Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 19 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती





my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १२७/१

तो गांवमे भानुभी खाना खा रहाथा तब रमाने उनसे कोइ बात नही की.. ओर चुपचाप वोभी खाना खाती रही.. वो भावनाको भी खोना नही चाहता था.. तो रमाको इस बारेमे इग्नोर करते भानुभी बीना कुछ बोले खाना खाकर वापस खेतोपे आगया.. ओर सीधा देवायतकी ओफीसमे जाकर आराम करने लगा.. ओर भावनाके साथ की हुइ हर चुदाइको याद करने लगा तब उनका हथीयार खडा होने लगा.. तो उसे कुछ याद आतेही अपना मुह धोकर गांवमे चला गया.. तब अ‍ेक गलीमे कीसीको ना देखकर अ‍ेक घरमे घुस गया....अब आगे

तब उस घरमे अ‍ेक ओरतके सीवा कोइ घरपे नही था.. पती कामपे गयाथा तो उनके दोनो बच्चेभी नोकरीपे गये थे.. ओर भानु दरवाजा बंध करके घरके अंदर चला गया.. तो उस ओरत भानुको देखतेही खुस होगइ.. ओर चुपचाप अपने कमरेमे चली गइ.. तब भानुभी घरका दरवाजा अच्छेसे बंध करके उस कमरेमे चला गया तो उस ओरत भानुसे लीपट गइ.. ओर भानुके चहेरेको कीसी पागलोकी तराह चुमने लगी.. मानो कीतने सालोसे वासनाकी आगमे जल रही हो.. फीर दोनोके होंठ मील गये..





भानु : (बुब्स मसलते होठ चुमते) बसंती.. आज तेरी याद आ गइ.. मेरी प्यास बुजादे.. कीतने दिनोके बाद हमे ये मोका मीला हे..

बसंती : (सरमाते सीनेपे सर रखते) भानुजी जुठ मत बोलो.. मे तो घरमे सारा दीन अकेली ही होती हु.. आप नही आते.. क्या अब इस बसंतीसे आपका मन भर गया हे..? आपने मुजसे वादा कीयाथा.. की आप मेरी प्यास बुजाते रहेगे.. तो हमसे कम हप्तेमे अ‍ेक बारतो आते..

भानु : (होंठ चुमते) नही बसंती.. अब कामभी थोडा बढ गया हे.. तो टाइमही नही मीलता.. चल कोइ आजाये इनसे पहेले हम अपना काम नीपटा लेते हे.. क्या गदराया माल हो गइ हे तु.. हें..हें..हें... ओर सादीमे भी तुम मस्त लग रही थी.. तुजेतो उसी दिन चोदनेका मन कर रहा था.. खेतोपे चली आती वहा कोइ नही था..

बसंती : (बेडपे पेटीकोट उचा करते लेटते) तो फीर इसारा करदेना चाहीयेनां.. मे वही चली आती.. सबतो सादीमे बीजी थे तो कीसीको भनकभी नही लगती.. ओर ये गदराया तन आपही की महेरबानी हे.. आपहीने मुजे चोद चोदके अ‍ैसा करदीया हे.. बाकी अब आपके भाइमे तो वो दम हे नही.. जबसे बीमार हुअ‍े हे तबसे आपही मुजे चोद रहे हे.. चलीये मेरीभी प्यास आज बुजा दीजीये.. कीतने दिनोके बाद आये हे आप..

तब भानुभी अपनी पेन्ट नीचे करते बेडपे चला जाता हे.. ओर बसंतीके पैरके बीच बैठते अपना लंड बसंतीकी चुतपे घीसने लगता हे.. तो बसंती आंख बंध करके सीसकारीया करने लगी ओर उनकी चुतसे पानीका रीसाव सुरु होगया.. तब भानुने लंडको थोडा चुतमे फसालीया ओर बसंतीपे जुकके लेट गया तो बसंतीने भानुको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर होने वाले कमलेके लीये तैयार होगइ..





तब भानुने अ‍ेकही जटकेमे पुरा लंड बंसंतीकी चुतमे उतार दीया.. ओर अपनी कमर हीलाते बसंतीको चोदने लगा तब बसंतीभी मदहोस होकर आधी आख चडाते भानुके साथ मजेसे चुदाइका आनंद लेने लगी.. तब कुछही देरमे भानु चोदनेकी स्पीड बढा देता हे.. ओर दोनोके बीच अ‍ेक धुआधार चुदाइ होने लगती हे..

तभी बसंती बानुको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लेती हे.. ओर कुछही देरमे भानु बसंतीकी चुतको अपने पानीसे भरते हरी भरी करदेता हे.. तो बसंती भी साथमे जडते सांत होजाती हे.. ओर भानुकी पीठको सहेलाने लगती हे..





बसंती : (पीठको सहेलाते) भानुजी.. मेतो दो पहोरको घरपे अकेली ही होती हु.. तो आजाते.. ओर अगर आपके खेतोपे कोइ नही होता तो मुजे बुला लेते.. मे वही आजाती.. अब आपके सीवा मेरी प्यास बुजायेगे कोन..? ओर आप चोदते भी मस्त हे.. आपके भाइने तो मुजे कभी अ‍ैसे नही चोदा.. अबतो हप्तेमे आपको अ‍ेक बार आनाही पडेगा.. मे आपसे केह देती हु..

भानु : (उपरसे हटते अपनी पेन्टको सही पहेनते) चल अब आउगा.. अबतो टाइमही टाइम मीलेगा.. क्युकी छोठे ठाकुर अब सहेरमे रहेने जाने वाले हे.. तो वहीका काम वोही सम्हाल लेगे तो मे फ्रि.. हें..हें..हें.. वैसे क्या कर रहा हे तेरा लडका.. देख.. आजकल उनका नाम वो डोक्टरके साथ आ रहा हे.. तुम खयाल रखना..

बसंती : (अपनी चुतको साफ करते) भानुजी अब वो जवान हो गया हे.. ओर मेरी लडकीभी जवान हो चुकी हे.. ओर दोनोही सादीके लीये मना कर रहे हे.. अब आपही ठाकुरसाहबको कहेके उनको मनवा लीजीये.. कबतक सादी नही करेगे..? आजकल मेरी लडकीके लक्षणभी मुजे ढीक नही लग रहे.. वोभी कीसी ओरतकी तराह गदराइ हो गइ हे.. लगताहे उनकाभी कीसीके साथ टाका भीडा हुआ लगता हे..

भानु : (हसते) तुम उनका खयाल रखना.. क्या कीसी लडकेके साथ उनका कोइ चकर बकरतो नही..?

बसंती : भगवान जाने.. अगर होगा तोभी अच्छा हे.. कमसे कम उनके साथ उनका घरतो बस जायेगा.. मेतो उनको केह केहके थक गइ.. मगर वो सादीके लीये मानती ही नही.. ओर मुनाभी सादी करनेको मना कर रहा हे.. कहेता हे अभी नही जब मन करेगा तो केह दुगा.. पता नही दोनोके मनमे क्या हे..

भानु : (होठ चुमते) चल ठीक हे मे चलता हु.. अगर मीलेगातो उनसे बात करुगा.. वरना देवुसे बात कर लुगा.. तुम अपना खयाल रखना.. अगर पैसेकी कोइ जरुरत होतो बताना..

कहेते भानु आजु बाजु देखकर वापस खेतो पे चला गया.. जीहा आप सोच रहे हे वोही हे.. मुना ओर बरखाकी मां बसंती.. जबसे उनके पतीको पेरेलीसीसका अ‍ेटेक आया तबसे वो भानुसे ही चुदवाती हे.. भानु बसंतीको कइ बार चोद चुका हे.. ओर बरखाने अ‍ेक दिन अपनी मांको चुदवाते देख लीया.. तब उसने अपने माोबाइलमे वो विडीयो क्लीप बनाली.. ताकी भविस्यमे उनका इस्तमाल अपने भाइके साथ सादीके लीये कर सके..

इधर सहेरमे साम होतेही चाइ नास्ता बन गयातो नीर्मलाने राजीवको जगाकर फ्रेस करवाया.. तो मंजुने चंदाको देवायतको जगानेको कहा.. तो चंदा सरमाते जुठा गुसा करते मंजुकी पीठमे मुका मारने लगी.. तो भावना सृती मंजु तीनो हसने लगी.. तभी मंजुही हसते हुअ‍े उपरकी मंजीलपे देवायतको जगाने चली गइ.. मंजुके जगातेही देवायत उनको अकेली रुममे देखता हे.. ओर मंजुको हाथ पकडकर अपने उपर गीरा देता हे..





फीर मंजुको बाहोमे भरके पलटके अपने नीचे सुलाते उनके होठोको चुमने लगते हे.. तब कुछही देरमे मंजुभी देवायतका साथ देने लगी.. तो देवायत धीरेसे उनका पेटीकोट उपर उठाते मंजुकी चुतको सहेलाने लगा.. तो मंजु मदहोस होकर सीसकारीया करते देवायतको अपनी बाहोमे भीच लेती हे.. तब मंजुको पताही नही चलाकी देवायतने कब अपना लंड पेन्टके बहार नीकाल लीया.. ओर मंजुकी चुतपे सेट कर दीया..

मंजुला : (सीसकारीया करते मदहोसीमे) नही देवु.. प्लीज.. दरवाजा खुला हे.. कोइभी आ सकता हे यहा नही.. आप घर जाकर मुजे चोद लेना.. प्ली..ज..

देवायत : (होंठ चुमते) मंजु सीर्फ अ‍ेक बार.. अभी होजायेगा.. पता नही तुजे देखते ही कंट्रोल नही होता..

मंजुला : (सरमाते हसते) लेकीन देवु इधर नही.. यहा मेरी सब सौतने हे.. कमीनी कोइभी उपर आ सकती हे.. आप घर जाकर कर लेना.. आइइइ.. उह.. मां.. घुसा दीया.. कहेके तो डालते.. चलो फटाफट चोदलो.. बहुत कमीनेहो आप..





देवायत : (धीरेसे कमर हीलाते) मंजु.. बस अभी होजायेगा.. आज क्या मस्त तैयार हुइ हे तु..

मंजुला : (अपनी कमर हीलाते) जानु.. अभी कोइ आजाये इनसे पहेले आप फटाफट चोदलो.. आपभीना..? अ‍ेक नही सुनते.. कमीनी कीसीने देखलीया तो मेरा मजाक उडायेगी..

तब उनको नही पता थाकी मंजुके जाते ही.. चंदा सृतीको इसारा करती हे.. ओर उनको लेकर मंजुके पीछे चली आती हे.. दोनो ही दरवाजेके बहार छुपकर देवायत मंजुकी मस्ती भरी बाते सुनते हस रही थी.. तभी मंजुकी सीसकारीया सुनकर सृतीने दरवाजेके अंदर थोडा सर नीकालके जांकते देखा तब देवायत मंजुके उपर चडके उनको जोरोसे चोद रहा था.. ये देखतेही सृती सर्मसार होते हसती हुइ वहासे हट गइ..

चंदा : (बहुत धीरेसे) सृती.. दोनो क्या कर रहे हे..? बतानां..

सृती : (बहुत धीमी आवाजमे सरमाते हसते) मौसी.. आपही देखलो.. क्या इसीलीये आप मना कर रही थी..?

चंदा : (अंदर जांकते हसते) हां.. इनको जगाने जाओतो यही सरारत करते हे.. आजतो मंजु गइ कामसे.. हें..हें..हें..

तब दोनोही छुपकेसे मंजु देवायतकी चुदाइ देखने लगी.. तभी अचानक सृतीको सरारत सुजी.. ओर उसने चंदाको धका मारते अंदर धकेल दीया.. जहा देवायत ओर मंजु चुदाइ कर रहेथे.. तब चंदा हडबडाते देवायतके उपर जाके गीरी.. तो देवायत मंजु दोनोही हडबडाते गभरा गये..

ओर देवायतने फौरन पलटके देखा तो सृती चंदाको धका माकर नीचेकी ओर जोरोसे हसती हुइ भाग रही थी.. तब देवायत सबकुछ समज गया.. ओर उसने फौरन चंदाको पकड लीया.. फीर उनको खीचके बेडपे लीटाते उनके उपर चड गया.. तो चंदा जोरोसे हसती हुइ देवायतसे छुटनेकी कोसीस करने लगी.. तब..





मंजुला : (हसते बेडसे कपडे सही करते उतरते) देवु.. आज इन कमीनीको मेरे सामनेही चोदलो.. आपको जगाने भेजा तो मना करदीया था.. ओर पीछेसे छुपके हमारा लाइव सो देखने आगइ.. बहुत नखरे कर रही हे.. आज लेलो बदला.. घुसादो अपना तगडा हथीयार.. हें..हें..हें..

