- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 33,324
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - ११४
कहातो चंदाने सर्मसार होते हसते रमाको उनकी पीठमे अेक मुका मारदीया.. फीर दोनोही सबसे थोडी दुर जाते सरमाते हसते हुअे धीरेसे अेक दुसरेकी सुहागरातके बारेमे बाते करने लगी.. तो सृतीभी भुमीकासे बात करके सबके पास आकर खडी होगइ.. तब मंजुने देवायतकोभी बुलालीया उनके साथ मंजुभी जा रहीथी.. ओर सभी लोग पैडल चलते रातके अंधेरेमे साथ चलते बाते करते रश्मीके घरकी ओर जाने लगे....अब आगे
सभी लेडीस आपसमे बाते करते चल रहीथी तब लता धीमी आवाजमे नीलमको अबभी धिरेनसे दुर रहेनेके लीये समजा रही थी.. तब मंजु सृती ओर देवायत बाते करते सबके पीछे चल रहेथे.. फीर मंजुने सृतीको पुछही लीयाकी दोनोने वहा क्या कीया.. सृतीने धीरेसे बाते करते मंजुको सब बता दीया की दोनोने सीर्फ ओरल सेक्सही कीया हे.. बाकी सबवो अपनी सुहागरातमे करेगे.. अैसे ही सब रश्मीके घर आगये..
अंदर आतेही रश्मीने पहेले सरपंचका जायजा लीया.. ओर उसे टीफीन नीकालकर खीलाने लगी.. तभी सब लेडीस ओर देवायतभी अंदर चले गये तो देवायतको देखतेही राघवका दीमाग खराब होगया.. अर उसने खानेको ठुकरा दीया.. तब रश्मीने उनको अेक बार फीर खरी खोटी सुनाइ ओर टीफीन लेकर कीचनमे रख दीया.. फीर सभी लोग होलमे सोफेपे बेठ गये ओर आपसमे बाते करती गप्पे लगाने लगे..
आज पुनमने रश्मीको बता दीयाथा की वो उनकी सादीसे पहेले अेक बार अपने भाइको मीलना चाहती हे.. तो रश्मीने उसे अपने रुममेही मीलनेको केह दीयाथा.. तभी रश्मीने घर आतेही इसारोसे पुनमको अपना रुम दीखा दीया.. तो पुनम मंजुको लेकर रुममे चली गइ.. ओर अंदर जातेही सरमाते देवायतको सादीसे पहेले आखरी बार मीलनेके लीये बुलानेको ओर उनको साथ रहेनेको कहा.. ताकी कीसीको सक नाहो.. तब मंजु मुस्कुराते वापस बहार आगइ ओर आतेही कहा..
मंजुला : (हसते) देवु.. वो आपने कागजात दीयेथे.. उनके बारेमे पुनोको समजादो.. ओर उसे आपसे कुछ जरुरी बातभी करनी हे.. तो आइअे मेरे साथ.. (लेडीसको) पुनोतो सादी करके चली जायेगी तो बहुतही जरुरी बात करनी हे.. आप सब बैठना हम अभी आते हे..
रश्मी : (हसते) अरे आरामसे जाइअे.. तबतक मे इन सबको बढीयासी चाइ पीलाती हु.. हें..हें..हें..
वंदना : (हसते) हां भाभी.. हम सब इधरही बैठी हे.. हमारी फीकर मत करो.. आरामसे बाते करके आओ..
कहातो मंजु वंदनाकी ओर कातील स्माइल करते देवायतको लेकर रश्मीके रुममे चली गइ.. ओर अंदर जातेही मंजुने धीरेसे दरवाजा बंध करलीया.. ओर धीरेसे लोक करलीया ताकी कोइ भुलसेभी अंदर ना आजाये.. जैसेही देवायत अंदर गया तो पुनम रश्मीके बेडपे सरमाते बैठी थी.. अब इसे मंजुका कोइ डर नही था.. जैसेही देवायत आया तो वो जटसे खडी होगइ ओर दोडकर देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर आंसु बहाने लगी..

पुनम : (आंसु बहाते) भाइ.. आइ लव यु.. आइ लव यु सोमच.. बस मे सादीसे पहेले आपको आखरी बार मीलना चाहती थी..
देवायत : (बाहोमे कसते) बस.. बस.. अब आंसु मत बहा.. क्या मुजे कमजोर करना चाहती हे..? हंम..? ओर आखरी बार क्यु..? हंम.. तुजेतो मे जींदगीभर मीलता रहुगा.. तुम मेरी मासुका ओर बीवी हमेसा रहेगी..
पुनम : (होंठ चुमते) हां.. भाइ.. आप कमजोर मत होना.. वरना मे टुट जाउगी.. जींदगीने मुजे कीस मोडपे लाके खडी करदी हे.. भाइ मुजे वहा मीलनेतो आओगेनां..?
मंजुला : (हसते सरको सहेलाते) हां मेरी बच्ची.. मे इनको वहा भेजती रहुगी.. तु फीकर मत कर.. तुजेही तो मेरे देवुको सम्हालना हे.. ओर सुन.. सादीके बाद ये १५ बीस दीनमेही तुजे प्रेगनेन्टकी बात करनी हे.. उनमे देर मत करना.. बस ज्यादासे ज्यादा २० दिन..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. अगर धिरेनने बच्चेके लीये मना करदीया तो..? मे क्या करुगी..?
मंजुला : (गंभीर होकर धीरेसे) नही पुनो.. वो मना करेतो उसे तुम मना लेना.. केह देनाकी मे बच्चा नही गीराउगी.. चाहे जोभी परीणाम आये.. मे सम्हाल लुगी.. मुजसे फोनपे बात करवाना.. तुजे वही डटके रहेना हे.. भलेही वो नाराज होजाये.. तुम तो सब जानती हे..
पुनम : (हां मे गरदन हीलाते) हां भाभी.. मुजे इस बच्चीको जन्म देनाही हे.. वरना बाबाको क्या मुह दीखाउगी.. भाइ.. मे अब आपको वही मीलुगी.. ओर आपसे फोनपे बात करती रहुगी..
मंजुला : (धीरेसे हसते) पुनो मे बहार जाती हु.. अब वक्त बरबाद मत करो.. दोनो अच्छी तराह मीललो..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) नही भाभी.. आपभी इधरही रहीये.. अब आपसे कैसा परदा.. आज जोभी करना आपके सामनेही करना हे.. अगर आप बहार गइतो कोइ हम दोनो पे सक कर सकती हे.. इसीलीये तो आपको साथ मे रखा हे.. आज हम तीनोही अेक साथ मीलेगे..
मंजुला : (सरमाते हसते) नही पुनो.. कल तुम्हारी सादी हेतो तुमही इनको अच्छेसे मीललो.. वरना तेरे साथ मेरी भी हालत खराब ना करदे.. देवु आज बहुत सम्हालके कल इनकी सादी हे.. तो धीरे करना.. हम घर जाकर आरामसे कर लेगे.. आज पुनोको अच्छेसे मीललो..
देवायत : (होंठ चुमते) हां पुनो मे भी सादीसे पहेले तुजे अेक बार मीलना चाहता था चल आजा.. आज मेरी बहेनको खुस कर दुगा.. फीर पता नही हमारे मीलनेकी कब बारी आयेगी..
पुनम : (सरमाते हसते) भाइ.. मेने धिरेनसे उनका सब सेड्युल जान लीया हे.. हम मेरे घर आरामसे मील सकते हे.. में आपको फोन करके बुला लुगी.. या भाभीसे बात करलुगी.. अब चलीये.. देर मत कीजीये..

कहेते पुनम देवायतके होठोको चुमने लगी.. दोनोही पागलोकी तराह अेक दुसरेके होठ चुमते रहे.. तभी देवायत पुनमको अपनी गोदमे उठाते बेडकी ओर चला गया ओर पुनमको बेडपे धीरेसे पीठके बल सुला दीया ओर अपनी पेन्टको नीचे करते अपना लंड बहार नीकाल दीया तो पुनम सर्मसार होगइ.. ओर वोभी सरमाते अपना पायजामा ढीला करते नीचे घुटनो तक कर देती हे.. तब देवायत उनके उपर चड गया..
तब पुनमने उसे कसके अपनी बाहोमे भीच लीया.. तब देवायतका लंड जटके मारते पुनमकी चुतपे ठोकर मारते अपने बीलका रास्ता ढुंढने लगा.. दोनोही अेक दुसरेके होठ चुमते मुहको थोडा खोल देते हे ओर अेक दुसरेके मुहमे जीभ डालते जीभको चुसने लगते हे.. तब पुनमने अेक हाथ नीचे लेजाते लंडको पकडके उनके बीलका रास्ता दीखा दीया.. ओर देवायतने धीरेसे अपनी कमर दबाते पुनमकी चुतमे पुस करदीया..

तो लंड पुनमकी चुतमे घुस गया.. तो पुनम आधी आंख चडाते मदहोसी मे छा गइ.. ओर सातवे आसमानपे चली गइ.. दोनोही भुल गयेकी इनके साथ मंजुभी हे.. तो मंजुभी दोनोको देखतेही उतेजीत होगइ ओर वोभी पुनमके सरके पास बेडके कीनारे बैठ गइ.. ओर पुनमके सरको सहेलाते अेक हाथसे अपनी सारीको कमर तक उची करते अपनी चुतको सहेलाने लगी.. ओर देवायत होलेसे कमर हीलाते धीरे धीरे पुनमको चोदने लगा..

आज देवायतभी मंजुके सामनेही अपनी बहेनको पहेली बार चोद रहा था.. दोनोही उतेजनाकी वजहसे कामुक्ताके नसे मे चुदाइमे मसगुल होगये.. तो मंजुभी अपनी चुतमे उंगली डालकर आंख बंध करके जोरोसे हीलाने लगी.. तभी पुनमने देवायतको अपनी बाहोमे जोरोसे भीच लीया ओर जोरोसे लीपलोकर करते अपनी कमरको जटके देने लगी.. ओर जडते देवायतके लंडको चुतके अंदर ही भीगोने लगी..
पुनम : (लडखडाती आवाजमे) बस.. बस.. भाइ.. अैसेही मुजे चोदते रहीयेगा.. मे आपके बीना नही रहुगी..
देवायत : (चुदाइके नसेमे धीरेसे) हंम.. हा.. हा... पुनो.. तुजे वहा आकर भी चोदता रहुगा.. भलेही मेरी जींदगीमे कीतनीभी ओरत आये.. लेकीन तुम मेरे लीये मेरी मंजुकी तराह स्पेसीयल हो.. आइ लव यु..
अंदर भाइ बहेनका प्यार चुदाइमे तबदील होते तांडव मचा रहाथा.. तब बहारकी ओर सृती लता नीलम वंदना सभी अेक दुसरेकी मस्तीया कर रही थी.. सब सृतीको देवायतका नाम लेकर छेड रहीथी.. तब रश्मीभी चाइ नास्ता बनाकर बहार लेकर आ गइ.. ओर वोभी सबके साथ सृतीकी मस्मी करनेमे सामील होगइ.. तब सृती सरर्मसार होते हसती रही.. ओर वंदनाको मुके मारने लगी.. तो नीलमकोभी अब यहा मजा आने लगा ओर वोभी सबके साथ सामील होगइ..
तबतक अंदर देवायतने धमाकेदार चुदाइ करके पुनमको दो बार जडा दीयाथा.. ओर अभी हाथके बल उचा होते पुनमको जोरोसे चोद रहाथा.. तब मंजुभी अपनी चुतमे जोरोसे उंगलो हीलाने लगी तभी उनकी चुतसे पानीका फवारा नीकल गया तो वो जटसे अंदरके बाथरुममे भाग गइ.. ओर अपनी चुतको साफ करते हाथ मुह धोते कंपलीट होने लगी.. तब तक देवायत ओर पुनमके बीच घमासान चुदाइ चल रहीथी..

