ओर अपनी मम्मीको पानी दीया.. तब भुमीकाने पानी पीकर ग्लास सृतीको वापस दीया ओर सृती ग्लास रखने चली गइ फीर वापस आकर अपनी जगाहपे बैठ गइ तब भुमीका उनके सामने देखती रही.. फीर मंजुका हाथ थामते उनके सामने देखकर मंजुके हाथको उठाकर अपने सरपे रखके जुक गइ.. फीर....अब आगे

भुमीका : (आंसु बहाते) बेटी.. आजतो तुमने मेरी जोली खुसीयोसे भरदी.. अ‍ैसा लगता हे आज साक्षात देवी मेरे घर खुसीया लेकर आइ हे.. जो बात आज तक मुमकीन नही हुइ.. वोही बात आज मुमकीन होती नजर आ रही हे..

मंजु ओर सृती भुमीकाका अ‍ैसा व्यवहार देखकर डर गइथी.. लेकीन जब उसने मंजुको ये बात कही तब सृती ओर मंजुने राहतकी सांसली.. ओर खुसीसे दोनोका चहेरा दमकने लगा.. तब मंजुने कहा..

मंजुला : (खुसीसे हसते) बुआ.. आप कीस बातके बारेमे बात कर रही हे..? हमे कहीयेनां..?

भुमीका : (प्यारसे गाल सहेलाते धीरेसे अ‍ेक चपत लगाते) बदमास.. सब बुआके मुहसे उगलवाना चाहती हे.. तुजेतो सब पताही हे.. तो फीर क्यु पुछती हे.. क्या मेरी सृतीकी बात तुम नही जान पाइ..?

मंजुला : (हसते हाथ थामते) नही बुआ.. बताइअ‍ेना.. हम आपके मुहसे सब सुनना चाहते हे.. ये बात सृतीको थोडीना पता हे.. उनकोभी पता चलेकी मेरी बात कहा चलीथी.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) हां.. देखा..? तु सब जानती हे.. फीरभी मेरे मुहसे सब उगलवाना चाहती हे.. तो सुन.. तुमने सही कहा.. मेने ओर सृतीके पापा जबवो जीन्दा थे तब सृतीभी काफी छोटी थी.. हम दोनोने सृतीका रीस्ता देवुके साथ करवानेका तैय किया था.. जब हम बात करने वालेथे तब अ‍ेक दिन किशन घरपे अ‍ेक मीठाइका बोक्ष लेकर आया.. क्युकी तब राजीव ओर किशनके बीच तुम्हारे रीस्तेकी बात हो गइथी.. ओर उसने तुम्हारी ओर देवु दोनोके रीस्तेकी बात कहे दी.. तब हम दोनो मीया बीवी खुब नीरास होगये..

मंजुला : (हसते) बुआ तो क्या हुआ.. फीरभी आपको मेरे ससुरसे इस बारेमे बात करनी चाहीअ‍ेथी..

भुमीका : नही बेटी.. तब हमारे दिमागमे अ‍ैसी बात आइही नही.. फीर हमने किशनसे सृतीकी कुछ बातही नही की.. ओर सृतीकी दुसरी जगाह सादी करदी.. ओर ये हमारी सबसे बडी भुल थी.. तबही हमे सोचना चाहीयेथा.. की देवुकीतो दुसरी सादीभी होसकती हे.. ओर देखो आज भगवानने हमारी सुनली..

मंजुला : (हसते) तो बुआ क्या इसे मे हां समजु..? ये रीस्ता पका करदे..? हें..हें..हें..

भुमीका : (जोरोसे हसते मंजुकी जांगपे अ‍ेक चपत लगाते) तो क्या अभी तक मे भजीया तल रहीथी..? हें..हें..हें.. अरे बेटी तु ये रीस्ता पकाही समज.. बस तु अ‍ेक बार सृतीको पुछले उसे कोइ अ‍ेतराजतो नही..? तो फीर मुजे क्या प्रोबलेम.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते सृतीकी ओर देखते) बुआ.. वोतो राजी हे.. इनफेक्ट दिलके अ‍ेक कोनेमे वोभी मेरे देवुसे प्यार करती हे.. बस कमीनी जताती नही.. हें..हें..हें..

इतना सुनतेही सृती सर्मसार होते अपने दांत पीसते मुस्कराते मंजुको पीठमे मुका जड देती हे.. तब भुमीका ओर मंजु दोजोही खुसीसे हसने लगती हे.. तब सृती अ‍ेकदम सरमाते हसते हुअ‍े खडी होकर कीचनमे चली गइ.. तब पीछेसे भुमीका ओर मंजु हसते हुअ‍े उनको जाते देखती रही.. तब भुमीका की आंखोसे खुसीके मारे दो बुंद आंसुके गीरते हे.. ओर वो मंजुका हाथ थामते उनकी ओर घुमजाती हे ओर धीरेसे मंजुसे बाते करने लगती हे..

भुमीका : बेटी.. आज मे बहुत खुस हु.. मेरी सृतीका घर बस जायेगा.. क्या इस बारेमे देवुको पता हे..?

मंजुला : नही बुआ.. आजही बाबासे बात हुइ.. ओर मुजे पहेले आपसे बात करना उचीत लगा.. तो आपको पुछ लीया.. अब आपने हां कहेदी हेतो मे बातको आगे बढाउगी..

भुमीका : बेटी अच्छा कीया.. तुम देवुसे भी अ‍ेक बार बात करलेना फीर मुजे फोन करके बता देनां..

मंजुला : बुआ.. वोतो मे करलुगी.. लेकीन मे चाहती हु देवु ओर सृती दोनोही इस बातपे खुद आगे बढे.. मुजे पुरा यकीन हे सृती भी देवुसे प्यार करती हे.. तो मेरे देवुको वोही प्यार करनेमे विवस करदेगी.. क्युकी मेरा देवुभीतो वोही राजाका अंस हे.. तब हम उन दोनोकी सादी करदेगे.. क्या कहेती हो आप..?

भुमीका : (हसते) चल ठीक हे जैसे तुजे अच्छा लगे.. ओर ये सहीभी हे.. मेने कइ बार देखा हे वो देवुकी बाते करते थकतीही नही हे.. भगवान करे सब ठीक होजाये.. अब मुजे सृतीकी चीन्ता नही.. सब ठीक होगया..

मंजुला : बुआ.. कुछ बाते अ‍ैसीहे.. मे आपको कैसे बताउ.. दरसल हम सब देवुके साथ कइ जन्मोसे जुडी हुइ हे.. तो हमे देवुको पानाही हे.. ओर इनमेसे हमारी सृतीभी अ‍ेक हे.. जो कइ जन्मोसे देवुके साथ जुडी हे..

भुमीका : (हसते) बेटी.. क्या तुजे सब ज्ञात होजाता हे..? मुजेतो यकीन ही नही हो रहा.. मंजु मुजे इस बारेमेभी कुछ बताओनां.. क्युकी कुछ बाते हेजो.. अब मे तुजे कैसे कहु..

मंजुला : बुआ.. आप इस बातकी बीलकुल फीकर मत करो.. मेने आपसे कहानां.. की कुछ राज मे सीर्फ अपने तकही सीमीत रखना चाहती हु.. वो कीसीको नही बताना.. ओर आज आपको अ‍ेक सच बताही देती हु.. वास्तमे हम सब परीया हे.. ओर मेरा पोताजो मेरे इस विजयकी बीवीकी कोखसे जन्म लेगा.. वोही हम सब परीयोका राजा हे.. ओर सभी परीया अपने आप इनके रीलेशनमे आही जाती हे..

भुमीका : (आस्चर्यसे धीरेसे) क्या..? सभी उनके रीलेशनमे आजानेका मतलब..?

मंजुला : (हसते) बुआ.. हम सभी उनके साथ कोइना कोइ रीस्तेसे जुडी हुइ हे.. तो हम सभी वहा उस लोकमें परीया होगी.. तभीतो हम सब मेरे देवुके साथ जुडी हुइ हे.. ओर मेरा देवुभी उनकाही अंस हे.. बस उन्ही अंसके माध्यमसे वो राजा पैदा होगे.. बस अभी मे आपको इतनाही बता सकती हु..

हम सब वो हिमाचलके राजाकी रानीया थी.. जो सब वापस इस धरतीपे दुबारा जन्म लेकर आइ हे.. ओर जबतक उनका मक्सद पुरा नही होता हम सब आती जाती रहेगी.. क्या पता आप ओर मेरी मम्मीभी उनमेसे अ‍ेक हो.. ओर अगले जन्ममे मेरे पोतेकी रानी हो.. हें..हें..हें..

भुमीका : (जोरसे हसते अ‍ेक चपत लगाते) बदमास.. कुछभी बोलती हे.. तुम क्या क्या कहानी बनाती हे.. हें..हें..हें.. क्या वाकइ ये सब चस हे..? तुम हम सबके बारेमे सचमे सबकुछ जानती हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. बुआ.. कुछ बाते हे जो मुजे आपके मुहसे सुननी हे.. वो जब हम दोनो अकेली होगी तबही हम इसके बारेमे बात करेगे.. ताकी आपके दिलका बोजभी कुछ हल्का होजाये.. क्या मे सच केह रही हुना्..?

भुमीका : (सरमाते धीरेसे मुस्कराते) बेटी.. मुजे लगता हे तुम वाकइ हमारे बारेमे सबकुछ जानती हे.. ठीक हे हम दोनो कभी इस बारेमे फुरसतमे बात करेगे.. तेरे साथ बाते करते आज जी हल्का होगया.. दुनीयामेभी क्या क्या कहानीया चल रही हे.. हर अ‍ेक ओरतकी अपनी कहानी हे.. हें..हें..हें..

मंजुला: (जोरोसे हसते खडी होते) बुआ.. ये कोइ कहानी नही हे.. में सच केह रही हु.. अब आप बैठीये मे सृतीकी कुछ मदद करती हु..

भुमीका : (हसते) अरे तुम इधर बैठनां.. वो सब करलेगी तु क्यु इस हालतमे तकलीफ लेती हे.. इधर बैठ..

मंजुला : (हसते जाते) नही बुआ.. उनको कंपनी मील जायेगी.. ओर कुछ बातेभी होजायेगी..

भुमीका : (हसते) अच्छा अच्छा.. चल जा.. लेकीन कोइ काम मत करना समजी..

तब मंजु हसते हुअ‍े कीचनमे चली गइ तब सृती खडे खडे सब्जीया काट रहीथी.. जैसेही मंजुको अंदर आते देखा वो सब छोडके खुसीके मारे मंजुसे लीपट गइ ओर सरमाते हसती रही.. तब मंजुने हसते हुअ‍े उसे जोरोसे बाहोमे भीच लीया तब सृतीके मुहसे आउच.. नीकल गया.. तभी मंजुने सृतीको अपने आपसे अलग कीया ओर उनके सामने देखकर मुस्कराती रही तब सृती सरमाकर नजरे चुराने लगी..

मंजुला : हां तो मेरी सौतानजी.. अब लगजाओ मीशन देवुपे.. हें..हें..हें.. देख मेने तेरा आधा कामतो करदीया.. अब हमारे देवुसे बात करनेकी जीम्वेवारी तेरी.. देखले कैसे मेरे देवुको पटाती हे.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते धीरेसे हसते) मंजु प्लीज.. यार मुजे बहुत सरम आ रही हे.. मुजेतो अभीभी ये सब अ‍ेक स्वप्नकी तराह लग रहा हे.. की तुम खुद उनकी बीवी होकर मुजे ये सब केह रही हो.. आइ कान्ट बीलीव.. क्या आजके जमानेमे भी ये सब पोसीबल हे..? कीतना अजीब हेनां..?

मंजुला : हां सृती ओर ये सब सच हे.. ओर अ‍ेक सच तुभी जानती हे.. मे सीर्फ दो तीन सालकी महेमान हु.. फीर मुजे वापसभी तो आना हे.. तेरी बहु बनकर..

सृती : (जोरोसे बाहोमे भीचते आंसु बहाते) नही मंजु.. मत कर अ‍ैसी बात.. हम सब तेरे बीना कैसे जीयेगे..? तुहीतो हे जो हम सबका खयाल रख सकती हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) नही सृती.. बस यही बात आज में तुमसे कहेने वाली हु.. जो मेने अभी तक कीसीको नही बताया.. आज बाबाने मुजे अपनी कसमसे मुक्त कीया हे.. तभी तो मे तुमसे कुछ बात कहेना चाहती हु जो आगे जाकर तुजे ओर पुनमको ही सब हेन्डल करना हे.. ताकी तुजे सब सम्हालने समजनेमे आसानी रहे.. ओर आज मे कुछ राज तुमसे सैर करना चाहती हु.. चल मे नीचे बेठकर सब्जी काटती हु तु कुछ दुसरा काम करले.. ओर यही नीचे बेठजा.. बात करनेके आसानी रहेगी..

सृती : (सबजी ओर कटर नीचे रखते) अरे तुम अ‍ैसेही बेठती.. मे सब करलेती.. तु क्यु तकलीफ लेती हे.. तु इधरही बैठ मे सब नीपटा लुगी..

मंजुला : (हसते) अरे लानां.. अकेली अकेली बेठकर क्या करुगी.. वहा भीतो कुछ करनेका नही.. दे..मुजे..

कहेते मंजु धीरेसे नीचे बैठ गइ तब सृती अ‍ेक बर्तनमे आटा नीकालते वोभी मंजुके पास नीचे बेठ गइ ओर आटेमे पानी डालकर उसे गुंदने लगी.. तब मंजुभी सब्जीया काटने लगी ओर दोनो बाते करने लगी..

सृती : (हसते) हां.. मंजु अ‍ेक बात बता.. मम्मीने वो विरजी अंकलकी बात आधी क्यु छोडदी..? कहाकी मंजुसे पुछ लेना.. क्या राज छुपा रही हे मम्मी.. ओर विरजी अंकलने मम्मीके साथ कोनसी जबरदस्ती की..?

मंजुला : (हसते) सृती कुछ बाते हम ना जाने तोही बहेतर हे.. हमे ये सब सुनकर दुख होता हे..

सृती : नही मंजु.. अबतो तुम्हारे साथ रेहकर मेभी बहुत कुछ सीख गइ हुं.. मुजे कोइ बुरा नही लगता.. बतानां.. कुछतो मम्मीके साथ बुरा हुआ होगा.. तभीतो आधी बात बताइ.. ओर तुजेतो सब पता चल जाता हे.. तो बताना मुजे अब बुरा नही लगेगा.. अबतो विरजी अंकलभी नही हे..

मंजुला : (सब्जी काटते) सृती.. विरजी अंकल भुमीका आंटीका अपहरण करके उसे जबरदस्तीसे अपने घर लेगये.. ओर वहा उनके साथ बलात्कार किया.. ओर वो इनमे कामयाबभी होगये.. लेकीन तेरे पापाको ये बात पता चल गइ ओर वो मेरे ससुरको लेकर आगये.. ओर भुमीका बुआको उनसे छुडालीया.. ओर दोनोने मीलकर विरजी अंकलको खुब मारा..

फीरतो विरजी अंकलको अपनी गलतीका अहेसास तबही होगया.. ओर बुआके पैरमे गीरके माफी मांगने लगा.. तो सबने दोस्तीकी वजहसे उसे तबतो माफ करदीया.. फीरतो विरजी अंकलने कोलेजही छोडदी.. ओर उनकी सरलाचाचीसे सादी भी होगइ.. लेकीन ये बात भुमीआंटी नही भुल पाइ..

सृती : (मुस्कुराते) हंम.. इतनातो मम्मीने भी कहा.. लेकीन बलात्कारकी बात नही बताइ.. फीर क्या हुआ..?

मंजुला : फीर क्या.. सबनेतो माफ करदीयाथा लेकीन बुआने विरजी अंकलको मनसे माफ नही कीयाथा.. उनके दिलके अ‍ेक कोनेमे विरजी अंकलसे बदला लेनेकी भावना थी.. ओर उसने मेरे ससुरसे अकेलेमे मीलके भाइ बहेनके रीस्तेका वास्ता देकर विरजीसे अ‍ैसा बदला लेनेकी बात कही.. ओर अ‍ैसा बदलाकी मुजेभी बतानेमे सरम आती हे.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) क्या मम्मीने..? अ‍ैसा कोनसा बदला लेना चाहती थी वो..? जो किशन अंकल उनकी बात मान गये.. हें..हें..हें.. फीर किशन अंकलने बदला लीया क्या..? ओर कैसा बदला लीया.. प्लीज.. बताओना.. सुननेमे बडा मजा आ रहा हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) कमीनी तुजेतो मजाही आयेगानां.. वहा विरजी अंकलको तो पताभी नही था.. की उनके साथ क्या होने वाला हे.. हें..हें..हें.. सुन.. लेकीन ये बात तुम कीसीको बताना नही.. अब जो बात तुजे कहे रहीहु इस बातका कीसीको पता नही हे.. तो बी केरफुल..

सृती : (हसते धीरेसे) अरे बताना.. मे कीसीको कुछ नही कहुगी.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) सुन.. जब विरजी अंकलकी सादी होगइ तब वो हमारे खेतोपे मेरे ससुरके साथ थे.. तब मेरे ससुरने विरजी अंकलको चाइमे अ‍ेक जडीबुटी पीलादी.. ओर उनका हथीयार बेकार करदीया.. हें..हें..हें.. मानलोना वो कीसी कामका नही रहा.. मतलब वो बच्चा पैदा करनेमे काबील नही रहे.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) क्या.. अ‍ैसे कोइ बदला लेता हे..? बेचारे..हें.हें..हें.. तो फीर उनकी बीवी बेचारी कहा जायेगी.. बेचारी सरलाचाची.. मंजु.. तो फीर वो भानुभाइ ओर लता कैसे पैदा हुअ‍े..?

मंजुल : (हसते) वो भी बडी दिलचस्प कहानी हे.. तुजे पता हे विरजी अंकलकी सादी जल्दीसे आनन फानन मे क्यु करदी गइ..? तो सुन.. अ‍ेकतो भुमीआंटीके हादसेसे वो बहुतही अपसेट थे.. तो दुसरी ओर सरलाचाचीका भी उनके मायकेमे इस्यु चल रहाथा.. सरलाचाचीने जबसे जवानीकी दहेलीजपे कदम रखा..