चंदा : (जोरोसे हसते छुटनेकी कोसीस करते) मंजु.. कीतनी कमीनी हो.. इनको उक्सा रही हो.. हें..हें..हें.. वो कुतीने मुजे धका दे दीया.. सोरी देवु.. यहा नही प्लीज.. छोडदो मुजे.. आप घर जाकर कर लेना.. नही नही.. वहा नही.. मत उचा करो.. कोइ देखलेगा.. नही.. नही.. प्लीज.. आइइइ.. देवु... आहइइ आह.. उइइइ मां.. घुसा.. दीया.. कीतने कमीने हो.. कह.करतो डालते.. उइइइ मां.. आह.. आह.. कुती.. कमीनी इनका बदला लुगी मे.. ओर वो कमीनीको भी देख लुगी.. उनको मेरे सामने चुदवाउगी..

मंजुला : (हसते) कमीनी.. धीरे बोल नीचे सब सुनते होगे.. हें..हें..हें..

देवायत : (जोरोसे कमर हीलाते चोदते) मेरी मंजुको गाली देती हे.. आजतो तुम गइ कामसे.. आतो तुजे दो बार चोदुगा..

चंदा : (हसते) नही नही.. देवु भुल होगइ मेरी.. हें..हें..हें.. आहइइइ.. धीरे करोना.. तुम कीतने कमीने हो.. फट जायेगी मेरी.. आह.. सीससइइइ उइइ मां..

ओर देवु चंदाकी ताबड तोब चुदाइ करने लगा.. तब कुछही देरकी धमाकेदार चुदाइके बाद चंदाभी मदहोस होकर चुदवाने लगी.. कुछही देरकी घमासान चुदाइके बाद देवायत चंदाकी चुतमे जटतक अपना लंड घुसा देता हे.. ओर चंदाकी चुतमे अपना माल उडेलने लगता हे.. तो चंदानेभी देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया ओर वोभी साथ जडने लगी.. तबतक मंजु वही खडी रहेकर हसते हुअ‍े दोनोकी चदाइ देखती रही..





ओर देवायत खलास होतेही जटसे लंड बहार नीकालकर बाथरुममे भाग गया.. तब चंदा बेडपे बेठकर अपनी चुतको साफ करते मंजुकी ओर जुठे गुस्सेसे देखते हसने लगी.. तभी मंजुलाभी हसती हुइ नीचे भाग गइ.. ओर चंदा चुतको साफ करके बेडसे उतर गइ ओर अपने कपडे सही करने लगी.. तभी देवायत फ्रेस होकर बहार आगया.. तो चंदा जुठा गुस्सा करते उनको मारने लगी..

तब देवायतने अ‍ेक बार फीरसे चंदाको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचते पकड लीया.. ओर चंदाके होंठोको चुमलीया.. तो चंदाने उनके सीनेपे मुका जड दीया ओर हसने लगी.. फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेकी आंखोमे देखते हसते रहे.. तभी अ‍ेक बार फीर देवायतने चंदाको बाहोमे भरलीया ओर उनके होठोको चुमलीया.. फीर दोनोही अ‍ेक साथ चलके नीचे आगये.. तब सब अपनी बातोमे बीजी थे.. तो भावना दोनोकी ओर देखते हस रही थी..

चंदा सीधेही कीचनमे चली गइ तो वहा सृती ओर मंजु चंदाको देखतेही जोरोसे हसने लगी.. तब चंदाने वहाभी सृतीको पीठमे दो तीन मुके हसते हुअ‍े जड दीये.. फीर तीनो ही सबका चाइ नास्ता लेकर बहार आगइ.. तब सृती अबभी चंदाकी ओर देखते हस रहीथी.. आज सृतीकोभी अपनी सौतनसे अ‍ैसा मजाक करते अच्छा लगा.. उनको आज अच्छेसे पता चल गयाकी पतीके साथ बेडरुममे कैसी सरारते ओर मजाक मस्ती होती हे..

फीर चाइ नास्ता करते सब सृती देवायतकी सादीकी प्लानींग करने लगे.. आश्रमपे कौनसी तारीखपे कीतने बजे पहोचना हे.. सब प्लानींग होगइ.. तो मंजुने वहीसे फोनपे बाबासे आश्रमपे सादी करनेकी बात करली.. फीर सब घर चलनेकी तैयारीया करने लगे.. तब भुमीका ओर सृतीने सबको बहुत आग्रह कीया की रातका डीनर करके नीकले.. लेकीन देवायत मंजु ओर चंदाने कामका बहाना करके मना करदीया..

ओर सब अ‍ेक दुसरेको गले मीलने लगे.. तब देवायतने जान बुजकर सृती नीर्मला ओर भुमीकाको जोरोसे बाहोमे भीचलीया.. तो तीनोही सरमा गइ.. सृती सबकी नजर बचाते देवायतको आंख मारके हसने लगती हे.. तो मंजुभी उनकी सरारत देखते हसने लगी.. तो सृती बहुतही सरमाइ.. भावनाभी देवायतके साथ रहेना चाहती थी तो वोभी अपनी बच्चीको लेकर वापस आने लगी.. ओर देवायत अपनी दोनो बीवीया ओर भावनाको लेकर वहासे नीकल गया..

चंदा देवायतके पास बैठीथी तो मंजु भावना अपने बच्चोको लेकर पीछली सीटमे आरामसे बच्चोको दुध पीला रहीथी तब मंजुने धीरेसे चंदा ओर देवायतकी सरारतके बारेमे बता दीया.. तो भावना चंदाकी ओर देखते जोरोसे हसने लगी.. तो चंदाभी समज गइकी मंजु ओर भावना उनके बारेमेही बाते कर रही हे.. तब चंदा अ‍ेक बार फीर सर्मसार होगइ.. ओर अपने दांत पीसते हसते हुअ‍े पीछे मंजुको मुका जड दीया..

चारो अ‍ैसेही मजाक मस्ती करते हवेलीपे पहोंच गये.. तो वहा दया रजीया ओर चंपाने सबका खाना कंपलीट रखाथा तो सब फ्रेस होकर खानेपे बैठ गये.. इस रात देवायतने मंजु ओर चंदाको जमकर दो दो बार चोदलीया.. ओर चोद चोदके देवायतने दोनोकी हालत पतली करदी.. ओर अ‍ैसेही दिन बीतने लगे.. इसी दौरान धिरेन पुनमके बीचभी नजदीकीया बढ गइ..

ओर दोनोने अ‍ेक दुसरेके साथ खुब सारीरीक सुख भोग लीया.. धिरेन हर वक्त पुनमको चोदनेकी फीराकमे रहेता.. ओर जैसेही पुनमको चोदने लगता.. तो कुछ ही देरमे उनके सीनेपे लुढक जाता.. वो पुनमको हर बार प्यासी छोड देता.. लेकीन इस बारेमे पुनमभी धिरेनको कुछ नही बोलती.. क्युकी पुनमको भी पताथा की उनको अपना भाइ देवायत ही संतुस्ट कर सकता हे.. उनका तो अब धिरेनसे चुदवानेका अ‍ेकही मक्सद था.. ओर वोहे उनके बच्चेको धिरेनका नाम देनेका..

तो लखन लताने भी अपने हनीमुनमे खुब मजे कीये.. इसी बीच धिरेनको नीलमसे बात करनेका अ‍ेकभी मौका नही मीला.. ओर आखीर दोनो कपलकी हनीमुन टुर खतम होगइ.. ओर घरकी ओर वापस नीकल गये.. तो इन दिनोमे रमानेभी भानुको अपने तनसे हाथ नही लगाने दिया.. तो फीर भानुने भी भावनाके बारेमे बात ना करके रमाको कुछ ज्यादा भाव नही दिया.. तो रमाभी थोडी नीरास होगइ..

उनको लगाथा की भानुको चोदने नही दुगीतो वो उनकी बात मान लेगा.. लेकीन जब भानुने रमाको ज्यादा भाव नही दीयातो रमा खुदभी बीना चुदाइके तडपने लगी.. ओर हार मानकर वोभी भानुसे बात करने लगी.. हालाकी ये बातके लीये अबभी भानुसे नाराज थी.. लेकीन रमाने समयके साथ समजोता करलीया.. तब रमाको नही पताथा की भानु बहुतही ठरकी इन्सान था जो अपने तनकी प्यास कही ओर बुजा लेता हे..

इसी दिनोके बीच भानुने अ‍ेक बार फीर बसंतीकी चुदाइ उनके घरपे जाकर करली.. तो अ‍ेक बार उनके वो ट्रक वाले दोस्त जीवा जो मुनीमके घरके पास रहेता था.. वही दोस्तकी बीवीको भी दो बार चोद चुकाथा.. वरना खेतोपे ट्युबवेल वाले रुममे चला जाता ओर वही उनकी दो तीन चहीती मजदुर थी उनमेसे कीसी अ‍ेकको बुलाकर चोद लेता.. आजकल वहा मालती नहीथी वरना उनसेही अपनी प्यास बुजा लेता..

ओर आजकल अ‍ेक नइ ओरत उनके फांसमे फस चुकीथी.. तो दो बार उनकोभी चोद लीया.. ओर वो ओरत थी छोटुकी बीवी रीटा.. जो बहुतही कामी ओर भानुकी तराह ठरकी ओरत थी.. इसी बीच वंदना ओर उनकी मां चारु ओर नीशाकी देवायतको मीलनेकी तडप बढ गइथी.. वोभी रश्मीभाभीको मीलकर देवायतसे मीलनेकी प्लानींग करने लगीथी..

तो दुसरी ओर जबसे मुना बरखाने देवायतसे खुलकर बाते की तबसे वो दोनोभी बीन्दास्त होकर मीलने लगेथे... अबतो मुनासे बात होनेके बाद बरखाने मुनासे प्रेगनेन्ट होनेके मक्सदसे आइपील लेना बंध करदीयाथा.. कोन्डमके बगैर ही चुदवाने लगी.. लेकीन मुनाने उनकी बहेनको ये नही बताया की वो प्रेगनेन्ट हो चुकी हे.. ओर वो अपनी बहेनके साथ मजे करता रहा.. ओर इसी बीच मुना सुधीरके कहेने पे उनकोभी खुस कर चुकाथा..
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १२७/२

आज दोपहरको दो बजे धिरेन पुनम ओर लखन लता अपना हनीमुन मनाकर वापस आने वाले थे.. तो आज सुबह देवायत ओर मंजु.. दोनोही कार लेकर सुबह सहेर चले गये.. दोनो कपल दो पहोरको आने वाले थे तो देवायत मंजुने कारको सीधेही आश्रमपे ले लीया.. ओर दोनोही मंदिरमे दर्शन करके सीधेही बाबाके पास चले गये.. तब बाबा दोनोको देखते ही खुस होगये.. तब सेवक देवायतका अभीवादन करते चला गया तो देवायत मंजु उनके पैर छुकर वही बैठ गये..

बाबा : (हसते) आखीर तुम दोनो आही गये.. बस इसी दिनका मे इन्तजार कर रहाथा.. कहो.. क्या कहेने आये हो..?

मंजुला : (हसते) बाबा आपतो सब जानतेही हे.. अब गांवमे अ‍ैसी परीस्थीती नीर्माण हो रही हे.. की हमे अब गांव वालोको समजाना ही पडेगा.. वरना सबलोग आपसमे ही जगडा करते रहेगे.. अब आपही कुछ मार्गदर्शन दीजीये.. ताकी गांव वालोको हम समजा सके.. आजकलतो गांवमे बहुत कुछ होने लगा हे..

बाबा : (हसते) बेटी.. बात थोडी ओर बढनेदो.. जब सभी लोगोके रीस्ते उजागर होने लगेगे.. तब अ‍ेक दिन सभी गांव वालोको इकठा करके अ‍ेक सार्वजनीक कार्यक्रम रखदो.. मे समजाने आजाउगा.. उनमे आसपासके सभी गांव वालोको भी बुलाना हे.. यहाभी जीतने सरपंच ओर लोग आते हे उनको मेभी केह दुगा.. अब सब लोग समज जायेगे.. ओर कुछ लोग नाराज होगे तो बादमे वोभी सहमत होजायेगे.. क्युकी उनके घरमेही अ‍ैसे रीस्ते नीकलेगे तो वो कहा जायेगे..? हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) बाबा.. अ‍ैसे दो तीन रीस्ते तो मेरे पास आभी गये हे.. क्या ये सब सही हो रहा हे..? क्युकी गाव वांले इसीलीये तो बापुसे ओर दादासे नाराज थे.. क्युकी उन सबको पताथा की उन्होने अपनी बहेनसे ही सादी करली थी.. इसीलीये सबने हमसे सबंध तोड दीयाथा..

बाबा : हां.. ये बात मुजसे किशनने कहीथी.. क्युकी गांवके कुछ लोग यहाके सेवक थे.. तो यही आते जाते उनको यहा कीसीसे पता चल गयाथा.. इसीलीये हमे फुंक फुंकके कदम रखने पडेगे.. ताकी तुजे कीसी तराह की कोइ बाधा ना आये..

देवायत : (हसते) हां बाबा देखना.. यहातो ज्यादातर रीस्ते आपसमे ही हे.. तो हमे उसी रीस्तेको अपनाने समजाना हे.. ओर सबकी आपसमे सादीया करवानी हे.. बहुत ही मुस्कील काम हे ये..