तब अचानक देवायत पुनमके उपर लेटकर छागया.. ओर पुनमके गलेमे मुह डालते उसे दांत गडाके चुमने लगा तो पुनमनेभी देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया तभी पुनमको अपनी बच्चेदानीपे गरम गरम महेसुस होने लगा ओर वो उतेजनासे कांपने लगी ओर देवायतके साथ जडने लगी.. दोनोही सांत हो गये तब पुनम देवायतके होंठ चुमते उनकी पीठ सहेलाती रही.. तब मंजुभी बाथरुमसे बहार आगइ..

मंजुला : (बेडपे बेठकर पुनमके सरको सहेलाते) दोनोका होगया बच्ची..? ओर करना हे..? तो करवाले.. फीर तेरा भाइ तेरे हाथोमे १० १५ दिनोके बाद आयुगा..
पुनम : (सरमाते हसते धीरेसे) नही भाभी.. भाइ अेकही बारमे हमको थका देते हे.. अगर आपको करवाना हे तो करवालो.. मे यही बैठी हु..
मंजुला : नही पुनो.. हमतो घर जाही रहे हे.. तो हम दोनो वहा आरामसे करेगे.. चलो दोनो बाथरुममे जाकर ठीक होजाओ.. फीर हमे जानभी हे..
कहातो देवु पुनमके उपरसे उतर गया तो लंड चुतसे फच.. आवाज करते बहार नीकल गया.. तो पुनमकी चुतसे दोनोका कामरस चुतसे बहार बहेने लगा.. तब पुनमने जटसे अपने नीकरसे चुतको पोछ लीया.. तभी देवायतने पुनमको अपनी गोदमे उठालीया ओर बाथरुमकी ओर चलने लगा.. तो पुनम मंजुके सामने देखकर हसने लगी.. ओर दोनो अंदर चले गये तो देवायतने पुनमको नीचे खडा कर दीया..
तभी पुनम अेक बार फीरसे देवायतकी बाहोमे समा गइ ओर देवायतको पागलोकी तराह चहेरेको चुमने लगी.. तो देवायतने फीरसे लंडको बहार नीकाल लीया.. ओर पुनम कुछ कहे इनसे पहेलेही पुनमकी अेक टांगको उची करते अपने हाथोमे फसा लीया ओर खडे खडेही लंडको पुनमकी चुतमे घुसा दीया.. तो पुनमने सर्मसार होते जोरोसे देवायतको बाहोमे पकड लीया.. ओर देवायतभी जोरोसे खडे खडे पुनमको चोदने लगा..

पुनम : (लडखडाती आवाजमे) भाइ.. बस.. बस.. ओर नही.. धीरेसे.. बस.. आप अेक बार सुरु होजाते हो तो फीर हमे छोडतेही नही.. बस.. हमे चोदतेही रहेते हो.. आपकी यही चोदनेकी अदा मे मीस करुगी.. आप कीतना मस्त चोदते हो.. बस मुजे वहा आकर अैसेही चोदते रहीयेगा..
देवायत : (धीरेसे होंठ चुमते) पुनो.. मेभी तो तेरे बगैर नही रेह सकता.. देखना तुजे वहा आकर चोद लुगा.. क्या मस्त माल दीखती हे तु.. वाकइ तु मेरी बीवी हे.. जी चाहता हे तुजे चोदता ही रहु..
पुनम : (चुदवाते) भाइ.. अब उस वंदनाकी बारीभी लेलो.. वो बीलकुल तैयार हे.. वो आपसे अपने प्यारका इजहार करना चाहती हे.. आप उसे सहेरमे लेजाओ तब ही उनका काम तमाम करदो.. वो आपको मना नही करेगी.. वो बस आपके प्यारका इजहार करनेका इन्तजार कर रही हे.. आप उसेभी बीवी बनाके चोदलो..
देवायत : (धीरेसे चोदते) पुनो तुजेभी हमारे साथमे चलना हे.. मे तुम दोनोको अेक साथ चोदना चाहता हु..
पुनम : आइ... भाइ मे गइ.. ओर जोरसे चोदो.. भाइ.. हमे मेरे घरमे बहुत मोके मीलेगे.. मे वंदनाको वही बुला लुगी.. आप आजाना.. हम तीनोही मेरे घर खुब मजे करेगे..
कहातो देवायत पुनमको जोरोसे चोदने लगा.. तब कुछही देरमे दोनो अेक दुसरेको जोरोसे बाहोमे भीच लेते हे ओर अपने होंठ लीपलोक करते अेक बार फीर दोनो साथमे जड गये.. ओर देवायतने पुनमकी चुतको अपने गरम पानीसे भरके हरी भरी करदी.. फीर दोनोही अपने लंड चुतको साफ करके फ्रेस होगये.. ओर अपना हुलीया ओर कपडे सही करके बहार आगये.. तब पुनम मंजुकी ओर देखते सरमाकर हसने लगी..
मंजुला : (हसते धीरेसे) पुनो.. क्या अंदरभी तेरी कुटाइ होगइ..? हें..हें..हें.. मुजे पता था ये दो बार कीये बीना मानेगे नही.. हें..हें..हें..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) हां भाभी.. लेकीन आज भाइने मजाभी बहुत दीया.. अब चलीये बहार..
फीर तीनोही बहार आगये तब सभी लेडीस चाइ नास्ता कर रही थी.. वंदना रश्मीके अलावा कीसीको पताभी नही थाकी अंदर दोनो भाइ बहेन चुदाइ करके आये हे.. तो वंदना देवायतको चोर नजरसे देखते सरमा रही थी.. तीनोभी सबके साथ चाइ नास्ता करने बैठ गये.. तभी सबकी नजर बचाते जैसेही वंदनासे आंख मीली तो देवायतने हसते हुअे वंदनाको आंख मारदी.. तो वंदनाका मुह खुलाही रेह गया.. वो सोक्ट होकर सर्मसार होगइ.. फीर मुहको दुसरी ओर करते सर्मसार होते हसने लगी..
सबने चाइ नास्ता करलीया तो देवायत मंजु नीकलने लगे.. तो रश्मी ओर सृती उसे बहार तक छोडने आ गइ.. तो बहार आतेही दोनो देवायत ओर मंजुको गले मीलने लगी.. तब देवायतको गले मीलते रश्मी ओर सृतीने देवायतके होठ चुमलीये तो मंजु हसने लगी.. फीर दोनो नीकल गये ओर रश्मी सृती वापस अंदर आगइ.. ओर सभी दरवाजे लोकर करदीये.. तो दुसरी ओर देवायत ओर मंजु अेक दुसरेका हाथ पकडके हवेलीकी ओर बाते करते जाने लगे..
देवायत : (हसते) मंजु.. तुमने पुनमको कहाकी तुमतो सब जानती हो.. तो क्या मुजे ये सब मालुम नही होगा..? तुम ओर पुनम बहुत कुछ जानती हो.. मुजे कब अपनी पहेचान करवाओगी..?
मंजुला : (हसते) हंम.. देवु.. सोचती हुकी आपको आज ही मेरी पहेचान करवादु.. ताकी आपको बार बार मुजसे कुछ पुछना ना पडे.. आज मे आपको हमारे संभोगके माध्यमसे कुछ शक्तिया दुगी.. (हसते) क्या आपको अपनी बहेनको चोदनेमे इतना मजा आता हेकी उसे दो बार चोद लीया..? मेभी तो आपकी बहेन हु.. आज मुजेभी पुनोकी तराह चोदलो.. मुजे आज संभोगके माध्यमसे आपको कुछ देना हे..
जब दोनो बाते करते हवेलीपे पहोचे तब सभी अपने रुममे जाकर सो रहे थे.. लखन धिरेनभी बेडपे लेटकर आपसमे बाते कर रहेथे.. तो राजीव दवाइकी वजहसे सो चुकाथा.. तो दुसरे रुममे नीर्मला ओर भुमीका दोनोही गाउन पहेनकर अेक दुसरेको बाहोमे भरके बाते भी कर रहीथी ओर बीच बीचमे अेक दुसरेके होंठ चुम रही थी.. रजीया दया ओर चंपाभी पुरे दिन कामकी थकानकी वजहसे सो चुकीथी.. तो देवायत मंजु अपने रुममे चले गये..
जब अंदर गये तो चंदा भी पुरे दिनकी दोड धामकी वजहसे गहेरी नींदमे सो चुकी थी.. तो देवायत मंजुको उसे जगाना ठीक नही लगा ओर दोनो नीचे गदा डालकर पुरे नंगे होकर सोने लगे.. आज मंजु खुद देवायतके उपर चड गइ.. उनकी कमरपे दोनो ओर पैर मोडके बैठ गइ.. रश्मीके घर पुनम ओर देवायतको चोदते हुअे देखकर कबसे अपनी चुतसे पानी बहा रहीथी.. वो घर आतेही जल्दसे जल्द देवायतका लंड अपनी चुतमे लेना चाहती थी..
तो कमरपे बैठतेही मंजुने देवायतका लंड पकडकर अपनी चुतपे रखदीया.. ओर धीरेसे बैठकर पुरा लंड अपनी चुतमे घुसा दीया.. फीर थोडी देर कामुक नजरोसे देवायतकी ओर देखते धीरे धीरे उपर नीचे होते देवायतको चोदने लगी.. तो देवायत भी उनके सामने बैठ गया.. ओर मंजुको अैसे चोदते हुअे देखकर हसता रहा.. आज मंजु उसे बहुतही कामी नजर आ रहीथी.. मानो कीसी रतीका अवतार हो..

तभी मंजु देवायतको चोदते हुअे अपनी आंख बंध करके बैठ गइ.. तो देवायतभी अपना होस गवा चुका.. आज मंजु देवायतको अपनी कुछ शक्तिओसे अवगत करवाना चाहती थी.. आज वो अपनी पहेचान देवायतसे करवाना चाहती थी.. ओर मंजु आंख बंध करते अपनी योनीके माध्यमसे देवायतके अंदर अपनी कुछ काम शकित स्थापीत करने लगी.. ओर देवायत स्वप्नकी दुनीयामे चला गया.. उसे बहुत कुछ ज्ञात होने लगा.. आज मंजु उसे कुछ अलगही लग रहीथी.. तभी मंजुने उनको अपना असली रुप दीखा दीया..