तबसे उनका अपने भाइके साथ पांच छे सालसे फीजीकल रीलेशन था.. ओर वो अपने भाइसे प्रेगनेन्ट भी होगइ थी.. तब उनकी माको सब पता चल गया.. ओर उसे सहेरमे लेजाकर उनका बच्चा गीरवाके विरजी अंकलसे जल्दी सादी करदी.. सरलाचाची बहुतही कामी ओरत हे.. उनकी माने उसे उनकी विदाइके वक्तही मायकेमे कभी नही आनेको केहदीया था..

सृती : (हसते) अरे.. तबतो विरजी अंकलके साथ इतने सालो तक कैसे रेह पाइ..? हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) अरे सुनतो सही.. फीर क्या हुआ.. सरलाचाचीको विरजी अंकलसे वो सुख नही मीलपाया.. वो विरजी अंकलसे संतुस्ट ही नही होतीथी.. ओर उपरसे उनकी माने उसे कभी मायकेमे ना आनेकी बात कहेदी.. तो उनके भाइकोभी नही मील सकती थी.. तब उनके सबसे ज्यादा नजदीक उनके पतीके खास दोस्त मेरे ससुरही थे..

ओर दोनोका बार बार मीलना होताथा जीनकी वजहसे वो मेरे ससुरके साथ बडी आसानीसे रीलेशनमे आगइ.. फीरतो अपनी जवानीका मजा मेरे ससुरके साथ फीजीकल होकर लेती रही.. तो मेरे ससुरभी विरजी अंकलको कीसी कामके बहाने सहेर भेज देते ओर पीछेसे विरजीअंकलके घर चले जाते..

सृती : (जोरोसे हसते) अरे किशन अंकलतो बडे रसीये कीस्मके आदमी नीकले.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) अरे सुनतो सही.. फीरतो मेरे ससुर ओर सरलाचाची पुरा दीन फीजीकल होते प्यारका खेल खेलते.. ओर उन्हीसे भानुभाइका जन्म हुआ.. तब विरजी अंकलको कुछ पता नही चला.. वोतो यही समजतेथे की भानुभाइ उनका बेटा हे.. लेकीन कुछ सालोके बाद सरलाचाचीको मेरे ससुरने फीरसे प्रेगनेन्ट करदीया.. तब विरजी अंकलको पता चल गयाथा की वो अब बच्चा पैदा करनेमे सक्षम नही हे.. फीरभी सरला कैसे प्रेगनेन्ट हुइ..? तबसे उनको सरलाचाचीपे सक हुआ ओर उनपे नजर रखने लगे..

ओर अ‍ेक दिन मेरे ससुर ओर सरलाचाचीको संभोग करते देखलीया.. अ‍ेकतो वो सनकी थे.. ओर वो ये बरदास्त नही कर पाये.. उनको तबही दिलका दौरा पड गया.. ओर वो चल बसे.. फीर कुछ महिनोके बाद सरलाचाचीने लताको जन्म दिया.. जबतब मेरे ससुर जींदा रहे तबतक सरलाचाचीके साथ रीलेशनमे रहे.. ओर उन्होने भानुभाइ ओर लता सरलाचाचीकी पुरी जीम्वेवारी उठाइ.. तो ये हे भुमी आंटीके बदलेकी बात.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) किशन अंकल ओर मम्मीने बहुत डेन्जर बदला लीया.. हें..हें..हें.. मम्मी ओर किशन अंकलको अ‍ैसा नही करना चाहीयेथा.. बेचारे विरजी अंकल..

मंजुला : छोडना सृती.. सायद उनकी यही सजाथी.. लेकीन तुमने अ‍ेक बातपे गौर नही कीया..?

सृती : (हसते सवालीया नजरोसे) अब कौनसी बात..? हें..हें..हें..

मंजुला : सृती.. इस नाते भानुभाइ ओर लताभी हमारे भाइ बहेन हुअ‍े.. ओर तुजेतो पता हे लताकीभी सादी लखनसे हो रही हे.. तो इस नाते वो दोनोभी भाइ बहेन हुअ‍े नां..? हें..हें..हें..

सृती : (जोरोसे हसते) अरे हां.. हें..हें..हें.. देखा तुम सभी भाइ बहेनकी आपसमे सादी हो रही हे.. हें..हें..हें..

इधर दोनोही कीचनमे हसी मजाक करते बाते कर रहीथी तब बहारकी ओर भुमीकाआंटी दिखनेमे तो कोइ धार्मीक कीताब बढ रहीथी.. लेकीन मंजुके जातेही उनके दिमागमे विचारोका घमासान युध्ध चल रहाथा.. ओर अपने अतीतकी सब पुरानी बाते याद कर रहीथी.. मंजुसे सब बाते करते उनको पता चल गयाकी मंजु सब बाते जानती हे.. तो वो बातसे थोडी डरी हुइभी थी.. लेकीन मंजुने उनको विस्वास भी दियाथा की वो कुछ बाते कीसीके साथ सैर नही करेगी.. उस बातसे वो थोडी नीस्चीत भी होगइ थी..

तभी सबसे दुर सहेरमे देवायत चंदा धिरेन पुन लता लखन ओर नीलम सब मार्केटमे जाकर खरीदी कर रहेथे.. तब चंदा ओर देवायत दोनोही नये सादीसुधा जोडेकी तराह अ‍ेक दुसरेका हाथ पकडकर चल रहेथे.. ओर हस हसके आपसमे धीरेसे बाते कर रहेथे.. तो पुनमभी ना चाहते हुअ‍े भी धिरेनके साथ चल रहीथी ओर बार बार देवायत ओर चंदाकी ओर देख रही थी.. उनको आज अ‍ैसा लगने लगाथाकी उनकी सास चंदाने उनसे अपना पती छीनलीया हो..

तो दुसरी ओर लखन ओर लताभी अ‍ेक दुसरेका हाथ पकडते साथ चल रहेथे.. ओर मस्तीकी बाते कर रहेथे.. तब लखनकी बाते सुनकर कइ बार लता सर्मसार होकर हसने लगती थी.. तब नीलमभी पुनमके साथ चल रहीथी.. ओर आज सबको जोडीमे देखकर.. ओर अ‍ेक दुसरेका हाथ पकडते चलते देखकर नीलमको पहेली बार प्यारकी परीभासा समजमे आने लगी.. सीर्फ वोही अकेली लडकीथी जो उनका कोइ साथी नही था.. तब नीलम अपने आपको कभी लताकी जगह तो कभी पुनमकी जगह इमेजींग करने लगी..

आज उनको सुबह धिरेनकी कही हुइ सब बाते याद आने लगी.. उनको धिरेन पढालीखा ओर समजदार लडका लगा जो अपनी इजतदार बेंककी नोकरीसे अपने बल बुतेपे खडाथा.. तो धिरेनकी बेंककी नोकरी उसे इजतदार लगी.. ओर धिरेनका बात करनेका अंदाज.. बस उसीके बारेमे सोचते वो धिरेनकी ओर ढलने लगी.. ओर उसे धिरेन अच्छा लगने लगा.. तभी उसने धिरेनके साथ उनकी दोस्ती कबुल करनेका फैसला करलीया.. तब इधर सृतीके घरमे..

सृती : (हसते धीरेसे) मंजु तु कुछ तेरे बारेमे बताने वालीथी.. प्लीज बताओनां.. मे तेरे बारेमे सबकुछ जानना चाहती हु.. तुम तेरे पोतेकी कुछ बात कर रही थी.. ओर अभी कहाकी मे तेरी बहु बनके वापस आउगी..

मंजुला : (हसते) हां सृती.. सुन आज तुजे वो राज बता रही हु.. जो अभीतक कोइ नही जानता.. तुमने वो राजाकी कहानीतो सुनी हेनां..?

सृती : हां मंजु.. में उन कहानीको (ये केसी अनुभुती) कइ बार पढ चुकी हु.. लेकीन उनसे तेरा क्या तालुक..? बाबाभी कुछ उनकी बाते कर रहेथे..

मंजुला : हे..सृती.. सीर्फ मेरा नही हम सबका उस कहानीसे गहेरा तालुकात हे.. उनमे वो देवयानीदेवी हेनां.. वोही मे हु.. जो थोडे समयके लीये.. मे उन राजाके अंसके साथ सादी करके फीरसे उन राजाके साथ जुड जाउगी.. इसीलीये मुजे वापस जाना होगा..

सृती : (थोडा सीरीयस होते) मंजु अ‍ैसे नही.. मुजे जरा खुलकर बता.. ताकी मे उस टाइम तुजे पहेचान सकु..

मंजुला : सृती.. देवु उस राजाकाही अंस हे.. ओर मुजे उस अंसके माध्यमसे हमारे स्वामीको जन्म देना हे.. ओर उसी उदेस्यसे मेरा जन्म हुआ हे ताकी मे देवुसे सादी करके हमारे राजाके जन्म लेनेका रास्ता बना सकु.. ओर मुजे उनको मेरी कोखसे जन्म देना हे.. फीर उसीके साथ सादी करके मे मेरा अपना संसार बसालुंगी..

सृती : (चोंकते) क्या..? तुम तेरे बेटेके साथही सादी करलेगी..? कीतना अजीब हेनां..?

मंजुला : हां सुती.. मे तबभी उनकी माइ थी.. ओर बादमे उनकी बीवी होगइ.. ओर आजभी मे विजयकी मां हु ओर दुसरे जन्ममे उनकी बीवी होजाउगी.. फीर उन्हीके बेटेको जन्म दुगी.. जो हमारे राजा होगा.. जब वो बडा ओर जवान होजायेगा तबमे फीरसे उनकी भी बीवी होजाउगी.. अ‍ेकही जन्ममे मेरे जीवनमे दो दो पती आयेगे.. सृती आज अ‍ेक राजकी बात बता रही हु.. ये बातका जीक्र तुम कीसीके साथ नही करना.. बस.. सब देखती रहेना.. क्या होता हे..

सृती : (मंजुके सामने देखकर) मंजु तु फीकर मत कर ये राज सीर्फ मेरे तकही सीमीत रहेगा.. बस मुजेतो तेरे बारेमे सब जानना हे.. सायद इसीलीये तुजे इस घरतीसे जल्दी बुलालीया होगा..

मंजुला : हां सृती.. तुजे पता हे मेरी जानका खतरा होनेके बावजुद मेने विजयको क्यु जन्म दिया..? ताकी मे वापस इस दुनीयामे आसकु.. सृती आज देवु ओर मौसीके साथ भानुभाइ ओर उनकी मामीकी भी सादी होगइ.. अब हमारी भावु भानुभाइसे काफी दुर हो चुकी हे.. ओर हमारी भावु आगे जाकर हमारे देवुके साथ रीलेशन रखेगी.. ओर उनसे प्रेगनेन्ट होगी.. तब मुजे उनकी कोखसे लडकीके रुपमे पैदा होना हे.. ओर वो लडकी मेरे विजयकी बीवी होजायेगी.. तब उस लडकीकी कोखसे वो राजा पैदा होगे..

ओर उन लडकीका यानी मेरा विजयसे सब रीस्ता खतम होजायेगा.. ओर वो विजयके बच्चेको पाल पोसके बडा करेगी.. ओर अ‍ेक दिन अपने बेटेके साथही रीलेशनमे आकर उनसे सादी करलेगी.. ओर हम दोनो मां बेटा अपना रीस्ता सबसे छुपाके अपना अ‍ेक अलगही संसार चलायेगे.. यानी मे मेरेही बेटेको जन्म देकर उनसे सादी करलेती हु.. फीर उनके बेटेको पैदा करके मे फीरसे मेरे बेटेके साथ सादी करके जुड जाती हु.. ओर ये चक्र चलताही रहेता हे.. मेरा कामही यही हे.. सायद इसीलीये मे सबकी जननी हु..

सृती : (काम छोडके आस्चर्यसे देखते) ओह..माइ.. गोड.. मंजु.. तुजे इतना सब पता हे..? क्या ये सब सच हे..? मुजेतो यकीन ही नही हो रहा.. की तुम दुसरे जन्म मे तेरे ही बेटेसे फीर अपने पोतेसे सादी करके घर बसायेगी.. कीतना अजीब हेनां..? अपनेही पतीको अपनी कोखसे पैदा करना.. फीर बडा होतेही उनके साथ सादी करके फीजीकल होना.. कीतना अजीब हे.. क्या ये सब सच हे..?

मंजुला : (हसते) हां सृती.. यही सच हे.. तब मेरे बेटीकी कइ बीवीया होगी.. ओर तब काम ओर रतीभी अपने चरमपे होगे.. तब कइ लोग होगे जो आपसी रीस्तोमेही सादी करके घर संसार चलायेगे.. खुद मेरा बेटाभी अपनी बहेन ओर बुआसे सादी करलेगा.. ओर अ‍ैसी कइ उनकी सीक्रेट बीवीयाभी होगी.. जो अभी मेरे देवुकीभी हे.. वोभी तो मेरा ही अंस हे.. उनका कामही यही हे.. जीनकोभी बच्चा नही हो रहा.. वो सबको बच्चे देनेकी जीम्वेवारी अच्छी तराह नीभाता हे..

सृती : (आस्चर्यसे) क्या देवुकी भी सीक्रेट वाइफ हे..? तुजे सब पता हे..? तो तुजे दुख नही होता..?

मंजुला : नही सृती.. येभी हमारी दुनीयाका अ‍ेक हिसा हे.. हम पीरलोकमे या अप्सरालोकमे बहारके आदमीसे सादी नही करते.. क्या पता देवुकी जीतनीभी बीवीया हे वोभी परी यातो अप्सराये हो.. तभीतो उनके साथ रीलेशनमे आइ होगी.. फीर पता नही कीसीकी कोखसे कौन परी या अप्सरा जन्म लेकर आजाये.. ओर तुजे पता हे तुमभी अ‍ेक मेरी ही तराह अप्सरा हो.. तब क्या पता.. तुम ओर मेरी पुनमभी मेरे पोतेके साथ रीलेशनमे आजाओ..

सृती : (सर्मसार होकर चोंकते) मंजु.. तुम ये क्या बोल रही हो.. मे ओर पुनमभी..? नही अ‍ैसा नही होसकता..

मंजुला : (हसते) नही सृती.. क्युकी तब उनका आकर्सण ही इतना होगाकी तुम खुद अपने आपको उनके साथ रीलेशनमे आनेसे रोक नही पाओगी.. तब जीतनीभी लडकीया हो या ओरते जीनकोभी वो जानते होगे सबके साथ उनके रीलेशन होगे.. ओर उसी समय ये सब आम बात होगी.. फीर भलेही तब रीस्तेमे हमारी भावु उनकी नानी हो.. वोभी इनके साथ रीलेशनमे होगी..

सृती : (सरमाते हसते मुका मारते) ओह.. गोड.. कमीनी कुछतो सरम कर.. तुम कुछभी बोलती हे.. तब हमारी उमर क्या होगी तुजे पता हे..? बुढी हुगी मे.. बात करती हे.. ओर भावु..? तब उनकी उमर क्या होगी तुजे पता हे..? क्या कोइ पोतेकी उमरके लडकेसेके साथ रीलेशनमे आती हे..? तब हमारी काम शकितया भी खतम हो चुकी होगी.. बात करती हे.. मंजु तुमभीनां.. कुछ.. भी..?

मंजुला : (हसते) सृती.. तुजे अभी मेरी ये सब बातोपे विस्वास नही होरहा हेनां..? तुजे सब मजाक लग रहा हेनां..? इसीलीये मे ये बात कीसीके साथ सेर करना नही चाहती.. लेकीन तुम मेरी सब बाते बरोबर याद रखना.. ये बात सीर्फ तुम ओर पुनमही जानती होगी.. ओर ये सब होकर ही रहेगा.. क्युकी तुम भुल गइहो की हम सब परीया ओर अप्सराये हे..

हमपे ये उमरका ओर काम शक्तिका नीयम लागु नही होता.. तब मेरा पोता कुछभी कर सकेगा.. क्यु उन कहानीमे (ये केसी अनुभुती) उसने देवयानी ओर उनकी दादीको फीरसे जवान नही कीयाथा..? तब दादीकी उमर क्याथी..? उनकातो पीरीयड आना भी बंध हो चुकाथा.. फीरभी उनका पीरीयड फीरसे सुरु करके उनको प्रेगनेन्ट नही कीया..? फीर वोभी तो वापस जवान होगइ थी..

सृती : (थोडा सीरीयस होते) अरे हां.. मंजु.. मे तो सीर्फ मजाकमे केह रही हु.. वो देवयानीभीतो जवानथी.. उन्होनेतो दुनीयाको दीखानेके लीये दुसरा रुप लीया था.. तो तुमभी तो वही हो.. कही अभी अपनी पहेचान हमसेतो नही छीपाती..? हें..हें..हें.. अभी तुमनेही कहाकी मे देवयानी हु.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) सृती मे तेरे कहेनेका मतलब समज गइ.. तुम फीकर मत करो.. मेरे जानेसे पहेले तुजे पुनो चंदामौसी ओर मेरे देवुको मेरी असली पहेचान करवाके जाउगी.. हें..हें..हें..

सृती : (मुस्कराते) लेकीन क्या ये सब सचमे होगा..? आइ मीन.. (धीरेसे सरमाते) तेरा पोता मेरे साथभी..

मंजुला : हां सृती.. जब मेरा पोता तुम्हारी बेटीसे सादी करलेगा तब तुम खुद भी उनके साथ सामनेसे रीलेशनमे आजायेगी.. जब वो जन्म लेगा ओर जवानीके देहलीजपे कदम रखेगा तब हमारा देवु कीसी कामका नही रहेगा.. तब उनका रोल इस दुनीयामे पुरा होजायेगा.. उनकी सारी काम शक्ति उनके पोतेमे आजायेगी. ओर वो देवुकी जगाह ले लेगा.. तब सीर्फ तुम ही नही.. चंदामौसी पुनम.. सबके साथ उनका फीजीकल रीलेशन होगा..

ओर जब उनके पास वो सब शक्तिया आजायेगी तब संभोगके माध्यमसे तुम सबको अपनी खुदकी पहेचान करवायेगा.. ये बात तुम याद रखना.. तब तुजे पता चल जायेगाकी पीछले जन्ममे तुम कौन थी.. ओर तब वो तुम सबमे संभोगके माध्यमसे कामशक्ति वापस जगायेगा.. क्युकी उनका कामही यही हे.. वो स्वयंम कामका अंस होगा.. हमारे राजा.. मेरे स्वामी.. मेरा बेटा.. ओर मेरा पती.. मेरा सबकुछ..