बाबा : अरे.. तुम इतनी बीवीया होनेके बावजुदभी अबभी वही अटके हुअ‍े हो..? ये सब तुम्हारे लीये थोडीना हो रहा हे.. बस हमे उनके लीये रास्ता बनाना हे.. अभीतो सुरुआत हे.. तब गांवतो क्या सहेरमेभी सब अ‍ैसे रीस्तेको अपनाते आपसमे सादीया करते होगे.. अब कलयुग आगया हे..

हम सब प्रकृतीकी ओर ढल रहे हे.. ओर आने वाले दिनोमे तो कोइ नात जात भेद भाव नही होगे.. तुजे कहीपे अ‍ेकभी त्यक्ता या विधवा महीला नही दीखेगी.. सब उन हिमाचलकी तराह जी रहे होगे.. सभी अ‍ेक दुसरेको खुलके प्यार करते होगे..

मंजुला : (हसते) हां देवु.. ये मत सोचोकी सब हमारी वजहसे हो रहा हे.. हमतो मात्र नीमीत हे.. बाकी सब तैय हे.. वो होकर ही रहेगा.. तुम संकोच मत करो.. हमेतो सबको जीतनी मदद हो सके करना हे.. अगर हम कुछभी ना करे तबभी ये सब होकर रहेगा.. हमेतो इसीलीये मदद करनी हे क्युकी वो स्वंम हमारे घर जन्म लेने वाले हे.. क्यु बाबा..?

बाबा : हां बेटा.. ये सब प्रकृतीका खेल हे.. हमे सीर्फ ओरत ओर मर्दके रीस्तेको ही याद रखना हे.. ओर हर ओरतका सन्मान करना हे.. अ‍ेक जमाना था.. जब कोइ लडकी विधवा होती थी.. तो गांवके लोग उनका मुंडन करके उनको समाजसे दुर रखते थे.. ओर उस बेचारीको सब अपसुकनीयाल मानकर जलील करते थे..

ओर त्यक्ता लडकीको भी सब भेडीयेकी नजरसे देखते थे.. ओर अपनी हवसका शीकार बनाते थे.. इनसे तो अच्छा हे.. कोइ घरके आदमीसे ही सादी करके सुहागनकी जींदगीतो बीतायेगी.. ओर उनके साथ खुसभी रहेगी.. फीर चाहे वो दुसरी बीवी हो या तीसरी क्या फर्क पडता हे.. कमसे कम अपने आपको सुरक्षीत तो महेसुस करेगी..

मंजुला : बाबा.. ठीक कहा आपने.. बस हमे यही बाते लोगोको समजानी हे.. कीतनी ओरते अपने पतीकी बुरी आदतकी वजहसे बांज रेह जाती हे.. अगर दुसरोसे सबंध बाधलीये ओर बच्चेका सुख पाती हे तो उनमे क्या बुरा हे..? देखते नही कीतने पुरुष अपनी सादीके बावजुदभी दुसरी ओरतसे अवैध रीस्ता रखते हे.. तो क्या ये अधीकार सीर्फ पुरुषके लीये ही हे..? उन ओरतोके लीये नही..? जो अपने पतीसे अ‍ेक बच्चेका सुखभी नही पा सकती..? देवु.. सब प्रकृतीपे छोडदो.. अभीतो आपको बहुत कुछ करना हे.. ओर देखना हे..

बाबा : (हसते) हां बेटा.. मेरी बेटी बहुत समजदार हे.. इसीलीये तो तुजे अपनी सौतनोके बीच बाट रही हे.. ओर तुजेभी कहा सामनेसे कीसीके पास जाना हे.. जो सामनेसे आती हे.. उनकोही न्याय देना हे.. कोइभी मर्द हो या ओरत.. अगर आपसमे अ‍ेक दुसरेकी रजामंदीसे रीलेशन रखते हे तो फीर क्या क्षोभ करना..? हंम..?

बेटा जोभी होता हे होनेदो.. हमे प्रकृतीके बीच नही आना.. जब तेरा बेटा बडा होजायेगा तो तुजे अ‍ैसा बहुत कुछ दिखनेको मीलेगा.. जीनके बारेमे तु सोचभी नही सकता.. तब दुखी मत होना.. ओर सब स्वीकार करलेना.. क्युकी तुम अभी मनुस्य हो.. तो कर्मतो तुजेभी भुगतना पडेगा..

देवायत : (हसते) ठीक हे बाबा.. देखते हे आगे क्या होता हे.. अभीतो पुनो लखन सब घुमने गये थे.. उसीको लेने सहेर जा रहे हे.. ओर आपको मीलनाभी था तो दोनो चले आये.. अब यहा भोजन करके नीकल जायेगे.. अबतो पुनोका पतीभी सहेरमे अ‍ेक घर ले रहा हे..

बाबा : सुन बेटा.. उन लडकेकी जींदगीमे भी अ‍ेक ओर लडकी आगइ हे.. बस वोही लडकीकी वजहसे तेरी बहेन तुमसे वापस मीलेगी.. तुम उनके बारेमे सुनकर वीचलीत मत होना.. क्युकी आगे बहुत कुछ होने वाला हे.. जीनके बारेमे जानकर तुजे अभी दुख हो सकता हे..

मंजुला: (हसते) बाबा वो सब मे देवुको बादमे समजा दुगी.. बस अभी जो परीस्थीती नीर्माण होने वाली हे या हो रहीहे.. उन्हीका समाधान करना हे.. बस आप अ‍ेक बार आजाइअ‍े ओर लोगोसे बात करलीजीये फीर हम सम्हाल लेगे.. क्यु देवु..?

देवायत : (मुस्कुराते) हां बाबा..

बाबा : (हसते) हां बहुत कुछ जल्दी होने लगा हे.. तुम जब कहो मे आजाउगा.. ओर सुन.. बेटा अ‍ेक बार वो कबीलेमे जाकरभी सबको मील लेना.. खास करके वो तेरी दिवानीको.. बस उनके माध्यमसे वहा भी बहुत कुछ सम्हालना हे.. अब उनको कबीलेकी रानी बनादे.. ताकी उनके माध्यमसे वहा बहुत कुछ करना हे..

देवायत : (हसते) जी बाबा.. आजतो समय नही हे.. बस दो तीन दिनमे वहा सबको मील लुगा..

मंजुला : (हसते) बाबा.. अब वो चारोको लेने जाना हे.. तो फीर कल इनकी सादीभी यहा करवानी हे.. तो कल सुबह हम सबको लेकर आजायेगे.. कहो मुजे क्या तैयारीया करनी हे..?

बाबा : (हसते) अरे कुछ नही करना.. बस ये दोनोको लेकर आजाना.. वही मंदिरमे सादी कर देगे.. फीर सबको भोजनभी यही करना हे.. चलो अब जाओ तुम दोनो भीजन करलो.. फीर आरामसे सहेर जाना..

फीर देवायत ओर मंजुला काफी देर तक बाबासे बाते करते वहा बैठे रहे.. बाबाने भवीस्यके बारेमे दोनोको बहुत सारी जानकारीया देदी.. फीर बाबाको दक्षीणा देकर वहासे नीकलकर भोजन खंडमे चले गये.. वहा दोनोने भोजन करलीया.. तो दोनोही कार लेकर सहेरकी ओर नीकल गये.. देवायतने कारको सीधेही होस्टेलपे लेली.. वहा नीलमको मीलकर उनको कुछ पैसे देदीये.. फीर दोनो टड्ढावेल्सकी ओफीसपे चले गये..

यहा देवुने जाकर पुछातो बस आधे घंटेमे ही पहोचने वाली थी.. तो देवायत कार पार्क करके मंजुको लेकर अ‍ेक आइसक्रिम पार्लरमे चला गया.. ओर वहा दोनोके लीये आइसक्रिम ओर्डर करदीया.. तब कुछही देरमे वेटर दोनोको पानी पीलाकर आइसक्रिम देकर चला गया ओर दोनो आइसक्रिम खाते बाते करने लगे..

देवायत : मंजु अभी आधे घंटेमे बस पहोंच जायेगी.. मुजे ये बता.. ये धिरेन नीलमका क्या चकर हे..?

मंजुला : (हसते) देखो देवु.. जानकर दुखी मत होना.. सब आपके फायदेके लीये ही हे.. बस उस नीलमकी वजहसे ही पुनो आपको वापस मील जायेगी.. क्युकी पुनो धिरेनकी सगाइके बाद.. धिरेन सादीसे पहेलेही पुनोके साथ फीजीकल होना चाहता था.. लेकीन पुनोने उनको मना करदीया था.. क्युकी वो आपके साथ रीलेशनमे आना चाहती थी.. ओर आपको ही अपना कौमार्य सोपना चाहती थी..

देवायत : (हसते) हंम.. हां वोतो ठीक हे मगर नीलम धिरेनकी जींदगीमे कैसे आगइ..? हें..हें..हें..

मंजुला : जानु याद हे हम सब खरीदी करने यहा सहेरमे आयेथे..? तबही दोनोके बीच नजदीया बढ गइ.. क्युकी धिरेन वो सुख पाना चाहता था जो पुनोने उसे मना करदीया था.. तो वही सुख पानेके चकरमे उसने नीलुको अपने प्यारमे फसा लीया.. ओर नीलुभी जवान होचुकी हे.. ओर वोभी अपनी मा की तराह बुहत कामी ओर ठरकी लडकी हे..

इसीलीये धिरेनके साथ इजीली रीलेशनमे आगइ.. सादीके दिनही मेने भावुको उपर नही भेजा होता तो उसी दिन धिरेन नीलुका काम तमाम कर देता.. हें..हें..हें.. ओर भावुने दोनोको फटकार लगाइ ओर नीलुको बचा लीया.. लेकीन आगेकी गेरंटी मे नही दुंगी.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हंम.. तो ये बात हे..? मंजु.. तुम कबतक नीलुको बचायेगी.. यहातो वो अकेली रहेती हे.. ओर धिरेनभी यहा जोब करता हे.. तो दोनो यहा आसानीसे मील सकते हे.. जैसे हम मीलते थे..

मंजुला : (कामुक स्माइलसे) जानु.. हमे कहा नीलुको बचाना हे.. हमभी यही तो चाहते हेकी नीलु धिरेनको मील जाये.. ताकी उनकी वजहसे धिरेन वहा सहेरमे अपने नये मकानमे पडा रहेगा जीनकी वजहसे पुनो आपको मील जायेगी.. ओर नीलु इतनी कामी हेकी अ‍ेक अकेला धिरेन उनको नही सम्हाल पायेगा..

देवायत : (आस्चर्यसे देखते) तो फीर..? तुम क्या कहेना चाहती हो..? नीलु कीसी ओरके साथ भी..

मंजुला : (कामुक स्माइलसे) हां देवु.. तुमने सही सोचा हे.. वो धिरेनके साथ सादी करकेभी कीसी ओरसे अपने तनकी प्यास बुजाती रहेगी.. ओर उन्हीके बच्चेकी मां भी बनेगी.. बस सबको यही लगेगा की ये बच्चा धिरेनका हे.. लेकीन असलीयत वो दोनो ओर हम ही जानते होगे..

देवायत : (अ‍ेक नजरसे देखते) मंजु.. वो लडका कौन हे.. क्या बता सकती हो मुजे..?

मंजुला : (हसते) जानु.. वादा करो.. इस बारेमे तुम उसे कुछभी नही कहोगे.. तभी उनका नाम बता सकती हु..

देवायत : (हसते) मंजु.. अबतो कीसीके भी रीलेशनके बारेमे जानकर मुजे कोइ आस्चर्य नही होता.. फीरभी आइ प्रोमीस.. मे कीसीको कुछभी नही कहुगा.. बता वो लडका कौन हे..?

मंजुला : (हसते) जानु वो लडका हे.. हमारा लखन.. उनकाभी आपही की तराह बहुत लडकीया ओर ओरतोके साथ रीस्ता हे.. ओर हमारे लखनकी जींदगीमे भी दो पत्नीया हे.. हमारे लखनने भी हमारी तराह गांधर्व सादी करली हे.. हमारी लता उनकी दुसरी बीवी हे..

देवायत : (चोंकते) व्होट..? क्या ये लखनकी दुसरी सादी थी..? तो फीर उनकी पहेली बीवी कौन हे..?

मंजुला : (हसते) जानु चोंकीये मत.. लखनभी आपहीका खुन हे.. वोभी आपहीकी राहपे चल रहा हे.. हमारी रजीया ही उनकी पहेली बीवी हे.. जब आप ओर पुनमने सादी करलीथी तबही वो दोनो रीलेशनमे आगये थे.. जीस दिन आपने हमारी पुनमकी कोख भरदी उसी रात दोनोने गांधर्व सादी करके अपनी सुहागरात मनाइ.. ओर जबतक लखनकी सादी नही हुइ तबतक रजीया लखनकी बीवी बनकर उनका बीस्तर गरम करती रही..