देवायतको मंजुके असली रुपके दर्शन हो गये.. तब देवायतको मंजुके अंदर अपनी जननी विमलाका आभास होने लगा.. उसे अैसा प्रतीत होने लगाकी वो अपनी मां विमलाको चोद रहा हे.. ओर वो यही सोचते थोडा वीचलीत होगया.. ओर उसने फोरन अपनी आंख खोलदी.. तब मंजु आंख बंध करके अपनी कमर हीला रही थी.. तो देवायत उनको आस्चर्यसे देखता ही रेह गया.. तभी मंजुने आंख खोलकर देवायतकी ओर वासना भरी नजरोसे देखा.. ओर मंजुने जोरोसे देवायतको अपनी बाहोमे भीच लीया..
मंजुला : (धीरेसे कामुक आवाजमे) देवु.. कुछ गलत मत सोचो.. बस मुजे जोरोसे चोदते रहो.. भरदो मेरी योनीको.. यही जीवन हे.. हमे कोइ रीस्ते नातेको अहेमीयत नही देनी.. हम सब प्रकृतीसे जीनेवाले लोग हे..
देवायत : (थोडा जीजकते अपनी कमर हीलाते) मंजु.. ये सब क्या हे..? कौन हो तुम..? क्या मेने देखा वही हो..? मुजे अपनी असली पहेचान करवाओ..
मंजुला : (लडखडाती आवाजमे) देवु.. अभी कुछ नही.. पहेले मुजे अेक बार अच्छेसे चोदकर ठंडी करदो.. इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. अभीतो मुजे जमकर चोदलो.. फीर आपको मे सब कुछ बताती हु..

फीर देवायतने कुछ भी गलत सोचना बंध करदीया.. ओर मंजुको बाहोमे भीचते उसे जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा.. तब कुछही देरमे मंजुने देवायतको कसके अपनी बाहोमे भीचते होंठोको लीपलोक करलीया.. ओर अपनी कमरको जटके मारते जडने लगी.. तो आज देवायतभी जल्दीसे छुट गया..
ओर वोभी अपनी कमरको जटके देते मंजुकी चुतको अपने गाढे पानीसे भरने लगा.. तो आज जडते हुअे देवायतको कुछ अलग ही महेसुस होने लगा.. ओर दोनो साथमे जडकर सांत होगये.. फीर दोनोने अेक दुसरेके होठोको छोड दिये.. ओर अैसेही अेक दुसरेको बाहोमे भीचते बैठे रहे तब..
मंजुला : (धीरेसे) देवु.. आपने देखा वोही सच हे.. इसीलीये मे आपको अपनी पहेचान नही करवा रहीथी.. मेही आपकी मां विमला हु.. मेही आपकी सास नीर्मला हु.. मेही आपकी बुआ भुमीका हु.. मेही हमारी पुनो हु.. ओर मेही मेरे देवुकी मंजु हु.. मे इन सबकी जननी हु.. आप सभी मेरे संतान हो..
देवायत : (हसते) हंम.. मंजु.. मे बहुत कुछ समज गया.. क्या हमने कुछ गलत तो नही कीया..? बस मुजे सीर्फ इतनाही जानना हे.. क्युकी आज बाबाने भी सृतीको बहुत कुछ बता दीया हे.. तो उनकी बातोसे लगा की भवीस्यमे मेरे कइ रीस्ते भी उजागर होने वाले हे.. वो सृतीको बार बार विचलीत ना होनेको समजा रहेथे..
मंजुला : (देवायतके गलेमे हाथ रखते आंखोमे देखते) हां.. जानु.. सायद.. कुछ अैसाही होगा.. बाबाने सृतीको आपका ओर भुमी बुआके रीस्तेके बारेमे कहा होगा.. आगे बहुत कुछ होगा.. लेकीन आप बीलकुल गील्टी फील मत करना.. क्युकी आपका कामही उन राजाकी तराह हे.. हम दोनो खुद उनकेही अंस हे.. कइ जन्मोमे मुजे आपको जन्म देकर आपसे ही सादी करनी पडती हे.. ओर ये सब होता रहेता हे..
देवायत : मंजु.. क्या तुजे मेरे ओर भुमी बुआके रीस्तेके बारेमे जानकर दुख नही हुआ..? ओर बाबा सृतीको भी सायद इसीलीये समजा रहेथे.. हमने आज तक कीसीको हमारे रीस्तोके बारेमे भनकभी नही लगने दी.. तो फीर बाबा सृतीको अैसा क्यु समजा रहेथे..?
मंजुला : (हसते होंठ चुमते) देवु.. बस अेक बार ये सादी नीपट जाने दो.. इस बारेमें भुमी बुआ खुद आपसे बात करेगी.. ओर आप जोभी नीर्णय लो.. सोच समजक लेना.. हमे कीसीकी परवाव नही करनी..
देवायत : (आस्चर्यसे देखते) मंजु अैसी क्या बात हे.. जो तुम अैसा केह रही हो..? अगर अैसा कुछ हेतो तुमभी हमारे साथ रहेना.. अब जोभी होगा तेरे सामने ही होगा.. मुजे तुमसे कुछभी नही छीपाना..
मंजुला : (हसते) देवु.. मुजे सबकुछ पता हे.. कुछ अैसे रीस्ते होते हे.. जो हमे गील्टी फील करनेको मजबुर करते हे.. जैसे हमारी बुआ.. पुनम.. ओर यहा तककी मेरी मम्मी भी.. आपके लीये बुआ बहेन ओर सास हे.. उनके साथ फीजीकल होनेसे आपको गील्टी फील होती हे.. लेकीन ये सभी मेरे लीये केवल अेक परी यातो अप्सराये हे..
अगर मानलो ये तीनोही आपसे रीस्तेमे कोइ ना होतीतो..? क्या आपको कभी उनके साथ फीजीकल होनेसे गील्टी फील होती..? नहीनां..? बस आप सीर्फ इतना दिमागमे रखो की आप अेक मर्द हे ओर हम सभी सीर्फ ओरते हे.. इनसे ज्यादा आपको सोचने की जरुरत नही हे.. हमारे लोकमे रीस्तोके कोइ मायने नही हे..
देवायत : मंजु.. बस मुजे अेकही जवाब चाहीये.. फीर मुजे तुमसे कुछ भी नही जानना..?
मंजुला : (होंठ चुमते धीरेसे) हां मेरे देवु.. आज आपको जोभी पुछना हो बीन्दास पुछलो.. फीर कभी कोइ सवाल मत करना.. बस अपना यही कार्य करते रहेना.. देवु आपको अभीभी बहुत सी ओरते ओर लडकीया मीलेगी उन सभीकी गोद भरनी हे.. जीनको अपने पतीसे बच्चे नही हो रहे.. बस आपका कामही यही हे.. पुछो.. क्या पुछना चाहते हो..?
देवायत : (हसते) मंजु.. सीर्फ इतना बतादे.. हम सभी आपसी रीस्तेसे क्यु बंधे हे..? मतलब हमारे पर दादा फीर दादा फीर हमारे बापु ओर अब स्यंम हम.. तुम ओर हमारी पुनमभीतो मेरी बहेन हो.. भुमीका मेरी बुआ हे.. ओर तेरी मम्मी मेरी सास हे.. तो मे सबसे ज्यादा उन्हीकी ओर आकर्सीत होता हु.. जो मेरे आपसी रीस्तेमे होती हे.. कोइ खास वजह..?

मंजुला : (हसते होंठ चुमते) हंम.. देवु.. बस इतना जानलो.. आपके जीवनमे जीतनीभी ओरते या लडकी आइ हे.. यातो भवीस्यमे आने वाली हे.. वो कोइभी सामान्य ओरत नही होगी.. वो सभी यातो परीया होगी या फीर हमारे अप्सरा लोककी अप्सराये होगी.. ओर आप उन सबके राजाके अंस हो.. तो वहा कोइभी परीया या अप्सरा बहारके लोगसे सादी नही करती.. सब आपसी रीस्तोमेही सादी करते हे.. वहा हम सभी आपकी रानीया हे..
आप स्वयंम कामके अंस हो ओर मे स्वयंम रतीका अंस हु.. ओर सबकी जननी हु.. वास्वमे आप सभी मेरे ही संतान हो.. तो वो सबका आपकी ओर आकर्सीत होना ओर आपके साथ रीलेशनमे आना लाजमी हे.. उन सबको आपकोही संतुस्ट करना पडेगा.. ओर वो भी यहा धरतीपे सीर्फ आपके लीये ही जन्म लेकर आइ हे.. इसीलीये वो सभी अपके प्रती.. ओर आप उन सभीके प्रती आकर्सीत होते हो..
देवायत : (हसते) अगर हम सब तुम्हारी संतान हे तो तुम.. तुम अपने बेटेके साथ भी.. हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) हां.. लेकीन मत भुलो.. तुम सीर्फ उनका अंस हो.. तुम स्वयंम नही हो.., स्वयंतो मे हुं.. स्वंय तो वो राजा हे.. जो आने वाले वक्तमे हमारा पोता मेरी ही कोखसे जन्म लेकर आयेगा.. हमारे विजयकी संतान.. तबभी मुजे उनको अपनी कोखसे जन्म देना हे.. ओर आगे जाकर उनकी पत्नी भी होना हे..
इसीलीये तो मुजे यहासे जल्दीसे जाना पडेगा.. जानु.. मे कही नही जा रही.. मुजे हमारे ही बेटे विजयसे सादी करके स्वयंम मेरे स्वामीको जन्म देना हे.. फीर मे विजयको छोडकर उनसे सादी कर लुगी.. तब आप मुजे पहेचान लेनाकी ये मेरी मंजु हे.. इसीलीये हम सब आपसी रीस्तोसे बंधे हे..
देवायत : (हसते) मंजु.. तो फीर सृतीकी ओर आकर्सीत होकर उनको पसंद करता हु तो वोतो मेरी बहेन नही हे.., तो फीर मुजे उनकी ओर क्यु लगाव हो रहा हे..?
मंजुला : (सरमाते हसते) लगता हे जानु आज मुजे आपको सब सचाइ बता देनी चाहीये..
देवायत : (हसते) हंम.. मंजु अब तुमसे तो कुछ छीपा नही हे.. बतादे..