सृती : (मुह फाडके आस्चर्यसे देखते) ओ माइ गोड.. मंजु.. मुजेतो यकीन ही नही हो रहा हे.. की तुम इतना कुछ जानती हो.. ओर मेरा मन केह रहा हे ये आजके जमानेमे ये सब पोसीबल नही हे.. ओर दिल तेरी बाते माननेको विवस हो रहा हे.. की ये सब होकरही रहेगा.. ओर मजेकी बात.. मे.. चंदामौसी ओर पुनम.. तबभी हम सबकी साक्षी होगी.. ओर ये सब अनुभव करेगी.. लेकीन अ‍ेक बात मेरी समजमे नही आइ..

मंजुला : (हसते) कमीनी.. इतना कुछतो जानलीया.. अब ओर क्या रेह गया.. बता कोनसी बात..?

सृती : मंजु उस हिमाचलके राजाका जन्म अ‍ेक खास उदेस्यसे हुआथा.. ओर वोहे.. वो भव्य शीवमंदिर.. तो फीर इस बार सबको जन्म लेनेकी क्या आवस्यक्ता पड गइ..? क्या कोइ खास मक्सदसे जन्म ले रहा हे..?

मंजुला : (हसते) देखा.. सब अपनी कामइच्छा पुर्ती करनेमे बीजी हे.. बस सीर्फ तेरे मनमेही ये खयाल आया.., इसीलीये मे तुजे सब बाते बता रही हु.. सुन.. हम सबका यहा जन्म लेकर आनेका अ‍ेक खास मक्सद हे.. तभीतो हम सब यहा जन्म लेकर आये हे.. बस हमे कुछ दिन इन्तजार करना पडेगा..

फीर वो मक्सदभी सामने आजायेगा.. मुजे बस इतना पता हे अ‍ेक बार हम सब मीलकर वो शीवमंदिरमे जाने वाले हे.. तब हम वहाके उस राजाके परीवारसे मीलेगे.. यानी हमारेही पर पौत्र पौत्रीओसे मुलाकात करेगे.. जो आजभी हमारी परंपरासे जीते आये हे.. वो सब अभीभी अपनीही बहेनसे सादी करके वहा संसार चला रहे हे..

सृती : ओह.. गोड.. मे कीतनी खुसनसीब हु.. की मेभी आप सब लोगोका हीसा हु.. क्या मे सचमे अ‍ेक अप्सरा हु..? मुजेतो अभीभी यकीन नही हो रहा.. दिलतो सोचकरही रोमांचीत हो रहा हे..

मंजुला : हां सृती.. तब मे देवयानी थी.. ओर तब मुजे वहा मेरी बेटीके कारण अ‍ेक श्राप मीलाथा.. तब मेरे राजने मुजे उस श्रापसे मुक्त कीया.. फीर हमने तीन दीन ओर दो रात लगातार बीना नीचे उतरे अ‍ेकही बंध कमरेमे संभोग करते अनुभुतीकी.. ओर मे उस राजाको अनुभुतीमे अप्सरालोकमे लेगइ ओर उनके माध्यमसे वहाकी सभी अप्सराओको संभोगके माध्यमसे प्रेगनेन्ट करवा दीया..

ताकी वहाकी अप्सरालोककी संख्या बढे.. जो वहा बहुतही सीमीत अप्सराये बचीथी.. ओर उनमेसे तुमभी अ‍ेक हो.. जो मेरे राजके साथ संभोग करते उसे हमेसाके लीये उनका साथ पानेकी प्रार्थना करती थी.. ओर आज इसीलीये तुमभी इस धरतीपे उसे मीलन करने आगइ.. वो सबकी सुनते हे.. सबकी मानते हे हम सभी परीया ओर अप्सराओका सन्मान करते हे..

सृती : (मुह फाडके सुनते) क्या मेभी..? मेनेभी अ‍ैसी प्रार्थना की होगी..? तबतो पका मुजे उनसे मीलना होगा.. हें..हें..हें.. मंजु लेकीन पुनमकीतो अभी धिरेनसे सादी होने वाली हे.. तो फीर वो कैसे देवुसे प्यार कर बैठी.. अगर बाबाके कहेने मुताबीक उसने देवुसे सादी करली हे तो फीर अभी धिरेनसे क्यु सादी कर रही हे..? कोइ खास रीजन..?

मंजुला : (हसते) हां सुन.. लेकीन ये बातका जीक्र तुम भुलसेभी दुसरोके सामने नही करना.. खास करके मौसीके सामने.. जबसे पुनमने अपनी जवानीके दहेलीजपे कदम रखा तबसे वो धिरेनको नही.. अपने भाइ देवुसे प्यार करती थी.. उनकी धिरेनसे सादी मेरे कहेनेपे हो रही हे.. सब हमारे स्वामीका नीर्माण हे.. तु सोच जब पुनम अपने भाइसे सादी करके हमारे साथ रहेगी ओर उनके बच्चे पैदा करेगी तब लोग क्या कहेगे..?

इसीलीये पुनमकी देवुसे सादी होनेके बावजुद धिरेनसे सादी करवा रहे हे.. क्युकी धिरेन अल्प आयु वाला हे.. तब पुनम विधवा होकर हमारे पास आजायेगी तब लोगभी उसके बारेमे कुछ नही बोलेगे.. सबको यही लगेगाकी पुनम विधवा होकर वापस आइ हे.. ओर तब पुनम सबसे छुपके अपने पहेले पतीको यानी मेरे देवुके साथ अपना संसार चलायेगी ओर मेरे देवुको प्यार देती रहेगी..

सृती : (धीरेसे) मंजु.. तुजे पता हे.. बाबाने पुनोको कुछ कहा हे.. मुजसे चेक करवानेकी बात कर रहेथे..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां सृती.. सुन.. तु वहा सादीमे आये तब कोइ कीटबीट लेकर आना.. ओर सबसे छुपकर तु अ‍ेक बार पुनोको चेक करलेना.. क्युकी इस बारेमे अभी कीसीको नही पता.. सी इस प्रेगनेन्ट.. वो मेरे देवुसे प्रेगनेन्ट हो चुकी हे.. जो पुनोको बाबाने कहाथा.. वो सब राजकी बात हे बस तु पुनोका खयाल रखना.. मुजे आजही तेरी तराह उसे सब ज्ञात करवाना हे.. ओर वोभी अनुभुतीमे.. तब खुद वो आयेगे जीनके हम सभी अंस हे.. हमारे स्वामी.. काम ओर रती.. आज पुरे गांवमे काम अपने चरमोपे होगा..

सृती : (आस्चर्यसे धीरेसे) मंजु.. क्या वाकइ धिरेनकी आयु अल्प हे..? तुजे सब कैसे पता..? क्या मौसीको इस बारेमे पता हे..?

मंजुला : (जटसे धीरेसे) नही कमीनी.. उनको कुछ नही पता.. बस तु उनसे बात करनेमे खयाल रखना.. सृती ये बात मुजे बाबानेभी कही हे.. ओर उसीने ये रास्ता ढुंढ नीकाला हे.. ओर सुन अ‍ेक दुसरी मजेकी बात.. कुछ सालोके बाद.. हमारा लखनभी.. (आंसुके साथ रुआंसी आवाज होजाती हे)

सृती : (गंभीर होकर चोंकते) क्या.. लखनभैयाभी..? तो फीर लताका क्या होगा..?

मंजुला : (आंसु पोछते) सृती.. हमारी लताभी अ‍ेक परी हे.. तु समज गइनां..? तब मेरा देवु उसे सादी करके सम्हाल लेगा.. ओर उनहीकी बच्ची मेरे पोतेकी खास ओर उनकी सबसे चहीती बीवी होगी.. मेरी.. नेनु.. सुन सीर्फ तुजेही बता रही हु.. वो बच्ची जन्मके साथही अपाहीज होजायेगी.. बस अभी तुजे इतनाही कहेना हे..

सृती : (आस्चर्यसे) मंजु वोही राजाकी बडी बहेन थीनां.. नेनु.. जीसे वो राजा सबसे ज्यादा प्यार करता था.. उन राजाकी कहानीमे उनके दुसरे जन्ममे अपाहीज होनेका जीक्रभी हे.. तो फीर उनकी दुसरी बहेन वो सोनु थी.. वो कौन होगी.. वोही उनकी पहेली बीवी थीनां..? ओर वो कीसकी कोखसे पैदा होगी.. प्लीज मुजे उनके बारेमे बताओनां..

मंजुला : (हसते) कमीनी तु धीरे धीरे करते मुजसे सब बाते उगलवा रही हे.. अब छोड ये सब बाते..

सृती : (हसते) नही मंजु बस ये आखरी बात बतादो फीर मे तुमसे कुछभी नही पुछुगी.. प्लीज.. मे सब याद रखुगी.. ताकी मुजे तुम सबको पहेचाननेमे आसानी रहे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (गंभीर होते) सुन सृती.. भावु जब देवुसे प्रेगनेन्ट होगी तब मे भावुकी कोखसे पैदा हुगी.. तब मेरा विजय मेरी ही छोटी बहेनसे यानी भावु ओर देवुकी दुसरी लडकीसे प्यार करता होगा.. तब मेरी छोटी बहेनके कहेनेपे विजय उनकी बडी बहेनके साथ यानी मेरे साथ धोखेसे विजयसे संभोग करवायेगी.. ओर नतीजा विजय मुजे प्रेगनेन्ट कर देगा..

ओर फीर मेरी छोटी बहेनके बजाय विजयकी सादी मुजसे करदी जायेगी.. ओर मुजे जो पहेली बच्ची होगी वोही हमारी सोनु होगी.. यानी मेरे पोतेकी पहेली बीवी.. तब मेराही बेटा अपनी बडी बहेनसे सादी करलेगा.. तुजे पता हेना.. उस राजाने सोनुको पहेली बीवी होनेका वचन दिया था.. जो आजभी हमारे स्वामी उसे वचनसे बंधे हे.. उनके हर अंसके साथ सोनुही उनकी पहेली बीवी होती हे.. बस इस जन्ममेभी वो रीस्ता कायम रखेगे.. मेरी सोनुही उनकी पहीली बीवी होगी..

सृती : (धीरेसे सरमाकर) मंजु.. अ‍ेक बात कहु.. तुम कहेती हो इनके मुताबीक क्या हमारा देवुभी उनका अंस हेनां..? तो फीर तुमही उनकी पहेली बीवी हो.. ओर तुमतो देवयानी हो.. तो फीर सोनुके वचनका क्या हुआ..?

मंजुला : (थोडा गंभीर होते) नही सृती.. आइ अ‍ेम सोरी.. मे तुजे इस बातका जवाब नही दे पाउगी.. उन दोनो आजभी अपने वचनसे बंधे हे.. हमारी सोनु आजभी मेरे देवुकी पहेली बीवी हे.. बस मे तुजे इस जन्ममे उनकी पहेचान नही करवा सकती.. मे तुजे सीर्फ इतना बता सकती हुकी मे हमारे देवुकी पहेली बीवी नही.. उनकी दुसरी बीवी हु.. बस सीर्फ दुनीया वालोकी नजरमे मे उनकी पहेली बीवी हु..

सृती : (हसते) मंजु.. मे समज गइ.. जरुर तेरी कोइ मजबुरी होगी.. इसीलीये तु उनका नाम नही लेपा रही.. कुछ रीस्ते होते हे.. जो हमे उसे सबके सामने उजागर नही करना चाहीये.. तुजेतो पुरी कहानी पता हे.. तो तुजे उस राजाकी सब बीवीयोके बारेमे पता होगा.. तो उनके बारेमेभी जानती होगी..

मंजुला : (जुठा गुसा करते) हां लेकीन कमीनी मे अभी तुजे कुछभी नही बताउगी.. जीतनी जरुरी बातेथी वो सब तुजे बतादी.. समजी..

सृती : (हसते) चल ठीक हे.. मे सब याद रखुगी.. देखती हु मे तुजे तब पहेचान जाती हुकी नही..

भुमीका : (बहारसे जोरोसे आवाज लगाते) अरे दोनो कबसे क्या बाते कर रही हो.. कुछ खाना बानाभी बनाती होकी सीर्फ बाते ही करती हो..

सृती : (जोरोसे) मम्मी खानाभी बन रहा हे.. ओर बातेभी हो रही हे.. आप फीकर मत कीजीये.. अभी मंजु वहा आती हे..

मंजुला : (खडी होते) सृती मेने सब सब्जी काटली हे.. तु खाना बना.. मे थोडी देर विजयको लेकर आंटीके पास बेठती हु.. देखती हु वो भुखा होगा.. उसे दुध पीलादु..

सृती : (जोरोसे हसते फीर धीरेसे मजाकमे) हां जा देखले.. अच्छेसे दुध पीलाना.. ताकी दुसरे जन्ममे तुजे अच्छेसे ठोक सके.. हें..हें..हें.. चल जा.. मे खाना बना लुगी.. अब सब्जी कुकरपे चडाके सीर्फ रोटी ही तो बनानी हे.. जा देखले फीर मेभी बहार आती हु..

मंजुला : (सरमाते हसते धीरेसे) कमीनी.. सीर्फ मुजेही नही ये तुजेभी ठोकेगा.. समजी.. हें..हें..हें..

कहेते मंजु हाथ धोकर बहार चली गइ ओर सृतीके रुममे जाकर बच्चेको देखने लगी तब बच्चेने पीपी करलीतो मंजुने उनका डायपर चेन्ज करलीया ओर बच्चेको लेकर भुमीका आंटीके पास बेठ गइ ओर अपना ब्लाउस उचा करते विजयको दुध पीलाने लगी.. तब भुमीकाने कीताब बंध करके साइडमे रख दीया.. ओर मंजुके सरमे हाथ घुमाते उसे प्यार देने लगी.. तब मजुभी सरमाकर मुस्करा उठी.. ओर भुमीका आंटीके सामने देखकर हसती रही..

तभी दुसरी ओर मार्केटमे सभी अ‍ेक सारीके स्टोरमे सारीया सीलेक्ट कर रहेथे.. तब धिरेन ओर लखन दुसरे स्टोरपे अपने अपने कपडे ले रहेथे.. तब उनके साथ नीलमभी गइथी.. जो लखन ओर धिरेन उनके साथ मजाक करते बाते कर रहेथे.. तब नीलमभी उन दोनोके साथ हसी कजाक कर रहीथी.. अबतो धिरेन भी नीलमका कुछ खास खयाल रखने लगाथा.. ओर अपने सब कपडे नीलमको दिखा दिखाकर उनकी चोइसका लेने लगा.. इस बातपे नीलमभी खुस हो रहीथी..

नीलमको धिरेनका साथ बहुतही अच्छा लगने लगाथा.. इसी बीच धिरेनने नीलमको आइसक्रिम ओर मंहेगी चोकलेटभी दीलवाइ.. फीर उनकी ओरसे नीलमको अ‍ेक मंहेगी ओर सेक्सी ड्रेसभी दीलवाइ.. जीसे देखकर नीलम खुब सरमाइ.. वो उसे लेनेको मना कर रहीथी उनके बावजुद धिरेनने उसे जबरदस्तीसे दिलवाइ.. जब लखन अपनी खरीदी करनेमे बीजी था तब नीलमके लीये कुछ सींगारका सामानभी लीया..

नीलम : (सरमाकर धीरेसे) जीजु.. मुजे कुछ नही चाहीये.. लता दीदी सब देखलेगी ओर मुजसे कुछ कहेगी तो मे क्या कहुगी..? मे अ‍ैसी ड्रेस नही पहेनती..

धिरेन : (धीरेसे हसते) अरे.. वहा नही.. तु सहेर होस्टेलमे पढने आयेगी तब पहेनना.. वो कुछ नही कहेगी.. कुछ कहेतो मेरा नाम लेलेना.. केह देना मेरे बोयफ्रेन्डने दिलवाइ हे.. हें..हें..हें..

नीलम : (अ‍ेकदम सर्मसार होते) जीजु.. अ‍ेक मारुगी.. प्लीज.. यहा लखन जीजुभी हे.. कही सुनना ले.. मे कहासे आपकी गलफ्रेन्ड होगइ..? हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते धीरेसे) क्यु..? क्या तुमने मेरी दोस्ती कबुल नही की..?

नीलम : (सरमाते हसते) हां.. वोतो की.. लेकीन..

धिरेन : (हसते) देखो नीलम तुम लडकी हो ओर मेरी दोस्त हो तो हो गइनां मेरी गर्लफ्रेन्ड..?

नीलम : (सरमाते हसते धीरेसे) जीजु.. आप बहुत नोटी हो.. बातोमे आपसे कोइ नही जीत सकता.. लेकीन गर्लफ्रेन्ड बोयफ्रेन्डका कीसीको पता चल गयातो..?

धिरेन : (धीरेसे कानमे) अरे कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. तुम मुजे फोन करना तब तुजे मे कुछ बताउगा.. नीलु.. कास तुम मुजे पहेले मीली होती.. मे तुमसेही सादी करलेता.. खैर.. अभी मेरी सालीतो हे.. ओर सालीभीतो आधी घरवाली होती हे..तो तुम मुजे आधाही प्यार देना.. हें..हें..हें..

नीलम : (सर्मसार होकर हहसते) जीजु.. प्लीज.. अ‍ैसी बाते मत करो.. मुजे सरम आ रही हे.. कोइ सुनेगातो क्या सोचेगे.. कुछतो सरम करो अपनी सालीसे अ‍ैसी बाते करते हो.. आप बहुत बदमास हो.. हें..हें..हें..

धिरेन : (धीरेसे कानमें) नीलु.. अब मुजे जीजु कहेना बंध करदे.. हम दोनो दोस्त हे.. मुजे मेरे नामसे बुलानां.. क्या मे तुजे अच्छा नही लगता..

नीलम : (सरमाकर हसते धीरेसे) जीजु.. प्लीज.. अच्छेकी बात नही हे.. कही कोइ सुननांले.. मुजे मार नही खानी.. मे कैसे आपको नामसे बुला सकती हु.. आप मेरे जीजु हे..

धिरेन : (हसते) अरे सबके सामने नाम लेनेको थोडी केह रहा हु.. बस.. जब हम दोनो अकेलेहो.. तब तुम मुजे नासे बुलाओगी बस.. ओर फोनपेभी मुजे नामसे बुलाना.. समजी.. कीसीको कुछ पता नही चलेगा..