देवायत : (हसते सर पकडते) ओह गोड.. इतना तो पुनोने मुजे कहाथा की लखन रजीया रीलेशनमे हे.. पर ये पता नही थाकी दोनोने सादी करली हे.. मेरे ही घरमे इतना कुछ हो रहा हे.. ओर मुजेही नही पता.. मंजु.. तुजेतो सब पता चलजाता हे.. तो फीर तुमने लखनको क्यु नही रोका.. कोइ खास वजह..?

मंजुला : (आइसक्रिम खाते हसते) जानु.. क्या मे आपको रोक रही हु..? तो फीर लखनपे क्यु पाबंदी लगाउ..? उसेभी अपनी जींदगी अपने तरीकेसे जीनेका अधीकार हे.. ओर मत भुलो.. वोभी आपका भाइ हे.. ओर जानु.. हमारी रजीयाकी जींदगीभी सवर जायेगी.. हमने दया ओर रजीयाको कभी हमारी नौकरानी नही माना.. तो उनकेभी कुछ सपने होगे.. तो क्या हम उन दोनोके सपने पुरे नही कर सकते..?

देवायत : (मु्स्कुराते) मंजु.. हम रजीयाका सपनातो पुरा कर सकते हे.. लेकीन दया..? वोतो बेचारी पुनोके साथ चली जायेगी.. तो उनका क्या होगा..? क्या उनके बारेमे तुने पता हे..?

मंजुला : (हसते) हां जानु.. जीस तराह रश्मीभाभी चंपाभाभी अभी आपकी सीक्रेट बीवीया हे उसी तराह दयाभी आपकी सीक्रेट बीवी होगी.. पुनो खुद आप दोनोकी गांधर्वसादी करवा देगी.. ओर दया आपसे प्रेगनेन्टभी होगी.. क्युकी मत चुलो.. वोभी आपकी बहेन हे..

देवायत : (हसते) हंम.. मंजु आइ अ‍ेम सोरी.. मे सब समज गया.. ना जाने कीतने रीस्तोको मुजे नीभाना पडेगा.. मुजे लखनको रोकनेके लीये तुजे नही कहेना चाहीये था.. लखनको मेने अ‍ेक मजदुरनकी लडकीसे भी प्यार करते देखा हे.. ओर वो उन छोटुकी बीवीके साथभी रीलेशनमे हे जो पहेले रश्मीभाभीके यहा नोकरी करती थी.. सोरी मंजु..

मंजुला : जानु.. प्लीज.. सोरी मत कहो.. आगेतो इनसेभी ज्यादा बहुत कुछ होने वाला हे.. तब आप क्या करोगे..? लखनका हमारे गांवकी अ‍ेक ओर लडकीके साथभी चकर हे.. जानु.. अगर कीसीके भी रीस्तेके बारेमे आपको पता चले तो दुखी मत होना.. क्युकी जोभी होगा वो दोनोकी आपसी रजामंदीसे होगा.. तो क्यु दुखी होना..? जो होता हे होने दो.. ओर देखते जाओ..

देवायत : मंजु.. बात वो नही हे.. बस मुजे लताकी चीन्ता हो रही हे.. जब उसे पता चलेगा तब उन बेचारीपे क्या गुजरेगी..? कही. वोभी हमारी भावुकी तराह नाराज होगइ तो..? तो फीर हम क्या करेगे..?

मंजुला : (हसते) जानु.. अ‍ेक बात कहु.. कोइ भी चीज बीना वजह नही होती.. अगर रजीया लखनकी जींदगीमे आइ हे तो फीर उनकीभी कुछ वजाह होगी.. तभी तो लता लखनसे दुर होपायेगी.. क्या वोभी आपको प्यार नही करती..? जानु बुरा मत मानना.. पीछले कुछ दिनोसे उनका लगाव आपकी तरफ बढ गया हे.. वो मनही मन आपको चाहने लगी हे.. ओर अ‍ेक वक्त अ‍ैसाभी आयेगाकी वोभी आपसे सादी करके आपके साथ रीलेशनमे आजायेगी.. ओर वही हमारे पोतेकी चहीती रानीको जन्म देगी..

देवायत : (आस्चर्यसे देखते) मंजु..? तुमतो बहुत कुछ जानती हो.. क्या मुजे आगेका बता सकती हो..?

मंजुला : नही जानु.. कुछ बाते हे जो आपको सुख दे सकती हे.. तो कुछ बाते अ‍ैसीभी हे जो आपको दुखभी दे सकती हे.. ज्यादा जाननेकी कोसीस मत करो.. जोभी होता हे होने दो ओर देखते जाओ.. जानु.. हमे गांव वालोको समजाना हे तो हमे अपने घरके रीस्तोकोभी अपनाना पडेगा.. तभीतो हम दुसरोको समजा सकेगे.. अब चलो भी उन लोगोके आनेका टाइम होगया हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते खडे होते) मंजु.. ठीक कहा तुमने.. आज तुमसे ओर बाबासे बाते करते बहुत मजा आगया.. बहुत कुछ नया जाननेको मीला.. बस अ‍ैसेही बाते मुजे बताती रहेना.. अब हमारे घरके भी कीसी रीस्तेसे कोइ अ‍ेतराज नही करुगा.. ताकी मुजेभी आगे चलनेमे पता चले.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां जानु.. जो जरुरी बाते हे वो सब बाते मे आपको बताती रहुगी.. हें.. हें.. हें.. बस आपकी तो मोजही मोज हे.. पता नही आपकी जींदगीमेभी कीतनी लडकीया ओर औरते आयेगी.. सबको आपको वही सुख देना हे.. बस आपतो अपना फर्ज नीभाते जाइअ‍े.. अब चलीयेभी.. हें..हें..हें..

कहातो देवायत हसते हुअ‍े बहार नीकलने लगा तो मंजुभी उनका हाथ पकडके साथ चलने लगी.. दोनोने काउन्टरपे बील पे करदीया ओर ट्रावेल्सकी ओफीसपे आगये.. तब कुछ ही देरके बाद अ‍ेक लक्जरी बस आकर खडी होगइ.. तो उनमेसे सभी कपल खुस होकर हसते हुअ‍े नीकलने लगे.. तब लखन लता ओर धिरेन पुनमभी अ‍ेक दुसरेका हाथ पकडके नीचे उतर गये.. तो पुनमने मंजु ओर देवायतको देख लीया..

तो पुनम जोरोसे भाभी.. कहेते धिरेनका हाथ छोडकर दोडती हुइ देवायत मंजुके पास आगइ.. ओर मंजुके गले लग गइ.. फीर सरमाते हसती हुइ देवायतके पास चली गइ.. ओर अ‍ेक नजर उनको देखते हसते हुअ‍े वही खडी रही.. ओर अचानक पुनम देवायतकी बाहोमे समा गइ.. तब धिरेन हसते हुअ‍े दोनो भाइ बहेनका मीलन देखता रहा.. तब उनको नही पताथाकी पुनम अपने भाइको नही अपने पहेले पती ओर अपने यारको मील रही हे..

तबतक लखन धिरेनभी दोनोके पैर छुकर वही खडे रहे तब लताने मंजुके पैर छुलीया तो मंजुने उसे खडी करके अपने सीनेसे लगालीया.. ओर लता सरमाती देवायतके पास चली गइ.. ओर उनके पैर छुने लगी.. तब देवायतने उसे कंधेसे पकडकर रोकके अपने गले लगा लीया.. तब लताने देवायतको कुछ ज्यादाही बाहोमे भीचलीया.. ओर हसने लगी.. फीर चारोने अपना सामान बसकी डीकीसे नीकाल लीया.. ओर वापस दोनोके पास आगये..

पुनम : (हसते) भाभी.. अब चले..? हमारा सभी सामान लेलीया हे..

मंजुला : (हसते) अरे हां चलो.. चलो.. बाबा हमतो आधे घंटेसे आप सबका इन्तजार कर रहे हे.. आपका सामान कारमे रखदो.. वही कार खडी हे.. चलो..

लता : (धीरेसे मंजुके साथ चलते) भाभी.. क्या हम नीलुको मीलकर चले..?

मंजुला : (हसते धीरेसे) नही लता.. हम उनको मीलकर ही इधर आये हे.. तेरे भाइने उसे कुछ पैसे दिये हे.. ओर अभी खतरा भी साथमे हे.. हें..हें..हें.. तु समज गइनां..?

लता : (हसते) हां भाभी.. सब समज गइ.. अब देखना उनकी सकल कैसे होजाती हे.. हें..हें..हें..

लखन : (सामान कारमे रखते) भाइ.. अब सीधे हमरे गांवही जाना हेनां..? वो नीलुके पास जाना हे..?

देवायत : नही लखन.. हम उनको मीलकरही इधर आये हे.. वहा जानेकी कोइ जरुरत नही हे.. वो वहा ठीक हे.. अब सीधे गांवही चलना हे.. वहाभी आज बहुत काम हे..

कहातो धिरेन तो मायुस होगया.. लेकीन आज लखनभी ना सुनके कुछ नीरास होगया.. तब मंजु ओर लता दोनोही धिरेनपे नजर गडाये हुइ थी.. जैसेही उनकी सकलपे बाराह बज गये दोनोही अ‍ेक दुसरेकी सामने देखकर हसने लगी.. ओर कारमे बैठने लगी.. तब पुनमभी सबकुछ समज गइ.. ओर लता मंजुकी ओर देखते वोभी हसते हुअ‍े कारमे दोनोके पास बैठ गइ.. तो लखनने धिरेनको आगे देवायतके पास बीठा दीया ओर खुद पीछेकी सीटमे चला गया.. ओर देवायतने कारको गांवकी ओर जानेदी.. तब कारमे..

मंजुला : (हसते) धिरेनभैया.. लखन.. कहो कैसा रहा आपका हनीमुन ट्रीप..? हें..हें..हें..

धिरेन : (सरमाते हसते) दीदी.. वहा हमने खुब अ‍ेन्जोय कीया.. टुर वालोने हमे बहुन जगाहपे घुमाया.. वहा केसीनो बेसीनो.. साइट सीन.. वहा बहुत कुछ देखनेके लीये हे.. ओर होटेलभी मस्त थी..

मंजुला : (हसते) चलो अच्छा हे.. यानीकी कुल मीलाके आपका हनीमुन अच्छा रहा.. अब कहो आगेका क्या प्रोग्राम हे आपका..? बस कलके दिन रुकना हे.. फीर तुम दोनो मीया बीवी आजाद.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते) दीदी.. क्या कल सृती दीदी ओर भैयाकी सादी हेनां..?

मंजुला : (हसते) हां लता.. हम दोनो सुबहसेही नीकलेहे.. सुबह हम बाबाके पासही थे.. ओर खाना खाकर आप लोगोको लेने चले आये.. कल फीर हम सबको यहा आश्रमपे आना हे.. अभी सबको कहेनाभी बाकी हे..

पुनम : (हसते) भाभी.. क्या वंदु चारुभाभी ओर नीशाकोभी कहेना हे..?

मंजुला : (हसते) हां पुनो.. वो रश्मीभाभीको भी कहेना हे.. मतलब हमारे नजदीक जीतनेभी लोग हे सबको लेकर यहा आना हे.. जब सादी होजायेगी.. तब तुजे ओर धिरेनको अपने घर रहेना होतो चले जाना..

धिरेन : दीदी.. अब मुजे बेन्कपे भी जाना पडेगा.. क्युकी सीर्फ तीन चार दिनकी छुटी लेकर ही आयाथा.. येतो जीजुने ये सब प्रोग्राम फीक्स करदीया तो फोन करके बता दीया हे.. अब मुजे ओर छुटी नही मील सकती तो मे ओर पुनो सादीसे सीधेही घरपे चले जायेगे..

मंजुला : (हसते) हां भाइ कोइ बात नही.. कल हम दयाका सामान भी साथ लेलेगे.. ताकी वोभी तुम्हारे साथ आजाये.. अब दया वही रहेगी.. ताकी पुनोको काम काजमे हेल्प कर सके..

धिरेन : जीजु.. अब अ‍ेक हप्तेमे घरभी देख लुगा.. अगर पुनोको पसंद आजाये तो आप आजाना.. ओर सौदा कर लेना.. मुजे बेन्क हाउसींग लोन दे रहा हे.. तो इसी बहाने अ‍ेक प्रोपर्टी ओर होजायेगी..

देवायत : (हसते) हां धिरेन तुम ओर पुनम देखलो.. अगर पसंद आजाये तो मुजे कहेना मे आजाउगा..

अ‍ैसीही बाते करते सब अपने गांवकी ओर जा रहेथे.. तब पुनम मंद मंद मंजुकी ओर देखकर मुस्कुरा रहीथी.. क्युकी उन दोनोको पता थाकी धिरेन ये घर क्यु ले रहा हे.. ओर पुनमको अपने भाइको जल्द मीलनेकी संभावना दीखने लगी.. तब अ‍ेक बार फीर उनके साथ मीलन करनेकी बेकरारी बढ गइ.. ओर यही सब सोचते उसे अपनी चुतपे गीलापन महेसुस होने लगा.. तब वो खुब सरमाइ..