मंजुला : (हसते अपनी कमर हीलाते धीरेसे चोदते) देवु.. क्या मस्त पोजीसनमे आप सब पुछ रहे हे.. आजतो मजा आजायेगा.. आप भी धीरे धीरे मुजे चोदीये.. मे आपको सब बताती हु.. हम चुदाइ करते बाते करते हे..
देवायत : (कमर हीलाते चोदते) हंम.. अब बता.. क्या मस्त चुत हे तेरी.. जी चाहता हे तुजे सुबह तक अैसेही चोदता रहु..
मंजुला : (होंठ चुमते) तो मना कीसने कीया हे.. मे मेरे स्वामीके लीये इसीलीये तो यहा आइ हु.. सुनो.. जानु.. असलमे सृती भी आपकी बहेन हे.. भुमी बुआको कोइ संतान नही हो रहीथी.. तब बाबाके आदेशके बाद भुमी बुआने हमारे बापुसे राखीके तोहफेके बदलेमे अपनी गोद भरनेको कहा.. ओर हमारे बापुको मजबुरन भुमी बुआको प्रेगनेन्ट करना पडा.. बस सृती इन्हीकी संतान हे.. ओर ये बात आजतक कीसीको नही पता.. इनके बारेमे हमारे बापु ओर सीर्फ भुमी बुआही जानते हे..
देवायत : (हसते) क्या..? भुमी बुआ बापुसे फीजीकल हुइ होगी..? हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) हां.. जब अपनी खुदकी बहेन विमला यानीकी आपके मां से वो सादी कर सकते हे.. तो भुमी बुआ तो मुह बोली बहेन हे.. ओर सीर्फ इतना ही नही.. जब नरेश अंकल गुजर गये तब दोनोने सादीभी करली थी.. ओर उनके घरके खर्चे से लेकर सृतीकी पुरी पढाइ तक आपके बापुने ही उनका खयाल रखा हे.. जो अभी आप उनका खयाल रख रहे हो.. हें..हें..हें.. समजे कुछ..? की अभी नही समजे..? हें..हें..हें..
देवायत : (सरमाते हसते) हंम.. मतलब तुजे सब मालुम हे.. क्या तुजे हमारे बारेमे जानकर दुख नही हुआ..?
मंजुला : (हसते होंठ चुमते) नही जानु.. मत भुलो हमारी भुमी बुआ भी वोही हे.. पीछले जन्मकी माधवी.. तो उसेभी मेरी मम्मीकी तराह अपके संपर्कमे आनाही था.. हें..हें..हें..
देवायत : हंम.. बापुभीनां.. क्या वो भी मेरी तराह ठरकी थे..? मंजु इतनी कीतनी बहेन हे मेरी..?
मंजुला : (हसते कमर हीलाते) हंम.. अेक ओर भी हे.. जो समयके रेहेते वो भी आपके नीचे लेट जायेगी.. वोभी तो आपको पसंद करती हे.. ओर हमारे पोतेकी चहीती रानीको वोही जन्म देगी.. वो आपहीकी लडकी होगी..
देवायत : (आस्चर्यसे हसते देखते) अच्छा..? तो क्या हमारा पोताभी अपनी बुआसे सादी करेगा..? वो कौन हे..? क्या मुजे उनका नाम बता सकती हो..?
मंजुला : (हसते चोदते) हां आज आपको सबकुछ बता दुगी.. हें..हें..हें.. अरे आप भी चोदीयेनां.. बहुत मजा आ रहा हे.. आप क्या मस्त चोदते हो.. इसीलीये तो सभी कमीनी आपके नीचे लेटनेको तैयार होजाती हे.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते थोडी जोरोसे कमर हीलाते) हां.. बता अब.. कोन हे वो.. हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) हमं.. अब ठीक हे.. क्या मस्त चोदते हो आप.. सुनीये.. वो हे.. हमारी लता.. भानुभाइ ओर लता हमारे बापुकी ही संतान हे.. देवु.. इसी बीच सुख ओर दुख दोनोही आते रहेगे.. तब आप वीचलीत मत होना.. क्युकी हम सबका जीवन कोइ ओरही चला रहा हे.. कीसकी अेन्ट्री होगी ओर कीसकी अेक्जीट होगी.. वो सब वोही तैय करेगे.. तभी तो मुजे धिरेनका जानकर दुख नही होता.. बस अभी मे सीर्फ इतनाही कहुगी.. वरना आप फीरसे दुखी होजायेगे.. जानु.. कल साम आपकी ओर सृतीकी सगाइ हे..
ओर हां.. वो बेचारी नीशाका कामभी करदेना.. वोभी लाइनमे खडी हे.. वैसे वंदनाभी आपकी बीवी हे.. अब उनकाभी नंबर लेलो.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) हंम.. तुम बहुत कुछ जानती हो.. ओर सृतीका पता हे मुजे.. तुमने ही तो कहाथा.. मेने हम दोनोकी अंगुठी ओर चांदीका श्रीफल लेलीया हे.. मंजु वोभी तेरी तराह मुजे चाहती थी.. हम दोनोने वहा ओरल सेक्स कीया.. मंजु सीर्फ सृती जानती हे.. ओर अभी सीर्फ तुजे बता रहा हु.. मे दोनो कपलको गौवा हनीमुनके लीये भेज रहा हु.. मेने छे दिनका हनीमुन टुर पेकेज लेलीया हे..
मंजुला : (हसते होंठ चुमते) हंम.. चलो अच्छा हुआ.. कमसे कम पुनोतो कुछ धिरेनकी नजदीक आयेगी.. जानु.. कभी मुजेतो हनीमुनपे नही लेगये.. हें..हें..हें.. ओर अपनी दोनो छोटी बहेनको भेज रहे हो.. क्या इस बडी बहेनको नही लेजाओगे..? हें..हे..हें..
देवायत : (हसते कमर हिलाते चोदते) हंम.. तुजे चंदा ओर सृती तीनोको लेजाउगा.. लेकीन मंजु.. पुनम ओर लतासे छुपकर तुम उनका पेकींग करलेना परसो सामकी चारोकी टीकीट हे.. हम उन चारोको सरप्राइज देगे..
मंजुला : (हसते) हंम.. चलो अब कोइ बात नही अभीतो मुजे चोदो.. बहुत मजा आ रहा हे.. क्या मस्त चोदते हो आप..
इसके बाद दोनोके बीच धीरे धीरे करते घमासान चुदाइ होने लगी.. मंजुके अेक बार जडनेके बाद देवायतने मंजुको पीठके बल लीटा दीया ओर खुद उनके उपर चडते हाथके बल उचा होकर मंजुको जोरोसे चोदने लगा.. जबभी मंजु जडती देवायतको कसके बाहोमे भीचते लीपलोक कर लेती.. दोनोही सुबह चार बजेतक बीना लंड नीकाले चुदाइ करते रहे.. अबतक देवायत मंजुकी चुतको चार बार अपने पानीसे भर चुकाथा..
इधर नीर्मला ओर भुमीकाभी अेक दुसरेकी चुतमे उंगलीया करते ठंडी होकर सो गइथी.. तो देवायत मंजुभी अपने आपको बाथरुममे सही करके अेक दुसरेको बाहोमे भरकर सो गये.. तो आज गांवमेभी चारु ओर नीशा अच्छी तराह तैयार हुइथी.. तो रमेशनेभी घर जाकर चारुको चोदलीया.. लेकीन चारु हमेसाकी तराह प्यासी रेह गइ.. तो रमेशने उंगलीसे उनको ठंडी करदीया तो वही नीशाका भी वही हाल हुआ..
सुधीरने अभी अंदर डाला नही डाला.. तब नीशाकी चुतको छुतेही लंडने उल्टी करदी.. तब नीशा सहम गइ.. लेकीन कुछभी बोली नही ओर वो धीरेसे लेटर छुपाते लेकर बाथरुममे चली गइ.. ओर पहेले कमोडपे बेठकर उंगलीसे अपने आपको सांत करने लगी.. जब ठंडी होगइ तब देवायतने उसी चीठीमे नीचेकी खाली जगाहपे अपना जवाब लीखाथा.. जो वो धीरेसे लेटर नीकालकर पढने लगी..
प्रिय नीशाभाभी.. आपके बारेमे जानकर बहुतही दुख हुआ.. मुजे पता हे सुधीर अपनी कुछ गलत आदतोकी वजहसे आपको सारीरीक सुख देनेमे सक्षम नही हे.. जब वो खुद दुसरे मर्दके साथ अपको सबंध बनानेको केह रहाहे तो मुजे क्या अेतराज हो सकता हे..? मे आपको नीरास नही करुगा आप दुसरे गलत विचार करनेको त्याग दीजीये..
मेरातो कामही यही हे.. खैर वो मे आपको नही बता सकता.. लेकीन आपजोभी चाहती हे वो सब मे देनेके लीये तैयार हु.. मे सुधीरको सुरुसेही जानता हु.. उनके सामनेभी हम मीलेगे तबभी वो कोइ अेतराज नही करेगा.. ओर ये हम दोनोके लीये फायदेमंद भी हे.. क्युकी इनके कारण आपको संतान सुखभी मीलेगा.. मे आपको सबकुछ देनेको तैयार हु..
ओर वैसे देखा जायेतो जबसे मेने आपको सादीमे देखा तबसेही मुजे सुधीरसे ज्वेलेसी होने लगीथी.. मे तबसेही आपको पसंद करता हु.. ओर आपकी चीठी पढतेही मेने आपको अपना लीयाथा.. आजसे ये देवायत आपका होगया.. बस अेक बिनंती हे.. हम चारुभाभी ओर रश्मीभाभीके अलावा सबसे हमारे सबंध गुप्त रखेगे ताकी आपको कोइ प्रोबलेम ना हो.. हम सादीके बाद बहुतही जल्द मीलेगे.. आइ लव यु.. सो मच.. सीर्फ आपका प्रिय देवायत..
चीठी पढतेही नीशाकी खुसीका कोइ ठीकाना नही रहा.. खुसीके मारे उनकी आंखोसे आंसु बहेने लगे.. ओर आंसुओके बावजुद भी वो हसने लगी.. ओर बार बार चीठीको चुमने लगी.. नीशा फोरन खडी होगइ ओर चीठीको अपने सीनेसे लगाते बाथरुममे कुदते हुअे नाचने लगी.. आज उनकी सब मुराद देवायतने पुरी करदीथी.. ओर उसने जटसे चीठीको फोल्ड करके अपने गाउनमे हाथ डालकर अपने उरोजोकी क्लेवजमे छुपालीया..
ओर मुस्कुराते बाथरुमसे बहार आगइ.. तबतक सुधीर नींदकी आगोसमे चला गयाथा.. तो नीशाने धीरेसे अपनी अलमारी खोलकर चीठी नीकालकर अेक सारीकी गडीमे छुपालीया.. जहा सुधीरकी नजरभी ना पडे.. फीर नीशा खुस होते सुधीरको देवायत समजकर उनकी बगलमे आकर उनको बाहोमे भरके सोगइ.. तो रश्मीके घरधी वंदना देर रात तक सबको मंहेन्दी लगाती रही.. पहेले पुनम फीर लताको महेन्दी लगाकर सबको मंहेन्दी लगादी.. फीर अेक अेक करते सब सोगइ....
कन्टीन्यु
अध्याय - ११४
कहातो चंदाने सर्मसार होते हसते रमाको उनकी पीठमे अेक मुका मारदीया.. फीर दोनोही सबसे थोडी दुर जाते सरमाते हसते हुअे धीरेसे अेक दुसरेकी सुहागरातके बारेमे बाते करने लगी.. तो सृतीभी भुमीकासे बात करके सबके पास आकर खडी होगइ.. तब मंजुने देवायतकोभी बुलालीया उनके साथ मंजुभी जा रहीथी.. ओर सभी लोग पैडल चलते रातके अंधेरेमे साथ चलते बाते करते रश्मीके घरकी ओर जाने लगे....अब आगे
सभी लेडीस आपसमे बाते करते चल रहीथी तब लता धीमी आवाजमे नीलमको अबभी धिरेनसे दुर रहेनेके लीये समजा रही थी.. तब मंजु सृती ओर देवायत बाते करते सबके पीछे चल रहेथे.. फीर मंजुने सृतीको पुछही लीयाकी दोनोने वहा क्या कीया.. सृतीने धीरेसे बाते करते मंजुको सब बता दीया की दोनोने सीर्फ ओरल सेक्सही कीया हे.. बाकी सबवो अपनी सुहागरातमे करेगे.. अैसे ही सब रश्मीके घर आगये..
अंदर आतेही रश्मीने पहेले सरपंचका जायजा लीया.. ओर उसे टीफीन नीकालकर खीलाने लगी.. तभी सब लेडीस ओर देवायतभी अंदर चले गये तो देवायतको देखतेही राघवका दीमाग खराब होगया.. अर उसने खानेको ठुकरा दीया.. तब रश्मीने उनको अेक बार फीर खरी खोटी सुनाइ ओर टीफीन लेकर कीचनमे रख दीया.. फीर सभी लोग होलमे सोफेपे बेठ गये ओर आपसमे बाते करती गप्पे लगाने लगे..
आज पुनमने रश्मीको बता दीयाथा की वो उनकी सादीसे पहेले अेक बार अपने भाइको मीलना चाहती हे.. तो रश्मीने उसे अपने रुममेही मीलनेको केह दीयाथा.. तभी रश्मीने घर आतेही इसारोसे पुनमको अपना रुम दीखा दीया.. तो पुनम मंजुको लेकर रुममे चली गइ.. ओर अंदर जातेही सरमाते देवायतको सादीसे पहेले आखरी बार मीलनेके लीये बुलानेको ओर उनको साथ रहेनेको कहा.. ताकी कीसीको सक नाहो.. तब मंजु मुस्कुराते वापस बहार आगइ ओर आतेही कहा..
मंजुला : (हसते) देवु.. वो आपने कागजात दीयेथे.. उनके बारेमे पुनोको समजादो.. ओर उसे आपसे कुछ जरुरी बातभी करनी हे.. तो आइअे मेरे साथ.. (लेडीसको) पुनोतो सादी करके चली जायेगी तो बहुतही जरुरी बात करनी हे.. आप सब बैठना हम अभी आते हे..
रश्मी : (हसते) अरे आरामसे जाइअे.. तबतक मे इन सबको बढीयासी चाइ पीलाती हु.. हें..हें..हें..
वंदना : (हसते) हां भाभी.. हम सब इधरही बैठी हे.. हमारी फीकर मत करो.. आरामसे बाते करके आओ..
कहातो मंजु वंदनाकी ओर कातील स्माइल करते देवायतको लेकर रश्मीके रुममे चली गइ.. ओर अंदर जातेही मंजुने धीरेसे दरवाजा बंध करलीया.. ओर धीरेसे लोक करलीया ताकी कोइ भुलसेभी अंदर ना आजाये.. जैसेही देवायत अंदर गया तो पुनम रश्मीके बेडपे सरमाते बैठी थी.. अब इसे मंजुका कोइ डर नही था.. जैसेही देवायत आया तो वो जटसे खडी होगइ ओर दोडकर देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर आंसु बहाने लगी..