नीलम : (सरमाकर हसते) जीजु.. देखना अ‍ेक दिन आप मुजे मरवाओगे.. हें..हें..हें.. आपका नंबर मेरे पास थोडीनां हे..? वोतो पुनम दीदीके पास होगा.. हें..हें..हें..

धिरेन : (धीरेसे कानमे) नीलु.. आइ लव यु.. मुजे तुमसे सचमे प्यार होगया हे.. मे तुजे अपना नंबर देदुगा.. मुजे अकेलेमे फोन करना..

नीलम : (अ‍ेकदम सर्मसार होते) जीजु.. प्लीज.. ये नही हो सकता.. हम दोनो सीर्फ दोस्तही अच्छे हे.. अगर कीसीको पता चल गयातो मेरी तो खैरही नही.. प्लीज. ये प्यारका भुत अपने दिमागसे उतारदो..

धिरेन : (धीरेसे कानमे) नीलु.. तु मुजसे प्यार करती हेतो जरुर मुजे फोन करोगी.. तुजे मेरी कसम..

तभी लखन धिरेनको आवाज लगाकर अपने पास बुलाता हे तब धिरेन ना चाहते हुअ‍ेभी लखनके पास चला गया.. तब नीलमनेभी राहतकी सांसली ओर वो धिरेनके सामने सरारतभरी मुस्कान करते उनके सामने अपनी जीभ नीकालते हसते हुअ‍े धिरेनके साथ लखनके पास चली गइ.. लेकीन आज धिरेनके प्रपोजसे नीलम मनही मन बहुतही खुस होगइ.. आज पहेली बार वो रोमांचीत होने लगी.. ओर उनकी चुतमे हल्कीसी हलचल होने लगी.. तब नीलम खुब सरमाइ..

तो दुसरी ओर चंदा पुनम लता ओर देवायत सारीके सोरुम मे थे.. तब चंदा सब सारीया देवायतको हस हसके दीखा दीखाकर सीलेक्ट कर रहीथी.. तब पुनमको आज चंदासे काफी ज्वेलेसी फील होने लगी.. तो दुसरी ओर लताभी बार बार देवायतके पेन्टके उभारको देखते सरमाते हसती रही.. क्युकी देवायतके पेन्टमे उनका विकराल लंडका उभार साफ दिखाइ दे रहाथा.. तब अ‍ेक दो बार देवायतनेभी नोटीस करलीया.. लेकीन उसने लतापे ज्यादा ध्यान नही दीया.. फीर अ‍ेक घंटेकी मसकसके बाद सबने कपडे खरीद लीये.. ओर दुसरी दुकानपे चले गये....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ९५

तो दुसरी ओर चंदा पुनम लता ओर देवायत सारीके सोरुम मे थे.. तब चंदा सब सारीया देवायतको हस हसके दीखा दीखाकर सीलेक्ट कर रहीथी.. तब पुनमको आज चंदासे काफी ज्वेलेसी फील होने लगी.. तो दुसरी ओर लताभी बार बार देवायतके पेन्टके उभारको देखते सरमाते हसती रही.. क्युकी देवायतके पेन्टमे उनका विकराल लंडका उभार साफ दिखाइ दे रहाथा.. तब अ‍ेक दो बार देवायतनेभी नोटीस करलीया.. लेकीन उसने लतापे ज्यादा ध्यान नही दीया.. फीर अ‍ेक घंटेकी मसकसके बाद सबने कपडे खरीद लीये.. ओर दुसरी दुकानपे चले गये....अब आगे

वहाभी सबने कपडे ओर कुछ अंडर गारमेन्ट्स खरीद लीये.. फीर सभी लोग अ‍ेक ज्वेलेरी सोपमे चले गये वहा चंदाने पुनम ओर लताके लीये कुछ बाकी रेह गइ ज्वेलेरी लेली.. इसी बीच लता ओर लखनभी खुलकर साथ बाते करते रहे.. ओर सबके सामनेही अ‍ेक दुसरेका हाथ पकडके चलते रहे.. धिरेनको अभी तक पुनमने कुछ करने नही दीयाथा.. वो सादीसे पहेलेही पुनमको चोदना चाहता था.. लेकीन पुनम उनसे हर बार दुरीया बनाकर रखती थी..

इसीलीये वो थोडा बोखलाया हुआ था.. जीनकी वजहसे उनकी पुनमसे दुरीया ओर नीलमसे नजदीकीया बढ रहीथी.. तभी धिरेनको नीलमके साथ चलते बातोसे पता चलाकी वो सहेरमे पढनेके लीये पुनमथी वोही होस्टेलमे आरही जहा पुनम ओर लखन थे.. तो ये बात सुनकर धिरेन बहुतही अ‍ेक्साइटेड होने लगा.. क्युकी वोभी सहेरमेही जोब करता था तो नीलमको मीलनेमे बडी आसानी रहेगी.. यही सोचते वो पुनमके साथ साथ नीलमकोभी महेंगी महेंगी गीफ्ट दीलवाके सेट करनेमे लगा हुआथा..

क्युकी वो जान चुकाथाकी नीलम सहेरमे अकेली पढने आ रही हे वो नीलमको बडी आसानीसे सेट कर सकताथा यही सब सोचते वो नीलमपे कुछ ज्याादाही ध्यान देने लगा.. हांलाकी नीलम अभी टीनअ‍ेजर थी.. ओर अभी अभी जवानीकी ओर कदम रख रही थी.. धिरेन पुनम ओर लखन लताको देखकर प्यारकी परीभासा समजने लगीथी.. धिरेनका नीलमकी ओर ढलनेका सीर्फ अ‍ेकही रीजन था..

पुनमने उसे अभी तक सेक्स करने नही दीया.. जो उनसे बहुत उमीद लेकर बैठाथा.. तो दुसरी ओर नीलमकोभी धिरेनका साथ अच्छा लगने लगा.. ओर वो पुनमके साथ रहेके धिरेनसे ज्यादासे ज्यादा नजदीक रहेके उनसे बाते करती रही.. तब बीच बीचमे धिरेन पुनमकी नजर बचाते हल्का मजाक करते नीलमको छुने लगता.. बातो बातोमे कभी नीलमको पीठमे मुका मार देता या उनकी कमरमे चीटकी काट लेता तो कभी नीलमकी गरदन दबोच लेता.. तो नीलमकोभी इस खेलमे बहुत मजा आ रहाथा..

नीलमकोभी धिरेनकी अ‍ैसी मस्तीया अच्छी लगने लगी ओर वो सरमाते मुस्करा देती.. भलेही धिरेनने उनसे प्यारका इजहार करलीयाथा ओर नीलमने कुछ जवाब नही दिया लेकीन नीलम मनही मन धिरेनके प्यारको अ‍ेक्सेप्ट कर चुकीथी.. तभी धिरेनने अ‍ेक कागजकी परचीमे कुछ लीखर सबकी नजर बचाते वो परची नीलमको देदी ओर कानमे धीरेसे घर जाके देखलेना कहेकर हसने लगा..

तो नीलमनेभी गभराते सबकी ओर देखते वो परची जटसे अपने हाथोमे छुपाली.. ओर धेरसे अपनी जेबमे रखली.. ये सब हरकतसे वो बहुतही रोमांचीत होने लगी.. जीनकी वजहसे आज उनकी चुतभी फडफडाते गीली होने लगी.. उनकोतो पताही नही थाकी सब क्यु हो रहा हे.. उनपेभी नइ नइ जवानी चडी हुइथी.. तब उनको धिरेनकी नीयतका पता नही था.. लेकीन इस बातको पुनम बरोबर नोटीस कर रहीथी..

उनकी तेज नजर धिरेनकी सब हरकते नोटीस कर रहीथी.. ओर इस बातका उसे कोइ अ‍ेतराजभी नही था.. उनकोतो सीर्फ अपने भाइ देवायतसे मतलब था.. लेकीन फीरभी धिरेन उनका होने वाला पतीथा.. ओर नीलम अभी इन सब चीजोके लीये छोटी थी.. ओर पुनमने धीरेसे इस बातको लेकर लताको आगाह कर दीया.. पुनमकी बात सुनतेही लताभी चोंक गइ..

लेकीन लखनका साथ होनेकी वजहसे लताने कुछ खास ध्यान नही दीया.. वो नीलमको अकेली मीलकर इस बारेमे उनसे बात करनेकी ठानली.. ओर वोभी कभी नीलम ओर धिरेनकी हरकतोपे नजर रखते ध्यान रखने लगी.. तब धिरेन ओर नीलम अपनीही मस्तीओमे खोये हुअ‍े थे.. तो दुसरी ओर इधर घरपे सृती खाना बना रहीथी तब मंजु ओर भुमीका आंटी सोफेपे बेठकर आपसमे धीरे धीरे बाते कर रहीथी..

भुमीका : (धीरेसे) मंजु बेटा बाय चान्स.. अरे बाय चान्स क्या मानलोना सृतीकी देवुसे सादी होगइ.. तो फीर सृती रहेगी कहा..? मेतो यहा अकेली होजाउगी.. क्या इस बारेमे तुमने कुछ सोचा हे..?

मंजुला : (हसते) बुआ.. आप इसकी चीन्ता तो छोडही दो.. सृती इधरही आपके पासही रहेगी.. बस देवु इधर आता जाता रहेगा.. क्युकी वहाभी उनकी रानीया ओर उनका कारोबार हे.. ओर मे येभी जानती हु सृती अ‍ेक डोक्टर हे ओर उनकी क्लीनीक यहा हे.. तो उनकाभी यहा रहेना जरुरी हे.. तो आप इस बातकी बीलकुल फीकर मत करना.. सृती इधरही आपके पासही रहेगी.. ओर वेसे देवुकी अ‍ेक रानी इधरभी तो होनी चाहीये.. हें..हें..हें..

भुमीका : (खुस होते हसते) बेटी.. तबतो ठीक हे.. वो मुजे मीलनेभी तो नही आता.. अब इनकी बीवीसे मीलनेके बहाने यहा आता जाता रहेगा.. लेकीन वो इतना कहा बीजी रहेता हे..? सृतीसे कीतनी बार कहेलवाया वो आयाही नही.. आज कल बहुत बीजी हो गया हे..

मंजुला : (हसते) बुआ.. बस ये चारोकी सादी होजाये.. फीर हम सब फ्रि होजायेगे.. ओर उपरसे मेरे पीता बीमार हे.. ओर वो भानुभाइके मामाभी गुजर गये.. ओर अभी गांवमेभी कोइ सरपंच नही था.. तो गांवकाभी देखना होता हे.. अभी अभी उनके अ‍ेक दोस्तको सरपंच बनाया हे.. अब वो वहासे फ्रि होगये हे.. लेकीन आपको उनसे कुछ कामथा क्या..? मुजे केह देयी.. आप कहीयेना मे देवुसे बात करलुगी..

भुमीका : (हसते) अरे कुछ खास काम नही था.. बस कीतने दिन होगेये उनकी सकल नही देखी थी.. ओर उनको सृतीकी क्लीनीकका भी पुछना था.. वो आदमी पीछले कइ महीनोसे कीराया लेने ही नही आया..

मंजुला : (हसते) बुआ.. उन कीरायेकी फीकर छोडदो वो देवु सब स्महाल लेगा.. बस आपतो मजेही करो..

भुमीका : (हसते) वोतो ठीक हे बेटी.. लेकीन पुरा बिल्डींग बनाकर हमेही कीरायेपे देदीया.. ओर अभी तक इनके मालीकको भी नही देखा.. बस उनका आदमी कीराया लेकर चला जाता हे.. ओर देखो.. बील्डींगका नामभी मेराही रखा हे.. भुमी.. तभी मे इनके मालीकको मीलना चाहती हु.. क्यु उनके घरमेभी कोइ भुमी नामका हे.. जो ये नाम रखा हे..

मंजुला : बुआ.. हो सकता हे ये सीर्फ संजोगही हो.. कोइ भुमी नामका होगा उनके घरमे हमे क्या लेना देना..

भुमीका : चल ठीक हे.. ये बता तुमने पुनमकी सादी कब रखी हे..? क्या वहा नीमुभी आरही हेनां..? तो मे ओर सृतीभी आजायेगे.. वही नीमुसे ओर राजीवकोभी मीलकर हाल चाल पुछ लुंगी.. कीतने साल होगये.. मेनेतो राजीवको देखाही नही.. ओर तेरी मम्मीभीतो कीतने सालोके बाद मीली..

मंजुला : बुआ.. वो सादीका मुहुर्त बाबाने नीकाला हे.. बस अब सादीमे सीर्फ अ‍ेक हप्ता रेह गया हे.. तो आप ओर सृती पहेलेही आजाना.. कीतने दिन होगये होगे.. सृतीनेभी कोइ छुटी नही रखी होगी.. तो सब साथ मीलके खुब अ‍ेन्जोय करेगे.. आप सृतीको केह देना वरना वोतो मेरी बात मानेगी ही नही.. आपको कमसे कम वहा तीन दिनतो रहेनाही पडेगा.. मे अभीसे केह देती हु.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) अरे तु फीकर मत कर.. उनकोतो मे कान खीचकर लेआउगी.. ओर आयेगी क्यु नही..? अब वोभीतो उनका ससुराल हे.. तो देखभी लेगी.. बस मेभी कोलेजमे थी तब सबके साथ दो तीन बार गइ हु.. क्या अबभी हवेली अ‍ैसीही हेकी कुछ चेन्ज होगया हे..?

मंजुला : अरे बुआ.. अबतो बहुत कुछ बदल गया हे.. बहारसे सबकुछ अ‍ैसाही हे बस अंदरसे अ‍ेक बडे बंगलोकी तराह करदीया हे.. ओर सब सुवीधाये हे.. आप अ‍ेक बार आकर देखीयेतो सही.. आपतो जानती हे मेरे ससुने यहा अ‍ेक बंगलो खरीदके रखा हे ओर अबतो देवुभी यहा सहेरमे दुसरा अ‍ेक बडा बंगला खरीदनेको केह रहाथा.. सायद लखनभैया ओर लताको वो यहा रहेने भेजदे.. देखते हे अब..

भुमीका : बेटी.. तु कहेती हे वहा देवुका इतना बडा कारोबार हे तो क्या वो अकेला स्महाल पाता हे..? क्या लखन वहा नही जाता..? तो फीर वो यहा कैसे आयेगा..?

मंजुला : (तभी सृतीभी काम नीपटाके आकर दोनोके साथ बैठ जाती हे) बुआ.. वहा उनके साथ भानुभाइ ओर लखनभी हे.. अब देखते हे आगे क्या होता हे.. वो अ‍ेक बार केह रहेथेकी लखनको सहेरमे भेज देना हे.. (सृतीकी ओर) सृती खाना बन गया..?

सृती : हां सीर्फ रोटीया ही तो बनानी थी.. बाकीकातो सब होगया हे ओर सब्जी पक रही हे.. तु थोडी देर बैठ मम्मीसे बात कर.. तबतक मे पासकी मीठाइकी दुकानसे कुछ लाती हु..

मंजुला : (हसते) अरे नही.. तु रहेने दे.. हम यही सादा खाना खा लेगे.. कुछ नही लाना.. बैठ इधर..

भुमीका : (हसते) अरे अ‍ैसे कैसे नही लाना..? अबतो देवु मेरा जमाइ होने वाला हे.. जा सृती कुछ लेकर आ.. कीतने दिनोके बाद सबलोग साथ आये हे.. मुजेतो अ‍ैसाही लगताहे आप सबलोग मेरी सृतीका रीस्ता लेकर आये हो.. हें..हें..हें.. जा जा.. कुछ बडीयासी मीठाइ लेकरआ.. हें..हें..हें..

कहातो सृती सर्मसार होते हसती हुइ खडी होगइ.. ओर कीचनमे चली गइ.. फीर अ‍ेक डीबा लेकर अपने स्कुटरपे चली गइ.. तबतक भुमीका ओर सुती बाते करते रहे तब थोडी देरके बाद सृतीभी बासुंदी लेकर वापस आगइ.. तो पीछे भी सभी लोग खरीदी करके वापस आगये.. ओर सब अ‍ेक अ‍ेक करते फ्रेस होकर होलमे आने लगे.. ओर सोफेपे बेठने लगे.. तब चंदा ओर पुनम सृतीकी हेल्प करने कीचनमे चली गइ..

चंदा अभीभी अ‍ेक दुल्हने लीबासमे चज रही थी.. उनके हाथोकी कलाइमे चुडीयोकी खनखनाहट ओर पैरमे जांजरकी जनकार सुनकर सबको अपनी ओर ध्यान खीच रहीथी.. ओर देवायततो उनकी आवाज सुनकर आज चंदाके पीछे पागलही हो गयाथा पुरी रास्ते उसने चंदाका हाथ नही छोडा.. ओर चंदाभी सादीके बाद देवायतसे बाते करनेमे काफी खुल गइथी.. जो पहेले सीर्फ देवायतसे अकेली होतीथी, लेकीन अब सबके सामने बीन्दास देवायतके साथ अ‍ेक पत्नी जैसा व्यवहार कर रहीथी.. जीसे देखकर कभी कभी धिरेन ओर पुनमभी सरमा जाते थे..

तब लता लखन धिरेन नीलम अभीभी आपसमे मस्ती मजाक करते सोफेमे बेठे थे.. तभी देवायतभी कार पार्क करके भुमीकाके पास आकर बेठ गया.. तो अब भुमीकाका नजरीया देवुको देखते ही बदल गया.. ओर वो प्यारभरी नजरोसे देवायतको अ‍ेक दामादके रुपमे देखने लगी.. ओर प्यारसे उनके सरमे हाथ घुमाते उसे अजीब नीगाहोसे देखते प्यार देने लगी.. तब देवायतको भी थोडा अजीब लगा..

आज सबके सामने भुमीका उसे प्यार दे रही हे.. ओर वो उनके सामने प्रस्नार्थ भरी नजरोसे देखकर मुस्कराने लगा.. तभी अचानक भुमीकाने देवायतको आंखोके इसारेसे कुछ बात करली.. तब देवायत सब कुछ समज गया.. दोनोने आंखोके इसारोसे क्या बाते करली कीसीको कुछ नही पता चला.. फीरभी उनकोतो पताही नहीथा की उनके जातेही पीछेसे उनके ओर सृतीके बारेमे क्या बाते हुइ हे.. सीर्फ देवायतही नही.. बाकीके सभी लोग इस बातसे अन्जानथे की उनका ओर सृतीका रीस्ता आपसमे तैय होगया हे..