तो दुसरी ओर लताभी बात करते बार बार देवायतको चोर नजरसे देखती रही.. तो पुरे रास्ते धिरेन नीलमके बारेमे सोचता उनको मीलनेकी आगेकी प्लानींग करता रहा.. तो दुसरी ओर जबसे लखनने लतासे नीलम ओर धिरेनके बारेमे सुना तबसे ही लखनके लीये नीलमको फसाना बहुत आसान हो गयाथा.. वो नीलमको ब्लेकमेइल करके बहुत आसानीसे अपने नीचे लीटा सकता था..

यही सब सोचते वोभी नीलमको जल्द से जल्द मीलनेकी प्लानींग करता रहा.. इसीलीयेतो आज उसने देवायतको नीलमसे मीलनेकी बात कही.. लेकीन सबके बारेमे देवायत मंजुसे बहुत कुछ जान चुकाथा.. ओर देवायतने सबको नीलमको मीलनेके लीये मना करदीया.. देवायतभी जानताथा की धिरेन ओर लखनको नीलमको मीलनेके लीये ज्यादा दिन दुर नही रख सकता.. सब अपे अपने विचारोमे खोये हुअ‍े थे.. तब लता पुनम ओर मंजुला धीरेसे बाते करती रही.. ओर सब लोग हवेलीपे आगये....

कन्टीन्यु
 




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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १२८/१

यही सब सोचते वोभी नीलमको जल्द से जल्द मीलनेकी प्लानींग करता रहा.. इसीलीयेतो आज उसने देवायतको नीलमसे मीलनेकी बात कही.. लेकीन सबके बारेमे देवायत मंजुसे बहुत कुछ जान चुकाथा.. ओर देवायतने सबको नीलमको मीलनेके लीये मना करदीया.. देवायतभी जानताथा की धिरेन ओर लखनको नीलमको मीलनेके लीये ज्यादा दिन दुर नही रख सकता.. सब अपे अपने विचारोमे खोये हुअ‍े थे.. तब लता पुनम ओर मंजुला धीरेसे बाते करती रही.. ओर सब लोग हवेलीपे आगये....कन्टीन्यु

जैसेही कारकी आवाज आइ चंदा रजीया ओर दया दोडके बहार आगइ.. भावना अपनी बच्चीको लेकर वही खडी रही.. सब लोग कारसे उतरे तो चंदा दोडकर धिरेनके पास चली गइ.. तो धिरेनने उनके पांव छुअ‍े.. तो पुनमभी उनको भाभी कहेते गले लग गइ.. फीर लता लखनने भी चंदाके पांव छु लीये.. तो चंदाने उनको भी गले लगाया.. तब रजीया सीर्फ लखनको देखते सरमाते हसती रही.. ओर लखनने दया ओर रजीयाको भी गले लगाया..

दया : (हसते) कहो लखनभैया.. कैसी रही आपकी हनीमुनकी टुर..

लखन : (हसते) दया बहुतही मस्त.. हें..हें..हें..

लखन जवाबतो दयाको दे रहाथा लेकीन देखताथा रजीयाकी ओर.. तब रजीया सरमके मारे पानी पानी होगइ.. ओर लखन लताका सामान लेकर उपरकी ओर चलने लगी.. तो दयानेभी पुनम धिरेनका सामान लेलीया ओर उपरकी मंजीलपे उनके कमरेमे रखने चली गइ.. फीर सबलोग होलमे आगये.. ओर अपने अपने रुममे फ्रेस होनेके लीये चले गये.. तब भावना अपने रुममे जाकर बच्चीको दुध पीलाने लगी..

तो उपर जातेही लता बाथरुममे घुस गइ तो लखनभी दोडकर उनके साथ घुस गया.. ओर लखनने लताको अंदरही दबोच लीया.. तब लता जोरोसे हसते लखनसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. ओर लखनने लताको पीछेसे पकडकर उनकी अ‍ेक टांग उची करके अपना लंड लताकी चुतमे पीछेसे घुसा दीया.. तब थोडी ही देरके बाद लखन लताकी खडे खडे ही चुदाइ कर रहा था.. तब लताभी हसते हसते मदहोस होने लगी ओर अपना अ‍ेक पैर उचा करते लखनको चुदवानेमे साथ देने लगी..





तो धिरेननेभी रुममे जातेही पुनमको अपनी बाहोमे भीच लीया ओर उनके होठ चुमने लगा तब पुनम बहुत सरमाइ.. ओर लखनका साथ देती रही.. वैसेभी अपने भाइको देखकर वो काफी गरम हो चुकी थी.. तो धिरेनको ही देवायत समजकर धिरेनको प्यार करने लगी.. ओर धिरेन पुनमके बुब्सको मसलने लगा..





पुनम : (सरमाते धीरेसे) नही.. धिरेन.. प्लीज.. अभी नही.. नीचे सब वेइट करते होगे.. आप रातमे करलेना..

धिरेन : पुनो तुम क्या मस्त लग रही हो.. तुजे देखतेही हर वक्त प्यार करनेका मन करता हे.. चलना अ‍ेक बार करलेते हे.. अभी होजायेगा.. फीर रातमे आरामसे करेगे..

पुनम : (सरमाते हसते) नही धिरेन.. प्लीज थोडा सबर करलो.. कलतो हम घर जाही रहे हे.. तब आपको जीतना प्यार करना हे कर लीजीयेगा.. दिनमे भी.. मे मना नही करुगी.. लेकीन अभी नही प्ली..ज..

धिरेन : (हसते पुनमको छोडते) ओके.. चल.. लेकीन याद रखना.. फीर कल मुकर मत जाना.. मे दिनमेभी तुजे कभी भी प्यार करलुगा.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) हां कर लेना.. आपकोतो जब देखो प्यारही करना हे.. अबतो आपकी बीवी हु आपको मना थोडीना कर सकती हु.. हें..हें..हें..

धिरेन : पुनो.. क्या दयाभी वहा आ रही हे..? अगर वो साथमे होगीतो.. फीर..

पुनम : (हसते) जानु.. मुजे खाना बनाने कहा आता हे..? बस थोडा थोडा आता हे.. तो भाभी उनको काम करनेके लीये भेज रही हे.. ओर वैसेभी आप चीन्ता मत करो.. वो उपर हमारे कमरेमे बगैर परमीशन नही आयेगी.. तो हम आरामसे प्यार कर सकते हे.. अब चलीये फ्रेस होजाइये.. फीर मे होजाती हु..

कहेते ही धिरेन हसते हुअ‍े बाथरुममे घुस गया.. जब सबलोग फ्रेस गये तो नीचे आगये.. तब लता आतेही कीचनमे काम करने चली गइ.. तो वहा रजीया दया ओर चंपाभाभीने उसे काम करनेको मना करदीया ओर बहार नीकाल दिया.. तो मंजु भावना ओर पुनम हसने लगी.. ओर लताभी सरमाकर हसती हुइ भावनाके पास चली गइ.. ओर उनके पास जाकर बैठ गइ तो भावनाने प्यारसे उनके गाल सहेलाये..

भावना : (प्यारसे धीरेसे हसते) अरे मेरी प्यारी बहेना.. यहा इतने काम करने वाली हे.. तो तुजे काम करनेकी क्या आवस्यक्ता हे..? हंम.. क्या हनीमुनपे घुम आये..?

लता : (सरमाते हसते धीरेसे) हां भाभी.. ओह.. सोरी.. हां दीदी.. हें..हें..हें.. कहो.. आप कैसी हो..?

भावना : (हसते) बस यहातो मजेमे हु.. तु बता.. कैसा रहा तेरा हनीमुन.. कुछ अन्जोय बेन्जोय कीयाकी नही..? देख तेरे चहेरेपे कैसा नीखार आ गया हे.. हें..हें..हें..हें..

लता : (सर्मसार होते हसते धीरेसे.) हां दीदी.. बहुत अन्जोय कीया.. बहुत मजा आया.. (धीरेसे) दीदी.. क्या भाइसे कुछ बात हुइ..? या कीसी ओरसे.. मतलब.. आपने क्या सोचा हे..?

लता : (धीरेसे) छोटी.. अभीतो चार बजनेको आये हे.. फीर चाइ नास्ता करके तुम मेरे रुममे आना.. हम दोनो अकेली होगी तब वहा बेठकर हम दोनो आरामसे बात करेगे.. ओके..?

लता : (सरमाकर हसते) जी दीदी..

चंदा : (हसते) अरे दोनो ननंद भोजाइ आपसमे क्या खुसर पुसर कर रही हो.. हमे भी बताओ.. हें..हें..हें..

भावना : (हसते) मौसी कुछ नही.. बस अ‍ैसेही बात कर रही थी.. ओर सुनीये.. ये मेरी ननंद नही हे..

लता : (सरमाते हसते) हां भाभी.. अब ये मेरी बडी दीदी हे.. अब भाभीतो सीर्फ रमाभाभी ही हे..

मंजुला : (हसते) अरे वाह.. मेरी देवरानीतो बहुत सयानी हो गइ हे.. क्या बात हे.. ब..डी..दी..दी..? हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते) हा भाभी.. भाइने रमाभाभीसे सादी कीहे उनसे पहेलेही हम दोनो बहेने होगइ हे..

मंजुला : (हसते) चलो अच्छा हुआ.. कमसे कम उन घरमे भावनाका कोइ हम दर्द तो हे.. वरना तो इधर कीसीसे ज्यादा बात ही नही करती.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते) भाभी.. चाहो जो भी परीस्थीती हो.. मे हमेसा भावना दीदीका ही साथ दुगी..

कहातो भावनाने इमोस्नल होते लताको बैठेही गले लगा लीया.. तभी धिरेन लखन ओर देवायतभी वहा आकर बैठ गये.. तो लता वहासे खडी होने लगी.. तो मंजुने हसते हुअ‍े जबरदस्तीसे उनको हाथ पकडकर वापस बीठा दीया.. तब लता बहुतही सरमाइ.. तभी मंजुने कहा..

मंजुला : लता.. देख अबतो आये दिन सीर्फ हमही घरपे होगे.. मुजे अच्छा लगा तुमने तेरे जेठका रीस्पेक्ट कीया.. ओर खडी होगइ.. लेकीन.. अब हमे बदलना होगा.. कोइ महेमान घरपे हो तब ठीक हे.. लेकीन जब घरके सब लोग हो.. तो तुजे उठकर जानेकी जरुरत नही हे.. येभी तुम्हारे बडे भाइ ही हे.. ओके..? इनसेभी तुम बीन्दास्त बाते कीया कर..

लता : (सर्मसार होते हसते) जी भाभी.. कभी कभी बात करती हु..

मंजुला : (हसते प्यारसे सरको सहेलाते) सुन.. तुम्हारे लीये ओर लखनके लीये अ‍ेक खुस खबरी हे..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) क्या भाभी.. हमारे लीये..? क्या खुस खबरी हे..?

मंजुला : (हसते) हां.. तुम दोनोके लीये.. सुन.. अब तुम अपनी बीवीके साथ सहेरमे रहेने जा रहे हो.. हमारे बंगलोपे.. अब तेरे भाइने डीसाइड कीया हेकी तुम अब वही रहेकर हमारा कारोबार देखोगे..

लखन : (आस्चर्यसे देवायतकी ओर देखते) भाइ..? ये भाभी क्या केह रही हे..?

देवायत : (हसते) हां लखन.. भानु तुजे वहाका सब सीखा देगा.. ओर वैसेभी तुम दोनो सहेरमे जाते यही तो करते हो.. तो मे चाहता हु.. की अब तुम वोही सब काम अकेला सम्हालो.. ओर भानु यहाकी खेतीबाडी देखेगा.. अब सहेरमेभी हमारा घरका कोइतो होना चाहीये.. ताकी जब हम वहा आयेतो हमे मस्त खानाभी मीले.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते) हां भाइ.. आप आइअ‍ेतो सही.. मे आपको मस्त खाना खीलाउगी..

चंदा : (जोरोसे हसते) लोजी.. देवु.. आपके खानेकी समस्यातो हल हो गइ.. हें..हें..हें..

कहातो सब जोरोसे हसते लगे.. तब लता बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर देवायतकी ओर तीरछी नजरोसे देखते हसती रही.. तभी लखनने कहा..

लखन : (हसते) लेकीन भाइ.. क्या आपको लगता हे मे ये सब अकेला सम्हाल पाउगा..?

देवायत : (हसते) हां मुजे मेरे भाइपे पुरा यकीन हे.. की वो सब अकेला सम्हाल लेगा..

लता : (सरमाते हसते) लेकीन भाभी.. मे अभी अभी तो यहा सादी करके आइ हु.. तो क्या कुछ दिन मे आप सबके साथ यहा नही रेह सकती..?

मंजुला : अरे मेरी बच्ची.. बीलकुल रेह सकती हे.. तुजे जबभी यहा आनेका मन करे चली आना.. ओर जीतना दिन यहा रहेना हो रहेना बस..? अबतो खुस..?