पुनम : (आंसु बहाते) भाइ.. आइ लव यु.. आइ लव यु सोमच.. बस मे सादीसे पहेले आपको आखरी बार मीलना चाहती थी..
देवायत : (बाहोमे कसते) बस.. बस.. अब आंसु मत बहा.. क्या मुजे कमजोर करना चाहती हे..? हंम..? ओर आखरी बार क्यु..? हंम.. तुजेतो मे जींदगीभर मीलता रहुगा.. तुम मेरी मासुका ओर बीवी हमेसा रहेगी..
पुनम : (होंठ चुमते) हां.. भाइ.. आप कमजोर मत होना.. वरना मे टुट जाउगी.. जींदगीने मुजे कीस मोडपे लाके खडी करदी हे.. भाइ मुजे वहा मीलनेतो आओगेनां..?
मंजुला : (हसते सरको सहेलाते) हां मेरी बच्ची.. मे इनको वहा भेजती रहुगी.. तु फीकर मत कर.. तुजेही तो मेरे देवुको सम्हालना हे.. ओर सुन.. सादीके बाद ये १५ बीस दीनमेही तुजे प्रेगनेन्टकी बात करनी हे.. उनमे देर मत करना.. बस ज्यादासे ज्यादा २० दिन..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. अगर धिरेनने बच्चेके लीये मना करदीया तो..? मे क्या करुगी..?
मंजुला : (गंभीर होकर धीरेसे) नही पुनो.. वो मना करेतो उसे तुम मना लेना.. केह देनाकी मे बच्चा नही गीराउगी.. चाहे जोभी परीणाम आये.. मे सम्हाल लुगी.. मुजसे फोनपे बात करवाना.. तुजे वही डटके रहेना हे.. भलेही वो नाराज होजाये.. तुम तो सब जानती हे..
पुनम : (हां मे गरदन हीलाते) हां भाभी.. मुजे इस बच्चीको जन्म देनाही हे.. वरना बाबाको क्या मुह दीखाउगी.. भाइ.. मे अब आपको वही मीलुगी.. ओर आपसे फोनपे बात करती रहुगी..
मंजुला : (धीरेसे हसते) पुनो मे बहार जाती हु.. अब वक्त बरबाद मत करो.. दोनो अच्छी तराह मीललो..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) नही भाभी.. आपभी इधरही रहीये.. अब आपसे कैसा परदा.. आज जोभी करना आपके सामनेही करना हे.. अगर आप बहार गइतो कोइ हम दोनो पे सक कर सकती हे.. इसीलीये तो आपको साथ मे रखा हे.. आज हम तीनोही अेक साथ मीलेगे..
मंजुला : (सरमाते हसते) नही पुनो.. कल तुम्हारी सादी हेतो तुमही इनको अच्छेसे मीललो.. वरना तेरे साथ मेरी भी हालत खराब ना करदे.. देवु आज बहुत सम्हालके कल इनकी सादी हे.. तो धीरे करना.. हम घर जाकर आरामसे कर लेगे.. आज पुनोको अच्छेसे मीललो..
देवायत : (होंठ चुमते) हां पुनो मे भी सादीसे पहेले तुजे अेक बार मीलना चाहता था चल आजा.. आज मेरी बहेनको खुस कर दुगा.. फीर पता नही हमारे मीलनेकी कब बारी आयेगी..
पुनम : (सरमाते हसते) भाइ.. मेने धिरेनसे उनका सब सेड्युल जान लीया हे.. हम मेरे घर आरामसे मील सकते हे.. में आपको फोन करके बुला लुगी.. या भाभीसे बात करलुगी.. अब चलीये.. देर मत कीजीये..

कहेते पुनम देवायतके होठोको चुमने लगी.. दोनोही पागलोकी तराह अेक दुसरेके होठ चुमते रहे.. तभी देवायत पुनमको अपनी गोदमे उठाते बेडकी ओर चला गया ओर पुनमको बेडपे धीरेसे पीठके बल सुला दीया ओर अपनी पेन्टको नीचे करते अपना लंड बहार नीकाल दीया तो पुनम सर्मसार होगइ.. ओर वोभी सरमाते अपना पायजामा ढीला करते नीचे घुटनो तक कर देती हे.. तब देवायत उनके उपर चड गया..
तब पुनमने उसे कसके अपनी बाहोमे भीच लीया.. तब देवायतका लंड जटके मारते पुनमकी चुतपे ठोकर मारते अपने बीलका रास्ता ढुंढने लगा.. दोनोही अेक दुसरेके होठ चुमते मुहको थोडा खोल देते हे ओर अेक दुसरेके मुहमे जीभ डालते जीभको चुसने लगते हे.. तब पुनमने अेक हाथ नीचे लेजाते लंडको पकडके उनके बीलका रास्ता दीखा दीया.. ओर देवायतने धीरेसे अपनी कमर दबाते पुनमकी चुतमे पुस करदीया..

तो लंड पुनमकी चुतमे घुस गया.. तो पुनम आधी आंख चडाते मदहोसी मे छा गइ.. ओर सातवे आसमानपे चली गइ.. दोनोही भुल गयेकी इनके साथ मंजुभी हे.. तो मंजुभी दोनोको देखतेही उतेजीत होगइ ओर वोभी पुनमके सरके पास बेडके कीनारे बैठ गइ.. ओर पुनमके सरको सहेलाते अेक हाथसे अपनी सारीको कमर तक उची करते अपनी चुतको सहेलाने लगी.. ओर देवायत होलेसे कमर हीलाते धीरे धीरे पुनमको चोदने लगा..

आज देवायतभी मंजुके सामनेही अपनी बहेनको पहेली बार चोद रहा था.. दोनोही उतेजनाकी वजहसे कामुक्ताके नसे मे चुदाइमे मसगुल होगये.. तो मंजुभी अपनी चुतमे उंगली डालकर आंख बंध करके जोरोसे हीलाने लगी.. तभी पुनमने देवायतको अपनी बाहोमे जोरोसे भीच लीया ओर जोरोसे लीपलोकर करते अपनी कमरको जटके देने लगी.. ओर जडते देवायतके लंडको चुतके अंदर ही भीगोने लगी..
पुनम : (लडखडाती आवाजमे) बस.. बस.. भाइ.. अैसेही मुजे चोदते रहीयेगा.. मे आपके बीना नही रहुगी..
देवायत : (चुदाइके नसेमे धीरेसे) हंम.. हा.. हा... पुनो.. तुजे वहा आकर भी चोदता रहुगा.. भलेही मेरी जींदगीमे कीतनीभी ओरत आये.. लेकीन तुम मेरे लीये मेरी मंजुकी तराह स्पेसीयल हो.. आइ लव यु..
अंदर भाइ बहेनका प्यार चुदाइमे तबदील होते तांडव मचा रहाथा.. तब बहारकी ओर सृती लता नीलम वंदना सभी अेक दुसरेकी मस्तीया कर रही थी.. सब सृतीको देवायतका नाम लेकर छेड रहीथी.. तब रश्मीभी चाइ नास्ता बनाकर बहार लेकर आ गइ.. ओर वोभी सबके साथ सृतीकी मस्मी करनेमे सामील होगइ.. तब सृती सरर्मसार होते हसती रही.. ओर वंदनाको मुके मारने लगी.. तो नीलमकोभी अब यहा मजा आने लगा ओर वोभी सबके साथ सामील होगइ..
तबतक अंदर देवायतने धमाकेदार चुदाइ करके पुनमको दो बार जडा दीयाथा.. ओर अभी हाथके बल उचा होते पुनमको जोरोसे चोद रहाथा.. तब मंजुभी अपनी चुतमे जोरोसे उंगलो हीलाने लगी तभी उनकी चुतसे पानीका फवारा नीकल गया तो वो जटसे अंदरके बाथरुममे भाग गइ.. ओर अपनी चुतको साफ करते हाथ मुह धोते कंपलीट होने लगी.. तब तक देवायत ओर पुनमके बीच घमासान चुदाइ चल रहीथी..