देवायत : कहो आंटी.. बातो बातोमे हम सब चले गयेतो पुछना ही भुल गयाथा.. क्या काम था मुजसे..?

भुमीका : (हसते) तो क्या काम होगा तभी तु आयेगा..? अ‍ैसेही अपनी आंटीको मीलने नही आ सकता..? ओर आंटीके बच्चे ये आंटी आंटी क्या लगा रखा हे.. मे बुआ हु तेरी.. किशन मेरा भाइ था.. समजे..? (धीरेसे) की तुजे दुसरे तरीकेसे समजाना पडेगा..

देवायत : (हसते) सोरी बुआ.. समज गया.. मे आता जाता तो रहेता हु.. लेकीन आपतो जानती हे मे अभी कुछ काममे फसा हुआथा.. अब आजाउगा.. ओर वेसेभी अबतो मेरी बुआका घर हे मे कभीभी बिन्दास्त आजा सकता हु.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) हां ये हुइना बात.. देवु बेटा.. वो तेरा बील्डर दोस्तका आदमी पीछले कइ महीनोसे कीराया लेने ही नही आया.. जो मेने उनका कीराया सम्हालके रखा हे.. अब तु आज आयाहे तो लेकर जाना.. ओर वो मीलेतो उसे दे देना.. हमे इतनी बडी बील्डींग बनाकर देदी.. तो हमाराभी फर्ज बनता हे की हम उसे टाइमपे कीराया देदे..

देवायत : (हसते) छोडीये बुआ उसे.. जब उनको जरुरत पडेगी तब वो लेजायेगा.. तबतक आप रखीये.. हें..हें..हें..

तभी चंदा सब सारीया कपडे ओर ज्वेलेरी लेकर आगइ.. फीर मंजु ओर भुमीकाको दीखाने लगी.. तो दुसरी ओर पुनम लता नीलम सब खाना कीचनसे बहार लाने लगी.. तभी दो महेंगी सारीया नीकालके चंदाने भुमीका ओर सृतीके लीये देदी जो चंदा उनके लीये लाइ थी.. तो भुमीका मना करने लगी.. तब मंजुने जबरदस्तीसे उसे देदीया.. फीर सभी अ‍ेक साथ भारतीय बेठकमे खाना खाने बेठ गये..

सभी बाते करते ओर अ‍ेक दुसरोकी मस्तीया करते खाना खाते रहे.. तब सृती बार बार सरमाती हुइ देवायतको चोर नजरोसे देखती रही.. ओर मंजुके सामने देखते हसती रही.. तो लखन लताभी साथमे बैठकर खाना खाते अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया कर रहेथे.. तो दुसरी ओर धिरेनभी पुनमके साथ बेठकर खाना खा रहाथा तब नीलमभी धिरेनके साथ दुसरी साइड बैठ गइथी.. ओर धिरेनकी ओर देखकर सरमाते मुस्कराती रही..

तभी सबकी नजर बचाते धिरेन नीलमकी जांघोपे हाथ रखकर उनको छु लेता हे.. तब नीलम बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर गभराते सबकी ओर देखने लगी.. जब कीसीका ध्यान उनकी ओर नही था.. तब वो सरमाकर मुस्कराने लगती.. ओर धिरनका हाथ हटानेकी कोसीस करने लगी.. उनको धिरेनका अ‍ैसे छुपकेसे छुना बहुतही अच्छा लगने लगा.. फीरतो वोभी सामनेसे धिरेनको छुनेका पुरा मौका देने लगी..

ओर सबने बाते करते भोजन फीनीस कीया.. फीर सब सोफेपे बेठ गये तब सृती लता चंदा पुनम सबने मीलकर सब काम नीपटा लीया.. ओर सबके साथ आकर बेठ गइ.. तब मंजुने सभी सारीओमेसे अ‍ेक महंगी सारी नीकालकर सृतीके हातोमे देदी तो सृती सरमाते सारी लेनेको मना करने लगी.. तो भुमीकाने हसते हुअ‍े उनको सारी लेनेको हां केहदीया तब मंजुने उसे धीरेसे कानमे सगुनकी सारी हे.. कहा तो सृतीने सरमाते हसते हुअ‍े सारीको लेलीया.. तब चंदा पुनम लता सब आस्चर्यसे दोनोही ओर देखते रहे..

फीर थोडी देर सब साथमे बैठकर बाते करके रहे.. इसी बीच धिरेन ओर नीलम अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया करते रहे..र तब चार आंखे उन दोनोकी सभी हरकतोपे नजर जमाये देख रहीथी.. वो थी पुनम ओर लता.. फीर सब नीकलने लगे.. तो सृती नीरास होने लगी.. तब मंजु सब समज गइ ओर उसने सृतीको हग करलीया.. ओर जल्द अपने घर आनेको केह दीया.. तब सृतीके चहेरेपे स्माइल आगइ.. ओर सब भुमीकाके पैर छुकर नीकलने लगे..

देवायतभी भुमीकाके पैर छुनेके लीये जुका तब भुमीकाने फौरन उसे कंधेसे पकडकर खडा करदीया ओर कातील स्माइल करते देवायतको गले लगा लीया.. तब देवायतने सरारतसे भुमीकाको जरा जोरोसे बाहोमे भीज लीया तो भुमीका धीरेसे आउच.. करते मुस्कराने लगी.. ओर देवायतसे अलग होकर हसते हुअ‍े उनके कंधेपे मुका जडदीया तब उसे देखकर सृतीभी सरमाते हसने लगी..

फीर उसनेभी सरमाते हसते हुअ‍े देवायतको हाथ हीलाकर बाय कहा.. आज देवायतको वो अपना जीजाजी नही अपना होनेवाला पतीके रुपमे देख रहीथी.. आज पहेली बार देवायतके जानेसे वो नीरास लग रहीथी.. ओर ये बात भुमीकाभी नोटीस कर रहीथी.. ओर सभी कारमे बेठकर अपने गांवकी ओर नीकल पडे.. तब आज मंजुने चंदाको आगे देवायतके साथ बीठा दीया.. तो चंदा खुब सरमाइ..

तब बीच रास्तेमे सब मस्तीया करते जा रहेथे.. आज चंदा देवायतकी बगल वाली सीटमे बैठी हुइथी.. ओर बार बार देवायतकी ओर देखते सरमाते हस रहीथी.. तो देवायतभी उनकी ओर देखते कुछ कामुक इसारा कर देताथा.. तब चंदा खुुब सर्मसार होकर हसने लगती थी.. तो लखन ओर लता अ‍ैक साथ बेठे थे तो सामनेकी सीटमे आज धिरेन ओर नीलम अ‍ेक साथ लखन लताके सामने बेठे थे..

ओर रास्तेमे अंधेरेका फायदा उठाते अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया करने लगे.. अंधेरीकी वजहसे कीसीको कुछभी दीखाइ नही देताथा.. ओर आज धिरेन उसी बातका पुरा फायदा उठाना चाहता था.. तब पुमन ओर मंजु विजयको लेकर बीचकी सीटमे बेठीथी.. ओर कार अंधेरेमे सडकपे दोड रहीथी.. तब मौका देखतेही लखन ओर लता अ‍ेक दुसरेके साथ छेडखानी करने लगे.. ओर लखनने अ‍ेक हाथ लताके गलेमे डाल दीया..

ओर लताको अपनी ओर खीचकर पासमे सटालीया.. तब लता खुब सरमाइ ओर हसती रही.. तभी उनको अपने बुब्सपे लखनका दुसरा हाथ महेसुस हुआ ओर वो सरसे पांव तक हील गइ.. ओर मुह घुमाते लखनके कंधेपे सर रख दीया.. उनकी चुत हरकतमे आगइ उनके दोनो होठ फडफडाने लगे.. पीछे कीसी कारकी रोसनी पडतेही नीलमकी नजर उन दोनोकी हरकतोपे चली गइ.. जीसे देखकर नीलम सममाते हसती रही..

तभी नीलमको अपने पेरपे कीसीका पैर महेसुस हुआ जो उनके पैरको सहेला रहाथा.. तब वो देखते समज गइ की ये धिरेन जीजुकी सरारत हे.. ओर वो सर्मसार होते अपने पैर दुर करने लगी.. ओर सबकी नजर बचाते वो इसारोसे धिरेनको हसते हुअ‍े मना करने लगी.. जब नीलमने हसते हुअ‍े सबकी नजर बचाते धिरेनका हाथ दबाकर इसारोसे मना कीया तो धिरेन समज गयाकी अब आगे बढनेका रास्ता क्लीयर हे..

ओर उसने धीरेसे नीलमकी जांगोपे अपना हाथ रख दीया.. ओर धीरे धीरे सहेलाने लगा.. तब नीलम अ‍ेकदम सर्मसार होने लगी.. उनको कुछ समजमे नही आ रहाथा की वो क्या करे.. उनकी जींदगीमे आज पहेली बारथा जो कीसी अंधेरेमे कोइ लडका उनको इस तराह छेड रहाथा.. धिरेनकी ये हरकत उनको बहुतही रोमांचीत करने लगी.. ओर वो सबसे छुपकेसे धिरेनका हाथ पकड लेती हे.. ओर सरमाते मुस्कराते हुअ‍े अपनी जागसे धिरेनका हाथ हटानेकी नाकाम कोसीस करने लगी..

नीलम : (धीरेसे हसते) जीजु प्लीज.. रहेने दीजीयेनां यहा नही.. कोइ देख लेगा.. आप बहुत सरारती हे..

धिरेन : (जांग सहेलाते धीरेसे उनके कानमे) कोइ नही देखेगा.. यहा बहुत अंधेरा हे.. नीलु तुम मुजे बहुत अच्छी लगती हो.. तुम वाकइ बहुतही सुंदर हो.. आइ लव यु.. मेने तुजे चीठीमे मेरा फोन नंबर दीया हे मुजे कल अकेलेमे फोन करना..

नीलम : (हसते धीरेसे कानमे) जीजु सरम करो.. अगर पुनमदीदीको पता चल गयातो आपको मार डालेगी.. हें..हें..हें.. में आपकी साली हु.. अपनी सालीपे ही लाइन मार रहे हो.. कीसीको पता चल गया तो..?

धिरेन : (धीरेसे कानमें) अरे कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. नीलु.. अभी यहा नही तु मुजे कल फोन करना मे घरपे अकेला ही हु.. तुजे सबकुछ बताउगा.. ओर वैसे सालीभी तो आधी घरवाली होती हे.. हें..हें..हें..

नीलम : (हसते धीरेसे कानमें) भुल जाओ जीजु मे कोइ फोन बोन करने वाली नही हु.. मुजे मार नही खानी.. हें..हें..हें.. मे आपकी साली हु घरवाली नही.. पुनमदीदीको कहेना वो आपकी घरवाली हे.. वो आपको फोन करेगी.. हें..हें..हें..

धिरेन : (धीरेसे कानमे) प्लीज नीलु.. बस अ‍ेब बार मुजे फोन करना.. फीर मे तुजे कुछ बताउगा.. अगर तुमने मुजे फोन नही कीयातो तुजे मेरी कसम.. बस तुम अ‍ेक बार मेरी बात सुनलेना.. फीर खुद डीसाइड करना में तुजेही पुरी घरवाली बनाना चाहता हुं..

नीलम : (जुठा गुसा करते धीरेसे) जीजु.. मुजे नही बनना पुरी घरवाली.. कुछतो सरम करो.. अभी आपकी सादीभी नही हुइ ओर आप अ‍ैसी बाते कर रहे हो.. ओर आपने कसम क्यु दी..? मे कोइ फोन बोन नही करुगी.. पुनमदीदीको देखा हे..? वो क्या सोचेगी..? आप अपनी हरकतोसे बाज आओ.. वरना आपको में खुब पीटुगी.. हें..हें..हें..

धिरेन : (धीरेसे कानमे) ठीक हे.. अगर तु मुजे चाहती होगी तो मुजे जरुर फोन करोगी.. वरना मे समज जाउगा.. तु भी.. सबकी तराह.. जा मुजे तुमसे बात नही करनी.. मुजे बत बुलाना.. तुम सब लडकीया अ‍ेक जैसीही हो..

नीलम : (हसते धीरेसे कानमें) अरे आपतो नाराज होगये.. हें..हें..हें.. कोइ बात नही मे फोन करुगी.. लेकीन मेरे पास फोन नही हे.. मे लतादीदी या मेरी मम्मीके फोनसे फोन करुगी.. बस..? अब खुस..?





धिरेन : (उनके गलेमे हाथ डालकर उसे अपनी ओर खीचते साथमे सटाकर) हां अब खुस.. ये हुइना बात.. नीलु.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. क्या तुम मुजे आइ लव यु नही कहेगी..?

नीलम : (धीरेसे कानमे) जीजु.. प्लीज.. छोडीये मुजे.. मुजे बहुत सरम आ रही हे.. यहा नही.. सब बैठे हे.. हम अकेलेमे फोनपे बात करेगेनां.. अगर लतादीदीने देखलीया तो मेरी खैर नही छोडीये प्लीज..

दोनो अपनी मस्तीमे बीजी थे तब उनको पताही नही थाकी सामने बेठे लखन ओर लता अंधेरेका फायदा उठाते क्या क्या कर रहेथे.. दोनोही सबको भुलके अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमते अ‍ेक दुसरेके गुप्त पार्टके साथ खेल रहेथे.. ओर खेलते खेलते गरम हो गयेथे.. तब लखन लताकी चुतमे उंगली डालके हीला रहाथा तो लताभी देवायतके पेन्टके उभारको बार बार देखते कबसे कामातुर होगइ थी..





ओर वो लखनके पेन्टके अंदर हाथ डालकर लखनका लंड अपनी मुठीमे पकड लेती हे.. ओर होले होले सहेलाने लगी.. दोनोही वासनाकी आगमे जलने लगे.. अगर दोनो अभी अकेले होतेतो लता पका इस वक्त लखनका लंड अपनी चुतमे लेकर उनसे चुदवाने लगती.. वो लखनका लंड कइ बार अपनी चुतमे ले चुकीथी.. ओर इसीलीये आज वो बीन्दास अ‍ेब बीवीकी हेसीयतसे लखनके साथ प्यार कर रही थी..

वो देवायतका लंड कइ बार उनकी मां सरलाकी चुदाइ करते वक्त देख चुकीथी.. ओर अपने रुमसे अक्सर अपने भाइको अपनी भाभी भावनाको चोदते हुअ‍े दखती रहेती थी.. जो लखनके ओर भानुके लंडको देवायतके लंडसे कंपैर करते उसे देवायतका लंड काफी बडा लग रहाथा.. लेकीन उसने बडी मुस्कीलसे अपने आपको कंट्रोल कीया था.. जबसे उनकी लखनके साथ सगाइ हुइ.. तबसे वो सीर्फ लखनके ही सपने देख रही थी..

ओर वो देवायतके लंडको इमेजींग करते लखनके लंडको अपनी मुठीमे पकडकर हीला रहीथी.. तो लखनभी लताकी चुतमे उंगली डालकर उसे अंदर बहार कर रहाथा.. ओर अ‍ेक हाथसे लताके बुब्सके साथ खेल रहाथा.. दोनोही कामातुर होते सबकुछ भुलकर अ‍ेक दुसरेके साथ प्यारका खेल खेल रहेथे.. तभी धिरेनकी नजर लखन ओर लताकी ओर चली गइ तब रातके अंधेरेमे हल्की रासनीमे लखन ओर लताकी हरकत देखकर वोभी गरम होने लगा.. ओर उसने तबही कुछ सोच लीया..

ओर वो नीलमको कानमे उसे लखन लताकी हरकतको देखनेके लीये कहेता हे.. तब नीलमका ध्यानभी लता लखनकी ओर गया.. ओर वो दोनोकी हरकत देखकर समरसे पानी पानी होगइ.. फीरा धिरेनसे दुसरी ओर मुह घुमाते मुस्कराने लगी.. नीलम लखन लताकी हरकत देखकर उतेजीत होने लगी.. तभी उनके छोटे संतरे जैसे बुब्सपे धिरेनका हाथ महेसुस हुआ जो उनको दबाते मसल रहाथा.. तब नीलमको बडा जटका लगा.. ओर वो सरसे पांवतक कांपने लगी..

वो जटसे आजु बाजु नजर घुकाते देखते गभरा गइ.. फीर नीलम अ‍ेकदम सर्मसार होगइ ओर वो समज गइकी ये धिरेनकी करतुत हे.. ओर वो गभराकर धिरेनके हाथको पकडते उसे हटाने लगी.. ओर धिरेनकी ओर गुसेसे देखकर बडी आंख करते उसे इसारोसे मना करने लगी.. तब अचानक धिरेनने उनके गलेमे हाथ डालकर नीलमके चहेरेको अपने मुहकी ओर खीचलीया ओर अपने चहेरेकी ओर जुका लीया..





नीलम कुछ समज पाती इनसे पहेलेही अचानकही धिरेन नीलमके होठोपे होठ रखते चुमने लगता हे.. ओर दुसरे हाथोसे नीलमके बुब्स दबाते उसे मसलने लगता हे.. तो नीलमभी अपना सब होंस खोबेठी ओर धिरेनका साथ देने लगी.. तभी उनको अचानक याद आयाकी सामने लखन लताभी बैठे हे.. ओर वो डर गइ.. निलम धिरेनकी ओरसे हुअ‍े अचानक इस हमलेसे गभरा गइ.. अ‍ेकदम सर्मसार होकर जटसे धिरेनसे दुर हट गइ.. उनको कुछ समजमे नही आयाकी वो क्या करे..

लेकीन धिरेन उनको अपनी ओर खीचकर बार बार छेडता रहा.. तब नीलमभी आज पहेली बार काफी गरम होगइ.. धिरेन कभी उनके होंठ चुमलेता तो कभी नीलमके गलेको चुम लेता.. तो कभी उनके छोटे संतरे जैसे बुब्सको दबाकर सहेलाने लगता तो कभी उननकी जांगोको सहेलाता.. ओर हदतो तब होगइ धिरेनने अ‍ेक दो बार निलमका हाथ पकडके उनके पेन्टके उपरसेही लंडपे रख देताथा.. तब नीलम गभराते अपना हाथ वापस खीचलेती थी.. ओर लखनने इस छेडखानीके बीच दो बार नीलमकी चुतको भी दबोच लीया..