लता : (सरमाते हसते) भाभी.. तो फीर आपके देवरका खाना पीना.. आइ मीन.. वो सब..

मंजुला : (हसते) हां.. मुजे पता हे.. लेकीन इनकी फीकर तुम मत करना.. क्युकी तुम दोनो अकेले थोडीना जा रहे हो.. आपके साथ वहा रजीयाभी तो आ रही हे.. तुम अकेली इतना बडे बंगलेका काम थोडीना देख सकती हो..? इसके लीये रजीया तुम दोनोका खानाभी देख लेगी ओर तुम्हारे काममे हाथभी बटायेगी..

इताना सुनतेही कीचनमे रजीया खुसीओके मारे पानी पानी होगइ.. ओर अ‍ेकदम सरमाके दयाको गले लग गइ.. तो दयानेभी उसे कसके गले लगा लीया.. ओर रजीयाका चहेरा अपनी हथेलीओमे थामकर आंखोमे देखा.. तो रजीया नजरे जुकाते मंद मंद मुस्कुराने लगी.. आखीर मंजुने उनका काम करही दीया..

दया : (धीरेसे हसते) देखा रजु.. आखीर भाभीने तेरा काम आसान कर ही दीया.. जा.. जीले अपनी जींदगी.. बस खयाल रखना.. की अभी तुम दोनो कीसीकी नजरमे ना आओ.. भाभी धीरे धीरे करते सब सही कर देगी..

रजीया : (सरमाते हसते) जी दीदी.. आइ लव यु..

दया : (सर चुमते) हंम.. आइ लव यु टु.. जा बहेन.. तु साथ जानेमे मना मत करना उनके साथ चली जाना.. मेभी पुनोदीदीके साथ जा रही हु.. अब यहा चंपाभाभी सब सम्हाल लेगी..

चंपा : (हसते) हां रजीया.. अबतो मे यही हु.. तुम दोनो यहाकी फीकर मत करना.. चलो अब चाइ नास्ता बन गया हे तो सबको देदो.. सब वेइट कर रहे हे..

जब सब चाइ नास्ता कर रहेथे तब मंजुने देवायतको कल सादीमे आनेके लीये रमेश सुधीर ओर रश्मीभाभी को न्योता देनेको कहा.. फीर सबने चाइ नास्ता करलीया तो लखन ओर धिरेन अपने खेतोपे चले गये.. तो पुनम ओर लताभी उपरकी मंजीलपे अपने कमरेमे चली गइ.. ओर वहा दोनोही बेडपे बैठकर बाते करने लगी.. तब लताने उस दिनकी दोनोके बीच हुइ अधुरी बातको फीरसे याद करके दोहराया..

तब पुनमने आज लताको सब कुछ खुलकर बतानेका नीर्णय कर लीया.. क्युकी इतने दिनोमे साथ रहेनेकी वजहसे पुनमने लताका दिल जीत लीयाथा.. ओर लताको सब परीस्थीतीको फेस करने मानसीक रुपसे तैयार कर दीयाथा.. पुनमने लताको वो सब कौन हे.. ओर यहा कीस मक्सदसे जन्म लेकर आयेहे.. आने वाले दिनोमे यहा क्या बदलाव आने वाला हे.. ओर धिरेन ओर लखन नीलमके बारेमे सब कुछ खुलकर बता दीया..





तो लता आस्चर्य भावसे सब सुनती रही.. पुनमने आनेवाले भविष्यके बारेमे लखनकी कुछ बाते छोडके कुछ बाते बतादी.. ओर पुनमने लताको अब कीसी भी रीस्तोमे इन्टरफीयर नही कहेन की सलाह दी.. ओर दोनोही बाते करते वही बैठी रही.. पुनमने लताको लखनका दुसरी लडकीयोसे अवैध रीस्ते ओर रजीयाके साथ सादीके बारेमे अभी नही बताया.. क्युकी लखन लताकी अभी अभीतो सादी हुइ थी..

लेकीन पुनमने भविस्यमे लताका देवायतके साथ रीलेशनकी थोडी हीन्ट जरुर दी.. जीसे सुनकर लता बहुतही सर्मसार रोमांचीत होगइ.. तो दुसरी ओर नीचे मंजुके रुममे मंजु चंदा ओर भावना कलकी सादीकी तैयारीया करने लगी.. देवायत हवेलीसे नीकलतेही सीधाही पंचायतकी ओफीसमे चला गया.. तो वहा सीर्फ रश्मी ओर वंदना आपसमे बैठकर बाते कर रही थी.. तो दोनोही देवायतको देखकर सरमा गइ.. ओर हसते हुअ‍े उनको बैठनेके लीये कहा..

रश्मी : (हसते) कहो देवरजी.. आज इधरका रास्ता कैसे भुल गये..? हें..हें..हें.. मुजे मीलने आये होकी वंदुको.. हें..हें..हें..

कहातो वंदना सर्मसार होगइ..ओर रश्मीको अ‍ेक मुका मारते दुसरी ओर मुह करते हसने लगी..

देवायत : (हसते) दोनोको.. आप दोनोको कल हमारे साथ आश्रमपे आना हे.. मेरी सादी हे सृतीके साथ..

रश्मी : (जोरोसे हसते) कीतने कमीने हो.. सादी पे सादी कीये ही.. जा रहे हो.. बीवीओसे थकते ही नही..

देवायत : (हसते) अरे.. बीवीओसे कोइ थोडीना थकता हे.. कहोतो तुम दोनोसे भी सादी करलु.. हें..हें..हें..

रश्मी : (कहातो वंदना सर्मसार होगइ) देवरजी अबतो मे विधवा होगइ हु.. हां अगर वंदु तैयार हे तो आप उनसे सादी कर सकते हो.. हें..हें..हें.. क्यु वंदु..? करनी हे सादी इनसे..? हें..हें..हें..

वंदना : (अ‍ेकदम सरमाते रश्मीको बाजुमे मुका मारते) भाभी.. कीतनी बेसर्महो आप.. चलो मे चलती हु..

रश्मी : (जोरोसे हसते) अरे बैठना मेतो मजाक कर रहीथी.. बैठ अब नही कहुगी.. कीतने दिनोके बादतो ये हाथमे आये हे.. कहो देवु.. हमे कब नीकलना हे..? ओर कौन कोन आ रहे हे..?

देवायत : (हसते) बस.. आप ओर रमेशकी फेमीली ओर सुधीर नीशाभाभी.. ओर हम सब घरके ही लोग.. ओर भानुकी फेमीली आयेगी.. बस कीसी ओरको नही कहेना..

रश्मी : (हसते) ठीक हे.. हम सब सुबह आपके घरपे आजायेगे.. ओर सुनीये.. वो मेरे घरका काम सुरु करवा दीया हे.. बस अ‍ेक महीनेमे कंपलीट होजायेगा.. ओर स्कुलके लीयेभी परमीशन आगइ हे.. कल ही आइ..

देवायत : (हसते) अरे वाह.. इतनी जल्दी आगइ..? तबतो उनकाभी टेन्डर नीकलवाके काम सुरु करदो..

रश्मी : हां सायद रमेशभाइ इसीलीये कीसी कोन्टड्ढाक्टरको मीलने दुसरे गांव गये हे.. देखते हे कल.. क्या करके आयेहे.. ओर देवु.. आसपासके बहुत सारे बच्चेका अ‍ेडमीशनभी हो रहा हे.. ये हमारे लीये अच्छा हे.. क्या पुनो लता जो घुमने गइथी.. वो आगइ..?

देवायत : (हसते) हां.. अभी दो घंटे पहेलेही उनको लेकर आये हे.. (वंदनाकी ओर देखते) वंदना.. तुम पुनोको मील लेना.. सायद कल वो सीधे आश्रमसे ही अपने घर चले जायेगे..

वंदना : (सरमाते धीरेसे) जी.. आज ही मील लुगी.. क्या आप हमारे घर जा रहे हे..?

देवायत : (हसते) हां.. पहेले सुधीरके घर जाकर उसे न्योता दे दु.. फीर तेरे घर चला जाउगा.. सायद तबतक रमेश भी आजाये.. क्यु.. तुजे घर आना हे..? तो चल छोड देता हु..

नंदना : (सरमाते हसते) अरे नही नही.. मेतो बस अ‍ैसेही केह रहीथी..

रश्मी : (सरमाते धीरेसे) देवु.. आपकी कल सादी हे तो.. आप कब फ्रि होजायेगे..?

देवायत : हमं.. सायद परसो.. या उनके बाद.. क्यु..? कुछ काम था..?

रश्मी : (वंदनाकी ओर हसते देखते) हां अ‍ेक जरुरी काम था.. आप दो दिनके बाद मेरे घर आजाना अ‍ेक जरुरी काम हे.. मे आपको वही बताउगी.. बहुत जरुरी हे..

देवायत : (हसते) अरे इतना जरुरी हेतो.. दो दिनके बाद क्यु..? अभी बतादो..

रश्मी : (वंदनाकी ओर कातील स्माइलसे देखते) अरे नही नही.. अभी नही आप जब मेरे घर आओगे तभी बताउगी.. मुजे आपकी कसीसे मीलवाना हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हंम.. ठीक हे आजाउगा.. सायद दो दिन नइ बीवीके साथ रहेना पडे.. मे ओर मंजु दोनो ही वही रुकेगे.. वो मंजुकी सहेलीजो हे.. ठीक हे चलो मे चलता हु.. तुम दोनो सुबह टाइमपे घर आजाना..
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १२८/२

जब देवायत जा रहाथा तब रश्मी कामुक नजरोसे कातील स्माइल करते उनको देखती रही.. तो वंदनाभी सरमाते हसते हुअ‍े उनको देखती रही.. जबवो चला गया तो रश्मी वंदनाकी ओर देखते रहस्यमय तरीकेसे हसने लगी.. तब वंदना बहुत ही सरमाइ.. लेकीन रश्मी उनकी ओर देखते अ‍ैसे हस रहीथी तब वंदनाको कुछ आसंकाये हुइ तो रश्मीको पुछने लगी..

वंदना : (सरमाते हसते) भाभी.. आपने देवायतजीको क्यु मीलने बुलाया हे..? क्या मुजे बता सकती हे..? आप उनको कीससे मीलवाना चाहती हे..?

रश्मी : (हसते) नही.. हें..हें..हें.. अभी नही बता सकती.. हें..हें..हें.. तुजे बडी दिलचस्पी हे सब जाननेकी..? तो सुन.. बस इतना पता हे दो दिनके बाद तुजेभी मेरे घर आना हे.. वही मे तुम दोनोकी मुलाकात करवाना चाहती हु.. समज गइनां..? तब अपने दिलकी बात उनसे करलेना..

वंदना : (सर्मसार होते धीरेसे) भाभी प्लीज.. कही आप पागलतो नही होगइ..? मुजे नही मीलना.. आपही मील लेना.. कही कीसीको पता चल गयातो मेतो गइ कामसे.. मम्मीको देखा हे..? मार डालेगी मुजे..

रश्मी : नही वंदु.. कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. ओर सुन.. ये सब तेरी मम्मीका ही प्लान हे.. वो चाहती हेकी तुजे तेरा प्यार मील जाये.. ओर तु इनकी फीकर मत करना ये तो राजा हे.. कीतनीभी सादीया करले कोइ इनको नही पुछेगा.. बस तुम जीले अपनी जींदगी.. जबसे मे इनके साथ रीलेशनमे आइ हु तबसे मेरे जीवनमे खुसीया ही खुसीया हे.. तुमभी बटोरले अपनी खुसीया.. मेरे जीवनमे सब सही होता जा रहा हे..

वंदना : (सर्मसार होते धीरेसे) नही भाभी.. पता नही फीरभी अ‍ेक डरसा लग रहा हे..

रश्मी : कमीनी इसी डरकी वजहसे तो आज तक अपने दिलकी बात उनको नही बतापाइ.. वंदु अगर डरेगीतो अ‍ैसेही घुट घुटके जीयेगी.. बस अ‍ेक बार इनसे प्यार करकेतो देख.. तेरी जींदगीमे बहार आजायेगी.. ओर वैसेभी तेरे लीये इनको मीलनेकी दो दो जगह हे.. पुनोने भी तुजे उनके घरपे मीलनेको कहा हे.. ओर तेरे लीये तो मेरे घरके दरवाजे हमेसा खुले ही हे.. जबभी इनको मीलनेका दिल करे मुजे बता देना मे इनको बुला लुगी.. पता नही इनमे क्या आकर्सण हे इनको देखतेही दिल मचलने लगता हे..

वंदना : (सर्मसार होते हसते) भाभी.. यकीन नही होता मम्मीने आपको कहा हे.. क्या सचमे कहा हे..?

रश्मी : हां वंदु.. ये बात तुम कीसीको मत कहेना.. वो तेरी मा हेनां..? तुजे अ‍ैसे घुट घुटके जीते नही देख सकती.. वो तेरी सादीभी इनसे करवानेके लीये तैयार हे..इसके लीये तेरे पापासे भी क्यु बगावत करना पडे..