तब अचानक देवायत पुनमके उपर लेटकर छागया.. ओर पुनमके गलेमे मुह डालते उसे दांत गडाके चुमने लगा तो पुनमनेभी देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया तभी पुनमको अपनी बच्चेदानीपे गरम गरम महेसुस होने लगा ओर वो उतेजनासे कांपने लगी ओर देवायतके साथ जडने लगी.. दोनोही सांत हो गये तब पुनम देवायतके होंठ चुमते उनकी पीठ सहेलाती रही.. तब मंजुभी बाथरुमसे बहार आगइ..

मंजुला : (बेडपे बेठकर पुनमके सरको सहेलाते) दोनोका होगया बच्ची..? ओर करना हे..? तो करवाले.. फीर तेरा भाइ तेरे हाथोमे १० १५ दिनोके बाद आयुगा..
पुनम : (सरमाते हसते धीरेसे) नही भाभी.. भाइ अेकही बारमे हमको थका देते हे.. अगर आपको करवाना हे तो करवालो.. मे यही बैठी हु..
मंजुला : नही पुनो.. हमतो घर जाही रहे हे.. तो हम दोनो वहा आरामसे करेगे.. चलो दोनो बाथरुममे जाकर ठीक होजाओ.. फीर हमे जानभी हे..
कहातो देवु पुनमके उपरसे उतर गया तो लंड चुतसे फच.. आवाज करते बहार नीकल गया.. तो पुनमकी चुतसे दोनोका कामरस चुतसे बहार बहेने लगा.. तब पुनमने जटसे अपने नीकरसे चुतको पोछ लीया.. तभी देवायतने पुनमको अपनी गोदमे उठालीया ओर बाथरुमकी ओर चलने लगा.. तो पुनम मंजुके सामने देखकर हसने लगी.. ओर दोनो अंदर चले गये तो देवायतने पुनमको नीचे खडा कर दीया..
तभी पुनम अेक बार फीरसे देवायतकी बाहोमे समा गइ ओर देवायतको पागलोकी तराह चहेरेको चुमने लगी.. तो देवायतने फीरसे लंडको बहार नीकाल लीया.. ओर पुनम कुछ कहे इनसे पहेलेही पुनमकी अेक टांगको उची करते अपने हाथोमे फसा लीया ओर खडे खडेही लंडको पुनमकी चुतमे घुसा दीया.. तो पुनमने सर्मसार होते जोरोसे देवायतको बाहोमे पकड लीया.. ओर देवायतभी जोरोसे खडे खडे पुनमको चोदने लगा..

पुनम : (लडखडाती आवाजमे) भाइ.. बस.. बस.. ओर नही.. धीरेसे.. बस.. आप अेक बार सुरु होजाते हो तो फीर हमे छोडतेही नही.. बस.. हमे चोदतेही रहेते हो.. आपकी यही चोदनेकी अदा मे मीस करुगी.. आप कीतना मस्त चोदते हो.. बस मुजे वहा आकर अैसेही चोदते रहीयेगा..
देवायत : (धीरेसे होंठ चुमते) पुनो.. मेभी तो तेरे बगैर नही रेह सकता.. देखना तुजे वहा आकर चोद लुगा.. क्या मस्त माल दीखती हे तु.. वाकइ तु मेरी बीवी हे.. जी चाहता हे तुजे चोदता ही रहु..
पुनम : (चुदवाते) भाइ.. अब उस वंदनाकी बारीभी लेलो.. वो बीलकुल तैयार हे.. वो आपसे अपने प्यारका इजहार करना चाहती हे.. आप उसे सहेरमे लेजाओ तब ही उनका काम तमाम करदो.. वो आपको मना नही करेगी.. वो बस आपके प्यारका इजहार करनेका इन्तजार कर रही हे.. आप उसेभी बीवी बनाके चोदलो..
देवायत : (धीरेसे चोदते) पुनो तुजेभी हमारे साथमे चलना हे.. मे तुम दोनोको अेक साथ चोदना चाहता हु..
पुनम : आइ... भाइ मे गइ.. ओर जोरसे चोदो.. भाइ.. हमे मेरे घरमे बहुत मोके मीलेगे.. मे वंदनाको वही बुला लुगी.. आप आजाना.. हम तीनोही मेरे घर खुब मजे करेगे..
कहातो देवायत पुनमको जोरोसे चोदने लगा.. तब कुछही देरमे दोनो अेक दुसरेको जोरोसे बाहोमे भीच लेते हे ओर अपने होंठ लीपलोक करते अेक बार फीर दोनो साथमे जड गये.. ओर देवायतने पुनमकी चुतको अपने गरम पानीसे भरके हरी भरी करदी.. फीर दोनोही अपने लंड चुतको साफ करके फ्रेस होगये.. ओर अपना हुलीया ओर कपडे सही करके बहार आगये.. तब पुनम मंजुकी ओर देखते सरमाकर हसने लगी..
मंजुला : (हसते धीरेसे) पुनो.. क्या अंदरभी तेरी कुटाइ होगइ..? हें..हें..हें.. मुजे पता था ये दो बार कीये बीना मानेगे नही.. हें..हें..हें..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) हां भाभी.. लेकीन आज भाइने मजाभी बहुत दीया.. अब चलीये बहार..
फीर तीनोही बहार आगये तब सभी लेडीस चाइ नास्ता कर रही थी.. वंदना रश्मीके अलावा कीसीको पताभी नही थाकी अंदर दोनो भाइ बहेन चुदाइ करके आये हे.. तो वंदना देवायतको चोर नजरसे देखते सरमा रही थी.. तीनोभी सबके साथ चाइ नास्ता करने बैठ गये.. तभी सबकी नजर बचाते जैसेही वंदनासे आंख मीली तो देवायतने हसते हुअे वंदनाको आंख मारदी.. तो वंदनाका मुह खुलाही रेह गया.. वो सोक्ट होकर सर्मसार होगइ.. फीर मुहको दुसरी ओर करते सर्मसार होते हसने लगी..
सबने चाइ नास्ता करलीया तो देवायत मंजु नीकलने लगे.. तो रश्मी ओर सृती उसे बहार तक छोडने आ गइ.. तो बहार आतेही दोनो देवायत ओर मंजुको गले मीलने लगी.. तब देवायतको गले मीलते रश्मी ओर सृतीने देवायतके होठ चुमलीये तो मंजु हसने लगी.. फीर दोनो नीकल गये ओर रश्मी सृती वापस अंदर आगइ.. ओर सभी दरवाजे लोकर करदीये.. तो दुसरी ओर देवायत ओर मंजु अेक दुसरेका हाथ पकडके हवेलीकी ओर बाते करते जाने लगे..
देवायत : (हसते) मंजु.. तुमने पुनमको कहाकी तुमतो सब जानती हो.. तो क्या मुजे ये सब मालुम नही होगा..? तुम ओर पुनम बहुत कुछ जानती हो.. मुजे कब अपनी पहेचान करवाओगी..?
मंजुला : (हसते) हंम.. देवु.. सोचती हुकी आपको आज ही मेरी पहेचान करवादु.. ताकी आपको बार बार मुजसे कुछ पुछना ना पडे.. आज मे आपको हमारे संभोगके माध्यमसे कुछ शक्तिया दुगी.. (हसते) क्या आपको अपनी बहेनको चोदनेमे इतना मजा आता हेकी उसे दो बार चोद लीया..? मेभी तो आपकी बहेन हु.. आज मुजेभी पुनोकी तराह चोदलो.. मुजे आज संभोगके माध्यमसे आपको कुछ देना हे..
जब दोनो बाते करते हवेलीपे पहोचे तब सभी अपने रुममे जाकर सो रहे थे.. लखन धिरेनभी बेडपे लेटकर आपसमे बाते कर रहेथे.. तो राजीव दवाइकी वजहसे सो चुकाथा.. तो दुसरे रुममे नीर्मला ओर भुमीका दोनोही गाउन पहेनकर अेक दुसरेको बाहोमे भरके बाते भी कर रहीथी ओर बीच बीचमे अेक दुसरेके होंठ चुम रही थी.. रजीया दया ओर चंपाभी पुरे दिन कामकी थकानकी वजहसे सो चुकीथी.. तो देवायत मंजु अपने रुममे चले गये..
जब अंदर गये तो चंदा भी पुरे दिनकी दोड धामकी वजहसे गहेरी नींदमे सो चुकी थी.. तो देवायत मंजुको उसे जगाना ठीक नही लगा ओर दोनो नीचे गदा डालकर पुरे नंगे होकर सोने लगे.. आज मंजु खुद देवायतके उपर चड गइ.. उनकी कमरपे दोनो ओर पैर मोडके बैठ गइ.. रश्मीके घर पुनम ओर देवायतको चोदते हुअे देखकर कबसे अपनी चुतसे पानी बहा रहीथी.. वो घर आतेही जल्दसे जल्द देवायतका लंड अपनी चुतमे लेना चाहती थी..
तो कमरपे बैठतेही मंजुने देवायतका लंड पकडकर अपनी चुतपे रखदीया.. ओर धीरेसे बैठकर पुरा लंड अपनी चुतमे घुसा दीया.. फीर थोडी देर कामुक नजरोसे देवायतकी ओर देखते धीरे धीरे उपर नीचे होते देवायतको चोदने लगी.. तो देवायत भी उनके सामने बैठ गया.. ओर मंजुको अैसे चोदते हुअे देखकर हसता रहा.. आज मंजु उसे बहुतही कामी नजर आ रहीथी.. मानो कीसी रतीका अवतार हो..

तभी मंजु देवायतको चोदते हुअे अपनी आंख बंध करके बैठ गइ.. तो देवायतभी अपना होस गवा चुका.. आज मंजु देवायतको अपनी कुछ शक्तिओसे अवगत करवाना चाहती थी.. आज वो अपनी पहेचान देवायतसे करवाना चाहती थी.. ओर मंजु आंख बंध करते अपनी योनीके माध्यमसे देवायतके अंदर अपनी कुछ काम शकित स्थापीत करने लगी.. ओर देवायत स्वप्नकी दुनीयामे चला गया.. उसे बहुत कुछ ज्ञात होने लगा.. आज मंजु उसे कुछ अलगही लग रहीथी.. तभी मंजुने उनको अपना असली रुप दीखा दीया..