तब नीलम सरसे पांव तक हील गइ.. वो धिरेनकी इस हरकतकी वजहसे बहुतही सरमाइ.. फीर वोभी कामातुर होगइ.. ओर धिरेनकी इस हरकतका विरोध करना सेस मात्र रेह गया.. अब इस खेलमे नीलमको धीरे धीरे मजा आने लगा.. ओर वो गरम होने लगी.. आज पहेली बार उनकी चुतमे हलचल तेज होगइ.. ओर वो कामातुर होने लगी.. उनकी चुतसे आज पानीका रीसाव होने लगा ओर चुत गीली होगइ.. आज पहेली बार कोइ लडका उनको इस तरीकेसे छेड रहाथा..

तब इधर सामनेकी सीटमे लखन ओर लताभी सबकुछ भुलकर कामातुर होकर अ‍ेक दुसरेके साथ प्यार कर रहेथे.. तभी कुछ ही क्षणमे लता ओर लखन दोनोने अपना अपना पानी छोड दीया.. दोनोही जड गये तब लताका हाथ लखके वीर्यसे भीग गया.. तब वो खुब सरमाइ.. तभी लखनने अपना रुमाल नीकालके उसे दीया.. तब वो अपना हाथ पोछते खुब सरमाइ ओर मुस्कराते रुमाल अपनी चुतपे रखकर पेन्टीको सही करते अपने कपडे सही करने लगी..

कपडे सही करते उनको होस आयाकी यहा सभी लोग साथमे हे ओर सामने धिरेन ओर नीलम बैठे हे.. ओर वो थोडा गभराते अंधेरेमे नीलमकी ओर देखनेकी कोसीस करने लगी की कही नीलमनेतो उसे देखतो नही लीया.. तब वो चोंक गइ.. क्युकी अंधेरेमेभी हल्की रोसनीमे धिरेन नीलमके गलेमे हाथ डालके उसे अपने साथ सटाकर उनके साथ छेडखानी कर रहाथा.. छेडखानी करते धिरेन नीलमके होंठ चुमलेता फीर उनका मुह नीलमके कानके पास लेजाता ओर उनको कानमे कुछ हसते हुअ‍े केह रहाथा.. तब नीलम हसते हुअ‍े बुरी तराह सरमा जाती..

फीर नीलम हसते हुअ‍े उसे मना करते उनसे छुटनेकी कोसीस कर रहीथी.. वो नीलम ओर धिरेनकी सब हरकते देखने लगी.. अभीभी धिरेन कभी नीलमके बुब्स सहेलाता तो कभी नीलमके होंठ चुमलेता तब नीलमभी हस हसके धिरेनका साथ दे रहीथी.. तो लताको नीलमकी ओर धिरेनकी हरकते देखकर धिरेनपे ओर नीलमपे बहुत गुसा आने लगा.. क्युकी नीलम अभी इन सब चीजोके लीये बहुतही छोटी थी.. उसने लखनको कहा..

लता : (धीरेसे कानमे) लखन सामने देखो.. मुजे धिरेनकी नीयत कुछ अच्छी नही लगती.. नीलु अभी छोटी बच्ची हे.. धिरेन कीतना कमीना हे.. ठरकी कहीका.. इस छोटी बच्चीकोही फसालीया.. उनकी हरकत देखो.. मुजे उनसे बात करनी पडेगी..

लखन : (धिरेन नीलमकी ओर देअते धीरेसे कानमे) अरे हां.. येतो बडा कमीना लगता हे.. तुम नीलुको समजा देना उनसे दुर रहे.. अब इसेभी तो हम कुछ केह नही सकते.. पता नही भाइने इनके साथ क्या सोचकर पुनोकी सगाइ करदी.. कमीना.. बडाही ठरकी लगता हे..

लखनको आज धिरेनपे गुसा आने लगा.. लेकीन उनकी वजह ये नहीथीकी धिरेन उनकी साली नीलमको सेट करके उनसे प्यार कर रहाथा.. उनको बस इस बातपे धिरेनपे गुसा आरहाथा की उनसे पहेले धिरेनने उनकी सालीपे हाथ मार लीयाथा.. ओर इस बारेमे नीलमको खुद बात करते उसे ब्लेकमेइल करते कैसे उनके नीचे लीटाये इस बारेमे सोचने लगा.. ओर आज वो पहेली बार नीलमको वासनाभरी नजरोसे देखने लगा.. ओर उनका लंड फीरसे जटके मारने लगा.. तभी..

लता : (धीरेसे कानमे) लखन.. तुम अभी इस बारेमे कीसीको कुछ मत कहेना.. मे नीलुको समजा दुगी..

लखन : (धीरेसे) ठीक हे.. लता तुम आजही नीलुसे इस बारेमे बात करलेना.. ओर सबके सोनेके बाद मेरे रुममे उपर आजाना.. हम दोनो खुब मजे करेगे..

लता : (धीरेसे) पागल होगये हो क्या..? अभी अभीतो कीया हे.. आज नीलु भी मेरे साथ होगी.. अब अ‍ेक हप्तेकीतो बात हे.. अ‍ेक हप्ते तक सबर नही कर सकते..? ना बाबा ना.. मे नही आउगी.. कीसीको पता चल गया तो..? हमारी बहुत फजीहत होजायेगी.. बाबु थोडा सबर करलो.. फीरतो मे तुम्हारी ही हु.. जब चाहो जैसे चाहो मुजसे प्यार करलेना..

लखन : (हसते) अरे कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. आजतो भाइकी सुहागरात होगी.. तो दोनो भाभीयातो वही होगी.. ओर पुनोदीदीभी अपने कमरेमे सोयेगी.. सायद आज मंजु भाभीभी उनके साथ सोयेगी.. तो तुजे ओर नीलमकोभी ये लोग नीचे ही सुलायेगे.. जब नीलम सोजाये तब उपर मेरे कमरेमे आजाना.. वरना मे वहा आजाउगा..

लता : (धीरेसे कानमे) लखन पागल मत बनो.. प्लीज.. अभी तो कीया हे.., क्या तुम अ‍ेक हप्ता इन्तजार नही कर सकते..? बाबा कोइ देख लेगातो मेरी फजीहत होजायेगी.. मुजेतो बहुत डर लग रहा हे.. नीलुभीतो साथ होगी.. कमीनी इनको साथ ना लाइ होती तो अच्छा था.. कमसे कम इस कमीनेसेतो बच जाती.. मुजे नीलुको उनसे दुर करना होगा.. वरना हमारी इजत मीटीमे मीला देगी ये लडकी..

लखन : (हसते धीरेसे) चल पहेले देखते हे.. कोन कहा सोता हे.. हम बादमे देखते हे.. लेकीन तुम आजही नीलुको समजा देना.. वरना मुजसे कहेना हम दोनो नीलुको समजायेगे..

लता : (हसते गाल चुमते धीरेसे) अरे मेरा बाबु.. मान गया.. हें..हें..हें.. जानु मे भी आपकी तराह तडप रही हु.. लेकीन सादी तक इन्तजार करलो.. इन्तजारके बाद मीलनका कुछ ओर ही मजा हे.. हें..हें..हें.. जानु आप धिरेनके साथ बैठो मे नीलमको इधर बुला लेती हु वरना वो कमीना उसे खराब करदेगा.. ओर पहेले मेही नीलुसे बात करलुगी.. वरना दखती हु.. हम दोनो उसे समजायेगे.. अभी ठहेरो.. ओर तभी..

लता : नीलु जरा इधर आना.. मुजे तुमसे कुछ बात करनी हे..

नीलम : (अ‍ेकदम गभराते) जी.. जी दीदी अभी आइ..

तब नीलम गभराकर जटसे धिरेनसे दुर होगइ.. फीर धीरेसे अपने कपडे सही करते लताके पास जाकर बैठने लगी तो लखनभी खडा होते धिरेनके साथ बैठ गया.. तब धिरेन अपने आपको सही करते काफी नीरास होगया.. ओर वो फीकी मुस्कानके साथ लखनकी ओर देखते हसने लगा.. तो लखन भी धिरेनकी ओर देखते कातील स्माइल करने लगा....

कन्टीन्यु
 
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ९६

तब नीलम गभराकर जटसे धिरेनसे दुर होगइ.. फीर धीरेसे अपने कपडे सही करते लताके पास जाकर बैठने लगी तो लखनभी खडा होते धिरेनके साथ बैठ गया.. तब धिरेन अपने आपको सही करते काफी नीरास होगया.. ओर वो फीकी मुस्कानके साथ लखनकी ओर देखते हसने लगा.. तो लखन भी धिरेनकी ओर देखते कातील स्माइल करने लगा....अब आगे

तभी आगेकी ओर चंदाभी आज देवायतके साथ मस्ती करनेके मुडमे थी.. वो बार बार देवायतकी ओर देखते कामुक इसारा करते देवायतको छेड रहीथी.. कभी देवायतकी जागोको सहेलाती तो कभी उनके सामने देखकर आंख मार देती ओर हसने लगती.. तब देवायतभी उनकी ये सब हरकतोसे बहुत गरम हो गया था.. ओर चंदा यही तो चाहतीथी की देवायत आज बहुतही कामुक होकर सुहागरातमे उनकी जमकर चोदाइ करले..

जबसे सादी हुइ ओर दोनो मार्केटमे खरीदी करने गये.. तबसे चंदा बीनदास्त देवायतके साथ पत्नी जैसा व्यवहार करने लगीथी.. अब उनको देवायतसे बात करनेमे कीसीकी सरम नही रही.. वो देवायतके साथ हस हसके बाते कर रहीथी.. जब दोनो चलते तबभी वो देवायतका हाथ पकडकर उनके सटकर चलती थी.. ओर पत्नी होनेका हक जताते वो देवायतसे हसी मजाक भी करती रही.. जैसे वो अपने बेटे धिरेनको जता रही हो की देखो अब मे उनकी बीवी होगइ हु.. अब उसे धिरेनकाभी डर नही था..

इसी व्यवहारको देखते धिरेनभी आज देवायतसे काफी जलन महेसुस कर रहाथा.. जो उनकी मां जैसा व्यावहार देवायतकी बहेन पुनम उनके साथ नही कर रहीथी.. जबसे पुनमको पहेली बार देखा तबसेही वो पुनमके पीछे पागल था.. ओर उनको चोदनेकी फीराकमे था.. वो समजता था की पुनम सहेरमे पढी लीखी हे इसीलीये सादीसे पहेले उसे सेक्स करने देगी.. लेकीन पुनमने उसे कीस से ज्यादा आगे बढने नही दीया..

क्युकी उनको क्या पताकी उनकी हमसफर पुनम अपने भाइ देवायतकी अमानत होगइ हे.. ओर देवायतके साथ सादी करके सुहागरात मानाकर उनके साथ कइ राते रंगीन करचुकी हे.. ओर नतीजेके फल स्वरुप उनका बच्चाभी अपने पेटमे पाल रही हे.. ओर पुनमका मक्सदभी तो अपने भाइके बच्चेको पैदा करना था.. जबसे जवानीके दहेलीजपे कदम रखा तबसेही पुनम अपने भाइको मनसे पतीके रुपमे अपना चुकी थी..

पुनमभी आज अपनी सासके देवायतके साथ व्यवहारसे बहुतही जलने लगी थी.. तब बीचमे मंजु अपने उरोजको बार नीकालकर विजयको दुध पीला रहीथी तो पुनम मंजुके उरोज देखते उनके सामने देखकर मुस्करा रही थी.. तो मंजुभी पुनमकी मनोदसा भलीभांती जान चुकीथी.. ओर वो पुनमके सामने देखकर नैन नचाते मुस्कराने लगी.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके नजदीक मुह लाते धीरेसे बाते करने लगी..

पुनम : (धीरेसे) भाभी.. मुजे आपसे कुछ बात करनी हे.. आज मुजे कुछ अजीबसा लग रहा हे.. मेने सृती दीदीको कहा तो बोलीकी मे वहा आउगी तब तुजे चेक कर लुगी.. उसने कहाहे अभी मंजुके पास जो टेबलेट हे उसे ले लेना.. क्या आपके पास कोइ टेबलेट हे..? मुजे घर जातेही देना..

मंजुला : (मुस्कुराते) पुनो तु घर चल.. आज मे तेरे साथ सोउगी.. तब लेकर आउगी तु खा लेना.. क्या बैचेनी लगती हेनां..? ओर कोइ बोलेतो भी अच्छा नही लगता.. क्या अ‍ैसा कुछ होता हे..?

पुनम : (धीरेसे) हां भाभी.. बस अ‍ैसाही लगता हे.. जबसे बाबाको मीलकर आये तबसे कही चेइन ही नही मीलता.. ओर उपरसे वो धिरेन.. अब आपसे मे क्या कहु.. वोभी मेरे पीछे पडा हे.. आप समज गइनां..?

मंजुला : (हसते धीरेसे) क्यु..? अभीसे हींमत हार गइ..? जो चीजसे तु भाग रहीहे वो चीजसे तुजे अ‍ेक दीनतो फेस करनाही पडेगा.. पुनो तुजेतो आगे बहुत कुछ देखना हे.. आज मे तुजे सबकुछ बता दुगी.. जो मे जानती हु.. तु जानती हे वोभी ओर तु जो नही जानती वोभी.. ताकी तुजे बार बार अ‍ैसी सीचुअ‍ेशन देखके तकलीफ ना हो.. तुजेतो आगे जाके बहुत कुछ देखना हे ओर सम्हालना हे.. तब तुजे ओर सृतीकोही सब देखना पडेगा..

पुनम : (धीरेसे) भाभी क्या आपको पता हे.. मे क्या कहेना चाहती हु..? आपतो सब जानती हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते धीरेसे कानमे)) पुनो.. देख अब तु चीन्ता मत कर.. तु जो चाहतीथी वो सबतो होगया हे.. तेरे भाइका बच्चा तेरे पेटमे पल रहा हे.. तो अब धिरेनके साथ तुजे सेक्स करनेमे क्या प्रोबलेम..? ओर अबतो वैसेभी ये सब सादीके बादही होने वाला हे.. अब टाइमही कीतना बचा हे..?

पुनम : (अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे) भाभी.. वो सबतो ठीक हे.. लेकीन मे कुछ ओरही बात केह रही हु.. मुजे अब मेरी चीन्ता नही हे.. आपभी मीररसे पीछे देखो.. वहा सब क्या चल रहा हे..

मंजुला : (हसते धीरेसे) हां पुनो.. तु धिरेन ओर नीलमके बारेमे जानकर चींता करती हेनां..? तुम मुजसे उनके बारेमे बात करना चाहती हेनां..? तो सुन.. अभीसे दोनोके बीच प्यारका बीज बो चुका हे.. फीरभी तुजे उनसे सादी करनी हे.. ताकी तु तेरे भाइके साथ आरामसे रेह सके..

बाकी वो नीलमकी जींदगीसे खीलवाड करके ही रहेगा.. तब तुजे ही सब सम्हालना हे.. पता नही इस मासुमकी जींदगीसे क्यु खेल रहा हे.. सायद सब तेरी वजहसे.. क्युकी तुमने उसे अभी तक सेक्स करने नही दियानां.. तो वो सेक्सके लीये पागल होगया हे..

पुनम : (सरर्मसार होते धीरेसे) हां भाभी.. आपने सही कहा.. इनमेभी सायद वोही रीजन लगता हे.. वो मेरे साथ सेक्स करना चाहता हे.. लेकीन मेने सादी तक उसे मना करदीया हे.. सायद इसीलीये वो अभी नीलमके पीछे पडे हे.. ओर आप जानती हे.. मे अभी कोइ रीस्क लेना नही चाहती थी.. क्युकी रीजन आपको पता हे..

मंजुला : (धीरेसे पुनमको समजाते) पुनो.. अब तुजे इन सब चीजोकी आदत डालनी पडेगी.. आगे अ‍ैसा बहुत कुछ होने वाला हे.. तुजे अ‍ैसे बहुत कुछ रीस्ते दिखनेको मीलेगे.. जो तुम सोचभी नही सकती.. तु कीस कीसका ध्यान रखेगी..? देखती नही हमारा लखनभी कुछ कम नही हे..

अब आगे जाकरतो वोभी नीलमके साथ रीलेशनमे होगा.. पुनो.. सब रीस्ते नातेही खतम होजायेगे.. जो जीसकी मरजीमे आये उनके साथ सेक्स करेगे.. तो तुम कीसका ध्यान रखोगी..? ओर यही सबतो होने ही वाला हे.. बस हमे हमारी जींदगी हमारे तरीकेसे जीनी हे.. मे तुजे आज अ‍ेक बहुत बडी जीम्वेवारी सोंपने वाली हु.. तु बस उसे मत भुलना..

पुनम : (धीरेसे हसते) भाभी.. आप सबके बारेमे जानती हे.. फीरभी सांत होकर हसती रहेती हे जैसे आपको कुछ पताही नही हो.. हें..हें..हें.. मेभी आपहीकी तराह स्ट्रंोग बननेकी कोसीस करुगी.. क्या आप मुजे अभी इस बारेमे कुछ बता सकती हो..?

मंजुला : (मुस्कुराते) नही पुनो.. हम इस बारेमे रातमे आरामसे बात करेगे.. आज हमारे पास अच्छा मौका हे.. आज हम दोनोके पास वक्त ही वक्त हे.. मुजे तुमसे बहुत कुछ बताना हे.. तु सीर्फ यही मत मानना की जो लडकीकी सादी जीनके साथ होगी वो उनकीही बीवी बनकर रहेगी.. हम कुछभी नही केह सकते की कीसका कीसीसे कब रीलेशन चेन्ज होजाये.. ओर आज गांवमेभी अ‍ैसा बहुत कुछ होगा.. बस मे अभी सीर्फ इतनाही बता सकती हु..

पुनम : (आस्चर्यसे) हमारे गांवमें..? भाभी आपतो सब जानती हो बताओना क्या होने वाला हे..

मंजुला : पुनो.. बस.. अभी सीर्फ इतना जानले.. आज गांवमे सब रीस्ते उजागर होने वाले हे.. तुजे पताही नही हे की हमारे गांवमे अ‍ैसे कीतने नाजायज रीस्ते पल रहे हे.. बस आज रात तक इन्तजार करले.. ओर कुछ नही.. गांवमे सीर्फ तुमही नहीहो.. जो अपने भाइके साथ रीलेशनमे हो..