वंदना : नही भाभी.. मे पापाकोभी इतना चाहती हु.. मे उनको दुखी होते नही देख सकती.. वो दोनो दोस्तभी हे.. मे नही चाहती मेरी वजहसे उनकी दोस्तीमे कोइ दरार आये..

रश्मी : नही वंदु कोइ दरार नही आयेगी.. क्या तुमभी मेरी तराह उनकी सीक्रेट वाइफ बनके नही रेह सकती..? तो फीर क्या प्रोबलेम हे..? मेरी मान.. अ‍ैसा कुछभी नही होगा.. ओर वैसेभी मंजुभाभीसे सुना हे.. की देवुकी जींदगीमे जीतनीभी ओरते ओर लडकीया आयेगी वो कोइ सामान्य ओरते नही होगी.. वो उनके पीछले जन्मकी बीवीया ही होगी.. तो फीर क्या पता तुम ओर मे भी वोही हो.. हें..हें..हे..

वंदना : (हसते) भाभी.. क्या तुमभी ये सब बातोपे बीलीव करती हो..? मुजेतो अ‍ैसा नही लगता.. हें..हें..हें..

रश्मी : (गहेरी सांस लेते) सुन वंदु.. मुजे लगता हे आज कुछ बाते तुमसे केह ही दु.. क्या तुमने वो हिमाचलके राजाकी कहानी सुनी या पढी हे..?

वंदना : (हसते) क्या वो.. कीताब जो जीनका नाम (ये केसी अनुभुती) हे.. आप उन्हीकी बात तो नही करती..?

रश्मी : (हसते) हां वोही.. वंदु ये सीर्फ कहानी नही हे.. कुछ सालो पहेले वहा सब हकीकतमे हुआ हे.. ओर उन राजाका जन्मभी हमारे पासके सहेरमे ही हुआथा.. तब वो छोटासा सहेरथा.. जहा सुती रहेती हे.. आज वो बहुत बडा सहेर होगया हे.. बस उसीके कारण आज हिमाचलमे अ‍ेकभी विधवा या त्यक्ता नही मीलती.. वहा आजभी सब आपसी रीस्तोमे सादी करके सुहागन रहेती हे..

वंदना : (हसते) हां भाभी मेने वो किताब दो बार पढी हे.. पुनोके पास थी.. सायद अभीभी हे.. तो उन कहानीका हमसे क्या तालुकात..?

रश्मी : हे वंदु.. हे.. मंजुभाभीके कहेने मुताबीक वोही राजा देवुके घर यहा उनके पोतेके रुपमे जन्म लेगा.. ओर उन्हीकी रानीया अभी जन्म लेकर उनके अंसको मील रही हे.. देवुभी उनका अंस हे.. तभीतो उनमे इतना आकर्सण हे.. कोइभी ओरत हो या लडकी उनको देखतेही पागल होजाती हे..

तुजे पता हे हमारे गांवमे कुछ ओरते ओर लडकीया.. देवुके नीचे लेट चुकी हे.. ओर बहुत सारी ओरते लडकीया अभीभी देवुके नीचे लेटनेके लीये तैयार हे.. सब ओरते लडकीया इनको पानेकी फीराकमे हे.. तुम ओर मे नसीब वाली हेकी देवु हमसे जुडा हुआ हे..

वंदना : (हसते) लेकीन भाभी.. उनकी रानीया तो सभी परीया यातो अप्राये थी.. अ‍ैसा उनमे लीखा हे..

रश्मी : नही वंदु.. तुमने ठीकसे नही पढा.. ये सच हेकी वो सभी परीया या अप्सराये थी.. लेकीन वो सब अपने स्वामीको पानेके लीये धरतीपे ओरतके रुपमे उनकी बहेन बनके या उनकी टीचर बनके आइ थी..जो बादमे उनसे सादी करलेती हे.. ओर जन्मो जन्म तक उनको मीलनेकी कामना करती हे..

ओर सायद हमारी मंजुदी ओर हम सभी वो रानीया हे.. वंदु तुजे अ‍ेक बात बताउ..? जबसे देवु मेरी जींदगीमे आया हे तबसे मेरी सारी तकलीफे दुर होती जा रही हे.. जैसे उन राजाको मीलतेही सबकी जींदगीमे शुभ होताथा..

वंदना : (हसते) भाभी.. आपकोतो बहुत कुछ पता हे..? क्या ये सब सच हे..? अगर सच हेतो उन्होनेतो वहा बुहत सारी परंपरा सुरु कीथी.. यहा तक की उन्होने अपनी दादी.. चाची.. बहेने.. भाभी उनकी टीचरसेभी सादी करलीथी.. तो फीर यहातो अ‍ैसा कुछ भी नही हे.. हें..हें..हें..

रश्मी : वंदु.. सायद कुछही दिनोमे अ‍ैसा अब हमारे गांव ओर आसपासके सभी गांवोमे होने वाला हे.. देखना कुछही दिनोमे अ‍ैसे कइ रीस्ते हमारे सामने आजायेगे.. जीनके बारेमे हम सोचभी नही सकते.. ओर मंजुभाभीके कहेनेके मुताबीक उनकी सुरुआत उनके खानदानमे तीन पीढीसे होगइ हे.. तुजे पता हे देवुके पीता ओर उनके दादाके साथ हमारे गांव वालोसे रीस्ता नही था.. सायद इन्हीका कारण यही हे.. सबलोग कहेते थे की उन्होनेभी अपनी बहेनसे सादीया करली थी.. इसीलीये सबने उनसे रीस्ते तोड दीये थे..

वंदना : (आस्चर्यसे देखते) ओह गोड.. भाभी.. अब कुछ बात मेरी समजमे आ रही हे.. सायद इसीलीये.. हमारी पुनो.. ओर देवुभी..

रश्मी : हां वंदु.. ये बातका जीक्र कीसीके सामने भुलसेभी मत करना येतो हम दोनोको पुनोका राज पता हे इसीलीये हम बाते कर रहे हे.. तो बी केरफुल.. ओर सायद वही वजह हेकी पुनोने देवुसे सादी करली हे.. ओर अ‍ेक राजकी बात मुजे ओर पता हे जो मे सादी करके इधर आइथी तब अ‍ेक बार राघवके मुहसे सुनाथा..

वंदना : (आस्चर्यसे देखते) कोनसी बात..? भाभी प्लीज.. बताइअ‍ेना मे कीसीको नही कहुगी..

रश्मी : (मुस्कुराते) हंम.. देखना मंजुभाभी ओर पुनोकोभी नही बताना.. सुन.. सायद मंजुभाभी भी उनकी बहेन हे.. अ‍ैसा राघव अ‍ेक बार मुजे सब बता रहा था..

वंदना : (आस्चर्यसे) व्होट..? भाभी क्या बात कर रही हो..? पर कैसे..? वोतो राजीव अंकल ओर नीर्मलाआंटी की बेटी हेनां..?

रश्मी : (मुस्कुराते धीरेसे) सुन.. प्लीज.. कीसीको कहेना मत.. पहेले राजीव अंकल ओर नीर्मलाआंटी यही हवेलीमे रहेते थे.. वो दोनोभी सायद भाइ बहेन हे.. तब देवुके पीता ओर नीर्मलाआंटी दोनोही अपनी सादीसे पहेले रीलेशनमे थे.. ओर देवुके पीतानेही उनको सादीसे पहेले प्रेगनेन्ट करदीयाथा..

फीर दोनो यहासे चले गये ओर भाइ बहेनने आपसमे सादी करली.. ओर मंजुभाभीका जन्म हुआ.. देवु ओर मंजुभाभीके पीता दोनोही हमारे बडे ठाकुर हे.. तो दोनो हुअ‍ेनां भाइ बहेन..? बस इसीलीये केह रहीथी.. यहा बहुत कुछ होने वाला हे..

वंदना : भाभी आइ कान्ट बीलीव.. मुजेतो अब भी यकीन नही हो रहा हेकी हम सब उनका हिस्सा हे.. आजके जमानेमे भी ये सब पोसीबल हो रहा हे.. ओर हमारा दिमाग इन बातोको ना मानने को मजबुर हे..

रश्मी : नही वंदु.. उन बातोको कोइ ज्यादा साल नही हुआ.. तबभी उनको ये सब पोसीबल नही लगता था.. ओर ये बात सच हे.. इसीलीये केह रही हु.. की तु मानजा.. मीलले हमारे स्वामीको.. ओर जब गांवमे अ‍ैसे रीस्तोको सब अपनाने लगेगे तब तेरे पापाभी ये सब मानते होगे.. तो फीर क्या दीकत..?

वंदना : (कुछ सोचते) हां भाभी.. सायद आप ठीक केह रही हे.. फीरभी उनको मीलनेमे अ‍ेक डरसा लग रहा हे.. ओर अबतो पुनोभी ससुराल चली जायेगी.. वरना उनको साथ रखती.. भाभी.. क्या आप हमारे साथ रहेगी..? तो फीर कुछ सोचती हु..

रश्मी : (हसते) हां मे तेरे साथ ही हु.. ओर कमीनी.. अगर उनको अकेली मीलेगी तो वो तुजे सीधी चोद नही लेगा.. जो उनसे डरती हे हें..हें..हें.. बात करती हे.. हें..हें..हें..

वंदना : (सर्मसार होते अ‍ेक मुका मारते) भाभी.. तुम कीतनी कमीनी हो.. मुजेतो बहुत सर्म आ रही हे.. अ‍ैसाभी कोइ बोलता हे.. हें..हें..हें.. चलो ठीक हे.. मे आजाउगी.. हें..हें..हें..

रश्मी : (खडी होकर हग करते) हां ये हुइना बात.. वैसे कलतो हम सब साथमे ही हे.. तो कुछ प्लानीग करते हे.. मुजे पुनोसेभी बात करनी पडेगी..

वंदना : (सरमाते हसते धीरे) वो कमीनीतो कबसे हम दोनोके मीलनका इन्तजार कर रही हे.. कमीनी मेरे पीछेही पड गइथी.. भाभी आप पुनोसे बात करलेना.. मुजेतो बहुत सरम आयेगी.. मे कुछ नही कहुगी..

रश्मी : (हसते) हा. हा.. तो मेही बात करलुगी तु फीकर मत कर..

दोनोही अ‍ैसी बाते करती रही.. तबतक देवायत सीधाही सुधीरके घर चला गयाथा.. ओर वहा जाके उनका दरवाजा खटखटाया तो नीशाने आकर दरवाजा खोला.. ओर देवायतको देखतेही सरमाके हसने लगी.. ओर साइडमे हटकर उनको अंदर आनेका रास्ता दीया.. तो देवायत घरके अंदर चला गया तब नीशाने धीरेसे दरवाजा बंध करके लोक करदीया ओर सरमाते वोभी देवायतके पीछे घरके अंदर चली गइ..

नीशा : (सरमाते हसते) आइअ‍े देवरजी.. आखीर आपने हिंमत करही ली.. वरना तो आपके भाइ होते हे तबही घरमे आते हे.. अभीतो वो क्लीनीकपे हे.. ९ बजे आयेगे.. आइअ‍े बैठीये.. कहो क्या पीयोगे..? चाइ के कुछ ठंडा..? आप बेठीये मे पानी लेकर आती हु..

देवायत : (पहेली बार नाम लेते हसते) नही नीशा.. आज मे तुमसे ही मीलने आया हु.. आइ लव यु..

कहेते देवायतने अपने दोनो हाथ फैला दीये.. तब नीशा दोडके देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर सीनेमे सर छुपाके आंसु बहाने लगी.. तो देवायतने उनकी पीठ सहेलाते जोरोसे बाहोमे भीच लीया.. ओर दोनो काफी देरतक अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे खडे रहे.. तभी देवायतने नीशाके चहेरेको पकडके थोडा उचा करदीया ओर उनके होठोपे अपना होठ रख दीया.. तब नीशा सरसे पांव तक कांपते आंखे बंध करते देवायतके होंठ चुमते उनका साथ देने लगती हे..





नीशा : (लडखडाती आवाजमे आंखोमे देखते) देवु.. आइ लव यु टु.. आपने बहुत इन्तजार करवाया मुजे..

देवायत : (सरको चुमते) लव यु.. नीशा.. हमेतो मीलनाही था.. बस थोडी देर होगइ.. कही हम सुधीरको धोखातो नही दे रहे..? बस उन्हीकी फीकर हे.. वो मेरा दोस्त हे..

नीशा : (बाहोमे उनके सामने देखते) नही देवु.. आप उनकी फीकर मत करो.. आज मे आपको अ‍ेक बात बताना चाहती हु.. ये बात सीर्फ मेरे ओर सुधीरके अलावा कोइ नही जानेगा.. इनके बारेमे सीर्फ मुजे ओर सुधीरकोही पता होगा.. आपभी कीसीके सामने इसका जीक्र मत कीजीयेगा.. चारुभाभी ओर रश्मीभाभीको भी नही.. बात सीर्फ हम तीनोके बीचही रहेगी..