देवायतको मंजुके असली रुपके दर्शन हो गये.. तब देवायतको मंजुके अंदर अपनी जननी विमलाका आभास होने लगा.. उसे अैसा प्रतीत होने लगाकी वो अपनी मां विमलाको चोद रहा हे.. ओर वो यही सोचते थोडा वीचलीत होगया.. ओर उसने फोरन अपनी आंख खोलदी.. तब मंजु आंख बंध करके अपनी कमर हीला रही थी.. तो देवायत उनको आस्चर्यसे देखता ही रेह गया.. तभी मंजुने आंख खोलकर देवायतकी ओर वासना भरी नजरोसे देखा.. ओर मंजुने जोरोसे देवायतको अपनी बाहोमे भीच लीया..
मंजुला : (धीरेसे कामुक आवाजमे) देवु.. कुछ गलत मत सोचो.. बस मुजे जोरोसे चोदते रहो.. भरदो मेरी योनीको.. यही जीवन हे.. हमे कोइ रीस्ते नातेको अहेमीयत नही देनी.. हम सब प्रकृतीसे जीनेवाले लोग हे..
देवायत : (थोडा जीजकते अपनी कमर हीलाते) मंजु.. ये सब क्या हे..? कौन हो तुम..? क्या मेने देखा वही हो..? मुजे अपनी असली पहेचान करवाओ..
मंजुला : (लडखडाती आवाजमे) देवु.. अभी कुछ नही.. पहेले मुजे अेक बार अच्छेसे चोदकर ठंडी करदो.. इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. अभीतो मुजे जमकर चोदलो.. फीर आपको मे सब कुछ बताती हु..

फीर देवायतने कुछ भी गलत सोचना बंध करदीया.. ओर मंजुको बाहोमे भीचते उसे जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा.. तब कुछही देरमे मंजुने देवायतको कसके अपनी बाहोमे भीचते होंठोको लीपलोक करलीया.. ओर अपनी कमरको जटके मारते जडने लगी.. तो आज देवायतभी जल्दीसे छुट गया..
ओर वोभी अपनी कमरको जटके देते मंजुकी चुतको अपने गाढे पानीसे भरने लगा.. तो आज जडते हुअे देवायतको कुछ अलग ही महेसुस होने लगा.. ओर दोनो साथमे जडकर सांत होगये.. फीर दोनोने अेक दुसरेके होठोको छोड दिये.. ओर अैसेही अेक दुसरेको बाहोमे भीचते बैठे रहे तब..
मंजुला : (धीरेसे) देवु.. आपने देखा वोही सच हे.. इसीलीये मे आपको अपनी पहेचान नही करवा रहीथी.. मेही आपकी मां विमला हु.. मेही आपकी सास नीर्मला हु.. मेही आपकी बुआ भुमीका हु.. मेही हमारी पुनो हु.. ओर मेही मेरे देवुकी मंजु हु.. मे इन सबकी जननी हु.. आप सभी मेरे संतान हो..
देवायत : (हसते) हंम.. मंजु.. मे बहुत कुछ समज गया.. क्या हमने कुछ गलत तो नही कीया..? बस मुजे सीर्फ इतनाही जानना हे.. क्युकी आज बाबाने भी सृतीको बहुत कुछ बता दीया हे.. तो उनकी बातोसे लगा की भवीस्यमे मेरे कइ रीस्ते भी उजागर होने वाले हे.. वो सृतीको बार बार विचलीत ना होनेको समजा रहेथे..
मंजुला : (देवायतके गलेमे हाथ रखते आंखोमे देखते) हां.. जानु.. सायद.. कुछ अैसाही होगा.. बाबाने सृतीको आपका ओर भुमी बुआके रीस्तेके बारेमे कहा होगा.. आगे बहुत कुछ होगा.. लेकीन आप बीलकुल गील्टी फील मत करना.. क्युकी आपका कामही उन राजाकी तराह हे.. हम दोनो खुद उनकेही अंस हे.. कइ जन्मोमे मुजे आपको जन्म देकर आपसे ही सादी करनी पडती हे.. ओर ये सब होता रहेता हे..
देवायत : मंजु.. क्या तुजे मेरे ओर भुमी बुआके रीस्तेके बारेमे जानकर दुख नही हुआ..? ओर बाबा सृतीको भी सायद इसीलीये समजा रहेथे.. हमने आज तक कीसीको हमारे रीस्तोके बारेमे भनकभी नही लगने दी.. तो फीर बाबा सृतीको अैसा क्यु समजा रहेथे..?
मंजुला : (हसते होंठ चुमते) देवु.. बस अेक बार ये सादी नीपट जाने दो.. इस बारेमें भुमी बुआ खुद आपसे बात करेगी.. ओर आप जोभी नीर्णय लो.. सोच समजक लेना.. हमे कीसीकी परवाव नही करनी..
देवायत : (आस्चर्यसे देखते) मंजु अैसी क्या बात हे.. जो तुम अैसा केह रही हो..? अगर अैसा कुछ हेतो तुमभी हमारे साथ रहेना.. अब जोभी होगा तेरे सामने ही होगा.. मुजे तुमसे कुछभी नही छीपाना..
मंजुला : (हसते) देवु.. मुजे सबकुछ पता हे.. कुछ अैसे रीस्ते होते हे.. जो हमे गील्टी फील करनेको मजबुर करते हे.. जैसे हमारी बुआ.. पुनम.. ओर यहा तककी मेरी मम्मी भी.. आपके लीये बुआ बहेन ओर सास हे.. उनके साथ फीजीकल होनेसे आपको गील्टी फील होती हे.. लेकीन ये सभी मेरे लीये केवल अेक परी यातो अप्सराये हे..
अगर मानलो ये तीनोही आपसे रीस्तेमे कोइ ना होतीतो..? क्या आपको कभी उनके साथ फीजीकल होनेसे गील्टी फील होती..? नहीनां..? बस आप सीर्फ इतना दिमागमे रखो की आप अेक मर्द हे ओर हम सभी सीर्फ ओरते हे.. इनसे ज्यादा आपको सोचने की जरुरत नही हे.. हमारे लोकमे रीस्तोके कोइ मायने नही हे..
देवायत : मंजु.. बस मुजे अेकही जवाब चाहीये.. फीर मुजे तुमसे कुछ भी नही जानना..?
मंजुला : (होंठ चुमते धीरेसे) हां मेरे देवु.. आज आपको जोभी पुछना हो बीन्दास पुछलो.. फीर कभी कोइ सवाल मत करना.. बस अपना यही कार्य करते रहेना.. देवु आपको अभीभी बहुत सी ओरते ओर लडकीया मीलेगी उन सभीकी गोद भरनी हे.. जीनको अपने पतीसे बच्चे नही हो रहे.. बस आपका कामही यही हे.. पुछो.. क्या पुछना चाहते हो..?
देवायत : (हसते) मंजु.. सीर्फ इतना बतादे.. हम सभी आपसी रीस्तेसे क्यु बंधे हे..? मतलब हमारे पर दादा फीर दादा फीर हमारे बापु ओर अब स्यंम हम.. तुम ओर हमारी पुनमभीतो मेरी बहेन हो.. भुमीका मेरी बुआ हे.. ओर तेरी मम्मी मेरी सास हे.. तो मे सबसे ज्यादा उन्हीकी ओर आकर्सीत होता हु.. जो मेरे आपसी रीस्तेमे होती हे.. कोइ खास वजह..?

मंजुला : (हसते होंठ चुमते) हंम.. देवु.. बस इतना जानलो.. आपके जीवनमे जीतनीभी ओरते या लडकी आइ हे.. यातो भवीस्यमे आने वाली हे.. वो कोइभी सामान्य ओरत नही होगी.. वो सभी यातो परीया होगी या फीर हमारे अप्सरा लोककी अप्सराये होगी.. ओर आप उन सबके राजाके अंस हो.. तो वहा कोइभी परीया या अप्सरा बहारके लोगसे सादी नही करती.. सब आपसी रीस्तोमेही सादी करते हे.. वहा हम सभी आपकी रानीया हे..
आप स्वयंम कामके अंस हो ओर मे स्वयंम रतीका अंस हु.. ओर सबकी जननी हु.. वास्वमे आप सभी मेरे ही संतान हो.. तो वो सबका आपकी ओर आकर्सीत होना ओर आपके साथ रीलेशनमे आना लाजमी हे.. उन सबको आपकोही संतुस्ट करना पडेगा.. ओर वो भी यहा धरतीपे सीर्फ आपके लीये ही जन्म लेकर आइ हे.. इसीलीये वो सभी अपके प्रती.. ओर आप उन सभीके प्रती आकर्सीत होते हो..
देवायत : (हसते) अगर हम सब तुम्हारी संतान हे तो तुम.. तुम अपने बेटेके साथ भी.. हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) हां.. लेकीन मत भुलो.. तुम सीर्फ उनका अंस हो.. तुम स्वयंम नही हो.., स्वयंतो मे हुं.. स्वंय तो वो राजा हे.. जो आने वाले वक्तमे हमारा पोता मेरी ही कोखसे जन्म लेकर आयेगा.. हमारे विजयकी संतान.. तबभी मुजे उनको अपनी कोखसे जन्म देना हे.. ओर आगे जाकर उनकी पत्नी भी होना हे..
इसीलीये तो मुजे यहासे जल्दीसे जाना पडेगा.. जानु.. मे कही नही जा रही.. मुजे हमारे ही बेटे विजयसे सादी करके स्वयंम मेरे स्वामीको जन्म देना हे.. फीर मे विजयको छोडकर उनसे सादी कर लुगी.. तब आप मुजे पहेचान लेनाकी ये मेरी मंजु हे.. इसीलीये हम सब आपसी रीस्तोसे बंधे हे..
देवायत : (हसते) मंजु.. तो फीर सृतीकी ओर आकर्सीत होकर उनको पसंद करता हु तो वोतो मेरी बहेन नही हे.., तो फीर मुजे उनकी ओर क्यु लगाव हो रहा हे..?
मंजुला : (सरमाते हसते) लगता हे जानु आज मुजे आपको सब सचाइ बता देनी चाहीये..
देवायत : (हसते) हंम.. मंजु अब तुमसे तो कुछ छीपा नही हे.. बतादे..