हमारे गांवमेभी कइ अ‍ैसे भाइ बहेन हे.. जो सबसे छुपकेसे अपनी जींदगी अ‍ेक पती पत्नीकी तराह जी रहे हे.. आज हमारे गांवमे हमारे स्वामी स्वयंम अपनी मौजुदीका अहेसास करवायेगे.. जीनकी वजहसे पुरे गांवमे वासनाका तांडव मचेगा.. तब कुछही दिनोके बाद अ‍ेक अ‍ेक करके बहुत सारे रीस्ते उजागर होने लगेगे..

पुनम : (आस्चर्यसे धीरेसे) भाभी.. क्या बात कर रही हो..? हमारे गांवमे भी..? ओर वोभी भाइ बहेनके बीच नाजायज रीस्ते..?

मंजुला : (धीरेसे हसते कानमें) हां पुनो.. तुम गांवमे अ‍ैसे कइ नाजायज रीस्तेको देखोगी.. सीर्फ भाइ बहेनके बीच नही.. अ‍ैसे कइ रीस्ते पनप रहे हे जीनके बारेमे हम सोचभी नही सकते.. बस कुछ दिनो इन्तजार करले.. वो सब रीस्ते खुदबखुद हमारे सामने आजायेगे..

दोनो धीमी आवाजमे बाते कर रहीथी.. तब पीछे धिरेन नीलमके लताके पास जानेसे थोडा गुसे ओर नीरास होगया था.. वो बार बार चोर नजरसे नीलमकी ओर देखता रहा.. तो नीलमभी धीरेनकी ओर पुरी ढल चुकीथी.. तो वो भी नीरास होते बार बार धिरेनकी ओर देखने लगी.. तभी अचानक धिरेनका गांव आगया.. तो धिरेनने कारको रोकनेके लीये कहा.. तब सबने उसे साथमे चलनेको कहा..

लेकीन कल धिरेनको जोबमे जानाथा.. ओर उपरसे नीलमके साथ छेडखानी करते बहुत गरम हो गयाथा.. तो वो जल्दसे जल्द अपने आपको हल्का करना चाहताथा.. इसीलीये सबको मना करते उतर गया.. ओर अ‍ेक नजर नीलमपे डालके बीना कुछ बोलेही कारसे उतर गया.. ओर आगे जाकर कारका दरवाजा खोलकर अपनी मम्मीके पैर छुने लगा.. तब लता ओर नीलम उसे देखती ही रही.. तभी..

चंदा : (आंखमे आंसुके साथ आशीर्वाद देते) जीते रहो बेटा.. बस अपना खयाल रखना.. ओर टाइमपे खाते पीते रहेना.. वरना तुम अपनी सादी तक उधरही आजा.. वहीसे जोबपे चले जाना..

धिरेन : नही मोम.. आप मेरी फीकर मत करो.. आप अपना खयाल रखना.. जीलो अपनी जींदगी.. ओर अ‍ैसेही खुस रहो.. आपकी खुसीमे ही मेरी खुसी हे.. ओर बातभी कीतने दिनोकी हे.. सीर्फ तीन चार दिनही तो नीकालने हे.. फीर मेभी उधर आजाउगा..

ओर उसने पुनमकी ओर अ‍ेक नजर डाली.. फीर सबको बाय बोलकर बीना सबके सामने देखे ही अपने घरकी ओर चलने गया.. तो सबको धिरेनके इस बेरुखी व्यवहारसे थोडा अजीब लगा.. लेकीन इस बातको पुनम ओर नीलम अच्छी तराह जान गइथी की धिरेन सीर्फ उनकी वजहसेही नाराज हे..

ओर वो मनही मन दुखी होने लगी.. तभी नीलमने मनमे धिरेनसे फोनपे बात करनेकी ठानली.. ओर यही उनकी सबसे बडी भुल साबीत होगी.. आज अ‍ेक बार फीर धिरेनका के.अ‍ेल.पी.डी. होगया था.. तब वो नीरास होकर घरमे चला गया..

ओर सीधा बाथरुममे घुसकर नीलमके साथ की हुइ छेडखानीको याद करते उनको इमेजींग करते अपना लंड नीकालकर जोरोसे हीलाने लगा.. तब कुछ ही देरमे अ‍ेक तेज सफेद धारकी पीचकारी छुटकर सामनेकी दीवालपे चीपकने लगी.. ओर धिरेन सांत मनसे वही लंड पकडकर खडा रहेते नीलमके बारेमे सोचने लगा.. उनको यकीन थाकी कल जरुर नीलमका फोन आयेगा.. क्युकी नीलमभी उनको प्यार करने लगी थी.. तब दुसरी ओर धिरेनके जातेही देवायतने कार अपने गांवकी ओर जाने दी..

तब नीलम बहुतही नीरास होगइ.. ओर धिरेनकी नाराजगी देखकर मनही मन अपने आपको कोसने लगी.. तब २० २५ मीनीटकी ड्राइवके बाद सब हेलीपे पहोंच गये.. सभी लोग कारसे सामान लेकर उतरने लगे.. तब पुनमने उतरकर बच्चेको अपने हाथमे लेलीया तब मंजुभी उतर गइ.. ओर सब घरमे आगये.. तभी दया ओर रजीयाभी सबको पानी देने लगी.. ओर सभी होलमे आकर सोफेपे बेठ गये..

तब रजया लखनको पानी देते उनके सामने देखकर कातीलाना मुस्कराने लगी.. तो लखननेभी हसते हुअ‍े पानी लेलीया.. तब उनको दो आंखे देख रहीथी.. जो उनपे कबसे नजर रख रहीथी.. वो थी पुनम.. आज पुनमकोभी लखन ओर धिरेनमे कुछ ज्यादा फर्क नजर नही लगा.. वो अब अ‍ैसे रीस्तोको बहुतही हल्केमे लेना चाहती थी.. आज उनकी मंजुके साथ इस बारेमे बहुत कुछ बाते हो चुकीथी.. तभी..

दया : (मंजुको) दीदी क्या सब खाना खाकर आये हे..? यहा आपने जोभी कहाथा सब कंपलीट हे..

मंजुला : (हसते) हां दया.. हम सभी खाकर आये हे क्या तुम दोनोने खा लीया..?

दया : (हसते) हां दीदी जब आपका फोन आयातो आपनेही कहाथाकी हम सब खाना खाकर आयेगे.. तो मेने ओर रजीयाने भी खा लीया हे.. ओर आपके कहेनेके मुताबीक सब कंपलीट हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) ठीक हे दया.. अगर सब काम होगया हेतो अब तुम दोनोभी जाकर सो जाओ.. हम सभी आज थक गये हे.. तो हमभी सब अभी सोजायेगे.. तु सब दरवाजा अच्छेसे बंध करलेना.. ओर हां.. सायद हम सब कल देरसे उठेंगे.. तो तुम दोनोभी अपना सब काम बादमे आरामसे नीपटालेना..

दया : (हसते जाते हुअ‍े) जी दीदी..

तब दयाके पीछे रजीयाभी लखनकी ओर सरमाते देखते जाने लगी.. तब लखनने सबकी नजर बचाते रजीयाको नामे गरदन हीलाके लताकी ओर इसारा करदीया.. तो रजीयाभी सरमाते हसती हुइ चली गइ.. लखनभी खडा होकर उपर सोनेके लीये जाने लगा.. तभी वो लताकी ओर देखकर कुछ इसारा करता हे तब लता सरमके मारे कुछ बोल नही पाइ.. ओर आंखोके इसारोसे उसने मना करदीया.. तो लखन चला गया तब नीलमने लताके इसारोको नोटीस करलीया.. ओर वो भी सरमाकर मनही मन हसने लगी..

तभी मंजुने पुनमको कुछ इसारा कीया तो पुनमभी खडी होगइ.. ओर चंदाको इसारा करते अपने साथ चलनेको कहा.. तब चंदा सरमके मारे पानीपानी होने लगी ओर वो सरमाते पुनमके पीछे जाने लगी.. तब पुनम चंदाको देवायतके रुममे लेगइ.. तो अंदर जातेही दोनो खुसीके मारे सोक्ट होगइ.. ओर चंदा खुब सरमाने लगी.. क्युकी दया ओर रजीयाने मंजुके फोन आतेही पुरा बेड फुलोसे सजा दीया था.. तभी..

पुनम : (सरारतसे हसते आज पहेली बार) भाभी.. आइअ‍े.. अब मे आपको भाभीही कहुगी.. आजसे आप मेरी बाकायदा भाभी हो.. मम्मी सीर्फ हमारे उस घरमे आओगी तबही कहुगी.. आइअ‍े.. में आपको थोडासा मेकअप करके ठीक करदेती हु.. आप आज भाइको खुस कर देना हें..हें..हें..

चंदा : (सरमसे पानीपानी होते) पुनो.. तुमभीनां.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. तुम वहाभी मुजे भाभी कहके बुला सकती हो.. ओर आज मुजे तेरे मुहसे भाभी सुनकर बहुत अच्छा लगा.. अब तुम मुजे भाभी कहेकर ही बुलाना.. मुजे तेरी सास बनकर नही तेरी भाभी होकर रहेना हे..





तब पुनम उनके गले लग गइ तब चंदाने जोरोसे पुनमको अपनी बाहोमे भीच लीया ओर पुनमके गालको चुमते उनका सरभी चुमलीया तब पुनम सरमाकर हसती रही.. तभी पुनम चंदाको बाथरुममे लेगइ वहा चंदाको फ्रेस करवाया फीर बहार आकर सीसेके सामने लेगइ ओर चंदाका शींगार करने लगी.. तब चंदा बहुतही सरमाइ ओर मेकअप होतेही चंदा दुल्हनकी तराह दिखने लगी.. पुनम चंदाको बेडकी ओर लेगइ.. फीर चंदाको बेडके बीच घुंघट नीकालके अच्छेसे बीठा दीया तब चंदा खुब सरमाइ.. ओर सरमके मारे पुनमसे नजरे चुराने लगी.. तब..

पुनम : भाभी.. आप बैठो यहा दयाने सब कंपलीट करके रखा हे मे इस दुबको गरम करके लाती हु..

चंदा : (सरमाते धीरेसे) पुनो वो.. जरा मंजुको इधर बुलादोनां..

पुनम : (दोनो ग्लास उठाते) नही भाभी.. आज मंजु भाभी मेरे साथही सोयेगी.. आज सीर्फ भाइ ओर आप दोनोकोही इधर सोना हे.. भाभी आज आपकी सुहागरात हे.. आप दोनो खुब मजे करना.. हम बगल वाले रुममे ही सोइ हे.. (हसते) देखतेहे आज आप कीतना चीलाती हे.. हें..हें..हें.. बस अब आपभी मुजे अ‍ेक भतीजा या भतीजी दे दीजीये.. हें..हें..हें..

चंदा : (अ‍ेकदम सर्मसार होते हसते) पुनोदीदी.. प्लीज.. मुजे बहुत सरम आ रही हे..

पुनम : (हसते) अरे वाह.. अपनी बहुको दीदी.. हें..हें..हें.. अब ननंदसे क्या सरमाना.. ओर सरमाओगी तो मेरे भाइको प्यार कैसे करोगी.. हें..हें..हें.. आप बैठो मे अभी आइ..

कहेते पुनम चली गइ तब चंदा अ‍ेकदम सर्मसार होगइ ओर मुस्कराने लगी.. आज उनकी बहु.. उनकी नंनद होकर उनसे मस्तीया करके गइथी.. ओर चीलानेकी बात सुनकर उनको देवायतके साथ की हुइ हर चुदाइ याद आने लगी.. तब उनकी चुत हरकतमे आने लगी ओर फडफडाते पानी छोडने लगी.. वो चाहतीथी की देवायत आज उनको जी भरके चोदले.. क्युकी अबतक वो देवायतसे जीतनी बार चुदवातीथी उनके मनमे अ‍ेक डरसा लगा रहेता था.. की कही कीसीको दोनोके रीस्तोके बारेमे पता ना चल जाये..

ओर आज वो बाकायदा देवायतकी पत्नी हो गइथी.. ओर आज वो देवायतसे बीना डरके खुलकर चुदवाने वाली थी.. यही सब सोचते वो घुंघटमे खुब सरमाने लगी.. आज वो पुरा दिन देवायतके साथ मस्तीया कर रहीथी ओर आखीर वो पलभी आगया.. जीस पलके लीये वो पुरे दिन इन्तजार करते मचल रही थी.. ओर वो पल था देवायतका लंड जटसे अपनी चुतमे डलवानेका.. तभी कुछ ही देरमे पुनम दुधका ग्लास रखके जाते धीरेसे चंदाको कहेती गइ..

पुनम : भाभी आप रेडी होकर बैठो मे भैयाको अंदर भेजती हु.. बेस्ट ओफ लक.. हें..हें..हें..

कहके पुनम बहार चली गइ.. तब चंदाके दिलकी धडकर बढने लगी.. आज वो दुसरी बार अपनी सुहागरात मना रही थी.. जब पहेली बार अपने पहेले पतीसे सुहागरात मनाइ तब उनको कुछ पताही नही थाकी सुहागरातमे क्या होता हे.. ओर आज वो इस मामलेमे काफी अनुभवी होगइ थी.. ओर बहार पुनम देवायतकी ओर मुस्कुराते मंजुके पास बेठ गइ.. तब मंजु लता ओर नीलमको कुछ केह रही थी.. तब पुनम उनके पास बेठे देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखते कुछ इसारा करने लगी.. तब मंजुने कहा..

मंजुला : लता.. तुम ओर नीलम आज यही नीचे पुनोके बगल वाले रुममे सोजाओ.. जाओ.. सुबह तेरे जेठजी तुम दोनोको अपने गांव छोड जायेगे.. ओर देवु आपभी अब सो जाओ.. कल इन दोनोको आपकोही छोडने जाना हे.. ओर भानुभाइसे सब बातभी कर लेना.. वो लोग दो तीन दिन पहेलेही यहा आजाये.. फीर वहीसे आप मम्मी पापाके पास चले जाना.. ओर हो सकेतो उन दोनोकोभी कलही इधर लेके आना..

तभी लता ओर नीलम खडी होकर पुनमके बगल वाले रुममे चली जाती हे.. तभी नीलमका दिल जोरोसे धडकने लगता हे.. उनको डर थाकी कही धिरेनके साथ मस्तीया करते लतादीदीने उसे दखतो नही लीया..? ओर नीलमके अंदर आतेही लताने दरवाजा खाली बंध करलीया ओर नीलमके सामने दैखे बगैरही वो बाथरुममे धुस गइ.. तबभी नीलम डर रहीथी ओर वो लताके बहार नीकलनेका इन्तजार करने लगी.. तभी बहार..

देवायत : (खडा होते) मंजु तुभी आ रही हेनां.. चलना..

मंजुला : (हसते धीरेसे) नही देवु.. आज आप जाओ.. आज आप ओर दीदीकी सुहागरात हे.. मे पुनोके साथ ही सो जाती हु.. मुजे इनसे बुछ जरुरी बाते भी करनी हे.. प्लीज.. (पुनमकी ओर देखते) पुनो क्या तुजे साथमे जाना हे..? हें..हें..हें.. जा.. तो तेरी ओर तेरी सास दोनोकी सुहागरात साथमे होजायेगी.. हें..हें..हें..

पुनम : (अ‍ेकदम सर्मसार होते पीठमे मुका मारते मुस्कुराते) क्या भाभी आपभी.. मुजे नही जाना.. हें..हें..हें.. मेरा कामतो हो गया हे.. बस अब मेरी नइ भाभीकी बारी हे.. हें..हें..हें..

कहातो मंजु ओर देवायत दोनोही हसने लगे ओर देवायत ने पुनमको बाजुसे पकडकर अपने आपसे चीपका लीया तब पुनम सरमसे पानी पानी होगइ.. ओर सरमाते हसते हुअ‍े मंजुकी पीठमे अ‍ेक ओर मुका जड दीया.. ओर वो देवायतकी ओर कातील स्माइल करते हसती रही.. तब देवायत पुनमकी ओर देखते अ‍ेक आंख मार देता हे ओर हसने लगता हे तब मंजु ओर पुनमभी हसते हुअ‍े खडी होगइ.. तभी देवायतने मंजुको अपनी बाहोमे भरते भीचलीया तो मंजुने पुनमकोभी हाथ खीचकर अपने साथ सामील करलीया..

मंजु ओर पुनम दोनोही देवायतकी बाहोमे खडी रही.. तब देवायतने दोनोके होंठ बारी बारी चुमलीया तो दोनोही खुब सरमाइ ओर देवायत अपने रुमकी ओर जाने लगा.. तब पुनम बच्चेको सोफेसे उठाने लगी.. ओर मंजु पुनमभी अपने रुममे चली गइ.. ओर दरवाजा बंध करके बेडकी ओर चली गइ तब मंजुने बच्चेको वही रखे जुलेमे डाल दीया.. जो दयाने पहेलेही पुनमके रुममे रख दीया था..

तब दुसरी ओर देवायत जेसेही अपने रुममे गया तो रुममे हल्की रोसनी जल रहीथी.. ओर उनका पुरा बेड फुलोसे सजा हुआथा.. ओर बीचमे चंदा घुंघट डालके घुटनोसे पैर मोडके बैठी थी.. जीसे देखतेही देवायतकी खुसीके मारे हसी नीकल गइ.. ओर वो दरवाजा बंध करके बेडकी ओर बढने लगा.. तब देवायतको आते देखकर चंदाके दीलकी धडकन बढने लगी.. ओर वो सरमसे पानी पानी होने लगी.. आखीर वो दीन आही गया.. जो चंदा कबसे इस दिनका इन्तजार कर रही थी..





देवायत धीरेसे बेडपे बेठ गया.. ओर चंदाका घुंघट उठाने लगा तब चंदा सरमसे पानीपानी होने लगी.. ओर अपनी नजर जुकाते मुस्कराती रही.. आज उनका चांदसा मुखडा कुछ अलगही लग रहाथा.. जैसे आसमानसे कोइ परी उतरके आइ हो.. ओर देवायतने जेबसे अ‍ेक डायमंड नेकलेस नीकालके चंदाको दे दीया.. तब चंदाने नजर जुकाते सरमाते वो नेकलेस अपने हाथोमे लेलीया..