देवायत : (बाहोमे भरते खडे रहेते) नीशा.. अ‍ेसी कौनसी बात हे जो मे नही जानता..? बता..

नीशा : (सरमाते धीरेसे) देवु.. आपतो जानते हे.. की सुधीर मुजे वो सुख देनेमे सक्षम नही हे.. ओर ये बात वो खुदभी जानता हे.. इसके लीये वो मुजसे डिवोर्स देनेके लीयेभी तैयार था.. ताकी मे वो सुख कीसी ओरसे पा सकु.. उस दिन आपने उसे समजाने हमारे घर आयेथे उसी रात हम दोनोने कुछ बाते करके डीसाइड कीयाथा.. अब मे उनके साथ ही रहुगी..

देवायत : नीशा.. बता तुम दोनोने क्या डीसाइड कीयाथा..

नीशा : (सरमाते नजरे जुकाते) देवु.. सुधीरने मुजे आपके साथ रीलेशनमे आनेकी सलाह दीथी.. ताकी वो सुख मे उनके साथ रहेकरभी पा सकु.. सुधीरको हम दोनोके रीलेशनसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. उसने सामनेसे मुजे आपके साथ रीलेशनके लीये कहा हे.. तो सुधीरको पता होनेका कोइ डरही नही हे.. वो चाहताहे मे आपके साथ रीलेशनमे आकर ओरतका वो हर सुख पाउ.. जीनका हर ओरतका सपना होता हे..

देवायत : (आस्चर्यसे देखते) नीशा.. क्या अ‍ैसा सुधीरने खुद कहा हे..?

नीशा : (सरमाते हसते) हां देवु.. उनको पता हे की वो मुजे वो सुख देनेमे सक्षम नही हे.. ओर वो मुजे प्यारभी बहुत करते हे.. ओर मे उनको छोडनाभी नही चाहती.. तो सुधीरने बीचका यही रास्ता नीकलक हे.. उसे हम दोनोके रीलेशनसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. बस.. ये बात सीर्फ हम तीनोके बीचही रखना चाहते हे..

देवायत : नीशा.. सुधीरवाली बात हम तीनोके बीच ही रहेगी.. आइ प्रोमीस.. लेकीन हमारे रीस्तोके बारेमे मेरी बीवीओको पता चल जायेगा.. सोचले.. खास करके चारुभाभी ओर रश्मीभाभीको..

नीशा : (सरमाते हसते) देवु.. वैसेतो उन दोनो कमीनीओको सब मालुम हेकी आपने मेरा प्यार कबुल करलीया हे.. ओर इस बारेमे मंजुभाभी ओर पुनमदीदीको भी पता हे.. क्या उन दोनोको सब पता चलजाता हेनां..?

देवायत : (होंठ चुमते) हंम.. पुनोकातो पता नही लेकीन मेरी मंजुको सब पता चल जाता हे.. कहो.. कब मीलना हे हमे..?

नीशा : (सरमाते धीरेसे) देवु.. आजतो पोसीबल नही हे.. बस आपही कुछ अ‍ेरेन्ज कर लेना.. वरना मुजे मौका मीलतेही मे आपको इधर बुला लुगी.. आप आजाना.. मे हमारा पहेला मीलन अ‍ैसे जल्दबाजीमे करना नही चाहती.. मुजे पुरा समय चाहीये.. पुरी रात सीर्फ हम दोनोही होगे.. बस मुजे वो सुख देदो.. जो मे सादी करकेभी नही पा सकी.. देवु.. आइ अ‍ेम वर्जीन.. मे अभी तक कुआरी हु.. मुजे लडकीसे ओरत बननेका सुख चाहीये..

देवायत : (होंठ चुमते) हंम.. नीशा.. हम अपनी सुहागरात मनायेगे.. हमारी सेज सजी होगी.. ओर बेडकी चदरपे तेरे कोमार्यकी नीशानी हमारी सुहागरातकी गवाही होगी..

नीशा : (खुस होते जोरोसे बाहोमे भीचते) ओह.. देवु.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच..

तभी कीसीने दरवाजा खटखटाया तो दोनो जटसे अलग होगये.. तब देवायत आरामसे सोफेपे बैठ गया ओर नीशा अपने कपडेको सही करते जटसे दरवाजा खोलने चली गइ.. ओर दरवाजा खोलके देखातो बहार सुधीर खडाथा.. तब नीशाने हसते हुअ‍े देवायतके आनेकी बात कही.. तो सुधीरभी हसते हुअ‍े अंदर आ गया.. ओर आतेही देवायतको गले लग गया.. फीर दोनोही सोफेपे बैठ गये तब नीशा उनके लीये पानी लेने चली गइ..

सुधीर : (हसते) आओ भाइ.. आजतो इधरका रास्ता भुल गये..?

देवायत : (हसते) हां अभी अभी पंचायत ओफीससे आ रहा हु.. अभी आयाही थाकी तुम आगये.. हें..हें..हें..

नीशा : (दोनोको पानी देते) लीजीये पानी पीजीये.. ओर कहीये आप क्या पीयेगे..?

सुधीर : (हसते पानी लेते) लगताहे अभी आके बैठे ही हो.. नीशा.. हमारे लीये मस्त दुधवाला कोल्डड्ढींक बनादे.. वरना खाना नीकाल आज हम तीनो साथमे ही खायेगे.. क्या खाना बन गया हे..?

देवायत : अरे रहेने दे अभी रमेशके घरभी जाना हे.. वहाभी चारुभाभी जबरदस्ती कुछना कुछ पीलाही देगी.. बस तुम दोनोको न्योता देने आया था.. कल तुम दोनोको आश्रमपे हमारे साथ आना हे.. कल सृतीके साथ मेरी सादी हे..

नीशा : (खाली ग्लास लेते हसते) अरे वाह.. मतलब अ‍ेक और देवरानी आ रही हे मेरी.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां यार.. पता नही अब मेरे नसीबमे कीतनी सादीया लीखी हे.. हें..हें..हें..

सुधीर : (जोरोसे हसते) भाइ.. तो अच्छा हेना.. हमेतो लडु खानेको मील रहा हे.. हें..हें..हें.. आप सादीया करते जाओ.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) साले तेरे लडुके चकरमे मुजे जींदगीभरके लीये बीवीको पालना पडता हे.. हें..हें..हें..

नीशा : (जोरोसे हसते) अरे.. गालीया देने लगे.. आप बैठो मे अभी कोल्ड्रींक बनाकर लाइ.. हें..हें..हें..

सुधीर : (हसते नीशाके जातेही नजदीक आते) भाइ.. क्या वो मुना आपको मीलने आया था..? उनसे बात हो गइ..? उसने कुछ कहातो नही..?

देवायत : (हसते धीरेसे) नही सुधीर.. मेने उन दोनोसे बात करली हे.. सब सही हो गया हे.. बस अ‍ेक बार मेने जो कुछ सोचा हे होनेदे.. फीर देख.. मजा.. बस तुम इतना खयाल रखना.. वहा तेरी क्लीनीकपे जीतनीभी लडकी या ओरते आये.. उनपे ध्यान रखना.. की कीतनी प्रेगनेन्ट हे.. बस उनकी जानकारीया मुजे चाहीये.. बाकी मे सब सम्हाल लुगा.. ओर मुना ओर बरखाकी सादीभी करवा दुगा..

सुधीर : (हसते) भाइ.. वो सब इन्फोर्मेशन तो मे देदुगा..क्या उनके मा बाप इस सादीके लीये मानेगे..?

देवायत : हां मान जायेगे.. क्युकी कुछ बात मुजे अ‍ैसी पता चली हे की दोनोकी सादी होजायेगी.. ओर कुछ ही दिनमे बाबाभी सबको समजाने इधर आ रहे हे..

सुधीर : (हसते) भाइ.. लगता हे बाबाने भुतकालमे जोभी बाते कहीथी आज सब सच होने जा रही हे.. अब हमारे गांवमेभी उन हिमाचलकी तराह होने लगा हे.. ओर सहेरमेभी ये बात बढ गइ हे.. वहाभी अ‍ैसे रीस्ते बहुत बढ गये हे.. भाइ.. इनमे मेरी कोइभी मददकी जरुरत होतो कहेना.. अबतो मेभी अ‍ैसे रीस्तोको गलत नही मानता.. क्युकी अ‍ैसे रीस्तोमे दोनोके बीच प्यारभी बहुत होता हे..

देवायत : (हसते) चल ठीक हे.. लेकीन तु अब यहा अ‍ेक लेडीसकी बडी होस्पीटलके बारेमे सोचना.. क्युकी आगे जाकर इनकी बहुत जरुरत पडेगी.. तुम अ‍ेक बार सृतीको मीललेना.. वो कोइ तेरी मदद कर देगी..

सुधीर : (हसते) भाइ मेभी यही सोच रहा हु.. की कही बडी जगाह लेकर वो होस्पीटल मेही खोलदु.. अ‍ेक दो लेडीस डोक्टरको रखलु तो काम होजायेगा.. नीशाभी मेरी मदद करती रहेगी.. ओर मेरा क्लीनीकभी वहीसे चलाउगा.. तो बाकीका मेइन्टेनका काम नीशा देख लेगी.. क्या कहेते हो आप..?

देवायत : हां यार.. आइडीया अच्छा हे.. लेकीन ध्यान रखना.. वहा गरीब लोगोको मत लुटना.. तु समज गयानां..? वरना सबसे पहेले मे ही तुजे पीटुगा.. हें..हें..हें..

सुधीर : (हसते) नही भाइ.. मुजे धंधा नही करना.. बस सेवा करनी हे.. मे आपकी बात बीलकुल समज गया.. आप फीकर मत करो.. जो पैसे वाले हे उन्हीके पास ही फीस लेनी हे.. बाकी सब खर्चा ही लेना हे..

देवायत : (हसते) हां तब ठीक हे.. अगर जगाह नही मीलती तो रमेशको कहेना.. वो कुछ अ‍ेरेन्ज करदेगा..

सुधीर : (हसते) साला.. आज कल मीलताही नही.. पता नही कमीना कहा घुमता रहेता हे.. क्या आपको मीलता हे..?

देवायत : नही सुधीर.. मुजे नही मीला काफी टाइम होगया हे.. बस अभी वंदुकी नोकरका ओडर लेकर आये तबही मीलाथा.. (धीरेसे) सुधीर.. सुना हे उनकाभी कीसीके साथ चकर हे..? हें..हें..हें..

सुधीर : (हसते धीरेसे कानके पास) हां भाइ सही सुना हे आपने.. वो आपके पंचायतके सदस्य हेनां.. सामतभाइ.. बस उनकी बीवीको ठोकता हे.. कमीना बहुत ही छुपा रुस्तम नीकला.. हें..हें..हें.. दोनोही अलग अलग जाकर सहेरमे कीसी होटेलमे मीलते हे.. ओर वापस अलग अलग आजाते हे.. हें..हें..हें.. सालेने क्या मस्त गदराया माल सेट कीया हे.. हें..हें..हें..

नीशा : (कोल्ड्रींक लाते) अरे दोनो क्या खुसर पुसर कर रहे हो.. लीजीये ठंडा पीजीये.. हें..हें..हें..

सुधीर : (ठंडेका ग्लास लेते हसते) अरे कुछ नही.. नीशा.. देवु केह रहा हे.. की हम यहा लेडीसकी होस्पीटल खोलदे.. ओर उनको तुम ओर मे दोनो सम्हालेगे.. ओर सृतीभाभी भी हमारी हेल्प करेगी.. क्या कहेती हो तुम..? हें..हें..हें..

नीशा : (खुस होते देवायतको ठंडा देते) अरे वाह.. तबतो अच्छा हेना.. यहा कीसीको सहेरमे इनकी नइ बीवीके पास जानाही नही पडेगा.. हें..हें..हें..

देवायत : (ठंडा पीते) देखा.. सुधीर.. तेरे होस्पीटलके चकरमे मेरी बीवीका धंधा तो गया हाथसे.. हें..हें..हें..

सुधीर : (हसते) क्या भाइ.. आप भाभीकोही इधर बुलालो.. तो हम तीनो मीलकर ही होस्पीटल खोल देगे..

देवायत : (हसते) नही यार मेतो मजाक कर रहा हु.. वहा भी उनकी होस्पीटल बहुत अच्छी चल रही हे.. वो यहा आनेके लीे नही मानेगी.. फीरभी मे उसे अ‍ेक बार पुछ लुगा..

तीनोही कोल्ड्रींक पीते बाते करते रहे फीर देवायत वहासे न्योता देकर नीकल गया.. तब आज नीशा बहुत खुस थी.. क्युकी अपने मन चाहे प्यारको पानेमे अ‍ेक कदम आगे बढ चुकी थी.. तो दुसरी ओर देवायत सीधाही रमेशके घर पहोंभ गया.. तो वहा रमेश अभी अभी घरपे आया था.. तो चारुभाभी कीचनमे खाना पका रहीथी.. तब वंदना पुनमको मीलने गइ थी.. ओर रमेशने उनको देखतेही हसते गले लगा लीया....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
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