मंजुला : (हसते अपनी कमर हीलाते धीरेसे चोदते) देवु.. क्या मस्त पोजीसनमे आप सब पुछ रहे हे.. आजतो मजा आजायेगा.. आप भी धीरे धीरे मुजे चोदीये.. मे आपको सब बताती हु.. हम चुदाइ करते बाते करते हे..
देवायत : (कमर हीलाते चोदते) हंम.. अब बता.. क्या मस्त चुत हे तेरी.. जी चाहता हे तुजे सुबह तक अैसेही चोदता रहु..
मंजुला : (होंठ चुमते) तो मना कीसने कीया हे.. मे मेरे स्वामीके लीये इसीलीये तो यहा आइ हु.. सुनो.. जानु.. असलमे सृती भी आपकी बहेन हे.. भुमी बुआको कोइ संतान नही हो रहीथी.. तब बाबाके आदेशके बाद भुमी बुआने हमारे बापुसे राखीके तोहफेके बदलेमे अपनी गोद भरनेको कहा.. ओर हमारे बापुको मजबुरन भुमी बुआको प्रेगनेन्ट करना पडा.. बस सृती इन्हीकी संतान हे.. ओर ये बात आजतक कीसीको नही पता.. इनके बारेमे हमारे बापु ओर सीर्फ भुमी बुआही जानते हे..
देवायत : (हसते) क्या..? भुमी बुआ बापुसे फीजीकल हुइ होगी..? हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) हां.. जब अपनी खुदकी बहेन विमला यानीकी आपके मां से वो सादी कर सकते हे.. तो भुमी बुआ तो मुह बोली बहेन हे.. ओर सीर्फ इतना ही नही.. जब नरेश अंकल गुजर गये तब दोनोने सादीभी करली थी.. ओर उनके घरके खर्चे से लेकर सृतीकी पुरी पढाइ तक आपके बापुने ही उनका खयाल रखा हे.. जो अभी आप उनका खयाल रख रहे हो.. हें..हें..हें.. समजे कुछ..? की अभी नही समजे..? हें..हें..हें..
देवायत : (सरमाते हसते) हंम.. मतलब तुजे सब मालुम हे.. क्या तुजे हमारे बारेमे जानकर दुख नही हुआ..?
मंजुला : (हसते होंठ चुमते) नही जानु.. मत भुलो हमारी भुमी बुआ भी वोही हे.. पीछले जन्मकी माधवी.. तो उसेभी मेरी मम्मीकी तराह अपके संपर्कमे आनाही था.. हें..हें..हें..
देवायत : हंम.. बापुभीनां.. क्या वो भी मेरी तराह ठरकी थे..? मंजु इतनी कीतनी बहेन हे मेरी..?
मंजुला : (हसते कमर हीलाते) हंम.. अेक ओर भी हे.. जो समयके रेहेते वो भी आपके नीचे लेट जायेगी.. वोभी तो आपको पसंद करती हे.. ओर हमारे पोतेकी चहीती रानीको वोही जन्म देगी.. वो आपहीकी लडकी होगी..
देवायत : (आस्चर्यसे हसते देखते) अच्छा..? तो क्या हमारा पोताभी अपनी बुआसे सादी करेगा..? वो कौन हे..? क्या मुजे उनका नाम बता सकती हो..?
मंजुला : (हसते चोदते) हां आज आपको सबकुछ बता दुगी.. हें..हें..हें.. अरे आप भी चोदीयेनां.. बहुत मजा आ रहा हे.. आप क्या मस्त चोदते हो.. इसीलीये तो सभी कमीनी आपके नीचे लेटनेको तैयार होजाती हे.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते थोडी जोरोसे कमर हीलाते) हां.. बता अब.. कोन हे वो.. हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) हमं.. अब ठीक हे.. क्या मस्त चोदते हो आप.. सुनीये.. वो हे.. हमारी लता.. भानुभाइ ओर लता हमारे बापुकी ही संतान हे.. देवु.. इसी बीच सुख ओर दुख दोनोही आते रहेगे.. तब आप वीचलीत मत होना.. क्युकी हम सबका जीवन कोइ ओरही चला रहा हे.. कीसकी अेन्ट्री होगी ओर कीसकी अेक्जीट होगी.. वो सब वोही तैय करेगे.. तभी तो मुजे धिरेनका जानकर दुख नही होता.. बस अभी मे सीर्फ इतनाही कहुगी.. वरना आप फीरसे दुखी होजायेगे.. जानु.. कल साम आपकी ओर सृतीकी सगाइ हे..
ओर हां.. वो बेचारी नीशाका कामभी करदेना.. वोभी लाइनमे खडी हे.. वैसे वंदनाभी आपकी बीवी हे.. अब उनकाभी नंबर लेलो.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) हंम.. तुम बहुत कुछ जानती हो.. ओर सृतीका पता हे मुजे.. तुमने ही तो कहाथा.. मेने हम दोनोकी अंगुठी ओर चांदीका श्रीफल लेलीया हे.. मंजु वोभी तेरी तराह मुजे चाहती थी.. हम दोनोने वहा ओरल सेक्स कीया.. मंजु सीर्फ सृती जानती हे.. ओर अभी सीर्फ तुजे बता रहा हु.. मे दोनो कपलको गौवा हनीमुनके लीये भेज रहा हु.. मेने छे दिनका हनीमुन टुर पेकेज लेलीया हे..
मंजुला : (हसते होंठ चुमते) हंम.. चलो अच्छा हुआ.. कमसे कम पुनोतो कुछ धिरेनकी नजदीक आयेगी.. जानु.. कभी मुजेतो हनीमुनपे नही लेगये.. हें..हें..हें.. ओर अपनी दोनो छोटी बहेनको भेज रहे हो.. क्या इस बडी बहेनको नही लेजाओगे..? हें..हे..हें..
देवायत : (हसते कमर हिलाते चोदते) हंम.. तुजे चंदा ओर सृती तीनोको लेजाउगा.. लेकीन मंजु.. पुनम ओर लतासे छुपकर तुम उनका पेकींग करलेना परसो सामकी चारोकी टीकीट हे.. हम उन चारोको सरप्राइज देगे..
मंजुला : (हसते) हंम.. चलो अब कोइ बात नही अभीतो मुजे चोदो.. बहुत मजा आ रहा हे.. क्या मस्त चोदते हो आप..
इसके बाद दोनोके बीच धीरे धीरे करते घमासान चुदाइ होने लगी.. मंजुके अेक बार जडनेके बाद देवायतने मंजुको पीठके बल लीटा दीया ओर खुद उनके उपर चडते हाथके बल उचा होकर मंजुको जोरोसे चोदने लगा.. जबभी मंजु जडती देवायतको कसके बाहोमे भीचते लीपलोक कर लेती.. दोनोही सुबह चार बजेतक बीना लंड नीकाले चुदाइ करते रहे.. अबतक देवायत मंजुकी चुतको चार बार अपने पानीसे भर चुकाथा..
इधर नीर्मला ओर भुमीकाभी अेक दुसरेकी चुतमे उंगलीया करते ठंडी होकर सो गइथी.. तो देवायत मंजुभी अपने आपको बाथरुममे सही करके अेक दुसरेको बाहोमे भरकर सो गये.. तो आज गांवमेभी चारु ओर नीशा अच्छी तराह तैयार हुइथी.. तो रमेशनेभी घर जाकर चारुको चोदलीया.. लेकीन चारु हमेसाकी तराह प्यासी रेह गइ.. तो रमेशने उंगलीसे उनको ठंडी करदीया तो वही नीशाका भी वही हाल हुआ..
सुधीरने अभी अंदर डाला नही डाला.. तब नीशाकी चुतको छुतेही लंडने उल्टी करदी.. तब नीशा सहम गइ.. लेकीन कुछभी बोली नही ओर वो धीरेसे लेटर छुपाते लेकर बाथरुममे चली गइ.. ओर पहेले कमोडपे बेठकर उंगलीसे अपने आपको सांत करने लगी.. जब ठंडी होगइ तब देवायतने उसी चीठीमे नीचेकी खाली जगाहपे अपना जवाब लीखाथा.. जो वो धीरेसे लेटर नीकालकर पढने लगी..
प्रिय नीशाभाभी.. आपके बारेमे जानकर बहुतही दुख हुआ.. मुजे पता हे सुधीर अपनी कुछ गलत आदतोकी वजहसे आपको सारीरीक सुख देनेमे सक्षम नही हे.. जब वो खुद दुसरे मर्दके साथ अपको सबंध बनानेको केह रहाहे तो मुजे क्या अेतराज हो सकता हे..? मे आपको नीरास नही करुगा आप दुसरे गलत विचार करनेको त्याग दीजीये..
मेरातो कामही यही हे.. खैर वो मे आपको नही बता सकता.. लेकीन आपजोभी चाहती हे वो सब मे देनेके लीये तैयार हु.. मे सुधीरको सुरुसेही जानता हु.. उनके सामनेभी हम मीलेगे तबभी वो कोइ अेतराज नही करेगा.. ओर ये हम दोनोके लीये फायदेमंद भी हे.. क्युकी इनके कारण आपको संतान सुखभी मीलेगा.. मे आपको सबकुछ देनेको तैयार हु..
ओर वैसे देखा जायेतो जबसे मेने आपको सादीमे देखा तबसेही मुजे सुधीरसे ज्वेलेसी होने लगीथी.. मे तबसेही आपको पसंद करता हु.. ओर आपकी चीठी पढतेही मेने आपको अपना लीयाथा.. आजसे ये देवायत आपका होगया.. बस अेक बिनंती हे.. हम चारुभाभी ओर रश्मीभाभीके अलावा सबसे हमारे सबंध गुप्त रखेगे ताकी आपको कोइ प्रोबलेम ना हो.. हम सादीके बाद बहुतही जल्द मीलेगे.. आइ लव यु.. सो मच.. सीर्फ आपका प्रिय देवायत..
चीठी पढतेही नीशाकी खुसीका कोइ ठीकाना नही रहा.. खुसीके मारे उनकी आंखोसे आंसु बहेने लगे.. ओर आंसुओके बावजुद भी वो हसने लगी.. ओर बार बार चीठीको चुमने लगी.. नीशा फोरन खडी होगइ ओर चीठीको अपने सीनेसे लगाते बाथरुममे कुदते हुअे नाचने लगी.. आज उनकी सब मुराद देवायतने पुरी करदीथी.. ओर उसने जटसे चीठीको फोल्ड करके अपने गाउनमे हाथ डालकर अपने उरोजोकी क्लेवजमे छुपालीया..
ओर मुस्कुराते बाथरुमसे बहार आगइ.. तबतक सुधीर नींदकी आगोसमे चला गयाथा.. तो नीशाने धीरेसे अपनी अलमारी खोलकर चीठी नीकालकर अेक सारीकी गडीमे छुपालीया.. जहा सुधीरकी नजरभी ना पडे.. फीर नीशा खुस होते सुधीरको देवायत समजकर उनकी बगलमे आकर उनको बाहोमे भरके सोगइ.. तो रश्मीके घरधी वंदना देर रात तक सबको मंहेन्दी लगाती रही.. पहेले पुनम फीर लताको महेन्दी लगाकर सबको मंहेन्दी लगादी.. फीर अेक अेक करते सब सोगइ....
कन्टीन्यु



