ओर बोक्षमेसे नीकालकर वापस बीना कुछ कहे देवायतके हाथोमे वापस थमा दीया.. तब देवायतभी समज गया ओर हसते हुअ‍े चंदाके नजदीक बेठ गया ओर चंदाके मुहकी ओर जुकते नेकलेस चंदाको गलेमे पहेनाने लगा.. तब चंदा अ‍ेक लडकीकी तराह खुब सरमाते हसती रही.. ओर देवायतने नेकलेस पहेना दीया..





देवायत : चंदा आज तुम बहोत खुबसुरत लग रही हो.. जी चाहताहे तुजे सुबह तक अ‍ैसेही देखता रहु..

चंदा : (सरमाते धीरेसे) देवु.. अब मे बाकायदा आपकी अमानत होगइ हु.. आपको जैसा ठीक लगे अ‍ैसा व्यवहार मेरे साथ कीजीये.. क्युकी मेने पुनमकोभी अपनी बहु नही अपनी ननंद मानलीया हे.. मे अपने आपको बदलनेकी पुरी कोसीस करुगी.. ताकी मे इस हवेलीकी बहु बन सकु.. मेरा बरसोका सपना आज पुरा हो गया हे..

देवायत : नही चंदा तुम जैसी थी उसीमे मेने तुजे स्वीकार कीया हे.. तुजे बदलनेकी कोइ जरुरत नही.. मुजे मेरी वोही चंदा चाहीये.. जो मुजे बहुत सरमाती भी हे ओर मुजसे खुलके प्यारभी करती हे.. आइ लव यु चंदा..

चंदा : (सरमाते हसते) देवु.. आइ लव यु टु..

कहातो चंदाने बेठेही देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया ओर उनके कंधेपे सर रखके बेठ गइ.. तब देवायतनेभी चंदाको बाहोमे भरलीया ओर अ‍ेक हाथसे चंदाकी पीठ सहेलाने लगा.. दोनो काफी देर अ‍ैसेही अ‍ेक दुसरोकी बाहोमे खामोस बैठे रहे.. जब देवायतने चंदाको अपने आपसे अलग कीया तब चंदाकी आंखोमें आंसु बेह रहे थे.. तो देवायतने अपनी जेबसे रुमाल नीकालकर चंदाके आंसु पोछ दीये.. ओर सवालीया नजरोसे चंदाको देखने लगा..

चंदा : (आंसु पोछते हसते) सोरी.. देवु.. मे भावनाओने बहेक गइ थी.. येतो खुसीके आंसु हे.. आपको पता हे मेरा बचपन इसी हवेलीमे गुजरा हे.. ओर आज इसी हवेलीमे बहु बनकर आगइ.. मुजेतो अभीभी यकीन नही हो रहाकी हमारी सादी सबके सामने होगइ हे.. ओर मे आपकी अर्धांगीनी होगइ हु..

देवायत : (हसते) हां चंदा.. आखीर मेने तुजे पा ही लीया.. मेरी मंजुने सही फैसला लीया हे.. मुजे गर्वहे मेरी मंजुपे.. जो मुजे इस खुबसुरत बीवी दे दी.. आजा.. आज हम पुरी रात प्यार करेगे.. तुजे सुबह तक सोने ही नही दुंगा.. आज तुजपे इतना प्यार आ रहा हे.. आज मे सारा प्यार तुजपे लुटा देना चाहता हु..

चंदा : (सर्मसार होते धीरेसे) जानु.. आपतो मुजे अ‍ेकही बारमे थका देते हो.. तो मे पुरी रात आपको कैसे जेल पाउगी..? हम दो बार प्यार करेगेनां.. प्लीज..

देवायत : (बाहोमे भरते) नही मतलब नही.. आज हमारी सुहागरात हे.. मे इसे यादगार बनाना चाहता हु.. ओर ये मेरी मंजुका भी ओर्डर हे..

चंदा : (सरमाते हसते) सुबह मे चलने फीरने.. लायक ही नही रहुगी.. तो वैसेभी ये यादगार होजायेगी.. देखोना आपकी लाडली.. ओर मंजु मेरी कैसी मस्तीया करेगी.. अभी अभी आपकी लाडली ओर मेरी प्यारी ननंद मेरी मस्ती करके गइ हे.. कहेती थी.. हम सुनेगी की आप कीतना चीलाती हे.. हें..हें..हें.. कहेके गइ हे मुजे अ‍ेक भतीजा या भतीजी देदो.. देवु मुजेतो बहुत सरम आइ..

देवायत : (हसते) हां तो सहीतो कहा उसने.. चल आज तेरी कोख भरही देता हु.. हें..हें..हें..

चंदा : (अ‍ेकदम सर्मसार होते) देवु.. प्लीज.. हम कुछ दिन ठहेर जाते हेनां.. फीर मे सामनेसे कहुगी.. प्लीज.. अभी नही.. कुछ महीनो मे आपके साथ अ‍ैसेही मजे करना चाहती हु.. प्ली..ज..

देवायत : (हसते) चल ठीक हे.. जैसी तेरी मरजी.. लेकीन अ‍ेक बात पकी हे.. मुजे तुमसे अ‍ेक बच्चा चाहीये..

चंदा : (सर्मसार होते धीरेसे) देवु.. मेरीभी यही तम्मना हे.. लेकीन अभी नही.. मुजे मंजुसे इस बारेमे बुछ बात करनी हे.. फीर हम दोनो प्लानींग करेगेंनां..

दोनोही बाते करते प्यार करने लगे.. ओर कब दोनोके होंठ मील गये पताही नही चला.. तब चंदाकी आंखोमे नसा छाने लगा वो आंधी आंख चडाके देवायतके होठोका रसपान करने लगी.. तब देवायत उनके उरोजोको मुहमे लेकर चुम रहाथा तब चंदा अ‍ेकदम गरम होकर काम अग्नीमे जलने लगी.. ओर धीरे धीरे करते दोनोके तनसे कपडे हटने लगे.. आज चंदा खुद नसीली आंखोसे देखते देवायतके कपडे नीकाल रहीथी..

चंदाके उपर पुरी तराह वासना हावी हो चुकी थी.. ओर वोभी पुरी तराह नंगी होगइ.. बस तनपे सीर्फ ब्रा ओर पेन्टी ही रेह गइ.. ओर देवायत पुरी तराह नंगा होगया.. उनका लंड चंदाका अ‍ैसा रुप देखकर हवामे लहेराते जटके पे जटका मार रहाथा.. जीसे देखकर चंदा सर्मसार होते बार बार चोर नजरसे लंडको देखती रही..

जीस लंडको वो कइ बार अपनी चुतमे ले चुकीथी.. वोही लंड आज चंदाको कुछ ज्यादा ही बडा दीख रहा था.. ओर वो थोडा गभरा रही थी.. क्युकी कुछही देरमे वो ही लंड उनकी चुतकी धजीया उडाने वाला था..

तभी देवायतने चंदाको बेडपे धीरेसे पीठके बल लीटा दीया ओर अ‍ेक पैर चंदाके उपर डालते उनके उपर चड गया.. तब चंदाने देवायतको अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर दोनोके होंठ अ‍ेकबार फीरसे मील गये.. ओर अ‍ेक दुसरेके होठोका रसपान करने लगे.. तभी देवायतने चंदाकी ब्रा खीचके नीकालदी तब उनके दोनो कठोर उरोज उछलकर बहार आगये.. तब देवायतने दोनो बुब्सको अपनी मुठीकी गीरफ्तमे लेलीया..





ओर वो उसे मसलने लगा.. तब चंदा जोरोसे सीसकारीया करने लगी.. ओर वो सरमके मारे देवायतसे नजरे चुराने लगी.. देवायत उनके उरोजोको मसलते कभी हल्कासा दबा देता तो कभी बुब्सकी नीपलको अपने दातोसे दबाकर हल्कासा खीच लेता.. तो कभी नीपलको चुसने लगता.. तो कभी जुकते चंदाके गलेको चुमलेता.. चंदा देवायतकी अ‍ैसीही हरकतोसे पागल होने लगी.. ओर उनकी चुतसे पानी नीकलने लगा..





तभी देवायत चंदाके पैरोके बीच बैठ गया ओर पेन्टीमे दोनो ओर उगलीया फसाकर पेन्टीको खीचकर नीकालने लगा तब चंदा अ‍ेकदम सर्मसार होगइ ओर अपनी कमर उची करते दोनो पैर घुटनोसे मोडकर देवायतको पेन्टी नीकालनेमे साथ देने लगी.. ओर देवायत पेन्टीको नीकालकर वही रखते चंदाकी चुतपे जुक गया.. तब चंदा होनेवाली हरकतसे बीलकुल वाकेफ होगइ..

चंदा : (सरमाते धीरेसे) देवु.. नही.. प्लीज.. वहा नही.. उपर आजाओनां.. अब बरदास्त नही होता.. मुजे बुछ होने लगता हे.. मे ज्यादा बरदास्त नही करपाउगी.. आप मुजे अ‍ैसे ही जडा देते हो..

देवायत : (कामुक्त होकर) बस.. चंदा अ‍ेक बार.. अ‍ेक बार मुजे इसे छु लेनेदे.. फीर सुबह तक मुजे तेरे उपरसे उतरना ही नही.. आज तुजे सुबह तक खुब प्यार दुगा.. मे हमारी इस रातको यादगार बनाना चाहता हु..

कहातो चंदा सर्मसार होते मुस्कराने लगी.. ओर अपना मुह दुसरी ओर करते देवायतसे नैन चुराते दोनो हाथोसे चदरको पकडली.. क्युकी उसे पता था अब आगे क्या होने वाला हे.. तभी चंदाको अपनी चुतपे देवायतका मुह महेसुस हुआ ओर वो नजरको नीचेकी ओर टेडी करते देखने लगी तब देवायत उनकी कमरको पकडते अपनी जीभको चंदाकी चुतमे घुसानेके लीये तैयार था.. ओर अचानक देवायतने चंदाकी चुतमे जीभ घुसादी.. ओर चंदाकी चुतके दानेको अपनी जीभसे छेडने लगा..





तब चंदाने जोरोसे अपनी आंख भीचली ओर उनके मुहसे अ‍ेक हल्की चीख नीकल गइ.. वो अ‍ेकदम कामुक होकर छटपटाने लगी.. अ‍ैसा नही थाकी वो ये सब पहेली बारही कर रही थी.. देवायत ओर चंदा दोनो इस खेलको कइ बार खेल चुके थे.. लेकीन चंदाको मालुम थाकी आगे क्या होने वाला हे.. देवायत चंदाको इस खेलमे कइ बार बीना चोदेही अ‍ैसे जडा देता हे.. ओर आज चंदा अ‍ैसेही जडना नही चाहती थी..

वो आज नही चाहती थीकी दोनोका कामरस अ‍ेसेही बहार व्यर्थ जाये.. ना देवायतका ओर नाही खुदका.. वो दोनोका कामरस आज अपनी चुतमे भरकर महेसुस करना चाहती थी.. क्युकी अब उसे कीसी बातका कोइ डर नही था.. उनके मनके अ‍ेक कोनेमे देवायतसे मां बननेका ख्वाब देख रहीथी.. इसीलीये वो चाहती थीकी वो देवायतके बच्चेकी मां बने इसीलीये देवायत उनकी चुतको पुरी रात भरता रहे..





हालाकी वो अभी देवायतके बच्चेकी मां बनना नही चाहती थी.. लेकीन फीरभी वो आइपील लेकर इनसे बचना चाहती थी.. चंदाने जबसे पहेली बार देवायतको देखा तबसेही वो देवायतके लीये सारी हदे पार करना चाहती थी.. वो देवायतके व्यक्तीत्वसे बहुतही आकर्सीत हो चुकीथी.. सीर्फ चंदाही नही इस गांवमे अ‍ैसी कइ ओरते ओर लडकीयाथी जो देवायतके नीचे लेटनेको आजभी आसानीसे तैयार थी..

जब चंदासे बरदास्तसे बहार होने लगा वो अचानक बैठ गइ.. ओर देवायतके सरको पकडते अपनी ओर खीचलीया ओर वो लेट गइ.. ओर देवायतकोभी खीचकर अपने उपर लीटा दीया.. ओर उनके गलेमे दोनो हाथ डालमे अपने तनसे जोरोसे चीपकालीया तब देवायत उनके गलेको चुमने लगा.. तो चंदा ओर मदहोस होने लगी.. ओर आधी आंख चडाते देवातके सरको सहेलाती रही.. वो चाहती थी देवायत जटसे जट अपना लंड उनकी चुतमे घुसादे..





तभी उसे अपनी चुतपे देवायतका लंड ठोकर मारते महेसुस हुआ.. जो अपने बीलमे जानेका रास्ता ढुंढ रहाथा.. उनका लंडभी चंदाकी चुतके बीलमे कइ बार जाकर उल्टीया कर चुकाथा.. तो इस चुतको वो कैसे नही पहेचाने.. उनको चंदाकी चुत जानी पहेचानी लगी..

ओर वो चंदाकी चुतमे घुसनेके लीये कामयाब होगया.. जैसेही लंड चुतमे घुस गया तब चंदाकी आंख खुलके बडी होगइ.. ओर वो देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचते आह.. कहेते आहे भरने लगी.. आज उसे देवायतका लंड कुछ जरुरतसे ज्यादाही मोटा फील हो रहाथा..





तो दुसरी ओर चंदाकी चुतकोभी देवायतका लंड जाना पहेचाना लगा तो वोभी अपनी दोनो होठ जैसी नाजुक पंखडीयोसे देवायतके लंडको फडफडाते नीगलने लगी.. जैसे कोइ सांप चुहेको नीगल रहा हो.. देवायत ओर चंदा दोनोही मदहोस होकर चुदाइमे मसगुल होगये.. आज दो जीस्म अ‍ेक जान होगये.. ओर देवायतने पुरा लंड चंदाकी चुतमे उतार दीया.. तब जाके चंदाने राहतकी सांस ली.. ओर उनके चहेरेपे राहतकी मुस्कान आगइ.. जैसे उसने कोइ कीला फतेह करलीया हो.. चंदाने देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचलीया..

तभी इस गांवसे दुर आज अ‍ेक ओर सुहागरात चल रही थी.. जीहां.. भानु ओर उनकी मामी रमाकी.. जो आज भानुकी बीवी होगइ थी.. रमाने भावनाको बहुत साथ आनेका आग्रह कीया लेकीन भावनाने बडी सीफततासे उनकी सुहागरातका हवाला देकर मना करदीया.. ओर वो अपनी बच्चीको लेकर बाजुवाले लताके रुममे सोने चली गइ.. ओर रुमके बीच अ‍ेक दरवाजा लगा हुआ था.. ओर भावना बच्चीको लेकर लताके बेडपे सो गइ.. जहासे दोनोकी आवाजे साफ सुनाइ दे रहीथी..

तब दश पंद्गह मीनीटके बादही बाजुके रुमसे भावनाको अ‍ेक तेज चीखकी आवाज सुनाइ दी.. तब वो समज गइकी भानु ने अपना लंड रमाकी चुतमे उतार दीया हे.. ओर वो रमाको चोद रहा हे.. ओर इतनी उमर होनेके बावजुद रमाकी चीख सुनकर उसे जरासीभी समजनेमे देर नही लगीकी भानु उसे कामोतेजक गोली खाकर चोद रहा हे.. तब वो खडी होकर दरवाजेके पास चली गइ ओर वहा कोइ छेद देखनेकी कोसीस करने लगी..

तभी वहा अ‍ेक कपडा लडकता नजर आया ओर उसने कपडेको हटाया तो वहा उसे बडा छेद नजर आया ओर वो वहा आंख लगाकर अपने रुमका नजारा देखनेकी कोसीस करने लगी.. तभी वो चोंक गइ.. क्युकी वहीसे उनका पुरा बेड उसे दीखाइ दे रहाथा.. रमा पुरी नंगी होकर भानुके नीचे लेटी हुइथी.. उनको दोनो पैर घुटनोसे मुडे फैले हुअ‍े थे.. ओर भानु रमाको पैरोके बीच बैठेही तेजीसे अपनी कमर हीलाते रमाको चोद रहाथा..





भावना छेदसे देखने लगी तब भानु बडेही जोरोसे कमर हीला हीलाकर रमाकी चुदाइ कर रहाथा ओर रमा अपने बेडकी चदर पकटते अपना मुह इधर उधर करते छटपटा रहीथी ओर भानुके हर धकेको चीखते ओर आहे भरते जेल रहीथी.. तब भानुभी रमाको बडी बेहरेहमीसे चोद रहाथा.. तो रमाभी चुदवाते चीखती चीलाती रही.. ओर भावना कातील मुस्कान करते फीरसे बेडपे आकर सोगइ..

तभी उसे खयाल आयाकी ये रुमतो लताका हे.. तो क्या लताभी उनकी ओर भानुकी चुदाइ हर दिन देखती हे..? यही सब सोचकर वो सरमसे पानी पानी होने लगी.. ओर मुस्कुराते मनही मन लताको गालीया देने लगी.. लेकीन अबतो लता उनकी ओर देवायतके प्रेमकी राजदार होगइ थी.. तब उनको लताकी अ‍ैसी हरकतोपे हसी आगइ.. तब बाजुके रुममे चुदाइका भवंडर तुफान बनकर तांडव मचा रहाथा..

काफी देर तक भानु रमाकी चुदाइ करता रहा.. इसी बीच रमा भी दो बार जड चुकीथी.. फीरभी भानु उसे चोदेही जा रहाथा.. तब रमाको आज भानुकी इतनी चोदनेकी स्टेमीना देखकर समज गइकी भानु कोइ कामोतेजक गोली खाकर उसे चोद रहा हे.. तब कुछ पलके लीयेतो वोभी खुस होगइ.. लेकीन जैसे जैसे भानु उसे उछल उछलकर चोदने लगा तब रमासेभी चुदावाना बरदास्तसे बहार होने लगा..

अभी तब रमा तीनसे चार बार जड चुकीथी.. तो उनकी चुतमेभी जलन महेसुस होने लगी.. तकरीबन २५ मीनीटकी धका पैनी जबरदस्त चुदाइके बाद भानुके लंडने भी जवाब देना मुनासीब समजा.. ओर भानु रमाकी चुतमे जडतक लंड घुसाके जडने लगता हे.. तब रमाभी भानुको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलेती हे.. तभी जडतेही भानु रमाके सीनेपे सर रखते ढेर हो गया.. ओर रमा उनकी पीठ सहेलाते भानुसे नजरे चुराने लगी.. ओर उसने राहतकी सांस ली.. तबतक भावना भी नींदकी आगोसमे चली गइ थी....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
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